अब्राहम की सन्‍तान, दाऊद की सन्‍तान, यीशु मसीह की वंशावली। अब्राहम से इसहाक उत्पन्न हुआ, इसहाक से याकूब उत्‍पन्न हुआ, और याकूब से यहूदा और उसके भाई उत्‍पन्न हुए। यहूदा और तामार से फिरिस व जोरह उत्‍पन्न हुए, और फिरिस से हिस्रोन उत्‍पन्न हुआ, और हिस्रोन से एराम उत्‍पन्न हुआ। एराम से अम्‍मीनादाब उत्‍पन्न हुआ, और अम्‍मीनादाब से नहशोन, और नहशोन से सलमोन उत्‍पन्न हुआ। सलमोन और राहब से बोअज उत्‍पन्न हुआ, और बोअज और रूत से ओबेद उत्‍पन्न हुआ, और ओबेद से यिशै उत्‍पन्न हुआ। और यिशै से दाऊद राजा उत्‍पन्न हुआ। और दाऊद से सुलैमान उस स्‍त्री से उत्‍पन्न हुआ जो पहले उरिय्‍याह की पत्‍नी थी। सुलैमान से रहबाम उत्‍पन्न हुआ, और रहबाम से अबिय्‍याह उत्‍पन्न हुआ, और अबिय्‍याह से आसा उत्पन्न हुआ। आसा से यहोशाफात उत्‍पन्न हुआ, और यहोशाफात से योराम उत्‍पन्न हुआ, और योराम से उज्‍जियाह उत्‍पन्न हुआ। उज्‍जियाह से योताम उत्‍पन्न हुआ, योताम से आहाज उत्‍पन्न हुआ, और आहाज से हिजकिय्‍याह उत्‍पन्न हुआ। हिजकिय्याह से मनश्‍शिह उत्‍पन्न हुआ, मनश्‍शिह से आमोन उत्‍पन्न हुआ, और आमोन से योशिय्‍याह उत्‍पन्न हुआ। और बन्‍दी होकर बेबीलोन जाने के समय में योशिय्‍याह से यकुन्‍याह, और उस के भाई उत्‍पन्न हुए। बन्‍दी होकर बेबीलोन पहुँचाए जाने के बाद यकुन्‍याह से शालतिएल उत्‍पन्न हुआ, और शालतिएल से जरूब्‍बाबिल उत्‍पन्न हुआ। जरूब्‍बाबिल से अबीहूद उत्‍पन्न हुआ, अबीहूद से इल्‍याकीम उत्‍पन्न हुआ, और इल्‍याकीम से अजोर उत्‍पन्न हुआ। अजोर से सदोक उत्‍पन्न हुआ, सदोक से अखीम उत्‍पन्न हुआ, और अखीम से इलीहूद उत्‍पन्न हुआ। इलीहूद से इलियाजार उत्‍पन्न हुआ, इलियाजर से मत्तान उत्‍पन्न हुआ, और मत्तान से याकूब उत्‍पन्न हुआ। याकूब से यूसुफ उत्‍पन्न हुआ, जो मरियम का पति था, और मरियम से यीशु उत्‍पन्न हुआ जो मसीह कहलाता है। अब्राहम से दाऊद तक सब चौदह पीढ़ी हुई, और दाऊद से बेबीलोन को बन्‍दी होकर पहुँचाए जाने तक चौदह पीढ़ी, और बन्‍दी होकर बेबीलोन को पहुँचाए जाने के समय से लेकर मसीह तक चौदह पीढ़ी हुई। अब यीशु मसीह का जन्‍म इस प्रकार से हुआ, कि जब उसकी माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उनके इकट्ठे होने के पहले से वह पवित्र आत्‍मा की ओर से गर्भवती पाई गई। अतः उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्‍याग देने की मनसा की। जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्‍वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा, “हे यूसुफ! दाऊद की सन्‍तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहाँ ले आने से मत डर, क्‍योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्‍मा की ओर से है। वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्‍योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।” यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा था, वह पूरा होः ”देखो एक कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्‍मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ यह है “परमेश्‍वर हमारे साथ।” तब यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहाँ ले आया। और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा। हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्‍म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्‍योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे। कि यहूदियों का राजा जिसका जन्‍म हुआ है, कहाँ है? क्‍योंकि हम ने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं। यह सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया। और उसने लोगों के सब महायाजकों और शास्‍त्रियों को इकट्ठे करके उनसे पूछा, कि मसीह का जन्‍म कहाँ होना चाहिए? उन्होंने उससे कहा, “यहूदिया के बैतलहम में; क्‍योंकि भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा यों लिखा है: ”हे बैतलहम, यहूदा के देश, तू किसी रीति से यहूदा के अधिकारियों में सब से छोटा नहीं; क्‍योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा।” तब हेरोदेस ने ज्‍योतिषियों को चुपके से बुलाकर उनसे पूछा, कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था। और उसने यह कहकर उन्‍हें बैतलहम भेजा, कि जाकर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उसको प्रणाम करूँ। वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उनके आगे आगे चला, और जहाँ बालक था। उस जगह के ऊपर पहुँचकर ठहर गया। उस तारे को देखकर वे अति आनन्‍दित हुए। और उस घर में पहुँचकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और मुँह के बल गिरकर बालक को प्रणाम किया, और अपना अपना थैला खोलकर उसे सोना, और लोबान, और गन्‍धरस की भेंट चढ़ाई। और स्‍वप्‍न में यह चेतावनी पाकर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से होकर अपने देश को चले गए। उनके चले जाने के बाद देखो, प्रभु के एक दूत ने स्‍वप्‍न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, “उठ! उस बालक को और उसकी माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूँ, तब तक वही रहना; क्‍योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूँढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले।” तब वह रात ही को उठकर बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र को चल दिया। और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा। इसलिये कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा था कि पूरा होः “मैं ने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया।” जब हेरोदेस ने यह देखा, कि ज्‍योतिषियों ने मेरे साथ धोखा किया है, तब वह क्रोध से भर गया, और लोगों को भेजकर ज्‍योतिषियों से ठीक ठीक पूछे हुए समय के अनुसार बैतलहम और उसके आस पास के स्थानों के सब लड़कों को जो दो वर्ष के या उससे छोटे थे, मरवा डाला। तब जो वचन यिर्मयाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआः “रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी; और शान्‍त होना न चाहती थी, क्‍योंकि वे अब नहीं रहे।” हेरोदेस के मरने के बाद देखो, प्रभु के दूत ने मिस्र में यूसुफ को स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहा, ”उठ, बालक और उसकी माता को लेकर इस्राएल के देश में चला जा; क्‍योंकिं जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए।” वह उठा, और बालक और उसकी माता को साथ लेकर इस्राएल के देश में आया। परन्‍तु यह सुनकर कि अरखिलाउस अपने पिता हेरोदेस की जगह यहूदिया पर राज्‍य कर रहा है, वहाँ जाने से डरा; और स्‍वप्‍न में चेतावनी पाकर गलील प्रदेश में चला गया। और नासरत नामक नगर में जा बसा, ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा कहा गया थाः “वह नासरी कहलाएगा।” उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा: “मन फिराओ, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य निकट आ गया है।” यह वही है जिसकी चर्चा यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा की गई: “जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द हो रहा है, कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसकी सड़कें सीधी करो।” यह यूहन्‍ना ऊँट के रोम का वस्‍त्र पहिने था, और अपनी कमर में चमड़े का कटिबन्ध बाँधे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियां और बनमधु था। तब यरूशलेम के और सारे यहूदिया के, और यरदन के आस पास के सारे देश के लोग उसके पास निकल आए। और अपने-अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उससे बपतिस्‍मा लिया। जब उसने बहुतेरे फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्‍मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उनसे कहा, “हे साँप के बच्‍चों, तुम्‍हें किसने जता दिया कि आनेवाले क्रोध से भागो? इसलिए मन फिराव के योग्‍य फल लाओ; और अपने-अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता अब्राहम है; क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्‍वर इन पत्‍थरों से अब्राहम के लिये सन्‍तान उत्‍पन्न कर सकता है। और अब कुल्‍हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो-जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है। ”मैं तो पानी से तुम्‍हें मन फिराव का बपतिस्‍मा देता हूँ, परन्‍तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उसकी जूती उठाने के योग्‍य नहीं, वह तुम्‍हें पवित्र आत्‍मा और आग से बपतिस्‍मा देगा। उसका सूप उस के हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्‍छी रीति से साफ करेगा, और अपने गेहूँ को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्‍तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो बुझने की नहीं।” उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे पर यूहन्‍ना के पास उससे बपतिस्‍मा लेने आया। परन्‍तु यूहन्ना यह कहकर उसे रोकने लगा, कि मुझे तेरे हाथ से बपतिस्‍मा लेने की आवश्‍यक्‍ता है, और तू मेरे पास आया है? यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्‍योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्‍मा लेकर तुरन्‍त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उसने परमेश्‍वर के आत्‍मा को कबूतर की नाई उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्‍यन्‍त प्रसन्न हूँ।” तब उस समय आत्‍मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उसकी परीक्षा हो। वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी। तब परखनेवाले ने पास आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्‍थर रोटियाँ बन जाएँ।” उसने उत्तर दिया, “लिखा है कि मनुष्‍य केवल रोटी ही से नहीं, परन्‍तु हर एक वचन से जो परमेश्‍वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।” तब इब्लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। और उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्‍योंकि लिखा है, कि ‘वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा’; और ‘वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पाँवों में पत्‍थर से ठेस लगे।’ “ यीशु ने उससे कहा, “यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्‍वर की परीक्षा न कर।” फिर शैतान उसे एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्‍य और उसका वैभव दिखाकर उससे कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूँगा। तब यीशु ने उससे कहा, “हे शैतान दूर हो जा, क्‍योंकि लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।’ “ तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्‍वर्गदूत आकर उसकी सेवा करने लगे। जब उसने यह सुना कि यूहन्ना पकड़वा दिया गया, तो वह गलील को चला गया। और नासरत को छोड़कर कफरनहूम में जो झील के किनारे जबूलून और नपताली के देश में है जाकर रहने लगा। ताकि जो यशायाह भविष्‍द्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो। “जबूलून और नपताली के देश, झील के मार्ग से यरदन के पास अन्‍यजातियों का गलील- जो लोग अन्‍धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्‍योंति देखी; और जो मृत्‍यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्‍योति चमकी।” उस समय से यीशु प्रचार करना और यह कहना आरम्‍भ किया, “मन फिराओ क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य निकट आया है।” उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात् शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्‍द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्‍योंकि वे मछवे थे। और उनसे कहा, “मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्‍यों के पकड़नेवाले बनाऊँगा।” वे तुरन्‍त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। और वहाँ से आगे बढ़कर, उसने और दो भाइयों अर्थात् जब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्‍हें भी बुलाया। वे तुरन्‍त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उनकी आराधनालयों में उपदेश करता और राज्‍य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। और सारे सीरिया देश में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्‍टात्‍माएँ थीं और मिर्गीवालों और लकवे के रोगियों को उसके पास लाए और उसने उन्‍हें चंगा किया। और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली। वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। और वह अपना मुँह खोलकर उन्‍हें यह उपदेश देने लगा: “धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है। ”धन्‍य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएँगे। ”धन्‍य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्‍वी के अधिकारी होंगे। ”धन्‍य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्‍योंकि वे तृप्‍त किये जायेंगे । ”धन्‍य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी। ”धन्‍य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्‍वर को देखेंगे। ”धन्‍य हैं वे, जो मेल करवानेवाले हैं, क्‍योंकि वे परमेश्‍वर के पुत्र कहलाएँगे। ”धन्‍य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है। ”धन्‍य हो तुम, जब मनुष्‍य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। ”आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्‍हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है। इसलिये कि उन्होंने उन भविष्‍यद्वक्‍ताओं को जो तुम से पहले थे इसी रीति से सताया था। ”तुम पृथ्‍वी के नमक हो; परन्‍तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्‍तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इसके कि बाहर फेंका जाए और मनुष्‍यों के पैरों तले रौंदा जाए। ”तुम जगत की ज्‍योति हो। जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। ”और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्‍तु दीवट पर रखते हैं, तब उससे घर के सब लोगों को प्रकाश पहुँचता है। ”उसी प्रकार तुम्‍हारा उजियाला मनुष्‍यों के सामने चमके कि वे तुम्‍हारे भले कामों को देखकर तुम्‍हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें। ”यह न समझो, कि मैं व्‍यवस्‍था या भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तकों को लोप करने आया हूँ, लोप करने नहीं, परन्‍तु पूरा करने आया हूँ। ”क्‍योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तक आकाश और पृथ्‍वी टल न जाएँ, तब तक व्‍यवस्‍था से एक मात्रा या बिन्‍दु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा। ”इसलिये जो कोई इन छोटी से छोटी आज्ञाओं में से किसी एक को तोड़े, और वैसा ही लोगों को सिखाए, वह स्‍वर्ग के राज्‍य में सब से छोटा कहलाएगा; परन्‍तु जो कोई उन का पालन करेगा और उन्‍हें सिखाएगा, वही स्‍वर्ग के राज्‍य में महान कहलाएगा। ”क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि यदि तुम्‍हारी धार्मिकता शास्‍त्रियों और फरीसियों की धार्मिकता से बढ़कर न हो, तो तुम स्‍वर्ग के राज्‍य में कभी प्रवेश करने न पाओगे। ”तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि ‘हत्‍या न करना’, और ‘जो कोई हत्‍या करेगा वह कचहरी में दण्‍ड के योग्‍य होगा।’ ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्‍ड के योग्‍य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्‍मा कहेगा वह महासभा में दण्‍ड के योग्‍य होगा; और जो कोई कहे ‘अरे मूर्ख’ वह नरक की आग के दण्‍ड के योग्‍य होगा। ”इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहाँ तू स्‍मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के सामने छोड़ दे, और जाकर पहले अपने भाई से मेल मिलाप कर, और तब आकर अपनी भेंट चढ़ा। ”जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग में हैं, उससे झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे, और हाकिम तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्‍दीगृह में डाल दिया जाए। ”मैं तुम से सच कहता हूँ कि जब तक तू कौड़ी-कौड़ी भर न दे तब तक वहाँ से छूटने न पाएगा। ”तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, ‘व्‍यभिचार न करना।’ ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई किसी स्‍त्री पर कुदृष्‍टि डाले वह अपने मन में उससे व्‍यभिचार कर चुका। ”यदि तेरी दाहिनी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर अपने पास से फेंक दे; क्‍योंकि तेरे लिये यही भला है कि तेरे अगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। ”और यदि तेरा दाहिना हाथ तुझे ठोकर खिलाए, तो उसको काटकर अपने पास से फेंक दे, क्‍योंकि तेरे लिये यही भला है, कि तेरे अंगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। ”यह भी कहा गया था, ‘जो कोई अपनी पत्‍नी को त्‍याग दे, तो उसे त्‍यागपत्र दे।’ ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई अपनी पत्‍नी को व्‍यभिचार के सिवा किसी और कारण से छोड़ दे, तो वह उससे व्‍यभिचार करवाता है; और जो कोई उस त्‍यागी हुई से ब्‍याह करे, वह व्‍यभिचार करता है। ”फिर तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था, ‘झूठी शपथ न खाना, परन्‍तु प्रभु के लिये अपनी शपथ को पूरी करना।’ ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि कभी शपथ न खाना; न तो स्‍वर्ग की, क्‍योंकि वह परमेश्‍वर का सिंहासन है। ”न धरती की, क्‍योंकि वह उसके पाँवों की चौकी है; न यरूशलेम की, क्‍योंकि वह महाराजा का नगर है। ”अपने सिर की भी शपथ न खाना क्‍योंकि तू एक बाल को भी न उजला, न काला कर सकता है। ”परन्‍तु तुम्‍हारी बात हाँ की हाँ, या नहीं की नहीं हो; क्‍योंकि जो कुछ इस से अधिक होता है वह बुराई से होता है। ”तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आँख के बदले आँख, और दाँत के बदले दाँत। ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि बुरे का सामना न करना; परन्‍तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्‍पड़ मारे, उसकी ओर दूसरा भी फेर दे। ”और यदि कोई तुझ पर नालिश करके तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे। ”और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा। ”जो कोई तुझ से माँगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उससे मुँह न मोड़। ”तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। ”परन्‍तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो। ”जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्‍तान ठहरोगे क्‍योंकि वह भलों और बुरों दोनो पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। ”क्‍योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखनेवालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्‍हारे लिये क्‍या लाभ होगा? क्‍या महसूल लेनेवाले भी ऐसा ही नहीं करते? ”और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्‍या अन्‍यजाति भी ऐसा नहीं करते? ”इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है। ”सावधान रहो! तुम मनुष्‍यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। ”इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसे कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उनकी बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वे अपना फल पा चुके। ”परन्‍तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बायाँ हाथ न जानने पाए। ”ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। ”और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्‍योंकि लोगों को दिखाने के लिये आराधनालयों में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े होकर प्रार्थना करना उनको अच्‍छा लगता है। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। ”परन्‍तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। ”प्रार्थना करते समय अन्‍यजातियों के समान बक बक न करो; क्‍योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उनकी सुनी जाएगी। ”सो तुम उनके समान न बनो, क्‍योंकि तुम्‍हारा पिता तुम्‍हारे माँगने से पहले ही जानता है, कि तुम्‍हारी क्‍या-क्‍या आवश्‍यक्‍ता है। ”अतः तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे पिता, तू जो स्‍वर्ग में हैं; तेरा नाम पवित्र माना जाए। ”तेरा राज्‍य आए। तेरी इच्‍छा जैसे स्‍वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्‍वी पर भी हो। ”हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। ”और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। ”और हमें परीक्षा में न ला, परन्‍तु बुराई से बचा। [क्‍योंकि राज्‍य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही है।” आमीन।] ”इसलिये यदि तुम मनुष्‍य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्‍हें क्षमा करेगा। ”और यदि तुम मनुष्‍यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्‍हारा पिता भी तुम्‍हारे अपराध क्षमा न करेगा। ”जब तुम उपवास करो, तो कपटियों के समान तुम्हारे मुँह पर उदासी न छाई रहे, क्‍योंकि वे अपना मुँह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्‍हें उपवासी जानें। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। ”परन्‍तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुँह धो। ”ताकि लोग नहीं परन्‍तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने। इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। ”अपने लिये पृथ्‍वी पर धन इकट्ठा न करो; जहाँ कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। ”परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहाँ न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। ”क्‍योंकि जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा। ”शरीर का दीया आँख है: इसलिये यदि तेरी आँख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा। ”परन्‍तु यदि तेरी आँख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्‍धियारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्‍धकार हो तो वह अन्‍धकार कैसा बड़ा होगा! ”कोई मनुष्‍य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा। ‘तुम परमेश्‍वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते। ”इसलिये मैं तुम से कहता हूँ, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएँगे, और क्‍या पीएँगे, और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहनेंगे, क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? ”आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता उनको खिलाता है। क्‍या तुम उनसे अधिक मूल्‍य नहीं रखते? ”तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? ”और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो? जंगली फूलों पर ध्‍यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। ”तौभी मैं तुम से कहता हूँ, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहने हुए न था। ”इसलिये जब परमेश्‍वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहनाता है, तो हे अल्‍पविश्‍वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहनाएगा? ”इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएँगे, या क्‍या पीएँगे, या क्‍या पहनेंगे? ”क्‍योंकि अन्‍यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्‍हें ये सब वस्तुएँ चाहिए। ”इसलिये पहले तुम परमेश्वर के राज्‍य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएँ तुम्‍हें मिल जाएँगी। ”अतः कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है। ”दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए। ”क्‍योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्‍हारे लिये भी नापा जाएगा। ”तू क्‍यों अपने भाई की आँख के तिनके को देखता है, और अपनी आँख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता? ”जब तेरी ही आँख मे लट्ठा है, तो तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, कि ला मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ? ”हे कपटी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आँख का तिनका भली भाँति देखकर निकाल सकेगा। ”पवित्र वस्‍तु कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे मत डालो; ऐसा न हो कि वे उन्‍हें पाँवों तले रौंदें और पलटकर तुम को फाड़ डालें। ”माँगो, तो तुम्‍हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्‍हारे लिये खोला जाएगा। ”क्‍योंकि जो कोई माँगता है, उसे मिलता है; और जो ढूँढ़ता है, वह पाता है। और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा। ”तुम में से ऐसा कौन मनुष्‍य है, कि यदि उसका पुत्र उससे रोटी माँगे, तो वह उसे पत्‍थर दे? ”या मछली माँगे, तो उसे साँप दे? ”अतः जब तुम बुरे होकर, अपने बच्‍चों को अच्‍छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता अपने माँगनेवालों को अच्‍छी वस्तुएँ क्‍यों न देगा? ”इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्‍य तुम्‍हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो; क्‍योंकि व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍तओं की शिक्षा यही है। ”सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्‍योंकि चौड़ा है वह फाटक और सरल है वह मार्ग जो विनाश को पहुँचाता है; और बहुतेरे हैं जो उससे प्रवेश करते हैं। ”क्‍योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुँचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं। ”झूठे भविष्‍यद्वक्‍ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्‍हारे पास आते हैं, परन्‍तु अन्‍तर में फाड़नेवाले भड़िए हैं। ”उनके फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे। क्‍या झाड़ियों से अँगूर, वा ऊँटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं? ”इसी प्रकार हर एक अच्‍छा पेड़ अच्‍छा फल लाता है और निकम्‍मा पेड़ बुरा फल लाता है। ”अच्‍छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्‍मा पेड़ अच्‍छा फल ला सकता है। ”जो-जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है। ”अतः उनके फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे। ”जो मुझ से, ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्‍य में प्रवेश न करेगा, परन्‍तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्‍छा पर चलता है। ”उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्‍या हम ने तेरे नाम से भविष्‍यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्‍भे के काम नहीं किए?’ ”तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा कि मैंने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करनेवालों, मेरे पास से चले जाओ। ”इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्‍हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्‍य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। ”और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्‍करें लगीं, परन्‍तु वह नहीं गिरा, क्‍योंकि उसकी नींव चट्टान पर डाली गई थी। ”परन्‍तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्‍य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। ”और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्‍करें लगीं और वह गिरकर सत्‍यानाश हो गया।” जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। क्‍योंकि वह उनके शास्‍त्रियों के समान नहीं परन्‍तु अधिकारी के समान उन्‍हें उपदेश देता था। जब वह उस पहाड़ से उतरा, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा; कि हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है। यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ, और कहा, “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा” और वह तुरन्‍त कोढ़ से शुद्ध हो गया। यीशु ने उससे कहा, “देख, किसी से न कहना, परन्‍तु जाकर अपने आप को याजक को दिखा और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उनके लिये गवाही हो।” और जब वह कफरनहूम में आया तो एक सूबेदार ने उसके पास आकर उससे विनती की, “हे प्रभु, मेरा सेवक घर में झोले का मारा बहुत दुःखी पड़ा है।” उसने उससे कहा, “मैं आकर उसे चंगा करूँगा।” सूबेदार ने उत्तर दिया; कि हे प्रभु मैं इस योग्‍य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए, पर केवल मुख से कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। क्‍योंकि मैं भी पराधीन मनुष्‍य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक से कहता हूँ, जा, तो वह जाता है; और दूसरे को कि आ, तो वह आता है; और अपने दास से कहता हूँ, कि यह कर, तो वह करता है। यह सुनकर यीशु ने अचम्‍भा किया, और जो उसके पीछे आ रहे थे उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि मैंने इस्राएल में भी ऐसा विश्‍वास नहीं पाया। और मैं तुम से कहता हूँ, कि बहुतेरे पूर्व और पश्‍चिम से आकर अब्राहम और इसहाक और याकूब के साथ स्‍वर्ग के राज्‍य में बैठेंगे। परन्‍तु राज्‍य के सन्‍तान बाहर अन्धकार में डाल दिए जाएँगे: वहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।” और यीशु ने सूबेदार से कहा, “जा, जैसा तेरा विश्‍वास है, वैसा ही तेरे लिये हो। और उसका सेवक उसी घड़ी चंगा हो गया। और यीशु ने पतरस के घर में आकर उसकी सांस को ज्‍वर में पड़ी देखा। उसने उसका हाथ छूआ और उसका ज्‍वर उतर गया; और वह उठकर उसकी सेवा करने लगी। जब संध्‍या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिनमें दुष्‍टात्‍माएँ थीं और उसने उन आत्‍माओं को अपने वचन से निकाल दिया, और सब बीमारों को चंगा किया। ताकि जो वचन यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो: “उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।” यीशु ने अपने चारों ओर एक बड़ी भीड़ देखकर झील के उस पार जाने की आज्ञा दी। और एक शास्‍त्री ने पास आकर उससे कहा, “हे गुरू, जहाँ कहीं तू जाएगा, मैं तेरे पीछे-पीछे हो लूँगा।” यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं; परन्‍तु मनुष्‍य के पुत्र के लिये सिर धरने की भी जगह नहीं है।” एक और चेले ने उससे कहा, “हे प्रभु, मुझे पहले जाने दे, कि अपने पिता को गाड़ दूँ।” यीशु ने उससे कहा, “तू मेरे पीछे हो ले; और मुर्दों को अपने मुर्दे गाड़ने दे।” जब वह नाव पर चढ़ा, तो उसके चेले उसके पीछे हो लिए। और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफान उठा कि नाव लहरों से ढँपने लगी; और वह सो रहा था। तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा, “हे प्रभु, हमें बचा, हम नाश हुए जाते हैं।” उसने उनसे कहा, “हे अल्‍पविश्‍वासियों, क्‍यों डरते हो?” तब उसने उठकर आन्‍धी और पानी को डाँटा, और सब शान्‍त हो गया। और लोग अचम्‍भा करके कहने लगे कि यह कैसा मनुष्‍य है, कि आन्‍धी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते हैं। जब वह उस पार गदरेनियों के देश में पहुँचा, तो दो मनुष्‍य जिन में दुष्‍टात्‍माएँ थीं कब्रो से निकलते हुए उसे मिले, जो इतने प्रचण्‍ड थे, कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। और देखो, उन्होंने चिल्‍लाकर कहा, “हे परमेश्‍वर के पुत्र, हमारा तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू समय से पहले हमें दु:ख देने यहाँ आया है?” उनसे कुछ दूर बहुत से सूअरों का झुण्‍ड चर रहा था। दुष्‍टात्‍माओं ने उससे यह कहकर विनती की, क यदि तू हमें निकालता है, तो सूअरों के झुण्‍ड में भेज दे। उसने उनसे कहा, “जाओ!” वे निकलकर सूअरों में पैठ गए और देखो, सारा झुण्‍ड कड़ाड़े पर से झपटकर पानी में जा पड़ा और डूब मरा। और चरवाहे भागे, और नगर में जाकर ये सब बातें और जिन में दुष्‍टात्‍माएँ थीं; उन का सारा हाल कह सुनाया। और देखो, सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर विनती की, कि हमारे सिवाना से बाहर निकल जा। फिर वह नाव पर चढ़कर पार गया, और अपने नगर में आया। और देखो, कई लोग एक झोले के मारे हुए को खाट पर रखकर उसके पास लाए। यीशु ने उन का विश्‍वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा, “हे पुत्र, ढाढ़स बान्‍ध; तेरे पाप क्षमा हुए।” और देखो, कई शास्‍त्रियों ने सोचा, कि यह तो परमेश्‍वर की निन्‍दा करता है। यीशु ने उनके मन की बातें मालूम करके कहा, “तुम लोग अपने-अपने मन में बुरा विचार क्‍यों कर रहे हो? सहज क्‍या है? यह कहना, कि तेरे पाप क्षमा हुए; या यह कहना कि उठ और चल फिर। परन्‍तु इसलिये कि तुम जान लो कि मनुष्‍य के पुत्र को पृथ्‍वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है। उसने झोले के मारे हुए से कहा: उठ, अपनी खाट उठा, और अपने घर चला जा।” वह उठकर अपने घर चला गया। लोग यह देखकर डर गए और परमेश्‍वर की महिमा करने लगे जिसने मनुष्‍यों को ऐसा अधिकार दिया है। वहाँ से आगे बढ़कर यीशु ने मत्ती नाम एक मनुष्‍य को महसूल की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” वह उठकर उसके पीछे हो लिया। और जब वह घर में भोजन करने के लिये बैठा तो बहुतेरे महसूल लेनेवालें और पापी आकर यीशु और उसके चेलों के साथ खाने बैठे। यह देखकर फरीसियों ने उसके चेलों से कहा, “तुम्‍हारा गुरू महसूल लेनेवालों और पापियों के साथ क्‍यों खाता है?” यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “वैद्द भले चंगों को नहीं परन्‍तु बीमारों के लिए आवश्यक है। इसलिए तुम जाकर इसका अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्‍तु दया चाहता हूँ; क्‍योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूँ।” तब यूहन्ना के चेलों ने उसके पास आकर कहा, “क्‍या कारण है कि हम और फरीसी इतना उपवास करते हैं, पर तेरे चेले उपवास नहीं करते?” यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या बराती, जब तक दुल्‍हा उनके साथ है शोक कर सकते हैं? पर वे दिन आएँगे कि दूल्‍हा उनसे अलग किया जाएगा, उस समय वे उपवास करेंगे। कोरे कपड़े का पैवन्द पुराने वस्त्र पर कोई नहीं लगाता, क्‍योंकि वह पैवन्द वस्त्र से और कुछ खींच लेता है, और वह अधिक फट जाता है। और नया दाखरस पुरानी मशकों में नहीं भरते हैं; क्‍योंकि ऐसा करने से मशकें फट जाती हैं, और दाखरस बह जाता है और मशकें नाश हो जाती हैं, परन्‍तु नया दाखरस नई मशकों में भरते हैं और वह दोनों बची रहती हैं।” वह उनसे ये बातें कह ही रहा था, कि देखो, एक सरदार ने आकर उसे प्रणाम किया और कहा, “मेरी पुत्री अभी मरी है; परन्‍तु चलकर अपना हाथ उस पर रख, तो वह जीवित हो जाएगी।” यीशु उठकर अपने चेलों समेत उसके पीछे हो लिया। और देखो, एक स्‍त्री ने जिसके बारह वर्ष से लहू बहता था, उसके पीछे से आकर उसके वस्‍त्र के आँचल को छू लिया। क्‍योंकि वह अपने मन में कहती थी कि यदि मैं उसके वस्‍त्र ही को छू लूँगी तो चंगी हो जाऊँगी। यीशु ने फिरकर उसे देखा और कहा, “पुत्री ढाढ़स बान्‍ध; तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है।” अतः वह स्‍त्री उसी घड़ी चंगी हो गई। जब यीशु उस सरदार के घर में पहुँचा और बाँसली बजानेवालों और भीड़ को हुल्‍लड़ मचाते देखा, तब कहा, “हट जाओ, लड़की मरी नहीं, पर सोती है।” इस पर वे उसकी हँसी करने लगे। परन्‍तु जब भीड़ निकाल दी गई, तो उसने भीतर जाकर लड़की का हाथ पकड़ा, और वह जी उठी। और इस बात की चर्चा उस सारे देश में फैल गई। जब यीशु वहाँ से आगे बढ़ा, तो दो अन्‍धे उसके पीछे यह पुकारते हुए चले, कि हे दाऊद की सन्‍तान, हम पर दया कर। जब वह घर में पहुँचा, तो वे अन्‍धे उस के पास आए, और यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम्‍हें विश्‍वास है, कि मैं यह कर सकता हूँ?” उन्होंने उससे कहा, “हाँ प्रभु।” तब उसने उनकी आँखे छूकर कहा, “तुम्‍हारे विश्‍वास के अनुसार तुम्‍हारे लिये हो।” और उनकी आँखे खुल गई और यीशु ने उन्‍हें चिताकर कहा, “सावधान, कोई इस बात को न जाने।” पर उन्होंने निकलकर सारे देश में उसका यश फैला दिया। जब वे बाहर जा रहे थे, तो देखो, लोग एक गूँगे को जिसमें दुष्‍टात्‍मा थी उस के पास लाए। और जब दुष्‍टात्‍मा निकाल दी गई, तो गूंगा बोलने लगा। और भीड़ ने अचम्‍भा करके कहा कि इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया। परन्‍तु फरीसियों ने कहा, “यह तो दुष्‍टात्‍माओं के सरदार की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता है।” और यीशु सब नगरों और गाँवों में फिरता रहा और उनके आराधनालयों में उपदेश करता, और राज्‍य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्‍याकुल और भटके हुए से थे। तब उसने अपने चेलों से कहा, “पक्‍के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। इसलिये खेत के स्‍वामी से विनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।” फिर उसने अपने बारह चेलों को पास बुलाकर, उन्‍हें अशुद्ध आत्‍माओं पर अधिकार दिया, कि उन्‍हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें। इन बारह प्रेरितों के नाम ये हैं: पहला शमौन, जो पतरस कहलाता है, और उसका भाई अन्‍द्रियास; जब्‍दी का पुत्र याकूब, और उसका भाई यूहन्ना; फिलिप्‍पुस और बरतुल्‍मै, थोमा, और महसूल लेनेवाला मत्ती, हलफै का पुत्र याकूब और तद्दै। शमौन कनानी, और यहूदा इस्‍करियोती, जिसने उसे पकड़वा भी दिया। इन बारहों को यीशु ने यह आज्ञा देकर भेजा, “अन्‍यजातियों की ओर न जाना, और सामरियों के किसी नगर में प्रवेश न करना। परन्‍तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना। और चलते चलते प्रचार कर कहो कि स्‍वर्ग का राज्‍य निकट आ गया है। बीमारों को चंगा करो: मरे हुओं को जिलाओ: कोढि़यों को शुद्ध करो: दुष्‍टात्‍माओं को निकालो: तुम ने सेंतमेंत पाया है, सेंतमेंत दो। अपने पटुकों में न तो सोना, और न रूपा, और न तांबा रखना। मार्ग के लिये न झोली रखो, न दो कुरते, न जूते और न लाठी लो, क्‍योंकि मजदूर को उसका भोजन मिलना चाहिए। जिस किसी नगर या गाँव में जाओ तो पता लगाओ कि वहाँ कौन योग्‍य है? और जब तक वहाँ से न निकलो, उसी के यहाँ रहो। और घर में प्रवेश करते हुए उसे आशीष देना। यदि उस घर के लोग योग्‍य होंगे तो तुम्‍हारा कल्‍याण उन पर पहुंचेगा परन्‍तु यदि वे योग्य न हों तो तुम्‍हारा कल्‍याण तुम्‍हारे पास लौट आएगा। और जो कोई तुम्‍हें ग्रहण न करे, और तुम्‍हारी बातें न सुने, उस घर या उस नगर से निकलते हुए अपने पांवों की धूल झाड़ डालो। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि न्‍याय के दिन उस नगर की दशा से सदोम और अमोरा के देश की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी। देखो, मैं तुम्‍हें भेड़ों की नाई भेडि़यों के बीच में भेजता हूँ सो सांपों की नाई बुद्धिमान और कबूतरों की नाई भोले बनो। परन्‍तु लोगों से सावधान रहो, क्‍योंकि वे तुम्‍हें महासभाओं में सौपेंगे, और अपनी पंचायत में तुम्‍हें कोड़े मारेंगे। तुम मेरे लिये हाकिमों ओर राजाओं के सामने उन पर, और अन्‍यजातियों पर गवाह होने के लिये पहुँचाए जाओगे। जब वे तुम्‍हें पकड़वाएँगे तो यह चिन्‍ता न करना, कि हम किस रीति से; या क्‍या कहेंगे: क्‍योंकि जो कुछ तुम को कहना होगा, वह उसी घड़ी तुम्‍हें बता दिया जाएगा। क्‍योंकि बोलनेवाले तुम नहीं हो परन्‍तु तुम्‍हारे पिता का आत्‍मा तुम में बोलता है। भाई, भाई को और पिता पुत्र को, घात के लिये सौंपेंगे, और बच्चे माता-पिता के विरोध में उठकर उन्‍हें मरवा डालेंगे। मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे, पर जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा। जब वे तुम्‍हें एक नगर में सताएँ, तो दूसरे को भाग जाना। मैं तुम से सच कहता हूँ, तुम इस्राएल के सब नगरों में न फिर चुकोगे कि मनुष्‍य का पुत्र आ जाएगा। चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं; और न दास अपने स्‍वामी से। चेले का गुरू के, और दास का स्‍वामी के बाराबर होना ही बहुत है; जब उन्होंने घर के स्‍वामी को शैतान कहा तो उसके घरवालों को क्‍यों न कहेंगे? सो उनसे मत डरना, क्‍योंकि कुछ ढँका नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा। जो मैं तुम से अन्‍धियारे मे कहता हूँ, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्‍मा को घात नहीं कर सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्‍मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। क्‍या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकती? तौभी तुम्‍हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। तुम्‍हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। जो कोई मनुष्‍यों के सामने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के सामने मान लूँगा। पर जो कोई मनुष्‍यों के सामने मेरा इन्‍कार करेगा उससे मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के सामने इन्‍कार करूँगा। यह न समझो, कि मैं पृथ्‍वी पर मिलाप कराने को आया हूँ; मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूँ। मैं तो आया हूँ, कि मनुष्‍य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी माँ से, और बहू को उसकी सास से अलग कर दूँ। मनुष्‍य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे। जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्‍य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्‍य नहीं। और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्‍य नहीं। जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। जो तुम्‍हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है। जो भविष्‍यद्वक्‍ता को भविष्‍यद्वक्‍ता जानकर ग्रहण करे, वह भविष्‍यद्वक्‍ता का बदला पाएगा; और जो धर्मी को जानकर धर्मी को ग्रहण करे, वह धर्मी का बदला पाएगा। जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूँ, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा।” जब यीशु अपने बारह चेलों को आज्ञा दे चुका, तो वह उनके नगरों में उपदेश और प्रचार करने को वहाँ से चला गया। यूहन्ना ने बन्‍दीगृह में मसीह के कामों का समाचार सुनकर अपने चेलों को उससे यह पूछने भेजा। कि क्‍या आनेवाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें? यीशु ने उत्तर दिया, “जो कुछ तुम सुनते हो और देखते हो, वह सब जाकर यूहन्ना से कह दो। कि अन्‍धे देखते हैं और लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं और बहरे सुनते हैं, मुर्दे जिलाए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। और धन्‍य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।” जब वे वहाँ से चल दिए, तो यीशु यूहन्ना के विषय में लोगों से कहने लगा, “तुम जंगल में क्‍या देखने गए थे? क्‍या हवा से हिलते हुए सरकण्‍डे को? फिर तुम क्‍या देखने गए थे? देखो, जो कोमल वस्‍त्र पहनते हैं, वे राजभवनों में रहते हैं। तो फिर क्‍यों गए थे? क्‍या किसी भविष्‍यद्वक्‍ता को देखने को? हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, वरन् भविष्‍यद्वक्‍ता से भी बड़े को। यह वही है, जिसके विषय में लिखा है, कि देख; मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूँ, जो तेरे आगे तेरा मार्ग तैयार करेगा। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो स्‍त्रियों से जन्‍मे हैं, उन में से यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवालों से कोई बड़ा नहीं हुआ; पर जो स्‍वर्ग के राज्‍य में छोटे से छोटा है वह उससे बड़ा है। यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाले के दिनों से अब तक स्‍वर्ग के राज्‍य में बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवाल उसे छीन लेते हैं। यूहन्ना तक सारे भविष्‍यद्वक्‍ता और व्‍यवस्‍था भविष्‍यद्ववाणी करते रहे। और चाहो तो मानो, एलिय्‍याह जो आनेवाला था, वह यही है। जिसके सुनने के कान हों, वह सुन ले। मैं इस समय के लोगों की उपमा किस से दूँ? वे उन बालकों के समान हैं, जो बाजारों में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं। कि हम ने तुम्‍हारे लिये बांसली बजाई, और तुम न नाचे; हम ने विलाप किया, और तुम ने छाती नहीं पीटी। क्‍योंकि यूहन्ना न खाता आया और न पीता, और वे कहते हैं कि उसमें दुष्‍टात्‍मा है। मनुष्‍य का पुत्र खाता-पीता आया, और वे कहते हैं कि देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्‍य, महसूल लेनेवालों और पापियों का मित्र! पर ज्ञान अपने कामों में सच्‍चा ठहराया गया है।” तब वह उन नगरों को उलाहना देने लगा, जिन में उसने बहुतेरे सामर्थ्य के काम किए थे; क्‍योंकि उन्होंने अपना मन नहीं फिराया था। ”हाय, खुराजीन! हाय, बैतसैदा! जो सामर्थ्य के काम तुम में किए गए, यदि वे सूर और सैदा में किए जाते, तो टाट ओढ़कर, और राख में बैठकर, वे कब से मन फिरा लेते। परन्‍तु मैं तुम से कहता हूँ; कि न्‍याय के दिन तुम्‍हारी दशा से सूर और सैदा की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी। और हे कफरनहूम, क्‍या तू स्‍वर्ग तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे जाएगा; जो सामर्थ्य के काम तुझ में किए गए है, यदि सदोम में किए जाते, तो वह आज तक बना रहता। पर मैं तुम से कहता हूँ, कि न्‍याय के दिन तेरी दशा से सदोम के देश की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी।” उसी समय यीशु ने कहा, “हे पिता, स्‍वर्ग और पृथ्‍वी के प्रभु, मैं तेरा धन्‍यवाद करता हूँ, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है। ”हाँ, हे पिता, क्‍योंकि तुझे यही अच्‍छा लगा। ”मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे। ”हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्‍हें विश्राम दूँगा। ”मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्‍योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। ”क्‍योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्‍का है।” उस समय यीशु सब्‍त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके चेलों को भूख लगी, और वे बालें तोड़ तोड़कर खाने लगे। फरीसियों ने यह देखकर उससे कहा, “देख, तेरे चेले वह काम कर रहे हैं, जो सब्‍त के दिन करना उचित नहीं।” उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम ने नहीं पढ़ा, कि दाऊद ने, जब वह और उसके साथी भूखे हुए तो क्‍या किया? वह कैसे परमेश्‍वर के घर में गया, और भेंट की रोटियाँ खाईं, जिन्‍हें खाना न तो उसे और न उसके साथियों को, पर केवल याजकों को उचित था? या क्या तुम ने व्‍यवस्‍था में नहीं पढ़ा, कि याजक सब्‍त के दिन मन्‍दिर में सब्‍त के दिन के विधि को तोड़ने पर भी निर्दोष ठहरते हैं? ”पर मैं तुम से कहता हूँ, कि यहाँ वह है, जो मन्‍दिर से भी बड़ा है। ”यदि तुम इस का अर्थ जानते कि मैं दया से प्रसन्न हूँ, बलिदान से नहीं, तो तुम निर्दोष को दोषी न ठहराते। ”मनुष्‍य का पुत्र तो सब्‍त के दिन का भी प्रभु है।” वहाँ से चलकर वह उनके आराधनालय में आया। और देखो, एक मनुष्‍य था, जिसका हाथ सूखा हुआ था; और उन्होंने उस पर दोष लगाने के लिेए उससे पूछा, कि क्‍या सब्‍त के दिन चंगा करना उचित है? उसने उनसे कहा, “तुम में ऐसा कौन है, जिसकी एक भेड़ हो, और वह सब्‍त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो वह उसे पकड़कर न निकाले? भला, मनुष्‍य का मूल्‍य भेड़ से कितना बढ़ कर है! इसलिये सब्‍त के दिन भलाई करना उचित है।” तब उसने उस मनुष्‍य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने बढ़ाया, और वह फिर दूसरे हाथ के समान अच्‍छा हो गया। तब फरीसियों ने बाहर जाकर उसके विरोध में सम्‍मति की, कि उसे किस प्रकार नाश करें? यह जानकर यीशु वहाँ से चला गया। और बहुत लोग उसके पीछे हो लिये, और उसने सब को चंगा किया। और उन्‍हें चिताया, कि मुझे प्रगट न करना। कि जो वचन यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: ”देखो, यह मेरा सेवक है, जिसे मैं ने चुना है; मेरा प्रिय, जिस से मेरा मन प्रसन्न है: मैं अपना आत्‍मा उस पर डालूँगा; और वह अन्‍यजातियों को न्‍याय का समाचार देगा। वह न झगड़ा करेगा, और न धूम मचाएगा; और न बाजारों में कोई उसका शब्‍द सुनेगा। वह कुचले हुए सरकण्‍डे को न तोड़ेगा; और धूआँ देती हुई बत्ती को न बुझाएगा, जब तक न्‍याय को प्रबल न कराए। और अन्‍यजातियाँ उसके नाम पर आशा रखेंगी।” तब लोग एक अन्‍धे-गूँगे को जिसमें दुष्‍टात्‍मा थी, उसके पास लाए; और उसने उसे अच्‍छा किया; और वह गूँगा बोलने और देखने लगा। इस पर सब लोग चकित होकर कहने लगे, “यह क्‍या दाऊद की सन्‍तान का है?” परन्‍तु फरीसियों ने यह सुनकर कहा, “यह तो दुष्‍टात्‍माओं के सरदार शैतान की सहायता के बिना दुष्‍टात्‍माओं को नहीं निकालता।” उसने उनके मन की बात जानकर उनसे कहा, “जिस किसी राज्‍य में फूट होती है, वह उजड़ जाता है, और कोई नगर या घराना जिसमें फूट होती है, बना न रहेगा। ”और यदि शैतान ही शैतान को निकाले, तो वह अपना ही विरोधी हो गया है; फिर उसका राज्‍य कैसे बना रहेगा? ”भला, यदि मैं शैतान की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता हूँ, तो तुम्‍हारे वंश किस की सहायता से निकालते हैं? इसलिये वे ही तुम्‍हारा न्‍याय चुकाएँगे। ”पर यदि मैं परमेश्‍वर के आत्‍मा की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता हूँ, तो परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारे पास आ पहुँचा है। ”या कैसे कोई मनुष्‍य किसी बलवन्‍त के घर में घुसकर उसका माल लूट सकता है जब तक कि पहले उस बलवन्‍त को न बान्‍ध ले? और तब वह उसका घर लूट लेगा। ”जो मेरे साथ नहीं, वह मेरे विरोध में है; और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है। ”इसलिये मैं तुम से कहता हूँ, कि मनुष्‍य का सब प्रकार का पाप और निन्‍दा क्षमा की जाएगी, पर पवित्र आत्‍मा की निन्‍दा क्षमा न की जाएगी। ”जो कोई मनुष्‍य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहेगा, उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा, परन्‍तु जो कोई पवित्र आत्‍मा के विरोध में कुछ कहेगा, उसका अपराध न तो इस लोक में और न परलोक में क्षमा किया जाएगा। ”यदि पेड़ को अच्‍छा कहो, तो उसके फल को भी अच्‍छा कहो, या पेड़ को निकम्‍मा कहो, तो उसके फल को भी निकम्‍मा कहो; क्‍योंकि पेड़ फल ही से पहचाना जाता है। ”हे साँप के बच्‍चों, तुम बुरे होकर कैसे अच्‍छी बातें कह सकते हो? क्‍योंकि जो मन में भरा है, वही मुँह पर आता है। ”भला, मनुष्‍य मन के भले भण्‍डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्‍य बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है। ”और मै तुम से कहता हूँ, कि जो-जो निकम्‍मी बातें मनुष्‍य कहेंगे, न्‍याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। ”क्‍योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा।” इस पर कितने शास्‍त्रियों और फरीसियों ने उससे कहा, “हे गुरू, हम तुझ से एक चिन्‍ह देखना चाहते हैं।” उसने उन्‍हें उत्तर दिया, “इस युग के बुरे और व्‍यभिचारी लोग चिन्‍ह ढूँढ़ते हैं; परन्‍तु योना भविष्‍यद्वक्‍ता के चिन्‍ह को छोड़ कोई और चिन्‍ह उनको न दिया जाएगा। ”योना तीन रात-दिन जल जन्‍तु के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्‍य का पुत्र तीन रात-दिन पृथ्‍वी के भीतर रहेगा। ”नीनवे के लोग न्‍याय के दिन इस युग के लोगों के साथ उठकर उन्‍हें दोषी ठहराएँगे, क्‍योंकि उन्होंने योना का प्रचार सुनकर, मन फिराया और देखो, यहाँ वह है जो योना से भी बड़ा है। ”दक्षिण की रानी न्‍याय के दिन इस युग के लोगों के साथ उठकर उन्‍हें दोषी ठहराएँगी, क्‍योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने के लिये पृथ्‍वी की छोर से आई, और देखो, यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है। ”जब अशुद्ध आत्‍मा मनुष्‍य में से निकल जाती है, तो सूखी जगहों में विश्राम ढूँढ़ती फिरती है, और पाती नहीं। ”तब कहती है, कि मैं अपने उसी घर में जहाँ से निकली थी, लौट जाऊँगी, और आकर उसे सूना, झाड़ा-बुहारा और सजा-सजाया पाती है। ”तब वह जाकर अपने से और बुरी सात आत्‍माओं को अपने साथ ले आती है, और वे उसमें पैठकर वहाँ वास करती है, और उस मनुष्‍य की पिछली दशा पहले से भी बुरी हो जाती है। इस युग के बुरे लोगों की दशा भी ऐसी ही होगी।” जब वह भीड़ से बातें कर ही रहा था, तो देखो, उसकी माता और भाई बाहर खड़े थे, और उससे बातें करना चाहते थे। किसी ने उससे कहा, “देख तेरी माता और तेरे भाई बाहर खड़े हैं, और तुझ से बातें करना चाहते हैं।” यह सुन उसने कहनेवाले को उत्तर दिया, “कौन है मेरी माता? और कौन है मेरे भाई?” और अपने चेलों की ओर अपना हाथ बढ़ा कर कहा, देखो, “मेरी माता और मेरे भाई ये हैं। क्‍योंकि जो कोई मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्‍छा पर चले, वही मेरा भाई, और बहन, और माता है।” उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे जा बैठा। और उसके पास ऐसी बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई कि वह नाव पर चढ़ गया, और सारी भीड़ किनारे पर खड़ी रही। और उसने उनसे दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें कही: “देखो, एक बोनेवाला बीज बोने निकला। ”बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्‍हें चुग लिया। ”कुछ बीज पत्‍थरीली भूमि पर गिरे, जहाँ उन्‍हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्‍द उग आए। ”पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए। ”कुछ बीज झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्‍हें दबा डाला। ”पर कुछ अच्‍छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। ”जिसके कान हों वह सुन ले।” और चेलों ने पास आकर उससे कहा, “तू उनसे दृष्‍टान्‍तों में क्‍यों बातें करता है?” उसने उत्तर दिया, “तुम को स्‍वर्ग के राज्‍य के भेदों की समझ दी गई है, पर उनको नहीं। ”क्‍योंकि जिसके पास है, उसे दिया जाएगा; और उसके पास बहुत हो जाएगा; पर जिसके पास कुछ नहीं है, उससे जो कुछ उसके पास है, वह भी ले लिया जाएगा। ”मैं उनसे दृष्‍टान्‍तों में इसलिये बातें करता हूँ, कि वे देखते हुए नहीं देखते; और सुनते हुए नहीं सुनते; और नहीं समझते। ”और उनके विषय में यशायाह की यह भविष्‍यद्ववाणी पूरी होती है: “तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं; और आंखों से तो देखोगे, पर तुम्‍हें न सूझेगा। ”क्‍योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊँचा सुनते हैं और उन्होंने अपनी आँखें मूंद लीं हैं; कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें, और कानों से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएँ, और मैं उन्‍हें चंगा करूँ।” ”पर धन्‍य है तुम्‍हारी आँखें, कि वे देखती हैं; और तुम्‍हारे कान, कि वे सुनते हैं। ”क्‍योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, कि बहुत से भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने और धर्मियों ने चाहा कि जो बातें तुम देखते हो, देखें पर न देखीं; और जो बातें तुम सुनते हो, सुनें, पर न सुनीं। ”अब तुम बोनेवाले का दृष्‍टान्‍त सुनो: ”जो कोई राज्‍य का वचन सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्‍ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था। ”और जो पत्‍थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्‍त आनन्‍द के साथ मान लेता है। पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्‍त ठोकर खाता है। ”जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्‍ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता। ”जो अच्‍छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।” उसने उन्‍हें एक और दृष्‍टान्‍त दिया, “स्‍वर्ग का राज्‍य उस मनुष्‍य के समान है जिसने अपने खेत में अच्‍छा बीज बोया। ”पर जब लोग सो रहे थे तो उसका बैरी आकर गेहूँ के बीच जंगली बीज बोकर चला गया। ”जब अंकुर निकले और बालें लगी, तो जंगली दाने के पौधे भी दिखाई दिए। ”इस पर गृहस्‍थ के दासों ने आकर उससे कहा, ‘हे स्‍वामी, क्‍या तू ने अपने खेत में अच्‍छा बीज न बोया था? फिर जंगली दाने के पौधे उसमें कहाँ से आए?’ ”उसने उनसे कहा, ‘यह किसी बैरी का काम है।’ दासों ने उससे कहा, ‘क्‍या तेरी इच्‍छा है, कि हम जाकर उनको बटोर लें?’ ”उसने कहा, ‘नहीं, ऐसा न हो कि जंगली दाने के पौधे बटोरते हुए उनके साथ गेहूँ भी उखाड़ लो। ‘कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो, और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूँगा; पहले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिये उनके गट्ठे बान्‍ध लो, और गेहूँ को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो’।” उसने उन्‍हें एक और दृष्‍टान्‍त दिया, “स्‍वर्ग का राज्‍य राई के एक दाने के समान है, जिसे किसी मनुष्‍य ने लेकर अपने खेत में बो दिया। वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब बढ़ जाता है तब सब साग-पात से बड़ा होता है; और ऐसा पेड़ हो जाता है, कि आकाश के पक्षी आकर उसकी डालियों पर बसेरा करते हैं।” उसने एक और दृष्‍टान्‍त उन्‍हें सुनाया, “स्‍वर्ग का राज्‍य खमीर के समान है जिस को किसी स्‍त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिला दिया और होते-होते वह सब खमीर हो गया।” ये सब बातें यीशु ने दृष्‍टान्‍तों में लोगों से कहीं, और बिना दृष्‍टान्‍त वह उनसे कुछ न कहता था। कि जो वचन भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: “मैं दृष्‍टान्‍त कहने को अपना मुँह खोलूँगा: मैं उन बातों को जो जगत की उत्‍पत्ति से गुप्‍त रही हैं प्रगट करूँगा।” तब वह भीड़ को छोड़कर घर में आया, और उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, “खेत के जंगली दाने का दृष्‍टान्‍त हमें समझा दे।” उसने उनको उत्तर दिया, “अच्‍छे बीज का बोनेवाला मनुष्‍य का पुत्र है। खेत संसार है, अच्‍छा बीज राज्‍य के सन्‍तान, और जंगली बीज दुष्‍ट के सन्‍तान हैं। जिस बैरी ने उनको बोया वह शैतान है; कटनी जगत का अन्‍त है: और काटनेवाले स्‍वर्गदूत हैं। ”अतः जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्‍त में होगा। ”मनुष्‍य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्‍य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करनेवालों को इकट्ठा करेंगे। और उन्‍हें आग के कुंड में डालेंगे, वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा। ”उस समय धर्मी अपने पिता के राज्‍य में सूर्य के समान चमकेंगे। जिसके कान हों वह सुन ले। ”स्‍वर्ग का राज्‍य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्‍य ने पाकर छिपा दिया, और आनन्‍द के मारे जाकर और अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया। ”फिर स्‍वर्ग का राज्‍य एक व्यापारी के समान है जो अच्‍छे मोतियों की खोज में था। जब उसे एक बहुमूल्‍य मोती मिला तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया। ”फिर स्‍वर्ग का राज्‍य उस बड़े जाल के समान है, जो समुद्र में डाला गया, और हर प्रकार की मछलियों को समेट लाया। और जब जाल भर गया, तो उसको किनारे पर खींच लाए, और बैठकर अच्‍छी-अच्‍छी तो बरतनों में इकट्ठा किया और निकम्‍मी, निकम्‍मीं फेंक दी। ”जगत के अन्‍त में ऐसा ही होगा; स्‍वर्गदूत आकर दुष्‍टों को धर्मियों से अलग करेंगे, और उन्‍हें आग के कुंड में डालेंगे। वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा। ”क्‍या तुम ने ये सब बातें समझीं?” उन्होंने उससे कहा, “हाँ।” उसने उनसे कहा, “इसलिये हर एक शास्‍त्री जो स्‍वर्ग के राज्‍य का चेला बना है, उस गृहस्‍थ के समान है जो अपने भण्‍डार से नई और पुरानी वस्तुएँ निकालता है।” जब यीशु ने सब दृष्‍टान्‍त कह चुका, तो वहाँ से चला गया। और अपने देश में आकर उनकी आराधनालय में उन्‍हें ऐसा उपदेश देने लगा; कि वे चकित होकर कहने लगे; कि इस को यह ज्ञान और सामर्थ्य के काम कहाँ से मिले? क्‍या यह बढ़ई का बेटा नहीं? और क्‍या इस की माता का नाम मरियम और इस के भाइयों के नाम याकूब और यूसुफ और शमौन और यहूदा नहीं? और क्‍या इस की सब बहनें हमारे बीच में नहीं रहती? फिर इस को यह सब कहाँ से मिला? इस प्रकार उन्होंने उसके कारण ठोकर खाई, पर यीशु ने उनसे कहा, “भविष्‍यद्वक्‍ता अपने देश और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता।” और उसने वहाँ उनके अविश्‍वास के कारण बहुत सामर्थ्य के काम नहीं किए। उस समय चौथाई देश के राजा हेरोदेस ने यीशु की चर्चा सुनी। और अपने सेवकों से कहा, “यह यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाला है: वह मरे हुओं में से जी उठा है, इसी लिये उससे सामर्थ्य के काम प्रगट होते हैं।” क्‍योंकि हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्‍पुस की पत्‍नी हेरोदियास के कारण, यूहन्ना को पकड़कर बान्‍धा, और जेलखाने में डाल दिया था। क्‍योंकि यूहन्ना ने उससे कहा था, कि इस को रखना तुझे उचित नहीं है। और वह उसे मार डालना चाहता था, पर लोगों से डरता था, क्‍योंकि वे उसे भविष्‍यद्वक्‍ता जानते थे। पर जब हेरोदेस का जन्‍म दिन आया, तो हेरोदियास की बेटी ने उत्‍सव में नाच दिखाकर हेरोदेस को खुश किया। इसलिये उसने शपथ खाकर वचन दिया, कि जो कुछ तू माँगेगी, मैं तुझे दूँगा। वह अपनी माता की उस्‍काई हुई बोली, यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाले का सिर थाल में यहीं मुझे मँगवा दे। राजा दुखित हुआ, पर अपनी शपथ के, और साथ बैठनेवालों के कारण, आज्ञा दी, कि दे दिया जाए। और उसने जेलखाने में लोगों को भेजकर यूहन्ना का सिर कटवा दिया। और उसका सिर थाल में लाया गया, और लड़की को दिया गया; और वह उसको अपनी माँ के पास ले गई। और उसके चेलों ने आकर और उसकी शव को ले जाकर गाढ़ दिया और जाकर यीशु को समाचार दिया। जब यीशु ने यह सुना, तो नाव पर चढ़कर वहाँ से किसी सुनसान जगह को, एकान्‍त में चला गया; और लोग यह सुनकर नगर-नगर से पैदल उसके पीछे हो लिए। उसने निकलकर एक बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, और उसने उनके बीमारों को चंगा किया। जब साँझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, “यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्‍तियों में जाकर अपने लिये भोजन मोल लें।” यीशु ने उनसे कहा, “उनका जाना आवश्‍यक नहीं! तुम ही इन्‍हें खाने को दो।” उन्होंने उससे कहा, “यहाँ हमारे पास पाँच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।” उसने कहा, “उनको यहाँ मेरे पास ले आओ।” तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्‍वर्ग की ओर देखकर धन्‍यवाद किया और रोटियाँ तोड़-तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को। और सब खाकर तृप्‍त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियाँ उठाई। और खानेवाले स्‍त्रियों और बालकों को छोड़कर पाँच हजार पुरूषों के लगभग थे। और उसने तुरन्‍त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उससे पहले पार चले जाएँ, जब तक कि वह लोगों को विदा करे। वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और साँझ को वह वहाँ अकेला था। उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्‍योंकि हवा सामने की थी। और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उनके पास आया। चेले उसको झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए, और कहने लगे, “वह भूत है,” और डर के मारे चिल्‍ला उठे। यीशु ने तुरन्‍त उनसे बातें की, और कहा, “ढाढ़स बान्‍धो, मैं हूँ; डरो मत।” पतरस ने उसको उत्तर दिया, “हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे।” उसने कहा, “आ!” तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा। पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा तो चिल्‍लाकर कहा, “हे प्रभु, मुझे बचा।” यीशु ने तुरन्‍त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उससे कहा, “हे अल्‍प-विश्‍वासी, तू ने क्‍यों सन्‍देह किया?” जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई। इस पर जो नाव पर थे, उन्होंने उसे दण्डवत करके कहा, “सचमुच, तू परमेश्‍वर का पुत्र है।” वे पार उतरकर गन्नेसरत प्रदेश में पहुँचे। और वहाँ के लोगों ने उसे पहचानकर आस-पास के सारे देश में कहला भेजा, और सब बीमारों को उसके पास लाए। और उससे विनती करने लगे कि वह उन्‍हें अपने वस्‍त्र के आँचल ही को छूने दे; और जितनों ने उसे छूआ, वे चंगे हो गए। तब यरूशलेम से कुछ फरीसी और शास्‍त्री यीशु के पास आकर कहने लगे, ”तेरे चेले पुरनियों की परम्पराओं को क्‍यों टालते हैं, कि बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?” उसने उनको उत्तर दिया, “तुम भी अपनी परम्पराओं के कारण क्‍यों परमेश्‍वर की आज्ञा टालते हो? ”क्‍योंकि परमेश्‍वर ने कहा, “अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, और जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, वह मार डाला जाए।” ”पर तुम कहते हो, कि यदि कोई अपने पिता या माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुँच सकता था, वह परमेश्‍वर को भेंट चढ़ाई जा चुकी। तो वह अपने पिता का आदर न करे, इस प्रकार तुम ने अपनी परम्परा के कारण परमेश्‍वर का वचन टाल दिया। ”हे कपटियों, यशायाह ने तुम्‍हारे विषय में यह भविष्‍यद्वाणी ठीक ही की है: ”ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्‍यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्‍य की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।” और उसने लोगों को अपने पास बुलाकर उनसे कहा, “सुनो, और समझो। ”जो मुँह में जाता है, वह मनुष्‍य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुँह से निकलता है, वही मनुष्‍य को अशुद्ध करता है।” तब चेलों ने आकर उससे कहा, “क्‍या तू जानता है कि फरीसियों ने यह वचन सुनकर ठोकर खाई?” उसने उत्तर दिया, “हर पौधा जो मेरे स्‍वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। ”उनको जाने दो; वे अन्‍धे मार्ग दिखानेवाले हैं: और अन्‍धा यदि अन्‍धे को मार्ग दिखाए, तो दोनों गड़हे में गिर पड़ेंगे।” यह सुनकर पतरस ने उससे कहा, “यह दृष्‍टान्‍त हमें समझा दे।” उसने कहा, “क्‍या तुम भी अब तक ना समझे हो? ”क्‍या तुम नहीं समझते, कि जो कुछ मुँह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्‍डास से निकल जाता है? ”पर जो कुछ मुँह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्‍य को अशुद्ध करता है। ”क्‍योंकि बुरे विचार, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, व्‍यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्‍दा मन ही से निकलती है। ”यही हैं जो मनुष्‍य को अशुद्ध करती हैं, परन्‍तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्‍य को अशुद्ध नहीं करता।” यीशु वहाँ से निकलकर, सूर और सैदा के देशों की ओर चला गया। और देखो, उस प्रदेश से एक कनानी स्‍त्री निकली, और चिल्‍लाकर कहने लगी, “हे प्रभु दाऊद के सन्‍तान, मुझ पर दया कर, मेरी बेटी को दुष्‍टात्‍मा बहुत सता रहा है।” पर उसने उसे कुछ उत्तर न दिया, और उसके चेलों ने आकर उससे विनती कर कहा, “इसे विदा कर; क्‍योंकि वह हमारे पीछे चिल्‍लाती आती है।” उसने उत्तर दिया, “इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों को छोड़ मैं किसी के पास नहीं भेजा गया।” पर वह आई, और उसे प्रणाम करके कहने लगी, “हे प्रभु, मेरी सहायता कर।” उसने उत्तर दिया, “लड़कों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना अच्‍छा नहीं।” उसने कहा, “सत्‍य है प्रभु; पर कुत्ते भी वह चूरचार खाते हैं, जो उनके स्‍वामियों की मेज से गिरते हैं।” इस पर यीशु ने उसको उत्तर देकर कहा, “हे स्‍त्री, तेरा विश्‍वास बड़ा है; जैसा तू चाहती है, तेरे लिये वैसा ही हो” और उसकी बेटी उसी घड़ी चंगी हो गई। यीशु वहाँ से चलकर, गलील की झील के पास आया, और पहाड़ पर चढ़कर वहाँ बैठ गया। और भीड़ पर भीड़ लंगड़ों, अन्‍धों, गूँगों, टुण्‍डों, और बहुत औरों को लेकर उसके पास आए; और उन्‍हें उसके पाँवों पर डाल दिया, और उसने उन्‍हें चंगा किया। अतः जब लोगों ने देखा, कि गूंगे बोलते और टुण्‍डे चंगे होते और लंगड़े चलते और अन्‍धे देखते हैं, तो अचम्‍भा करके इस्राएल के परमेश्‍वर की बड़ाई की। यीशु ने अपने चेलों को बुलाकर कहा, “मुझे इस भीड़ पर तरस आता है; क्‍योंकि वे तीन दिन से मेरे साथ हैं और उनके पास कुछ खाने को नहीं; और मैं उन्‍हें भूखा विदा करना नहीं चाहता; कहीं ऐसा न हो कि मार्ग में थककर रह जाएँ।” चेलों ने उससे कहा, “हमें इस जंगल में कहाँ से इतनी रोटी मिलेगी कि हम इतनी बड़ी भीड़ को तृप्‍त करें?” यीशु ने उनसे पूछा, “तुम्‍हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्होंने कहा, “सात और थोड़ी सी छोटी मछलियाँ।” तब उसने लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी। और उन सात रोटियों और मछलियों को ले धन्‍यवाद करके तोड़ा और अपने चेलों को देता गया, और चेले लोगों को। इस प्रकार सब खाकर तृप्‍त हो गए और बचे हुए टुकड़ों से भरे हुए सात टोकरे उठाए। और खानेवाले स्‍त्रियों और बालकों को छोड़ चार हजार पुरूष थे। तब वह भीड़ को विदा करके नाव पर चढ़ गया, और मगदन देश के सिवानों में आया। और फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिये उससे कहा, कि हमें आकाश का कोई चिन्‍ह दिखा। उसने उनको उत्तर दिया, “साँझ को तुम कहते हो, कि मौसम अच्छा रहेगा, क्‍योंकि आकाश लाल है। ”और भोर को कहते हो, कि आज आन्‍धी आएगी क्‍योंकि आकाश लाल और धुमला है; तुम आकाश का लक्षण देखकर भेद बता सकते हो, पर समयों के चिन्‍हों का भेद क्यों नहीं बता सकते? ”इस युग के बुरे और व्‍यभिचारी लोग चिन्‍ह ढूँढ़ते हैं पर योना के चिन्‍ह को छोड़ कोई और चिन्‍ह उन्‍हें न दिया जाएगा।” और वह उन्‍हें छोड़कर चला गया। और चेले झील के उस पार जाते समय रोटी लेना भूल गए थे। यीशु ने उनसे कहा, “देखो, फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकस रहना।” वे आपस में विचार करने लगे, “हम तो रोटी नहीं लाए। इसलिए वह ऐसा कहता है।” यह जानकर, यीशु ने उनसे कहा, “हे अल्‍पविश्‍वासियों, तुम आपस में क्‍यों विचार करते हो कि हमारे पास रोटी नहीं?” ”क्‍या तुम अब तक नहीं समझे? और उन पाँच हजार की पाँच रोटी स्‍मरण नहीं करते, और न यह कि कितनी टोकरियाँ उठाईं थीं? ”और न उन चार हजार की सात रोटियाँ, और न यह कि कितने टोकरे उठाए गए थे? ”तुम क्‍यों नहीं समझते कि मैंने तुम से रोटियों के विषय में नहीं कहा? परन्तु फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकस रहना।” तब उनको समझ में आया, कि उसने रोटी के खमीर से नहीं, पर फरीसियों और सदूकियों की शिक्षा से चौकस रहने को कहा था। यीशु कैसरिया फिलिप्‍पी के प्रदेश में आकर अपने चेलों से पूछने लगा, “लोग मनुष्‍य के पुत्र को क्‍या कहते हैं?” उन्होंने कहा, “कितने तो यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाला कहते हैं और कितने एलिय्‍याह, और कितने यिर्मयाह या भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से कोई एक कहते हैं।” उसने उनसे कहा, “परन्‍तु तुम मुझे क्‍या कहते हो?” शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवते परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है।” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “हे शमौन, योना के पुत्र, तू धन्‍य है; क्‍योंकि माँस और लोहू ने नहीं, परन्‍तु मेरे पिता ने जो स्‍वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है। और मैं भी तुझ से कहता हूँ, कि तू पतरस है, और मैं इस पत्‍थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा, और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। ”मैं तुझे स्‍वर्ग के राज्‍य की कुंजियाँ दूँगा: और जो कुछ तू पृथ्‍वी पर बाँधेगा, वह स्‍वर्ग में बंधेगा; और जो कुछ तू पृथ्‍वी पर खोलेगा, वह स्‍वर्ग में खुलेगा।” तब उसने चेलों को चिताया, “किसी से न कहना! कि मैं मसीह हूँ।” उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, “मुझे अवश्‍य है, कि यरूशलेम को जाऊँ, और पुरनियों और महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊँ; और मार डाला जाऊँ; और तीसरे दिन जी उठूँ।” इस पर पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा, “हे प्रभु, परमेश्‍वर न करे! तुझ पर ऐसा कभी न होगा।” उसने फिरकर पतरस से कहा, “हे शैतान, मेरे सामने से दूर हो! तू मेरे लिये ठोकर का कारण है; क्‍योंकि तू परमेश्‍वर की बातें नहीं, पर मनुष्‍यों की बातों पर मन लगाता है।” तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। ”क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। ”यदि मनुष्‍य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा? या मनुष्‍य अपने प्राण के बदले में क्‍या देगा? ”मनुष्‍य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय ‘वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा।’ ”मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो यहाँ खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं, कि जब तक मनुष्‍य के पुत्र को उसके राज्‍य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्‍यु का स्‍वाद कभी न चखेंगे।” छ: दिन के बाद यीशु ने पतरस और याकूब और उसके भाई यूहन्ना को साथ लिया, और उन्‍हें एकान्‍त में किसी ऊँचे पहाड़ पर ले गया। और वहाँ उनके सामने उसका रूपान्‍तर हुआ और उसका मुँह सूर्य के समान चमका और उसका वस्‍त्र ज्‍योति के समान उजला हो गया। और देखो, मूसा और एलिय्‍याह उसके साथ बातें करते हुए उन्‍हें दिखाई दिए। इस पर पतरस ने यीशु से कहा, “हे प्रभु, हमारा यहाँ रहना अच्‍छा है; यदि तेरी इच्‍छा हो तो मैं यहाँ तीन मण्‍डप बनाऊँ; एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्‍याह के लिये।” वह बोल ही रहा था, कि देखो, एक उजले बादल ने उन्‍हें छा लिया, और देखो; उस बादल में से यह शब्‍द निकला, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्न हूँ: इस की सुनो।” चेले यह सुनकर मुँह के बल गिर गए और अत्‍यन्‍त डर गए। यीशु ने पास आकर उन्‍हें छूआ, और कहा, “उठो, डरो मत।” तब उन्होंने अपनी आँखे उठाकर यीशु को छोड़ और किसी को न देखा। जब वे पहाड़ से उतर रहे थे तब यीशु ने उन्‍हें यह आज्ञा दी, “जब तक मनुष्‍य का पुत्र मरे हुओं में से न जी उठे, तब तक जो कुछ तुम ने देखा है किसी से न कहना।” और उसके चेलों ने उससे पूछा, “फिर शास्‍त्री क्‍यों कहते हैं, कि एलिय्‍याह का पहले आना अवश्‍य है?” उसने उत्तर दिया, “एलिय्‍याह तो अवश्य आएगा और सब कुछ सुधारेगा। परन्‍तु मैं तुम से कहता हूँ, कि एलिय्‍याह आ चुका; और उन्होंने उसे नहीं पहचाना; परन्‍तु जैसा चाहा वैसा ही उसके साथ किया। इसी रीति से मनुष्‍य का पुत्र भी उनके हाथ से दुख उठाएगा।” तब चेलों ने समझा कि उसने हम से यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाले के विषय में कहा है। जब वे भीड़ के पास पहुँचे, तो एक मनुष्‍य उसके पास आया, और घुटने टेककर कहने लगा। ”हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर! क्‍योंकि उसको मिर्गी आती है, और वह बहुत दुःख उठाता है; और बार-बार आग में और बार-बार पानी में गिर पड़ता है। और मैं उसको तेरे चेलों के पास लाया था, पर वे उसे अच्‍छा नहीं कर सके।” यीशु ने उत्तर दिया, “हे अविश्‍वासी और हठीले लोगों, मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्‍हारी सहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।” तब यीशु ने उसे घुड़का, और दुष्‍टात्‍मा उसमें से निकला; और लड़का उसी घड़ी अच्‍छा हो गया। तब चेलों ने एकान्‍त में यीशु के पास आकर कहा, “हम इसे क्‍यों नहीं निकाल सके?” उसने उनसे कहा, “अपने विश्‍वास की घटी के कारण: क्‍योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम्‍हारा विश्‍वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, कि यहाँ से सरककर वहाँ चला जा, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्‍हारे लिये अनहोनी न होगी। [पर यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के नहीं निकलती।]” जब वे गलील में थे, तो यीशु ने उनसे कहा, “मनुष्‍य का पुत्र मनुष्‍यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा। और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।” इस पर वे बहुत उदास हुए। जब वे कफरनहूम में पहुँचे, तो मन्‍दिर के लिये कर लेनेवालों ने पतरस के पास आकर पूछा, कि क्‍या तुम्‍हारा गुरू मन्‍दिर का कर नहीं देता? उसने कहा, “हाँ, देता है।” जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहले उससे कहा, “हे शमौन तू क्‍या समझता है? पृथ्‍वी के राजा महसूल या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?” पतरस ने उनसे कहा, “परायों से।” यीशु ने उससे कहा, “तो पुत्र बच गए। तौभी इसलिये कि हम उन्‍हें ठोकर न खिलाएँ, तू झील के किनारे जाकर बंसी डाल, और जो मछली पहले निकले, उसे ले; तो तुझे उसका मुँह खोलने पर एक सिक्‍का मिलेगा, उसी को लेकर मेरे और अपने बदले उन्‍हें दे देना।” उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “स्‍वर्ग के राज्‍य में बड़ा कौन है?” इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उनके बीच में खड़ा किया, और कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्‍वर्ग के राज्‍य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। ”जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्‍वर्ग के राज्‍य में बड़ा होगा। ”और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है। पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्‍वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता। ”ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्‍य है; पर हाय उस मनुष्‍य पर जिसके द्वारा ठोकर लगती है। ”यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काटकर फेंक दे; टुण्‍डा या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्‍त आग में डाला जाए। ”और यदि तेरी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे। काना होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आँख रहते हुए तू नरक की आग में डाला जाए। ”देखो, तुम इन छोटों में से किसी को तुच्‍छ न जानना; क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि स्‍वर्ग में उनके दूत मेरे स्‍वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं। [“क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को बचाने आया है।] [Ms. 1] ”तुम क्‍या समझते हो? यदि किसी मनुष्‍य की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक भटक जाए, तो क्‍या निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को न ढूंढ़ेगा? ”और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वह उन निन्यानबे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं इतना आनन्‍द नहीं करेगा, जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा। ”ऐसा ही तुम्‍हारे पिता की जो स्‍वर्ग में है यह इच्‍छा नहीं, कि इन छोटों में से एक भी नाश हो। ”यदि तेरा भाई तेरे विरुद्ध अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत करके उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तू ने अपने भाई को पा लिया। ”और यदि वह न सुने, तो और एक दो जन को अपने साथ ले जा, कि हर एक बात दो या तीन गवाहों के मुँह से ठहराई जाए। ”यदि वह उनकी भी न माने, तो कलीसिया से कह दे, परन्‍तु यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो तू उसे अन्‍यजाति और महसूल लेनेवाले के जैसा जान। ”मैं तुम से सच कहता हूँ, जो कुछ तुम पृथ्‍वी पर बाँधोगे, वह स्‍वर्ग पर बंधेगा और जो कुछ तुम पृथ्‍वी पर खोलोगे, वह स्‍वर्ग में खुलेगा। ”फिर मैं तुम से कहता हूँ, यदि तुम में से दो जन पृथ्‍वी पर किसी बात के लिये जिसे वे माँगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्‍वर्ग में है उनके लिये हो जाएगी। ”क्‍योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।” तब पतरस ने पास आकर, उससे कहा, “हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूँ, क्‍या सात बार तक?” यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन् सात बार के सत्तर गुने तक। ”इसलिये स्‍वर्ग का राज्‍य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा। ”जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके सामने लाया गया जो दस हजार तोड़े का कर्जदार था। ”जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्‍वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्‍नी और बाल-बच्चे और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए। ”इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा, ‘हे स्‍वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूँगा।’ ”तब उस दास के स्‍वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका कर्ज क्षमा किया। ”परन्‍तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उसको मिला, जो उसके सौ दीनार का कर्जदार था; उसने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा और कहा, ‘जो कुछ तू धारता है भर दे।’ ”इस पर उसका संगी दास गिरकर, उससे विनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूँगा। ”उसने न माना, परन्‍तु जाकर उसे बन्‍दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे। ”उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जाकर अपने स्‍वामी को पूरा हाल बता दिया। ”तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उससे कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से विनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। ‘इसलिए जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्‍या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?’ ”और उसके स्‍वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्‍ड देनेवालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उनके हाथ में रहे। ”इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्‍वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।” जब यीशु ये बातें कह चुका, तो गलील से चला गया; और यहूदिया के प्रदेश में यरदन के पार आया। और बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली, और उसने उन्‍हें वहाँ चंगा किया। तब फरीसी उसकी परीक्षा करने के लिये पास आकर कहने लगे, “क्‍या हर एक कारण से अपनी पत्‍नी को त्‍यागना उचित है?” उसने उत्तर दिया, “क्‍या तुम ने नहीं पढ़ा, कि जिसने उन्‍हें बनाया, उसने आरम्‍भ से नर और नारी बनाकर कहा। “इस कारण मनुष्‍य अपने माता पिता से अलग होकर अपनी पत्‍नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे?” ”अतः वे अब दो नहीं, परन्‍तु एक तन हैं: इसलिये जिसे परमेश्‍वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्‍य अलग न करे।” उन्होंने उससे कहा, “फिर मूसा ने क्‍यों यह ठहराया, कि त्‍यागपत्र देकर उसे छोड़ दे?” उसने उनसे कहा, “मूसा ने तुम्‍हारे मन की कठोरता के कारण तुम्‍हें अपनी पत्‍नी को छोड़ देने की आज्ञा दी, परन्‍तु आरम्‍भ में ऐसा नहीं था। ”और मैं तुम से कहता हूँ, कि जो कोई व्‍यभिचार को छोड़ और किसी कारण से अपनी पत्‍नी को त्‍यागकर, दूसरी से ब्‍याह करे, वह व्‍यभिचार करता है: और जो छोड़ी हुई को ब्‍याह करे, वह भी व्‍यभिचार करता है।” चेलों ने उससे कहा, “यदि पुरूष का स्‍त्री के साथ ऐसा सम्‍बन्‍ध है, तो ब्‍याह करना अच्‍छा नहीं।” उसने उनसे कहा, “सब यह वचन ग्रहण नहीं कर सकते, केवल वे जिन को यह दान दिया गया है। ”क्‍योंकि कुछ नपुंसक ऐसे हैं जो माता के गर्भ ही से ऐसे जन्‍में; और कुछ नपुंसक ऐसे हैं, जिन्‍हें मनुष्‍य ने नपुंसक बनाया: और कुछ नपुंसक ऐसे हैं, जिन्‍होंने स्‍वर्ग के राज्‍य के लिये अपने आप को नपुंसक बनाया है, जो इस को ग्रहण कर सकता है, वह ग्रहण करे।” तब लोग बालकों को उसके पास लाए, कि वह उन पर हाथ रखे और प्रार्थना करे; पर चेलों ने उन्‍हें डाँटा। यीशु ने कहा, “बालकों को मेरे पास आने दो, और उन्‍हें मना न करो, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य ऐसों ही का है।” और वह उन पर हाथ रखकर, वहाँ से चला गया। और देखो, एक मनुष्‍य ने पास आकर उससे कहा, “हे गुरू, मैं कौन सा भला काम करूँ, कि अनन्‍त जीवन पाऊँ?” उसने उससे कहा, “तू मुझ से भलाई के विषय में क्‍यों पूछता है? भला तो एक ही है; पर यदि तू जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो आज्ञाओं को माना कर।” उसने उससे कहा, “कौन सी आज्ञाएँ?” यीशु ने कहा, “यह कि हत्‍या न करना, व्‍यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना; अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।” उस जवान ने उससे कहा, “इन सब को तो मैं ने माना है अब मुझ में किस बात की घटी है?” यीशु ने उससे कहा, “यदि तू सिद्ध होना चाहता है; तो जा, अपना सबकुछ बेचकर कंगालों को बांट दे; और तुझे स्‍वर्ग में धन मिलेगा; और आकर मेरे पीछे हो ले।” परन्‍तु वह जवान यह बात सुन उदास होकर चला गया, क्‍योंकि वह बहुत धनी था। तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि धनवान का स्‍वर्ग के राज्‍य में प्रवेश करना कठिन है। ”फिर तुम से कहता हूँ, कि परमेश्‍वर के राज्‍य में धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है।” यह सुनकर, चेलों ने बहुत चकित होकर कहा, “फिर किस का उद्धार हो सकता है?” यीशु ने उनकी ओर देखकर कहा, “मनुष्‍यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्‍तु परमेश्‍वर से सब कुछ हो सकता है।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “देख, हम तो सब कुछ छोड़ के तेरे पीछे हो लिये हैं: तो हमें क्‍या मिलेगा?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि नई उत्‍पत्ति से जब मनुष्‍य का पुत्र अपनी महिमा के सिहांसन पर बैठेगा, तो तुम भी जो मेरे पीछे हो लिये हो, बारह सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्‍याय करोगे। ”और जिस किसी ने घरों या भाइयों या बहनों या पिता या माता या बाल-बच्चों या खेतों को मेरे नाम के लिये छोड़ दिया है, उसको सौ गुना मिलेगा, और वह अनन्‍त जीवन का अधिकारी होगा। ”परन्‍तु बहुतेरे जो पहले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहले होंगे। ”स्‍वर्ग का राज्‍य किसी गृहस्‍थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। ”और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्‍हें अपने दाख की बारी में भेजा। ”फिर पहर एक दिन चढ़े, निकलकर, अन्य लोगों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, और उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्‍हें दूँगा।’ सो वे भी गए। ”फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। ”और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर दूसरों को खड़े पाया, और उनसे कहा ‘तु क्‍यों यहाँ दिन भर बेकार खड़े रहे?’ उन्होंने उससे कहा, ‘इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया।’ उसने उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ।’ ”साँझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, ‘मजदूरों को बुलाकर पिछलों से लेकर पहिलों तक उन्‍हें मजदूरी दे दे।’ “जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्‍हें एक एक दीनार मिला। ”जो पहले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्‍तु उन्‍हें भी एक ही एक दीनार मिला। ”जब मिला, तो वह गृह स्वामी पर कुड़कुड़ा के कहने लगे। कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्‍हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्‍होंने दिन भर का भार उठाया और धुप सहा? ”उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्‍याय नहीं करता; क्‍या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? ‘जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्‍छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूँ। ‘क्‍या यह उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूँ सो करूँ? क्‍या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्‍टि से देखता है?’ ”इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहले होंगे, और जो पहले हैं, वे पिछले होंगे।” यीशु यरूशलेम को जाते हुए बारह चेलों को एकान्‍त में ले गया, और मार्ग में उनसे कहने लगा। ”देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं; और मनुष्‍य का पुत्र महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा और वे उसको घात के योग्‍य ठहराएँगे। और उसको अन्‍यजातियों के हाथ सोंपेंगे, कि वे उसे ठट्ठों में उड़ाएँ, और कोड़े मारें, और क्रूस पर चढ़ाएँ, और वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।” जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उससे कुछ माँगने लगी। उसने उससे कहा, “तू क्‍या चाहती है?” वह उससे बोली, “यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्‍य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएँ बैठें।” यीशु ने उत्तर दिया, “तुम नहीं जानते कि क्‍या माँगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूँ, क्‍या तुम पी सकते हो?” उन्होंने उससे कहा, “पी सकते हैं।” उसने उनसे कहा, “तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएँ किसी को बैठाना मेरा काम नहीं, पर जिनके लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।” यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए। यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, “तुम जानते हो, कि अन्‍य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं। ”परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्‍हारा सेवक बने; और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्‍हारा दास बने; जैसे कि मनुष्‍य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल किई जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे।” जब वे यरीहो से निकल रहे थे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। और देखो, दो अन्‍धे, जो सड़क के किनारे बैठे थे, यह सुनकर कि यीशु जा रहा है, पुकारकर कहने लगे, “हे प्रभु, दाऊद की सन्‍तान, हम पर दया कर।” लोगों ने उन्‍हें डाँटा, कि चुप रहे, पर वे और भी चिल्‍लाकर बोले, “हे प्रभु, दाऊद की सन्‍तान, हम पर दया कर।” तब यीशु ने खडे होकर, उन्‍हें बुलाया, और कहा, “तुम क्‍या चाहते हो कि मैं तुम्‍हारे लिये करूँ?” उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह कि हमारी आँखे खुल जाएँ।” यीशु ने तरस खाकर उनकी आँखे छूई, और वे तुरन्‍त देखने लगे; और उसके पीछे हो लिए। जब वे यरूशलेम के निकट पहुँचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए, तो यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा, “अपने सामने के गाँव में जाओ, वहाँ पहुँचते ही एक गदही बन्‍धी हुई, और उसके साथ बच्‍चा तुम्‍हें मिलेगा; उन्‍हें खोलकर, मेरे पास ले आओ। ”यदि तुम में से कोई कुछ कहे, तो कहो, कि प्रभु को इन का प्रयोजन है: तब वह तुरन्‍त उन्‍हें भेज देगा।” यह इसलिये हुआ, कि जो वचन भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: “सिय्‍योन की बेटी से कहो, ‘देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है; वरन् लादू के बच्‍चे पर।’ “ चेलों ने जाकर, जैसा यीशु ने उनसे कहा था, वैसा ही किया। और गदही और बच्‍चे को लाकर, उन पर अपने कपड़े डाले, और वह उन पर बैठ गया। और बहुतेरे लोगों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए, और और लोगों ने पेड़ों से डालियाँ काटकर मार्ग में बिछाई। और जो भीड़ आगे-आगे जाती और पीछे-पीछे चली आती थी, पुकार-पुकार कर कहती थी, “दाऊद के सन्‍तान को होशाना; धन्‍य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना।” जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया, तो सारे नगर में हलचल मच गई; और लोग कहने लगे, “यह कौन है?” लोगों ने कहा, “यह गलील के नासरत का भविष्‍यद्वक्‍ता यीशु है।” यीशु ने परमेश्‍वर के मन्‍दिर में जाकर, उन सब को, जो मन्‍दिर में लेन-देन कर रहे थे, निकाल दिया; और सर्राफों के पीढ़े और कबूतरों के बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं। और उनसे कहा, “लिखा है, ‘मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा’; परन्‍तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो।” और अन्‍धे और लंगड़े, मन्‍दिर में उसके पास लाए, और उसने उन्‍हें चंगा किया। परन्‍तु जब महायाजकों और शास्‍त्रियों ने इन अद्भुत कामों को, जो उसने किए, और लड़कों को मन्‍दिर में ‘दाऊद की सन्‍तान को होशाना’ पुकारते हुए देखा, तो क्रोधित हुए, और उससे कहने लगे, “क्‍या तू सुनता है कि ये क्‍या कहते हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “हाँ; क्‍या तुमने यह कभी नहीं पढ़ा: ‘बालकों और दूध पीते बच्‍चों के मुँह से तु ने स्‍तुति सिद्ध कराई'?” तब वह उन्‍हें छोड़कर नगर के बाहर बैतनिय्‍याह को गया, और वहाँ रात बिताई। भोर को जब वह नगर को लौट रहा था, तो उसे भूख लगी। और अंजीर के पेड़ सड़क के किनारे देखकर वह उसके पास गया, और पत्तों को छोड़ उसमें और कुछ न पाकर उससे कहा, “अब से तुझ में फिर कभी फल न लगे।” और अंजीर का पेड़ तुरन्‍त सुख गया। यह देखकर चेलों ने अचम्‍भा किया, और कहा, “यह अंजीर का पेड़ तुरन्‍त कैसे सूख गया?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “मैं तुम से सच कहता हूँ; यदि तुम विश्‍वास रखो, और सन्‍देह न करो; तो न केवल यह करोगे, जो इस अंजीर के पेड़ से किया गया है; परन्‍तु यदि इस पहाड़ से भी कहोगे, कि उखड़ जा, और समुद्र में जा पड़, तो यह हो जाएगा। ”और जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्‍वास से माँगोगे वह सब तुम को मिलेगा।” यहूदी नेताओं का यीशु के अधिकार पर संदेह वह मन्‍दिर में जाकर उपदेश कर रहा था, कि महायाजकों और लोगों के पुरनियों ने उसके पास आकर पूछा, “तू ये काम किस के अधिकार से करता है? और तुझे यह अधिकार किस ने दिया है?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “मैं भी तुम से एक बात पूछता हूँ; यदि वह मुझे बताओगे, तो मैं भी तुम्‍हें बताऊँगा कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ। ”यूहन्ना का बपतिस्‍मा कहां से था? स्‍वर्ग की ओर से या मनुष्‍यों की ओर से था?” तब वे आपस में विवाद करने लगे, “यदि हम कहें ‘स्‍वर्ग की ओर से’, तो वह हम से कहेगा, ‘फिर तुम ने उसकी प्रतीति क्‍यों न की?’ और यदि कहें ‘मनुष्‍यों की ओर से’, तो हमें भीड़ का डर है, क्‍योंकि वे सब युहन्ना को भविष्‍यद्वक्‍ता जानते हैं।” अतः उन्होंने यीशु को उत्तर दिया, “हम नहीं जानते।” उसने भी उनसे कहा, “तो मैं भी तुम्‍हें नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ। ”तुम क्‍या समझते हो? किसी मनुष्‍य के दो पुत्र थे; उसने पहले के पास जाकर कहा, ‘हे पुत्र, आज दाख की बारी में काम कर।’ ”उसने उत्तर दिया, ‘मैं नहीं जाऊँगा’, परन्‍तु बाद में पछता कर गया। फिर दूसरे के पास जाकर ऐसा ही कहा, उसने उत्तर दिया, ‘जी हाँ जाता हूँ’, परन्‍तु नहीं गया। ”इन दोनों में से किस ने पिता की इच्‍छा पूरी की?” उन्होंने कहा, “पहले ने।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि महसूल लेनेवाले और वेश्‍या तुम से पहले परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करते हैं। ”क्‍योंकि यूहन्ना धर्म के मार्ग से तुम्‍हारे पास आया, और तुम ने उसकी प्रतीति न की: पर महसूल लेनेवालों और वेश्‍याओं ने उसकी प्रतीति की: और तुम यह देखकर पीछे भी न पछताए कि उसकी प्रतीति कर लेते। ”एक और दृष्‍टान्‍त सुनो: एक गृहस्‍थ था, जिसने दाख की बारी लगाई; और उसके चारों ओर बाड़ा बान्‍धा; और उस मे रस का कुंड खोदा; और गुम्‍मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया। ”जब फल का समय निकट आया, तो उसने अपने दासों को उसका फल लेने के लिये किसानों के पास भेजा। ”पर किसानों ने उसके दासों को पकड़ के, किसी को पीटा, और किसी को मार डाला; और किसी को पत्‍थरवाह किया। ”फिर उसने और दासों को भेजा, जो पहलों से अधिक थे; और उन्होंने उनसे भी वैसा ही किया। ”अन्‍त में उसने अपने पुत्र को उनके पास यह कहकर भेजा, कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे। ”परन्‍तु किसानों ने पुत्र को देखकर आपस में कहा, ‘यह तो वारिस है, आओ, उसे मार डालें: और उसकी मीरास ले लें।’ ”और उन्होंने उसे पकड़ा और दाख की बारी से बाहर निकालकर मार डाला। ”इसलिये जब दाख की बारी का स्‍वामी आएगा, तो उन किसानों के साथ क्‍या करेगा?” उन्‍होंने उससे कहा, “वह उन बुरे लोगों को बुरी रीति से नाश करेगा; और दाख की बारी का ठेका और किसानों को देगा, जो समय पर उसे फल दिया करेंगे।” यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम ने कभी पवित्र शास्‍त्र में यह नहीं पढ़ा: “जिस पत्‍थर को राजमिस्‍त्रियों ने निकम्‍मा ठहराया था, वही कोने के सिरे का पत्‍थर हो गया? यह प्रभु की ओर से हुआ, और हमारे देखने में अद्भुत है,” ”इसलिये मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्‍वर का राज्‍य तुम से ले लिया जाएगा; और ऐसी जाति को जो उसका फल लाए, दिया जाएगा। ”जो इस पत्‍थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा: और जिस पर वह गिरेगा, उसको पीस डालेगा।” महायाजक और फरीसी उसके दृष्‍टान्‍तों को सुनकर समझ गए, कि वह हमारे विषय में कहता है। और उन्होंने उसे पकड़ना चाहा, परन्‍तु लोगों से डर गए क्‍योंकि वे उसे भविष्‍यद्वक्‍ता जानते थे। इस पर यीशु फिर उनसे दृष्‍टान्‍तों में कहने लगा। ”स्‍वर्ग का राज्‍य उस राजा के समान है, जिसने अपने पुत्र का ब्‍याह किया। ”और उसने अपने दासों को भेजा, कि निमंत्रित लोगों को ब्‍याह के भोज में बुलाएँ; परन्‍तु उन्होंने आना न चाहा। ”फिर उसने और दासों को यह कहकर भेजा, कि निमंत्रित लोगों से कहो: देखो, मैं भोज तैयार कर चुका हूँ, और मेरे बैल और पले हुए पशु मारे गए हैं: और सब कुछ तैयार है; ब्‍याह के भोज में आओ। ”परन्‍तु वे उपेक्षा करके चल दिए: कोई अपने खेत को, कोई अपने व्यापार को। अन्य लोगों ने जो बच रहे थे उसके दासों को पकड़कर उन का अनादर किया और मार डाला। ”तब राजा को क्रोध आया, और अपनी सेना भेजकर उन हत्‍यारों को नाश किया, और उनके नगर फूँक दिया। ”तब उसने अपने दासों से कहा, ‘ब्याह का भोज तो तैयार है, परन्‍तु निमंत्रित लोग योग्‍य न ठहरे। इसलिये चौराहों में जाओ, और जितने लोग तुम्‍हें मिलें, सब को ब्‍याह के भोज में बुला लाओ।’ ”अतः उन दासों ने सड़कों पर जाकर क्‍या बुरे, क्‍या भले, जितने मिले, सब को इकट्ठे किया; और ब्‍याह का घर अतिथियों से भर गया। ”जब राजा अतिथियों के देखने को भीतर आया; तो उसने वहाँ एक मनुष्‍य को देखा, जो ब्‍याह का वस्‍त्र नहीं पहने था। उसने उससे पूछा, ‘हे मित्र; तू ब्‍याह का वस्‍त्र पहने बिना यहाँ क्‍यों आ गया?’ उसका मुँह बन्‍द हो गया। ”तब राजा ने सेवकों से कहा, ‘इस के हाथ-पाँव बान्‍धकर उसे बाहर अन्‍धियारे में डाल दो, वहाँ रोना, और दाँत पीसना होगा।’ ”क्‍योंकि बुलाए हुए तो बहुत परन्‍तु चुने हुए थोड़े हैं।” तब फरीसियों ने जाकर आपस में विचार किया, कि उसको किस प्रकार बातों में फँसाएँ। अतः उन्होंने अपने चेलों को हेरोदियों के साथ उसके पास यह कहने को भेजा, “हे गुरू, हम जानते हैं, कि तू सच्‍चा है, और परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से सिखाता है, और किसी की परवाह नहीं करता, क्‍योंकि तू मनुष्‍यों का मुँह देखकर बातें नही करता। इस लिये हमें बता तू क्‍या समझता है? कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं।” यीशु ने उनकी दुष्‍टता जानकर कहा, “हे कपटियों, मुझे क्‍यों परखते हो? ”कर का सिक्‍का मुझे दिखाओ।” तब वे उसके पास एक दीनार ले आए। उसने, उनसे पूछा, “यह आकृति और नाम किस का है?” उन्होंने उससे कहा, “कैसर का।” तब उसने उनसे कहा, “जो कैसर का है, वह कैसर को; और जो परमेश्‍वर का है, वह परमेश्‍वर को दो।” यह सुनकर उन्होंने अचम्‍भा किया, और उसे छोड़कर चले गए। उसी दिन सदूकी जो कहते हैं कि मरे हुओं का पुनरूत्‍थान है ही नहीं उसके पास आए, और उससे पूछा, “हे गुरू, मूसा ने कहा था, कि यदि कोई बिना सन्‍तान मर जाए, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी को ब्‍याह करके अपने भाई के लिये वंश उत्‍पन्न करे। अब हमारे यहाँ सात भाई थे; पहला ब्‍याह करके मर गया; और सन्‍तान न होने के कारण अपनी पत्‍नी को अपने भाई के लिये छोड़ गया। इसी प्रकार दूसरे और तीसरे ने भी किया, और सातों तक यही हुआ। सब के बाद वह स्‍त्री भी मर गई। अतः जी उठने पर वह उन सातों में से किसकी पत्‍नी होगी? क्‍योंकि वह सब की पत्‍नी हो चुकी थी।” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “तुम पवित्र शास्‍त्र और परमेश्‍वर की सामर्थ्य नहीं जानते; इस कारण भूल में पड़ गए हो। ”क्‍योंकि जी उठने पर ब्‍याह शादी न होगी; परन्‍तु वे स्‍वर्ग में परमेश्‍वर के दूतों के समान होंगे। ”परन्‍तु मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्‍या तुम ने यह वचन नहीं पढ़ा जो परमेश्‍वर ने तुम से कहा: ”मैं अब्राहम का परमेश्‍वर, और इसहाक का परमेश्‍वर, और याकूब का परमेश्‍वर हूँ?’ वह तो मरे हुओं का नहीं, परन्‍तु जीवतों का परमेश्‍वर है।” यह सुनकर लोग उसके उपदेश से चकित हुए। जब फरीसियों ने सुना कि यीशु ने सदूकियों का मुँह बन्‍द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए। और उन में से एक व्‍यवस्‍थापक ने परखने के लिये, उससे पूछा, ”हे गुरू, व्‍यवस्‍था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” उसने उससे कहा, “तू परमेश्‍वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख।” ”बड़ी और मुख्‍य आज्ञा तो यही है। ”और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। ”ये ही दो आज्ञाएँ सारी व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ताओं का आधार है।” जब फरीसी इकट्ठे थे, तो यीशु ने उनसे पूछा, ”मसीह के विषय में तुम क्‍या समझते हो? वह किस की सन्‍तान है?” उन्होंने उससे कहा, “दाऊद का।” उसने उनसे पूछा, “तो दाऊद आत्‍मा में होकर उसे प्रभु क्‍यों कहता है? ”प्रभु ने, मेरे प्रभु से कहा, मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवों के नीचे न कर दूँ।” ”भला, जब दाऊद उसे प्रभु कहता है, तो वह उसका पुत्र कैसे ठहरा?” उसके उत्तर में कोई भी एक बात न कह सका। परन्‍तु उस दिन से किसी को फिर उससे कुछ पूछने का हियाव न हुआ। तब यीशु ने भीड़ से और अपने चेलों से कहा, ”शास्‍त्री और फरीसी मूसा की गद्दी पर बैठे हैं; इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना, परन्‍तु उनके से काम मत करना; क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं। ”वे एक ऐसे भारी बोझ को जिन को उठाना कठिन है, बान्‍धकर उन्‍हें मनुष्‍यों के कन्‍धों पर रखते हैं; परन्‍तु आप उन्‍हें अपनी उंगली से भी सरकाना नहीं चाहते । ”वे अपने सब काम लोगों को दिखाने के लिये करते हैं: वे अपने तावीजों को चौड़े करते, और अपने वस्‍त्रों की कोरें बढ़ाते हैं। ”भोज में मुख्‍य-मुख्‍य जगहें, और सभा में मुख्‍य-मुख्‍य आसन, और बाजारों में नमस्‍कार और मनुष्‍य में रब्‍बी कहलाना उन्‍हें भाता है। ”परन्‍तु तुम रब्‍बी न कहलाना, क्योंकि तुम्‍हारा एक ही गुरू है: और तुम सब भाई हो। ”और पृथ्‍वी पर किसी को अपना पिता न कहना, क्‍योंकि तुम्‍हारा एक ही पिता है, जो स्‍वर्ग में है। ”और स्‍वामी भी न कहलाना, क्योंकि तुम्‍हारा एक ही स्‍वामी है, अर्थात् मसीह। ”जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्‍हारा सेवक बने। ”जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा। ”हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम मनुष्‍यों के विरोध में स्‍वर्ग के राज्‍य का द्वार बन्‍द करते हो, न तो आप ही उसमें प्रवेश करते हो और न उसमें प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो। [“हे कपटी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम विधवाओं के घरों को खा जाते हो, और दिखाने के लिए बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हो: इसलिये तुम्‍हें अधिक दण्‍ड मिलेगा।] ”हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है, तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो। ”हे अन्‍धे अगुवों, तुम पर हाय, जो कहते हो कि यदि कोई मन्‍दिर की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्‍तु यदि कोई मन्‍दिर के सोने की सौगन्‍ध खाए तो उससे बन्‍ध जाएगा। ”हे मूर्खो, और अन्‍धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्‍दिर जिस से सोना पवित्र होता है? ”फिर कहते हो कि यदि कोई वेदी की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्‍तु जो भेंट उस पर है, यदि कोई उसकी शपथ खाए तो बन्‍ध जाएगा। ”हे अन्‍धों, कौन बड़ा है, भेंट या वेदी: जिस से भेंट पवित्र होता है? ”इसलिये जो वेदी की शपथ खाता है, वह उसकी, और जो कुछ उस पर है, उसकी भी शपथ खाता है। ”और जो मन्‍दिर की शपथ खाता है, वह उसकी और उसमें रहनेवालों की भी शपथ खाता है। ”और जो स्‍वर्ग की शपथ खाता है, वह परमेश्‍वर के सिहांसन की और उस पर बैठनेवाले की भी शपथ खाता है। ”हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवाँ अंश देते हो, परन्‍तु तुम ने व्‍यवस्‍था की गम्‍भीर बातों अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्‍हें भी करते रहते, और उन्‍हें भी न छोड़ते। ”हे अन्‍धे अगुवों, तुम मच्‍छर को तो छान डालते हो, परन्‍तु ऊँट को निगल जाते हो। ”हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो माँजते हो परन्‍तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। ”हे अन्‍धे फरीसी, पहले कटोरे और थाली को भीतर से माँज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों। ”हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम चूना फिरी हुई कब्रो के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्‍तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। ”इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्‍यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्‍तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो। ”हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम भविष्‍यद्वक्‍ताओं की कब्रें सँवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। और कहते हो, कि यदि हम अपने बापदादों के दिनों में होते तो भविष्‍यद्वक्‍ताओं की हत्‍या में उनके साझी न होते। ”इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्‍यद्वक्‍ताओं के घातकों की सन्‍तान हो। ”अतः तुम अपने बापदादों के पाप का घड़ा भर दो। ”हे साँपो, हे करैतों के बच्‍चो, तुम नरक के दण्‍ड से कैसे बचोगे? ”इसलिये देखो, मैं तुम्‍हारे पास भविष्‍यद्वक्‍ताओं और बुद्धिमानों और शास्‍त्रियों को भेजता हूँ; और तुम उन में से कुछ को मार डालोगे, और क्रूस पर चढ़ाओगे; और कुछ को अपनी आराधनालयों में कोड़े मारोगे, और एक नगर से दूसरे नगर में खदेड़ते फिरोगे। जिस से धर्मी हाबिल से लेकर बिरिक्‍याह के पुत्र जकरयाह तक, जिसे तुम ने मन्‍दिर और वेदी के बीच में मार डाला था, जितने धर्मियों का लोहू पृथ्‍वी पर बहाया गया है, वह सब तुम्‍हारे सिर पर पड़ेगा। “ ”मैं तुम से सच कहता हूँ, ये सब बातें इस समय के लोगों पर आ पड़ेंगी। ”हे यरूशलेम, हे यरूशलेम! तू जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्‍हें पत्‍थरवाह करता है, कितनी ही बार मैंने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्‍चों को अपने पँखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे कर लूँ, परन्‍तु तुम ने न चाहा। ”देखो, तुम्‍हारा घर तुम्‍हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है। ”क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि अब से जब तक तुम न कहोगे, कि धन्‍य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है, तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।” जब यीशु मन्‍दिर से निकलकर जा रहा था, तो उसके चेले उसको मन्‍दिर की रचना दिखाने के लिये उस के पास आए। उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम यह सब नहीं देखते? मैं तुम से सच कहता हूँ, यहाँ पत्‍थर पर पत्‍थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा।” और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, “हम से कह कि ये बातें कब होंगी? और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्‍या चिन्‍ह होगा?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “सावधान रहो! कोई तुम्‍हें न भरमाने पाए। ”क्‍योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं मसीह हूँ’, और बहुतों को भरमाएँगे। ”तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्‍योंकि इन का होना अवश्‍य है, परन्‍तु उस समय अन्‍त न होगा। ”क्‍योंकि जाति पर जाति, और राज्‍य पर राज्‍य चढ़ाई करेगा, और जगह-जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईडोल होंगे। ”ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्‍भ होंगी। ”तब वे क्‍लेश दिलाने के लिये तुम्‍हें पकड़वाएँगे, और तुम्‍हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे। ”तब बहुतेरे ठोकर खाएँगे, और एक दूसरे को पकड़वाएँगे और एक दूसरे से बैर रखेंगे। ”बहुत से झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएँगे । ”और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा। ”परन्‍तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। ”और राज्‍य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा। ”इसलिए जब तुम उस उजाड़नेवाली घृणित वस्‍तु को जिसकी चर्चा दानिय्‍येल भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा हुई थी, पवित्र स्‍थान में खड़ी हुई देखो, (जो पढ़े, वह समझे)। तब जो यहूदिया में हों वे पहाड़ों पर भाग जाएँ। ”जो छत पर हो, वह अपने घर में से सामान लेने को न उतरे। ”और जो खेत में हो, वह अपना कपड़ा लेने को पीछे न लौटे। ”उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उनके लिये हाय, हाय। ”और प्रार्थना करो; कि तुम्‍हें जाड़े में या सब्‍त के दिन भागना न पड़े। ”क्‍योंकि उस समय ऐसा भारी क्‍लेश होगा, जैसा जगत के आरम्‍भ से न अब तक हुआ, और न कभी होगा। ”और यदि वे दिन घटाए न जाते, तो कोई प्राणी न बचता; परन्‍तु चुने हुओं के कारण वे दिन घटाए जाएँगे। ”उस समय यदि कोई तुम से कहे, कि देखो, मसीह यहाँ हैं! या वहाँ है! तो प्रतीति न करना। ”क्‍योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्‍ह और अद्भुत काम दिखाएँगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें। ”देखो, मैं ने पहले से तुम से यह सब कुछ कह दिया है। ”इसलिये यदि वे तुम से कहें, ‘देखो, वह जंगल में है’, तो बाहर न निकल जाना; ‘देखो, वह कोठरियों में हैं’, तो प्रतीति न करना। ”क्‍योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती जाती है, वैसा ही मनुष्‍य के पुत्र का भी आना होगा। ”जहाँ लोथ हो, वहीं गिद्ध इकट्ठे होंगे। ”उन दिनों के क्‍लेश के बाद तुरन्‍त सूर्य अंधियारा हो जाएगा, और चान्‍द का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी। ”तब मनुष्‍य के पुत्र का चिन्‍ह आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्‍वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्‍य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे। ”और वह तुरही के बड़े शब्‍द के साथ, अपने दूतों को भेजेगा, और वे आकाश के इस छोर से उस छोर तक, चारों दिशा से उसके चुने हुओं को इकट्ठे करेंगे। ”अंजीर के पेड़ से यह दृष्‍टान्‍त सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो, कि ग्रीष्‍म काल निकट है। इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो, कि वह निकट है, वरन् द्वार पर है। ”मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तब ये सब बातें पूरी न हो लें, तब तक इस पीढ़ी का अंत नहीं होगा। ”आकाश और पृथ्‍वी टल जाएँगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। ”उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्‍वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्‍तु केवल पिता। ”जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्‍य के पुत्र का आना भी होगा। ”क्‍योंकि जैसे जल-प्रलय से पहले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्‍याह शादी होती थी। और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उनको कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्‍य के पुत्र का आना भी होगा। ”उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। ”दो स्‍त्रियाँ चक्‍की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। ”इसलिये जागते रहो, क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्‍हारा प्रभु किस दिन आएगा। ”परन्‍तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। ”इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्‍योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्‍य का पुत्र आ जाएगा। ”अतः वह विश्‍वासयोग्‍य और बुद्धिमान दास कौन है, जिसे स्‍वामी ने अपने नौकर-चाकरों पर सरदार ठहराया, कि समय पर उन्‍हें भोजन दे? ”धन्‍य है, वह दास, जिसे उसका स्‍वामी आकर ऐसा की करते पाए। ”मैं तुम से सच कहता हूँ; वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकारी ठहराएगा। ”परन्‍तु यदि वह दुष्‍ट दास सोचने लगे, कि मेरे स्‍वामी के आने में देर है। और अपने साथी दासों को पीटने लगे, और पियक्‍कड़ों के साथ खाए-पीए। तो उस दास का स्‍वामी ऐसे दिन आएगा, जब वह उसकी बाट न जोहता हो, और ऐसी घड़ी कि वह न जानता हो, और उसे भारी ताड़ना देकर, उसका भाग कपटियों के साथ ठहराएगा: वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा। ”तब स्‍वर्ग का राज्‍य उन दस कुँवारियों के समान होगा जो अपनी मशालें लेकर दूल्‍हे से भेंट करने को निकलीं। ”उन में पाँच मूर्ख और पाँच समझदार थीं। ”मूर्खों ने अपनी मशालें तो लीं, परन्‍तु अपने साथ तेल नहीं लिया। ”परन्‍तु समझदारों ने अपनी मशालों के साथ अपनी कुप्‍पियों में तेल भी भर लिया। ”जब दुल्‍हे के आने में देर हुई, तो वे सब ऊँघने लगीं, और सो गई। ”आधी रात को धूम मची, कि देखो, दूल्‍हा आ रहा है, उससे भेंट करने के लिये चलो। ”तब वे सब कुँवारियाँ उठकर अपनी मशालें ठीक करने लगीं। ”और मूर्खों ने समझदारों से कहा, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दो, क्‍योंकि हमारी मशालें बुझी जाती हैं।’ ”परन्‍तु समझदारों ने उत्तर दिया कि कदाचित हमारे और तुम्‍हारे लिये पूरा न हो; भला तो यह है, कि तुम बेचनेवालों के पास जाकर अपने लिये मोल ले लो। ”जब वे मोल लेने को जा रही थीं, तो दूल्‍हा आ पहुँचा, और जो तैयार थीं, वे उसके साथ ब्‍याह के घर में चलीं गई और द्वार बन्‍द किया गया। ”इसके बाद वे दूसरी कुँवारियाँ भी आकर कहने लगीं, ‘हे स्‍वामी, हे स्‍वामी, हमारे लिये द्वार खोल दे।’ ”उसने उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच कहता हूँ, मैं तुम्‍हें नहीं जानता। ”इसलिये जागते रहो, क्‍योंकि तुम न उस दिन को जानते हो, न उस घड़ी को। ”क्‍योंकि यह उस मनुष्‍य की सी दशा है जिसने परदेश को जाते समय अपने दासों को बुलाकर अपनी संपत्ति उनको सौंप दी। ”उसने एक को पाँच तोड़, दूसरे को दो, और तीसरे को एक; अर्थात् हर एक को उसकी सामर्थ्य के अनुसार दिया, और तब परदेश चला गया। ”तब, जिस को पाँच तोड़े मिले थे, उसने तुरन्‍त जाकर उनसे लेन-देन किया, और पाँच तोड़े और कमाए। ”इसी रीति से जिस को दो मिले थे, उसने भी दो और कमाए। ”परन्‍तु जिस को एक मिला था, उसने जाकर मिट्टी खोदी, और अपने स्‍वामी के रूपये छिपा दिए। ”बहुत दिनों के बाद उन दासों का स्‍वामी आकर उनसे लेखा लेने लगा। ”जिस को पाँच तोड़े मिले थे, उसने पाँच तोड़े और लाकर कहा, ‘हे स्‍वामी, तू ने मुझे पाँच तोड़े सौंपे थे, देख मैं ने पाँच तोड़े और कमाए हैं।’ ”उसके स्‍वामी ने उससे कहा, ‘धन्‍य हे अच्‍छे और विश्‍वासयोग्‍य दास, तू थोड़े में विश्‍वासयोग्‍य रहा; मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊँगा। अपने स्‍वामी के आनन्‍द में सहभागी हो।’ ”और जिस को दो तोड़े मिले थे, उसने भी आकर कहा, ‘हे स्‍वामी तू ने मुझे दो तोड़े सौंपें थे, देख, मैं ने दो तोड़े और कमाए।’ ”उसके स्‍वामी ने उससे कहा, ‘धन्‍य हे अच्‍छे और विश्‍वासयोग्‍य दास, तू थोड़े में विश्‍वासयोग्‍य रहा, मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊँगा अपने स्‍वामी के आनन्‍द में सहभागी हो।’ ”तब जिसको एक तोड़ा मिला था, उसने आकर कहा, ‘हे स्‍वामी, मैं तुझे जानता था, कि तू कठोर मनुष्‍य है: तू जहाँ कहीं नहीं बोता वहाँ काटता है, और जहाँ नहीं छींटता वहाँ से बटोरता है।’ इसलिए मैं डर गया और जाकर तेरा तोड़ा मिट्टी में छिपा दिया; देख, ‘जो तेरा है, वह यह है।’ ”उसके स्‍वामी ने उसे उत्तर दिया, कि हे दुष्‍ट और आलसी दास; जब यह तू जानता था, कि जहाँ मैं ने नहीं बोया वहाँ से काटता हूँ; और जहाँ मैं ने नहीं छींटा वहाँ से बटोरता हूँ। तो तुझे चाहिए था, कि मेरा रूपया सर्राफों को दे देता, तब मैं आकर अपना धन ब्‍याज समेत ले लेता। इसलिये वह तोड़ा उससे ले लो, और जिसके पास दस तोड़े हैं, उसको दे दो। ”क्‍योंकि जिस किसी के पास है, उसे और दिया जाएगा; और उसके पास बहुत हो जाएगा: परन्‍तु जिसके पास नहीं है, उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। ”और इस निकम्‍मे दास को बाहर के अन्‍धेरे में डाल दो, जहाँ रोना और दाँत पीसना होगा। ”जब मनुष्‍य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्‍वर्ग दूत उसके साथ आएँगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। ”और सब जातियाँ उसके सामने इकट्ठी की जाएँगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकरियों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्‍हें एक दूसरे से अलग करेगा। और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकरियों को बाई ओर खड़ी करेगा। ”तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, ‘हे मेरे पिता के धन्‍य लोगों, आओ, उस राज्‍य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्‍हारे लिये तैयार किया हुआ है। ‘क्योंकि मै भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया; मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझसे मिलने आए।’ ”तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पानी पिलाया? ‘हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहनाए? ‘हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए?’ ”तब राजा उन्‍हें उत्तर देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।’ ”तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, ‘हे स्रापित लोगो, मेरे सामने से उस अनन्‍त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। क्‍योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुमने मुझे पानी नहीं पिलाया; मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुमने मेरी सुधि न ली।’ ”तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? ”तब वह उन्‍हें उत्तर देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया।’ ”और यह अनन्‍त दण्‍ड भोगेंगे परन्‍तु धर्मी अनन्‍त जीवन में प्रवेश करेंगे।” जब यीशु ये सब बातें कह चुका, तो अपने चेलों से कहने लगा। ”तुम जानते हो, कि दो दिन के बाद फसह का पर्व होगा; और मनुष्‍य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिये पकड़वाया जाएगा।” तब महायाजक और प्रजा के पुरनिए काइफा नाम महायाजक के आँगन में इकट्ठे हुए। और आपस में विचार करने लगे कि यीशु को छल से पकड़कर मार डालें। परन्‍तु वे कहते थे, कि पर्व के समय नहीं; कहीं ऐसा न हो कि लोगों में बलवा मच जाए। जब यीशु बैतनिय्‍याह में शमौन कोढ़ी के घर में था। तो एक स्‍त्री संगमरमर के पात्र में बहुमूल्य इत्र लेकर उसके पास आई, और जब वह भोजन करने बैठा था, तो उसके सिर पर उण्‍डेल दिया। यह देखकर, उसके चेले रिसयाए और कहने लगे, ‘इसका क्‍यों सत्‍यनाश किया गया? यह तो अच्‍छे दाम पर बेचकर कंगालों को बाँटा जा सकता था।’ यह जानकर यीशु ने उनसे कहा, “स्‍त्री को क्‍यों सताते हो? उसने मेरे साथ भलाई की है। ”कंगाल तुम्‍हारे साथ सदा रहते हैं, परन्‍तु मैं तुम्‍हारे साथ सदैव न रहूँगा। ”उसने मेरी देह पर जो यह इत्र उण्‍डेला है, वह मेरे गाड़े जाने के लिये किया है। ”मैं तुम से सच कहता हूँ, कि सारे जगत में जहाँ कहीं यह सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ उसके इस काम का वर्णन भी उसके स्‍मरण में किया जाएगा।” तब यहूदा इस्‍करियोती ने, बारह चेलों में से एक था, महायाजकों के पास जाकर कहा, ”यदि मैं उसे तुम्‍हारे हाथ पकड़वा दूँ, तो मुझे क्‍या दोगे?” उन्होंने उसे तीस चाँदी के सिक्‍के तौलकर दे दिए। और वह उसी समय से उसे पकड़वाने का अवसर ढूँढने लगा। अखमीरी रोटी के पर्ब्ब के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?” उसने कहा, “नगर में फलाने के पास जाकर उससे कहो, कि गुरू कहता है, कि मेरा समय निकट है, मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहाँ पर्व मनाऊँगा।” अतः चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी, और फसह तैयार किया। जब साँझ हुई, तो वह बारहों के साथ भोजन करने के लिये बैठा। जब वे खा रहे थे, तो उसने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।” इस पर वे बहुत उदास हुए, और हर एक उससे पूछने लगा, “हे गुरू, क्‍या वह मैं हूँ?” उसने उत्तर दिया, “जिसने मेरे साथ थाली में हाथ डाला है, वही मुझे पकड़वाएगा। ”मनुष्‍य का पुत्र तो जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्‍तु उस मनुष्‍य के लिये शोक है जिसके द्वारा मनुष्‍य का पुत्र पकड़वाया जाता है: यदि उस मनुष्‍य का जन्‍म न होता, तो उसके लिये भला होता।” तब उसके पकड़वाने वाले यहूदा ने कहा, “हे रब्‍बी, क्‍या वह मैं हूँ?” उसने उससे कहा, “तू कह चुका।” जब वे खा रहे थे, तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष माँगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्‍यवाद किया, और उन्‍हें देकर कहा, “तुम सब इस में से पीओ, क्‍योंकि यह वाचा का मेरा वह लोहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है। ”मैं तुम से कहता हूँ, कि दाख का यह रस उस दिन तक कभी न पीऊँगा, जब तक तुम्‍हारे साथ अपने पिता के राज्‍य में नया न पीऊँ।” फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ पर गए। तब यीशु ने उनसे कहा, “तुम सब आज ही रात को मेरे विषय में ठोकर खाओगे; क्‍योंकि लिखा है “मैं चरवाहे को मारूँगा; और झुण्‍ड की भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।” ”परन्‍तु मैं अपने जी उठने के बाद तुम से पहले गलील को जाऊँगा।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “यदि सब तेरे विषय में ठोकर खाएँ तो खाएँ, परन्‍तु मैं कभी भी ठोकर न खाऊँगा।” यीशु ने उससे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि आज ही रात को मुर्ग के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझ से मुकर जाएगा।” पतरस ने उससे कहा, “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी हो, तौभी, मैं तुझ से कभी न मुकरूँगा।” और ऐसा ही सब चेलों ने भी कहा। तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नामक एक स्‍थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा “यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहाँ जाकर प्रार्थना करूँ।” और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्‍याकुल होने लगा। तब उसने उनसे कहा, “मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।” फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए, तौभी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्‍तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।” फिर चेलों के पास आकर उन्‍हें सोते पाया, और पतरस से कहा, “क्‍या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? ”जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो! आत्‍मा तो तैयार है, परन्‍तु शरीर दुर्बल है।” फिर उसने दूसरी बार जाकर यह प्रार्थना की, “हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्‍छा पूरी हो।” तब उसने आकर उन्‍हें फिर सोते पाया, क्‍योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं। और उन्‍हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की। तब उसने चेलों के पास आकर उनसे कहा, “अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुँची है, और मनुष्‍य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। ”उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुँचा है।” वह यह कह ही रहा था, कि देखो यहूदा जो बारहों में से एक था, आया, और उसके साथ महायाजकों और लोगों के पुरनियों की ओर से बड़ी भीड़, तलवारें और लाठियाँ लिए हुए आई। उसके पकड़वाने वाले ने उन्‍हें यह पता दिया था कि जिसको मैं चूम लूँ वही है; उसे पकड़ लेना। और तुरन्‍त यीशु के पास आकर कहा, “हे रब्‍बी, नमस्‍कार!” और उसको बहुत चूमा। यीशु ने उससे कहा, “हे मित्र, जिस काम के लिये तू आया है, उसे कर ले।” तब उन्होंने पास आकर यीशु पर हाथ डाले और उसे पकड़ लिया। और देखो, यीशु के साथियों में से एक ने हाथ बढ़ाकर अपनी तलवार खींच ली और महायाजक के दास पर चलाकर उसका कान उड़ा दिया। तब यीशु ने उससे कहा, “अपनी तलवार म्यान में रख ले क्‍योंकि जो तलवार चलाते हैं, वे सब तलवार से नाश किए जाएँगे। ”क्‍या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से विनती कर सकता हूँ, और वह स्‍वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्‍थित कर देगा? ”परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्‍य है, कैसे पूरी होंगी?” उसी घड़ी यीशु ने भीड़ से कहा, “क्‍या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे डाकू के समान पकड़ने के लिये निकले हो? मैं हर दिन मन्‍दिर में बैठकर उपदेश दिया करता था, और तुम ने मुझे नहीं पकड़ा। ”परन्‍तु यह सब इसलिये हुआ है, कि भविष्‍यद्वक्‍ताओं के वचन पूरे हों।” तब सब चेलें उसे छोड़कर भाग गए। और यीशु के पकड़ने वाले उसको काइफा नामक महायाजक के पास ले गए, जहाँ शास्‍त्री और पुरनिए इकट्ठे हुए थे। और पतरस दूर से उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन तक गया, और भीतर जाकर अन्‍त देखने को प्‍यादों के साथ बैठ गया। महायाजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे। परन्‍तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। अंत में दो जन आये, और कहा, “इसने कहा कि मैं परमेश्‍वर के मन्‍दिर को ढा सकता हूँ और उसे तीन दिन में बना सकता हूँ।” तब महायाजक ने खड़े होकर उससे कहा, “क्‍या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?” परन्‍तु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा “मैं तुझे जीवते परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ, कि यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।” यीशु ने उससे कहा, “तू ने आप ही कह दिया; वरन् मैं तुम से यह भी कहता हूँ, कि अब से तुम मनुष्‍य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।” तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, “इसने परमेश्‍वर की निन्‍दा की है, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन? देखो, तुम ने अभी यह निन्‍दा सुनी है! तुम क्‍या समझते हो?” उन्होंने उत्तर दिया, “यह वध होने के योग्‍य है।” तब उन्होंने उस के मुँह पर थूका और उसे घूँसे मारे, दूसरों ने थप्पड़ मार के कहा, ”हे मसीह, हमसे भविष्‍यद्वाणी करके कह कि किस ने तुझे मारा?” पतरस बाहर आँगन में बैठा हुआ था कि एक दासी उसके पास आकर कहा, “तू भी यीशु गलीली के साथ था।” उसने सब के सामने यह कह कर इन्‍कार किया और कहा, “मैं नहीं जानता तू क्‍या कह रही है।” जब वह बाहर डेवढ़ी में चला गया, तो दूसरी दासी ने उसे देखकर उनसे जो वहाँ थे कहा, “यह भी तो यीशु नासरी के साथ था।” उसने शपथ खाकर फिर इन्‍कार किया, “मैं उस मनुष्‍य को नहीं जानता।” थोड़ी देर के बाद, जो वहाँ खड़े थे, उन्होंने पतरस के पास आकर उससे कहा, “सचमुच तू भी उन में से एक है; क्‍योंकि तेरी बोली तेरा भेद खोल देती है।” तब वह धिक्‍कार देने और शपथ खाने लगा, “मैं उस मनुष्‍य को नहीं जानता।” और तुरन्‍त मुर्ग ने बाँग दी। तब पतरस को यीशु की कही हुई बात स्‍मरण आई, “मुर्ग के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।” और वह बाहर जाकर फूट-फूट कर रोने लगा। जब भोर हुई, तो सब महायाजकों और लोगों के पुरनियों ने यीशु के मार डालने की सम्‍मति की। और उन्होंने उसे बान्‍धा और ले जाकर पीलातुस हाकिम के हाथ में सौंप दिया। जब उसके पकड़वाने वाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया और वे तीस चाँदी के सिक्‍के महायाजकों और पुरनियों के पास फेर लाया। और कहा, “मैं ने निर्दोषी को घात के लिये पकड़वा कर पाप किया है?” उन्होंने कहा, “हमें क्‍या? तू ही जान।” तब वह उन सिक्‍कों को मन्‍दिर में फेंककर चला गया, और जाकर अपने आप को फाँसी दी। महायाजकों ने उन सिक्‍कों को लेकर कहा, “इन्‍हें, भण्‍डार में रखना उचित नहीं, क्‍योंकि यह लोहू का दाम है।” अतः उन्होंने सम्‍मति करके उन सिक्‍कों से परदेशियों के गाड़ने के लिये कुम्‍हार का खेत मोल ले लिया। इस कारण वह खेत आज तक लोहू का खेत कहलाता है। तब जो वचन यिर्मयाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हुआ: “उन्होंने वे तीस सिक्‍के अर्थात् उस ठहराए हुए मूल्‍य को (जिसे इस्राएल की सन्‍तान में से कितनों ने ठहराया था) ले लिए। और जैसे प्रभु ने मुझे आज्ञा दी थी वैसे ही उन्‍हें कुम्‍हार के खेत के मूल्‍य में दे दिया।” जब यीशु हाकिम के सामने खड़ा था, तो हाकिम ने उससे पूछा, “क्‍या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने उससे कहा, “तू आप ही कह रहा है।” जब महायाजक और पुरनिए उस पर दोष लगा रहे थे, तो उसने कुछ उत्तर नहीं दिया। इस पर पीलातुस ने उससे कहा, “क्‍या तू नहीं सुनता, कि ये तेरे विरोध में कितनी गवाहियाँ दे रहे हैं?” परन्‍तु उसने उसको एक बात का भी उत्तर नहीं दिया, यहाँ तक कि हाकिम को बड़ा आश्‍चर्य हुआ। और हाकिम की यह रीति थी, कि उस पर्ब्ब में लोगों के लिये किसी एक बन्दी को जिसे वे चाहते थे, छोड़ देता था। उस समय बरअब्‍बा नामक उन्‍हीं में का, एक नामी बन्धुआ था। अतः जब वे इकट्ठे हुए, तो पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम किसको चाहते हो, कि मैं तुम्‍हारे लिये छोड़ दूँ? बरअब्‍बा को, या यीशु को जो मसीह कहलाता है?” क्‍योंकि वह जानता था कि उन्होंने उसे डाह से पकड़वाया है। जब वह न्‍याय की गद्दी पर बैठा हुआ था तो उसकी पत्‍नी ने उसे कहला भेजा, “तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना; क्‍योंकि मैं ने आज स्‍वप्‍न में उसके कारण बहुत दु:ख उठाया है।” महायाजकों और पुरनियों ने लोगों को उभारा, कि वे बरअब्‍बा को माँग ले, और यीशु को नाश कराएँ। हाकिम ने उनसे पूछा, “इन दोनों में से किस को चाहते हो, कि तुम्‍हारे लिये छोड़ दूँ?” उन्होंने कहा, “बरअब्‍बा को।” पीलातुस ने उनसे पूछा, “फिर यीशु को जो मसीह कहलाता है, क्‍या करूँ?” सब ने उससे कहा, “वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।” हाकिम ने कहा, “क्‍यों उसने क्‍या बुराई की है?” परन्‍तु वे और भी चिल्‍ला-चिल्‍लाकर कहने लगे, “वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।” जब पीलातुस ने देखा, कि कुछ बन नहीं पड़ता परन्‍तु इस के विपरीत हुल्‍लड़ होता जाता है, तो उसने पानी लेकर भीड़ के सामने अपने हाथ धोए, और कहा, “मैं इस धर्मी के लोहू से निर्दोष हूँ; तुम ही जानो।” सब लोगों ने उत्तर दिया, “इस का लोहू हम पर और हमारी सन्‍तान पर हो!” इस पर उसने बरअब्‍बा को उनके लिये छोड़ दिया, और यीशु को कोड़े लगवाकर सौंप दिया, कि क्रूस पर चढ़ाया जाए। तब हाकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जाकर सारी पलटन उसके चारों ओर इकट्ठी की। और उसके कपड़े उतारकर उसे किरमिजी बागा पहिनाया। और काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा; और उसके दाहिने हाथ में सरकण्‍डा दिया और उसक े आगे घुटने टेककर उसे ठट्ठे में उड़ाने लगे, “हे यहूदियों के राजा नमस्‍कार!” और उस पर थूका; और वही सरकण्‍डा लेकर उसके सिर पर मारने लगे। जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो वह बागा उस पर से उतारकर फिर उसी के कपड़े उसे पहनाए, और क्र ूस पर चढ़ाने के लिये ले चले। बाहर जाते हुए उन्‍हें शमौन नामक एक कुरेनी मनुष्‍य मिला, उन्‍होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। और उस स्‍थान पर जो गुलगुता नाम की जगह अर्थात् खोपड़ी का स्‍थान कहलाता है पहुँचकर। उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्‍तु उसने चखकर पीना न चाहा। तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया; और चिट्ठियाँ डालकर उसके कपड़े बाँट लिए। और वहाँ बैठकर उसका पहरा देने लगे। और उसका दोषपत्र, उसके सिर के ऊपर लगाया, कि “यह यहूदियों का राजा यीशु है।” तब उसके साथ दो डाकू एक दाहिने और एक बाएँ क्रूसों पर चढ़ाए गए। और आने जाने-वाले सिर हिला-हिलाकर उसकी निन्‍दा करते थे। और यह कहते थे, “हे मन्‍दिर के ढानेवाले और तीन दिन में बनानेवाले, अपने आप को तो बचा! यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ।” इसी रीति से महायाजक भी शास्‍त्रियों और पुरनियों समेत ठट्ठा कर करके कहते थे, ”इसने दूसरों को बचाया, और अपने आप को नहीं बचा सकता। यह तो ‘इस्राएल का राजा’ है। अब क्रूस पर से उतर आए, तो हम उस पर विश्‍वास करें। उसने परमेश्‍वर का भरोसा रखा है, यदि वह इस को चाहता है, तो अब इसे छुड़ा ले, क्‍योंकि इस ने कहा था, कि ‘मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ’।” इसी प्रकार डाकू भी जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे उसकी निन्‍दा करते थे। दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्‍धेरा छाया रहा। तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “एली, एली, लमा शबक्‍तनी?” अर्थात् “हे मेरे परमेश्‍वर, हे मेरे परमेश्‍वर, तू ने मुझे क्‍यों छोड़ दिया?” जो वहाँ खड़े थे, उन में से कितनों ने यह सुनकर कहा, “वह तो एलिय्‍याह को पुकारता है।” उन में से एक तुरन्‍त दौड़ा, और स्‍पंज लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्‍डे पर रखकर उसे चुसाया। औरों ने कहा, “रह जाओ, देखें, एलिय्‍याह उसे बचाने आता है कि नहीं।” तब यीशु ने फिर बड़े शब्‍द से चिल्‍लाकर प्राण छोड़ दिए। और देखो, मन्‍दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया: और धरती डोल गई और चटानें तड़क गईं। और कब्रें खुल गईं, और सोए हुए पवित्र लोगों की बहुत शव जी उठी। और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए, और बहुतों को दिखाई दिए। तब सूबेदार और जो उसके साथ यीशु का पहरा दे रहे थे, भुईडोल और जो कुछ हुआ था, देखकर अत्‍यन्‍त डर गए, और कहा, “सचमुच यह परमेश्‍वर का पुत्र था!” वहाँ बहुत सी स्‍त्रियाँ जो गलील से यीशु की सेवा करती हुईं उसके साथ आईं थीं, दूर से देख रही थीं। उनमें मरियम मगदलीनी और याकूब और योसेस की माता मरियम और जब्‍दी के पुत्रों की माता थीं। जब साँझ हुई तो यूसुफ नाम अरिमतियाह का एक धनी मनुष्‍य जो आप ही यीशु का चेला था, आया। उसने पीलातुस के पास जाकर यीशु का शव माँगा। इस पर पीलातुस ने दे देने की आज्ञा दी। यूसुफ ने शव को लेकर उसे उज्‍जवल चादर में लपेटा। और उसे अपनी नई कब्र में रखा, जो उसने चटान में खुदवाई थी, और कब्र के द्वार पर बड़ा पत्‍थर लुढ़काकर चला गया। और मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम वहाँ कब्र के सामने बैठी थीं। दूसरे दिन जो तैयारी के दिन के बाद का दिन था, महायाजकों और फरीसियों ने पीलातुस के पास इकट्ठे होकर कहा। ”हे महाराज, हमें स्‍मरण है, कि उस भरमानेवाले ने अपने जीते जी कहा था, कि मैं तीन दिन के बाद जी उठूँगा। अतः आज्ञा दे कि तीसरे दिन तक कब्र की रखवाली की जाए, ऐसा न हो कि उसके चेले आकर उसे चुरा ले जाएँ, और लोगों से कहनें लगें, कि वह मरे हुओं में से जी उठा है: तब पिछला धोखा पहले से भी बुरा होगा।” पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम्‍हारे पास पहरूए तो हैं जाओ, अपनी समझ के अनुसार रखवाली करो।” अतः वे पहरूओं को साथ ले कर गए, और पत्‍थर पर मुहर लगाकर कब्र की रखवाली की। सब्‍त के दिन के बाद सप्‍ताह के पहले दिन पौ फटते ही मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम कब्र को देखने आई। और देखो एक बड़ा भुईंडोल हुआ, क्‍योंकि प्रभु का एक दूत स्‍वर्ग से उतरा, और पास आकर उसने पत्‍थर को लुढ़का दिया, और उस पर बैठ गया। उसका रूप बिजली का सा और उसका वस्‍त्र पाले के समान उज्‍ज्‍वल था। उसके भय से पहरूए काँप उठे, और मृतक समान हो गए। स्‍वर्गदूत ने स्त्रियों से कहा, “मत डरो, मै जानता हूँ कि तुम यीशु को जो क्रुस पर चढ़ाया गया था ढूँढती हो। वह यहाँ नहीं है, परन्‍तु अपने वचन के अनुसार जी उठा है; आओ, यह स्‍थान देखो, जहाँ प्रभु पड़ा था। और शीघ्र जाकर उसके चेलों से कहो, कि वह मृतकों में से जी उठा है; और देखो वह तुम से पहले गलील को जाता है, वहाँ उसका दर्शन पाओगे, देखो, मैं ने तुम से कह दिया।” और वे भय और बड़े आनन्‍द के साथ कब्र से शीघ्र लौटकर उसके चेलों को समाचार देने के लिये दौड़ गई। और देखो, यीशु उन्‍हें मिला और कहा; ‘सलाम’ और उन्होंने पास आकर और उसके पाँव पकड़कर उसको दण्‍डवत किया। तब यीशु ने उनसे कहा, “मत डरो; मेरे भाईयों से जाकर कहो, कि गलील को चलें जाएँ वहाँ मुझे देखेंगे।” वे जा ही रही थी, कि देखो, पहरूओं में से कितनों ने नगर में आकर पूरा हाल महायाजकों से कह सुनाया। तब उन्होंने पुरनियों के साथ इकट्ठे होकर सम्‍मति की, और सिपाहियों को बहुत चाँदी देकर कहा। “यह कहना कि रात को जब हम सो रहे थे, तो उसके चेले आकर उसे चुरा ले गए। और यदि यह बात हाकिम के कान तक पहुँचेगी, तो हम उसे समझा लेंगे और तुम्हें जोखिम से बचा लेंगे।” अतः उन्होंने रूपए लेकर जैसा सिखाए गए थे, वैसा ही किया; और यह बात आज तक यहूदियों में प्रचलित है। और ग्‍यारह चेले गलील में उस पहाड़ पर गए, जिसे यीशु ने उन्‍हें बताया था। और उन्होंने उसके दर्शन पाकर उसे प्रणाम किया, पर किसी-किसी को सन्‍देह हुआ। यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्‍वर्ग और पृथ्‍वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। ”इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्‍हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्‍मा के नाम से बपतिस्‍मा दो, ”और उन्‍हें सब बातें जो मैंने तुम्‍हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्‍हारे संग हूँ।” परमेश्‍वर के पुत्र यीशु मसीह के सुसमाचार का आरम्‍भ। जैसे यशायाह भविष्‍यद्वकता की पुस्‍तक में लिखा है: “देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूँ, जो तेरे लिये मार्ग सुधारेगा। जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द सुनाई दे रहा है कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, और उसकी सड़कें सीधी करो।” यूहन्ना आया, जो जंगल में बपतिस्‍मा देता, और पापों की क्षमा के लिये मनफिराव के बपतिस्‍मा का प्रचार करता था। सारे यहूदिया के, और यरूशलेम के सब रहनेवाले निकलकर उसके पास गए, और अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उससे बपतिस्‍मा लिया। यूहन्ना ऊँट के रोम का वस्‍त्र पहिने और अपनी कमर में चमड़ें का पटुका बाँधे रहता था और टिड्डियाँ और वन मधु खाया करता था। और यह प्रचार करता था, कि मेरे बाद वह आने वाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं इस योग्‍य नहीं कि झुककर उसके जूतों का बन्‍ध खोलूँ। मैं ने तो तुम्‍हें पानी से बपतिस्‍मा दिया है पर वह तुम्‍हें पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा देगा। उन दिनों में यीशु ने गलील के नासरत से आकर, यरदन में यूहन्ना से बपतिस्‍मा लिया। और जब वह पानी से निकलकर ऊपर आया, तो तुरन्‍त उसने आकाश को खुलते और आत्‍मा को कबूतर की नाईं अपने ऊपर उतरते देखा। और यह आकाशवाणी हुई, कि तू मेरा प्रिय पुत्र है, तुझ से मैं प्रसन्न हूँ । तब आत्‍मा ने तुरन्‍त उस को जंगल की ओर भेजा। और जंगल में चालीस दिन तक शैतान ने उसकी परीक्षा की; और वह वन पशुओं के साथ रहा; और स्‍वर्गदूत उसकी सेवा करते रहे। यूहन्ना के पकड़वाए जाने के बाद यीशु ने गलील में आकर परमेश्‍वर के राज्‍य का सुसमाचार प्रचार किया। और कहा, “समय पूरा हुआ है, और परमेश्‍वर का राज्‍य निकट आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्‍वास करो।” गलील की झील के किनारे किनारे जाते हुए, उसने शमौन और उसके भाई अन्‍द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्‍योंकि वे मछुवारे थे। और यीशु ने उनसे कहा, “मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्‍यों के मछुवे बनाऊँगा।” वे तुरन्‍त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। और कुछ आगे बढ़कर, उसने जब्दी के पुत्र याकूब, और उसके भाई यहून्ना को, नाव पर जालों को सुधारते देखा। उसने तुरन्‍त उन्‍हें बुलाया; और वे अपने पिता जब्दी को मजदूरों के साथ नाव पर छोड़कर, उसके पीछे हो लिए। और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्‍त सब्‍त के दिन आराधनालय में जाकर उपदेश करने लगा। और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्‍योंकि वह उन्‍हें शास्‍त्रियों की नाईं नहीं, परन्‍तु अधिकारी की नाई उपदेश देता था। और उसी समय, उनकी आराधनालय में एक मनुष्‍य था, जिसमें एक अशुद्ध आत्‍मा थी। उसने चिल्‍लाकर कहा, “हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूँ, तू कौन है? परमेश्‍वर का पवित्र जन!” यीशु ने उसे डाँट कर कहा, “चुप रह; और उसमें से निकल जा।” तब अशुद्ध आत्‍मा उसको मरोड़कर, और बड़े शब्‍द से चिल्‍लाकर उसमें से निकल गई। इस पर सब लोग आश्‍चर्य करते हुए आपस में वाद-विवाद करने लगे कि यह क्‍या बात है? यह तो कोई नया उपदेश है! वह अधिकार के साथ अशुद्ध आत्‍माओं को भी आज्ञा देता है, और वे उसकी आज्ञा मानती हैं। और उसका नाम तुरन्‍त गलील के आसपास के सारे प्रदेश में फैल गया। और वह तुरन्‍त आराधनालय में से निकलकर, याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्‍द्रियास के घर आया। और शमौन की सास ज्‍वर से पीडि़त थी, और उन्‍होंने तुरन्‍त उसके विषय में उससे कहा। तब उसने पास जाकर उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया; और उसका ज्‍वर उस पर से उतर गया, और वह उनकी सेवा-टहल करने लगी। संध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें, जिन में दुष्‍टात्‍मा थीं, उसके पास लाए। और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ। और उसने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्‍माओं को निकाला; और दुष्‍टात्‍माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं। और भोर को दिन निकलने से बहुत पहले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्‍थान में गया और वहाँ प्रार्थना करने लगा। तब शमौन और उसके साथी उसकी खोज में गए। जब वह मिला, तो उससे कहा; कि सब लोग तुझे ढूँढ़ रहे हैं। यीशु ने उनसे कहा, “आओ; हम और कहीं आसपास की बस्‍तियों में जाएँ, कि मैं वहाँ भी प्रचार करूँ, क्‍योंकि मै इसी लिये निकला हूँ।” और वह सारे गलील में उनके आराधनालयों में जा जाकर प्रचार करता और दुष्‍टात्‍माओं को निकालता रहा। एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उससे विनती की, और उसके सामने घुटने टेककर, उससे कहा, “यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” उसने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा, “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा।” और तुरन्‍त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया। तब उसने उसे चिताकर तुरन्‍त विदा किया, और उससे कहा, “देख, किसी से कुछ मत कहना, परन्‍तु जाकर अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने ठहराया है उसे भेंट चढ़ा, कि उन पर गवाही हो।” परन्‍तु वह बाहर जाकर इस बात को बहुत प्रचार करने और यहाँ तक फैलाने लगा, कि यीशु फिर खुल्‍लम खुल्‍ला नगर में न जा सका, परन्‍तु बाहर जंगली स्‍थानों में रहा; और चारों ओर से लोग उसके पास आते रहे। कई दिन के बाद वह फिर कफरनहूम में आया और सुना गया, कि वह घर में है। फिर इतने लोग इकट्ठे हुए, कि द्वार के पास भी जगह नहीं मिली; और वह उन्‍हें वचन सुना रहा था। और लोग एक झोले के मारे हुए को चार मनुष्‍यों से उठवाकर उसके पास ले आए। परन्‍तु जब वे भीड़ के कारण उसके निकट न पहुँच सके, तो उन्‍होंने उस छत को जिसके नीचे वह था, खोल दिया और जब उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर झोले का मारा हुआ पड़ा था, लटका दिया। यीशु ने, उनका विश्‍वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा, “हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।” तब कई एक शास्‍त्री जो वहाँ बैठे थे, अपने अपने मन में विचार करने लगे, “यह मनुष्‍य क्‍यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्‍वर की निन्‍दा करता है! परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?” यीशु ने तुरन्‍त अपनी आत्‍मा में जान लिया, कि वे अपने अपने मन में ऐसा विचार कर रहे हैं, और उनसे कहा, “तुम अपने अपने मन में यह विचार क्‍यों कर रहे हो? सहज क्‍या है? क्‍या झोले के मारे से यह कहना कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना, कि उठ अपनी खाट उठा कर चल फिर? परन्‍तु जिस से तुम जान लो कि मनुष्‍य के पुत्र को पृथ्‍वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है।” उसने उस झोले के मारे हुए से कहा, “मैं तुझ से कहता हूँ, उठ, अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।” वह उठा, और तुरन्‍त खाट उठाकर सब के सामने से निकलकर चला गया। इस पर सब चकित हुए, और परमेश्‍वर की बड़ाई करके कहने लगे, कि हम ने ऐसा कभी नहीं देखा। वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्‍हें उपदेश देने लगा। जाते हुए यीशु ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” और वह उठकर, उसके पीछे हो लिया। और वह उसके घर में भोजन करने बैठा; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी भी उसके और चेलों के साथ भोजन करने बैठे, क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। और शास्त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा, “वह तो चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ खाता पीता है!” यीशु ने यह सुनकर, उनसे कहा, “भले चंगों को वैद्य की आवश्‍यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूँ।” यूहन्ना के चेले, और फरीसी उपवास करते थे; अतः उन्‍होंने आकर उससे यह कहा; कि यूहन्ना के चेले और फरीसियों के चेले क्‍यों उपवास रखते हैं, परन्‍तु तेरे चेले उपवास नहीं रखते? यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दुल्‍हा बरातियों के साथ रहता है क्‍या वे उपवास कर सकते हैं? अतः जब तक दूल्‍हा उनके साथ है, तब तक वे उपवास नहीं कर सकते। परन्‍तु वे दिन आएँगे, कि दूल्‍हा उनसे अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे। कोरे कपड़े का पैवन्‍द पुराने वस्त्र पर कोई नहीं लगाता; नहीं तो वह पैवन्‍द उसमें से कुछ खींच लेगा, अर्थात् नया, पुराने से, और वह और फट जाएगा। नये दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं रखता, नहीं तो दाखरस मश्‍कों को फाड़ देगा, और दाखरस और मश्‍कें दोनों नष्‍ट हो जाएँगी; परन्‍तु दाख का नया रस नई मश्‍कों में भरा जाता है।” और ऐसा हुआ कि वह सब्‍त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था; और उसके चेले चलते हुए बालें तोड़ने लगे। तब फरीसियों ने उससे कहा, “देख, ये सब्‍त के दिन वह काम क्‍यों करते हैं जो उचित नहीं?” उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम ने कभी नहीं पढ़ा, कि जब दाऊद को आवश्‍यकता हुई और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उसने क्‍या किया था? उसने क्‍योंकर अबियातार महायाजक के समय, परमेश्‍वर के भवन में जाकर, भेंट की रोटियाँ खाईं, जिसका खाना याजकों को छोड़ और किसी को भी उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दीं?” और उसने उनसे कहा, “सब्‍त का दिन मनुष्‍य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्‍य सब्‍त के दिन के लिये। इसलिये मनुष्‍य का पुत्र सब्‍त के दिन का भी स्‍वामी है।” और वह फिर आराधनालय में गया; और वहाँ एक मनुष्‍य था, जिसका हाथ सूख गया था। और वे उस पर दोष लगाने के लिये उसकी घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्‍त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। उसने सूखे हाथवाले मनुष्‍य से कहा, “बीच में खड़ा हो।” और उनसे कहा, “क्‍या सब्‍त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना?” पर वे चुप रहे। और उसने उनके मन की कठोरता से उदास होकर, उनको क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्‍य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्‍छा हो गया। तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्‍त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्‍मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें। और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सूर और सैदा के आसपास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्‍भे के काम करता है, उसके पास आई। और उसने अपने चेलों से कहा, “भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें।” क्‍योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे। और अशुद्ध आत्‍माएँ भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्‍लाकर कहती थीं कि तू परमेश्‍वर का पुत्र है। और उसने उन्‍हें बहुत चिताया, कि मुझे प्रगट न करना। फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्‍हें वह चाहता था उन्‍हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्‍त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्‍हें भेजे, कि प्रचार करें। और दुष्‍टात्‍माओं को निकालने का अधिकार रखें। और वे ये हैं: शमौन जिस का नाम उसने पतरस रखा। और जब्दी का पुत्र याकूब, और याकूब का भाई यूहन्ना, जिनका नाम उसने बूअनरगिस, अर्थात् गर्जन के पुत्र रखा। और अन्‍द्रियास, और फिलिप्‍पुस, और बरतुल्‍मै, और मत्ती, और थोमा, और हलफई का पुत्र याकूब; और तद्दै, और शमौन कनानी। और यहूदा इस्‍करियोती, जिस ने उसे पकड़वा भी दिया। और वह घर में आया: और ऐसी भीड़ इकट्ठी हो गई, कि वे रोटी भी न खा सके। जब उसके कुटुम्‍बियों ने यह सुना, तो उसे पकड़ने के लिये निकले; क्‍योंकि कहते थे, कि उसका चित्त ठिकाने नहीं है। और शास्‍त्री जो यरूशलेम से आए थे, यह कहते थे, कि उसमें शैतान है, और यह भी, कि वह दुष्‍टात्‍माओं के सरदार की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता है। और वह उन्‍हें पास बुलाकर, उनसे दृष्टान्तों में कहने लगा, “शैतान क्‍योंकर शैतान को निकाल सकता है? और यदि किसी राज्‍य में फूट पड़े, तो वह राज्‍य क्‍योंकर स्‍थिर रह सकता है? और यदि किसी घर में फूट पड़े, तो वह घर क्‍योंकर स्‍थिर रह सकेगा? और यदि शैतान अपना ही विरोधी होकर अपने में फूट डाले, तो वह क्‍योंकर बना रह सकता है? उसका तो अन्‍त ही हो जाता है। किन्‍तु कोई मनुष्‍य किसी बलवन्‍त के घर में घुसकर उसका माल लूट नहीं सकता, जब तक कि वह पहले उस बलवन्‍त को न बाँध ले; और तब उसके घर को लूट लेगा। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि मनुष्‍यों की सन्‍तान के सब पाप और निन्‍दा जो वे करते हैं, क्षमा की जाएगी। परन्‍तु जो कोई पवित्रात्‍मा के विरूद्ध निन्‍दा करे, वह कभी भी क्षमा न किया जाएगा: वरन् वह अनन्‍त पाप का अपराधी ठहरता है।” क्‍योंकि वे यह कहते थे, कि उसमें अशुद्ध आत्‍मा है। और उसकी माता और उसके भाई आए, और बाहर खड़े होकर उसे बुलवा भेजा। और भीड़ उसके आसपास बैठी थी, और उन्‍होंने उससे कहा, “देख, तेरी माता और तेरे भाई बाहर तुझे ढूंढते हैं।” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मेरी माता और मेरे भाई कौन हैं?” और उन पर जो उसके आस पास बैठे थे, दृष्‍टि करके कहा, “देखो, मेरी माता और मेरे भाई यह हैं। क्‍योंकि जो कोई परमेश्‍वर की इच्‍छा पर चले, वही मेरा भाई, और बहिन और माता है।” यीशु फिर झील के किनारे उपदेश देने लगा: और ऐसी बड़ी भीड़ उसके पास इकट्ठी हो गई, कि वह झील में एक नाव पर चढ़कर बैठ गया, और सारी भीड़ भूमि पर झील के किनारे खड़ी रही। और वह उन्‍हें दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें सिखाने लगा, और अपने उपदेश में उनसे कहा, “सुनो! देखो, एक बोनेवाला, बीज बोने के लिये निकला। और बोते समय कुछ तो मार्ग के किनारे गिरा और पक्षियों ने आकर उसे चुग लिया। और कुछ पत्‍थरीली भूमि पर गिरा जहाँ उसको बहुत मिट्टी न मिली, और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण जल्‍द उग आया। और जब सूर्य निकला, तो जल गया, और जड़ न पकड़ने के कारण सूख गया। और कुछ तो झाडि़यों में गिरा, और झाडि़यों ने बढ़कर उसे दबा दिया, और वह फल न लाया। परन्‍तु कुछ अच्‍छी भूमि पर गिरा; और वह उगा, और बढ़कर फलवन्‍त हुआ; और कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा फल लाया।” और उसने कहा, “जिसके पास सुनने के लिये कान हों वह सुन ले।” जब वह अकेला रह गया, तो उसके साथियों ने उन बारह समेत उससे इन दृष्‍टान्‍तों के विषय में पूछा। उसने उनसे कहा, “तुम को तो परमेश्‍वर के राज्‍य के भेद की समझ दी गई है, परन्‍तु बाहरवालों के लिये सब बातें दृष्‍टान्‍तों में होती हैं। इसलिये कि “वे देखते हुए देखें और उन्‍हें सुझाई न पड़े और सुनते हुए सुनें भी और न समझें; ऐसा न हो कि वे फिरें, और क्षमा किए जाएँ।” फिर उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम यह दृष्‍टान्‍त नहीं समझते? तो फिर और सब दृष्‍टान्‍तों को क्‍योंकर समझोगे? बोनेवाला वचन बोता है। जो मार्ग के किनारे के हैं जहाँ वचन बोया जाता है, ये वे हैं, कि जब उन्‍होंने सुना, तो शैतान तुरन्‍त आकर वचन को जो उनमें बोया गया था, उठा ले जाता है। और वैसे ही जो पत्‍थरीली भूमि पर बोए जाते हैं, ये वे हैं, कि जो वचन को सुनकर तुरन्‍त आनन्‍द से ग्रहण कर लेते हैं। परन्‍तु अपने भीतर जड़ न रखने के कारण वे थोड़े ही दिनों के लिये रहते हैं; इस के बाद जब वचन के कारण उन पर क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो वे तुरन्‍त ठोकर खाते हैं। और जो झाडियों में बोए गए ये वे हैं जिन्‍होंने वचन सुना, और संसार की चिन्‍ता, और धन का धोखा, और वस्‍तुओं का लोभ उनमें समाकर वचन को दबा देता है और वह निष्‍फल रह जाता है। और जो अच्‍छी भूमि में बोए गए, ये वे हैं, जो वचन सुनकर ग्रहण करते और फल लाते हैं, कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा, और कोई सौ गुणा।” और उसने उनसे कहा, “क्‍या दिये को इसलिये लाते हैं कि पैमाने या खाट के नीचे रखा जाए? क्‍या इसलिये नहीं, कि दीवट पर रखा जाए? क्‍योंकि कोई वस्‍तु छिपी नहीं, परन्‍तु इसलिये कि प्रगट हो जाए; और न कुछ गुप्‍त है पर इसलिये कि प्रगट हो जाए। यदि किसी के सुनने के कान हों, तो सुन ले।” फिर उसने उनसे कहा, “चौकस रहो, कि क्‍या सुनते हो? जिस नाप से तुम नापते हो उसी से तुम्‍हारे लिये भी नापा जाएगा, और तुम को अधिक दिया जाएगा। क्‍योंकि जिसके पास है, उस को दिया जाएगा; परन्‍तु जिसके पास नहीं है उससे वह भी जो उसके पास है; ले लिया जाएगा।” फिर उसने कहा, “परमेश्‍वर का राज्‍य ऐसा है, जैसे कोई मनुष्‍य भूमि पर बीज छींटे, और रात को सोए, और दिन को जागे और वह बीज ऐसे उगे और बढ़े कि वह न जाने। पृथ्‍वी आप से आप फल लाती है पहले अंकुर, तब बाल, और तब बालों में तैयार दाना। परन्‍तु जब दाना पक जाता है, तब वह तुरन्‍त हँसिया लगाता है, क्‍योंकि कटनी आ पहुँची है।” फिर उसने कहा, “हम परमेश्‍वर के राज्‍य की उपमा किससे दें, और किस दृष्‍टान्‍त से उसका वर्णन करें? वह राई के दाने के समान हैं; कि जब भूमि में बोया जाता है तो भूमि के सब बीजों से छोटा होता है। परन्‍तु जब बोया गया, तो उगकर सब साग पात से बड़ा हो जाता है, और उसकी ऐसी बड़ी डालियाँ निकलती हैं, कि आकाश के पक्षी उसकी छाया में बसेरा कर सकते हैं।” और वह उन्‍हें इस प्रकार के बहुत से दृष्‍टान्‍त दे देकर उनकी समझ के अनुसार वचन सुनाता था। और बिना दृष्‍टान्‍त कहे उनसे कुछ भी नहीं कहता था; परन्‍तु एकान्‍त में वह अपने निज चेलों को सब बातों का अर्थ बताता था। उसी दिन जब साँझ हुई, तो उसने चेलों से कहा, “आओ, हम पार चलें।” और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। तब बड़ी आँधी आई, और लहरें नाव पर यहाँ तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्‍होंने उसे जगाकर उससे कहा, “हे गुरू, क्‍या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?” तब उसने उठकर आँधी को डाँटा, और पानी से कहा, “शान्‍त रह, थम जा!” और आँधी थम गई और बड़ा चैन हो गया। और उनसे कहा, “तुम क्‍यों डरते हो? क्‍या तुम्‍हें अब तक विश्‍वास नहीं?” और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले, “यह कौन है, कि आँधी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते हैं?” वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुँचे, और जब वह नाव पर से उतरा तो तुरन्‍त एक मनुष्‍य जिसमें अशुद्ध आत्‍मा थी कब्रों से निकलकर उसे मिला। वह कब्रों में रहा करता था और कोई उसे साँकलों से भी न बाँध सकता था, क्‍योंकि वह बार बार बेडि़यों और साँकलों से बाँधा गया था, पर उसने साँकलों को तोड़ दिया, और बेडि़यों के टुकड़े टुकड़े कर दिए थे, और कोई उसे वश में नहीं कर सकता था। वह लगातार रात-दिन कब्रों और पहाड़ो में चिल्‍लाता, और अपने को पत्‍थरों से घायल करता था। वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा, और उसे प्रणाम किया। और ऊँचे शब्‍द से चिल्‍लाकर कहा, “हे यीशु, परमप्रधान परमेश्‍वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्‍या काम? मैं तुझे परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ, कि मुझे पीड़ा न दे।” क्‍योंकि उसने उससे कहा था, “हे अशुद्ध आत्‍मा, इस मनुष्‍य में से निकल आ।” यीशु ने उससे पूछा, “तेरा क्‍या नाम है?” उसने उससे कहा, “मेरा नाम सेना है; क्‍योंकि हम बहुत हैं।” और उसने उससे बहुत विनती की, “हमें इस देश से बाहर न भेज।” वहाँ पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्‍ड चर रहा था। और उन्‍होंने उससे विनती करके कहा, कि हमें उन सूअरों में भेज दे, कि हम उनके भीतर जाएँ। अतः उसने उन्‍हें आज्ञा दी और अशुद्ध आत्‍मा निकलकर सूअरों के भीतर पैठ गई और झुण्‍ड, जो कोई दो हजार का था, कड़ाडे पर से झपटकर झील में जा पड़ा, और डूब मरा। और उनके चरवाहों ने भागकर नगर और गाँवों में समाचार सुनाया, और जो हुआ था, लोग उसे देखने आए। यीशु के पास आकर, वे उसको जिसमें दुष्टात्माएँ समाई थी, कपड़े पहिने और सचेत बैठे देखकर, डर गए। और देखनेवालों ने उसका जिसमें दुष्टात्माएँ थीं, और सूअरों का पूरा हाल, उनको कह सुनाया। और वे उससे विनती कर के कहने लगे, कि हमारे सीमा से चला जा। और जब वह नाव पर चढ़ने लगा, तो वह जिसमें पहले दुष्‍टात्‍माएँ थीं, उससे विनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे। परन्‍तु उसने उसे आज्ञा न दी, और उससे कहा, “अपने घर जाकर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया करके प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं।” वह जाकर दिकापुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए; और सब अचम्‍भा करते थे। जब यीशु फिर नाव से पार गया, तो एक बड़ी भीड़ उसके पास इकट्ठी हो गई; और वह झील के किनारे था। और याईर नामक आराधनालय के सरदारों में से एक आया, और उसे देखकर, उसके पाँवों पर गिरा। और उसने यह कहकर बहुत विनती की, कि मेरी छोटी बेटी मरने पर है: तू आकर उस पर हाथ रख, कि वह चंगी होकर जीवित रहे। तब वह उसके साथ चला; और बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली, यहाँ तक कि लोग उस पर गिरे पड़ते थे। और एक स्‍त्री, जिस को बारह वर्ष से लहू बहने का रोग था। और जिस ने बहुत वैद्यों से बड़ा दुख उठाया और अपना सब माल व्‍यय करने पर भी कुछ लाभ न उठाया था, परन्‍तु और भी रोगी हो गई थी। यीशु की चर्चा सुनकर, भीड़ में उसके पीछे से आई, और उसके वस्‍त्र को छू लिया, क्‍योंकि वह कहती थी, “यदि मैं उसके वस्‍त्र ही को छू लूँगी, तो चंगी हो जाऊँगी।” और तुरन्‍त उसका लहू बहना बन्‍द हो गया; और उसने अपनी देह में जान लिया, कि मैं उस बीमारी से अच्‍छी हो गई हूँ। यीशु ने तुरन्‍त अपने में जान लिया, कि मुझ से सामर्थ्य निकली है, और भीड़ में पीछे फिरकर पूछा, “मेरा वस्‍त्र किसने छूआ?” उसके चेलों ने उससे कहा, “तू देखता है, कि भीड़ तुझ पर गिरी पड़ती है, और तू कहता है; कि किसने मुझे छुआ?” तब उसने उसे देखने के लिये जिस ने यह काम किया था, चारों ओर दृष्‍टि की। तब वह स्‍त्री यह जानकर, कि मेरी कैसी भलाई हुई है, डरती और काँपती हुई आई, और उसके पाँवों पर गिरकर, उससे सब हाल सच सच कह दिया। उसने उससे कहा, “पुत्री, तेरे विश्‍वास ने तुझे चंगा किया है: कुशल से जा, और अपनी इस बीमारी से बची रह।” वह यह कह ही रहा था, कि आराधनालय के सरदार के घर से लोगों ने आकर कहा, कि तेरी बेटी तो मर गई; अब गुरू को क्‍यों दुख देता है? जो बात वे कह रहे थे, उस को यीशु ने अनसुनी करके, आराधनालय के सरदार से कहा, “मत डर; केवल विश्‍वास रख।” और उसने पतरस और याकूब और याकूब के भाई यूहन्ना को छोड़, और किसी को अपने साथ आने न दिया। और अराधनालय के सरदार के घर में पहुँचकर, उसने लोगों को बहुत रोते और चिल्‍लाते देखा। तब उसने भीतर जाकर उनसे कहा, “तुम क्‍यों हल्‍ला मचाते और रोते हो? लड़की मरी नहीं, परन्‍तु सो रही है।” वे उसकी हँसी करने लगे, परन्‍तु उसने सब को निकालकर लड़की के माता-पिता और अपने साथियों को लेकर, भीतर जहाँ लड़की पड़ी थी, गया। और लड़की का हाथ पकड़कर उससे कहा, ‘तलीता कूमी’; जिस का अर्थ यह है कि ‘हे लड़की, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ’। और लड़की तुरन्‍त उठकर चलने फिरने लगी; क्‍योंकि वह बारह वर्ष की थी। और इस पर लोग बहुत चकित हो गए। फिर उसने उन्‍हें चिताकर आज्ञा दी कि यह बात कोई जानने न पाए और कहा; कि उसे कुछ खाने को दिया जाए। वहाँ से निकलकर वह अपने देश में आया, और उसके चेले उसके पीछे हो लिए। सब्‍त के दिन वह आराधनालय में उपदेश करने लगा; और बहुत लोग सुनकर चकित हुए और कहने लगे, “इस को ये बातें कहाँ से आ गई? और यह कौन सा ज्ञान है जो उस को दिया गया है? और कैसे सामर्थ्य के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैं? क्‍या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्र, और याकूब और योसेस और यहूदा और शमौन का भाई है? और क्‍या उसकी बहिनें यहाँ हमारे बीच में नहीं रहतीं?” इसलिये उन्‍होंने उसके विषय में ठोकर खाई। यीशु ने उनसे कहा, कि भविष्‍यद्वक्‍ता का अपने देश और अपने कुटुम्‍ब और अपने घर को छोड़ और कहीं भी निरादर नहीं होता। और वह वहाँ कोई सामर्थ्य का काम न कर सका, केवल थोड़े बीमारों पर हाथ रखकर उन्‍हें चंगा किया। और उसने उनके अविश्‍वास पर आश्‍चर्य किया और चारों ओर से गाँवों में उपदेश करता फिरा। और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्‍हें दो दो करके भेजने लगा; और उन्‍हें अशुद्ध आत्‍माओं पर अधिकार दिया। और उसने उन्‍हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे। परन्‍तु जूतियाँ पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो। और उसने उनसे कहा, “जहाँ कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहाँ से विदा न हो, तब तक उसी घर में ठहरे रहो। जिस स्‍थान के लोग तुम्‍हें ग्रहण न करें, और तुम्‍हारी न सुनें, वहाँ से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो। और उन्‍होंने जाकर प्रचार किया, कि मन फिराओ, और बहुतेरे दुष्‍टात्‍माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्‍हें चंगा किया। और हेरोदेस राजा ने उसकी चर्चा सुनी, क्‍योंकि उसका नाम फैल गया था, और उसने कहा, कि यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाला मरे हुओं में से जी उठा है, इसी लिये उससे ये सामर्थ्य के काम प्रगट होते हैं। और औरों ने कहा, यह एलिय्‍याह है, परन्‍तु औरों ने कहा, भविष्‍यद्वक्‍ता या भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से किसी एक के समान है। हेरोदेस ने यह सुन कर कहा, “जिस यूहन्ना का सिर मैं ने कटवाया था, वही जी उठा है।” क्‍योंकि हेरोदेस ने आप अपने भाई फिलिप्‍पुस की पत्‍नी हेरोदियास के कारण, जिस से उसने ब्‍याह किया था, लोगों को भेजकर यूहन्ना को पकड़वाकर बन्‍दीगृह में डाल दिया था। क्‍योंकि यूहन्ना ने हेरोदेस से कहा था, कि अपने भाई की पत्‍नी को रखना तुझे उचित नहीं। इसलिये हेरोदियास उससे बैर रखती थी और यह चाहती थी, कि उसे मरवा डाले, परन्‍तु ऐसा न हो सका, क्‍योंकि हेरोदेस यूहन्ना को धर्मी और पवित्र पुरूष जानकर उससे डरता था, और उसे बचाए रखता था, और उसकी सुनकर बहुत घबराता था, पर आनन्‍द से सुनता था। और ठीक अवसर पर जब हेरोदेस ने अपने जन्‍म दिन में अपने प्रधानों और सेनापतियों, और गलील के बड़े लोगों के लिये भोज किया। और उसी हेरोदियास की बेटी भीतर आई, और नाचकर हेरोदेस को और उसके साथ बैठनेवालों को प्रसन्न किया; तब राजा ने लड़की से कहा, “तू जो चाहे मुझ से माँग मैं तुझे दूँगा।” और उसने शपथ खाई, कि मैं अपने आधे राज्‍य तक जो कुछ तू मुझ से माँगेगी मैं तुझे दूँगा। उसने बाहर जाकर अपनी माता से पूछा, कि मैं क्‍या माँगूँ? वह बोली, “यूहन्‍ना बपतिस्‍मा देनेवाले का सिर।” वह तुरन्‍त राजा के पास भीतर आई, और उससे विनती की, “मैं चाहती हूँ, कि तू अभी यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाले का सिर एक थाल में मुझे मँगवा दे।” तब राजा बहुत उदास हुआ, परन्‍तु अपनी शपथ के कारण और साथ बैठनेवालों के कारण उसे टालना न चाहा। और राजा ने तुरन्‍त एक सिपाही को आज्ञा देकर भेजा, कि उसका सिर काट लाए। उसने जेलखाने में जाकर उसका सिर काटा, और एक थाल में रखकर लाया और लड़की को दिया, और लड़की ने अपनी माँ को दिया। यह सुनकर उसके चेले आए, और उसके शव को उठाकर कब्र में रखा। प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे होकर, जो कुछ उन्‍होंने किया, और सिखाया था, सब उस को बता दिया। उसने उनसे कहा, “तुम आप अलग किसी एकान्त स्‍थान में आकर थोड़ा विश्राम करो।” क्‍योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्‍हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए। और बहुतों ने उन्‍हें जाते देखकर पहिचान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे होकर वहाँ पैदल दौड़े और उनसे पहले जा पहुँचे। उसने उतर कर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिनका कोई रखवाला न हो; और वह उन्‍हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे, “यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है। उन्‍हें विदा कर, कि चारों ओर के गाँवों और बस्‍तियों में जाकर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।” उसने उन्‍हें उत्तर दिया, “तुम ही उन्‍हें खाने को दो।” उन्‍होंने उससे कहा, “क्‍या हम सौ दीनार की रोटियाँ मोल लें, और उन्‍हें खिलाएँ?” उसने उनसे कहा, “जाकर देखो तुम्‍हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्‍होंने मालूम करके कहा, “पाँच और दो मछली भी।” तब उसने उन्‍हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पाँति पाँति से बैठा दो। वे सौ सौ और पचास पचास करके पाँति पाँति बैठ गए। और उसने उन पाँच रोटियों को और दो मछलियों को लिया, और स्‍वर्ग की ओर देखकर धन्‍यवाद किया और रोटियाँ तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछलियाँ भी उन सब में बाँट दीं। और सब खाकर तृप्‍त हो गए, और उन्‍होंने टुकडों से बारह टोकरियाँ भर कर उठाई, और कुछ मछलियों से भी। जिन्‍होंने रोटियाँ खाई, वे पाँच हजार पुरूष थे। तब उसने तुरन्‍त अपने चेलों को विवश किया कि वे नाव पर चढ़कर उससे पहले उस पार बैतसैदा को चले जाएँ, जब तक कि वह लोगों को विदा करे। और उन्‍हें विदा करके पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया। और जब साँझ हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था। और जब उसने देखा, कि वे खेते खेते घबरा गए हैं, क्‍योंकि हवा उनके विरूद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उनके पास आया; और उनसे आगे निकल जाना चाहता था। परन्‍तु उन्‍होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्‍ला उठे, क्‍योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे। पर उसने तुरन्‍त उनसे बातें कीं और कहा, “ढाढ़स बाँधो: मैं हूँ; डरो मत।” तब वह उनके पास नाव पर आया, और हवा थम गई: वे बहुत ही आश्‍चर्य करने लगे। क्‍योंकि वे उन रोटियों के विषय में न समझे थे परन्‍तु उनके मन कठोर हो गए थे। और वे पार उतरकर गन्नेसरत में पहुँचे, और नाव घाट पर लगाई। और जब वे नाव पर से उतरे, तो लोग तुरन्‍त उस को पहचान कर, आसपास के सारे देश में दौड़े, और बीमारों को खाटों पर डालकर, जहाँ जहाँ समाचार पाया कि वह है, वहाँ वहाँ लिए फिरे। और जहाँ कहीं वह गाँवों, नगरों, या बस्‍तियों में जाता था, तो लोग बीमारों को बाजारों में रखकर उससे विनती करते थे, कि वह उन्‍हें अपने वस्‍त्र के आँचल ही को छू लेने दे: और जितने उसे छूते थे, सब चंगे हो जाते थे। तब फरीसी और कई एक शास्‍त्री जो यरूशलेम से आए थे, उसके पास इकट्ठे हुए, और उन्‍होंने उसके कई चेलों को अशुद्ध अर्थात् बिना हाथ धोए रोटी खाते देखा। क्‍योंकि फरीसी और सब यहूदी, पुरनियों की रीति पर चलते हैं और जब तक भली भाँति हाथ नहीं धो लेते तब तक नहीं खाते; और बाजार से आकर, जब तक स्‍नान नहीं कर लेते, तब तक नहीं खाते; और बहुत सी अन्य बातें हैं, जो उनके पास मानने के लिये पहुँचाई गई हैं, जैसे कटोरों, और लोटों, और ताँबे के बरतनों को धोना-माँजना। इसलिये उन फरीसियों और शास्‍त्रियों ने उससे पूछा, कि तेरे चेले क्‍यों पूर्वजों की परम्पराओं पर नहीं चलते, और बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं? उसने उनसे कहा, “यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्‍यद्ववाणी की; जैसा लिखा है: ‘ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्‍यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्‍यों की आज्ञाओं को धर्मोंपदेश करके सिखाते हैं।’ क्‍योंकि तुम परमेश्‍वर की आज्ञा को टालकर मनुष्‍यों की रीतियों को मानते हो।” और उसने उनसे कहा, “तुम अपनी रीतियों को मानने के लिये परमेश्‍वर आज्ञा कैसी अच्‍छी तरह टाल देते हो! क्‍योंकि मूसा ने कहा है, कि अपने पिता और अपनी माता का आदर कर; और जो कोई पिता वा माता को बुरा कहे, वह अवश्‍य मार डाला जाए। परन्‍तु तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता वा माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुँच सकता था, वह कुरबान अर्थात् संकल्‍प हो चुका। तो तुम उस को उसके पिता वा उसकी माता की कुछ सेवा करने नहीं देते। इस प्रकार तुम अपनी रीतियों से, जिन्‍हें तुम ने ठहराया है, परमेश्‍वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो।” और उसने लोगों को अपने पास बुलाकर उनसे कहा, “तुम सब मेरी सुनो, और समझो। ऐसी तो कोई वस्‍तु नहीं जो मनुष्‍य में बाहर से समाकर उसे अशुद्ध करे; परन्‍तु जो वस्तुएँ मनुष्‍य के भीतर से निकलती हैं, वे ही उसे अशुद्ध करती हैं। यदि किसी के सुनने के कान हों तो सुन ले।” जब वह भीड़ के पास से घर में गया, तो उसके चेलों ने इस दृष्‍टान्‍त के विषय में उससे पूछा। उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम भी ऐसे ना समझ हो? क्‍या तुम नहीं समझते, कि जो वस्‍तु बाहर से मनुष्‍य के भीतर जाती है, वह उसे अशुद्ध नहीं कर सकती? क्‍योंकि वह उसके मन में नहीं, परन्‍तु पेट में जाती है, और संडास में निकल जाती है?” यह कहकर उसने सब भोजन वस्‍तुओं को शुद्ध ठहराया। फिर उसने कहा, “जो मनुष्‍य में से निकलता है, वही मनुष्‍य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्‍य के मन से, बुरे बुरे विचार, व्‍यभिचार, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्‍दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्‍य को अशुद्ध करती हैं।” फिर वह वहाँ से उठकर सूर और सैदा के देशों में आया; और एक घर में गया, और चाहता था, कि कोई न जाने; परन्‍तु वह छिप न सका। और तुरन्‍त एक स्‍त्री जिस की छोटी बेटी में अशुद्ध आत्‍मा थी, उसकी चर्चा सुन कर आई, और उसके पाँवों पर गिरी। यह यूनानी और सूरूफिनीकी जाति की थी; और उसने उससे विनती की, कि मेरी बेटी में से दुष्‍टात्‍मा निकाल दे। उसने उससे कहा, “पहले लड़कों को तृप्‍त होने दे, क्‍योंकि लड़को की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना उचित नहीं है।” उसने उस को उत्तर दिया; कि सच है प्रभु; तौभी कुत्ते भी तो मेज के नीचे बालकों की रोटी के चूर चार खा लेते हैं। उसने उससे कहा, “इस बात के कारण चली जा; दुष्‍टात्‍मा तेरी बेटी में से निकल गई है।” और उसने अपने घर आकर देखा कि लड़की खाट पर पड़ी है, और दुष्‍टात्‍मा निकल गई है। फिर वह सूर और सैदा के देशों से निकलकर दिकापुलिस देश से होता हुआ गलील की झील पर पहुँचा। और लोगों ने एक बहिरे को जो हक्ला भी था, उसके पास लाकर उससे विनती की, कि अपना हाथ उस पर रख े। तब वह उस को भीड़ से अलग ले गया, और अपनी उंगलियाँ उसके कानों में डालीं, और थूक कर उसकी जीभ को छूआ। और स्‍वर्ग की ओर देखकर आह भरी, और उस से कहा, “इप्‍फत्तह!” अर्थात् “खुल जा”! और उसके कान खुल गए, और उसकी जीभ की गाँठ भी खुल गई, और वह साफ साफ बोलने लगा। तब उसने उन्‍हें चिताया कि किसी से न कहना; परन्‍तु जितना उसने उन्‍हें चिताया उतना ही वे और प्रचार करने लगे। और वे बहुत ही आश्‍चर्य में होकर कहने लगे, “उसने जो कुछ किया सब अच्‍छा किया है; वह बहिरों को सुनने की, और गूँगों को बोलने की शक्ति देता है।” उन दिनों में, जब फिर बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई, और उनके पास कुछ खाने को न था, तो उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उनसे कहा, “मुझे इस भीड़ पर तरस आता है, क्‍योंकि यह तीन दिन से बराबर मेरे साथ हैं, और उनके पास कुछ भी खाने को नहीं। यदि मैं उन्‍हें भूखा घर भेज दूँ, तो मार्ग में थक कर रह जाएँगे; क्‍योकि इन में से कोई कोई दूर से आए हैं |” उसके चेलों ने उस को उत्तर दिया, कि यहाँ जंगल में इतनी रोटी कोई कहाँ से लाए कि ये तृप्‍त हों? उसने उनसे पूछा, “तुम्‍हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्‍होंने कहा, “सात।” तब उसने लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी, और वे सात रोटियाँ लीं, और धन्‍यवाद करके तोड़ी, और अपने चेलों को देता गया कि उनके आगे रखें, और उन्‍होंने लोगों के आगे परोस दिया | उनके पास थोड़ी सी छोटी मछलियाँ भी थीं; और उसने धन्‍यवाद करके उन्‍हें भी लोगों के आगे रखने की आज्ञा दी। सो वे खाकर तृप्‍त हो गए और शेष टुकड़ो के सात टोकरे भरकर उठाए। और लोग चार हजार के लगभग थे, और उसने उनको विदा किया। और वह तुरन्‍त अपने चेलों के साथ नाव पर चढ़कर दलमनूता देश को चला गया। फिर फरीसी निकलकर उससे वाद-विवाद करने लगे, और उसे जांचने के लिये उससे कोई स्‍वर्गीय चिन्‍ह माँगा। उसने अपनी आत्‍मा में आह मार कर कहा, “इस समय के लोग क्‍यों चिन्‍ह ढूंढ़ते हैं? मैं तुम से सच कहता हूँ, कि इस समय के लोगों को कोई चिन्‍ह नहीं दिया जाएगा।” और वह उन्‍हें छोड़कर फिर नाव पर चढ़ गया, और पार चला गया। और वे रोटी लेना भूल गए थे, और नाव में उनके पास एक ही रोटी थी। और उसने उन्‍हें चिताया, कि देखो, फरीसियों के खमीर और हेरोदेस के खमीर से चौकस रहो। वे आपस में विचार करके कहने लगे, कि हमारे पास तो रोटी नहीं है। यह जानकर यीशु ने उनसे कहा, “तुम क्‍यों आपस में विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्‍या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते? क्‍या तुम्‍हारा मन कठोर हो गया है? क्‍या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्‍हें स्‍मरण नहीं? कि जब मैं ने पाँच हजार के लिये पाँच रोटी तोड़ी थीं तो तुम ने टुकड़ों की कितनी टोकरियाँ भरकर उठाईं?” उन्‍होंने उससे कहा, “बारह टोकरियाँ।” उसने उनसे कहा, सात टोकरे। उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम अब तक नहीं समझते?” और वे बैतसैदा में आए; और लोग एक अन्‍धे को उसके पास ले आए और उससे विनती की कि उस को छूए। वह उस अन्‍धे का हाथ पकड़कर उसे गांव के बाहर ले गया | और उसकी आंखों में थूककर उस पर हाथ रखे, और उससे पूछा, “क्‍या तू कुछ देखता है?” उसने आंख उठा कर कहा, “मैं मनुष्‍यों को देखता हूँ; क्‍योंकि वे मुझे चलते हुए दिखाई देते हैं, जैसे पेड़।” तब उसने फिर दोबारा उसकी आंखों पर हाथ रखे, और उसने ध्‍यान से देखा | और चंगा हो गया, और सब कुछ साफ साफ देखने लगा। और उसने उससे यह कहकर घर भेजा, कि इस गांव के भीतर पांव भी न रखना। यीशु और उसके चेले कैसरिया फिलिप्‍पी के गाँवों में चले गए; और मार्ग में उसने अपने चेलों से पूछा, कि लोग मुझे क्‍या कहते हैं? उन्‍होंने उत्तर दिया, कि यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाला; पर कोई कोई, एलिय्‍याह; और कोई कोई, भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से एक भी कहते हैं। उसने उनसे पूछा, “परन्‍तु तुम मुझे क्‍या कहते हो?” पतरस ने उस को उत्तर दिया, “तू मसीह है।” तब उसने उन्‍हें चिताकर कहा कि मेरे विषय में यह किसी से न कहना। और वह उन्‍हें सिखाने लगा, कि मनुष्‍य के पुत्र के लिये अवश्‍य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरनिए और महायाजक और शास्‍त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे। उसने यह बात उनसे साफ साफ कह दी। इस पर पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा। परन्‍तु उसने फिरकर, और अपने चेलों की ओर देखकर पतरस को झिड़कर कर कहा, “हे शैतान, मेरे सामने से दूर हो; क्‍योंकि तू परमेश्‍वर की बातों पर नहीं, परन्‍तु मनुष्‍य की बातों पर मन लगाता है।” उसने भीड़ को अपने चेलों समेत पास बुलाकर उनसे कहा, “जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपने आप से इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाकर, मेरे पीछे हो ले। क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे वह उसे खोएगा, पर जो कोई मेरे और सुसमाचार के लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे बचाएगा। यदि मनुष्‍य सारे जगत को प्राप्‍त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा? और मनुष्‍य अपने प्राण के बदले क्‍या देगा? जो कोई इस व्‍यभिचारी और पापी जाति के बीच मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा, मनुष्‍य का पुत्र भी जब वह पवित्र दूतों के साथ अपने पिता की महिमा सहित आएगा, तब उससे भी लजाएगा।” और उसने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो यहाँ खड़े हैं, उनमें से कोई ऐसे हैं, कि जब तक परमेश्‍वर के राज्‍य को सामर्थ्य सहित आता हुआ न देख लें, तब तक मृत्‍यु का स्‍वाद कदापि न चखेंगे।” छ: दिन के बाद यीशु ने पतरस और याकूब और यूहन्ना को साथ लिया, और एकान्‍त में किसी ऊँचे पहाड़ पर ले गया; और उनके सामने उसका रूप बदल गया। और उसका वस्‍त्र ऐसा चमकने लगा और यहाँ तक अति उज्‍जवल हुआ, कि पृथ्‍वी पर कोई धोबी भी वैसा उज्‍जवल नहीं कर सकता। और उन्‍हें मूसा के साथ एलिय्‍याह दिखाई दिया; और वे यीशु के साथ बातें करते थे। इस पर पतरस ने यीशु से कहा, “हे रब्‍बी, हमारा यहाँ रहना अच्‍छा है: इसलिये हम तीन मण्‍डप बनाएं; एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्‍याह के लिये।” क्‍योंकि वह न जानता था कि क्‍या उत्तर दे, इसलिये कि वे बहुत डर गए थे। तब एक बादल ने उन्‍हें छा लिया, और उस बादल में से यह शब्‍द निकला, “यह मेरा प्रिय पुत्र है; उसकी सुनो।” तब उन्‍होंने एकाएक चारों ओर दृष्‍टि की, और यीशु को छोड़ अपने साथ और किसी को न देखा। पहाड़ से उतरते हुए, उसने उन्‍हें आज्ञा दी, कि जब तक मनुष्‍य का पुत्र मरे हुओं में से जी न उठे, तब तक जो कुछ तुम ने देखा है वह किसी से न कहना। उन्‍होंने इस बात को स्‍मरण रखा; और आपस में वाद-विवाद करने लगे, कि मरे हुओं में से जी उठने का क्‍या अर्थ है? और उन्‍होंने उससे पूछा, “शास्‍त्री क्‍यों कहते हैं, कि एलिय्‍याह का पहले आना अवश्‍य है?” उसने उन्‍हें उत्तर दिया, “एलिय्‍याह सचमुच पहले आकर सब कुछ सुधारेगा, परन्‍तु मनुष्‍य के पुत्र के विषय में यह क्‍यों लिखा है, कि वह बहुत दुख उठाएगा, और तुच्‍छ गिना जाएगा? परन्‍तु मैं तुम से कहता हूँ, कि एलिय्‍याह तो आ चुका, और जैसा उसके विषय में लिखा है, उन्‍होंने जो कुछ चाहा उसके साथ किया।” और जब वह चेलों के पास आया, तो देखा कि उनके चारों ओर बड़ी भीड़ लगी है और शास्‍त्री उनके साथ विवाद कर रहें हैं। और उसे देखते ही सब बहुत ही आश्‍चर्य करने लगे, और उसकी ओर दौड़कर उसे नमस्‍कार किया। उसने उनसे पूछा, “तुम इन से क्‍या विवाद कर रहे हो?” भीड़ में से एक ने उसे उत्तर दिया, “हे गुरू, मैं अपने पुत्र को, जिसमें गूंगी आत्‍मा समाई है, तेरे पास लाया था। जहाँ कहीं वह उसे पकड़ती है, वहीं पटक देती है; और वह मुंह में फेन भर लाता, और दांत पीसता, और सूखता जाता है। और मैं ने तेरे चेलों से कहा था, कि वे उसे निकाल दें, परन्‍तु वह निकाल न सके।” यह सुनकर उसने उनसे उत्तर देके कहा, “हे अविश्‍वासी लोगों, मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा? और कब तक तुम्‍हारी सहूँगा? उसे मेरे पास लाओ।” तब वे उसे उसके पास ले आए। और जब उसने उसे देखा, तो उस आत्‍मा ने तुरन्‍त उसे मरोड़ा, और वह भूमि पर गिरा, और मुंह से फेन बहाते हुए लोटने लगा। उसने उसके पिता से पूछा, “इस की यह दशा कब से है?” और उसने कहा, “बचपन से। उसने इसे नाश करने के लिये कभी आग और कभी पानी में गिराया; परन्‍तु यदि तू कुछ कर सके, तो हम पर तरस खाकर हमारा उपकार कर।” यीशु ने उससे कहा, “यदि तू कर सकता है! यह क्‍या बात है? विश्‍वास करनेवाले के लिये सब कुछ हो सकता है।” बालक के पिता ने तुरन्‍त गिड़गिड़ाकर कहा, “हे प्रभु, मैं विश्‍वास करता हूँ; मेरे अविश्‍वास का उपाय कर।” जब यीशु ने देखा, कि लोग दौड़कर भीड़ लगा रहे हैं, तो उसने अशु़द्ध आत्‍मा को यह कहकर डाँटा, कि “हे गूंगी और बहिरी आत्‍मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूँ, उसमें से निकल आ, और उसमें फिर कभी प्रवेश न कर।” तब वह चिल्‍लाकर, और उसे बहुत मरोड़ कर, निकल आई; और बालक मरा हुआ सा हो गया, यहाँ तक कि बहुत लोग कहने लगे, कि वह मर गया। परन्‍तु यीशु ने उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया, और वह खड़ा हो गया। जब वह घर में आया, तो उसके चेलों ने एकान्‍त में उससे पूछा, “हम उसे क्‍यों न निकाल सके?” उसने उनसे कहा, “यह जाति बिना प्रार्थना किसी और उपाय से निकल नहीं सकती।” फिर वे वहाँ से चले, और गलील में होकर जा रहे थे, और वह अपने चेलों को उपदेश देता और उनसे कहता था, “मनुष्‍य का पुत्र, मनुष्‍यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा, और वे उसे मार डालेंगे; और वह मरने के तीन दिन बाद जी उठेगा।” पर यह बात उनकी समझ में नहीं आई, और वे उससे पूछने से डरते थे। फिर वे कफरनहूम में आए; और घर में आकर उसने उनसे पूछा, कि रास्‍ते में तुम किस बात पर विवाद करते थे? वे चुप रहे, क्‍योंकि मार्ग में उन्‍होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है? वे चुप रहे, क्‍योंकि मार्ग में उन्‍होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है? तब उसने बैठकर बारहों को बुलाया, और उनसे कहा, “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने।” और उसने एक बालक को लेकर उनके बीच में खड़ा किया, और उसको गोद में लेकर उनसे कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता, वह मुझे नहीं, वरन मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।” तब यूहन्ना ने उससे कहा, “हे गुरु, हम ने एक मनुष्‍य को तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को निकालते देखा और हम उसे मना करने लगे, क्‍योंकि वह हमारे पीछे नहीं हो लेता था।” यीशु ने कहा, “उस को मना मत करो; क्‍योंकि ऐसा कोई नहीं जो मेरे नाम से सामर्थ्य का काम करे, और जल्‍दी से मुझे बुरा कह सके, क्‍योंकि जो हमारे विरोध में नहीं, वह हमारी ओर है।” जो कोई एक कटोरा पानी तुम्‍हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा। पर “जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्‍वास करते हैं, किसी को ठोकर खिलाए तो उसके लिये भला यह है कि एक बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाए और वह समुद्र में डाल दिया जाए। यदि तेरा हाथ तुझे ठोकर खिलाए तो उसे काट डाल टुण्‍डा होकर जीवन में प्रवेश करना, तेरे लिये इस से भला है कि दो हाथ रहते हुए नरक के बीच उस आग में डाला जाए जो कभी बुझने का नहीं। जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती। और यदि तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए तो उसे काट डाल। लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो पांव रहते हुए नरक में डाला जाए। और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए तो उसे निकाल डाल, काना होकर परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आंख रहते हुए तू नरक में डाला जाए। जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती। क्‍योंकि हर एक जन आग से नमकीन किया जाएगा। नमक अच्‍छा है, पर यदि नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किससे स्‍वादित करोगे? अपने में नमक रखो, और आपस में मेल मिलाप से रहो।” फिर वह वहाँ से उठकर यहूदिया के सिवानों में और यरदन के पार आया, और भीड़ उसके पास फिर इकट्ठी हो गई, और वह अपनी रीति के अनुसार उन्‍हें फिर उपदेश देने लगा। तब फरीसियों ने उसके पास आकर उसकी परीक्षा करने को उससे पूछा, क्‍या यह उचित है, कि पुरूष अपनी पत्‍नी को त्‍यागे? उसने उनको उत्तर दिया, “मूसा ने तुम्‍हें क्‍या आज्ञा दी है?” उन्‍होंने कहा, “मूसा ने त्‍याग पत्र लिखने और त्‍यागने की आज्ञा दी है।” यीशु ने उनसे कहा, कि तुम्‍हारे मन की कठोरता के कारण उसने तुम्‍हारे लिये यह आज्ञा लिखी। “पर सृष्‍टि के आरम्‍भ से, परमेश्‍वर ने ‘नर और नारी करके उनको बनाया है।’ ‘इस कारण मनुष्‍य अपने माता-पिता से अलग होकर अपनी पत्‍नी के साथ रहेगा, ‘और वे दोनों एक तन होंगे’; इसलिये वे अब दो नहीं, पर एक तन हैं। “इसलिये जिसे परमेश्‍वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्‍य अलग न करे।” और घर में चेलों ने इस के विषय में उससे फिर पूछा। उसने उनसे कहा, “जो कोई अपनी पत्‍नी को त्‍यागकर दूसरी से ब्‍याह करे तो वह उस पहिली के विरोध में व्‍यभिचार करता है। “और यदि पत्‍नी अपने पति को छोड़कर दूसरे से ब्‍याह करे, तो वह व्‍यभिचार करती है।” फिर लोग बालकों को उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे; पर चेलों ने उनको डाँटा। यीशु ने यह देख क्रुद्ध होकर उनसे कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्‍हें मना न करो, क्‍योंकि परमेश्‍वर का राज्‍य ऐसों ही का है। “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो कोई परमेश्‍वर के राज्‍य को बालक की नाई ग्रहण न करे, वह उसमें कभी प्रवेश करने न पाएगा।” और उसने उन्‍हें गोद में लिया, और उन पर हाथ रखकर उन्‍हें आशीष दी। और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्‍य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उससे पूछा, “हे उत्तम गुरू, अनन्‍त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्‍यां करूं?” यीशु ने उससे कहा, “तू मुझे उत्तम क्‍यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात् परमेश्‍वर। “तू आज्ञाओं को तो जानता है: हत्‍या न करना, व्‍यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।” उसने उससे कहा, “हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूँ।” यीशु ने उस पर दृष्‍टि करके उससे प्रेम किया, और उससे कहा, “तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्‍वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।” इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्‍योंकि वह बहुत धनी था। यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, “धनवानों को परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!” उसकी बातों से अचम्भित हुए। इस पर यीशु ने फिर उनसे कहा, “हे बालको, जो धन पर भरोसा रखता हैं, उनके लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! परमेश्‍वर के राज्‍य में धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! वे बहुत ही चकित होकर आपस में कहने लगे, “तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?” यीशु ने उनकी ओर देखकर कहा, “मनुष्‍यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्‍तु परमेश्‍वर से हो सकता है; क्‍योंकि परमेश्‍वर से सब कुछ हो सकता है।” पतरस उससे कहने लगा, कि देख, हम तो सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं। यीशु ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि ऐसा कोई नहीं, जिस ने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या बाल-बच्चों या खेतों को छोड़ दिया हो, और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और बाल-बच्चों और खेतों को, पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्‍त जीवन। पर बहुतेरे जो पहले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, वे पहले होंगे।” और वे यरूशलेम को जाते हुए मार्ग में थे, और यीशु उनके आगे आगे जा रहा था: और चेले अचम्‍भा करने लगे और जो उसके पीछे पीछे चलते थे डरने लगे, तब वह फिर उन बारहों को लेकर उनसे वे बातें कहने लगा, जो उस पर आनेवाली थीं। “देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्‍य का पुत्र महायाजकों और शास्‍त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा, और वे उस को घात के योग्‍य ठहराएँगे, और अन्‍य जातियों के हाथ में सौंपेंगे। और वे उस को ठट्ठों में उड़ाएँगे, और उस पर थूकेंगे, और उसे कोड़े मारेंगे, और उसे घात करेंगे, और तीन दिन के बाद वह जी उठेगा।” तब जब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, “हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से माँगे, वही तू हमारे लिये करे।” उसने उनसे कहा, “तुम क्‍या चाहते हो कि मैं तुम्‍हारे लिये करूं?” उन्‍होंने उससे कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दहिने और दूसरा तेरे बाएँ बैठे। यीशु ने उनसे कहा, “तुम नहीं जानते, कि क्‍या माँगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूँ, क्‍या तुम पी सकते हो? और जो बपतिस्‍मा मैं लेने पर हूँ, क्‍या तुम ले सकते हो?” उन्‍होंने उससे कहा, “हम से हो सकता है।” यीशु ने उनसे कहा, “जो कटोरा मैं पीने पर हूँ, तुम पीओंगे; और जो बपतिस्‍मा मैं लेने पर हूँ, उसे लोगे। पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्‍हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएँ बैठाना मेरा काम नहीं।” यह सुनकर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसियाने लगे। तो यीशु ने उनको पास बुला कर उनसे कहा, “तुम जानते हो, कि जो अन्‍यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उनमें जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्‍हारा सेवक बने; और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। क्‍योंकि मनुष्‍य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।” वे यरीहो में आए, और जब वह और उसके चेले, और एक बड़ी भीड़ यरीहो से निकलती थी, तो तिमाई का पुत्र बरतिमाई एक अन्‍धा भिखारी, सड़क के किनारे बैठा था। वह यह सुनकर कि यीशु नासरी है, पुकार पुकार कर कहने लगा; कि हे दाऊद की सन्‍तान, यीशु मुझ पर दया कर। बहुतों ने उसे डाँटा कि चुप रहे, पर वह और भी पुकारने लगा, कि हे दाऊद की सन्‍तान, मुझ पर दया कर। तब यीशु ने ठहरकर कहा, “उसे बुलाओ।” और लोगों ने उस अन्‍धे को बुलाकर उससे कहा, “ढाढ़स बाँध, उठ, वह तुझे बुलाता है।” वह अपना कपड़ा फेंककर शीघ्र उठा, और यीशु के पास आया। इस पर यीशु ने उससे कहा, “तू क्‍या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूं?” अन्‍धे ने उससे कहा, “हे रब्‍बी, यह कि मैं देखने लगूँ।” यीशु ने उससे कहा, “चला जा, तेरे विश्‍वास ने तुझे चंगा कर दिया है।” और वह तुरन्‍त देखने लगा, और मार्ग में उसके पीछे हो लिया। जब वे यरूशलेम के निकट, जैतून पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्‍याह के पास आए, तो उसने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा, “सामने के गाँव में जाओ, और उसमें पहुँचते ही एक गदही का बच्‍चा, जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बंधा हुआ तुम्‍हें मिलेगा, उसे खोल लाओ। यदि तुम से कोई पूछे, ‘यह क्‍यों करते हो?’ तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है, और वह शीघ्र उसे यहाँ भेज देगा।” उन्‍होंने जाकर उस बच्‍चे को बाहर द्वार के पास चौक में बंधा हुआ पाया, और खोलने लगे। और उनमें से जो वहाँ खड़े थे, कोई कोई कहने लगे कि यह क्‍या करते हो, गदही के बच्‍चे को क्‍यों खोलते हो? चेलों ने जैसा यीशु ने कहा था, वैसा ही उनसे कह दिया; तब उन्‍होंने उन्‍हें जाने दिया। और उन्‍होंने बच्‍चे को यीशु के पास लाकर उस पर अपने कपड़े डाले और वह उस पर बैठ गया। और बहुतों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए और औरों ने खेतों में से डालियाँ काट काट कर फैला दीं। और जो उसके आगे आगे जाते और पीछे पीछे चले आते थे, पुकार पुकार कर कहते जाते थे, कि होशाना; धन्‍य है वह जो प्रभु के नाम से आता है। हमारे पिता दाऊद का राज्‍य जो आ रहा है; धन्‍य है: आकाश में होशाना। और वह यरूशलेम पहुँचकर मन्‍दिर में आया, और चारों ओर सब वस्‍तुओं को देखकर बारहों के साथ बैतनिय्‍याह गया, क्‍योंकि साँझ हो गई थी। दूसरे दिन जब वे बैतनिय्‍याह से निकले तो उसको भूख लगी। और वह दूर से अंजीर का एक हरा पेड़ देखकर निकट गया, कि क्या जानेउसमें कुछ पाए: पर पत्तों को छोड़ कुछ न पाया; क्‍योंकि फल का समय न था। इस पर उसने उससे कहा, “अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।” और उसके चेले सुन रहे थे। फिर वे यरूशलेम में आए, और वह मन्‍दिर में गया; और वहाँ जो लेन-देन कर रहे थे उन्‍हें बाहर निकालने लगा, और सर्राफों के पीढ़े और कबूतर के बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं। और मन्‍दिर में से होकर किसी को बरतन लेकर आने जाने न दिया। और उपदेश करके उनसे कहा, “क्‍या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है।” यह सुनकर महायाजक और शास्‍त्री उसके नाश करने का अवसर ढूंढ़ने लगे; क्‍योंकि उससे डरते थे, इसलिये कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे। और साँझ होते ही वह नगर से बाहर चले गए । फिर भोर को जब वे उधर से जाते थे तो उन्‍होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ तक सूखा हुआ देखा। पतरस को वह बात स्‍मरण आई, और उसने उससे कहा, “हे रब्‍बी, देख! यह अंजीर का पेड़ जिसे तू ने स्राप दिया था सूख गया है।” यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि परमेश्‍वर पर विश्‍वास रखो। मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, ‘तू उखड़ जा, और समुद्र में जा पड़,’ और अपने मन में सन्‍देह न करे, वरन् प्रतीति करे, कि जो कहता हूँ वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही होगा। इसलिये मैं तुम से कहता हूँ, कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके माँगों तो प्रतीति कर लो कि तुम्‍हें मिल गया, और तुम्‍हारे लिये हो जाएगा। और जब कभी तुम खड़े हुए प्रार्थना करते हो, तो यदि तुम्‍हारे मन में किसी की ओर से कुछ विरोध हो, तो क्षमा करो: इसलिये कि तुम्‍हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्‍हारे अपराध क्षमा करे। “परन्तु यदि तुम क्षमा न करो तो तुम्‍हारा पिता भी जो स्‍वर्ग में है, तुम्‍हारा अपराध क्षमा न करेगा।” वे फिर यरूशलेम में आए, और जब वह मन्‍दिर में टहल रहा था तो महायाजक और शास्‍त्री और पुरनिए उसके पास आकर पूछने लगे। कि तू ये काम किस अधिकार से करता है? और यह अधिकार तुझे किसने दिया है कि तू ये काम करे? यीशु ने उससे कहा, “मैं भी तुम से एक बात पूछता हूँ; मुझे उत्तर दो, तो मैं तुम्‍हें बताऊँगा कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ। यूहन्ना का बपतिस्‍मा क्‍या स्‍वर्ग की ओर से था या मनुष्‍यों की ओर से था? मुझे उत्तर दो।” तब वे आपस में विवाद करने लगे कि यदि हम कहें ‘स्‍वर्ग की ओर से,’ तो वह कहेगा, ‘फिर तुम ने उसकी प्रतीति क्‍यों नहीं की?’ और यदि हम कहें, ‘मनुष्‍यों की ओर से,’ तो लोगों का डर है, क्‍योंकि सब जानते हैं कि यूहन्ना सचमुच भविष्‍यद्वक्‍ता था। सो उन्‍होंने यीशु को उत्तर दिया, कि हम नहीं जानते। यीशु ने उनसे कहा, “मैं भी तुम को नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूँ।” फिर वह दृष्‍टान्‍तों में उनसे बातें करने लगा: “किसी मनुष्‍य ने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बाँधा, और रस का कुंड खोदा, और गुम्‍मट बनाया; और किसानों को उसका ठेका देकर परदेश चला गया। फिर फल के मौसम में उसने किसानों के पास एक दास को भेजा कि किसानों से दाख की बारी के फलों का भाग ले। पर उन्‍होंने उसे पकड़कर पीटा और खाली हाथ लौटा दिया। फिर उसने एक और दास को उनके पास भेजा और उन्‍होंने उसका सिर फोड़ डाला और उसका अपमान किया। फिर उसने एक और को भेजा, और उन्‍होंने उसे मार डाला; तब उसने और बहुतों को भेजा, उनमें से उन्‍होंने कितनो को पीटा, और कितनों को मार डाला। अब एक ही रह गया था, जो उसका प्रिय पुत्र था; अन्‍त में उसने उसे भी उनके पास यह सोचकर भेजा कि वे मेरे पुत्र का आदर करेंगे। पर उन किसानों ने आपस में कहा; यही तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, तब मीरास हमारी हो जाएगी। और उन्‍होंने उसे पकड़कर मार डाला, और दाख की बारी के बाहर फेंक दिया। इसलिये दाख की बारी का स्‍वामी क्‍या करेगा? वह आकर उन किसानों क नाश करेगा, और दाख की बारी औरों को दे देगा। क्‍या तुम ने पवित्र शास्‍त्र में यह वचन नहीं पढ़ा: ‘जिस पत्‍थर को राजमिस्‍त्रियों ने निकम्‍मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया; यह प्रभु की ओर से हुआ, और हमारी दृष्टि में अद्भुत है’?” तब उन्‍होंने उसे पकड़ना चाहा; क्‍योंकि समझ गए थे, कि उसने हमारे विरोध में यह दृष्‍टान्‍त कहा है: पर वे लोगों से डरे; और उसे छोड़ कर चले गए। तब उन्‍होंने उसे बातों में फँसाने के लिये कई एक फरीसियों और हेरोदियों को उसके पास भेजा। और उन्‍होंने आकर उससे कहा, “हे गुरू, हम जानते हैं, कि तू सच्‍चा है, और किसी की परवाह नहीं करता; क्‍योंकि तू मनुष्‍यों का मुँह देख कर बातें नहीं करता, परन्‍तु परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से बताता है। तो क्‍या कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं? हम दें, या न दें?” उसने उनका कपट जानकर उनसे कहा, “मुझे क्‍यों परखते हो? एक दीनार मेरे पास लाओ, कि मैं देखूँ।” वे ले आए, और उसने उनसे कहा, “यह मूर्ति और नाम किस का है?” उन्‍होंने कहा, “कैसर का।” यीशु ने उनसे कहा, “जो कैसर का है वह कैसर को, और जो परमेश्‍वर का है परमेश्‍वर को दो।” तब वे उस पर बहुत अचम्‍भा करने लगे। फिर सदूकियों ने भी, जो कहते हैं कि मरे हुओं का जी उठना है ही नहीं, उसके पास आकर उससे पूछा। कि हे गुरू, मूसा ने हमारे लिये लिखा है, कि यदि किसी का भाई बिना सन्‍तान मर जाए, और उसकी पत्‍नी रह जाए, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी को ब्‍याह ले और अपने भाई के लिये वंश उत्‍पन्‍न करे। सात भाई थे। पहला भाई ब्‍याह करके बिना सन्‍तान मर गया। तब दूसरे भाई ने उस स्‍त्री को ब्‍याह लिया और बिना सन्‍तान मर गया; और वैसे ही तीसरे ने भी। और सातों से सन्‍तान न हुई। सब के पीछे वह स्‍त्री भी मर गई। अत: जी उठने पर वह उनमें से किस की पत्‍नी होगी? क्‍योंकि वह सातों की पत्‍नी हो चुकी थी। यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम इस कारण से भूल में नहीं पड़े हो कि तुम न तो पवित्र शास्‍त्र ही को जानते हो, और न परमेश्‍वर की सामर्थ्य को? क्‍योंकि जब वे मरे हुओं में से जी उठेंगे, तो उनमें ब्‍याह शादी न होगी; पर स्‍वर्ग में दूतों के समान होंगे। मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्‍या तुम ने मूसा की पुस्‍तक में झाड़ी की कथा में नही पढ़ा कि परमेश्‍वर ने उससे कहा: “मैं अब्राहम का परमेश्‍वर, और इसहाक का परमेश्‍वर, और याकूब का परमेश्‍वर हूँ?” परमेश्‍वर मरे हुओं का नहीं, वरन् जीवतों का परमेश्‍वर है, सो तुम बड़ी भूल में पड़े हो।” और शास्‍त्रियों में से एक ने आकर उन्‍हें विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने उन्‍हें अच्‍छी रीति से उत्तर दिया, उससे पूछा, “सब से मुख्‍य आज्ञा कौन सी है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “सब आज्ञाओं में से यह मुख्‍य है: ‘हे इस्राएल सुन, प्रभु हमारा परमेश्‍वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्‍वर से अपने सारे मन से, और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना।’ और दूसरी यह है, ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।’ इससे बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।” शास्‍त्री ने उससे कहा, “हे गुरू, बहुत ठीक! तू ने सच कहा कि वह एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं। और उससे सारे मन, और सारी बुद्धि, और सारे प्राण, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखन; और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमबलियों और बलिदानों से बढ़कर है।” जब यीशु ने देखा कि उसने समझ से उत्तर दिया, तो उससे कहा, “तू परमेश्‍वर के राज्‍य से दूर नहीं।” और किसी को फिर उससे कुछ पूछने का साहस न हुआ। फिर यीशु ने मन्‍दिर में उपदेश करते हुए यह कहा, “शास्‍त्री क्‍योंकर कहते हैं, कि मसीह दाऊद का पुत्र है? दाऊद ने आप ही पवित्र आत्‍मा में होकर कहा है: ‘प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, “मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवों की पीढ़ी न कर दूँ।”’ “दाऊद तो आप ही उसे प्रभु कहता है, फिर वह उसका पुत्र कहाँ से ठहरा?” और भीड़ के लोग उसकी आनन्‍द से सुनते थे। उसने अपने उपदेश में उनसे कहा, “शस्‍त्रियों से चौकस रहो, जो लम्‍बे वस्‍त्र पहिने हुए फिरना और बाजारों में नमस्‍कार, और आराधनालयों में मुख्‍य मुख्‍य आसन और भोज में मुख्‍य मुख्‍य स्‍थान भी चाहते हैं। वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं, ये अधिक दण्‍ड पाएँगे।” और वह मन्‍दिर के भण्‍डार के सामने बैठकर देख रहा था कि लोग मन्‍दिर के भण्‍डार में किस प्रकार पैसे डालते हैं, और बहुत धनवानों ने बहुत कुछ डाला। इतने में एक कंगाल विधवा ने आकर दो दमडि़याँ, जो एक अधेले के बराबर होती है, डाली। तब उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ कि मन्‍दिर के भण्‍डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है; क्‍योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्‍तु इस ने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात् अपनी सारी जीविका डाल दी है।” जब वह मन्‍दिर से निकल रहा था, तो उसके चेलों में से एक ने उससे कहा, “हे गुरू, देख, कैसे कैसे पत्‍थर और कैसे कैसे भवन हैं!” यीशु ने उससे कहा, “क्‍या तुम ये बड़े बड़े भवन देखते हो: यहाँ पत्‍थर पर पत्‍थर भी बचा न रहेगा जो ढाया न जाएगा।” जब वह जैतून के पहाड़ पर मन्‍दिर के सामने बैठा था, तो पतरस और याकूब और यूहन्ना और अन्‍द्रियास ने अलग जाकर उससे पूछा, कि हमें बता कि ये बातें कब होंगी? और जब ये सब बातें पूरी होने पर होंगी उस समय का क्‍या चिन्‍ह होगा? यीशु उनसे कहने लगा, “चौकस रहो कि कोई तुम्‍हें न भरमाए।” बहुतेरे मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं वही हूँ ’और बहुतों को भरमाएँगे। और जब तुम लड़ाइयाँ, और लड़ाइयों की चर्चा सुनो, तो न घबराना; क्‍योंकि इनका होना अवश्‍य है, परन्‍तु उस समय अन्‍त न होगा। क्‍योंकि जाति पर जाति, और राज्‍य पर राज्‍य चढ़ाई करेगा। और हर कहीं भूकम्प होंगे, और अकाल पडेंगे। यह तो पीड़ाओं का आरम्‍भ ही होगा। “परन्‍तु तुम अपने विषय में चौकस रहो, क्‍योंकि लोग तुम्‍हें महासभाओं में सौंपेंगे और तुम पंचायतों में पीटे जाओगे, और मेरे कारण हाकिमों और राजाओं के आगे खड़े किए जाओगे, ताकि उनके लिये गवाही हो। पर अवश्‍य है कि पहले सुसमाचार सब जातियों में प्रचार किया जाए। जब वे तुम्‍हें ले जाकर सौंपेंगे, तो पहले से चिन्‍ता न करना, कि हम क्‍या कहेंगे। पर जो कुछ तुम्‍हें उसी घड़ी बताया जाए, वही कहना; क्‍योंकि बोलनेवाले तुम नहीं हो, परन्‍तु पवित्र आत्‍मा है। और भाई को भाई, और पिता को पुत्र घात के लिये सौंपेंगे, और बच्चे माता-पिता के विरोध में उठकर उन्‍हें मरवा डालेंगे। और मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे; पर जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। सो जब तुम उस उजाड़नेवाली घृणित वस्‍तु को जहाँ उचित नहीं वहाँ खड़ी देखो, (पढ़नेवाला समझ ले) तब जो यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जाएँ। जो छत पर हो, वह अपने घर से कुछ लेने को नीचे न उतरे और न भीतर जाए। और जो खेत में हो, वह अपना कपड़ा लेने के लिये पीछे न लौटे। उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उनके लिये हाय हाय! और प्रार्थना किया करो कि यह जाड़े में न हो। क्‍योंकि वे दिन ऐसे क्‍लेश के होंगे, कि सृष्‍टि के आरम्‍भ से जो परमेश्‍वर ने सृजी है अब तक न तो हुए, और न कभी फिर होंगे। और यदि प्रभु उन दिनों को न घटाता, तो कोई प्राणी भी न बचता; परन्‍तु उन चुने हुओं के कारण जिनको उसने चुना है, उन दिनों को घटाया। उस समय यदि कोई तुम से कहे, ‘देखो, मसीह यहाँ है!’ या ‘देखो, वहाँ है!’ तो प्रतीति न करना। क्‍योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और चिन्‍ह और अद्भुत काम दिखाएँगे कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें। पर तुम चौकस रहो: देखो, मैं ने तुम्‍हें सब बातें पहले ही से कह दी हैं। “उन दिनों में, उस क्‍लेश के बाद सूरज अन्‍धेरा हो जाएगा, और चान्‍द प्रकाश न देगा; और आकाश से तारागण गिरने लगेंगे, और आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी। तब लोग मनुष्‍य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और महिमा के साथ बादलों में आते देखेंगे। उस समय वह अपने दूतों को भेजकर, पृथ्‍वी के इस छोर से आकाश की उस छोर तक चारों दिशा से अपने चुने हुए लोगों को इकट्ठा करेगा। “अंजीर के पेड़ से यह दृष्‍टान्‍त सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती; और पत्ते निकलने लगते हैं; तो तुम जान लेते हो, कि ग्रीष्‍मकाल निकट है। इसी रीति से जब तुम इन बातों को होते देखो, तो जान लो, कि वह निकट है वरन् द्वार ही पर है। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तक ये सब बातें न हो लेंगी, तब तक यह लोग जाते न रहेंगे। आकाश और पृथ्‍वी टल जाएँगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। “उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्‍वर्ग के दूत और न पुत्र; परन्‍तु केवल पिता। देखो, जागते और प्रार्थना करते रहो; क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आएगा। यह उस मनुष्‍य की सी दशा है, जो परदेश जाते समय अपना घर छोड़ जाए, और अपने दासों को अधिकार दे: और हर एक को उसका काम जता दे, और द्वारपाल को जागते रहने की आज्ञा दे। इसलिये जागते रहो; क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि घर का स्‍वामी कब आएगा, साँझ को या आधी रात को, या मुर्ग़ के बाँग देने के समय या भोर को। ऐसा न हो कि वह अचानक आकर तुम्‍हें सोते पाए। और जो मैं तुम से कहता हूँ, वही सब से कहता हूँ: जागते रहो।” दो दिन के बाद फसह और अखमीरी रोटी का पर्व होनेवाला था। और महायाजक और शास्‍त्री इस बात की खोज में थे कि उसे कैसे छल से पकड़ कर मार डालें। परन्‍तु कहते थे, कि पर्व के दिन नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों मे बलवा मचे। जब वह बैतनिय्‍याह में शमौन कोढ़ी के घर भोजन करने बैठा हुआ था जब एक स्‍त्री संगमरमर के पात्र में जटामाँसी का बहुमूल्‍य शुद्ध इ़त्र लेकर आई; और पात्र तोड़ कर इत्र को उसके सिर पर उण्‍डेला। परन्‍तु कोई कोई अपने मन में रिसियाकर कहने लगे, “इस इत्र का क्‍यों सत्‍यनाश किया गया? क्‍योकि यह इत्र तो तीन सौ दीनार से अधिक मूल्‍य में बेचकर कंगालों को बाँटा जा सकता था।” और वे उसको झिड़कने लगे। यीशु ने कहा, “उसे छोड़ दो; उसे क्‍यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है। कंगाल तुम्‍हारे साथ सदा रहते हैं: और तुम जब चाहो तब उनसे भलाई कर सकते हो; पर मैं तुम्‍हारे साथ सदा न रहूँगा। जो कुछ वह कर सकी, उसने किया; उसने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहले से मेरी देह पर इत्र मला है। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि सारे जगत में जहाँ कहीं सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ उसके इस काम की चर्चा भी उसके स्‍मरण में की जाएगी।” तब यहूदा इस्करियोती जो बारह में से एक था, महायाजकों के पास गया, कि उसे उनके हाथ पकड़वा दे। वे यह सुनकर आनन्‍दित हुए, और उस को रूपये देना स्‍वीकार किया, और यह अवसर ढूँढ़ने लगा कि उसे किसी प्रकार पकड़वा दे। अखमीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, जिसमें वे फसह का बलिदान करते थे, उसके चेलों ने उससे पूछा, “तू कहाँ चाहता है, कि हम जाकर तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करे?” उसने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा, “नगर में जाओ, और एक मनुष्‍य जल का घड़ा उठाए हुए तुम्‍हें मिलेगा, उसके पीछे हो लेना। और वह जिस घर में जाए उस घर के स्‍वामी से कहना: ‘गुरू कहता है, कि मेरी पाहुनशाला जिसमें मैं अपने चेलों के साथ फसह खाऊँ कहाँ है?’ वह तुम्‍हें एक सजी सजाई, और तैयार की हुई बड़ी अटारी दिखा देगा, वहाँ हमारे लिये तैयारी करो।” सो चेले निकलकर नगर में आये और जैसा उसने उनसे कहा था, वैसा ही पाया, और फसह तैयार किया। जब साँझ हुई, तो वह बारहों के साथ आया। और जब वे बैठे भोजन कर रहे थे, तो यीशु ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम में से एक, जो मेरे साथ भोजन कर रहा है, मुझे पकड़वाएगा।” उन पर उदासी छा गई और वे एक एक करके उससे कहने लगे, “क्‍या वह मैं हूँ?” उसने उनसे कहा, “वह बारहों में से एक है, जो मेरे साथ थाली में हाथ डालता है। क्‍योंकि मनुष्‍य का पुत्र तो, जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्‍तु उस मनुष्‍य पर हाय जिसके द्वारा मनुष्‍य का पुत्र पकड़वाया जाता है! यदि उस मनुष्‍य का जन्‍म ही न होता तो उसके लिये भला होता।” और जब वे खा ही रहे थे तो उसने रोटी ली, और आशीष माँगकर तोड़ी, और उन्‍हें दी, और कहा, “लो, यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्‍यवाद किया, और उन्‍हें दिया; और उन सब ने उसमें से पीया। और उसने उनसे कहा, “यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये बहाया जाता है। मैं तुम से सच कहता हूँ, कि दाख का रस उस दिन तक फिर कभी न पीऊँगा, जब तक परमेश्‍वर के राज्‍य में नया न पीऊँ।” फिर वे भजन गाकर बाहर जैतून के पहाड़ पर गए। तब यीशु ने उनसे कहा, “तुम सब ठोकर खाओगे, क्‍योंकि लिखा है: ‘मैं रखवाले को मारूँगा, और भेड़ तित्तर बित्तर हो जाएँगी।’ परन्‍तु मैं अपने जी उठने के बाद तुम से पहले गलील को जाऊँगा।” पतरस ने उससे कहा, “यदि सब ठोकर खाएँ तो खाएँ, पर मैं ठोकर नहीं खाऊँगा।” यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझ से सच कहता हूँ, कि आज ही इसी रात को मुर्गे के दो बार बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझ से मुकर जाएगा।” पर उसने और भी जोर देकर कहा, “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी पड़े तौभी तेरा इन्‍कार कभी न करूंगा।” इसी प्रकार और सब ने भी कहा। फिर वे गतसमनी नाम एक जगह में आए; और उसने अपने चेलों से कहा, “यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ। और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया; और बहुत ही अधीर और व्‍याकुल होने लगा, और उनसे कहा, “मेरा मन बहुत उदास है, यहाँ तक कि मैं मरने पर हूँ: तुम यहाँ ठहरो और जागते रहो।” और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। और कहा, “हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।” फिर वह आया और उन्‍हें सोते पाकर पतरस से कहा, “हे शमौन, तू सो रहा है? क्‍या तू एक घड़ी भी न जाग सका? जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो। आत्‍मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है।” और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की। और फिर आकर उन्‍हें सोते पाया, क्‍योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्‍या उत्तर दें। फिर तीसरी बार आकर उनसे कहा, “अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुँची; देखो मनुष्‍य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। उठो, चलें! देखो, मेरा पकड़वानेवाला निकट आ पहुँचा है!” वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से था, अपने साथ महायाजकों और शास्‍त्रियों और पुरनियों की ओर से एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए तुरन्‍त आ पहुँची। और उसके पकड़नेवाले ने उन्‍हें यह पता दिया था, कि जिस को मैं चूमूं वही है, उसे पकड़कर यतन से ले जाना। और वह आया, और तुरन्‍त उसके पास जाकर कहा, “हे रब्‍बी!” और उस को बहुत चूमा। तब उन्‍होंने उस पर हाथ डालकर उसे पकड़ लिया। उनमें से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींच कर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया। यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम डाकू जानकर मुझे पकड़ने के लिये तलवारें और लाठियाँ लेकर निकले हो? मैं तो हर दिन मन्‍दिर में तुम्‍हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्‍तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्र शास्‍त्र की बातें पूरी हों।” इस पर सब चेले उसे छोड़कर भाग गए। और एक जवान अपनी नंगी देह पर चादर ओढ़े हुए उसके पीछे हो लिया; और लोगों ने उसे पकड़ा। पर वह चादर छोड़कर नंगा भाग गया। फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए; और सब महायाजक और पुरनिए और शास्‍त्री उसके यहाँ इकट्ठे हो गए। पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आँगन के भीतर तक गया, और प्‍यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा। महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली। क्‍योंकि बहुत से उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उनकी गवाही एक सी न थी। तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी, “हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूँगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊँगा, जो हाथ से न बना हो।” इस पर भी उनकी गवाही एक सी न निकली। तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा; कि तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उससे फिर पूछा, “क्‍या तू उस परम धन्‍य का पुत्र मसीह है?” यीशु ने कहा, “हाँ मैं हूँ: और तुम मनुष्‍य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।” तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, “अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है? तुम ने यह निन्‍दा सुनी। तुम्‍हारी क्‍या राय है?” उन सब ने कहा वह वध के योग्‍य है। तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुँह ढाँपने और उसे घूँसे मारने, और उससे कहने लगे, “भविष्‍यद्वाणी कर!” और प्‍यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे। जब पतरस नीचे आंगन में था, तो महायाजक की दासियों में से एक वहाँ आई। और पतरस को आग तापते देखकर उस पर टकटकी लगाकर देखा और कहने लगी, “तू भी तो उस नासरी यीशु के साथ था।” वह मुकर गया, और कहा, कि मैं तो नहीं जानता और नहीं समझता कि तू क्‍या कह रही है। फिर वह बाहर डेवढ़ी में गया; और मुर्गे ने बाँग दी। वह दासी उसे देखकर उनसे जो पास खड़े थे, फिर कहने लगी, कि यह उनमें से एक है। परन्‍तु वह फिर मुकर गया। और थोड़ी देर बाद उन्‍होंने जो पास खड़े थे फिर पतरस से कहा, “निश्‍चय तू उनमें से एक है; क्‍योंकि तू गलीली भी है।” तब वह धिक्‍कारने और शपथ खाने लगा, कि मैं उस मनुष्‍य को, जिस की तुम चर्चा करते हो, नहीं जानता। तब तुरन्‍त दूसरी बार मुर्ग़ ने बांग दी: पतरस को यह बात जो यीशु ने उससे कही थी स्‍मरण आई, “मुर्ग़ के दो बार बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।” वह इस बात को सोचकर रोने लगा। और भोर होते ही तुरन्‍त प्रधान याजकों, पुरनियों, और शास्‍त्रियों ने वरन् सारी महासभा ने सलाह करके यीशु को बन्‍धवाया, और उसे ले जाकर पिलातुस के हाथ सौंप दिया। और पिलातुस ने उससे पूछा, “क्‍या तू यहूदियों का राजा है?” उसने उसको उत्तर दिया, “तू आप ही कह रहा है।” और प्रधान याजक उस पर बहुत बातों का दोष लगा रहे थे। पिलातुस ने उससे फिर पूछा, “क्‍या तू कुछ उत्तर नहीं देता, देख ये तुझ पर कितनी बातों का दोष लगाते हैं?” यीशु ने फिर कुछ उत्तर नहीं दिया; यहाँ तक कि पिलातुस को बड़ा आश्‍चर्य हुआ। वह उस पर्व में किसी एक बन्‍धुए को जिसे वे चाहते थे, उनके लिये छोड़ दिया करता था। और बरअब्‍बा नाम का एक मनुष्‍य उन बलवाइयों के साथ बन्‍धुआ था, जिन्‍होंने बलवे में हत्‍या की थी। और भीड़ ऊपर जाकर उससे विनती करने लगी, कि जैसा तू हमारे लिये करता आया है वैसा ही कर। पिलातुस ने उनको यह उत्तर दिया, क्‍या तुम चाहते हो, कि मैं तुम्‍हारे लिये यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ? क्‍योंकि वह जानता था, कि महायाजकों ने उसे डाह से पकड़वाया था। परन्‍तु महायाजकों ने लोगों को उभारा, कि वह बरअब्‍बा ही को उनके लिये छोड़ दे। यह सुन पिलातुस ने उनसे फिर पूछा, “तो जिसे तुम यहूदियों का राजा कहते हो, उसको मैं क्‍या करूँ?” वे फिर चिल्‍लाए, “उसे क्रूस पर चढ़ा दे!” पिलातुस ने उनसे कहा, “क्‍यों, इसने क्‍या बुराई की है?” परन्‍तु वे और भी चिल्‍लाए, “उसे क्रूस पर चढ़ा दे।” तब पिलातुस ने भीड़ को प्रसन्न करने की इच्‍छा से, बरअब्‍बा को उनके लिये छोड़ दिया, और यीशु को कोड़े लगवाकर सौंप दिया, कि क्रूस पर चढ़ाया जाए। सिपाही उसे किले के भीतर आँगन में ले गए जो प्रीटोरियुन कहलाता है, और सारी पलटन को बुला लाए। और उन्‍होंने उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया और काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा, और यह कहकर उसे नमस्‍कार करने लगे, “हे यहूदियों के राजा, नमस्‍कार!” वे उसके सिर पर सरकण्‍डे मारते, और उस पर थूकते, और घुटने टेककर उसे प्रणाम करते रहे। जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो उस पर बैंजनी वस्‍त्र उतारकर उसी के कपड़े पहिनाए; और तब उसे क्रूस पर चढ़ाने के लिये बाहर ले गए। सिकन्‍दर और रूफुस का पिता शमौन, नाम एक कुरेनी मनुष्‍य, जो गाँव से आ रहा था उधर से निकला; उन्‍होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। और वे उसे गुलगुता नामक जगह पर, जिस का अर्थ खोपड़ी की जगह है, लाए। और उसे मुर्र मिला हुआ दाखरस देने लगे, परन्‍तु उसने नहीं लिया। तब उन्‍होंने उसको क्रूस पर चढ़ाया, और उसके कपड़ों पर चिट्ठियाँ डालकर, कि किस को क्‍या मिले, उन्‍हें बाँट लिया। और एक पहर दिन चढ़ा था, जब उन्‍होंने उसको क्रूस पर चढ़ाया। और उसका दोषपत्र लिखकर उसके ऊपर लगा दिया गया कि “यहूदियों का राजा”। उन्‍होंने उसके साथ दो डाकू, एक उसकी दहिनी और एक उसकी बाईं ओर क्रूस पर चढ़ाए। “तब धर्मशास्‍त्र का वह वचन कि वह अपराधियों के संग गिना गया,” पूरा हुआ। और मार्ग में जानेवाले सिर हिला हिलाकर और यह कहकर उसकी निन्‍दा करते थे, “वाह! मन्‍दिर के ढानेवाले, और तीन दिन में बनानेवाले! क्रूस पर से उतर कर अपने आप को बचा ले।” इसी रीति से प्रधान याजक भी, शास्‍त्रियों समेत, आपस में ठट्ठे से कहते थे; कि इस ने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता। इस्राएल का राजा, मसीह, अब क्रूस पर से उतर आए कि हम देखकर विश्‍वास करें। और जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे, वे भी उसकी निन्‍दा करते थे। और दोपहर होने पर सारे देश में अन्‍धियारा छा गया, और तीसरे पहर तक रहा। तीसरे पहर यीशु ने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “इलोई, इलोई, लमा शबक्‍तनी?” जिस का अर्थ है, “हे मेरे परमेश्‍वर, हे मेरे परमेश्‍वर, तू ने मुझे क्‍यों छोड़ दिया?” जो पास खड़े थे, उनमें से कितनों ने यह सुनकर कहा, “देखो, यह एलिय्‍याह को पुकारता है।” और एक ने दौड़कर स्‍पंज को सिरके में डुबोया, और सरकण्‍डे पर रखकर उसे चुसाया, और कहा, “ठहर जाओ; देखें, एलिय्‍याह उसे उतारने के लिये आता है कि नहीं।” तब यीशु ने बड़े शब्‍द से चिल्‍लाकर प्राण छोड़ दिये। और मन्‍दिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया। जो सूबेदार उसके सामने खड़ा था, जब उसे यूँ चिल्‍लाकर प्राण छोड़ते हुए देखा, तो उसने कहा, “सचमुच यह मनुष्‍य, परमेश्‍वर का पुत्र था!” कई स्‍त्रियाँ भी दूर से देख रही थीं: उनमें मरियम मगदलीनी, और छोटे याकूब और योसेस की माता मरियम, और सलोमी थीं। जब वह गलील में था तो ये उसके पीछे हो लेती थीं और उसकी सेवाटहल किया करती थीं; और भी बहुत सी स्‍त्रियाँ थीं, जो उसके साथ यरूशलेम में आई थीं। जब संध्‍या हो गई, तो इसलिये कि तैयारी का दिन था, जो सब्‍त के एक दिन पहले होता है, अरिमतिया का रहेनवाला यूसुफ आया, जो प्रतिष्‍ठित मंत्री और आप भी परमेश्‍वर के राज्‍य की बाट जोहता था। वह हियाव करके पिलातुस के पास गया और यीशु का शव माँगा। पिलातुस ने आश्‍चर्य किया, कि वह इतना शीघ्र मर गया; और उसने सूबेदार को बुलाकर पूछा, कि क्‍या उस को मरे हुए देर हुई? जब उसने सूबेदार के द्वारा हाल जान लिया, तो शव यूसुफ को दिला दिया। तब उसने एक मलमल की चादर मोल ली, और शव को उतारकर उस चादर में लपेटा, और एक कब्र मे जो चट्टान में खोदी गई थी रखा, और कब्र के द्वार पर एक पत्‍थर लुढ़का दिया। और मरियम मगदलीनी और योसेस की माता मरियम देख रही थीं कि वह कहाँ रखा गया है। जब सब्‍त का दिन बीत गया, तो मरियम मगदलीनी, और याकूब की माता मरियम, और सलोमी ने सुगन्‍धित वस्तुएँ मोल लीं, कि आकर उस पर मलें। सप्‍ताह के पहले दिन बड़े भोर, जब सूरज निकला ही था, वे कब्र पर आईं, और आपस में कहती थीं, “हमारे लिये कब्र के द्वार पर से पत्‍थर कौन लुढ़ाकाएगा?” जब उन्‍होंने आँख उठाई, तो देखा कि पत्‍थर लुढ़का हुआ है! वह बहुत ही बड़ा था। और कब्र के भीतर जाकर, उन्‍होंने एक जवान को श्‍वेत वस्‍त्र पहिने हुए दहिनी ओर बैठे देखा, और बहुत चकित हुई। उसने उनसे कहा, चकित मत हो, तुम यीशु नासरी को, जो क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूँढ़ती हो। वह जी उठा है, यहाँ नहीं है; देखो, यही वह स्‍थान है, जहाँ उन्‍होंने उसे रखा था। परन्‍तु तुम जाओ, और उसके चेलों और पतरस से कहो, कि वह तुम से पहले गलील को जाएगा; जैसा उसने तुम से कहा था, तुम वही उसे देखोगे। और वे निकलकर कब्र से भाग गईं; क्‍योंकि कँपकँपी और घबराहट उन पर छा गई थीं। और उन्‍होंने किसी से कुछ न कहा, क्‍योंकि डरती थीं। सप्‍ताह के पहले दिन भोर होते ही वह जी उठ कर पहले - पहल मरियम मगदलीनी को जिसमें से उसने सात दुष्‍टात्‍माएँ निकाली थीं, दिखाई दिया। उसने जाकर उसके साथियों को जो शोक में डूबे हुए थे और रो रहे थे, समाचार दिया। और उन्‍होंने यह सुनकर कि वह जीवित है और उसने उसे देखा है, प्रतीति न की। इस के बाद वह दूसरे रूप में उनमें से दो को जब वे गाँव की ओर जा रहे थे, दिखाई दिया। उन्‍होंने भी जाकर औरों को समाचार दिया, परन्‍तु उन्‍होंने उनकी भी प्रतीति न की। पीछे वह उन ग्‍यारहों को भी, जब वे भोजन करने बैठे थे दिखाई दिया, और उनके अविश्‍वास और मन की कठोरता पर उलाहना दिया, क्‍योंकि जिन्‍होंने उसके जी उठने के बाद उसे देखा था, इन्‍होंने उनकी प्रतीति न की थी। और उसने उनसे कहा, “तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो विश्‍वास करे और बपतिस्‍मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्‍तु जो विश्‍वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा। और विश्‍वास करनेवालों में ये चिन्‍ह होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को निकालेंगे; नई नई भाषा बोलेंगे; साँपों को उठा लेंगे, और यदि वे प्राणनाशक वस्‍तु भी पी जाएँ तौभी उनकी कुछ हानि न होगी; वे बीमारों पर हाथ रखेंगे, और वे चंगे हो जाएँगे।” तब प्रभु यीशु उनसे बातें करने के बाद स्‍वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेश्‍वर की दाहिनी ओर बैठ गया। और उन्‍होंने निकलकर हर जगह प्रचार किया, और प्रभु उनके साथ काम करता रहा और उन चिन्‍हों के द्वारा जो साथ साथ होते थे, वचन को दृढ़ करता रहा। आमीन। इसलिये कि बहुतों ने उन बातों का जो हमारे बीच में बीती हैं, इतिहास लिखने में हाथ लगाया है। जैसा कि उन्होंने जो पहले ही से इन बातों के देखनेवाले और वचन के सेवक थे हम तक पहुँचाया। इसलिये हे श्रीमान थियुफिलुस मुझे भी यह उचित मालूम हुआ कि उन सब बातों का सम्‍पूर्ण हाल आरम्‍भ से ठीक-ठीक जाँच करके उन्‍हें तेरे लिये क्रमानुसार लिखूँ। कि तू यह जान ले, कि वे बातें जिनकी तू ने शिक्षा पाई है, कैसी अटल हैं। यहूदियों के राजा हेरोदेस के समय अबिय्‍याह के दल में जकरयाह नाम का एक याजक था, और उसकी पत्‍नी हारून के वंश की थी, जिसका नाम इलीशिबा था। और वे दोनों परमेश्‍वर के सामने धर्मी थे, और प्रभु की सारी आज्ञाओं और विधियों पर निर्दोष चलने वाले थे। उनके कोई सन्‍तान न थी, क्‍योंकि इलीशिबा बाँझ थी, और वे दोनों बूढ़े थे।। जब वह अपने दल की पारी पर परमेश्‍वर के सामने याजक का काम करता था। तो याजकों की रीति के अनुसार उसके नाम पर चिट्ठी निकली, कि प्रभु के मन्‍दिर में जाकर धूप जलाए। और धूप जलाने के समय लोगों की सारी मण्‍डली बाहर प्रार्थना कर रही थी। कि प्रभु का एक स्‍वर्गदूत धूप की वेदी की दाहिनी ओर खड़ा हुआ उसको दिखाई दिया। और जकरयाह देखकर घबराया और उस पर बड़ा भय छा गया। परन्‍तु स्‍वर्गदूत ने उससे कहा, “हे जकरयाह, भयभीत न हो क्‍योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्‍नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्‍पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्‍ना रखना। और तुझे आनन्‍द और हर्ष होगा: और बहुत लोग उसके जन्‍म के कारण आनन्‍दित होंगे। क्‍योंकि वह प्रभु के सामने महान होगा; और दाखरस और मदिरा कभी न पिएगा; और अपनी माता के गर्भ ही से पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण हो जाएगा। और इस्राएलियों में से बहुतेरों को उनके प्रभु परमेश्‍वर की ओर फेरेगा। वह एलिय्‍याह की आत्‍मा और सामर्थ्य में हो कर उसके आगे-आगे चलेगा, कि पितरों का मन बाल-बच्चों की ओर फेर दे; और आज्ञा न माननेवालों को धर्मियों की समझ पर लाए; और प्रभु के लिये एक योग्‍य प्रजा तैयार करे। जकरयाह ने स्‍वर्गदूत से पूछा, “यह मैं कैसे जानूँ? क्‍योंकि मैं तो बूढ़ा हूँ; और मेरी पत्‍नी भी बूढ़ी हो गई है।” स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया, “मैं जिब्राईल हूँ, जो परमेश्‍वर के सामने खड़ा रहता हूँ; और मैं तुझ से बातें करने और तुझे यह सुसमाचार सुनाने को भेजा गया हूँ। और देख, जिस दिन तक ये बातें पूरी न हो लें, उस दिन तक तू मौन रहेगा, और बोल न सकेगा, इसलिये कि तू ने मेरी बातों की जो अपने समय पर पूरी होंगी, प्रतीति न की।” लोग जकरयाह की बाट देखते रहे और अचम्‍भा करने लगे कि उसे मन्‍दिर में ऐसी देर क्‍यों लगी? जब वह बाहर आया, तो उनसे बोल न सका: अतः वे जान गए, कि उसने मन्‍दिर में कोई दर्शन पाया है; और व उनसे संकेत करता रहा, और गूँगा रह गया। जब उसकी सेवा के दिन पूरे हुए, तो वह अपने घर चला गया। इन दिनों के बाद उसकी पत्‍नी इलीशिबा गर्भवती हुई; और पाँच महीने तक अपने आप को यह कह के छिपाए रखा। कि मनुष्‍यों में मेरा अपमान दूर करने के लिये प्रभु ने इन दिनों में कृपादृष्‍टि करके मेरे लिये ऐसा किया है। छठवें महीने में परमेश्‍वर की ओर से जिब्राईल स्‍वर्गदूत गलील के नासरत नगर में, एक कुँवारी के पास भेजा गया। जिसकी मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुँवारी का नाम मरियम था। और स्‍वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा, “आनन्‍द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्‍वर का अनुग्रह हुआ है! प्रभु तेरे साथ है!” वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और अतःचने लगी कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? स्‍वर्गदूत ने उससे कहा, “हे मरियम; भयभीत न हो, क्‍योंकि परमेश्‍वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्‍पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्‍वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। और वह याकूब के घराने पर सदा राज्‍य करेगा; और उसके राज्‍य का अन्‍त न होगा।” मरियम ने स्‍वर्गदूत से कहा, “यह कैसे होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं।” स्‍वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया, “पवित्र आत्‍मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्‍पन्न होनेवाला है, परमेश्‍वर का पुत्र कहलाएगा। और देख, और तेरी कुटुम्‍बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होनेवाला है, यह उसका, जो बाँझ कहलाती थी छठवाँ महीना है। क्‍योंकि जो वचन परमेश्‍वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता।” मरियम ने कहा, “देख, मैं प्रभु की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो।” तब स्‍वर्गदूत उसके पास से चला गया। उन दिनों में मरियम उठकर शीघ्र ही पहाड़ी देश में यहूदा के एक नगर को गई। और जकरयाह के घर में जाकर इलीशिबा को नमस्‍कार किया। ज्‍योंही इलीशिबा ने मरियम का नमस्‍कार सुना, त्‍योंही बच्‍चा उसके पेट में उछला, और इलीशिबा पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण हो गई। और उसने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “तू स्‍त्रियों में धन्‍य है, और तेरे पेट का फल धन्‍य है! और यह अनुग्रह मुझे कहाँ से हुआ, कि मेरे प्रभु की माता मेरे पास आई? और देख ज्‍योंही तेरे नमस्‍कार का शब्‍द मेरे कानों में पड़ा त्‍योंही बच्‍चा मेरे पेट में आनन्‍द से उछल पड़ा। और धन्‍य है, वह जिस ने विश्‍वास किया कि जो बातें प्रभु की ओर से उससे कही गई, वे पूरी होंगी।” तब मरियम ने कहा, “मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है। और मेरी आत्‍मा मेरे उद्धार करनेवाले परमेश्‍वर से आनन्‍दित हुई। क्‍योंकि उसने अपनी दासी की दीनता पर दृष्‍टि की है; इसलिये देखो, अब से सब युग-युग के लोग मुझे धन्‍य कहेंगे। क्‍योंकि उस शक्तिमान ने मेरे लिये बड़े-बड़े काम किए हैं, और उसका नाम पवित्र है। और उसकी दया उन पर, जो उससे डरते हैं, पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है। उसने अपना भुजबल दिखाया, और जो अपने आप को बड़ा समझते थे, उन्‍हें तित्तर-बित्तर किया। उसने बलवानों को सिंहासनों से गिरा दिया; और दीनों को ऊँचा किया। उसने भूखों को अच्‍छी वस्‍तुओं से तृप्‍त किया, और धनवानों को छूछे हाथ निकाल दिया। उसने अपने सेवक इस्राएल को सम्‍भाल लिया कि अपनी उस दया को स्‍मरण करे, जो अब्राहम और उसके वंश पर सदा रहेगी, जैसा उसने हमारे बाप-दादों से कहा था।” मरियम लगभग तीन महीने उसके साथ रहकर अपने घर लौट गई। तब इलीशिबा के जनने का समय पूरा हुआ, और वह पुत्र जनी। उसके पड़ोसियों और कुटुम्‍बियों ने यह सुन कर, कि प्रभु ने उस पर बड़ी दया की है, उसके साथ आनन्‍दित हुए। और ऐसा हुआ कि आठवें दिन वे बालक का खतना करने आए और उसका नाम उसके पिता के नाम पर जकरयाह रखने लगे। और उसकी माता ने उत्तर दिया, “नहीं; वरन उसका नाम यूहन्‍ना रखा जाए।” और उन्होंने उससे कहा, “तेरे कुटुम्‍ब में किसी का यह नाम नहीं।” तब उन्होंने उसके पिता से संकेत करके पूछा कि तू उसका नाम क्‍या रखना चाहता है? और उसने लिखने की पट्टी मँगाकर लिख दिया, “उसका नाम यूहन्‍ना है,” और सभों ने अचम्‍भा किया। तब उसका मुँह और जीभ तुरन्‍त खुल गई; और वह बोलने और परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करने लगा। और उसके आस पास के सब रहनेवालों पर भय छा गया; और उन सब बातों की चर्चा यहूदिया के सारे पहाड़ी देश में फैल गई। और सब सुननेवालों ने अपने-अपने मन में विचार करके कहा, “यह बालक कैसा होगा?” क्‍योंकि प्रभु का हाथ उसके साथ था। और उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण हो गया, और भविष्‍यद्ववाणी करने लगा। “प्रभु इस्राएल का परमेश्‍वर धन्‍य हो, कि उसने अपने लोगों पर दृष्‍टि की और उन का छुटकारा किया है, और अपने सेवक दाऊद के घराने में हमारे लिये एक उद्धार का सींग निकाला, जैसे उसने अपने पवित्र भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था, अर्थात् हमारे शत्रुओं से, और हमारे सब बैरियों के हाथ से हमारा उद्धार किया है; कि हमारे बाप-दादों पर दया करके अपनी पवित्र वाचा का स्‍मरण करे, और वह शपथ जो उसने हमारे पिता अब्राहम से खाई थी, कि वह हमें यह देगा, कि हम अपने शत्रुओं के हाथ से छुटकर, उसके सामने पवित्रता और धार्मिकता से जीवन भर निडर रहकर उसकी सेवा करते रहें। और तू हे बालक, परमप्रधान का भविष्‍यद्वक्‍ता कहलाएगा, क्‍योंकि तू प्रभु के मार्ग तैयार करने के लिये उसके आगे-आगे चलेगा, कि उसके लोगों को उद्धार का ज्ञान दे, जो उनके पापों की क्षमा से प्राप्‍त होता है। यह हमारे परमेश्‍वर की उसी बड़ी करूणा से होगा; जिसके कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा। कि अन्‍धकार और मृत्‍यु की छाया में बैठनेवालों को ज्‍योति दे, और हमारे पाँवो को कुशल के मार्ग में सीधे चलाए।” और वह बालक बढ़ता और आत्‍मा में बलवन्‍त होता गया, और इस्राएल पर प्रगट होने के दिन तक जंगलों में रहा। उन दिनों में औगुस्तुस कैसर की ओर से आज्ञा निकली, कि सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएँ। यह पहली नाम लिखाई उस समय हुई, जब क्विरिनियुस सीरिया का हाकिम था। और सब लोग नाम लिखवाने के लिये अपने-अपने नगर को गए। अतः यूसुफ भी इसलिये कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम को गया। कि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी नाम लिखवाए। उनके वहाँ रहते हुए उसके जनने के दिन पूरे हुए। और वह अपना पहलौठा पुत्र जनी और उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा; क्‍योंकि उनके लिये सराय में जगह न थी। और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्‍ड का पहरा देते थे। और प्रभु का एक दूत उनके पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उनके चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। तब स्‍वर्गदूत ने उनसे कहा, “मत डरो; क्‍योंकि देखो, मैं तुम्‍हें बड़े आनन्‍द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिये होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्‍हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्‍मा है, और यही मसीह प्रभु है। और इस का तुम्‍हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े मे लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे।” तब एकाएक उस स्‍वर्गदूत के साथ स्‍वर्गदूतों का दल परमेश्‍वर की स्‍तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया, “आकाश में परमेश्‍वर की महिमा और पृथ्‍वी पर उन मनुष्‍यों में जिनसे वह प्रसन्‍न है शान्‍ति हो।” जब स्‍वर्गदूत उनके पास से स्‍वर्ग को चले गए, तो गड़ेरियों ने आपस में कहा, “आओ, हम बैतलहम जाकर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें।” और उन्होंने तुरन्‍त जाकर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। इन्‍हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उनसे कही गई थी, प्रगट की। और सब सुननेवालों ने उन बातों से जो गड़ेरियों ने उनसे कहीं आश्‍चर्य किया। परन्‍तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। और गडरिये जैसा उनसे कहा गया था, वैसा ही सब सुनकर और देखकर परमेश्‍वर की महिमा और स्‍तुति करते हुए लौट गए। जब आठ दिन पूरे हुए, और उसके खतने का समय आया, तो उसका नाम यीशु रखा गया, जो स्‍वर्गदूत ने उसके पेट में आने से पहले कहा था। और जब मूसा को व्‍यवस्‍था के अनुसार उनके शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएँ। (जैसा कि प्रभु की व्‍यवस्‍था में लिखा है: “हर एक पहलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा।”) और प्रभु की व्‍यवस्‍था के वचन के अनुसार, “पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्‍चे ला कर बलिदान करें।” और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्‍य था, और वह मनुष्‍य धर्मी और भक्‍त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्‍मा उस पर था। और पवित्र आत्‍मा से उसको चेतावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख न लेगा, तक तक मृत्‍यु को न देखेगा। और वह आत्‍मा के सिखाने से मन्‍दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्‍यवस्‍था की रीति के अनुसार करें, तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करके कह: “हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है; क्‍योंकि मेरी आँखों ने तेरे उद्धार को देख लिया है। जिसे तू ने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है। कि वह अन्‍य जतियों को प्रकाश देने के लिये ज्‍योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो।” और उसका पिता और उसकी माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्‍चर्य करते थे। तब शमौन ने उनको आशीष देकर, उसकी माता मरियम से कहा, “देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्‍ह होने के लिये ठहराया गया है, जिसके विरोध में बातें की जाएगीं – वरन तेरा प्राण भी तलवार से आर-पार छिद जाएगा- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।” और अशेर के गोत्र में से हन्‍नाह नामक फनूएल की बेटी एक भविष्‍यद्विक्‍तन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्‍याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्‍दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर करके रात-दिन उपासना किया करती थी। और वह उस घड़ी वहाँ आकर प्रभु का धन्‍यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी। और जब वे प्रभु की व्‍यवस्‍था के अनुसार सब कुछ निपटा चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए। और बालक बढ़ता, और बलवन्‍त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्‍वर का अनुग्रह उस पर था। उसके माता-पिता प्रति वर्ष फसह के पर्व में यरूशलेम को जाया करते थे। जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए। और जब वे उन दिनों को पूरा करके लौटने लगे, तो वह बालक यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे। वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्‍बियों और जान-पहचान वालों में ढूँढ़ने लगे। पर जब नहीं मिला, तो ढूँढ़ते-ढूँढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए। और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्‍दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उनकी सुनते और उनसे प्रश्‍न करते हुए पाया। और जितने उसकी सुन रहे थे, वे सब उसकी समझ और उसके उत्तरों से चकित थे। तब वे उसे देखकर चकित हुए और उसकी माता ने उससे कहा, “हे पुत्र, तू ने हम से क्‍यों ऐसा व्‍यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूँढ़ते थे।” उसने उनसे कहा, “तुम मुझे क्‍यों ढूँढ़ते थे? क्‍या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्‍य है?” परन्‍तु जो बात उसने उनसे कही, उन्होंने उसे नहीं समझा। तब वह उनके साथ गया, और नासरत में आया, और उनके वश में रहा; और उसकी माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं। और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्‍वर और मनुष्‍यों के अनुग्रह में बढ़ता गया। तिबिरियुस कैसर के राज्‍य के पंद्रहवें वर्ष में जब पुन्‍तियुस पीलातुस यहूदिया का हाकिम था, और गलील में हेरोदेस नाम चौथाई का इतूरैया, और त्रखोनीतिस में, उसका भाई फिलिप्‍पुस, और अबिलेने में लिसानियास चौथाई के राजा थे। और जब हन्‍ना और कैफा महायाजक थे, उस समय परमेश्‍वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्‍ना के पास पहुँचा। और वह यरदन के आस-पास के सारे प्रदेश में आकर, पापों की क्षमा के लिये मन फिराव के बपतिस्‍मा का प्रचार करने लगा। जैसे यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के कहे हुए वचनों की पुस्‍तक में लिखा है, “जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द हो रहा हे कि ‘प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसकी सड़कें सीधी बनाओ। हर एक घाटी भर दी जाएगी, और हर एक पहाड़ और टीला नीचा किया जाएगा; और जो टेढ़ा है सीधा, और जो ऊँचा नीचा है वह चौरस मार्ग बनेगा। और हर प्राणी परमेश्‍वर के उद्धार को देखेगा’।” जो भीड़ की भीड़ उससे बपतिस्‍मा लेने को निकल कर आती थी, उनसे वह कहता था, “हे साँप के बच्‍चो, तुम्‍हें किस ने चिता दिया, कि आनेवाले क्रोध से भागो। अतः मन फिराव के योग्‍य फल लाओ: और अपने-अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता अब्राहम है; क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्‍वर इन पत्‍थरों से अब्राहम के लिये सन्‍तान उत्‍पन्न कर सकता है। और अब ही कुल्‍हाड़ा पेड़ों की जड़ पर धरा है, इसलिये जो-जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।” और लोगों ने उससे पूछा, “तो हम क्‍या करें?” उसने उन्‍हें उतर दिया, “जिसके पास दो कुरते हों? वह उसके साथ जिसके पास नहीं हैं बाँट दे और जिसके पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।” और महसूल लेनेवाले भी बपतिस्‍मा लेने आए, और उससे पूछा, “हे गुरू, हम क्‍या करें?” उसने उनसे कहा, “जो तुम्‍हारे लिये ठहराया गया है, उससे अधिक न लेना।” और सिपाहियों ने भी उससे यह पूछा, “हम क्‍या करें?” उसने उनसे कहा, “किसी पर उपद्रव न करना, और न झूठा दोष लगाना, और अपनी मजदूरी पर सन्‍तोष करना।” जब लोग आस लगाए हुए थे, और सब अपने-अपने मन में यूहन्‍ना के विषय में विचार कर रहे थे, कि क्‍या यही मसीह तो नहीं है। तो यूहन्‍ना ने उन सब के उत्तर में कहा, “मैं तो तुम्‍हें पानी से बपतिस्‍मा देता हूँ, परन्‍तु वह आनेवाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं तो इस योग्‍य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्‍ध खोल सकूँ, वह तुम्‍हें पवित्र आत्‍मा और आग से बपतिस्‍मा देगा। उसका सूप, उसके हाथ में है; और वह अपना खलिहान अच्‍छी तरह से साफ करेगा; और गेहूँ को अपने खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्‍तु भूसी को उस आग में जो बुझने की नहीं जला देगा।” अतः वह बहुत सी शिक्षा दे देकर लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा। हेरोदेस द्वारा यूहन्ना को बन्दीगृह में डालना परन्‍तु उसने चौथाई देश के राजा हेरोदेस को उसके भाई फिलिप्‍पुस की पत्‍नी हेरोदियास के विषय, और सब कुकर्मों के विषय में जो उसने किए थे, उलाहना दिया। इसलिये हेरोदेस ने उन सब से बढ़कर यह कुकर्म भी किया, कि यूहन्‍ना को बन्‍दीगृह में डाल दिया। जब सब लोगों ने बपतिस्‍मा लिया, और यीशु भी बपतिस्‍मा लेकर प्रार्थना कर रहा था, तो आकाश खुल गया। और पवित्र आत्‍मा शारीरिक रूप में कबूतर के नाई उस पर उतरा, और यह आकाशवाणी हुई: “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझ से प्रसन्‍न हूँ।” जब यीशु आप उपदेश करने लगा, तो लगभग तीस वर्ष की आयु का था और (जैसा समझा जाता था) यूसुफ का पुत्र था; और व एली का, और वह मत्तात का, और वह लेवी का, और वह मलकी का, और वह यन्‍ना का, और वह यूसुफ का, और वह मत्तित्याह का, और वह आमोस का, और वह नहूम का, और वह असल्‍याह का, और वह नोगह का, और वह मात का, और वह मत्तित्‍याह का, और वह शिमी का, और वह योसेख का, और वह योदाह का, और वह यूहन्‍ना का, और वह रेसा का, और वह जरूब्‍बाबिल का, और वह शालतियेल का, और वह नेरी का, और वह मलकी का, और वह अद्दी का, और वह कोसाम का, और वह इलमोदाम का, और वह एर का, और वह येशू का, और वह इलाजार का, और वह योरीम का, और वह मत्तात का, और वह लेवी का, और वह शमौन का, और वह यहूदाह का, और वह यूसुफ का, और वह योनान का, और वह इलयाकीम का, और वह मलेआह का, और वह मिन्‍नाह का, और वह मत्तता का, और वह नातान का, और वह दाऊद का, और वह यिशै का, और वह ओबेद का, और वह बोअज का, और वह सलमोन का, और वह नहशोन का, और वह अम्‍मीनादाब का, और वह अरनी का, और वह हिस्रोन का, और वह फिरिस का, और वह यहूदाह का, और वह याकूब का, और वह इसहाक का, और वह अब्राहम का, और वह तिरह का, और वह नाहोर का, और वह सरूग का, और वह रऊ का, और वह फिलिग का, और वह एबिर का, और वह शिलह का, और वह केनान का, वह अरफक्षद का, और वह शेम का, वह नूह का, वह लिमिक का, और वह मथूशिलह का, और वह हनोक का, और वह यिरिद का, और वह महललेल का, और वह केनान का, और वह एनोश का, और वह शेत का, और वह आदम का, और वह परमेश्‍वर का था।। फिर यीशु पवित्र आत्‍मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा; और चालीस दिन तक आत्‍मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उसकी परीक्षा करता रहा। उन दिनों में उसने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी। और शैतान ने उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो इस पत्‍थर से कह, कि रोटी बन जाए।” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: ‘मनुष्‍य केवल रोटी से जीवित न रहेगा’।” तब शैतान उसे ले गया और उसको पल भर में जगत के सारे राज्‍य दिखाए। और उससे कहा, “मैं यह सब अधिकार, और इनका वैभव तुझे दूँगा, क्‍योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूँ, उसी को दे देता हूँ। इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा।” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर’।” तब उसने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहाँ से नीचे गिरा दे। क्‍योंकि लिखा है, ‘वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें।’ और ‘वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पाँव में पत्‍थर से ठेस लगे’।” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “यह भी कहा गया है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर की परीक्षा न करना’।” जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।। फिर यीशु आत्‍मा की सामर्थ्य से भरा हुआ गलील को लौटा, और उसकी चर्चा आस-पास के सारे देश में फैल गई। और वह उन ही आराधनालयों में उपदेश करता रहा, और सब उसकी बड़ाई करते थे।। और वह नासरत में आया; जहाँ पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्‍त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ। यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक उसे दी गई, और उसने पुस्‍तक खोलकर, वह जगह निकाली जहाँ यह लिखा था: “प्रभु का आत्‍मा मुझ पर है, इसलिये कि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्‍धुओं को छुटकारे का और अन्‍धों को दृष्‍टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूँ और कुचले हुओं को छुड़ाऊँ, और प्रभु के प्रसन्‍न रहने के वर्ष का प्रचार करूँ।” तब उसने पुस्‍तक बन्‍द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आँखे उस पर लगी थी। तब वह उनसे कहने लगा, “आज ही यह लेख तुम्‍हारे सामने पूरा हुआ है।” और सब ने उसे सराहा, और जो अनुग्रह की बातें उसके मुँह से निकलती थेीं, उनसे अचम्भित हुए; और कहने लगे, “क्‍या यह यूसुफ का पुत्र नहीं?” उसने उससे कहा, “तुम मुझ पर यह कहावत अवश्‍य कहोगे, कि हे वैद्य, अपने आप को अच्‍छा कर! जो कुछ हम ने सुना है कि कफरनहूम में किया गया है उसे यहाँ अपने देश में भी कर।” और उसने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कोई भविष्‍यद्वक्‍ता अपने देश में मान-सम्‍मान नहीं पाता। और मैं तुम से सच कहता हूँ, कि एलिय्‍याह के दिनों में जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बन्‍द रहा, यहाँ तक कि सारे देश में बड़ा आकाल पड़ा, तो इस्राएल में बहुत सी विधवाएँ थीं। पर एलिय्‍याह उनमें से किसी के पास नहीं भेजा गया, केवल सैदा के सारफत में एक विधवा के पास। और एलीशा भविष्‍यद्वक्‍ता के समय इस्राएल में बहुत से कोढ़ी थे, पर सीरिया वासी नामान को छोड़ उनमें से काई शुद्ध नहीं किया गया।” ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए। और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ था, उसकी चोटी पर ले चले, कि उसे वहाँ से नीचे गिरा दें। पर वह उनके बीच में से निकलकर चला गया।। फिर वह गलील के कफरनहूम नगर में गया, और सब्‍त के दिन लोगों को उपदेश दे रहा था। वे उस के उपदेश से चकित हो गए क्‍योंकि उसका वचन अधिकार सहित था। आराधनालय में एक मनुष्‍य था, जिसमें अशुद्ध आत्‍मा थी। वह ऊँचे शब्‍द से चिल्‍ला उठा, “हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूँ तू कौन है? तू परमेश्‍वर का पवित्र जन है!” यीशु ने उसे डाँटकर कहा, “चुप रह: और उसमें से निकल जा!” तब दुष्‍टात्‍मा उसे बीच में पटककर बिना हानि पहुँचाए उसमें से निकल गई। इस पर सब को अचम्‍भा हुआ, और वे आपस में बातें करके कहने लगे, “यह कैसा वचन है? कि वह अधिकार और सामर्थ्य के साथ अशुद्ध आत्‍माओं को आज्ञा देता है, और वे निकल जाती हैं।” अतः चारों ओर हर जगह उसकी चर्चा होने लगी। वह आराधनालय में से उठकर शमौन के घर में गया और शमौन की सास को ज्‍वर चढ़ा हुआ था, और उन्होंने उसके लिये उससे विनती की। उसने उसके निकट खड़े होकर ज्‍वर को डाँटा और ज्वर उतर गया और वह तुरन्‍त उठकर उनकी सेवा-टहल करने लगी। सूरज डूबते समय जिन-जिन के यहाँ लोग नाना प्रकार की बीमारियों में पड़े हुए थे, वे सब उन्‍हें उसके पास ले आएं, और उसने एक एक पर हाथ रखकर उन्‍हें चंगा किया। और दुष्‍टात्‍मा चिल्‍लाती और यह कहती हुई, “तू परमेश्‍वर का पुत्र है,” बहुतों में से निकल गई पर वह उन्‍हें डाँटता और बोलने नहीं देता था, क्‍योंकि वे जानते थे, कि यह मसीह है। जब दिन हुआ तो वह निकलकर एक जंगली जगह में गया, और भीड़ की भीड़ उसे ढूँढ़ती हुई उसके पास आई, और उसे रोकने लगी, कि हमारे पास से न जा। परन्‍तु उसने उनसे कहा, “मुझे और और नगरों में भी परमेश्‍वर के राज्‍य का सुसमाचार सुनाना अवश्‍य है, क्‍योंकि मैं इसीलिये भेजा गया हूँ।” और वह गलील के आराधनालयों में प्रचार करता रहा। जब भीड़ उस पर गिरी पड़ती थी, और परमेश्‍वर का वचन सुनती थी, और वह गन्‍नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ। कि उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुवे उन पर से उतरकर जाल धो रहे थे। उन नावों में से एक पर, जो शमौन की थी, चढ़कर, उसने उससे विनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठकर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा। जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, “गहिरे में ले चल, और मछलियाँ पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।” शमौन ने उसको उत्तर दिया, “हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा; तौभी तेरे कहने से जाल डालूँगा।” जब उन्होंने ऐसा किया, तो बहुत मछलियाँ घेर लाए, और उनके जाल फटने लगे। इस पर उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्होंने आकर, दोनो नाव यहाँ तक भर लीं कि वे डूबने लगीं। यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पाँवो पर गिरा, और कहा, “हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्‍योंकि मैं पापी मनुष्‍य हूँ!” क्‍योंकि इतनी मछलियों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्‍भा हुआ; और वैसे ही जब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्‍ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्‍भा हुआ: तब यीशु ने शमौन से कहा, “मत डर, अब से तू मनुष्‍यों को जीवता पकड़ा करेगा।” और वे नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए। जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहाँ कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्‍य था, और वह यीशु को देखकर मुँह के बल गिरा, और विनती की, “हे प्रभु यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” उसने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ और कहा, “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा।” और उसका कोढ़ तुरन्‍त जाता रहा। तब उसने उसे चिताया, “किसी से न कह, परन्‍तु जाके अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने चढ़ावा ठहराया है उसे चढ़ा कि उन पर गवाही हो।” परन्‍तु उसकी चर्चा और भी फैलती गई, और भीड़ की भीड़ उसकी सुनने के लिये और अपनी बिमारियों से चंगे होने के लिये इकट्ठी हुई। परन्‍तु वह जंगलों में अलग जाकर प्रार्थना किया करता था। और एक दिन ऐसा हुआ कि वह उपदेश दे रहा था, और फरीसी और व्‍यवस्‍थापक वहाँ बैठे हुए थे, जो गलील और यहूदिया के हर एक गाँव से, और यरूशलेम से आए थे; और चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ्य उसके साथ थी। और देखो कई लोग एक मनुष्‍य को जो लकवे का रोगी था, खाट पर लाए, और वे उसे भीतर ले जाने और यीशु के सामने रखने का उपाय ढूँढ़ रहे थे। और जब भीड़ के कारण उसे भीतर न ले जा सके तो उन्होंने छत पर चढ़ कर और खपरैल हटाकर, उसे खाट समेत बीच में यीशु के सामने उतरा दिया। उसने उन का विश्‍वास देखकर उससे कहा, “हे मनुष्‍य, तेरे पाप क्षमा हुए।” तब शास्‍त्री और फरीसी विवाद करने लगे, “यह कौन है, जो परमेश्‍वर की निन्‍दा करता है? परमेश्‍वर का छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है?” यीशु ने उनके मन की बातें जानकर, उनसे कहा, “तुम अपने मनों में क्‍या विवाद कर रहे हो? सहज क्‍या है? क्‍या यह कहना, कि ‘तेरे पाप क्षमा हुए,’ या यह कहना कि ‘उठ और चल फिर’? परन्‍तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्‍य के पुत्र को पृथ्‍वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है।” (उसने उस लकवे के रोगी से कहा), “मैं तुझ से कहता हूँ, उठ और अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।” वह तुरन्‍त उनके सामने उठा, और जिस पर वह पड़ा था उसे उठाकर, परमेश्‍वर की बड़ाई करता हुआ अपने घर चला गया। तब सब चकित हुए और परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगे, और बहुत डरकर कहने लगे, “आज हम ने अनोखी बातें देखी हैं।” और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेनेवाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। और लेवी ने अपने घर में उसके लिये एक बड़ा भोज दिया; और चुंगी लेनेवालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी। और फरीसी और उनके शास्‍त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, “तुम चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ क्‍यों खाते-पीते हो?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्‍तु बीमारों के लिये अवश्‍य है। मैं धर्मियों को नहीं, परन्‍तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूँ।” और उन्होंने उससे कहा, “यूहन्‍ना के चेले तो बराबर उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं, और वैसे ही फरीसियों के भी, परन्‍तु तेरे चेले तो खाते-पीते हैं।” यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम बरातियों से जब तक दूल्‍हा उनके साथ रहे, उपवास करवा सकते हो? परन्‍तु वे दिन आएँगे, जिन में दूल्‍हा उनसे अलग किया जाएगा, तब वे उन दिनों में उपवास करेंगे।” उसने एक और दृष्‍टान्‍त भी उनसे कहा: “कोई मनुष्‍य नये वस्त्र में से फाड़कर पुराने वस्त्र में पैवन्द नहीं लगाता, नहीं तो नया फट जाएगा और वह पैवन्द पुराने में मेल भी नहीं खाएगा। और कोई नया दाखरस पुरानी मशकों में नही भरता, नहीं तो नया दाखरस मशकों को फाड़कर बह जाएगा, और मशकें भी नाश हो जाएँगी। परन्‍तु नया दाखरस नई मशकों में भरना चाहिये। कोई मनुष्‍य पुराना दाखरस पीकर नया नहीं चाहता क्‍योंकि वह कहता है, कि पुराना ही अच्‍छा है।” फिर सब्‍त के दिन वह खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके चेले बालें तोड़-तोड़कर, और हाथों से मल-मल कर खाते जाते थे। तब फरीसियों में से कई एक कहने लगे, “तुम वह काम क्‍यों करते हो जो सब्‍त के दिन करना उचित नहीं?” यीशु ने उन का उत्तर दिया, “क्‍या तुम ने यह नहीं पढ़ा, कि दाऊद ने जब वह और उसके साथी भूखे थे तो क्‍या किया? वह कैसे परमेश्‍वर के घर में गया, और भेंट की रोटियाँ लेकर खाई, जिन्‍हें खाना याजकों को छोड़ और किसी को उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दी?” और उसने उनसे कहा, “मनुष्‍य का पुत्र सब्‍त के दिन का भी प्रभु है।” और ऐसा हुआ कि किसी और सब्‍त के दिन को वह आराधनालय में जाकर उपदेश करने लगा; और वहाँ एक मनुष्‍य था, जिसका दाहिना हाथ सूखा था। शास्‍त्री और फरीसी उस पर दोष लगाने का अवसर पाने के लिये उसकी ताक में थे, कि देखें कि वह सब्‍त के दिन चंगा करता है कि नहीं। परन्‍तु वह उनके विचार जानता था; इसलिये उसने सूखे हाथवाले मनुष्‍य से कहा, “उठ, बीच में खड़ा हो।” वह उठ खड़ा हुआ। यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से यह पूछता हूँ कि सब्‍त के दिन क्‍या उचित है, भला करना या बुरा करना; प्राण को बचाना या नाश करना?” और उसने चारों ओर उन सभों को देखकर उस मनुष्‍य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने ऐसा ही किया, और उसका हाथ फिर चंगा हो गया। परन्‍तु वे आपे से बाहर होकर आपस में विवाद करने लगे कि हम यीशु के साथ क्‍या करें? और उन दिनों में वह पहाड़ पर प्रार्थना करने को निकला, और परमेश्‍वर से प्रार्थना करने में सारी रात बिताई। जब दिन हुआ, तो उसने अपने चेलों को बुलाकर उनमें से बारह चुन लिए, और उनको प्रेरित कहा। और वे ये हैं: शमौन जिसका नाम उसने पतरस भी रखा; और उसका भाई अन्‍द्रियास, और याकूब, और यूहन्‍ना, और फिलिप्‍पुस, और बरतुलमै, और मत्ती, और थोमा, और हलफई का पुत्र याकूब, और शमौन जो जेलोतेस कहलाता है, और याकूब का बेटा यहूदा, और यहूदा इस्करियोती, जो उसका पकड़वाने वाला बना। तब वह उनके साथ उतरकर चौरस जगह में खड़ा हुआ, और उसके चेलों की बड़ी भीड़, और सारे यहूदिया, और यरूशलेम, और सूर और सैदा के समुद्र के किनारे से बहुतेरे लोग, जो उसकी सुनने और अपनी बीमारियों से चंगा होने के लिये उसके पास आए थे, वहाँ थे। और अशुद्ध आत्‍माओं के सताए हुए लोग भी अच्‍छे किए जाते थे। और सब उसे छूना चाहते थे, क्‍योंकि उसमें से सामर्थ्य निकलकर सब को चंगा करती थी। तब उसने अपने चेलों की ओर देखकर कहा, “धन्‍य हो तुम, जो दीन हो, क्‍योंकि परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारा है। “धन्‍य हो तुम, जो अब भूखे हो; क्‍योंकि तृप्‍त किए जाओगे। धन्‍य हो तुम, जो अब रोते हो, क्‍योंकि हँसोगे। “धन्‍य हो तुम, जब मनुष्‍य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्‍हें निकाल देंगे, और तुम्‍हारी निन्‍दा करेंगे, और तुम्‍हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। “उस दिन आनन्‍दित होकर उछलना, क्‍योंकि देखो, तुम्‍हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा प्रतिफल है। उनके बाप-दादे भविष्‍यद्वक्‍ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे। “परन्‍तु हाय तुम पर जो धनवान हो, क्‍योंकि तुम अपनी शान्‍ति पा चुके। “हाय तुम पर जो अब तृप्‍त हो, क्‍योंकि भूखे होगे। हाय, तुम पर; जो अब हँसते हो, क्‍योंकि शोक करोगे और रोओगे। “हाय, तुम पर जब सब मनुष्‍य तुम्‍हें भला कहें, क्‍योंकि उनके बाप-दादे झूठे भविष्‍यद्वक्‍ताओं के साथ भी ऐसा ही किया करते थे। “परन्‍तु मैं तुम सुननेवालों से कहता हूँ, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो। जो तुम्‍हें स्राप दें, उनको आशीष दो; जो तुम्‍हारा अपमान करें, उनके लिये प्रार्थना करो। “जो तेरे एक गाल पर थप्‍पड़ मारे उसकी ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उसको कुरता लेने से भी न रोक। “जो कोई तुझ से माँगे, उसे दे; और जो तेरी वस्‍तु छीन ले, उससे न माँग। “और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्‍हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो। “यदि तुम अपने प्रेम रखनेवालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्‍हारी क्‍या बड़ाई? क्‍योंकि पापी भी अपने प्रेम रखनेवालों के साथ प्रेम रखते हैं। “और यदि तुम अपने भलाई करनेवालों ही के साथ भलाई करते हो, तो तुम्‍हारी क्‍या बड़ाई? क्‍योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं। “और यदि तुम उसे उधार दो, जिनसे फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्‍हारी क्‍या बड़ाई? क्‍योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएँ। “वरन् अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो, और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्‍हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्‍तान ठहरोगे, क्‍योंकि वह उन पर जो धन्‍यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। “जैसा तुम्‍हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो। “दोष मत लगाओ; तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा: दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे: क्षमा करो, तो तुम्हे भी क्षमा किया जाएगा। “दिया करो, तो तुम्‍हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाम दबा-दबाकर और हिला-हिलाकर और उभरता हुआ तुम्‍हारी गोद में डालेंगे, क्‍योंकि जिस नाम से तुम नापते हो, उसी से तुम्‍हारे लिये भी नापा जाएगा।” फिर उसने उनसे एक दृष्‍टान्‍त कहा: “क्‍या अन्‍धा, अन्‍धे को मार्ग बता सकता है? क्‍या दोनो गड़हे में नहीं गिरेंगे? “चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं, परन्‍तु जो कोई सिद्ध होगा, वह अपने गुरू के नाई होगा। “तू अपने भाई की आँख के तिनके को क्‍यों देखता है, और अपनी ही आँख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता? “और जब तू अपनी ही आँख का लट्ठा नहीं देखता, तो अपने भाई से कैसे कह सकता है, ‘हे भाई, ठहर जा तेरी आँख से तिनके को निकाल दूँ’? हे कपटी, पहले अपनी आँख से लट्ठा निकाल, तब जो तिनका तेरे भाई की आँख में है, भली भाँति देखकर निकाल सकेगा। “कोई अच्‍छा पेड़ नहीं, जो निकम्‍मा फल लाए, और न तो कोई निकम्‍मा पेड़ है, जो अच्‍छा फल लाए। “हर एक पेड़ अपने फल से पहचाना जाता है; क्‍योंकि लोग झाड़ियों से अंजीर नहीं तोड़ते, और न झड़बेरी से अंगूर। “भला मनुष्‍य अपने मन के भले भण्‍डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्‍य अपने मन के बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है; क्‍योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुँह पर आता है। “जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्‍यों मुझे ‘हे प्रभु, हे प्रभु,’ कहते हो? “जो कोई मेरे पास आता है, और मेरी बातें सुनकर उन्‍हें मानता है, मैं तुम्‍हें बताता हूँ कि वह किसके नाई है? वह उस मनुष्‍य के नाई है, जिस ने घर बनाते समय भूमि गहरी खोदकर चट्टान की नींव डाली, और जब बाढ़ आई तो धारा उस घर पर लगी, परन्‍तु उसे हिला न सकी; क्‍योंकि वह पक्‍का बना था। “परन्‍तु जो सुनकर नहीं मानता, वह उस मनुष्‍य के नाई है, जिस ने मिट्टी पर बिना नींव का घर बनाया। जब उस पर धारा लगी, तो वह तुरन्‍त गिर पड़ा, और वह गिरकर सत्‍यानाश हो गया।” जब वह लोगों को अपनी सारी बातें सुना चुका, तो कफरनहूम में आया। और किसी सूबेदार का एक दास जो उसका प्रिय था, बीमारी से मरने पर था। उसने यीशु की चर्चा सुनकर यहूदियों के कई पुरनियों को उससे यह विनती करने को उसके पास भेजा, कि आकर मेरे दास को चंगा कर। वे यीशु के पास आकर उससे बड़ी विनती करके कहने लगे, “वह इस योग्‍य है, कि तू उसके लिये यह करे, क्‍योंकि वह हमारी जाति से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे आराधनालय को बनाया है।” यीशु उनके साथ साथ चला, पर जब वह घर से दूर न था, तो सूबेदार ने उसके पास कई मित्रों के द्वारा कहला भेजा, “हे प्रभु दु:ख न उठा, क्‍योंकि मैं इस योग्‍य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए। इसी कारण मैंने अपने आप को इस योग्‍य भी न समझा, कि तेरे पास आऊँ, पर वचन ही कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। मैं भी पराधीन मनुष्‍य हूँ; और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक को कहता हूँ, ‘जा,’ तो वह जाता है, और दूसरे से कहता हूँ कि ‘आ,’ तो आता है; और अपने किसी दास को कि ‘यह कर,’ तो वह उसे करता है।” यह सुनकर यीशु ने अचम्‍भा किया, और उसने मुँह फेरकर उस भीड़ से जो उसके पीछे आ रही थी कहा, “मैं तुम से कहता हूँ, कि मैं ने इस्राएल में भी ऐसा विश्‍वास नहीं पाया।” और भेजे हुए लोगों ने घर लौटकर, उस दास को चंगा पाया। थोड़े दिन के बाद वह नाईन नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी। जब वह नगर के फाटक के पास पहुँचा, तो देखो, लोग एक मुर्दा को बाहर लिए जा रहे थे; जो अपनी माँ का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे। उसे देख कर प्रभु को तरस आया, और उसने कहा, “मत रो।” तब उसने पास आकर अर्थी को छुआ; और उठानेवाले ठहर गए, तब उसने कहा, “हे जवान, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ!” तब वह मुर्दा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उसने उसे उसकी माँ को सौप दिया। इस से सब पर भय छा गया; और वे परमेश्‍वर की बड़ाई करके कहने लगे, “हमारे बीच में एक बड़ा भविष्‍यद्वक्‍ता उठा है, और परमेश्‍वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्‍टि की है।” और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस-पास के सारे देश में फैल गई।। और यूहन्‍ना को उसके चेलों ने इन सब बातों का समचार दिया। तब यूहन्‍ना ने अपने चेलों में से दो को बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिये भेजा, “क्‍या आनेवाला तू ही है, या हम किसी और दूसरे की बाट देखें?” उन्होंने उसके पास आकर कहा, “यूहन्‍ना बपतिस्‍मा देनेवाले ने हमें तेरे पास यह पूछने को भेजा है, कि क्‍या आनेवाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें?” उसी घड़ी उसने बहुतों को बीमारियों और पीड़ाओं, और दुष्‍टात्‍माओं से छुड़ाया; और बहुत से अन्‍धों को आँखे दी। और उसने उनसे कहा, “जो कुछ तुम ने देखा और सुना है, जाकर यूहन्‍ना से कह दो; कि अन्‍धे देखते हैं, लंगड़े चलते-फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं, बहरे सुनते है, और मुर्दे जिलाए जाते है, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। “धन्‍य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।” जब यूहन्‍ना के भेजे हुए लोग चल दिए, तो यीशु यूहन्‍ना के विषय में लोगों से कहने लगा, “तुम जंगल में क्‍या देखने गए थे? क्‍या हवा से हिलते हुए सरकण्‍डे को? “तो तुम फिर क्‍या देखने गए थे? क्‍या कोमल वस्‍त्र पहने हुए मनुष्‍य को? देखो, जो भड़कीला वस्‍त्र पहनते, और सुख-विलास से रहते हैं, वे राजभवनों में रहते हैं। “तो फिर क्‍या देखने गए थे? क्‍या किसी भविष्‍यद्वक्‍ता को? हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, वरन भविष्‍यद्वक्‍ता से भी बड़े को। “यह वही है, जिसके विषय में लिखा है: “देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे-आगे भेजता हूँ, जो तेरे आगे मार्ग सीधा करेगा।” “मैं तुम से कहता हूँ, कि जो स्‍त्रियों से जन्‍में हैं, उनमें से यूहन्‍ना से बड़ा कोई नहीं: पर जो परमेश्‍वर के राज्‍य में छोटे से छोटा है, वह उससे भी बड़ा है।” और सब साधारण लोगों ने सुनकर और चुंगी लेनेवालों ने भी यूहन्‍ना का बपतिस्‍मा लेकर परमेश्‍वर को सच्‍चा मान लिया। पर फरीसियों और व्‍यवस्‍थापकों ने उससे बपतिस्‍मा न लेकर परमेश्‍वर की मनसा को अपने विषय में टाल दिया। “अतः मैं इस युग के लोगों की उपमा किस से दूँ कि वे किस के नाई हैं? “वे उन बालकों के नाई हैं जो बाजार में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं, ‘हम ने तुम्‍हारे लिये बाँसली बजाई, और तुम न नाचे, हम ने विलाप किया, और तुम न रोए!’ “क्‍योंकि यूहन्‍ना बपतिस्‍मा देनेवाला न रोटी खाता आया, न दाखरस पीता आया, और तुम कहते हो, उसमें दुष्‍टात्‍मा है। “मनुष्‍य का पुत्र खाता-पीता आया है; और तुम कहते हो, ‘देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्‍य, चुंगी लेनेवालों का और पापियों का मित्र।’ “पर ज्ञान अपनी सब सन्‍तानों से सच्‍चा ठहराया गया है।” फिर किसी फरीसी ने उससे विनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; अतः वह उस फरीसी के घर में जाकर भोजन करने बैठा। और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्‍त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई। और उसके पाँवो के पास, पीछे खड़ी होकर, रोती हुई, उसके पाँवो को आँसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पाँव बार-बार चूमकर उन पर इत्र मला। यह देखकर, वह फरीसी जिस ने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, “यदि यह भविष्‍यद्वक्‍ता होता तो जान जाता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्‍त्री है? क्‍योंकि वह तो पापिन है।” यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा, “हे शमौन, मुझे तुझ से कुछ कहना है।” वह बोला, “हे गुरू, कह।” “किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पाँच सौ, और दूसरा पचास दीनार देनदार था। “जब कि उनके पास वापस लौटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनो को क्षमा कर दिया। अतः उनमें से कौन उससे अधिक प्रेम रखेगा। शमौन ने उत्तर दिया, “मेरी समझ में वह, जिसका उसने अधिक छोड़ दिया।” उसने उससे कहा, “तू ने ठीक विचार किया है।” और उस स्‍त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा, “क्‍या तू इस स्‍त्री को देखता है? मैं तेरे घर में आया परन्‍तु तू ने मेरे पाँव धाने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पाँव आँसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा।” “तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूँ तब से इसने मेरे पाँवो का चूमना न छोड़ा। “तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इसने मेरे पाँवो पर इत्र मला है। “इसलिये मैं तुझ से कहता हूँ; कि इसके पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्‍योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिसका थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।” और उसने स्‍त्री से कहा, “तेरे पाप क्षमा हुए।” तब जो लोग उसके साथ भोजन करने बैठे थे, वे अपने-अपने मन में सोचने लगे, “यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है?” पर उसने स्‍त्री से कहा, “तेरे विश्‍वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।” इसके बाद वह नगर-नगर और गाँव-गाँव प्रचार करता हुआ, और परमेश्‍वर के राज्‍य का सुसमाचार सुनाता हुआ, फिरने लगा, और वे बारह उसके साथ थे, और कुछ स्त्रियाँ भी जो दुष्‍टात्‍माओं से और बीमारियों से छुड़ाई गई थीं, और वे यह हैं: मरियम जो मगदलीनी कहलाती थी, जिसमें से सात दुष्टात्माएँ निकली थीं, और हेरोदेस के भण्‍डारी खोजा की पत्‍नी योअन्‍ना और सूसन्‍नाह और बहुत सी और स्त्रियाँ: ये तो अपनी सम्‍पत्ति से उसकी सेवा करती थीं।। जब बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई, और नगर-नगर के लोग उसके पास चले आते थे, तो उसने दृष्‍टान्‍त में कहा: “एक बोने वाला बीज बोने निकला: बोते हुए कुछ मार्ग के किनारे गिरा, और रौंदा गया, और आकाश के पक्षियों ने उसे चुग लिया। “और कुछ चट्टान पर गिरा, और उपजा, परन्‍तु नमी न मिलने से सूख गया। “कुछ झाड़ियों के बीच में गिरा, और झाड़ियों ने साथ-साथ बढ़कर उसे दबा लिया। “और कुछ अच्‍छी भूमि पर गिरा, और उगकर सौ गुणा फल लाया।” यह कहकर उसने ऊँचे शब्‍द से कहा, “जिसके सुनने के कान हों वह सुन लें।” उसके चेलों ने उससे पूछा, “इस दृष्‍टान्‍त का अर्थ क्‍या है?” उसने कहा, “तुम को परमेश्‍वर के राज्‍य के भेदों की समझ दी गई है, पर औरों को दृष्‍टान्‍तों में सुनाया जाता है, इसलिये कि “वे देखते हुए भी न देखें, और सुनते हुए भी न समझें।” “दृष्‍टान्‍त का अर्थ यह है: बीज तो परमेश्‍वर का वचन है। “मार्ग के किनरे के वे हैं, जिन्होंने सुना; तब शैतान आकर उनके मन में से वचन उठा ले जाता है, कि कहीं ऐसा न हो कि वे विश्‍वास करके उद्धार पाएँ। “चट्टान पर के वे हैं, कि जब सुनते हैं, तो आनन्‍द से वचन को ग्रहण तो करते हैं, परन्‍तु जड़ न पकड़ने से वे थोड़ी देर तक विश्‍वास रखते हैं, और परीक्षा के समय बहक जाते हैं। “जो झाड़ियों में गिरा, यह वे हैं, जो सुनते हैं, पर आगे चलकर चिन्‍ता और धन और जीवन के सुख-विलास में फँस जाते हैं, और उन का फल नहीं पकता। “पर अच्‍छी भूमि में के वे हैं, जो वचन सुनकर भले और उत्तम मन में सम्‍भाले रहते हैं, और धीरज से फल लाते हैं। “कोई दीया जला कर बरतन से नहीं ढाँपता, और न खाट के नीचे रखता है, परन्‍तु दीवट पर रखता है, कि भीतर आनेवाले प्रकाश पाएँ। “कुछ छिपा नहीं, जो प्रगट न हो; और न कुछ गुप्‍त है, जो जाना न जाए, और प्रगट न हो। “इसलिये चौकस रहो, कि तुम किस रीति से सुनते हो? क्‍योंकि जिसके पास है, उसे दिया जाएगा; और जिसके पास नहीं है, उससे वह भी ले लिया जाएगा, जिसे वह अपना समझता है।” उसकी माता और उसके भाई पास आए, पर भीड़ के कारण उससे भेंट न कर सके। और उससे कहा गया, “तेरी माता और तेरे भाई बाहर खड़े हुए तुझ से मिलना चाहते हैं।” उसने उसके उत्तर में उनसे कहा, “मेरी माता और मेरे भाई ये ही है, जो परमेश्‍वर का वचन सुनते और मानते हैं।” फिर एक दिन वह और उसके चेले नाव पर चढ़े, और उसने उनसे कहा, “आओ, झील के पार चलें।” अतः उन्होंने नाव खोल दी। पर जब नाव चल रही थी, तो वह सो गया: और झील पर आँधी आई, और नाव पानी से भरने लगी और वे जोखिम में थे। तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा, “स्‍वामी! स्‍वामी! हम नाश हुए जाते हैं।” तब उसने उठकर आँधी को और पानी की लहरों को डाँटा और वे थम गए, और शान्त हो गया। और उसने उनसे कहा, “तुम्‍हारा विश्‍वास कहाँ था?” पर वे डर गए, और अचम्‍भित होकर आपस में कहने लगे, “यह कौन है, जो आँधी और पानी को भी आज्ञा देता है, और वे उसकी मानते हैं?” फिर वे गिरासेनियों के देश में पहुँचे, जो उस पार गलील के सामने है। जब वह किनारे पर उतरा, तो उस नगर का एक मनुष्‍य उसे मिला, जिसमें दुष्टात्माएँ थीं। और बहुत दिनों से न कपड़े पहनता था और न घर में रहता था वरन कब्रों में रहा करता था। वह यीशु को देखकर चिल्‍लाया, और उसके सामने गिरकर ऊँचे शब्‍द से कहा, “हे परम प्रधान परमेश्‍वर के पुत्र यीशु! मुझे तुझ से क्‍या काम? मैं तेरी विनती करता हूँ, मुझे पीड़ा न दे।” क्‍योंकि वह उस अशुद्ध आत्‍मा को उस मनुष्‍य में से निकलने की आज्ञा दे रहा था, इसलिये कि वह उस पर बार-बार प्रबल होती थी। और यद्यपि लोग उसे जंजीरों और बेड़ियों से बाँधते थे, तौभी वह बन्‍धनों को तोड़ डालता था, और दुष्‍टात्‍मा उसे जंगल में भगाए फिरती थी । यीशु ने उससे पूछा, “तेरा क्‍या नाम है?” उसने कहा, “सेना,” क्‍योंकि बहुत दुष्टात्माएँ उसमें समा गई थीं। और उन्होंने उससे विनती की, “हमें अथाह गड़हे में जाने की आज्ञा न दे।” वहाँ पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्‍ड चर रहा था, अतः उन्होंने उससे विनती की, “हमें उनमें समाने दे।” अतः उसने उन्‍हें जाने दिया। तब दुष्‍टात्‍माएँ उस मनुष्‍य से निकलकर सूअरों में समा गई और वह झुण्‍ड कड़ाड़े पर से झपटकर झील में जा गिरा और डूब मरा। चरवाहे यह जो हुआ था देखकर भागे, और नगर में, और गांवों में जाकर उसका समाचार कहा। और लोग यह जो हुआ था उसके देखने को निकले, और यीशु के पास आकर जिस मनुष्‍य से दुष्टात्माएँ निकली थीं, उसे यीशु के पाँवो के पास कपड़े पहने और सचेत बैठे हुए पाकर डर गए। और देखनेवालों ने उनको बताया, कि वह दुष्‍टात्‍मा का सताया हुआ मनुष्‍य किस प्रकार अच्‍छा हुआ। तब गिरासेनियों के आस-पास के सब लोगों ने यीशु से विनती की, कि हमारे यहाँ से चला जा; क्‍योंकि उन पर बड़ा भय छा गया था। अतः वह नाव पर चढ़कर लौट गया। जिस मनुष्‍य से दुष्‍टात्‍माऐं निकली थीं वह उससे विनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे, परन्‍तु यीशु ने उसे विदा करके कहा। “अपने घर में लौट जा और लोगों से कह दे, कि परमेश्‍वर ने तेरे लिये कैसे बड़े-बड़े काम किए हैं।” वह जाकर सारे नगर में प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े-बड़े काम किए।। जब यीशु लौट रहा था, तो लोग उससे आनन्‍द के साथ मिले; क्‍योंकि वे सब उसकी बाट जोह रहे थे। और देखो, याईर नाम एक मनुष्‍य जो आराधनालय का सरदार था, आया, और यीशु के पाँवो पर गिर के उससे विनती करने लगा, “मेरे घर चल।” क्‍योंकि उसके बारह वर्ष की एकलौती बेटी थी, और वह मरने पर थी। जब वह जा रहा था, तब लोग उस पर गिरे पड़ते थे। और एक स्‍त्री ने जिस को बारह वर्ष से लोहू बहने का रोग था, और जो अपनी सारी जिविका वैद्यों के पीछे व्‍यय कर चुकी थी और तौभी किसी के हाथ से चंगी न हो सकी थी, पीछे से आकर उसके वस्‍त्र के आँचल को छूआ, और तुरन्‍त उसका लोहू बहना थम गया। इस पर यीशु ने कहा, “मुझे किस ने छूआ?” जब सब मुकरने लगे, तो पतरस और उसके साथियों ने कहा, “हे स्‍वामी, तुझे तो भीड़ दबा रही है और तुझ पर गिरी पड़ती है।” परन्‍तु यीशु ने कहा, “किसी ने मुझे छूआ है क्‍योंकि मैं ने जान लिया है कि मुझ में से सामर्थ्य निकली है।” जब स्‍त्री ने देखा, कि मैं छिप नहीं सकती, तब कांपती हुई आई, और उसके पाँवो पर गिरकर सब लोगों के सामने बताया, कि मैंने किस कारण से तुझे छूआ, और कैसे तुरन्‍त चंगी हो गई। उसने उससे कहा, “बेटी तेरे विश्‍वास ने तुझे चंगा किया है, कुशल से चली जा।” वह यह कह ही रहा था, कि किसी ने आराधनालय के सरदार के यहाँ से आकर कहा, “तेरी बेटी मर गई: गुरु को दु:ख न दे।” यीशु ने सुनकर उसे उत्तर दिया, “मत डर; केवल विश्‍वास रख; तो वह बच जाएगी।” घर में आकर उसने पतरस, और यूहन्‍ना, और याकूब, और लड़की के माता-पिता को छोड़ और किसी को अपने साथ भीतर आने न दिया। और सब उसके लिये रो पीट रहे थे, परन्‍तु उसने कहा, “रोओ मत; वह मरी नहीं परन्‍तु सो रही है।” वे यह जानकर, कि मर गई है, उसकी हँसी करने लगे। परन्‍तु उसने उसका हाथ पकड़ा, और पुकारकर कहा, “हे लकड़ी उठ!” तब उसके प्राण लौट आए और वह तुरन्‍त उठी; फिर उसने आज्ञा दी, कि उसे कुछ खाने को दिया जाए। उसके माता-पिता चकित हुए, परन्‍तु उसने उन्‍हें चेतावनी दिया, कि यह जो हुआ है, किसी से न कहना। फिर उसने बारहों को बुलाकर उन्‍हें सब दुष्‍टात्‍माओं और बिमारियों को दूर करने की सामर्थ्य और अधिकार दिया। और उन्‍हें परमेश्‍वर के राज्‍य का प्रचार करने, और बिमारों को अच्‍छा करने के लिये भेजा। और उसने उनसे कहा, “मार्ग के लिये कुछ न लेना: न तो लाठी, न झोली, न रोटी, न रूपये और न दो-दो कुरते। “और जिस किसी घर में तुम उतरो, वहीं रहो; और वहीं से विदा हो। “जो कोई तुम्‍हें ग्रहण न करेगा उस नगर से निकलते हुए अपने पाँवो की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।” अतः वे निकलकर गाँव-गाँव सुसमाचार सुनाते, और हर कहीं लोगों को चंगा करते हुए फिरते रहे। और देश की चौथाई का राजा हेरोदेस यह सब सुनकर घबरा गया, क्‍योंकि कितनों ने कहा, कि यूहन्‍ना मरे हुओं में से जी उठा है। और कितनों ने यह, कि एलिय्‍याह दिखाई दिया है: औरों ने यह, कि पुराने भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से कोई जी उठा है। परन्‍तु हेरोदेस ने कहा, “युहन्‍ना का तो मैं ने सिर कटवाया अब यह कौन है, जिसके विषय में ऐसी बातें सुनता हूँ?” और उसने उसे देखने की इच्‍छा की।। फिर प्रेरितों ने लौटकर जो कुछ उन्होंने किया था, उसको बता दिया, और वह उन्‍हें अलग करके बैतसैदा नामक एक नगर को ले गया। यह जानकर भीड़ उसके पीछे हो ली, और वह आनन्‍द के साथ उनसे मिला, और उनसे परमेश्‍वर के राज्‍य की बातें करने लगा, और जो चंगे होना चाहते थे, उन्‍हें चंगा किया। जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने आकर उससे कहा, “भीड़ को विदा कर, कि चारों ओर के गाँवों और बस्‍तियों में जाकर अपने लिए रहने को स्थान, और भोजन का उपाय करें, क्‍योंकि हम यहाँ सुनसान जगह में हैं।” उसने उनसे कहा, “तुम ही उन्‍हें खाने को दो।” उन्होंने कहा, “हमारे पास पाँच रोटियाँ और दो मछली को छोड़ और कुछ नहीं; परन्‍तु हाँ, यदि हम जाकर इन सब लोगों के लिये भोजन मोल लें, तो हो सकता है।” (क्योंकि वहाँ पर लगभग पाँच हजार पुरूष थे।) और उसने अपने चेलों से कहा, “उन्‍हें पचास-पचास करके पाँति में बैठा दो।” उन्होंने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया। तब उसने वे पाँच रोटियाँ और दो मछलीयाँ लीं, और स्‍वर्ग की और देखकर धन्‍यवाद किया, और तोड़-तोड़कर चेलों को देता गया कि लोगों को परोसें। अतः सब खाकर तृप्‍त हुए, और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरीयाँ भरकर उठाई। जब वह एकान्‍त में प्रार्थना कर रहा था, और चेले उसके साथ थे, तो उसने उनसे पूछा, “लोग मुझे क्‍या कहते हैं?” उन्होंने उत्तर दिया, “युहन्‍ना बपतिस्‍मा देनेवाला, और कोई कोई एलिय्‍याह, और कोई यह कि पुराने भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से कोई जी उठा है।” उसने उनसे पूछा, “परन्‍तु तुम मुझे क्‍या कहते हो?” पतरस ने उत्तर दिया, “परमेश्‍वर का मसीह।” तब उसने उन्‍हें चेतावनी देकर कहा, “यह किसी से न कहना।” और उसने कहा, “मनुष्‍य के पुत्र के लिये अवश्‍य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरनिए और महायाजक और शास्‍त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे।” उसने सब से कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्‍कार करे और प्रति-दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। “क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्‍तु जो कोई मेरे लिय अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। “यदि मनुष्‍य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपना प्राण खो दे, या उसकी हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा? “जो कोई मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा; मनुष्‍य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्‍वर्ग दूतों की, महिमा सहित आएगा, तो उससे लजाएगा। “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो यहाँ खड़े हैं, उनमें से कोई कोई ऐसे हैं कि जब तक परमेश्‍वर का राज्‍य न देख लें, तब तक मृत्‍यु का स्‍वाद न चखेंगे।” इन बातों के कोई आठ दिन बाद वह पतरस, और यूहन्‍ना, और याकूब को साथ लेकर प्रार्थना करने के लिये पहाड़ पर गया। जब वह प्रार्थना कर ही रहा था, तो उसके चेहरे का रूप बदल गया, और उसका वस्‍त्र श्‍वेत होकर चमकने लगा। और देखो, मूसा और एलिय्‍याह, ये दो पुरूष उसके साथ बातें कर रहे थे। ये महिमा सहित दिखाई दिए, और उसके मरने की चर्चा कर रहे थे, जो यरूशलेम में होनवाला था। पतरस और उसके साथी नींद से भरे थे, और जब अच्‍छी तरह सचेत हुए, तो उसकी महिमा; और उन दो पुरूषों को, जो उसके साथ खड़े थे, देखा। जब वे उसके पास से जाने लगे, तो पतरस ने यीशु से कहा, “हे स्‍वामी, हमारा यहाँ रहना भला है: अतः हम तीन मण्‍डप बनाएँ, एक तेरे लिये, एक मूसा के लिये, और एक एलिय्‍याह के लिये।” वह जानता न था, कि क्‍या कह रहा है। वह यह कह ही रहा था, कि एक बादल ने आकर उन्‍हें छा लिया, और जब वे उस बादल से घिरने लगे, तो डर गए। और उस बादल में से यह शब्‍द निकला, “यह मेरा पुत्र और मेरा चुना हुआ है, इस की सुनो।” यह शब्‍द होते ही यीशु अकेला पाया गया; और वे चुप रहे, और जो कुछ देखा था, उसकी कोई बात उन दिनों में किसी से न कही। और दूसरे दिन जब वे पहाड़ से उतरे, तो एक बड़ी भीड़ उससे आ मिली। और देखो, भीड़ में से एक मनुष्‍य ने चिल्‍ला कर कहा, “हे गुरू, मैं तुझ से विनती करता हूँ, कि मेरे पुत्र पर कृपा दृष्‍टि कर; क्‍योंकि वह मेरा एकलौता है। और देख, एक दुष्‍टात्‍मा उसे पकड़ती है, और वह एकाएक चिल्‍ला उठता है; और वह उसे ऐसा मरोड़ती है, कि वह मुँह में फेन भर लाता है; और उसे कुचलकर कठिनाई से छोड़ती है। और मै ने तेरे चेलों से विनती की, कि उसे निकालें; परन्‍तु वे न निकाल सके।” यीशु ने उत्तर दिया, “हे अविश्‍वासी और हठिले लोगो, मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा, और तुम्‍हारी सहूँगा? अपने पुत्र को यहाँ ले आ।” वह आ ही रहा था कि दुष्‍टात्‍मा ने उसे पटककर मरोड़ा, परन्‍तु यीशु ने अशुद्ध आत्‍मा को डाँटा और लड़के को अच्‍छा करके उसके पिता को सौंप दिया। तब सब लोग परमेश्‍वर के महासामर्थ्य से चकित हुए। परन्‍तु जब सब लोग उन सब कामों से जो वह करता था, अचम्‍भा कर रहे थे, तो उसने अपने चेलों से कहा, “ये बातें तुम्‍हारे कानों में पड़ी रहें, क्‍योंकि मनुष्‍य का पु़त्र मनुष्‍यों के हाथ में पकड़वाया जाने को है।” परन्‍तु वे इस बात को न समझते थे, और यह उनसे छिपी रही; कि वे उसे जानने न पाएँ, और वे इस बात के विषय में उससे पूछने से डरते थे। फिर उनमें यह विवाद होने लगा, कि हम में से बड़ा कौन है? पर यीशु ने उनके मन का विचार जान लिया, और एक बालक को लेकर अपने पास खड़ा किया, और उनसे कहा, “जो कोई मेरे नाम से इस बालक को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है, क्‍योंकि जो तुम में सब से छोटे से छोटा है, वही बड़ा है। तब युहन्‍ना ने कहा, “हे स्‍वामी, हम ने एक मनुष्‍य को तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को निकालते देखा, और हम ने उसे मना किया, क्‍योंकि वह हमारे साथ होकर तेरे पीछे नहीं हो लेता।” यीशु ने उससे कहा, “उसे मना मत करो; क्‍योंकि जो तुम्‍हारे विरोध में नहीं, वह तुम्‍हारी ओर है।” जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, तो उसने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया। और उसने अपने आगे दूत भेजे: वे सामरियों के एक गाँव में गए, कि उसके लिये जगह तैयार करें। परन्‍तु उन लोगों ने उसे उतरने न दिया, क्‍योंकि वह यरूशलेम को जा रहा था। यह देखकर उसके चेले याकूब और यूहन्‍ना ने कहा, “हे प्रभु; क्‍या तू चाहता है, कि हम आज्ञा दें, कि आकाश से आग गिरकर उन्‍हें भस्‍म कर दे?” परन्‍तु उसने फिरकर उन्‍हें डाँटा [और कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम कैसी आत्‍मा के हो। क्‍योंकि मनुष्‍य का पुत्र लोगों के प्राणों को नाश करने नहीं वरन बचाने के लिये आया है।”] और वे किसी और गाँव में चले गए। जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी ने उससे कहा, “जहाँ-जहाँ तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूँगा।” यीशु ने उससे कहा, “लोमडि़यों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्‍य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं।” उसने दूसरे से कहा, “मेरे पीछे हो ले।” उसने कहा, “हे प्रभु, मुझे पहले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूँ।” उसने उससे कहा, “मरे हुओं को अपने मुर्दे गाड़ने दे, पर तू जाकर परमेश्‍वर के राज्‍य की कथा सुना।” एक और ने भी कहा, “हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूँगा; पर पहले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊँ।” यीशु ने उससे कहा, “जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्‍वर के राज्‍य के योग्‍य नहीं।” और इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और मनुष्‍य नियुक्‍त किए और जिस-जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था, वहाँ उन्‍हें दो-दो करके अपने आगे भेजा। और उसने उनसे कहा, “पक्‍के खेत बहुत हैं; परन्‍तु मजदूर थोड़े हैं: इसलिये खेत के स्‍वामी से विनती करो, कि वह अपने खेत काटने को मजदूर भेज दे। “जाओ; देखों मैं तुम्‍हें भेड़ों के नाई भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ। “इसलिये न बटुआ, न झोली, न जूते लो; और न मार्ग में किसी को नमस्‍कार करो। “जिस किसी घर में जाओ, पहले कहो, ‘इस घर पर कल्‍याण हो।’ “यदि वहाँ कोई कल्‍याण के योग्‍य होगा; तो तुम्‍हारा कल्‍याण उस पर ठहरेगा, नहीं तो तुम्‍हारे पास लौट आएगा। “उसी घर में रहो, और जो कुछ उनसे मिले, वही खाओ-पीओ, क्‍योंकि मजदूर को अपनी मजदूरी मिलनी चाहिए; घर-घर न फिरना। “और जिस नगर में जाओ, और वहाँ के लोग तुम्‍हें उतारें, तो जो कुछ तुम्‍हारे सामने रखा जाए वही खाओ। “वहाँ के बीमारों को चंगा करो: और उनसे कहो, ‘परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारे निकट आ पहुँचा है।’ “परन्‍तु जिस नगर में जाओ, और वहाँ के लोग तुम्‍हें ग्रहण न करें, तो उसके बाजारों में जाकर कहो, ‘तुम्‍हारे नगर की धूल भी, जो हमारे पाँवो में लगी है, हम तुम्‍हारे सामने झाड़ देते हैं, तौभी यह जान लो, कि परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारे निकट आ पहुँचा है।’ “मैं तुम से कहता हूँ, कि उस दिन उस नगर की दशा से सदोम की दशा सहने योग्‍य होगी। “हाय खुराजीन! हाय बैतसैदा! जो सामर्थ्य के काम तुम में किए गए, यदि वे सूर और सैदा में किए जाते, तो टाट ओढ़कर और राख में बैठकर वे कब के मन फिराते। “परन्‍तु न्‍याय के दिन तुम्‍हरी दशा से सूर और सैदा की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी। “और हे कफरनहूम, क्‍या तू स्‍वर्ग तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे जाएगा। “जो तुम्‍हारी सुनता है, वह मेरी सुनता है, और जो तुम्‍हें तुच्‍छ जानता है, वह मुझे तुच्‍छ जानता है; और जो मुझे तुच्‍छ जानता है, वह मेरे भेजनेवाले को तुच्‍छ जानता है।” वे सत्तर आनन्‍द से फिर आकर कहने लगे, “हे प्रभु, तेरे नाम से दुष्‍टात्‍मा भी हमारे वश में है।” उसने उनसे कहा, “मैं शैतान को बिजली के नाई स्‍वर्ग से गिरा हुआ देख रहा था।” “देखो, मैने तुम्‍हे साँपों और बिच्‍छुओं को रौंदने का, और शत्रु की सारी सामर्थ्य पर अधिकार दिया है; और किसी वस्‍तु से तुम्‍हें कुछ हानि न होगी। “तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्‍मा तुम्‍हारे वश में हैं, परन्‍तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्‍हारे नाम स्‍वर्ग पर लिखे हैं।” उसी घड़ी वह पवित्र आत्‍मा में होकर आनन्‍द से भर गया, और कहा, “हे पिता, स्‍वर्ग और पृथ्‍वी के प्रभु, मैं तेरा धन्‍यवाद करता हूँ, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया: हाँ, हे पिता, क्‍योंकि तुझे यही अच्‍छा लगा। “मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंप दिया है; और कोई नहीं जानता कि पुत्र कौन है केवल पिता और पिता कौन है यह भी कोई नहीं जानता, केवल पुत्र के और वह जिस पर पुत्र उसे प्रकट करना चाहे।” और चेलों की ओर मुड़कर अकेले में कहा, “धन्‍य हैं वे आँखे, जो ये बाते जो तुम देखते हो देखती हैं, क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि बहुत से भविष्‍यद्वक्‍ताओं और राजाओं ने चाहा, कि जो बातें तुम देखते हो देखें; पर न देखीं और जो बातें तुम सुनते हो सुनें, पर न सुनीं।” और देखो, एक व्‍यवस्‍थापक उठा; और यह कहकर, उसकी परीक्षा करने लगा, “हे गुरू, अनन्‍त जीवन का वारिस होने के लिये मैं क्‍या करूँ?” उसने उससे कहा, “व्‍यवस्‍था में क्‍या लिखा है? तू कैसे पढ़ता है?” उसने उत्तर दिया, “तू प्रभु अपने परमेश्‍वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने नाई प्रेम रख।” उसने उससे कहा, “तू ने ठीक उत्तर दिया, यही कर तो तू जीवित रहेगा।” परन्‍तु उसने अपने आप को धर्मी ठहराने की इच्‍छा से यीशु से पूछा, “तो मेरा पड़ोसी कौन है?” यीशु ने उत्तर दिया “एक मनुष्‍य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीटकर उसे अधमरा छोड़कर चले गए। “और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था, परन्‍तु उसे देख कर कतराकर चला गया। “इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख कर कतराकर चला गया। “परन्‍तु एक सामरी यात्री वहाँ आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया। और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियाँ बाँधी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उसकी सेवा टहल की। “दूसरे दिन उसने दो दिनार निकालकर सराय के मालिक को दिए, और कहा, ‘इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे दे दूँगा।’ “अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?” उसने कहा, “वही जिस ने उस पर तरस खाया।” यीशु ने उससे कहा, “जा, तू भी ऐसा ही कर।” फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गाँव में गया, और मार्था नाम एक स्‍त्री ने उसे अपने घर में उतारा। और मरियम नामक उसकी एक बहन थी; वह प्रभु के पाँवो के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। परन्तु मार्था सेवा करते-करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी, “हे प्रभु, क्‍या तुझे कुछ भी चिन्ता नहीं कि मेरी बहन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है?” इसलिए उससे कह, मेरी सहायता करे।” प्रभु ने उसे उत्तर दिया, “मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्‍तु एक बात अवश्‍य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उससे छीना न जाएगा।” फिर वह किसी जगह प्रार्थना कर रहा था। और जब वह प्रार्थना कर चुका, तो उसके चेलों में से एक ने उससे कहा, “हे प्रभु, जैसे यूहन्‍ना ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखलाया वैसे ही हमें भी तू सिखा दे।” उसने उनसे कहा, “जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो: ‘हे पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्‍य आए। ‘हमारी दिन भर की रोटी हर दिन हमें दिया कर। ‘और हमारे पापों को क्षमा कर, क्‍योंकि हम भी अपने हर एक अपराधी को क्षमा करते हैं, और हमें परीक्षा में न ला’।” और उसने उनसे कहा, “तुम में से कौन है कि उसका एक मित्र हो, और वह आधी रात को उसके पास जाकर उससे कहे, कि हे मित्र; मुझे तीन रोटियाँ दे। क्‍योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है। और वह भीतर से उत्तर देता, कि मुझे दु:ख न दे; अब तो द्वार बन्‍द है, और मेरे बालक मेरे पास बिछौने पर हैं, इसलिये मैं उठकर तुझे दे नहीं सकता? “मैं तुम से कहता हूँ, यदि उसका मित्र होने पर भी उसे उठकर न दे, तौभी उसके लज्‍जा छोड़कर माँगने के कारण उसे जितनी आवश्‍यकता हो उतनी उठकर देगा। “और मैं तुम से कहता हूँ; कि माँगो, तो तुम्‍हें दिया जाएगा; ढूँढो तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्‍हारे लिये खोला जाएगा। “क्‍योंकि जो कोई माँगता है, उसे मिलता है; और जो ढूँढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा। “तुम में से ऐसा कौन पिता होगा, कि जब उसका पुत्र रोटी माँगे, तो उसे पत्‍थर दे: या मछली माँगे, तो मछली के बदले उसे साँप दे? “या अण्‍डा माँगे तो उसे बिच्‍छू दे? “अतः जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्‍छी वस्‍तुएँ देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने माँगनेवालों को पवित्र आत्‍मा क्‍यों न देगा।” फिर उसने एक गूँगी दुष्‍टात्‍मा को निकाला; जब दुष्‍टात्‍मा निकल गई, तो गूँगा बोलने लगा; और लोगों ने अचम्‍भा किया। परन्‍तु उनमें से कितनों ने कहा, “यह तो बालजबूल नामक दुष्‍टात्‍माओं के प्रधान की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता है।” औरों ने उसकी परीक्षा करने के लिये उससे आकाश का एक चिन्‍ह माँगा। परन्‍तु उसने, उनके मन की बातें जानकर, उनसे कहा, “जिस-जिस राज्‍य में फूट होती है, वह राज्‍य उजड़ जाता है; और जिस घर में फूट होती है, वह नाश हो जाता है। “और यदि शैतान अपना ही विरोधी हो जाए, तो उसका राज्‍य कैसे बना रहेगा? क्‍योंकि तुम मेरे विषय में तो कहते हो, कि यह शैतान की सहायता से दुष्‍टात्‍मा निकालता है। “भला यदि मैं शैतान की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता हूँ, तो तुम्‍हारी सन्‍तान किस की सहायता से निकालते हैं? इसलिये वे ही तुम्‍हारा न्‍याय चुकाएँगे। “परन्‍तु यदि मैं परमेश्‍वर की सामर्थ्य से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता हूँ, तो परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारे पास आ पहुँचा। “जब बलवन्‍त मनुष्‍य हथियार बाँधे हुए अपने घर की रखवाली करता है, तो उसकी संपत्ति बची रहती है। “पर जब उससे बढ़कर कोई और बलवन्‍त चढ़ाई करके उसे जीत लेता है, तो उसके वे हथियार जिन पर उसका भरोसा था, छीन लेता है और उसकी संपत्ति लूटकर बाँट देता है। “जो मेरे साथ नहीं वह मेरे विरोध में है, और जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिखेरता है। “जब अशुद्ध आत्‍मा मनुष्‍य में से निकल जाती है तो सूखी जगहों में विश्राम ढूँढ़ती फिरती है, और जब नहीं पाती तो कहती है, कि मैं अपने उसी घर में जहाँ से निकली थी लौट जाऊँगी। “और आकर उसे झाड़ा-बुहारा और सजा-सजाया पाती है। “तब वह आकर अपने से और बुरी सात आत्‍माओं को अपने साथ ले आती है, और वे उसमें समाकर वास करती हैं, और उस मनुष्‍य की पिछली दशा पहले से भी बुरी हो जाती है।” जब वह ये बातें कह ही रहा था तो भीड़ में से किसी स्‍त्री ने ऊँचे शब्‍द से कहा, “धन्‍य वह गर्भ जिसमें तू रहा और वे स्‍तन, जो तू ने चूसे।” उसने कहा, “हाँ; परन्‍तु धन्‍य वे हैं, जो परमेश्‍वर का वचन सुनते और मानते हैं।” जब बड़ी भीड़ इकट्ठी होती जाती थी तो वह कहने लगा, “इस युग के लोग बुरे हैं; वे चिन्‍ह ढूँढ़ते हैं; पर योना के चिन्‍ह को छोड़ कोई और चिन्‍ह उन्‍हें न दिया जाएगा। “जैसा योना नीनवे के लोगों के लिये चिन्‍ह ठहरा, वैसा ही मनुष्‍य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा। “दक्षिण की रानी न्‍याय के दिन इस समय के मनुष्‍यों के साथ उठकर, उन्‍हें दोषी ठहराएगी, क्‍योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने को पृथ्‍वी की छोर से आई, और देखो यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है। “नीनवे के लोग न्‍याय के दिन इस समय के लोगों के साथ खड़े होकर, उन्‍हें दोषी ठहराएँगे; क्‍योंकि उन्होंने योना का प्रचार सुनकर मन फिराया और देखो, यहाँ वह है, जो योना से भी बड़ा है। “कोई मनुष्‍य दीया बार के तलघर में, या पैमाने के नीचे नहीं रखता, परन्‍तु दीवट पर रखता है कि भीतर आनेवाले उजियाला पाएँ। “तेरे शरीर का दीया तेरी आँख है, इसलिये जब तेरी आँख निर्मल है, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला है; परन्‍तु जब वह बुरी है, तो तेरा शरीर भी अन्‍धेरा है। “इसलिये चौकस रहना, कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्‍धेरा न हो जाए। “इसलिये यदि तेरा सारा शरीर उजियाला हो, और उसका कोई भाग अन्‍धेरा न रहे, तो सब का सब ऐसा उजियाला होगा, जैसा उस समय होता है, जब दीया अपनी चमक से तुझे उजाला देता है।” जब वह बातें कर रहा था, तो किसी फरीसी ने उससे विनती की, कि मेरे यहाँ भोजन कर; और वह भीतर जाकर भोजन करने बैठा। फरीसी ने यह देखकर अचम्‍भा किया कि उसने भोजन करने से पहले स्‍नान नहीं किया। प्रभु ने उससे कहा, “हे फरीसियों, तुम कटोरे और थाली को ऊपर-ऊपर तो माँजते हो, परन्‍तु तुम्‍हारे भीतर अन्‍धेर और दुष्‍टता भरी है। “हे निर्बुद्धियों, जिस ने बाहर का भाग बनाया, क्‍या उसने भीतर का भाग नहीं बनाया? “परन्‍तु हाँ, भीतरवाली वस्‍तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्‍हारे लिये शुद्ध हो जाएगा।। “पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भाँति के साग-पात का दसवाँ अंश देते हो, परन्‍तु न्‍याय को और परमेश्‍वर के प्रेम को टाल देते हो; चाहिए तो था कि इन्‍हें भी करते रहते और उन्‍हें भी न छोड़ते। “हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम आराधनालयों में मुख्‍य-मुख्‍य आसन और बाजारों में नमस्‍कार चाहते हो। “हाय तुम पर! क्‍योंकि तुम उन छिपी कब्रों के नाई हो, जिन पर लोग चलते हैं, परन्‍तु नहीं जानते।” तब एक व्‍यवस्‍थापक ने उसको उत्तर दिया, “हे गुरू, इन बातों के कहने से तू हमारी निन्‍दा करता है।” उसने कहा, “हे व्‍यवस्‍थापकों, तुम पर भी हाय! तुम ऐसे बोझ जिनको उठाना कठिन है, मनुष्‍यों पर लादते हो परन्‍तु तुम आप उन बोझों को अपनी एक ऊँगली से भी नहीं छूते। “हाय तुम पर! तुम उन भविष्‍यद्वक्‍तओं की कब्रें बनाते हो, जिन्‍हें तुम्‍हारे बाप-दादों ने मार डाला था। “अतः तुम गवाह हो, और अपने बाप-दादों के कामों में सम्‍मत हो; क्‍योंकि उन्होंने तो उन्‍हें मार डाला और तुम उनकी कब्रें बनाते हो। “इसलिये परमेश्‍वर की बुद्धि ने भी कहा है, कि मैं उनके पास भविष्‍यद्वक्‍ताओं और प्रेरितों को भेजूँगी, और वे उनमें से कितनों को मार डालेंगे, और कितनों को सताएँगे। ताकि जितने भविष्‍यद्वक्‍ताओं का लोहू जगत की उत्‍पत्ति से बहाया गया है, सब का लेखा, इस युग के लोगों से लिया जाए, हाबील की हत्‍या से लेकर जकरयाह की हत्‍या तक जो वेदी और मन्‍दिर के बीच में घात किया गया: मैं तुम से सच कहता हूँ; उसका लेखा इसी समय के लोगों से लिया जाएगा। “हाय तुम व्‍यवस्‍थापकों पर! कि तुम ने ज्ञान की कुंजी ले तो ली, परन्‍तु तुम ने आपही प्रवेश नहीं किया, और प्रवेश करनेवालों को भी रोक दिया।” जब वह वहाँ से निकला, तो शास्‍त्री और फरीसी बहुत पीछे पड़ गए और छेड़ने लगे, कि वह बहुत सी बातों की चर्चा करे, और उसकी घात में लगे रहे, कि उसके मुँह की कोई बात पकड़ें। इतने में जब हजारों की भीड़ लग गई, यहाँ तक कि एक दूसरे पर गिरे पड़ते थे, तो वह सब से पहले अपने चेलों से कहने लगा, “फरीसियों के कपटरूपी खमीर से चौकस रहना। “कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा। “इसलिये जो कुछ तुम ने अन्‍धेरे में कहा है, वह उजाले में सुना जाएगा; और जो तुम ने भीतर के कमरों में कानों कान कहा है, वह छतों पर प्रचार किया जाएगा। “परन्‍तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूँ, कि जो शरीर को घात करते हैं परन्‍तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते उनसे मत डरो। “मैं तुम्‍हें चेतावनी देता हूँ कि तुम्‍हें किस से डरना चाहिए, घात करने के बाद जिसको नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो; वरन मैं तुम से कहता हूँ उसी से डरो। “क्‍या दो पैसे की पाँच गौरैयाँ नहीं बिकती? तौभी परमेश्‍वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता। “वरन तुम्‍हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, अतः डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। “मैं तुम से कहता हूँ जो कोई मनुष्‍यों के सामने मुझे मान लेगा उसे मनुष्‍य का पुत्र भी परमेश्‍वर के स्‍वर्गदूतों के सामने मान लेगा। परन्‍तु जो मनुष्‍यों के सामने मुझे इन्‍कार करे उसका परमेश्‍वर के स्‍वर्गदूतों के सामने इन्‍कार किया जाएगा। “जो कोई मनुष्‍य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहे, उसका वह अपराध क्षमा किया जाएगा। परन्तु जो पवित्र आत्मा की निन्दा करें, उसका अपराध क्षमा नहीं किया जायेगा। “जब लोग तुम्‍हें सभाओं और हाकिमों और अधिकारियों के सामने ले जाएँ, तो चिन्‍ता न करना कि हम किस रीति से या क्‍या उत्तर दें, या क्‍या कहें। क्‍योंकि पवित्र आत्‍मा उसी घड़ी तुम्‍हें सिखा देगा, कि क्‍या कहना चाहिए।” फिर भीड़ में से एक ने उससे कहा, “हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बाँट दे।” उसने उससे कहा, “हे मनुष्‍य, किस ने मुझे तुम्‍हारा न्‍यायी या बाँटनेवाला नियुक्‍त किया है?” और उसने उनसे कहा, “चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो; क्‍योंकि किसी का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता।” उसने उनसे एक दृष्‍टान्‍त कहा, “किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। “तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्‍या करूँ, क्‍योंकि मेरे यहाँ जगह नहीं, जहाँ अपनी उपज इत्‍यादि रखूँ। “और उसने कहा, ‘मैं यह करूँगा: मैं अपनी बखारियाँ तोड़ कर उनसे बड़ी बनाऊँगा; और वहाँ अपना सब अन्‍न और संपत्ति रखूँगा; ‘और अपने प्राण से कहूँगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह।’ “परन्‍तु परमेश्‍वर ने उससे कहा, ‘हे मूर्ख! इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा; तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किसका होगा?’ “ऐसा ही वह मनुष्‍य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्‍तु परमेश्‍वर की दृष्‍टि में धनी नहीं।” फिर उसने अपने चेलों से कहा, “इसलिये मैं तुम से कहता हूँ, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्‍या खाएँगे; न अपने शरीर की कि क्‍या पहनेंगे। “क्‍योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है। “कौवों पर ध्‍यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उनके भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्‍वर उन्‍हें पालता है। तुम्‍हारा मूल्‍य पक्षियों से कहीं अधिक है “तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्‍था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? “इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो? “सोसनों के पेड़ों पर ध्‍यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं; तौभी मैं तुम से कहता हूँ, कि सुलैमान भी अपने सारे वैभव में, उनमें से किसी एक के नाई वस्‍त्र पहने हुए न था। “इसलिये यदि परमेश्‍वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहनाता है; तो हे अल्‍प विश्‍वासियों, वह तुम्‍हें क्‍यों न पहनाएगा? “और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्‍या खाएँगे और क्‍या पीएँगे, और न सन्‍देह करो। “क्‍योंकि संसार की जातियाँ इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्‍हारा पिता जानता है, कि तुम्‍हें इन वस्‍तुओं की आवश्‍यकता है। “परन्‍तु उसके राज्‍य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुएँ भी तुम्‍हें मिल जाएँगी। “हे छोटे झुण्‍ड, मत डर; क्‍योंकि तुम्‍हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्‍हें राज्‍य दे। “अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात् स्‍वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिसके निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता। “क्‍योंकि जहाँ तुम्‍हारा धन है, वहाँ तुम्‍हारा मन भी लगा रहेगा। “तुम्‍हारी कमरें बन्‍धी रहें, और तुम्‍हारे दीये जलते रहें। “और तुम उन मनुष्‍यों के नाई बनो, जो अपने स्‍वामी की बाट देख रहे हों, कि वह ब्‍याह से कब लौटेगा; कि जब वह आकर द्वार खटखटाएँ तो तुरन्‍त उसके लिए खोल दें। “धन्‍य हैं वे दास, जिन्‍हें स्‍वामी आकर जागते पाए; मैं तुम से सच कहता हूँ, कि वह कमर बान्‍ध कर उन्‍हें भोजन करने को बैठाएगा, और पास आकर उनकी सेवा करेगा। “यदि वह रात के दूसरे पहर या तीसरे पहर में आकर उन्‍हें जागते पाए, तो वे दास धन्‍य हैं। “परन्‍तु तुम यह जान रखो, कि यदि घर का स्‍वामी जानता, कि चोर किस घड़ी आएगा, तो जागता रहता, और अपने घर में सेंध लगने न देता। “तुम भी तैयार रहो; क्‍योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उस घड़ी मनुष्‍य का पुत्र आ जायेगा। तब पतरस ने कहा, “हे प्रभु, क्‍या यह दृष्‍टान्‍त तू हम ही से या सब से कहता है।” प्रभु ने कहा, “वह विश्‍वास योग्‍य और बुद्धिमान भण्‍डारी कौन है, जिसका स्‍वामी उसे नौकर चाकरों पर सरदार ठहराए कि उन्‍हें समय पर भोजन सामग्री दे। “धन्‍य है वह दास, जिसे उसका स्‍वामी आकर ऐसा ही करते पाए। “मैं तुम से सच कहता हूँ; वह उसे अपनी सब संपत्ति पर अधिकारी ठहराएगा। “परन्‍तु यदि वह दास सोचने लगे, कि मेरा स्‍वामी आने में देर कर रहा है, और दासों और दासियों को मारने-पीटने और खाने-पीने और पियक्‍कड़ होने लगे। तो उस दास का स्‍वामी ऐसे दिन कि वह उसकी बाट जोहता न रहे, और ऐसी घड़ी जिसे वह जानता न हो आएगा, और उसे भारी ताड़ना देकर उसका भाग अविश्‍वासियों के साथ ठहराएगा। “और वह दास जो अपने स्‍वामी की इच्‍छा जानता था, और तैयार न रहा और न उसकी इच्‍छा के अनुसार चला, बहुत मार खाएगा। परन्‍तु जो नहीं जानकर मार खाने के योग्‍य काम करे वह थोड़ी मार खाएगा, इसलिये जिसे बहुत दिया गया है, उससे बहुत माँगा जाएगा; और जिसे बहुत सौंपा गया है, उससे बहुत लिया जाएगा। “मैं पृथ्‍वी पर आग लगाने आया हूँ; और क्‍या चाहता हूँ केवल यह कि अभी सुलग जाती! “मुझे तो एक बपतिस्‍मा लेना है; और जब तक वह न हो ले तब तक मैं कैसी व्यथा में रहूँगा! “क्‍या तुम समझते हो कि मैं पृथ्‍वी पर मिलाप कराने आया हूँ? मैं कहता हूँ; नहीं, वरन अलग कराने आया हूँ। क्‍योंकि अब से एक घर में पाँच जन आपस में विरोध रखेंगे, तीन दो से दो तीन से। “पिता पुत्र से, और पुत्र पिता से विरोध रखेगा; माँ बेटी से, और बेटी माँ से, सास बहू से, और बहू सास से विरोध रखेगी।” और उसने भीड़ से भी कहा, “जब बादल को पश्चिम से उठते देखते हो, तो तुरन्‍त कहते हो, कि वर्षा होगी; और ऐसा ही होता है। “और जब दक्षिणी हवा चलती दखते हो तो कहते हो, कि लू चलेगी, और ऐसा ही होता है। “हे कपटियों, तुम धरती और आकाश के रूप में भेद कर सकते हो, परन्‍तु इस युग के विषय में क्‍यों भेद करना नहीं जानते? “और तुम आप ही निर्णय क्‍यों नहीं कर लेते, कि उचित क्‍या है? “जब तू अपने मुद्दई के साथ हाकिम के पास जा रहा है, तो मार्ग ही में उससे छूटने का यत्‍न कर ले ऐसा न हो, कि वह तुझे न्‍यायी के पास खींच ले जाए, और न्‍यायी तुझे सिपाही को सौंपे और सिपाही तुझे बन्‍दीगृह में डाल दे। “मैं तुम से कहता हूँ, कि जब तक तू दमड़ी-दमड़ी भर न देगा तब तक वहाँ से छूटने न पाएगा।” उस समय कुछ लोग आ पहुँचे, और उससे उन गलीलियों की चर्चा करने लगे, जिन का लहू पीलातुस ने उन ही के बलिदानों के साथ मिलाया था। यह सुन उसने उनसे उत्तर में यह कहा, “क्‍या तुम समझते हो, कि ये गलीली, और सब गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?” “मैं तुम से कहता हूँ, कि नहीं; परन्‍तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम सब भी इसी रीति से नाश होगे। “या क्‍या तुम समझते हो, कि वे अठारह जन जिन पर शीलोह का गुम्‍मट गिरा, और वे दब कर मर गए: यरूशलेम के और सब रहनेवालों से अधिक अपराधी थे? “मैं तुम से कहता हूँ, कि नहीं; परन्‍तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम भी सब इसी रीति से नाश होगें।” फिर उसने यह दृष्‍टान्‍त भी कहा, “किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था: वह उसमें फल ढूँढ़ने आया, परन्‍तु न पाया। “तब उसने बारी के रखवाले से कहा, ‘देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूँढ़ने आता हूँ, परन्‍तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्‍यों रोके रहे?’ “उसने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, इसे इस वर्ष तो और रहने दे; कि मैं इसके चारो ओर खोदकर खाद डालूँ। अतः आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना।” सब्‍त के दिन वह एक आराधनालय में उपदेश कर रहा था। और देखो, एक स्‍त्री थी, जिसे अठारह वर्ष से एक दुर्बल करनेवाली दुष्‍टात्‍मा लगी थी, और वह कुबड़ी हो गई थी, और किसी रीति से सीधी नहीं हो सकती थी। यीशु ने उसे देखकर बुलाया, और कहा, “हे नारी, तू अपनी दुर्बलता से छूट गई।” तब उसने उस पर हाथ रखे, और वह तुरन्‍त सीधी हो गई, और परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगी। इसलिये कि यीशु ने सब्‍त के दिन उसे अच्‍छा किया था, आराधनालय का सरदार रिसियाकर लोगों से कहने लगा, “छ: दिन हैं, जिन में काम करना चाहिए, अतः उन ही दिनों में आकर चंगे होओ; परन्‍तु सब्‍त के दिन में नहीं।” यह सुन कर प्रभु ने उत्तर देकर कहा, “हे कपटियों, क्‍या सब्‍त के दिन तुम में से हर एक अपने बैल या गदहे को थान से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता? “और क्‍या उचित न था, कि यह स्‍त्री जो अब्राहम की बेटी है जिसे शैतान ने अठारह वर्ष से बान्‍ध रखा था, सब्‍त के दिन इस बन्‍धन से छुड़ाई जाती?” जब उसने ये बातें कहीं, तो उसके सब विरोधी लज्‍जित हो गए, और सारी भीड़ उन महिमा के कामों से जो वह करता था, आनन्‍दित हुई। फिर उसने कहा, “परमेश्‍वर का राज्‍य किसके नाई है? और मैं उसकी उपमा किससे दूँ? “वह राई के एक दाने के नाई है, जिसे किसी मनुष्‍य ने लेकर अपनी बारी में बोया: और वह बढ़कर पेड़ हो गया; और आकाश के पक्षियों ने उसकी डालियों पर बसेरा किया।” उसने फिर कहा, “मैं परमेश्‍वर के राज्‍य कि उपमा किस से दूँ? “वह खमीर के नाई है, जिस को किसी स्‍त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिलाया, और होते-होते सब आटा खमीर हो गया।” वह नगर-नगर, और गाँव-गाँव होकर उपदेश करता हुआ यरूशलेम की ओर जा रहा था। और किसी ने उससे पूछा, “हे प्रभु, क्‍या उद्धार पानेवाले थोड़े हैं?” उसने उनसे कहा, “सकेत द्वार से प्रवेश करने का यत्‍न करो, क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि बहुत से प्रवेश करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे। “जब घर का स्‍वामी उठकर द्वार बन्‍द कर चुका हो, और तुम बाहर खड़े हुए द्वार खटखटाकर कहने लगो, ‘हे प्रभु, हमारे लिये खोल दे,’ और वह उत्तर दे कि मैं तुम्‍हें नहीं जानता, तुम कहाँ के हो? “तब तुम कहने लगोगे, कि हम ने तेरे सामने खाया-पीया और तू ने हमारे बजारों में उपदेश किया। परन्‍तु वह कहेगा, मैं तुम से कहता हूँ, ‘मैं नहीं जानता तुम कहाँ से हो। हे कुकर्म करनेवालो, तुम सब मुझ से दूर हो।’ “वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा: जब तुम अब्राहम और इसहाक और याकूब और सब भविष्‍यद्वक्‍ताओं को परमेश्‍वर के राज्‍य में बैठे, और अपने आप को बाहर निकाले हुए देखोगे। “और पूर्व और पश्चिम; उत्तर और दक्षिण से लोग आकर परमेश्‍वर के राज्‍य के भोज में भागी होंगे। “और देखो, कितने पिछले हैं वे प्रथम होंगे, और कितने जो प्रथम हैं, वे पिछले होंगे।” उसी घड़ी कितने फरीसियो ने आकर उससे कहा, “यहाँ से निकलकर चला जा; क्‍योंकि हेरोदेस तुझे मार डालना चाहता है।” उसने उनसे कहा, “जाकर उस लोमड़ी से कह दो, कि देख मैं आज और कल दुष्‍टात्‍माओं को निकालता और बिमारों को चंगा करता हूँ और तीसरे दिन पूरा करूँगा। “तौभी मुझे आज और कल और परसों चलना अवश्‍य है, क्‍योंकि हो नही सकता कि कोई भविष्‍यद्वक्‍ता यरूशलेम के बाहर मारा जाए। “हे यरूशलेम! हे यरूशलेम! तू जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं को मार डालती है, और जो तेरे पास भेजे गए उन्‍हें पत्‍थरवाह करती है; कितनी ही बार मैं ने यह चाहा, कि जैसे मुर्गी अपने बच्‍चों को अपने पंखो के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे करूँ, पर तुम ने यह न चाहा। “देखो, तुम्‍हारा घर तुम्‍हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है, और मैं तुम से कहता हूँ; जब तक तुम न कहोगे, कि धन्‍य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है, तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।” फिर वह सब्‍त के दिन फरीसियों के सरदारों में से किसी के घर में रोटी खाने गया: और वे उसकी घात में थे। और देखो, एक मनुष्‍य उसके सामने था, जिसे जलन्‍धर का रोग था। इस पर यीशु ने व्‍यवस्‍थापकों और फरीसियों से कहा, “क्‍या सब्‍त के दिन अच्‍छा करना उचित है, कि नहीं?” परन्‍तु वे चुपचाप रहे। तब उसने उसे हाथ लगा कर चंगा किया, और जाने दिया। और उनसे कहा, “तुम में से ऐसा कौन है, जिसका गदहा या बैल कुएँ में गिर जाए और वह सब्‍त के दिन उसे तुरन्‍त बाहर न निकाल ले?” वे इन बातों का कुछ उत्तर न दे सके। जब उसने देखा, कि आमन्त्रित लोग कैसे मुख्‍य-मुख्‍य जगह चुन लेते हैं तो एक दृष्‍टान्‍त देकर उनसे कहा, “जब कोई तुझे ब्‍याह में बुलाए, तो मुख्‍य जगह में न बैठना, कहीं ऐसा न हो, कि उसने तुझ से भी किसी बड़े को नेवता दिया हो। और जिस ने तुझे और उसे दोनों को नेवता दिया है, आकर तुझ से कहे, कि इसको जगह दे, और तब तुझे लज्‍जित होकर सब से नीची जगह में बैठना पड़े। “पर जब तू बुलाया जाए, तो सब से नीची जगह जा बैठ, कि जब वह, जिस ने तुझे नेवता दिया है आए, तो तुझ से कहे कि हे मित्र, आगे बढ़कर बैठ; तब तेरे साथ बैठनेवालों के सामने तेरी बड़ाई होगी। “क्‍योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।” तब उसने अपने नेवता देनेवाले से भी कहा, “जब तू दिन का या रात का भोज करे, तो अपने मित्रों या भाइयों या कुटुम्‍बियों या धनवान पड़ोसियों को न बुला, कहीं ऐसा न हो, कि वे भी तुझे नेवता दें, और तेरा बदला हो जाए। “परन्‍तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला। तब तू धन्‍य होगा, क्‍योंकि उनके पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्‍तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इसका प्रतिफल मिलेगा।” उसके साथ भोजन करनेवालों में से एक ने ये बातें सुनकर उससे कहा, “धन्‍य है वह, जो परमेश्‍वर के राज्‍य में रोटी खाएगा।” उसने उससे कहा, “किसी मनुष्‍य ने बड़ा भोज दिया और बहुतों को बुलाया। जब भोजन तैयार हो गया, तो उसने अपने दास के हाथ आमन्त्रित लोगों को कहला भेजा, कि आओ; अब भोजन तैयार है। “पर वे सब के सब क्षमा माँगने लगे, पहले ने उससे कहा, ‘मैंने खेत मोल लिया है, और अवश्‍य है कि उसे दखूँ; मैं तुझ से विनती करता हूँ, मुझे क्षमा करा दे।’ “दूसरे ने कहा, ‘मैं ने पाँच जोड़े बैल मोल लिए हैं, और उन्‍हें परखने जाता हूँ; मैं तुझ से विनती करता हूँ, मुझे क्षमा करा दे।’ “एक और ने कहा, ‘मै ने ब्‍याह किया है, इसलिये मैं नहीं आ सकता।’ “उस दास ने आकर अपने स्‍वामी को ये बातें कह सुनाईं। तब घर के स्‍वामी ने क्रोध में आकर अपने दास से कहा, ‘नगर के बाजारों और गलियों में तुरन्‍त जाकर कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को यहाँ ले आओ।’ “दास ने फिर कहा, ‘हे स्‍वामी, जैसे तूने कहा था, वैसे ही किया गया है; फिर भी जगह है।' “स्‍वामी ने दास से कहा, ‘सड़कों पर और बाड़ों की ओर जाकर लोगों को बरबस ले ही आ ताकि मेरा घर भर जाए। ‘क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि उन आमन्त्रित लोगों में से कोई मेरे भोज को न चखेगा’।” और जब बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी, तो उसने पीछे फिरकर उनसे कहा। “यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्‍नी और बच्चों और भाइयों और बहनों वरन अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता; “और जो कोई अपना क्रूस न उठाए; और मेरे पीछे न आए; वह भी मेरा चेला नहीं हो सकता। “तुम में से कौन है कि गढ़ बनाना चाहता हो, और पहले बैठकर खर्च न जोड़े, कि पूरा करने की सामर्थ्य मेरे पास है कि नहीं? “कहीं ऐसा न हो, कि जब नींव डालकर तैयार न कर सके, तो सब देखने वाले यह कहकर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगें, कि यह मनुष्‍य बनाने तो लगा, पर तैयार न कर सका? “या कौन ऐसा राजा है, कि दूसरे राजा से युद्ध करने जाता हो, और पहले बैठकर विचार न कर ले कि जो बीस हजार लेकर मुझ पर चढ़ा आता है, क्‍या मैं दस हजार लेकर उसका सामना कर सकता हूँ, कि नहीं? “नहीं तो उसके दूर रहते ही, वह दूतों को भेजकर मिलाप करना चाहेगा। “इसी रीति से तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्‍याग न दे, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता। “नमक तो अच्‍छा है, परन्‍तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह किस वस्‍तु से नमकीन किया जाएगा। “वह न तो भूमि के और न खाद के लिये काम में आता है: उसे तो लोग बाहर फेंक देते हैं। जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले।” सब चुंगी लेनेवाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उसकी सुनें। और फरीसी और शास्‍त्री कुड़कुड़ाकर कहने लगे, “यह तो पापियों से मिलता है और उनके साथ खाता भी है।” तब उसने उनसे यह दृष्‍टान्‍त कहा: “तुम में से कौन है जिसकी सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? “और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्‍द से उसे कांधे पर उठा लेता है। “और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे करके कहता है, ‘मेरे साथ आनन्‍द करो, क्‍योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।’ “मैं तुम से कहता हूँ; कि इसी रीति से एक मन फिरानेवाले पापी के विषय में भी स्‍वर्ग में इतना ही आनन्‍द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्‍हें मन फिराने की आवश्‍यकता नहीं। “या कौन ऐसी स्‍त्री होगी, जिसके पास दस सिक्‍के हों, और उनमें से एक खो जाए; तो वह दीया जलाकर और घर झाड़-बुहारकर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे? “और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी करके कहती है, कि मेरे साथ आनन्‍द करो, क्‍योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है। “मैं तुम से कहता हूँ; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्‍वर के स्‍वर्गदूतों के सामने आनन्‍द होता है।” फिर उसने कहा, “किसी मनुष्‍य के दो पुत्र थे। “उनमें से छोटा ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उसने उनको अपनी संपत्ति बाँट दी। “और बहुत दिन न बीते थे कि छोटा पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहाँ कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी। “जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया। “और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहाँ जा पड़ा। उसने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा। “और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था। “जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहाँ भूखा मर रहाँ हूँ। ‘मैं अब उठकर अपने पिता के पास जाऊँगा और उससे कहूँगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है। अब इस योग्‍य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊँ, मुझे अपने एक मजदूर के नाई रख ले।’ “तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। “पुत्र ने उससे कहा, ‘पिताजी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है; और अब इस योग्‍य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊँ।’ “परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा, ‘झट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकालकर उसे पहनाओ, और उसके हाथ में अँगूठी, और पाँवो में जूतियाँ पहनाओ, और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खाएँ और आनन्‍द मनाये। क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गय था, अब मिल गया है।’ और वे आनन्‍द करने लगे। “परन्‍तु उसका जेठा पुत्र खेत में था। और जब वह आते हुए घर के निकट पहुँचा, तो उसने गाने-बजाने और नाचने का शब्‍द सुना। “और उसने एक दास को बुलाकर पूछा, ‘यह क्‍या हो रहा है?’ “उसने उससे कहा, ‘तेरा भाई आया है, और तेरे पिता ने पला हुआ बछड़ा कटवाया है, इसलिये कि उसे भला चंगा पाया है।’ “यह सुनकर वह क्रोध से भर गया और भीतर जाना न चाहा: परन्‍तु उसका पिता बाहर आकर उसे मनाने लगा। “उसने पिता को उत्तर दिया, कि देख; मैं इतने वर्ष से तेरी सेवा कर रहा हूँ, और कभी भी तेरी आज्ञा नहीं टाली, तौभी तू ने मुझे कभी एक बकरी का बच्‍चा भी न दिया, कि मैं अपने मित्रों के साथ आनन्‍द करता। परन्‍तु जब तेरा यह पुत्र, जिस ने तेरी संपत्ति वेश्‍याओं में उड़ा दी है, आया, तो उसके लिये तू ने पला हुआ बछड़ा कटवाया। “उसने उससे कहा, ‘पुत्र, तू सर्वदा मेरे साथ है; और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा ही है। ‘परन्‍तु अब आनन्‍द करना और मगन होना चाहिए क्‍योंकि यह तेरा भाई मर गया था फिर जी गया है; खो गया था, अब मिल गया है’।” फिर उसने चेलों से भी कहा, “किसी धनवान का एक भण्‍डारी था, और लोगों ने उसके सामने उस पर यह दोष लगाया कि यह तेरी सब संपत्ति उड़ाए देता है। “अतः उसने उसे बुलाकर कहा, ‘यह क्‍या है जो मै तेरे विषय में सुन रहा हूँ? अपने भण्‍डारीपन का लेखा दे; क्‍योंकि तू आगे को भण्‍डारी नहीं रह सकता।’ “तब भण्‍डारी सोचने लगा, कि अब मैं क्‍या करूँ? क्‍योंकि मेरा स्‍वामी अब भण्‍डारी का काम मुझ से छीन ले रहा है: मिट्टी तो मुझ से खोदी नहीं जाती; और भीख माँगने से मुझे लज्‍जा आती है। ‘मैं समझ गया, कि क्‍या करूँगा: ताकि जब मैं भण्‍डारी के काम से छुड़ाया जाऊँ तो लोग मुझे अपने घरों में ले लें।’ “और उसने अपने स्‍वामी के देनदारो में से एक-एक को बुलाकर पहले से पूछा, कि तुझ पर मेरे स्‍वामी का कितना कर्ज है? “उसने कहा, ‘सौ मन तेल,’ तब उसने उससे कहा, कि अपनी खाता-बही ले और बैठकर तुरन्‍त पचास लिख दे। “फिर दूसरे से पूछा, ‘तुझ पर कितना कर्ज है?’ उसने कहा, ‘सौ मन गेहूँ,’ तब उसने उससे कहा, ‘अपनी खाता-बही लेकर अस्‍सी लिख दे।’ “स्‍वामी ने उस अधर्मी भण्‍डारी को सराहा, कि उसने चतुराई से काम किया है; क्‍योंकि इस संसार के लोग अपने समय के लोगों के साथ रीति-व्‍यवहारों में ज्‍योति के लोगों से अधिक चतुर हैं। “और मैं तुम से कहता हूँ, कि अधर्मं के धन से अपने लिये मित्र बना लो; ताकि जब वह जाता रहे, तो वे तुम्‍हें अनन्‍त निवासों में ले लें। “जो थोड़े से थोड़े में सच्‍चा है, वह बहुत में भी सच्‍चा है: और जो थोड़े से थोड़े में अधर्मी है, वह बहुत में भी अधर्मी है। “इसलिये जब तुम अधर्म के धन में सच्‍चे न ठहरे, तो सच्‍चा तुम्‍हें कौन सौंपेगा? “और यदि तुम पराये धन में सच्‍चे न ठहरे, तो जो तुम्‍हारा है, उसे तुम्‍हें कौन देगा? “कोई दास दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता: क्‍योंकि वह तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा; या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा: तुम परमेश्‍वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।” फरीसी जो लोभी थे, ये सब बातें सुनकर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगे। उसने उनसे कहा, “तुम तो मनुष्‍यों के सामने अपने आप को धर्मी ठहराते हो: परन्‍तु परमेश्‍वर तुम्‍हारे मन को जानता है, क्‍योंकि जो वस्‍तु मनुष्‍यों की दृष्‍टि में महान है, वह परमेश्‍वर के निकट घृणित है। “व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ता यूहन्‍ना तक रहे, उस समय से परमेश्‍वर के राज्‍य का सुसमाचार सुनाया जा रहा है, और हर कोई उसमें प्रबलता से प्रवेश करता है। “आकाश और पृथ्‍वी का टल जाना व्‍यवस्‍था के एक बिन्‍दु के मिट जाने से सहज है। “जो कोई अपनी पत्‍नी को त्‍यागकर दूसरी से ब्‍याह करता है, वह व्‍यभिचार करता है, और जो कोई ऐसी त्‍यागी हुई स्‍त्री से ब्‍याह करता है, वह भी व्‍यभिचार करता है। “एक धनवान मनुष्‍य था जो बैंजनी कपड़े और मलमल पहनता और प्रति-दिन सुख-विलास और धूम-धाम के साथ रहता था। “और लाजर नाम का एक कंगाल घावों से भरा हुआ उसकी डेवढ़ी पर छोड़ दिया जाता था। और वह चाहता था, कि धनवान की मेज पर की जूठन से अपना पेट भरे; वरन कुत्ते भी आकर उसके घावों को चाटते थे। “और ऐसा हुआ कि वह कंगाल मर गया, और स्‍वर्गदूतों ने उसे लेकर अब्राहम की गोद में पहुँचाया। और वह धनवान भी मरा; और गाड़ा गया, “और अधोलोक में उसने पीड़ा में पड़े हुए अपनी आँखें उठाई, और दूर से अब्राहम की गोद में लाजर को देखा। “और उसने पुकार कर कहा, ‘हे पिता अब्राहम, मुझ पर दय करके लाजर को भेज दे, ताकि वह अपनी ऊँगुली का सिरा पानी में भिगोकर मेरी जीभ को ठंडी करे, क्‍योंकि मैं इस ज्‍वाला में तड़प रहा हूँ।’ “परन्‍तु अब्राहम ने कहा, ‘हे पुत्र स्‍मरण कर, कि तू अपने जीवन में अच्‍छी वस्‍तुएँ ले चुका है, और वैसे ही लाजर बुरी वस्‍तुएँ: परन्‍तु अब वह यहाँ शान्‍ति पा रहा है, और तू तड़प रहा है। ‘और इन सब बातों को छोड़ हमारे और तुम्‍हारे बीच एक भारी गड़हा ठहराया गया है कि जो यहाँ से उस पार तुम्‍हारे पास जाना चाहें, वे न जा सकें, और न कोई वहाँ से इस पार हमारे पास आ सके।’ उसने कहा, “तो हे पिता, मैं तुझ से विनती करता हूँ, कि तू उसे मेरे पिता के घर भेज, क्‍योंकि मेरे पाँच भाई हैं; वह उनके सामने इन बातों की गवाही दे, ऐसा न हो कि वे भी इस पीड़ा की जगह में आएँ। “अब्राहम ने उससे कहा, ‘उनके पास तो मूसा और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तकें हैं, वे उनकी सुनें।’ “उसने कहा, ‘नहीं, हे पिता अब्राहम; पर यदि कोई मरे हुओं में से उनके पास जाए, तो वे मन फिराएँगे।’ “उसने उससे कहा, ‘जब वे मूसा और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की नहीं सुनते, तो यदि मरे हुओं में से कोई भी जी उठे तौभी उसकी नहीं मानेंगे’।” फिर उसने अपने चेलों से कहा, “हो नहीं सकता कि ठोकरें न लगें, परन्‍तु हाय, उस मनुष्‍य पर जिसके कारण वे आती है! “जो इन छोटों में से किसी एक को ठोकर खिलाता है, उसके लिये यह भला होता कि चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह समुद्र में डाल दिया जाता। “सचेत रहो; यदि तेरा भाई अपराध करे तो उसे समझा, और यदि पछताए तो उसे क्षमा कर। “यदि दिन भर में वह सात बार तेरा अपराध करे और सातों बार तेरे पास फिर आकर कहे, कि मैं पछताता हूँ, तो उसे क्षमा कर।” तब प्रेरितों ने प्रभु से कहा, “हमारा विश्‍वास बढ़ा।” प्रभु ने कहा, “यदि तुम को राई के दाने के बराबर भी विश्‍वास होता, तो तुम इस शहतूत के पेड़ से कहते कि जड़ से उखड़कर समुद्र में लग जा, तो वह तुम्‍हारी मान लेता। “पर तुम में से ऐसा कौन है, जिसका दास हल जोतता, या भेंड़ें चराता हो, और जब वह खेत से आए, तो उससे कहे, ‘तुरन्‍त आकर भोजन करने बैठ’? “और यह न कहे, कि मेरा खाना तैयार कर: और जब तक मैं खाऊँ-पीऊँ तब तक कमर बान्‍धकर मेरी सेवा कर; इसके बाद तू भी खा पी लेना? “क्‍या वह उस दास का अहसान मानेगा, कि उसने वे ही काम किए जिसकी आज्ञा दी गई थी? “इसी रीति से तुम भी, जब उन सब कामों को कर चुको जिसकी आज्ञा तुम्‍हें दी गई थी, तो कहो, ‘हम निकम्‍मे दास हैं; कि जो हमें करना चाहिए था वही किया है’।” और ऐसा हुआ कि वह यरूशलेम को जाते हुए सामरिया और गलील के बीच से होकर जा रहा था। और किसी गाँव में प्रवेश करते समय उसे दस कोढ़ी मिले। और उन्होंने दूर खड़े होकर, “ऊँचे शब्‍द से कहा, हे यीशु, हे स्‍वामी, हम पर दया कर!” उसने उन्‍हें देखकर कहा, “जाओ; और अपने आपको याजकों को दिखाओ।” और जाते ही जाते वे शुद्ध हो गए। तब उनमें से एक यह देखकर कि मैं चंगा हो गया हूँ, ऊँचे शब्‍द से परमेश्‍वर की बड़ाई करता हुआ लौटा; और यीशु के पाँवो पर मुँह के बल गिरकर उसका धन्‍यवाद करने लगा; और वह सामरी था। इस पर यीशु ने कहा, “क्‍या दसों शुद्ध न हुए, तो फिर वे नौ कहाँ हैं? “क्‍या इस परदेशी को छोड़ कोई और न निकला, जो परमेश्‍वर की बड़ाई करता?” तब उसने उससे कहा, “उठकर चला जा; तेरे विश्‍वास ने तुझे चंगा किया है।” जब फरीसियों ने उससे पूछा, कि परमेश्‍वर का राज्‍य कब आएगा? तो उसने उनको उत्तर दिया, “पमेश्‍वर का राज्‍य प्रगट रूप में नहीं आता। और लोग यह न कहेंगे, कि देखो, यहाँ है, या वहाँ है। क्‍योंकि देखो, परमेश्‍वर का राज्‍य तुम्‍हारे बीच में है।” और उसने चेलों से कहा, “वे दिन आएँगे, जिन में तुम मनुष्‍य के पुत्र के दिनों में से एक दिन को देखना चाहोगे, और नहीं देखने पाओगे। “लोग तुम से कहेंगे, ‘देखो, वहाँ है!’ या ‘देखो यहाँ है!’ परन्‍तु तुम चले न जाना और न उनके पीछे हो लेना। “क्‍योंकि जैसे बिजली आकाश की एक छोर से कौंधकर आकाश की दूसरी छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्‍य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। “परन्‍तु पहले अवश्‍य है, कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्‍छ ठहराएँ। “जैसा नूह के दिनों में हुआ था, वैसा ही मनुष्‍य के पुत्र के दिनों में भी होगा। जिस दिन तक नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उनमें ब्‍याह-शादी होती थी; तब जल-प्रलय ने आकर उन सब को नाश किया। “और जैसा लूत के दिनों में हुआ था, कि लोग खाते-पीते लेन-देन करते, पेड़ लगाते और घर बनाते थे; परन्‍तु जिस दिन लूत सदोम से निकला, उस दिन आग और गन्‍धक आकाश से बरसी और सब को नाश कर दिया। “मनुष्‍य के पुत्र के प्रगट होने के दिन भी ऐसा ही होगा। “उस दिन जो छत पर हो; और उसका सामान घर में हो, वह उसे लेने को न उतरे, और वैसे ही जो खेत में हो वह पीछे न लौटे। “लूत की पत्‍नी को स्‍मरण रखो! “जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे वह उसे खोएगा, और जो कोई उसे खोए वह उसे जीवित रखेगा। “मैं तुम से कहता हूँ, उस रात दो मनुष्‍य एक खाट पर होंगे, एक ले लिया जाएगा, और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। “दो स्त्रियाँ एक साथ चक्‍की पीसती होंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। [“दो जन खेत में होंगे एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ा जाएगा।”] यह सुन उन्होंने उससे पूछा, “हे प्रभु यह कहाँ होगा?” उसने उनसे कहा, “जहाँ लोथ हैं, वहाँ गिद्ध इकट्ठे होंगे।” फिर उसने इसके विषय में कि नित्‍य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उनसे यह दृष्‍टान्‍त कहा: “किसी नगर में एक न्‍यायी रहता था; जो न परमेश्‍वर से डरता था और न किसी मनुष्‍य की परवाह करता था। “और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्‍याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा। “उसने कितने समय तक तो न माना परन्‍तु अन्‍त में मन में विचारकर कहा, ‘यद्यपि मैं न परमेश्‍वर से डरता, और न मनुष्‍यों की कुछ परवाह करता हूँ; तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्‍याय चुकाऊँगा, कहीं ऐसा न हो कि घड़ी-घड़ी आकर अन्‍त को मेरा नाक में दम करे’।” प्रभु ने कहा, “सुनो, कि यह अधर्मी न्‍यायी क्‍या कहता है? अतः क्‍या परमेश्‍र अपने चुने हुओं का न्‍याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उसकी दुहाई देते रहते; और क्‍या वह उनके विषय में देर करेगा? “मैं तुम से कहता हूँ; वह तुरन्‍त उन का न्‍याय चुकाएगा; तौभी मनुष्‍य का पुत्र जब आएगा, तो क्‍या वह पृथ्‍वी पर विश्‍वास पाएगा?” और उसने उनसे जो अपने ऊपर भरोसा रखते थे, कि हम धर्मी हैं, और दूसरों को तुच्‍छ जानते थे, यह दृष्‍टान्‍त कहा: “दो मनुष्‍य मन्‍दिर में प्रार्थना करने के लिये गए; एक फरीसी था और दूसरा चुंगी लेनेवाला। “फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यों प्रार्थना करने लगा, कि हे परमेश्‍वर, मैं तेरा धन्‍यवाद करता हूँ, कि मैं और मनुष्‍यों के नाई अन्‍धेर करनेवाला, अन्‍यायी और व्‍यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेनेवाले के नाई हूँ। मैं सप्‍ताह में दो बार उपवास करता हूँ; मैं अपनी सब कमाई का दसवाँ अंश भी देता हूँ। “परन्‍तु चुंगी लेनेवाले ने दूर खड़े होकर, स्‍वर्ग की ओर आँख उठाना भी न चाहा, वरन अपनी छाती पीट-पीटकर कहा, ‘हे परमेश्‍वर मुझ पापी पर दया कर!’ “मैं तुम से कहता हूँ, कि वह दूसरा नहीं; परन्‍तु यही मनुष्‍य धर्मी ठहराया जाकर अपने घर गया; क्‍योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।” फिर लोग अपने बच्‍चों को भी उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे; और चेलों ने देखकर उन्‍हें डाँटा। यीशु ने बच्‍चों को पास बुलाकर कहा, “बालकों को मेरे पास आने दो, और उन्‍हें मना न करो: क्‍योंकि परमेश्‍वर का राज्‍य ऐसों ही का है। “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो कोई परमश्‍वर के राज्‍य को बालक के नाई ग्रहण न करेगा वह उसमें कभी प्रवेश करने न पाएगा।” किसी सरदार ने उससे पूछा, “हे उत्तम गुरू, अनन्‍तजीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्‍या करूँ?” यीशु ने उससे कहा, “तू मुझे उत्तम क्‍यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक, अर्थात् परमेश्‍वर। “तू आज्ञाओं को तो जानता है: “व्‍यभिचार न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।” उसने कहा, “मैं तो इन सब को लड़कपन ही से मानता आया हूँ।” यह सुन, “यीशु ने उससे कहा, तुझ में अब भी एक बात की घटी है, अपना सब कुछ बेचकर कंगालों को बाँट दे; और तुझे स्‍वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।” वह यह सुनकर बहुत उदास हुआ, क्‍योंकि वह बड़ा धनी था। यीशु ने उसे देखकर कहा, “धनवानों का परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना कितना कठिन है! “परमेश्‍वर के राज्‍य में धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है।” और सुननेवालों ने कहा, “तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?” उसने कहा, “जो मनुष्‍य से नहीं हो सकता, वह परमेश्‍वर से हो सकता है।” पतरस ने कहा, “देख, हम तो घर-बार छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं।” उसने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि ऐसा कोई नहीं जिस ने परमेश्‍वर के राज्‍य के लिये घर, या पत्‍नी, या भाइयों, या माता-पिता, या बाल-बच्चों को छोड़ दिया हो। और इस समय कई गुणा अधिक न पाए; और परलोक में अनन्‍त जीवन।” फिर उसने बारहों को साथ लेकर उनसे कहा, “देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और जितनी बातें मनुष्‍य के पुत्र के लिये भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा लिखी गई हैं वे सब पूरी होंगी। “क्‍योंकि वह अन्‍यजातियों के हाथ में सौंपा जाएगा, और वे उसे ठट्ठों में उड़ाएँगे; और उसका अपमान करेंगे, और उस पर थूकेंगे। और उसे कोड़े मारेंगे, और घात करेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।” और उन्होंने इन बातों में से कोई बात न समझी: और यह बात उनमें छिपी रही, और जो कहा गया था वह उनकी समझ में न आया। जब वह यरीहो के निकट पहुँचा, तो एक अन्‍धा सड़क के किनारे बैठा हुआ भीख माँग रहा था। और वह भीड़ के चलने की आहट सुनकर पूछने लगा, “यह क्‍या हो रहा है?” उन्होंने उसको बताया, “यीशु नासरी जा रहा है।” तब उसने पुकार के कहा, “हे यीशु दाऊद की सन्‍तान, मुझ पर दया कर!” जो आगे-आगे जा रहे थे, वे उसे डाँटने लगे कि चुप रहे: परन्‍तु वह और भी चिल्‍लाने लगा, “हे दाऊद की सन्‍तान, मुझ पर दया कर!” तब यीशु ने खड़े होकर आज्ञा दी कि उसे मेरे पास लाओ, और जब वह निकट आया, तो उसने उससे यह पूछा, तू क्‍या चाहता है, “मैं तेरे लिये करूँ?” उसने कहा, “हे प्रभु यह कि मैं देखने लगूँ।” यीशु ने उससे कहा, “देखने लग, तेरे विश्‍वास ने तुझे अच्‍छा कर दिया है।” और वह तुरन्‍त देखने लगा; और परमेश्‍वर की बड़ाई करता हुआ उसके पीछे हो लिया, और सब लोगों ने देखकर परमेश्‍वर की स्‍तुति की। वह यरीहो में प्रवेश करके जा रहा था। और देखो, जक्‍कई नाम एक मनुष्‍य था जो चुंगी लेनेवालों का सरदार और धनी था। वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है? परन्‍तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्‍योंकि वह नाटा था। तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर क पेड़ पर चढ़ गया, क्‍योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। जब यीशु उस जगह पहुँचा, तो ऊपर दृष्‍टि कर के उससे कहा, “हे जक्‍कई, झट उतर आ; क्‍योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्‍य है।” वह तुरन्‍त उतरकर आनन्‍द से उसे अपने घर को ले गया। यह देखकर सब लोग कुड़कुड़ाकर कहने लगे, “वह तो एक पापी मनुष्‍य के यहाँ जा उतरा है।” जक्‍कई ने खड़े होकर प्रभु से कहा, “हे प्रभु, देख, मैं अपनी आधी सम्‍पत्ति कंगालों को देता हूँ, और यदि किसी का कुछ भी अन्‍याय करके ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूँ।” तब यीशु ने उससे कहा, “आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी अब्राहम का एक पुत्र है। “क्‍योंकि मनुष्‍य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।” जब वे ये बातें सुन रहे थे, तो उसने एक दृष्‍टान्‍त कहा, इसलिये कि वह यरूशलेम के निकट था, और वे समझते थे, कि परमेश्‍वर का राज्‍य अभी प्रगट होने वाला है। अतः उसने कहा, “एक धनी मनुष्‍य दूर देश को चला ताकि राजपद पाकर लौट आए। “और उसने अपने दासों में से दस को बुलाकर उन्‍हें दस मुहरें दीं, और उनसे कहा, ‘मेरे लौट आने तक लेन-देन करना।’ “परन्‍तु उसके नगर के रहनेवाले उससे बैर रखते थे, और उसके पीछे दूतों के द्वारा कहला भेजा, कि हम नहीं चाहते, कि यह हम पर राज्‍य करे। “जब वह राजपद पाकर लौट आया, तो ऐसा हुआ कि उसने अपने दासों को जिन्‍हें रोकड़ दी थी, अपने पास बुलवाया ताकि मालूम करे कि उन्होंने लेन-देन से क्‍या-क्‍या कमाया। “तब पहले ने आकर कहा, ‘हे स्‍वामी तेरे मुहर से दस और मुहरें कमाई हैं।’ “उसने उससे कहा, ‘धन्‍य हे उत्तम दास, तुझे धन्‍य है, तू बहुत ही थोड़े में विश्‍वासी निकला अब दस नगरों का अधिकार रख।’ “दूसरे ने आकर कहा, ‘हे स्‍वामी तेरी मुहर से पाँच और मुहरें कमाई हैं।’ “उसने उससे कहा, ‘तू भी पाँच नगरों पर हाकिम हो जा।’ “तीसरे ने आकर कहा, ‘हे स्‍वामी देख, तेरी मुहर यह है, जिसे मैं ने अंगोछे में बान्‍ध रखा था।’ क्‍योंकि मैं तुझ से डरता था, इसलिये कि तू कठोर मनुष्‍य है: जो तू ने नहीं रखा उसे उठा लेता है, और जो तू ने नहीं बोया, उसे काटता है। “उसने उससे कहा, ‘हे दुष्‍ट दास, मैं तेरे ही मुँह से तुझे दोषी ठहराता हूँ: तू मुझे जानता था कि कठोर मनुष्‍य हूँ, जो मैं ने नहीं रखा उसे उठा लेता, और जो मैं ने नहीं बोया, उसे काटता हूँ? ‘तो तू ने मेरे रूपये कोठी में क्‍यों नहीं रख दिए, कि मैं आकर ब्‍याज समेत ले लेता?’ “और जो लोग निकट खड़े थे, उसने उनसे कहा, ‘वह मुहर उससे ले लो, और जिसके पास दस मुहरें हैं उसे दे दो।’ “उन्होंने उससे कहा, ‘हे स्‍वामी, उसके पास दस मुहरें तो हैं।’ “मैं तुम से कहता हूँ, कि जिसके पास है, उसे दिया जाएगा; और जिसके पास नहीं, उससे वह भी जो उसके पास है ले लिया जाएगा। “परन्‍तु मेरे उन बैरियों को जो नहीं चाहते थे कि मैं उन पर राज्‍य करूँ, उनको यहाँ लाकर मेरे सामने घात करो।” ये बातें कहकर वह यरूशलेम की ओर उनके आगे-आगे चला। और जब वह जैतून नाम पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्याह के पास पहुँचा, तो उसने अपने चेलों में से दो को यह कहके भेजा, “सामने के गाँव में जाओ, और उसमें पहुँचते ही एक गदही का बच्‍चा जिस पर कभी कोई सवार नहीं हुआ, बन्‍धा हुआ तुम्‍हें मिलेगा, उसे खोलकर लाओ। “और यदि कोई तुम से पूछे, कि क्‍यों खोलते हो, तो यह कह देना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है।” जो भेजे गए थे, उन्होंने जाकर जैसा उसने उनसे कहा था, वैसा ही पाया। जब वे गदहे के बच्‍चे को खोल रहे थे, तो उसके मालिकों ने उनसे पूछा, “इस बच्‍चे को क्‍यों खोलते हो?” उन्होंने कहा, “प्रभु को इस का प्रयोजन है।” वे उसको यीशु के पास ले आए और अपने कपड़े उस बच्‍चे पर डालकर यीशु को उस पर बैठा दिया। जब वह जा रहा था, तो वे अपने कपड़े मार्ग में बिछाते जाते थे। और निकट आते हुए जब वह जैतून पहाड़ की ढलान पर पहुँचा, तो चेलों की सारी मण्‍डली उन सब सामर्थ्य के कामों के कारण जो उन्होंने देखे थे, आनन्‍दित होकर बड़े शब्‍द से परमेश्‍वर की स्‍तुति करने लगी: “धन्‍य है वह राजा, जो प्रभु के नाम से आता है! स्‍वर्ग में शान्‍ति और आकाश मण्‍डल में महिमा हो!” तब भीड़ में से कितने फरीसी उससे कहने लगे, “हे गुरू अपने चेलों को डाँट।” उसने उत्तर दिया, “तुम में से कहता हूँ, यदि ये चुप रहें, तो पत्‍थर चिल्‍ला उठेंगे।” जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया। और कहा, “क्‍या ही भला होता, कि तू; हाँ, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्‍तु अब वे तेरी आँखों से छिप गई हैं। “क्‍योंकि वे दिन तुझ पर आएँगे कि तेरे बैरी मोर्चा बान्‍धकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएँगे। और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएँगे, और तुझ में पत्‍थर पर पत्‍थर भी न छोड़ेंगे; क्‍योंकि तू ने वह अवसर जब तुझ पर कृपा दृष्‍टि की गई न पहचाना।” तब वह मन्‍दिर में जाकर बेचनेवालों को बाहर निकालने लगा। और उनसे कहा, “लिखा है; ‘मेरा घर प्रार्थना का घर होगा,’ परन्‍तु तुम ने उसे डाकुओं की खोह बना दिया है।” और वह प्रति दिन मन्‍दिर में उपदेश करता था: और महायाजक और शास्‍त्री और लोगों के प्रमुख उसे नाश करने का अवसर ढूँढ़ते थे। परन्‍तु कोई उपाय न निकाल सके; कि यह किस प्रकार करें, क्‍योंकि सब लोग बड़ी चाह से उसकी सुनते थे। एक दिन ऐसा हुआ कि जब वह मन्‍दिर में लोगों को उपदेश देता और सुसमाचार सुना रहा था, तो महायाजक और शास्‍त्री, पुरनियों के साथ पास आकर खड़े हुए। और कहने लगे, “हमें बता, तू इन कामों को किस अधिकार से करता है, और वह कौन है, जिसने तुझे यह अधिकार दिया है?” उसने उनको उत्तर दिया, “मैं भी तुम से एक बात पूछता हूँ; मुझे बताओ: “यूहन्‍ना का बपतिस्‍मा स्‍वर्ग की ओर से था या मनुष्‍यों की ओर से था?” तब वे आपस में कहने लगे, “यदि हम कहें, ‘स्‍वर्ग की ओर से,’ तो वह कहेगा; ‘फिर तुम ने उसकी प्रतीति क्‍यों न की?’ “और यदि हम कहें, ‘मनुष्‍यों की ओर से,’ तो सब लोग हमें पत्‍थरवाह करेंगे, क्‍योंकि वे सचमुच जानते हैं, कि यूहन्‍ना भविष्‍यद्वकता था।” अतः उन्होंने उत्तर दिया, “हम नहीं जानते, कि वह किस की ओर से था।” यीशु ने उनसे कहा, “तो मैं भी तुम को नहीं बताता कि मैं ये काम किस अधिकार से करता हूँ।” तब वह लोगों से यह दृष्‍टान्‍त कहने लगा, “किसी मनुष्‍य ने दाख की बारी लगाई, और किसानों को उसका ठेका दे दिया और बहुत दिनों के लिये परेदश चला गया। “समय पर उसने किसानों के पास एक दास को भेजा, कि वे दाख की बारी के कुछ फलों का भाग उसे दें, पर किसानों ने उसे पीटकर खाली हाथ लौटा दिया। “फिर उसने एक और दास को भेजा, ओर उन्होंने उसे भी पीटकर और उसका अपमान करके खाली हाथ लौटा दिया। “फिर उसने तीसरा भेजा, और उन्होंने उसे भी घायल करके निकाल दिया। “तब दाख की बारी के स्‍वामी ने कहा, ‘मैं क्‍या करूँ? मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा क्‍या जाने वे उसका आदर करें।’ “जब किसानों ने उसे देखा तो आपस में विचार करने लगे, कि यह तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, कि मिरास हमारी हो जाए। “और उन्होंने उसे दाख की बारी से बाहर निकालकर मार डाला: इसलिये दाख की बारी का स्‍वामी उनके साथ क्‍या करेगा? “वह आकर उन किसानों को नाश करेगा, और दाख की बारी दूसरों को सौंपेगा।” यह सुनकर उन्होंने कहा, “परमेश्‍वर ऐसा न करे।” उसने उनकी ओर देखकर कहा, “फिर यह क्‍या लिखा है: ‘जिस पत्‍थर को राजमिस्‍त्रियों ने निकम्‍मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया।’ “जो कोई उस पत्‍थर पर गिरेगा वह चकनाचूर हो जाएगा, और जिस पर वह गिरेगा, उसको पीस डालेगा।” उसी घड़ी शास्‍त्रियों और महायाजकों ने उसे पकड़ना चाहा, क्‍योंकि समझ गए, कि उसने हम पर यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्‍तु वे लोगों से डरे। और वे उसकी ताक में लगे और भेदिये भेजे, कि धर्म का भेष धरकर उसकी कोई न कोई बात पकड़ें, कि उसे हाकिम के हाथ और अधिकार में सौंप दें। उन्होंने उससे यह पूछा, “हे गुरू, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता, और सिखाता भी है, और किसी का पक्षपात नहीं करता; वरन परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से बताता है। “क्‍या हमें कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं?” उसने उनकी चतुराई को ताड़कर उनसे कहा, “एक दीनार मुझे दिखाओ। इस पर किसकी छाप और नाम है?” उन्होंने कहा, “कैसर का।” उसने उनसे कहा, “तो जो कैसर का है, वह कैसर को दो और जो परमेश्‍वर का है, वह परमेश्‍वर को दो।” वे लोगों के सामने उस बात को पकड़ न सके, वरन उसके उत्तर से अचम्‍भित होकर चुप रह गए। फिर सदूकी जो कहते हैं, कि मरे हुओं का जी उठना है ही नहीं, उनमें से कुछ ने उसके पास आकर पूछा। “हे गुरू, मूसा ने हमारे लिये यह लिखा है, “यदि किसी का भाई अपनी पत्‍नी के रहते हुए बिना सन्‍तान मर जाए, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी को ब्‍याह ले, और अपने भाई के लिये वंश उत्‍पन्न करे।” अतः सात भाई थे, पहला भाई ब्‍याह करके बिना सन्‍तान मर गया। फिर दूसरे, और तीसरे ने भी उस स्‍त्री को ब्‍याह लिया। इसी रीति से सातों बिना सन्‍तान मर गए। सब के पीछे वह स्‍त्री भी मर गई। अतः जी उठने पर वह उनमें से किस की पत्‍नी होगी, क्‍योंकि वह सातों की पत्‍नी हो चुकी थी।” यीशु ने उनसे कहा, “इस युग के सन्‍तानों में तो ब्‍याह शादी होती है। पर जो लोग इस योग्‍य ठहरेंगे, कि उस युग को और मरे हुओं में से जी उठना प्राप्‍त करें, उनमें ब्‍याह शादी न होगी। वे फिर मरने के भी नहीं; क्‍योंकि वे स्‍वर्गदूतों के नाई होंगे, और पुनरुत्थान की सन्‍तान होने से परमेश्‍वर के भी सन्‍तान होंगे। “परन्‍तु इस बात को कि मरे हुए जी उठते हैं, मूसा न भी झाड़ी की कथा में प्रगट की है, “वह प्रभु को अब्राहम का परमेश्‍वर, और इसहाक का परमेश्‍वर, और याकूब का परमेश्वर कहता है।” “परमेश्‍वर तो मुर्दों का नहीं परन्‍तु जीवतों का परमेश्‍वर है: क्‍योंकि उसके निकट सब जीवित हैं।” तब यह सुनकर शास्‍त्रियों में से कितनों ने कहा, “हे गुरू, तू ने अच्‍छा कहा।” और उन्‍हें फिर उससे कुछ और पूछने का हियाव न हुआ। फिर उसने उनसे पूछा, “मसीह को दाऊद की सन्‍तान कैसे कहते हैं? “दाऊद आप भजन संहिता की पुस्‍तक में कहता है: “प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवो के तले न कर दूँ।” “दाऊद तो उसे प्रभु कहता है; तो फिर वह उसकी सन्‍तान कैसे ठहरा?” जब सब लोग सुन रहे थे, तो उसने अपने चेलों से कहा। “शास्‍त्रियों से चौकस रहो, जिन को लम्‍बे-लम्‍बे वस्‍त्र पहने हुए फिरना अच्छा लगता है, और जिन्‍हें बाजारों में नमस्‍कार, और आराधनालयों में मुख्‍य आसन और भोज में मुख्‍य स्‍थान प्रिय लगते हैं। वे विधवाओं के घर खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं: ये बहुत ही दण्‍ड पाएँगे।” फिर उसने आँख उठाकर धनवानों को अपना-अपना दान भण्‍डार में डालते देखा। और उसने एक कंगाल विधवा को भी उसमें दो दमडि़याँ डालते देखा। तब उसने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ कि इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। क्‍योंकि उन सब ने अपनी-अपनी बढ़ती में से दान में कुछ डाला है, परन्‍तु इस ने अपनी घटी में से अपनी सारी जीविका डाल दी है।” जब कितने लोग मन्‍दिर के विषय में कह रहे थे, कि वह कैसे सुन्‍दर पत्‍थरों और भेंट की वस्‍तुओं से सँवारा गया है, तो उसने कहा, “वे दिन आएँगे, जिनमें यह सब जो तुम देखते हो, उनमें से यहाँ किसी पत्‍थर पर पत्‍थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा।” उन्होंने उससे पूछा, “हे गुरू, यह सब कब होगा? और ये बातें जब पूरी होने पर होंगी, तो उस समय का क्‍या चिन्‍ह होगा?” उसने कहा, “चौकस रहो, कि भरमाए न जाओ, क्‍योंकि बहुत से मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं वही हूँ; और यह भी कि समय निकट आा पहुँचा है: तुम उनके पीछे न चले जाना। “और जब तुम लड़ाइयों और बलवों की चर्चा सुनो, तो घबरा न जाना; क्‍योंकि इनका पहले होना अवश्‍य है; परन्‍तु उस समय तुरन्‍त अन्‍त न होगा।” तब उसने उनसे कहा, “जाति पर जाति और राज्‍य पर राज्‍य चढ़ाई करेगा। और बड़ें-बड़ें भूईडोल होंगे, और जगह-जगह अकाल और महामरियाँ पड़ेंगी, और आकाश में भयंकर बातें और बड़े-बड़े चिन्‍ह प्रगट होंगे। “परन्‍तु इन सब बातों से पहले वे मेरे नाम के कारण तुम्‍हें पकडे़ंगे, और सताएँगे, और पंचायतों में सौपेंगे, और बन्‍दीगृह मे डलवाएँगे, और राजाओं और हाकिमों के सामने ले जाएँगे। “पर यह तुम्‍हारे लिये गवाही देने का अवसर हो जाएगा। “इसलिये अपने-अपने मन में ठान रखो कि हम पहले से उत्तर देने की चिन्‍ता न करेंगे। क्‍योंकि मैं तुम्‍हें ऐसा बोल और बुद्धि दूँगा, कि तुम्‍हारे सब विरोधी सामना या खण्‍डन न कर सकेंगे। “और तुम्‍हारे मात- पिता और भाई और कुटुम्‍ब, और मित्र भी तुम्‍हें पकड़वाएँगे; यहाँ तक कि तुम में से कितनों को मरवा डालेंगे। और मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे। “परन्‍तु तुम्‍हारे सिर का एक बाल भी बाँका न होगा। “अपने धीरज से तुम अपने प्राणों को बचाए रखोगे। “जब तुम यरूशलेम को सेनाओं से घिरा हुआ देखो, तो जान लेना कि उसका उजड़ जाना निकट है। “तब जो यहूदिया में हों वह पहाड़ों पर भाग जाएँ, और जो यरूशलेम के भीतर हों वे बाहर निकल जाएँ; और जो गाँवों में हो वे उसमें न जाएँ। क्‍योंकि यह पलटा लेने के ऐसे दिन होंगे, जिन में लिखी हुई सब बातें पूरी हो जाएँगी। “उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उनके लिये हाय, हाय! क्‍योंकि देश में बड़ा क्‍लेश और इन लोगों पर बड़ी आपत्ति होगी। वे तलवार के कौर हो जाएँगे, और सब देशों के लोगों में बन्‍धुए होकर पहुँचाए जाएँगे, और जब तक अन्‍य जातियों का समय पूरा न हो, तब तक यरूशलेम अन्‍य जातियों से रौंदा जाएगा। “और सूरज और चाँद और तारों में चिन्‍ह दिखाई देंगें, और पृथ्‍वी पर, देश-देश के लोगों को संकट होगा; क्‍योंकि वे समुद्र के गरजने और लहरों के कोलाहल से घबरा जाएँगे। और भय के कारण और संसार पर आनेवाली घटनाओं की बाँट देखते-देखते लोगों के जी में जी न रहेगा क्‍योंकि आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी। “तब वे मनुष्‍य के पुत्र को सामर्थ्य और बड़ी महिमा के साथ बादल पर आते देखेंगे। “जब ये बातें होने लगें, तो सीधे होकर अपने सिर ऊपर उठाना; क्‍योंकि तुम्‍हारा छुटकारा निकट होगा।” उसने उनसे एक दृष्‍टान्‍त भी कहा, “अंजीर के पेड़ और सब पेड़ों को देखो। ज्‍योंहि उनकी कोंपलें निकलती हैं, तो तुम देखकर आप ही जान लेते हो, कि ग्रीष्‍मकाल निकट है। “इसी रीति से जब तुम ये बातें होते देखो, तब जान लो कि परमेश्‍वर का राज्‍य निकट है। “मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तक ये सब बातें न हो लें, तब तक इस पीढ़ी का कदापि अन्‍त न होगा। “आकाश और पृथ्‍वी टल जाएँगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। “इसलिये सावधान रहो, ऐसा न हो कि तुम्‍हारे मन खुमार और मतवालेपन, और इस जीवन की चिन्‍ताओं से सुस्‍त हो जाएँ, और वह दिन तुम पर फन्‍दे के नाई अचानक आ पड़े। क्‍योंकि वह सारी पृथ्‍वी के सब रहनेवालों पर इसी प्रकार आ पड़ेगा। “इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आनेवाली घटनाओं से बचने, और मनुष्‍य के पुत्र के सामने खड़े होने के योग्‍य बनो।” और वह दिन को मन्‍दिर में उपदेश करता था; और रात को बाहर जाकर जैतून नाम पहाड़ पर रहा करता था। और भोर को तड़के सब लोग उसकी सुनने के लिये मन्‍दिर में उसके पास आया करते थे। अखमीरी रोटी का पर्व जो फसह कहलाता है, निकट था। और महायाजक और शास्‍त्री इस बात की खोज में थे कि उसको कैसे मार डालें, पर वे लोगों से डरते थे। और शैतान यहूदा में समाया, जो इस्‍करियोती कहलाता और बारह चेलों में गिना जाता था। उसने जाकर महायाजकों और पहरूओं के सरदारों के साथ बातचीत की, कि उसको किस प्रकार उनके हाथ पकड़वाए। वे आनन्‍दित हुए, और उसे रूपये देने का वचन दिया। उसने मान लिया, और अवसर ढूँढ़ने लगा, कि बिना उपद्रव के उसे उनके हाथ पकड़वा दे। तब अखमीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह का मेम्‍ना बली करना अवश्‍य था। और यीशु ने पतरस और यूहन्‍ना को यह कहकर भेजा, “जाकर हमारे खाने के लिये फसह तैयार करो।” उन्होंने उससे पूछा, “तू कहाँ चाहता है, कि हम तैयार करें?” उसने उनसे कहा, “देखो, नगर में प्रवेश करते ही एक मनुष्‍य जल का घड़ा उठाए हुए तुम्‍हें मिलेगा, जिस घर में वह जाए; तुम उसके पीछे चले जाना, “और उस घर के स्‍वामी से कहो, कि गुरू तुझ से कहता है; कि वह पाहुनशाला कहाँ है जिसमें मैं अपने चेलों के साथ फसह खाऊँ? “वह तुम्‍हें एक सजी-सजाई बड़ी अटारी दिखा देगा; वहाँ तैयारी करना। उन्होंने जाकर, जैसा उसने उनसे कहा था, वैसा ही पाया, और फसह तैयार किया। जब घड़ी पहुँची, तो वह प्रेरितों के साथ भोजन करने बैठा। और उसने उनसे कहा, “मुझे बड़ी लालसा थी, कि दु:ख-भोगने से पहले यह फसह तुम्‍हारे साथ खाऊँ। क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि जब तक वह परमेश्‍वर के राज्‍य में पूरा न हो तब तक मैं उसे कभी न खाऊँगा।” तब उसने कटोरा लेकर धन्‍यवाद किया और कहा, “इस को लो और आपस में बाँट लो। क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि जब तक परमेश्‍वर का राज्‍य न आए तब तक मैं दाखरस अब से कभी न पीऊँगा।” फिर उसने रोटी ली, और धन्‍यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, “यह मेरी देह है, जो तुम्‍हारे लिये दी जाती है: मेरे स्‍मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लोहू में जो तुम्‍हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है। “पर देखो, मेरे पकड़वाने वाले का हाथ मेरे साथ मेज पर है। “क्‍योंकि मनुष्‍य का पुत्र तो जैसा उसके लिये ठहराया गया जाता ही है, पर हाय उस मनुष्‍य पर, जिसके द्वारा वह पकड़वाया जाता है!” तब वे आपस में पूछ-ताछ करने लगे, “हम में से कौन है, जो यह काम करेगा?” उनमें यह वाद-विवाद भी हुआ; कि हम में से कौन बड़ा समझा जाता है? उसने उनसे कहा, “अन्‍यजातियों के राजा उन पर प्रभुता करते हैं; और जो उन पर अधिकार रखते हैं, वे उपकारक कहलाते हैं। “परन्‍तु तुम ऐसे न होना; वरन जो तुम में बड़ा है, वह छोटे की नाई और जो प्रधान है, वह सेवक की नाई बने। “क्‍योंकि बड़ा कौन है; वह जो भोजन पर बैठा या वह जो सेवा करता है? क्‍या वह नहीं जो भोजन पर बैठा है? पर मैं तुम्‍हारे बीच में सेवक की नाई हूँ। “परन्‍तु तुम वह हो, जो मेरी परीक्षाओं में लगातार मेरे साथ रहे; और जैसे मेरे पिता ने मेरे लिये एक राज्‍य ठहराया है, वैसे ही मैं भी तुम्‍हारे लिये ठहराता हूँ। ताकि तुम मेरे राज्‍य में मेरी मेज पर खाओ-पिओ; वरन सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्‍याय करो। “शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम लोगों को माँग लिया है कि गेंहूँ की नाई फटके। परन्‍तु मैंने तेरे लिये विनती की, कि तेरा विश्‍वास जाता न रहे: और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।” उसने उससे कहा, “हे प्रभु, मैं तेरे साथ बन्‍दीगृह जाने, वरन मरने को भी तैयार हूँ।” उसने कहा, “हे पतरस मैं तुझ से कहता हूँ, कि आज मुर्गा बाँग देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्‍कार न कर लेगा कि मैं उसे नहीं जानता।” और उसने उनसे कहा, “जब मैं ने तुम्‍हें बटुए, और झोली, और जूते बिना भेजा था, तो क्‍या तुम को किसी वस्‍तु की घटी हुई थी?” उन्होंने कहा, “किसी वस्‍तु की नहीं।” उसने उनसे कहा, “परन्‍तु अब जिसके पास बटुआ हो वह उसे ले, और वैसे ही झोली थी, और जिसके पास तलवार न हो वह अपने कपड़े बेचकर एक मोल ले। “क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि यह जो लिखा है, “वह अपराधियों के साथ गिना गया, उसका मुझ में पूरा होना अवश्‍य है; क्‍योंकि मेरे विषय की बातें पूरी होन पर हैं।” उन्होंने कहा, “हे प्रभु, देख, यहाँ दो तलवारें हैं।” उसने उनसे कहा, “बहुत हैं।” तब वह बाहर निकलकर अपनी रीति के अनुसार जैतून के पहाड़ पर गया, और चेले उसके पीछे हो लिए। उस जगह पहुँचकर उसने उनसे कहा, “प्रार्थना करो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो।” और वह आप उनसे अलग एक ढेला फेंकने की दूरी भर गया, और घुटने टेककर प्रार्थना करने लगा। “हे पिता यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्‍तु तेरी ही इच्‍छा पूरी हो।” तब स्‍वर्ग से एक दूत उसको दिखाई दिया जो उसे सामर्थ्य देता था। और वह अत्‍यन्‍त संकट में व्‍याकुल होकर और भी हृदय वेदना से प्रार्थना करने लगा; और उसका पसीना मानो लोहू की बड़ी-बड़ी बूँदों की नाई भूमि पर गिर रहा था। तब वह प्रार्थना से उठा और अपने चेलों के पास आकर उन्‍हें उदासी के मारे सोता पाया। और उनसे कहा, “क्‍यों सोते हो? उठो, प्रार्थना करो, कि परीक्षा में न पड़ो।” वह यह कह ही रहा था, कि देखो एक भीड़ आई, और उन बारहों में से एक जिसका नाम यहूदा था उनके आगे-आगे आ रहा था, वह यीशु के पास आया, कि उसका चूमा ले। यीशु ने उससे कहा, “हे यहूदा, क्‍या तू चूमा लेकर मनुष्‍य के पुत्र को पकड़वाता है?” उसके साथियों ने जब देखा कि क्‍या होनेवाला है, तो कहा, “हे प्रभु, क्‍या हम तलवार चलाएँ?” और उनमें से एक ने महायाजक के दास पर तलवार चलाकर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। इस पर यीशु ने कहा, “अब बस करो।” और उसका कान छूकर उसे अच्‍छा किया। तब यीशु ने महायाजकों; और मन्‍दिर के पहरूओं के सरदारों और पुरनियों से, जो उस पर चढ़ आए थे, कहा, “क्‍या तुम मुझे डाकू जानकर तलवारें और लाठियाँ लिए हुए निकले हो? “जब मैं मन्‍दिर में हर दिन तुम्‍हारे साथ था, तो तुम ने मुझ पर हाथ न डाला; पर यह तुम्‍हारी घड़ी है, और अन्‍धकार का अधिकार है।” फिर वे उसे पकड़कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे-पीछे चलता था। और जब वे आँगन में आग सुलगाकर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उनके बीच में बैठ गया। और एक दासी उसे आग के उजियाले में बैठे देखकर और उसकी ओर ताककर कहने लगी, “यह भी तो उसके साथ था।” परन्‍तु उसने यह कहकर इन्‍कार किया, “हे नारी, मैं उसे नहीं जानता।” थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, “तू भी तो उन्‍हीं में से है।” पतरस ने कहा, “हे मनुष्‍य मैं नहीं हूँ।” कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्‍य दृढ़ता से कहने लगा, “निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था; क्‍योंकि यह गलीली है।” पतरस ने कहा, “हे मनुष्‍य, मैं नहीं जानता कि तू क्‍या कहता है?” वह कह ही रहा था कि तुरन्‍त मुर्गा ने बाँग दी। तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उसने कही थी, “आज मुर्ग के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।” और वह बाहर निकलकर फूट-फूट कर रोने लगा। जो मनुष्‍य यीशु को पकड़े हुए थे, वे उसे ठट्ठों में उड़ाकर पीटने लगे; और उसकी आँखे ढाँपकर उससे पूछा, “भविष्‍यद्वाणी करके बता कि तुझे किसने मारा।” और उन्होंने बहुत सी और भी निन्‍दा की बातें उसके विरोध में कहीं। जब दिन हुआ तो लोगों के पुरनिए और महायाजक और शास्‍त्री इकट्ठे हुए, और उसे अपनी महासभा में लाकर पूछा, “यदि तू मसीह है, तो हम से कह दे!” उसने उनसे कहा, “यदि मैं तुम से कहूँ तो प्रतीति न करोगे। और यदि पूछूँ, तो उत्तर न दोगे। परनतु अब से मनुष्‍य का पुत्र सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की दाहिनी और बैठा रहेगा।” इस पर सब ने कहा, “तो क्‍या तू परमेश्‍वर का पुत्र है?” उसने उनसे कहा, “तुम आप ही कहते हो, क्‍योंकि मैं हूँ।” तब उन्होंने कहा, “अब हमें गवाही का क्‍या प्रयोजन है; क्‍योंकि हम ने आप ही उसके मुँह से सुन लिया है।” तब सारी सभा उठकर उसे पीलातुस के पास ले गई। और वे यह कहकर उस पर दोष लगाने लगे, “हम ने इसे लोगों को बहकाते और कैसर को कर देने से मना करते, और अपने आप को मसीह, राजा कहते हुए सुना है।” पीलातुस ने उससे पूछा, “क्‍या तू यहूदियों का राजा है?” उसने उसे उत्तर दिया, “तू आप ही कह रहा है।” तब पीलातुस ने महायाजकों और लोगों से कहा, “मैं इस मनुष्‍य में कुछ दोष नहीं पाता।” पर वे और भी दृढ़ता से कहने लगे, “यह गलील से लेकर यहाँ तक सारे यहूदिया में उपदेश दे देकर लोगों को भड़कता है।” यह सुनकर पीलातुस ने पूछा, “क्‍या यह मनुष्‍य गलीली है?” और यह जानकर कि वह हेरोदेस की रियासत का है, उसे हेरोदेस के पास भेज दिया, क्‍योंकि उन दिनों में वह भी यरूशलेम में था। हेरोदेस यीशु को देखकर बहुत ही प्रसन्न हुआ, क्‍योंकि वह बहुत दिनों से उसको देखना चाहता था: इसलिये कि उसके विषय में सुना था, और उसका कुछ चिन्‍ह देखने की आशा रखता था। वह उसने बहुतेरी बातें पूछता रहा, पर उसने उसको कुछ भी उत्तर न दिया। और महायाजक और शास्‍त्री खड़े हुए तन मन से उस पर दोष लगाते रहे। तब हेरोदेस ने अपने सिपाहियों के साथ उसका अपमान करके ठट्ठों में उड़ाया, और भड़कीला वस्‍त्र पहनाकर उसे पीलातुस के पास लौटा दिया। उसी दिन पीलातुस और हेरोदेस मित्र हो गए। इसके पहले वे एक दूसरे के बैरी थे। पीलातुस ने महायाजकों और सरदारों और लोगों को बुलाकर उनसे कहा, “तुम इस मनुष्‍य को लोगों का बहकानेवाला ठहराकर मेरे पास लाए हो, और देखो, मैं ने तुम्‍हारे सामने उसकी जाँच की, पर जिन बातों का तुम उस पर दोष लगाते हो, उन बातों के विषय में मैं ने उसमें कुछ भी दोष नहीं पाया है; “न हेरोदेस ने, क्‍योंकि उसने उसे हमारे पास लौटा दिया है: और देखो, उससे ऐसा कुछ नहीं हुआ कि वह मृत्‍यु के दण्‍ड के योग्‍य ठहराया जाए। “इसलिये मैं उसे पिटवाकर छोड़ देता हूँ।” पिलातुस पर्व के समय उनके एक बन्‍दी को छोड़ने पर विवश था। तब सब मिलकर चिल्‍ला उठे, “इसका काम तमाम कर, और हमारे लिये बरअब्‍बा को छोड़ दे।” वह किसी बलवे के कारण जो नगर में हुआ था, और हत्‍या के कारण बन्‍दीगृह में डाला गया था। पर पीलातुस ने यीशु को छोड़ने की इच्‍छा से लोगों को फिर समझाया। परन्‍तु उन्होंने चिल्‍लाकर कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर!” उसने तीसरी बार उनसे कहा, “क्‍यों उसने कौन सी बुराई की है? मैं ने उसमें मृत्‍यु दण्‍ड के योग्‍य कोई बात नहीं पाई! इसलिये मैं उसे पिटवाकर छोड़ देता हूँ।” परन्‍तु वे चिल्‍ला-चिल्‍लाकर पीछे पड़ गए, कि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए, और उन का चिल्‍लाना प्रबल हुआ। अतः पीलातुस ने आज्ञा दी, कि उनकी विनती के अनुसार किया जाए। और उसने उस मनुष्‍य को जो बलवे और हत्‍या के कारण बन्‍दीगृह में डाला गया था, और जिसे वे माँगते थे, छोड़ दिया; और यीशु को उनकी इच्‍छा के अनुसार सौंप दिया।। जब वे उसे लिए जा रहे थे, तो उन्होंने शमौन नाम एक कुरेनी को जो गाँव से आ रहा था, पकड़कर उस पर क्रूस को लाद दिया कि उसे यीशु के पीछे-पीछे ले चले। और लोगों की बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली: और बहुत सी स्त्रियाँ भी, जो उसके लिये छाती-पीटती और विलाप करती थीं। यीशु ने उनकी ओर फिरकर कहा, “हे यरूशलेम की पुत्रियो, मेरे लिये मत रोओ; परन्‍तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ। “क्‍योंकि देखो, वे दिन आते हैं, जिन में कहेंगे, ‘धन्‍य हैं वे जो बाँझ हैं, और वे गर्भ जो न जने और वे स्‍तन जिन्‍होंने दूध न पिलाया।’ “उस समय ‘वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, कि हम पर गिरो, और टीलों से कि हमें ढाँप लो।’ “क्‍योंकि जब वे हरे पेड़ के साथ ऐसा करते हैं, तो सूखे के साथ क्‍या कुछ न किया जाएगा?” वे और दो मनुष्‍यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले। जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुँचे, तो उन्होंने वहाँ उसे और उन कुकर्मियों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया। तब यीशु ने कहा, “हे पिता, इन्‍हें क्षमा कर, क्‍योंकि ये जानते नहीं कि क्‍या कर रहें हैं?” और उन्होंने चिट्ठियाँ डालकर उसके कपड़े बाँट लिए। लोग खड़े-खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर-करके कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्‍वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा करके कहते थे। “यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा!” और उसके ऊपर एक दोष पत्र भी लगा था: “यह यहूदियों का राजा है।” जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उनमें से एक ने उसकी निन्‍दा करके कहा, “क्‍या तू मसीह नहीं? तो फिर अपने आप को और हमें बचा!” इस पर दूसरे ने उसे डाँटकर कहा, “क्‍या तू परमेश्‍वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है, “और हम तो न्‍यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्‍योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।” तब उसने कहा, “हे यीशु, जब तू अपने राज्‍य में आए, तो मेरी सुधि लेना।” उसने उससे कहा, “मै तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्‍वर्गलोक में होगा।” और लगभग दो पहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अन्‍धियारा छाया रहा, और सूर्य का उजियाला जाता रहा, और मन्‍दिर का पर्दा बीच से फट गया, और यीशु ने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “हे पिता, मै अपनी आत्‍मा तेरे हाथों में सौंपत हूँ।” और यह कहकर प्राण छोड़ दिए। सूबेदार ने, जो कुछ हुआ था देखकर परमेश्‍वर की बड़ाई की, और कहा, “निश्‍चय यह मनुष्‍य धर्मी था।” और भीड़ जो यह देखने को इकट्ठी हुई थी, इस घटना को देखकर छाती पीटती हुई लौट गई। और उसके सब जान पहचान, और जो स्त्रियाँ गलील से उसके साथ आई थीं, दूर खड़ी हुई यह सब देख रही थीं। और देखो यूसुफ नामक महासभा का एक सदस्य था जो सज्‍जन और धर्मी पुरुष था। और उनके विचार और उनके इस काम से प्रसन्न न था; और वह यूहदियों के नगर अरिमतिया का रहने वाला और परमेश्‍वर के राज्‍य की बाट जोहने वाला था। उसने पीलातुस के पास जाकर यीशु का शव माँगा, और उसे उतारकर मलमल की चादर में लपेटा, और एक कब्र में रखा, जो चट्टान में खोदी हुई थी; और उसमें कोई कभी न रखा गया था। वह तैयारी का दिन था, और सब्‍त का दिन आरम्‍भ होने पर था। और उन स्त्रियों ने जो उसके साथ गलील से आई थीं, पीछे-पीछॆ, जाकर उस कब्र को देखा और यह भी कि उसका शव किस रीति से रखा गया हैं। और लौटकर सुगन्धित वस्तुएँ और इत्र तैयार किया; और सब्‍त के दिन तो उन्होंने आज्ञा के अनुसार विश्राम किया। परन्‍तु सप्‍ताह के पहले दिन बड़े भोर को वे उन सुगन्धित वस्‍तुओं को जो उन्होंने तैयार की थी, ले कर कब्र पर आईं। और उन्होंने पत्‍थर को कब्र पर से लुढ़का हुआ पाया, और भीतर जाकर प्रभु यीशु का शव न पाया। जब वे इस बात से भौचक्‍की हो रही थीं तो देखो, दो पुरूष झलकते वस्‍त्र पहने हुए उनके पास आ खड़े हुए। जब वे डर गईं, और धरती की ओर मुँह झुकाए रहीं; तो उन्होंने उनसे कहा, “तुम जीवते को मरे हुओं में क्‍यों ढूँढ़ती हो? “वह यहाँ नहीं, परन्‍तु जी उठा है। स्‍मरण करो कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था, कि अवश्‍य है, कि मनुष्‍य का पुत्र पापियों के हाथ में पकड़वाया जाए, और क्रूस पर चढ़ाया जाए, और तीसरे दिन जी उठे।” तब उसकी बातें उनको स्‍मरण आईं। और कब्र से लौटकर उन्होंने उन ग्‍यारहों को, और अन्य सब को, ये सब बातें कह सुनाई। जिन्‍होंने प्रेरितों से ये बातें कहीं, वे मरियम मगदलीनी और योअन्ना और याकूब की माता मरियम और उनके साथ की अन्य स्त्रियाँ भी थीं। परन्‍तु उनकी बातें उनहें कहाँनी सी समझ पड़ीं, और उन्होंने उनकी प्रतीति न की। तब पतरस उठकर कब्र पर दौड़ा गया, और झुककर केवल कपड़े पड़े देखे, और जो हुआ था, उससे अचम्‍भा करता हुआ, अपने घर चला गया। देखो, उसी दिन उनमें से दो जन इम्‍माऊस नामक एक गाँव को जा रहे थे, जो यरूशलेम से कोई सात मील की दूरी पर था। और वे इन सब बातों पर जो हुईं थीं, आपस में बातचीत करते जा रहे थे। और जब वे आपस में बातचीत और पूछताछ कर रहे थे, तो यीशु आप पास आकर उनके साथ हो लिया। परन्‍तु उनकी आँखे ऐसी बन्‍द कर दी गईं थी, कि उसे पहचान न सके। उसने उनसे पूछा, “ये क्‍या बातें हैं, जो तुम चलते-चलते आपस में करते हो?” वे उदास से खड़े रह गए। यह सुनकर, उनमें से क्लियुपास नामक एक व्यक्ति ने कहा, “क्‍या तू यरूशलेम में अकेला परदेशी है; जो नहीं जानता, कि इन दिनों में उसमें क्या-क्‍या हुआ है?” उसने उनसे पूछा, “कौन सी बातें?” उन्होंने उससे कहा, “यीशु नासरी के विषय में जो परमेश्‍वर और सब लोगों के निकट काम और वचन में सामर्थी भविष्‍यद्वक्‍ता था। और महायाजकों और हमारे सरदारों ने उसे पकड़वा दिया, कि उस पर मृत्‍यु की आज्ञा दी जाए; और उसे क्रूस पर चढ़वाया। “परन्‍तु हमें आशा थी, कि यही इस्राएल को छुटकारा देगा, और इन सब बातों के सिवाय इस घटना को हुए तीसरा दिन है। “और हम में से कई स्त्रियों ने भी हमें आश्‍चर्य में डाल दिया है, जो भोर को कब्र पर गई थीं। और जब उसका शव न पाई, तो यह कहती हुई आईं, कि हम ने स्‍वर्गदूतों का दर्शन पाया, जिन्‍हों ने कहा कि वह जीवित है। “तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए, और जैसा स्‍त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया; परन्‍तु उसको न देखा।” तब उसने उनसे कहा, “हे निर्बुद्धियों, और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की सब बातों पर विश्‍वास करने में मन्‍दमतियों! “क्‍या अवश्‍य न था, कि मसीह ये दु:ख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे?” तब उसने मूसा से और सब भविष्‍यद्वक्‍ताओं से आरम्‍भ करके सारे पवित्र शास्‍त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्‍हें समझा दिया। इतने में वे उस गाँव के पास पहुँचे, जहाँ वे जा रहे थे, और उसके ढंग से ऐसा जान पड़ा, कि वह आगे बढ़ना चाहता है। परन्‍तु उन्होंने यह कहकर उसे रोका, “हमारे साथ रह; क्‍योंकि संध्‍या हो चली है और दिन अब बहुत ढल गया है।” तब वह उनके साथ रहने के लिये भीतर गया। जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्‍यवाद किया, और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखे खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा, “जब वह मार्ग में हम से बातें करता था, और पवित्र शास्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्‍या हमारे मन में उत्तेजना न उत्‍पन्न हुई?” वे उसी घड़ी उठकर यरूशलेम को लौट गए, और उन ग्‍यारहों और उनके साथियों को इकट्ठे पाया। वे कहते थे, “प्रभु सचमुच जी उठा है, और शमौन को दिखाई दिया है।” तब उन्होंने मार्ग की बातें उन्‍हें बता दीं और यह भी कि उन्होंने उसे रोटी तोड़ते समय कैसे पहचाना। वे ये बातें कह ही रहे थे, कि वह आप ही उनके बीच में आ खड़ा हुआ; और उनसे कहा, “तुम्‍हें शान्ति मिले।” परन्‍तु वे घबरा गए, और डर गए, और समझे, कि हम किसी भूत को देख रहे हैं। उसने उनसे कहा, “क्‍यों घबराते हो? और तुम्‍हारे मन में क्‍यों सन्‍देह उठते हैं? “मेरे हाथ और मेरे पाँव को देखो, कि मैं वहीं हूँ; मुझे छूकर देखो; क्‍योंकि आत्‍मा के हड्डी माँस नहीं होता जैसा मुझ में देखते हो।” यह कहकर उसने उन्‍हें अपने हाथ पाँव दिखाए। जब आनन्‍द के मारे उनको प्रतीति न हुई, और आश्‍चर्य करते थे, तो उसने उनसे पूछा, “क्‍या यहाँ तुम्‍हारे पास कुछ भोजन है?” उन्होंने उसे भूनी मछली का टुकड़ा दिया। उसने लेकर उनके सामने खाया। फिर उसने उनसे कहा, “ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्‍हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्‍य है, कि जितनी बातें मूसा की व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ताओं और भजनों की पुस्‍तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।” तब उसने पवित्र शास्‍त्र समझने के लिये उनकी समझ खोल दी। और उनसे कहा, “यों लिखा है कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा, और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। “तुम इन सब बातें के गवाह हो। “और देखो, जिसकी प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, मैं उसको तुम पर उतारूँगा और जब तक स्‍वर्ग से सामर्थ्य न पाओ, तब तक तुम इसी नगर में ठहरे रहो।” तब वह उन्‍हें बैतनिय्‍याह तक बाहर ले गया, और अपने हाथ उठाकर उन्‍हें आशीष दी; और उन्‍हें आशीष देते हुए वह उनसे अलग हो गया और स्‍वर्ग पर उठा लिया गया। और वे उसको दण्‍डवत् करके बड़े आनन्‍द से यरूशलेम को लौट गए। और वे लगातार मन्‍दिर में उपस्‍थित होकर परमेश्‍वर की स्‍तुति किया करते थे। आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था। यही आदि में परमेश्‍वर के साथ था। सब कुछ उसी के द्वारा उत्‍पन्‍न हुआ और जो कुछ उत्‍पन्‍न हुआ है, उसमें से कोई भी वस्‍तु उसके बिना उत्‍पन्‍न न हुई। उसमें जीवन था; और वह जीवन मुनष्‍यों की ज्‍योति थी। और ज्‍योति अन्‍धकार में चमकती है; और अन्‍धकार ने उसे ग्रहण न किया। एक मनुष्‍य परमेश्‍वर की ओर से आ उपस्‍थित हुआ जिसका नाम यूहन्‍ना था। यह गवाही देने आया, कि ज्‍योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्‍वास लाएँ। वह आप तो वह ज्‍योति न था, परन्‍तु उस ज्‍योति की गवाही देने के लिये आया था। सच्‍ची ज्‍योति जो हर एक मनुष्‍य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्‍पन्‍न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। वह अपने घर में आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्‍हें परमेश्‍वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्‍वास रखते हैं: वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्‍य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुए हैं। और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। यूहन्‍ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिसका मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्‍योंकि वह मुझ से पहले था। क्‍योंकि उसकी परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्‍त किया अर्थात् अनुग्रह पर अनुग्रह। इसलिये कि व्‍यवस्‍था तो मूसा के द्वारा दी गई, परन्‍तु अनुग्रह और सच्‍चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुँची। परमेश्‍वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र** जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया। यूहन्‍ना की गवाही यह है, कि जब यहूदियों ने यरूशलेम से याजकों और लेवीयों को उससे यह पूछने के लिये भेजा, “तू कौन है?” तो उसने यह मान लिया, और इन्‍कार नहीं किया, परन्‍तु मान लिया कि मैं मसीह नहीं हूँ। तब उन्होंने उससे पूछा, “तो फिर कौन है? क्‍या तू एलिय्‍याह है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।” तो क्‍या तू वह भविष्‍यद्वक्‍ता है? उसने उत्तर दिया, “नहीं”। तब उन्होंने उससे पूछा, “फिर तू है कौन? ताकि हम अपने भेजनेवालों को उत्तर दें। तू अपने विषय में क्‍या कहता है?” उसने कहा, “जैसा यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता ने कहा है, ‘मैं जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द हूँ कि तुम प्रभु का मार्ग सीधा करो’।” ये फरीसियों की ओर से भेजे गए थे। उन्होंने उससे यह प्रश्‍न पूछा, कि यदि तू न मसीह है, और न एलिय्‍याह, और न वह भविष्‍यद्वक्‍ता है, तो फिर बपतिस्‍मा क्‍यों देता है? यूहन्‍ना ने उनको उत्तर दिया, कि मैं तो जल से बपतिस्‍मा देता हूँ, परन्‍तु तुम्‍हारे बीच में एक व्यक्ति खड़ा है, जिसे तुम नहीं जानते। अर्थात् मेरे बाद आनेवाला है, जिस की जूती का बन्‍ध मैं खोलने के योग्‍य नहीं। ये बातें यरदन के पार बैतनिय्‍याह में हुई, जहाँ यूहन्‍ना बपतिस्‍मा देता था। दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्‍ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। यह वही है, जिसके विषय में मैं ने कहा था, कि एक पुरूष मेरे पीछे आता है, जो मुझ से श्रेष्‍ठ है, क्‍योंकि वह मुझ से पहले था। और मैं तो उसे पहिचानता न था, परन्‍तु इसलिये मैं जल से बपतिस्‍मा देता हुआ आया, कि वह इस्राएल पर प्रगट हो जाए।” और यूहन्‍ना ने यह गवाही दी, कि मैं ने आत्‍मा को कबूतर की नाई आकाश से उतरते देखा है, और वह उस पर ठहर गया। और मैं तो उसे पहिचानता नहीं था, परन्‍तु जिस ने मुझे जल से बपतिस्‍मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्‍मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा देनेवाला है। और मैं ने देखा, और गवाही दी है कि यही परमेश्‍वर का पुत्र है। दूसरे दिन फिर यूहन्‍ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। और उसने यीशु पर जो जा रहा था, दृष्‍टि करके कहा, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्‍ना है।” तब वे दोनों चेले उसकी सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। यीशु ने मुड़कर और उनको पीछे आते देखकर उनसे कहा, “तुम किस की खोज में हो?” उन्होंने उससे कहा, “हे रब्‍बी, अर्थात् (हे गुरू), तू कहाँ रहता है?” उसने उनसे कहा, “चलो, तो देख लोगे।” तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्‍थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। उन दोनों में से, जो यूहन्‍ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिए थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्‍द्रियास था। उसने पहले अपने सगे भाईं शमौन से मिलकर उससे कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात् मसीह मिल गया। वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्‍टि करके कहा, “तू यूहन्‍ना का पुत्र शमौन है, तू केफा” अर्थात् पतरस कहलाएगा। दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा, और फिलिप्‍पुस से मिलकर कहा, “मेरे पीछे हो ले।” फिलिप्‍पुस तो अन्‍द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था। फिलिप्‍पुस ने नतनएल से मिलकर उससे कहा, “जिसका वर्णन मूसा ने व्‍यवस्‍था में और भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।” नतनएल ने उससे कहा, “क्‍या कोई अच्‍छी वस्‍तु भी नासरत से निकल सकती है?” फिलिप्‍पुस ने उससे कहा, “चलकर देख ले।” यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, “देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं।” नतनएल ने उससे कहा, “तू मुझे कहाँ से जानता है?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “उससे पहले कि फिलिप्‍पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।” नतनएल ने उसको उत्तर दिया, “हे रब्‍बी, तू परमेश्‍वर का पुत्र हे; तू इस्राएल का महाराजा है।” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्‍या तु इसी लिये विश्‍वास करता है? तु इस से बड़े बड़े काम देखेगा।” फिर उससे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्‍वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्वर्गदूतों को मनुष्‍य के पुत्र के ऊपर उतरते और ऊपर जाते देखोगे।” फिर तीसरे दिन गलील के काना में किसी का ब्याह था, और यीशु की माता भी वहाँ थी। यीशु और उसके चेले भी उस ब्याह में नेवते गए थे। जब दाखरस घट गया, तो यीशु की माता ने उससे कहा, “उन के पास दाखरस नहीं रहा।” यीशु ने उससे कहा, “हे महिला मुझे तुझ से क्‍या काम? अभी मेरा समय नहीं आया।” उसकी माता ने सेवकों से कहा, “जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना।” वहाँ यहूदियों के शुद्ध करने की रीति के अनुसार पत्‍थर के छ: मटके धरे थे, जिसमें दो दो, तीन तीन मन समाता था। यीशु ने उनसे कहा, “मटको में पानी भर दो।” सो उन्‍हो ने उन्‍हे मंहामुंह भर दिया। तब उसने उनसे कहा, “अब निकालकर भोज के प्रधान के पास ले जाओ।” और वे ले गए। जब भोज के प्रधान ने वह पानी चखा, जो दाखरस बन गया था और नहीं जानता था कि वह कहाँ से आया हैं; (परन्‍तु जिन सेवकों ने पानी निकाला था वे जानते थे), तो भोज के प्रधान ने दूल्‍हे को बुलाकर, उससे कहा। “हर एक मनुष्‍य पहले अच्‍छा दाखरस देता है, और जब लोग पीकर छक जाते हैं, तब मध्‍यम देता है; परन्‍तु तू ने अच्‍छा दाखरस अब तक रख छोड़ा है।” यीशु ने गलील के काना में अपना यह पहिला चिन्‍ह दिखाकर अपनी महिमा प्रगट की और उसके चेलों ने उस पर विश्‍वास किया। इसके बाद वह और उसकी माता, उसके भाई, उसके चेले, कफरनहूम को गए और वहाँ कुछ दिन रहे। यहूदियों का फसह का पर्व निकट था, और यीशु यरूशलेम को गया। और उसने मन्‍दिर में बैल, और भेड़ और कबूतर के बेचनेवालों ओर सर्राफों को बैठे हुए पाया। तब उसने रस्‍सियों का कोड़ा बनाकर, सब भेड़ों और बैलों को मन्‍दिर से निकाल दिया, और सर्राफों के पैसे बिखेर दिए, और पीढ़ों को उलट दिया, और कबूतर बेचनेवालों से कहा, “इन्‍हें यहाँ से ले जाओ। मेरे पिता के भवन को व्यापार का घर मत बनाओ।” तब उसके चेलों को स्‍मरण आया कि लिखा है, “तेरे घर की धुन मुझे खा जाएगी।” इस पर यहूदियों ने उससे कहा, “तू जो यह करता है तो हमें कौन सा चिन्‍ह दिखाता हैं?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “इस मन्‍दिर को ढा दो, और मैं इसे तीन दिन में खड़ा कर दूँगा।” यहूदियों ने कहा, “इस मन्‍दिर के बनाने में छियालीस वर्ष लगे हैं, और क्‍या तू उसे तीन दिन में खड़ा कर देगा?” परन्‍तु उसने अपनी देह के मन्‍दिर के विषय में कहा था। सो जब वह मुर्दों में से जी उठा तो उसके चेलों को स्‍मरण आया कि उसने यह कहा था; और उन्होंने पवित्र शास्‍त्र और उस वचन की जो यीशु ने कहा था, प्रतीति की। जब वह यरूशलेम में फसह के समय, पर्व में था, तो बहुतों ने उन चिन्‍हों को जो वह दिखाता था देखकर उसके नाम पर विश्‍वास किया। परन्‍तु यीशु ने अपने आप को उनके भरोसे पर नहीं छोड़ा, क्‍योंकि वह सब को जानता था, और उसे प्रयोजन न था कि मनुष्‍य के विषय में कोई गवाही दे, क्‍योंकि वह आप जानता था कि मनुष्‍य के मन में क्‍या है? फरीसियों में से नीकुदेमुस नाम एक मनुष्‍य था, जो यहूदियों का सरदार था। उसने रात को यीशु के पास आकर उससे कहा, “हे रब्‍बी, हम जानते हैं, कि तू परमेश्‍वर की ओर से गुरू हो कर आया है; क्‍योंकि कोई इन चिन्‍हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्‍वर उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्‍में तो परमेश्‍वर का राज्‍य देख नहीं सकता।” नीकुदेमुस ने उससे कहा, “मनुष्‍य जब बूढ़ा हो गया, तो क्‍योंकर जन्‍म ले सकता है? क्‍या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्‍म ले सकता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्‍य जल और आत्‍मा से न जन्‍मे तो वह परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश नहीं कर सकता। क्‍योंकि जो शरीर से जन्‍मा है, वह शरीर है; और जो आत्‍मा से जन्‍मा है, वह आत्‍मा है। अचम्‍भा न कर, कि मैं ने तुझ से कहा, ‘तुम्‍हें नये सिरे से जन्‍म लेना अवश्‍य है।’ हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्‍द सुनता है, परन्‍तु नहीं जानता, कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्‍मा से जन्‍मा है वह ऐसा ही है।” नीकुदेमुस ने उसको उत्तर दिया, “ये बातें क्‍योंकर हो सकती हैं?” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “तू इस्राएलियों का गुरू हो कर भी क्‍या इन बातों को नहीं समझता? मैं तुझ से सच सच कहता हूँ कि हम जो जानते हैं, वह कहते हैं, और जिसे हम ने देखा है उसकी गवाही देते हैं, और तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते। जब मैं ने तुम से पृथ्‍वी की बातें कहीं, और तुम प्रतीति नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्‍वर्ग की बातें कहूँ, तो फिर क्‍योंकर प्रतीति करोगे? कोई स्‍वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वहीं जो स्‍वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्‍य का पुत्र जो स्‍वर्ग में है। और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्‍य है कि मनुष्‍य का पुत्र भी ऊँचे पर चढ़ाया जाए। ताकि जो कोई विश्‍वास करे उसमें अनन्‍त जीवन पाए। “क्‍योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए। परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्‍तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। जो उस पर विश्‍वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्‍तु जो उस पर विश्‍वास नहीं करता, वह दोषी ठहरा चुका; इसलिये कि उसने परमेश्‍वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्‍वास नहीं किया। और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्‍योति जगत में आई है, और मनुष्‍यों ने अन्‍धकार को ज्‍योति से अधिक प्रिय जाना क्‍योंकि उनके काम बुरे थे। क्‍योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्‍योति से बैर रखता है, और ज्‍योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। परन्‍तु जो सच्‍चाई पर चलता है वह ज्‍योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों कि वह परमेश्‍वर की ओर से किए गए हैं।” इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहाँ उनके साथ रहकर बपतिस्‍मा देने लगा। और यूहन्‍ना भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्‍मा देता था। क्‍योंकि वहाँ बहुत जल था, और लोग आकर बपतिस्‍मा लेते थे। क्‍योंकि यूहन्‍ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था। वहाँ यूहन्‍ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ। और उन्होंने यूहन्‍ना के पास आकर उससे कहा, “हे रब्‍बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है; देख, वह बपतिस्‍मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।” यूहन्‍ना ने उत्तर दिया, “जब तक मनुष्‍य को स्‍वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता। तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, ‘मैं मसीह नहीं, परन्‍तु उसके आगे भेजा गया हूँ।’ जिस की दुलहिन है, वही दूल्‍हा है: परन्‍तु दूल्‍हे का मित्र जो खड़ा हुआ उसकी सुनता है, दूल्‍हे के शब्‍द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है। अवश्‍य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ। “जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्‍वी से आता है वह पृथ्‍वी का है; और पृथ्‍वी की ही बातें कहता है: जो स्‍वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है। जो कुछ उसने देखा, और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उसकी गवाही ग्रहण नहीं करता। जिसने उसकी गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप दे दी कि परमेश्‍वर सच्‍चा है। क्‍योंकि जिसे परमेश्‍वर ने भेजा है, वह परमेश्‍वर की बातें कहता है: क्‍योंकि वह आत्‍मा नाप नापकर नहीं देता। पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएँ उसके हाथ में दे दी हैं। जो पुत्र पर विश्‍वास करता है, अनन्‍त जीवन उसका है; परन्‍तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्‍तु परमेश्‍वर का क्रोध उस पर रहता है।” फिर जब प्रभु को मालूम हुआ कि फरीसियों ने सुना है कि यीशु यूहन्‍ना से अधिक चेले बनाता और उन्‍हें बपतिस्‍मा देता है। (यद्यपि यीशु स्वयं नहीं वरन् उसके चेले बपतिस्‍मा देते थे), तब वह यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया, और उसको सामरिया से होकर जाना अवश्‍य था। इसलिए वह सूखार नामक सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। और याकूब का कूआँ भी वहीं था। सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएँ पर योंही बैठ गया। और यह बात छठे घण्‍टे के लगभग हुई। इतने में एक सामरी स्‍त्री जल भरने को आई। यीशु ने उससे कहा, “मुझे पानी पिला।” क्‍योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। उस सामरी स्‍त्री ने उससे कहा, “तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्‍त्री से पानी क्‍यों माँगता है?” (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्‍यवहार नहीं रखते।) यीशु ने उत्तर दिया, “यदि तू परमेश्‍वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है, ‘मुझे पानी पिला,’ तो तू उससे माँगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।” स्‍त्री ने उससे कहा, “हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआँ गहिरा है; तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहा से आया? क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआँ दिया; और आपही अपने सन्‍तान, और अपने पशुओं समेत उसमें से पीया?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा, परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक पियासा न होगा; वरन् जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।” स्‍त्री ने उससे कहा, “हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्‍यासी न होऊँ और न जल भरने को इतनी दूर आऊँ।” यीशु ने उससे कहा, “जा, अपने पति को यहाँ बुला ला।” स्‍त्री ने उत्तर दिया, “मैं बिना पति की हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “तू ठीक कहती है, ‘मैं बिना पति की हूँ।’ क्‍योंकि तू पाँच पति कर चुकी है, और जिसके पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।” स्‍त्री ने उससे कहा, “हे प्रभु, मुझे लगता है कि तू भविष्यद्वकता है। हमारे बापदादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया, और तुम कहते हो कि वह जगह जहाँ भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।” यीशु ने उससे कहा, “हे नारी, मेरी बात का विश्वास कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे, न यरूशलेम में। तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्‍योंकि उद्धार यहूदियों में से है। परन्‍तु वह समय आता है, वरन् अब भी है, जिसमें सच्‍चे भक्‍त पिता का भजन आत्‍मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करनेवालों को ढूँढ़ता है। परमेश्‍वर आत्‍मा है, और अवश्‍य है कि उसके भजन करनेवाले आत्‍मा और सच्‍चाई से भजन करें।” स्‍त्री ने उससे कहा, “मैं जानती हूँ कि मसीह जो ख्रीस्तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।” यीशु ने उससे कहा, “मैं जो तुझ से बोल रहा हूँ, वही हूँ।” इतने में उसके चेले आ गए, और अचम्‍भा करने लगे कि वह स्‍त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न पूछा, “तू क्‍या चाहता है?” या “किस लिये उससे बातें करता है?” तब स्‍त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी, “आओ, एक मनुष्‍य को देखो, जिस ने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया। कहीं यही तो मसीह नहीं है?” तब वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे। इतने में उसके चेले यीशु से यह विनती करने लगे, “हे रब्‍बी, कुछ खा ले।” परन्‍तु उसने उनसे कहा, “मेरे पास खाने के लिये ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।” तब चेलों ने आपस में कहा, “क्‍या कोई उसके लिये कुछ खाने को लाया है?” यीशु ने उनसे कहा, “मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजनेवाले की इच्‍छा के अनुसार चलूँ और उसका काम पूरा करूँ। क्‍या तुम नहीं कहते, ‘कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं?’ देखो, मैं तुम से कहता हूँ, अपनी आँखे उठाकर खेतों पर दृष्‍टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं। और काटनेवाला मजदूरी पाता, और अनन्‍त जीवन के लिये फल बटोरता है, ताकि बोनेवाला और काटनेवाला दोनों मिलकर आनन्‍द करें। क्‍योंकि इस पर यह कहावत ठीक बैठती है: ‘बोनेवाला और है और काटनेवाला और।’ मैं ने तुम्‍हें वह खेत काटने के लिये भेजा जिसमें तुम ने परिश्रम नहीं किया: औरों ने परिश्रम किया और तुम उनके परिश्रम के फल में भागी हुए।” और उस नगर के बहुत से सामरियों ने उस स्‍त्री के कहने से यीशु पर विश्वास किया; जिस ने यह गवाही दी थी, कि उसने सब कुछ जो मैं ने किया है, मुझे बता दिया। तब जब ये सामरी उसके पास आए, तो उससे विनती करने लगे कि हमारे यहाँ रह। सो वह वहाँ दो दिन तक रहा। और उसके वचन के कारण और भी बहुतेरों ने विश्‍वास किया। और उस स्‍त्री से कहा, “अब हम तेरे कहने ही से विश्‍वास नहीं करते; क्‍योंकि हम ने आप ही सुन लिया, और जानते हैं कि यही सचमुच में जगत का उद्धारकर्ता है।” फिर उन दो दिनों के बाद वह वहाँ से निकल कर गलील को गया। क्‍योंकि यीशु ने आप ही साक्षी दी कि भविष्‍यद्वक्‍ता अपने देश में आदर नहीं पाता। जब वह गलील में आया, तो गलीली आनन्‍द के साथ उससे मिले; क्‍योंकि जितने काम उसने यरूशलेम में पर्व के समय किए थे, उन्होंने उन सब को देखा था, क्‍योंकि वे भी पर्व में गए थे। तब वह फिर गलील के काना में आया, जहाँ उसने पानी को दाखरस बनाया था। वहाँ राजा का एक कर्मचारी था जिसका पुत्र कफरनहूम में बीमार था। वह यह सुनकर कि यीशु यहूदिया से गलील में आ गया है, उसके पास गया और उससे विनती करने लगा कि चलकर मेरे पुत्र को चंगा कर दे: क्‍योंकि वह मरने पर था। यीशु ने उससे कहा, “जब तक तुम चिन्‍ह और अद्भुत काम न देखोगे तब तक कदापि विश्‍वास न करोगे।” राजा के कर्मचारी ने उससे कहा, “हे प्रभु, मेरे बालक की मृत्‍यु होने से पहले चल।” यीशु ने उससे कहा, “जा, तेरा पुत्र जीवित है।” उस मनुष्‍य ने यीशु की कही हुई बात की प्रतीति की और चला गया। वह मार्ग में जा रहा था, कि उसके दास उससे आ मिले और कहने लगे, “तेरा लड़का जीवित है।” उसने उनसे पूछा, कि किस घड़ी वह अच्‍छा होने लगा? उन्होंने उससे कहा, “कल सातवें घण्‍टे में उसका ज्‍वर उतर गया।” तब पिता जान गया कि यह उसी घड़ी हुआ जिस घड़ी यीशु ने उससे कहा, “तेरा पुत्र जीवित है,” और उसने और उसके सारे घराने ने विश्‍वास किया। यह दूसरा आश्‍चर्यकर्म था जो यीशु ने यहूदिया से गलील में आकर दिखाया। इन बातों के पश्चात् यहूदियों का एक पर्व हुआ, और यीशु यरूशलेम को गया। यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्‍ड है जो इब्रानी भाषा में बेतहसदा कहलाता है, और उसके पाँच ओसारे हैं। इनमें बहुत से बीमार, अन्‍धे, लंगड़े और सूखे अंगवाले (पानी के हिलने की आशा में) पड़े रहते थे। (क्‍योंकि नियुक्ति समय पर परमेश्‍वर के स्‍वर्गदूत कुण्‍ड में उतरकर पानी को हिलाया करते थे: पानी हिलते ही जो कोई पहले उतरता वह चंगा हो जाता था चाहे उसकी कोई बीमारी क्‍यों न हो।) वहाँ एक मनुष्‍य था, जो अड़तीस वर्ष से बीमारी में पड़ा था। यीशु ने उसे पड़ा हुआ देखकर और जानकर कि वह बहुत दिनों से इस दशा में पड़ा है, उससे पूछा, “क्‍या तू चंगा होना चाहता है?” उस बीमार ने उसको उत्तर दिया, “हे प्रभु, मेरे पास कोई मनुष्‍य नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए, तो मुझे कुण्‍ड में उतारे; परन्‍तु मेरे पहुँचते पहुँचते दूसरा मुझ से पहले उतर जाता है।” यीशु ने उससे कहा, “उठ, अपनी खाट उठाकर चल फिर।” वह मनुष्‍य तुरन्‍त चंगा हो गया, और अपनी खाट उठाकर चलने फिरने लगा। वह सब्‍त का दिन था। इसलिये यहूदी उससे जो चंगा हुआ था, कहने लगे, “आज तो सब्‍त का दिन है, तुझे खाट उठानी उचित्त नहीं।” उसने उन्‍हें उत्तर दिया, “जिस ने मुझे चंगा किया, उसी ने मुझ से कहा, अपनी खाट उठाकर चल फिर।” उन्होंने उससे पूछा, “वह कौन मनुष्‍य है जिस ने तुझ से कहा, ‘खाट उठा और, चल फिर’?” परन्‍तु जो चंगा हो गया था, वह नहीं जानता था वह कौन है; क्‍योंकि उस जगह में भीड़ होने के कारण यीशु वहाँ से हट गया था। इन बातों के बाद वह यीशु को मन्‍दिर में मिला, तब उस ने उससे कहा, “देख, तू तो चंगा हो गया है; फिर से पाप मत करना, ऐसा न हो कि इस से कोई भारी विपत्ति तुझ पर आ पड़े।” उस मनुष्‍य ने जाकर यहूदियों से कह दिया, कि जिस ने मुझे चंगा किया, वह यीशु है। इस कारण यहूदी यीशु को सताने लगे, क्‍योंकि वह ऐसे ऐसे काम सब्‍त के दिन करता था। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मेरा पिता अब तक काम करता है, और मैं भी काम करता हूँ।” इस कारण यहूदी और भी अधिक उसके मार डालने का प्रयत्‍न करने लगे, कि वह न केवल सब्‍त के दिन की विधि को तोड़ता, परन्‍तु परमेश्‍वर को अपना पिता कह कर, अपने आप को परमेश्‍वर के तुल्‍य ठहराता था। इस पर यीशु ने उनसे कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूँ, पुत्र आप से कुछ नहीं कर सकता, केवल वह जो पिता को करते देखता है, क्‍योंकि जिन जिन कामों को वह करता है उन्‍हें पुत्र भी उसी रीति से करता है। क्‍योंकि पिता पुत्र से प्रीति रखता है और जो जो काम वह आप करता है, वह सब उसे दिखाता है; और वह इन से भी बड़े काम उसे दिखाएगा, ताकि तुम अचम्‍भा करो। क्‍योकि जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्‍हें चाहता है उन्‍हें जिलाता है। पिता किसी का न्‍याय भी नहीं करता, परन्‍तु न्‍याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है, इसलिये कि सब लोग जैसे पिता का आदर करते हैं वैसे ही पुत्र का भी आदर करें: जो पुत्र का आदर नहीं करता, वह पिता का जिसने उसे भेजा है, आदर नहीं करता। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजनेवाले पर विश्वास करता है, अनन्‍त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्‍तु वह मृत्‍यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है। “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, वह समय आता है, और अब है, जिसमें मृतक परमेश्‍वर के पुत्र का शब्‍द सुनेंगे, और जो सुनेंगे वे जीएँगे। क्‍योंकि जिस रीति से पिता अपने आप में जीवन रखता है, उसी रीति से उसने पुत्र को भी यह अधिकार दिया है कि अपने आप में जीवन रखे; वरन् उसे न्‍याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्‍य का पुत्र है। इस से अचम्‍भा मत करो; क्‍योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्‍द सुनकर निकलेंगे। जिन्‍हों ने भलाई की है वे जीवन के पुनरूत्‍थान के लिये जी उठेंगे और जिन्‍होंने बुराई की है वे दंड के पुनरूत्‍थान के लिये जी उठेंगे। “मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूँ, वैसा न्‍याय करता हूँ, और मेरा न्‍याय सच्‍चा है; क्‍योंकि मैं अपनी इच्‍छा नहीं, परन्‍तु अपने भेजनेवाले की इच्‍छा चाहता हूँ। यदि मैं आप ही अपनी गवाही दूँ; तो मेरी गवाही सच्‍ची नहीं। एक और है जो मेरी गवाही देता है, और मैं जानता हुँ कि मेरी जो गवाही वह देता है, वह सच्‍ची है। तुम ने यूहन्‍ना से पुछवाया और उसने सच्‍चाई की गवाही दी है। परन्‍तु मैं अपने विषय में मनुष्‍य की गवाही नहीं चाहता; तौभी मैं ये बातें इसलिये कहता हूँ, कि तुम्‍हें उद्धार मिले। वह जो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्‍हें कुछ देर तक उसकी ज्‍योति में, मगन होना अच्‍छा लगा। परन्‍तु मेरे पास जो गवाही है वह यूहन्‍ना की गवाही से बड़ी है: क्‍योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात् यही काम जो मैं करता हूँ, वे मेरे गवाह हैं, कि पिता ने मुझे भेजा है। और पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्‍द सुना, और न उसका रूप देखा है; और उसके वचन को मन में स्‍थिर नहीं रखते, क्‍योंकि जिसे उसने भेजा तुम उसकी प्रतीति नहीं करते। तुम पवित्रशास्‍त्र में ढूँढ़ते* हो, क्‍योंकि समझते हो कि उसमें अनन्‍त जीवन तुम्‍हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते। मैं मनुष्‍यों से आदर नहीं चाहता। परन्‍तु मैं तुम्‍हें जानता हूँ, कि तुम में परमेश्‍वर का प्रेम नहीं। मैं अपने पिता के नाम से आया हूँ, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे। तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो और वह आदर जो एकमात्र परमेश्‍वर की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्‍वास कर सकते हो? यह न समझो, कि मैं पिता के साम्‍हने तुम पर दोष लगाऊंगा: तुम पर दोष लगानेवाला तो है, अर्थात् मूसा जिस पर तुम ने भरोसा रखा है। क्‍योंकि यदि तुम मूसा का प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उसने मेरे विषय में लिखा है। परन्‍तु यदि तुम उसकी लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्‍योंकर प्रतीति करोगे।” इन बातों के बाद यीशु गलील की झील अर्थात् तिबिरियास की झील के पास गया। और एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली क्‍योंकि जो आश्‍चर्यकर्म वह बीमारों पर दिखाता था वे उनको देखते थे। तब यीशु पहाड़ पर चढ़कर अपने चेलों के साथ वहाँ बैठा। और यहूदियों के फसह का पर्व निकट था। तब यीशु ने अपनी आँखे उठाकर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलिप्‍पुस से कहा, “हम इन के भोजन के लिये कहाँ से रोटी मोल लाएं?” परन्‍तु उसने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्‍योंकि वह आप जानता था कि मैं क्‍या करूँगा। फिलिप्‍पुस ने उसको उत्तर दिया, “दो सौ दीनार** की रोटी उनके लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए।” उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्‍द्रियास ने उससे कहा, “यहाँ एक लड़का है जिसके पास जव की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं, परन्‍तु इतने लोगों के लिये वे क्‍या हैं।” यीशु ने कहा, “लोगों को बैठा दो।” उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पाँच हजार के थे, बैठ गए: तब यीशु ने रोटियाँ लीं, और धन्‍यवाद करके बैठनेवालों को बाँट दी: और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बाँट दिया। जब वे खाकर तृप्‍त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, “बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए।” सो उन्होंने बटोरा, और जौ की पाँच रोटियों के टुकड़े जो खानेवालों से बच रहे थे उनकी बारह टोकरियाँ भरीं। तब जो आश्‍चर्य कर्म उसने कर दिखाया उसे वे लोग देखकर कहने लगे; कि वह भविष्‍यद्वक्‍ता जो जगत में आनेवाला था निश्‍चय यही है। यीशु यह जानकर कि वे मुझे राजा बनाने के लिये आकर पकड़ना चाहते हैं, फिर पहाड़ पर अकेला चला गया। फिर जब संध्‍या हुई, तो उसके चेले झील के किनारे गए, और नाव पर चढ़कर झील के पार कफरनहूम को जाने लगे: उस समय अन्‍धेरा हो गया था, और यीशु अभी तक उनके पास नहीं आया था। और आँधी के कारण झील में लहरें उठने लगीं। सो जब वे खेते खेते तीन चार मील के लगभग निकल गए, तो उन्होंने यीशु को झील पर चलते, और नाव के निकट आते देखा, और डर गए। परन्‍तु उसने उनसे कहा, “मैं हूँ; डरो मत।” सो वे उसे नाव पर चढ़ा लेने के लिये तैयार हुए और तुरन्‍त वह नाव उसी स्‍थान पर जा पहुँची जहाँ वह जाते थे। दूसरे दिन उस भीड़ ने, जो झील के पार खड़ी थी, यह देखा, कि यहाँ एक को छोड़कर और कोई छोटी नाव न थी, और यीशु अपने चेलों के साथ उस नाव पर न चढ़ा, परन्‍तु केवल उसके चेले चले गए थे। (तौभी और छोटी नावें तिबिरियास से उस जगह के निकट आई, जहाँ उन्होंने प्रभु के धन्‍यवाद करने के बाद रोटी खाई थी।) सो जब भीड़ ने देखा, कि यहाँ न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूँढ़ते हुए कफरनहूम को पहँचे। और झील के पार उससे मिलकर कहा, “हे रब्‍बी, तू यहाँ कब आया?” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूँढ़ते हो कि तुम ने अचम्‍भित काम देखे, परन्‍तु इसलिये कि तुम रोटियाँ खाकर तृप्‍त हुए। नाशवान् भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्‍तु उस भोजन के लिये जो अनन्‍त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्‍य का पुत्र तुम्‍हें देगा, क्‍योंकि पिता, अर्थात् परमेश्‍वर ने उसी पर छाप कर दी है।” उन्होंने उससे कहा, “परमेश्‍वर के कार्य करने के लिये हम क्‍या करें?” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “परमेश्‍वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्‍वास करो।” तब उन्होंने उससे कहा, “फिर तू कौन सा चिन्‍ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें? तू कौन सा काम दिखाता है? हमारे बापदादों ने जंगल में मन्‍ना खाया; जैसा लिखा है, ‘उसने उन्‍हें खाने के लिये स्‍वर्ग से रोटी दी’।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि मूसा ने तुम्‍हें वह रोटी स्‍वर्ग से न दी, परन्‍तु मेरा पिता तुम्‍हें सच्‍ची रोटी स्‍वर्ग से देता है। क्‍योंकि परमेश्‍वर की रोटी वही है, जो स्‍वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।” तब उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर।” यीशु ने उनसे कहा, “जीवन की रोटी मैं हूँ: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्‍वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। परन्‍तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तौभी विश्‍वास नहीं करते। जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, और जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूँगा। क्‍योंकि मैं अपनी इच्‍छा नहीं, वरन् अपने भेजनेवाले की इच्‍छा पूरी करने के लिये स्‍वर्ग से उतरा हूँ। और मेरे भेजनेवाले की इच्‍छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उसमें से मैं कुछ न खोऊँ परन्‍तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँ। क्‍योंकि मेरे पिता की इच्‍छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्‍वास करे, वह अनन्‍त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँगा।” सो यहूदी उस पर कुड़कुड़ाने लगे, इसलिये कि उसने कहा था, “जो रोटी स्‍वर्ग से उतरी, वह मैं हूँ।” और उन्होंने कहा, “क्‍या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिसके माता-पिता को हम जानते हैं? तो वह क्‍योंकर कहता है कि मैं स्‍वर्ग से उतरा हूँ?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “आपस में मत कुड़कुड़ाओ। कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँगा। भविष्‍यद्वक्‍ताओं के लेखों में यह लिखा है, ‘वे सब परमेश्‍वर की ओर से सिखाए हुए होंगे।’ जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है। यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्‍तु जो परमेश्‍वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो कोई विश्‍वास करता है, अनन्‍त जीवन उसी का है। जीवन की रोटी मैं हूँ। तुम्‍हारे बापदादों ने जंगल में मन्‍ना खाया और मर गए। यह वह रोटी है जो स्‍वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्‍य उसमें से खाए और न मरे। जीवन की रोटी जो स्‍वर्ग से उतरी मैं हूँ। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा; और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूँगा, वह मेरा मांस है।” इस पर यहूदी यह कहकर आपस में झगड़ने लगे, “यह मनुष्‍य क्‍योंकर हमें अपना मांस खाने को दे सकता है?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ जब तक मनुष्‍य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता, और मेरा लोहू पीता हैं, अनन्‍त जीवन उसी का है, और मैं अंतिम दिन फिर उसे जिला उठाऊँगा। क्‍योंकि मेरा मांस वास्‍तव में खाने की वस्‍तु है और मेरा लोहू वास्‍तव में पीने की वस्‍तु है। जो मेरा मांस खाता और मेरा लोहू पीता है, वह मुझ में स्‍थिर बना रहता है, और मैं उसमें। जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूँ वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा। जो रोटी स्‍वर्ग से उतरी यही है, बापदादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा।” ये बातें उसने कफरनहूम के एक आराधनालय में उपदेश देते समय कहीं। इसलिये उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, “यह कठोर बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है?” यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उनसे पूछा, “क्‍या इस बात से तुम्‍हें ठोकर लगती है? और यदि तुम मनुष्‍य के पुत्र को जहाँ वह पहले था, वहाँ ऊपर जाते देखोगे, तो क्‍या होगा? आत्‍मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्‍मा है, और जीवन भी हैं। परन्‍तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्‍वास नहीं करते।” क्‍योंकि यीशु तो पहले ही से जानता था कि जो विश्‍वास नहीं करते, वे कौन हैं; और कौन मुझे पकड़वाएगा। और उसने कहा, “इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर से यह वरदान न दिया जाए तब तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।” इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उल्‍टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले। तब यीशु ने उन बारहों से कहा, “क्‍या तुम भी चले जाना चाहते हो?” शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, “हे प्रभु, हम किस के पास जाएँ? अनन्‍त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। और हम ने विश्‍वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्‍वर का पवित्र जन तू ही है।” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “क्‍या मैं ने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तौभी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है।” यह उसने शमौन इस्‍करियोती के पुत्र यहूदा के विषय में कहा, क्योंकि यही जो उन बारहों में से था, उसे पकड़वाने को था। इन बातों के बाद यीशु गलील में फिरता रहा, क्‍योंकि यहूदी उसे मार डालने का यत्‍न कर रहे थे, इसलिये वह यहूदिया में फिरना न चाहता था। और यहूदियों का झोपड़ियों का पर्व निकट था। इसलिये उसके भाइयों ने उससे कहा, “यहाँ से कूच करके यहूदिया में चला जा, कि जो काम तू करता है, उन्‍हें तेरे चेले भी देखें। क्‍योंकिं ऐसा कोई न होगा जो प्रसिद्ध होना चाहे, और छिपकर काम करे: यदि तू यह काम करता है, तो अपने आप को जगत पर प्रगट कर।” क्‍योंकि उसके भाई भी उस पर विश्‍वास नहीं करते थे। तब यीशु ने उनसे कहा, “मेरा समय अभी नहीं आया; परन्‍तु तुम्‍हारे लिये सब समय है। जगत तुम से बैर नहीं कर सकता, परन्‍तु वह मुझ से बैर करता है, क्‍योंकि मैं उसके विरोध में यह गवाही देता हूँ, कि उसके काम बुरे हैं। तुम पर्व में जाओ; मैं अभी इस पर्व में नहीं जाता, क्‍योंकि अभी तक मेरा समय पूरा नहीं हुआ।” वह उनसे ये बातें कहकर गलील ही में रह गया। परन्‍तु जब उसके भाई पर्व में चले गए, तो वह आप ही प्रगट में नहीं, परन्‍तु मानों गुप्‍त होकर गया। यहूदी पर्व में उसे यह कहकर ढूँढ़ने लगे कि वह कहाँ है? और लोगों में उसके विषय चुपके चुपके बहुत सी बातें हुईं: कितने कहते थे, “वह भला मनुष्‍य है।” और कितने कहते थे, “नहीं, वह लोगों को भरमाता है।” तौभी यहूदियों के भय के मारे कोई व्यक्ति उसके विषय में खुलकर नहीं बोलता था। और जब पर्व के आधे दिन बीत गए; तो यीशु मन्‍दिर में जाकर उपदेश करने लगा। तब यहूदियों ने अचम्‍भा करके कहा, कि इसे बिन पढ़े विद्या कैसे आ गई? यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मेरा उपदेश मेरा नहीं, परन्‍तु मेरे भेजनेवाले का है। यदि कोई उसकी इच्‍छा पर चलना चाहे, तो वह इस उपदेश के विषय में जान जाएगा कि वह परमेश्‍वर की ओर से है, या मैं अपनी ओर से कहता हूँ। जो अपनी ओर से कुछ कहता है, वह अपनी ही बढ़ाई चाहता है; परन्‍तु जो अपने भेजनेवाले की बड़ाई चाहता है वही सच्‍चा है, और उसमें अधर्म नहीं। क्‍या मूसा ने तुम्‍हें व्‍यवस्‍था नहीं दी? तौभी तुम में से कोई व्‍यवस्‍था पर नहीं चलता। तुम क्‍यों मुझे मार डालना चाहते हो?” लोगों ने उत्तर दिया; “तुझ में दुष्‍टात्‍मा है! कौन तुझे मार डालना चाहता है?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “मैं ने एक काम किया, और तुम सब अचम्‍भा करते हो। इसी कारण मूसा ने तुम्‍हें खतने की आज्ञा दी है (यह नहीं कि वह मूसा की ओर से है परन्‍तु बापदादों से चली आई है), और तुम सब्‍त के दिन को मनुष्‍य का खतना करते हो। जब सब्‍त के दिन मनुष्‍य का खतना किया जाता है ताकि मूसा की व्‍यवस्‍था की आज्ञा टल न जाए, तो तुम मुझ पर क्‍यों इसलिये क्रोध करते हो, कि मैं ने सब्‍त के दिन एक मनुष्‍य को पूरी रीति से चंगा किया। मुँह देखकर न्‍याय न चुकाओ, परन्‍तु ठीक ठीक न्‍याय चुकाओ।” तब कितने यरूशलेमवासी कहने लगे, “क्‍या यह वह नहीं, जिसके मार डालने का प्रयत्‍न किया जा रहा है? परन्‍तु देखो, वह तो खुल्‍लमखुल्‍ला बातें करता है और कोई उससे कुछ नहीं कहता; क्‍या सम्‍भव है कि सरदारों ने सच सच जान लिया है; कि यही मसीह है? इसको तो हम जानते हैं, कि यह कहाँ का है; परन्‍तु मसीह जब आएगा, तो कोई न जानेगा कि वह कहा ँ का है।” तब यीशु ने मन्‍दिर में उपदेश देते हुए पुकार के कहा, “तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ: मैं तो आप से नहीं आया परन्‍तु मेरा भेजनेवाला सच्‍चा है, उसको तुम नहीं जानते। मैं उसे जानता हूँ; क्‍योंकि मैं उसकी ओर से हूँ और उसी ने मुझे भेजा है।” इस पर उन्होंने उसे पकड़ना चाहा तौभी किसी ने उस पर हाथ न डाला, क्‍योंकि उसका समय अब तक न आया था। और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्‍वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्‍या इस से अधिक आश्‍चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए? फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे। इस पर यीशु ने कहा, “मैं थोड़ी देर तक और तुम्‍हारे साथ हूँ; तब अपने भेजनेवाले के पास चला जाऊँगा । तुम मुझे ढूँढ़ोगे, परन्‍तु नहीं पाओगे; और जहाँ मैं हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते।” यहूदियों ने आपस में कहा, “यह कहाँ जाएगा कि हम इसे न पाएँगे? क्‍या वह उनके पास जाएगा जो यूनानियों में तितर बितर होकर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा? यह क्‍या बात है जो उसने कही, कि ‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे, परन्‍तु न पाओगे: और जहाँ मैं हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते’?” जीवन-जल की नदियाँ फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्‍य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए। जो मुझ पर विश्‍वास करेगा, जैसा पवित्रशास्‍त्र में आया है, ‘उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी’।” उसने यह वचन उस आत्‍मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्‍वास करनेवाले पाने पर थे; क्‍योंकि आत्‍मा अब तक न उतरा था, क्‍योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुँचा था। तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, “सचमुच यही वह भविष्‍यद्वक्‍ता है।” औरों ने कहा, “यह मसीह है,” परन्‍तु किसी ने कहा, “क्‍यों? क्‍या मसीह गलील से आएगा? क्‍या पवित्रशास्‍त्र में नहीं आया कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गाँव से आएगा, जहाँ दाऊद रहता था?” सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी। उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्‍तु किसी ने उस पर हाथ न डाला। तब सिपाही महायाजकों और फरीसियों के पास आए, और उन्होंने उनसे कहा, “तुम उसे क्‍यों नहीं लाए?” सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्‍य ने कभी ऐसी बातें न की। फरीसियों ने उनको उत्तर दिया, “क्‍या तुम भी भरमाए गए हो? क्‍या सरदारों या फरीसियों में से किसी ने भी उस पर विश्‍वास किया है? परन्‍तु ये लोग जो व्‍यवस्‍था नहीं जानते, शापित हैं।” नीकुदेमुस ने, (जो पहले उसके पास आया था और उन में से एक था), उनसे कहा, “क्‍या हमारी व्‍यवस्‍था किसी व्यक्ति को जब तक पहले उसकी सुनकर जान न ले कि वह क्‍या करता है; दोषी ठहराती है?” उन्होंने उसे उत्तर दिया, “क्‍या तू भी गलील का है? ढूँढ़ और देख, कि गलील से कोई भविष्‍यद्वक्‍ता प्रगट नहीं होने का।” तब सब कोई अपने अपने घर चले गए। परन्‍तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। और भोर को फिर मन्‍दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्‍हें उपदेश देने लगा। तब शास्‍त्री और फरीसी एक स्‍त्री को लाए जो व्‍यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी करके यीशु से कहा, “हे गुरू, यह स्‍त्री व्‍यभिचार करते पकड़ी गई है। व्‍यवस्‍था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों कों पत्‍थरवाह करें: सो तू इस स्‍त्री के विषय में क्‍या कहता है?” उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएँ, परन्‍तु यीशु झुककर उँगली से भूमि पर लिखने लगा। जब वे उससे पूछते रहे, तो उसने सीधे होकर उनसे कहा, “तूम में जो निष्‍पाप हो, वही पहले उसको पत्‍थर मारे।” और फिर झुककर भूमि पर उँगली से लिखने लगा। परन्‍तु वे यह सुनकर बड़ों से लेकर छोटों तक एक एक करके निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्‍त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। यीशु ने सीधे होकर उससे कहा, “हे नारी, वे कहाँ गए? क्‍या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी?” उसने कहा, “हे प्रभु, किसी ने नहीं।” यीशु ने कहा, “मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।” तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, “जगत की ज्‍योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्‍धकार में न चलेगा, परन्‍तु जीवन की ज्‍योति पाएगा।” फरीसियों ने उससे कहा; “तू अपनी गवाही आप देता है; तेरी गवाही ठीक नहीं।” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “यदि मैं अपनी गवाही आप देता हूँ, तौभी मेरी गवाही ठीक है, क्‍योंकि मैं जानता हूँ, कि मैं कहाँ से आया हूँ और कहाँ को जाता हूँ? परन्‍तु तुम नहीं जानते कि मैं कहाँ से आता हूँ या कहाँ को जाता हूँ। तुम शरीर के अनुसार न्‍याय करते हो; मैं किसी का न्‍याय नहीं करता। और यदि मैं न्‍याय करूँ भी, तो मेरा न्‍याय सच्‍चा है; क्‍योंकि मैं अकेला नहीं, परन्‍तु मैं हूँ, और पिता है जिस ने मुझे भेजा। और तुम्‍हारी व्‍यवस्‍था में भी लिखा है; कि दो जनों की गवाही मिलकर ठीक होती है। एक तो मैं आप अपनी गवाही देता हूँ, और दूसरा पिता मेरी गवाही देता है जिस ने मुझे भेजा।” उन्होंने उससे कहा, “तेरा पिता कहाँ है?” यीशु ने उत्तर दिया, “न तुम मुझे जानते हो, न मेरे पिता को, यदी मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते।” ये बातें उसने मन्‍दिर में उपदेश देते हुए भण्‍डार घर में कहीं, और किसी ने उसे न पकड़ा; क्‍योंकि उसका समय अब तक नहीं आया था। उसने फिर उनसे कहा, “मैं जाता हूँ, और तुम मुझे ढूँढ़ोगे और अपने पाप में मरोगे: जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते।” इस पर यहूदियों ने कहा, “क्‍या वह अपने आप को मार डालेगा, जो कहता है, ‘जहाँ मैं जाता हूँ वहाँ तुम नहीं आ सकते’?” उसने उनसे कहा, “तुम नीचे के हो, मैं ऊपर का हूँ; तुम संसार के हो, मैं संसार का नहीं। इसलिये मैं ने तुम से कहा, कि तुम अपने पापों में मरोगे; क्‍योंकि यदि तुम विश्‍वास न करोगे कि मैं वहीं हूँ, तो अपने पापों में मरोगे।” उन्होंने उससे कहा, “तू कौन है?” यीशु ने उनसे कहा, “वही** हूँ जो प्रारम्‍भ से तुम से कहता आया हूँ। तुम्‍हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना और निर्णय करना है परन्‍तु मेरा भेजनेवाला सच्‍चा है; और जो मैं ने उससे सुना है, वही जगत से कहता हूँ।” वे न समझे कि हम से पिता के विषय में कहता है। तब यीशु ने कहा, “जब तुम मनुष्‍य के पुत्र को ऊंचे पर चढ़ाओगे, तो जानोगे कि मैं वही हूँ, और अपने आप से कुछ नहीं करता, परन्‍तु जैसे मेरे पिता ने मुझे सिखाया, वैसे ही ये बातें कहता हूँ। और मेरा भेजनेवाला मेरे साथ है; उसने मुझे अकेला नहीं छोड़ा; क्‍योंकि मैं सर्वदा वही काम करता हूँ, जिस से वह प्रसन्‍न होता है।” वह ये बातें कह ही रहा था, कि बहुतेरों ने उस पर विश्‍वास किया। तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्‍हों ने उनकी प्रतीति की थी, कहा, “यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। और सत्‍य को जानोगे, और सत्‍य तुम्‍हें स्‍वतंत्र करेगा।” उन्होंने उसको उत्तर दिया, “हम तो इब्राहीम के वंश से हैं, और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्‍योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है। और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है। इसलिए यदि पुत्र तुम्‍हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे। मैं जानता हूँ कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्‍हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो। मैं वही कहता हूँ, जो अपने पिता के यहाँ देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।” उन्होंने उनको उत्तर दिया, “हमारा पिता तो इब्राहीम है।” यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम इब्राहीम के सन्‍तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते। परन्‍तु अब तुम मुझे ऐसे मनुष्‍य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्‍हें वह सत्‍य वचन बताया जो परमेश्‍वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था। तुम अपने पिता के समान काम करते हो” उन्होंने उससे कहा, “हम व्‍यभिचार से नहीं जन्‍में, हमारा एक पिता है अर्थात् परमेश्‍वर।” यीशु ने उनसे कहा, “यदि परमेश्‍वर तुम्‍हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्‍योंकि मैं परमेश्‍वर में से निकल कर आया हूँ; मैं आप से नहीं आया, परन्‍तु उसी ने मुझे भेजा। तुम मेरी बात क्‍यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते। तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्‍भ से हत्‍यारा है, और सत्‍य पर स्‍थिर न रहा, क्‍योंकि सत्‍य उसमें है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्‍योंकि वह झूठा है, वरन्झूठ का पिता है। परन्‍तु मैं जो सच बोलता हूँ, इसीलिये तुम मेरी विश्वास नहीं करते। तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूँ, तो तुम मेरी प्रतीति क्‍यों नहीं करते? जो परमेश्‍वर से होता हे, वह परमेश्‍वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्‍वर की ओर से नहीं हो।” यह सुन यहूदियों ने उससे कहा, “क्‍या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्‍टात्‍मा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मुझ में दुष्‍टात्‍मा नहीं; परन्‍तु मैं अपने पिता का आदर करता हूँ, और तुम मेरा निरादर करते हो। परन्‍तु मैं अपनी प्रतिष्‍ठा नहीं चाहता, हाँ, एक तो है जो चाहता है, और न्‍याय करता है। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्‍त काल तक मृत्‍यु को न देखेगा।” यहूदियों ने उससे कहा, “अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्‍टात्‍मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्‍यद्वक्‍ता भी मर गए हैं और तू कहता है, ‘यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्‍त काल तक मृत्‍यु का स्‍वाद न चखेगा।’ हमारा पिता इब्राहीम तो मर गया, क्‍या तू उससे बड़ा है? और भविष्‍यद्वक्‍ता भी मर गए, तू अपने आप को क्‍या ठहराता है।” यीशु ने उत्तर दिया, “यदि मैं आप अपनी महिमा करूँ, तो मेरी महिमा कुछ नहीं, परन्‍तु मेरी महिमा करनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम कहते हो, कि वह हमारा परमेश्‍वर है। और तुम ने तो उसे नहीं जाना: परन्‍तु मैं उसे जानता हूँ; और यदि कहूँ कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्‍हारी नाईं झूठा ठहरूंगा: परन्‍तु मैं उसे जानता, और उसके वचन पर चलता हूँ। तुम्‍हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उसने देखा, और आनन्‍द किया।” यहूदियों ने उससे कहा, “अब तक तू पचास वर्ष का नहीं, फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि पहले इसके कि इब्राहीम उत्‍पन्‍न हुआ, मैं हूँ।” तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्‍थर उठाए, परन्‍तु यीशु छिपकर मन्‍दिर से निकल गया। फिर जाते हुए उसने एक मनुष्‍य को देखा, जो जन्‍म का अन्‍धा था। और उसके चेलों ने उससे पूछा, “हे रब्‍बी, किस ने पाप किया था कि यह अन्‍धा जन्‍मा, इस मनुष्‍य ने, या उसके माता पिता ने?” यीशु ने उत्तर दिया, “न तो इस ने पाप किया था, न इस के माता पिता ने: परन्‍तु यह इसलिये हुआ, कि परमेश्‍वर के काम उसमें प्रगट हों। जिस ने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्‍य है: वह रात आनेवाली है जिसमें कोई काम नहीं कर सकता। जब तक मैं जंगल में हूँ, तब तक जगत की ज्‍योति हूँ।” यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और वह मिट्टी उस अन्‍धे की आँखों पर लगाकर। उससे कहा, “जा, शीलोह के कुण्‍ड में धो ले” (जिसका अर्थ भेजा हुआ है) सो उसने जाकर धोया, और देखता हुआ लौट आया। तब पड़ोसी और जिन्‍हों ने पहले उसे भीख माँगते देखा था, कहने लगे, “क्‍या यह वही नहीं, जो बैठा भीख माँगा करता था?” कुछ लोगों ने कहा, “यह वही है,” औरों ने कहा, “नहीं, परन्‍तु उसके समान है” उसने कहा, “मैं वही हूँ।” तब वे उससे पूछने लगे, “तेरी आँखें क्‍योंकर खुल गई?” उसने उत्तर दिया, “यीशु नाम एक व्यक्ति ने मिट्टी सानी, और मेरी आँखें पर लगाकर मुझ से कहा, ‘शीलोह में जाकर धो ले,’ सो मैं गया, और धोकर देखने लगा।” उन्होंने उससे पूछा, “वह कहाँ है?” उसने कहा, “मैं नहीं जानता।” लोग उसे जो पहले अन्‍धा था फरीसियों के पास ले गए। जिस दिन यीशु ने मिट्टी सानकर उसकी आँखें खोली थी वह सब्‍त का दिन था। फिर फरीसियों ने भी उससे पूछा; तेरी आँखें किस रीति से खुल गई? उसने उनसे कहा, “उसने मेरी आँखों पर मिट्टी लगाई, फिर मैंने धो लिया, और अब देखता हूँ।” इस पर कई फरीसी कहने लगे, “यह मनुष्‍य परमेश्‍वर की ओर से नहीं, क्‍योंकि वह सब्‍त का दिन नहीं मानता।” औरों ने कहा, “पापी मनुष्‍य क्‍योंकर ऐसे चिन्‍ह दिखा सकता है?” सो उन में फूट पड़ी। उन्होंने उस अन्‍धे से फिर कहा, “उसने जो तेरी आंखे खोली, तू उसके विषय में क्‍या कहता है?” उसने कहा, “यह भविष्‍यद्वक्‍ता है।” परन्‍तु यहूदियों को विश्‍वास न हुआ कि यह अन्‍धा था और अब देखता है जब तक उन्होंने उसके माता-पिता को जिस की आंखे खुल गई थी, बुलाकर उनसे न पूछा, “क्‍या यह तुम्‍हारा पुत्र है, जिसे तुम कहते हो कि अन्‍धा जन्‍मा था? फिर अब क्‍योंकर देखता है?” उसके माता-पिता ने उत्तर दिया, “हम तो जानते हैं कि यह हमारा पुत्र है, और अन्‍धा जन्‍मा था। परन्‍तु हम यह नहीं जानते हैं कि अब क्‍योंकर देखता है; और न यह जानते हैं, कि किस ने उसकी आंखे खोलीं; वह सयाना है; उसी से पूछ लो; वह अपने विषय में आप कह देगा।” ये बातें उसके माता-पिता ने इसलिये कहीं क्‍योंकि वे यहूदियों से डरते थे; क्‍योकि यहूदी एका कर चुके थे, कि यदि कोई कहे कि वह मसीह है, तो आराधनालय से निकाला जाए। इसी कारण उसके माता-पिता ने कहा, कि वह सयाना है; उसी से पूछ लो। तब उन्होंने उस मनुष्‍य को जो अन्‍धा था दूसरी बार बुलाकर उससे कहा, “परमेश्‍वर की स्‍तुति कर; हम तो जानते हैं कि वह मनुष्‍य पापी है।” उसने उत्तर दिया, “मैं नहीं जानता कि वह पापी है या नहीं: मैं एक बात जानता हूँ कि मैं अन्‍धा था और अब देखता हूँ।” उन्होंने उससे फिर कहा, कि उसने तेरे साथ क्‍या किया? और किस तरह तेरी आंखें खोली? उसने उनसे कहा, “मैं तो तुम से कह चुका, और तुम ने न सुना; अब दूसरी बार क्‍यों सुनना चाहते हो? क्‍या तुम भी उसके चेले होना चाहते हो?” तब वे उसे बुरा-भला कहकर बोले, “तू ही उसका चेला है; हम तो मूसा के चेले हैं। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर ने मूसा से बातें कीं; परन्‍तु इस मनुष्‍य को नहीं जानते की कहाँ का है।” उसने उनको उत्तर दिया, “यह तो अचम्‍भे की बात है कि तुम नहीं जानते की कहाँ का है तौभी उसने मेरी आँखें खोल दीं। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर पापियों की नहीं सुनता परन्‍तु यदि कोई परमेश्‍वर का भक्‍त हो, और उसकी इच्‍छा पर चलता है, तो वह उसकी सुनता है। जगत के आरम्‍भ से यह कभी सुनने में नहीं आया, कि किसी ने भी जन्‍म के अन्‍धे की आँखे खोली हों। यदि यह व्यक्ति परमेश्‍वर की ओर से न होता, तो कुछ भी नहीं कर सकता। उन्होंने उसको उत्तर दिया, “तू तो बिलकुल पापों में जन्‍मा है, तू हमें क्‍या सिखाता है?” और उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया। यीशु ने सुना, कि उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया है; और जब उससे भेंट हुई तो कहा, “क्‍या तू परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है?” उसने उत्तर दिया, “हे प्रभु, वह कौन है कि मैं उस पर विश्‍वास करूँ?” यीशु ने उससे कहा, तू ने उसे देखा भी है; और जो तेरे साथ बातें कर रहा है वही है। उसने कहा, “हे प्रभु, मैं विश्‍वास करता हूँ।” और उसे दंडवत किया। तब यीशु ने कहा, “मैं इस जगत में न्‍याय के लिये आया हूँ, ताकि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अन्‍धे हो जाएँ।” जो फरीसी उसके साथ थे, उन्होंने ये बातें सुन कर उससे कहा, “क्‍या हम भी अन्‍धे हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम अन्‍धे होते तो पापी न ठहरते परन्‍तु अब कहते हो, कि हम देखते हैं, इसलिये तुम्‍हारा पाप बना रहता है। “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्‍तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है। परन्‍तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है। उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्‍द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है। और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उनके आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्‍योंकि वे उसका शब्‍द पहचानती हैं। परन्‍तु वे पराये के पीछे नहीं जाएँगी, परन्‍तु उससे भागेंगी, क्‍योंकि वे परायों का शब्‍द नहीं पहचानती।” यीशु ने उनसे यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्‍तु वे न समझे कि ये क्‍या बातें हैं जो वह हम से कहता है। तब यीशु ने उनसे फिर कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि भेड़ों का द्वार मैं हूँ। जितने मुझ से पहले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्‍तु भेड़ों ने उनकी न सुनी। द्वार मैं हूँ: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्‍तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएँ। अच्‍छा चरवाहा मैं हूँ; अच्‍छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेडि़ए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेडि़या उन्‍हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं। अच्‍छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं। जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूँ। और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूँ। और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्‍य है, वे मेरा शब्‍द सुनेंगी; तब एक ही झुण्‍ड और एक ही चरवाहा होगा। पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूँ, कि उसे फिर ले लूं। कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूँ: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है। इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी। उनमें से बहुतेरे कहने लगे, “उसमें दुष्‍टात्‍मा है, और वह पागल है; उसकी क्‍यों सुनते हो?” औरों ने कहा, “ये बाते ऐसे मनुष्‍य की नहीं जिसमें दुष्‍टात्‍मा हो: क्‍या दुष्‍टात्‍मा अन्‍धों की आँखे खोल सकती है?” यरूशलेम में स्‍थापन पर्व हुआ, और जाड़े की ऋतु थी। और यीशु मन्‍दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था। तब यहूदियों ने उसे आ घेरा और पूछा, “तू हमारे मन को कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है, तो हम से साफ कह दे।” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मैं ने तुम से कह दिया, और तुम प्रतीति करते ही नहीं, जो काम मैं अपने पिता के नाम से करता हूँ वे ही मेरे गवाह हैं। परन्‍तु तुम इसलिये प्रतीति नहीं करते, कि मेरी भेड़ों में से नहीं हो। मेरी भेड़ें मेरा शब्‍द सुनती हैं, और मैं उन्‍हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। और मैं उन्‍हें अनन्‍त जीवन देता हूँ, और वे कभी नाश नहीं होंगी, और कोई उन्‍हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। मेरा पिता, जिस ने उन्‍हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्‍हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता। मैं और पिता एक हैं।” यहूदियों ने उसे पत्‍थरवाह करने को फिर पत्‍थर उठाए। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं ने तुम्‍हें अपने पिता की ओर से बहुत से भले काम दिखाए हैं, उन में से किस काम के लिये तुम मुझे पत्‍थरवाह करते हो?” यहूदियों ने उसको उत्तर दिया, “भले काम के लिये हम तुझे पत्‍थरवाह नहीं करते, परन्‍तु परमेश्‍वर की निन्‍दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्‍य होकर अपने आप को परमेश्‍वर बनाता है।” यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “क्‍या तुम्‍हारी व्‍यवस्‍था में नहीं लिखा है कि ‘मैंने कहा, तुम ईश्‍वर हो’? यदि उसने उन्‍हें ईश्‍वर कहा जिन के पास परमेश्‍वर का वचन पहुंचा (और पवित्र शास्‍त्र की बात लोप नहीं हो सकती।) तो जिसे पिता ने पवित्र ठहराकर जगत में भेजा है, तुम उससे कहते हो, ‘तू निन्‍दा करता है,’ इसलिये कि मैं ने कहा, ‘मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ’। यदि मैं अपने पिता के काम नहीं करता, तो मेरी प्रतीति न करो। परन्‍तु यदि मैं करता हूँ, तो चाहे मेरी प्रतीति न भी करो, परन्‍तु उन कामों की तो प्रतीति करो, ताकि तुम जानो, और समझो, कि पिता मुझ में है, और मैं पिता में हूँ।” तब उन्होंने फिर उसे पकड़ने का प्रयत्‍न किया परन्‍तु वह उनके हाथ से निकल गया। फिर वह यरदन के पार उस स्‍थान पर चला गया, जहाँ यूहन्‍ना पहले बपतिस्‍मा दिया करता था, और वहीं रहा। और बहुतेरे उसके पास आकर कहते थे, “युहन्‍ना ने तो कोई चिन्‍ह नहीं दिखाया, परन्‍तु जो कुछ यूहन्‍ना ने इस के विषय में कहा था वह सब सच था।” और वहाँ बहुतेरों ने उस पर विश्‍वास किया। मरियम और उसकी बहिन मरथा के गाँव बैतनिय्‍याह का लाजर नाम एक मनुष्‍य बीमार था। यह वही मरियम थी जिस ने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पाँवों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाजर बीमार था। सो उसकी बहिनों ने उसे कहला भेजा, “हे प्रभु, देख, जिस से तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।” यह सुनकर यीशु ने कहा, “यह बीमारी मृत्‍यु की नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर की महिमा के लिये है, कि उसके द्वारा परमेश्‍वर के पुत्र की महिमा हो।” और यीशु मरथा और उसकी बहन और लाजर से प्रेम रखता था। सो जब उसने सुना, कि वह बीमार है, तो जिस स्‍थान पर वह था, वहाँ दो दिन और ठहर गया। फिर इस के बाद उसने चेलों से कहा, “आओ, हम फिर यहूदिया को चलें।” चेलों ने उससे कहा, “हे रब्‍बी, अभी तो यहूदी तुझे पत्‍थरवाह करना चाहते थे, और क्‍या तू फिर भी वहीं जाता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “क्‍या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यदि कोई दिन को चले, तो ठोकर नहीं खाता, क्‍योंकि इस जगत का उजाला देखता है। परन्‍तु यदि कोई रात को चले, तो ठोकर खाता है, क्‍योंकि उसमें प्रकाश नहीं।” उसने ये बातें कहीं, और इस के बाद उनसे कहने लगा, “हमारा मित्र लाजर सो गया है, परन्‍तु मैं उसे जगाने जाता हूँ।” तब चेलों ने उससे कहा, “हे प्रभु, यदि वह सो गया है, तो बच जाएगा।” यीशु ने तो उसकी मृत्‍यु के विषय में कहा था: परन्‍तु वे समझे कि उसने नींद से सो जाने के विषय में कहा। तब यीशु ने उनसे साफ कह दिया, “लाजर मर गया है। और मैं तुम्‍हारे कारण आनन्‍दित हूँ कि मैं वहाँ न था जिस से तुम विश्‍वास करो। परन्‍तु अब आओ, हम उसके पास चलें।” तब थोमा ने जो दिदुमुस कहलाता है, अपने साथ के चेलों से कहा, “आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें।” सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं। बैतनिय्‍याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था। और बहुत से यहूदी मरथा और मरियम के पास उनके भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे। जब मरथा यीशु के आने का समाचार सुनकर उससे भेंट करने को गई, परन्‍तु मरियम घर में बैठी रही। मरथा ने यीशु से कहा, “हे प्रभु, यदि तू यहाँ होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता। और अब भी मैं जानती हूँ, कि जो कुछ तू परमेश्‍वर से माँगेगा, परमेश्‍वर तुझे देगा।” यीशु ने उससे कहा, “तेरा भाई जी उठेगा।” मरथा ने उससे कहा, मैं जानती हूँ, “अन्‍तिम दिन में पुनरूत्‍थान के समय वह जी उठेगा।” यीशु ने उससे कहा, “पुनरूत्‍थान और जीवन मैं ही हूँ, जो कोई मुझ पर विश्‍वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवित है, और मुझ पर विश्‍वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा। क्‍या तू इस बात पर विश्‍वास करती है?” उसने उससे कहा, “हाँ, हे प्रभु, मैं विश्‍वास कर चुकी हूँ, कि परमेश्‍वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।” यह कहकर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुलाकर कहा, “गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।” वह सुनते ही तुरन्‍त उठकर उसके पास आई। (यीशु अभी गाँव में नहीं पहुंचा था, परन्‍तु उसी स्‍थान में था जहाँ मरथा ने उससे भेंट की थी।) तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्‍त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये। जब मरियम वहाँ पहुँची जहाँ यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पाँवों पर गिर के कहा, “हे प्रभु, यदि तू यहाँ होता तो मेरा भाई न मरता।” जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्‍मा में बहुत ही उदास और व्याकुल हुआ, और कहा, “तुम ने उसे कहाँ रखा है?” उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, चलकर देख ले।” यीशु के आंसू बहने लगे। तब यहूदी कहने लगे, “देखो, वह उससे कैसी प्रीति रखता था।” परन्‍तु उन में से कितनों ने कहा, “क्‍या यह जिस ने अन्‍धे की आँखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्‍य न मरता?” यीशु मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्‍थर उस पर धरा था। यीशु ने कहा, “पत्‍थर को उठाओ।” उस मरे हुए की बहिन मरथा उससे कहने लगी, “हे प्रभु, उसमें से अब तो दुर्गंध आती है, क्‍योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।” यीशु ने उससे कहा, “क्‍या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्‍वास करेगी, तो परमेश्‍वर की महिमा को देखेगी।” तब उन्होंने उस पत्‍थर को हटाया, फिर यीशु ने आँखें उठाकर कहा, “हे पिता, मैं तेरा धन्‍यवाद करता हूँ कि तू ने मेरी सुन ली है। और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्‍तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उनके कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्‍वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।” यह कहकर उसने बड़े शब्‍द से पुकारा, “हे लाजर, निकल आ!” जो मर गया था, वह कफन से हाथ पाँव बन्धे हुए निकल आया और उसका मुँह अंगोछे से लिपटा हुआ था। यीशु ने उनसे कहा, “उसे खोलकर जाने दो।” तब जो यहूदी मरियम के पास आए थे, और उसका यह काम देखा था, उन में से बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया। परन्‍तु उन में से कितनों ने फरीसियों के पास जाकर यीशु के कामों का समाचार दिया। इस पर महायाजकों और फरीसियों ने मुख्‍य सभा के लोगों को इकट्ठा करके कहा, “हम करते क्‍या हैं? यह मनुष्‍य तो बहुत चिन्‍ह दिखाता है। यदि हम उसे योंही छोड़ दे, तो सब उस पर विश्‍वास ले आएँगे और रोमी आकर हमारी जगह और जाति दोनों पर अधिकार कर लेंगे।” तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उनसे कहा, “तुम कुछ नहीं जानते; और न यह सोचते हो, कि तुम्‍हारे लिये यह भला है, कि हमारे लोगों के लिये एक मनुष्‍य मरे, और न यह, कि सारी जाति नाश हो।” यह बात उसने अपनी ओर से न कही, परन्‍तु उस वर्ष का महायाजक होकर भविष्‍यद्वाणी की, कि यीशु उस जाति के लिये मरेगा; और न केवल उस जाति के लिये, वरन् इसलिये भी, कि परमेश्‍वर की तित्तर बित्तर सन्‍तानों को एक कर दे। सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्‍मति करने लगे। इसलिये यीशु उस समय से यहूदियों में प्रगट होकर न फिरा; परन्‍तु वहाँ से जंगल के निकटवर्ती प्रदेश के इफ्राईम नाम, एक नगर को चला गया; और अपने चेलों के साथ वहीं रहने लगा। और यहूदियों का फसह निकट था, और बहुतेरे लोग फसह से पहले दिहात से यरूशलेम को गए कि अपने आप को शुद्ध करें। सो वे यीशु को ढूढ़ने और मन्‍दिर में खड़े होकर आपस में कहने लगे, “तुम क्‍या समझते हो? क्‍या वह पर्व में नहीं आएगा?” और महायाजकों और फरीसियों ने भी आज्ञा दे रखी थी, कि यदि कोई यह जाने कि यीशु कहाँ है तो बताए, कि उसे पकड़ लें। फिर यीशु फतह से छ: दिन पहले बैतनिय्‍याह में आया, जंहा लाजर था: जिसे यीशु ने मरे हुओं में से जिलाया था। वहाँ उन्होंने उसके लिये भोजन तैयार किया, और मरथा सेवा कर रही थी, और लाजर उन में से एक था, जो उसके साथ भोजन करने के लिये बैठे थे। तब मरियम ने जटामासी का आध सेर बहुमोल इत्र लेकर यीशु के पाँवों पर डाला, और अपने बालों से उसके पाँव पोंछे, और इत्र की सुगंध से घर सुगन्‍धित हो गया। परन्‍तु उसके चेलों में से यहूदा इस्‍करियोती नाम एक चेला जो उसे पकड़वाने पर था, कहने लगा, “यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर कंगालों को क्‍यों न दिया गया?” उसने यह बात इसलिये न कही, कि उसे कंगालों की चिन्‍ता थी, परन्‍तु इसलिये कि वह चोर था और उसके पास उनकी थैली रहती थी, और उसमें जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था। यीशु ने कहा, “उसे मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रहने दे। क्‍योंकि कंगाल तो तुम्‍हारे साथ सदा रहते हैं, परन्‍तु मैं तुम्‍हारे साथ सदा न रहूँगा।” लाजर को मार डालने का निर्णय यहूदियों में से साधारण लोग जान गए, कि वह वहाँ है, और वे न केवल यीशु के कारण आए परन्‍तु इसलिये भी कि लाजर को देंखें, जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया था। तब महायाजकों ने लाजर को भी मार डालने की सम्‍मति की। क्‍योंकि उसके कारण बहुत से यहूदी चले गए, और यीशु पर विश्‍वास किया। यीशु का यरूशलेम में विजय-प्रवेश दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे, यह सुनकर, कि यीशु यरूशलेम में आरहा है। इसलिए उन्होंने खजूर की, डालियाँ लेीं, और उससे भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, “होशाना! धन्‍य इस्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है।” जब यीशु को एक गदहे का बच्‍चा मिला, तो उस पर बैठा, जैसा लिखा है, “हे सिय्‍योन की बेटी, मत डर; देख, तेरा राजा गदहे के बच्‍चे पर चढ़ा हुआ चला आता है।” उसके चेले, ये बातें पहले न समझे थे; परन्‍तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई, तो उनको स्‍मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं; और लोगों ने उससे इस प्रकार का व्‍यवहार किया था। तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उसने लाजर को कब्र में से बुलाकर, मरे हुओं में से जिलाया था। इसी कारण लोग उससे भेंट करने को आए थे क्‍योंकि उन्होंने सुना था, कि उसने यह आश्‍चर्यकर्म दिखाया है। तब फरीसियों ने आपस में कहा, “सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है।” जो लोग उस पर्व में भजन करने आए थे उन में से कई यूनानी थे। उन्होंने गलील के बैतसैदा के रहनेवाले फिलिप्‍पुस के पास आकर उससे विनती की, “श्रीमान् हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं।” फिलिप्‍पुस ने आकर अद्रियास से कहा; तब अन्‍द्रियास और फिलिप्‍पुस ने यीशु से कहा। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “वह समय आ गया है, कि मनुष्‍य के पुत्र कि महिमा हो। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जब तक गेहूँ का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्‍तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है। जो अपने प्राण को प्रिय जानता है, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनन्‍त जीवन के लिये उसकी रक्षा करेगा। यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहाँ मैं हूँ वहाँ मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा। “अब मेरा जी व्‍याकुल हो रहा है। इसलिये अब मैं क्‍या कहूँ? ‘हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा?’ परन्‍तु मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुँचा हूँ। हे पिता अपने नाम की महिमा कर।” तब यह आकाशवाणी हुई, “मैंने उसकी महिमा की है, और फिर भी करूँगा।” तब जो लोग खड़े हुए सुन रहे थे, उन्होंने कहा; कि बादल गरजा, औरों ने कहा, “कोई स्‍वर्गदूत उससे बोला।” इस पर यीशु ने कहा, “यह शब्‍द मेरे लिये नहीं परन्‍तु तुम्‍हारे लिये आया है। अब इस जगत का न्‍याय होता है, अब इस जगत का सरदार निकाल दिया जाएगा। और मैं यदि पृथ्‍वी पर से ऊँचे पर चढ़ाया जाउँगा, तो सब को अपने पास खीचूँगा।” ऐसा कहकर उसने यह प्रगट कर दिया, कि वह कैसी मृत्‍यु से मरेगा। इस पर लोगों ने उससे कहा, “हम ने व्‍यवस्‍था की यह बात सुनी है, कि मसीह सर्वदा रहेगा, फिर तू क्‍यों कहता है, कि मनुष्‍य के पुत्र को ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्‍य है? यह मनुष्‍य का पुत्र कौन है?” यीशु ने उनसे कहा, “ज्‍योति अब थोड़ी देर तक तुम्‍हारे बीच में है, जब तक ज्‍योति तुम्‍हारे साथ है तब तक चले चलो; ऐसा न हो कि अन्‍धकार तुम्‍हें आ घेरे; जो अन्‍धकार में चलता है वह नहीं जानता कि किधर जाता है। जब तक ज्‍योति तुम्‍हारे साथ है, ज्‍योति पर विश्‍वास करो कि तुम ज्‍योति के सन्‍तान होओ।” ये बातें कहकर यीशु चला गया और उनसे छिपा रहा। और उसने उनके साम्‍हने इतने चिन्‍ह दिखाए, तौभी उन्होंने उस पर विश्‍वास न किया; ताकि यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता का वचन पूरा हो जो उसने कहा: “हे प्रभु, हमारे समाचार पर किस ने प्रतीति की है? और प्रभु का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?” इस कारण वे विश्‍वास न कर सके, क्‍योंकि यशायाह ने यह भी कहा है: “उसने उनकी आँखें अन्‍धी, और उन का मन कठोर किया है; कहीं ऐसा न हो, कि आँखों से देखें, और मन से समझें, और फिरें, और मैं उन्‍हें चंगा करूँ।” यशायाह ने ये बातें इसलिये कहीं, कि उसने उसकी महिमा देखी; और उसने उसके विषय में बातें की। तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया, परन्‍तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि आराधनालय में से निकाले जाएँ। क्‍योंकि मनुष्‍यों की प्रशंसा उनको परमेश्‍वर की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी। यीशु ने पुकारकर कहा, “जो मुझ पर विश्‍वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजनेवाले पर विश्‍वास करता है। और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजनेवाले को देखता है। मैं जगत में ज्‍योति होकर आया हूँ ताकि जो कोई मुझ पर विश्‍वास करे, वह अन्‍धकार में न रहे। यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्‍योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्‍तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वह पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा। क्‍योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्‍तु पिता जिस ने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्‍या क्‍या कहूँ और क्‍या क्‍या बोलूं? और मैं जानता हूँ, कि उसकी आज्ञा अनन्‍त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूँ, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूँ।” फसह के पर्व से पहले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुँची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्‍त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा। और जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्‍करियोती के मन में यह डाल चुका था, कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय। यीशु ने यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्‍वर के पास से आया हूँ, और परमेश्‍वर के पास जाता हूँ। भोजन पर से उठकर अपने कपड़े उतार दिए, और अँगोछा लेकर अपनी कमर बान्‍धी। यीशु का चेलों के पैर धोना तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछा से उसकी कमर बन्‍धी थी उसी से पोंछने लगा। जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उसने उससे कहा, “हे प्रभु, क्‍या तू मेरे पाँव धोता है?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “जो मैं करता हूँ, तू अब नहीं जानता, परन्‍तु इस के बाद समझेगा।” पतरस ने उससे कहा, “तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा!” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।” शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तो मेरे पाँव ही नहीं, वरन् हाथ और सिर भी धो दे।” यीशु ने उससे कहा, “जो नहा चुका है, उसे पाँव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्‍तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो; परन्‍तु सब के सब नहीं।” वह तो अपने पकड़वानेवाले को जानता था इसी लिये उसने कहा, “तुम सब के सब शुद्ध नहीं।” जब वह उनके पाँव धो चुका और अपने कपड़े पहिनकर फिर बैठ गया तो उनसे कहने लगा, “क्‍या तुम समझे कि मैं ने तुम्‍हारे साथ क्‍या किया? तुम मुझे गुरू, और प्रभु, कहते हो, और भला कहते हो, क्‍योंकि मैं वहीं हूँ। यदि मैं ने प्रभु और गुरू होकर तुम्‍हारे पाँव धोए; तो तुम्‍हें भी एक दुसरे के पाँव धोना चाहिए। क्‍योंकि मैं ने तुम्‍हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्‍हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं; और न भेजा हुआ* अपने भेजनेवाले से। तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्‍य हो। मैं तुम सब के विषय में नहीं कहता: जिन्‍हें मैं ने चुन लिया है, उन्‍हें मैं जानता हूँ: परन्‍तु यह इसलिये है, कि पवित्र शास्‍त्र का यह वचन पूरा हो, ‘जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझ पर लात उठाई।’ अब मैं उसके होने से पहले तुम्‍हें जताए देता हूँ कि जब हो जाए तो तुम विश्‍वास करो कि मैं वहीं हूँ। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।” ये बातें कहकर यीशु आत्‍मा में व्‍याकुल हुआ और यह गवाही दी, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।” चेले यह संदेह करते हुए, कि वह किस के विषय में कहता है, एक दूसरे की ओर देखने लगे। उसके चेलों में से एक जिस से यीशु प्रेम रखता था, यीशु की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था। तब शमौन पतरस ने उसकी ओर सैन करके पूछा, “बता तो, वह किस के विषय में कहता है?” तब उसने उसी तरह यीशु की छाती की ओर झुक कर पूछा, “हे प्रभु, वह कौन है?” यीशु ने उत्तर दिया, “जिसे मैं यह रोटी का टुकड़ा डुबोकर दूँगा, वही है।” और उसने टुकड़ा डुबोकर शमौन के पुत्र यहूदा इस्‍करियोती को दिया। और टुकड़ा लेते ही शैतान उसमें समा गया: तब यीशु ने उससे कहा, “जो तू करता है, तुरन्‍त कर।” परन्‍तु बैठनेवालों में से किसी ने न जाना कि उसने यह बात उससे किस लिये कही। यहूदा के पास थैली रहती थी, इसलिये किसी किसी ने समझा, कि यीशु उससे कहता है, कि जो कुछ हमें पर्व के लिये चाहिए वह मोल ले, या यह कि कंगालों को कुछ दे। तब वह टुकड़ा लेकर तुरन्‍त बाहर चला गया, और रात्रि का समय था। जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा, “अब मनुष्‍य का पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्‍वर की महिमा उसमें हुई; और परमेश्‍वर भी अपने में उसकी महिमा करेगा, वरन तुरन्‍त करेगा। हे बालको, मैं और थोड़ी देर तुम्‍हारे पास हूँ: फिर तुम मुझे ढूँढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, ‘जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ तुम नहीं आ सकते,’ वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूँ। मैं तुम्‍हें एक नई आज्ञा देता हूँ, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।” शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तू कहाँ जाता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्‍तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा।” पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्‍यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूँगा।” यीशु ने उत्तर दिया, “क्‍या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूँ कि मुर्ग बाँग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्‍कार न कर लेगा। “तुम्‍हारा मन व्‍याकुल न हो, तुम परमेश्‍वर पर विश्‍वास रखते हो मुझ पर भी विश्‍वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्‍थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्‍हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्‍हें अपने यहाँ ले जाऊँगा, कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो। और जहाँ मैं जाता हूँ तुम वहाँ का मार्ग जानते हो।” थोमा ने उससे कहा, “हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहाँ जाता है; तो मार्ग कैसे जानें?” यीशु ने उससे कहा, “मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।” फिलिप्‍पुस ने उससे कहा, “हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।” यीशु ने उससे कहा, “हे फिलिप्‍पुस, मैं इतने दिन से तुम्‍हारे साथ हूँ, और क्‍या तू मुझे नहीं जानता? जिस ने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्‍यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? क्‍या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूँ, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्‍तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूँ; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो। “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि जो मुझ पर विश्‍वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूँ वह भी करेगा, वरन् इनसे भी बड़े काम करेगा, क्‍योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ। और जो कुछ तुम मेरे नाम से माँगोगे, वही मैं करूँगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ माँगोगे, तो मैं उसे करूँगा। “यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। और मैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्‍हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्‍हारे साथ रहे। अर्थात् सत्‍य का आत्‍मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्‍योंकि वह तुम्‍हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। “मैं तुम्‍हें अनाथ न छोडूँगा, मैं तुम्‍हारे पास आता हूँ। और थोड़ी देर रह गई है कि संसार मुझे न देखेगा, परन्‍तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूँ, तुम भी जीवित रहोगे। उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। जिसके पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उससे मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उससे प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूँगा।” उस यहूदा ने जो इस्‍करियोती न था, उससे कहा, “हे प्रभु, क्‍या हुआ कि तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उससे प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएँगे, और उसके साथ वास करेंगे। जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा। “ये बातें मैं ने तुम्‍हारे साथ रहते हुए तुम से कही। परन्‍तु सहायक अर्थात् पवित्र आत्‍मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्‍हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्‍हें स्‍मरण कराएगा। मैं तुम्‍हें शान्‍ति दिए जाता हूँ, अपनी शान्‍ति तुम्‍हें देता हूँ; जैसे संसार देता है, मैं तुम्‍हें नहीं देता: तुम्‍हारा मन न घबराए और न डरे। तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, ‘मैं जाता हूँ, और तुम्‍हारे पास फिर आता हूँ’ यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूँ क्‍योंकि पिता मुझ से बड़ा है। और मैं ने अब इस के होने से पहले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो। मैं अब से तुम्‍हारे साथ और बहुत बातें न करूँगा, क्‍योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं। परन्‍तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूँ, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूँ। उठो, यहाँ से चलें। “सच्‍ची दाखलता मैं हूँ; और मेरा पिता किसान है। जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छाँटता है ताकि और फले। तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूँ: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्‍हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो माँगो और वह तुम्‍हारे लिये हो जाएगा। मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसे ही मैं ने तुम से प्रेम रखा मेरे प्रेम में बने रहो। यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूँ। मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्‍द तुम में बना रहे, और तुम्‍हारा आनन्‍द पूरा हो जाए। “मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्‍हें आज्ञा देता हूँ, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। अब से मैं तुम्‍हें दास न कहूँगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है: परन्‍तु मैं ने तुम्‍हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्‍हें बता दीं। तुम ने मुझे नहीं चुना परन्‍तु मैं ने तुम्‍हें चुना है और तुम्‍हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्‍हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्‍हें दे। इन बातें की आज्ञा मैं तुम्‍हें इसलिये देता हूँ, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो। संसार से सताव “यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उसने तुम से पहले मुझ से भी बैर रखा। यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्‍तु इस कारण कि तुम संसार में के नही वरन मैंने तुम्‍हें से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है। जो बात मैं ने तुम से कही थी, ‘दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं होता,’ उसको याद रखो: यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्‍हें भी सताएँगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्‍हारी भी मानेंगे। परन्‍तु यह सब कुछ वे मेरे नाम के कारण तुम्‍हारे साथ करेंगे क्‍योंकि वे मेरे भेजनेवाले को नहीं जानते। यदि मैं न आता और उनसे बातें न करता, तो वे पापी न ठहरते परन्‍तु अब उन्‍हें उनके पाप के लिये कोई बहाना नहीं। जो मुझ से बैर रखता है, वह मेरे पिता से भी बैर रखता है। यदि मैं उन में वे काम न करता, जो और किसी ने नहीं किए तो वे पापी नहीं ठहरते, परन्‍तु अब तो उन्होंने मुझे और मेरे पिता दोनों को देखा, और दोनों से बैर किया। और यह इसलिये हुआ, कि वह वचन पूरा हो, जो उनकी व्‍यवस्‍था में लिखा है, ‘उन्होंने मुझ से व्‍यर्थ बैर किया।’ परन्‍तु जब वह सहायक आएगा, जिसे मैं तुम्‍हारे पास पिता की ओर से भेजूंगा, अर्थात् सत्‍य का आत्‍मा जो पिता की ओर से निकलता है, तो वह मेरी गवाही देगा। और तुम भी गवाह हो क्‍योंकि तुम आरम्‍भ से मेरे साथ रहे हो। “ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। वे तुम्‍हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्‍हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्‍वर की सेवा करता हूँ। और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं। परन्‍तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्‍हें स्‍मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहले ही कह दिया था, “मैं ने आरम्‍भ में तुम से ये बातें इसलिये नहीं कहीं क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे साथ था। अब मैं अपने भेजनेवाले के पास जाता हूँ और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, ‘तू कहाँ जाता हैं?’ परन्‍तु मैं ने जो ये बातें तुम से कही हैं, इसलिये तुम्‍हारा मन शोक से भर गया। तौभी मैं तुम से सच कहता हूँ, कि मेरा जाना तुम्‍हारे लिये अच्‍छा है, क्‍योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्‍हारे पास न आएगा, परन्‍तु यदि मैं जाउँगा, तो उसे तुम्‍हारे पास भेज दूँगा। और वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्‍याय के विषय में निरूत्तर करेगा। पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्‍वास नहीं करते; और धार्मिकता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर न देखोगे; न्‍याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है। “मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्‍तु अभी तुम उन्‍हें सह नहीं सकते। परन्‍तु जब वह अर्थात् सत्‍य का आत्‍मा आएगा, तो तुम्‍हें सब सत्‍य का मार्ग बताएगा, क्‍योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्‍तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्‍हें बताएगा। वह मेरी महिमा करेगा, क्‍योंकि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्‍हें बताएगा। जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्‍हें बताएगा। “थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।” तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, “यह क्‍या है, जो वह हम से कहता है, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे?’ और यह ‘इसलिये कि मैं कि मैं पिता के पास जाता हूँ’?” तब उन्होंने कहा, “यह ‘थोड़ी देर’ जो वह कहता है, क्‍या बात है? हम नहीं जानते, कि क्‍या कहता है।” यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उनसे कहा, “क्‍या तुम आपस में मेरी इस बात के विषय में पूछ ताछ करते हो, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे’? मैं तुम से सच सच कहता हूँ; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्‍तु संसार आनन्‍द करेगा: तुम्‍हें शोक होगा, परन्‍तु तुम्‍हारा शोक आनन्‍द बन जाएगा। जब स्‍त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्‍योंकि उसकी दु:ख की घड़ी आ पहुँची, परन्‍तु जब वह बालक जन्‍म चुकी तो इस आनन्‍द से कि जगत में एक मनुष्‍य उत्‍पन्‍न हुआ, उस संकट को फिर स्‍मरण नहीं करती। और तुम्‍हें भी अब तो शोक है, परन्‍तु मैं तुम से फिर मिलूँगा और तुम्‍हारे मन में आनन्‍द होगा; और तुम्‍हारा आनन्‍द कोई तुम से छीन न लेगा। उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूँ, यदि पिता से कुछ माँगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्‍हें देगा। अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं माँगा; माँगो तो पाओगे ताकि तुम्‍हारा आनन्‍द पूरा हो जाए।। “मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्‍तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूँगा परन्‍तु खोलकर तुम्‍हें पिता के विषय में बताऊँगा। उस दिन तुम मेरे नाम से माँगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्‍हारे लिये पिता से विनती करूँगा। क्‍योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूँ, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूँ।” उसके चेलों ने कहा, “देख, अब तो तू खोलकर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्‍वर से निकला है।” यह सुन यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम अब प्रतीति करते हो? देखो, वह घड़ी आती है वरन् आ पहुँची कि तुम सब तित्तर बित्तर होकर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्‍योंकि पिता मेरे साथ है। मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्‍हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्‍हें क्‍लेश होता है, परन्‍तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।” यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आँखे आकाश की ओर उठाकर कहा, “हे पिता, वह घड़ी आ पहुँची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे, क्‍योंकि तू ने उस को सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्‍हें तू ने उसको दिया है, उन सब को वह अनन्‍त जीवन दे। और अनन्‍त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्‍चे परमेश्‍वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा करके मैं ने पृथ्‍वी पर तेरी महिमा की है। और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहले, मेरी तेरे साथ थी। “मैं ने तेरा नाम उन मनुष्‍यों पर प्रगट किया जिन्‍हें तू ने जगत में से मुझे दिया: वे तेरे थे और तू ने उन्‍हें मुझे दिया और उन्होंने तेरे वचन को मान लिया है। अब वे जान गए हैं, कि जो कुछ तू ने मुझे दिया है, सब तेरी ओर से है। क्‍योंकि जो बातें तू ने मुझे पहुँचा दीं, मैं ने उन्‍हें उनको पहुँचा दिया और उन्होंने उनको ग्रहण किया: और सच सच जान लिया है, कि मैं तेरी ओर से निकला हूँ, और प्रतीति कर ली है कि तू ही ने मुझे भेजा। मैं उनके लिये विनती करता हूँ, संसार के लिये विनती नहीं करता हूँ परन्‍तु उन्‍हीं के लिये जिन्‍हें तू ने मुझे दिया है, क्‍योंकि वे तेरे हैं। और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है; और जो तेरा है वह मेरा है वह सब तेरा है; और जो तेरा है, वह मेरा है; और इन से मेरी महिमा प्रगट हुई है। मैं आगे को जगत में न रहूँगा, परन्‍तु ये जगत में रहेंगे, और मैं तेरे पास आता हूँ; हे पवित्र पिता, अपने उस नाम से जो तू ने मुझे दिया है, उनकी रक्षा कर, कि वे हमारी नाई एक हों। जब मैं उनके साथ था, तो मैं ने तेरे उस नाम से, जो तू ने मुझे दिया है, उनकी रक्षा की, मैं ने उनकी चौकसी की और विनाश के पुत्र को छोड़ उन में से कोई नाश न हुआ, इसलिये कि पवित्र शास्‍त्र की बात पूरी हो। परन्‍तु अब मैं तेरे पास आता हूँ, और ये बातें जगत में कहता हूँ, कि वे मेरा आनन्‍द अपने में पूरा पाएँ। मैं ने तेरा वचन उन्‍हें पहुँचा दिया है, और संसार ने उनसे बैर किया, क्‍योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं। मैं यह विनती नहीं करता, कि तू उन्‍हें जगत से उठा ले, परन्‍तु यह कि तू उन्‍हें उस दुष्‍ट से बचाए रख। जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं। सत्‍य के द्वारा उन्‍हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्‍य है। जैसे तू ने जगत में मुझे भेजा, वैसे ही मैं ने भी उन्‍हें जगत में भेजा। और उनके लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूँ ताकि वे भी सत्‍य के द्वारा पवित्र किए जाएँ। “मैं केवल इन्‍हीं के लिये विनती नहीं करता, परन्‍तु उनके लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्‍वास करेंगे, कि वे सब एक हों; जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूँ, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा। और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्‍हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे कि हम एक हैं। मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध होकर एक हो जाएँ, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही उनसे प्रेम रखा। हे पिता, मैं चाहता हूँ कि जिन्‍हें तू ने मुझे दिया है, जहाँ मैं हूँ, वहाँ वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तू ने मुझे दी है, क्‍योंकि तू ने जगत की उत्‍पत्ति से पहले मुझ से प्रेम रखा। हे धार्मिक पिता, संसार ने मुझे नहीं जाना, परन्‍तु मैं ने तुझे जाना और इन्‍हों ने भी जाना कि तू ही ने मुझे भेजा। और मैं ने तेरा नाम उनको बताया और बताता रहूँगा कि जो प्रेम तुझ को मुझ से था, वह उन में रहे और मैं उन में रहूँ।” यीशु ये बातें कहकर अपने चेलों के साथ किद्रोन के नाले के पार गया, वहाँ एक बारी थी, जिसमें वह और उसके चेले गए। और उसका पकड़वानेवाला यहूदा भी वह जगह जानता था, क्‍योंकि यीशु अपने चेलों के साथ वहाँ जाया करता था। तब यहूदा पलटन को और महायाजकों और फरीसियों की ओर से प्‍यादों को लेकर दीपकों और मशालों और हथियारों को लिए हुए वहाँ आया। तब यीशु उन सब बातों को जो उस पर आनेवाली थीं, जानकर निकला, और उनसे कहने लगा, “किसे ढूँढ़ते हो?” उन्होंने उसको उत्तर दिया, “यीशु नासरी को।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं ही हूँ।” और उसका पकड़वानेवाला यहूदा भी उनके साथ खड़ा था। उसके यह कहते ही, “मैं हूँ,” वे पीछे हटकर भूमि पर गिर पड़े। तब उसने फिर उनसे पूछा, “तुम किस को ढूँढ़ते हो।” वे बोले, “यीशु नासरी को।” यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तो तुम से कह चुका हूँ कि मैं ही हूँ, यदि मुझे ढूँढ़ते हो तो इन्‍हें जाने दो।” यह इसलिये हुआ, कि वह वचन पूरा हो, जो उसने कहा था: “जिन्‍हें तू ने मुझे दिया, उन में से मैं ने एक को भी न खोया।” शमौन पतरस ने तलवार, जो उसके पास थी, खींची और महायाजक के दास पर चलाकर, उसका दहिना कान उड़ा दिया, उस दास का नाम मलखुस था। तब यीशु ने पतरस से कहा, “अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्‍या मैं उसे न पीऊँ?” तब सिपाहियों और उनके सूबेदार और यहूदियों के प्‍यादों ने यीशु को पकड़कर बाँध लिया, और पहले उसे हन्‍ना के पास ले गए क्‍योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था। यह वही काइफा था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरूष का मरना अच्‍छा है। शमौन पतरस और एक और चेला भी यीशु के पीछे हो लिए। यह चेला महायाजक का जाना पहचाना था और यीशु के साथ महायाजक के आँगन में गया। परन्‍तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा, तब वह दूसरा चेला जो महायाजक का जाना पहचाना था, बाहर निकला, और द्वारपालिन से कहकर, पतरस को भीतर ले आया। उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, “क्‍या तू भी इस मनुष्‍य के चेलों में से है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।” दास और प्‍यादे जाड़े के कारण कोएले धधकाकर खड़े ताप रहे थे और पतरस भी उनके साथ खड़ा ताप रहा था। तब महायाजक ने यीशु से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछा। यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं ने जगत से खोलकर बातें की; मैं ने सभाओं और आराधनालय में जहाँ सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्‍त में कुछ भी नहीं कहा। तू मुझ से क्‍यों पूछता है? सुननेवालों से पूछ: कि मैं ने उनसे क्‍या कहा? देख वे जानते हैं; कि मैं ने क्‍या क्‍या कहा।” जब उसने यह कहा, तो प्‍यादों में से एक ने जो पास खड़ा था, यीशु को थप्‍पड़ मारकर कहा, “क्‍या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है।” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि मैं ने बुरा कहा, तो उस बुराई पर गवाही दे; परन्‍तु यदि भला कहा, तो मुझे क्‍यों मारता है?” हन्‍ना ने उसे बन्‍धे हुए काइफा महायाजक के पास भेज दिया। शमौन पतरस खड़ा हुआ आग ताप रहा था। तब उन्होंने उससे कहा; “क्‍या तू भी उसके चेलों में से है?” उने इन्‍कार करके कहा, “मैं नहीं हूँ।” महायाजक के दासों में से एक जो उसके कुटुम्‍ब में से था, जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, “क्‍या मैं ने तुझे उसके साथ बारी में न देखा था?” पतरस फिर इन्‍कार कर गया और तुरन्‍त मुर्ग ने बाँग दी। और वे यीशु को काइफा के पास से किले को ले गए और भोर का समय था, परन्‍तु वे आप किले के भीतर न गए ताकि अशुद्ध न हों परन्‍तु फसह खा सकें। तब पीलातुस उनके पास बाहर निकल आया और कहा, “तुम इस मनुष्‍य पर किस बात की नालिश करते हो?” उन्होंने उसको उत्तर दिया, “यदि वह कुकर्मी न होता तो हम उसे तेरे हाथ न सौंपते।” पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही इसे ले जाकर अपनी व्‍यवस्‍था के अनुसार उसका न्‍याय करो।” यहूदियों ने उससे कहा, “हमें अधिकार नहीं कि किसी का प्राण लें।” यह इसलिये हुआ, कि यीशु की वह बात पूरी हो जो उसने यह पता देते हुए कही थी, कि उसका मरना कैसा होगा। तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उससे पूछा, “क्‍या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “क्‍या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?” पीलातुस ने उत्तर दिया, “क्‍या मैं यहूदी हूँ? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्‍या किया है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्‍य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्‍य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्‍तु अब मेरा राज्‍य यहाँ का नहीं।” पीलातुस ने उससे कहा, “तो क्‍या तु राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तू कहता है, क्‍योंकि मैं राजा हूँ; मैं ने इसलिये जन्‍म लिया, और इसलिये जगत में आया हूँ कि सत्‍य पर गवाही दूँ जो कोई सत्‍य का है, वह मेरा शब्‍द सुनता है।” पीलातुस ने उससे कहा, “सत्‍य क्‍या है?” और यह कहकर वह फिर यहूदियों के पास निकल गया और उनसे कहा, “मैं तो उसमें कुछ दोष नहीं पाता। पर तुम्‍हारी यह रीति है कि मैं फसह में तुम्‍हारे लिये एक व्यक्ति को छोड़ दूँ। सो क्‍या तुम चाहते हो, कि मैं तुम्‍हारे लिये यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?” तब उन्होंने फिर चिल्‍लाकर कहा, “इसे नहीं परन्‍तु हमारे लिये बरअब्‍बा को छोड़ दे।” और बरअब्‍बा डाकू था। इस पर पीलातुस ने यीशु को लेकर कोड़े लगवाए। और सिपाहियों ने काँटों का मुकुट गुँथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया, और उसके पास आ आकर कहने लगे, “हे यहूदियों के राजा, प्रणाम!” और उसे थप्‍पड़ मारे। तब पीलातुस ने फिर बाहर निकलकर लोगों से कहा, “देखो, मैं उसे तुम्‍हारे पास फिर बाहर लाता हूँ; ताकि तुम जानो कि मैं कुछ भी दोष नहीं पाता।” तब यीशु काँटों का मुकुट और बैंजनी वस्‍त्र पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उनसे कहा, “देखो, यह पुरूष।” जब महायाजकों और प्‍यादों ने उसे देखा, तो चिल्‍लाकर कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर!” पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही उसे लेकर क्रूस पर चढ़ाओ; क्‍योंकि मैं उसमें दोष नहीं पाता।” यहूदियों ने उसको उत्तर दिया, “हमारी भी व्‍यवस्‍था है और उस व्‍यवस्‍था के अनुसार वह मारे जाने के योग्‍य है क्‍योंकि उसने अपने आप को परमेश्‍वर का पुत्र बनाया।” जब पीलातुस ने यह बात सुनी तो और भी डर गया। और फिर किले के भीतर गया और यीशु से कहा, “तू कहाँ का है?” परन्‍तु यीशु ने उसे कुछ भी उत्तर न दिया। पीलातुस ने उससे कहा, “मुझ से क्‍यों नहीं बोलता? क्‍या तू नहीं जानता कि तुझे छोड़ देने का अधिकार मुझे है और तुझे क्रूस पर चढ़ाने का भी मुझे अधिकार है।” यीशु ने उत्तर दिया, “यदि तुझे ऊपर से न दिया जाता, तो तेरा मुझ पर कुछ अधिकार न होता; इसलिये जिस ने मुझे तेरे हाथ पकड़वाया है, उसका पाप अधिक है।” इस से पीलातुस ने उसे छोड़ देना चाहा, परन्‍तु यहूदियों ने चिल्‍ला चिल्‍लाकर कहा, “यदि तू इस को छोड़ देगा तो तेरी भक्ति कैसर की ओर नहीं; जो कोई अपने आप को राजा बनाता है वह कैसर का साम्‍हना करता है।” ये बातें सुनकर पीलातुस यीशु को बाहर लाया और उस जगह एक चबूतरा था जो इब्रानी में ‘गब्‍बता’ कहलाता है, और न्‍याय आसन पर बैठा। यह फसह की तैयारी का दिन था और छठे घंटे के लगभग था: तब उसने यहूदियों से कहा, “देखो, यही है, तुम्‍हारा राजा!” परन्‍तु वे चिल्‍लाए, “ले जा! ले जा! उसे क्रूस पर चढ़ा!” पीलातुस ने उनसे कहा, “क्‍या मैं तुम्‍हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊँ?” महायाजकों ने उत्तर दिया, “कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं।” तब उसने उसे उनके हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए। तब वे यीशु को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्‍थान तक बाहर गया, जो ‘खोपड़ी का स्‍थान’ कहलाता है और इब्रानी में ‘गुलगुता’। वहाँ उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्‍यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को। और पीलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया और उसमें यह लिखा हुआ था, “यीशु नासरी यहूदियों का राजा।” यह दोष-पत्र बहुत यहूदियों ने पढ़ा क्‍योंकि वह स्‍थान जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था नगर के पास था और पत्र इब्रानी और लतीनी और यूनानी में लिखा हुआ था। तब यहूदियों के महायाजकों ने पीलातुस से कहा, “‘यहूदियों का राजा’ मत लिख परन्‍तु यह कि ‘उसने कहा, मैं यहूदियों का राजा हूँ’।” पीलातुस ने उत्तर दिया, “मैं ने जो लिख दिया, वह लिख दिया।” जब सिपाही यीशु को क्रूस पर चढ़ा चुके, तो उसके कपड़े लेकर चार भाग किए, हर सिपाही के लिये एक भाग और कुरता भी लिया, परन्‍तु कुरता बिन सीअन ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था: इसलिये उन्होंने आपस में कहा, “हम इस को न फाडें, परन्‍तु इस पर चिट्ठी डालें कि वह किस का होगा।” यह इसलिये हुआ, कि पवित्र शास्‍त्र की बात पूरी हो, “उन्होंने मेरे कपड़े आपस में बाँट लिए और मेरे वस्‍त्र पर चिट्ठी डाली।” सो सिपाहियों ने ऐसा ही किया। परन्‍तु यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहिन मरियम, क्‍लोपास की पत्‍नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी। यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा, “हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।” तब उस चेले से कहा, “यह तेरी माता है।” और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया। इस के बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ हो चुका; इसलिये कि पवित्र शास्‍त्र की बात पूरी हो कहा, “मैं प्‍यासा हूँ।” वहाँ एक सिरके से भरा हुआ बर्तन धरा था, सो उन्होंने सिरके के भिगोए हुए इस्‍पंज को जूफे पर रखकर उसके मुँह से लगाया। जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा, “पूरा हुआ”; और सिर झुकाकर प्राण त्‍याग दिए। और इसलिये कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पीलातुस से विनती की कि उनकी टांगे तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ ताकि सब्‍त के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्‍योंकि वह सब्‍त का दिन बड़ा दिन था। सो सिपाहियों ने आकर पहले की टांगें तोड़ीं तब दूसरे की भी, जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे। परन्‍तु जब यीशु के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उसकी टांगें न तोड़ीं। परन्‍तु सिपाहियों में से एक ने बरछे से उसका पंजर बेधा और उसमें से तुरन्‍त लोहू और पानी निकला। जिस ने यह देखा, उसी ने गवाही दी है, और उसकी गवाही सच्‍ची है; और वह जानता है, कि सच कहता है कि तुम भी विश्‍वास करो। ये बातें इसलिये हुईं कि पवित्र शास्‍त्र की यह बात पूरी हो, “उसकी कोई हड्डी तोड़ी न जाएगी।” फिर एक और स्‍थान पर यह लिखा है, “जिसे उन्होंने बेधा है, उस पर दृष्‍टि करेंगे।” इन बातों के बाद अरमतियाह के यूसुफ ने, जो यीशु का चेला था, (परन्‍तु यहूदियों के डर से इस बात को छिपाए रखता था), पीलातुस से विनती की, कि मैं यीशु की लोथ को ले जाऊँ, और पीलातुस ने उसकी विनती सुनी, और वह आकर उसकी लोथ ले गया। निकुदेमुस भी जो पहले यीशु के पास रात को गया था पचास सेर के लगभग मिला हुआ गन्‍धरस और एलवा ले आया। तब उन्होंने यीशु की लोथ को लिया और यहूदियों के गाड़ने की रीति के अनुसार उसे सुगन्‍ध द्रव्‍य के साथ कफन में लपेटा। उस स्‍थान पर जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था, एक बारी थी; और उस बारी में एक नई कब्र थी; जिसमें कभी कोई न रखा गया था। सो यहूदियों की तैयारी के दिन के कारण, उन्होंने यीशु को उसी में रखा, क्‍योंकि वह कब्र निकट थी। सप्‍ताह के पहले दिन मरियम मगदलीनी भोर को अंधेरा रहते ही कब्र पर आई, और पत्‍थर को कब्र से हटा हुआ देखा। तब वह दौड़ी और शमौन पतरस और उस दूसरे चेले के पास जिस से यीशु प्रेम रखता था आकर कहा, “वे प्रभु को कब्र में से निकाल ले गए हैं; और हम नहीं जानतीं, कि उसे कहाँ रख दिया है।” तब पतरस और वह दूसरा चेला निकलकर कब्र की ओर चले। और दोनों साथ साथ दौड़ रहे थे, परन्‍तु दूसरा चेला पतरस से आगे बढ़कर कब्र पर पहले पहुँचा। और झुककर कपड़े पड़े देखे: तौभी वह भीतर न गया। तब शमौन पतरस उसके पीछे पीछे पहुँचा और कब्र के भीतर गया और कपड़े पड़े देखे। और वह अंगोछा जो उसके सिर से बन्‍धा हुआ था, कपड़ों के साथ पड़ा हुआ नहीं परन्‍तु अलग एक जगह लपेटा हुआ देखा। तब दूसरा चेला भी जो कब्र पर पहले पहुँचा था, भीतर गया और देखकर विश्‍वास किया। वे तो अब तक पवित्र शास्‍त्र की वह बात न समझते थे, कि उसे मरे हुओं में से जी उठना होगा। तब ये चेले अपने घर लौट गए। परन्‍तु मरियम रोती हुई कब्र के पास ही बाहर खड़ी रही और रोते रोते कब्र की ओर झुककर, दो स्‍वर्गदूतों को उज्‍जवत कपड़े पहिने हुए एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने बैठे देखा, जहाँ यीशु की लोथ पड़ी थी। उन्होंने उससे कहा, “हे नारी, तू क्‍यों रोती है?” उसने उनसे कहा, “वे मेरे प्रभु को उठा ले गए और मैं नहीं जानती कि उसे कहाँ रखा है।” यह कहकर वह पीछे फिरी और यीशु को खड़े देखा और न पहचाना कि यह यीशु है। यीशु ने उससे कहा, “हे नारी तू क्‍यों रोती है? किस को ढूंढ़ती है?” उसने माली समझकर उससे कहा, “हे महाराज, यदि तू ने उसे उठा लिया है तो मुझ से कह कि उसे कहाँ रखा है और मैं उसे ले जाऊँगी।” यीशु ने उससे कहा, “मरियम!” उसने पीछे फिरकर उससे इब्रानी में कहा, “रब्‍बूनी!” अर्थात् ‘हे गुरु’। यीशु ने उससे कहा, “मुझे मत छू क्‍योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्‍तु मेरे भाइयों के पास जाकर उनसे कह दे, कि मैं अपने पिता, और तुम्‍हारे पिता, और अपने परमेश्‍वर और तुम्‍हारे परमेश्‍वर के पास ऊपर जाता हूँ।” मरियम मगदलीनी ने जाकर चेलों को बताया, “मैं ने प्रभु को देखा और उसने मुझ से बातें कहीं।” उसी दिन जो सप्‍ताह का पहिला दिन था, संध्या के समय जब वहाँ के द्वार जहाँ चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्‍द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा होकर उनसे कहा, “तुम्‍हें शान्‍ति मिले।” और यह कहकर उसने अपना हाथ और अपना पंजर उनको दिखाए: तब चेले प्रभु को देखकर आनन्‍दित हुए। यीशु ने फिर उनसे कहा, “तुम्‍हें शान्‍ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्‍हें भेजता हूँ।” यह कहकर उसने उन पर फूंका और उनसे कहा, “पवित्र आत्‍मा लो। जिनके पाप तुम क्षमा करो वे उनके लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं।” परन्‍तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात् थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उनके साथ न था। जब और चेले उससे कहने लगे, “हम ने प्रभु को देखा है,” तब उसने उनसे कहा, “जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूँ, और कीलों के छेदों में अपनी उँगली न डाल लूँ, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूँगा।” आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, “तुम्‍हें शान्‍ति मिले।” तब उसने थोमा से कहा, “अपनी उँगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्‍वासी नहीं परन्‍तु विश्‍वासी हो।” यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्‍वर!” यीशु ने उससे कहा, “तू ने तो मुझे देखकर विश्‍वास किया है? धन्‍य हैं वे जिन्‍हों ने बिना देखे विश्‍वास किया।” यीशु ने और भी बहुत चिन्‍ह चेलों के साम्‍हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। परन्‍तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्‍वास करो, कि यीशु ही परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है: और विश्‍वास करके उसके नाम से जीवन पाओ। इन बातों के बाद यीशु ने अपने आप को तिबिरियास झील के किनारे चेलों पर प्रगट किया और इस रीति से प्रगट किया। शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, और गलील के काना नगर का नतनएल और जब्दी के पुत्र, और उसके चेलों में से दो और जन इकट्ठे थे। शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने जाता हूँ।” उन्होंने उससे कहा, “हम भी तेरे साथ चलते हैं।” सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्‍तु उस रात कुछ न पकड़ा। भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़ा हुआ; तौभी चेलों ने न पहचाना कि यह यीशु है। तब यीशु ने उनसे कहा, “हे बालको, क्‍या तुम्‍हारे पास कुछ खाने को है?” उन्होंने उत्तर दिया, “नहीं।” उसने उनसे कहा, “नाव की दहिनी ओर जाल डालो, तो पाओगे।” तब उन्होंने जाल डाला, और अब मछलियों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके। इसलिये उस चेले ने जिस से यीशु प्रेम रखता था पतरस से कहा, “यह तो प्रभु है।” शमौन पतरस ने यह सुनकर कि प्रभु है, कमर में अंगरखा कस लिया, क्‍योंकि वह नंगा था, और झील में कूद पड़ा। परन्‍तु और चेले डोंगी पर मछलियों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्‍योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे। जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोएले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी। यीशु ने उनसे कहा, “जो मछलियाँ तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ।” शमौन पतरस ने डोंगी पर चढ़कर एक सौ तिरपन बड़ी मछलियों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछलियाँ होने पर भी जाल न फटा। यीशु ने उनसे कहा, “आओ, भोजन करो।” और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उससे पूछे, “तू कौन है?” क्योंकी वे जानते थे कि यह प्रभु है। यीशु आया, और रोटी लेकर उन्‍हें दी, और वैसे ही मछली भी। यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए। भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, “हे शमौन, यूहन्‍ना के पुत्र, क्‍या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ प्रभु; तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन यूहन्‍ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उनसे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ों की रखवाली कर।” उसने तीसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्‍ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है?” पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा।” “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहाँ चाहता था, वहाँ फिरता था; परन्‍तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्‍बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहाँ तू न चाहेगा वहाँ तुझे ले जाएगा।” उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्‍यु से परमेश्‍वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” पतरस ने फिरकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिस से यीशु प्रेम रखता था, और जिस ने भोजन के समय उसकी छाती की और झुककर पूछा “हे प्रभु, तेरा पकड़वानेवाला कौन है?” उसे देखकर पतरस ने यीशु से कहा, “हे प्रभु, इस का क्‍या हाल होगा?” यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्‍या? तू मेरे पीछे हो ले।” इसलिये भाइयों में यह बात फैल गई, कि वह चेला न मरेगा; तौभी यीशु ने उससे यह नहीं कहा, कि यह न मरेगा, परन्‍तु यह कि “यदि मैं चाहूँ कि यह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इस से क्‍या?” यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिस ने इन बातों को लिखा है और हम जानते हैं, कि उसकी गवाही सच्‍ची है। और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ, कि पुस्‍तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं। हे थियुफिलुस, मैंने पहली पुस्‍तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्‍भ किया और करता और सिखाता रहा, उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्‍हें उसने चुना था, पवित्र आत्‍मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पक्‍के प्रमाणों से अपने आप को उन्‍हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्‍हें दिखाई देता रहा, और परमेश्‍वर के राज्‍य की बातें करता रहा। और चेलों से मिलकर उन्‍हें आज्ञा दी, “यरूशलेम को न छोड़ो, परन्‍तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिसकी चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। क्‍योंकि यूहन्‍ना ने तो पानी में बपतिस्‍मा दिया है परन्‍तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्‍मा से बपतिस्‍मा पाओगे।” अतः उन्होंने इकट्ठे होकर उससे पूछा, “हे प्रभु, क्‍या तू इसी समय इस्राएल का राज्‍य पुनः स्थापित करेगा?” उसने उनसे कहा, “उन समयों या कालों को जानना, जिनको पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्‍हारा काम नहीं। परन्‍तु जब पवित्र आत्‍मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्‍वी की छोर तक मेरे गवाह होंगे।” यह कहकर वह उनके देखते-देखते ऊपर उठा लिया गया, और बादल ने उसे उनकी आँखों से छिपा लिया। और उसके जाते समय जब वे आकाश की ओर ताक रहे थे, तो देखो, दो पुरूष श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए उनके पास आ खड़े हुए। और कहने लगे, “हे गलीली पुरूषों, तुम क्‍यों खड़े स्‍वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्‍हारे पास से स्‍वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्‍वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।” तब वे जैतून नामक पहाड़ से जो यरूशलेम के निकट एक सब्त के दिन की दूरी पर है, यरूशलेम को लौटे। और जब वहाँ पहुँचे तो वे उस अटारी पर गए, जहाँ पतरस और यूहन्‍ना और याकूब और अन्‍द्रियास और फिलिप्‍पुस और थोमा और बरतुल्मै और मत्ती और हलफई का पुत्र याकूब और शमौन जेलोतेस और याकूब का पुत्र यहूदा रहते थे। ये सब कई स्‍त्रियों और यीशु की माता मरियम और उसके भाइयों के साथ एक चित्त होकर प्रार्थना में लगे रहे। और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा होकर कहने लगा। “हे भाइयों, अवश्‍य था कि पवित्र शास्‍त्र का वह लेख पूरा हो, जो पवित्र आत्‍मा ने दाऊद के मुख से यहूदा के विषय में जो यीशु के पकड़ने वालों का अगुवा था, पहले से कहा था। क्‍योंकि वह तो हम में गिना गया, और इस सेवकाई में भी सहभागी हुआ। (उसने अधर्म की कमाई से एक खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उसकी सब अं‍तड़ियाँ निकल गई। और इस बात को यरूशलेम के सब रहनेवाले जान गए, यहाँ तक कि उस खेत का नाम उनकी भाषा में ‘हकलदमा’ अर्थात् ‘लहू का खेत’ पड़ गया।) क्‍योंकि भजन संहिता में लिखा है, “उसका घर उजड़ जाए, और उसमें कोई न बसे और उसका पद कोई दूसरा ले ले।” इसलिये जितने दिन तक प्रभु यीशु हमारे साथ आता जाता रहा, अर्थात् यूहन्‍ना के बपतिस्‍मा से लेकर उसके हमारे पास से उठाए जाने तक, जो लोग बराबर हमारे साथ रहे, उचित है कि उनमें से एक व्यक्ति हमारे साथ उसके जी उठने का गवाह हो जाए।” तब उन्होंने दो को खड़ा किया, एक यूसुफ को, जो बर-सबा कहलाता है, जिसका उपनाम यूसतुस है, दूसरा मत्तियाह को। और यह कहकर प्रार्थना की, “हे प्रभु, तू जो सब के मन को जानता है, यह प्रगट कर कि इन दोनों में से तूने किस को चुना है, कि वह इस सेवकाई और प्रेरिताई का पद ले जिसे यहूदा छोड़ कर अपने स्‍थान को गया।” तब उन्होंने उनके बारे में चिट्ठियाँ डालीं, और चिट्ठी मत्तियाह के नाम पर निकली, अतः वह उन ग्‍यारह प्रेरितों के साथ गिना गया। जब पिन्‍तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। और अचानक आकाश से बड़ी आँधी की सी सनसनाहट का शब्‍द हुआ, और उससे सारा घर जहाँ वे बैठे थे, गूँज गया। और उन्‍हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। और वे सब पवित्र आत्‍मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्‍मा ने उन्‍हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्‍य-अन्‍य भाषा बोलने लगे। और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्‍त-यहूदी यरूशलेम में रहतें थे। जब वह शब्‍द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्‍योंकि हर एक को यही सुनाई देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं। और वे सब चकित और अचम्‍भित होकर कहने लगे, “देखो, ये जो बोल रहे हैं क्‍या सब गलीली नहीं? तो फिर क्‍यों हम में से हर एक अपनी-अपनी जन्‍म भूमि की भाषा सुनता है? हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मेसोपोटामिया और यहूदिया और कप्‍पदूकिया और पुन्‍तुस और आसिया, और फ्रूगिया और पमफूलिया और मिसर और लीबिया देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहनेवाले और रोमी प्रवासी, अर्थात क्‍या यहूदी, और क्‍या यहूदी मत धारण करनेवाले, क्रेती और अरबी भी हैं, परन्‍तु अपनी-अपनी भाषा में उनसे परमेश्‍वर के बड़े-बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं। और वे सब चकित हुए, और घबराकर एक दूसरे से कहने लगे, “यह क्‍या हो रहा है?” परन्‍तु दूसरों ने ठट्ठा करके कहा, “वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।” पतरस उन ग्‍यारह के साथ खड़ा हुआ और ऊँचे शब्‍द से कहने लगा, “हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के सब रहनेवालो, यह जान लो और कान लगाकर मेरी बातें सुनो। जैसा तुम समझ रहे हो, ये नशें में नहीं है, क्‍योंकि अभी तो तीसरा पहर ही दिन चढ़ा है। परन्‍तु यह वह बात है, जो योएल भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा कही गई है: “परमेश्‍वर कहता है, कि अन्‍त के दिनों में ऐसा होगा, कि मैं अपना आत्‍मा सब मनुष्‍यों पर उँडेलूँगा और तुम्‍हारे बेटे और तुम्‍हारी बेटियाँ भविष्‍यद्वाणी करेंगी, और तुम्‍हारे जवान दर्शन देखेंगे, और तुम्‍हारे पुरनिए स्वप्न देखेंगे। वरन् मैं अपने दासों और अपनी दासियों पर भी उन दिनों में अपने आत्‍मा में से उँडेलूँगा, और वे भविष्‍यद्वाणी करेंगे। और मैं ऊपर आकाश में अद्भुत काम, और नीचे धरती पर चिन्ह, अर्थात् लहू, और आग और धूएँ का बादल दिखाऊँगा। प्रभु के महान और तेजस्वी दिन के आने से पहले सूर्य अन्‍धेरा और चाँद लहू सा हो जाएगा। और जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वही उद्धार पाएगा।” “हे इस्राएलियों, ये बातें सुनो: कि यीशु नासरी एक मनुष्‍य था जिसका परमेश्‍वर की ओर से होने का प्रमाण उन सामर्थ्य के कामों और आश्‍चर्य के कामों और चिन्‍हों से प्रगट है, जो परमेश्‍वर ने तुम्‍हारे बीच उसके द्वारा कर दिखलाए जिसे तुम आप ही जानते हो। उसी को, जब वह परमेश्‍वर की ठहराई हुई योजना और पूर्व ज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया, तो तुम ने अधर्मियों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वाकर मार डाला। परन्‍तु उसी को परमेश्‍वर ने मृत्‍यु के बन्‍धनों से छुड़ाकर जिलाया: क्‍योंकि यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता। “क्‍योंकि दाऊद उसके विषय में कहता है, ‘मैं प्रभु को सर्वदा अपने सामने देखता रहा क्‍योंकि वह मेरी दाहिनी ओर है, ताकि मैं डिग न जाऊँ। इसी कारण मेरा मन आनन्दित हुआ, और मेरी जीभ मग्न हुई; वरन् मेरा शरीर भी आशा में बना रहेगा। क्‍योंकि तू मेरे प्राणों को अधोलोक में न छोड़ेगा; और न अपने पवित्र जन को सड़ने ही देगा! तूने मुझे जीवन का मार्ग बताया है; तू मुझे अपने दर्शन के द्वारा आनन्‍द से भर देगा।” “हे भाइयों, मैं उस कुलपति दाऊद के विषय में तुम से साहस के साथ कह सकता हूँ कि वह तो मर गया और गाड़ा भी गया और उसकी कब्र आज तक हमारे यहाँ वर्तमान है। वह भविष्‍यद्वक्‍ता था, वह जानता था कि परमेश्‍वर ने मुझ से शपथ खाई है, “मैं तेरे वंश में से एक व्यक्ति को तेरे सिंहासन पर बैठाऊँगा।” उसने होने वाली बात को पहले ही से देखकर मसीह के जी उठने के विषय में भविष्‍यद्वाणी की कि न तो उसका प्राण अधोलोक में छोड़ा गया, और न उसकी देह सड़ने पाई। इसी यीशु को परमेश्‍वर ने जिलाया, जिसके हम सब गवाह हैं। इस प्रकार परमेश्‍वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्‍च पद पाकर, और पिता से वह पवित्र आत्‍मा प्राप्‍त करके जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी, उसने यह उंडेल दिया है जो तुम देखते और सुनते हो। क्‍योंकि दाऊद तो स्‍वर्ग पर नहीं चढ़ा; परन्‍तु वह आप कहता है, “प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा; मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवों तले की चौकी न कर दूँ।” अतः अब इस्राएल का सारा घराना निश्‍चय जान ले कि परमेश्‍वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।” तब सुननेवालों के हृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, “हे भाइयो, हम क्‍या करें?” पतरस ने उनसे कहा, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने-अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्‍मा ले; तो तुम पवित्र आत्‍मा का दान पाओगे। क्‍योंकि यह प्रतिज्ञा तुम, और तुम्‍हारी सन्‍तानों, और उन सब दूर-दूर के लोगों के लिये भी है जिनको प्रभु हमारा परमेश्‍वर अपने पास बुलाएगा।” उसने बहुत और बातों से भी गवाही दे देकर समझाया कि अपने आप को इस टेढ़ी जाति से बचाओ। अतः जिन्‍होंने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्‍मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्‍यों के लगभग उनमें मिल गए। और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। और सब लोगों पर भय छा गया, और बहुत से अद्भुत काम और चिन्‍ह प्रेरितों के द्वारा प्रगट होते थे। और वे सब विश्‍वास करनेवाले इकट्ठे रहते थे, और उनकी सब वस्तुएँ साझे की थीं। और वे अपनी-अपनी सम्‍पत्ति और सामान बेच-बेचकर जैसी जिसकी आवश्‍यकता होती थी बाँट दिया करते थे। और वे प्रतिदिन एक मन होकर मन्‍दिर में इकट्ठे होते थे, और घर-घर रोटी तोड़ते हुए आनन्‍द और मन की सीधाई से भोजन किया करते थे। और परमेश्‍वर की स्‍तुति करते थे, और सब लोग उनसे प्रसन्‍न थे; और जो उद्धार पाते थे, उनको प्रभु प्रतिदिन उनमें मिला देता था। पतरस और यूहन्‍ना तीसरे पहर प्रार्थना के समय मन्‍दिर में जा रहे थे। और लोग एक जन्‍म के लंगड़े को ला रहे थे, जिसको वे प्रति दिन मन्‍दिर के उस द्वार पर जो ‘सुन्‍दर’ कहलाता है, बैठा देते थे, कि वह मन्‍दिर में जानेवालों से भीख माँगे। जब उसने पतरस और यूहन्‍ना को मन्‍दिर में जाते देखा, तो उनसे भीख माँगी। पतरस ने यूहन्‍ना के साथ उसकी ओर ध्‍यान से देखकर कहा, “हमारी ओर देख!” अतः वह उनसे कुछ पाने की आशा रखते हुए उनकी ओर ताकने लगा। तब पतरस ने कहा, “चाँदी और सोना तो मेरे पास है नहीं; परन्‍तु जो मेरे पास है, वह तुझे देता हूँ; यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर।” और उसने उसका दाहिना हाथ पकड़ के उसे उठाया; और तुरन्‍त उसके पाँवों और टखनों में बल आ गया। और वह उछलकर खड़ा हो गया, और चलने-फिरने लगा; और चलता, और कूदता, और परमेश्‍वर की स्‍तुति करता हुआ उनके साथ मन्‍दिर में गया। सब लोगों ने उसे चलते-फिरते और परमेश्‍वर की स्‍तुति करते देखकर, उसको पहचान लिया कि यह वही है, जो मन्‍दिर के ‘सुन्‍दर’ फाटक पर बैठ कर भीख माँगा करता था; और उस घटना से जो उसके साथ हुई थी; वे बहुत अचम्‍भित और चकित हुए। जब वह पतरस और यूहन्‍ना को पकड़े हुए था, तो सब लोग बहुत अचम्‍भा करते हुए उस ओसारे में जो सुलैमान का कहलाता है, उनके पास दौड़े आए। यह देखकर पतरस ने लोगों से कहा, “हे इस्राएलियों, तुम इस मनुष्‍य पर क्‍यों अचम्‍भा करते हो, और हमारी ओर क्‍यों इस प्रकार देख रहे हो, कि मानो हम जैसे ही ने अपनी सामर्थ्य या भक्ति से इसे चलने-फिरने योग्य बना दिया। अब्राहम और इसहाक और याकूब के परमेश्‍वर, हमारे बापदादों के परमेश्‍वर ने अपने सेवक यीशु की महिमा की, जिसे तुम ने पकड़वा दिया, और जब पीलातुस ने उसे छोड़ देने का विचार किया, तब तुम ने उसके सामने उसका तिरस्कार किया। तुम ने उस पवित्र और धर्मी का तिरस्कार किया, और चाहाकि, एक हत्‍यारे को तुम्‍हारे लिये छोड़ दिया जाए। और तुम ने जीवन के कर्त्ता को मार डाला, जिसे परमेश्‍वर ने मरे हुओं में से जिलाया; और इस बात के हम गवाह हैं। और उसी के नाम ने, उस विश्‍वास के द्वारा जो उसके नाम पर है, इस मनुष्‍य को जिसे तुम देखते हो और जानते भी हो सामर्थ्य दी है; और निश्‍चय उसी विश्‍वास ने जो उसके द्वारा है, इस को तुम सब के सामने बिलकुल भला चंगा कर दिया है। और अब हे भाइयो, मैं जानता हूँ कि यह काम तुम ने अज्ञानता से किया, और वैसा ही तुम्‍हारे सरदारों ने भी किया। परन्‍तु जिन बातों को परमेश्‍वर ने सब भविष्यवक्ताओं के मुख से पहले ही बताया था, कि उसका मसीह दु:ख उठाएगा; उन्‍हें उसने इस रीति से पूरा किया। इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्‍हारे पाप मिटाए जाएँ, जिस से प्रभु के सम्‍मुख से विश्रान्‍ति के दिन आएँ। और वह उस यीशु को भेजे जो तुम्‍हारे लिये पहले ही से मसीह ठहराया गया है। अवश्‍य है कि वह स्‍वर्ग में उस समय तक रहे जब तक कि वह सब बातों का सुधार न कर ले जिसकी चर्चा प्राचीन काल से परमेश्‍वर ने अपने पवित्र भविष्यवक्ताओं के मुख से की है। जैसा कि मूसा ने कहा, “प्रभु परमेश्‍वर तुम्‍हारे भाइयों में से तुम्‍हारे लिये मुझ सा एक भविष्यवक्ता उठाएगा, जो कुछ वह तुम से कहे, उसकी सुनना।” परन्‍तु प्रत्‍येक मनुष्‍य जो उस भविष्यवक्ता की न सुने, लोगों में से नाश किया जाएगा। और शमूएल से लेकर उसके बाद वालों तक जितने भविष्यवक्ताओं ने बात कहीं उन सब ने इन दिनों का सन्‍देश दिया है। तुम भविष्‍यद्वक्‍ताओं की सन्‍तान और उस वाचा के भागी हो, जो परमेश्‍वर ने तुम्‍हारे बापदादों से बाँधी, जब उसने अब्राहम से कहा, “तेरे वंश के द्वारा पृथ्‍वी के सारे घराने आशीष पाएँगे।” परमेश्‍वर ने अपने सेवक को उठाकर पहले तुम्‍हारे पास भेजा, कि तुम में से हर एक को उसकी बुराइयों से फेरकर आशीष दे।” जब वे लोगों से यह कह रहे थे, तो याजक और मन्‍दिर के सरदार और सदूकी उन पर चढ़ आए। क्‍योंकि वे बहुत क्रोधित हुए कि वे लोगों को सिखाते थे और यीशु का उदाहरण दे-देकर मरे हुओं के जी उठने का प्रचार करते थे। और उन्होंने उन्‍हें पकड़कर दूसरे दिन तक हवालात में रखा क्‍योंकि संध्या हो गई थी। परन्‍तु वचन के सुननेवालों में से बहुतों ने विश्‍वास किया, और उनकी गिनती पाँच हजार पुरूषों के लगभग हो गई। दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उनके सरदार और पुरनिये और शास्‍त्री। और महायाजक हन्‍ना और कैफा और यूहन्‍ना और सिकन्‍दर और जितने महायाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकट्ठे हुए। और उन्‍हें बीच में खड़ा करके पूछने लगे, “तुम ने यह काम किस सामर्थ्य से और किस नाम से किया है?” तब पतरस ने पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण होकर उनसे कहा, “हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्‍य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ-ताछ की जाती है, कि वह कैसे अच्‍छा हुआ। तो तुम सब और सारे इस्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्‍वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्‍य तुम्‍हारे सामने भला चंगा खड़ा है। यह वही पत्‍थर है जिसे तुम राजमिस्‍त्रियों ने तुच्‍छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्‍थर हो गया। और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्‍योंकि स्‍वर्ग के नीचे मनुष्‍यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।” जब उन्होंने पतरस और यूहन्‍ना का हियाव देखा, और यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्‍य हैं, तो अचम्‍भा किया; फिर उनको पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं। परन्तु उस मनुष्‍य को जो अच्‍छा हुआ था, उनके साथ खड़े देखकर, वे उनके विरोध में कुछ न कह सके। परन्‍तु उन्‍हें सभा के बाहर जाने की आज्ञा देकर, वे आपस में विचार करने लगे, “हम इन मनुष्‍यों के साथ क्‍या करें? क्‍योंकि यरूशलेम के सब रहनेवालों पर प्रगट है, कि इन के द्वारा एक प्रसिद्ध चिन्‍ह दिखाया गया है; और हम उसका इन्‍कार नहीं कर सकते। परन्‍तु इसलिये कि यह बात लोगों में और अधिक फैल न जाए, हम उन्‍हें धमकाएँ, कि वे इस नाम से फिर किसी मनुष्‍य से बातें न करें।” तब उन्‍हें बुलाया और चेतावनी देकर यह कहा, “यीशु के नाम से कुछ भी न बोलना और न सिखलाना।” परन्‍तु पतरस और यूहन्‍ना ने उनको उत्तर दिया, “तुम ही न्‍याय करो, कि क्‍या यह परमेश्‍वर के निकट भला है, कि हम परमेश्‍वर की बात से बढ़कर तुम्‍हारी बात मानें? क्‍योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें।” तब उन्होंने उनको और धमकाकर छोड़ दिया, क्‍योंकि लोगों के कारण उन्‍हें दण्‍ड देने का कोई कारण नहीं मिला, इसलिये कि जो घटना हुई थी उसके कारण सब लोग परमेश्‍वर की बड़ाई करते थे। क्‍योंकि वह मनुष्‍य, जिस पर यह चंगा करने का चिन्‍ह दिखाया गया था, चालीस वर्ष से अधिक आयु क था। वे छूटकर अपने साथियों के पास आए, और जो कुछ महायाजकों और पुरनियों ने उनसे कहा था, उनो सुना दिया। यह सुनकर, उन्होंने एक चित्त होकर ऊँचे शब्‍द से परमेश्‍वर से कहा, “हे प्रभु, तू वही है जिसने स्र्ग और पृथ्‍वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है बनाया। तू ने पवित्र आत्‍मा के द्वारा अपने सेवक हमारे पिता दाऊद के मुख से कहा, “अन्‍य जातियों ने हुल्‍लड़ क्‍यों मचाया? और देश-देश के लोगों ने क्‍यों व्‍यर्थ बातें सोची? प्रभु और उसके मसीह के विरोध में पृथ्‍वी के राजा खड़े हुए, और हाकिम एक साथ इकट्ठे हो गए।” क्‍योंकि सचमुच तेरे सेवक यीशु के विरोध में, जिसे तू ने अभिषेक किया, हेरोदेस और पु्‍तियुस पीलातुस भी अन्‍य जातियों और इस्राएलियों के साथ इस नगर में इकट्ठे हुए, कि जो कुछ पहले से तेरी सामर्थ्य और मति से ठहरा था वही करें। अब हे प्रभु, उनकी धमकियों को देख; और अपने दासों को यह वरदान दे कि तेरा वचन बड़े हियाव सेसुनाएँ। और चंगा करने के लिये तू अपना हाथ बढ़ा कि चिन्‍ह और अद्भुत काम तेरे पवित्र सेवक यीशु के ना से किए जाएँ।” जब वे प्रार्थना कर चुके, तो वह स्‍थान जहाँ वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण हो गए, और परमेश्‍वर का वचन हियाव से सुनाते रहे। और विश्‍वास करनेवालों की मण्‍डली एक चित्त और एक मन के थे यहाँ तक कि कोई भी अपनी सम्‍पति अपनी नहीं कहता था, परन्‍तु सब कुछ साझे का था। और प्रेरित बड़ी सामर्थ्य से प्रभु यीशु के जी उठने की गवाही देते रहे और उन सब पर बड़ा अनुग्रह था। और उनमें कोई भी दरिद्र न था, क्‍योंकि जिनके पास भूमि या घर थे, वे उनको बेच-बेचकर, बिकी हुई वस्‍तुओं का दाम लाते, और उसे प्रेरितों के पाँवों पर रखते थे। और जैसी जिसे आवश्‍यकता होती थी, उसके अनुसार हर एक को बाँट दिया करते थे। और यूसुफ नामक, साइप्रस का एक लेवी था जिसका नाम प्रेरितों ने बरनबास अर्थात् (शान्‍ति का पुत्र) रखा था। उसकी कुछ भूमि थी, जिसे उसने बेचा, और दाम के रूपये लाकर प्रेरितों के पाँवों पर रख दिए। हनन्‍याह नामक एक मनुष्‍य, और उसकी पत्‍नी सफीरा ने कुछ भूमि बेची। और उसके दाम में से कुछ रख छोड़ा; और यह बात उसकी पत्‍नी भी जानती थी, और उसका एक भाग लाकर प्रेरितों के पाँवों के आगे रख दिया। परन्‍तु पतरस ने कहा, “हे हनन्‍याह! शैतान ने तेरे मन में यह बात क्‍यों डाली है कि तू पवित्र आत्‍मा से झूठ बोले, और भूमि के दाम में से कुछ रख छोड़े? जब तक वह तेरे पास रही, क्‍या तेरी न थी? और जब बिक गई तो क्‍या तेरे वश में न थी? तू ने यह बात अपने मन में क्‍यों सोचा? तू मनुष्‍यों से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर से झूठ बोला।” ये बातें सुनते ही हनन्‍याह गिर पड़ा, और प्राण छोड़ दिए; और सब सुननेवालों पर बड़ा भय छा गया। फिर जवानों ने उठकर उसकी अर्थी बनाई और बाहर ले जाकर गाड़ दिया। लगभग तीन घंटे के बाद उसकी पत्‍नी, जो कुछ हुआ था न जानकर, भीतर आई। तब पतरस ने उससे कहा, “मुझे बता क्‍या तुम ने वह भूमि इतने ही में बेची थी?” उसने कहा, “हाँ, इतने ही में।” पतरस ने उससे कहा, “यह क्‍या बात है, कि तुम दोनों ने प्रभु की आत्‍मा के परीक्षा के लिये एका किया है? देख, तेरे पति के गाड़नेवाले द्वार ही पर खड़े हैं, और तुझे भी बाहर ले जाएँगे।” तब वह तुरन्‍त उसके पाँवों पर गिर पड़ी, और प्राण छोड़ दिए; और जवानों ने भीतर आकर उसे मरा पाया, और बाहर ले जाकर उसके पति के पास गाड़ दिया। और सारी कलीसिया पर और इन बातों के सब सुननेवालों पर, बड़ा भय छा गया। प्रेरितों के हाथों से बहुत चिन्‍ह और अद्भुत काम लोगों के बीच में दिखाए जाते थे, (और वे सब एक चित्त होकर सुलैमान के ओसारे में इकट्ठे हुआ करते थे। परन्‍तु औरों में से किसी को यह हियाव न होता था कि, उनमें जा मिलें; फिर भी लोग उनकी बड़ाई करते थे। और विश्‍वास करनेवाले बहुतेरे पुरूष और स्‍त्रियाँ प्रभु की कलीसिया में और भी अधिक आकर मिलते रहे।) यहाँ तक कि लोग बीमारों को सड़कों पर ला-लाकर, खाटों और खटोलों पर लिटा देते थे, कि जब पतरस आए, तो उसकी छाया ही उनमें से किसी पर पड़ जाए। और यरूशलेम के आस-पास के नगरों से भी बहुत लोग बीमारों और अशुद्ध आत्‍माओं के सताए हुओं को ला-लाकर, इकट्ठे होते थे, और सब अच्‍छे कर दिए जाते थे। तब महायाजक और उसके सब साथी जो सदूकियों के पंथ के थे, डाह से भर कर उठे। और प्रेरितों को पकड़कर बन्‍दीगृह में बन्‍द कर दिया। परन्‍तु रात को प्रभु के एक स्‍वर्गदूत ने बन्‍दीगृह के द्वार खोलकर उन्‍हें बाहर लाकर कहा, “जाओ, मन्‍दिर में खड़े होकर, इस जीवन की सब बातें लोगों को सुनाओ।” वे यह सुनकर भोर होते ही मन्‍दिर में जाकर उपदेश देने लगे। परन्‍तु महायाजक और उसके साथियों ने आकर महासभा को और इस्राएलियों के सब पुरनियों को इक्कठा किया, और बन्‍दीगृह में कहला भेजा कि उन्‍हें लाएँ। परन्‍तु अधिकारीयों ने वहाँ पहुँचकर उन्‍हें बन्‍दीगृह में न पाया, और लौटकर संदेश दिया, “हम ने बन्‍दीगृह को बड़ी चौकसी से बन्‍द किया हुआ, और पहरेवालों को बाहर द्वारों पर खड़े हुए पाया; परन्तु जब खोला, तो भीतर कोई न मिला।” जब मन्‍दिर के सरदार और महायाजकों ने ये बातें सुनीं, तो उनके विषय में भारी चिन्‍ता में पड़ गए कि उनका क्‍या हुआ! इतने में किसी ने आकर उन्‍हें बताया, “देखो, जिन्‍हें तुम ने बन्‍दीगृह में बन्‍द रखा था, वे मनुष्‍य मन्‍दिर में खड़े हुए लोगों को उपदेश दे रहे हैं।” तब सरदार, अधिकारीयों के साथ जाकर, उन्‍हें ले आया, परन्‍तु बलपूर्वक नहीं, क्‍योंकि वे लोगों से डरते थे, कि हम पर पत्थराव न करें। उन्होंने उन्‍हें फिर लाकर महासभा के सामने खड़ा कर दिया और महायाजक ने उनसे पूछा, “क्‍या हम ने तुम्‍हें चिताकर आज्ञा न दी थी, कि तुम इस नाम से उपदेश न करना? फिर भी देखो, तुम ने सारे यरूशलेम को अपने उपदेश से भर दिया है और उस व्यक्ति का लहू हमारी गर्दन पर लाना चाहते हो।” तब पतरस और, अन्य प्रेरितों ने उत्तर दिया, “मनुष्‍यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्‍वर की आज्ञा का पालन करना ही कर्तव्‍य है। हमारे बापदादों के परमेश्‍वर ने यीशु को जिलाया, जिसे तुम ने क्रूस पर लटकाकर मार डाला था। उसी को परमेश्‍वर ने प्रभु और उध्दारकर्ता ठहराकर, अपने दाहिने हाथ से सर्वोच्‍च किया, कि वह इस् राएलियों को मन फिराव की शक्ति और पापों की क्षमा प्रदान करे। और हम इन बातों के गवाह हैं, और पवित्र आत्‍मा भी, जिसे परमेश्‍वर ने उन्‍हें दिया है, जो उसकी आज्ञा मानते हैं।” यह सुनकर वे जल उठे, और उन्‍हें मार डालना चाहा। परन्‍तु गमलीएल नामक एक फरीसी ने जो व्‍यवस्‍थापक और सब लोगों में माननीय था, न्‍यायालय में खड़े होकर प्रेरितों को थोड़ी देर के लिये बाहर कर देने की आज्ञा दी। तब उसने कहा, “हे इस्राएलियों, जो कुछ इन मनुष्‍यों से करना चाहते हो, सोच समझ के करना। क्‍योंकि इन दिनों से पहले थियूदास यह कहता हुआ उठा, कि मैं भी कुछ हूँ; और कोई चार सौ मनुष्‍य उसके साथ हो लिए, परन्‍तु वह मारा गया; और जितने लोग उसे मानते थे, सब तित्तर-बित्तर हुए और मिट गए। उसके बाद नाम लिखाई के दिनों में यहूदा गलीली उठा, और कुछ लोग अपनी ओर कर लिए; वह भी नाश हो गया, और जितने लोग उसे मानते थे, सब तित्तर-बित्तर हो गए। इसलिये अब मैं तुम से कहता हूँ, इन मनुष्‍यों से दूर ही रहो और उनसे कुछ काम न रखो; क्‍योंकि यदि यह धर्म या काम मनुष्‍यों की ओर से हो तब तो मिट जाएगा; परन्‍तु यदि परमेश्‍वर की ओर से है, तो तुम उन्‍हें कदापि मिटा न सकोगे; कहीं ऐसा न हो, कि तुम परमेश्‍वर से भी लड़नेवाले ठहरो।” तब उन्होंने उसकी बात मान ली; और प्रेरितों को बुलाकर पिटवाया; और यह आज्ञा देकर छोड़ दिया, कि यीशु के नाम से फिर बातें न करना। वे इस बात से आनन्‍दित होकर महासभा के सामने से चले गए, कि हम उसके नाम के लिये निरादर होने के योग्‍य तो ठहरे। और प्रतिदिन मन्‍दिर में और घर-घर में उपदेश करने, और इस बात का सुसमाचार सुनाने से, कि यीशु ही मसीह है न रूके। उन दिनों में जब चेलों की संख्या बहुत बढ़ने लगी, तब यूनानी भाषा बोलनेवाले इब्रानियों पर कुड़कुड़ाने लगे, कि प्रतिदिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती। तब उन बारहों ने चेलों की मण्‍डली को अपने पास बुलाकर कहा, “यह ठीक नहीं कि हम परमेश्‍वर का वचन छोड़कर खिलाने-पिलाने की सेवा में रहें। इसलिये हे भाइयो, अपने में से सात सुनाम पुरूषों को जो पवित्र आत्‍मा और बुद्धि से परिपूर्ण हो, चुन लो, कि हम उन्‍हें इस काम पर ठहरा दें। परन्‍तु हम तो प्रार्थना में और वचन की सेवा में लगे रहेंगे।” यह बात सारी मण्‍डली को अच्‍छी लगी, और उन्होंने स्तिफनुस नामक एक पुरूष को जो विश्‍वास और पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण था, और फिलिप्‍पुस और प्रुखुरुस और नीकानोर और तीमोन और परमिनास और अन्‍ताकिया वासी नीकुलाउस को जो यहूदी मत में आ गया था, चुन लिया। और इन्‍हें प्रेरितों के सामने खड़ा किया और उन्होंने प्रार्थना करके उन पर हाथ रखे। और परमेश्‍वर का वचन फैलता गया और यरूशलेम में चेलों की गिनती बहुत बढ़ती गई; और याजकों का एक बड़ा समाज इस मत के अधीन हो गया। स्तिफनुस अनुग्रह और सामर्थ्य से परिपूर्ण होकर लोगों में बड़े-बड़े अद्भुत काम और चिन्‍ह दिखाया करता था। तब उस आराधनालय में से जो लिबिरतीनों की कहलाती थी, और कुरेनी और सिकन्‍दरिया और किलिकिया और एशिया के लोगों में से कई एक उठकर स्‍तिफनुस से वाद-विवाद करने लगे। परन्‍तु उस ज्ञान और उस आत्‍मा का जिस से वह बातें करता था, वे सामना न कर सके। इस पर उन्होंने कई लोगों को उकसाया जो कहने लगे, “हम ने इसे मूसा और परमेश्‍वर के विरोध में निन्‍दा की बातें कहते सुना है।” और लोगों और प्राचीनों और शास्‍त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए। और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्‍होंने कहा, “यह मनुष्‍य इस पवित्र स्‍थान और व्‍यवस्‍था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता। क्‍योंकि हमने उसे यह कहते सुना है, कि यही यीशु नासरी इस जगह को ढा देगा, और उन रीतियों को बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।” तब सब लोगों ने जो सभा में बैठे थे, उसकी ओर ताककर उसका मुखड़ा स्‍वर्गदूत का सा देखा। तब महायाजक ने कहा, “क्‍या ये बातें सत्य है?” उसने कहा, “हे भाइयो, और पितरो सुनो, हमारा पिता अब्राहम हारान में बसने से पहले जब मेसोपोटामिया में था; तो तेजोमय परमेश्‍वर ने उसे दर्शन दिया। और उससे कहा, ‘तू अपने देश और अपने कुटुम्‍ब से निकलकर उस देश मे चला जा, जिसे मैं तुझे दिखाऊँगा।’ तब वह कसदियों के देश से निकलकर हारान में जा बसा; और उसके पिता की मृत्‍यु के बाद परमेश्‍वर ने उसको वहाँ से इस देश में लाकर बसाया जिसमें अब तुम बसते हो, और परमेश्वर ने उसको कुछ मीरास न दी, वरन् पैर रखने भर की भी उसमें जगह न दी, यद्यपि उस समय उसके कोई पुत्र भी न था। फिर भी प्रतिज्ञा की, ‘कि मैं यह देश, तेरे और तेरे बाद तेरे वंश के हाथ कर दूँगा।’ और परमेश्‍वर ने यों कहा, ‘तेरी सन्‍तान के लोग पराये देश में परदेशी होंगे, और वे उन्‍हें दास बनाएँगे, और चार सौ वर्ष तक दु:ख देंगे।’ फिर परमेश्‍वर ने कहा, ‘जिस जाति के वे दास होंगे, उसको मैं दण्‍ड दूँगा; और इसके बाद वे निकलकर इसी जगह मेरी सेवा करेंगे।’ और उसने उससे खतने की वाचा बाँधी; और इसी दशा में इसहाक उससे उत्‍पन्‍न हुआ; और आठवें दिन उसका खतना किया गया; और इसहाक से याकूब और याकूब से बारह कुलपति उत्‍पन्‍न हुए। और कुलपतियों ने यूसुफ से डाह करके उसे मिसर देश जानेवालों के हाथ बेचा; परन्‍तु परमेश्‍वर उसके साथ था। और उसे उसके सब क्‍लेशों से छुड़ाकर मिसर के राजा फिरौन के आगे अनुग्रह और बुद्धि दी, और उसने उसे मिस्त्र पर और अपने सारे घर पर हाकिम ठहराया। तब मिसर और कनान के सारे देश में अकाल पडा; जिस से भारी क्‍लेश हुआ, और हमारे बाप दादों (पूर्वज) को अन्‍न नहीं मिलता था। परन्‍तु याकूब ने यह सुनकर, कि मिसर में अनाज है, हमारे बाप दादों को पहली बार भेजा। और दूसरी बार यूसुफ अपने भाइयों पर प्रगट हो गया, और यूसुफ की जाति फिरौन को मालूम हो गई। तब यूसुफ ने अपने पिता याकूब और अपने सारे कुटुम्‍ब को, जो पचहत्तर व्यक्ति थे, बुला भेजा। तब याकूब मिसर में गया; और वहाँ वह और हमारे बापदादे मर गए। उनके शव शकेम में पहुँचाए जाकर उस कब्र में रखे गए, जिसे अब्राहम ने चाँदी देकर शकेम में हमोर की सन्‍तान से मोल लिया था। परन्‍तु जब उस प्रतिज्ञा के पूरे होने का समय निकट आया, जो परमेश्‍वर ने अब्राहम से की थी, तो मिसर में वे लोग बढ़ गए; और बहुत हो गए। तब मिसर में दूसरा राजा हुआ जो यूसुफ को नहीं जानता था। उसने हमारी जाति से चतुराई करके हमारे बाप दादों के साथ यहाँ तक बुरा व्यवहार किया, कि उन्‍हें अपने बालकों को फेंक देना पड़ा कि वे जीवित न रहें। उस समय मूसा उत्‍पन्‍न हुआ; और वह परमेश्वर की दृष्टि में बहुत ही सुन्‍दर था; और वह तीन महीने तक अपने पिता के घर में पाला गया। परन्‍तु जब फेंक दिया गया तो फिरौन की बेटी ने उसे उठा लिया, और अपना पुत्र करके पाला। और मूसा को मिसरियों की सारी विद्या पढ़ाई गई, और वह बातों और कामों में सामर्थी था। जब वह चालीस वर्ष का हुआ, तो उसके मन में आया कि मैं अपने इस्राएली भाइयों से भेंट करूँ। और उसने एक व्यक्ति पर अन्‍याय होते देखकर, उसे बचाया, और मिसरी को मारकर सताए हुए का पलटा लिया। उसने सोचा, कि मेरे भाई समझेंगे कि परमेश्‍वर मेरे हाथों से उन का उद्धार करेगा, परन्‍तु उन्होंने न समझा। दूसरे दिन जब वे आपस में लड़ रहे थे, तो वह वहाँ जा पहुंचा; और यह कहके उन्‍हें मेल करने के लिये समझाया, कि हे पुरूषो, ‘तुम तो भाई-भाई हो, एक दूसरे पर क्‍यों अन्‍याय करते हो?’ परन्‍तु जो अपने पड़ोसी पर अन्‍याय कर रहा था, उसने उसे यह कहकर हटा दिया, ‘तुझे किस ने हम पर हाकिम और न्यायाधीश ठहराया है? क्‍या जिस रीति से तूने कल मिस्त्री को मार डाला मुझे भी मार डालना चाहता है?’ यह बात सुनकर, मूसा भागा और मिद्यान देश में परदेशी होकर रहने लगा: और वहाँ उसके दो पुत्र उत्‍पन्‍न हुए। जब पूरे चालीस वर्ष बीत गए, तो एक स्‍वर्गदूत ने सीनै पहाड़ के जंगल में उसे जलती हुई झाड़ी की ज्‍वाला में दर्शन दिया। मूसा ने उस दर्शन को देखकर अचम्‍भा किया, और जब देखने के लिये पास गया, तो प्रभु की यह वाणी सुनाई दी, “मैं तेरे पूर्वज, अब्राहम, इसहाक और याकूब का परमेश्‍वर हूँ।” तब तो मूसा काँप उठा, यहाँ तक कि उसे देखने का हियाव न रहा। तब प्रभु ने उससे कहा, ‘अपने पाँवों से जूती उतार ले, क्‍योंकि जिस जगह तू खड़ा है, वह पवित्र भूमि है। मैंने सचमुच अपने लोगों की दुर्दशा को जो मिसर में है, देखी है; और उनकी आहें और उन का रोना सुन लिया है; इसलिये उन्‍हें छुड़ाने के लिये उतरा हूँ। अब आ, मैं तुझे मिस्त्र में भेजूँगा। जिस मूसा को उन्होंने यह कहकर नकारा था, ‘तुझे किस ने हम पर हाकिम और न्यायाधीश ठहराया है?’ उसी को परमेश्‍वर ने हाकिम और छुड़ानेवाला ठहराकर, उस स्‍वर्गदूत के द्वारा जिस ने उसे झाड़ी में दर्शन दिया था, भेजा। यही व्यक्ति मिसर और लाल समुद्र और जंगल में चालीस वर्ष तक अद्भुत काम और चिन्‍ह दिखा दिखाकर उन्‍हें निकाल लाया। यह वही मूसा है, जिस ने इस्राएलियों से कहा, ‘परमेश्‍वर तुम्‍हारे भाइयों में से तुम्‍हारे लिये मुझ सा एक भविष्‍यद्वक्‍ता उठाएगा।’ यह वही है, जिस ने जंगल में कलीसिया के बीच उस स्‍वर्गदूत के साथ सीनै पहाड़ पर उससे बातें की, और हमारे पूर्वजों के साथ था, उसी को जीवित वचन मिले, कि हम तक पहुँचाए। परन्‍तु हमारे बापदादों ने उसकी मानना न चाहा; वरन् उसे हटाकर अपने मन मिसर की ओर फेरे, और हारून से कहा, ‘हमारे लिये ऐसा देवता बना, जो हमारे आगे-आगे चलें; क्‍योंकि यह मूसा जो हमें मिसर देश से निकाल लाया, हम नहीं जानते उसे क्‍या हुआ?’ उन दिनों में उन्होंने एक बछड़ा बनाकर, उसकी मूरत के आगे बलि चढ़ाया; और अपने हाथों के कामों में मग्न होने लगे। अतः परमेश्‍वर ने मुँह मोड़कर उन्‍हें छोड़ दिया, कि आकाशगण पूजें, जैसा भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तक में लिखा है, ‘हे इस्राएल के घराने, क्‍या तुम जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्‍नबलि मुझ ही को चढ़ाते रहे?’ और तुम मोलेक के तम्‍बू और रिफान देवता के तारे को लिए फिरते थे, अर्थात् उन मूर्तियों को जिन्‍हें तुम ने दण्‍डवत करने के लिये बनाया था। अतः मैं तुम्‍हें बाबुल के परे ले जाकर बसाऊँगा। साक्षी का तम्‍बू जंगल में हमारे बापदादों के बीच में था; जैसा उसने ठहराया, जिस ने मूसा से कहा, ‘जो आकार तू ने देखा है, उसके अनुसार इसे बना।’ उसी तम्‍बू को हमारे बापदादे पूर्वकाल से पाकर यहोशू के साथ यहाँ ले आए; जिस समय कि उन्होंने उन अन्‍यजातियों पर अधिकार पाया, जिन्‍हें परमेश्‍वर ने हमारे बापदादों के सामने से निकाल दिया, और वह दाऊद के समय तक रहा। उस पर परमेश्‍वर ने अनुग्रह किया; अतः उसने विनती की, कि मैं याकूब के परमेश्‍वर के लिये निवास स्‍थान बनाऊँ। परन्‍तु सुलैमान ने उसके लिये घर बनाया। परन्‍तु परम प्रधान हाथ के बनाए घरों में नहीं रहता, जैसा कि भविष्‍यद्वक्‍ता ने कहा, ‘प्रभु कहता है, स्‍वर्ग मेरा सिहांसन और पृथ्‍वी मेरे पाँवों तले की पीढ़ी है, मेरे लिये तुम किस प्रकार का घर बनाओगे? और मेरे विश्राम का कौन सा स्‍थान होगा? क्‍या ये सब वस्तुएँ मेरे हाथ की बनाई नहीं?’ “हे हठीले, और मन और कान के खतनारहित लोगो, तुम सदा पवित्र आत्‍मा का विरोध करते हो। जैसा तुम्‍हारे पूर्वज करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो। भविष्यवक्ताओं में से किसको तुम्‍हारे बापदादों ने नहीं सताया? और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्‍देश देनेवालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए। तुम ने स्‍वर्गदूतों के द्वारा ठहराई हुई व्‍यवस्‍था तो पाई, परन्‍तु उसका पालन नहीं किया।” ये बातें सुनकर वे जल गए और उस पर दाँत पीसने लगे। परन्‍तु उसने पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण होकर स्‍वर्ग की ओर देखा और परमेश्‍वर की महिमा को और यीशु को परमेश्‍वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर कहा, “देखों, मैं स्‍वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्‍य के पुत्र को परमेश्‍वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूँ।” तब उन्होंने बड़े शब्‍द से चिल्‍लाकर कान बन्‍द कर लिए, और एक चित्त होकर उस पर झपटे। और उसे नगर के बाहर निकालकर पत्थराव करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े शाऊल नामक एक जवान के पाँवों के पास उतार कर रखे। और वे स्तिफनुस को पत्थराव करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा, “हे प्रभु यीशु, मेरी आत्‍मा को ग्रहण कर।” फिर घुटने टेककर ऊँचे शब्‍द से पुकारा, “हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।” और यह कहकर सो गया। और शाऊल उसके वध में सहमत था। उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपद्रव होने लगा और प्रेरितों को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशों में तित्तर-बित्तर हो गए। और भक्‍तों ने स्‍तिफनुस को कब्र में रखा; और उसके लिये बड़ा विलाप किया। शाऊल कलीसिया को उजाड़ रहा था; और घर-घर घुसकर पुरूषों और स्‍त्रियों को घसीट-घसीटकर बन्‍दीगृह में डालता था। जो तित्तर-बित्तर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे। और फिलिप्‍पुस सामरिया नगर में जाकर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। जो बातें फिलिप्‍पुस ने कहीं उन्‍हें लोगों ने सुनकर और जो चिन्‍ह वह दिखाता था उन्‍हें देख-देखकर, एक चित्त होकर मन लगाया। क्‍योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएँ बड़े शब्‍द से चिल्‍लाती हुई निकल गई, और बहुत से लकवे के रोगी और लंगड़े भी अच्‍छे किए गए। और उस नगर में बड़ा आनन्‍द छा गया। इस से पहले उस नगर में शमौन नामक एक मनुष्‍य था, जो जादू-टोना करके सामरिया के लोगों को चकित करता और अपने आप को कोई बड़ा पुरूष बनाता था। और सब छोटे से बड़े तक उसका सम्मान कर कहते थे, “यह मनुष्‍य परमेश्वर की वह शक्ति है, जो महान कहलाती है।” उसने बहुत दिनों से उन्‍हें अपने जादू के कामों से चकित कर रखा था, इसीलिये वे उसको बहुत मानते थे। परन्‍तु जब उन्होंने फिलिप्‍पुस का विश्वास किया जो परमेश्‍वर के राज्‍य और यीशु के नाम का सुसमाचार सुनाता था तो लोग, क्‍या पुरूष, क्‍या स्‍त्री बपतिस्‍मा लेने लगे। तब शमौन ने स्वयं भी विश्वास किया और बपतिस्‍मा लेकर फिलिप्‍पुस के साथ रहने लगा और चिन्‍ह और बड़े-बड़े सामर्थ्य के काम होते देखकर चकित होता था। जब प्रेरितों ने जो यरूशलेम में थे सुना कि सामरियों ने परमेश्‍वर का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहन्‍ना को उनके पास भेजा। और उन्होंने जाकर उनके लिये प्रार्थना की ताकि पवित्र आत्‍मा पाएँ। क्‍योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था, उन्होंने तो केवल प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्‍मा लिया था। तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्‍मा पाया। जब शमौन ने देखा कि प्रेरितों के हाथ रखने से पवित्र आत्‍मा दिया जाता है, तो उनके पास रूपये लाकर कहा, “यह अधिकार मुझे भी दो, कि जिस किसी पर हाथ रखूँ, वह पवित्र आत्‍मा पाए।” पतरस ने उससे कहा, “तेरे रूपये तेरे साथ नाश हों, क्‍योंकि तूने परमेश्‍वर का दान रूपयों से मोल लेने का विचार किया। इस बात में न तेरा हिस्‍सा है, न भाग; क्‍योंकि तेरा मन परमेश्‍वर के आगे सीधा नहीं। इसलिये अपनी इस बुराई से मन फिराकर प्रभु से प्रार्थना कर, सम्‍भव है तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए। क्‍योंकि मैं देखता हूँ, कि तू पित्त की सी कड़वाहट और अधर्म के बन्‍धन में पड़ा है।” शमौन ने उत्तर दिया, “तुम मेरे लिये प्रभु से प्रार्थना करो कि जो बातें तुमने कहीं, उनमें से कोई मुझ पर न आ पड़े।” अतः वे गवाही देकर और प्रभु का वचन सुनाकर, यरूशलेम को लौट गए, और सामरियों के बहुत से गाँवों में सुसमाचार सुनाते गए। फिर प्रभु के एक स्‍वर्गदूत ने फिलिप्‍पुस से कहा, “उठकर दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से गाजा को जाता है। यह रेगिस्तानी मार्ग है। वह उठकर चल दिया, और देखो, कूश देश का एक मनुष्‍य आ रहा था जो खोजा और कूशियों की रानी कन्‍दाके का मन्‍त्री और खजांची था, और आराधना करने को यरूशलेम आया था। और वह अपने रथ पर बैठा हुआ था, और यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक पढ़ता हुआ लौटा जा रहा था। तब आत्‍मा ने फिलिप्‍पुस से कहा, “निकट जाकर इस रथ के साथ हो ले।” फिलिप्‍पुस उसकी ओर दौड़ा और उसे यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, “तू जो पढ़ रहा है क्‍या उसे समझता भी है?” उसने कहा, “जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं कैसे समझूँ?” और उसने फिलिप्‍पुस से विनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ। पवित्र शास्‍त्र का जो अध्‍याय वह पढ़ रहा था, वह यह था: “वह भेड़ के समान वध होने को पहुँचाया गया, और जैसा मेम्‍ना अपने ऊन कतरनेवालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला, उसकी दीनता में उसका न्‍याय होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगों का वर्णन कौन करेगा? क्‍योंकि पृथ्‍वी से उसका प्राण उठा लिया जाता है।” इस पर खोजे ने फिलिप्‍पुस से पूछा, “मैं तुझ से विनती करता हूँ, यह बता कि भविष्‍यद्वक्‍ता यह किस के विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में?” तब फिलिप्‍पुस ने अपना मुँह खोला, और इसी शास्‍त्र से आरम्‍भ करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया। मार्ग में चलते-चलते वे किसी जल की जगह पहुँचे, तब खोजे ने कहा, “देख यहाँ जल है, अब मुझे बपतिस्‍मा लेने में क्‍या रोक है?” फिलिप्‍पुस ने कहा, “यदि तू सारे मन से विश्‍वास करता है तो ले सकता है।” उसने उत्तर दिया, “मैं विश्‍वास करता हूँ कि यीशु मसीह परमेश्‍वर का पुत्र है।” तब उसने रथ खड़ा करने की आज्ञा दी, और फिलिप्‍पुस और खोजा दोनों जल में उतर पड़े, और उसने उसे बपतिस्‍मा दिया। जब वे जल में से निकलकर ऊपर आए, तो प्रभु का आत्‍मा फिलिप्‍पुस को उठा ले गया, और खोजे ने उसे फिर न देखा, और वह आनन्‍द करता हुआ अपने मार्ग चला गया। फिलिप्‍पुस अशदोद में आ निकला, और जब तक कैसरिया में न पहुँचा, तब तक नगर-नगर सुसमाचार सुनाता गया। शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया। और उससे दमिश्‍क की आराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियाँ माँगी, कि क्‍या पुरूष, क्‍या स्‍त्री, जिन्‍हें वह इस पंथ पर पाए उन्‍हें बाँधकर यरूशलेम में ले आए। परन्‍तु चलते-चलते जब वह दमिश्‍क के निकट पहुँचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्‍योति चमकी, और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्‍द सुना, “हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्‍यों सताता है?” उसने पूछा, “हे प्रभु, तू कौन है?” उसने कहा, “मैं यीशु हूँ; जिसे तू सताता है। परन्‍तु अब उठकर नगर में जा, और जो तुझे करना है, वह तुझ से कहा जाएगा।” जो मनुष्‍य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्‍योंकि शब्‍द तो सुनते थे, परन्‍तु किसी को देखते न थे। तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्‍तु जब आँखें खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़ के दमिश्‍क में ले गए। और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया। दमिश्‍क में हनन्‍याह नामक एक चेला था, उससे प्रभु ने दर्शन में कहा, “हे हनन्‍याह!” उसने कहा, “हाँ प्रभु।” तब प्रभु ने उससे कहा, “उठकर उस गली में जा जो ‘सीधी’ कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नामक एक तरसुस वासी को पूछ ले; क्‍योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है, और उसने हनन्‍याह नामक एक पुरूष को भीतर आते, और अपने ऊपर हाथ रखते देखा है; ताकि फिर से दृष्‍टि पाए।” हनन्‍याह ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैंने इस मनुष्‍य के विषय में बहुतों से सुना है कि इस ने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी-बड़ी बुराईयाँ की हैं; और यहाँ भी इस को महायाजकों की ओर से अधिकार मिला है, कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बाँध ले।” परन्‍तु प्रभु ने उससे कहा, “तू चला जा; क्‍योंकि यह, तो अन्‍यजातियों और राजाओं, और इस्राएलियों के सामने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है। और मैं उसे बताऊँगा, कि मेरे नाम के लिये उसे कैसा-कैसा दु:ख उठाना पड़ेगा।” तब हनन्‍याह उठकर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, “हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात् यीशु, जो उस रास्‍ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्‍टि पाए और पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण हो जाए।” और तुरन्‍त उसकी आँखों से छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठकर बपतिस्‍मा लिया; फिर भोजन करके बल पाया। वह कई दिन उन चेलों के साथ रहा जो दमिश्‍क में थे। और वह तुरन्‍त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्‍वर का पुत्र है। और सब सुननेवाले चकित होकर कहने लगे, “क्‍या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्‍हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहाँ भी इसीलिये आया था, कि उन्हें बाँधकर महायाजकों के पास ले जाए?” परन्‍तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे-देकर कि मसीह यही है, दमिश्‍क के रहनेवाले यहूदियों का मुँह बन्‍द करता रहा। जब बहुत दिन बीत गए, तो यहूदियों ने मिलकर उसके मार डालने की युक्ति निकाली। परन्‍तु उनकी युक्ति शाऊल को मालूम हो गई: वे तो उसके मार डालने के लिये रात दिन फाटकों पर घातमे लगे रहे थे। परन्‍तु रात को उसके चेलों ने उसे लेकर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर से लटकाकर उतार दिया। यरूशलेम में पहुँचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्‍तु सब उससे डरते थे, क्‍योंकि उनको विश्वास न होता था, कि वह भी चेला है। परन्‍तु बरनबास ने उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जाकर उनसे कहा, कि इसने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और उसने इससे बातें की; फिर दमिश्‍क में इसने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया। वह उनके साथ यरूशलेम में आता-जाता रहा। और निधड़क होकर प्रभु के नाम से प्रचार करता था; और यूनानी भाषा बोलनेवाले यहूदियों के साथ बातचीत और वाद-विवाद करता था; परन्तु वे उसे मार डालने का यत्‍न करने लगे। यह जानकर भाई उसे कैसरिया में ले आए, और तरसुस को भेज दिया। इस प्रकार सारे यहूदिया, और गलील, और सामरिया में कलीसिया को चैन मिला, और उसकी उन्‍नति होती गई; और वह प्रभु के भय और पवित्र आत्‍मा की शान्‍ति में चलती और बढ़ती गई। फिर ऐसा हुआ कि पतरस हर जगह फिरता हुआ, उन पवित्र लोगों के पास भी पहुँचा, जो लुद्दा में रहते थे। वहाँ उसे ऐनियास नामक लकवे का मारा हुआ एक मनुष्‍य मिला, जो आठ वर्ष से खाट पर पड़ा था। पतरस ने उससे कहा, “हे ऐनियास! यीशु मसीह तुझे चंगा करता है। उठ, अपना बिछौना उठा।” तब वह तुरन्‍त उठ खड़ा हुआ। और लुद्दा और शारोन के सब रहनेवाले उसे देखकर प्रभु की ओर फिरे। याफा में तबीता अर्थात् दोरकास नाम एक विश्‍वासिनी रहती थी, वह बहुत से भले-भले काम और दान किया करती थी। उन्‍हीं दिनों में वह बीमार होकर मर गई; और उन्होंने उसे नहलाकर अटारी पर रख दिया। और इसलिये कि लुद्दा याफा के निकट था, चेलों ने यह सुनकर कि पतरस वहाँ है दो मनुष्‍य भेजकर उससे विनंती की, “हमारे पास आने में देर न कर।” तब पतरस उठकर उनके साथ हो लिया, और जब पहुँच गया, तो वे उसे उस अटारी पर ले गए। और सब विधवाएँ रोती हुई उसके पास आ खड़ी हुई: और जो कुर्ते और कपड़े दोरकास ने उनके साथ रहते हुए बनाए थे, दिखाने लगीं। तब पतरस ने सब को बाहर कर दिया, और घुटने टेककर प्रार्थना की; और शव की ओर देखकर कहा, “हे तबीता, उठ।” तब उसने अपनी आँखें खोल दी; और पतरस को देखकर उठ बैठी। उसने हाथ देकर उसे उठाया और पवित्र लोगों और विधवाओं को बुलाकर उसे जीवित और जागृत दिखा दिया। यह बात सारे याफा में फैल गई; और बहुतेरों ने प्रभु पर विश्‍वास किया। और पतरस याफा में शमौन नामक किसी चमड़े के धन्‍धा करनेवाले के यहाँ बहुत दिन तक रहा। कैसरिया में कुरनेलियुस नाम एक मनुष्‍य था, जो इतालियानी नाम पलटन का सूबेदार था। वह भक्‍त था, और अपने सारे घराने समेत परमेश्‍वर से डरता था, और यहूदी लोगों को बहुत दान देता, और बराबर परमेश्‍वर से प्रार्थना करता था। उसने दिन के तीसरे पहर के निकट दर्शन में स्‍पष्‍ट रूप से देखा कि परमेश्‍वर का एक स्‍वर्गदूत मेरे पास भीतर आकर कहा, “हे कुरनेलियुस।” उसने उसे ध्‍यान से देखा और डरकर कहा, “हे प्रभु क्‍या है?” उसने उससे कहा, “तेरी प्रार्थनाएँ और तेरे दान स्‍मरण के लिये परमेश्‍वर के सामने पहुँचे हैं। और अब याफा में मनुष्‍य भेजकर शमौन को, जो पतरस कहलाता है, बुलवा ले। वह शमौन, चमड़े के धन्‍धा करनेवाले के यहाँ अतिथि है, जिसका घर समुद्र के किनारे हैं।” जब वह स्‍वर्गदूत जिसने उससे बातें की थीं चला गया, तो उसने दो सेवक, और जो उसके पास उपस्‍थित रहा करते थे उनमें से एक भक्‍त सिपाही को बुलाया, और उन्‍हें सब बातें बताकर याफा को भेजा। दूसरे दिन जब वे चलते-चलते नगर के पास पहुँचे, तो दो पहर के निकट पतरस छत पर प्रार्थना करने चढ़ा। उसे भूख लगी और कुछ खाना चाहता था, परन्‍तु जब वे तैयार कर रहे थे तो वह बेसुध हो गया। और उसने देखा, कि आकाश खुल गया; और एक पात्र बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकता हुआ, पृथ्वी की ओर उतर रहा है। जिसमें पृथ्‍वी के सब प्रकार के चौपाए और रेंगनेवाले जन्‍तु और आकाश के पक्षी थे। और उसे एक ऐसा वाणी सुनाई दी, “हे पतरस उठ, मार और खा।” परन्‍तु पतरस ने कहा, “नहीं प्रभु, कदापि नहीं; क्‍योंकि मैंने कभी कोई अपवित्र या अशुद्ध वस्‍तु नहीं खाई है।” फिर दूसरी बार उसे वाणी सुनाई दी, “जो कुछ परमेश्‍वर ने शुद्ध ठहराया है, उसे तू अशुद्ध मत कह।” तीन बार ऐसा ही हुआ; तब तुरन्‍त वह पात्र आकाश पर उठा लिया गया। जब पतरस अपने मन में दुविधा में था, कि यह दर्शन जो मैंने देखा क्‍या है, तो देखो, वे मनुष्‍य जिन्‍हें कुरनेलियुस ने भेजा था, शमौन के घर का पता लगाकर द्वार पर आ खड़े हुए। और पुकारकर पूछने लगे, “क्‍या शमौन जो पतरस कहलाता है, यहाँ परअतिथि है?” पतरस जो उस दर्शन पर सोच ही रहा था, कि आत्‍मा ने उससे कहा, “देख, तीन मनुष्‍य तुम्हें खोज रहे हैं। अतः उठकर नीचे जा, और निःसंकोच उनके साथ हो ले; क्‍योंकि मैंने ही उन्‍हें भेजा है।” तब पतरस ने नीचे उतरकर उन मनुष्‍यों से कहा, “देखो, जिसको तुम खोज रहे हो, वह मैं ही हूँ; तुम्‍हारे आने का क्‍या कारण है?” उन्होंने कहा, “कुरनेलियुस सूबेदार जो धर्मी और परमेश्‍वर से डरनेवाला और सारी यहूदी जाति में सुनाम मनुष्‍य है, उसने एक पवित्र स्‍वर्गदूत से यह निर्देश पाया है, कि तुझे अपने घर बुलाकर तुझ से उपदेश सुने। तब उसने उन्‍हें भीतर बुलाकर उनको रहने की जगह दी। और दूसरे दिन, वह उनके साथ गया; और याफा के भाइयों में से कुछ उसके साथ हो लिए। दूसरे दिन वे कैसरिया में पहुँचे, और कुरनेलियुस अपने कुटुम्‍बियों और प्रिय मित्रों को इकट्ठे करके उनकी प्रतिक्षा कर रहा था। जब पतरस भीतर आ रहा था, तो कुरनेलियुस ने उससे भेंट की, और उसके पाँवों पर गिर कर उसे प्रणाम किया। परन्‍तु पतरस ने उसे उठाकर कहा, “खड़ा हो, मैं भी तो मनुष्‍य हीहूँ।” और उसके साथ बातचीत करता हुआ भीतर गया, और बहुत से लोगों को इकट्ठे देखकर उनसे कहा, “तुम जानते हो, कि अन्‍यजाति की संगति करना या उसके यहाँ जाना यहूदी के लिये अधर्म है, परन्‍तु परमेश्‍वर ने मुझे बताया है कि किसी मनुष्‍य को अपवित्र या अशुद्ध न कहूँ। इसी लिये मैं जब बुलाया गया तो बिना कुछ कहे चला आया। अब मैं पूछता हूँ कि मुझे किस काम के लिये बुलाया गया है?” कुरनेलियुस ने कहा, “चारदिन पश्चात, इसी समय, मैं अपने घर में तीसरे पहर को प्रार्थना कर रहा था; कि देखो, एक पुरूष चमकीला वस्‍त्र पहने हुए, मेरे सामने आ खड़ा हुआ। और कहने लगा, ‘हे कुरनेलियुस, तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरे दान परमेश्‍वर के सामने स्‍मरण किए गए हैं। इसलिये किसी को याफा भेजकर शमौन को जो पतरस कहलाता है, बुला। वह समुद्र के किनारे शमौन जो, चमड़े का धन्धा करनेवाले के घर में अतिथि है। तब मैंने तुरन्‍त तेरे पास लोग भेजे, और तू ने भला किया जो आ गया। अब हम सब यहाँ परमेश्‍वर के सामने हैं, ताकि जो कुछ परमेश्‍वर ने तुझ से कहा है उसे सुनें।” तब पतरस ने मुँह खोलकर कहा, अब मुझे निश्‍चय हुआ, कि परमेश्‍वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन् हर जाति में जो उससे डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है। जो वचन उसने इस्राएलियों के पास भेजा, जब कि उसने यीशु मसीह के द्वारा (जो सब का प्रभु है) शान्‍ति का सुसमाचार सुनाया, वह वचन तुम जानते हो, जो यूहन्‍ना के बपतिस्‍मा के प्रचार के बाद गलील से आरम्‍भ होकर सारे यहूदिया में फैल गया: परमेश्‍वर ने किस रीति से यीशु नासरी को पवित्र आत्‍मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया; वह भलाई करता, और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा, क्‍योंकि परमेश्‍वर उसके साथ था। और हम उन सब कामों के गवाह हैं; जो उसने यहूदिया के देश और यरूशलेम में भी किए, और उन्होंने उसे काठ पर लटकाकर मार डाला। उसको परमेश्‍वर ने तीसरे दिन जिलाया, और प्रगट भी कर दिया है। सब लोगों को नहीं वरन् उन गवाहों को जिन्‍हें परमेश्‍वर ने पहले से चुन लिया था, अर्थात् हमको जिन्‍होंने उसके मरे हुओं में से जी उठने के बाद उसके साथ खाया पीया; और उसने हमें आज्ञा दी कि लोगों में प्रचार करो और गवाही दो, कि यह वही है जिसे परमेश्‍वर ने जीवतों और मरे हुओं का न्‍यायी ठहराया है। उसकी सब भविष्‍यद्वक्‍ता गवाही देते है कि जो कोई उस पर विश्‍वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी। पतरस ये बातें कह ही रहा था कि पवित्र आत्‍मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किए हुए विश्‍वासी पतरस के साथ आए थे, वे सब चकित हुए कि अन्‍यजातियों पर भी पवित्र आत्‍मा का दान उंडेला गया है। क्‍योंकि उन्होंने उन्‍हें भाँति-भाँति की भाषा बोलते और परमेश्‍वर की बड़ाई करते सुना। इस पर पतरस ने कहा, “क्‍या अब कोई इन्हें जल से रोक सकता है कि ये बपतिस्‍मा न पाएँ, जिन्‍होंने हमारे समान पवित्र आत्‍मा पाया है?” और उसने आज्ञा दी कि उन्‍हें यीशु मसीह के नाम में बपतिस्‍मा दिया जाए। तब उन्होंने उससे विनती की कि कुछ दिन और हमारे साथ रह। और प्रेरितों और भाइयों ने जो यहूदिया में थे सुना, कि अन्‍यजातियों ने भी परमेश्‍वर का वचन मान लिया है। और जब पतरस यरूशलेम में आया, तो खतना किए हुए लोग उससे वाद-विवाद करने लगे, “तूने खतनारहित लोगों के यहाँ जाकर उनके साथ खाया।” तब पतरस ने उन्‍हें आरम्‍भ से क्रमानुसार कह सुनाया; “मैं याफा नगर में प्रार्थना कर रहा था, और बेसुध होकर एक दर्शन देखा, कि एक पात्र, बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकाया हुआ, आकाश से उतरकर मेरे पास आया। जब मैंने उस पर ध्‍यान किया, तो पृथ्‍वी के चौपाए और वनपशु और रेंगनेवाले जन्‍तु और आकाश के पक्षी देखे; और यह आवाज़ भी सुना, ‘हे पतरस उठ मार और खा।’ मैंने कहा, ‘नहीं प्रभु, नहीं; क्‍योंकि कोई अपवित्र या अशुद्ध वस्‍तु मेरे मुँह में कभी नहीं गई।’ इसके उत्तर में आकाश से दूसरी आवाज़ आई, ‘जो कुछ परमेश्‍वर ने शुद्ध ठहराया है, उसे अशुद्ध मत कह।’ तीन बार ऐसा ही हुआ; तब सब कुछ फिर आकाश पर खींच लिया गया। और देखो, तुरन्‍त तीन मनुष्‍य जो कैसरिया से मेरे पास भेजे गए थे, उस घर पर जिसमें हम थे, आ खड़े हुए। तब आत्‍मा ने मुझ से उनके साथ बेझिझक हो लेने को कहा, और ये छ: भाई भी मेरे साथ हो लिए; और हम उस मनुष्‍य के घर में गए। और उसने बताया, कि मैंने एक स्‍वर्गदूत को अपने घर में खड़ा देखा, जिसने मुझ से कहा, ‘याफा में मनुष्‍य भेजकर शमौन को जो पतरस कहलाता है, बुलवा ले। वह तुझ से ऐसी बातें कहेगा, जिनके द्वारा तू और तेरा सारा घराना उद्धार पाएगा।’ जब मैं बातें करने लगा, तो पवित्र आत्‍मा उन पर उसी रीति से उतरा, जिस रीति से आरम्‍भ में हम पर उतरा था। तब मुझे प्रभु का वह वचन स्‍मरण आया; जो उसने कहा, ‘यूहन्‍ना ने तो पानी से बपतिस्‍मा दिया, परन्‍तु तुम पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा पाओगे।’ अतः जब कि परमेश्‍वर ने उन्‍हें भी वही दान दिया, जो हमें प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास करने से मिला; तो मैं कौन था जो परमेश्‍वर को रोक सकता था?” यह सुनकर, वे चुप रहे, और परमेश्‍वर की बड़ाई करके कहने लगे, “तब तो परमेश्‍वर ने अन्‍यजातियों को भी जीवन के लिये मन फिराव का दान दिया है।” जो लोग उस क्‍लेश के मारे जो स्‍तिफनुस के कारण पड़ा था, तित्तर-बित्तर हो गए थे, वे फिरते-फिरते फीनीके और साइप्रस और अन्‍ताकिया में पहुँचे; परन्‍तु यहूदियों को छोड़ किसी और को वचन न सुनाते थे। परन्‍तु उनमें से कुछ साइप्रस वासी और कुरेनी थे, जो अन्‍ताकिया में आकर युनानियों को भी प्रभु यीशु का सुसमचार की बातें सुनाने लगे। और प्रभु का हाथ उन पर था, और बहुत लोग विश्‍वास करके प्रभु की ओर फिरे। तब उनकी चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के सुनने में आई, और उन्होंने बरनबास को अन्‍ताकिया भेजा। वह वहाँ पहुँचकर, और परमेश्‍वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहें। क्‍योंकि वह एक भला मनुष्‍य था; और पवित्र आत्‍मा और विश्‍वास से परिपूर्ण था; और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले। तब वह शाऊल को ढूँढने के लिये तरसुस को चला गया। और जब उनसे मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत से लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए। उन्‍हीं दिनों में कई भविष्यवक्ता यरूशलेम से अन्‍ताकिया में आए। उनमें से अगबुस ने खड़े होकर आत्‍मा की प्रेरणा से यह बताया, कि सारे जगत में बड़ा अकाल पड़ेगा, और वह अकाल क्‍लौदियुस के समय में पड़ा। तब चेलों ने निर्णय किया कि हर एक अपनी अपनी पूँजी के अनुसार यहूदिया में रहनेवाले भाइयों की सेवा के लिये कुछ भेजे। और उन्होंने ऐसा ही किया; और बरनबास और शाऊल के हाथ प्राचीनों के पास कुछ भेज दिया। उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कई एक व्यक्तियों को दु:ख देने के लिये उन पर हाथ डाले। उसने यूहन्‍ना के भाई याकूब को तलवार से मरवा डाला। जब उसने देखा, कि यहूदी लोग इस से आनन्‍दित होते हैं, तो उसने पतरस को भी पकड़ लिया। वे दिन अखमीरी रोटी के दिन थे। और उसने उसे पकड़ कर बन्‍दीगृह में डाला, और रखवाली के लिये, चार-चार सिपाहियों के चार पहरों में रखा: इस मनसा से कि फसह के बाद उसे लोगों के सामने लाए। बन्‍दीगृह में पतरस की रखवाली हो रही थी; परन्‍तु कलीसिया उसके लिये लौ लगाकर परमेश्‍वर से प्रार्थना कर रही थी। और जब हेरोदेस उसे उनके सामने लाने को था, तो उसी रात पतरस दो जंजीरों से बंधा हुआ, दो सिपाहियों के बीच में सो रहा था; और पहरूए द्वार पर बन्‍दीगृह की रखवाली कर रहे थे। तो देखो, प्रभु का एक स्‍वर्गदूत आ खड़ा हुआ और उस कोठरी में ज्‍योति चमकी, और उसने पतरस की पसली पर हाथ मार कर उसे जगाया, और कहा, “उठ, जल्दी कर।” और उसके हाथ से जंजीरें खुलकर गिर पड़ीं। तब स्‍वर्गदूत ने उससे कहा, “कमर बाँध, और अपने जूते पहन ले।” उसने वैसा ही किया, फिर उसने उससे कहा, “अपना वस्‍त्र पहनकर मेरे पीछे हो ले।” वह निकलकर उसके पीछे हो लिया; परन्‍तु यह न जानता था कि जो कुछ स्‍वर्गदूत कर रहा है, वह सच है, बल्क़ि यह समझा कि मैं दर्शन देख रहा हूँ। तब वे पहले और दूसरे पहरे से निकलकर उस लोहे के फाटक पर पहुँचे, जो नगर की ओर है। वह उनके लिये आप से आप खुल गया, और वे निकलकर एक ही गली होकर गए, इतने में स्वर्गदूत उसे छोड़कर चला गया। तब पतरस ने सचेत होकर कहा, “अब मैंने सच जान लिया कि प्रभु ने अपना स्‍वर्गदूत भेजकर मुझे हेरोदेस के हाथ से छुड़ा लिया, और यहूदियों की सारी आशा तोड़ दी।” और यह सोचकर, वह उस यूहन्‍ना की माता मरियम के घर आया, जो मरकुस कहलाता है। वहाँ बहुत लोग इकट्ठे होकर प्रार्थना कर रहे थे। जब उसने फाटक की खिड़की खटखटाई तो रूदे नामक एक दासी सुनने को आई। और पतरस का शब्‍द पहचानकर, उसने आनन्‍द के मारे फाटक न खोला; परन्‍तु दौड़कर भीतर गई, और बताया कि पतरस द्वार पर खड़ा है। उन्होंने उससे कहा, “तू पागल है।” परन्‍तु वह दृढ़ता से बोली कि ऐसा ही है: तब उन्होंने कहा, “उसका स्‍वर्गदूत होगा।” परन्‍तु पतरस खटखटाता ही रहा: अतः उन्होंने खिड़की खोली, और उसे देखकर चकित रह गए। तब उसने उन्‍हें हाथ से संकेत किया कि चुप रहें; और उनको बताया कि प्रभु किस रीति से मुझे बन्‍दीगृह से निकाल लाया है। फिर कहा, “याकूब और भाइयों को यह बात कह देना।” तब निकलकर दूसरी जगह चला गया। भोर को सिपाहियों में बड़ी हलचल होने लगी कि पतरस कहाँ गया। जब हेरोदेस ने उसकी खोज की और न पाया, तो पहरूओं की जाँच करके आज्ञा दी कि वे मार डाले जाएँ: और वह यहूदिया को छोड़कर कैसरिया में जा कर रहने लगा। हेरोदेस सूर और सैदा के लोगों से बहुत अप्रसन्‍न था। सो वे एक चित्त होकर उसके पास आए और बलास्‍तुस को जो राजा का एक कर्मचारी था, मनाकर मेल करना चाहा; क्‍योंकि राजा के देश से उनके देश का पालन-पोषण होता था। ठहराए हुए दिन हेरोदेस राजवस्‍त्र पहनकर सिंहासन पर बैठा; और उनको व्‍याख्‍यान देने लगा। और लोग पुकार उठे, “यह तो मनुष्‍य का नहीं परमेश्‍वर का शब्‍द है।” उसी क्षण प्रभु के एक स्‍वर्गदूत ने तुरन्‍त उसे मारा, क्‍योंकि उसने परमेश्वर की महिमा नही की और उसके शरीर में कीड़े पड़ गए और वह मर गया। परन्‍तु परमेश्‍वर का वचन बढ़ता और फैलता गया। जब बरनबास और शाऊल अपनी सेवा पूरी कर चुके तो यूहन्‍ना को जो मरकुस कहलाता है, साथ लेकर यरूशलेम से लौटे। अन्‍ताकिया की कलीसिया में कई भविष्‍यद्वक्‍ता और उपदेशक थे; अर्थात् बरनबास और शमौन जो नीगर कहलाता है; और लूकियुस कुरेनी, और चौथाई देश के राजा हेरोदेस का दूधभाई मनाहेम और शाऊल। जब वे उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे थे, तो पवित्र आत्‍मा ने कहा, “मेरे लिये बरनबास और शाऊल को उस काम के लिये अलग करो जिसके लिये मैंने उन्‍हें बुलाया है।” तब उन्होंने उपवास और प्रार्थना करके और उन पर हाथ रखकर उन्‍हें विदा किया। अतः वे पवित्र आत्‍मा के भेजे हुए सिलूकिया को गए; और वहाँ से जहाज पर चढ़कर साइप्रस को चले। और सलमीस में पहुँचकर, परमेश्‍वर का वचन यहूदियों के आराधनालयों में सुनाया; और यूहन्‍ना उनका सेवक था। और उस सारे टापू में से होते हुए, पाफुस तक पहुँचे। वहाँ उन्‍हें बार-यीशु नामक एक जादूगर मिला जो यहूदी और झूठा भविष्‍यद्वक्‍ता था। वह हाकिम सिरगियुस पौलुस के साथ था, जो बुद्धिमान पुरूष था। उसने बरनबास और शाऊल को अपने पास बुलाकर परमेश्‍वर का वचन सुनना चाहा। परन्‍तु इलीमास टोन्हे ने, क्‍योंकि यही उसके नाम का अर्थ है उनका सामना करके, हाकिम को विश्‍वास करने से रोकना चाहा। तब शाऊल ने जिसका नाम पौलुस भी है, पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण होकर उसकी ओर टकटकी लगाकर कहा, “हे सारे कपट और सब चतुराई से भरे हुए शैतान की सन्‍तान, सकल धर्म के बैरी, क्‍या तू प्रभु के सीधे मार्गो को टेढ़ा करना न छोड़ेगा? अब देख, प्रभु का हाथ तुझ पर पड़ा है; और तू कुछ समय तक अंधा रहेगा और सूर्य को न देखेगा।” तब तुरन्‍त धुंधलापन और अन्‍धेरा उस पर छा गया, और वह इधर-उधर टटोलने लगा ताकि कोई उसका हाथ पकड़ कर ले चले। तब हाकिम ने जो कुछ हुआ था, देखकर और प्रभु के उपदेश से चकित होकर विश्‍वास किया। पौलुस और उसके साथी पाफुस से जहाज खोलकर पंफूलिया के पिरगा में आए; और यूहन्‍ना उन्‍हें छोड़कर यरूशलेम को लौट गया। और पिरगा से आगे बढ़कर पिसिदिया के अन्‍ताकिया में पहुँचे; और सब्‍त के दिन आराधनालय में जाकर बैठ गए। व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तक से पढ़ने के बाद आराधनालय के सरदारों ने उनके पास कहला भेजा, “हे भाइयों, यदि लोगों के उपदेश के लिये तुम्‍हारे मन में कोई बात हो तो कहो।” तब पौलुस ने खड़े होकर और हाथ से इशारा करके कहा, “हे इस्राएलियों, और परमेश्‍वर से डरनेवालों, सुनो: इन इस्राएली लोगों के परमेश्‍वर ने हमारे बापदादों को चुन लिया, और जब ये मिस्त्र देश में परदेशी होकर रहते थे, तो उनकी उन्‍नति की; और बलवन्‍त भुजा से निकाल लाया। और वह कोई चालीस वर्ष तक जंगल में उनकी सहता रहा, और कनान देश में सात जातियों का नाश करके उन का देश लगभग साढ़े चार सौ वर्ष में इन की मीरास में कर दिया। इसके बाद उसने शमूएल भविष्‍यद्वक्‍ता तक उनमें न्‍यायी ठहराए। उसके बाद उन्होंने एक राजा माँगा; तब परमेश्‍वर ने चालीस वर्ष के लिये बिन्‍यामीन के गोत्र में से एक मनुष्‍य अर्थात् कीश के पुत्र शाऊल को उन पर राजा ठहराया। फिर उसे अलग करके दाऊद को उनका राजा बनाया; जिसके विषय में उसने गवाही दी, ‘मुझे एक मनुष्‍य, यिशै का पुत्र दाऊद, मेरे मन के अनुसार मिल गया है। वही मेरी सारी इच्‍छा पूरी करेगा।’ उसी के वंश में से परमेश्‍वर ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार इस्राएल के पास एक उद्धारकर्ता, अर्थात् यीशु को भेजा। जिसके आने से पहले यूहन्‍ना ने सब इस्राएलियों को मन फिराव के बपतिस्‍मा का प्रचार किया। और जब यूहन्‍ना अपनी सेवा पूरी करने पर था, तो उसने कहा, ‘तुम मुझे क्‍या समझते हो? मैं वह नहीं! वरन् देखो, मेरे बाद एक आनेवाला है, जिसके पाँवों की जूती के बन्ध भी मैं खोलने के योग्‍य नहीं।’ “हे भाइयो, तुम जो अब्राहम की सन्‍तान हो; और तुम जो परमेश्‍वर से डरते हो, तुम्‍हारे पास इस उद्धार का वचन भेजा गया है। क्‍योंकि यरूशलेम के रहनेवालों और उनके सरदारों ने, न उसे पहचाना, और न भविष्‍यद्वक्‍ताओं की बातें समझी; जो हर सब्‍त के दिन पढ़ी जाती हैं, इसलिये उसे दोषी ठहराकर उनको पूरा किया। उन्होंने मार डालने के योग्‍य कोई दोष उसमें न पाया, तौभी पिलातुस से विनती की, कि वह मार डाला जाए। और जब उन्होंने उसके विषय में लिखी हुई सब बातें पूरी की, तो उसे क्रूस पर से उतार कर कब्र में रखा। परन्‍तु परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और वह उन्‍हें जो उसके साथ गलील से यरूशलेम आए थे, बहुत दिनों तक दिखाई देता रहा; लोगों के सामने अब वे ही उसके गवाह हैं। और हम तुम्‍हें उस प्रतिज्ञा के विषय में जो बापदादों से की गई थी, यह सुसमाचार सुनाते हैं, कि परमेश्‍वर ने यीशु को जिलाकर, वही प्रतिज्ञा हमारी सन्‍तान के लिये पूरी की; जैसा दूसरे भजन में भी लिखा है, ‘तू मेरा पुत्र है; आज मैं ही ने तुझे जन्‍माया है।’ और उसके इस रीति से मरे हुओं में से जिलाने के विषय में भी, कि वह कभी न सड़े, उसने यों कहा है, ‘मैं दाऊद पर की पवित्र और अटल कृपा तुम पर करूँगा।’ इसलिये उसने एक और भजन में भी कहा है, ‘तू अपने पवित्र जन को सड़ने न देगा।’ क्‍योंकि दाऊद तो परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार अपने समय में सेवा करके सो गया, और अपने बापदादों में जा मिला, और सड़ भी गया। परन्‍तु जिसको परमेश्‍वर ने जिलाया, वह सड़ने नहीं पाया। इसलिये, हे भाइयो; तुम जान लो कि इसी के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्‍हें दिया जाता है। और जिन बातों से तुम मूसा की व्‍यवस्‍था के द्वारा निर्दोष नहीं ठहर सकते थे, उन्‍हीं सब से हर एक विश्‍वास करनेवाला उसके द्वारा निर्दोष ठहरता है। इसलिये चौकस रहो, ऐसा न हो, कि जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तक में लिखित है, तुम पर भी आ पड़े: ‘हे निन्‍दा करनेवालो, देखो, और चकित हो, और मिट जाओ; क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे दिनों में एक काम करता हूँ; ऐसा काम, कि यदि कोई तुम से उसकी चर्चा करे, तो तुम कभी विश्वास न करोगे’।” उनके बाहर निकलते समय लोग उनसे विनती करने लगे, कि अगले सब्‍त के दिन हमें ये बातें फिर सुनाई जाएँ। और जब सभा उठ गई तो यहूदियों और यहूदी मत में आए हुए भक्‍तों में से बहुत से पौलुस और बरनबास के पीछे हो लिए; और उन्होंने उनसे बातें करके समझाया, कि परमेश्‍वर के अनुग्रह में बने रहो। अगले सब्‍त के दिन नगर के प्राय: सब लोग परमेश्‍वर का वचन सुनने को इकट्ठे हो गए। परन्‍तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्‍दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे। तब पौलुस और बरनबास ने निडर होकर कहा, “अवश्‍य था, कि परमेश्‍वर का वचन पहले तुम्‍हें सुनाया जाता; परन्‍तु जब कि तुम उसे दूर करते हो, और अपने को अनन्‍त जीवन के योग्‍य नहीं ठहराते, तो देखो, हम अन्‍यजातियों की ओर फिरते हैं। क्‍योकिं प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है, ‘मैने तुझे अन्‍यजातियों के लिये ज्‍योति ठहराया है, ताकि तू पृथ्‍वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो’।” यह सुनकर अन्‍यजाति आनन्‍दित हुए, और परमेश्‍वर के वचन की बड़ाई करने लगे, और जितने अनन्‍त जीवन के लिये ठहराए गए थे, उन्होंने विश्‍वास किया। तब प्रभु का वचन उस सारे देश में फैलने लगा। परन्‍तु यहूदियों ने भक्‍त और कुलीन स्‍त्रियों को और नगर के बड़े लोगों को भड़काया, और पौलुस और बरनबास पर उपद्रव करवाकर उन्‍हें अपनी सीमा से बाहर निकाल दिया। तब वे उनके सामने अपने पाँवों की धूल झाड़कर इकुनियुम को चले गए। और चेले आनन्‍द से और पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण होते रहे। इकुनियुम में ऐसा हुआ कि वे यहूदियों की आराधनालय में साथ-साथ गए, और ऐसी बातें की, कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहुतों ने विश्‍वास किया। परन्‍तु विश्वास न करने वाले यहूदियों ने अन्‍यजातियों के मन भाइयों के विरोध में भड़काए, और कटुता उत्पन्न कर दी। और वे बहुत दिन तक वहाँ रहे, और प्रभु के भरोसे पर हियाव से बातें करते थे: और वह उनके हाथों से चिन्‍ह और अद्भुत काम करवाकर अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था। परन्‍तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इससे कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए। परन्‍तु जब अन्‍यजाति और यहूदी उनका अपमान और उन्‍हें पत्थराव करने के लिये अपने सरदारों समेत उन पर दौड़े। तो वे इस बात को जान गए, और लुकाउनिया के लुस्‍त्रा और दिरबे नगरों में, और आसपास के प्रदेशों में भाग गए। और वहाँ सुसमाचार सुनाने लगे। लुस्‍त्रा में एक मनुष्‍य बैठा था, जो पाँवों का निर्बल था। वह जन्‍म ही से लंगड़ा था, और कभी न चला था। वह पौलुस को बातें करते सुन रहा था और पौलुस ने उसकी ओर टकटकी लगाकर देखा कि इस को चंगा हो जाने का विश्‍वास है। और ऊँचे शब्‍द से कहा, “अपने पाँवों के बल सीधा खड़ा हो।” तब वह उछलकर चलने फिरने लगा। लोगों ने पौलुस का यह काम देखकर लुकाउनिया भाषा में ऊँचे शब्‍द से कहा, “देवता मनुष्‍यों के रुप में होकर हमारे पास उतर आए हैं।” और उन्होंने बरनबास को ज्‍यूस, और पौलुस को हिरमेस कहा क्‍योंकि वह बातें करने में मुख्‍य था। और ज्‍यूस के उस मन्‍दिर का पुजारी जो उनके नगर के सामने था, बैल और फूलों के हार फाटकों पर लाकर लोगों के साथ बलिदान करना चाहता था। परन्‍तु बरनबास और पौलुस प्रेरितों ने जब सुना, तो अपने कपड़े फाड़े, और भीड़ की ओर लपक गए, और पुकारकर कहने लगे, “हे लोगो, तुम क्‍या करते हो? हम भी तो तुम्‍हारे समान दु:ख-सुख भोगी मनुष्‍य हैं, और तुम्‍हें सुसमाचार सुनाते हैं, कि तुम इन व्‍यर्थ वस्‍तुओं से अलग होकर जीवते परमेश्‍वर की ओर फिरो, जिसने स्‍वर्ग और पृथ्‍वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है बनाया। उसने बीते समयों में सब जातियों को अपने-अपने मार्गों में चलने दिया। तौभी उसने अपने आप को बे-गवाह न छोड़ा; किन्‍तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्‍त ऋतु देकर तुम्‍हारे मन को भोजन और आनन्‍द से भरता रहा।” यह कहकर भी उन्होंने लोगों को बड़ी कठिनाई से रोका कि उनके लिये बलिदान न करें। परन्‍तु कितने यहूदियों ने अन्‍ताकिया और इकुनियम से आकर लोगों को अपनी ओर कर लिया, और पौलुस को पथराव किया, और मरा समझकर उसे नगर के बाहर घसीट ले गए। पर जब चेले उसकी चारों ओर आ खड़े हुए, तो वह उठकर नगर में गया और दूसरे दिन बरनबास के साथ दिरबे को चला गया। और वे उस नगर के लोगों को सुसमाचार सुनाकर, और बहुत से चेले बनाकर, लुस्‍त्रा और इकुनियम और अन्‍ताकिया को लौट आए। और चेलों के मन को स्‍थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे कि विश्वास में बने रहो; और यह कहते थे, “हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्‍वर के राज्‍य में प्रवेश करना होगा।” और उन्होंने हर एक कलीसिया में उनके लिये प्राचीन ठहराए, और उपवास सहित प्रार्थना करके उन्‍हें प्रभु के हाथ सौंपा जिस पर उन्होंने विश्‍वास किया था। और पिसिदिया से होते हुए वे पंफूलिया में पहुँचे; और पिरगा में वचन सुनाकर अत्तलिया में आए। और वहाँ से जहाज द्वारा अन्‍ताकिया गये, जहाँ वे उस काम के लिये जो उन्होंने पूरा किया था परमेश्‍वर के अनुग्रह में सौंपे गए। वहाँ पहुँचकर, उन्होंने कलीसिया इकट्ठी की और बताया, कि परमेश्‍वर ने हमारे साथ होकर कैसे बड़े-बड़े काम किए! और अन्‍यजातियों के लिये विश्‍वास का द्वार खोल दिया। और वे चेलों के साथ बहुत दिन तक रहे। फिर कुछ लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे: “यदि मूसा की रीति पर तुम्‍हारा खतना न हो तो तुम उद्धार नहीं पा सकते।” जब पौलुस और बरनबास का उनसे बहुत मतभेद और विवाद हुआ तो यह ठहराया गया, कि पौलुस और बरनबास, और उनमे से कुछ व्यक्ति इस बात के विषय में प्रेरितों और प्राचीनों के पास यरूशलेम को जाएँ। अतः कलीसिया ने उन्‍हें कुछ दूर तक पहुँचाया; और वे फीनीके और सामरिया से होते हुए अन्‍यजातियों के मन फिराने का समाचार सुनाते गए, और सब भाइयों को बहुत आनन्‍दित किया। जब वे यरूशलेम में पहुँचे, तो कलीसिया और प्रेरित और प्राचीन उनसे आनन्‍द के साथ मिले, और उन्होंने बताया कि परमेश्‍वर ने उनके साथ होकर कैसे-कैसे काम किए थे। परन्‍तु फरीसियों के पंथ में से जिन्‍होंने विश्‍वास किया था, उनमें से कितनों ने उठकर कहा, “उन्‍हें खतना कराने और मूसा की व्‍यवस्‍था को मानने की आज्ञा देनी चाहिए।” तब प्रेरित और प्राचीन इस बात के विषय में विचार करने के लिये इकट्ठे हुए। तब पतरस ने बहुत वाद-विवाद हो जाने के बाद खड़े होकर उनसे कहा, “हे भाइयो, तुम जानते हो, कि बहुत दिन हुए, कि परमेश्‍वर ने तुम में से मुझे चुन लिया, कि मेरे मुँह से अन्‍यजातियाँ सुसमाचार का वचन सुनकर विश्‍वास करें।” और मन के जाँचने वाले परमेश्‍वर ने उनको भी हमारे समान पवित्र आत्‍मा देकर उनकी गवाही दी; और विश्‍वास के द्वारा उनके मन शुद्ध करके हम में और उनमें कुछ भेद न रखा। तो अब तुम क्‍यों परमेश्‍वर की परीक्षा करते हो। कि चेलों की गर्दन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सकते थे और न हम उठा सकते है। हाँ, हमारा यह तो निश्‍चय है कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएँगे; उसी रीति से हम भी पाएँगे।” तब सारी सभा चुपचाप होकर बरनबास और पौलुस की सुनने लगी, कि परमेश्‍वर ने उनके द्वारा अन्‍यजातियों में कैसे-कैसे बड़े चिन्‍ह, और अद्भुत काम दिखाए। जब वे चुप हुए, तो याकूब कहने लगा, “हे भाइयो, मेरी सुनो। शमौन ने बताया, कि परमेश्‍वर ने पहले पहल अन्‍यजातियों पर कैसी कृपादृष्‍टि की, कि उनमें से अपने नाम के लिये एक लोग बना ले। और इससे भविष्‍यद्वक्‍ताओं की बातें भी मिलती हैं, जैसा लिखा है, ‘इसके बाद मैं फिर आकर दाऊद का गिरा हुआ डेरा उठाऊँगा, और उसके खंडहरों को फिर बनाऊँगा, और उसे खड़ा करूँगा, इसलिये कि शेष मनुष्‍य, अर्थात् सब अन्‍यजाति जो मेरे नाम के कहलाते हैं, प्रभु को ढूँढें, यह वही प्रभु कहता है जो जगत की उत्‍पत्ति से इन बातों का समाचार देता आया है।’ इसलिये मेरा विचार यह है, कि अन्‍यजातियों में से जो लोग परमेश्‍वर की ओर फिरते हैं, हम उन्‍हें दु:ख न दें; परन्‍तु उन्‍हें लिख भेंजें, कि वे मूरतों की अशुद्धताओं और व्‍यभिचार और गला घोंटे हुओं के माँस से और लहू से परे रहें। क्‍योंकि पुराने समय से नगर-नगर मूसा की व्‍यवस्‍था के प्रचार करनेवाले होते चले आए है, और वह हर सब्‍त के दिन आराधनालय में पढ़ी जाती है।” तब सारी कलीसिया सहित प्रेरितों और प्राचीनों को अच्‍छा लगा, कि अपने में से कुछ मनुष्‍यों को चुनें, अर्थात् यहूदा, जो बरसब्‍बा कहलाता है, और सीलास को जो भाइयों में मुखिया थे; और उन्‍हें पौलुस और बरनबास के साथ अन्‍ताकिया को भेजें। और उन्होंने उनके हाथ यह लिख भेजा: “अन्‍ताकिया और सीरिया और किलिकिया के रहनेवाले भाइयों को जो अन्‍यजातियों में से हैं, प्रेरितों और प्राचीन भाइयों का नमस्‍कार! हम ने सुना है, कि हम में से कुछ ने वहाँ जाकर, तुम्‍हें अपनी बातों से घबरा दिया; और तुम्‍हारे मन उलट दिए हैं परन्‍तु हम ने उनको आज्ञा नहीं दी थी। इसलिये हम ने एक चित्त होकर ठीक समझा, कि चुने हुए मनुष्‍यों को अपने प्रिय बरनबास और पौलुस के साथ तुम्‍हारे पास भेजें। ये तो ऐसे मनुष्‍य हैं, जिन्‍होंने अपने प्राण हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम के लिये जोखिम में डाले हैं। और हम ने यहूदा और सीलास को भेजा है, जो अपने मुँह से भी ये बातें कह देंगे। पवित्र आत्‍मा को, और हम को भी ठीक जान पड़ा कि इन आवश्‍यक बातों को छोड़; तुम पर और बोझ न डालें; कि तुम मूरतों के बलि किए हुओं से, और लहू से, और गला घोंटे हुओं के माँस से, और व्‍यभिचार से दूर रहो। इनसे दूर रहो तो तुम्‍हारा भला होगा। शुभकामना।” फिर वे विदा होकर अन्‍ताकिया में पहुँचे, और सभा को इकट्ठी करके वह उन्‍हें पत्री दे दी। और वे पढ़कर उस उपदेश की बात से अति आनन्‍दित हुए। और यहूदा और सीलास ने जो आप भी भविष्‍यद्वक्‍ता थे, बहुत बातों से भाइयों को उपदेश देकर स्‍थिर किया। वे कुछ दिन रहकर भाइयों से शान्‍ति के साथ विदा हुए कि अपने भेजनेवालों के पास जाएँ। (परन्‍तु सीलास को वहाँ रहना अच्‍छा लगा।) और पौलुस और बरनबास अन्‍ताकिया में रह गए: और अन्य बहुत से लोगों के साथ प्रभु के वचन का उपदेश करते और सुसमाचार सुनाते रहे। कुछ दिन बाद पौलुस ने बरनबास से कहा, “जिन-जिन नगरों में हम ने प्रभु का वचन सुनाया था, आओ, फिर उनमें चलकर अपने भाइयों को देखें कि कैसे हैं।” तब बरनबास ने यूहन्‍ना को जो मरकुस कहलाता है, साथ लेने का विचार किया। परन्‍तु पौलुस ने उसे जो पंफूलिया में उनसे अलग हो गया था, और काम पर उनके साथ न गया, साथ ले जाना अच्‍छा न समझा। अतः ऐसा विवाद उठा कि वे एक दूसरे से अलग हो गए; और बरनबास, मरकुस को लेकर जहाज से साइप्रस को चला गया। परन्‍तु पौलुस ने सीलास को चुन लिया, और भाइयों से परमेश्‍वर के अनुग्रह में सौंपा जाकर वहाँ से चला गया। और कलीसियाओं को स्‍थिर करता हुआ, सीरिया और किलिकिया से होते हुए निकला। फिर वह दिरबे और लुस्‍त्रा में भी गया, और देखो, वहाँ तीमुथियुस नामक एक चेला था। उसकी माँ यहूदि विश्वासी थी, परन्‍तु उसका पिता यूनानी था। वह लुस्‍त्रा और इकुनियुम के भाइयों में सुनाम था। पौलुस की इच्छा थी कि वह मेरे साथ चले; और जो यहूदी लोग उन जगहों में थे उनके कारण उसे लेकर उसका खतना किया, क्‍योंकि वे सब जानते थे, कि उसका पिता यूनानी था। और नगर-नगर जाते हुए वे उन विधियों को जो यरूशलेम के प्रेरितों और प्राचीनों ने ठहराई थीं, मानने के लिये उन्‍हें पहुँचाते जाते थे। इस प्रकार कलीसियाएँ विश्‍वास में स्‍थिर होती गई और गिनती में प्रतिदिन बढ़ती गई। और वे फ्रूगिया और गलातिया प्रदेशों में से होकर गए, क्योंकि पवित्र आत्‍मा ने उन्‍हें एशिया में वचन सुनाने से मना किया। और उन्होंने मूसिया के निकट पहुँचकर, बितूनिया में जाना चाहा; परन्‍तु यीशु के आत्‍मा ने उन्‍हें जाने न दिया। अतः वे मूसिया से होकर त्रोआस में आए। वहाँ पौलुस ने रात को एक दर्शन देखा कि एक मकिदुनी पुरूष खड़ा हुआ, उससे विनती करके कहता है, “पार उतरकर मकिदुनिया में आ, और हमारी सहायता कर।” उसके यह दर्शन देखते ही हम ने तुरन्‍त मकिदुनिया जाना चाहा, यह समझकर कि परमेश्‍वर ने हमें उन्‍हें सुसमाचार सुनाने के लिये बुलाया है। इसलिये त्रोआस से जहाज खोलकर हम सीधे सुमात्रा और दूसरे दिन नियापुलिस में आए। वहाँ से हम फिलिप्‍पी में पहुँचे, जो मकिदुनिया प्रान्‍त का मुख्‍य नगर, और रोमियों की बस्‍ती है; और हम उस नगर में कुछ दिन तक रहे। सब्‍त के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समझकर गए कि वहाँ प्रार्थना करने का स्‍थान होगा; और बैठकर उन स्‍त्रियों से जो इकट्ठी हुई थीं, बातें करने लगे। और लुदिया नाम थुआथीरा नगर की बैंजनी कपड़े बेचनेवाली एक भक्‍त स्‍त्री सुन रही थी, और प्रभु ने उसका मन खोला, ताकि पौलुस की बातों पर ध्यान लगाए। और जब उसने अपने घराने समेत बपतिस्‍मा लिया, तो उसने विनती की, “यदि तुम मुझे प्रभु की विश्‍वासिनी समझते हो, तो चलकर मेरे घर में रहो,” और वह हमें मनाकर ले गई। जब हम प्रार्थना करने की जगह जा रहे थे, तो हमें एक दासी मिली जिसमें भावी कहनेवाली आत्‍मा थी; और भावी कहने से अपने स्‍वामियों के लिये बहुत कुछ कमा लाती थी। वह पौलुस के और हमारे पीछे आकर चिल्‍लाने लगी, “ये मनुष्‍य परम प्रधान परमेश्‍वर के दास हैं, जो हमें उद्धार के मार्ग की कथा सुनाते हैं।” वह बहुत दिन तक ऐसा ही करती रही, परन्‍तु पौलुस दुखी हुआ, और मुड़करउस आत्‍मा से कहा, “मैं तुझे यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देता हूँ, कि उसमें से निकल जा और वह उसी घड़ी निकल गई।” जब उसके स्‍वामियों ने देखा, कि हमारी कमाई की आशा जाती रही, तो पौलुस और सीलास को पकड़ कर चौक में प्रधानों के पास खींच ले गए। और उन्‍हें फौजदारी के हाकिमों के पास ले जाकर कहा, “ये लोग जो यहूदी हैं, हमारे नगर में बड़ी हलचल मचा रहे हैं; और ऐसी रीतियाँ बता रहे हैं, जिन्‍हें ग्रहण करना या मानना हम रोमियों के लिये ठीक नहीं। तब भीड़ के लोग उनके विरोध में इकट्ठे होकर चढ़ आए, और हाकिमों ने उनके कपड़े फाड़कर उतार डाले, और उन्‍हें बेंत मारने की आज्ञा दी। और बहुत बेंत लगवाकर उन्होंने उन्‍हें बन्‍दीगृह में डाल दिया और दरोगा को आज्ञा दी कि उन्‍हें चौकसी से रखे। उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्‍हें भीतर की कोठरी में रखा और उनके पाँव काठ में ठोंक दिए। आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्‍वर के भजन गा रहे थे, और कैदी उनकी सुन रहे थे। कि इतने में अचानक एक बड़ा भूकम्प हुआ, यहाँ तक कि बन्‍दीगृह की नीव हिल गईं, और तुरन्‍त सब द्वार खुल गए; और सब के बन्‍धन खुल गए। और दरोगा जाग उठा, और बन्‍दीगृह के द्वार खुले देखकर समझा कि कैदी भाग गए, अतः उसने तलवार खींचकर अपने आपको मार डालना चाहा। परन्‍तु पौलुस ने ऊँचे शब्‍द से पुकारकर कहा, “अपने आप को कुछ हानि न पहुँचा, क्‍योंकि हम सब यहीं हैं।” तब वह दीया मँगवाकर भीतर लपका और काँपता हुआ पौलुस और सीलास के आगे गिरा; और उन्‍हें बाहर लाकर कहा, “हे सज्जनों, उद्धार पाने के लिये मैं क्‍या करूँ?” उन्होंने कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।” और उन्होंने उसको और उसके सारे घर के लोगों को प्रभु का वचन सुनाया। और रात को उसी घड़ी उसने उन्‍हें ले जाकर उनके घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्‍त बपतिस्‍मा लिया। और उसने उन्‍हें अपने घर में ले जाकर, उनके आगे भोजन रखा और सारे घराने समेत परमेश्‍वर पर विश्‍वास करके आनन्‍द किया। जब दिन हुआ तक हाकिमों ने सिपाहियों के हाथ कहला भेजा कि उन मनुष्‍यों को छोड़ दो। दरोगा ने ये बातें पौलुस से कह सुनाई, “हाकिमों ने तुम्‍हारे छोड़ देने की आज्ञा भेज दी है, इसलिये अब निकलकर कुशल से चले जाओ।” परन्‍तु पौलुस ने उससे कहा, “उन्होंने हमें जो रोमी मनुष्‍य हैं, दोषी ठहाराए बिना लोगों के सामने मारा और बन्‍दीगृह में डाला, और अब क्‍या चुपके से निकाल देते हैं? ऐसा नहीं, परन्‍तु वे आप आकर हमें बाहर ले जाएँ।” सिपाहियों ने ये बातें हाकिमों से कह दीं, और वे यह सुनकर कि रोमी हैं, डर गए, और आकर उन्‍हें मनाया, और बाहर ले जाकर विनती की कि नगर से चले जाएँ। वे बन्‍दीगृह से निकल कर लुदिया के यहाँ गए, और भाइयों से भेंट करके उन्‍हें शान्‍ति दी, और चले गए। फिर वे अम्‍फिपुलिस और अपुल्‍लोनिया होकर थिस्‍सलुनीके में आए, जहाँ यहूदियों का एक आराधनालय था। और पौलुस अपनी रीति के अनुसार उनके पास गया, और तीन सब्‍त के दिन पवित्र शास्‍त्रों से उनके साथ वाद-विवाद किया; और उन का अर्थ खोल-खोलकर समझाता था कि मसीह का दु:ख उठाना, और मरे हुओं में से जी उठना, अवश्‍य था; “यही यीशु जिसकी मैं तुम्‍हें कथा सुनाता हूँ, मसीह है।” उनमें से कितनों ने, और भक्‍त यूनानियों में से बहुतों ने और बहुत सी कुलीन स्त्रियों ने मान लिया, और पौलुस और सीलास के साथ मिल गए। परन्‍तु यहूदियों ने डाह से भरकर बजारू लोगों में से कई दुष्‍ट मनुष्‍यों को अपने साथ में लिया, और भीड़ लगाकर नगर में हुल्‍लड़ मचाने लगे, और यासोन के घर पर चढ़ाई करके उन्‍हें लोगों के सामने लाना चाहा। और उन्‍हें न पाकर, वे यह चिल्‍लाते हुए यासोन और कुछ भाइयों को नगर के हाकिमों के सामने खींच लाए, “ये लोग जिन्‍होंने जगत को उलटा पुलटा कर दिया है, यहाँ भी आए हैं। और यासोन ने उन्‍हें अपने यहाँ उतारा है, और ये सब के सब यह कहते हैं कि यीशु राजा है, और कैसर की आज्ञाओं का विरोध करते हैं।” उन्होंने लोगों को और नगर के हाकिमों को यह सुनाकर घबरा दिया। और उन्होंने यासोन और बाकी लोगों को ज़मानत पर छोड़ दिया। भाइयों ने तुरन्‍त रात ही रात पौलुस और सीलास को बिरीया में भेज दिया, और वे वहाँ पहुँचकर यहूदियों के आराधनालय में गए। ये लोग तो थिस्‍सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रतिदिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूँढ़ते रहे कि ये बातें ऐसीं हीं हैं कि नहीं। इसलिये उनमें से बहुतों ने, और यूनानी कुलीन स्‍त्रियों में सेऔरपुरूषों में से बहुतों ने विश्‍वास किया। किन्‍तु जब थिस्‍सलुनीके के यहूदी जान गए कि पौलुस बिरीया में भी परमेश्‍वर का वचन सुनाता है, तो वहाँ भी आकर लोगों को भड़काने और हलचल मचाने लगे। तब भाइयों ने तुरन्‍त पौलुस को विदा किया कि समुद्र के किनारे चला जाए; परन्‍तु सीलास और तीमुथियुस वहीं रह गए। पौलुस के पहुँचाने वाले उसे एथेंस तक ले गए, और सीलास और तीमुथियुस के लिये यह आज्ञा लेकर विदा हुए कि मेरे पास अति शीघ्र आओ। जब पौलुस एथेंस में उनकी प्रतिक्षा कर रहा था, तो नगर को मूरतों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल उठा। अतः वह आराधनालय में यहूदियों और भक्‍तों से और चौक में जो लोग मिलते थे, उनसे हर दिन वाद-विवाद किया करता था। तब इपिकूरी और स्‍तोईकी दार्शनिकों में से कुछ उससे तर्क करने लगे, और कुछ ने कहा, “यह बकवादी क्‍या कहना चाहता है?” परन्‍तु दूसरों ने कहा, “वह अन्‍य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है,” क्‍योंकि वह यीशु का और पुनरूत्‍थान का सुसमाचार सुनाता था। तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, “क्‍या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्‍या है? क्‍योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्‍या है?” (इसलिये कि सब एथेंस वासी और परदेशी जो वहाँ रहते थे नई-नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे।) तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा होकर कहा, “हे एथेंस के लोगों, मैं देखता हूँ कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो। क्‍योंकि मैं फिरते हुए तुम्‍हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, ‘अनजाने ईश्‍वर के लिये।’ इसलिये जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्‍हें उसका समाचार सुनाता हूँ। जिस परमेश्‍वर ने पृथ्‍वी और उसकी सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्‍वर्ग और पृथ्‍वी का स्‍वामी होकर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। न किसी वस्‍तु की आवश्यकता के कारण मनुष्‍यों के हाथों की सेवा लेता है, क्‍योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है। उसने एक ही मूल से मनुष्‍यों की सब जातियाँ सारी पृथ्‍वी पर रहने के लिये बनाई हैं; और उनके ठहराए हुए समय और निवास के सीमाओं को इसलिये बाँधा है, कि वे परमेश्‍वर को ढूँढे, कदाचित उसे टटोलकर पाएँ तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं। क्‍योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्‍थिर रहते हैं; जैसे तुम्‍हारे कितने कवियों ने भी कहा है, “हम तो उसी के वंश भी हैं।” अतः परमेश्‍वर का वंश होकर हमें यह समझना उचित नहीं कि ईश्‍वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्‍थर के समान है, जो मनुष्‍य की कारीगरी और कल्‍पना से गढ़े गए हों। इसलिये परमेश्‍वर ने अज्ञानता के समयों पर ध्यान नहीं दिया, पर अब हर जगह सब मनुष्‍यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्‍योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिसमें वह उस मनुष्‍य के द्वारा धर्म से जगत का न्‍याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।” मरे हुओं के पुनरूत्‍थान की बात सुनकर कितने तो ठट्ठा करने लगे, और कितनों ने कहा, “यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे।” इस पर पौलुस उनके बीच में से चला गया। परन्‍तु कुछ मनुष्‍य उसके साथ मिल गए, और विश्‍वास किया; जिनमें दियुनुसियुस जो अरियुपगुस का सदस्य था, और दमरिस नाम एक स्‍त्री थी, और उनके साथ और भी कितने लोग थे। इस के बाद पौलुस एथेंस को छोड़कर कुरिन्‍थुस में आया। और वहाँ अक्विला नामक एक यहूदी मिला, जिसका जन्‍म पुन्‍तुस मेंहुआ था; और अपनी पत्‍नी प्रिस्किल्‍ला के साथ इटली से हाल ही में आया था, क्‍योंकि क्‍लौदियुस ने सब यहूदियों को रोम से निकल जाने की आज्ञा दी थी, इसलिये वह उनके यहाँ गया। और उसका और उनका एक ही उद्यम था; इसलिये वह उनके साथ रहा, और वे काम करने लगे, और उनका उद्यम तम्‍बू बनाने का था। और वह हर एक सब्‍त के दिन अराधनालय में वाद-विवाद करके यहूदियों और यूनानियों को भी समझाता था। जब सीलास और तीमुथियुस मकिदुनिया से आए, तो पौलुस वचन सुनाने की धुन में लगकर यहूदियों को गवाही देता था कि यीशु ही मसीह है। परन्‍तु जब वे विरोध और निन्‍दा करने लगे, तो उसने अपने कपड़े झाड़कर उनसे कहा, “तुम्‍हारा लहू तुम्‍हारी गर्दन पर रहे! मैं निर्दोष हूँ। अब से मैं अन्‍यजातियों के पास जाऊँगा।” और वहाँ से चलकर वह तितुस युस्‍तुस नामक परमेश्‍वर के एक भक्‍त के घर में आया, जिसका घर आराधनालय से लगा हुआ था। तब आराधनालय के सरदार क्रिस्‍पुस ने अपने सारे घराने समेत प्रभु पर विश्‍वास किया; और बहुत से कुरिन्थ वासी सुनकर विश्‍वास लाए और बपतिस्‍मा लिया। और प्रभु ने रात को दर्शन के द्वारा पौलुस से कहा, “मत डर, वरन् कहे जा और चुप मत रह; क्‍योंकि मैं तेरे साथ हूँ, और कोई तुझ पर चढ़ाई करके तेरी हानि न करेगा; क्‍योंकि इस नगर में मेरे बहुत से लोग हैं।” इसलिये वह उनमें परमेश्‍वर का वचन सिखाते हुए डेढ़ वर्ष तक रहा। जब गल्‍लियो अखाया देश का हाकिम था तो यहूदी लोग एका करके पौलुस पर चढ़ आए, और उसे न्‍याय आसन के सामने लाकर कहने लगे, “यह लोगों को समझाता है, कि परमेश्‍वर की उपासना ऐसी रीति से करें, जो व्‍यवस्‍था के विपरीत है।” जब पौलुस बोलने पर था, तो गल्‍लियो ने यहूदियों से कहा, “हे यहूदियो, यदि यह कुछ अन्‍याय या दुष्‍टता की बात होती तो उचित था कि मैं तुम्‍हारी सुनता। परन्‍तु यदि यह वाद-विवाद शब्‍दों, और नामों, और तुम्‍हारे यहाँ की व्‍यवस्‍था के विषय में है, तो तुम ही जानो; क्‍योंकि मैं इन बातों का न्‍यायी बनना नहीं चाहता।” और उसने उन्‍हें न्‍याय आसन के सामने से निकलवा दिया। तब सब लोगों ने आराधनालय के सरदार सोस्‍थिनेस को पकड़ के न्‍याय आसन के सामने मारा। परन्‍तु गल्‍लियो ने इन बातों की कुछ भी चिन्‍ता न की। अतः पौलुस बहुत दिन तक वहाँ रहा, फिर भाइयों से विदा होकर क्रिंख्रिया में इसलिये सिर मुण्‍डाया, क्‍योंकि उसने मन्‍नत मानी थी और जहाज पर सीरिया को चल दिया और उसके साथ प्रिस्किल्‍ला और अक्विला थे। और उसने इफिसुस में पहुँचकर उनको वहाँ छोड़ा, और आप ही आराधनालय में जाकर यहूदियों से विवाद करने लगा। जब उन्होंने उससे विनती की, “हमारे साथ और कुछ दिन रह।” तो उसने स्‍वीकार न किया; परन्‍तु यह कहकर उनसे विदा हुआ, “यदि परमेश्‍वर चाहे तो मैं तुम्‍हारे पास फिर आऊँगा।” तब इफिसुस से जहाज खोलकर चल दिया; और कैसरिया में उतर कर (यरूशलेम को) गया और कलीसिया को नमस्‍कार करके अन्‍ताकिया में आया। फिर कुछ दिन रहकर वहाँ से चला गया, और एक ओर से गलातिया और फ्रूगिया में सब चेलों को स्‍थिर करता फिरा। अपुल्‍लोस नामक एक यहूदी जिसका जन्‍म सिकन्‍दरिया में हुआ था, जो विद्वान पुरूष था और पवित्र शास्‍त्र को अच्‍छी तरह से जानता था इफिसुस में आया। उसने प्रभु के मार्ग की शिक्षा पाई थी, और मन लगाकर यीशु के विषय में ठीक-ठीक सुनाता और सिखाता था, परन्‍तु वह केवल यूहन्‍ना के बपतिस्‍मा की बात जानता था। वह आराधनालय में निडर होकर बोलने लगा, पर प्रिस्‍किल्‍ला और अक्विला उसकी बातें सुनकर, उसे अपने यहाँ ले गए और परमेश्‍वर का मार्ग उसको और भी ठीक-ठीक बताया। और जब उसने निश्‍चय किया कि पार उतरकर अखाया को जाए तो भाइयों ने उसे ढाढ़स देकर चेलों को लिखा कि वे उससे अच्‍छी तरह मिलें, और उसने पहुँचकर वहाँ उन लोगों की बड़ी सहायता की जिन्‍होंने अनुग्रह के कारण विश्‍वास किया था। क्‍योंकि वह पवित्र शास्‍त्र से प्रमाण दे देकर कि यीशु ही मसीह है; बड़ी प्रबलता से यहूदियों को सब के सामने निरूत्तर करता रहा। और जब अपुल्‍लोस कुरिन्‍थुस में था, तो पौलुस ऊपर के सारे देश से होकर इफिसुस में आया और वहाँ कुछ चेले मिले। उसने कहा, “क्‍या तुम ने विश्‍वास करते समय पवित्र आत्‍मा पाया?” उन्होंने उससे कहा, “हम ने तो पवित्र आत्‍मा की चर्चा भी नहीं सुनी।” उसने उनसे कहा, “तो फिर तुम ने किसका बपतिस्‍मा लिया?” उन्होंने कहा, “यूहन्‍ना का बपतिस्‍मा।” पौलुस ने कहा, “यूहन्‍ना ने यह कहकर मन फिराव का बपतिस्‍मा दिया, कि जो मेरे बाद आनेवाला है, उस पर अर्थात् यीशु पर विश्‍वास करना।” यह सुनकर उन्होंने प्रभु यीशु के नाम का बपतिस्‍मा लिया। और जब पौलुस ने उन पर हाथ रखे, तो उन पर पवित्र आत्‍मा उतरा, और वे भिन्‍न-भिन्न भाषा बोलने और भविष्‍यद्ववाणी करने लगे। ये सब लगभग बारह पुरूष थे। और वह आराधनालय में जाकर तीन महीने तक निडर होकर बोलता रहा, और परमेश्‍वर के राज्‍य के विषय में विवाद करता और समझाता रहा। परन्‍तु जब कुछ लोगों ने कठोर होकर उसकी नहीं मानी वरन् लोगों के सामने इस पंथ को बुरा कहने लगे, तो उसने उनको छोड़कर चेलों को अलग कर लिया, और प्रतिदिन तुरन्‍नुस की पाठशाला में वाद-विवाद किया करता था। दो वर्ष तक यही होता रहा, यहाँ तक कि आसिया के रहनेवाले क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी सब ने प्रभु का वचन सुन लिया। और परमेश्‍वर पौलुस के हाथों से सामर्थ्य के अद्भुत् काम दिखाता था। यहाँ तक कि रूमाल और अंगोछे उसकी देह से स्पर्श कराकर बीमारों पर डालते थे, और उनकी बीमारियाँ दूर हो जाती थी; और दुष्टात्मा्एँ उनमें से निकल जाया करती थीं। परन्‍तु कुछ यहूदी जो झाड़ा फूँकी करते फिरते थे, यह करने लगे कि जिनमें दुष्‍टात्‍मा हों उन पर प्रभु यीशु का नाम यह कहकर फूंकनेलगे, “जिस यीशु का प्रचार पौलुस करता है, मैं तुम्‍हें उसी की शपथ देता हूँ।” और स्क्किवा नाम के एक यहूदी महायाजक के सात पुत्र थे, जो ऐसा ही करते थे। पर दुष्‍टात्‍मा ने उत्तर दिया, “यीशु को मैं जानती हूँ, और पौलुस को भी पहचानती हूँ; परन्‍तु तुम कौन हो?” और उस मनुष्‍य ने जिसमें दुष्‍ट आत्‍मा थी; उन पर लपककर, और उन्‍हें काबू में लाकर, उन पर ऐसा उपद्रव किया, कि वे नंगे और घायल होकर उस घर से निकल भागे। और यह बात इफिसुस के रहनेवाले यहूदी और यूनानी भी सब जान गए, और उन सब पर भय छा गया; और प्रभु यीशु के नाम की बड़ाई हुई। और जिन्‍होंने विश्‍वास किया था, उनमें से बहुतेरों ने आकर अपने-अपने कामों को मान लिया और प्रगट किया। और जादू टोना करनेवालों में से बहुतों ने अपनी-अपनी पोथियाँ इकट्ठी करके सब के सामने जला दीं; और जब उन का दाम जोड़ा गया, जो पचास हजार चाँदी के सिक्कों के बराबर निकला। इस प्रकार प्रभु का वचन सामर्थपूर्वक फैलता गया और प्रबल होता गया। जब ये बातें हो चुकीं तो पौलुस ने आत्‍मा में ठाना कि मकिदुनिया और अखाया से होकर यरूशलेम को जाऊँ, और कहा, “वहाँ जाने के बाद मुझे रोम को भी देखना अवश्‍य है।” इसलिये अपनी सेवा करनेवालों में से तीमुथियुस और इरास्‍तुस को मकिदुनिया में भेजकर आप कुछ दिन आसिया में रह गया। उस समय उस पन्‍थ के विषय में बड़ा हुल्‍लड़ हुआ। क्‍योंकि देमेत्रियुस नाम का एक सुनार अरतिमिस के चाँदी के मन्‍दिर बनवाकर कारीगरों को बहुत काम दिलाया करता था। उसने उनको और ऐसी वस्‍तुओं के कारीगरों को इकट्ठे करके कहा, “हे मनुष्‍यो, तुम जानते हो कि इस काम से हमें कितना धन मिलता है। और तुम देखते और सुनते हो कि केवल इफिसुस ही में नहीं, वरन् प्राय: सारे आसिया में यह कह कहकर इस पौलुस ने बहुत लोगों को समझाया और भरमाया भी है, कि जो हाथ की कारीगरी है, वे ईश्‍वर नहीं। और अब केवल इसी एक बात का ही डर नहीं कि हमारे इस धन्‍धे की प्रतिष्‍ठा जाती रहेगी; वरन् यह कि महान देवी अरतिमिस का मन्‍दिर तुच्‍छ समझा जाएगा और जिसे सारा आसिया और जगत पूजता है उसका महत्‍व भी जाता रहेगा।” वे यह सुनकर क्रोध से भर गए और चिल्‍ला-चिल्‍लाकर कहने लगे, “इफिसियों की अरतिमिस, महान है!” और सारे नगर में बड़ा कोलाहल मच गया और लोगों ने गयुस और अरिस्तर्खुस, मकिदुनियों को जो पौलुस के संगी यात्री थे, पकड़ लिया, और एक साथ होकर रंगशाला में दौड़ गए। जब पौलुस ने लोगों के पास भीतर जाना चाहा तो चेलों ने उसे जाने न दिया। आसिया के हाकिमों में से भी उसके कई मित्रों ने उसके पास कहला भेजा और विनती की, कि रंगशाला में जाकर जोखिम न उठाना। वहाँ कोई कुछ चिल्‍लाता था, और कोई कुछ; क्‍योंकि सभा में बड़ी गड़बड़ी हो रही थी, और बहुत से लोग तो यह जानते भी नहीं थे कि हम किस लिये इकट्ठे हुए हैं। तब उन्होंने सिकन्‍दर को, जिसे यहूदियों ने खड़ा किया था, भीड़ में से आगे बढ़ाया, और सिकन्‍दर हाथ से संकेत करके लोगों के सामने उत्तर देना चाहता था। परन्‍तु जब उन्होंने जान लिया कि वह यहूदी है, तो सब के सब एक स्वर से कोई दो घंटे तक चिल्‍लाते रहे, “इफिसियों की अरतिमिस, महान है।” तब नगर के मन्‍त्री ने लोगों को शान्‍त करके कहा, “हे इफिसियों, कौन नहीं जानता, कि इफिसियों का नगर बड़ी देवी अरतिमिस के मन्‍दिर, और ज्‍यूस की ओर से गिरी हुई मूरत का टहलुआ है। अतः जब कि इन बातों का खण्‍डन ही नहीं हो सकता, तो उचित है, कि तुम शान्त रहो; और बिना सोचे-विचारे कुछ न करो। क्‍योंकि तुम इन मनुष्‍यों को लाए हो, जो न मन्‍दिर के लूटनेवाले है, और न हमारी देवी के निन्‍दक हैं। यदि देमेत्रियुस और उसके साथी कारीगरों को किसी से विवाद हो तो कचहरी खुली है, और हाकिम भी हैं; वे एक दूसरे पर नालिश करें। परन्‍तु यदि तुम किसी और बात के विषय में कुछ पूछना चाहते हो, तो नियत सभा में फैसला किया जाएगा। क्‍योंकि आज के बलवे के कारण हम पर दोष लगाए जाने का डर है, इसलिये कि इसका कोई कारण नहीं, सो हम इस भीड़ के इकट्ठा होने का कोई उत्तर न दे सकेंगे।” और यह कह के उसने सभा को विदा किया। जब हुल्‍लड़ थम गया तो पौलुस ने चेलों को बुलवाकर समझाया, और उनसे विदा होकर मकिदुनिया की ओर चल दिया। उस सारे प्रदेश में से होकर और चेलों को बहुत उत्साहित कर वह यूनान में आया। जब तीन महीने रहकर वह वहाँ से जहाज पर सीरिया की ओर जाने पर था, तो यहूदी उसकी घात में लगे, इसलिये उसने यह निश्चय किया कि मकिदुनिया होकर लौट जाए। बिरीया के पुरूर्स का पुत्र सोपत्रुस और थिस्‍सलुनीकियों में से अरिस्‍तर्खुस और सिकुन्‍दुस और दिरबे का गयुस, और तीमुथियुस और आसिया का तुखिकुस और त्रुफिमुस आसिया तक उसके साथ हो लिए। वे आगे जाकर त्रोआस में हमारी बाट जोहते रहे। और हम अखमीरी रोटी के दिनों के बाद फिलिप्‍पी से जहाज पर चढ़कर पाँच दिन में त्रोआस में उनके पास पहुँचे, और सात दिन तक वहीं रहे। सप्‍ताह के पहले दिन जब हम रोटी तोड़ने के लिये इकट्ठे हुए, तो पौलुस ने जो दूसरे दिन चले जाने पर था, उनसे बातें की, और आधी रात तक उपदेश देता रहा। जिस अटारी पर हम इकट्ठे थे, उसमें बहुत दीये जल रहे थे। और यूतुखुस नाम का एक जवान खिड़की पर बैठा हुआ गहरी नींद से झुक रहा था, और जब पौलुस देर तक बातें करता रहा तो वह नींद के झोके में तीसरी अटारी पर से गिर पड़ा, और मरा हुआ उठाया गया। परन्‍तु पौलुस उतरकर उससे लिपट गया, और गले लगाकर कहा, “घबराओ नहीं; क्‍योंकि उसका प्राण उसी में है।” और ऊपर जाकर रोटी तोड़ी और खाकर इतनी देर तक उनसे बातें करता रहा कि पौ फट गई; फिर वह चला गया। और वे उस जवान को जीवित ले आए, और बहुत शान्‍ति पाई। हम पहले से जहाज पर चढ़कर अस्‍सुस को इस विचार से आगे गए, कि वहाँ से हम पौलुस को चढ़ा लें क्‍योंकि उसने यह इसलिये ठहराया था, कि आप ही पैदल जानेवाला था। जब वह अस्‍सुस में हमें मिला तो हम उसे चढ़ाकर मितुलेने में आए। और वहाँ से जहाज खोलकर हम दूसरे दिन खियुस के सामने पहुँचे, और अगले दिन सामुस में जा पहुंचे, फिर दूसरे दिन मिलेतुस में आए। क्‍योंकि पौलुस ने इफिसुस के पास से होकर जाने की ठानी थी, कि कहीं ऐसा न हो, कि उसे आसिया में देर लगे; क्‍योंकि वह जल्‍दी में था, कि यदि हो सके, तो वह पिन्‍तेकुस्त के दिन यरूशलेम में रहे। और उसने मिलेतुस से इफिसुस में कहला भेजा, और कलीसिया के प्राचीनों को बुलवाया। जब वे उस के पास आए, तो उनसे कहा, “तुम जानते हो, कि पहले ही दिन से जब मैं आसिया में पहुँचा, मैं हर समय तुम्‍हारे साथ किस प्रकार रहा। अर्थात् बड़ी दीनता से, और आँसू बहा-बहाकर, और उन परीक्षाओं में जो यहूदियों के षड्यंत्र के कारण मुझ पर आ पड़ी; मैं प्रभु की सेवा करता ही रहा। और जो-जो बातें तुम्‍हारे लाभ की थीं, उनको बताने और लोगों के सामने और घर-घर सिखाने से कभी न झिझका। वरन् यहूदियों और यूनानियों के सामने गवाही देता रहा कि परमेश्‍वर की ओर मन फिराना, और हमारे प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास करना चाहिए। और अब देखो, मैं आत्‍मा में बंधा हुआ यरूशलेम को जाता हूँ, और नहीं जानता, कि वहाँ मुझ पर क्‍या-क्‍या बीतेगा, केवल यह कि पवित्र आत्‍मा हर नगर में गवाही दे-देकर मुझ से कहता है कि बन्‍धन और क्‍लेश तेरे लिये तैयार है। परन्‍तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता कि उसे प्रिय जानूँ, वरन् यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवा को पूरी करूँ, जो मैंने परमेश्‍वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है। और अब देखो, मैं जानता हूँ, कि तुम सब जिनमें मैं परमेश्‍वर के राज्‍य का प्रचार करता फिरा, मेरा मुँह फिर न देखोगे। इसलिये मैं आज के दिन तुम से गवाही देकर कहता हूँ, कि मैं सब के लहू से निर्दोष हूँ। क्‍योंकि मैं परमेश्‍वर की सारी मनसा को तुम्‍हें पूरी रीति से बताने से न झिझका। इसलिये अपनी और पूरे झुण्ड की चौकसी करो; जिसमें पवित्र आत्‍मा ने तुम्‍हें अध्‍यक्ष ठहराया है कि तुम परमेश्‍वर की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उसने अपने लहू से मोल लिया है। मैं जानता हूँ, कि मेरे जाने के बाद फाड़नेवाले भेड़िए तुम में आएँगे, जो झुण्ड को न छोड़ेंगे। तुम्‍हारे ही बीच में से भी ऐसे-ऐसे मनुष्‍य उठेंगे, जो चेलों को अपने पीछे खींच लेने को टेढ़ी-मेढ़ी बातें कहेंगे। इसलिये जागते रहो, और स्‍मरण करो कि मैंने तीन वर्ष तक रात दिन आँसू बहा-बहाकर, हर एक को सचेत देना न छोड़ा। और अब मैं तुम्‍हें परमेश्‍वर को, और उसके अनुग्रह के वचन को सौंप देता हूँ; जो तुम्‍हारी उन्‍नति कर सकता है, और सब पवित्र किये गये लोगों में साझी करके मीरास दे सकता है। मैंने किसी के चाँदी, सोने या कपड़े का लालच नहीं किया। तुम आप ही जानते हो कि इन्‍हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की आवश्‍यकताएँ पूरी की। मैंने तुम्‍हें सब कुछ करके दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्‍भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्‍मरण रखना अवश्‍य है, कि उसने आप ही कहा है: ‘लेने से देना धन्‍य है’।” यह कहकर उसने घुटने टेके और उन सब के साथ प्रार्थना की। तब वे सब बहुत रोए और पौलुस के गले लिपट कर उसे चूमने लगे। वे विशेष करके इस बात का शोक करते थे, जो उसने कही थी, कि तुम मेरा मुँह फिर न देखोगे। और उन्होंने उसे जहाज तक पहुँचाया। जब हमने उनसे अलग होकर जहाज खोला, तो सीधे मार्ग से कोस में आए, और दूसरे दिन रूदुस में, और वहाँ से पतरा में; और एक जहाज फीनीके को जाता हुआ मिला, और हमने उस पर चढ़कर, उसे खोल दिया। जब साइप्रस दिखाई दिया, तो हमने उसे बाएँ हाथ छोड़ा, और सीरिया को चलकर सूर में उतरे; क्‍योंकि वहाँ जहाज का बोझ उतारना था। और चेलों को पाकर हम वहाँ सात दिन तक रहे। उन्होंने आत्‍मा के सिखाए पौलुस से कहा कि यरूशलेम में पाँव न रखना। जब वे दिन पूरे हो गए, तो हम वहाँ से चल दिए; और सब स्‍त्रियों और बालकों समेत हमें नगर के बाहर तक पहुँचाया और हमने किनारे पर घुटने टेककर प्रार्थना की। तब एक दूसरे से विदा होकर, हम तो जहाज पर चढ़े, और वे अपने-अपने घर लौट गए। जब हम सूर से जलयात्रा पूरी करके पतुलिमयिस में पहुँचे, और भाइयों को नमस्‍कार करके उनके साथ एक दिन रहे। दूसरे दिन हम वहाँ से चलकर कैसरिया में आए, और फिलिप्‍पुस सुसमाचार प्रचारक के घर में जो सातों में से एक था, जाकर उसके यहाँ रहे। उसकी चार कुँवारी पुत्रियाँ थीं; जो भविष्‍यद्वाणी करती थीं। जब हम वहाँ बहुत दिन रह चुके, तो अगबुस नामक एक भविष्‍यद्वक्‍ता यहूदिया से आया। उसने हमारे पास आकर पौलुस का कमरबंध लिया, और अपने हाथ पाँव बाँधकर कहा, “पवित्र आत्‍मा यह कहता है, कि जिस मनुष्‍य का यह कटिबन्ध है, उसको यरूशलेम में यहूदी इसी रीति से बाँधेंगे, और अन्‍यजातियों के हाथ में सौंपेंगे।” जब हमने ये बातें सुनी, तो हम और वहाँ के लोगों ने उससे विनती की, कि यरूशलेम को न जाए। परन्‍तु पौलुस ने उत्तर दिया, “तुम क्‍या करते हो, कि रो-रोकर मेरा मन तोड़ते हो? मैं तो प्रभु यीशु के नाम के लिये यरूशलेम में न केवल बाँधे जाने ही के लिये वरन् मरने के लिये भी तैयार हूँ।” जब उसने न माना तो हम यह कहकर चुप हो गए, “प्रभु की इच्‍छा पूरी हो।” उन दिनों के बाद हमने तैयारी की और यरूशलेम को चल दिए। कैसरिया के भी कुछ चेले हमारे साथ हो लिए, और मनासोन नामक साइप्रस के एक पुराने चेले को साथ ले आए, कि हम उसके यहाँ टिकें। जब हम यरूशलेम में पहुँचे, तो भाई बड़े आनन्‍द के साथ हम से मिले। दूसरे दिन पौलुस हमें लेकर याकूब के पास गया, जहाँ सब प्राचीन इकट्ठे थे। तब उसने उन्‍हें नमस्‍कार करके, जो-जो काम परमेश्‍वर ने उसकी सेवकाई के द्वारा अन्‍यजातियों में किए थे, एक-एक करके सब बताया। उन्होंने यह सुनकर परमेश्‍वर की महिमा की, फिर उससे कहा, “हे भाई, तू देखता है, कि यहूदियों में से कई हजार ने विश्‍वास किया है; और सब व्‍यवस्‍था के लिये धुन लगाए हैं। और उनको तेरे विषय में सिखाया गया है, कि तू अन्‍यजातियों में रहनेवाले यहूदियों को मूसा से फिर जाने को सिखाता है, और कहता है, कि न अपने बच्‍चों का खतना कराओ ओर न रीतियों पर चलो। तो फिर क्‍या किया जाए? लोग अवश्‍य सुनेंगे कि तू यहाँ आया है। इसलिये जो हम तुझ से कहते हैं, वह कर। हमारे यहाँ चार मनुष्‍य हैं, जिन्‍होंने मन्‍नत मानी है। उन्‍हें लेकर उसके साथ अपने आप को शुद्ध कर; और उनके लिये खर्चा दे, कि वे सिर मुड़ाएँ। तब सब जान लेगें, कि जो बातें उन्‍हें तेरे विषय में सिखाई गईं, उनकी कुछ जड़ नहीं है परन्‍तु तू आप भी व्‍यवस्‍था को मानकर उसके अनुसार चलता है। परन्‍तु उन अन्‍यजातियों के विषय में जिन्‍होंने विश्‍वास किया है, हमने यह निर्णय करके लिख भेजा है कि वे मूर्तियों के सामने बलि किए हुए माँस से, और लहू से, और गला घोंटे हुओं के माँस से, और व्‍यभिचार से, बचे रहें।” तब पौलुस उन मनुष्‍यों को लेकर, और दूसरे दिन उनके साथ शुद्ध होकर मन्‍दिर में गया, और वहाँ बता दिया, कि शुद्ध होने के दिन, अर्थात् उनमें से हर एक के लिये चढ़ावा चढ़ाए जाने तक के दिन कब पूरे होंगे। जब वे सात दिन पूरे होने पर थे, तो आसिया के यहूदियों ने पौलुस को मन्‍दिर में देखकर सब लोगों को भड़काया, और यों चिल्ला-चिल्‍लाकर उसको पकड़ लिया, “हे इस्राएलियों, सहायता करो; यह वही मनुष्‍य है, जो लोगों के, और व्‍यवस्‍था के, और इस स्‍थान के विरोध में हर जगह सब लोगों को सिखाता है, यहाँ तक कि यूनानियों को भी मन्‍दिर में लाकर उसने इस पवित्र स्‍थान को अपवित्र किया है।” उन्होंने तो इस से पहले इफिसुस वासी त्रुफिमुस को उसके साथ नगर में देखा था, और समझते थे कि पौलुस उसे मन्‍दिर में ले आया है। तब सारे नगर में कोलाहल मच गया, और लोग दौड़कर इकट्ठे हुए, और पौलुस को पकड़कर मन्‍दिर के बाहर घसीट लाए, और तुरन्‍त द्वार बन्‍द किए गए। जब वे उसे मार डालना चाहते थे, तो पलटन के सरदार को सन्‍देश पहुँचा कि सारे यरूशलेम में कोलाहल मच रहा है। तब वह तुरन्‍त सिपाहियों और सूबेदारों को लेकर उनके पास नीचे दौड़ आया; और उन्होंने पलटन के सरदार को और सिपाहियों को देख कर पौलुस को मारने-पीटने से हाथ उठाया। तब पलटन के सरदार ने पास आकर उसे पकड़ लिया; और दो जंजीरों से बाँधने की आज्ञा देकर पूछने लगा, “यह कौन है, और इस ने क्‍या किया है?” परन्‍तु भीड़ में से कोई कुछ और कोई कुछ चिल्‍लाते रहे और जब हुल्‍लड़ के मारे ठीक सच्‍चाई न जान सका, तो उसे गढ़ में ले जाने की आज्ञा दी। जब वह सीढ़ी पर पहुँचा, तो ऐसा हुआ कि भीड़ के दबाव के मारे सिपाहियों को उसे उठाकर ले जाना पड़ा। क्‍योंकि लोगों की भीड़ यह चिल्‍लाती हुई उसके पीछे पड़ी, “उसका अन्‍त कर दो।” जब वे पौलुस को गढ़ में ले जाने पर थे, तो उसने पलटन के सरदार से कहा, “क्‍या मुझे आज्ञा है कि मैं तुझ से कुछ कहूँ?” उसने कहा, “क्‍या तू यूनानी जानता है? क्‍या तू वह मिसरी नहीं, जो इन दिनों से पहले बलवाई बनाकर चार हजार कटारबन्‍द लोगों को जंगल में ले गया?” पौलुस ने कहा, “मैं तो तरसुस का यहूदी मनुष्‍य हूँ! किलिकिया के प्रसिद्ध नगर का निवासी हूँ। और मैं तुझ से विनती करता हूँ, कि मुझे लोगों से बातें करने दे।” जब उसने आज्ञा दी, तो पौलुस ने सीढ़ी पर खड़े होकर लोगों को हाथ से संकेत किया। जब वे चुप हो गए, तो वह इब्रानी भाषा में बोलने लगा: “हे भाइयों और पितरो, मेरा प्रत्‍युत्तर सुनो, जो मैं अब तुम्‍हारे सामने कहता हूँ।” वे यह सुनकर कि वह हमसे इब्रानी भाषा में बोलता है, और भी चुप रहे। तब उसने कहा: “मैं तो यहूदी शिक्षा पाएहूँ, जो किलिकिया के तरसुस में जन्‍मा; परन्‍तु इस नगर में गमलीएल के पाँवों के पास बैठकर शिक्षा प्राप्त की, और बापदादों की व्‍यवस्‍था भी ठीक रीति पर सिखाया गया; और परमेश्‍वर के लिये ऐसी धुन लगाए था, जैसे तुम सब आज लगाए हो। मैंने पुरूष और स्‍त्री दोनों को बाँध-कर, और बन्‍दीगृह में-डालकर, इस पंथ को यहाँ तक सताया, कि उन्‍हें मरवा भी डाला। स्वयं महायाजक और सब पुरनिये गवाह हैं; कि उनमें से मैं भाइयों के नाम पर चिट्ठियाँ लेकर दमिश्‍क को चला जा रहा था, कि जो वहाँ हों उन्‍हें दण्‍ड दिलाने के लिये बाँधकर यरूशलेम में लाऊँ। “जब मैं चलते-चलते दमिश्‍क के निकट पहुँचा, तो ऐसा हुआ कि दो पहर के लगभग अचानक एक बड़ी ज्‍योति आकाश से मेरे चारों ओर चमकी। और मैं भूमि पर गिर पड़ा: और यह वाणी सुना, ‘हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्‍यों सताता है?’ मैंने उत्तर दिया, ‘हे प्रभु, तू कौन है?’ उसने मुझ से कहा, ‘मैं यीशु नासरी हूँ, जिसे तू सताता है।’ और मेरे साथियों ने ज्‍योति तो देखी, परन्‍तु जो मुझ से बोलता था उसकी वाणी न सुनी। तब मैने कहा, ‘हे प्रभु मैं क्‍या करूँ?’ प्रभु ने मुझ से कहा, ‘उठकर दमिश्‍क में जा, और जो कुछ तेरे करने के लिये ठहराया गया है वहाँ तुझ से सब बता दिया जाएगा।’ जब उस ज्‍योति के तेज के कारण मुझे कुछ दिखाई न दिया, तो मैं अपने साथियों के हाथ पकड़े हुए दमिश्‍क में आया। “तब हनन्‍याह नाम का व्‍यवस्‍था के अनुसार एक भक्‍त मनुष्‍य, जो वहाँ के रहनेवाले सब यहूदियों में सुनाम था, मेरे पास आया, और खड़ा होकर मुझ से कहा, ‘हे भाई शाऊल, फिर देखने लग।’ उसी घड़ी मेरी आँखे खुल गई और मैंने उसे देखा। तब उसने कहा, ‘हमारे बापदादों के परमेश्‍वर ने तुझे इसलिये ठहराया है कि तू उसकी इच्‍छा को जाने, और उस धर्मी को देखे, और उसके मुँह से बातें सुने। क्‍योंकि तू उसकी ओर से सब मनुष्‍यों के सामने उन बातों का गवाह होगा, जो तू ने देखी और सुनी हैं। अब क्‍यों देर करता है? उठ, बपतिस्‍मा ले, और उसका नाम लेकर अपने पापों को धो डाल।’ “जब मैं फिर यरूशलेम में आकर मन्‍दिर में प्रार्थना कर रहा था, तो बेसुध हो गया। और उसको देखा कि मुझ से कहता है, ‘जल्‍दी करके यरूशलेम से झट निकल जा; क्‍योंकि वे मेरे विषय में तेरी गवाही न मानेंगे।’ मैंने कहा, ‘हे प्रभु वे तो आप जानते हैं, कि मैं तुझ पर विश्‍वास करनेवालों को बन्‍दीगृह में डालता और जगह-जगह आराधनालय में पिटवाता था। और जब तेरे गवाह स्‍तिफनुस का लहू बहाया जा रहा था तब भी मैंवहाँ खड़ा था, और इस बात में सहमत था, और उसके घातकों के कपड़ों की रखवाली करता था।’ और उसने मुझ से कहा, ‘चला जा: क्‍योंकि मैं तुझे अन्‍यजातियों के पास दूर-दूर भेजूँगा’।” वे इस बात तक उसकी सुनते रहे; तब ऊँचे शब्‍द से चिल्‍लाए, “ऐसे मनुष्‍य का अन्‍त करो; उसका जीवित रहना उचित नहीं!” जब वे चिल्‍लाते और कपड़े फेंकते और आकाश में धूल उड़ाते थे; तो पलटन के सूबेदार ने कहा, “इसे गढ़ में ले जाओ; और कोड़े मारकर जाँचो, कि मैं जानूँ कि लोग किस कारण उसके विरोध में ऐसा चिल्‍ला रहे हैं।” जब उन्होंने उसे तसमों से बाँधा तो पौलुस ने उस सूबेदार से जो उसके पास खड़ा था कहा, “क्‍या यह उचित है, कि तुम एक रोमी मनुष्‍य को, और वह भी बिना दोषी ठहराए हुए कोड़े मारो?” सूबेदार ने यह सुनकर पलटन के सरदार के पास जाकर कहा, “तू यह क्‍या करता है? यह तो रोमी मनुष्‍य है।” तब पलटन के सरदार ने उसके पास आकर कहा, “मुझे बता, क्‍या तू रोमी है?” उसने कहा, “हाँ।” यह सुनकर पलटन के सरदार ने कहा, “मैंने रोमी होने का पद बहुत रूपये देकर पाया है।” पौलुस ने कहा, “मैं तो जन्‍म से रोमी हूँ।” तब जो लोग उसे जाँचने पर थे, वे तुरन्‍त उसके पास से हट गए; और पलटन का सरदार भी यह जानकर कि यह रोमी है, और मैंने उसे बाँधा है, डर गया। दूसरे दिन वह ठीक-ठीक जानने की इच्‍छा से कि यहूदी उस पर क्‍यों दोष लगाते हैं, इसलिए उसके बन्‍धन खोल दिए; और महायाजकों और सारी महासभा को इकट्ठे होने की आज्ञा दी, और पौलुस को नीचे ले जाकर उनके सामने खड़ा कर दिया। पौलुस ने महासभा की ओर टकटकी लगाकर देखा, और कहा, “हे भाइयों, मैंने आज तक परमेश्‍वर के लिये बिलकुल सच्‍चे विवेक से जीवन बिताया है।” हनन्‍याह महायाजक ने, उनको जो उसके पास खड़े थे, उसके मुँह पर थप्‍पड़ मारने की आज्ञा दी। तब पौलुस ने उससे कहा, “हे चूना फिरी हुई भीत, परमेश्‍वर तुझे मारेगा। तू व्‍यवस्‍था के अनुसार मेरा न्‍याय करने को बैठा है, और फिर क्‍या व्‍यवस्‍था के विरूद्ध मुझे मारने की आज्ञा देता है?” जो पास खड़े थे, उन्होंने कहा, “क्‍या तू परमेश्‍वर के महायाजक को बुरा-भला कहता है?” पौलुस ने कहा, “हे भाइयों, मैं नहीं जानता था, कि यह महायाजक है; क्‍योंकि लिखा है, ‘अपने लोगों के प्रधान को बुरा न कह’।” तब पौलुस ने यह जानकर, कि एक सदूकियों और दूसरा फरीसियों का हैं, सभा में पुकारकर कहा, “हे भाइयों, मैं फरीसी और फरीसियों के वंश का हूँ, मरे हुओं की आशा और पुनरूत्‍थान के विषय में मेरा मुकद्दमा हो रहा है।” जब उसने यह बात कही तो फरीसियों और सदूकियों में झगड़ा होने लगा; और सभा में फूट पड़ गई। क्‍योंकि सदूकी तो यह कहते हैं, कि न पुनरूत्‍थान है, न स्‍वर्गदूत और न आत्‍मा है; परन्‍तु फरीसी इन सबको मानते हैं। तब बड़ा हल्‍ला मचा और कुछ शास्‍त्री जो फरीसियों के दल के थे, उठकर यों कहकर झगड़ने लगे, “हम इस मनुष्‍य में कुछ बुराई नहीं पाते; और यदि कोई आत्‍मा या स्‍वर्गदूत उससे बोला है तो फिर क्‍या?” जब बहुत झगड़ा हुआ, तो पलटन के सरदार ने इस डर से कि वे पौलुस के टुकड़े-टुकड़े न कर डालें, पलटन को आज्ञा दी कि उतरकर उसको उनके बीच में से जबरदस्ती निकालो, और गढ़ में ले आओ। उसी रात प्रभु ने उसके पास आ खड़े होकर कहा, “हे पौलुस, ढ़ाढ़स बाँध; क्‍योंकि जैसी तूने यरूशलेम में मेरी गवाही दी, वैसी ही तुझे रोम में भी गवाही देनी होगी।” जब दिन हुआ, तो यहूदियों ने एका किया, और शपथ खाई कि जब तक हम पौलुस को मार न डालें, यदि हम खाएँ या पीएँ तो हम पर धिक्‍कार। जिन्‍होंने यह शपथ खाई थी, वे चालीस जन से अधिक थे। उन्होंने महायाजकों और पुरनियों के पास आकर कहा, “हमने यह ठाना है कि जब तक हम पौलुस को मार न डालें, तब तक यदि कुछ भी चखें, तो हम पर धिक्‍कार है। इसलिये अब महासभा समेत पलटन के सरदार को समझाओ, कि उसे तुम्‍हारे पास ले आए, मानो कि तुम उसके विषय में और भी ठीक जाँच करना चाहते हो, और हम उसके पहुँचने से पहले ही उसे मार डालने के लिये तैयार रहेंगे।” और पौलुस के भांजे ने सुना कि वे उसकी घात में हैं, तो गढ़ में जाकर पौलुस को सन्‍देश दिया। पौलुस ने सूबेदारों में से एक को अपने पास बुलाकर कहा, “इस जवान को पलटन के सरदार के पास ले जाओ, यह उससे कुछ कहना चाहता है।” अतः उसने उसको पलटन के सरदार के पास ले जाकर कहा, “बन्दी पौलुस ने मुझे बुलाकर विनती की, कि यह जवान पलटन के सरदार से कुछ कहना चाहता है; इसे उसके पास ले जा।” पलटन के सरदार ने उसका हाथ पकड़कर, और उसे अलग ले जाकर पूछा, “तु मुझ से क्‍या कहना चाहता है?” उसने कहा, “यहूदियों ने एका किया है, कि तुझ से विनती करें कि कल पौलुस को महासभा में लाए, मानो तू और ठीक से उसकी जाँच करना चाहता है। परन्‍तु उनकी मत मानना, क्‍योंकि उनमें से चालीस के ऊपर मनुष्‍य उसकी घात में हैं, जिन्‍होंने यह ठान लिया है कि जब तक हम पौलुस को मार न डालें, तब तक न खाएँगे और न पीएँगे, और अब वे तैयार हैं और तेरे वचन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” तब पलटन के सरदार ने जवान को यह आज्ञा देकर विदा किया, “किसी से न कहना कि तूने मुझ को ये बातें बताई हैं।” और दो सूबेदारों को बुलाकर कहा, “दो सौ सिपाही, सत्तर सवार, और दो सौ भालैत, पहर रात बीते कैसरिया को जाने के लिये तैयार कर रखो।” और पौलुस की सवारी के लिये घोड़े तैयार रखो कि उसे फेलिक्‍स हाकिम के पास कुशल से पहुँचा दें।” उसने इस प्रकार की चिट्ठी भी लिखी: “महाप्रतापी फेलिक्‍स हाकिम को क्‍लौदियुस लूसियास को नमस्‍कार; इस मनुष्‍य को यहूदियों ने पकड़कर मार डालना चाहा, परन्‍तु जब मैंने जाना कि वो रोमी है, तो पलटन लेकर छुड़ा लाया। और मैं जानना चाहता था, कि वे उस पर किस कारण दोष लगाते हैं, इसलिये उसे उनकी महासभा में ले गया। तब मैंने जान लिया, कि वे अपनी व्‍यवस्‍था के विवादों के विषय में उस पर दोष लगाते हैं, परन्‍तु मार डाले जाने या बाँधे जाने के योग्‍य उसमें कोई दोष नहीं। और जब मुझे बताया गया, कि वे इस मनुष्‍य की घात में लगे हैं तो मैंने तुरन्‍त उसको तेरे पास भेज दिया; और मुद्दइयों को भी आज्ञा दी, कि तेरे सामने उस पर नालिश करें।” अतः जैसे सिपाहियों को आज्ञा दी गई थी वैसे ही पौलुस को लेकर रातों-रात अन्‍तिपत्रिस में लाए। दूसरे दिन वे सवारों को उसके साथ जाने के लिये छोड़कर आप गढ़ को लौटे। उन्होंने कैसरिया में पहुँचकर हाकिम को चिट्ठी दी; और पौलुस को भी उसके सामने खड़ा किया। उसने पढ़कर पूछा, “यह किस प्रदेश का है?” और जब जान लिया कि किलकिया का है; तो उससे कहा, “जब तेरे मुद्दई भी आएँगें, तो मैं तेरा मुकद्दमा करूँगा।” और उसने उसे हेरोदेस के किले में, पहरे में रखने की आज्ञा दी। पाँच दिन के बाद हनन्‍याह महायाजक कई पुरनियों और तिरतुल्‍लुस नामक किसी वकील को साथ लेकर आया; उन्होंने हाकिम के सामने पौलुस पर नालिश की। जब वह बुलाया गया तो तिरतुल्‍लुस उन पर दोष लगाकर कहने लगा, “हे महाप्रतापी फेलिक्‍स, तेरे द्वारा हमें जो बड़ा कुशल होता है; और तेरे प्रबन्‍ध से इस जाति के लिये कितनी बुराइयाँ सुधरती जाती हैं। इसको हम हर जगह और हर प्रकार से धन्‍यवाद के साथ मानते हैं। परन्‍तु इसलिये कि तुझे और दु:ख नहीं देना चाहता, मैं तुझ से विनती करता हूँ, कि कृपा करके हमारी दो एक बातें सुन ले। क्‍योंकि हम ने इस मनुष्‍य को उपद्रवी और जगत के सारे यहूदियों में बलवा करानेवाला, और नासरियों के कुपंथ का मुखिया पाया है। उसने मन्‍दिर को अशुद्ध करना चाहा, और तब हमने उसे बन्दी बना लिया। [हमने उसे अपनी व्यवस्था के अनुसार दण्ड दिया होता; परन्तु पलटन के सरदार लूसियास ने आकर उसे बलपूर्वक हमारे हाथों से छीन लिया, और इस पर दोष लगाने वालों को तेरे सम्मुख आने की आज्ञा दी।] इन सब बातों को जिन के विषय में हम उस पर दोष लगाते हैं, तू आपही उसको जाँच करके जान लेगा।” यहूदियों ने भी उसका साथ देकर कहा, ये बातें इसी प्रकार की हैं। जब हाकिम ने पौलुस को बोलने के लिये संकेत किया तो उसने उत्तर दिया: “मैं यह जानकर कि तू बहुत वर्षों से इस जाति का न्‍याय करता है, आनन्‍द से अपना प्रत्‍युत्तर देता हूँ।, तू आप जान सकता है, कि जब से मैं यरूशलेम में भजन करने को आया, मुझे बारह दिन से ऊपर नहीं हुए। उन्होंने मुझे न मन्‍दिर में, न आराधनालयों में, न नगर में किसी से विवाद करते या ना भीड़ लगाते पाया; और न तो वे उन बातों को, जिनका विषय में वे अब मुझ पर दोष लगाते हैं, तेरे सामने उन्हें सच प्रमाणित कर सकते हैं। परन्‍तु यह मैं तेरे सामने मान लेता हूँ, कि जिस पंथ को वे कुपंथ कहते हैं, उसी की रीति पर मैं अपने बापदादों के परमेश्‍वर की सेवा करता हूँ: और जो बातें व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तकों में लिखी है, उन सब पर विश्वास करता हूँ। और परमेश्‍वर से आशा रखता हूँ जो वे आप भी रखते हैं, कि धर्मी और अधर्मी दोनों का जी उठना होगा। इस से मैं आप भी यत्न करता हूँ, कि परमेश्‍वर की ओर और मनुष्‍यों की ओर मेरा विवेक सदा निर्दोष रहे। बहुत वर्षों के बाद मैं अपने लोगों को दान पहुँचाने, और भेंट चढ़ाने आया था। उन्होंने मुझे मन्‍दिर में, शुद्ध दशा में, बिना भीड़ के साथ, और बिना दंगा करते हुए इस काम में पाया। परन्तु वहाँ एशिया के कुछ यहूदी थे - औरउनको उचित था, कि यदि मेरे विरोध में उनकी कोई बात हो तो यहाँ तेरे सामने आकर मुझ पर दोष लगाते है। या ये आप ही कहें, कि जब मैं महासभा के सामने खड़ा था, तो उन्होंने मुझ में कौन सा अपराध पाया? इस एक बात को छोड़ जो मैंने उनके बीच में खड़े होकर पुकारकर कहा था, ‘मरे हुओं के जी उठने के विषय में आज मेरा तुम्‍हारे सामने मुकद्दमा हो रहा है’।” फेलिक्‍स ने जो इस पंथ की बातें ठीक-ठीक जानता था, उन्‍हें यह कहकर टाल दिया, “जब पलटन का सरदार लूसियास आएगा, तो तुम्‍हारी बात का निर्णय करूँगा।” और सूबेदार को आज्ञा दी, कि पौलुस को कुछ छूट में रखकर रखवाली करना, और उसके मित्रों में से किसी को भी उसकी सेवा करने से न रोकना। कुछ दिनों के बाद फेलिक्‍स अपनी पत्‍नी द्रुसिल्‍ला को, जो यहूदिनी थी, साथ लेकर आया और पौलुस को बुलवाकर उस विश्‍वास के विषय में जो मसीह यीशु पर है, उससे सुना। जब वह धर्म और संयम और आनेवाले न्‍याय की चर्चा कर रहा था, तो फेलिक्‍स ने भयभीत होकर उत्तर दिया, “अभी तो जा; अवसर पाकर मैं तुझे फिर बुलाऊँगा।” उसे पौलुस से कुछ धन मिलने की भी आशा थी; इसलिये और भी बुला-बुलाकर उससे बातें किया करता था। परन्‍तु जब दो वर्ष बीत गए, तो पुरकियुस फेस्‍तुस, फेलिक्‍स की जगह पर आया, और फेलिक्‍स यहूदियों को खुश करने की इच्‍छा से पौलुस को बन्दी ही छोड़ गया। फेस्‍तुस उस प्रान्‍त में पहुँचकर तीन दिन के बाद कैसरिया से यरूशलेम को गया। तब महायाजकों ने, और यहूदियों के प्रमुख लोगों ने, उसके सामने पौलुस की दोष की; और उससे विनती करके उसके विरोध में यह वर चाहा कि वह उसे यरूशलेम में बुलवाए, क्‍योंकि वे उसे रास्‍ते ही में मार डालने की घात लगाए हुए थे। फेस्‍तुस ने उत्तर दिया, “पौलुस कैसरिया में पहरे में है, और मैं आप जल्‍द वहाँ जाऊँगा।” फिर कहा, “तुम से जो अधिकार रखते हैं, वे साथ चलें, और यदि इस मनुष्‍य ने कुछ अनुचित काम किया है, तो उस पर दोष लगाएँ।” उनके बीच कोई आठ दस दिन रहकर वह कैसरिया गया: और दूसरे दिन न्‍याय-आसन पर बैठकर पौलुस को लाने की आज्ञा दी। जब वह आया, तो जो यहूदी यरूशलेम से आए थे, उन्होंने आस-पास खड़े होकर उस पर बहुत से गम्भीर दोष लगाए, जिनका प्रमाण वे नहीं दे सकते थे। परन्‍तु पौलुस ने उत्तर दिया, “मैंने न तो यहूदियों की व्‍यवस्‍था के और न मन्‍दिर को, और न कैसर के विरुद्ध कोई अपराध किया है।” तब फेस्‍तुस ने यहूदियों को खुश करने की इच्‍छा से पौलुस को उत्तर दिया, “क्‍या तू चाहता है कि यरूशलेम को जाए; और वहाँ मेरे सामने तेरा यह मुकद्दमा तय किया जाए?” पौलुस ने कहा, “मैं कैसर के न्‍याय-आसन के सामने खड़ा हूँ: मेरे मुकद्दमें का यहीं फैसला होना चाहिए। जैसा तू अच्‍छी तरह जानता है, यहूदियों का मैंने कुछ अपराध नहीं किया। यदि अपराधी हूँ और मार डाले जाने योग्‍य कोई काम किया है, तो मरने से नहीं मुकरता; परन्‍तु जिन बातों का ये मुझ पर दोष लगाते हैं, यदि उनमें से कोई बात सच न ठहरे, तो कोई मुझे उनके हाथ नहीं सौंप सकता। मैं कैसर की दोहाई देता हूँ।” तब फेस्‍तुस ने मन्‍त्रियों की सभा के साथ विचार करके उत्तर दिया, “तू ने कैसर की दोहाई दी है, तो तू कैसर के पास ही जाएगा।” कुछ दिन बीतने के बाद अग्रिप्‍पा राजा और बिरनीके ने कैसरिया में आकर फेस्‍तुस से भेंट की। उनके बहुत दिन वहाँ रहने के बाद फेस्‍तुस ने पौलुस के विषय में राजा को बताया, “एक मनुष्‍य है, जिसे फेलिक्‍स बन्दी छोड़ गया है। जब मैं यरूशलेम में था, तो महायाजक और यहूदियों के पुरनियों ने उसकी नालिश की और चाहा, कि उस पर दण्‍ड की आज्ञा दी जाए। परन्‍तु मैंने उनको उत्तर दिया, कि रोमियों की यह रीति नहीं, कि किसी मनुष्‍य को दण्‍ड के लिये सौंप दें, जब तक मुद्दाअलैह उसे अपने मुद्दइयों के अभियोग लगाने वालों के-सामने खड़े होकर दोष के उत्तर देने का अवसर न मिले। अतः जब वे यहाँ उपस्थित हुए, तो मैंने कुछ देर न की, परन्‍तु दूसरे ही दिन न्‍याय-आसन पर बैठकर, उस मनुष्‍य को लाने की आज्ञा दी। जब उसके मुद्दई खड़े हुए, तो उन्होंने ऐसी बुरी बातों का दोष नहीं लगाया, जैसा मैं समझता था। परन्‍तु अपने मत के, और यीशु नामक किसी मनुष्‍य के विषय में जो मर गया था, और पौलुस उसको जीवित बताता था, विवाद करते थे। और मैं उलझन में था, कि इन बातों का पता कैसे लगाऊँ? इसलिये मैंने उससे पूछा, ‘क्‍या तू यरूशलेम जाएगा, कि वहाँ इन बातों का फैसला हो?’ परन्‍तु जब पौलुस ने दोहाई दी, कि मेरे मुकद्दमें का फैसला महाराजाधिराज के यहाँ हो; तो मैंने आज्ञा दी, कि जब तक उसे कैसर के पास न भेजूँ, उसकी रखवाली की जाए।” तब अग्रिप्‍पा ने फेस्‍तुस से कहा, “मैं भी उस मनुष्‍य की सुनना चाहता हूँ। उसने कहा, “तू कल सुन लेगा।” अतः दूसरे दिन, जब अग्रिप्‍पा और बिरनीके बड़ी धूमधाम से आकर पलटन के सरदारों और नगर के प्रमुख लोगों के साथ दरबार में पहुँचे। तब फेस्‍तुस ने आज्ञा दी, कि वे पौलुस को ले आएँ। फेस्‍तुस ने कहा, “हे महाराजा अग्रिप्‍पा, और हे सब मनुष्‍यों जो यहाँ हमारे साथ हो, तुम इस मनुष्‍य को देखते हो, जिसके विषय में सारे यहूदियों ने यरूशलेम में और यहाँ भी चिल्‍ला-चिल्‍लाकर मुझ से विनती की, कि इसका जीवित रहना उचित नहीं। परन्‍तु मैंने जान लिया कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया कि मार डाला जाए; और जब कि उसने आप ही महाराजाधिराज की दोहाई दी, तो मैंने उसे भेजने का निर्णय किया। परन्‍तु मैंने उसके विषय में कोई ठीक बात नहीं पाई कि अपने स्‍वामी के पास लिखूँ, इसलिये मैं उसे तुम्‍हारे सामने और विशेष करके हे राजा अग्रिप्‍पा तेरे सामने लाया हूँ, कि जाँचने के बाद मुझे कुछ लिखने को मिले। क्‍योंकि बन्दी को भेजना और जो दोष उस पर लगाए गए, उन्‍हें न बताना, मुझे व्‍यर्थ समझ पड़ता है।” अग्रिप्‍पा ने पौलुस से कहा, “तुझे अपने विषय में बोलने की आज्ञा है।” तब पौलुस हाथ बढ़ाकर उत्तर देने लगा, “हे राजा अग्रिप्‍पा, जितनी बातों का यहूदी मुझ पर दोष लगाते हैं, आज तेरे सामने उनका उत्तर देने में मैं अपने को धन्‍य समझता हूँ, विशेष करके इसलिये कि तू यहूदियों के सब व्‍यवहारों और विवादों को जानता है। अतः मैं विनती करता हूँ, धीरज से मेरी सुन ले। “जैसा मेरा चाल-चलन आरम्‍भ से अपनी जाति के बीच और यरूशलेम में जैसा था, यह सब यहूदी जानते हैं। वे यदि गवाही देना चाहते हैं, तो आरम्‍भ से मुझे पहिचानते हैं, कि मैं फरीसी होकर अपने धर्म के सबसे खरे पंथ के अनुसार चला। और अब उस प्रतिज्ञा की आशा के कारण जो परमेश्‍वर ने हमारे बापदादों से की थी, मुझ पर मुकद्दमा चल रहा है। उसी प्रतिज्ञा के पूरे होने की आशा लगाए हुए, हमारे बारहों गोत्र अपने सारे मन से रात-दिन परमेश्‍वर की सेवा करते आए हैं। हे राजा, इसी आशा के विषय में यहूदी मुझ पर दोष लगाते हैं। जब कि परमेश्‍वर मरे हुओं को जिलाता है, तो तुम्‍हारे यहाँ यह बात क्‍यों विश्‍वास के योग्‍य नहीं समझी जाती? “मैंने भी समझा था कि यीशु नासरी के नाम के विरोध में मुझे बहुत कुछ करना चाहिए। और मैंने यरूशलेम में ऐसा ही किया; और महायाजकों से अधिकार पाकर बहुत से पवित्र लोगों को बन्‍दीगृह में डाल, और जब वे मार डाले जाते थे, तो मैं भी उनके विरोध में अपनी सम्मति देता था। और हर आराधनालय में मैं उन्‍हें ताड़ना दिला-दिलाकर यीशु की निन्‍दा करवाता था, यहाँ तक कि क्रोध के मारे ऐसा पागल हो गया कि बाहर के नगरों में भी जाकर उन्‍हें सताता था। “इसी धुन में जब मैं महायाजकों से अधिकार और आज्ञा-पत्र लेकर दमिश्‍क को जा रहा था; तो हे राजा, मार्ग में दोपहर के समय मैंने आकाश से सूर्य के तेज से भी बढ़कर एक ज्‍योति, अपने और अपने साथ चलनेवालों के चारों ओर चमकती हुई देखी। और जब हम सब भूमि पर गिर पड़े, तो मैंने इब्रानी भाषा में, मुझ से यह कहते हुए यह वाणी सुनी, ‘हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्‍यों सताता है? पैने पर लात मारना तेरे लिये कठिन है।’ मैंने कहा, ‘हे प्रभु, तू कौन है?’ प्रभु ने कहा, ‘मैं यीशु हूँ, जिसे तू सताता है। परन्‍तु तू उठ, अपने पाँवों पर खड़ा हो; क्‍योंकि मैंने तुझे इसलिये दर्शन दिया है कि तुझे उन बातों का भी सेवक और गवाह ठहराऊँ, जो तू ने देखी हैं, और उनका भी जिनके लिये मैं तुझे दर्शन दूँगा। और मैं तुझे तेरे लोगों से और अन्‍यजातियों से बचाता रहूँगा, जिन के पास मैं अब तुझे इसलिये भेजता हूँ। कि तू उनकी आँखें खोले, कि वे अंधकार से ज्‍योति की ओर, और शैतान के अधिकार से परमेश्‍वर की ओर फिरें; कि पापों की क्षमा, और उन लोगों के साथ जो मुझ पर विश्‍वास करने से पवित्र किए गए हैं, मीरास पाएँ।’ अतः हे राजा अग्रिप्‍पा, मैंने उस स्‍वर्गीय दर्शन की बात न टाली, परन्‍तु पहले दमिश्‍क के, फिर यरूशलेम के रहनेवालों को, तब यहूदिया के सारे देश में और अन्‍यजातियों को समझाता रहा, कि मन फिराओ और परमेश्‍वर की ओर फिर कर मन फिराव के योग्‍य काम करो। इन बातों के कारण यहूदी मुझे मन्‍दिर में पकड़ कर मार डालने का यत्न करते थे। परन्तु परमेश्‍वर की सहायता से मैं आज तक बना हूँ और छोटे बड़े सभी के सामने गवाही देता हूँ, और उन बातों को छोड़ कुछ नहीं कहता, जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं और मूसा ने भी कहा कि होनेवाली हैं, कि मसीह को दु:ख उठाना होगा, और वही सब से पहले मरे हुओं में से जी उठकर, हमारे लोगों में और अन्‍यजातियों में ज्‍योति का प्रचार करेगा।” जब वह इस रीति से उत्तर दे रहा था, तो फेस्‍तुस ने ऊँचे शब्‍द से कहा, “हे पौलुस, तू पागल है। बहुत विद्या ने तुझे पागल कर दिया है।” परन्‍तु उसने कहा, “हे महाप्रतापी फेस्‍तुस, मैं पागल नहीं, परन्‍तु सच्‍चाई और बुद्धि की बातें कहता हूँ। राजा भी जिसके सामने मैं निडर होकर बोल रहा हूँ, ये बातें जानता है, और मुझे विश्वास है, कि इन बातों में से कोई उससे छिपी नहीं, क्‍योंकि वह घटना तो कोने में नहीं हुई। हे राजा अग्रिप्‍पा, क्‍या तू भविष्‍यद्वक्‍ताओं का विश्वास करता है? हाँ, मैं जानता हूँ, कि तू विश्वास करता है।” अब अग्रिप्‍पा ने पौलुस से कहा, “क्या तू थोड़े ही समझाने से मुझे मसीही बनाना चाहता है?” पौलुस ने कहा, “परमेश्‍वर से मेरी प्रार्थना यह है कि क्‍या थोड़े में, क्‍या बहुत में, केवल तू ही नहीं, परन्‍तु जितने लोग आज मेरी सुनते हैं, मेरे इन बन्‍धनों को छोड़ वे मेरे समान हो जाएँ।” तब राजा और हाकिम और बिरनीके और उनके साथ बैठनेवाले उठ खड़े हुए; और अलग जाकर आपस में कहने लगे, “यह मनुष्‍य ऐसा तो कुछ नहीं करता, जो मृत्‍यु-दण्ड या बन्दीगृह में डाले जाने के योग्‍य हो। अग्रिप्‍पा ने फेस्‍तुस से कहा, “यदि यह मनुष्‍य कैसर की दोहाई न देता, तो छुट सकता था।” जब यह निश्चित हो गया कि हम जहाज द्वारा इटली जाएँ, तो उन्होंने पौलुस और कुछ अन्य बन्दियों को भी यूलियुस नामक औगुस्‍तुस की पलटन के एक सूबेदार के हाथ सौंप दिया। अद्रमुत्तियुम के एक जहाज पर जो एशिया के किनारे की जगहों में जाने पर था, चढ़कर हमने उसे खोल दिया, और अरिस्‍तर्खुस नामक थिस्‍सलुनीके का एक मकिदूनी हमारे साथ था। दूसरे दिन हम ने सैदा में लंगर डाला और यूलियुस ने पौलुस पर कृपा करके उसे मित्रों के यहाँ जाने दिया कि उसका सत्‍कार किया जाए। वहाँ से जहाज खोलकर हवा विरूद्ध होने के कारण हम साइप्रस की आड़ में होकर चले; और किलिकिया और पंफूलिया के निकट के समुद्र में होकर लूसिया के मूरा में उतरे। वहाँ सूबेदार को सिकन्‍दरिया का एक जहाज इतालिया जाता हुआ मिला, और उसने हमें उस पर चढ़ा दिया। जब हम बहुत दिनों तक धीरे-धीरे चलकर कठिनता से कनिदुस के सामने पहुँचे, तो इसलिये कि हवा हमें आगे बढ़ने न देती थी, हम सलमोने के सामने से होकर क्रेते की आड़ में चले; और उसके किनारे-किनारे कठिनता से चलकर ‘शुभ लंगरबारी’ नामक एक जगह पहुँचे, जहाँ से लसया नगर निकट था। जब बहुत दिन बीत गए, और जल यात्रा में जोखिम इसलिये होती थी कि उपवास के दिन अब बीत चुके थे, तो पौलुस ने उन्‍हें यह कहकर समझाया, “हे सज्‍जनो, मुझे ऐसा जान पड़ता है कि इस यात्रा में विपत्ति और बहुत हानि, न केवल माल और जहाज की वरन् हमारे प्राणों की भी होनेवाली है।” परन्‍तु सूबेदार ने कप्तान और जहाज के स्‍वामी की बातों को पौलुस की बातों से बढ़कर माना। वह बन्‍दरगाह जाड़ा काटने के लिये अच्‍छा न था; इसलिये बहुतों का विचार हुआ कि वहाँ से जहाज खोलकर यदि किसी रीति से हो सके तो फीनिक्‍स में पहुँचकर जाड़ा काटें। यह तो क्रेते का एक बन्‍दरगाह है जो दक्षिण-पश्चिम और उत्तर- पश्चिम की ओर खुलता है। जब कुछ-कुछ दक्षिणी हवा बहने लगी, तो यह समझकर कि हमारा अभिप्राय पूरा हो गया, लंगर उठाया और किनारे होते हुए क्रेते के पास से जाने लगे। परन्‍तु थोड़ी देर में जमीन की ओर से एक बड़ी आँधी उठी, जो ‘यूरकुलीन’ कहलाती है। जब आँधी जहाज पर लगी, तब वह हवा के सामने ठहर न सका, अतः हम ने उसे बहने दिया, और इसी तरह बहते हुए चले गए। तब कौदा नामक एक छोटे से टापू की आड़ में बहते-बहते हम कठिनता से डोंगी को वश में कर सके। फिर मल्‍लाहों ने उसे उठाकर, अनेक उपाय करके जहाज को नीचे से बाँधा, और सुरतिस के चोरबालू पर टिक जाने के भय से पाल और सामान उतार कर बहते हुए चले गए। और जब हम ने आँधी से बहुत हिचकोले और धक्‍के खाए, तो दूसरे दिन वे जहाज का माल फेंकने लगे; और तीसरे दिन उन्होंने अपने हाथों से जहाज का साज-सामान भी फेंक दिया। और जब बहुत दिनों तक न सूर्य न तारे दिखाई दिए, और बड़ी आँधी चल रही थी, तो अन्‍त में हमारे बचने की सारी आशा जाती रही। जब वे बहुत दिन तक भूखे रह चुके, तो पौलुस ने उनके बीच में खड़ा होकर कहा, “हे लोगो, चाहिए था कि तुम मेरी बात मानकर, क्रेते से न जहाज खोलते और न यह विपत्ति आती और न यह हानि उठाते। परन्‍तु अब मैं तुम्‍हें समझाता हूँ कि ढाढ़स बाँधो, क्‍योंकि तुम में से किसी के प्राण की हानि न होगी, पर केवल जहाज की। क्‍योंकि परमेश्‍वर जिसका मैं हूँ, और जिसकी सेवा करता हूँ, उसके स्‍वर्गदूत ने आज रात मेरे पास आकर कहा, ‘हे पौलुस, मत डर! तुझे कैसर के सामने खड़ा होना अवश्‍य है। और देख, परमेश्‍वर ने सब को जो तेरे साथ यात्रा करते हैं, तुझे दिया है।’ इसलिये, हे सज्‍जनों, ढाढ़स बाँधो; क्‍योंकि मैं परमेश्‍वर पर विश्वास करता हूँ, कि जैसा मुझ से कहा गया है, वैसा ही होगा। परन्‍तु हमें किसी टापू पर जा टिकना होगा।” जब चौदहवीं रात हुई, और हम अद्रिया समुद्र में भटक रहे थे, तो आधी रात के निकट मल्‍लाहों ने अनुमान से जाना कि हम किसी देश के निकट पहुँच रहे हैं। थाह लेकर उन्होंने बीस पुरसा गहरा पाया और थोड़ा आगे बढ़कर फिर थाह ली, तो पन्‍द्रह पुरसा पाया। तब पत्‍थरीली जगहों पर पड़ने के डर से उन्होंने जहाज की पीछे चार लंगर डाले, और भोर होने की कामना करते रहे। परन्‍तु जब मल्‍लाह जहाज पर से भागना चाहते थे, और गलही से लंगर डालने के बहाने डोंगी समुद्र में उतार दी; तो पौलुस ने सूबेदार और सिपाहियों से कहा, “यदि ये जहाज पर न रहें, तो तुम भी नहीं बच सकते।” तब सिपाहियों ने रस्‍से काटकर डोंगी गिरा दी। जब भोर होने पर था, तो पौलुस ने यह कह कर, सब को भोजन करने को समझाया, “आज चौदह दिन हुए कि तुम आस देखते-देखते भूखे रहे, और कुछ भोजन न किया। इसलिये तुम्‍हें समझाता हूँ कि कुछ खा लो, जिस से तुम्‍हारा बचाव हो; क्‍योंकि तुममें से किसी के सिर का एक बाल भी न गिरेगा।” और यह कहकर उसने रोटी लेकर सब के सामने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद किया और तोड़कर खाने लगा। तब वे सब भी ढाढ़स बाँधकर भोजन करने लगे। हम सब मिलकर जहाज पर दो सौ छिहत्तर जन थे। जब वे भोजन करके तृप्‍त हुए, तो गेंहू को समुद्र में फेंक कर जहाज हल्‍का करने लगे। जब दिन निकला, तो उन्होंने उस देश को नहीं पहचाना, परन्‍तु एक खाड़ी देखी जिसका चौरस किनारा था, और विचार किया कि यदि हो सके तो इसी पर जहाज को टिकाएँ। तब उन्होंने लंगरों को खोलकर समुद्र में छोड़ दिया और उसी समय पतवारों के बन्‍धन खोल दिए, और हवा के सामने अगला पाल चढ़ाकर किनारे की ओर चले। परन्‍तु दो समुद्र के संगम की जगह पड़कर उन्होंने जहाज को टिकाया, और गलही तो धक्‍का खाकर गड़ गई, और टल न सकी; परन्‍तु पिछली लहरों के बल से टूटने लगी। तब सिपाहियों का यह विचार हुआ कि बन्दियों को मार डालें; ऐसा न हो कि कोई तैर कर निकल भागे। परन्‍तु सूबेदार ने पौलुस को बचाने की इच्‍छा से उन्‍हें इस विचार से रोका, और यह कहा, कि जो तैर सकते हैं, पहले कूदकर किनारे पर निकल जाएँ। और बाकी कोई पटरों पर, और कोई जहाज की और वस्‍तुओं के सहारे निकल जाए, और इस रीति से सब कोई भूमि पर बच निकले। जब हम बच निकले, तो पता चला कि यह टापू माल्टा कहलाता है। और वहाँ के निवासियों ने हम पर अनोखी कृपा की; क्‍योंकि मेंह के कारण जो बरस रहा था और जाड़े के कारण, उन्होंने आग सुलगाकर हम सब को ठहराया। जब पौलुस ने लकडि़यों का गट्ठा बटोरकर आग पर रखा, तो एक साँप आँच पाकर निकला और उसके हाथ से लिपट गया। जब उन निवासियों ने साँप को उसके हाथ में लटके हुए देखा, तो आपस में कहा, “सचमुच यह मनुष्‍य हत्‍यारा है, कि यद्यपि समुद्र से बच गया, तौभी न्‍याय ने जीवित रहने न दिया।” तब उसने साँप को आग में झटक दिया, और उसे कुछ हानि न पहुँची। परन्‍तु वे बाट जोहते थे कि वह सूज जाएगा, या एकाएक गिरके मर जाएगा, परन्‍तु जब वे बहुत देर तक देखते रहे और देखा कि उसका कुछ भी नहीं बिगड़ा, तो और ही विचार कर कहा, “यह तो कोई देवता है।” उस जगह के आसपास पुबलियुस नामक उस टापू के प्रधान की भूमि थी: उसने हमें अपने घर ले जाकर तीन दिन मित्रभाव से पहुनाई की। पुबलियुस का पिता ज्‍वर और आँव लहू से रोगी पड़ा था। अतः पौलुस ने उसके पास घर में जाकर प्रार्थना की, और उस पर हाथ रखकर उसे चंगा किया। जब ऐसा हुआ, तो उस टापू के बाकी बीमार आए, और चंगे किए गए। उन्होंने हमारा बहुत आदर किया, और जब हम चलने लगे, तो जो कुछ हमारे लिये आवश्‍यक था, जहाज पर रख दिया। तीन महीने के बाद हम सिकन्‍दरिया के एक जहाज पर चल निकले, जो उस टापू में जाड़े भर रहा था, और जिसका चिन्‍ह दियुसकूरी था। सुरकूसा में लंगर डाल करके हम तीन दिन टिके रहे। वहाँ से हम घूमकर रेगियुम में आए; और एक दिन के बाद दक्षिणी हवा चली, तब दूसरे दिन पुतियुली में आए। वहाँ हम को भाई मिले, और उनके कहने से हम उनके यहाँ सात दिन तक रहे; और इस रीति से हम रोम को चले। वहाँ से भाई हमारा समाचार सुनकर अप्‍पियुस के चौक और तीन-सराए तक हमारी भेंट करने को निकल आए, जिन्‍हें देखकर पौलुस ने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद किया, और ढाढ़स बाँधा। जब हम रोम में पहुँचे, तो पौलुस को एक सिपाही के साथ जो उसकी रखवाली करता था, अकेले रहने की आज्ञा हुई। तीन दिन के बाद उसने यहूदियों के प्रमुख लोगों को बुलाया, और जब वे इकट्ठे हुए तो उनसे कहा, “हे भाइयों, मैंने अपने लोगों के या बापदादों के व्‍यवहारों के विरोध में कुछ भी नहीं किया, तौभी बन्दी बनाकर यरूशलेम से रोमियों के हाथ सौंपा गया। उन्होंने मुझे जाँच कर छोड़ देना चाहा, क्‍योंकि मुझ में मृत्‍यु के योग्‍य कोई दोष न था। परन्‍तु जब यहूदी इसके विरोध में बोलने लगे, तो मुझे कैसर की दोहाई देनी पड़ी; यह नहीं कि मुझे; अपने लोगों पर कोई दोष लगाना था। इसलिये मैंने तुम को बुलाया है, कि तुम से मिलूँ और बातचीत करूँ; क्‍योंकि इस्राएल की आशा के लिये मैं इस जंजीर से जकड़ा हुआ हूँ।” उन्होंने उससे कहा, “न हम ने तेरे विषय में यहूदियों से चिट्ठियाँ पाईं, और न भाइयों में से किसी ने आकर तेरे विषय में कुछ बताया, और न बुरा कहा। परन्‍तु तेरा विचार क्‍या है? वही हम तुझ से सुनना चाहते हैं, क्‍योंकि हम जानते हैं, कि हर जगह इस मत के विरोध में लोग बातें करते हैं।” तब उन्होंने उसके लिये एक दिन ठहराया, और बहुत से लोग उसके यहाँ इकट्ठे हुए, और वह परमेश्‍वर के राज्‍य की गवाही देता हुआ, और मूसा की व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तकों से यीशु के विषय में समझा-समझाकर भोर से साँझ तक वर्णन करता रहा। तब कुछ ने उन बातों को मान लिया, और कुछ ने विश्वास न किया। जब आपस में एक मत न हुए, तो पौलुस के इस एक बात के कहने पर चले गए, “पवित्र आत्‍मा ने यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा तुम्‍हारे बापदादों से ठीक ही कहा, ‘जाकर इन लोगों से कह, कि सुनते तो रहोगे, परन्‍तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्‍तु न बुझोगे; क्‍योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उनके कान भारी हो गए है, और उन्होंने अपनी आँखें बन्‍द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्‍हें चंगा करूँ।’ अतः तुम जानो, कि परमेश्‍वर के इस उद्धार की कथा अन्‍यजातियों के पास भेजी गई है, और वे सुनेंगे।” जब उसने यह कहा तो यहूदी आपस में बहुत विवाद करने लगे और वहाँ से चले गए। और वह पूरे दो वर्ष अपने किराये के घर में रहा, और जो उसके पास आते थे, उन सब से मिलता रहा और बिना रोक-टोक बहुत निडर होकर परमेश्‍वर के राज्‍य का प्रचार करता और प्रभु यीशु मसीह की बातें सिखाता रहा। पौलुस की ओर से जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्‍वर के उस सुसमाचार के लिये अलग किया गया है जिसकी उसने पहिले ही से अपने भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा पवित्रशास्‍त्र में, अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में प्रतिज्ञा की थी, जो शरीर के भाव से तो दाऊद के वंश से उत्‍पन्‍न हुआ और पवित्रता की आत्‍मा के भाव से मरे हुओं में से जी उठने के कारण सामर्थ्य के साथ परमेश्‍वर का पुत्र ठहरा है। जिस के द्वारा हमें अनुग्रह और प्रेरिताई मिली कि उसके नाम के कारण सब जातियों के लोग विश्‍वास करके उसकी मानें, जिनमें से तुम भी यीशु मसीह के होने के लिये बुलाए गए हो। उन सब के नाम जो रोम में परमेश्‍वर के प्‍यारे हैं और पवित्र होने के लिये बुलाए गए है: हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। पहले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ, कि तुम्‍हारे विश्‍वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है। परमेश्‍वर जिसकी सेवा मैं अपनी आत्‍मा से उसके पुत्र के सुसमाचार के विषय में करता हूँ, वही मेरा गवाह है, कि मैं तुम्‍हें किस प्रकार लगातार स्‍मरण करता रहता हूँ, और नित्‍य अपनी प्रार्थनाओं में विनती करता हूँ, कि किसी रीति से अब भी तुम्‍हारे पास आने को मेरी यात्रा परमेश्‍वर की इच्‍छा से सफल हो। क्‍योंकि मैं तुम से मिलने की लालसा करता हूँ, कि मैं तुम्‍हें कोई आत्‍मिक वरदान दूँ जिससे तुम स्‍थिर हो जाओ, अर्थात् यह, कि मैं तुम्‍हारे बीच में होकर तुम्‍हारे साथ उस विश्‍वास के द्वारा जो मुझ में, और तुम में है, शान्‍ति पाऊं। और हे भाइयों, मैं नहीं चाहता कि तुम इस से अनजान रहो कि मैं ने बार बार तुम्‍हारे पास आना चाहा, कि जैसा मुझे और अन्‍यजातियों में फल मिला, वैसा ही तुम में भी मिले, परन्‍तु अब तक रूका रहा। मैं यूनानियों और अन्‍यभाषियों का, और बुद्धिमानों और निर्बुद्धियों का कर्जदार हूँ। सो मैं तुम्‍हें भी जो रोम में रहते हो, सुसमाचार सुनाने को भरसक तैयार हूँ। क्‍योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्‍वास करनेवाले के लिये, पहले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये, उद्धार के निमित्त परमेश्‍वर की सामर्थ्य है। क्‍योंकि उसमें परमेश्‍वर की धार्मिकता विश्‍वास से और विश्‍वास के लिये प्रगट होती है; जैसा लिखा है, “विश्‍वास से धर्मी जन जीवित रहेगा।” परमेश्‍वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्‍वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्‍य को अधर्म से दबाए रखते हैं। इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्‍वर ने उन पर प्रगट किया है। क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उसकी सनातन सामर्थ्य और परमेश्‍वरत्‍व, जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहाँ तक कि वे निरुत्तर हैं। इस कारण कि परमेश्‍वर को जानने पर भी उन्‍होंने परमेश्‍वर के योग्‍य बड़ाई और धन्‍यवाद न किया, परन्‍तु व्‍यर्थ विचार करने लगे, यहाँ तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्‍धेरा हो गया। वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए, और अविनाशी परमेश्‍वर की महिमा को नाशवान मनुष्‍य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगनेवाले जन्‍तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला। इस कारण परमेश्‍वर ने उन्‍हें उनकी मन की अभिलाषाओं के अनुसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें। क्‍योंकि उन्‍होंने परमेश्‍वर की सच्‍चाई को बदलकर झूठ बना डाला, और सृष्‍टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्‍य है। आमीन। इसलिये परमेश्वर ने उन्‍हें नीच कामनाओं के वश में छोड़ दिया; यहाँ तक कि उनकी स्‍त्रियों ने भी स्‍वाभाविक व्‍यवहार को उससे जो स्‍वभाव के विरूद्ध है, बदल डाला। वैसे ही पुरूष भी स्‍त्रियों के साथ स्‍वाभाविक व्‍यवहार छोड़कर आपस में कामातुर होकर जलने लगे, और पुरूषों ने पुरूषों के साथ निर्लज काम करके अपने भ्रम का ठीक फल पाया। और जब उन्‍होंने परमेश्‍वर को पहिचानना न चाहा, इसलिये परमेश्‍वर ने भी उन्‍हें उन के निकम्‍मे मन पर छोड़ दिया; कि वे अनुचित काम करें। सो वे सब प्रकार के अधर्म, और दुष्‍टता, और लोभ, और बैरभाव से भर गए; और डाह, और हत्‍या, और झगड़े, और छल, और ईर्ष्या से भरपूर हो गए, और चुगलखोर, बदनाम करनेवाले, परमेश्‍वर के देखने में घृणित, औरों का अनादर करनेवाले, अभिमानी, डींगमार, बुरी बुरी बातों के बनानेवाले, माता पिता की आज्ञा न माननेवाले, निर्बुद्धि, विश्‍वासघाती, मयारहित और निर्दयी हो गए। वे तो परमेश्‍वर की यह विधि जानते हैं कि ऐसे ऐसे काम करनेवाले मृत्यु के दण्‍ड के योग्‍य हैं, तौभी न केवल आप ही ऐसे काम करते हैं वरन् करनेवालों से प्रसन्‍न भी होते हैं। सो हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्‍यों न हो, तू निरुत्तर है; क्‍योंकि जिस बात में तू दूसरे पर दोष लगाता है, उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिये कि तू जो दोष लगाता है, आप ही वही काम करता है। और हम जानते हैं कि ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर परमेश्‍वर की ओर से ठीक ठीक दण्‍ड की आज्ञा होती है। और हे मनुष्‍य, तू जो ऐसे ऐसे काम करनेवालों पर दोष लगाता है, और आप वे ही काम करता है; क्‍या यह समझता है कि तू परमेश्‍वर की दण्‍ड की आज्ञा से बच जाएगा? क्‍या तू उसकी कृपा, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन को तुच्‍छ जानता है? और क्‍या यह नहीं समझता कि परमेश्‍वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है? पर अपनी कठोरता और हठीले मन के अनुसार उसके क्रोध के दिन के लिये, जिसमें परमेश्‍वर का सच्‍चा न्‍याय प्रगट होगा, अपने लिये क्रोध कमा रहा है। वह हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला देगा। जो सुकर्म में स्‍थिर रहकर महिमा, और आदर, और अमरता की खोज में है, उन्‍हें वह अनन्‍त जीवन देगा; पर जो विवादी हैं और सत्‍य को नहीं मानते, वरन् अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा। और क्‍लेश और संकट हर एक मनुष्‍य के प्राण पर जो बुरा करता है आएगा, पहले यहूदी पर फिर यूनानी पर; परन्तु महिमा और आदर और कल्‍याण हर एक को मिलेगा, जो भला करता है, पहले यहूदी को फिर यूनानी को। क्‍योंकि परमेश्‍वर किसी का पक्ष नहीं करता। इसलिये कि जिन्होंने बिना व्‍यवस्‍था पाए पाप किया, वे बिना व्‍यवस्‍था के नाश भी होंगे, और जिन्‍हों ने व्‍यवस्‍था पाकर पाप किया, उन का दण्‍ड व्‍यवस्‍था के अनुसार होगा; (क्‍योंकि परमेश्‍वर के यहाँ व्‍यवस्‍था के सुननेवाले धर्मी नहीं, पर व्‍यवस्‍था पर चलनेवाले धर्मी ठहराए जाएँगे। फिर जब अन्‍यजाति लोग जिन के पास व्‍यवस्‍था नहीं, स्‍वभाव ही से व्‍यवस्‍था की बातों पर चलते हैं, तो व्‍यवस्‍था उनके पास न होने पर भी वे अपने लिये आप ही व्‍यवस्‍था हैं। वे व्‍यवस्‍था की बातें अपने-अपने हृदयों में लिखी हुई दिखाते हैं और उनके विवेक भी गवाही देते हैं, और उनकी चिन्ताएँ परस्‍पर दोष लगाती, या उन्‍हें निर्दोष ठहराती है।) जिस दिन परमेश्‍वर मेरे सुसमाचार के अनुसार यीशु मसीह के द्वारा मनुष्‍यों की गुप्‍त बातों का न्‍याय करेगा। यदि तू यहूदी कहलाता है, और व्‍यवस्‍था पर भरोसा रखता है, और परमेश्‍वर के विषय में घमण्‍ड करता है, और उसकी इच्‍छा जानता और व्‍यवस्‍था की शिक्षा पाकर उत्तम उत्तम बातों को प्रिय जानता है; और अपने पर भरोसा रखता है, कि मैं अन्‍धों का अगुवा, और अन्‍धकार में पड़े हुओं की ज्‍योति, और बुद्धिहीनों का सिखानेवाला, और बालकों का उपदेशक हूँ, और ज्ञान, और सत्‍य का नमूना, जो व्‍यवस्‍था में है, मुझे मिला है। सो क्‍या तू जो औरों को सिखाता है, अपने आप को नहीं सिखाता? क्‍या तू जो चोरी न करने का उपदेश देता है, आप ही चोरी करता है? तू जो कहता है, “व्‍यभिचार न करना,” क्‍या आप ही व्‍यभिचार करता है? तू जो मूरतों से घृणा करता है, क्‍या आप ही मन्‍दिरों को लूटता है? तू जो व्‍यवस्‍था के विषय में घमण्‍ड करता है, क्‍या व्‍यवस्‍था न मानकर, परमेश्‍वर का अनादर करता है? “क्‍योंकि तुम्‍हारे कारण अन्‍यजातियों में परमेश्‍वर के नाम की निन्‍दा की जाती है,” जैसा लिखा भी है। यदि तू व्‍यवस्‍था पर चले, तो खतने से लाभ तो है, परन्‍तु यदि तू व्‍यवस्‍था को न माने, तो तेरा खतना बिन खतना की दशा ठहरा। सो यदि खतनारहित मनुष्‍य व्‍यवस्‍था की विधियों को माना करे, तो क्‍या उसकी बिन खतना की दशा खतने के बराबर न गिनी जाएगी? और जो मनुष्‍य शारीरिक रूप के कारण बिन खतना रहा यदि वह व्‍यवस्‍था को पूरा करे, तो क्‍या तुझे जो लेख पाने और खतना किए जाने पर भी व्‍यवस्‍था को माना नहीं करता है, दोषी न ठहराएगा? क्‍योंकि वह यहूदी नहीं जो प्रगट में यहूदी है; और न वह खतना है जो प्रगट में है और देह में है। पर यहूदी वही है, जो मन में है; और खतना वही है, जो हृदय का और आत्‍मा में है; न कि लेख का: ऐसे की प्रशंसा मनुष्‍यों की ओर से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर की ओर से होती है। सो यहूदी की क्‍या बड़ाई, या खतने का क्‍या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उनको सौंपे गए। यदि कुछ विश्वासघाती निकले भी तो क्‍या हुआ? क्‍या उनके विश्‍वासघाती होने से परमेश्‍वर की सच्‍चाई व्‍यर्थ ठहरेगी? कदापि नहीं! वरन् परमेश्‍वर सच्‍चा और हर एक मनुष्‍य झूठा ठहरे, जैसा लिखा है, “जिससे तू अपनी बातों में धर्मी ठहरे और न्‍याय करते समय तू जय पाए।” सो यदि हमारा अधर्म परमेश्‍वर की धार्मिकता ठहरा देता है, तो हम क्‍या कहें? क्‍या यह कि परमेश्‍वर जो क्रोध करता है अन्‍यायी है? (यह तो मैं मनुष्‍य की रीति पर कहता हूँ)। कदापि नहीं! नहीं तो परमेश्‍वर कैसे जगत का न्‍याय करेगा? यदि मेरे झूठ के कारण परमेश्‍वर की सच्‍चाई उसकी महिमा के लिये अधिक करके प्रगट हुई, तो फिर क्‍यों पापी के समान मैं दण्‍ड के योग्‍य ठहराया जाता हूँ? “हम क्‍यों बुराई न करें, कि भलाई निकले?” जैसा हम पर यही दोष लगाया भी जाता है, और कुछ कहते हैं कि इनका यही कहना है। परन्‍तु ऐसों का दोषी ठहराना ठीक है। तो फिर क्‍या हुआ? क्‍या हम उनसे अच्‍छे हैं? कभी नहीं; क्‍योंकि हम यहूदियों और यूनानियों दोनों पर यह दोष लगा चुके हैं कि वे सब के सब पाप के वश में हैं। जैसा लिखा है: “कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्‍वर को खोजनेवाला नहीं। सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्‍मे बन गए; कोई भलाई करनेवाला नहीं, एक भी नहीं। उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है। और उनका मुँह श्राप और कड़वाहट से भरा है। उनके पाँव लहू बहाने को फुर्तीले हैं। उनके मार्गों में नाश और क्‍लेश है। उन्‍होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना। उनकी आँखों के सामने परमेश्‍वर का भय नहीं।” हम जानते हैं, कि व्‍यवस्‍था जो कुछ कहती है उन्‍हीं से कहती है, जो व्‍यवस्‍था के अधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुँह बन्‍द किया जाए, और सारा संसार परमेश्‍वर के दण्‍ड के योग्‍य ठहरे। क्‍येांकि व्‍यवस्‍था के कामों से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्‍यवस्‍था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। पर अब बिना व्‍यवस्‍था परमेश्‍वर की धार्मिकता प्रगट हुई है, जिसकी गवाही व्‍यवस्‍था और भविष्‍यद्वक्‍ता देते हैं, अर्थात् परमेश्‍वर की वह धार्मिकता, जो यीशु मसीह पर विश्‍वास करने से सब विश्‍वास करनेवालों के लिये है। क्‍योंकि कुछ भेद नहीं; इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा से रहित है, परन्‍तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। उसे परमेश्‍वर ने उसके लहू के कारण एक ऐसा प्रायश्‍चित ठहराया, जो विश्‍वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहले किए गए, और जिन पर परमेश्‍वर ने अपनी सहनशीलता से ध्यान नहीं दिया; उन के विषय में वह अपनी धार्मिकता प्रगट करे। वरन् इसी समय उसकी धार्मिकता प्रगट हो कि जिससे वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्‍वास करे, उसका भी धर्मी ठहरानेवाला हो। तो घमण्‍ड करना कहाँ रहा? उसकी तो जगह ही नहीं। कौन सी व्‍यवस्‍था के कारण से? क्‍या कर्मों की व्‍यवस्‍था से? नहीं, वरन् विश्‍वास की व्‍यवस्‍था के कारण। इसलिये हम इस परिणाम पर पहुँचते हैं, कि मनुष्‍य व्‍यवस्‍था के कामों के बिना विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहरता है। क्‍या परमेश्‍वर केवल यहूदियों का है? क्‍या अन्‍यजातियों का नहीं? हाँ, अन्‍यजातियों का भी है। क्‍योंकि एक ही परमेश्‍वर है, जो खतनावालों को विश्‍वास से और खतनारहितों को भी विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराएगा। तो क्‍या हम व्‍यवस्‍था को विश्‍वास के द्वारा व्‍यर्थ ठहराते हैं? कदापि नहीं! वरन् व्‍यवस्‍था को स्‍थिर करते हैं। सो हम क्‍या कहें, कि हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्‍या प्राप्‍त हुआ? क्‍योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्‍ड करने की जगह होती, परन्‍तु परमेश्‍वर के निकट नहीं। पवित्र शास्‍त्र क्‍या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।” काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्‍तु हक्‍क समझा जाता है। परन्‍तु जो काम नहीं करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्‍वास करता है, उसका विश्‍वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है। जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मो के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्‍य कहता है: “धन्‍य वे हैं, जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिन के पाप ढ़ापे गए। धन्‍य है वह मनुष्‍य जिसे परमेश्‍वर पापी न ठहराए।” तो यह धन्‍य वचन, क्‍या खतनावालों ही के लिये है, या खतनारहितों के लिये भी? हम यह कहते हैं, कि अब्राहम के लिये उसका विश्‍वास धार्मिकता गिना गया। तो वह कैसे गिना गया? खतने की दशा में या बिना खतने की दशा में? खतने की दशा में नहीं परन्‍तु बिना खतने की दशा में। और उसने खतने का चिन्‍ह पाया, कि उस विश्‍वास की धार्मिकता पर छाप हो जाए, जो उसने बिना खतने की दशा में रखा था, जिससे वह उन सब का पिता ठहरे, जो बिना खतने की दशा में विश्‍वास करते हैं, ताकि वे भी धर्मी ठहरें; और उन खतना किए हुओं का पिता हो, जो न केवल खतना किए हुए हैं, परन्‍तु हमारे पिता अब्राहम के उस विश्‍वास की लीक पर भी चलते हैं, जो उसने बिन खतने की दशा में किया था। क्‍योंकि यह प्रतिज्ञा कि वह जगत का वारिस होगा, न अब्राहम को, न उसके वंश को व्‍यवस्‍था के द्वारा दी गई थी, परन्‍तु विश्‍वास की धार्मिकता के द्वारा मिली। क्‍योंकि यदि व्‍यवस्‍थावाले वारिस हैं, तो विश्‍वास व्‍यर्थ और प्रतिज्ञा निष्‍फल ठहरी। व्‍यवस्‍था तो क्रोध उपजाती है और जहाँ व्‍यवस्‍था नहीं वहाँ उसका टालना भी नहीं। इसी कारण प्रतिज्ञा विश्‍वास पर आधारित है कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि वह सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसके लिये जो व्‍यवस्‍थावाला है, वरन् उनके लिये भी जो अब्राहम के समान विश्‍वासवाले हैं: वही तो हम सब का पिता है (जैसा लिखा है, “मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है”) उस परमेश्‍वर के सामने जिस पर उसने विश्‍वास किया और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं, उनका नाम ऐसा लेता है, कि मानो वे हैं। उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्‍वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि “तेरा वंश ऐसा होगा,” वह बहुत सी जातियों का पिता हो। वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्‍वास में निर्बल न हुआ, और न अविश्‍वासी होकर परमेश्‍वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्‍वास में दृढ़ होकर परमेश्‍वर की महिमा की, और निश्‍चय जाना कि जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरी करने को भी सामर्थी है। इस कारण, यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया। और यह वचन, “विश्‍वास उसके लिये धार्मिकता गिना गया,” न केवल उसी के लिये लिखा गया, वरन् हमारे लिये भी जिनके लिये विश्‍वास धार्मिकता गिना जाएगा, अर्थात् हमारे लिये जो उस पर विश्‍वास करते हैं, जिसने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया। वह हमारे अपराधों के लिये पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिये जिलाया भी गया। सो जब हम विश्‍वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर के साथ मेल रखें, जिसके द्वारा विश्‍वास के कारण उस अनुग्रह तक जिसमें हम बने हैं, हमारी पहुँच भी हुई, और परमेश्‍वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें। केवल यही नहीं, वरन् हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जानकर कि क्‍लेश से धीरज, और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्‍न होती है; और आशा से लज्‍जा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्‍मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्‍वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। क्‍योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो दुर्लभ है; परन्‍तु क्‍या जाने किसी भले मनुष्‍य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। परन्‍तु परमेश्‍वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा परमेश्वर के क्रोध से क्‍यों न बचेंगे? क्‍योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्‍यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्‍वर के साथ हुआ, फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्‍यों न पाएँगे? और केवल यही नहीं, परन्‍तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा, जिसके द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्‍वर में आनन्दित होते है। इसलिये जैसा एक मनुष्‍य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्‍यु आई, और इस रीति से मृत्‍यु सब मनुष्‍यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। क्‍योंकि व्‍यवस्‍था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्‍तु जहाँ व्‍यवस्‍था नहीं, वहाँ पाप गिना नहीं जाता। तौभी आदम से लेकर मूसा तक मृत्‍यु ने उन लोगों पर भी राज्‍य किया, जिन्‍होंने उस आदम, के अपराध की नाईं जो उस आनेवाले का चिन्‍ह है, पाप न किया। पर जैसी अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्‍योंकि जब एक मनुष्‍य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्‍वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्‍य के, अर्थात् यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुत से लोगों पर अवश्‍य ही अधिकाई से हुआ। और जैसा एक मनुष्‍य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्‍योंकि एक ही के कारण दण्‍ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्‍तु बहुत से अपराधों से ऐसा वरदान उत्‍पन्‍न हुआ कि लोग धर्मी ठहरे। क्‍योंकि जब एक मनुष्‍य के अपराध के कारण मृत्‍यु ने उस एक ही के द्वारा राज्‍य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्मरूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्‍य के, अर्थात् यीशु मसीह के द्वारा अवश्‍य ही अनन्‍त जीवन में राज्‍य करेंगे। इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्‍यों के लिये दण्‍ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्‍यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। क्‍योंकि जैसा एक मनुष्‍य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्‍य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। व्‍यवस्‍था बीच में आ गई कि अपराध बहुत हो, परन्‍तु जहाँ पाप बहुत हुआ, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ, कि जैसा पाप ने मृत्‍यु फैलाते हुए राज्‍य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्‍त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्‍य करे। सो हम क्‍या कहें? क्‍या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं! हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उसमें कैसे जीवन बिताएँ? क्‍या तुम नहीं जानते कि हम सब जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्‍मा लिया तो उसकी मृत्‍यु का बपतिस्‍मा लिया? सो उस मृत्‍यु का बपतिस्‍मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। क्‍योंकि यदि हम उसकी मृत्‍यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएँगे। क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्‍यत्‍व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्‍यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें। क्‍योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। इसलिये यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्‍वास यह है कि उसके साथ जीएँगे भी, क्‍योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठकर फिर मरने का नहीं; उस पर फिर मृत्‍यु की प्रभुता नहीं होने की। क्‍योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्‍तु जो जीवित है, तो परमेश्‍वर के लिये जीवित है। ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्‍वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। इसलिये पाप तुम्‍हारे नाशवान शरीर में राज्‍य न करे, कि तुम उसकी लालसाओं के अधीन रहो। और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आपको मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्‍वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्‍वर को सौंपो। तब तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्‍यवस्‍था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हो। तो क्‍या हुआ? क्‍या हम इसलिये पाप करें कि हम व्‍यवस्‍था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं! क्‍या तुम नहीं जानते कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों के समान सौंप देते हो उसी के दास हो: चाहे पाप के, जिसका अन्‍त मृत्‍यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिसका अन्‍त धार्मिकता है? परन्‍तु परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे अब मन से उस उपदेश के माननेवाले हो गए, जिसके साँचे में ढाले गए थे, और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। मैं तुम्‍हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्‍यों की रीति पर कहता हूँ। जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्‍वतंत्र थे। सो जिन बातों से अब तुम लज्‍जित होते हो, उनसे उस समय तुम क्‍या फल पाते थे? क्‍योंकि उनका अन्‍त तो मृत्‍यु है। परन्तु अब पाप से स्‍वतंत्र होकर और परमेश्‍वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिससे पवित्रता प्राप्‍त होती है, और उसका अन्‍त अनन्‍त जीवन है। क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्‍यु है, परन्‍तु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्‍त जीवन है। हे भाइयो, क्‍या तुम नहीं जानते (मैं व्‍यवस्‍था के जाननेवालों से कहता हूँ) कि जब तक मनुष्‍य जीवित रहता है, तब तक उस पर व्‍यवस्‍था की प्रभुता रहती है? क्‍योंकि विवाहिता स्‍त्री व्‍यवस्‍था के अनुसार अपने पति के जीते जी उस से बन्‍धी है, परन्‍तु यदि पति मर जाए, तो वह पति की व्‍यवस्‍था से छूट गई। इसलिये यदि पति के जीते जी वह किसी दूसरे पुरूष की हो जाए, तो व्‍यभिचारिणी कहलाएगी, परन्‍तु यदि पति मर जाए, तो वह उस व्‍यवस्‍था से छूट गई, यहाँ तक कि यदि किसी दूसरे पुरूष की हो जाए तौभी व्‍यभिचारिणी न ठहरेगी। तो हे मेरे भाइयो, तुम भी मसीह की देह के द्वारा व्‍यवस्‍था के लिये मरे हुए बन गए, कि उस दूसरे के हो जाओ, जो मरे हुओं में से जी उठा: ताकि हम परमेश्‍वर के लिये फल लाएँ। क्‍योंकि जब हम शारीरिक थे, तो पापों की अभिलाषाएँ जो व्‍यवस्‍था के द्वारा थीं, मृत्‍यु का फल उत्‍पन्‍न करने के लिये हमारे अंगों में काम करती थीं। परन्‍तु जिस के बन्‍धन में हम थे उसके लिये मर कर, अब व्‍यवस्‍था से ऐसे छूट गए, कि लेख की पुरानी रीति पर नहीं, वरन् आत्‍मा की नई रीति पर सेवा करते हैं। तो हम क्‍या कहें? क्‍या व्‍यवस्‍था पाप है? कदापि नहीं! वरन् बिना व्‍यवस्‍था के मैं पाप को नहीं पहिचानता: व्‍यवस्‍था यदि न कहती, कि लालच मत कर तो मैं लालच को न जानता। परन्‍तु पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझ में सब प्रकार का लालच उत्‍पन्‍न किया, क्‍योंकि बिना व्‍यवस्‍था के पाप मुर्दा है। मैं तो व्‍यवस्‍था बिना पहले जीवित था, परन्‍तु जब आज्ञा आई, तो पाप जी गया, और मैं मर गया। और वही आज्ञा जो जीवन के लिये थी, मेरे लिये मृत्‍यु का कारण ठहरी। क्‍योंकि पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझे बहकाया, और उसी के द्वारा मुझे मार भी डाला। इसलिये व्‍यवस्‍था पवित्र है, और आज्ञा भी ठीक और अच्‍छी है। तो क्‍या वह जो अच्‍छी थी, मेरे लिये मृत्‍यु ठहरी? कदापि नहीं! परन्‍तु पाप उस अच्‍छी वस्‍तु के द्वारा मेरे लिये मृत्‍यु का उत्‍पन्‍न करनेवाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो, और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे। क्‍योंकि हम जानते हैं कि व्‍यवस्‍था तो आत्‍मिक है, परन्‍तु मैं शारीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूँ। और जो मैं करता हूँ उस को नहीं जानता, क्‍योंकि जो मैं चाहता हूँ वह नहीं किया करता, परन्‍तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूँ। और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूँ, तो मैं मान लेता हूँ कि व्‍यवस्‍था भली है। तो ऐसी दशा में उसका करनेवाला मैं नहीं, वरन् पाप है जो मुझ में बसा हुआ है। क्‍योंकि मैं जानता हूँ, कि मुझ में अर्थात् मेरे शरीर में कोई अच्‍छी वस्‍तु वास नहीं करती, इच्‍छा तो मुझ में है, परन्‍तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते। क्‍योंकि जिस अच्‍छे काम की मैं इच्‍छा करता हूँ, वह तो नहीं करता, परन्‍तु जिस बुराई की इच्‍छा नहीं करता, वही किया करता हूँ। परन्‍तु यदि मैं वही करता हूँ जिस की इच्‍छा नहीं करता, तो उसका करनेवाला मैं न रहा, परन्‍तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है। सो मैं यह व्‍यवस्‍था पाता हूँ कि जब भलाई करने की इच्‍छा करता हूँ, तो बुराई मेरे पास आती है। क्‍योंकि मैं भीतरी मनुष्‍यत्‍व से तो परमेश्‍वर की व्‍यवस्‍था से बहुत प्रसन्‍न रहता हूँ। परन्‍तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्‍यवस्‍था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्‍यवस्‍था से लड़ती है और मुझे पाप की व्‍यवस्‍था के बन्‍धन में डालती है जो मेरे अंगों में है। मैं कैसा अभागा मनुष्‍य हूँ! मुझे इस मृत्‍यु की देह से कौन छुड़ाएगा? हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो: इसलिये मैं आप बुद्धि से तो परमेश्‍वर की व्‍यवस्‍था का, परन्‍तु शरीर से पाप की व्‍यवस्‍था का सेवन करता हूँ। सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्‍मा के अनुसार चलते हैं। क्‍योंकि जीवन की आत्‍मा की व्‍यवस्‍था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्‍यु की व्‍यवस्‍था से स्‍वतंत्र कर दिया। क्‍योंकि जो काम व्‍यवस्‍था शरीर के कारण दुर्बल होकर न कर सकी, उस को परमेश्‍वर ने किया, अर्थात् अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर, शरीर में पाप पर दण्‍ड की आज्ञा दी। इसलिये कि व्‍यवस्‍था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्‍मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। क्‍योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्‍तु आध्‍यात्‍मिक आत्‍मा की बातों पर मन लगाते हैं। शरीर पर मन लगाना तो मृत्‍यु है, परन्‍तु आत्‍मा पर मन लगाना जीवन और शान्‍ति है। क्‍योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्‍वर से बैर रखना है, क्‍योंकि न तो परमेश्‍वर की व्‍यवस्‍था के अधीन है, और न हो सकता है। और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्‍वर को प्रसन्‍न नहीं कर सकते। परन्‍तु जब कि परमेश्‍वर का आत्‍मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्‍तु आत्‍मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्‍मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्‍तु आत्‍मा धर्म के कारण जीवित है। और यदि उसी का आत्‍मा जिस ने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिस ने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्‍हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्‍मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा। सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें। क्‍योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्‍मा से देह की क्रियाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे। इसलिये कि जितने लोग परमेश्‍वर के आत्‍मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्‍वर के पुत्र हैं। क्‍योंकि तुम को दासत्‍व की आत्‍मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्‍तु लेपालकपन की आत्‍मा मिली है, जिस से हम हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं। आत्‍मा आप ही हमारी आत्‍मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्‍वर की सन्‍तान हैं। और यदि सन्‍तान हैं, तो वारिस भी, वरन् परमेश्‍वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएँ कि उसके साथ महिमा भी पाएँ। क्‍योंकि मैं समझता हूँ, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्‍हने, जो हम पर प्रगट होनेवाली है, कुछ भी नहीं हैं। क्‍योंकि सृष्‍टि बड़ी आशाभरी दृष्‍टि से परमेश्‍वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। क्‍योंकि सृष्‍टि अपनी इच्‍छा से नहीं पर आधीन करनेवाले की ओर से व्‍यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। कि सृष्‍टि भी आप ही विनाश के दासत्‍व से छुटकारा पाकर, परमेश्‍वर की सन्‍तानों की महिमा की स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करेगी। क्‍योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्‍टि अब तक मिलकर कहरती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्‍मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कहरते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात् अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्‍तु जिस वस्‍तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहाँ रही? क्‍योकि जिस वस्‍तु को कोई देख रहा है उसकी आशा क्‍या करेगा? परन्‍तु जिस वस्‍तु को हम नहीं देखते, यदि उसकी आशा रखते हैं, तो धीरज से उसकी बाट जोहते भी हैं। इसी रीति से आत्‍मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्‍तु आत्‍मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। और मनों का जांचनेवाला जानता है, कि आत्‍मा की मनसा क्‍या है? क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है। और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्‍न करती है; अर्थात् उन्‍हीं के लिये जो उसकी इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। क्‍योंकि जिन्‍हें उसने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। फिर जिन्‍हें उनसे पहिले से ठहराया, उन्‍हें बुलाया भी, और जिन्‍हें बुलाया, उन्‍हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्‍हें धर्मी ठहराया, उन्‍हें महिमा भी दी है। सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा? परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर वह है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। फिर कौन है जो दण्‍ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्‍वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, “तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम बध होनेवाली भेंडों की नाई गिने गए हैं।” परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं। क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूँ, कि न मृत्‍यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएँ, न वर्तमान, न भविष्‍य, न सामर्थ, न ऊँचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्‍वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। मैं मसीह में सच कहता हूँ, झूठ नहीं बोलता और मेरा विवेक भी पवित्र आत्‍मा में गवाही देता है। कि मुझे बड़ा शोक है, और मेरा मन सदा दुखता रहता है। क्‍योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्‍बी हैं, आप ही मसीह से शापित हो जाता। वे इस्राएली हैं, और लेपालकपन का हक्‍क और महिमा और वाचाएँ और व्‍यवस्‍था और उपासना और प्रतिज्ञाएँ उन्‍हीं की हैं। पुरखे भी उन्‍हीं के हैं, और मसीह भी शरीर के भाव से उन्‍हीं में से हुआ, जो सब के ऊपर परम परमेश्‍वर युगानुयुग धन्‍य है। आमीन। परन्‍तु यह नहीं, कि परमेश्‍वर का वचन टल गया, इसलिये कि जो इस्राएल के वंश हैं, वे सब इस्राएली नहीं; और न अब्राहम के वंश होने के कारण सब उसकी सन्‍तान ठहरे, परन्‍तु (लिखा है) “इसहाक ही से तेरा वंश कहलाएगा।” अर्थात् शरीर की सन्‍तान परमेश्‍वर की सन्‍तान नहीं, परन्‍तु प्रतिज्ञा के सन्‍तान वंश गिने जाते हैं। क्‍योंकि प्रतिज्ञा का वचन यह है, “मैं इस समय के अनुसार आऊँगा, और सारा के पुत्र होगा।” और केवल यही नहीं, परन्‍तु जब रिबका भी एक से अर्थात् हमारे पिता इसहाक से गर्भवती थी। और अभी तक न तो बालक जन्‍मे थे, और न उन्‍हों ने कुछ भला या बुरा किया था, इसलिये कि परमेश्‍वर की मनसा जो उसके चुन लेने के अनुसार है, कर्मों के कारण नहीं, परन्‍तु बुलानेवाले पर बनी रहे। उसने कहा, “जेठा छोटे का दास होगा।” जैसा लिखा है, “मैं ने याकूब से प्रेम किया, परन्‍तु एसाव को अप्रिय जाना।” सो हम क्‍या कहें? क्‍या परमेश्‍वर के यहाँ अन्‍याय है? कदापि नहीं! क्‍योंकि वह मूसा से कहता है, “मैं जिस किसी पर दया करना चाहूँ, उस पर दया करूँगा, और जिस किसी पर कृपा करना चाहूँ उसी पर कृपा करूँगा।” सो यह न तो चाहनेवाले की, न दौड़नेवाले की परन्‍तु दया करनेवाले परमेश्‍वर की बात है। क्‍येांकि पवित्र शास्‍त्र में फिरौन से कहा गया, “मैं ने तुझे इसी लिये खड़ा किया है, कि तुझ में अपनी सामर्थ दिखाऊँ, और मेरे नाम का प्रचार सारी पृथ्‍वी पर हो।” सो वह जिस पर चाहता है, उस पर दया करता है; और जिसे चाहता है, उसे कठोर कर देता है। सो तू मुझ से कहेगा, “वह फिर क्‍यों दोष लगाता है? कौन उसकी इच्‍छा का साम्‍हना करता हैं?” हे मनुष्‍य, भला तू कौन है, जो परमेश्‍वर का साम्‍हना करता है? क्‍या गढ़ी हुई वस्‍तु गढ़नेवाले से कह सकती है, “तू ने मुझे ऐसा क्‍यों बनाया है?” क्‍या कुम्‍हार को मिट्टी पर अधिकार नहीं, कि एक ही लौंदे मे से, एक बरतन आदर के लिये, और दूसरे को अनादर के लिये बनाए? तो इस में कौन सी अचम्‍भे की बात है? कि परमेश्‍वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ प्रगट करने की इच्‍छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे बड़े धीरज से सही। और दया के बरतनों पर जिन्‍हें उसने महिमा के लिये पहिले से तैयार किया, अपने महिमा के धन को प्रगट करने की इच्‍छा की? अर्थात् हम पर जिन्‍हें उसने न केवल यहूदियों में से वरन् अन्‍यजातियों में से भी बुलाया। जैसा वह होशे की पुस्‍तक में भी कहता है, “जो मेरी प्रजा न थी, उन्‍हें मैं अपनी प्रजा कहूँगा, और जो प्रिया न थी, उसे प्रिया कहूँगा; और ऐसा होगा कि जिस जगह में उनसे यह कहा गया था, कि तुम मेरी प्रजा नहीं हो, उसी जगह वे जीवते परमेश्‍वर की सन्‍तान कहलाएँगे।” और यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है, “चाहे इस्राएल की सन्‍तानों की गिनती समुद्र के बालू के बारबर हो, तौभी उन में से थोड़े ही बचेंगे। क्‍योंकि प्रभु अपना वचन पृथ्‍वी पर पूरा करके, धार्मिकता से शीघ्र उसे सिद्ध करेगा।” जैसा यशायाह ने पहिले भी कहा था, “यदि सेनाओं का प्रभु हमारे लिये कुछ वंश न छोड़ता, तो हम सदोम की नाईं हो जाते, और अमोरा के सरीखे ठहरते।” सो हम क्‍या कहें? यह कि अन्‍यजातियों ने जो धार्मिकता की खोज नहीं करते थे, धार्मिकता प्राप्‍त की अर्थात् उस धार्मिकता को जो विश्‍वास से है; परन्‍तु इस्राएली; जो धर्म की व्‍यवस्‍था की खोज करते हुए उस व्‍यवस्‍था तक नहीं पहुँचे। किस लिये? इसलिये कि वे विश्‍वास से नहीं, परन्‍तु मानों कर्मों से उसकी खोज करते थे: उन्‍हों ने उस ठोकर के पत्‍थर पर ठोकर खाई। जैसा लिखा है, “देखो मैं सिय्‍योन में एक ठेस लगने का पत्‍थर, और ठोकर खाने की चट्टान रखता हूँ, और जो उस पर विश्‍वास करेगा, वह लज्‍जित न होगा।” हे भाइयो, मेरे मन की अभिलाषा और उन के लिये परमेश्‍वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएँ। क्‍योंकि मैं उनकी गवाही देता हूँ, कि उन को परमेश्‍वर के लिये धुन रहती है, परन्‍तु बुद्धिमानी के साथ नहीं। क्‍योकिं वे परमेश्‍वर की धार्मिकता से अनजान होकर, और अपनी धार्मिकता स्‍थापन करने का यत्‍न करके, परमेश्‍वर की धार्मिकता के आधीन न हुए। क्‍योंकि हर एक विश्‍वास करनेवाले के लिये धार्मिकता के निमित्त मसीह व्‍यवस्‍था का अन्‍त है। क्‍योंकि मूसा ने यह लिखा है, “जो मनुष्‍य उस धार्मिकता पर जो व्‍यवस्‍था से है, चलता है, वह इसी कारण जीवित रहेगा।” परन्‍तु जो धार्मिकता विश्‍वास से है, वह यों कहती है, “तू अपने मन में यह न कहना कि स्‍वर्ग पर कौन चढ़ेगा?” (अर्थात् मसीह को उतार लाने के लिये!) या “गहिराव में कौन उतरेगा?” (अर्थात् मसीह को मरे हुओं में से जिलाकर ऊपर लाने के लिये!) परन्‍तु क्‍या कहती है? यह, कि “वचन तेरे निकट है, तेरे मुँह में और तेरे मन में है,” यह वही विश्‍वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं। कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्‍वास करे, कि परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्‍चय उद्धार पाएगा। क्‍योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है। क्‍योंकि पवित्र शास्‍त्र यह कहता है, “जो कोई उस पर विश्‍वास करेगा, वह लज्‍जित न होगा।” यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेनेवालों के लिये उदार है। क्‍योंकि “जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।” फिर जिस पर उन्‍हों ने विश्‍वास नहीं किया, वे उसका नाम क्‍योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्‍योंकर विश्‍वास करें? और प्रचारक बिना क्‍योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएँ, तो क्‍योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, “उन के पाँव क्‍या ही सोहावने हैं, जो अच्‍छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!” परन्‍तु सब ने उस सुसमाचार पर कान न लगाया: यशायाह कहता है, “हे प्रभु, किस ने हमारे समाचार की प्रतीति की है?” सो विश्‍वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है। परन्‍तु मैं कहता हूँ, क्‍या उन्‍हों ने नहीं सुना? सुना तो सही क्‍योंकि लिखा ह, “उन के स्‍वर सारी पृथ्‍वी पर, और उन के वचन जगत की छोर तक पहुँच गए हैं।” फिर मैं कहता हूँ। क्‍या इस्राएली नहीं जानते थे? पहिले तो मूसा कहता है, “मैं उन के द्वारा जो जाति नहीं, तुम्‍हारे मन में जलन उपजाऊँगा, मैं एक मूढ़ जाति के द्वारा तुम्‍हें रिस दिलाऊँगा।” फिर यशायाह बड़े हियाव के साथ कहता है, “जो मुझे नहीं ढूँढते थे, उन्‍हों ने मुझे पा लिया; और जो मुझे पूछते भी न थे, उन पर मैं प्रगट हो गया।” परन्‍तु इस्राएल के विषय में वह यह कहता है “मैं सारे दिन अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर पसारे रहा।” इसलिये मैं कहता हूँ, क्‍या परमेश्‍वर ने अपनी प्रजा को त्‍याग दिया? कदापि नहीं! मैं भी तो इस्राएली हूँ; अब्राहम के वंश और बिन्‍यामीन के गोत्र में से हूँ। परमेश्‍वर ने अपनी उस प्रजा को नहीं त्‍यागा, जिसे उसने पहिले ही से जाना: क्‍या तुम नहीं जानते, कि पवित्र शास्‍त्र एलियाह की कथा में क्‍या कहता है; कि वह इस्राएल के विरोध में परमेश्‍वर से बिनती करता है। “हे प्रभु, उन्‍हों ने तेरे भविष्‍यद्वक्‍ताओं को घात किया, और तेरी वेदियों को ढ़ा दिया है; और मैं ही अकेला बच रहा हूँ, और वे मेरे प्राण के भी खोजी हैं।” परन्‍तु परमेश्‍वर से उसे क्‍या उत्तर मिला “मैं ने अपने लिये सात हजार पुरूषों को रख छोड़ा है जिन्‍हों ने बाअल के आगे घुटने नहीं टेके हैं।” सो इसी रीति से इस समय भी, अनुग्रह से चुने हुए कितने लोग बाकी हैं। यदि यह अनुग्रह से हुआ है, तो फिर कर्मों से नहीं, नहीं तो अनुग्रह फिर अनुग्रह नहीं रहा। सो परिणाम क्‍या हुआ? यह कि इस्राएली जिस की खोज में हैं, वह उन को नहीं मिला; परन्‍तु चुने हुओं को मिला और शेष लोग कठोर किए गए हैं। जैसा लिखा है, “परमेश्‍वर ने उन्‍हें आज के दिन तक भारी नींद में डाल रखा है और ऐसी आँखें दी जो न देखें और ऐसे कान जो न सुनें।” और दाऊद कहता है, “उन का भोजन उन के लिये जाल, और फन्‍दा, और ठोकर, और दण्‍ड का कारण हो जाए। उनकी आँखों पर अन्‍धेरा छा जाए ताकि न देखें, और तू सदा उनकी पीठ को झुकाए रख।” सो मैं कहता हूँ क्‍या उन्‍हों ने इसलिये ठोकर खाई, कि गिर पड़ें? कदापि नहीं: परन्‍तु उन के गिरने के कारण अन्‍यजातियों को उद्धार मिला, कि उन्‍हें जलन हो। सो यदि उन का गिरना जगत के लिये धन और उनकी घटी अन्‍यजातियों के लिये सम्‍पत्ति का कारण हुआ, तो उनकी भरपूरी से कितना न होगा। मैं तुम अन्‍यजातियों से यह बातें कहता हूँ: जब कि मैं अन्यजातियों के लिये प्रेरित हूँ, तो मैं अपनी सेवा की बड़ाई करता हूँ, ताकि किसी रीति से मैं अपने कुटुम्‍बियों से जलन करवाकर उन में से कई एक का उद्धार कराऊँ। क्‍योंकि जब कि उन का त्‍याग दिया जाना जगत के मिलाप का कारण हुआ, तो क्‍या उन का ग्रहण किया जाना मरे हुओं में से जी उठने के बराबर न होगा? जब भेंट का पहिला पेड़ा पवित्र ठहरा, तो पूरा गूँधा हुआ आटा भी पवित्र है: और जब जड़ पवित्र ठहरी, तो डालियाँ भी ऐसी ही हैं। और यदि कई एक डाली तोड़ दी गई, और तू जंगली जैतून होकर उनमें साटा गया, और जैतून की जड़ की चिकनाई का भागी हुआ है। तो डालियों पर घमण्‍ड न करना; और यदि तू घमण्‍ड करे, तो जान रख, कि तू जड़ को नहीं, परन्‍तु जड़ तुझे सम्‍भालती है। फिर तू कहेगा, “डालियाँ इसलिये तोड़ी गई, कि मैं साटा जाऊँ।” भला, वे तो अविश्‍वास के कारण तोड़ी गई, परन्‍तु तू विश्‍वास से बना रहता है इसलिये अभिमानी न हो, परन्‍तु भय कर, क्‍योंकि जब परमेश्‍वर ने स्‍वाभाविक डालियाँ न छोड़ी, तो तुझे भी न छोड़ेगा। इसलिये परमेश्‍वर की कृपा और कड़ाई को देख! जो गिर गए, उन पर कड़ाई, परन्‍तु तुझ पर कृपा, यदि तू उस में बना रहे, नहीं तो, तू भी काट डाला जाएगा। और वे भी यदि अविश्‍वास में न रहें, तो साटे जाएँगे क्‍योंकि परमेश्वर उन्‍हें फिर साट सकता है। क्‍योंकि यदि तू उस जलपाई से, जो स्‍वभाव से जंगली है काटा गया और स्‍वभाव के विरूद्ध अच्‍छी जलपाई में साटा गया तो ये जो स्‍वाभाविक डालियाँ हैं, अपने ही जलपाई में साटे क्‍यों न जाएँगे । हे भाइयों, कहीं ऐसा न हो, कि तुम अपने आप को बुद्धिमान समझ लो; इसलिये मैं नहीं चाहता कि तुम इस भेद से अनजान रहो, कि जब तक अन्यजातियाँ पूरी रीति से प्रवेश न कर लें, तब तक इस्राएल का एक भाग ऐसा ही कठोर रहेगा। और इस रीति से सारा इस्राएल उद्धार पाएगा; जैसा लिखा है, “छुड़ानेवाला सिय्‍योन से आएगा, और अभक्ति को याकूब से दूर करेगा। और उन के साथ मेरी यही वाचा होगी, जब कि मैं उन के पापों को दूर कर दूँगा।” वे सुसमाचार के भाव से तो तुम्‍हारे वे परमेश्वर के बैरी हैं, परन्‍तु चुन लिये जाने के भाव से बापदादों के प्‍यारे हैं। क्‍योंकि परमेश्‍वर अपने बरदानों से, और बुलाहट से कभी पीछे नहीं हटता। क्‍योंकि जैसे तुम ने पहिले परमेश्‍वर की आज्ञा न मानी परन्‍तु अभी उन के आज्ञा न मानने से तुम पर दया हुई। वैसे ही उन्‍हों ने भी अब आज्ञा न मानी कि तुम पर जो दया होती है इस से उन पर भी दया हो। क्‍योंकि परमेश्‍वर ने सब को आज्ञा न मानने के कारण बन्‍द कर रखा ताकि वह सब पर दया करे। आहा! परमेश्‍वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्‍या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं! “प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना? या उसका मंत्री कौन हुआ? या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए?” क्‍योंकि उसकी ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन। इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्‍वर की दया स्‍मरण दिला कर बिनती करता हूँ, कि अपने शरीरो को जीवित, और पवित्र, और परमेश्‍वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्‍हारी आत्‍मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्‍तु तुम्‍हारी बुद्धि के नए हो जाने से तुम्‍हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्‍वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्‍छा अनुभव से मालूम करते रहो। क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ, कि जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्‍वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। क्‍योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं; वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्‍न भिन्‍न बरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्‍यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्‍वास के परिमाण के अनुसार भविष्‍यद्वाणी करे। यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखानेवाला हो, तो सिखाने में लगा रहे; जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे। प्रेम निष्‍कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो। भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्‍मिक उन्‍माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। आशा मे आनन्‍दित रहो; क्‍लेश में स्‍थिर रहो; प्रार्थना में नित्‍य लगे रहो। पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्‍य हो, उस में उनकी सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो। अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो स्‍त्राप न दो। आनन्‍द करनेवालों के साथ आनन्‍द करो, और रोनेवालों के साथ रोओ। आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्‍तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न हो। बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उनकी चिन्‍ता किया करो। जहाँ तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्‍यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना बदला न लेना; परन्‍तु क्रोध को अवसर दो, क्‍योंकि लिखा है, “बदला लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूँगा।” परन्‍तु “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला, यदि प्‍यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्‍योकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।” बुराई से न हारो परन्‍तु भलाई से बुराई का जीत लो। हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे; क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्‍वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्‍वर के ठहराए हुए हैं। इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्‍वर की विधि का साम्‍हना करता है, और साम्‍हना करनेवाले दण्‍ड पाएँगे। क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उसकी ओर से तेरी सराहना होगी; क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्‍वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्‍योकि वह तलवार व्‍यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्‍वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करनेवाले को दण्‍ड दे। इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्‍य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि शासन करनेवाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। इसलिये हर एक का हक्‍क चुकाया करो; जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उससे डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो। आपस के प्रेम को छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्‍यवस्‍था पूरी की है। क्‍योंकि यह कि “व्‍यभिचार न करना, हत्‍या न करना, चोरी न करना, लालच न करना,” और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।” प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्‍यवस्‍था को पूरा करना है। और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्‍हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्‍योंकिं जिस समय हम ने विश्‍वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है। रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्‍धकार के कामों को तज कर ज्‍योति के हथियार बान्‍ध लें। जैसा दिन को शोभा देता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्‍कड़पन, न व्‍यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में। वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो। जो विश्‍वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो, परन्‍तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं। क्‍योंकि एक को विश्‍वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्‍तु जो विश्‍वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है। और खानेवाला न-खानेवाले को तुच्‍छ न जाने, और न-खानेवाला खानेवाले पर दोष न लगाए; क्‍योंकि परमेश्‍वर ने उसे ग्रहण किया है। तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्‍थिर रहना या गिर जाना उसके स्‍वामी ही से सम्‍बन्‍ध रखता है, वरन् वह स्‍थिर ही कर दिया जाएगा; क्‍योंकि प्रभु उसे स्‍थिर रख सकता है। कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्‍चय कर ले। जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्‍योंकि परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता है, और जो नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता है। क्‍योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है। क्‍योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएँ या मरें, हम प्रभु ही के हैं। क्‍योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो। तू अपने भाई पर क्‍यों दोष लगाता है? या तू फिर क्‍यों अपने भाई को तुच्‍छ जानता है? हम सब के सब परमेश्‍वर के न्‍याय सिंहासन के साम्‍हने खड़े होंगे। क्‍योंकि लिखा है, “प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्‍ध कि हर एक घुटना मेरे साम्‍हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्‍वर को अंगीकार करेगी।” सो हम में से हर एक परमेश्‍वर को अपना अपना लेखा देगा। सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएँ पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के सामने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। मैं जानता हूँ, और प्रभु यीशु से मुझे निश्‍चय हुआ है, कि कोई वस्‍तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्‍तु जो उस को अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है। यदि तेरा भाई तेरे भोजन के कारण उदास होता है, तो फिर तू प्रेम की रीति से नहीं चलता; जिस के लिये मसीह मरा उस को तू अपने भोजन के द्वारा नाश न कर। अब तुम्‍हारी भलाई की निन्‍दा न होने पाए। क्‍योंकि परमेश्वर का राज्य खानापीना नहीं; परन्‍तु धर्म और मिलाप और वह आनन्‍द है जो पवित्र आत्‍मा स होता है। जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्‍वर को भाता है और म्‍यों में ग्रहणयोग्‍य ठहरता है। इसलिये हम उन बातों का प्रयत्‍न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो। भोजन के लिये परमेश्‍वर का काम न बिगाड़: सब कुछ शुद्ध तो है, परन्‍तु उस मनुष्‍य के लिये बुरा है, जिस को उसके भोजन करने से ठोकर लगती है। भला तो यह है, कि तू न मांस खाए, और न दाख रस पीए, न और कुछ ऐसा करे, जिस से तेरा भाई ठोकर खाए। तेरा जो विश्‍वास हो, उसे परमेश्‍वर के सामने अपने ही मन में रख: धन्‍य है वह, जो उस बात में, जिसे वह ठीक समझता है, अपने आप को दोषी नहीं ठहराता। परन्‍तु जो सन्‍देह कर के खाता है, वह दण्‍ड के योग्‍य ठहर चुका, क्‍योंकि वह निश्‍चय धारणा से नहीं खाता, और जो कुछ विश्‍वास से नहीं, वह पाप है। निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें, न कि अपने आप को प्रसन्‍न करें। हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये सुधारने के निमित्त प्रसन्‍न करे। क्‍योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्‍न नहीं किया, पर जैसा लिखा है, “तेरे निन्‍दकों की निन्‍दा मुझ पर आ पड़ी।” जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें। और धीरज, और शान्‍ति का दाता परमेश्‍वर तुम्‍हें यह बरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। ताकि तुम एक मन और एक स्वर होकर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्‍वर की बड़ाई करो। इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्‍वर की महिमा के लिये तुम्‍हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो। मैं कहता हूँ, कि जो प्रतिज्ञाएँ बापदादों को दी गई थीं, उन्‍हें दृढ़ करने के लिये मसीह, परमेश्‍वर की सच्‍चाई का प्रमाण देने के लिये खतना किए हुए लोगों का सेवक बना। और अन्‍यजाति भी दया के कारण परमेश्‍वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, “इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्‍यवाद करूँगा, और तेरे नाम के भजन गाऊँगा।” फिर कहा है, “हे जाति जाति के सब लोगों, उसकी प्रजा के साथ आनन्‍द करो।” और फिर, “हे जाति जाति के सब लोगों, प्रभु की स्‍तुति करो; और हे राज्‍य राज्‍य के सब लोगो; उसे सराहो।” और फिर यशायाह कहता है, “यिशै की एक जड़ प्रगट होगी, और अन्‍यजातियों का हाकिम होने के लिये एक उठेगा, उस पर अन्‍यजातियाँ आशा रखेंगी।” सो परमेश्‍वर जो आशा का दाता है तुम्‍हें विश्‍वास करने में सब प्रकार के आनन्‍द और शान्‍ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्रआत्‍मा की सामर्थ से तुम्‍हारी आशा बढ़ती जाए। हे मेरे भाइयो; मैं आप भी तुम्‍हारे विषय में निश्‍चय जानता हूँ, कि तुम भी आप ही भलाई से भरे और ईश्‍वरीय ज्ञान से भरपूर हो और एक दूसरे को चिता सकते हो। तौभी मैं ने कहीं कहीं याद दिलाने के लिये तुम्‍हें जो बहुत हियाव करके लिखा, यह उस अनुग्रह के कारण हुआ, जो परमेश्‍वर ने मुझे दिया है। कि मैं अन्यजातियों के लिये मसीह यीशु का सेवक होकर परमेश्‍वर के सुसमाचार की सेवा याजक की नाई करूँ; जिस से अन्‍यजातियों का मानों चढ़ाया जाना, पवित्र आत्‍मा से पवित्र बनकर ग्रहण किया जाए। सो उन बातों के विषय में जो परमेश्‍वर से सम्‍बन्‍ध रखती हैं, मैं मसीह यीशु में बड़ाई कर सकता हूँ। क्‍योंकि उन बातों को छोड़ मुझे और किसी बात के विषय में कहने का हियाव नहीं, जो मसीह ने अन्‍यजातियों की अधीनता के लिये वचन, और कर्म। और चिन्‍हों और अदभुत् कामों की सामर्थ से, और पवित्र आत्‍मा की सामर्थ से मेरे ही द्वारा किए: यहाँ तक कि मैं ने यरूशलेम से लेकर चारों ओर इल्‍लुरिकुम तक मसीह के सुसमाचार का पूरा पूरा प्रचार किया। पर मेरे मन की उमंग यह है, कि जहाँ जहाँ मसीह का नाम नहीं लिया गया, वहीं सुसमाचार सुनाऊँ; ऐसा न हो, कि दूसरे की नेव पर घर बनाऊँ। परन्‍तु जैसा लिखा है, वैसा ही हो, “जिन्‍हें उसका सुसमाचार नहीं पहुँचा, वे ही देखेंगे और जिन्‍हों ने नहीं सुना वे ही समझेंगे।” इसी लिये मैं तुम्‍हारे पास आने से बार बार रूका रहा। परन्‍तु अब मुझे इन देशों में और जगह नहीं रही, और बहुत वर्षों से मुझे तुम्‍हारे पास आने की लालसा है। इसलिये जब इसपानिया को जाऊँगा तो तुम्‍हारे पास होता हुआ जाऊँगा क्‍योंकि मुझे आशा है, कि उस यात्रा में तुम से भेंट करूँ, और जब तुम्‍हारी संगति से मेरा जी कुछ भर जाए, तो तुम मुझे कुछ दूर आगे पहुँचा दो। परन्‍तु अभी तो पवित्र लोगों की सेवा करने के लिये यरूशलेम को जाता हूँ। क्‍योंकि मकिदुनिया और अखया के लोगों को यह अच्‍छा लगा, कि यरूशलेम के पवित्र लोगों के कंगालों के लिये कुछ चन्‍दा करें। अच्‍छा तो लगा, परन्‍तु वे उन के कर्जदार भी हैं, क्‍योंकि यदि अन्‍यजाति उनकी आत्‍मिक बातों में भागी हुए, तो उन्‍हें भी उचित है, कि शारीरिक बातों में उनकी सेवा करें। सो मैं यह काम पूरा करके और उन को यह चन्‍दा सौंपकर तुम्‍हारे पास होता हुआ इसपानिया को जाऊँगा। और मैं जानता हूँ, कि जब मैं तुम्‍हारे पास आऊँगा, तो मसीह की पूरी आशीष के साथ आऊँगा । और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्‍मा के प्रेम का स्‍मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूँ, कि मेरे लिये परमेश्‍वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो। कि मैं यहूदिया के अविश्‍वासियों से बचा रहूँ, और मेरी वह सेवा जो यरूशलेम के लिये है, पवित्र लोगों को भाए। और मैं परमेश्‍वर की इच्‍छा से तुम्‍हारे पास आनन्‍द के साथ आकर तुम्‍हारे साथ विश्राम पाऊँ। शान्‍ति का परमेश्‍वर तुम सब के साथ रहे। आमीन।। मैं तुम से फीबे के लिए, जो हमारी बहिन और किंखि्रया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूँ। कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उसकी सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन् मेरी भी उपकारिणी हुई है। प्रिस्का और अक्विला को जो यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार। उन्‍हों ने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन् अन्‍यजातियों की सारी कलीसियाएँ भी उन का धन्‍यवाद करती हैं। और उस कलीसिया को भी नमस्‍कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्‍कार। मरियम को जिस ने तुम्‍हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार। अन्‍द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्‍बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्‍कार। अम्‍पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्‍कार। उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्‍तखुस को नमस्‍कार। अपिल्‍लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्‍कार। अरिस्‍तुबुलुस के घराने को नमस्‍कार। मेरे कुटुम्‍बी हेरोदियोन को नमस्‍कार। नरकिस्‍सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्‍कार। त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्‍कार। प्रिय पिरसिस को जिस ने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार। रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उसकी माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्‍कार। असुक्रितुस और फिलगोन और हिर्मेस ओर पत्रुबास और हिमांस और उन के साथ के भाइयों को नमस्‍कार। फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उसकी बहिन, और उलुम्‍पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्‍कार। आपस में पवित्र चुम्‍बन से नमस्‍कार करो: तुम को मसीह की सारी कलीस्‍यिाओं की ओर से नमस्‍कार। अब हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि जो लोग उस शिक्षा के विपरीत जो तुम ने पाई है, फूट पड़ने, और ठोकर खाने के कारण होते हैं, उन्‍हें ताड़ लिया करो; और उनसे दूर रहो। क्‍योंकि ऐसे लोग हमारे प्रभु मसीह की नहीं, परन्‍तु अपने पेट की सेवा करते है; और चिकनी चुपड़ी बातों से सीधे सादे मन के लोगों को बहका देते हैं। तुम्‍हारे आज्ञा मानने की चर्चा सब लोगों में फैल गई है; इसलिये मैं तुम्‍हारे विषय में आनन्‍द करता हूँ; परन्‍तु मैं यह चाहता हूँ, कि तुम भलाई के लिये बुद्धिमान, परन्‍तु बुराई के लिये भोले बने रहो। शान्‍ति का परमेश्‍वर शैतान को तुम्‍हारे पाँवों से शीघ्र कुचलवा देगा। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे। तीमुथियुस मेरे सहकर्मी का, और लूकियुस और यासोन और सोसिपत्रुस मेरे कुटुम्‍बियों का, तुम को नमस्‍कार। मुझ पत्री के लिखनेवाले तिरतियुस का प्रभु में तुम को नमस्‍कार। गयुस का जो मेरी और कलीसिया का पहुनाई करनेवाला है उसका तुम्‍हें नमस्‍कार: इरास्‍तुस जो नगर का भण्‍डारी है, और भाई क्‍वारतुस का, तुम को नमस्‍कार। अब जो तुम को मेरे सुसमाचार अर्थात् यीशु मसीह के विषय के प्रचार के अनुसार स्‍थिर कर सकता है, उस भेद के प्रकाश के अनुसार जो सनातन से छिपा रहा। परन्‍तु अब प्रगट होकर सनातन परमेश्‍वर की आज्ञा से भविष्‍यद्वक्‍ताओं की पुस्‍तकों के द्वारा सब जातियों को बताया गया है, कि वे विश्‍वास से आज्ञा माननेवाले हो जाएँ। उसी अद्वैत बुद्धिमान परमेश्‍वर की यीशु मसीह के द्वारा युगानुयुग महिमा होती रहे। आमीन। पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिये बुलाया गया और भाई सोस्‍थिनेस की ओर से। परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्‍थुस में है, अर्थात् उनके नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए, और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं; और उन सब के नाम भी जो हर जगह हमारे और अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम की प्रार्थना करते हैं। हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। मैं तुम्‍हारे विषय में अपने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद सदा करता हूँ, इसलिये कि परमेश्‍वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ। कि उसमें होकर तुम हर बात में अर्थात् सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए। कि मसीह की गवाही तुम में पक्‍की निकली। यहाँ तक कि किसी वरदान में तुम्‍हें घटी नहीं, और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने की बाट जोहते रहते हो। वह तुम्‍हें अन्‍त तक दृढ़ भी करेगा, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिन में निर्दोष ठहरो। परमेश्‍वर सच्‍चा** है; जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है। हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूँ, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्‍तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो। क्‍योंकि हे मेरे भाइयों, खलोए के घराने के लोगों ने मुझे तुम्‍हारे विषय में बताया है, कि तुम में झगड़े हो रहे हैं। मेरा कहना यह है, कि तुम में से कोई तो अपने आप को “पौलुस का,” कोई “अपुल्‍लोस का,” कोई “कैफा का,” कोई “मसीह का” कहता है। क्‍या मसीह बट गया? क्‍या पौलुस तुम्‍हारे लिये क्रूस पर चढ़ाया गया? या तुम्‍हें पौलुस के नाम पर बपतिस्‍मा मिला? मैं परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ, कि क्रिस्‍पुस और गयुस को छोड़, मैं ने तुम में से किसी को भी बपतिस्‍मा नहीं दिया। कहीं ऐसा न हो, कि कोई कहे, कि तुम्‍हें मेरे नाम पर बपतिस्‍मा मिला। और मैं ने स्‍तिफनास के घराने को भी बपतिस्‍मा दिया; इन को छोड़, मैं नहीं जानता कि मैं ने और किसी को बपतिस्‍मा दिया। क्‍योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्‍मा देने को नहीं, बरन सुसमाचार सुनाने को भेजा है, और यह भी शब्‍दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्‍यर्थ ठहरे। क्योंकि क्रूस की कथा नाश होनेवालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पानेवालों के निकट परमेश्‍वर की सामर्थ है। क्योंकि लिखा है, “मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूँगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूँगा।” कहाँ रहा ज्ञानवान? कहाँ रहा शास्‍त्री? कहाँ रहा इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्‍वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? क्‍योंकि जब परमेश्‍वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्‍वर को न जाना तो परमेश्‍वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्‍वास करनेवालों को उद्धार दे। यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं, परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्‍यजातियों के निकट मूर्खता है; परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उनके निकट मसीह परमेश्‍वर की सामर्थ, और परमेश्‍वर का ज्ञान है। क्‍योंकि परमेश्‍वर की मूर्खता मनुष्‍यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्‍वर की निर्बलता मनुष्‍यों के बल से बहुत बलवान है। हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्‍तु परमेश्‍वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञानवालों को लज्‍जित करे; और परमेश्‍वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्‍जित करे। और परमेश्‍वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, बरन जो हैं भी नहीं उनको भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्‍यर्थ ठहराए। ताकि कोई प्राणी परमेश्‍वर के साम्‍हने घमण्‍ड न करने पाए। परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्‍वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात् धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा। ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, “जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।” और हे भाइयों, जब मैं परमेश्‍वर का भेद सुनाता हुआ तुम्‍हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया। क्‍योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्‍हारे बीच यीशु मसीह, बरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूँ। और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्‍हारे साथ रहा। और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभानेवाली बातें नहीं; परन्‍तु आत्‍मा और सामर्थ का प्रमाण था, इसलिये कि तुम्‍हारा विश्‍वास मनुष्‍यों के ज्ञान पर नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर की सामर्थ पर निर्भर हो। फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्‍तु इस संसार का और इस संसार के नाश होनेवाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। परन्‍तु हम परमेश्‍वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्‍वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्‍योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। परन्‍तु जैसा लिखा है, “जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्‍य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्‍वर ने अपने प्रेम रखनेवालों के लिये तैयार की हैं।” परन्‍तु परमेश्‍वर ने उनको अपने आत्‍मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्‍योंकि आत्‍मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्‍योंकि आत्‍मा सब बातें, बरन परमेश्‍वर की गूढ़ बातें भी जाँचता है। मनुष्‍यों में से कौन किसी मनुष्‍य की बातें जानता है, केवल मनुष्‍य की आत्‍मा जो उसमें है? वैसी ही परमेश्‍वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्‍वर का आत्‍मा। परन्‍तु हम ने संसार की आत्‍मा नहीं, परन्‍तु वह आत्‍मा पाया है, जो परमेश्‍वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्‍वर ने हमें दी हैं। जिन को हम मनुष्‍यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्‍तु आत्‍मा की सिखाई हुई बातों में, आत्‍मिक बातें आत्‍मिक बातों से मिला मिलाकर सुनाते हैं। परन्‍तु शारीरिक मनुष्‍य परमेश्‍वर के आत्‍मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्‍योंकि वे उसकी दृष्‍टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्‍हें जान सकता है क्‍योंकि उनकी जाँच आत्‍मिक रीति से होती है। आत्‍मिक जन सब कुछ जाँचता है, परन्‍तु वह आप किसी से जाँचा नहीं जाता। “क्‍योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए?” परन्‍तु हम में मसीह का मन है। हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्‍मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उनसे जो मसीह में बालक हैं। मैं ने तुम्‍हें दूध पिलाया, अन्‍न न खिलाया; क्‍योंकि तुम उसको न खा सकते थे; बरन अब तक भी नहीं खा सकते हो, क्‍योंकि अब तक शारीरिक हो। इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्‍या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्‍य की रीति पर नहीं चलते? इसलिये कि जब एक कहता है, “मैं पौलुस का हूँ,” और दूसरा, “मैं अपुल्‍लोस का हूँ,” तो क्‍या तुम मनुष्‍य नहीं? अपुल्‍लोस क्‍या है? और पौलुस क्‍या? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्‍वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। मैं ने लगाया, अपुल्‍लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्‍वर ने बढ़ाया। इसलिये न तो लगानेवाला कुछ है, और न सींचनेवाला, परन्‍तु परमेश्‍वर जो बढ़ानेवाला है। लगानेवाला और सींचनेवाला दोनों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। क्‍योंकि हम परमेश्‍वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्‍वर की खेती और परमेश्‍वर की रचना हो। परमेश्‍वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नींव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है। परन्‍तु हर एक मनुष्‍य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। क्‍योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता। और यदि कोई इस नींव पर सोना या चाँदी या बहुमोल पत्‍थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखे, तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्‍योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। जिसका काम उस पर बना हुआ स्‍थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो वह हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्‍तु जलते-जलते। क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्‍वर का मन्‍दिर** हो, और परमेश्‍वर का आत्‍मा तुम में वास करता है? यदि कोई परमेश्‍वर के मन्‍दिर को नाश करेगा तो परमेश्‍वर उसे नाश करेगा; क्‍योंकि परमेश्‍वर का मन्‍दिर पवित्र है, और वह तुम हो। कोई अपने आप को धोखा न दे। यदि तुम में से कोई इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझे, तो मूर्ख बने; कि ज्ञानी हो जाए। क्‍योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्‍वर के निकट मूर्खता है, जैसा लिखा है, “वह ज्ञानियों को उनकी चतुराई में फँसा देता है,” और फिर, “प्रभु ज्ञानियों की चिन्‍ताओं को जानता है, कि व्‍यर्थ हैं।” इसलिये मनुष्‍यों पर कोई घमण्‍ड न करे, क्‍योंकि सब कुछ तुम्‍हारा है। क्‍या पौलुस, क्‍या अपुल्‍लोस, क्‍या कैफा, क्‍या जगत, क्‍या जीवन, क्‍या मरण, क्‍या वर्तमान, क्‍या भविष्‍य, सब कुछ तुम्‍हारा है, और तुम मसीह के हो, और मसीह परमेश्‍वर का है। मनुष्‍य हमें मसीह के सेवक और परमेश्‍वर के भेदों के भण्‍डारी समझे। फिर यहाँ भण्‍डारी में यह बात देखी जाती है, कि विश्‍वास योग्‍य निकले। परन्‍तु मेरी दृष्‍टि में यह बहुत छोटी बात है, कि तुम या मनुष्‍यों का कोई न्‍यायी मुझे परखे, बरन मैं आप ही अपने आप को नहीं परखता। क्‍योंकि मेरा मन मुझे किसी बात में दोषी नहीं ठहराता, परन्‍तु इस से मैं निर्दोष नहीं ठहरता, क्‍योंकि मेरा परखने वाला प्रभु है। सो जब तक प्रभु न आए, समय से पहले किसी बात का न्‍याय न करो: वही तो अन्‍धकार की छिपी बातें ज्‍योति में दिखाएगा, और मनों की मतियों को प्रगट करेगा, तब परमेश्‍वर कीओर से हर एक की प्रशंसा होगी। हे भाइयों, मैं ने इन बातों में तुम्‍हारे लिये अपनी और अपुल्‍लोस की चर्चा, दृष्‍टान्‍त की रीति पर की है, इसलिये कि तुम हमारे द्वारा यह सीखो, कि लिखे हुए से आगे न बढ़ना, और एक के पक्ष में और दूसरे के विरोध में गर्व न करना। क्‍योंकि तुझ में और दूसरे में कौन भेद करता है? और तेरे पास क्‍या है जो तू ने (दूसरे से) नहीं पाया: और जब कि तू ने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्‍ड क्‍यों करता है, कि मानों नही पाया? तुम तो तृप्‍त हो चुके; तुम धनी हो चुके, तुम ने हमारे बिना राज्‍य किया; परन्‍तु भला होता कि तुम राज्‍य करते कि हम भी तुम्‍हारे साथ राज्‍य करते। मेरी समझ में परमेश्‍वर ने हम प्रेरितों को सब के बाद उन लोगों के समान ठहराया है, जिन की मृत्‍यु की आज्ञा हो चुकी हो; क्‍योंकि हम जगत और स्‍वर्गदूतों और मनुष्‍यों के लिये एक तमाशा ठहरे हैं। हम मसीह के लिये मूर्ख है; परन्‍तु तुम मसीह में बुद्धिमान हो: हम निर्बल हैं परन्‍तु तुम बलवान हो: तुम आदर पाते हो, परन्‍तु हम निरादर होते हैं। हम इस घड़ी तक भूखे-प्‍यासे और नंगे हैं, और घूसे खाते हैं और मारे मारे फिरते हैं; और अपने ही हाथों के काम करके परिश्रम करते हैं। लोग बुरा कहते हैं, हम आशीष देते हैं; वे सताते हैं, हम सहते हैं। वे बदनाम करते हैं, हम बिनती करते हैं: हम आज तक जगत के कूड़े और सब वस्‍तुओं की खुरचन की नाई ठहरे हैं। मैं तुम्‍हें लज्‍जित करने के लिये ये बातें नहीं लिखता, परन्‍तु अपने प्रिय बालक जानकर तुम्हें चिताता हूँ। क्‍येांकि यदि मसीह में तुम्‍हारे सिखानेवाले दस हजार भी होते, तौभी तुम्‍हारे पिता बहुत से नहीं, इसलिये कि मसीह यीशु में सुसमाचार के द्वारा मैं तुम्‍हारा पिता हुआ। सो मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि मेरी सी चाल चलो। इसलिये मैं ने तीमुथियुस को जो प्रभु में मेरा प्रिय और विश्‍वासयोग्‍य पुत्र है, तुम्‍हारे पास भेजा है, और वह तुम्‍हें मसीह में मेरा चरित्र स्‍मरण कराएगा, जैसे कि मैं हर जगह हर एक कलीसिया में उपदेश करता हूँ। कितने तो ऐसे फूल गए हैं, मानों मैं तुम्‍हारे पास आने ही का नहीं। परन्‍तु प्रभु चाहे तो मैं तुम्‍हारे पास शीघ्र ही आऊँगा, और उन फूले हुओं की बातों को नहीं, परन्‍तु उनकी सामर्थ को जान लूँगा। क्‍योंकि परमेश्वर का राज्‍य बातों में नहीं, परन्‍तु सामर्थ में है। तुम क्‍या चाहते हो? क्‍या मैं छड़ी लेकर तुम्‍हारे पास आऊँ या प्रेम और नम्रता की आत्‍मा के साथ? यहाँ तक सुनने में आता है, कि तुम में व्‍यभिचार होता है, बरन ऐसा व्‍यभिचार जो अन्‍यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्‍य अपने पिता की पत्‍नी को रखता है। और तुम शोक तो नहीं करते, जिस से ऐसा काम करनेवाला तुम्‍हारे बीच में से निकाला जाता, परन्‍तु घमण्‍ड करते हो। मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्‍तु आत्‍मा के भाव से तुम्‍हारे साथ होकर, मानो उपस्‍थिति की दशा में ऐसे काम करनेवाले के विषय में यह आज्ञा दे चुका हूँ। कि जब तुम, और मेरी आत्‍मा, हमारे प्रभु यीशु की सामर्थ के साथ इकट्ठे हो, तो ऐसा मनुष्‍य, हमारे प्रभु यीशु के नाम से। शरीर के विनाश के लिये शैतान को सौंपा जाए, ताकि उसकी आत्‍मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए। तुम्‍हारा घमण्‍ड करना अच्‍छा नहीं; क्‍या तुम नहीं जानते, कि थोड़ा सा खमीर पूरे गूँधे हुए आटे को खमीर कर देता है। पुराना खमीर निकाल कर, अपने आप को शुद्ध करो: कि नया गूँधे हुआ आटा बन जाओ; ताकि तुम अखमीरी हो, क्‍योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है। सो आओ हम उत्‍सव में आनन्‍द मनावें, न तो पुराने खमीर से और न बुराई की दुष्‍टता के खमीर से, परन्‍तु सीधाई और सच्‍चाई की अखमीरी रोटी से। मैं ने अपनी पत्री में तुम्‍हें लिखा है, कि व्‍यभिचारियों की संगति न करना। यह नहीं, कि तुम बिलकुल इस जगत के व्‍यभिचारियों, या लोभियों, या अन्‍धेर करनेवालों, या मूर्त्तिपूजकों की संगति न करो; क्‍योंकि इस दशा में तो तुम्‍हें जगत में से निकल जाना ही पड़ता। मेरा कहना यह है; कि यदि कोई भाई कहलाकर, व्‍यभिचारी, या लोभी, या मूर्त्तिपूजक, या गाली देनेवाला, या पियक्‍कड़, या अन्‍धेर करनेवाला हो, तो उसकी संगति मत करना; बरन ऐसे मनुष्‍य के साथ खाना भी न खाना। क्‍योंकि मुझे बाहरवालों का न्‍याय करने से क्‍या काम? क्‍या तुम भीतरवालों का न्‍याय नहीं करते? परन्‍तु बाहरवालों का न्‍याय परमेश्‍वर करता है: इसलिये उस कुकर्मी को अपने बीच में से निकाल दो। क्‍या तुम में से किसी को यह हियाव है, कि जब दूसरे के साथ झगड़ा हो, तो फैसले के लिये अधर्मियों के पास जाए; और पवित्र लोगों के पास न जाए? क्‍या तुम नहीं जानते, कि पवित्र लोग जगत का न्‍याय करेंगे? सो तब तुम्‍हें जगत का न्‍याय करना है, तो क्‍या तुम छोटे से छोटे झगड़ों का भी निर्णय करने के योग्‍य नहीं? क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम स्‍वर्गदूतों का न्‍याय करेंगे? तो क्‍या सांसारिक बातों का निर्णय न करे? सो यदि तुम्‍हें सांसारिक बातों का निर्णय करना हो, तो क्‍या उन्‍हीं को बैठाओगे जो कलीसिया में कुछ नहीं समझे जाते हैं? मैं तुम्‍हें लज्‍जित करने के लिये यह कहता हूँ: क्‍या सचमुच तुम में से एक भी बुद्धिमान नहीं मिलता, जो अपने भाइयों का निर्णय कर सके? बरन भाई-भाई में मुकद्दमा होता है, और वह भी अविश्‍वासियों के साम्‍हने। परन्‍तु सचमुच तुम में बड़ा दोष तो यह है, कि आपस में मुकद्दमा करते हो: बरन अन्‍याय क्‍यों नहीं सहते? अपनी हानि क्‍यों नहीं सहते? बरन अन्‍याय करते और हानि पहुँचाते हो, और वह भी भाइयों को। क्‍या तुम नहीं जानते, कि अन्‍यायी लोग परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्‍यागामी, न मूर्त्तिपूजक, न परस्‍त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी। न चोर, न लोभी, न पियक्‍कड़, न गाली देनेवाले, न अन्‍धेर करनेवाले परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस होंगे। और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्‍तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्‍वर के आत्‍मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे। सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्तुएँ लाभ की नहीं, सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित हैं, परन्‍तु मैं किसी बात के आधीन न हूँगा। भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्‍तु परमेश्‍वर इस को और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्‍तु देह व्‍यभिचार के लिये नहीं, बरन प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है। और परमेश्‍वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा। क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्‍हारी देह मसीह के अंग हैं? सो क्‍या मैं मसीह के अंग लेकर उन्‍हें वेश्‍या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं। क्‍या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्‍या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है क्‍योंकि वह कहता है, “वे दोनों एक तन होंगे।” और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्‍मा हो जाता है। व्‍यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्‍य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्‍तु व्‍यभिचार करनेवाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है। क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्‍हारी देह पवित्रात्‍मा का मन्‍दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्‍हें परमेश्‍वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? कयोंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्‍वर की महिमा करो। उन बातों के विषय में जो तुम ने लिखीं, यह अच्‍छा है, कि पुरूष स्‍त्री को न छुए। परन्‍तु व्‍यभिचार के डर से हर एक पुरूष की पत्‍नी, और हर एक स्‍त्री का पति हो। पति अपनी पत्‍नी का हक्‍क पूरा करे; और वैसे ही पत्‍नी भी अपने पति का। पत्‍नी को अपनी देह पर अधिकार नहीं पर उसके पति का अधिकार है; वैसे ही पति को भी अपनी देह पर अधिकार नहीं, परन्‍तु पत्‍नी को। तुम एक दूसरे से अलग न रहो; परन्‍तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्‍मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो; ऐसा न हो, कि तुम्‍हारे असंयम के कारण शैतान तुम्‍हें परखे। परन्‍तु मैं जो यह कहता हूँ वह अनुमति है न कि आज्ञा। मैं यह चाहता हूँ, कि जैसा मैं हूँ, वैसा ही सब मनुष्‍य हों; परन्‍तु हर एक को परमेश्‍वर की ओर से विशेष वरदान मिले हैं; किसी को किसी प्रकार का, और किसी को किसी और प्रकार का। परन्‍तु मैं अविवाहितों और विधवाओं के विषय में कहता हूँ, कि उनके लिये ऐसा ही रहना अच्‍छा है, जैसा मैं हूँ। परन्‍तु यदि वे संयम न कर सकें, तो विवाह करें; क्‍योंकि विवाह करना कामातुर रहने से भला है। जिनका विवाह हो गया है, उनको मैं नहीं, बरन प्रभु आज्ञा देता है, कि पत्‍नी अपने पति से अलग न हो। (और यदि अलग भी हो जाए, तो बिना दूसरा विवाह किए रहे; या अपने पति से फिर मेल कर ले) और न पति अपनी पत्‍नी को छोड़े। दूसरों से प्रभु नहीं, परन्‍तु मैं ही कहता हूँ, यदि किसी भाई की पत्‍नी विश्‍वास न रखती हो, और उसके साथ रहने से प्रसन्‍न हो, तो वह उसे न छोड़े। और जिस स्‍त्री का पति विश्‍वास न रखता हो, और उसके साथ रहने से प्रसन्‍न हो; वह पति को न छोड़े। क्‍योंकि ऐसा पति जो विश्‍वास न रखता हो, वह पत्‍नी के कारण पवित्र ठहरता है, और ऐसी पत्‍नी जो विश्‍वास नहीं रखती, पति के कारण पवित्र ठहरती है; नहीं तो तुम्‍हारे लड़केबालें अशुद्ध होते, परन्‍तु अब तो पवित्र हैं। परन्‍तु जो पुरूष विश्‍वास नहीं रखता, यदि वह अलग हो, तो अलग होने दो, ऐसी दशा में कोई भाई या बहिन बन्‍धन में नहीं; परन्‍तु परमेश्‍वर ने तो हमें मेल मिलाप के लिये बुलाया है। क्‍योंकि हे स्‍त्री, तू क्‍या जानती है, कि तू अपने पति का उद्धार करा ले? और हे पुरूष, तू क्‍या जानता है कि तू अपनी पत्‍नी का उद्धार करा ले? पर जैसा प्रभु ने हर एक को बांटा है, और जैसा परमेश्‍वर ने हर एक को बुलाया है; वैसा ही वह चले: और मैं सब कलीसियाओं में ऐसा ही ठहराता हूँ। जो खतना किया हुआ बुलाया गया हो, वह खतनारहित न बने: जो खतनारहित बुलाया गया हो, वह खतना न कराए। न खतना कुछ है, और न खतनारहित परन्‍तु परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानना ही सब कुछ है। हर एक जन जिस दशा में बुलाया गया हो, उसी में रहे। यदि तू दास की दशा में बुलाया गया हो तो चिन्‍ता न कर; परन्‍तु यदि तू स्‍वतंत्र हो सके, तो ऐसा ही काम कर। क्‍योंकि जो दास की दशा में प्रभु में बुलाया गया है, वह प्रभु का स्‍वतंत्र किया हुआ है: और वैसे ही जो स्‍वतंत्रता की दशा में बुलाया गया है, वह मसीह का दास है। तुम दाम देकर मोल लिये गए हो, मनुष्‍यों के दास न बनो। हे भाइयो, जो कोई जिस दशा में बुलाया गया हो, वह उसी में परमेश्‍वर के साथ रहे। कुँवारीयो के विषय में प्रभु की कोई आज्ञा मुझे नहीं मिली, परन्‍तु विश्‍वासयोग्‍य होने के लिये जैसी दया प्रभु ने मुझ पर की है, उसी के अनुसार सम्‍मति देता हूँ। सो मेरी समझ में यह अच्‍छा है, कि आजकल क्‍लेश के कारण मनुष्‍य जैसा है, वैसा ही रहे। यदि तेरे पत्‍नी है, तो उससे अलग होने का यत्‍न न कर: और यदि तेरे पत्‍नी नहीं, तो पत्‍नी की खोज न कर: परन्‍तु यदि तू विवाह भी करे, तो पाप नहीं; और यदि कुँवारी ब्‍याही जाए तो कोई पाप नहीं; परन्‍तु ऐसों को शारीरिक दु:ख होगा, और मैं बचाना चाहता हूँ। हे भाइयो, मैं यह कहता हूँ, कि समय कम किया गया है, इसलिये चाहिए कि जिन के पत्‍नी हों, वे ऐसे हों मानो उनके पत्‍नी नहीं। और रोनेवाले ऐसे हों, मानो रोते नहीं; और आनन्‍द करनेवाले ऐसे हों, मानो आनन्‍द नहीं करते; और मोल लेनेवाले ऐसे हों, कि मानो उनके पास कुछ है नहीं। और इस संसार के बरतनेवाले ऐसे हों, कि संसार ही के न हो लें; क्‍योंकि इस संसार की रीति और व्‍यवहार बदलते जाते हैं। सो मैं यह चाहता हूँ, कि तुम्‍हें चिन्‍ता न हो: अविवाहित पुरूष प्रभु की बातों की चिन्‍ता में रहता है, कि प्रभु को क्‍योंकर प्रसन्‍न रखे। परन्‍तु विवाहित मनुष्‍य संसार की बातों की चिन्‍ता में रहता है, कि अपनी पत्‍नी को किस रीति से प्रसन्‍न रखे। विवाहिता और अविवाहिता में भी भेद है: अविवाहिता प्रभु की चिन्‍ता में रहती है, कि वह देह और आत्‍मा दोनों में पवित्र हो, परन्‍तु विवाहिता संसार की चिन्‍ता में रहती है, कि अपने पति को प्रसन्‍न रखे। यह बात तुम्‍हारे ही लाभ के लिये कहता हूँ, न कि तुम्‍हें फंसाने के लिये, बरन इसलिये कि जैसा सोहता है, वैसा ही किया जाए; कि तुम एक चित्त होकर प्रभु की सेवा में लगे रहो। और यदि कोई यह समझे, कि मैं अपनी उस कुंवारी का हक्‍क मार रहा हूँ, जिस की जवानी ढल चली है, और प्रयोजन भी होए, तो जैसा चाहे, वैसा करे, इस में पाप नहीं, वह उसका विवाह होने दे। परन्‍तु जो मन में दृढ़ रहता है, और उसको प्रयोजन न हो, बरन अपनी इच्‍छा पूरी करने में अधिकार रखता हो, और अपने मन में यह बात ठान ली हो, कि मैं अपनी कुंवारी लड़की को बिन ब्‍याही रखूंगा, वह अच्‍छा करता है। सो जो अपनी कुंवारी का विवाह कर देता है, वह अच्‍छा करता है और जो विवाह नहीं कर देता, वह और भी अच्‍छा करता है। जब तक किसी स्‍त्री का पति जीवित रहता है, तब तक वह उससे बन्‍धी हुई है, परन्‍तु जब उसका पति मर जाए, तो जिस से चाहे विवाह कर सकती है, परन्‍तु केवल प्रभु में। परन्‍तु जैसी है यदि वैसी ही रहे, तो मेरे विचार में और भी धन्‍य है, और मैं समझता हूँ, कि परमेश्‍वर का आत्‍मा मुझ में भी है। अब मूरतों के साम्‍हने बलि की हुई वस्‍तुओं के विषय में हम जानते हैं, कि हम सब को ज्ञान है: ज्ञान घमण्‍ड उत्‍पन्‍न करता है, परन्‍तु प्रेम से उन्‍नति होती है। यदि कोई समझे, कि मैं कुछ जानता हूँ, तो जैसा जानना चाहिए वैसा अब तक नहीं जानता। परन्‍तु यदि कोई परमेश्‍वर से प्रेम रखता है, तो उसे परमेश्‍वर पहिचानता है। सो मूरतों के साम्‍हने बलि की हुई वस्‍तुओं के खाने के विषय में हम जानते हैं, कि मूरत जगत में कोई वस्‍तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्‍वर नहीं। यद्यपि आकाश में और पृथ्‍वी पर बहुत से ईश्‍वर कहलाते हैं, (जैसा कि बहुत से ईश्‍वर और बहुत से प्रभु हैं)। तौभी हमारे निकट तो एक ही परमेश्‍वर है: अर्थात् पिता जिस की ओर से सब वस्तुएँ हैं, और हम उसी के लिये हैं, और एक ही प्रभु है, अर्थात् यीशु मसीह जिसके द्वारा सब वस्तुएँ हुई, और हम भी उसी के द्वारा हैं। परन्‍तु सब को यह ज्ञान नही; परन्‍तु कितने तो अब तक मूरत को कुछ समझने के कारण मूरतों के साम्‍हने बलि की हुई को कुछ वस्‍तु समझकर खाते हैं, और उन का विवेक निर्बल होकर अशुद्ध होता है। भोजन हमें परमेश्‍वर के निकट नहीं पहुँचाता, यदि हम न खाएँ, तो हमारी कुछ हानि नहीं, और यदि खाएं, तो कुछ लाभ नहीं। परन्‍तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्‍हारी यह स्‍वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए। क्‍येांकि यदि कोई तुझ ज्ञानी को मूरत के मन्‍दिर में भोजन करते देखे, और वह निर्बल जन हो, तो क्‍या उसके विवेक में मूरत के साम्‍हने बलि की हुई वस्‍तु के खाने का हियाव न हो जाएगा। इस रीति से तेरे ज्ञान के कारण वह निर्बल भाई जिसके लिये मसीह मरा नाश हो जाएगा। सो भाइयों का अपराध करने से और उनके निर्बल विवेक को चोट देने से तुम मसीह का अपराध करते हो। इस कारण यदि भोजन मेरे भाई को ठोकर खिलाए, तो मैं कभी किसी रीति से मांस न खाऊँगा, न हो कि मैं अपने भाई के ठोकर का कारण बनूँ। क्‍या मैं स्‍वतंत्र नहीं? क्‍या मैं प्रेरित नहीं? क्‍या मैं ने यीशु को जो हमारा प्रभु है, नहीं देखा? क्‍या तुम प्रभु में मेरे बनाए हुए नहीं? यदि मैं औरों के लिये प्रेरित नहीं, तौभी तुम्‍हारे लिये तो हूँ; क्‍योंकि तुम प्रभु में मेरी प्रेरिताई पर छाप हो। जो मुझे जाँचते हैं, उनके लिये यही मेरा उत्तर है। क्‍या हमें खाने-पीने का अधिकार नहीं? क्‍या हमें यह अधिकार नहीं, कि किसी मसीही बहिन को विवाह कर के लिए फिरें, जैसा और प्रेरित और प्रभु के भाई और कैफा करते हैं? या केवल मुझे और बरनबास को अधिकार नहीं कि कमाई करना छोड़ें। कौन कभी अपनी गिरह से खाकर सिपाही का काम करता है? कौन दाख की बारी लगाकर उसका फल नहीं खाता? कौन भेड़ों की रखवाली करके उन का दूध नहीं पीता? क्‍या मैं ये बातें मनुष्‍य ही की रीति पर बोलता हूँ? क्‍या व्‍यवस्‍था भी यही नहीं कहती? क्‍योंकि मूसा की व्‍यवस्‍था में लिखा है “दए में चलते हुए बैल का मुंह न बान्‍धना।” क्‍या परमेश्‍वर बैलों ही की चिन्‍ता करता है? या विशेष करके हमारे लिये कहता है। हां, हमारे लिये ही लिखा गया, क्‍योंकि उचित है, कि जोतनेवाला आशा से जोते, और दावनेवाला भागी होने की आशा से दावनी करे। सो जब कि हम ने तुम्‍हारे लिये आत्‍मिक वस्तुएँ बोई, तो क्‍या यह कोई बड़ी बात है, कि तुम्‍हारी शारीरिक वस्‍तुओं की फसल काटें। जब औरों का तुम पर यह अधिकार है, तो क्‍या हमारा इस से अधिक न होगा? परन्‍तु हम यह अधिकार काम में नहीं लाए; परन्‍तु सब कुछ सहते हैं, कि हमारे द्वारा मसीह के सुसमाचार की कुछ रोक न हो। क्‍या तुम नहीं जानते कि जो पवित्र वस्‍तुओं की सेवा करते हैं, वे मन्‍दिर में से खाते हैं; और जो वेदी की सेवा करते हैं; वे वेदी के साथ भागी होते हैं? इसी रीति से प्रभु ने भी ठहराया, कि जो लोग सुसमाचार सुनाते हैं, उनकी जीविका सुसमाचार से हो। परन्‍तु मैं इन में से कोई भी बात काम में न लाया, और मैं ने तो ये बातें इसलिये नहीं लिखीं, कि मेरे लिये ऐसा किया जाए, क्‍योंकि इस से तो मेरा मरना ही भला है; कि कोई मेरा घमण्‍ड व्‍यर्थ ठहराए। और यदि मैं सुसमाचार सुनाऊँ, तो मेरा कुछ घमण्‍ड नहीं; क्‍योंकि यह तो मेरे लिये अवश्‍य है; और यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय! क्‍योंकि यदि अपनी इच्‍छा से यह करता हूँ, तो मजदूरी मुझे मिलती है, और यदि अपनी इच्‍छा से नहीं करता, तौभी भण्‍डारीपन मुझे सौंपा गया है। सो मेरी कौन सी मजदूरी है? यह कि सुसमाचार सुनाने में मैं मसीह का सुसमाचार सेंत मेंत कर दूँ; यहाँ तक कि सुसमाचार में जो मेरा अधिकार है, उसको मैं पूरी रीति से काम में लाऊँ। क्‍योंकि सब से स्‍वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है; कि अधिक लोगों को खींच लाऊँ। मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊँ, जो लोग व्‍यवस्‍था के आधीन हैं उनके लिये मैं व्‍यवस्‍था के आधीन न होने पर भी व्‍यवस्‍था के आधीन बना, कि उन्‍हें जो व्‍यवस्‍था के आधीन हैं, खींच लाऊँ। व्यवस्थाहीनो के लिये मैं (जो परमेश्‍वर की व्‍यवस्‍था से हीन नहीं, परन्‍तु मसीह की व्‍यवस्‍था के आधीन हूँ) व्‍यवस्‍थाहीन सा बना, कि व्‍यवस्‍थाहीनों को खींच लाऊँ। मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊँ, मैं सब मनुष्‍यों के लिये सब कुछ बना हूँ, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊँ। और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूँ, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊँ। क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है? तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझानेवाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं। इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूँ, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्‍कों से लड़ता हूँ, परन्‍तु उसके समान नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है। परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूँ; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्‍मा ठहरूँ। हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बापदादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपतिस्‍मा लिया। और सब ने एक ही आत्‍मिक भोजन किया। और सब ने एक ही आत्‍मिक जल पीया, क्‍योंकि वे उस आत्‍मिक चट्टान से पीते थे, जो उनके साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। परन्‍तु परमेश्‍वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्‍न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए। ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें। और न तुम मूरत पूजनेवाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, “लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।” और न हम व्‍यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: और एक दिन में तेईस हजार मर गये। और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और साँपों के द्वारा नाश किए गए। और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करनेवाले के द्वारा नाश किए गए। परन्‍तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर थीं; और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं। इसलिये जो समझता है, “ मैं स्‍थिर हूँ,” वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़ें। तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्‍य के सहने के बाहर है: और परमेश्‍वर सच्‍चा है: वह तुम्‍हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। इस कारण, हे मेरे प्‍यारों मूर्त्ति पूजा से बचे रहो। मैं बुद्धिमान जानकर, तुम से कहता हूँ: जो मैं कहता हूँ, उसे तुम परखो। वह धन्‍यवाद का कटोरा, जिस पर हम धन्‍यवाद करते हैं, क्‍या वह मसीह के लोहू की सहभागिता नहीं? वह रोटी जिसे हम तोड़े हैं, क्‍या मसीह की देह की सहभागिता नहीं? इसलिये, कि एक ही रोटी है तो हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं: क्‍योंकि हम सब उसी एक रोटी में भागी होते हैं। जो शरीर के भाव से इस्राएली हैं, उनको देखो: क्‍या बलिदानों के खानेवाले वेदी के सहभागी नहीं? फिर मैं क्‍या कहता हूँ? क्‍या यह कि मूर्ति का बलिदान कुछ है, या मूरत कुछ है? नहीं, बस यह, कि अन्‍यजाति जो बलिदान करते हैं, वे परमेश्‍वर के लिये नहीं, परन्‍तु दुष्‍टात्‍माओं के लिये बलिदान करते हैं: और मैं नहीं चाहता, कि तुम दुष्‍टात्‍माओं के सहभागी हो। तुम प्रभु के कटोरे, और दुष्‍टात्‍माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज और दुष्‍टात्‍माओं की मेज दोनों के साझी नहीं हो सकते। क्‍या हम प्रभु को क्रोध दिलाते हैं? क्‍या हम उससे शक्तिमान हैं? सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब लाभ की नहीं: सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्‍तुओं से उन्नति नहीं। कोई अपनी ही भलाई को न, ढूँढे वरन् औरों की। जो कुछ कस्‍साइयों के यहाँ बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो। “क्‍योकि पृथ्‍वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है।” और यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्‍हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्‍हारे साम्‍हने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो। परन्‍तु यदि कोई तुम से कहे, “यह तो मूरत को बलि की हुई वस्‍तु है,” तो उसी बतानेवाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ। मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्‍तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्‍वतंत्रता दूसरे के विचार से क्‍यों परखी जाए? यदि मैं धन्‍यवाद करके साझी होता हूँ, तो जिस पर मैं धन्‍यवाद करता हूँ, उसके कारण मेरी बदनामीं क्‍यों होती है? सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्‍वर की महिमा के लिये करो। तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्‍वर की कलीसिया के लिये ठोकर के कारण बनो। जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्‍न रखता हूँ, और अपना नहीं, परन्‍तु बहुतों का लाभ ढूँढ़ता हूँ, कि वे उद्धार पाएँ। तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूँ। हे भाइयों, मैं तुम्‍हें सराहता हूँ, कि सब बातों में तुम मुझे स्‍मरण करते हो: और जो व्‍यवहार मैं ने तुम्‍हें सौंप दिए हैं, उन्‍हें धारण करते हो। सो मैं चाहता हूँ, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्‍त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्‍वर है। जो पुरूष सिर ढाँके हुए प्रार्थना या भविष्‍यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। परन्‍तु जो स्‍त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्‍योंकि वह मुण्‍डी होने के बराबर है। यदि स्‍त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्‍त्री के लिये बाल कटाना या मुण्‍डाना लज्‍जा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े। हां पुरूष को अपना सिर ढाँकना उचित नहीं, क्‍योंकि वह परमेश्‍वर का स्‍वरूप और महिमा है; परन्‍तु स्‍त्री पुरूष की महिमा। क्‍योंकि पुरूष स्‍त्री से नहीं हुआ, परन्‍तु स्‍त्री पुरुष से हुई है। और पुरूष स्‍त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्‍तु स्‍त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है। इसीलिये स्‍वर्गदूतों के कारण स्‍त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे। तौभी प्रभु में न तो स्‍त्री बिना पुरूष और न पुरूष बिना स्‍त्री के है। क्‍योंकि जैसे स्‍त्री पुरूष से है, वैसे ही पुरूष स्‍त्री के द्वारा है; परन्‍तु सब वस्तुएँ परमेश्‍वर से हैं। तुम आप ही विचार करो, क्‍या स्‍त्री को उघाड़े सिर परमेश्‍वर से प्रार्थना करना सोहता है? क्‍या स्‍वाभाविक रीति से भी तुम नहीं जानते, कि यदि पुरूष लम्‍बे बाल रखे, तो उसके लिये अपमान है। परन्‍तु यदि स्‍त्री लम्‍बे बाल रखे; तो उसके लिये शोभा है क्‍योंकि बाल उसको ओढ़नी के लिये दिए गए हैं। परन्‍तु यदि कोई विवाद करना चाहे, तो यह जाने कि न हमारी और न परमेश्‍वर की कलीसिओं की ऐसी रीति है। परन्‍तु यह आज्ञा देते हुए, मैं तुम्‍हें नहीं सराहता, इसलिये कि तुम्‍हारे इकट्ठे होने से भलाई नहीं, परन्‍तु हानि होती है। क्‍योंकि पहले तो मैं यह सुनता हूँ, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे होते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ कुछ प्रतीति भी करता हूँ। क्‍योंकि विधर्म भी तुम में अवश्‍य होंगे, इसलिये कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जाएँ। सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं। क्‍योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है। क्‍या खाने पीने के लिये तुम्‍हारे घर नहीं? या परमेश्‍वर की कलीसिया को तुच्‍छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्‍हें लज्‍जित करते हो? मैं तुम से क्‍या कहूँ? क्‍या इस बात में तुम्‍हारी प्रशंसा करूँ? मैं प्रशंसा नहीं करता। क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुँची, और मैं ने तुम्‍हें भी पहुँचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली, और धन्‍यवाद करके उसे तोड़ी, और कहा, “यह मेरी देह है, जो तुम्‍हारे लिये है: मेरे स्‍मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा, “यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्‍मरण के लिये यही किया करो।” क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्‍यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। इसलिये मनुष्‍य अपने आप को जाँच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। क्‍येांकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। इसी कारण तुम में बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। यदि हम अपने आप को जाँचते, तो दण्‍ड न पाते। परन्‍तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्‍हारा इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूँगा। हे भाइयों, मैं नहीं चाहता कि तुम आत्‍मिक बरदानों के विषय में अज्ञात रहो। तुम जानते हो, कि जब तुम अन्‍यजाति थे, तो गूंगी मूरतों के पीछे जैसे चलाए जाते थे वैसे चलते थे। इसलिये मैं तुम्‍हें चितौनी देता हूँ कि जो कोई परमेश्‍वर की आत्‍मा की अगुआई से बोलता है, वह नहीं कहता कि यीशु स्‍त्रापित है; और न कोई पवित्र आत्‍मा के बिना कह सकता है कि यीशु प्रभु है। वरदान तो कई प्रकार के हैं, परन्‍तु आत्‍मा एक ही है। और सेवा भी कई प्रकार की है, परन्‍तु प्रभु एक ही है। और प्रभावशाली कार्य कई प्रकार के हैं, परन्‍तु परमेश्वर एक ही है, जो सब में हर प्रकार का प्रभाव उत्‍पन्‍न करता है। किन्‍तु सब के लाभ पहुँचाने के लिये हर एक को आत्‍मा का प्रकाश दिया जाता है। क्‍योंकि एक को आत्‍मा के द्वारा बुद्धि की बातें दी जाती हैं; और दूसरे को उसी आत्‍मा के अनुसार ज्ञान की बातें। और किसी को उसी आत्‍मा से विश्‍वास; और किसी को उसी एक आत्‍मा से चंगा करने का वरदान दिया जाता है। फिर किसी को सामर्थ के काम करने की शक्ति; और किसी को भविष्‍यद्वाणी की; और किसी को आत्‍माओं की परख, और किसी को अनेक प्रकार की भाषा; और किसी को भाषाओं का अर्थ बताना। परन्‍तु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्‍मा करवाता है, और जिसे जो चाहता है वह बाँट देता है। क्‍योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। क्‍योंकि हम सब ने क्‍या यहूदी हो, क्‍या युनानी, क्‍या दास, क्‍या स्‍वतंत्र एक ही आत्‍मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्‍मा लिया, और हम सब को एक ही आत्‍मा पिलाया गया। इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं। यदि पाँव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? और यदि कान कहे, “मैं आँखनहीं, इसलिये देह का नहीं,” तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? यदि सारी देह आँख ही होती तो सुनना कहाँ से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूँघना कहाँ होता? परन्‍तु सचमुच परमेश्‍वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहाँ होती? परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। आँख हाथ से नहीं कह सकती, “मुझे तेरा प्रयोजन नहीं,” और न सिर पाँवो से कह सकता है, “मुझे तुम्‍हारा प्रयोजन नहीं।” परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्‍यक हैं। और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्‍य नहीं समझे हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं, फिर भी हमारे शोभायमान अंगो केा इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। इसी प्रकार तुम सब मिलकर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो। और परमेश्वर ने कलीसिया में अलग अलग व्यक्ति नियुक्‍त किए हैं; प्रथम प्रेरित, दूसरे भविष्‍यद्वक्‍ता, तीसरे शिक्षक, फिर सामर्थ के काम करनेवाले, फिर चंगा करनेवाले, और उपकार करनेवाले, और प्रधान, और नाना प्रकार की भाषा बोलनेवाले। क्‍या सब प्रेरित हैं? क्‍या सब भविष्‍यद्वक्‍ता हैं? क्‍या सब उपदेशक हैं? क्‍या सब सामर्थ के काम करनेवाले हैं? क्‍या सब को चंगा करने का वरदान मिला है? क्‍या सब नाना प्रकार की भाषा बोलते हैं? क्‍या सब अनुवाद करते हैं? तुम बड़े से बड़े वरदानों की धुन में रहो! परन्‍तु मैं तुम्‍हें और भी सब से उत्तम मार्ग बताता हूँ। यदि मैं मनुष्‍यों, और स्वर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखुँ, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूँ। और यदि मैं भविष्‍यद्वाणी कर सकूँ, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझुँ, और मुझे यहाँ तक पूरा विश्‍वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूँ, परन्‍तु प्रेम न रखूँ, तो मैं कुछ भी नहीं। और यदि मैं अपनी सम्‍पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूँ, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूँ, और प्रेम न रखूँ, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझुलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्‍तु सत्‍य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्‍यद्वाणियाँ हों, तो समाप्‍त हो जाएँगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। क्‍योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्‍यद्वाणी अधूरी। परन्‍तु जब सर्वसिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्‍तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी। अब हमें दर्पण में धुँधला सा दिखाई देता है; परन्‍तु उस समय आमने सामने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्‍तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूँगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूँ। पर अब विश्‍वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्‍थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। प्रेम का अनुकरण करो, और आत्‍मिक वरदानों की भी धुन में रहो विशेष करके यह, कि भविष्‍यद्वाणी करो। क्‍योंकि जो अन्‍यभाषा में बातें करता है; वह मनुष्‍यों से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर से बातें करता है; इसलिये कि उसकी कोई नहीं समझता; क्‍योंकि वह भेद की बातें आत्‍मा में होकर बोलता है। परन्‍तु जो भविष्‍यद्वाणी करता है, वह मनुष्‍यों से उन्‍नति, और उपदेश, और शान्‍ति की बातें कहता है। जो अन्‍य भाषा में बातें करता है, वह अपनी ही उन्‍नति करता है; परन्‍तु जो भविष्‍यद्वाणी करता है, वह कलीसिया की उन्‍नति करता है। मैं चाहता हूँ, कि तुम सब अन्‍य भाषाओं में बातें करो, परन्‍तु अधिकतर यह चाहता हूँ कि भविष्‍यद्वाणी करो: क्‍योंकि यदि अन्‍यान्‍य भाषा बोलनेवाला कलीसिया की उन्‍नति के लिये अनुवाद न करे तो भविष्‍यद्वाणी करनेवाला उससे बढ़कर है। इसलिये हे भाइयों, यदि मैं तुम्‍हारे पास आकर अन्‍यान्‍य भाषा में बातें करूँ, और प्रकाश, या ज्ञान, या भविष्‍यद्वाणी, या उपदेश की बातें तुम से न कहूँ, तो मुझ से तुम्‍हें क्‍या लाभ होगा? इसी प्रकार यदि निर्जीव वस्तुएँ भी, जिन से ध्‍वनि निकलती है जैसेबाँसुरी, या बीन, यदि उनके स्‍वरों में भेद न हो तो जो फूँका या बजाया जाता है, वह क्‍योंकर पहिचाना जाएगा? और यदि तुरही का शब्‍द साफ न हो तो कौन लड़ाई के लिये तैयारी करेगा? ऐसे ही तुम भी यदि जीभ से साफ बातें न कहो, तो जो कुछ कहा जाता है? वह क्‍योंकर समझा जाएगा? तुम तो हवा से बातें करनेवाले ठहरोगे। जगत में कितने ही प्रकार की भाषाएं क्‍यों न हों, परन्‍तु उन में से कोई भी बिना अर्थ की न होगी। इसलिये यदि मैं किसी भाषा का अर्थ न समझूँ, तो बोलनेवाले की दृष्‍टि में परदेशी ठहरूँगा; और बोलनेवाला मेरी दृष्‍टि में परदेशी ठहरेगा। इसलिये तुम भी जब आत्‍मिक वरदानों की धुन में हो, तो ऐसा प्रयत्‍न करो, कि तुम्‍हारे वरदानों की उन्‍नति से कलीसिया की उन्‍नति हो। इस कारण जो अन्‍य भाषा बोले, तो वह प्रार्थना करे, कि उसका अनुवाद भी कर सके। इसलिये यदि मैं अन्‍य भाषा में प्रार्थना करूँ, तो मेरी आत्‍मा प्रार्थना करती है, परन्‍तु मेरी बुद्धि काम नहीं देती। सो क्‍या करना चाहिए? मैं आत्‍मा से भी प्रार्थना करूँगा, और बुद्धि से भी प्रार्थना करूँगा; मैं आत्‍मा से गाऊँगा, और बुद्धि से भी गाऊँगा। नहीं तो यदि तू आत्‍मा ही से धन्‍यवाद करेगा, तो फिर अज्ञानी तेरे धन्‍यवाद पर आमीन क्योंकर कहेगा? इसलिये कि वह तो नहीं जानता, कि तू क्‍या कहता है? तू तो भली भांति से धन्‍यवाद करता है, परन्‍तु दूसरे की उन्‍नति नहीं होती। मैं अपने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ, कि मैं तुम सब से अधिक अन्‍यान्‍य भाषा में बोलता हूँ। परन्‍तु कलीसिया में अन्‍य भाषा में दस हजार बातें कहने से यह मुझे और भी अच्‍छा जान पड़ता है, कि औरों के सिखाने के लिये बुद्धि से पाँच ही बातें कहूँ। हे भाइयो, तुम समझ में बालक न बनो: तौभी बुराई में तो बालक रहो, परन्‍तु समझ में सियाने बानो। व्‍यवस्‍था में लिखा है, कि प्रभु कहता है, “मैं अन्‍य भाषा बोलनेवालों के द्वारा, और पराए मुख के द्वारा इन लोगों से बात करूँगा तौभी वे मेरी न सुनेंगे।” इसलिये अन्‍यान्‍य भाषाएं विश्‍वासियों के लिये नहीं, परन्‍तु अविश्‍वासियों के लिये चिन्‍ह हैं, और भविष्‍यद्वाणी अविश्‍वासीयों के लिये नहीं परन्‍तु विश्‍वासियों के लिये चिन्‍ह हैं। सो यदि कलीसिया एक जगह इकट्ठी हो, और सब के सब अन्‍यान्‍य भाषा बोलें, और अनपढ़े या अविश्‍वासी लोग भीतर आ जाएँ तो क्‍या वे तुम्‍हें पागल न कहेंगे? परन्‍तु यदि सब भविष्‍यद्वाणी करने लगें, और कोई अविश्‍वासी या अनपढ़ा मनुष्‍य भीतर आ जाए, तो सब उसे दोषी ठहरा देंगे और परख लेंगे। और उसके मन के भेद प्रगट हो जाएँगे, और तब वह मुंह के बल गिरकर परमेश्‍वर को दण्‍डवत करेगा, और मान लेगा, कि सचमुच परमेश्‍वर तुम्‍हारे बीच में है। इसलिये हे भाइयो क्‍या करना चाहिए? जब तुम इकट्ठे होते हो, तो हर एक के हृदय में भजन, या उपदेश, या अन्‍यभाषा, या प्रकाश, या अन्‍यभाषा का अर्थ बताना रहता है: सब कुछ आत्‍मिक उन्‍नति के लिये होना चाहिए। यदि अन्‍य भाषा में बातें करनीं हों, तो दो दो, या बहुत हो तो तीन तीन जन बारी बारी बोलें, और एक व्यक्ति अनुवाद करे। परन्‍तु यदि अनुवाद करनेवाला न हो, तो अन्‍यभाषा बोलनेवाला कलीसिया में शान्‍त रहे, और अपने मन से, और परमेश्‍वर से बातें करे। भविष्‍यद्वक्‍ताओं में से दो या तीन बोलें, और शेष लोग उनके वचन को परखें। परन्‍तु यदि दूसरे पर जो बैठा है, कुछ ईश्‍वरीय प्रकाश हो, तो पहिला चुप हो जाए। क्‍योंकि तुम सब एक एक करके भविष्‍यद्वाणी कर सकते हो ताकि सब सीखें, और सब शान्‍ति पाएँ। और भविष्‍यद्वक्‍ताओं की आत्‍मा भविष्‍यद्वक्‍ताओं के वश में है। क्‍येंकि परमेश्‍वर गड़बड़ी का नहीं, परन्‍तु शान्‍ति का कर्त्ता है; जैसा पवित्र लोगों की सब कलीसियाओं में है। स्‍त्रियां कलीसिया की सभा में चुप रहें, क्‍योंकि उन्‍हें बातें करने की आज्ञा नहीं, परन्‍तु आधीन रहने की आज्ञा है: जैसा व्‍यवस्‍था में लिखा भी है। और यदि वे कुछ सीखना चाहें, तो घर में अपने अपने पति से पूछें, क्‍योंकि स्‍त्री का कलीसिया में बातें करना लज्‍जा की बात है। क्‍यों परमेश्वर का वचन तुम में से निकला? या केवल तुम ही तक पहुँचा है? यदि कोई मनुष्‍य अपने आप को भविष्‍यद्वक्‍ता या आत्‍मिक जन समझे, तो यह जान ले, कि जो बातें मैं तुम्‍हें लिखता हूँ, वे प्रभु की आज्ञायँ हैं। परन्‍तु यदि कोई न जाने, तो न जाने। सो हे भाइयों, भविष्‍यद्वाणी करने की धुन में रहो और अन्‍यभाषा बोलने से मना न करो। पर सारी बातें सभ्‍यता और क्रमानुसार की जाएँ। हे भाइयों, मैं तुम्‍हें वही सुसमाचार बताता हूँ जो पहले सुना चुका हूँ, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिसमें तुम स्‍थिर भी हो। उसी के द्वारा तुम्‍हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्‍हें सुनाया था स्‍मरण रखते हो; नहीं तो तुम्‍हारा विश्‍वास करना व्‍यर्थ हुआ। इसी कारण मैं ने सब से पहले तुम्‍हें वही बात पहुँचा दी, जो मुझे पहुँची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया; और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। और कैफा को तब बारहों को दिखाई दिया। फिर पाँच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए। फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्‍मा हूँ। क्‍योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूँ, वरन् प्रेरित कहलाने के योग्‍य भी नहीं, क्‍योंकि मैं ने परमेश्‍वर की कलीसिया को सताया था। परन्‍तु मैं जो कुछ भी हूँ, परमेश्‍वर के अनुग्रह से हूँ: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्‍यर्थ नहीं हुआ परन्‍तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्‍तु परमेश्‍वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। सो चाहे मैं हूँ, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्‍वास भी किया। सो जब कि मसीह का यह प्रचार किया जाता है, कि वह मरे हुओं में से जी उठा, तो तुम में से कितने क्‍योंकर कहते हैं, कि मरे हुओं का पुनरूत्‍थान है ही नहीं? यदि मरे हुओं का पुनरूत्‍थान ही नहीं, तो मसीह भी नहीं जी उठा। और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्‍यर्थ है; और तुम्‍हारा विश्‍वास भी व्‍यर्थ है। वरन् हम परमेश्वर के झूठे गवाह ठहरे; क्‍योंकि हम ने परमेश्‍वर के विषय में यह गवाही दी कि उसने मसीह को जिला दिया यद्यपि नहीं जिलाया, यदि मरे हुए नहीं जी उठते। और यदि मुर्दे नहीं जी उठते, तो मसीह भी नहीं जी उठा। और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो तुम्‍हारा विश्‍वास व्‍यर्थ है; और तुम अब तक अपने पापों में फँसे हो। वरन् जो मसीह में सो गए हैं, वे भी नाश हुए। यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्‍यों से अधिक अभागे हैं। परन्‍तु सचमुच मसीह मुर्दों में से जी उठा है, और जो सो गए हैं, उन में पहिला फल हुआ। क्‍योंकि जब मनुष्‍य के द्वारा मृत्‍यु आई; तो मनुष्‍य ही के द्वारा मरे हुओं का पुनरूत्‍थान भी आया। और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएँगे। परन्‍तु हर एक अपनी अपनी बारी से; पहिला फल मसीह; फिर मसीह के आने पर उसके लोग। इस के बाद अन्‍त होगा; उस समय वह सारी प्रधानता और सारा अधिकार और सामर्थ का अन्‍त करके राज्‍य को परमेश्‍वर पिता के हाथ में सौंप देगा। क्‍योंकि जब तक कि वह अपने बैरियों को अपने पाँवों तले न ले आए, तब तक उसका राज्‍य करना अवश्‍य है। सब से अन्‍तिम बैरी जो नाश किया जाएगा वह मृत्‍यु है। क्‍येांकि “परमेश्‍वर ने सब कुछ उसके पाँवों तले कर दिया है,” परन्‍तु जब वह कहता है कि सब कुछ उसके आधीन कर दिया गया है तो प्रत्‍यक्ष है, कि जिस ने सब कुछ उसके आधीन कर दिया, वह आप अलग रहा। और जब सब कुछ उसके आधीन हो जाएगा, तो पुत्र आप भी उसके आधीन हो जाएगा जिस ने सब कुछ उसके आधीन कर दिया; ताकि सब में परमेश्‍वर ही सब कुछ हो। नहीं तो जो लोग मरे हुओं के लिये बपतिस्‍मा लेते हैं, वे क्‍या करेंगे? यदि मुर्दे जी उठते ही नहीं? तो फिर क्‍यों उनके लिये बपतिस्‍मा लेते हैं? और हम भी क्‍यों हर घड़ी जोखिम में पड़े रहते हैं? हे भाइयो, मुझे उस घमण्‍ड की सोंह जो हमारे मसीह यीशु में मैं तुम्‍हारे विषय में करता हूँ, कि मैं प्रति दिन मरता हूँ। यदि मैं मनुष्‍य की रीति पर इफिसुस में वन-पशुओं से लड़ा, तो मुझे क्‍या लाभ हुआ? यदि मुर्दे जिलाए नहीं जाएँगे, “तो आओ, खाएँ-पीएँ, क्‍योंकि कल तो मर ही जाएँगे।” धोखा न खाना, “बुरी संगति अच्‍छे चरित्र को बिगाड़ देती है।” धर्म के लिये जाग उठो और पाप न करो; क्‍योंकि कितने ऐसे हैं जो परमेश्‍वर को नहीं जानते, मैं तुम्‍हें लज्‍जित करने के लिये यह कहता हूँ। अब कोई यह कहेगा, “मुर्दे किस रीति से जी उठते हैं, और किस देह के साथ आते हैं?” हे निर्बुद्धि, जो कुछ तू बोता है, जब तक वह न मरे जिलाया नहीं जाता। और जो तू बोता है, यह वह देह नहीं जो उत्‍पन्‍न होनेवाली है, परन्‍तु निरा दाना है, चाहे गेहूँ का, चाहे किसी और अनाज का। परन्‍तु परमेश्‍वर अपनी इच्‍छा के अनुसार उसको देह देता है; और हर एक बीज को उसकी विशेष देह। सब शरीर एक सरीखे नहीं, परन्‍तु मनुष्‍यों का शरीर और है, पशुओं का शरीर और है; पक्षियों का शरीर और है; मछलियों का शरीर और है। स्‍वर्गीय देह है, और पार्थिव देह भी है: परन्‍तु स्‍वर्गीय देहों का तेज और हैं, और पार्थिव का और। सूर्य का तेज और है, चान्‍द का तेज और है, और तारागणों का तेज और है, (क्‍योंकि एक तारे से दूसरे तारे के तेज में अन्‍तर है)। मुर्दों का जी उठना भी ऐसा ही है। शरीर नाशमान दशा में बोया जाता है, और अविनाशी रूप में जी उठता है। वह अनादर के साथ बोया जाता है, और तेज के साथ जी उठता है; निर्बलता के साथ बोया जाता है; और सामर्थ के साथ जी उठता है। स्‍वाभाविक देह बोई जाती है, और आत्‍मिक देह जी उठती है: जब कि स्‍वाभाविक देह है, तो आत्‍मिक देह भी है। ऐसा ही लिखा भी है, “प्रथम मनुष्‍य, अर्थात् आदम, जीवित प्राणी बना” और अन्‍तिम आदम, जीवनदायक आत्‍मा बना। परन्‍तु पहले आत्‍मिक न था, पर स्‍वाभाविक था, इस के बाद आत्‍मिक हुआ। प्रथम मनुष्‍य धरती से अर्थात् मिट्टी का था; दूसरा मनुष्‍य स्‍वर्गीय है। जैसा वह मिट्टी का था वैसे ही और मिट्टी के हैं; और जैसा वह स्‍वर्गीय है, वैसे ही और भी स्‍वर्गीय हैं। और जैसे हम ने उसका रूप जो मिट्टी का था धारण किया वैसे ही उस स्‍वर्गीय का रूप भी धारण करेंगे। हे भाइयों, मैं यह कहता हूँ कि मांस और लोहू परमेश्‍वर के राज्‍य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है। देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूँ: कि हम सब तो नहीं सोएँगे, परन्‍तु सब बदल जाएँगे। और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूँकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे। क्‍योंकि अवश्‍य है, कि वह नाशवान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, “जय ने मृत्‍यु को निगल लिया। हे मृत्‍यु तेरी जय कहाँ रहीं? हे मृत्‍यु तेरा डंक कहाँ रहा?” मृत्‍यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्‍था है। परन्‍तु परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्‍योंकि यह जानते हो, कि तुम्‍हारा परिश्रम प्रभु में व्‍यर्थ नहीं है। अब उस चन्‍दे के विषय में जो पवित्र लोगों के लिये किया जाता है, जैसी आज्ञा मैं ने गलतिया की कलीसियाओं को दी, वैसा ही तुम भी करो। सप्‍ताह के पहले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे, कि मेरे आने पर चन्‍दा न करना पड़े। और जब मैं आऊँगा, तो जिन्‍हें तुम चाहोगे उन्‍हें मैं चिट्ठियाँ देकर भेज दूँगा, कि तुम्‍हारा दान यरूशलेम पहुँचा दें। और यदि मेरा भी जाना उचित हुआ, तो वे मेरे साथ जाएँगे। और मैं मकिदुनिया होकर तुम्‍हारे पास आऊँगा क्योंकि मुझे मकिदुनिया होकर जाना ही है। परन्‍तु सम्‍भव है कि तुम्‍हारे यहाँ ही ठहर जाऊँ और शरद ऋतु तुम्‍हारे यंहा काटूँ, तब जिस ओर मेरा जाना हो, उस ओर तुम मुझे पहुँचा दो। क्‍योंकि मैं अब मार्ग में तुम से भेंट करना नहीं चाहता; परन्‍तु मुझे आशा है, कि यदि प्रभु चाहे तो कुछ समय तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा। परन्‍तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूँगा। क्‍योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं। यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्‍हारे यहाँ निडर रहे; क्‍योंकि वह मेरी नाई प्रभु का काम करता है। इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्‍तु उसे कुशल से इस ओर पहुँचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्‍योंकि मैं उसकी बाट जोह रहा हूँ, कि वह भाइयों के साथ आए। और भाई अपुल्‍लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्‍हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्‍तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्‍छा न की, परन्‍तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा। जागते रहो, विश्‍वास में स्‍थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ। जो कुछ करते हो प्रेम से करो। हे भाइयो, तुम स्‍तिफनास के घराने को जानते हो, कि वे अखया के पहले फल हैं, और पवित्र लोगों की सेवा के लिये तैयार रहते हैं। सो मैं तुम से बिनती करता हूँ कि ऐसों के आधीन रहो, बरन हर एक के जो इस काम में परिश्रमी और सहकर्मी हैं। और मैं स्‍तिफनास और फूरतूनातुस और अखइकुस के आने से आनन्‍दित हूँ, क्‍योंकि उन्होंने तुम्‍हारी घटी को पूरी की है। और उन्होंने मेरी और तुम्‍हारी आत्‍मा को चैन दिया है इसलिये ऐसों को मानो। आसिया की कलीसियाओं की ओर से तुम को नमस्‍कार; अक्विला और प्रिस्का का और उनके घर की कलीसिया का भी तुम को प्रभु में बहुत बहुत नमस्‍कार। सब भाइयों का तुम को नमस्‍कार: पवित्र चुम्‍बन से आपस में नमस्‍कार करो। मुझ पौलुस का अपने हाथ का लिखा हुआ नमस्‍कार: यदि कोई प्रभु से प्रेम न रखे तो वह स्‍त्रापित हो। हमारा प्रभु आनेवाला है। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे। मेरा प्रेम मसीह यीशु में तुम सब से रहे। आमीन। पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्‍थुस में है, और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम: हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हे अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर, और पिता का धन्‍यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्‍वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्‍वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। क्‍योंकि जैसे मसीह के दु:ख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक सहभागी होती है। यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्‍हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्‍हारी शान्‍ति के लिये है; जिसके प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्‍हें हम भी सहते हैं। और हमारी आशा तुम्‍हारे विषय में दृढ़ है; क्‍योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो। हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहाँ तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे। वरन् हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्‍यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन् परमेश्‍वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्‍यु से बचाया, और बचाएगा; और उससे हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा। और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्‍यवाद करें। क्‍योंकि हम अपने विवेक** की इस गवाही पर घमण्‍ड करते हैं, कि जगत में और विशेष करके तुम्‍हारे बीच हमारा चरित्र परमेश्‍वर के योग्‍य ऐसी पवित्रता और सच्‍चाई सहित था, जो शारीरिक ज्ञान से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर के अनुग्रह के साथ था। हम तुम्‍हें और कुछ नहीं लिखते, केवल वह जो तुम पढ़ते या मानते भी हो, और मुझे आशा है, कि अन्‍त तक भी मानते रहोगे। जैसा तुम में से कितनों ने मान लिया है, कि हम तुम्‍हारे घमण्‍ड का कारण है; वैसे तुम भी प्रभु यीशु के दिन हमारे लिये घमण्‍ड का कारण ठहरोगे। और इस भरोसे से मैं चाहता था कि पहले तुम्‍हारे पास आऊँ; कि तुम्‍हें एक और दान मिले। और तुम्‍हारे पास से होकर मकिदुनिया को जाऊँ, और फिर मकिदुनिया से तुम्हारे पास आऊँ और तुम मुझे यहूदिया की ओर कुछ दूर तक पहुँचाओ। इसलिये मैं ने जो यह इच्‍छा की थी तो क्‍या मैं ने चंचलता दिखाई? या जो करना चाहता हूँ क्‍या शरीर के अनुसार करना चाहता हूँ, कि मैं बात में ‘हां, हां’ भी करूँ; और ‘नहीं नहीं’ भी करूँ? परमेश्‍वर सच्‍चा गवाह है, कि हमारे उस वचन में जो तुम से कहा ‘हाँ’ और ‘नहीं’ दोनों पाई नहीं जातीं। क्‍योंकि परमेश्‍वर का पुत्र यीशु मसीह जिसका हमारे द्वारा अर्थात् मेरे और सिलवानुस और तीमुथियुस के द्वारा तुम्‍हारे बीच मे प्रचार हुआ; उसमें ‘हाँ’ और ‘नहीं’ दोनों न थी; परन्‍तु, उसमें ‘हाँ’ ही ‘हाँ’ हुई। क्‍योंकि परमेश्‍वर की जितनी प्रतिज्ञायँ हैं, वे सब उसी में ‘हाँ’ के साथ हैं: इसलिये उसके द्वारा आमीन भी हुई, कि हमारे द्वारा परमेश्‍वर की महिमा हो। और जो हमें तुम्‍हारे साथ मसीह में दृढ़ करता है, और जिस ने हमें अभिषेक किया वही परमेश्‍वर है। जिस ने हम पर छाप भी कर दी है और बयाने में आत्‍मा को हमारे मनों में दिया। मैं परमेश्‍वर को गवाह करता हूँ, कि मै अब तक कुरिन्‍थुस में इसलिये नहीं आया, कि मुझे तुम पर तरस आता था। यह नहीं, कि हम विश्‍वास के विषय में तुम पर प्रभुता जताना चाहते हैं; परन्‍तु तुम्‍हारे आनन्‍द में सहायक हैं क्‍योंकि तुम विश्‍वास ही से स्‍थिर रहते हो। मैंने अपने मन में यही ठान लिया था कि फिर तुम्‍हारे पास उदास होकर न आऊँ। क्‍योंकि यदि मैं तुम्‍हें उदास करूँ, तो मुझे आनन्‍द देनेवाला कौन होगा, केवल वही जिस को मैं ने उदास किया? और मैं ने यही बात तुम्‍हें इसलिये लिखी, कि कहीं ऐसा न हो, कि मेरे आने पर जिन से आनन्‍द मिलना चाहिए, मैं उनसे उदास होऊँ; क्‍योंकि मुझे तुम सब पर इस बात का भरोसा है, कि जो मेरा आनन्‍द है, वही तुम सब का भी है। बड़े क्‍लेश, और मन के कष्‍ट से, मैं ने बहुत से आँसू बहा बहाकर तुम्‍हें लिखा, इसलिये नहीं, कि तुम उदास हो, परन्‍तु इसलिये कि तुम उस बड़े प्रेम को जान लो, जो मुझे तुम से है। और यदि किसी ने उदास किया है, तो मुझे ही नहीं वरन् (कि उसके साथ बहुत कड़ाई न करूँ) कुछ कुछ तुम सब को भी उदास किया है। ऐसे जन के लिये यह दण्‍ड जो भाइयों में से बहुतों ने दिया, बहुत है। इसलिये इस से यह भला है कि उसका अपराध क्षमा करो; और शान्‍ति दो, न हो कि ऐसा मनुष्‍य उदासी में डूब जाए। इस कारण मैं तुम से विनती करता हूँ, कि उसको अपने प्रेम का प्रमाण दो। क्‍योंकि मैं ने इसलिये भी लिखा था, कि तुम्‍हें परख लूँ, कि सब बातों के मानने के लिये तैयार हो, कि नहीं। जिसका तुम कुछ क्षमा करते हो उसे मैं भी क्षमा करता हूँ, क्‍योंकि मैं ने भी जो कुछ क्षमा किया है, यदि किया हो, तो तुम्‍हारे कारण मसीह की जगह में होकर क्षमा किया है। कि शैतान का हम पर दाँव न चले, क्‍योंकि हम उसकी युक्तियो से अनजान नहीं। और जब मैं मसीह का सुसमाचार, सुनाने को त्रोआस में आया, और प्रभु ने मेरे लिये एक द्वार खोल दिया। तो मेरे मन में चैन न मिला, इसलिये कि मैं ने अपने भाई तितुस को नहीं पाया; सो उनसे विदा होकर मैं मकिदुनिया को चला गया। परन्‍तु परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्‍योंकि हम परमेश्‍वर के निकट उद्धार पानेवालों, और नाश होनेवालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं। कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्‍य कौन है? क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्‍वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्‍वर की ओर से परमेश्‍वर को उपस्‍थित जानकर मसीह में बोलते हैं। क्‍या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाई सिफारिश की पत्रियाँ तुम्‍हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं? हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्‍य पहिचानते और पढ़ते है। यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाई लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्‍तु जीवते परमेश्‍वर के आत्‍मा से पत्‍थर की पटियों पर नहीं, परन्‍तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। हम मसीह के द्वारा परमेश्‍वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं। यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्‍य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्‍यता परमेश्‍वर की ओर से है। जिस ने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्‍य भी किया, शब्‍द के सेवक नहीं वरन् आत्‍मा के; क्‍योंकि शब्‍द मारता है, पर आत्‍मा जिलाता है। और यदि मृत्‍यु की यह वाचा जिसके अक्षर पत्‍थरों पर खोदे गए थे, यहाँ तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुँह पर के तेज के कारण जो घटता भी जाता था, इस्राएल उसके मुँह पर दृष्‍टि नहीं कर सकते थे। तो आत्‍मा की वाचा और भी तेजोमय क्‍यों न होगी? क्‍योंकि जब दोषी ठहरानेवाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहरानेवाली वाचा और भी तेजोमय क्‍यों न होगी? और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उससे बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। क्‍योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्‍थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्‍यों न होगा? सो ऐसी आशा रखकर हम हियाव के साथ बोलते हैं। और मूसा की नाईं नहीं, जिस ने अपने मुँह पर परदा डाला था ताकि इस्राएली उस घटनेवाली वस्‍तु के अन्‍त को न देखें। परन्‍तु वे मतिमन्‍द हो गए, क्‍योंकि आज तक पुराने नियम के पढ़ते समय उनके हृदयों पर वही परदा पड़ा रहता है; पर वह मसीह में उठ जाता है। और आज तक जब कभी मूसा की पुस्‍तक पढ़ी जाती है, तो उनके हृदय पर परदा पड़ा रहता है। परन्‍तु जब कभी उन का हृदय प्रभु की ओर फिरेगा, तब वह परदा उठ जाएगा। प्रभु तो आत्‍मा है: और जहाँ कहीं प्रभु का आत्‍मा है वहाँ स्‍वतंत्रता है। परन्‍तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्‍मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते। परन्‍तु हम ने लज्‍जा के गुप्‍त कामों को त्‍याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्‍वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्‍य को प्रगट करके, परमेश्‍वर के साम्‍हने हर एक मनुष्‍य के विवेक- में अपनी भलाई बैठाते हैं। परन्‍तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होनेवालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्‍वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्‍वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्‍वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। क्‍योंकि हम अपने को नहीं, परन्‍तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और उसके विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्‍हारे सेवक हैं। इसलिये कि परमेश्‍वर ही है, जिस ने कहा, “अन्‍धकार में से ज्‍योति चमके,” और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्‍वर की महिमा की पहिचान की ज्‍योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो। परन्‍तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्‍वर ही की ओर से ठहरे। हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्‍यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। हम यीशु की मृत्‍यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। क्‍योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्‍यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। सो मृत्‍यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर। और इसलिये कि हम में वही विश्‍वास की आत्‍मा है, “जिसके विषय में लिखा है, कि मैं ने विश्‍वास किया, इसलिये मैं बोला”। सो हम भी विश्‍वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। क्‍योंकि हम जानते हैं, जिस ने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्‍हारे साथ अपने साम्‍हने उपस्‍थित करेगा। क्‍योंकि सब वस्तुएँ तुम्‍हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक होकर परमेश्‍वर की महिमा के लिये धन्‍यवाद भी बढ़ाए। इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्‍यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्‍यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्‍का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त महिमा उत्‍पन्‍न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्‍योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्‍तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती हैं। क्‍योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्‍वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्‍वर की ओर से स्‍वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्‍तु चिरस्‍थाई है। इस में तो हम कहरते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएँ। और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कहरते रहते हैं; क्‍योंकि हम उतारना नहीं, वरन् और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। और जिस ने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्‍वर है, जिस ने हमें बयाने में आत्‍मा भी दिया है। सो हम सदा ढाढ़स बाँधे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। क्‍योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्‍वास से चलते हैं। इसलिये हम ढाढ़स बाँधे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें। क्‍योंकि अवश्‍य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्‍याय आसन के साम्‍हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों, पाए। सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्‍वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्‍हारे विवेक- पर भी प्रगट हुआ होगा। हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्‍हारे साम्‍हने नहीं करते वरन् हम अपने विषय में तुम्‍हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्‍हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन् दिखावटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं। यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्‍वर के लिये; और यदि चैतन्‍य हैं, तो तुम्‍हारे लिये हैं। क्‍योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएँ परन्‍तु उसके लिये जो उनके लिये मरा और फिर जी उठा। सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। और सब बातें परमेश्‍वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। अर्थात् परमेश्‍वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उनके अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है। सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्‍वर हमारे द्वारा समझात है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्‍वर के साथ मेल मिलाप कर लो। जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्‍वर की धार्मिकता बन जाएँ। और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्‍वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्‍यर्थ न रहने दो। क्‍योंकि वह तो कहता है, “अपनी प्रसन्‍नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैनें तेरी, सहायता की।” देखो; अभी प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है। हम किसी बात में ठोकर खाने का कोई भी अवसर नहीं देते, कि हमारी सेवा पर कोई दोष न आए। परन्‍तु हर बात में परमेश्‍वर के सेवकों की नाई अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्‍लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से, कोड़े खाने से, कैद होने से, हुल्‍लड़ों से, परिश्रम से, जागते रहने से, उपवास करने से, पवित्रता से, ज्ञान से, धीरज से, कृपालुता से, पवित्र आत्‍मा से। सच्‍चे प्रेम से, सत्‍य के वचन से, परमेश्‍वर की सामर्थ से; धार्मिकता के हथियारों से जो दाहिने, बाएँ हैं, आदर और निरादर से, दुरनाम और सुनाम से, यद्यपि भरमानेवालों के ऐसे मालूम होते हैं तौभी सच्‍चे हैं। अनजानों के सदृश्‍य हैं; तौभी प्रसिद्ध हैं; मरते हुओं के ऐसे हैं और देखों जीवित हैं; मारखाने वालों के सदृश हैं परन्‍तु प्राण से मारे नहीं जाते। शोक करनेवालों के समान हैं, परन्‍तु सर्वदा आनन्‍द करते हैं, कंगालों के ऐसे हैं, परन्‍तु बहुतों को धनवान बना देते हैं; ऐसे हैं जैसे हमारे पास कुछ नहीं तौभी सब कुछ रखते हैं। हे कुरिन्‍थियों, हम ने खुलकर तुम से बातें की हैं, हमारा हृदय तुम्‍हारी ओर खुला हुआ है। तुम्‍हारे लिये हमारे मन में कुछ संकोच नहीं, पर तुम्‍हारे ही मनों में संकोच है। पर अपने बच्चे जानकर तुम से कहता हूँ, कि तुम भी उसके बदले में अपना हृदय खोल दो। अविश्‍वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो, क्‍योंकि धार्मिकता और अधर्म का क्‍या मेल जोल? या ज्‍योति और अन्‍धकार की क्‍या संगति? और मसीह का बलियाल के साथ क्‍या लगाव? या विश्‍वासी के साथ अविश्‍वासी का क्‍या नाता? और मूरतों के साथ परमेश्‍वर के मन्‍दिर का क्‍या सम्‍बन्‍ध? क्‍योंकि हम तो जीवते परमेश्‍वर का मन्‍दिर हैं; जैसा परमेश्‍वर ने कहा है “मैं उन में बसूँगा और उन में चला फिरा करूँगा; और मैं उन का परमेश्‍वर हूँगा, और वे मेरे लोग होंगे।” इसलिये प्रभु कहता है, “उनके बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्‍तु को मत छूओ, तो मैं तुम्‍हें ग्रहण करूँगा; और तुम्‍हारा पिता हूँगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियां होगे: यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर का वचन है।” सो हे प्‍यारो जब कि ये प्रतिज्ञाएं हमें मिली हैं, तो आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्‍मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्‍वर का भय रखते हुए पवित्रता को सिद्ध करें। हमें अपने हृदय में जगह दो: हम ने न किसी से अन्‍याय किया, न किसी को बिगाड़ा, और न किसी को ठगा। मैं तुम्‍हें दोषी ठहराने के लिये यह नहीं कहता: क्‍योंकि मैं पहले ही कह चूका हूँ, कि तुम हमारे हृदय में ऐसे बस गए हो कि हम तुम्‍हारे साथ मरने जीने के लिये तैयार हैं। मैं तुम से बहुत हियाव के साथ बोल रहा हूँ, मुझे तुम पर बड़ा घमण्‍ड है: मैं शान्‍ति से भर गया हूँ; अपने सारे क्‍लेश में मैं आनन्‍द से अति भरपूर रहता हूँ। क्‍योंकि जब हम मकिदुनिया में आए, तब भी हमारे शरीर को चैन नहीं मिला, परन्‍तु हम चारों ओर से क्‍लेश पाते थे; बाहर लड़ाइयाँ थीं, भीतर भयंकर बातें थी। तौभी दीनों को शान्‍ति देनेवाले परमेश्‍वर ने तितुस के आने से हम को शान्‍ति दी। और न केवल उसके आने से परन्‍तु उसकी उस शान्‍ति से भी, जो उसको तुम्‍हारी ओर से मिली थी; और उसने तुम्‍हारी लालसा, और तुम्‍हारे दुख और मेरे लिये तुम्‍हारी धुन का समाचार हमें सुनाया, जिस से मुझे और भी आनन्‍द हुआ। क्योंकि यद्यपि मैं ने अपनी पत्री से तुम्‍हें शोकित किया, परन्‍तु उससे पछताता नहीं जैसा कि पहले पछताता था क्‍योंकि मैं देखता हूँ, कि उस पत्री से तुम्‍हें शोक तो हुआ परन्‍तु वह थोड़ी देर के लिये था। अब मैं आनन्‍दित हूँ पर इसलिये नहीं कि तुम को शोक पहुँचा वरन् इसलिये कि तुम ने उस शोक के कारण मन फिराया, क्‍योंकि तुम्‍हारा शोक परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार था, कि हमारी ओर से तुम्‍हें किसी बात में हानि न पहुँचे। क्‍योंकि परमेश्‍वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्‍चाताप उत्‍पन्‍न करता है जिसका परिणाम उद्धार है और फिर उससे पछताना नहीं पड़ता: परन्‍तु संसारी शोक मृत्‍यु उत्‍पन्‍न करता है। सो देखो, इसी बात से कि तुम्‍हें परमेश्‍वर-भक्ति का शोक हुआ तुम में कितनी उत्तेजना और प्रत्‍यत्तर और रिस, और भय, और लालसा, और धुन और पलटा लेने का विचार उत्‍पन्‍न हुआ? तुम ने सब प्रकार से यह सिद्ध कर दिखाया, कि तुम इस बात में निर्दोष हो। फिर मैं ने जो तुम्‍हारे पास लिखा था, वह न तो उसके कारण लिखा, जिस ने अन्‍याय किया, और न उसके कारण जिस पर अन्‍याय किया गया, परन्‍तु इसलिये कि तुम्‍हारी उत्तेजना जो हमारे लिये है, वह परमेश्‍वर के साम्‍हने तुम पर प्रगट हो जाए। इसलिये हमें शान्‍ति हुई; और हमारी इस शान्‍ति के साथ तितुस के आनन्‍द के कारण और भी आनन्‍द हुआ कयोंकि उसका जी तुम सब के कारण हरा भरा हो गया है। क्‍योंकि यदि मैं ने उसके साम्‍हने तुम्‍हारे विषय में कुछ घमण्ड दिखाया, तो लज्‍जित नहीं हुआ, परन्‍तु जैसे हम ने तुम से सब बातें सच सच कह दी थीं, वैसे ही हमारा घमण्‍ड दिखाना तितुस के साम्‍हने भी सच निकला। और जब उसको तुम सब के आज्ञाकारी होने का स्‍मरण आता है, कि क्‍योंकर तुम ने डरते और काँपते हुए उससे भेंट की; तो उसका प्रेम तुम्‍हारी ओर और भी बढ़ता जाता है। मैं आनन्‍द करता हूँ, कि तुम्‍हारी ओर से मुझे हर बात में भरोसा होता है। अब हे भाइयों, हम तुम्‍हें परमेश्‍वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है। कि क्‍लेश की बड़ी परीक्षा में उनके बड़े आनन्‍द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उनकी उदारता बहुत बढ़ गई। और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ भर वरन् सामर्थ से भी बाहर मन से दिया। और इस दान में और पवित्र लोगों की सेवा में भागी होने के अनुग्रह के विषय में हम से बार बार बहुत विनती की। और जैसी हम ने आशा की थी, वैसी ही नहीं, वरन् उन्होंने प्रभु को, फिर परमेश्‍वर की इच्‍छा से हम को भी अपने आपको दे दिया। इसलिये हम ने तितुस को समझाया, कि जैसा उसने पहले आरम्‍भ किया था, वैसा ही तुम्‍हारे बीच में इस दान के काम को पूरा भी कर ले। सो जैसे हर बात में अर्थात् विश्‍वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्‍न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ। मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं, परन्‍तु औरों के उत्‍साह से तुम्‍हारे प्रेम की सच्‍चाई को परखने के लिये कहता हूँ। तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी होकर भी तुम्‍हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ। और इस बात में मेरा विचार यही है: यह तुम्‍हारे लिये अच्‍छा है; जो एक वर्ष से न तो केवल इस काम को करने ही में, परन्‍तु इस बात के चाहने में भी प्रथम हुए थे। इसलिये अब यह काम पूरा करो; कि जिस प्रकार इच्‍छा करने में तुम तैयार थे, वैसा ही अपनी अपनी पूंजी के अनुसार पूरा भी करो। क्योंकि यदि मन की तैयारी हो तो दान उसके अनुसार ग्रहण भी होता है जो उसके पास है न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं। यह नहीं कि औरों को चैन और तुम को क्‍लेश मिले। परन्तु बराबरी के विचार से इस समय तुम्‍हारी बढ़ती उनकी घटी में काम आए, ताकि उनकी बढ़ती भी तुम्‍हारी घटी में काम आए, कि बराबरी हो जाए। जैसा लिखा है, “जिसने बहुत बटोरा उसका कुछ अधिक न निकला और जिस ने थोड़ा बटोरा उसका कुछ कम न निकला।” और परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो, जिसने तुम्‍हारे लिये वही उत्‍साह तीतुस के हृदय में डाल दिया है। कि उसने हमारा समझाना मान लिया वरन् बहुत उत्‍साही होकर वह अपनी इच्‍छा से तुम्‍हारे पास गया है। और हम ने उसके साथ उस भाई को भेजा है जिसका नाम सुसमाचार के विषय में सब कलीसिया में फैला हुआ है; और इतना ही नहीं, परन्‍तु वह कलीसिया से ठहराया भी गया कि इस दान के काम के लिये हमारे साथ जाए और हम यह सेवा इसलिये करते हैं, कि प्रभु की महिमा और हमारे मन की तैयारी प्रगट हो जाए। हम इस बात में चौकस रहते हैं, कि इस उदारता के काम के विषय में जिस की सेवा हम करते हैं, कोई हम पर दोष न लगाने पाए। क्‍येांकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्‍तु मनुष्‍यों के निकट भी भली हैं हम उनकी चिन्‍ता करते हैं। और हम ने उसके साथ अपने भाई को भेजा है, जिस को हमने बार बार परख के बहुत बातों में उत्‍साही पाया है; परन्‍तु अब तुम पर उसको बड़ा भरोसा है, इस कारण वह और भी अधिक उत्‍साही है। यदि कोई तीतुस के विषय में पूछे, तो वह मेरा साथी, और तुम्‍हारे लिये मेरा सहकर्मी है, और यदि हमारे भाइयों के विषय में पूछे, तो वे कलीसियाओं के भेजे हुए और मसीह की महिमा हैं। अत: अपना प्रेम और हमारा वह घमण्‍ड जो तुम्‍हारे विषय में है कलीसियाओं के सामने उन्‍हें सिद्ध करके दिखाओ। अब उस सेवा के विषय में जो पवित्र लोगों के लिये की जाती है, मुझे तुम को लिखना अवश्‍य नहीं। क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे मन की तैयारी को जानता हूँ, जिसके कारण मैं तुम्‍हारे विषय में मकिदुनियों के साम्‍हने घमण्‍ड दिखाता हूँ, कि अखया के लोग एक वर्ष से तैयार हुए हैं, और तुम्हारे उत्‍साह ने और बहुतों को भी उभारा है। परन्‍तु मैं ने भाइयों को इसलिये भेजा है, कि हम ने जो घमण्‍ड तुम्‍हारे विषय में दिखाया, वह इस बात में व्‍यर्थ न ठहरे; परन्‍तु जैसा मैं ने कहा; वैसे ही तुम तैयार हो रहो। ऐसा न हो, कि यदि कोई मकिदुनी मेरे साथ आए, और तुम्‍हें तैयार न पाए, तो क्‍या जानें, इस भरोसे के कारण हम (यह नहीं कहते कि तुम) लज्‍जित हों। इसलिये मैं ने भाइयों से यह विनती करना अवश्‍य समझा कि वे पहले से तुम्‍हारे पास जाएँ, और तुम्‍हारी उदारता का फल जिसके विषय में पहले से वचन दिया गया था, तैयार कर रखें, कि यह दबाव से नहीं परन्‍तु उदारता के फल की नाई तैयार हो। परन्‍तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्‍योंकि परमेश्‍वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है। और परमेश्‍वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्‍हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्‍हें आवश्‍यक हो, तुम्‍हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्‍हारे पास बहुत कुछ हो। जैसा लिखा है, “उसने बिखेरा, उसने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा।” सो जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्‍हें बीज देगा, और उसे फलवन्‍त करेगा; और तुम्‍हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा। कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ। क्‍योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियाँ पूरी होती हैं, परन्‍तु लोगों की ओर से परमेश्‍वर का बहुत धन्‍यवाद होता है। क्‍योंकि इस सेवा से प्रमाण लेकर परमेश्‍वर की महिमा प्रगट करते हैं, कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान कर उसके आधीन रहते हो, और उनकी, और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो। और वे तुम्‍हारे लिये प्रार्थना करते हैं; और इसलिये कि तुम पर परमेश्‍वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्‍हारी लालसा करते रहते हैं। परमेश्‍वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्‍यवाद हो। मैं वही पौलुस जो तुम्‍हारे साम्‍हने दीन हूँ, परन्‍तु पीठ पीछे तुम्‍हारी ओर साहस करता हूँ; तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता के कारण समझाता हूँ। मैं यह विनती करता हूँ, कि तुम्‍हारे साम्‍हने मुझे निर्भय होकर साहस करना न पड़े; जैसा मैं कितनों पर जो हम को शरीर के अनुसार चलनेवाले समझते हैं, वीरता दिखाने का विचार करता हूँ। क्‍योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते। क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्‍वर के द्वारा सामर्थी हैं। सो हम कल्‍पनाओं को, और हर एक ऊँची बात को, जो परमेश्‍वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं। और तैयार रहते हैं कि जब तुम्‍हारा आज्ञा मानना पूरा हो जाए, तो हर एक प्रकार के आज्ञा न मानने का पलटा लें। तुम इन्‍हीं बातों को देखते हो, जो आँखों के सामने हैं, यदि किसी का अपने पर यह भरोसा हो, कि मैं मसीह का हूँ, तो वह यह भी जान ले, कि जैसा वह मसीह का है, वैसे ही हम भी हैं। क्‍योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्‍ड दिखाऊँ, जो प्रभु ने तुम्‍हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्‍जित न हूँगा। यह मैं इसलिये कहता हूँ, कि पत्रियों के द्वारा तुम्‍हें डरानेवाला न ठहरुँ। क्‍योंकि कहते हें, “उसकी पत्रियाँ तो गम्‍भीर और प्रभावशाली हैं; परन्‍तु जब देखते हैं, तो वह देह का निर्बल और वक्‍तव्‍य में हल्‍का जान पड़ता है।” सो जो ऐसा कहता है, कि वह यह समझ रखे, कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्‍हारे साम्‍हने हमारे काम भी होंगे। क्‍योंकि हमें यह हियाव नहीं कि हम अपने आप को उन में से ऐसे कितनों के साथ गिनें, या उनसे अपने को मिलाएँ, जो अपनी प्रशंसा करते हैं, और अपने आप को आपस में नाप तौलकर एक दूसरे से मिलान करके मूर्ख ठहरते हैं। हम तो सीमा से बाहर घमण्‍ड कदापि न करेंगे, परन्‍तु उसी सीमा तक जो परमेश्‍वर ने हमारे लिये ठहरा दी है, और उसमें तुम भी आ गए हो और उसी के अनुसार घमण्‍ड भी करेंगे। क्‍योंकि हम अपनी सीमा से बाहर अपने आप को बढ़ाना नहीं चाहते, जैसे कि तुम तक न पहुँचने की दशा में होता, वरन् मसीह का सुसमाचार सुनाते हुए तुम तक पहुँच चुके हैं। और हम सीमा से बाहर औरों के परिश्रम पर घमण्ड नहीं करते; परन्‍तु हमें आशा है, कि ज्‍यों ज्‍यों तुम्‍हारा विश्‍वास बढ़ता जाएगा त्‍यों त्‍यों हम अपनी सीमा के अनुसार तुम्‍हारे कारण और भी बढ़ते जाएँगे। कि हम तुम्‍हारे सिवानों से आगे बढ़कर सुसमाचार सुनाएँ, और यह नहीं, कि हम औरों की सीमा के भीतर बने बनाए कामों पर घमण्‍ड करें। परन्तु जो घमण्‍ड करे, वह प्रभु पर घमण्‍ड करें। क्‍योंकि जो अपनी बड़ाई करता है, वह नहीं, परन्‍तु जिस की बड़ाई प्रभु करता है, वही ग्रहण किया जाता है। यदि तुम मेरी थोड़ी मूर्खता सह लेते तो क्‍या ही भला होता; हाँ, मेरी सह भी लेते हो। क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे विषय में ईश्‍वरीय धुन लगाए रहता हूँ, इसलिये कि मैं ने एक ही पुरूष से तुम्‍हारी बात लगाई है, कि तुम्‍हें पवित्र कुँवारी की नाई मसीह को सौंप दूँ। परन्‍तु मैं डरता हूँ कि जैसे साँप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्‍हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएँ। यदि कोई तुम्‍हारे पास आकर, किसी दूसरे यीशु को प्रचार करे, जिसका प्रचार हम ने नहीं किया: या कोई और आत्‍मा तुम्‍हें मिले; जो पहले न मिला था; या और कोई सुसमाचार जिसे तुम ने पहले न माना था, तो तुम्‍हारा सहना ठीक होता। मैं तो समझता हूँ, कि मैं किसी बात में बड़े से बड़े प्रेरितों से कम नहीं हूँ। यदि मैं वक्तव्य में अनाड़ी हूँ, तौभी ज्ञान में नहीं; वरन् हम ने इस को हर बात में सब पर तुम्‍हारे लिये प्रगट किया है। क्‍या इस में मैं ने कुछ पाप किया; कि मैं ने तुम्‍हें परमेश्‍वर का सुसमाचार सेंत मेंत सुनाया; और अपने आप को नीचा किया, कि तुम ऊँचे हो जाओ? मैं ने और कलीसियाओं को लूटा अर्थात् मैं ने उनसे मजदूरी ली, ताकि तुम्‍हारी सेवा करूँ। और जब तुम्‍हारे साथ था, और मुझे घटी हुई, तो मैं ने किसी पर भार नहीं दिया, क्‍योंकि भाइयों ने, मकिदुनिया से आकर मेरी घटी को पूरी की: और मैं ने हर बात में अपने आप को तुम पर भार होने से रोका, और रोके रहूँगा। यदि मसीह की सच्‍चाई मुझ में है, तो अखया देश में कोई मुझे इस घमण्‍ड से न रोकेगा। किस लिये? क्‍या इसलिये कि मैं तुम से प्रेम नहीं रखता? परमेश्‍वर यह जानता है। परन्‍तु जो मैं करता हूँ, वही करता रहूँगा; कि जो लोग दाँव ढूँढ़ते हैं, उन्‍हें मैं दाँव पाने दूं, ताकि जिस बात में वे घमण्‍ड करते हैं, उसमें वे हमारे ही समान ठहरें। क्‍योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, और छल से काम करनेवाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरनेवाले हैं। और यह कुछ अचम्‍भे की बात नहीं क्‍योंकि शैतान आप भी ज्‍योतिमर्य स्‍वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्‍तु उन का अन्‍त उनके कामों के अनुसार होगा। मैं फिर कहता हूँ, कोई मुझे मूर्ख न समझे; नहीं तो मूर्ख ही समझकर मेरी सह लो, ताकि थोड़ा सा मैं भी घमण्‍ड न कर सँकू। इस बेधड़क घमण्‍ड से बोलने में जो कुछ मैं कहता हूँ वह प्रभू की आज्ञा के अनुसार** नहीं पर मानों मूर्खता से ही कहता हूँ। जब कि बहुत लोग शरीर के अनुसार घमण्‍ड करते हैं, तो मैं भी घमण्‍ड करूँगा। तुम तो समझदार होकर आनन्‍द से मूर्खों की सह लेते हो। क्‍येांकि जब तुम्‍हें कोई दास बना लेता है, या खा जाता है, या फँसा लेता है, या अपने आप को बड़ा बनाता है, या तुम्‍हारे मुँह पर थप्‍पड़ मारता है, तो तुम सह लेते हो। मेरा कहना अनादर की रीति पर है, मानो कि हम निर्बल से थे; परन्‍तु जिस किसी बात में कोई हियाव करता है (मैं मूर्खता से कहता हूँ) तो मैं भी हियाव करता हूँ। क्‍या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूँ: क्‍या वे ही इस्राएली हैं? मैं भी हूँ; क्‍या वे ही अब्राहम के वंश के हैं? मैं भी हूँ: क्‍या वे ही मसीह के सेवक हैं? (मैं पागल की नाई कहता हूँ) मैं उनसे बढ़कर हूँ! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्‍यु के जोखिमों में। पाँच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। तीन बार मैं ने बेंते खाई; एक बार पत्‍थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जातिवालों से जोखिमों में; अन्‍यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में रहा; परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। और अन्य बातों को छोड़कर जिनका वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रतिदिन मुझे दबाती है। किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? यदि घमण्‍ड करना अवश्‍य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूँगा। प्रभु यीशु का परमेश्‍वर और पिता जो सदा धन्‍य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। दमिश्‍क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। और मैं टोकरे में खिड़की से होकर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला। यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूँगा। मैं मसीह में एक मनुष्‍य को जानता हूँ, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देहसहित, न जाने देहरहित, परमेश्‍वर जानता है, ऐसा मनुष्‍य तीसरे स्‍वर्ग तक उठा लिया गया। मैं ऐसे मनुष्‍य को जानता हूँ न जाने देहसहित, न जाने देहरहित परमेश्‍वर ही जानता है। कि स्‍वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और ऐसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिनका मुँह में लाना मनुष्‍य को उचित नहीं। ऐसे मनुष्‍य पर तो मैं घमण्‍ड करूँगा, परन्‍तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूँगा। क्‍योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूँ भी तो मूंर्ख न हूँगा, क्‍योंकि सच बोलुँगा; तौभी रूक जाता हूँ, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उससे बढ़कर समझे। और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊँ, मेरे शरीर में एक काँटा चुभाया गया अर्थात् शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊँ। इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार विनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। और उसने मुझ से कहा, “मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है।” इसलिये मैं बड़े आनन्‍द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूँगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्‍न हूँ; क्‍योंकि जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी बलवन्‍त होता हूँ। मैं मूर्ख तो बना, परन्‍तु तुम ही ने मुझ से यह बरबस करवाया: तुम्‍हें तो मेरी प्रशंसा करनी चाहिए थी, क्‍योंकि यद्यपि मैं कुछ भी नहीं, तौभी उन बड़े से बड़े प्रेरितों से किसी बात में कम नहीं हूँ। प्रेरित के लक्षण भी तुम्‍हारे बीच सब प्रकार के धीरज सहित चिन्‍हों, और अद्भुत कामों, और सामर्थ के कामों से दिखाए गए। तुम कौन सी बात में और कलीसियाओं से कम थे, केवल इस में कि मैं ने तुम पर अपना भार न रखा: मेरा यह अन्‍याय क्षमा करो। देखो, मैं तीसरी बार तुम्‍हारे पास आने को तैयार हूँ, और मैं तुम पर कोई भार न रखूंगा; क्‍योंकि मैं तुम्‍हारी सम्‍पत्ति नहीं, वरन् तुम ही को चाहता हूँ: क्‍योंकि बच्चों को माता-पिता के लिये धन बटोरना न चाहिए, पर माता-पिता को बच्चों के लिये। मैं तुम्‍हारी आत्‍माओं के लिये बहुत आनन्‍द से खर्च करूँगा, वरन् आप भी खर्च हो जाऊंगा: क्‍या जितना बढ़कर मैं तुम से प्रेम रखता हूँ, उतना ही घटकर तुम मुझ से प्रेम रखोगे? ऐसा हो सकता है, कि मैं ने तुम पर बोझ नहीं डाला, परन्‍तु चतुराई से तुम्‍हें धोखा देकर फ़ँसा लिया। भला, जिन्‍हें मैं ने तुम्‍हारे पास भेजा, क्‍या उन में से किसी के द्वारा मैं ने छल करके तुम से कुछ ले लिया? मै ने तितुस को समझाकर उसके साथ उस भाई को भेजा, तो क्‍या तीतुस ने छल करके तुम से कुछ लिया? क्‍या हम एक ही आत्‍मा के चलाए न चले? क्‍या एक ही लीक पर न चले? तुम अभी तक समझ रहे होगे कि हम तुम्‍हारे सामने प्रत्‍युत्तर दे रहे हैं, हम तो परमेश्‍वर को उपस्‍थित जानकर मसीह में बोलते हैं, और हे प्रियों, सब बातें तुम्‍हारी उन्‍नति ही के लिये कहते हैं। क्‍योंकि मुझे डर है, कहीं ऐसा न हो, कि मैं आकर जैसा चाहता हूँ, वैसा तुम्‍हें न पाऊँ; और मुझे भी जैसा तुम नहीं चाहते वैसा ही पाओ, कि तुम में झगड़ा, डाह, क्रोध, विरोध, ईर्ष्या, चुगली, अभिमान और बखेड़े हों। और मेरा परमेश्‍वर कहीं मेरे फिर से तुम्‍हारे यहाँ आने पर मुझ पर दबाव डाले और मुझे बहुतों के लिये फिर शोक करना पड़े, जिन्‍हों ने पहले पाप किया था, और उस गन्‍दे काम, और व्‍यभिचार, और लुचपन से, जो उन्होंने किया, मन नहीं फिराया। अब तीसरी बार तुम्‍हारे पास आता हूँ: दो या तीन गवाहों के मुँह से हर एक बात ठहराई जाएगी। जैसे मैं जब दूसरी बार तुम्‍हारे साथ था, सो वैसे ही अब दूर रहते हुए उन लोगों से जिन्‍हों ने पहले पाप किया, और और सब लोगों से अब पहले से कहे देता हूँ, कि यदि मैं फिर आऊँगा, तो नहीं छोडूँगा। तुम तो इस का प्रमाण चाहते हो, कि मसीह मुझ में बोलता है, जो तुम्‍हारे लिये निर्बल नहीं; परन्‍तु तुम में सामर्थी है। वह निर्बलता के कारण क्रूस पर चढ़ाया तो गया, तौभी परमेश्‍वर की सामर्थ से जीवित है, हम भी तो उसमें निर्बल हैं; परन्‍तु परमेश्‍वर की सामर्थ से जो तुम्‍हारे लिये है, उसके साथ जीएँगे। अपने प्राण को परखो, कि विश्‍वास में हो कि नहीं; अपने आप को जाँचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्‍मे निकले हो। पर मेरी आशा है, कि तुम जान लोगे, कि हम निकम्‍मे नहीं। और हम अपने परमेश्‍वर से प्रार्थना करते हैं, कि तुम कोई बुराई न करो; इसलिये नही, कि हम खरे देख पड़ें, पर इसलिये कि तुम भलाई करो, चाहे हम निकम्‍मे ही ठहरें। क्‍योंकि हम सत्‍य के विरोध में कुछ नहीं कर सकते, पर सत्‍य के लिये कर सकते हैं। जब हम निर्बल हैं, और तुम बलवन्‍त हो, तो हम आनन्‍दित होते हैं, और यह प्रार्थना भी करते हैं, कि तुम सिद्ध हो जाओ। इस कारण मैं तुम्‍हारे पीठ पीछे ये बातें लिखता हूँ, कि उपस्‍थित होकर मुझे उस अधिकार के अनुसार जिसे प्रभु ने बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये मुझे दिया है, कड़ाई से कुछ करना न पडे। निदान, हे भाइयो, आनन्‍दित रहो; सिद्ध बनते जाओ; ढाढ़स रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो, और प्रेम और शान्‍ति का दाता परमेश्‍वर तुम्‍हारे साथ होगा। एक दूसरे को पवित्र चुम्‍बन से नमस्‍कार करो। सब पवित्र लोग तुम्‍हें नमस्‍कार करते हैं। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्‍वर का प्रेम और पवित्र आत्‍मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे। पौलुस की, जो न मनुष्‍यों की ओर से, और न मनुष्‍य के द्वारा, वरन् यीशु मसीह और परमेश्‍वर पिता के द्वारा, जिस ने मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है। और सारे भाइयों की ओर से, जो मेरे साथ हैं; गलातिया की कलीसियाओं के नाम। परमेश्‍वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्‍वर और पिता की इच्‍छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। उसकी स्‍तुति और बड़ाई। युगानुयुग होती रहे। आमीन। मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्‍हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उससे तुम इतनी जल्‍दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्‍हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्‍हें सुनाए, तो स्रापित हो। जैसा हम पहले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूँ, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्‍यों को मानता हूँ या परमेश्‍वर को? क्‍या मैं मनुष्‍यों को प्रसन्‍न करना चाहता हूँ? यदि मैं अब तक मनुष्‍यों को ही प्रसन्‍न करता रहता, तो मसीह का दास न होता। हे भाइयो, मैं तुम्‍हें जताए देता हूँ, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्‍य का नहीं। क्‍योंकि वह मुझे मनुष्‍य की ओर से नहीं पहुँचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला। यहूदी मत में जो पहले मेरा चाल चलन था, तुम सुन चुके हो; कि मैं परमेश्‍वर की कलीसिया को बहुत ही सताता और नाश करता था। और अपने बहुत से जातिवालों से जो मेरी अवस्‍था के थे यहूदी मत में बढ़ता जाता था और अपने बापदादों के व्‍यवहारों में बहुत ही उत्तेजित था। परन्‍तु परमेश्‍वर की, जिस ने मेरी माता के गर्भ ही से मुझे ठहराया और अपने अनुग्रह से बुला लिया, जब इच्‍छा हुई, कि मुझ में अपने पुत्र को प्रगट करे कि मैं अन्‍यजातियों में उसका सुसमाचार सुनाऊँ; तो न मैं ने मांस और लोहू से सलाह ली; और न यरूशलेम को उनके पास गया जो मुझ से पहले प्रेरित थे, पर तुरन्‍त अरब को चला गया: और फिर वहाँ से दमिश्‍क को लौट आया। फिर तीन बरस के बाद मैं कैफा से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्‍द्रह दिन तक रहा। परन्‍तु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ और प्रेरितों में से किसी से न मिला। जो बातें मैं तुम्‍हें लिखता हूँ, देखो परमेश्‍वर को उपस्‍थित जानकर कहता हूँ, कि वे झूठी नहीं। इस के बाद मैं सूरिया और किलिकिया के देशों में आया। परन्‍तु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में थी, मेरा मुहँ तो कभी नहीं देखा था। परन्‍तु यही सुना करती थीं, कि जो हमें पहले सताता था, वह अब उसी धर्म का सुसमाचार सुनाता है, जिसे पहले नाश करता था। और मेरे विषय में परमेश्‍वर की महिमा करती थीं। चौदह वर्ष के बाद मैं वरनबास के साथ यरूशलेम को गया और तितुस को भी साथ ले गया। और मेरा जाना ईश्‍वरीय प्रकाश के अनुसार हुआ: और जो सुसमाचार मैं अन्‍यजातियों में प्रचार करता हूँ, उसको मैं ने उन्‍हें बता दिया, पर एकान्‍त में उन्‍हीं को जो बड़े समझे जाते थे, ताकि ऐसा न हो, कि मेरी इस समय की, या अगली दौड़ धूप व्‍यर्थ ठहरे। परन्‍तु तितुस भी जो मेरे साथ था और जो यूनानी है; खतना कराने के लिये विवश नहीं किया गया। और यह उन झूठे भाइयों के कारण हुआ, जो चोरी से घुस आए थे, कि उस स्‍वतंत्रता का जो मसीह यीशु में हमें मिली है, भेद लेकर हमें दास बनाएँ। उनके आधीन होना हम ने एक घड़ी भर न माना, इसलिये कि सुसमाचार की सच्‍चाई तुम में बनी रहे। फिर जो लोग कुछ समझे जाते थे (वे चाहे कैसे ही थे, मुझे इस से कुछ काम नहीं, परमेश्‍वर किसी का पक्षपात नहीं करता) उनसे जो कुछ भी समझे जाते थे, मुझे कुछ भी नहीं प्राप्‍त हुआ। परन्‍तु इसके विपरीत जब उन्होंने देखा, कि जैसा खतना किए हुए लोगों के लिये सुसमाचार का काम पतरस को सौंपा गया वैसा ही खतनारहितों के लिये मुझे सुसमाचार सुनाना सौंपा गया। (क्‍योंकि जिस ने पतरस से खतना किए हुओं में प्रेरिताई का कार्य बड़े प्रभाव सहित करवाया, उसी ने मुझ से भी अन्‍यजातियों में प्रभावशाली कार्य करवाया) और जब उन्होंने उस अनुग्रह को जो मुझे मिला था जान लिया, तो याकूब, और कैफा, और यूहन्‍ना ने जो कलीसिया के खम्‍भे समझे जाते थे, मुझ को और वरनबास को दहिना हाथ देकर संग कर लिया, कि हम अन्‍यजातियों के पास जाएँ, और वे खतना किए हुओं के पास। केवल यह कहा, कि हम कंगालों की सुधि लें, और इसी काम के करने का मैं आप भी यत्‍न कर रहा था। पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुँह पर उसका साम्‍हना किया, क्‍योंकि वह दोषी ठहरा था। इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहले वह अन्‍यजातियों के साथ खाया करता था, परन्‍तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उनसे हट गया और किनारा करने लगा। और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहाँ तक कि वरनबास भी उनके कपट में पड़ गया। पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्‍चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के साम्‍हने कैफा से कहा, “जब तू यहूदी होकर अन्‍यजातियों की नाई चलता है, और यहूदियों की नाईं नहीं तो तू अन्‍यजातियों को यहूदियों की नाईं चलने को क्‍यों कहता है?” हम जो जन्‍म के यहूदी हैं, और पापी अन्‍यजातियों में से नहीं। तौभी यह जानकर कि मनुष्‍य व्‍यवस्‍था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्‍वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्‍वास किया, कि हम व्‍यवस्‍था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्‍वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्‍यवस्‍था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा। हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्‍या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं! क्‍योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूँ, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूँ। मैं जो व्‍यवस्‍था के द्वारा व्‍यवस्‍था के लिये मर गया, कि परमेश्‍वर के लिये जीऊँ। मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल उस विश्‍वास से जीवित हूँ, जो परमेश्‍वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। मैं परमेश्‍वर के अनुग्रह को व्‍यर्थ नहीं ठहराता, क्‍योंकि यदि व्‍यवस्‍था के द्वारा धार्मिकता होती, तो मसीह का मरना व्‍यर्थ होता। हे निर्बुद्धि गलतियों, किस ने तुम्‍हें मोह लिया? तुम्‍हारी तो मानों आँखों के साम्‍हने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया! मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूँ, कि तुम ने आत्‍मा को, क्‍या व्‍यवस्‍था के कामों से, या विश्‍वास के समाचार से पाया? क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्‍मा की रीति पर आरम्‍भ करके अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे? क्‍या तुम ने इतना दुख योंही उठाया? परन्‍तु कदाचित व्‍यर्थ नहीं। सो जो तुम्‍हें आत्‍मा दान करता और तुम में सामर्थ के काम करता है, वह क्‍या व्‍यवस्‍था के कामों से या विश्‍वास के सुसमाचार से ऐसा करता है? “अब्राहम ने तो परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया और यह उसके लिये धार्मिकता गिनी गई।” तो यह जान लो, कि जो विश्‍वास करनेवाले हैं, वे ही अब्राहम की सन्‍तान हैं। और पवित्रशास्‍त्र ने पहले ही से यह जानकर, कि परमेश्‍वर अन्‍यजातियों को विश्‍वास से धर्मी ठहराएगा, पहले ही से अब्राहम को यह सुसमाचार सुना दिया, कि “तुझ में सब जातिएँ आशीष पाएँगी।” तो जो विश्‍वास करनेवाले हैं, वे विश्‍वासी अब्राहम के साथ आशीष पाते हैं। सो जितने लोग व्‍यवस्‍था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब स्राप के आधीन हैं, क्‍योंकि लिखा है, “जो कोई व्‍यवस्‍था की पुस्‍तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्‍थिर नहीं रहता, वह स्‍त्रापित है।” पर यह बात प्रगट है, कि व्‍यवस्‍था के द्वारा परमेश्‍वर के यहाँ कोई धर्मी नहीं ठहरता क्‍योंकि धर्मी जन विश्‍वास से जीवित रहेगा। पर व्‍यवस्‍था का विश्‍वास से कुछ सम्‍बन्‍ध नहीं; पर “जो उनको मानेगा, वह उनके कारण जीवित रहेगा।” मसीह ने जो हमारे लिये श्रापित बना, हमें मोल लेकर व्‍यवस्‍था के श्राप से छुड़ाया क्‍योंकि लिखा है, “जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह श्रापित है।” यह इसलिये हुआ, कि इब्राहिम की आशीष मसीह यीशु में अन्‍यजातियों तक पहुँचे, और हम विश्‍वास के द्वारा उस आत्‍मा को प्राप्‍त करें, जिस की प्रतिज्ञा हुई है। हे भाइयों, मैं मनुष्‍य की रीति पर कहता हूँ, कि मनुष्‍य की वाचा भी जो पक्‍की हो जाती है, तो न कोई उसे टालता है और न उसमें कुछ बढ़ाता है। निदान, प्रतिज्ञाएँ अब्राहम को, और उसके वंश को दी गईं; वह यह नहीं कहता, “वशों को,” जैसे बहुतों के विषय में कहा, पर जैसे एक के विषय में कि “तेरे वंश को” और वह मसीह है। पर मैं यह कहता हूँ कि जो वाचा परमेश्‍वर ने पहले से पक्‍की की थी, उसको व्‍यवस्‍था चार सौ तीस बरस के बाद आकर नहीं टाल देती, कि प्रतिज्ञा व्‍यर्थ ठहरे। क्‍योंकि यदि मीरास व्‍यवस्‍था से मिली है, तो फिर प्रतिज्ञा से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर ने अब्राहम को प्रतिज्ञा के द्वारा दे दी है। तब फिर व्‍यवस्‍था क्‍या रही? वह तो अपराधों के कारण बाद में दी गई, कि उस वंश के आने तक रहे, जिस को प्रतिज्ञा दी गई थी, और वह स्‍वर्गदूतों के द्वारा एक मध्‍यस्‍थ के हाथ ठहराई गई। मध्‍यस्‍थ तो एक का नहीं होता, परन्‍तु परमेश्‍वर एक ही है। तो क्‍या व्‍यवस्‍था परमेश्‍वर की प्रतिज्ञाओं के विरोध में है? कदापि नहीं? क्‍योंकि यदि ऐसी व्‍यवस्‍था दी जाती जो जीवन दे सकती, तो सचमुच धार्मिकता व्‍यवस्‍था से होती। परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र ने सब को पाप के आधीन कर दिया, ताकि वह प्रतिज्ञा जिसका आधार यीशु मसीह पर विश्‍वास करना है, विश्‍वास करनेवालों के लिये पूरी हो जाए। पर विश्‍वास के आने से पहले व्‍यवस्‍था की अधीनता में हमारी रखवाली होती थी, और उस विश्‍वास के आने तक जो प्रगट होनेवाला था, हम उसी के बन्‍धन में रहे। इसलिये व्‍यवस्‍था मसीह तक पहुँचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्‍वास से धर्मी ठहरें। परन्‍तु जब विश्‍वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के आधीन न रहे। क्‍योंकि तुम सब उस विश्‍वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्‍वर की सन्‍तान हो। और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्‍मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्‍योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। और यदि तुम मसीह के हो, तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो। मैं यह कहता हूँ, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उसमें और दास में कुछ भेद नहीं। परन्‍तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में होकर दास बने हुए थे। परन्‍तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्‍त्री से जन्‍मा, और व्‍यवस्‍था के आधीन उत्‍पन्‍न हुआ। ताकि व्‍यवस्‍था के आधीनों को मोल लेकर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के आत्‍मा को, जो ‘हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारता है,’ हमारे हृदय में भेजा है। इसलिये तू अब दास नहीं, परन्‍तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्‍वर के द्वारा वारिस भी हुआ। भला, तब तो तुम परमेश्‍वर को न जानकर उनके दास थे जो स्‍वभाव से परमेश्‍वर नहीं। पर अब जो तुम ने परमेश्‍वर को पहचान लिया वरन् परमेश्‍वर ने तुम केा पहचाना, तो उन निर्बल और निकम्‍मी आदि-शिक्षा की बातों की ओर क्‍यों फिरते हो, जिन के तुम दोबारा दास होना चाहते हो? तुम दिनों और महीनों और नियत समयों और वर्षों को मानते हो। मैं तुम्‍हारे विषय में डरता हूँ, कहीं ऐसा न हो, कि जो परिश्रम मैं ने तुम्‍हारे लिये किया है व्‍यर्थ ठहरे। हे भाइयों, मैं तुम से बिनती करता हूँ, तुम मेरे समान हो जाओ: क्‍योंकि मैं भी तुम्‍हारे समान हुआ हूँ; तुम ने मेरा कुछ बिगाड़ा नहीं। पर तुम जानते हो, कि पहले पहिल मैं ने शरीर की निर्बलता के कारण तुम्‍हें सुसमाचार सुनाया। और तुम ने मेरी शारीरिक दशा को जो तुम्‍हारी परीक्षा का कारण थी, तुच्‍छ न जाना; न उसने घृणा की; और परमेश्‍वर के दूत वरन् मसीह के समान मुझे ग्रहण किया। तो वह तुम्‍हारा आनन्‍द मनाना कहां गया? मैं तुम्‍हारा गवाह हूँ, कि यदि हो सकता, तो तुम अपनी आँखें भी निकालकर मुझे दे देते। तो क्‍या तुम से सच बोलने के कारण मैं तुम्‍हारा बैरी हो गया हूँ। वे तुम्‍हें मित्र बनाना तो चाहते हैं, पर भली मनसा से नहीं; वरन् तुम्‍हें अलग करना चाहते हैं, कि तुम उन्‍हीं को मित्र बना लो। पर यह भी अच्‍छा है, कि भली बात में हर समय मित्र बनाने का यत्‍न किया जाए, न केवल उसी समय, कि जब मैं तुम्‍हारे साथ रहता हूँ। हे मेरे बालकों, जब तक तुम में मसीह का रूप न बन जाए, तब तक मैं तुम्‍हारे लिये फिर जच्‍चा की सी पीड़ाएँ सहता हूँ। इच्‍छा तो यह होती है, कि अब तुम्‍हारे पास आकर और ही प्रकार से बोलूँ, क्‍योंकि तुम्‍हारे विषय में मुझे सन्‍देह है। तुम जो व्‍यवस्‍था के आधीन होना चाहते हो, मुझ से कहो, क्‍या तुम व्‍यवस्‍था की नहीं सुनते? यह लिखा है, कि अब्राहम के दो पुत्र हुए; एक दासी से, और एक स्‍वतंत्र स्‍त्री से। परन्‍तु जो दासी से हुआ, वह शारीरिक रीति से जन्‍मा, और जो स्‍वतंत्र स्‍त्री से हुआ, वह प्रतिज्ञा के अनुसार जन्‍मा। इन बातों में दृष्‍टान्‍त है, ये स्‍त्रियाँ मानों दो वाचाएँ हैं, एक तो सीना पहाड़ की जिस से दास ही उत्‍पन्‍न होते हैं; और वह हाजिरा है। और हाजिरा मानो अरब का सीना पहाड़ है, और आधुनिक यरूशलेम उसके तुल्‍य है, क्‍योंकि वह अपने बालकों समेत दासत्‍व में है। पर ऊपर की यरूशलेम स्‍वतंत्र है, और वह हमारी माता है। क्‍योंकि लिखा है, “हे बांझ, तू जो नहीं जनती आनन्‍द कर, तु जिस को पीड़ाएँ नहीं उठतीं गला खोलकर जय जयकार कर, क्‍योंकि त्‍यागी हुई की सन्‍तान सुहागिन की सन्‍तान से भी अधिक है।” हे भाइयो, हम इसहाक की नाईं प्रतिज्ञा की सन्‍तान हैं। और जैसा उस समय शरीर के अनुसार जन्‍मा हुआ आत्‍मा के अनुसार जन्‍मे हुए को सताता था, वैसा ही अब भी होता है। परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र क्‍या कहता है? “दासी और उसके पुत्र को निकाल दे, क्‍योंकि दासी का पुत्र स्‍वतंत्र स्‍त्री के पुत्र के साथ उत्तराधिकारी नहीं होगा।” इसलिये हे भाइयों, हम दासी के नहीं परन्‍तु स्‍वतंत्र स्‍त्री के सन्‍तान हैं। मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्‍थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो। देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूँ, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्‍हें कुछ लाभ न होगा। फिर भी मैं हर एक खतना करानेवाले को जताए देता हूँ, कि उसे सारी व्‍यवस्‍था माननी पड़ेगी। तुम जो व्‍यवस्‍था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो। क्‍योंकि आत्‍मा के कारण, हम विश्‍वास से, आशा की हुई धार्मिकता की बाट जोहते हैं। और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारहित कुछ काम का है, परन्‍तु केवल विश्‍वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। तुम तो भली भाँति दौड रहे थे, अब किस ने तुम्‍हें रोक दिया, कि सत्‍य को न मानो। ऐसी सीख तुम्‍हारे बुलानेवाले की ओर से नहीं। थोड़ा सा खमीर सारे गूँधे हुए आटे को खमीर कर डालता है। मैं प्रभु पर तुम्‍हारे विषय में भरोसा रखता हूँ, कि तुम्‍हारा कोई दूसरा विचार न होगा; परन्‍तु जो तुम्‍हें घबरा देता है, वह कोई क्‍यों न हो दण्‍ड पाएगा। परन्‍तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूँ, तो क्‍यों अब तक सताया जाता हूँ; फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही। भला होता, कि जो तुम्‍हें डाँवाँडोल करते हैं, वे अपना अंग ही काट डालते! हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्‍तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन् प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। क्‍योंकि सारी व्‍यवस्‍था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।” पर यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्‍यानाश न कर दो। पर मैं कहता हूँ, आत्‍मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। क्‍योंकि शरीर आत्‍मा के विरोध में और आत्‍मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। और यदि तुम आत्‍मा के चलाए चलते हो तो व्‍यवस्‍था के आधीन न रहे। शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात् व्‍यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन। मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। डाह, मलवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहले से कह देता हूँ जैसा पहले कह भी चुका हूँ, कि ऐसे ऐसे काम करनेवाले परमेश्‍वर के राज्‍य के वारिस न होंगे। पर आत्‍मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्‍वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्‍यवस्‍था नहीं। और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है। यदि हम आत्‍मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्‍मा के अनुसार चलें भी। हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें। हे भाइयों, यदि कोई मनुष्‍य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्‍मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्‍यवस्‍था को पूरी करो। क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। पर हर एक अपने ही काम को जाँच ले, और तक दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा। जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्‍छी वस्‍तुओं में सिखानेवाले को भागी करे। धोखा न खाओ, परमेश्‍वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्‍य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। क्‍योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्‍मा के लिये बोता है, वह आत्‍मा के द्वारा अनन्‍त जीवन की कटनी काटेगा। हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्‍योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष करके विश्‍वासी भाइयों के साथ। देखो, मैं ने कैसे बड़े बड़े अक्षरों में तुम को अपने हाथ से लिखा है। जितने लोग शरीरिक दिखावा चाहते हैं वे तुम्‍हारे खतना करवाने के लिये दबाव देते हैं, केवल इसलिये कि वे मसीह के क्रूस के कारण सताए न जाएँ। क्‍योंकि खतना करानेवाले आप तो, व्‍यवस्‍था पर नहीं चलते, पर तुम्‍हारा खतना कराना इसलिये चाहते हैं, कि तुम्‍हारी शारीरिक दशा पर घमण्‍ड करें। पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्‍ड करूँ, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिसके द्वारा संसार मेरी दृष्‍टि में और मैं संसार की दृष्‍टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ। क्‍योंकि न खतना, और न खतनारहित कुछ है, परन्‍तु नई सृष्‍टि। और जितने इस नियम पर चलेंगे उन पर, और परमेश्‍वर के इस्राएल पर, शान्‍ति और दया होती रहे। आगे को कोई मुझे दुख न दे, क्‍योंकि मैं यीशु के दागों को अपनी देह में लिये फिरता हूँ। हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्‍हारी आत्‍मा के साथ रहे। आमीन। पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से यीशु मसीह का प्रेरित है, उन पवित्र और मसीह यीशु में विश्‍वासी लोगों के नाम जो इफिसुस में हैं, हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर और पिता का धन्‍यवाद हो कि उसने हमें मसीह में स्‍वर्गीय स्‍थानों में सब प्रकार की आशीष दी है। जैसा उसने हमें जगत की उत्‍पति से पहले उसमें चुन लिया कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। और अपनी इच्‍छा के भले अभिप्राय के अनुसार हमें अपने लिये पहले से ठहराया कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्‍तुति हो, जिसे उसने हमें उस प्यार में सेंत-मेंत दिया। हम को उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है, जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया। क्योंकि उसने अपनी इच्‍छा का भेद उस भले अभिप्राय के अनुसार हमें बताया, जिसे उसने अपने आप में ठान लिया था। कि समयों के पूरे होने का ऐसा प्रबन्‍ध हो कि जो कुछ स्‍वर्ग में है, और जो कुछ पृथ्‍वी पर है, सब कुछ वह मसीह में एकत्र करे। उसी में जिसमें हम भी उसी की मनसा से जो अपनी इच्‍छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है, पहले से ठहराए जाकर मीरास बने। कि हम जिन्‍होंने पहले से मसीह पर आशा रखी थी, उसकी महिमा की स्‍तुति के कारण हों। और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्‍य का वचन सुना, जो तुम्‍हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुमने विश्‍वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्‍मा की छाप लगी। वह उसके मोल लिए हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उसकी महिमा की स्‍तुति हो। इस कारण, मैं भी उस विश्‍वास का समाचार सुनकर जो तुम लोगों में प्रभु यीशु पर है और सब पवित्र लोगों पर प्रगट है, तुम्‍हारे लिये धन्‍यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्‍हें स्‍मरण किया करता हूँ। कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्‍वर जो महिमा का पिता है, तुम्‍हें अपनी पहचान में ज्ञान और प्रकाश का आत्‍मा दे। और तुम्‍हारे मन की आँखें ज्‍योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उसकी मीरास की महिमा का धन कैसा है। और उसकी सामर्थ्य हमारी ओर जो विश्‍वास करते हैं, कितनी महान है, उसकी शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार। जो उसने मसीह के विषय में किया, कि उसको मरे हुओं में से जिलाकर स्‍वर्गीय स्‍थानों में अपनी दाहिनी ओर, सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ्य, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आनेवाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया; और सब कुछ उसके पाँवों तले कर दिया और उसे सब वस्‍तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया, यह उसकी देह है, और उसी की परिपूर्णता है, जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है। और उसने तुम्‍हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। जिनमें तुम पहले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात् उस आत्‍मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न माननेवालों में कार्य करता है। इनमें हम भी सब के सब पहले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएँ पूरी करते थे, और अन्य लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्‍तान थे। परन्‍तु परमेश्‍वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण जिससे उसने हम से प्रेम किया, जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्‍हारा उद्धार हुआ है), और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्‍थानों में उसके साथ बैठाया। कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आनेवाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। क्‍योंकि विश्‍वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्‍हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्‍हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्‍वर का दान है; और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्‍वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किया। इस कारण स्‍मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्‍यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतनावाले कहलाते हैं, वे तुम को खतनारहित कहते हैं), तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्‍वररहित थे। पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहले दूर थे, मसीह के लहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्‍योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करनेवाले दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। और अपने शरीर में बैर अर्थात् वह व्‍यवस्‍था जिस की आज्ञएँ विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्‍य उत्‍पन्‍न करके मेल करा दे, और क्रूस पर बैर को नाश करके इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्‍वर से मिलाए। और उसने आकर तुम्‍हें जो दूर थे, और उन्‍हें जो निकट थे, दोनों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। क्‍योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्‍मा में पिता के पास पहुँच होती है। इसलिये तुम अब परदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्‍तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्‍वर के घराने के हो गए। और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर जिसके कोने का पत्‍थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिसमें सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्‍दिर बनती जाती है, जिसमें तुम भी आत्‍मा के द्वारा परमेश्‍वर का निवासस्‍थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो। इसी कारण मैं पौलुस जो तुम अन्‍यजातियों के लिये मसीह यीशु का बन्दी हूँ — यदि तुमने परमेश्‍वर के उस अनुग्रह के प्रबन्‍ध का समाचार सुना हो, जो तुम्‍हारे लिये मुझे दिया गया। अर्थात् यह कि वह भेद मुझ पर प्रकाश के द्वारा प्रगट हुआ, जैसा मैं पहले संक्षेप में लिख चुका हूँ। जिससे तुम पढ़कर जान सकते हो कि मैं मसीह का वह भेद कहाँ तक समझता हूँ। जो अन्य समयों में मनुष्‍यों की सन्‍तानों को ऐसा नहीं बताया गया था, जैसा कि आत्‍मा के द्वारा अब उसके पवित्र प्रेरितों और भविष्यवक्ताओं पर प्रगट किया गया हैं। अर्थात् यह कि मसीह यीशु में सुसमाचार के द्वारा अन्‍यजातीय लोग मीरास में साझी, और एक ही देह के और प्रतिज्ञा के भागी हैं। और मैं परमेश्‍वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार, जो सामर्थ्य के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया, उस सुसमाचार का सेवक बना। मुझ पर जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से भी छोटा हूँ, यह अनुग्रह हुआ कि मैं अन्‍यजातियों को मसीह के अगम्‍य धन का सुसमाचार सुनाऊँ, और सब पर यह बात प्रकाशित करूँ कि उस भेद का प्रबन्‍ध क्‍या है, जो सब के सृजनहार परमेश्‍वर में आदि से गुप्‍त था। ताकि अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्‍वर का विभिन्न प्रकार का ज्ञान, उन प्रधानों और अधिकारियों पर, जो स्‍वर्गीय स्‍थानों में हैं प्रगट किया जाए। उस सनातन मनसा के अनुसार जो उसने हमारे प्रभु मसीह यीशु में की थीं। जिसमें हम को उस पर विश्‍वास रखने से हियाव और भरोसे से निकट आने का अधिकार है। इसलिये मैं विनती करता हूँ कि जो क्‍लेश तुम्‍हारे लिये मुझे हो रहे हैं, उनके कारण हियाव न छोड़ो, क्‍योंकि उनमें तुम्‍हारी महिमा है। मैं इसी कारण उस पिता के सामने घुटने टेकता हूँ, जिससे स्‍वर्ग और पृथ्‍वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है, कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्‍हें यह दान दे कि तुम उसके आत्‍मा से अपने भीतरी मनुष्‍यत्‍व में सामर्थ्य पाकर बलवन्‍त होते जाओ, और विश्‍वास के द्वारा मसीह तुम्‍हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नींव डाल कर, सब पवित्र लोगों के साथ भली-भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्‍बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी है। और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है कि तुम परमेश्‍वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ। अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है, कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उसकी महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन। इसलिये मैं जो प्रभु में बन्दी हूँ तुमसे विनती करता हूँ कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्‍य चाल चलो, अर्थात् सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो, और मेल के बन्धन में आत्‍मा की एकता रखने का यत्‍न करो। एक ही देह है, और एक ही आत्‍मा; जैसे तुम्‍हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। एक ही प्रभु है, एक ही विश्‍वास, एक ही बपतिस्‍मा, और सब का एक ही परमेश्‍वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्‍य में, और सब में है। पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। इसलिये वह कहता है, “वह ऊँचे पर चढ़ा, और बन्दियों को बाँध ले गया, और मनुष्‍यों को दान दिए।” (उसके चढ़ने से, और क्‍या पाया जाता है केवल यह कि वह पृथ्‍वी की निचली जगहों में उतरा भी था। और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश के ऊपर चढ़ भी गया कि सब कुछ परिपूर्ण करे।) और उसने कुछ को प्रेरित नियुक्‍त करके, और कुछ को भविष्‍यद्वक्‍ता नियुक्‍त करके, और कुछ को सुसमाचार सुनानेवाले नियुक्‍त करके, और कुछ को रखवाले और उपदेशक नियुक्‍त करके दे दिया । जिससे पवित्र लोग सिद्ध हो जाएँ और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्‍नति पाए। जब तक कि हम सब के सब विश्‍वास, और परमेश्‍वर के पुत्र की पहचान में एक न हो जाएँ, और एक सिद्ध मनुष्‍य न बन जाएँ और मसीह के पूरे डील-डौल तक न बढ़ जाएँ। ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्‍यों की ठग-विद्या और चतुराई से उनके भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों। वरन् प्रेम में सच्‍चाई से चलते हुए, सब बातों में उसमें जो सिर है, अर्थात् मसीह में बढ़ते जाएँ, जिससे सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर, उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक अंग के ठीक-ठीक कार्य करने के द्वारा उसमें होता है, अपने आप को बढ़ाती है कि वह प्रेम में उन्‍नति करती जाए। इसलिये मैं यह कहता हूँ और प्रभु में जताए देता हूँ कि जैसे अन्‍यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो। क्‍योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उनमें है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्‍वर के जीवन से अलग किए हुए हैं; और वे सुन्‍न होकर लुचपन में लग गए हैं कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें। पर तुमने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई। वरन् तुमने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्‍य है, उसी में सिखाए भी गए। कि तुम अपने चालचलन के पुराने मनुष्‍यत्‍व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। और अपने मन के आत्‍मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ, और नये मनुष्‍यत्‍व को पहन लो, जो परमेश्‍वर के अनुसार सत्‍य की धार्मिकता, और पवित्रता में सृजा गया है। इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। क्रोध तो करो, पर पाप मत करो; सूर्य अस्‍त होने तक तुम्‍हारा क्रोध न रहे। और न शैतान को अवसर दो। चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन् भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। कोई गन्‍दी बात तुम्‍हारे मुँह से न निकले, पर आवश्‍यकता के अनुसार वही निकले जो उन्‍नति के लिये उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो। परमेश्‍वर के पवित्र आत्‍मा को शोकित मत करो, जिससे तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्‍वर ने मसीह में तुम्‍हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। इसलिये प्रिय बालकों के समान परमेश्‍वर काअनुसरण करो; और प्रेम में चलो जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्‍वर के आगे भेंट करके बलिदान कर दिया। और जैसा पवित्र लोगों के योग्‍य है, वैसा तुम में व्‍यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। और न निर्लज्‍जन मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्‍योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन् धन्‍यवाद ही सुना जाएँ। क्‍योंकि तुम यह जानते हो कि किसी व्‍यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्‍य की, जो मूरत पूजनेवाले के बराबर है, मसीह और परमेश्‍वर के राज्‍य में मीरास नहीं। कोई तुम्‍हें व्‍यर्थ बातों से धोखा न दे; क्‍योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्‍वर का क्रोध आज्ञा न माननेवालों पर भड़कता है। इसलिये तुम उनके सहभागी न हो। क्‍योंकि तुम तो पहले अन्‍धकार थे परन्‍तु अब प्रभु में ज्‍योति हो, अतः ज्‍योति की सन्‍तान के समान चलो। (क्‍योंकि ज्‍योंति का फल सब प्रकार की भलाई, और धार्मिकता, और सत्‍य है), और यह परखो, कि प्रभु को क्‍या भाता है? और अन्‍धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन् उन पर उलाहना दो। क्‍योंकि उनके गुप्‍त कामों की चर्चा भी लज्जा की बात है। पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्‍योति से प्रगट होते हैं, क्‍योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है। इस कारण वह कहता है, “हे सोनेवाले जाग और मुर्दों में से जी उठ; तो मसीह की ज्‍योति तुझ पर चमकेगी।” इसलिये ध्‍यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियोंकी नाई नहीं पर बुद्धिमानों की नाई चलो। और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्‍योंकि दिन बुरे हैं। इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्‍यान से समझो, कि प्रभु की इच्‍छा क्‍या है। और दाखरस से मतवाले न बनो, क्‍योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्‍मा से परिपूर्ण होते जाओ, और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्‍मिक गीत गाया करो, और अपने-अपने मन में प्रभु के सामने गाते और कीर्तन करते रहो। और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्‍वर पिता का धन्‍यवाद करते रहो। और मसीह के भय से एक दूसरे के अधीन रहो। हे पत्‍नियों, अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के। क्‍योंकि पति तो पत्‍नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है। पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्‍नियाँ भी हर बात में अपने-अपने पति के अधीन रहें। हे पतियों, अपनी-अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया, कि उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए, और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बनाकर अपने पास खड़ी करे, जिसमें न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्‍तु हो, वरन् पवित्र और निर्दोष हो। इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी-अपनी पत्‍नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है। क्‍योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन् उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है। इसलिये कि हम उसकी देह के अंग हैं। “इस कारण मनुष्‍य माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।” यह भेद तो बड़ा है; पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूँ। पर तुम में से हर एक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने। हे बालकों, प्रभु में अपने माता-पिता के आज्ञाकारी बनो, क्‍योंकि यह उचित है। “अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहली आज्ञा है, जिसके साथ प्रतिज्ञा भी है), कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।” और हे बच्‍चेवालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्‍तु प्रभु की शिक्षा, और चेतावनी देते हुए, उनका पालन-पोषण करो। हे दासो, जो लोग संसार के अनुसार तुम्‍हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और काँपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उनकी भी आज्ञा मानो। और मनुष्‍यों को प्रसन्‍न करनेवालों के समान दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों के समान मन से परमेश्‍वर की इच्‍छा पर चलो, और उस सेवा को मनुष्‍यों की नहीं, परन्‍तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। क्‍योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्‍छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र, प्रभु से वैसा ही पाएगा। और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियाँ छोड़कर उनके साथ वैसा ही व्‍यवहार करो, क्‍योंकि जानते हो, कि उनका और तुम्‍हारा दोनों का स्‍वामी स्‍वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता। इसलिये प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। परमेश्‍वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम शैतान की युक्तियों के सामने खड़े रह सको। क्‍योंकि हमारा यह मल्‍लयुद्ध, लहू और मांस से नहीं, परन्‍तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्‍धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्‍मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। इसलिये परमेश्‍वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम बुरे दिन में सामना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्‍थिर रह सको। इसलिये सत्‍य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहन कर, और पाँवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहन कर; और उन सब के साथ विश्‍वास की ढाल लेकर स्‍थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। और उद्धार का टोप, और आत्‍मा की तलवार जो परमेश्‍वर का वचन है, ले लो। और हर समय और हर प्रकार से आत्‍मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो, और मेरे लिये भी कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूँ, जिसके लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूँ। और यह भी कि मैं उस के विषय में जैसा मुझे चाहिए हियाव से बोलूँ। और तुखिकुस जो प्रिय भाई और प्रभु में विश्‍वासयोग्‍य सेवक है, तुम्‍हें सब बातें बताएगा कि तुम भी मेरी दशा जानो कि मैं कैसा रहता हूँ। उसे मैंने तुम्‍हारे पास इसी लिये भेजा है, कि तुम हमारी दशा जानो, और वह तुम्‍हारे मनों को शान्‍ति दे। परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से भाइयों को शान्‍ति और विश्‍वास सहित प्रेम मिले। जो हमारे प्रभु यीशु मसीह से सच्‍चा प्रेम रखते हैं, उन सब पर अनुग्रह होता रहे। मसीह यीशु के दास पौलुस और तीमुथियुस की ओर से सब पवित्र लोगों के नाम, जो मसीह यीशु में होकर फिलिप्‍पी में रहते हैं, अध्‍यक्षों और सेवकों समेत, हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। धन्यवाद और कलीसिया के लिये प्रार्थना मैं जब-जब तुम्‍हें स्‍मरण करता हूँ, तब-तब अपने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ, और जब कभी तुम सब के लिये विनती करता हूँ, तो सदा आनन्‍द के साथ विनती करता हूँ इसलिये कि तुम पहले दिन से लेकर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। मुझे इस बात का भरोसा है कि जिसने तुम में अच्‍छा काम आरम्‍भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। उचित है कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूँ, क्‍योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो। इसमें परमेश्‍वर मेरा गवाह है कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति करके तुम सब की लालसा करता हूँ। और मैं यह प्रार्थना करता हूँ, कि तुम्‍हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए, यहाँ तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्‍चे बने रहो, और ठोकर न खाओ; और उस धार्मिकता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिससे परमेश्‍वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे। हे भाइयों, मैं चाहता हूँ, कि तुम यह जान लो कि मुझ पर जो बीता है, उससे सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। यहाँ तक कि कैसर राज्‍य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूँ, और प्रभु में जो भाई हैं, उनमें से अधिकांश मेरे कैद होने के कारण, हियाव बाँध कर, परमेश्‍वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। कुछ तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कुछ भली मनसा से। कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूँ प्रेम से प्रचार करते हैं। और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्‍पन्‍न करें। तो क्‍या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्‍चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इससे आनन्‍दित हूँ, और आनन्‍दित रहूँगा भी। क्‍योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्‍हारी विनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्‍मा के दान के द्वारा इसका प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूँ कि मैं किसी बात में लज्‍जित न होऊँ, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूँ या मर जाऊँ। क्‍योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता कि किसको चुनूँ। क्‍योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूँ; जी तो चाहता है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूँ, क्‍योंकि यह बहुत ही अच्‍छा है, परन्‍तु शरीर में रहना तुम्‍हारे कारण और भी आवश्‍यक है। और इसलिये कि मुझे इसका भरोसा है अतः मैं जानता हूँ कि मैं जीवित रहूँगा, वरन् तुम सब के साथ रहूँगा जिससे तुम विश्‍वास में दृढ़ होते जाओ और उसमें आनन्‍दित रहो; और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्‍हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए। केवल इतना करो कि तुम्‍हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्‍य हो कि चाहे मैं आकर तुम्‍हें देखूँ, चाहे न भी आऊँ, तुम्‍हारे विषय में यह सुनूँ कि तुम एक ही आत्‍मा में स्‍थिर हो, और एक चित्त होकर सुसमाचार के विश्‍वास के लिये परिश्रम करते रहते हो। और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते। यह उनके लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्‍ह है, परन्‍तु तुम्‍हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्‍वर की ओर से है। क्‍योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्‍वास करो पर उसके लिये दु:ख भी उठाओ, और तुम्‍हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुमने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो कि मैं वैसा ही करता हूँ। अतः यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्‍मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है, तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन् दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्‍हारा भी स्‍वभाव हो; जिसने परमेश्‍वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्‍वर के तुल्‍य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा। वरन् अपने आप को ऐसा शून्‍य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्‍य की समानता में हो गया। और मनुष्‍य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्‍यु, हाँ, क्रूस की मृत्‍यु भी सह ली। इस कारण परमेश्‍वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है, कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्‍वी पर और जो पृथ्‍वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें, और परमेश्‍वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। इसलिये हे मेरे प्‍यारो, जिस प्रकार तुम सदा से आज्ञा मानते आए हो, वैसे ही अब भी न केवल मेरे साथ रहते हुए पर विशेष करके अब मेरे दूर रहने पर भी डरते और काँपते हुए अपने-अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ। क्‍योंकि परमेश्‍वर ही है, जिसने अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्‍हारे मन में इच्‍छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है। सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो; ताकि तुम निर्दोष और भोले होकर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्‍वर के निष्‍कलंक सन्‍तान बने रहो, जिनके बीच में तुम जीवन का वचन लिए हुए जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो, कि मसीह के दिन मुझे घमण्‍ड करने का कारण हो कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्‍यर्थ हुआ। यदि मुझे तुम्‍हारे विश्‍वास के बलिदान और सेवा के साथ अपना लहू भी बहाना पड़े तौभी मैं आनन्‍दित हूँ, और तुम सब के साथ आनन्‍द करता हूँ। वैसे ही तुम भी आनन्‍दित हो, और मेरे साथ आनन्‍द करो। मुझे प्रभु यीशु में आशा है कि मैं तीमुथियुस को तुम्‍हारे पास तुरन्‍त भेजुँगा, ताकि तुम्‍हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले। क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्वभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्‍हारी चिन्‍ता करे। क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की। पर उसको तो तुमने परखा और जान भी लिया है कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उसने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया। इसलिये मुझे आशा है कि ज्‍यों ही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्‍यों ही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूँगा। और मुझे प्रभु में भरोसा है कि मैं आप भी शीघ्र आऊँगा। पर मैंने इपफ्रुदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्‍हारा दूत, और आवश्‍यक बातों में मेरी सेवा टहल करनेवाला है, तुम्‍हारे पास भेजना अवश्‍य समझा। क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्‍याकुल रहता था क्‍योंकि तुमने उसकी बीमारी का हाल सुना था। और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहाँ तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्‍वर ने उस पर दया की; और केवल उस पर ही नहीं, पर मुझ पर भी कि मुझे शोक पर शोक न हो। इसलिये मैंने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उससे फिर भेंट करके आनन्‍दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए। इसलिये तुम प्रभु में उससे बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना, क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठाकर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्‍हारी ओर से मेरी सेवा में हुई उसे पूरा करे। इसलिये हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो। वे ही बातें तुम को बार-बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्‍हारी कुशलता है। कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करनेवालों से चौकस रहो, उन काट कूट करनेवालों से चौकस रहो। क्‍योंकि खतनावाले तो हम ही हैं जो परमेश्‍वर के आत्‍मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूँ। यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उससे भी बढ़कर रख सकता हूँ। आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्राएल के वंश, और बिन्‍यामीन के गोत्र का हूँ; इब्रानियों का इब्रानी हूँ; व्‍यवस्‍था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूँ। उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सतानेवाला; और व्‍यवस्‍था की धार्मिकता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। परन्‍तु जो-जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैंने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन् मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ: जिसके कारण मैंने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूँ, जिससे मैं मसीह को प्राप्‍त करुँ। और उसमें पाया जाऊँ; न कि अपनी उस धार्मिकता के साथ, जो व्‍यवस्‍था से है, वरन् उस धार्मिकता के साथ जो मसीह पर विश्‍वास करने के कारण है, और परमेश्‍वर की ओर से विश्‍वास करने पर मिलती है, ताकि मैं उसको और उसके मृत्‍युंजय की सामर्थ्य को, और उसके साथ दु:खों में सहभागी होने के मर्म को जानूँ, और उसकी मृत्‍यु की समानता को प्राप्‍त करुँ। ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुँचू। यह मतलब नहीं कि मैं पा चुका हूँ, या सिद्ध हो चुका हूँ: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूँ, जिसके लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूँ, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊँ, जिसके लिये परमेश्‍वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। अतः हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्‍हारा और ही विचार हो तो परमेश्‍वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा। इसलिये जहाँ तक हम पहुँचे हैं, उसी के अनुसार चलें। हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्‍हें पहचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिसका उदाहरण तुम हम में पाते हो। क्‍योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिनकी चर्चा मैंने तुम से बार-बार किया है और अब भी रो-रोकर कहता हूँ, कि वे अपनी चाल-चलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं, उनका अन्‍त विनाश है, उनका ईश्‍वर पेट है, वे अपनी लज्‍जा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्‍वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं। पर हमारा स्‍वदेश स्‍वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहाँ से आने की बाट जोह रहे हैं। वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिसके द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा। इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्‍द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्‍थिर रहो। मैं यूओदिया को भी समझाता हूँ, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। और हे सच्‍चे सहकर्मी मैं तुझ से भी विनती करता हूँ, कि तू उन स्‍त्रियों की सहायता कर, क्‍योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकर्मियों समेत परिश्रम किया, जिनके नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं। प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्‍दित रहो। तुम्‍हारी कोमलता सब मनुष्‍यों पर प्रगट हो। प्रभु निकट है। किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो; परन्‍तु हर एक बात में तुम्‍हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्‍यवाद के साथ परमेश्‍वर के सम्‍मुख उपस्‍थित किए जाएँ। तब परमेश्‍वर की शान्‍ति, जो सारी समझ से बिलकुल परे है, तुम्‍हारे हृदय और तुम्‍हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी। इसलिये, हे भाइयों, जो-जो बातें सत्‍य हैं, और जो-जो बातें आदरणीय हैं, और जो-जो बातें उचित हैं, और जो-जो बातें पवित्र हैं, और जो-जो बातें सुहावनी हैं, और जो-जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो-जो सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्‍यान लगाया करो। जो बातें तुमने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्‍वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्‍हारे साथ रहेगा।। मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूँ कि अब इतने दिनों के बाद तुम्‍हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्‍हें आरम्‍भ में भी इसका विचार था, पर तुम्‍हें अवसर न मिला। यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूँ; क्‍योंकि मैंने यह सीखा है कि जिस दशा में हूँ, उसी में सन्‍तोष करुँ। मैं दीन होना भी जानता हूँ और बढ़ना भी जानता हूँ; हर एक बात और सब दशाओं में मैंने तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ। तौभी तुमने भला किया कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। और हे फिलिप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो कि सुसमाचार प्रचार के आरम्‍भ में जब मैंने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्‍हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने-देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। इसी प्रकार जब मैं थिस्‍सलुनीके में था; तब भी तुमने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्‍या वरन् दो बार कुछ भेजा था। यह नहीं कि मैं दान चाहता हूँ परन्‍तु मैं ऐसा फल चाहता हूँ, जो तुम्‍हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। मेरे पास सब कुछ है, वरन् बहुतायत से भी है; जो वस्‍तुएँ तुमने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्‍हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूँ, वह तो सुखदायक सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्‍य बलिदान है, जो परमेश्‍वर को भाता है। और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्‍हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। हमारे परमेश्‍वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। हर एक पवित्र जन को जो यीशु मसीह में हैं नमस्‍कार कहो। जो भाई मेरे साथ हैं तुम्‍हें नमस्‍कार कहते हैं। सब पवित्र लोग, विशेष करके जो कैसर के घराने के हैं तुम को नमस्‍कार कहते हैं। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्‍हारी आत्‍मा के साथ रहे। पौलुस की ओर से, जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से, मसीह में उन पवित्र और विश्‍वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्‍से में रहते हैं। हमारे पिता परमेश्‍वर की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति प्राप्‍त होती रहे। हम तुम्‍हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात् परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करते हैं। क्‍योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्‍हारा विश्‍वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो; उस आशा की हुई वस्‍तु के कारण जो तुम्‍हारे लिये स्‍वर्ग में रखी हुई है, जिसका वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्‍य वचन में सुन चुके हो। जो तुम्‍हारे पास पहुँचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात् जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्‍चाई से परमेश्‍वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्‍वासयोग्‍य सेवक है। उसी ने तुम्‍हारे प्रेम को जो आत्‍मा में है हम पर प्रगट किया। इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्‍हारे लिये यह प्रार्थना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्‍मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्‍वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ, ताकि तुम्‍हारा चाल-चलन प्रभु के योग्‍य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्‍न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्‍वर की पहिचान में बढ़ते जाओ, और उसकी महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहाँ तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। और पिता का धन्‍यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्‍य बनाया कि ज्‍योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में सहभागी हों। उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्‍य में प्रवेश कराया, जिसमें हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है। वह तो अदृश्‍य परमेश्‍वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्‍वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुताएँ, क्‍या प्रधानताएँ, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्‍तुएँ उसी में स्‍थिर रहती हैं। और वही देह, अर्थात् कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। क्‍योंकि पिता की प्रसन्‍नता इसी में है कि उसमें सारी परिपूर्णता वास करे। और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप करके, सब वस्‍तुओं को उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्‍वी पर की हों, चाहे स्‍वर्ग में की। तुम जो पहले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया ताकि तुम्‍हें अपने सम्‍मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्‍थित करे। यदि तुम विश्‍वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिसका प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिसका मैं पौलुस सेवक बना। अब मैं उन दुखों के कारण आनन्‍द करता हूँ, जो तुम्‍हारे लिये उठाता हूँ, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उसकी देह के लिये, अर्थात् कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूँ, जिसका मैं परमेश्‍वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्‍हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्‍वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूँ। अर्थात् उस भेद को समयों और पीढि़यों से गुप्‍त रहा, परन्‍तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। जिन पर परमेश्‍वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्‍हें ज्ञात हो कि अन्‍यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्‍य क्‍या है, और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। जिसका प्रचार करके हम हर एक मनुष्‍य को जता देते हैं और सारे ज्ञान से हर एक मनुष्‍य को सिखाते हैं, कि हम हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध करके उपस्‍थित करें। और इसी के लिये मैं उसकी उस शक्ति के अनुसार जो मुझ में सामर्थ के साथ प्रभाव डालती है तन मन लगाकर परिश्रम भी करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम जान लो, कि तुम्‍हारे और उनके जो लौदीकिया में हैं, और उन सब के लिये जिन्‍हों ने मेरा शारीरिक मुँह नहीं देखा मैं कैसा परिश्रम करता हूँ। ताकि उनके मनों में शान्‍ति हो और वे प्रेम से आपस में गठे रहें, और वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्‍त करें, और परमेश्‍वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहिचान लें। जिसमें बुद्धि और ज्ञान से सारे भण्‍डार छिपे हुए हैं। यह मैं इसलिये कहता हूँ, कि कोई मनुष्‍य तुम्‍हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे। क्‍योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूँ, तौभी आत्‍मिक भाव से तुम्‍हारे निकट हूँ, और तुम्‍हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्‍हारे विश्‍वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्‍न होता हूँ। सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो। और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्‍वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्‍यन्‍त धन्‍यवाद करते रहो। चौकस रहो कि कोई तुम्‍हें उस तत्‍व-ज्ञान और व्‍यर्थ धोखे के द्वारा अहेर न कर ले, जो मनुष्‍यों के परम्‍पराई मत और संसार की आदि शिक्षा के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं। क्‍योंकि उसमें ईश्‍वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है। और तुम उसी में भरपूर हो गए हो जो सारी प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है। उसी में तुम्‍हारा ऐसा खतना हुआ है, जो हाथ से नहीं होता, अर्थात् मसीह का खतना, जिस से शारीरिक देह उतार दी जाती है। और उसी के साथ बपतिस्‍मा में गाड़े गए, और उसी में परमेश्‍वर की शक्ति पर विश्‍वास करके, जिस ने उसको मरे हुओं में से जिलाया, उसके साथ जी भी उठे। और उसने तुम्‍हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारहित दशा में मुर्दा थे, उसे साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया। और विधियों का वह लेख जो हमारे नाम पर और हमारे विरोध में था मिटा डाला; और उसको क्रूस पर कीलों से जड़कर साम्‍हने से हटा दिया है। और उसने प्रधानताओं और अधिकारों को अपने ऊपर से उतार कर उन का खुल्‍लमखुल्‍ला तमाशा बनाया और क्रूस के कारण उन पर जय-जय-कार की ध्वनी सुनाई। इसलिये खाने पीने या पर्व या नए चाँद, या सब्‍तों के विषय में तुम्‍हारा कोई फैसला न करे। क्‍योंकि ये सब आनेवाली बातों की छाया हैं, पर मूल वस्तुएँ मसीह की हैं। कोई मनुष्‍य दीनता और स्‍वर्गदूतों की पूजा करके तुम्‍हें दौड़ के प्रतिफल से वंचित न करे। ऐसा मनुष्‍य देखी हुई बातों में लगा रहता है और अपनी शारीरिक समझ पर व्‍यर्थ फूलता है। और उस शिरोमणि को पकड़े नहीं रहता जिस से सारी देह जोड़ों और पट्ठों के द्वारा पालन-पोषण पाकर और एक साथ गठकर, परमेश्‍वर की ओर से बढ़ती जाती है। जब कि तुम मसीह के साथ संसार की आदि शिक्षा की ओर से मर गए हो, तो फिर उनके समान जो संसार में जीवन बिताते हैं और ऐसी विधियों के वश में क्‍यों रहते हो? कि ‘यह न छूना,’ ‘उसे न चखना,’ और ‘उसे हाथ न लगाना’, (क्‍योंकि ये सब वस्‍तु काम में लाते लाते नाश हो जाएँगी) क्योंकि ये मनुष्यों की आज्ञाओं और शिक्षाओं के अनुसार है। इन विधियों में अपनी इच्‍छा के अनुसार गढ़ी हुई भक्ति की रीति, और दीनता, और शारीरिक अभ्यास के भाव से ज्ञान का नाम तो है, परन्‍तु शारीरिक लालसाओं को रोकने में इन से कुछ भी लाभ नहीं होता। सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहाँ मसीह वर्तमान है और परमेश्‍वर के दहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्‍यान लगाओ। क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्‍हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्‍वर में छिपा हुआ है। जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे। इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्‍वी पर हैं, अर्थात् व्‍यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। इन ही के कारण परमेश्‍वर का प्रकोप आज्ञा न माननेवालों पर पड़ता है। और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे। पर अब तुम भी इन सब को अर्थात् क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुहँ से गालियाँ बकना ये सब बातें छोड़ दो। एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्‍यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। और नए मनुष्‍यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये नया बनता जाता है। उसमें न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारहित, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है। इसलिये परमेश्‍वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो; और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्‍हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। और मसीह की शान्‍ति जिसके लिये तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्‍हारे हृदय में राज्‍य करे, और तुम धन्‍यवादी बने रहो। मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्‍वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्‍मिक गीत गाओ। और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्‍वर पिता का धन्‍यवाद करो। हे पत्‍नियो, जैसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने अपने पति के आधीन रहो। हे पतियो, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, और उनसे कठोरता न करो। हे बालको, सब बातों में अपने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो, क्‍योंकि प्रभु इस से प्रसन्‍न होता है। हे बच्‍चेवालो, अपने बालकों को तंग न करो, न हो कि उन का साहस टूट जाए। हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्‍हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो, मनुष्‍यों को प्रसन्‍न करनेवालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्‍तु मन की सीधाई और परमेश्‍वर के भय से। और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्‍यों के लिये नहीं परन्‍तु प्रभु के लिये करते हो। क्‍योंकि तुम जानते हो कि तुम्‍हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। क्‍योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहाँ किसी का पक्षपात नहीं। हे स्‍वामियों, अपने अपने दासों के साथ न्‍याय और ठीक ठीक व्‍यवहार करो, यह समझकर कि स्‍वर्ग में तुम्‍हारा भी एक स्‍वामी है। प्रार्थना में लगे रहो, और धन्‍यवाद के साथ उसमें जागृत रहो; और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्‍वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिसके कारण मैं कैद में हूँ। और उसे ऐसा प्रगट करूँ, जैसा मुझे करना उचित है। अवसर को बहुमूल्‍य समझकर बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो। तुम्‍हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्‍हें हर मनुष्‍य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए। प्रिय भाई और विश्‍वासयोग्‍य सेवक, तुखिकुस जो प्रभु में मेरा सहकर्मी है, मेरी सब बातें तुम्‍हें बता देगा। उसे मैं ने इसलिये तुम्‍हारे पास भेजा है, कि तुम्‍हें हमारी दशा मालूम हो जाए और वह तुम्‍हारे हृदयों को शान्‍ति दे। और उसके साथ उनेसिमुस को भी भेजा है जो विश्‍वासयोग्‍य और प्रिय भाई और तुम ही में से है, ये तुम्‍हें यहाँ की सारी बातें बता देंगे। अरिस्‍तर्खुस जो मेरे साथ कैदी है, और मरकुस जो वरनबा का भाई लगता है। (जिसके विषय में तुम ने आज्ञा पाई थी कि यदि वह तुम्‍हारे पास आए, तो उससे अच्‍छी तरह व्‍यवहार करना।) और यीशु जो यूस्‍तुस कहलाता है, तुम्‍हें नमस्‍कार कहते हैं। खतना किए हुए लोगों में से केवल ये ही परमेश्‍वर के राज्‍य के लिये मेरे सहकर्मी और मेरी शान्‍ति का कारण रहे हैं। इपफ्रास जो तुम में से है, और मसीह यीशु का दास है, तुम से नमस्‍कार कहता है और सदा तुम्‍हारे लिये प्रार्थनाओं में प्रयत्‍न करता है, ताकि तुम सिद्ध होकर पूर्ण विश्‍वास के साथ परमेश्‍वर की इच्‍छा पर स्‍थिर रहो। मैं उसका गवाह हूँ, कि वह तुम्‍हारे लिये और लौदीकिया और हियरापुलिसवालों के लिये बड़ा यत्‍न करता रहता है। प्रिय वैद्य लूका और देमास का तुम्‍हें नमस्‍कार। लौदीकिया के भाइयों को और नुमफास और उनके घर की कलीसिया को नमस्‍कार कहना। और जब यह पत्र तुम्‍हारे यहाँ पढ़ लिया जाए, तो ऐसा करना कि लौदीकिया की कलीसिया में भी पढ़ा जाए, और वह पत्र जो लौदीकिया से आए उसे तुम भी पढ़ना। फिर अर्खिप्‍पुस से कहना कि जो सेवा प्रभु में तुझे सौंपी गई है, उसे सावधानी के साथ पूरी करना। मुझ पौलुस का अपने हाथ से लिखा हुआ नमस्‍कार। मेरी जंजीरों को स्‍मरण रखना; तुम पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्‍हें मिलती रहे। हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्‍हें स्‍मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करते हैं, और अपने परमेश्‍वर और पिता के सामने तुम्‍हारे विश्‍वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्‍मरण करते हैं। और हे भाइयो, परमेश्‍वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो। क्‍योंकि हमारा सुसमाचार तुम्‍हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन् सामर्थ और पवित्र आत्‍मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुँचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्‍हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे। और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्‍मा के आनन्‍द के साथ वचन को मानकर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। यहाँ तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्‍वासियों के लिये तुम आदर्श बने। क्‍योंकि तुम्‍हारे यहाँ से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्‍हारे विश्‍वास की जो परमेश्‍वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्‍यकता ही नहीं। क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्‍हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्‍वर की ओर फिरें ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्‍वर की सेवा करो। और उसके पुत्र के स्‍वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात् यीशु को, जो हमें आनेवाले प्रकोप से बचाता है। हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्‍हारे पास आना व्‍यर्थ न हुआ। वरन् तुम आप ही जानते हो, कि पहले पहिल फिलिप्‍पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्‍वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्‍वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्‍हें सुनाएँ। क्‍योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है। पर जैसा परमेश्‍वर ने हमें योग्‍य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्‍यों को नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर को, जो हमारे मनों को जाँचता है, प्रसन्‍न करते हैं। क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी चापलूसी की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्‍वर गवाह है। और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्‍यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से। परन्‍तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्‍हारे बीच में रहकर कोमलता दिखाई है। और वैसे ही हम तुम्‍हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्‍वर का सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्‍हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्‍यारे हो गए थे। क्‍योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्‍मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्‍वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों। तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्‍वर भी, कि तुम्‍हारे बीच में जो विश्‍वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धार्मिकता और निर्दोषता से रहे। जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे। कि तुम्‍हारा चाल चलन परमेश्‍वर के योग्‍य हो, जो तुम्‍हें अपने राज्‍य और महिमा में बुलाता है। इसलिये हम भी परमेश्‍वर का धन्‍यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्‍वर के सुसमाचार का वचन तुम्‍हारे पास पहुँचा, तो तुम ने उसे मनुष्‍यों का नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर का वचन समझकर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्‍वास रखते हो, प्रभावशाली है। इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्‍वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्‍योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्होंने यहूदियों से पाया था। जिन्‍हों ने प्रभु यीशु को और भविष्यद्वक्ताओं को भी मार डाला और हम को सताया, और परमेश्‍वर उनसे प्रसन्‍न नहीं; और वे सब मनुष्‍यों को विरोध करते हैं। और वे अन्‍यजातियों से उनके उद्धार के लिये बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों का नपुआ भरते रहें; पर उन पर भयानक प्रकोप आ पहुँचा है। हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं वरन् प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्‍हारा मुँह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया। इसलिये हम ने (अर्थात् मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन् दो बार तुम्‍हारे पास आना चाहा, परन्‍तु शैतान हमें रोके रहा। भला हमारी आशा, या आनन्‍द या बड़ाई का मुकुट क्‍या है? क्‍या हमारे प्रभु यीशु के सम्‍मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे? हमारी बड़ाई और आनन्‍द तुम ही हो। इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएँ। और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्‍वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्‍हें स्‍थिर करे; और तुम्‍हारे विश्‍वास के विषय में तुम्‍हें समझाए। कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्‍योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं। क्‍योंकि पहले भी, जब हम तुम्‍हारे यहाँ थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो। इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्‍हारे विश्‍वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करनेवाले ने तुम्‍हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्‍यर्थ हो गया हो। पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्‍हारे पास से हमारे यहाँ आकर तुम्‍हारे विश्‍वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्‍मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्‍हें देखने की। इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्‍हारे विश्‍वास से तुम्‍हारे विषय में शान्‍ति पाई। क्‍योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्‍थिर रहो तो हम जीवित हैं। और जैसा आनन्‍द हमें तुम्‍हारे कारण अपने परमेश्‍वर के साम्‍हने है, उसके बदले तुम्‍हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करें? हम राज दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्‍हारा मुँह देखें, और तुम्‍हारे विश्‍वास की घटी पूरी करें। अब हमारा परमेश्‍वर और पिता आप ही और हमारा प्रभु यीशु, तुम्‍हारे यहाँ आने के लिये हमारी अगुवाई करे। और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्‍हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्‍यों के साथ बढ़े, और उन्‍नति करता जाए, ताकि वह तुम्‍हारे मनों को ऐसा स्‍थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्‍वर और पिता के साम्‍हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें। इसलिए हे भाइयों, हम तुम से विनती करते हैं, और तुम्‍हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्‍य चाल चलना, और परमेश्‍वर को प्रसन्‍न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ। क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम ने प्रभु यीशु की ओर से तुम्‍हें कौन कौन सी आज्ञा पहुँचाई। क्‍योंकि परमेश्‍वर की इच्‍छा यह है, कि तुम पवित्र बनो: अर्थात् व्‍यभिचार से बचे रहो, और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्‍त करना जाने। और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न उन जातियों की समान, जो परमेश्‍वर को नहीं जानतीं। कि इस बात में कोई अपने भाई को न ठगे, और न उस पर दाँव चलाए, क्‍योंकि प्रभु इस सब बातों का पलटा लेनेवाला है; जैसा कि हम ने पहले तुम से कहा, और चिताया भी था। क्‍योंकि परमेश्‍वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्‍तु पवित्र होने के लिये बुलाया है। इस कारण जो तुच्‍छ जानता है, वह मनुष्‍य को नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर को तुच्‍छ जानता है, जो अपना पवित्र आत्‍मा तुम्‍हें देता है। किन्‍तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्‍य नहीं, कि मैं तुम्‍हारे पास कुछ लिखूँ; क्‍योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्‍वर से सीखा है; और सारे मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा करते भी हो, पर हे भाइयों, हम तुम्‍हें समझाते हैं, कि और भी बढ़ते जाओ, और जैसी हम ने तुम्‍हें आज्ञा दी, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना अपना काम काज करने, और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्‍न करो। कि बाहरवालों के साथ सभ्‍यता से बर्ताव करो, और तुम्‍हें किसी वस्‍तु की घटी न हो। हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की समान शोक करो जिन्‍हें आशा नहीं। क्‍योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्‍वर उन्‍हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। क्‍योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे। क्‍योंकि प्रभु आप ही स्‍वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्‍द सुनाई देगा, और परमेश्‍वर की तुरही फूँकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिए जाएँगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो। पर हे भाइयो, इसका प्रयोजन नहीं, कि समयों और कालों के विषय में तुम्‍हारे पास कुछ लिखा जाए। क्‍योंकि तुम आप ठीक जानते हो कि जैसा रात को चोर आता है, वैसा ही प्रभु का दिन आनेवाला है। जब लोग कहते होंगे, “कुशल हैं, और कुछ भय नहीं,” तो उन पर एकाएक विनाश आ पड़ेगा, जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा; और वे किसी रीति से न बचेंगे। पर हे भाइयों, तुम तो अन्‍धकार में नहीं हो, कि वह दिन तुम पर चोर की समान आ पड़े। क्‍योंकि तुम सब ज्‍योति की सन्‍तान, और दिन की सन्‍तान हो, हम न रात के हैं, न अन्‍धकार के हैं। इसलिये हम औरों की समान सोते न रहें, पर जागते और सावधान रहें। क्‍योंकि जो सोते हैं, वे रात ही को सोतें हैं, और जो मतवाले होते हैं, वे रात ही को मतवाले होते हैं। पर हम जो दिन के हैं, विश्‍वास और प्रेम की झिलम पहिनकर और उद्धार की आशा का टोप पहिनकर सावधान रहें। क्‍योंकि परमेश्‍वर ने हमें क्रोध के लिये नहीं, परन्‍तु इसलिये ठहराया कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार प्राप्‍त करें। वह हमारे लिये इस कारण मरा, कि हम चाहे जागते हों, चाहे सोते हों: सब मिलकर उसी के साथ जीएँ। इस कारण एक दूसरे को शान्‍ति दो, और एक दूसरे की उन्‍नति के कारण बनो, निदान, तुम ऐसा करते भी हो। और हे भाइयों, हम तुम से विनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्‍हारे अगुवे हैं, और तुम्‍हें शिक्षा देते हैं, उन्‍हें मानो। और उनके काम के कारण प्रेम के साथ उनको बहुत ही आदर के योग्‍य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो। और हे भाइयों, हम तुम्‍हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उनको समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ। सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो। सदा आनन्‍दित रहो। निरन्‍तर प्रार्थना में लगे रहो। हर बात में धन्‍यवाद करो: क्‍योंकि तुम्‍हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्‍वर की यहीं इच्‍छा है। आत्‍मा को न बुझाओ। भविष्‍यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो। सब बातों को परखो: जो अच्‍छी है उसे पकड़े रहो। सब प्रकार की बुराई से बचे रहो। शान्‍ति का परमेश्‍वर आप ही तुम्‍हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्‍हारी आत्‍मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। तुम्‍हारा बुलानेवाला सच्‍चा है, और वह ऐसा ही करेगा। हे भाइयों, हमारे लिये प्रार्थना करो। सब भाइयों को पवित्र चुम्‍बन से नमस्‍कार करो। मैं तुम्‍हें प्रभु की शपथ देता हूँ, कि यह पत्री सब भाइयों को पढ़कर सुनाई जाए। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे। पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनीकियों की कलीसिया के नाम, जो हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह में है: हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। हे भाइयो, तुम्‍हारे विषय में हमें हर समय परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्‍हारा विश्‍वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब में प्रेम आपस में बहुत ही बढता जाता है। यहाँ तक कि हम आप परमेश्‍वर की कलीसिया में तुम्‍हारे विषय में घमण्‍ड करते हैं, कि जितने उपद्रव और क्‍लेश तुम सहते हो, उन सब में तुम्‍हारा धीरज और विश्‍वास प्रगट होता है। यह परमेश्‍वर के सच्‍चे न्‍याय का स्‍पष्‍ट प्रमाण है; कि तुम परमेश्‍वर के राज्‍य के योग्‍य ठहरो, जिस के लिये तुम दुख भी उठाते हो। क्‍योंकि परमेश्‍वर के निकट यह न्‍याय है, कि जो तुम्‍हें क्‍लेश देते हैं, उन्‍हें बदले में क्‍लेश न दे। और तुम्‍हें जो क्‍लेश पाते हो, हमारे साथ चैन दे; उस समय जब कि प्रभु यीशु अपने सामर्थी दूतों के साथ, धधकती हुई आग में स्‍वर्ग से प्रगट होगा। और जो परमेश्‍वर को नहीं पहचानते, और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते उन से पलटा लेगा। वे प्रभु के साम्‍हने से, और उसकी शक्ति के तेज से दूर होकर अनन्‍त विनाश का दण्‍ड पाएँगे। यह उस दिन होगा, जब वह अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने, और सब विश्‍वास करनेवालों में आश्‍चर्य का कारण होने को आएगा; क्‍योंकि तुम ने हमारी गवाही पर विश्वास किया। इसी लिये हम सदा तुम्‍हारे निमित्त प्रार्थना भी करते हैं, कि हमारा परमेश्‍वर तुम्‍हें इस बुलाहट के योग्‍य समझे, और भलाई की हर एक इच्‍छा, और विश्‍वास के हर एक काम को सामर्थ सहित पूरा करे, कि हमारे परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार हमारे प्रभु यीशु का नाम तुम में महिमा पाए, और तुम उस में। हे भाइयों, हम अपने प्रभु यीशु मसीह के आने, और उसके पास अपने इकट्ठे होने के विषय में तुम से बिनती करते हैं। कि किसी आत्‍मा, या वचन, या पत्री के द्वारा जो कि मानों हमारी ओर से हो, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुँचा है, तुम्‍हारा मन अचानक अस्‍थिर न हो जाए; और न तुम घबराओ। किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्‍योंकि वह दिन न आएगा, जब तक धर्म का त्‍याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो। जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्‍वर, या पूज्‍य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्‍वर के मन्‍दिर में बैठकर अपने आप को परमेश्‍वर प्रगट करता है। क्‍या तुम्‍हें स्‍मरण नहीं, कि जब मैं तुम्‍हारे यहाँ था, तो तुम से ये बातें कहा करता था? और अब तुम उस वस्‍तु को जानते हो, जो उसे रोक रही है, कि वह अपने ही समय में प्रगट हो। क्‍योंकि अधर्म का भेद अब भी कार्य करता जाता है, पर अभी एक रोकनेवाला है, और जब तक वह दूर न हो जाए, वह रोके रहेगा। तब वह अधर्मी प्रगट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा, और अपने आगमन के तेज से भस्‍म करेगा। उस अधर्मी का आना शैतान के कार्य के अनुसार सब प्रकार की झूठी सामर्थ, और चिन्‍ह, और अद्भुत काम के साथ। और नाश होनेवालों के लिये अधर्म के सब प्रकार के धोखे के साथ होगा; क्‍योंकि उन्‍होंने सत्‍य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया जिस से उन का उद्धार होता। और इसी कारण परमेश्‍वर उन में एक भटका देनेवाली सामर्थ को भेजेगा ताकि वे झूठ की प्रतीति करें। और जितने लोग सत्‍य की प्रतीति नहीं करते, वरन अधर्म से प्रसन्‍न होते हैं, सब दण्‍ड पाएँ। पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्‍हारे विषय में सदा परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करते रहें, कि परमेश्‍वर ने आदि से तुम्‍हें चुन लिया; कि आत्‍मा के द्वारा पवित्र बनकर, और सत्‍य की प्रतीति करके उद्धार पाओ। जिस के लिये उस ने तुम्‍हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्‍त करो। इसलिये, हे भाइयों, स्‍थिर रहो; और जो जो बातें तुम ने क्‍या वचन, क्‍या पत्री के द्वारा हम से सीखी है, उन्‍हें थामे रहो। हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्‍वर जिस ने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्‍त शान्‍ति और उत्तम आशा दी है। तुम्‍हारे मनों में शान्‍ति दे, और तुम्‍हें हर एक अच्‍छे काम, और वचन में दृढ़ करे।। निदान, हे भाइयो, हमारे लिये प्रार्थना किया करो, कि प्रभु का वचन ऐसा शीघ्र फैले, और महिमा पाए, जैसा तुम में हुआ। और हम टेढ़े और दुष्‍ट मनुष्‍यों से बचे रहें क्‍योंकि हर एक में विश्‍वास नहीं। परन्‍तु प्रभु सच्‍चा है; वह तुम्‍हें दृढ़ता से स्‍थिर करेगा: और उस दुष्‍ट से सुरक्षित रखेगा। और हमें प्रभु में तुम्‍हारे ऊपर भरोसा है, कि जो जो आज्ञा हम तुम्‍हें देते हैं, उन्‍हें तुम मानते हो, और मानते भी रहोगे। परमेश्‍वर के प्रेम और मसीह के धीरज की ओर प्रभु तुम्‍हारे मन की अगुआई करे। हे भाइयों, हम तुम्‍हें अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देते हैं; कि हर एक ऐसे भाई से अलग रहो, जो अनुचित चाल चलता, और जो शिक्षा उस ने हम से पाई उसके अनुसार नहीं करता। क्‍योंकि तुम आप जानते हो, कि किस रीति से हमारी सी चाल चलनी चाहिए; क्‍योंकि हम तुम्‍हारे बीच में अनुचित चाल न चले। और किसी की रोटी मुफ़्त में न खाई; पर परिश्रम और कष्‍ट से रात दिन काम धन्‍धा करते थे, कि तुम में से किसी पर भार न हो। यह नहीं, कि हमें अधिकार नहीं; पर इसलिये कि अपने आप को तुम्‍हारे लिये आदर्श ठहराएँ, कि तुम हमारी सी चाल चलो। और जब हम तुम्‍हारे यहाँ थे, तब भी यह आज्ञा तुम्‍हें देते थे, कि यदि कोई काम करना न चाहे, तो खाने भी न पाए। हम सुनते हैं, कि कितने लोग तुम्‍हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं; और कुछ काम नहीं करते, पर औरों के काम में हाथ डाला करते हैं। ऐसों को हम प्रभु यीशु मसीह में आज्ञा देते और समझाते हैं, कि चुपचाप काम करके अपनी ही रोटी खाया करें। और तुम, हे भाइयो, भलाई करने में हियाव न छोड़ो। यदि कोई हमारी इस पत्री की बात को न माने, तो उस पर दृष्‍टि रखो; और उस की संगति न करो, जिस से वह लज्‍जित हो; तौभी उसे बैरी मत समझो पर भाई जानकर चिताओ। अब प्रभु जो शान्‍ति का सोता है आप ही तुम्‍हें सदा और हर प्रकार से शान्‍ति दे: प्रभु तुम सब के साथ रहे। मैं पौलुस अपने हाथ से नमस्‍कार लिखता हूँ: हर पत्री में मेरा यही चिन्‍ह है: मैं इसी प्रकार से लिखता हूँ। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम सब पर होता रहे। पौलुस की ओर से जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर, और हमारी आशा के आधार मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है, तिमुथियुस के नाम जो विश्‍वास में मेरा सच्‍चा पुत्र है: पिता परमेश्‍वर, और हमारे प्रभु मसीह यीशु से, तुझे अनुग्रह और दया, और शान्‍ति मिलती रहे। जैसे मैंने मकिदुनिया को जाते समय तुझे समझाया था, कि इफिसुस में रहकर कुछ लोगों को आज्ञा दे कि अन्य प्रकार की शिक्षा न दें, और उन ऐसी कहानियों और अनन्‍त वंशावलियों पर मन न लगाएँ, जिनसे विवाद होते हैं; और परमेश्‍वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार नहीं, जो विश्‍वास से सम्‍बन्‍ध रखता है; वैसे ही फिर भी कहता हूँ। आज्ञा का सारांश यह है कि शुद्ध मन और अच्‍छे विवेक, और कपटरहित विश्‍वास से प्रेम उत्‍पन्‍न हो। इनको छोड़कर कितने लोग फिरकर बकवाद की ओर भटक गए हैं, और व्‍यवस्‍थापक तो होना चाहते हैं, पर जो बातें कहते और जिनको दृढ़ता से बोलते हैं, उनको समझते भी नहीं। पर हम जानते हैं कि यदि कोई व्‍यवस्‍था को व्‍यवस्‍था की रीति पर काम में लाए तो वह भली है। यह जानकर कि व्‍यवस्‍था धर्मी जन के लिये नहीं पर अधर्मियों, निरंकुशों, भक्तिहीनों, पापियों, अपवित्रों और अशुद्धों, माँ-बाप के घात करनेवालों, हत्‍यारों, व्यभिचारियों, पुरूषगामियों, मनुष्‍य के बेचनेवालों, झूठ बोलने वालों, और झूठी शपथ खानेवालों, और इनको छोड़ खरे उपदेश के सब विरोधियों के लिये ठहराई गई है। यही परमधन्‍य परमेश्‍वर की महिमा के उस सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सौंपा गया है। और मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिस ने मुझे सामर्थ्य दी है, धन्‍यवाद करता हूँ; कि उसने मुझे विश्‍वासयोग्‍य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया। मैं तो पहले निन्‍दा करनेवाला, और सतानेवाला, और अन्‍धेर करनेवाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्‍योंकि मैंने अविश्‍वास की दशा में बिन समझे बूझे ये काम किए थे। और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्‍वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्‍य है कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिनमें सबसे बड़ा मैं हूँ। पर मुझपर इसलिये दया हुई कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्‍त जीवन के लिये विश्‍वास करेंगे, उनके लिये मैं एक आदर्श बनूँ। अब सनातन राजा अर्थात् अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्‍वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। हे पुत्र तीमुथियुस, उन भविष्‍यवाणियों के अनुसार जो पहले तेरे विषय में की गई थीं, मैं यह आज्ञा सौंपता हूँ, कि तू उनके अनुसार अच्‍छी लड़ाई को लड़ता रहे। और विश्‍वास और उस अच्‍छे विवेक को थामें रह जिसे दूर करने के कारण कितनों का विश्‍वास रूपी जहाज डूब गया। उन्‍हीं में से हुमिनयुस और सिकन्‍दर हैं जिन्‍हें मैंने शैतान को सौंप दिया कि वे निन्‍दा करना न सीखें। अब मैं सबसे पहले यह आग्रह करता हूँ, कि विनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्‍यवाद, सब मनुष्‍यों के लिये किए जाएँ। राजाओं और सब ऊँचे पदवालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्‍भीरता से जीवन बिताएँ। यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर को अच्‍छा लगता और भाता भी है, जो यह चाहता है, कि सब मनुष्‍यों का उद्धार हो; और वे सत्‍य को भली-भाँति पहचान लें। क्‍योंकि परमेश्‍वर एक ही है, और परमेश्‍वर और मनुष्‍यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात् मसीह यीशु जो मनुष्‍य है, जिसने अपने आप को सबके छुटकारे के दाम में दे दिया; ताकि उसकी गवाही ठीक समयों पर दी जाए। मैं सच कहता हूँ, झूठ नहीं बोलता, कि मैं इसी उद्देश्य से प्रचारक और प्रेरित और अन्‍यजातियों के लिये विश्‍वास और सत्‍य का उपदेशक ठहराया गया। इसलिये मैं चाहता हूँ, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठाकर प्रार्थना किया करें। वैसे ही स्‍त्रियाँ भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथनें, और सोने, और मोतियों, और बहुमूल्य कपड़ों से, पर भले कामों से, क्‍योंकि परमेश्‍वर की भक्ति ग्रहण करनेवाली स्‍त्रियों को यही उचित भी है। और स्‍त्री को चुपचाप पूरी आधीनता में सीखना चाहिए। मैं कहता हूँ, कि स्‍त्री न उपदेश करे और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्‍तु चुपचाप रहे। क्‍योंकि आदम पहले, उसके बाद हव्‍वा बनाई गई। और आदम बहकाया न गया, पर स्‍त्री बहकाने में आकर अपराधिनी हुई। तौभी स्त्री बच्‍चे जनने के द्वारा उद्धार पाएगी, यदि वे संयम सहित विश्‍वास, प्रेम, और पवित्रता में स्‍थिर रहें। यह बात सत्‍य है कि जो अध्‍यक्ष होना चाहता है, तो वह भले काम की इच्‍छा करता है। यह आवश्यक है कि अध्‍यक्ष निर्दोष, और एक ही पत्‍नी का पति, संयमी, सुशील, सभ्‍य, अतिथि-सत्कार करनेवाला, और सिखाने में निपुण हो। पियक्‍कड़ या मारपीट करनेवाला न हो; वरन कोमल हो, और न झगड़ालू, और न धन का लोभी हो। अपने घर का अच्‍छा प्रबन्‍ध करता हो, और बाल-बच्चों को सारी गम्‍भीरता से अधीन रखता हो। (जब कोई अपने घर ही का प्रबन्‍ध करना न जानता हो, तो परमेश्‍वर की कलीसिया की रखवाली कैसे करेगा?) फिर यह कि नया चेला न हो, ऐसा न हो कि अभिमान करके शैतान का सा दण्‍ड पाए। और बाहरवालों में भी उसका सुनाम हो ऐसा न हो कि निन्‍दित होकर शैतान के फंदे में फँस जाए। वैसे ही सेवकों को भी गम्‍भीर होना चाहिए, दो रंगी, पियक्‍कड़, और नीच कमाई के लोभी न हों; पर विश्‍वास के भेद को शुद्ध विवेक से सुरक्षित रखें। और ये भी पहले परखे जाएँ, तब यदि निर्दोष निकलें तो सेवक का काम करें। इसी प्रकार से स्‍त्रियों को भी गम्‍भीर होना चाहिए; दोष लगानेवाली न हों, पर सचेत और सब बातों में विश्‍वासयोग्‍य हों। सेवक एक ही पत्‍नी के पति हों और बाल-बच्चों और अपने घरों का अच्‍छा प्रबन्‍ध करना जानते हों। क्‍योंकि जो सेवक का काम अच्‍छी तरह से कर सकते हैं, वे अपने लिये अच्‍छा पद और उस विश्‍वास में, जो मसीह यीशु पर है, बड़ा हियाव प्राप्‍त करते हैं। मैं तेरे पास जल्‍द आने की आशा रखने पर भी ये बातें तुझे इसलिये लिखता हूँ, कि यदि मेरे आने में देर हो तो तू जान ले कि परमेश्‍वर के घराने में जो जीवते परमेश्‍वर की कलीसिया है, और जो सत्‍य का खंभा और नींव है; कैसा बर्ताव करना चाहिए। और इसमें सन्‍देह नहीं कि भक्ति का भेद गम्‍भीर है, अर्थात्, वह जो शरीर में प्रगट हुआ, आत्‍मा में धर्मी ठहरा, स्‍वर्गदूतों को दिखाई दिया, अन्‍यजातियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्‍वास किया गया, और महिमा में ऊपर उठाया गया। परन्‍तु आत्‍मा स्‍पष्‍टता से कहता है कि आनेवाले समयों में कितने लोग भरमानेवाली आत्‍माओं, और दुष्‍टात्‍माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्‍वास से बहक जाएँगे, यह उन झूठे मनुष्‍यों के कपट के कारण होगा, जिनका विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है, जो विवाह करने से रोकेंगे, और भोजन की कुछ वस्‍तुओं से परे रहने की आज्ञा देंगे; जिन्‍हें परमेश्‍वर ने इसलिये सृजा कि विश्‍वासी और सत्‍य के पहचाननेवाले उन्‍हें धन्‍यवाद के साथ खाएँ। क्‍योंकि परमेश्‍वर की सृजी हुई हर एक वस्‍तु अच्‍छी है, और कोई वस्‍तु अस्‍वीकार करने के योग्‍य नहीं; पर यह कि धन्‍यवाद के साथ खाई जाए; क्‍योंकि परमेश्‍वर के वचन और प्रार्थना के द्वारा शुद्ध हो जाती है। यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्‍छा सेवक ठहरेगा; और विश्‍वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जो तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा। पर अशुद्ध और बूढ़ियों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये साधना कर। क्‍योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्‍योंकि इस समय के और आनेवाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है। यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्‍य है। क्‍योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्‍वर पर है; जो सब मनुष्‍यों का और निज करके विश्‍वासियों का उद्धारकर्ता है। इन बातों की आज्ञा देकर और सिखाता रह। कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्‍वास, और पवित्रता में विश्‍वासियों के लिये आदर्श बन जा। जब तक मैं न आऊँ, तब तक पढ़ने और उपदेश देने और सिखाने में लौलीन रह। उस वरदान से जो तुझ में है, और भविष्‍यद्वाणी के द्वारा प्राचीनों के हाथ रखते समय तुझे मिला था, निश्‍चिन्‍त मत रह। उन बातों को सोचता रह और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह, ताकि तेरी उन्‍नति सब पर प्रगट हो। अपनी और अपने उपदेश की चौकसी रख। इन बातों पर स्‍थिर रह, क्‍योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुननेवालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा। किसी बूढ़े को न डाँट; पर उसे पिता जानकर समझा दे, और जवानों को भाई जानकर; बूढ़ी स्‍त्रियों को माता जानकर; और जवान स्‍त्रियों को पूरी पवित्रता से बहन जानकर, समझा दे। उन विधवाओं का जो सचमुच विधवा हैं आदर कर। और यदि किसी विधवा के बच्चे या नाती-पोते हों, तो वे पहले अपने ही घराने के साथ भक्ति का बर्ताव करना, और अपने माता-पिता आदि को उन का हक देना सीखें, क्‍योंकि यह परमेश्‍वर को भाता है। जो सचमुच विधवा है, और उसका कोई नहीं; वह परमेश्‍वर पर आशा रखती है, और रात-दिन विनती और प्रार्थना में लौलीन रहती है। पर जो भोगविलास में पड़ गई, वह जीते जी मर गई है। इन बातों की भी आज्ञा दिया कर ताकि वे निर्दोष रहें। पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्‍वास से मुकर गया है, और अविश्‍वासी से भी बुरा बन गया है। उसी विधवा का नाम लिखा जाए जो साठ वर्ष से कम की न हो, और एक ही पति की पत्‍नी रही हो, और भले काम में सुनाम रही हो, जिसने बच्‍चों का पालन-पोषण किया हो; अतिथि की सेवा की हो, पवित्र लोगों के पाँव धोए हो, दुखियों की सहायता की हो, और हर एक भले काम में मन लगाया हो। पर जवान विधवाओं के नाम न लिखना, क्‍योंकि जब वे मसीह का विरोध करके सुख-विलास में पड़ जाती हैं, तो विवाह करना चाहती हैं, और दोषी ठहरती हैं, क्‍योंकि उन्होंने अपने पहले विश्‍वास को छोड़ दिया है। और इस के साथ ही साथ वे घर-घर फिरकर आलसी होना सीखती है, और केवल आलसी नहीं, पर बकबक करती रहती और दूसरों के काम में हाथ भी डालती हैं और अनुचित बातें बोलती हैं। इसलिये मैं यह चाहता हूँ, कि जवान विधवाएँ विवाह करें; और बच्‍चे जनें और घरबार संभालें, और किसी विरोधी को बदनाम करने का अवसर न दें। क्‍योंकि कई एक तो बहककर शैतान के पीछे हो चुकी हैं। यदि किसी विश्‍वासिनी के यहाँ विधवाएँ हों, तो वही उनकी सहायता करे कि कलीसिया पर भार न हो ताकि वह उनकी सहायता कर सके, जो सचमुच में विधवाएँ हैं। जो प्राचीन अच्‍छा प्रबन्‍ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्‍य समझे जाएँ। क्‍योंकि पवित्र शास्‍त्र कहता है, “दाँवनेवाले बैल का मुँह न बाँधना,” क्‍योंकि “मजदूर अपनी मजदूरी का हक्‍कदार है।” कोई दोष किसी प्राचीन पर लगाया जाए तो बिना दो या तीन गवाहों के उसको न सुन। पाप करनेवालों को सब के सामने समझा दे, ताकि और लोग भी डरें। परमेश्‍वर, और मसीह यीशु, और चुने हुए स्‍वर्गदूतों को उपस्‍थित जानकर मैं तुझे चेतावनी देता हूँ कि तू मन खोलकर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर। किसी पर शीघ्र हाथ न रखना और दूसरों के पापों में भागी न होना; अपने आपको पवित्र बनाए रख। भविष्‍य में केवल जल ही का पीनेवाला न रह, पर अपने पेट के और अपने बार-बार बीमार होने के कारण थोड़ा-थोड़ा दाखरस भी काम में लाया कर। कुछ मनुष्‍यों के पाप प्रगट हो जाते हैं, और न्‍याय के लिये पहले से पहुँच जाते हैं, पर कुछ के पीछे से आते हैं। वैसे ही कुछ भले काम भी प्रगट होते हैं, और जो ऐसे नहीं होते, वे भी छिप नहीं सकते। जितने दास जूए के नीचे हैं, वे अपने-अपने स्‍वामी को बड़े आदर के योग्‍य जानें, ताकि परमेश्‍वर के नाम और उपदेश की निन्‍दा न हो। और जिनके स्‍वामी विश्‍वासी हैं, इन्‍हें वे भाई होने के कारण तुच्‍छ न जानें; वरन् उनकी और भी सेवा करें, क्‍योंकि इस से लाभ उठाने वाले विश्‍वासी और प्रेमी हैं। इन बातों का उपदेश किया कर और समझाता रह। यदि कोई और ही प्रकार का उपदेश देता है और खरी बातों को, अर्थात् हमारे प्रभु यीशु मसीह की बातों को और उस उपदेश को नहीं मानता, जो भक्ति के अनुसार है। तो वह अभिमानी हो गया, और कुछ नहीं जानता, वरन् उसे विवाद और शब्‍दों पर तर्क करने का रोग है, जिनसे डाह, और झगड़े, और निन्‍दा की बातें, और बुरे-बुरे सन्‍देह, और उन मनुष्‍यों में व्‍यर्थ रगड़े-झगड़े उत्‍पन्‍न होते हैं, जिनकी बुद्धि बिगड़ गई है और वे सत्‍य से विहीन हो गए हैं, जो समझते हैं कि भक्ति कमाई का द्वार है। पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। क्‍योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। और यदि हमारे पास खाने और पहनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुत से व्‍यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फँसते हैं, जो मनुष्‍यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। क्‍योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्‍त करने का प्रयत्‍न करते हुए कितनों ने विश्‍वास से भटककर अपने आपको विभिन्न प्रकार के दु:खों से छलनी बना लिया है। पर हे परमेश्‍वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्‍वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। विश्‍वास की अच्‍छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्‍त जीवन को धर ले, जिसके लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के सामने अच्‍छा अंगीकार किया था। मैं तुझे परमेश्‍वर को जो सबको जीवित रखता है, और मसीह यीशु को गवाह करके जिसने पुन्‍तियुस पीलातुस के सामने अच्‍छा अंगीकार किया, यह आज्ञा देता हूँ, कि तू हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने तक इस आज्ञा को निष्‍कलंक और निर्दोष रख, जिसे वह ठीक समय पर दिखाएगा, जो परमधन्‍य और एकमात्र अधिपति और राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु है, और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्‍य ज्‍योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्‍य ने देखा और न कभी देख सकता है। उसकी प्रतिष्‍ठा और राज्‍य युगानुयुग रहेगा। आमीन। इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्‍तु परमेश्‍वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों, और आगे के लिये एक अच्‍छी नींव डाल रखें, कि सत्‍य जीवन को वश में कर लें। हे तीमुथियुस इस धरोहर की रखवाली कर और जिस ज्ञान को ज्ञान कहना ही भूल है, उसके अशुद्ध बकवाद और विरोध की बातों से परे रह। कितने इस ज्ञान का अंगीकार करके विश्‍वास से भटक गए हैं। तुम पर अनुग्रह होता रहे। पौलुस की ओर से जो उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो मसीह यीशु में है, परमेश्‍वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, प्रिय पुत्र तीमुथियुस के नाम। परमेश्‍वर पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह और दया और शान्‍ति मिलती रहे। जिस परमेश्‍वर की सेवा मैं अपने बापदादों की रीति पर शुद्ध विवेक से करता हूँ, उसका धन्‍यवाद हो कि अपनी प्रार्थनाओं में तुझे लगातार स्‍मरण करता हूँ, और तेरे आँसुओं की सुधि कर करके रात दिन तुझ से भेंट करने की लालसा रखता हूँ कि आनन्‍द से भर जाऊँ। और मुझे तेरे उस निष्‍कपट विश्‍वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस, और तेरी माता यूनीके में थी, और मुझे निश्‍चय हुआ है, कि तुझ में भी है। इसी कारण मैं तुझे सुधि दिलाता हूँ, कि तू परमेश्‍वर के उस वरदान को जो मेरे हाथ रखने के द्वारा तुझे मिला है चमका दे। क्‍योंकि परमेश्‍वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्‍मा दी है। इसलिये हमारे प्रभु की गवाही से, और मुझ से जो उसका कैदी हूँ, लज्‍जित न हो, पर उस परमेश्‍वर की सामर्थ के अनुसार सुसमाचार के लिये मेरे साथ दुख उठा। जिस ने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है जो मसीह यीशु में सनातन से हम पर हुआ है। पर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रगट होने के द्वारा प्रकाश हुआ, जिस ने मृत्‍यु का नाश किया, और जीवन और अमरता को उस सुसमाचार के द्वारा प्रकाशमान कर दिया। जिसके लिये मैं प्रचारक, और प्रेरित, और उपदेशक भी ठहरा। इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूँ, पर लजाता नहीं, क्‍योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूँ; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। जो खरी बातें तू ने मुझ से सुनी हैं उनको उस विश्‍वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, अपना आदर्श बनाकर रख। और पवित्र आत्‍मा के द्वारा जो हम में बसा हुआ है, इस अच्‍छी थाती की रखवाली कर। तू जानता है, कि आसियावाले सब मुझ से फिर गए हैं, जिन में फूगिलुस और हिरमुगिनेस हैं। उनेसिफुरूस के घराने पर प्रभु दया करे, क्‍योंकि उसने बहुत बार मेरे जी को ठंडा किया, और मेरी जंजीरों से लज्‍जित न हुआ। पर जब वह रोमा में आया, तो बड़े यत्‍न से ढूँढर मुझ से भेंट की। (प्रभु करे, कि उस दिन उस पर प्रभु की दया हो)। और जो जो सेवा उसने इफिसुस में की है उन्‍हें भी तू भली भँति जानता है। इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्‍हने मुझ से सुनी है, उन्‍हें विश्‍वासी मनुष्‍यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्‍य हों। मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाई मेरे साथ दुख उठा। जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करनेवाले को प्रसन्‍न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता फिर अखाड़े में लड़नेवाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। जो गृहस्‍थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहले उसे मिलना चाहिए। जो मैं कहता हूँ, उस पर ध्‍यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। यीशु मसीह को स्‍मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। जिसके लिये मैं कुकर्मी की नाई दुख उठाता हूँ, यहाँ तक कि कैद भी हूँ; परन्‍तु परमेश्‍वर का वचन कैद नहीं। इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूँ, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएँ। यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएँगे भी। यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्‍य भी करेंगे: यदि हम उसका इन्‍कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्‍कार करेगा। यदि हम अविश्‍वासी भी हों तौभी वह विश्‍वासयोग्‍य बना रहता है, क्‍योंकि वह आप अपना इन्‍कार नहीं कर सकता। इन बातों की सुधि उन्‍हें दिला, और प्रभु के साम्‍हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता; वरन् सुननेवाले बिगड़ जाते हैं। अपने आप को परमेश्‍वर का ग्रहणयोग्‍य और ऐसा काम करनेवाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्‍जित होने न पाए, और जो सत्‍य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। पर अशुद्ध बकवाद से बचा रह; क्‍योंकि ऐसे लोग और भी अभक्ति में बढ़ते जाएँगे। और उन का वचन सड़े-घाव की तरह फैलता जाएगा: हुमिनयुस और फिलेतुस उन्‍हीं में से हैं, जो यह कहकर कि पुनरूत्‍था हो चुका है सत्‍य से भटक गए हैं, और कितनों के विश्‍वास को उलट पुलट कर देते हैं। तौभी परमेश्‍वर की पक्‍की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है: “प्रभु अपनों को पहिचानता है,” और “जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।” बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ धर्म, और विश्‍वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्‍योंकि तू जानता है, कि उनसे झगड़े होते हैं। और प्रभु के दास को झगड़ालू नहीं होना चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुर्ण, और सहनशील हो। और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्‍वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्‍य को पहिचानें। और इस के द्वारा उसकी इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतन के फंदे से छूट जाएँ। पर यह जान रख, कि अन्‍तिम दिनों में कठिन समय आएँगे। क्‍योंकि मनुष्‍य अपस्‍वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्‍दक, माता-पिता की आज्ञा टालनेवाले, कृतघ्‍न, अपवित्र, मयारहित, क्षमारहित, दोष लगानेवाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी, विश्‍वासघाती, ढीठ, घमण्‍डी, और परमेश्‍वर के नहीं वरन् सुखविलास ही के चाहनेवाले होंगे। वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना। इन्‍हीं में से वे लोग हैं, जो घरों में दबे पाँव घुस आते हैं और उन छिछोरी स्‍त्रियों को वश में कर लेते हैं, जो पापों से दबी और हर प्रकार की अभिलाषाओं के वश में हैं। और सदा सीखती तो रहती हैं पर सत्‍य की पहिचान तक कभी नहीं पहुँचतीं। और जैसे यन्‍नेस और यम्‍ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्‍य का विरोध करते हैं: ये तो ऐसे मनुष्‍य हैं, जिन की बुद्धि भ्रष्‍ट हो गई है और वे विश्‍वास के विषय में निकम्‍मे हैं। पर वे इस से आगे नहीं बढ़ सकते, क्‍योंकि जैसे उनकी अज्ञानता सब मनुष्‍यों पर प्रगट हो गई थी, वैसे ही इन की भी हो जाएगी। पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्‍वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया। और ऐसे दुखों में भी जो अन्‍ताकिया और इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्‍तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया। पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएँगे। और दुष्‍ट, और बहकानेवाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएँगे। पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्‍हें किन लोगों से सीखा है, और बालकपन से पवित्र शास्‍त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्‍वास करने से उद्धार प्राप्‍त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है, ताकि परमेश्‍वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। परमेश्‍वर और मसीह यीशु को गवाह करके, जो जीवतों और मरे हुओं का न्‍याय करेगा, उसे और उसके प्रगट होने, और राज्‍य को सुधि दिलाकर मैं तुझे आदेश देता हूँ। कि तू वचन का प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डाँट, और समझा। क्‍योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे। और अपने कान सत्‍य से फेरकर कथा-कहानियों पर लगाएँगे। पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर। क्‍योंकि अब मैं अर्ध की नाई उंडेला जाता हूँ, और मेरे कूच का समय आ पहुँचा है। मैं अच्‍छी कुश्‍ती लड़ चुका हूँ मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्‍वास की रखवाली की है। भविष्‍य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्‍यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन् उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। मेरे पास शीघ्र आने का प्रयत्‍न कर। क्‍योंकि देमास ने इस संसार को प्रिय जानकर मुझे छोड़ दिया है, और थिस्‍सलुनीके को चला गया है, और क्रेसकेंस गलतिया को और तीतुस दलमतिया को चला गया है। केवल लूका मेरे साथ है: मरकुस को लेकर चला आ; क्‍योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है। तुखिकुस को मैं ने इफिसुस को भेजा है। जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहाँ छोड़ आया हूँ, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष करके धर्मपत्रों को लेते आना। सिकन्‍दर ठठेरे ने मुझ से बहुत बुराइयाँ की हैं प्रभु उसे उसके कामों के अनुसार बदला देगा। तू भी उससे सावधान रह, क्‍योंकि उसने हमारी बातों का बहुत ही विरोध किया। मेरे पहले प्रत्‍युत्तर करने के समय में किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, वरन् सब ने मुझे छोड़ दिया था: भला हो, कि इस का उनको लेखा देना न पड़े। परन्‍तु प्रभु मेरा सहायक रहा, और मुझे सामर्थ दी: ताकि मेरे द्वारा पूरा पूरा प्रचार हो, और सब अन्‍यजाति सुन ले; और मैं तो सिंह के मुँह से छुड़ाया गया। और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्‍वर्गीय राज्‍य में उद्धार करके पहूँचाएगा: उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। प्रिसका और अक्विला को, और उनेसिफुरूस के घराने को नमस्‍कार। इरास्‍तुस कुरिन्‍थुस में रह गया, और त्रुफिमुस को मैं ने मीलेतुस में बीमार छोड़ा है। जाड़े से पहले चले आने का प्रयत्‍न कर: यूबूलुस, और पूदेंस, और लीनुस और क्‍लौदिया, और सब भाइयों का तुझे नमस्‍कार। प्रभु तेरी आत्‍मा के साथ रहे: तुम पर अनुग्रह होता रहे। पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर का दास और यीशु मसीह का प्रेरित है, परमेश्‍वर के चुने हुए लोगों के विश्‍वास, और भक्ति के अनुसार है, उस अनन्‍त जीवन की आशा पर, जिस की प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने जो झूठ बोल नहीं सकता सनातन से की है, पर ठीक समय पर अपने वचन को उस प्रचार के द्वारा प्रगट किया, जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की आज्ञा के अनुसार मुझे सौंपा गया। तीतुस के नाम जो विश्‍वास की सहभागिता के विचार से मेरा सच्‍चा पुत्र है: परमेश्‍वर पिता और हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु से अनुग्रह और शान्‍ति होती रहे। मैं इसलिये तुझे क्रेते में छोड़ आया था, कि तू शेष रही हुई बातों को सुधारे, और मेरी आज्ञा के अनुसार नगर नगर प्राचीनों को नियुक्‍त करे। जो निर्दोष और एक ही पत्‍नी के पति हों, जिन के बच्चे विश्‍वासी हो, और जिन पर लुचपन और निरंकुशता का दोष नहीं। क्‍योंकि अध्‍यक्ष को परमेश्‍वर का भण्‍डारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए; न हठी, न क्रोधी, न पियक्‍कड़, न मारपीट करनेवाला, और न नीच कमाई का लोभी। पर पहुनाई करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, संयमी, न्‍यायी, पवित्र और जितेन्‍द्रिय हो; और विश्‍वासयोग्‍य वचन पर जो धर्मोपदेश के अनुसार है, स्‍थिर रहे; कि खरी शिक्षा से उपदेश दे सके; और विवादियों का मुँह भी बन्‍द कर सके। क्‍योंकि बहुत से लोग निरंकुश बकवादी और धोखा देनेवाले हैं; विशेष करके खतनावालों में से। इन का मुँह बन्‍द करना चाहिए: ये लोग नीच कमाई के लिये अनुचित बातें सिखाकर घर के घर बिगाड़ देते हैं। उन्‍हीं में से एक जन ने जो उन्‍हीं का भविष्यद्वक्ता हैं, कहा है, “क्रेती लोग सदा झूठे, दुष्‍ट, पशु और आलसी पेटू होते हैं।” यह गवाही सच है, इसलिये उन्‍हें कड़ाई से चितौनी दिया कर, कि वे विश्‍वास में पक्‍के हो जाएँ। और वे यहूदियों की कथा कहानियों और उन मनुष्‍यों की आज्ञाओं पर मन न लगाएँ, जो सत्‍य से भटक जाते हैं। शुद्ध लोगों के लिये सब वस्‍तु शुद्ध हैं, पर अशुद्ध और अविश्‍वासियों के लिये कुछ भी शुद्ध नहीं: बरन उन की बुद्धि और विवेक दोनों अशुद्ध हैं। वे कहते हैं, कि हम परमेश्‍वर को जानते हैं: पर अपने कामों से उसका इन्‍कार करते हैं, क्‍योंकि वे घृणित और आज्ञा न माननेवाले हैं: और किसी अच्‍छे काम के योग्‍य नहीं। पर तू ऐसी बातें कहा कर, जो खरे उपदेश के योग्‍य हैं। अर्थात् बूढ़े पुरूष, सचेत और गम्‍भीर और संयमी हों, और उनका विश्‍वास और प्रेम और धीरज पक्‍का हो। इसी प्रकार बूढ़ी स्‍त्रियों का चाल चलन पवित्र लोगों सा हो, वे दोष लगानेवाली और पियक्‍कड़ नहीं; पर अच्‍छी बातें सिखानेवाली हों। ताकि वे जवान स्‍त्रियों को चितौनी देती रहें, कि अपने पतियों और बच्‍चों से प्रीति रखें; और संयमी, पतिव्रता, घर का कारबार करनेवाली, भली और अपने अपने पति के आधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्‍वर के वचन की निन्‍दा न होने पाए। ऐसे ही जवान पुरूषों को भी समझाया कर, कि संयमी हों। सब बातों में अपने आप को भले कामों का नमूना बना: तेरे उपदेश में सफाई, गम्‍भीरता। और ऐसी खराई पाई जाए, कि कोई उसे बुरा न कह सके; जिस से विरोधी हम पर कोई दोष लगाने की गौं न पाकर लज्‍जित हों। दासों को समझा, कि अपने अपने स्‍वामी के आधीन रहें, और सब बातों में उन्‍हें प्रसन्‍न रखें, और उलटकर जवाब न दें; चोरी चालाकी न करें; पर सब प्रकार से पूरे विश्‍वासी निकलें, कि वे सब बातों में हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर के उपदेश को शोभा दें। क्‍योंकि परमेश्‍वर का अनुग्रह प्रगट है, जो सब मनुष्‍यों के उद्धार का कारण है। और हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस युग में संयम और धर्म और भक्ति से जीवन बिताएँ; और उस धन्‍य आशा की अर्थात् अपने महान परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें। जिस ने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले भले कामों में सरगर्म हो। पूरे अधिकार के साथ ये बातें कह और समझा और सिखाता रह: कोई तुझे तुच्छ न जानने पाए। लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहे, किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्‍यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। क्‍योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न माननेवाले, और भ्रम में पड़े हुए, और विभिन्न प्रकार की अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्‍व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे। पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की कृपा, और मनुष्‍यों पर उसकी प्रीति प्रगट हुई। तो उस ने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्‍म के स्‍नान, और पवित्र आत्‍मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। जिसे उस ने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्‍त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। यह बात सच है, और मैं चाहता हूँ, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्‍हों ने परमेश्‍वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्‍यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्‍यों के लाभ की हैं। पर मूर्खता के विवादों, और वंशावलियों, और बैर विरोध, और उन झगड़ों से, जो व्‍यवस्‍था के विषय में हों बचा रह; क्‍योंकि वे निष्‍फल और व्‍यर्थ हैं। किसी पाखंडी को एक दो बार समझा बुझाकर उस से अलग रह। यह जानकर कि ऐसा मनुष्‍य भटक गया है, और अपने आप को दोषी ठहराकर पाप करता रहता है। जब मैं तेरे पास अरतिमास या तुखिकुस को भेजूँ, तो मेरे पास नीकुपुलिस आने का यत्‍न करना: क्‍योंकि मैं ने वहीं जाड़ा काटने की ठानी है। जेनास व्‍यवस्‍थापक और अपुल्‍लोस को यत्‍न करके आगे पहूँचा दे, और देख, कि उन्‍हें किसी वस्‍तु की घटी न होने पाए। और हमारे लोग भी आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिये अच्‍छे कामों में लगे रहना सीखें ताकि निष्‍फल न रहें। मेरे सब साथियों का तुझे नमस्‍कार और जो विश्‍वास के कारण हम से प्रीति रखते हैं, उन को नमस्‍कार। तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। पौलुस की ओर से जो मसीह यीशु का कैदी है, और भाई तिमुथियुस की ओर से हमारे प्रिय सहकर्मी फिलेमोन। और बहिन अफफिया, और हमारे साथी योद्धा अरखिप्‍पुस और फिलेमोन के घर की कलीसिया के नाम। हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह और शान्‍ति तुम्‍हें मिलती रहे। मैं सदा परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्‍मरण करता हूँ। तेरे उस प्रेम और विश्‍वास की चर्चा सुनकर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि तेरा विश्‍वास में सहभागी होना तुम्‍हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो। क्‍योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्‍द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं। इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूँ। तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूँ, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूँ। मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्‍मा है तुझ से बिनती करता हूँ। वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है। उसी को अर्थात् जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है। उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण हैं, मेरी सेवा करे। पर मैं ने तेरी इच्‍छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्‍द से हो। क्‍योंकि क्‍या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे। परन्‍तु अब से दास की नाई नहीं, बरन दास से भी उत्तम, अर्थात् भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो। सो यदि तू मुझे सहभागी समझता है, तो उसे इस प्रकार ग्रहण कर जैसे मुझे। और यदि उस ने तेरी कुछ हानि की है, या उस पर तेरा कुछ आता है, तो मेरे नाम पर लिख ले। मैं पौलुस अपने हाथ से लिखता हूँ, कि मैं आप भर दूँगा; और इस के कहने की कुछ आवश्‍यकता नहीं, कि मेरा कर्ज जो तुझ पर है वह तू ही है। हे भाई यह आनन्‍द मुझे प्रभु में तेरी ओर से मिले: मसीह में मेरे जी को हरा भरा कर दे। मैं तेरे आज्ञाकारी होने का भरोसा रखकर, तुझे लिखता हूँ और यह जानता हूँ, कि जो कुछ मैं कहता हूँ, तू उस से कहीं बढ़कर करेगा। और यह भी, कि मेरे लिये उतरने की जगह तैयार रख; मुझे आशा है, कि तुम्‍हारी प्रार्थनाओं के द्वारा मैं तुम्‍हें दे दिया जाऊँगा। इपफ्रास जो मसीह यीशु में मेरे साथ कैदी है। और मरकुस और अरिस्‍तर्खुस और देमास और लूका जो मेरे सहकर्मी है इन का तुझे नमस्‍कार।। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्‍हारी आत्‍मा पर होता रहे। आमीन। पूर्व युग में परमेश्‍वर ने बापदादों से थोड़ा थोड़ा करके और भांति भांति से भविष्‍यद्वक्‍ताओं के द्वारा बातें कर, इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊँचे स्‍थानों पर महामहिमन् के दहिने जा बैठा। और स्‍वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा, जितना उसने उनसे बड़े पद का वारिस होकर उत्तम नाम पाया। क्‍योंकि स्‍वर्गदूतों में से उसने कब किसी से कहा, “तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्‍पन्‍न हुआ?” और फिर यह, “मैं उसका पिता हूँगा, और वह मेरा पुत्र होगा?” और जब पहिलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है, “परमेश्‍वर के सब स्‍वर्गदूत उसे दण्‍डवत करें।” और स्‍वर्गदूतों के विषय में यह कहता है, “वह अपने दूतों को पवन, और अपने सेवकों को धधकती आग बनाता है।” परन्‍तु पुत्र से कहता है, “हे परमेश्‍वर तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा: तेरे राज्‍य का राजदण्‍ड न्‍याय का राजदण्‍ड है। तू ने धर्म से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; इस कारण परमेश्‍वर, तेरे परमेश्‍वर, ने तेरे साथियों से बढ़कर हर्षरूपी तेल से तुझे अभिषेक किया।” और यह कि, “हे प्रभु, आदि में तू ने पृथ्‍वी की नींव डाली, और स्‍वर्ग तेरे हाथों की कारीगरी है। वे तो नाश हो जाएँगे; परन्‍तु तू बना रहेगा: और वे सब वस्‍त्र की नाई पुराने हो जाएँगे। और तू उन्‍हें चादर की नाईं लपेटेगा, और वे वस्‍त्र की नाई बदल जाएँगे: पर तू वही है और तेरे वर्षों का अन्‍त न होगा।” और स्‍वर्गदूतों में से उसने किस से कब कहा, “तू मेरे दहिने बैठ, जब कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवों के नीचे की पीढ़ी न कर दूं?” क्‍या वे सब सेवा टहल करनेवाली आत्‍माएं नहीं; जो उद्धार पानेवालों के लिये सेवा करने को भेजी जाती हैं? इस कारण चाहिए, कि हम उन बातों पर जो हम ने सुनी हैं और भी मन लगाएँ, ऐसा न हो कि बहकर उनसे दूर चले जाएँ। क्‍योंकि जो वचन स्‍वर्गदूतों के द्वारा कहा गया था, जब वह स्‍थिर रहा और हर एक अपराध और आज्ञा न मानने का ठीक-ठीक बदला मिला। तो हम लोग ऐसे बड़े उद्धार से निश्‍चिन्‍त रहकर क्‍योंकर बच सकते हैं? जिस की चर्चा पहले-पहल प्रभु के द्वारा हुई, और सुननेवालों के द्वारा हमें निश्‍चय हुआ। और साथ ही परमेश्‍वर भी अपनी इच्‍छा के अनुसार चिन्‍हों, और अद्भुत कामों, और नाना प्रकार के सामर्थ के कामों, और पवित्र आत्‍मा के वरदानों के बाँटने के द्वारा इस की गवाही देता रहा। उसने उस आनेवाले जगत को जिस की चर्चा हम कर रहे हैं, स्‍वर्गदूतों के आधीन न किया। वरन् किसी ने कहीं, यह गवाही दी है, “मनुष्‍य क्‍या हैं, कि तू उस की सुधि लेता है? या मनुष्‍य का पुत्र क्‍या है, कि तू उस पर दृष्‍टि करता है? तू ने उसे स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया; तू ने उस पर महिमा और आदर का मुकुट रखा और उसे अपने हाथों के कामों पर अधिकार दिया। तू ने सब कुछ उसके पाँवों के नीचे कर दिया।” इसलिये जब कि उसने सब कुछ उसके आधीन कर दिया, तो उसने कुछ भी रख न छोड़ा, जो उसके आधीन न हो: पर हम अब तक सब कुछ उसके आधीन नहीं देखते। पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्‍यु का दु:ख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्‍वर के अनुग्रह से वह हर एक मनुष्‍य के लिये मृत्‍यु का स्‍वाद चखे। क्‍योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्‍छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुँचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दु:ख उठाने के द्वारा सिद्ध करे। क्‍योंकि पवित्र करनेवाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्‍हें भाई कहने से नहीं लजाता। पर वह कहता है, “मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊँगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊँगा।” और फिर यह, “मैं उस पर भरोसा रखूँगा।” और फिर यह, “देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्‍वर ने मुझे दिए।” इसलिये जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्‍यु के द्वारा उसे जिसे मृत्‍यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान** को निकम्‍मा कर दे, और जितने मृत्‍यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फँसे थे, उन्‍हें छुड़ा ले। क्‍योंकि वह तो स्‍वर्गदूतों को नहीं वरन् अब्राहम के वंश को संभालता है। इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्‍वर से सम्‍बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्‍वासयोग्‍य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित करे। क्‍योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दु:ख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। सो हे पवित्र भाइयों तुम जो स्‍वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं ध्‍यान करो। जो अपने नियुक्‍त करनेवाले के लिये विश्‍वासयोग्‍य था, जैसा मूसा भी परमेश्वर के सारे घर में था। क्‍योंकि यीशु मूसा से इतना बढ़कर महिमा के योग्‍य समझा गया है, जितना कि घर बनानेवाला घर से बढ़कर आदर रखता है। क्‍योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनानेवाला होता है, पर जिस ने सब कुछ बनाया वह परमेश्‍वर है। मूसा तो परमेश्वर के सारे घर में सेवक की नाई विश्‍वासयोग्‍य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होनेवाला था, उन की गवाही दे। पर मसीह पुत्र की नाई परमेश्वर के घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्‍ड पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्‍थिर रहें। सो जैसा पवित्र आत्‍मा कहता है, “यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो, तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। जहाँ तुम्‍हारे बापदादों ने मुझे जाँचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। इस कारण मैं उस समय के लोगों से क्रोधित रहा, और कहा, ‘इनके मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना।’ तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, ‘वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएँगे’।” हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्‍वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्‍वर से दूर हटा ले जाए। वरन् जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। क्‍योंकि हम मसीह के** भागीदार हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्‍थिर रहें। जैसा कहा जाता है, “यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था।” भला किन लोगों ने सुनकर क्रोध दिलाया? क्‍या उन सब ने नहीं जो मूसा के द्वारा मिसर से निकले थे? और वह चालीस वर्ष तक किन लोगों से क्रोधित रहा? क्‍या उन्‍हीं से नहीं, जिन्‍हों ने पाप किया, और उनके शव जंगल में पड़े रहे? और उसने किन से शपथ खाई, कि तुम मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाओगे: केवल उनसे जिन्‍हों ने आज्ञा न मानी? सो हम देखते हैं, कि वे अविश्‍वास के कारण प्रवेश न कर सके। इसलिये जब कि उसके विश्राम में प्रवेश करने की प्रतिज्ञा अब तक है, तो हमें डरना चाहिए; ऐसा ने हो, कि तुम में से कोई जन उससे वंचित रह जाए। क्‍योंकि हमें उन्‍हीं के समान सुसमाचार सुनाया गया है, पर सुने हुए वचन से उन्‍हें कुछ लाभ न हुआ; क्‍योंकि सुननेवालों के मन में विश्‍वास के साथ नहीं बैठा। और हम जिन्‍हों ने विश्‍वास किया है, उस विश्राम में प्रवेश करते हैं; जैसा उसने कहा, “मैं ने अपने क्रोध में शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएँगे।” यद्यपि जगत की उत्‍पत्ति के समय से उस के काम हो चुके थे। क्‍योंकि सातवें दिन के विषय में उसने कहीं यों कहा है, “परमेश्‍वर ने सातवें दिन अपने सब कामों को निपटा करके** विश्राम किया।” और इस जगह फिर यह कहता है, “वे मेरे विश्राम में प्रवेश न करने पाएँगे।” तो जब यह बात बाकी है कि कितने और हैं जो उस विश्राम में प्रवेश करें, और जिन्‍हें उसका सुसमाचार पहले सुनाया गया, उन्‍होने आज्ञा न मानने के कारण उस में प्रवेश न किया। तो फिर वह किसी विशेष दिन को ठहराकर इतने दिन के बाद दाऊद की पुस्‍तक में उसे ‘आज का दिन’ कहता है, जैसे पहले कहा गया, “यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो।” और यदि यहोशू उन्‍हें विश्राम में प्रवेश करा लेता, तो उसके बाद दूसरे दिन की चर्चा न होती। सो जान लो कि परमेश्‍वर के लोगों के लिये सब्‍त का विश्राम बाकी है। क्‍योंकि जिस ने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्‍वर की नाई अपने कामों को पूरा करके** विश्राम किया है। सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्‍न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उनके समान आज्ञा न मानकर गिर पड़े। क्‍योंकि परमेश्‍वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और प्राण, और आत्‍मा को, और गाँठ-गाँठ, और गूदे-गूदे को अलग करके, आर-पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है। और सृष्‍टि की कोई वस्‍तु उससे छिपी नहीं है वरन् जिस से हमें काम है, उस की आँखों के सामने सब वस्‍तुएँ खुली और प्रगट हैं। सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से होकर गया है, अर्थात् परमेश्‍वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। क्‍योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दु:खी न हो सके; वरन् वह सब बातों में हमारी नाई परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ, जो आवश्‍यकता के समय हमारी सहायता करे। क्‍योंकि हर एक महायाजक मनुष्‍यों में से लिया जाता है, और मनुष्‍यों ही के लिये उन बातों के विषय में जो परमेश्‍वर से सम्‍बन्‍ध रखती हैं, ठहराया जाता है: कि भेंट और पाप बलि चढ़ाया करे। और वह अज्ञानों, और भूले भटकों के साथ नर्मी से व्‍यवहार कर सकता है इसलिये कि वह आप भी निर्बलता से घिरा है। और इसी लिये उसे चाहिए, कि जैसे लोगों के लिये, वैसे ही अपने लिये भी पाप-बलि चढ़ाया करे। और यह आदर का पद कोई अपने आप से नहीं लेता, जब तक कि हारून की नाई परमेश्‍वर की ओर से ठहराया न जाए। वैसे ही मसीह ने भी महायाजक बनने की बड़ाई अपने आप से नहीं ली, पर उस को उसी ने दी, जिस ने उससे कहा था, “तू मेरा पुत्र है, आज मैं ही ने तुझे उत्पन्न किया है। इसी प्रकार वह दूसरी जगह में भी कहता है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये याजक है।” यीशु ने अपनी देह में रहने के दिनों में ऊँचे शब्‍द से पुकार-पुकारकर, और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उस को मृत्‍यु से बचा** सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की और भक्ति के कारण उस की सुनी गई। और पुत्र होने पर भी, उसने दु:ख उठा-उठाकर आज्ञा माननी सीखी। और सिद्ध बनकर, अपने सब आज्ञा माननेवालों के लिये सदा काल के उद्धार का कारण हो गया। और उसे परमेश्‍वर की ओर से मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक का पद मिला। इस के विषय में हमें बहुत सी बातें कहनी हैं, जिन का समझाना भी कठिन है; इसलिये कि तुम ऊँचा सुनने लगे हो। समय के विचार से तो तुम्‍हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्‍या यह आवश्‍यक है, कि कोई तुम्‍हें परमेश्‍वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए? और ऐसे हो गए हो, कि तुम्‍हें अन्‍न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। क्‍योंकि दूध पीनेवाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्‍योंकि वह बालक है। पर अन्‍न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रियाँ अभ्‍यास करते-करते, भले-बुरे में भेद करने में निपुर्ण हो गई हैं। इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्‍भ की बातों को छोड़कर, हम सिद्धता की ओर बढ़ते जाएँ, और मरे हुए कामों से मन फिराने, और परमेश्‍वर पर विश्‍वास करने, और बपतिस्‍मों और हाथ रखने, और मरे हुओं के जी उठने,** और अन्‍तिम न्‍याय की शिक्षारूपी नीँव, फिर से न डालें। और यदि परमेश्‍वर चाहे, तो हम यहीं करेंगे। क्‍योंकि जिन्‍हों ने एक बार ज्‍योति पाई है, और जो स्‍वर्गीय वरदान का स्‍वाद चख चुके हैं और पवित्र आत्‍मा के भागी हो गए हैं, और परमेश्‍वर के उत्तम वचन का और आनेवाले युग की सामर्थ्य का स्‍वाद चख चुके हैं। यदि वे भटक जाएँ; तो उन्‍हें मन फिराव के लिये फिर नया बनाना अन्‍होना है; क्‍योंकि वे परमेश्‍वर के पुत्र को अपने लिये फिर क्रूस पर चढ़ाते हैं और प्रगट में उस पर कलंक लगाते हैं। क्‍योंकि जो भूमि वर्षा के पानी को जो उस पर बार-बार पड़ता है, पी पीकर जिन लोगों के लिये वह जोती-बोई जाती है, उन के काम का साग-पात उपजाती है, वह परमेश्‍वर से आशीष पाती है। पर यदि वह झाड़ी और ऊँटकटारे उगाती है, तो निकम्‍मी और स्रापित होने पर है, और उसका अन्‍त जलाया जाना है। पर हे प्रियो यद्यपि हम ये बातें कहते हैं तौभी तुम्‍हारे विषय में हम इस से अच्छी और उद्धारवाली बातों का भरोसा करते हैं। क्‍योंकि परमेश्‍वर अन्‍यायी नहीं, कि तुम्‍हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर भी रहे हो। पर हम बहुत चाहते हैं, कि तुम में से हर एक जन अन्‍त तक पूरी आशा के लिये ऐसा ही प्रयत्‍न करता रहे। ताकि तुम आलसी न हो जाओ; वरन् उन का अनुकरण करो, जो विश्‍वास और धीरज के द्वारा प्रतिज्ञाओं के वारिस होते हैं। और परमेश्‍वर ने अब्राहम को प्रतिज्ञा देते समय जब कि शपथ खाने के लिये किसी को अपने से बड़ा न पाया, तो अपनी ही शपथ खाकर कहा, “मैं सचमुच तुझे बहुत आशीष दूँगा, और तेरी सन्‍तान को बढ़ाता जाऊँगा। और इस रीति से उसने धीरज धरकर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्‍त की। मनुष्‍य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाया करते हैं और उन के हर एक विवाद का फैसला शपथ से पक्‍का होता है। इसलिये जब परमेश्‍वर ने प्रतिज्ञा के वारिसों पर और भी साफ रीति से प्रगट करना चाहा, कि उसकी मनसा बदल नहीं सकती तो शपथ को बीच में लाया। ताकि दो बे-बदल बातों के द्वारा जिन के विषय में परमेश्‍वर का झूठा ठहरना अन्‍होना है, हमारा दृढ़ता से ढाढ़स बन्‍ध जाए, जो शरण लेने को इसलिये दौड़े है, कि उस आशा को जो सामने रखी हुई है प्राप्‍त करें। वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्‍थिर और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुँचता है। जहाँ यीशु ने मलिकिसिदक की रीति पर सदा काल का महायाजक बनकर, हमारे लिये अगुआ के रूप में प्रवेश किया है। यह मलिकिसिदक शालेम का राजा, और परमप्रधान परमेश्‍वर का याजक, सर्वदा याजक बना रहता है; जब अब्राहम राजाओं को मारकर लौटा जाता था, तो इसी ने उससे भेंट करके उसे आशीष दी, इसी को अब्राहम ने सब वस्‍तुओं का दसवाँ अंश भी दिया: यह पहले अपने नाम के अर्थ के अनुसार, धर्म का राजा और फिर शालेम अर्थात् शान्‍ति का राजा है। जिस का न पिता, न माता, न वंशावली है, जिस के न दिनों का आदि है और न जीवन का अन्‍त है; परन्‍तु परमेश्‍वर के पुत्र के स्‍वरूप ठहरकर वह सदा के लिए याजक बना रहता है। अब इस पर ध्‍यान करो कि यह कैसा महान था जिस को कुलपिता अब्राहम ने अच्‍छे से अच्‍छे माल की लूट का दसवाँ अंश दिया। लेवी की संतान में से जो याजक का पद पाते हैं, उन्‍हें आज्ञा मिली है, कि लोगों, अर्थात् अपने भाइयों से चाहे, वे अब्राहम ही की देह से क्‍यों न जन्‍में हों, व्‍यवस्‍था के अनुसार दसवाँ अंश लें। पर इस ने, जो उन की वंशावली में का भी न था अब्राहम से दसवाँ अंश लिया और जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थी उसे आशीष दी। और उस में संदेह नहीं, कि छोटा बड़े से आशीष पाता है। और यहाँ तो मरनहार मनुष्‍य दसवाँ अंश लेते हैं पर वहाँ वही लेता है, जिस की गवाही दी जाती है, कि वह जीवित है। तो हम यह भी कह सकते हैं, कि लेवी ने भी, जो दसवाँ अंश लेता है, अब्राहम के द्वारा दसवाँ अंश दिया। क्‍योंकि जिस समय मलिकिसिदक ने उसके पिता से भेंट की, उस समय यह अपने पिता की देह में था। तब यदि लेवीय याजक पद के द्वारा सिद्धि हो सकती है (जिस के सहारे से लोगों को व्‍यवस्‍था मिली थी) तो फिर क्‍या आवश्‍यकता थी, कि दूसरा याजक मलिकिसिदक की रीति पर खड़ा हो, और हारून की रीति का न कहलाए? क्‍योंकि जब याजक का पद बदला जाता है? तो व्‍यवस्‍था का भी बदलना अवश्‍य है। क्‍योंकि जिस के विषय में ये बातें कही जाती हैं कि वह दूसरे गोत्र का है, जिस में से किसी ने वेदी की सेवा नहीं की। तो प्रगट है, कि हमारा प्रभु यहूदा के गोत्र में से उदय हुआ है और इस गोत्र के विषय में मूसा ने याजक पद की कुछ चर्चा नहीं की। और जब मलिकिसिदक के समान एक और ऐसा याजक उत्‍पन्‍न होनेवाला था। जो शारीरिक आज्ञा की व्‍यवस्‍था के अनुसार नहीं, पर अविनाशी जीवन की सामर्थ के अनुसार नियुक्‍त हो तो हमारा दावा और भी स्‍पष्‍टता से प्रगट हो गया। क्‍योंकि उसके विषय में यह गवाही दी गई है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।” निदान, पहिली आज्ञा निर्बल; और निष्‍फल होने के कारण लोप हो गई। (इसलिये कि व्‍यवस्‍था ने किसी बात की सिद्धि नहीं कि) और उसके स्‍थान पर एक ऐसी उत्तम आशा रखी गई है जिस के द्वारा हम परमेश्‍वर के समीप जा सकते हैं। और इसलिये कि मसीह की नियुक्ति बिना शपथ नहीं हुई। (क्‍योंकि वे तो बिना शपथ याजक ठहराए गए पर यह शपथ के साथ उस की ओर से नियुक्‍त किया गया जिस ने उसके विषय में कहा, “प्रभु ने शपथ खाई, और वह उससे फिर न पछताएगा, कि तू युगानुयुग याजक है”)। सो यीशु एक उत्तम वाचा का जामिन ठहरा। वे तो बहुत से याजक बनते आए, इस का कारण यह था कि मृत्‍यु उन्‍हें रहने नहीं देती थी। पर यह युगानुयुग रहता है; इस कारण उसका याजक पद अटल है। इसी लिये जो उसके द्वारा परमेश्‍वर के पास आते हैं, वह उन का पूरा पूरा उद्धार कर सकता है, क्‍योंकि वह उन के लिये बिनती करने को सर्वदा जीवित है। सो ऐसा ही महायाजक हमारे योग्‍य था, जो पवित्र, और निष्‍कपट और निर्मल, और पापियों से अलग, और स्‍वर्ग से भी ऊँचा किया हुआ हो। और उन महायाजकों की नाई उसे आवश्‍यक नहीं कि प्रति दिन पहले अपने पापों और फिर लोगों के पापों के लिये बलिदान चढ़ाए; क्‍योंकि उसने अपने आप को बलिदान चढ़ाकर उसे एक ही बार निपटा दिया। क्‍योंकि व्‍यवस्‍था तो निर्बल मनुष्‍यों को महायाजक नियुक्‍त करती है; परन्‍तु उस शपथ का वचन जो व्‍यवस्‍था के बाद खाई गई, उस पुत्र को नियुक्‍त करता है जो युगानुयुग के लिये सिद्ध किया गया है। अब जो बातें हम कह रहे हैं, उन में से सब से बड़ी बात यह है, कि हमारा ऐसा महायाजक है, जो स्‍वर्ग पर महामहिमन के सिंहासन के दहिने जा बैठा। और पवित्र स्‍थान और उस सच्‍चे तम्‍बू का सेवक हुआ, जिसे किसी मनुष्‍य ने नहीं, वरन् प्रभु ने खड़ा किया था। क्‍योंकि हर एक महायाजक भेंट, और बलिदान चढ़ाने के लिये ठहराया जाता है, इस कारण अवश्‍य है, कि इस के पास भी कुछ चढ़ाने के लिये हो। और यदि पृथ्‍वी पर होता तो कभी याजक न होता, इसलिये कि व्‍यवस्‍था के अनुसार भेंट चढ़ानेवाले तो हैं। जो स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप और प्रतिबिम्‍ब की सेवा करते हैं, जैसे जब मूसा तम्‍बू बनाने पर था, तो उसे यह चितावनी मिली, “देख जो नमूना तुझे पहाड़ पर दिखाया गया था, उसके अनुसार सब कुछ बनाना।” पर उस को उन की सेवकाई से बढ़कर मिली, क्‍योंकि वह और भी उत्तम वाचा का मध्‍यस्‍थ ठहरा, जो और उत्तम प्रतिज्ञाओं के सहारे बान्‍धी गई है। क्‍योंकि यदि वह पहिली वाचा निर्दोष होती, तो दूसरी के लिये अवसर न ढूँढा जाता। पर वह उन पर दोष लगाकर कहता है, कि प्रभु कहता है, देखो वे दिन आते हैं, कि मैं इस्राएल के घराने के साथ, और यहूदा के घराने के साथ, नई वाचा बाँधूँगा यह उस वाचा के समान न होगी, जो मैं ने उन के बापदादों के साथ उस समय बान्‍धी थी, जब मैं उन का हाथ पकड़कर उन्‍हें मिसर देश से निकाल लाया, क्‍योंकि वे मेरी वाचा पर स्‍थिर न रहे, और मैं ने उन की सुधि न ली; प्रभु यही कहता है। फिर प्रभु कहता है, कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने के साथ बाँधूँगा, वह यह है, कि मैं अपनी व्‍यवस्‍था को उन के मनों में डालूँगा, और उसे उन के हृदय पर लिखूँगा, और मैं उन का परमेश्‍वर ठहरूँगा, और वे मेरे लोग ठहरेंगे। और हर एक अपने देशवाले को और अपने भाई को यह शिक्षा न देगा, कि तू प्रभु को पहिचान क्योंकि छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे। क्‍योंकि मैं उन के अधर्म के विषय मे दयावन्‍त हूँगा, और उन के पापों को फिर स्‍मरण न करूँगा। नई वाचा के स्‍थापन से उसने प्रथम वाचा को पुरानी ठहराई, और जो वस्‍तु पुरानी और जीर्ण हो जाती है उसका मिट जाना अनिवार्य है। निदान, उस पहिली वाचा में भी सेवा के नियम थे; और ऐसा पवित्रस्‍थान जो इस जगत का था। अर्थात् एक तम्‍बू बनाया गया, पहले तम्‍बू में दीवट, और मेज, और भेंट की रोटियाँ थी; और वह पवित्रस्‍थान कहलाता है। और दूसरे परदे के पीछे वह तम्‍बू था, जो परम पवित्रस्‍थान कहलाता है। उस में सोने की धूपदानी, और चारों ओर सोने से मढ़ा हुआ वाचा का संदूक और इस में मन्ना से भरा हुआ सोने का मर्तबान और हारून की छड़ी जिस में फूल फल आ गए थे और वाचा की पटियाँ थीं। और उसके ऊपर दोनों तेजोमय करूब थे, जो प्रायश्चित के ढकने पर छाया किए हुए थे: इन्‍हीं का एक एक करके वर्णन करने का अभी अवसर नहीं है। जब ये वस्‍तुएँ इस रीति से तैयार हो चुकी, तक पहले तम्‍बू में तो याजक हर समय प्रवेश करके सेवा के काम निबाहते हैं पर दूसरे में केवल महायाजक वर्ष भर में एक ही बार जाता है; और बिना लहू लिये नहीं जाता; जिसे वह अपने लिये और लोगों की भूल चूक के लिये चढ़ावा चढ़ाता है। इस से पवित्र आत्‍मा यही दिखाता है, कि जब तक पहिला तम्‍बू खड़ा है, तब तक पवित्रस्‍थान का मार्ग प्रगट नहीं हुआ। और यह तम्‍बू तो वर्तमान समय के लिये एक दृष्‍टान्‍त है; जिस में ऐसी भेंट और बलिदान चढ़ाए जाते हैं, जिन से आराधना करनेवालों के विवेक सिद्ध नहीं हो सकते। इसलिये कि वे केवल खाने पीने की वस्‍तुओं, और भांति भांति के स्‍नान विधि के आधार पर शारीरिक नियम हैं, जो सुधार के समय तक के लिये नियुक्‍त किए गए हैं। परन्‍तु जब मसीह आनेवाली अच्‍छी अच्‍छी वस्‍तुओं का महायाजक होकर आया, तो उसने और भी बड़े और सिद्ध तम्‍बू से होकर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात् सृष्‍टि का नहीं। और बकरों और बछड़ों के लहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्‍थान में प्रवेश किया, और अनन्‍त छुटकारा प्राप्‍त किया। क्‍योंकि जब बकरों और बैलों का लहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है। तो मसीह का लहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्‍मा के द्वारा परमेश्‍वर के सामने निर्दोष चढ़ाया, तुम्‍हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्‍यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्‍वर की सेवा करो। और इसी कारण वह नई वाचा का मध्‍यस्‍थ है, ताकि उस मृत्‍यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्‍त मीरास को प्राप्‍त करें। क्‍योंकि जहाँ वाचा बान्‍धी गई है वहाँ वाचा बान्‍धनेवाले की मृत्‍यु का समझ लेना भी अवश्‍य है। क्‍योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्‍की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धनेवाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती। इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लहू के नहीं बान्‍धी गई। क्‍योंकि जब मूसा सब लोगों को व्‍यवस्‍था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उसने बछड़ों और बकरों का लहू लेकर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया। और कहा, “यह उस वाचा का लहू है, जिस की आज्ञा परमेश्‍वर ने तुम्‍हारे लिये दी है।” और इसी रीति से उसने तम्‍बू और सेवा के सारे सामान पर लहू छिड़का। और व्‍यवस्‍था के अनुसार प्राय: सब वस्‍तुएँ लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं; और बिना लहू बहाए क्षमा नहीं होती। इसलिये अवश्‍य है, कि स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप इन के द्वारा शुद्ध किए जाएँ; पर स्‍वर्ग में की वस्‍तुएँ आप इन से उत्तम बलिदानों के द्वारा। क्‍योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्र स्‍थान में जो सच्‍चे पवित्र स्‍थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्‍वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्‍वर के सामने दिखाई दे। यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए, जैसा कि महायाजक प्रति वर्ष दूसरे का लहू लिये पवित्रस्‍थान में प्रवेश किया करता है। नहीं तो जगत की उत्‍पत्ति से लेकर उस को बार बार दु:ख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्‍त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे। और जैसे मनुष्‍यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्‍याय का होना नियुक्‍त है। वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उस की बाट जोहते हैं, उन के उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा। क्‍योंकि व्‍यवस्‍था जिस में आनेवाली अच्‍छी वस्‍तुओं का प्रतिबिम्‍ब है, पर उन का असली स्‍वरूप नहीं, इसलिये उन एक ही प्रकार के बलिदानों के द्वारा, जो प्रति वर्ष अचूक चढ़ाए जाते हैं, पास आनेवालों को कदापि सिद्ध नहीं कर सकतीं। नहीं तो उन का चढ़ाना बन्‍द क्‍यों न हो जाता? इसलिये कि जब सेवा करनेवाले एक ही बार शुद्ध हो जाते, तो फिर उन का विवेक उन्‍हें पापी न ठहराता। परन्‍तु उन के द्वारा प्रति वर्ष पापों का स्‍मरण हुआ करता है। क्‍योंकि अनहोना है, कि बैलों और बकरों का लहू पापों को दूर करे। इसी कारण वह जगत में आते समय कहता है, “बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया। होम-बलियों और पाप-बलियों से तू प्रसन्‍न नहीं हुआ। तब मैं ने कहा, ‘देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्‍त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्‍वर तेरी इच्‍छा पूरी करूँ’।” ऊपर तो वह कहता है, “न तू ने बलिदान और भेंट और होम-बलियों और पाप-बलियों को चाहा, और न उनसे प्रसन्‍न हुआ,” यद्यपि ये बलिदान तो व्‍यवस्‍था के अनुसार चढ़ाए जाते हैं। फिर यह भी कहता है, “देख, मैं आ गया हूं, ताकि तेरी इच्‍छा पूरी करूँ,” निदान वह पहले को उठा देता है, ताकि दूसरे को नियुक्‍त करे। उसी इच्‍छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं। और हर एक याजक तो खड़े होकर प्रति दिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते; बार बार चढ़ाता है। पर यह व्यक्ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ाकर परमेश्‍वर के दहिने जा बैठा। और उसी समय से इस की बाट जोह रहा है, कि उसके बैरी उसके पाँवों के नीचे की पीढ़ी बनें। क्‍योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्‍हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है। और पवित्र आत्‍मा भी हमें यही गवाही देता है; क्‍योंकि उसने पहले कहा था “प्रभु कहता है; कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद उनसे बान्‍धूँगा वह यह है कि मैं अपनी व्‍यवस्‍थाओं को उनके हृदय पर लिखुँगा और मैं उन के विवेक में डालूँगा।” (फिर वह यह कहता है,) “मैं उन के पापों को, और उन के अधर्म के कामों को फिर कभी स्‍मरण न करूँगा।” और जब इन की क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा। सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्‍थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है, जो उसने परदे अर्थात् अपने शरीर में से होकर, हमारे लिये अभिषेक किया है, और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्‍वर के घर का अधिकारी है। तो आओ; हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्‍वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्‍वर के समीप जाएँ। और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है। और प्रेम, और भले कामों में उस्‍काने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्‍यों ज्‍यों उस दिन को निकट आते देखो, त्‍यों त्‍यों और भी अधिक यह किया करो। क्‍योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं। हाँ, दण्‍ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्‍वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्‍म कर देगा। जब कि मूसा की व्‍यवस्‍था का न माननेवाला दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है। तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्‍ड के योग्‍य ठहरेगा, जिस ने परमेश्‍वर के पुत्र को पाँवों से रौंदा, और वाचा के लहू को जिस के द्वारा वह पवित्र ठहराया गया था, अपवित्र जाना हैं, और अनुग्रह की आत्‍मा का अपमान किया। क्‍योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, “पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूँगा।” और फिर यह, कि “प्रभु अपने लोगों का न्‍याय करेगा।” जीवते परमेश्‍वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है। परन्‍तु उन पहले दिनों को स्‍मरण करो, जिन में तुम ज्‍योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्‍थिर रहे। कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की दुर्दशा की जाती थीं। क्‍योंकि तुम कैदियों के दु:ख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्‍द से लुटने दी; यह जानकर, कि तुम्‍हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरनेवाली संपत्ति है। सो अपना हियाव न छोड़ो क्‍योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है। क्‍योंकि तुम्‍हें धीरज धरना अवश्‍य है, ताकि परमेश्‍वर की इच्‍छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ। “क्‍योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आनेवाला आएगा, और देर न करेगा। और मेरा धर्मी जन विश्‍वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उससे प्रसन्‍न न होगा।” पर हम हटनेवाले नहीं, कि नाश हो जाएँ पर विश्‍वास करनेवाले हैं, कि प्राणों को बचाएँ। अब विश्‍वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अन देखी वस्‍तुओं का प्रमाण है। क्‍योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्‍छी गवाही दी गईं। विश्‍वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्‍वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो। विश्‍वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्‍वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्‍योंकि परमेश्‍वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है। विश्‍वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्‍यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्‍योंकि परमेश्‍वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्‍वर को प्रसन्‍न किया है। और विश्‍वास बिना उसे प्रसन्‍न करना अनहोना है, क्‍योंकि परमेश्‍वर के पास आनेवाले को विश्‍वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है। विश्‍वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धर्म का वारिस हुआ, जो विश्‍वास से होता है। विश्‍वास ही से अब्राहम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेनेवाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूँ; तौभी निकल गया। विश्‍वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रहकर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्‍बूओं में वास किया। क्‍योंकि वह उस स्‍थिर नेववाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचनेवाला और बनानेवाला परमेश्‍वर है। विश्‍वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्‍योंकि उसने प्रतिज्ञा करनेवाले को सच्‍चा जाना था। इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू की नाई, अनगिनित वंश उत्‍पन्‍न हुआ। ये सब विश्‍वास ही की दशा में मरे; और उन्‍हों ने प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तुएँ नहीं पाई; पर उन्‍हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्‍वी पर परदेशी और बाहरी हैं। जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्‍हें लौट जाने का अवसर था। पर वे एक उत्तम अर्थात् स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्‍वर उन का परमेश्‍वर कहलाने में उनसे नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है। विश्‍वास ही से अब्राहम ने, परखे जाने के समय में, इसहाक को बलिदान चढ़ाया, और जिस ने प्रतिज्ञाओं को सच माना था। और जिस से यह कहा गया था, “इसहाक से तेरा वंश कहलाएगा,” वह अपने एकलौते को चढ़ाने लगा। क्‍योंकि उसने विचार किया, कि परमेश्‍वर सामर्थी है, कि मरे हुओं में से जिलाए, सो उन्‍हीं में से दृष्‍टान्‍त की रीति पर वह उसे फिर मिला। विश्‍वास ही से इसहाक ने याकूब और एसाव को आनेवाली बातों के विषय मे आशीष दी। विश्‍वास ही से याकूब ने मरते समय यूसुफ के दोनों पुत्रों में से एक एक को आशीष दी, और अपनी लाठी के सिरे पर सहारा लेकर दण्‍डवत किया। विश्‍वास ही से यूसुफ ने, जब वह मरने पर था, तो इस्राएल की सन्‍तान के निकल जाने की चर्चा की, और अपनी हड्डियों के विषय में आज्ञा दी। विश्‍वास ही से मूसा के माता पिता ने उस को, उत्‍पन्‍न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्‍योंकि उन्‍हों ने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे। विश्‍वास ही से मूसा ने सयाना होकर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्‍कार किया। इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्‍वर के लोगों के साथ दु:ख भोगना और उत्तम लगा। और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्‍योंकि उस की आँखे फल पाने की ओर लगी थीं। विश्‍वास ही से राजा के क्रोध से न डरकर उसने मिसर को छोड़ दिया, क्‍योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा। विश्‍वास ही से उसने फसह और लहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करनेवाला इस्राएलियों पर हाथ न डाले। विश्‍वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे। विश्‍वास ही से यरीहो की शहरपनाह, जब सात दिन तक उसका चक्‍कर लगा चुके तो वह गिर पड़ी। विश्‍वास ही से राहाब वेश्‍या आज्ञा न माननेवालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिये कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था। अब और क्‍या कहूँ? क्‍योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और शिमशोन का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्‍यद्वक्‍ताओं का वर्णन करूँ। इन्‍हों ने विश्‍वास ही के द्वारा राज्‍य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तुएँ प्राप्‍त की, सिंहों के मुँह बन्‍द किए, आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया। स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरूत्‍थान के भागी हों। कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए। पत्‍थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दु:ख भोगते हुए भेड़ों और बकरियों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे। और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्‍वी की दरारों में भटकते फिरे। संसार उन के योग्य न था: और विश्‍वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्‍छी गवाही दी गई, तौभी उन्‍हें प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तु न मिली। क्‍योंकि परमेश्‍वर ने हमारे लिये पहले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुँचे। इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकनेवाली वस्‍तु, और उलझानेवाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्‍वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्‍जा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दु:ख सहा; और सिंहासन पर परमेश्‍वर के दहिने जा बैठा। इसलिये उस पर ध्‍यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर हियाव न छोड़ दो। तुम ने पाप से लड़ते हुए उससे ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्‍हारा लहू बहा हो। और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाई दिया जाता है, भूल गए हो: “हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़। क्‍योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उस को कोड़े भी लगाता है।” तुम दु:ख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्‍वर तुम्‍हें पुत्र जानकर तुम्‍हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्‍हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्‍यभिचार की सन्‍तान ठहरे! फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्‍या आत्‍माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से हम जीवित रहें। वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएँ। और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्‍द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उस को सहते सहते पक्‍के हो गए हैं, पीछे उन्‍हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है। इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो। और अपने पाँवों के लिये सीधे मार्ग बनाओ, कि लंगड़ा भटक न जाए, पर भला चंगा हो जाए। सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। और ध्‍यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्‍वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूटकर कष्‍ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएँ। ऐसा न हो, कि कोई जन व्‍यभिचारी, या एसाव की नाई अधर्मी हो, जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहिलौठे होने का पद बेच डाला। तुम जानते तो हो, कि बाद को जब उसने आशीष पानी चाही, तो अयोग्‍य गिना गया, और आँसू बहा बहाकर खोजने पर भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला। तुम तो उस पहाड़ के पास जो छूआ जा सकता था और आग से प्रज्‍वलित था, और काली घटा, और अन्‍धेरा, और आन्‍धी के पास। और तुरही की ध्‍वनि, और बोलनेवाले के ऐसे शब्‍द के पास नहीं आए, जिस के सुननेवालों ने बिनती की, कि अब हम से और बातें न की जाएँ। क्‍योंकि वे उस आज्ञा को न सह सके: “यदि कोई पशु भी पहाड़ को छूए, तो पत्‍थरवाह किया जाए।” और वह दर्शन ऐसा डरावना था, कि मूसा ने कहा, “मैं बहुत डरता और काँपता हूँ।” पर तुम सिय्‍योन के पहाड़ के पास, और जीवते परमेश्‍वर के नगर स्‍वर्गीय यरूशलेम के पास और लाखों स्‍वर्गदूतों, और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिन के नाम स्‍वर्ग में लिखे हुए हैं: और सब के न्‍यायी परमेश्‍वर के पास, और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्‍माओं। और नई वाचा के मध्‍यस्‍थ यीशु, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है। सावधान रहो, और उस कहनेवाले से मुँह न फेरो, क्‍योंकि वे लोग जब पृथ्‍वी पर के चितावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर न बच सके, तो हम स्‍वर्ग पर से चितावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर क्‍योंकर बच सकेंगे? उस समय तो उसके शब्‍द ने पृथ्‍वी को हिला दिया पर अब उसने यह प्रतिज्ञा की है, “एक बार फिर मैं केवल पृथ्‍वी को नहीं, वरन् आकाश को भी हिला दूँगा।” और यह वाक्‍य ‘एक बार फिर’ इस बात को प्रगट करता है, कि जो वस्‍तुएँ हिलाई जाती हैं, वे सृजी हुई वस्‍तुएँ होने के कारण टल जाएँगी; ताकि जो वस्‍तुएँ हिलाई नहीं जातीं, वे अटल बनी रहें। इस कारण हम इस राज्‍य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिस के द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्‍वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिस से वह प्रसन्‍न होता है। क्‍योकि हमारा परमेश्‍वर भस्‍म करनेवाली आग हैं । भाईचारे की प्रीति बनी रहे। अतिथि सत्कार करना न भूलना, क्‍योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों का आदर सत्कार किया है। कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उनके साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है। विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह बिछौना निष्‍कलंक रहे; क्‍योंकि परमेश्‍वर व्‍यभिचारियों, और परस्‍त्रीगामियों का न्‍याय करेगा। तुम्‍हारा स्‍वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्‍हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्‍योंकि उसने आप ही कहा है, “मैं तुझे कभी न छोडूँगा, और न कभी तुझे त्‍यागूँगा।” इसलिये हम बेधड़क होकर कहते हैं, “प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूँगा; मनुष्‍य मेरा क्‍या कर सकता है।” जो तुम्‍हारे अगुवे थे, और जिन्‍हों ने तुम्‍हें परमेश्‍वर का वचन सुनाया है, उन्‍हें स्‍मरण रखो; और ध्‍यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देखकर उन के विश्‍वास का अनुकरण करो। यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है। नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखनेवालों को कुछ लाभ न हुआ। हमारी एक ऐसी वेदी है, जिस पर से खाने का अधिकार उन लोगों को नहीं, जो तम्‍बू की सेवा करते हैं। क्‍योंकि जिन पशुओं का लहू महायाजक पाप-बलि के लिये पवित्र स्‍थान में ले जाता है, उन की देह छावनी के बाहर जलाई जाती है। इसी कारण, यीशु ने भी लोगों को अपने ही लहू के द्वारा पवित्र करने के लिये फाटक के बाहर दु:ख उठाया। सो आओ उस की निन्‍दा अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर उसके पास निकल चलें। क्‍योंकि यहाँ हमारा कोई स्‍थिर रहनेवाला नगर नहीं, वरन् हम एक आनेवाले नगर की खोज में हैं। इसलिये हम उसके द्वारा स्‍तुतिरूपी बलिदान, अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्‍वर के लिये सर्वदा चढ़ाया करें। पर भलाई करना, और उदारता न भूलो; क्‍योंकि परमेश्‍वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्‍न होता है। अपने अगुवों की मानो; और उनके अधीन रहो, क्‍योंकि वे उन की नाई तुम्‍हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्‍हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्‍द से करें, न कि ठंडी साँस ले लेकर, क्‍योंकि इस दशा में तुम्‍हें कुछ लाभ नहीं। हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्‍योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्‍छी चाल चलना चाहते हैं। प्रार्थना करने के लिये मैं तुम्‍हें और भी समझाता हूँ, कि मैं शीघ्र तुम्‍हारे पास फिर आ सकूँ। अब शान्‍तिदाता परमेश्‍वर जो हमारे प्रभु यीशु को जो भेड़ों का महान रखवाला है सनातन वाचा के लहू के गुण से मरे हुओं में से जिलाकर ले आया, तुम्‍हें हर एक भली बात में सिद्ध करे, जिस से तुम उस की इच्‍छा पूरी करो, और जो कुछ उस को भाता है, उसे यीशु मसीह के द्वारा हम में उत्‍पन्‍न करे, जिस की बड़ाई युगानुयुग होती रहे। आमीन। हे भाइयों मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि इन उपदेश की बातों को सह लो; क्‍योंकि मैं ने तुम्‍हें बहुत संक्षेप में लिखा है। तुम यह जान लो कि तीमुथियुस हमारा भाई छूट गया है और यदि वह शीघ्र आ गया, तो मैं उसके साथ तुम से भेंट करूँगा। अपने सब अगुवों और सब पवित्र लोगों को नमस्‍कार कहो। इतालियावाले तुम्‍हें नमस्‍कार कहते हैं। तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। परमेश्‍वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुँचे। हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्‍हारे विश्‍वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्‍न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्‍वर से माँगों, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी। पर विश्‍वास से माँगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्‍योंकि सन्‍देह करनेवाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। ऐसा मनुष्‍य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा, वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है। दीन भाई अपने ऊँचे पद पर घमण्‍ड करे। और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की तरह जाता रहेगा। क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उसकी शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा। धन्‍य है वह मनुष्‍य, जो परीक्षा में स्‍थिर रहता है; क्‍योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है। जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्‍वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्‍वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है। परन्‍तु प्रत्‍येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फँसकर परीक्षा में पड़ता है। फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनता है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्‍यु को उत्‍पन्‍न करता है। हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ। क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्‍योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिसमें न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, और न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। उसने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्‍य के वचन के द्वारा उत्‍पन्‍न किया, ताकि हम उसकी सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों। हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्‍य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। क्‍योंकि मनुष्‍य का क्रोध परमेश्‍वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्‍हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। परन्‍तु वचन पर चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। क्‍योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्‍य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुँह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था। पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्‍यवस्‍था पर ध्‍यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर भूलता नहीं, पर वैसा ही काम करता है। यदि कोई अपने आप को भक्‍त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उसकी भक्ति व्‍यर्थ है। हमारे परमेश्‍वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों ओर विधवाओं के क्‍लेश में उनकी सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें। हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्‍त प्रभु यीशु मसीह का विश्‍वास तुम में पक्षपात के साथ न हो। क्‍योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्‍ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्‍हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए। और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्रवाले का मुँह देखकर कहो, “तू वहाँ अच्‍छी जगह बैठ,” और उस कंगाल से कहो, “तू यहाँ खड़ा रह,” या “मेरे पाँवों की पीढ़ी के पास बैठ।” तो क्‍या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्‍याय करनेवाले न ठहरे? हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो; क्‍या परमेश्‍वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्‍वास में धनी, और उस राज्‍य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उसने उनसे की है जो उससे प्रेम रखते हैं? पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया: क्‍या धनी लोग तुम पर अत्‍याचार नहीं करते और क्‍या वे ही तुम्‍हें कचहरियों में घसीट घसीट कर नहीं ले जाते? क्‍या वे उस उत्तम नाम की निन्‍दा नहीं करते जिसके तुम कहलाए जाते हो? तौभी यदि तुम पवित्र शास्‍त्र के इस वचन के अनुसार, “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख,” सचमुच उस राज्‍य व्‍यवस्‍था को पूरी करते हो, तो अच्‍छा करते हो। पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्‍यवस्‍था तुम्‍हें अपराधी ठहराती है। क्‍योंकि जो कोई सारी व्‍यवस्‍था का पालन करता है परन्‍तु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों मे दोषी ठहरा। इसलिये कि जिस ने यह कहा, “तू व्‍यभिचार न करना” उसी ने यह भी कहा, “तू हत्‍या न करना” इसलिये यदि तू ने व्‍यभिचार तो नहीं किया, पर हत्‍या की तौभी तू व्‍यवस्‍था का उलंघन करने वाला ठहरा। तुम उन लोगों की नाई वचन बोलो, और काम भी करो, जिनका न्‍याय स्‍वतंत्रता की व्‍यवस्‍था के अनुसार होगा। क्‍योंकि जिस ने दया नहीं की, उसका न्‍याय बिना दया के होगा: दया न्‍याय पर जयवन्‍त होती है। हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्‍वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उससे क्‍या लाभ? क्‍या ऐसा विश्‍वास कभी उसका उद्धार कर सकता है? यदि कोई भाई या बहिन नंगे उघाड़े हों, और उन्‍हें प्रति दिन भोजन की घटी हो, और तुम में से कोई उनसे कहे, “कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्‍त रहो,” पर जो वस्‍तुएं देह के लिये आवश्‍यक हैं वह उन्‍हें न दे, तो क्‍या लाभ? वैसे ही विश्‍वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है। वरन् कोई कह सकता है, “तुझे विश्‍वास है, और मैं कर्म करता हूँ।” तू अपना विश्‍वास मुझे कर्म बिना तो दिखा; और मैं अपना विश्‍वास अपने कर्मों के द्वारा तुझे दिखाऊँगा। तुझे विश्‍वास है कि एक ही परमेश्‍वर है: तू अच्‍छा करता है: दुष्‍टात्‍मा भी विश्‍वास रखते, और थरथराते हैं। पर हे निकम्‍मे मनुष्‍य क्‍या तू यह भी नहीं जानता, कि कर्म बिना विश्‍वास व्‍यर्थ है? जब हमारे पिता अब्राहम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्‍या वह कर्मो से धार्मिक न ठहरा था। सो तू ने देख लिया कि विश्‍वास ने उस के कामों के साथ मिलकर प्रभाव डाला है और कर्मो से विश्‍वास सिद्ध हुआ। और पवित्र शास्‍त्र का यह वचन पूरा हुआ, “अब्राहम ने परमेश्‍वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया,” और वह परमेश्‍वर का मित्र कहलाया। सो तुम ने देख लिया कि मनुष्‍य केवल विश्‍वास से ही नहीं, वरन् कर्मों से भी धर्मी ठहरता है। वैसे ही राहाब वेश्‍या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्‍या कर्मों से धार्मिक न ठहरी? निदान, जैसे देह आत्‍मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्‍वास भी कर्म बिना मरा हुआ है। हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्‍योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे। इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्‍य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है। जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुँह में लगाम लगाते हैं, तो हम उनकी सारी देह को भी फेर सकते हैं। देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा माँझी की इच्‍छा के अनुसार घुमाए जाते हैं। वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है। जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्‍ड की आग से जलती रहती है। क्‍योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्‍य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। पर जीभ को मनुष्‍यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्‍यों को जो परमेश्‍वर के स्‍वरूप में उत्‍पन्‍न हुए हैं स्राप देते हैं। एक ही मुँह से धन्‍यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं। हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए। क्‍या सोते के एक ही मुँह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है? हे मेरे भाइयों, क्‍या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता। तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्‍पन्‍न होती है। पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्‍य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना। यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन् सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। इसलिये कि जहाँ डाह और विरोध होता है, वहाँ बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है। तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहाँ से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्‍हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? तुम लालसा रखते हो, और तुम्‍हें मिलता नहीं; तुम हत्‍या और डाह करते हो, और कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्‍हें इसलिये नहीं मिलता, कि माँगते नहीं। तुम माँगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्‍छा से माँगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। हे व्‍यभिचारिणियों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्‍वर से बैर करना है? सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्‍वर का बैरी बनाता है। क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्‍यर्थ कहता है? “जिस आत्‍मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिसका प्रतिफल डाह हो”? वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, “परमेश्‍वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।” इसलिये परमेश्‍वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का सामना करो, तो वह तुम्‍हारे पास से भाग निकलेगा। परमेश्‍वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्‍हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। दुखी होओ, और शोक करो, और रोओ: तुम्‍हारी हाँसी शोक से और तुम्‍हारा आनन्‍द उदासी से बदल जाए। प्रभु के सामने दीन बनो, तो वह तुम्‍हें शिरोमणि बनाएगा। हे भाइयों, एक दूसरे की बदनामी न करो, जो अपने भाई की बदनामी करता है, या भाई पर दोष लगाता है, वह व्‍यवस्‍था की बदनामी करता है, और व्‍यवस्‍था पर दोष लगाता है, तो तू व्‍यवस्‍था पर चलनेवाला नहीं, पर उस पर हाकिम ठहरा। व्‍यवस्‍था देनेवाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है; तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? तुम जो यह कहते हो, “आज या कल हम किसी और नगर में जाकर वहाँ एक वर्ष बिताएँगे, और व्‍यापार करके लाभ उठाएँगे।” और यह नहीं जानते कि कल क्‍या होगा: सुन तो लो, तुम्‍हारा जीवन है ही क्‍या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्‍हें यह कहना चाहिए, “यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे।” पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है। हे धनवानों सुन तो लो; तुम अपने आनेवाले क्‍लेशों पर चिल्‍लाकर रोओ। तुम्‍हारा धन बिगड़ गया और तुम्‍हारे वस्‍त्रों को कीड़े खा गए। तुम्‍हारे सोने-चाँदी में काई लग गई है; और वह काई तुम पर गवाही देगी, और आग की नाई तुम्‍हारा मांस खा जाएगी: तुम ने अन्‍तिम युग में धन बटोरा है। देखो, जिन मजदूरों ने तुम्‍हारे खेत काटे, उनकी वह मजदूरी जो तुम ने धोखा देकर रख ली है चिल्‍ला रही है, और लवनेवालों की दोहाई, सेनाओं के प्रभु के कानों तक पहूँच गई है। तुम पृथ्‍वी पर भोग-विलास में लगे रहे और बड़ा ही सुख भोगा; तुम ने इस वध के दिन के लिये अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया। तुम ने धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला; वह तुम्‍हारा सामना नहीं करता। सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्‍वी के बहुमूल्‍य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है। तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्‍योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। हे भाइयो, जिन भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्‍हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो। देखो, हम धीरज धरनेवालों को धन्‍य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्‍यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है। पर हे मेरे भाइयों, सब से श्रेष्‍ठ बात यह है, कि शपथ न खाना; न स्‍वर्ग की न पृथ्‍वी की, न किसी और वस्‍तु की, पर तुम्‍हारी बातचीत हां की हां, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्‍ड के योग्‍य न ठहरो। यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए। यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें। और विश्‍वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठाकर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उनकी भी क्षमा हो जाएगी। इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के सामने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिससे चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। एलिय्‍याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्‍य था; और उसने गिड़गिड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा। फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई। हे मेरे भाइयों, यदि तुम में कोई सत्‍य के मार्ग से भटक जाए, और कोई उसको फेर लाए। तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्‍यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा। पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बिथुनिया में तितर-बितर होकर रहते हैं। और परमेश्‍वर पिता के भविष्‍य ज्ञान के अनुसार, आत्‍मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्‍हें अत्‍यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर और पिता का धन्‍यवाद दो, जिसने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्‍म दिया, अर्थात् एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये जो तुम्‍हारे लिये स्‍वर्ग में रखी है, जिनकी रक्षा परमेश्‍वर की सामर्थ से, विश्‍वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आनेवाले समय में प्रगट होनेवाली है, की जाती है। इस कारण तुम मग्न होते हो, यद्यपि अवश्‍य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण दुःख में हो, और यह इसलिये है कि तुम्‍हारा परखा हुआ विश्‍वास, जो आग से ताए हुए नाशवान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्‍य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। उससे तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्‍वास करके ऐसे आनन्‍दित और मग्न होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है, और अपने विश्‍वास का प्रतिफल अर्थात् आत्‍माओं का उद्धार प्राप्‍त करते हो। इसी उद्धार के विषय में उन भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने बहुत ढूँढ़-ढाँढ़ और जाँच-पड़ताल की, जिन्‍होंने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्‍यद्वाणी की थी। उन्होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्‍मा जो उन में था, और पहले ही से मसीह के दु:खों की और उनके बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था। उन पर यह प्रगट किया गया कि वे अपनी नहीं वरन् तुम्‍हारी सेवा के लिये ये बातें कहा करते थे, जिनका समाचार अब तुम्‍हें उनके द्वारा मिला जिन्‍होंने पवित्र आत्‍मा के द्वारा जो स्‍वर्ग से भेजा गया, तुम्‍हें सुसमाचार सुनाया, और इन बातों को स्‍वर्गदूत भी ध्‍यान से देखने की लालसा रखते हैं। इस कारण अपनी-अपनी बुद्धि की कमर बाँधकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्‍हें मिलनेवाला है। और आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो। पर जैसा तुम्‍हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल-चलन में पवित्र बनो। क्‍योंकि लिखा है, “पवित्र बनो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूँ।” और जब कि तुम, ‘हे पिता’ कह कर उससे प्रार्थना करते हो, जो बिना पक्षपात हर एक के काम के अनुसार न्‍याय करता है, तो अपने परदेशी होने का समय भय से बिताओ। क्‍योंकि तुम जानते हो कि तुम्‍हारा निकम्‍मा चाल-चलन जो बापदादों से चला आता है उससे तुम्‍हारा छुटकारा चाँदी-सोने अर्थात् नाशवान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ, पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्‍ने अर्थात् मसीह के बहुमूल्‍य लहू के द्वारा हुआ। उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्‍हारे लिये प्रगट हुआ। जो उसके द्वारा उस परमेश्‍वर पर विश्‍वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी कि तुम्‍हारा विश्‍वास और आशा परमेश्‍वर पर हो। अतः जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्‍य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन-मन लगाकर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो। क्‍योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्‍वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्‍म पाया है। क्‍योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है। परन्‍तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्‍थिर रहता है।” और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्‍हें सुनाया गया था। इसलिये सब प्रकार का बैरभाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके, नये जन्‍में हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्‍मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ, यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है। उसके पास आकर, जिसे मनुष्‍यों ने तो निकम्‍मा ठहराया, परन्‍तु परमेश्‍वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्‍य जीवता पत्‍थर है। तुम भी आप जीवते पत्‍थरों के समान आत्‍मिक घर बनते जाते हो, जिससे याजकों का पवित्र समाज बनकर, ऐसे आत्‍मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर को ग्राह्य हो। इस कारण पवित्र शास्‍त्र में भी आया है, “देखो, मैं सिय्‍योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्‍य पत्‍थर धरता हूँ: और जो कोई उस पर विश्‍वास करेगा, वह किसी रीति से लज्‍जित नहीं होगा।” अतः तुम्‍हारे लिये जो विश्‍वास करते हो, वह तो बहुमूल्‍य है, पर जो विश्‍वास नहीं करते उनके लिये, “जिस पत्‍थर को राजमिस्रीयों ने निकम्‍मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया,” और, “ठेस लगने का पत्‍थर और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है,” क्‍योंकि वे तो वचन को न मानकर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे। पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्‍वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्‍हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्‍योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। तुम पहले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्‍वर की प्रजा हो; तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है। हे प्रियों मैं तुम से विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्‍मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। अन्‍यजातियों में तुम्‍हारा चाल-चलन भला हो; इसलिये कि जिन-जिन बातों में वे तुम्‍हें कुकर्मी जानकर बदनाम करते हैं, वे तुम्‍हारे भले कामों को देखकर उन्‍हीं के कारण कृपा-दृष्‍टि के दिन परमेश्‍वर की महिमा करें। प्रभु के लिये मनुष्‍यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है, और हाकिमों के, क्‍योंकि वे कुकर्मियों को दण्‍ड देने और सुकर्मियों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। क्‍योंकि परमेश्‍वर की इच्‍छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। अपने आपको स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आपको परमेश्‍वर के दास समझकर चलो। सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्‍वर से डरो, राजा का सम्‍मान करो। हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के अधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी। क्‍योंकि यदि कोई परमेश्‍वर का विचार करके अन्‍याय से दु:ख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है। क्‍योंकि यदि तुम ने अपराध करके घूँसे खाए और धीरज धरा, तो उसमें क्‍या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम करके दु:ख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्‍वर को भाता है। और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्‍योंकि मसीह भी तुम्‍हारे लिये दु:ख उठाकर, तुम्‍हें एक आदर्श दे गया है कि तुम भी उसके पद-चिन्‍ह पर चलो। न तो उसने पाप किया, और न उसके मुँह से छल की कोई बात निकली। वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दु:ख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आपको सच्‍चे न्‍यायी के हाथ में सौंपता था। वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मर करके धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। क्‍योंकि तुम पहले भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्‍यक्ष के पास फिर आ गए हो। हे पत्‍नियों, तुम भी अपने पति के अधीन रहो। इसलिये कि यदि इनमें से कोई ऐसे हो जो वचन को न मानते हों, तौभी तुम्‍हारे भय सहित पवित्र चाल-चलन को देखकर बिना वचन के अपनी-अपनी पत्‍नी के चाल-चलन के द्वारा खिंच जाएँ। और तुम्‍हारा श्रृंगार दिखावटी न हो, अर्थात् बाल गूँथने, और सोने के गहने, या भाँति-भाँति के कपड़े पहनना। वरन् तुम्‍हारा छिपा हुआ और गुप्‍त मनुष्‍यत्‍व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्‍जित रहे, क्‍योंकि परमेश्‍वर की दृष्‍टि में इसका मूल्‍य बड़ा है। और पूर्वकाल में पवित्र स्‍त्रियाँ भी, जो परमेश्‍वर पर आशा रखती थीं, अपने आपको इसी रीति से संवारती और अपने-अपने पति के अधीन रहती थीं। जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती और उसे स्‍वामी कहती थी। सो तुम भी यदि भलाई करो और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो तो उसकी बेंटियाँ ठहरोगी। वैसे ही हे पतियों, तुम भी बुद्धिमानी से पत्‍नियों के साथ जीवन निर्वाह करो और स्‍त्री को निर्बल पात्र जानकर उसका आदर करो, यह समझकर कि हम दोनों जीवन के वरदान के वारिस हैं, जिससे तुम्‍हारी प्रार्थनाएँ रूक न जाएँ। अतः सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखनेवाले, और करूणामय, और नम्र बनो। बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्‍योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। क्‍योंकि “जो कोई जीवन की इच्‍छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूँढ़े, और उसके यत्‍न में रहे। क्‍योंकि प्रभु की आँखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उसकी विनती की ओर लगे रहते हैं, परन्‍तु प्रभु बुराई करनेवालों के विमुख रहता है।” यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्‍हारी बुराई करनेवाला फिर कौन है? यदि तुम धर्म के कारण दु:ख भी उठाओ, तो धन्‍य हो; पर उनके डराने से मत डरो, और न घबराओ, पर मसीह को प्रभु जानकर अपने-अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्‍हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ; और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो मसीह में तुम्हारे अच्‍छे चाल-चलन का अपमान करते हैं, लज्‍जित हों। क्‍योंकि यदि परमेश्‍वर की यही इच्‍छा हो कि तुम भलाई करने के कारण दु:ख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दु:ख उठाने से उत्तम है। इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दु:ख उठाया, ताकि हमें परमेश्‍वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्‍मा के भाव से जिलाया गया। उसी में उसने जाकर कैदी आत्‍माओं को भी प्रचार किया। जिन्‍होंने उस बीते समय में आज्ञा न माना जब परमेश्‍वर नूह के दिनों में धीरज धरकर ठहरा रहा, और वह जहाँज बन रहा था, जिसमें बैठकर थोड़े लोग अर्थात् आठ प्राणी पानी के द्वारा बच गए। और उसी पानी का दृष्‍टान्‍त भी, अर्थात् बपतिस्‍मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्‍हें बचाता है; (उससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्‍तु शुद्ध विवेक से परमेश्‍वर के वश में हो जाने का अर्थ है)। वह स्‍वर्ग पर जाकर परमेश्‍वर के दाहिनी ओर बैठ गया; और स्‍वर्गदूत और अधिकारी और सामर्थी उसके अधीन किए गए हैं। इसलिये जब कि मसीह ने शरीर में होकर दु:ख उठाया तो तुम भी उसी मनसा को हथियार के समान धारण करो, क्‍योंकि जिसने शरीर में दु:ख उठाया, वह पाप से छूट गया, ताकि भविष्‍य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्‍यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन् परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार व्‍यतीत करो। क्‍योंकि अन्‍यजातियों की इच्‍छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्‍कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जहाँ तक हमने पहले से समय गँवाया, वही बहुत हुआ। इससे वे अचम्‍भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उनका साथ नहीं देते, और इसलिये वे बुरा भला कहते हैं। पर वे उसको जो जीवतों और मरे हुओं का न्‍याय करने को तैयार हैं, लेखा देंगे। क्‍योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसी लिये सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्‍यों के अनुसार उनका न्‍याय हो, पर आत्‍मा में वे परमेश्‍वर के अनुसार जीवित रहें। सब बातों का अन्‍त तुरन्‍त होनेवाला है; इसलिये संयमी होकर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। सब में श्रेष्‍ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है। बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो। जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्‍वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए। यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले मानों परमेश्‍वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे, तो उस शक्ति से करे जो परमेश्‍वर देता है; जिससे सब बातों मे यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्‍वर की महिमा प्रगट हो। महिमा और साम्राज्‍य युगानुयुग उसी की है। आमीन। हे प्रियों, जो दु:ख रूपी अग्‍नि तुम्‍हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इससे यह समझकर अचम्‍भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। पर जैसे-जैसे मसीह के दु:खों में सहभागी होते हो, आनन्‍द करो, जिससे उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मग्न हो। फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्‍हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्‍य हो; क्‍योंकि महिमा का आत्‍मा, जो परमेश्‍वर का आत्‍मा है, तुम पर छाया करता है। तुम में से कोई व्यक्ति हत्‍यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दु:ख न पाए। पर यदि मसीही होने के कारण दु:ख पाए, तो लज्‍जित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्‍वर की महिमा करे। क्‍योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्‍याय किया जाए, और जब कि न्‍याय का आरम्‍भ हम ही से होगा तो उनका क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्‍वर के सुसमाचार को नहीं मानते? और “यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्‍या ठिकाना?” इसलिये जो परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार दु:ख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने-अपने प्राण को विश्‍वासयोग्‍य सृजनहार के हाथ में सौंप दें। तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उनके समान प्राचीन और मसीह के दु:खों का गवाह और प्रगट होनेवाली महिमा में सहभागी होकर उन्‍हें यह समझाता हूँ। कि परमेश्‍वर के उस झुण्ड की, जो तुम्‍हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर की इच्‍छा के अनुसार आनन्‍द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। जो लोग तुम्‍हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन् झुण्ड के लिये आदर्श बनो। और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्‍हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने का नहीं। हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के अधीन रहो, वरन् तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बाँधे रहो, क्‍योंकि “परमेश्‍वर अभिमानियों का विरोध करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है।” इसलिये परमेश्‍वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिससे वह तुम्‍हें उचित समय पर बढ़ाए। अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उसको तुम्‍हारा ध्‍यान है। सचेत हो, और जागते रहो, क्‍योंकि तुम्‍हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किसको फाड़ खाए। विश्‍वास में दृढ़ होकर, और यह जानकर उसका सामना करो, कि तुम्‍हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दु:ख भुगत रहे हैं। अब परमेश्‍वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्‍हें मसीह में अपनी अनन्‍त महिमा के लिये बुलाया, तुम्‍हारे थोड़ी देर तक दु:ख उठाने के बाद आप ही तुम्‍हें सिद्ध और स्‍थिर और बलवन्‍त करेगा। उसी का साम्राज्‍य युगानुयुग रहे। आमीन। मैंने सिलवानुस के हाथ, जिसे मैं विश्‍वासयोग्‍य भाई समझता हूँ, संक्षेप में लिखकर तुम्‍हें समझाया है और यह गवाही दी है कि परमेश्‍वर का सच्‍चा अनुग्रह यही है, इसी में स्‍थिर रहो। जो बेबीलोन में तुम्‍हारे समान चुने हुए लोग हैं, वह और मेरा पुत्र मरकुस तुम्‍हें नमस्‍कार कहते हैं। प्रेम से चुम्‍बन ले लेकर एक दूसरे को नमस्‍कार करो। तुम सब को जो मसीह में हो शान्‍ति मिलती रहे। शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्‍हों ने हमारे परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धार्मिकता से हमारा सा बहुमूल्‍य विश्‍वास प्राप्‍त किया है। परमेश्‍वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्‍योंकि उसके ईश्‍वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्‍बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्‍य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएँ दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूटकर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्‍वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ। और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न करके, अपने विश्‍वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ, और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। क्‍योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएँ, तो तुम्‍हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्‍मे और निष्‍फल न होने देंगी। और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है। इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भाँति यत्‍न करते जाओ, क्‍योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे; वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्‍त राज्‍य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे। इसलिये यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्‍य वचन तुम्‍हें मिला है, उस में बने रहते हो, तौभी मैं तुम्‍हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूँगा। और मैं यह अपने लिये उचित समझता हूँ, कि जब तक मैं इस डेरे में हूँ, तब तक तुम्‍हें सुधि दिलाकर उभारता रहूँ। क्‍योंकि यह जानता हूँ, कि मसीह के वचन के अनुसार मेरे डेरे के गिराए जाने का समय शीघ्र आनेवाला है। इसलिये मैं ऐसा यत्‍न करूँगा, कि मेरे कूच करने के बाद तुम इन सब बातों को सर्वदा स्‍मरण कर सको। क्‍योंकि जब हम ने तुम्‍हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था बरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था। कि उस ने परमेश्‍वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं प्रसन्‍न हूँ।” और जब हम उसके साथ पवित्र पहाड़ पर थे, तो स्‍वर्ग से यही वाणी आते सुना। और हमारे पास जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्‍छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्‍यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्‍धियारे स्‍थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्‍हारे हृदयों में न चमक उठे। पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्‍यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती। क्‍योंकि कोई भी भविष्‍यद्वाणी मनुष्‍य की इच्‍छा से कभी नहीं हुई पर भक्‍त जन पवित्र आत्‍मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्‍वर की ओर से बोलते थे। और जिस प्रकार उन लोगों में झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता थे उसी प्रकार तुम में भी झूठे उपदेशक होंगे, जो नाश करनेवाले पाखण्‍ड का उद्घाटन छिप छिपकर करेंगे और उस स्‍वामी का जिस ने उन्‍हें मोल लिया है इन्‍कार करेंगे और अपने आप को शीघ्र विनाश में डाल देंगे। और बहुतेरे उन की समान लुचपन करेंगे, जिन के कारण सत्‍य के मार्ग की निन्‍दा की जाएगी। और वे लोभ के लिये बातें गढ़कर तुम्‍हें अपने लाभ का कारण बनाएँगे, और जो दण्‍ड की आज्ञा उन पर पहिले से हो चुकी है, उसके आने में कुछ भी देर नहीं, और उन का विनाश ऊँघता नहीं। क्‍योंकि जब परमेश्‍वर ने उन स्‍वर्गदूतों को जिन्‍हों ने पाप किया नहीं छोड़ा, पर नरक में भेजकर अन्‍धेरे कुण्‍डों में डाल दिया, ताकि न्‍याय के दिन तक बन्‍दी रहें। और प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, बरन भक्तिहीन संसार पर महा जल-प्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया; और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्‍ड दिया, कि उन्‍हें भस्‍म करके राख में मिला दिया ताकि वे आनेवाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्‍टान्‍त बनें, और धर्मी लूत को जो अधर्मियों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया। (क्‍योंकि वह धर्मी उन के बीच में रहते हुए, और उन के अधर्म के कामों को देख देखकर, और सुन सुनकर, हर दिन अपने सच्‍चे मन को पीडि़त करता था)। तो प्रभु के भक्‍तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधर्मियों को न्‍याय के दिन तक दण्‍ड की दशा में रखना भी जानता है। निज करके उन्‍हें जो अशुद्ध अभिलाषाओं के पीछे शरीर के अनुसार चलते, और प्रभुता को तुच्‍छ जानते हैं: वे ढीठ, और हठी हैं, और ऊँचे पदवालों को बुरा भला कहने से नहीं डरते। तौभी स्‍वर्गदूत जो शिक्‍त और सामर्थ में उन से बड़े हैं, प्रभु के सामने उन्‍हें बुरा भला कहकर दोष नहीं लगाते। पर ये लोग निर्बुद्धि पशुओं ही के तुल्‍य हैं, जो पकड़े जाने और नाश होने के लिये उत्‍पन्‍न हुए हैं; और जिन बातों को जानते ही नहीं, उन के विषय में औरों को बुरा भला कहते हैं, वे अपनी सड़ाहट में आप ही सड़ जाएँगे। औरों का बुरा करने के बदले उन्‍हीं का बुरा होगा: उन्‍हें दिन दोपहर सुख-विलास करना भला लगता है; यह कलंक और दोष है- जब वे तुम्‍हारे साथ खाते पीते हैं, तो अपनी ओर से प्रेम भोज करके भोग-विलास करते हैं। उन ही आँखों में व्‍यभिचारिणी बसी हुई है, और वे पाप किए बिना रूक नहीं सकते: वे चंचल मनवालों को फुसला लेते हैं; उन के मन को लोभ करने का अभ्‍यास हो गया है, वे सन्‍ताप के सन्‍तान हैं। वे सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं, और बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग पर हो लिए हैं; जिस ने अधर्म की मजदूरी को प्रिय जाना; पर उसके अपराध के विषय में उलाहना दिया गया, यहाँ तक कि अबोल गदही ने मनुष्‍य की बोली से उस भविष्‍यद्वक्‍ता को उसके बावलेपन से रोका। ये लोग सूखे कुँए, और आन्‍धी के उड़ाए हुए बादल हैं, उन के लिये अनन्‍त अन्‍धकार ठहराया गया है। वे व्‍यर्थ घमण्‍ड की बातें कर करके लुचपन के कामों के द्वारा, उन लोगों को शारीरिक अभिलाषाओं में फँसा लेते हैं, जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं। वे उन्‍हें स्‍वतंत्र होने की प्रतिज्ञा तो देते हैं, पर आप ही सड़ाहट के दास हैं, क्‍योंकि जो व्यक्ति जिस से हार गया है, वह उसका दास बन जाता है। और जब वे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की पहचान के द्वारा संसार की नाना प्रकार की अशुद्धता से बच निकले, और फिर उन में फँसकर हार गए, तो उन की पिछली दशा पहिली से भी बुरी हो गई है। क्‍योंकि धर्म के मार्ग में न जानना ही उन के लिये इस से भला होता, कि उसे जानकर, उस पवित्र आज्ञा से फिर जाते, जो उन्‍हें सौंपी गई थी। उन पर यह कहावत ठीक बैठती है, कि कुत्ता अपनी छाँट की ओर और धोई हुई सुअरनी कीचड़ में लोटने के लिये फिर चली जाती है। हे प्रियो, अब मैं तुम्‍हें यह दूसरी पत्री लिखता हूँ, और दोनों में सुधि दिलाकर तुम्‍हारे शुद्ध मन को उभारता हूँ, कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविष्यद्वक्ताओं ने पहिले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्‍मरण करो, जो तुम्‍हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थी। और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों मे हाँसी ठट्ठा करनेवाले आएँगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। और कहेंगे, “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्‍योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्‍भ से था?” वे तो जान बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्‍वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्‍वी भी जल में से बनी और जल में स्‍थिर है, इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया। पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्‍वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएँ; और वह भक्तिहीन मनुष्‍यों के न्‍याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे। हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहाँ एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं। प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्‍हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाई आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़ हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएँगे, और पृथ्‍वी और उस पर के काम जल जाऐंगे। तो जब कि ये सब वस्‍तुएँ, इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्‍हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्‍य होना चाहिए, और परमेश्‍वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्‍द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएँगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त होकर गल जाएँगे । पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्‍वी की आस देखते हैं जिन में धार्मिकता वास करेगी। इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके सामने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो। और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्‍हें लिखा है। वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्‍त्र की और बातों के समान खींच तानकर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं। इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जानकर चौकस रहो, ताकि अधर्मियों के भ्रम में फंसकर अपनी स्‍थिरता को हाथ से कहीं खो न दो। पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन। उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आँखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्‍यान से देखा; और हाथों से छूआ। (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उसकी गवाही देते हैं, और तुम्‍हें उस अनन्‍त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्‍हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्‍द पूरा हो जाए।। जो समाचार हम ने उससे सुना, और तुम्‍हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्‍वर ज्‍योति हैं: और उसमें कुछ भी अन्‍धकार नहीं। यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्‍धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्‍य पर नहीं चलते। पर यदि जैसा वह ज्‍योति में है, वैसे ही हम भी ज्‍योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु मसीह का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्‍य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्‍वासयोग्‍य और धर्मी है। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है। हे मेरे बालको, मैं ये बातें तुम्‍हें इसलिये लिखता हूँ, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् धार्मिक यीशु मसीह। और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, बरन सारे जगत के पापों का भी। यदि हम उसकी आज्ञाओं को मानेंगे, तो उससे हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। जो कोई यह कहता है, “मैं उसे जान गया हूँ,” और उसकी आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उसमें सत्‍य नहीं। पर जो कोई उसके वचन पर चले, उसमें सचमुच परमेश्‍वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उसमें हैं। जो कोई यह कहता है, कि मैं उसमें बना रहता हूँ, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। हे प्रियों, मैं तुम्‍हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्‍भ से तुम्‍हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। फिर मैं तुम्‍हें नई आज्ञा लिखता हूँ; और यह तो उसमें और तुम में सच्‍ची ठहरती है; क्योंकि अन्‍धकार मिटता जाता है और सत्‍य की ज्‍योति अभी चमकने लगी है। जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्‍योति में हूँ; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्‍धकार ही में है। जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्‍योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्‍धकार में है, और अन्‍धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहाँ जाता है, क्‍योंकि अन्‍धकार ने उसकी आँखे अन्‍धी कर दी हैं।। हे बालको, मैं तुम्‍हें इसलिये लिखता हूँ, कि उसके नाम से तुम्‍हारे पाप क्षमा हुए। हे पितरों, मैं तुम्‍हें इसलिये लिखता हूँ, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्‍हें इसलिये लिखता हूँ, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्‍हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो। हे पितरों, मैं ने तुम्‍हें इसलिये लिखा है, कि जो आदि से है तुम उसे जान गए हो: हे जवानो, मैं ने तुम्‍हें इसलिये लिखा है, कि बलवन्‍त हो, और परमेश्‍वर का वचन तुम में बना रहता है, और तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है। तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है। क्‍योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आँखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्‍तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उसकी अभिलाषाएँ दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्‍वर की इच्‍छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। हे लड़कों, यह अन्‍तिम समय है, और जैसा तुम ने सुना है, कि मसीह का विरोधी आनेवाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्‍तिम समय है। वे निकले तो हम ही में से, पर हम में के थे नहीं; क्‍योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं। और तुम्‍हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो। मैं ने तुम्‍हें इसलिये नहीं लिखा, कि तुम सत्‍य को नहीं जानते, पर इसलिये, कि उसे जानते हो, और इसलिये कि कोई झूठ, सत्‍य की ओर से नहीं। झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्‍कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र का इन्‍कार करता है। जो कोई पुत्र का इन्‍कार करता है उसके पास पिता भी नहीं: जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है। जो कुछ तुम ने आरम्‍भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्‍भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे। और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्‍त जीवन है। मैं ने ये बातें तुम्‍हें उस के विषय में लिखी हैं, जो तुम्‍हें भरमाते हैं। और तुम्‍हारा वह अभिषेक, जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्‍हें इस का प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्‍हें सिखाए, बरन जैसे वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया तुम्‍हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्‍चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उसने तुम्‍हें सिखाया है वैसे ही तुम उसमें बने रहते हो। निदान, हे बालको, उसमें बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्‍हने लज्‍जित न हों। यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उससे जन्‍मा है। देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्‍वर की सन्‍तान कहलाएँ, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्‍योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। हे प्रियों, अभी हम परमेश्‍वर की सन्‍तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्‍या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्‍योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है। जो कोई पाप करता है, वह व्‍यवस्‍था का विरोध करता है; और पाप तो व्‍यवस्‍था का विरोध है। और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं। जो कोई उसमें बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उसने न तो उसे देखा है, और न उसको जाना है। हे बालको, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उसकी नाई धर्मी है। जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्‍योंकि शैतान आरम्‍भ ही से पाप करता आया है: परमेश्‍वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे। जो कोई परमेश्‍वर से जन्‍मा है वह पाप नहीं करता; क्‍योंकि उसका बीज उसमें बना रहता है: और वह पाप कर ही नहीं सकता, क्‍योंकि परमेश्‍वर से जन्‍मा है। इसी से परमेश्‍वर की सन्‍तान, और शैतान की सन्‍तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्‍वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता। क्‍योंकि जो समाचार तुम ने आरम्‍भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखे। और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्‍ट से था, और जिस ने अपने भाई को घात किया? और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे। हे भाइयों, यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्‍भा न करना। हम जानते हैं, कि हम मृत्‍यु से पार होकर जीवन में पहुँचे हैं; क्‍योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्‍यु की दशा में रहता है। जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्‍यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्‍यारे में अनन्‍त जीवन नहीं रहता। हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देखकर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उसमें परमेश्‍वर का प्रेम क्‍योंकर बना रह सकता है? हे बालको, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्‍य के द्वारा भी प्रेम करें। इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्‍य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उस विषय में हम उसके साम्‍हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे। क्‍योंकि परमेश्‍वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है। हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्‍वर के साम्‍हने हियाव होता है। और जो कुछ हम माँगते हैं, वह हमें उससे मिलता है; क्‍योंकि हम उसकी आज्ञाओं को मानते हैं; और जो उसे भाता है वही करते हैं। और उसकी आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्‍वास करें और जैसा उसने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें। और जो उसकी आज्ञाओं को मानता है, वह इस में, और यह उसमें बना रहता है: और इसी से, अर्थात् उस आत्‍मा से जो उसने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है। हे प्रियों, हर एक आत्‍मा की प्रतीति न करो: बरन आत्‍माओं को परखो, कि वे परमेश्‍वर की ओर से हैं कि नहीं; क्‍योंकि बहुत से झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। परमेश्‍वर का आत्‍मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्‍मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्‍वर की ओर से है। और जो कोई आत्‍मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्‍वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्‍मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आनेवाला है: और अब भी जगत में है। हे बालको, तुम परमेश्‍वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्‍योंकि जो तुम में है, वह उससे जो संसार में है, बड़ा है। वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उनकी सुनता है। हम परमेश्‍वर के हैं: जो परमेश्‍वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्‍वर को नहीं जानता वह हमारी नही सुनता; इसी प्रकार हम सत्‍य की आत्‍मा और भ्रम की आत्‍मा को पहचान लेते हैं। हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्‍वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्‍वर से जन्‍मा है; और परमेश्‍वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्‍वर प्रेम है। जो प्रेम परमेश्‍वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्‍वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्‍वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियों, जब परमेश्‍वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। परमेश्‍वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्‍वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। इसी से हम जानते हैं, कि हम उसमें बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उसने अपने आत्‍मा में से हमें दिया है। और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है। जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्‍वर का पुत्र है: परमेश्‍वर उसमें बना रहता है, और वह परमेश्‍वर में। और जो प्रेम परमेश्‍वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उसकी प्रतीति है; परमेश्‍वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्‍वर में बना रहता है; और परमेश्‍वर उसमें बना रहता है। इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्‍याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी है। प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहले उसने हम से प्रेम किया। यदि कोई कहे, “मैं परमेश्‍वर से प्रेम रखता हूँ,” और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्‍वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। और उससे हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्‍वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।। जिसका यह विश्‍वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्‍न करनेवाले से प्रेम रखता है, वह उससे भी प्रेम रखता है, जो उससे उत्‍पन्‍न हुआ है। जब हम परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं, और उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं, कि परमेश्‍वर की सन्‍तानों से प्रेम रखते हैं। और परमेश्‍वर का प्रेम यह है, कि हम उसकी आज्ञाओं को मानें; और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं। क्‍योंकि जो कुछ परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्‍त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्‍त होती है हमारा विश्‍वास है। संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका विश्‍वास है, कि यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र है। यही है वह, जो पानी और लोहू के द्वारा आया था; अर्थात् यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा, बरन पानी और लोहू दोनों के द्वारा आया था। और जो गवाही देता है, वह आत्‍मा है; क्‍योंकि आत्‍मा सत्‍य है। और गवाही देनेवाले तीन हैं; आत्‍मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सम्‍मत हैं। जब हम मनुष्‍यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्‍वर की गवाही तो उससे बढ़कर है; और परमेश्‍वर की गवाही यह है, कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है। जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिस ने परमेश्‍वर की प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्‍योंकि उसने उस गवाही पर विश्‍वास नहीं किया, जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। और वह गवाही यह है, कि परमेश्‍वर ने हमें अनन्‍त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।। मैं ने तुम्‍हें, जो परमेश्‍वर के पुत्र के नाम पर विश्‍वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्‍त जीवन तुम्‍हारा है। और हमें उसके साम्‍हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्‍छा के अनुसार कुछ माँगते हैं, तो हमारी सुनता है। और जब हम जानते हैं, कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो यह भी जानते हैं, कि जो कुछ हम ने उससे माँगा, वह पाया है। यदि कोई अपने भाई को ऐसा पाप करते देखे, जिसका फल मृत्‍यु न हो, तो विनती करे, और परमेश्‍वर, उसे, उनके लिये, जिन्‍हों ने ऐसा पाप किया है जिसका फल मृत्‍यु न हो, जीवन देगा: पाप ऐसा भी होता है जिसका फल मृत्‍यु है: इस के विषय में मै विनती करने के लिये नहीं कहता। सब प्रकार का अधर्म तो पाप है, परन्‍तु ऐसा पाप भी है, जिसका फल मृत्‍यु नहीं।। हम जानते हैं, कि जो कोई परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है, वह पाप नहीं करता; जो परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ, उसे वह बचाए रखता है: और वह दुष्‍ट उसे छूने नहीं पाता। हम जानते हैं, कि हम परमेश्‍वर से हैं, और सारा संसार उस दुष्‍ट के वंश में पड़ा है। और यह भी जानते हैं, कि परमेश्‍वर का पुत्र आ गया है और उसने हमें समझ दी है, कि हम उस सच्‍चे को पहचानें, और हम उसमें जो सत्‍य है, अर्थात् उसके पुत्र यीशु मसीह में रहते हैं: सच्‍चा परमेश्‍वर और अनन्‍त जीवन यही है। हे बालको, अपने आप को मूरतों से बचाए रखो। मुझ प्राचीन की ओर से उस चुनी हुई महिला और उसके बच्चों के नाम जिनसे मैं उस सच्‍चाई के कारण सत्‍य प्रेम रखता, हूँ और केवल मैं ही नहीं, वरन् वह सब भी प्रेम रखते हैं, जो सच्‍चाई को जानते हैं। वह सत्य जो हम में स्थिर रहता है, और सर्वदा हमारे साथ अटल रहेगा; परमेश्‍वर पिता, और पिता के पुत्र यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह, और दया, और शान्‍ति, सत्‍य, और प्रेम सहित हमारे साथ रहेंगे। मैं बहुत आनन्‍दित हुआ, कि मैं ने तेरे कुछ बच्चों को उस आज्ञा के अनुसार, जो हमें पिता की ओर से मिली थी सत्‍य पर चलते हुए पाया। अब हे महिला, मैं तुझे कोई नई आज्ञा नहीं, पर वही जो आरम्‍भ से हमारे पास है, लिखता हूँ; और तुझ से बिनती करता हूँ, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें। और प्रेम यह है कि हम उस की आज्ञाओं के अनुसार चलें: यह वही आज्ञा है, जो तुम ने आरम्‍भ से सुनी है और तुम्‍हें इस पर चलना भी चाहिए। क्‍योंकि बहुत से ऐसे भरमानेवाले जगत में निकल आए हैं, जो यह नहीं मानते, कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया: भरमानेवाला और मसीह का विरोधी यही है। अपने विषय में चौकस रहो; कि जो परिश्रम हम ने किया है, उस को तुम न बिगाड़ो: वरन उसका पूरा प्रतिफल पाओ। जो कोई आगे बढ़ जाता है, और मसीह की शिक्षा में बना नहीं रहता, उसके पास परमेश्‍वर नहीं: जो कोई उस की शिक्षा में स्‍थिर रहता है, उसके पास पिता भी है, और पुत्र भी। यदि कोई तुम्‍हारे पास आए, और यही शिक्षा न दे, उसे न तो घर में आने दो, और न नमस्‍कार करो। क्‍योंकि जो कोई ऐसे जन को नमस्‍कार करता है, वह उस के बुरे कामों में साझी होता है। मुझे बहुत सी बातें तुम्‍हें लिखनी हैं, पर कागज और सियाही से लिखना नहीं चाहता; पर आशा है, कि मैं तुम्‍हारे पास आऊँगा, और सम्‍मुख होकर बातचीत करूँगा: जिस से तुम्‍हारा आनन्‍द पूरा हो। तेरी चुनी हुई बहिन के बच्चे तुझे नमस्‍कार करते हैं। मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिस से मैं सच्‍चा प्रेम रखता हूँ। हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्‍मिक उन्‍नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों मे उन्‍नति करे, और भला चगा रहे। क्‍योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्‍य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्‍दित हुआ। मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्‍द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे बच्चे सत्‍य पर चलते हैं। हे प्रिय, जो कुछ तू उन भाइयों के साथ करता है, जो परदेशी भी हैं, उसे विश्‍वासी की नाई करता है। उन्‍हों ने कलीसिया के साम्‍हने तेरे प्रेम की गवाही दी थी: यदि तू उन्‍हें उस प्रकार विदा करेगा जिस प्रकार परमेश्‍वर के लोगों के लिये उचित है तो अच्‍छा करेगा। क्‍योंकि वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्‍यजातियों से कुछ नहीं लेते। इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्‍य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों। मैं ने कलीसिया को कुछ लिखा था; पर दियुत्रिफेस जो उन में बड़ा बनना चाहता है, हमें ग्रहण नहीं करता। सो जब मैं आऊँगा, तो उसके कामों की जो वह कर रहा है सुधि दिलाऊँगा, कि वह हमारे विषय में बुरी बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्‍तोष न करके आप ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्‍हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है: और कलीसिया से निकाल देता है। हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्‍वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उस ने परमेश्‍वर को नहीं देखा। देमेत्रियुस के विषय में सब ने बरन सत्‍य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है। मुझे तुझ को बहुत कुछ लिखना तो था; पर सियाही और कलम से लिखना नहीं चाहता। पर मुझे आशा है कि तुझ से शीघ्र भेंट करूँगा: तब हम आमने - सामने बातचीत करेंगे: तुझे शान्‍ति मिलती रहे। यहाँ के मित्र तुझे नमस्‍कार करते हैं: वहाँ के मित्रों के नाम ले लेकर नमस्‍कार कह देना। यहूदा की ओर से जो यीशु मसीह का दास और याकूब का भाई है, उन बुलाए हुओं के नाम जो परमेश्‍वर पिता में प्रिय और यीशु मसीह के लिये सुरक्षित हैं। दया और शान्‍ति और प्रेम तुम्‍हें बहुतायत से प्राप्‍त होता रहे। हे प्रियो, जब मैं तुम्‍हें उस उद्धार के विषय में लिखने में अत्‍यन्‍त परिश्रम से प्रयत्‍न कर रहा था, जिस में हम सब सहभागी हैं; तो मैं ने तुम्‍हें यह समझाना आवश्‍यक जाना कि उस विश्‍वास के लिये पूरा यत्‍न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था। क्‍योंकि कितने ऐसे मनुष्‍य चुपके से हम में आ मिले हैं, जिन से इस दण्‍ड का वर्णन पुराने समय में पहिले ही से लिखा गया था: ये भक्तिहीन हैं, और हमारे परमेश्‍वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते है, और हमारे अद्वैत स्‍वामी और प्रभु यीशु मसीह का इन्‍कार करते हैं। पर यद्यपि तुम सब बात एक बार जान चुके हो, तौभी मैं तुम्‍हें इस बात की सुधि दिलाना चाहता हूँ, कि प्रभु ने एक कुल को मिस्र देश से छुड़ाने के बाद विश्‍वास न लानेवालों को नाश कर दिया। फिर जो स्वर्गदूत ने अपने पद को स्‍थिर न रखा वरन अपने निज निवास को छोड़ दिया, उस ने उन को भी उस भीषण दिन के न्‍याय के लिये अन्‍धकार में जो सदा काल के लिये है बन्‍धनों में रखा है। जिस रीति से सदोम और अमोरा और उन के आस पास के नगर, जो इन की नाई व्‍यभिचारी हो गए थे और पराये शरीर के पीछे लग गए थे आग के अनन्‍त दण्‍ड में पड़कर दृष्‍टान्‍त ठहरे हैं। उसी रीति से ये स्‍वप्‍नदर्शी भी अपने अपने शरीर को अशुद्ध करते, और प्रभुता को तुच्‍छ जानते हैं; और ऊँचे पदवालों को बुरा भला कहते हैं। परन्‍तु प्रधान स्‍वर्गदूत मीकाईल ने, जब शैतान से मूसा की लोथ के विषय में वाद-विवाद करता था, तो उस को बुरा भला कहके दोष लगाने का साहस न किया; पर यह कहा, “प्रभु तुझे डाँटे।” पर ये लोग जिन बातों को नहीं जानते, उन को बुरा भला कहते हैं; पर जिन बातों को अचेतन पशुओं की नाई स्‍वभाव ही से जानते हैं, उन में अपने आप को नाश करते हैं। उन पर हाय! कि वे कैन की सी चाल चले, और मजदूरी के लिये बिलाम की नाई भ्रष्‍ट हो गए हैं: और कोरह की नाई विरोध करके नाश हुए हैं। यह तुम्‍हारी प्रेम सभाओं में तुम्‍हारे साथ खाते-पीते, समुद्र में छिपी हुई चट्टान सरीखे हैं, और बेधड़क अपना ही पेट भरनेवाले रखवाले हैं; वे निर्जल बादल हैं; जिन्‍हें हवा उड़ा ले जाती है; पतझड़ के निष्‍फल पेड़ हैं, जो दो बार मर चुके हैं; और जड़ से उखड़ गए हैं; ये समुद्र के प्रचण्‍ड हिलकोरे हैं, जो अपनी लज्‍जा का फेन उछालते हैं: ये डाँवाडोल तारे हैं, जिन के लिये सदा काल तक घोर अन्‍धकार रखा गया है। और हनोक ने भी जो आदम से सातवीं पीढ़ी में था, इन के विषय में यह भविष्‍यद्वाणी की, “देखो, प्रभु अपने लाखों पवित्रों के साथ आया। कि सब का न्‍याय करे, और सब भक्तिहीनों को उन के अभक्ति के सब कामों के विषय में, जो भक्तिहीन पापियों ने उसके विरोध में कही हैं, दोषी ठहराए।” ये तो असंतुष्‍ट, कुड़कुड़ानेवाले, और अपने अभिलाषाओं के अनुसार चलनेवाले हैं; और अपने मुँह से घमण्‍ड की बातें बोलते हैं; और वे लाभ के लिये मुँह देखी बड़ाई किया करते हैं। पर हे प्रियों, तुम उन बातों को स्‍मरण रखो; जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरित पहिले कह चुके हैं। वे तुम से कहा करते थे, “पिछले दिनों में ऐसे ठट्ठा करनेवाले होंगे, जो अपनी अभक्ति के अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।” ये तो वे है, जो फूट डालते हैं; ये शारीरिक लोग हैं, जिन में आत्‍मा नहीं। पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्‍वास में अपनी उन्‍नति करते हुए और पवित्र आत्‍मा में प्रार्थना करते हुए। अपने आप को परमेश्‍वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्‍त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो। और उन पर जो शंका में हैं दया करो। और बहुतों को आग में से झपटकर निकालो, और बहुतों पर भय के साथ दया करो; बरन उस वस्‍त्र से भी घृणा करो जो शरीर के द्वारा कलंकित हो गया है। अब जो तुम्‍हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्‍हने मगन और निर्दोष करके खड़ा कर सकता है। उस अद्वैत परमेश्‍वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन। यीशु मसीह का प्रकाशितवाक्‍य, जो उसे परमेश्‍वर ने इसलिये दिया कि अपने दासों को वे बातें, जिनका शीघ्र होना अवश्‍य है, दिखाए: और उसने अपने स्‍वर्गदूत को भेजकर उसके द्वारा अपने दास यूहन्‍ना को बताया, जिसने परमेश्‍वर के वचन और यीशु मसीह की गवाही, अर्थात् जो कुछ उसने देखा था उसकी गवाही दी। धन्‍य है वह जो इस भविष्‍यद्वाणी के वचन को पढ़ता है, और वे जो सुनते हैं और इस में लिखी हुई बातों को मानते हैं, क्‍योंकि समय निकट है। यूहन्‍ना की ओर से एशिया की सात कलीसियाओं के नाम: उसकी ओर से जो है, और जो था, और जो आनेवाला है; और उन सात आत्‍माओं की ओर से, जो उसके सिंहासन के सामने है, और यीशु मसीह की ओर से, जो विश्‍वासयोग्‍य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहलौठा, और पृथ्‍वी के राजाओं का हाकिम है, तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। जो हम से प्रेम रखता है, और जिसने अपने लहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है। और हमें एक राज्‍य और अपने पिता परमेश्‍वर के लिये याजक भी बना दिया; उसी की महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। आमीन। देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है; और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था, वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्‍वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हाँ। आमीन। प्रभु परमेश्‍वर, वह जो है, और जो था, और जो आनेवाला है; जो सर्वशक्तिमान है: यह कहता है, “मैं ही अल्‍फा और ओमेगा हूँ।” मैं यूहन्‍ना, जो तुम्‍हारा भाई, और यीशु के क्‍लेश, और राज्‍य, और धीरज में तुम्‍हारा सहभागी हूँ, परमेश्‍वर के वचन, और यीशु की गवाही के कारण पतमुस नामक टापू में था। मैं प्रभु के दिन आत्‍मा में आ गया, और अपने पीछे तुरही का सा बड़ा शब्‍द यह कहते सुना, “जो कुछ तू देखता है, उसे पुस्‍तक में लिखकर सातों कलीसियाओं के पास भेज दे, अर्थात् इफिसुस, और स्‍मुरना, और पिरगमुन, और थूआतीरा, और सरदीस, और फिलदिलफिया, और लौदीकिया को।” तब मैंने उसे जो मुझ से बोल रहा था; देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैंने सोने की सात दीवटें देखी; और उन दीवटों के बीच में मनुष्‍य के पुत्र सरीखा एक पुरूष को देखा, जो पाँवों तक का वस्‍त्र पहने, और छाती पर सोने का पटुका बाँधे हुए था। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन वरन् पाले के से उज्‍जवल थे; और उसकी आँखें आग की ज्‍वाला के समान थी। उसके पाँव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्टी में तपाए गए हों; और उसका शब्‍द बहुत जल के शब्‍द के नाई था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए था, और उसके मुख से तेज दोधारी तलवार निकलती थी; और उसका मुँह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है। जब मैने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, “मत डर; मैं प्रथम और अन्‍तिम और जीवता हूँ, मैं मर गया था, और अब देख मैं युगानुयुग जीवता हूँ; और मृत्‍यु और अधोलोक की कुंजियाँ मेरे ही पास हैं। “इसलिये जो बातें तू ने देखीं हैं और जो बातें हो रही हैं; और जो इस के बाद होनेवाली हैं, उन सब को लिख ले। “अर्थात् उन सात तारों का भेद जिन्‍हें तू ने मेरे दाहिने हाथ में देखा था, और उन सात सोने की दीवटों का भेद: वे सात तारे सातों कलीसियाओं के दूत हैं, और वे सात दीवट सात कलीसियाएँ हैं। “इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिए हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है: ‘मै तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूँ; और यह भी कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्‍हें तूने परखकर झूठा पाया। और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते-उठाते थका नहीं। ‘पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है कि तूने अपना पहला सा प्रेम छोड़ दिया है। ‘इसलिये स्मरण कर, कि तू कहाँ से गिरा है, और मन फिरा और पहले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मै तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्‍थान से हटा दूँगा। ‘पर हाँ, तुझ में यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कामों से घृणा करता है, जिनसे मैं भी घृणा करता हूँ। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्‍वर के स्‍वर्गलोक में है, फल खाने को दूँगा।’ “स्‍मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो प्रथम और अन्‍तिम है; जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है: ‘मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूँ (परन्‍तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उनकी निन्‍दा को भी जानता हूँ। ‘जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उनसे मत डर: क्‍योंकि देखो, शैतान तुम में से कुछ को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्‍हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्‍वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है: जो जय पाए, उसको दूसरी मृत्‍यु से हानि न पहूँचेगी।’ “पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख: जिसके पास दोधारी और तेज तलवार है, वह यह कहता है: ‘मैं यह तो जानता हूँ, कि तू वहाँ रहता है जहाँ शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्‍थिर रहता है; और मुझ पर विश्‍वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिनमें मेरा विश्‍वासयोग्‍य साक्षी अन्‍तिपास, तुम में उस स्‍थान पर घात किया गया जहाँ शैतान रहता है। ‘पर मुझे तेरे विरूद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्‍योंकि तेरे यहाँ कुछ तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जिसने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूर्तियों पर चढ़ाई गई वस्तुएँ खाएँ, और व्‍यभिचार करें। ‘वैसे ही तेरे यहाँ कुछ तो ऐसे हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं। ‘अतः मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उनके साथ लड़ूँगा। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है; जो जय पाए, उसको मैं गुप्‍त मन्‍ना में से दूँगा, और उसे एक श्‍वेत पत्‍थर भी दूँगा; और उस पत्‍थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पानेवाले के सिवाय और कोई न जानेगा।’ “थूआतीरा की कलीसिया के दूत को यह लिख: परमेश्‍वर का पुत्र जिसकी आँखें आग की ज्‍वाला के समान, और जिसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, वह यह कहता है: ‘मैं तेरे कामों, और प्रेम, और विश्‍वास, और सेवा, और धीरज को जानता हूँ, और यह भी कि तेरे पिछले काम पहलों से बढ़कर हैं। ‘पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है, कि तू उस स्‍त्री इजेबेल को रहने देता है जो अपने आप को भविष्‍यद्वक्तिन कहती है, और मेरे दासों को व्‍यभिचार करने, और मूर्तियों के आगे चढ़ाई गई वस्तुएँ खाना सिखलाकर भरमाती है। ‘मैंने उसको मन फिराने के लिये अवसर दिया, पर वह अपने व्‍यभिचार से मन फिराना नहीं चाहती। ‘देख, मैं उसे खाट पर डालता हूँ; और जो उसके साथ व्‍यभिचार करते हैं यदि वे भी उसके से कामों से मन न फिराएँगे तो उन्‍हें बड़े क्‍लेश में डालूँगा। ‘मैं उसके बच्‍चों को मार डालूँगा; और तब सब कलीसियाएँ जान लेंगी कि हृदय और मन का परखनेवाला मैं ही हूँ: और मैं तुम में से हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला दूँगा। ‘पर तुम थूआतीरा के बाकी लोगों से, जितने इस शिक्षा को नहीं मानते, और उन बातों को जिन्‍हें शैतान की गहिरी बातें कहते हैं नहीं जानते, यह कहता हूँ, कि मैं तुम पर और बोझ न डालूँगा। ‘पर हाँ, जो तुम्‍हारे पास है उसको मेरे आने तक थामें रहो। जो जय पाए, और मेरे कामों के अनुसार अन्‍त तक करता रहे, ‘मैं उसे जाति-जाति के लोगों पर अधिकार दूँगा। और वह लोहे का राजदण्‍ड लिये हुए उन पर राज्‍य करेगा, जिस प्रकार कुम्‍हार के मिट्टी के बर्तन चकनाचूर हो जाते है: मैने भी ऐसा ही अधिकार अपने पिता से पाया है। और मैं उसे भोर का तारा दूँगा। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।’ “सरदीस की कलीसिया के दूत को लिख: जिसके पास परमेश्‍वर की सात आत्माएँ और सात तारे हैं, यह कहता है कि मैं तेरे कामों को जानता हूँ, कि तू जीवित तो कहलाता है, पर है मरा हुआ। ‘जागृत रह, और उन वस्‍तुओं को जो बाकी रह गई हैं, और जो मिटने को थी, उन्‍हें दृढ़ कर; क्‍योंकि मैंने तेरे किसी काम को अपने परमेश्‍वर के निकट पूरा नहीं पाया। ‘इसलिये स्मरण कर, कि तुने किस रीति से शिक्षा प्राप्‍त की और सुनी थी, और उसमें बना रह, और मन फिरा: और यदि तू जागृत न रहेगा तो मैं चोर की नाई आ जाऊँगा और तू कदापि न जान सकेगा, कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पड़ूँगा। ‘पर हाँ, सरदीस में तेरे यहाँ कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने-अपने वस्‍त्र अशुद्ध नहीं किए, वे श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए मेरे साथ घूमेंगे, क्‍योंकि वे इस योग्‍य हैं। ‘जो जय पाए, उसे इसी प्रकार श्‍वेत वस्‍त्र पहनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्‍तक में से किसी रीति से न काटूँगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्‍वर्गदूतों के सामने मान लूँगा। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।’ “फिलदिलफिया की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो पवित्र और सत्‍य है, और जो दाऊद की कुंजी रखता है, जिसके खोले हुए को कोई बन्‍द नहीं कर सकता और बन्‍द किए हुए को कोई खोल नहीं सकता, वह यह कहता है, ‘मैं तेरे कामों को जानता हूँ। देख, मैंने तेरे सामने एक द्वार खोल रखा है, जिसे कोई बन्‍द नहीं कर सकता; तेरी सामर्थ्य थोड़ी सी तो है, फिर भी तूने मेरे वचन का पालन किया है और मेरे नाम का इन्‍कार नहीं किया। ‘देख, मैं शैतान के उन सभावालों को तेरे वश में कर दूँगा जो यहूदी बन बैठे हैं, पर हैं नहीं, वरन् झूठ बोलते हैं— देख, मैं ऐसा करूँगा, कि वे आकर तेरे चरणों में दण्‍डवत करेंगे, और यह जान लेंगे, कि मैंने तुझ से प्रेम रखा है। ‘तूने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूँगा, जो पृथ्‍वी पर रहनेवालों के परखने के लिये सारे संसार पर आनेवाला है। ‘मैं शीघ्र ही आनेवाला हूँ; जो कुछ तेरे पास है उसे थामें रह, कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले। ‘जो जय पाए, उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्‍दिर में एक खंभा बनाऊँगा; और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम, और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास से स्‍वर्ग पर से उतरनेवाला है और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा। ‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।’ “लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो आमीन, और विश्‍वासयोग्‍य, और सच्‍चा गवाह है, और परमेश्‍वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है: ‘मैं तेरे कामों को जानता हूँ कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता। ‘इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुँह से उगलने पर हूँ। ‘तू जो कहता है, कि मैं धनी हूँ, और धनवान हो गया हूँ, और मुझे किसी वस्‍तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अंधा, और नंगा है, इसीलिये मैं तुझे सम्‍मति देता हूँ, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए; और श्‍वेत वस्‍त्र ले ले कि पहनकर तुझे अपने नंगेपन की लज्‍जा न हो; और अपनी आँखों में लगाने के लिये सुरमा ले कि तू देखने लगे। ‘मैं जिन जिनसे प्रीति रखता हूँ, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूँ, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा। ‘देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्‍द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ। ‘जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊँगा, जैसा मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया। ‘जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है’।” इन बातों के बाद जो मैंने दृष्‍टि की, तो क्‍या देखता हूँ कि स्‍वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है; और जिसको मैंने पहले तुरही के से शब्‍द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, “यहाँ ऊपर आ जा, और मैं वे बातें तुझे दिखाऊँगा, जिनका इन बातों के बाद पूरा होना अवश्‍य है।” तुरन्‍त मैं आत्‍मा में आ गया; और क्‍या देखता हूँ कि एक सिंहासन स्‍वर्ग में रखा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है। और जो उस पर बैठा है, वह यशब और माणिक्य सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है। उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन है; और इन सिंहासनों पर चौबीस प्राचीन श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए बैठे हैं, और उनके सिरों पर सोने के मुकुट हैं। उस सिंहासन में से बिजलियाँ और गर्जन निकलते हैं और सिंहासन के सामने आग के सात दीपक जल रहे हैं, वे परमेश्‍वर की सात आत्माएँ हैं, और उस सिंहासन के सामने मानो बिल्‍लौर के समान काँच का सा समुद्र है, और सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी है, जिनके आगे-पीछे आँखें ही आँखें हैं। पहला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी का बछड़े के समान है, तीसरे प्राणी का मुँह मनुष्‍य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान है। और चारों प्राणियों के छ:-छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आँखें ही आँखें हैं; और वे रात-दिन बिना विश्राम लिए यह कहते रहते हैं, “पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्‍वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आनेवाला है।” और जब वे प्राणी उसकी जो सिंहासन पर बैठा है, और जो युगानुयुग जीवता है, महिमा और आदर और धन्‍यवाद करेंगे। तब चौबीसों प्राचीन सिंहासन पर बैठनेवाले के सामने गिर पड़ेंगे, और उसे जो युगानुयुग जीवता है प्रणाम करेंगे; और अपने-अपने मुकुट सिंहासन के सामने यह कहते हुए डाल देंगे, “हे हमारे प्रभु, और परमेश्‍वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ्य के योग्‍य है; क्‍योंकि तू ही ने सब वस्तुएँ सृजीं और वे तेरी ही इच्‍छा से थी, और सृजी गईं। और जो सिंहासन पर बैठा था, मैंने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्‍द की गई थी। फिर मैंने एक बलवन्‍त स्‍वर्गदूत को देखा जो ऊँचे शब्‍द से यह प्रचार करता था “इस पुस्‍तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्‍य कौन है?” और न स्‍वर्ग में, न पृथ्‍वी पर, न पृथ्‍वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्‍टि डालने के योग्‍य निकला। तब मैं फूट-फूटकर रोने लगा, क्‍योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्‍टि करने के योग्‍य कोई न मिला। इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा, “मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है।” और मैंने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेमना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आँखें थी; ये परमेश्‍वर की सातों आत्माएँ हैं, जो सारी पृथ्‍वी पर भेजी गई हैं। उसने आकर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली, जब उसने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेमने के सामने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएँ हैं। और वे यह नया गीत गाने लगे, “तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्‍य है; क्‍योंकि तूने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्‍वर के लिये लोगों को मोल लिया है। “और उन्‍हें हमारे परमेश्‍वर के लिये एक राज्‍य और याजक बनाया; और वे पृथ्‍वी पर राज्‍य करते हैं।” जब मैने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्‍द सुना, जिनकी गिनती लाखों और करोड़ों की थी। और वे ऊँचे शब्‍द से कहते थे, “वध किया हुआ मेमना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्‍यवाद के योग्‍य है।” फिर मैंने स्‍वर्ग में, और पृथ्‍वी पर, और पृथ्‍वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, “जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेमने का धन्‍यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्‍य, युगानुयुग रहे।” और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिरकर दण्‍डवत् किया। फिर मैंने देखा कि मेमने ने उन सात मुहरों में से एक को खोला; और उन चारों प्राणियों में से एक का गर्जन का सा शब्‍द सुना, “आ।” मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक श्‍वेत घोड़ा है, और उसका सवार धनुष लिए हुए है: और उसे एक मुकुट दिया गया, और वह जय करता हुआ निकला कि और भी जय प्राप्‍त करे। जब उसने दूसरी मुहर खोली, तो मैंने दूसरे प्राणी को यह कहते सुना, “आ।” फिर एक और घोड़ा निकला, जो लाल रंग का था; उसके सवार को यह अधिकार दिया गया कि पृथ्‍वी पर से मेल उठा ले, ताकि लोग एक दूसरे को वध करें; और उसे एक बड़ी तलवार दी गई। जब उसने तीसरी मुहर खोली, तो मैंने तीसरे प्राणी को यह कहते सुना, “आ।” और मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक काला घोड़ा है; और उसके सवार के हाथ में एक तराजू है। और मैंने उन चारों प्राणियों के बीच में से एक शब्‍द यह कहते सुना, “दीनार का सेर भर गेहूँ, और दीनार का तीन सेर जौ, और तेल, और दाखरस की हानि न करना।” और जब उसने चौथी मुहर खोली, तो मैंने चौथे प्राणी का शब्‍द यह कहते सुना, “आ।” मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक पीला सा घोड़ा है; और उसके सवार का नाम मृत्‍यु है; और अधोलोक उसके पीछे-पीछे है और उन्‍हें पृथ्‍वी की एक चौथाई पर यह अधिकार दिया गया, कि तलवार, और अकाल, और मरी, और पृथ्‍वी के वनपशुओं के द्वारा लोगों को मार डालें। जब उसने पाँचवी मुहर खोली, तो मैंने वेदी के नीचे उनके प्राणों को देखा, जो परमेश्‍वर के वचन के कारण, और उस गवाही के कारण जो उन्होंने दी थी, वध किए गए थे। और उन्होंने बड़े शब्‍द से पुकार कर कहा, “हे स्‍वामी, हे पवित्र, और सत्‍य; तू कब तक न्‍याय न करेगा? और पृथ्‍वी के रहनेवालों से हमारे लहू का पलटा कब तक न लेगा?” और उनमें से हर एक को श्‍वेत वस्‍त्र दिया गया, और उनसे कहा गया, कि और थोड़ी देर तक विश्राम करो, जब तक कि तुम्‍हारे संगी दास और भाई जो तुम्‍हारे समान वध होनेवाले हैं, उनकी भी गिनती पूरी न हो ले। जब उसने छठवीं मुहर खोली, तो मैंने देखा कि एक बड़ा भूकम्प हुआ; और सूर्य कम्बल के समान काला, और पूरा चन्‍द्रमा लहू का सा हो गया। और आकाश के तारे पृथ्‍वी पर ऐसे गिर पड़े जैसे बड़ी आँधी से हिलकर अंजीर के पेड़ में से कच्‍चे फल झड़ते हैं। आकाश ऐसा सरक गया, जैसा पत्र लपेटने से सरक जाता है; और हर एक पहाड़, और टापू, अपने-अपने स्‍थान से टल गया। पृथ्‍वी के राजा, और प्रधान, और सरदार, और धनवान और सामर्थी लोग, और हर एक दास, और हर एक स्‍वतंत्र, पहाड़ों की गुफाओं और चटानों में जा छिपे; और पहाड़ों, और चट्टानों से कहने लगे, “हम पर गिर पड़ो; और हमें उसके मुँह से जो सिंहासन पर बैठा है और मेमने के प्रकोप से छिपा लो; क्‍योंकि उनके प्रकोप का भयानक दिन आ पहुँचा है, अब कौन ठहर सकता है?” इसके बाद मैंने पृथ्‍वी के चारों कोनों पर चार स्‍वर्गदूत खड़े देखे, वे पृथ्‍वी की चारों हवाओं को थामे हुए थे ताकि पृथ्‍वी, या समुद्र, या किसी पेड़ पर, हवा न चले। फिर मैंने एक और स्‍वर्गदूत को जीवते परमेश्‍वर की मुहर लिए हुए पूरब से ऊपर की ओर आते देखा; उसने उन चारों स्‍वर्गदूतों से जिन्‍हें पृथ्‍वी और समुद्र की हानि करने का अधिकार दिया गया था, ऊँचे शब्‍द से पुकारकर कहा, “जब तक हम अपने परमेश्‍वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें, तब तक पृथ्‍वी और समुद्र और पेड़ों को हानि न पहुँचाना।” इस्राएल के 1,44,000 लोग और जिन पर मुहर दी गई, मैंने उनकी गिनती सुनी, कि इस्राएल की सन्‍तानों के सब गोत्रों में से एक लाख चौवालीस हजार पर मुहर दी गई: यहूदा के गोत्र में से बारह हजार पर मुहर दी गई, रूबेन के गोत्र में से बारह हजार पर, गाद के गोत्र में से बारह हजार पर, आशेर के गोत्र में से बारह हजार पर, नप्ताली के गोत्र में से बारह हजार पर; मनश्शे के गोत्र में से बारह हजार पर, शमौन के गोत्र में से बारह हजार पर, लेवी के गोत्र में से बारह हजार पर, इस्‍साकार के गोत्र में से बारह हजार पर, जबूलून के गोत्र में से बारह हजार पर, यूसुफ के गोत्र में से बारह हजार पर, और बिन्‍यामीन के गोत्र में से बारह हजार पर मुहर दी गई। इसके बाद मैंने दृष्‍टि की, और देखो, हर एक जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्‍वेत वस्‍त्र पहने और अपने हाथों में खजूर की डालियाँ लिये हुए सिंहासन के सामने और मेमने के सामने खड़ी है; और बड़े शब्‍द से पुकारकर कहती है, “उद्धार के लिये हमारे परमेश्‍वर का, जो सिंहासन पर बैठा है, और मेमने का जय-जयकार हो।” और सारे स्‍वर्गदूत, उस सिंहासन और प्राचीनों और चारों प्राणियों के चारों ओर खड़े हैं, फिर वे सिंहासन के सामने मुँह के बल गिर पड़े और परमेश्‍वर को दण्‍डवत् करके कहा, “आमीन, हमारे परमेश्‍वर की स्‍तुति, ओर महिमा, और ज्ञान, और धन्‍यवाद, और आदर, और सामर्थ्य, और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन।” इस पर प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा, “ये श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए कौन हैं? और कहाँ से आए हैं?” मैंने उससे कहा, “हे स्‍वामी, तू ही जानता है।” उसने मुझ से कहा, “ये वे हैं, जो उस महा क्‍लेश में से निकलकर आए हैं; इन्‍होंने अपने-अपने वस्‍त्र मेमने के लहू में धोकर श्‍वेत किए हैं। “इसी कारण वे परमेश्‍वर के सिंहासन के सामने हैं, और उसके मन्‍दिर में दिन-रात उसकी सेवा करते हैं; और जो सिंहासन पर बैठा है, वह उनके ऊपर अपना तम्‍बू तानेगा। “वे फिर भूखे और प्‍यासे न होंगे; और न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। क्‍योंकि मेमना जो सिंहासन के बीच में है, उनकी रखवाली करेगा; और उन्‍हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा, और परमेश्‍वर उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा।” जब उसने सातवीं मुहर खोली, तो स्‍वर्ग में आधे घण्टे तक सन्‍नाटा छा गया। और मैंने उन सातों स्‍वर्गदूतों को जो परमेश्‍वर के सामने खड़े रहते हैं, देखा, और उन्‍हें सात तुरहियाँ दी गईं। फिर एक और स्‍वर्गदूत सोने का धूपदान लिये हुए आया, और वेदी के निकट खड़ा हुआ; और उसको बहुत धूप दिया गया कि सब पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ सोने की उस वेदी पर, जो सिंहासन के सामने है चढ़ाएँ। और उस धूप का धुआँ पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं सहित स्‍वर्गदूत के हाथ से परमेश्‍वर के सामने पहुँच गया। तब स्‍वर्गदूत ने धूपदान लेकर उसमें वेदी की आग भरी, और पृथ्‍वी पर डाल दी, और गर्जन और शब्‍द और बिजलियाँ और भूकम्प होने लगे। और वे सातों स्‍वर्गदूत जिनके पास सात तुरहियाँ थी, फूँकने को तैयार हुए। पहले स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी, और लहू से मिले हुए ओले और आग उत्‍पन्‍न हुई, और पृथ्‍वी पर डाली गई; और एक तिहाई पृथ्‍वी जल गई, और एक तिहाई पेड़ जल गई, और सब हरी घास भी जल गई। दूसरे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी, तो मानो आग सा जलता हुआ एक बड़ा पहाड़ समुद्र में डाला गया; और समुद्र भी एक तिहाई लहू हो गया, और समुद्र की एक तिहाई सृजी हुई वस्तुएँ जो सजीव थीं मर गई, और एक तिहाई जहाज नाश हो गए। तीसरे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी, और एक बड़ा तारा जो मशाल के समान जलता था, स्‍वर्ग से टूटा, और नदियों की एक तिहाई पर, और पानी के सोतों पर आ पड़ा। उस तारे का नाम नागदौना है, और एक तिहाई पानी नागदौना सा कड़वा हो गया, और बहुत से मनुष्‍य उस पानी के कड़वे हो जाने से मर गए। चौथे स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी, और सूर्य की एक तिहाई, और चाँद की एक तिहाई और तारों की एक तिहाई पर आपत्ति आई, यहाँ तक कि उनका एक तिहाई अंग अन्‍धेरा हो गया और दिन की एक तिहाई में उजाला न रहा, और वैसे ही रात में भी। जब मैंने फिर देखा, तो आकाश के बीच में एक उकाब को उड़ते और ऊँचे शब्‍द से यह कहते सुना, “उन तीन स्‍वर्गदूतों की तुरही के शब्‍दों के कारण जिनका फूँकना अभी बाकी है, पृथ्‍वी के रहनेवालों पर हाय, हाय, हाय!” जब पाँचवें स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी, तो मैंने स्‍वर्ग से पृथ्‍वी पर एक तारा गिरता हुआ देखा, और उसे अथाह कुण्‍ड की कुंजी दी गई। उसने अथाह कुण्‍ड को खोला, और कुण्‍ड में से बड़ी भट्टी का सा धुआँ उठा, और कुण्‍ड के धुएँ से सूर्य और वायु अन्धकारमय हो गए। उस धुएँ में से पृथ्‍वी पर टिड्डियाँ निकलीं, और उन्‍हें पृथ्‍वी के बिच्‍छुओं की सी शक्ति दी गई। उनसे कहा गया कि न पृथ्‍वी की घास को, न किसी हरियाली को, न किसी पेड़ को हानि पहुँचाएँ, केवल उन मनुष्‍यों को हानि पहुँचाएँ जिनके माथे पर परमेश्‍वर की मुहर नहीं है। और उन्‍हें लोगों को मार डालने का तो नहीं, पर पाँच महीने तक लोगों को पीड़ा देने का अधिकार दिया गया: और उनकी पीड़ा ऐसी थी, जैसे बिच्‍छू के डंक मारने से मनुष्‍य को होती है। उन दिनों में मनुष्‍य मृत्‍यु को ढूँढ़ेंगे, और न पाएँगे; और मरने की लालसा करेंगे, और मृत्‍यु उनसे भागेगी। उन टिड्डियों के आकार लड़ाई के लिये तैयार किए हुए घोड़ों के जैसे थे, और उनके सिरों पर मानों सोने के मुकुट थे; और उनके मुँह मनुष्‍यों के जैसे थे। उनके बाल स्‍त्रियों के बाल जैसे, और दाँत सिंहों के दाँत जैसे थे। वे लोहे की सी झिलम पहने थे, और उनके पंखों का शब्‍द ऐसा था जैसा रथों और बहुत से घोड़ों का जो लड़ाई में दौड़ते हों। उनकी पूँछ बिच्‍छुओं की सी थीं, और उनमें डंक थे, और उन्‍हें पाँच महीने तक मनुष्‍यों को दु:ख पहुँचाने की जो शक्ति मिली थी, वह उनकी पूँछों में थी। अथाह कुण्‍ड का दूत उन पर राजा था, उसका नाम इब्रानी में अबद्दोन, और यूनानी में अपुल्‍लयोन है। पहली विपत्ति बीत चुकी, देखो अब इसके बाद दो विपत्तियाँ और होनेवाली हैं। जब छठवें स्‍वर्गदूत ने तुरही फूँकी तो जो सोने की वेदी परमेश्‍वर के सामने है उसके सींगो में से मैंने ऐसा शब्‍द सुना, मानों कोई छठवें स्‍वर्गदूत से, जिसके पास तुरही थी कह रहा है, “उन चार स्‍वर्गदूतों को जो बड़ी नदी फुरात के पास बन्‍धे हुए हैं, खोल दे।” और वे चारों दूत खोल दिए गए जो उस घड़ी, और दिन, और महीने, और वर्ष के लिये मनुष्‍यों की एक तिहाई के मार डालने को तैयार किए गए थे। उनकी फौज के सवारों की गिनती बीस करोड़ थी; मैंने उनकी गिनती सुनी। और मुझे इस दर्शन में घोड़े और उनके ऐसे सवार दिखाई दिए, जिनकी झिलमें आग, और धूम्रकान्‍त, और गन्‍धक की सी थीं, और उन घोड़ों के सिर सिंहों के सिरों के से थे: और उनके मुँह से आग, और धुआँ, और गन्‍धक निकलते थे। इन तीनों महामारियों; अर्थात् आग, और धुएँ, और गन्‍धक से, जो उसके मुँह से निकलते थे, मनुष्‍यों की एक तिहाई मार डाली गई। क्‍योंकि उन घोड़ों की सामर्थ्य उनके मुँह, और उनकी पूँछों में थी; इसलिये कि उनकी पूँछे साँपों की सी थीं, और उन पूँछों के सिर भी थे, और इन्‍हीं से वे पीड़ा पहुँचाते थे। बाकी मनुष्‍यों ने जो उन महामारियों से न मरे थे, अपने हाथों के कामों से मन न फिराया, कि दुष्‍टात्‍माओं की, और सोने और चाँदी, और पीतल, और पत्‍थर, और काठ की मूर्तियों की पूजा न करें, जो न देख, न सुन, न चल सकती हैं। और जो खून, और टोना, और व्‍यभिचार, और चोरियाँ, उन्होंने की थीं, उनसे मन न फिराया। फिर मैंने एक और शक्तिशाली स्‍वर्गदूत को बादल ओढ़े हुए स्‍वर्ग से उतरते देखा; और उसके सिर पर मेघधनुष था, और उसका मुँह सूर्य के समान और उसके पाँव आग के खंभे के समान थे; और उसके हाथ में एक छोटी सी खुली हुई पुस्‍तक थी। उसने अपना दाहिना पाँव समुद्र पर, और बायाँ पृथ्‍वी पर रखा; और ऐसे बड़े शब्‍द से चिल्‍लाया, जैसा सिंह गरजता है; और जब वह चिल्‍लाया तो गर्जन के सात शब्‍द सुनाई दिए। जब सातों गर्जन के शब्‍द सुनाई दे चुके, तो मैं लिखने पर था, और मैंने स्‍वर्ग से यह शब्‍द सुना, “जो बातें गर्जन के उन सात शब्‍दों से सुनी हैं, उन्‍हें गुप्‍त रख, और मत लिख।” जिस स्‍वर्गदूत को मैंने समुद्र और पृथ्‍वी पर खड़े देखा था; उसने अपना दाहिना हाथ स्‍वर्ग की ओर उठाया और उसकी शपथ खाकर जो युगानुयुग जीवित है, और जिसने स्वर्ग को और जो कुछ उसमें है, और पृथ्‍वी को और जो कुछ उस पर है, और समुद्र को और जो कुछ उसमें है सृजा है, कहा कि अब और देर न होगी। वरन् सातवें स्‍वर्गदूत के शब्‍द देने के दिनों में, जब वह तुरही फूँकने पर होगा, तो परमेश्‍वर का वह रहस्य पूरा हो जाएगा, जिसका सुसमाचार उसने अपने दास भविष्‍यद्वक्‍ताओं को दिया था। जिस शब्‍द करनेवाले को मैंने स्‍वर्ग से बोलते सुना था, वह फिर मेरे साथ बातें करने लगा, “जा, जो स्‍वर्गदूत समुद्र और पृथ्‍वी पर खड़ा है, उसके हाथ में की खुली हुईं पुस्‍तक ले ले।” और मैंने स्‍वर्गदूत के पास जाकर कहा, “यह छोटी पुस्‍तक मुझे दे।” और उसने मुझ से कहा, “ले, इसे खा ले; यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुँह में मधु सी मीठी लगेगी।” अतः मैं वह छोटी पुस्‍तक उस स्‍वर्गदूत के हाथ से लेकर खा गया। वह मेरे मुँह में मधु सी मीठी तो लगी, पर जब मैं उसे खा गया, तो मेरा पेट कड़वा हो गया। तब मुझ से यह कहा गया, “तुझे बहुत से लोगों, और जातियों, और भाषाओं, और राजाओं के विषय में फिर भविष्‍यद्ववाणी करनी होगी।” फिर मुझे नापने के लिये एक सरकंडा दिया गया, और किसी ने कहा, “उठ, परमेश्‍वर के मन्‍दिर और वेदी, और उसमें भजन करनेवालों को नाप ले। “पर मन्‍दिर के बाहर का आँगन छोड़ दे; उसे मत नाप क्‍योंकि वह अन्‍यजातियों को दिया गया है, और वे पवित्र नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगी। “और मैं अपने दो गवाहों को यह अधिकार दूँगा कि टाट ओढ़े हुए एक हजार दो सौ साठ दिन तक भविष्‍यद्ववाणी करें।” ये वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं जो पृथ्‍वी के प्रभु के सामने खड़े रहते हैं। और यदि कोई उनको हानि पहुँचाना चाहता है, तो उनके मुँह से आग निकलकर उनके बैरियों को भस्‍म करती है, और यदि कोई उनको हानि पहुँचाना चाहेगा, तो अवश्‍य इसी रीति से मार डाला जाएगा। उन्हें अधिकार है कि आकाश को बन्‍द करें, कि उनकी भविष्‍यद्ववाणी के दिनों में मेंह न बरसे, और उन्‍हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लहू बनाएँ, और जब-जब चाहें तब-तब पृथ्‍वी पर हर प्रकार की विपत्ति लाएँ। जब वे अपनी गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अथाह कुण्‍ड में से निकलेगा, उनसे लड़कर उन्‍हें जीतेगा और उन्‍हें मार डालेगा। और उनके शव उस बड़े नगर के चौक में पड़ी रहेंगी, जो आत्‍मिक रीति से सदोम और मिस्र कहलाता है, जहाँ उनका प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। और सब लोगों, और कुलों, और भाषाओं, और जातियों में से लोग उनके शवों को साढ़े तीन दिन तक देखते रहेंगे, और उनके शवों को कब्र में रखने न देंगे। और पृथ्‍वी के रहनेवाले उनके मरने से आनन्‍दित और मगन होंगे, और एक दूसरे के पास भेंट भेजेंगे, क्‍योंकि इन दोनों भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने पृथ्‍वी के रहनेवालों को सताया था। परन्तु साढ़े तीन दिन के बाद परमेश्‍वर की ओर से जीवन का श्वांस उनमें पैठ गया; और वे अपने पाँवों के बल खड़े हो गए, और उनके देखनेवालों पर बड़ा भय छा गया। और उन्‍हें स्‍वर्ग से एक बड़ा शब्‍द सुनाई दिया, “यहाँ ऊपर आओ!” यह सुन वे बादल पर सवार होकर अपने बैरियों के देखते-देखते स्‍वर्ग पर चढ़ गए। फिर उसी घड़ी एक बड़ा भूकम्प हुआ, और नगर का दसवाँ भाग गिर पड़ा; और उस भूकम्प से सात हजार मनुष्‍य मर गए और शेष डर गए, और स्‍वर्ग के परमेश्‍वर की महिमा की। दूसरी विपत्ति बीत चुकी; देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र आनेवाली है। जब सातवें दूत ने तुरही फूँकी, तो स्‍वर्ग में इस विषय के बड़े-बड़े शब्‍द होने लगे: “जगत का राज्‍य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया और वह युगानुयुग राज्‍य करेगा।” और चौबीसों प्राचीन जो परमेश्‍वर के सामने अपने-अपने सिंहासन पर बैठे थे, मुँह के बल गिरकर परमेश्‍वर को दण्‍डवत करके, यह कहने लगे, “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था, हम तेरा धन्‍यवाद करते हैं कि तूने अपनी बड़ी सामर्थ्य को काम में लाकर राज्‍य किया है। और अन्‍यजातियों ने क्रोध किया, और तेरा प्रकोप आ पड़ा और वह समय आ पहुँचा है कि मरे हुओं का न्‍याय किया जाए, और तेरे दास भविष्‍यद्वक्‍ताओं और पवित्र लोगों को और उन छोटे-बड़ों को जो तेरे नाम से डरते हैं, बदला दिया जाए, और पृथ्‍वी के बिगाड़नेवाले नाश किए जाएँ।” और परमेश्‍वर का जो मन्‍दिर स्‍वर्ग में है, वह खोला गया, और उसके मन्‍दिर में उसकी वाचा का सन्‍दूक दिखाई दिया, और बिजलियाँ और शब्‍द और गर्जन और भूकम्प हुए, और बड़े ओले पड़े। फिर स्‍वर्ग पर एक बड़ा चिन्‍ह दिखाई दिया, अर्थात् एक स्‍त्री जो सूर्य ओढ़े हुए थी, और चाँद उसके पाँवों तले था, और उसके सिर पर बारह तारों का मुकुट था; और वह गर्भवती हुई, और चिल्‍लाती थी; क्योंकि प्रसव की पीड़ा उसे लगी थी; और वह बच्‍चा जनने की पीड़ा में थी। एक और चिन्‍ह स्‍वर्ग में दिखाई दिया, और देखो; एक बड़ा लाल अजगर था जिसके सात सिर और दस सींग थे, और उसके सिरों पर सात राजमुकुट थे। और उसकी पूँछ ने आकाश के तारों की एक तिहाई को खींचकर पृथ्‍वी पर डाल दिया, और वह अजगर उस स्‍त्री के सामने जो जच्‍चा थी, खड़ा हुआ, कि जब वह बच्‍चा जने तो उसके बच्‍चे को निगल जाए। और वह बेटा जनी जो लोहे का दण्‍ड लिए हुए, सब जातियों पर राज्‍य करने पर था, और उसका बच्‍चा एकाएक परमेश्‍वर के पास, और उसके सिंहासन के पास उठाकर पहुँचा दिया गया। और वह स्‍त्री उस जंगल को भाग गई, जहाँ परमेश्‍वर की ओर से उसके लिये एक जगह तैयार की गई थी कि वहाँ वह एक हजार दो सौ साठ दिन तक पाली जाए। फिर स्‍वर्ग पर लड़ाई हुई, मीकाईल और उसके स्‍वर्गदूत अजगर से लड़ने को निकले; और अजगर और उसके दूत उससे लड़े, परन्‍तु प्रबल न हुए, और स्‍वर्ग में उनके लिये फिर जगह न रही। और वह बड़ा अजगर अर्थात् वही पुराना साँप, जो इब्लीस और शैतान कहलाता है, और सारे संसार का भरमानेवाला है, पृथ्‍वी पर गिरा दिया गया; और उसके दूत उसके साथ गिरा दिए गए। फिर मैंने स्‍वर्ग पर से यह बड़ा शब्‍द आते हुए सुना, “अब हमारे परमेश्‍वर का उद्धार, और सामर्थ्य, और राज्‍य, और उसके मसीह का अधिकार प्रगट हुआ है; क्‍योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगानेवाला, जो रात-दिन हमारे परमेश्‍वर के सामने उन पर दोष लगाया करता था, गिरा दिया गया। “और वे मेमने के लहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्‍त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहाँ तक कि मृत्‍यु भी सह ली। “इस कारण, हे स्‍वर्गों, और उनमें रहनेवालों मगन हो; हे पृथ्‍वी, और समुद्र, तुम पर हाय! क्‍योंकि शैतान बड़े क्रोध के साथ तुम्‍हारे पास उतर आया है; क्‍योंकि जानता है कि उसका थोड़ा ही समय और बाकी है।” और जब अजगर ने देखा, कि मैं पृथ्‍वी पर गिरा दिया गया हूँ, तो उस स्‍त्री को जो बेटा जनी थी, सताया। पर उस स्‍त्री को बड़े उकाब के दो पंख दिए गए, कि साँप के सामने से उड़कर जंगल में उस जगह पहुँच जाए, जहाँ वह एक समय, और समयों, और आधे समय तक पाली जाए। और साँप ने उस स्‍त्री के पीछे अपने मुँह से नदी के समान पानी बहाया कि उसे इस नदी से बहा दे। परन्‍तु पृथ्‍वी ने उस स्‍त्री की सहायता की, और अपना मुँह खोलकर उस नदी को जो अजगर ने अपने मुँह से बहाई थी, पी लिया। तब अजगर स्‍त्री पर क्रोधित हुआ, और उसकी शेष सन्‍तान से जो परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु की गवाही देने पर स्‍थिर हैं, लड़ने को गया। और वह समुद्र के बालू पर जा खड़ा हुआ। और मैंने एक पशु को समुद्र में से निकलते हुए देखा, जिसके दस सींग और सात सिर थे। उसके सींगों पर दस राज मुकुट, और उसके सिरों पर परमेश्वर की निन्‍दा के नाम लिखे हुए थे। और जो पशु मैंने देखा, वह चीते के समान था; और उसके पाँव भालू के से, और मुँह सिंह का सा था। और उस अजगर ने अपनी सामर्थ्य, और अपना सिंहासन, और बड़ा अधिकार, उसे दे दिया। मैंने उसके सिरों में से एक पर ऐसा भारी घाव लगा देखा, मानो वह मरने पर है; फिर उसका प्राणघातक घाव अच्‍छा हो गया, और सारी पृथ्‍वी के लोग उस पशु के पीछे-पीछे अचम्भा करते हुए चले। उन्होंने अजगर की पूजा की, क्‍योंकि उसने पशु को अपना अधिकार दे दिया था, और यह कहकर पशु की पूजा की, “इस पशु के समान कौन है? कौन इससे लड़ सकता है?” बड़े बोल बोलने और निन्‍दा करने के लिये उसे एक मुँह दिया गया, और उसे बयालीस महीने तक काम करने का अधिकार दिया गया। और उसने परमेश्‍वर की निन्‍दा करने के लिये मुँह खोला, कि उसके नाम और उसके तम्‍बू अर्थात् स्‍वर्ग के रहनेवालों की निन्‍दा करे। उसे यह अधिकार दिया गया, कि पवित्र लोगों से लड़े, और उन पर जय पाए, और उसे हर एक कुल, और लोग, और भाषा, और जाति पर अधिकार दिया गया। पृथ्‍वी के वे सब रहनेवाले जिनके नाम उस मेमने की जीवन की पुस्‍तक में लिखे नहीं गए, जो जगत की उत्‍पत्ति के समय से घात हुआ है, उस पशु की पूजा करेंगे। जिसके कान हों वह सुने। जिसको कैद में पड़ना है, वह कैद में पड़ेगा, जो तलवार से मारेगा, अवश्‍य है कि वह तलवार से मारा जाएगा। पवित्र लोगों का धीरज और विश्‍वास इसी में है। फिर मैंने एक और पशु को पृथ्‍वी में से निकलते हुए देखा, उसके मेमने के से दो सींग थे; और वह अजगर के समान बोलता था। यह उस पहले पशु का सारा अधिकार उसके सामने काम में लाता था, और पृथ्‍वी और उसके रहनेवालों से उस पहले पशु की, जिसका प्राणघातक घाव अच्‍छा हो गया था, पूजा कराता था। वह बड़े-बड़े चिन्‍ह दिखाता था, यहाँ तक कि मनुष्‍यों के सामने स्‍वर्ग से पृथ्‍वी पर आग बरसा देता था। और उन चिन्‍हों के कारण जिन्‍हें उस पशु के सामने दिखाने का अधिकार उसे दिया गया था; वह पृथ्‍वी के रहनेवालों को इस प्रकार भरमाता था, कि पृथ्‍वी के रहनेवालों से कहता था कि जिस पशु को तलवार लगी थी, वह जी गया है, उसकी मूर्ति बनाओ। और उसे उस पशु की मूर्ति में प्राण डालने का अधिकार दिया गया, कि पशु की मूर्ति बोलने लगे; और जितने लोग उस पशु की मूर्ति की पूजा न करें, उन्‍हें मरवा डाले। और उसने छोटे-बड़े, धनी-कंगाल, स्‍वत्रंत-दास सब के दाहिने हाथ या उनके माथे पर एक-एक छाप करा दी, कि उसको छोड़ जिस पर छाप अर्थात् उस पशु का नाम, या उसके नाम का अंक हो, और अन्य कोई लेन-देन न कर सके। ज्ञान इसी में है: जिसे बुद्धि हो, वह इस पशु का अंक जोड़ ले, क्‍योंकि वह मनुष्‍य का अंक है, और उसका अंक छ: सौ छियासठ है। फिर मैंने दृष्‍टि की, और देखो, वह मेमना सिय्‍योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालीस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है। और स्‍वर्ग से मुझे एक ऐसा शब्‍द सुनाई दिया, जो जल की बहुत धाराओं और बड़े गर्जन का सा शब्‍द था, और जो शब्‍द मैंने सुना वह ऐसा था, मानो वीणा बजानेवाले वीणा बजाते हों। और वे सिंहासन के सामने और चारों प्राणियों और प्राचीनों के सामने मानो, एक नया गीत गा रहे थे, और उन एक लाख चौवालीस हजार जनो को छोड़, जो पृथ्‍वी पर से मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता था। ये वे हैं, जो स्‍त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुँवारे हैं; ये वे ही हैं, कि जहाँ कहीं मेमना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्‍वर के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्‍यों में से मोल लिए गए हैं। और उनके मुँह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं। फिर मैंने एक और स्‍वर्गदूत को आकाश के बीच में उड़ते हुए देखा जिसके पास पृथ्‍वी पर के रहनेवालों की हर एक जाति, और कुल, और भाषा, और लोगों को सुनाने के लिये सनातन सुसमाचार था। और उसने बड़े शब्‍द से कहा, “परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्‍योंकि उसके न्‍याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसका भजन करो, जिसने स्‍वर्ग और पृथ्‍वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।” फिर इसके बाद एक और, दूसरा स्‍वर्गदूत यह कहता हुआ आया, “गिर पड़ा, वह बड़ा बेबीलोन गिर पड़ा जिसने अपने व्‍यभिचार की कोपमय मदिरा सारी जातियों को पिलाई है।” फिर इनके बाद एक और, तीसरा स्‍वर्गदूत बड़े शब्‍द से यह कहता हुआ आया, “जो कोई उस पशु और उसकी मूर्ति की पूजा करे, और अपने माथे या अपने हाथ पर उसकी छाप ले, तो वह परमेश्‍वर का प्रकोप की निरी मदिरा जो उसके क्रोध के कटोरे में डाली गई है, पीएगा और पवित्र स्‍वर्गदूतों के सामने और मेमने के सामने आग और गन्‍धक की पीड़ा में पड़ेगा। और उनकी पीड़ा का धुआँ युगानुयुग उठता रहेगा, और जो उस पशु और उसकी मूर्ति की पूजा करते हैं, और जो उसके नाम ही छाप लेते हैं, उनको रात-दिन चैन न मिलेगा।” पवित्र लोगों का धीरज इसी में है, जो परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु पर विश्‍वास रखते हैं। और मैंने स्‍वर्ग से यह शब्‍द सुना, “लिख: जो मृतक प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्‍य हैं।” आत्‍मा कहता है, “हाँ, क्‍योंकि वे अपने परिश्रमों से विश्राम पाएँगे, और उनके कार्य उनके साथ हो लेते हैं।” मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक उजला बादल है, और उस बादल पर मनुष्‍य के पुत्र सरीखा कोई बैठा है, जिसके सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में चोखा हँसुआ है। फिर एक और स्‍वर्गदूत ने मन्‍दिर में से निकलकर, उससे जो बादल पर बैठा था, बड़े शब्‍द से पुकारकर कहा, “अपना हँसुआ लगाकर लवनी कर, क्‍योंकि लवने का समय आ पहुँचा है, इसलिये कि पृथ्‍वी की खेती पक चुकी है।” अतः जो बादल पर बैठा था, उसने पृथ्‍वी पर अपना हँसुआ लगाया, और पृथ्‍वी की लवनी की गई। फिर एक और स्‍वर्गदूत उस मन्‍दिर में से निकला, जो स्‍वर्ग में है, और उसके पास भी चोखा हँसुआ था। फिर एक और स्‍वर्गदूत, जिसे आग पर अधिकार था, वेदी में से निकला, और जिसके पास चोखा हँसुआ था, उससे ऊँचे शब्‍द से कहा, “अपना चोखा हँसुआ लगाकर पृथ्‍वी की दाखलता के गुच्‍छे काट ले; क्‍योंकि उसकी दाख पक चुकी है।” तब उस स्‍वर्गदूत ने पृथ्‍वी पर अपना हँसुआ लगाया, और पृथ्‍वी की दाखलता का फल काटकर, अपने परमेश्‍वर के प्रकोप के बड़े रसकुण्‍ड में डाल दिया। और नगर के बाहर उस रसकुण्‍ड में दाख रौंदे गए, और रसकुण्‍ड में से इतना लहू निकला कि घोड़ों के लगामों तक पहुँचा, और सौ कोस तक बह गया। फिर मैंने स्‍वर्ग में एक और बड़ा और अद्भुत चिन्‍ह देखा, अर्थात् सात स्‍वर्गदूत जिनके पास सातों अन्तिम विपत्तियाँ थीं, क्‍योंकि उनके हो जाने पर परमेश्‍वर के प्रकोप का अन्‍त है। और मैंने आग से मिले हुए काँच का सा एक समुद्र देखा, और जो उस पशु पर और उसकी मूर्ति पर, और उसके नाम के अंक पर जयवन्‍त हुए थे, उन्‍हें उस काँच के समुद्र के निकट परमेश्‍वर की वीणाओं को लिए हुए खड़े देखा। और वे परमेश्‍वर के दास मूसा का गीत, और मेमने का गीत गा गाकर कहते थे, “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, तेरे कार्य महान, और अद्भुत हैं, हे युग-युग के राजा, तेरी चाल ठीक और सच्‍ची है। “हे प्रभु, कौन तुझ से न डरेगा? और तेरे नाम की महिमा न करेगा? क्‍योंकि केवल तू ही पवित्र है, और सारी जातियाँ आकर तेरे सामने दण्‍डवत् करेंगी, क्‍योंकि तेरे न्‍याय के काम प्रगट हो गए हैं।” और इसके बाद मैंने देखा, कि स्‍वर्ग में साक्षी के तम्‍बू का मन्‍दिर खोला गया, और वे सातों स्‍वर्गदूत जिनके पास सातों विपत्तियाँ थीं, मलमल के शुद्ध और चमकदार वस्त्र पहने और छाती पर सोने की पट्टियाँ बाँधे हुए मन्‍दिर से निकले। तब उन चारों प्राणियों में से एक ने उन सात स्‍वर्गदूतों को परमेश्‍वर के, जो युगानुयुग जीवता है, प्रकोप से भरे हुए सात सोने के कटोरे दिए। और परमेश्‍वर की महिमा, और उसकी सामर्थ्य के कारण मन्‍दिर धुएँ से भर गया और जब तक उन सातों स्‍वर्गदूतों की सातों विपत्तियाँ समाप्‍त न हुई, तब तक कोई मन्‍दिर में न जा सका। फिर मैंने मन्‍दिर में किसी को ऊँचे शब्‍द से उन सातों स्‍वर्गदूतों से यह कहते सुना, “जाओ, परमेश्‍वर के प्रकोप के सातों कटोरों को पृथ्‍वी पर उंडेल दो।” अतः पहले ने जाकर अपना कटोरा पृथ्‍वी पर उंडेल दिया। और उन मनुष्‍यों के जिन पर पशु की छाप थी, और जो उसकी मूर्ति की पूजा करते थे, एक प्रकार का बुरा और दु:खदाई फोड़ा निकला। दूसरे ने अपना कटोरा समुद्र पर उंडेल दिया और वह मरे हुए का सा लहू बन गया, और समुद्र में का हर एक जीवधारी मर गया। तीसरे ने अपना कटोरा नदियों, और पानी के सोतों पर उंडेल दिया, और वे लहू बन गए। और मैंने पानी के स्‍वर्गदूत को यह कहते सुना, “हे पवित्र, जो है, और जो था, तू न्‍यायी है और तूने यह न्‍याय किया। क्‍योंकि उन्होंने पवित्र लोगों, और भविष्‍यद्वक्‍ताओं का लहू बहाया था, और तू ने उन्‍हें लहू पिलाया; क्‍योंकि वे इसी योग्‍य हैं।” फिर मैंने वेदी से यह शब्‍द सुना, “हाँ, हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, तेरे निर्णय ठीक और सच्‍चे हैं। चौथे स्वर्गदूत ने अपना कटोरा सूर्य पर उंडेल दिया, और उसे मनुष्‍यों को आग से झुलसा देने का अधिकार दिया गया। मनुष्‍य बड़ी तपन से झुलस गए, और परमेश्‍वर के नाम की जिसे इन विपत्तियों पर अधिकार है, निन्‍दा की और उसकी महिमा करने के लिये मन न फिराया। पाँचवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा उस पशु के सिंहासन पर उंडेल दिया और उसके राज्‍य पर अंधेरा छा गया; और लोग पीड़ा के मारे अपनी-अपनी जीभ चबाने लगे, और अपनी पीड़ाओं और फोड़ों के कारण स्‍वर्ग के परमेश्‍वर की निन्‍दा की; और अपने-अपने कामों से मन न फिराया। और छठवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा महानदी फुरात पर उंडेल दिया और उसका पानी सूख गया कि पूर्व दिशा के राजाओं के लिये मार्ग तैयार हो जाए। और मैंने उस अजगर के मुँह से, और उस पशु के मुँह से और उस झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता के मुँह से तीन अशुद्ध आत्‍माओं को मेंढ़कों के रूप में निकलते देखा। ये चिन्‍ह दिखानेवाली दुष्‍टात्‍माएँ हैं, जो सारे संसार के राजाओं के पास निकलकर इसलिये जाती हैं, कि उन्‍हें सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के उस बड़े दिन की लड़ाई के लिये इकट्ठा करें। “देख, मैं चोर के समान आता हूँ; धन्‍य वह है, जो जागता रहता है, और अपने वस्‍त्र कि चौकसी करता है कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें।” और उन्होंने उनको उस जगह इकट्ठा किया, जो इब्रानी में हर-मगिदोन कहलाता है। और सातवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा हवा पर उंडेल दिया, और मंदिर के सिंहासन से यह बड़ा शब्‍द हुआ, “हो चुका।” फिर बिजलियाँ, और शब्‍द, और गर्जन हुए, और एक ऐसा बड़ा भूकम्प हुआ, कि जब से मनुष्‍य की उत्‍पत्ति पृथ्‍वी पर हुई, तब से ऐसा बड़ा भूकम्प कभी न हुआ था। इससे उस बड़े नगर के तीन टुकडे़ हो गए, और जाति-जाति के नगर गिर पड़े, और बड़े बेबीलोन का स्‍मरण परमेश्‍वर के यहाँ हुआ, कि वह अपने क्रोध की जलजलाहट की मदिरा उसे पिलाए। और हर एक टापू अपनी जगह से टल गया, और पहाड़ों का पता न लगा। और आकाश से मनुष्‍यों पर मन-मन भर के बड़े ओले गिरे, और इसलिये कि यह विपत्ति बहुत ही भारी थी, लोगों ने ओलों की विपत्ति के कारण परमेश्‍वर की निन्‍दा की। और जिन सात स्‍वर्गदूतों के पास वे सात कटोरे थे, उनमें से एक ने आकर मुझ से यह कहा, “इधर आ, मैं तुझे उस बड़ी वेश्‍या का दण्‍ड दिखाऊँ, जो बहुत से पानी पर बैठी है। जिसके साथ पृथ्‍वी के राजाओं ने व्‍यभिचार किया, और पृथ्‍वी के रहनेवाले उसके व्‍यभिचार की मदिरा से मतवाले हो गए थे। तब वह मुझे आत्‍मा में जंगल को ले गया, और मैंने लाल रंग के पशु पर जो निन्‍दा के नामों से भरा हुआ था और जिसके सात सिर और दस सींग थे, एक स्‍त्री को बैठे हुए देखा। यह स्‍त्री बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े पहने थी, और सोने और बहुमूल्य मणियों और मोतियों से सजी हुई थी, और उसके हाथ में एक सोने का कटोरा था जो घृणित वस्‍तुओं से और उसके व्‍यभिचार की अशुद्ध वस्‍तुओं से भरा हुआ था। और उसके माथे पर यह नाम लिखा था, “भेद बड़ा बेबीलोन पृथ्‍वी की वेश्‍याओं और घृणित वस्‍तुओं की माता।” और मैंने उस स्‍त्री को पवित्र लोगों के लहू और यीशु के गवाहों के लहू पीने से मतवाली देखा; और उसे देखकर मैं चकित हो गया। उस स्‍वर्गदूत ने मुझ से कहा, “तू क्‍यों चकित हुआ? मैं इस स्‍त्री, और उस पशु का, जिस पर वह सवार है, और जिसके सात सिर और दस सींग हैं, तुझे भेद बताता हूँ। “जो पशु तूने देखा है, यह पहले तो था, पर अब नहीं है, और अथाह कुण्ड से निकलकर विनाश में पड़ेगा, और पृथ्‍वी के रहनेवाले जिनके नाम जगत की उत्‍पत्ति के समय से जीवन की पुस्‍तक में लिखे नहीं गए, इस पशु की यह दशा देखकर कि पहले था, और अब नहीं; और फिर आ जाएगा, अचम्भा करेंगे। “उस बुद्धि के लिये जिसमें ज्ञान है यही अवसर है: वे सातों सिर सात पहाड़ हैं, जिन पर वह स्‍त्री बैठी है। और वे सात राजा भी हैं, पाँच तो हो चुके हैं, और एक अभी है; और एक अब तक आया नहीं, और जब आएगा तो कुछ समय तक उसका रहना भी अवश्‍य है। “जो पशु पहले था, और अब नहीं, वह आप आठवाँ है; और उन सातों में से उत्‍पन्‍न हुआ, और विनाश में पड़ेगा। “जो दस सींग तूने देखे वे दस राजा हैं; जिन्होंने अब तक राज्‍य नहीं पाया; पर उस पशु के साथ घड़ी भर के लिये राजाओं का सा अधिकार पाएँगे। “ये सब एक मन होंगे, और वे अपनी-अपनी सामर्थ्य और अधिकार उस पशु को देंगे। “ये मेमने से लड़ेंगे, और मेमना उन पर जय पाएगा; क्‍योंकि वह प्रभुओं का प्रभु, और राजाओं का राजा है, और जो बुलाए हुए और चुने हुए और विश्‍वासी उसके साथ हैं, वे भी जय पाएँगे।” फिर उसने मुझ से कहा, “जो पानी तूने देखे, जिन पर वेश्‍या बैठी है, वे लोग, और भीड़ और जातियाँ, और भाषाएँ हैं। “और जो दस सींग तूने देखे, वे और पशु उस वेश्‍या से बैर रखेंगे, और उसे लाचार और नंगी कर देंगे; और उसका माँस खा जाएँगे, और उसे आग में जला देंगे। “क्‍योंकि परमेश्‍वर उनके मन में यह डालेगा कि वे उसकी मनसा पूरी करें; और जब तक परमेश्‍वर के वचन पूरे न हो लें, तब तक एक मन होकर अपना-अपना राज्‍य पशु को दे दें। “और वह स्‍त्री, जिसे तूने देखा है वह बड़ा नगर है, जो पृथ्‍वी के राजाओं पर राज्‍य करता है।” इसके बाद मैंने एक स्‍वर्गदूत को स्‍वर्ग से उतरते देखा, जिसका बड़ा अधिकार प्राप्त था; और पृथ्‍वी उसके तेज से प्रकाशित हो उठी। उसने ऊँचे शब्‍द से पुकारकर कहा, “गिर गया, बड़ा बेबीलोन गिर गया है! और दुष्‍टात्‍माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्‍मा का अड्डा, और हर एक अशुद्ध और घृणित पक्षी का अड्डा हो गया। “क्‍योंकि उसके व्‍यभिचार के भयानक मदिरा के कारण सब जातियाँ गिर गई हैं, और पृथ्‍वी के राजाओं ने उसके साथ व्‍यभिचार किया है; और पृथ्‍वी के व्‍यापारी उसके सुख-विलास की बहुतायत के कारण धनवान हुए हैं।” फिर मैंने स्‍वर्ग से एक और शब्‍द सुना, “हे मेरे लोगों, उसमें से निकल आओ कि तुम उसके पापों में भागी न हो, और उसकी विपत्तियों में से कोई तुम पर आ न पड़े; क्‍योंकि उसके पापों का ढेर स्‍वर्ग तक पहुँच गया हैं, और उसके अधर्म परमेश्‍वर को स्‍मरण आए हैं। “जैसा उसने तुम्‍हें दिया है, वैसा ही उसको दो, और उसके कामों के अनुसार उसे दो गुणा बदला दो, जिस कटोरे में उसने भर दिया था उसी में उसके लिये दो गुणा भर दो। “जितनी उसने अपनी बड़ाई की और सुख-विलास किया; उतनी उसको पीड़ा, और शोक दो; क्‍योंकि वह अपने मन में कहती है, ‘मैं रानी हो बैठी हूँ, विधवा नहीं; और शोक में कभी न पड़ूँगी।’ “इस कारण एक ही दिन में उस पर विपत्तियाँ आ पड़ेंगी, अर्थात् मृत्‍यु, और शोक, और अकाल; और वह आग में भस्‍म कर दी जाएगी, क्‍योंकि उसका न्‍यायी प्रभु परमेश्‍वर शक्तिमान है। “और पृथ्‍वी के राजा जिन्होंने उसके साथ व्‍यभिचार, और सुख-विलास किया, जब उसके जलने का धुआँ देखेंगे, तो उसके लिये रोएँगे, और छाती पीटेंगे। और उसकी पीड़ा के डर के मारे वे बड़ी दूर खड़े होकर कहेंगे, ‘हे बड़े नगर, बेबीलोन! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी ही भर में तुझे दण्‍ड मिल गया है।’ “और पृथ्‍वी के व्‍यापारी उसके लिये रोएँगे और कलपेंगे, क्‍योंकि अब कोई उन का माल मोल न लेगा— अर्थात् सोना, चाँदी, रत्‍न, मोती, और मलमल, और बैंजनी, और रेशमी, और लाल रंग के कपड़े, और हर प्रकार का सुगन्‍धित काठ, और हाथी दाँत की हर प्रकार की वस्तुएँ, और बहुमूल्य काठ, और पीतल, और लोहे, और संगमरमर की सब भाँति के पात्र, और दालचीनी, मसाले, धूप, इत्र, लोबान, मदिरा, तेल, मैदा, गेहूँ, गाय-बैल, भेड़-बकरियाँ, घोड़े, रथ, और दास, और मनुष्‍यों के प्राण। “अब मेरे मन भावने फल तेरे पास से जाते रहे; और स्‍वादिष्‍ट और भड़कीली वस्तुएँ तुझ से दूर हुई हैं, और वे फिर कदापि न मिलेंगी। “इन वस्‍तुओं के व्‍यापारी जो उसके द्वारा धनवान हो गए थे, उसकी पीड़ा के डर के मारे दूर खड़े होंगे, और रोते और कलपते हुए कहेंगे, ‘हाय! हाय! यह बड़ा नगर जो मलमल, और बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े पहने था, और सोने, और रत्‍नों, और मोतियों से सजा था; घड़ी ही भर में उसका ऐसा भारी धन नाश हो गया।’ और हर एक माँझी, और जलयात्री, और मल्‍लाह, और जितने समुद्र से कमाते हैं, सब दूर खड़े हुए, और उसके जलने का धुआँ देखते हुए पुकारकर कहेंगे, ‘कौन सा नगर इस बड़े नगर के समान है?’ और अपने-अपने सिरों पर धूल डालेंगे, और रोते हुए और कलपते हुए चिल्‍ला-चिल्‍लाकर कहेंगे, ‘हाय! हाय! यह बड़ा नगर जिसकी सम्‍पत्ति के द्वारा समुद्र के सब जहाजवाले धनी हो गए थे, घड़ी ही भर में उजड़ गया।’ “हे स्‍वर्ग, और हे पवित्र लोगों, और प्रेरितों, और भविष्‍यद्वक्‍ताओं, उस पर आनन्‍द करो, क्‍योंकि परमेश्‍वर ने न्‍याय करके उससे तुम्‍हारा पलटा लिया है।” फिर एक बलवन्‍त स्‍वर्गदूत ने बड़ी चक्‍की के पाट के समान एक पत्‍थर उठाया, और यह कहकर समुद्र में फेंक दिया, “बड़ा नगर बेबीलोन ऐसे ही बड़े बल से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा। “और वीणा बजानेवालों, और गायकों, और बंसी बजानेवालों, और तुरही फूँकनेवालों का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा, और किसी उद्यम का कोई कारीगर भी फिर कभी तुझ में न मिलेगा; और चक्‍की के चलने का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा; और दीया का उजाला फिर कभी तुझ में न चमकेगा और दूल्‍हे और दुल्हन का शब्‍द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा; क्‍योंकि तेरे व्यापारी पृथ्‍वी के प्रधान थे, और तेरे टोने से सब जातियाँ भरमाई गई थी। और भविष्‍यद्वक्‍ताओं और पवित्र लोगों, और पृथ्‍वी पर सब घात किए हुओं का लहू उसी में पाया गया।” इसके बाद मैंने स्‍वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊँचे शब्‍द से यह कहते सुना, “हालेलूय्‍याह! उद्धार, और महिमा, और सामर्थ्य हमारे परमेश्‍वर ही की है। क्‍योंकि उसके निर्णय सच्‍चे और ठीक हैं, इसलिये कि उसने उस बड़ी वेश्‍या का जो अपने व्‍यभिचार से पृथ्‍वी को भ्रष्‍ट करती थी, न्‍याय किया, और उससे अपने दासों के लहू का पलटा लिया है।” फिर दूसरी बार उन्होंने कहा, “हालेलूय्‍याह! उसके जलने का धुआँ युगानुयुग उठता रहेगा।” और चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने गिरकर परमेश्‍वर को दण्‍डवत् किया; जो सिंहासन पर बैठा था, और कहा, “आमीन! हालेलूय्‍याह!” और सिंहासन में से एक शब्‍द निकला, “हे हमारे परमेश्‍वर से सब डरनेवाले दासों, क्‍या छोटे, क्‍या बड़े; तुम सब उसकी स्‍तुति करो।” फिर मैंने बड़ी भीड़ का सा और बहुत जल का सा शब्‍द, और गर्जनों का सा बड़ा शब्‍द सुना: “हालेलूय्‍याह! इसलिये कि प्रभु हमारा परमेश्‍वर, सर्वशक्तिमान राज्‍य करता है। “आओ, हम आनन्‍दित और मगन हों, और उसकी स्‍तुति करें, क्‍योंकि मेमने का विवाह आ पहुँचा है, और उसकी दुल्हन ने अपने आपको तैयार कर लिया है।” उसको शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहनने को दिया गया, क्‍योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम है— तब उसने मुझ से कहा, “यह लिख, कि धन्‍य वे हैं, जो मेमने के विवाह के भोज में बुलाए गए हैं।” फिर उसने मुझ से कहा, “ये वचन परमेश्‍वर के सत्‍य वचन हैं।” तब मैं उसको दण्‍डवत करने के लिये उसके पाँवों पर गिरा। उसने मुझ से कहा, “देख, ऐसा मत कर, मैं तेरा और तेरे भाइयों का संगी दास हूँ, जो यीशु की गवाही देने पर स्‍थिर हैं। परमेश्‍वर ही को दण्‍डवत् कर; क्‍योंकि यीशु की गवाही भविष्‍यद्वाणी की आत्‍मा है।” फिर मैंने स्‍वर्ग को खुला हुआ देखा, और देखता हूँ कि एक श्‍वेत घोड़ा है; और उस पर एक सवार है, जो विश्‍वास योग्‍य, और सत्‍य कहलाता है; और वह धर्म के साथ न्‍याय और लड़ाई करता है। उसकी आँखें आग की ज्‍वाला हैं, और उसके सिर पर बहुत से राजमुकुट हैं। और उसका एक नाम उस पर लिखा हुआ है, जिसे उसको छोड़ और कोई नहीं जानता। वह लहू में डुबोया हुआ वस्‍त्र पहने है, और उसका नाम ‘परमेश्‍वर का वचन’ है। और स्‍वर्ग की सेना श्‍वेत घोड़ों पर सवार और श्‍वेत और शुद्ध मलमल पहने हुए उसके पीछे-पीछे है। जाति-जाति को मारने के लिये उसके मुँह से एक चोखी तलवार निकलती है, और वह लोहे का राजदण्‍ड लिए हुए उन पर राज्‍य करेगा, और वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के भयानक प्रकोप की जलजलाहट की मदिरा के कुण्ड में दाख रौंदेगा। और उसके वस्‍त्र और जाँघ पर यह नाम लिखा है: “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।” फिर मैंने एक स्‍वर्गदूत को सूर्य पर खड़े हुए देखा, और उसने बड़े शब्‍द से पुकारकर आकाश के बीच में से उड़नेवाले सब पक्षियों से कहा, “आओ, परमेश्‍वर की बड़े भोज के लिये इकट्ठे हो जाओ, जिससे तुम राजाओं का माँस, और सरदारों का माँस, और शक्तिमान पुरूषों का माँस, और घोड़ों का और उनके सवारों का माँस, और क्‍या स्‍वतंत्र क्‍या दास, क्‍या छोटे क्‍या बड़े, सब लोगों का माँस खाओ।” फिर मैंने उस पशु और पृथ्‍वी के राजाओं और उनकी सेनाओं को उस घोड़े के सवार, और उसकी सेना से लड़ने के लिये इकट्ठे देखा। और वह पशु और उसके साथ वह झूठा भविष्‍यद्वक्‍ता पकड़ा गया, जिसने उसके सामने ऐसे चिन्‍ह दिखाए थे, जिनके द्वारा उसने उनको भरमाया, जिन पर उस पशु की छाप थी, और जो उसकी मूर्ति की पूजा करते थे। ये दोनों जीते जी उस आग की झील में, जो गन्‍धक से जलती है, डाले गए। और शेष लोग उस घोड़े के सवार की तलवार से, जो उसके मुँह से निकलती थी, मार डाले गए; और सब पक्षी उनके माँस से तृप्‍त हो गए। फिर मैने एक स्‍वर्गदूत को स्‍वर्ग से उतरते देखा; जिसके हाथ में अथाह कुण्ड की कुंजी, और एक बड़ी जंजीर थी। और उसने उस अजगर, अर्थात् पुराने साँप को, जो इब्लीस और शैतान है; पकड़कर हजार वर्ष के लिये बाँध दिया, और उसे अथाह कुण्ड में डालकर बन्‍द कर दिया और उस पर मुहर कर दी, कि वह हजार वर्ष के पूरे होने तक जाति-जाति के लोगों को फिर न भरमाए। इसके बाद अवश्‍य है कि थोड़ी देर के लिये फिर खोला जाए। फिर मैंने सिंहासन देखे, और उन पर लोग बैठ गए, और उनको न्‍याय करने का अधिकार दिया गया। और उनकी आत्‍माओं को भी देखा, जिनके सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्‍वर के वचन के कारण काटे गए थे, और जिन्होंने न उस पशु की, और न उसकी मूर्ति की पूजा की थी, और न उसकी छाप अपने माथे और हाथों पर ली थी। वे जीवित होकर मसीह के साथ हजार वर्ष तक राज्‍य करते रहे। जब तक ये हजार वर्ष पूरे न हुए तक तक शेष मरे हुए न जी उठे। यह तो पहला पुनरुत्थान है। धन्‍य और पवित्र वह है, जो इस पहले पुनरूत्‍थान का भागी है, ऐसों पर दूसरी मृत्‍यु का कुछ भी अधिकार नहीं, पर वे परमेश्‍वर और मसीह के याजक होंगे, और उसके साथ हजार वर्ष तक राज्‍य करेंगे। जब हजार वर्ष पूरे हो चुकेंगे तो शैतान कैद से छोड़ दिया जाएगा। और उन जातियों को जो पृथ्‍वी के चारों ओर होंगी, अर्थात् गोग और मागोग को जिनकी गिनती समुद्र की बालू के बराबर होगी, भरमाकर लड़ाई के लिये इकट्ठे करने को निकलेगा। और वे सारी पृथ्‍वी पर फैल जाएँगी और पवित्र लोगों की छावनी और प्रिय नगर को घेर लेंगी और आग स्‍वर्ग से उतरकर उन्‍हें भस्‍म करेगी। और उनका भरमानेवाला शैतान आग और गन्‍धक की उस झील में, जिसमें वह पशु और झूठा भविष्‍यद्वक्‍ता भी होगा, डाल दिया जाएगा; और वे रात-दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे। फिर मैंने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसको जो उस पर बैठा हुआ है, देखा, जिसके सामने से पृथ्‍वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैंने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्‍तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्‍तक खोली गईं, अर्थात् जीवन की पुस्‍तक; और जैसे उन पुस्‍तकों में लिखा हुआ था, उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्‍याय किया गया। और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उसमें थे दे दिया, और मृत्‍यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उनमें थे दे दिया; और उनमें से हर एक के कामों के अनुसार उनका न्‍याय किया गया। और मृत्‍यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए। यह आग की झील तो दूसरी मृत्‍यु है। और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया। फिर मैंने नये आकाश और नयी पृथ्‍वी को देखा, क्‍योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्‍वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हन के समान थी, जो अपने दुल्हे के लिये श्रृगांर किए हो। फिर मैंने सिंहासन में से किसी को ऊँचे शब्‍द से यह कहते हुए सुना, “देख, परमेश्‍वर का डेरा मनुष्‍यों के बीच में है; वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्‍वर आप उनके साथ रहेगा; और उनका परमेश्‍वर होगा। और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्‍यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।” और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, “देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूँ।” फिर उसने कहा, “लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्‍वास के योग्‍य और सत्‍य हैं।” फिर उसने मुझ से कहा, “ये बातें पूरी हो गई हैं। मैं अल्फा और ओमेगा, आदि और अन्‍त हूँ। मैं प्‍यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊँगा। “जो जय पाए, वही उन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्‍वर होऊँगा, और वह मेरा पुत्र होगा। “परन्तु डरपोकों, और अविश्‍वासियों, और घिनौनों, और हत्‍यारों, और व्‍यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्‍यु है।” फिर जिन सात स्‍वर्गदूतों के पास सात अन्तिम विपत्तियों से भरे हुए सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मेरे साथ बातें करके कहा, “इधर आ, मैं तुझे दुल्हन अर्थात् मेमने की पत्‍नी दिखाऊँगा।” और वह मुझे आत्‍मा में, एक बड़े और ऊँचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्‍वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते दिखाया। परमेश्‍वर की महिमा उसमें थी, और उसकी ज्‍योति बहुत ही बहुमूल्य पत्‍थर, अर्थात् बिल्‍लौर के समान यशब की तरह स्‍वच्‍छ थी। और उसकी शहरपनाह बड़ी ऊँची थी, और उसके बारह फाटक और फाटकों पर बारह स्‍वर्गदूत थे; और उन फाटकों पर इस्राएलियों के बारह गोत्रों के नाम लिखे थे। पूर्व की ओर तीन फाटक, उत्तर की ओर तीन फाटक, दक्षिण की ओर तीन फाटक, और पश्‍चिम की ओर तीन फाटक थे। और नगर की शहरपनाह की बारह नींवे थीं, और उन पर मेमने के बारह प्रेरितों के बारह नाम लिखे थे। जो मेरे साथ बातें कर रहा था, उसके पास नगर और उसके फाटकों और उसकी शहरपनाह को नापने के लिये एक सोने का गज था। वह नगर वर्गाकार बसा हुआ था और उसकी लम्‍बाई, चौड़ाई के बराबर थी, और उसने उस गज से नगर को नापा, तो साढ़े सात सौ कोस का निकला: उसकी लम्‍बाई, और चौड़ाई, और ऊँचाई बराबर थी। और उसने उसकी शहरपनाह को मनुष्‍य के, अर्थात् स्‍वर्गदूत के नाप से नापा, तो एक सौ चौवालीस हाथ निकली। उसकी शहरपनाह यशब की बनी थी, और नगर ऐसे शुद्ध सोने का था, जो स्‍वच्‍छ काँच के समान हो। उस नगर की नींवे हर प्रकार के बहुमूल्य पत्‍थरों से सँवारी हुई थी, पहली नींव यशब की, दूसरी नीलमणि की, तीसरी लालड़ी की, चौथी मरकत की, पाँचवी गोमेदक की, छठवीं माणिक्‍य की, सातवीं पीतमणि की, आठवीं पेरोज की, नवीं पुखराज की, दसवीं लहसनिए की, ग्‍यारहवीं धूम्रकान्‍त की, बारहवीं याकूत की थी। और बारहों फाटक, बारह मोतियों के थे; एक-एक फाटक, एक-एक मोती का बना था। और नगर की सड़क स्‍वच्‍छ काँच के समान शुद्ध सोने की थी। मैंने उसमें कोई मंदिर न देखा, क्‍योंकि सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, और मेमना उसका मंदिर हैं। और उस नगर में सूर्य और चाँद के उजियाले की आवश्यकता नहीं, क्‍योंकि परमेश्‍वर के तेज से उसमें उजियाला हो रहा है, और मेमना उसका दीपक है। जाति-जाति के लोग उसकी ज्‍योति में चले-फिरेंगे, और पृथ्‍वी के राजा अपने-अपने तेज का सामान उसमें लाएँगे। उसके फाटक दिन को कभी बन्‍द न होंगे, और रात वहाँ न होगी। और लोग जाति-जाति के तेज और वैभव का सामान उसमें लाएँगे। और उसमें कोई अपवित्र वस्‍तु या घृणित काम करनेवाला, या झूठ का गढ़नेवाला, किसी रीति से प्रवेश न करेगा; पर केवल वे लोग जिनके नाम मेमने की जीवन की पुस्‍तक में लिखे हैं। फिर उसने मुझे बिल्‍लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्‍वर और मेमने के सिंहासन से निकलकर, उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। नदी के इस पार और उस पार जीवन का पेड़ था; उसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति-जाति के लोग चंगे होते थे। फिर स्राप न होगा, और परमेश्‍वर और मेमने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। वे उसका मुँह देखेंगे, और उसका नाम उनके माथों पर लिखा हुआ होगा। और फिर रात न होगी, और उन्‍हें दीपक और सूर्य के उजियाले की आवश्यकता न होगी, क्‍योंकि प्रभु परमेश्‍वर उन्‍हें उजियाला देगा, और वे युगानुयुग राज्‍य करेंगे। फिर उसने मुझ से कहा, “ये बातें विश्‍वास के योग्‍य और सत्‍य हैं। और प्रभु ने, जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं की आत्‍माओं का परमेश्‍वर है, अपने स्‍वर्गदूत को इसलिये भेजा कि अपने दासों को वे बातें, जिनका शीघ्र पूरा होना अवश्‍य है दिखाए।” “और देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ; धन्‍य है वह, जो इस पुस्‍तक की भविष्‍यद्वाणी की बातें मानता है।” मैं वही यूहन्‍ना हूँ, जो ये बातें सुनता, और देखता था। और जब मैंने सुना और देखा, तो जो स्‍वर्गदूत मुझे ये बातें दिखाता था, मैं उसके पाँवों पर दण्‍डवत करने के लिये गिर पड़ा। पर उसने मुझ से कहा, “देख, ऐसा मत कर; क्‍योंकि मैं तेरा और तेरे भाई भविष्‍यद्वक्‍ताओं और इस पुस्‍तक की बातों के माननेवालों का संगी दास हूँ, परमेश्‍वर ही को दण्‍डवत कर।” फिर उसने मुझ से कहा, “इस पुस्‍तक की भविष्‍यद्ववाणी की बातों को बन्‍द मत कर; क्‍योंकि समय निकट है। “जो अन्‍याय करता है, वह अन्‍याय ही करता रहे; और जो मलिन है, वह मलिन बना रहे; और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्र है, वह पवित्र बना रहे।” “देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। “मैं अल्फा और ओमेगा, पहला और अन्तिम, आदि और अन्‍त हूँ।” धन्‍य वे हैं, जो अपने वस्‍त्र धो लेते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से होकर नगर में प्रवेश करेंगे। पर कुत्ते, और टोन्‍हें, और व्‍यभिचारी, और हत्‍यारे और मूर्तिपूजक, और हर एक झूठ का चाहनेवाला, और गढ़नेवाला बाहर रहेगा। “मुझ यीशु ने अपने स्‍वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि तुम्‍हारे आगे कलीसियाओं के विषय में इन बातों की गवाही दे। मैं दाऊद का मूल और वंश, और भोर का चमकता हुआ तारा हूँ।” और आत्‍मा, और दुल्हन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” और जो प्‍यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले। मैं हर एक को, जो इस पुस्‍तक की भविष्‍यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ: यदि कोई मनुष्‍य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। और यदि कोई इस भविष्‍यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्‍वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा। जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, “हाँ, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ।” आमीन। हे प्रभु यीशु आ! प्रभु यीशु का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन।