अब्राहम की संतान, दाऊद की संतान, यीशु मसीह की वंशावली का वृत्तांत। अब्राहम से इसहाक उत्पन्‍न‍ हुआ, इसहाक से याकूब उत्पन्‍न‍ हुआ, और याकूब से यहूदा और उसके भाई उत्पन्‍न‍ हुए, और यहूदा से तामार के द्वारा फिरिस और जोरह उत्पन्‍न‍ हुए, और फिरिस से हिस्रोन उत्पन्‍न‍ हुआ, और हिस्रोन से एराम उत्पन्‍न‍ हुआ, और एराम से अम्मीनादाब उत्पन्‍न‍ हुआ, और अम्मीनादाब से नहशोन उत्पन्‍न‍ हुआ, और नहशोन से सलमोन उत्पन्‍न‍ हुआ, और सलमोन से राहब के द्वारा बोअज़ उत्पन्‍न‍ हुआ, और बोअज़ से रूत के द्वारा ओबेद उत्पन्‍न‍ हुआ, और ओबेद से यिशै उत्पन्‍न‍ हुआ, और यिशै से राजा दाऊद उत्पन्‍न‍ हुआ। दाऊद से सुलैमान उस स्‍त्री के द्वारा उत्पन्‍न‍ हुआ जो पहले उरिय्याह की पत्‍नी थी, और सुलैमान से रहबाम उत्पन्‍न‍ हुआ, और रहबाम से अबिय्याह उत्पन्‍न‍ हुआ, और अबिय्याह से आसा उत्पन्‍न‍ हुआ, और आसा से यहोशापात उत्पन्‍न‍ हुआ, और यहोशापात से योराम उत्पन्‍न‍ हुआ, और योराम से उज्‍जियाह उत्पन्‍न‍ हुआ, और उज्‍जियाह से योताम उत्पन्‍न‍ हुआ, और योताम से आहाज उत्पन्‍न‍ हुआ, और आहाज से हिजकिय्याह उत्पन्‍न‍ हुआ, और हिजकिय्याह से मनश्शे उत्पन्‍न‍ हुआ, और मनश्शे से आमोन उत्पन्‍न‍ हुआ, और आमोन से योशिय्याह उत्पन्‍न‍ हुआ, और बेबीलोन निर्वासन में जाने के समय योशिय्याह से यकुन्याह और उसके भाई उत्पन्‍न‍ हुए। बेबीलोन निर्वासन के बाद यकुन्याह से शालतिएल उत्पन्‍न‍ हुआ, और शालतिएल से जरुब्बाबिल उत्पन्‍न‍ हुआ, और जरुब्बाबिल से अबीहूद उत्पन्‍न‍ हुआ, और अबीहूद से एल्याकीम उत्पन्‍न‍ हुआ, और एल्याकीम से अज़ोर उत्पन्‍न‍ हुआ, और अज़ोर से सदोक उत्पन्‍न‍ हुआ, और सदोक से अखीम उत्पन्‍न‍ हुआ, और अखीम से इलीहूद उत्पन्‍न‍ हुआ, और इलीहूद से एलीआज़ार उत्पन्‍न‍ हुआ, और एलीआज़ार से मत्तान उत्पन्‍न‍ हुआ, और मत्तान से याकूब उत्पन्‍न‍ हुआ, और याकूब से यूसुफ उत्पन्‍न‍ हुआ जो मरियम का पति था, और मरियम से यीशु उत्पन्‍न‍ हुआ जो मसीह कहलाता है। इस प्रकार अब्राहम से दाऊद तक चौदह पीढ़ियाँ, और दाऊद से बेबीलोन निर्वासन तक चौदह पीढ़ियाँ, और बेबीलोन निर्वासन से मसीह तक चौदह पीढ़ियाँ हुईं। अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार हुआ: उसकी माता मरियम की मँगनी यूसुफ से हुई, पर उनके एक साथ होने से पहले वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। परंतु उसके मँगेतर यूसुफ ने, जो एक धर्मी व्यक्‍ति था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने का विचार किया। जब वह इन बातों पर विचार कर ही रहा था तो देखो, प्रभु के एक स्वर्गदूत ने उसे स्वप्न में दिखाई देकर कहा, “हे यूसुफ, दाऊद की संतान! तू मरियम को अपनी पत्‍नी स्वीकार करने से मत डर, क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। वह एक पुत्र को जन्म देगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।” यह सब इसलिए हुआ कि प्रभु का वह वचन जो भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी, और उसका नाम “इम्मानुएल” रखा जाएगा, जिसका अर्थ है, परमेश्‍वर हमारे साथ। तब यूसुफ ने नींद से जागकर वैसा ही किया जैसा प्रभु के स्वर्गदूत ने उसे आज्ञा दी थी, और उसे अपनी पत्‍नी स्वीकार करके ले आया; और उसके पास तब तक नहीं गया जब तक उसने पुत्र को जन्म न दिया; और उसने उसका नाम यीशु रखा। राजा हेरोदेस के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो! पूर्व से कुछ विद्वान यरूशलेम में आकर पूछने लगे, “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा और उसे दंडवत् करने आए हैं।” यह सुनकर राजा हेरोदेस और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया, और वह लोगों के सभी मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों को इकट्ठा करके उनसे पूछने लगा कि मसीह का जन्म कहाँ होना है। उन्होंने उससे कहा, “यहूदिया के बैतलहम में, क्योंकि भविष्यवक्‍ता के द्वारा यह लिखा गया है: हे यहूदा प्रदेश के बैतलहम! तू किसी भी रीति से यहूदा के शासकों में सब से छोटा नहीं; क्योंकि तुझमें से एक शासक निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा। ” तब हेरोदेस ने उन विद्वानों को चुपके से बुलाकर उनसे तारा प्रकट होने के समय का पता लगाया, और उन्हें यह कहकर बैतलहम भेजा, “तुम जाकर उस बालक के विषय में भली-भाँति पूछताछ करो, और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो, ताकि मैं भी जाकर उसे दंडवत् करूँ।” तब वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उनके आगे-आगे चलने लगा, और जहाँ बालक था वहाँ ऊपर आकर ठहर गया। वे उस तारे को देखकर अति आनंदित हुए। उन्होंने उस घर में जाकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और गिरकर उसे दंडवत् किया, और अपने संदूक खोलकर उसे सोना, लोबान और गंधरस की भेंट चढ़ाई। तब स्वप्न में यह चेतावनी पाकर कि हेरोदेस के पास न लौटना, वे दूसरे मार्ग से अपने देश को चले गए। जब वे चले गए, तो देखो, प्रभु के एक स्वर्गदूत ने यूसुफ को स्वप्न में दिखाई देकर कहा, “उठ, बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा, और जब तक मैं तुझसे न कहूँ तब तक वहीं रहना, क्योंकि हेरोदेस इस बालक को मार डालने के लिए उसको ढूँढ़ने वाला है।” तब वह उठा और रात को ही बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र को चला गया, और हेरोदेस की मृत्यु तक वहीं रहा; ताकि प्रभु का वह वचन जो भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया। जब हेरोदेस ने देखा कि उन विद्वानों ने उसे धोखा दिया है, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ, और उसने लोगों को भेजकर उस समय के अनुसार जो उसने उन विद्वानों द्वारा पता लगाया था, बैतलहम और उसके आस-पास के सभी क्षेत्रों के दो वर्ष और उससे छोटे सब लड़कों को मरवा डाला। तब वह वचन जो यिर्मयाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हुआ: रामाह में रोने और बड़े विलाप की आवाज़ सुनाई दी, राहेल अपने बच्‍चों के लिए रो रही है और सांत्वना नहीं चाहती, क्योंकि अब वे नहीं रहे। जब हेरोदेस की मृत्यु हो गई तो देखो, प्रभु के एक स्वर्गदूत ने मिस्र में यूसुफ को स्वप्न में दिखाई देकर कहा, “उठ, बालक और उसकी माता को लेकर इस्राएल देश में चला जा, क्योंकि जो बालक का प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए हैं।” तब वह उठा, और बालक तथा उसकी माता को लेकर इस्राएल देश में आया। परंतु वह यह सुनकर कि अरखिलाउस अपने पिता हेरोदेस के स्थान पर यहूदिया में राज्य कर रहा है, वहाँ जाने से डरा; फिर स्वप्न में चेतावनी पाकर वह गलील प्रदेश में गया, और नासरत नामक नगर में आ बसा, जिससे कि वह वचन जो भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा कहा गया था, पूरा हो कि वह नासरी कहलाएगा। उन दिनों यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में प्रचार करने लगा, “पश्‍चात्ताप करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।” यह वही था जिसके विषय में यशायाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था: एक आवाज़ जंगल में पुकार रही है, “प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसके पथ सीधे करो।” यूहन्‍ना तो ऊँट के बालों का वस्‍त्र पहनता और अपनी कमर पर चमड़े का पट्टा बाँधा करता था, तथा उसका भोजन टिड्डियाँ और जंगली शहद था। तब यरूशलेम और सारे यहूदिया और यरदन के आस-पास के सारे क्षेत्रों के लोग निकलकर उसके पास आने लगे, और अपने पापों का अंगीकार करते हुए यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लेने लगे। परंतु जब उसने बहुत से फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा लेने के लिए अपनी ओर आते देखा तो उनसे कहा, “हे साँप के बच्‍चो, तुम्हें आने वाले प्रकोप से भागने की चेतावनी किसने दी? इसलिए पश्‍चात्ताप के योग्य फल लाओ और अपने मन में यह मत सोचो, ‘हमारा पिता अब्राहम है,’ क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्‍वर इन पत्थरों से भी अब्राहम के लिए संतान उत्पन्‍न‍ कर सकता है। अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा है, और प्रत्येक पेड़ जो अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंक दिया जाता है। मैं तो तुम्हें पश्‍चात्ताप के लिए पानी से बपतिस्मा देता हूँ; परंतु जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझसे अधिक सामर्थी है, मैं उसके जूते उठाने के भी योग्य नहीं हूँ; वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। उसका सूप उसके हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी तरह से साफ़ करेगा, और अपने गेहूँ को खत्ते में इकट्ठा करेगा, परंतु भूसी को वह कभी न बुझनेवाली आग में भस्म करेगा।” तब यीशु यरदन के तट पर यूहन्‍ना से बपतिस्मा लेने के लिए गलील से उसके पास आया। परंतु यूहन्‍ना यीशु को यह कहते हुए रोकने लगा, “मुझे तो तुझसे बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?” इस पर यीशु ने उससे कहा, “अभी ऐसा ही होने दे, क्योंकि इस प्रकार सारी धार्मिकता को पूरा करना हमारे लिए उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरंत पानी में से ऊपर आया; और देखो, उसके लिए आकाश खुल गया, और उसने परमेश्‍वर के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते हुए देखा। और देखो, आकाश से एक आवाज़ आई, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अति प्रसन्‍न हूँ।” फिर आत्मा यीशु को जंगल में ले गया कि शैतान द्वारा उसकी परीक्षा हो। चालीस दिन और चालीस रात उपवास करने के बाद उसे भूख लगी। तब परखनेवाले ने पास आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियाँ बन जाएँ।” इस पर यीशु ने कहा, “लिखा है: मनुष्य केवल रोटी से नहीं, परंतु परमेश्‍वर के मुँह से निकलनेवाले हर एक वचन से जीवित रहेगा।” तब शैतान उसे पवित्र नगर में ले गया और मंदिर की चोटी पर खड़ा किया, और उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो अपने आपको नीचे गिरा दे, क्योंकि लिखा है: वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा और वे तुझे हाथों पर उठा लेंगे, कहीं ऐसा न हो कि तेरे पैरों को पत्थर से चोट लगे।” यीशु ने उससे कहा, “यह भी लिखा है: तू अपने प्रभु परमेश्‍वर की परीक्षा न कर।” फिर शैतान उसे बहुत ऊँचे पहाड़ पर ले गया और जगत के सारे राज्य और उनका वैभव दिखाया, और उससे कहा, “यदि तू गिरकर मुझे दंडवत् करे तो मैं यह सब तुझे दे दूँगा।” तब यीशु ने उससे कहा, “हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है: तू अपने प्रभु परमेश्‍वर को दंडवत् कर और केवल उसी की सेवा कर।” तब शैतान उसे छोड़कर चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर यीशु की सेवा करने लगे। जब यीशु ने यह सुना कि यूहन्‍ना बंदी बना लिया गया है तो वह गलील को चला गया। वह नासरत को छोड़कर कफरनहूम में आकर रहा, जो झील के किनारे जबूलून और नप्‍ताली के क्षेत्रों के बीच में है; ताकि वह वचन जो यशायाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: जबूलून और नप्‍ताली के देश, झील के मार्ग पर, यरदन के पार, गैरयहूदियों का गलील— जहाँ के लोग अंधकार में रहते थे, उन्होंने एक बड़ी ज्योति देखी, और जो मृत्यु के देश और छाया में रहते थे, उन पर ज्योति उदय हुई। उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरंभ किया, “पश्‍चात्ताप करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।” गलील की झील के किनारे चलते समय यीशु ने दो भाइयों अर्थात् शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अंद्रियास को झील में जाल डालते हुए देखा, क्योंकि वे मछुए थे। यीशु ने उनसे कहा, “मेरे पीछे आओ, और मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुए बनाऊँगा।” तब वे तुरंत जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। वहाँ से आगे जाकर उसने दूसरे दो भाइयों, ज़ब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्‍ना को अपने पिता ज़ब्दी के साथ नाव में अपने जालों को सुधारते हुए देखा; और उसने उनको बुलाया। वे तुरंत नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। यीशु सारे गलील में घूमता रहा और उनके आराधनालयों में उपदेश देता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और हर प्रकार की दुर्बलता को दूर करता रहा। उसकी चर्चा सारे सीरिया में फैल गई; तब वे सब बीमारों को जो भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ प्रकार की बीमारियों और दुःखों से जकड़े हुए थे, और दुष्‍टात्माग्रस्त लोगों, तथा मिर्गी और लकवे के रोगियों को उसके पास लाए, और उसने उन्हें स्वस्थ कर दिया। तब गलील, दिकापुलिस, यरूशलेम, यहूदिया और यरदन नदी के पार से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल दी। यीशु उस भीड़ को देखकर पहाड़ पर चढ़ गया और जब वह बैठ गया तो उसके शिष्य उसके पास आए; और वह उन्हें यह कहते हुए उपदेश देने लगा: “धन्य हैं वे जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। धन्य हैं वे जो शोक करते हैं, क्योंकि वे सांत्वना पाएँगे। धन्य हैं वे जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के उत्तराधिकारी होंगे। धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्‍त किए जाएँगे। धन्य हैं वे जो दयावान हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। धन्य हैं वे जिनके मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर को देखेंगे। धन्य हैं वे जो मेल कराते हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर के पुत्र कहलाएँगे। धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। “धन्य हो तुम, जब लोग मेरे कारण तुम्हारी निंदा करें और सताएँ, तथा झूठ बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनंदित और मगन होना, क्योंकि स्वर्ग में तुम्हारा प्रतिफल बड़ा है; इसलिए कि उन्होंने उन भविष्यवक्‍ताओं को भी जो तुमसे पहले हुए, इसी प्रकार सताया था। “तुम पृथ्वी के नमक हो, परंतु यदि नमक अपना स्वाद खो दे, तो वह किससे नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इसके कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। “तुम जगत की ज्योति हो। पहाड़ पर स्थित नगर छिप नहीं सकता। लोग दीपक जलाकर टोकरी के नीचे नहीं बल्कि दीवट पर रखते हैं, और वह उस घर में सब लोगों को प्रकाश देता है। उसी प्रकार अपनी ज्योति को मनुष्यों के सामने चमकने दो ताकि वे तुम्हारे भले कार्यों को देखकर तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है, महिमा करें। “यह न समझो कि मैं व्यवस्था या भविष्यवक्‍ताओं के लेखों को नष्‍ट करने आया हूँ; नष्‍ट करने नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने आया हूँ। क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ, कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएँ, तब तक व्यवस्था में से एक मात्रा या एक बिंदु भी पूरा हुए बिना न टलेगा। इसलिए जो कोई इन छोटी से छोटी आज्ञाओं में से किसी एक को तोड़ेगा और वैसा ही मनुष्यों को सिखाएगा, वह स्वर्ग के राज्य में सब से छोटा कहलाएगा; परंतु जो कोई उनका पालन करेगा और उन्हें सिखाएगा, वही स्वर्ग के राज्य में बड़ा कहलाएगा। क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि यदि तुम्हारी धार्मिकता शास्‍त्रियों और फरीसियों की धार्मिकता से बढ़कर न हो, तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश नहीं कर पाओगे। “तुमने सुना है कि पूर्वजों से कहा गया था: तू हत्या न करना; और जो कोई हत्या करेगा, वह दंड के योग्य होगा। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि प्रत्येक जो अपने भाई पर क्रोध करता है वह दंड के योग्य होगा; और जो कोई अपने भाई को ‘निकम्मा’ कहेगा, वह महासभा में दंड के योग्य होगा; और जो कोई ‘मूर्ख’ कहेगा, वह नरक की आग के योग्य ठहरेगा। इसलिए यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहाँ तुझे स्मरण आए कि मेरे भाई के मन में मेरे विरुद्ध कुछ है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के सामने छोड़ दे, और जाकर पहले अपने भाई से मेल-मिलाप कर ले, और तब आकर अपनी भेंट चढ़ा। जब तू अपने विरोधी के साथ मार्ग ही में हो, तो उससे शीघ्र मेल-मिलाप कर ले, कहीं ऐसा न हो कि विरोधी तुझे न्यायाधीश को सौंप दे, और न्यायाधीश सिपाही को, और तू बंदीगृह में डाल दिया जाए; मैं तुझसे सच कहता हूँ, जब तक तू एक-एक पैसा चुका न दे, तब तक तू वहाँ से कभी छूट नहीं पाएगा। “तुमने सुना है कि यह कहा गया था: तू व्यभिचार न करना। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि जो कोई किसी स्‍त्री को कामुकता से देखता है, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका। यदि तेरी दाहिनी आँख तेरे लिए ठोकर का कारण बनती है, तो उसे निकालकर अपने से दूर फेंक दे, क्योंकि तेरे लिए भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। यदि तेरा दाहिना हाथ तेरे लिए ठोकर का कारण बनता है, तो उसे काटकर अपने से दूर फेंक दे, क्योंकि तेरे लिए भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। “यह कहा गया था: जो कोई अपनी पत्‍नी को तलाक देना चाहे, वह उसे त्याग-पत्र दे। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि जो कोई व्यभिचार को छोड़ किसी और कारण से अपनी पत्‍नी को तलाक देता है, वह उससे व्यभिचार करवाता है, और यदि कोई त्यागी हुई स्‍त्री से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है। “फिर तुमने सुना है कि पूर्वजों से कहा गया था: तू झूठी शपथ न खाना, परंतु प्रभु के लिए अपनी शपथ को पूरी करना। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि कभी शपथ न खाना; न तो स्वर्ग की, क्योंकि वह परमेश्‍वर का सिंहासन है; न धरती की, क्योंकि वह उसके पैरों की चौकी है; न यरूशलेम की, क्योंकि वह महाराजाधिराज का नगर है; और न ही अपने सिर की शपथ खाना, क्योंकि तू एक बाल को भी सफ़ेद या काला नहीं कर सकता। परंतु तुम्हारी बात ‘हाँ’ की ‘हाँ’ या ‘न’ की ‘न’ हो; और इससे अधिक बात उस दुष्‍ट की ओर से होती है। “तुमने सुना है कि कहा गया था: आँख के बदले आँख, और दाँत के बदले दाँत। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि दुष्‍ट का सामना न करना; परंतु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उसकी ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तुझ पर दोष लगाकर तेरा कुरता लेना चाहे, उसे अपना चोगा भी दे दे। जो कोई तुझे एक किलोमीटर बेगार में ले जाए, उसके साथ दो किलोमीटर चला जा। जो तुझसे माँगे, उसे दे, और जो तुझसे उधार लेना चाहे, उससे मुँह न फेर। “तुमने सुना है कि कहा गया था: तू अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने शत्रु से घृणा करना। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ, अपने शत्रुओं से प्रेम रखो और जो तुम्हें सताते हैं, उनके लिए प्रार्थना करो, ताकि तुम अपने पिता की, जो स्वर्ग में है, संतान बन जाओ क्योंकि वह भले और बुरे दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मी और अधर्मी दोनों पर मेंह बरसाता है। क्योंकि यदि तुम उन्हीं से प्रेम रखो जो तुमसे प्रेम रखते हैं, तो तुम्हारा क्या प्रतिफल होगा? क्या कर वसूलनेवाले भी ऐसा नहीं करते? यदि तुम अपने भाइयों का ही अभिवादन करते हो, तो कौन सा बड़ा कार्य करते हो? क्या गैरयहूदी भी ऐसा नहीं करते? इसलिए तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गिक पिता सिद्ध है। “सावधान रहो! तुम मनुष्यों के सामने उन्हें दिखाने के लिए अपने धार्मिकता के कार्य न करो, नहीं तो अपने पिता से, जो स्वर्ग में है, कुछ भी प्रतिफल न पाओगे। “इसलिए जब तू दान करे तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसे पाखंडी आराधनालयों और गलियों में करते हैं कि मनुष्यों के द्वारा उन्हें सम्मान मिले; मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना प्रतिफल पा चुके। परंतु जब तू दान करे, तो तेरा बायाँ हाथ न जान पाए कि तेरा दाहिना हाथ क्या कर रहा है, ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। “जब तुम प्रार्थना करो तो पाखंडियों के समान न होना; क्योंकि उन्हें आराधनालयों में और सड़क के कोनों पर खड़े होकर प्रार्थना करना प्रिय लगता है, ताकि लोग उन्हें देखें; मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना प्रतिफल पा चुके। परंतु जब तू प्रार्थना करे तो अपने कमरे में जा, और द्वार बंद करके अपने पिता से जो गुप्‍त में है, प्रार्थना कर; तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। प्रार्थना करते समय गैरयहूदियों के समान अर्थहीन बातें न दोहराओ, क्योंकि वे सोचते हैं कि उनके अधिक बोलने से उनकी सुनी जाएगी। इसलिए तुम उनके समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे माँगने से पहले जानता है कि तुम्हारी क्या आवश्यकता है। “अतः तुम इस प्रकार प्रार्थना करो: हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है, तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे; और जिस प्रकार हमने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। हमें परीक्षा में न पड़ने दे, बल्कि बुराई से बचा। [क्योंकि राज्य और सामर्थ्य और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन।] “क्योंकि यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्वर्गिक पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा; परंतु यदि तुम मनुष्यों के अपराधों को क्षमा नहीं करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा नहीं करेगा। “जब तुम उपवास करो, तो पाखंडियों के समान उदास मुँह मत बनाओ, वे अपना मुँह इसलिए बिगाड़ लेते हैं कि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना प्रतिफल पा चुके। परंतु उपवास करते समय तू अपने सिर पर तेल मल और अपना मुँह धो, ताकि मनुष्य नहीं, बल्कि तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। “अपने लिए पृथ्वी पर धन इकट्ठा मत करो, जहाँ कीड़ा और ज़ंग उसको बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर सेंध लगाते और चुराते हैं; परंतु अपने लिए स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहाँ न तो कीड़ा और न ही ज़ंग उसे बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर न तो सेंध लगाते और न चुराते हैं; क्योंकि जहाँ तेरा धन है, वहाँ तेरा मन भी होगा। “देह का दीपक आँख है। इसलिए यदि तेरी आँख ठीक है, तो तेरी सारी देह उजियाली होगी। परंतु यदि तेरी आँख बुरी हो, तो तेरी सारी देह भी अंधकारमय होगी। इसलिए यदि तेरे भीतर की ज्योति ही अंधकार हो, तो वह अंधकार कितना अधिक होगा। “कोई भी दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि वह या तो एक से घृणा करेगा और दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा; तुम परमेश्‍वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते। “इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, अपने प्राण के लिए चिंता मत करो कि क्या खाएँगे या क्या पीएँगे, और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे; क्या प्राण भोजन से और देह वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? आकाश के पक्षियों को देखो, वे न बोते हैं और न काटते हैं और न ही खत्तों में इकट्ठा करते हैं, फिर भी तुम्हारा स्वर्गिक पिता उन्हें खिलाता है; क्या तुम्हारा मूल्य उनसे बढ़कर नहीं? तुममें से कौन है जो चिंता करके अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? फिर वस्‍त्र के विषय में तुम क्यों चिंता करते हो? जंगली सौसन के फूलों पर ध्यान दो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न तो परिश्रम करते हैं और न ही कातते हैं; परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि सुलैमान भी अपने सारे वैभव में उनमें से किसी के समान वस्‍त्र पहने हुए नहीं था। यदि परमेश्‍वर मैदान की घास को, जो आज है और कल भट्ठी में झोंकी जाएगी, ऐसे वस्‍त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्‍वासियो, क्या वह तुम्हें इससे बढ़कर नहीं पहनाएगा? इसलिए यह कहकर चिंता न करो, ‘हम क्या खाएँगे?’ या ‘क्या पीएँगे?’ या फिर ‘क्या पहनेंगे?’ क्योंकि गैरयहूदी इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, परंतु तुम्हारा स्वर्गिक पिता जानता है कि तुम्हें इन सब की आवश्यकता है। इसलिए पहले परमेश्‍वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो, और ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी। अतः कल की चिंता न करो, क्योंकि कल अपनी चिंता आप करेगा; आज के लिए आज ही का दुःख बहुत है। “दोष मत लगाओ ताकि तुम पर भी दोष न लगाया जाए; क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिए नापा जाएगा। तू क्यों अपने भाई की आँख के तिनके को देखता है, परंतु अपनी आँख के लट्ठे पर ध्यान नहीं देता? या तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, ‘आ, मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ’, जबकि देख, तेरी आँख में तो लट्ठा है? अरे पाखंडी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल, तब तू अपने भाई की आँख से तिनका निकालने के लिए स्पष्‍ट देख पाएगा। “पवित्र वस्तु कुत्तों को न दो, और न ही अपने मोतियों को सूअरों के आगे फेंको, कहीं ऐसा न हो कि वे उन्हें अपने पैरों से रौंदें, और मुड़कर तुम्हें फाड़ डालें। “माँगो और तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो और तुम पाओगे; खटखटाओ और तुम्हारे लिए खोला जाएगा। क्योंकि प्रत्येक जो माँगता है उसे मिलता है, जो ढूँढ़ता है वह पाता है और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। तुममें से कौन ऐसा मनुष्य है, जो अपने पुत्र के रोटी माँगने पर उसे पत्थर देता है? और मछली माँगने पर उसे साँप देता है? इसलिए, यदि तुम बुरे होकर अपने बच्‍चों को अच्छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्हारा पिता जो स्वर्ग में है, उससे भी बढ़कर अपने माँगनेवालों को अच्छी वस्तुएँ क्यों न देगा? इसलिए जो कुछ तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, वही तुम भी उनके साथ करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यवक्‍ता यही सिखाते हैं। “सकरे फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि विशाल है वह फाटक और चौड़ा है वह मार्ग, जो विनाश की ओर ले जाता है, और उसमें प्रवेश करनेवाले बहुत हैं। क्या ही छोटा है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन की ओर ले जाता है, और उसे पानेवाले थोड़े ही हैं। “झूठे भविष्यवक्‍ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के वेश में तुम्हारे पास आते हैं, परंतु भीतर से भूखे भेड़िए हैं। तुम उनके फलों के द्वारा उन्हें पहचान लोगे। क्या लोग कँटीली झाड़ियों से अंगूर और काँटेदार पौधों से अंजीर तोड़ते हैं? इसी प्रकार प्रत्येक अच्छा पेड़ अच्छे फल लाता है, परंतु बेकार पेड़ बुरे फल लाता है; न तो अच्छा पेड़ बुरे फल ला सकता है और न ही बेकार पेड़ अच्छे फल ला सकता है। जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंक दिया जाता है। अतः तुम उन्हें उनके फलों से पहचान लोगे। “प्रत्येक जो मुझे ‘प्रभु! प्रभु!’ कहता है, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं करेगा, परंतु जो मेरे स्वर्गिक पिता की इच्छा पर चलता है, वही प्रवेश करेगा। उस दिन बहुत लोग मुझसे कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हमने तेरे नाम से भविष्यवाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत सामर्थ्य के कार्य नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैंने तुम्हें कभी नहीं जाना। हे कुकर्मियो, मेरे पास से चले जाओ।’ “इसलिए जो कोई मेरे इन वचनों को सुनता और उनका पालन करता है, वह उस बुद्धिमान व्यक्‍ति के समान है, जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। फिर वर्षा हुई और बाढ़ें आईं, और हवाएँ चलीं और उस घर से टकराईं, फिर भी वह नहीं गिरा, क्योंकि उसकी नींव चट्टान पर डाली गई थी। परंतु जो कोई मेरे इन वचनों को सुनकर उनका पालन नहीं करता, वह उस मूर्ख व्यक्‍ति के समान है, जिसने अपना घर बालू पर बनाया। फिर वर्षा हुई और बाढ़ें आईं, और हवाएँ चलीं और उस घर से टकराईं, और वह गिर गया, और उसका सर्वनाश हो गया।” और ऐसा हुआ कि जब यीशु ये बातें कह चुका, तो भीड़ उसके उपदेश से आश्‍चर्यचकित हुई; क्योंकि वह उनके शास्‍त्रियों के समान नहीं बल्कि एक अधिकारी के समान उन्हें उपदेश दे रहा था। जब यीशु पहाड़ से नीचे उतरा, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल पड़ी, और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे दंडवत् किया और कहा, “प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा, “मैं चाहता हूँ; शुद्ध हो जा!” और वह तुरंत कोढ़ से शुद्ध हो गया। तब यीशु ने उससे कहा, “देख, तू किसी से न कह, बल्कि जा, अपने आपको याजक को दिखा और वह भेंट चढ़ा जिसकी आज्ञा मूसा ने दी है, ताकि उनके लिए साक्षी हो।” जब यीशु ने कफरनहूम में प्रवेश किया, तो एक शतपति उसके पास आया और उससे विनती करने लगा, “प्रभु, मेरा सेवक लकवे का मारा घर में पड़ा है और अत्यंत कष्‍ट में है।” यीशु ने उससे कहा, “मैं आकर उसे स्वस्थ करूँगा।” इस पर शतपति ने कहा, “प्रभु, मैं इस योग्य नहीं हूँ कि तू मेरी छत के नीचे आए; परंतु केवल वचन ही कह दे, और मेरा सेवक स्वस्थ हो जाएगा। क्योंकि मैं भी अधिकार के अधीन एक मनुष्य हूँ, मेरे अधीन सैनिक हैं और जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा’, तो वह जाता है, और दूसरे से ‘आ’, तो वह आता है; और अपने दास से, ‘यह कर’, तो वह करता है।” यह सुनकर यीशु को आश्‍चर्य हुआ और जो उसके पीछे चल रहे थे उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, इस्राएल में इतना बड़ा विश्‍वास मैंने किसी में नहीं पाया। मैं तुमसे कहता हूँ कि पूर्व और पश्‍चिम से बहुत लोग आएँगे और अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ स्वर्ग के राज्य में भोजन करने बैठेंगे; परंतु राज्य की संतान बाहर अंधकार में फेंक दी जाएगी, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।” और यीशु ने शतपति से कहा, “जा, जैसा तूने विश्‍वास किया, वैसा ही तेरे लिए हो।” और उसका सेवक उसी घड़ी स्वस्थ हो गया। जब यीशु पतरस के घर में आया, तो उसने उसकी सास को ज्वर में पड़े देखा। तब उसने उसका हाथ छुआ, और उसका ज्वर उतर गया; फिर वह उठकर उसकी सेवा करने लगी। संध्या होने पर लोग बहुत से दुष्‍टात्माग्रस्त लोगों को उसके पास लाए; और उसने मात्र शब्दों से उन आत्माओं को निकाला तथा सब बीमारों को स्वस्थ किया, ताकि वह वचन जो यशायाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: उसने आप हमारी निर्बलताओं को ले लिया और बीमारियों को उठा लिया। जब यीशु ने अपने चारों ओर भीड़ देखी, तो उस पार जाने की आज्ञा दी। तब एक शास्‍त्री ने पास आकर उससे कहा, “गुरु, जहाँ कहीं तू जाएगा, मैं तेरे पीछे चलूँगा।” यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों की माँदें और आकाश के पक्षियों के घोंसले होते हैं, परंतु मनुष्य के पुत्र के लिए सिर रखने का भी स्थान नहीं है।” उसके एक अन्य शिष्य ने उससे कहा, “हे प्रभु, पहले मुझे जाकर अपने पिता को गाड़ने की अनुमति दे।” परंतु यीशु ने उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले और मृतकों को अपने मृतक गाड़ने दे।” जब वह नाव पर चढ़ा तो उसके शिष्य भी उसके साथ हो लिए; और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफ़ान उठा कि नाव लहरों से ढकने लगी; परंतु यीशु सो रहा था। तब उसके शिष्यों ने पास आकर उसे जगाया और कहा, “प्रभु! बचा, हम नाश हो रहे हैं।” उसने उनसे कहा, “हे अल्पविश्‍वासियो, तुम क्यों डरते हो?” तब उसने उठकर आँधी और झील को डाँटा और बड़ी शांति छा गई। इस पर वे आश्‍चर्य करके कहने लगे, “यह कैसा मनुष्य है कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?” जब यीशु उस पार गदरेनियों के प्रदेश में पहुँचा, तो दुष्‍टात्माग्रस्त दो मनुष्य कब्रों से निकलकर उसके सामने आए, जो इतने उग्र थे कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। और देखो, उन्होंने चिल्‍लाकर कहा, “हे परमेश्‍वर के पुत्र, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू समय से पहले हमें यातना देने यहाँ आया है?” उनसे कुछ दूरी पर बहुत से सूअरों का एक झुंड चर रहा था। दुष्‍टात्माएँ उससे विनती करने लगीं, “यदि तू हमें निकाल रहा है, तो हमें उन सूअरों के झुंड में भेज दे ।” तब यीशु ने उनसे कहा, “जाओ।” और वे निकलकर सूअरों में समा गईं; और देखो, सारा झुंड ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और पानी में डूब मरा। इस पर चरवाहे भागे और नगर में जाकर यह सब और उन दुष्‍टात्माग्रस्त मनुष्यों की बात भी कह सुनाई। और देखो, सारा नगर यीशु से मिलने के लिए निकल आया और उसे देखकर विनती की, कि वह उनके क्षेत्र की सीमा से चला जाए। फिर यीशु ने नाव पर चढ़कर झील पार की और अपने नगर में आया। और देखो, कुछ लोग एक लकवे के रोगी को खाट पर लिटाकर उसके पास लाए। तब यीशु ने उनके विश्‍वास को देखकर उस लकवे के रोगी से कहा, “पुत्र, साहस रख; तेरे पाप क्षमा हुए।” और देखो, कुछ शास्‍त्रियों ने अपने मन में कहा, “यह तो परमेश्‍वर की निंदा कर रहा है।” उनके विचारों को जानकर यीशु ने कहा, “तुम अपने मन में बुरा विचार क्यों कर रहे हो? सहज क्या है? यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना, ‘उठ और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है।” तब उसने उस लकवे के रोगी से कहा, “उठ, अपनी खाट उठा और अपने घर चला जा।” और वह उठकर अपने घर चला गया। यह देखकर लोगों पर भय छा गया और उन्होंने परमेश्‍वर की महिमा की, जिसने मनुष्यों को ऐसा अधिकार दिया। वहाँ से आगे बढ़ने पर यीशु ने मत्ती नामक एक मनुष्य को कर-चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” और वह उठकर उसके पीछे हो लिया। फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु घर में भोजन करने बैठा, तो देखो, बहुत से कर वसूलनेवाले और पापी आकर यीशु और उसके शिष्यों के साथ भोजन करने लगे। यह देखकर फरीसी उसके शिष्यों से कहने लगे, “तुम्हारा गुरु कर वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों भोजन करता है?” यह सुनकर यीशु ने कहा, “वैद्य की आवश्यकता स्वस्थ लोगों को नहीं बल्कि बीमारों को है। तुम जाकर इसका अर्थ सीखो: मैं दया चाहता हूँ, बलिदान नहीं; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं बल्कि पापियों को बुलाने आया हूँ।” तब यूहन्‍ना के शिष्यों ने उसके पास आकर कहा, “क्या कारण है कि हम और फरीसी तो बहुत उपवास करते हैं, परंतु तेरे शिष्य उपवास नहीं करते?” तब यीशु ने उनसे कहा, “जब दूल्हा बरातियों के साथ है, तो क्या वे शोक मना सकते हैं? परंतु वे दिन आएँगे जब दूल्हा उनसे अलग कर दिया जाएगा, तब वे उपवास करेंगे। पुराने वस्‍त्र पर कोई नए कपड़े का पैवंद नहीं लगाता, क्योंकि पैवंद से वह वस्‍त्र खिंच जाएगा और पहले से भी अधिक फट जाएगा। कोई पुरानी मशकों में नया दाखरस भर कर नहीं रखता, नहीं तो मशकें फट जाती हैं, और दाखरस बह जाता है और मशकें नष्‍ट हो जाती हैं; इसलिए नया दाखरस नई मशकों में भरते हैं और वे दोनों सुरक्षित रहते हैं।” जब वह इन बातों को उनसे कह ही रहा था कि देखो, एक अधिकारी आया और उसे दंडवत् करके कहने लगा, “मेरी बेटी अभी मरी है; परंतु तू आकर उस पर अपना हाथ रख दे, और वह जीवित हो जाएगी।” तब यीशु उठकर अपने शिष्यों के साथ उसके पीछे चल दिया। और देखो, एक स्‍त्री ने जो बारह वर्ष से रक्‍तस्राव से पीड़ित थी, पीछे से आकर यीशु के वस्‍त्र का किनारा छू लिया। क्योंकि वह अपने मन में कहती थी, “यदि मैं उसके वस्‍त्र को ही छू लूँगी तो स्वस्थ हो जाऊँगी।” तब यीशु ने मुड़कर उसे देखा और कहा, “बेटी, साहस रख, तेरे विश्‍वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है।” और वह स्‍त्री उसी घड़ी स्वस्थ हो गई। जब यीशु अधिकारी के घर पहुँचा, तो बाँसुरी बजानेवालों और भीड़ को कोलाहल मचाते देखकर कहा, “चले जाओ, क्योंकि लड़की मरी नहीं परंतु सो रही है।” इस पर वे उसकी हँसी उड़ाने लगे। परंतु जब वह भीड़ निकाल दी गई, तो यीशु ने भीतर आकर उस लड़की का हाथ पकड़ा, और वह जीवित हो गई। तब इस बात की चर्चा उस सारे प्रदेश में फैल गई। जब यीशु वहाँ से आगे बढ़ा, तो दो अंधे व्यक्‍ति चिल्‍लाते हुए उसके पीछे आए, “दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।” घर पहुँचने पर वे अंधे व्यक्‍ति उसके पास आए। यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुम विश्‍वास करते हो कि मैं यह कर सकता हूँ?” उन्होंने उससे कहा, “हाँ, प्रभु।” तब उसने यह कहते हुए उनकी आँखें छुईं, “तुम्हारे विश्‍वास के अनुसार तुम्हारे लिए हो।” और उनकी आँखें खुल गईं। तब यीशु ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी, “देखो, इस बात को कोई न जाने।” परंतु उन्होंने बाहर जाकर उस सारे प्रदेश में उसकी चर्चा फैला दी। जब वे बाहर निकल रहे थे तो देखो, लोग दुष्‍टात्माग्रस्त एक गूँगे मनुष्य को उसके पास लाए; और जब दुष्‍टात्मा निकाल दी गई, तो वह गूँगा मनुष्य बोलने लगा। इस पर लोगों को आश्‍चर्य हुआ और वे कहने लगे, “इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया।” परंतु फरीसी कहने लगे, “वह दुष्‍टात्माओं के प्रधान के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता है।” यीशु सब नगरों और गाँवों में जा जाकर उनके आराधनालयों में उपदेश देता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और हर प्रकार की दुर्बलता को दूर करता रहा। जब यीशु ने भीड़ को देखा तो उसे लोगों पर तरस आया क्योंकि वे बिना चरवाहे की भेड़ों के समान व्याकुल और भटके हुए थे। तब उसने अपने शिष्यों से कहा, “फसल तो बहुत है, परंतु मज़दूर थोड़े हैं; इसलिए फसल के स्वामी से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मज़दूरों को भेजे।” फिर यीशु ने अपने बारह शिष्यों को पास बुलाकर उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया कि वे उन्हें निकालें और हर प्रकार की बीमारी और हर प्रकार की दुर्बलता को दूर करें। और उन बारह प्रेरितों के नाम ये हैं: पहला शमौन, जो पतरस कहलाता है, और उसका भाई अंद्रियास, ज़ब्दी का पुत्र याकूब, और उसका भाई यूहन्‍ना, फिलिप्पुस, और बरतुल्मै, थोमा, और कर वसूलनेवाला मत्ती, हलफई का पुत्र याकूब, और तद्दै, शमौन कनानी, और यहूदा इस्करियोती जिसने यीशु को पकड़वा भी दिया। यीशु ने इन बारहों को यह आज्ञा देकर भेजा: “गैरयहूदियों की ओर न जाना और न सामरियों के नगर में प्रवेश करना; बल्कि इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों के पास जाओ; और चलते-चलते यह प्रचार करो, ‘स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।’ बीमारों को स्वस्थ करो, मृतकों को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्‍टात्माओं को निकालो; तुमने मुफ़्त में पाया, मुफ़्त में दो। अपने कमरबंदों में न तो सोना, न चाँदी, और न ताँबा रखना, यात्रा के लिए न थैला, न दो कुरते, न जूते और न ही लाठी लेना; क्योंकि मज़दूर को उसका भोजन मिलना चाहिए। जिस किसी नगर या गाँव में तुम जाओ, तो पता लगाओ कि वहाँ कौन योग्य है; और विदा होने तक तुम वहीं रहो। जब तुम उस घर में प्रवेश करो, तो उन्हें शांति की आशिष दो। यदि वह घर उसके लिए योग्य होगा, तो तुम्हारी शांति उस पर आ जाएगी; परंतु यदि वह योग्य न होगा, तो तुम्हारी शांति तुम्हारे पास लौट आएगी। और जो कोई तुम्हें ग्रहण न करे, और न ही तुम्हारे वचनों को सुने, तो उस घर से या उस नगर से बाहर निकलते समय अपने पैरों की धूल झाड़ देना। मैं तुमसे सच कहता हूँ, न्याय के दिन सदोम और अमोरा देश की दशा उस नगर से अधिक सहनीय होगी। “देखो, मैं तुम्हें भेड़ों के समान भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ; इसलिए साँपों के समान चतुर और कबूतरों के समान भोले बनो। मनुष्यों से सावधान रहो; क्योंकि वे तुम्हें महासभाओं में सौंपेंगे, और अपने आराधनालयों में तुम्हें कोड़े मारेंगे; और मेरे कारण तुम्हें शासकों और राजाओं के सामने भी ले जाया जाएगा ताकि उनके और गैरयहूदियों के लिए साक्षी हो। परंतु जब वे तुम्हें पकड़वाएँ, तो चिंता न करना कि कैसे और क्या कहेंगे; क्योंकि उसी समय तुम्हें बता दिया जाएगा कि क्या कहना है; क्योंकि बोलनेवाले तुम नहीं, बल्कि तुम्हारे पिता का आत्मा है जो तुममें बोलता है। भाई, भाई को और पिता अपनी संतान को मृत्यु के लिए सौंप देगा और संतान अपने माता-पिता के विरुद्ध उठ खड़ी होंगी और उन्हें मरवा डालेंगी। मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे घृणा करेंगे, परंतु जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। जब वे तुम्हें इस नगर में सताएँ तो तुम दूसरे में भाग जाना; क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुम इस्राएल के नगरों में पूरा फिर भी न पाओगे कि मनुष्य का पुत्र आ जाएगा। “शिष्य अपने गुरु से बड़ा नहीं होता और न ही दास अपने स्वामी से। शिष्य का अपने गुरु के समान और दास का अपने स्वामी के समान होना ही बहुत है। जब उन्होंने घर के स्वामी को बालज़बूल कहा, तो उसके घरवालों को क्या कुछ न कहेंगे। “इसलिए उनसे मत डरना; क्योंकि ऐसा कुछ ढका नहीं जो प्रकट न किया जाएगा, और न कुछ छिपा है जो जाना न जाएगा। जो मैं तुमसे अंधकार में कहता हूँ, उसे उजियाले में कहो; और जो तुम कान में सुनते हो, उसे छतों पर से प्रचार करो। उनसे मत डरो, जो शरीर को घात करते हैं पर आत्मा को घात नहीं कर सकते; बल्कि उससे डरो जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। क्या दो गौरैयाँ एक पैसे में नहीं बिकतीं? फिर भी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उनमें से एक भी भूमि पर नहीं गिरती। तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं। इसलिए डरो मत, तुम बहुत सी गौरैयों से अधिक मूल्यवान हो। “अतः प्रत्येक जो मनुष्यों के सामने मुझे स्वीकार करेगा, मैं भी अपने पिता के सामने, जो स्वर्ग में है, उसे स्वीकार करूँगा। परंतु जो कोई मनुष्यों के सामने मेरा इनकार करेगा, मैं भी अपने पिता के सामने, जो स्वर्ग में है, उसका इनकार करूँगा। “तुम यह न समझो कि मैं पृथ्वी पर मेल-मिलाप कराने आया हूँ; मैं मेल-मिलाप कराने नहीं बल्कि तलवार चलवाने आया हूँ। क्योंकि मैं मनुष्य को उसके पिता के, बेटी को उसकी माँ के और बहू को उसकी सास के विरुद्ध करने आया हूँ। इस प्रकार मनुष्य के शत्रु उसके घर के ही लोग होंगे। “जो अपने पिता या माता को मुझसे अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं; और जो अपने बेटे या बेटी को मुझसे अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं; और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे नहीं चलता, वह मेरे योग्य नहीं। जो अपना प्राण बचाता है, वह उसे गँवाएगा, परंतु जो मेरे कारण अपना प्राण गँवाता है, वह उसे पाएगा। “जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है। जो भविष्यवक्‍ता को इसलिए ग्रहण करता है कि वह भविष्यवक्‍ता है, वह भविष्यवक्‍ता का प्रतिफल पाएगा, और जो धर्मी को इसलिए ग्रहण करता है कि वह धर्मी है, वह धर्मी का प्रतिफल पाएगा। जो कोई इन छोटों में से किसी एक को एक कटोरा ठंडा पानी इसलिए पिलाए कि वह मेरा शिष्य है, तो मैं तुमसे सच कहता हूँ, वह अपना प्रतिफल कदापि न खोएगा।” ऐसा हुआ कि जब यीशु अपने बारह शिष्यों को आदेश दे चुका, तो वह उनके नगरों में उपदेश देने और प्रचार करने के लिए वहाँ से चला गया। यूहन्‍ना ने जब बंदीगृह में मसीह के कार्यों के विषय में सुना, तो अपने शिष्यों को उससे यह पूछने भेजा, “क्या तू ही वह है जो आनेवाला था या हम किसी और की प्रतीक्षा करें?” तब यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “जो कुछ तुम सुनते और देखते हो, उसे जाकर यूहन्‍ना को बताओ: ‘अंधे देखते हैं और लंगड़े चलते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं और बहरे सुनते हैं, तथा मृतक जिलाए जाते हैं और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है।’ और धन्य है वह जो मेरे कारण ठोकर नहीं खाता।” जब वे वहाँ से जा रहे थे, तो यीशु यूहन्‍ना के विषय में लोगों से कहने लगा: “तुम जंगल में क्या देखने निकले थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकंडे को? फिर तुम क्या देखने निकले थे? क्या कोमल वस्‍त्र पहने हुए मनुष्य को? देखो, कोमल वस्‍त्र पहननेवाले तो राजमहलों में रहते हैं। तो तुम क्या देखने निकले थे? क्या किसी भविष्यवक्‍ता को? हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, भविष्यवक्‍ता से भी बड़े व्यक्‍ति को। यह वही है जिसके विषय में लिखा है: देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेज रहा हूँ, जो तेरे आगे तेरा मार्ग तैयार करेगा। “मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो स्‍त्रियों से जन्मे हैं उनमें यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले से बड़ा कोई नहीं हुआ; परंतु जो स्वर्ग के राज्य में सब से छोटा है, वह उससे भी बड़ा है। यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले के दिनों से लेकर अब तक स्वर्ग के राज्य में बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवान उसे छीन लेते हैं। क्योंकि यूहन्‍ना के समय तक सभी भविष्यवक्‍ताओं और व्यवस्था ने भविष्यवाणी की; और यदि तुम चाहो तो मान लो कि एलिय्याह जो आने वाला था, यही है। जिसके पास कान हों, वह सुन ले। “परंतु इस पीढ़ी की तुलना मैं किससे करूँ? यह बाज़ारों में बैठे हुए उन बालकों के समान है जो दूसरों को पुकारकर कहते हैं, ‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी बजाई परंतु तुम नहीं नाचे; हमने विलाप का गीत गाया परंतु तुमने छाती नहीं पीटी।’ “क्योंकि यूहन्‍ना न तो खाता और न ही पीता आया, और लोग कहते हैं, ‘उसमें दुष्‍टात्मा है।’ मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया, और लोग कहते हैं, ‘देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्य, कर वसूलनेवालों और पापियों का मित्र।’ परंतु बुद्धि अपने कार्यों के द्वारा सच्‍ची ठहरती है।” तब वह उन नगरों को धिक्‍कारने लगा जिनमें उसके अधिकांश सामर्थ्य के कार्य किए गए थे, क्योंकि उन लोगों ने पश्‍चात्ताप नहीं किया था: “हे खुराजीन! तुझ पर हाय; हे बैतसैदा! तुझ पर हाय; क्योंकि जो सामर्थ्य के कार्य तुममें किए गए, यदि सूर और सैदा में किए जाते, तो बहुत पहले ही वे टाट ओढ़कर और राख पर बैठकर पश्‍चात्ताप कर लेते। जैसा भी हो, मैं तुमसे कहता हूँ, न्याय के दिन सूर और सैदा की दशा तुमसे अधिक सहनीय होगी। और तू, हे कफरनहूम, क्या तुझे स्वर्ग तक ऊँचा उठाया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे उतारा जाएगा। क्योंकि जो सामर्थ्य के कार्य तुम्हारे बीच किए गए, यदि वे सदोम में किए जाते, तो वह आज तक बना रहता। फिर भी मैं तुमसे कहता हूँ कि न्याय के दिन सदोम देश की दशा तुझसे अधिक सहनीय होगी।” उसी समय यीशु ने कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ, क्योंकि तूने इन बातों को बुद्धिमानों और समझदारों से छिपाया और बच्‍चों पर प्रकट किया है; हाँ पिता, क्योंकि तेरी दृष्‍टि में यही अच्छा था। “मेरे पिता के द्वारा मुझे सब कुछ सौंपा गया है, और पिता को छोड़ पुत्र को कोई नहीं जानता; और पुत्र तथा जिस पर पुत्र प्रकट करना चाहे उसको छोड़ पिता को कोई नहीं जानता। हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जुआ अपने ऊपर उठाओ और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं नम्र और मन का दीन हूँ, और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे; क्योंकि मेरा जुआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।” उस समय यीशु सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था; उसके शिष्यों को भूख लगी और वे अनाज की बालें तोड़ तोड़कर खाने लगे। यह देखकर फरीसियों ने उससे कहा, “देख, तेरे शिष्य वही कर रहे हैं जिसे सब्त के दिन करना उचित नहीं।” परंतु यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुमने नहीं पढ़ा कि जब दाऊद अपने साथियों के साथ था और उसे भूख लगी, तो उसने क्या किया? वह किस प्रकार परमेश्‍वर के भवन में गया, और उन्होंने भेंट की रोटियाँ खाईं, जिन्हें खाना न तो उसके लिए और न ही उसके साथियों के लिए, पर केवल याजकों के लिए उचित था? या क्या तुमने व्यवस्था में नहीं पढ़ा कि सब्त के दिनों में याजक मंदिर में सब्त के दिन की विधि को तोड़ने पर भी निर्दोष रहते हैं? परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि यहाँ वह है जो मंदिर से भी बड़ा है। यदि तुमने इसका अर्थ जाना होता, ‘मैं बलिदान नहीं परंतु दया चाहता हूँ,’ तो तुम निर्दोषों पर दोष न लगाते। क्योंकि मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी प्रभु है।” वहाँ से निकलकर वह उनके आराधनालय में आया; और देखो, एक सूखे हाथवाला मनुष्य था। उन्होंने यीशु पर दोष लगाने के लिए उससे पूछा, “क्या सब्त के दिन स्वस्थ करना उचित है?” उसने उनसे कहा, “तुममें से कौन ऐसा मनुष्य होगा जिसके पास एक ही भेड़ हो, और वही सब्त के दिन गड्‌ढे में गिर जाए, और उसे पकड़कर न निकाले? फिर मनुष्य तो भेड़ से कितना अधिक मूल्यवान है। इसलिए सब्त के दिन भलाई करना उचित है।” तब यीशु ने उस मनुष्य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” और उसने बढ़ाया और वह हाथ दूसरे हाथ के समान फिर से ठीक हो गया। तब फरीसियों ने बाहर जाकर यीशु के विरुद्ध सम्मति की कि उसे किस प्रकार नाश करें। यह जानकर यीशु वहाँ से चला गया। बहुत लोग उसके पीछे चल दिए और उसने उन सब को स्वस्थ किया, और उन्हें चेतावनी दी कि वे उसे प्रकट न करें; ताकि वह वचन जो यशायाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: मेरे सेवक को देख, जिसे मैंने चुना है, यह मेरा प्रिय है जिससे मेरा मन अति प्रसन्‍न है; मैं अपना आत्मा उस पर डालूँगा और वह गैरयहूदियों को न्याय का समाचार देगा। वह न तो झगड़ा करेगा और न ही चिल्‍लाएगा, और न सड़कों पर कोई उसकी आवाज़ सुनेगा। जब तक वह न्याय को विजय न दिला दे, वह न तो कुचले हुए सरकंडे को तोड़ेगा और न ही धुआँ देती हुई बत्ती को बुझाएगा। गैरयहूदी उसके नाम पर आशा रखेंगे। तब यीशु के पास एक दुष्‍टात्माग्रस्त व्यक्‍ति को लाया गया जो अंधा और गूँगा था; उसने उसे अच्छा कर दिया और वह गूँगा व्यक्‍ति बोलने और देखने लगा। इस पर सब लोग चकित होकर कहने लगे, “क्या यही दाऊद का पुत्र है?” यह सुनकर फरीसियों ने कहा, “यह दुष्‍टात्माओं के प्रधान बालज़बूल के द्वारा ही दुष्‍टात्माओं को निकालता है।” यीशु ने उनके विचारों को जानकर उनसे कहा: “जिस राज्य में फूट पड़ी हो, वह उजड़ जाता है; और जिस नगर या घर में फूट पड़ी हो, वह स्थिर नहीं रहेगा। यदि शैतान ही शैतान को निकालता है तो वह स्वयं अपना विरोधी हो जाता है; फिर उसका राज्य कैसे स्थिर रहेगा? और यदि मैं बालज़बूल के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता हूँ, तो तुम्हारे पुत्र किसके द्वारा निकालते हैं? इस कारण वे ही तुम्हारे न्यायी होंगे। परंतु यदि मैं परमेश्‍वर के आत्मा के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता हूँ तो परमेश्‍वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा है। किसी शक्‍तिशाली मनुष्य के घर में प्रवेश करके कोई उसका सामान कैसे लूट सकता है, जब तक कि पहले वह उस शक्‍तिशाली मनुष्य को बाँध न ले? वह तभी उसके घर को लूट सकता है। जो मेरे साथ नहीं, वह मेरे विरुद्ध है, और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि मनुष्यों का हर पाप और निंदा क्षमा की जाएगी, परंतु आत्मा की निंदा क्षमा नहीं की जाएगी। जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरुद्ध कोई बात कहेगा, उसका अपराध क्षमा किया जाएगा, परंतु जो कोई पवित्र आत्मा के विरुद्ध कहेगा, उसका अपराध न तो इस युग में और न ही आने वाले युग में क्षमा किया जाएगा। “यदि पेड़ को अच्छा मानो तो उसके फल को भी अच्छा मानो, या पेड़ को बेकार मानो तो उसके फल को भी बेकार मानो; क्योंकि पेड़ अपने फल से ही पहचाना जाता है। हे साँप के बच्‍चो, तुम बुरे होकर अच्छी बातें कैसे कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है वही मुँह पर आता है। भला मनुष्य अपने भले भंडार से भली बातें निकालता है, और बुरा मनुष्य अपने बुरे भंडार से बुरी बातें निकालता है। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि जो भी व्यर्थ बात मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन उसका लेखा उन्हें देना पड़ेगा; क्योंकि तू अपने शब्दों से निर्दोष और अपने ही शब्दों से दोषी ठहराया जाएगा।” तब कुछ शास्‍त्रियों और फरीसियों ने उससे कहा, “हे गुरु, हम तुझसे कोई चिह्‍न देखना चाहते हैं।” इस पर उसने उनसे कहा, “बुरी और व्यभिचारी पीढ़ी चिह्‍न ढूँढ़ती है, परंतु योना भविष्यवक्‍ता के चिह्‍न को छोड़ उसे कोई चिह्‍न नहीं दिया जाएगा। क्योंकि जिस प्रकार योना एक विशाल मछली के पेट में तीन दिन और तीन रात रहा, उसी प्रकार मनुष्य का पुत्र भी पृथ्वी के गर्भ में तीन दिन और तीन रात रहेगा। न्याय के दिन नीनवे के लोग इस पीढ़ी के साथ उठ खड़े होंगे और इसे दोषी ठहराएँगे, क्योंकि उन्होंने योना का प्रचार सुनकर पश्‍चात्ताप किया, परंतु देखो, यहाँ वह है जो योना से भी बढ़कर है। दक्षिण की रानी न्याय के दिन इस पीढ़ी के साथ उठकर इसे दोषी ठहराएगी; क्योंकि वह सुलैमान की बुद्धिमानी की बातें सुनने के लिए पृथ्वी के छोर से आई, परंतु देखो, यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बढ़कर है। “जब अशुद्ध आत्मा मनुष्य में से निकल जाती है, तो वह विश्राम की खोज में सूखे स्थानों में भटकती है, परंतु उसे नहीं मिलता। तब वह कहती है, ‘जहाँ से मैं निकली थी अपने उसी घर में लौट जाऊँगी’ और आकर उसे खाली, झाड़ू लगा और सजा सजाया पाती है। फिर वह जाकर अपने से भी बुरी सात और आत्माओं को अपने साथ ले आती है, और उसमें प्रवेश करके वहीं बस जाती है; तब उस मनुष्य की दशा पहले से भी बुरी हो जाती है। इस दुष्‍ट पीढ़ी के साथ भी ऐसा ही होगा।” अभी वह भीड़ से बातें कर ही रहा था कि देखो, उसकी माता और भाई बाहर खड़े थे और उससे बात करना चाहते थे। तब किसी ने यीशु से कहा, “देख, तेरी माता और तेरे भाई बाहर खड़े हैं और तुझसे बात करना चाहते हैं।” इस पर उसने उस कहनेवाले से कहा, “कौन है मेरी माता, और कौन हैं मेरे भाई?” और उसने अपने शिष्यों की ओर अपना हाथ बढ़ाकर कहा, “देखो, मेरी माता और मेरे भाई; क्योंकि जो कोई मेरे स्वर्गिक पिता की इच्छा पर चलता है, वही मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी माता है।” उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे बैठा हुआ था; और उसके पास इतनी बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई कि वह नाव पर चढ़कर बैठ गया, और सारी भीड़ तट पर खड़ी रही। तब उसने दृष्‍टांतों में उनसे बहुत सी बातें कहीं: “देखो, एक बीज बोनेवाला बीज बोने निकला। बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे, और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ पथरीली भूमि पर गिरे जहाँ अधिक मिट्टी नहीं मिली, और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे तुरंत उग आए। परंतु सूर्य उदय होने पर वे झुलस गए और जड़ न पकड़ने के कारण सूख गए। कुछ बीज कँटीली झाड़ियों में गिरे और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा दिया। परंतु कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और कोई सौ गुणा, कोई साठ गुणा और कोई तीस गुणा फल लाया। जिसके पास कान हों, वह सुन ले।” तब शिष्यों ने पास आकर उससे पूछा, “तू क्यों उनसे दृष्‍टांतों में बात करता है?” इस पर उसने उनसे कहा, “तुम्हें तो स्वर्ग के राज्य के भेदों को जानने की समझ दी गई है, परंतु उन्हें नहीं दी गई। क्योंकि जिसके पास है, उसे दिया जाएगा और उसके पास बहुत हो जाएगा; परंतु जिसके पास नहीं है, उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। मैं इसलिए उनसे दृष्‍टांतों में बात करता हूँ, क्योंकि वे देखते हुए भी नहीं देखते और सुनते हुए भी नहीं सुनते, और न ही समझते हैं। उनमें यशायाह की यह भविष्यवाणी पूरी होती है: तुम सुनते तो रहोगे, परंतु नहीं समझोगे; और तुम देखते तो रहोगे, परंतु तुम्हें सूझेगा नहीं। क्योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है; वे कानों से सुनना नहीं चाहते और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली हैं। कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें और कानों से सुनें, मन से समझें तथा फिरें, और मैं उन्हें स्वस्थ करूँ। “परंतु धन्य हैं तुम्हारी आँखें क्योंकि वे देखती हैं, और तुम्हारे कान क्योंकि वे सुनते हैं। क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जो तुम देखते हो उसे बहुत से भविष्यवक्‍ताओं और धर्मियों ने देखना चाहा, परंतु नहीं देखा, और जो तुम सुनते हो, उसे सुनना चाहा, परंतु नहीं सुना।” “अब तुम बीज बोनेवाले के दृष्‍टांत का अर्थ सुनो। जब कोई व्यक्‍ति राज्य का वचन सुनता है और उसे नहीं समझता, तो दुष्‍ट आकर जो कुछ उसके मन में बोया गया था उसे छीन ले जाता है। यह वही बीज है जिसे मार्ग के किनारे बोया गया था। पथरीली भूमि पर बोया गया बीज वह है, जो वचन को सुनकर तुरंत उसे आनंद से ग्रहण करता है; परंतु वह अपने आपमें जड़ नहीं पकड़ पाता और थोड़े ही समय के लिए रहता है। फिर जब वचन के कारण कष्‍ट या सताव आता है तो वह तुरंत ठोकर खाता है। कँटीली झाड़ियों में बोया गया बीज वह है, जो वचन सुनता है परंतु संसार की चिंता और धन का धोखा उस वचन को दबा देता है, और वह बिना फल के ही रह जाता है। परंतु अच्छी भूमि पर बोया गया बीज वह है, जो वचन को सुनकर और समझकर सचमुच फल लाता है, कोई सौ गुणा, कोई साठ गुणा और कोई तीस गुणा।” उसने उन्हें एक और दृष्‍टांत दिया: “स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिसने अपने खेत में अच्छा बीज बोया। परंतु जब लोग सो रहे थे, तो उसका शत्रु आया और गेहूँ के बीच जंगली बीज बोकर चला गया। जब पौधा अंकुरित हुआ और बालें लगीं, तो जंगली पौधे भी दिखाई दिए। इस पर घर के स्वामी के दासों ने पास आकर उससे कहा, ‘स्वामी, क्या तूने अपने खेत में अच्छा बीज नहीं बोया था? फिर ये जंगली पौधे कहाँ से आए?’ उसने उनसे कहा, ‘यह किसी शत्रु ने किया है।’ तब दासों ने उससे पूछा, ‘तो क्या तू चाहता है कि हम जाकर उन्हें बटोर लें?’ परंतु उसने कहा, ‘नहीं, कहीं ऐसा न हो कि जंगली पौधे बटोरते हुए तुम उनके साथ गेहूँ भी उखाड़ लो। कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो; और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूँगा कि तुम जंगली पौधों को पहले बटोरकर उन्हें जलाने के लिए गट्ठों में बाँध लो, परंतु गेहूँ को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो।’ ” उसने उन्हें एक और दृष्‍टांत दिया: “स्वर्ग का राज्य राई के दाने के समान है, जिसे एक मनुष्य ने लेकर अपने खेत में बो दिया; वह सब बीजों से छोटा तो होता है, परंतु जब वह बढ़ जाता है, तो सब पौधों से बड़ा हो जाता है और एक पेड़ बन जाता है तथा आकाश के पक्षी आकर उसकी डालियों पर बसेरा करते हैं।” उसने उन्हें एक और दृष्‍टांत दिया: “स्वर्ग का राज्य ख़मीर के समान है, जिसे एक स्‍त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिलाया और धीरे-धीरे वह सब ख़मीरा हो गया।” यीशु ने ये सब बातें भीड़ से दृष्‍टांतों में कहीं, और दृष्‍टांत के बिना वह उनसे कुछ नहीं कहता था; जिससे कि वह वचन जो भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: मैं दृष्‍टांतों में बोलने के लिए अपना मुँह खोलूँगा; मैं जगत की उत्पत्ति से छिपी हुई बातों को प्रकट करूँगा। तब यीशु भीड़ को छोड़कर घर आया। फिर उसके शिष्य यह कहते हुए उसके पास आए, “हमें खेत के जंगली बीजों का दृष्‍टांत समझा दे।” इस पर यीशु ने कहा: “अच्छा बीज बोनेवाला मनुष्य का पुत्र है, और खेत यह संसार है; अच्छे बीज राज्य की संतान हैं; परंतु जंगली बीज दुष्‍ट की संतान हैं, और उन्हें बोनेवाला शत्रु शैतान है; तथा कटनी जगत का अंत है और काटनेवाले स्वर्गदूत हैं। इसलिए जैसे जंगली पौधों को बटोरकर आग में जलाया जाता है, वैसे ही जगत के अंत में होगा; मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्य में से सभी ठोकर के कारणों और कुकर्मियों को एकत्रित करेंगे, और उन्हें आग की भट्ठी में डाल देंगे, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा। तब धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य के समान चमकेंगे। जिसके पास कान हों, वह सुन ले। “स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे उस धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर फिर छिपा दिया। तब मारे आनंद के उसने जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उस खेत को खरीद लिया। “फिर स्वर्ग का राज्य एक मनुष्य के समान है जो अच्छे मोतियों को खोजनेवाला एक व्यापारी है। जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला, तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उसे खरीद लिया। “फिर स्वर्ग का राज्य एक बड़े जाल के समान है जो समुद्र में डाला गया और हर प्रकार की मछलियों को समेटने लगा। जब वह भर गया तो लोग उसे तट पर खींच लाए और बैठकर अच्छी मछलियाँ तो बरतनों में इकट्ठा कीं, परंतु बेकार बाहर फेंक दीं। जगत के अंत में ऐसा ही होगा; स्वर्गदूत आएँगे और दुष्‍टों को धर्मियों के बीच में से निकालकर अलग करेंगे और उन्हें आग की भट्ठी में डाल देंगे, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा। “ क्या तुमने इन सब बातों को समझा?” उन्होंने उससे कहा, “हाँ।” तब उसने उनसे कहा, “इस कारण प्रत्येक शास्‍त्री जो स्वर्ग के राज्य का शिष्य बना है, ऐसे मनुष्य के समान है जो घर का स्वामी है और अपने भंडार से नई और पुरानी वस्तुएँ निकालता है।” जब यीशु इन दृष्‍टांतों को कह चुका, तो वहाँ से चला गया। वह अपने नगर में आकर लोगों को उनके आराधनालय में उपदेश देने लगा, जिससे वे आश्‍चर्यचकित होकर कहने लगे, “इसे ऐसा ज्ञान और सामर्थ्य कहाँ से मिला? क्या यह बढ़ई का पुत्र नहीं है? क्या इसकी माता का नाम मरियम नहीं, और इसके भाई याकूब, यूसुफ, शमौन और यहूदा नहीं? और क्या इसकी सब बहनें हमारे साथ नहीं हैं? फिर इसे यह सब कहाँ से मिला?” इस प्रकार उन्हें उससे ठोकर लगी। परंतु यीशु ने उनसे कहा, “भविष्यवक्‍ता का अपने नगर और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता।” और उनके अविश्‍वास के कारण उसने वहाँ अधिक सामर्थ्य के कार्य नहीं किए। उस समय चौथाई देश के राजा हेरोदेस ने यीशु की चर्चा सुनकर अपने सेवकों से कहा, “यह यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला है; वह मृतकों में से जी उठा है, इसलिए उसके द्वारा सामर्थ्य के ये कार्य प्रकट होते हैं।” हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्‍नी हेरोदियास के कारण यूहन्‍ना को पकड़कर बाँधा और बंदीगृह में डाल दिया था; क्योंकि यूहन्‍ना उससे कहता था, “उसे रखना तेरे लिए उचित नहीं।” वह उसे मार डालना चाहता था, परंतु लोगों से डरता था, क्योंकि वे उसे भविष्यवक्‍ता मानते थे। जब हेरोदेस के जन्मदिन का उत्सव हुआ तो हेरोदियास की बेटी ने अतिथियों के सामने नाचकर हेरोदेस को प्रसन्‍न किया, इसलिए उसने शपथ खाकर उसे वचन दिया कि जो कुछ तू माँगेगी, मैं तुझे दूँगा। तब अपनी माँ के द्वारा उकसाए जाने पर उसने कहा, “मुझे यहीं यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर एक थाल में मँगवा दे।” राजा दुःखी हुआ परंतु अपनी शपथ और साथ बैठे लोगों के कारण उसने आज्ञा दी कि दे दिया जाए। उसने सिपाही भेजकर बंदीगृह में यूहन्‍ना का सिर कटवा दिया; और उसका सिर एक थाल में लाकर उस लड़की को दे दिया गया, और वह उसे अपनी माँ के पास ले गई। तब यूहन्‍ना के शिष्य आकर शव को ले गए और उसे गाड़ दिया, और जाकर यह समाचार यीशु को दिया। यह सुनकर यीशु वहाँ से नाव में अकेला ही किसी निर्जन स्थान की ओर चला गया; जब लोगों ने यह सुना तो नगरों से पैदल ही उसके पीछे चल दिए। जब यीशु नाव से उतरा तो उसने एक बड़ी भीड़ को देखा और उसे लोगों पर तरस आया, और उसने उनके बीमारों को स्वस्थ किया। संध्या होने पर शिष्य उसके पास आकर कहने लगे, “यह स्थान निर्जन है और समय भी बीत चुका है; भीड़ को विदा कर, ताकि वे गाँवों में जाकर अपने लिए भोजन खरीद लें।” परंतु यीशु ने उनसे कहा, “उन्हें जाने की आवश्यकता नहीं; तुम ही उन्हें खाने को दो।” उन्होंने उससे कहा, “हमारे पास यहाँ पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ भी नहीं है।” उसने कहा, “उन्हें यहाँ मेरे पास ले आओ।” तब उसने लोगों को घास पर बैठाने की आज्ञा देकर पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और रोटियाँ तोड़कर शिष्यों को दीं और शिष्यों ने लोगों को। सब ने खाया और तृप्‍त हो गए। फिर शिष्यों ने बचे हुए टुकड़ों से भरी बारह टोकरियाँ उठाईं। खानेवालों में स्‍त्रियों और बच्‍चों को छोड़ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे। फिर यीशु ने तुरंत शिष्यों को नाव पर चढ़ने और उससे पहले उस पार चले जाने के लिए विवश किया, जबकि वह लोगों को विदा करता रहा। लोगों को विदा करके वह एकांत में प्रार्थना करने के लिए पहाड़ पर चढ़ गया। संध्या होने पर वह वहाँ अकेला था। परंतु उस समय नाव किनारे से कई मील दूर लहरों के थपेड़े खा रही थी, क्योंकि हवा विपरीत थी। रात के लगभग तीन बजे यीशु झील पर चलते हुए उनके पास आया। परंतु जब शिष्यों ने उसे झील पर चलते हुए देखा तो घबरा गए और कहने लगे, “यह तो कोई भूत है।” और डर के मारे चिल्‍ला उठे। यीशु ने तुरंत उनसे बातें कीं और कहा, “साहस रखो, मैं हूँ, डरो मत।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, यदि यह तू ही है, तो मुझे पानी पर चलकर अपने पास आने की आज्ञा दे।” उसने कहा, “आ जा।” तब पतरस नाव से उतरा और पानी पर चलकर यीशु की ओर आया। परंतु तेज़ हवा को देखकर वह डर गया, और जब डूबने लगा तो चिल्‍लाकर कहा, “प्रभु, मुझे बचा!” यीशु ने तुरंत अपना हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया और उससे कहा, “हे अल्पविश्‍वासी, तूने क्यों संदेह किया?” जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई; और जो नाव में थे, उन्होंने उसे दंडवत् करके कहा, “सचमुच, तू परमेश्‍वर का पुत्र है।” फिर वे पार होकर गन्‍नेसरत के प्रदेश में आए। उस स्थान के लोगों ने उसे पहचानकर आस-पास के सारे क्षेत्र में संदेश भेजा, और सब बीमारों को उसके पास लाए, और उससे विनती करने लगे कि वह उन्हें अपने वस्‍त्र का किनारा ही छूने दे; और जितनों ने छुआ, वे स्वस्थ हो गए। तब यरूशलेम से कुछ फरीसी और शास्‍त्री यीशु के पास आकर कहने लगे, “तेरे शिष्य पूर्वजों की परंपरा का उल्‍लंघन क्यों करते हैं? क्योंकि जब वे रोटी खाते हैं तो अपने हाथ नहीं धोते ।” इस पर उसने उनसे कहा, “तुम भी अपनी परंपरा के लिए परमेश्‍वर की आज्ञा का उल्‍लंघन क्यों करते हो? क्योंकि परमेश्‍वर ने कहा है: अपने पिता और अपनी माता का आदर कर और जो अपने पिता या माता को बुरा कहे वह निश्‍चय मार डाला जाए । परंतु तुम कहते हो ‘जो कोई अपने पिता या अपनी माता से कहे, “जो कुछ तुम्हें मुझसे मिलना था वह परमेश्‍वर को अर्पित है,” तो उसे अपने माता-पिता का आदर करने की आवश्यकता नहीं।’ इस प्रकार तुमने अपनी परंपरा के लिए परमेश्‍वर के वचन को व्यर्थ ठहरा दिया। हे पाखंडियो, यशायाह ने तुम्हारे विषय में ठीक ही भविष्यवाणी की है: ये लोग होंठों से तो मेरा आदर करते हैं, परंतु इनके मन मुझसे बहुत दूर हैं; वे मनुष्यों के नियमों को धर्म-शिक्षा के रूप में सिखाकर व्यर्थ में मेरी उपासना करते हैं।” तब उसने लोगों को अपने पास बुलाकर उनसे कहा, “सुनो और समझो: जो मुँह में जाता है वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, बल्कि जो मुँह से निकलता है वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।” तब शिष्यों ने पास आकर उससे कहा, “क्या तू जानता है कि यह बात सुनकर फरीसियों को बुरा लगा?” इस पर उसने कहा, “प्रत्येक पौधा जिसे मेरे स्वर्गिक पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। उन्हें छोड़ो; वे अंधों के अंधे मार्गदर्शक हैं; और यदि अंधा ही अंधे का मार्गदर्शन करे, तो दोनों ही गड्‌ढे में गिर जाएँगे।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “हमें यह दृष्‍टांत समझा।” यीशु ने कहा, “क्या अब तक तुम भी नासमझ हो? क्या तुम नहीं जानते कि जो कुछ मुँह में जाता है वह पेट में जाकर संडास में से निकल जाता है? परंतु जो मुँह से बाहर आता है, वह मन से निकलता है और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि मन से बुरे बुरे विचार, हत्या, परस्‍त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निंदा निकलती हैं। मनुष्य को अशुद्ध करनेवाली बातें ये ही हैं, परंतु बिना हाथ धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।” फिर यीशु वहाँ से निकलकर सूर और सैदा के क्षेत्रों में चला गया। और देखो, उस क्षेत्र से एक कनानी स्‍त्री निकली और चिल्‍लाने लगी, “हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर; मेरी बेटी बुरी तरह से दुष्‍टात्माग्रस्त है।” परंतु उसने उसे कोई उत्तर नहीं दिया। तब उसके शिष्य पास आकर उससे यह विनती करने लगे, “इसको भेज, क्योंकि यह हमारे पीछे-पीछे चिल्‍ला रही है।” इस पर उसने कहा, “मुझे इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों को छोड़ किसी और के पास नहीं भेजा गया।” परंतु वह आई और उसे दंडवत् करके कहने लगी, “प्रभु, मेरी सहायता कर।” इस पर उसने कहा, “बच्‍चों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे फेंकना अच्छा नहीं।” परंतु उसने कहा, “हाँ प्रभु, परंतु कुत्ते भी तो अपने स्वामियों की मेज़ से गिरे हुए रोटी के टुकड़ों में से खाते हैं।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “हे स्‍त्री! तेरा विश्‍वास बड़ा है; जैसा तू चाहती है वैसा ही तेरे लिए हो।” और उसी घड़ी उसकी बेटी अच्छी हो गई। फिर यीशु वहाँ से निकलकर गलील की झील के किनारे आया, और पहाड़ पर चढ़कर वहाँ बैठ गया। तब बहुत से लोग लंगड़े, अंधे, लूले, गूँगे और अन्य बहुतों को अपने साथ लेकर यीशु के पास आए और उन्हें उसके चरणों पर डाल दिया, और उसने उन्हें स्वस्थ किया; जब लोगों ने देखा कि गूँगे बोलते हैं, लूले ठीक होते हैं, लंगड़े चलते हैं तथा अंधे देखते हैं तो आश्‍चर्य में पड़ गए; और उन्होंने इस्राएल के परमेश्‍वर की महिमा की। तब यीशु ने अपने शिष्यों को पास बुलाकर कहा, “मुझे इस भीड़ पर तरस आता है, क्योंकि ये लोग तीन दिन से मेरे साथ हैं और उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं; मैं उन्हें भूखा नहीं भेजना चाहता, कहीं ऐसा न हो कि वे मार्ग में ही मूर्च्छित हो जाएँ।” शिष्यों ने उससे कहा, “जंगल में इतनी बड़ी भीड़ को तृप्‍त करने के लिए हम इतनी रोटियाँ कहाँ से लाएँ?” यीशु ने उनसे पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्होंने कहा, “सात, और कुछ छोटी मछलियाँ।” तब लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा देकर उसने सात रोटियाँ और मछलियाँ लीं, धन्यवाद देकर उन्हें तोड़ा और शिष्यों को देता गया, तथा शिष्य लोगों को। सब ने खाया और तृप्‍त हो गए, फिर उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरे सात टोकरे उठाए। खानेवालों में स्‍त्रियों और बच्‍चों को छोड़ चार हज़ार पुरुष थे। तब भीड़ को विदा करके वह नाव पर चढ़ गया, और मगदन के क्षेत्र में आया। तब फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिए उससे माँग की कि वह उन्हें स्वर्ग का कोई चिह्‍न दिखाए। इस पर उसने उनसे कहा, “संध्या होने पर तुम कहते हो, ‘मौसम अच्छा रहेगा, क्योंकि आकाश लाल है;’ और भोर को कहते हो, ‘आज आँधी आएगी, क्योंकि आकाश धुँधला और लाल है।’ तुम आकाश के लक्षण पहचानना जानते हो, परंतु समयों के चिह्‍नों को पहचान नहीं सकते। बुरी और व्यभिचारी पीढ़ी चिह्‍न ढूँढ़ती है, परंतु योना के चिह्‍न को छोड़ उसे कोई चिह्‍न नहीं दिया जाएगा।” फिर वह उन्हें छोड़कर चला गया। शिष्य उस पार पहुँचे परंतु रोटी ले जाना भूल गए थे। यीशु ने उनसे कहा, “देखो, फरीसियों और सदूकियों के ख़मीर से सावधान रहो।” वे आपस में सोच विचार करने लगे, “हम तो रोटी नहीं लाए।” परंतु यह जानकर यीशु ने कहा, “हे अल्पविश्‍वासियो, तुम आपस में सोच विचार क्यों कर रहे हो कि तुम्हारे पास रोटी नहीं है? क्या तुम अब भी नहीं समझते? और क्या तुम्हें उन पाँच हज़ार लोगों के लिए पाँच रोटियाँ स्मरण नहीं, और यह कि तुमने कितनी टोकरियाँ उठाईं? और न ही उन चार हज़ार लोगों के लिए सात रोटियाँ, और यह कि तुमने कितने टोकरे उठाए? तुम क्यों नहीं समझते कि मैंने तुमसे रोटियों के विषय में नहीं कहा? परंतु यह कि फरीसियों और सदूकियों के ख़मीर से सावधान रहना।” तब वे समझ गए कि उसने रोटियों के ख़मीर से नहीं बल्कि फरीसियों और सदूकियों की शिक्षाओं से सावधान रहने को कहा था। जब यीशु कैसरिया फिलिप्पी के प्रदेश में आया तो अपने शिष्यों से पूछने लगा, “लोगों का क्या कहना है? मनुष्य का पुत्र कौन है?” तब उन्होंने उत्तर दिया, “कुछ तो यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला, और कुछ लोग एलिय्याह, और कुछ लोग यिर्मयाह या भविष्यवक्‍ताओं में से एक कहते हैं।” उसने उनसे पूछा, “परंतु तुम मुझे क्या कहते हो?” शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवित परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “हे योना के पुत्र शमौन! तू धन्य है, क्योंकि यह बात मांस और लहू ने नहीं, बल्कि मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, तुझ पर प्रकट की है। मैं भी तुझसे कहता हूँ कि तू पतरस है, और इस चट्टान पर मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा, और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल नहीं होंगे। मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा, और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा वह स्वर्ग में बँध जाएगा, और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा वह स्वर्ग में खुल जाएगा।” तब उसने शिष्यों को मना किया कि वे किसी से न कहें कि वह मसीह है। उस समय से यीशु अपने शिष्यों पर प्रकट करने लगा कि अवश्य है कि मैं यरूशलेम को जाऊँ और धर्मवृद्धों, मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों के हाथों बहुत दुःख उठाऊँ और मार डाला जाऊँ, और तीसरे दिन जी उठूँ। तब पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा, “नहीं प्रभु! परमेश्‍वर की दया तुझ पर बनी रहे! तेरे साथ ऐसा कभी नहीं होगा।” परंतु उसने मुड़कर पतरस से कहा, “हे शैतान, मुझसे दूर हो जा। तू मेरे लिए ठोकर का कारण है, क्योंकि तू परमेश्‍वर की नहीं बल्कि मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है।” तब यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह अपने आप का इनकार करे, अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले; क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा, वह उसे गँवाएगा; परंतु जो कोई मेरे कारण अपना प्राण गँवाएगा, वह उसे पाएगा। यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त कर ले परंतु अपने प्राण की हानि उठाए तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा? क्योंकि मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आने वाला है, और उस समय वह प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार प्रतिफल देगा। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ खड़े लोगों में से कुछ ऐसे हैं कि जब तक मनुष्य के पुत्र को अपने राज्य में आता हुआ न देख लें, तब तक मृत्यु का स्वाद कदापि न चखेंगे।” छः दिन के बाद यीशु ने पतरस, याकूब और उसके भाई यूहन्‍ना को साथ लिया, और उन्हें एकांत में एक ऊँचे पहाड़ पर ले गया। वहाँ उनके सामने उसका रूपांतरण हुआ, उसका मुख सूर्य के समान चमक उठा और उसके वस्‍त्र ज्योति के समान उज्‍ज्‍‍वल हो गए। और देखो, उन्हें मूसा और एलिय्याह उसके साथ बातचीत करते हुए दिखाई दिए। इस पर पतरस ने यीशु से कहा, “हे प्रभु, यह अच्छा है कि हम यहाँ हैं। यदि तू चाहे तो मैं यहाँ तीन मंडप बना दूँगा, एक तेरे लिए, एक मूसा के लिए और एक एलिय्याह के लिए।” अभी वह यह कह ही रहा था कि देखो, एक उजला बादल उन पर छा गया, और देखो उस बादल में से आवाज़ आई, “यह मेरा प्रिय पुत्र है जिससे मैं अति प्रसन्‍न हूँ; इसकी सुनो।” यह सुनकर शिष्य मुँह के बल गिर पड़े और अत्यंत डर गए। यीशु उनके पास आया और उन्हें छूकर कहा, “उठो, डरो मत।” जब उन्होंने अपनी आँखें उठाईं तो यीशु को छोड़ और किसी को न देखा। जब वे पहाड़ से नीचे उतर रहे थे तो यीशु ने उन्हें यह आज्ञा दी, “जब तक मनुष्य का पुत्र मृतकों में से जी न उठे, तब तक तुम इस दर्शन के विषय में किसी से न कहना।” तब शिष्यों ने उससे पूछा, “फिर शास्‍त्री क्यों कहते हैं कि एलिय्याह का पहले आना अवश्य है?” उसने उत्तर दिया, “एलिय्याह का आना तो अवश्य है और वह सब कुछ सुधारेगा; परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि एलिय्याह आ चुका है, और लोगों ने उसे नहीं पहचाना, बल्कि जैसा उन्होंने चाहा वैसा उसके साथ किया; इसी प्रकार मनुष्य का पुत्र भी उनके हाथों दुःख उठाने वाला है।” तब शिष्य समझ गए कि उसने हमसे यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले के विषय में कहा है। जब वे भीड़ के पास पहुँचे तो एक मनुष्य उसके पास आया और उसके सामने घुटने टेककर कहने लगा, “प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर, क्योंकि उसे मिर्गी आती है और बुरी तरह से पीड़ित है; और वह कभी आग में तो कभी पानी में गिर पड़ता है। मैं उसे तेरे शिष्यों के पास लाया था, परंतु वे उसे ठीक नहीं कर सके।” इस पर यीशु ने कहा, “हे अविश्‍वासी और भ्रष्‍ट पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।” तब यीशु ने दुष्‍टात्मा को डाँटा, और वह उसमें से निकल गई; तथा लड़का उसी घड़ी ठीक हो गया। तब शिष्यों ने एकांत में यीशु के पास जाकर कहा, “हम उसे क्यों नहीं निकाल सके?” यीशु ने उनसे कहा, “तुम्हारे अविश्‍वास के कारण; क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम्हारा विश्‍वास राई के दाने के बराबर भी हो, और तुम इस पहाड़ से कहो, ‘यहाँ से हटकर वहाँ जा’ तो वह हट जाएगा; और तुम्हारे लिए कुछ भी असंभव नहीं होगा।” [यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के नहीं निकलती।] जब वे गलील में एक साथ थे, तो यीशु ने उनसे कहा, “मनुष्य का पुत्र, मनुष्यों के हाथों पकड़वाया जाने वाला है, और वे उसे मार डालेंगे, परंतु वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।” इस पर वे बहुत उदास हो गए। जब वे कफरनहूम में पहुँचे तो मंदिर का शुल्क लेनेवालों ने पतरस के पास आकर पूछा, “क्या तुम्हारा गुरु मंदिर का शुल्क नहीं देता?” उसने कहा “हाँ, देता है।” जब वह घर आया तो यीशु ने पहले ही उससे पूछ लिया, “शमौन, तू क्या सोचता है? इस पृथ्वी के राजा चुंगी या कर किनसे लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?” उसने कहा, “परायों से।” यीशु ने उससे कहा, “तो फिर पुत्र कर-मुक्‍त हैं। परंतु इसलिए कि हम उनके लिए ठोकर का कारण न बनें, तू जाकर झील में काँटा डाल और जो मछली पहले आए उसे ले, और उसका मुँह खोलने पर तुझे एक सिक्‍का मिलेगा; उसे लेकर मेरी और अपनी ओर से उन्हें दे दे।” उस समय शिष्य यीशु के पास आकर पूछने लगे, “स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?” तब उसने एक बच्‍चे को अपने पास बुलाकर उसे उनके बीच में खड़ा किया और कहा: “मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम न फिरो और बच्‍चों के समान न बनो, तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश नहीं कर पाओगे। इसलिए जो कोई अपने आपको इस बच्‍चे के समान नम्र बनाता है, वही स्वर्ग के राज्य में बड़ा है। जो कोई ऐसे किसी एक बच्‍चे को मेरे नाम से ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है। “परंतु जो कोई मुझ पर विश्‍वास करनेवाले इन छोटों में से किसी एक के भी ठोकर का कारण बनता है, उसके लिए अच्छा होता कि एक बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाकर समुद्र की गहराई में डुबा दिया जाता। ठोकरों के कारण इस संसार पर हाय! ठोकरों का आना तो अवश्य है, परंतु हाय उस मनुष्य पर जिसके कारण ठोकर आती है! यदि तेरा हाथ या तेरा पैर तेरे लिए ठोकर का कारण बनता है, तो उसे काटकर अपने से दूर फेंक दे; लूला या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिए इससे अच्छा है कि तू दोनों हाथों या दोनों पैरों के रहते हुए अनंत आग में डाल दिया जाए। यदि तेरी आँख तेरे लिए ठोकर का कारण बनती है तो उसे निकालकर अपने से दूर फेंक दे; काना होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिए इससे अच्छा है कि तू दोनों आँखों के रहते हुए नरक की आग में डाल दिया जाए। “देखो, इन छोटों में से किसी एक को भी तुच्छ न समझना; क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि स्वर्ग में उनके दूत मेरे स्वर्गिक पिता के मुख को निरंतर देखते रहते हैं। [मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को बचाने आया है।] तुम क्या सोचते हो? यदि किसी मनुष्य के पास सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह उन निन्यानवे को पहाड़ों पर छोड़कर उस भटकी हुई को जाकर नहीं ढूँढ़ता? और यदि वह उसे मिल जाए, तो मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह उसके लिए इतना आनंदित होता है जितना उन निन्यानवे के लिए नहीं, जो भटकी नहीं थीं। इस प्रकार तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है, यह इच्छा नहीं कि इन छोटों में से एक भी नाश हो। “यदि तेरा भाई तेरे विरुद्ध पाप करे, तो तू जाकर उसे अकेले में समझा। यदि वह तेरी सुने, तो तूने अपने भाई को पा लिया; परंतु यदि वह न सुने, तो एक या दो जन को अपने साथ ले जा, ताकि हर बात की पुष्‍टि दो या तीन गवाहों के मुँह से हो जाए। फिर भी यदि वह उनकी न माने, तो कलीसिया से कह; और यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो वह तेरे लिए गैरयहूदी और कर वसूलनेवाले के समान ठहरे। “मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो कुछ तुम पृथ्वी पर बाँधोगे वह स्वर्ग में बँध जाएगा, और जो कुछ तुम पृथ्वी पर खोलोगे वह स्वर्ग में खुल जाएगा। मैं तुमसे फिर कहता हूँ कि यदि तुममें से दो जन पृथ्वी पर एक मन होकर किसी विषय पर कुछ भी माँगें, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है, उनके लिए पूरी होगी। क्योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।” तब पतरस ने पास आकर उससे कहा, “प्रभु, मेरा भाई मेरे विरुद्ध पाप करता रहे तो मैं उसे कितनी बार क्षमा करूँ? क्या सात बार तक?” यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे यह नहीं कहता कि सात बार तक, बल्कि सात बार के सत्तर गुने तक। इसलिए स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा। जब वह लेखा लेने लगा तो उसके सामने एक जन को लाया गया जिस पर दस हज़ार तोड़ों का ऋण था। परंतु उसके पास चुकाने के लिए कुछ नहीं था, तो स्वामी ने आदेश दिया कि उसको तथा उसकी पत्‍नी और बच्‍चों और जो कुछ भी उसके पास है, सब बेचकर ऋण चुकाया जाए। तब उस दास ने गिरकर उसे दंडवत् किया और कहने लगा, ‘ धीरज धर, मैं तेरा सब कुछ चुका दूँगा।’ तब उस दास के स्वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका ऋण भी क्षमा कर दिया। परंतु जब वह दास बाहर निकला तो उसे अपना एक संगी दास मिला जो उसके एक सौ दीनार का ऋणी था; तब वह उसे पकड़कर उसका गला दबाने लगा और कहा, ‘तुझ पर जो भी ऋण है, उसे चुका दे।’ इस पर उसका संगी दास गिरकर उससे विनती करने लगा, ‘धीरज धर, मैं तुझे सब चुका दूँगा।’ परंतु वह नहीं माना बल्कि जाकर उसे तब तक के लिए बंदीगृह में डाल दिया जब तक वह ऋण न चुका दे। इसलिए जो कुछ हुआ उसे देखकर उसके संगी दास बहुत उदास हुए; और उन्होंने जाकर अपने स्वामी को जो कुछ हुआ था वह सब बताया। तब उसके स्वामी ने उसे बुलाकर उससे कहा, ‘अरे दुष्‍ट दास, तूने मुझसे विनती की, इसलिए मैंने तेरा वह सारा ऋण क्षमा कर दिया था; जैसे मैंने तुझ पर दया की, क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया नहीं करनी चाहिए थी?’ और उसके स्वामी ने क्रोध में आकर उसे यातना देनेवालों के हाथ तब तक के लिए सौंप दिया जब तक वह उसका सारा ऋण न चुका दे। यदि तुममें से प्रत्येक अपने भाई को मन से क्षमा नहीं करेगा, तो मेरा स्वर्गिक पिता भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करेगा।” ऐसा हुआ कि जब यीशु ये बातें कह चुका, तो वह गलील से विदा होकर यरदन के पार यहूदिया के क्षेत्र में आया। तब बहुत से लोग उसके पीछे चल पड़े, और उसने वहाँ उन्हें स्वस्थ किया। फिर उसे परखने के लिए फरीसी उसके पास आए और कहने लगे, “क्या किसी भी कारण से अपनी पत्‍नी को तलाक देना पुरुष के लिए उचित है?” इस पर उसने कहा, “क्या तुमने नहीं पढ़ा कि सृष्‍टिकर्ता ने आरंभ से उन्हें नर और नारी बनाया और कहा: इस कारण पुरुष अपने पिता और अपनी माता से अलग होकर अपनी पत्‍नी के साथ मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। अतः अब वे दो नहीं बल्कि एक तन हैं। इसलिए जिसे परमेश्‍वर ने एक साथ जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे।” उन्होंने उससे कहा, “फिर मूसा ने त्याग-पत्र देकर उसे तलाक देने की आज्ञा क्यों दी?” यीशु ने उनसे कहा, “तुम्हारे मन की कठोरता के कारण मूसा ने तुम्हें अपनी पत्‍नी को तलाक देने की अनुमति दी, परंतु आरंभ से ऐसा नहीं था। परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि जो कोई व्यभिचार को छोड़ अन्य किसी कारण से अपनी पत्‍नी को तलाक देकर दूसरी से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है ।” उसके शिष्यों ने उससे कहा, “यदि पुरुष का अपनी पत्‍नी के साथ ऐसा संबंध है, तो विवाह न करना भला है।” उसने उनसे कहा, “इस वचन को सब नहीं, पर वे ही ग्रहण कर सकते हैं जिन्हें यह वरदान दिया गया है। क्योंकि कुछ नपुंसक ऐसे हैं जो माता के गर्भ से ऐसे ही जन्मे हैं, और कुछ नपुंसक ऐसे हैं जो मनुष्यों के द्वारा नपुंसक बनाए गए हैं, और कुछ नपुंसक ऐसे हैं जिन्होंने स्वर्ग के राज्य के लिए अपने आपको नपुंसक बनाया है। जो इसे ग्रहण कर सकता है, वह ग्रहण करे।” तब लोग उसके पास बच्‍चों को लाए कि वह उन पर अपने हाथ रखे और प्रार्थना करे; परंतु शिष्यों ने उन्हें डाँटा। तब यीशु ने कहा, “बच्‍चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मत रोको, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है।” और उन पर हाथ रखने के बाद वह वहाँ से चला गया। तब देखो, एक व्यक्‍ति ने उसके पास आकर कहा, “ गुरु, मैं कौन सा उत्तम कार्य करूँ कि अनंत जीवन पाऊँ?” उसने उससे कहा, “तू उत्तम के विषय में मुझसे क्यों पूछता है? उत्तम तो एक ही है। यदि तू जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो आज्ञाओं का पालन कर।” उसने उससे कहा, “कौन सी?” यीशु ने कहा, “यह कि तू हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।” उस युवक ने यीशु से कहा, “मैंने इन सब बातों का पालन किया है; क्या अब भी मुझमें कमी है?” यीशु ने उससे कहा, “यदि तू सिद्ध होना चाहता है, तो जा, अपनी संपत्ति को बेचकर कंगालों को दे दे, फिर तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।” जब उस युवक ने यह बात सुनी तो उदास होकर चला गया, क्योंकि उसके पास बहुत संपत्ति थी। तब यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना कठिन है। मैं तुमसे फिर कहता हूँ कि परमेश्‍वर के राज्य में एक धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के छेद में से निकल जाना अधिक सहज है।” जब शिष्यों ने यह सुना तो वे बहुत आश्‍चर्यचकित होकर कहने लगे, “तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?” यीशु ने उनकी ओर देखकर कहा, “मनुष्यों के लिए तो यह असंभव है, परंतु परमेश्‍वर के लिए सब कुछ संभव है।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “देख, हमने सब कुछ छोड़ दिया और तेरे पीछे हो लिए हैं; फिर हमें क्या मिलेगा?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि उस नई सृष्‍टि में जब मनुष्य का पुत्र अपने महिमामय सिंहासन पर बैठेगा, तो तुम भी जो मेरे पीछे हो लिए हो, बारह सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करोगे। जिस किसी ने मेरे नाम के कारण घरों या भाइयों या बहनों या माता या पिता या बच्‍चों या खेतों को छोड़ा है, उसे सौ गुणा मिलेगा और वह अनंत जीवन का उत्तराधिकारी होगा। परंतु बहुत से लोग जो प्रथम हैं, वे अंतिम होंगे और जो अंतिम हैं, वे प्रथम होंगे। “स्वर्ग का राज्य किसी घर के एक स्वामी के समान है जो भोर को निकला कि अपने अंगूर के बगीचे में मज़दूरों को काम पर लगाए; उसने मज़दूरों के साथ एक दीनार की दिहाड़ी तय करके उन्हें अपने अंगूर के बगीचे में भेजा। फिर लगभग नौ बजे जब वह निकला तो उसने दूसरों को बाज़ार में बेकार खड़े देखा; और उसने उनसे कहा, ‘तुम भी अंगूर के बगीचे में जाओ, और जो उचित होगा, मैं तुम्हें दूँगा।’ और वे चले गए। फिर जब वह लगभग बारह बजे और तीन बजे निकला तो उसने वैसा ही किया। फिर लगभग पाँच बजे जब वह निकला तो उसने और दूसरों को खड़े पाया, और उनसे कहा, ‘तुम यहाँ दिन भर बेकार क्यों खड़े रहे?’ उन्होंने उससे कहा, ‘क्योंकि किसी ने हमें मज़दूरी पर नहीं लगाया।’ उसने उनसे कहा, ‘तुम भी अंगूर के बगीचे में जाओ ।’ संध्या होने पर अंगूर के बगीचे के स्वामी ने अपने प्रबंधक से कहा, ‘मज़दूरों को बुला और अंत में आनेवालों से लेकर पहले आनेवालों तक सब को मज़दूरी दे।’ संध्या के लगभग पाँच बजे आनेवालों को एक-एक दीनार मिला। तब पहले आनेवालों ने सोचा कि हमें अधिक मिलेगा, परंतु उन्हें भी एक-एक दीनार मिला। उसे लेने के बाद वे घर के स्वामी पर कुड़कुड़कर कहने लगे, ‘अंत में आनेवालों ने तो एक ही घंटा कार्य किया, फिर भी तूने उन्हें हमारे बराबर कर दिया जिन्होंने दिन भर के बोझ और गर्मी को सहा।’ इस पर उसने उनमें से एक से कहा, ‘मित्र, मैं तुझ पर अन्याय नहीं कर रहा हूँ; क्या तूने मेरे साथ एक दीनार में दिहाड़ी तय नहीं की थी? अपना दीनार उठा और चला जा; यह मेरी इच्छा है कि मैं अंत में आनेवालों को भी उतना ही दूँ जितना तुझे दिया है। क्या यह उचित नहीं कि मैं अपनी वस्तुओं के साथ जैसा चाहता हूँ वैसा करूँ? क्या मेरा भला होना तेरी आँख में खटकता है?’ इस प्रकार जो अंतिम हैं, वे प्रथम होंगे और जो प्रथम हैं, वे अंतिम होंगे। ” यरूशलेम को जाते हुए यीशु अपने बारह शिष्यों को एकांत में ले गया, और मार्ग में उनसे कहने लगा, “देखो, हम यरूशलेम को जा रहे हैं, और मनुष्य का पुत्र मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों के हाथ सौंप दिया जाएगा, और वे उसे मृत्युदंड के योग्य ठहराएँगे, और उसे गैरयहूदियों के हाथ सौंप देंगे ताकि वे उसका उपहास करें और कोड़े मारें और उसे क्रूस पर चढ़ा दें, परंतु वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।” तब ज़ब्दी के पुत्रों की माता अपने पुत्रों के साथ यीशु के पास आई और प्रणाम करके उससे कुछ माँगने लगी। यीशु ने उससे कहा, “तू क्या चाहती है?” उसने उससे कहा, “वचन दे कि तेरे राज्य में मेरे ये दोनों पुत्र, एक तेरे दाहिनी ओर और दूसरा तेरे बाईं ओर बैठे।” इस पर यीशु ने कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम क्या माँग रहे हो; जो कटोरा मैं पीने वाला हूँ क्या तुम पी सकते हो?” उन्होंने उससे कहा, “हम पी सकते हैं।” उसने उनसे कहा, “तुम मेरा कटोरा पीओगे, परंतु तुम्हें अपने दाहिनी और बाईं ओर बैठाना मेरा काम नहीं; बल्कि यह उनके लिए है जिनके लिए मेरे पिता के द्वारा तैयार किया गया है।” यह सुनकर दसों शिष्य उन दोनों भाइयों से नाराज़ हो गए। परंतु यीशु ने उन्हें अपने पास बुलाकर कहा, “तुम जानते हो कि गैरयहूदियों के प्रधान उन पर प्रभुता करते हैं और जो बड़े हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। तुममें ऐसा न हो, परंतु जो कोई तुममें बड़ा बनना चाहे, उसे तुम्हारा सेवक बनना होगा, और जो कोई तुममें प्रथम होना चाहे, उसे तुम्हारा दास बनना होगा; जैसे कि मनुष्य का पुत्र सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण देने आया।” जब वे यरीहो से निकल रहे थे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल पड़ी। और देखो, मार्ग के किनारे बैठे दो अंधे व्यक्‍ति यह सुनकर कि यीशु वहाँ से जा रहा है, चिल्‍लाकर कहने लगे, “हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।” लोगों ने उन्हें डाँटा कि वे चुप रहें; परंतु वे और ज़ोर से चिल्‍लाकर कहने लगे, “हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।” तब यीशु ने रुककर उन्हें बुलाया और कहा, “तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करूँ?” उन्होंने उससे कहा, “प्रभु, यह कि हमारी आँखें खुल जाएँ।” यीशु ने तरस खाकर उनकी आँखों को छुआ, और वे तुरंत देखने लगे और उसके पीछे हो लिए। जब वे यरूशलेम के निकट पहुँचे और जैतून पहाड़ के पास बैतफगे में आए, तब यीशु ने दो शिष्यों को भेजा और उनसे कहा, “अपने सामने वाले गाँव में जाओ, और वहाँ पहुँचते ही तुम्हें एक गधी बँधी हुई और उसके साथ उसका बच्‍चा मिलेगा; उन्हें खोलकर मेरे पास ले आओ। यदि कोई तुमसे कुछ पूछे, तो कहना, ‘प्रभु को इनकी आवश्यकता है।’ और वह तुरंत उन्हें भेज देगा।” यह इसलिए हुआ कि वह वचन जो भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हो: सिय्योन की बेटी से कहो, “देख तेरा राजा तेरे पास आ रहा है; वह नम्र है और एक गधे पर, अर्थात् लद्दू के बच्‍चे पर बैठा है।” शिष्यों ने जाकर वैसा ही किया जैसा यीशु ने उन्हें निर्देश दिया था और वे गधी और उसके बच्‍चे को ले आए, और उन पर अपने वस्‍त्र डाले और यीशु उन पर बैठ गया। भीड़ में से अधिकांश लोगों ने अपने वस्‍त्र मार्ग में बिछा दिए, और अन्य लोग पेड़ों से डालियाँ काटकर मार्ग में बिछाने लगे। उसके आगे और पीछे चलनेवाले लोग यह नारे लगा रहे थे: दाऊद के पुत्र को होशन्‍ना! धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है; सर्वोच्‍च स्थान में होशन्‍ना। जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया तो सारे नगर में हलचल मच गई और लोग कहने लगे, “यह कौन है?” लोगों ने कहा, “यह गलील के नासरत का भविष्यवक्‍ता यीशु है।” फिर यीशु ने मंदिर-परिसर में जाकर वहाँ सब लेन-देन करनेवालों को बाहर निकाल दिया, तथा सर्राफों की चौकियाँ और कबूतर बेचनेवालों के आसन उलट दिए, और उनसे कहा, “लिखा है: मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा, परंतु तुम इसे डाकुओं का अड्डा बना रहे हो।” तब मंदिर-परिसर में अंधे और लंगड़े लोग उसके पास आए, और उसने उन्हें ठीक कर दिया। परंतु जब मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों ने इन चमत्कारों को देखा जिन्हें यीशु ने किया और यह भी कि बच्‍चे मंदिर-परिसर में “दाऊद के पुत्र को होशन्‍ना” कहकर चिल्‍ला रहे हैं तो क्रोधित हो गए और उन्होंने उससे कहा, “क्या तू सुनता है कि ये क्या कह रहे हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “हाँ, क्या तुमने यह कभी नहीं पढ़ा: तूने बच्‍चों और शिशुओं के मुँह से अपनी स्तुति कराई।” फिर यीशु उन्हें छोड़कर नगर से बाहर बैतनिय्याह को चला गया, और वहाँ रात बिताई। भोर को जब वह नगर में लौट रहा था, तो उसे भूख लगी। मार्ग में अंजीर का एक पेड़ देखकर वह उसके पास गया, और उसमें पत्तियों को छोड़ उसे और कुछ न मिला, तब उसने उस पेड़ से कहा, “अब से तुझमें कभी फल न लगे।” और वह अंजीर का पेड़ तुरंत सूख गया। जब शिष्यों ने यह देखा तो आश्‍चर्य किया और कहने लगे, “यह अंजीर का पेड़ तुरंत कैसे सूख गया?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम विश्‍वास रखो और संदेह न करो, तो तुम न केवल वह करोगे जो अंजीर के पेड़ के साथ किया गया, परंतु यदि इस पहाड़ से भी कहोगे, ‘उखड़ जा और समुद्र में जा गिर,’ तो वह हो जाएगा। जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्‍वास से माँगोगे, वह सब तुम्हें मिल जाएगा।” जब वह मंदिर-परिसर में आकर उपदेश दे रहा था, तो मुख्य याजक और लोगों के धर्मवृद्ध उसके पास आकर कहने लगे, “तू ये कार्य किस अधिकार से करता है? और यह अधिकार तुझे किसने दिया?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैं भी तुमसे एक बात पूछता हूँ, यदि तुम मुझे उसका उत्तर दोगे तो मैं भी तुम्हें बताऊँगा कि किस अधिकार से मैं ये कार्य करता हूँ। यूहन्‍ना का बपतिस्मा कहाँ से था? स्वर्ग की ओर से या मनुष्यों की ओर से?” वे आपस में तर्क-वितर्क करने लगे, “यदि हम कहें ‘स्वर्ग की ओर से’ तो वह हमसे कहेगा, ‘फिर तुमने उसका विश्‍वास क्यों नहीं किया?’ और यदि हम कहें, ‘मनुष्यों की ओर से’, तो हमें भीड़ का डर है, क्योंकि सब यूहन्‍ना को भविष्यवक्‍ता मानते हैं।” तब उन्होंने यीशु को उत्तर दिया, “हम नहीं जानते।” उसने भी उनसे कहा, “तो मैं भी तुम्हें नहीं बताता कि किस अधिकार से ये कार्य करता हूँ। “तुम क्या सोचते हो? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे और उसने पहले के पास जाकर कहा, ‘बेटे, आज अंगूर के बगीचे में जाकर काम कर।’ इस पर उसने कहा, ‘मैं नहीं जाना चाहता,’ परंतु बाद में पछताया और चला गया। फिर उसने दूसरे के पास जाकर वैसा ही कहा। उसने कहा, ‘जी, मैं जाता हूँ,’ परंतु नहीं गया। इन दोनों में से किसने पिता की इच्छा पूरी की?” उन्होंने कहा, “पहले ने।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि कर वसूलनेवाले और वेश्याएँ तुमसे पहले परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। क्योंकि यूहन्‍ना धार्मिकता का मार्ग दिखाने तुम्हारे पास आया, और तुमने उसका विश्‍वास नहीं किया; परंतु कर वसूलनेवालों और वेश्याओं ने उसका विश्‍वास किया; और यह देखने के बाद भी तुम न पछताए कि उसका विश्‍वास करते। “एक और दृष्‍टांत सुनो: एक घर का स्वामी था जिसने अंगूर का बगीचा लगाया, और उसके चारों ओर बाड़ा बनाया; उसने उसमें रसकुंड खोदा और बुर्ज बनाया, फिर उसे किसानों को ठेके पर देकर यात्रा पर चला गया। जब फल का समय निकट आया तो उसने अपने दासों को किसानों के पास अपने फल लेने के लिए भेजा। परंतु किसानों ने उसके दासों को पकड़कर किसी को पीटा, किसी को मार डाला और किसी पर पथराव किया। फिर उसने अन्य दासों को भेजा जो पहले से अधिक थे, परंतु उन्होंने उनके साथ भी वैसा ही किया। अंत में उसने अपने पुत्र को यह सोचकर उनके पास भेजा, ‘वे मेरे पुत्र का सम्मान करेंगे।’ परंतु जब किसानों ने पुत्र को देखा तो आपस में कहा, ‘यह तो उत्तराधिकारी है। आओ, इसे मार डालें और इसका उत्तराधिकार हड़प लें।’ अतः उन्होंने उसे पकड़कर अंगूर के बगीचे से बाहर निकाल दिया और मार डाला। इसलिए जब अंगूर के बगीचे का स्वामी आएगा, तो वह उन किसानों के साथ क्या करेगा?” उन्होंने उससे कहा, “वह उन दुष्‍टों का बुरी तरह से नाश करेगा, और अंगूर के बगीचे का ठेका दूसरे किसानों को दे देगा जो उचित समय पर उसे फल देंगे।” यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुमने कभी पवित्रशास्‍त्र में नहीं पढ़ा: जिस पत्थर को राजमिस्‍त्रियों ने ठुकरा दिया, वही कोने का प्रमुख पत्थर बन गया? यह प्रभु की ओर से हुआ, और हमारी दृष्‍टि में अद्भुत है। “इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्‍वर का राज्य तुमसे ले लिया जाएगा और ऐसी जाति को दे दिया जाएगा जो उसका फल लाए। जो इस पत्थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा; और जिस पर यह गिरेगा, उसे पीस डालेगा।” तब मुख्य याजक और फरीसी उसके दृष्‍टांतों को सुनकर समझ गए कि यीशु उनके विषय में कह रहा है; उन्होंने उसे पकड़ना चाहा, पर भीड़ से डर गए, क्योंकि लोग उसे भविष्यवक्‍ता मानते थे। तब यीशु उनसे फिर दृष्‍टांतों में कहने लगा: “स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने पुत्र का विवाह किया। उसने विवाह में आमंत्रित लोगों को बुलाने के लिए अपने दास भेजे, परंतु उन्होंने आना न चाहा। फिर उसने अन्य दासों को यह कहकर भेजा ‘आमंत्रित लोगों से कहो, “देखो, मैंने अपना भोज तैयार कर लिया है, मेरे बैल और पले हुए पशु काटे जा चुके हैं, और सब कुछ तैयार है; विवाह-भोज में आओ।” ’ परंतु वे ध्यान दिए बिना चले गए, कुछ अपने खेत में और कुछ अपने व्यापार के लिए; और अन्य लोगों ने उसके दासों को पकड़कर अपमानित किया और उन्हें मार डाला। तब राजा क्रोधित हुआ और उसने अपने सैनिकों को भेजकर उन हत्यारों का नाश किया और उनके नगर को जला दिया। तब उसने अपने दासों से कहा, ‘विवाह-भोज तो तैयार है परंतु आमंत्रित लोग योग्य नहीं थे। इसलिए चौराहों पर जाओ, और जितने भी तुम्हें मिलें, उन सब को विवाह-भोज में बुला लाओ।’ अतः उन दासों ने मार्गों पर जाकर जितने भी बुरे या भले मिले, सब को इकट्ठा किया; और विवाह का घर अतिथियों से भर गया। “जब राजा अतिथियों को देखने भीतर आया तो उसने वहाँ एक मनुष्य को देखा जो विवाह का वस्‍त्र पहने हुए नहीं था; राजा ने उससे कहा, ‘मित्र, तू विवाह का वस्‍त्र पहने बिना यहाँ कैसे आया?’ परंतु वह चुप रहा। तब राजा ने सेवकों से कहा, ‘इसके पैर और हाथ बाँधकर इसे बाहर अंधकार में फेंक दो, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।’ क्योंकि बुलाए हुए तो बहुत हैं परंतु चुने हुए थोड़े हैं।” तब फरीसियों ने जाकर सम्मति की कि वे उसे किस प्रकार बातों में फँसाएँ। फिर उन्होंने अपने शिष्यों को हेरोदियों के साथ उसके पास यह कहने को भेजा, “हे गुरु, हम जानते हैं कि तू सच्‍चा है और परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से सिखाता है, और तू किसी की भी परवाह नहीं करता, क्योंकि तू किसी का पक्षपात नहीं करता। इसलिए हमें बता, तू क्या सोचता है; कैसर को कर देना उचित है या नहीं?” परंतु यीशु ने उनकी दुष्‍टता को जानकर कहा, “हे पाखंडियो, मुझे क्यों परखते हो? मुझे कर चुकाने का सिक्‍का दिखाओ।” और वे उसके पास एक दीनार ले आए। उसने उनसे कहा, “यह छाप और लेख किसका है?” उन्होंने उससे कहा, “कैसर का।” तब उसने उनसे कहा, “इसलिए जो कैसर का है, वह कैसर को, और जो परमेश्‍वर का है, वह परमेश्‍वर को दो।” यह सुनकर उन्हें आश्‍चर्य हुआ, और वे उसे छोड़कर चले गए। उसी दिन कुछ सदूकी जो कहते थे कि पुनरुत्थान नहीं होता, उसके पास आए, और उससे पूछा, “गुरु, मूसा ने कहा: यदि कोई निस्संतान मर जाए, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी से विवाह करके अपने भाई के लिए वंश उत्पन्‍न‍ करे। अब हमारे यहाँ सात भाई थे; पहला विवाह करके मर गया, और निस्संतान होने के कारण वह अपनी पत्‍नी को अपने भाई के लिए छोड़ गया; इसी प्रकार दूसरे और तीसरे से लेकर सातवें तक यही होता रहा। इन सब के बाद वह स्‍त्री भी मर गई। अतः पुनरुत्थान के समय वह सातों में से किसकी पत्‍नी होगी? क्योंकि सब ने उससे विवाह किया था।” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “तुम न तो पवित्रशास्‍त्र को समझते हो और न ही परमेश्‍वर के सामर्थ्य को, इसलिए भ्रम में पड़े हो। क्योंकि पुनरुत्थान होने पर वे न तो विवाह करेंगे और न ही विवाह में दिए जाएँगे, बल्कि स्वर्ग में दूतों के समान होंगे। क्या तुमने वह वचन नहीं पढ़ा जो मृतकों के पुनरुत्थान के विषय में परमेश्‍वर ने तुमसे कहा: मैं अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर और याकूब का परमेश्‍वर हूँ। वह मृतकों का नहीं परंतु जीवितों का परमेश्‍वर है।” लोग यह सुनकर उसके उपदेश से आश्‍चर्यचकित हुए। जब फरीसियों ने यह सुना कि उसने सदूकियों का मुँह बंद कर दिया है, तो वे एक साथ इकट्ठे हो गए। उनमें से एक व्यवस्थापक ने उसे परखने के लिए पूछा, “हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” यीशु ने उससे कहा, “तू प्रभु अपने परमेश्‍वर से अपने संपूर्ण मन और अपने संपूर्ण प्राण और अपनी संपूर्ण बुद्धि से प्रेम रखना। यही बड़ी और प्रमुख आज्ञा है। इसी के समान दूसरी यह है, तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना। इन्हीं दो आज्ञाओं पर संपूर्ण व्यवस्था और भविष्यवक्‍ताओं के लेख आधारित हैं।” जब फरीसी इकट्ठे थे, तो यीशु ने उनसे यह प्रश्‍न किया, “ मसीह के विषय में तुम क्या सोचते हो? वह किसका पुत्र है?” उन्होंने उससे कहा, “दाऊद का।” यीशु ने उनसे कहा, “फिर दाऊद आत्मा में होकर उसे ‘प्रभु’ क्यों कहता है? वह कहता है: प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, ‘मेरे दाहिनी ओर बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पैरों तले न कर दूँ।’ “ अतः यदि दाऊद उसे प्रभु कहता है, तो वह उसका पुत्र कैसे हुआ?” कोई भी उसे कुछ उत्तर न दे सका, और न ही उस दिन से किसी ने उससे फिर प्रश्‍न करने का साहस किया। तब यीशु ने भीड़ और अपने शिष्यों से कहा: “शास्‍त्री और फरीसी मूसा के आसन पर बैठे हैं। इसलिए जो भी वे तुमसे कहें, वह सब करना और मानना, परंतु उनके जैसे कार्य मत करना; क्योंकि वे कहते तो हैं परंतु करते नहीं। वे भारी और असहनीय बोझ बाँधकर मनुष्यों के कंधों पर रखते हैं, परंतु स्वयं उन्हें अपनी उँगली से हिलाना भी नहीं चाहते। वे अपने सब कार्य लोगों को दिखाने के लिए करते हैं; इसलिए वे अपने तावीज़ों को चौड़ा करते हैं और अपने वस्‍त्र की झालरों को बढ़ाते हैं, उन्हें भोजों में मुख्य स्थान और आराधनालयों में मुख्य आसन और बाज़ारों में नमस्कार और लोगों से ‘रब्बी’ कहलाना प्रिय लगता है। परंतु तुम रब्बी न कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही गुरु है, और तुम सब भाई हो। तुम पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, क्योंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्वर्ग में है। न ही अगुवे कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही अगुवा है, अर्थात् मसीह। परंतु तुममें जो बड़ा है, वही तुम्हारा सेवक होगा। जो कोई अपने आपको ऊँचा उठाएगा वह नीचा किया जाएगा, और जो अपने आपको दीन करेगा वह ऊँचा उठाया जाएगा। “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बंद कर देते हो; और न तो तुम स्वयं उसमें प्रवेश करते हो और न ही उन्हें जो प्रवेश कर रहे हैं, प्रवेश करने देते हो। [हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम विधवाओं के घरों को हड़पते हो; और दिखावे के लिए लंबी-लंबी प्रार्थना करते हो, इसलिए तुम कठोर दंड पाओगे।] “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम एक व्यक्‍ति को अपने मत में लाने के लिए जल और थल में फिरते हो, और जब वह आ जाता है तो तुम उसे अपने से दुगुना नारकीय बना देते हो। “हे अंधे मार्गदर्शको, तुम पर हाय! तुम जो कहते हो, ‘जो कोई मंदिर की शपथ खाए, तो उससे कुछ नहीं; परंतु जो कोई मंदिर के सोने की शपथ खाए, तो वह उसमें बँध जाता है।’ हे मूर्खो और अंधो, बड़ा क्या है, सोना या सोने को पवित्र करनेवाला मंदिर? फिर तुम कहते हो, ‘जो कोई वेदी की शपथ खाए, तो उससे कुछ नहीं; परंतु जो कोई उसके ऊपर की भेंट की शपथ खाए, तो वह उसमें बँध जाता है।’ हे मूर्खो और अंधो, बड़ा क्या है, भेंट या भेंट को पवित्र करनेवाली वेदी? अतः जो वेदी की शपथ खाता है, वह उसकी और जो कुछ उस पर है उसकी भी शपथ खाता है; और जो मंदिर की शपथ खाता है, वह उसकी और उसमें वास करनेवाले की भी शपथ खाता है; और जो स्वर्ग की शपथ खाता है, वह परमेश्‍वर के सिंहासन और उस पर बैठनेवाले की भी शपथ खाता है। “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम पुदीने, सौंफ और जीरे का दशमांश देते हो, परंतु न्याय, दया और विश्‍वास जैसी व्यवस्था की गंभीर बातों को छोड़ देते हो; चाहिए था कि इन्हें करते और उन्हें भी न छोड़ते। हे अंधे मार्गदर्शको, तुम मच्छर को तो छान देते हो पर ऊँट को निगल जाते हो। “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम कटोरे और थाली को बाहर से माँजते हो, परंतु वे भीतर लूट और असंयम से भरे हैं। हे अंधे फरीसी! पहले कटोरे को भीतर से तो माँज ताकि वह बाहर से भी स्वच्छ हो जाए। “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम पुती हुई कब्रों के समान हो, जो बाहर से तो सुंदर दिखाई देती हैं, परंतु भीतर मरे हुओं की हड्डियों और हर प्रकार की अशुद्धता से भरी हैं। इसी प्रकार तुम भी मनुष्यों को बाहर से धर्मी दिखाई देते हो, परंतु भीतर पाखंड और अधर्म से भरे हो। “हे पाखंडी शास्‍त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम भविष्यवक्‍ताओं की कब्रों को बनाते और धर्मियों के स्मारकों को सजाते हो, और कहते हो, ‘यदि हम अपने पूर्वजों के दिनों में होते, तो उनके साथ भविष्यवक्‍ताओं की हत्या में साझेदार न होते।’ इस प्रकार तुम स्वयं साक्षी देते हो कि तुम भविष्यवक्‍ताओं के हत्यारों की संतान हो। अतः तुम अपने पूर्वजों के कार्य को पूरा करो। हे साँपो, हे करैत के बच्‍चो! तुम नरक के दंड से कैसे बचोगे? इसलिए देखो, मैं भविष्यवक्‍ताओं, बुद्धिमानों और शास्‍त्रियों को तुम्हारे पास भेजता हूँ; उनमें से कितनों को तुम मार डालोगे और क्रूस पर चढ़ाओगे, और कितनों को अपने आराधनालयों में कोड़े मारोगे और नगर-नगर सताते फिरोगे। इस कारण उन धर्मियों का लहू जो पृथ्वी पर बहाया गया, अर्थात् धर्मी हाबिल के लहू से लेकर बिरिक्याह के पुत्र जकरयाह के लहू तक, जिसे तुमने मंदिर और वेदी के बीच में मार डाला था, वह सब तुम्हारे ऊपर आ पड़ेगा। मैं तुमसे सच कहता हूँ, ये सब बातें इसी पीढ़ी पर आ पड़ेंगी। “हे यरूशलेम, हे यरूशलेम! तू जो भविष्यवक्‍ताओं को मार डालती है और जो तेरे पास भेजे गए, उन पर पथराव करती है। मैंने कितनी बार चाहा कि जैसे मुरगी अपने बच्‍चों को पंखों तले इकट्ठा करती है, वैसे ही तेरे बच्‍चों को इकट्ठा करूँ, परंतु तूने न चाहा। देखो, तुम्हारे लिए तुम्हारा घर उजाड़ छोड़ा जाता है। क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि अब से जब तक तुम यह न कहोगे: ‘धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है,’ तब तक मुझे कभी न देखोगे।” मंदिर-परिसर से निकलकर जब यीशु जा रहा था, तो उसके शिष्य उसे मंदिर के भवन दिखाने के लिए उसके पास आए। इस पर उसने उनसे कहा, “तुम ये सब देख रहे हो न? मैं तुमसे सच कहता हूँ, यहाँ एक पत्थर भी पत्थर पर टिका न रहेगा जो ढाया न जाएगा।” जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा हुआ था तो शिष्यों ने एकांत में उसके पास आकर पूछा, “हमें बता कि ये बातें कब होंगी, और तेरे आगमन और इस जगत के अंत का क्या चिह्‍न होगा?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया: “सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाए। क्योंकि बहुत से लोग मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं मसीह हूँ,’ और बहुतों को भरमाएँगे। तुम युद्धों की आवाज़ और युद्धों की चर्चाएँ सुनोगे; देखो, घबरा मत जाना; क्योंकि इन बातों का होना अवश्य है, परंतु यह अंत नहीं है। जाति, जाति के विरुद्ध और राज्य, राज्य के विरुद्ध उठ खड़े होंगे; स्थान-स्थान पर अकाल पड़ेंगे और भूकंप आएँगे। ये सब बातें पीड़ाओं का आरंभ होंगी। “तब वे तुम्हें कष्‍ट देने के लिए पकड़वाएँगे और तुम्हें मार डालेंगे, और मेरे नाम के कारण सब जातियाँ तुमसे घृणा करेंगी। तब बहुत से लोग ठोकर खाएँगे और एक दूसरे को पकड़वाएँगे और एक दूसरे से घृणा करेंगे; बहुत से झूठे भविष्यवक्‍ता उठ खड़े होंगे और बहुतों को भरमाएँगे; और अधर्म बढ़ जाने के कारण बहुतों का प्रेम ठंडा हो जाएगा। परंतु जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। फिर राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा कि सब जातियों के लिए साक्षी हो और तब अंत आ जाएगा। “इसलिए जब तुम दानिय्येल भविष्यवक्‍ता के द्वारा बताए गए उस उजाड़नेवाले घृणित पात्र को पवित्र स्थान में खड़े हुए देखो (पाठक समझ ले), तो जो यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जाएँ, जो छत पर हो, वह अपने घर से सामान लेने के लिए नीचे न उतरे, और जो खेत में हो, वह अपना वस्‍त्र लेने के लिए पीछे न लौटे। परंतु हाय उन पर जो उन दिनों में गर्भवती होंगी और जो दूध पिलाती होंगी। प्रार्थना करो कि तुम्हें शीतकाल में या सब्त के दिन भागना न पड़े; क्योंकि उस समय ऐसा भारी क्लेश होगा जैसा जगत के आरंभ से लेकर अब तक न तो हुआ है और न कभी होगा। यदि उन दिनों को कम न किया गया होता तो कोई भी प्राणी न बचता; परंतु चुने हुओं के कारण उन दिनों को कम किया जाएगा। उस समय यदि कोई तुमसे कहे, ‘देखो, मसीह यहाँ है’ या ‘वहाँ है’ तो विश्‍वास न करना; क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यवक्‍ता उठ खड़े होंगे और बड़े-बड़े चिह्‍न और अद्भुत कार्य दिखाएँगे कि यदि संभव हो तो चुने हुओं को भी भरमा दें; देखो, मैंने पहले ही तुम्हें बता दिया है। इसलिए यदि वे तुमसे कहें, ‘देखो, वह जंगल में है,’ तो बाहर न निकलना; ‘देखो, वह भीतरी कमरों में है,’ तो उनका विश्‍वास न करना; क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आगमन होगा। जहाँ शव हो, वहाँ गिद्ध इकट्ठे होंगे। “परंतु उन दिनों के क्लेश के तुरंत बाद सूर्य अंधकारमय हो जाएगा और चंद्रमा अपना प्रकाश नहीं देगा, आकाश से तारे गिर जाएँगे, और आकाश की शक्‍तियाँ हिलाई जाएँगी। तब आकाश में मनुष्य के पुत्र का चिह्‍न दिखाई देगा, और उस समय पृथ्वी के समस्त कुल छाती पीटेंगे और मनुष्य के पुत्र को सामर्थ्य और बड़ी महिमा के साथ आकाश के बादलों पर आते हुए देखेंगे; और वह तुरही के ऊँचे स्वर के साथ अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे आकाश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक, चारों दिशाओं से उसके चुने हुओं को इकट्ठा करेंगे। “अंजीर के पेड़ के इस दृष्‍टांत से सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती है और पत्तियाँ निकलने लगती हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्मकाल निकट है। उसी प्रकार जब तुम भी इन सब बातों को देखो, तो जान लेना कि वह निकट है बल्कि द्वार पर ही है। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो जाएँ, तब तक इस पीढ़ी का अंत कदापि नहीं होगा। आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परंतु मेरे वचन कदापि न टलेंगे। “परंतु उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न ही पुत्र, परंतु केवल पिता। जैसे नूह के दिनों में हुआ, वैसे ही मनुष्य के पुत्र के आगमन पर होगा। क्योंकि जैसे जलप्रलय से पहले के उन दिनों में जब तक नूह ने जहाज़ में प्रवेश नहीं किया था, लोग खाते-पीते, विवाह करते और विवाह कराते रहे; और उन्हें तब तक कुछ समझ नहीं आया जब तक जलप्रलय आकर सब कुछ बहा न ले गया; वैसे ही मनुष्य के पुत्र के आगमन पर भी होगा। उस समय खेत में दो लोग होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। दो स्‍त्रियाँ चक्‍की पीसती होंगी, एक ले ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी। इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। परंतु यह जान लो कि यदि घर का स्वामी जानता कि चोर किस पहर आएगा, तो वह जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने नहीं देता। इसलिए तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं होगे, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा। “फिर ऐसा विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान दास कौन है जिसे उसके स्वामी ने अपने नौकरों के ऊपर नियुक्‍त किया कि उन्हें उचित समय पर भोजन दे? धन्य है वह दास जिसे उसका स्वामी आकर ऐसा ही करते पाए। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकारी नियुक्‍त करेगा। परंतु यदि वह दास दुष्‍ट हो और अपने मन में कहे, ‘मेरे स्वामी के आने में देर है।’ और वह अपने संगी दासों को पीटने लगे, और पियक्‍‍कड़ों के साथ खाए-पीए, तो उस दास का स्वामी ऐसे दिन आएगा जब वह उसकी प्रतीक्षा नहीं करता होगा और ऐसी घड़ी जिसे वह नहीं जानता होगा; और उसे वह कठोर दंड देगा और उसका भाग पाखंडियों के साथ ठहराएगा, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।” “स्वर्ग का राज्य उन दस कुँवारियों के समान होगा जो अपनी-अपनी मशालें लेकर दूल्हे से मिलने के लिए निकलीं। उनमें पाँच मूर्ख और पाँच बुद्धिमान थीं। मूर्खों ने अपनी मशालों को तो लिया पर अपने साथ तेल नहीं लिया; परंतु बुद्धिमानों ने अपनी मशालों के साथ कुप्पियों में तेल भी लिया। जब दूल्हे के आने में देर हो रही थी, तो वे सब ऊँघने लगीं और सो गईं। आधी रात को पुकार हुई, ‘देखो दूल्हा आ रहा है, उससे मिलने चलो।’ तब उन सब कुँवारियों ने उठकर अपनी-अपनी मशालें तैयार कीं। तब मूर्खों ने बुद्धिमानों से कहा, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दे दो, क्योंकि हमारी मशालें बुझ रही हैं।’ इस पर बुद्धिमानों ने कहा, ‘नहीं, यह हमारे और तुम्हारे लिए पर्याप्‍त नहीं होगा; अच्छा होगा कि तुम बेचनेवालों के पास जाकर अपने लिए खरीद लो।’ जब वे खरीदने जा रही थीं कि दूल्हा आ पहुँचा, और जो कुँवारियाँ तैयार थीं, वे उसके साथ विवाह के घर में चली गईं और द्वार बंद कर दिया गया। इसके बाद वे अन्य कुँवारियाँ भी आईं और कहने लगीं, ‘हे स्वामी, हे स्वामी! हमारे लिए द्वार खोल दे।’ इस पर उसने कहा, ‘मैं तुमसे सच कहता हूँ, मैं तुम्हें नहीं जानता।’ इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम न तो उस दिन को और न ही उस घड़ी को जानते हो । “फिर, यह यात्रा पर जानेवाले उस मनुष्य के समान है जिसने अपने दासों को बुलाकर अपनी संपत्ति उन्हें सौंप दी, और उसने एक को पाँच तोड़े, दूसरे को दो और तीसरे को एक, अर्थात् प्रत्येक को उसकी क्षमता के अनुसार दिया और यात्रा पर चला गया। जिसे पाँच तोड़े मिले थे उसने तुरंत जाकर उनसे व्यापार किया तथा पाँच तोड़े और कमाए; इसी प्रकार जिसे दो मिले थे उसने भी दो और कमाए। परंतु जिसे एक मिला था उसने जाकर मिट्टी खोदी और अपने स्वामी का धन वहाँ छिपा दिया। “बहुत समय के बाद उन दासों का स्वामी आया और उनसे लेखा लेने लगा। जिसे पाँच तोड़े मिले थे वह पाँच तोड़े और लेकर उसके पास आया और कहने लगा, ‘स्वामी, तूने मुझे पाँच तोड़े सौंपे थे; देख, मैंने पाँच तोड़े और कमाए।’ उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘शाबाश, भले और विश्‍वासयोग्य दास! तू थोड़े में विश्‍वासयोग्य रहा; मैं तुझे बहुत वस्तुओं पर अधिकारी ठहराऊँगा। अपने स्वामी के आनंद में सहभागी हो।’ जिसे दो तोड़े मिले थे, उसने भी आकर कहा, ‘स्वामी, तूने मुझे दो तोड़े सौंपे थे; देख, मैंने दो तोड़े और कमाए।’ उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘शाबाश, भले और विश्‍वासयोग्य दास! तू थोड़े में विश्‍वासयोग्य रहा; मैं तुझे बहुत वस्तुओं पर अधिकारी ठहराऊँगा। अपने स्वामी के आनंद में सहभागी हो।’ जिसे एक तोड़ा मिला था उसने भी आकर कहा, ‘स्वामी, मैं तुझे जानता था कि तू कठोर मनुष्य है; तू जहाँ नहीं बोता वहाँ से काटता है और जहाँ नहीं बिखेरता वहाँ से बटोरता है। इसलिए मैं डर गया और जाकर तेरा तोड़ा मिट्टी में छिपा दिया। देख, जो तेरा है, वह यह रहा।’ इस पर उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘दुष्‍ट और आलसी दास! तो क्या तू जानता था कि जहाँ मैं नहीं बोता वहाँ से काटता हूँ और जहाँ मैं नहीं बिखेरता वहाँ से बटोरता हूँ? फिर तो तुझे मेरा धन साहूकारों के पास जमा करना चाहिए था, और मैं आकर अपना धन ब्याज समेत ले लेता। इसलिए वह तोड़ा भी इससे ले लो और जिसके पास दस तोड़े हैं, उसे दे दो; क्योंकि जिसके पास है उसे और दिया जाएगा और उसके पास बहुत हो जाएगा; परंतु जिसके पास नहीं है उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। इस निकम्मे दास को बाहर अंधकार में फेंक दो, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।’ “जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा और सब स्वर्गदूत उसके साथ होंगे, तब वह अपने महिमामय सिंहासन पर बैठेगा; और सब जातियाँ उसके सामने इकट्ठी की जाएँगी, और जैसे चरवाहा भेड़ों को बकरियों से अलग करता है, वैसे ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। वह भेड़ों को अपने दाहिनी ओर, और बकरियों को अपनी बाईं ओर खड़ा करेगा। तब राजा अपने दाहिनी ओर वालों से कहेगा, ‘हे मेरे पिता के धन्य लोगो, आओ! जगत की उत्पत्ति से तुम्हारे लिए जो राज्य तैयार किया गया है, उसके उत्तराधिकारी बनो; क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे खाने को दिया, मैं प्यासा था और तुमने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था और तुमने मुझे घर में बुलाया, मैं निर्वस्‍त्र था और तुमने मुझे वस्‍त्र पहनाए, मैं बीमार था और तुमने मेरी सुधि ली, मैं बंदीगृह में था और तुम मुझसे मिलने आए।’ तब धर्मी उससे कहेंगे, ‘हे प्रभु, हमने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया, या प्यासा देखा और पानी पिलाया, और कब तुझे परदेशी देखा और घर में बुलाया, या निर्वस्‍त्र देखा और वस्‍त्र पहनाए, और कब हमने तुझे बीमार या बंदीगृह में देखा और तुझसे मिलने आए?’ तब राजा उन्हें उत्तर देगा, ‘मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुमने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे साथ किया।’ “तब वह बाईं ओर वालों से भी कहेगा, ‘हे शापित लोगो, मेरे सामने से उस अनंत आग में चले जाओ जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गई है; क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था और तुमने मुझे पानी नहीं पिलाया, मैं परदेशी था और तुमने मुझे घर में नहीं बुलाया, मैं निर्वस्‍त्र था और तुमने मुझे वस्‍त्र नहीं पहनाए, मैं बीमार और बंदीगृह में था और तुमने मेरी सुधि नहीं ली।’ तब वे भी यह कहेंगे, ‘हे प्रभु, हमने कब तुझे भूखा या प्यासा या परदेशी या निर्वस्‍त्र या बीमार या बंदीगृह में देखा, और तेरी सेवा नहीं की?’ तब वह उन्हें उत्तर देगा, ‘मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो तुमने इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया।’ ये लोग अनंत दंड भोगेंगे, परंतु धर्मी अनंत जीवन में प्रवेश करेंगे।” ऐसा हुआ कि जब यीशु ये सब बातें कह चुका, तो उसने अपने शिष्यों से कहा, “तुम जानते हो कि दो दिन के बाद फसह का पर्व है, और मनुष्य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाया जाएगा।” उस समय मुख्य याजक और लोगों के धर्मवृद्ध, काइफा नामक महायाजक के आँगन में इकट्ठे हुए, और वे मिलकर यीशु को छल से पकड़ने और मार डालने की योजना बनाने लगे; परंतु उन्होंने कहा, “पर्व के समय नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों के बीच में उपद्रव हो जाए।” जब यीशु बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर पर था, तो एक स्‍त्री संगमरमर के पात्र में बहुमूल्य इत्र लेकर उसके पास आई और जब वह भोजन करने बैठा था तो उसके सिर पर उंडेल दिया। यह देखकर शिष्य नाराज़ हुए और कहने लगे, “यह बरबादी किस लिए? इसे ऊँचे दाम में बेचकर कंगालों को पैसा दिया जा सकता था।” यह जानकर यीशु ने उनसे कहा, “तुम इस स्‍त्री को क्यों तंग कर रहे हो? उसने तो मेरे लिए भला कार्य किया है; क्योंकि कंगाल तो सदा तुम्हारे साथ रहते हैं, परंतु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा; इसने मेरी देह पर यह इत्र उंडेलकर मेरे गाड़े जाने के लिए तैयारी की है। मैं तुमसे सच कहता हूँ, समस्त संसार में जहाँ कहीं यह सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ इस स्‍त्री ने जो किया उसका वर्णन भी उसकी स्मृति में किया जाएगा।” तब उन बारहों में से एक ने, जो यहूदा इस्करियोती कहलाता था, मुख्य याजकों के पास जाकर कहा, “यदि मैं उसे तुम्हारे हाथों पकड़वा दूँ तो तुम मुझे क्या दोगे?” तब उन्होंने उसे चाँदी के तीस सिक्‍के तौलकर दिए। उस समय से वह उसे पकड़वाने का अवसर ढूँढ़ने लगा। अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, शिष्य यीशु के पास आकर कहने लगे, “तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिए फसह का भोज खाने की तैयारी करें?” उसने कहा, “नगर में अमुक व्यक्‍ति के पास जाओ और उससे कहो कि गुरु कहता है, ‘मेरा समय निकट है; मैं अपने शिष्यों के साथ तेरे यहाँ फसह का पर्व मनाऊँगा।’ ” अतः जैसा यीशु ने उन्हें निर्देश दिया था, शिष्यों ने वैसा ही किया और फसह का भोज तैयार किया। संध्या होने पर वह बारहों के साथ भोजन करने बैठा। जब वे भोजन कर रहे थे तो उसने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि तुममें से एक मुझे पकड़वाएगा।” उन पर बड़ी उदासी छा गई और वे एक-एक करके उससे पूछने लगे, “प्रभु, क्या वह मैं हूँ?” इस पर उसने कहा, “जिसने मेरे साथ थाली में हाथ डाला है, वही मुझे पकड़वाएगा। मनुष्य का पुत्र तो जाता ही है जैसा उसके विषय में लिखा है, परंतु हाय उस मनुष्य पर जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है। यदि उस मनुष्य का जन्म ही न होता तो उसके लिए अच्छा था।” इस पर उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने कहा, “हे रब्बी, क्या वह मैं हूँ?” यीशु ने उससे कहा, “तूने कह दिया।” जब वे भोजन कर रहे थे तो यीशु ने रोटी ली और आशिष माँगकर तोड़ी और शिष्यों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद दिया और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है जो बहुतों के पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है। मैं तुमसे कहता हूँ, अब से मैं अंगूर का यह रस उस दिन तक कभी न पीऊँगा जब तक मैं उसे अपने पिता के राज्य में तुम्हारे साथ नया न पीऊँ।” फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ की ओर चले गए। तब यीशु ने उनसे कहा, “इस रात को तुम सब मेरे कारण ठोकर खाओगे, क्योंकि लिखा है: मैं चरवाहे को मारूँगा और झुंड की भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी। “परंतु अपने जी उठने के बाद मैं तुमसे पहले गलील को जाऊँगा।” इस पर पतरस ने उससे कहा, “चाहे सब तेरे कारण ठोकर खाएँ, पर मैं कभी ठोकर न खाऊँगा।” यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ कि इसी रात को मुरगे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इनकार करेगा।” पतरस ने उससे कहा, “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी पड़े, फिर भी मैं तेरा इनकार कभी न करूँगा।” सब शिष्यों ने भी यही कहा। तब यीशु उनके साथ गतसमनी नामक स्थान पर आया, और उसने शिष्यों से कहा, “जब तक मैं वहाँ जाकर प्रार्थना करता हूँ, यहीं बैठे रहो।” वह पतरस और ज़ब्दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। तब उसने उनसे कहा, “मेरा मन बहुत उदास है, यहाँ तक कि मैं मरने पर हूँ; तुम यहीं ठहरो और मेरे साथ जागते रहो।” फिर थोड़ा आगे बढ़कर वह मुँह के बल गिरा और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि संभव हो तो यह कटोरा मुझसे टल जाए; फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, बल्कि जैसा तू चाहता है, वैसा ही हो।” फिर वह शिष्यों के पास आया और उन्हें सोते हुए पाया, उसने पतरस से कहा, “क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो; आत्मा तो तैयार है परंतु देह दुर्बल है।” फिर उसने दूसरी बार जाकर प्रार्थना की, “हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना टल नहीं सकता, तो तेरी इच्छा पूरी हो।” और उसने आकर उन्हें फिर सोते हुए पाया, क्योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं। वह उन्हें फिर छोड़कर चला गया, और उन्हीं शब्दों में उसने तीसरी बार प्रार्थना की। तब उसने शिष्यों के पास आकर उनसे कहा, “क्या तुम अब तक सोते और विश्राम करते हो? देखो, वह घड़ी आ पहुँची है और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथों पकड़वाया जाता है। उठो, हम चलें! देखो मुझे पकड़वानेवाला निकट आ पहुँचा है।” अभी यीशु यह कह ही रहा था कि देखो, यहूदा जो बारहों में से एक था, आया, और उसके साथ मुख्य याजकों और लोगों के धर्मवृद्धों की ओर से आई एक भीड़ थी जिनके पास तलवारें और लाठियाँ थीं। उसे पकड़वानेवाले ने उन्हें यह संकेत दिया था, “जिसे मैं चूमूँ, वह वही है, उसे पकड़ लेना।” उसने तुरंत यीशु के पास आकर कहा, “रब्बी, नमस्कार!” और उसे चूमा। यीशु ने उससे कहा, “मित्र, तू जिस काम के लिए आया है, वह कर!” तब उन्होंने पास आकर यीशु पर हाथ डाला और उसे पकड़ लिया। और देखो, यीशु के साथियों में से एक ने हाथ बढ़ाकर अपनी तलवार खींची और महायाजक के दास पर चलाकर उसका कान उड़ा दिया। तब यीशु ने उससे कहा, “अपनी तलवार म्यान में वापस रख, क्योंकि वे सब जो तलवार चलाते हैं, तलवार से नाश होंगे। या क्या तू सोचता है कि मैं अपने पिता से विनती नहीं कर सकता? वह स्वर्गदूतों की बारह से अधिक पलटनों को मेरे लिए अभी उपस्थित कर देगा। फिर पवित्रशास्‍त्र के वे लेख कि ऐसा होना अवश्य है, कैसे पूरे होंगे?” उस समय यीशु ने भीड़ से कहा, “क्या तुम डाकू समझकर तलवारों और लाठियों के साथ मुझे पकड़ने आए हो? मैं तो प्रतिदिन मंदिर में बैठकर उपदेश देता था, तब तो तुमने मुझे नहीं पकड़ा। परंतु यह सब इसलिए हुआ है कि भविष्यवक्‍ताओं के लेख पूरे हों।” तब उसके सब शिष्य उसे छोड़कर भाग गए। फिर यीशु के पकड़नेवाले उसे महायाजक काइफा के पास ले गए, जहाँ शास्‍त्री और धर्मवृद्ध इकट्ठे थे। परंतु पतरस दूरी बनाए रखकर उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन तक गया, और परिणाम देखने के लिए वह भीतर प्रवेश करके सिपाहियों के साथ बैठ गया। मुख्य याजक और संपूर्ण महासभा यीशु के विरुद्ध झूठी गवाही ढूँढ़ने लगी ताकि उसे मार डालें। बहुत से झूठे गवाह आए, पर उन्हें कुछ न मिला। अंत में दो मनुष्यों ने आकर कहा, “इसने कहा था, ‘मैं परमेश्‍वर के मंदिर को ढाकर उसे तीन दिन में बना सकता हूँ।’ ” तब महायाजक ने खड़े होकर उससे कहा, “क्या तेरे पास कोई उत्तर नहीं? ये लोग तेरे विरुद्ध क्या गवाही दे रहे हैं?” परंतु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा, “मैं तुझे जीवित परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ कि यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है तो हमें बता।” यीशु ने उससे कहा, “तूने कह दिया; परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्‍तिमान के दाहिनी ओर बैठा और आकाश के बादलों पर आता हुआ देखोगे।” इस पर महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, “इसने परमेश्‍वर की निंदा की है; अब हमें और गवाहों की क्या आवश्यकता है? देखो, तुमने अभी यह निंदा सुनी है; तुम क्या सोचते हो?” उन्होंने उत्तर दिया, “यह मृत्युदंड के योग्य है।” तब उन्होंने उसके मुँह पर थूका और उसे घूँसे मारे, और थप्पड़ मारकर कहने लगे, “हे मसीह! भविष्यवाणी करके हमें बता, तुझे किसने मारा है?” पतरस बाहर आँगन में बैठा था कि एक दासी उसके पास आकर कहने लगी, “तू भी तो गलील के यीशु के साथ था।” परंतु उसने सब के सामने यह कहकर इनकार किया, “मैं नहीं जानता कि तू क्या कह रही है।” जब वह बाहर निकलकर फाटक की ओर गया तो दूसरी दासी ने उसे देखा और वहाँ जो लोग थे, उनसे कहा, “यह तो यीशु नासरी के साथ था।” परंतु उसने शपथ खाकर फिर से इनकार किया, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” थोड़ी देर बाद वहाँ जो खड़े थे, उन्होंने पास आकर पतरस से कहा, “सचमुच तू भी तो उन्हीं में से है, क्योंकि तेरी बोली स्पष्‍ट बता रही है।” तब वह अपने को कोसने और शपथ खाने लगा, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” और तुरंत मुरगे ने बाँग दी। तब पतरस को यीशु की कही वह बात स्मरण आई, “मुरगे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इनकार करेगा।” और वह बाहर जाकर फूट फूटकर रोया। जब भोर हुआ, तो सब मुख्य याजकों और लोगों के धर्मवृद्धों ने यीशु के विरुद्ध सम्मति की, कि उसे मार डालें; और वे उसे बाँधकर ले गए तथा राज्यपाल पिलातुस के हाथ सौंप दिया। उसे पकड़वानेवाले यहूदा ने जब यह देखा कि यीशु दोषी ठहराया गया है, तो पछताया और चाँदी के उन तीस सिक्‍कों को मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों को लौटाकर कहा, “मैंने उस निर्दोष लहू का सौदा करके पाप किया है।” परंतु उन्होंने कहा, “हमें इससे क्या? तू ही जान।” तब वह चाँदी के उन सिक्‍कों को मंदिर में फेंककर चला गया, और जाकर अपने आपको फाँसी लगा ली। मुख्य याजकों ने चाँदी के उन सिक्‍कों को लेकर कहा, “इन्हें मंदिर के भंडार में रखना उचित नहीं, क्योंकि यह लहू का मूल्य है।” अतः उन्होंने सम्मति करके उन सिक्‍कों से परदेशियों के कब्रिस्तान के लिए कुम्हार का खेत खरीद लिया। इस कारण वह खेत आज तक लहू का खेत कहलाता है। तब वह वचन जो यिर्मयाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा कहा गया था, पूरा हुआ, “उन्होंने चाँदी के तीस सिक्‍के, अर्थात् उस ठहराए हुए मूल्य को लिया, जिसे इस्राएल की संतानों ने ठहराया था, और उन्हें कुम्हार के खेत के लिए दे दिया, जैसे प्रभु ने मुझे निर्देश दिया था।” अब यीशु को राज्यपाल के सामने खड़ा किया गया; और राज्यपाल ने उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने कहा, “तू आप ही कह रहा है।” मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों द्वारा उस पर आरोप लगाए जाने पर भी उसने कोई उत्तर नहीं दिया। तब पिलातुस ने उससे कहा, “क्या तू सुन नहीं रहा, ये तेरे विरुद्ध कितनी गवाहियाँ दे रहे हैं?” परंतु उसने उत्तर में एक शब्द भी नहीं कहा; इस पर राज्यपाल को बड़ा आश्‍चर्य हुआ। राज्यपाल की यह रीति थी कि पर्व के समय किसी एक बंदी को, जिसे लोग चाहते थे, छोड़ देता था। उस समय उनके पास बरअब्बा नामक एक कुख्यात बंदी था। अतः जब वे इकट्ठे हुए तो पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम किसे चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए छोड़ दूँ, बरअब्बा को या यीशु को जो मसीह कहलाता है?” क्योंकि वह जानता था कि उन्होंने उसे ईर्ष्या के कारण पकड़वाया है। जब वह न्यायासन पर बैठा था, तो उसकी पत्‍नी ने उसके पास यह कहला भेजा, “तू उस धर्मी जन के साथ कुछ न कर, क्योंकि आज उसके कारण मैंने स्वप्न में बहुत दुःख उठाया है।” परंतु मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों ने लोगों को उकसाया कि वे बरअब्बा को माँग लें और यीशु का नाश कराएँ। इस पर राज्यपाल ने उनसे पूछा, “इन दोनों में से तुम किसे चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए छोड़ दूँ?” उन्होंने कहा, “बरअब्बा को!” पिलातुस ने उनसे पूछा, “फिर मैं उस यीशु का, जो मसीह कहलाता है, क्या करूँ?” सब ने कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ाया जाए!” उसने कहा, “क्यों, उसने क्या बुराई की है?” परंतु वे और भी अधिक चिल्‍लाकर कहने लगे, “उसे क्रूस पर चढ़ाया जाए!” जब पिलातुस ने यह देखा कि मुझसे कुछ बन नहीं पड़ता बल्कि और भी अधिक कोलाहल मच रहा है, तो उसने पानी लेकर भीड़ के सामने अपने हाथ धोए और कहा, “मैं इस मनुष्य के लहू से निर्दोष हूँ; तुम ही जानो।” इस पर सब लोगों ने उत्तर दिया, “इसका लहू हम पर और हमारी संतानों पर हो।” तब उसने बरअब्बा को उनके लिए छोड़ दिया और यीशु को कोड़े लगवाकर सौंप दिया कि क्रूस पर चढ़ाया जाए। फिर राज्यपाल के सैनिक यीशु को राजभवन के भीतर ले गए और उसके पास पूरे सैन्य दल को इकट्ठा किया। तब उन्होंने उसके वस्‍त्र उतारकर उसे गहरे लाल रंग का चोगा पहनाया, और काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा तथा उसके दाहिने हाथ में सरकंडा थमाया, और उसके सामने घुटने टेककर उसका उपहास करते हुए कहने लगे, “यहूदियों के राजा, तेरी जय हो!” फिर उन्होंने उस पर थूका और सरकंडा लेकर उसके सिर पर मारने लगे। जब वे उसका उपहास कर चुके तो उन्होंने उसका चोगा उतारकर उसी के वस्‍त्र उसे पहना दिए, और फिर उसे क्रूस पर चढ़ाने के लिए ले चले। बाहर निकलने पर उन्हें शमौन नामक एक कुरेनी मनुष्य मिला। उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा कि वह यीशु का क्रूस उठाकर ले चले। जब वे गुलगुता नामक उस स्थान पर पहुँचे जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है, तो उन्होंने उसको पित्त मिला हुआ दाखरस पीने के लिए दिया; परंतु उसने चखकर पीना न चाहा। तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ा दिया और पर्ची डालकर उसके वस्‍त्रों को आपस में बाँट लिया, और वहाँ बैठकर उसका पहरा देने लगे। उन्होंने उसका दोषपत्र उसके सिर के ऊपर लगाया, जिस पर लिखा था: “यह यहूदियों का राजा यीशु है।” उस समय उसके साथ दो डाकुओं को भी क्रूस पर चढ़ाया गया, एक दाहिनी ओर और दूसरा बाईं ओर। वहाँ से आने-जानेवाले अपने सिर हिलाते हुए उसकी निंदा कर रहे थे, और कह रहे थे, “मंदिर को ढाकर तीन दिन में बनानेवाले, अपने आपको बचा, यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है तो क्रूस से नीचे उतर आ!” इसी प्रकार मुख्य याजक भी शास्‍त्रियों और धर्मवृद्धों के साथ उपहास करते हुए कह रहे थे, “इसने दूसरों को बचाया, पर अपने आपको नहीं बचा सकता; यह तो इस्राएल का राजा है, अब क्रूस से नीचे उतर आए, तब हम इस पर विश्‍वास कर लेंगे। इसने परमेश्‍वर पर भरोसा रखा है, अब यदि परमेश्‍वर चाहता है तो इसे बचा ले; क्योंकि इसने कहा था कि मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ।” इसी प्रकार डाकू भी, जो उसके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए थे, उसकी निंदा कर रहे थे। दिन के बारह बजे से लेकर तीन बजे तक सारे देश पर अंधकार छाया रहा। लगभग तीन बजे यीशु ने ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहा, “एली, एली, लमा शबक्‍तनी?” जिसका अर्थ है, “हे मेरे परमेश्‍वर, हे मेरे परमेश्‍वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?” तब वहाँ खड़े कुछ लोग यह सुनकर कहने लगे, “वह एलिय्याह को बुला रहा है।” उनमें से एक तुरंत दौड़ा और स्पंज लेकर सिरके से भरा, तथा सरकंडे पर लगाकर उसे पीने के लिए दिया। परंतु अन्य कहने लगे, “ठहर जा, देखते हैं कि एलिय्याह उसे बचाने आता है या नहीं।” तब यीशु ने फिर ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाकर अपना प्राण त्याग दिया। और देखो, मंदिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया, और पृथ्वी हिल गई और चट्टानें तड़क गईं; तथा कब्रें खुल गईं और सोए हुए बहुत से पवित्र लोगों के शरीर जिलाए गए, और यीशु के पुनरुत्थान के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए और बहुतों को दिखाई दिए। जब शतपति और उसके साथ यीशु का पहरा देनेवालों ने भूकंप और उन घटनाओं को देखा तो अत्यंत डर गए और कहने लगे, “सचमुच, यह परमेश्‍वर का पुत्र था।” वहाँ बहुत सी स्‍त्रियाँ जो यीशु की सेवा करती हुई गलील से उसके पीछे आई थीं, दूर से यह देख रही थीं; उनमें मरियम मगदलीनी, याकूब और यूसुफ की माता मरियम तथा ज़ब्दी के पुत्रों की माता थीं। जब संध्या हुई तो यूसुफ नामक अरिमतिया का एक धनी मनुष्य, जो स्वयं भी यीशु का शिष्य था, आया। उसने पिलातुस के पास जाकर यीशु का शव माँगा। तब पिलातुस ने शव दिए जाने की आज्ञा दी। यूसुफ ने शव लेकर उसे मलमल की स्वच्छ चादर में लपेटा, और उसे अपनी नई कब्र में रख दिया जो उसने चट्टान में खुदवाई थी, फिर वह कब्र के द्वार पर एक बड़ा पत्थर लुढ़काकर चला गया। मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम वहाँ कब्र के सामने बैठी थीं। अगले दिन, जो तैयारी के दिन के बाद का दिन था, मुख्य याजक और फरीसी पिलातुस के पास इकट्ठे हुए, और कहा, “महोदय, हमें स्मरण है कि उस भरमानेवाले ने अपने जीते जी कहा था, ‘मैं तीन दिन के बाद जी उठूँगा’। इसलिए तीसरे दिन तक कब्र की रखवाली करवाने का आदेश दे, कहीं ऐसा न हो कि उसके शिष्य आकर उसे चुरा ले जाएँ और लोगों से कहें, ‘वह मृतकों में से जी उठा है।’ और यह धोखा पहले से भी बुरा होगा।” पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम्हारे पास पहरेदार हैं; जाओ, जैसा उचित समझो, उसकी रखवाली करो।” तब उन्होंने जाकर पत्थर पर मुहर लगाई और पहरेदार बैठाकर कब्र की रखवाली की। सब्त के दिन के बाद, सप्‍ताह के पहले दिन भोर होते ही मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम कब्र को देखने आईं। और देखो, एक बड़ा भूकंप हुआ। क्योंकि प्रभु का एक दूत स्वर्ग से नीचे उतर आया और पास आकर पत्थर को लुढ़का दिया और उस पर बैठ गया। उसका रूप बिजली के समान था और उसका वस्‍त्र हिम के समान श्‍वेत था। उसके भय से पहरेदार काँप उठे और मृतकों के समान हो गए। तब स्वर्गदूत ने स्‍त्रियों से कहा, “डरो मत, मैं जानता हूँ कि तुम यीशु को, जिसे क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूँढ़ रही हो; वह यहाँ नहीं है, क्योंकि जैसा उसने कहा था, वह जी उठा है; आओ! इस स्थान को देखो जहाँ उसे रखा गया था। शीघ्र जाकर उसके शिष्यों को बताओ कि वह मृतकों में से जी उठा है, और देखो, वह तुमसे पहले गलील को जा रहा है, तुम उससे वहीं मिलोगे। देखो, मैंने तुमसे कह दिया है।” तब वे भय और बड़े आनंद के साथ शीघ्र कब्र से लौटीं और उसके शिष्यों को समाचार देने के लिए दौड़ीं। और देखो, यीशु उनसे मिला और कहा, “आनंदित रहो।” उन्होंने पास आकर उसके पैर पकड़ लिए और उसे दंडवत् किया। तब यीशु ने उनसे कहा, “डरो मत! जाओ, मेरे भाइयों को बताओ कि वे गलील को चले जाएँ, वहीं वे मुझे देखेंगे।” जब वे जा ही रही थीं कि देखो, कुछ पहरेदारों ने नगर में आकर जो कुछ हुआ था वह सब मुख्य याजकों को बता दिया। तब उन्होंने धर्मवृद्धों के साथ इकट्ठे होकर सम्मति की और उन सैनिकों को बहुत से रुपए दिए और कहा, “तुम यह कहना कि रात को जब हम सो रहे थे, तो उसके शिष्यों ने आकर उसे चुरा लिया। और यदि यह बात राज्यपाल तक पहुँचेगी, तो हम उसे समझाकर तुम्हें संकट से बचा लेंगे।” तब उन्होंने रुपए लेकर वैसा ही किया, जैसा उन्हें सिखाया गया था; और यह बात यहूदियों में आज तक प्रचलित है। फिर ग्यारह शिष्य गलील के उस पहाड़ पर गए जहाँ आने के लिए यीशु ने उन्हें कहा था, और उन्होंने उसे देखकर दंडवत् किया, परंतु कुछ लोगों ने संदेह किया। तब यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग में और पृथ्वी पर, सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ, और सब जातियों के लोगों को शिष्य बनाओ, और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें उन सब बातों का पालन करना सिखाओ, जिनकी आज्ञा मैंने तुम्हें दी है; और देखो, मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे साथ हूँ।” परमेश्‍वर के पुत्र यीशु मसीह के सुसमाचार का आरंभ। जैसा यशायाह भविष्यवक्‍ता ने लिखा है: देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेज रहा हूँ, जो तेरा मार्ग तैयार करेगा। एक आवाज़ जंगल में पुकार रही है, “प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसके पथ सीधे करो।” उसी प्रकार यूहन्‍ना आया, जो जंगल में बपतिस्मा देता और पापों की क्षमा के लिए पश्‍चात्ताप के बपतिस्मा का प्रचार करता था। सारे यहूदिया क्षेत्र तथा यरूशलेम के सब निवासी निकलकर उसके पास आने, और अपने पापों का अंगीकार करते हुए उससे यरदन नदी में बपतिस्मा लेने लगे। यूहन्‍ना ऊँट के बालों का वस्‍त्र पहनता और अपनी कमर पर चमड़े का पट्टा बाँधता तथा टिड्डियाँ और जंगली शहद खाया करता था। वह यह कहकर प्रचार करता था, “मेरे बाद जो आ रहा है वह मुझसे अधिक सामर्थी है; मैं झुककर उसके जूतों के फ़ीते खोलने के भी योग्य नहीं हूँ। मैंने तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा।” उन दिनों में ऐसा हुआ कि यीशु ने गलील के नासरत से आकर यरदन नदी में यूहन्‍ना से बपतिस्मा लिया। पानी में से ऊपर आते ही उसने आकाश को खुलते और आत्मा को कबूतर के समान अपने ऊपर उतरते देखा। तब आकाश से एक आवाज़ आई, “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझसे अति प्रसन्‍न हूँ।” तब आत्मा तुरंत उसे जंगल में ले गया। जंगल में शैतान के द्वारा चालीस दिन तक उसकी परीक्षा होती रही। वह वन-पशुओं के साथ रहा और स्वर्गदूत उसकी सेवा करते थे। यूहन्‍ना के बंदी बना लिए जाने के बाद, यीशु परमेश्‍वर के राज्य का सुसमाचार प्रचार करता हुआ गलील में आया और कहने लगा, “समय पूरा हुआ है और परमेश्‍वर का राज्य निकट आ गया है; पश्‍चात्ताप करो और सुसमाचार पर विश्‍वास करो।” जब वह गलील की झील के किनारे जा रहा था तो उसने शमौन और उसके भाई अंद्रियास को झील में जाल डालते हुए देखा क्योंकि वे मछुए थे। यीशु ने उनसे कहा, “मेरे पीछे आओ; मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुए बनाऊँगा।” तब वे तुरंत जालों को छोड़कर उसके पीछे चल दिए। थोड़ा आगे जाकर उसने ज़ब्दी के पुत्र याकूब, और उसके भाई यूहन्‍ना को नाव में जालों को सुधारते हुए देखा। उसने तुरंत उनको बुलाया; और वे अपने पिता ज़ब्दी को मज़दूरों के साथ नाव में छोड़कर उसके पीछे चल दिए। फिर वे कफरनहूम में आए और तुरंत सब्त के दिन यीशु आराधनालय में जाकर उपदेश देने लगा। लोग उसके उपदेश से आश्‍चर्यचकित थे क्योंकि वह उन्हें शास्‍त्रियों के समान नहीं बल्कि एक अधिकारी के समान उपदेश दे रहा था। उसी समय उनके आराधनालय में एक मनुष्य था जिसमें अशुद्ध आत्मा थी और वह चिल्‍लाकर कहने लगा, “हे यीशु नासरी, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं जानता हूँ कि तू कौन है: परमेश्‍वर का पवित्र जन।” परंतु यीशु ने उसे डाँटकर कहा, “चुप रह और उसमें से निकल जा!” तब वह अशुद्ध आत्मा उसे मरोड़कर ऊँची आवाज़ से चीखती हुई उसमें से निकल गई। सब लोग अचंभित हुए और आपस में विचार-विमर्श करते हुए कहने लगे, “यह क्या है? अधिकार के साथ एक नई शिक्षा! वह अशुद्ध आत्माओं को भी आज्ञा देता है और वे उसकी आज्ञा मानती हैं!” फिर उसकी चर्चा गलील के आस-पास सभी क्षेत्रों में चारों ओर तुरंत फैल गई। आराधनालय से बाहर निकलते ही वह याकूब और यूहन्‍ना के साथ शमौन और अंद्रियास के घर गया। वहाँ शमौन की सास ज्वर में पड़ी हुई थी, और उन्होंने तुरंत उसके विषय में उसे बताया। तब उसने पास जाकर उसको हाथ पकड़कर उठाया; और उसका ज्वर उतर गया तथा वह उनकी सेवा करने लगी। संध्या के समय जब सूर्यास्त हो गया तो लोग सब बीमारों और दुष्‍टात्माग्रस्त लोगों को उसके पास लाने लगे और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हो गया। उसने बहुतों को जो भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ प्रकार की बीमारियों से पीड़ित थे, स्वस्थ किया और बहुत सी दुष्‍टात्माओं को निकाला; और उसने दुष्‍टात्माओं को बोलने नहीं दिया क्योंकि वे उसे जानती थीं। बड़े भोर को अंधेरे में ही वह उठकर बाहर निकल गया और किसी एकांत स्थान पर जाकर वहाँ प्रार्थना करने लगा। तब शमौन और उसके साथी उसे ढूँढ़ने लगे। जब वह मिल गया तो उन्होंने उससे कहा, “सब लोग तुझे ढूँढ़ रहे हैं।” उसने उनसे कहा, “आओ, हम और कहीं आस-पास की बस्तियों में चलें कि मैं वहाँ भी प्रचार करूँ क्योंकि मैं इसी लिए आया हूँ।” फिर वह सारे गलील क्षेत्र में जाकर उनके आराधनालयों में प्रचार करता और दुष्‍टात्माओं को निकालता रहा। एक कोढ़ी यीशु के पास आया और घुटने टेककर उससे विनती करने लगा, “यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” यीशु ने उस पर तरस खाकर अपना हाथ बढ़ाया, उसे छुआ और उससे कहा, “मैं चाहता हूँ; शुद्ध हो जा!” और उसका कोढ़ तुरंत दूर हो गया और वह शुद्ध हो गया। तब उसने उसे कड़ी चेतावनी देकर तुरंत भेज दिया, और उससे कहा, “देख, तू किसी से कुछ न कहना बल्कि जा, अपने आपको याजक को दिखा और अपने शुद्ध होने के विषय में वह भेंट चढ़ा जिसकी आज्ञा मूसा ने दी है, ताकि उनके लिए साक्षी हो।” परंतु बाहर जाकर वह इस बात का इतना अधिक प्रचार करने और फैलाने लगा कि यीशु नगर में खुलेआम प्रवेश नहीं कर सका और बाहर निर्जन स्थानों पर रहा; फिर भी लोग चारों ओर से उसके पास आते रहे। कुछ दिनों के बाद जब यीशु कफरनहूम में वापस आया तो यह सुना गया कि वह घर में है। फिर इतने लोग इकट्ठे हो गए कि द्वार पर भी कोई स्थान नहीं रहा और वह उन्हें वचन सुना रहा था। तभी लोग एक लकवे के रोगी को चार लोगों से उठवाकर उसके पास ले आए। परंतु जब वे भीड़ के कारण उसे यीशु के पास नहीं पहुँचा सके तो उन्होंने उस छत को, जिसके नीचे यीशु था, खोल दिया और खुली जगह बनाकर उस बिछौने को, जिस पर वह लकवे का रोगी पड़ा था, नीचे उतार दिया। तब यीशु ने उनके विश्‍वास को देखकर उस लकवे के रोगी से कहा, “पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।” परंतु वहाँ कुछ शास्‍त्री बैठे हुए थे और वे अपने-अपने मन में विचार करने लगे, “यह ऐसा क्यों बोल रहा है? यह तो परमेश्‍वर की निंदा कर रहा है! परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?” तब यीशु ने तुरंत अपने आत्मा में जानकर कि वे अपने मन में इस प्रकार विचार कर रहे हैं, उनसे कहा, “तुम अपने-अपने मन में क्यों यह विचार कर रहे हो? सहज क्या है? लकवे के रोगी से यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना, ‘उठ, अपना बिछौना उठा और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है,” उसने उस लकवे के रोगी से कहा, “मैं तुझसे कहता हूँ, उठ, अपना बिछौना उठा और अपने घर चला जा!” वह उठा और तुरंत बिछौना उठाकर सब के सामने से बाहर निकल गया। इससे वे सब चकित हुए और परमेश्‍वर की महिमा करते हुए कहने लगे, “हमने ऐसा कभी नहीं देखा।” फिर यीशु निकलकर झील के किनारे गया। सारी भीड़ उसके पास आ गई और वह उन्हें उपदेश देने लगा। जाते समय उसने हलफई के पुत्र लेवी को कर-चौकी पर बैठे देखा और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” वह उठकर उसके पीछे हो लिया। फिर ऐसा हुआ कि यीशु उसके घर भोजन करने बैठा, और बहुत से कर वसूलनेवाले और पापी भी यीशु और उसके शिष्यों के साथ भोजन करने लगे; क्योंकि वे बहुत थे जो उसके पीछे चल रहे थे। जब उन फरीसियों ने जो शास्‍त्री थे देखा कि वह पापियों और कर वसूलनेवालों के साथ भोजन कर रहा है तो उसके शिष्यों से कहने लगे, “वह कर वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों खाता-पीता है?” यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “वैद्य की आवश्यकता स्वस्थ लोगों को नहीं बल्कि बीमारों को है। मैं धर्मियों को नहीं बल्कि पापियों को बुलाने आया हूँ।” यूहन्‍ना के शिष्य और फरीसी उपवास करते थे। अतः वे आकर यीशु से पूछने लगे, “यूहन्‍ना के शिष्य और फरीसियों के शिष्य तो उपवास करते हैं, परंतु तेरे शिष्य उपवास क्यों नहीं करते?” तब यीशु ने उनसे कहा, “जब दूल्हा बरातियों के साथ है, तो क्या वे उपवास कर सकते हैं? जब तक दूल्हा उनके साथ है, वे उपवास नहीं कर सकते। परंतु वे दिन आएँगे जब दूल्हा उनसे अलग कर दिया जाएगा, तब उस समय वे उपवास करेंगे। “पुराने वस्‍त्र पर कोई नए कपड़े का पैवंद नहीं लगाता, नहीं तो वह नया पैवंद पुराने वस्‍त्र में से कुछ खींच लेगा और वह पहले से भी अधिक फट जाएगा। फिर कोई पुरानी मशकों में नया दाखरस भरकर नहीं रखता, नहीं तो दाखरस मशकों को फाड़ देगा और दाखरस और मशकें दोनों नष्‍ट हो जाएँगी। इसलिए नया दाखरस नई मशकों में रखा जाता है।” फिर ऐसा हुआ कि सब्त के दिन यीशु खेतों में से होकर जा रहा था तो मार्ग में चलते हुए उसके शिष्य बालें तोड़ने लगे। तब फरीसियों ने उससे कहा, “देख, जो कार्य सब्त के दिन करना उचित नहीं, उसे वे क्यों करते हैं?” उसने उनसे कहा, “क्या तुमने कभी नहीं पढ़ा कि जब दाऊद अपने साथियों के साथ था और उसे आवश्यकता पड़ी और भूख लगी तो उसने क्या किया? महायाजक अबियातार के दिनों में वह किस प्रकार परमेश्‍वर के भवन में गया और भेंट की रोटियाँ खाईं जिन्हें खाना याजकों को छोड़ और किसी के लिए उचित नहीं था और उसने अपने साथियों को भी दीं?” फिर उसने उनसे कहा, “सब्त का दिन मनुष्य के लिए बना है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिए। इसलिए मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी प्रभु है।” यीशु फिर आराधनालय में गया। वहाँ एक मनुष्य था जिसका हाथ सूख गया था। फरीसी उसकी ताक में थे कि देखें, वह सब्त के दिन उसको स्वस्थ करेगा या नहीं, जिससे वे उस पर दोष लगा सकें। उसने उस सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा, “उठ, बीच में खड़ा हो जा!” फिर उसने उनसे कहा, “क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण बचाना या मारना?” परंतु वे चुप रहे। उसने उन सब को क्रोध से देखा और उनके मन की कठोरता पर दुःखी होकर उस मनुष्य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा!” उसने बढ़ाया और उसका हाथ फिर से ठीक हो गया। तब फरीसी तुरंत बाहर जाकर हेरोदियों के साथ यीशु के विरुद्ध सम्मति करने लगे कि किस प्रकार उसका नाश करें? फिर यीशु अपने शिष्यों के साथ झील की ओर चला गया और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल पड़ी। तब यहूदिया यरूशलेम, इदूमिया, यरदन के पार तथा सूर और सैदा के आस-पास से एक बड़ी भीड़ उसके सब कार्यों के विषय में सुनकर उसके पास आई। तब उसने अपने शिष्यों से कहा कि भीड़ के कारण उसके लिए एक नाव तैयार रखें ताकि भीड़ उसे दबा न दे; क्योंकि उसने बहुतों को स्वस्थ किया था, इसलिए जितने भी बीमार थे, वे सभी उसे छूने के लिए उस पर गिरे जाते थे। जब भी अशुद्ध आत्माएँ उसे देखतीं तो उसके सामने गिर पड़ती थीं और यह कहते हुए चिल्‍लाती थीं, “तू परमेश्‍वर का पुत्र है।” और वह उन्हें कड़ी चेतावनी देता था कि वे उसे प्रकट न करें। फिर यीशु पहाड़ पर चढ़ गया और जिन्हें वह चाहता था, उन्हें अपने पास बुलाया और वे उसके पास आए। तब उसने बारह को नियुक्‍त किया [जिनको उसने प्रेरित नाम भी दिया] कि वे उसके साथ रहें और वह उन्हें प्रचार के लिए भेजे और वे दुष्‍टात्माओं को निकालने का अधिकार रखें। उसने इन बारहों को नियुक्‍त किया: शमौन जिसका नाम उसने पतरस रखा, ज़ब्दी का पुत्र याकूब और याकूब का भाई यूहन्‍ना, जिनका नाम उसने “बुअनरगिस” अर्थात् गर्जन-पुत्र रखा, अंद्रियास, फिलिप्पुस, बरतुल्मै, मत्ती, थोमा, हलफई का पुत्र याकूब, तद्दै, शमौन कनानी, और यहूदा इस्करियोती जिसने उसको पकड़वा भी दिया। तब यीशु घर में आया और भीड़ फिर से एकत्रित हो गई जिससे कि वे रोटी भी नहीं खा सके। जब उसके परिवार वालों ने यह सुना तो वे उसे पकड़ने के लिए निकले, क्योंकि वे कहते थे कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। शास्‍त्री जो यरूशलेम से आए हुए थे, कहते थे, “उसमें बालज़बूल समाया है,” और “वह दुष्‍टात्माओं के प्रधान के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता है।” तब यीशु उन्हें पास बुलाकर उनसे दृष्‍टांतों में कहने लगा: “शैतान कैसे शैतान को निकाल सकता है? यदि किसी राज्य में फूट पड़ जाए तो उस राज्य का स्थिर रहना संभव नहीं और यदि किसी घर में फूट पड़ जाए तो उस घर का स्थिर रहना संभव नहीं। उसी प्रकार यदि शैतान अपने ही विरुद्ध उठ खड़ा हो और उसमें फूट पड़ जाए तो उसका स्थिर रहना संभव नहीं, बल्कि उसका अंत ही हो जाता है। कोई भी किसी शक्‍तिशाली मनुष्य के घर में प्रवेश करके उसका सामान नहीं लूट सकता जब तक कि वह पहले उस शक्‍तिशाली मनुष्य को बाँध न ले। वह तभी उसके घर को लूट सकता है। “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि मनुष्यों की संतान के पाप और निंदा जो भी वे करते हैं, सब क्षमा किए जाएँगे। परंतु जो कोई पवित्र आत्मा की निंदा करता है, उसे सदा काल तक कभी भी क्षमा नहीं मिलेगी बल्कि वह अनंत पाप का दोषी है।” उसने यह इसलिए कहा क्योंकि वे कह रहे थे, “उसमें अशुद्ध आत्मा है।” तब उसकी माता और उसके भाई आए, और उन्होंने बाहर खड़े होकर उसे बुलावा भेजा। भीड़ उसके चारों ओर बैठी थी, और उन्होंने उससे कहा, “देख, तेरी माता, तेरे भाई और तेरी बहनें तुझे बाहर ढूँढ़ रही हैं।” इस पर उसने उनसे कहा, “कौन है मेरी माता और मेरे भाई?” अपने चारों ओर बैठे हुए लोगों की ओर देखकर उसने कहा, “देखो, ये हैं मेरी माता और मेरे भाई। क्योंकि जो कोई परमेश्‍वर की इच्छा पर चलता है, वही मेरा भाई, मेरी बहन और माता है।” यीशु फिर झील के किनारे उपदेश देने लगा; और उसके पास इतनी बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई कि वह झील में नाव पर चढ़कर बैठ गया और सारी भीड़ झील के किनारे भूमि पर ही रही। फिर वह उन्हें दृष्‍टांतों में बहुत सी बातें सिखाने लगा; और उनसे अपने उपदेश में कहा: “सुनो! देखो, एक बीज बोनेवाला बीज बोने निकला। बोते समय ऐसा हुआ कि कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे; और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ पथरीली भूमि पर गिरे जहाँ अधिक मिट्टी नहीं मिली, और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे तुरंत उग आए। जब सूर्य उदय हुआ तो वे झुलस गए और जड़ न पकड़ने के कारण सूख गए। फिर कुछ बीज कँटीली झाड़ियों में गिरे और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा दिया और वे फल नहीं लाए। परंतु कुछ अच्छी भूमि पर गिरे; और जब वे उगे और बढ़े तो फलते गए, और कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा फल लाया।” तब उसने कहा, “जिसके पास सुनने के लिए कान हैं, वह सुन ले।” जब वह अकेला था, तो उसके साथी उन बारहों के साथ उससे इन दृष्‍टांतों के विषय में पूछने लगे। तब उसने उनसे कहा, “तुम्हें तो परमेश्‍वर के राज्य का भेद दिया गया है परंतु बाहरवालों के लिए सब बातें दृष्‍टांतों में होती हैं, जिससे कि वे देखते हुए देखें परंतु उन्हें न सूझे, और सुनते हुए सुनें परंतु न समझें; कहीं ऐसा न हो कि वे फिरें और क्षमा किए जाएँ।” तब उसने उनसे कहा: “क्या तुम इस दृष्‍टांत को नहीं समझे? तो फिर सब दृष्‍टांतों को कैसे समझोगे? बोनेवाला वचन बोता है। जो मार्ग के किनारे के हैं जहाँ वचन बोया जाता है, वे लोग हैं कि जब वे सुनते हैं तो शैतान तुरंत आकर उनमें बोए गए वचन को उठा ले जाता है। इसी प्रकार जो पथरीली भूमि पर बोए जाते हैं, वे लोग हैं कि जब वे वचन को सुनते हैं तो तुरंत उसे आनंद से ग्रहण कर लेते हैं, परंतु अपने आपमें जड़ नहीं पकड़ पाते और थोड़े ही समय के लिए रहते हैं। फिर जब वचन के कारण कष्‍ट या सताव आता है तो वे तुरंत गिर जाते हैं । कुछ जो कँटीली झाड़ियों में बोए गए हैं, वे लोग हैं जो वचन तो सुनते हैं, परंतु संसार की चिंताएँ, धन का धोखा और अन्य वस्तुओं की लालसाएँ आकर वचन को दबा देती हैं और वे बिना फल के ही रह जाते हैं। परंतु जो अच्छी भूमि पर बोए गए हैं, वे लोग हैं जो वचन सुनकर ग्रहण करते हैं और फल लाते हैं—कोई तीस गुणा तो कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा।” यीशु ने उनसे कहा, “क्या दीपक को इसलिए लाया जाता है कि उसे टोकरी या खाट के नीचे रखा जाए? क्या इसलिए नहीं कि उसे दीवट पर रखा जाए? क्योंकि ऐसा कुछ छिपा नहीं जो प्रकट न किया जाए; और न ही कोई भेद है जो प्रकट न हो। यदि किसी के पास सुनने के लिए कान हों, तो वह सुन ले।” तब उसने उनसे कहा, “सावधान रहो कि क्या सुनते हो। तुम जिस नाप से नापते हो उसी से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा और तुम्हें और अधिक दिया जाएगा; क्योंकि जिसके पास है, उसे दिया जाएगा; और जिसके पास नहीं है, उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा।” फिर उसने कहा, “परमेश्‍वर का राज्य ऐसा है जैसे कोई मनुष्य भूमि पर बीज डाले, और वह सोए या जागे, रात और दिन, वह बीज कैसे अंकुरित होकर बढ़ता है, वह स्वयं नहीं जानता। भूमि अपने आप उपज लाती है: पहले पत्ती, फिर बाल और फिर बाल में पूरा दाना। जब फसल पक जाती है तो वह तुरंत हँसिया लगाता है क्योंकि कटनी आ पहुँची है।” तब उसने कहा: “परमेश्‍वर के राज्य की तुलना हम किससे करें या इसके लिए हम कौन सा दृष्‍टांत दें? वह राई के दाने के समान है। जब यह भूमि में बोया जाता है तो पृथ्वी के सब बीजों में सब से छोटा होता है, और जब उसे बो दिया जाता है तो वह उगकर सब पौधों से बड़ा हो जाता है और उसमें ऐसी बड़ी डालियाँ निकल आती हैं कि आकाश के पक्षी भी उसकी छाया में बसेरा कर सकते हैं।” वह उन्हें ऐसे बहुत से दृष्‍टांतों के द्वारा उनकी समझ के अनुसार वचन सुनाता था। वह उन्हें बिना दृष्‍टांत के कुछ भी नहीं बताता था परंतु अपने शिष्यों को एकांत में सब कुछ समझाता था। उसी दिन जब संध्या हुई तो यीशु ने उनसे कहा, “आओ, हम उस पार चलें।” इसलिए वे भीड़ को छोड़कर, जैसा वह नाव में था, वैसा ही उसे अपने साथ ले गए, और उसके साथ दूसरी नावें भी थीं। तब एक बड़ी आँधी आई और लहरें नाव से टकराने लगीं, यहाँ तक कि अब नाव में पानी भरने लगा। परंतु वह नाव के पिछले भाग में तकिया लगाकर सो रहा था। उन्होंने उसे जगाया और उससे कहा, “हे गुरु, क्या तुझे चिंता नहीं कि हम नाश हो रहे हैं?” उसने उठकर आँधी को डाँटा और झील से कहा, “शांत हो जा! थम जा!” और आँधी थम गई और बड़ी शांति छा गई। तब उसने उनसे कहा, “तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अभी भी विश्‍वास नहीं?” वे अत्यंत भयभीत हो गए और आपस में कहने लगे, “आखिर यह है कौन कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?” फिर वे झील के उस पार गिरासेनियों के क्षेत्र में आए। जब यीशु नाव से उतरा तो तुरंत एक मनुष्य जिसमें अशुद्ध आत्मा थी, कब्रों के बाहर उससे मिला। वह कब्रों में रहा करता था। कोई उसे ज़ंजीरों से भी नहीं बाँध सकता था, क्योंकि उसे बार-बार बेड़ियों और ज़ंजीरों से बाँधा जाता था परंतु वह ज़ंजीरों को टुकड़े-टुकड़े कर देता और बेड़ियों को भी तोड़ डालता था और कोई भी उसे वश में नहीं कर सकता था। वह निरंतर रात और दिन कब्रों और पहाड़ों में चिल्‍लाता रहता और स्वयं को पत्थरों से घायल करता रहता था। वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा और उसके चरणों पर गिर पड़ा और ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाते हुए कहा, “हे परमप्रधान परमेश्‍वर के पुत्र यीशु, तुझसे मेरा क्या लेना-देना? मैं तुझे परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ कि मुझे यातना न दे।” क्योंकि यीशु उससे कह रहा था, “हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल जा!” फिर यीशु ने उससे पूछा, “तेरा नाम क्या है?” उसने उससे कहा, “मेरा नाम सेना है क्योंकि हम बहुत हैं।” तब वह उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा कि उन्हें उस क्षेत्र से बाहर न भेजे। वहीं पहाड़ के पास सूअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था। उन्होंने उससे यह कहकर विनती की, “हमें इन सूअरों में भेज दे कि हम उनमें समा जाएँ।” अतः उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर अशुद्ध आत्माएँ उसमें से निकलकर सूअरों में समा गईं, और वह झुंड जो लगभग दो हज़ार का था, ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और झील में जा डूबा। उनके चरवाहे भाग गए और नगर तथा गाँवों में जाकर समाचार सुनाया; तब लोग देखने आए कि क्या हुआ। फिर वे यीशु के पास आए और उस दुष्‍टात्माग्रस्त को, जिसमें सेना थी, वस्‍त्र पहने तथा सचेत बैठे हुए देखा, और वे डर गए। तब देखनेवालों ने उन्हें सब कुछ बता दिया कि उस दुष्‍टात्माग्रस्त व्यक्‍ति और सूअरों के साथ क्या हुआ था। फिर वे लोग यीशु से अपने क्षेत्र से चले जाने की विनती करने लगे। जब यीशु नाव पर चढ़ने लगा तो वह व्यक्‍ति जो दुष्‍टात्माग्रस्त था उससे विनती करने लगा कि वह उसे अपने साथ रहने दे। परंतु यीशु ने उसे आने न दिया बल्कि उससे कहा, “तू अपने लोगों के पास अपने घर जा और उन्हें बता कि प्रभु ने तेरे लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं और तुझ पर कैसी दया की।” अतः वह चला गया और दिकापुलिस में प्रचार करने लगा कि यीशु ने उसके लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं, और सब चकित रह गए। जब यीशु नाव से फिर उस पार गया तो उसके पास एक बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई; और वह झील के किनारे था। तब आराधनालय के अधिकारियों में से याईर नामक एक अधिकारी आया और यीशु को देखकर उसके चरणों पर गिर पड़ा, और उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा, “मेरी छोटी सी बेटी मरने पर है; तू आकर उस पर अपना हाथ रख दे कि वह ठीक हो जाए और जीवित रहे।” अतः वह उसके साथ चल दिया। एक बड़ी भीड़ उसके पीछे-पीछे चल रही थी और लोग उस पर गिरे जा रहे थे। एक स्‍त्री थी जो बारह वर्ष से रक्‍तस्राव से पीड़ित थी। उसने अनेक वैद्यों के हाथों बहुत दुःख उठाया और अपना सब कुछ खर्च करने पर भी उसे कुछ लाभ नहीं हुआ बल्कि उसकी दशा और भी अधिक बिगड़ गई। उसने यीशु के विषय में सुना और भीड़ में पीछे से आकर उसका वस्‍त्र छू लिया, क्योंकि उसका कहना था, “यदि मैं उसके वस्‍त्र ही को छू लूँगी तो मैं स्वस्थ हो जाऊँगी।” तब तुरंत उसका रक्‍तस्राव बंद हो गया और उसने अपनी देह में जान लिया कि वह इस बीमारी से अच्छी हो गई है। यीशु ने तुरंत अपने में जान लिया कि उसमें से सामर्थ्य निकला है। उसने भीड़ की ओर मुड़कर पूछा, “मेरे वस्‍त्र को किसने छुआ?” तब उसके शिष्यों ने उससे कहा, “तू देख रहा है कि भीड़ तुझ पर गिरी जा रही है और तू पूछ रहा है, ‘मुझे किसने छुआ?’ ” फिर भी यीशु यह पता लगाने के लिए कि यह किसने किया है, चारों ओर देखने लगा। तब वह स्‍त्री यह जानकर कि उसके साथ क्या हुआ है, डरती और काँपती हुई आई और उसके सामने गिर पड़ी, और उसे सारी बात सच-सच बता दी। तब यीशु ने उससे कहा, “बेटी, तेरे विश्‍वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है। शांति से जा और अपनी बीमारी से बची रह।” अभी वह यह कह ही रहा था कि आराधनालय के अधिकारी के घर से लोगों ने आकर कहा, “तेरी बेटी तो मर गई, अब गुरु को क्यों कष्‍ट देता है?” परंतु यीशु ने उनकी बात पर ध्यान न देकर आराधनालय के अधिकारी से कहा, “मत डर! केवल विश्‍वास रख!” और उसने पतरस, याकूब और याकूब के भाई यूहन्‍ना को छोड़ और किसी को अपने साथ आने नहीं दिया। जब वे आराधनालय के अधिकारी के घर पहुँचे तो उसने कोलाहल मचा हुआ और लोगों को बहुत रोते और बिलखते हुए देखा। तब यीशु ने भीतर जाकर उनसे कहा, “तुम क्यों रोते और हल्‍ला मचाते हो? बच्‍ची मरी नहीं बल्कि सो रही है।” वे उसकी हँसी उड़ाने लगे; परंतु उसने सब को बाहर निकाल दिया और बच्‍ची के पिता और उसकी माता तथा अपने साथियों को लेकर भीतर गया, जहाँ वह बच्‍ची थी। तब उसने उस बच्‍ची का हाथ पकड़कर कहा, “तलीथा कूमी” जिसका अर्थ है, हे लड़की, मैं तुझसे कहता हूँ, उठ! वह लड़की तुरंत उठ खड़ी हुई और चलने-फिरने लगी क्योंकि वह बारह वर्ष की थी। इस पर लोग अत्यंत चकित हो गए। तब यीशु ने उन्हें कड़ा आदेश दिया कि यह बात किसी को भी पता न चले; और कहा कि लड़की को कुछ खाने के लिए दिया जाए। फिर यीशु वहाँ से निकलकर अपने नगर में आया और उसके शिष्य उसके पीछे-पीछे चले। जब सब्त का दिन आया तो वह आराधनालय में उपदेश देने लगा। बहुत से लोग उसके उपदेश को सुनकर आश्‍चर्यचकित हुए और कहने लगे, “इसको ये बातें कहाँ से आईं? और इसे कौन सा ज्ञान दिया गया है कि उसके हाथों से ऐसे सामर्थ्य के कार्य हो रहे हैं? क्या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्र और याकूब, योसेस, यहूदा और शमौन का भाई है? क्या इसकी बहनें यहाँ हमारे साथ नहीं?” इस प्रकार उन्हें उससे ठोकर लगी। तब यीशु ने उनसे कहा, “भविष्यवक्‍ता का अपने नगर, अपने संबंधियों और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता।” अतः कुछ बीमारों पर हाथ रखकर उन्हें स्वस्थ करने के अतिरिक्‍त वह वहाँ कोई और सामर्थ्य का कार्य नहीं कर सका और उनके अविश्‍वास के कारण उसे आश्‍चर्य हुआ। फिर वह आस-पास के गाँवों में उपदेश देता हुआ घूमता रहा। फिर उसने बारहों को अपने पास बुलाया और उन्हें दो-दो करके भेजने लगा, तथा उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया। उसने उन्हें आज्ञा दी कि वे यात्रा के लिए लाठी को छोड़ और कुछ न लें—न रोटी, न थैला और न ही कमरबंद में कोई पैसा; परंतु चप्पल पहनें और दो कुरते न पहनें। उसने उनसे कहा, “जहाँ कहीं तुम किसी घर में प्रवेश करो, तब तक वहीं रहो जब तक उस स्थान से विदा न हो जाओ; और जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें और न ही तुम्हारी बातें सुनें, तो वहाँ से निकलते हुए अपने तलवों की धूल झाड़ दो कि उनके विरुद्ध साक्षी हो।” तब उन्होंने जाकर प्रचार किया कि लोग पश्‍चात्ताप करें; और वे बहुत सी दुष्‍टात्माओं को निकालते और बहुत से बीमारों पर तेल मलकर उन्हें स्वस्थ करते थे। फिर राजा हेरोदेस ने यीशु के विषय में सुना क्योंकि उसका नाम प्रसिद्ध हो गया था। कुछ लोग कह रहे थे, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला मृतकों में से जिलाया गया है; इसलिए उसके द्वारा ये सामर्थ्य के कार्य हो रहे हैं।” परंतु कुछ लोग कह रहे थे, “वह एलिय्याह है” और कुछ लोग कह रहे थे, “वह प्राचीन काल के भविष्यवक्‍ताओं के समान एक भविष्यवक्‍ता है।” हेरोदेस यह सुनकर कहने लगा, “जिस यूहन्‍ना का सिर मैंने कटवाया था, वही जी उठा है।” हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्‍नी हेरोदियास के कारण, जिससे उसने विवाह कर लिया था, स्वयं लोगों को भेजकर यूहन्‍ना को पकड़वाया और उसे बंदीगृह में डाल दिया था। क्योंकि यूहन्‍ना हेरोदेस से कहता था, “तेरे लिए अपने भाई की पत्‍नी को रखना उचित नहीं।” इसलिए हेरोदियास यूहन्‍ना से बैर रखती थी और वह उसे मरवाना चाहती थी, परंतु कुछ कर नहीं सकती थी क्योंकि हेरोदेस यूहन्‍ना को एक धर्मी और पवित्र व्यक्‍ति जानकर उससे डरता और उसकी रक्षा करता था। वह उसकी बातें सुनकर बहुत घबराता था फिर भी आनंद से उसकी सुनता था। परंतु एक दिन उचित अवसर तब आया जब हेरोदेस ने अपने जन्मदिन के उत्सव पर अपने उच्‍चाधिकारियों, सेनापतियों और गलील के मुख्य लोगों के लिए एक भोज दिया। तब हेरोदियास की बेटी भीतर आई और उसने नाचकर हेरोदेस और उसके साथ बैठनेवालों को प्रसन्‍न किया। राजा ने उस लड़की से कहा, “तू जो चाहे मुझसे माँग और मैं तुझे दूँगा।” और उसने बार-बार शपथ खाकर उससे कहा, “तू जो भी मुझसे माँगेगी, चाहे वह मेरा आधा राज्य तक भी क्यों न हो, मैं तुझे दे दूँगा।” तब उसने बाहर जाकर अपनी माँ से पूछा, “मैं क्या माँगूँ?” उसने कहा, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर।” और तुरंत वह भीतर राजा के पास शीघ्रता से आई और यह कहकर माँग की, “मैं चाहती हूँ कि तू अभी मुझे यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर एक थाल में मँगवा दे।” तब राजा बहुत उदास हुआ, परंतु अपनी शपथ और साथ बैठे हुए अतिथियों के कारण वह उसे इनकार नहीं करना चाहता था। अतः राजा ने तुरंत जल्‍लाद को भेजकर उसका सिर लाने का आदेश दिया। उसने जाकर बंदीगृह में उसका सिर काट दिया; और उसके सिर को एक थाल में रखकर लाया और उस लड़की को दिया, और उस लड़की ने उसे अपनी माँ को दे दिया। यूहन्‍ना के शिष्य यह सुनकर आए और उसके शव को ले जाकर एक कब्र में रख दिया। प्रेरित यीशु के पास इकट्ठे हुए; और उन्होंने जो कुछ किया और सिखाया था, वह सब उसे बताया। तब उसने उनसे कहा, “आओ, अलग किसी निर्जन स्थान में चलकर थोड़ी देर विश्राम कर लो।” क्योंकि वहाँ बहुत से लोग आ-जा रहे थे और उन्हें भोजन करने का भी अवसर नहीं मिल रहा था। इसलिए वे नाव में अकेले ही किसी निर्जन स्थान की ओर चल दिए। बहुतों ने उन्हें जाते हुए देखा और पहचान लिया, और सब नगरों से वहाँ पैदल ही दौड़कर उनसे पहले जा पहुँचे। नाव से उतरकर जब यीशु ने एक बड़ी भीड़ को देखा तो उसे उन पर तरस आया क्योंकि वे बिना चरवाहे की भेड़ों के समान थे, और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। जब बहुत समय बीत गया तो उसके शिष्य उसके पास आकर कहने लगे, “यह स्थान निर्जन है और अब समय भी बहुत हो गया है। उन्हें विदा कर कि वे आस-पास की बस्तियों और गाँवों में जाकर अपने खाने के लिए कुछ खरीद लें ।” इस पर उसने उनसे कहा, “तुम ही उन्हें खाने को दो।” उन्होंने उससे कहा, “क्या हम जाकर दो सौ दीनार की रोटियाँ खरीदें और उन्हें खाने को दें?” फिर उसने उनसे पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं? जाकर देखो!” उन्होंने पता लगाकर कहा, “पाँच, और दो मछलियाँ भी।” तब उसने उन्हें आदेश दिया कि सब लोगों को अलग-अलग समूहों में हरी घास पर बैठाएँ। अतः वे सौ-सौ और पचास-पचास के समूहों में बैठ गए। उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी। फिर उसने रोटियाँ तोड़ीं और अपने शिष्यों को देता गया कि वे लोगों को परोसें; और उसने दो मछलियाँ भी उन सब में बाँट दीं। सब ने खाया और तृप्‍त हो गए। फिर शिष्यों ने रोटियों के टुकड़ों और मछलियों से भरी बारह टोकरियाँ उठाईं। जिन्होंने रोटियाँ खाईं, वे पाँच हज़ार पुरुष थे। फिर उसने तुरंत अपने शिष्यों को नाव पर चढ़ने और उस पार बैतसैदा को पहले चले जाने के लिए विवश किया; जबकि वह लोगों को विदा करता रहा। उन्हें विदा करके वह प्रार्थना करने पहाड़ पर चला गया। जब संध्या हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था। यह देखकर कि उन्हें नाव खेने में कठिनाई हो रही है क्योंकि हवा उनके विपरीत थी, वह रात के लगभग तीन बजे झील पर चलकर उनके पास आया। वह उनसे आगे निकल जाना चाहता था। परंतु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा कि कोई भूत है, और वे चिल्‍ला उठे; क्योंकि सब ने उसे देखा और घबरा गए थे। परंतु उसने तुरंत उनसे बातें कीं और कहा, “साहस रखो, मैं हूँ; डरो मत।” जब वह नाव पर उनके पास आया तो हवा थम गई। वे मन ही मन में अत्यधिक अचंभित हुए, क्योंकि वे उन रोटियों की घटना से कुछ नहीं समझे थे, बल्कि उनके मन कठोर हो गए थे। फिर वे पार होकर गन्‍नेसरत पहुँचे और नाव किनारे पर लगा दी। जब वे नाव से उतरे तो लोग तुरंत यीशु को पहचान कर उस संपूर्ण क्षेत्र में चारों ओर भागते फिरे और जहाँ कहीं उन्होंने सुना कि यीशु है, वे अपने बीमारों को बिछौनों पर रखकर वहीं ले जाने लगे। वह जिन-जिन गाँवों, नगरों या बस्तियों में प्रवेश करता था, लोग अपने बीमारों को बाज़ारों में लिटा देते और उससे विनती करते थे कि उसके वस्‍त्र का किनारा ही छूने दे; और जितने उसे छूते, वे स्वस्थ हो जाते थे। तब फरीसी और कुछ शास्‍त्री जो यरूशलेम से आए थे, यीशु के पास इकट्ठे हुए और उन्होंने देखा कि उसके कुछ शिष्य अशुद्ध हाथ से अर्थात् बिना हाथ धोए रोटी खा रहे हैं । वास्तव में फरीसी और सब यहूदी, पूर्वजों की परंपरा का पालन करते हुए जब तक विधि अनुसार अपने हाथ नहीं धो लेते तब तक भोजन नहीं करते थे और बाज़ार से आकर जब तक अपने आपको पानी से शुद्ध नहीं कर लेते, भोजन नहीं करते थे; फिर और भी बहुत सी बातें थीं जो उन्हें पालन करने के लिए मिली थीं; जैसे कटोरों, घड़ों, ताँबे के बरतनों और खाटों का धोना। इसलिए फरीसियों और शास्‍त्रियों ने उससे पूछा, “तेरे शिष्य पूर्वजों की परंपराओं के अनुसार क्यों नहीं चलते बल्कि अशुद्ध हाथों से रोटी खाते हैं?” उसने उनसे कहा, “यशायाह ने तुम पाखंडियों के विषय में ठीक ही भविष्यवाणी की थी, जैसा लिखा है: ये लोग होंठों से तो मेरा आदर करते हैं, परंतु इनके मन मुझसे बहुत दूर हैं। वे मनुष्यों के नियमों को धर्म-शिक्षा के रूप में सिखाकर व्यर्थ में मेरी उपासना करते हैं। “तुम परमेश्‍वर की आज्ञा को छोड़कर मनुष्यों की परंपरा का पालन करते हो ।” फिर उसने उनसे कहा, “तुम परमेश्‍वर की आज्ञा को बड़ी अच्छी तरह व्यर्थ ठहरा देते हो ताकि अपनी परंपरा को बनाए रख सको। क्योंकि मूसा ने तो कहा था, ‘अपने पिता और अपनी माता का आदर कर’ और ‘जो अपने पिता या माता को बुरा कहे वह निश्‍चय मार डाला जाए।’ परंतु तुम कहते हो ‘यदि कोई अपने पिता या अपनी माता से कहे कि जो कुछ तुम्हें मुझसे मिलना था, वह तो “कुरबान” अर्थात् परमेश्‍वर को अर्पित है, तो उसे अपने पिता या अपनी माता के लिए कुछ भी करना नहीं पड़ता।’ तुम अपनी परंपरा के द्वारा जिसे तुमने बनाए रखा है, परमेश्‍वर के वचन को व्यर्थ ठहरा देते हो और इसी प्रकार के और भी बहुत से कार्य करते हो।” तब उसने भीड़ को फिर से पास बुलाया और उनसे कहा, “तुम सब मेरी बात सुनो और समझो! कोई भी वस्तु बाहर से मनुष्य के भीतर जाकर उसे अशुद्ध नहीं कर सकती, बल्कि जो मनुष्य के भीतर से निकलती हैं वे ही उसे अशुद्ध करती हैं। [यदि किसी के पास सुनने के लिए कान हैं, तो वह सुन ले।] ” भीड़ से निकलकर जब उसने घर में प्रवेश किया तो उसके शिष्यों ने इस दृष्‍टांत के विषय में उससे पूछा। तब उसने उनसे कहा, “क्या तुम भी ऐसे नासमझ हो? क्या तुम नहीं जानते कि कोई भी वस्तु जो बाहर से मनुष्य के भीतर जाती है, वह उसे अशुद्ध नहीं कर सकती? क्योंकि वह उसके मन में नहीं बल्कि पेट में जाती है और संडास में निकल जाती है।” इस प्रकार उसने सब भोजन वस्तुओं को शुद्ध ठहराया। फिर उसने कहा, “जो मनुष्य में से निकलता है वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर, अर्थात् मनुष्य के मन से बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्‍त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, कामुकता, कुदृष्‍टि, निंदा, अहंकार और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।” फिर वहाँ से उठकर वह सूर के क्षेत्र में आया। जब उसने एक घर में प्रवेश किया तो वह चाहता था कि कोई यह न जाने, परंतु वह छिप न सका और तुरंत एक स्‍त्री जिसकी छोटी सी बेटी में अशुद्ध आत्मा थी, उसके विषय में सुनकर आई और उसके चरणों पर गिर पड़ी। यह सुरूफिनीकी मूल की यूनानी स्‍त्री थी। वह उससे विनती करने लगी कि वह उसकी बेटी में से दुष्‍टात्मा निकाल दे। तब यीशु ने उससे कहा, “पहले बच्‍चों को तृप्‍त होने दे; क्योंकि बच्‍चों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे फेंकना अच्छा नहीं।” परंतु उस स्‍त्री ने उसे उत्तर दिया, “हाँ प्रभु! परंतु कुत्ते भी तो मेज़ के नीचे, बच्‍चों की रोटी के टुकड़ों में से खाते हैं।” तब उसने उससे कहा, “इसी बात के कारण तू जा, दुष्‍टात्मा तेरी बेटी में से निकल गई है।” और अपने घर पहुँचकर उसने अपनी बच्‍ची को खाट पर पड़े हुए देखा और दुष्‍टात्मा निकल चुकी थी। फिर यीशु सूर क्षेत्र से निकलकर सैदा होते हुए गलील की झील पर पहुँचा जो दिकापुलिस क्षेत्र के मार्ग के बीच में है। लोग एक बहरे और हकले व्यक्‍ति को उसके पास लाए तथा उससे विनती करने लगे कि वह उस पर अपना हाथ रखे। इस पर यीशु उसे भीड़ से अलग अकेले में ले गया और उसने अपनी उँगलियाँ उसके कानों में डालीं और थूककर उसकी जीभ को छुआ। फिर उसने स्वर्ग की ओर देखकर आह भरी और उससे कहा, “इफ्फत्तह,” जिसका अर्थ है, खुल जा। तुरंत उसके कान खुल गए और उसकी जीभ का बंधन भी खुल गया; और वह स्पष्‍ट बोलने लगा। तब यीशु ने लोगों को मना किया कि वे किसी को न बताएँ परंतु जितना वह उन्हें मना करता था, वे उतना ही अधिक प्रचार करते थे। लोग अत्यंत आश्‍चर्यचकित होकर कहने लगे, “सब कुछ उसने अच्छा किया है, वह बहरों को सुननेवाले और गूँगों को बोलनेवाले बना देता है।” उन्हीं दिनों में जब फिर से एक बड़ी भीड़ एकत्र हो गई और उनके पास खाने के लिए कुछ न था, तब यीशु ने शिष्यों को पास बुलाकर उनसे कहा, “मुझे इस भीड़ पर तरस आता है क्योंकि ये लोग तीन दिन से मेरे साथ हैं और उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। यदि मैं उन्हें भूखा घर भेज दूँ तो वे मार्ग में ही मूर्च्छित हो जाएँगे; इनमें से कुछ लोग तो बहुत दूर से आए हैं।” इस पर उसके शिष्यों ने उससे कहा, “यहाँ इस जंगल में इन्हें तृप्‍त करने के लिए इतनी रोटियाँ कोई कहाँ से ला पाएगा?” उसने उनसे पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?” उन्होंने कहा, “सात।” तब उसने भीड़ को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी, और उन सात रोटियों को लेकर धन्यवाद देते हुए तोड़ा और अपने शिष्यों को देता गया कि वे उन्हें परोसें और उन्होंने भीड़ को परोस दिया। उनके पास कुछ छोटी मछलियाँ भी थीं; और उसने उन पर आशिष माँगकर उन्हें भी परोसने को कहा। वे खाकर तृप्‍त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरे सात टोकरे उठाए। वे लगभग चार हज़ार लोग थे। फिर उसने उनको विदा किया और वह तुरंत अपने शिष्यों के साथ नाव पर चढ़कर दलमनूता के क्षेत्र को चला गया। तब फरीसी आकर उससे वाद-विवाद करने लगे और उसे परखने के लिए उससे स्वर्ग का कोई चिह्‍न माँगा। परंतु उसने अपनी आत्मा में गहरी आह भरते हुए कहा, “इस पीढ़ी के लोग चिह्‍न क्यों माँगते हैं? मैं तुमसे सच कहता हूँ कि इस पीढ़ी के लोगों को कोई चिह्‍न नहीं दिया जाएगा।” और वह उन्हें छोड़कर फिर नाव पर चढ़ा और उस पार चला गया। शिष्य रोटी ले जाना भूल गए थे और नाव में उनके पास एक रोटी को छोड़ और कुछ नहीं था। तब यीशु ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा, “देखो! फरीसियों के ख़मीर और हेरोदेस के ख़मीर से सावधान रहो।” फिर वे आपस में सोच विचार करने लगे कि उनके पास रोटी नहीं है। यह जानकर उसने उनसे कहा, “तुम आपस में सोच विचार क्यों कर रहे हो कि तुम्हारे पास रोटी नहीं है? क्या तुम अब भी नहीं जानते और न ही समझते हो? क्या तुम्हारा मन कठोर हो चुका है? क्या तुम आँखें होते हुए भी नहीं देखते और कान होते हुए भी नहीं सुनते? क्या तुम्हें स्मरण नहीं? जब मैंने पाँच हज़ार के बीच में पाँच रोटियाँ तोड़ीं तो तुमने टुकड़ों से भरी कितनी टोकरियाँ उठाईं?” उन्होंने उससे कहा, “बारह।” “और जब चार हज़ार के बीच में सात रोटियाँ थीं तो तुमने टुकड़ों से भरे कितने टोकरे उठाए?” उन्होंने उससे कहा, “सात।” तब उसने उनसे कहा, “क्या तुम अब भी नहीं समझे?” फिर वे बैतसैदा आए। तब लोग एक अंधे व्यक्‍ति को उसके पास ले आए और उससे विनती करने लगे कि वह उसे छुए। वह उस अंधे व्यक्‍ति का हाथ पकड़कर उसे गाँव के बाहर ले गया, उसकी आँखों पर थूका और उसके ऊपर हाथ रखकर उससे पूछा, “क्या तुझे कुछ दिखाई देता है?” उसने आँखें उठाकर कहा, “मैं लोगों को देखता हूँ, वे मुझे चलते हुए पेड़ों के समान दिखाई दे रहे हैं।” उसने दुबारा अपने हाथ उसकी आँखों पर रखे। जब उस अंधे व्यक्‍ति ने ध्यान से देखा, तो वह फिर से देखने लगा और उसे सब कुछ स्पष्‍ट दिखाई दे रहा था। तब यीशु ने यह कहकर उसे घर भेजा, “इस गाँव में प्रवेश मत करना।” यीशु और उसके शिष्य कैसरिया फिलिप्पी के गाँवों में गए। मार्ग में वह अपने शिष्यों से पूछने लगा, “लोग क्या कहते हैं कि मैं कौन हूँ?” उन्होंने उसे उत्तर दिया, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला; पर कुछ लोग एलिय्याह, और कुछ लोग भविष्यवक्‍ताओं में से एक कहते हैं।” उसने उनसे पूछा, “परंतु तुम क्या कहते हो कि मैं कौन हूँ?” पतरस ने उसे उत्तर दिया, “तू मसीह है।” तब उसने उन्हें चेतावनी दी कि वे उसके विषय में किसी को न बताएँ। फिर वह उन्हें सिखाने लगा कि मनुष्य के पुत्र के लिए अवश्य है कि वह बहुत दुःख उठाए; धर्मवृद्धों, मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों द्वारा ठुकराया जाए, मार डाला जाए और तीन दिन के बाद फिर जी उठे। वह यह बात स्पष्‍ट रूप से बता रहा था। तब पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा। परंतु उसने मुड़कर अपने शिष्यों की ओर देखते हुए पतरस को झिड़का और कहा, “हे शैतान, मुझसे दूर हो जा! क्योंकि तू परमेश्‍वर की नहीं बल्कि मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है।” फिर उसने अपने शिष्यों समेत भीड़ को अपने पास बुलाया और उनसे कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह अपने आप का इनकार करे, अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले; क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा, वह उसे गँवाएगा; परंतु जो कोई मेरे और सुसमाचार के कारण अपना प्राण गँवाएगा, वह उसे बचाएगा। क्योंकि मनुष्य यदि सारे जगत को प्राप्‍त कर ले परंतु अपने प्राण की हानि उठाए तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा? इस व्यभिचारी और पापी पीढ़ी में यदि कोई मुझसे और मेरे वचनों से लजाएगा, तो मनुष्य का पुत्र भी जब पवित्र स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, उससे लजाएगा।” तब यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ खड़े लोगों में से कुछ ऐसे हैं कि जब तक वे परमेश्‍वर के राज्य को सामर्थ्य के साथ आया हुआ न देख लें, तब तक मृत्यु का स्वाद कदापि न चखेंगे।” छः दिन के बाद यीशु ने पतरस, याकूब और यूहन्‍ना को साथ लिया और उन्हें अलग एकांत में एक ऊँचे पहाड़ पर ले गया। वहाँ उनके सामने उसका रूपांतरण हुआ, और उसके वस्‍त्र चमककर इतने श्‍वेत हो गए कि पृथ्वी पर कोई धोबी भी इतने श्‍वेत नहीं कर सकता। फिर उन्हें मूसा के साथ एलिय्याह दिखाई दिया, वे यीशु के साथ बातचीत कर रहे थे। इस पर पतरस ने यीशु से कहा, “हे रब्बी! हमारा यहाँ होना अच्छा है, इसलिए हम तीन मंडप बनाएँ, एक तेरे लिए, एक मूसा के लिए और एक एलिय्याह के लिए।” वह नहीं जानता था कि क्या कहना है, क्योंकि वे बहुत डर गए थे। तभी एक बादल उन पर छा गया और उस बादल में से यह आवाज़ आई, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, इसकी सुनो।” फिर अचानक, उन्होंने चारों ओर दृष्‍टि की तो वहाँ उन्हें यीशु को छोड़ अपने साथ और कोई दिखाई नहीं दिया। जब वे पहाड़ से नीचे उतर रहे थे तो उसने उन्हें आज्ञा दी कि जब तक मनुष्य का पुत्र मृतकों में से जी न उठे, तब तक जो कुछ उन्होंने देखा है, किसी को न बताएँ। उन्होंने इस बात को अपने तक ही रखा और यह विचार-विमर्श करने लगे कि मृतकों में से जी उठने का क्या अर्थ है। फिर उन्होंने उससे पूछा, “शास्‍त्री क्यों कहते हैं कि एलिय्याह का पहले आना अवश्य है?” उसने उनसे कहा, “एलिय्याह ही पहले आकर सब कुछ सुधारेगा; परंतु मनुष्य के पुत्र के विषय में यह क्यों लिखा है कि वह बहुत दुःख उठाएगा और उसे तुच्छ समझा जाएगा? फिर भी मैं तुमसे कहता हूँ कि एलिय्याह तो आ चुका और जैसा उसके विषय में लिखा है, लोगों ने उसके साथ वही किया जो वे चाहते थे।” जब वे शिष्यों के पास आए तो देखा कि उनके चारों ओर एक बड़ी भीड़ लगी है और शास्‍त्री उनके साथ विवाद कर रहे हैं। यीशु को देखते ही भीड़ के सब लोग विस्मित हो गए और उसकी ओर दौड़कर उसे नमस्कार किया। तब उसने उनसे पूछा, “तुम उनके साथ क्या विवाद कर रहे हो?” भीड़ में से एक व्यक्‍ति ने उसे उत्तर दिया, “हे गुरु, मैं अपने पुत्र को तेरे पास लाया था जिसमें गूँगी आत्मा समाई है। वह उसे जहाँ भी पकड़ती है, वहीं पटक देती है; और वह मुँह से झाग निकालता, अपने दाँत पीसता और सूखता जाता है। इसलिए मैंने तेरे शिष्यों से कहा कि उसे निकाल दें, परंतु वे निकाल न सके।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “हे अविश्‍वासी पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे मेरे पास लाओ।” तब वे लड़के को उसके पास ले आए। उसको देखकर उस दुष्‍टात्मा ने तुरंत लड़के को मरोड़ा; और वह भूमि पर गिरकर मुँह से झाग निकालता हुआ इधर-उधर लोटने लगा। तब यीशु ने उसके पिता से पूछा, “ऐसा उसको कब से हो रहा है?” उसने कहा, “बचपन से; और उसने इसे नाश करने के लिए कभी आग में गिराया तो कभी पानी में। परंतु यदि तू कुछ कर सकता है तो हम पर तरस खाकर हमारी सहायता कर।” यीशु ने उससे कहा, “यदि तू कर सकता है? विश्‍वास करनेवाले के लिए सब कुछ संभव है।” बालक का पिता तुरंत गिड़गिड़ाकर कहने लगा, “ मैं विश्‍वास करता हूँ; मेरे अविश्‍वास का उपाय कर!” जब यीशु ने देखा कि भीड़ बढ़ती जा रही है तो उसने उस अशुद्ध आत्मा को यह कहकर डाँटा, “हे गूँगी और बहरी आत्मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूँ कि इसमें से निकल जा और इसमें फिर कभी प्रवेश मत करना।” तब वह चीखती और बहुत मरोड़ती हुई उसमें से निकल गई; और वह लड़का मरा हुआ सा हो गया, जिस कारण बहुत लोग कहने लगे कि वह मर गया है। परंतु यीशु ने उसका हाथ पकड़कर उसे उठाया और वह उठ खड़ा हुआ। जब यीशु ने घर में प्रवेश किया तो उसके शिष्य एकांत में उससे पूछने लगे, “हम उसे क्यों नहीं निकाल सके?” उसने उनसे कहा, “यह जाति प्रार्थना और उपवास को छोड़ और किसी भी रीति से निकल नहीं सकती।” फिर वे वहाँ से निकलकर गलील होते हुए जा रहे थे परंतु यीशु नहीं चाहता था कि कोई जाने। क्योंकि वह अपने शिष्यों को सिखाता और उन्हें बताता था, “मनुष्य का पुत्र, मनुष्यों के हाथों पकड़वाया जाएगा, वे उसे मार डालेंगे और मरने के तीन दिन बाद वह फिर जी उठेगा।” परंतु वे इस बात को नहीं समझे और उससे पूछने से डरते थे। फिर वे कफरनहूम में आए। जब वह घर में था तो वह उनसे पूछने लगा, “तुम मार्ग में किस बात पर विवाद कर रहे थे?” परंतु वे चुप रहे क्योंकि उन्होंने मार्ग में एक दूसरे से वाद-विवाद किया था कि उनमें बड़ा कौन है? तब उसने बैठकर बारहों को बुलाया और उनसे कहा, “यदि कोई प्रथम होना चाहे तो वह सब से अंतिम और सब का सेवक बने।” उसने एक बच्‍चे को लेकर उनके बीच में खड़ा किया और उसे बाँहों में लेकर उनसे कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बच्‍चों में से किसी एक को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मुझे नहीं बल्कि मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।” यूहन्‍ना ने उससे कहा, “हे गुरु, हमने किसी को तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को निकालते हुए देखा, और उसे रोकने का प्रयास किया क्योंकि वह हमारा अनुसरण नहीं कर रहा था।” परंतु यीशु ने कहा, “उसे मत रोको, क्योंकि ऐसा कोई नहीं जो मेरे नाम से सामर्थ्य का कार्य करे और फिर तुरंत मुझे बुरा कह सके। क्योंकि जो हमारे विरोध में नहीं, वह हमारी ओर है। जो कोई मेरे नाम से तुम्हें एक कटोरा पानी इसलिए पिलाए कि तुम मसीह के हो, तो मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह अपना प्रतिफल कदापि न खोएगा। “परंतु जो कोई मुझ पर विश्‍वास करनेवाले इन छोटों में से किसी एक के भी ठोकर का कारण बने तो उसके लिए अच्छा यही है कि एक बड़ी चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाकर समुद्र में फेंक दिया जाए। यदि तेरा हाथ तेरे लिए ठोकर का कारण बने तो उसे काट डाल; लूला होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिए इससे अच्छा है कि तू दोनों हाथों के रहते हुए नरक में अर्थात् उस कभी न बुझनेवाली आग में डाल दिया जाए, [जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती।] और यदि तेरा पैर तेरे लिए ठोकर का कारण बने तो उसे काट डाल; लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिए इससे अच्छा है कि तू दोनों पैरों के रहते हुए नरक में डाल दिया जाए, [जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती।] और यदि तेरी आँख तेरे लिए ठोकर का कारण बने तो उसे निकाल कर फेंक दे; काना होकर परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करना तेरे लिए इससे अच्छा है कि तू दोनों आँखों के रहते हुए नरक में डाल दिया जाए, जहाँ उनका कीड़ा नहीं मरता और आग नहीं बुझती। निश्‍चय ही प्रत्येक जन आग से नमकीन किया जाएगा । “नमक अच्छा है, परंतु यदि नमक का स्वाद चला जाए तो उसे किससे नमकीन करोगे? अपने आपमें नमक रखो और आपस में मेल-मिलाप से रहो।” फिर यीशु वहाँ से उठकर यरदन नदी के पार यहूदिया के क्षेत्र में आया; और उसके पास फिर से भीड़ इकट्ठी हो गई और जैसा वह किया करता था, उन्हें फिर से उपदेश देने लगा। तब फरीसियों ने आकर उसे परखने के लिए उससे पूछा कि क्या किसी पति के लिए अपनी पत्‍नी को तलाक देना उचित है? इस पर उसने उनसे कहा, “मूसा ने तुम्हें क्या आज्ञा दी है?” उन्होंने कहा, “मूसा ने त्याग-पत्र लिखकर तलाक देने की अनुमति दी है।” तब यीशु ने उनसे कहा, “यह आज्ञा उसने तुम्हारे मन की कठोरता के कारण तुम्हारे लिए लिखी। परंतु परमेश्‍वर ने सृष्‍टि के आरंभ से ही उन्हें नर और नारी बनाया। इस कारण पुरुष अपने पिता और माता से अलग होकर अपनी पत्‍नी के साथ मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। अतः अब वे दो नहीं बल्कि एक तन हैं। इसलिए जिसे परमेश्‍वर ने एक साथ जोड़ा है उसे कोई मनुष्य अलग न करे।” घर पर शिष्य इस विषय में उससे फिर पूछने लगे। तब उसने उनसे कहा, “जो कोई अपनी पत्‍नी को तलाक देकर दूसरी से विवाह करता है, वह उसके साथ व्यभिचार करता है और पत्‍नी भी यदि अपने पति को छोड़कर दूसरे से विवाह करती है तो वह व्यभिचार करती है।” फिर लोग बच्‍चों को उसके पास लाने लगे कि वह उन पर हाथ रखे; परंतु शिष्यों ने उनको डाँटा। यह देखकर यीशु क्रोधित हो गया और उनसे कहा, “बच्‍चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मत रोको, क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य ऐसों ही का है। मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो कोई परमेश्‍वर के राज्य को एक बच्‍चे के समान स्वीकार नहीं करता, वह उसमें कभी प्रवेश नहीं करेगा।” फिर उसने उन्हें बाँहों में लिया और उन पर हाथ रखकर आशिष देने लगा। जब वह मार्ग में जा रहा था तो एक व्यक्‍ति दौड़ता हुआ आया और उसके सामने घुटने टेककर पूछने लगा, “हे उत्तम गुरु! अनंत जीवन का उत्तराधिकारी होने के लिए मैं क्या करूँ?” यीशु ने उससे कहा, “तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? केवल एक अर्थात् परमेश्‍वर को छोड़ कोई उत्तम नहीं। आज्ञाओं को तो तू जानता है: हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और माता का आदर करना।” उसने उससे कहा, “गुरु, इन सब का पालन मैं अपने लड़कपन से करता आया हूँ।” उसे देखकर यीशु का प्रेम उस पर उमड़ आया, और उसने उससे कहा, “तुझमें एक बात की कमी है। जा, जो कुछ तेरे पास है उसे बेचकर कंगालों को दे दे; फिर तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।” इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई और वह दुःखी होकर चला गया क्योंकि उसके पास बहुत संपत्ति थी। यीशु ने चारों ओर देखकर अपने शिष्यों से कहा, “धनवानों का परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करना कितना कठिन है!” उसके इन शब्दों पर शिष्य अचंभित हुए। यीशु ने उनसे फिर कहा, “ बालको! परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करना कितना कठिन है! परमेश्‍वर के राज्य में एक धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के छेद में से निकल जाना अधिक सहज है।” वे और भी आश्‍चर्यचकित होकर आपस में कहने लगे, “तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?” उनकी ओर देखकर यीशु ने कहा, “मनुष्यों के लिए तो यह असंभव है, परंतु परमेश्‍वर के लिए नहीं, क्योंकि परमेश्‍वर के लिए सब कुछ संभव है।” पतरस उससे कहने लगा, “देख, हमने सब कुछ छोड़ दिया और तेरे पीछे हो लिए हैं।” यीशु ने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि ऐसा कोई नहीं जिसने मेरे और सुसमाचार के कारण घर या भाइयों या बहनों या माता या पिता या बच्‍चों या खेतों को छोड़ दिया हो, और वर्तमान समय में घरों और भाइयों और बहनों और माताओं और बच्‍चों और खेतों का सौ गुणा न पाए, पर सताव के साथ; और आने वाले युग में अनंत जीवन। परंतु बहुत से लोग जो प्रथम हैं, वे अंतिम होंगे और जो अंतिम हैं, वे प्रथम होंगे।” वे यरूशलेम को जानेवाले मार्ग पर थे और यीशु उनके आगे-आगे चल रहा था। उनको अचंभा हुआ और पीछे चलनेवाले डरे हुए थे। तब वह फिर उन बारहों को लेकर उन्हें अपने साथ होनेवाली बातें बताने लगा, “देखो, हम यरूशलेम को जा रहे हैं, वहाँ मनुष्य का पुत्र मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों के हाथ में सौंप दिया जाएगा, वे उसे मृत्युदंड के योग्य ठहराएँगे और उसे गैरयहूदियों के हाथ में सौंप देंगे। वे उसका उपहास करेंगे, उस पर थूकेंगे, उसे कोड़े मारेंगे और मार डालेंगे तथा तीन दिन के बाद वह फिर जी उठेगा।” तब ज़ब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्‍ना ने उसके पास आकर उससे कहा, “हे गुरु, हम चाहते हैं कि जो भी हम तुझसे माँगें, तू हमारे लिए करे।” उसने उनसे कहा, “तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करूँ?” उन्होंने उससे कहा, “यह कि तू अपनी महिमा में हममें से एक को अपने दाहिनी ओर और एक को बाईं ओर बैठने दे।” परंतु यीशु ने उनसे कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम क्या माँग रहे हो; जो कटोरा मैं पी रहा हूँ, क्या तुम उसे पी सकते हो या जो बपतिस्मा मैं लेता हूँ, क्या उसे ले सकते हो?” उन्होंने उससे कहा, “हम कर सकते हैं।” तब यीशु ने उनसे कहा, “जिस कटोरे को मैं पी रहा हूँ, उसे तुम भी पीओगे और जो बपतिस्मा मैं लेता हूँ, तुम भी लोगे; परंतु अपने दाहिनी या बाईं ओर बैठाना मेरा काम नहीं और यह उनके लिए है जिनके लिए तैयार किया गया है।” यह सुनकर दसों शिष्य याकूब और यूहन्‍ना से नाराज़ हो गए। तब यीशु ने उन्हें अपने पास बुलाकर उनसे कहा, “तुम जानते हो कि जो गैरयहूदियों के शासक समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं और उनमें जो बड़े हैं वे उन पर अधिकार जताते हैं। परंतु तुममें ऐसा नहीं है, बल्कि जो कोई तुममें बड़ा बनना चाहे, उसे तुम्हारा सेवक बनना होगा; और जो कोई तुममें प्रथम होना चाहे, वह सब का दास बने। क्योंकि मनुष्य का पुत्र सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण देने आया।” फिर वे यरीहो में आए। जब यीशु अपने शिष्यों और एक बड़ी भीड़ के साथ यरीहो से निकलकर जा रहा था तो एक अंधा भिखारी, तिमाई का पुत्र बरतिमाई मार्ग के किनारे बैठा हुआ था। वह यह सुनकर कि यीशु नासरी है, चिल्‍लाकर कहने लगा, “हे दाऊद के पुत्र यीशु, मुझ पर दया कर!” बहुत से लोग उसे डाँटने लगे कि वह चुप रहे; परंतु वह और भी अधिक चिल्‍लाने लगा, “हे दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर!” तब यीशु ने रुककर कहा, “उसे बुलाओ!” और उन्होंने उस अंधे व्यक्‍ति को बुलाकर उससे कहा, “साहस रख! उठ, वह तुझे बुला रहा है!” तब वह अपना चोगा फेंककर उठ खड़ा हुआ और यीशु के पास आया। इस पर यीशु ने उससे कहा, “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?” तब उस अंधे व्यक्‍ति ने उससे कहा, “हे मेरे गुरु, यह कि मैं देखने लगूँ।” यीशु ने उससे कहा, “जा, तेरे विश्‍वास ने तुझे बचा लिया है!” और वह तुरंत देखने लगा और मार्ग में उसके पीछे हो लिया। जब वे यरूशलेम के निकट जैतून पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्याह के पास पहुँचे, तो यीशु ने अपने दो शिष्यों को भेजा और उनसे कहा, “अपने सामनेवाले गाँव में जाओ, और उसमें प्रवेश करते ही तुम्हें एक गधी का बच्‍चा बँधा हुआ मिलेगा जिस पर अब तक कोई नहीं बैठा। उसे खोलकर ले आओ। और यदि कोई तुमसे पूछे, ‘तुम ऐसा क्यों कर रहे हो?’ तो कहना, ‘प्रभु को इसकी आवश्यकता है, और वह तुरंत इसे यहाँ वापस भेज देगा।’ ” अतः वे गए और चौक पर उन्हें गधी का एक बच्‍चा द्वार के पास बाहर बँधा हुआ मिला, और वे उसे खोलने लगे। तब वहाँ खड़े कुछ लोग उनसे कहने लगे, “तुम क्या कर रहे हो? क्यों गधी के बच्‍चे को खोल रहे हो?” जैसा यीशु ने कहा था उन्होंने उनको वैसा ही कह दिया। फिर लोगों ने उन्हें ले जाने दिया। वे गधी के बच्‍चे को यीशु के पास लाए और उस पर अपने वस्‍त्र डाल दिए, और यीशु उस पर बैठ गया। बहुतों ने अपने वस्‍त्र मार्ग में बिछा दिए तथा औरों ने खेतों से डालियाँ काटकर मार्ग में बिछा दीं। उसके आगे और पीछे चलनेवाले, नारे लगा रहे थे: होशन्‍ना! धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है! धन्य है हमारे पिता दाऊद का राज्य, जो आ रहा है! सर्वोच्‍च स्थान में होशन्‍ना! यरूशलेम में आकर यीशु ने मंदिर में प्रवेश किया और चारों ओर सब कुछ देखकर वह बारहों के साथ बैतनिय्याह चला गया क्योंकि संध्या हो चुकी थी। अगले दिन जब वे बैतनिय्याह से बाहर आए तो यीशु को भूख लगी। वह पत्तियों से भरे अंजीर के पेड़ को दूर से देखकर उसके पास गया कि कहीं उस पर कुछ मिल जाए। जब वह उसके पास पहुँचा तो उसे पत्तियों को छोड़ और कुछ न मिला; क्योंकि यह अंजीर के फल का समय नहीं था। तब उसने पेड़ से कहा, “अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।” और उसके शिष्य यह सुन रहे थे। फिर वे यरूशलेम में आए, और यीशु मंदिर-परिसर में जाकर वहाँ लेन-देन करनेवालों को बाहर निकालने लगा, तथा सर्राफों की चौकियाँ और कबूतर बेचनेवालों के आसन उलट दिए, और किसी को भी मंदिर-परिसर में से बरतन लेकर आने-जाने नहीं दिया। फिर वह उन्हें उपदेश देने लगा, “क्या यह नहीं लिखा है: मेरा घर सब जातियों के लिए प्रार्थना का घर कहलाएगा। परंतु तुमने इसे डाकुओं का अड्डा बना दिया है।” जब मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों ने यह सुना तो वे उसे नाश करने का अवसर ढूँढ़ने लगे; परंतु वे उससे डरते थे, क्योंकि सब लोग उसके उपदेश से आश्‍चर्यचकित थे। जब संध्या हो गई तो वे नगर से बाहर चले गए। फिर भोर को वहाँ से जाते हुए उन्होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ से सूखा हुआ देखा। तब पतरस ने स्मरण करके उससे कहा, “हे रब्बी, देख! वह अंजीर का पेड़ जिसे तूने शाप दिया था, सूख गया है।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “परमेश्‍वर पर विश्‍वास रखो। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, ‘उखड़ जा और समुद्र में जा गिर’ और अपने मन में संदेह न करे बल्कि विश्‍वास करे कि जो कह रहा है, वह हो जाएगा, तो उसके लिए वही होगा। इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके माँगते हो, विश्‍वास करो कि वह तुम्हें मिल गया और तुम्हारे लिए वही हो जाएगा। जब कभी तुम प्रार्थना के लिए खड़े होते हो, तो यदि तुम्हारे मन में किसी के विरुद्ध कुछ है तो उसे क्षमा करो जिससे कि तुम्हारा पिता भी जो स्वर्ग में है तुम्हारे अपराध क्षमा करे। [परंतु यदि तुम क्षमा नहीं करोगे तो तुम्हारा पिता भी जो स्वर्ग में है, तुम्हारे अपराध क्षमा नहीं करेगा।] ” वे फिर से यरूशलेम में आए; और जब वह मंदिर-परिसर में टहल रहा था तो मुख्य याजक, शास्‍त्री और धर्मवृद्ध उसके पास आए और उससे पूछने लगे, “तू ये कार्य किस अधिकार से करता है? और ये कार्य करने का अधिकार तुझे किसने दिया?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं भी तुमसे एक बात पूछता हूँ, मुझे उत्तर दो; तब मैं तुम्हें बताऊँगा कि किस अधिकार से मैं ये कार्य करता हूँ। यूहन्‍ना का बपतिस्मा स्वर्ग की ओर से था या मनुष्यों की ओर से? मुझे उत्तर दो।” वे आपस में तर्क-वितर्क करने लगे, “यदि हम कहें ‘स्वर्ग की ओर से’ तो वह कहेगा, ‘फिर तुमने उसका विश्‍वास क्यों नहीं किया?’ फिर हम क्या कहें, ‘मनुष्यों की ओर से?’ ” वे भीड़ से डरते थे, क्योंकि सब मानते थे कि यूहन्‍ना सचमुच एक भविष्यवक्‍ता था। इसलिए उन्होंने यीशु को उत्तर दिया, “हम नहीं जानते।” तब यीशु ने उनसे कहा, “तो मैं भी तुम्हें नहीं बताता कि किस अधिकार से ये कार्य करता हूँ।” फिर यीशु उनसे दृष्‍टांतों में बातें करने लगा: “किसी मनुष्य ने अंगूर का बगीचा लगाया, और उसके चारों ओर बाड़ा बनाया, उसका रसकुंड खोदा और बुर्ज बनाया, फिर उसे किसानों को ठेके पर देकर यात्रा पर चला गया। फसल के समय उसने एक दास को उन किसानों के पास भेजा, ताकि वह किसानों से अंगूर के बगीचे की उपज का भाग प्राप्‍त करे। परंतु उन्होंने उसे पकड़कर पीटा और खाली हाथ लौटा दिया। उसने फिर से उनके पास एक और दास भेजा; उन्होंने उसके सिर पर मारा और अपमानित किया। तब उसने एक और को भेजा, उन्होंने उसे मार डाला। ऐसे ही और भी बहुतों को भेजा; उन्होंने कुछ को पीटा और कुछ को मार डाला। “अब उसके पास एक ही था, उसका प्रिय पुत्र। अंत में उसने उसे यह सोचकर उनके पास भेजा, ‘वे मेरे पुत्र का सम्मान करेंगे।’ परंतु उन किसानों ने आपस में कहा, ‘यह तो उत्तराधिकारी है। आओ, इसे मार डालें, और यह उत्तराधिकार हमारा हो जाएगा।’ अतः उन्होंने उसे पकड़कर मार डाला और अंगूर के बगीचे के बाहर फेंक दिया। “अब अंगूर के बगीचे का स्वामी क्या करेगा? वह आएगा और उन किसानों का नाश करेगा, और अंगूर का बगीचा दूसरों को दे देगा। क्या तुमने पवित्रशास्‍त्र में यह नहीं पढ़ा: जिस पत्थर को राजमिस्‍त्रियों ने ठुकरा दिया, वही कोने का प्रमुख पत्थर बन गया; यह प्रभु की ओर से हुआ और हमारी दृष्‍टि में अद्भुत है।” तब उन्होंने उसे पकड़ना चाहा, क्योंकि वे समझ गए थे कि उसने यह दृष्‍टांत उनके विषय में कहा है; परंतु वे भीड़ से डर गए, इसलिए उसे छोड़कर चले गए। तब उन्होंने कुछ फरीसियों तथा हेरोदियों को उसके पास भेजा ताकि उसे बातों में फँसाएँ। उन्होंने उसके पास आकर कहा, “हे गुरु, हम जानते हैं कि तू सच्‍चा है और तू किसी की भी परवाह नहीं करता; क्योंकि तू किसी का पक्षपात नहीं करता, बल्कि परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से सिखाता है। कैसर को कर देना उचित है या नहीं? हम दें या न दें?” परंतु उसने उनके पाखंड को भाँपकर उनसे कहा, “तुम मुझे क्यों परखते हो? मेरे पास एक दीनार लाओ कि मैं देखूँ।” और वे ले आए। उसने उनसे कहा, “यह छाप और लेख किसका है?” उन्होंने उससे कहा, “कैसर का।” तब यीशु ने उनसे कहा, “जो कैसर का है, वह कैसर को, और जो परमेश्‍वर का है, वह परमेश्‍वर को दो।” और वे उस पर चकित हुए। फिर उसके पास कुछ सदूकी आए जिनका कहना था कि पुनरुत्थान है ही नहीं; वे उससे पूछने लगे, “गुरु, मूसा ने हमारे लिए लिखा है कि यदि कोई निस्संतान मर जाए और अपने पीछे पत्‍नी छोड़ जाए, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी से विवाह करे और अपने भाई के लिए वंश उत्पन्‍न‍ करे। सात भाई थे। पहले ने एक स्‍त्री से विवाह किया और निस्संतान मर गया। फिर दूसरे भाई ने उस स्‍त्री से विवाह किया और वह निस्संतान मर गया, और इसी प्रकार तीसरे ने भी किया, और सातों से कोई संतान नहीं हुई। अंत में वह स्‍त्री भी मर गई। पुनरुत्थान के समय जब वे जी उठेंगे तो वह उनमें से किसकी पत्‍नी होगी? क्योंकि सातों ने उसे अपनी पत्‍नी बनाया था।” यीशु ने उनसे कहा, “कहीं तुम इसलिए तो भ्रम में नहीं हो कि न तो तुम पवित्रशास्‍त्र को समझते हो और न ही परमेश्‍वर के सामर्थ्य को? क्योंकि जब वे मृतकों में से जी उठेंगे तो वे न तो विवाह करेंगे और न ही विवाह में दिए जाएँगे, बल्कि स्वर्ग में दूतों के समान होंगे। अब मृतकों के जिलाए जाने के विषय में क्या तुमने मूसा की पुस्तक में झाड़ी का वर्णन नहीं पढ़ा कि किस प्रकार परमेश्‍वर ने उससे कहा था: मैं अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर और याकूब का परमेश्‍वर हूँ। वह मृतकों का नहीं परंतु जीवितों का परमेश्‍वर है। तुम बहुत बड़े भ्रम में पड़े हो।” शास्‍त्रियों में से एक ने वहाँ आकर उनको विवाद करते हुए सुना और यह जानकर कि यीशु ने उन्हें अच्छी रीति से उत्तर दिया है, उससे पूछा, “सब से प्रमुख आज्ञा कौन सी है?” यीशु ने उत्तर दिया, “ प्रमुख यह है: हे इस्राएल, सुन! प्रभु हमारा परमेश्‍वर एक ही प्रभु है। इसलिए तू प्रभु अपने परमेश्‍वर से अपने संपूर्ण मन और अपने संपूर्ण प्राण और अपनी संपूर्ण बुद्धि और अपनी संपूर्ण शक्‍ति से प्रेम रखना। दूसरी यह है: तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना। इनसे बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।” तब शास्‍त्री ने उससे कहा, “गुरु, बिलकुल ठीक! तूने सच कहा कि वह केवल एक ही है और उसको छोड़ और कोई दूसरा नहीं। इसलिए उससे संपूर्ण मन, संपूर्ण समझ और संपूर्ण शक्‍ति से प्रेम रखना तथा अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमबलियों और बलिदानों से बढ़कर है।” जब यीशु ने देखा कि उसने समझदारी से बात की है तो उससे कहा, “अब तू परमेश्‍वर के राज्य से दूर नहीं।” फिर किसी ने भी उससे प्रश्‍न पूछने का साहस नहीं किया। इसके बाद यीशु मंदिर-परिसर में उपदेश देते हुए कहने लगा, “शास्‍त्री कैसे कहते हैं कि मसीह दाऊद का पुत्र है? दाऊद ने स्वयं पवित्र आत्मा में होकर कहा: प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, ‘मेरे दाहिनी ओर बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पैरों तले न कर दूँ।’ “दाऊद स्वयं उसे प्रभु कहता है, तो वह उसका पुत्र कैसे हुआ?” और विशाल भीड़ आनंद से उसकी बात सुन रही थी। उसने अपने उपदेश में कहा, “शास्‍त्रियों से सावधान रहो जिन्हें लंबे-लंबे चोगे पहनकर घूमना, बाज़ारों में नमस्कार, आराधनालयों में मुख्य आसन और भोजों में मुख्य स्थान पसंद है, जो विधवाओं के घरों को हड़प लेते हैं और दिखावे के लिए लंबी-लंबी प्रार्थनाएँ करते हैं। वे कठोर दंड पाएँगे।” यीशु मंदिर-कोष के सामने बैठकर देख रहा था कि लोग किस प्रकार मंदिर-कोष में पैसे डाल रहे हैं; अनेक धनवान बहुत कुछ डाल रहे थे। तभी एक कंगाल विधवा ने आकर दो छोटे सिक्‍के डाले जिनका मूल्य बहुत कम था। तब उसने अपने शिष्यों को पास बुलाकर उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि इस मंदिर-कोष में डालनेवालों में से इस कंगाल विधवा ने सब से अधिक डाला है। क्योंकि सब ने अपनी भरपूरी में से डाला है, परंतु इसने अपने अभाव में से जो कुछ उसके पास था, वह सब, अर्थात् अपनी संपूर्ण जीविका डाल दी है।” जब यीशु मंदिर से बाहर निकल रहा था तो उसके शिष्यों में से एक ने उससे कहा, “हे गुरु! देख, ये कैसे पत्थर और कैसे भवन हैं!” यीशु ने उससे कहा, “क्या तुम इन विशाल भवनों को देख रहे हो? यहाँ एक पत्थर भी पत्थर पर टिका न रहेगा जो ढाया न जाएगा।” जब यीशु मंदिर के सामने जैतून पहाड़ पर बैठा हुआ था तो पतरस, याकूब, यूहन्‍ना और अंद्रियास ने एकांत में उससे पूछा, “हमें बता कि ये बातें कब होंगी? और जब ये सब बातें पूरी होने पर होंगी तो क्या चिह्‍न होगा?” तब यीशु ने उन्हें बताना आरंभ किया: “सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाए। बहुत से लोग मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं वही हूँ,’ और बहुतों को भरमाएँगे। जब तुम युद्धों की आवाज़ और युद्धों की चर्चाएँ सुनो, तो घबरा मत जाना। इन बातों का होना अवश्य है, परंतु तब भी अंत न होगा। क्योंकि जाति, जाति के विरुद्ध और राज्य, राज्य के विरुद्ध उठ खड़े होंगे; स्थान-स्थान पर भूकंप आएँगे और अकाल पड़ेंगे । ये बातें पीड़ाओं का आरंभ होंगी। “परंतु तुम अपने विषय में सावधान रहना। वे तुम्हें महासभाओं में सौंपेंगे, तुम आराधनालयों में पीटे जाओगे और मेरे कारण शासकों और राजाओं के सामने खड़े किए जाओगे, ताकि उनके लिए साक्षी हो। परंतु पहले सब जातियों में सुसमाचार का प्रचार किया जाना आवश्यक है। जब वे तुम्हें पकड़कर ले जाएँ, तो तुम पहले से चिंता मत करना कि क्या कहोगे, परंतु उस समय जो कुछ तुम्हें बताया जाए, वही कहना; क्योंकि बोलनेवाले तुम नहीं बल्कि पवित्र आत्मा है। “भाई, भाई को और पिता अपनी संतान को मृत्यु के लिए सौंप देगा और संतान अपने माता-पिता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और उन्हें मरवा डालेगी। मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे घृणा करेंगे, परंतु जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। “जब तुम उस उजाड़नेवाले घृणित पात्र को वहाँ खड़े हुए देखो जहाँ उसे नहीं होना चाहिए, (पाठक समझ ले) तो जो यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जाएँ। जो छत पर हो, वह नीचे न उतरे और न ही कुछ लेने के लिए अपने घर में प्रवेश करे। जो खेत में हो, वह अपना वस्‍त्र लेने के लिए पीछे न लौटे। परंतु हाय उन पर जो उन दिनों में गर्भवती होंगी और जो दूध पिलाती होंगी। प्रार्थना करो कि यह शीतकाल में न हो। क्योंकि वे ऐसे क्लेश के दिन होंगे जैसे सृष्‍टि के आरंभ से लेकर—जिसे परमेश्‍वर ने सृजा—अब तक न तो हुए और न कभी होंगे। यदि प्रभु ने उन दिनों को कम न किया होता तो कोई भी प्राणी नहीं बचता; परंतु उन चुने हुओं के कारण जिन्हें उसने स्वयं चुना है, उसने उन दिनों को कम किया है। उस समय यदि कोई तुमसे कहे, ‘देखो, मसीह यहाँ है’ या ‘देखो, वहाँ है’ तो विश्‍वास मत करना। क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यवक्‍ता उठ खड़े होंगे तथा चिह्‍न और अद्भुत कार्य दिखाएँगे कि यदि संभव हो तो चुने हुओं को भटका दें। परंतु तुम सावधान रहो! मैंने पहले ही तुम्हें सब कुछ बता दिया है। “उन दिनों में क्लेश के बाद सूर्य अंधकारमय हो जाएगा और चंद्रमा अपना प्रकाश नहीं देगा, आकाश से तारे गिरने लगेंगे, और जो शक्‍तियाँ आकाश में हैं, वे हिलाई जाएँगी। तब लोग मनुष्य के पुत्र को बड़े सामर्थ्य और महिमा के साथ बादलों में आते हुए देखेंगे। तब वह स्वर्गदूतों को भेजेगा और पृथ्वी के छोर से लेकर आकाश के छोर तक, चारों दिशाओं से अपने चुने हुओं को इकट्ठा करेगा। “अतः अंजीर के पेड़ के इस दृष्‍टांत से सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती है और पत्तियाँ निकलने लगती हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्मकाल निकट है। इसी प्रकार जब तुम भी इन बातों को होते हुए देखो, तो जान लो कि वह निकट है बल्कि द्वार पर ही है। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो जाएँ, तब तक इस पीढ़ी का अंत कदापि न होगा। आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परंतु मेरे वचन कभी न टलेंगे। “परंतु उस दिन या घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न ही पुत्र, परंतु केवल पिता। सावधान! जागते रहो और प्रार्थना करो! क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आएगा। यह ऐसा है जैसे कोई मनुष्य अपना घर छोड़कर दूर यात्रा पर जाते हुए अपने दासों को अधिकार और हर एक को उसका कार्य सौंप जाए, तथा द्वारपाल को आज्ञा दे कि वह जागता रहे। इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि घर का स्वामी कब आएगा; हो सकता है संध्या के समय या आधी रात को या मुरगे के बाँग देने के समय या भोर को। कहीं ऐसा न हो कि वह अचानक आकर तुम्हें सोते हुए पाए। जो तुमसे कह रहा हूँ, वही मैं सब से कहता हूँ, ‘जागते रहो।’ ” दो दिन के बाद फसह और अख़मीरी रोटी का पर्व था। मुख्य याजक और शास्‍त्री इस खोज में थे कि यीशु को किस प्रकार छल से पकड़कर मार डालें। परंतु वे कहते थे, “पर्व के समय नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों में उपद्रव हो जाए।” जब यीशु बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर भोजन करने बैठा हुआ था, तो एक स्‍त्री संगमरमर के पात्र में जटामांसी का बहुमूल्य शुद्ध इत्र लेकर आई। उसने उस संगमरमर के पात्र को तोड़कर इत्र को यीशु के सिर पर उंडेल दिया। परंतु कुछ लोग आपस में बड़बड़ाने लगे, “इत्र की यह बरबादी क्यों हुई? क्योंकि यह इत्र तीन दीनार सौ से भी अधिक में बिक जाता और वह धन कंगालों में बाँटा जा सकता था।” और वे उस स्‍त्री को डाँटने लगे। परंतु यीशु ने कहा, “उसे छोड़ दो! क्यों उसे तंग कर रहे हो? उसने मेरे लिए भला कार्य किया है; कंगाल तो सदा तुम्हारे साथ रहेंगे और जब तुम चाहो उनके साथ भलाई कर सकते हो, परंतु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा। जो वह कर सकती थी, उसने किया; उसने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहले ही से मेरी देह पर इत्र मला है। मैं तुमसे सच कहता हूँ, समस्त संसार में जहाँ कहीं सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ इस स्‍त्री ने जो किया उसका वर्णन भी उसकी स्मृति में किया जाएगा।” तब यहूदा इस्करियोती जो बारहों में से एक था, मुख्य याजकों के पास गया ताकि यीशु को उनके हाथ पकड़वा दे। यह सुनकर वे प्रसन्‍न हुए और उसे रुपए देने की प्रतिज्ञा की। तब वह इस खोज में लग गया कि किस प्रकार अवसर पाकर उसे पकड़वा दे। अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, जब फसह के मेमने का बलिदान किया जाता था, उसके शिष्यों ने उससे पूछा, “तू कहाँ चाहता है कि हम जाकर तेरे खाने के लिए फसह का भोज तैयार करें?” तब उसने अपने दो शिष्यों को भेजा और उनसे कहा, “नगर में जाओ और वहाँ तुम्हें पानी का घड़ा उठाए हुए एक मनुष्य मिलेगा; उसके पीछे चले जाना, और वह जिस घर में प्रवेश करे, उस घर के स्वामी से कहना, ‘गुरु कहता है, “मेरा अतिथि कक्ष कहाँ है, जहाँ मैं अपने शिष्यों के साथ फसह का भोज करूँ?” ’ और वह तुम्हें एक तैयार और बड़ा सा ऊपरी कक्ष दिखाएगा जो सुसज्‍जित किया हुआ है; वहीं तुम हमारे लिए तैयारी करना।” उसके शिष्य निकलकर नगर में आए और जैसा उसने उनसे कहा था वैसा ही पाया, और फसह का भोज तैयार किया। फिर संध्या होने पर वह बारहों के साथ आया। जब वे बैठे भोजन कर रहे थे, तब यीशु ने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि तुममें से एक, जो मेरे साथ भोजन कर रहा है, मुझे पकड़वाएगा।” उन पर उदासी छा गई और वे एक-एक करके उससे पूछने लगे, “क्या वह मैं हूँ?” और उसने उनसे कहा, “वह बारहों में से एक है, जो मेरे साथ थाली में हाथ डालता है। मनुष्य का पुत्र तो जाता ही है जैसा उसके विषय में लिखा है, परंतु हाय उस मनुष्य पर जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है। यदि उस मनुष्य का जन्म ही न होता तो उसके लिए अच्छा था।” जब वे भोजन कर रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, आशिष माँगकर तोड़ी और उन्हें देकर कहा, “लो, यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें दिया; तथा सब ने उसमें से पीया। उसने उनसे कहा, “यह वाचा का मेरा वह लहू है जो बहुतों के लिए बहाया जाता है। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि मैं अंगूर का रस उस दिन तक फिर कभी न पीऊँगा जब तक मैं परमेश्‍वर के राज्य में नया न पीऊँ।” फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ की ओर चले गए। तब यीशु ने उनसे कहा, “तुम सब ठोकर खाओगे, क्योंकि लिखा है: मैं चरवाहे को मारूँगा और भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी। “परंतु अपने जी उठने के बाद मैं तुमसे पहले गलील को जाऊँगा।” पतरस ने उससे कहा, “चाहे सब ठोकर खाएँ, परंतु मैं नहीं खाऊँगा।” तब यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ कि आज इसी रात को, मुरगे के दो बार बाँग देने से पहले, तू तीन बार मेरा इनकार करेगा।” परंतु वह दृढ़तापूर्वक यही कहता रहा, “यदि मुझे तेरे लिए मरना भी पड़े, फिर भी मैं तेरा इनकार कभी न करूँगा।” और सब शिष्य भी इसी प्रकार कहने लगे। फिर वे गतसमनी नामक स्थान पर आए, और उसने अपने शिष्यों से कहा, “जब तक मैं प्रार्थना करता हूँ, यहीं बैठे रहो!” वह पतरस, याकूब और यूहन्‍ना को अपने साथ ले गया, और अत्यंत व्यथित और व्याकुल होने लगा। उसने उनसे कहा, “मेरा मन बहुत उदास है, यहाँ तक कि मैं मरने पर हूँ; तुम यहीं ठहरो और जागते रहो।” फिर थोड़ा आगे बढ़कर वह भूमि पर गिरा और प्रार्थना करने लगा कि यदि संभव हो तो उस पर से यह घड़ी टल जाए, और कहा, “हे अब्बा, हे पिता, तेरे लिए सब कुछ संभव है। यह कटोरा मुझसे हटा ले; फिर भी जो मैं चाहता हूँ वह नहीं बल्कि जो तू चाहता है, वही हो।” तब वह आया और उन्हें सोते हुए पाया। उसने पतरस से कहा, “शमौन, क्या तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका? जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो; आत्मा तो तैयार है परंतु देह दुर्बल है।” और उसने फिर जाकर उन्हीं शब्दों में प्रार्थना की। उसने फिर आकर उन्हें सोते हुए पाया, क्योंकि उनकी आँखें नींद से भारी हो रही थीं, और वे नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें। फिर वह तीसरी बार आया और उनसे कहा, “क्या तुम अब तक सोते और विश्राम करते हो? बहुत हुआ! अब घड़ी आ पहुँची है। देखो, मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथों पकड़वाया जाता है। उठो, हम चलें! देखो मेरा पकड़वानेवाला निकट आ पहुँचा है।” अभी यीशु यह कह ही रहा था कि यहूदा जो बारहों में से एक था, आ पहुँचा; और उसके साथ मुख्य याजकों, शास्‍त्रियों और धर्मवृद्धों की ओर से आई एक भीड़ थी जिनके पास तलवारें और लाठियाँ थीं। उसे पकड़वानेवाले ने उन्हें यह संकेत दिया था, “जिसे मैं चूमूँ, वह वही है, उसको पकड़कर सुरक्षित ले जाना।” वहाँ पहुँचकर यहूदा ने तुरंत उसके पास जाकर कहा, “रब्बी!” और उसे चूमा। तब उन्होंने यीशु पर हाथ डाला और उसे पकड़ लिया। परंतु जो पास खड़े थे उनमें से एक ने तलवार खींचकर महायाजक के दास पर चलाई और उसका कान उड़ा दिया। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुम डाकू समझकर तलवारों और लाठियों के साथ मुझे पकड़ने आए हो? मैं तो प्रतिदिन तुम्हारे साथ मंदिर-परिसर में उपदेश देता था, तब तो तुमने मुझे नहीं पकड़ा; परंतु यह इसलिए हुआ कि पवित्रशास्‍त्र के लेख पूरे हों।” तब सब उसे छोड़कर भाग गए। एक युवक अपनी नग्‍न देह पर चादर लपेटे उसके पीछे-पीछे चलने लगा और लोगों ने उसे पकड़ा। तब वह चादर छोड़कर निर्वस्‍त्र ही भाग गया। फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए; और सब मुख्य याजक, धर्मवृद्ध और शास्‍त्री एकत्रित हुए। पतरस दूरी बनाए रखकर उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन में भीतर तक गया और सिपाहियों के साथ बैठकर आग तापने लगा। मुख्य याजक और संपूर्ण महासभा यीशु को मार डालने के लिए उसके विरुद्ध गवाही ढूँढ़ने लगी, परंतु उन्हें नहीं मिली; क्योंकि बहुत लोग उसके विरुद्ध झूठी गवाही दे रहे थे, परंतु वे गवाहियाँ एक समान नहीं थीं। तब कुछ लोग खड़े होकर उसके विरुद्ध यह झूठी गवाही देने लगे, “हमने इसे कहते हुए सुना है, ‘मैं हाथों से बने इस मंदिर को ढा दूँगा और तीन दिन में दूसरा बनाऊँगा जो हाथों से बना नहीं होगा।’ ” परंतु उनकी यह गवाही भी एक समान नहीं थी। तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, “क्या तेरे पास कोई भी उत्तर नहीं? ये लोग तेरे विरुद्ध क्या गवाही दे रहे हैं?” परंतु वह चुप रहा और उसने कोई उत्तर नहीं दिया। महायाजक ने उससे फिर पूछा, “क्या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?” यीशु ने कहा, “मैं हूँ! और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्‍तिमान के दाहिनी ओर बैठा और आकाश के बादलों के साथ आता हुआ देखोगे।” तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़ते हुए कहा, “अब हमें और गवाहों की क्या आवश्यकता है? तुमने यह निंदा सुनी, तुम्हारा क्या विचार है?” और उन सब ने उसे मृत्युदंड के योग्य ठहराया। तब कुछ लोग उस पर थूकने, और उसका मुँह ढककर उसे घूँसे मारने और उससे कहने लगे, “भविष्यवाणी कर!” और सिपाहियों ने उसे पकड़कर थप्पड़ मारे। जब पतरस नीचे आँगन में था तो महायाजक की दासियों में से एक वहाँ आई, और पतरस को आग तापते देखकर, उसे घूरते हुए बोली, “तू भी तो उस नासरी यीशु के साथ था।” परंतु उसने यह कहकर इनकार किया, “मैं नहीं जानता और न ही मेरी समझ में आ रहा है कि तू क्या कह रही है?” फिर वह बाहर प्रवेश द्वार की ओर चला गया, और मुरगे ने बाँग दी। तब वह दासी उसे देखकर पास खड़े लोगों से फिर कहने लगी, “यह तो उन्हीं में से है।” परंतु उसने फिर से इनकार किया। थोड़ी देर बाद जो पास खड़े हुए थे, वे फिर पतरस से कहने लगे, “सचमुच तू उन्हीं में से है, क्योंकि तू भी तो गलीली है ।” तब वह अपने को कोसने और शपथ खाने लगा, “जिस मनुष्य की तुम बात कर रहे हो, उसे मैं नहीं जानता।” और तुरंत मुरगे ने दूसरी बार बाँग दी; तब पतरस को वह बात स्मरण आई जो यीशु ने उससे कही थी: “मुरगे के दो बार बाँग देने से पहले, तू तीन बार मेरा इनकार करेगा।” तब वह फूट फूटकर रोने लगा। भोर होते ही धर्मवृद्धों और शास्‍त्रियों के साथ मुख्य याजकों और संपूर्ण महासभा ने सम्मति की और यीशु को बाँधकर ले गए, तथा पिलातुस के हाथों सौंप दिया। पिलातुस ने उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” इस पर उसने उससे कहा, “तू आप ही कह रहा है।” फिर मुख्य याजक उस पर बहुत से आरोप लगाने लगे। पिलातुस ने उससे फिर पूछा, “क्या तेरे पास कोई भी उत्तर नहीं? देख, वे तुझ पर कितने आरोप लगा रहे हैं।” परंतु यीशु ने कोई उत्तर नहीं दिया। इस पर पिलातुस को आश्‍चर्य हुआ। पर्व के समय वह किसी एक बंदी को, जिसके लिए लोग अनुरोध करते थे, छोड़ दिया करता था। उस समय बरअब्बा नामक व्यक्‍ति उन विद्रोहियों के साथ बंदी था जिन्होंने विद्रोह में हत्या की थी। भीड़ ऊपर जाकर पिलातुस से माँग करने लगी कि जैसा तू हमारे लिए करता आया है वैसा ही कर। इस पर पिलातुस ने उनसे कहा, “क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?” क्योंकि वह जानता था कि मुख्य याजकों ने उसे ईर्ष्या के कारण पकड़वाया है। परंतु मुख्य याजकों ने भीड़ को उकसाया कि वह बदले में बरअब्बा को ही उनके लिए छोड़े। इस पर पिलातुस ने उनसे फिर पूछा, “तो जिसे तुम यहूदियों का राजा कहते हो, उसके साथ मैं क्या करूँ?” तब वे फिर से चिल्‍लाए, “उसे क्रूस पर चढ़ा!” पिलातुस ने उनसे कहा, “क्यों! उसने क्या बुराई की है?” परंतु वे और भी अधिक चिल्‍लाए, “उसे क्रूस पर चढ़ा!” तब भीड़ को संतुष्‍ट करने की इच्छा से पिलातुस ने उनके लिए बरअब्बा को छोड़ दिया और यीशु को कोड़े लगवाकर सौंप दिया कि क्रूस पर चढ़ाया जाए। फिर सैनिक उसे राजभवन के आँगन में ले गए जो प्रीटोरियुम कहलाता है और उन्होंने पूरे सैन्य दल को एक साथ बुलाया। तब उन्होंने उसे बैंजनी वस्‍त्र पहनाया और काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा; और उसका अभिवादन करने लगे, “यहूदियों के राजा, तेरी जय हो!” फिर वे उसके सिर पर सरकंडा मारते, उस पर थूकते और घुटने टेककर उसे प्रणाम करते रहे। जब वे उसका उपहास कर चुके तो उन्होंने उसका बैंजनी वस्‍त्र उतारकर उसी के वस्‍त्र उसे पहना दिए। तब वे उसे क्रूस पर चढ़ाने के लिए बाहर ले गए। तब उन्होंने वहाँ से निकलनेवाले सिकंदर और रूफुस के पिता शमौन कुरेनी को, जो गाँव से आ रहा था, बेगार में पकड़ा कि वह यीशु का क्रूस उठाकर ले चले। फिर वे यीशु को “गुलगुता” नामक स्थान पर लाए, जिसका अर्थ खोपड़ी का स्थान है। वे उसे गंधरस मिला हुआ दाखरस देने लगे परंतु उसने नहीं लिया। तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ा दिया और अपने लिए पर्ची डालकर कि कौन क्या ले, उसके वस्‍त्रों को आपस में बाँट लिया। जब उन्होंने यीशु को क्रूस पर चढ़ाया तब सुबह के नौ बजे थे। उसके दोषपत्र पर लिखा था: “यहूदियों का राजा।” उसके साथ उन्होंने दो डाकुओं को भी क्रूस पर चढ़ाया, एक उसके दाहिनी ओर और दूसरा उसके बाईं ओर। [इस प्रकार पवित्रशास्‍त्र का वह वचन पूरा हुआ कि वह अपराधियों के साथ गिना गया।] वहाँ से आने-जानेवाले अपने सिर हिलाते हुए यह कहकर उसकी निंदा कर रहे थे, “अरे! मंदिर को ढाकर तीन दिन में बनानेवाले! क्रूस से उतरकर अपने आपको बचा।” इसी प्रकार मुख्य याजक भी शास्‍त्रियों के साथ आपस में उसका उपहास करते हुए कह रहे थे, “इसने दूसरों को बचाया, पर अपने आपको नहीं बचा सकता। इस्राएल का राजा मसीह, अब क्रूस से नीचे उतर आए, ताकि हम देखें और विश्‍वास करें!” जो उसके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए थे, वे भी उसकी निंदा कर रहे थे। जब दिन के बारह बज गए तो सारे देश पर अंधकार छा गया और तीन बजे तक रहा। तीन बजे, यीशु ने ऊँची आवाज़ में पुकारा, “इलोई, इलोई, लमा शबक्‍तनी?” जिसका अर्थ है, “हे मेरे परमेश्‍वर, हे मेरे परमेश्‍वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?” जो पास खड़े थे उनमें से कुछ लोग यह सुनकर कहने लगे, “देखो, वह एलिय्याह को बुला रहा है।” तभी किसी ने दौड़कर स्पंज को सिरके से भरा, और सरकंडे पर लगाकर उसे पीने को दिया और कहा, “ठहरे रहो, देखते हैं कि इसे नीचे उतारने के लिए एलिय्याह आता है या नहीं।” फिर यीशु ने ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाकर प्राण त्याग दिया। तब मंदिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया। यीशु के सामने खड़े शतपति ने उसे इस प्रकार प्राण त्यागते देखकर कहा, “सचमुच यह मनुष्य परमेश्‍वर का पुत्र था।” कुछ स्‍त्रियाँ भी दूर से देख रही थीं, जिनमें मरियम मगदलीनी, छोटे याकूब तथा योसेस की माता मरियम और सलोमी थीं। जब वह गलील में था तो ये उसके पीछे चलती और उसकी सेवा करती रहती थीं, तथा अन्य बहुत सी स्‍त्रियाँ भी थीं जो उसके साथ यरूशलेम तक आई थीं। यह तैयारी का दिन, अर्थात् सब्त से पहले का दिन था। अतः जब संध्या हो गई, तो अरिमतिया का यूसुफ जो महासभा का प्रतिष्‍ठित सदस्य था और स्वयं भी परमेश्‍वर के राज्य की प्रतीक्षा करता था, आया और साहस करके पिलातुस के पास गया और यीशु का शव माँगा। पिलातुस को आश्‍चर्य हुआ कि वह इतनी जल्दी मर गया; और उसने शतपति को बुलाकर पूछा कि वह मर चुका है या नहीं। शतपति से जानकारी प्राप्‍त करके उसने यूसुफ को शव दे दिया। तब यूसुफ ने मलमल की एक चादर खरीदी और शव को उतारकर उस चादर में लपेटा तथा उसे एक कब्र में जो चट्टान में खोदी गई थी, रख दिया। फिर उसने कब्र के द्वार पर एक बड़ा सा पत्थर लुढ़का दिया। मरियम मगदलीनी और योसेस की माता मरियम देख रही थीं कि उसे कहाँ रखा गया है। सब्त का दिन बीतने पर मरियम मगदलीनी, याकूब की माता मरियम और सलोमी ने सुगंधित मसाले खरीदे कि जाकर यीशु पर मलें। सप्‍ताह के पहले दिन बड़े भोर को सूर्योदय होते ही वे कब्र पर आईं। वे आपस में बात कर रही थीं, “हमारे लिए कब्र के द्वार से पत्थर कौन लुढ़काएगा?” परंतु उन्होंने आँखें उठाईं तो देखा कि पत्थर लुढ़का हुआ है जबकि वह बहुत बड़ा था। कब्र के भीतर जाने पर उन्होंने एक युवक को श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए दाहिनी ओर बैठे देखा और वे विस्मित रह गईं। परंतु उसने उनसे कहा, “विस्मित मत हो। तुम यीशु नासरी को ढूँढ़ रही हो जो क्रूस पर चढ़ाया गया था। वह जी उठा है! वह यहाँ नहीं है। देखो, यह वह स्थान है जहाँ उन्होंने उसे रखा था। अब तुम जाओ, उसके शिष्यों और पतरस से कहो कि वह तुमसे पहले गलील को जा रहा है। तुम उससे वहीं मिलोगे, जैसा उसने तुमसे कहा था।” तब वे कब्र से निकलकर भागीं, क्योंकि कँपकँपी और घबराहट उन पर छाई हुई थी। उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा, क्योंकि वे डरी हुई थीं। [सप्‍ताह के पहले दिन जब यीशु जी उठा, वह भोर को सब से पहले मरियम मगदलीनी को दिखाई दिया, जिसमें से उसने सात दुष्‍टात्माएँ निकाली थीं। उसने जाकर यीशु के साथियों को समाचार दिया जो शोक में डूबे हुए थे और रो रहे थे; जब उन्होंने सुना कि यीशु जीवित है और उसे दिखाई दिया है, तो उन्हें विश्‍वास नहीं हुआ। इन बातों के बाद जब उनमें से दो जन गाँव की ओर जा रहे थे तो यीशु उन्हें दूसरे रूप में दिखाई दिया। उन्होंने जाकर अन्य शिष्यों को यह समाचार दिया, परंतु उन्होंने उनका भी विश्‍वास नहीं किया। इसके बाद जब वे ग्यारह भोजन करने बैठे थे, यीशु वहाँ प्रकट हुआ और उसने उनके अविश्‍वास तथा मन की कठोरता को धिक्‍कारा, क्योंकि उन्होंने उन लोगों का विश्‍वास नहीं किया जिन्होंने उसे जी उठने के बाद देखा था। फिर उसने उनसे कहा, “सारे जगत में जाओ और समस्त सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो विश्‍वास करेगा और बपतिस्मा लेगा उसी का उद्धार होगा, परंतु जो विश्‍वास नहीं करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा। विश्‍वास करनेवालों में ये चिह्‍न होंगे: वे मेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को निकालेंगे, नई-नई भाषाएँ बोलेंगे, वे साँपों को हाथों से उठा लेंगे और यदि वे कोई प्राणनाशक विष भी पी जाएँ फिर भी उन्हें हानि नहीं होगी; वे बीमारों पर हाथ रखेंगे और वे स्वस्थ हो जाएँगे।” उनसे बातें करने के बाद प्रभु यीशु स्वर्ग पर उठा लिया गया और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर बैठ गया। फिर उन्होंने हर स्थान पर जाकर प्रचार किया। प्रभु उनके साथ कार्य करता रहा और साथ-साथ होनेवाले चिह्‍नों के द्वारा वचन को दृढ़ करता रहा। आमीन।] हे माननीय थियुफिलुस, क्योंकि बहुत से लोगों ने हमारे बीच में हुई घटनाओं के विवरण को व्यवस्थित करने का कार्य अपने हाथों में लिया, जैसा हमें उन लोगों से प्राप्‍त हुआ, जिन्होंने आरंभ से इन बातों को देखा और वचन के सेवक थे; इसलिए मैंने भी यह उचित समझा कि उन सब बातों को आरंभ से भली-भाँति जाँचकर तेरे लिए क्रमानुसार लिखूँ, ताकि जो बातें तुझे सिखाई गईं तू उनकी निश्‍चितता को जाने। यहूदिया के राजा हेरोदेस के दिनों में जकरयाह नाम का एक याजक था जो अबिय्याह के दल का था, और उसकी पत्‍नी हारून के वंश की थी, जिसका नाम इलीशिबा था। वे दोनों परमेश्‍वर की दृष्‍टि में धर्मी थे, और प्रभु की सारी आज्ञाओं और नियमों का पालन करने में निर्दोष थे। उनके कोई संतान नहीं थी, क्योंकि इलीशिबा बाँझ थी, और वे दोनों बूढ़े हो चुके थे। फिर ऐसा हुआ कि जब वह अपने दल की बारी आने पर परमेश्‍वर के सामने याजक का कार्य कर रहा था, तो याजकों की रीति के अनुसार उसे पर्ची डालकर चुना गया कि प्रभु के मंदिर में प्रवेश करके धूप जलाए, और धूप जलाने के समय लोगों की समस्त मंडली बाहर प्रार्थना कर रही थी। तब उसे प्रभु का एक स्वर्गदूत धूप की वेदी के दाहिनी ओर खड़ा हुआ दिखाई दिया। उसे देखकर जकरयाह घबरा गया, और उस पर भय छा गया। परंतु स्वर्गदूत ने उससे कहा, “हे जकरयाह मत डर! क्योंकि तेरी प्रार्थना सुनी गई है, और तेरी पत्‍नी इलीशिबा तेरे लिए एक पुत्र को जन्म देगी, और तू उसका नाम यूहन्‍ना रखना। वह तेरे लिए आनंद और हर्ष का कारण होगा, और बहुत से लोग उसके जन्म से आनंदित होंगे; क्योंकि वह प्रभु की दृष्‍टि में महान होगा, और कभी दाखरस और मदिरा न पीएगा, और अपनी माता के गर्भ से ही पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होगा। वह इस्राएल की संतानों में से बहुतों को उनके प्रभु परमेश्‍वर की ओर फिराएगा; और वह उसके आगे-आगे एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ्य में चलेगा कि पिताओं के मनों को बालकों की ओर और आज्ञा न माननेवालों को धर्मियों की समझ की ओर फिरा दे, और प्रभु के लिए एक योग्य प्रजा तैयार करे।” तब जकरयाह ने स्वर्गदूत से कहा, “मैं यह कैसे जानूँ? क्योंकि मैं तो बूढ़ा हूँ और मेरी पत्‍नी भी बूढ़ी हो चुकी है।” स्वर्गदूत ने उसे उत्तर दिया, “मैं जिब्राईल हूँ, जो परमेश्‍वर के सामने खड़ा रहता हूँ; और मुझे तुझसे बात करने और तुझे यह सुसमाचार सुनाने के लिए भेजा गया है। और देख, जिस दिन तक ये बातें पूरी न हो जाएँ तू मौन रहेगा और बोल न पाएगा, क्योंकि तूने मेरी बातों पर विश्‍वास नहीं किया जो अपने समय पर पूरी होंगी।” जो लोग जकरयाह की प्रतीक्षा कर रहे थे, वे आश्‍चर्य करने लगे कि उसे मंदिर में इतनी देर कैसे लग रही है। जब वह बाहर आया तो उनसे बोल न सका। तब वे जान गए कि उसने मंदिर में कोई दर्शन पाया है; और वह उन्हें संकेत करता रहा और गूँगा ही रहा। फिर ऐसा हुआ कि जब उसकी सेवा के दिन पूरे हुए तो वह अपने घर चला गया। इन दिनों के बाद उसकी पत्‍नी इलीशिबा गर्भवती हुई; और उसने यह कहकर अपने आपको पाँच महीने तक छिपाए रखा, “प्रभु ने मनुष्यों में मेरे अपमान को दूर करने के लिए इन दिनों में मुझ पर कृपादृष्‍टि करके मेरे साथ ऐसा किया है।” उसके छठे महीने में जिब्राईल स्वर्गदूत को परमेश्‍वर की ओर से गलील के नासरत नामक नगर में एक कुँवारी के पास भेजा गया, जिसकी मँगनी दाऊद के घराने के यूसुफ नामक एक पुरुष से हुई थी, और उस कुँवारी का नाम मरियम था। स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा, “हे प्रभु की कृपापात्री, आनंदित हो! प्रभु तेरे साथ है ।” परंतु इस कथन से वह बहुत घबरा गई, और सोचने लगी यह कैसा अभिवादन है? तब स्वर्गदूत ने उससे कहा, “हे मरियम, मत डर! क्योंकि तुझ पर परमेश्‍वर का अनुग्रह हुआ है; देख, तू गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी, और तू उसका नाम यीशु रखना। वह महान होगा और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा, और प्रभु परमेश्‍वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसे देगा, वह याकूब के घराने पर सदा काल तक राज्य करेगा, और उसके राज्य का अंत न होगा।” परंतु मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, “यह कैसे होगा, क्योंकि मैं तो कुँवारी हूँ?” स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया, “पवित्र आत्मा तुझ पर आएगा, और परमप्रधान का सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगा; इसलिए वह पवित्र जो उत्पन्‍न‍ होगा, परमेश्‍वर का पुत्र कहलाएगा। देख, तेरी संबंधी इलीशिबा भी अपने बुढ़ापे में एक पुत्र जनने वाली है, और यह उसका जो बाँझ कहलाती थी, छठा महीना है; क्योंकि परमेश्‍वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।” मरियम ने कहा, “देख, मैं प्रभु की दासी हूँ; तेरे वचन के अनुसार मेरे साथ हो।” तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया। उन दिनों में मरियम उठकर शीघ्रता से यहूदा के पहाड़ी प्रदेश में स्थित एक नगर को गई, जहाँ उसने जकरयाह के घर में जाकर इलीशिबा को नमस्कार किया। फिर ऐसा हुआ कि जब इलीशिबा ने मरियम का नमस्कार सुना, तब बच्‍चा उसके पेट में उछला, और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गई, और ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, “तू स्‍त्रियों में धन्य है, और तेरे गर्भ का फल धन्य है। मुझ पर यह कृपा कैसे हुई कि मेरे प्रभु की माता मेरे पास आई? क्योंकि देख, जैसे ही तेरे नमस्कार की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी, वैसे ही बच्‍चा मेरे पेट में आनंद से उछल पड़ा। धन्य है वह जिसने विश्‍वास किया कि जो बातें प्रभु की ओर से उससे कही गई हैं, पूरी होंगी।” तब मरियम ने कहा: मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है, और मेरी आत्मा अपने उद्धारकर्ता परमेश्‍वर में मगन हुई, क्योंकि उसने अपनी दासी की दीन दशा पर दृष्‍टि की है। इसलिए देखो, अब से सब पीढ़ियाँ मुझे धन्य कहेंगी; क्योंकि उस सामर्थी ने मेरे लिए बड़े-बड़े कार्य किए हैं, और उसका नाम पवित्र है, और उसकी दया उन पर, जो उसका भय मानते हैं, पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है। उसने अपने भुजबल से पराक्रम का कार्य किया, और जो अपने मन में अभिमान करते थे, उन्हें तितर-बितर किया; उसने शासकों को सिंहासनों से गिराकर दीनों को ऊँचा उठाया, उसने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्‍त किया और धनवानों को खाली हाथ निकाल दिया। उसने सदा अपनी दया का स्मरण करके अपने सेवक इस्राएल को संभाला, जैसा उसने हमारे पूर्वजों से अर्थात् अब्राहम और उसके वंशज से कहा था। मरियम लगभग तीन महीने इलीशिबा के साथ रही, फिर वह अपने घर लौट गई। तब इलीशिबा के प्रसव का समय पूरा हुआ, और उसने एक पुत्र को जन्म दिया। जब उसके पड़ोसियों और संबंधियों ने सुना कि प्रभु ने उस पर अपनी बड़ी दया दिखाई है, तो वे भी उसके साथ आनंद मनाने लगे। फिर ऐसा हुआ कि वे आठवें दिन बालक का ख़तना करने के लिए आए, और उसके पिता के नाम पर उसका नाम जकरयाह रखने लगे। इस पर उसकी माता ने कहा, “नहीं, बल्कि इसका नाम यूहन्‍ना रखा जाएगा।” तब उन्होंने उससे कहा, “तेरे कुटुंब में तो किसी का यह नाम नहीं।” फिर वे उसके पिता से संकेत करके पूछने लगे कि वह उसका क्या नाम रखना चाहता है। उसने एक तख्ती मँगाकर उस पर लिखा, “इसका नाम यूहन्‍ना है।” और सब को आश्‍चर्य हुआ। तुरंत उसका मुँह और उसकी जीभ खुल गई और वह परमेश्‍वर की स्तुति करने लगा। उनके आस-पड़ोस में रहनेवाले सब लोगों पर भय छा गया, और यहूदिया के सारे पहाड़ी प्रदेश में इन सब बातों की चर्चा होने लगी, और जिन्होंने यह सुना, उन सब ने इन बातों को अपने मन में रखा और कहा, “यह बालक कैसा होगा?” क्योंकि निश्‍चय ही प्रभु का हाथ उस पर था। तब उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया और भविष्यवाणी करने लगा: इस्राएल का प्रभु परमेश्‍वर धन्य है, क्योंकि प्रभु ने अपने लोगों की सुधि ली और उनका छुटकारा किया, और अपने सेवक दाऊद के घराने में हमारे लिए एक उद्धार का सींग निकाला, —जैसे उसने प्राचीन काल से अपने पवित्र भविष्यवक्‍ताओं के मुँह से कहलवाया था— अर्थात् हमारे शत्रुओं और हमसे सब घृणा करनेवालों के हाथों से हमारा उद्धार किया; और हमारे पूर्वजों पर दया की तथा अपनी उस पवित्र वाचा का स्मरण किया, अर्थात् वह शपथ जो उसने हमारे पिता अब्राहम से खाई थी, कि वह हमें यह दान देगा कि हम शत्रुओं के हाथ से मुक्‍त होकर जीवन भर निडरता, पवित्रता और धार्मिकता के साथ प्रभु के सामने उसकी सेवा करें। और तू, हे बालक, परमप्रधान का भविष्यवक्‍ता कहलाएगा, क्योंकि तू प्रभु के मार्ग तैयार करने के लिए उसके आगे-आगे चलेगा, कि उसके लोगों को उनके पापों की क्षमा के द्वारा उद्धार का ज्ञान दे, जो हमारे परमेश्‍वर की अपार करुणा के कारण होगा, जिससे हम पर ऊपर से भोर का प्रकाश प्रकट होगा, कि अंधकार और मृत्यु की छाया में बैठनेवालों को प्रकाश दे, और हमारे पैरों को शांति के मार्ग पर ले जाए। और वह बालक बढ़ता और आत्मा में बलवंत होता गया, और इस्राएल पर अपने प्रकट होने के दिन तक जंगलों में रहा। उन दिनों में ऐसा हुआ कि औगुस्तुस कैसर की ओर से आज्ञा निकली कि सारे जगत के लोगों के नाम लिखे जाएँ। यह पहली नाम लिखाई उस समय हुई जब क्‍विरिनियुस सीरिया का राज्यपाल था। सब लोग नाम लिखवाने के लिए अपने-अपने नगर को जाने लगे। अतः यूसुफ भी इसलिए कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर को गया, जो बैतलहम कहलाता है, कि वह अपनी मँगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी, नाम लिखवाए। फिर ऐसा हुआ कि जब वे वहाँ थे तब मरियम के प्रसव के दिन पूरे हुए, और उसने अपने पहलौठे पुत्र को जन्म दिया, तथा उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में लिटा दिया, क्योंकि उनके लिए सराय में कोई स्थान नहीं था। उस क्षेत्र में कुछ चरवाहे थे जो रात को मैदान में रहकर अपने झुंड की रखवाली कर रहे थे। तब प्रभु का एक स्वर्गदूत उनके सामने आ खड़ा हुआ और प्रभु का तेज उनके चारों ओर फैल गया, और वे अत्यंत भयभीत हो गए। परंतु स्वर्गदूत ने उनसे कहा, “डरो मत, क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, क्योंकि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, जो मसीह प्रभु है; और तुम्हारे लिए यह चिह्‍न होगा कि तुम एक शिशु को कपड़े में लिपटा और चरनी में लेटा हुआ पाओगे।” तब अचानक उस स्वर्गदूत के साथ स्वर्गीय सेना का एक बड़ा दल परमेश्‍वर की स्तुति करते और यह कहते हुए दिखाई दिया: सर्वोच्‍च स्थान में परमेश्‍वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में शांति हो, जिनसे वह प्रसन्‍न है। फिर ऐसा हुआ कि जब स्वर्गदूत उनके पास से स्वर्ग को चले गए, तो चरवाहे आपस में कहने लगे, “आओ, हम बैतलहम जाकर इस बात को जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें।” तब उन्होंने शीघ्र जाकर मरियम और यूसुफ को, और उस शिशु को जो चरनी में लेटा हुआ था, पाया; यह देखकर उन्होंने वह बात जो उस बालक के विषय में उनसे कही गई थी, कह सुनाई। जिन्होंने भी उन बातों को सुना जो चरवाहों ने उनसे कहीं, आश्‍चर्य किया; परंतु मरियम इन सब बातों को अपने मन में रखकर विचार करती रही। चरवाहे परमेश्‍वर की महिमा और स्तुति करते हुए लौट गए, क्योंकि जो कुछ उन्होंने सुना और देखा, वह सब वैसा ही था जैसा उनसे कहा गया था। जब आठ दिन पूरे हुए और उसके ख़तने का समय आया, तो उसका नाम यीशु रखा गया, जो उसके गर्भ में आने से पहले स्वर्गदूत के द्वारा दिया गया था। जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उनके शुद्ध होने के दिन पूरे हुए, तो वे उसे प्रभु को अर्पित करने के लिए यरूशलेम लाए (जैसा प्रभु की व्यवस्था में लिखा है: प्रत्येक पहलौठा प्रभु के लिए पवित्र ठहरेगा। ), कि जो प्रभु की व्यवस्था में कहा गया उसके अनुसार, पंडुकों का एक जोड़ा या कबूतर के दो बच्‍चे बलिदान करें। और देखो, यरूशलेम में शिमोन नामक एक मनुष्य था। वह धर्मी और भक्‍त मनुष्य था और इस्राएल की शांति की प्रतीक्षा कर रहा था, तथा पवित्र आत्मा उस पर था; और पवित्र आत्मा के द्वारा उस पर यह प्रकट किया गया था कि जब तक वह प्रभु के मसीह को न देख ले, मृत्यु को न देखेगा। वह आत्मा की प्रेरणा से मंदिर-परिसर में आया; और जब माता-पिता बालक यीशु को भीतर लाए कि व्यवस्था की विधि के अनुसार उसके साथ करें, तो उसने बालक को गोद में लिया और परमेश्‍वर की स्तुति करते हुए कहा: हे स्वामी, अब तू अपने वचन के अनुसार अपने दास को शांति से विदा कर; क्योंकि मेरी आँखों ने तेरे उद्धार को देख लिया जिसे तूने सब लोगों के सामने तैयार किया है, कि वह गैरयहूदियों के लिए प्रकाशन की ज्योति हो और तेरी प्रजा इस्राएल की महिमा हो। बालक के विषय में जो कहा गया, उससे उसके पिता और माता को आश्‍चर्य हुआ। तब शिमोन ने उन्हें आशिष दी और उसकी माता मरियम से कहा, “देख, यह बालक इस्राएल में बहुतों के पतन और उत्थान के लिए और ऐसा चिह्‍न होने के लिए ठहराया गया है जिसका विरोध किया जाएगा (और तलवार तेरे अपने प्राण को आर-पार छेदेगी), जिससे बहुतों के मन के विचार प्रकट होंगे।” अब आशेर के गोत्र से फनूएल की बेटी हन्‍नाह एक भविष्यवक्‍तिन थी। वह बहुत बूढ़ी हो गई थी, और विवाह के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रही, और अब चौरासी वर्ष की विधवा थी। वह मंदिर को नहीं छोड़ती थी बल्कि दिन-रात उपवास और प्रार्थना के साथ सेवा करती रहती थी। उसी घड़ी वह पास आकर परमेश्‍वर को धन्यवाद देने लगी और उन सब लोगों को जो यरूशलेम के छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे थे, उस बालक के विषय में बताने लगी। जब उन्होंने प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ पूरा कर लिया, तो गलील में अपने नगर नासरत को लौट गए। वह बालक बढ़ता, बलवंत होता और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया, और परमेश्‍वर का अनुग्रह उस पर था। उसके माता-पिता प्रति वर्ष फसह के पर्व पर यरूशलेम को जाया करते थे। जब वह बारह वर्ष का था, तो वे पर्व की रीति के अनुसार वहाँ गए। जब वे उन दिनों को पूरा करके वापस लौट रहे थे, तो बालक यीशु यरूशलेम में रह गया, और उसके माता-पिता यह नहीं जानते थे। वे यह सोचकर कि यीशु यात्रियों के साथ होगा, एक दिन के पड़ाव तक निकल आए; फिर वे उसे संबंधियों और परिचित लोगों में ढूँढ़ने लगे, और जब वह नहीं मिला, तो उसे ढूँढ़ते-ढूँढ़ते यरूशलेम को लौटे। फिर ऐसा हुआ कि तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मंदिर-परिसर में शिक्षकों के बीच बैठे, उनकी बातें सुनते और उनसे प्रश्‍न करते हुए पाया; और जो उसकी सुन रहे थे, वे सब उसकी समझ और उसके उत्तरों से चकित थे। उसे देखकर उसके माता-पिता आश्‍चर्यचकित हुए, और उसकी माता ने उससे कहा, “बेटा, तूने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? देख, तेरे पिता और मैं व्याकुल होकर तुझे ढूँढ़ रहे थे।” उसने उनसे कहा, “तुम मुझे क्यों ढूँढ़ रहे थे? क्या तुम नहीं जानते थे कि मेरा अपने पिता के घर में होना अवश्य है?” परंतु जो बात उसने उनसे कही, उसे वे नहीं समझे। फिर वह उनके साथ गया और नासरत में आया, तथा उनके अधीन रहा। उसकी माता ने इन सब बातों को अपने मन में रखा। यीशु बुद्धि और डील-डौल में तथा परमेश्‍वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया। तिबिरियुस कैसर के शासन के पंद्रहवें वर्ष में पुंतियुस पिलातुस यहूदिया का राज्यपाल था, और चौथाई राजाओं में हेरोदेस गलील का, और उसका भाई फिलिप्पुस इतूरैया और त्रखोनीतिस क्षेत्र का और लिसानियास अबिलेने का शासक था; और जब हन्‍ना और काइफा महायाजक थे, उस समय परमेश्‍वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्‍ना के पास पहुँचा। वह यरदन के आस-पास के सारे क्षेत्र में जाकर पापों की क्षमा के लिए पश्‍चात्ताप के बपतिस्मा का प्रचार करने लगा, जैसा यशायाह भविष्यवक्‍ता के वचनों की पुस्तक में लिखा है: एक आवाज़ जंगल में पुकार रही है, “प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसके पथ सीधे करो। प्रत्येक घाटी भरी जाएगी और प्रत्येक पहाड़ और टीला नीचा किया जाएगा, और जो टेढ़े हैं उन्हें सीधा तथा जो ऊबड़-खाबड़ हैं उन्हें समतल मार्ग बनाया जाएगा; और सब प्राणी परमेश्‍वर के उद्धार को देखेंगे।” वह उस भीड़ से जो उससे बपतिस्मा लेने के लिए निकलकर आई थी, कहने लगा, “हे साँप के बच्‍चो, तुम्हें आनेवाले प्रकोप से भागने की चेतावनी किसने दी? इसलिए पश्‍चात्ताप के योग्य फल लाओ, और अपने मन में यह न कहने लगो, ‘हमारा पिता अब्राहम है,’ क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्‍वर इन पत्थरों से भी अब्राहम के लिए संतान उत्पन्‍न‍ कर सकता है। अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा है, और प्रत्येक पेड़ जो अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंक दिया जाता है।” तब लोग उससे पूछने लगे, “तो हम क्या करें?” उसने उन्हें उत्तर दिया, “जिसके पास दो कुरते हों वह उसके साथ बाँट ले जिसके पास नहीं है, और जिसके पास भोजन हो वह भी ऐसा ही करे।” फिर कर वसूलनेवाले भी बपतिस्मा लेने आए और उससे पूछा, “हे गुरु, हम क्या करें?” उसने उनसे कहा, “जितना लेने का तुम्हें आदेश मिला है, उससे अधिक वसूल न करना।” सैनिक भी उससे पूछने लगे, “और हम क्या करें?” उसने उन्हें उत्तर दिया, “किसी पर अत्याचार न करना और न ही झूठा आरोप लगाना, परंतु अपने वेतन में संतुष्‍ट रहना।” जब लोग आशा कर रहे थे, और वे सब अपने-अपने मन में यूहन्‍ना के विषय में विचार कर रहे थे कि कहीं यही तो मसीह नहीं है, तो यूहन्‍ना ने सब से कहा, “मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ; परंतु जो आ रहा है वह मुझसे अधिक सामर्थी है, मैं उसके जूतों के फ़ीते खोलने के भी योग्य नहीं हूँ। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। उसका सूप उसके हाथ में है कि वह अपना खलिहान अच्छी तरह से साफ़ करे और गेहूँ को अपने खत्ते में इकट्ठा करे, परंतु भूसी को वह कभी न बुझनेवाली आग में भस्म करेगा।” इस प्रकार वह अन्य बहुत सी बातों को समझाता हुआ लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा; परंतु जब उसने चौथाई देश के राजा हेरोदेस को उसके भाई फिलिप्पुस की पत्‍नी हेरोदियास के विषय में और सब बुरे कार्यों के विषय में जो उसने किए थे, फटकार लगाई, तो हेरोदेस ने उन सब कार्यों के साथ यह भी किया कि यूहन्‍ना को बंदीगृह में डाल दिया। फिर ऐसा हुआ कि जब सब लोगों ने बपतिस्मा लिया तो यीशु ने भी बपतिस्मा लिया, और जब वह प्रार्थना कर रहा था तो आकाश खुल गया, तब पवित्र आत्मा दैहिक रूप में कबूतर के समान उस पर उतरा और आकाश से एक आवाज़ आई, “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझसे अति प्रसन्‍न हूँ।” यीशु ने जब अपनी सेवा आरंभ की तो वह लगभग तीस वर्ष का था, और जैसा समझा जाता था, वह यूसुफ का पुत्र था जो एली का, और जो मत्तात का, जो लेवी का, जो मलकी का, जो यन्‍ना का, जो यूसुफ का, जो मत्तित्याह का, जो आमोस का, जो नहूम का, जो असल्याह का, जो नोगह का, जो मात का, जो मत्तित्याह का, जो शिमी का, जो योसेख का, जो योदाह का, जो यूहन्‍ना का, जो रेसा का, जो जरुब्बाबिल का, जो शालतिएल का, जो नेरी का, जो मलकी का, जो अद्दी का, जो कोसाम का, जो इलमोदाम का, जो एर का, जो येशू का, जो इलाजार का, जो योरीम का, जो मत्तात का, जो लेवी का, जो शिमोन का, जो यहूदा का, जो यूसुफ का, जो योनान का, जो एल्याकीम का, जो मलेआह का, जो मिन्‍नाह का, जो मत्तता का, जो नातान का, जो दाऊद का, जो यिशै का, जो ओबेद का, जो बोअज़ का, जो सलमोन का, जो नहशोन का, जो अम्मीनादाब का, जो आदमीन का, जो अरनी का, जो हिस्रोन का, जो फिरिस का, जो यहूदा का, जो याकूब का, जो इसहाक का, जो अब्राहम का, जो तेरह का, जो नाहोर का, जो सरूग का, जो रू का, जो पेलेग का, जो एबेर का, जो शेलह का, जो केनान का, जो अर्पक्षद का, जो शेम का, जो नूह का, जो लेमेक का, जो मथूशेलह का, जो हनोक का, जो येरेद का, जो महललेल का, जो केनान का, जो एनोश का, जो शेत का, जो आदम का, और जो परमेश्‍वर का पुत्र था। पवित्र आत्मा से परिपूर्ण यीशु यरदन से लौटा, और आत्मा उसे जंगल में ले गया जहाँ शैतान के द्वारा चालीस दिन तक उसकी परीक्षा हुई। उन दिनों में उसने कुछ नहीं खाया और जब वे दिन पूरे हुए तो उसे भूख लगी। तब शैतान ने उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है तो इस पत्थर से कह कि रोटी बन जाए।” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: मनुष्य केवल रोटी से जीवित नहीं रहेगा।” फिर शैतान ने उसे ऊपर ले जाकर क्षण भर में जगत के सारे राज्य दिखाए; और उससे कहा, “मैं यह सब अधिकार और इनका वैभव तुझे दे दूँगा, क्योंकि यह मुझे सौंपा गया है और जिसे चाहूँ उसे मैं देता हूँ; इसलिए यदि तू मुझे दंडवत् करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “ लिखा है: तू अपने प्रभु परमेश्‍वर को दंडवत् कर और केवल उसी की सेवा कर।” तब शैतान ने उसे यरूशलेम में ले जाकर मंदिर की चोटी पर खड़ा किया, और उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो अपने आपको यहाँ से नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है: वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा कि तेरी रक्षा करें, “और वे तुझे अपने हाथों पर उठा लेंगे कहीं ऐसा न हो कि तेरे पैर को पत्थर से चोट लगे।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “कहा गया है: तू अपने प्रभु परमेश्‍वर की परीक्षा न करना।” जब शैतान हर प्रकार की परीक्षा कर चुका, तो कुछ समय के लिए उसके पास से चला गया। फिर यीशु आत्मा के सामर्थ्य से भरा हुआ गलील को लौटा और उसकी चर्चा आस-पास के सभी क्षेत्रों में फैल गई। वह उनके आराधनालयों में उपदेश देता था, और सब लोग उसकी प्रशंसा करते थे। फिर वह नासरत में आया, जहाँ उसका पालन-पोषण हुआ था, और अपने नियमानुसार वह सब्त के दिन आराधनालय में गया, और पढ़ने के लिए खड़ा हुआ। उसे यशायाह भविष्यवक्‍ता की पुस्तक दी गई, और उसने पुस्तक खोलकर वह स्थान निकाला जहाँ लिखा था: प्रभु का आत्मा मुझ पर है, क्योंकि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिए मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे भेजा है कि मैं बंदियों को छुटकारे का और अंधों को दृष्‍टि पाने का समाचार दूँ और कुचले हुओं को छुड़ाऊँ और प्रभु के अनुग्रह के वर्ष की घोषणा करूँ। फिर उसने पुस्तक बंद की और सेवक को देकर बैठ गया, और आराधनालय में सब की आँखें उसी पर लगी थीं। तब वह उनसे कहने लगा, “पवित्रशास्‍त्र का यह लेख आज तुम्हारे सुनने के साथ ही पूरा हो गया है।” सब उसकी प्रशंसा करने लगे और उसके मुँह से निकले अनुग्रह के वचनों पर आश्‍चर्य करते हुए कहने लगे, “क्या यह यूसुफ का पुत्र नहीं?” उसने उनसे कहा, “तुम अवश्य मेरे लिए यह कहावत कहोगे; ‘हे वैद्य, अपने को स्वस्थ कर; जो कुछ हमने सुना कि कफरनहूम में हुआ, यहाँ अपने नगर में भी कर।’ ” फिर उसने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि कोई भी भविष्यवक्‍ता अपने नगर में सम्मान नहीं पाता। मैं तुमसे सच कहता हूँ, एलिय्याह के दिनों में जब तीन वर्ष और छः महीने तक आकाश बंद रहा, और संपूर्ण पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ा, तब इस्राएल में बहुत सी विधवाएँ थीं, परंतु एलिय्याह को उनमें से किसी के पास नहीं, केवल सैदा के सारफत में एक विधवा के पास भेजा गया। फिर एलीशा भविष्यवक्‍ता के दिनों में इस्राएल में बहुत से कोढ़ी थे, परंतु उनमें से किसी को नहीं, केवल सीरियावासी नामान को ही शुद्ध किया गया।” ये बातें सुनते ही आराधनालय में सब लोग क्रोध से भर गए, और उन्होंने उठकर उसे नगर से बाहर निकाल दिया, और जिस पहाड़ पर उनका नगर बसा हुआ था उसकी चोटी पर ले गए, कि उसे वहाँ से गिरा दें। परंतु वह उनके बीच में से निकलकर चला गया। फिर वह गलील के एक नगर कफरनहूम में आया, और सब्त के दिन लोगों को उपदेश देने लगा; लोग उसके उपदेश से आश्‍चर्यचकित थे, क्योंकि उसका वचन अधिकार के साथ था। उस आराधनालय में एक मनुष्य था जिसमें दुष्‍टात्मा थी, और वह ऊँची आवाज़ से चिल्‍ला उठा, “हे यीशु नासरी! हमें छोड़, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं जानता हूँ कि तू कौन है: परमेश्‍वर का पवित्र जन।” परंतु यीशु ने उसे डाँटकर कहा, “चुप रह और उसमें से निकल जा।” और वह दुष्‍टात्मा उस मनुष्य को उनके बीच में पटककर बिना उसे हानि पहुँचाए उसमें से निकल गई। इस पर सब लोग अचंभित हुए, और आपस में यह बात करने लगे, “यह कैसा वचन है? वह अधिकार और सामर्थ्य के साथ अशुद्ध आत्माओं को आज्ञा देता है और वे निकल जाती हैं।” अतः आस-पास के प्रत्येक स्थान में उसकी चर्चा फैलने लगी। वह आराधनालय से उठकर शमौन के घर गया। शमौन की सास तेज़ ज्वर से पीड़ित थी, और उन्होंने उसके लिए यीशु से विनती की। तब उसने उसके पास खड़े होकर ज्वर को डाँटा, और उसका ज्वर उतर गया तथा वह तुरंत उठकर उनकी सेवा करने लगी। सूर्यास्त होने पर वे सब जिनके पास भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ प्रकार की बीमारियों से पीड़ित लोग थे, उन्हें यीशु के पास लाए; और उसने उनमें से हर एक पर हाथ रखकर उन्हें स्वस्थ किया। बहुतों में से दुष्‍टात्माएँ भी चिल्‍लाती और यह कहती हुई निकल गईं, “तू परमेश्‍वर का पुत्र है।” परंतु वह उन्हें डाँटता और बोलने नहीं देता था, क्योंकि वे जानती थीं कि वह मसीह है। जब दिन हुआ तो वह निकलकर किसी निर्जन स्थान पर चला गया; और लोग उसे ढूँढ़ते हुए उसके पास पहुँच गए, और उसे रोकने लगे कि वह उनके पास से न जाए। परंतु उसने उनसे कहा, “मुझे अन्य नगरों में भी परमेश्‍वर के राज्य का सुसमाचार सुनाना अवश्य है, क्योंकि मुझे इसी लिए भेजा गया है।” और वह यहूदिया के आराधनालयों में प्रचार करता रहा। फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु गन्‍नेसरत की झील के किनारे खड़ा था और लोग परमेश्‍वर का वचन सुनने के लिए उस पर गिरे पड़ रहे थे, तो उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं; और मछुए उनमें से उतरकर जालों को धो रहे थे। फिर उसने उन नावों में से एक पर, जो शमौन की थी, चढ़कर उससे कहा कि किनारे से थोड़ा हटा ले। तब वह बैठकर नाव से लोगों को उपदेश देने लगा। जब वह बोल चुका, तब उसने शमौन से कहा, “गहरे में ले चल और तुम मछलियाँ पकड़ने के लिए अपने जाल डालो।” इस पर शमौन ने कहा, “हे स्वामी, हमने पूरी रात परिश्रम किया पर कुछ हाथ नहीं लगा, फिर भी तेरे कहने पर मैं जाल डालूँगा।” और जब उन्होंने ऐसा किया तो बड़ी संख्या में मछलियाँ घेर लाए, और उनके जाल फटने लगे। उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव में थे, संकेत किया कि वे आकर उनकी सहायता करें; और उन्होंने आकर दोनों नावें इतनी भर लीं कि वे डूबने लगीं। जब शमौन पतरस ने यह देखा तो यीशु के चरणों पर गिर पड़ा और कहने लगा, “प्रभु, मुझसे दूर रह, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ।” क्योंकि इतनी मछलियाँ पकड़ने पर उसे और उसके सब साथियों को अचंभा हुआ था; और ज़ब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्‍ना की भी, जो शमौन के साझेदार थे, यही दशा हुई। तब यीशु ने शमौन से कहा, “मत डर! अब से तू मनुष्यों को पकड़ा करेगा।” तब वे नावों को किनारे पर लाए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए। फिर ऐसा हुआ कि जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहाँ कोढ़ से भरा एक मनुष्य था। उसने यीशु को देखा और अपने मुँह के बल गिरकर उससे विनती की, “हे प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।” यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा, “मैं चाहता हूँ, शुद्ध हो जा!” और तुरंत उसका कोढ़ दूर हो गया। तब उसने उसे आदेश दिया, “किसी से न कह, बल्कि जाकर अपने आपको याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में वह भेंट चढ़ा जिसकी आज्ञा मूसा ने दी है, ताकि उनके लिए साक्षी हो।” परंतु उसकी चर्चा और अधिक फैलने लगी, और बड़ी भीड़ उसे सुनने और अपनी बीमारियों से स्वस्थ होने के लिए एकत्रित होती थी; परंतु वह चुपचाप जंगलों में जाकर प्रार्थना किया करता था। फिर एक दिन ऐसा हुआ कि यीशु उपदेश दे रहा था, और फरीसी तथा व्यवस्था के शिक्षक जो गलील और यहूदिया के प्रत्येक गाँव और यरूशलेम से आए थे, वहाँ बैठे थे; और स्वस्थ करने के लिए प्रभु का सामर्थ्य उसमें था। और देखो, कुछ लोग एक मनुष्य को जो लकवे का रोगी था, खाट पर लाए और उसे भीतर ले जाकर यीशु के सामने रखना चाहते थे। जब भीड़ के कारण उसे भीतर ले जाने का कोई उपाय न सूझा, तो उन्होंने छत पर चढ़कर खपरैल हटाया और उसे खाट समेत बीच में यीशु के सामने उतार दिया। उनका विश्‍वास देखकर उसने कहा, “हे मनुष्य, तेरे पाप क्षमा हुए।” परंतु शास्‍त्री और फरीसी यह विचार करने लगे, “यह कौन है जो परमेश्‍वर की निंदा करता है? परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पापों को क्षमा कर सकता है?” उनके विचारों को जानकर यीशु ने उनसे कहा, “तुम अपने-अपने मन में यह विचार क्यों कर रहे हो? सहज क्या है, यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए,’ या यह कहना, ‘उठ और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है,” फिर उसने लकवे के रोगी से कहा, “मैं तुझसे कहता हूँ, उठ, अपनी खाट उठा और अपने घर चला जा।” और वह तुरंत उनके सामने उठा और जिस पर वह लेटा हुआ था उसे उठाकर, परमेश्‍वर की महिमा करते हुए अपने घर चला गया। वे सब स्तब्ध रह गए और परमेश्‍वर की महिमा करने लगे, तथा अत्यंत भयभीत होकर कहने लगे, “आज हमने अद्भुत कार्य देखे हैं।” इन बातों के बाद यीशु बाहर निकला और उसने लेवी नामक एक कर वसूलनेवाले को कर-चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। फिर लेवी ने अपने घर पर उसके लिए एक बड़ा भोज तैयार किया; और वहाँ कर वसूलनेवालों और अन्य लोगों की एक बड़ी भीड़ थी, जो उनके साथ भोजन करने बैठी थी। तब फरीसी और उनके शास्‍त्री उसके शिष्यों पर कुड़कुड़ाते हुए कहने लगे, “तुम कर वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “वैद्य की आवश्यकता स्वस्थ लोगों को नहीं बल्कि बीमारों को है; मैं धर्मियों को नहीं बल्कि पापियों को पश्‍चात्ताप के लिए बुलाने आया हूँ।” उन्होंने उससे कहा, “यूहन्‍ना के शिष्य तो प्रायः उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं, इसी प्रकार फरीसियों के शिष्य भी, परंतु तेरे शिष्य तो खाते-पीते हैं।” यीशु ने उनसे कहा, “जब दूल्हा बरातियों के साथ है, तो क्या तुम उनसे उपवास करवा सकते हो? परंतु वे दिन आएँगे, जब दूल्हा उनसे अलग कर दिया जाएगा, तब उन दिनों में वे उपवास करेंगे।” उसने उनसे यह दृष्‍टांत भी कहा: “कोई नए वस्‍त्र में से फाड़कर पुराने वस्‍त्र पर पैवंद नहीं लगाता, नहीं तो नया वस्‍त्र फट जाएगा और नए वस्‍त्र का पैवंद पुराने वस्‍त्र से मेल भी नहीं खाएगा। कोई नया दाखरस पुरानी मशकों में नहीं रखता; नहीं तो नया दाखरस उन मशकों को फाड़कर बह जाएगा और मशकें भी नष्‍ट हो जाएँगी; इसलिए नया दाखरस नई मशकों में रखा जाता है । कोई भी पुराना दाखरस पीकर नया नहीं चाहता; क्योंकि वह कहता है, ‘पुराना ही अच्छा है।’ ” फिर ऐसा हुआ कि सब्त के दिन यीशु खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके शिष्य अनाज की बालें तोड़ने और हाथों से मसल मसलकर खाने लगे। तब कुछ फरीसियों ने कहा, “जो कार्य सब्त के दिन करना उचित नहीं, उसे क्यों करते हो?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “क्या तुमने यह नहीं पढ़ा कि जब दाऊद को भूख लगी और उसके साथी उसके साथ थे, तो उसने क्या किया? वह किस प्रकार परमेश्‍वर के भवन में गया और भेंट की रोटियाँ लेकर खाईं तथा अपने साथियों को भी दीं, जिन्हें खाना याजकों को छोड़ और किसी के लिए उचित नहीं था?” फिर उसने उनसे कहा, “मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी प्रभु है।” ऐसा हुआ कि किसी और सब्त के दिन यीशु आराधनालय में जाकर उपदेश देने लगा, और वहाँ एक मनुष्य था जिसका दाहिना हाथ सूखा था। शास्‍त्री और फरीसी उसकी ताक में थे कि देखें, वह सब्त के दिन उसको स्वस्थ करता है या नहीं, जिससे उन्हें उस पर दोष लगाने का अवसर मिल जाए। परंतु वह उनके विचारों को जानता था; तब उसने उस सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा, “उठ, और बीच में खड़ा हो,” और वह उठकर खड़ा हो गया। फिर यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण बचाना या नाश करना?” और उसने चारों ओर उन सब को देखकर उस मनुष्य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने ऐसा ही किया और उसका हाथ फिर से ठीक हो गया। इस पर वे क्रोध से भर गए और आपस में विचार-विमर्श करने लगे कि यीशु के साथ क्या किया जाए। उन्हीं दिनों ऐसा हुआ कि यीशु पहाड़ पर प्रार्थना करने गया, और सारी रात परमेश्‍वर से प्रार्थना करता रहा। जब दिन हुआ, तो उसने अपने शिष्यों को बुलाया और उनमें से बारह को चुना और उन्हें प्रेरित नाम भी दिया: शमौन जिसका नाम उसने पतरस भी रखा, उसका भाई अंद्रियास, याकूब और यूहन्‍ना, फिलिप्पुस, बरतुल्मै, मत्ती, थोमा, हलफई का पुत्र याकूब और शमौन जो ज़ेलोतेस कहलाता था, याकूब का पुत्र यहूदा और यहूदा इस्करियोती जो विश्‍वासघाती निकला। तब यीशु उनके साथ नीचे उतरकर समतल स्थान पर खड़ा हुआ, और वहाँ उसके शिष्यों की एक बड़ी भीड़ और सारे यहूदिया तथा यरूशलेम, सूर और सैदा के समुद्र तट से आए लोगों का एक बड़ा जनसमूह था, जो उसका उपदेश सुनने और अपनी बीमारियों से स्वस्थ होने के लिए आए थे; और अशुद्ध आत्माओं के द्वारा सताए हुए लोग भी अच्छे किए जा रहे थे। सब लोग उसे छूना चाहते थे, क्योंकि उसमें से सामर्थ्य निकलकर सब को स्वस्थ कर रहा था। तब उसने अपने शिष्यों की ओर अपनी आँखें उठाईं और कहने लगा: “धन्य हो तुम जो दीन हो, क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य तुम्हारा है। धन्य हो तुम जो अब भूखे हो, क्योंकि तुम तृप्‍त किए जाओगे। धन्य हो तुम जो अब रोते हो, क्योंकि तुम हँसोगे। धन्य हो तुम, जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुमसे घृणा करें, और तुम्हारा बहिष्कार करें तथा तुम्हारी निंदा करें, और बुरा समझकर तुम्हारा नाम मिट्टी में मिला दें। “उस दिन तुम आनंदित होकर उछलना, क्योंकि देखो स्वर्ग में तुम्हारा प्रतिफल बड़ा है। उनके पूर्वज भी भविष्यवक्‍ताओं के साथ ऐसा ही किया करते थे।” “परंतु हाय तुम पर जो धनवान हो, क्योंकि तुम अपना सुख पा चुके। हाय तुम पर जो अब तृप्‍त हो, क्योंकि तुम भूखे होगे। हाय तुम पर जो अब हँसते हो, क्योंकि तुम शोक करोगे और रोओगे। हाय तुम पर जब सब मनुष्य तुम्हें भला कहें, क्योंकि उनके पूर्वज भी झूठे भविष्यवक्‍ताओं के साथ ऐसा ही किया करते थे। “परंतु मैं तुम सुननेवालों से कहता हूँ, अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, जो तुमसे घृणा करें उनके साथ भलाई करो; जो तुम्हें शाप दें, उन्हें आशिष दो; जो तुम्हारा अपमान करें, उनके लिए प्रार्थना करो। जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे, उसकी ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरा चोगा छीने, उसको कुरता लेने से भी न रोक। प्रत्येक जो तुझसे माँगे, उसे दे, और जो तेरी वस्तुएँ छीने, उससे वापस मत माँग। जैसा तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, वैसा ही तुम भी उनके साथ करो। “यदि तुम उनसे प्रेम रखते हो जो तुमसे प्रेम रखते हैं, तो इसमें तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखनेवालों से प्रेम रखते हैं। इसी प्रकार यदि तुम उनके साथ भलाई करो जो तुम्हारे साथ भलाई करते हैं, तो इसमें तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं। यदि तुम उन्हें उधार दो जिनसे तुम्हें मिलने की आशा है, तो इसमें तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी पापियों को उधार देते हैं कि उन्हें उतना ही वापस मिले। परंतु तुम अपने शत्रुओं से प्रेम रखो और भलाई करो, तथा वापस पाने की आशा न रखकर उधार दो; और तुम्हारा प्रतिफल बड़ा होगा, और तुम परमप्रधान के पुत्र ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और दुष्‍टों पर भी कृपा करता है। दयालु बनो, जैसे तुम्हारा पिता भी दयालु है। “दोष मत लगाओ, और तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा; किसी को दोषी मत ठहराओ, और तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे। क्षमा करो, तो तुम भी क्षमा किए जाओगे; दो, तो तुम्हें दिया जाएगा; लोग अच्छे नाप से दबा दबाकर और हिला हिलाकर उमड़ता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे; क्योंकि जिस नाप से तुम नापते हो उसी से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा।” उसने उनसे एक और दृष्‍टांत कहा: “क्या कोई अंधा व्यक्‍ति किसी अंधे व्यक्‍ति का मार्गदर्शन कर सकता है? क्या वे दोनों ही गड्‌ढे में नहीं गिरेंगे? शिष्य अपने गुरु से बड़ा नहीं होता, परंतु प्रत्येक जो पूर्ण रूप से प्रशिक्षित होगा, वह अपने गुरु के समान बन जाएगा। तू क्यों अपने भाई की आँख के तिनके को देखता है, परंतु अपनी आँख के लट्ठे पर ध्यान नहीं देता? तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, ‘हे भाई, आ, मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ,’ जबकि तुझे स्वयं अपनी आँख में लट्ठा दिखाई नहीं देता? अरे पाखंडी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल, और तब अपने भाई की आँख से तिनका निकालने के लिए तू स्पष्‍ट देख पाएगा। “अच्छा पेड़ बेकार फल नहीं लाता, और न ही बेकार पेड़ कभी अच्छा फल लाता है। प्रत्येक पेड़ अपने फल से पहचाना जाता है; क्योंकि लोग कँटीली झाड़ियों से अंजीर नहीं बटोरते, और न ही झाड़ी से अंगूर बटोरते हैं। भला मनुष्य अपने मन के भले भंडार से भली बात निकालता है, और बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भंडार से बुरी बात निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुँह पर आता है। “जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो मुझे ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ क्यों कहते हो? जो कोई मेरे पास आता है और मेरे वचन सुनकर उनका पालन करता है, मैं तुम्हें बताऊँगा कि वह किसके समान है: वह उस मनुष्य के समान है जिसने घर बनाते समय भूमि को गहरा खोदकर चट्टान पर नींव डाली; और जब बाढ़ आई तो जल की धारा उस घर से टकराई, परंतु उसे हिला न सकी, क्योंकि वह अच्छी तरह बना था । परंतु जो सुनकर पालन नहीं करता, वह उस मनुष्य के समान है जिसने भूमि पर बिना नींव के घर बनाया; जब जल की धारा उस घर से टकराई, तो वह तुरंत गिर पड़ा, और पूरी तरह से नाश हो गया।” जब यीशु ये सारी बातें लोगों को सुना चुका, तो कफरनहूम में आया। अब किसी शतपति का एक दास जो उसका प्रिय था, बीमारी से मरने पर था। जब उसने यीशु के विषय में सुना तो यहूदियों के धर्मवृद्धों को उसके पास यह निवेदन करने के लिए भेजा कि वह आकर उसके दास को बचा ले। वे यीशु के पास आए और उससे बड़ी विनती करके कहने लगे, “जिसके लिए तू यह करेगा, वह इसके योग्य है, क्योंकि वह हमारे लोगों से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे लिए आराधनालय बनवाया है।” यीशु उनके साथ चल पड़ा। परंतु जब वह उसके घर से दूर न था, तो शतपति ने अपने मित्रों को उससे यह कहने के लिए भेजा, “हे प्रभु, कष्‍ट न कर, क्योंकि मैं इस योग्य नहीं कि तू मेरी छत के नीचे आए। इस कारण मैंने अपने आपको तेरे पास आने के योग्य भी न समझा; परंतु तू वचन ही कह दे, और मेरा सेवक स्वस्थ हो जाएगा। क्योंकि मैं भी अधिकार के अधीन एक मनुष्य हूँ, मेरे अधीन सैनिक हैं और जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा,’ तो वह जाता है, और दूसरे से ‘आ,’ तो वह आता है, और अपने दास से, ‘यह कर,’ तो वह करता है।” यह सुनकर यीशु को उस पर आश्‍चर्य हुआ, और उसने मुड़कर अपने पीछे आ रही भीड़ से कहा, “मैं तुमसे कहता हूँ, मैंने इस्राएल में भी इतना बड़ा विश्‍वास नहीं पाया।” और जब वे लोग जो भेजे गए थे, वापस घर लौटे तो उस दास को स्वस्थ पाया। इसके बाद ऐसा हुआ कि यीशु नाईन नामक नगर को गया, और उसके साथ उसके शिष्य और एक बड़ी भीड़ चल रही थी। जब वह नगर के फाटक के निकट पहुँचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को ले जा रहे थे जो अपनी माँ का एकलौता पुत्र था; और उसकी माँ विधवा थी तथा नगर के बहुत लोग उसके साथ थे। जब प्रभु ने उसे देखा तो उस पर तरस आया और उससे कहा, “रो मत।” उसने पास आकर अरथी को छुआ, और अरथी उठानेवाले रुक गए, तब उसने कहा, “हे जवान, मैं तुझसे कहता हूँ, उठ।” तब वह मृतक उठ बैठा और बोलने लगा, और यीशु ने उसे उसकी माता को सौंप दिया। सब लोगों पर भय छा गया और वे परमेश्‍वर की महिमा करते हुए कहने लगे, “एक महान भविष्यवक्‍ता हमारे बीच में उठ खड़ा हुआ है,” और “परमेश्‍वर ने अपने लोगों की सुधि ली है।” यीशु के विषय में यह बात सारे यहूदिया और उसके आस-पास के हर क्षेत्र में फैल गई। यूहन्‍ना को उसके शिष्यों ने इन सब बातों का समाचार दिया। तब यूहन्‍ना ने अपने शिष्यों में से दो को पास बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिए भेजा, “क्या तू ही वह है जो आनेवाला था या हम किसी और की प्रतीक्षा करें?” अतः उन्होंने उसके पास जाकर कहा, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने हमें तेरे पास यह पूछने के लिए भेजा है, ‘क्या तू ही वह है जो आनेवाला था या हम किसी और की प्रतीक्षा करें?’ ” उस घड़ी उसने बहुतों को बीमारियों और पीड़ाओं और दुष्‍ट आत्माओं से छुटकारा दिया, तथा बहुत से अंधे लोगों को दृष्‍टि दान की। तब यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “जो कुछ तुमने देखा और सुना है, जाकर यूहन्‍ना को बताओ; अंधे देखते हैं, लंगड़े चलते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं और बहरे सुनते हैं, मृतक जिलाए जाते हैं और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है; और धन्य है वह जो मेरे कारण ठोकर नहीं खाता।” यूहन्‍ना के दूतों के जाने के बाद यीशु यूहन्‍ना के विषय में लोगों से कहने लगा, “तुम जंगल में क्या देखने निकले थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकंडे को? फिर तुम क्या देखने निकले थे? क्या कोमल वस्‍त्र पहने हुए मनुष्य को? देखो, जो भड़कीले वस्‍त्र पहनते और विलासिता में रहते हैं, वे राजमहलों में रहते हैं। तो तुम क्या देखने निकले थे? क्या किसी भविष्यवक्‍ता को? हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, भविष्यवक्‍ता से भी बड़े व्यक्‍ति को। यह वही है जिसके विषय में लिखा है: देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेज रहा हूँ, जो तेरे आगे तेरा मार्ग तैयार करेगा। “मैं तुमसे कहता हूँ, जो स्‍त्रियों से जन्मे हैं उनमें यूहन्‍ना से बड़ा कोई नहीं है; परंतु जो परमेश्‍वर के राज्य में सब से छोटा है, वह उससे भी बड़ा है।” (जो यह सुन रहे थे, उन सब लोगों ने और कर वसूलनेवालों ने भी यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर परमेश्‍वर को सच्‍चा ठहराया; परंतु फरीसियों और व्यवस्थापकों ने उससे बपतिस्मा न लेकर, अपने प्रति परमेश्‍वर की योजना को अस्वीकार कर दिया।) “ अतः इस पीढ़ी के लोगों की तुलना मैं किससे करूँ, कि वे किसके समान हैं? वे उन बालकों के समान हैं जो बाज़ार में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं, ‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी बजाई परंतु तुम नहीं नाचे; हमने विलाप का गीत गाया परंतु तुम नहीं रोए।’ “इसी रीति से यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला न तो रोटी खाते और न ही दाखरस पीते हुए आया, और तुम कहते हो, ‘उसमें दुष्‍टात्मा है।’ मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया है, और तुम कहते हो, ‘देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्य, कर वसूलनेवालों और पापियों का मित्र।’ परंतु बुद्धि अपनी सब संतानों के द्वारा सच्‍ची ठहरती है।” फिर एक फरीसी यीशु से निवेदन करने लगा कि वह उसके साथ भोजन करे; अतः वह उस फरीसी के घर में जाकर भोजन करने बैठ गया। और देखो, उस नगर में एक स्‍त्री थी, जो पापिन थी, और वह यह जानकर कि यीशु फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई और उसके पैरों के पास पीछे खड़ी होकर रोने लगी, और उसके आँसुओं से यीशु के पैर भीगने लगे। फिर वह अपने सिर के बालों से उसके पैरों को पोंछने, और उन्हें चूमकर उन पर इत्र मलने लगी। यह देखकर उस फरीसी ने, जिसने यीशु को बुलाया था, अपने मन में कहा, “यदि यह भविष्यवक्‍ता होता, तो जान जाता कि जो इसे छू रही है वह कौन और कैसी स्‍त्री है, क्योंकि वह तो एक पापिन है।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “शमौन, मुझे तुझसे कुछ कहना है।” उसने कहा, “गुरु, कह।” “किसी साहूकार के दो ऋणी थे; एक पर पाँच सौ दीनार ऋण था, और दूसरे पर पचास। जब उनके पास कर्ज़ चुकाने के लिए कुछ न रहा, तो साहूकार ने दोनों को क्षमा कर दिया। अतः उनमें से कौन उससे अधिक प्रेम रखेगा?” शमौन ने उत्तर दिया, “मेरे विचार से वह, जिसका उसने अधिक क्षमा किया।” यीशु ने उससे कहा, “तूने ठीक सोचा।” फिर वह उस स्‍त्री की ओर मुड़कर शमौन से कहने लगा, “क्या तू इस स्‍त्री को देख रहा है? मैं तेरे घर में आया, तूने मुझे पैर धोने के लिए पानी नहीं दिया; परंतु इसने अपने आँसुओं से मेरे पैर भिगोए और अपने बालों से उन्हें पोंछा। तूने मुझे नहीं चूमा, परंतु जब से मैं आया हूँ इसने मेरे पैरों को चूमना न छोड़ा। तूने मेरे सिर पर तेल नहीं मला, परंतु इसने मेरे पैरों पर इत्र मला है। इस कारण मैं तुझसे कहता हूँ, कि यह बहुत प्रेम रखती है क्योंकि इसके पाप जो बहुत थे, क्षमा हो गए हैं; परंतु जिसके थोड़े क्षमा हुए हैं, वह थोड़ा प्रेम रखता है।” और यीशु ने उस स्‍त्री से कहा, “तेरे पाप क्षमा हो गए हैं।” तब जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे, अपने मन में कहने लगे, “यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है?” उसने उस स्‍त्री से कहा, “तेरे विश्‍वास ने तेरा उद्धार किया है; शांति से जा।” इसके बाद ऐसा हुआ कि यीशु नगर-नगर और गाँव-गाँव में परमेश्‍वर के राज्य का प्रचार करता और सुसमाचार सुनाता फिरा; और उसके साथ वे बारह, और कुछ स्‍त्रियाँ भी थीं, जो दुष्‍ट आत्माओं और बीमारियों से छुड़ाई गई थीं, उनमें मरियम जो मगदलीनी कहलाती थी और जिसमें से सात दुष्‍टात्माएँ निकली थीं, हेरोदेस के प्रबंधक खुज़ा की पत्‍नी योअन्‍ना, सूसन्‍नाह और अन्य बहुत सी थीं, जो अपने साधनों से उनकी सेवा किया करती थीं। जब एक बड़ी भीड़ एकत्र हो रही थी और नगर-नगर से लोग उसके पास आ रहे थे, तो उसने दृष्‍टांत में कहा: “एक बीज बोनेवाला अपने बीज बोने निकला। बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे, और पैरों से रौंदे गए और आकाश के पक्षियों ने उन्हें चुग लिया। कुछ चट्टान पर गिरे, और जब उगे तो नमी न मिलने के कारण सूख गए। कुछ कँटीली झाड़ियों के बीच में गिरे, और झाड़ियों ने उनके साथ बढ़कर उन्हें दबा दिया। परंतु कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और जब उगे तो सौ गुणा फल लाए।” यह कहकर उसने ऊँची आवाज़ में कहा, “जिसके पास सुनने के लिए कान हों, वह सुन ले।” उसके शिष्य उससे पूछने लगे कि इस दृष्‍टांत का क्या अर्थ हो सकता है? इस पर उसने कहा, “तुम्हें तो परमेश्‍वर के राज्य के भेदों को जानने की समझ दी गई है, परंतु अन्य लोगों के लिए ये दृष्‍टांतों में हैं कि वे देखते हुए भी न देखें और सुनते हुए भी न समझें। “इस दृष्‍टांत का अर्थ यह है: बीज परमेश्‍वर का वचन है। मार्ग के किनारे के बीज वे हैं जिन्होंने सुना, परंतु फिर शैतान आकर उनके मन से वचन को उठा ले जाता है, कि कहीं वे विश्‍वास करके उद्धार न पा लें। चट्टान पर के बीज वे हैं जब वे वचन सुनते हैं तो आनंद से ग्रहण करते हैं, परंतु जड़ नहीं पकड़ने के कारण कुछ समय तो विश्‍वास करते हैं परंतु परीक्षा के समय में बहक जाते हैं। कँटीली झाड़ियों में गिरनेवाले बीज वे हैं, जो सुनते तो हैं, परंतु आगे चलकर चिंताओं, धन और जीवन की लालसाओं से दब जाते हैं, और उनका फल नहीं पकता। परंतु अच्छी भूमि के बीज वे हैं, जो अच्छे और भले मन से वचन सुनकर उसे दृढ़ता से थामे रहते हैं और धीरज से फल लाते हैं। “कोई भी दीपक जलाकर उसे बरतन से नहीं ढकता और न खाट के नीचे रखता है, बल्कि उसे दीवट पर रखता है, ताकि भीतर आनेवालों को प्रकाश मिले। ऐसा कुछ छिपा नहीं जो प्रकट न हो, और ऐसा कोई भेद नहीं जो जाना न जाए और प्रकट न हो। इसलिए सावधान रहो कि तुम कैसे सुनते हो; क्योंकि जिसके पास है, उसे और दिया जाएगा, और जिसके पास नहीं है, उससे वह भी जिसे वह अपना समझता है, ले लिया जाएगा।” अब यीशु की माता और उसके भाई उसके पास आए, परंतु भीड़ के कारण उससे मिल नहीं सके। उसे बताया गया, “तेरी माता और तेरे भाई बाहर खड़े हैं और तुझसे मिलना चाहते हैं।” इस पर उसने उनसे कहा, “मेरी माता और मेरे भाई ये हैं जो परमेश्‍वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं।” फिर एक दिन ऐसा हुआ कि यीशु और उसके शिष्य नाव पर चढ़े, और उसने उनसे कहा, “आओ, हम झील के उस पार चलें।” अतः उन्होंने नाव खोल दी। जब वे नाव से जा रहे थे तो वह सो गया; और झील पर आँधी आई, तथा नाव में पानी भरने लगा और वे खतरे में थे। तब उन्होंने पास जाकर उसे जगाया और कहा, “स्वामी, स्वामी! हम नाश हो रहे हैं।” उसने उठकर आँधी और पानी की लहरों को डाँटा; और वे थम गईं, तथा शांति छा गई। उसने उनसे कहा, “तुम्हारा विश्‍वास कहाँ है?” पर शिष्य भयभीत और विस्मित होकर आपस में कहने लगे, “आखिर यह है कौन? यह आँधी और पानी को भी आज्ञा देता है, और वे इसकी आज्ञा मानते हैं!” फिर वे गिरासेनियों के क्षेत्र में पहुँचे, जो गलील के सामने है। जब यीशु किनारे पर उतरा तो उसे उस नगर का एक मनुष्य मिला जो दुष्‍टात्माओं से ग्रसित था; वह बहुत समय से वस्‍त्र नहीं पहनता था और घर में नहीं बल्कि कब्रों में रहा करता था। वह यीशु को देखकर चिल्‍लाता हुआ उसके सामने गिर पड़ा और ऊँची आवाज़ में कहा, “हे परमप्रधान परमेश्‍वर के पुत्र यीशु, तुझसे मेरा क्या लेना-देना? मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे यातना न दे।” क्योंकि यीशु ने अशुद्ध आत्मा को उस मनुष्य में से निकल जाने की आज्ञा दी थी, इसलिए कि वह बार-बार उसे पकड़ती थी। उस मनुष्य को ज़ंजीरों और बेड़ियों से बाँधकर पहरे में रखा जाता था, परंतु वह उन बंधनों को तोड़ डालता था और दुष्‍टात्मा उसे जंगलों में भगाए फिरती थी। फिर यीशु ने उससे पूछा, “तेरा नाम क्या है?” उसने कहा, “सेना,” क्योंकि उसमें बहुत सी दुष्‍टात्माएँ समाई थीं। वे उससे विनती करने लगीं कि वह उन्हें अथाह कुंड में जाने की आज्ञा न दे। वहीं पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था; उन्होंने उससे विनती की कि वह उन्हें सूअरों में समा जाने की अनुमति दे; और उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर दुष्‍टात्माएँ उस मनुष्य में से निकलकर सूअरों में समा गईं, और वह झुंड ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और जा डूबा। जो कुछ हुआ वह देखकर चरवाहे भागे और नगर तथा गाँवों में जाकर समाचार सुनाया। तब जो हुआ था उसे देखने के लिए लोग निकलकर यीशु के पास आए, और उस मनुष्य को जिसमें से दुष्‍टात्माएँ निकली थीं, यीशु के चरणों में वस्‍त्र पहने तथा सचेत बैठे हुए पाया, और वे डर गए। जिन्होंने यह देखा था, उन्होंने उनको बताया कि वह दुष्‍टात्माग्रस्त व्यक्‍ति किस प्रकार अच्छा किया गया। तब गिरासेनियों और आस-पास के क्षेत्र के सब लोगों ने यीशु से विनती की कि वह उनके पास से चला जाए, क्योंकि उन पर बड़ा भय छा गया था; तब वह नाव पर चढ़कर लौट गया। जिस मनुष्य में से दुष्‍टात्माएँ निकली थीं वह यीशु से विनती करने लगा कि मुझे अपने साथ रहने दे; परंतु उसने यह कहकर उसे भेज दिया, “अपने घर को लौट जा, और बता कि परमेश्‍वर ने तेरे लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं।” अतः वह सारे नगर में प्रचार करता हुआ लौट गया कि यीशु ने उसके लिए कैसे बड़े कार्य किए हैं। यीशु के लौटने पर लोगों ने उसका स्वागत किया, क्योंकि वे सब उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। और देखो, याईर नामक एक मनुष्य आया, जो आराधनालय का अधिकारी था, और वह यीशु के चरणों पर गिरकर उससे अपने घर चलने के लिए विनती करने लगा, क्योंकि उसकी एकलौती बेटी जो लगभग बारह वर्ष की थी, मरने पर थी। जब यीशु जा रहा था तो भीड़ उस पर टूटी पड़ रही थी। एक स्‍त्री थी जो बारह वर्ष से रक्‍तस्राव से पीड़ित थी। वह अपनी सारी जीविका वैद्यों पर व्यय कर चुकी थी, फिर भी कोई उसे स्वस्थ नहीं कर सका था। उसने पीछे से आकर यीशु के वस्‍त्र का किनारा छू लिया, और तुरंत उसका रक्‍तस्राव रुक गया। तब यीशु ने कहा, “मुझे किसने छुआ?” जब सब इनकार कर रहे थे तो पतरस ने कहा, “हे स्वामी, लोग तुझे घेरे हुए हैं और चारों ओर से दबा रहे हैं ।” परंतु यीशु ने कहा, “किसी ने मुझे छुआ है, क्योंकि मैंने जान लिया है कि मुझमें से सामर्थ्य निकला है।” जब स्‍त्री ने यह देखा कि मैं छिप नहीं सकती, तो वह काँपती हुई आई और उसके सामने गिरकर सब लोगों के सामने बताया कि उसने किस कारण से उसे छुआ और कैसे वह तुरंत स्वस्थ हो गई। तब उसने उससे कहा, “ बेटी, तेरे विश्‍वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है; शांति से जा।” अभी यीशु यह कह ही रहा था कि आराधनालय के अधिकारी के घर से किसी ने आकर कहा, “तेरी बेटी मर गई है, अब गुरु को और कष्‍ट न दे।” जब यीशु ने यह सुना तो याईर से कहा, “मत डर! केवल विश्‍वास रख, और वह बच जाएगी।” फिर जब वह उस घर में पहुँचा तो उसने पतरस, यूहन्‍ना, याकूब और उस लड़की के माता-पिता को छोड़, और किसी को अपने साथ भीतर आने न दिया। सब लोग रो रोकर उसके लिए अपनी छाती पीट रहे थे। परंतु उसने कहा, “रोओ मत, क्योंकि वह मरी नहीं बल्कि सो रही है।” वे उसकी हँसी उड़ाने लगे, क्योंकि वे जानते थे कि वह मर चुकी है। परंतु उसने उसका हाथ पकड़कर पुकारा, “हे लड़की, उठ।” और उसका प्राण लौट आया, और वह तुरंत उठ खड़ी हुई, तब यीशु ने आदेश दिया कि उसे कुछ खाने को दिया जाए। उसके माता-पिता चकित हो गए, परंतु यीशु ने उन्हें आज्ञा दी कि जो हुआ उसे किसी को न बताएँ। फिर यीशु ने बारहों को एक साथ बुलाकर उन्हें सब दुष्‍टात्माओं पर और बीमारियों से स्वस्थ करने के लिए सामर्थ्य और अधिकार दिया, और उन्हें परमेश्‍वर के राज्य का प्रचार करने तथा बीमारों को स्वस्थ करने के लिए भेजा। उसने उनसे कहा, “यात्रा के लिए कुछ न लेना, न तो लाठी, न थैला, न रोटी, न रुपए और न ही दो-दो कुरते रखना। जिस किसी घर में तुम प्रवेश करो, वहीं रहो और वहीं से विदा हो। यदि लोग तुम्हें ग्रहण न करें, तो उस नगर से निकलते हुए अपने पैरों से धूल झाड़ दो ताकि उनके विरुद्ध साक्षी हो।” अतः वे निकलकर गाँव-गाँव सुसमाचार सुनाते और हर स्थान पर लोगों को स्वस्थ करते हुए फिरते रहे। जब चौथाई देश के राजा हेरोदेस ने इन सब घटनाओं के विषय में सुना तो दुविधा में पड़ गया क्योंकि कुछ लोगों का कहना था कि यूहन्‍ना मृतकों में से जिलाया गया है, और कुछ लोगों का यह भी कहना था कि एलिय्याह प्रकट हुआ है, और अन्य लोगों का यह कि प्राचीन काल का कोई भविष्यवक्‍ता जी उठा है। परंतु हेरोदेस ने कहा, “यूहन्‍ना का सिर तो मैंने कटवाया था; फिर यह कौन है जिसके विषय में मैं ऐसी बातें सुन रहा हूँ?” और वह यीशु को देखना चाहता था। जब प्रेरित लौट आए तो उन्होंने जो कुछ किया था यीशु को कह सुनाया। तब वह उन्हें लेकर चुपचाप बैतसैदा नामक नगर को चला गया। परंतु जब लोगों को यह पता चला तो वे उसके पीछे चल पड़े। तब यीशु उनका स्वागत करके उन्हें परमेश्‍वर के राज्य के विषय में बताने लगा, और जिन्हें स्वस्थ होने की आवश्यकता थी उन्हें स्वस्थ करने लगा। जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने पास आकर उससे कहा, “भीड़ को विदा कर, कि वे आस-पास के गाँवों और बस्तियों में जाकर ठहरें और उन्हें भोजन मिले, क्योंकि हम यहाँ निर्जन स्थान में हैं।” परंतु उसने उनसे कहा, “तुम ही उन्हें खाने को दो। ” उन्होंने कहा, “यह तभी हो सकता है जब हम जाकर इन सब लोगों के लिए भोजन खरीद लें, नहीं तो हमारे पास पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।” क्योंकि वहाँ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे। तब उसने अपने शिष्यों से कहा, “इन्हें लगभग पचास-पचास के समूहों में बैठा दो।” उन्होंने ऐसा ही किया और उन सब को बैठा दिया। तब उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और उन्हें तोड़कर शिष्यों को देता गया कि लोगों को परोसें। अतः सब खाकर तृप्‍त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियाँ उठाईं। फिर ऐसा हुआ कि जब वह अकेले प्रार्थना कर रहा था और शिष्य उसके साथ थे, तो उसने उनसे पूछा, “लोग मुझे क्या कहते हैं?” उन्होंने उत्तर दिया, “ यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला, और कुछ लोग एलिय्याह, फिर कुछ लोग उसे प्राचीन काल का एक भविष्यवक्‍ता कहते हैं, जो जी उठा है।” उसने उनसे कहा, “परंतु तुम मुझे क्या कहते हो?” पतरस ने उत्तर दिया, “परमेश्‍वर का मसीह।” तब यीशु ने उन्हें चेतावनी देकर यह आज्ञा दी कि यह बात किसी से न कहना, और कहा, “अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र बहुत दुःख उठाए; धर्मवृद्धों, मुख्य याजकों और शास्‍त्रियों द्वारा ठुकराया जाए, मार डाला जाए और तीसरे दिन जी उठे।” तब वह सब से कहने लगा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह अपने आप का इनकार करे, प्रतिदिन अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले; क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा, वह उसे गँवाएगा; परंतु जो कोई मेरे कारण अपना प्राण गँवाएगा, वह उसे बचाएगा। क्योंकि मनुष्य यदि सारे जगत को प्राप्‍त करे, परंतु अपना प्राण गँवा दे या उसकी हानि उठाए तो उसे क्या लाभ होगा? जो कोई मुझसे और मेरे वचनों से लजाएगा, मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की और पवित्र स्वर्गदूतों की महिमा में आएगा तो उससे लजाएगा। परंतु मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ खड़े लोगों में से कुछ ऐसे हैं कि जब तक परमेश्‍वर के राज्य को न देख लें, तब तक मृत्यु का स्वाद कदापि न चखेंगे।” फिर ऐसा हुआ कि इन बातों के लगभग आठ दिन बाद यीशु पतरस, यूहन्‍ना और याकूब को साथ लेकर प्रार्थना करने पहाड़ पर गया। जब वह प्रार्थना कर रहा था तो उसके मुख का रूप बदल गया और उसका वस्‍त्र श्‍वेत होकर चमकने लगा। और देखो, दो पुरुष उससे बातचीत कर रहे थे, वे मूसा और एलिय्याह थे। वे महिमा में प्रकट होकर यीशु की मृत्यु की बात कर रहे थे जो यरूशलेम में होने वाली थी। पतरस और उसके साथी नींद में थे; परंतु जब वे पूरी तरह जागे तो उन्होंने यीशु की महिमा को और उन दो पुरुषों को जो उसके साथ खड़े थे, देखा। जब वे यीशु के पास से जाने लगे, तो पतरस ने यीशु से कहा, “हे स्वामी, हमारा यहाँ होना अच्छा है, इसलिए हम तीन मंडप बनाएँ, एक तेरे लिए, एक मूसा के लिए और एक एलिय्याह के लिए।” वह नहीं जानता था कि क्या कह रहा है। जब वह ये बातें कह ही रहा था कि एक बादल आया और उन पर छाने लगा, और जब वे बादल से घिरने लगे तो डर गए। फिर बादल में से यह आवाज़ आई, “यह मेरा पुत्र है, जिसे मैंने चुना है, इसकी सुनो।” यह आवाज़ आने के बाद यीशु अकेला पाया गया। अतः वे चुप रहे और जो कुछ उन्होंने देखा था उसके विषय में उन दिनों किसी को नहीं बताया। फिर ऐसा हुआ कि अगले दिन जब वे पहाड़ से नीचे उतरे तो एक बड़ी भीड़ उससे मिली। और देखो, भीड़ में से एक मनुष्य ने पुकारकर कहा, “हे गुरु, मैं तुझसे विनती करता हूँ, मेरे पुत्र पर दृष्‍टि कर, क्योंकि वह मेरा एकलौता पुत्र है; और देख, एक आत्मा उसे जकड़ लेती है और वह अचानक चिल्‍लाने लगता है, और वह उसे ऐसे मरोड़ती है कि उसके मुँह से फेन निकलने लगता है और उसे तड़पाकर कठिनाई से छोड़ती है। मैंने तेरे शिष्यों से विनती की कि उसे निकाल दें, परंतु वे निकाल न सके।” इस पर यीशु ने कहा, “हे अविश्‍वासी और भ्रष्‍ट पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा और तुम्हारी सहूँगा? अपने पुत्र को यहाँ ले आ।” वह अभी आ ही रहा था कि दुष्‍टात्मा ने उसे पटककर मरोड़ा; परंतु यीशु ने उस अशुद्ध आत्मा को डाँटा, और लड़के को अच्छा करके उसके पिता को सौंप दिया। तब सब लोग परमेश्‍वर की महानता पर आश्‍चर्यचकित हुए। जब सब लोग उन सब कार्यों पर जिन्हें वह कर रहा था आश्‍चर्य कर रहे थे, तो यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “तुम इन वचनों पर अपने कान लगाओ कि मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथों पकड़वाया जाने वाला है।” परंतु वे इस बात को नहीं समझे, और उनसे यह गुप्‍त रखी गई थी कि वे इसे न जानें, और वे इस बात के विषय में उससे पूछने से डरते थे। अब उनमें यह विवाद छिड़ गया कि हममें से बड़ा कौन है। परंतु यीशु ने उनके मन के विचार को जान लिया, और एक बच्‍चे को लेकर अपने पास खड़ा किया, और उनसे कहा, “जो कोई मेरे नाम से इस बच्‍चे को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है; क्योंकि तुम सब में जो छोटा है, वही बड़ा है।” तब यूहन्‍ना ने कहा, “हे स्वामी, हमने किसी को तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को निकालते हुए देखा, और उसे रोकने का प्रयास किया क्योंकि वह हमारे साथ तेरा अनुसरण नहीं करता।” परंतु यीशु ने उससे कहा, “उसे मत रोको, क्योंकि जो तुम्हारे विरोध में नहीं, वह तुम्हारी ओर है।” फिर ऐसा हुआ कि जब उसके स्वर्ग में उठाए जाने का दिन निकट आ रहा था, तो उसने यरूशलेम जाने का विचार दृढ़ किया। उसने अपने आगे दूतों को भेजा। उन्होंने जाकर सामरियों के एक गाँव में प्रवेश किया कि उसके लिए तैयारी करें; परंतु उन्होंने उसका स्वागत नहीं किया, क्योंकि वह यरूशलेम की ओर जा रहा था। यह देखकर उसके शिष्य याकूब और यूहन्‍ना ने कहा, “हे प्रभु, तू चाहे तो क्या हम आग को आकाश से उतरकर उन्हें भस्म करने को कहें?” परंतु उसने मुड़कर उन्हें डाँटा [और कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम कैसी आत्मा के हो। क्योंकि मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के प्राणों को नाश करने नहीं, बल्कि बचाने आया है।” ] और वे दूसरे गाँव की ओर चले गए। जब वे मार्ग में जा रहे थे, किसी ने यीशु से कहा, “ जहाँ भी तू जाएगा, मैं तेरे पीछे चलूँगा।” यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों की माँदें और आकाश के पक्षियों के घोंसले होते हैं, परंतु मनुष्य के पुत्र के लिए सिर रखने का भी स्थान नहीं है।” उसने दूसरे से कहा, “मेरे पीछे हो ले।” परंतु उसने कहा, “प्रभु, पहले मुझे जाकर अपने पिता को गाड़ने की अनुमति दे।” परंतु उसने उससे कहा, “मृतकों को अपने मृतक गाड़ने दे, पर तू जाकर परमेश्‍वर के राज्य का प्रचार कर।” फिर एक और ने भी कहा, “प्रभु, मैं तेरे पीछे चलूँगा; परंतु पहले मुझे अपने घर वालों से विदा लेने की अनुमति दे।” परंतु यीशु ने उससे कहा, “जो कोई हल पर हाथ रखकर पीछे की ओर देखता है, वह परमेश्‍वर के राज्य के योग्य नहीं।” इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर अन्य व्यक्‍तियों को नियुक्‍त किया, और उन्हें दो-दो करके अपने आगे हर उस नगर और स्थान पर भेजा, जहाँ वह स्वयं जाने पर था। यीशु ने उनसे कहा: “फसल तो बहुत है, परंतु मज़दूर थोड़े हैं; इसलिए फसल के स्वामी से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मज़दूरों को भेजे। जाओ; देखो, मैं तुम्हें मेमनों के समान भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ। तुम न तो बटुआ और न थैला और न जूते लेना और न ही मार्ग में किसी को नमस्कार करना। जिस किसी घर में तुम प्रवेश करो, पहले कहो, ‘इस घर में शांति हो।’ यदि वहाँ कोई शांति का पात्र होगा, तो तुम्हारी शांति उस पर ठहर जाएगी; नहीं तो तुम्हारे पास लौट आएगी। तुम उसी घर में रहो, और जो उनसे मिले वही खाओ और पीओ, क्योंकि मज़दूर को अपनी मज़दूरी मिलनी चाहिए। घर-घर मत फिरना। जिस किसी नगर में तुम जाओ और वहाँ के लोग तुम्हारा स्वागत करें, तो जो कुछ तुम्हारे सामने परोसा जाए, उसे खाओ, और वहाँ के बीमारों को स्वस्थ करो, और उनसे कहो, ‘परमेश्‍वर का राज्य तुम्हारे निकट आ गया है।’ परंतु जिस किसी नगर में तुम जाओ और वहाँ के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, तो उसकी गलियों में जाकर कहो, ‘हम तुम्हारे नगर की धूल को भी, जो हमारे पैरों में लगी है, तुम्हारे सामने झाड़ देते हैं; परंतु तुम यह जान लो कि परमेश्‍वर का राज्य निकट आ गया है।’ मैं तुमसे कहता हूँ कि उस दिन सदोम की दशा उस नगर से अधिक सहनीय होगी। “हे खुराजीन! तुझ पर हाय; हे बैतसैदा! तुझ पर हाय; क्योंकि जो सामर्थ्य के कार्य तुममें किए गए, यदि सूर और सैदा में किए जाते, तो बहुत पहले ही वे टाट ओढ़कर और राख पर बैठकर पश्‍चात्ताप कर लेते। जैसा भी हो, न्याय के दिन सूर और सैदा की दशा तुमसे अधिक सहनीय होगी। और तू, हे कफरनहूम, क्या तुझे स्वर्ग तक ऊँचा उठाया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे उतारा जाएगा। “जो तुम्हारी सुनता है, वह मेरी सुनता है, और जो तुम्हें अस्वीकार करता है, वह मुझे अस्वीकार करता है; और जो मुझे अस्वीकार करता है, वह मेरे भेजनेवाले को अस्वीकार करता है।” वे सत्तर आनंद के साथ लौटे और कहने लगे, “प्रभु, तेरे नाम से तो दुष्‍टात्माएँ भी हमारे अधीन हो जाती हैं।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं देख रहा था कि शैतान बिजली के समान आकाश से गिरा। देखो, मैंने तुम्हें साँपों और बिच्छुओं को रौंदने का और शत्रु की सारी शक्‍ति पर अधिकार दिया है; और तुम्हें किसी से कुछ भी हानि न होगी। फिर भी इस बात से आनंदित मत होना कि आत्माएँ तुम्हारे अधीन हो जाती हैं, परंतु इससे आनंदित होना कि तुम्हारे नाम स्वर्ग में लिखे हैं।” उसी घड़ी यीशु ने पवित्र आत्मा में मगन होकर कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ, क्योंकि तूने इन बातों को बुद्धिमानों और समझदारों से छिपाया और बच्‍चों पर प्रकट किया है; हाँ पिता, क्योंकि तेरी दृष्‍टि में यही अच्छा था। मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और पिता को छोड़ कोई नहीं जानता कि पुत्र कौन है; और न ही पुत्र और जिस पर पुत्र प्रकट करना चाहे उसको छोड़ कोई जानता है कि पिता कौन है।” फिर उसने शिष्यों की ओर मुड़कर अकेले में कहा, “धन्य हैं वे आँखें जो उन बातों को देख रही हैं जिन्हें तुम देखते हो। क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि जो तुम देखते हो उसे बहुत से भविष्यवक्‍ताओं और राजाओं ने देखना चाहा, परंतु नहीं देखा, और जो तुम सुनते हो, उसे सुनना चाहा, परंतु नहीं सुना।” और देखो, एक व्यवस्थापक उसकी परीक्षा लेने के लिए खड़ा हुआ, और कहने लगा, “हे गुरु, अनंत जीवन का उत्तराधिकारी होने के लिए मैं क्या करूँ?” उसने उससे कहा, “व्यवस्था में क्या लिखा है? तू उसे कैसे पढ़ता है?” उसने उत्तर दिया, “तू प्रभु अपने परमेश्‍वर से अपने संपूर्ण मन और अपने संपूर्ण प्राण और अपनी संपूर्ण शक्‍ति और अपनी संपूर्ण बुद्धि से प्रेम रखना, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना। ” अतः यीशु ने उससे कहा, “तूने ठीक उत्तर दिया; यही कर तो तू जीवित रहेगा।” परंतु अपने आपको धर्मी ठहराने की इच्छा से उसने यीशु से कहा, “तो मेरा पड़ोसी कौन है?” इस पर यीशु ने कहा: “एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था कि डाकुओं ने उसे घेर लिया, और उसके वस्‍त्र छीनकर उसे मारा-पीटा और अधमरा छोड़कर चले गए। संयोग से एक याजक उसी मार्ग से जा रहा था, परंतु जब उसने उसे देखा तो कतराकर चला गया; इसी प्रकार एक लेवी भी उस स्थान पर आया और जब उसे देखा तो कतराकर चला गया। फिर एक सामरी यात्री उसके पास से निकला और जब उसे देखा तो उसने तरस खाया, और उसके पास गया और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियाँ बाँधीं, तथा उसे अपनी सवारी पर चढ़ाकर एक सराय में ले गया और उसकी देखभाल की। अगले दिन उसने दो दीनार निकालकर सराय के मालिक को दिए और कहा, ‘इसकी देखभाल करना, और इससे अधिक जो भी तेरा लगेगा, मैं अपने लौटने पर तुझे चुका दूँगा।’ अब तेरे विचार से इन तीनों में से उस व्यक्‍ति का, जो डाकुओं के हाथ पड़ गया था, पड़ोसी कौन हुआ?” उसने कहा, “वही, जिसने उस पर दया की।” यीशु ने उससे कहा, “जा और तू भी ऐसा ही कर।” जब वे जा रहे थे तो यीशु ने एक गाँव में प्रवेश किया, और मार्था नामक एक स्‍त्री ने अपने घर में उसका स्वागत किया। उसकी मरियम नामक एक बहन थी, वह प्रभु के चरणों में बैठकर उसका वचन सुनने लगी। परंतु मार्था बहुत सेवा करते-करते विचलित हो गई, और पास आकर कहने लगी, “प्रभु, क्या तुझे यह ध्यान नहीं कि मेरी बहन ने मुझे सेवा करने के लिए अकेला छोड़ दिया? इसलिए उससे कह कि मेरी सहायता करे।” इस पर प्रभु ने उससे कहा, “मार्था, मार्था, तू बहुत सी बातों की चिंता करती है और घबरा जाती है, परंतु एक बात आवश्यक है; और मरियम ने उस उत्तम भाग को चुन लिया है जो उससे छीना नहीं जाएगा।” फिर ऐसा हुआ कि यीशु किसी स्थान पर प्रार्थना कर रहा था, और जब वह कर चुका, तो उसके शिष्यों में से एक ने उससे कहा, “प्रभु, हमें प्रार्थना करना सिखा, जैसे यूहन्‍ना ने भी अपने शिष्यों को सिखाया था।” तब उसने उनसे कहा, “जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो: हे पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए; तेरा राज्य आए। हमारी दिन भर की रोटी प्रतिदिन हमें दिया कर। हमारे पापों को क्षमा कर, क्योंकि हम भी अपने प्रत्येक अपराधी को क्षमा करते हैं; और हमें परीक्षा में न पड़ने दे ।” फिर उसने उनसे कहा: “तुममें से ऐसा कौन है जिसका एक मित्र आधी रात को उसके पास जाए और उससे कहे, ‘मित्र, मुझे तीन रोटियाँ दे, क्योंकि मेरा एक मित्र यात्रा करता हुआ मेरे पास आया है और उसके सामने परोसने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है।’ और वह भीतर से उत्तर दे, ‘मुझे तंग न कर; द्वार पहले ही बंद है, और मेरे बच्‍चे मेरे साथ बिस्तर पर हैं; मैं तुझे उठकर कुछ नहीं दे सकता।’ मैं तुमसे कहता हूँ, यदि वह उसका मित्र होने पर भी उठकर उसे न दे, फिर भी उसके आग्रह करते रहने के कारण उसकी जितनी आवश्यकता हो उठकर उसे देगा। “मैं तुमसे कहता हूँ, माँगो और तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो और तुम पाओगे; खटखटाओ और तुम्हारे लिए खोला जाएगा। क्योंकि प्रत्येक जो माँगता है उसे मिलता है, और जो ढूँढ़ता है वह पाता है, और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। तुममें से कौन ऐसा पिता होगा जिसका पुत्र मछली माँगे और वह मछली के बदले उसे साँप दे? या अंडा माँगे, तो उसे बिच्छू दे? इसलिए, यदि तुम बुरे होकर अपने बच्‍चों को अच्छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो तुम्हारा पिता जो स्वर्ग में है, उससे भी बढ़कर अपने माँगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।” फिर यीशु ने एक दुष्‍टात्मा को निकाला जो गूँगी थी; और ऐसा हुआ कि जब दुष्‍टात्मा निकली तो गूँगा मनुष्य बोलने लगा और लोगों को आश्‍चर्य हुआ; परंतु उनमें से कुछ ने कहा, “वह दुष्‍टात्माओं के प्रधान बालज़बूल के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता है।” अन्य लोग उसे परखने के लिए उससे स्वर्ग का कोई चिह्‍न माँगने लगे। परंतु उनके विचारों को जानकर उसने उनसे कहा: “प्रत्येक राज्य जिसमें फूट पड़ी हो, वह उजड़ जाता है; और जब घर ही घर के विरुद्ध हो जाए तो वह गिर जाता है। यदि शैतान अपना ही विरोधी हो जाए, तो उसका राज्य कैसे स्थिर रहेगा? क्योंकि तुम कहते हो कि मैं बालज़बूल के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता हूँ। यदि मैं बालज़बूल के द्वारा दुष्‍टात्माओं को निकालता हूँ, तो तुम्हारे पुत्र किसके द्वारा निकालते हैं? इस कारण वे ही तुम्हारे न्यायी होंगे। परंतु यदि मैं परमेश्‍वर के सामर्थ्य से दुष्‍टात्माओं को निकालता हूँ, तो परमेश्‍वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा। जब कोई शक्‍तिशाली मनुष्य हथियार लेकर अपने घर की रखवाली करता है, तो उसकी संपत्ति सुरक्षित रहती है; परंतु जब उससे भी अधिक शक्‍तिशाली मनुष्य आक्रमण करके उसे जीत लेता है, तो वह उसके समस्त हथियार छीन लेता है जिन पर उसे भरोसा था, और उसकी संपत्ति को लूटकर बाँट देता है। जो मेरे साथ नहीं, वह मेरे विरुद्ध है, और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिखेरता है। “जब अशुद्ध आत्मा मनुष्य में से निकल जाती है, तो वह विश्राम की खोज में सूखे स्थानों में भटकती है। जब उसे नहीं मिलता तो कहती है, ‘जहाँ से मैं निकली थी अपने उसी घर में लौट जाऊँगी,’ और आकर उसे झाड़ू लगा और सजा सजाया पाती है। फिर वह जाकर अपने से भी बुरी सात और आत्माओं को ले आती है, और प्रवेश करके वहीं बस जाती है, तब उस मनुष्य की दशा पहले से भी बुरी हो जाती है।” फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु ये बातें कह रहा था तो भीड़ में से एक स्‍त्री ने ऊँची आवाज़ में उससे कहा, “धन्य है वह गर्भ जिसमें तू रहा और वे स्तन जिनसे तेरा पोषण हुआ।” उसने कहा, “हाँ, बल्कि अधिक धन्य वे हैं जो परमेश्‍वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं।” जब भीड़ बढ़ रही थी तो वह कहने लगा: “यह पीढ़ी एक बुरी पीढ़ी है; यह चिह्‍न ढूँढ़ती है, परंतु योना के चिह्‍न को छोड़ उसे कोई चिह्‍न नहीं दिया जाएगा। क्योंकि जिस प्रकार योना नीनवे के लोगों के लिए एक चिह्‍न ठहरा, उसी प्रकार मनुष्य का पुत्र भी इस पीढ़ी के लिए चिह्‍न ठहरेगा। दक्षिण की रानी न्याय के दिन इस पीढ़ी के लोगों के साथ उठकर उन्हें दोषी ठहराएगी; क्योंकि वह सुलैमान की बुद्धिमानी की बातें सुनने के लिए पृथ्वी के छोर से आई, परंतु देखो, यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बढ़कर है। न्याय के दिन नीनवे के लोग इस पीढ़ी के साथ उठ खड़े होंगे और इसे दोषी ठहराएँगे, क्योंकि उन्होंने योना का प्रचार सुनकर पश्‍चात्ताप किया, परंतु देखो, यहाँ वह है जो योना से भी बढ़कर है। “कोई भी दीपक जलाकर उसे तहखाने में या टोकरी के नीचे नहीं रखता, बल्कि दीवट पर रखता है, ताकि भीतर आनेवालों को प्रकाश मिले। तेरी देह का दीपक तेरी आँख है। जब तेरी आँख ठीक है, तो तेरी सारी देह उजियाली है; परंतु जब वह बुरी है, तो तेरी देह भी अंधकारमय है। इसलिए चौकस रह कि तेरे भीतर का उजियाला कहीं अंधकार न बन जाए। यदि तेरी सारी देह उजियाली हो, और उसका कोई भाग अंधकारमय न हो, तो वह सब ऐसी उजियाली होगी, जैसे दीपक अपनी चमक से तुझे प्रकाश देता है।” जब यीशु बात कर ही रहा था तो एक फरीसी ने उससे विनती की कि उसके साथ भोजन करे; और वह भीतर जाकर भोजन करने बैठ गया। फरीसी को यह देखकर आश्‍चर्य हुआ कि उसने भोजन से पहले हाथ नहीं धोए । प्रभु ने उससे कहा: “तुम फरीसी तो कटोरे और थाली को बाहर से माँजते हो, परंतु तुम्हारे भीतर लूट और दुष्‍टता भरी है। हे मूर्खो, जिसने बाहर का भाग बनाया, क्या उसने भीतर का भाग भी नहीं बनाया? बल्कि जो भीतर का है उसे दान करो, और देखो तुम्हारे लिए सब कुछ शुद्ध होगा। “परंतु हे फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम पुदीने, सिताब और हर प्रकार के साग-पात का दशमांश तो देते हो, परंतु परमेश्‍वर के न्याय और प्रेम की उपेक्षा करते हो; चाहिए था कि इन्हें करते और उनमें भी कमी न आने देते। हे फरीसियो, तुम पर हाय! क्योंकि तुम्हें आराधनालयों में मुख्य आसन और बाज़ारों में नमस्कार प्रिय लगता है। हाय तुम पर, क्योंकि तुम छिपी कब्रों के समान हो, जिन पर लोग अनजाने में चलते हैं।” इस पर व्यवस्थापकों में से एक ने उससे कहा, “हे गुरु, ऐसी बातें कहकर तू हमारा भी अपमान करता है।” परंतु उसने कहा: “तुम व्यवस्थापकों पर भी हाय! क्योंकि तुम मनुष्यों पर असहनीय बोझ लादते हो, और स्वयं उन बोझों को अपनी एक उँगली से भी नहीं छूते। हाय तुम पर, क्योंकि तुम भविष्यवक्‍ताओं के स्मारकों को बनाते हो, जबकि तुम्हारे ही पूर्वजों ने उन्हें मार डाला था। इसलिए तुम साक्षी हो कि तुम अपने पूर्वजों के कार्यों से सहमत हो, क्योंकि उन्होंने उन्हें मार डाला और तुम उनके स्मारक बनाते हो। इसी कारण परमेश्‍वर की बुद्धि ने भी कहा, ‘मैं उनके पास भविष्यवक्‍ताओं और प्रेरितों को भेजूँगी, और उनमें से कितनों को वे मार डालेंगे और कितनों को सताएँगे,’ ताकि जितने भविष्यवक्‍ताओं का लहू इस जगत की उत्पत्ति से बहाया गया है, उन सब का लेखा इस पीढ़ी से लिया जाए, हाबिल के लहू से लेकर जकरयाह के लहू तक, जो वेदी और मंदिर के बीच मारा गया; हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, उसका लेखा इसी पीढ़ी से लिया जाएगा। तुम व्यवस्थापकों पर हाय! क्योंकि तुमने ज्ञान की कुंजी तो ले ली, पर स्वयं प्रवेश नहीं किया; और प्रवेश करनेवालों को भी रोक दिया।” यीशु वहाँ से बाहर निकल गया, और शास्‍त्री और फरीसी उससे अत्यंत बैर रखने लगे और बहुत से विषयों पर उससे प्रश्‍न करने लगे, और इस ताक में रहने लगे कि उसके मुँह की किसी बात से उसे फँसाएँ । उस समय जब वहाँ हज़ारों लोग इकट्ठे हो गए, यहाँ तक कि वे एक दूसरे पर गिरे जा रहे थे, तो यीशु ने पहले अपने शिष्यों से कहना आरंभ किया: “फरीसियों के ख़मीर, अर्थात् पाखंड से अपने आपको बचाए रखो। ऐसा कुछ ढका नहीं जो प्रकट न किया जाएगा, और न कुछ छिपा है जो जाना न जाएगा। इसलिए जो तुमने अंधकार में कहा है, वह उजियाले में सुना जाएगा, और जो तुमने भीतरी कमरों में फुसफुसाकर कहा है, वह छतों पर से प्रचार किया जाएगा। “अब मैं तुमसे जो मेरे मित्र हो कहता हूँ, उनसे मत डरो जो शरीर को घात करते हैं और उसके बाद कुछ और नहीं कर सकते। मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम्हें किससे डरना चाहिए; घात करने के बाद जिसके पास नरक में डालने का अधिकार है, उससे डरो; हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, उसी से डरो। क्या पाँच गौरैयाँ दो पैसे में नहीं बिकतीं? फिर भी परमेश्‍वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता। तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं। डरो मत, तुम बहुत सी गौरैयों से अधिक मूल्यवान हो। “मैं तुमसे कहता हूँ, जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे स्वीकार करता है, मनुष्य का पुत्र भी उसे परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों के सामने स्वीकार करेगा; परंतु जो मनुष्यों के सामने मेरा इनकार करता है, उसका परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों के सामने इनकार किया जाएगा। “जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरुद्ध कोई बात कहेगा, उसका अपराध क्षमा किया जाएगा; परंतु जो पवित्र आत्मा की निंदा करता है उसका अपराध क्षमा नहीं किया जाएगा। “जब लोग तुम्हें आराधनालयों, शासकों और अधिकारियों के सामने ले जाएँ, तो तुम चिंता न करना कि अपने बचाव में कैसे और क्या उत्तर दोगे या क्या कहोगे; क्योंकि पवित्र आत्मा तुम्हें उसी घड़ी सिखाएगा कि क्या कहना चाहिए।” भीड़ में से किसी ने यीशु से कहा, “हे गुरु, मेरे भाई से कह कि पैतृक संपत्ति का मेरे साथ बँटवारा करे।” परंतु उसने उससे कहा, “हे मनुष्य, किसने मुझे तुम्हारे ऊपर न्यायी या बँटवारा करनेवाला नियुक्‍त किया है?” फिर उसने उनसे कहा, “ध्यान दो, हर प्रकार के लोभ से बचे रहो, क्योंकि किसी का जीवन उसकी संपत्ति के अधिक होने पर निर्भर नहीं होता।” फिर यीशु ने उनसे एक दृष्‍टांत कहा: “किसी धनी मनुष्य के खेत में अच्छी उपज हुई। तब वह अपने मन में सोचने लगा, ‘मैं क्या करूँ? क्योंकि मेरे पास कोई स्थान नहीं है, जहाँ मैं अपनी उपज को इकट्ठा करूँ।’ फिर उसने कहा ‘मैं ऐसा करूँगा कि अपने खत्तों को तोड़कर उन्हें और भी बड़ा बनाऊँगा, और वहाँ अपना सारा अनाज और अच्छी वस्तुएँ इकट्ठा करूँगा, और मैं अपने प्राण से कहूँगा, “हे प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिए बहुत सी अच्छी वस्तुएँ रखी हैं; विश्राम कर, खा, पी, और आनंद मना।” ’ परंतु परमेश्‍वर ने उससे कहा, ‘हे मूर्ख! इसी रात तेरा प्राण तुझसे ले लिया जाएगा; अब तूने जो तैयारी की है, वह किसकी होगी?’ जो अपने लिए धन बटोरता है वह ऐसा ही है और परमेश्‍वर के सामने धनी नहीं।” फिर उसने अपने शिष्यों से कहा: “इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, अपने प्राण के लिए चिंता मत करो कि क्या खाएँगे, और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे। क्योंकि प्राण भोजन से और देह वस्‍त्र से बढ़कर है। कौवों पर ध्यान दो, वे न बोते और न ही काटते हैं, न उनके गोदाम और न ही खत्ते होते हैं, फिर भी परमेश्‍वर उन्हें खिलाता है; तुम्हारा मूल्य तो पक्षियों से कहीं अधिक है। तुममें से कौन है जो चिंता करके अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? इसलिए यदि तुम सब से छोटा कार्य भी नहीं कर सकते, तो अन्य बातों की चिंता क्यों करते हो? सौसन के फूलों पर ध्यान दो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न तो परिश्रम करते हैं और न ही कातते हैं; परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि सुलैमान भी अपने सारे वैभव में उनमें से किसी के समान वस्‍त्र पहने हुए नहीं था। यदि परमेश्‍वर मैदान की घास को, जो आज है और कल भट्ठी में झोंकी जाएगी, ऐसे वस्‍त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्‍वासियो, वह तुम्हें इससे बढ़कर क्यों न पहनाएगा। इसलिए तुम इसकी खोज में मत रहो कि क्या खाएँगे और क्या पीएँगे, और न ही संदेह करो; क्योंकि संसार की जातियाँ इन सब वस्तुओं की खोज में रहती हैं, परंतु तुम्हारा पिता जानता है कि तुम्हें इनकी आवश्यकता है। परंतु परमेश्‍वर के राज्य की खोज करो, और ये वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी। “हे छोटे झुंड, मत डर! क्योंकि तुम्हारा पिता इससे प्रसन्‍न है कि तुम्हें राज्य दे। अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिए ऐसे बटुए बनाओ जो पुराने नहीं होते, अर्थात् स्वर्ग में समाप्‍त न होनेवाला धन इकट्ठा करो, जिसके निकट न तो चोर आता है और न कीड़ा नष्‍ट करता है। क्योंकि जहाँ तुम्हारा धन है, वहाँ तुम्हारा मन भी होगा। “तुम्हारी कमर कसी रहे और तुम्हारे दीपक जलते रहें, और तुम उन मनुष्यों के समान बनो जो अपने स्वामी की प्रतीक्षा करते हैं कि वह विवाह से कब लौटेगा, ताकि जब वह आकर द्वार खटखटाए तो तुरंत उसके लिए द्वार खोल दें। धन्य हैं वे दास, जिन्हें स्वामी आकर जागते हुए पाए; मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह अपनी कमर कसकर उन्हें भोजन करने के लिए बैठाएगा और आकर उन्हें परोसेगा। यदि वह रात के बारह बजे या प्रातः तीन बजे आकर उन्हें जागते हुए पाए, तो वे दास धन्य हैं। परंतु यह जान लो कि यदि घर का स्वामी जानता कि चोर किस घड़ी आएगा, तो वह अपने घर में सेंध लगने नहीं देता। तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं होगे, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।” तब पतरस ने कहा, “प्रभु, क्या तू यह दृष्‍टांत हमसे कह रहा है या सब से?” प्रभु ने कहा: “ऐसा विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान प्रबंधक कौन है, जिसे उसका स्वामी अपने नौकरों के ऊपर नियुक्‍त करे कि उन्हें उचित समय पर भोजन सामग्री दे? धन्य है वह दास, जिसे उसका स्वामी आकर ऐसा करते हुए पाए; मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकारी नियुक्‍त करेगा। परंतु यदि वह दास अपने मन में कहे, ‘मेरे स्वामी के आने में देर है,’ और वह सेवकों और सेविकाओं को पीटने लगे, और खा-पीकर मतवाला होने लगे, तो उस दास का स्वामी ऐसे दिन आएगा जब वह उसकी प्रतीक्षा न करता हो और ऐसी घड़ी जिसे वह न जानता हो; और उसे वह कठोर दंड देगा और उसका भाग अविश्‍वासियों के साथ ठहराएगा। वह दास जो अपने स्वामी की इच्छा जानकर भी न तो तैयार रहा और न ही उसकी इच्छा के अनुसार चला, वह बहुत मार खाएगा; परंतु जो न जानकर मार खाने के योग्य कार्य करे, वह कम मार खाएगा। अतः प्रत्येक जिसे बहुत दिया गया है, उससे बहुत माँगा जाएगा, और जिसे बहुत सौंपा गया है, उससे अधिक लिया जाएगा। “मैं पृथ्वी पर आग लगाने आया हूँ, और मेरी बड़ी इच्छा थी कि आग सुलग गई होती। परंतु मुझे एक बपतिस्मा लेना है, और जब तक वह पूरा नहीं हो जाता तब तक मैं कितना व्यथित हूँ। क्या तुम सोचते हो कि मैं पृथ्वी पर मेल-मिलाप कराने आया हूँ? मैं तुमसे कहता हूँ, नहीं, बल्कि फूट डालने आया हूँ। क्योंकि अब से एक घर के पाँच जनों में फूट होगी, तीन दो के और दो तीन के विरुद्ध होंगे, अर्थात् पिता पुत्र के और पुत्र पिता के, माँ बेटी के और बेटी माँ के, सास अपनी बहू के और बहू सास के विरुद्ध होगी।” तब वह लोगों से भी कहने लगा: “जब तुम पश्‍चिम से बादल को उठता हुआ देखते हो, तो तुरंत कहते हो कि वर्षा होगी, और ऐसा ही होता है; और जब दक्षिणी हवा चलती है तो तुम कहते हो कि गर्मी पड़ेगी, और ऐसा ही होता है। हे पाखंडियो, तुम धरती और आकाश के लक्षण परखना जानते हो, परंतु इस समय को परखना क्यों नहीं जानते? “तुम अपने आप ही निर्णय क्यों नहीं करते कि उचित क्या है? अतः जब तू अपने विरोधी के साथ अधिकारी के सामने जाता हो, तो मार्ग में ही उससे छूटने का यत्‍न कर, कहीं ऐसा न हो कि वह तुझे खींचकर न्यायाधीश के पास ले जाए, और न्यायाधीश तुझे दरोगा को सौंप दे, और दरोगा तुझे बंदीगृह में डाल दे। मैं तुझसे कहता हूँ, जब तक तू एक-एक पैसा चुका न देगा, वहाँ से कभी छूट न पाएगा।” उस समय वहाँ कुछ लोग थे जो यीशु को उन गलीलियों के विषय में बताने लगे, जिनका लहू पिलातुस ने उन्हीं के बलिदानों में मिलाया था। इस पर उसने उनसे कहा, “तुम क्या सोचते हो कि ये गलीली अन्य सब गलीलियों से अधिक पापी थे, कि उन्होंने ऐसे दुःख उठाए? मैं तुमसे कहता हूँ, नहीं! बल्कि यदि तुम पश्‍चात्ताप न करो, तो तुम सब भी इसी प्रकार नाश होगे। या वे अठारह जन जिनके ऊपर शीलोह का बुर्ज गिरा और मर गए, तुम क्या समझते हो कि वे यरूशलेम के सब रहनेवाले मनुष्यों से अधिक पापी थे? मैं तुमसे कहता हूँ, नहीं! बल्कि यदि तुम पश्‍चात्ताप न करो, तो तुम सब भी इसी प्रकार नाश होगे।” फिर वह यह दृष्‍टांत कहने लगा: “किसी मनुष्य ने अपने अंगूर के बगीचे में अंजीर का पेड़ लगा रखा था, और वह उसमें फल ढूँढ़ने आया परंतु उसे कुछ न मिला। अतः उसने माली से कहा, ‘देख, मैं तीन वर्षों से इस अंजीर के पेड़ पर फल ढूँढ़ने आता हूँ, परंतु कुछ नहीं मिलता। इसलिए इसे काट डाल। यह भूमि को भी क्यों घेरे रहे?’ इस पर उसने उससे कहा, ‘स्वामी, इसे इस वर्ष भी रहने दे। मैं इसके चारों ओर खोदकर खाद डालूँगा, और यदि अगले वर्ष यह फल दे तो ठीक है, नहीं तो इसे काट डालना।’ ” सब्त के दिन यीशु एक आराधनालय में उपदेश दे रहा था। और देखो, एक स्‍त्री अठारह वर्ष से दुर्बल करनेवाली आत्मा से ग्रस्त थी और वह कुबड़ी हो गई थी तथा पूरी तरह से सीधी खड़ी नहीं हो सकती थी। जब यीशु ने उसे देखा तो बुलाकर उससे कहा, “हे नारी, तू अपनी दुर्बलता से मुक्‍त हो गई है।” और उसने अपने हाथ उस पर रखे; तब वह तुरंत सीधी हो गई, और परमेश्‍वर की महिमा करने लगी। इस पर आराधनालय का अधिकारी नाराज़ हो गया कि यीशु ने सब्त के दिन उसे स्वस्थ किया है। वह भीड़ से कहने लगा, “छः दिन हैं जिनमें कार्य करना चाहिए; अतः उन्हीं दिनों में आकर स्वस्थ होओ परंतु सब्त के दिन में नहीं।” तब प्रभु ने उससे कहा, “हे पाखंडियो, क्या तुममें से प्रत्येक सब्त के दिन अपने बैल या गधे को चरनी से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता? तो क्या यह आवश्यक नहीं था कि अब्राहम की इस बेटी को, जिसे शैतान ने अठारह वर्ष से बाँध रखा था, सब्त के दिन इस बंधन से मुक्‍त किया जाता?” जब उसने ये बातें कहीं तो उसके सारे विरोधी लज्‍जित हो गए, और सारी भीड़ उन सब महिमामय कार्यों से आनंदित थी जो उसके द्वारा हो रहे थे। फिर यीशु कहने लगा, “परमेश्‍वर का राज्य किसके समान है, और उसकी तुलना मैं किससे करूँ? वह राई के दाने के समान है, जिसे एक मनुष्य ने लेकर अपने बाग में बोया, और वह बढ़कर एक पेड़ बन गया, और आकाश के पक्षियों ने उसकी डालियों पर बसेरा किया।” यीशु ने फिर कहा, “परमेश्‍वर के राज्य की तुलना मैं किससे करूँ? वह ख़मीर के समान है, जिसे एक स्‍त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिलाया और धीरे-धीरे वह सब ख़मीरा हो गया।” यीशु नगर-नगर और गाँव-गाँव होकर उपदेश देता हुआ यरूशलेम की ओर जा रहा था। किसी ने उससे पूछा, “हे प्रभु, क्या उद्धार पानेवाले थोड़े हैं?” उसने उनसे कहा, “सकरे द्वार से प्रवेश करने का प्रयत्‍न करो, क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि बहुत से लोग प्रवेश करना चाहेंगे पर न कर सकेंगे। जब घर का स्वामी उठकर द्वार बंद कर चुका हो, और तुम बाहर खड़े द्वार खटखटाकर कहने लगो, ‘हे प्रभु हमारे लिए खोल दे,’ तो वह तुमसे कहेगा, ‘मैं तुम्हें नहीं जानता कि तुम कहाँ के हो।’ तब तुम कहने लगोगे, ‘हमने तेरे सामने खाया और पीया, और हमारी सड़कों में तूने उपदेश दिया।’ इस पर वह तुमसे कहेगा, ‘मैं तुम्हें नहीं जानता कि तुम कहाँ के हो; हे सब कुकर्म करनेवालो, मुझसे दूर हो जाओ।’ जब तुम अब्राहम, इसहाक और याकूब और सब भविष्यवक्‍ताओं को परमेश्‍वर के राज्य में और स्वयं को बाहर निकाले हुए देखोगे, तो वहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा। पूर्व और पश्‍चिम, उत्तर और दक्षिण से लोग आएँगे और परमेश्‍वर के राज्य में भोजन करने बैठेंगे। और देखो, जो अंतिम हैं वे प्रथम होंगे, और जो प्रथम हैं वे अंतिम होंगे।” उसी घड़ी कुछ फरीसी यीशु के पास आकर कहने लगे, “यहाँ से निकलकर चला जा, क्योंकि हेरोदेस तुझे मार डालना चाहता है।” परंतु उसने उनसे कहा, “जाकर उस लोमड़ी से कह दो, ‘देख, मैं आज और कल दुष्‍टात्माओं को निकालता और बीमारों को स्वस्थ करता हूँ, और तीसरे दिन मैं अपना कार्य पूरा करूँगा।’ कुछ भी हो, मुझे आज, कल और परसों चलना अवश्य है, क्योंकि भविष्यवक्‍ता का यरूशलेम के बाहर मारा जाना संभव नहीं। “हे यरूशलेम, हे यरूशलेम! तू जो भविष्यवक्‍ताओं को मार डालती है और जो तेरे पास भेजे गए, उन पर पथराव करती है। मैंने कितनी बार चाहा कि जैसे मुरगी अपने बच्‍चों को पंखों तले इकट्ठा करती है, वैसे ही तेरे बच्‍चों को इकट्ठा करूँ, परंतु तूने न चाहा। देखो, तुम्हारे लिए तुम्हारा घर उजाड़ छोड़ा जाता है। मैं तुमसे कहता हूँ, जब तक वह समय न आएगा कि तुम यह कहो: ‘धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है,’ तब तक तुम मुझे कभी न देखोगे।” फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु सब्त के दिन फरीसियों के अधिकारियों में से एक के घर में रोटी खाने गया तो लोग उसे ध्यान से देख रहे थे। और देखो, उसके सामने जलोदर रोग से पीड़ित एक मनुष्य था। इस पर यीशु ने व्यवस्थापकों और फरीसियों से कहा, “क्या सब्त के दिन स्वस्थ करना उचित है या नहीं?” परंतु वे चुप रहे। तब उसने उसे छूकर स्वस्थ किया और भेज दिया। उसने उनसे कहा, “तुममें से कौन है, जिसका बेटा या बैल सब्त के दिन कुएँ में गिर जाए और वह उसे तुरंत बाहर न निकाले?” परंतु वे इन बातों का कुछ भी उत्तर न दे सके। जब यीशु ने ध्यान दिया कि आमंत्रित लोग किस प्रकार मुख्य स्थानों को चुन रहे हैं, तो वह उनसे एक दृष्‍टांत कहने लगा: “जब कोई तुझे विवाह में आमंत्रित करे, तो मुख्य स्थान पर न बैठना, कहीं ऐसा न हो कि उसने तुझसे भी अधिक सम्मानित व्यक्‍ति को आमंत्रित किया हो, और जिसने तुझे और उसे आमंत्रित किया है, आकर तुझसे कहे, ‘यह स्थान इसे दे दे।’ और तब तुझे लज्‍जित होकर सब से नीचे का स्थान लेना पड़े। परंतु जब तुझे आमंत्रित किया जाए, तो सब से नीचे स्थान पर जाकर बैठ, ताकि जब तुझे आमंत्रित करनेवाला आए और तुझसे कहे, ‘हे मित्र, ऊँचे स्थान पर जाकर बैठ।’ तो तेरे साथ बैठनेवाले सब लोगों के सामने तेरी बड़ाई होगी। क्योंकि प्रत्येक जो अपने आपको ऊँचा उठाता है वह नीचा किया जाएगा, और जो अपने आपको दीन करता है वह ऊँचा उठाया जाएगा।” फिर यीशु अपने आमंत्रित करनेवाले से भी कहने लगा, “जब तू दिन या रात का भोजन करे, तो न अपने मित्रों को, न अपने भाइयों को, न अपने संबंधियों को और न ही धनी पड़ोसियों को बुला, कहीं ऐसा न हो कि वे भी तुझे आमंत्रित करके बदला चुका दें। बल्कि जब तू भोज दे तो कंगालों, अपंगों, लंगड़ों और अंधों को आमंत्रित कर; तब तू धन्य होगा, क्योंकि उनके पास तुझे बदले में देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए इसका प्रतिफल तुझे धर्मियों के पुनरुत्थान पर दिया जाएगा।” ये बातें सुनकर उसके साथ भोजन करनेवालों में से एक ने उससे कहा, “धन्य है वह जो परमेश्‍वर के राज्य में रोटी खाएगा।” यीशु ने उससे कहा: “किसी मनुष्य ने एक बड़ा भोज दिया, और बहुतों को आमंत्रित किया, और भोज के समय उसने अपने दास को आमंत्रित लोगों से यह कहने के लिए भेजा, ‘आओ, अब भोज तैयार है।’ परंतु एक-एक करके वे सब क्षमा माँगने लगे। पहले ने उससे कहा, ‘मैंने खेत खरीदा है और मुझे जाकर उसे देखना आवश्यक है; मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे क्षमा कर दे।’ और दूसरे ने कहा, ‘मैंने बैलों की पाँच जोड़ियाँ खरीदी हैं और मैं उन्हें परखने जा रहा हूँ; मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे क्षमा कर दे।’ एक और ने कहा, ‘मैंने विवाह किया है, इस कारण मैं आ नहीं सकता।’ अतः उस दास ने आकर अपने स्वामी को ये बातें बताईं। तब घर के स्वामी ने क्रोधित होकर अपने दास से कहा, ‘तू शीघ्र नगर की सड़कों और गलियों में जा, और कंगालों, अपंगों, अंधों और लंगड़ों को यहाँ ले आ।’ फिर दास ने कहा, ‘हे स्वामी, जो आज्ञा तूने दी थी उसका पालन हुआ है, परंतु अब भी स्थान है।’ तब स्वामी ने दास से कहा, ‘मार्गों और बाड़ों में जा और लोगों को आने के लिए विवश कर, ताकि मेरा घर भर जाए; क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि उन आमंत्रित लोगों में से कोई भी मेरे भोज को न चखेगा।’ ” अब एक बड़ी भीड़ यीशु के साथ जा रही थी, और उसने मुड़कर उनसे कहा: “यदि कोई मेरे पास आता है और अपने पिता और माता और पत्‍नी और संतान और भाइयों और बहनों और यहाँ तक कि अपने प्राण को भी अप्रिय नहीं जानता, तो वह मेरा शिष्य नहीं हो सकता। जो अपना क्रूस उठाकर मेरे पीछे नहीं आता, वह मेरा शिष्य नहीं हो सकता। “क्योंकि तुममें से कौन है जो बुर्ज बनाना चाहता है और पहले बैठकर खर्च का हिसाब नहीं करता, कि पूरा करने के लिए पर्याप्‍त धन है या नहीं? कहीं ऐसा न हो कि वह नींव डालकर पूरा न कर सके, और सब देखनेवाले उसका उपहास करने लगें और कहें, ‘इस मनुष्य ने बनाना तो आरंभ किया परंतु पूरा न कर सका।’ या कौन ऐसा राजा है जो दूसरे राजा से युद्ध करने जाता हो, और पहले बैठकर यह विचार न करे कि जो बीस हज़ार सैनिकों के साथ उसके विरुद्ध चला आ रहा है उसका सामना क्या वह दस हज़ार से कर सकता है? नहीं तो अभी उसके दूर रहते ही वह दूत भेजकर शांति का प्रस्ताव रखेगा। इसी प्रकार तुममें से जो कोई अपनी सारी संपत्ति को त्याग नहीं देता, वह मेरा शिष्य नहीं हो सकता। “नमक तो अच्छा है, परंतु यदि नमक ही अपना स्वाद खो दे, तो वह किससे नमकीन किया जाएगा? वह न तो भूमि के और न ही खाद के काम आता है; लोग उसे बाहर फेंक देते हैं। जिसके पास सुनने के लिए कान हों, वह सुन ले।” यीशु की बातें सुनने के लिए उसके पास सब कर वसूलनेवाले और पापी आया करते थे। तब फरीसी और शास्‍त्री बुड़बुड़ाकर कहने लगे, “यह पापियों के साथ मिलता-जुलता है और उनके साथ खाता है।” तब उसने उनसे यह दृष्‍टांत कहा: “तुममें से ऐसा कौन मनुष्य है जिसके पास सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक खो जाए, और वह उन निन्यानवे को जंगल में छोड़कर, जब तक वह खोई हुई मिल न जाए, ढूँढ़ता न फिरे? और जब वह मिल जाती है, तो वह आनंद से उसे अपने कंधों पर उठा लेता है, और घर पहुँचकर अपने मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठा करता है और उनसे कहता है, ‘मेरे साथ आनंद मनाओ, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मुझे मिल गई है।’ मैं तुमसे कहता हूँ कि इसी प्रकार पश्‍चात्ताप करनेवाले एक पापी के लिए स्वर्ग में इतना बड़ा आनंद होगा, जितना उन निन्यानवे धर्मियों के लिए नहीं, जिन्हें पश्‍चात्ताप की आवश्यकता नहीं है। “या ऐसी कौन स्‍त्री होगी जिसके पास दस सिक्‍के हों, और उनमें से एक खो जाए; और वह दीपक जलाकर तथा घर में झाड़ू लगाकर जब तक वह मिल न जाए, ध्यान से ढूँढ़ती न रहे? जब वह मिल जाता है, तो वह अपनी सहेलियों और पड़ोसिनों को इकट्ठा करके कहती है, ‘मेरे साथ आनंद मनाओ, क्योंकि जो सिक्‍का मुझसे खो गया था, वह मुझे मिल गया है।’ मैं तुमसे कहता हूँ, इसी प्रकार एक पापी के पश्‍चात्ताप करने पर परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों के सामने आनंद मनाया जाता है।” फिर यीशु ने कहा: “किसी मनुष्य के दो पुत्र थे। उनमें से छोटे ने पिता से कहा, ‘हे पिता, संपत्ति में से जो मेरा भाग है, वह मुझे दे दे।’ अतः उसने उनमें संपत्ति बाँट दी। अभी बहुत दिन नहीं बीते थे कि छोटा पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके दूर देश को चला गया, और वहाँ उसने भोग-विलास का जीवन बिताकर अपनी संपत्ति उड़ा दी। जब वह अपना सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में भयंकर अकाल पड़ा, और उसके पास कुछ नहीं था। तब वह उस देश के एक निवासी के पास जाकर काम में लग गया, और उस व्यक्‍ति ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने भेज दिया; और जिन फलियों को सूअर खाते थे, उनसे वह अपना पेट भरने के लिए तरसता था, और कोई उसे कुछ नहीं देता था। परंतु जब वह अपने आपे में आया तो कहने लगा, ‘मेरे पिता के कितने मज़दूरों को भरपेट भोजन मिलता है, और मैं यहाँ भूखा मर रहा हूँ। मैं उठकर अपने पिता के पास जाऊँगा, और उससे कहूँगा, हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, अब मैं तेरा पुत्र कहलाने के योग्य नहीं रहा; तू मुझे अपने एक मज़दूर के समान रख ले।’ “तब वह उठकर अपने पिता के पास जाने को चल पड़ा। अभी वह दूर ही था कि उसके पिता ने उसे देखा और उस पर तरस खाया तथा दौड़कर उसे गले लगा लिया और उसको बहुत चूमा। पुत्र ने उससे कहा, ‘हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, अब मैं तेरा पुत्र कहलाने के योग्य नहीं रहा।’ परंतु पिता ने अपने दासों से कहा, ‘शीघ्र सब से अच्छा वस्‍त्र निकाल लाओ और उसे पहनाओ, तथा उसके हाथ में अँगूठी और पैरों में जूते पहनाओ, और मोटा बछड़ा लाकर काटो कि हम खाकर आनंद मनाएँ, क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, परंतु फिर से जीवित हो गया है; खो गया था, अब मिल गया है।’ और वे आनंद मनाने लगे। “उसका बड़ा पुत्र खेत में था; और लौटते हुए जब वह घर के निकट पहुँचा, तो उसने गाने-बजाने और नाचने की आवाज़ सुनी, तब वह एक सेवक को बुलाकर पूछने लगा कि यह क्या हो रहा है। उसने उससे कहा, ‘तेरा भाई आया है, और तेरे पिता ने मोटा बछड़ा कटवाया है, क्योंकि उसने उसे सकुशल पाया है।’ परंतु वह क्रोध से भर गया और भीतर जाना न चाहा। तब उसका पिता बाहर आकर उसे मनाने लगा। इस पर उसने अपने पिता से कहा, ‘देख, मैं इतने वर्षों से दास के समान तेरी सेवा कर रहा हूँ और मैंने कभी भी तेरी आज्ञा नहीं टाली, फिर भी तूने मुझे कभी बकरी का एक बच्‍चा भी नहीं दिया कि मैं अपने मित्रों के साथ आनंद मनाता; परंतु जब तेरा यह पुत्र आया जिसने तेरी संपत्ति वेश्याओं पर उड़ा दी, तो तूने उसके लिए मोटा बछड़ा कटवाया।’ पिता ने उससे कहा, ‘पुत्र, तू तो सदा मेरे साथ है, और मेरा सब कुछ तेरा ही है; परंतु अब हमें मगन और आनंदित होना चाहिए, क्योंकि तेरा यह भाई मर गया था परंतु जीवित हो गया है, और खो गया था अब मिल गया है।’ ” फिर यीशु शिष्यों से भी कहने लगा: “किसी धनी मनुष्य का एक प्रबंधक था, और उस पर यह आरोप लगाया गया कि वह उसकी संपत्ति उड़ा रहा है। स्वामी ने उसको बुलाकर कहा, ‘तेरे विषय में मैं यह क्या सुन रहा हूँ? अपने प्रबंधन का लेखा दे, क्योंकि अब तू प्रबंधक नहीं रह सकता।’ तब प्रबंधक ने अपने मन में कहा, ‘मैं क्या करूँ, क्योंकि मेरा स्वामी मुझसे प्रबंधक का कार्य छीन रहा है? मिट्टी की खुदाई करने की शक्‍ति मुझमें नहीं है और भीख माँगने में मुझे लज्‍जा आती है। मैं समझ गया कि मुझे क्या करना चाहिए, ताकि जब मैं प्रबंधक के कार्य से हटाया जाऊँ तो लोग अपने घरों में मेरा स्वागत करें।’ और उसने अपने स्वामी के ऋणियों को एक-एक करके बुलाया और पहले से पूछा, ‘मेरे स्वामी का तुझ पर कितना ऋण है?’ उसने कहा, ‘तीन हज़ार लीटर तेल।’ उसने उससे कहा, ‘अपना बहीखाता ले और शीघ्र बैठकर डेढ़ हज़ार लीटर लिख।’ फिर उसने दूसरे से कहा, ‘तुझ पर कितना ऋण है?’ उसने कहा, ‘पाँच सौ बोरी गेहूँ।’ उसने उससे कहा, ‘अपना बहीखाता ले और चार सौ लिख ले।’ “स्वामी ने उस अधर्मी प्रबंधक की सराहना की कि उसने चतुराई से कार्य किया; क्योंकि इस संसार की संतान अपनी पीढ़ी के लोगों में ज्योति की संतान से अधिक चतुर है। और मैं तुमसे कहता हूँ, अधर्म के धन से अपने लिए मित्र बनाओ, ताकि जब वह समाप्‍त हो जाए तो अनंत निवासस्थानों में तुम्हारा स्वागत हो। जो थोड़े से थोड़े में विश्‍वासयोग्य है वह बहुत में भी विश्‍वासयोग्य है, और जो थोड़े से थोड़े में अधर्मी है वह बहुत में भी अधर्मी है। अतः यदि तुम अधर्म के धन में विश्‍वासयोग्य न रहे, तो कौन तुम्हें सच्‍चा धन सौंपेगा? और यदि तुम पराए धन में विश्‍वासयोग्य न रहे, तो जो तुम्हारा अपना है, उसे तुम्हें कौन देगा? “कोई भी सेवक दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि वह या तो एक से घृणा करेगा और दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्‍वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।” फरीसी जो धन के लोभी थे, ये सब बातें सुनकर उसका ठट्ठा करने लगे। तब यीशु ने उनसे कहा: “तुम अपने आपको मनुष्यों के सामने धर्मी ठहराते हो, परंतु परमेश्‍वर तुम्हारे मनों को जानता है; क्योंकि जो मनुष्यों में सम्मानित है वह परमेश्‍वर की दृष्‍टि में घृणित है। “व्यवस्था और भविष्यवक्‍ता यूहन्‍ना तक थे; उस समय से परमेश्‍वर के राज्य का सुसमाचार सुनाया जा रहा है और प्रत्येक उसमें बलपूर्वक प्रवेश कर रहा है। व्यवस्था के एक बिंदु के मिट जाने से आकाश और पृथ्वी का टल जाना अधिक सहज है। “जो कोई अपनी पत्‍नी को तलाक देकर दूसरी से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है, और जो पति द्वारा त्यागी हुई स्‍त्री से विवाह करता है, वह भी व्यभिचार करता है। “अब एक धनी मनुष्य था। वह बैंजनी वस्‍त्र और मलमल पहना करता था और प्रतिदिन विलासिता में पड़ा आनंद मनाता रहता था। उसके फाटक पर लाज़र नामक एक कंगाल को छोड़ दिया जाता था, जो घावों से भरा हुआ था, और धनवान की मेज़ से जो टुकड़े गिरते थे, उनसे वह अपना पेट भरने के लिए तरसता था; ऊपर से कुत्ते भी आ आकर उसके घावों को चाटा करते थे। और ऐसा हुआ कि वह कंगाल मर गया और उसे स्वर्गदूतों द्वारा अब्राहम की गोद में पहुँचाया गया। फिर वह धनवान भी मरा और गाड़ा गया। अधोलोक में उसने पीड़ा में पड़े हुए जब अपनी आँखें उठाईं तो दूर से अब्राहम और उसकी गोद में लाज़र को देखा। तब उसने पुकारकर कहा, ‘हे पिता अब्राहम, मुझ पर दया कर और लाज़र को भेज कि वह अपनी उँगली का सिरा पानी में डुबोए और मेरी जीभ को ठंडा करे, क्योंकि मैं इस ज्वाला में तड़प रहा हूँ।’ परंतु अब्राहम ने कहा, ‘हे पुत्र, स्मरण कर कि तूने अपने जीवन में अच्छी वस्तुएँ पा लीं, और इसी प्रकार लाज़र ने बुरी वस्तुएँ; और अब वह यहाँ सांत्वना पा रहा है और तू तड़प रहा है। इन सब बातों को छोड़ हमारे और तुम्हारे बीच बहुत गहरी खाई निर्धारित की गई है, कि जो यहाँ से उस पार तुम्हारे पास जाना चाहें, वे न जा सकें, और न ही कोई वहाँ से पार होकर हमारे पास आ सके।’ उस धनवान ने कहा, ‘हे पिता! तब मैं तुझसे विनती करता हूँ, कि तू उसे मेरे पिता के घर भेज दे, क्योंकि मेरे पाँच भाई हैं; वह उन्हें चेतावनी दे, कहीं ऐसा न हो कि वे भी इस पीड़ा के स्थान में आएँ।’ परंतु अब्राहम ने कहा, ‘उनके पास मूसा और भविष्यवक्‍ताओं के लेख हैं, वे उनकी सुनें।’ उसने कहा, ‘नहीं, हे पिता अब्राहम, परंतु यदि मृतकों में से कोई उनके पास जाए तो वे पश्‍चात्ताप करेंगे।’ परंतु उसने उससे कहा, ‘यदि वे मूसा और भविष्यवक्‍ताओं की नहीं सुनते, तो मृतकों में से कोई जी भी उठे फिर भी वे उसकी नहीं मानेंगे।’ ” फिर यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “यह असंभव है कि ठोकरें न लगें, परंतु हाय उस पर जिसके कारण वह लगती है। उसके लिए इन छोटों में से एक के भी ठोकर का कारण बनने से अच्छा होता कि एक चक्‍की का पाट उसके गले में लटकाकर समुद्र में डाल दिया जाता। तुम अपने विषय में सावधान रहो। यदि तेरा भाई पाप करे तो उसे डाँट, और यदि वह पश्‍चात्ताप करे तो उसे क्षमा कर; और यदि वह दिन में सात बार तेरे विरुद्ध पाप करे और सातों बार तेरे पास आकर कहे, ‘मैं पश्‍चात्ताप करता हूँ,’ तो तू उसे क्षमा करना।” प्रेरितों ने प्रभु से कहा, “हमारे विश्‍वास को बढ़ा।” तब प्रभु ने कहा, “यदि तुम्हारा विश्‍वास राई के दाने के समान भी होता, और तुम इस शहतूत के पेड़ से कहते, ‘उखड़ जा और समुद्र में लग जा,’ तो यह तुम्हारी मान लेता। तुममें से ऐसा कौन है जिसका दास हल जोतता या भेड़ें चराता हो, और जब वह खेत से लौटे तो उससे कहे, ‘तुरंत आकर भोजन करने बैठ’? बल्कि क्या वह उससे यह न कहेगा, ‘मेरे खाने के लिए कुछ तैयार कर, और जब तक मैं खा-पी न लूँ, कमर कसकर मेरी सेवा कर, इसके बाद तू भी खा-पी लेना’? क्या वह उस दास का आभारी होगा कि उसने उन आदेशों का पालन किया जो उसे मिले थे? इसी प्रकार तुम भी, जब उन सब आदेशों का पालन करो जो तुम्हें मिले थे, तो कहो, ‘हम अयोग्य दास हैं, हमने तो केवल वही किया जो हमें करना चाहिए था।’ ” फिर ऐसा हुआ कि यीशु सामरिया और गलील के बीच में से होकर यरूशलेम को जा रहा था। जब वह किसी गाँव में प्रवेश कर रहा था, तो उसे दस कोढ़ी पुरुष मिले जो दूर खड़े थे, और उन्होंने ऊँची आवाज़ से पुकारा, “हे यीशु, हे स्वामी, हम पर दया कर।” यह देखकर यीशु ने उनसे कहा, “जाकर अपने आपको याजकों को दिखाओ।” और ऐसा हुआ कि जाते-जाते वे शुद्ध हो गए। परंतु उनमें से एक ने जब यह देखा कि वह स्वस्थ हो गया है, तो ऊँची आवाज़ से परमेश्‍वर की महिमा करता हुआ लौट आया, और यीशु के चरणों पर मुँह के बल गिरकर उसका धन्यवाद करने लगा; और वह एक सामरी था। इस पर यीशु ने कहा, “क्या दसों शुद्ध नहीं हुए? तो फिर वे नौ कहाँ हैं? क्या इस परदेशी को छोड़ कोई और नहीं रहा जो लौटकर परमेश्‍वर को महिमा देता?” और उसने उससे कहा, “उठ और जा; तेरे विश्‍वास ने तुझे अच्छा किया है।” जब फरीसियों के द्वारा पूछा गया कि परमेश्‍वर का राज्य कब आएगा, तो यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “परमेश्‍वर का राज्य प्रकट रूप में नहीं आता, और न ही लोग यह कहेंगे, ‘देखो वह यहाँ है।’ या ‘वहाँ है।’ क्योंकि देखो, परमेश्‍वर का राज्य तुम्हारे बीच में है।” फिर यीशु ने शिष्यों से कहा, “वे दिन आएँगे जब तुम मनुष्य के पुत्र के दिनों में से एक दिन को देखने के लिए तरसोगे परंतु नहीं देख पाओगे। लोग तुमसे कहेंगे, ‘देखो वह वहाँ है।’ या ‘देखो यहाँ है।’ तुम न तो जाना और न ही उनका पीछा करना। क्योंकि जैसे बिजली कौंधकर आकाश के एक छोर से आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में होगा। परंतु पहले अवश्य है कि वह बहुत दुःख उठाए और इस पीढ़ी के द्वारा ठुकराया जाए। जैसे नूह के दिनों में हुआ, वैसे ही मनुष्य के पुत्र के दिनों में भी होगा। जिस दिन तक नूह ने जहाज़ में प्रवेश न किया, लोग खाते, पीते, विवाह करते, और विवाह में दिए जाते रहे; तब जलप्रलय ने आकर सब को नष्‍ट कर दिया। ऐसा ही लूत के दिनों में भी हुआ; लोग खाते, पीते, खरीदते, बेचते, पेड़ लगाते और घर बनाते थे। परंतु जिस दिन लूत सदोम से बाहर निकला, आकाश से आग और गंधक बरसा और सब को नष्‍ट कर दिया। जिस दिन मनुष्य का पुत्र प्रकट होगा, ऐसा ही होगा। “उस दिन जो छत पर हो और उसका सामान घर में हो, तो वह उसे लेने नीचे न उतरे, और इसी प्रकार जो खेत में हो, वह पीछे न लौटे। लूत की पत्‍नी को स्मरण रखो। जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा, वह उसे गँवाएगा, परंतु जो कोई उसे गँवाएगा, वह उसे बचाए रखेगा। मैं तुमसे कहता हूँ, उस रात एक खाट पर दो लोग होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। दो स्‍त्रियाँ एक साथ चक्‍की पीसती होंगी, एक ले ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी। [खेत में दो मनुष्य होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा।]” इस पर उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह कहाँ होगा?” उसने उनसे कहा, “जहाँ शव होगा, वहाँ गिद्ध भी इकट्ठे होंगे।” फिर यीशु ने उनसे इस विषय में कि सदा प्रार्थना करना और निराश न होना कितना आवश्यक है, एक दृष्‍टांत कहा: “किसी नगर में एक न्यायाधीश रहता था जो परमेश्‍वर का भय नहीं मानता था और न ही किसी मनुष्य की परवाह करता था। उसी नगर में एक विधवा रहती थी और वह उसके पास आ आकर कहती थी, ‘मेरा न्याय चुकाकर मेरे मुद्दई से मुझे बचा।’ कुछ समय तक तो वह नहीं माना, परंतु बाद में उसने अपने मन में कहा, ‘भले ही मैं परमेश्‍वर से नहीं डरता और न ही किसी मनुष्य की परवाह करता हूँ, फिर भी मैं उसका न्याय चुकाऊँगा क्योंकि यह विधवा मुझे तंग करती रहती है, कहीं ऐसा न हो कि वह आ आकर मेरी नाक में दम कर दे।’ ” फिर प्रभु ने कहा, “सुनो, वह अधर्मी न्यायाधीश क्या कहता है; तो क्या परमेश्‍वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा जो दिन और रात उसे पुकारते रहते हैं? क्या वह उनके विषय में देर करेगा? मैं तुमसे कहता हूँ कि वह शीघ्र उनका न्याय चुकाएगा। फिर भी जब मनुष्य का पुत्र आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्‍वास पाएगा?” तब यीशु ने उनसे भी, जो अपने आपको धर्मी मानते थे और दूसरों को तुच्छ समझते थे, यह दृष्‍टांत कहा: “दो मनुष्य मंदिर में प्रार्थना करने के लिए गए, एक फरीसी था और दूसरा कर वसूलनेवाला। वह फरीसी खड़ा होकर अपने मन में इस प्रकार प्रार्थना करने लगा, ‘हे परमेश्‍वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि मैं अन्य मनुष्यों के समान लुटेरा, अधर्मी और व्यभिचारी नहीं हूँ, और न ही इस कर वसूलनेवाले के समान हूँ। मैं सप्‍ताह में दो बार उपवास करता हूँ, और जितना मुझे मिलता है उन सब का दशमांश देता हूँ।’ “परंतु कर वसूलनेवाले ने दूर खड़े होकर अपनी आँखें स्वर्ग की ओर उठाना भी नहीं चाहा, बल्कि अपनी छाती पीट-पीटकर कहने लगा, ‘हे परमेश्‍वर, मुझ पापी पर दया कर।’ मैं तुमसे कहता हूँ, यही मनुष्य धर्मी ठहराया जाकर अपने घर गया, न कि वह दूसरा मनुष्य; क्योंकि प्रत्येक जो अपने आपको ऊँचा उठाता है वह नीचा किया जाएगा, परंतु जो अपने आपको दीन करता है वह ऊँचा उठाया जाएगा।” लोग अपने शिशुओं को भी यीशु के पास लाने लगे कि वह उन पर हाथ रखे; परंतु यह देखकर शिष्य उन्हें डाँटने लगे। परंतु यीशु ने उन्हें अपने पास बुलाया और कहा, “बच्‍चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मत रोको, क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य ऐसों ही का है। मैं तुमसे सच कहता हूँ, जो कोई परमेश्‍वर के राज्य को एक बच्‍चे के समान स्वीकार नहीं करता, वह उसमें कभी प्रवेश नहीं करेगा।” फिर किसी प्रधान ने उससे यह पूछा, “हे उत्तम गुरु! अनंत जीवन का उत्तराधिकारी होने के लिए मैं क्या करूँ?” यीशु ने उससे कहा, “तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? केवल एक अर्थात् परमेश्‍वर को छोड़ कोई उत्तम नहीं। आज्ञाओं को तो तू जानता है: व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और माता का आदर करना।” उसने कहा, “इन सब का पालन मैं अपने लड़कपन से करता आया हूँ।” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “तुझमें अब भी एक बात की कमी है; जो कुछ तेरे पास है, सब बेचकर कंगालों को बाँट दे, फिर तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।” यह सुनकर वह बहुत उदास हुआ, क्योंकि वह बहुत धनी था। जब यीशु ने उसे देखा कि वह बहुत उदास है तो कहा, “धनवानों का परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करना कितना कठिन है; क्योंकि परमेश्‍वर के राज्य में एक धनवान के प्रवेश करने से ऊँट का सूई के छेद में से निकल जाना अधिक सहज है।” तब सुननेवालों ने कहा, “तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?” उसने कहा, “जो मनुष्यों के लिए असंभव है, वह परमेश्‍वर के लिए संभव है।” पतरस ने कहा, “देख, हम अपना सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिए हैं।” तब उसने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि ऐसा कोई नहीं जिसने परमेश्‍वर के राज्य के लिए घर या पत्‍नी या भाइयों या माता-पिता या बच्‍चों को छोड़ा हो, और वर्तमान समय में कई गुणा अधिक न पाए और आने वाले युग में अनंत जीवन।” फिर यीशु ने उन बारहों को साथ लेकर उनसे कहा, “देखो, हम यरूशलेम को जा रहे हैं, और जो बातें मनुष्य के पुत्र के विषय में भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा लिखी गई हैं, सब पूरी होंगी; क्योंकि वह गैरयहूदियों के हाथ सौंपा जाएगा, उसका उपहास किया जाएगा, उससे दुर्व्यवहार किया जाएगा, और उस पर थूका जाएगा, तथा वे उसे कोड़े मारेंगे और मार डालेंगे, परंतु तीसरे दिन वह जी उठेगा।” परंतु वे इन बातों में से कुछ भी न समझे, और यह बात उनसे छिपी रही, तथा जो कहा गया था, उनकी समझ में नहीं आया। फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु यरीहो के निकट पहुँचा, तो एक अंधा व्यक्‍ति मार्ग के किनारे बैठा भीख माँग रहा था। पास से निकलती हुई भीड़ की आवाज़ सुनकर वह पूछने लगा, “यह क्या हो रहा है?” लोगों ने उसे बताया, “यीशु नासरी जा रहा है।” तब उसने पुकारकर कहा, “हे यीशु, दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर।” जो उसके आगे जा रहे थे, वे उसे डाँटने लगे कि वह चुप रहे; परंतु वह और भी अधिक चिल्‍लाने लगा, “हे दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर।” तब यीशु ने रुककर उसे अपने पास लाने की आज्ञा दी। जब वह पास आया तो उसने उससे पूछा, “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?” तब उसने कहा, “हे प्रभु, यह कि मैं फिर से देखने लगूँ।” यीशु ने उससे कहा, “देखने लग; तेरे विश्‍वास ने तुझे अच्छा किया है।” वह तुरंत देखने लगा, और परमेश्‍वर की महिमा करता हुआ उसके पीछे हो लिया। सब लोगों ने यह देखकर परमेश्‍वर की स्तुति की। यीशु यरीहो में प्रवेश करके वहाँ से जा रहा था। और देखो, वहाँ जक्‍कई नामक एक मनुष्य था, जो कर वसूलनेवालों का प्रधान था और धनी था। वह देखना चाहता था कि यीशु कौन सा है, परंतु भीड़ के कारण देख नहीं पा रहा था क्योंकि वह नाटा था। अतः उसे देखने के लिए वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से होकर जाने वाला था। जब यीशु उस स्थान पर पहुँचा, तो उसने ऊपर देखकर उससे कहा, “हे जक्‍कई, शीघ्र नीचे उतर आ, क्योंकि आज अवश्य ही मुझे तेरे घर में रहना है।” वह शीघ्र नीचे उतरा, और आनंद से उसका स्वागत किया। परंतु यह देखकर सब लोग बुड़बुड़ाते हुए कहने लगे, “वह तो एक पापी मनुष्य के यहाँ ठहरने गया है।” जक्‍कई ने खड़े होकर प्रभु से कहा, “प्रभु, देख, मैं अपनी आधी संपत्ति कंगालों को देता हूँ, और यदि मैंने छल करके किसी का कुछ लिया है तो उसे चौगुना लौटाए देता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “आज इस घर में उद्धार आया है, क्योंकि यह भी अब्राहम का एक पुत्र है। मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।” जब लोग ये बातें सुन रहे थे तो यीशु ने एक और दृष्‍टांत कहा, क्योंकि वह यरूशलेम के निकट था और लोग सोचते थे कि परमेश्‍वर का राज्य तुरंत प्रकट होने वाला है। अतः उसने कहा: “एक कुलीन मनुष्य दूर देश को गया कि अपने लिए राजपद पाकर लौट आए। उसने अपने दस दासों को बुलाकर उन्हें दस मीना दिए, और उनसे कहा, ‘मेरे आने तक इससे व्यापार करो।’ परंतु उसके नगरवासी उससे घृणा करते थे, और उन्होंने उसके पीछे दूत के द्वारा यह कहला भेजा, ‘हम नहीं चाहते कि वह हम पर राज्य करे।’ “फिर ऐसा हुआ कि जब वह राजपद पाकर लौटा, तो उसने उन दासों को जिन्हें धन दिया था, अपने पास बुलवाया ताकि पता चले कि उन्होंने व्यापार से कितना कमाया। पहले ने आकर कहा, ‘हे स्वामी, तेरे एक मीना से मैंने दस मीना और कमाए हैं।’ और उसने उससे कहा, ‘शाबाश, भले दास! क्योंकि तू थोड़े से थोड़े में विश्‍वासयोग्य रहा, अब दस नगरों का अधिकारी बन।’ तब दूसरे ने आकर कहा, ‘हे स्वामी, तेरे एक मीना से मैंने पाँच मीना कमाए हैं।’ उसने उससे भी कहा, ‘तू भी पाँच नगरों का अधिकारी बन।’ फिर एक और ने आकर कहा, ‘हे स्वामी, देख तेरा यह मीना, जिसे मैंने अंगोछे में संभालकर रखा था; क्योंकि मैं तुझसे डरता था, इसलिए कि तू कठोर मनुष्य है, जो तूने नहीं रखा उसे लेता है और जो तूने नहीं बोया उसे काटता है।’ उसने उससे कहा, ‘हे दुष्‍ट दास! मैं तेरे ही शब्दों से तुझे दोषी ठहराऊँगा। तो क्या तू जानता था कि मैं एक कठोर मनुष्य हूँ, जो मैंने नहीं रखा उसे लेता, और जो मैंने नहीं बोया उसे काटता हूँ? फिर तूने मेरा धन साहूकार को क्यों नहीं दिया कि मैं आकर उसे ब्याज समेत ले लेता?’ और उसने पास खड़े लोगों से कहा, ‘उससे वह मीना ले लो और जिसके पास दस मीना हैं, उसे दे दो।’ उन्होंने उससे कहा, ‘हे स्वामी, उसके पास तो दस मीना हैं।’ ‘मैं तुमसे कहता हूँ कि प्रत्येक जिसके पास है, उसे दिया जाएगा, परंतु जिसके पास नहीं है उससे वह भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। अब मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते थे कि मैं उन पर राज्य करूँ, यहाँ लाओ और मेरे सामने उन्हें मार डालो।’ ” ये बातें कहकर यीशु यरूशलेम की ओर आगे चला। फिर ऐसा हुआ कि जब वह जैतून नामक पहाड़ के पास बैतफगे और बैतनिय्याह के निकट पहुँचा, तो उसने अपने दो शिष्यों को भेजा और कहा, “सामने वाले गाँव में जाओ; उसमें प्रवेश करते ही तुम्हें एक गधी का बच्‍चा बँधा हुआ मिलेगा, जिस पर कभी कोई नहीं बैठा, उसे खोलकर ले आओ। यदि कोई तुमसे पूछे, ‘तुम इसे क्यों खोल रहे हो?’ तो यह कहना, ‘प्रभु को इसकी आवश्यकता है।’ ” और जो भेजे गए थे, उन्होंने जाकर वैसा ही पाया जैसा उसने उनसे कहा था। जब वे गधी के बच्‍चे को खोल रहे थे, तो उसके स्वामियों ने उनसे कहा, “तुम गधी के बच्‍चे को क्यों खोल रहे हो?” उन्होंने कहा, “प्रभु को इसकी आवश्यकता है।” वे उसे यीशु के पास लाए, और उस गधी के बच्‍चे पर अपने वस्‍त्र डालकर यीशु को बैठाया। जब वह जा रहा था, तो लोग अपने वस्‍त्र मार्ग में बिछाने लगे। जब वह जैतून पहाड़ की ढलान पर पहुँचा, तो शिष्यों की सारी भीड़ उन सब सामर्थ्य के कार्यों के कारण जो उन्होंने देखे थे, आनंदित होकर ऊँची आवाज़ से परमेश्‍वर की स्तुति करने लगी: धन्य है वह राजा, जो प्रभु के नाम से आता है; स्वर्ग में शांति और सर्वोच्‍च स्थान में महिमा हो। तब भीड़ में से कुछ फरीसियों ने उससे कहा, “हे गुरु, अपने शिष्यों को डाँट।” इस पर उसने कहा, “मैं तुमसे कहता हूँ, यदि ये चुप हो जाएँ तो पत्थर चिल्‍ला उठेंगे।” जब वह यरूशलेम के निकट पहुँचा, तो उस नगर को देखकर उस पर रोया, और कहा, “भला होता यदि तूने, हाँ तूने भी आज ही शांति की बातों को जाना होता, परंतु अभी तो यह तेरी आँखों से छिपी हुई है। क्योंकि तुझ पर ऐसे दिन आएँगे कि तेरे शत्रु तेरे विरुद्ध मोर्चा बाँधकर तुझे घेर लेंगे, और तुझे चारों ओर से दबाएँगे, तथा वे तुझे और तेरे साथ तेरी संतान को धूल में मिला देंगे, और तुझमें पत्थर पर पत्थर भी पड़ा न छोड़ेंगे, क्योंकि तूने उस अवसर को न पहचाना जब तुझ पर कृपादृष्‍टि हुई थी।” फिर वह मंदिर-परिसर में जाकर बेचनेवालों को बाहर निकालने लगा, उसने उनसे कहा, “लिखा है: मेरा घर प्रार्थना का घर होगा, परंतु तुमने इसे डाकुओं का अड्डा बना दिया है।” वह प्रतिदिन मंदिर में उपदेश देता था। मुख्य याजक, शास्‍त्री और लोगों के प्रमुख उसे नाश करने का अवसर ढूँढ़ रहे थे; परंतु उनकी समझ में नहीं आया कि क्या करें, क्योंकि सब लोग बड़े ध्यान से उसकी सुनते थे। एक दिन ऐसा हुआ जब यीशु मंदिर में लोगों को उपदेश दे रहा था और सुसमाचार सुना रहा था, तो मुख्य याजक और शास्‍त्री, धर्मवृद्धों के साथ आ खड़े हुए, और उससे कहने लगे, “हमें बता कि तू ये कार्य किस अधिकार से करता है, और वह कौन है जिसने तुझे यह अधिकार दिया?” इस पर उसने उनसे कहा, “मैं भी तुमसे एक बात पूछता हूँ, मुझे बताओ; यूहन्‍ना का बपतिस्मा स्वर्ग की ओर से था या मनुष्यों की ओर से?” तब वे आपस में तर्क करने लगे, “यदि हम कहें ‘स्वर्ग की ओर से’ तो वह कहेगा, ‘फिर तुमने उसका विश्‍वास क्यों नहीं किया?’ और यदि हम कहें, ‘मनुष्यों की ओर से,’ तो सब लोग हम पर पथराव करेंगे, क्योंकि वे सचमुच यूहन्‍ना को एक भविष्यवक्‍ता मानते हैं।” अतः उन्होंने उत्तर दिया, “हम नहीं जानते कि वह कहाँ से था।” तब यीशु ने उनसे कहा, “तो मैं भी तुम्हें नहीं बताता कि किस अधिकार से ये कार्य करता हूँ।” फिर वह लोगों से यह दृष्‍टांत कहने लगा: “किसी मनुष्य ने अंगूर का बगीचा लगाया, और उसे किसानों को ठेके पर देकर लंबे समय के लिए यात्रा पर चला गया। फसल के समय उसने एक दास को उन किसानों के पास भेजा, कि वे अंगूर के बगीचे की उपज का एक भाग उसे दें; परंतु किसानों ने उसे पीटकर खाली हाथ लौटा दिया। उसने फिर दूसरे दास को भेजा; परंतु उन्होंने उसे भी पीटा और अपमानित करके खाली हाथ लौटा दिया। उसने फिर तीसरे को भेजा, परंतु उन्होंने उसे भी घायल करके बाहर फेंक दिया। तब अंगूर के बगीचे के स्वामी ने कहा, ‘मैं क्या करूँ? मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा; हो सकता है कि वे उसका सम्मान करें।’ परंतु जब किसानों ने उसे देखा तो यह कहकर आपस में सोच विचार करने लगे, ‘यह तो उत्तराधिकारी है। आओ, इसे मार डालें, ताकि यह उत्तराधिकार हमारा हो जाए।’ और उन्होंने उसे अंगूर के बगीचे से बाहर निकालकर मार डाला। अब अंगूर के बगीचे का स्वामी उनके साथ क्या करेगा? वह आएगा और उन किसानों का नाश करेगा, और अंगूर का बगीचा दूसरों को दे देगा।” यह सुनकर उन्होंने कहा, “ऐसा कभी न हो।” उसने उनकी ओर देखकर कहा, “फिर यह क्या है जो लिखा है: जिस पत्थर को राजमिस्‍त्रियों ने ठुकरा दिया, वही कोने का प्रमुख पत्थर बन गया। जो कोई इस पत्थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा; और जिस पर यह गिरेगा, उसे पीस डालेगा।” शास्‍त्रियों और मुख्य याजकों ने उसी समय उस पर हाथ डालना चाहा, क्योंकि वे समझ गए थे कि उसने यह दृष्‍टांत उनके विषय में कहा है, परंतु वे लोगों से डरे। वे उसकी ताक में थे और उन्होंने धर्मियों का स्वाँग रचनेवाले भेदियों को भेजा, ताकि उसे उसी की बात में पकड़ें और राज्यपाल के हाथ और अधिकार में सौंप दें। उन्होंने उससे पूछा, “हे गुरु, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता और सिखाता है, और पक्षपात नहीं करता, बल्कि परमेश्‍वर का मार्ग सच्‍चाई से सिखाता है। हमें कैसर को कर देना उचित है या नहीं?” उसने उनकी चतुराई भाँपकर उनसे कहा, “मुझे एक दीनार दिखाओ; यह छाप और लेख किसका है?” उन्होंने कहा, “कैसर का।” तब उसने उनसे कहा, “तो जो कैसर का है, वह कैसर को, और जो परमेश्‍वर का है, वह परमेश्‍वर को दो।” और वे लोगों के सामने उसकी बात को न पकड़ सके, और उसके उत्तर से चकित होकर चुप हो गए। फिर कुछ सदूकियों ने, जो कहते थे कि पुनरुत्थान है ही नहीं, पास आकर उससे पूछा, “गुरु, मूसा ने हमारे लिए लिखा है कि यदि कोई पत्‍नी के रहते हुए मर जाए और उसकी कोई संतान न हो, तो उसका भाई उसकी पत्‍नी से विवाह करे और अपने भाई के लिए वंश उत्पन्‍न‍ करे। अब सात भाई थे। पहले ने एक स्‍त्री से विवाह किया और निस्संतान मर गया। फिर दूसरे ने और तीसरे ने भी उससे विवाह किया, और इसी प्रकार सातों ने भी और बिना संतान छोड़े मर गए। अंत में वह स्‍त्री भी मर गई। अतः पुनरुत्थान के समय वह उनमें से किसकी पत्‍नी होगी? क्योंकि सातों ने उसे अपनी पत्‍नी बनाया था।” यीशु ने उनसे कहा, “इस युग के लोग विवाह करते और विवाह में दिए जाते हैं, परंतु जो उस युग में प्रवेश करने और मृतकों में से जी उठने के योग्य ठहरेंगे, वे न तो विवाह करेंगे और न ही विवाह में दिए जाएँगे। फिर वे कभी नहीं मर सकते, क्योंकि वे स्वर्गदूतों के समान होंगे और पुनरुत्थान की संतान होने के कारण परमेश्‍वर की संतान होंगे। मृतक तो जिलाए जाते हैं, मूसा ने भी इसे जलती झाड़ी की कथा में प्रकट किया है, जहाँ वह प्रभु को अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर और याकूब का परमेश्‍वर कहता है। वह मृतकों का नहीं परंतु जीवितों का परमेश्‍वर है, क्योंकि उसमें सब जीवित हैं।” इस पर कुछ शास्‍त्रियों ने कहा, “हे गुरु, तूने ठीक कहा।” फिर उन्होंने उससे कुछ भी पूछने का साहस नहीं किया। तब उसने उनसे पूछा, “लोग मसीह को दाऊद का पुत्र कैसे कहते हैं? क्योंकि दाऊद स्वयं भजन संहिता में कहता है: प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, ‘मेरे दाहिनी ओर बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पैरों की चौकी न बना दूँ।’ “जब दाऊद उसे प्रभु कहता है तो वह उसका पुत्र कैसे हुआ?” जब सब लोग सुन रहे थे तो उसने अपने शिष्यों से कहा, “शास्‍त्रियों से सावधान रहो जिन्हें लंबे-लंबे चोगे पहनकर घूमना पसंद है और जिन्हें बाज़ारों में नमस्कार, आराधनालयों में मुख्य आसन और भोजों में मुख्य स्थान प्रिय लगते हैं, जो विधवाओं के घरों को हड़प लेते हैं और दिखावे के लिए लंबी-लंबी प्रार्थनाएँ करते हैं; वे कठोर दंड पाएँगे।” फिर यीशु ने आँखें उठाकर धनवानों को अपना-अपना दान मंदिर-कोष में डालते देखा। उसने एक कंगाल विधवा को भी उसमें दो छोटे सिक्‍के डालते देखा। उसने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि इस कंगाल विधवा ने सब से अधिक डाला है। क्योंकि उन सब ने अपनी भरपूरी में से दान में डाला है, परंतु इसने अपने अभाव में से जो उसके पास था अर्थात् अपनी सारी जीविका डाल दी है।” जब कुछ लोग मंदिर के विषय में कह रहे थे कि वह कैसे सुंदर पत्थरों और भेंटों से सजाया गया है, तो उसने कहा, “ये जो तुम देख रहे हो, ऐसे दिन आएँगे जब यहाँ एक पत्थर भी पत्थर पर टिका न रहेगा जो ढाया न जाएगा।” उन्होंने उससे पूछा, “हे गुरु, ये बातें कब होंगी? और जब ये बातें पूरी होने पर होंगी तो क्या चिह्‍न होगा?” उसने कहा, “सावधान रहो, कहीं तुम भरमाए न जाओ, क्योंकि बहुत से लोग मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं वही हूँ,’ और ‘समय निकट आ पहुँचा है।’ उनके पीछे न चले जाना। जब तुम युद्धों और उपद्रवों की चर्चा सुनो, तो घबरा न जाना, क्योंकि इन बातों का पहले होना अवश्य है; परंतु अंत तुरंत न होगा।” तब उसने उनसे कहा: “जाति, जाति के विरुद्ध और राज्य, राज्य के विरुद्ध उठ खड़े होंगे, बड़े-बड़े भूकंप, और स्थान-स्थान पर अकाल और महामारियाँ आएँगी, और आकाश में भयानक बातें और बड़े-बड़े चिह्‍न प्रकट होंगे। परंतु इन सब बातों से पहले लोग तुम्हें पकड़ेंगे और सताएँगे, तुम्हें आराधनालयों में सौंपकर बंदीगृहों में डलवा देंगे, और मेरे नाम के कारण तुम्हें राजाओं और शासकों के सामने ले जाएँगे; यह तुम्हारे लिए साक्षी देने का अवसर हो जाएगा। इसलिए अपने मन में ठान लो कि पहले से अपने बचाव की तैयारी नहीं करोगे, क्योंकि मैं तुम्हें ऐसे शब्द और बुद्धि दूँगा जिसका सामना या खंडन तुम्हारा कोई भी विरोधी न कर सकेगा। तुम अपने माता-पिता, भाइयों, संबंधियों और मित्रों के द्वारा भी पकड़वाए जाओगे, और वे तुममें से कुछ को मरवा डालेंगे, और मेरे नाम के कारण सब लोग तुमसे घृणा करेंगे। परंतु तुम्हारे सिर का एक बाल भी बाँका न होगा। अपने धीरज से तुम अपने प्राणों को बचाए रखोगे। “जब तुम यरूशलेम को सेनाओं से घिरा हुआ देखो, तो जान लेना कि उसका उजड़ जाना निकट है। उस समय जो यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जाएँ, जो नगर के भीतर हों, वे बाहर चले जाएँ, और जो गाँवों में हों, उस नगर में न जाएँ, क्योंकि ये बदला लेने के दिन होंगे कि वे सब बातें जो लिखी गई हैं पूरी हों। परंतु हाय उन पर जो उन दिनों में गर्भवती होंगी और जो दूध पिलाती होंगी; क्योंकि देश पर घोर संकट और इन लोगों पर प्रकोप होगा, उन्हें तलवार से घात किया जाएगा, और सब देशों में बंदी बनाकर ले जाया जाएगा, और जब तक गैरयहूदियों का समय पूरा न हो जाए, तब तक यरूशलेम गैरयहूदियों के द्वारा रौंदा जाएगा। “सूर्य, चंद्रमा और तारों में चिह्‍न दिखाई देंगे, और पृथ्वी पर संकट होगा और समुद्र और लहरों के कोलाहल से जातियाँ घबरा जाएँगी। संसार पर आने वाली बातों के भय और आशंका से लोग मूर्च्छित हो जाएँगे, क्योंकि आकाश की शक्‍तियाँ हिलाई जाएँगी। तब लोग मनुष्य के पुत्र को सामर्थ्य और बड़ी महिमा के साथ बादल में आते हुए देखेंगे। जब ये बातें होने लगें तो तुम खड़े होकर अपने सिर उठाना, क्योंकि तुम्हारा छुटकारा निकट होगा।” फिर उसने उनसे एक दृष्‍टांत कहा: “अंजीर के पेड़ और सब पेड़ों को देखो; जब उनमें कोपलें निकल आती हैं, तो तुम उन्हें देखकर स्वयं जान लेते हो कि अब ग्रीष्मकाल निकट है। इसी प्रकार जब तुम भी इन बातों को होते हुए देखो, तो जान लो कि परमेश्‍वर का राज्य निकट है। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो जाएँ, तब तक इस पीढ़ी का अंत कदापि नहीं होगा। आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परंतु मेरे वचन कभी न टलेंगे। “तुम अपने विषय में सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे मन दुराचार, मतवालेपन और जीवन की चिंताओं के भार से दब जाएँ, और वह दिन अचानक फंदे के समान तुम पर आ पड़े। क्योंकि वह दिन संपूर्ण पृथ्वी की सतह पर रहनेवाले सब लोगों पर आ पड़ेगा। इसलिए हर समय जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली बातों से बच निकलो और मनुष्य के पुत्र के सामने खड़े हो सको।” यीशु दिन को मंदिर-परिसर में उपदेश दिया करता था, और रात को बाहर जाकर जैतून नामक पहाड़ पर रहा करता था; और भोर को सब लोग उसके पास मंदिर में उसकी बातें सुनने के लिए आया करते थे। अब अख़मीरी रोटी का पर्व, जो फसह कहलाता है, निकट आ रहा था। मुख्य याजक और शास्‍त्री इस खोज में थे कि यीशु को कैसे मार डालें, क्योंकि वे लोगों से डरते थे। तब शैतान उस यहूदा में समा गया जो इस्करियोती कहलाता था और उन बारहों में गिना जाता था। उसने जाकर मुख्य याजकों और मंदिर के सुरक्षा अधिकारियों के साथ बातचीत की कि किस प्रकार यीशु को उनके हाथ पकड़वाए। वे प्रसन्‍न हुए और उसे रुपए देने के लिए सहमत हो गए। उसने मान लिया, और अवसर ढूँढ़ने लगा कि जब भीड़ न हो, तो उसे उनके हाथ पकड़वा दे। अब अख़मीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह के मेमने का बलिदान करना आवश्यक था। इसलिए यीशु ने पतरस और यूहन्‍ना को यह कहकर भेजा, “जाओ और हमारे खाने के लिए फसह का भोज तैयार करो।” उन्होंने उससे कहा, “तू कहाँ चाहता है कि हम उसे तैयार करें?” उसने उन्हें उत्तर दिया, “देखो, जब तुम नगर में प्रवेश करो तो तुम्हें पानी का घड़ा उठाए हुए एक मनुष्य मिलेगा। जिस घर में वह जाए उसके पीछे चले जाना, और उस घर के स्वामी से कहना, ‘गुरु तुझसे कहता है, “वह अतिथि कक्ष कहाँ है, जहाँ मैं अपने शिष्यों के साथ फसह का भोज करूँ?” ’ और वह तुम्हें एक बड़ा सा ऊपरी कक्ष दिखाएगा जो सुसज्‍जित किया हुआ है; वहीं तुम तैयारी करना।” उन्होंने जाकर जैसा उसने उनसे कहा था वैसा ही पाया, और फसह का भोज तैयार किया। जब घड़ी आई, तो यीशु भोजन करने बैठा, और प्रेरित उसके साथ थे। उसने उनसे कहा, “मेरी बड़ी लालसा थी कि अपने दुःख उठाने से पहले मैं तुम्हारे साथ फसह का यह भोज खाऊँ; क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि जब तक यह परमेश्‍वर के राज्य में पूरा न हो जाए, तब तक मैं इसे फिर कभी न खाऊँगा।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और कहा, “इसे लो और आपस में बाँट लो; क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि अब से मैं अंगूर का रस तब तक कभी न पीऊँगा जब तक परमेश्‍वर का राज्य न आ जाए।” फिर उसने रोटी ली, धन्यवाद देकर तोड़ी और यह कहते हुए उन्हें दी, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिए दी जाती है; मेरे स्मरण में यही किया करो।” भोजन करने के बाद उसने इसी प्रकार कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है, नई वाचा है। फिर भी देखो, मुझे पकड़वानेवाले का हाथ मेरे साथ मेज़ पर है; क्योंकि मनुष्य का पुत्र तो जैसा उसके लिए ठहराया गया है, जाता ही है, परंतु हाय उस मनुष्य पर जिसके द्वारा वह पकड़वाया जाता है।” तब वे आपस में बात करने लगे कि हममें से ऐसा कार्य करनेवाला कौन हो सकता है। फिर उनमें एक विवाद भी हुआ कि हममें से कौन बड़ा समझा जाता है। यीशु ने उनसे कहा, “गैरयहूदियों के राजा उन पर प्रभुता करते हैं, और जो उन पर अधिकार रखते हैं, वे परोपकारी कहलाते हैं। परंतु तुममें ऐसा न हो, बल्कि जो तुममें बड़ा है वह छोटे के समान, और जो प्रमुख है वह सेवक के समान हो। क्योंकि बड़ा कौन है, जो भोजन करने बैठा है या वह जो सेवा करता है? क्या वह नहीं जो भोजन करने बैठा है? परंतु मैं तुम्हारे बीच में सेवक के समान हूँ। “परंतु तुम वे हो जो मेरी परीक्षाओं में मेरे साथ रहे; जैसे मेरे पिता ने मुझे राज्य दिया है, वैसे ही मैं भी तुम्हें यह देता हूँ कि तुम मेरे राज्य में मेरी मेज़ पर खाओ-पीओ, और सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करो। “शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम्हें गेहूँ के समान फटकने के लिए माँगा है; परंतु मैंने तेरे लिए प्रार्थना की कि तेरा विश्‍वास चला न जाए; और जब तू फिरे तो अपने भाइयों को दृढ़ करना।” उसने उससे कहा, “प्रभु, मैं तेरे साथ बंदीगृह में जाने और मरने को भी तैयार हूँ।” उसने कहा, “पतरस, मैं तुझसे कहता हूँ, जब तक तू इस बात से कि मुझे जानता है आज तीन बार इनकार न कर लेगा, तब तक मुरगा बाँग न देगा।” फिर उसने उनसे कहा, “जब मैंने तुम्हें बटुए और थैले और जूतों के बिना भेजा, तो क्या तुम्हें कुछ कमी हुई?” उन्होंने कहा, “नहीं।” उसने उनसे कहा, “परंतु अब जिसके पास बटुआ हो वह उसे ले, उसी प्रकार थैला भी, और जिसके पास तलवार न हो वह अपने वस्‍त्र बेचकर खरीद ले। क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि यह जो लिखा है: वह अपराधियों के साथ गिना गया, उसका मुझमें पूरा होना अवश्य है; क्योंकि जो बातें मेरे विषय में लिखी हैं, वे पूरी होने पर हैं।” उन्होंने कहा, “प्रभु, देख, यहाँ दो तलवारें हैं।” उसने उनसे कहा, “बहुत हैं।” फिर वह बाहर निकलकर अपनी रीति के अनुसार जैतून पहाड़ की ओर चला; और शिष्य भी उसके पीछे चल दिए। उस स्थान पर पहुँचकर उसने उनसे कहा, “प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो।” फिर वह उनसे लगभग पत्थर फेंकने की दूरी पर गया, और घुटने टेककर प्रार्थना करने लगा, “हे पिता, यदि तू चाहे तो यह कटोरा मुझसे हटा ले; फिर भी मेरी नहीं बल्कि तेरी इच्छा पूरी हो।” तब स्वर्ग का एक दूत उस पर प्रकट हुआ और उसे बल देने लगा। यीशु अत्यंत व्याकुल होकर और भी यत्‍न से प्रार्थना करने लगा; और उसका पसीना लहू की बड़ी-बड़ी बूँदों के समान भूमि पर गिर रहा था। जब वह प्रार्थना से उठकर शिष्यों के पास आया तो उसने उन्हें उदासी के कारण सोते हुए पाया। उसने उनसे कहा, “क्यों सो रहे हो? उठो और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो।” अभी वह यह कह ही रहा था कि देखो, एक भीड़ आई, और उन बारहों में से एक जो यहूदा कहलाता था, उनके आगे-आगे चल रहा था, और वह यीशु को चूमने के लिए उसके पास आया। परंतु यीशु ने उससे कहा, “हे यहूदा, क्या तू चूमकर मनुष्य के पुत्र को पकड़वाता है?” तब यह जानकर कि क्या होने वाला है, उसके साथियों ने कहा, “हे प्रभु, क्या हम तलवार चलाएँ?” और उनमें से किसी एक ने महायाजक के दास पर तलवार चलाकर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। इस पर यीशु ने कहा, “बस, बहुत हुआ!” और उसका कान छूकर अच्छा कर दिया। तब यीशु ने मुख्य याजकों और मंदिर के सुरक्षा अधिकारियों और धर्मवृद्धों से, जो उसके विरुद्ध आए थे, कहा, “क्या तुम मुझे डाकू समझकर तलवारों और लाठियों के साथ आए हो? जब मैं प्रतिदिन तुम्हारे साथ मंदिर में था, तब तुमने मुझ पर हाथ नहीं डाला; परंतु यह तुम्हारी घड़ी है और अंधकार का अधिकार है।” फिर वे उसे पकड़कर ले गए और महायाजक के घर में लाए। पतरस दूर रहकर उनके पीछे आ रहा था। आँगन के बीचों-बीच लोग आग जलाकर इकट्ठे बैठे हुए थे और पतरस भी उनके साथ बैठ गया। जब एक दासी ने उसे आग के पास बैठे देखा तो उसकी ओर दृष्‍टि गड़ाकर कहा, “यह भी उसके साथ था।” परंतु उसने यह कहकर इनकार किया, “हे नारी, मैं उसे नहीं जानता।” और थोड़ी देर बाद कोई और उसे देखकर कहने लगा, “तू भी तो उन्हीं में से है।” परंतु पतरस ने कहा, “जी नहीं, मैं नहीं हूँ।” जब लगभग एक घंटा बीत गया तो एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, “सचमुच यह भी उसके साथ था, क्योंकि यह भी गलीली है।” परंतु पतरस ने कहा, “मैं नहीं जानता कि तू क्या कह रहा है।” और अभी वह कह ही रहा था कि तुरंत मुरगे ने बाँग दी। तब प्रभु ने मुड़कर पतरस को देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात स्मरण आई जो उसने उससे कही थी: “आज मुरगे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इनकार करेगा।” और वह बाहर जाकर फूट फूटकर रोया। जिन लोगों ने यीशु को पकड़ा था वे उसे पीटते हुए उसका उपहास करने लगे, और उसकी आँखें ढककर उससे पूछने लगे, “भविष्यवाणी कर, तुझे किसने मारा है?” और वे उसके विरुद्ध निंदा की, तथा अन्य बहुत सी बातें कह रहे थे। जब दिन हुआ तो लोगों के प्रमुख, जिनमें मुख्य याजक और शास्‍त्री दोनों थे, इकट्ठे हुए, और उसे अपनी महासभा में ले गए, और कहा, “यदि तू मसीह है तो हमें बता।” परंतु उसने उनसे कहा, “यदि मैं तुमसे कहूँ तो भी तुम विश्‍वास नहीं करोगे; और यदि मैं तुमसे पूछूँ, तो भी तुम उत्तर न दोगे। परंतु अब से मनुष्य का पुत्र सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर के दाहिनी ओर बैठा होगा।” तब सब ने कहा, “तो क्या तू परमेश्‍वर का पुत्र है?” उसने उनसे कहा, “तुम कह रहे हो, क्योंकि मैं हूँ।” तब उन्होंने कहा, “अब हमें गवाही की क्या आवश्यकता? क्योंकि हमने स्वयं उसके मुँह से सुन लिया है।” तब सारी सभा उठकर यीशु को पिलातुस के पास ले गई। वे उस पर यह कहकर दोष लगाने लगे, “हमने इसे हमारे लोगों को बहकाते और कैसर को कर देने से मना करते और अपने आपको मसीह, अर्थात् राजा कहते हुए पाया है।” पिलातुस ने उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” उसने उसे उत्तर दिया, “तू आप ही कह रहा है।” तब पिलातुस ने मुख्य याजकों और लोगों से कहा, “मैं इस मनुष्य में कोई दोष नहीं पाता।” परंतु वे ज़ोर देकर कहने लगे, “वह गलील से लेकर यहाँ तक, सारे यहूदिया में उपदेश दे देकर लोगों को भड़काता है।” यह सुनकर पिलातुस ने पूछा कि क्या यह मनुष्य गलीली है, और यह जानकर कि वह हेरोदेस के अधिकार-क्षेत्र का है, उसने उसे हेरोदेस के पास भेज दिया; उन दिनों हेरोदेस भी यरूशलेम में था। हेरोदेस यीशु को देखकर अति आनंदित हुआ। वह बहुत समय से उससे मिलना चाहता था क्योंकि वह उसके विषय में सुनता था और आशा करता था कि उसका कोई चिह्‍न देखे। वह उससे बहुत सी बातें पूछता रहा, परंतु उसने उसे कोई उत्तर नहीं दिया। मुख्य याजक और शास्‍त्री खड़े होकर उस पर ज़ोर-शोर से आरोप लगा रहे थे। हेरोदेस ने भी अपने सैनिकों के साथ उसे अपमानित किया और उसका उपहास करके उसे भड़कीला वस्‍त्र पहनाया और वापस पिलातुस के पास भेज दिया। उसी दिन से हेरोदेस और पिलातुस दोनों एक दूसरे के मित्र हो गए; पहले उनके बीच शत्रुता थी। पिलातुस ने मुख्य याजकों, अधिकारियों और लोगों को एक साथ बुलाकर उनसे कहा, “तुम इस मनुष्य को लोगों का भड़कानेवाला कहकर मेरे पास लाए हो, परंतु देखो, जब मैंने तुम्हारे सामने इसकी जाँच की तो जिन बातों का आरोप तुम इस पर लगाते हो, उनके विषय में मैंने इसमें कोई दोष नहीं पाया; और न ही हेरोदेस ने; क्योंकि उसने इसे हमारे पास वापस भेज दिया। और देखो, उससे ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ जो मृत्युदंड के योग्य है। इसलिए मैं इसे ताड़ना देकर छोड़ दूँगा।” [पर्व के समय वह उनके लिए किसी एक बंदी को छोड़ दिया करता था।] परंतु वे सब मिलकर चिल्‍ला उठे, “इसे हटा, और हमारे लिए बरअब्बा को छोड़ दे!” यह वही था जो नगर में हुए विद्रोह और हत्या के कारण बंदीगृह में डाला गया था। पिलातुस ने यीशु को छोड़ने की इच्छा से उन्हें फिर समझाया; परंतु वे चिल्‍लाते रहे, “क्रूस पर चढ़ा! उसे क्रूस पर चढ़ा!” फिर तीसरी बार उसने उनसे कहा, “क्यों, इसने क्या बुराई की है? मैंने इसमें मृत्युदंड के योग्य कुछ नहीं पाया, इसलिए मैं इसे ताड़ना देकर छोड़ दूँगा।” परंतु वे ऊँची आवाज़ से यह माँग करते रहे कि उसे क्रूस पर चढ़ाया जाए, और उनकी आवाज़ प्रबल होती गई। अतः पिलातुस ने उनकी माँग पूरी करने का निर्णय लिया, और उसे जो विद्रोह और हत्या के कारण बंदीगृह में डाला गया था और जिसे वे माँग रहे थे, छोड़ दिया; और यीशु को उनकी इच्छा के अनुसार सौंप दिया। जब वे उसे ले जा रहे थे, तो उन्होंने शमौन नामक एक कुरेनी को जो गाँव से आ रहा था, पकड़कर उस पर क्रूस लाद दिया कि वह यीशु के पीछे-पीछे उसे ले चले। लोगों की एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चली आ रही थी जिनमें स्‍त्रियाँ भी थीं जो उसके लिए छाती पीट-पीटकर विलाप कर रही थीं। परंतु यीशु ने मुड़कर उनसे कहा, “हे यरूशलेम की बेटियो, मेरे लिए मत रोओ; बल्कि अपने और अपनी संतानों के लिए रोओ, क्योंकि देखो, वे दिन आते हैं जब लोग कहेंगे, ‘धन्य हैं वे जो बाँझ हैं और वे गर्भ जिन्होंने जन्म नहीं दिया, और वे स्तन जिन्होंने दूध नहीं पिलाया।’ तब वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, ‘हम पर गिर पड़ो,’ और टीलों से कहेंगे, ‘हमें ढक लो;’ “क्योंकि यदि वे हरे पेड़ के साथ ऐसा करते हैं, तो सूखे के साथ क्या कुछ न होगा?” वे दो अन्य अपराधियों को भी उसके साथ मृत्युदंड के लिए ले जा रहे थे। जब वे उस स्थान पर पहुँचे जो खोपड़ी कहलाता है, तो उन्होंने वहाँ उसे और उन अपराधियों को भी, एक को दाहिनी और दूसरे को बाईं ओर, क्रूस पर चढ़ाया। तब यीशु ने कहा, “हे पिता इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।” उन्होंने पर्चियाँ डालकर उसके वस्‍त्रों को आपस में बाँट लिया। लोग खड़े होकर देख रहे थे। अधिकारी भी यह कहते हुए उसका ठट्ठा करने लगे, “इसने दूसरों को बचाया, यदि यह परमेश्‍वर का मसीह अर्थात् उसका चुना हुआ है, तो अपने आपको बचा ले।” सैनिकों ने भी पास आकर उसका उपहास किया, और उसे सिरका देकर कहा, “यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आपको बचा।” और उसके ऊपर यह दोषपत्र भी लगा था: “यह यहूदियों का राजा है।” जो अपराधी लटकाए गए थे उनमें से एक यह कहते हुए उसकी निंदा करने लगा, “तू मसीह है न? तो अपने को और हमें बचा।” इस पर दूसरा उसे डाँटकर कहने लगा, “क्या तू परमेश्‍वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दंड पा रहा है। हमारे लिए यही उचित है, क्योंकि हमने जो किया उसी का फल भोग रहे हैं, परंतु इसने कोई भी अनुचित कार्य नहीं किया।” तब उसने कहा, “हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए तो मुझे स्मरण रखना।” उसने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ, तू आज ही मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।” उस समय दिन के लगभग बारह बज रहे थे और सारे देश पर अंधकार छा गया और तीन बजे तक सूर्य का प्रकाश नहीं रहा, और मंदिर का परदा बीच में से फट गया। तब यीशु ने ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।” और यह कहकर उसने प्राण त्याग दिया। जब शतपति ने जो कुछ हुआ उसे देखा तो यह कहकर परमेश्‍वर की महिमा करने लगा, “सचमुच यह मनुष्य धर्मी था।” और सब लोग, जो इस दृश्य को देखने इकट्ठे हुए थे, इन घटनाओं को देखकर छाती पीटते हुए लौटने लगे। परंतु उसके सब परिचित लोग, और गलील से उसके साथ आई स्‍त्रियाँ दूर खड़ी होकर ये देख रही थीं। और देखो, यूसुफ नामक महासभा का एक सदस्य था जो भला और धर्मी मनुष्य था तथा उनकी योजना और कार्य से सहमत नहीं था। वह यहूदियों के एक नगर अरिमतिया का था, और परमेश्‍वर के राज्य की प्रतीक्षा करता था। उसने पिलातुस के पास जाकर यीशु का शव माँगा, और उसे उतारकर मलमल की चादर में लपेटा, तथा चट्टान में खोदी हुई एक कब्र में रख दिया, जहाँ अब तक किसी को नहीं रखा गया था। वह तैयारी का दिन था, और सब्त का दिन आरंभ होने वाला था। उन स्‍त्रियों ने जो उसके साथ गलील से आई थीं, पीछे-पीछे जाकर उस कब्र को देखा और यह भी कि वहाँ उसका शव किस प्रकार रखा गया। तब उन्होंने लौटकर सुगंधित मसाले और इत्र तैयार किए। फिर सब्त के दिन उन्होंने आज्ञा के अनुसार विश्राम किया। सप्‍ताह के पहले दिन बड़े भोर को वे उन सुगंधित मसालों को जिन्हें उन्होंने तैयार किया था, लेकर कब्र पर आईं। परंतु उन्होंने कब्र से पत्थर को लुढ़का हुआ पाया, और जब वे भीतर गई तो उन्हें प्रभु यीशु का शव नहीं मिला। फिर ऐसा हुआ कि जब वे इस बात से असमंजस में पड़ी थीं, तो देखो, चमकते हुए वस्‍त्र पहने दो पुरुष उनके पास आ खड़े हुए। जब वे भयभीत होकर भूमि की ओर मुँह झुकाए हुए थीं, तो उन्होंने उनसे कहा, “तुम जीवित को मृतकों में क्यों ढूँढ़ती हो? वह यहाँ नहीं है, परंतु जी उठा है। स्मरण करो कि जब वह गलील में था तो उसने तुमसे कहा था, ‘अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र पापी मनुष्यों के हाथों पकड़वाया जाए और क्रूस पर चढ़ाया जाए तथा तीसरे दिन जी उठे।’ ” तब उन्हें उसकी बातें स्मरण आईं, और कब्र से लौटकर उन्होंने उन ग्यारहों को और अन्य सब को ये सारी बातें कह सुनाईं। जिन्होंने ये बातें प्रेरितों को बताईं, वे मरियम मगदलीनी, योअन्‍ना और याकूब की माता मरियम, और उनके साथ की अन्य स्‍त्रियाँ थीं। परंतु उन्हें ये बातें व्यर्थ कहानी सी जान पड़ीं, और उन्होंने उनका विश्‍वास नहीं किया। तब पतरस उठकर कब्र की ओर दौड़ा, और झाँककर केवल कफ़न को पड़े देखा; और जो हुआ था उस पर आश्‍चर्य करता हुआ वह अपने घर चला गया। और देखो, उसी दिन उनमें से दो जन यरूशलेम से ग्यारह किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव की ओर जा रहे थे, जो इम्माऊस कहलाता था। वे आपस में इन सब घटनाओं के विषय में बातचीत कर रहे थे। फिर ऐसा हुआ कि जब वे बातचीत और विचार-विमर्श कर ही रहे थे कि यीशु स्वयं पास आकर उनके साथ चलने लगा, परंतु उनकी आँखें ऐसी बंद की गई थीं कि वे उसे न पहचानें। उसने उनसे कहा, “ये कौन सी बातें हैं जिनकी चर्चा तुम चलते-चलते आपस में कर रहे हो?” वे उदास होकर रुक गए। इस पर क्लियोपास नामक एक व्यक्‍ति ने उससे कहा, “क्या तू यरूशलेम में एकमात्र परदेशी है जो इन दिनों में उसमें हुई बातों को नहीं जानता?” यीशु ने उनसे पूछा, “कौन सी बातें?” उन्होंने उससे कहा, “वे बातें जो उस व्यक्‍ति यीशु नासरी के विषय में हैं, जो परमेश्‍वर और सब लोगों के सामने कार्य और वचन में एक सामर्थी भविष्यवक्‍ता था, और कैसे हमारे मुख्य याजकों और अधिकारियों ने उसे मृत्युदंड के लिए सौंप दिया और उसे क्रूस पर चढ़ा दिया। परंतु हम आशा कर रहे थे कि वही इस्राएल को छुड़ाने वाला है; इन सब के अतिरिक्‍त, इन बातों को हुए यह तीसरा दिन है। हमारे बीच की कुछ स्‍त्रियों ने भी हमें अचंभित कर दिया; वे भोर को कब्र पर गई थीं और जब उसका शव नहीं मिला, तो आकर कहने लगीं कि हमने स्वर्गदूतों का दर्शन भी पाया, जिन्होंने कहा कि वह जीवित है। फिर हमारे कुछ साथी कब्र पर गए, और उन्होंने भी वैसा ही पाया जैसा उन स्‍त्रियों ने कहा था, परंतु उसे नहीं देखा।” तब उसने उनसे कहा, “हे निर्बुद्धियो, और भविष्यवक्‍ताओं की सब बातों पर विश्‍वास करने में मंदमतियो! क्या मसीह के लिए आवश्यक न था कि वह ये दुःख उठाए और अपनी महिमा में प्रवेश करे?” तब उसने मूसा से और सब भविष्यवक्‍ताओं से आरंभ करके संपूर्ण पवित्रशास्‍त्र में से अपने विषय में लिखी बातों का अर्थ उन्हें समझाया। जब वे उस गाँव के निकट आ पहुँचे जहाँ वे जा रहे थे, तो उसने ऐसा दिखाया मानो उसे और आगे जाना हो। परंतु उन्होंने यह कहते हुए उसे विवश किया, “हमारे साथ ठहर जा, क्योंकि संध्या होने वाली है और अब दिन ढल गया है।” तब वह उनके साथ ठहरने के लिए भीतर गया। फिर ऐसा हुआ कि जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर आशिष माँगी और तोड़कर उन्हें देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं और उन्होंने उसे पहचान लिया; परंतु वह उनकी आँखों से ओझल हो गया। उन्होंने आपस में कहा, “जब वह मार्ग में हमसे बातें कर रहा था, और हमें पवित्रशास्‍त्र की बातों को समझा रहा था, तो क्या हमारे हृदय उत्तेजित नहीं हो रहे थे?” वे उसी समय उठकर यरूशलेम को लौट गए, और उन ग्यारहों और उनके साथियों को इकट्ठा पाया, जिनका कहना था कि प्रभु वास्तव में जी उठा है और शमौन को दिखाई दिया है। तब वे मार्ग की बातें उन्हें बताने लगे और यह भी कि उन्होंने रोटी तोड़ते समय किस प्रकार उसे पहचाना। अभी वे ये बातें कह ही रहे थे कि यीशु स्वयं उनके बीच में आ खड़ा हुआ और उनसे कहा, “तुम्हें शांति मिले।” परंतु वे घबरा गए और भयभीत होकर सोचने लगे कि किसी आत्मा को देख रहे हैं। तब उसने उनसे कहा, “तुम क्यों घबराते हो? और तुम्हारे मन में क्यों संदेह उठते हैं? मेरे हाथ और मेरे पैरों को देखो कि यह मैं ही हूँ। मुझे छुओ और देखो, क्योंकि आत्मा के मांस और हड्डियाँ नहीं होतीं, जैसा तुम मुझमें देखते हो।” यह कहकर उसने उन्हें अपने हाथ और पैर दिखाए। परंतु आनंद के मारे उन्हें अब भी विश्‍वास नहीं हुआ और वे आश्‍चर्यचकित थे। तब उसने उनसे कहा, “क्या यहाँ तुम्हारे पास खाने के लिए कुछ है?” उन्होंने उसे भुनी हुई मछली का एक टुकड़ा दिया; और उसने उसे लेकर उनके सामने खाया। फिर उसने उनसे कहा, “ये मेरी वे बातें हैं, जो मैंने तुम्हारे साथ रहते हुए तुमसे कही थीं कि मूसा की व्यवस्था और भविष्यवक्‍ताओं और भजनों की पुस्तक में मेरे विषय में लिखी गई सब बातों का पूरा होना अवश्य है।” तब उसने पवित्रशास्‍त्र को समझने के लिए उनकी बुद्धि खोल दी। उसने उनसे कहा, “इस प्रकार लिखा है कि मसीह दुःख उठाएगा और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठेगा, और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में उसके नाम से पापों की क्षमा के लिए पश्‍चात्ताप का प्रचार किया जाएगा; तुम इन बातों के साक्षी हो। और देखो, मेरे पिता ने जिसकी प्रतिज्ञा की है, उसे मैं तुम्हारे पास भेजता हूँ; परंतु जब तक तुम ऊपर से सामर्थ्य न पाओ, तब तक इसी नगर में ठहरे रहो।” अतः यीशु उन्हें बाहर बैतनिय्याह के पास तक ले गया, और अपने हाथों को उठाकर उन्हें आशिष दी। वह उन्हें आशिष देते-देते उनसे अलग हो गया और स्वर्ग पर उठा लिया गया। तब वे उसे दंडवत् करके बड़े आनंद के साथ यरूशलेम को लौट गए; और वे निरंतर मंदिर में परमेश्‍वर की स्तुति किया करते थे। आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था। यही आदि में परमेश्‍वर के साथ था। सब कुछ उसके द्वारा उत्पन्‍न‍ हुआ और जो कुछ उत्पन्‍न‍ हुआ है, उसमें से कुछ भी उसके बिना उत्पन्‍न‍ नहीं हुआ। उसमें जीवन था और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति था। वह ज्योति अंधकार में चमकती है, और अंधकार ने उसे ग्रहण नहीं किया। परमेश्‍वर का भेजा हुआ एक मनुष्य आया, जिसका नाम यूहन्‍ना था। वह साक्षी देने के लिए आया कि उस ज्योति के विषय में साक्षी दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्‍वास करें। वह स्वयं तो वह ज्योति नहीं था, परंतु वह इसलिए आया कि उस ज्योति के विषय में साक्षी दे। वह सच्‍ची ज्योति, जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आ रही थी। वह जगत में था और जगत उसके द्वारा उत्पन्‍न‍ हुआ, परंतु जगत ने उसे नहीं पहचाना। वह अपनों के पास आया परंतु उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। परंतु जितनों ने उसे ग्रहण किया, अर्थात् जो उसके नाम पर विश्‍वास करते हैं, उसने उन्हें परमेश्‍वर की संतान होने का अधिकार दिया। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से और न ही मनुष्य की इच्छा से, परंतु परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुए हैं। वचन देहधारी हुआ और हमारे बीच में डेरा किया। हमने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। वह अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण था। यूहन्‍ना ने उसके विषय में साक्षी दी और पुकारकर कहा, “यह वही है, जिसके विषय में मैंने कहा, ‘मेरे बाद आनेवाला मुझसे आगे है क्योंकि वह मुझसे पहले था।’ ” और उसकी परिपूर्णता से हम सब ने अनुग्रह पर अनुग्रह पाया है। व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई, परंतु अनुग्रह और सच्‍चाई यीशु मसीह के द्वारा आई। परमेश्‍वर को किसी ने कभी नहीं देखा; परमेश्‍वर अर्थात् एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में है, उसी ने उसे प्रकट किया। यूहन्‍ना की साक्षी यह है: जब यहूदियों ने यरूशलेम से उसके पास याजकों और लेवियों को यह पूछने के लिए भेजा, “तू कौन है?” तो उसने यह मान लिया और इनकार नहीं किया, परंतु मान ही लिया, “मैं मसीह नहीं हूँ।” तब उन्होंने उससे पूछा, “तो फिर कौन है? क्या तू एलिय्याह है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।” “तो क्या तू वह भविष्यवक्‍ता है?” उसने उत्तर दिया, “नहीं।” अतः उन्होंने उससे कहा, “फिर तू कौन है? हमें अपने भेजनेवालों को उत्तर देना है। तू अपने विषय में क्या कहता है?” उसने कहा, “मैं वह आवाज़ हूँ जो जंगल में पुकारती है: प्रभु का मार्ग सीधा करो, जैसा यशायाह भविष्यवक्‍ता ने कहा था।” वे फरीसियों की ओर से भेजे गए थे। अतः उन्होंने उससे पूछा, “यदि तू मसीह नहीं है और न एलिय्याह और न ही वह भविष्यवक्‍ता है तो बपतिस्मा क्यों देता है?” यूहन्‍ना ने उनको उत्तर दिया, “मैं पानी से बपतिस्मा देता हूँ; परंतु तुम्हारे बीच में वह खड़ा है, जिसे तुम नहीं जानते। वह मेरे बाद आने वाला है और मैं उसके जूते का फ़ीता खोलने के भी योग्य नहीं हूँ।” ये बातें यरदन के पार बैतनिय्याह में हुईं, जहाँ यूहन्‍ना बपतिस्मा देता था। अगले दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते हुए देखकर कहा, “देखो, परमेश्‍वर का मेमना, जो जगत का पाप उठा ले जाता है। यह वही है, जिसके विषय में मैंने कहा कि मेरे बाद एक पुरुष आता है जो मुझसे आगे है क्योंकि वह मुझसे पहले था। मैं तो उसे नहीं जानता था, परंतु मैं इसी कारण पानी से बपतिस्मा देता हुआ आया कि वह इस्राएल पर प्रकट हो जाए।” और यूहन्‍ना ने यह साक्षी दी: “मैंने आत्मा को आकाश से कबूतर के समान उतरते हुए देखा, और वह उस पर ठहर गया। मैं तो उसे नहीं जानता था, परंतु जिसने मुझे पानी से बपतिस्मा देने के लिए भेजा, उसी ने मुझसे कहा, ‘जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे, वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है।’ और मैंने देखा, और साक्षी दी है कि यही परमेश्‍वर का पुत्र है।” अगले दिन फिर यूहन्‍ना अपने दो शिष्यों के साथ खड़ा था और उसने यीशु को जाते हुए देखकर कहा, “देखो, परमेश्‍वर का मेमना।” जब दोनों शिष्यों ने उसे यह कहते सुना, तो वे यीशु के पीछे हो लिए। यीशु ने मुड़कर उनको पीछे आते देखा और उनसे पूछा, “तुम क्या चाहते हो?” उन्होंने उसे उत्तर दिया, “हे रब्बी (अर्थात् हे गुरु), तू कहाँ रहता है?” उसने उनसे कहा, “आओ, तो तुम देख लोगे।” तब उन्होंने जाकर देखा कि वह कहाँ रहता है, और उस दिन वे उसके साथ रहे। यह संध्या के लगभग चार बजे का समय था। जो यूहन्‍ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिए थे, उन दोनों में से एक शमौन पतरस का भाई अंद्रियास था। वह पहले अपने सगे भाई शमौन से मिला और उसे बताया, “हमें मसीह (अर्थात् ‘ख्रीष्‍ट’) मिल गया है।” वह उसे यीशु के पास लाया। यीशु ने उसे देखकर कहा, “तू यूहन्‍ना का पुत्र शमौन है; तू कैफा (अर्थात् ‘पतरस’) कहलाएगा।” अगले दिन यीशु ने गलील को जाने का निश्‍चय किया और वह फिलिप्पुस से मिला। यीशु ने उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” फिलिप्पुस तो अंद्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का था। फिलिप्पुस नतनएल से मिला और उससे कहा, “जिसके विषय में मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यवक्‍ताओं ने भी लिखा है, वह हमें मिल गया है; यूसुफ का पुत्र, नासरत का यीशु।” नतनएल ने उससे कहा, “क्या नासरत से कुछ अच्छा निकल सकता है?” फिलिप्पुस ने उससे कहा, “आ और देख ले।” यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते हुए देखा और उसके विषय में कहा, “देखो, यह सचमुच इस्राएली है, इसमें छल कपट नहीं।” नतनएल ने उससे कहा, “तू मुझे कैसे जानता है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “फिलिप्पुस के बुलाने से पहले मैंने अंजीर के पेड़ के नीचे तुझे देखा था।” इस पर नतनएल ने उससे कहा, “हे रब्बी, तू परमेश्‍वर का पुत्र है; तू इस्राएल का राजा है!” तब यीशु ने उससे कहा, “क्या तू इसलिए विश्‍वास करता है कि मैंने तुझसे कहा, ‘मैंने अंजीर के पेड़ के नीचे तुझे देखा था’? तू इससे भी बड़े-बड़े कार्य देखेगा।” उसने फिर उससे कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, तुम स्वर्ग को खुला हुआ और परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों को मनुष्य के पुत्र पर उतरते और ऊपर चढ़ते हुए देखोगे।” तीसरे दिन गलील के काना में एक विवाह था, और यीशु की माता वहाँ थी। यीशु और उसके शिष्य भी उस विवाह में आमंत्रित थे। जब दाखरस कम पड़ गया तो यीशु की माता ने उससे कहा, “उनके पास दाखरस नहीं है।” यीशु ने उससे कहा, “हे नारी, इससे तेरा और मेरा क्या लेना-देना? अभी मेरा समय नहीं आया है।” उसकी माता ने सेवकों से कहा, “जो कुछ वह तुमसे कहे, वही करना।” उस समय वहाँ यहूदियों की शुद्धीकरण प्रथा के अनुसार पत्थर के छः घड़े रखे हुए थे, प्रत्येक में अस्सी से एक सौ बीस लीटर तक समाता था। यीशु ने सेवकों से कहा, “घड़ों को पानी से भर दो।” अतः उन्होंने उन्हें मुँह तक भर दिया। तब उसने उनसे कहा, “अब निकालकर भोज के प्रबंधक के पास ले जाओ।” और वे ले गए। जब भोज के प्रबंधक ने वह पानी चखा जो दाखरस बन गया था और नहीं जानता था कि यह कहाँ से आया है (परंतु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे), तो उसने दूल्हे को बुलाया और उससे कहा, “हर एक मनुष्य पहले अच्छा दाखरस देता है और जब लोग पीकर मतवाले हो जाते हैं तब उससे घटिया देता है। तूने तो अच्छा दाखरस अब तक बचा रखा है!” इस प्रकार यीशु ने गलील के काना में चिह्‍नों का आरंभ किया और अपनी महिमा प्रकट की, तथा उसके शिष्यों ने उस पर विश्‍वास किया। इसके बाद यीशु, अपनी माता, अपने भाइयों और अपने शिष्यों के साथ कफरनहूम को गया, परंतु वे वहाँ अधिक दिन नहीं रहे। जब यहूदियों के फसह का पर्व निकट आया तो यीशु यरूशलेम को गया। उसने मंदिर-परिसर में बैल, भेड़ और कबूतर बेचनेवालों और सर्राफों को बैठे हुए देखा। तब उसने रस्सियों का एक कोड़ा बनाकर भेड़ों और बैलों सहित सब को मंदिर-परिसर से बाहर निकाल दिया, और सर्राफों के सिक्‍के बिखेर दिए तथा चौकियों को उलट दिया; और कबूतर बेचनेवालों से कहा, “इन्हें यहाँ से ले जाओ। मेरे पिता के घर को व्यापार का घर मत बनाओ।” तब उसके शिष्यों को स्मरण आया कि लिखा है: तेरे घर की धुन मुझे खा जाएगी। इस पर यहूदियों ने यीशु से कहा, “तू जो यह कर रहा है, उसके लिए हमें कौन सा चिह्‍न दिखाता है?” यीशु ने उनको उत्तर दिया, “इस मंदिर को ढा दो, और मैं इसे तीन दिन में खड़ा कर दूँगा।” तब यहूदियों ने कहा, “यह मंदिर छियालीस वर्ष में बनाया गया और क्या तू इसे तीन दिन में खड़ा कर देगा?” परंतु वह अपनी देह रूपी मंदिर के विषय में कह रहा था। अतः जब वह मृतकों में से जी उठा तो उसके शिष्यों को स्मरण आया कि उसने यह कहा था, और उन्होंने पवित्रशास्‍त्र और उस वचन पर जो यीशु ने कहा था, विश्‍वास किया। फसह के पर्व के समय जब वह यरूशलेम में था, तो उसके उन चिह्‍नों को देखकर जिन्हें वह दिखाता था, बहुतों ने उसके नाम पर विश्‍वास किया। परंतु यीशु ने अपने आपको उनके भरोसे पर नहीं छोड़ा, क्योंकि वह सब को जानता था, और उसे आवश्यकता नहीं थी कि मनुष्य के विषय में कोई साक्षी दे, क्योंकि वह जानता था कि मनुष्य के मन में क्या है। फरीसियों में से नीकुदेमुस नामक एक मनुष्य था, जो यहूदियों का एक अधिकारी था। वह रात को यीशु के पास आया और उससे कहा, “हे रब्बी, हम जानते हैं कि तू परमेश्‍वर की ओर से आया हुआ गुरु है, क्योंकि जिन चिह्‍नों को तू दिखाता है उन्हें जब तक परमेश्‍वर साथ न हो, कोई दिखा नहीं सकता।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई नए सिरे से जन्म न ले, वह परमेश्‍वर के राज्य को नहीं देख सकता।” नीकुदेमुस ने उससे पूछा, “मनुष्य बूढ़ा होकर कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुबारा प्रवेश करके जन्म ले सकता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई जल और आत्मा से जन्म न ले, वह परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। जो शरीर से जन्मा है वह शरीर है और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। आश्‍चर्य न कर कि मैंने तुझसे कहा, ‘तुम्हें नए सिरे से जन्म लेना अवश्य है।’ हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसकी आवाज़ सुनता है, परंतु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर जाती है। प्रत्येक जो आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।” इस पर नीकुदेमुस ने उससे कहा, “यह सब कैसे हो सकता है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “तू इस्राएलियों का गुरु है, फिर भी इन बातों को नहीं समझता? मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ कि जो हम जानते हैं वह कहते हैं, और जो हमने देखा है उसकी साक्षी देते हैं, परंतु तुम हमारी साक्षी ग्रहण नहीं करते। जब मैं तुमसे पृथ्वी की बातें कहता हूँ, तुम विश्‍वास नहीं करते, तो यदि मैं तुमसे स्वर्ग की बातें कहूँ तो तुम कैसे विश्‍वास करोगे? कोई भी स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र । जिस प्रकार मूसा ने जंगल में साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी प्रकार मनुष्य के पुत्र का ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह अनंत जीवन पाए। “क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नाश न हो, परंतु अनंत जीवन पाए। परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए नहीं भेजा कि वह जगत को दोषी ठहराए, परंतु इसलिए कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। जो उस पर विश्‍वास करता है, वह दोषी नहीं ठहराया जाता, परंतु जो विश्‍वास नहीं करता, वह दोषी ठहराया जा चुका है; क्योंकि उसने परमेश्‍वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्‍वास नहीं किया। और दोष यह है कि ज्योति जगत में आ चुकी है, परंतु मनुष्यों ने अंधकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना, क्योंकि उनके कार्य बुरे थे। क्योंकि प्रत्येक जो बुराई करता है, वह ज्योति से घृणा करता है और ज्योति के पास नहीं आता, जिससे उसके कार्य प्रकट न हो जाएँ। परंतु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के पास आता है, जिससे यह प्रकट हो जाए कि उसके कार्य परमेश्‍वर की ओर से किए गए हैं।” इन बातों के बाद यीशु और उसके शिष्य यहूदिया प्रदेश में आए, और वह वहाँ उनके साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा। यूहन्‍ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था, क्योंकि वहाँ पानी बहुत था, और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे। (तब तक यूहन्‍ना बंदीगृह में नहीं डाला गया था।) फिर वहाँ यूहन्‍ना के शिष्यों का एक यहूदी के साथ शुद्धीकरण के विषय में वाद-विवाद हो गया। उन्होंने यूहन्‍ना के पास आकर उससे कहा, “हे रब्बी, जो यरदन के उस पार तेरे साथ था और जिसकी साक्षी तूने दी है, देख, वह बपतिस्मा दे रहा है और सब लोग उसके पास जा रहे हैं।” इस पर यूहन्‍ना ने कहा, “जब तक स्वर्ग से न दिया जाए, मनुष्य कुछ भी प्राप्‍त नहीं कर सकता। तुम स्वयं मेरी साक्षी देते हो कि मैंने कहा था, ‘मैं मसीह नहीं हूँ, परंतु उसके आगे भेजा गया हूँ।’ जिसके पास दुल्हन है वही दूल्हा है, और दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उसकी सुनता है, वह दूल्हे की आवाज़ से बहुत आनंदित होता है। अतः मेरा यह आनंद पूरा हुआ है। अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ।” जो ऊपर से आता है वह सब के ऊपर है। जो पृथ्वी से है वह पृथ्वी का है, और पृथ्वी की बातें कहता है। जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है। जो उसने देखा और सुना है, उसकी वह साक्षी देता है। परंतु कोई भी उसकी साक्षी ग्रहण नहीं करता। जिसने उसकी साक्षी ग्रहण कर ली, उसने इस बात पर मुहर लगा दी कि परमेश्‍वर सच्‍चा है। क्योंकि जिसे परमेश्‍वर ने भेजा है, वह परमेश्‍वर की बातें कहता है, क्योंकि परमेश्‍वर उसे बिना नाप-तोल के आत्मा देता है। पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया है। जो पुत्र पर विश्‍वास करता है, अनंत जीवन उसका है। परंतु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, बल्कि परमेश्‍वर का प्रकोप उस पर बना रहता है। जब यीशु ने जान लिया कि फरीसियों ने सुना है, कि यीशु यूहन्‍ना से अधिक शिष्य बनाता और बपतिस्मा देता है, —यद्यपि यीशु स्वयं नहीं बल्कि उसके शिष्य बपतिस्मा देते थे— तब वह यहूदिया छोड़कर फिर गलील को चल दिया। परंतु उसका सामरिया से होकर जाना आवश्यक था। इसलिए वह सामरिया के सूखार नामक नगर में आया, जो उस भूमि के पास था जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। वहाँ याकूब का कुआँ था। अतः यीशु यात्रा से थका हुआ उस कुएँ के पास बैठ गया। यह दिन के लगभग बारह बजे का समय था। तब सामरिया की एक स्‍त्री जल भरने आई। यीशु ने उससे कहा, “मुझे पीने के लिए पानी दे।” क्योंकि उसके शिष्य नगर में भोजन खरीदने के लिए गए हुए थे। उस सामरी स्‍त्री ने उससे कहा, “तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्‍त्री से पानी कैसे माँग रहा है?” (क्योंकि यहूदियों का सामरियों के साथ कोई मेल जोल नहीं।) यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि तू परमेश्‍वर के वरदान को जानती और यह भी कि वह कौन है जो तुझसे कहता है, ‘मुझे पीने के लिए पानी दे’, तो तू उससे माँगती और वह तुझे जीवन का जल देता।” स्‍त्री ने उससे कहा, “महोदय, तेरे पास जल निकालने के लिए कुछ नहीं है और कुआँ गहरा है, तो फिर तेरे पास वह जीवन का जल कहाँ से आया? क्या तू हमारे पिता याकूब से बढ़कर है, जिसने हमें यह कुआँ दिया तथा स्वयं उसने, उसकी संतानों ने और उसके मवेशियों ने इसमें से पीया?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “प्रत्येक जो इस जल में से पीएगा वह फिर प्यासा होगा, परंतु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह अनंत काल तक कभी प्यासा न होगा, बल्कि जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें अनंत जीवन के लिए उमड़नेवाला जल का सोता बन जाएगा।” स्‍त्री ने उससे कहा, “महोदय, यह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊँ और न ही जल भरने यहाँ आऊँ।” यीशु ने उससे कहा, “जा, अपने पति को बुलाकर यहाँ ला।” इस पर स्‍त्री ने उससे कहा, “मेरा कोई पति नहीं है।” यीशु ने उससे कहा, “तूने ठीक कहा, ‘मेरा कोई पति नहीं है।’ क्योंकि तू पाँच पति कर चुकी है, और अब जो तेरे पास है, वह तेरा पति नहीं है। यह तूने सच ही कहा है।” स्‍त्री ने उससे कहा, “महोदय, मुझे लगता है कि तू भविष्यवक्‍ता है। हमारे पूर्वजों ने इस पहाड़ पर आराधना की, और तुम कहते हो कि जहाँ आराधना करनी चाहिए, वह स्थान यरूशलेम में है।” यीशु ने उससे कहा, “हे नारी, मेरा विश्‍वास कर, क्योंकि वह समय आता है जब तुम पिता की आराधना न तो इस पहाड़ पर और न ही यरूशलेम में करोगे। तुम उसकी आराधना करते हो जिसे नहीं जानते, हम उसकी आराधना करते हैं जिसे जानते हैं, क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है। परंतु वह समय आता है बल्कि अब है, जब सच्‍चे आराधक पिता की आराधना आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिए ऐसे ही आराधना करनेवालों को ढूँढ़ता है। परमेश्‍वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्‍चाई से आराधना करें।” स्‍त्री ने उससे कहा, “मैं जानती हूँ कि मसीह, जो ख्रीष्‍ट कहलाता है, आने वाला है। जब वह आएगा तो हमें सब कुछ बता देगा।” यीशु ने उससे कहा, “मैं जो तुझसे बात कर रहा हूँ, वही हूँ।” इतने में उसके शिष्य आ गए और उन्हें आश्‍चर्य हुआ क्योंकि वह एक स्‍त्री से बात कर रहा था। फिर भी किसी ने नहीं पूछा, “तू क्या चाहता है?” या “तू क्यों उस स्‍त्री से बात कर रहा है?” तब वह स्‍त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई और लोगों से कहने लगी, “आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने वह सब जो मैंने किया था, मुझे बता दिया। कहीं यही तो मसीह नहीं?” अतः वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे। इसी बीच शिष्यों ने यीशु से निवेदन किया, “हे रब्बी, कुछ खा ले।” परंतु उसने उनसे कहा, “मेरे पास खाने के लिए ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।” तब शिष्य आपस में कहने लगे, “कहीं कोई उसके खाने के लिए तो कुछ नहीं लाया?” यीशु ने उनसे कहा, “मेरा भोजन यह है कि मैं अपने भेजनेवाले की इच्छा पर चलूँ और उसका कार्य पूरा करूँ। क्या तुम नहीं कहते, ‘कटनी का समय आने में अब भी चार महीने पड़े हैं?’ देखो, मैं तुमसे कहता हूँ, अपनी आँखें उठाकर स्वयं देखो कि खेत कटनी के लिए पक चुके हैं। अब काटनेवाले को मज़दूरी मिलती है और वह अनंत जीवन के लिए फल बटोरता है, ताकि बोनेवाला और काटनेवाला एक साथ मिलकर आनंद मनाएँ। इसलिए यहाँ पर यह कहावत सच है, ‘बोनेवाला कोई और है तथा काटनेवाला कोई और।’ मैंने तुम्हें वह फसल काटने के लिए भेजा जिसके लिए तुमने परिश्रम नहीं किया; दूसरों ने परिश्रम किया है और तुम उनके परिश्रम में सहभागी हुए हो।” उस नगर के बहुत से सामरियों ने यीशु पर विश्‍वास किया क्योंकि साक्षी देनेवाली स्‍त्री ने यह कहा था, “जो मैंने किया था, उसने मुझे सब कुछ बता दिया।” फिर जब सामरी उसके पास आकर उससे निवेदन करने लगे कि वह उनके साथ रहे, तो वह वहाँ दो दिन तक रहा। उसके वचन के कारण और भी बहुत से लोगों ने विश्‍वास किया। तब वे उस स्‍त्री से कहने लगे, “अब हम तेरे कहने के कारण ही विश्‍वास नहीं करते, क्योंकि हमने स्वयं सुन लिया है, और जान गए हैं कि सचमुच यही जगत का उद्धारकर्ता है।” फिर दो दिन बाद वह वहाँ से गलील की ओर निकला, जबकि यीशु ने स्वयं साक्षी दी थी कि भविष्यवक्‍ता अपने नगर में आदर नहीं पाता। जब वह गलील में आया तो गलीलियों ने उसका स्वागत किया, क्योंकि वे भी पर्व में गए थे और उन्होंने उन सब कार्यों को देखा था जो उसने यरूशलेम में पर्व के समय किए थे। तब वह फिर गलील के काना में आया, जहाँ उसने पानी को दाखरस बनाया था। वहाँ एक राजाधिकारी था जिसका पुत्र कफरनहूम में बीमार था। जब उसने यह सुना कि यीशु यहूदिया से गलील में आया है, तो वह उसके पास गया और उससे विनती करने लगा कि चलकर मेरे पुत्र को स्वस्थ कर दे, क्योंकि वह मरने पर था। तब यीशु ने उससे कहा, “जब तक तुम चिह्‍न और अद्भुत कार्य न देखोगे, तुम कभी विश्‍वास नहीं करोगे।” राजाधिकारी ने उससे कहा, “हे प्रभु, इससे पहले कि मेरा बच्‍चा मर जाए, तू चल।” यीशु ने उससे कहा, “जा, तेरा पुत्र जीवित है।” उस मनुष्य ने यीशु के वचन पर विश्‍वास किया और चल दिया। जब वह जा ही रहा था, तो उसके दास उससे मिले और कहने लगे कि तेरा लड़का जीवित है। तब उसने उनसे पूछा कि वह किस घड़ी ठीक होने लगा। इस पर उन्होंने उससे कहा, “कल दिन के एक बजे उसका ज्वर उतर गया था।” तब पिता जान गया कि यह वही घड़ी थी, जब यीशु ने उससे कहा था, “तेरा पुत्र जीवित है।” और उसने तथा उसके पूरे घराने ने विश्‍वास किया। यह दूसरा चिह्‍न था जो यीशु ने यहूदिया से गलील में आकर दिखाया। इन बातों के बाद यहूदियों का एक पर्व आया, और यीशु यरूशलेम को गया। यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुंड है जो इब्रानी भाषा में बैतहसदा कहलाता है; उसके पाँच ओसारे हैं। इनमें बहुत से बीमार, अंधे, लंगड़े और सूखे अंगवाले [पानी हिलने की प्रतीक्षा में] पड़े रहते थे। [क्योंकि स्वर्गदूत निश्‍चित समय पर कुंड में उतरकर पानी को हिलाता था। पानी के हिलने के बाद जो भी उसमें पहले उतरता था, चाहे वह किसी भी बीमारी से पीड़ित क्यों न हो, स्वस्थ हो जाता था।] वहाँ एक मनुष्य था, जो अड़तीस वर्ष से अपनी बीमारी में पड़ा था। यीशु ने उसे पड़ा हुआ देखकर और यह जानकर कि वह बहुत समय से इस दशा में है, उससे पूछा, “क्या तू ठीक होना चाहता है?” उस बीमार ने उसे उत्तर दिया, “महोदय, मेरे पास कोई मनुष्य नहीं कि जब पानी हिलाया जाए तो मुझे कुंड में उतार दे। जब तक मैं पहुँचता हूँ कोई दूसरा मुझसे पहले उतर जाता है।” यीशु ने उससे कहा, “उठ, अपना बिछौना उठा, और चल फिर।” वह मनुष्य तुरंत ठीक हो गया, और अपना बिछौना उठाकर चलने-फिरने लगा। वह दिन सब्त का दिन था। इसलिए यहूदी उससे जो स्वस्थ किया गया था, कहने लगे, “यह सब्त का दिन है, और तेरे लिए अपना बिछौना उठाना उचित नहीं।” इस पर उसने उनसे कहा, “जिसने मुझे ठीक किया, उसी ने मुझसे कहा, ‘अपना बिछौना उठा, और चल फिर’।” उन्होंने उससे पूछा, “वह मनुष्य कौन है जिसने तुझसे कहा, ‘अपना बिछौना उठा और चल फिर’?” परंतु जो स्वस्थ किया गया था नहीं जानता था कि वह कौन है, क्योंकि उस स्थान पर भीड़ थी और यीशु निकल गया था। इन बातों के बाद यीशु उससे मंदिर-परिसर में मिला और कहा, “देख, तू ठीक हो गया है। फिर से पाप मत करना, कहीं ऐसा न हो कि तेरे साथ इससे भी बुरा कुछ हो जाए।” उस मनुष्य ने जाकर यहूदियों को बता दिया कि जिसने मुझे ठीक किया, वह यीशु है। इस कारण यहूदी यीशु को सताने लगे, क्योंकि वह इन कार्यों को सब्त के दिन करता था। परंतु यीशु ने उनसे कहा, “मेरा पिता अब तक कार्य करता है, और मैं भी कार्य करता हूँ।” इस कारण यहूदी और भी अधिक उसे मार डालने का अवसर ढूँढ़ने लगे, क्योंकि वह न केवल सब्त के दिन की विधि को तोड़ रहा था, बल्कि परमेश्‍वर को अपना पिता कहकर अपने आपको परमेश्‍वर के तुल्य ठहरा रहा था। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, पुत्र अपनी ओर से कुछ नहीं कर सकता, केवल वही जो पिता को करते देखता है, क्योंकि जो कार्य पिता करता है, उन्हें पुत्र भी उसी रीति से करता है। क्योंकि पिता पुत्र से प्रेम करता है और उसे उन सब बातों को दिखाता है जिन्हें वह करता है, और वह उसे इनसे भी बड़े कार्य दिखाएगा, ताकि तुम्हें आश्‍चर्य हो। जिस प्रकार पिता मृतकों को जिलाता और उन्हें जीवन देता है, उसी प्रकार पुत्र भी जिन्हें वह चाहता है जीवन देता है। पिता किसी का न्याय नहीं करता बल्कि उसने न्याय का सारा कार्य पुत्र को सौंप दिया है, ताकि सब लोग जैसे पिता का आदर करते हैं पुत्र का भी आदर करें। जो पुत्र का आदर नहीं करता, वह पिता का भी आदर नहीं करता जिसने उसे भेजा है। “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि जो मेरे वचन को सुनता और मेरे भेजनेवाले पर विश्‍वास करता है, अनंत जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, बल्कि वह मृत्यु में से निकलकर जीवन में प्रवेश कर चुका है। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि वह समय आता है बल्कि अब है जब मृतक परमेश्‍वर के पुत्र की आवाज़ सुनेंगे, और जो सुनेंगे वे जीएँगे। क्योंकि जिस प्रकार पिता अपने में जीवन रखता है, उसी प्रकार उसने होने दिया कि पुत्र भी अपने में जीवन रखे; और उसने उसे न्याय करने का अधिकार भी दिया, क्योंकि वह मनुष्य का पुत्र है। इस बात पर आश्‍चर्य मत करो क्योंकि वह समय आता है जब वे सब जो कब्रों में हैं उसकी आवाज़ सुनेंगे, और जिन्होंने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिए, और जिन्होंने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिए निकल आएँगे। “मैं अपनी ओर से कुछ नहीं कर सकता, जैसा सुनता हूँ वैसा न्याय करता हूँ और मेरा न्याय सच्‍चा है, क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं बल्कि अपने भेजनेवाले की इच्छा चाहता हूँ। “यदि मैं अपने विषय में साक्षी दूँ तो मेरी साक्षी सच्‍ची नहीं है। एक और है जो मेरे विषय में साक्षी देता है, और मैं जानता हूँ कि जो साक्षी वह मेरे विषय में देता है, वह सच्‍ची है। तुमने अपने लोगों को यूहन्‍ना के पास भेजा, और उसने सत्य की साक्षी दी है। मैं मनुष्य की ओर से साक्षी स्वीकार नहीं करता, फिर भी मैं ये बातें इसलिए कहता हूँ कि तुम्हें उद्धार मिले। यूहन्‍ना जलता और चमकता हुआ दीपक था, और तुमने थोड़े समय तक उसकी ज्योति में मगन होना चाहा। परंतु मेरे पास यूहन्‍ना की साक्षी से भी बड़ी साक्षी है, क्योंकि जो कार्य पिता ने मुझे पूरा करने के लिए सौंपे हैं, अर्थात् वे कार्य जिन्हें मैं करता हूँ, मेरे विषय में साक्षी देते हैं कि पिता ने मुझे भेजा है; और पिता जिसने मुझे भेजा है, उसने भी मेरे विषय में साक्षी दी है। तुमने न कभी उसकी आवाज़ सुनी और न ही उसका रूप देखा है, और उसका वचन तुममें बना नहीं रहता, क्योंकि जिसे उसने भेजा है तुम उसका विश्‍वास नहीं करते। तुम पवित्रशास्‍त्र के लेखों में ढूँढ़ते हो, क्योंकि तुम सोचते हो कि उनमें अनंत जीवन है, परंतु ये वे हैं जो मेरे विषय में साक्षी देते हैं। फिर भी तुम मेरे पास आना नहीं चाहते कि तुम जीवन पाओ। “मैं मनुष्यों का आदर ग्रहण नहीं करता, परंतु मैं तुम्हें जानता हूँ कि तुममें परमेश्‍वर का प्रेम नहीं है। मैं अपने पिता के नाम से आया हूँ, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते। यदि कोई अपने नाम से आए तो तुम उसे ग्रहण कर लोगे। तुम जो एक दूसरे से आदर पाते हो और वह आदर नहीं चाहते जो एकमात्र परमेश्‍वर की ओर से है, तो कैसे विश्‍वास कर सकते हो? यह न सोचो कि मैं पिता के सामने तुम पर दोष लगाऊँगा, तुम पर दोष लगानेवाला तो मूसा है, जिस पर तुमने आशा लगा रखी है। क्योंकि यदि तुम मूसा पर विश्‍वास करते तो मुझ पर भी विश्‍वास करते, क्योंकि उसने मेरे विषय में लिखा है। परंतु यदि तुम उसके लेखों पर विश्‍वास नहीं करते, तो मेरे वचनों पर कैसे विश्‍वास करोगे?” इन बातों के बाद यीशु गलील अर्थात् तिबिरियास की झील के उस पार चला गया। तब एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल पड़ी, क्योंकि वे उन आश्‍चर्यजनक चिह्‍नों को देखते थे, जो वह बीमारों पर दिखाता था। फिर यीशु पहाड़ पर चढ़ गया और अपने शिष्यों के साथ वहाँ बैठ गया। यहूदियों का फसह का पर्व निकट था। जब यीशु ने अपनी आँखें उठाकर देखा कि एक बड़ी भीड़ उसके पास चली आ रही है, तो उसने फिलिप्पुस से कहा, “हम इनके खाने के लिए रोटियाँ कहाँ से खरीदें?” परंतु वह उसे परखने के लिए यह कह रहा था, क्योंकि वह स्वयं जानता था कि वह क्या करने वाला है। फिलिप्पुस ने उसे उत्तर दिया, “दो सौ दीनार की रोटियाँ भी इनके लिए पर्याप्‍त नहीं होंगी कि हर एक को थोड़ी-थोड़ी मिल जाए।” उसके शिष्यों में से एक अर्थात् शमौन पतरस के भाई अंद्रियास ने उससे कहा, “यहाँ एक छोटा लड़का है जिसके पास जौ की पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ हैं, परंतु इतने लोगों के लिए ये क्या हैं?” यीशु ने कहा, “लोगों को बैठा दो!” उस स्थान पर बहुत घास थी। तब वे जो संख्या में लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे, बैठ गए। यीशु ने रोटियाँ लीं और धन्यवाद देकर बैठे हुए लोगों में बाँट दीं, उसी प्रकार उसने मछलियाँ भी लीं और जितनी वे चाहते थे, बाँट दीं। जब वे तृप्‍त हो गए तो उसने अपने शिष्यों से कहा, “बचे हुए टुकड़ों को बटोर लो ताकि कुछ भी नष्‍ट न हो।” अतः उन्होंने बटोर लिए, और जौ की पाँच रोटियों के टुकड़ों से, जो उन खानेवालों से बच गए थे, बारह टोकरियाँ भर लीं। तब जो आश्‍चर्यजनक चिह्‍न यीशु ने दिखाया, उसे देखकर लोग कहने लगे, “सचमुच यह वही भविष्यवक्‍ता है, जो इस जगत में आनेवाला था।” फिर जब यीशु ने यह जाना कि लोग आकर उसे राजा बनाने के लिए पकड़ने वाले हैं, तो वह फिर से अकेला पहाड़ पर चला गया। जब संध्या हुई तो उसके शिष्य झील के तट पर आए, और नाव पर चढ़कर झील के उस पार कफरनहूम को जाने लगे। अंधेरा हो चुका था, परंतु यीशु अभी तक उनके पास नहीं पहुँचा था, और तेज़ हवाएँ चलने के कारण झील में लहरें उठने लगीं। जब वे नाव खेते हुए लगभग तीन-चार मील दूर निकल गए, तो उन्होंने यीशु को झील पर चलते और नाव के पास आते हुए देखा, और वे डर गए। परंतु उसने उनसे कहा, “मैं हूँ, डरो मत!” तब उन्होंने उसे नाव पर चढ़ाना चाहा, इतने में नाव उसी स्थान पर पहुँच गई जहाँ वे जा रहे थे। अगले दिन झील के दूसरी ओर रह गई भीड़ ने देखा कि वहाँ एक ही नाव है और दूसरी नहीं, और यीशु अपने शिष्यों के साथ नाव में नहीं गया बल्कि उसके शिष्य अकेले चले गए। तब कुछ नावें तिबिरियास से उस स्थान के निकट आईं जहाँ प्रभु के धन्यवाद देने के बाद लोगों ने रोटी खाई थी। अतः जब भीड़ ने देखा कि यीशु वहाँ नहीं है और न ही उसके शिष्य, तो वे नावों पर चढ़कर यीशु को ढूँढ़ते हुए कफरनहूम पहुँचे। जब झील के उस पार उन्हें यीशु मिला तो उन्होंने उससे पूछा, “हे रब्बी, तू यहाँ कब आया?” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, तुम मुझे इसलिए नहीं ढूँढ़ते कि तुमने चिह्‍न देखे, परंतु इसलिए कि तुमने रोटियाँ खाईं और तृप्‍त हो गए। नाश होनेवाले भोजन के लिए नहीं बल्कि अनंत जीवन तक रहनेवाले उस भोजन के लिए परिश्रम करो जो मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता परमेश्‍वर ने उसी पर मुहर लगाई है।” तब उन्होंने उससे पूछा, “परमेश्‍वर के कार्य करने के लिए हम क्या करें?” इस पर यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “परमेश्‍वर का कार्य यह है कि तुम उस पर विश्‍वास करो जिसे उसने भेजा है।” उन्होंने उससे कहा, “फिर तू कौन सा चिह्‍न दिखाता है कि हम देखें और तेरा विश्‍वास करें? तू कौन सा कार्य करता है? हमारे पूर्वजों ने जंगल में मन्‍ना खाया, जैसा लिखा है: उसने उन्हें खाने के लिए स्वर्ग से रोटी दी।” तब यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, तुम्हें स्वर्ग से रोटी मूसा ने नहीं दी, परंतु मेरा पिता तुम्हें स्वर्ग से सच्‍ची रोटी देता है। क्योंकि परमेश्‍वर की रोटी वह है जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।” तब उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह रोटी हमें सदैव दिया कर।” यीशु ने उनसे कहा, “जीवन की रोटी मैं हूँ। जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा नहीं होगा, और जो मुझ पर विश्‍वास करेगा वह फिर कभी प्यासा नहीं होगा। परंतु मैंने तुमसे कहा कि तुमने मुझे देखा है और फिर भी विश्‍वास नहीं करते। वह प्रत्येक जिसे पिता मुझे देता है, मेरे पास आएगा और जो मेरे पास आएगा, मैं उसे कभी बाहर नहीं निकालूँगा; क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं बल्कि अपने भेजनेवाले की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्ग से उतर आया हूँ। मेरे भेजनेवाले की इच्छा यह है कि प्रत्येक जिसे उसने मुझे दिया है, उसमें से मैं किसी को भी न खोऊँ, बल्कि उसे अंतिम दिन में जिला उठाऊँ। क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है कि जो कोई पुत्र को देखे और उस पर विश्‍वास करे, वह अनंत जीवन पाए, और मैं उसे अंतिम दिन में जिला उठाऊँगा।” अतः यहूदी उसके विषय में कुड़कुड़ाने लगे क्योंकि उसने कहा, “वह रोटी जो स्वर्ग से उतरी, मैं हूँ।” तब वे कहने लगे, “क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिसके पिता और माता को हम जानते हैं? तो अब यह कैसे कहता है, ‘मैं स्वर्ग से उतर आया हूँ’?” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “आपस में मत कुड़कुड़ाओ। कोई मेरे पास तब तक नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसे अंतिम दिन में जिला उठाऊँगा। भविष्यवक्‍ताओं द्वारा लिखा गया है: वे सब परमेश्‍वर के सिखाए हुए होंगे। “प्रत्येक जिसने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है। यह नहीं कि किसी ने पिता को देखा है, परंतु जो परमेश्‍वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो विश्‍वास करता है, अनंत जीवन उसका है। जीवन की रोटी मैं हूँ। तुम्हारे पूर्वजों ने जंगल में मन्‍ना खाया फिर भी मर गए। यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरी है, ताकि जो कोई इसमें से खाए, वह न मरे। जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी, मैं हूँ। यदि कोई इस रोटी में से खाएगा, वह अनंत काल तक जीवित रहेगा; और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिए दूँगा, वह मेरा मांस है।” अतः यहूदी यह कहते हुए आपस में वाद-विवाद करने लगे, “यह हमें खाने के लिए अपना मांस कैसे दे सकता है?” तब यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, यदि तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ और उसका लहू न पीओ तो तुममें जीवन नहीं है। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनंत जीवन उसका है, और मैं उसे अंतिम दिन में जिला उठाऊँगा। क्योंकि मेरा मांस सच्‍चा भोजन है और मेरा लहू सच्‍चा पेय है। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, वह मुझमें बना रहता है और मैं उसमें। जिस प्रकार जीवित पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूँ, उसी प्रकार जो मुझे खाता है वह भी मेरे कारण जीवित रहेगा। यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरी है; वैसी नहीं जो पूर्वजों ने खाई फिर भी मर गए। जो इस रोटी को खाएगा वह अनंत काल तक जीवित रहेगा।” ये बातें उसने कफरनहूम में तब कहीं जब वह आराधनालय में उपदेश दे रहा था। यह सुनकर उसके शिष्यों में से बहुतों ने कहा, “यह कठोर वचन है, इसे कौन सुन सकता है?” यीशु ने अपने मन में यह जानकर कि उसके शिष्य इस विषय पर कुड़कुड़ा रहे हैं, उनसे कहा, “क्या इससे तुम्हें ठोकर लगती है? फिर यदि तुम मनुष्य के पुत्र को ऊपर जाते हुए देखो, जहाँ वह पहले था, तो क्या होगा? आत्मा ही है जो जीवन देता है, शरीर से कुछ लाभ नहीं। मैंने तुमसे जो वचन कहे हैं, वे आत्मा हैं और जीवन भी। फिर भी तुममें से कुछ ऐसे हैं जो विश्‍वास नहीं करते।” क्योंकि यीशु आरंभ से जानता था कि कौन हैं जो विश्‍वास नहीं करते और कौन है जो उसे पकड़वाएगा। फिर उसने कहा, “इसी कारण मैंने तुमसे कहा है कि कोई मेरे पास तब तक नहीं आ सकता जब तक उसे पिता की ओर से न दिया गया हो।” इस पर उसके बहुत से शिष्य वापस लौट गए और फिर उसके साथ नहीं चले। तब यीशु ने उन बारहों से कहा, “क्या तुम भी चले जाना चाहते हो?” शमौन पतरस ने उसे उत्तर दिया, “प्रभु, हम किसके पास जाएँगे? अनंत जीवन की बातें तो तेरे पास हैं, हमने विश्‍वास किया और जान लिया है कि तू ही परमेश्‍वर का पवित्र जन है।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “क्या मैंने तुम बारहों को नहीं चुना? फिर भी तुममें से एक व्यक्‍ति शैतान है।” वह शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदा के विषय में कह रहा था जो बारहों में से एक था, क्योंकि वह यीशु को पकड़वाने पर था। इन बातों के बाद यीशु गलील में ही फिरता रहा। वह यहूदिया में फिरना नहीं चाहता था क्योंकि यहूदी उसको मार डालने की खोज में थे। यहूदियों का झोपड़ियों का पर्व निकट था। इसलिए उसके भाइयों ने उससे कहा, “यहाँ से निकलकर यहूदिया को चला जा ताकि तेरे शिष्य भी उन कार्यों को देखें जिन्हें तू करता है। क्योंकि ऐसा कोई नहीं है जो प्रसिद्ध होना चाहे और छिपकर कार्य करे। यदि तू इन कार्यों को करता है तो अपने आपको जगत पर प्रकट कर।” क्योंकि उसके भाई भी उस पर विश्‍वास नहीं करते थे। अतः यीशु ने उनसे कहा, “मेरा समय अभी नहीं आया, परंतु तुम्हारे लिए सब समय उपयुक्‍त है। संसार तुमसे घृणा नहीं कर सकता; परंतु वह मुझसे घृणा करता है, क्योंकि मैं उसके विरुद्ध साक्षी देता हूँ कि उसके कार्य बुरे हैं। तुम पर्व में जाओ। मैं इस पर्व में नहीं जाऊँगा, क्योंकि मेरा समय अब तक पूर्ण रूप से नहीं आया।” और ये बातें कहकर वह गलील में ही ठहरा रहा। परंतु जब उसके भाई पर्व में चले गए तो वह भी चला गया, परंतु खुलेआम नहीं, मानो गुप्‍त रीति से। यहूदी उसे पर्व में यह कहते हुए ढूँढ़ रहे थे, “वह कहाँ है?” और लोगों के बीच उसके विषय में बहुत कानाफूसी होने लगी। कुछ कह रहे थे, “वह अच्छा व्यक्‍ति है।” परंतु कुछ कह रहे थे, “नहीं, बल्कि वह लोगों को भरमाता है।” फिर भी यहूदियों के भय के कारण कोई भी उसके विषय में खुलकर नहीं बोल रहा था। अभी आधा पर्व ही बीता था कि यीशु मंदिर-परिसर में जाकर उपदेश देने लगा। तब यहूदी चकित होकर कहने लगे, “बिना सीखे वह कैसे विद्या जानता है?” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “यह शिक्षा मेरी अपनी नहीं बल्कि मेरे भेजनेवाले की है। यदि कोई परमेश्‍वर की इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस शिक्षा के विषय में जान जाएगा कि यह परमेश्‍वर की ओर से है या मैं अपनी ओर से बोलता हूँ। जो अपनी ओर से बोलता है वह अपनी प्रशंसा चाहता है, परंतु जो अपने भेजनेवाले की प्रशंसा चाहता है वह सच्‍चा है, और उसमें कोई अधर्म नहीं। क्या मूसा ने तुम्हें व्यवस्था नहीं दी? फिर भी तुममें से कोई भी व्यवस्था का पालन नहीं करता। तुम मुझे क्यों मार डालना चाहते हो?” लोगों ने उत्तर दिया, “तुझमें दुष्‍टात्मा है। तुझे कौन मार डालना चाहता है?” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैंने एक कार्य किया और तुम सब आश्‍चर्य करते हो। इसी कारण मूसा ने तुम्हें ख़तना की विधि दी है (ऐसा नहीं कि यह मूसा की ओर से है परंतु यह पूर्वजों से है), और तुम सब्त के दिन मनुष्य का ख़तना करते हो। यदि सब्त के दिन मनुष्य का ख़तना इसलिए किया जाता है कि मूसा की व्यवस्था का उल्‍लंघन न हो, तो तुम मुझसे इस बात पर क्यों रुष्‍ट होते हो कि सब्त के दिन मैंने एक मनुष्य को पूर्ण रूप से स्वस्थ कर दिया? बाहरी रूप देखकर न्याय मत करो, बल्कि धार्मिकता से न्याय करो।” तब यरूशलेम के कुछ लोग कहने लगे, “क्या यह वही नहीं, जिसे वे मार डालना चाहते हैं? और देखो वह खुलकर बोल रहा है और कोई उससे कुछ नहीं कहता। कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिकारियों ने सचमुच जान लिया कि यही मसीह है? इसको तो हम जानते हैं कि यह कहाँ का है, परंतु जब मसीह आएगा तो कोई नहीं जानेगा कि वह कहाँ का है।” तब यीशु ने मंदिर-परिसर में उपदेश देते हुए पुकारकर कहा, “तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ। मैं अपने आप से नहीं आया, परंतु जिसने मुझे भेजा है वह सच्‍चा है, जिसे तुम नहीं जानते। मैं उसे जानता हूँ, क्योंकि मैं उसकी ओर से हूँ और उसी ने मुझे भेजा है।” अतः उन्होंने उसे पकड़ना चाहा, फिर भी किसी ने उस पर हाथ नहीं डाला, क्योंकि अभी उसका समय नहीं आया था। भीड़ में से बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया और कहने लगे, “जब मसीह आएगा तो क्या वह इससे अधिक चिह्‍न दिखाएगा जो इसने दिखाए?” फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में यह कानाफूसी करते हुए सुना। फिर मुख्य याजकों और फरीसियों ने उसे पकड़ने के लिए सिपाहियों को भेजा। तब यीशु ने कहा, “अभी थोड़े समय के लिए मैं तुम्हारे साथ हूँ फिर मैं अपने भेजनेवाले के पास चला जाऊँगा। तुम मुझे ढूँढ़ोगे परंतु मुझे नहीं पाओगे, और जहाँ मैं होऊँगा वहाँ तुम नहीं आ सकते।” तब यहूदियों ने आपस में कहा, “यह कहाँ जाने वाला है कि हम उसे नहीं पाएँगे? कहीं वह यूनानियों में तितर-बितर हुए लोगों के पास जाकर यूनानियों को भी सिखाने वाला तो नहीं है? यह कैसी बात है जो उसने कही, ‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे परंतु मुझे नहीं पाओगे, और जहाँ मैं होऊँगा वहाँ तुम नहीं आ सकते’?” अब पर्व के अंतिम दिन जो मुख्य दिन था, यीशु खड़ा हुआ और पुकारकर कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो वह मेरे पास आए और पीए। जो मुझ पर विश्‍वास करता है, जैसा पवित्रशास्‍त्र कहता है, उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।” यह बात उसने उस आत्मा के विषय में कही, जो उस पर विश्‍वास करनेवालों को मिलने वाला था, क्योंकि अब तक यीशु के महिमान्वित न होने के कारण आत्मा नहीं आया था। तब भीड़ में से कुछ लोग इन बातों को सुनकर कहने लगे, “सचमुच यह वही भविष्यवक्‍ता है।” दूसरे कह रहे थे, “यही मसीह है।” परंतु कुछ और लोग कहने लगे, “क्या मसीह गलील से आएगा? क्या पवित्रशास्‍त्र ने नहीं कहा कि मसीह दाऊद के वंश से और उस बैतलहम गाँव से आएगा, जहाँ का दाऊद था?” अतः उसके कारण लोगों में फूट पड़ गई। उनमें से कुछ उसे पकड़ना चाहते थे परंतु किसी ने उस पर हाथ नहीं डाला। तब सिपाही मुख्य याजकों और फरीसियों के पास आए। उन्होंने पहरेदारों से पूछा, “तुम उसे क्यों नहीं लाए?” सिपाहियों ने उत्तर दिया, “किसी मनुष्य ने इस प्रकार की बातें कभी नहीं कीं।” इस पर फरीसियों ने उनसे कहा, “क्या तुम भी भरमाए गए हो? क्या अधिकारियों या फरीसियों में से किसी ने उस पर विश्‍वास किया? परंतु यह भीड़ जो व्यवस्था नहीं जानती, शापित है।” नीकुदेमुस ने, जो यीशु के पास पहले आया था और उनमें से एक था, उनसे कहा, “क्या हमारी व्यवस्था किसी मनुष्य को जब तक पहले उसकी सुन न ले और जान न ले कि उसने क्या किया है, दोषी ठहराती है?” इस पर उन्होंने उससे कहा, “क्या तू भी गलील का है? ढूँढ़ और देख, गलील में से कोई भविष्यवक्‍ता उत्पन्‍न‍ नहीं होता।” [तब सब अपने-अपने घर चले गए। परंतु यीशु जैतून पहाड़ पर चला गया। भोर को वह फिर मंदिर-परिसर में आया; सब लोग उसके पास आने लगे, और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। तब शास्‍त्री और फरीसी एक स्‍त्री को लाए जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसे बीच में खड़ा करके यीशु से कहा, “हे गुरु, यह स्‍त्री व्यभिचार करते हुए पकड़ी गई है, और व्यवस्था में मूसा ने हमें ऐसी स्‍त्रियों पर पथराव करने की आज्ञा दी है। इस पर तू क्या कहता है?” वे यह बात उसे परखने के लिए कह रहे थे ताकि उस पर दोष लगा सकें। परंतु यीशु नीचे झुककर अपनी उँगली से भूमि पर लिखने लगा। जब वे उससे पूछते ही रहे तो उसने उठकर उनसे कहा, “तुममें से जो निष्पाप हो वही पहले उस पर पत्थर फेंके।” और वह फिर नीचे झुककर भूमि पर लिखने लगा। जब लोगों ने यह सुना, तो बड़ों से आरंभ करके सब एक-एक करके जाने लगे और यीशु अकेला रह गया, और वह स्‍त्री बीच में खड़ी रह गई। फिर यीशु ने उठकर उससे कहा, “हे नारी, वे कहाँ हैं? क्या किसी ने तुझे दंड नहीं दिया?” उसने कहा, “किसी ने नहीं, प्रभु।” तब यीशु ने कहा, “मैं भी तुझे दंड नहीं देता। जा और अब से फिर पाप मत करना।” ] यीशु ने लोगों से फिर कहा, “जगत की ज्योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह कभी अंधकार में नहीं चलेगा बल्कि जीवन की ज्योति पाएगा।” तब फरीसियों ने उससे कहा, “तू स्वयं अपने विषय में साक्षी देता है। तेरी साक्षी सच्‍ची नहीं है।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “भले ही मैं अपने विषय में साक्षी दूँ फिर भी मेरी साक्षी सच्‍ची है, क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं कहाँ से आया हूँ और कहाँ जा रहा हूँ। परंतु तुम नहीं जानते कि मैं कहाँ से आया हूँ या कहाँ जा रहा हूँ। तुम शरीर के अनुसार न्याय करते हो, मैं किसी का न्याय नहीं करता। और यदि मैं न्याय करूँ भी तो मेरा न्याय सच्‍चा है, क्योंकि मैं अकेला नहीं हूँ बल्कि इसमें मैं हूँ और पिता है जिसने मुझे भेजा है। फिर तुम्हारी व्यवस्था में भी लिखा है कि दो मनुष्यों की साक्षी सच्‍ची है। मैं अपने विषय में साक्षी देता हूँ, और पिता भी जिसने मुझे भेजा है, मेरे विषय में साक्षी देता है।” तब वे उससे कहने लगे, “तेरा पिता कहाँ है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तुम न तो मुझे और न ही मेरे पिता को जानते हो। यदि तुम मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते।” उसने ये बातें मंदिर-परिसर में उपदेश देते हुए कोषागार के पास कहीं; और किसी ने भी उसे नहीं पकड़ा, क्योंकि अभी उसका समय नहीं आया था। उसने फिर उनसे कहा, “मैं जा रहा हूँ और तुम मुझे ढूँढ़ोगे और अपने पाप में मर जाओगे। जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ तुम नहीं आ सकते।” अतः यहूदी कहने लगे, “कहीं वह अपने आपको मार तो नहीं डालेगा? क्योंकि वह कहता है, ‘जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ तुम नहीं आ सकते।’ ” तब उसने उनसे कहा, “तुम नीचे के हो और मैं ऊपर का हूँ। तुम इस संसार के हो, मैं इस संसार का नहीं हूँ। मैंने तुमसे कहा कि तुम अपने पापों में मर जाओगे; क्योंकि यदि तुम विश्‍वास नहीं करते कि मैं वही हूँ, तो तुम अपने पापों में मर जाओगे।” तब वे उससे कहने लगे, “तू कौन है?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं आरंभ से ही तुमसे क्या कहता आया हूँ? तुम्हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना है और निर्णय करना है। परंतु जिसने मुझे भेजा है वह सच्‍चा है, और जो बातें मैंने उससे सुनीं, वही जगत से कहता हूँ।” वे नहीं समझे कि वह उनसे पिता के विषय में कह रहा था। तब यीशु ने उनसे कहा, “जब तुम मनुष्य के पुत्र को ऊँचे पर चढ़ाओगे, तब तुम जानोगे कि मैं वही हूँ, और मैं अपनी ओर से कुछ नहीं करता, बल्कि जैसे पिता ने मुझे सिखाया है, वैसे ही बोलता हूँ। जिसने मुझे भेजा वह मेरे साथ है। उसने मुझे अकेला नहीं छोड़ा क्योंकि मैं सदैव वही कार्य करता हूँ, जिनसे वह प्रसन्‍न होता है।” जब वह इन बातों को कह रहा था तो बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया। तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्होंने उस पर विश्‍वास किया था, कहा, “यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे तो सचमुच मेरे शिष्य ठहरोगे, और तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।” इस पर उन्होंने उससे कहा, “हम अब्राहम के वंशज हैं और कभी किसी के दासत्व में नहीं रहे। फिर तू कैसे कहता है, ‘तुम स्वतंत्र हो जाओगे’?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि प्रत्येक जो पाप करता है, वह पाप का दास है। दास सदा घर में नहीं रहता, परंतु पुत्र सदा रहता है। इसलिए यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करता है, तो तुम वास्तव में स्वतंत्र हो जाओगे। मैं जानता हूँ कि तुम अब्राहम के वंशज हो। फिर भी तुम मुझे मार डालना चाहते हो, क्योंकि मेरा वचन तुम्हारे हृदय में स्थान नहीं पाता। मैं वही कहता हूँ जो मैंने अपने पिता के यहाँ देखा है, और तुम वही करते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।” इस पर उन्होंने उससे कहा, “हमारा पिता अब्राहम है।” यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम अब्राहम की संतान होते, तो तुम अब्राहम के समान कार्य करते। परंतु अब तुम मुझे मार डालना चाहते हो, अर्थात् उस मनुष्य को जिसने तुम्हें वह सत्य बताया है जो उसने परमेश्‍वर से सुना। अब्राहम ने तो ऐसा नहीं किया। तुम अपने पिता के कार्य करते हो।” तब उन्होंने कहा, “हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक ही पिता है अर्थात् परमेश्‍वर।” यीशु ने उनसे कहा, “यदि परमेश्‍वर तुम्हारा पिता होता तो तुम मुझसे प्रेम रखते, क्योंकि मैं परमेश्‍वर की ओर से आया और यहाँ हूँ; मैं अपने आप से नहीं आया बल्कि उसी ने मुझे भेजा है। क्या कारण है कि तुम मेरी बात नहीं समझते? इसलिए कि तुम मेरा वचन सुन नहीं सकते। तुम अपने पिता शैतान की ओर से हो और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह आरंभ से ही हत्यारा है और सत्य पर कभी स्थिर नहीं रहा, क्योंकि उसमें सत्य नहीं है। जब वह झूठ बोलता है तो अपने स्वभाव से बोलता है, क्योंकि वह झूठा है और झूठ का पिता है। परंतु इसलिए कि मैं सच बोलता हूँ, तुम मेरा विश्‍वास नहीं करते। तुममें से कौन मुझे पाप का दोषी ठहराता है? यदि मैं सच बोलता हूँ तो क्या कारण है कि तुम मेरा विश्‍वास नहीं करते? जो परमेश्‍वर की ओर से है वह परमेश्‍वर के वचनों को सुनता है। तुम इसलिए नहीं सुनते क्योंकि तुम परमेश्‍वर की ओर से नहीं हो।” इस पर यहूदियों ने उससे कहा, “क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है और तुझमें दुष्‍टात्मा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मुझमें दुष्‍टात्मा नहीं है, बल्कि मैं अपने पिता का आदर करता हूँ, और तुम मेरा निरादर करते हो। परंतु मैं अपनी महिमा नहीं चाहता; एक है जो चाहता है और न्याय करता है। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि यदि कोई मेरे वचन का पालन करेगा तो वह अनंत काल तक मृत्यु को नहीं देखेगा।” तब यहूदियों ने उससे कहा, “अब हम समझ गए कि तुझमें दुष्‍टात्मा है। अब्राहम मर गया और भविष्यवक्‍ता भी मर गए, परंतु तू कहता है, ‘यदि कोई मेरे वचन का पालन करेगा तो वह अनंत काल तक मृत्यु का स्वाद नहीं चखेगा।’ क्या तू हमारे पिता अब्राहम से भी बड़ा है, जो मर गया? भविष्यवक्‍ता भी तो मर गए। तू अपने आपको क्या समझता है?” यीशु ने उत्तर दिया, “यदि मैं अपने आपको महिमा दूँ तो मेरी महिमा कुछ भी नहीं है। मुझे महिमा देनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम अपना परमेश्‍वर कहते हो। तुमने उसे नहीं जाना, परंतु मैं उसे जानता हूँ। यदि मैं कहूँ कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्हारे समान झूठा ठहरूँगा। परंतु मैं उसे जानता हूँ और उसके वचन का पालन करता हूँ। तुम्हारा पिता अब्राहम मेरे दिन को देखने के लिए मगन था, और उसने देखा भी तथा आनंदित हुआ।” यहूदियों ने उससे कहा, “तू अभी पचास वर्ष का भी नहीं हुआ और तूने अब्राहम को देखा है?” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच सच कहता हूँ, इससे पहले कि अब्राहम उत्पन्‍न‍ हुआ, मैं हूँ।” तब उन्होंने उसे मारने के लिए पत्थर उठाए, परंतु यीशु छिपकर मंदिर से बाहर निकल गया। फिर जाते हुए यीशु ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म से अंधा था। उसके शिष्यों ने उससे पूछा, “रब्बी, किसने पाप किया कि यह अंधा जन्मा, इसने या इसके माता-पिता ने?” यीशु ने उत्तर दिया, “न तो इसने पाप किया और न ही इसके माता-पिता ने, परंतु यह इसलिए हुआ कि इसमें परमेश्‍वर के कार्य प्रकट हों। हमें उसके कार्यों को, जिसने मुझे भेजा है, दिन ही दिन में करना आवश्यक है, क्योंकि वह रात आने वाली है जब कोई कार्य नहीं कर सकता। जब तक मैं जगत में हूँ, इस जगत की ज्योति हूँ।” यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और उस मिट्टी को उस अंधे व्यक्‍ति की आँखों पर लगाया और उससे कहा, “जा, शीलोह के कुंड में धो ले” (शीलोह का अर्थ है भेजा हुआ)। अतः उसने जाकर धोया और देखता हुआ लौट आया। तब उसके पड़ोसी और वे, जिन्होंने उसे पहले एक भिखारी के रूप में देखा था, कहने लगे, “क्या यह वही नहीं, जो बैठकर भीख माँगा करता था?” कुछ लोग कह रहे थे, “यह वही है।” अन्य लोग कह रहे थे, “नहीं, परंतु यह उसी के जैसा दिखता है।” उसने कहा, “मैं वही हूँ।” तब वे उससे पूछने लगे, “फिर तेरी आँखें कैसे खुल गईं?” उसने उत्तर दिया, “यीशु नामक एक मनुष्य ने मिट्टी सानकर मेरी आँखों पर लगाई और मुझसे कहा कि शीलोह के कुंड में जा और धो ले। अतः जब मैंने जाकर धोया तो मैं देखने लगा।” उन्होंने उससे कहा, “वह कहाँ है?” उसने कहा, “मैं नहीं जानता।” वे उसको जो पहले अंधा था, फरीसियों के पास ले गए। जिस दिन यीशु ने मिट्टी सानकर उसकी आँखें खोली थीं, वह सब्त का दिन था। फरीसियों ने उससे फिर पूछा कि वह कैसे देखने लगा। तब उसने उनसे कहा, “उसने मेरी आँखों पर मिट्टी लगाई, फिर मैंने धोया और अब मैं देखता हूँ।” तब फरीसियों में से कुछ लोग कहने लगे, “यह मनुष्य परमेश्‍वर की ओर से नहीं है क्योंकि वह सब्त के दिन का पालन नहीं करता।” परंतु दूसरे कहने लगे, “एक पापी मनुष्य ऐसे चिह्‍न कैसे दिखा सकता है?” और उनके बीच में फूट पड़ गई। तब उन्होंने उस अंधे व्यक्‍ति से फिर पूछा, “उसके विषय में तू क्या कहता है, क्योंकि उसने तेरी आँखें खोली हैं?” उसने कहा, “वह भविष्यवक्‍ता है।” यहूदियों ने उसकी इस बात पर कि वह अंधा था और अब देखने लगा, तब तक विश्‍वास नहीं किया जब तक कि उस दृष्‍टि पानेवाले के माता-पिता को बुलवाकर उनसे यह पूछ न लिया, “क्या यह तुम्हारा पुत्र है, जिसको तुम कहते हो कि यह अंधा जन्मा था? फिर अब यह कैसे देखता है?” तब उसके माता-पिता ने उत्तर दिया, “हम जानते हैं कि यह हमारा पुत्र है और अंधा जन्मा था; परंतु हम नहीं जानते कि अब यह कैसे देखता है और न ही जानते हैं कि इसकी आँखें किसने खोलीं। उसी से पूछ लो, वह सयाना है, वह स्वयं अपने विषय में बताएगा।” उसके माता-पिता ने ये बातें इसलिए कहीं क्योंकि वे यहूदियों से डरते थे; क्योंकि यहूदी पहले ही एकमत हो चुके थे कि यदि कोई यीशु को मसीह मानेगा तो वह आराधनालय से बाहर निकाल दिया जाएगा। इसलिए उसके माता-पिता ने कहा, “वह सयाना है, उससे पूछ लो।” तब उन्होंने उस मनुष्य को जो अंधा था दुबारा बुलाया और उससे कहा, “परमेश्‍वर को महिमा दे। हम जानते हैं कि वह मनुष्य पापी है।” इस पर उसने कहा, “वह पापी है या नहीं, मैं नहीं जानता। मैं एक बात जानता हूँ कि मैं अंधा था और अब देखता हूँ।” तब उन्होंने उससे पूछा, “तेरे साथ उसने क्या किया? उसने तेरी आँखें किस प्रकार खोलीं?” उसने उन्हें उत्तर दिया, “मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया परंतु तुमने नहीं सुना। तुम फिर से क्यों सुनना चाहते हो? क्या तुम भी उसके शिष्य बनना चाहते हो?” तब वे उसे बुरा-भला कहकर बोले, “तू ही उसका शिष्य है, परंतु हम तो मूसा के शिष्य हैं। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर ने मूसा से बातें कीं, परंतु हम इसको नहीं जानते कि कहाँ का है।” इस पर उस मनुष्य ने उनसे कहा, “यह तो सचमुच आश्‍चर्य की बात है कि तुम नहीं जानते कि वह कहाँ का है, फिर भी उसने मेरी आँखें खोल दीं। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर पापियों की नहीं सुनता, परंतु यदि कोई परमेश्‍वर का भक्‍त हो और उसकी इच्छा पर चलता हो, तो वह उसकी सुनता है। जगत के आरंभ से कभी सुनने में नहीं आया कि किसी ने अंधे जन्मे व्यक्‍ति की आँखें खोल दीं। यदि यह व्यक्‍ति परमेश्‍वर की ओर से नहीं होता, तो कुछ भी नहीं कर सकता था।” इस पर उन्होंने उससे कहा, “तू तो पूर्ण रूप से पापों में जन्मा है, और क्या तू हमें सिखाता है?” और उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया। जब यीशु ने सुना कि उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया है, तो उसने उससे मिलकर कहा, “क्या तू मनुष्य के पुत्र पर विश्‍वास करता है?” उसने उत्तर दिया, “महोदय! वह कौन है कि मैं उस पर विश्‍वास करूँ?” यीशु ने उससे कहा, “तूने उसे देखा है और जो तुझसे बात कर रहा है, वह वही है।” तब उसने कहा, “हे प्रभु! मैं विश्‍वास करता हूँ।” और उसने उसे दंडवत् किया। यीशु ने कहा, “मैं इस जगत में न्याय के लिए आया हूँ ताकि जो नहीं देखते वे देखें और जो देखते हैं वे अंधे हो जाएँ।” फरीसियों में से जो उसके साथ थे, उन्होंने यह सुनकर उससे कहा, “तो क्या हम भी अंधे हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम अंधे होते तो पापी न ठहरते; परंतु अब तुम कहते हो, ‘हम देखते हैं’, इसलिए तुम्हारा पाप बना रहता है। “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता बल्कि दूसरी ओर से चढ़ आता है, वह चोर और डाकू है। परंतु जो द्वार से प्रवेश करता है, वह भेड़ों का चरवाहा है। उसके लिए द्वारपाल द्वार खोल देता है और भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं। वह अपनी भेड़ों को नाम लेकर बुलाता है और उन्हें बाहर ले जाता है। जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल लेता है, तो उनके आगे-आगे चलता है और भेड़ें उसके पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसकी आवाज़ पहचानती हैं। परंतु वे पराए के पीछे कभी नहीं जाएँगी बल्कि उससे भागेंगी, क्योंकि वे परायों की आवाज़ नहीं पहचानतीं।” यीशु ने उनसे यह दृष्‍टांत कहा। परंतु वे नहीं समझे कि जिन बातों को वह उन्हें बता रहा था, वे क्या हैं। तब यीशु ने फिर कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि भेड़ों का द्वार मैं हूँ। “वे सब जो मुझसे पहले आए, चोर और डाकू हैं, परंतु भेड़ों ने उनकी नहीं सुनी। द्वार मैं हूँ। यदि कोई मेरे द्वारा प्रवेश करेगा तो वह उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। चोर केवल चोरी करने, हत्या करने और नाश करने के लिए आता है; मैं इसलिए आया हूँ कि वे जीवन पाएँ और बहुतायत से पाएँ। “अच्छा चरवाहा मैं हूँ। अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है। मज़दूर, चरवाहा नहीं है, न ही भेड़ें उसकी अपनी हैं। वह जब भेड़िए को आते देखता है तो भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िया उन्हें पकड़कर तितर-बितर कर देता है; क्योंकि वह मज़दूर है और उसे भेड़ों की चिंता नहीं। अच्छा चरवाहा मैं हूँ। मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, जिस प्रकार पिता मुझे जानता है और मैं पिता को जानता हूँ; और मैं भेड़ों के लिए अपना प्राण देता हूँ। मेरी और भी भेड़ें हैं जो इस भेड़शाला की नहीं हैं। मुझे उनको भी लाना आवश्यक है और वे मेरी आवाज़ सुनेंगी, तब एक ही झुंड होगा और एक ही चरवाहा। “पिता मुझसे इसलिए प्रेम रखता है क्योंकि मैं अपना प्राण देता हूँ, जिससे कि मैं उसे फिर ले लूँ। कोई उसे मुझसे नहीं छीनता, बल्कि मैं अपने आप ही उसे देता हूँ। मेरे पास उसे देने का अधिकार है और उसे फिर लेने का भी अधिकार है। यह आज्ञा मुझे अपने पिता से मिली है।” इन बातों के कारण यहूदियों में फिर से फूट पड़ गई। उनमें से बहुत से लोग कहने लगे, “उसमें दुष्‍टात्मा है और वह पागल है। तुम उसकी क्यों सुनते हो?” अन्य लोग कह रहे थे, “ये बातें दुष्‍टात्माग्रस्त की नहीं हैं। क्या दुष्‍टात्मा अंधों की आँखें खोल सकती है?” उस समय यरूशलेम में समर्पण-पर्व मनाया जा रहा था। शीतकाल का समय था, और यीशु मंदिर-परिसर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था। तब यहूदियों ने उसे घेर लिया और उससे पूछने लगे, “तू हमारे मन को कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है तो हमें स्पष्‍ट बता दे।” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैंने तुम्हें बता दिया परंतु तुम विश्‍वास नहीं करते। जो कार्य मैं अपने पिता के नाम से करता हूँ वे ही मेरी साक्षी देते हैं। परंतु तुम विश्‍वास नहीं करते, क्योंकि तुम मेरी भेड़ों में से नहीं हो। मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं, और मैं उन्हें अनंत जीवन देता हूँ; वे कभी भी नाश न होंगी और न कोई उन्हें मेरे हाथ से छीनेगा। मेरा पिता, जिसने उन्हें मुझे सौंपा है, सब से महान है और उन्हें पिता के हाथ से कोई नहीं छीन सकता। मैं और पिता एक हैं।” यहूदियों ने उस पर पथराव करने के लिए फिर से पत्थर उठा लिए। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “मैंने तुम्हें पिता की ओर से बहुत से भले कार्य दिखाए। उनमें से किस कार्य के कारण तुम मुझ पर पथराव कर रहे हो?” यहूदियों ने उसे उत्तर दिया, “हम भले कार्य के लिए नहीं बल्कि परमेश्‍वर की निंदा के कारण तुझ पर पथराव कर रहे हैं, क्योंकि तू मनुष्य होकर अपने आपको परमेश्‍वर बताता है।” इस पर यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुम्हारी व्यवस्था में यह नहीं लिखा है: मैंने कहा, ‘तुम ईश्‍वर हो’? “यदि उसने उन्हें ईश्‍वर कहा जिनके पास परमेश्‍वर का वचन आया (और पवित्रशास्‍त्र की बात को मिटाया नहीं जा सकता), तो जिसे पिता ने पवित्र किया और जगत में भेजा, उसे तुम कहते हो, ‘तू परमेश्‍वर की निंदा कर रहा है।’ क्योंकि मैंने कहा, ‘मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ’? यदि मैं अपने पिता के कार्य नहीं करता, तो मेरा विश्‍वास मत करो। परंतु यदि मैं करता हूँ, तो भले ही तुम मेरा विश्‍वास न करो परंतु उन कार्यों का तो विश्‍वास करो, ताकि तुम जानो और समझो कि पिता मुझमें है और मैं पिता में।” अतः उन्होंने उसे फिर से पकड़ने का प्रयत्‍न किया, परंतु वह उनके हाथ से बच निकला। वह फिर से यरदन के पार उस स्थान पर चला गया जहाँ यूहन्‍ना पहले बपतिस्मा देता था, और वहीं रहा। तब बहुत से लोग उसके पास आए और कहने लगे, “यूहन्‍ना ने भले ही कोई चिह्‍न नहीं दिखाया, परंतु जो कुछ यूहन्‍ना ने इसके विषय में कहा, वह सब सच था।” और वहाँ बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया। मरियम और उसकी बहन मार्था के गाँव बैतनिय्याह का लाज़र नामक एक व्यक्‍ति बीमार था। यह वही मरियम थी जिसने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पैरों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाज़र बीमार था। इसलिए इन बहनों ने उसके पास यह कहला भेजा, “प्रभु! देख, जिससे तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।” यह सुनकर यीशु ने कहा, “यह बीमारी मृत्यु की नहीं, बल्कि परमेश्‍वर की महिमा के लिए है, ताकि इसके द्वारा परमेश्‍वर के पुत्र की महिमा हो।” यीशु, मार्था और उसकी बहन और लाज़र से प्रेम रखता था। फिर जब उसने सुना कि वह बीमार है, तो जिस स्थान पर वह था, वहाँ दो दिन और रहा। तब इसके बाद उसने अपने शिष्यों से कहा, “आओ, हम फिर यहूदिया को चलें।” शिष्यों ने उससे कहा, “रब्बी, अभी तो यहूदी तुझ पर पथराव करना चाह रहे थे, और क्या तू फिर वहीं जा रहा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यदि कोई दिन में चलता है तो ठोकर नहीं खाता, क्योंकि वह इस जगत की ज्योति को देखता है। परंतु यदि कोई रात में चलता है तो ठोकर खाता है, क्योंकि उसमें ज्योति नहीं है।” उसने ये बातें कहीं और इसके बाद उनसे कहा, “हमारा मित्र लाज़र सो गया है, और मैं उसे जगाने के लिए जा रहा हूँ।” तब शिष्यों ने उससे कहा, “प्रभु, यदि वह सो गया है तो बच जाएगा।” यीशु ने उसकी मृत्यु के विषय में कहा था। परंतु उन्होंने समझा कि वह विश्राम की नींद के विषय में कह रहा है। तब यीशु ने उनसे स्पष्‍ट कहा, “लाज़र मर गया, और मैं तुम्हारे कारण आनंदित हूँ कि मैं वहाँ नहीं था, जिससे कि तुम विश्‍वास करो। आओ हम उसके पास चलें।” इस पर थोमा ने, जो दिदुमुस भी कहलाता है, अपने साथी शिष्यों से कहा, “आओ, हम भी उसके साथ मरने चलें।” जब यीशु वहाँ पहुँचा तो उसे पता चला कि लाज़र को कब्र में रखे चार दिन हो गए हैं। बैतनिय्याह, यरूशलेम से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर था। बहुत से यहूदी मार्था और मरियम के पास आए थे ताकि उन्हें उनके भाई के विषय में सांत्वना दें। जब मार्था ने सुना कि यीशु आ रहा है तो वह उससे मिलने गई, परंतु मरियम घर में ही बैठी रही। मार्था ने यीशु से कहा, “प्रभु, यदि तू यहाँ होता तो मेरा भाई नहीं मरता। परंतु अब भी मैं जानती हूँ कि जो कुछ तू परमेश्‍वर से माँगेगा, परमेश्‍वर तुझे देगा।” यीशु ने उससे कहा, “तेरा भाई फिर जी उठेगा।” मार्था ने उससे कहा, “मैं जानती हूँ कि अंतिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह फिर जी उठेगा।” यीशु ने उससे कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ। जो मुझ पर विश्‍वास करता है, चाहे वह मर भी जाए फिर भी जीएगा, और जो जीवित है और मुझ पर विश्‍वास करता है, वह अनंत काल तक कभी नहीं मरेगा। क्या तू यह विश्‍वास करती है?” उसने उससे कहा, “हाँ प्रभु, मैं तो विश्‍वास कर चुकी हूँ कि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है जो जगत में आनेवाला था।” यह कहकर वह चली गई और अपनी बहन मरियम को यह कहकर चुपके से बुलाया, “गुरु यहीं है और तुझे बुला रहा है।” जब उसने यह सुना तो वह शीघ्र उठी और उसके पास जाने लगी। यीशु अभी गाँव में नहीं पहुँचा था, बल्कि वह अब तक उसी स्थान पर था जहाँ मार्था उससे मिली थी। तब जो यहूदी मरियम के साथ घर में थे और उसे सांत्वना दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम शीघ्र उठकर बाहर चली गई, उसके पीछे चल दिए; क्योंकि उन्होंने सोचा कि वह कब्र पर रोने के लिए जा रही है। जब मरियम वहाँ पहुँची जहाँ यीशु था तो उसे देखकर उसके पैरों पर गिर पड़ी और उससे कहने लगी, “प्रभु, यदि तू यहाँ होता तो मेरा भाई नहीं मरता।” यीशु ने जब उसको और उसके साथ आए हुए यहूदियों को रोते हुए देखा, तो वह आत्मा में अत्यंत व्यथित और व्याकुल हो गया, और कहा, “तुमने उसे कहाँ रखा है?” उन्होंने उससे कहा, “प्रभु, आ और देख ले।” यीशु रो पड़ा। तब यहूदी कहने लगे, “देखो! वह उससे कितनी प्रीति रखता था।” परंतु उनमें से कुछ लोगों ने कहा, “जिसने अंधे व्यक्‍ति की आँखें खोलीं, क्या वह यह नहीं कर सका कि यह मनुष्य न मरता?” तब यीशु फिर से मन ही मन में अत्यंत व्यथित होकर कब्र पर आया। वह एक गुफा थी, और उस पर एक पत्थर रखा हुआ था। यीशु ने कहा, “पत्थर को हटाओ।” मृतक की बहन, मार्था ने उससे कहा, “प्रभु, अब तो उसमें से दुर्गंध आती है, क्योंकि यह चौथा दिन है।” यीशु ने उससे कहा, “क्या मैंने तुझसे नहीं कहा कि यदि तू विश्‍वास करेगी तो परमेश्‍वर की महिमा देखेगी?” तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया । फिर यीशु ने अपनी आँखें ऊपर उठाईं और कहा, “हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मेरी सुन ली। मैं जानता था कि तू सदैव मेरी सुनता है; फिर भी चारों ओर खड़े इन लोगों के कारण मैंने यह कहा, ताकि ये विश्‍वास करें कि तूने मुझे भेजा है।” और यह कहकर उसने ऊँची आवाज़ से पुकारा, “हे लाज़र, बाहर आ।” जो मर गया था, वह कफ़न से हाथ और पैर बँधे हुए निकल आया, और उसका चेहरा अंगोछे से लिपटा हुआ था। यीशु ने उनसे कहा, “उसे खोल दो और जाने दो।” तब जो यहूदी मरियम के पास आए थे और जिन्होंने यीशु के इस कार्य को देखा था, उनमें से बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया। परंतु उनमें से कुछ ने फरीसियों के पास जाकर उन्हें जो कुछ यीशु ने किया था, बता दिया। तब मुख्य याजकों और फरीसियों ने महासभा बुलाई और कहने लगे, “हम क्या कर रहे हैं? यह मनुष्य तो बहुत चिह्‍न दिखा रहा है। यदि हम उसे ऐसे ही छोड़ दें तो सब उस पर विश्‍वास करेंगे, तब रोमी आएँगे और हमारा स्थान और जाति दोनों को छीन लेंगे।” परंतु उनमें से काइफा नामक एक व्यक्‍ति ने, जो उस वर्ष महायाजक था, उनसे कहा, “तुम कुछ भी नहीं जानते, और न ही तुम समझते हो कि तुम्हारे लिए यही भला है कि हमारे लोगों के लिए एक मनुष्य मरे और संपूर्ण जाति नाश न हो।” परंतु उसने यह अपनी ओर से नहीं कहा, बल्कि उस वर्ष महायाजक होते हुए उसने भविष्यवाणी की कि उस जाति के लिए यीशु मरने वाला है, और न केवल उस जाति के लिए बल्कि इसलिए भी कि परमेश्‍वर की तितर-बितर हुई संतानों को एक कर दे। अतः उसी दिन से वे उसे मार डालने के लिए योजना बनाने लगे। इसलिए यीशु अब यहूदियों के बीच में खुलकर नहीं फिरा, बल्कि वहाँ से जंगल के निकटवर्ती क्षेत्र के इफ्राईम नामक नगर में चला गया और अपने शिष्यों के साथ वहीं रहा। अब यहूदियों के फसह का पर्व निकट था, और फसह से पहले बहुत से लोग ग्रामीण क्षेत्र से यरूशलेम को गए ताकि अपने आपको शुद्ध करें। अतः वे यीशु को ढूँढ़ने लगे और मंदिर-परिसर में खड़े होकर आपस में कहने लगे, “तुम क्या सोचते हो? क्या वह पर्व में नहीं आएगा?” मुख्य याजकों और फरीसियों ने यह आदेश दे रखा था कि यदि कोई जानता है कि वह कहाँ है तो बताए, ताकि वे उसे पकड़ सकें। फसह के पर्व से छः दिन पहले यीशु बैतनिय्याह में आया, जहाँ लाज़र था, जिसे यीशु ने मृतकों में से जिलाया था। तब उन्होंने उसके लिए वहाँ भोजन तैयार किया और मार्था परोसने लगी, और जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे, लाज़र उनमें से एक था। तब मरियम ने लगभग तीन सौ ग्राम शुद्ध जटामांसी का बहुमूल्य इत्र लेकर यीशु के पैरों पर मला, और उसके पैरों को अपने बालों से पोंछा; तथा इत्र की सुगंध से घर भर गया। परंतु यहूदा इस्करियोती नामक उसका एक शिष्य, जो उसे पकड़वाने पर था, कहने लगा, “यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर कंगालों को क्यों नहीं दिया गया?” उसने यह इसलिए नहीं कहा कि उसे कंगालों की चिंता थी, बल्कि इसलिए कि वह चोर था; उसके पास पैसों की थैली रहती थी और जो उसमें डाला जाता था, वह उसे निकाल लिया करता था। इस पर यीशु ने कहा, “उसे छोड़ दे, उसने मेरे गाड़े जाने के दिन के लिए इसे रखा था। क्योंकि कंगाल तो तुम्हारे साथ सदा रहेंगे, परंतु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा।” जब यहूदियों की बड़ी भीड़ ने जान लिया कि यीशु वहाँ है, तो वे न केवल यीशु के कारण आए बल्कि इसलिए भी कि लाज़र को देखें, जिसे उसने मृतकों में से जिलाया था। तब मुख्य याजकों ने लाज़र को भी मार डालने की योजना बनाई, क्योंकि उसके कारण बहुत से यहूदी उनसे अलग होकर यीशु पर विश्‍वास करने लगे थे। अगले दिन पर्व में आई बड़ी भीड़ ने जब यह सुना कि यीशु यरूशलेम में आ रहा है, तो लोग खजूर की टहनियाँ लेकर उससे मिलने निकले और चिल्‍लाने लगे: होशन्‍ना! धन्य है इस्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है। फिर गधे का एक बच्‍चा पाकर यीशु उस पर बैठ गया, जैसा लिखा है: हे सिय्योन की बेटी, मत डर! देख, तेरा राजा गधी के बच्‍चे पर सवार होकर आ रहा है। उसके शिष्य पहले तो इन बातों को नहीं समझे, परंतु जब यीशु की महिमा हुई तब उन्हें स्मरण हुआ कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं और लोगों ने उसके साथ ऐसा ही किया। तब वे लोग साक्षी देने लगे, जो उस समय उसके साथ थे जब उसने लाज़र को कब्र से बुलाया और उसे मृतकों में से जिलाया था। इस कारण लोग उससे मिलने आए क्योंकि उन्होंने सुना था कि उसने यह चिह्‍न दिखाया है। तब फरीसियों ने आपस में कहा, “तुम देखते हो कि हमसे कुछ नहीं बन पड़ता; देखो, संसार उसके पीछे चल पड़ा है।” अब पर्व में आराधना करने के लिए आए लोगों में से कुछ यूनानी थे। अतः ये लोग फिलिप्पुस के पास आए जो गलील के बैतसैदा का था और उससे विनती करने लगे, “महोदय, हम यीशु से मिलना चाहते हैं।” फिलिप्पुस ने जाकर अंद्रियास को बताया; तब फिलिप्पुस और अंद्रियास ने जाकर यीशु को बताया। इस पर यीशु ने उनसे कहा, “समय आ गया है कि मनुष्य के पुत्र की महिमा हो। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जब तक गेहूँ का दाना मिट्टी में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है; परंतु जब वह मर जाता है, तो बहुत फल लाता है। जो अपने प्राण को प्रिय जानता है वह उसे गँवाता है, और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है, वह उसे अनंत जीवन के लिए बचाए रखेगा। यदि कोई मेरी सेवा करे तो मेरे पीछे हो ले, और जहाँ मैं हूँ वहाँ मेरा वह सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे तो पिता उसका सम्मान करेगा। “अब मेरा जी व्याकुल है। फिर मैं क्या कहूँ, ‘हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा’? परंतु मैं इसी कारण इस घड़ी तक पहुँचा हूँ। हे पिता, अपने नाम की महिमा कर।” तब आकाश से एक आवाज़ आई, “मैंने उसकी महिमा की है और फिर उसकी महिमा करूँगा।” तब जो लोग खड़े हुए थे, यह सुनकर कहने लगे, “गर्जन हुई है।” दूसरों ने कहा, “किसी स्वर्गदूत ने उससे बात की है।” इस पर यीशु ने कहा, “यह आवाज़ मेरे लिए नहीं बल्कि तुम्हारे लिए आई है। अब इस संसार के न्याय का समय है, इस संसार के शासक को अब बाहर निकाल दिया जाएगा; और यदि मैं पृथ्वी से ऊँचे पर चढ़ाया जाऊँगा, तो सब को अपनी ओर खींचूँगा।” वह यह बात संकेत देते हुए कह रहा था कि किस प्रकार की मृत्यु से वह मरने जा रहा है। इस पर लोगों ने उससे कहा, “हमने व्यवस्था में सुना है कि मसीह सदा काल तक बना रहेगा, फिर तू कैसे कहता है कि मनुष्य के पुत्र का ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है? यह मनुष्य का पुत्र कौन है?” तब यीशु ने उनसे कहा, “ज्योति अभी थोड़े समय के लिए तुम्हारे बीच में है। जब तक ज्योति तुम्हारे पास है तब तक चलते रहो, कहीं ऐसा न हो कि अंधकार तुम्हें आ घेरे; जो अंधकार में चलता है वह नहीं जानता कि कहाँ जाता है। जब तक ज्योति तुम्हारे पास है ज्योति पर विश्‍वास करो, जिससे कि तुम ज्योति की संतान बन जाओ।” यीशु ने ये बातें कहीं और वह जाकर उनसे छिप गया। यद्यपि उसने उनके सामने इतने चिह्‍न दिखाए थे, फिर भी वे उस पर विश्‍वास नहीं कर रहे थे, ताकि यशायाह भविष्यवक्‍ता का वह वचन पूरा हो जो उसने कहा: हे प्रभु, हमारे संदेश पर किसने विश्‍वास किया? और प्रभु का भुजबल किस पर प्रकट हुआ? इस कारण वे विश्‍वास नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि यशायाह ने फिर कहा: उसने उनकी आँखें अंधी और उनका मन कठोर कर दिया है, कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्हें स्वस्थ करूँ। यशायाह ने ये बातें इसलिए कहीं क्योंकि उसने उसकी महिमा देखी, और उसके विषय में कहा। फिर भी अधिकारियों में से बहुतों ने उस पर विश्‍वास किया, परंतु वे फरीसियों के कारण खुले रूप में अंगीकार नहीं कर रहे थे, कहीं ऐसा न हो कि वे आराधनालय से निकाले जाएँ। क्योंकि उन्हें परमेश्‍वर की प्रशंसा से बढ़कर मनुष्यों की प्रशंसा अधिक प्रिय थी। यीशु ने पुकारकर कहा, “जो मुझ पर विश्‍वास करता है, वह मुझ पर नहीं बल्कि मेरे भेजनेवाले पर विश्‍वास करता है; और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजनेवाले को देखता है। मैं ज्योति हूँ और जगत में आया हूँ, ताकि जो कोई मुझ पर विश्‍वास करे, वह अंधकार में न रहे। यदि कोई मेरे वचनों को सुनकर पालन न करे, तो मैं उसको दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने नहीं बल्कि जगत का उद्धार करने आया हूँ। जो मुझे अस्वीकार करता है और मेरे वचनों को ग्रहण नहीं करता, उसको दोषी ठहरानेवाला एक है; जो वचन मैंने कहा है, वही अंतिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा। क्योंकि मैंने यह अपनी ओर से नहीं कहा, परंतु पिता जिसने मुझे भेजा है, उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि मैं क्या कहूँ और क्या बोलूँ। मैं जानता हूँ कि उसकी आज्ञा अनंत जीवन है। इसलिए जो कुछ मैं बोलता हूँ, जैसा पिता ने मुझसे कहा है वैसा ही बोलता हूँ।” अब फसह के पर्व से पहले यीशु यह जान गया था कि इस जगत से पिता के पास जाने की मेरी घड़ी आ पहुँची है, उसने अपने लोगों से जो जगत में थे प्रेम रखा और अंत तक उनसे प्रेम रखा। शैतान पहले ही शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था कि वह उसे पकड़वाए; और भोजन करते समय यीशु यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथों में दे दिया, और मैं परमेश्‍वर की ओर से आया और परमेश्‍वर के पास जा रहा हूँ, भोजन से उठा और अपने बाहरी वस्‍त्र उतारे तथा अंगोछा लेकर अपनी कमर पर बाँध लिया। तब उसने एक बरतन में पानी भरा और शिष्यों के पैर धोने तथा उस अंगोछे से पोंछने लगा जिसे उसने कमर पर बाँध रखा था। फिर वह शमौन पतरस के पास आया। उसने उससे कहा, “प्रभु, क्या तू मेरे पैर धोता है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “जो मैं कर रहा हूँ, तू अभी नहीं जानता, परंतु बाद में इन्हें समझेगा।” पतरस ने उससे कहा, “नहीं, तू मेरे पैर कभी भी न धोएगा।” इस पर यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ तो मेरे साथ तेरा कोई साझा नहीं।” शमौन पतरस ने उससे कहा, “प्रभु, तो मेरे पैर ही नहीं बल्कि मेरे हाथ और मेरा सिर भी धो दे।” यीशु ने उससे कहा, “जो नहा चुका है उसे पैरों को छोड़ कुछ और धोने की आवश्यकता नहीं, बल्कि वह पूर्ण रूप से शुद्ध है; तुम तो शुद्ध हो, परंतु सब के सब नहीं।” वह अपने पकड़वानेवाले को जानता था; इसलिए उसने कहा, “तुम सब के सब शुद्ध नहीं।” जब उसने उनके पैर धो लिए तो वह अपने बाहरी वस्‍त्र पहनकर दुबारा बैठ गया और उनसे कहा, “क्या तुम समझे कि मैंने तुम्हारे साथ क्या किया है? तुम मुझे गुरु और प्रभु कहते हो, और ठीक ही कहते हो क्योंकि मैं हूँ। इसलिए यदि मैंने प्रभु और गुरु होकर तुम्हारे पैर धोए, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पैर धोने चाहिए; क्योंकि मैंने तुम्हारे लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया है कि जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया वैसा ही तुम भी किया करो। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, न तो दास अपने स्वामी से बड़ा होता है और न ही भेजा हुआ अपने भेजनेवाले से बड़ा होता है। यदि तुम इन बातों को जानते हो और यदि इनका पालन करते हो, तो तुम धन्य हो। मैं तुम सब के विषय में नहीं कहता; मैं जानता हूँ कि मैंने किन्हें चुना है। परंतु यह इसलिए है कि पवित्रशास्‍त्र का यह लेख पूरा हो: मेरी रोटी खानेवाले ने मेरे विरुद्ध अपनी लात उठाई। “अब यह होने से पहले ही मैं तुम्हें बता रहा हूँ, ताकि जब यह हो जाए, तो तुम विश्‍वास करो कि मैं वही हूँ। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।” ये बातें कहकर यीशु आत्मा में व्याकुल हो गया और उसने साक्षी दी, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि तुममें से एक मुझे पकड़वाएगा।” शिष्य एक दूसरे की ओर संदेह से देखने लगे कि वह किसके विषय में कह रहा है। उसके शिष्यों में से एक, जिससे यीशु प्रेम रखता था, यीशु की छाती की ओर झुका बैठा था। तब शमौन पतरस ने उसकी ओर संकेत किया कि पूछे, वह कौन है जिसके विषय में यीशु कह रहा है। तब उसने यीशु की छाती की ओर झुककर उससे पूछा, “प्रभु, वह कौन है?” यीशु ने उत्तर दिया, “जिसे मैं रोटी का टुकड़ा डुबाकर दूँगा, वह वही है।” तब उसने रोटी का टुकड़ा लिया और डुबाकर शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदा को दिया। रोटी का टुकड़ा लेते ही शैतान उसमें समा गया। तब यीशु ने उससे कहा, “जो तू कर रहा है, शीघ्र कर।” परंतु बैठनेवालों में से कोई भी नहीं जानता था कि उसने किस लिए उससे यह कहा है। क्योंकि यहूदा पैसों की थैली रखता था, इसलिए कुछ सोच रहे थे कि यीशु ने उससे कहा है कि पर्व के लिए हमें जिन वस्तुओं की आवश्यकता है खरीद ले, या यह कि कंगालों को कुछ दे दे। अतः रोटी का टुकड़ा लेकर वह तुरंत बाहर चला गया; और वह रात का समय था। जब वह चला गया तो यीशु ने कहा, “अब मनुष्य के पुत्र की महिमा हुई है, और उसमें परमेश्‍वर की महिमा हुई है। यदि उसमें परमेश्‍वर की महिमा हुई, तो परमेश्‍वर भी अपने में उसकी महिमा करेगा, और तुरंत उसकी महिमा करेगा। बच्‍चो, मैं तुम्हारे साथ थोड़ी देर और हूँ। तुम मुझे ढूँढ़ोगे और जैसा मैंने यहूदियों से कहा, अब तुमसे भी कहता हूँ, ‘जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ तुम नहीं आ सकते।’ मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसे मैंने तुमसे प्रेम रखा वैसे ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो।” शमौन पतरस ने उससे पूछा, “प्रभु, तू कहाँ जा रहा है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ तू मेरे पीछे अभी नहीं आ सकता, परंतु बाद में आएगा।” पतरस ने उससे कहा, “प्रभु, मैं तेरे पीछे अभी क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिए अपना प्राण भी दे दूँगा।” इस पर यीशु ने कहा, “क्या तू मेरे लिए अपना प्राण देगा? मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ कि जब तक तू तीन बार मेरा इनकार न कर लेगा तब तक मुरगा बाँग न देगा।” “तुम्हारा मन व्याकुल न हो। परमेश्‍वर पर विश्‍वास रखो और मुझ पर भी विश्‍वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से निवासस्थान हैं; यदि नहीं होते तो मैं तुमसे कह देता, क्योंकि मैं तुम्हारे लिए स्थान तैयार करने जाता हूँ। जब मैं जाकर तुम्हारे लिए स्थान तैयार कर लूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा, ताकि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो। जहाँ मैं जा रहा हूँ तुम वह मार्ग जानते हो।” थोमा ने उससे कहा, “प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहाँ जा रहा है; तो उस मार्ग को कैसे जान सकते हैं?” यीशु ने उससे कहा, “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ। बिना मेरे द्वारा कोई भी पिता के पास नहीं पहुँचता। “यदि तुमने मुझे जान लिया है तो मेरे पिता को भी जान जाओगे; और अब से तुम उसे जानते हो और उसे देख भी लिया है।” फिलिप्पुस ने उससे कहा, “प्रभु, हमें पिता को दिखा दे, हमारे लिए यही पर्याप्‍त है।” यीशु ने उससे कहा, “मैं इतने समय से तुम्हारे साथ हूँ, फिर भी फिलिप्पुस, तूने मुझे नहीं जाना? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू कैसे कहता है, ‘हमें पिता को दिखा’? क्या तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझमें है? जो बातें मैं तुमसे कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता; परंतु पिता जो मुझमें रहता है, वही अपने कार्य करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझमें; नहीं तो इन कार्यों के कारण ही विश्‍वास करो। “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो मुझ पर विश्‍वास करता है, वह भी उन कार्यों को करेगा जिन्हें मैं करता हूँ, बल्कि इनसे भी बड़े कार्य करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ; और जो कुछ तुम मेरे नाम से माँगोगे, वह मैं करूँगा, जिससे पुत्र में पिता की महिमा हो। यदि तुम मेरे नाम से कुछ भी मुझसे माँगोगे, तो मैं उसे करूँगा। “यदि तुम मुझसे प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे; और मैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्हें एक अन्य सहायक देगा कि वह सदा तुम्हारे साथ रहे, अर्थात् सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न तो उसे देखता और न ही जानता है। तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है और वह तुममें होगा। मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोड़ूँगा, मैं तुम्हारे पास आऊँगा। “अब थोड़ी देर में यह संसार फिर मुझे नहीं देखेगा, परंतु तुम मुझे देखोगे, इसलिए कि मैं जीवित हूँ, तुम भी जीवित रहोगे। उस दिन तुम जानोगे कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझमें, और मैं तुममें। जिसके पास मेरी आज्ञाएँ हैं और जो उनका पालन करता है, वही मुझसे प्रेम रखता है; और जो मुझसे प्रेम रखता है, उससे मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उससे प्रेम रखूँगा और अपने आपको उस पर प्रकट करूँगा।” यहूदा ने जो इस्करियोती नहीं था, उससे कहा, “प्रभु, फिर ऐसा क्या हो गया कि तू अपने आपको हम पर प्रकट करने पर है और संसार पर नहीं?” इस पर यीशु ने उससे कहा, “यदि कोई मुझसे प्रेम रखता है तो वह मेरे वचन का पालन करेगा, और मेरा पिता उससे प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएँगे और उसके साथ वास करेंगे। जो मुझसे प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचनों का पालन नहीं करता; और जो वचन तुम सुनते हो वह मेरा नहीं बल्कि पिता का है जिसने मुझे भेजा है। “मैंने ये बातें तुम्हारे साथ रहते हुए तुमसे कही हैं; परंतु सहायक अर्थात् पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, तुम्हें सब बातें सिखाएगा और जो बातें मैंने तुमसे कहीं, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। “मैं तुम्हारे लिए शांति छोड़े जाता हूँ, अपनी शांति तुम्हें देता हूँ; जैसी संसार देता है, वैसी मैं तुम्हें नहीं देता। तुम्हारा मन व्याकुल न हो और न डरे। तुमने सुना कि मैंने तुमसे कहा, ‘मैं जा रहा हूँ और फिर तुम्हारे पास आऊँगा।’ यदि तुम मुझसे प्रेम रखते तो आनंदित होते कि मैं पिता के पास जाता हूँ, क्योंकि पिता मुझसे बड़ा है। अब मैंने तुम्हें यह होने से पहले बता दिया है, ताकि जब यह हो जाए तो तुम विश्‍वास करो। मैं तुमसे और अधिक बात नहीं करूँगा, क्योंकि इस संसार का शासक आ रहा है; परंतु मुझ पर उसका कोई अधिकार नहीं, बल्कि यह इसलिए है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूँ, और जिस प्रकार पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं उसी प्रकार करता हूँ। “उठो, यहाँ से चलें। “सच्‍ची दाखलता मैं हूँ, और मेरा पिता किसान है। प्रत्येक डाली जो मुझमें है और फल नहीं लाती, उसे वह काटता है, और प्रत्येक जो फल लाती है उसे वह छाँटता है, ताकि और अधिक फल लाए। अब तुम उस वचन के कारण जो मैंने तुमसे कहा है, शुद्ध हो। तुम मुझमें बने रहो और मैं तुममें। जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से फल नहीं ला सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझमें बने न रहो, तो फल नहीं ला सकते। मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो। जो मुझमें बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल लाता है, क्योंकि मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यदि कोई मुझमें बना न रहे, तो वह डाली के समान बाहर फेंक दिया जाता है और सूख जाता है, फिर लोग उन्हें इकट्ठा करके आग में झोंक देते हैं और वे जल जाती हैं। यदि तुम मुझमें बने रहो और मेरे वचन तुममें बने रहें, तो जो चाहो माँगो और वह तुम्हारे लिए हो जाएगा। मेरे पिता की महिमा इसी से होती है कि तुम बहुत फल लाओ और मेरे शिष्य बने रहो। “जैसे पिता ने मुझसे प्रेम रखा, वैसे ही मैंने भी तुमसे प्रेम रखा; मेरे प्रेम में बने रहो। यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे तो तुम मेरे प्रेम में बने रहोगे, जैसे मैंने अपने पिता की आज्ञाओं का पालन किया है और उसके प्रेम में बना रहता हूँ। “मैंने ये बातें तुमसे इसलिए कही हैं कि मेरा आनंद तुममें हो और तुम्हारा आनंद पूरा हो जाए। मेरी आज्ञा यह है कि जैसे मैंने तुमसे प्रेम रखा वैसे ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। इससे बड़ा प्रेम कोई नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिए अपना प्राण दे। जो आज्ञा मैं तुम्हें देता हूँ, यदि तुम उसका पालन करते हो तो तुम मेरे मित्र हो। अब से मैं तुम्हें दास नहीं कहूँगा, क्योंकि दास नहीं जानता कि उसका स्वामी क्या करता है; परंतु मैंने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि जो मैंने अपने पिता से सुना, तुम्हें सब बता दिया। तुमने मुझे नहीं चुना, बल्कि मैंने तुम्हें चुना और तुम्हें नियुक्‍त किया कि तुम जाकर फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे, ताकि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। मैं तुम्हें इन बातों की आज्ञा इसलिए देता हूँ कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो। “यदि संसार तुमसे घृणा करता है, तो जान लो कि उसने तुमसे पहले मुझसे घृणा की है। यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रेम करता। परंतु तुम संसार के नहीं हो, बल्कि संसार में से मैंने तुम्हें चुन लिया, इसलिए संसार तुमसे घृणा करता है। जो बात मैंने तुमसे कही, उसे स्मरण रखो, ‘दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता।’ यदि उन्होंने मुझे सताया तो तुम्हें भी सताएँगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्हारी भी मानेंगे। परंतु यह सब वे मेरे नाम के कारण तुम्हारे साथ करेंगे, क्योंकि वे मेरे भेजनेवाले को नहीं जानते। यदि मैं आकर उन्हें न बताता तो वे पापी न ठहरते; परंतु अब अपने पाप के लिए उनके पास कोई बहाना नहीं है। जो मुझसे घृणा करता है वह मेरे पिता से भी घृणा करता है। यदि मैंने उनके बीच वे कार्य न किए होते जिन्हें किसी और ने नहीं किया, तो वे पापी न ठहरते; परंतु अब उन्होंने मुझे और मेरे पिता दोनों को देखा है और दोनों से घृणा की है। यह इसलिए हुआ कि वह वचन पूरा हो जो उनकी व्यवस्था में लिखा है: उन्होंने मुझसे बिना कारण घृणा की। “जब वह सहायक आएगा जिसे मैं पिता की ओर से तुम्हारे पास भेजूँगा, अर्थात् सत्य का आत्मा जो पिता की ओर से आता है, तब वह मेरे विषय में साक्षी देगा; और तुम भी साक्षी दोगे, क्योंकि तुम आरंभ से मेरे साथ रहे हो। “मैंने ये बातें तुमसे इसलिए कही हैं कि तुम ठोकर न खाओ। वे तुम्हें आराधनालयों से बाहर निकाल देंगे; बल्कि वह समय आ रहा है कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा, वह समझेगा कि परमेश्‍वर की सेवा कर रहा है। वे ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि उन्होंने न तो पिता को जाना है और न ही मुझे। परंतु मैंने ये बातें तुमसे इसलिए कही हैं कि जब उनका समय आए तो तुम्हें स्मरण रहे कि मैंने तुम्हें ये बातें बताई थीं। “मैंने ये बातें तुम्हें आरंभ से नहीं बताईं, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था। परंतु अब मैं अपने भेजनेवाले के पास जा रहा हूँ, और तुममें से कोई भी मुझसे नहीं पूछता, ‘तू कहाँ जा रहा है?’ परंतु तुम्हारा हृदय शोक से भर गया है, क्योंकि मैंने ये बातें तुमसे कही हैं। परंतु मैं तुमसे सच कहता हूँ, मेरा चला जाना तुम्हारे लिए लाभदायक है। क्योंकि यदि मैं नहीं जाऊँगा, तो तुम्हारे पास सहायक नहीं आएगा; परंतु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। वह आकर संसार को पाप, धार्मिकता और न्याय के विषय में दोषी होने का बोध कराएगा; पाप के विषय में इसलिए कि वे मुझ पर विश्‍वास नहीं करते, और धार्मिकता के विषय में इसलिए कि मैं पिता के पास जा रहा हूँ और तुम मुझे फिर नहीं देखोगे, और न्याय के विषय में इसलिए कि इस संसार का शासक दोषी ठहराया गया है। “मुझे तुमसे और भी बहुत कुछ कहना है, परंतु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परंतु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो संपूर्ण सत्य में तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा; क्योंकि वह अपनी ओर से कुछ नहीं कहेगा, बल्कि जो कुछ सुनेगा वही कहेगा और आनेवाली बातों को तुम पर प्रकट करेगा। वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों को लेकर तुम्हें बताएगा। वह सब जो पिता का है, मेरा है; इसलिए मैंने कहा कि वह मेरी बातों को लेकर तुम्हें बताएगा। “थोड़ी देर में तुम मुझे नहीं देखोगे, और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे ।” तब उसके कुछ शिष्यों ने आपस में कहा, “यह क्या है जो वह हमसे कहता है, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे नहीं देखोगे और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे?’ और ‘क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ?’ ” अतः वे कहने लगे, “जिसे वह ‘थोड़ी देर में’ कहता है, वह क्या है? हम नहीं जानते कि वह क्या कह रहा है।” यीशु ने यह जानकर कि वे उससे पूछना चाहते हैं, उनसे कहा, “क्या तुम इस विषय में एक दूसरे से पूछताछ कर रहे हो कि मैंने कहा, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे नहीं देखोगे, और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे’? मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परंतु संसार आनंदित होगा; तुम शोकित होगे, परंतु तुम्हारा शोक आनंद में बदल जाएगा। जब स्‍त्री प्रसव में होती है तो उसे शोक होता है, क्योंकि उसकी घड़ी आ पहुँची है; परंतु जब वह बच्‍चे को जन्म दे देती है, तो इस आनंद से कि इस संसार में एक मनुष्य का जन्म हुआ, अपने उस कष्‍ट को फिर स्मरण नहीं करती। इसी प्रकार अभी तो तुम्हें शोक है; परंतु मैं तुमसे फिर मिलूँगा, तब तुम्हारा हृदय आनंदित होगा और तुम्हारे उस आनंद को तुमसे कोई भी नहीं छीनेगा। उस दिन तुम मुझसे कुछ नहीं पूछोगे। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगोगे, वह तुम्हें देगा। तुमने अब तक मेरे नाम से कुछ नहीं माँगा। माँगो तो तुम पाओगे, ताकि तुम्हारा आनंद पूरा हो जाए। “मैंने ये बातें तुमसे दृष्‍टांतों में कही हैं; वह समय आता है जब मैं तुमसे दृष्‍टांतों में फिर नहीं कहूँगा, बल्कि पिता के विषय में तुम्हें स्पष्‍ट बताऊँगा। उस दिन तुम मेरे नाम से माँगोगे, और मैं तुमसे नहीं कहता कि मैं तुम्हारे लिए पिता से विनती करूँगा; इसलिए कि पिता स्वयं तुमसे प्रेम करता है, क्योंकि तुमने मुझसे प्रेम किया है और यह विश्‍वास किया है कि मैं परमेश्‍वर की ओर से आया हूँ। मैं पिता की ओर से जगत में आया हूँ। मैं फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जा रहा हूँ।” उसके शिष्यों ने कहा, “देख, अब तू स्पष्‍ट बोल रहा है, और कोई दृष्‍टांत नहीं कहता। अब हम जान गए हैं कि तू सब कुछ जानता है और तुझे आवश्यकता नहीं कि कोई तुझसे कुछ पूछे; इससे हम विश्‍वास करते हैं कि तू परमेश्‍वर की ओर से आया है।” इस पर यीशु ने कहा, “क्या तुम अब विश्‍वास करते हो? देखो, वह समय आता है बल्कि आ गया है कि तुम सब तितर-बितर होकर अपने-अपने घर चले जाओगे और मुझे अकेला छोड़ दोगे; फिर भी मैं अकेला नहीं हूँ, क्योंकि पिता मेरे साथ है। मैंने ये बातें तुमसे इसलिए कही हैं कि तुम मुझमें शांति पाओ। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परंतु साहस रखो! मैंने संसार को जीत लिया है।” यीशु ने ये बातें कहीं और स्वर्ग की ओर अपनी आँखें उठाकर कहा: “हे पिता, समय आ पहुँचा है; अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे, क्योंकि तूने उसे संपूर्ण मानव जाति पर अधिकार दिया है कि जिन्हें तूने उसे सौंपा है उन सब को वह अनंत जीवन दे; और अनंत जीवन यह है कि वे तुझ एकमात्र सच्‍चे परमेश्‍वर को और यीशु मसीह को, जिसे तूने भेजा है, जानें। जो कार्य तूने मुझे करने के लिए दिया था, उसे पूरा करके मैंने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है; और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर, जो जगत की उत्पत्ति से पहले मेरी तेरे साथ थी। “मैंने तेरे नाम को उन मनुष्यों पर प्रकट किया है जिन्हें तूने मुझे जगत में से दिया। वे तेरे थे और तूने उन्हें मुझे दिया, और उन्होंने तेरे वचन का पालन किया है। अब वे जान गए हैं कि जो कुछ तूने मुझे दिया है, वह सब तेरी ओर से है। क्योंकि जिन वचनों को तूने मुझे दिया, मैंने उन्हें उन तक पहुँचा दिया है, और उन्होंने उन्हें ग्रहण किया और सचमुच जान लिया कि मैं तेरी ओर से आया हूँ, और विश्‍वास किया कि तूने ही मुझे भेजा है। मैं उनके लिए विनती करता हूँ; मैं संसार के लिए नहीं बल्कि उनके लिए विनती करता हूँ जिन्हें तूने मुझे दिया है, क्योंकि वे तेरे हैं। जो मेरा है वह सब तेरा है और जो तेरा है वह मेरा है, और उनसे मेरी महिमा हुई है। मैं जगत में अब और नहीं रहूँगा परंतु वे जगत में रहेंगे, और मैं तेरे पास आ रहा हूँ। हे पवित्र पिता, अपने उस नाम के द्वारा जो तूने मुझे दिया, उनकी रक्षा कर, ताकि वे हमारे समान एक हों। जब मैं उनके साथ था, तो तेरे उस नाम के द्वारा, जो तूने मुझे दिया है, उनकी रक्षा करता था। मैंने उनकी रखवाली की और उनमें से विनाश के पुत्र को छोड़ कोई भी नाश नहीं हुआ, इसलिए कि पवित्रशास्‍त्र का लेख पूरा हो। अब मैं तेरे पास आता हूँ, और मैं ये बातें जगत में इसलिए कहता हूँ कि वे अपने में मेरा आनंद पूरा पाएँ। मैंने तेरा वचन उन्हें दिया है और संसार ने उनसे घृणा की, क्योंकि जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं हैं। मैं यह विनती नहीं करता कि तू उन्हें संसार से उठा ले बल्कि यह कि तू उन्हें उस दुष्‍ट से बचाए रख। जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे वे भी संसार के नहीं हैं। सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर; तेरा वचन सत्य है। जैसे तूने मुझे जगत में भेजा, वैसे ही मैंने भी उन्हें जगत में भेजा। उनके लिए मैं अपने आपको पवित्र करता हूँ, ताकि वे भी सत्य के द्वारा पवित्र किए जाएँ। “मैं केवल इनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके लिए भी विनती करता हूँ जो इनके वचन के द्वारा मुझ पर विश्‍वास करेंगे, कि वे सब एक हों, जैसे, हे पिता, तू मुझमें है और मैं तुझमें, वैसे ही वे भी हममें एक हों, ताकि संसार विश्‍वास करे कि तूने मुझे भेजा है। जो महिमा तूने मुझे दी है, मैंने उन्हें दी है, ताकि वे एक हों जैसे हम एक हैं, मैं उनमें और तू मुझमें, ताकि वे सिद्ध होकर एक हो जाएँ, जिससे संसार जाने कि तूने मुझे भेजा और उनसे वैसा ही प्रेम रखा जैसा तूने मुझसे प्रेम रखा। हे पिता, मैं चाहता हूँ कि जिन्हें तूने मुझे दिया है, वे भी मेरे साथ वहाँ हों जहाँ मैं हूँ, ताकि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तूने मुझे दी है क्योंकि जगत की उत्पत्ति से पहले तूने मुझसे प्रेम रखा। हे धर्मी पिता, यद्यपि संसार ने तुझे नहीं जाना, परंतु मैंने तुझे जाना, और इन्होंने भी जाना कि तूने मुझे भेजा, और मैंने उन्हें तेरा नाम बताया और बताता रहूँगा, ताकि जो प्रेम तूने मुझसे रखा वह उनमें रहे और मैं उनमें।” जब यीशु ये बातें कह चुका तो वह अपने शिष्यों के साथ किद्रोन घाटी के पार गया जहाँ एक बाग था, जिसमें उसने और उसके शिष्यों ने प्रवेश किया। उसे पकड़वानेवाला यहूदा भी उस स्थान को जानता था, क्योंकि यीशु अकसर वहाँ अपने शिष्यों के साथ मिला करता था। तब यहूदा वहाँ लालटेनों, मशालों और हथियारों सहित एक सैन्य दल और उन सिपाहियों को लेकर आया जो मुख्य याजकों तथा फरीसियों के थे। तब यीशु अपने साथ होनेवाली सब बातों को जानकर बाहर निकला और उनसे पूछा, “तुम किसे ढूँढ़ रहे हो? ” उन्होंने उसे उत्तर दिया, “यीशु नासरी को।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं ही हूँ।” और उसे पकड़वानेवाला यहूदा भी उनके साथ खड़ा था। जैसे ही उसने उनसे कहा, “मैं ही हूँ,” वे पीछे हटे और भूमि पर गिर पड़े। तब उसने उनसे फिर पूछा, “तुम किसे ढूँढ़ रहे हो?” और उन्होंने कहा, “यीशु नासरी को।” इस पर यीशु ने कहा, “मैंने तुम्हें बता दिया कि मैं ही हूँ; इसलिए यदि तुम मुझे ढूँढ़ रहे हो, तो इन्हें जाने दो।” यह इसलिए हुआ कि वह वचन पूरा हो जो उसने कहा, “जिन्हें तूने मुझे दिया है उनमें से मैंने किसी को भी नहीं खोया।” तब शमौन पतरस ने उस तलवार को जो उसके पास थी, खींचा और महायाजक के दास पर चलाकर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। उस दास का नाम मलखुस था। तब यीशु ने पतरस से कहा, “तलवार को म्यान में रख! जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे न पीऊँ?” तब सैन्य दल, सेनापति और यहूदियों के सिपाहियों ने यीशु को पकड़ लिया और उसे बाँधकर पहले हन्‍ना के पास ले गए; क्योंकि वह काइफा का ससुर था, जो उस वर्ष महायाजक था; यह वही काइफा था जिसने यहूदियों को यह सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिए एक मनुष्य का मरना भला है। अब शमौन पतरस और दूसरा शिष्य यीशु के पीछे चल दिए। यह शिष्य महायाजक का परिचित था, इसलिए उसने यीशु के साथ महायाजक के आँगन में प्रवेश किया, परंतु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा। अतः वह दूसरा शिष्य भी जो महायाजक का परिचित था, बाहर निकल आया और द्वारपालिन से कहकर पतरस को भीतर ले गया। तब उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, “कहीं तू भी तो इस मनुष्य के शिष्यों में से नहीं?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।” वहाँ खड़े दासों और सिपाहियों ने कोयले की आग सुलगाई क्योंकि ठंड थी, और उसे तापने लगे; और पतरस भी उनके साथ खड़े होकर तापने लगा। तब महायाजक ने यीशु से उसके शिष्यों और उसकी शिक्षाओं के विषय में पूछा। इस पर यीशु ने उससे कहा, “मैंने संसार से खुलकर बातें की हैं। मैंने सदा आराधनालय और मंदिर-परिसर में जहाँ सब यहूदी एकत्रित होते हैं, उपदेश दिया, और गुप्‍त में कुछ भी नहीं कहा। तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? सुननेवालों से पूछ कि मैंने उन्हें क्या बताया। देख, मैंने जो कहा उसे वे जानते हैं।” जब उसने यह कहा, तो पास खड़े हुए सिपाहियों में से एक ने यीशु को यह कहकर थप्पड़ मारा, “क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि मैंने बुरा कहा, तो उस बुराई को प्रमाणित कर; परंतु यदि ठीक कहा, तो फिर मुझे क्यों मारता है?” तब हन्‍ना ने उसे बँधे हुए ही महायाजक काइफा के पास भेज दिया। अब शमौन पतरस खड़ा हुआ आग ताप रहा था। तब लोगों ने उससे कहा, “कहीं तू भी तो उसके शिष्यों में से नहीं?” उसने इनकार करके कहा, “मैं नहीं हूँ।” महायाजक के दासों में से एक ने, जो उस व्यक्‍ति का संबंधी था जिसका कान पतरस ने काट डाला था, कहा, “क्या मैंने तुझे उसके साथ बाग में नहीं देखा था?” इस पर पतरस ने फिर से इनकार किया, और तुरंत मुरगे ने बाँग दी। अतः वे यीशु को काइफा के पास से राजभवन में ले गए; यह भोर का समय था। परंतु उन्होंने राजभवन में प्रवेश नहीं किया ताकि वे अशुद्ध न हों और फसह का भोज खा सकें। तब पिलातुस उनके पास बाहर आया, और कहा, “तुम इस मनुष्य पर क्या आरोप लगा रहे हो?” इस पर उन्होंने उससे कहा, “यदि इसने बुरा न किया होता, तो हम इसे तेरे हाथ में नहीं सौंपते।” तब पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही इसे ले जाओ और अपनी व्यवस्था के अनुसार इसका न्याय करो।” यहूदियों ने उससे कहा, “हम किसी को मृत्युदंड नहीं दे सकते।” ऐसा इसलिए हुआ कि यीशु का वह वचन पूरा हो जिसमें उसने यह संकेत देते हुए कहा था कि उसकी मृत्यु किस प्रकार की होगी। तब पिलातुस ने फिर राजभवन में प्रवेश किया और यीशु को बुलाकर उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने कहा, “क्या तू यह अपनी ओर से कह रहा है या दूसरों ने मेरे विषय में तुझे बताया है?” पिलातुस ने कहा, “क्या मैं यहूदी हूँ? तेरे ही लोगों और मुख्य याजकों ने तुझे मेरे हाथ में सौंपा है; तूने क्या किया है?” यीशु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्य इस संसार का नहीं है। यदि मेरा राज्य इस संसार का होता, तो मेरे सेवक युद्ध करते कि मैं यहूदियों के हाथ में सौंपा न जाता; परंतु मेरा राज्य यहाँ का नहीं है।” तब पिलातुस ने उससे पूछा, “तो क्या तू राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तू आप ही कह रहा है कि मैं राजा हूँ। मैंने इसलिए जन्म लिया और इसलिए इस संसार में आया हूँ कि सत्य की साक्षी दूँ। प्रत्येक जो सत्य का है, वह मेरी आवाज़ सुनता है।” पिलातुस ने उससे कहा, “सत्य क्या है?” यह कहकर वह फिर से यहूदियों के पास बाहर निकला और उनसे कहा, “मैं उसमें कोई दोष नहीं पाता। परंतु तुम्हारी रीति है कि मैं फसह के पर्व पर तुम्हारे लिए किसी एक को छोड़ दूँ; तो क्या तुम यह चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?” इस पर उन्होंने फिर चिल्‍लाकर कहा, “इसे नहीं, बल्कि बरअब्बा को छोड़ दे!” और बरअब्बा एक डाकू था। तब पिलातुस ने यीशु को ले जाकर कोड़े लगवाए। सैनिकों ने काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्‍त्र पहनाया, और उसके पास आकर कहने लगे, “यहूदियों के राजा, तेरी जय हो!” और उसे थप्पड़ मारने लगे। पिलातुस ने फिर बाहर आकर उनसे कहा, “देखो, मैं उसे तुम्हारे पास बाहर ला रहा हूँ, ताकि तुम जान लो कि मैं उसमें कोई दोष नहीं पाता।” तब यीशु काँटों का मुकुट और बैंजनी वस्‍त्र पहने हुए बाहर निकल आया। पिलातुस ने उनसे कहा, “देखो, यह मनुष्य!” जब मुख्य याजकों और सिपाहियों ने उसे देखा तो चिल्‍लाकर कहा, “उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर चढ़ा!” पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही इसे ले जाओ और क्रूस पर चढ़ाओ, क्योंकि मैं इसमें कोई दोष नहीं पाता।” इस पर यहूदियों ने उससे कहा, “हमारी व्यवस्था है और उस व्यवस्था के अनुसार उसे मर जाना चाहिए, क्योंकि उसने अपने आपको परमेश्‍वर का पुत्र ठहराया है।” जब पिलातुस ने यह बात सुनी तो और भी डर गया, और फिर राजभवन के भीतर जाकर यीशु से कहा, “तू कहाँ का है?” परंतु यीशु ने उसे उत्तर नहीं दिया। तब पिलातुस ने उससे कहा, “तू मुझसे बोलता क्यों नहीं? क्या तू नहीं जानता कि मेरे पास तुझे छोड़ देने का अधिकार है और तुझे क्रूस पर चढ़ाने का भी अधिकार है?” यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि तुझे ऊपर से न दिया गया होता तो तेरा मुझ पर कोई अधिकार न होता; इसलिए जिसने मुझे तेरे हाथ सौंपा है उसका पाप और भी बड़ा है।” इस कारण पिलातुस ने उसे छोड़ देना चाहा; परंतु यहूदियों ने चिल्‍लाकर कहा, “यदि तू इसे छोड़ देगा तो तू कैसर का मित्र नहीं। जो अपने आपको राजा बनाता है वह कैसर का विरोध करता है।” ये बातें सुनकर पिलातुस यीशु को बाहर लाया और उस स्थान में न्यायासन पर बैठ गया जिसे इब्रानी में गब्बता अर्थात् चबूतरा कहा जाता है। यह फसह के पर्व की तैयारी का दिन था, और दिन के लगभग बारह बजे थे। तब उसने यहूदियों से कहा, “देखो, तुम्हारा राजा।” इस पर वे चिल्‍लाए, “ले जा, ले जा! इसे क्रूस पर चढ़ा!” पिलातुस ने उनसे कहा, “क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊँ?” मुख्य याजकों ने उत्तर दिया, “कैसर को छोड़ हमारा कोई राजा नहीं।” अतः उसने उसे उनके हाथ सौंप दिया कि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए। तब वे यीशु को ले गए; और वह स्वयं अपना क्रूस उठाए उस स्थान की ओर निकल पड़ा जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है और जिसे इब्रानी में गुलगुता कहा जाता है। वहाँ उन्होंने उसे और उसके साथ दो अन्य मनुष्यों को भी क्रूस पर चढ़ाया, एक को इस ओर, दूसरे को उस ओर, तथा बीच में यीशु को। पिलातुस ने एक दोषपत्र भी लिखकर क्रूस पर लगवा दिया; उस पर लिखा था: यीशु नासरी, यहूदियों का राजा। इस दोषपत्र को बहुत से यहूदियों ने पढ़ा, क्योंकि जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया, वह स्थान नगर के पास था; और यह इब्रानी, लतीनी और यूनानी भाषाओं में लिखा हुआ था। तब यहूदियों के मुख्य याजक पिलातुस से कहने लगे, “ ‘यहूदियों का राजा’ मत लिख, बल्कि यह कि इसने कहा ‘मैं यहूदियों का राजा हूँ’।” इस पर पिलातुस ने कहा, “जो मैंने लिख दिया, सो लिख दिया।” जब सैनिकों ने यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया तो उन्होंने उसके वस्‍त्रों को लेकर उनके चार भाग किए, प्रत्येक सैनिक के लिए एक भाग; और कुरता भी लिया, परंतु वह कुरता बिना सिले पूरा ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था। इसलिए उन्होंने आपस में कहा, “हम इसे न फाड़ें, बल्कि इसके लिए पर्ची डाल लें कि यह किसका होगा।” जिससे कि पवित्रशास्‍त्र का यह लेख पूरा हो: उन्होंने मेरे वस्‍त्र आपस में बाँट लिए और मेरे कपड़े के लिए पर्ची डाली। अतः सैनिकों ने ऐसा ही किया। अब यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहन, क्लोपास की पत्‍नी मरियम और मरियम मगदलीनी खड़ी थीं। जब यीशु ने अपनी माता और शिष्य को, जिससे वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखा, तो अपनी माता से कहा, “हे नारी, देख, तेरा पुत्र।” फिर उसने उस शिष्य से कहा, “देख, तेरी माता।” और उसी समय से वह शिष्य उसे अपने घर ले गया। इसके बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है, कहा, “मैं प्यासा हूँ।” जिससे कि पवित्रशास्‍त्र का लेख पूरा हो। वहाँ सिरके से भरा एक बरतन रखा था। तब उन्होंने उस सिरके से भरे स्पंज को जूफे की टहनी पर रखकर उसके मुँह पर लगाया। जब यीशु ने सिरका ले लिया तो कहा, “पूरा हुआ।” और सिर झुकाकर अपना प्राण त्याग दिया। वह तैयारी का दिन था, इसलिए यहूदियों ने पिलातुस से विनती की कि उनकी टाँगें तोड़कर उन्हें उतार दिया जाए ताकि सब्त के दिन उनके शव क्रूस पर न रहें, क्योंकि वह दिन सब्त का एक बड़ा दिन था। तब सैनिक आए और जो उसके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए थे, उनमें से पहले की टाँगें तोड़ दीं और फिर दूसरे की भी; परंतु जब यीशु के पास आकर देखा कि वह पहले ही मर चुका है, तो उन्होंने उसकी टाँगें नहीं तोड़ीं। फिर भी एक सैनिक ने भाले से उसकी पसली को बेधा और तुरंत लहू और पानी बह निकला। जिसने देखा उसी ने साक्षी दी है और उसकी साक्षी सच्‍ची है, और वह जानता है कि वह सच कह रहा है, जिससे तुम भी विश्‍वास करो। ये बातें इसलिए हुईं कि पवित्रशास्‍त्र का यह लेख पूरा हो: उसकी एक भी हड्डी तोड़ी नहीं जाएगी। और फिर पवित्रशास्‍त्र का एक और लेख यह कहता है: जिसे उन्होंने बेधा, उसे वे देखेंगे। इन बातों के बाद अरिमतिया के यूसुफ ने, जो यहूदियों के डर के कारण गुप्‍त रूप से यीशु का शिष्य था, पिलातुस से विनती की कि उसे यीशु का शव ले जाने दे; और पिलातुस ने उसे अनुमति दे दी। अतः वह आकर उसका शव ले गया। फिर नीकुदेमुस भी, जो पहले यीशु के पास रात के समय आया था, लगभग तैंतीस किलो गंधरस और एलुवा का मिश्रण लेकर आया। तब उन्होंने यीशु का शव लेकर यहूदियों के गाड़ने की रीति के अनुसार उसे कफ़न में सुगंधित मसालों के साथ लपेटा। जहाँ उसे क्रूस पर चढ़ाया गया था, उस स्थान पर एक बाग था, और उस बाग में एक नई कब्र थी जिसमें अब तक किसी को नहीं रखा गया था। अतः यहूदियों की तैयारी का दिन होने के कारण और इसलिए कि वह कब्र निकट थी, उन्होंने यीशु को वहाँ रख दिया। सप्‍ताह के पहले दिन भोर को जब अंधेरा ही था, मरियम मगदलीनी कब्र पर आई, और कब्र से पत्थर हटा हुआ देखा। तब वह दौड़ी और शमौन पतरस तथा उस दूसरे शिष्य के पास, जिससे यीशु प्रीति रखता था, आई और उनसे कहा, “वे प्रभु को कब्र में से उठा ले गए हैं और हमें नहीं पता कि उसे कहाँ रखा है।” तब पतरस और दूसरा शिष्य भी निकलकर कब्र की ओर जाने लगे। दोनों एक साथ दौड़ रहे थे; परंतु दूसरा शिष्य पतरस से तेज़ दौड़कर कब्र पर पहले पहुँचा, और उसने झाँककर कफ़न को पड़े हुए देखा, फिर भी वह भीतर नहीं गया। तब शमौन पतरस भी उसके पीछे-पीछे पहुँचा, और कब्र के भीतर गया; और उसने कफ़न को पड़े हुए देखा, और वह अंगोछा जो यीशु के सिर पर था, कफ़न के साथ नहीं बल्कि अलग एक स्थान पर लपेटा हुआ रखा था। तब दूसरा शिष्य भी जो कब्र पर पहले पहुँचा था, भीतर गया, और देखकर विश्‍वास किया। वे पवित्रशास्‍त्र के उस लेख को अभी तक नहीं समझे थे कि उसका मृतकों में से जी उठना अवश्य है। तब ये शिष्य फिर अपने घर लौट गए। परंतु मरियम रोती हुई कब्र के बाहर खड़ी रही। फिर जब उसने रोते-रोते कब्र के भीतर झाँका, तो देखा कि जहाँ यीशु का शव रखा था, वहाँ श्‍वेत वस्‍त्रों में दो स्वर्गदूत बैठे हुए थे: एक सिरहाने और दूसरा पैताने की ओर। उन्होंने उससे कहा, “हे नारी, तू क्यों रो रही है?” उसने उनसे कहा, “वे मेरे प्रभु को उठा ले गए हैं और मैं नहीं जानती कि उसे कहाँ रखा है।” यह कहती हुई वह पीछे मुड़ी, और यीशु को खड़े देखा, परंतु उसने नहीं पहचाना कि यह यीशु है। यीशु ने उससे कहा, “हे नारी, तू क्यों रो रही है? तू किसको ढूँढ़ रही है?” उसने यह समझकर कि वह माली है, उससे कहा, “महोदय, यदि तूने उसे उठा लिया है तो मुझे बता कि उसे कहाँ रखा है, और मैं उसे ले जाऊँगी।” यीशु ने उससे कहा, “मरियम!” उसने मुड़कर इब्रानी भाषा में उससे कहा, “रब्बूनी (जिसका अर्थ है गुरु)”। यीशु ने उससे कहा, “मुझे मत छू, क्योंकि मैं अभी तक पिता के पास ऊपर नहीं गया हूँ। परंतु तू मेरे भाइयों के पास जा और उन्हें बता, ‘मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता, अपने परमेश्‍वर और तुम्हारे परमेश्‍वर के पास ऊपर जा रहा हूँ।’ ” मरियम मगदलीनी ने जाकर शिष्यों को बताया, “मैंने प्रभु को देखा है, और उसने मुझसे ये बातें कही हैं।” उसी दिन अर्थात् सप्‍ताह के पहले दिन, संध्या होने पर, उस स्थान पर जहाँ शिष्य यहूदियों के डर से द्वार बंद किए हुए थे, यीशु आकर उनके बीच में खड़ा हो गया और उनसे कहा, “तुम्हें शांति मिले।” और यह कहकर उसने अपने हाथ और अपनी पसली उन्हें दिखाई। तब शिष्य प्रभु को देखकर आनंदित हुए। यीशु ने उनसे फिर कहा, “तुम्हें शांति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।” यह कहकर उसने उन पर फूँका और उनसे कहा, “पवित्र आत्मा लो। जिनके पाप तुम क्षमा करोगे तो वे क्षमा किए जाएँगे, जिनके तुम रखोगे तो वे रखे जाएँगे।” परंतु उन बारहों में से एक अर्थात् थोमा, जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उनके साथ नहीं था। अतः अन्य शिष्य उससे कहने लगे, “हमने प्रभु को देखा है।” परंतु उसने उनसे कहा, “जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के छेद न देख लूँ और उन कीलों के छेद में अपनी उँगली न डाल लूँ और उसकी पसली में अपना हाथ न डाल लूँ, तब तक मैं बिलकुल विश्‍वास नहीं करूँगा।” आठ दिन के बाद उसके शिष्य फिर घर के भीतर थे और थोमा उनके साथ था। तब द्वार बंद होने पर भी यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा, “तुम्हें शांति मिले।” फिर उसने थोमा से कहा, “अपनी उँगली यहाँ ला और मेरे हाथों को देख, और अपना हाथ लाकर मेरी पसली में डाल, और अविश्‍वासी नहीं बल्कि विश्‍वासी हो।” इस पर थोमा ने उससे कहा, “मेरे प्रभु! मेरे परमेश्‍वर!” यीशु ने उससे कहा, “तूने मुझे देखा है, क्या इसलिए विश्‍वास किया है? धन्य हैं वे जिन्होंने बिना देखे विश्‍वास किया।” यीशु ने अपने शिष्यों के सामने और भी बहुत से चिह्‍न दिखाए, जो इस पुस्तक में नहीं लिखे गए; परंतु ये इसलिए लिखे गए हैं, ताकि तुम विश्‍वास करो कि यीशु ही परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, और विश्‍वास करके उसके नाम से जीवन पाओ। इन बातों के बाद यीशु ने तिबिरियास झील के तट पर अपने आपको शिष्यों पर फिर प्रकट किया; और उसने इस प्रकार प्रकट किया: शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है और गलील के काना का नतनएल और ज़ब्दी के पुत्र और यीशु के शिष्यों में से दो अन्य जन, एक साथ थे। शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने जा रहा हूँ।” उन्होंने उससे कहा, “हम भी तेरे साथ आ रहे हैं।” वे निकलकर नाव पर चढ़ गए, परंतु उस रात उन्होंने कुछ नहीं पकड़ा। भोर होने पर यीशु तट पर खड़ा था; फिर भी शिष्यों ने नहीं पहचाना कि वह यीशु है। तब यीशु ने उनसे कहा, “हे बच्‍चो! क्या तुम्हें कोई मछली नहीं मिली?” उन्होंने उसे उत्तर दिया, “नहीं।” फिर उसने उनसे कहा, “नाव के दाहिनी ओर जाल डालो तो पाओगे।” तब उन्होंने जाल डाला और अब मछलियों की बहुतायत के कारण वे उसे खींच नहीं पा रहे थे। तब उस शिष्य ने, जिससे यीशु प्रेम रखता था, पतरस से कहा, “वह प्रभु है!” अतः शमौन पतरस ने यह सुनकर कि वह प्रभु है, अंगरखा बाँधा, क्योंकि वह नग्‍न था, और झील में कूद पड़ा। परंतु अन्य शिष्य मछलियों से भरे जाल को खींचते हुए नाव से आए, क्योंकि वे भूमि से दूर नहीं बल्कि लगभग सौ मीटर पर थे। जब वे भूमि पर आए तो उन्होंने कोयले की आग और उस पर मछली और रोटी रखी हुई देखी। यीशु ने उनसे कहा, “जो मछलियाँ तुमने अभी पकड़ी हैं, उनमें से कुछ लाओ।” अतः शमौन पतरस नाव पर चढ़कर एक सौ तिरपन बड़ी मछलियों से भरे जाल को भूमि पर खींच लाया; परंतु इतनी अधिक मछलियाँ होने पर भी जाल नहीं फटा। यीशु ने उनसे कहा, “आओ, नाश्ता करो।” शिष्यों में से किसी ने भी उससे यह पूछने का साहस नहीं किया, “तू कौन है?” क्योंकि वे जानते थे कि वह प्रभु है। यीशु आया और रोटी लेकर उन्हें दी, और उसी प्रकार मछली भी दी। अब यह तीसरी बार था, जब यीशु मृतकों में से जीवित होकर शिष्यों पर प्रकट हुआ। फिर जब उन्होंने नाश्ता कर लिया तो यीशु ने शमौन पतरस से पूछा, “यूहन्‍ना के पुत्र शमौन, क्या तू इनसे अधिक मुझसे प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ प्रभु, तू जानता है कि मैं तुझसे प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” यीशु ने उससे फिर दूसरी बार पूछा, “यूहन्‍ना के पुत्र शमौन, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है? ” उसने उससे कहा, “हाँ प्रभु, तू जानता है कि मैं तुझसे प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों की रखवाली कर।” उसने तीसरी बार उससे पूछा, “यूहन्‍ना के पुत्र शमौन, क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?” पतरस उदास हो गया कि यीशु ने उससे तीसरी बार पूछा, “क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?” और उसने उससे कहा, “प्रभु, तू तो सब जानता है; तू जानता है कि मैं तुझसे प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा। मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तू जवान था तो अपने आप कमर बाँधकर जहाँ चाहता था वहाँ चला फिरा करता था; परंतु जब तू बूढ़ा हो जाएगा तो अपने हाथ फैलाएगा और दूसरा तेरी कमर बाँधकर जहाँ तू नहीं चाहता वहाँ तुझे ले जाएगा।” यह बात कहकर यीशु ने यह संकेत दिया कि पतरस किस प्रकार की मृत्यु से परमेश्‍वर की महिमा करेगा, और यह कहने के बाद उसने उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” पतरस ने मुड़कर उस शिष्य को पीछे आते हुए देखा, जिससे यीशु प्रेम रखता था, जिसने भोजन के समय उसकी छाती की ओर झुककर पूछा था, “प्रभु, तुझे पकड़वानेवाला कौन है?” उसे देखकर पतरस ने यीशु से पूछा, “प्रभु, और इसका क्या होगा?” यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक रहे, तो इससे तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।” इसलिए भाइयों में यह बात फैल गई कि वह शिष्य नहीं मरेगा। परंतु यीशु ने उससे यह नहीं कहा कि वह नहीं मरेगा, बल्कि यह, “यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक रहे, तो इससे तुझे क्या?” यह वही शिष्य है जिसने इन बातों के विषय में साक्षी दी और इन्हें लिखा है, और हम जानते हैं कि उसकी साक्षी सच्‍ची है। और भी बहुत से कार्य हैं जो यीशु ने किए; यदि उन्हें एक-एक करके लिखा जाता तो मैं सोचता हूँ कि लिखी गई पुस्तकें जगत में भी न समातीं। हे थियुफिलुस, मैंने अपनी पहली पुस्तक में उन सब बातों के विषय में लिखा है, जिन्हें यीशु ने करना और सिखाना आरंभ किया, और उस दिन तक करता रहा जब तक वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। अपने दुःख-भोग के बाद यीशु ने बहुत से ठोस प्रमाणों से अपने आपको उन पर जीवित प्रकट किया, और वह चालीस दिन तक उन्हें दिखाई देता रहा और परमेश्‍वर के राज्य की बातें बताता रहा। जब वह उनके साथ था, उसने उन्हें आज्ञा दी, “यरूशलेम को न छोड़ना, बल्कि पिता की उस प्रतिज्ञा की प्रतीक्षा करना जिसे तुमने मुझसे सुना है; क्योंकि यूहन्‍ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा दिया जाएगा।” अतः जब वे एकत्रित हुए तो यीशु से पूछने लगे, “प्रभु, क्या तू इसी समय इस्राएल के राज्य को पुनःस्थापित करेगा?” उसने उनसे कहा, “उन समयों या कालों को जानना जिन्हें पिता ने अपने अधिकार में रखा है, तुम्हारा कार्य नहीं; परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे, और यरूशलेम में और सारे यहूदिया और सामरिया में और पृथ्वी के छोर तक मेरे साक्षी होगे।” ये बातें कहकर यीशु उनके देखते ही देखते ऊपर उठा लिया गया, और बादल ने उसे उनकी आँखों से छिपा लिया। जब वे आकाश की ओर टकटकी लगाकर उसे जाते हुए देख रहे थे, तो देखो, श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए दो पुरुष उनके पास आ खड़े हुए, और कहा, “हे गलीली पुरुषो, तुम खड़े-खड़े आकाश की ओर क्यों देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, वैसे ही फिर आएगा जैसे तुमने उसे स्वर्ग को जाते हुए देखा है।” तब वे जैतून नामक पहाड़ से, जो यरूशलेम के निकट एक सब्त के दिन की दूरी पर है, यरूशलेम को लौट गए। जब वे वहाँ पहुँचे, तो उस अटारी पर गए, जहाँ पतरस और यूहन्‍ना और याकूब और अंद्रियास, फिलिप्पुस और थोमा, बरतुल्मै और मत्ती, हलफई का पुत्र याकूब और शमौन ज़ेलोतेस और याकूब का पुत्र यहूदा ठहरे थे। ये सब कई स्‍त्रियों और यीशु की माता मरियम तथा उसके भाइयों के साथ एक मन होकर प्रार्थना में लगे हुए थे। उन्हीं दिनों में पतरस ने उन भाइयों के बीच (जहाँ लगभग एक सौ बीस लोग थे) खड़े होकर कहा, “भाइयो, यह आवश्यक था कि पवित्रशास्‍त्र का वह वचन पूरा हो, जो पवित्र आत्मा ने दाऊद के मुँह से उस यहूदा के विषय में पहले से कहा था जो यीशु को पकड़नेवालों का मार्गदर्शक बना। वह हमारे साथ गिना जाता था और इस सेवाकार्य में सहभागी था। उसने अधर्म की कमाई से एक खेत खरीदा, और सिर के बल गिरकर उसका पेट फट गया, और उसकी सब आँतें बाहर निकल आईं। यरूशलेम के सब निवासी यह बात जान गए; इस कारण उनकी अपनी भाषा में वह खेत ‘हकलदमा’ अर्थात् लहू का खेत कहलाया। क्योंकि भजन संहिता में लिखा है: उसका निवास स्थान उजड़ जाए और उसमें वास करनेवाला कोई न रहे; और उसका पद कोई और ले ले। “इसलिए आवश्यक है कि जो लोग हमारे साथ उस समय से हैं जब प्रभु यीशु हमारे बीच में आता जाता था, अर्थात् यूहन्‍ना के बपतिस्मा से लेकर उस दिन तक जब यीशु हमारे पास से ऊपर उठा लिया गया, उनमें से एक हमारे साथ उसके पुनरुत्थान का साक्षी हो।” तब उन्होंने दो व्यक्‍तियों को खड़ा किया, यूसुफ जो बरसब्बा कहलाता था और जिसे यूस्तुस भी कहते थे, तथा मत्तियाह को। उन्होंने प्रार्थना की, “हे प्रभु, तू जो सब के मन को जानता है, यह प्रकट कर कि इन दोनों में से तूने किसको चुना है कि वह इस सेवा और प्रेरिताई का पद ले, जिससे फिरकर यहूदा अपने स्थान को चला गया।” तब उन्होंने उनके लिए पर्चियाँ डालीं, और पर्ची मत्तियाह के नाम पर निकली। अतः वह उन ग्यारह प्रेरितों के साथ गिना गया। जब पिंतेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक स्थान पर एकत्रित थे। अचानक आकाश से एक प्रचंड आँधी की सनसनाहट की सी आवाज़ हुई और उससे सारा घर, जहाँ वे बैठे थे, गूँज गया; और उन्हें आग की सी विभाजित जीभें दिखाई दीं, और वे उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जैसे आत्मा ने उन्हें बोलने का सामर्थ्य दिया, वे अन्य भाषाओं में बोलने लगे। उस समय यरूशलेम में आकाश के नीचे के प्रत्येक देश से आए यहूदी भक्‍त रह रहे थे। जब यह आवाज़ हुई तो भीड़ लग गई और लोग भौचक्‍के रह गए, क्योंकि हर एक अपनी ही भाषा में उनको बोलते हुए सुन रहा था। वे चकित थे और आश्‍चर्य करते हुए कहने लगे, “देखो, ये सब जो बोल रहे हैं, क्या गलीली नहीं? फिर हममें से प्रत्येक अपनी जन्मभूमि की भाषा में कैसे सुन रहा है? हम तो पारथी और मेदी और एलामी, और मेसोपोटामिया, यहूदिया और कप्पदुकिया, पुंतुस और आसिया, फ्रूगिया और पंफूलिया, मिस्र, और कुरेने के पास लिबिया के प्रदेशों में रहनेवाले, और रोम से आए हुए लोग हैं, अर्थात् यहूदी और यहूदी मत धारण करनेवाले, और क्रेती तथा अरबी भी हैं; हम अपनी-अपनी भाषा में उनको परमेश्‍वर के महान कार्यों का वर्णन करते हुए सुन रहे हैं।” और वे सब चकित हुए और दुविधा में पड़कर एक दूसरे से कहने लगे, “इसका क्या अर्थ है?” परंतु अन्य लोग ठट्ठा करके कहने लगे, “वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।” तब पतरस ने उन ग्यारहों के साथ खड़े होकर ऊँची आवाज़ में उनसे कहा, “हे यहूदी लोगो और यरूशलेम के सब रहनेवालो, तुम यह जान लो और मेरी बातें कान लगाकर सुनो। जैसा तुम समझ रहे हो, ये लोग नशे में नहीं हैं; क्योंकि अभी तो दिन के नौ बजे हैं, बल्कि यह वह बात है जो योएल भविष्यवक्‍ता के द्वारा कही गई थी: परमेश्‍वर कहता है, ‘अंतिम दिनों में ऐसा होगा कि मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उंडेलूँगा, और तुम्हारे पुत्र और तुम्हारी पुत्रियाँ भविष्यवाणी करेंगी, और तुम्हारे युवक दर्शन देखेंगे, और तुम्हारे वृद्ध स्वप्न देखेंगे; और मैं अपने दासों और अपनी दासियों पर भी उन दिनों में अपना आत्मा उंडेलूँगा, और वे भविष्यवाणी करेंगे। मैं ऊपर आकाश में अद्भुत कार्य और नीचे पृथ्वी पर चिह्‍न, अर्थात् लहू और आग और धुएँ का बादल दिखाऊँगा। प्रभु के उस महान और तेजस्वी दिन के आने से पहले, सूर्य अंधकार में और चंद्रमा लहू में बदल जाएगा; और ऐसा होगा कि जो कोई प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पाएगा।’ “हे इस्राएलियो, ये बातें सुनो: यीशु नासरी सामर्थ्य के कार्यों, अद्भुत कार्यों और चिह्‍नों के द्वारा तुम्हारे सामने ऐसा मनुष्य प्रमाणित हुआ जो परमेश्‍वर की ओर से है। ये कार्य परमेश्‍वर ने उसके द्वारा तुम्हारे बीच दिखाए, जैसा तुम स्वयं जानते हो। उसी यीशु को जो परमेश्‍वर की निर्धारित योजना और पूर्वज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया था, तुमने अधर्मियों के हाथों क्रूस पर चढ़ाकर मार डाला। उसी को परमेश्‍वर ने मृत्यु की पीड़ाओं से छुड़ाकर जिला उठाया, क्योंकि यह संभव नहीं था कि वह मृत्यु के वश में रहता। क्योंकि दाऊद उसके विषय में कहता है: मैं निरंतर प्रभु को अपने सामने देखता रहा; क्योंकि वह मेरे दाहिनी ओर है कि मैं डगमगा न जाऊँ। इस कारण मेरा मन आनंदित हुआ और मेरी जीभ मगन हुई, और इसके साथ-साथ मेरा शरीर भी आशा में बना रहेगा; क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, और न ही अपने पवित्र जन को सड़ने देगा। तूने मुझ पर जीवन का मार्ग प्रकट किया है, तू अपनी उपस्थिति के द्वारा मुझे आनंद से भर देगा। “हे भाइयो, मैं तुमसे कुलपति दाऊद के विषय में साहस के साथ कह सकता हूँ कि वह तो मर गया और गाड़ा भी गया और उसकी कब्र आज तक हमारे बीच में है। क्योंकि वह एक भविष्यवक्‍ता था, इसलिए यह जानता था कि परमेश्‍वर ने उसके वंश में से एक को उसके सिंहासन पर बैठाने की शपथ उससे खाई है, उसने मसीह के पुनरुत्थान के विषय में पहले से जानकर कहा कि न तो वह अधोलोक में छोड़ा गया और न ही उसका शरीर सड़ा। इसी यीशु को परमेश्‍वर ने जिला उठाया, जिसके हम सब साक्षी हैं। अतः परमेश्‍वर के दाहिनी ओर ऊँचे पर उठाए जाकर यीशु ने पवित्र आत्मा को उंडेल दिया जिसकी प्रतिज्ञा उसने पिता से पाई थी, और जिसे अब तुम देख और सुन रहे हो। क्योंकि दाऊद तो स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, परंतु वह आप कहता है: प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, ‘मेरे दाहिनी ओर बैठ जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पैरों की चौकी न बना दूँ।’ “इसलिए इस्राएल का सारा घराना यह निश्‍चित रूप से जान ले कि जिस यीशु को तुमने क्रूस पर चढ़ाया, उसी को परमेश्‍वर ने प्रभु और मसीह भी ठहराया।” यह सुनकर उनके हृदय छिद गए, और उन्होंने पतरस तथा अन्य प्रेरितों से पूछा, “भाइयो, हम क्या करें?” पतरस ने उनसे कहा, “पश्‍चात्ताप करो, और तुममें से हर एक अपने पापों की क्षमा के लिए यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले, और तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे; क्योंकि यह प्रतिज्ञा तुम्हारे और तुम्हारी संतानों के लिए और उन सब दूर-दूर के लोगों के लिए है जिन्हें प्रभु हमारा परमेश्‍वर अपने पास बुलाता है।” और उसने अन्य बहुत सी बातों के द्वारा साक्षी दी, और यह कहते हुए उन्हें प्रोत्साहित करता रहा, “इस कुटिल पीढ़ी से बचो।” अतः जिन्होंने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्मा लिया, और उसी दिन लगभग तीन हज़ार लोग उनमें जुड़ गए। वे प्रेरितों की शिक्षा पाने और संगति रखने, रोटी तोड़ने और प्रार्थना करने में निरंतर लगे रहे। प्रत्येक के मन में भय छाया रहता था, और प्रेरितों के द्वारा बहुत से अद्भुत कार्य और चिह्‍न होते थे। सभी विश्‍वास करनेवाले एक साथ रहते थे और उनकी सब वस्तुएँ साझे की होती थीं, तथा वे अपनी संपत्ति और सामान बेचकर जैसी जिसकी आवश्यकता होती थी उसके अनुसार सब को बाँट दिया करते थे। वे प्रतिदिन एक मन होकर मंदिर-परिसर में निरंतर इकट्ठा होते, घर-घर रोटी तोड़ते, आनंद तथा मन की सीधाई से भोजन करते, और परमेश्‍वर की स्तुति किया करते थे और सब लोग उनसे प्रसन्‍न थे। प्रभु प्रतिदिन उद्धार पानेवालों को उनमें जोड़ दिया करता था। पतरस और यूहन्‍ना दिन के तीन बजे, जब प्रार्थना का समय था, मंदिर में जा रहे थे। लोग जन्म से लंगड़े एक मनुष्य को लाकर प्रतिदिन मंदिर-परिसर के सुंदर नामक द्वार के पास बैठा देते थे कि वह मंदिर-परिसर में प्रवेश करनेवालों से भीख माँगे। जब उसने देखा कि पतरस और यूहन्‍ना मंदिर-परिसर में प्रवेश करने पर हैं, तो वह उनसे भीख माँगने लगा। पतरस ने यूहन्‍ना के साथ उसकी ओर एकटक देखकर कहा, “हमारी ओर देख।” वह उनसे कुछ पाने की आशा रखते हुए उनकी ओर ताकने लगा। तब पतरस ने कहा, “चाँदी और सोना तो मेरे पास नहीं है, परंतु जो मेरे पास है वह मैं तुझे देता हूँ; यीशु मसीह नासरी के नाम से उठ और चल फिर।” उसने उसका दाहिना हाथ पकड़कर उसे उठाया; और तुरंत उसके पैरों और टखनों में बल आ गया। वह उछलकर खड़ा हो गया और चलने-फिरने लगा, और उसने चलते और कूदते और परमेश्‍वर की स्तुति करते हुए उनके साथ मंदिर-परिसर में प्रवेश किया। सब लोगों ने उसे चलते-फिरते और परमेश्‍वर की स्तुति करते हुए देखा, और पहचान लिया कि यह वही है जो मंदिर-परिसर के सुंदर-फाटक के पास भीख माँगने के लिए बैठता था; और जो उसके साथ हुआ उससे वे आश्‍चर्य और घबराहट से भर गए। जब वह पतरस और यूहन्‍ना को पकड़े हुए था तो सब लोग अत्यंत आश्‍चर्यचकित होकर उस ओसारे में जो सुलैमान का कहलाता है, उनके पास दौड़े आए। यह देखकर पतरस ने लोगों से कहा, “हे इस्राएलियो, तुम इस बात पर क्यों आश्‍चर्य कर रहे हो, या हमें ऐसे एकटक क्यों देख रहे हो, मानो हमने अपनी शक्‍ति या भक्‍ति से उसे चलने योग्य बना दिया? अब्राहम के परमेश्‍वर और इसहाक के परमेश्‍वर और याकूब के परमेश्‍वर, अर्थात् हमारे पूर्वजों के परमेश्‍वर ने अपने सेवक यीशु को महिमा दी, जिसे तुमने पकड़वाया और जब पिलातुस ने उसे छोड़ देने का निर्णय किया, तो उसके सामने उसका इनकार किया। तुमने उस पवित्र और धर्मी का इनकार किया और अपने लिए एक हत्यारे को छोड़ने की माँग की, और जीवन के कर्ता को मार डाला; पर परमेश्‍वर ने उसे मृतकों में से जिला दिया, जिसके हम साक्षी हैं। यीशु के नाम ने—उस विश्‍वास के द्वारा जो उसके नाम पर है—इस मनुष्य को जिसे तुम देखते और जानते हो, बल दिया है; और उसी विश्‍वास ने जो यीशु के द्वारा है, इस मनुष्य को तुम सब के सामने बिलकुल अच्छा कर दिया है। “अब हे भाइयो, मैं जानता हूँ कि तुमने यह अज्ञानता में किया, वैसे ही तुम्हारे अधिकारियों ने भी किया; परंतु जिन बातों को परमेश्‍वर ने सब भविष्यवक्‍ताओं के मुँह से पहले से बता दिया था कि उसका मसीह दुःख उठाएगा, उन्हें उसने इसी प्रकार पूरा किया। इसलिए पश्‍चात्ताप करो और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएँ, ताकि प्रभु की उपस्थिति से सुख-शांति का समय आए और वह तुम्हारे लिए पहले से ठहराए गए मसीह अर्थात् यीशु को भेजे। यह अवश्य है कि वह स्वर्ग में तब तक रहे जब तक कि उन सब वस्तुओं की पुनर्स्थापना का समय न आ जाए जिनके विषय में परमेश्‍वर ने प्राचीन काल से अपने पवित्र भविष्यवक्‍ताओं के मुँह से बताया है। मूसा ने कहा: प्रभु तुम्हारा परमेश्‍वर तुम्हारे भाइयों में से मेरे समान एक भविष्यवक्‍ता को तुम्हारे लिए खड़ा करेगा; जो भी वह तुमसे कहे, उसकी सुनना। और ऐसा होगा कि प्रत्येक व्यक्‍ति जो उस भविष्यवक्‍ता की नहीं सुनेगा, उसे लोगों में से पूर्ण रूप से नाश किया जाएगा। शमूएल से लेकर उसके बाद के जितने भी भविष्यवक्‍ताओं ने भविष्यवाणी की, सब ने इन दिनों की घोषणा की। तुम भविष्यवक्‍ताओं और उस वाचा की संतान हो जिसे परमेश्‍वर ने अब्राहम से यह कहते हुए तुम्हारे पूर्वजों के साथ बाँधी: तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशिष पाएँगे। परमेश्‍वर ने अपने सेवक को उठाकर पहले तुम्हारे पास भेजा कि तुममें से हर एक को उसकी बुराइयों से फेरकर आशिष दे।” जब वे लोगों से बातें कर रहे थे तो याजक और मंदिर का मुख्य सुरक्षा अधिकारी और सदूकी उनके विरुद्ध आ खड़े हुए। वे इस बात से क्रोधित थे कि वे लोगों को उपदेश दे रहे थे और यह प्रचार कर रहे थे कि यीशु में मृतकों का पुनरुत्थान है। तब उन्होंने उन्हें पकड़ा और अगले दिन तक हवालात में रखा, क्योंकि संध्या हो चुकी थी। परंतु वचन सुननेवालों में से बहुतों ने विश्‍वास किया, और उन पुरुषों की संख्या लगभग पाँच हज़ार हो गई। फिर ऐसा हुआ कि अगले दिन उनके अधिकारी और धर्मवृद्ध और शास्‍त्री यरूशलेम में इकट्ठे हुए, और महायाजक हन्‍ना और काइफा और यूहन्‍ना और सिकंदर और जितने महायाजकीय घराने में से थे, सब वहाँ थे। वे उन्हें बीच में खड़ा करके पूछने लगे, “तुमने यह कार्य किस सामर्थ्य से या किस नाम से किया है?” तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर उनसे कहा, “हे प्रजा के अधिकारियो और धर्मवृद्धो, यदि आज एक दुर्बल मनुष्य के साथ हुई भलाई के विषय में हमसे पूछताछ की जा रही है कि वह कैसे अच्छा हुआ है, तो तुम सब और इस्राएल के सब लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से, जिसे तुमने क्रूस पर चढ़ाया, और जिसे परमेश्‍वर ने मृतकों में से जिलाया, उसी के नाम से यह मनुष्य तुम्हारे सामने अच्छा-भला खड़ा है। यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्‍त्रियों ने ठुकरा दिया था, पर वह कोने का प्रमुख पत्थर बन गया। “किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों के बीच में कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया जिसके द्वारा हमारा उद्धार हो सके।” जब उन्होंने पतरस और यूहन्‍ना के साहस को देखा और यह भी जाना कि वे अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं तो उनको आश्‍चर्य हुआ, और उन्होंने पहचाना कि ये यीशु के साथ रहे हैं; फिर उस मनुष्य को जो अच्छा हुआ था, उनके साथ खड़ा देखकर वे विरोध में कुछ न कह सके। तब उन्हें महासभा से बाहर जाने का आदेश देकर वे आपस में विचार-विमर्श करने लगे और कहने लगे, “हम इन मनुष्यों के साथ क्या करें? क्योंकि यरूशलेम के सब रहनेवालों पर प्रकट है कि उनके द्वारा एक असाधारण चिह्‍न दिखाया गया है और हम इसका इनकार नहीं कर सकते। परंतु कहीं ऐसा न हो कि यह बात और अधिक लोगों में फैल जाए, इसलिए हम उन्हें धमकाएँ कि वे इस नाम से किसी भी मनुष्य से बात न करें।” तब उन्होंने उन्हें बुलाकर आज्ञा दी कि वे यीशु के नाम से कुछ भी बात न करें और न ही शिक्षा दें। परंतु पतरस और यूहन्‍ना ने उनको उत्तर दिया, “तुम ही न्याय करो। परमेश्‍वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानना क्या परमेश्‍वर की दृष्‍टि में उचित है? क्योंकि यह तो हमसे नहीं हो सकता कि जो हमने देखा और सुना है, उसे न कहें।” तब उन्होंने उनको और धमकाकर छोड़ दिया, क्योंकि लोगों के कारण वे समझ नहीं पा रहे थे कि उन्हें कैसे दंड दें, इसलिए कि जो कुछ हुआ था उसके कारण सब लोग परमेश्‍वर की महिमा कर रहे थे। जिस मनुष्य पर स्वस्थ होने का यह चिह्‍न दिखाया गया था, वह चालीस वर्ष से अधिक का था। वे छूटकर अपने लोगों के पास आए और जो कुछ मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों ने उनसे कहा था, कह सुनाया। जब उन्होंने यह सुना तो एक मन होकर ऊँची आवाज़ से परमेश्‍वर को पुकारा, “हे स्वामी, तू वही है जिसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है सब को बनाया। तूने पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे पिता, अपने सेवक दाऊद के मुँह से कहा: गैरयहूदियों ने क्यों हुल्‍लड़ मचाया और लोगों ने व्यर्थ बातें क्यों गढ़ीं? प्रभु के विरुद्ध और उसके अभिषिक्‍त के विरुद्ध पृथ्वी के राजा खड़े हुए और शासक एक साथ इकट्ठे हुए। “क्योंकि सचमुच तेरे पवित्र सेवक यीशु के विरुद्ध, जिसका अभिषेक तूने किया, हेरोदेस और पुंतियुस पिलातुस भी गैरयहूदियों और इस्राएल के लोगों के साथ इस नगर में इकट्ठे हुए, कि वे वही करें जिसका होना तेरे सामर्थ्य और तेरी योजना में पहले से निर्धारित था। अब, हे प्रभु, उनकी धमकियों को देख, और अपने दासों को वरदान दे कि तेरा वचन पूरे साहस के साथ सुनाएँ, और साथ ही तू अपना हाथ बढ़ा कि तेरे पवित्र सेवक यीशु के नाम से चंगाई और चिह्‍न और अद्भुत कार्य हों।” जब वे प्रार्थना कर चुके तो जिस स्थान पर वे इकट्ठे थे, वह हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए, और साहस के साथ परमेश्‍वर का वचन सुनाने लगे। विश्‍वास करनेवालों का समूह एक मन और एक चित्त था, और कोई भी अपनी संपत्ति को अपनी नहीं कहता था, बल्कि उनका सब कुछ साझे का था। प्रेरित बड़े सामर्थ्य के साथ प्रभु यीशु के पुनरुत्थान की साक्षी देते थे। उन सब पर बड़ा अनुग्रह था। उनमें से किसी को भी कोई अभाव न था क्योंकि जिस किसी के पास भूमि या घर थे वे उन्हें बेचकर उनका मूल्य लाते और प्रेरितों के चरणों में रख देते थे; और जिस किसी को जैसी आवश्यकता होती थी उसके अनुसार उसे बाँट दिया जाता था। यूसुफ साइप्रस का एक लेवी था, जो प्रेरितों द्वारा बरनाबास अर्थात् प्रोत्साहन का पुत्र भी कहलाता था, उसकी कुछ भूमि थी जिसे उसने बेचा और रुपए लाकर प्रेरितों के चरणों में रख दिए। हनन्याह नामक एक व्यक्‍ति ने अपनी पत्‍नी सफीरा के साथ मिलकर अपनी कुछ संपत्ति बेची और उसके मूल्य में से कुछ अपने लिए रख लिया—यह बात उसकी पत्‍नी भी जानती थी—और उसका एक भाग लाकर प्रेरितों के चरणों में रख दिया। परंतु पतरस ने कहा, “हनन्याह, शैतान ने तेरे मन में यह बात क्यों डाली कि तू पवित्र आत्मा से झूठ बोले और भूमि के मूल्य में से कुछ अपने लिए रख ले? जब वह तेरे पास रही, तो क्या वह तेरी न थी? और जब बिक गई तो क्या तेरे अधिकार में न थी? फिर तेरे मन में ऐसा करने का विचार क्यों आया? तूने मनुष्यों से नहीं, परंतु परमेश्‍वर से झूठ बोला है।” इन शब्दों को सुनते ही हनन्याह गिर पड़ा और दम तोड़ दिया; और सब सुननेवालों पर बड़ा भय छा गया। तब जवानों ने उठकर उसके शव को कपड़े में लपेटा और बाहर ले जाकर गाड़ दिया। फिर लगभग तीन घंटे के बाद ऐसा हुआ कि उसकी पत्‍नी, जो इस घटना से अनजान थी, भीतर आई। पतरस ने उससे कहा, “मुझे बता, क्या तुमने वह भूमि इतने में ही बेची थी?” उसने कहा, “हाँ, इतने में ही।” तब पतरस ने उससे कहा, “तुम दोनों प्रभु के आत्मा की परीक्षा करने के लिए क्यों एकमत हुए? देख, तेरे पति के गाड़नेवाले द्वार पर ही हैं और वे तुझे भी बाहर ले जाएँगे।” वह तुरंत उसके पैरों पर गिर पड़ी और दम तोड़ दिया। फिर जवानों ने भीतर आकर उसे मरा पाया, और उसे बाहर ले जाकर उसके पति के पास गाड़ दिया। तब सारी कलीसिया पर और इस बात के सब सुननेवालों पर बड़ा भय छा गया। प्रेरितों के हाथों के द्वारा बहुत से चिह्‍न और अद्भुत कार्य लोगों के मध्य किए जा रहे थे; (और सब एक मन होकर सुलैमान के ओसारे में इकट्ठे होते थे। यद्यपि औरों में से किसी को उनमें सम्मिलित होने का साहस नहीं होता था, फिर भी लोग उनकी बड़ाई करते थे; और प्रभु पर विश्‍वास करनेवाले पुरुषों और स्‍त्रियों की संख्या बढ़ती जा रही थी।) यहाँ तक कि लोग बीमारों को बिछौनों और खाटों पर ला-लाकर सड़कों पर लिटा देते थे कि जब पतरस आए तो उसकी छाया ही उनमें से किसी पर पड़ जाए। यरूशलेम के आस-पास के नगरों से भी बहुत लोग बीमारों और अशुद्ध आत्माओं के सताए हुओं को ला-लाकर एकत्रित होते थे, और वे सब अच्छे किए जाते थे। तब महायाजक उठा और अपने सब साथियों के साथ जो सदूकी पंथ के थे, ईर्ष्या से भरकर प्रेरितों को पकड़ा और उन्हें कारागार में डाल दिया। परंतु रात को प्रभु के एक स्वर्गदूत ने बंदीगृह के द्वार खोलकर उन्हें बाहर निकाला और कहा, “जाओ और मंदिर में खड़े होकर लोगों को इस जीवन की सब बातें सुनाओ।” यह सुनकर वे भोर को ही मंदिर में जाकर उपदेश देने लगे। जब महायाजक तथा उसके साथी आए तो उन्होंने महासभा और इस्राएलियों के सब धर्मवृद्धों को इकट्ठा किया, और बंदीगृह से प्रेरितों को लाने का आदेश भेजा। परंतु जब सिपाही वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने उन्हें बंदीगृह में नहीं पाया, और लौटकर यह सूचना दी, “हमने बंदीगृह को पूरी सुरक्षा के साथ बंद किया हुआ और पहरेदारों को द्वारों पर खड़े हुए पाया, परंतु जब उन्हें खोला तो हमें भीतर कोई नहीं मिला।” जब मंदिर-परिसर के मुख्य सुरक्षा अधिकारी और मुख्य याजकों ने ये बातें सुनीं तो उनके विषय में बड़ी दुविधा में पड़ गए कि अब क्या होगा। फिर किसी ने आकर उन्हें बताया, “देखो, जिन लोगों को तुमने बंदीगृह में डाला था, वे मंदिर में खड़े होकर लोगों को उपदेश दे रहे हैं।” तब मुख्य सुरक्षा अधिकारी सिपाहियों के साथ जाकर उन्हें ले आया, पर बलपूर्वक नहीं, क्योंकि वे लोगों से डरते थे कि कहीं लोग उन पर पथराव न कर दें। फिर उन्होंने उन्हें महासभा के सामने लाकर खड़ा कर दिया। तब महायाजक ने उनसे पूछा, “क्या हमने तुम्हें कड़ा आदेश नहीं दिया था कि तुम इस नाम से उपदेश न देना? फिर भी देखो, तुमने यरूशलेम को अपनी शिक्षा से भर दिया है, और तुम उस मनुष्य का लहू हमारे सिर पर मढ़ना चाहते हो।” तब पतरस और प्रेरितों ने उत्तर दिया, “मनुष्यों की अपेक्षा परमेश्‍वर की आज्ञा मानना आवश्यक है। हमारे पूर्वजों के परमेश्‍वर ने यीशु को जिलाया, जिसे तुमने काठ पर लटकाकर मार डाला था। उसी को परमेश्‍वर ने प्रभु और उद्धारकर्ता ठहराकर अपने दाहिनी ओर ऊँचा उठाया कि वह इस्राएल को पश्‍चात्ताप और पापों की क्षमा प्रदान करे। हम इन बातों के साक्षी हैं, और वैसे ही पवित्र आत्मा भी है जिसे परमेश्‍वर ने अपनी आज्ञा माननेवालों को दिया है।” जब उन्होंने यह सुना तो वे भड़क उठे और उन्हें मार डालना चाहा। परंतु गमलीएल नामक एक फरीसी ने, जो व्यवस्था का शिक्षक तथा सब लोगों में आदरणीय था, महासभा में खड़े होकर उन लोगों को थोड़ी देर के लिए बाहर कर देने का आदेश दिया, और उसने उनसे कहा, “हे इस्राएलियो, तुम इन लोगों के साथ जो करना चाहते हो, सोच समझकर करो। क्योंकि कुछ समय पहले थियूदास स्वयं कुछ होने का दावा करते हुए उठ खड़ा हुआ, और लगभग चार सौ पुरुष उसके साथ हो लिए थे; परंतु वह मारा गया, और जितने उसके अनुयायी थे वे सब तितर-बितर हो गए और मिट गए। इसके बाद नाम लिखाई के दिनों में यहूदा गलीली उठ खड़ा हुआ और लोगों को अपनी ओर कर लिया; परंतु वह भी नाश हो गया, और जितने उसके अनुयायी थे वे सब तितर-बितर हो गए। इसलिए अब मैं तुमसे कहता हूँ, इन लोगों से दूर रहो और इन्हें छोड़ दो; क्योंकि यदि यह योजना या कार्य मनुष्यों की ओर से है तो नष्‍ट हो जाएगा, परंतु यदि परमेश्‍वर की ओर से है, तो तुम उन्हें नष्‍ट नहीं कर सकोगे; कहीं ऐसा न हो कि तुम परमेश्‍वर से भी लड़नेवाले ठहरो।” तब उन्होंने उसकी मान ली, और प्रेरितों को भीतर बुलवाकर उन्हें पिटवाया, और उन्हें यीशु के नाम से बात न करने की आज्ञा देकर छोड़ दिया। तब वे महासभा के सामने से आनंदित होकर चले गए कि हम उसके नाम के लिए अपमानित होने के योग्य तो ठहरे; और उन्होंने प्रतिदिन मंदिर-परिसर और घर-घर में उपदेश देना और यह सुसमाचार सुनाना न छोड़ा कि यीशु ही मसीह है। उन दिनों में जब शिष्यों की संख्या बढ़ने लगी, तो यूनानी बोलनेवाले यहूदी इब्रानी बोलनेवाले यहूदियों पर कुड़कुड़ाने लगे कि प्रतिदिन की सेवा में उनकी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती। तब उन बारहों ने शिष्यों की मंडली को अपने पास बुलाकर कहा, “हमारे लिए यह ठीक नहीं है कि हम परमेश्‍वर के वचन को छोड़कर खिलाने-पिलाने की सेवा करें। इसलिए, हे भाइयो, अपने में से सात सुनाम पुरुषों को चुन लो जो पवित्र आत्मा और बुद्धि से परिपूर्ण हों, कि उन्हें हम इस कार्य के लिए नियुक्‍त करें। परंतु हम तो प्रार्थना और वचन की सेवा में लगे रहेंगे।” यह बात सारी मंडली को अच्छी लगी, और उन्होंने स्तिफनुस को, जो विश्‍वास और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण व्यक्‍ति था, और फिलिप्पुस और प्रुखुरुस और नीकानोर और तीमोन और परमिनास और यहूदी मत में आनेवाले अंताकिया के नीकुलाउस को चुन लिया। उन्होंने उन्हें प्रेरितों के सामने खड़ा किया, जिन्होंने प्रार्थना करके उन पर हाथ रखे। इस प्रकार परमेश्‍वर का वचन फैलता गया, और यरूशलेम में शिष्यों की संख्या बहुत बढ़ती गई, और बहुत से याजक भी इस मत को मानने लगे। स्तिफनुस अनुग्रह और सामर्थ्य से परिपूर्ण होकर लोगों के बीच में अद्भुत कार्य और बड़े-बड़े चिह्‍न दिखाया करता था। तब कुछ जो लिबिरतीन नामक आराधनालय के थे और कुरेनी और सिकंदरिया से थे, और कुछ जो किलिकिया और आसिया के थे, उठ खड़े हुए और स्तिफनुस से वाद-विवाद करने लगे, परंतु जिस बुद्धि और आत्मा से वह बोल रहा था, उसका सामना न कर सके। तब उन्होंने कुछ लोगों को उकसाया जो कहने लगे, “हमने इसे मूसा और परमेश्‍वर के विरुद्ध निंदा की बातें कहते सुना है।” और लोगों और धर्मवृद्धों और शास्‍त्रियों को भड़काया। फिर उन्होंने आकर उसे पकड़ा और महासभा में ले आए। तब उन्होंने झूठे गवाहों को खड़ा किया जिन्होंने कहा, “यह मनुष्य इस पवित्र स्थान और व्यवस्था के विरुद्ध बोलता रहता है। हमने इसे यह कहते हुए सुना है कि वही यीशु नासरी इस स्थान को ढा देगा और उन रीतियों को बदल देगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।” और जब महासभा में बैठे सब लोगों ने उस पर दृष्‍टि गड़ाई तो उसका मुख स्वर्गदूत के समान दिखाई दिया। तब महायाजक ने पूछा, “क्या ये बातें सच हैं?” स्तिफनुस ने कहा, “हे संगी भाइयो और बुज़ुर्गो, सुनो। हमारे पिता अब्राहम के हारान में बसने से पहले जब वह मेसोपोटामिया में था तो महिमामय परमेश्‍वर ने उसे दर्शन दिया, और उससे कहा: तू अपने देश से और अपने संबंधियों में से निकलकर उस देश को चला जा जो मैं तुझे दिखाऊँगा। तब वह कसदियों के देश से निकलकर हारान में बस गया। उसके पिता के मरने के बाद परमेश्‍वर ने उसे वहाँ से इस देश में बसाया जिसमें तुम अब रहते हो; और उसमें परमेश्‍वर ने उसे न तो कोई उत्तराधिकार दिया और न ही पैर रखने का स्थान, परंतु प्रतिज्ञा की कि वह इस देश को उसके और उसके बाद उसके वंश के अधिकार में कर देगा, जबकि उसके कोई संतान न थी। परमेश्‍वर ने इस प्रकार कहा: उसका वंश पराए देश में परदेशी होकर रहेगा, और वहाँ के लोग उसे दास बनाएँगे और चार सौ वर्ष तक उसके साथ दुर्व्यवहार करेंगे। फिर परमेश्‍वर ने कहा: मैं उस जाति को दंड दूँगा जिसके वे दास होंगे, और इसके बाद वे निकल आएँगे और इसी स्थान पर मेरी सेवा करेंगे। और उसने उससे ख़तने की वाचा बाँधी। इस प्रकार उससे इसहाक उत्पन्‍न‍ हुआ और आठवें दिन उसका ख़तना किया गया, और इसहाक से याकूब, और याकूब से बारह कुलपति उत्पन्‍न‍ हुए और उनका भी ख़तना किया गया। “कुलपतियों ने यूसुफ से ईर्ष्या करके उसे मिस्र जानेवालों के हाथ बेच डाला। परंतु परमेश्‍वर उसके साथ था, और उसने समस्त संकटों से उसे छुड़ाकर मिस्र के राजा फ़िरौन के सामने अनुग्रह और बुद्धि प्रदान की, और फ़िरौन ने उसे मिस्र और अपने सारे घराने पर प्रधान नियुक्‍त किया। तब पूरे मिस्र और कनान में अकाल पड़ा तथा भारी संकट आया, और हमारे पूर्वजों को अन्‍न नहीं मिला। परंतु जब याकूब ने सुना कि मिस्र में अनाज है तो उसने हमारे पूर्वजों को पहली बार वहाँ भेजा। फिर दूसरी भेंट में यूसुफ ने स्वयं को अपने भाइयों पर प्रकट किया, और फ़िरौन को यूसुफ के परिवार के विषय में पता चला। तब यूसुफ ने संदेश भेजकर अपने पिता याकूब और सारे संबंधियों को जो कुल मिलाकर पचहत्तर लोग थे, बुलाया; और याकूब मिस्र को चला गया। वह और हमारे पूर्वज वहीं मर गए, और उनके शव शकेम में लाकर उस कब्र में रखे गए, जिसे अब्राहम ने चाँदी के कुछ सिक्‍कों से शकेम में हमोर के पुत्रों से खरीदी थी। “परंतु जैसे-जैसे उस प्रतिज्ञा का समय निकट आता गया जो परमेश्‍वर ने अब्राहम से की थी, मिस्र में वे लोग बढ़ते गए और बहुत हो गए। तब मिस्र में एक अन्य राजा हुआ जो यूसुफ को नहीं जानता था। उसने हमारी जाति से छल करके हमारे पूर्वजों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया कि उन्हें अपने शिशुओं को फेंकना पड़ा कि वे जीवित न रहें। उस समय मूसा का जन्म हुआ, और वह परमेश्‍वर की दृष्‍टि में सुंदर था। उसका पालन-पोषण तीन महीने तक अपने पिता के घर में हुआ। जब उसे बाहर छोड़ दिया गया, तो फ़िरौन की बेटी ने उसे उठा लिया और अपने पुत्र के समान उसका पालन-पोषण किया। मूसा को मिस्रियों की सारी विद्या सिखाई गई, और वह अपने वचन और कार्यों में सामर्थी था। “परंतु जब वह चालीस वर्ष का हुआ, तो उसके मन में आया कि अपने इस्राएली भाइयों की सुधि ले। जब उसने एक के साथ अन्याय होते देखा तो उसका बचाव किया और मिस्री को मारकर उस सताए हुए का बदला लिया। उसने सोचा कि अब उसके भाई समझ जाएँगे कि परमेश्‍वर उनका छुटकारा उसके हाथों से करेगा, परंतु उन्होंने न समझा। फिर दूसरे दिन जब उसने उन्हें झगड़ते हुए देखा तो यह कहते हुए उनका मेल कराने लगा, ‘हे पुरुषो, तुम तो भाई-भाई हो; एक दूसरे को क्यों मारते हो?’ परंतु जो अपने पड़ोसी को मार रहा था उसने मूसा को धक्‍का देकर कहा: तुझे किसने हम पर प्रधान और न्यायी ठहराया है? क्या तू मुझे भी वैसे ही मार डालना चाहता है जैसे तूने कल उस मिस्री को मार डाला था? यह बात सुनकर मूसा भागा, और मिद्यान देश में परदेशी होकर रहने लगा, जहाँ उसके दो पुत्र हुए। “जब चालीस वर्ष बीत गए तो उसे सीनै पहाड़ के जंगल में जलती हुई झाड़ी की ज्वाला के बीच एक स्वर्गदूत दिखाई दिया। यह दर्शन देखकर मूसा को आश्‍चर्य हुआ; और जब वह उसे ध्यान से देखने के लिए पास गया तो प्रभु की यह आवाज़ आई: मैं तेरे पूर्वजों का परमेश्‍वर हूँ, अब्राहम और इसहाक और याकूब का परमेश्‍वर। मूसा काँप उठा और देखने का साहस भी न कर सका। तब प्रभु ने उससे कहा: अपने पैरों से जूते उतार, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है, वह पवित्र भूमि है। मैंने निश्‍चय ही मिस्र में अपनी प्रजा की दुर्दशा देखी और उनका कराहना सुना है, और मैं उन्हें छुड़ाने के लिए उतर आया हूँ। अब आ, मैं तुझे मिस्र में भेजूँगा। “यह वही मूसा है, जिसका लोगों ने यह कहकर इनकार किया था, ‘तुझे किसने हम पर प्रधान और न्यायी ठहराया है?’ उसी को परमेश्‍वर ने प्रधान और छुड़ानेवाला ठहराकर उस स्वर्गदूत के द्वारा भेजा जो उसे झाड़ी में दिखाई दिया था। यही व्यक्‍ति मिस्र देश और लाल समुद्र में और चालीस वर्ष तक जंगल में अद्भुत कार्यों और चिह्‍नों को दिखाकर उन्हें निकाल लाया। यह वही मूसा है जिसने इस्राएलियों से कहा: परमेश्‍वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिए मेरे जैसा एक भविष्यवक्‍ता खड़ा करेगा। यह वही है जो जंगल में मंडली के बीच सीनै पहाड़ पर उस स्वर्गदूत के साथ था जिसने उससे बातें कीं, और हमारे पूर्वजों के साथ था; उसने जीवित वचन प्राप्‍त किए कि उन्हें हम तक पहुँचाए। परंतु हमारे पूर्वजों ने उसका आज्ञाकारी होना न चाहा बल्कि उसे ठुकराकर अपने मनों को मिस्र की ओर फेरा। उन्होंने हारून से कहा: हमारे लिए ऐसे देवता बना जो हमारे आगे-आगे चलें; क्योंकि हम नहीं जानते कि उस मूसा का क्या हुआ जो हमें मिस्र देश से निकाल लाया था। तब उन दिनों में उन्होंने एक बछड़ा बनाया और उस मूर्ति के सामने बलि चढ़ाई, और अपने हाथों के कार्यों में मगन होने लगे। परंतु परमेश्‍वर ने अपना मुँह मोड़ लिया और उन्हें आकाशगणों को पूजने के लिए छोड़ दिया, जैसा भविष्यवक्‍ताओं की पुस्तक में लिखा है: हे इस्राएल के घराने, क्या तुमने जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्‍न‍बलि मुझे ही चढ़ाए? तुमने मोलेक के तंबू और अपने रिफान देवता के तारे अर्थात् उन मूर्तियों को लिया, जिन्हें तुमने पूजने के लिए बनाया था। अतः मैं तुम्हें बेबीलोन के परे ले जाकर बसाऊँगा। “हमारे पूर्वजों के पास जंगल में साक्षी का तंबू था; यह वैसा ही था जैसा मूसा से बात करनेवाले ने आदेश दिया था कि वह उसे उसी नमूने के अनुसार बनाए जिसे उसने देखा था। उसी तंबू को हमारे पूर्वज उत्तराधिकार में पाकर यहोशू के साथ उस समय ले आए जब उन्होंने उन जातियों पर अधिकार पाया, जिन्हें परमेश्‍वर ने हमारे पूर्वजों के सामने से निकाल दिया था, और वह दाऊद के समय तक रहा। दाऊद पर परमेश्‍वर का अनुग्रह हुआ और उसने याकूब के परमेश्‍वर के लिए निवासस्थान बनाने की अनुमति माँगी। परंतु सुलैमान ने उसके लिए भवन बनाया। परंतु परमप्रधान हाथ के बनाए भवनों में नहीं रहता, जैसा कि भविष्यवक्‍ता ने कहा: प्रभु कहता है, ‘स्वर्ग मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे पैरों की चौकी है; तुम मेरे लिए किस प्रकार का भवन बनाओगे, और मेरे विश्राम के लिए कौन सा स्थान होगा? क्या मेरे ही हाथों ने इन सब को नहीं सृजा?’ “हे हठीले, तथा मन और कान के ख़तनारहित लोगो, तुम हर समय पवित्र आत्मा का विरोध करते हो, जैसे तुम्हारे पूर्वज थे वैसे ही तुम हो। तुम्हारे पूर्वजों ने भविष्यवक्‍ताओं में से किसको नहीं सताया? उन्होंने उनको मार डाला जिन्होंने पहले से उस धर्मी के आगमन का संदेश दिया था, और अब तुम उसी के पकड़वानेवाले और हत्यारे ठहरे हो। तुमने स्वर्गदूतों द्वारा ठहराई हुई व्यवस्था तो पाई, परंतु उसका पालन नहीं किया।” जब उन्होंने ये बातें सुनीं तो वे अपने मन में तिलमिला उठे और उस पर दाँत पीसने लगे। परंतु उसने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर स्वर्ग की ओर दृष्‍टि की और परमेश्‍वर की महिमा तथा यीशु को परमेश्‍वर के दाहिनी ओर खड़े देखा, और कहा, “देखो, मैं स्वर्ग को खुला हुआ और मनुष्य के पुत्र को परमेश्‍वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूँ।” परंतु उन्होंने ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाकर अपने कान बंद कर लिए, और एक साथ उस पर झपटे, और उसे नगर के बाहर निकालकर उस पर पथराव करने लगे। गवाहों ने अपने वस्‍त्र उतारकर शाऊल नामक एक युवक के पैरों के पास रख दिए। वे स्तिफनुस पर पथराव कर रहे थे और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा, “हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।” फिर वह घुटने टेककर ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाया, “हे प्रभु, यह पाप इन पर न लगा!” और यह कहकर वह सो गया। शाऊल स्तिफनुस की हत्या में सहमत था। उस दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा सताव आरंभ हुआ; और प्रेरितों को छोड़ सब लोग यहूदिया और सामरिया के क्षेत्रों में तितर-बितर हो गए। कुछ भक्‍तों ने स्तिफनुस को गाड़ा और उसके लिए बड़ा विलाप किया। परंतु शाऊल घर-घर घुसकर कलीसिया को उजाड़ने और पुरुषों तथा स्‍त्रियों को घसीट-घसीटकर बंदीगृह में डालने लगा। तब वे जो तितर-बितर हुए थे, वचन का प्रचार करते फिरे। फिलिप्पुस सामरिया नगर में जाकर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। जब लोगों ने फिलिप्पुस की बातें सुनीं और उन चिह्‍नों को देखा जो वह दिखा रहा था, तो वे एकचित्त होकर उसकी कही बातों पर ध्यान देने लगे; क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएँ ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाती हुई निकल रही थीं, और बहुत से लकवे के रोगी और लंगड़े अच्छे किए जा रहे थे। इस प्रकार उस नगर में बड़ा आनंद छा गया। उस नगर में शमौन नामक एक व्यक्‍ति था, जो जादू-टोना करके सामरिया के लोगों को चकित करता और अपने आपको महान कहता था। छोटे से लेकर बड़े तक सब उसे सम्मान देते और कहते थे, “यह व्यक्‍ति परमेश्‍वर की वह शक्‍ति है जो महान कहलाती है।” वे इसलिए उसे सम्मान देते थे क्योंकि उसने लंबे समय से उन्हें अपने जादू से चकित कर रखा था। परंतु जब उन्होंने फिलिप्पुस का विश्‍वास किया जो परमेश्‍वर के राज्य और यीशु मसीह के नाम का सुसमाचार सुनाता था, तो क्या पुरुष और क्या स्‍त्री, सब बपतिस्मा लेने लगे। स्वयं उस शमौन ने भी विश्‍वास किया, और बपतिस्मा लेकर फिलिप्पुस के साथ रहने लगा; वह चिह्‍नों और सामर्थ्य के बड़े-बड़े कार्यों को होते देखकर चकित होता था। जब यरूशलेम में प्रेरितों ने सुना कि सामरियों ने परमेश्‍वर का वचन ग्रहण कर लिया है तो उन्होंने पतरस और यूहन्‍ना को उनके पास भेजा। उन्होंने जाकर उनके लिए प्रार्थना की कि वे पवित्र आत्मा पाएँ; क्योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था, और उन्होंने केवल प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा लिया था। तब उन्होंने उन पर अपने हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया। जब शमौन ने देखा कि प्रेरितों के हाथ रखने से पवित्र आत्मा दिया जाता है, तो वह उनके पास रुपए लाया और कहा, “यह अधिकार मुझे भी दो कि जिस किसी पर मैं हाथ रखूँ वह पवित्र आत्मा पाए।” परंतु पतरस ने उससे कहा, “तेरे रुपए तेरे साथ नाश हों, क्योंकि तूने परमेश्‍वर के वरदान को रुपयों से प्राप्‍त करने का विचार किया। इस बात में तेरा न कोई भाग है और न हिस्सा, क्योंकि परमेश्‍वर के सामने तेरा मन सीधा नहीं। इसलिए अपनी इस बुराई से पश्‍चात्ताप कर और प्रभु से प्रार्थना कर, संभव है कि तेरे मन का विचार क्षमा किया जाए; क्योंकि मैं देख रहा हूँ कि तू पित्त की सी कड़वाहट और अधर्म के बंधन में है।” इस पर शमौन ने कहा, “तुम मेरे लिए प्रभु से प्रार्थना करो कि जो तुमने कहा है उनमें से कुछ भी मुझ पर न आ पड़े।” अतः जब वे साक्षी देकर प्रभु का वचन सुना चुके तो यरूशलेम को लौट पड़े, और सामरिया के बहुत से गाँवों में सुसमाचार सुनाते गए। फिर प्रभु के एक स्वर्गदूत ने फिलिप्पुस से कहा, “उठ और दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से गाज़ा को जाता है।” यह एक निर्जन मार्ग है। वह उठकर गया; और देखो, इथियोपिया देश का एक व्यक्‍ति, जो खोजा और इथियोपिया की रानी कंदाके का मंत्री तथा कोषाध्यक्ष था, आराधना करने यरूशलेम आया था। वह अपने रथ में बैठा हुआ लौट रहा था और यशायाह भविष्यवक्‍ता की पुस्तक पढ़ रहा था। तब आत्मा ने फिलिप्पुस से कहा, “जा और उस रथ के साथ हो ले।” फिलिप्पुस दौड़कर गया और उसने उसे यशायाह भविष्यवक्‍ता की पुस्तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, “तू जो पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?” उसने उत्तर दिया, “जब तक कोई मुझे न समझाए, मैं कैसे समझ सकता हूँ?” और उसने फिलिप्पुस से विनती की कि वह चढ़कर उसके साथ बैठे। पवित्रशास्‍त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था: उसे भेड़ के समान वध होने के लिए ले जाया गया और जैसे मेमना ऊन कतरनेवाले के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने अपना मुँह न खोला। उसकी दीन दशा में उसे न्याय से वंचित किया गया; उसकी पीढ़ी का वर्णन कौन करेगा? क्योंकि पृथ्वी से उसका जीवन उठा लिया जाता है। इस पर खोजे ने फिलिप्पुस से कहा, “मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे बता कि भविष्यवक्‍ता यह किसके विषय में कहता है? अपने विषय में या किसी दूसरे के विषय में?” तब फिलिप्पुस ने अपना मुँह खोला और पवित्रशास्‍त्र के इसी लेख से आरंभ करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया। मार्ग में चलते-चलते वे एक स्थान पर पहुँचे जहाँ पानी था, और खोजे ने कहा, “देख, यहाँ पानी है। अब मेरे बपतिस्मा लेने में क्या रुकावट है?” [फिलिप्पुस ने कहा, “यदि तू पूरे मन से विश्‍वास करता है, तो ले सकता है।” उसने उत्तर दिया, “मैं विश्‍वास करता हूँ कि यीशु मसीह परमेश्‍वर का पुत्र है।”] तब उसने रथ रोकने का आदेश दिया, और फिलिप्पुस और खोजा दोनों पानी में उतरे, और उसने खोजे को बपतिस्मा दिया। और जब वे पानी में से ऊपर आए, तो प्रभु का आत्मा फिलिप्पुस को उठा ले गया, और खोजे ने उसे फिर नहीं देखा; और वह आनंद के साथ अपने मार्ग पर चला गया। फिर फिलिप्पुस ने अपने आपको अशदोद में पाया, और वह कैसरिया पहुँचने तक सब नगरों में सुसमाचार सुनाता गया। शाऊल जो अब भी प्रभु के शिष्यों को धमकाने और उनकी हत्या करने की धुन में था, महायाजक के पास गया, और उससे दमिश्क के आराधनालयों के लिए पत्र माँगे कि इस “मार्ग” के जो भी मिलें, चाहे पुरुष हों या स्‍त्री, उन्हें बाँधकर यरूशलेम ले आए। फिर ऐसा हुआ कि जब वह चलते-चलते दमिश्क के निकट पहुँचा, तो अचानक आकाश से उसके चारों ओर एक ज्योति चमकी, और वह भूमि पर गिर पड़ा और उसने एक आवाज़ यह कहते हुए सुनी, “हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?” शाऊल ने पूछा, “हे प्रभु, तू कौन है?” उसने कहा, “मैं यीशु हूँ जिसे तू सताता है। परंतु अब उठ और नगर में जा, और जो तुझे करना है वह तुझे बता दिया जाएगा।” और जो लोग उसके साथ यात्रा कर रहे थे, वे अवाक् खड़े रह गए, क्योंकि वे आवाज़ तो सुन रहे थे पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। तब शाऊल भूमि पर से उठा, परंतु आँखें खुली होने पर भी उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था; और वे उसका हाथ पकड़कर दमिश्क में ले गए। वह तीन दिन तक न देख सका, और न उसने कुछ खाया और न ही पीया। दमिश्क में हनन्याह नामक एक शिष्य था, और प्रभु ने दर्शन में उससे कहा, “हे हनन्याह!” उसने कहा, “प्रभु देख, मैं यहाँ हूँ।” तब प्रभु ने उससे कहा, “उठकर उस गली में जा जो युथुस कहलाती है और यहूदा के घर पर शाऊल नामक तरसुसवासी के विषय में पूछ; क्योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है, और उसने दर्शन में हनन्याह नामक एक पुरुष को भीतर आते और अपने ऊपर हाथ रखते देखा है कि वह फिर से देख सके।” हनन्याह ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैंने बहुतों से इस मनुष्य के विषय में सुना है कि उसने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ कितना बुरा किया है; और यहाँ उसे मुख्य याजकों की ओर से अधिकार मिला है कि जो तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बाँध ले।” परंतु प्रभु ने उससे कहा, “जा, क्योंकि वह गैरयहूदियों, राजाओं और इस्राएल की संतानों के सामने मेरा नाम प्रकट करने के लिए मेरा चुना हुआ पात्र है; और मैं उसे दिखाऊँगा कि मेरे नाम के लिए उसे कितना दुःख उठाना पड़ेगा।” तब हनन्याह ने जाकर उस घर में प्रवेश किया और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, “भाई शाऊल, प्रभु अर्थात् उस यीशु ने जिसने तुझे मार्ग में आते समय दर्शन दिया था, मुझे भेजा है ताकि तू फिर से देखने लगे और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए।” और तुरंत उसकी आँखों से छिलके से गिरे और वह फिर से देखने लगा और उसने उठकर बपतिस्मा लिया, और भोजन करके बल प्राप्‍त किया। फिर वह कुछ दिन दमिश्क में शिष्यों के साथ रहा, और शीघ्र ही आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा कि यही परमेश्‍वर का पुत्र है। सब सुननेवाले चकित होकर कहने लगे, “क्या यह वही नहीं जो यरूशलेम में इस नाम के लेनेवालों का नाश करता था, और यहाँ इसलिए आया था कि उन्हें बाँधकर मुख्य याजकों के पास ले जाए?” परंतु शाऊल और भी अधिक सामर्थी होता गया और यह प्रमाणित करते हुए कि यीशु ही मसीह है, दमिश्क में रहनेवाले यहूदियों को विस्मित करता रहा। जब बहुत दिन बीत गए, तो यहूदियों ने मिलकर उसे मार डालने की योजना बनाई; परंतु शाऊल को उनके षड्यंत्र का पता चल गया। वे तो उसे मार डालने के लिए दिन और रात फाटकों पर ताक लगाए रहते थे; परंतु रात को उसके शिष्य उसे ले गए और एक टोकरे में बैठाकर उसे शहरपनाह से नीचे उतार दिया। वह यरूशलेम में पहुँचकर शिष्यों के साथ मिल जाने का प्रयत्‍न करने लगा; परंतु वे सब उससे डरते थे, और उन्हें विश्‍वास नहीं होता था कि वह भी शिष्य है। तब बरनाबास उसे लेकर प्रेरितों के पास आया और उन्हें बताया कि किस प्रकार उसने मार्ग में प्रभु को देखा और प्रभु ने उससे बातें कीं, तथा दमिश्क में कैसे उसने साहसपूर्वक यीशु के नाम से प्रचार किया। फिर वह उनके साथ यरूशलेम में आता-जाता रहा, और साहसपूर्वक प्रभु के नाम से प्रचार करता रहा, और वह यूनानी भाषी यहूदियों के साथ बातचीत तथा वाद-विवाद करता रहा; परंतु वे उसको मार डालने का यत्‍न करने लगे। जब भाइयों ने यह जाना तो उसे कैसरिया ले गए और फिर उसे तरसुस भेज दिया। इस प्रकार सारे यहूदिया और गलील और सामरिया की कलीसिया को शांति मिली, और वह प्रभु के भय में चलते और उन्‍नति करते हुए पवित्र आत्मा के प्रोत्साहन में बढ़ती गई। फिर ऐसा हुआ कि पतरस सब क्षेत्रों में यात्रा करता हुआ उन पवित्र लोगों के पास भी आया जो लुद्दा में रहते थे। वहाँ उसे एनियास नामक एक मनुष्य मिला जो लकवे का रोगी था और आठ वर्षों से बिस्तर पर पड़ा था। पतरस ने उससे कहा, “एनियास, यीशु मसीह तुझे स्वस्थ करता है। उठ, और अपना बिस्तर स्वयं ठीक कर।” और वह तुरंत उठ खड़ा हुआ। उसे देखकर लुद्दा और शारोन के रहनेवाले सब लोग प्रभु की ओर फिरे। याफा में तबीता नामक एक शिष्या रहती थी, जिसके नाम का यूनानी अनुवाद है दोरकास । वह बहुत से भले कार्य और दान किया करती थी। उन दिनों में ऐसा हुआ कि वह बीमार होकर मर गई; और लोगों ने उसे नहलाकर अटारी पर रख दिया। इसलिए कि लुद्दा याफा के निकट था, शिष्यों ने यह सुनकर कि पतरस वहाँ है, उसके पास यह विनती करने के लिए दो मनुष्यों को भेजा, “कृपया बिना देर किए हमारे यहाँ आ।” पतरस उठकर उनके साथ चल दिया; जब वह वहाँ पहुँचा तो वे उसे अटारी पर ले गए। तब सब विधवाएँ रोती हुई उसके पास खड़ी हो गईं, और जो कुरते और वस्‍त्र दोरकास ने उनके साथ रहते हुए बनाए थे, दिखाने लगीं। परंतु पतरस ने सब को बाहर कर दिया और घुटने टेककर प्रार्थना की, और शव की ओर मुड़कर कहा, “तबीता, उठ।” तब उसने अपनी आँखें खोल दीं और पतरस को देखकर उठ बैठी। उसने अपना हाथ देकर उसे उठाया, और पवित्र लोगों और विधवाओं को बुलाकर उसे जीवित सौंप दिया। यह बात सारे याफा में फैल गई, और बहुतों ने प्रभु पर विश्‍वास किया। पतरस याफा में चमड़े का काम करनेवाले शमौन के यहाँ बहुत दिन तक ठहरा रहा। कैसरिया में कुरनेलियुस नामक एक व्यक्‍ति था। वह उस सैन्य दल का शतपति था जो इतालियानी कहलाता था। वह एक भक्‍त था और अपने सारे घराने समेत परमेश्‍वर का भय मानता था, और लोगों को बहुत दान देता और परमेश्‍वर से निरंतर प्रार्थना करता रहता था। दिन के लगभग तीन बजे उसने दर्शन में स्पष्‍ट रूप से देखा कि परमेश्‍वर के एक स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर उससे कहा, “हे कुरनेलियुस!” उसने उसे ध्यान से देखा और भयभीत होकर कहा, “हे प्रभु, क्या है?” उसने उससे कहा, “तेरी प्रार्थनाएँ और तेरे दान परमेश्‍वर के सामने स्मृति के रूप में पहुँचे हैं। अब लोगों को याफा में भेज और उस शमौन को बुलवा ले जो पतरस कहलाता है। वह चमड़े का काम करनेवाले शमौन के यहाँ ठहरा हुआ है, जिसका घर समुद्र के किनारे है।” जब वह स्वर्गदूत जिसने उससे बातें की थीं चला गया, तो उसने अपने दो सेवकों और निरंतर अपने पास रहनेवालों में से एक भक्‍त सैनिक को बुलाया, और उन्हें सब कुछ बताकर याफा को भेज दिया। अगले दिन जब वे यात्रा करते-करते उस नगर के पास पहुँच रहे थे, उसी समय पतरस प्रार्थना करने के लिए छत पर गया; वह लगभग दोपहर का समय था। तब उसे भूख लगी और वह कुछ खाना चाहता था; परंतु जब वे तैयारी कर ही रहे थे कि वह बेसुध हो गया, और उसने देखा कि आकाश खुल गया और एक पात्र बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकता हुआ पृथ्वी पर उतर रहा है। उसमें पृथ्वी के हर प्रकार के चौपाए और रेंगनेवाले जंतु और आकाश के पक्षी थे। फिर उसे एक आवाज़ सुनाई दी, “हे पतरस, उठ, मार और खा।” परंतु पतरस ने कहा, “हे प्रभु, बिलकुल नहीं, क्योंकि मैंने कभी कोई अपवित्र और अशुद्ध वस्तु नहीं खाई।” उसे दूसरी बार फिर से आवाज़ सुनाई दी, “जिसे परमेश्‍वर ने शुद्ध ठहराया है उसे तू अशुद्ध मत कह।” ऐसा तीन बार हुआ, फिर तुरंत वह पात्र आकाश में उठा लिया गया। जब पतरस अपने मन में इस दुविधा में था कि जो दर्शन उसने देखा, उसका क्या अर्थ हो सकता है, तो देखो, कुरनेलियुस द्वारा भेजे गए लोग शमौन के घर का पता लगाकर फाटक पर आ खड़े हुए, और पुकारकर पूछने लगे, “शमौन जो पतरस कहलाता है, क्या यहीं ठहरा है?” पतरस जब उस दर्शन के विषय में सोच ही रहा था कि आत्मा ने उससे कहा, “देख, तीन पुरुष तुझे ढूँढ़ रहे हैं। इसलिए उठ और नीचे जा, और निःसंकोच उनके साथ चला जा, क्योंकि मैंने ही उन्हें भेजा है।” तब पतरस ने नीचे उतरकर उन पुरुषों से कहा, “देखो, जिसे तुम ढूँढ़ रहे हो वह मैं ही हूँ। तुम्हारे यहाँ आने का क्या कारण है?” उन्होंने कहा, “शतपति कुरनेलियुस, जो एक धर्मी और परमेश्‍वर का भय माननेवाला और सारी यहूदी जाति में सुनाम व्यक्‍ति है, उसे एक पवित्र स्वर्गदूत के द्वारा यह निर्देश मिला है कि तुझे अपने घर बुलाकर तुझसे वचन सुने।” तब उसने उन्हें भीतर बुलाकर घर में ठहराया। फिर अगले दिन वह उठकर उनके साथ गया, और याफा के कुछ भाई भी उसके साथ हो लिए। अगले दिन वह कैसरिया पहुँचा। कुरनेलियुस अपने संबंधियों और घनिष्‍‍ठ मित्रों को एक साथ बुलाकर उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। फिर ऐसा हुआ कि जब पतरस भीतर आ रहा था, तो कुरनेलियुस उससे मिला और उसके पैरों पर गिरकर उसे दंडवत् किया। परंतु पतरस ने उसे उठाकर कहा, “उठ, मैं भी तो एक मनुष्य हूँ।” फिर वह उसके साथ बातचीत करते हुए भीतर गया, और उसने बहुत से लोगों को एकत्रित पाया; और उसने उनसे कहा, “तुम जानते हो कि एक यहूदी के लिए किसी गैरयहूदी से मिलना या उसके पास जाना वर्जित है, परंतु परमेश्‍वर ने मुझ पर प्रकट किया है कि मैं किसी भी मनुष्य को अपवित्र या अशुद्ध न कहूँ। इसलिए जब मुझे बुलाया गया तो बिना किसी आपत्ति के चला आया। अब मैं पूछता हूँ कि तुमने किस लिए मुझे बुलाया है?” तब कुरनेलियुस कहने लगा, “चार दिन पहले इसी समय, मैं अपने घर में तीन बजे प्रार्थना कर रहा था, तो देखो, चमकीला वस्‍त्र पहने हुए एक पुरुष मेरे सामने आ खड़ा हुआ और कहा, ‘हे कुरनेलियुस, तेरी प्रार्थना सुनी गई है और तेरे दान परमेश्‍वर के सामने स्मरण किए गए हैं। इसलिए किसी को याफा में भेज और शमौन को जो पतरस कहलाता है बुलवा ले। वह समुद्र के किनारे चमड़े का काम करनेवाले शमौन के घर में ठहरा है।’ अतः मैंने तुरंत तेरे पास लोग भेजे, और तूने आकर अच्छा किया। इसलिए अब हम सब यहाँ परमेश्‍वर के सामने उपस्थित हैं कि उन सब बातों को सुनें जो प्रभु ने तुझसे कही हैं।” तब पतरस ने अपना मुँह खोला और कहा, “अब मैं सचमुच समझ गया हूँ कि परमेश्‍वर किसी का पक्षपात नहीं करता, बल्कि प्रत्येक जाति में जो उसका भय मानता और धार्मिकता के कार्य करता है, वह उसे ग्रहणयोग्य होता है। जो संदेश परमेश्‍वर ने यीशु मसीह के द्वारा (जो सब का प्रभु है) शांति का सुसमाचार सुनाते हुए इस्राएल की संतानों के पास भेजा, उसे तुम जानते हो और यह भी कि यूहन्‍ना के बपतिस्मा के प्रचार के बाद गलील से लेकर सारे यहूदिया में क्या हुआ, कि परमेश्‍वर ने किस प्रकार उस यीशु नासरी का पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया, जो भलाई करता और शैतान के द्वारा सताए हुए सब लोगों को अच्छा करता फिरा, क्योंकि परमेश्‍वर उसके साथ था। हम उन सब कार्यों के साक्षी हैं जो उसने यहूदियों के देश और यरूशलेम में किए थे; उसे उन्होंने काठ पर लटकाकर मार भी डाला। उसको परमेश्‍वर ने तीसरे दिन जिलाया और उसे प्रकट भी होने दिया, सब लोगों पर नहीं, बल्कि उन साक्षियों पर जो परमेश्‍वर द्वारा पहले से चुने गए थे, अर्थात् हम पर जिन्होंने उसके मृतकों में से जी उठने के बाद उसके साथ खाया और पीया; और उसने हमें लोगों में प्रचार करने और यह साक्षी देने की आज्ञा दी कि यह वही है जिसे परमेश्‍वर ने जीवितों और मृतकों का न्यायी ठहराया है। सब भविष्यवक्‍ता उसी के विषय में साक्षी देते हैं कि जो कोई उस पर विश्‍वास करता है, उसे उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलती है।” पतरस अभी ये बातें कह ही रहा था कि वचन के सब सुननेवालों पर पवित्र आत्मा उतर आया। जितने ख़तना किए हुए विश्‍वासी पतरस के साथ आए थे वे चकित हुए कि पवित्र आत्मा का दान गैरयहूदियों पर भी उंडेला गया है; क्योंकि वे उन्हें अन्य-अन्य भाषाओं में बोलते और परमेश्‍वर की बड़ाई करते हुए सुन रहे थे। तब पतरस ने कहा, “क्या कोई जल को रोक सकता है कि ये लोग जिन्होंने हमारे समान ही पवित्र आत्मा पाया है, बपतिस्मा न लें?” और उसने आज्ञा दी कि उन्हें यीशु मसीह के नाम में बपतिस्मा दिया जाए। तब उन्होंने उससे विनती की कि वह कुछ दिन और वहाँ ठहरे। फिर प्रेरितों और भाइयों ने जो यहूदिया में थे सुना कि गैरयहूदियों ने भी परमेश्‍वर का वचन ग्रहण किया है। अतः जब पतरस यरूशलेम को गया, तो ख़तना किए हुए लोग यह कहकर उसकी आलोचना करने लगे, “तू ख़तनारहित लोगों के यहाँ गया और तूने उनके साथ खाया।” तब पतरस ने यह कहते हुए उन्हें क्रमानुसार समझाना आरंभ किया, “मैं याफा नगर में प्रार्थना कर रहा था, और मैंने बेसुध दशा में एक दर्शन देखा कि एक पात्र, बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकता हुआ, आकाश से उतरकर मेरे पास आया। जब मैंने उसे ध्यान से देखा तो उसमें पृथ्वी के चौपायों, वन-पशुओं और रेंगनेवाले जंतुओं और आकाश के पक्षियों को देखा। तब मैंने यह आवाज़ भी सुनी, ‘हे पतरस, उठ, मार और खा।’ परंतु मैंने कहा, ‘हे प्रभु, बिलकुल नहीं, क्योंकि मेरे मुँह में कोई भी अपवित्र या अशुद्ध वस्तु कभी नहीं गई।’ इस पर दूसरी बार आकाश से आवाज़ आई, ‘जिसे परमेश्‍वर ने शुद्ध ठहराया है उसे तू अशुद्ध मत कह।’ ऐसा तीन बार हुआ, और सब कुछ फिर से आकाश पर उठा लिया गया। और देखो, उसी समय तीन पुरुष जो कैसरिया से मेरे पास भेजे गए थे, उस घर के सामने आ खड़े हुए जिसमें हम थे। तब आत्मा ने मुझे निःसंकोच उनके साथ जाने को कहा। ये छः भाई भी मेरे साथ गए, और हमने उस व्यक्‍ति के घर में प्रवेश किया। उसने हमें बताया कि कैसे उसने अपने घर में एक स्वर्गदूत को खड़े और यह कहते हुए देखा, ‘किसी को याफा में भेज और उस शमौन को बुलवा ले जो पतरस कहलाता है। वह तुझे ऐसी बातें बताएगा जिनके द्वारा तू और तेरा सारा घराना उद्धार पाएगा।’ जब मैं बोलने लगा तो पवित्र आत्मा उन पर वैसे ही उतरा जैसे आरंभ में हम पर उतरा था। तब मुझे प्रभु की वह बात स्मरण आई जो उसने कही थी, ‘यूहन्‍ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा दिया जाएगा।’ इसलिए यदि परमेश्‍वर ने उन्हें भी वही दान दिया जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास करने से हमें मिला था, तो मैं कौन था जो परमेश्‍वर को रोक सकता?” ये सुनकर वे चुप हो गए और परमेश्‍वर की महिमा करते हुए कहने लगे, “तब तो परमेश्‍वर ने गैरयहूदियों को भी पश्‍चात्ताप का वह दान दिया है जो जीवन की ओर ले जाता है।” स्तिफनुस पर हुए क्लेश के कारण जो लोग तितर-बितर हुए थे, वे फीनीके और साइप्रस और अंताकिया तक पहुँचे; परंतु वे यहूदियों को छोड़ किसी और को वचन नहीं सुनाते थे। परंतु उनमें से कुछ साइप्रसवासी और कुरेनी थे, जो अंताकिया में आकर यूनानियों को भी प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाने लगे। प्रभु का हाथ उन पर था, और बड़ी संख्या में लोग विश्‍वास करके प्रभु की ओर फिरे। जब उनके विषय में यह चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के कानों तक पहुँची, तो उन्होंने बरनाबास को अंताकिया भेजा। जब वह वहाँ पहुँचा तो परमेश्‍वर के अनुग्रह को देखकर आनंदित हुआ, और सब को प्रोत्साहित करने लगा कि वे पूरे मन से प्रभु में बने रहें, क्योंकि वह एक भला मनुष्य था और पवित्र आत्मा तथा विश्‍वास से परिपूर्ण था; और बहुत लोग प्रभु में लाए गए। तब वह शाऊल को ढूँढ़ने के लिए तरसुस को चला गया। जब वह उसे मिला तो उसे अंताकिया ले आया। फिर ऐसा हुआ कि पूरे एक वर्ष तक वे कलीसिया के साथ मिलते और बहुत से लोगों को उपदेश देते रहे; और शिष्य सब से पहले अंताकिया में मसीही कहलाए। उन्हीं दिनों कुछ भविष्यवक्‍ता यरूशलेम से अंताकिया में आए। उनमें से अगबुस नामक एक व्यक्‍ति ने खड़े होकर आत्मा के द्वारा बताया कि सारे जगत में भयंकर अकाल पड़ने वाला है (यह क्लौदियुस के समय में पड़ा)। तब शिष्यों ने निर्णय किया कि हर एक अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार यहूदिया में रहनेवाले भाइयों की सहायता के लिए कुछ भेजे। अतः उन्होंने ऐसा ही किया और बरनाबास और शाऊल के हाथ प्रवरों के पास कुछ भेज दिया। उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कुछ लोगों को हानि पहुँचाने के लिए हाथ डाले। उसने यूहन्‍ना के भाई याकूब को तलवार से मरवा डाला। जब उसने देखा कि यहूदी इससे प्रसन्‍न होते हैं तो वह पतरस को भी पकड़ने के लिए आगे बढ़ा। वे अख़मीरी रोटी के पर्व के दिन थे। उसने उसे भी पकड़कर बंदीगृह में डाल दिया, और उसे चार-चार सैनिकों के चार दलों के पहरे में रखा। वह फसह के पर्व के बाद उसे लोगों के सामने लाना चाहता था। अतः पतरस को बंदीगृह में रखा गया; परंतु कलीसिया उसके लिए मन लगाकर परमेश्‍वर से प्रार्थना कर रही थी। जब हेरोदेस उसे लोगों के सामने लाने वाला था, उसी रात को पतरस दो ज़ंजीरों से बँधा हुआ दो सैनिकों के बीच सो रहा था और द्वार पर पहरेदार बंदीगृह की रखवाली कर रहे थे। और देखो, प्रभु का एक स्वर्गदूत आ खड़ा हुआ और उस कोठरी में ज्योति चमकी। उसने पतरस की पसली पर मारकर उसे जगाया और कहा, “जल्दी उठ!” और उसके हाथों से ज़ंजीरें खुलकर गिर पड़ीं। तब स्वर्गदूत ने उससे कहा, “कमर बाँध और अपनी चप्पल पहन।” और उसने वैसा ही किया। फिर उसने उससे कहा, “अपना चोगा पहन और मेरे पीछे आ।” वह बाहर निकलकर उसके पीछे चल दिया, और वह नहीं जानता था कि जो कुछ स्वर्गदूत कर रहा है वह सच है, परंतु उसने सोचा कि वह कोई दर्शन देख रहा है। जब वे पहले और दूसरे पहरे से निकलकर लोहे के फाटक पर पहुँचे जो नगर की ओर जाता है, तो वह उनके लिए अपने आप खुल गया। फिर वे बाहर निकलकर एक गली में आगे बढ़े, और तुरंत ही वह स्वर्गदूत उसे छोड़कर चला गया। तब पतरस अपने आपे में आया और उसने कहा, “अब मैं सचमुच जान गया हूँ कि प्रभु ने अपने स्वर्गदूत को भेजकर मुझे हेरोदेस के हाथ से छुड़ाया और यहूदियों की सारी आशाओं पर पानी फेर दिया है।” यह जानकर वह उस यूहन्‍ना की माता मरियम के घर गया जो मरकुस भी कहलाता है, जहाँ बहुत से लोग इकट्ठे होकर प्रार्थना कर रहे थे। जब उसने फाटक का द्वार खटखटाया तो रूदे नामक एक दासी देखने आई। परंतु पतरस की आवाज़ पहचानकर वह आनंद के मारे बिना फाटक खोले ही भीतर दौड़ गई और बताया कि पतरस फाटक पर खड़ा है। उन्होंने उससे कहा, “तू पागल हो गई है।” परंतु वह दृढ़ता से कहती रही कि ऐसा ही है। तब वे कहने लगे, “उसका स्वर्गदूत होगा।” परंतु पतरस खटखटाता रहा। जब उन्होंने फाटक खोला तो वे उसे देखकर चकित रह गए। उसने हाथ से उन्हें चुप रहने का संकेत करते हुए बताया कि किस प्रकार प्रभु ने उसे बंदीगृह से बाहर निकाला। फिर उसने कहा, “याकूब तथा भाइयों को ये बातें बताओ।” और वह निकलकर दूसरे स्थान को चला गया। जब दिन हुआ तो सैनिकों के बीच में बड़ी खलबली मच गई कि आखिर पतरस का क्या हुआ। जब हेरोदेस ने उसकी खोज की और वह नहीं मिला तो उसने पहरेदारों से पूछताछ की और आदेश दिया कि उन्हें मार डाला जाए। फिर वह यहूदिया से कैसरिया में जाकर रहने लगा। हेरोदेस सूर और सैदा के लोगों से अत्यंत क्रोधित था; इसलिए वे एकचित्त होकर उसके पास आए, और राजभवन के प्रबंधक बलास्तुस को मनाकर मेल-मिलाप की विनती की, क्योंकि उनके देश का पालन-पोषण राजा के देश से होता था। अतः नियुक्‍त दिन हेरोदेस राजसी वस्‍त्र पहनकर सिंहासन पर बैठा और लोगों को भाषण देने लगा। तब लोग चिल्‍लाने लगे, “यह मनुष्य की नहीं, ईश्‍वर की वाणी है।” उसी क्षण प्रभु के एक स्वर्गदूत ने उसे मारा क्योंकि उसने परमेश्‍वर को महिमा नहीं दी, और वह कीड़े पड़कर मर गया। परंतु परमेश्‍वर का वचन बढ़ता और फैलता गया। जब बरनाबास और शाऊल अपनी सेवा पूरी करके यरूशलेम से लौटे, तो यूहन्‍ना को जो मरकुस भी कहलाता है, साथ ले आए। अब जो कलीसिया अंताकिया में थी उसमें कई भविष्यवक्‍ता और शिक्षक थे: बरनाबास, और शिमोन जो नीगर कहलाता था, और लूकियुस कुरेनी, और मनाहेम जिसका पालन-पोषण चौथाई देश के राजा हेरोदेस के साथ हुआ था, और शाऊल। जब वे उपवास के साथ प्रभु की उपासना कर रहे थे तो पवित्र आत्मा ने कहा, “मेरे लिए बरनाबास और शाऊल को उस कार्य के लिए अलग करो जिसके लिए मैंने उन्हें बुलाया है।” तब उन्होंने उपवास तथा प्रार्थना करके उन पर हाथ रखे और उन्हें विदा किया। तब पवित्र आत्मा के द्वारा भेजे जाकर वे सिलूकिया को गए, और वहाँ से जहाज़ द्वारा साइप्रस को गए, और सलमीस पहुँचकर यहूदियों के आराधनालयों में परमेश्‍वर के वचन का प्रचार करने लगे; और उनके पास सहायक के रूप में यूहन्‍ना भी था। जब वे पूरे द्वीप में से होते हुए पाफुस तक पहुँचे तो वहाँ उन्हें बार-यीशु नामक एक यहूदी जादूगर मिला जो झूठा भविष्यवक्‍ता था। वह राज्यपाल सिरगियुस पौलुस के साथ था, जो एक समझदार पुरुष था। उसने बरनाबास और शाऊल को अपने पास बुलाकर परमेश्‍वर का वचन सुनना चाहा; परंतु इलीमास अर्थात् वह जादूगर (उसके नाम का यही अर्थ है) उनका विरोध करने लगा और उसने राज्यपाल को विश्‍वास करने से बहकाना चाहा। परंतु शाऊल ने जो पौलुस भी कहलाता है, पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर उस पर दृष्‍टि गड़ाई और कहा, “हे सारे छल और सारी धूर्तता से भरे हुए शैतान की संतान, समस्त धार्मिकता के शत्रु! क्या तू प्रभु के सीधे मार्गों को टेढ़ा करना नहीं छोड़ेगा? अब देख प्रभु का हाथ तेरे विरुद्ध है, और तू अंधा हो जाएगा तथा कुछ समय तक सूर्य को न देखेगा।” तब तुरंत उस पर धुँधलापन और अंधकार छा गया, और वह इधर-उधर टटोलने लगा कि कोई हाथ पकड़कर उसे ले चले। तब राज्यपाल ने जो हुआ उसे देखकर, और प्रभु के उपदेश से आश्‍चर्यचकित होकर विश्‍वास किया। पौलुस और उसके साथी पाफुस से जहाज़ द्वारा रवाना होकर पंफूलिया के पिरगा में आए; परंतु यूहन्‍ना उन्हें छोड़कर यरूशलेम को लौट गया। वे पिरगा से निकलकर पिसिदिया के अंताकिया में पहुँचे, और सब्त के दिन आराधनालय में जाकर बैठ गए। व्यवस्था और भविष्यवक्‍ताओं की पुस्तकों से पढ़ने के बाद आराधनालय के अधिकारियों ने उनके पास कहला भेजा, “भाइयो, यदि तुम्हारे पास लोगों के लिए प्रोत्साहन का कोई वचन है तो कहो।” तब पौलुस खड़ा हुआ और हाथ से संकेत करके कहने लगा, “हे इस्राएलियो और परमेश्‍वर का भय माननेवालो, सुनो। इन इस्राएली लोगों के परमेश्‍वर ने हमारे पूर्वजों को चुन लिया, और मिस्र देश में उनके प्रवास के समय उन्हें बढ़ाया, और बलवंत भुजा से उन्हें वहाँ से बाहर निकाल लाया, और लगभग चालीस वर्ष तक जंगल में उनकी सहता रहा। फिर कनान देश में सात जातियों का नाश करके उनकी भूमि को उत्तराधिकार के रूप में दे दिया, जिसमें लगभग साढ़े चार सौ वर्ष लगे। इन बातों के बाद उसने शमूएल भविष्यवक्‍ता तक न्यायी दिए। तब उन्होंने एक राजा की माँग की, और परमेश्‍वर ने उन्हें बिन्यामीन के गोत्र में से एक मनुष्य, अर्थात् कीश के पुत्र शाऊल को चालीस वर्ष के लिए दे दिया। फिर उसे हटाकर उसने दाऊद को उनका राजा बनाया, जिसके विषय में साक्षी देते हुए उसने कहा, ‘मुझे यिशै का पुत्र दाऊद मिल गया है, ऐसा मनुष्य जो मेरे मन के अनुसार है, वही मेरी सारी इच्छाएँ पूरी करेगा।’ इसी के वंश में से परमेश्‍वर ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार इस्राएल के लिए एक उद्धारकर्ता अर्थात् यीशु को भेजा। उसके आने से पहले यूहन्‍ना ने इस्राएल के सब लोगों में पश्‍चात्ताप के बपतिस्मा का प्रचार किया। जब यूहन्‍ना अपनी दौड़ पूरी करने पर था तो उसने कहा, ‘तुम मुझे क्या समझते हो? मैं वह नहीं हूँ! परंतु देखो, वह मेरे बाद आ रहा है, जिसके पैरों के जूते खोलने के भी योग्य मैं नहीं हूँ।’ “हे भाइयो, अब्राहम के घराने की संतानो और परमेश्‍वर का भय माननेवालो, हमारे लिए ही यह उद्धार का वचन भेजा गया है। क्योंकि यरूशलेम के रहनेवालों और उनके अधिकारियों ने उसे नहीं पहचाना और न ही भविष्यवक्‍ताओं की उन बातों को समझा जो हर सब्त के दिन पढ़ी जाती हैं, इसलिए उन्होंने उसे दोषी ठहराकर उन बातों को पूरा किया; और मृत्युदंड का कोई कारण न मिलने पर भी उन्होंने पिलातुस से माँग की कि उसे मार डाला जाए। जब उन्होंने उसके विषय में लिखी हुई सब बातें पूरी कीं, तो उसे क्रूस से उतारकर कब्र में रख दिया। परंतु परमेश्‍वर ने उसे मृतकों में से जिलाया; और वह उनको जो गलील से यरूशलेम तक उसके साथ आए थे बहुत दिन तक दिखाई देता रहा। वे ही अब लोगों के सामने उसके साक्षी हैं। “हम तुम्हें उस प्रतिज्ञा का सुसमाचार सुनाते हैं जो हमारे पूर्वजों से की गई थी; परमेश्‍वर ने यीशु को जिलाकर उनकी संतानों अर्थात् हमारे लिए उसी प्रतिज्ञा को पूरा किया, जैसा दूसरे भजन में भी लिखा है: तू मेरा पुत्र है, आज ही मैंने तुझे उत्पन्‍न‍ किया है। “और उसने उसे मृतकों में से जिला उठाया कि वह कभी न सड़े। उसने इस प्रकार कहा: मैं तुम्हें दाऊद की पवित्र और अटल आशिष दूँगा। इसलिए उसने एक और भजन में भी कहा है: तू अपने पवित्र जन को सड़ने न देगा। क्योंकि दाऊद तो परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार अपनी पीढ़ी की सेवा करके सो गया और अपने पूर्वजों में जा मिला और सड़ गया, परंतु जिसे परमेश्‍वर ने जिलाया वह न सड़ा। इसलिए, हे भाइयो, तुम यह जान लो कि इसी के द्वारा तुम्हारे बीच पापों की क्षमा का प्रचार किया जाता है, और जिन बातों में तुम मूसा की व्यवस्था के द्वारा धर्मी नहीं ठहर सके, उन बातों में प्रत्येक विश्‍वास करनेवाला उसी के द्वारा धर्मी ठहरता है। इसलिए सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा कही गई बात तुम पर आ पड़े: हे निंदा करनेवालो, देखो! आश्‍चर्य करो और मिट जाओ, क्योंकि मैं तुम्हारे दिनों में एक कार्य करने पर हूँ, ऐसा कार्य जिसका यदि कोई तुमसे वर्णन भी करे तो तुम कभी विश्‍वास न करोगे।” जब वे आराधनालय से बाहर निकल रहे थे तो लोग उनसे विनती करने लगे कि अगले सब्त के दिन भी ये बातें उन्हें सुनाई जाएँ। जब सभा समाप्‍त हुई तो बहुत से यहूदी और यहूदी मत धारण करनेवाले भक्‍त पौलुस और बरनाबास के पीछे हो लिए। तब उन्होंने उनसे बातें करके उन्हें समझाया कि वे परमेश्‍वर के अनुग्रह में बने रहें। अगले सब्त के दिन लगभग सारा नगर प्रभु का वचन सुनने के लिए इकट्ठा हुआ। परंतु भीड़ को देखकर यहूदी ईर्ष्या से भर गए और निंदा करते हुए पौलुस द्वारा कही बातों का विरोध करने लगे। तब पौलुस और बरनाबास ने साहसपूर्वक कहा, “यह आवश्यक था कि परमेश्‍वर का वचन पहले तुम्हें सुनाया जाता; परंतु तुम उसे ठुकराते और अपने आपको अनंत जीवन के अयोग्य ठहराते हो। इसलिए देखो, हम गैरयहूदियों की ओर फिरते हैं। क्योंकि प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है: मैंने तुझे गैरयहूदियों के लिए ज्योति ठहराया है कि तू पृथ्वी के छोर तक उद्धार का कारण हो।” यह सुनकर गैरयहूदी आनंदित हुए और प्रभु के वचन की बड़ाई करने लगे, और जितने अनंत जीवन के लिए ठहराए गए थे, उन्होंने विश्‍वास किया; और प्रभु का वचन उस संपूर्ण क्षेत्र में फैलता गया। परंतु यहूदियों ने भक्‍त और कुलीन स्‍त्रियों तथा नगर के प्रमुख लोगों को उकसाया और पौलुस तथा बरनाबास के विरुद्ध उपद्रव करवाकर उन्हें अपनी सीमा से निकाल दिया। तब वे उनके सामने अपने पैरों की धूल झाड़कर इकुनियुम को चले गए; और शिष्य आनंद और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते गए। फिर ऐसा हुआ कि वे साथ-साथ इकुनियुम में यहूदियों के आराधनालय में गए और इस प्रकार बातें कीं कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहुत लोगों ने विश्‍वास किया। परंतु विश्‍वास न करनेवाले यहूदियों ने गैरयहूदियों को भड़काया और उनके मनों में भाइयों के विरुद्ध कटुता भर दी। वे वहाँ लंबे समय तक रहे और निर्भीकता से प्रभु के विषय में प्रचार करते रहे; और प्रभु उनके हाथों से चिह्‍न दिखाकर और अद्भुत कार्य करवाकर अपने अनुग्रह के वचन की साक्षी देता रहा। परंतु नगर के लोगों में फूट पड़ गई, और कुछ यहूदियों के साथ और कुछ प्रेरितों के साथ हो गए। जब गैरयहूदियों और यहूदियों ने अपने अधिकारियों के साथ मिलकर उन्हें अपमानित करने और उन पर पथराव करने का प्रयास किया, तो यह जानकर वे लुकाउनिया के नगरों, लुस्‍त्रा और दिरबे तथा आस-पास के क्षेत्रों में भाग गए, और वहाँ सुसमाचार सुनाने लगे। लुस्‍त्रा में एक व्यक्‍ति था। उसके पैर निर्बल थे और वह बैठा रहता था। वह जन्म से ही लंगड़ा था, और कभी नहीं चला था। वह पौलुस को बातें करते हुए सुन रहा था। पौलुस ने उसकी ओर दृष्‍टि गड़ाई और यह देखकर कि उसमें अच्छा होने का विश्‍वास है, ऊँची आवाज़ से कहा, “अपने पैरों पर सीधा खड़ा हो।” और वह उछलकर खड़ा हो गया और चलने-फिरने लगा। जब लोगों ने पौलुस का यह कार्य देखा तो वे लुकाउनिया की भाषा में ऊँची आवाज़ से कहने लगे, “मनुष्यों के रूप में देवता हमारे पास उतर आए हैं।” वे बरनाबास को ज़्यूस और पौलुस को हिर्मेस कहने लगे, क्योंकि पौलुस बात करने में प्रमुख था। ज़्यूस के उस मंदिर के पुजारी ने, जो नगर के सामने था, फाटक पर बैलों और फूल-मालाओं को लाकर भीड़ के साथ बलिदान चढ़ाना चाहा। परंतु जब प्रेरितों अर्थात् बरनाबास और पौलुस ने यह सुना तो अपने वस्‍त्र फाड़कर चिल्‍लाते हुए भीड़ में लपके और कहा, “हे लोगो, तुम ये क्यों कर रहे हो? हम भी तुम्हारे समान मनुष्य हैं, और तुम्हें सुसमाचार सुनाते हैं कि तुम इन व्यर्थ वस्तुओं को छोड़कर उस जीवित परमेश्‍वर की ओर फिरो जिसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उनमें है सब को बनाया। उसने बीते समयों में सब जातियों को अपने-अपने मार्गों पर चलने दिया; फिर भी उसने अपने आपको बिना साक्षी के नहीं छोड़ा बल्कि भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा तथा फलदायक ऋतुओं को दे देकर तुम्हारे मनों को भोजन और आनंद से तृप्‍त करता रहा।” ये बातें कहने पर भी उन्होंने बड़ी कठिनाई से लोगों को रोका कि उनके लिए बलिदान न चढ़ाएँ। तब कुछ यहूदी अंताकिया और इकुनियुम से आए और उन्होंने लोगों को अपनी ओर करके पौलुस पर पथराव किया और उसे मरा हुआ समझकर नगर के बाहर घसीट ले गए। परंतु जब शिष्य उसके चारों ओर आ खड़े हुए तो वह उठकर नगर में गया। अगले दिन वह बरनाबास के साथ दिरबे को चला गया। उस नगर में सुसमाचार सुनाकर और बहुत से शिष्य बनाकर, वे लुस्‍त्रा और इकुनियुम और अंताकिया को लौट गए, और शिष्यों के मनों को दृढ़ करते और यह कहकर विश्‍वास में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहे, “हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।” फिर उन्होंने प्रत्येक कलीसिया में उनके लिए प्रवर नियुक्‍त किए, और उपवास के साथ प्रार्थना करके उन्हें प्रभु को सौंप दिया, जिस पर उन्होंने विश्‍वास किया था। तब वे पिसिदिया से होते हुए पंफूलिया पहुँचे, और पिरगा में वचन सुनाकर वे अत्तलिया को चले गए। वहाँ से वे जहाज़ द्वारा अंताकिया गए, जहाँ वे परमेश्‍वर के अनुग्रह में उस कार्य के लिए सौंपे गए थे, जिसे उन्होंने पूरा किया। जब वे वहाँ पहुँचे तो कलीसिया को इकट्ठा कर जो कुछ परमेश्‍वर ने उनके साथ किया वह बताने लगे और यह भी कि कैसे उसने गैरयहूदियों के लिए विश्‍वास का द्वार खोल दिया। फिर वे शिष्यों के साथ बहुत दिनों तक रहे। अब कुछ लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे, “यदि मूसा की रीति के अनुसार तुम्हारा ख़तना न हो, तो तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता।” इस पर पौलुस और बरनाबास का उनके साथ बड़ा मतभेद तथा वाद-विवाद हुआ। तब पौलुस और बरनाबास तथा उनमें से कुछ अन्य लोगों को नियुक्‍त किया गया कि वे इस विवाद को लेकर प्रेरितों और प्रवरों के पास यरूशलेम जाएँ। अतः कलीसिया ने उन्हें विदा किया; और वे फीनीके और सामरिया से होकर गैरयहूदियों के मन-परिवर्तन का वर्णन करते हुए गए जिससे सब भाई बहुत आनंदित हुए। जब वे यरूशलेम में पहुँचे तो कलीसिया और प्रेरितों और प्रवरों द्वारा उनका स्वागत किया गया। तब उन्होंने वह सब बताया जो परमेश्‍वर ने उनके साथ किया था। परंतु फरीसी पंथ में से आए कुछ विश्‍वासियों ने खड़े होकर कहा, “उनका ख़तना कराना और उन्हें मूसा की व्यवस्था का पालन करने का आदेश देना आवश्यक है।” तब प्रेरित और प्रवर इस बात पर विचार करने के लिए इकट्ठे हुए। जब बहुत वाद-विवाद हो चुका, तो पतरस ने खड़े होकर उनसे कहा, “भाइयो, तुम जानते हो कि बहुत दिनों पहले परमेश्‍वर ने तुममें से मुझे चुना कि गैरयहूदी मेरे मुँह से सुसमाचार का वचन सुनें और विश्‍वास करें। मनों को जाननेवाले परमेश्‍वर ने उन्हें भी हमारे समान पवित्र आत्मा देकर उनकी साक्षी दी, और विश्‍वास के द्वारा उनके मनों को शुद्ध करके उसने हमारे और उनके बीच कोई भेद नहीं रखा। अतः अब तुम इन शिष्यों की गर्दन पर ऐसा जुआ रखकर परमेश्‍वर को क्यों परखते हो, जिसे न तो हमारे पूर्वज और न ही हम उठा सके? परंतु हमारा विश्‍वास है कि जैसे प्रभु यीशु के अनुग्रह से हमारा उद्धार होता है, वैसे ही उनका भी होगा।” तब सारी मंडली चुप हो गई और बरनाबास और पौलुस से उन चिह्‍नों और अद्भुत कार्यों का विवरण सुनने लगी जो परमेश्‍वर ने उनके द्वारा गैरयहूदियों के बीच दिखाए थे। जब वे बोल चुके, तो याकूब ने कहा, “भाइयो, मेरी सुनो। शमौन ने बताया कि परमेश्‍वर ने किस प्रकार पहले गैरयहूदियों पर कृपादृष्‍टि की कि उनमें से अपने नाम के लिए एक प्रजा को चुन ले। इससे भविष्यवक्‍ताओं के वचन भी मेल खाते हैं, जैसा लिखा है: इन बातों के बाद मैं लौटूँगा और दाऊद का गिरा हुआ डेरा फिर से उठाऊँगा, और उसके खंडहरों को फिर से बनाऊँगा, और उसे फिर से खड़ा करूँगा, ताकि शेष लोग और सब गैरयहूदी भी जो मेरे नाम के कहलाते हैं, प्रभु को खोजें। यह वही प्रभु कहता है जो प्राचीन काल से इन बातों को प्रकट करता आया है। “इसलिए मेरा निर्णय यह है कि हम उन्हें दुःख न दें जो गैरयहूदियों में से परमेश्‍वर की ओर फिरते हैं, बल्कि उन्हें लिख भेजें कि वे मूर्तियों की अशुद्धताओं से, और व्यभिचार से, और गला घोंटे हुए पशुओं के मांस से, और लहू से दूर रहें; क्योंकि प्राचीन काल से नगर-नगर में मूसा की व्यवस्था का प्रचार करनेवाले रहे हैं और वह हर सब्त के दिन आराधनालयों में पढ़ी जाती है।” तब सारी कलीसिया के साथ प्रेरितों और प्रवरों को यह उचित लगा कि अपने में से कुछ लोगों को अर्थात् बरसब्बा कहलानेवाले यहूदा और सीलास को, जो भाइयों में प्रमुख थे, चुनकर पौलुस और बरनाबास के साथ अंताकिया भेजें, और उन्होंने उनके हाथ यह लिख भेजा: “प्रेरित और प्रवर भाइयों की ओर से अंताकिया और सीरिया और किलिकिया के भाइयों के नाम जो गैरयहूदियों में से हैं, नमस्कार। हमने सुना है कि हममें से कुछ लोगों ने जाकर अपनी बातों से तुम्हें विचलित और तुम्हारे मनों को अस्थिर कर दिया है, जब कि हमने उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। इसलिए हमें सर्वसम्मति से यह उचित लगा कि हम कुछ लोगों को चुनकर अपने प्रिय बरनाबास और पौलुस के साथ तुम्हारे पास भेजें। वे ऐसे मनुष्य हैं जिन्होंने हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम के लिए अपने प्राणों को जोखिम में डाला है। इसलिए हमने यहूदा और सीलास को भेजा है, जो अपने मुँह से ये बातें तुम्हें बताएँगे। क्योंकि पवित्र आत्मा और हमें उचित जान पड़ा कि इन आवश्यक बातों को छोड़ तुम पर और अधिक बोझ न डालें: तुम मूर्तियों को चढ़ाई गई वस्तुओं से, और लहू से, और गला घोंटे हुए पशुओं के मांस से, और व्यभिचार से दूर रहो; इनसे अपने आपको दूर रखो तो तुम्हारे लिए भला होगा। नमस्कार।” फिर वे विदा होकर अंताकिया पहुँचे, और सभा को इकट्ठा करके वह पत्र उन्हें दे दिया। पत्र पढ़कर उन्हें प्रोत्साहन मिला और वे आनंदित हुए। यहूदा और सीलास ने, जो स्वयं भी भविष्यवक्‍ता थे, भाइयों को लंबा उपदेश देकर प्रोत्साहित और दृढ़ किया, और कुछ समय वहाँ बिताकर वे शांति के साथ भाइयों से विदा हुए कि अपने भेजनेवालों के पास जाएँ। [परंतु सीलास को वहाँ ठहरना उचित लगा।] पौलुस और बरनाबास अंताकिया में ही रहे और अन्य बहुत लोगों के साथ वे भी प्रभु के वचन की शिक्षा देते और उसका सुसमाचार सुनाते रहे। कुछ दिनों के बाद पौलुस ने बरनाबास से कहा, “जिस-जिस नगर में हमने प्रभु के वचन का प्रचार किया था, आओ, फिर से वहाँ जाकर भाइयों को देखें कि वे कैसे हैं।” बरनाबास यूहन्‍ना को भी जो मरकुस कहलाता है, साथ ले जाना चाहता था; परंतु पौलुस ने यह उचित समझा कि उसे साथ न ले जाएँ जिसने पंफूलिया में उनका साथ छोड़ दिया और उनके साथ कार्य पर नहीं गया था। इस पर उनके बीच ऐसा विवाद उठ खड़ा हुआ कि वे एक दूसरे से अलग हो गए, और बरनाबास मरकुस को लेकर जहाज़ द्वारा साइप्रस चला गया। परंतु पौलुस ने सीलास को चुना और भाइयों द्वारा प्रभु के अनुग्रह में सौंपा जाकर वहाँ से विदा हुआ, और सीरिया तथा किलिकिया से होता हुआ कलीसियाओं को दृढ़ करता गया। फिर पौलुस दिरबे और लुस्‍त्रा में भी गया। और देखो, वहाँ तीमुथियुस नामक एक शिष्य था, जो एक विश्‍वासी यहूदी स्‍त्री का पुत्र था, परंतु उसका पिता यूनानी था। वह लुस्‍त्रा और इकुनियुम के भाइयों में सुनाम था। पौलुस उसे अपने साथ ले जाना चाहता था, इसलिए उसने उन स्थानों में रहनेवाले यहूदियों के कारण उसे ले जाकर उसका ख़तना किया, क्योंकि वे सब जानते थे कि उसका पिता यूनानी था। जब वे नगर-नगर होकर जा रहे थे तो लोगों को पालन करने के लिए वे आदेशों को सौंपते गए जो यरूशलेम में प्रेरितों और प्रवरों के द्वारा ठहराई गई थीं। इस प्रकार कलीसियाएँ विश्‍वास में दृढ़ होती गईं और प्रतिदिन संख्या में बढ़ती गईं। वे फ्रूगिया और गलातिया के क्षेत्र से होकर गए, क्योंकि पवित्र आत्मा ने उन्हें आसिया में वचन सुनाने से मना किया था। जब वे मूसिया में पहुँचे तो उन्होंने बिथूनिया में जाने का प्रयत्‍न किया, परंतु यीशु के आत्मा ने उन्हें जाने न दिया; तब वे मूसिया से होकर त्रोआस में आए। रात में पौलुस को एक दर्शन दिखाई दिया: एक मकिदुनियावासी पुरुष खड़ा हुआ उससे विनती कर रहा है, “मकिदुनिया में आकर हमारी सहायता कर।” जब उसने यह दर्शन देखा, तो हमने यह समझकर तुरंत मकिदुनिया जाना चाहा कि परमेश्‍वर ने हमें उन लोगों को सुसमाचार सुनाने के लिए बुलाया है। इसलिए हम त्रोआस से जहाज़ द्वारा रवाना होकर सीधे सुमात्राके पहुँचे, और दूसरे दिन नियापुलिस को, और वहाँ से फिलिप्पी पहुँचे, जो मकिदुनिया प्रांत का प्रमुख नगर तथा रोमी उपनिवेश है। उस नगर में हम कुछ दिन तक रहे। फिर सब्त के दिन हम फाटक के बाहर नदी के किनारे यह सोचकर गए कि वहाँ प्रार्थना का स्थान होगा, और बैठकर उन स्‍त्रियों से बातें करने लगे जो वहाँ एकत्रित थीं। थुआतीरा नगर की लुदिया नामक एक स्‍त्री सुन रही थी जो बैंजनी वस्‍त्र की व्यापारी और परमेश्‍वर की भक्‍त थी। प्रभु ने उसका मन खोला कि वह पौलुस की बातों पर ध्यान लगाए। जब उसने और उसके घराने ने बपतिस्मा लिया तो उसने यह कहकर विनती की, “यदि तुम मुझे प्रभु की विश्‍वासिनी मानते हो, तो आकर मेरे घर में ठहरो।” और उसने हमें विवश कर दिया। फिर ऐसा हुआ कि जब हम प्रार्थना के स्थान की ओर जा रहे थे तो हमें एक दासी मिली जिसमें भविष्य बतानेवाली आत्मा थी; वह भविष्य बताकर अपने स्वामियों के लिए बहुत धन कमा लाती थी। वह पौलुस और हमारे पीछे आकर चिल्‍लाने लगी, “ये लोग परमप्रधान परमेश्‍वर के दास हैं, जो तुम्हें उद्धार का मार्ग बताते हैं।” ऐसा वह बहुत दिन तक करती रही। तब पौलुस दुःखी होकर मुड़ा और उस आत्मा से कहा, “मैं तुझे यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देता हूँ, उसमें से निकल जा!” और वह उसी घड़ी निकल गई। परंतु जब उसके स्वामियों ने देखा कि उनकी कमाई की आशा समाप्‍त हो गई, तो वे पौलुस और सीलास को पकड़कर अधिकारियों के पास चौक पर खींचते हुए ले गए, और उन्हें मुख्य न्यायाधीशों के सामने लाकर कहा, “ये लोग यहूदी हैं और हमारे नगर में बड़ी गड़बड़ी फैला रहे हैं, और वे ऐसी रीतियों का प्रचार कर रहे हैं जिन्हें मानना या जिन पर चलना हम रोमियों के लिए उचित नहीं।” तब भीड़ इकट्ठी होकर उन पर चढ़ आई, और मुख्य न्यायाधीशों ने उनके वस्‍त्र फाड़कर उतरवाए और आदेश दिया कि उन्हें बेंत लगाए जाएँ। बहुत बेंत लगाने के बाद उन्होंने उन्हें बंदीगृह में डाल दिया, और बंदीगृह के अधिकारी को आज्ञा दी कि उन्हें कड़े पहरे में रखे। उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्हें बंदीगृह के भीतरी भाग में डाल दिया और उनके पैर काठ में जकड़ दिए। आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना कर रहे थे और परमेश्‍वर के भजन गा रहे थे, और बंदी उनकी सुन रहे थे। तभी अचानक एक बड़ा भूकंप आया जिससे बंदीगृह की नींवें हिल गईं और तुरंत सब द्वार खुल गए और सब के बंधन खुल गए। बंदीगृह का अधिकारी जाग उठा और बंदीगृह के द्वारों को खुले देखकर उसने सोचा कि बंदी भाग गए हैं, और वह तलवार खींचकर अपने आपको मारने ही वाला था, कि पौलुस ने ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, “अपने आपको हानि न पहुँचा, क्योंकि हम सब यहीं हैं।” तब वह दीपक मँगवाकर भीतर दौड़ा, और काँपता हुआ पौलुस और सीलास के सामने गिर पड़ा; और उन्हें बाहर लाकर कहने लगा, “सज्‍जनो, मुझे उद्धार पाने के लिए क्या करना चाहिए?” उन्होंने कहा, “प्रभु यीशु पर विश्‍वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।” तब उन्होंने उसे और उसके घर के सब लोगों को प्रभु का वचन सुनाया। फिर रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जाकर उनके घाव धोए, और तुरंत उसने और उसके सारे घराने ने बपतिस्मा लिया। तब उसने उन्हें अपने घर में लाकर उनके सामने भोजन परोसा, और सारे घराने समेत परमेश्‍वर पर विश्‍वास करके आनंद मनाया। जब दिन हुआ तो मुख्य न्यायाधीशों ने सिपाहियों के द्वारा यह कहला भेजा, “उन मनुष्यों को छोड़ दो।” तब बंदीगृह के अधिकारी ने पौलुस को ये बातें बताईं, “मुख्य न्यायाधीशों ने यह कहला भेजा है कि तुम्हें छोड़ दिया जाए; इसलिए अब बाहर निकलकर शांति से चले जाओ।” परंतु पौलुस ने उनसे कहा, “उन्होंने हम रोमी मनुष्यों को बिना मुकदमे के सब के सामने पिटवाकर बंदीगृह में डाल दिया, और अब चुपके से हमें बाहर निकाल रहे हैं? ऐसा नहीं होगा, वे स्वयं आकर हमें यहाँ से बाहर निकालें।” सिपाहियों ने ये बातें मुख्य न्यायाधीशों को बताईं। जब उन्होंने सुना कि वे रोमी हैं तो डर गए; और उन्होंने आकर उन्हें मनाया, और बाहर ले जाकर विनती की कि वे नगर से चले जाएँ। तब वे बंदीगृह से निकलकर लुदिया के घर गए, और भाइयों से मिलकर उन्हें प्रोत्साहित किया और वहाँ से चल दिए। फिर वे अम्फिपुलिस और अपुल्‍लोनिया होकर थिस्सलुनीके में आए, जहाँ यहूदियों का एक आराधनालय था। पौलुस अपनी रीति के अनुसार उनके पास गया और तीन सब्त के दिन उनके साथ पवित्रशास्‍त्र से वाद-विवाद करता रहा, और यह समझाता और प्रकट करता रहा कि मसीह का दुःख उठाना और मृतकों में से जी उठना अवश्य था, और “जिस यीशु का प्रचार मैं तुम्हारे बीच करता हूँ, वही मसीह है।” उनमें से कुछ लोगों ने विश्‍वास किया और पौलुस तथा सीलास के साथ मिल गए, और ऐसा ही बड़ी संख्या में भक्‍त यूनानियों तथा बहुत सी प्रमुख स्‍त्रियों ने भी किया। परंतु यहूदियों ने ईर्ष्या से भरकर कुछ बाज़ारू गुंडों को लिया और भीड़ इकट्ठी करके नगर में कोलाहल मचाने लगे, और यासोन के घर पर हमला करके उन्हें लोगों के सामने लाने का प्रयत्‍न किया। परंतु जब उन्होंने उन्हें वहाँ नहीं पाया तो वे यासोन और कुछ भाइयों को नगर के अधिकारियों के पास घसीटते हुए लाए, और चिल्‍लाकर कहने लगे, “जिन लोगों ने संसार को उलट-पुलट कर दिया, वे यहाँ भी आ पहुँचे हैं, और यासोन ने उन्हें अपने यहाँ ठहराया है; और ये सब कैसर की आज्ञाओं का यह कहते हुए विरोध करते हैं कि यीशु नाम का कोई दूसरा राजा है।” यह कहकर उन्होंने भीड़ और नगर के अधिकारियों को विचलित कर दिया। तब उन्होंने यासोन और बाकी लोगों से जमानत लेकर उन्हें छोड़ दिया। भाइयों ने तुरंत पौलुस और सीलास को रात ही में बिरीया भेज दिया। वहाँ पहुँचकर वे यहूदियों के आराधनालय में जाने लगे। ये लोग थिस्सलुनीके के लोगों से अधिक सज्‍जन थे, और उन्होंने बड़ी उत्सुकता से वचन को ग्रहण किया तथा प्रतिदिन पवित्रशास्‍त्र में खोजते रहे कि ये बातें ऐसी ही हैं या नहीं। अतः उनमें से बहुतों ने और बहुत सी कुलीन यूनानी स्‍त्रियों और पुरुषों ने भी विश्‍वास किया। परंतु जब थिस्सलुनीके के यहूदियों को पता चला कि पौलुस ने बिरीया में भी परमेश्‍वर के वचन का प्रचार किया है, तो वे वहाँ भी आकर लोगों को उकसाने और भड़काने लगे। तब भाइयों ने तुरंत पौलुस को समुद्र तट पर जाने के लिए भेज दिया; परंतु सीलास और तीमुथियुस वहीं रहे। पौलुस को पहुँचानेवाले उसे एथेंस तक ले गए; और वहाँ सीलास तथा तीमुथियुस के लिए उससे यह आज्ञा पाकर विदा हुए कि वे उसके पास अति शीघ्र आएँ। जब पौलुस एथेंस में उनकी प्रतीक्षा कर रहा था, तो नगर को मूर्तियों से भरा हुआ देखकर अपनी आत्मा में जल उठा। अतः वह आराधनालय में यहूदियों और भक्‍तों से और प्रतिदिन चौक में मिलनेवालों से वाद-विवाद किया करता था। तब कुछ इपिकूरी और स्तोईकी दार्शनिक भी उससे तर्क-वितर्क करने लगे; और कुछ कह रहे थे, “यह बकवादी क्या कहना चाहता है?” परंतु दूसरों ने कहा, “वह परदेशी देवताओं का प्रचारक लगता है।” क्योंकि वह यीशु और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुना रहा था। तब वे उसे पकड़कर अरियुपगुस की सभा में ले आए और पूछने लगे, “क्या हम जान सकते हैं कि वह नई शिक्षा जो तू देता है, क्या है? क्योंकि तू कुछ अनोखी बातें हमें सुनाता है; इसलिए हम जानना चाहते हैं कि इन बातों का अर्थ क्या है?” सब एथेंसवासी और वहाँ रहनेवाले परदेशी नई-नई बात कहने या सुनने के अतिरिक्‍त किसी और बात में समय नहीं बिताते थे। तब पौलुस अरियुपगुस की सभा के बीच में खड़ा होकर कहने लगा, “हे एथेंस के लोगो, मैं देखता हूँ कि तुम सब बातों में बड़े धार्मिक हो; क्योंकि जब मैं घूमते-फिरते तुम्हारी पूजने की वस्तुओं को देख रहा था तो मुझे एक वेदी भी मिली, जिस पर लिखा था: ‘अनजाने ईश्‍वर के लिए।’ इसलिए जिसे तुम न जानते हुए पूजते हो, मैं उसी के विषय में तुम्हें बताता हूँ। जिस परमेश्‍वर ने जगत और उसमें की सब वस्तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का प्रभु है, और हाथों से बने मंदिरों में वास नहीं करता, और न ही मनुष्यों के हाथों से सेवा लेता है मानो उसे किसी बात की आवश्यकता हो, क्योंकि वह स्वयं सब को जीवन और श्‍वास और सब कुछ देता है। उसने एक ही मूल से मनुष्यों की प्रत्येक जाति को बनाया कि सारी पृथ्वी पर बस जाए, और निश्‍चित समयों तथा उनके निवास की सीमाओं को निर्धारित किया, कि परमेश्‍वर को ढूँढ़ें, हो सकता है कि वे उसे टटोलें और वह मिल जाए; यद्यपि वह हममें से किसी से भी दूर नहीं। क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, चलते-फिरते और अस्तित्व रखते हैं, जैसा तुम्हारे कुछ कवियों ने भी कहा है, ‘हम भी तो उसी की संतान हैं।’ इसलिए परमेश्‍वर की संतान होकर हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि परमेश्‍वर सोने या चाँदी या पत्थर के समान है जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़ा गया हो। इसलिए अब परमेश्‍वर अज्ञानता के समयों को अनदेखा करके हर स्थान पर सब मनुष्यों को पश्‍चात्ताप करने की आज्ञा देता है, क्योंकि उसने एक दिन निश्‍चित किया है जिसमें वह उस मनुष्य के द्वारा धार्मिकता से इस जगत का न्याय करेगा जिसे उसने नियुक्‍त किया है; और उसने उसे मृतकों में से जिलाकर सब को इसका प्रमाण दिया है।” मृतकों के पुनरुत्थान की बात सुनकर कुछ लोग ठट्ठा करने लगे, और कुछ ने कहा, “तुझसे हम इस विषय में फिर से सुनेंगे।” अतः पौलुस उनके बीच में से निकल गया। परंतु कुछ लोग उसके साथ हो लिए और उन्होंने विश्‍वास किया, जिनमें अरियुपगुस का सदस्य दियुनुसियुस और दमरिस नामक एक स्‍त्री और उनके साथ अन्य लोग भी थे। इसके बाद पौलुस एथेंस को छोड़कर कुरिंथुस में आया। वहाँ उसे पुंतुस में जन्मा अक्‍विला नामक एक यहूदी मिला, जो हाल ही में अपनी पत्‍नी प्रिस्किल्‍ला के साथ इटली से आया था, क्योंकि क्लौदियुस ने सब यहूदियों को रोम से निकल जाने का आदेश दिया था। वह उनके पास गया, और एक ही व्यवसाय होने के कारण वह उनके साथ रहने और कार्य करने लगा; वे व्यवसाय से तंबू बनानेवाले थे। वह हर सब्त के दिन आराधनालय में वाद-विवाद किया करता, और यहूदियों तथा यूनानियों को समझाया करता था। जब सीलास और तीमुथियुस मकिदुनिया से आए तो पौलुस पूरी रीति से वचन सुनाने में लग गया और यहूदियों को साक्षी देने लगा कि यीशु ही मसीह है। परंतु जब वे उसका विरोध और निंदा करने लगे तो उसने अपने वस्‍त्र झाड़ते हुए उनसे कहा, “तुम्हारा लहू तुम्हारे सिर पर हो; मैं निर्दोष हूँ। अब से मैं गैरयहूदियों के पास जाऊँगा।” फिर वहाँ से निकलकर वह तितियुस यूस्तुस नामक एक व्यक्‍ति के घर में गया जो परमेश्‍वर का भक्‍त था, और जिसका घर आराधनालय से लगा हुआ था। तब उस आराधनालय के अधिकारी क्रिसपुस ने अपने सारे घराने समेत प्रभु पर विश्‍वास किया, और यह सुनकर बहुत से कुरिंथवासी भी विश्‍वास करने और बपतिस्मा लेने लगे। रात को प्रभु ने दर्शन के द्वारा पौलुस से कहा, “मत डर, बल्कि बोलता जा और चुप न रह, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ और कोई भी तुझे हानि पहुँचाने के लिए तुझ पर आक्रमण न करेगा, क्योंकि इस नगर में मेरे बहुत से लोग हैं।” इसलिए वह उनके बीच परमेश्‍वर का वचन सिखाते हुए डेढ़ वर्ष तक रहा। परंतु जब गल्‍लियो अखाया का राज्यपाल था, तो यहूदी एकजुट होकर पौलुस पर चढ़ आए और उसे न्यायासन के सामने लाकर कहा, “यह लोगों को परमेश्‍वर की उपासना ऐसे करने के लिए उकसाता है जो व्यवस्था के विपरीत है।” और जब पौलुस अपना मुँह खोलने ही वाला था कि गल्‍लियो ने यहूदियों से कहा, “हे यहूदियो, यदि वास्तव में यह कोई अन्याय या गंभीर अपराध की बात होती तो मैं धीरज से तुम्हारी बात सुनता। परंतु यदि यह विवाद शब्दों, नामों और तुम्हारी व्यवस्था के विषय में है, तो तुम ही जानो; मैं इन बातों का न्यायी नहीं बनना चाहता।” और उसने उन्हें न्यायासन के सामने से निकलवा दिया। तब सब लोग आराधनालय के अधिकारी सोस्थिनेस को पकड़कर न्यायासन के सामने ही पीटने लगे; परंतु गल्‍लियो ने इन बातों की कोई परवाह नहीं की। वहाँ बहुत दिन तक रहने के बाद पौलुस ने भाइयों से विदा ली और प्रिस्किल्‍ला और अक्‍विला सहित जहाज़ द्वारा सीरिया को चल दिया। उसने किंख्रिया में अपना सिर मुँड़वाया, क्योंकि उसने मन्‍नत मानी थी। फिर इफिसुस पहुँचकर उसने उन्हें वहाँ छोड़ा, और स्वयं आराधनालय में जाकर यहूदियों से वाद-विवाद करने लगा। उन्होंने उससे कुछ और समय रहने के लिए विनती की पर उसने स्वीकार नहीं किया, बल्कि विदा होते हुए कहा, “यदि परमेश्‍वर की इच्छा हुई तो मैं तुम्हारे पास फिर आऊँगा।” तब वह इफिसुस से जहाज़ द्वारा चल दिया; और कैसरिया में उतरकर वह ऊपर यरूशलेम को गया और कलीसिया को नमस्कार करके नीचे अंताकिया को चला गया। कुछ समय बिताकर वह वहाँ से निकला, और गलातिया के क्षेत्र तथा फ्रूगिया से नगर-नगर होता हुआ सब शिष्यों को दृढ़ करता रहा। अपुल्‍लोस नामक एक यहूदी जिसका जन्म सिकंदरिया में हुआ था, इफिसुस में आया। वह कुशल वक्‍ता और पवित्रशास्‍त्र में निपुण पुरुष था। उसे प्रभु के मार्ग की शिक्षा मिली थी और वह आत्मिक उत्साह के साथ यीशु के विषय में भली-भाँति बताया और सिखाया करता था; पर वह केवल यूहन्‍ना के बपतिस्मा के विषय में जानता था। वह निर्भीकता से आराधनालय में बोलने लगा; परंतु जब प्रिस्किल्‍ला और अक्‍विला ने उसकी बातें सुनीं तो वे उसे अलग ले गए और परमेश्‍वर के मार्ग के विषय में उसको और भी ठीक रीति से समझाया। फिर जब अपुल्‍लोस ने अखाया में जाना चाहा तो भाइयों ने उसे प्रोत्साहित करके शिष्यों को लिखा कि उसका स्वागत करें। वहाँ पहुँचकर उसने उन लोगों की बड़ी सहायता की जिन्होंने अनुग्रह के द्वारा विश्‍वास किया था; क्योंकि वह पवित्रशास्‍त्र में से प्रमाण दे देकर कि यीशु ही मसीह है, बड़ी प्रबलता से यहूदियों को सब के सामने निरुत्तर करता था। फिर ऐसा हुआ कि जब अपुल्‍लोस कुरिंथुस में था तो पौलुस भीतरी प्रदेशों से होते हुए इफिसुस में पहुँचा और वहाँ उसे कुछ शिष्य मिले। उसने उनसे पूछा, “क्या तुमने विश्‍वास करते समय पवित्र आत्मा पाया था?” उन्होंने उससे कहा, “नहीं, हमने तो यह भी नहीं सुना कि पवित्र आत्मा है।” तब उसने कहा, “फिर तुमने किसका बपतिस्मा लिया?” उन्होंने कहा, “यूहन्‍ना का बपतिस्मा।” इस पर पौलुस ने कहा, “यूहन्‍ना ने लोगों को यह कहकर पश्‍चात्ताप का बपतिस्मा दिया कि जो उसके बाद आने वाला है, उस पर अर्थात् यीशु पर विश्‍वास करना।” यह सुनकर उन्होंने प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा लिया; और जब पौलुस ने उन पर अपने हाथ रखे तो पवित्र आत्मा उन पर उतर आया, और वे अन्य-अन्य भाषाएँ बोलने और भविष्यवाणी करने लगे। ये सब लगभग बारह पुरुष थे। वह तीन महीने तक आराधनालय में जाकर परमेश्‍वर के राज्य के विषय में वाद-विवाद करते और समझाते हुए साहसपूर्वक बोलता रहा। परंतु जब कुछ लोगों ने कठोर होकर उसकी नहीं मानी और वे लोगों के सामने इस “मार्ग” को बुरा कहने लगे, तो उसने उन्हें छोड़कर शिष्यों को अलग कर लिया, और तुरन्‍नुस की पाठशाला में प्रतिदिन वाद-विवाद करता रहा। दो वर्ष तक ऐसा होता रहा, जिससे आसिया में रहनेवाले सब यहूदियों और यूनानियों ने प्रभु का वचन सुना। परमेश्‍वर पौलुस के हाथों से सामर्थ्य के असाधारण कार्य करता रहा, यहाँ तक कि उसकी देह से स्पर्श किए हुए अंगोछे या गमछे बीमारों पर डालने से उनकी बीमारियाँ दूर हो जाती, और दुष्‍ट आत्माएँ उनमें से निकल जाती थीं। तब इधर-उधर घूमने-फिरनेवाले कुछ यहूदी ओझाओं ने भी दुष्‍ट आत्माओं से ग्रसित लोगों पर प्रभु यीशु का नाम लेने का यत्‍न किया और कहने लगे, “मैं तुम्हें उस यीशु के नाम से आदेश देता हूँ जिसका प्रचार पौलुस करता है।” एक यहूदी मुख्य याजक स्किवा के सात पुत्र भी ऐसा ही कर रहे थे। इस पर दुष्‍ट आत्मा ने उनसे कहा, “मैं यीशु को तो जानती हूँ और पौलुस को भी पहचानती हूँ, परंतु तुम कौन हो?” और वह मनुष्य, जिसमें दुष्‍ट आत्मा थी, उन पर झपटा और उन्हें अपने वश में करके उन पर ऐसा प्रबल हुआ कि वे निर्वस्‍त्र और घायल होकर उस घर से निकल भागे। यह बात इफिसुस में रहनेवाले सब यहूदी और यूनानी भी जान गए, और उन सब पर भय छा गया; और प्रभु यीशु के नाम की बड़ाई होने लगी। जिन्होंने विश्‍वास किया था उनमें से बहुत लोग आकर अपने कार्यों का अंगीकार करने और उन्हें प्रकट करने लगे। बहुत से जादू-टोना करनेवाले भी अपनी पुस्तकें इकट्ठी करके सब के सामने जलाने लगे; और जब उनका मूल्य आँका गया, तो पचास हज़ार चाँदी के सिक्‍कों के बराबर निकला। इस प्रकार प्रभु का वचन प्रभावशाली रूप से फैलता और प्रबल होता गया। जब ये बातें हो चुकीं, तो पौलुस ने अपनी आत्मा में मकिदुनिया और अखाया होते हुए यरूशलेम को जाने का निश्‍चय किया, और कहा, “वहाँ पहुँचने के बाद मुझे रोम भी देखना अवश्य है।” अतः वह अपने साथ सेवा करनेवालों में से दो अर्थात् तीमुथियुस और इरास्तुस को मकिदुनिया भेजकर स्वयं कुछ समय के लिए आसिया में ही रहा। उस समय इस “मार्ग” को लेकर बड़ी खलबली मच गई। क्योंकि देमेत्रियुस नामक एक सुनार था, जो अरतिमिस के चाँदी के मंदिर बनवाकर कारीगरों को बहुत काम दिलाया करता था। उसने उन्हें और इसी प्रकार के कार्य करनेवालों को इकट्ठा करके कहा, “हे पुरुषो, तुम जानते हो कि इसी काम के कारण हम धन-संपन्‍न हैं। तुम देखते और सुनते हो कि न केवल इफिसुस में बल्कि लगभग सारे आसिया में इस पौलुस ने बहुत से लोगों को समझा बुझाकर बहका दिया है कि जो हाथों के बने हैं, वे ईश्‍वर नहीं। इससे न केवल हमारे व्यवसाय के बदनाम होने का खतरा है, बल्कि यह भी कि महान देवी अरतिमिस का मंदिर तुच्छ समझा जाएगा, और जिसे सारा आसिया और संसार पूजता है उसकी महानता भी जाती रहेगी।” जब उन्होंने यह सुना तो क्रोध से भर गए और चिल्‍लाकर कहने लगे, “इफिसियों की अरतिमिस महान है।” और नगर में हुल्‍लड़ मच गया, और लोग मकिदुनियावासी गयुस और अरिस्तर्खुस को जो पौलुस के संगी यात्री थे, पकड़कर एक साथ तेज़ी से रंगशाला में दौड़े गए। पौलुस लोगों के सामने भीतर जाना चाहता था पर शिष्यों ने उसे जाने नहीं दिया; और आसिया के कुछ अधिकारियों ने भी जो उसके मित्र थे, उसके पास कहला भेजा और विनती की कि वह रंगशाला में जाने का जोखिम न उठाए। वहाँ कोई कुछ चिल्‍ला रहा था तो कोई कुछ और, क्योंकि सभा में गड़बड़ी मची हुई थी, और बहुत से लोग यह भी नहीं जानते थे कि वे किस कारण एकत्रित हुए थे। तब भीड़ में से कुछ लोगों ने सिकंदर को खड़ा किया, जिसे यहूदियों ने आगे किया था। सिकंदर ने हाथ से संकेत करके अपने पक्ष में लोगों के सामने कुछ कहना चाहा। परंतु जब उन्होंने जाना कि वह यहूदी है तो लगभग दो घंटे तक वे सब एक स्वर से चिल्‍लाते रहे, “इफिसियों की अरतिमिस महान है।” तब नगर के अधिकारी ने भीड़ को शांत करके कहा, “हे इफिसुस के लोगो, ऐसा कौन मनुष्य है जो नहीं जानता कि इफिसियों का नगर महान देवी अरतिमिस के मंदिर और आकाश से गिरी मूर्ति का संरक्षक है? इसलिए जब इन बातों का खंडन नहीं हो सकता तो तुम्हारे लिए उचित है कि तुम शांत रहो और उतावली न करो; क्योंकि तुम जिन मनुष्यों को लाए हो, वे न तो मंदिर के लुटेरे हैं और न ही हमारी देवी के निंदक हैं। फिर भी यदि देमेत्रियुस और उसके साथ के कारीगरों को किसी के विरुद्ध कोई शिकायत है, तो न्यायालय खुले हैं और राज्यपाल भी हैं; वहाँ वे एक दूसरे पर आरोप लगाएँ। परंतु इसके अतिरिक्‍त यदि तुम कुछ और चाहते हो, तो उसका निर्णय न्यायिक सभा में किया जाएगा। क्योंकि हमें सचमुच इस बात का खतरा है कि आज की घटना के विषय में कहीं हम पर विद्रोह का आरोप न लगा दिया जाए, जबकि इसके होने का कोई कारण नहीं था, और हम इस उपद्रवी भीड़ के जमा होने का कोई कारण नहीं दे सकेंगे।” ये बातें कहकर उसने सभा को भंग कर दिया। हुल्‍लड़ थम जाने के बाद पौलुस ने शिष्यों को बुलवाकर उन्हें प्रोत्साहित किया, और उनसे विदा होकर मकिदुनिया जाने के लिए निकला। फिर वह उन प्रदेशों से होता हुआ और लोगों को बहुत से वचनों के द्वारा उत्साहित करता हुआ यूनान में आया। वहाँ तीन महीने बिताकर जब वह जहाज़ से सीरिया के लिए रवाना होने पर था, तो यहूदियों ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा; इसलिए उसने मकिदुनिया होकर लौट जाने का निश्‍चय किया। बीरियावासी पुर्रुस का पुत्र सोपत्रुस, थिस्सलुनीकिया के अरिस्तर्खुस और सिकुंदुस, दिरबे का गयुस और तीमुथियुस, आसिया के तुखिकुस और त्रुफिमुस उसके साथ थे। ये लोग पहले जाकर त्रोआस में हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे। अख़मीरी रोटी के पर्व के दिनों के बाद हम फिलिप्पी से जहाज़ द्वारा निकले, और पाँच दिन में उनके पास त्रोआस में पहुँचे, जहाँ हम सात दिन रहे। सप्‍ताह के पहले दिन जब हम रोटी तोड़ने के लिए इकट्ठे हुए तो पौलुस उन्हें प्रवचन देने लगा; वह अगले दिन जाने वाला था, इसलिए आधी रात तक बातें करता रहा। जिस अटारी पर हम इकट्ठे हुए थे, वहाँ बहुत से दीपक जल रहे थे। उस समय यूतुखुस नामक एक युवक खिड़की पर बैठा हुआ था, और जब पौलुस लंबे समय तक प्रवचन देता रहा तो उसे गहरी नींद के झोंके आने लगे; और नींद में वह तीसरी मंज़िल से नीचे गिर गया और मरा हुआ उठाया गया। परंतु पौलुस नीचे उतरकर उस पर झुका और उसे गले लगाकर कहा, “घबराओ मत, क्योंकि इसका प्राण इसी में है।” फिर उसने ऊपर जाकर रोटी तोड़ी और खाई, और बहुत देर अर्थात् भोर तक बातचीत करता रहा; फिर वह चला गया। तब वे उस लड़के को जीवित ले आए, और उन्हें बड़ी शांति मिली। हम जहाज़ पर पहले जाकर अस्सुस के लिए रवाना हुए कि वहाँ से पौलुस को चढ़ा लें, क्योंकि उसने स्वयं ही पैदल जाने की इच्छा से ऐसा प्रबंध किया था। जब वह हमें अस्सुस में मिला तो उसे लेकर हम मितुलेने में आए, और वहाँ से हम जहाज़ द्वारा दूसरे दिन खियुस के सामने पहुँचे, और अगले दिन सामुस पहुँचे, फिर एक दिन बाद मिलेतुस में आए। पौलुस ने इफिसुस में जाए बिना आगे बढ़ने का निश्‍चय किया ताकि उसे आसिया में समय बिताना न पड़े। वह इसलिए जल्दी कर रहा था कि यदि संभव हो तो पिंतेकुस्त के दिन वह यरूशलेम में हो। उसने मिलेतुस से इफिसुस में संदेश भेजकर कलीसिया के प्रवरों को बुलवाया। जब वे उसके पास आए तो उसने उनसे कहा, “तुम स्वयं जानते हो कि पहले दिन से जब मैंने आसिया में पैर रखा, मैं हर समय तुम्हारे साथ किस प्रकार रहा, अर्थात् पूरी दीनता से और आँसू बहाते हुए और उन परीक्षाओं में जो यहूदियों के षड्यंत्रों के कारण मुझ पर आईं, मैं प्रभु की सेवा करता रहा; और किस प्रकार जो-जो लाभ की बातें थीं उन्हें तुम्हें बताने, और सब के सामने तथा घर-घर तुम्हें सिखाने से मैं नहीं झिझका, और यहूदियों और यूनानियों, दोनों को परमेश्‍वर के प्रति पश्‍चात्ताप और हमारे प्रभु यीशु पर विश्‍वास करने के विषय में दृढ़तापूर्वक साक्षी देता रहा। अब देखो, मैं आत्मा में बँधा हुआ यरूशलेम को जा रहा हूँ, और नहीं जानता कि वहाँ मेरे साथ क्या होगा, केवल यह जानता हूँ कि पवित्र आत्मा हर नगर में मुझे चेतावनी दे रहा है कि बंधन और क्लेश मेरी प्रतीक्षा में हैं। परंतु मैं अपने प्राण को अपने लिए मूल्यवान नहीं समझता, बल्कि यह कि मैं अपनी दौड़ को और उस सेवा को पूरा करूँ जो मुझे प्रभु यीशु से मिली है, अर्थात् मैं परमेश्‍वर के अनुग्रह के सुसमाचार की दृढ़तापूर्वक साक्षी दूँ। “अब देखो, मैं जानता हूँ कि तुम सब जिनके बीच मैं राज्य का प्रचार करता फिरा, मेरा मुँह फिर नहीं देखोगे। इसलिए आज के दिन मैं तुम्हारे सामने यह साक्षी देता हूँ कि मैं सब के लहू से निर्दोष हूँ, क्योंकि मैं परमेश्‍वर की संपूर्ण इच्छा को तुम्हें बताने से नहीं झिझका। इसलिए अपना और अपने पूरे झुंड का ध्यान रखो, जिसका पवित्र आत्मा ने तुम्हें अध्यक्ष ठहराया है कि तुम परमेश्‍वर की उस कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उसने अपने लहू से खरीदा है। मैं जानता हूँ कि मेरे जाने के बाद खूँखार भेड़िए तुम्हारे बीच में आएँगे, जो झुंड को नहीं छोड़ेंगे, और तुम्हारे ही बीच में से कुछ ऐसे लोग उठ खड़े होंगे जो शिष्यों को अपने पीछे खींच लेने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी बातें करेंगे। इसलिए जागृत रहो, और स्मरण करो कि मैंने तीन वर्ष तक रात और दिन आँसू बहाते हुए हर एक को चेतावनी देना नहीं छोड़ा। और अब मैं तुम्हें परमेश्‍वर और उसके अनुग्रह के उस वचन के हाथ सौंपता हूँ, जो तुम्हारी उन्‍नति कर सकता है और सब पवित्र किए गए लोगों के साथ तुम्हें उत्तराधिकार दे सकता है। मैंने कभी किसी की चाँदी या सोने या वस्‍त्र का लालच नहीं किया; तुम स्वयं जानते हो कि मेरे इन्हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की आवश्यकताओं को पूरा किया है। मैंने तुम्हें सब बातों में दिखाया कि इसी प्रकार परिश्रम करके निर्बलों को संभालना, और प्रभु यीशु के उन वचनों को स्मरण रखना अवश्य है, जो उसने स्वयं कहे: ‘लेने से देना धन्य है।’ ” ये बातें कहकर उसने अपने घुटने टेके और उन सब के साथ प्रार्थना की। तब वे सब बहुत रोए और पौलुस को गले लगाकर उसे चूमने लगे। वे विशेषकर इस बात से शोकित थे, जो उसने कही थी कि तुम मेरा मुँह फिर न देखोगे। तब उन्होंने उसे जहाज़ तक पहुँचाया। फिर ऐसा हुआ कि जब हम उनसे विदा होकर जहाज़ से रवाना हुए, तो हम सीधे कोस में आए, और अगले दिन रुदुस में, और वहाँ से पतरा में। वहाँ हमें फीनीके को जानेवाला जहाज़ मिला, और हम उस पर सवार होकर चल पड़े। जब हमें साइप्रस दिखाई दिया तो उसे बाईं ओर छोड़कर सीरिया की ओर बढ़े, और सूर में उतरे, क्योंकि वहाँ जहाज़ का माल उतरना था। ढूँढ़ने पर हमें वहाँ कुछ शिष्य मिले और हम वहाँ सात दिन रहे। वे आत्मा के द्वारा पौलुस को कहते रहे कि यरूशलेम को न जाए। फिर ऐसा हुआ कि जब वे दिन पूरे हुए तो हम वहाँ से निकलकर चल दिए; और वे सब स्‍त्रियों तथा बच्‍चों समेत नगर के बाहर तक हमारे साथ आए, और समुद्र तट पर हमने घुटने टेककर प्रार्थना की, और एक दूसरे से विदा ली। फिर हम जहाज़ पर चढ़ गए, और वे अपने-अपने घर लौट गए। तब सूर से जलयात्रा पूरी करके हम पतुलिमयिस में पहुँचे, और भाइयों को नमस्कार किया और एक दिन उनके साथ रहे। अगले दिन हम वहाँ से निकलकर कैसरिया में आए और सुसमाचार प्रचारक फिलिप्पुस के घर में जाकर उसके साथ रहे; वह उन सातों में से एक था। उसकी चार कुँवारी पुत्रियाँ थीं जो भविष्यवाणी करती थीं। जब वहाँ रहते हुए हमें कई दिन हो गए तो यहूदिया से अगबुस नामक एक भविष्यवक्‍ता आया। उसने हमारे पास आकर पौलुस का कमरबंद लिया और अपने पैर और हाथ बाँधकर कहा, “पवित्र आत्मा यह कहता है, ‘जिस मनुष्य का यह कमरबंद है उसे यरूशलेम में यहूदी इसी प्रकार बाँधेंगे और गैरयहूदियों के हाथों में सौंप देंगे।’” जब हमने यह सुना, तो हम और वहाँ के लोग उससे विनती करने लगे कि वह यरूशलेम को न जाए। तब पौलुस ने उत्तर दिया, “तुम क्या कर रहे हो? क्यों रो रोकर मेरा दिल तोड़ते हो? मैं तो प्रभु यीशु के नाम के लिए यरूशलेम में न केवल बाँधे जाने, बल्कि मरने के लिए भी तैयार हूँ।” जब वह नहीं माना तो हम यह कहकर चुप हो गए, “प्रभु की इच्छा पूरी हो।” इन दिनों के बाद हमने तैयारी की, और यरूशलेम को चल दिए। कैसरिया से भी कुछ शिष्य हमारे साथ हो लिए, और हमें साइप्रस के एक पुराने शिष्य मनासोन के पास ले गए, जिसके पास हमें ठहरना था। जब हम यरूशलेम पहुँचे तो भाइयों ने आनंद के साथ हमारा स्वागत किया। दूसरे दिन पौलुस हमारे साथ याकूब के पास गया, जहाँ सब प्रवर आए हुए थे। तब पौलुस ने उनको नमस्कार किया और जो कुछ परमेश्‍वर ने उसकी सेवा के द्वारा गैरयहूदियों के बीच किया था, एक-एक करके बताने लगा। यह सुनकर वे परमेश्‍वर की महिमा करने लगे, और उन्होंने उससे कहा, “भाई, तू देखता है कि यहूदियों में से हज़ारों ने विश्‍वास किया है, और वे सब व्यवस्था के लिए बड़े उत्साही हैं। परंतु उन्हें तेरे विषय में बताया गया है कि तू गैरयहूदियों के बीच रहनेवाले सब यहूदियों को शिक्षा देता है कि मूसा को त्याग दो, और कहता है कि न तो अपने बच्‍चों का ख़तना कराओ और न ही रीतियों के अनुसार चलो। अब क्या किया जाए? वे अवश्य सुनेंगे कि तू आया है। इसलिए तू वही कर जो हम तुझसे कहते हैं। हमारे यहाँ चार मनुष्य हैं जिन्होंने अपने लिए मन्‍नत मानी है। तू उन्हें ले जाकर उनके साथ अपने आपको शुद्ध कर और उनके सिर मुँड़ाने का खर्चा दे। तब सब जानेंगे कि तेरे विषय जो बातें बताई गई हैं उनमें कोई सच्‍चाई नहीं, बल्कि तू स्वयं भी व्यवस्था का पालन करता और उसके अनुसार चलता है। परंतु उन गैरयहूदियों के विषय में जिन्होंने विश्‍वास किया है, हमने यह निर्णय करके लिख भेजा है कि वे मूर्तियों को चढ़ाई गई वस्तु से, और लहू से, और गला घोंटे हुए पशुओं के मांस से, और व्यभिचार से बचे रहें।” तब पौलुस ने उन मनुष्यों को लिया और दूसरे दिन उनके साथ शुद्ध होकर मंदिर-परिसर में प्रवेश किया, और वहाँ सूचित किया कि कब उनके शुद्धीकरण के दिन पूरे होंगे और उनमें से हर एक के लिए बलिदान चढ़ाया जाएगा। जब वे सात दिन पूरे होने पर थे, तो आसिया के यहूदी उसे मंदिर-परिसर में देखकर सब लोगों को भड़काने लगे और उसे पकड़कर चिल्‍लाए, “हे इस्राएलियो, हमारी सहायता करो! यह वही मनुष्य है जो हर स्थान पर सब को हमारे लोगों और व्यवस्था और इस स्थान के विरुद्ध सिखाता है, यहाँ तक कि इसने यूनानियों को भी मंदिर में लाकर इस पवित्र स्थान को अशुद्ध कर दिया है।” क्योंकि उन्होंने पहले उसके साथ इफिसुस के त्रुफिमुस को नगर में देखा था, और समझ रहे थे कि पौलुस उसे मंदिर में ले आया है। तब सारा नगर भड़क गया और लोग दौड़कर इकट्ठे हुए, और पौलुस को पकड़कर मंदिर-परिसर से बाहर घसीट लाए, और तुरंत द्वार बंद कर दिए गए। जब वे उसे मार ही डालना चाहते थे, तो सैन्य दल के सेनापति के पास यह सूचना पहुँची कि सारे यरूशलेम में गड़बड़ी मची हुई है। वह तुरंत सैनिकों तथा शतपतियों को लेकर उनके पास नीचे दौड़ आया; और जब लोगों ने सेनापति और सैनिकों को देखा तो पौलुस को पीटना बंद कर दिया। तब सेनापति ने पास आकर उसे पकड़ा और दो ज़ंजीरों से बाँधने का आदेश दिया, और पूछने लगा कि वह कौन है और उसने क्या किया है। परंतु भीड़ में से कोई कुछ तो कोई कुछ चिल्‍ला रहा था। जब कोलाहल के कारण वह सही बात न जान सका, तो उसने उसे छावनी में ले जाने का आदेश दिया। जब वह सीढ़ियों के पास पहुँचा, तो ऐसा हुआ कि भीड़ के उग्र हो जाने के कारण सैनिकों को उसे उठाकर ले जाना पड़ा, क्योंकि लोगों की भीड़ यह चिल्‍लाती हुई उसके पीछे चली आ रही थी, “उसे मार डालो।” जब वे पौलुस को छावनी के भीतर लाने पर थे तो उसने सेनापति से कहा, “क्या मैं तुझसे कुछ कह सकता हूँ?” वह कहने लगा, “क्या तू यूनानी जानता है? तो क्या तू वही मिस्री तो नहीं जिसने कुछ दिन पहले विद्रोह करवाया और चार हज़ार कटारबंद पुरुषों को जंगल में ले गया था?” पौलुस ने कहा, “मैं तो एक यहूदी मनुष्य हूँ, और किलिकिया के प्रसिद्ध नगर तरसुस का निवासी हूँ। मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे लोगों से बात करने की अनुमति दे।” जब उसने अनुमति दे दी तो पौलुस ने सीढ़ियों पर खड़े होकर लोगों को अपने हाथ से संकेत किया; और जब बड़ा सन्‍नाटा छा गया तो उसने उन्हें इब्रानी भाषा में यह कहकर संबोधित किया: “हे भाइयो और बुज़ुर्गो, अब अपने सामने मेरा प्रत्युत्तर सुनो।” यह सुनकर कि वह उन्हें इब्रानी भाषा में संबोधित कर रहा है, वे और भी शांत हो गए। तब उसने कहा, “मैं किलिकिया के तरसुस में जन्मा एक यहूदी मनुष्य हूँ, परंतु मेरा पालन-पोषण इसी नगर में हुआ और गमलीएल के चरणों में मुझे पूर्वजों की व्यवस्था को खराई से सिखाया गया। मैं परमेश्‍वर के लिए बड़ा उत्साही था जैसे आज तुम सब हो। मैंने इस ‘मार्ग’ के पुरुषों और स्‍त्रियों दोनों को बाँध बाँधकर बंदीगृह में डलवाया और उन्हें मृत्यु तक सताया; महायाजक और सब धर्मवृद्ध भी इस बात के साक्षी हैं। मैं उनसे भाइयों के लिए पत्र भी प्राप्‍त करके दमिश्क की ओर जा रहा था कि जो वहाँ हैं उन्हें भी बाँधकर यरूशलेम में ले आऊँ ताकि उन्हें दंड मिले। “फिर ऐसा हुआ कि लगभग दोपहर के समय जब मैं चलते-चलते दमिश्क के निकट पहुँचा तो अचानक आकाश से एक बड़ी ज्योति मेरे चारों ओर चमकी, और मैं भूमि पर गिर पड़ा और एक आवाज़ मुझसे यह कहते हुए सुनाई दी, ‘शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?’ इस पर मैंने पूछा, ‘हे प्रभु, तू कौन है?’ उसने मुझसे कहा, ‘मैं यीशु नासरी हूँ जिसे तू सताता है।’ जो मेरे साथ थे उन्होंने ज्योति तो देखी परंतु मुझसे जो बात कर रहा था उसकी आवाज़ न सुनी। तब मैंने कहा, ‘हे प्रभु, मैं क्या करूँ?’ और प्रभु ने मुझसे कहा, ‘उठ और दमिश्क में जा, और वहाँ तुझे उन सब बातों के विषय में बता दिया जाएगा जिन्हें करने के लिए तुझे ठहराया गया है।’ उस ज्योति के तेज के कारण मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए मैं अपने साथियों का हाथ पकड़कर दमिश्क तक आया। तब हनन्याह नामक एक मनुष्य, जो व्यवस्था के अनुसार भक्‍त था और वहाँ रहनेवाले सब यहूदियों में सुनाम था, मेरे पास आया और पास खड़े होकर मुझसे कहा, ‘हे भाई शाऊल, देखने लग।’ और मैंने उसी घड़ी दृष्‍टि पाकर उसे देखा। उसने कहा, ‘हमारे पूर्वजों के परमेश्‍वर ने तुझे पहले से चुन लिया है कि तू उसकी इच्छा को जाने और उस धर्मी को देखे और उसके मुँह से बातें सुने, क्योंकि तू उसकी ओर से सब मनुष्यों के सामने उन बातों का साक्षी होगा जो तूने देखी और सुनी हैं। अब देर क्यों करता है? उठ और बपतिस्मा ले, और उसका नाम लेकर अपने पापों को धो डाल।’ “फिर ऐसा हुआ कि जब मैं यरूशलेम को लौटकर मंदिर-परिसर में प्रार्थना कर रहा था, तो बेसुध हो गया और उसे देखा कि वह मुझसे कह रहा है, ‘जल्दी कर और यरूशलेम से तुरंत निकल जा, क्योंकि वे मेरे विषय में तेरी साक्षी को ग्रहण नहीं करेंगे।’ तब मैंने कहा, ‘प्रभु, वे स्वयं जानते हैं कि मैं आराधनालयों में जा जाकर तुझ पर विश्‍वास करनेवालों को बंदी बनाता और पिटवाता था; और जब तेरे साक्षी स्तिफनुस का लहू बहाया जा रहा था, तो मैं स्वयं भी वहाँ खड़ा था और उसमें सहमत था और उसकी हत्या करनेवालों के वस्‍त्रों की रखवाली कर रहा था।’ तब प्रभु ने मुझसे कहा, ‘तू जा, क्योंकि मैं तुझे गैरयहूदियों के पास दूर-दूर भेजूँगा।’” इस बात तक तो वे उसकी सुनते रहे; फिर वे ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाने लगे, “ऐसे मनुष्य को पृथ्वी से मिटा दो, क्योंकि उसका जीवित रहना ठीक नहीं।” जब वे चिल्‍ला चिल्‍लाकर अपने वस्‍त्रों को फेंकने और हवा में धूल उड़ाने लगे, तो सेनापति ने उसे छावनी में ले जाने का आदेश दिया, और कहा कि कोड़े मारकर उसकी जाँच-पड़ताल की जाए ताकि पता चले कि लोग उस पर क्यों ऐसे चिल्‍ला रहे हैं। जब उन्होंने उसे कोड़े लगाने के लिए चमड़े की पट्टियों से बाँधा तो पौलुस ने पास खड़े शतपति से कहा, “क्या तुम्हारे लिए एक रोमी मनुष्य को बिना मुकदमे के कोड़े मारना उचित है?” यह सुनकर शतपति ने सेनापति के पास जाकर कहा, “तू क्या करने वाला है? यह मनुष्य तो रोमी है।” इस पर सेनापति ने उसके पास जाकर उससे कहा, “मुझे बता, क्या तू रोमी है?” उसने कहा, “हाँ।” सेनापति ने कहा, “मैंने यह नागरिकता बहुत रुपए देकर खरीदी है।” पौलुस ने कहा, “पर मैं तो जन्म से रोमी हूँ।” तब जो लोग उसकी जाँच-पड़ताल करने पर थे, वे तुरंत उसके पास से हट गए; और सेनापति भी यह जानकर कि वह एक रोमी है, डर गया, क्योंकि उसी ने उसे बंदी बनाया था। अगले दिन सही बात जानने की इच्छा से कि यहूदियों ने उस पर क्यों आरोप लगाया है, सेनापति ने उसके बंधन खोल दिए, और मुख्य याजकों तथा सारी महासभा को एकत्रित होने का आदेश दिया, और पौलुस को ले जाकर उनके सामने खड़ा कर दिया। पौलुस ने महासभा की ओर टकटकी लगाकर देखते हुए कहा, “हे भाइयो, मैंने आज तक परमेश्‍वर के सामने पूरे खरे विवेक से जीवन बिताया है।” इस पर महायाजक हनन्याह ने उसके पास खड़े लोगों को उसके मुँह पर थप्पड़ मारने की आज्ञा दी। तब पौलुस ने उससे कहा, “हे चूना पुती हुई दीवार, परमेश्‍वर तुझे मारेगा! तू व्यवस्था के अनुसार मेरा न्याय करने के लिए बैठा है, फिर क्या व्यवस्था के विरुद्ध मुझे मारने की आज्ञा देता है?” जो पास खड़े थे, उन्होंने कहा, “तू परमेश्‍वर के महायाजक को बुरा-भला कहता है?” तब पौलुस ने कहा, “हे भाइयो, मैं नहीं जानता था कि यह महायाजक है; क्योंकि लिखा है: तू अपने लोगों के प्रधान को बुरा न कहना।” तब पौलुस यह जानकर कि एक दल सदूकियों का और दूसरा फरीसियों का है, महासभा में पुकारकर कहने लगा, “हे भाइयो, मैं फरीसी हूँ और फरीसियों के वंश का हूँ, और मृतकों के पुनरुत्थान की आशा के विषय में मुझ पर मुकदमा चलाया जा रहा है।” जब उसने यह कहा तो फरीसियों और सदूकियों में विवाद छिड़ गया, और सभा में फूट पड़ गई। क्योंकि सदूकी कहते हैं कि न तो पुनरुत्थान है, न स्वर्गदूत, और न ही आत्मा, परंतु फरीसी ये सब मानते हैं। तब बड़ा कोलाहल मच गया, और फरीसियों के दल के कुछ शास्‍त्री उठ खड़े हुए और यह कहकर झगड़ने लगे, “हम इस मनुष्य में कोई बुराई नहीं पाते; यदि किसी आत्मा या स्वर्गदूत ने उससे बातें की हैं तो क्या?” जब विवाद बहुत बढ़ गया तो सेनापति ने इस डर से कि कहीं वे पौलुस के टुकड़े-टुकड़े न कर दें, सैनिकों को आदेश दिया कि वे नीचे जाकर उसे उनके बीच से बलपूर्वक निकालें और छावनी में ले आएँ। उसी रात प्रभु ने उसके पास खड़े होकर कहा, “ साहस रख, क्योंकि जिस प्रकार तूने यरूशलेम में मेरे विषय में दृढ़तापूर्वक साक्षी दी है, उसी प्रकार तुझे रोम में भी साक्षी देनी होगी।” जब दिन हुआ तो कुछ यहूदियों ने मिलकर षड्यंत्र रचा और यह कहते हुए आपस में शपथ खाई कि जब तक वे पौलुस को मार न डालें, तब तक न तो खाएँगे और न ही पीएँगे। जिन्होंने यह षड्यंत्र रचा था, वे चालीस से अधिक थे। उन्होंने मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों के पास जाकर कहा, “हमने आपस में शपथ खाकर यह ठाना है कि जब तक पौलुस को मार न डालें, तब तक कुछ न चखेंगे। इसलिए अब तुम महासभा के साथ मिलकर सेनापति को सूचित कर दो कि वह उसे तुम्हारे पास ले आए, मानो तुम उसके विषय में और भी ठीक रीति से जाँच करना चाहते हो। हम उसके पहुँचने से पहले ही उसे मार डालने के लिए तैयार रहेंगे।” जब पौलुस के भांजे ने सुना कि वे उसकी घात में हैं तो वह छावनी में पहुँचा और भीतर जाकर पौलुस को यह बात बता दी। तब पौलुस ने शतपतियों में से एक को अपने पास बुलाकर कहा, “इस युवक को सेनापति के पास ले जा, क्योंकि इसको उसे कुछ बताना है।” अतः वह उसे सेनापति के पास ले गया और कहा, “बंदी पौलुस ने मुझे अपने पास बुलाकर विनती की कि इस युवक को तेरे पास ले आऊँ, क्योंकि इसको तुझसे कुछ कहना है।” तब सेनापति उसका हाथ पकड़कर उसे एकांत में ले गया और पूछने लगा, “क्या बात है जो तू मुझे बताना चाहता है?” उसने कहा, “यहूदी एकमत हो गए हैं कि तुझसे विनती करें कि तू पौलुस को कल महासभा के सामने ले आए, मानो वे उसके विषय में कुछ और ठीक रीति से पूछताछ करना चाहते हों। इसलिए तू उनकी बात मत मानना; क्योंकि उनमें चालीस से अधिक पुरुष उसकी घात में हैं, और उन्होंने आपस में शपथ खाई है कि जब तक वे उसको मार न डालें तब तक वे न तो खाएँगे और न ही पीएँगे, और अब वे तैयार हैं और तेरे वचन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” तब सेनापति ने युवक को यह आज्ञा देकर विदा किया, “किसी से न कहना कि तूने ये बातें मुझे बताई हैं।” फिर उसने दो शतपतियों को अपने पास बुलाकर कहा, “रात के नौ बजे तक कैसरिया जाने के लिए दो सौ सैनिकों, सत्तर घुड़सवारों और दो सौ भाला चलानेवालों को तैयार रखो, और सवारी पशुओं का प्रबंध करो कि वे पौलुस को बैठाकर राज्यपाल फेलिक्स के पास सुरक्षित पहुँचा दें।” और उसने इस प्रकार का एक पत्र लिखा: “माननीय राज्यपाल फेलिक्स को क्लौदियुस लूसियास का नमस्कार। जब यहूदी इस मनुष्य को पकड़कर मार डालने पर थे, तो यह जानकर कि वह रोमी है मैंने सैनिकों के साथ आकर उसे छुड़ा लिया। मैं जानना चाहता था कि वे किस कारण उस पर आरोप लगा रहे थे, इसलिए मैं उसे उनकी महासभा में ले गया। तब मुझे पता चला कि वे अपनी व्यवस्था के विवादों के विषय में उस पर आरोप लगा रहे हैं, परंतु उसमें मृत्युदंड या बंदी बनाए जाने योग्य कोई दोष नहीं। जब मुझे बताया गया कि इस मनुष्य के विरुद्ध षड्यंत्र रचा गया है, तो मैंने तुरंत उसे तेरे पास भेज दिया, और यह आदेश भी दिया कि इस पर आरोप लगानेवाले तेरे सामने इस पर आरोप लगाएँ। ” अतः सैनिक उन्हें दिए गए आदेश के अनुसार पौलुस को लेकर रातों-रात अंतिपत्रिस में आ गए; और अगले दिन घुड़सवारों को उसके साथ जाने के लिए छोड़कर वे छावनी को लौट आए। कैसरिया पहुँचकर उन्होंने राज्यपाल को पत्र दिया और पौलुस को उसके सामने खड़ा किया। उसने पत्र पढ़कर पूछा कि वह किस प्रांत का है, और यह जानकर कि वह किलिकिया का है, उसने कहा, “जब तुझ पर आरोप लगानेवाले भी आ जाएँगे, तब मैं तेरी सुनवाई करूँगा।” और उसने पौलुस को हेरोदेस के राजभवन में पहरे में रखने का आदेश दिया। पाँच दिन के बाद महायाजक हनन्याह कुछ धर्मवृद्धों तथा तिरतुल्‍लुस नामक एक वकील के साथ आया। उन्होंने राज्यपाल के सामने पौलुस के विरुद्ध अभियोग लगाया। जब उसे बुलाया गया तो तिरतुल्‍लुस यह कहकर उस पर आरोप लगाने लगा, “हे माननीय फेलिक्स, तेरे कारण हमने बड़ी शांति पाई है और तेरी दूरदर्शिता के कारण इस देश में सुधार के कार्य हो रहे हैं, हम इसे हर प्रकार से और हर स्थान पर बड़े आभार के साथ स्वीकार करते हैं। अब तेरा और अधिक समय नष्‍ट न करते हुए मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू हमारी कुछ बातें सुनने की कृपा कर। क्योंकि हमने पाया है कि यह मनुष्य एक महामारी जैसा है जो संसार के सारे यहूदियों में दंगे भड़काता है और नासरियों के कुपंथ का नेता है। उसने मंदिर-परिसर को अशुद्ध करने का भी प्रयत्‍न किया, पर हमने उसे पकड़ लिया [और अपनी व्यवस्था के अनुसार न्याय करना चाहते थे। परंतु सेनापति लूसियास ने आकर उसे बलपूर्वक हमारे हाथों से छीन लिया, और उस पर अभियोग लगानेवालों को तेरे सामने आने का आदेश दिया।] तू स्वयं जाँच-पड़ताल करके उससे इन सब बातों को जान लेगा जिनके विषय में हम उस पर आरोप लगाते हैं।” यहूदियों ने भी उसका साथ देकर कहा कि ये बातें ऐसी ही हैं। जब राज्यपाल ने पौलुस को बोलने का संकेत किया तो उसने उत्तर दिया, “यह जानकर कि तू बहुत वर्षों से इस जाति का न्यायाधीश है, मैं प्रसन्‍नतापूर्वक अपने बचाव में बोलता हूँ। तू स्वयं जान सकता है कि मुझे आराधना करने के लिए यरूशलेम में गए बारह दिन से अधिक नहीं हुए हैं। इन्होंने मुझे न तो मंदिर-परिसर में, न आराधनालय में और न ही नगर में किसी के साथ वाद-विवाद करते या भीड़ में दंगा करवाते हुए पाया है, और न ही वे उन आरोपों को तेरे सामने प्रमाणित कर सकते हैं जो वे अब मुझ पर लगा रहे हैं। परंतु मैं तेरे सामने यह मान लेता हूँ कि जिसे ये कुपंथ कहते हैं, मैं उसी ‘मार्ग’ के अनुसार अपने पूर्वजों के परमेश्‍वर की सेवा करता हूँ, और उन सब बातों पर विश्‍वास करता हूँ जो व्यवस्था में और भविष्यवक्‍ताओं की पुस्तकों में लिखी गई हैं, और परमेश्‍वर में यह आशा रखता हूँ, जो ये स्वयं भी रखते हैं, कि धर्मी और अधर्मी दोनों का पुनरुत्थान होगा। इस कारण मैं भी स्वयं परमेश्‍वर और मनुष्यों के सामने अपने विवेक को निर्दोष रखने का सदा प्रयत्‍न करता हूँ। अब बहुत वर्षों के बाद मैं अपने लोगों को दान पहुँचाने और भेंट चढ़ाने आया था, इन्होंने मुझे मंदिर-परिसर में विधिपूर्वक शुद्ध दशा में पाया; और न तो मेरे साथ भीड़ थी और न ही कोई उपद्रव। परंतु हाँ, वहाँ आसिया के कुछ यहूदी थे, और यदि मेरे विरुद्ध उनके पास कुछ था तो चाहिए था कि वे तेरे सामने आते और मुझ पर आरोप लगाते। या ये लोग स्वयं बताएँ कि जब मैं महासभा के सामने खड़ा था तो उन्होंने मुझमें कौन सा अपराध पाया, केवल इस एक बात को छोड़ जो मैंने उनके बीच खड़े होकर चिल्‍लाकर कही थी: ‘मृतकों के पुनरुत्थान के विषय में आज तुम्हारे सामने मुझ पर मुकदमा चलाया जा रहा है।’” परंतु फेलिक्स ने जो इस “मार्ग” के विषय में और ठीक रीति से जानता था, उन्हें यह कहकर टाल दिया, “जब सेनापति लूसियास आएगा तो मैं तुम्हारी बातों के विषय में अपना निर्णय दूँगा।” फिर उसने शतपति को आदेश दिया कि पौलुस को कुछ छूट देकर पहरे में रखा जाए और उसके अपने लोगों को उसकी सेवा करने से न रोका जाए। कुछ दिनों के बाद जब फेलिक्स अपनी पत्‍नी द्रुसिल्‍ला के साथ जो एक यहूदिनी थी, आया तो उसने पौलुस को बुलाया और उससे उस विश्‍वास के विषय में सुना जो मसीह यीशु में है। जब वह धार्मिकता और संयम और आने वाले न्याय के विषय में चर्चा कर रहा था, तो फेलिक्स ने भयभीत होकर कहा, “अभी तू जा, समय पाकर मैं तुझे फिर बुलवाऊँगा।” साथ ही साथ वह पौलुस से रुपए पाने की आशा भी कर रहा था; इसलिए वह उसे बार-बार बुलवाकर उससे बातचीत किया करता था। जब दो वर्ष पूरे हो गए तो पुरकियुस फेस्तुस, फेलिक्स का उत्तराधिकारी बना; और फेलिक्स यहूदियों को प्रसन्‍न करने की इच्छा से पौलुस को बंदीगृह में ही छोड़ गया। उस प्रांत में पहुँचने के तीन दिन बाद फेस्तुस कैसरिया से यरूशलेम को गया। तब मुख्य याजकों और यहूदियों के प्रमुख लोगों ने उसके सामने पौलुस के विरुद्ध आरोप लगाए, और पौलुस के विरुद्ध उससे विनती करने लगे कि वह पौलुस को यरूशलेम में बुलवाने की कृपा करे; क्योंकि वे उसे मार्ग में मार डालने की ताक में थे। परंतु फेस्तुस ने उत्तर दिया कि पौलुस कैसरिया में पहरे में है, और वह स्वयं वहाँ शीघ्र जाने वाला है। फिर उसने कहा, “तुममें से जो प्रमुख हैं वे साथ चलें और यदि उस मनुष्य ने कोई अनुचित कार्य किया है तो उस पर आरोप लगाएँ।” वह उनके बीच आठ या दस दिन रहकर कैसरिया को चला गया। अगले दिन उसने न्यायासन पर बैठकर आदेश दिया कि पौलुस को लाया जाए। जब वह आया तो यरूशलेम से आए हुए यहूदी उसके चारों ओर खड़े हो गए, और बहुत से गंभीर आरोप लगाने लगे जिन्हें वे प्रमाणित नहीं कर सकते थे। तब पौलुस ने अपना बचाव करते हुए कहा, “मैंने न तो यहूदियों की व्यवस्था के विरुद्ध और न मंदिर के विरुद्ध और न ही कैसर के विरुद्ध कोई पाप किया है।” तब फेस्तुस ने यहूदियों को प्रसन्‍न करने की इच्छा से पौलुस से कहा, “क्या तू चाहता है कि यरूशलेम में जाकर वहाँ मेरे सामने इन बातों का न्याय हो?” परंतु पौलुस ने कहा, “मैं कैसर के न्यायासन के सामने खड़ा हूँ, मेरा न्याय यहीं होना चाहिए। मैंने यहूदियों का कुछ बुरा नहीं किया, जैसा कि तू भी अच्छी तरह जानता है। यदि मैंने कुछ बुरा किया है और मृत्युदंड के योग्य कोई कार्य किया है तो मैं मरने से इनकार नहीं करता; परंतु यदि ऐसी कोई बात नहीं है जिनका ये मुझ पर आरोप लगाते हैं, तो कोई भी मुझे उनके हाथ नहीं सौंप सकता। मैं कैसर से अपील करता हूँ।” तब फेस्तुस ने अपने मंत्रिमंडल के साथ परामर्श करके उसे उत्तर दिया, “तूने कैसर से अपील की है, तू कैसर के पास जाएगा।” जब कुछ दिन बीत गए तो राजा अग्रिप्पा और बिरनीके, फेस्तुस का अभिवादन करने कैसरिया में आए। वहाँ कई दिन रहने के बाद फेस्तुस ने राजा के सामने पौलुस के विषय में यह बताया, “फेलिक्स एक व्यक्‍ति को बंदी छोड़ गया है। जब मैं यरूशलेम में गया हुआ था तो यहूदियों के मुख्य याजकों और धर्मवृद्धों ने उसके विरुद्ध आरोप लगाए और उसे दंड देने का निवेदन किया। तब मैंने उन्हें उत्तर दिया कि रोमियों की यह रीति नहीं है कि किसी मनुष्य को पहले ही से दंड के लिए सौंप दें, जब तक कि उस आरोपी को आरोप लगानेवालों के सामने आकर दोष का उत्तर देने का अवसर न मिले। अतः जब वे यहाँ एकत्रित हुए तो मैंने बिना देर किए अगले ही दिन न्यायासन पर बैठकर उस मनुष्य को ले आने का आदेश दिया। जब आरोप लगानेवाले खड़े हुए तो उन्होंने उस पर किसी ऐसे गंभीर अपराध का दोष नहीं लगाया जैसा मैं समझ रहा था, परंतु उसके साथ उनका विवाद अपने धर्म की कुछ बातों पर और किसी यीशु के विषय में था, जो मर गया था पर पौलुस उसके जीवित होने का दावा करता था। मेरी समझ में नहीं आया कि मैं इन बातों की छान-बीन कैसे करूँ, इसलिए मैंने उससे पूछा कि क्या वह यरूशलेम को जाना चाहता है कि वहाँ इन बातों का न्याय किया जाए। परंतु जब पौलुस ने महाराजाधिराज के निर्णय तक स्वयं को वहीं पहरे में रखने की अपील की, तो मैंने उसे तब तक पहरे में रखने का आदेश दिया जब तक कि उसे कैसर के पास न भेज दूँ।” तब अग्रिप्पा ने फेस्तुस से कहा, “मैं स्वयं भी उस मनुष्य की सुनना चाहता हूँ।” उसने कहा, “कल उसकी सुन लेना।” अतः अगले दिन अग्रिप्पा और बिरनीके ने बड़ी धूमधाम के साथ आकर सेनापति और नगर के मुख्य लोगों के साथ सभा भवन में प्रवेश किया; और फेस्तुस के आदेश पर पौलुस को लाया गया। तब फेस्तुस ने कहा, “हे राजा अग्रिप्पा और हमारे साथ उपस्थित सब लोगो, तुम इस मनुष्य को देखते हो जिसके विषय में सारे यहूदी समाज ने यरूशलेम में और यहाँ भी चिल्‍ला चिल्‍लाकर मुझसे आग्रह किया कि इसका अब और जीवित रहना उचित नहीं। परंतु मैंने जान लिया कि इसने मृत्युदंड के योग्य कोई कार्य नहीं किया, और अब जबकि इसने स्वयं ही महाराजाधिराज से अपील की है तो मैंने उसे भेजने का निर्णय किया है। मेरे पास उसके विषय में महाराजा को लिखने के लिए कोई निश्‍चित बात नहीं है; इसलिए मैं उसे तुम्हारे सामने और, हे राजा अग्रिप्पा, विशेष करके तेरे सामने लाया हूँ, ताकि जाँच होने पर मुझे लिखने के लिए कुछ मिल जाए। क्योंकि किसी बंदी को उस पर लगे आरोप बताए बिना भेजना मुझे निरर्थक जान पड़ता है।” अग्रिप्पा ने पौलुस से कहा, “तुझे अपने विषय में बोलने की अनुमति है।” इस पर पौलुस अपना हाथ बढ़ाकर अपने बचाव में बोलने लगा, “हे राजा अग्रिप्पा, जो आरोप यहूदियों द्वारा मुझ पर लगाए गए हैं, उन सब के विषय में आज तेरे सामने मैं अपने बचाव में बोलते हुए अपने आपको धन्य समझता हूँ; विशेषकर इसलिए कि तू यहूदियों की सब रीतियों और विवादों से परिचित है। अतः मैं तुझसे विनती करता हूँ कि धीरज से मेरी सुन। “सब यहूदी जानते हैं कि वास्तव में मेरा चाल-चलन अपनी युवावस्था से अर्थात् आरंभ से ही अपनी जाति के बीच और यरूशलेम में कैसा था। वे बहुत पहले से मुझे जानते हैं और यदि वे चाहें तो गवाही दे सकते हैं कि मैंने अपने धर्म के सब से कट्टर पंथ के अनुसार फरीसी होकर जीवन बिताया है। परंतु अब उस प्रतिज्ञा की आशा के कारण जो परमेश्‍वर ने हमारे पूर्वजों से की थी, मुझ पर मुकदमा चलाया जा रहा है। उसी प्रतिज्ञा को हमारे बारहों गोत्र उत्सुकता से रात और दिन सेवा करते हुए प्राप्‍त करने की आशा करते हैं; हे राजा, इसी आशा के विषय में यहूदियों ने मुझ पर आरोप लगाए हैं। तुम्हें यह अविश्‍वसनीय क्यों लगता है कि परमेश्‍वर मृतकों को जिलाता है? वास्तव में, मैंने भी सोचा था कि यीशु नासरी के नाम के विरुद्ध मुझे बहुत कुछ करना चाहिए; और मैंने यरूशलेम में वह किया भी। मैंने मुख्य याजकों से अधिकार पाकर बहुत से पवित्र लोगों को बंदीगृह में डाला, और जब वे मार डाले जाते थे तो मैं उस पर सम्मति देता था। मैं सब आराधनालयों में उन्हें यातना दे देकर यीशु की निंदा करने के लिए विवश करता रहा, और यहाँ तक कि उनके विरुद्ध क्रोध से भरकर बाहर के नगरों तक भी उनका पीछा करता रहा। “इसी धुन में जब मैं मुख्य याजकों के अधिकार और आज्ञापत्र के साथ दमिश्क को जा रहा था, तो हे राजा, मैंने दोपहर के समय मार्ग में आकाश से सूर्य से अधिक तेजोमय एक ज्योति को अपने और अपने साथ यात्रा करनेवालों के चारों ओर चमकते हुए देखा; और हम सब भूमि पर गिर पड़े और मुझे इब्रानी भाषा में एक आवाज़ सुनाई दी, जो मुझसे यह कह रही थी, ‘शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है? अंकुश की नोक पर लात मारना तेरे लिए कठिन है।’ मैंने कहा, ‘प्रभु, तू कौन है?’ तब प्रभु ने कहा, ‘मैं यीशु हूँ, जिसे तू सताता है। परंतु तू उठ और अपने पैरों पर खड़ा हो जा; क्योंकि मैंने तुझे इसलिए दर्शन दिया है कि तुझे अपनी उन बातों का सेवक और साक्षी ठहराऊँ, जो तूने देखी हैं और जिन्हें मैं तुझ पर प्रकट करूँगा। मैं तुझे तेरे लोगों से और गैरयहूदियों से बचाता रहूँगा, जिनके पास मैं तुझे भेजता हूँ कि तू उनकी आँखें खोले, ताकि वे अंधकार से ज्योति की ओर और शैतान के अधिकार से परमेश्‍वर की ओर फिरें, तथा पापों की क्षमा और उन लोगों के साथ उत्तराधिकार प्राप्‍त करें जो मुझ पर विश्‍वास करने के द्वारा पवित्र किए गए हैं।’ “अतः हे राजा अग्रिप्पा, मैंने उस स्वर्गीय दर्शन की आज्ञा का उल्‍लंघन नहीं किया, परंतु पहले दमिश्क के और फिर यरूशलेम के, और यहूदिया के प्रत्येक क्षेत्र के लोगों को और गैरयहूदियों को भी यही प्रचार करता रहा कि वे पश्‍चात्ताप करके परमेश्‍वर की ओर फिरें और पश्‍चात्ताप के योग्य कार्य करें। इन बातों के कारण यहूदियों ने मुझे मंदिर-परिसर में पकड़कर मार डालने की चेष्‍टा की। परंतु परमेश्‍वर से सहायता पाकर मैं आज तक खड़ा हूँ और छोटे बड़े सब को साक्षी देता हूँ, और उन बातों को छोड़ कुछ नहीं कहता जो भविष्यवक्‍ताओं और मूसा ने कहीं कि वे होने वाली हैं, अर्थात् यह कि मसीह को दुःख उठाना होगा, और मृतकों में से जी उठने में प्रथम होकर वह अपने लोगों तथा गैरयहूदियों दोनों को ज्योति का प्रचार करेगा।” जब वह अपने बचाव में ये बातें कह ही रहा था तो फेस्तुस ने ऊँची आवाज़ में कहा, “पौलुस तू पागल है! तेरी बहुत विद्या ने तुझे पागल बना दिया है।” परंतु पौलुस ने कहा, “हे माननीय फेस्तुस, मैं पागल नहीं हूँ, बल्कि मैं सच्‍चाई और समझ की बातें बोलता हूँ। इन बातों के विषय में राजा जानता है, और उसी के सामने मैं निडर होकर बोल रहा हूँ। मुझे निश्‍चय है कि इन बातों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं, क्योंकि यह घटना किसी कोने में नहीं हुई। हे राजा अग्रिप्पा, क्या तू भविष्यवक्‍ताओं पर विश्‍वास करता है? मैं जानता हूँ कि तू विश्‍वास करता है।” तब अग्रिप्पा ने पौलुस से कहा, “तू मुझे थोड़े समय में ही मसीही बनाना चाहता है!” इस पर पौलुस ने कहा, “परमेश्‍वर से मेरी प्रार्थना है कि थोड़े में या अधिक समय में, न केवल तू बल्कि ये सब भी जो आज मेरी बातें सुन रहे हैं, वैसे ही बन जाएँ जैसा मैं भी हूँ—इन बंधनों को छोड़कर।” तब राजा, राज्यपाल और बिरनीके तथा जो उनके साथ बैठे थे, उठ खड़े हुए, और वहाँ से निकलकर आपस में यह कहने लगे, “इस मनुष्य ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जो मृत्युदंड या बंदी बनाए जाने के योग्य हो।” तब अग्रिप्पा ने फेस्तुस से कहा, “यदि इस मनुष्य ने कैसर से अपील न की होती तो इसे छोड़ा जा सकता था।” जब यह निश्‍चित हो गया कि हमें जहाज़ से इटली जाना है, तो उन्होंने पौलुस और कुछ अन्य बंदियों को औगुस्तुस के सैन्य दल के यूलियुस नामक शतपति के हाथ सौंप दिया। अद्रमुत्तियुम का एक जहाज़ आसिया के किनारे के स्थानों से होता हुआ जाने वाला था। हम उस पर चढ़कर रवाना हुए। थिस्सलुनीके का मकिदुनियावासी अरिस्तर्खुस भी हमारे साथ था। दूसरे दिन हम सैदा में उतरे, और यूलियुस ने पौलुस पर कृपा करके उसे मित्रों के पास जाने की अनुमति दी कि उसका सत्कार किया जाए। वहाँ से हम जहाज़ द्वारा साइप्रस की आड़ में चले क्योंकि हवा हमारे विपरीत थी। फिर हम किलिकिया और पंफूलिया के तटवर्ती समुद्र को पार करके लूसिया के मूरा में उतरे। वहाँ शतपति को इटली जानेवाला सिकंदरिया का एक जहाज़ मिला और उसने हमें उस पर चढ़ा दिया। जब हम बहुत दिन तक धीरे-धीरे खेते हुए बड़ी कठिनाई से कनिदुस के सामने पहुँचे, तो हवा हमें आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। इसलिए हम सलमोने के सामने से क्रेते द्वीप की आड़ में चले, और उसके किनारे-किनारे बड़ी कठिनाई से खेते हुए हम एक स्थान पर पहुँचे जो सुंदर-बंदरगाह कहलाता था; लसया नगर उसके निकट था। बहुत समय बीत गया था और यहाँ तक कि उपवास का दिन भी बीत गया था, और अब जलयात्रा संकटमय हो चुकी थी। अतः पौलुस उन्हें यह कहकर चेतावनी देने लगा, “हे सज्‍जनो, मुझे जान पड़ता है कि इस यात्रा में विपत्ति आएगी, और न केवल माल और जहाज़ की, बल्कि हमारे प्राणों की भी हानि होगी।” परंतु शतपति ने कप्‍तान और जहाज़ के स्वामी की बातों को पौलुस की बातों से बढ़कर माना। वह बंदरगाह शीतकाल बिताने के लिए उपयुक्‍त नहीं था, इसलिए अधिकांश लोगों ने वहाँ से जहाज़ द्वारा रवाना होने का विचार किया, कि यदि हो सके तो वे किसी प्रकार फीनिक्स में पहुँचकर शीतकाल बिताएँ। यह क्रेते का बंदरगाह था जिसका मुँह दक्षिण-पश्‍चिम तथा उत्तर-पश्‍चिम की ओर था। जब दक्षिणी हवा धीरे-धीरे बहने लगी, तो उन्होंने यह सोचकर लंगर उठाया कि उनका उद्देश्य पूरा हो गया है और वे क्रेते के पास से किनारे-किनारे जाने लगे। परंतु अभी अधिक समय भी नहीं बीता था कि द्वीप की ओर से एक भयानक तूफ़ान उठा जो यूरकुलीन कहलाता है। जब जहाज़ तूफ़ान में फँस गया तो उसका सामना न कर सका; और हम विवश होकर उसके साथ-साथ बहने लगे। तब कौदा नामक एक छोटे से द्वीप की आड़ में बहते हुए हम बड़ी कठिनाई से डोंगी को अपने वश में कर सके। डोंगी को उठाने के बाद उन्होंने रस्सों से जहाज़ को नीचे से कस दिया; और इस डर से कि कहीं बालू में फँस न जाएँ, वे पाल को नीचे करके बहते हुए जाने लगे। हम तूफ़ान से बहुत हिचकोले खा रहे थे, इसलिए अगले दिन वे जहाज़ का माल फेंकने लगे, और तीसरे दिन उन्होंने अपने हाथों से जहाज़ का साज़ो-सामान भी फेंक दिया। बहुत दिनों तक न तो सूर्य और न ही तारे दिखाई दिए, और तूफ़ान भी प्रचंड था। अंत में हमारे बचने की सारी आशा भी जाती रही। बहुत समय तक वे बिना भोजन के रहे। तब पौलुस ने उनके बीच में खड़े होकर कहा, “हे भाइयो, वास्तव में उचित तो यह था कि तुम मेरी बात मानकर क्रेते से जहाज़ द्वारा रवाना न होते, तब न यह विपत्ति आती और न यह हानि होती। परंतु अब मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि साहस रखो, क्योंकि इस जहाज़ को छोड़ तुममें से किसी के भी प्राण की हानि न होगी। क्योंकि जिस परमेश्‍वर का मैं हूँ और जिसकी मैं सेवा करता हूँ, उसका एक स्वर्गदूत पिछली रात को मेरे पास आ खड़ा हुआ, और कहा, ‘हे पौलुस, मत डर! तुझे कैसर के सामने खड़ा होना अवश्य है, और देख, परमेश्‍वर ने इन सब को जो तेरे साथ यात्रा कर रहे हैं, तुझे सौंप दिया है।’ इसलिए हे भाइयो, साहस रखो! क्योंकि मैं परमेश्‍वर पर विश्‍वास करता हूँ कि जैसा मुझसे कहा गया है, वैसा ही होगा। हम अवश्य किसी द्वीप पर जा लगेंगे।” जब चौदहवीं रात आई और हम अद्रिया समुद्र में भटक रहे थे, तो आधी रात के लगभग नाविकों को किसी तट के निकट पहुँचने का आभास हुआ। जब उन्होंने गहराई नापी तो वह सैंतीस मीटर थी, और थोड़ा आगे बढ़कर फिर गहराई नापी तो सत्ताईस मीटर थी। तब इस डर से कि कहीं हम पथरीले स्थानों से टकरा न जाएँ, उन्होंने जहाज़ के पिछले भाग से चार लंगर डाले और दिन होने की कामना करने लगे। परंतु नाविक जहाज़ पर से भाग जाना चाहते थे और उन्होंने डोंगी समुद्र में ऐसे उतारी मानो वे अगले भाग से लंगर डाल रहे हों। तब पौलुस ने शतपति और सैनिकों से कहा, “यदि ये जहाज़ पर नहीं रहे, तो तुम भी बच नहीं सकते।” अतः सैनिकों ने डोंगी के रस्से काट दिए और उसे नीचे गिरा दिया। जब दिन निकलने वाला था तो पौलुस ने यह कहकर सब से भोजन करने का आग्रह किया, “बिना भोजन किए प्रतीक्षा करते-करते आज तुम्हें चौदह दिन हो गए हैं, और तुमने कुछ भी नहीं खाया है। इसलिए मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि कुछ खा लो, यह तुम्हारे बचाव के लिए है; क्योंकि तुममें से किसी के सिर का एक बाल भी बाँका न होगा।” यह कहने के बाद उसने रोटी लेकर सब के सामने परमेश्‍वर का धन्यवाद किया और तोड़कर खाने लगा। तब उन सब ने भी प्रोत्साहित होकर भोजन किया। जहाज़ में हम सब कुल दो सौ छिहत्तर व्यक्‍ति थे। भरपेट भोजन करने के बाद वे गेहूँ को समुद्र में फेंककर जहाज़ को हल्का करने लगे। दिन होने पर उन्होंने उस स्थान को तो नहीं पहचाना, पर उन्हें एक खाड़ी दिखाई दे रही थी जिसका रेतीला तट था। उन्होंने विचार किया कि यदि हो सके तो जहाज़ को उसी पर लगा दें। उन्होंने लंगरों को काटकर समुद्र में छोड़ दिया, और साथ ही साथ पतवारों के बंधन ढीले कर दिए, और अगला पाल उठाकर हवा के सहारे तट की ओर चलने लगे। परंतु जहाज़ दो जल प्रवाहों के बीच पड़कर बालू में फँस गया और उसका अगला भाग ऐसा धंस गया कि हिल न सका और पिछला भाग लहरों के बल से टूटने लगा। सैनिकों का विचार था कि बंदियों को मार डालें, कहीं ऐसा न हो कि कोई तैरकर निकल भागे। परंतु शतपति ने पौलुस को बचाने की इच्छा से उन्हें ऐसा करने से रोका, और आदेश दिया कि जो तैर सकते हैं वे पहले कूदकर भूमि पर पहुँच जाएँ; और बाकी लोग पटरों और जहाज़ की अन्य वस्तुओं के सहारे पहुँच जाएँ। इस प्रकार सब लोग भूमि पर सुरक्षित पहुँच गए। जब हम सुरक्षित पहुँच गए तो हमें पता चला कि यह द्वीप माल्टा कहलाता है। वहाँ के निवासियों ने हमारे प्रति असाधारण उदारता दिखाई, और आग जलाकर हम सब का स्वागत किया क्योंकि वर्षा होने के कारण ठंड थी। परंतु जब पौलुस ने लकड़ियों का एक गट्ठर बटोरकर आग पर रखा, तो आँच के कारण एक साँप निकलकर उसके हाथ से लिपट गया। जब उन निवासियों ने उस जंतु को उसके हाथ से लटके हुए देखा, तो वे आपस में कहने लगे, “यह मनुष्य अवश्य ही कोई हत्यारा है; वह समुद्र से तो बच निकला, पर न्याय ने उसे जीवित रहने नहीं दिया।” तब उसने उस जंतु को आग में झटक दिया, और उसे कोई हानि नहीं हुई। वे तो यह प्रतीक्षा कर रहे थे कि वह सूज जाएगा या अचानक गिरकर मर जाएगा। परंतु जब वे बहुत देर तक प्रतीक्षा करते रहे और देखा कि उसे कुछ भी नहीं हुआ तो विचार बदलकर कहने लगे, “यह तो कोई देवता है।” उस स्थान के आस-पास की भूमि उस द्वीप के मुखिया की थी, जिसका नाम पुबलियुस था। उसने हमारा स्वागत किया और तीन दिन तक मित्रभाव से हमारा अतिथि-सत्कार किया। फिर ऐसा हुआ कि पुबलियुस का पिता ज्वर और पेचिश से पीड़ित पड़ा था। पौलुस ने उसके पास जाकर प्रार्थना की और उस पर हाथ रखकर उसे स्वस्थ किया। इस घटना के बाद उस द्वीप के अन्य बीमार भी उसके पास आने लगे और वे स्वस्थ किए गए। उन्होंने अनेक प्रकार से हमारा सम्मान किया; और जब हम जहाज़ से रवाना होने वाले थे तो उन्होंने हमारी आवश्यकता की वस्तुएँ जहाज़ पर रख दीं। हमें वहाँ रहते हुए तीन महीने हो चुके थे। तब हम सिकंदरिया के एक जहाज़ से रवाना हुए, जो शीतकाल में इसी द्वीप पर था, और जिस पर दियुसकूरी का चिह्‍न था। सुरकूसा में लंगर डालकर हम वहाँ तीन दिन रहे। वहाँ से घूमकर हम रेगियुम में पहुँचे। फिर एक दिन बाद दक्षिणी हवा चलने लगी। अतः हम दूसरे दिन पुतियुली में आए, जहाँ हमें कुछ भाई मिले जिन्होंने विनती की कि हम उनके साथ सात दिन रहें; और इस प्रकार हम रोम पहुँचे। जब वहाँ के कुछ भाइयों ने हमारे विषय में सुना तो वे अप्पियुस के चौक और तीन सराय तक हमसे मिलने आए। उन्हें देखकर पौलुस ने परमेश्‍वर का धन्यवाद किया और उसे साहस मिला। जब हमने रोम में प्रवेश किया तो पौलुस को एक सैनिक के साथ, जो उसकी रखवाली करता था, अलग रहने की अनुमति मिली। फिर ऐसा हुआ कि तीन दिन के बाद पौलुस ने यहूदियों के प्रमुख लोगों को एक साथ बुलाया; और जब वे एकत्रित हो गए तो वह उनसे कहने लगा, “हे भाइयो, मैंने अपने लोगों के या अपने पूर्वजों की रीतियों के विरोध में कुछ भी नहीं किया, फिर भी मुझे यरूशलेम से बंदी बनाकर रोमियों के हाथों सौंप दिया गया है। उन्होंने मेरी जाँच-पड़ताल करके मुझे छोड़ देना चाहा क्योंकि उन्हें मुझमें मृत्युदंड का कोई कारण नहीं मिला। परंतु जब यहूदियों ने विरोध किया तो मैं कैसर से अपील करने के लिए विवश हो गया, यह इसलिए नहीं कि मुझे अपने लोगों पर कोई दोष लगाना था। अतः इसी कारण मैंने तुम्हें बुलाया कि तुमसे मिलूँ और बातचीत करूँ, क्योंकि इस्राएल की आशा ही के कारण मैं इस ज़ंजीर से बँधा हूँ।” तब उन्होंने उससे कहा, “हमें तेरे विषय में न तो यहूदिया से कोई पत्र मिला, और न ही किसी भाई ने आकर तेरे विषय में बताया और न कुछ बुरा कहा। परंतु हम तुझसे सुनना चाहते हैं कि तेरा विचार क्या है, क्योंकि हम जानते हैं कि हर स्थान पर इस पंथ का विरोध किया जाता है।” तब उन्होंने उसके लिए एक दिन ठहरा दिया, और बहुत लोग उसके रहने के स्थान पर आए। वह भोर से संध्या तक उन्हें परमेश्‍वर के राज्य की साक्षी देता और मूसा की व्यवस्था तथा भविष्यवक्‍ताओं की पुस्तकों से यीशु के विषय में बताता हुआ समझाता रहा। तब कुछ लोगों ने तो उसकी कही बातों को मान लिया, परंतु कुछ ने विश्‍वास नहीं किया। वे आपस में असहमत होकर वहाँ से जा ही रहे थे कि पौलुस ने एक बात कही, “पवित्र आत्मा ने यशायाह भविष्यवक्‍ता के द्वारा तुम्हारे पूर्वजों से ठीक कहा था: इन लोगों के पास जा और कह, ‘तुम सुनते तो रहोगे परंतु नहीं समझोगे, और तुम देखते तो रहोगे परंतु तुम्हें नहीं सूझेगा; क्योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है; वे कानों से सुनना नहीं चाहते और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली हैं। कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें और कानों से सुनें, मन से समझें तथा फिरें, और मैं उन्हें स्वस्थ करूँ।’ “इसलिए तुम जान लो कि परमेश्‍वर का यह उद्धार गैरयहूदियों के पास भेजा गया है; और वे सुनेंगे।” जब उसने ये बातें कहीं तो यहूदी आपस में बहुत विवाद करते हुए चले गए। पौलुस अपने किराए के घर में पूरे दो वर्ष रहा, और जो उसके पास आते थे उन सब का वह स्वागत करता था। और बिना किसी रुकावट के पूरे साहस के साथ परमेश्‍वर के राज्य का प्रचार करता और प्रभु यीशु मसीह के विषय में सिखाता था। पौलुस की ओर से, जो मसीह यीशु का दास है और प्रेरित होने के लिए बुलाया गया, और परमेश्‍वर के उस सुसमाचार के लिए अलग किया गया है, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने पहले से ही पवित्रशास्‍त्र में अपने भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा अपने पुत्र, अर्थात् हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में की थी, जो शारीरिक रूप से दाऊद के वंश से उत्पन्‍न‍ हुआ, और पवित्रता के आत्मा के अनुसार मृतकों में से जी उठने के द्वारा सामर्थ्य के साथ परमेश्‍वर का पुत्र प्रमाणित हुआ, और उसी के द्वारा हमें अनुग्रह और प्रेरिताई मिली है कि उसके नाम के लिए सब गैरयहूदियों में विश्‍वास की आज्ञाकारिता उत्पन्‍न‍ हो, जिनमें से तुम भी यीशु मसीह के बुलाए हुए हो, उन सब के नाम जो रोम में परमेश्‍वर के प्रिय हैं और पवित्र होने के लिए बुलाए गए हैं: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। पहले तो मैं तुम सब के लिए यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्‍वर का धन्यवाद करता हूँ, क्योंकि तुम्हारे विश्‍वास का प्रचार समस्त संसार में हो रहा है। क्योंकि वह परमेश्‍वर, जिसकी सेवा मैं अपनी आत्मा से उसके पुत्र का सुसमाचार प्रचार करने के द्वारा करता हूँ, मेरा साक्षी है कि मैं किस प्रकार तुम्हें निरंतर स्मरण करता हूँ, और सदैव अपनी प्रार्थनाओं में विनती करता हूँ कि किसी प्रकार अब मैं परमेश्‍वर की इच्छा से तुम्हारे पास आने में सफल हो जाऊँ। मैं तुमसे मिलने की लालसा करता हूँ कि तुम्हें कोई आत्मिक वरदान दे सकूँ जिससे तुम दृढ़ हो जाओ; अर्थात् जब मैं तुम्हारे मध्य होऊँ तो हम आपस में एक दूसरे के विश्‍वास के द्वारा प्रोत्साहित किए जाएँ। हे भाइयो, मैं नहीं चाहता कि तुम इस बात से अनजान रहो कि मैंने बार-बार तुम्हारे पास आने की योजना बनाई थी कि मुझे तुममें भी कुछ फल प्राप्‍त हो, जैसे अन्य गैरयहूदियों में प्राप्‍त हुआ था—परंतु आज तक रोका गया। मैं यूनानियों और गैरयूनानियों, बुद्धिमानों और निर्बुद्धियों दोनों का ऋणी हूँ। अतः जहाँ तक मेरा संबंध है, मैं तो तुम्हें भी जो रोम में हो, सुसमाचार सुनाने के लिए तैयार हूँ। मैं सुसमाचार से लज्‍जित नहीं होता, क्योंकि यह प्रत्येक विश्‍वास करनेवाले के लिए—पहले यहूदी और फिर यूनानी के लिए—उद्धार के निमित्त परमेश्‍वर का सामर्थ्य है। क्योंकि इसमें परमेश्‍वर की धार्मिकता प्रकट होती है जो विश्‍वास से है और विश्‍वास के लिए है, जैसा लिखा है: धर्मी जन विश्‍वास से जीवित रहेगा। परमेश्‍वर का प्रकोप उन लोगों की समस्त अभक्‍ति और अधार्मिकता पर स्वर्ग से प्रकट होता है जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं, इसलिए कि परमेश्‍वर के विषय में जो कुछ भी जाना जा सकता है वह उन पर प्रकट है, क्योंकि उसे परमेश्‍वर ने उन पर प्रकट किया है। जगत की सृष्‍टि से ही उसके अदृश्य गुण अर्थात् उसका अनंत सामर्थ्य और परमेश्‍वरत्व, उसकी रचना के द्वारा समझे जाकर स्पष्‍ट दिखाई देते हैं, इसलिए वे निरुत्तर हैं। क्योंकि परमेश्‍वर को जानने पर भी उन्होंने न तो परमेश्‍वर के योग्य उसकी महिमा की और न ही उसका धन्यवाद किया, बल्कि वे अपने विचारों में निरर्थक हो गए और उनका नासमझ मन अंधकारमय हो गया। बुद्धिमान होने का दावा करते हुए वे मूर्ख बन गए, और अविनाशी परमेश्‍वर की महिमा को उन्होंने नश्‍वर मनुष्य और पक्षियों और चौपायों और रेंगनेवाले जंतुओं की मूरत की समानता में बदल दिया। इसलिए परमेश्‍वर ने उन्हें उनके मन की वासनाओं में अशुद्धता के लिए छोड़ दिया कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें। उन्होंने परमेश्‍वर की सच्‍चाई को झूठ में बदल दिया और सृष्‍टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृष्‍टिकर्ता की जो सदा-सर्वदा धन्य है। आमीन। इसलिए परमेश्‍वर ने उन्हें तुच्छ वासनाओं के वश में छोड़ दिया; यहाँ तक कि उनकी स्‍त्रियों ने भी प्राकृतिक क्रिया को अप्राकृतिक में बदल डाला। इसी प्रकार पुरुष भी स्‍त्री के साथ प्राकृतिक क्रिया को छोड़कर आपस में कामातुर होकर जलने लगे, और पुरुषों ने पुरुषों के साथ निर्लज्‍ज कार्य करके स्वयं अपने दुष्कर्म का उचित दंड पाया। जब उन्होंने परमेश्‍वर को पहचानना न चाहा, तब परमेश्‍वर ने उन्हें उनके भ्रष्‍ट मन के वश में छोड़ दिया कि वे अनुचित कार्य करें। वे सब प्रकार की अधार्मिकता, दुष्‍टता, लोभ और बुराई से भरकर ईर्ष्या, हत्या, झगड़े, छल और दुर्भावना से भर गए। वे चुगलखोर, निंदक, परमेश्‍वर से घृणा करनेवाले, ढीठ, अभिमानी, डींग मारनेवाले, बुराई गढ़नेवाले, माता-पिता की आज्ञा न माननेवाले, नासमझ, विश्‍वासघाती, प्रेम-रहित और निर्दयी हो गए। यद्यपि वे परमेश्‍वर की विधि जानते हैं कि ऐसे कार्य करनेवाले मृत्यु के योग्य हैं, फिर भी न केवल वे उन्हें करते हैं बल्कि ऐसा करनेवालों का समर्थन भी करते हैं। अतः हे दोष लगानेवाले, तू जो भी हो, निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दूसरे पर दोष लगाता है, उसी में स्वयं को भी दोषी पाता है, इसलिए कि तू जिस बात का दोष लगाता है वही करता है। परंतु हम जानते हैं कि ऐसे कार्य करनेवालों पर परमेश्‍वर के दंड की आज्ञा सत्य के अनुसार होती है। हे मनुष्य, तू जो ऐसे कार्य करनेवालों पर दोष लगाता है और स्वयं उन्हीं कार्यों को करता है, क्या तू यह सोचता है कि तू परमेश्‍वर के दंड से बच जाएगा? अथवा क्या तू यह नहीं समझता कि परमेश्‍वर की कृपा तुझे पश्‍चात्ताप की ओर ले जाती है? और क्या तू उसकी कृपा और सहनशीलता और धैर्य के धन को तुच्छ जानता है? परंतु तू अपनी कठोरता और अपश्‍चात्तापी मन के कारण प्रकोप के दिन के लिए, जब परमेश्‍वर का सच्‍चा न्याय प्रकट होगा, अपने प्रति प्रकोप इकट्ठा कर रहा है। वह प्रत्येक को उसके कार्यों के अनुसार प्रतिफल देगा: जो धीरज से भला कार्य करते हुए महिमा, आदर और अमरता को खोजते हैं उन्हें अनंत जीवन मिलेगा, परंतु जो स्वार्थी हैं और सत्य को नहीं मानते बल्कि अधर्म पर चलते हैं, उन पर प्रकोप और क्रोध पड़ेगा। बुरा कार्य करनेवाले प्रत्येक मनुष्य पर क्लेश और संकट आएँगे, पहले यहूदी और फिर यूनानी पर; परंतु भला कार्य करनेवाले प्रत्येक को महिमा, आदर और शांति मिलेगी, पहले यहूदी और फिर यूनानी को: क्योंकि परमेश्‍वर किसी का पक्षपात नहीं करता। इसलिए जितनों ने व्यवस्था को पाए बिना पाप किया, वे बिना व्यवस्था के नाश भी होंगे; और जितनों ने व्यवस्था के अधीन होकर पाप किया, उनका न्याय व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा। (क्योंकि परमेश्‍वर की दृष्‍टि में व्यवस्था के सुननेवाले नहीं, बल्कि व्यवस्था का पालन करनेवाले धर्मी ठहराए जाएँगे। फिर जब गैरयहूदी लोग जिनके पास व्यवस्था नहीं, स्वभाव से ही व्यवस्था की बातों का पालन करते हैं, तो उनके पास व्यवस्था न होने पर भी वे स्वयं ही अपने लिए व्यवस्था हैं। वे व्यवस्था की बातों को अपने हृदयों में लिखा हुआ दर्शाते हैं, और उनका विवेक इसकी साक्षी देता है, और उनके विचार उन्हें दोषी या कभी निर्दोष ठहराते हैं।) यह उस दिन होगा जब परमेश्‍वर मेरे सुसमाचार के अनुसार मसीह यीशु के द्वारा मनुष्यों की गुप्‍त बातों का न्याय करेगा। परंतु यदि तू यहूदी कहलाता है और व्यवस्था पर निर्भर रहता है, और परमेश्‍वर पर गर्व करता है, और उसकी इच्छा जानता है और व्यवस्था से शिक्षा पाकर उत्तम बातों का समर्थन करता है, और इस बात का भरोसा रखता है कि तू स्वयं अंधों का मार्गदर्शक, अंधकार में रहनेवालों के लिए ज्योति, निर्बुद्धियों को सिखानेवाला, और बच्‍चों का शिक्षक है, क्योंकि तुझे व्यवस्था में ज्ञान और सत्य का स्वरूप मिला है, तो तू जो दूसरे को सिखाता है, क्या स्वयं को नहीं सिखाता? क्या तू जो उपदेश देता है कि चोरी न करना, स्वयं ही चोरी करता है? तू जो कहता है कि व्यभिचार न करना, क्या स्वयं ही व्यभिचार करता है? तू जो मूर्तियों से घृणा करता है, क्या स्वयं ही मंदिरों को लूटता है? तू जो व्यवस्था पर गर्व करता है, क्या व्यवस्था का उल्‍लंघन करके परमेश्‍वर का अपमान करता है? जैसा लिखा है: तुम्हारे कारण गैरयहूदियों के बीच परमेश्‍वर के नाम की निंदा होती है। यदि तू व्यवस्था का पालन करता है तो वास्तव में ख़तने से लाभ है, परंतु यदि तू व्यवस्था का उल्‍लंघन करता है तो तेरा ख़तना, ख़तनारहित ठहरा। इसलिए यदि ख़तनारहित व्यक्‍ति व्यवस्था के नियमों का पालन करता है, तो क्या उसका ख़तनारहित होना, ख़तना होने के समान नहीं माना जाएगा? जो शारीरिक रीति से ख़तनारहित है परंतु व्यवस्था को पूरा करता है, वह तुझे जो लिखित व्यवस्था और ख़तना पाने पर भी व्यवस्था का उल्‍लंघन करता है, दोषी ठहराएगा। क्योंकि यहूदी वह नहीं जो बाहरी रूप से यहूदी हो, और ख़तना वह नहीं जो बाहरी रूप से देह में हो; परंतु यहूदी वही है जो मन से यहूदी है, और ख़तना वही है जो आत्मा के द्वारा हृदय का है न कि लेख का। ऐसे व्यक्‍ति की प्रशंसा मनुष्यों की ओर से नहीं बल्कि परमेश्‍वर की ओर से होती है। फिर यहूदी होने में क्या बड़ाई, या ख़तने का क्या लाभ? हर प्रकार से बहुत कुछ। पहले तो यह कि परमेश्‍वर के वचन उन्हें सौंपे गए। यदि कुछ लोगों ने विश्‍वास नहीं भी किया तो क्या हुआ? क्या उनका अविश्‍वास परमेश्‍वर की विश्‍वासयोग्यता को व्यर्थ ठहराएगा? कदापि नहीं! चाहे प्रत्येक मनुष्य झूठा ठहरे, परंतु परमेश्‍वर सच्‍चा है, जैसा लिखा है: तू अपने वचनों में धर्मी ठहरे और अपने न्याय में विजयी हो। परंतु यदि हमारी अधार्मिकता परमेश्‍वर की धार्मिकता को प्रकट करती है, तो हम क्या कहें? क्या परमेश्‍वर जो क्रोध करता है, अधर्मी है? (मैं मानवीय रीति पर कह रहा हूँ।) कदापि नहीं! अन्यथा परमेश्‍वर जगत का न्याय कैसे करेगा? यदि मेरे झूठ से परमेश्‍वर का सत्य उसकी महिमा के लिए और भी अधिकता से प्रकट होता है, तो फिर मैं पापी के समान दोषी क्यों ठहराया जाता हूँ? फिर हम क्यों न कहें, “आओ हम बुराई करें कि भलाई उत्पन्‍न‍ हो,” जैसे कि कुछ लोगों द्वारा हम पर यह कहने का झूठा आरोप लगाया जाता है? उनका दोषी ठहराया जाना उचित है। तो क्या हुआ? क्या हम दूसरों से अच्छे हैं? बिलकुल नहीं! हम पहले ही दोष लगा चुके हैं कि चाहे यहूदी हों या यूनानी, सब पाप के अधीन हैं। जैसा लिखा है: कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्‍वर का खोजी नहीं। सब भटक गए हैं, और सब के सब निकम्मे हो गए हैं; कोई भलाई करनेवाला नहीं, एक भी नहीं। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से धोखा देते हैं, उनके होंठों पर साँपों का विष है। उनका मुँह शाप और कड़वाहट से भरा रहता है। उनके पैर लहू बहाने को तत्पर रहते हैं। उनके मार्गों में विनाश और विपत्ति है, और उन्होंने शांति का मार्ग नहीं जाना। उनकी दृष्‍टि में परमेश्‍वर का भय नहीं है। अब हम जानते हैं कि व्यवस्था जो भी कहती है उन्हीं से कहती है जो व्यवस्था के अधीन हैं, ताकि प्रत्येक मुँह बंद किया जाए और सारा संसार परमेश्‍वर को लेखा देनेवाला ठहरे; क्योंकि व्यवस्था के कार्यों के द्वारा कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिए कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहचान होती है। परंतु अब व्यवस्था के बिना परमेश्‍वर की धार्मिकता प्रकट हुई है, जिसकी साक्षी व्यवस्था और भविष्यवक्‍ता देते हैं, अर्थात् परमेश्‍वर की वह धार्मिकता जो यीशु मसीह पर विश्‍वास करने के द्वारा सब विश्‍वास करनेवालों के लिए है। इसमें कोई भेदभाव नहीं है; इसलिए कि सब ने पाप किया है, वे परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं, परंतु वे उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु ही में है, बिना मूल्य चुकाए धर्मी ठहराए जाते हैं। उसी यीशु को परमेश्‍वर ने उसके लहू में, विश्‍वास के द्वारा प्रायश्‍चित्त के रूप में प्रस्तुत किया कि अपनी सहनशीलता के कारण उन पापों को जो पहले किए गए थे, अनदेखा करके अपनी धार्मिकता प्रकट करे। इस वर्तमान समय में उसने उसे इसलिए प्रस्तुत किया कि अपनी धार्मिकता को प्रकट करे, जिससे वह स्वयं धर्मी ठहरे और जो यीशु पर विश्‍वास करता है उसका धर्मी ठहरानेवाला हो। तो घमंड कहाँ रहा? वह तो रहा ही नहीं। कौन सी व्यवस्था से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, परंतु विश्‍वास की व्यवस्था से। इसलिए हम यह मानते हैं कि मनुष्य व्यवस्था के कार्यों से अलग, विश्‍वास से धर्मी ठहराया जाता है। क्या परमेश्‍वर केवल यहूदियों का ही है? क्या गैरयहूदियों का भी नहीं? हाँ, गैरयहूदियों का भी है, क्योंकि एक ही परमेश्‍वर है जो ख़तनावालों को विश्‍वास से और ख़तनारहितों को भी विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराएगा। तो क्या विश्‍वास के द्वारा हम व्यवस्था को व्यर्थ ठहराते हैं? कदापि नहीं! बल्कि हम व्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। तो हम अब्राहम के विषय में क्या कहें जो शारीरिक रूप से हमारा पूर्वज है? उसे क्या प्राप्‍त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कर्मों के द्वारा धर्मी ठहराया जाता, तो वह घमंड कर सकता था, परंतु परमेश्‍वर के सामने नहीं। पवित्रशास्‍त्र क्या कहता है? अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया और यह उसके लिए धार्मिकता गिना गया। अब कार्य करनेवाले को मज़दूरी देना कृपा नहीं बल्कि उसका अधिकार समझा जाता है। परंतु वह जो कार्य न करने पर भी भक्‍तिहीन को धर्मी ठहरानेवाले परमेश्‍वर पर विश्‍वास करता है, उसका विश्‍वास उसके लिए धार्मिकता गिना जाता है। उसी प्रकार दाऊद भी उस मनुष्य को धन्य कहता है जिसे परमेश्‍वर कर्मों के बिना धर्मी गिनता है: धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए और जिनके पाप ढाँपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसके पाप का लेखा प्रभु कभी नहीं लेगा। तो क्या यह आशिष ख़तनावालों के लिए ही है, या ख़तनारहितों के लिए भी? हम कहते हैं, “अब्राहम के लिए उसका विश्‍वास धार्मिकता गिना गया।” फिर यह कैसे गिना गया? ख़तने की दशा में या ख़तनारहित दशा में? ख़तने की दशा में नहीं बल्कि ख़तनारहित दशा में। उसे धार्मिकता की मुहर के रूप में ख़तने का चिह्‍न प्राप्‍त हुआ जो उसने ख़तनारहित दशा में विश्‍वास से पाया था जिससे वह ख़तनारहित दशा में सब विश्‍वास करनेवालों का पिता हो, ताकि वे भी धर्मी गिने जाएँ; और वह उन ख़तनावालों का भी पिता ठहरे, जो न केवल ख़तना किए हुए हैं बल्कि हमारे पिता अब्राहम के उस विश्‍वास के पद-चिह्‍नों पर भी चलते हैं जो उसका ख़तनारहित दशा में था। अब यह प्रतिज्ञा कि वह जगत का उत्तराधिकारी होगा, अब्राहम या उसके वंश को व्यवस्था के द्वारा नहीं बल्कि विश्‍वास की धार्मिकता के द्वारा मिली थी। इसलिए यदि व्यवस्थावाले उत्तराधिकारी हैं, तो विश्‍वास व्यर्थ ठहरा और प्रतिज्ञा निष्फल हुई; क्योंकि व्यवस्था तो प्रकोप उत्पन्‍न‍ करती है, परंतु जहाँ व्यवस्था नहीं, वहाँ उसका उल्‍लंघन भी नहीं होता। इस कारण, प्रतिज्ञा विश्‍वास पर आधारित है, ताकि वह अनुग्रह के अनुसार हो और सभी वंशजों के लिए निश्‍चित हो, केवल उनके लिए ही नहीं जो व्यवस्थावाले हैं बल्कि उनके लिए भी जो अब्राहम के समान विश्‍वासवाले हैं; जो हम सब का पिता है (जैसा लिखा है: मैंने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है ), उस परमेश्‍वर की दृष्‍टि में जिस पर उसने विश्‍वास किया जो मृतकों को जीवन देता है और जो वस्तुएँ हैं ही नहीं उनका नाम ऐसे लेता है मानो वे हैं। उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्‍वास किया कि उस वचन के अनुसार वह बहुत सी जातियों का पिता होगा, जैसा उससे कहा गया था: तेरा वंश ऐसा ही होगा। लगभग एक सौ वर्ष की आयु में अपने मृतक समान शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई दशा को जानकर भी वह विश्‍वास में निर्बल न हुआ, और न ही परमेश्‍वर की प्रतिज्ञा के विषय में अविश्‍वास के कारण डगमगाया, बल्कि विश्‍वास में दृढ़ हुआ और परमेश्‍वर को महिमा दी। वह पूर्णतः आश्‍वस्त था कि जो प्रतिज्ञा उसने की है वह उसे पूरा करने में भी समर्थ है। इसलिए, “यह उसके लिए धार्मिकता गिना गया।” अब “उसके लिए धार्मिकता गिना गया” न केवल उसके लिए लिखा गया, बल्कि हमारे लिए भी। हम जो उस पर विश्‍वास करते हैं जिसने हमारे प्रभु यीशु को मृतकों में से जिलाया उनके लिए यह धार्मिकता गिना जाएगा। वह हमारे अपराधों के कारण पकड़वाया गया और हमें धर्मी ठहराने के लिए जिलाया भी गया। अतः विश्‍वास से धर्मी ठहराए जाकर हमारा मेल परमेश्‍वर से अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हुआ है, जिसके द्वारा हमने उस अनुग्रह में, जिसमें हम स्थिर हैं, विश्‍वास के द्वारा प्रवेश भी प्राप्‍त किया है और हम परमेश्‍वर की महिमा की आशा में प्रफुल्‍लित होते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि हम क्लेशों में भी प्रफुल्‍लित होते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि क्लेश से धीरज उत्पन्‍न‍ होता है, और धीरज से खरा चरित्र तथा खरे चरित्र से आशा उत्पन्‍न‍ होती है। आशा हमें लज्‍जित नहीं करती, क्योंकि जो पवित्र आत्मा हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्‍वर का प्रेम हमारे मनों में उंडेला गया है। जब हम निर्बल ही थे, तब उचित समय पर मसीह भक्‍तिहीनों के लिए मरा। दुर्लभ है कि किसी धर्मी मनुष्य के लिए कोई मरे। हाँ, हो सकता है कि किसी भले व्यक्‍ति के लिए कोई मरने का साहस कर भी ले। परंतु परमेश्‍वर हमारे प्रति अपने प्रेम को इस प्रकार प्रकट करता है कि जब हम पापी ही थे, तब मसीह हमारे लिए मरा। इसलिए अब जबकि हम उसके लहू के द्वारा धर्मी ठहराए गए हैं, तो निश्‍चय ही उसके द्वारा परमेश्‍वर के क्रोध से भी बच जाएँगे। क्योंकि जब शत्रु होने पर भी उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा परमेश्‍वर से हमारा मेल हुआ, तो फिर मेल-मिलाप हो जाने पर हम निश्‍चय ही उसके जीवन के द्वारा उद्धार पाएँगे। इतना ही नहीं, बल्कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर में प्रफुल्‍लित भी होते हैं, जिसके द्वारा अब हमारा मेल-मिलाप हुआ है। अतः जिस प्रकार एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस प्रकार मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। व्यवस्था के दिए जाने तक पाप संसार में तो था, परंतु जहाँ व्यवस्था नहीं होती वहाँ पाप का लेखा भी नहीं लिया जाता। फिर भी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने राज्य किया, उन लोगों पर भी जिन्होंने आदम के अपराध के समान पाप नहीं किया था; आदम उसका प्रतीक था जो आनेवाला था। परंतु वरदान अपराध के समान नहीं होता; क्योंकि यदि एक मनुष्य के अपराध के कारण बहुत लोग मरे, तो परमेश्‍वर का अनुग्रह और वह दान जो एक मनुष्य अर्थात् यीशु मसीह के अनुग्रह में है, निश्‍चय ही बहुत लोगों को बहुतायत से मिला। यह दान एक मनुष्य के पाप के कारण प्राप्‍त परिणाम के समान नहीं, क्योंकि एक ओर तो एक पाप के कारण न्याय आया जिसका परिणाम दंड की आज्ञा हुआ; वहीं दूसरी ओर अनेक अपराधों के कारण वरदान आया जिसका परिणाम धर्मी ठहराया जाना हुआ। जब एक मनुष्य के अपराध के कारण मृत्यु ने उसी एक मनुष्य के द्वारा राज्य किया, तो जो बहुतायत से अनुग्रह और धार्मिकता का वरदान प्राप्‍त करते हैं, वे एक ही मनुष्य, अर्थात् यीशु मसीह के द्वारा जीवन में निश्‍चय ही राज्य करेंगे। अतः जिस प्रकार एक अपराध का परिणाम सब मनुष्यों पर दंड की आज्ञा हुआ, उसी प्रकार धार्मिकता के एक कार्य का परिणाम भी सब मनुष्यों के लिए जीवन के निमित्त धर्मी ठहराया जाना हुआ; क्योंकि जिस प्रकार एक मनुष्य के आज्ञा-उल्‍लंघन से सब पापी ठहराए गए, उसी प्रकार एक मनुष्य की आज्ञाकारिता से बहुत लोग धर्मी ठहराए जाएँगे। इसी बीच व्यवस्था आई कि अपराध बढ़े, परंतु जहाँ पाप बढ़ा वहाँ अनुग्रह उससे कहीं अधिक हुआ, ताकि जिस प्रकार पाप ने मृत्यु में राज्य किया, उसी प्रकार अनुग्रह भी धार्मिकता से हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनंत जीवन के लिए राज्य करे। तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बढ़ता रहे? कदापि नहीं! हम जो पाप के प्रति मर गए तो अब उसमें कैसे जीवन बिताएँ? क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु में बपतिस्मा पाया है, उसकी मृत्यु में बपतिस्मा पाया है? अतः हम मृत्यु में बपतिस्मा के द्वारा उसके साथ गाड़े गए, ताकि जिस प्रकार पिता की महिमा के द्वारा मसीह मृतकों में से जिलाया गया, उसी प्रकार हम भी नए जीवन की चाल चलें। क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में जुड़े हैं, तो वैसे ही उसके पुनरुत्थान की समानता में भी होंगे। हम यह जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया ताकि पाप की देह निष्क्रिय हो जाए, और हम फिर पाप के दासत्व में न रहें; क्योंकि जो मर गया वह पाप से मुक्‍त हो गया। अब यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हम विश्‍वास करते हैं कि उसके साथ जीएँगे भी; क्योंकि हम यह जानते हैं कि मसीह मृतकों से जी उठकर फिर कभी न मरेगा; उस पर फिर कभी मृत्यु की प्रभुता न होगी। क्योंकि वह जो मरा तो पाप के लिए एक ही बार मर गया; परंतु अब वह जो जीवित है तो परमेश्‍वर के लिए जीवित है। इसी प्रकार तुम भी अपने आपको पाप के लिए तो मरा हुआ, परंतु मसीह यीशु में परमेश्‍वर के लिए जीवित समझो। इसलिए पाप तुम्हारे मरणशील देह पर राज्य न करे, ऐसा न हो कि तुम उसकी लालसाओं के अधीन हो जाओ, और अपने अंगों को अधर्म के हथियार होने के लिए पाप को सौंप दो, बल्कि तुम अपने आपको मृतकों में से जीवित जानकर अपने अंगों को धार्मिकता के हथियार होने के लिए परमेश्‍वर को सौंप दो। तब तुम पर पाप की प्रभुता नहीं होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के अधीन नहीं परंतु अनुग्रह के अधीन हो। तो क्या? क्या हम इसलिए पाप करें क्योंकि हम व्यवस्था के अधीन नहीं बल्कि अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं! क्या तुम नहीं जानते कि जिसकी आज्ञा मानने के लिए तुम अपने आपको दासों के समान सौंप देते हो, तो तुम उसी के दास बन जाते हो जिसकी तुम आज्ञा मानते हो—चाहे पाप के जिसका परिणाम मृत्यु है, या आज्ञाकारिता के जिसका परिणाम धार्मिकता है? परंतु परमेश्‍वर का धन्यवाद हो कि यद्यपि तुम पाप के दास थे, फिर भी मन से उस शिक्षा के आज्ञाकारी हो गए जिसके साँचे में तुम ढाले गए थे, और अब पाप से छुड़ाए जाकर धार्मिकता के दास बन गए हो। तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मैं मानवीय रीति से कह रहा हूँ। जिस प्रकार तुमने अपने अंगों को अशुद्धता और अधर्म के दास होने के लिए सौंप दिया था और उसके परिणामस्वरूप और अधिक अधर्म हुआ; उसी प्रकार अब तुम अपने अंगों को धार्मिकता के दास होने के लिए सौंप दो जिसका परिणाम पवित्रता हो। क्योंकि जब तुम पाप के दास थे, तो धार्मिकता के संबंध में स्वतंत्र थे। इसलिए जिन बातों से अब तुम लज्‍जित होते हो, उनसे तुम्हें उस समय क्या फल मिला? क्योंकि उन बातों का अंत तो मृत्यु है। परंतु अब पाप से छुड़ाए जाकर और परमेश्‍वर के दास होकर तुम्हें यह फल मिला है, जिसका परिणाम पवित्रता है और जिसका अंत अनंत जीवन है। क्योंकि पाप की मज़दूरी तो मृत्यु है, परंतु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनंत जीवन है। हे भाइयो, क्या तुम नहीं जानते—मैं व्यवस्था जाननेवालों से कहता हूँ—कि व्यवस्था मनुष्य पर उस समय तक प्रभुता करती है जब तक वह जीवित है? उदाहरण के लिए, एक विवाहित स्‍त्री व्यवस्था के अनुसार तब तक ही अपने पति से बँधी है जब तक वह जीवित है; परंतु यदि उसके पति की मृत्यु हो जाए, तो वह पति से संबंधित व्यवस्था से मुक्‍त हो जाती है। इसलिए यदि वह अपने पति के जीवित रहते हुए किसी दूसरे पुरुष की हो जाए तो व्यभिचारिणी कहलाएगी; परंतु यदि उसके पति की मृत्यु हो जाए तो वह उस व्यवस्था से स्वतंत्र है, और वह किसी दूसरे पुरुष की भी हो जाए तो भी व्यभिचारिणी नहीं कहलाएगी। अतः हे मेरे भाइयो, मसीह की देह के द्वारा तुम भी व्यवस्था के प्रति मृत बना दिए गए थे कि तुम उस दूसरे के हो जाओ जो मृतकों में से जी उठा ताकि हम परमेश्‍वर के लिए फल लाएँ; क्योंकि जब हम शारीरिक थे तो हमारी लालसाएँ जो व्यवस्था के अनुसार पापमय थीं, हमारे अंगों में मृत्यु का फल लाने के लिए कार्य करती थीं। परंतु अब जिस व्यवस्था से हम बँधे थे उसके प्रति मरकर हम उससे स्वतंत्र हो गए हैं, ताकि हम लेख की पुरानी रीति से नहीं बल्कि आत्मा की नई रीति से सेवा करें। तो हम क्या कहें? क्या व्यवस्था पाप है? कदापि नहीं! बल्कि व्यवस्था के बिना मैं पाप को नहीं जान पाता। क्योंकि यदि व्यवस्था न कहती, “तू लालच न करना,” तो मैं लालच के विषय में नहीं जानता। परंतु पाप ने आज्ञा के द्वारा अवसर पाकर मुझमें हर प्रकार का लालच उत्पन्‍न‍ किया; क्योंकि व्यवस्था के बिना पाप मृत है। पहले मैं व्यवस्था के बिना जीवित था, परंतु जब आज्ञा आई तो पाप जीवित हो उठा और मैं मर गया, और मैंने पाया कि जो आज्ञा जीवन के लिए थी, वह मृत्यु का कारण हुई; क्योंकि आज्ञा के द्वारा अवसर पाकर पाप ने मुझे बहकाया और उसी के द्वारा मुझे मार भी डाला। इसलिए व्यवस्था पवित्र है, और आज्ञा भी पवित्र, न्यायसंगत और भली है। तो क्या वह जो भली है, मेरे लिए मृत्यु का कारण बनी? कदापि नहीं! बल्कि पाप उस भली बात के द्वारा मुझमें मृत्यु उत्पन्‍न‍ करनेवाला हुआ जिससे कि वह पाप के रूप में प्रकट हो जाए और आज्ञा के द्वारा और भी अधिक पापमय ठहरे। हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है; परंतु मैं शारीरिक हूँ और पाप के हाथों बिका हुआ हूँ। इसलिए जो मैं करता हूँ उसे समझ नहीं पाता, क्योंकि जो मैं चाहता हूँ वह मैं नहीं करता, बल्कि जिससे घृणा करता हूँ, वही करता हूँ। अब यदि मैं वही करता हूँ जो मैं नहीं करना चाहता, तो मैं सहमत हूँ कि व्यवस्था भली है। अतः वह कार्य करनेवाला मैं नहीं बल्कि पाप है जो मुझमें वास करता है। क्योंकि मैं जानता हूँ कि मुझमें, अर्थात् मेरे शरीर में कोई भली वस्तु वास नहीं करती। मुझमें इच्छा तो है परंतु मुझसे भले कार्य नहीं हो पाते; और जो भला मैं करना चाहता हूँ, वह नहीं करता बल्कि जो बुरा मैं नहीं करना चाहता, वही मैं करता हूँ। अब यदि मैं वही करता हूँ जो मैं नहीं करना चाहता, तो वह कार्य करनेवाला मैं नहीं बल्कि पाप है जो मुझमें वास करता है। अतः मैं यह सिद्धांत पाता हूँ कि यद्यपि मैं भलाई करना चाहता हूँ, फिर भी मुझमें बुराई ही है; क्योंकि मैं अपने भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्‍वर की व्यवस्था से प्रसन्‍न होता हूँ, परंतु मैं अपने अंगों में एक अलग व्यवस्था को देखता हूँ जो मेरे मन की व्यवस्था के विरुद्ध युद्ध करती है और मुझे पाप की उस व्यवस्था का बंदी बना देती है जो मेरे अंगों में बसी है। मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर का धन्यवाद हो। इसलिए अब एक ओर तो मैं अपने मन से परमेश्‍वर की व्यवस्था की, और दूसरी ओर शरीर से पाप की व्यवस्था की सेवा करता हूँ। अतः अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दंड की आज्ञा नहीं; [वे शरीर के अनुसार नहीं बल्कि आत्मा के अनुसार चलते हैं।] क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में तुम्हें पाप और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया है। जो कार्य शरीर के दुर्बल होने के कारण व्यवस्था से असंभव था, उसे परमेश्‍वर ने किया अर्थात् अपने पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिए भेजकर शरीर में पाप को दोषी ठहराया, ताकि हममें जो शरीर के अनुसार नहीं बल्कि आत्मा के अनुसार चलते हैं, व्यवस्था की माँग पूरी हो सके। क्योंकि शारीरिक व्यक्‍ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं, परंतु आत्मिक व्यक्‍ति आत्मा की बातों पर। क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परंतु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शांति है। क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्‍वर से शत्रुता करना है, वह न तो परमेश्‍वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है; और जो शारीरिक हैं वे परमेश्‍वर को प्रसन्‍न नहीं कर सकते। परंतु यदि परमेश्‍वर का आत्मा तुममें वास करता है, तो तुम शारीरिक नहीं बल्कि आत्मिक हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं, तो वह मसीह का नहीं है। यदि मसीह तुममें है, तो पाप के कारण देह मरी हुई है, परंतु धार्मिकता के कारण आत्मा जीवित है। यदि उसका आत्मा जिसने यीशु को मृतकों में से जिलाया तुममें वास करता है, तो जिसने मसीह को मृतकों में से जिलाया वह तुम्हारी मरणशील देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुममें वास करता है, जीवन देगा। इसलिए अब हे भाइयो, हम शरीर के ऋणी नहीं हैं कि शरीर के अनुसार जीवन बिताएँ; क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार जीवन बिताते हो तो तुम्हें मरना ही है, परंतु यदि आत्मा के द्वारा देह के कार्यों को मार डालते हो तो जीवित रहोगे। अतः जितने परमेश्‍वर के आत्मा के द्वारा चलाए जाते हैं, वे परमेश्‍वर की संतान हैं। क्योंकि तुम्हें दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो जाओ, बल्कि तुम्हें लेपालकपन का आत्मा मिला है, जिसके द्वारा हम “हे अब्बा, हे पिता” पुकारते हैं। आत्मा स्वयं हमारी आत्मा के साथ यह साक्षी देता है कि हम परमेश्‍वर की संतान हैं। अब यदि संतान हैं, तो उत्तराधिकारी भी—परमेश्‍वर के उत्तराधिकारी, और मसीह के सह-उत्तराधिकारी—जबकि हम उसके साथ महिमा पाने के लिए उसके साथ दुःख उठाते हैं। क्योंकि मैं समझता हूँ कि वर्तमान समय के दुःख इस योग्य नहीं हैं कि उनकी तुलना उस आने वाली महिमा से की जाए जो हम पर प्रकट होने वाली है। सृष्‍टि बड़ी आशा से परमेश्‍वर के पुत्रों के प्रकट होने की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रही है। क्योंकि सृष्‍टि स्वेच्छा से नहीं बल्कि अधीन करनेवाले के द्वारा इस आशा से व्यर्थता के अधीन कर दी गई, कि स्वयं सृष्‍टि भी विनाश के दासत्व से स्वतंत्र होकर परमेश्‍वर की संतानों की महिमापूर्ण स्वतंत्रता प्राप्‍त करे। क्योंकि हम जानते हैं कि सारी सृष्‍टि एक साथ अब तक कराहती और प्रसव की सी पीड़ा में तड़पती है; और केवल यही नहीं, बल्कि स्वयं हम भी जिनके पास आत्मा का पहला फल है, अपने आपमें कराहते हैं और लेपालक पुत्र होने की अर्थात् अपनी देह के छुटकारे की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करते हैं। इसी आशा में हमारा उद्धार हुआ है। अब जो आशा दिखाई देती है वह आशा नहीं है, क्योंकि उसकी आशा कौन करेगा जो दिखाई देती है? परंतु यदि हम उसकी आशा करते हैं जो दिखाई नहीं देती, तो हम धीरज से उत्सुकतापूर्वक उसकी प्रतीक्षा करते हैं। इसी प्रकार आत्मा भी हमारी निर्बलता में सहायता करता है; क्योंकि हम नहीं जानते कि हमें किस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए, परंतु आत्मा स्वयं ऐसी आहें भर भरकर जो वर्णन से बाहर हैं, हमारे लिए विनती करता है। मनों को जाँचनेवाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है, क्योंकि वह परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार पवित्र लोगों के लिए विनती करता है। हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं अर्थात् जो उसके उद्देश्य के अनुसार बुलाए गए हैं, उनके लिए वह सब बातों को मिलाकर भलाई ही उत्पन्‍न‍ करता है। क्योंकि जिन्हें वह पहले से जानता था, उन्हें उसने पहले से ठहराया भी कि वे उसके पुत्र के स्वरूप में हो जाएँ, ताकि वह अनेक भाइयों में पहलौठा ठहरे; और जिन्हें उसने पहले से ठहराया उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया उन्हें धर्मी भी ठहराया, और जिन्हें धर्मी ठहराया उन्हें महिमा भी दी। अतः इन बातों के विषय में हम क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है तो हमारे विरुद्ध कौन हो सकता है? जिसने अपने पुत्र को भी न रख छोड़ा, बल्कि उसे हम सब के लिए दे दिया, तो वह उसके साथ हमें सब कुछ उदारता से क्यों न देगा? परमेश्‍वर के चुने हुओं पर कौन आरोप लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहराता है। कौन है जो दंड की आज्ञा देगा? मसीह यीशु वह है जो मरा, इतना ही नहीं बल्कि मृतकों में से जी भी उठा, जो परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिए विनती भी करता है। कौन हमें मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या विपत्ति, या सताव, या अकाल, या नंगाई, या संकट, या तलवार? जैसा लिखा है: तेरे लिए ही हम दिन भर घात किए जाते हैं, हम वध होनेवाली भेड़ों के समान समझे जाते हैं। परंतु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हमसे प्रेम किया है जयवंत से भी बढ़कर हैं। क्योंकि मुझे निश्‍चय है कि न तो मृत्यु और न जीवन, न स्वर्गदूत न प्रधानताएँ, न वर्तमान न भविष्य, न शक्‍तियाँ, न ऊँचाई न गहराई, और न ही सृष्‍टि की कोई वस्तु हमें परमेश्‍वर के प्रेम से जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। मैं मसीह में सच कहता हूँ, मैं झूठ नहीं बोलता, मेरा विवेक भी पवित्र आत्मा में साक्षी देता है, कि मुझे बड़ा दुःख है और मेरा मन निरंतर पीड़ा में है। मैं यहाँ तक चाहता था कि अपने उन भाइयों के लिए स्वयं ही शापित होकर मसीह से अलग हो जाता जो शारीरिक रीति से मेरे कुटुंबी, अर्थात् इस्राएली हैं, और लेपालकपन का अधिकार, महिमा, वाचाएँ, व्यवस्था को प्राप्‍त करना, उपासना और प्रतिज्ञाएँ उन्हीं की हैं। पूर्वज उन्हीं के हैं, और शारीरिक रीति से मसीह भी उन्हीं में से हुआ, जो सब के ऊपर युगानुयुग धन्य परमेश्‍वर है। आमीन। परंतु ऐसा नहीं कि परमेश्‍वर का वचन विफल हो गया है। जो इस्राएल के वंशज हैं, वे सब इस्राएली नहीं; और न ही अब्राहम के वंश होने के कारण सब सच्‍ची संतान ठहरे, बल्कि लिखा है: इसहाक से तेरा वंश कहलाएगा। अर्थात्, जो शरीर की संतान हैं वे परमेश्‍वर की संतान नहीं, बल्कि प्रतिज्ञा की संतान को ही वंश माना जाता है। क्योंकि प्रतिज्ञा का वचन यह है: मैं निर्धारित समय पर आऊँगा और सारा के एक पुत्र होगा। केवल यही नहीं, बल्कि जब रिबका भी एक मनुष्य अर्थात् हमारे पिता इसहाक से गर्भवती हुई (अब तक न तो जुड़वाँ बालकों का जन्म हुआ था और न ही उन्होंने कुछ भला या बुरा किया था) तो उससे कहा गया था, “बड़ा छोटे की सेवा करेगा।” यह इस अभिप्राय से था कि परमेश्‍वर द्वारा चुने जाने का उद्देश्य, जो कर्मों के कारण नहीं बल्कि बुलानेवाले के कारण है, बना रहे। जैसा लिखा है: याकूब से मैंने प्रेम रखा, परंतु एसाव को अप्रिय जाना। तो हम क्या कहें? क्या परमेश्‍वर के यहाँ अन्याय है? कदापि नहीं! क्योंकि वह मूसा से कहता है: मैं जिस किसी पर दया करना चाहूँ उस पर दया करूँगा, और जिस किसी पर करुणा करना चाहूँ उस पर करुणा करूँगा। अतः यह न तो चाहनेवाले पर और न दौड़-धूप करनेवाले पर परंतु दया करनेवाले परमेश्‍वर पर निर्भर करता है। क्योंकि पवित्रशास्‍त्र फ़िरौन से कहता है: मैंने तुझे इसी लिए खड़ा किया कि मैं तुझमें अपना सामर्थ्य दिखाऊँ, ताकि संपूर्ण पृथ्वी पर मेरे नाम का प्रचार किया जाए। इसलिए जिस पर वह चाहता है दया करता है, और जिसे चाहता है कठोर कर देता है। तब तू मुझसे कहेगा, “फिर वह अब भी दोष क्यों लगाता है? क्योंकि कौन उसकी इच्छा का विरोध कर सकता है?” हे मनुष्य, परमेश्‍वर को पलटकर उत्तर देनेवाला भला तू कौन होता है? क्या रचना अपने रचनाकार से यह कहेगी, “तूने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?” क्या कुम्हार को मिट्टी पर यह अधिकार नहीं है कि वह एक ही लोंदे से एक पात्र आदर के लिए, और दूसरा अनादर के लिए बनाए? तो क्या हुआ यदि परमेश्‍वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपना सामर्थ्य प्रकट करने की इच्छा से विनाश के लिए तैयार किए गए क्रोध के पात्रों को बड़े धैर्य के साथ सहा, ताकि अपनी महिमा का धन दया के उन पात्रों पर प्रकट करे, जिन्हें उसने महिमा के लिए पहले से तैयार किया था अर्थात् हमें, जिन्हें उसने न केवल यहूदियों में से बल्कि गैरयहूदियों में से भी बुलाया है? जिस प्रकार वह होशे की पुस्तक में भी कहता है: जो “मेरी प्रजा” नहीं थी, उसे मैं “अपनी प्रजा” कहूँगा, और जो “प्रिय” न थी उसे “प्रिया” कहूँगा। और ऐसा होगा कि उसी स्थान पर जहाँ उनसे कहा गया था, “तुम मेरी प्रजा नहीं हो,” वहाँ वे “जीवित परमेश्‍वर के पुत्र” कहलाएँगे। यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है: यद्यपि इस्राएल की संतानों की संख्या समुद्र तट की बालू के समान हो फिर भी थोड़े ही उद्धार पाएँगे। क्योंकि प्रभु शीघ्र ही पृथ्वी पर अपने वचन को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करेगा। और जिस प्रकार यशायाह ने पहले ही कहा था: यदि सेनाओं का प्रभु हमारे लिए वंश न छोड़ता, तो हम सदोम के समान हो जाते और अमोरा के सदृश्य ठहरते। तो हम क्या कहें? यह कि धार्मिकता की खोज न करनेवाले गैरयहूदियों ने धार्मिकता प्राप्‍त कर ली, अर्थात् वह धार्मिकता जो विश्‍वास से है; परंतु इस्राएल धार्मिकता की व्यवस्था की खोज करते हुए उस व्यवस्था तक नहीं पहुँचा। ऐसा क्यों? क्योंकि उन्होंने विश्‍वास से नहीं बल्कि मानो कर्मों से उसकी खोज की थी; उन्होंने उस ठोकर के पत्थर से ठोकर खाई। जैसा लिखा है: देखो, मैं सिय्योन में एक ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान रखता हूँ, और जो उस पर विश्‍वास करेगा वह लज्‍जित न होगा। हे भाइयो, मेरे मन की अभिलाषा और उनके लिए परमेश्‍वर से यह प्रार्थना है कि वे उद्धार पाएँ। मैं उनके विषय में साक्षी देता हूँ कि उनमें परमेश्‍वर के प्रति धुन तो है, परंतु सच्‍चे ज्ञान के अनुसार नहीं; क्योंकि परमेश्‍वर की धार्मिकता से अनजान होकर, और अपनी धार्मिकता को स्थापित करने का प्रयत्‍न करके, वे परमेश्‍वर की धार्मिकता के अधीन नहीं हुए। अब मसीह व्यवस्था का अंत है, ताकि प्रत्येक विश्‍वास करनेवाले को धार्मिकता प्राप्‍त हो। मूसा उस धार्मिकता के विषय में जो व्यवस्था से है, लिखता है: जो उनका पालन करता है वह मनुष्य उनके द्वारा जीवित रहेगा। परंतु धार्मिकता जो विश्‍वास से है, यह कहती है: अपने मन में यह न कहना, स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा? (अर्थात् मसीह को नीचे लाने के लिए); या, अधोलोक में कौन उतरेगा? (अर्थात् मसीह को मृतकों में से ऊपर लाने के लिए।) परंतु वह क्या कहती है? वचन तेरे निकट है, वह तेरे मुँह में और तेरे मन में है, यह विश्‍वास का वचन है जिसका हम प्रचार करते हैं। यदि तू अपने मुँह से अंगीकार करे कि यीशु प्रभु है, और अपने मन में विश्‍वास करे कि परमेश्‍वर ने उसे मृतकों में से जिलाया, तो तू उद्धार पाएगा; क्योंकि मन से विश्‍वास करने का परिणाम धार्मिकता होता है, और मुँह से अंगीकार करने का परिणाम उद्धार होता है। क्योंकि पवित्रशास्‍त्र कहता है: जो कोई उस पर विश्‍वास करेगा वह लज्‍जित न होगा। चाहे यहूदी हो या यूनानी, उनमें कोई अंतर नहीं, क्योंकि सब का एक ही प्रभु है, और वह अपने सब पुकारनेवालों के लिए उदार है; क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। परंतु जिस पर उन्होंने विश्‍वास नहीं किया उसे वे कैसे पुकारें? और जिसके विषय में उन्होंने सुना नहीं उस पर वे कैसे विश्‍वास करें? और बिना प्रचार करनेवाले के वे कैसे सुनें? और यदि उन्हें भेजा न जाए तो वे कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है: उनके पैर कितने सुहावने हैं जो भली बातों का सुसमाचार सुनाते हैं। परंतु सब ने सुसमाचार को नहीं माना। यशायाह कहता है: हे प्रभु, किसने हमारे संदेश पर विश्‍वास किया? अतः विश्‍वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन के द्वारा होता है। परंतु मैं कहता हूँ, “क्या उन्होंने नहीं सुना?” उन्होंने अवश्य सुना है: उनकी वाणी संपूर्ण पृथ्वी पर, और उनके वचन जगत के छोर तक फैल गए हैं। परंतु मैं कहता हूँ, “क्या इस्राएल नहीं जानता था?” पहले मूसा कहता है: जो जाति है ही नहीं मैं उनके द्वारा तुममें जलन उत्पन्‍न‍ करूँगा, और एक नासमझ जाति के द्वारा तुम्हें क्रोध दिलाऊँगा। फिर यशायाह बड़े साहस से कहता है: जो मुझे ढूँढ़ते नहीं थे, उन्होंने मुझे पा लिया, और जो मुझे पूछते नहीं थे, उन पर मैं प्रकट हो गया। परंतु इस्राएल के विषय में वह कहता है: मैं दिन भर आज्ञा न माननेवाली और हठीली प्रजा के सामने अपने हाथ बढ़ाए रहा। अब मैं पूछता हूँ, क्या परमेश्‍वर ने अपनी प्रजा को त्याग दिया? कदापि नहीं! क्योंकि मैं भी एक इस्राएली हूँ, अब्राहम के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूँ। परमेश्‍वर ने अपनी प्रजा को नहीं त्यागा जिसे वह पहले से जानता था। क्या तुम नहीं जानते कि पवित्रशास्‍त्र एलिय्याह के विषय में क्या कहता है कि वह कैसे इस्राएल के विरुद्ध परमेश्‍वर से विनती करता है? हे प्रभु, उन्होंने तेरे भविष्यवक्‍ताओं को मार डाला, तेरी वेदियों को ढा दिया, और अकेला मैं ही बचा हूँ, और अब वे मेरा प्राण लेना चाहते हैं। परंतु परमेश्‍वर उसे क्या उत्तर देता है? मैंने अपने लिए सात हज़ार पुरुषों को रख छोड़ा है, जिन्होंने बाल के सामने घुटने नहीं टेके। इसी प्रकार वर्तमान समय में भी अनुग्रह से चुने हुए कुछ लोग बाकी हैं। यदि यह अनुग्रह से हुआ तो फिर यह कर्मों के आधार पर नहीं, अन्यथा अनुग्रह फिर अनुग्रह नहीं रहता। इससे क्या हुआ? इस्राएली जिसकी खोज में थे, वह उन्हें प्राप्‍त नहीं हुआ, केवल चुने हुओं को प्राप्‍त हुआ; और बाकी लोग कठोर कर दिए गए, जैसा लिखा है: परमेश्‍वर ने उन्हें आज तक भारी नींद की आत्मा में डाल रखा है, और ऐसी आँखें दी हैं जो न देखें और ऐसे कान दिए हैं जो न सुनें। और दाऊद कहता है: उनका भोजन उनके लिए फंदा और जाल तथा ठोकर और प्रतिशोध बन जाए, उनकी आँखों के आगे अंधेरा छा जाए कि वे न देखें, और उनकी पीठ सदा झुकी रहे। तो मैं यह पूछता हूँ, “क्या उन्हें इसलिए ठोकर लगी कि वे गिर पड़ें?” कदापि नहीं! बल्कि उनके अपराध के कारण गैरयहूदियों का उद्धार हुआ, कि उनमें जलन उत्पन्‍न‍ हो। अब यदि उनका अपराध संसार के लिए धन और उनकी घटी गैरयहूदियों के लिए भरपूरी ठहरी, तो उनकी परिपूर्णता से क्या कुछ न होगा। अब मैं तुम गैरयहूदियों से कहता हूँ: जबकि मैं गैरयहूदियों के लिए प्रेरित हूँ, मैं अपनी सेवा को ऐसा महत्त्व देता हूँ, कि मैं किसी प्रकार अपने लोगों में जलन उत्पन्‍न‍ कर सकूँ और उनमें से कुछ का उद्धार करवा सकूँ। क्योंकि यदि उनका त्यागा जाना जगत के मेल-मिलाप का कारण हुआ, तो उनका ग्रहण किया जाना मृतकों में से जी उठने के अतिरिक्‍त और क्या होगा? यदि उपज का पहला भाग पवित्र है, तो उसका गूँधा हुआ आटा भी; और यदि जड़ पवित्र है, तो डालियाँ भी। परंतु यदि कुछ डालियाँ तोड़ दी गईं, और तुझे जंगली जैतून की डाली होने पर भी उनमें कलम लगाया गया, और तू अच्छे जैतून की जड़ के पोषक-तत्त्व का सहभागी हुआ, तो उन डालियों के सामने घमंड न कर; परंतु यदि तू घमंड करता है, तो याद रख कि तू जड़ को नहीं बल्कि जड़ तुझे संभालती है। फिर तू कहेगा, “डालियाँ इसलिए तोड़ी गईं कि मैं उसमें कलम लगाया जाऊँ।” ठीक है! वे अपने अविश्‍वास के कारण तोड़ी गईं, परंतु तू अपने विश्‍वास के कारण स्थिर है। अभिमानी न हो, परंतु भय मान; क्योंकि यदि परमेश्‍वर ने स्वाभाविक डालियों को नहीं छोड़ा, तो वह तुझे भी नहीं छोड़ेगा। इसलिए परमेश्‍वर की कृपा और कठोरता को देख: जो गिर गए उनके प्रति कठोरता, परंतु तेरे प्रति परमेश्‍वर की कृपा—यदि तू उसकी कृपा में बना रहे—नहीं तो तुझे भी काट डाला जाएगा। वे भी यदि अविश्‍वास में बने न रहें, तो कलम लगाए जाएँगे; क्योंकि परमेश्‍वर उन्हें फिर से कलम लगाने में समर्थ है। क्योंकि यदि तू स्वाभाविक जंगली जैतून से काटा जाकर अपने स्वभाव के विपरीत अच्छे जैतून में कलम लगाया गया, तो वे जो स्वाभाविक डालियाँ हैं उन्हें अपने ही जैतून वृक्ष में कितनी सरलता से कलम लगाया जाएगा। हे भाइयो, कहीं तुम अपने आपको बुद्धिमान न समझ लो, इसलिए मैं नहीं चाहता कि तुम इस भेद से अनजान रहो कि जब तक गैरयहूदियों की संख्या पूर्ण न हो जाए तब तक इस्राएल का एक भाग कठोर बना रहेगा। और इस प्रकार समस्त इस्राएल उद्धार पाएगा, जैसा लिखा है: छुटकारा देनेवाला सिय्योन से आएगा, वह याकूब से अभक्‍ति को दूर करेगा। उनके साथ मेरी यही वाचा होगी, जब मैं उनके पापों को दूर कर दूँगा। सुसमाचार की दृष्‍टि से तो वे तुम्हारे निमित्त शत्रु हैं, परंतु चुनाव की दृष्‍टि से वे पूर्वजों के कारण प्रिय हैं; क्योंकि परमेश्‍वर के वरदान और उसकी बुलाहट अटल हैं। जिस प्रकार पहले तुमने परमेश्‍वर की आज्ञा नहीं मानी, परंतु अब उनके आज्ञा न मानने से तुम पर दया हुई है, उसी प्रकार अब उनके आज्ञा न मानने से तुम पर जो दया हुई, वह उन पर भी की जाए। क्योंकि परमेश्‍वर ने सब को आज्ञा-उल्‍लंघन का बंदी बना दिया ताकि वह सब पर दया करे। आहा! परमेश्‍वर का धन, बुद्धि और ज्ञान कितना गहन है! उसके निर्णय कैसे अथाह और उसके मार्ग कैसे अगम्य हैं! प्रभु का मन किसने जाना है? या उसका परामर्शदाता कौन हुआ है? या किसने पहले उसे कुछ दिया है कि उसे लौटाया जाए? क्योंकि सब कुछ उसी की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिए है। उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। अतः हे भाइयो, परमेश्‍वर की दया स्मरण दिलाकर मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्‍वर को भावते हुए बलिदान के रूप में अर्पित करो, यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। इस संसार के सदृश्य न बनो, बल्कि अपने मन के नए हो जाने के द्वारा तुम परिवर्तित होते जाओ, जिससे तुम परमेश्‍वर की इच्छा को पहचान सको, जो भली, ग्रहणयोग्य और सिद्ध है। मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझे मिला है, तुममें से प्रत्येक से कहता हूँ कि कोई अपने आपको जितना समझना चाहिए उससे बढ़कर न समझे, बल्कि जैसा परमेश्‍वर ने प्रत्येक जन को विश्‍वास के परिमाण के अनुसार दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ समझे। क्योंकि जिस प्रकार हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का कार्य एक सा नहीं, उसी प्रकार हम अनेक होते हुए भी मसीह में एक देह हैं, और आपस में एक दूसरे के अंग हैं। उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ वरदान मिले हैं: यदि किसी को भविष्यवाणी का मिला हो तो वह विश्‍वास के परिमाण के अनुसार भविष्यवाणी करे; यदि सेवा का हो तो सेवा में लगा रहे; यदि उपदेश देनेवाला हो तो उपदेश दे; प्रोत्साहित करनेवाला हो तो प्रोत्साहित करे। दान देनेवाला उदारता से दे, नेतृत्व करनेवाला उत्साह से नेतृत्व करे, दया करनेवाला सहर्ष दया करे। प्रेम निष्कपट हो। बुराई से घृणा करो, भलाई में लगे रहो, भाईचारे की भावना से एक दूसरे से स्‍नेह रखो, आदर करने में एक दूसरे से आगे रहो, प्रयत्‍न करने में आलसी न हो, आत्मा में उत्साही रहो, और प्रभु की सेवा करते रहो, आशा में आनंदित रहो, क्लेश में धीरज धरो, प्रार्थना में निरंतर लगे रहो, पवित्र लोगों की आवश्यकताओं में सहायता करो, अतिथि-सत्कार में लगे रहो। अपने सतानेवालों को आशिष दो; हाँ, आशिष दो, शाप नहीं। आनंद मनानेवालों के साथ आनंद मनाओ, रोनेवालों के साथ रोओ। आपस में एक सा मन रखो, अभिमानी न हो बल्कि दीनों के साथ संगति रखो। अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न बनो। बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; उन बातों पर ध्यान दो जो सब लोगों की दृष्‍टि में भली हैं। जहाँ तक संभव हो, सब मनुष्यों के साथ मेल-मिलाप से रहो। हे प्रियो, अपने आप बदला न लेना, बल्कि परमेश्‍वर के क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है: प्रभु कहता है, बदला लेना मेरा काम है, बदला मैं लूँगा। बल्कि यदि तेरा शत्रु भूखा है तो उसे खाना खिला, यदि वह प्यासा है तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करके तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। बुराई से न हार, बल्कि भलाई से बुराई को जीत ले। प्रत्येक व्यक्‍ति शासकीय अधिकारियों के अधीन रहे, क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं जो परमेश्‍वर की ओर से न हो, और जो अधिकारी हैं वे परमेश्‍वर के द्वारा नियुक्‍त हैं। इसलिए जो अधिकार का विरोध करता है वह परमेश्‍वर की विधि का सामना करता है, और सामना करनेवाले अपने ऊपर दंड लाएँगे। शासक अच्छे कार्य के लिए नहीं परंतु बुरे कार्य के लिए भय का कारण होते हैं। यदि तू अधिकारी से निर्भय रहना चाहता है तो वही कर जो अच्छा है, और उसकी ओर से तेरी प्रशंसा होगी; क्योंकि वह तेरी भलाई के लिए परमेश्‍वर का सेवक है। परंतु यदि तू बुराई करे तो डर, क्योंकि वह व्यर्थ ही तलवार धारण नहीं करता। वह परमेश्‍वर का सेवक है, जो बुराई करनेवालों को उसके क्रोध के अनुसार दंड देता है। अतः केवल क्रोध के कारण ही नहीं, बल्कि विवेक के कारण भी अधीन रहना आवश्यक है। इसी कारण तुम कर भी चुकाते हो; क्योंकि अधिकारी परमेश्‍वर के सेवक हैं जो निरंतर इसी सेवा में लगे हैं। जिसका तुम्हें कुछ चुकाना है उसे चुकाओ: जिसे कर चुकाना है उसे कर चुकाओ, जिसे चुंगी देनी है उसे चुंगी दो, जिससे डरना है उससे डरो, जिसका आदर करना है उसका आदर करो। आपस के प्रेम को छोड़ किसी बात में किसी के ऋणी न बनो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है उसने व्यवस्था को पूरा किया है। इसलिए कि, तू व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, और न ही लालच करना, और यदि कोई दूसरी आज्ञा भी हो, तो उसका सारांश इस वचन में पाया जाता है, तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना। प्रेम पड़ोसी की बुराई नहीं करता, इसलिए प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है। समय को पहचानते हुए ऐसा ही करो, क्योंकि तुम्हारे लिए नींद से जाग उठने की घड़ी आ चुकी है। जब से हमने विश्‍वास किया, उस समय की अपेक्षा अब हमारा उद्धार अधिक निकट है। रात बहुत बीत चुकी है, और दिन निकलने पर है। अतः हम अंधकार के कार्यों को त्याग दें, और ज्योति के हथियारों को धारण कर लें। जैसे दिन को शोभा देता है हम वैसी ही चाल चलें, न कि रंगरेलियों और मतवालेपन में, न अनैतिक यौनाचार और कामुकता में, और न ही झगड़े और ईर्ष्या में; बल्कि प्रभु यीशु मसीह को धारण कर लो, और शारीरिक अभिलाषाओं को पूरा करने की ओर ध्यान न लगाओ। अब जो विश्‍वास में निर्बल है उसे ग्रहण करो, परंतु उसके विचारों पर विवाद करने के लिए नहीं। एक का विश्‍वास है कि वह सब कुछ खा सकता है, परंतु जो विश्‍वास में निर्बल है वह साग-पात ही खाता है। खानेवाला न-खानेवाले को तुच्छ न समझे; और न ही न-खानेवाला खानेवाले पर दोष लगाए, क्योंकि परमेश्‍वर ने उसे ग्रहण किया है। तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिरना उसके स्वामी पर निर्भर है; और वह अवश्य स्थिर किया जाएगा, क्योंकि प्रभु उसे स्थिर करने में समर्थ है। कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर मानता है, और कोई प्रत्येक दिन को एक समान मानता है। प्रत्येक व्यक्‍ति अपने मन में इसके प्रति पूर्णतः आश्‍वस्त हो जाए। जो किसी दिन को विशेष मानता है वह प्रभु के लिए मानता है। जो खाता है वह प्रभु के लिए खाता है, क्योंकि वह परमेश्‍वर का धन्यवाद करता है; और जो नहीं खाता वह प्रभु के लिए नहीं खाता, और वह परमेश्‍वर का धन्यवाद करता है। क्योंकि हममें से न तो कोई अपने लिए जीता है, और न कोई अपने लिए मरता है। यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिए जीवित हैं, और यदि हम मरते हैं, तो प्रभु के लिए मरते हैं। अतः चाहे हम जीएँ या मरें, हम प्रभु के ही हैं। क्योंकि इसी कारण मसीह मरा और फिर जीवित हो उठा ताकि वह मृतकों और जीवितों दोनों का प्रभु हो। फिर तू अपने भाई पर दोष क्यों लगाता है? या फिर तू अपने भाई को तुच्छ क्यों समझता है? हम सब परमेश्‍वर के न्यायासन के सामने खड़े होंगे; क्योंकि लिखा है: प्रभु कहता है, इसलिए कि मैं जीवित हूँ, हर एक घुटना मेरे सामने टिकेगा और हर एक जीभ परमेश्‍वर का अंगीकार करेगी। इसलिए हममें से प्रत्येक परमेश्‍वर को अपना-अपना लेखा देगा। अतः अब से हम एक दूसरे पर दोष न लगाएँ, बल्कि यह निर्णय लें कि कोई अपने भाई के मार्ग में ठेस या ठोकर का पत्थर न रखे। मैं जानता हूँ और प्रभु यीशु में मुझे निश्‍चय हुआ है कि कुछ भी अपने आपमें अशुद्ध नहीं है; परंतु जो उसे अशुद्ध समझता है, उसके लिए वह अशुद्ध है। यदि तेरे भोजन के कारण तेरे भाई को दुःख पहुँचता है, तो तू प्रेम की रीति पर नहीं चलता। अपने भोजन के द्वारा तू उसे नाश न कर जिसके लिए मसीह मरा। इसलिए जो बात तेरे लिए भली है, उसकी निंदा न होने दे। क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य खाना और पीना नहीं बल्कि धार्मिकता, मेल और पवित्र आत्मा में आनंद है। जो इस प्रकार मसीह की सेवा करता है वह परमेश्‍वर को भावता है और मनुष्यों को ग्रहणयोग्य होता है। इसलिए हम उन बातों में लगे रहें जिनसे मेल-मिलाप और एक दूसरे की उन्‍नति हो। भोजन के कारण परमेश्‍वर के कार्य को नष्‍ट न कर। सब वस्तुएँ शुद्ध तो हैं, परंतु उस मनुष्य के लिए बुरी हैं जिसे उस भोजन से ठोकर लगती है। अच्छा तो यह है कि तू न मांस खाए और न दाखरस पीए और न ही ऐसा कार्य करे जिससे तेरे भाई को चोट पहुँचे । तेरा जो विश्‍वास है उसे परमेश्‍वर के सामने अपने तक ही सीमित रख। धन्य है वह जो उस बात में जिसे वह ठीक समझता है अपने आपको दोषी नहीं ठहराता। परंतु यदि कोई संदेह करके खाए तो वह दोषी ठहर चुका है, क्योंकि वह विश्‍वास से नहीं खाता; और जो कुछ विश्‍वास से नहीं, वह पाप है। अब हम बलवानों को चाहिए कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें, न कि अपने आपको प्रसन्‍न करें। हममें से प्रत्येक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिए प्रसन्‍न करे कि उसकी उन्‍नति हो। मसीह ने भी अपने आपको प्रसन्‍न नहीं किया, बल्कि जैसा लिखा है: तेरी निंदा करनेवालों की निंदा मुझ पर आ पड़ी। जो कुछ पहले से लिखा गया था, वह हमारी शिक्षा के लिए लिखा गया, ताकि हम धीरज से और पवित्रशास्‍त्र के प्रोत्साहन द्वारा आशा रखें। अब धीरज और प्रोत्साहन का परमेश्‍वर, तुम्हें मसीह यीशु के अनुसार आपस में मन की एकता दे, ताकि तुम एक मन होकर एक स्वर में परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता की महिमा करो। इसलिए एक दूसरे को ग्रहण करो, जैसे मसीह ने भी परमेश्‍वर की महिमा के लिए तुम्हें ग्रहण किया है। मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्‍वर की सच्‍चाई को प्रकट करने के लिए मसीह ख़तनावालों का सेवक हुआ जिससे पूर्वजों को दी गई प्रतिज्ञाएँ दृढ़ हों, और गैरयहूदी भी उन पर हुई दया के कारण परमेश्‍वर की महिमा करें; जैसा लिखा है: इसलिए गैरयहूदियों के बीच मैं तेरी स्तुति करूँगा, और तेरे नाम के भजन गाऊँगा। और फिर पवित्रशास्‍त्र कहता है: हे गैरयहूदियो, उसकी प्रजा के साथ आनंद मनाओ। और फिर यह: हे सब गैरयहूदियो, प्रभु की स्तुति करो; सब लोग उसकी प्रशंसा करें। और फिर यशायाह कहता है: यिशै का एक वंशज प्रकट होगा, और वह गैरयहूदियों पर शासन करने के लिए उठेगा; गैरयहूदी उस पर आशा रखेंगे। अब जो आशा का परमेश्‍वर है, वह तुम्हारे विश्‍वास करने में तुम्हें संपूर्ण आनंद और शांति से भर दे, जिससे तुम पवित्र आत्मा के सामर्थ्य के द्वारा आशा से भरपूर हो जाओ। हे मेरे भाइयो, मैं स्वयं तुम्हारे विषय में आश्‍वस्त हूँ कि तुम आप भी भलाई से भरे हो, और समस्त ज्ञान से परिपूर्ण हो, तथा एक दूसरे को चिता भी सकते हो। फिर भी मैंने तुम्हें स्मरण दिलाने के लिए कुछ बातों को बड़े साहस के साथ लिखा है। यह सब उस अनुग्रह के कारण है जो परमेश्‍वर से मुझे मिला है, कि मैं गैरयहूदियों के लिए मसीह यीशु का सेवक बनूँ और परमेश्‍वर के सुसमाचार की सेवा याजक के रूप में करूँ, ताकि गैरयहूदी रूपी मेरी भेंट पवित्र आत्मा के द्वारा पवित्र होकर ग्रहणयोग्य हो। अतः मेरे पास मसीह यीशु में परमेश्‍वर की इस सेवा पर गर्व करने का कारण है। क्योंकि मैं उन बातों को छोड़ कुछ और कहने का साहस नहीं करूँगा जो मसीह ने गैरयहूदियों की आज्ञाकारिता के लिए वचन और कार्य से, चिह्‍नों और अद्भुत कार्यों के सामर्थ्य से, और परमेश्‍वर के आत्मा के सामर्थ्य से मेरे द्वारा किए; यहाँ तक कि मैंने यरूशलेम से लेकर चारों ओर इल्‍लुरिकुम तक मसीह के सुसमाचार का पूरा प्रचार किया है। मैं वहाँ सुसमाचार सुनाने का प्रयत्‍न करता हूँ जहाँ मसीह का नाम नहीं लिया गया, ताकि मैं दूसरे की नींव पर घर न बनाऊँ, जैसा लिखा है: जिन्हें उसके विषय में बताया नहीं गया, वे देखेंगे; और जिन्होंने नहीं सुना है, वे समझेंगे। यही कारण है कि मैं तुम्हारे पास आने में बार-बार बाधित होता रहा। परंतु अब इन प्रदेशों में मेरे कार्य के लिए कोई स्थान नहीं बचा, और तुम्हारे पास आने की अभिलाषा मुझे बहुत वर्षों से रही है, कि जब कभी मैं स्पेन को जाऊँ तो तुम्हारे पास आऊँ; क्योंकि मैं आशा करता हूँ कि जाते हुए तुमसे भेंट हो, चाहे थोड़े समय के लिए ही सही तुम्हारी संगति से मुझे तृप्‍ति मिले, और फिर वहाँ से तुम्हारे द्वारा भेजा जाऊँ। परंतु अभी तो मैं पवित्र लोगों की सेवा करने के लिए यरूशलेम को जा रहा हूँ। क्योंकि मकिदुनिया और अखाया के विश्‍वासियों को यह अच्छा लगा कि यरूशलेम के पवित्र लोगों में जो निर्धन हैं उनके लिए कुछ दान दें। हाँ, उन्हें अच्छा लगा, और वे उनके ऋणी भी हैं; क्योंकि यदि गैरयहूदी उनकी आत्मिक बातों में सहभागी हुए, तो उचित है कि वे भौतिक वस्तुओं से उनकी सेवा भी करें। अतः इस कार्य को पूरा करके और इस दान को उन्हें सौंपकर, मैं तुम्हारे पास से होता हुआ स्पेन को चला जाऊँगा; और मैं जानता हूँ कि जब मैं तुम्हारे पास आऊँगा तो मसीह की आशिष की परिपूर्णता में आऊँगा। अब हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह के और आत्मा के प्रेम के द्वारा मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम मेरे लिए परमेश्‍वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ प्रयत्‍नशील रहो, जिससे मैं यहूदिया के विश्‍वास न करनेवाले लोगों से बचा रहूँ और यरूशलेम में मेरी सेवा पवित्र लोगों को ग्रहणयोग्य हो, ताकि मैं परमेश्‍वर की इच्छा से आनंदपूर्वक तुम्हारे पास आकर तुम्हारे साथ विश्राम पाऊँ। अब शांति का परमेश्‍वर तुम सब के साथ रहे। आमीन। मैं तुमसे हमारी बहन फीबे के लिए, जो किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, विनती करता हूँ, कि तुम उसका प्रभु में वैसे ही स्वागत करो जैसे पवित्र लोगों का करते हो; और जिस किसी बात में उसे तुम्हारी आवश्यकता हो उसकी सहायता करो, क्योंकि वह भी बहुतों की और स्वयं मेरी सहायक रही है। मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी प्रिस्का और अक्‍विला को मेरा नमस्कार कहना, जिन्होंने मेरे प्राण के लिए अपना जीवन भी जोखिम में डाल दिया था और उनका धन्यवाद केवल मैं ही नहीं बल्कि गैरयहूदियों की सब कलीसियाएँ भी करती हैं। और उस कलीसिया को भी नमस्कार कहना जो उनके घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को नमस्कार कहना, जो मसीह के लिए आसिया का पहला फल है। मरियम को नमस्कार कहना, जिसने तुम्हारे लिए बहुत परिश्रम किया। मेरे कुटुंबी अंद्रनीकुस और यूनियास को नमस्कार कहना, जो मेरे साथ बंदीगृह में थे, और प्रेरितों में प्रख्यात हैं तथा मुझसे भी पहले मसीह में आ चुके थे। प्रभु में मेरे प्रिय अम्पलियातुस को नमस्कार कहना। मसीह में हमारे सहकर्मी उरबानुस और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार कहना। अपिल्‍लेस को, जो मसीह में खरा है, नमस्कार कहना। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार कहना। मेरे कुटुंबी हेरोदियोन को नमस्कार कहना। नरकिस्सुस के घराने में से जो प्रभु में हैं, उन्हें नमस्कार कहना। प्रभु में परिश्रम करनेवाली त्रुफेना और त्रुफोसा को, नमस्कार कहना। प्रिय परसिस को, जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया है, नमस्कार कहना। प्रभु में चुने हुए रूफुस को और उसकी माता को जो मेरी भी माता है, नमस्कार कहना। असुंक्रितुस, फिलगोन, हिर्मेस, पत्रुबास, हिर्मास और उनके साथी भाइयों को नमस्कार कहना। फिलुलुगुस और यूलिया, नेर्युस और उसकी बहन, और उलुम्पास, और उनके साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार कहना। पवित्र चुंबन से एक दूसरे का अभिवादन करो। मसीह की सब कलीसियाओं की ओर से तुम्हें नमस्कार। अब हे भाइयो, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि उनसे चौकस रहो जो उस शिक्षा के विपरीत जो तुमने प्राप्‍त की है फूट डालते और ठोकर का कारण बनते हैं, उनसे दूर ही रहो; क्योंकि ऐसे मनुष्य हमारे प्रभु मसीह की नहीं बल्कि अपने पेट की सेवा करते हैं, और चिकनी-चुपड़ी बातों और चापलूसी से सीधे-साधे लोगों के मनों को बहका देते हैं। तुम्हारी आज्ञाकारिता का समाचार सब लोगों तक पहुँच गया है; इसलिए मैं तुम्हारे विषय में आनंदित हूँ, परंतु मैं चाहता हूँ कि तुम भलाई के प्रति बुद्धिमान और बुराई के प्रति भोले बने रहो। शांति का परमेश्‍वर शीघ्र ही शैतान को तुम्हारे पैरों तले कुचल देगा। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे। मेरा सहकर्मी तीमुथियुस और मेरे कुटुंबी लूकियुस, यासोन और सोसिपत्रुस तुम्हें नमस्कार कहते हैं। इस पत्र को लिखनेवाले मुझ तिरतियुस का प्रभु में तुम्हें नमस्कार। मेरा और सारी कलीसिया का आतिथ्य करनेवाला गयुस तुम्हें नमस्कार कहता है। नगर कोषाध्यक्ष इरास्तुस और भाई क्‍वारतुस भी तुम्हें नमस्कार कहते हैं। [हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम सब के साथ रहे। आमीन।] अब जो तुम्हें मेरे उस सुसमाचार और यीशु मसीह के प्रचार के अनुसार दृढ़ कर सकता है, अर्थात् उस भेद के प्रकाशन के अनुसार, जो सनातन काल से गुप्‍त रखा गया परंतु अब प्रकट होकर अनंत परमेश्‍वर की आज्ञा से भविष्यवक्‍ताओं के लेखों के द्वारा विश्‍वास की आज्ञाकारिता के लिए सब जातियों को बताया गया है, उस एकमात्र बुद्धिमान परमेश्‍वर की यीशु मसीह के द्वारा युगानुयुग महिमा होती रहे। आमीन। पौलुस, जो परमेश्‍वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित होने के लिए बुलाया गया, और भाई सोस्थिनेस की ओर से, परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिंथुस में है, अर्थात् उनके नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए हैं और उन सब के साथ पवित्र जन होने के लिए बुलाए गए हैं जो हर जगह हमारे प्रभु यीशु मसीह का नाम लेते हैं—वह हमारा और उनका भी प्रभु है: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। मैं तुम्हारे विषय में अपने परमेश्‍वर का सदा धन्यवाद करता हूँ क्योंकि मसीह यीशु में तुम पर परमेश्‍वर का यह अनुग्रह हुआ, कि तुम उसमें प्रत्येक बात अर्थात् सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए —जैसा कि मसीह की साक्षी तुममें प्रमाणित भी हुई— जिससे तुममें किसी वरदान की कमी न रही और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रकट होने की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करते रहते हो। वह तुम्हें अंत तक दृढ़ भी रखेगा कि हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिन में तुम निर्दोष ठहरो। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्य है; उसी ने तुम्हें अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है। हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम सब एक ही बात कहो, और तुममें फूट न हो, परंतु तुम एक ही मन और एक ही विचार में होकर मिले रहो। क्योंकि हे मेरे भाइयो, खलोए के घराने के द्वारा मुझे तुम्हारे विषय में बताया गया है कि तुम्हारे बीच झगड़े हो रहे हैं। मेरे कहने का अर्थ यह है कि तुममें से कोई कहता है, “मैं पौलुस का हूँ,” तो कोई “अपुल्‍लोस का,” कोई “कैफा का,” और कोई कहता है “मैं मसीह का हूँ।” क्या मसीह बँट गया है? क्या पौलुस तुम्हारे लिए क्रूस पर चढ़ाया गया है? या तुम्हें पौलुस के नाम से बपतिस्मा दिया गया है? मैं परमेश्‍वर का धन्यवाद करता हूँ कि क्रिसपुस और गयुस को छोड़ मैंने तुममें से किसी को भी बपतिस्मा नहीं दिया, ताकि कोई यह न कहे कि तुम्हें मेरे नाम से बपतिस्मा दिया गया। हाँ, मैंने स्तिफनास के घराने को भी बपतिस्मा दिया था; इन्हें छोड़ मैं नहीं जानता कि मैंने किसी और को बपतिस्मा दिया। क्योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्मा देने के लिए नहीं बल्कि सुसमाचार सुनाने के लिए भेजा है, और वह भी शब्दों के ज्ञान के द्वारा नहीं, कहीं ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्यर्थ ठहरे। क्योंकि क्रूस का संदेश नाश होनेवालों के लिए तो मूर्खता है, परंतु हम उद्धार पानेवालों के लिए परमेश्‍वर का सामर्थ्य है। क्योंकि लिखा है: मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नष्‍ट करूँगा, और समझदारों की समझ को व्यर्थ ठहरा दूँगा। कहाँ है ज्ञानवान? कहाँ है शास्‍त्री? कहाँ है इस युग का विवादी? क्या परमेश्‍वर ने इस संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? क्योंकि परमेश्‍वर के ज्ञान में जब यह संसार अपने ज्ञान से परमेश्‍वर को न जान सका, तो परमेश्‍वर को यह अच्छा लगा कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्‍वास करनेवालों का उद्धार करे। क्योंकि यहूदी तो चिह्‍न माँगते हैं और यूनानी ज्ञान की खोज में रहते हैं, परंतु हम क्रूस पर चढ़ाए गए मसीह का प्रचार करते हैं, जो यहूदियों के लिए ठोकर का कारण और गैरयहूदियों के लिए मूर्खता है, परंतु उन बुलाए हुओं के लिए, चाहे वे यहूदी हों या यूनानी, मसीह परमेश्‍वर का सामर्थ्य और परमेश्‍वर का ज्ञान है। क्योंकि परमेश्‍वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से अधिक ज्ञानवान है, और परमेश्‍वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से अधिक बलवान है। इसलिए हे भाइयो, तुम अपनी बुलाहट पर विचार करो कि तुममें न तो शरीर के अनुसार बहुत से ज्ञानवान, न बहुत से बलवान, न बहुत से कुलीन थे। परंतु परमेश्‍वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया कि ज्ञानवानों को लज्‍जित करे, और परमेश्‍वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया कि बलवानों को लज्‍जित करे, और परमेश्‍वर ने जगत के निम्‍‍न और तुच्छ लोगों को, जो कुछ हैं भी नहीं, चुन लिया कि उन्हें जो कुछ हैं, व्यर्थ ठहराए, ताकि कोई प्राणी परमेश्‍वर के सामने घमंड न करे। परमेश्‍वर के कारण ही तुम मसीह यीशु में हो, जो हमारे लिए परमेश्‍वर की ओर से ज्ञान ठहरा, और साथ ही धार्मिकता और पवित्रता और छुटकारा भी, ताकि, जैसा लिखा है: जो गर्व करे वह प्रभु में गर्व करे। हे भाइयो, जब मैं तुम्हारे पास परमेश्‍वर के भेद का प्रचार करता हुआ आया, तो शब्दों या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया। क्योंकि मैंने निश्‍चय किया था कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह को अर्थात् जिसे क्रूस पर चढ़ाया गया, उसे छोड़ और किसी बात को न जानूँ। मैं निर्बलता और भय में और बहुत काँपते हुए तुम्हारे साथ रहा, और मेरा वचन और मेरा प्रचार ज्ञान के लुभानेवाले शब्दों के साथ नहीं, बल्कि आत्मा और सामर्थ्य के प्रमाण के साथ था, ताकि तुम्हारा विश्‍वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परंतु परमेश्‍वर के सामर्थ्य पर आधारित हो। फिर भी परिपक्‍व लोगों के बीच हम ज्ञान की बातें बताते हैं, परंतु यह ज्ञान इस युग का नहीं और न ही इस युग के शासकों का है जो मिटने वाले हैं; बल्कि हम भेद में परमेश्‍वर के उस गुप्‍त ज्ञान का वर्णन करते हैं जिसे परमेश्‍वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया है। इस युग के शासकों में से किसी ने इस ज्ञान को नहीं जाना, क्योंकि यदि वे जानते तो महिमा के प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। परंतु जैसा लिखा है: जो बातें आँख ने नहीं देखीं, कान ने नहीं सुनीं और न ही मनुष्य के मन में आईं, उन्हीं को परमेश्‍वर ने उससे प्रेम रखनेवालों के लिए तैयार किया है। परंतु परमेश्‍वर ने उन्हें हम पर आत्मा के द्वारा प्रकट किया; क्योंकि आत्मा सब बातों को, यहाँ तक कि परमेश्‍वर की गहरी बातों को भी खोजता है। मनुष्यों के विचारों को उस मनुष्य की आत्मा को छोड़ जो उसमें है, कौन जानता है? इसी प्रकार परमेश्‍वर के विचारों को भी परमेश्‍वर के आत्मा को छोड़ कोई नहीं जानता। परंतु हमने संसार की आत्मा नहीं, बल्कि वह आत्मा पाया है जो परमेश्‍वर की ओर से है, ताकि हम उन बातों को जानें जो परमेश्‍वर के द्वारा हमें उदारता से दी गई हैं; उन्हीं बातों को हम बताते भी हैं, मनुष्यों के ज्ञान के सिखाए हुए शब्दों में नहीं बल्कि आत्मिक बातों की तुलना आत्मिक बातों से करके आत्मा के द्वारा सिखाए हुए शब्दों में। परंतु शारीरिक मनुष्य परमेश्‍वर के आत्मा की बातों को ग्रहण नहीं करता, क्योंकि उसके लिए वह मूर्खता है; वह उन्हें जान नहीं सकता, क्योंकि वे आत्मिक रूप से परखी जाती हैं। आत्मिक मनुष्य सब कुछ परखता है, परंतु वह आप किसी के द्वारा परखा नहीं जाता। क्योंकि, प्रभु का मन किसने जाना है कि वह उसे सिखाए? परंतु हमारे पास मसीह का मन है। हे भाइयो, मैं तुमसे ऐसे बातें न कर सका जैसे कि आत्मिक लोगों से, परंतु ऐसे जैसे शारीरिक लोगों से, अर्थात् उनसे जो मसीह में छोटे बच्‍चे हैं। मैंने तुम्हें दूध पिलाया, अन्‍न नहीं खिलाया, क्योंकि तुम उसे पचा नहीं सकते थे। वास्तव में, तुम अब भी पचा नहीं सकते, क्योंकि तुम अब तक शारीरिक हो। जबकि तुममें ईर्ष्या और झगड़े हैं, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मानवीय रीति पर नहीं चलते? क्योंकि जब एक कहता है, “मैं पौलुस का हूँ,” और दूसरा, “मैं अपुल्‍लोस का हूँ,” तो क्या तुम मनुष्य ही न हुए? तो फिर अपुल्‍लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिनके द्वारा तुमने विश्‍वास किया, जैसा कि प्रभु ने हर एक को दिया। मैंने बोया, अपुल्‍लोस ने सींचा, परंतु परमेश्‍वर ने बढ़ाया। इसलिए न तो बोनेवाला कुछ है और न ही सींचनेवाला, परंतु परमेश्‍वर ही सब कुछ है जो बढ़ाता है। बोनेवाला और सींचनेवाला एक समान हैं, और प्रत्येक अपने परिश्रम के अनुसार अपना प्रतिफल पाएगा। क्योंकि हम परमेश्‍वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्‍वर के खेत हो और परमेश्‍वर का भवन हो। परमेश्‍वर के उस अनुग्रह के अनुसार जो मुझे दिया गया, मैंने कुशल राजमिस्‍त्री के समान नींव डाली, और दूसरा उस पर निर्माण करता है। परंतु प्रत्येक सावधान रहे कि वह उस पर कैसा निर्माण करता है। क्योंकि उस डली हुई नींव को छोड़ जो यीशु मसीह है, कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता। यदि कोई इस नींव पर सोने, चाँदी, बहुमूल्य पत्थरों, काठ या घास-फूस से निर्माण करे, तो प्रत्येक का कार्य प्रकट हो जाएगा, क्योंकि वह दिन उसे स्पष्‍ट दिखाएगा। वह आग के द्वारा प्रकट किया जाएगा, और आग प्रत्येक के कार्य को परखेगी कि कैसा है। यदि किसी का वह कार्य जिसका उसने निर्माण किया, बना रहेगा तो वह प्रतिफल पाएगा। यदि किसी का कार्य जल जाएगा तो वह हानि उठाएगा; परंतु वह स्वयं बच जाएगा, फिर भी मानो आग में से होकर। क्या तुम नहीं जानते कि तुम परमेश्‍वर का मंदिर हो और परमेश्‍वर का आत्मा तुममें वास करता है? यदि कोई परमेश्‍वर के मंदिर को नष्‍ट करता है तो परमेश्‍वर उसे नष्‍ट करेगा; क्योंकि परमेश्‍वर का मंदिर पवित्र है, और वह तुम हो। कोई अपने आपको धोखा न दे। यदि तुममें से कोई इस संसार में अपने आपको बुद्धिमान समझता है तो वह मूर्ख बने कि बुद्धिमान बन जाए; क्योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्‍वर की दृष्‍टि में मूर्खता है, जैसा लिखा है: वह ज्ञानवानों को उन्हीं की चतुराई में फँसा देता है। और फिर यह: प्रभु ज्ञानवानों के विचारों को जानता है कि वे व्यर्थ हैं। इसलिए कोई मनुष्यों पर घमंड न करे; क्योंकि सब कुछ तुम्हारा है, चाहे पौलुस हो या अपुल्‍लोस या फिर कैफा, चाहे संसार हो या जीवन या फिर मृत्यु, चाहे वर्तमान बातें हों या भावी बातें—सब कुछ तुम्हारा है, और तुम मसीह के हो, और मसीह परमेश्‍वर का है। मनुष्य हमें मसीह के सेवक और परमेश्‍वर के भेदों के प्रबंधक समझे। अब यहाँ प्रबंधकों से अपेक्षा की जाती है कि वे विश्‍वासयोग्य पाए जाएँ। मेरे लिए यह बहुत छोटी बात है कि मैं तुम्हारे या मानवीय न्यायालय द्वारा परखा जाऊँ। सच तो यह है कि मैं अपने आपको नहीं परखता, क्योंकि मेरा मन मुझे किसी बात में दोषी नहीं ठहराता। फिर भी इससे मैं निर्दोष नहीं ठहरता, मेरा परखनेवाला तो प्रभु है। इसलिए समय से पहले अर्थात् जब तक प्रभु न आ जाए, किसी बात का न्याय मत करो। वही अंधकार में छिपी बातों को प्रकाशित करेगा और मनों के उद्देश्यों को प्रकट करेगा। तब परमेश्‍वर की ओर से प्रत्येक की प्रशंसा होगी। अब हे भाइयो, मैंने तुम्हारे लिए इन बातों को अपने पर और अपुल्‍लोस पर लागू किया है ताकि तुम हमसे यह सीखो कि लिखी हुई बातों से आगे न बढ़ना, और यह कि तुममें से कोई किसी एक के पक्ष में दूसरे के विरुद्ध होकर घमंड से न फूले। कौन है जो तुझे दूसरे से श्रेष्‍ठ समझता है? और तेरे पास क्या है जो तुझे नहीं मिला? और जबकि तुझे मिला है, तो घमंड क्यों करता है मानो तुझे मिला ही नहीं? तुम तो पहले ही तृप्‍त हो चुके हो, और धनी भी हो गए, और हमारे बिना तुम राजा बन गए हो। भला होता कि तुम वास्तव में राजा बन गए होते ताकि हम भी तुम्हारे साथ राज्य करते। मैं सोचता हूँ कि परमेश्‍वर ने हम प्रेरितों को उन लोगों के समान सब से अंत में प्रदर्शित किया है जिन पर मृत्युदंड की आज्ञा हो चुकी है: हम जगत में स्वर्गदूतों और मनुष्यों दोनों के लिए तमाशा बन गए हैं। हम मसीह के लिए मूर्ख हैं परंतु तुम मसीह में बुद्धिमान हो, हम निर्बल हैं परंतु तुम बलवान हो, तुम आदर के पात्र हो परंतु हम निरादर के। इस घड़ी तक हम भूखे-प्यासे और नंगे हैं, हम मार खाते और मारे-मारे फिरते हैं, हम अपने हाथों से कठिन परिश्रम करते हैं। निंदा किए जाने पर भी हम आशिष देते हैं, सताए जाने पर हम सहते हैं, बदनाम किए जाने पर हम विनती करते हैं; हम अब तक मानो संसार का मैल और सब के लिए कूड़ा-करकट बने हुए हैं। मैं ये बातें तुम्हें लज्‍जित करने के लिए नहीं बल्कि अपने प्रिय बच्‍चों के समान तुम्हें चिताने के लिए लिख रहा हूँ। यदि मसीह में तुम्हारे शिक्षक दस हज़ार भी हों, फिर भी अनेक पिता तो नहीं, क्योंकि सुसमाचार के द्वारा मसीह यीशु में मैं तुम्हारा पिता बना। इसलिए मैं तुमसे विनती करता हूँ, मेरा अनुकरण करनेवाले बनो। इसी कारण मैंने तीमुथियुस को तुम्हारे पास भेजा है जो प्रभु में मेरा प्रिय और विश्‍वासयोग्य पुत्र है। वह तुम्हें मसीह यीशु में मेरे आचरण का स्मरण कराएगा, जैसे कि मैं हर स्थान पर प्रत्येक कलीसिया में सिखाता हूँ। कुछ तो घमंड से ऐसे फूल गए हैं, मानो मैं अब तुम्हारे पास आऊँगा ही नहीं। परंतु यदि प्रभु ने चाहा तो मैं शीघ्र तुम्हारे पास आऊँगा, और उन फूले हुओं की बातों को नहीं, बल्कि उनके सामर्थ्य को जान लूँगा। क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य बातों में नहीं बल्कि सामर्थ्य में है। तुम क्या चाहते हो? क्या मैं छड़ी लेकर तुम्हारे पास आऊँ, या प्रेम और नम्रता की आत्मा के साथ? यहाँ तक सुनने में आया है कि तुम्हारे बीच व्यभिचार होता है, और ऐसा व्यभिचार जो अविश्‍वासियों में भी नहीं होता कि कोई अपने पिता की पत्‍नी को रखता है। फिर भी तुम घमंड से फूले हुए हो। क्या तुम्हें शोक नहीं मनाना चाहिए था कि ऐसा कार्य करनेवाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता? यद्यपि मैं शारीरिक रूप से अनुपस्थित हूँ, पर आत्मा में उपस्थित हूँ; और मानो वहाँ उपस्थित होकर मैं ऐसा कार्य करनेवाले के विरुद्ध निर्णय दे चुका हूँ। जब तुम हमारे प्रभु यीशु के नाम से इकट्ठे होते हो और मेरी आत्मा हमारे प्रभु यीशु के सामर्थ्य से उपस्थित होती है, तब ऐसा मनुष्य शरीर के विनाश के लिए शैतान के हाथ सौंपा जाए ताकि प्रभु के दिन उसकी आत्मा उद्धार पाए। तुम्हारा घमंड करना अच्छा नहीं। क्या तुम नहीं जानते कि थोड़ा सा ख़मीर पूरे गूँधे हुए आटे को ख़मीरा कर देता है? पुराना ख़मीर निकालकर अपने आपको शुद्ध करो कि नया गूँधा आटा बन जाओ, जैसे कि तुम अख़मीरी हो। क्योंकि वास्तव में हमारे फसह का मेमना मसीह बलिदान हुआ है; इसलिए हम न तो पुराने ख़मीर से और न ही बुराई और दुष्‍टता के ख़मीर से, बल्कि शुद्धता और सच्‍चाई की अख़मीरी रोटी से पर्व मनाएँ। अपने पत्र में मैंने तुम्हें लिखा था कि व्यभिचारियों के साथ संगति न रखना। यह नहीं कि तुम इस संसार के व्यभिचारियों, या लोभियों और लुटेरों, या मूर्तिपूजकों से बिलकुल संगति न रखो, क्योंकि उस दशा में तो तुम्हें संसार से निकल जाना पड़ेगा। परंतु अब मैं तुम्हें लिखता हूँ कि यदि कोई भाई कहलाकर व्यभिचारी, लोभी, मूर्तिपूजक, गाली देनेवाला, पियक्‍कड़ या लुटेरा हो, तो उससे संगति न रखना; बल्कि ऐसे मनुष्य के साथ भोजन भी न करना। क्योंकि बाहरवालों का न्याय करने से मेरा क्या लेना-देना? क्या तुम्हें उनका न्याय नहीं करना है जो भीतर हैं? बाहरवालों का न्याय तो परमेश्‍वर करेगा। तुम उस दुष्‍ट जन को अपने बीच में से निकाल दो। क्या तुममें से कोई किसी दूसरे के साथ झगड़ा होने पर न्याय के लिए पवित्र लोगों के पास न जाकर अधर्मियों के पास जाने का दुस्साहस करता है? क्या तुम यह नहीं जानते कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे? और यदि तुम्हारे द्वारा जगत का न्याय किया जाना है, तो क्या तुम इन छोटे से छोटे विषयों का न्याय करने के भी योग्य नहीं हो? क्या तुम नहीं जानते कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? सांसारिक विषयों की तो बात ही छोड़ो। यदि वास्तव में तुम्हें सांसारिक विषयों का न्याय करना हो, तो फिर क्या तुम ऐसे लोगों को नियुक्‍त करोगे जिनका कलीसिया में कोई महत्त्व नहीं? मैं तुम्हें लज्‍जित करने के लिए यह कह रहा हूँ। क्या तुममें एक भी बुद्धिमान नहीं जो भाइयों के आपसी झगड़े सुलझा सके? बल्कि यहाँ तो भाई अपने भाई पर मुकदमा चलाता है, और वह भी अविश्‍वासियों के सामने! इसलिए वास्तव में तुम्हारी पराजय तो पूरी तरह से इस बात में हो चुकी है कि तुम एक दूसरे पर मुकदमा चलाते हो। इसकी अपेक्षा तुम अन्याय क्यों नहीं सह लेते? तुम छल को क्यों नहीं सह लेते? इसके विपरीत तुम तो अन्याय और छल करते हो, और वह भी अपने भाइयों के साथ। या क्या तुम नहीं जानते कि अधर्मी लोग परमेश्‍वर के राज्य के उत्तराधिकारी नहीं होंगे? धोखा न खाओ: न व्यभिचारी, न मूर्तिपूजक, न परस्‍त्रीगामी, न किसी भी प्रकार के समलैंगिक, न चोर, न लोभी, न पियक्‍कड़, न गाली देनेवाले और न लुटेरे परमेश्‍वर के राज्य के उत्तराधिकारी होंगे। तुममें से कुछ ऐसे ही थे, परंतु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम में और हमारे परमेश्‍वर के आत्मा के द्वारा धोए गए, पवित्र किए गए और धर्मी ठहराए गए हो। सब वस्तुएँ मेरे लिए उचित तो हैं, परंतु सब वस्तुएँ लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ मेरे लिए उचित तो हैं, परंतु मैं किसी वस्तु के अधीन नहीं होऊँगा। भोजन पेट के लिए है और पेट भोजन के लिए, परंतु परमेश्‍वर इन दोनों को नष्‍ट करेगा। फिर भी देह व्यभिचार के लिए नहीं बल्कि प्रभु के लिए है, और प्रभु देह के लिए है। परमेश्‍वर ने प्रभु को जिलाया और हमें भी अपने उस सामर्थ्य से जिलाएगा। क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं? तो क्या मैं मसीह के अंगों को लेकर वेश्या के अंग बनाऊँ? कदापि नहीं! या क्या तुम नहीं जानते कि जो वेश्या से जुड़ जाता है वह उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि कहा गया है: वे दोनों एक तन होंगे। परंतु जो प्रभु से जुड़ जाता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है। व्यभिचार से भागो; अन्य सब पाप जो मनुष्य करता है देह के बाहर होते हैं, परंतु व्यभिचार करनेवाला अपनी ही देह के विरुद्ध पाप करता है। क्या तुम यह नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है जो तुममें है, और परमेश्‍वर की ओर से तुम्हें मिला है? और तुम अपने नहीं हो, क्योंकि तुम मूल्य देकर खरीदे गए हो। इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्‍वर की महिमा करो। अब उन बातों के विषय में जो तुमने लिखी हैं: पुरुष के लिए अच्छा यह है कि वह स्‍त्री को न छुए। परंतु व्यभिचार से बचने के लिए प्रत्येक पुरुष की अपनी पत्‍नी हो, और प्रत्येक स्‍त्री का अपना पति। पति अपनी पत्‍नी के प्रति और इसी प्रकार पत्‍नी भी अपने पति के प्रति कर्तव्य निभाए। पत्‍नी को अपनी देह पर अधिकार नहीं, परंतु उसके पति को है। इसी प्रकार पति को भी अपनी देह पर अधिकार नहीं, परंतु उसकी पत्‍नी को है। एक दूसरे को इससे वंचित न करो; केवल कुछ समय के लिए आपसी सहमति से अलग रहो कि तुम्हें प्रार्थना के लिए अवकाश मिले और फिर एक साथ हो जाओ, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परीक्षा में डाल दे। परंतु यह जो मैं कहता हूँ वह अनुमति है, आज्ञा नहीं। मैं तो चाहता हूँ कि सब मनुष्य वैसे हों जैसा मैं हूँ; परंतु प्रत्येक को परमेश्‍वर से अपना-अपना वरदान मिला है, किसी को एक प्रकार का तो किसी को दूसरे प्रकार का। परंतु मैं अविवाहितों और विधवाओं से कहता हूँ: यदि वे वैसे ही रहें जैसा मैं हूँ, तो उनके लिए अच्छा है। परंतु यदि उनमें संयम न हो तो वे विवाह कर लें, क्योंकि विवाह करना कामातुर रहने से अच्छा है। अब जो विवाहित हैं उनको मैं आज्ञा देता हूँ, मैं नहीं बल्कि प्रभु: पत्‍नी अपने पति से अलग न हो, और यदि वह अलग हो, तो बिना विवाह किए रहे, या अपने पति के साथ फिर से मेल कर ले; और पति भी अपनी पत्‍नी को न छोड़े। बाकी लोगों से प्रभु नहीं, बल्कि मैं कहता हूँ: यदि किसी भाई की पत्‍नी अविश्‍वासी हो, और उसके साथ रहने के लिए सहमत हो, तो वह उसे न छोड़े; और यदि किसी स्‍त्री का पति अविश्‍वासी हो, और उसके साथ रहने के लिए सहमत हो, तो वह अपने पति को न छोड़े। क्योंकि अविश्‍वासी पति अपनी पत्‍नी के कारण पवित्र ठहरता है, और अविश्‍वासी पत्‍नी अपने पति के कारण पवित्र ठहरती है; अन्यथा तुम्हारे बच्‍चे अशुद्ध होते, परंतु वे तो पवित्र हैं। परंतु यदि अविश्‍वासी अलग होता है, तो उसे अलग होने दो; ऐसी स्थिति में कोई भाई या बहन बंधन में नहीं है। परमेश्‍वर ने हमें शांतिपूर्ण जीवन के लिए बुलाया है। क्योंकि हे स्‍त्री, तू कैसे जानती है कि तू अपने पति का उद्धार करा लेगी? या हे पुरुष, तू कैसे जानता है कि तू अपनी पत्‍नी का उद्धार करा लेगा? प्रभु ने जैसा प्रत्येक को दिया है, और जैसा परमेश्‍वर ने प्रत्येक को बुलाया है, वह वैसा ही चले। मैं सब कलीसियाओं में यही आज्ञा देता हूँ। क्या कोई ख़तने की दशा में बुलाया गया है? वह ख़तनारहित न बने। क्या कोई ख़तनारहित दशा में बुलाया गया है? वह ख़तना न कराए। न तो ख़तना कुछ है, और न ही ख़तनारहित, बल्कि परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानना ही सब कुछ है। प्रत्येक जन जिस दशा में बुलाया गया हो उसी में बना रहे। क्या तू दास की दशा में बुलाया गया था? तू इसकी चिंता मत कर; बल्कि यदि तू स्वतंत्र हो सकता है, तो इस अवसर का अवश्य लाभ उठा। क्योंकि जो दास की दशा में प्रभु में बुलाया गया है वह प्रभु का स्वतंत्र जन है; वैसे ही जो स्वतंत्र दशा में बुलाया गया है वह मसीह का दास है। तुम मूल्य चुकाकर खरीदे गए हो; मनुष्यों के दास मत बनो। हे भाइयो, प्रत्येक जन जिस दशा में बुलाया गया हो उसी में परमेश्‍वर के साथ बना रहे। अब कुँवारियों के विषय में मेरे पास प्रभु से कोई आज्ञा नहीं है, परंतु प्रभु की दया से विश्‍वासयोग्य होने के कारण मैं अपनी सलाह देता हूँ। मेरे विचार से वर्तमान संकट के कारण यही अच्छा है कि मनुष्य जैसा है वैसा ही रहे। क्या तेरे पास पत्‍नी है? तो अलग होने का प्रयत्‍न न कर। क्या तेरे पास पत्‍नी नहीं? तो पत्‍नी की खोज न कर। परंतु यदि तू विवाह कर भी लेता है, तो पाप नहीं करता; और यदि कुँवारी विवाह करती है, तो पाप नहीं करती। परंतु ऐसों को शारीरिक जीवन में कष्‍ट होगा, और मैं तुम्हें बचाना चाहता हूँ। हे भाइयो, मैं यह कहता हूँ कि समय कम किया गया है। इसलिए अब से जिनके पास पत्‍नी है, वे ऐसे रहें मानो उनकी पत्‍नी नहीं है, और रोनेवाले ऐसे हों मानो रोते नहीं, और आनंद करनेवाले ऐसे हों मानो आनंद नहीं करते, और खरीदनेवाले ऐसे हों मानो उनके पास कुछ नहीं, और संसार का उपयोग करनेवाले ऐसे हों जैसे उसमें लिप्‍त नहीं; क्योंकि इस संसार का स्वरूप बदलता जाता है। मैं चाहता हूँ कि तुम चिंतामुक्‍त रहो। अविवाहित पुरुष प्रभु की बातों की चिंता करता है कि वह प्रभु को कैसे प्रसन्‍न रखे। परंतु विवाहित पुरुष सांसारिक बातों की चिंता करता है कि वह अपनी पत्‍नी को कैसे प्रसन्‍न रखे, और उसका ध्यान बँट जाता है। अविवाहिता या कुँवारी प्रभु की बातों की चिंता करती है, ताकि वह देह और आत्मा दोनों में पवित्र हो। परंतु विवाहिता संसार की बातों की चिंता करती है कि वह अपने पति को कैसे प्रसन्‍न रखे। मैं यह तुम्हारे ही लाभ के लिए कहता हूँ—तुम्हें बंधन में बाँधने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि जो शोभा देता है वही हो और तुम एक चित्त होकर प्रभु की सेवा में लगे रहो। यदि कोई सोचता है कि वह अपनी उस कुँवारी कन्या के प्रति अन्याय कर रहा है, जिसकी विवाह की आयु निकल रही है और आवश्यकता भी है, तो जैसा वह चाहता है वैसा ही करे। वह उसका विवाह कर दे, यह पाप नहीं है। परंतु वह जो विवश हुए बिना अपने मन में दृढ़ रहता है और अपनी इच्छा पूरी करने का अधिकार रखता है और जिसने अपने मन में अपनी कुँवारी कन्या को ऐसे ही रखने का निर्णय ले लिया हो, वह अच्छा ही करता है। इसलिए जो अपनी कुँवारी कन्या को विवाह में देता है, वह अच्छा करता है, और जो विवाह में नहीं देता, वह और भी अच्छा करता है। जब तक किसी स्‍त्री का पति जीवित है तब तक वह उसी से बँधी हुई है; परंतु यदि उसका पति मर जाए तो वह स्वतंत्र है कि जिससे चाहे विवाह कर ले, परंतु केवल प्रभु में। परंतु मेरे विचार से जैसी वह है, यदि वैसी ही रहे तो और भी धन्य है; और मैं समझता हूँ कि मुझमें भी परमेश्‍वर का आत्मा है। अब मूर्तियों को चढ़ाई हुई वस्तुओं के विषय में: हम जानते हैं कि हम सब के पास ज्ञान है। ज्ञान घमंड उत्पन्‍न‍ करता है, परंतु प्रेम से उन्‍नति होती है। यदि कोई सोचता है कि वह कुछ जानता है, तो जैसा उसे जानना चाहिए वैसा अब तक उसने नहीं जाना। परंतु यदि कोई परमेश्‍वर से प्रेम रखता है, तो परमेश्‍वर उसे जानता है। अतः मूर्तियों को चढ़ाई हुई वस्तुओं को खाने के विषय में हम जानते हैं कि संसार में मूर्ति का कोई अस्तित्व नहीं, और एक को छोड़ कोई परमेश्‍वर नहीं। क्योंकि यद्यपि आकाश में या पृथ्वी पर ईश्‍वर कहलानेवाले तो हैं—जैसे बहुत से ईश्‍वर और बहुत से प्रभु हैं— फिर भी हमारे लिए तो एक ही परमेश्‍वर है, अर्थात् पिता, जिसकी ओर से सब कुछ है और हम भी उसी के लिए हैं; और एक ही प्रभु है, अर्थात् यीशु मसीह, जिसके द्वारा सब कुछ है और हम भी उसी के द्वारा हैं। परंतु यह ज्ञान सब मनुष्यों को नहीं है। कुछ लोग मूर्तिपूजा के अब तक इतने आदी हो गए हैं कि वे मूर्ति को चढ़ाए गए भोजन को कुछ विशेष समझकर खाते हैं और उनका विवेक निर्बल होने के कारण अशुद्ध हो जाता है। परंतु भोजन हमें परमेश्‍वर के पास नहीं पहुँचाएगा; यदि हम न खाएँ तो हमारी कुछ हानि नहीं, और यदि खाएँ तो कोई लाभ भी नहीं। सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी यह स्वतंत्रता निर्बलों के लिए ठोकर का कारण बन जाए। यदि कोई तुझे, जिसको यह ज्ञान है, मूर्ति के मंदिर में भोजन करते देख ले, तो क्या उसके निर्बल विवेक को मूर्तियों को चढ़ाया हुआ भोजन खाने का साहस न होगा? और तेरे इस ज्ञान के कारण वह निर्बल जन अर्थात् वह भाई नाश हो जाएगा जिसके लिए मसीह मरा। इस प्रकार भाइयों के विरुद्ध पाप करने और उनके निर्बल विवेक को ठेस पहुँचाने के द्वारा तुम मसीह के विरुद्ध पाप करते हो। इसलिए यदि भोजन मेरे भाई के लिए ठोकर का कारण बनता है, तो मैं कभी मांस नहीं खाऊँगा, ऐसा न हो कि मैं अपने भाई के लिए ठोकर का कारण बनूँ। क्या मैं स्वतंत्र नहीं? क्या मैं प्रेरित नहीं? क्या मैंने यीशु को जो हमारा प्रभु है, नहीं देखा? क्या तुम प्रभु में मेरे परिश्रम का फल नहीं? भले ही मैं दूसरों के लिए प्रेरित नहीं, फिर भी तुम्हारे लिए तो हूँ; क्योंकि तुम प्रभु में मेरी प्रेरिताई की छाप हो। मुझे जाँचनेवालों के लिए मेरा प्रत्युत्तर यह है: क्या हमारे पास खाने-पीने का अधिकार नहीं? क्या अन्य प्रेरितों, प्रभु के भाइयों और कैफा के समान हमें भी यह अधिकार नहीं कि एक विश्‍वासी पत्‍नी को अपने साथ लेकर चलें? या क्या केवल मुझे और बरनाबास को ही यह अधिकार नहीं कि हम जीविका कमाना छोड़ें? कौन है जो अपने ही खर्च पर सेना में सेवा करता है? कौन है जो अंगूर का बगीचा लगाकर उसका फल नहीं खाता? या कौन है जो भेड़-बकरियों की रखवाली करके उनका दूध नहीं पीता? क्या मैं ये बातें मानवीय रीति से कह रहा हूँ? क्या व्यवस्था भी यही नहीं कहती? क्योंकि मूसा की व्यवस्था में लिखा है: दाँवते हुए बैल का मुँह न बाँधना। क्या परमेश्‍वर बैलों की चिंता करता है? क्या यह सब वह हमारे लिए ही नहीं कह रहा? हाँ, यह हमारे लिए ही लिखा गया है, क्योंकि यह उचित है कि हल जोतनेवाला आशा से जोते, और दाँवनेवाला उपज का भाग पाने की आशा से दाँवनी करे। यदि हमने तुममें आत्मिक बातें बोई हैं तो क्या यह बड़ी बात होगी कि हम तुमसे भौतिक वस्तुओं की फसल काटें? यदि दूसरे लोगों का तुम पर अधिकार है, तो क्या हमारा और अधिक नहीं? फिर भी हमने इस अधिकार का उपयोग नहीं किया, बल्कि हम सब कुछ सह लेते हैं, ताकि हमारे द्वारा मसीह के सुसमाचार में कोई रुकावट न आए। क्या तुम नहीं जानते कि जो मंदिर में सेवा करते हैं वे मंदिर में से खाते हैं; और जो वेदी पर सेवा करते हैं वे वेदी की भेंट में सहभागी होते हैं? इसी प्रकार प्रभु ने ठहराया है कि जो सुसमाचार का प्रचार करते हैं वे सुसमाचार से ही जीविका प्राप्‍त करें। परंतु मैंने इनमें से किसी का भी उपयोग नहीं किया है। मैंने ये बातें इसलिए नहीं लिखीं कि यह सब मेरे लिए भी हो, क्योंकि इससे तो मेरे लिए मर जाना ही अच्छा है कि कोई मेरे गर्व को व्यर्थ ठहराए। इसलिए यदि मैं सुसमाचार सुनाऊँ तो मेरे लिए यह कोई गर्व की बात नहीं, क्योंकि मैं तो इसके लिए विवश हूँ। यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊँ तो मुझ पर हाय! क्योंकि यदि मैं यह स्वेच्छा से करता हूँ तो मेरे लिए प्रतिफल है, परंतु यदि स्वेच्छा से नहीं, तो भी उत्तरदायित्व मुझे सौंपा गया है। फिर मेरा प्रतिफल क्या है? यह कि जब मैं सुसमाचार सुनाऊँ तो सुसमाचार को मुफ़्त में दूँ, यहाँ तक कि सुसमाचार संबंधित मेरा जो अधिकार है उसका पूरा उपयोग न करूँ। सब मनुष्यों से स्वतंत्र होने पर भी मैंने अपने आपको सब का दास बना लिया है कि मैं और भी अधिक लोगों को जीत सकूँ। यहूदियों के लिए मैं यहूदी जैसा बना कि यहूदियों को जीत सकूँ; जो व्यवस्था के अधीन हैं, उनके लिए मैं स्वयं व्यवस्था के अधीन न होने पर भी व्यवस्था के अधीन जैसा बना कि जो व्यवस्था के अधीन हैं उनको जीत सकूँ। उनके लिए जो व्यवस्थारहित हैं, मैं—जो परमेश्‍वर की व्यवस्था से रहित नहीं बल्कि मसीह की व्यवस्था के अधीन हूँ—व्यवस्थारहित जैसा बना कि जो व्यवस्थारहित हैं उन्हें जीत सकूँ। निर्बलों के लिए मैं निर्बल बना कि निर्बलों को जीत सकूँ। मैं सब लोगों के लिए सब कुछ बना हूँ कि किसी न किसी प्रकार से कुछ का उद्धार करा सकूँ। मैं सब कुछ सुसमाचार के लिए करता हूँ, ताकि औरों के साथ उसमें सहभागी हो जाऊँ। क्या तुम नहीं जानते कि दौड़ के मैदान में दौड़ते तो सब हैं, परंतु पुरस्कार एक ही को मिलता है? अतः इस प्रकार दौड़ो कि तुम उसे प्राप्‍त कर सको। प्रतियोगिता में खेलनेवाला प्रत्येक खिलाड़ी सब बातों में संयम रखता है। वे तो नाश होनेवाले मुकुट को प्राप्‍त करने के लिए ऐसा करते हैं, परंतु हम उस मुकुट के लिए करते हैं जो अविनाशी है। इसलिए मैं दौड़ता हूँ पर लक्ष्यहीन के समान नहीं, मैं मुक्‍‍केबाज़ी करता हूँ परंतु हवा में मारनेवाले के समान नहीं; बल्कि मैं अपनी देह को ताड़ना देता और वश में लाता हूँ, कहीं ऐसा न हो कि दूसरों को तो प्रचार करूँ पर स्वयं अयोग्य ठहरूँ। हे भाइयो, मैं नहीं चाहता कि तुम इस बात से अनजान रहो कि हमारे सब पूर्वज बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हुए। और सब ने बादल में और समुद्र में मूसा का बपतिस्मा लिया। सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया, और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया; क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे जो उनके साथ-साथ चलती थी, और वह चट्टान मसीह था। परंतु परमेश्‍वर उनमें से अधिकांश से प्रसन्‍न न हुआ, और वे जंगल में ही ढेर हो गए। अब ये बातें हमारे लिए उदाहरण बनीं कि हम बुरी बातों की लालसा न करें, जैसे कि उन्होंने की थी। तुम मूर्तिपूजक न बनो जैसे कि उनमें से कुछ थे; जैसा लिखा है: लोग बैठे तो खाने-पीने के लिए, और उठे तो नाचने-कूदने के लिए। न ही हम व्यभिचार करें, जैसे कि उनमें से कितनों ने किया, और एक दिन में तेईस हज़ार मर गए; न ही हम मसीह को परखें, जैसे कि उनमें से कितनों ने परखा और साँपों के द्वारा नष्‍ट किए गए। न ही तुम कुड़कुड़ाओ, जैसे उनमें से कितने कुड़कुड़ाए और नष्‍ट करनेवाले के द्वारा नष्‍ट किए गए। अब ये बातें जो उनके साथ घटीं उदाहरण के रूप में थीं, और ये हमारी चेतावनी के लिए लिखी गईं, जो युग के अंतिम समय में आ पहुँचे हैं। अतः जो सोचता है कि वह स्थिर है, वह सावधान रहे कि कहीं गिर न पड़े। तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े हो जो मनुष्य के सहने से बाहर है। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्य है और वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में पड़ने नहीं देगा, बल्कि परीक्षा के साथ-साथ बचने का उपाय भी करेगा कि तुम उसे सह सको। इस कारण, हे मेरे प्रियो, मूर्तिपूजा से भागो। मैं तुम्हें बुद्धिमान समझकर कह रहा हूँ: जो मैं कहता हूँ उसे तुम परखो। धन्यवाद का वह कटोरा जिसके लिए हम धन्यवाद देते हैं, क्या मसीह के लहू की सहभागिता नहीं? वह रोटी जिसे हम तोड़ते हैं, क्या मसीह की देह की सहभागिता नहीं? रोटी एक ही है इसलिए हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं; क्योंकि हम सब उसी एक रोटी में भागी होते हैं। शारीरिक रूप से जो इस्राएली हैं उनको देखो: क्या बलिदानों को खानेवाले वेदी के सहभागी नहीं? मेरे कहने का अर्थ क्या है? क्या मूर्ति को चढ़ाया हुआ बलिदान कुछ है? क्या मूर्ति कुछ है? नहीं! पर जो बलिदान वे चढ़ाते हैं, उन्हें परमेश्‍वर को नहीं बल्कि दुष्‍टात्माओं को चढ़ाते हैं, और मैं नहीं चाहता कि तुम दुष्‍टात्माओं के सहभागी बनो। तुम प्रभु के कटोरे और दुष्‍टात्माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते। तुम प्रभु की मेज़ और दुष्‍टात्माओं की मेज़ दोनों में सहभागी नहीं हो सकते। क्या हम प्रभु को क्रोध दिलाते हैं? क्या हम उससे अधिक शक्‍तिशाली हैं? सब वस्तुएँ उचित तो हैं, परंतु सब वस्तुएँ लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ उचित तो हैं, परंतु सब वस्तुओं से उन्‍नति नहीं होती। कोई अपने ही नहीं, बल्कि दूसरों के हित को भी खोजे। मांस-बाज़ार में जो कुछ भी बिकता है, उसे विवेक में प्रश्‍न किए बिना खा लो; क्योंकि पृथ्वी और जो कुछ उसमें है सब प्रभु का है। यदि अविश्‍वासियों में से कोई तुम्हें आमंत्रित करता है, और तुम जाना चाहते हो तो विवेक में प्रश्‍न किए बिना वह सब खा लो जो तुम्हारे सामने परोसा गया है। परंतु यदि कोई तुमसे कहे, “यह मूर्ति को चढ़ाया हुआ भोजन है!” तो तुम उस बतानेवाले और विवेक के कारण न खाओ । मेरा तात्पर्य तुम्हारे विवेक से नहीं बल्कि दूसरे व्यक्‍ति के विवेक से है। मेरी स्वतंत्रता भला दूसरे के विवेक से क्यों परखी जाए? यदि मैं धन्यवाद करके भोजन में सहभागी होता हूँ, तो जिसके लिए मैं धन्यवाद करता हूँ, उसके कारण मेरी निंदा क्यों की जाती है? इसलिए चाहे तुम खाओ या पीओ, या जो कुछ भी करो, सब परमेश्‍वर की महिमा के लिए करो। तुम न तो यहूदियों, न यूनानियों और न ही परमेश्‍वर की कलीसिया के लिए ठोकर का कारण बनो; ठीक वैसे ही जैसे मैं भी सब बातों में सब मनुष्यों को प्रसन्‍न रखता हूँ, और अपना नहीं बल्कि बहुतों का लाभ ढूँढ़ता हूँ कि वे उद्धार पाएँ। मेरा अनुकरण करो, जैसे मैं मसीह का अनुकरण करता हूँ। मैं तुम्हारी सराहना करता हूँ कि तुम सब बातों में मुझे स्मरण रखते हो, और जो परंपराएँ मैंने तुम्हें सौंपी हैं उनका दृढ़ता से पालन करते हो। परंतु मैं चाहता हूँ कि तुम यह जान लो कि प्रत्येक पुरुष का सिर मसीह है, और स्‍त्री का सिर पुरुष है, और मसीह का सिर परमेश्‍वर है। जो पुरुष अपना सिर ढककर प्रार्थना या भविष्यवाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। परंतु जो स्‍त्री सिर उघाड़े प्रार्थना या भविष्यवाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है; क्योंकि ऐसा करना सिर मुँड़ाने के समान है। यदि स्‍त्री अपना सिर न ढके तो वह अपने बाल भी कटवा ले। परंतु यदि स्‍त्री के लिए बाल कटवाना या सिर मुँड़वाना लज्‍जा की बात हो, तो वह अपना सिर ढके। पुरुष के लिए सिर ढकना उचित नहीं, क्योंकि वह परमेश्‍वर का स्वरूप और महिमा है; परंतु स्‍त्री तो पुरुष की महिमा है। पुरुष स्‍त्री से नहीं बल्कि स्‍त्री पुरुष से है; और न ही पुरुष स्‍त्री के लिए सृजा गया बल्कि स्‍त्री पुरुष के लिए सृजी गई है। इसलिए स्वर्गदूतों के कारण स्‍त्री के लिए उचित है कि वह अधिकार का चिह्‍न अपने सिर पर रखे। फिर भी, प्रभु में न तो स्‍त्री बिना पुरुष के और न पुरुष बिना स्‍त्री के है, क्योंकि जैसे स्‍त्री पुरुष से हुई वैसे ही पुरुष स्‍त्री के द्वारा है; और सब कुछ परमेश्‍वर से है। तुम स्वयं विचार करो, क्या स्‍त्री का उघाड़े सिर परमेश्‍वर से प्रार्थना करना उचित है? क्या प्रकृति स्वयं तुम्हें नहीं सिखाती कि यदि पुरुष लंबे बाल रखे, तो उसके लिए अपमान की बात है, परंतु यदि स्‍त्री लंबे बाल रखे, तो यह उसके लिए शोभा की बात है? क्योंकि उसे लंबे बाल ओढ़नी के रूप में दिए गए हैं। परंतु यदि कोई इस विषय में विवाद करना चाहे, तो न हमारी और न ही परमेश्‍वर की कलीसियाओं की ऐसी कोई रीति है। अब यह आदेश देते हुए मैं तुम्हारी सराहना नहीं करता, क्योंकि तुम्हारे एकत्रित होने से भलाई नहीं परंतु और बुराई ही होती है। सर्वप्रथम, मैं सुनता हूँ कि जब तुम कलीसिया के रूप में एकत्रित होते हो तो तुम्हारे बीच में फूट होती है, और इस बात पर मैं कुछ-कुछ विश्‍वास भी करता हूँ। तुम्हारे बीच दलबंदी भी अवश्य होगी, ताकि तुममें जो खरे हैं, वे प्रकट हो जाएँ। अतः जब तुम एक स्थान पर एकत्रित होते हो तो यह प्रभु-भोज खाने के लिए नहीं, क्योंकि खाने के समय प्रत्येक अपना भोजन दूसरे से पहले ही झटपट खा लेता है, जिससे कोई तो भूखा रह जाता है और कोई मतवाला हो जाता है। क्या खाने और पीने के लिए तुम्हारे पास घर नहीं? या क्या तुम परमेश्‍वर की कलीसिया को तुच्छ जानते हो और जिनके पास नहीं है उन्हें लज्‍जित करते हो? मैं तुमसे क्या कहूँ? क्या मैं तुम्हारी प्रशंसा करूँ? इसमें मैं तुम्हारी प्रशंसा नहीं करता? क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से प्राप्‍त हुई, जो मैंने तुम्हें भी सौंप दी, कि प्रभु यीशु ने, जिस रात वह पकड़वाया गया, रोटी ली, और धन्यवाद करके उसे तोड़ी और कहा, “ यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिए है, मेरे स्मरण में यही किया करो।” इसी प्रकार भोजन के बाद उसने कटोरा भी लिया और कहा, “यह कटोरा मेरे लहू में नई वाचा है; जब भी पीओ, तो मेरे स्मरण में यही किया करो।” क्योंकि जब भी तुम यह रोटी खाते और इस कटोरे में से पीते हो, तो जब तक प्रभु न आए उसकी मृत्यु का प्रचार करते हो। इसलिए जो कोई अनुचित रूप से प्रभु की रोटी खाए या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लहू का दोषी ठहरेगा। अतः मनुष्य अपने आपको जाँच ले; और फिर इस रोटी में से खाए और इस कटोरे में से पीए। क्योंकि जो प्रभु की देह को पहचाने बिना खाता और पीता है, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दंड लाता है। इसी कारण तुममें बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए हैं। यदि हम अपने आपको जाँचते, तो दंड न पाते; परंतु प्रभु दंड देकर हमें अनुशासित करता है, ताकि हम संसार के साथ दोषी न ठहराए जाएँ। इसलिए, हे मेरे भाइयो, जब तुम भोजन करने के लिए एकत्रित होते हो तो एक दूसरे की प्रतीक्षा किया करो। यदि कोई भूखा हो तो वह अपने घर में ही खा ले, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारा एकत्रित होना दंड का कारण बन जाए। बाकी बातों को जब मैं आऊँगा तो ठीक करूँगा। अब आत्मिक वरदानों के विषय में: हे भाइयो, मैं नहीं चाहता कि तुम अनजान रहो। तुम जानते हो कि जब तुम अविश्‍वासी थे, तब गूँगी मूर्तियों के पीछे तुम्हें जैसे चलाया जाता था, तुम चल पड़ते थे। इसलिए मैं तुम्हें यह बता देता हूँ कि जो परमेश्‍वर के आत्मा के द्वारा बोलता है, यह नहीं कहता, “यीशु शापित है,” और न कोई पवित्र आत्मा के बिना यह कह सकता है, “यीशु प्रभु है।” वरदान तो विभिन्‍न‍ प्रकार के हैं, पर आत्मा एक ही है; और सेवाएँ भी विभिन्‍न‍ प्रकार की हैं, पर प्रभु एक ही है; कार्य भी विभिन्‍न‍ प्रकार के हैं, पर परमेश्‍वर एक ही है, जो सब में सब कुछ करता है। परंतु प्रत्येक को सब की भलाई के लिए आत्मा का प्रकाश दिया जाता है। क्योंकि एक को आत्मा के द्वारा बुद्धि का वचन, तो दूसरे को उसी आत्मा के द्वारा ज्ञान का वचन दिया जाता है, किसी को उसी आत्मा के द्वारा विश्‍वास, और किसी को उसी आत्मा के द्वारा चंगाई के वरदान, फिर किसी को सामर्थ्य के कार्य, किसी को भविष्यवाणी, किसी को आत्माओं की परख, किसी को अन्य-अन्य भाषाएँ, और किसी को भाषाओं का अर्थ। परंतु ये सब कार्य वही एक आत्मा कराता है, और प्रत्येक को जैसा चाहता है, व्यक्‍तिगत रूप से बाँट देता है। जिस प्रकार देह तो एक है और उसके बहुत से अंग हैं, और देह के सब अंग बहुत होने पर भी देह एक है, उसी प्रकार मसीह भी है; क्योंकि चाहे यहूदी हों या यूनानी, दास हों या स्वतंत्र, हम सब को एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिए बपतिस्मा दिया गया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। देह एक नहीं बल्कि बहुत से अंगों की है। यदि पैर कहे, “क्योंकि मैं हाथ नहीं इसलिए मैं देह का नहीं।” तो क्या इस कारण वह देह का नहीं? और यदि कान कहे, “क्योंकि मैं आँख नहीं इसलिए मैं देह का नहीं।” तो क्या इस कारण वह देह का नहीं? यदि सारी देह आँख ही होती, तो सुनना कहाँ होता? यदि सारी देह कान ही होती, तो सूँघना कहाँ होता? परंतु परमेश्‍वर ने अपनी इच्छा के अनुसार सब अंगों को एक-एक करके देह में रखा है। और यदि वे सब एक ही अंग होते तो देह कहाँ होती? अब अंग तो बहुत से हैं, परंतु देह एक ही है। आँख, हाथ से नहीं कह सकती, “मुझे तेरी आवश्यकता नहीं।” और न ही सिर, पैरों से कह सकता है, “मुझे तुम्हारी आवश्यकता नहीं।” बल्कि देह के जो अंग निर्बल प्रतीत होते हैं, वे और भी अधिक आवश्यक हैं, और देह के जिन अंगों को हम कम आदर के योग्य सोचते हैं, उन्हीं का हम अधिक आदर करते हैं, और हमारे शोभाहीन अंग और अधिक शोभनीय हो जाते हैं; जबकि हमारे शोभनीय अंगों को इसकी आवश्यकता नहीं होती। परमेश्‍वर ने कम समझे जानेवाले अंगों को अधिक महत्त्व देते हुए देह को सुगठित किया है, ताकि देह में कोई फूट न पड़े, बल्कि सब अंग अपने समान एक दूसरे का ध्यान रखें। इसलिए यदि एक अंग दुःख उठाता है तो उसके साथ सब अंग दुःख उठाते हैं; यदि एक अंग का सम्मान होता है तो उसके साथ सब अंग आनंद मनाते हैं। तुम मिलकर मसीह की देह और व्यक्‍तिगत रूप से उसके अंग हो। और परमेश्‍वर ने इन्हें कलीसिया में पहले प्रेरित, दूसरे भविष्यवक्‍ता और तीसरे शिक्षक नियुक्‍त किया है; फिर सामर्थ्य के कार्य, चंगाई के वरदान, परोपकार, प्रबंधन, और अन्य भाषाएँ। क्या सब प्रेरित हैं? क्या सब भविष्यवक्‍ता हैं? क्या सब शिक्षक हैं? क्या सब सामर्थ्य के कार्य करनेवाले हैं? क्या सब के पास चंगाई के वरदान हैं? क्या सब अन्य-अन्य भाषाएँ बोलते हैं? क्या सब उनका अर्थ बताते हैं? तुम बड़े से बड़े वरदानों की धुन में रहो। परंतु मैं तुम्हें सब से उत्तम मार्ग बताता हूँ। यदि मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की भाषाओं में बोलूँ, पर प्रेम न रखूँ, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल और झनझनाती हुई झाँझ हूँ। यदि मेरे पास भविष्यवाणी करने का वरदान हो, और मैं सब भेदों और समस्त ज्ञान को समझूँ, और यहाँ तक कि मुझे पूरा विश्‍वास हो कि पहाड़ों को हटा दूँ, पर प्रेम न रखूँ, तो मैं कुछ भी नहीं। यदि मैं अपनी सारी संपत्ति कंगालों को खिलाने के लिए दे दूँ, और अपनी देह को जलाने के लिए सौंप दूँ, पर प्रेम न रखूँ, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है, वह ईर्ष्या नहीं करता, प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और घमंड से नहीं फूलता। वह अनुचित व्यवहार नहीं करता, अपनी भलाई नहीं चाहता, झुँझलाता नहीं, बुराई का लेखा नहीं रखता; वह अधर्म से आनंदित नहीं होता, परंतु सत्य से आनंदित होता है। वह सब बातों को सहता है, सब बातों का विश्‍वास करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। प्रेम कभी टलता नहीं। भविष्यवाणियाँ हों तो मिट जाएँगी, भाषाएँ हों तो समाप्‍त हो जाएँगी, ज्ञान हो तो मिट जाएगा। क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है और हमारी भविष्यवाणी भी अधूरी है; परंतु जब सर्वसिद्ध आएगा तो वह जो अधूरा है मिट जाएगा। जब मैं बच्‍चा था तो मैं बच्‍चे के समान बोलता था, बच्‍चे के समान सोचता था और बच्‍चे के समान समझता था; परंतु जब मैं सयाना हो गया तो मैंने बचपन की बातें छोड़ दीं। अभी तो हमें दर्पण में धुँधला सा दिखाई देता है, परंतु उस समय आमने-सामने देखेंगे; अभी तो मेरा ज्ञान अधूरा है, परंतु उस समय मैं पूर्ण रूप से जानूँगा, जैसे मुझे भी पूर्ण रूप से जाना गया है। अब विश्‍वास, आशा और प्रेम, ये तीनों स्थाई हैं; पर इनमें सब से बड़ा प्रेम है। प्रेम का अनुसरण करो और आत्मिक वरदानों की धुन में रहो, विशेषकर यह कि भविष्यवाणी करो। इसलिए कि जो अन्य भाषा में बोलता है वह मनुष्यों से नहीं बल्कि परमेश्‍वर से बात करता है, और कोई उसकी बातों को नहीं समझता, क्योंकि वह आत्मा में भेद की बातें बोलता है। परंतु जो भविष्यवाणी करता है वह मनुष्यों से उन्‍नति, प्रोत्साहन और सांत्वना की बातें कहता है। जो अन्य भाषा में बोलता है वह अपनी ही उन्‍नति करता है, परंतु जो भविष्यवाणी करता है वह कलीसिया की उन्‍नति करता है। मैं तो चाहता हूँ कि तुम सब अन्य भाषाओं में बोलो, परंतु इससे भी बढ़कर यह चाहता हूँ कि तुम भविष्यवाणी करो; यदि अन्य भाषाओं में बोलनेवाला कलीसिया की उन्‍नति के लिए उसका अनुवाद न करे तो भविष्यवाणी करनेवाला उससे बढ़कर है। अब हे भाइयो, यदि मैं तुम्हारे पास आकर अन्य भाषाओं में बोलूँ, परंतु प्रकाशन या ज्ञान या भविष्यवाणी या शिक्षा की बातें न करूँ तो तुम्हें मुझसे क्या लाभ होगा? जैसे कि आवाज़ निकालनेवाली निर्जीव वस्तुओं के भी, चाहे वह बाँसुरी हो या वीणा, यदि उनके सुरों में अंतर न हो तो कैसे पहचाना जाएगा कि क्या बजाया जा रहा है? यदि तुरही से अस्पष्‍‍ट आवाज़ निकले तो भला कौन युद्ध के लिए तैयार होगा? इसी प्रकार तुम भी यदि अपनी जीभ से स्पष्‍ट बात न कहो, तो जो कहा जा रहा है वह कैसे समझा जाएगा? तुम तो हवा से बात करनेवाले ही ठहरोगे। इस संसार में न जाने कितने प्रकार की भाषाएँ हैं, परंतु उनमें से एक भी अर्थहीन नहीं। इसलिए यदि मैं उस भाषा का अर्थ न जानूँ, तो मैं बोलनेवाले के लिए परदेशी ठहरूँगा और बोलनेवाला मेरे लिए परदेशी ठहरेगा। अतः तुम भी, जबकि आत्मिक वरदानों के लिए उत्साही हो, प्रयत्‍न करो कि कलीसिया की उन्‍नति के लिए उनसे भरपूर हो जाओ। इसलिए जो अन्य भाषा में बोलता है वह प्रार्थना करे कि उसका अनुवाद भी कर सके। क्योंकि यदि मैं अन्य भाषा में प्रार्थना करूँ, तो मेरी आत्मा तो प्रार्थना करती है परंतु मेरी बुद्धि निष्क्रिय हो जाती है। फिर क्या करना चाहिए? मैं आत्मा में प्रार्थना करूँगा, और बुद्धि से भी प्रार्थना करूँगा; मैं आत्मा से गाऊँगा, और बुद्धि से भी गाऊँगा। नहीं तो यदि तू आत्मा से धन्यवाद करे तो वहाँ उपस्थित अनजान व्यक्‍ति तेरे धन्यवाद पर कैसे “आमीन” कहेगा, क्योंकि वह तो नहीं जानता कि तू क्या कहता है? तू तो भली-भाँति धन्यवाद करता है, परंतु उससे दूसरे की उन्‍नति नहीं होती। मैं परमेश्‍वर का धन्यवाद करता हूँ कि मैं तुम सब से बढ़कर अन्य भाषाओं में बोलता हूँ। फिर भी कलीसिया में मैं अन्य भाषा में दस हज़ार शब्दों की अपेक्षा अपनी बुद्धि से पाँच शब्द ही बोलना अच्छा समझता हूँ ताकि दूसरों को भी सिखा सकूँ। हे भाइयो, अपनी समझ में बच्‍चे न रहो; बुराई में तो शिशु बने रहो परंतु समझ में परिपक्‍व हो जाओ। व्यवस्था में लिखा है कि प्रभु यह कहता है: मैं दूसरी भाषाओं में बोलनेवालों और पराए लोगों के मुख से इन लोगों से बात करूँगा, फिर भी वे मेरी नहीं सुनेंगे। अतः अन्य भाषाएँ विश्‍वासियों के लिए नहीं बल्कि अविश्‍वासियों के लिए चिह्‍न हैं, परंतु भविष्यवाणी अविश्‍वासियों के लिए नहीं बल्कि विश्‍वासियों के लिए चिह्‍न है। इसलिए यदि सारी कलीसिया एक साथ एकत्रित हो और सब अन्य भाषाओं में बोलें, और अनजान या अविश्‍वासी लोग भीतर आ जाएँ, तो क्या वे तुम्हें पागल नहीं कहेंगे? परंतु यदि सब भविष्यवाणी करें और कोई अविश्‍वासी या अनजान व्यक्‍ति भीतर आ जाए, तो सब की बातों से उसको अपने पापों का बोध होगा और वह परखा जाएगा, और उसके मन की गुप्‍त बातें प्रकट होंगी; और तब वह अपने मुँह के बल गिरकर परमेश्‍वर को दंडवत् करेगा और यह मान लेगा, “सचमुच परमेश्‍वर तुम्हारे बीच में है।” हे भाइयो, फिर क्या होना चाहिए? जब तुम एकत्रित होते हो तो हर एक के पास भजन, उपदेश, प्रकाशन, अन्य भाषा या उसका अनुवाद होता है; यह सब तुम्हारी उन्‍नति के लिए हो। यदि कोई अन्य भाषा में बोलता है, तो दो या अधिक से अधिक तीन जन बारी-बारी से बोलें, और एक उसका अनुवाद करे। परंतु यदि कोई अनुवाद करनेवाला न हो, तो वह कलीसिया में चुप रहे और अपने आप से तथा परमेश्‍वर से ही बात करे। भविष्यवक्‍ताओं में से भी दो या तीन जन बोलें, और अन्य लोग उन्हें परखें। परंतु यदि वहाँ बैठे किसी दूसरे व्यक्‍ति को कोई प्रकाशन मिले, तो पहला चुप हो जाए; क्योंकि तुम सब एक-एक करके भविष्यवाणी कर सकते हो, जिससे सब सीखें और सब प्रोत्साहित हों। भविष्यवक्‍ताओं की आत्मा भविष्यवक्‍ताओं के अधीन रहती है; क्योंकि परमेश्‍वर गड़बड़ी का नहीं बल्कि शांति का परमेश्‍वर है। जैसा पवित्र लोगों की सब कलीसियाओं में होता है, स्‍त्रियाँ कलीसियाओं में चुप रहें, क्योंकि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं; परंतु वे अधीन रहें, जैसा व्यवस्था भी कहती है। यदि वे कुछ सीखना चाहती हैं, तो घर पर अपने पति से पूछें, क्योंकि स्‍त्री का कलीसिया में बोलना लज्‍जा की बात है। क्या परमेश्‍वर का वचन तुममें से निकला, या केवल तुम ही तक पहुँचा है? यदि कोई सोचता है कि वह भविष्यवक्‍ता या आत्मिक जन है, तो वह यह जान ले कि जो कुछ मैं तुम्हें लिख रहा हूँ वह प्रभु की आज्ञा है; परंतु यदि कोई इसे न पहचाने, तो उसे भी पहचाना नहीं जाएगा। अतः मेरे भाइयो, भविष्यवाणी करने की धुन में रहो, और अन्य भाषाओं में बोलने से मना मत करो। पर सारी बातें शालीनता और व्यवस्थित रूप से हों। हे भाइयो, अब मैं तुम्हें उसी सुसमाचार का स्मरण कराता हूँ जिसे मैंने तुम्हें सुनाया और तुमने ग्रहण भी किया था, और जिसमें तुम स्थिर भी हो, और तुम्हारा उद्धार भी उसी के द्वारा होता है, यदि तुम सुसमाचार के उस वचन को दृढ़ता से थामे रहो जो मैंने तुम्हें सुनाया था अन्यथा तुमने व्यर्थ में विश्‍वास किया। मैंने वह सब से मुख्य बात तुम्हें पहुँचा दी जो मुझ तक भी पहुँची थी, कि पवित्रशास्‍त्र के अनुसार मसीह हमारे पापों के लिए मरा, और वह गाड़ा गया, और पवित्रशास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी उठा, और कैफा को, और फिर बारहों को दिखाई दिया। इसके बाद वह पाँच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिनमें से अधिकांश तो अब तक जीवित हैं, परंतु कुछ सो गए। तब वह याकूब को और फिर सब प्रेरितों को दिखाई दिया, और सब से अंत में मुझे भी दिखाई दिया जो मानो अधूरे समय का जन्मा हूँ। मैं तो प्रेरितों में सब से छोटा हूँ, बल्कि प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैंने परमेश्‍वर की कलीसिया को सताया था। फिर भी मैं जो कुछ भी हूँ, परमेश्‍वर के अनुग्रह से हूँ, और मुझ पर उसका अनुग्रह व्यर्थ नहीं हुआ, परंतु मैंने उन सब से बढ़कर परिश्रम किया; फिर भी यह मुझसे नहीं बल्कि परमेश्‍वर के अनुग्रह से हुआ जो मेरे साथ था। इसलिए चाहे मैं हूँ या वे हों, हम यही प्रचार करते हैं और तुमने इसी पर विश्‍वास किया है। अब यदि मसीह का यह प्रचार किया जाता है कि वह मृतकों में से जी उठा, तो तुममें से कुछ क्यों कहते हैं कि मृतकों का पुनरुत्थान है ही नहीं? और यदि मृतकों का पुनरुत्थान नहीं है, तो मसीह भी नहीं जी उठा; और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो व्यर्थ है हमारा प्रचार भी और व्यर्थ है तुम्हारा विश्‍वास भी। इतना ही नहीं, हम परमेश्‍वर के झूठे साक्षी भी ठहरते हैं, क्योंकि हमने परमेश्‍वर के विषय में साक्षी दी है कि उसने मसीह को जिलाया; यदि वास्तव में मृतक जिलाए नहीं जाते तो उसने मसीह को भी नहीं जिलाया। हाँ, यदि मृतक जिलाए नहीं जाते तो मसीह भी नहीं जी उठा, और यदि मसीह नहीं जी उठा तो तुम्हारा विश्‍वास व्यर्थ है और तुम अब तक अपने पापों में पड़े हो। फिर तो जो मसीह में सो गए हैं वे भी नाश हुए। यदि हमने मसीह से केवल इस जीवन में आशा रखी है, तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं। परंतु अब मसीह मृतकों में से जी उठा है, और सोए हुओं में वह पहला फल है। क्योंकि जब मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई, तो मनुष्य ही के द्वारा मृतकों का पुनरुत्थान भी आया; और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसे ही मसीह में सब को जीवन दिया जाएगा। परंतु हर एक अपनी-अपनी बारी से: पहला फल मसीह, फिर मसीह के आगमन पर उसके लोग। इसके बाद जब वह सारी प्रधानता और सारे अधिकार और सामर्थ्य का अंत करके राज्य को परमेश्‍वर पिता के हाथों में सौंप देगा तो अंत होगा; क्योंकि जब तक वह अपने सब शत्रुओं को अपने पैरों तले न कर ले, उसका राज्य करना अवश्य है। अंतिम शत्रु जिसका नाश किया जाएगा, वह मृत्यु है; क्योंकि उसने सब कुछ उसके पैरों तले कर दिया है। परंतु जब यह कहा गया है कि सब कुछ उसके अधीन किया गया है, तो स्पष्‍ट है कि जिसने सब कुछ उसके अधीन कर दिया वह स्वयं इसमें सम्मिलित नहीं। परंतु जब सब कुछ पुत्र के अधीन हो जाएगा, तो पुत्र स्वयं भी उसके अधीन हो जाएगा जिसने सब कुछ उसके अधीन किया था, ताकि परमेश्‍वर ही सब में सब कुछ हो। अन्यथा जो मृतकों के लिए बपतिस्मा लेते हैं वे क्या करेंगे? यदि मृतक जिलाए ही नहीं जाते, तो उनके लिए बपतिस्मा क्यों लिया जाता है? हम भी क्यों हर घड़ी खतरे में पड़े रहते हैं? हे भाइयो, जो गर्व मुझे हमारे प्रभु मसीह यीशु में तुम पर है उसकी शपथ कि मैं प्रतिदिन मरता हूँ। यदि मानवीय विचार से मैं इफिसुस में हिंसक पशुओं से लड़ा, तो मुझे क्या लाभ हुआ? यदि मृतक जिलाए नहीं जाते, तो आओ, हम खाएँ-पीएँ, क्योंकि कल तो हमें मरना ही है। धोखा न खाओ: “बुरी संगति अच्छे चरित्र को भ्रष्‍ट कर देती है।” धार्मिकता के लिए जाग उठो और पाप न करो, क्योंकि कुछ लोग ऐसे हैं जो परमेश्‍वर को नहीं पहचानते; यह मैं तुम्हें लज्‍जित करने के लिए कह रहा हूँ। अब कोई यह कहेगा, “मृतक कैसे जिलाए जाते हैं? और वे किस प्रकार की देह में आते हैं?” अरे मूर्ख! जो तू बोता है, जब तक वह मर न जाए, जिलाया नहीं जाता; और जो तू बोता है, वह उत्पन्‍न‍ होने वाली देह नहीं बल्कि निरा दाना है, चाहे गेहूँ का हो या किसी और अनाज का। परंतु परमेश्‍वर अपनी इच्छा के अनुसार उसे एक देह देता है, और हर एक बीज को उसकी अपनी देह। सब शरीर एक समान नहीं: मनुष्यों का शरीर और है तो पशुओं का और; पक्षियों का शरीर और है तो मछलियों का और। स्वर्गिक देह हैं और पार्थिव देह भी, परंतु स्वर्गिक देह का तेज अलग है तो पार्थिव देह का अलग। सूर्य का तेज और है, चंद्रमा का तेज और, तथा तारों का तेज और है; यहाँ तक कि एक तारे का तेज दूसरे तारे से भिन्‍न‍ है। मृतकों का पुनरुत्थान भी ऐसा ही है। देह नाशवान दशा में बोई जाती है और अविनाशी दशा में जिलाई जाती है। वह अनादर के साथ बोई जाती है और महिमा के साथ जिलाई जाती है; निर्बलता के साथ बोई जाती है और सामर्थ्य के साथ जिलाई जाती है। स्वाभाविक देह बोई जाती है और आत्मिक देह जिलाई जाती है। यदि स्वाभाविक देह है तो आत्मिक देह भी है। इसलिए यह भी लिखा है: पहला मनुष्य, आदम जीवित प्राणी बना, और अंतिम आदम जीवनदायक आत्मा बना; परंतु पहले आत्मिक नहीं बल्कि स्वाभाविक है, उसके बाद आत्मिक। पहला मनुष्य पृथ्वी से अर्थात् मिट्टी का था, दूसरा मनुष्य स्वर्ग से है। जैसा वह मिट्टी का था, वैसे ही वे सब हैं जो मिट्टी के हैं, और जैसा वह स्वर्गिक है, वैसे ही वे सब हैं जो स्वर्गिक हैं; और जैसे हमने उसका रूप धारण किया जो मिट्टी का था, वैसे ही हम उसका रूप भी धारण करेंगे जो स्वर्गिक है। हे भाइयो, मैं यह कहता हूँ, कि मांस और लहू परमेश्‍वर के राज्य के उत्तराधिकारी नहीं हो सकते, और न नाशवान अविनाशी का उत्तराधिकारी हो सकता है। देखो, मैं तुम्हें एक भेद की बात बताता हूँ: हम सब सोएँगे नहीं बल्कि हम सब बदल जाएँगे। यह एक क्षण में, पलक झपकते ही, अंतिम तुरही के फूँके जाने के साथ होगा; क्योंकि जब तुरही फूँकी जाएगी तो मृतक अविनाशी दशा में जिलाए जाएँगे और हम बदल जाएँगे। क्योंकि इस नाशवान का अविनाशी को और मरणशील का अमरता को पहन लेना अवश्य है। जब यह नाशवान अविनाशी को और मरणशील अमरता को पहन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है पूरा हो जाएगा: जय ने मृत्यु को निगल लिया। हे मृत्यु, कहाँ रही तेरी विजय? हे मृत्यु, कहाँ रहा तेरा डंक? मृत्यु का डंक तो पाप है, और पाप की शक्‍ति व्यवस्था है; परंतु परमेश्‍वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें विजय प्रदान करता है। इसलिए हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो तथा प्रभु के कार्य में सदैव बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। अब पवित्र लोगों के लिए दान एकत्रित करने के विषय में: मैंने गलातिया की कलीसियाओं को जैसा निर्देश दिया था, तुम भी वैसा ही करो। सप्‍ताह के पहले दिन तुममें से प्रत्येक अपनी आय के अनुसार अपने पास कुछ रख छोड़े ताकि जब मैं आऊँ तो दान एकत्रित करना न पड़े। जब मैं आऊँगा तो जिन्हें तुम चाहोगे, उन्हें पत्र देकर भेज दूँगा कि तुम्हारा दान यरूशलेम पहुँचा दें; और यदि मेरा भी जाना उचित हुआ, तो वे मेरे साथ जाएँगे। जब मैं मकिदुनिया से होकर जाऊँ तो तुम्हारे पास आऊँगा, क्योंकि मुझे मकिदुनिया होकर जाना ही है; और हो सकता है कि मैं तुम्हारे साथ ठहरूँ या शीतकाल भी तुम्हारे साथ बिताऊँ ताकि जहाँ मुझे जाना हो वहाँ के लिए तुम मुझे तैयारी के साथ विदा कर सको। मैं मार्ग में जाते समय ही तुमसे मिलना नहीं चाहता, बल्कि आशा करता हूँ कि यदि प्रभु ने चाहा तो कुछ समय तुम्हारे साथ रहूँगा; परंतु मैं पिंतेकुस्त तक इफिसुस में ही रहूँगा, क्योंकि मेरे लिए एक बड़ा और प्रभावशाली सेवा का द्वार खुला है, और विरोधी बहुत हैं। यदि तीमुथियुस आ जाए, तो ध्यान रखना कि वह तुम्हारे साथ निर्भय होकर रहे, क्योंकि वह भी मेरे समान प्रभु का कार्य कर रहा है। इसलिए कोई उसे तुच्छ न समझे, बल्कि तुम उसे कुशल से विदा करना कि वह मेरे पास आ जाए, क्योंकि मैं भाइयों के साथ उसके आने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। अब भाई अपुल्‍लोस के विषय में: मैंने उससे बहुत विनती की कि वह भाइयों के साथ तुम्हारे पास आए; परंतु इस समय आने की उसकी बिलकुल इच्छा नहीं थी। फिर भी, जब उसे अवसर मिलेगा, तो वह आ जाएगा। जागृत रहो, विश्‍वास में स्थिर रहो, पुरुषार्थ रखो और बलवंत बनो। तुम्हारे सब कार्य प्रेम से किए जाएँ। हे भाइयो, तुम स्तिफनास के घराने को जानते हो कि वे अखाया के पहले फल हैं और उन्होंने अपने आपको पवित्र लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया है। अतः मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि तुम भी ऐसे लोगों के अधीन रहो और उन सब के भी जो इस कार्य में सहकर्मी और परिश्रमी हैं। मैं स्तिफनास, फूरतूनातुस और अखइकुस के आने से आनंदित हूँ, क्योंकि उन्होंने तुम्हारी घटी को पूरा किया है। उन्होंने मेरी और तुम्हारी आत्मा को विश्राम दिया है, इसलिए ऐसे लोगों का आदर करो। आसिया की कलीसियाओं की ओर से तुम्हें नमस्कार। अक्‍विला और प्रिस्का और उनके घर की कलीसिया का तुम्हें प्रभु में बहुत-बहुत नमस्कार। सब भाइयों का तुम्हें नमस्कार। पवित्र चुंबन से एक दूसरे का अभिवादन करो। मुझ पौलुस का अपने हाथ से लिखा हुआ नमस्कार। यदि कोई प्रभु से प्रेम नहीं करता तो वह शापित हो। हे हमारे प्रभु, आ! प्रभु यीशु का अनुग्रह तुम पर होता रहे। मेरा प्रेम मसीह यीशु में तुम सब के साथ रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो परमेश्‍वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिंथुस में है, तथा सारे अखाया के सब पवित्र लोगों के नाम: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। धन्य है परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जो दयालु पिता और समस्त शांति का परमेश्‍वर है। वह हमारे हर क्लेश में हमें शांति देता है, ताकि हम उस शांति के कारण जो हमें परमेश्‍वर से मिलती है, उन्हें भी शांति दे सकें जो किसी प्रकार के क्लेश में हों; क्योंकि जैसे मसीह के दुःख हममें बहुतायत से हैं वैसे ही हमारी शांति भी मसीह के द्वारा बहुतायत से है। यदि हम क्लेश सहते हैं, तो यह तुम्हारी शांति और उद्धार के लिए है; यदि हमें शांति मिलती है तो यह तुम्हारी शांति के लिए है, जिससे तुममें उन दुःखों को सहने का धीरज उत्पन्‍न‍ हो जिन्हें हम भी सहते हैं। तुम्हारे विषय में हमारी आशा दृढ़ है, क्योंकि हम जानते हैं कि जिस प्रकार तुम हमारे दुःखों में सहभागी हो, उसी प्रकार हमारी शांति में भी सहभागी हो। हे भाइयो, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो जो आसिया में हमें सहना पड़ा था। हम ऐसे बोझ से दब गए थे जो हमारी सहनशक्‍ति से बाहर था, यहाँ तक कि हम जीवित रहने की आशा भी छोड़ चुके थे; बल्कि हमें ऐसा लग रहा था मानो हम पर मृत्युदंड की आज्ञा हो चुकी हो। यह इसलिए था कि हम स्वयं पर नहीं बल्कि परमेश्‍वर पर भरोसा रखें जो मृतकों को जिलाता है। उसी ने हमें ऐसी भयानक मृत्यु से बचाया और बचाएगा। हमने उस पर आशा रखी है कि वह हमें आगे भी बचाता रहेगा, और तुम भी अपनी प्रार्थनाओं द्वारा हमारी सहायता करते रहोगे, ताकि हमारी ओर से बहुत से लोग उस अनुग्रह के लिए धन्यवाद करें जो बहुतों की प्रार्थनाओं द्वारा हमें मिला है। यह हमारा गर्व अर्थात् हमारे विवेक की साक्षी है कि हमने इस संसार में, विशेषकर तुम्हारे प्रति, शारीरिक ज्ञान के अनुसार नहीं बल्कि परमेश्‍वर के अनुग्रह के अनुसार, भक्‍तिपूर्ण खराई और सच्‍चाई से आचरण किया है। इसलिए जिन बातों को तुम पढ़ते और समझते भी हो, उन्हें छोड़ हम कुछ और नहीं लिख रहे हैं; और मैं आशा करता हूँ कि जिस प्रकार तुमने हमें आंशिक रूप से समझा है उसी प्रकार पूर्ण रूप से यह समझ लोगे कि जैसे हम तुम्हारा गर्व हैं वैसे हमारे प्रभु यीशु के दिन में तुम भी हमारा गर्व ठहरोगे। इसी भरोसे के साथ मैं पहले तुम्हारे पास आना चाहता था कि तुम्हें दूसरी बार आशिष प्राप्‍त हो, अर्थात् यह कि तुम्हारे पास से होता हुआ मकिदुनिया जाऊँ और फिर मकिदुनिया से तुम्हारे पास आऊँ, और तुम्हारे द्वारा यहूदिया के लिए विदा किया जाऊँ। जब मैंने ऐसा करना चाहा तो क्या मेरा मन अस्थिर था? या जो निर्णय मैं लेता हूँ, क्या वह शरीर के अनुसार लेता हूँ कि मैं “हाँ, हाँ” भी कहूँ और साथ ही “नहीं, नहीं” भी? जिस प्रकार परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्य है, उसी प्रकार तुम्हारे प्रति हमारे वचन में “हाँ” और “नहीं” दोनों एक साथ नहीं पाए जाते। क्योंकि परमेश्‍वर का पुत्र यीशु मसीह, जिसका प्रचार तुम्हारे बीच हमारे द्वारा, अर्थात् मेरे, सिलवानुस और तीमुथियुस के द्वारा किया गया, वह ऐसा नहीं जो “हाँ” और “नहीं” दोनों हो, बल्कि उसमें “हाँ” ही है। क्योंकि परमेश्‍वर की जितनी भी प्रतिज्ञाएँ हैं, वे उसमें “हाँ” ही “हाँ” हैं। इसलिए उसमें हमारे द्वारा “आमीन” भी परमेश्‍वर की महिमा के लिए होती है। अब वह परमेश्‍वर ही है जो हमें तुम्हारे साथ मसीह में दृढ़ करता है, और जिसने हमारा अभिषेक किया है, और हम पर मुहर भी लगाई है और बयाने के रूप में अपना आत्मा हमारे मनों में दिया है। मैं परमेश्‍वर को अपने जीवन का साक्षी मानकर कहता हूँ कि तुम्हें दुःख से बचाने के लिए ही मैं फिर कुरिंथुस नहीं आया। इसका अर्थ यह नहीं कि हम तुम्हारे विश्‍वास पर प्रभुता जताना चाहते हैं, बल्कि हम तुम्हारे आनंद के लिए तुम्हारे सहकर्मी हैं, क्योंकि विश्‍वास ही के द्वारा तुम स्थिर रहते हो। मैंने अपने आपमें यह निश्‍चय कर लिया था कि मैं फिर से दुःख देने तुम्हारे पास न आऊँ। क्योंकि यदि मैं तुम्हें दुःख पहुँचाता हूँ, तो उस व्यक्‍ति को छोड़ जिसे मुझसे दुःख पहुँचा है, मुझे आनंद देनेवाला कौन होगा? और मैंने यह बात इसलिए लिखी है कि जब मैं आऊँ मुझे उनसे दुःख न पहुँचे जिनसे मुझे आनंद मिलना चाहिए, क्योंकि मुझे तुम सब पर भरोसा है कि जो आनंद मेरा है वही तुम सब का भी है। मैंने बड़े कष्‍ट और हृदय की वेदना के साथ आँसू बहा बहाकर तुम्हें लिखा था, इसलिए नहीं कि तुम्हें दुःख पहुँचे बल्कि इसलिए कि तुम मेरे उस गहरे प्रेम को जान सको जो तुम्हारे प्रति है। परंतु यदि किसी ने दुःख पहुँचाया है, तो उसने मुझे ही नहीं बल्कि थोड़ा बहुत (कहीं उसके प्रति मैं अधिक कठोर न हो जाऊँ) तुम सब को भी पहुँचाया है। ऐसे व्यक्‍ति को बहुमत से जो दंड मिला वही पर्याप्‍त है; इसलिए अब तुम उसे क्षमा करो और शांति दो, कहीं ऐसा न हो कि वह बहुत अधिक दुःख में डूब जाए। इसलिए मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि उसको अपने प्रेम का प्रमाण दो। मैंने तुम्हें इसलिए भी लिखा था कि तुम्हें परखकर जान लूँ कि तुम सब बातों में आज्ञाकारी हो या नहीं। तुम किसी बात में जिसे क्षमा करते हो, उसे मैं भी क्षमा करता हूँ; क्योंकि मैंने जो कुछ क्षमा किया है, यदि किया है तो उसे मसीह की उपस्थिति में तुम्हारे ही कारण किया है, कि कहीं ऐसा न हो कि शैतान हमसे कुछ लाभ उठाए, क्योंकि हम उसकी युक्‍तियों से अनजान नहीं हैं। जब मैं मसीह का सुसमाचार सुनाने के लिए त्रोआस आया, तो मेरे लिए प्रभु में वहाँ एक द्वार खुला था, परंतु अपने भाई तीतुस को वहाँ न पाकर मेरी आत्मा को चैन न मिला; इसलिए मैं उनसे विदा होकर मकिदुनिया को चला गया। परंतु परमेश्‍वर का धन्यवाद हो जो हमें सदैव मसीह में विजय-उत्सव में लिए चलता है और हमारे द्वारा अपने ज्ञान की सुगंध हर जगह फैलाता है; क्योंकि उद्धार पानेवालों और नाश होनेवालों के मध्य हम परमेश्‍वर के लिए मसीह की सुगंध हैं, कुछ के लिए तो मृत्यु की ओर ले जानेवाली मृत्यु की गंध, और कुछ के लिए जीवन की ओर ले जानेवाली जीवन की सुगंध। भला इन बातों के योग्य कौन है? क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं जो परमेश्‍वर के वचन में मिलावट करते हैं, बल्कि हम सच्‍चाई के साथ और परमेश्‍वर के भेजे हुओं के रूप में परमेश्‍वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं। क्या हम फिर अपनी प्रशंसा करने लगे? या अन्य लोगों के समान क्या हमें भी तुम्हें प्रशंसा-पत्र देने या तुमसे लेने की आवश्यकता है? हमारा पत्र तो तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखा गया है और उसे सब लोग पहचानते और पढ़ते हैं। यह स्पष्‍ट है कि तुम हमारी सेवा के फलस्वरूप मसीह का पत्र हो, जिसे स्याही से नहीं बल्कि जीवित परमेश्‍वर के आत्मा से, और पत्थर की पटियाओं पर नहीं बल्कि मानवीय हृदय-पटल पर लिखा गया है। मसीह के द्वारा परमेश्‍वर पर हमें ऐसा ही भरोसा है। यह नहीं कि हम अपने आपको इस योग्य समझें कि हम कुछ कर सकते हैं, बल्कि हमारी योग्यता तो परमेश्‍वर की ओर से है। उसने हमें उस नई वाचा का सेवक होने के योग्य भी बनाया, जो अक्षर की नहीं परंतु आत्मा की है, क्योंकि अक्षर तो मारता है, परंतु आत्मा जीवन देता है। अब यदि मृत्यु की उस वाचा की सेवा जिसके अक्षर पत्थरों पर खोदे गए, इतनी तेजोमय थी कि इस्राएल की संतान उस तेज के कारण मूसा के मुँह की ओर एकटक देख न सकी जो घटता जा रहा था, तो फिर आत्मा की वाचा की सेवा और भी तेजोमय क्यों न होगी? क्योंकि यदि दोषी ठहरानेवाली वाचा की सेवा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहरानेवाली वाचा की सेवा और भी अधिक तेजोमय होगी। वास्तव में वह जो तेजोमय थी, अब उससे भी अधिक तेजोमय तेज के कारण निस्तेज हो गई है; क्योंकि यदि जो घटती जा रही थी तेजोमय थी, तो वह जो स्थिर है और भी अधिक तेजोमय होगी। अतः ऐसी आशा होने के कारण हम बड़े साहस के साथ बोलते हैं, और मूसा के समान नहीं हैं जो अपने मुँह पर परदा डाले रहता था कि इस्राएल की संतान उस घटते जा रहे तेज के अंत को न देखे। परंतु उनके मन कठोर किए गए और आज तक पुरानी वाचा को पढ़ते समय वही परदा बिना हटाए उन पर पड़ा रहता है, क्योंकि वह मसीह में ही हटाया जाता है। आज भी जब कभी मूसा की पुस्तक पढ़ी जाती है, तो उनके हृदय पर परदा पड़ा रहता है। परंतु जब भी कोई प्रभु की ओर फिरता है, तो वह परदा हटा लिया जाता है। प्रभु तो आत्मा है, और जहाँ प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है। हम सब उघाड़े मुँह से प्रभु का तेज मानो दर्पण में देखते हुए प्रभु अर्थात् आत्मा के द्वारा उसी तेजस्वी रूप में अंश-अंश करके बदलते जाते हैं। इसलिए जब हम पर ऐसी दया हुई कि हमें यह सेवा मिली, तो हम निराश नहीं होते। हमने लज्‍जा के गुप्‍त कार्यों को त्याग दिया; और हम न तो चतुराई से चलते हैं और न ही परमेश्‍वर के वचन में मिलावट करते हैं, बल्कि सत्य को प्रकट करने के द्वारा हम परमेश्‍वर के सामने प्रत्येक मनुष्य के विवेक में अपने आपको योग्य प्रस्तुत करते हैं। यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा भी हो, तो यह नाश होनेवालों के लिए पड़ा है; और इस संसार के ईश्‍वर ने उन अविश्‍वासियों की बुद्धि को अंधा कर दिया है ताकि परमेश्‍वर के प्रतिरूप अर्थात् मसीह के तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। क्योंकि हम अपना नहीं बल्कि यीशु मसीह का प्रचार करते हैं कि वह प्रभु है; और हम स्वयं यीशु के कारण तुम्हारे दास हैं। इसलिए कि परमेश्‍वर जिसने कहा, “अंधकार में से ज्योति चमके,” वह स्वयं हमारे हृदयों में चमका कि हमें परमेश्‍वर की महिमा के ज्ञान का प्रकाश प्रदान करे जो यीशु मसीह के चेहरे में है। परंतु हमारे पास यह धन मिट्टी के पात्रों में इसलिए है ताकि यह स्पष्‍ट हो कि यह असीम सामर्थ्य हमारी ओर से नहीं बल्कि परमेश्‍वर की ओर से है। हम चारों ओर से कष्‍ट तो सहते हैं परंतु कुचले नहीं जाते, निरुपाय तो होते हैं परंतु आशा नहीं छोड़ते, सताए तो जाते हैं परंतु त्यागे नहीं जाते, गिराए तो जाते हैं परंतु नाश नहीं होते; हम यीशु की मृत्यु को सदा अपनी देह में लिए फिरते हैं ताकि हमारी देह में यीशु का जीवन भी प्रकट हो। हम जो जीवित हैं हर समय यीशु के कारण मृत्यु को सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारी मरणशील देह में प्रकट हो। इस प्रकार मृत्यु हममें कार्य करती है, और जीवन तुममें। क्योंकि हममें विश्‍वास की वही आत्मा है, जिसके विषय में लिखा है: मैंने विश्‍वास किया, इसलिए मैं बोला। हम भी विश्‍वास करते हैं, इसलिए बोलते हैं, और यह भी जानते हैं कि जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु के साथ जिलाएगा और तुम्हारे साथ अपने सामने प्रस्तुत करेगा। क्योंकि यह सब तुम्हारे लिए है ताकि वह अनुग्रह अधिक से अधिक लोगों में फैलकर परमेश्‍वर की महिमा के लिए अधिकाधिक धन्यवाद का कारण हो। इसलिए हम निराश नहीं होते। यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्‍ट होता जाता है, फिर भी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन-प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल-भर का यह हल्का सा क्लेश हमारे लिए ऐसी अनंत और अपार महिमा उत्पन्‍न‍ करता है, जो अतुल्य है। हम उन वस्तुओं पर दृष्‍टि नहीं लगाते जो दृश्य हैं, बल्कि उन वस्तुओं पर जो अदृश्य हैं; क्योंकि जो दृश्य हैं वे थोड़े समय की हैं, परंतु जो अदृश्य हैं वे अनंत काल की हैं। हम जानते हैं कि जब हमारा पृथ्वी पर का तंबू रूपी घर गिराया जाएगा, तो स्वर्ग में हमें परमेश्‍वर से ऐसा भवन अर्थात् अनंत घर मिलेगा जो हाथों से बना हुआ नहीं होगा। इस घर में हम कराहते हैं और लालसा करते हैं कि अपने स्वर्गीय घर को पहन लें, और यदि हम उसे पहनते हैं तो नग्‍न नहीं पाए जाएँगे। वास्तव में इस तंबू में रहते हुए हम बोझ से दबे कराहते हैं, क्योंकि हम निर्वस्‍त्र होना नहीं बल्कि धारण करना चाहते हैं ताकि जो मरणशील है वह जीवन के द्वारा निगल लिया जाए। अब जिसने हमें इस बात के लिए तैयार किया है वह परमेश्‍वर है, और उसी ने बयाने में हमें अपना आत्मा दिया है। अतः हम सदा साहस रखते हैं और यह भी जानते हैं कि जब तक हम देह रूपी घर में रहते हैं, प्रभु से दूर हैं, क्योंकि हम रूप देखकर नहीं, बल्कि विश्‍वास से चलते हैं। इसलिए हम साहस रखते हैं और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। इस कारण हमारी अभिलाषा यह है कि हम चाहे साथ रहें या अलग, उसे भाते रहें। क्योंकि हम सब को मसीह के न्यायासन के सामने उपस्थित होना अवश्य है ताकि प्रत्येक को अपने उन भले या बुरे कार्यों का प्रतिफल मिले जो उसने देह के द्वारा किए हैं। अतः हम प्रभु का भय मानते हुए लोगों को समझाते हैं, परंतु परमेश्‍वर के सामने हमारी दशा स्पष्‍ट है और मैं आशा करता हूँ कि तुम्हारे विवेक में भी स्पष्‍ट होगी। हम तुम्हारे सामने फिर से अपनी प्रशंसा नहीं कर रहे हैं बल्कि तुम्हें हम पर गर्व करने का अवसर दे रहे हैं ताकि तुम उन्हें उत्तर दे सको जो मन पर नहीं बल्कि दिखावे पर घमंड करते हैं। यदि हम बेसुध हैं तो परमेश्‍वर के लिए हैं, और यदि सुध में हैं तो तुम्हारे लिए हैं। मसीह का प्रेम हमें विवश करता है क्योंकि हमें यह निश्‍चय है कि जब एक सब के लिए मरा तो सब मर गए; और वह सब के लिए मरा, ताकि वे जो जीवित हैं अब से अपने लिए न जीएँ बल्कि उसके लिए जीएँ जो उनके लिए मरा और फिर जी उठा। इसलिए अब से हम किसी को शरीर के अनुसार नहीं समझेंगे। यद्यपि हमने मसीह को शरीर के अनुसार ही जाना था, फिर भी अब हम उसे वैसे नहीं जानते। अतः यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है। पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, सब नई हो गई हैं। यह सब परमेश्‍वर की ओर से हुआ है, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और हमें मेल-मिलाप की सेवा सौंप दी है; अर्थात् परमेश्‍वर ने मसीह में होकर संसार का अपने साथ मेल-मिलाप कर लिया और उनके अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया, और मेल-मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है। इसलिए हम मसीह के राजदूत हैं और परमेश्‍वर हमारे द्वारा समझाता है; हम मसीह की ओर से विनती करते हैं कि तुम परमेश्‍वर से मेल-मिलाप कर लो। वह जो पाप से अनजान था, उसे परमेश्‍वर ने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें परमेश्‍वर की धार्मिकता बन जाएँ। हम परमेश्‍वर के सहकर्मी होने के नाते यह आग्रह भी करते हैं कि तुम पर जो परमेश्‍वर का अनुग्रह हुआ, उसे व्यर्थ न जाने दो। क्योंकि वह कहता है: उचित समय पर मैंने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैंने तेरी सहायता की। देख, अभी है वह उचित समय। देख, आज है वह उद्धार का दिन। हम किसी के लिए ठोकर का कारण नहीं बनते, ऐसा न हो कि हमारी सेवा पर कोई दोष लगे, बल्कि हम हर बात में परमेश्‍वर के सेवकों के समान अपने आपको प्रस्तुत करते हैं, अर्थात् बड़े धीरज के साथ क्लेशों में, अभावों में, संकटों में, मार खाने में, बंदी होने में, उपद्रवों में, परिश्रम में, जागते रहने में, भूखे रहने में, हम पवित्रता से, ज्ञान से, सहनशीलता से, दयालुता से, पवित्र आत्मा से, सच्‍चे प्रेम से, सत्य के वचन से, परमेश्‍वर के सामर्थ्य से, और धार्मिकता के हथियारों को दाहिने और बाएँ हाथों में लेकर, आदर और निरादर में, बदनामी और सम्मान में अपने आपको प्रस्तुत करते हैं। हम भरमानेवाले समझे जाते हैं फिर भी सच्‍चे हैं, अनजान समझे जाते हैं फिर भी हमें सब जानते हैं, मरते हुए समझे जाते हैं फिर भी देखो जीवित हैं, मार खानेवाले समझे जाते हैं फिर भी जान से मारे नहीं जाते, शोक मनानेवाले समझे जाते हैं फिर भी सदैव आनंद मनाते हैं, कंगाल समझे जाते हैं फिर भी बहुतों को धनी बना देते हैं, ऐसे समझे जाते हैं मानो हमारे पास कुछ नहीं फिर भी हमारे पास सब कुछ है। हे कुरिंथियो, हमने खुलकर तुमसे बातें की हैं, हमारा हृदय खुला हुआ है। तुम्हारे संकोच का कारण हम नहीं हैं, परंतु तुम अपने ही मनों में संकोच करते हो। इसके बदले तुम भी अपने हृदय खोल दो; मैं तुम्हें अपने बच्‍चे जानकर यह कहता हूँ। अविश्‍वासियों के साथ असमान जुए में न जुतो, क्योंकि धार्मिकता और अधर्म का क्या मेल? या ज्योति की अंधकार से क्या सहभागिता? और मसीह का बलियाल से क्या तालमेल? या विश्‍वासी का अविश्‍वासी के साथ क्या साझा? और मूर्तियों के साथ परमेश्‍वर के मंदिर की क्या सहमति? क्योंकि हम तो जीवित परमेश्‍वर का मंदिर हैं; जैसा कि परमेश्‍वर ने कहा है: मैं उनमें वास करूँगा और उनके मध्य चला-फिरा करूँगा। मैं उनका परमेश्‍वर होऊँगा, और वे मेरे लोग होंगे। फिर प्रभु यह कहता है: इसलिए उनके बीच में से निकल आओ और अलग हो जाओ, जो अशुद्ध है उसे मत छुओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूँगा; और मैं तुम्हारा पिता होऊँगा, और तुम मेरे पुत्र और पुत्रियाँ होगे। सर्वशक्‍तिमान प्रभु यह कहता है। अतः हे प्रियो, जब कि हमें ये प्रतिज्ञाएँ प्राप्‍त हैं, तो आओ हम अपने आपको देह और आत्मा की सारी मलिनता से शुद्ध करते हुए परमेश्‍वर के भय में पवित्रता को पूर्ण करें। हमें अपने हृदय में स्थान दो। हमने न तो किसी के साथ अन्याय किया है, न किसी को बिगाड़ा है, और न ही किसी का अनुचित लाभ उठाया है। मैं तुम्हें दोषी ठहराने के लिए यह नहीं कहता, क्योंकि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि तुम हमारे हृदयों में रहते हो कि हम साथ मरें और साथ जीएँ। मुझे तुम पर बहुत भरोसा है, मुझे तुम पर बहुत गर्व है; मैं शांति से भरा हुआ हूँ, और उन सारे क्लेशों में जो हम सहते हैं मुझमें आनंद उमड़ता रहता है। जब हम मकिदुनिया में आए तब भी हमारी देह को विश्राम न मिला, बल्कि चारों ओर से कष्‍टों से घिरे रहे—बाहर झगड़े थे तो भीतर भय। परंतु दीन-दुखियों को शांति देनेवाले परमेश्‍वर ने तीतुस के आने के द्वारा हमें शांति दी; न केवल उसके आने के द्वारा बल्कि उस प्रोत्साहन के द्वारा भी, जो उसे तुमसे प्राप्‍त हुआ। उसने तुम्हारी लालसा, तुम्हारे शोक और मेरे प्रति तुम्हारे उत्साह के विषय में हमें बताया, जिससे मैं अति आनंदित हुआ। यद्यपि मैंने अपने पत्र से तुम्हें दुःख पहुँचाया, फिर भी मुझे उसका पछतावा नहीं। हाँ, पहले तो पछतावा हुआ था—क्योंकि मैं देखता हूँ कि उस पत्र ने तुम्हें दुःख पहुँचाया, भले ही वह थोड़े ही समय के लिए था— परंतु अब मैं आनंदित हूँ, इसलिए नहीं कि तुम्हें दुःख पहुँचा, बल्कि इसलिए कि उस दुःख के कारण तुमने पश्‍चात्ताप किया। तुम्हारा दुःखी होना तो परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार हुआ ताकि हमारे कारण तुम्हें किसी प्रकार की हानि न हो। क्योंकि जो दुःख परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार होता है, वह उद्धार के लिए ऐसा पश्‍चात्ताप उत्पन्‍न‍ करता है जिसके लिए पछताना नहीं पड़ता; परंतु सांसारिक दुःख मृत्यु उत्पन्‍न‍ करता है। अतः देखो, यह दुःख जो परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार हुआ उससे तुममें कितना उत्साह, अपने को निर्दोष सिद्ध करने की कितनी अभिलाषा, कितना रोष, कितना भय, कितनी लालसा, कितनी धुन और न्याय चुकाने की कितनी इच्छा उत्पन्‍न‍ हुई है। तुमने हर बात में अपने आपको निर्दोष प्रस्तुत किया है। यद्यपि मैंने तुम्हें लिखा, फिर भी यह न तो उस अन्याय करनेवाले के कारण था और न ही अन्याय सहनेवाले के कारण, बल्कि इसलिए कि हमारे प्रति तुम्हारा उत्साह परमेश्‍वर की दृष्‍टि में तुम पर प्रकट हो जाए। इस कारण हमें शांति मिली है। परंतु हमारी इस शांति के साथ-साथ हम तीतुस के आनंद के कारण और भी अधिक आनंदित हुए, क्योंकि तुम सब ने उसकी आत्मा को हरा-भरा किया है; और यदि मैंने उसके सामने तुम्हारे विषय में किसी बात पर गर्व किया तो मुझे लज्‍जित नहीं होना पड़ा, बल्कि जैसे हमने तुमसे सब कुछ सच-सच कहा था, वैसे ही तीतुस के सामने हमारा गर्व करना भी सच निकला। जब वह तुम सब की आज्ञाकारिता को स्मरण करता है कि तुमने कैसे डरते और काँपते हुए उसे ग्रहण किया तो उसका प्रेम तुम्हारे प्रति और भी बढ़ता जाता है। मैं आनंदित हूँ कि प्रत्येक बात में मुझे तुम पर भरोसा है। हे भाइयो, अब हम तुम्हें परमेश्‍वर के उस अनुग्रह के विषय में बताते हैं जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ कि क्लेश की कठिन परीक्षा में उनका अपार आनंद और घोर दरिद्रता में उनकी बड़ी उदारता उमड़ पड़ी। मैं साक्षी देता हूँ कि उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार, बल्कि क्षमता से भी बढ़कर स्वेच्छा से दिया, और बड़े उत्साह के साथ हमसे विनती करते रहे कि उन्हें पवित्र लोगों की सेवा में सहभागी होने का अवसर मिले, और जैसी हमने आशा की वैसी ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने आपको परमेश्‍वर की इच्छा से पहले प्रभु के लिए और फिर हमारे लिए सौंप दिया। इसलिए हमने तीतुस से आग्रह किया कि जैसे उसने यह दान का कार्य आरंभ किया, वैसे ही तुम्हारे बीच उसे पूरा भी करे। अब जैसे तुम प्रत्येक बात में, अर्थात् विश्‍वास, वचन, ज्ञान, हर प्रकार के उत्साह, और उस प्रेम में जो हमारा तुम्हारे लिए है भरपूर होते जाते हो, वैसे ही इस दान के कार्य में भी भरपूर होते जाओ। मैं यह आज्ञा के रूप में नहीं बल्कि दूसरों के उत्साह के द्वारा तुम्हारे प्रेम की सच्‍चाई को भी परखते हुए कहता हूँ। तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह को तो जानते हो कि वह धनवान होने पर भी तुम्हारे लिए निर्धन बना ताकि तुम उसकी निर्धनता के द्वारा धनवान हो जाओ। मैं इस विषय में एक सलाह देता हूँ: यह तुम्हारे लिए अर्थात् उनके लिए लाभदायक है, जिन्होंने पिछले वर्ष से केवल यह कार्य करना ही नहीं बल्कि इसकी इच्छा रखना भी आरंभ किया। अब इस कार्य को पूरा भी करो ताकि जैसे तुम इसकी इच्छा रखने में उत्सुक थे, वैसे ही जो तुम्हारे पास है उसी में से इसे पूरा भी कर सको। क्योंकि यदि कोई दान देने को उत्सुक हो, तो जो उसके पास है उसी के अनुसार वह दान ग्रहणयोग्य होता है, न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं है। इसका अर्थ दूसरों को चैन और तुम्हें कष्‍ट देने से नहीं, बल्कि समानता से है। इस वर्तमान समय में तुम्हारी बहुतायत उनके अभाव में काम आए, ताकि उनकी बहुतायत भी तुम्हारे अभाव में काम आए, जिससे समानता उत्पन्‍न‍ हो; जैसा लिखा है: जिसने अधिक बटोरा उसके पास बहुत अधिक न हुआ, और जिसने कम बटोरा उसे कुछ घटी न हुई। परंतु परमेश्‍वर का धन्यवाद हो जिसने तीतुस के मन में तुम्हारे लिए ऐसा ही उत्साह उत्पन्‍न‍ किया है, क्योंकि उसने हमारा आग्रह स्वीकार किया और बहुत उत्साही होकर स्वेच्छा से तुम्हारे पास आ रहा है। हम उसके साथ उस भाई को भेज रहे हैं जिसकी प्रशंसा सुसमाचार प्रचार के संबंध में सब कलीसियाओं में की जाती है, और इतना ही नहीं, बल्कि कलीसियाओं के द्वारा उसे नियुक्‍त भी किया गया है कि इस दान को लेकर हमारे साथ यात्रा करे; इस सेवाकार्य को हम स्वयं प्रभु की महिमा और अपनी तत्परता को प्रकट करने के लिए कर रहे हैं। हम इस बात से सावधान रहते हैं कि हमारे द्वारा इस उदारता के दान की सेवा के विषय में हम पर कोई दोष न लगाए; क्योंकि हम उन बातों पर ध्यान देते हैं जो केवल प्रभु की दृष्‍टि में ही नहीं बल्कि मनुष्यों की दृष्‍टि में भी भली हैं। हम उनके साथ अपने भाई को भी भेज रहे हैं जिसको हमने बार-बार परखा है और बहुत सी बातों में उत्साही पाया है और अब तुम पर बहुत भरोसा करने के कारण उसका उत्साह और भी अधिक बढ़ गया है। यदि तीतुस के विषय में कहूँ, तो वह मेरा साथी और तुम्हारे लिए मेरा सहकर्मी है। यदि हमारे भाइयों के विषय में कहूँ, तो वे कलीसियाओं के दूत और मसीह की महिमा हैं। अतः कलीसियाओं के सामने उन्हें अपने प्रेम का प्रमाण दो और उस गर्व का भी जो हम तुम पर करते हैं। यह आवश्यक नहीं कि जो सेवा पवित्र लोगों के लिए की जाती है उसके विषय में मैं तुम्हें लिखूँ, क्योंकि मैं तुम्हारी उत्सुकता को जानता हूँ और मकिदुनिया के लोगों के सामने तुम्हारे विषय में गर्व करता हूँ कि अखाया के लोग पिछले वर्ष से तैयार हैं, और तुम्हारे उत्साह ने बहुतों को प्रेरित किया है। परंतु मैं भाइयों को इसलिए भेज रहा हूँ कि इस विषय में तुम्हारे प्रति हमारा गर्व व्यर्थ न ठहरे, और यह कि तुम वैसे ही तैयार रहो, जैसा कि मैं कहता आया हूँ; ऐसा न हो कि जब कुछ मकिदुनियावासी मेरे साथ आएँ और तुम्हें तैयार न पाएँ, तो इस भरोसे के कारण हमें (यह नहीं कहता कि “तुम्हें”) लज्‍जित होना पड़े। इसलिए मैंने भाइयों से यह आग्रह करना आवश्यक समझा कि वे पहले से तुम्हारे पास आकर तुम्हारी उस उदार भेंट का प्रबंध कर लें जिसकी प्रतिज्ञा तुमने पहले से की थी; और यह भेंट उदारता से तैयार रहे न कि दबाव से। स्मरण रखो, जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा ही काटेगा और जो बहुत बोता है वह बहुत काटेगा। प्रत्येक जन वैसा ही दान करे जैसा उसने अपने मन में निश्‍चित किया है, न तो अनिच्छा से और न ही विवश होकर; क्योंकि परमेश्‍वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है। परमेश्‍वर तुम्हें सब प्रकार का अनुग्रह बहुतायत से देने में समर्थ है, जिससे तुम सदैव हर बात में संपन्‍न रहो कि हर भले कार्य के लिए तुम्हारे पास बहुतायत से हो, जैसा लिखा है: उसने बिखेरा, उसने दरिद्रों को दिया, उसकी धार्मिकता सदा बनी रहती है। अब जो बोनेवाले को बीज और भोजन के लिए रोटी देता है, वही तुम्हें बीज देगा और उसे बढ़ाएगा और तुम्हारी धार्मिकता की उपज में वृद्धि करेगा। तुम उस संपूर्ण उदारता के लिए हर बात में धनी किए जाओगे, जो हमारे द्वारा परमेश्‍वर के प्रति धन्यवाद उत्पन्‍न‍ करती है; क्योंकि यह सेवाकार्य न केवल पवित्र लोगों के अभावों को पूरा करता है, बल्कि परमेश्‍वर को बहुत धन्यवाद देने के द्वारा इसकी वृद्धि भी होती है। इस सेवा को प्रमाण मानकर कि तुम अधीनता के साथ मसीह के सुसमाचार का अंगीकार करते हो तथा उनके और सब के लिए उदारता से दान देते हो, वे परमेश्‍वर की महिमा करेंगे; और तुम पर हुए परमेश्‍वर के अपार अनुग्रह के कारण वे तुम्हारे लिए प्रार्थना करने के साथ-साथ तुम्हारी लालसा करेंगे। परमेश्‍वर का उसके उस दान के लिए धन्यवाद हो, जो वर्णन से बाहर है! अब मैं, पौलुस, जो तुम्हारे बीच होने पर तो दीन परंतु न होने पर तुम्हारे प्रति साहसी हूँ, स्वयं मसीह की नम्रता और कोमलता में तुमसे आग्रह करता हूँ। मेरी यह विनती है कि जब मैं आऊँ तो मुझे दृढ़ निश्‍चय के साथ ऐसा साहस दिखाना न पड़े जैसा साहस मैं उनके प्रति दिखाने के लिए सोचता हूँ जो हमें शरीर के अनुसार चलनेवाले समझते हैं। यद्यपि हम शरीर में चलते-फिरते हैं, फिर भी शरीर के अनुसार युद्ध नहीं करते, क्योंकि हमारे युद्ध के हथियार शारीरिक नहीं बल्कि परमेश्‍वर द्वारा सामर्थी हैं जिनसे हम गढ़ों को ध्वस्त करते, और परमेश्‍वर के ज्ञान के विरुद्ध उठनेवाले तर्क-वितर्कों और प्रत्येक ऊँची बात का खंडन करते हैं, और प्रत्येक विचार को बंदी बनाकर मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं; और तैयार रहते हैं कि जब तुम्हारी आज्ञाकारिता पूरी हो जाए, तो सब प्रकार के आज्ञा-उल्‍लंघन को दंडित करें। तुम वही देखते हो जो तुम्हारी आँखों के सामने है। यदि किसी को अपने पर यह भरोसा हो कि वह मसीह का है, तो वह स्वयं इस बात पर भी विचार करे कि जैसे वह मसीह का है वैसे ही हम भी हैं। यदि मैं उस अधिकार के विषय में कुछ अधिक गर्व करूँ, जो प्रभु ने तुम्हारे विनाश के लिए नहीं बल्कि उन्‍नति के लिए हमें दिया है, तो मैं लज्‍जित नहीं होऊँगा। कहीं तुम्हें ऐसा न लगे कि मैं अपने पत्रों के द्वारा तुम्हें डरा रहा हूँ; क्योंकि कोई तो कहता है, “उसके पत्र तो गंभीर और प्रभावशाली होते हैं, परंतु उसकी व्यक्‍तिगत उपस्थिति प्रभावहीन और उसका प्रवचन व्यर्थ है।” ऐसा व्यक्‍ति यह समझ ले, कि अनुपस्थित होने पर अपने पत्रों में जैसा हम लिखते हैं, उपस्थित होने पर अपने कार्यों में भी हम वैसे ही हैं। हम उनके साथ अपनी गिनती या तुलना करने का साहस नहीं करते जो अपनी ही प्रशंसा करते हैं; परंतु जब वे स्वयं से अपने को नापते और स्वयं से ही अपनी तुलना करते हैं तो नासमझ ठहरते हैं। परंतु हम अपनी मर्यादा से बाहर गर्व नहीं करेंगे, बल्कि अपने कार्यक्षेत्र की उस सीमा के भीतर ही गर्व करेंगे जो परमेश्‍वर ने हमारे लिए निर्धारित की है, और उसमें तुम भी हो। हम अपनी सीमा से बाहर नहीं जा रहे मानो तुम तक पहुँचे ही न हों, परंतु हम तो मसीह का सुसमाचार लेकर तुम तक पहुँच चुके हैं। हम मर्यादा से बाहर दूसरों के परिश्रम पर गर्व नहीं करते, परंतु हमारी आशा है कि तुम्हारा विश्‍वास बढ़ता जाए और तुम्हारे द्वारा हमारा कार्यक्षेत्र और भी फैलता जाए, ताकि हम तुम्हारे क्षेत्रों से बाहर सुसमाचार सुनाएँ, न कि दूसरों के कार्यक्षेत्र में किए गए कार्यों पर गर्व करें। परंतु जो गर्व करे, वह प्रभु में गर्व करे। क्योंकि जो अपनी प्रशंसा करता है वह नहीं, बल्कि जिसकी प्रशंसा प्रभु करता है, वही ग्रहणयोग्य होता है। भला होता कि तुम मेरी थोड़ी सी मूर्खता सह लेते; बल्कि तुम मेरी सह भी रहे हो। मैं तुम्हारे लिए ईश्‍वरीय धुन लगाए रहता हूँ, क्योंकि मैंने तुम्हारी बात एक ही पुरुष अर्थात् मसीह से लगाई है कि तुम्हें एक पवित्र कुँवारी के समान उसे सौंप दूँ। परंतु मुझे डर है, जैसे साँप ने अपनी चतुराई से हव्वा को बहकाया, वैसे ही कहीं तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से भटक न जाएँ, जो मसीह में है। क्योंकि यदि कोई आकर किसी अन्य यीशु का प्रचार करे जिसका प्रचार हमने नहीं किया था, या तुम्हें कोई और आत्मा मिले जो पहले नहीं मिली थी, या कोई और सुसमाचार जिसे तुमने ग्रहण नहीं किया था, तो तुम उसे भली-भाँति सह लेते हो। मैं अपने आपको उन महाप्रेरितों से किसी भी प्रकार से कम नहीं समझता; यद्यपि मैं बोलने में निपुण नहीं, फिर भी ज्ञान में तो हूँ, बल्कि हमने इसे सब बातों में हर प्रकार से तुम पर प्रकट किया है। क्या मैंने तुम्हें ऊँचा उठाने के लिए अपने आपको दीन करके और मुफ़्त में तुम्हें परमेश्‍वर का सुसमाचार सुनाकर कोई पाप किया? मैंने अन्य कलीसियाओं से मज़दूरी लेकर मानो उन्हें लूटा है कि तुम्हारी सेवा कर सकूँ, और जब मैं तुम्हारे साथ था तो घटी होने पर भी किसी पर बोझ नहीं बना, क्योंकि मकिदुनिया से आए भाइयों ने मेरी घटी को पूरा किया था। मैंने किसी भी प्रकार से स्वयं को तुम पर बोझ बनने न दिया, और न बनने दूँगा। जबकि मसीह की सच्‍चाई मुझमें है, तो अखाया क्षेत्र में कोई भी मुझे इस बात पर गर्व करने से रोक नहीं सकेगा। क्यों? क्या इसलिए कि मैं तुमसे प्रेम नहीं रखता? परमेश्‍वर जानता है। मैं जो कर रहा हूँ वही करता रहूँगा ताकि मैं उनको यह घमंड करने का अवसर न दूँ कि वे हमारे ही समान हैं; वे ऐसे ही अवसर को खोज रहे हैं। क्योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित और छल से कार्य करनेवाले हैं, और मसीह के प्रेरित होने का ढोंग रचते हैं। इसमें कोई आश्‍चर्य नहीं, क्योंकि स्वयं शैतान भी ज्योतिर्मय स्वर्गदूत होने का ढोंग रचता है। इसलिए यदि उसके सेवक भी धार्मिकता के सेवक होने का ढोंग रचते हैं तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं; उनका अंत उनके कार्यों के अनुसार ही होगा। मैं फिर से कहता हूँ कि कोई मुझे मूर्ख न समझे; परंतु यदि तुम ऐसा समझते हो तो मुझे मूर्ख समझकर ही ग्रहण कर लो ताकि मैं भी कुछ गर्व कर सकूँ। मैं जो कुछ कहता हूँ वह प्रभु की ओर से नहीं, पर मानो मूर्खता में बेधड़क होकर गर्व के साथ कहता हूँ। जब बहुत से लोग शरीर के अनुसार घमंड करते हैं, तो मैं भी घमंड करूँगा। तुम इतने बुद्धिमान हो कि आनंद से मूर्खों की सह लेते हो। क्योंकि जब कोई तुम्हें दास बना लेता है, या लूट लेता है, या तुमसे अनुचित लाभ उठाता है, या अपने आपको बड़ा बनाता है, या तुम्हारे मुँह पर थप्पड़ मारता है, तो तुम उसकी सह लेते हो। मैं लज्‍जा के साथ कहता हूँ कि हम निर्बल ही रहे हैं। परंतु जिस किसी बात में कोई साहस रखता है—मैं मूर्खता से कहता हूँ—तो मैं भी उतना ही साहस रखता हूँ। क्या वे इब्रानी हैं? मैं भी हूँ। क्या वे इस्राएली हैं? मैं भी हूँ। क्या वे अब्राहम के वंशज हैं? मैं भी हूँ। क्या वे मसीह के सेवक हैं? मैं एक पागल के समान कहता हूँ कि मैं उनसे बढ़कर हूँ; अधिक परिश्रम करने में, बहुत बार बंदी बनाए जाने में, अत्यधिक मार खाने में, और बार-बार मृत्यु के जोखिम में। मैंने पाँच बार यहूदियों से उनतालीस-उनतालीस कोड़े खाए। तीन बार मुझे बेंतों से पीटा गया, एक बार मुझ पर पथराव हुआ, तीन बार मेरा जहाज़ दुर्घटनाग्रस्त हुआ, मैंने एक रात और एक दिन समुद्र में काटा। मैं बार-बार यात्राओं में, नदियों के खतरों में, डाकुओं के खतरों में, अपनी ही जाति के लोगों से उत्पन्‍न‍ खतरों में, गैरयहूदियों से उत्पन्‍न‍ खतरों में, नगर के खतरों में, जंगल के खतरों में, समुद्र के खतरों में, झूठे भाइयों के खतरों में रहा। मैंने परिश्रम और कष्‍ट में, रात-रात भर जागने में, भूख और प्यास में, बार-बार निराहार रहने में, ठंड में और उघाड़े रहने में समय बिताया है। इनके साथ-साथ और भी बातें हैं, इन सब के अतिरिक्‍त प्रतिदिन सब कलीसियाओं की चिंता मुझे दबाए रखती है। कौन है जिसकी निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? कौन है जिसके ठोकर खाने से मेरा जी नहीं जलता? यदि गर्व करना ही है तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर गर्व करूँगा। परमेश्‍वर और प्रभु यीशु का पिता जो सदा-सर्वदा धन्य है, जानता है कि मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। दमिश्क में राजा अरितास के राज्यपाल ने मुझे पकड़ने के लिए दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था, तब मुझे एक टोकरे में बैठाकर शहरपनाह की एक खिड़की से नीचे उतार दिया गया और मैं उसके हाथों से बच निकला। अब मुझे गर्व करना ही होगा। यद्यपि इससे लाभ नहीं, फिर भी मैं प्रभु के दर्शनों और प्रकाशनों की चर्चा करूँगा। मैं मसीह में एक ऐसे मनुष्य को जानता हूँ जो चौदह वर्ष पहले तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया, न जाने देह-सहित या देह-रहित, परमेश्‍वर ही जानता है; और मैं जानता हूँ कि यही मनुष्य, न जाने देह-सहित या देह-रहित, परमेश्‍वर जानता है, स्वर्गलोक पर उठा लिया गया, और उसने ऐसी बातें सुनीं जो वर्णन से बाहर है, और जिन्हें बोलने की अनुमति मनुष्य को नहीं। ऐसे मनुष्य पर तो मैं गर्व करूँगा, परंतु अपनी निर्बलताओं को छोड़ मैं अपने आप पर गर्व न करूँगा। यदि मैं गर्व करना भी चाहूँ, तो मूर्ख न ठहरूँगा, क्योंकि मैं सच ही कहूँगा। परंतु मैं ऐसा नहीं करूँगा ताकि कोई मुझे उससे बढ़कर न समझे जैसा वह मुझे देखता या मुझसे सुनता है; और प्रकाशनों की अधिकता के कारण कहीं मैं घमंड न करने लगूँ, इसलिए मेरी देह में एक काँटा चुभाया गया है, अर्थात् शैतान का एक दूत कि वह मुझे घूँसे मारे, ताकि मैं घमंड न करूँ। इस विषय में मैंने प्रभु से तीन बार विनती की कि वह मुझसे दूर हो जाए; परंतु उसने मुझसे कहा, “मेरा अनुग्रह तेरे लिए पर्याप्‍त है, क्योंकि मेरा सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होता है।” अतः मैं बड़े हर्ष के साथ अपनी निर्बलताओं पर और भी अधिक गर्व करूँगा, ताकि मसीह का सामर्थ्य मुझ पर बना रहे। इस कारण मसीह के लिए मैं निर्बलताओं में, अपमानों में, कठिनाइयों में, सतावों और विपत्तियों में प्रसन्‍न हूँ; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी बलवान होता हूँ। मैं मूर्ख बन गया हूँ, तुमने ही मुझे इसके लिए विवश किया है; वास्तव में तुम्हें तो मेरी प्रशंसा करनी चाहिए थी। यद्यपि मैं कुछ भी नहीं हूँ, फिर भी उन महाप्रेरितों से किसी भी प्रकार से कम नहीं हूँ। प्रेरित होने के लक्षण भी तुम्हारे बीच चिह्‍नों, अद्भुत कार्यों और सामर्थ्य के कार्यों के द्वारा बड़े धीरज के साथ प्रदर्शित किए गए। किस बात में तुम अन्य कलीसियाओं से कम थे, केवल इसमें कि मैं तुम पर बोझ न बना? मेरी इस भूल को क्षमा करो। देखो, मैं तीसरी बार तुम्हारे पास आने को तैयार हूँ, और मैं तुम पर बोझ नहीं बनूँगा; क्योंकि मैं तुम्हारी वस्तुओं को नहीं बल्कि तुम्हें चाहता हूँ। बच्‍चों को माता-पिता के लिए नहीं बल्कि माता-पिता को बच्‍चों के लिए धन इकट्ठा करना चाहिए। मैं तुम्हारी आत्माओं के लिए बड़े हर्ष के साथ खर्च करूँगा और स्वयं भी खर्च हो जाऊँगा। यदि मैं तुमसे अधिक प्रेम रखता हूँ, तो क्या मुझसे कम प्रेम रखा जाएगा? ठीक है, मैंने तुम पर बोझ नहीं डाला; फिर भी कोई कहता है कि मैं चालाक हूँ और मैंने छल से तुम्हें फँसा लिया। मैंने जिनको तुम्हारे पास भेजा था, क्या उनके द्वारा मैंने तुमसे कोई अनुचित लाभ उठाया? मैंने तीतुस से जाने का आग्रह किया और उसके साथ एक भाई को भी भेजा। क्या तीतुस ने तुमसे कोई अनुचित लाभ उठाया? क्या हम उसी आत्मा में नहीं चले? क्या हम उन्हीं पद-चिह्‍नों पर नहीं चले? क्या तुम अब तक यही सोच रहे हो कि हम तुम्हारे सामने अपना बचाव कर रहे हैं? हम परमेश्‍वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं; और हे प्रियो, यह सब तुम्हारी ही उन्‍नति के लिए है। मुझे डर है, कहीं ऐसा न हो कि जब मैं तुम्हारे पास आऊँ तो तुम्हें वैसा पाऊँ जैसा मैं नहीं चाहता, और तुम भी मुझे वैसा पाओ जैसा तुम नहीं चाहते; ऐसा न हो कि तुममें झगड़े, ईर्ष्या, क्रोध, स्वार्थ, निंदा, चुगली, अहंकार और उपद्रव हों। मुझे डर है, कहीं ऐसा न हो कि जब मैं फिर से आऊँ तो मेरा परमेश्‍वर मुझे तुम्हारे सामने लज्‍जित करे, और मैं उन बहुतों के लिए शोक करूँ जिन्होंने पाप किया है और अपनी अशुद्धता, व्यभिचार और कामुकता के कार्यों से पश्‍चात्ताप नहीं किया। यह तीसरी बार है जब मैं तुम्हारे पास आ रहा हूँ; हर बात की पुष्‍टि दो या तीन गवाहों के मुँह से की जाएगी। जब मैं दूसरी बार तुम्हारे मध्य था तो मैंने तुमसे कहा था, और अब जबकि मैं अनुपस्थित हूँ तो उनसे जिन्होंने पहले पाप किया था और बाकी सब लोगों से भी कह देता हूँ कि यदि मैं फिर से आऊँ तो किसी को न छोड़ूँगा। क्योंकि तुम तो इसका प्रमाण चाहते हो कि मसीह मेरे द्वारा बोलता है, और वह तुम्हारे लिए निर्बल नहीं बल्कि तुम्हारे बीच सामर्थी है। वास्तव में वह निर्बलता में क्रूस पर चढ़ाया तो गया, फिर भी परमेश्‍वर के सामर्थ्य से जीवित है। हम भी उसमें निर्बल तो हैं, परंतु परमेश्‍वर के उस सामर्थ्य से जो तुम्हारे लिए है, हम उसके साथ जीएँगे। अपने आपको परखो कि तुम विश्‍वास में हो या नहीं। अपने आपको जाँचो! या क्या तुम अपने विषय में नहीं जानते कि यीशु मसीह तुममें है? यदि नहीं तो तुम निकम्मे हो। परंतु मैं आशा करता हूँ कि तुम यह जान लोगे कि हम निकम्मे नहीं हैं। अब हम परमेश्‍वर से प्रार्थना करते हैं कि तुम कोई बुराई न करो; इसलिए नहीं कि हम खरे दिखाई दें बल्कि इसलिए कि तुम वही करो जो अच्छा है, भले ही हम निकम्मे क्यों न ठहरें। क्योंकि हम सत्य के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते, बल्कि सत्य के लिए ही कर सकते हैं। जब हम निर्बल और तुम बलवान होते हो तो हम आनंदित होते हैं; और यह प्रार्थना भी करते हैं कि तुम सिद्ध हो जाओ। इस कारण अनुपस्थित होते हुए भी मैं ये बातें लिख रहा हूँ, ताकि जब मैं तुम्हारे पास आऊँ तो मुझे उस अधिकार का प्रयोग कठोरता से न करना पड़े जिसे प्रभु ने मुझे तुम्हारे विनाश के लिए नहीं बल्कि उन्‍नति के लिए दिया है। अंततः हे भाइयो, आनंदित रहो, सिद्ध होते जाओ, प्रोत्साहित रहो, एक मन रखो, मेल-मिलाप से रहो; और प्रेम तथा शांति का परमेश्‍वर तुम्हारे साथ रहेगा। पवित्र चुंबन से एक दूसरे का अभिवादन करो। सब पवित्र लोग तुम्हें नमस्कार कहते हैं। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्‍वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो न तो मनुष्यों की ओर से और न किसी मनुष्य के द्वारा बल्कि यीशु मसीह और उस परमेश्‍वर पिता के द्वारा प्रेरित नियुक्‍त किया गया जिसने यीशु को मृतकों में से जिलाया, और उन सब भाइयों की ओर से जो मेरे साथ हैं, गलातिया की कलीसियाओं के नाम: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले, जिसने हमारे परमेश्‍वर और पिता की इच्छा के अनुसार अपने आपको हमारे पापों के लिए दे दिया कि हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ा ले। उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। मुझे आश्‍चर्य होता है कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह में बुलाया उससे इतने शीघ्र फिरकर तुम किसी और ही सुसमाचार की ओर जा रहे हो। वास्तव में दूसरा सुसमाचार तो है ही नहीं; परंतु कुछ लोग हैं जो तुम्हें विचलित करते हैं और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परंतु यदि हम या स्वर्ग का कोई दूत भी उस सुसमाचार के विपरीत जो हमने तुम्हें सुनाया है, कोई अन्य सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो वह शापित हो। जैसा हम पहले भी कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर से कहता हूँ: यदि कोई उस सुसमाचार के विपरीत जो तुमने ग्रहण किया है, कोई अन्य सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो वह शापित हो। अब क्या मैं मनुष्यों की कृपा पाने का प्रयास कर रहा हूँ या परमेश्‍वर की? या फिर, क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्‍न करना चाहता हूँ? यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्‍न करता रहता तो मसीह का दास न होता। हे भाइयो, मैं तुम्हें यह बता देता हूँ कि जो सुसमाचार मैंने तुम्हें सुनाया वह किसी मनुष्य का नहीं है; क्योंकि न तो मुझे वह किसी मनुष्य से प्राप्‍त हुआ और न ही मुझे सिखाया गया, बल्कि मुझे वह यीशु मसीह के प्रकाशन के द्वारा प्राप्‍त हुआ है। यहूदी धर्म में मेरे पूर्व आचरण के बारे में तो तुमने सुना ही है कि मैं परमेश्‍वर की कलीसिया को अत्यधिक सताया और नष्‍ट किया करता था। मैं यहूदी धर्म में अपने लोगों के बीच उन बहुतों से अधिक प्रगति कर रहा था जो उस समय मेरी आयु के थे, और मैं अपने पूर्वजों की परंपराओं के प्रति अत्यंत उत्साही था। परंतु जब परमेश्‍वर को, जिसने मुझे मेरी माता के गर्भ से ही अलग किया और अपने अनुग्रह के द्वारा बुलाया, यह अच्छा लगा कि वह मुझमें अपने पुत्र को प्रकट करे ताकि मैं गैरयहूदियों के बीच उसका सुसमाचार सुनाऊँ, तो मैंने न तो मांस और लहू से सलाह ली, और न मैं यरूशलेम में उनके पास गया जो मुझसे पहले से प्रेरित थे, बल्कि तुरंत मैं अरब को चला गया और फिर से दमिश्क को लौट आया। फिर तीन वर्ष के बाद मैं कैफा से मिलने यरूशलेम गया और उसके साथ पंद्रह दिन रहा, परंतु प्रभु के भाई याकूब को छोड़ अन्य किसी प्रेरित से नहीं मिला। जो कुछ मैं तुम्हें लिख रहा हूँ, देखो, परमेश्‍वर को उपस्थित जानकर कहता हूँ कि उसमें झूठ नहीं। इसके बाद मैं सीरिया और किलिकिया के क्षेत्रों में गया; परंतु यहूदिया की कलीसियाओं ने जो मसीह में हैं, मुझे कभी नहीं देखा था। वे केवल यही सुना करती थीं: “जो पहले हमें सताता था अब वह उसी विश्‍वास का सुसमाचार सुनाता है जिसे कभी नाश करने का प्रयास करता था।” और वे मेरे कारण परमेश्‍वर की महिमा करती थीं। तब चौदह वर्ष के बाद मैं बरनाबास के साथ फिर यरूशलेम गया, और तीतुस को भी साथ ले गया। मैं ईश्‍वरीय प्रकाशन के कारण वहाँ गया था; और जो सुसमाचार मैं गैरयहूदियों के बीच प्रचार करता हूँ, वही मैंने उनके सामने प्रस्तुत किया, परंतु एकांत में केवल प्रतिष्‍ठित लोगों के सामने ही, ताकि ऐसा न हो कि मेरी इस समय की या पिछली दौड़-धूप व्यर्थ ठहरे। परंतु किसी ने तीतुस को जो मेरे साथ था यूनानी होने पर भी ख़तना कराने के लिए विवश नहीं किया। यह प्रश्‍न उन झूठे भाइयों के कारण उठा जो चोरी से घुस आए थे कि मसीह यीशु में प्राप्‍त हमारी स्वतंत्रता का भेद लेकर हमें दास बनाएँ। हमने एक घड़ी के लिए भी उनकी अधीनता स्वीकार नहीं की ताकि सुसमाचार की सच्‍चाई तुममें बनी रहे। परंतु जो प्रतिष्‍ठित समझे जाते थे (वे जो भी थे, मेरे लिए इसका कोई महत्त्व नहीं, परमेश्‍वर किसी का पक्षपात नहीं करता), उन्होंने मुझे और कोई निर्देश नहीं दिया। इसके विपरीत, यह देखकर कि जैसे पतरस को ख़तना किए हुए लोगों के लिए, वैसे ही मुझे ख़तनारहित लोगों के लिए सुसमाचार का कार्य सौंपा गया है (क्योंकि जिसने ख़तना किए हुए लोगों का प्रेरित होने के लिए पतरस में कार्य किया, उसी ने गैरयहूदियों के लिए मुझमें भी कार्य किया), और मुझे दिए गए अनुग्रह को पहचानकर याकूब और कैफा और यूहन्‍ना ने, जो कलीसिया के स्तंभ समझे जाते हैं, मुझे और बरनाबास को संगति का दाहिना हाथ दिया कि हम गैरयहूदियों में, और वे ख़तना किए हुए लोगों में कार्य करें। उन्होंने केवल यह कहा कि हम कंगालों को स्मरण रखें, और यही करने के लिए मैं भी उत्सुक रहा हूँ। परंतु जब कैफा अंताकिया आया तो मैंने उसके मुँह पर उसका विरोध किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था। क्योंकि याकूब की ओर से कुछ लोगों के आने से पहले वह गैरयहूदियों के साथ खाया करता था, परंतु जब वे आए तो ख़तना किए हुए लोगों के डर से वह पीछे हटने और किनारा करने लगा। फिर बाकी यहूदियों ने भी इस पाखंड में उसका साथ दिया, यहाँ तक कि बरनाबास भी उनके इस पाखंड के कारण बहक गया। परंतु जब मैंने देखा कि वे सुसमाचार की सच्‍चाई पर सीधी चाल नहीं चल रहे हैं, तो मैंने सब के सामने कैफा से कहा, “यदि तू यहूदी होकर यहूदियों के समान नहीं परंतु गैरयहूदियों के समान आचरण करता है, तो तू गैरयहूदियों को यहूदियों के समान आचरण करने के लिए कैसे विवश कर सकता है?” हम तो जन्म से यहूदी हैं, गैरयहूदी पापियों में से नहीं। फिर भी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कार्यों से नहीं परंतु केवल यीशु मसीह पर विश्‍वास करने के द्वारा धर्मी ठहराया जाता है, हमने भी मसीह यीशु पर विश्‍वास किया है, ताकि हम व्यवस्था के कार्यों से नहीं परंतु मसीह पर विश्‍वास करने से धर्मी ठहराए जाएँ, क्योंकि व्यवस्था के कार्यों से कोई भी मनुष्य धर्मी नहीं ठहराया जाएगा। अब हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि स्वयं ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं! यदि मैं उन वस्तुओं को फिर से बनाऊँ जिन्हें मैंने नष्‍ट कर दिया था, तो अपने आपको अपराधी ठहराता हूँ। मैं व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिए मर गया कि मैं परमेश्‍वर के लिए जीऊँ। मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ; अब मैं जीवित नहीं रहा, परंतु मसीह मुझमें जीवित है। अब जो मैं शरीर में जीवित हूँ तो उस विश्‍वास के द्वारा जीवित हूँ जो परमेश्‍वर के पुत्र पर है जिसने मुझसे प्रेम रखा और अपने आपको मेरे लिए दे दिया। मैं परमेश्‍वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता; क्योंकि यदि धार्मिकता व्यवस्था के द्वारा होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता। हे निर्बुद्धि गलातियो, तुम्हें किसने मोह लिया? तुम्हारी आँखों के सामने ही तो मानो यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया हुआ दिखाया गया था। मैं तुमसे केवल यही जानना चाहता हूँ कि तुमने आत्मा को क्या व्यवस्था के कार्यों से पाया था, या विश्‍वास सहित सुनने से? क्या तुम इतने निर्बुद्धि हो कि आत्मा के द्वारा आरंभ करके अब शरीर के द्वारा पूरा करोगे? क्या तुमने व्यर्थ ही इतने दुःख उठाए? सचमुच वे व्यर्थ नहीं थे। अतः जो तुम्हें आत्मा प्रदान करता है और तुममें सामर्थ्य के कार्य करता है, क्या वह व्यवस्था के कार्यों से ऐसा करता है या तुम्हारे विश्‍वास सहित सुनने से? अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया और यह उसके लिए धार्मिकता गिना गया। इसलिए यह जान लो कि जो विश्‍वास करनेवाले हैं, वे अब्राहम के पुत्र हैं। पवित्रशास्‍त्र ने पहले ही से यह जानकर कि परमेश्‍वर विश्‍वास के द्वारा गैरयहूदियों को धर्मी ठहराएगा, पहले से ही अब्राहम को यह सुसमाचार सुना दिया, सब जातियाँ तुझमें आशिष पाएँगी। इसलिए, जो विश्‍वास करनेवाले हैं, वे विश्‍वासी अब्राहम के साथ आशिष पाते हैं। परंतु जितने व्यवस्था के कार्यों पर निर्भर रहते हैं, वे शाप के अधीन हैं, क्योंकि लिखा है: शापित है वह जो व्यवस्था की पुस्तक में लिखी हुई सब बातों का पालन नहीं करता। अब स्पष्‍ट है कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्‍वर की दृष्‍टि में कोई भी धर्मी नहीं ठहरता, क्योंकि धर्मी जन विश्‍वास से जीवित रहेगा। परंतु व्यवस्था विश्‍वास पर आधारित नहीं है, बल्कि जो उनका पालन करेगा वह उनके द्वारा जीवित रहेगा। मसीह ने हमारे लिए शाप बनकर हमें व्यवस्था के शाप से छुड़ाया (क्योंकि लिखा है: शापित है वह जो काठ पर लटकाया जाता है। ), ताकि अब्राहम की आशिष मसीह यीशु में गैरयहूदियों तक पहुँचे, और हम विश्‍वास के द्वारा उस आत्मा को प्राप्‍त करें जिसकी प्रतिज्ञा की गई है। हे भाइयो, मैं मानवीय रीति पर कह रहा हूँ, मनुष्य का अनुबंध भी जब पक्‍का हो जाता है तो न कोई उसे रद्द करता है और न उसमें कुछ जोड़ता है। अब प्रतिज्ञाएँ अब्राहम और उसके वंशज से की गई थीं। वह यह नहीं कहता “और वंशजों से,” मानो बहुतों के विषय में हो बल्कि और तेरे वंशज से, मानो एक के विषय में, जो मसीह है। मेरे कहने का अर्थ यह है कि जिस वाचा को परमेश्‍वर ने पहले से ही पक्‍का कर दिया था, उसको चार सौ तीस वर्ष के बाद आई व्यवस्था रद्द नहीं कर सकती कि प्रतिज्ञा को व्यर्थ ठहराए; क्योंकि यदि उत्तराधिकार व्यवस्था से है तो फिर प्रतिज्ञा से नहीं हो सकता, परंतु परमेश्‍वर ने अब्राहम को यह प्रतिज्ञा के द्वारा दिया है। फिर व्यवस्था क्यों दी गई? वह अपराधों के कारण बाद में दी गई कि उस वंशज के आने तक रहे जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी; और वह स्वर्गदूतों के द्वारा एक मध्यस्थ के हाथ ठहराई गई। अब मध्यस्थ तो एक पक्ष का नहीं होता, परंतु परमेश्‍वर एक ही है। तो क्या व्यवस्था परमेश्‍वर की प्रतिज्ञाओं के विरुद्ध है? कदापि नहीं! क्योंकि यदि ऐसी व्यवस्था दी गई होती जो जीवन प्रदान कर सकती थी तो वास्तव में धार्मिकता व्यवस्था से होती। परंतु पवित्रशास्‍त्र ने सब को पाप के अधीन कर दिया ताकि वह प्रतिज्ञा जो यीशु मसीह पर विश्‍वास करने के द्वारा है, विश्‍वास करनेवालों को दी जाए। परंतु विश्‍वास के आने से पहले हम व्यवस्था की अधीनता में रखे गए थे और आने वाले विश्‍वास के प्रकट होने तक उसी के बंधन में रहे। इस प्रकार मसीह तक पहुँचाने के लिए व्यवस्था हमारी शिक्षक बनी, ताकि हम विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाएँ। परंतु जब विश्‍वास आ गया है तो अब हम शिक्षक के अधीन नहीं रहे। तुम सब मसीह यीशु पर विश्‍वास करने के द्वारा परमेश्‍वर की संतान हो; क्योंकि तुममें से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहन लिया है। अब न कोई यहूदी है और न यूनानी, न कोई दास है और न स्वतंत्र, न कोई पुरुष है और न स्‍त्री; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। यदि तुम मसीह के हो, तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार उत्तराधिकारी हो। मेरे कहने का अर्थ यह है कि उत्तराधिकारी जब तक बच्‍चा है, तब तक सब वस्तुओं का स्वामी होने पर भी उसमें और किसी दास में कोई अंतर नहीं, बल्कि वह पिता के द्वारा निर्धारित समय तक संरक्षकों और प्रबंधकों के अधीन रहता है। इसी प्रकार हम भी जब तक बच्‍चे थे, संसार के मूल सिद्धांतों के अधीन दासत्व में थे। परंतु जब समय पूरा हुआ तो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्‍त्री से जन्मा और व्यवस्था के अधीन उत्पन्‍न‍ हुआ, कि जो व्यवस्था के अधीन हैं उन्हें मूल्य चुकाकर छुड़ा ले, जिससे हमें लेपालक पुत्र होने का अधिकार प्राप्‍त हो। क्योंकि तुम पुत्र हो, इसलिए परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के आत्मा को हमारे हृदयों में भेजा है जो “हे अब्बा, हे पिता” कहकर पुकारता है। अतः अब तू दास नहीं बल्कि पुत्र है, और यदि पुत्र है तो परमेश्‍वर के द्वारा उत्तराधिकारी भी है। वास्तव में, जब तुम परमेश्‍वर को नहीं जानते थे तो उनके दास थे जो स्वभाव से ईश्‍वर हैं ही नहीं। परंतु अब तुमने परमेश्‍वर को जान लिया है, बल्कि यह कहें कि परमेश्‍वर ने तुम्हें जान लिया है, तो तुम कैसे फिर से उन निर्बल और निरर्थक आरंभिक सिद्धांतों की ओर लौट रहे हो? क्या तुम एक बार फिर उनके दास बनना चाहते हो? तुम विशेष दिनों, महीनों, ऋतुओं और वर्षों को मानते हो। मैं तुम्हारे विषय में डरता हूँ कि तुम्हारे लिए किया गया मेरा परिश्रम कहीं व्यर्थ न हो जाए। हे भाइयो, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि मेरे समान बन जाओ, क्योंकि मैं भी तुम्हारे समान बन गया हूँ। तुमने मेरा कुछ बुरा नहीं किया। तुम जानते हो कि यह मेरी शारीरिक निर्बलता के कारण ही था कि मैंने तुम्हें पहली बार सुसमाचार सुनाया, और तुमने मेरी शारीरिक दशा को, जो तुम्हारी परीक्षा का कारण थी, तुच्छ न समझा और न उससे घृणा की, परंतु तुमने मुझे परमेश्‍वर के दूत बल्कि स्वयं मसीह यीशु के समान ग्रहण किया। तुम्हारा आनंद अब कहाँ गया? मैं तुम्हारा साक्षी हूँ कि यदि संभव होता तो तुम अपनी आँखें तक निकालकर मुझे दे देते। क्या तुमसे सच बोलने के कारण मैं तुम्हारा शत्रु बन गया हूँ? वे तुम्हारे प्रति उत्सुक हैं, पर अच्छे उद्देश्य से नहीं, बल्कि वे तुम्हें अलग करना चाहते हैं ताकि तुम उनके प्रति उत्सुक रहो। सदैव अच्छे उद्देश्य के लिए उत्सुक रहना अच्छा है, केवल उसी समय नहीं जब मैं तुम्हारे साथ उपस्थित होता हूँ। हे मेरे बच्‍चो, जब तक तुममें मसीह का रूप न बन जाए, मैं तुम्हारे लिए फिर से प्रसव की सी पीड़ा सहता हूँ। इच्छा तो यह है कि अभी तुम्हारे पास आकर और ही तरह से बात करूँ, क्योंकि मैं तुम्हारे विषय में उलझन में हूँ। तुम जो व्यवस्था के अधीन होना चाहते हो, मुझे बताओ, क्या तुम व्यवस्था की नहीं सुनते? क्योंकि लिखा है कि अब्राहम के दो पुत्र थे, एक दासी से और दूसरा स्वतंत्र स्‍त्री से। दासी का पुत्र शरीर के अनुसार जन्मा था, और स्वतंत्र स्‍त्री का पुत्र प्रतिज्ञा के द्वारा। ये रूपक के समान हैं: ये स्‍त्रियाँ मानो दो वाचाएँ हैं, एक तो सीनै पहाड़ की, जिससे दास ही उत्पन्‍न‍ होते हैं, और वह हाजिरा है। अब हाजिरा मानो अरब का सीनै पहाड़ है जो वर्तमान यरूशलेम के तुल्य है, क्योंकि वह अपनी संतानों के साथ दासत्व में है। परंतु ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, जो हमारी माता है। क्योंकि लिखा है: हे बाँझ, तू जो जन्म नहीं देती, आनंद मना; तू जो प्रसव-पीड़ा से अनजान है, उल्‍लासित होकर जय जयकार कर, क्योंकि त्यागी हुई की संतानें सुहागिन की संतानों से अधिक हैं। अब हे भाइयो, तुम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की संतान हो। परंतु जैसे उस समय शरीर के अनुसार जन्मा हुआ आत्मा के अनुसार जन्मे हुए को सताता था, वैसे अब भी होता है। परंतु पवित्रशास्‍त्र क्या कहता है? दासी और उसके पुत्र को निकाल दे, क्योंकि दासी का पुत्र स्वतंत्र स्‍त्री के पुत्र के साथ कभी उत्तराधिकारी नहीं होगा। इसलिए हे भाइयो, हम दासी की नहीं परंतु स्वतंत्र स्‍त्री की संतान हैं। मसीह ने स्वतंत्रता के लिए हमें स्वतंत्र किया है; इसलिए स्थिर रहो और दासत्व के जुए में फिर से न जुतो। देखो, मैं पौलुस तुमसे कहता हूँ कि यदि तुम ख़तना कराते हो तो मसीह से तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा। मैं ख़तना करानेवाले प्रत्येक मनुष्य को फिर से बता देता हूँ कि वह संपूर्ण व्यवस्था का पालन करने के लिए बाध्य है। तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से वंचित हो गए हो। क्योंकि आत्मा के द्वारा हम विश्‍वास से उस धार्मिकता की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करते हैं जिसकी हमें आशा है। मसीह यीशु में न तो ख़तने का कुछ महत्त्व है और न ही बिना ख़तने का, परंतु केवल उस विश्‍वास का जो प्रेम के द्वारा कार्य करता है। तुम तो अच्छी तरह से दौड़ रहे थे। किसने तुम्हें रोक दिया कि सत्य को न मानो? यह सीख तुम्हारे बुलानेवाले की ओर से नहीं है। थोड़ा सा ख़मीर पूरे गूँधे हुए आटे को ख़मीरा कर देता है। प्रभु में मुझे तुम पर भरोसा है कि तुम किसी अन्य विचारधारा को स्वीकार नहीं करोगे; परंतु तुम्हें विचलित करनेवाला चाहे कोई भी हो, वह दंड पाएगा। परंतु हे भाइयो, यदि मैं अब भी ख़तना का प्रचार करता हूँ तो मैं अब तक क्यों सताया जाता हूँ? फिर तो क्रूस की ठोकर समाप्‍त हो गई। भला होता कि जो तुम्हें विचलित कर रहे हैं, वे अपना ही अंग काट डालते। हे भाइयो, तुम स्वतंत्रता के लिए बुलाए गए हो; इस स्वतंत्रता का प्रयोग शरीर को अवसर देने के लिए न करो, बल्कि प्रेम से एक दूसरे की सेवा करो। क्योंकि संपूर्ण व्यवस्था एक ही वाक्य में पूरी हो जाती है: तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना। परंतु यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो तो सावधान रहो कि कहीं तुम एक दूसरे को नाश न कर डालो। परंतु मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की अभिलाषाओं को किसी भी रीति से पूरा नहीं करोगे। क्योंकि शरीर आत्मा के विरुद्ध लालसा करता है और आत्मा शरीर के विरुद्ध। ये एक दूसरे के विरोधी हैं ताकि तुम उन कार्यों को न कर सको जो तुम करना चाहते हो। परंतु यदि तुम आत्मा के द्वारा चलाए जाते हो तो तुम व्यवस्था के अधीन नहीं हो। अब शरीर के कार्य तो स्पष्‍ट हैं, अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, कामुकता, मूर्तिपूजा, जादू-टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, स्वार्थ, फूट, दलबंदी, डाह, मतवालापन, रंगरेलियाँ, तथा ऐसे और भी कार्य हैं जिनके विषय में मैं तुम्हें पहले ही कह देता हूँ, जैसा मैं पहले भी कह चुका हूँ कि ऐसे कार्य करनेवाले परमेश्‍वर के राज्य के उत्तराधिकारी नहीं होंगे। परंतु आत्मा का फल प्रेम, आनंद, शांति, धैर्य, कृपा, भलाई, विश्‍वासयोग्यता, नम्रता और संयम है। ऐसी बातों के विरुद्ध कोई व्यवस्था नहीं है। अब जो मसीह यीशु के हैं उन्होंने अपने शारीरिक स्वभाव को वासनाओं और लालसाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है। यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। हम अहंकारी न बनें, न एक दूसरे को उकसाएँ और न ही एक दूसरे से ईर्ष्या रखें। हे भाइयो, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो नम्रतापूर्वक उसे सुधारो, परंतु स्वयं चौकस रहो कि कहीं तुम भी परीक्षा में न पड़ जाओ। एक दूसरे का बोझ उठाओ और इस प्रकार तुम मसीह की व्यवस्था को पूर्ण करोगे। क्योंकि यदि कोई व्यक्‍ति कुछ न होने पर भी अपने को कुछ समझता है तो वह अपने आपको धोखा देता है। प्रत्येक व्यक्‍ति अपने ही कार्य को परखे और तब उसे किसी दूसरे पर नहीं बल्कि स्वयं पर ही गर्व होगा; क्योंकि प्रत्येक व्यक्‍ति अपना ही बोझ उठाएगा। जो वचन की शिक्षा प्राप्‍त करता है, वह अपने शिक्षक को सब अच्छी वस्तुओं में सहभागी बनाए। धोखा न खाओ, परमेश्‍वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता। मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा; क्योंकि जो अपने शरीर के लिए बोता है वह शरीर से विनाश की कटनी काटेगा, परंतु जो आत्मा के लिए बोता है वह आत्मा से अनंत जीवन की कटनी काटेगा। हम भलाई करने में निरुत्साहित न हों, क्योंकि यदि हम शिथिल न पड़ें तो उचित समय पर कटनी काटेंगे। इसलिए अब जब भी अवसर मिले तो हम सब के साथ भलाई करें, विशेषकर विश्‍वास के घराने के साथ। देखो, मैंने कैसे बड़े-बड़े अक्षरों में तुम्हें अपने हाथों से लिखा है। जो लोग शारीरिक दिखावा चाहते हैं, वे तुम्हें ख़तना कराने के लिए विवश करते हैं, केवल इसलिए कि मसीह के क्रूस के कारण उन्हें सताव न सहना पड़े। क्योंकि ख़तनावाले स्वयं तो व्यवस्था का पालन नहीं करते, परंतु तुम्हारा ख़तना इसलिए कराना चाहते हैं कि तुम्हारी शारीरिक दशा पर घमंड करें। परंतु ऐसा कभी न हो कि मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस को छोड़ किसी और बात पर घमंड करूँ, जिसके द्वारा संसार मेरे प्रति क्रूस पर चढ़ाया जा चुका है और मैं संसार के प्रति। क्योंकि न तो ख़तने का कुछ महत्त्व है और न बिना ख़तने का, परंतु केवल नई सृष्‍टि का। जितने इस नियम पर चलेंगे, उन पर और परमेश्‍वर के इस्राएल पर शांति और दया होती रहे। अब से मुझे कोई दुःख न दे, क्योंकि मैं यीशु के दागों को अपनी देह में लिए फिरता हूँ। हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा के साथ बना रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो परमेश्‍वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, उन पवित्र लोगों के नाम जो इफिसुस में रहते हैं और मसीह यीशु में विश्‍वासयोग्य हैं: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। धन्य है परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जिसने मसीह में हमें स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशिषों से भरपूर किया है। उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले उसमें चुन लिया कि हम उसके सामने प्रेम में पवित्र और निर्दोष रहें, और उसने अपनी इच्छा के भले उद्देश्य के अनुसार अपने लिए पहले से ठहराया कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, ताकि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो जो उसने अपने प्रिय में हमें उदारता से दिया; उसी में हमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा और अपराधों की क्षमा मिलती है। यह परमेश्‍वर के उस अनुग्रह के धन के अनुसार है जो उसने संपूर्ण बुद्धि और समझ के साथ हमें बहुतायत से दिया और अपनी इच्छा के भेद को अपने उस भले उद्देश्य के अनुसार हम पर प्रकट किया जो उसने मसीह में निर्धारित किया था कि समयों के पूर्ण होने पर ऐसा प्रबंध हो कि जो स्वर्ग में है और जो पृथ्वी पर है, सब मसीह में एकत्रित हों। उसी में जिसमें हम भी उसके उद्देश्य के अनुसार, जो अपनी इच्छा के निर्णय के अनुसार सब कुछ करता है, पहले से ही उत्तराधिकारी ठहराए गए हैं, ताकि हम, जिन्होंने पहले से मसीह पर आशा रखी है, उसकी महिमा की स्तुति का कारण बनें। उसी में जब तुमने सत्य का वचन अर्थात् अपने उद्धार का सुसमाचार सुना और उस पर विश्‍वास भी किया, तो तुम पर प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की मुहर लगी, जो उसके मोल लिए हुओं के छुटकारे तक हमारे उत्तराधिकार का बयाना है, ताकि उसकी महिमा की स्तुति हो। इस कारण मैं भी प्रभु यीशु में तुम्हारे विश्‍वास और सब पवित्र लोगों के प्रति तुम्हारे प्रेम के विषय में सुनकर तुम्हारे लिए निरंतर धन्यवाद करता हूँ और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करता हूँ कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्‍वर, जो महिमा का पिता है, अपनी पूर्ण पहचान में तुम्हें बुद्धि और प्रकाशन की आत्मा दे, और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हो जाएँ ताकि तुम जान सको कि तुम्हारी बुलाहट की आशा क्या है, और पवित्र लोगों में उसके उत्तराधिकार की महिमा का धन क्या है, और उसकी शक्‍ति के प्रभाव के कार्य के अनुसार विश्‍वास करनेवाले हम लोगों के लिए उसके सामर्थ्य की महानता कितनी अपार है। उसने मसीह में इस सामर्थ्य को तब प्रकट किया जब उसने उसे मृतकों में से जिलाया, और स्वर्गीय स्थानों में अपने दाहिनी ओर सब प्रधानता और अधिकार और सामर्थ्य और प्रभुता और प्रत्येक उस नाम से ऊपर बैठाया, जो न केवल इस युग में बल्कि आने वाले युगों में भी लिया जाएगा और सब कुछ उसके पैरों तले कर दिया और उसे सब वस्तुओं पर प्रधान ठहराकर कलीसिया को दे दिया। यह कलीसिया मसीह की देह, और उसकी परिपूर्णता है जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है। तुम तो अपने उन अपराधों और पापों में मरे हुए थे, जिनमें तुम पहले इस संसार की रीति के अनुसार अर्थात् आकाश पर अधिकार रखनेवाले उस शासक के अनुसार चलते थे, जिसकी आत्मा अब भी आज्ञा न माननेवालों में कार्य करती है। हम सब भी पहले उन्हीं के बीच अपने शरीर की लालसाओं में जीते थे, और शरीर तथा मन की इच्छाएँ पूरी करते थे, और अन्य लोगों के समान ही स्वभाव से क्रोध के पात्र थे। परंतु परमेश्‍वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण जो उसने हमसे किया, हमें मसीह के साथ जीवित किया जबकि हम अपराधों में मरे हुए थे (अनुग्रह से ही तुम्हारा उद्धार हुआ है) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया और स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया ताकि वह आने वाले युगों में उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, अपने अनुग्रह का अपार धन दिखाए। विश्‍वास के द्वारा अनुग्रह से ही तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं बल्कि परमेश्‍वर का दान है; और न ही कर्मों के द्वारा, ऐसा न हो कि कोई घमंड करे। क्योंकि हम उसकी रचना हैं और मसीह यीशु में उन भले कार्यों के लिए सृजे गए हैं, जिन्हें परमेश्‍वर ने पहले से ही तैयार किया कि हम उन्हें करें। इसलिए स्मरण करो कि तुम पहले शारीरिक रीति से गैरयहूदी थे, और उनके द्वारा ख़तनारहित कहलाते थे जो शरीर में हाथ से किए हुए ख़तने के कारण ख़तनावाले कहलाते हैं, और उस समय तुम मसीह के बिना, इस्राएल की नागरिकता से वंचित और प्रतिज्ञा की वाचाओं से अनजान थे, तथा जगत में आशाहीन और परमेश्‍वर-रहित थे। परंतु अब मसीह यीशु में तुम जो पहले दूर थे मसीह के लहू के द्वारा निकट लाए गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है जिसने दोनों को एक कर दिया और अलग करनेवाली शत्रुता की दीवार को ढा दिया, और अपनी देह के द्वारा विधियों पर आधारित आज्ञाओं की व्यवस्था को मिटा दिया ताकि वह उन दोनों से अपने में एक नए मनुष्य की सृष्‍टि करे और शांति स्थापित करे, और क्रूस पर शत्रुता का नाश करके उसके द्वारा दोनों का एक देह में परमेश्‍वर के साथ मेल-मिलाप कराए। उसने आकर तुम्हें जो दूर थे और उन्हें भी जो निकट थे मेल का सुसमाचार सुनाया; क्योंकि उसी के द्वारा हम दोनों की एक ही आत्मा में पिता के पास पहुँच होती है। इसलिए अब तुम अजनबी और परदेशी नहीं, बल्कि पवित्र लोगों के संगी नागरिक और परमेश्‍वर के घराने के हो, और प्रेरितों तथा भविष्यवक्‍ताओं की नींव पर, जिसके कोने का पत्थर स्वयं मसीह यीशु है, बनाए गए हो। उसमें संपूर्ण रचना एक साथ जुड़कर प्रभु में एक पवित्र मंदिर बनती जाती है, जिसमें तुम भी आत्मा में परमेश्‍वर के निवासस्थान होने के लिए एक साथ बनाए जाते हो। इसी कारण, मैं, पौलुस, तुम गैरयहूदियों के लिए मसीह यीशु का बंदी हूँ। तुमने वास्तव में परमेश्‍वर के अनुग्रह के उस प्रबंध के विषय में सुना है, जो तुम्हारे लिए मुझे सौंपा गया, अर्थात् वह भेद जो प्रकाशन के द्वारा मुझ पर प्रकट किया गया था, जैसे मैंने पहले ही संक्षेप में लिखा है। उसे पढ़कर तुम मसीह के उस भेद के विषय में मेरे विचारों को समझ सकते हो, जिसे पिछली पीढ़ियों में मनुष्यजाति को इस प्रकार नहीं बताया गया था, जिस प्रकार अब आत्मा के द्वारा उसके पवित्र प्रेरितों और भविष्यवक्‍ताओं पर प्रकट किया गया है। भेद यह है कि मसीह यीशु में उस सुसमाचार के द्वारा गैरयहूदी भी सह-उत्तराधिकारी, एक ही देह के अंग और प्रतिज्ञा में सहभागी हैं, जिसका मैं परमेश्‍वर के अनुग्रह के उस दान के अनुसार सेवक बना, जो उसके सामर्थ्य के प्रभाव के अनुसार मुझे दिया गया। मुझ पर, जो सब पवित्र लोगों में छोटे से भी छोटा हूँ, यह अनुग्रह हुआ कि मैं गैरयहूदियों को मसीह के अगम्य धन का सुसमाचार सुनाऊँ, और सब पर यह प्रकट करूँ कि उस भेद का प्रबंधन क्या है, जो सब वस्तुओं के सृष्‍टि करनेवाले परमेश्‍वर में युगों से गुप्‍त था, ताकि अब कलीसिया के द्वारा आकाश के प्रधानों और अधिकारियों पर परमेश्‍वर के विभिन्‍न‍ प्रकार के ज्ञान को प्रकट किया जाए। यह उस सनातन उद्देश्य के अनुसार है जो उसने हमारे प्रभु मसीह यीशु में पूरा किया; उसी में और उस पर विश्‍वास करने के द्वारा हमें भरोसे के साथ परमेश्‍वर के पास आने का साहस होता है। इसलिए मैं चाहता हूँ कि तुम उन क्लेशों के कारण निराश न हो जो मैं तुम्हारे लिए सहता हूँ, क्योंकि इसमें तुम्हारा गौरव है। इस कारण मैं उस पिता के सामने घुटने टेकता हूँ, जिससे स्वर्ग और पृथ्वी के प्रत्येक घराने का नाम रखा जाता है, कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें वह दान दे कि तुम अपने भीतरी मनुष्यत्व में उसके आत्मा के द्वारा सामर्थ्य पाकर बलवान हो जाओ, और विश्‍वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदयों में वास करे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नींव डालकर सब पवित्र लोगों के साथ भली-भाँति समझने की शक्‍ति पाओ कि मसीह के प्रेम की चौड़ाई, और लंबाई, और ऊँचाई और गहराई कितनी है, और उसके उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है ताकि तुम परमेश्‍वर की समस्त परिपूर्णता तक भर जाओ। अब जो हमारे माँगने और सोचने से कहीं अधिक बढ़कर, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हमारे भीतर कार्य करता है, सब कुछ कर सकता है, उस परमेश्‍वर की महिमा कलीसिया में और मसीह यीशु में पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन। इसलिए, मैं जो प्रभु में बंदी हूँ, तुमसे आग्रह करता हूँ कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए हो, उसके योग्य चाल चलो, संपूर्ण दीनता और नम्रता के साथ धैर्य रखते हुए प्रेम में एक दूसरे की सह लो, और मेल के बंधन में आत्मा की एकता बनाए रखने का पूरा प्रयत्‍न करो। एक ही देह है और एक ही आत्मा है; जिस प्रकार तुम भी अपनी बुलाहट की एक ही आशा में बुलाए गए थे। एक ही प्रभु, एक ही विश्‍वास, एक ही बपतिस्मा, एक ही परमेश्‍वर और सब का एक ही पिता है जो सब के ऊपर, सब के मध्य और सब में है। परंतु हममें से प्रत्येक को मसीह के दान के परिमाण के अनुसार अनुग्रह दिया गया है। इसलिए वह कहता है: जब वह ऊँचे पर चढ़ा तो बंदियों को बंधुआई में ले गया, और उसने मनुष्यों को दान दिए। (अब “वह चढ़ा” का अर्थ यह छोड़ और क्या है कि वह पृथ्वी के निचले स्थानों में उतरा भी था? और जो नीचे उतरा वह वही है जो सारे आकाशों से भी ऊपर चढ़ा कि वह सब कुछ परिपूर्ण करे।) उसने कुछ को प्रेरित, और कुछ को भविष्यवक्‍ता, और कुछ को सुसमाचार प्रचारक और कुछ को चरवाहे और शिक्षक नियुक्‍त करके दे दिया, कि पवित्र लोग सेवाकार्य के योग्य हो जाएँ जिससे मसीह की देह की तब तक उन्‍नति हो, जब तक कि हम सब विश्‍वास और परमेश्‍वर के पुत्र की पहचान में एक न हो जाएँ, सिद्ध मनुष्य न बन जाएँ और मसीह की पूरे डील-डौल तक न पहुँच जाएँ, ताकि हम फिर बच्‍चे न रहें जो मनुष्यों की धूर्तता में उस चतुराई से बनी शिक्षा के हर झोंके से उछाले और भटकाए जाते हैं जो भ्रम की युक्‍ति की ओर ले जाती है, बल्कि प्रेम में सच्‍चाई से चलते हुए सब बातों में, उसमें जो सिर है अर्थात् मसीह में बढ़ते जाएँ, जिसके द्वारा सारी देह प्रत्येक जोड़ की सहायता से एक साथ जुड़ती और सुगठित होती है, और हर एक अंग के अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करने से देह का विकास होता है, और प्रेम में स्वयं उसकी उन्‍नति होती है। इसलिए मैं यह कहता हूँ और प्रभु में समझाता हूँ कि जैसे अन्य लोग अपने मन की अनर्थ रीति पर चलते हैं, वैसे तुम अब से न चलना। उनकी समझ अंधकारमय हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उनमें है और अपने मन की कठोरता के कारण वे परमेश्‍वर के जीवन से दूर हो गए हैं। वे सुन्‍न होकर स्वयं लुचपन में लग गए कि लालायित होकर हर प्रकार की अशुद्धता का कार्य करें। परंतु तुमने मसीह को इस प्रकार नहीं जाना। यह मानकर कि तुमने वास्तव में उसके विषय में सुना है और जैसा यीशु में सत्य है, उसमें सिखाए भी गए हो, कि तुम पिछले आचरण के पुराने मनुष्यत्व को उतार डालो जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, और अपने मन के आत्मिक स्वभाव में नए बनते जाओ, और नए मनुष्यत्व को पहन लो जो परमेश्‍वर के अनुरूप सत्य की धार्मिकता और पवित्रता में सृजा गया है। इसलिए झूठ को छोड़कर प्रत्येक अपने पड़ोसी से सच बोले क्योंकि हम आपस में एक ही देह के अंग हैं। क्रोध तो करो पर पाप मत करो; सूर्यास्त होने तक तुम्हारा क्रोध बना न रहे, और न शैतान को अवसर दो। चोरी करनेवाला अब चोरी न करे, बल्कि कोई अच्छा कार्य करने के लिए अपने हाथों से परिश्रम करे ताकि आवश्यकता में पड़े हुए को देने के लिए उसके पास कुछ हो। कोई अपशब्द तुम्हारे मुँह से न निकले, बल्कि वही निकले जो आवश्यकता के अनुसार दूसरों की उन्‍नति के लिए उत्तम हो, ताकि सुननेवालों पर अनुग्रह हो। परमेश्‍वर के पवित्र आत्मा को शोकित न करो, जिसके द्वारा तुम पर छुटकारे के दिन के लिए मुहर लगाई गई है। सारी बुराई के साथ सब प्रकार की कड़वाहट, और रोष, और क्रोध, और कलह, और निंदा तुमसे दूर किए जाएँ। एक दूसरे के प्रति कृपालु और दयालु बनो, और जैसे परमेश्‍वर ने मसीह में तुम्हें क्षमा किया है, वैसे तुम भी एक दूसरे को क्षमा करो। इसलिए प्रिय बच्‍चों के समान परमेश्‍वर का अनुकरण करनेवाले बनो, और प्रेम में चलो, जैसे मसीह ने भी हमसे प्रेम रखा और एक मधुर सुगंध के लिए परमेश्‍वर के सामने भेंट और बलिदान के रूप में अपने आपको हमारे स्थान पर अर्पित कर दिया। जैसा कि पवित्र लोगों के लिए उचित है, तुम्हारे बीच व्यभिचार, किसी भी प्रकार की अशुद्धता या लालच का नाम तक न लिया जाए, और न निर्लज्‍जता और मूर्खता की बातें या भद्दे मज़ाक हों जो शोभा नहीं देते, बल्कि धन्यवाद ही दिया जाए। क्योंकि तुम यह भली-भाँति जानते हो कि किसी व्यभिचारी या अशुद्ध या लोभी मनुष्य का, जो एक मूर्तिपूजक के समान है, मसीह और परमेश्‍वर के राज्य में कोई उत्तराधिकार नहीं है। कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे, क्योंकि इन्हीं कार्यों के कारण परमेश्‍वर का प्रकोप आज्ञा न माननेवालों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे लोगों के सहभागी न बनो। पहले तो तुम अंधकार थे, परंतु अब प्रभु में ज्योति हो, इसलिए ज्योति की संतान के समान चलो —ज्योति का फल हर प्रकार की भलाई और धार्मिकता और सत्य है— और यह परखो कि प्रभु किस बात से प्रसन्‍न होता है। अंधकार के निष्फल कार्यों में सहभागी न हो, बल्कि उन्हें प्रकाश में लाओ; क्योंकि जो कार्य वे गुप्‍त में करते हैं उनकी चर्चा करना भी लज्‍जा की बात है। परंतु ज्योति के द्वारा प्रकाशित होने पर सब कुछ प्रकट हो जाता है। और जो प्रकट हो जाता है, वह ज्योति बन जाता है। इसलिए ऐसा कहा जाता है: “हे सोनेवाले, जाग और मृतकों में से जी उठ, और मसीह तुझ पर प्रकाशमान होगा।” इसलिए ध्यान से देखो कि तुम कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों के समान नहीं बल्कि बुद्धिमानों के समान चलो। समय का सदुपयोग करो, क्योंकि दिन बुरे हैं। इसलिए मूर्ख न बनो, बल्कि यह समझो कि प्रभु की इच्छा क्या है। मदिरा पीकर मतवाले न बनो, इससे दुराचार होता है, बल्कि आत्मा में परिपूर्ण होते जाओ, भजनों, स्तुतिगानों और आत्मिक गीतों में एक दूसरे से बातचीत करो, अपने मन से प्रभु के लिए गाते और संगीत बजाते रहो; और सब बातों के लिए हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्‍वर पिता का सदा धन्यवाद करते रहो, और मसीह के भय में एक दूसरे के अधीन रहो। हे पत्‍नियो, अपने-अपने पति के वैसे ही अधीन रहो जैसे प्रभु के; क्योंकि पति पत्‍नी का सिर है जैसे मसीह कलीसिया का सिर है और स्वयं देह का उद्धारकर्ता भी है। इसलिए जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्‍नियाँ भी हर बात में अपने-अपने पति के अधीन रहें। हे पतियो, अपनी-अपनी पत्‍नियों से वैसा ही प्रेम रखो जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम रखा, और अपने आपको उसके लिए दे दिया कि वह वचन के द्वारा उसे जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए, और अपने सामने एक महिमामय कलीसिया के रूप में खड़ी करे, जिसमें न कोई कलंक, न कोई झुर्री और न कोई ऐसी बात हो, बल्कि वह पवित्र और निष्कलंक हो। इसी प्रकार पतियों को भी चाहिए कि वे अपनी-अपनी पत्‍नी से अपनी देह के समान प्रेम रखें। जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है वह स्वयं से प्रेम रखता है; क्योंकि कोई अपनी देह से घृणा नहीं करता, बल्कि उसका पालन-पोषण करता है, जैसे मसीह भी कलीसिया के साथ करता है, क्योंकि हम उसकी देह के अंग हैं। इस कारण पुरुष अपने पिता और अपनी माता से अलग होकर अपनी पत्‍नी के साथ मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कह रहा हूँ। अतः तुममें से प्रत्येक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने। हे बच्‍चो, प्रभु में अपने माता-पिता की आज्ञा मानो, क्योंकि यह उचित है। अपने पिता और माता का आदर कर (यह पहली आज्ञा है जिसके साथ यह प्रतिज्ञा है), ताकि तेरा भला हो और तू पृथ्वी पर दीर्घायु हो। हे पिताओ, अपने बच्‍चों को क्रोध न दिलाओ बल्कि प्रभु के निर्देशों और अनुशासन में उनका पालन-पोषण करो। हे दासो, जिस प्रकार तुम मसीह की आज्ञा मानते हो, उसी प्रकार अपने मन की सीधाई से डरते और काँपते हुए अपने शारीरिक स्वामियों की आज्ञा भी मानो। मनुष्यों को प्रसन्‍न करनेवालों के समान दिखावे के लिए सेवा न करो बल्कि मसीह के दासों के समान मन से परमेश्‍वर की इच्छा पर चलो, और मनुष्यों की नहीं परंतु प्रभु की सेवा समझकर भली इच्छा से करो; क्योंकि तुम जानते हो कि हर एक, चाहे दास हो या स्वतंत्र, जो जैसा भला कार्य करेगा, प्रभु से वैसा ही प्रतिफल पाएगा। हे स्वामियो, तुम भी उन्हें धमकाना छोड़कर उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करो; क्योंकि तुम जानते हो कि उनका और तुम्हारा स्वामी स्वर्ग में है और वह पक्षपात नहीं करता। अंततः प्रभु में और उसकी शक्‍ति के प्रभाव में बलवंत बनो। परमेश्‍वर के समस्त हथियार धारण कर लो कि तुम शैतान की युक्‍तियों के विरुद्ध खड़े रह सको; क्योंकि हमारा संघर्ष लहू और मांस से नहीं बल्कि प्रधानों, अधिकारियों, इस अंधकार के युग की सांसारिक शक्‍तियों और दुष्‍ट की उन आत्मिक शक्‍तियों से है जो आकाश में हैं। इसलिए, परमेश्‍वर के समस्त हथियार उठा लो ताकि तुम बुरे दिन का सामना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर खड़े रह सको। अतः सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता का कवच पहनकर, और पैरों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहनकर, और इन सब के साथ विश्‍वास की ढाल लेकर स्थिर खड़े रहो, जिसके द्वारा तुम दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सकोगे; और उद्धार का टोप और आत्मा की तलवार, जो परमेश्‍वर का वचन है, ले लो। हर समय, प्रत्येक विनती और निवेदन सहित आत्मा में प्रार्थना करते रहो; और इसी लिए जागते रहकर पूरे धीरज के साथ सब पवित्र लोगों के लिए विनती किया करो, और मेरे लिए भी कि जब मैं मुँह खोलूँ तो मुझे ऐसा वचन दिया जाए कि मैं साहस के साथ उस सुसमाचार का भेद प्रकट कर सकूँ, जिसके लिए मैं ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ राजदूत हूँ, कि उसमें जैसा मुझे बोलना चाहिए साहस के साथ बोल सकूँ। प्रिय भाई और प्रभु में विश्‍वासयोग्य सेवक तुखिकुस तुम्हें सब कुछ बताएगा ताकि अब तुम भी मेरे विषय में जान सको कि मैं किस स्थिति में हूँ। मैंने उसे तुम्हारे पास इसी लिए भेजा है कि तुम हमारे विषय में जान लो और वह तुम्हारे मनों को प्रोत्साहित करे। परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से भाइयों को शांति और विश्‍वास सहित प्रेम मिले। उन सब पर, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह से अविनाशी प्रेम रखते हैं, अनुग्रह होता रहे। आमीन। मसीह यीशु के दास पौलुस और तीमुथियुस की ओर से फिलिप्पी में रहनेवाले अध्यक्षों और सेवकों सहित सब पवित्र लोगों के नाम जो मसीह यीशु में हैं। हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। जब भी मैं तुम्हें स्मरण करता हूँ, तो अपने परमेश्‍वर का धन्यवाद करता हूँ, और जब भी मैं तुम सब के लिए प्रार्थना करता हूँ, तो सदा आनंद के साथ प्रार्थना करता हूँ; क्योंकि तुम पहले दिन से लेकर अब तक सुसमाचार प्रचार में सहभागी रहे हो। मैं इस बात के प्रति आश्‍वस्त हूँ कि जिसने तुममें भला कार्य आरंभ किया है वही उसे मसीह यीशु के दिन तक पूरा भी करेगा। तुम सब के विषय में ऐसा सोचना मेरे लिए उचित भी है, क्योंकि तुम मेरे मन में बसे हो, और तुम सब मेरे बंधनों में, और सुसमाचार का बचाव करने और उसकी पुष्‍टि करने में मेरे साथ अनुग्रह के सहभागी हो। परमेश्‍वर मेरा साक्षी है कि मैं मसीह यीशु के प्रेम में तुम सब के लिए कितना लालायित रहता हूँ। मैं यह प्रार्थना करता हूँ कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और हर प्रकार की समझ में अधिक से अधिक बढ़ता जाए ताकि तुम उत्तम बातों को जान लो और मसीह के दिन तक सच्‍चे और निर्दोष बने रहो, तथा परमेश्‍वर की महिमा और प्रशंसा के लिए यीशु मसीह के द्वारा धार्मिकता के फल से परिपूर्ण हो जाओ। अब हे भाइयो, मैं चाहता हूँ कि तुम यह जान लो कि जो कुछ मुझ पर बीता है उससे सुसमाचार की और भी प्रगति हुई है, जिससे राजभवन के सारे पहरेदारों और बाकी सब लोगों पर यह प्रकट हुआ है कि मैं मसीह के लिए कैद में हूँ, और मेरे कैद होने के कारण अधिकांश भाई प्रभु पर भरोसा रखकर और भी अधिक साहस और निडरता के साथ वचन सुनाते हैं। कुछ तो ईर्ष्या और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं, परंतु कुछ भले उद्देश्य से। भले उद्देश्यवाले प्रेम से ऐसा करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मैं सुसमाचार का बचाव करने के लिए ठहराया गया हूँ, परंतु अन्य लोग मसीह का प्रचार सच्‍चाई से नहीं बल्कि स्वार्थ-भाव से यह सोचकर करते हैं कि बंदीगृह में मेरे कष्‍ट बढ़ जाएँ। तो क्या हुआ? केवल यह कि चाहे दिखावे से हो या सच्‍चाई से, हर प्रकार से मसीह का प्रचार हो रहा है; और मैं इससे आनंदित हूँ। मैं और भी आनंदित होऊँगा, क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्हारी प्रार्थनाओं और यीशु मसीह के आत्मा की सहायता से इसका परिणाम मेरा छुटकारा होगा। मेरी हार्दिक इच्छा और आशा यही है कि मैं किसी भी बात में लज्‍जित न होऊँ बल्कि जैसे मसीह की महिमा मेरी देह से पूरे साहस के साथ सदा होती रही है वैसे ही अब भी हो, चाहे मैं जीवित रहूँ या मर जाऊँ। मेरे लिए तो जीवित रहना मसीह, और मर जाना लाभ है। परंतु यदि मुझे शरीर में जीवित रहना है तो यह मेरे लिए फलदायी परिश्रम होगा; और मैं नहीं जानता कि किसको चुनूँ। मैं इन दोनों के बीच अधर में लटका हूँ। अभिलाषा तो यह है कि यहाँ से विदा होकर मसीह के साथ रहूँ, क्योंकि यह और भी अच्छा है; परंतु तुम्हारे कारण मेरा शरीर में जीवित रहना और भी आवश्यक है। क्योंकि मुझे इस बात का भरोसा है, इसलिए मैं जानता हूँ कि मैं जीवित रहूँगा और विश्‍वास में तुम्हारी उन्‍नति और आनंद के लिए तुम सब के साथ रहूँगा, ताकि जो गर्व तुम मेरे विषय में करते हो, वह तुम्हारे पास मेरे फिर से आने के द्वारा मसीह यीशु में और अधिक बढ़ जाए। तुम केवल इतना करो कि मसीह के सुसमाचार के योग्य जीवन बिताओ, फिर मैं चाहे आकर तुम्हें देखूँ या न भी आऊँ, मैं तुम्हारे विषय में यही सुनूँ कि तुम एक आत्मा में स्थिर हो, और एक मन होकर सुसमाचार के विश्‍वास के लिए मिलकर संघर्ष करते हो, और किसी भी बात में विरोधियों से भयभीत नहीं होते। यह उनके लिए तो विनाश का, परंतु तुम्हारे लिए उद्धार का प्रमाण है; और यह परमेश्‍वर की ओर से है। क्योंकि मसीह की ओर से तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्‍वास करो बल्कि उसके लिए दुःख भी उठाओ; और वैसा ही संघर्ष करो जो तुमने मुझे करते देखा है, और सुनते हो कि अब भी कर रहा हूँ। अतः यदि मसीह में कुछ प्रोत्साहन है, प्रेम का ढाढ़स है, आत्मा की सहभागिता है, स्‍नेह और करुणा है, तो एक ही मन, एक ही प्रेम, एक ही चित्त और एक ही मनसा रखकर मेरा आनंद पूरा करो। स्वार्थ से या अहंकार से कुछ न करो, बल्कि दीनता से दूसरों को अपने से श्रेष्‍ठ समझो, प्रत्येक व्यक्‍ति अपने हित का ही नहीं, बल्कि दूसरों के हित का भी ध्यान रखे। तुममें वही स्वभाव हो जो मसीह यीशु में था, जिसने परमेश्‍वर के स्वरूप में होते हुए भी परमेश्‍वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा, बल्कि अपने को शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप लेकर मनुष्य की समानता में हो गया। उसने मनुष्य रूप में प्रकट होकर अपने आपको दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्‍वर ने उसे अति महान भी किया और उसे वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है, ताकि स्वर्ग में और पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे, हर घुटना यीशु के नाम पर टिके, और हर जीभ परमेश्‍वर पिता की महिमा के लिए अंगीकार करे कि यीशु मसीह ही प्रभु है। अतः हे मेरे प्रियो, जिस प्रकार तुमने सदैव आज्ञा मानी, उसी प्रकार केवल मेरी उपस्थिति में ही नहीं बल्कि अनुपस्थिति में भी, उससे और भी अधिक डरते और काँपते हुए अपने-अपने उद्धार का कार्य पूरा करो; क्योंकि परमेश्‍वर ही है जो तुम्हारे भीतर अपने भले उद्देश्य के लिए इच्छा रखने और कार्य करने दोनों का प्रभाव डालता है। सब कार्य बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो, ताकि तुम निर्दोष और खरे बनो, और इस कुटिल और भ्रष्‍ट पीढ़ी के बीच परमेश्‍वर की निष्कलंक संतान बनकर जगत में ज्योति के समान चमको, और जीवन के वचन को दृढ़ता से थामे रहो। तब मसीह के दिन मुझे इस बात पर गर्व होगा कि न तो मेरी दौड़-धूप और न मेरा परिश्रम व्यर्थ गया। और चाहे मैं तुम्हारे विश्‍वास के बलिदान और सेवाकार्य पर अर्घ-स्वरूप उंडेला भी जाता हूँ, तो भी मैं आनंदित हूँ और तुम सब के साथ आनंद मनाता हूँ। वैसे ही तुम भी आनंदित रहो और मेरे साथ आनंद मनाओ। प्रभु यीशु में मुझे आशा है कि तीमुथियुस को तुम्हारे पास शीघ्र भेजूँ, ताकि तुम्हारे विषय में जानकर मुझे भी प्रसन्‍नता हो। क्योंकि मेरे पास उसके जैसा कोई नहीं, जो मेरे समान सच्‍चे मन से तुम्हारी चिंता करे। सब अपने ही हित को खोजते हैं, न कि यीशु मसीह के। परंतु तुम उसकी योग्यता से परिचित हो कि जैसे पुत्र अपने पिता के साथ करता है, वैसे ही उसने मेरे साथ सुसमाचार की सेवा की है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ कि अपनी स्थिति स्पष्‍ट होते ही मैं उसे तुम्हारे पास तुरंत भेज दूँगा; और प्रभु में मुझे भरोसा है कि मैं स्वयं भी शीघ्र आऊँगा। फिर भी मैंने आवश्यक समझा कि मैं इपफ्रुदीतुस को तुम्हारे पास भेज दूँ जो मेरा भाई, सहकर्मी और संगी योद्धा है, परंतु मेरी आवश्यकताओं में सेवा-टहल करनेवाला तुम्हारा दूत है। वह तुम सब से मिलने के लिए लालायित और व्याकुल रहता है क्योंकि तुमने उसकी बीमारी का हाल सुन लिया था। वास्तव में वह इतना बीमार था कि मरने पर था, परंतु परमेश्‍वर ने उस पर दया की, और केवल उस पर ही नहीं बल्कि मुझ पर भी, कि कहीं मुझे दुःख पर दुःख सहना न पड़े। मैंने उसे और भी उत्सुकता से इसलिए भेजा है कि तुम उसे फिर से देखकर आनंदित हो जाओ और मेरा दुःख भी कम हो जाए। अतः तुम बड़े आनंद के साथ प्रभु में उसका स्वागत करो, और ऐसे लोगों का आदर किया करो; क्योंकि वह मसीह के कार्य के लिए अपने प्राण को जोखिम में डालकर मृत्यु के निकट आ गया, ताकि मेरे प्रति तुम्हारी सेवा में जो घटी रह गई थी, उसे पूरा करे। अंततः हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनंदित रहो। वही बातें तुम्हें बार-बार लिखने में मुझे कोई कष्‍ट नहीं, क्योंकि इसमें तुम्हारी सुरक्षा है। कुत्तों से सावधान रहो, बुरे कार्य करनेवालों से सावधान रहो, चमड़ी काटनेवालों से सावधान रहो। वास्तविक ख़तनावाले तो हम हैं, जो परमेश्‍वर के आत्मा में आराधना करते और मसीह यीशु पर गर्व करते हैं, और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। यद्यपि मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूँ। यदि कोई और शरीर पर भरोसा रखने का विचार करे, तो मैं उससे बढ़कर रख सकता हूँ। आठवें दिन मेरा ख़तना हुआ; मैं इस्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूँ, इब्रानियों का इब्रानी, व्यवस्था के विषय में कहो तो एक फरीसी, उत्साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया को सतानेवाला, और व्यवस्था पर आधारित धार्मिकता के विषय में कहो तो निर्दोष था। परंतु जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्हें मैंने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। इससे भी बढ़कर मैं अपने प्रभु मसीह यीशु के ज्ञान की श्रेष्‍ठता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ, जिसके कारण मैंने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ जिससे मैं मसीह को प्राप्‍त करूँ, और उसी में पाया जाऊँ—यह अपनी उस धार्मिकता के कारण नहीं जो व्यवस्था से प्राप्‍त होती है, बल्कि उस धार्मिकता के कारण है जो मसीह पर विश्‍वास करने से है, अर्थात् वह धार्मिकता जो विश्‍वास के आधार पर परमेश्‍वर से प्राप्‍त होती है— जिससे कि मैं उसको और उसके पुनरुत्थान के सामर्थ्य को और उसके दुःखों की सहभागिता को जानूँ, और उसकी मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूँ, ताकि मैं किसी प्रकार से मृतकों के पुनरुत्थान को प्राप्‍त करूँ। यह नहीं कि मैंने उस लक्ष्य को प्राप्‍त कर लिया, या सिद्ध हो चुका हूँ, पर मैं उसे प्राप्‍त करने के लिए दौड़ा जाता हूँ, जिसके लिए मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयो, मैं यह नहीं समझता कि मैं प्राप्‍त कर चुका हूँ; परंतु एक कार्य करता हूँ, जो बातें पीछे रह गई हैं, उन्हें भूलकर आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, मैं उस लक्ष्य की ओर दौड़ा जाता हूँ कि मसीह यीशु में परमेश्‍वर की स्वर्गीय बुलाहट का पुरस्कार पाऊँ। अतः हममें जितने भी परिपक्‍व हैं, यही विचार रखें। और यदि किसी बात में तुम्हारा विचार अलग हो तो परमेश्‍वर उसे भी तुम पर प्रकट करेगा; फिर भी जहाँ तक हम पहुँचे हैं, उसके अनुसार चलें। हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरा अनुकरण करो, और उन पर ध्यान दो जो उसी रीति से चलते हैं जिसका उदाहरण तुम हममें पाते हो। क्योंकि बहुत से ऐसे हैं जिनके विषय में मैंने तुमसे बार-बार कहा है, और अब भी रो रोकर कहता हूँ, कि वे अपने चाल-चलन से मसीह के क्रूस के शत्रु हैं। उनका अंत विनाश है, उनका ईश्‍वर पेट है और उनकी महिमा उनकी निर्लज्‍जता में है; वे भौतिक वस्तुओं पर मन लगाए रखते हैं। हमारी नागरिकता तो स्वर्ग की है, जहाँ से हम उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के आने की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करते हैं। वह अपने उस सामर्थ्य के द्वारा जिससे वह सब वस्तुओं को अपने अधीन भी कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह को बदलकर अपनी महिमामय देह के अनुरूप बना देगा। इसलिए हे मेरे प्रिय भाइयो, तुम मेरे आनंद और मुकुट हो, जिनके लिए मैं लालायित रहता हूँ। हे प्रियो, इसी प्रकार प्रभु में स्थिर रहो। मैं यूओदिया से विनती करता हूँ और सुन्तुखे से भी विनती करता हूँ कि वे प्रभु में एक ही मन रहें। हे मेरे सच्‍चे सहकर्मी, मैं तुझसे भी विनती करता हूँ कि तू इन स्‍त्रियों की सहायता कर, जिन्होंने सुसमाचार फैलाने में मेरे, क्लेमेंस और मेरे अन्य सहकर्मियों के साथ, जिनके नाम जीवन की पुस्तक में लिखे हैं, मिलकर संघर्ष किया है। प्रभु में सदा आनंदित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनंदित रहो। तुम्हारी शालीनता सब मनुष्यों पर प्रकट हो। प्रभु निकट है। किसी भी बात की चिंता मत करो, बल्कि प्रत्येक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्‍वर के सामने प्रस्तुत किए जाएँ। तब परमेश्‍वर की शांति जो सारी समझ से परे है, मसीह यीशु में तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को सुरक्षित रखेगी। अंततः हे भाइयो, जो बातें सच्‍ची हैं, जो आदरणीय हैं, जो न्यायसंगत हैं, जो पवित्र हैं, जो सुहावनी हैं, जो सराहनीय हैं, यदि कोई सद्गुण या प्रशंसायोग्य बातें हैं, तो उन पर ध्यान लगाया करो। जो बातें तुमने मुझसे सीखीं, और ग्रहण कीं, और सुनीं, और मुझमें देखी हैं, उनका पालन किया करो; और शांति का परमेश्‍वर तुम्हारे साथ रहेगा। मैं प्रभु में बहुत आनंदित हूँ कि अब एक बार फिर मेरे प्रति तुम्हारी चिंता जागृत हुई है। निस्संदेह तुम्हें मेरी चिंता तो थी, परंतु उसे प्रकट करने का अवसर नहीं मिला। मैं अपने किसी अभाव के कारण यह नहीं कहता, क्योंकि मैंने हर परिस्थिति में संतुष्‍ट रहना सीख लिया है। मैं दीन-हीन दशा में रहना जानता हूँ, और बहुतायत में रहना भी। मैंने हर बात और सब परिस्थितियों में रहना सीख लिया है, चाहे तृप्‍त होना हो या भूखा रहना, बहुतायत हो या घटी। मैं मसीह में, जो मुझे सामर्थ्य देता है, सब कुछ कर सकता हूँ। परंतु मेरे क्लेश में सहभागी होकर तुमने अच्छा किया। हे फिलिप्पियो, तुम तो जानते ही हो कि सुसमाचार प्रचार के आरंभ में, जब मैं मकिदुनिया से विदा हुआ था, तो तुम्हें छोड़ कोई और कलीसिया लेन-देन के विषय में मेरे साथ सहभागी नहीं हुई। जब मैं थिस्सलुनीके में था, तब भी तुमने मेरी आवश्यकता में बार-बार कुछ भेजा था। ऐसा नहीं कि मैं दान चाहता हूँ, बल्कि ऐसा फल चाहता हूँ जो तुम्हारे लाभ के लिए बढ़ता जाए। मेरे पास सब कुछ है और बहुतायत से है। इपफ्रुदीतुस के द्वारा जो वस्तुएँ तुमने भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूँ; वे तो मनमोहक सुगंध और ग्रहणयोग्य बलिदान हैं जिनसे परमेश्‍वर प्रसन्‍न होता है। मेरा परमेश्‍वर अपने उस धन के अनुसार जो महिमा में है, तुम्हारी प्रत्येक आवश्यकता को मसीह यीशु में पूरी करेगा। हमारे परमेश्‍वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। मसीह यीशु में प्रत्येक पवित्र जन को नमस्कार। जो भाई मेरे साथ हैं वे भी तुम्हें नमस्कार कहते हैं। सब पवित्र लोग, विशेषकर जो कैसर के घराने के हैं, तुम्हें नमस्कार कहते हैं। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा के साथ बना रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो परमेश्‍वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से मसीह में उन पवित्र लोगों और विश्‍वासयोग्य भाइयों के नाम जो कुलुस्से में हैं: हमारे परमेश्‍वर पिता की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। जब हम तुम्हारे लिए प्रार्थना करते हैं तो परमेश्‍वर अर्थात् अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता का सदैव धन्यवाद करते हैं; क्योंकि हमने मसीह यीशु में तुम्हारे विश्‍वास और सब पवित्र लोगों के लिए तुम्हारे प्रेम के विषय में सुना है। यह उस आशा के कारण है जो तुम्हारे लिए स्वर्ग में रखी है जिसके विषय में तुमने सत्य के वचन अर्थात् उस सुसमाचार में पहले ही सुना है जो तुम्हारे पास पहुँचा है, और जैसे यह सुसमाचार सारे जगत में फलता और बढ़ता जा रहा है, वैसे ही जिस दिन तुमने उसे सुना और सत्य से परमेश्‍वर के अनुग्रह को जाना, तब से तुम्हारे बीच में भी हो रहा है; तुमने यह हमारे प्रिय संगी दास इपफ्रास से सीखा जो तुम्हारे लिए मसीह का विश्‍वासयोग्य सेवक है। उसी ने तुम्हारे उस प्रेम को जो आत्मा में है, हम पर प्रकट किया। इस कारण जिस दिन से हमने यह सुना, हम भी तुम्हारे लिए प्रार्थना और विनती करना नहीं छोड़ते कि तुम सारी आत्मिक बुद्धि और समझ में परमेश्‍वर की इच्छा की पहचान से परिपूर्ण हो जाओ, जिससे तुम्हारा चाल-चलन हर प्रकार से प्रभु को प्रसन्‍न करने योग्य हो, और तुम हर भले कार्य में फल लाकर परमेश्‍वर की पहचान में बढ़ते जाओ, और उसकी महिमा की शक्‍ति के अनुसार हर प्रकार के सामर्थ्य से बलवंत होते जाओ ताकि तुम हर प्रकार का धीरज और सहनशीलता प्राप्‍त करो, और आनंद के साथ पिता का धन्यवाद करते रहो जिसने तुम्हें ज्योति में पवित्र लोगों के उत्तराधिकार का सहभागी होने के योग्य बनाया। उसी ने हमें अंधकार के वश से छुड़ाया और अपने प्रिय पुत्र के राज्य में ले आया, और उस पुत्र में हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा मिलती है। वह अदृश्य परमेश्‍वर का प्रतिरूप और समस्त सृष्‍टि में पहलौठा है; क्योंकि जो कुछ स्वर्ग में और पृथ्वी पर है, दृश्य और अदृश्य, सब उसी में सृजा गया, चाहे वे सिंहासन हों या प्रभुताएँ, प्रधानताएँ हों या अधिकार, सब उसके द्वारा और उसी के लिए सृजे गए हैं। वह सब में प्रथम है और सब उसी में स्थिर रहते हैं। वह देह अर्थात् कलीसिया का सिर है। वही आदि है, और मृतकों में से जी उठने में पहलौठा, ताकि वह सब बातों में प्रधान हो; क्योंकि पिता इससे प्रसन्‍न हुआ कि उसकी सारी परिपूर्णता उसमें वास करे, और उसके क्रूस पर बहाए गए लहू के द्वारा शांति स्थापित करके उसी के द्वारा सब वस्तुओं का अपने साथ मेल-मिलाप कर ले, चाहे वे पृथ्वी पर हों या स्वर्ग में। तुम पहले अपने बुरे कार्यों के कारण उससे अलग किए गए थे और मन से उसके शत्रु थे; परंतु अब उसने अपने पुत्र की शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुमसे मेल कर लिया कि तुम्हें अपने सामने पवित्र, निष्कलंक और निर्दोष खड़ा करे। यह तभी होगा यदि तुम विश्‍वास में दृढ़ होकर स्थिर बने रहो और उस सुसमाचार की आशा को न छोड़ो जिसे तुमने सुना, जिसका प्रचार आकाश के नीचे सारी सृष्‍टि में किया गया, और जिसका मैं पौलुस सेवक बना। अब मैं तुम्हारे लिए अपने दुःखों में आनंदित हूँ और अपने शरीर में मसीह के कष्‍टों को सहने में जो घटी रहती है, उसे उसकी देह अर्थात् कलीसिया के लिए पूरी कर रहा हूँ, जिसका मैं परमेश्‍वर द्वारा सौंपे गए उत्तरदायित्व के अनुसार तुम्हारे लिए सेवक बना कि परमेश्‍वर के वचन का पूर्ण रूप से प्रचार करूँ। यह वह भेद है जो युगों और पीढ़ियों से गुप्‍त रखा गया, परंतु अब उसके पवित्र लोगों पर प्रकट किया गया है। परमेश्‍वर चाहता था कि वे जानें कि गैरयहूदियों में उस भेद की महिमा का धन क्या है; वह भेद यह है कि मसीह जो महिमा की आशा है, तुममें है। उसी का प्रचार हम सारी बुद्धि से प्रत्येक मनुष्य को चेतावनी देते और प्रत्येक मनुष्य को सिखाते हुए करते हैं ताकि हम प्रत्येक मनुष्य को मसीह में सिद्ध प्रस्तुत करें। इसके लिए मैं भी उसकी उस शक्‍ति के अनुसार जो मुझमें सामर्थ्य के साथ कार्य करती है, कठोर परिश्रम करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम यह जान लो कि मैं तुम्हारे और लौदीकिया के निवासियों के लिए और उन सब के लिए जिन्होंने मुझे नहीं देखा, कितना संघर्ष करता हूँ, ताकि प्रेम में एक साथ बँधकर और समझ के पूर्ण आश्‍वासन के समस्त धन को प्राप्‍त करके उनके मन प्रोत्साहित हों, जिससे वे परमेश्‍वर के भेद अर्थात् मसीह को पहचान लें, जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भंडार छिपे हैं। यह मैं इसलिए कहता हूँ कि कोई तुम्हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे। यद्यपि मैं शरीर में तो तुमसे दूर हूँ फिर भी आत्मा में तुम्हारे साथ हूँ और तुम्हारे व्यवस्थित जीवन तथा मसीह में तुम्हारे विश्‍वास की दृढ़ता को देखकर आनंदित हूँ। अतः जैसे तुमने मसीह यीशु को प्रभु मानकर ग्रहण किया है, वैसे ही उसमें चलो, तथा उसमें जड़ पकड़ते और उन्‍नत होते जाओ, और जैसे तुम्हें सिखाया गया वैसे ही विश्‍वास में दृढ़ होते हुए अत्यधिक धन्यवाद करते रहो। सावधान रहो कि कहीं तुम्हें कोई उस तत्त्व-ज्ञान और धोखे की व्यर्थ बातों द्वारा अपना शिकार न बना ले जो मनुष्यों की परंपरा और संसार के मूल सिद्धांतों के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं; क्योंकि उसी में परमेश्‍वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है और तुम उसी में परिपूर्ण किए गए हो जो समस्त प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है। उसमें तुम्हारा ख़तना भी हुआ जो हाथ से नहीं होता, अर्थात् मसीह का ख़तना, जिसमें शारीरिक देह उतार दी जाती है; और उसके साथ बपतिस्मा में गाड़े गए और परमेश्‍वर के उस सामर्थ्य पर विश्‍वास करने के द्वारा, जिसने उसे मृतकों में से जिलाया, तुम उसके साथ जिलाए भी गए। उसी ने तुमको भी जो अपने अपराधों और अपने शरीर की ख़तनारहित दशा में मरे हुए थे, मसीह के साथ जीवित कर दिया। उसने हमारे सब अपराधों को क्षमा कर दिया और विधियों का वह लेख जो हमारे नाम पर और हमारे विरुद्ध था, मिटा डाला, और उसे क्रूस पर कीलों से जड़कर सामने से हटा दिया है। उसने प्रधानताओं और अधिकारों को निरस्‍त्र किया और क्रूस के द्वारा उन पर विजय प्राप्‍त करके उनका खुलेआम तमाशा बनाया। इसलिए खाने और पीने में या पर्व या नए चाँद या सब्त के दिन के विषय में तुम पर कोई दोष न लगाए, जो आनेवाली बातों की छाया मात्र है परंतु वास्तविकता तो मसीह है। कोई भी जो झूठी दीनता और स्वर्गदूतों की पूजा में लिप्‍त रहता है, तुम्हें प्रतिफल से वंचित न कर दे। ऐसा व्यक्‍ति देखी हुई बातों पर लगा रहता है और अपनी शारीरिक समझ पर व्यर्थ फूलता है, और उस सिर से जुड़ा नहीं रहता जिसके द्वारा सारी देह जोड़ों और अस्थिबंधों के माध्यम से पोषित और सुगठित होकर परमेश्‍वर की ओर से बढ़ती है। जब तुम मसीह के साथ इस संसार के मूल सिद्धांतों के प्रति मर गए हो, तो फिर उनके समान जो सांसारिक जीवन बिताते हैं, ऐसी विधियों से क्यों बँधे रहते हो, जैसे “इसे न छूना, उसे न चखना, उसे हाथ न लगाना”? ये सब मनुष्यों की आज्ञाओं और शिक्षाओं के अनुसार हैं और उन वस्तुओं के संबंध में हैं जो उपयोग में आते-आते नष्‍ट हो जाती हैं। ये वे बातें हैं, जो मनगढ़ंत भक्‍ति, झूठी दीनता और शारीरिक तपस्याओं में बुद्धि का वेश धारण किए हुए तो हैं, परंतु शारीरिक लालसाओं को रोकने में इनसे कोई लाभ नहीं । इसलिए, जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए हो तो ऊपर की वस्तुओं की खोज में रहो, जहाँ मसीह विद्यमान है और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं, परंतु ऊपर की वस्तुओं पर मन लगाओ; क्योंकि तुम तो मर गए और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्‍वर में छिपा हुआ है। जब मसीह जो तुम्हारा जीवन है, प्रकट होगा, तो तुम भी उसके साथ महिमा में प्रकट किए जाओगे। इसलिए जो कुछ तुममें सांसारिक है उसे मार डालो, जैसे व्यभिचार, अशुद्धता, कामुकता, बुरी लालसा, तथा लोभ को जो मूर्तिपूजा है। इन्हीं के कारण परमेश्‍वर का प्रकोप आज्ञा न माननेवालों पर पड़ता है। जब तुम इन बुराइयों में जीवन बिताते थे तो इन्हीं के साथ चलते थे। परंतु अब तुम इन सब बातों को अर्थात् क्रोध, रोष, बुराई, निंदा और गालियाँ जो तुम्हारे मुँह से निकलती हैं, छोड़ दो। आपस में झूठ मत बोलो, क्योंकि तुमने अपने पुराने मनुष्यत्व को उसके कार्यों के साथ उतार फेंका है और नए मनुष्यत्व को पहन लिया है जो अपने सृष्‍टिकर्ता के स्वरूप के अनुसार ज्ञान में नया होता जाता है; जिसमें न कोई यूनानी है और न यहूदी, न ख़तनावाला और न ख़तनारहित, न बर्बर, न असभ्य, न दास और न स्वतंत्र, परंतु मसीह सब कुछ और सब में है। अतः तुम परमेश्‍वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, करुणा, दयालुता, दीनता, नम्रता और सहनशीलता को धारण करो। यदि किसी को किसी के विरुद्ध कोई शिकायत है तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे को क्षमा करो। जैसे प्रभु ने तुम्हें क्षमा किया, वैसे तुम भी करो; और इन सब के ऊपर प्रेम को धारण करो जो सिद्धता का बंधन है। मसीह की शांति तुम्हारे मनों पर राज्य करे जिसके लिए तुम एक देह में बुलाए भी गए हो; और आभारी बने रहो। मसीह का वचन तुममें बहुतायत से वास करे। सारी बुद्धि के साथ तुम एक दूसरे को सिखाते और चेतावनी देते रहो और धन्यवाद के साथ अपने-अपने मनों में परमेश्‍वर के लिए भजन, स्तुति और आत्मिक गीत गाते रहो। वचन से या कार्य से तुम जो कुछ भी करो, सब प्रभु यीशु के द्वारा परमेश्‍वर पिता को धन्यवाद देते हुए उसके नाम से करो। हे पत्‍नियो, जैसा प्रभु में उचित है, अपने-अपने पतियों के अधीन रहो। हे पतियो, अपनी-अपनी पत्‍नियों से प्रेम रखो और उनके प्रति कठोर मत बनो। हे बच्‍चो, सब बातों में अपने माता-पिता की आज्ञा मानो, क्योंकि प्रभु इससे प्रसन्‍न होता है। हे पिताओ, अपने बच्‍चों को क्रोध मत दिलाओ; ऐसा न हो कि वे निरुत्साहित हो जाएँ। हे दासो, सब बातों में अपने शारीरिक स्वामियों की आज्ञा मानो, लोगों को प्रसन्‍न करनेवालों के समान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि प्रभु का भय मानते हुए मन की सीधाई से। तुम जो कुछ करो, मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिए नहीं बल्कि प्रभु के लिए कर रहे हो, क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें प्रभु से उत्तराधिकार का प्रतिफल मिलेगा। तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। जो बुरा करता है, उसे अपनी बुराई का फल मिलेगा, और कोई पक्षपात नहीं होगा। हे स्वामियो, अपने दासों से न्यायसंगत और उचित व्यवहार करो, क्योंकि तुम जानते हो कि स्वर्ग में तुम्हारा भी एक स्वामी है। प्रार्थना में लगे रहो, धन्यवाद के साथ उसमें जागृत रहो। साथ ही हमारे लिए भी प्रार्थना करते रहो कि परमेश्‍वर हमारे लिए वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोले कि मसीह के उस भेद को बता सकें, जिसके कारण मैं बंदी भी बनाया गया हूँ, और उसे ऐसे प्रकट करूँ जैसे मुझे करना चाहिए। अवसर का सदुपयोग करते हुए बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करो। तुम्हारी बातचीत सदा अनुग्रह के साथ और सलोनी हो ताकि तुम जान जाओ कि हर एक को कैसे उत्तर देना चाहिए। प्रभु में प्रिय भाई और विश्‍वासयोग्य सेवक तथा संगी दास तुखिकुस तुम्हें मेरे विषय में सब बता देगा। मैंने उसे तुम्हारे पास इसी लिए भेजा है कि तुम हमारे विषय में जान लो और वह तुम्हारे मनों को प्रोत्साहित करे । उसके साथ विश्‍वासयोग्य और प्रिय भाई उनेसिमुस भी है जो तुम्हीं में से है। वे तुम्हें यहाँ की सारी बातें बता देंगे। मेरा साथी बंदी अरिस्तर्खुस तुम्हें नमस्कार कहता है और मरकुस भी जो बरनाबास का संबंधी है (जिसके विषय में तुम्हें आज्ञा मिली है कि यदि वह तुम्हारे पास आए तो तुम उसका स्वागत करना), और यीशु भी जो यूस्तुस कहलाता है। ख़तना किए हुओं में से केवल ये ही परमेश्‍वर के राज्य के लिए मेरे सहकर्मी हैं, और मेरी सांत्वना का कारण बने हैं। इपफ्रास, जो तुममें से है और मसीह यीशु का दास है, तुम्हें नमस्कार कहता है। वह अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हारे लिए सदा संघर्ष करता है कि तुम परिपक्‍व और परमेश्‍वर की संपूर्ण इच्छा पर आश्‍वस्त होकर स्थिर रहो। मैं उसकी साक्षी देता हूँ कि वह तुम्हारे लिए और जो लौदीकिया और हियरापुलिस में हैं उनके लिए बहुत परिश्रम करता है। प्रिय वैद्य लूका और देमास तुम्हें नमस्कार कहते हैं। लौदीकिया के भाइयों को और नुमफास तथा उसके घर की कलीसिया को नमस्कार कहना। जब यह पत्र तुम्हारे बीच पढ़ा जाए तो ऐसा करना कि इसे लौदीकिया की कलीसिया में भी पढ़ा जाए, और जो पत्र लौदीकिया से आए उसे भी तुम पढ़ना। अरखिप्पुस से कहना, “ध्यान दे कि जो सेवा तुझे प्रभु में सौंपी गई है, उसे तू पूरा करे।” मुझ पौलुस का अपने हाथ से लिखा हुआ नमस्कार। मेरी बेड़ियों को स्मरण रखना। तुम पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। पौलुस, सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है: तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते हुए तुम सब के लिए परमेश्‍वर का सदैव धन्यवाद करते हैं, और अपने परमेश्‍वर और पिता के सामने तुम्हारे विश्‍वास के कार्य, प्रेम के परिश्रम और अपने प्रभु यीशु मसीह में आशा की दृढ़ता को निरंतर स्मरण करते हैं। हे भाइयो, परमेश्‍वर के प्रियो, हम जानते हैं कि तुम चुने हुए हो, क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास केवल शब्दों में ही नहीं बल्कि सामर्थ्य में और पवित्र आत्मा में तथा पूर्ण आश्‍वासन के साथ भी पहुँचा। तुम जानते ही हो कि हम तुम्हारे लिए तुम्हारे बीच किस प्रकार से रहते थे। तुम बड़े क्लेश में पवित्र आत्मा के आनंद के साथ वचन को ग्रहण करके हमारे और प्रभु के अनुकरण करनेवाले बन गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि तुम मकिदुनिया और अखाया के सब विश्‍वासियों के लिए आदर्श बन गए। क्योंकि तुम्हारे यहाँ से प्रभु का वचन न केवल मकिदुनिया और अखाया में गूँजा, बल्कि परमेश्‍वर के प्रति तुम्हारा विश्‍वास भी हर जगह फैल गया है। अतः हमें कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं रही। वे स्वयं ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे बीच हमारा कैसा स्वागत हुआ, और कैसे तुम मूर्तियों से परमेश्‍वर की ओर फिरे कि जीवित और सच्‍चे परमेश्‍वर की सेवा करो, और उसके पुत्र अर्थात् यीशु के स्वर्ग से आने की प्रतीक्षा करो, जिसे उसने मृतकों में से जिलाया और जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है। हे भाइयो, तुम स्वयं ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ नहीं हुआ, परंतु तुम तो जानते हो कि फिलिप्पी में दुःख उठाने और अपमान सहने पर भी, हमें अपने परमेश्‍वर में ऐसा साहस प्राप्‍त हुआ कि हम घोर विरोध के बीच तुम्हें परमेश्‍वर का सुसमाचार सुना सके। क्योंकि हमारा उपदेश न तो भ्रम से, न अशुद्धता से और न ही छल के साथ है, बल्कि जैसे परमेश्‍वर ने हमें सुसमाचार का कार्य सौंपने के योग्य समझा, हम वैसी ही बात करते हैं—मनुष्यों को प्रसन्‍न करने के लिए नहीं बल्कि परमेश्‍वर को प्रसन्‍न करने के लिए, जो हमारे मनों को जाँचता है। तुम जानते ही हो कि हमने कभी चापलूसी की बात नहीं की और न लोभ के लिए कोई बहाना बनाया (परमेश्‍वर साक्षी है)। हमने मनुष्यों से प्रशंसा न चाही, न तुमसे और न दूसरों से, जबकि मसीह के प्रेरित होने के नाते हम तुम पर बोझ बन सकते थे। हमने तुम्हारे बीच में रहकर कोमलता दिखाई, जैसे एक माता अपने बच्‍चों का पालन-पोषण करती है। इस प्रकार तुमसे हमें इतना स्‍नेह हो गया था कि हम तुम्हें परमेश्‍वर का सुसमाचार सुनाने को ही नहीं बल्कि तुम्हारे लिए अपने प्राण देने को भी तैयार थे; इसलिए कि तुम हमारे प्रिय हो गए थे। हे भाइयो, तुम्हें हमारे परिश्रम और कष्‍टों का तो स्मरण होगा कि हमने रात और दिन काम करते हुए तुम्हारे बीच परमेश्‍वर का सुसमाचार प्रचार किया ताकि हम तुममें से किसी पर बोझ न बनें। तुम साक्षी हो और परमेश्‍वर भी कि तुम विश्‍वासियों के साथ हमारा व्यवहार कैसा पवित्र, धार्मिक और निर्दोष था। तुम तो जानते हो कि जैसे पिता अपनी संतान के साथ व्यवहार करता है वैसे ही हम तुममें से प्रत्येक को उपदेश देते, प्रोत्साहित करते और समझाते रहे कि तुम्हारा चाल-चलन उस परमेश्‍वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है। इसी कारण हम भी निरंतर परमेश्‍वर का धन्यवाद करते हैं कि जब हमारे द्वारा तुम्हें परमेश्‍वर के वचन का संदेश मिला, तो तुमने उसे मनुष्यों का नहीं, बल्कि परमेश्‍वर का वचन समझकर ग्रहण किया (सचमुच वह है भी) जो तुम विश्‍वास करनेवालों में कार्य भी करता है। हे भाइयो, तुम मसीह यीशु में परमेश्‍वर की उन कलीसियाओं के अनुकरण करनेवाले बन गए हो जो यहूदिया में हैं, क्योंकि तुमने भी अपने देशवासियों से वैसा ही दुःख सहा जैसा उन्होंने भी यहूदियों से सहा था, जिन्होंने प्रभु यीशु और भविष्यवक्‍ताओं को मार डाला और हमें भी सताया। वे परमेश्‍वर को प्रसन्‍न नहीं करते, और सब मनुष्यों के विरोधी हैं। वे गैरयहूदियों से उनके उद्धार के लिए बात करने से हमें रोकते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनके पापों का घड़ा सदा भरता जाता है; और अब अंततः उन पर प्रकोप आ ही पड़ा है। हे भाइयो, जब हम कुछ समय के लिए तुमसे दूर हो गए थे (आत्मा में नहीं परंतु शरीर में) तो हमने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुख देखने के लिए और भी अधिक प्रयत्‍न किया। इसलिए हमने, विशेषकर मुझ पौलुस ने तो बार-बार तुम्हारे पास आना चाहा, परंतु शैतान हमें बाधित करता रहा। हमारे प्रभु यीशु के आगमन पर उसके सामने हमारी आशा या आनंद या गर्व का मुकुट भला कौन होगा? क्या तुम ही नहीं? तुम ही हमारा गौरव और आनंद हो। इसलिए जब हमसे और अधिक रहा नहीं गया, तो हमने एथेंस में अकेले रह जाना उचित समझा, और तीमुथियुस को, जो हमारा भाई और मसीह के सुसमाचार में परमेश्‍वर का सहकर्मी है, भेज दिया कि वह तुम्हारे विश्‍वास में तुम्हें दृढ़ और प्रोत्साहित करे, ताकि कोई भी इन क्लेशों से विचलित न हो जाए। तुम स्वयं जानते हो कि हम इसी के लिए ठहराए गए हैं। वास्तव में जब हम तुम्हारे साथ थे तो पहले से ही तुम्हें कहा करते थे कि हमें क्लेश सहने पड़ेंगे, और तुम जानते हो कि ऐसा हुआ भी। इस कारण जब मुझसे और रहा नहीं गया, तो मैंने उसे तुम्हारे विश्‍वास की दशा जानने के लिए भेजा, कि कहीं परीक्षा करनेवाले ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो जाए। परंतु अब तीमुथियुस विश्‍वास और प्रेम का यह अच्छा समाचार लेकर तुम्हारे यहाँ से हमारे पास लौट आया है कि तुम सदैव प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमसे मिलने की वैसे ही लालसा करते हो जैसे कि हम तुमसे मिलने की। इसलिए, हे भाइयो, हमने तुम्हारे विश्‍वास से अपने सारे दुःखों और क्लेशों में तुम्हारे विषय में शांति पाई है। क्योंकि यदि तुम प्रभु में स्थिर हो तो अब हम सचमुच जीवित हैं। हम उस संपूर्ण आनंद के बदले में जो तुम्हारे विषय में है परमेश्‍वर का धन्यवाद कैसे करें? हम तुम्हारे कारण अपने परमेश्‍वर के सामने आनंदित होते हैं, तथा रात और दिन बहुत प्रार्थना करते रहते हैं कि तुम्हारा मुख देखें और तुम्हारे विश्‍वास की घटी को पूरा करें। अब हमारा परमेश्‍वर और पिता स्वयं ही, तथा हमारा प्रभु यीशु तुम्हारे पास आने में हमारा मार्गदर्शन करे; और प्रभु ऐसा करे कि तुम एक दूसरे और सब लोगों के लिए प्रेम में वैसे ही बढ़ते और भरपूर होते जाओ, जैसे हम भी तुम्हारे लिए होते हैं, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए तो वह तुम्हारे मनों को हमारे परमेश्‍वर और पिता के सामने पवित्रता में निर्दोष ठहराए। आमीन। इसलिए, अब हे भाइयो, हम प्रभु यीशु में तुमसे विनती करते और तुम्हें प्रोत्साहित करते हैं कि जैसे तुमने हमसे योग्य चाल चलना और परमेश्‍वर को प्रसन्‍न करना सीखा है—और जैसे तुम चलते भी हो—वैसे ही इनमें और अधिक बढ़ते जाओ। क्योंकि तुम जानते हो कि हमने प्रभु यीशु के द्वारा तुम्हें कौन-कौन सी आज्ञाएँ दी हैं। परमेश्‍वर की यही इच्छा है कि तुम पवित्र बनो, अर्थात् व्यभिचार से दूर रहो, और तुममें से प्रत्येक अपने-अपने पात्र को पवित्रता और आदर के साथ संभालना जाने, और उन गैरयहूदियों के समान कामुकता में नहीं, जो परमेश्‍वर को नहीं जानते हैं। इस बात में कोई अपने भाई के प्रति अपराध न करे और न उसका अनुचित लाभ उठाए क्योंकि इन सब बातों का बदला लेनेवाला प्रभु है, जैसा कि हमने तुम्हें पहले ही बताया और चिताया भी था। परमेश्‍वर ने हमें अशुद्धता के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता के लिए बुलाया है। इसलिए जो इसे अस्वीकार करता है वह मनुष्य को नहीं बल्कि परमेश्‍वर को अस्वीकार करता है, जो तुम्हें अपना पवित्र आत्मा देता है। अब भाईचारे के प्रेम के विषय में यह आवश्यक नहीं कि मैं तुम्हें कुछ लिखूँ, क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुमने स्वयं परमेश्‍वर से सीखा है; और तुम वास्तव में समस्त मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा ही प्रेम रखते हो। परंतु हे भाइयो, हम तुम्हें प्रोत्साहित करते हैं कि इसमें और अधिक बढ़ते जाओ, और जैसी हमने तुम्हें आज्ञा दी थी, तुम शांतिपूर्ण जीवन जीने का प्रयत्‍न करो, अपने काम से काम रखो और अपने हाथों से परिश्रम करो, ताकि बाहरवालों के सामने तुम्हारा चाल-चलन उचित हो, और तुम्हें किसी वस्तु की घटी न हो। अब हे भाइयो, हम नहीं चाहते कि तुम उनके विषय में अनजान रहो जो सो गए हैं; ऐसा न हो कि तुम अन्य लोगों के समान शोक करो जो आशारहित हैं। क्योंकि यदि हम विश्‍वास करते हैं कि यीशु मरा और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्‍वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। प्रभु के वचन के अनुसार हम तुमसे यह कहते हैं कि हम जो जीवित हैं और प्रभु के आगमन तक बचे रहेंगे, उन सोए हुओं से कदापि आगे न बढ़ेंगे। क्योंकि प्रभु स्वयं ललकार के साथ, और प्रधान स्वर्गदूत की पुकार तथा परमेश्‍वर की तुरही की आवाज़ के साथ स्वर्ग से उतरेगा, और जो मसीह में मृत हैं, वे पहले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे हुए होंगे उनके साथ ही हवा में प्रभु से मिलने के लिए बादलों पर उठा लिए जाएँगे; और इस प्रकार हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। इसलिए इन बातों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहो। अब हे भाइयो, समयों और कालों के विषय में यह आवश्यक नहीं कि तुम्हें कुछ लिखा जाए, क्योंकि तुम स्वयं भली-भाँति जानते हो कि प्रभु का दिन ऐसे आएगा जैसे रात को चोर आता है। जब लोग कहेंगे, “शांति और सुरक्षा है,” तब जैसे गर्भवती स्‍त्री पर प्रसव-पीड़ा आती है, वैसे ही अचानक उन पर विनाश आ पड़ेगा, और वे बच नहीं सकेंगे। परंतु हे भाइयो, तुम अंधकार में नहीं हो कि वह दिन तुम पर चोर के समान आ पड़े, क्योंकि तुम सब ज्योति की संतान और दिन की संतान हो; हम न तो रात के हैं और न ही अंधकार के। अतः हम दूसरों के समान सोते न रहें, बल्कि जागते और सचेत रहें। जो सोते हैं वे रात ही को सोते हैं, और जो मतवाले होते हैं वे रात ही को मतवाले होते हैं। परंतु हम दिन के हैं, इसलिए आओ, हम विश्‍वास और प्रेम का कवच और उद्धार की आशा का टोप पहनकर सचेत रहें; क्योंकि परमेश्‍वर ने हमें प्रकोप के लिए नहीं बल्कि हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार प्राप्‍त करने के लिए ठहराया है, जो हमारे लिए मरा कि हम चाहे जागते हों या सोते हों, हम मिलकर उसके साथ जीवित रहें। इसलिए एक दूसरे को प्रोत्साहित करो और एक दूसरे की उन्‍नति करो, जैसा कि तुम कर भी रहे हो। अब हे भाइयो, हम तुमसे विनती करते हैं कि जो तुम्हारे बीच परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे ऊपर अधिकारी हैं तथा तुम्हें शिक्षा देते हैं, उनका सम्मान करो; और उनके कार्य के कारण प्रेमपूर्वक उनका अत्यधिक आदर करो। आपस में मेल-मिलाप से रहो। हे भाइयो, हम तुमसे विनती करते हैं कि जो अनुचित चाल चलते हैं उन्हें चेतावनी दो, कायरों को प्रोत्साहन दो, निर्बलों को संभालो, सब के प्रति सहनशीलता दिखाओ। ध्यान रखो कि बुराई के बदले कोई किसी से बुराई न करे, परंतु सदा एक दूसरे और सब लोगों के साथ भलाई करने का प्रयत्‍न करो। सदा आनंदित रहो। निरंतर प्रार्थना करते रहो। हर बात में धन्यवाद करो, क्योंकि मसीह यीशु में तुम्हारे लिए परमेश्‍वर की यही इच्छा है। आत्मा को न बुझाओ। भविष्यवाणियों को तुच्छ न समझो। सब बातों को परखो, और जो अच्छी है उसे दृढ़ता से थामे रहो। हर प्रकार की बुराई से दूर रहो। अब शांति का परमेश्‍वर स्वयं तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे, और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आगमन तक पूर्ण रूप से निर्दोष और सुरक्षित रहें। तुम्हारा बुलानेवाला विश्‍वासयोग्य है, और वह ऐसा ही करेगा। हे भाइयो, हमारे लिए प्रार्थना करते रहो। पवित्र चुंबन से सब भाइयों का अभिवादन करो। मैं प्रभु में तुम्हें आदेश देता हूँ कि यह पत्र सब भाइयों को पढ़कर सुनाया जाए। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे। आमीन। पौलुस, सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम, जो हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें परमेश्‍वर का सदैव धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है, क्योंकि तुम्हारा विश्‍वास बढ़ रहा है, और एक दूसरे के प्रति तुम सब का प्रेम भी बढ़ता जा रहा है। इसलिए परमेश्‍वर की कलीसियाओं में हम स्वयं तुम्हारे विषय में गर्व करते हैं कि जितने सताव और क्लेश तुम सहते हो, उन सब में तुम्हारा धीरज और विश्‍वास प्रकट होता है। यह परमेश्‍वर के सच्‍चे न्याय का स्पष्‍ट प्रमाण है कि तुम परमेश्‍वर के राज्य के योग्य ठहराए जाओगे, जिसके लिए तुम दुःख भी उठा रहे हो। निश्‍चय ही परमेश्‍वर के लिए यह न्यायसंगत है कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे, और तुम क्लेश सहनेवालों को हमारे साथ उस समय विश्राम दे जब प्रभु यीशु अपने सामर्थी स्वर्गदूतों के साथ स्वर्ग से धधकती आग में प्रकट होगा, और उन्हें दंड देगा जो परमेश्‍वर को नहीं जानते और हमारे प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार को नहीं मानते। वे प्रभु की उपस्थिति और उसके सामर्थ्य की महिमा से दूर होकर अनंत विनाश का दंड पाएँगे। यह उस दिन होगा जब वह अपने पवित्र लोगों में महिमान्वित होने और सब विश्‍वास करनेवालों में आश्‍चर्य का कारण होने के लिए आएगा—तुममें भी क्योंकि तुमने हमारी साक्षी पर विश्‍वास किया है। इसी कारण हम सदैव तुम्हारे लिए प्रार्थना भी करते हैं कि हमारा परमेश्‍वर तुम्हें अपनी बुलाहट के योग्य समझे और भलाई की हर एक इच्छा और विश्‍वास के हर एक कार्य को सामर्थ्य के साथ पूरा करे, ताकि हमारे परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह के अनुसार हमारे प्रभु यीशु मसीह का नाम तुममें महिमा पाए, और तुम उसमें। हे भाइयो, अब हमारे प्रभु यीशु मसीह के आगमन और उसके साथ हमारे एकत्र होने के विषय में हम तुमसे विनती करते हैं, कि तुम किसी आत्मा, या वचन, या पत्र के द्वारा जो मानो हमारी ओर से हो, और यह प्रकट करता हो कि प्रभु का दिन आ गया है, अपने मन में शीघ्र विचलित न होना और न ही घबराना। कोई तुम्हें किसी भी प्रकार से धोखा न दे सके, क्योंकि वह दिन तब तक नहीं आएगा जब तक कि पहले धर्म का त्याग न हो और अधर्म का पुरुष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रकट न हो जाए, जो प्रत्येक तथाकथित ईश्‍वर या आराध्य वस्तु का विरोध करता है और अपने आपको उनसे ऊँचा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्‍वर के मंदिर में बैठकर अपने आपको परमेश्‍वर घोषित करता है। क्या तुम्हें स्मरण नहीं कि जब मैं तुम्हारे साथ था तो तुम्हें ये बातें बताया करता था? और तुम जानते हो कि अपने निर्धारित समय में प्रकट होने के लिए अभी उसे क्या रोके हुए है। क्योंकि अधर्म का भेद अब भी क्रियाशील है, और जब तक रोकनेवाला मार्ग से हटा न दिया जाए तब तक वह उसे रोके रखेगा। तब वह अधर्मी प्रकट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा और अपने आगमन के तेज से भस्म कर देगा। उस अधर्मी का आना नाश होनेवालों के लिए शैतान के कार्य के अनुसार सब प्रकार की शक्‍ति और चिह्‍नों और झूठे आश्‍चर्यकर्मों, और अधर्म के हर प्रकार के धोखे के साथ होगा, क्योंकि उन्होंने सत्य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया जिससे उनका उद्धार होता। इस कारण परमेश्‍वर उनमें एक बड़े भ्रम को भेजेगा कि वे झूठ पर विश्‍वास करें, ताकि वे सब दंड पाएँ जिन्होंने सत्य पर विश्‍वास नहीं किया परंतु अधर्म से प्रसन्‍न हुए। हे भाइयो, प्रभु के प्रियो, हमें तुम्हारे विषय में परमेश्‍वर का सदैव धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि परमेश्‍वर ने आरंभ से ही तुम्हें चुन लिया है कि तुम आत्मा के द्वारा पवित्र बनकर और सत्य पर विश्‍वास करके उद्धार पाओ। इसी के लिए उसने हमारे सुसमाचार के द्वारा तुम्हें बुलाया कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्‍त करो। अतः हे भाइयो, स्थिर रहो और उन परंपराओं को थामे रहो जिनकी शिक्षा तुम्हें वचन या पत्र के द्वारा हमसे मिली थी। अब स्वयं हमारा प्रभु यीशु मसीह और हमारा परमेश्‍वर पिता, जिसने हमसे प्रेम रखा और अनुग्रह के द्वारा हमें अनंत शांति और उत्तम आशा दी है, तुम्हारे मनों को प्रोत्साहित करे और हर भले कार्य और वचन में दृढ़ करे। अंततः हे भाइयो, हमारे लिए प्रार्थना करो कि प्रभु का वचन शीघ्रता से फैले और महिमा पाए, जैसा तुम्हारे बीच हुआ और यह कि हम कुटिल और दुष्‍ट मनुष्यों से बचे रहें; क्योंकि विश्‍वास सब के पास नहीं है। परंतु प्रभु विश्‍वासयोग्य है, वह तुम्हें दृढ़ करेगा और उस दुष्‍ट से बचाएगा। हमें प्रभु में तुम पर भरोसा है कि जिन बातों की आज्ञा हम तुम्हें देते हैं तुम उनका पालन करते हो और करते रहोगे। अब प्रभु तुम्हारे मनों का मार्गदर्शन परमेश्‍वर के प्रेम और मसीह के धीरज की ओर करे। हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से अब हम तुम्हें आज्ञा देते हैं कि तुम ऐसे प्रत्येक भाई से दूर रहो जो अनुचित चाल चलता है और उस शिक्षा के अनुसार नहीं चलता जो तुमने हमसे पाई है। तुम स्वयं जानते हो कि तुम्हें किस प्रकार हमारा अनुकरण करना चाहिए, क्योंकि हम तुम्हारे बीच अनुचित चाल नहीं चले, और न ही हमने मुफ़्त में किसी की रोटी खाई, बल्कि रात और दिन परिश्रम और कष्‍ट के साथ कार्य करते रहे कि तुममें से किसी पर बोझ न बनें। यह नहीं कि हमें अधिकार नहीं है, पर इसलिए कि हम अपने आपको तुम्हारे सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें ताकि तुम हमारा अनुकरण करो। क्योंकि जब हम तुम्हारे साथ थे तो तुम्हें यह आज्ञा दिया करते थे: “यदि कोई कार्य करना नहीं चाहता तो वह खाए भी नहीं।” हम सुनते हैं कि तुम्हारे बीच में कुछ ऐसे लोग हैं जो अनुचित चाल चलते हैं, और कोई कार्य नहीं करते बल्कि दूसरों के कामों में टाँग अड़ाते हैं; ऐसे लोगों को हम प्रभु यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देते और समझाते हैं कि वे चुपचाप कार्य करके अपनी ही रोटी खाएँ। परंतु हे भाइयो, तुम भलाई करने में साहस न छोड़ो। यदि कोई इस पत्र में लिखी हमारी बातों को न माने तो उससे सतर्क रहना और उसके साथ संगति न रखना, ताकि वह लज्‍जित हो। फिर भी उसे शत्रु मत समझो, बल्कि एक भाई के समान उसे समझाओ। अब शांति का प्रभु स्वयं तुम्हें हर परिस्थिति में निरंतर शांति देता रहे। प्रभु तुम सब के साथ रहे। मुझ पौलुस का अपने हाथ से लिखा हुआ नमस्कार। प्रत्येक पत्र में मेरा यही चिह्‍न है; मैं इसी प्रकार लिखता हूँ। हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम सब पर होता रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर और हमारी आशा मसीह यीशु की आज्ञा के अनुसार मसीह यीशु का प्रेरित है, विश्‍वास में मेरे सच्‍चे पुत्र तीमुथियुस के नाम: परमेश्‍वर पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह, दया और शांति मिले। जैसा मैंने मकिदुनिया जाते समय तुझसे आग्रह किया था, तू इफिसुस में ही रह ताकि कुछ लोगों को आज्ञा दे सके कि वे अन्य प्रकार की शिक्षा न दें, और न ही उन कल्पित कथाओं और अंतहीन वंशावलियों पर ध्यान दें, जो विश्‍वास पर आधारित परमेश्‍वर के प्रबंध की अपेक्षा व्यर्थ विवादों को बढ़ावा देती हैं। परंतु हमारे इस निर्देश का लक्ष्य वह प्रेम है जो शुद्ध मन और खरे विवेक और निष्कपट विश्‍वास से उत्पन्‍न‍ होता है, जिन बातों से हटकर कितने ही लोग व्यर्थ के वाद-विवाद में फँस गए हैं। वे व्यवस्था के शिक्षक बनना तो चाहते हैं, परंतु जो वे कहते हैं और जिन बातों की वे दृढ़ता से पुष्‍टि करते हैं, स्वयं उन्हें समझते भी नहीं। परंतु हम जानते हैं कि यदि कोई व्यवस्था का उचित रूप से उपयोग करे तो वह भली है। हम यह भी जानते हैं कि व्यवस्था धर्मी जन के लिए नहीं बल्कि अधर्मियों और उपद्रवियों, भक्‍तिहीनों और पापियों, अपवित्र और अशुद्ध लोगों, माता-पिता को मार डालनेवालों, हत्यारों, व्यभिचारियों, समलैंगिकों, अपहरणकर्ताओं, झूठ बोलनेवालों, झूठी गवाही देनेवालों, और जो कुछ उस खरी शिक्षा के विरोध में है, उन सब के लिए ठहराई गई है। यह परम धन्य परमेश्‍वर के उस महिमामय सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सौंपा गया है। मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का जिसने मुझे सामर्थ्य दिया है धन्यवाद करता हूँ, क्योंकि उसने मुझे विश्‍वासयोग्य समझकर सेवा के लिए नियुक्‍त किया है। पहले तो मैं निंदा करनेवाला, सतानेवाला और हिंसक व्यक्‍ति था, फिर भी मुझ पर दया की गई क्योंकि मैंने यह सब अविश्‍वास की दशा में अज्ञानता से किया था; और हमारे प्रभु का अनुग्रह मुझ पर विश्‍वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। यह बात सच और हर प्रकार से ग्रहणयोग्य है कि मसीह यीशु जगत में पापियों का उद्धार करने आया, जिनमें सब से बड़ा मैं हूँ। फिर भी मुझ पर इसलिए दया हुई कि मसीह यीशु मुझ सब से बड़े पापी में अपनी पूर्ण सहनशीलता दिखाए, जिससे मैं उन लोगों के लिए आदर्श बनूँ जो अनंत जीवन के लिए उस पर विश्‍वास करेंगे। अब सनातन राजा, अर्थात् अविनाशी, अदृश्य और एकमात्र परमेश्‍वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। हे मेरे पुत्र तीमुथियुस, उन भविष्यवाणियों के अनुसार जो पहले से तेरे विषय में की गई थीं, मैं तुझे यह आज्ञा सौंपता हूँ कि तू उनके द्वारा अच्छी लड़ाई लड़ता रह, और विश्‍वास तथा खरे विवेक को थामे रह, जिसे त्याग देने के कारण कितने ही लोगों का विश्‍वास रूपी जहाज़ डूब गया है; हुमिनयुस और सिकंदर उन्हीं में से हैं, जिन्हें मैंने शैतान को सौंप दिया है, ताकि उन्हें सिखाया जाए कि वे परमेश्‍वर की निंदा न करें। अब मैं सब से पहले यह आग्रह करता हूँ कि सब लोगों के लिए विनती, प्रार्थना, मध्यस्थता और धन्यवाद किए जाएँ, तथा राजाओं और सब अधिकारियों के लिए भी, ताकि हम पूर्ण भक्‍ति और सम्मान के साथ अमन और शांति का जीवन व्यतीत करें। यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की दृष्‍टि में अच्छा और ग्रहणयोग्य है, जो चाहता है कि सब मनुष्य उद्धार पाएँ और सत्य को जानें। क्योंकि एक ही परमेश्‍वर है तथा परमेश्‍वर और मनुष्यों के बीच भी एक ही मध्यस्थ है, अर्थात् मसीह यीशु, जो मनुष्य है। उसने अपने आपको सब की छुड़ौती के रूप में दे दिया और इसकी साक्षी उचित समय पर दी गई। इसी कारण मुझे प्रचारक, प्रेरित और गैरयहूदियों के लिए विश्‍वास तथा सत्य का शिक्षक ठहराया गया—मैं सच कहता हूँ, झूठ नहीं बोलता। अब मैं चाहता हूँ कि हर जगह पुरुष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठाकर प्रार्थना करें। इसी प्रकार स्‍त्रियाँ भी शालीनता और सादगी के साथ उचित पहनावे से अपने आपको सँवारें; वे बाल गूँथने और सोने या मोतियों या बहुमूल्य वस्‍त्रों से नहीं, बल्कि भले कार्यों से, क्योंकि परमेश्‍वर की भक्‍ति करनेवाली स्‍त्रियों को यही शोभा देता है। स्‍त्री चुपचाप पूरी अधीनता के साथ सीखे। मैं अनुमति नहीं देता कि स्‍त्री उपदेश दे या पुरुष पर अधिकार जताए, बल्कि वह चुपचाप रहे। क्योंकि आदम पहले रचा गया था, उसके बाद हव्वा। आदम बहकाया नहीं गया, परंतु स्‍त्री बहकावे में आकर अपराधिनी हुई। फिर भी यदि वह संयम के साथ विश्‍वास, प्रेम और पवित्रता में बनी रहे तो संतान उत्पन्‍न‍ करने के द्वारा उद्धार पाएगी। यह बात सच है: यदि कोई अध्यक्ष बनना चाहता है, तो वह भले कार्य की इच्छा करता है। इसलिए आवश्यक है कि अध्यक्ष निर्दोष, एक ही पत्‍नी का पति, संयमी, समझदार, सम्माननीय, अतिथि-सत्कार करनेवाला और सिखाने में निपुण हो; पियक्‍कड़ और मारपीट करनेवाला न हो बल्कि विनम्र हो, और न ही झगड़ालू और धन का लोभी हो। वह अपने घर को अच्छी तरह से संभालता हो, और पूरे सम्मान के साथ बच्‍चों को अनुशासन में रखता हो। (यदि कोई अपने ही घर को संभालना न जानता हो, तो वह परमेश्‍वर की कलीसिया की देखभाल कैसे करेगा?) वह नया विश्‍वासी न हो, कहीं ऐसा न हो कि वह अभिमानी होकर शैतान के समान दंड पाए। और यह भी आवश्यक है कि बाहर के लोगों में उसका अच्छा नाम हो, ऐसा न हो कि वह निंदित होकर शैतान के फंदे में फँस जाए। इसी प्रकार सेवकों का भी सम्माननीय होना आवश्यक है; वे न दोगले, न पियक्‍कड़ और न ही धन के लोभी हों, परंतु विश्‍वास के भेद को शुद्ध विवेक से थामे रखनेवाले हों। ये लोग भी पहले परखे जाएँ, और यदि निर्दोष ठहरें तो सेवाकार्य करें। इसी प्रकार उनकी पत्‍नियाँ भी सम्माननीय हों; दोष लगानेवाली नहीं बल्कि संयमी और सब बातों में विश्‍वासयोग्य हों। सेवक एक ही पत्‍नी के पति हों, और अपने बाल-बच्‍चों तथा घर को अच्छी तरह से संभालनेवाले हों। क्योंकि जिन्होंने अच्छी तरह से सेवाकार्य किया है, वे अपने लिए उच्‍च स्थान और विश्‍वास में उस बड़े साहस को प्राप्‍त करते हैं जो मसीह यीशु में है। मुझे आशा है कि मैं शीघ्र तेरे पास आऊँगा; फिर भी मैं तुझे ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ, कि मेरे आने में देर होने पर भी तुझे यह मालूम रहे कि परमेश्‍वर के घराने में, जो जीवित परमेश्‍वर की कलीसिया है और सत्य का स्तंभ तथा आधार है, कैसा आचरण होना चाहिए। निस्संदेह भक्‍ति का यह भेद बड़ा है: वह देह में प्रकट हुआ, आत्मा के द्वारा धर्मी ठहरा, स्वर्गदूतों को दिखाई दिया, गैरयहूदियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्‍वास किया गया और महिमा में ऊपर उठा लिया गया। अब आत्मा स्पष्‍ट रूप से कहता है कि अंत के समय में कुछ लोग भरमानेवाली आत्माओं और दुष्‍टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्‍वास से भटक जाएँगे। यह उन झूठे लोगों के पाखंड के कारण होगा, जिनका विवेक मानो जलते लोहे से दाग दिया गया हो। वे विवाह करने से रोकेंगे, और कुछ भोजन वस्तुओं को त्यागने की आज्ञा देंगे जिन्हें परमेश्‍वर ने इसलिए सृजा है कि विश्‍वासी और सत्य को जाननेवाले धन्यवाद के साथ खाएँ। क्योंकि परमेश्‍वर द्वारा सृजी प्रत्येक वस्तु अच्छी है और यदि धन्यवाद के साथ स्वीकार की जाए तो कोई वस्तु अस्वीकार्य नहीं है; क्योंकि वह परमेश्‍वर के वचन और प्रार्थना के द्वारा शुद्ध हो जाती है। यदि तू भाइयों को इन बातों का स्मरण कराता रहे तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा, और विश्‍वास के उन वचनों तथा खरी शिक्षा के द्वारा, जिनका तू पालन करता आया है, तेरा पोषण होता रहेगा। अभक्‍ति और मूर्खता से भरी कल्पित कथाओं से दूर रह। अपने आपको भक्‍ति में प्रशिक्षित कर, क्योंकि शारीरिक व्यायाम से थोड़ा ही लाभ होता है, परंतु भक्‍ति सब बातों में लाभदायक है, और इसमें वर्तमान और आने वाले जीवन की प्रतिज्ञा पाई जाती है। यह बात सच और हर प्रकार से ग्रहणयोग्य है; इसी कारण हम परिश्रम और संघर्ष करते रहते हैं, क्योंकि हमारी आशा उस जीवित परमेश्‍वर पर है, जो सब मनुष्यों का, विशेषकर विश्‍वासियों का उद्धारकर्ता है। इन्हीं बातों की आज्ञा और शिक्षा दे। कोई तेरी जवानी को तुच्छ न समझे, बल्कि तू वचन, आचरण, प्रेम, विश्‍वास और पवित्रता में विश्‍वासियों के लिए आदर्श बन। जब तक मैं न आऊँ, पवित्रशास्‍त्र पढ़ने, प्रोत्साहित करने और शिक्षा देने में लगा रह। वह वरदान जो तुझमें है और तुझे प्रवरों के हाथ रखने पर भविष्यवाणी के द्वारा प्राप्‍त हुआ था, उसकी उपेक्षा न कर। इन बातों को करने में प्रयत्‍नशील रह, और इन्हीं में बना रह, ताकि तेरी उन्‍नति सब पर प्रकट हो जाए। तू अपने और अपनी शिक्षा के प्रति सजग रह। उन्हीं बातों पर स्थिर रह, क्योंकि ऐसा करने से तू अपने और अपने सुननेवालों के उद्धार का कारण होगा। किसी वृद्ध व्यक्‍ति को न डाँट बल्कि उसे पिता जानकर समझा; और जवानों को भाई जानकर, वृद्ध स्‍त्रियों को माँ जानकर, और जवान स्‍त्रियों को पूरी पवित्रता के साथ बहन जानकर समझा। उन विधवाओं का आदर कर जो वास्तव में विधवा हैं। यदि किसी विधवा के बच्‍चे या नाती-पोते हों, तो वे पहले अपने परिवार में भक्‍ति का व्यवहार करना और अपने माता-पिता के उपकारों का बदला चुकाना सीखें; क्योंकि परमेश्‍वर की दृष्‍टि में यह ग्रहणयोग्य है। जो वास्तव में विधवा है और अकेली है, वह परमेश्‍वर पर ही आशा रखती है, तथा रात और दिन प्रार्थना और विनती में लगी रहती है; परंतु जो भोग-विलास का जीवन व्यतीत करती है, वह जीवित होते हुए भी मरी हुई है। इन बातों की भी आज्ञा दिया कर, ताकि वे निर्दोष रहें। परंतु यदि कोई अपने लोगों की, और विशेषकर अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल नहीं करता, तो वह अपने विश्‍वास से फिर गया है, और अविश्‍वासी से भी बुरा हो गया है। उसी विधवा का नाम सूची में लिखा जाए जो साठ वर्ष से कम की न हो, और एक ही पति की पत्‍नी रही हो। वह अच्छे कार्यों के लिए जानी जाती हो, अर्थात् जिसने बच्‍चों का पालन-पोषण किया हो, अतिथि सेवा की हो, पवित्र लोगों के पैर धोए हों, दुखियों की सहायता की हो, और जो हर भले कार्य में लगी रही हो। परंतु जवान विधवाओं के नाम न लिखना क्योंकि जब वे शारीरिक अभिलाषाओं के कारण मसीह से विमुख हो जाती हैं तो विवाह करना चाहती हैं। इस प्रकार वे दोषी ठहरेंगी क्योंकि उन्होंने अपनी उस विश्‍वास-प्रतिज्ञा को तोड़ा है जो पहले की थी। साथ ही साथ, वे घर-घर फिरकर आलसी होना भी सीखती हैं, और न केवल आलसी होना सीखती हैं बल्कि बकबक करती और दूसरों के कामों में हस्तक्षेप भी करती हैं, तथा ऐसी बातें बोलती हैं जो बोलनी नहीं चाहिए। इसलिए मैं यह चाहता हूँ कि जवान विधवाएँ विवाह करें, संतान उत्पन्‍न‍ करें, घर संभालें, और विरोधी को निंदा करने का कोई अवसर न दें; क्योंकि कुछ तो पहले ही बहककर शैतान के पीछे हो ली हैं। यदि किसी विश्‍वासी स्‍त्री के यहाँ विधवाएँ हों, तो वह उनकी सहायता करे और कलीसिया पर बोझ न डाले, ताकि कलीसिया उनकी सहायता कर सके जो वास्तव में विधवा हैं। जो प्रवर अच्छा नेतृत्व करते हैं, वे दुगुने आदर के योग्य समझे जाएँ, विशेषकर वे जो वचन के प्रचार और शिक्षा के कार्य में परिश्रम करते हैं। क्योंकि पवित्रशास्‍त्र कहता है: दाँवते हुए बैल का मुँह न बाँधना, और मज़दूर को अपनी मज़दूरी मिलनी चाहिए। किसी प्रवर के विरुद्ध लगे आरोप को तब तक न मानना, जब तक दो या तीन गवाह न हों। जो पाप में लिप्‍त हैं, उन्हें सब के सामने डाँट ताकि बाकी लोग भी डरें। मैं परमेश्‍वर और मसीह यीशु तथा चुने हुए स्वर्गदूतों को उपस्थित जानकर तुझे दृढ़तापूर्वक आदेश देता हूँ कि तू इन बातों का पालन बिना किसी भेदभाव के कर और पक्षपात से कुछ न कर। किसी पर शीघ्र हाथ न रख और न ही दूसरों के पापों में सहभागी हो; अपने आपको पवित्र बनाए रख। अब से केवल पानी ही न पी, बल्कि अपने पेट और बार-बार हो रही बीमारियों के कारण थोड़े दाखरस का भी उपयोग कर लिया कर। कुछ लोगों के पाप तो प्रकट होते हैं जो न्याय के लिए पहले से पहुँच जाते हैं, परंतु कुछ लोगों के पाप बाद में प्रकट होते हैं। इसी प्रकार भले कार्य भी प्रकट होते हैं, और जो प्रकट नहीं होते वे भी छिपे नहीं रह सकते। जितने भी जुए के नीचे हैं अर्थात् दास हैं, वे अपने-अपने स्वामियों को बड़े आदर के योग्य समझें, ताकि परमेश्‍वर के नाम और हमारी शिक्षा की निंदा न हो। जिन दासों के स्वामी विश्‍वासी हैं, उनका वे भाई होने के कारण अनादर न करें, बल्कि उनकी और भी सेवा करें; क्योंकि उनकी सेवाओं से जिन्हें लाभ मिलता है वे विश्‍वासी और प्रिय जन हैं। इन बातों को सिखाता और समझाता रह। यदि कोई अन्य प्रकार की शिक्षा देता है, और हमारे प्रभु यीशु मसीह के खरे वचनों तथा उस शिक्षा से सहमत नहीं होता जो भक्‍ति के अनुसार है, तो वह अभिमानी हो गया है, और कुछ नहीं समझता, बल्कि उसे वाद-विवाद और शब्दों पर तर्क करने का रोग है, जिससे ईर्ष्या, कलह, निंदा, बुरी-बुरी आशंकाएँ, और उन मनुष्यों में निरंतर झगड़े उत्पन्‍न‍ होते हैं, जिनकी बुद्धि भ्रष्‍ट हो गई है और जो सत्य से वंचित रह गए हैं और सोचते हैं कि भक्‍ति कमाई का साधन है। परंतु संतोष सहित भक्‍ति बड़ा लाभ है: क्योंकि न तो हम इस संसार में कुछ लेकर आए हैं, और न ही कुछ लेकर जा सकते हैं; यदि हमारे पास भोजन और वस्‍त्र हैं, तो हम इन्हीं से संतुष्‍ट रहेंगे। परंतु जो धनी होना चाहते हैं वे ऐसी परीक्षा, फंदे और अनेक मूर्खतापूर्ण तथा हानिकारक अभिलाषाओं में पड़ जाते हैं जो मनुष्यों को पतन और विनाश के समुद्र में डुबा देती हैं। क्योंकि धन का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसकी लालसा में कितने ही लोगों ने विश्‍वास से भटककर अपने आपको अनेक दुःखों से छलनी कर लिया है। परंतु हे परमेश्‍वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धार्मिकता, भक्‍ति, विश्‍वास, प्रेम, धीरज और नम्रता का पीछा कर। विश्‍वास की अच्छी कुश्ती लड़; और उस अनंत जीवन को थाम ले, जिसके लिए तू बुलाया गया और जिसकी तूने बहुत से गवाहों के सामने उत्तम साक्षी दी थी। मैं सब के जीवनदाता परमेश्‍वर की उपस्थिति में और मसीह यीशु की उपस्थिति में जिसने पुंतियुस पिलातुस के सामने उत्तम साक्षी दी, तुझे यह आज्ञा देता हूँ, कि तू इस आज्ञा का पालन करने में निष्कलंक और निर्दोष रह जब तक हमारा प्रभु यीशु मसीह प्रकट न हो, जिसे परमेश्‍वर अपने उचित समय पर परम धन्य और एकमात्र शासक के रूप में प्रकट करेगा—वह जो राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है, जो एकमात्र अमर है, और अगम्य ज्योति में वास करता है, जिसे किसी मनुष्य ने न तो देखा है और न ही देख सकता है; उसी का आदर और पराक्रम युगानुयुग हो। आमीन। इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे कि वे अहंकारी न बनें और अनिश्‍चित धन पर नहीं बल्कि परमेश्‍वर पर आशा रखें जो हमारे आनंद के लिए सब कुछ बहुतायत से देता है। वे भलाई करें, अच्छे कार्यों में धनी बनें, दानशील और उदार हों, कि वे अपने लिए ऐसा धन संचय करें जो भविष्य के लिए अच्छी नींव बन जाए, जिससे वे सच्‍चे जीवन को थाम लें। हे तीमुथियुस, जो धरोहर तुझे सौंपी गई है उसकी रखवाली कर, और सांसारिक बकवाद और झूठे ज्ञान के विरोधी तर्कों से दूर रह, जिसे स्वीकार करके कितने ही लोग विश्‍वास से भटक गए हैं। तुम पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। पौलुस की ओर से, जो मसीह यीशु में निहित जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार परमेश्‍वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, मेरे प्रिय पुत्र तीमुथियुस के नाम: परमेश्‍वर पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह, दया और शांति मिले। मैं अपनी प्रार्थनाओं में रात और दिन निरंतर तुझे स्मरण करते हुए परमेश्‍वर का धन्यवाद करता हूँ, जिसकी सेवा मैं अपने पूर्वजों की रीति पर शुद्ध विवेक से करता हूँ। तेरे आँसुओं का स्मरण करते हुए मैं तुझसे मिलने की लालसा करता हूँ कि मैं आनंद से भर जाऊँ। मुझे तेरा सच्‍चा विश्‍वास भी स्मरण आता है, जो पहले तेरी नानी लोइस और फिर तेरी माता यूनीके में था और मुझे निश्‍चय है कि वह तुझमें भी है। इसी कारण मैं तुझे स्मरण दिलाता हूँ कि परमेश्‍वर के उस वरदान को जो मेरे हाथ रखने के द्वारा तुझे प्राप्‍त हुआ है, प्रज्‍ज्वलित कर। क्योंकि परमेश्‍वर ने हमें भय की नहीं बल्कि सामर्थ्य, प्रेम और संयम की आत्मा दी है। इसलिए तू हमारे प्रभु की साक्षी देने में और मुझसे जो उसका बंदी हूँ, लज्‍जित न हो, बल्कि परमेश्‍वर के सामर्थ्य के अनुसार सुसमाचार के लिए मेरे साथ दुःख उठा। उसी ने हमारा उद्धार किया है और पवित्र बुलाहट से बुलाया है। यह हमारे कार्यों के अनुसार नहीं बल्कि उसके उद्देश्य और उस अनुग्रह के अनुसार है जो मसीह यीशु में सनातन काल से हम पर था, पर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रकट होने के द्वारा प्रकाशित हुआ है, जिसने मृत्यु का नाश किया और सुसमाचार के द्वारा जीवन और अमरता को प्रकाश में ले आया। मैं इस सुसमाचार के लिए प्रचारक, प्रेरित और शिक्षक ठहराया गया हूँ। इस कारण मैं ये सब दुःख भी उठाता हूँ, फिर भी लज्‍जित नहीं होता; क्योंकि मैं उसे जानता हूँ जिस पर मैंने विश्‍वास किया है, और मैं आश्‍वस्त हूँ कि वह उस दिन तक मेरी धरोहर की रखवाली करने में समर्थ है। जो खरे वचन तूने मुझसे सुने हैं उन्हें उस विश्‍वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, अपना आदर्श बनाए रख। पवित्र आत्मा के द्वारा, जो हममें वास करता है, उस अच्छी धरोहर की रखवाली कर। तू यह जानता है कि वे सब जो आसिया में हैं मुझसे विमुख हो गए हैं, जिनमें फूगिलुस और हिरमुगिनेस भी हैं। उनेसिफुरुस के घराने पर प्रभु कृपा करे, क्योंकि उसने मुझे बहुत बार प्रोत्साहित किया और वह मेरी ज़ंजीरों से कभी लज्‍जित नहीं हुआ, बल्कि जब वह रोम आया तो उसने बड़े यत्‍न से मुझे ढूँढ़ा और मुझसे भेंट की। प्रभु करे कि उस दिन उस पर प्रभु की दया हो। इफिसुस में जो सेवाएँ उसने की हैं, उन्हें तू भली-भाँति जानता है। इसलिए हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह में जो मसीह यीशु में है, बलवंत हो जा। जो बातें तूने बहुत से गवाहों के सामने मुझसे सुनी हैं, उन्हें ऐसे विश्‍वासयोग्य मनुष्यों को सौंप दे जो दूसरों को भी सिखाने के योग्य हों। मसीह यीशु के अच्छे सिपाही के समान मेरे साथ दुःख उठा। सैनिक के रूप में कार्य करनेवाला कोई भी व्यक्‍ति अपने आपको दैनिक जीवन के झंझटों में इसलिए नहीं फँसाता कि वह अपने भरती करनेवाले को प्रसन्‍न कर सके। इसी प्रकार, यदि कोई खिलाड़ी नियमों के अनुसार न खेले तो वह पुरस्कार नहीं पाता। परिश्रम करनेवाले किसान को उपज का भाग सब से पहले मिलना चाहिए। जो मैं कहता हूँ उस पर ध्यान दे, क्योंकि प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। दाऊद के वंशज यीशु मसीह को स्मरण रख जो मृतकों में से जी उठा, और यह उस सुसमाचार के अनुसार है जिसका मैंने प्रचार किया, और जिसके लिए मैं दुःख उठाता हूँ, यहाँ तक कि अपराधी के समान बंधनों में भी हूँ; परंतु परमेश्‍वर का वचन किसी बंधन में नहीं है। इसलिए मैं चुने हुओं के कारण सब कुछ सह लेता हूँ कि वे भी उस उद्धार को, जो मसीह यीशु में है, अनंत महिमा के साथ प्राप्‍त करें। यह कथन विश्‍वास करने योग्य है: यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएँगे भी। यदि हम धीरज से सहते रहें तो उसके साथ राज्य भी करेंगे। यदि हम उसका इनकार करेंगे, तो वह भी हमारा इनकार करेगा। यदि हम विश्‍वासयोग्य न भी हों, तो भी वह विश्‍वासयोग्य बना रहता है, क्योंकि वह स्वयं अपना इनकार नहीं कर सकता। उन्हें इन बातों का स्मरण करा और परमेश्‍वर के सामने उनको चेतावनी दे कि शब्दों को लेकर वाद-विवाद न करें, क्योंकि इससे कोई लाभ नहीं बल्कि सुननेवालों का विनाश ही होता है। अपने आपको परमेश्‍वर की दृष्‍टि में ग्रहणयोग्य और ऐसे सेवक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयत्‍न कर, जिसे लज्‍जित होना न पड़े और जो सत्य के वचन को भली-भाँति काम में लाता हो। सांसारिक बकवाद से दूर रह, क्योंकि इससे लोग अभक्‍ति में और अधिक बढ़ते जाएँगे, और उनकी बातें सड़े घाव के समान फैलेंगी। हुमिनयुस और फिलेतुस उन्हीं में से हैं, जो यह कहते हुए सत्य से भटक गए हैं कि पुनरुत्थान पहले ही हो चुका है, और कितनों के विश्‍वास को उलट देते हैं। परंतु परमेश्‍वर की पक्‍की नींव बनी रहती है, जिस पर यह मुहर लगी है: “प्रभु अपने लोगों को जानता है,” और “जो कोई प्रभु का नाम लेता है वह अधर्म से दूर रहे।” बड़े घर में केवल सोने-चाँदी ही के नहीं बल्कि लकड़ी और मिट्टी के पात्र भी होते हैं; कुछ आदर के तो कुछ अनादर के लिए। इसलिए यदि कोई अपने आपको इनसे शुद्ध रखे, तो वह आदर का ऐसा पात्र ठहरेगा, जो पवित्र, स्वामी के लिए उपयोगी और हर भले कार्य के लिए तैयार होगा। जवानी की लालसाओं से भाग और जो शुद्ध मन से प्रभु को पुकारते हैं उनके साथ धार्मिकता, विश्‍वास, प्रेम, और शांति का पीछा कर। मूर्खता और अज्ञानता के विवादों से दूर रह, क्योंकि तू जानता है कि इनसे झगड़े उत्पन्‍न‍ होते हैं। परमेश्‍वर के दास को झगड़ालू नहीं होना चाहिए, बल्कि वह सब के साथ भला, शिक्षा देने में निपुण, सहनशील, और नम्रता से विरोधियों को समझानेवाला हो। संभव है कि परमेश्‍वर उन्हें पश्‍चात्ताप का अवसर दे कि वे सत्य को जान सकें और सचेत होकर शैतान के फंदे से बच निकलें, जिसने उन्हें अपनी इच्छा पूरी करने के लिए बंदी बना रखा है। यह जान ले कि अंतिम दिनों में कठिन समय आएँगे; क्योंकि मनुष्य स्वार्थी, लोभी, डींग मारनेवाले, अहंकारी, निंदक, माता-पिता की आज्ञा न माननेवाले, अकृतज्ञ, अपवित्र, प्रेम-रहित, क्षमारहित, दोष लगानेवाले, असंयमी, क्रूर, भलाई से घृणा करनेवाले, विश्‍वासघाती, ढीठ, अभिमानी और परमेश्‍वर से प्रेम करने की अपेक्षा सुख-विलास से प्रेम करनेवाले होंगे। वे भक्‍ति का वेश तो धारण करेंगे परंतु उसकी शक्‍ति को नहीं मानेंगे; ऐसे लोगों से दूर रह। इन्हीं में से वे लोग हैं जो घरों में घुसकर उन मूर्ख स्‍त्रियों को वश में कर लेते हैं जो पापों से दबी और विभिन्‍न‍ प्रकार की लालसाओं में फँसी हैं। वे सदा सीखती तो रहती हैं परंतु सत्य की पहचान तक कभी नहीं पहुँच पातीं। जैसे यन्‍नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था, वैसे ही ये लोग भी सत्य का विरोध करते हैं; इन मनुष्यों की बुद्धि भ्रष्‍ट हो गई है, और ये विश्‍वास के विषय में निकम्मे हैं। परंतु वे और आगे नहीं बढ़ पाएँगे; क्योंकि जैसे उन लोगों की अज्ञानता सब पर प्रकट हो गई थी, वैसे ही इनकी भी हो जाएगी। परंतु तूने मेरी शिक्षा, आचरण, उद्देश्य, विश्‍वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, तथा उन सतावों और दुःखों में मेरा साथ दिया, जो अंताकिया, इकुनियुम और लुस्‍त्रा में मुझ पर पड़े। मैंने कैसे-कैसे सताव सहे, परंतु प्रभु ने मुझे उन सब से बचाया। वास्तव में वे सब, जो मसीह यीशु में भक्‍तिपूर्ण जीवन बिताना चाहते हैं, सताए जाएँगे; परंतु दुष्‍ट और बहकानेवाले लोग धोखा देते और धोखा खाते हुए और अधिक बिगड़ते चले जाएँगे। परंतु तू उन बातों पर स्थिर रह जो तूने सीखी हैं और जिनका तुझे निश्‍चय हुआ है; क्योंकि तू यह जानता है कि तूने उन्हें किनसे सीखा है, और यह भी कि बचपन से पवित्रशास्‍त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह यीशु में विश्‍वास के द्वारा उद्धार पाने के लिए बुद्धि दे सकता है। संपूर्ण पवित्रशास्‍त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा देने, ताड़ना देने, सुधारने और धार्मिकता की शिक्षा के लिए लाभदायक है, जिससे परमेश्‍वर का जन सिद्ध बने, और हर भले कार्य के लिए सक्षम हो जाए। मैं परमेश्‍वर और मसीह यीशु को, जो जीवितों और मृतकों का न्याय करेगा, साक्षी मानकर और मसीह के प्रकट होने और उसके राज्य की सुधि दिलाकर तुझे दृढ़तापूर्वक आदेश देता हूँ: वचन का प्रचार कर, समय-असमय तैयार रह, बड़े धैर्य से शिक्षा देते हुए समझा, डाँट और प्रोत्साहित कर। क्योंकि ऐसा समय आएगा जब लोग खरी शिक्षा को सहन नहीं करेंगे बल्कि अपने कानों की खुजलाहट के कारण और अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिए गुरु बटोर लेंगे। वे अपने कान सत्य से फेरकर कल्पित कथाओं पर लगाएँगे। परंतु तू सब बातों में संयमी रह, दुःख उठा, सुसमाचार प्रचार का कार्य कर और अपनी सेवा पूरी कर। क्योंकि मैं अब अर्घ के समान उंडेला जाता हूँ; मेरे जाने का समय आ पहुँचा है। मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्‍वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिए धार्मिकता का मुकुट रखा हुआ है जिसे प्रभु, जो धार्मिकता से न्याय करनेवाला है, मुझे उस दिन देगा और केवल मुझे ही नहीं बल्कि उन सब को भी जो उसके प्रकट होने को प्रिय समझते हैं। मेरे पास शीघ्र आने का प्रयत्‍न कर, क्योंकि देमास ने इस संसार को प्रिय समझकर मुझे छोड़ दिया और थिस्सलुनीके को चला गया है। क्रेसकेंस गलातिया को और तीतुस दलमतिया को चला गया है। केवल लूका मेरे साथ है। मरकुस को अपने साथ लेते आना, क्योंकि सेवाकार्य में वह मेरे लिए उपयोगी है। मैंने तुखिकुस को इफिसुस भेजा है। जब तू आए तो जिस चोगे को मैं त्रोआस में करपुस के यहाँ छोड़ आया था, उसे और साथ ही पुस्तकों, विशेषकर चर्म-पत्रों को भी लेते आना। सिकंदर ताम्रकार ने मेरे साथ बहुत बुरा किया है, प्रभु उसे उसके कार्यों के अनुसार बदला देगा। तू भी उससे सावधान रह, क्योंकि उसने हमारे उपदेशों का कड़ा विरोध किया है। अपने बचाव की पहली सुनवाई में, किसी ने मेरा साथ नहीं दिया बल्कि सब ने मुझे छोड़ दिया था। प्रभु करे कि उन्हें इसका लेखा देना न पड़े! परंतु प्रभु मेरे साथ खड़ा हुआ और उसने मुझे सामर्थ्य दिया कि मेरे द्वारा प्रचार का कार्य पूर्ण रूप से हो और सब जातियाँ सुनें। मैं तो सिंह के मुँह से छुड़ाया गया। प्रभु मुझे हर बुरे कार्य से बचाएगा और अपने स्वर्गीय राज्य में सुरक्षित पहुँचाएगा। उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। प्रिस्का और अक्‍विला तथा उनेसिफुरुस के घराने को नमस्कार। इरास्तुस कुरिंथुस में रह गया, और मैं त्रुफिमुस को मीलेतुस में बीमार छोड़ आया हूँ। शीतकाल से पहले आने का प्रयत्‍न कर। यूबूलुस, पूदेंस, लीनुस, क्लौदिया और सब भाई तुझे नमस्कार कहते हैं। प्रभु तेरी आत्मा के साथ रहे। तुम पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। परमेश्‍वर के दास और यीशु मसीह के प्रेरित पौलुस की ओर से, जो परमेश्‍वर के चुने हुओं के विश्‍वास और सत्य के उस ज्ञान के लिए ठहराया गया है जो भक्‍ति की ओर ले जाता है; उस अनंत जीवन की आशा में जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्‍वर ने, जो झूठ नहीं बोल सकता, सनातन काल से की है, परंतु उचित समय पर उसने अपने वचन को उस प्रचार के द्वारा प्रकट किया जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की आज्ञा के अनुसार मुझे सौंपा गया; विश्‍वास की सहभागिता में मेरे सच्‍चे पुत्र तीतुस के नाम: परमेश्‍वर पिता और हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह और शांति मिले। मैं तुझे क्रेते में इस कारण छोड़ आया था कि तू शेष बातों को सुधारे और मेरे आदेश के अनुसार प्रत्येक नगर में प्रवरों को नियुक्‍त करे। प्रवर निर्दोष, और एक ही पत्‍नी का पति हो, और उसके बच्‍चे विश्‍वासी हों, दुराचार या अवज्ञाकारिता के दोषी न हों। परमेश्‍वर के भंडारी के रूप में अध्यक्ष के लिए आवश्यक है कि वह निर्दोष हो; वह न तो अहंकारी, न क्रोधी, न पियक्‍कड़, न मारपीट करनेवाला और न ही धन का लोभी हो, बल्कि अतिथि-सत्कार करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, समझदार, न्यायप्रिय, पवित्र और संयमी हो, और वह उस विश्‍वासयोग्य वचन को दृढ़ता से थामे रहे जो धर्मोपदेश के अनुसार है, ताकि वह खरी शिक्षा का उपदेश दे सके और विरोधियों का मुँह भी बंद कर सके। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि बहुत से लोग अधीनता में न रहनेवाले, बकवादी और धोखा देनेवाले हैं, विशेषकर ख़तनावालों में से। इनका मुँह बंद करना आवश्यक है, क्योंकि वे नीचता से धन कमाने के लिए गलत शिक्षा देकर घर के घर बिगाड़ रहे हैं। उनमें से एक ने जो उन्हीं का भविष्यवक्‍ता है, कहा है: “क्रेतेवासी सदैव झूठे, हिंसक पशु और आलसी पेटू होते हैं।” यह गवाही सच है। इस कारण तू उन्हें कड़ाई से झिड़क, ताकि वे विश्‍वास में पक्‍‍के हो जाएँ, और यहूदियों की कल्पित कथाओं और सच्‍चाई से भटके मनुष्यों की आज्ञाओं पर ध्यान न दें। शुद्ध लोगों के लिए सब वस्तुएँ शुद्ध हैं, परंतु अशुद्ध और अविश्‍वासियों के लिए कुछ भी शुद्ध नहीं, बल्कि उनके मन और विवेक दोनों ही अशुद्ध हैं। वे परमेश्‍वर को जानने का दावा तो करते हैं परंतु अपने कार्यों से उसका इनकार करते हैं। वे घृणित, आज्ञा न माननेवाले और किसी भले कार्य के योग्य नहीं हैं। परंतु तू ऐसी बातें कहा कर जो खरी शिक्षा के अनुरूप हों। वृद्ध पुरुष संयमी, सम्माननीय, और समझदार हों, तथा वे विश्‍वास, प्रेम और धैर्य में अटल हों। इसी प्रकार वृद्ध स्‍त्रियों का आचरण भी पवित्र हो। वे न तो दोष लगानेवाली और न ही पियक्‍कड़ हों, बल्कि अच्छी बातें सिखानेवाली हों, ताकि वे जवान स्‍त्रियों को सिखा सकें कि वे अपने-अपने पति और बच्‍चों से प्रीति रखनेवाली, समझदार, पवित्र आचरण रखनेवाली, कुशल गृहणी, भली और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, जिससे परमेश्‍वर के वचन की निंदा न हो। इसी प्रकार जवान पुरुषों को भी संयमी होने के लिए प्रोत्साहित कर। तू स्वयं सब बातों में भले कार्यों का आदर्श बन। तेरी शिक्षा में शुद्धता और गंभीरता हो, और तेरा वचन ऐसा खरा हो जिसकी निंदा न की जा सके, ताकि विरोधी को हमारे विषय में कुछ भी बुरा कहने का अवसर न मिले और वह लज्‍जित हो। दासों को चाहिए कि वे सब बातों में अपने-अपने स्वामियों की अधीनता में रहें, उन्हें प्रसन्‍न रखें तथा पलटकर जवाब न दें, चोरी चालाकी न करें, बल्कि अपनी पूर्ण विश्‍वासयोग्यता प्रकट करें ताकि सब बातों में वे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की शिक्षा की शोभा बढ़ाएँ। परमेश्‍वर का अनुग्रह सब मनुष्यों के उद्धार के लिए प्रकट हुआ है, और हमें सिखाता है कि हम अभक्‍ति और सांसारिक अभिलाषाओं का इनकार करके इस युग में संयम, धार्मिकता और भक्‍ति का जीवन बिताएँ, और उस धन्य आशा की अर्थात् अपने महान परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता, यीशु मसीह के महिमा में प्रकट होने की प्रतीक्षा करते रहें, जिसने अपने आपको हमारे लिए दे दिया ताकि हर प्रकार के अधर्म से हमें छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिए एक ऐसी निज प्रजा बना ले जो भले कार्यों को करने में उत्साही हो। इन बातों को पूरे अधिकार के साथ कह, प्रोत्साहित कर और समझा। कोई तुझे तुच्छ न समझे। लोगों को स्मरण दिला कि वे शासकों और अधिकारियों की अधीनता में रहें, और उनकी आज्ञा मानें, तथा हर भले कार्य के लिए तैयार रहें। वे किसी की निंदा न करें, लड़ाई-झगड़ा न करें, शालीन हों और सब मनुष्यों के साथ नम्रतापूर्वक व्यवहार करें। हम भी पहले निर्बुद्धि, आज्ञा न माननेवाले, भ्रम में पड़े हुए, तथा विभिन्‍न‍ प्रकार की लालसाओं और भोग-विलास के दासत्व में थे, तथा बुराई और ईर्ष्या में जीवन व्यतीत करते थे। हम घृणित थे और एक दूसरे से घृणा करते थे। परंतु जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की कृपा और मनुष्यों के प्रति उसका प्रेम प्रकट हुआ, तो उसने हमारा उद्धार किया—उसने यह हमारे द्वारा किए गए धर्म के कार्यों के कारण नहीं, बल्कि अपनी दया के अनुसार पवित्र आत्मा के द्वारा नए जन्म और नए किए जाने के स्‍नान से किया। इसी पवित्र आत्मा को उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर बहुतायत से उंडेला, ताकि हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहराए जाकर, अनंत जीवन की आशा के अनुसार उत्तराधिकारी बन जाएँ। यह बात सच है, और मैं चाहता हूँ कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले ताकि जिन्होंने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया है, वे भले कार्य करने पर मन लगाएँ। ये बातें मनुष्यों के लिए उत्तम और लाभदायक हैं। परंतु मूर्खतापूर्ण विवादों और वंशावलियों, तथा व्यवस्था से संबंधित मतभेदों और झगड़ों से दूर रह; क्योंकि वे अहितकारी और व्यर्थ हैं। फूट डालनेवाले मनुष्य को पहली और दूसरी बार चेतावनी देकर उससे दूर रह। यह जान ले कि ऐसा मनुष्य पथभ्रष्‍ट हो गया है और पाप करता रहता है; और वह स्वयं को दोषी ठहराता है। जब मैं अरतिमास या तुखिकुस को तेरे पास भेजूँ तो निकुपुलिस में मेरे पास आने का प्रयत्‍न करना, क्योंकि मैंने वहीं शीतकाल बिताने का निर्णय किया है। वकील जेनास और अपुल्‍लोस की यात्रा में हर संभव सहायता करना, ताकि उन्हें किसी बात की घटी न हो। हमारे लोग भी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भले कार्य करना सीखें ताकि वे निष्फल न रहें। मेरे सब साथियों का तुझे नमस्कार। विश्‍वास के कारण हमसे प्रीति रखनेवालों को भी नमस्कार। तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। मसीह यीशु के बंदी पौलुस और भाई तीमुथियुस की ओर से हमारे प्रिय और सहकर्मी फिलेमोन, और बहन अफफिया, तथा हमारे संगी योद्धा अरखिप्पुस और फिलेमोन के घर की कलीसिया के नाम: हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले। मैं तुझे अपनी प्रार्थनाओं में स्मरण करके अपने परमेश्‍वर का सदैव धन्यवाद करता हूँ, क्योंकि मैं तेरे उस प्रेम और विश्‍वास के विषय में सुनता हूँ जो प्रभु यीशु पर और सब पवित्र लोगों के प्रति है। मेरी प्रार्थना है कि प्रत्येक भली बात जो तुममें मसीह के लिए है, उसे पहचानने के द्वारा तेरे विश्‍वास की सहभागिता प्रभावशाली हो जाए। हे भाई, तेरे प्रेम से मुझे बहुत आनंद और प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के हृदय हरे-भरे हो गए हैं। इसलिए जो उचित है उसकी आज्ञा तुझे देने का मसीह में मुझे पर्याप्‍त साहस है, फिर भी मैं प्रेम के कारण विनती करता हूँ। मैं पौलुस जो इतना बूढ़ा हूँ, और अब मसीह यीशु के लिए बंदी भी हूँ, मैं तुझसे अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिए विनती करता हूँ जिसको मैंने कारावास में जन्म दिया। वह पहले तेरे लिए उपयोगी न था, परंतु अब तेरे और मेरे दोनों के लिए उपयोगी है। मैंने उसी को जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, तेरे पास वापस भेजा है; मैं उसे अपने पास रखना तो चाहता था कि वह इस कारावास में जो सुसमाचार के कारण है, तेरी ओर से मेरी सेवा करे, परंतु तेरी सहमति के बिना मैंने कुछ करना न चाहा ताकि तेरी भलाई विवशता से नहीं बल्कि अपनी इच्छा से हो। क्योंकि हो सकता है कि उसे कुछ समय के लिए इसलिए तुझसे अलग किया गया कि तू उसे सदा अपने पास रखे, एक दास के समान नहीं बल्कि दास से बढ़कर एक प्रिय भाई के रूप में, जो मेरे लिए तो अत्यंत प्रिय है, फिर तेरे लिए वह शरीर और प्रभु दोनों में और कितना अधिक होगा। इसलिए यदि तू मुझे अपना सहभागी मानता है तो उसे वैसे ही ग्रहण कर जैसे मुझे। यदि उसने तुझे कुछ हानि पहुँचाई है या तेरा कुछ लिया है, तो उसे मेरे नाम पर लिख देना। मैं पौलुस, अपने हाथ से लिखता हूँ कि मैं चुका दूँगा; तुझसे यह कहने की आवश्यकता नहीं कि तुझ पर भी मेरा ऋण है, और वह तू स्वयं है। हाँ भाई, प्रभु में मुझे तुझसे यह लाभ मिले; मसीह में मेरे हृदय को हरा-भरा कर दे। मैंने तेरे आज्ञाकारी होने का भरोसा करते हुए तुझे लिखा है, और यह जानता हूँ कि जो मैं कहता हूँ तू उससे बढ़कर करेगा। साथ ही मेरे लिए ठहरने का स्थान भी तैयार कर, क्योंकि मुझे आशा है कि तुम्हारी प्रार्थनाओं के द्वारा मैं तुम्हें लौटा दिया जाऊँगा। इपफ्रास, जो मसीह यीशु में मेरा साथी बंदी है, तुझे नमस्कार कहता है, साथ ही मेरे सहकर्मी मरकुस, अरिस्तर्खुस, देमास और लूका भी। प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा के साथ बना रहे। आमीन। प्राचीन काल में परमेश्‍वर ने भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा पूर्वजों से बार-बार और अनेक प्रकार से बातें कीं, पर इन अंतिम दिनों में उसने अपने पुत्र के द्वारा हमसे बातें कीं, जिसे उसने सब वस्तुओं का उत्तराधिकारी ठहराया, और उसी के द्वारा उसने सृष्‍टि की भी रचना की है। वह उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्त्व का प्रतिरूप है, और अपने सामर्थ्य के वचन के द्वारा वह सब वस्तुओं को संभाले रखता है। वह हमारे पापों को धोकर ऊँचे पर महामहिम के दाहिनी ओर जा बैठा। इस प्रकार वह स्वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा, जितना उसने उनसे श्रेष्‍ठ नाम उत्तराधिकार में पाया है। स्वर्गदूतों में से उसने कब किसी से यह कहा: तू मेरा पुत्र है, आज ही मैंने तुझे उत्पन्‍न‍ किया है, और फिर यह, मैं उसका पिता होऊँगा और वह मेरा पुत्र होगा। और जब वह पहलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है: परमेश्‍वर के सब स्वर्गदूत उसकी आराधना करें। स्वर्गदूतों के विषय में वह कहता है: वह अपने स्वर्गदूतों को पवन और अपने सेवकों को अग्‍नि-ज्वाला बना देता है। परंतु पुत्र के विषय में वह कहता है, “हे परमेश्‍वर, तेरा सिंहासन युगानुयुग का है, और तेरे राज्य का राजदंड न्याय का राजदंड है। तूने धार्मिकता से प्रेम और अधर्म से घृणा की है; इसलिए परमेश्‍वर, तेरे परमेश्‍वर ने तेरे साथियों से बढ़कर आनंद के तेल से तेरा अभिषेक किया है।” और: हे प्रभु, आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली, और आकाश तेरे ही हाथों की कारीगरी है। वे तो नष्‍ट हो जाएँगे, पर तू बना रहेगा; और वे सब वस्‍त्र के समान पुराने हो जाएँगे। तू उन्हें चादर के समान लपेटेगा, और वे वस्‍त्र के समान बदल दिए जाएँगे; परंतु तू एक समान बना रहता है और तेरे वर्षों का अंत न होगा। उसने स्वर्गदूतों में से कब किसी से कहा: मेरे दाहिनी ओर बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे पैरों की चौकी न बना दूँ। क्या वे सब सेवा करनेवाली आत्माएँ नहीं, जिन्हें उद्धार पानेवालों की सेवा के लिए भेजा गया है? इस कारण यह आवश्यक है कि हम उन बातों पर जो हमने सुनी हैं और भी अधिक ध्यान लगाएँ; कहीं ऐसा न हो कि हम भटक जाएँ। क्योंकि यदि स्वर्गदूतों के द्वारा कहा गया वचन अटल प्रमाणित हुआ, और प्रत्येक अपराध तथा आज्ञा-उल्‍लंघन का उचित दंड मिला, तो हम ऐसे महान उद्धार की उपेक्षा करके कैसे बच सकते हैं? इस उद्धार का वर्णन सर्वप्रथम प्रभु के द्वारा किया गया, और सुननेवालों के द्वारा हमारे सामने इसकी पुष्‍टि हुई। परमेश्‍वर ने भी अपनी इच्छा के अनुसार चिह्‍नों, और अद्भुत कार्यों, और विभिन्‍न‍ प्रकार के सामर्थ्य के कार्यों, और पवित्र आत्मा के वरदानों को बाँटने के द्वारा इसकी साक्षी दी। परमेश्‍वर ने उस आने वाले संसार को, जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं, स्वर्गदूतों के अधीन नहीं किया। परंतु किसी ने कहीं पर यह साक्षी दी है: मनुष्य क्या है कि तू उसे स्मरण रखे? या मनुष्य का पुत्र क्या है कि तू उसकी सुधि ले? तूने उसे थोड़े समय के लिए ही स्वर्गदूतों से कम किया; तूने उस पर महिमा और आदर का मुकुट रखा, और उसे अपने हाथों के कार्यों पर अधिकार दिया। तूने सब कुछ उसके पैरों तले कर दिया। इसलिए जब उसने सब कुछ उसके अधीन कर दिया तो उसने ऐसा कुछ भी नहीं छोड़ा जो उसके अधीन न किया हो। फिर भी हम अब तक सब कुछ उसके अधीन नहीं देखते। परंतु हम यीशु को—जिसे स्वर्गदूतों से थोड़े समय के लिए कम किया गया ताकि परमेश्‍वर के अनुग्रह से वह सब लोगों के लिए मृत्यु का स्वाद चखे—मृत्यु का दुःख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं। परमेश्‍वर को, जिसके लिए और जिसके द्वारा सब कुछ है, यह उचित लगा कि वह अपने अनेक पुत्रों को महिमा में लाने के लिए उनके उद्धार के कर्ता को दुःख उठाने के द्वारा सिद्ध करे। क्योंकि पवित्र करनेवाला और पवित्र किए जानेवाले सब एक ही मूल से हैं, इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से लज्‍जित नहीं होता, वह कहता है: मैं अपने भाइयों में तेरे नाम का प्रचार करूँगा; मैं सभा के बीच तेरा भजन गाऊँगा। और फिर, मैं उस पर भरोसा रखूँगा। और यह भी, देख, मैं और ये बच्‍चे, जो परमेश्‍वर ने मुझे दिए हैं। अतः जैसे बच्‍चे लहू और मांस में सहभागी हैं, वैसे ही वह स्वयं भी उनमें सहभागी हुआ, ताकि मृत्यु के द्वारा मृत्यु पर अधिकार रखनेवाले, अर्थात् शैतान को निष्फल कर दे, और उन्हें स्वतंत्र कर दे जो मृत्यु के भय के कारण जीवन भर दासत्व में जकड़े हुए थे। क्योंकि यह तो निश्‍चित है कि वह स्वर्गदूतों को नहीं बल्कि अब्राहम के वंश को संभालता है। इस कारण यह आवश्यक था कि वह सब बातों में अपने भाइयों के समान बने, जिससे वह परमेश्‍वर से संबंधित बातों में दयालु और विश्‍वासयोग्य महायाजक बनकर लोगों के पापों का प्रायश्‍चित्त करे। क्योंकि जब उसने स्वयं परीक्षा के समय दुःख उठाया, तो वह उनकी भी सहायता कर सकता है जिनकी परीक्षा होती है। इसलिए हे पवित्र भाइयो, तुम जो स्वर्गीय बुलाहट में सहभागी हो, यीशु पर ध्यान दो जिसे हम प्रेरित और महायाजक मानते हैं। वह अपने नियुक्‍त करनेवाले के प्रति विश्‍वासयोग्य रहा, जैसा मूसा भी परमेश्‍वर के सारे घराने में रहा। परंतु यीशु को मूसा से अधिक महिमा के योग्य समझा गया है, जैसे घर बनानेवाले को घर की अपेक्षा अधिक आदर मिलता है। प्रत्येक घर किसी न किसी के द्वारा बनाया जाता है, परंतु जिसने सब वस्तुओं को बनाया वह परमेश्‍वर है। परमेश्‍वर के सारे घराने में मूसा एक सेवक के समान विश्‍वासयोग्य रहा कि उन बातों का साक्षी हो जिनका वर्णन बाद में होने वाला था। परंतु मसीह परमेश्‍वर के घराने पर एक पुत्र के समान विश्‍वासयोग्य रहा; और यदि हम अपने साहस और अपने आशा के गर्व पर दृढ़ रहें तो हम ही उसका घराना हैं। अतः जैसा पवित्र आत्मा कहता है: यदि आज तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने मनों को वैसे कठोर न करना, जैसे तुमने जंगल में परीक्षा के दिन मुझे क्रोध दिलाने के समय किया था। जहाँ तुम्हारे पूर्वजों ने जाँचकर मुझे परखा, और चालीस वर्षों तक मेरे कार्यों को देखा। इसलिए मैं उस पीढ़ी से क्रोधित हुआ और मैंने कहा: “इनके मन हर समय भटकते रहते हैं, और इन्होंने मेरे मार्गों को नहीं जाना।” तब मैंने क्रोध में आकर शपथ खाई कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश नहीं करेंगे। हे भाइयो, सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुममें से किसी का मन बुरा और अविश्‍वासी हो और वह तुम्हें जीवित परमेश्‍वर से दूर कर दे। जब तक “आज का दिन” कहलाता है, तब तक एक दूसरे को प्रतिदिन प्रोत्साहित करते रहो, ताकि तुममें से कोई पाप के छलावे में आकर कठोर न हो जाए— यदि हम अपने आरंभिक विश्‍वास को अंत तक दृढ़ता से थामे रहते हैं, तो हम मसीह के सहभागी बन जाते हैं। जैसा कहा गया है: यदि आज तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने मनों को वैसे कठोर न करना, जैसे तुमने मुझे क्रोध दिलाने के समय किया था। वे कौन थे जिन्होंने सुनकर भी विद्रोह किया? क्या वे सब नहीं जो मूसा की अगुवाई में मिस्र से बाहर निकले थे? और परमेश्‍वर चालीस वर्षों तक किन लोगों से क्रोधित रहा? क्या उनसे नहीं जिन्होंने पाप किया था, और जिनके शव जंगल में पड़े रहे? और उसने किनसे शपथ खाई कि तुम मेरे विश्राम में कभी प्रवेश नहीं करोगे? क्या उनसे नहीं जिन्होंने आज्ञा नहीं मानी? अतः हम देखते हैं कि अविश्‍वास के कारण वे प्रवेश न कर सके। इसलिए जब उसके विश्राम में प्रवेश करने की प्रतिज्ञा अब तक बनी हुई है, तो हम सतर्क रहें, कहीं ऐसा न हो कि तुममें से कोई उससे वंचित रह जाए। वास्तव में, हमें भी उन्हीं के समान सुसमाचार सुनाया गया है; परंतु जो वचन उन्होंने सुना, उससे उन्हें कुछ लाभ न हुआ, क्योंकि जब उन्होंने उसे सुना तो विश्‍वास के साथ ग्रहण नहीं किया। हम जिन्होंने विश्‍वास किया है, उस विश्राम में प्रवेश करते हैं; जैसा उसने कहा है: मैंने क्रोध में आकर शपथ खाई कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश नहीं करेंगे। यद्यपि उसके कार्य जगत की उत्पत्ति के समय से ही पूरे हो गए थे। क्योंकि उसने सातवें दिन के विषय में कहीं पर इस प्रकार कहा है: परमेश्‍वर ने सातवें दिन अपने सब कार्यों से विश्राम किया। फिर इसी संदर्भ में वह कहता है: वे मेरे विश्राम में प्रवेश नहीं करेंगे। अतः इसमें कुछ लोगों का प्रवेश करना बाकी है। जिन लोगों को पहले सुसमाचार सुनाया गया था, वे तो आज्ञा न मानने के कारण प्रवेश नहीं कर पाए। इसलिए वह फिर से एक विशेष दिन को नियुक्‍त करता है, जिसे बहुत समय के बाद वह दाऊद के द्वारा फिर “आज का दिन” कहता है; जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है: यदि आज तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करना। यदि यहोशू उन्हें विश्राम में प्रवेश करा देता, तो परमेश्‍वर बाद में आने वाले किसी अन्य दिन की चर्चा न करता। अतः परमेश्‍वर के लोगों के लिए सब्त का विश्राम बाकी है। क्योंकि जिसने उसके विश्राम में प्रवेश कर लिया है, उसने भी परमेश्‍वर के समान अपने कार्यों से विश्राम पाया है। इसलिए हम भी उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्‍न करें, कहीं ऐसा न हो कि कोई जन उसी प्रकार आज्ञा न मानने के कारण गिर पड़े। परमेश्‍वर का वचन जीवित, प्रभावशाली और किसी भी दोधारी तलवार से अधिक तेज़ है, जो प्राण और आत्मा, जोड़ों और मज्‍जा को आर-पार भेदकर अलग करता है, और मन के विचारों और अभिप्रायों को परखता है। परमेश्‍वर की दृष्‍टि से कोई प्राणी छिपा नहीं है; उसकी आँखों के सामने सब नग्‍न और खुला है। उसी को हमें अपना लेखा देना है। जबकि हमारे पास ऐसा बड़ा महायाजक है जो आकाशमंडल से होकर गया, अर्थात् परमेश्‍वर का पुत्र यीशु, तो आओ, हम अपने विश्‍वास के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें। क्योंकि हमारा महायाजक ऐसा नहीं है जो हमारी निर्बलताओं में हमसे सहानुभूति न रख सके। वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, फिर भी निष्पाप निकला। अतः हम साहस के साथ अनुग्रह के सिंहासन के पास आएँ, ताकि हम पर दया हो और अनुग्रह पाएँ कि आवश्यकता के समय हमारी सहायता हो। प्रत्येक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है और मनुष्यों ही के लिए परमेश्‍वर से संबंधित बातों के विषय में नियुक्‍त किया जाता है कि वह पापों के लिए भेंट और बलिदान चढ़ाए। वह अज्ञानियों और भटके हुओं के साथ कोमलता से व्यवहार कर सकता है, क्योंकि वह स्वयं भी निर्बलता से घिरा रहता है। इस कारण, उसे चाहिए कि जैसे वह लोगों के लिए पापबलि चढ़ाता है वैसे ही अपने लिए भी चढ़ाया करे। कोई भी यह सम्मान अपने आप नहीं लेता, बल्कि परमेश्‍वर के द्वारा बुलाए जाने पर ही प्राप्‍त होता है, जैसे हारून भी बुलाया गया। इसी प्रकार, मसीह ने भी महायाजक बनने की महिमा स्वयं नहीं ली, बल्कि उसे उसने दी जिसने उससे कहा था: तू मेरा पुत्र है, आज ही मैंने तुझे उत्पन्‍न‍ किया है। जैसा वह अन्य स्थान पर भी कहता है: तू मलिकिसिदक की रीति के अनुसार सदा के लिए याजक है। यीशु ने अपनी देह में रहने के दिनों में ऊँचे स्वर से पुकारकर और आँसू बहा बहाकर, उससे जो उसे मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनतियाँ कीं; और भक्‍ति के कारण उसकी सुनी गई। यद्यपि वह पुत्र था, फिर भी उसने दुःख उठाकर आज्ञाकारिता सीखी, और उन सब के लिए, जो उसकी आज्ञा मानते हैं, सिद्ध ठहराया जाकर अनंत उद्धार का स्रोत बन गया, तथा परमेश्‍वर के द्वारा उसे मलिकिसिदक की रीति के अनुसार महायाजक नियुक्‍त किया गया। इस विषय में हमारे पास कहने के लिए बहुत कुछ है, जिसे समझाना कठिन है, क्योंकि तुम ऊँचा सुनने लगे हो। इस समय तक तो तुम्हें गुरु बन जाना चाहिए था, परंतु तुम्हें आवश्यकता है कि कोई तुम्हें परमेश्‍वर के वचनों के मूल सिद्धांतों को फिर से सिखाए। तुम्हें ठोस भोजन की नहीं परंतु दूध की आवश्यकता है। अब प्रत्येक जो दूध पीता है, वह धार्मिकता के वचन को नहीं पहचानता, क्योंकि वह बच्‍चा है। परंतु ठोस भोजन बड़ों के लिए होता है, जिनकी ज्ञानेंद्रियाँ अभ्यास के द्वारा भले और बुरे की पहचान करने में निपुण हो गई हैं। इसलिए आओ हम मसीह संबंधी आरंभिक शिक्षा से परिपक्‍वता की ओर आगे बढ़ जाएँ, और मरे हुए कार्यों से पश्‍चात्ताप करने, और परमेश्‍वर पर विश्‍वास करने, बपतिस्मों, हाथ रखने, मृतकों के पुनरुत्थान और अनंत दंड की शिक्षा की नींव फिर से न डालें। यदि परमेश्‍वर अनुमति दे तो हम ऐसा करके परिपक्‍वता की ओर बढ़ेंगे। क्योंकि जो एक बार ज्योति प्राप्‍त कर चुके हैं, और स्वर्गीय वरदानों का स्वाद चख चुके हैं, और पवित्र आत्मा में सहभागी हो गए हैं, और परमेश्‍वर के उत्तम वचन तथा आने वाले युग के सामर्थ्य का स्वाद चख चुके हैं, वे यदि भटक जाएँ तो उनको फिर पश्‍चात्ताप की ओर लाना असंभव है, क्योंकि वे अपने ही लिए परमेश्‍वर के पुत्र को फिर से क्रूस पर चढ़ाते हैं और खुलेआम उसका अपमान करते हैं। क्योंकि जो भूमि बार-बार होनेवाली वर्षा के पानी को पीती है और अपने जोतनेवालों के लिए उपयोगी साग-पात उपजाती है, वह परमेश्‍वर से आशिष पाती है। परंतु यदि वह भूमि काँटे और ऊँटकटारे उगाए, तो वह व्यर्थ है और शापित होने पर है, तथा उसका अंत जलाया जाना है। हे प्रियो, यद्यपि हम ऐसा कह रहे हैं, फिर भी हमें तुम्हारे विषय में उद्धार से संबंधित और भी अच्छी बातों का निश्‍चय है। क्योंकि परमेश्‍वर ऐसा अन्यायी नहीं कि वह तुम्हारे कार्य और उस प्रेम को भूल जाए जो तुमने उसके नाम के लिए पवित्र लोगों की सेवा करने में दिखाया था, और जिनकी सेवा तुम अब भी कर रहे हो। हम चाहते हैं कि तुममें से प्रत्येक अपनी आशा के पूर्ण निश्‍चय के लिए अंत तक ऐसा ही प्रयत्‍न करता रहे, ताकि तुम आलसी न हो जाओ, बल्कि उनका अनुकरण करनेवाले बनो जो विश्‍वास और धैर्य के द्वारा प्रतिज्ञाओं के उत्तराधिकारी हैं। अब्राहम से प्रतिज्ञा करते समय जब परमेश्‍वर को शपथ खाने के लिए अपने से बड़ा कोई न मिला, तो उसने अपनी ही शपथ खाई, और कहा: मैं निश्‍चित रूप से तुझे आशिष दूँगा और तुझे बहुत बढ़ाऊँगा। इस प्रकार अब्राहम ने धीरज धरकर प्रतिज्ञा की हुई बात को प्राप्‍त किया। मनुष्य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाते हैं, और शपथ से वह बात पक्‍की होकर उनके हर विवाद का अंत कर देती है। इसलिए जब परमेश्‍वर ने प्रतिज्ञा के उत्तराधिकारियों पर अपने अटल उद्देश्य को और भी अधिक प्रकट करना चाहा, तो उसने शपथ का उपयोग किया, ताकि दो न बदलनेवाली बातों के द्वारा, जिनमें परमेश्‍वर का झूठा ठहरना असंभव है, हमें—जो सामने रखी हुई आशा को प्राप्‍त करने के लिए दौड़ पड़े हैं—दृढ़ प्रोत्साहन मिले। यह आशा हमारे प्राण के लिए लंगर के समान स्थिर और दृढ़ है जो परदे के भीतर तक प्रवेश करती है, जहाँ यीशु ने हमारे अग्रदूत के रूप में मलिकिसिदक की रीति के अनुसार सदा के लिए महायाजक बनकर प्रवेश किया। यह मलिकिसिदक शालेम का राजा और परमप्रधान परमेश्‍वर का याजक था। जब अब्राहम राजाओं का संहार करके लौट रहा था, तो इसी ने उससे भेंट करके उसे आशिष दी। इसी को अब्राहम ने सब वस्तुओं का दशमांश भी दिया। मलिकिसिदक अपने नाम के अनुसार पहले तो धार्मिकता का राजा है, और फिर शालेम का राजा अर्थात् शांति का राजा भी है। उसका न तो कोई पिता, न माता, और न ही कोई वंशावली है, उसके दिनों का न तो आरंभ है और न ही जीवन का अंत; परंतु परमेश्‍वर के पुत्र के सदृश्य ठहरकर वह सदा के लिए याजक बना रहता है। अब देखो कि वह कैसा महान था, जिसे कुलपति अब्राहम ने दशमांश के रूप में अपनी लूट का उत्तम भाग दिया। लेवी के पुत्रों में से जो याजक पद पाते हैं, उन्हें आज्ञा मिली है कि वे लोगों, अर्थात् अपने भाइयों से व्यवस्था के अनुसार दशमांश प्राप्‍त करें, भले ही वे अब्राहम के वंशज हैं। परंतु उसने, जो उनकी वंशावली में से भी नहीं था, अब्राहम से दशमांश प्राप्‍त किया और जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थीं, उसे आशिष दी। इसमें कोई संदेह नहीं कि छोटा बड़े से आशिष पाता है। यहाँ तो नश्‍वर मनुष्य दशमांश लेते हैं, परंतु वहाँ वही लेता है जिसकी साक्षी दी जाती है कि वह जीवित है। अतः यह कहा जा सकता है कि स्वयं लेवी ने, जो दशमांश लेता है, अब्राहम के द्वारा दशमांश दिया। क्योंकि जिस समय मलिकिसिदक ने उसके पिता अब्राहम से भेंट की, उस समय वह अपने पिता की देह में ही था। अब यदि सिद्धता लेवीय याजक पद के द्वारा प्राप्‍त होती (क्योंकि इसी आधार पर लोगों को व्यवस्था प्राप्‍त हुई थी), तो फिर किसी दूसरे याजक के खड़े होने की क्या आवश्यकता थी जो हारून की रीति के अनुसार न होकर मलिकिसिदक की रीति के अनुसार हो? जब याजक पद बदला जाता है, तो व्यवस्था का भी बदला जाना आवश्यक है। क्योंकि जिसके विषय में ये बातें कही जाती हैं, वह किसी अन्य गोत्र का है, जिसमें से किसी ने भी वेदी की सेवा नहीं की। यह स्पष्‍ट है कि हमारा प्रभु यहूदा के गोत्र में से आया है, और उस गोत्र के विषय में मूसा ने याजक-संबंधी कोई बात नहीं कही। यह बात तब और भी अधिक स्पष्‍ट हो जाती है, जब मलिकिसिदक के समान कोई ऐसा याजक खड़ा हो जाता है, जो शारीरिक आज्ञा की व्यवस्था के अनुसार नहीं बल्कि अविनाशी जीवन के सामर्थ्य के अनुसार नियुक्‍त हुआ है। उसके विषय में यह साक्षी दी गई है: तू मलिकिसिदक की रीति के अनुसार सदा के लिए याजक है। जहाँ एक ओर पहली आज्ञा निर्बल और निष्फल होने के कारण रद्द हो गई— क्योंकि व्यवस्था ने किसी को सिद्ध नहीं किया—वहीं दूसरी ओर एक उत्तम आशा रखी गई जिसके द्वारा हम परमेश्‍वर के निकट आते हैं। मसीह की नियुक्‍ति बिना शपथ के नहीं हुई। याजक तो बिना शपथ के ही नियुक्‍त होते थे, परंतु वह शपथ के साथ उसके द्वारा नियुक्‍त किया गया जिसने उससे कहा: प्रभु ने शपथ खाई है और वह अपना मन न बदलेगा, “तू सदा के लिए याजक है।” इस प्रकार यीशु एक उत्तम वाचा का ज़ामिन ठहरा है। अब याजक पद पर रहनेवालों की संख्या तो बड़ी है, क्योंकि मृत्यु ने उन्हें रहने नहीं दिया; परंतु यीशु सदा के लिए बना रहता है, इस कारण उसका याजक पद अटल है। अतः जो उसके द्वारा परमेश्‍वर के पास आते हैं, वह उनका सदा के लिए उद्धार करने में समर्थ है, क्योंकि वह उनकी ओर से विनती करने के लिए सर्वदा जीवित है। हमारे लिए ऐसा ही महायाजक उपयुक्‍त था जो पवित्र, निर्दोष, निर्मल, पापियों से अलग, और स्वर्ग से भी ऊँचा हो। उसे अन्य महायाजकों के समान प्रतिदिन पहले अपने पापों के लिए और फिर लोगों के पापों के लिए बलिदान चढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसने अपने आपको बलिदान चढ़ाकर यह कार्य सदा के लिए एक ही बार में पूरा कर दिया है। व्यवस्था तो निर्बल मनुष्यों को महायाजक नियुक्‍त करती है, परंतु शपथ का वह वचन, जो व्यवस्था के बाद आया, उस पुत्र को नियुक्‍त करता है जो सदा के लिए सिद्ध किया गया है। अब जो बातें हम कह रहे हैं उनमें मुख्य बात यह है कि हमारा एक ऐसा महायाजक है जो स्वर्ग में महामहिम के सिंहासन के दाहिनी ओर विराजमान है, और उस पवित्र स्थान और सच्‍चे तंबू का सेवक है, जिसे किसी मनुष्य ने नहीं बल्कि प्रभु ने खड़ा किया है। प्रत्येक महायाजक को भेंट और बलिदान चढ़ाने के लिए नियुक्‍त किया जाता है; इसलिए आवश्यक है कि इस महायाजक के पास भी चढ़ाने के लिए कुछ हो। यदि वह पृथ्वी पर होता, तो कभी याजक न होता, क्योंकि व्यवस्था के अनुसार भेंट चढ़ानेवाले तो यहाँ हैं, जो स्वर्ग की वस्तुओं के प्रतिरूप और छाया की सेवा करते हैं; जैसे मूसा को, जब वह तंबू बनाने वाला था, परमेश्‍वर से चेतावनी मिली थी: देख, तू सब कुछ उस नमूने के अनुसार बनाना जो तुझे पहाड़ पर दिखाया गया था। परंतु यीशु को श्रेष्‍ठ सेवा प्राप्‍त हुई है, यहाँ तक कि वह उस उत्तम वाचा का मध्यस्थ भी ठहरा, जो उत्तम प्रतिज्ञाओं पर आधारित है। यदि पहली वाचा निर्दोष होती तो दूसरी को ढूँढ़ने की आवश्यकता न होती। परंतु परमेश्‍वर उन पर दोष लगाते हुए कहता है: प्रभु कहता है, “देखो, वे दिन आ रहे हैं जब मैं इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने के साथ एक नई वाचा बाँधूँगा।” फिर प्रभु कहता है, “यह उस वाचा के समान नहीं होगी, जो मैंने उनके पूर्वजों के साथ उस दिन बाँधी थी जब मैंने उनका हाथ थामकर उन्हें मिस्र देश से बाहर निकाला था— क्योंकि वे मेरी वाचा में स्थिर नहीं रहे, और मैं भी उनसे विमुख हो गया।” प्रभु फिर कहता है, “उन दिनों के बाद मैं इस्राएल के घराने के साथ जो वाचा बाँधूँगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में डालूँगा और उसे उनके हृदयों पर लिखूँगा; मैं उनका परमेश्‍वर होऊँगा, और वे मेरे लोग होंगे। तब वे अपने किसी पड़ोसी को और अपने किसी भाई को यह शिक्षा नहीं देंगे, ‘प्रभु को जान,’ क्योंकि उनमें छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे, क्योंकि मैं उनके अधर्म के विषय में दयालु होऊँगा, और उनके पापों को फिर कभी स्मरण न करूँगा।” जब उसने कहा, “एक नई वाचा,” तो उसने पहली वाचा को पुरानी ठहरा दिया। अब जो पुरानी और जीर्ण हो रही है, वह लुप्‍त होने पर है। अब पहली वाचा में भी सेवा के नियम थे, और पृथ्वी का पवित्र स्थान था। एक तंबू बनाया गया, जिसके बाहरी भाग में जो पवित्र स्थान कहलाता था, दीवट, मेज़ और भेंट की रोटियाँ होती थीं। दूसरे परदे के पीछे तंबू का वह भाग था जो परम पवित्र स्थान कहलाता था। उसमें धूप जलाने के लिए सोने की एक वेदी और चारों ओर से सोने से मढ़ा हुआ वाचा का संदूक था, जिसमें मन्‍ना से भरा हुआ सोने का मर्तबान, हारून की अंकुरित हुई लाठी और वाचा की पटियाँ थीं। संदूक के ऊपर तेजोमय करूब थे जो प्रायश्‍चित्त के ढक्‍कन पर छाया किए हुए थे। इनका विस्तार से वर्णन करना अभी संभव नहीं है। इन वस्तुओं के इस प्रकार व्यवस्थित होने के बाद याजक तंबू के बाहरी भाग में नियमित रूप से प्रवेश करके सेवाकार्य को संपन्‍न करते हैं, परंतु भीतरी भाग में केवल महायाजक प्रवेश कर सकता है, और वह भी वर्ष में एक ही बार। वह इसमें लहू लिए बिना नहीं जाता, जिसे वह अपने लिए और लोगों द्वारा अनजाने में किए गए पापों के लिए चढ़ाता है। इससे पवित्र आत्मा यह दर्शाता है कि जब तक बाहरी तंबू खड़ा है, परम पवित्र स्थान का मार्ग प्रकट नहीं है। यह वर्तमान समय के लिए एक प्रतीक है, जिसके अनुसार ऐसी भेंट और बलिदान चढ़ाए जाते हैं, जो आराधना करनेवाले के विवेक को सिद्ध नहीं कर सकते; क्योंकि ये केवल खाने-पीने और भाँति-भाँति की स्‍नान-विधियों से संबंधित शारीरिक नियम हैं, जो सुधार के समय तक के लिए ही निर्धारित हैं। परंतु जब मसीह आने वाली अच्छी बातों के महायाजक के रूप में प्रकट हुआ, तो उसने और भी श्रेष्‍ठ तथा सिद्ध तंबू से होकर प्रवेश किया, जो हाथों का बनाया हुआ अर्थात् इस सृष्‍टि का नहीं है। उसने बकरों और बछड़ों के लहू के द्वारा नहीं परंतु अपने ही लहू के द्वारा सदा के लिए एक ही बार परम पवित्र स्थान में प्रवेश करके हमारे लिए अनंत छुटकारा प्राप्‍त किया। क्योंकि यदि बकरों और बैलों का लहू तथा कलोर की राख का अशुद्ध लोगों पर छिड़का जाना उन्हें देह की शुद्धता के लिए पवित्र करता है, तो मसीह, जिसने अपने आपको अनंत आत्मा के द्वारा परमेश्‍वर के सामने निर्दोष चढ़ा दिया, उसका लहू हमारे विवेक को मरे हुए कार्यों से कितना अधिक शुद्ध करेगा ताकि हम जीवित परमेश्‍वर की सेवा कर सकें। इसी कारण मसीह नई वाचा का मध्यस्थ है ताकि उसकी मृत्यु के द्वारा, जो पहली वाचा के अंतर्गत अपराधों से छुटकारे के लिए हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनंत उत्तराधिकार को प्राप्‍त करें। जहाँ वसीयतनामा है, वहाँ उसके लिखनेवाले की मृत्यु का होना भी आवश्यक है; क्योंकि मृत्यु के बाद ही वसीयतनामा मान्य होता है। जब तक वसीयत लिखनेवाला जीवित है तब तक वसीयतनामा प्रभावी नहीं होता। इस कारण, पहली वाचा भी लहू के बिना नहीं बाँधी गई; जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की प्रत्येक आज्ञा सुना चुका, तो उसने बछड़ों और बकरों के लहू को पानी के साथ लेकर, उसे लाल ऊन तथा जूफे से व्यवस्था की पुस्तक और सब लोगों पर छिड़क दिया और कहा: यह उस वाचा का लहू है जिसका पालन करने की आज्ञा परमेश्‍वर ने तुम्हें दी है। इसी प्रकार उसने तंबू और सेवा के सब पात्रों पर लहू छिड़का। व्यवस्था के अनुसार प्रायः सब वस्तुएँ लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं, और बिना लहू बहाए पापों की क्षमा है ही नहीं। इसलिए आवश्यक था कि स्वर्ग की वस्तुओं के प्रतिरूप इन बलिदानों के द्वारा शुद्ध किए जाते, परंतु स्वर्गीय वस्तुएँ स्वयं इनसे भी उत्तम बलिदानों के द्वारा शुद्ध की जातीं। क्योंकि मसीह ने हाथों से बने उस पवित्र स्थान में, जो सच्‍चे पवित्र स्थान का प्रतिरूप है, प्रवेश नहीं किया, बल्कि स्वर्ग में ही प्रवेश किया कि अब हमारे लिए परमेश्‍वर के सामने प्रकट हो। इसलिए नहीं कि वह अपने आपको बार-बार चढ़ाए—जिस प्रकार महायाजक प्रतिवर्ष दूसरे का लहू लेकर पवित्र स्थान में प्रवेश करता है— अन्यथा उसे जगत की उत्पत्ति से बार-बार दुःख उठाना पड़ता; परंतु अब वह युग के अंत में एक ही बार प्रकट हुआ कि अपने बलिदान के द्वारा पाप को मिटा दे। जिस प्रकार सब मनुष्यों के लिए एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना निर्धारित है, उसी प्रकार मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिए एक ही बार बलिदान हुआ; और दूसरी बार वह पाप उठाने के लिए नहीं बल्कि उनके उद्धार के लिए प्रकट होगा, जो उसकी प्रतीक्षा करते हैं। व्यवस्था में तो आने वाली अच्छी वस्तुओं की छाया मात्र है, उनका वास्तविक स्वरूप नहीं है, इसलिए वह अपने पास आनेवालों को उन एक ही प्रकार के बलिदानों के द्वारा, जो प्रतिवर्ष नियमित रूप से चढ़ाए जाते हैं, कभी सिद्ध नहीं बना सकती। अन्यथा उनका चढ़ाया जाना क्या बंद नहीं हो जाता? क्योंकि आराधना करनेवाले जब एक ही बार शुद्ध हो जाते, तो उनका विवेक उन्हें फिर कभी पापी नहीं ठहराता। परंतु उन बलिदानों के द्वारा प्रतिवर्ष पापों का स्मरण होता है; क्योंकि बैलों और बकरों के लहू से पापों को दूर करना असंभव है। इस कारण मसीह ने जगत में आते समय कहा: तूने बलिदान और भेंट को न चाहा, परंतु तूने मेरे लिए एक देह तैयार की है। तू होमबलियों और पापबलियों से प्रसन्‍न नहीं हुआ। तब मैंने कहा, “देख, मैं आया हूँ, पवित्रशास्‍त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है, ताकि हे परमेश्‍वर, तेरी इच्छा पूरी करूँ।” उपरोक्‍त कथन में उसने कहा, “तूने बलिदानों और भेंटों को तथा होमबलियों और पापबलियों को न चाहा और न उनसे प्रसन्‍न हुआ,” जबकि ये व्यवस्था के अनुसार चढ़ाए जाते हैं, फिर उसने कहा, “देख, मैं आया हूँ, ताकि तेरी इच्छा पूरी करूँ।” वह पहले को हटा देता है ताकि दूसरे को स्थापित करे। इसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा, जो सदा के लिए एक ही बार हुआ, पवित्र किए गए हैं। अब प्रत्येक याजक प्रतिदिन खड़ा होकर सेवा करता है और एक ही प्रकार के बलिदानों को, जो पापों को कभी दूर नहीं कर सकते, बार-बार चढ़ाता है। परंतु यह याजक पापों के बदले सर्वदा के लिए एक ही बलिदान चढ़ाकर परमेश्‍वर के दाहिनी ओर जा बैठा। तब से वह यह प्रतीक्षा कर रहा है कि उसके शत्रु उसके पैरों की चौकी बना दिए जाएँ। क्योंकि उसने एक ही बलिदान के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिए सिद्ध कर दिया है। पवित्र आत्मा भी हमें इसकी साक्षी देता है, क्योंकि उसने पहले ही कहा है: प्रभु कहता है कि उन दिनों के बाद मैं उनके साथ जो वाचा बाँधूँगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके हृदयों में डालूँगा और उसे उनके मनों पर लिखूँगा। फिर वह कहता है: मैं उनके पापों और उनके अधर्मों को फिर कभी स्मरण न करूँगा। जहाँ इनकी क्षमा है, वहाँ पाप के लिए फिर कोई बलिदान नहीं रहा। अतः हे भाइयो, जब हमें यीशु के लहू के द्वारा उस नए और जीवित मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का साहस हुआ है, जिसे उसने परदे अर्थात् अपनी देह के द्वारा हमारे लिए खोला है, और जबकि हमारा एक ऐसा महान याजक है, जो परमेश्‍वर के घर का अधिकारी है, तो आओ, हम सच्‍चे मन और विश्‍वास के पूर्ण आश्‍वासन के साथ, और विवेक के दोष को दूर करने के लिए हृदयों पर छिड़काव लेकर तथा देह को शुद्ध जल से धोकर परमेश्‍वर के पास आएँ। आओ, हम अटल रहकर अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें, क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा की है वह विश्‍वासयोग्य है; और हम प्रेम और भले कार्यों में एक दूसरे को उत्साहित करने पर ध्यान दें। एक दूसरे के साथ संगति करना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, बल्कि एक दूसरे को प्रोत्साहित भी करते रहें; और तुम जितना उस दिन को निकट आते हुए देखो, उतना अधिक यह किया करो। यदि सत्य का ज्ञान प्राप्‍त करने के बाद भी हम जानबूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिए कोई बलिदान बाकी नहीं रह जाता, परंतु दंड की भयानक प्रतीक्षा और अग्‍नि-ज्वाला बाकी रह जाती है जो विरोधियों को भस्म कर देगी। जब मूसा की व्यवस्था का उल्‍लंघन करनेवाला, दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है, तो तुम्हीं सोचो कि वह कितने कठोर दंड के योग्य होगा, जिसने परमेश्‍वर के पुत्र को पैरों से रौंदा, और वाचा के उस लहू को अपवित्र समझा जिससे वह पवित्र किया गया था, और अनुग्रह के आत्मा का अपमान किया? क्योंकि हम उसे जानते हैं जिसने कहा: प्रतिशोध लेना मेरा काम है, बदला मैं ही लूँगा। और फिर यह: प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा। जीवित परमेश्‍वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है। परंतु उन बीते हुए दिनों को स्मरण करो, जिनमें तुम ज्योति प्राप्‍त करने के बाद कष्‍टों के बड़े संघर्ष में भी स्थिर रहे; कभी तो तुम निंदा और कष्‍ट सहते हुए खुलेआम तमाशा बने, तो कभी तुम उनके भागीदार बने जिनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया। तुमने बंदियों के साथ सहानुभूति दिखाई और अपनी संपत्ति के लुटने को यह जानकर आनंद के साथ स्वीकार कर लिया, कि तुम्हारे पास उत्तम और चिरस्थाई संपत्ति है। इसलिए अपने उस विश्‍वास को त्याग न दो, जिसका प्रतिफल बड़ा है। तुम्हें धीरज धरने की आवश्यकता है ताकि तुम परमेश्‍वर की इच्छा पूरी करके उसे प्राप्‍त कर सको जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी। क्योंकि अब थोड़े ही समय में आनेवाला आएगा, और वह देर नहीं करेगा; परंतु मेरा धर्मी जन विश्‍वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हटे, तो मेरा मन उससे प्रसन्‍न न होगा। परंतु हम पीछे हटनेवालों में से नहीं कि नाश हो जाएँ, बल्कि विश्‍वास करनेवाले हैं कि अपने प्राणों को बचाएँ। अब विश्‍वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है। इसी के द्वारा पूर्वजों को अच्छी गवाही प्राप्‍त हुई। विश्‍वास ही से हम समझते हैं कि परमेश्‍वर के वचन के द्वारा सारी सृष्‍टि की रचना ऐसे हुई कि जो वस्तुएँ दिखाई देती हैं वे उनसे रची गईं जो दिखाई नहीं देतीं। विश्‍वास ही से हाबिल ने परमेश्‍वर को कैन से उत्तम बलिदान चढ़ाया, और उसी के द्वारा वह धर्मी समझा गया, क्योंकि परमेश्‍वर ने उसकी भेंटों के विषय में गवाही दी थी। यद्यपि हाबिल मर गया, फिर भी विश्‍वास के द्वारा वह अब तक बोलता है। विश्‍वास ही से हनोक को उठा लिया गया कि वह मृत्यु को न देखे; उसका कुछ पता न चला, क्योंकि परमेश्‍वर ने उसे उठा लिया था। उठा लिए जाने से पहले उसके लिए यह गवाही दी गई कि परमेश्‍वर उससे प्रसन्‍न था। विश्‍वास के बिना उसे प्रसन्‍न करना असंभव है, क्योंकि जो कोई परमेश्‍वर के पास आता है उसके लिए यह विश्‍वास करना आवश्यक है कि परमेश्‍वर है; और जो उसे खोजते हैं उनको वह प्रतिफल देता है। विश्‍वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में, जो दिखाई नहीं देती थीं, चेतावनी पाकर भक्‍तिपूर्ण भय के साथ अपने परिवार के बचाव के लिए जहाज़ बनाया, जिसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया, और उस धार्मिकता का उत्तराधिकारी हुआ जो विश्‍वास के अनुसार है। विश्‍वास ही से अब्राहम जब बुलाया गया तो वह आज्ञा मानकर एक ऐसे स्थान को निकल गया जो उसे उत्तराधिकार में मिलने वाला था। वह नहीं जानता था कि कहाँ जा रहा है, फिर भी निकल गया। विश्‍वास ही से उसने प्रतिज्ञा के देश में परदेशी के समान वास किया, और इसहाक तथा याकूब के साथ जो उसी प्रतिज्ञा के सह-उत्तराधिकारी थे, तंबुओं में रहा। वह उस पक्‍की नींववाले नगर की प्रतीक्षा में था जिसका रचनाकार और बनानेवाला परमेश्‍वर है। विश्‍वास ही से सारा ने, जो स्वयं एक बाँझ थी, आयु ढल जाने पर भी गर्भधारण करने की शक्‍ति पाई, क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करनेवाले को विश्‍वासयोग्य माना। इसलिए एक ही मनुष्य से, जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र तट की बालू के समान असंख्य संतान उत्पन्‍न‍ हुई। ये सब विश्‍वास की दशा में मरे। इन्होंने प्रतिज्ञा की गई वस्तुओं को प्राप्‍त नहीं किया पर उन्हें दूर ही से देखकर उनका स्वागत किया और यह मान लिया कि हम पृथ्वी पर परदेशी और यात्री हैं। जो ऐसा कहते हैं वे स्पष्‍ट कर देते हैं कि वे निज देश की खोज में हैं। वे जिस देश से निकले थे, यदि उसी को स्मरण करते रहते तो उनके पास लौट जाने का अवसर होता; परंतु वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गीय देश की लालसा करते हैं। अतः परमेश्‍वर, उनका परमेश्‍वर कहलाने से लज्‍जित नहीं होता। उसने तो उनके लिए एक नगर तैयार किया है। विश्‍वास ही से अब्राहम ने परखे जाने के समय इसहाक को बलि चढ़ाया। जिसे प्रतिज्ञाएँ मिली थीं वही अपने एकलौते पुत्र को बलि चढ़ाने लगा, जिसके विषय में उससे कहा गया था: इसहाक से तेरा वंश कहलाएगा। उसने समझ लिया था कि परमेश्‍वर मृतकों में से भी जिलाने में सामर्थी है, और उसने दृष्‍टांत के रूप में इसहाक को फिर से प्राप्‍त किया। विश्‍वास ही से इसहाक ने याकूब और एसाव को आने वाली बातों के विषय में आशिष दी। विश्‍वास ही से याकूब ने अपनी मृत्यु के समय यूसुफ के प्रत्येक पुत्र को आशिष दी और अपनी लाठी के सिरे का सहारा लेकर परमेश्‍वर को दंडवत् किया। विश्‍वास ही से यूसुफ ने अपनी मृत्यु के समय इस्राएल की संतान के मिस्र से निकल जाने का उल्‍लेख किया, और अपनी अस्थियों के विषय में आज्ञा दी। विश्‍वास ही से मूसा के माता-पिता ने उसे जन्म के बाद तीन महीने तक छिपाए रखा, क्योंकि उन्होंने देखा कि बालक सुंदर है; और वे राजा की आज्ञा से न डरे। विश्‍वास ही से मूसा ने बड़े होने पर फ़िरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इनकार कर दिया, और पाप में थोड़े समय के सुख भोगने की अपेक्षा उसने परमेश्‍वर के लोगों के साथ कष्‍ट सहने को चुना। उसने मिस्र के धन के भंडारों की अपेक्षा मसीह के कारण निंदित होना उत्तम समझा, क्योंकि वह प्रतिफल की ओर दृष्‍टि लगाए हुए था। विश्‍वास ही से उसने मिस्र को छोड़ दिया और राजा के क्रोध से नहीं डरा, क्योंकि उस अदृश्य को मानो देखते हुए वह दृढ़ रहा। विश्‍वास ही से उसने फसह के पर्व की स्थापना की और लहू के छिड़काव की विधि को माना, ताकि पहलौठों का नाश करनेवाला उनमें से किसी को न छुए। विश्‍वास ही से उन्होंने लाल समुद्र को ऐसे पार किया, मानो वे सूखी भूमि पर हों; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करने का प्रयास किया तो वे डूब गए। विश्‍वास ही से यरीहो की शहरपनाह भी ढह गई जब वे सात दिन तक उसकी परिक्रमा कर चुके। विश्‍वास ही से राहब वेश्या आज्ञा न माननेवालों के साथ नाश नहीं हुई क्योंकि उसने गुप्‍तचरों का स्वागत किया था। इससे अधिक और क्या कहूँ? क्योंकि मेरे पास समय नहीं है कि मैं गिदोन, बाराक, शिमशोन, यिफतह, दाऊद, शमूएल और भविष्यवक्‍ताओं का वर्णन करूँ, जिन्होंने विश्‍वास ही से राज्यों पर विजय प्राप्‍त की, धार्मिकता के कार्य किए, प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ प्राप्‍त कीं, सिंहों के मुँह बंद किए, धधकती आग को शांत किया, तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवंत हुए, युद्ध में शक्‍तिशाली बने और विदेशी सेनाओं को खदेड़ दिया। स्‍त्रियों ने अपने मृतकों को फिर जीवित पाया। कितनों को यातनाएँ दी गईं परंतु उन्होंने छुटकारा न चाहा, ताकि वे उत्तम पुनरुत्थान को प्राप्‍त करें। अन्य कई लोग उपहास और कोड़ों की मार सहने, और यहाँ तक कि बेड़ियों में जकड़े जाने और बंदीगृह में डाले जाने के द्वारा परखे गए। उन पर पथराव किया गया, उन्हें आरे से दो टुकड़ों में चीरा गया, उन्हें तलवार से मार डाला गया; वे घटी, कष्‍टों और दुर्व्यवहार को सहते हुए भेड़ और बकरियों की खाल पहने इधर-उधर भटकते रहे, संसार उनके योग्य नहीं था। वे जंगलों, पहाड़ों, गुफाओं और पृथ्वी की दरारों में भटकते रहे। यद्यपि विश्‍वास ही के द्वारा इन सब की गवाही दी गई, फिर भी उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुओं को प्राप्‍त न किया; क्योंकि परमेश्‍वर ने हमारे लिए पहले से एक उत्तम बात ठहराई थी कि वे हमारे बिना सिद्धता को प्राप्‍त न करें। इसलिए जब गवाहों का इतना बड़ा बादल हमें घेरे हुए है, तो आओ, हम भी प्रत्येक बाधा और उलझानेवाले पाप को दूर करके उस दौड़ को धीरज से दौड़ें जो हमारे सामने है; और विश्‍वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें, जिसने उस आनंद के लिए जो उसके सामने रखा था, लज्‍जा की चिंता किए बिना क्रूस के दुःख को सह लिया, और परमेश्‍वर के सिंहासन के दाहिनी ओर जा बैठा। इसलिए उस पर ध्यान दो जिसने अपने विरुद्ध पापियों का इतना विरोध सहा कि तुम थककर हताश न हो जाओ। पाप के विरुद्ध लड़ते हुए तुमने अब तक इतना संघर्ष नहीं किया कि तुम्हारा लहू बहा हो। तुम उस उपदेश को भूल गए हो जो तुम्हें पुत्र के रूप में संबोधित करता है: हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हल्का न जान, और जब वह तुझे डाँटे तो हताश न हो; क्योंकि प्रभु जिससे प्रेम रखता है उसकी ताड़ना भी करता है, और उस प्रत्येक को जिसे वह अपना पुत्र मानता है, कोड़े भी मारता है। तुम दुःख को ताड़ना समझकर सह लो। परमेश्‍वर तुम्हारे साथ पुत्र के समान व्यवहार करता है। ऐसा कौन सा पुत्र है जिसकी ताड़ना उसका पिता नहीं करता? यदि वह ताड़ना जिसके भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं बल्कि अवैध संतान हो। फिर यह भी कि जब हमारे शारीरिक पिता हमारी ताड़ना किया करते थे तो हमने उनका आदर किया। तो क्या हम आत्माओं के पिता के और भी अधिक अधीन न रहें, जिससे कि जीवित रहें? उन्होंने तो थोड़े समय के लिए, जैसा उन्हें उचित लगा, हमारी ताड़ना की, परंतु परमेश्‍वर हमारी भलाई के लिए ऐसा करता है ताकि हम उसकी पवित्रता में सहभागी हो जाएँ। किसी भी प्रकार की ताड़ना उस समय के लिए आनंददायी नहीं बल्कि दुःखदायी प्रतीत होती है, परंतु जो इसमें पक्‍‍के हो गए हैं उन्हें यह बाद में धार्मिकता का शांतिदायक फल प्रदान करती है। अतः अपने ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सबल बनाओ, और अपने पैरों के लिए सीधे मार्ग बनाओ, कि वह पैर जो लंगड़ा है जोड़ से न उखड़ जाए बल्कि स्वस्थ हो जाए। सब के साथ मेल-मिलाप बनाए रखने और उस पवित्रता को पाने का यत्‍न करो, जिसके बिना कोई भी प्रभु को नहीं देख पाएगा। ध्यान रखो कि कोई भी परमेश्‍वर के अनुग्रह से वंचित न रह जाए, कहीं ऐसा न हो कि कोई कड़वी जड़ फूटकर कष्‍ट दे और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएँ। ऐसा न हो कि तुममें से कोई व्यभिचारी या एसाव के समान भक्‍तिहीन हो, जिसने एक बार के भोजन के लिए अपने पहलौठे होने का अधिकार बेच डाला था। तुम जानते हो कि बाद में जब उसने आशिष प्राप्‍त करनी चाही तो अयोग्य ठहराया गया, और आँसू बहा बहाकर खोजने पर भी उसे पश्‍चात्ताप करने का अवसर न मिला। तुम ऐसे पहाड़ के पास नहीं आए जिसे छुआ जा सके, और न धधकती आग, अंधकार, काले धुएँ के बादल, बवंडर के पास; और न ही तुरही-नाद या शब्दों की ऐसी वाणी के पास आए हो, जिसके सुननेवालों ने याचना की कि अब ऐसा कोई और शब्द उनसे न कहा जाए, क्योंकि वे इस आदेश को सह न सके: यदि कोई पशु भी उस पहाड़ को छुए तो उस पर पथराव किया जाए । वह दृश्य इतना भयानक था कि मूसा ने कहा, “मैं बहुत डरा हुआ हूँ और काँप रहा हूँ।” परंतु तुम तो सिय्योन पहाड़, और जीवित परमेश्‍वर के नगर अर्थात् स्वर्गीय यरूशलेम, तथा असंख्य स्वर्गदूतों के पास, और पहलौठों की महासभा तथा कलीसिया के पास जिनके नाम स्वर्ग में लिखे हैं, और सब के न्यायी परमेश्‍वर, और सिद्ध किए हुए धर्मी लोगों की आत्माओं के पास, तथा नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिड़के हुए उस लहू के पास आए हो जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है। सावधान रहो, कहीं तुम उस कहनेवाले का इनकार न कर दो; क्योंकि यदि वे पृथ्वी पर चेतावनी देनेवाले का इनकार करके नहीं बच सके, तो हम स्वर्ग से चेतावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर बिलकुल नहीं बच सकेंगे। उस समय उसकी वाणी ने पृथ्वी को हिला दिया था, परंतु अब उसने यह प्रतिज्ञा की है, मैं फिर एक बार न केवल पृथ्वी को बल्कि आकाश को भी हिला दूँगा। अब ये शब्द, “फिर एक बार” उन वस्तुओं, अर्थात् सृजी हुई वस्तुओं के हटाए जाने की ओर संकेत करते हैं जो हिलाई जा सकती हैं, ताकि वे वस्तुएँ बनी रहें जो हिलाई नहीं जा सकतीं। अतः जब हमें ऐसा राज्य मिल रहा है जो अटल है, तो आओ, हम आभारी रहें, और भय और आदर के साथ परमेश्‍वर की ऐसी आराधना करें जो उसे ग्रहणयोग्य हो। निश्‍चय ही हमारा परमेश्‍वर भस्म करनेवाली आग है। भाईचारे का प्रेम बना रहे। अतिथि-सत्कार करना न भूलो, क्योंकि इसके द्वारा कुछ लोगों ने अनजाने में ही स्वर्गदूतों का स्वागत-सत्कार किया है। बंदियों की ऐसी सुधि लो कि मानो तुम भी उनके साथ बंदी हो, और उनकी भी सुधि लो जिनके साथ दुर्व्यवहार होता है, क्योंकि तुम भी देह में हो। विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह-शय्या निष्कलंक रहे; क्योंकि परमेश्‍वर व्यभिचारियों और परस्‍त्रीगामियों को दंड देगा। तुम्हारा जीवन लोभ-रहित हो और जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्‍ट रहो। उसने स्वयं कहा है: मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी त्यागूँगा। इसलिए हम साहस के साथ कहते हैं: प्रभु मेरा सहायक है, मैं न डरूँगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? अपने अगुवों को स्मरण रखो, जिन्होंने तुम्हें परमेश्‍वर का वचन सुनाया था, और उनके आचरण के परिणाम को देखकर उनके विश्‍वास का अनुकरण करो। यीशु मसीह कल, आज और युगानुयुग एक सा है। तुम भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ प्रकार की विचित्र शिक्षाओं के द्वारा भरमाए न जाओ; क्योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन भोजन संबंधी नियमों से जिनका पालन करनेवाले लोगों को कुछ लाभ नहीं हुआ। हमारे पास एक वेदी है जिस पर से खाने का अधिकार तंबू की सेवा करनेवालों को नहीं है। क्योंकि जिन पशुओं का लहू महायाजक पाप के बलिदान के रूप में परम पवित्र स्थान में ले जाता है, उनके शरीर छावनी के बाहर जलाए जाते हैं। इसी कारण यीशु ने भी लोगों को अपने लहू के द्वारा पवित्र करने के लिए फाटक के बाहर दुःख उठाया। इसलिए आओ, हम उसकी निंदा को अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर उसके पास चलें। क्योंकि यहाँ हमारा कोई स्थाई नगर नहीं है, परंतु हम उस नगर की खोज में हैं, जो आने वाला है। अतः हम उसके द्वारा परमेश्‍वर को स्तुति रूपी बलिदान निरंतर चढ़ाते रहें, अर्थात् उन होंठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं। भलाई करना और उदारता के कार्य करना न भूलो, क्योंकि ऐसे बलिदानों से परमेश्‍वर प्रसन्‍न होता है। अपने अगुवों की आज्ञा मानो और उनके अधीन रहो; वे तो यह जानकर कि उन्हें लेखा देना है, तुम्हारे प्राणों की चौकसी करते हैं, इसलिए उन्हें यह कार्य आनंद से करने दो न कि आहें भरते हुए, क्योंकि इस दशा में तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा। हमारे लिए प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें निश्‍चय है कि हमारा विवेक शुद्ध है, और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। मैं तुमसे प्रार्थना करने के लिए और भी अधिक आग्रह करता हूँ ताकि मैं शीघ्र तुम्हारे पास फिर से आ सकूँ। अब शांति का परमेश्‍वर, जिसने अनंत वाचा के लहू के द्वारा भेड़ों के महान चरवाहे हमारे प्रभु यीशु को मृतकों में से जीवित कर दिया, तुम्हें उसकी इच्छा पूरी करने के लिए हर भली बात में सिद्ध करे, और जो कुछ उसको भावता है उसे यीशु मसीह के द्वारा हममें पूरा करे। उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। हे भाइयो, मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि इस उपदेश के वचन को धीरज से सुनो, क्योंकि मैंने तुम्हें बहुत ही संक्षेप में लिखा है। तुम यह जान लो कि हमारा भाई तीमुथियुस बंदीगृह से छूट गया है, और यदि वह शीघ्र आ गया तो मैं उसके साथ तुमसे भेंट करूँगा। अपने सब अगुवों और सब पवित्र लोगों को नमस्कार कहना। इटलीवासी तुम्हें नमस्कार कहते हैं। तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। आमीन। परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारह गोत्रों को जो तितर-बितर हैं, नमस्कार। हे मेरे भाइयो, जब तुम विभिन्‍न‍ परीक्षाओं में पड़ो तो इसे बड़े आनंद की बात समझो, यह जानते हुए कि तुम्हारे विश्‍वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्‍न‍ होता है। धीरज को अपना पूरा कार्य करने दो कि तुम सिद्ध और पूर्ण हो जाओ, और तुममें किसी बात की कमी न रहे। तुममें से यदि किसी को बुद्धि की कमी हो तो वह परमेश्‍वर से माँगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है, और वह उसे दी जाएगी। परंतु वह विश्‍वास से माँगे, और कुछ भी संदेह न करे; क्योंकि संदेह करनेवाला समुद्र की उस लहर के समान है जो हवा के द्वारा बहाई और उछाली जाती है। इसलिए ऐसा मनुष्य यह न सोचे कि प्रभु से उसे कुछ मिलेगा; वह दुचित्ता है और अपने समस्त आचरण में अस्थिर है। दीन भाई अपने ऊँचे पद पर गर्व करे, और धनवान अपनी दीन दशा पर, क्योंकि घास के फूल के समान उसका अंत हो जाएगा। सूर्य तपती धूप के साथ उदय होकर घास को सुखा देता है, उसका फूल झड़ जाता है और उसका सुंदर रूप नष्‍ट हो जाता है; इसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते-चलते धूल में मिल जाएगा। धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में धीरज धरता है क्योंकि वह खरा उतरकर जीवन का वह मुकुट पाएगा जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम रखनेवालों से की है। परीक्षा के समय कोई यह न कहे कि मेरी परीक्षा परमेश्‍वर की ओर से की जा रही है; क्योंकि परमेश्‍वर की न तो बुरी बातों से परीक्षा हो सकती है, और न वह स्वयं किसी की परीक्षा करता है। परंतु प्रत्येक व्यक्‍ति अपनी ही अभिलाषा द्वारा खिंचकर और फँसकर परीक्षा में पड़ता है; फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जन्म देती है, और पाप बढ़कर मृत्यु को उत्पन्‍न‍ करता है। हे मेरे प्रिय भाइयो, धोखा न खाओ। प्रत्येक भला दान और प्रत्येक उत्तम वरदान ऊपर से उस ज्योतियों के पिता की ओर से आता है जिसमें न तो कोई परिवर्तन होता है और न ही वह ऐसी छाया है जो बदलती रहती है। उसने अपनी इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्‍न‍ किया कि हम उसकी सृष्‍टि में से मानो प्रथम फल हों। हे मेरे प्रिय भाइयो, तुम यह जान लो कि प्रत्येक मनुष्य सुनने में तत्पर, बोलने में धीरजवंत और क्रोध करने में धीमा हो; क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्‍वर की धार्मिकता को उत्पन्‍न‍ नहीं करता। इसलिए सारी मलिनता और समस्त बुराई को छोड़कर उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो जो तुममें रोपा गया है और तुम्हारे प्राणों को बचा सकता है। वचन का पालन करनेवाले बनो और केवल सुननेवाले ही नहीं जो स्वयं को धोखा देते हैं। क्योंकि यदि कोई वचन का सुननेवाला हो परंतु उसका पालन न करे, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना प्राकृतिक चेहरा दर्पण में देखता है; वह स्वयं को देखकर चला जाता है और तुरंत भूल जाता है कि वह कैसा था। परंतु जो स्वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान देता और उस पर बना रहता है, वह सुनकर भूलनेवाला नहीं बल्कि उसका पालन करनेवाला होता है; और वह अपने कार्य के कारण आशिष पाएगा। यदि कोई अपने आपको भक्‍त समझे और अपनी जीभ पर लगाम न लगाए बल्कि अपने हृदय को धोखा दे, तो उसकी भक्‍ति व्यर्थ है। हमारे परमेश्‍वर और पिता की दृष्‍टि में शुद्ध और निर्मल भक्‍ति यह है कि अनाथों और विधवाओं के दुःख में उनकी सुधि लें, और अपने आपको इस संसार से निष्कलंक रखें। हे मेरे भाइयो, हमारे महिमामय प्रभु यीशु मसीह पर तुम्हारा विश्‍वास एक दूसरे के प्रति पक्षपात के साथ न हो। क्योंकि यदि तुम्हारे आराधनालय में कोई व्यक्‍ति सोने की अँगूठी और चमकीला वस्‍त्र पहने हुए प्रवेश करे, और उसी समय एक कंगाल भी मैले-कुचैले वस्‍त्र पहने हुए आए, और तुम चमकीले वस्‍त्र पहने हुए व्यक्‍ति की ओर दृष्‍टि करके कहो, “आप यहाँ अच्छे स्थान पर बैठिए,” और उस कंगाल से कहो, “तू वहाँ खड़ा रह या मेरे पैर के पास बैठ,” तो क्या तुमने आपस में भेदभाव नहीं किया और बुरे विचारों वाले न्यायी नहीं हुए? हे मेरे प्रिय भाइयो, सुनो! क्या परमेश्‍वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि वे विश्‍वास में धनी और उस राज्य के उत्तराधिकारी हों जिसकी प्रतिज्ञा उसने अपने प्रेम करनेवालों से की है? परंतु तुमने उस कंगाल को अपमानित किया। क्या धनवान तुम पर अत्याचार करके तुम्हें न्यायालयों में खींचकर नहीं ले जाते? क्या वे उस उत्तम नाम की निंदा नहीं करते जिसके तुम कहलाते हो? फिर भी, यदि तुम पवित्रशास्‍त्र के अनुसार उस राजसी व्यवस्था को कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, पूरा करते हो, तो तुम अच्छा करते हो। परंतु यदि तुम पक्षपात करते हो तो तुम पाप करते हो, और व्यवस्था द्वारा अपराधी ठहराए जाते हो। क्योंकि जो कोई संपूर्ण व्यवस्था का पालन करता है परंतु किसी एक बात में चूक जाए, तो वह सारी व्यवस्था का दोषी ठहरता है। जिसने यह कहा, तू व्यभिचार न करना, उसने यह भी कहा, तू हत्या न करना। अब यदि तू व्यभिचार नहीं करता परंतु हत्या करता है, तो तू व्यवस्था का अपराधी ठहरता है। तुम उन लोगों के समान बोलो और कार्य करो जिनका न्याय स्वतंत्रता की व्यवस्था के अनुसार होने वाला है। क्योंकि जिसने दया नहीं की उसका न्याय भी बिना दया के होगा: दया न्याय पर विजयी होती है। हे मेरे भाइयो, यदि कोई कहे कि उसे विश्‍वास है, परंतु कार्य न करे तो इससे क्या लाभ? क्या ऐसा विश्‍वास उसका उद्धार कर सकता है? यदि किसी भाई या बहन के पास वस्‍त्र न हों और उसके पास प्रतिदिन के भोजन की भी कमी हो, और तुममें से कोई उनसे कहे, “कुशल से जाओ, गर्म और तृप्‍त रहो,” परंतु तुम उन्हें वे वस्तुएँ न दो जो उनकी देह के लिए आवश्यक हैं, तो इससे क्या लाभ? इसी प्रकार विश्‍वास भी, यदि उसके साथ कार्य न हों तो अपने आपमें मरा हुआ है। परंतु कोई कह सकता है, “तेरे पास विश्‍वास है और मेरे पास कार्य हैं।” तू मुझे अपना विश्‍वास बिना कार्यों के तो दिखा, और मैं तुझे अपना विश्‍वास अपने कार्यों के द्वारा दिखाऊँगा। तू विश्‍वास करता है कि परमेश्‍वर एक है; तू अच्छा करता है। दुष्‍टात्माएँ भी विश्‍वास करती हैं और थरथराती हैं। परंतु हे निकम्मे मनुष्य, क्या तू जानना चाहता है कि कार्यों के बिना विश्‍वास व्यर्थ है? जब हमारे पिता अब्राहम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्या वह कार्यों के द्वारा धर्मी नहीं ठहराया गया? तूने देखा कि विश्‍वास उसके कार्यों के साथ मिलकर कार्य करता रहा और कार्यों से ही उसका विश्‍वास सिद्ध हुआ, और पवित्रशास्‍त्र का वह वचन पूरा हुआ जो कहता है: अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया, और यह उसके लिए धार्मिकता गिना गया, और वह परमेश्‍वर का मित्र कहलाया। तुम देखते हो कि मनुष्य कार्यों से धर्मी ठहराया जाता है, अकेले विश्‍वास से नहीं। इसी प्रकार राहब वेश्या ने जब दूतों का स्वागत किया और फिर दूसरे मार्ग से उन्हें भेज दिया, तो क्या वह भी कार्यों के द्वारा धर्मी न ठहरी? अतः जिस प्रकार देह आत्मा के बिना मरी हुई है, उसी प्रकार विश्‍वास भी कार्यों के बिना मरा हुआ है। हे मेरे भाइयो, तुममें से बहुत लोग शिक्षक न बनें, क्योंकि जानते हो कि हम शिक्षक और कठोर दंड पाएँगे। क्योंकि हम सब बहुत सी बातों में चूक जाते हैं। यदि कोई अपनी बातों में नहीं चूकता तो वह सिद्ध मनुष्य है, और अपनी सारी देह पर भी नियंत्रण रख सकता है। यदि हम घोड़ों को अपने वश में करने के लिए उनके मुँह में लगाम लगाएँ, तो हम उनकी सारी देह को घुमा सकते हैं। देखो, जहाज़ भी, यद्यपि विशाल होते हैं और तेज़ हवाओं द्वारा चलाए जाते हैं, फिर भी एक छोटी सी पतवार से नाविक उन्हें जहाँ चाहता है घुमाता है। इसी प्रकार जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी-बड़ी डींगे मारती है। देखो, एक थोड़ी सी आग कितने बड़े जंगल को जला देती है! जीभ एक आग है। जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक संसार है, जो सारी देह को कलंकित करती और जीवन की गति में आग लगा देती है, तथा स्वयं नरक की आग से जलाई जाती है। क्योंकि हर प्रकार के वन-पशु और पक्षी, रेंगनेवाले जंतु और समुद्री जीव मनुष्यजाति के वश में किए जा सकते हैं और वश में कर भी दिए गए हैं, परंतु कोई भी मनुष्य जीभ को वश में नहीं कर सकता। यह ऐसी बुराई है जो शांत नहीं रहती और प्राणनाशक विष से भरी है। इसी से हम प्रभु और पिता को धन्य कहते हैं, और इसी से हम मनुष्यों को शाप देते हैं जो परमेश्‍वर के स्वरूप में बनाए गए हैं; एक ही मुँह से आशिष और शाप दोनों निकलते हैं। हे मेरे भाइयो! ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या सोते के एक ही मुँह से मीठा और खारा पानी निकलता है? हे मेरे भाइयो, क्या अंजीर के पेड़ पर जैतून या दाखलता पर अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे पानी के सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता। तुममें बुद्धिमान और समझदार कौन है? यदि कोई है तो वह अपने कार्यों को अच्छे आचरण के द्वारा उस नम्रता में प्रकट करे जो ज्ञान से उत्पन्‍न‍ होती है। परंतु यदि तुम्हारे मन में कटु ईर्ष्या और स्वार्थ भरा है, तो घमंड न करो और न ही सत्य के विरोध में झूठ बोलो। यह वह ज्ञान नहीं जो ऊपर से आता है, बल्कि सांसारिक, स्वाभाविक, और शैतानी है; क्योंकि जहाँ ईर्ष्या और स्वार्थ है, वहाँ बखेड़ा और हर प्रकार की बुराई होती है। परंतु जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले पवित्र है, फिर शांतिप्रिय, विनम्र, विचारशील, दया और अच्छे फलों से भरा हुआ, पक्षपात-रहित और निष्कपट है; और मेल करानेवाले धार्मिकता का फल मेल-मिलाप के साथ बोते हैं। तुम्हारे बीच में लड़ाइयाँ और झगड़े कहाँ से आए? क्या यह उन लालसाओं के कारण नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ती रहती हैं? तुम लालसा करते हो और जब तुम्हें मिलता नहीं तो तुम हत्या करते हो। तुम ईर्ष्या करते हो और जब कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते तो तुम लड़ते और झगड़ते हो। तुम्हें इसलिए नहीं मिलता क्योंकि तुम माँगते नहीं। तुम माँगते हो पर पाते नहीं, क्योंकि तुम बुरे उद्देश्य से माँगते हो, ताकि तुम उसे अपनी लालसाओं पर उड़ा दो। हे व्यभिचारिणियो, क्या तुम नहीं जानतीं कि संसार से मित्रता का अर्थ परमेश्‍वर से शत्रुता रखना है? इसलिए यदि कोई संसार का मित्र बनना चाहता है, तो वह स्वयं को परमेश्‍वर का शत्रु बनाता है। या तुम सोचते हो कि पवित्रशास्‍त्र व्यर्थ ही कहता है कि परमेश्‍वर जिसने आत्मा को हमारे भीतर बसाया है, वह उसकी तीव्र लालसा करता है। क्या वह और अधिक अनुग्रह नहीं देता? इस कारण वह कहता है: परमेश्‍वर अभिमानियों का विरोध करता है, परंतु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिए परमेश्‍वर के अधीन हो जाओ; शैतान का सामना करो, और वह तुम्हारे पास से भाग जाएगा। परमेश्‍वर के निकट आओ, और वह तुम्हारे निकट आएगा। हे पापियो, अपने हाथों को शुद्ध करो; हे दुचित्तो, अपने हृदयों को शुद्ध करो। दुःखी होओ, शोक करो और रोओ; तुम्हारी हँसी शोक में और तुम्हारा आनंद उदासी में बदल जाए। प्रभु के सामने दीन बनो और वह तुम्हें ऊँचा उठाएगा। हे भाइयो, एक दूसरे के विरोध में न बोलो; जो अपने भाई के विरोध में बोलता है या अपने भाई पर दोष लगाता है वह व्यवस्था के विरोध में बोलता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है; और यदि तू व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था का पालन करनेवाला नहीं बल्कि उसका न्यायी ठहरा। व्यवस्था देनेवाला और न्यायी एक ही है, जो बचाने और नाश करने में समर्थ है; परंतु तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? अब सुनो, तुम जो यह कहते हो, “हम आज या कल अमुक नगर में जाकर वहाँ एक वर्ष बिताएँगे और व्यापार करके धन कमाएँगे।” तुम यह भी नहीं जानते कि कल तुम्हारे जीवन का क्या होगा—क्योंकि तुम तो भाप के समान हो जो थोड़ी देर दिखाई देती है, और फिर लुप्‍त हो जाती है— इसके बदले तुम्हें यह कहना चाहिए, “यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे और यह या वह कार्य करेंगे।” पर अब बात यह है कि तुम अपने डींग मारने पर घमंड करते हो; ऐसा सब घमंड बुरा है। इसलिए जो भला कार्य करना जानता है और नहीं करता, उसके लिए यह पाप है। अब हे धनवानो, सुनो, अपने ऊपर आने वाली विपत्तियों पर चिल्‍ला चिल्‍लाकर रोओ। तुम्हारा धन सड़ गया है और तुम्हारे वस्‍त्रों को कीड़े खा गए हैं। तुम्हारे सोने और चाँदी पर जंग लग गया है, और उनका जंग तुम्हारे विरुद्ध साक्षी देगा और तुम्हारे शरीर को आग के समान खा जाएगा। तुमने अंतिम दिनों में धन इकट्ठा किया है। देखो, तुम्हारे खेतों में फसल काटनेवाले मज़दूरों की मज़दूरी जो तुमने छल करके रख ली है, पुकारती है, और फसल काटनेवालों की चिल्‍लाहट सेनाओं के प्रभु के कानों तक जा पहुँची है। तुमने इस पृथ्वी पर विलासिता का जीवन व्यतीत किया और भोग-विलास में रहे; तुमने अपने हृदयों को वध के दिन के लिए मोटा-ताज़ा किया है। तुमने धर्मी को दोषी ठहराकर मार डाला। वह तुम्हारा विरोध नहीं करता। इसलिए हे भाइयो, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो। देखो, किसान भूमि की बहुमूल्य उपज के लिए प्रथम और अंतिम वर्षा होने तक बड़े धीरज से प्रतीक्षा करता है। तुम भी धीरज धरो, अपने हृदयों को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का आगमन निकट है। हे भाइयो, एक दूसरे के विरुद्ध शिकायत मत करो, ताकि तुम दोषी न ठहराए जाओ; देखो, न्यायी द्वार ही पर खड़ा है। हे भाइयो, दुःख सहने और धीरज धरने के लिए उन भविष्यवक्‍ताओं को आदर्श समझो, जिन्होंने प्रभु के नाम से बातें कीं। देखो, हम धीरज धरनेवालों को धन्य कहते हैं। तुमने अय्यूब के धीरज के विषय में सुना और प्रभु से प्राप्‍त प्रतिफल को भी देखा है कि प्रभु अत्यंत करुणामय और दयालु है। हे मेरे भाइयो, सब से बड़ी बात यह है कि शपथ न खाना, न स्वर्ग की, न पृथ्वी की और न ही किसी अन्य वस्तु की; परंतु तुम्हारी “हाँ” की “हाँ” और “न” की “न” हो, ताकि तुम दंड के योग्य न ठहरो। क्या तुममें से कोई दुःखी है? तो वह प्रार्थना करे। क्या कोई आनंदित है? तो वह भजन गाए। क्या तुममें से कोई बीमार है? तो वह कलीसिया के प्रवरों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मलकर उसके लिए प्रार्थना करें; और विश्‍वास की प्रार्थना उस रोगी को स्वस्थ कर देगी, और प्रभु उसे उठाकर खड़ा करेगा। यदि उसने पाप किए हों, तो वे भी क्षमा कर दिए जाएँगे। इसलिए आपस में अपने-अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो कि तुम स्वस्थ किए जाओ। धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। एलिय्याह हमारे ही समान एक मनुष्य था, और उसने वर्षा न होने के लिए गिड़गिड़ाकर प्रार्थना की, और पृथ्वी पर तीन वर्ष और छः महीने तक वर्षा नहीं हुई। उसने फिर से प्रार्थना की, तब आकाश से वर्षा हुई और पृथ्वी ने अपनी उपज दी। हे मेरे भाइयो, यदि तुममें से कोई सत्य से भटक जाए और दूसरा उसे फेर लाए, तो वह यह जान ले कि जो किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह उसके प्राण को मृत्यु से बचाएगा और अनेक पापों को ढक देगा। यीशु मसीह के प्रेरित, पतरस की ओर से, उन चुने हुए परदेशियों के नाम जो पुंतुस, गलातिया, कप्पदुकिया, आसिया और बिथूनिया में तितर-बितर होकर रहते हैं, और परमेश्‍वर पिता के पूर्वज्ञान के अनुसार और आत्मा के द्वारा पवित्र किए जाकर यीशु मसीह की आज्ञाकारिता और उसके लहू के छिड़काव के लिए चुने गए हैं: तुम्हें अनुग्रह और शांति बहुतायत से मिलती रहे। धन्य है परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जिसने यीशु मसीह के मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा अपनी महान दया के अनुसार हमें जीवित आशा में नया जन्म दिया है, कि हम उस उत्तराधिकार को प्राप्‍त करें जो अविनाशी, निष्कलंक और अमिट है और तुम्हारे लिए स्वर्ग में रखा गया है। तुम्हारी रक्षा विश्‍वास के द्वारा परमेश्‍वर के सामर्थ्य से उस उद्धार के लिए की जाती है जो अंतिम समय में प्रकट होने पर है। इसलिए तुम मगन होते हो, भले ही अभी थोड़े समय के लिए तुम्हें भिन्‍न‍-भिन्‍न‍ प्रकार की परीक्षाओं के कारण दुःख उठाना पड़ता है, ताकि तुम्हारा परखा हुआ विश्‍वास, जो आग में ताए गए नाशवान सोने से भी अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रकट होने पर प्रशंसा, महिमा और आदर का कारण ठहरे। तुमने उसे नहीं देखा, फिर भी तुम उससे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिना देखे विश्‍वास करके ऐसे आनंद के साथ मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है, और अपने विश्‍वास का प्रतिफल अर्थात् अपनी आत्माओं का उद्धार प्राप्‍त करते हो। इसी उद्धार के विषय में उन भविष्यवक्‍ताओं ने खोजबीन और जाँच-पड़ताल की, जिन्होंने उस अनुग्रह के विषय में भविष्यवाणी की थी जो तुम पर होने को था। वे इस बात को खोज रहे थे कि मसीह का आत्मा, जो उनमें है और पहले ही से मसीह के दुःखों की और उसके बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता है, वह किस व्यक्‍ति और किस समय की ओर संकेत कर रहा था। उन पर यह प्रकट किया गया था कि वे इन बातों में अपनी नहीं बल्कि तुम्हारी सेवा कर रहे हैं। ये बातें अब तुम्हें उनके द्वारा बताई गईं, जिन्होंने स्वर्ग से भेजे गए पवित्र आत्मा के द्वारा तुम्हें सुसमाचार सुनाया था। स्वर्गदूत भी इन बातों को देखने की लालसा करते हैं। इसलिए मानसिक रूप से तैयार और सचेत रहकर, उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो जो यीशु मसीह के प्रकट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है। आज्ञाकारी बच्‍चों के समान, अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश्य न बनो, परंतु जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है वैसे ही तुम भी अपने समस्त आचरण में पवित्र बनो, क्योंकि लिखा है: पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ। यदि तुम “हे पिता” कहकर उससे प्रार्थना करते हो, जो बिना पक्षपात प्रत्येक का न्याय उसके कार्य के अनुसार करता है, तो तुम पृथ्वी पर अपने रहने का समय भय सहित बिताओ। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो तुम्हारे पूर्वजों से चला आ रहा है, उससे तुम्हारा छुटकारा चाँदी या सोने जैसी नाशवान वस्तुओं से नहीं, बल्कि निर्दोष और निष्कलंक मेमने अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा हुआ है। वह तो जगत की उत्पत्ति के पहले ही से जाना गया था, परंतु अब तुम्हारे लिए इन अंतिम समयों में प्रकट हुआ। तुम मसीह के द्वारा उस परमेश्‍वर पर विश्‍वास करते हो, जिसने मसीह को मृतकों में से जिलाया और उसे महिमा दी कि तुम्हारा विश्‍वास और आशा परमेश्‍वर पर हो। जब तुमने भाईचारे के निष्कपट प्रेम के लिए अपने मनों को सत्य का पालन करके शुद्ध किया है, तो उत्साहपूर्वक शुद्ध मन से आपस में प्रेम रखो। तुमने नाशवान नहीं बल्कि अविनाशी बीज से, अर्थात् परमेश्‍वर के जीवित और अटल रहनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म प्राप्‍त किया है; क्योंकि प्रत्येक प्राणी घास के समान है, और उसका सारा वैभव घास के फूल के समान है। घास सूख जाती, और फूल झड़ जाता है, परंतु प्रभु का वचन सदा के लिए बना रहता है। और यही सुसमाचार का वह वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। इसलिए हर प्रकार की बुराई, और हर प्रकार के छल और कपट और ईर्ष्या, और हर प्रकार की निंदा को छोड़कर, नवजात शिशुओं के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा तुम उद्धार में बढ़ते जाओ; क्योंकि तुमने चख लिया है कि प्रभु भला है। उस जीवित पत्थर के पास आकर—जिसे मनुष्यों ने तो ठुकरा दिया था परंतु परमेश्‍वर के लिए वह चुना हुआ और बहुमूल्य है— तुम भी स्वयं जीवित पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो कि याजकों का पवित्र समाज बनकर ऐसे आत्मिक बलिदानों को चढ़ाओ जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर को ग्रहणयोग्य हों। इसी कारण पवित्रशास्‍त्र में लिखा है: देख, मैं सिय्योन में एक चुना हुआ पत्थर, अर्थात् कोने का बहुमूल्य पत्थर रखता हूँ, और जो उस पर विश्‍वास करेगा, वह कभी लज्‍जित न होगा। अतः तुम विश्‍वास करनेवालों के लिए यह बहुमूल्य है, परंतु जो विश्‍वास नहीं करते उनके लिए, “जिस पत्थर को राजमिस्‍त्रियों ने ठुकरा दिया, वही कोने का प्रमुख पत्थर बन गया,” और “ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान हो गया।” वे ठोकर खाते हैं क्योंकि वे वचन को नहीं मानते, जिसके लिए वे ठहराए भी गए थे। परंतु तुम एक चुना हुआ वंश, राजकीय याजकों का समाज, पवित्र लोग, और परमेश्‍वर की निज प्रजा हो, ताकि तुम उसके सद्गुणों को प्रकट करो, जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है। पहले तो तुम प्रजा नहीं थे परंतु अब परमेश्‍वर की प्रजा हो; तुम पर दया नहीं हुई थी, परंतु अब दया हुई है। हे प्रियो, मैं तुमसे आग्रह करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर शारीरिक वासनाओं से दूर रहो, जो आत्मा के विरुद्ध युद्ध करती हैं। अन्य लोगों के बीच तुम्हारा आचरण भला रहे, ताकि वे जिस विषय में तुम्हें कुकर्मी कहकर तुम्हारी निंदा करते हैं, वे कृपादृष्‍टि के दिन तुम्हारे भले कार्यों को देखकर परमेश्‍वर की महिमा करें। प्रभु के लिए प्रत्येक मानवीय शासन-प्रबंध के अधीन रहो: चाहे राजा के जो प्रधान है, या राज्यपालों के, जो कुकर्मियों को दंड देने और भले कार्य करनेवालों की सराहना के लिए उसके द्वारा भेजे हुए हैं। क्योंकि परमेश्‍वर की इच्छा यह है कि तुम भले कार्य करने के द्वारा अज्ञानता की बातें बोलनेवाले मूर्ख मनुष्यों का मुँह बंद कर दो। स्वतंत्र लोगों के समान रहो, पर अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग बुराई पर परदा डालने के लिए मत करो, बल्कि परमेश्‍वर के दासों के समान रहो। सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्‍वर का भय मानो, और राजा का सम्मान करो। हे सेवको, पूरे भय के साथ अपने-अपने स्वामियों के अधीन रहो, न केवल उनके जो भले और विनम्र हैं, बल्कि उनके भी जो कुटिल हैं। क्योंकि यदि कोई परमेश्‍वर के प्रति सचेत रहकर दुःख उठाते हुए अन्याय को सहता है तो यह प्रशंसनीय है। यदि तुम पाप करके मार खाते और फिर उसे सह लेते हो तो इसमें क्या बड़ाई? परंतु यदि तुम भले कार्य करके दुःख उठाते और उसे सह लेते हो, तो यह परमेश्‍वर की दृष्‍टि में प्रशंसनीय है। तुम इसी लिए बुलाए गए हो, क्योंकि मसीह ने भी तुम्हारे लिए दुःख उठाया, और तुम्हारे लिए एक आदर्श छोड़ गया कि तुम उसके पद-चिह्‍नों पर चलो। उसने कोई पाप नहीं किया और न ही उसके मुँह से छल की कोई बात निकली। वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और न दुःख उठाकर धमकी देता था, पर अपने आपको सच्‍चे न्यायी के हाथ में सौंप देता था। उसने स्वयं हमारे पापों को अपनी देह में क्रूस पर उठा लिया, ताकि हम पापों के लिए मरकर धार्मिकता के लिए जीवन बिताएँ। उसके मार खाने से तुम स्वस्थ हुए हो। तुम तो भटकी हुई भेड़ों के समान थे, परंतु अब तुम अपने प्राणों के चरवाहे और अध्यक्ष के पास लौट आए हो। हे पत्‍नियो, अपने-अपने पति के अधीन रहो, जिससे यदि उनमें से कुछ ऐसे हों जो वचन का पालन न करते हों, तो वे तुम्हारे भक्‍तिपूर्ण पवित्र आचरण को देखकर वचन बिना ही तुम्हारे व्यवहार से जीत लिए जाएँ। तुम्हारा श्रृंगार बाहरी न हो जैसे बालों का गूँथना और सोने के आभूषण या भड़कीले वस्‍त्र पहनना, बल्कि यह तुम्हारे मन का छिपा हुआ व्यक्‍तित्व हो, जो नम्र और शांत स्वभाव के अविनाशी आभूषणों से सुसज्‍जित हो, जिसका परमेश्‍वर की दृष्‍टि में बड़ा मूल्य है। पूर्वकाल में परमेश्‍वर पर आशा रखनेवाली पवित्र स्‍त्रियाँ भी अपने-अपने पति के अधीन रहकर अपने आपको ऐसे ही सँवारती थीं, जैसे सारा, जो अब्राहम को स्वामी कहकर उसकी आज्ञा मानती थी। यदि तुम भी भलाई करो और किसी बात से भयभीत न हो, तो उसकी बेटियाँ ठहरोगी। हे पतियो, तुम भी इसी प्रकार अपनी-अपनी पत्‍नी के साथ समझदारी से रहो, और उन्हें निर्बल पात्र जानकर और अनुग्रह के जीवन का सह-उत्तराधिकारी समझकर उनका आदर करो, जिससे तुम्हारी प्रार्थनाओं में बाधा न आए। अंततः तुम सब एक मन, करुणामय, भाईचारे का प्रेम रखनेवाले, दयालु और नम्र बनो। बुराई के बदले बुराई न करो, और न गाली के बदले गाली दो, परंतु इसके विपरीत आशिष ही दो, क्योंकि तुम इसी लिए बुलाए गए हो कि उत्तराधिकार में आशिष प्राप्‍त करो। क्योंकि जो जीवन से प्रेम रखना और अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से और होंठों को छल की बातें बोलने से रोके रहे। वह बुराई से दूर रहे और भलाई करे; वह मेल-मिलाप को ढूँढ़े और उसे पाने के यत्‍न में रहे, क्योंकि प्रभु की आँखें धर्मियों पर तथा उसके कान उनकी प्रार्थनाओं की ओर लगे रहते हैं, परंतु प्रभु बुराई करनेवालों से मुँह फेर लेता है। यदि तुम भलाई के प्रति उत्साही रहो, तो कौन तुम्हें हानि पहुँचाएगा? परंतु यदि तुम्हें धार्मिकता के कारण दुःख उठाना भी पड़े, तो तुम धन्य हो। लोगों के डराने से न तो डरो और न ही घबराओ, पर अपने मन में मसीह को प्रभु जानकर आदर दो; और जो तुम्हारी आशा के विषय में तुमसे कुछ पूछे, उसे नम्रता और आदर के साथ उत्तर देने को हर समय तैयार रहो; और विवेक को शुद्ध रखो, ताकि जो लोग तुम्हारे विरोध में बोलते हैं और मसीह में तुम्हारे अच्छे आचरण का अपमान करते हैं, वे लज्‍जित हों। यदि परमेश्‍वर की इच्छा है कि तुम भलाई करते हुए दुःख उठाओ, तो यह बुराई करके दुःख उठाने से उत्तम है। इसलिए कि मसीह ने भी पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, अर्थात् धर्मी ने अधर्मियों के लिए, ताकि तुम्हें परमेश्‍वर के निकट ले आए। वह शरीर में तो मारा गया, पर आत्मा में जिलाया गया। उसी आत्मिक दशा में उसने जाकर बंदी आत्माओं को भी प्रचार किया, जो उस समय आज्ञा न माननेवाले थे, जब परमेश्‍वर नूह के दिनों में धीरज से प्रतीक्षा कर रहा था और जहाज़ बनाया जा रहा था। उस जहाज़ में थोड़े ही लोग अर्थात् आठ लोग पानी से बचाए गए। यह पानी बपतिस्मा का प्रतीक है (जिसका अर्थ शरीर का मैल दूर करना नहीं, बल्कि परमेश्‍वर के प्रति शुद्ध विवेक से वचनबद्ध होना है), जो अब यीशु मसीह के पुनरुत्थान के द्वारा तुम्हें बचाता है। वह स्वर्ग में जाकर परमेश्‍वर के दाहिनी ओर विराजमान है, तथा स्वर्गदूत और अधिकार और सामर्थ्य उसके अधीन किए गए हैं। अतः जब मसीह ने शरीर में दुःख उठाया, तो तुम भी उसी अभिप्राय से अपने हथियार बाँध लो—क्योंकि जो शरीर में दुःख उठाता है वह पाप से छूट जाता है— ताकि शरीर में अपना शेष जीवन मनुष्यों की लालसाओं के अनुसार नहीं बल्कि परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार बिताओ। क्योंकि तुमने पहले ही बहुत समय गैरयहूदियों की इच्छा के अनुसार काम करने, कामुकता, लालसाओं, मतवालेपन, रंगरेलियों, पियक्‍कड़पन और घृणित मूर्तिपूजा में पड़कर गँवा दिया है। वे इस बात से चकित होते हैं कि तुम अब ऐसे भारी दुराचार में उनका साथ नहीं देते, और इसलिए वे तुम्हारी निंदा करते हैं; वे तो उसे अपना लेखा देंगे, जो जीवितों और मृतकों का न्याय करने को तैयार है। क्योंकि मृतकों को भी सुसमाचार इस कारण सुनाया गया, कि शरीर में भले ही उनका न्याय मनुष्यों की रीति पर हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्‍वर की रीति पर जीवित रहें। सब बातों का अंत निकट आ गया है। इसलिए संयमी बनो, और प्रार्थना के लिए सचेत रहो, सब से बढ़कर, एक दूसरे के प्रति गहरा प्रेम रखो, क्योंकि प्रेम बहुत से पापों को ढाँप देता है। बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो। जिसको जैसा वरदान मिला है वह उसे परमेश्‍वर के अनुग्रह के विभिन्‍न‍ दानों के भले प्रबंधकों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए। यदि कोई बोले, तो ऐसे बोले जैसे वे परमेश्‍वर के वचन हों; यदि कोई सेवा करे, तो उस सामर्थ्य से करे जो परमेश्‍वर देता है, ताकि सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर की महिमा हो, क्योंकि महिमा और पराक्रम युगानुयुग उसी का है। आमीन। हे प्रियो, यह दुःख रूपी अग्‍नि जो तुम्हें परखने के लिए तुम पर आई है इससे यह समझकर आश्‍चर्यचकित न होना कि तुम्हारे साथ कोई अनोखी बात हो रही है, बल्कि जब तुम मसीह के दुःखों में सहभागी होते हो, तो आनंदित रहो, ताकि उसकी महिमा के प्रकट होने के समय भी तुम आनंदित और मगन हो सको। यदि मसीह के नाम के कारण तुम्हारी निंदा की जाती है, तो तुम धन्य हो, क्योंकि महिमा का आत्मा जो परमेश्‍वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। तुममें से कोई हत्यारा या चोर या किसी प्रकार का बुरा कार्य करनेवाला या दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप करनेवाला होने के कारण दुःख न उठाए; परंतु यदि कोई मसीही होने के कारण दुःख उठाता है, तो वह लज्‍जित न हो, बल्कि इस बात के लिए परमेश्‍वर की महिमा करे। क्योंकि समय आ पहुँचा है कि परमेश्‍वर के घराने से न्याय का आरंभ हो; और यदि यह हमसे आरंभ होगा, तो उनका परिणाम क्या होगा जो परमेश्‍वर के सुसमाचार को नहीं मानते? और यदि धर्मी जन कठिनाई से उद्धार प्राप्‍त करेगा, तो भक्‍तिहीन और पापी का क्या होगा? इसलिए जो भी परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार दुःख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए अपने आपको विश्‍वासयोग्य सृष्‍टिकर्ता के हाथों में सौंप दें। अतः तुम्हारे सह-प्रवर और मसीह के दुःखों के साक्षी तथा उस प्रकट होनेवाली महिमा के सहभागी के रूप में मैं तुम्हारे बीच जो प्रवर हैं उन्हें समझाता हूँ: परमेश्‍वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच है, रखवाली करो, किसी दबाव से नहीं बल्कि परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार, और नीच कमाई के लिए नहीं बल्कि उत्साह से; और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं उन पर प्रभुता मत जताओ बल्कि झुंड के लिए आदर्श बनो। जब प्रधान चरवाहा प्रकट होगा, तब तुम महिमा के उस मुकुट को प्राप्‍त करोगे जो कभी नहीं मुरझाएगा। इसी प्रकार, हे जवानो, तुम भी प्रवरों के अधीन रहो। तुम सब एक दूसरे के प्रति दीनता को धारण कर लो, क्योंकि परमेश्‍वर अभिमानियों का विरोध करता है, परंतु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिए परमेश्‍वर के बलवंत हाथ के नीचे दीनता से रहो, ताकि वह तुम्हें उचित समय पर ऊँचा उठाए। अपनी सारी चिंता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारा ध्यान रखता है। सचेत और जागते रहो। तुम्हारा विरोधी शैतान, गरजनेवाले सिंह के समान इस ताक में रहता है कि किसको फाड़ खाए। विश्‍वास में दृढ़ होकर उसका सामना करो और यह जान लो कि तुम्हारे भाई जो इस संसार में हैं, इसी प्रकार दुःख सह रहे हैं। अब परमेश्‍वर जो समस्त अनुग्रह का दाता है, और जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनंत महिमा के लिए बुलाया है, वह तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद स्वयं तुम्हें सिद्ध, ढृढ़, बलवंत और स्थिर करेगा। उसी का पराक्रम युगानुयुग बना रहे। आमीन। मैंने सिलवानुस के द्वारा, जिसे मैं विश्‍वासयोग्य भाई मानता हूँ, तुम्हें उत्साहित करते और यह गवाही देते हुए संक्षेप में लिखा है कि यही परमेश्‍वर का सच्‍चा अनुग्रह है। इसी में स्थिर रहो। वह जो बेबीलोन में है और तुम्हारे साथ चुनी हुई है, तुम्हें नमस्कार कहती है, और मेरा पुत्र मरकुस भी तुम्हें नमस्कार कहता है। प्रेम के चुंबन से एक दूसरे का अभिवादन करो। तुम सब को जो मसीह में हो, शांति मिलती रहे। आमीन। यीशु मसीह के दास और प्रेरित शमौन पतरस की ओर से, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धार्मिकता के द्वारा हमारे समान बहुमूल्य विश्‍वास प्राप्‍त किया है: परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा तुम्हें अनुग्रह और शांति बहुतायत से मिलती रहे। प्रभु यीशु के ईश्‍वरीय सामर्थ्य ने हमें जीवन और भक्‍ति के विषय में सब कुछ दिया है। यह सब उसकी पहचान के द्वारा हुआ जिसने अपनी महिमा और सद्गुण के द्वारा हमें बुलाया है; इन्हीं के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बड़ी-बड़ी प्रतिज्ञाएँ दी हैं ताकि उनके द्वारा तुम उस भ्रष्‍ट आचरण से बचकर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं के कारण है, ईश्‍वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ। इसी कारण पूरा प्रयत्‍न करो कि अपने विश्‍वास में सद्गुण, सद्गुण में ज्ञान, और ज्ञान में संयम, और संयम में धीरज, और धीरज में भक्‍ति, और भक्‍ति में भाईचारे की प्रीति और भाईचारे की प्रीति में प्रेम बढ़ाते जाओ। यदि ये बातें तुममें बनी रहें और बढ़ती जाएँ, तो ये हमारे प्रभु यीशु मसीह की पहचान में न तो तुम्हें निष्क्रिय होने देंगी, और न निष्फल। क्योंकि जिसमें ये बातें नहीं हैं, वह अंधा है और धुँधला देखता है, और भूल गया है कि वह अपने पिछले पापों से शुद्ध हो चुका है। इसलिए हे भाइयो, अपनी बुलाहट और चुने जाने को प्रमाणित करने का अत्यधिक प्रयत्‍न करो, क्योंकि ऐसा करने से तुम कभी ठोकर नहीं खाओगे। इस प्रकार तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनंत राज्य में बड़े स्वागत के साथ प्रवेश पाओगे। इसलिए मैं तुम्हें इन बातों का सदैव स्मरण दिलाता रहूँगा, भले ही तुम इन्हें जानते हो और उस सत्य में जो तुम्हारे पास है, दृढ़ भी किए गए हो। मैं यह उचित समझता हूँ कि जब तक इस डेरे में हूँ तब तक तुम्हें इन बातों का स्मरण दिलाकर उत्साहित करता रहूँ। क्योंकि मैं जानता हूँ कि मेरे डेरे के गिराए जाने का समय निकट है, जैसा हमारे प्रभु यीशु मसीह ने मुझ पर प्रकट भी किया है। इसलिए मैं ऐसा यत्‍न करूँगा कि मेरे जाने के बाद भी तुम इन बातों को सदैव स्मरण कर सको। जब हमने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह के सामर्थ्य और आगमन के विषय में बताया, तो हमने चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण करते हुए ऐसा नहीं किया, बल्कि हमने तो उसके प्रताप को अपनी आँखों से देखा था। जब उसने परमेश्‍वर पिता से आदर और महिमा प्राप्‍त की, तो उस प्रतापमय महिमा में से उसके लिए यह आवाज़ आई: “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अति प्रसन्‍न हूँ।” और स्वर्ग से आती इस आवाज़ को हमने उस समय सुना जब हम उसके साथ पवित्र पर्वत पर थे। अतः भविष्यवक्‍ताओं का जो वचन हमारे पास है वह और भी अधिक दृढ़ ठहरा। तुम यह अच्छा करते हो जो उस वचन पर यह जानकर ध्यान देते हो कि वह एक ऐसा दीपक है, जो अंधेरे स्थान में तब तक प्रकाश देता रहता है जब तक पौ न फटे और भोर का तारा तुम्हारे हृदय में उदय न हो जाए। परंतु सब से पहले यह जान लो कि पवित्रशास्‍त्र की कोई भी भविष्यवाणी किसी की व्यक्‍तिगत विचारधारा के आधार पर नहीं होती; क्योंकि कोई भी भविष्यवाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, बल्कि मनुष्य पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर परमेश्‍वर की ओर से बोलते थे । जिस प्रकार उन लोगों में झूठे भविष्यवक्‍ता थे, उसी प्रकार तुममें भी झूठे शिक्षक होंगे जो विनाशकारी विधर्मी शिक्षाओं को गुप्‍त रीति से लेकर आएँगे, और यहाँ तक कि वे उस स्वामी का जिसने उन्हें मोल लिया है, इनकार करेंगे। इस प्रकार वे शीघ्र ही अपने ऊपर विनाश ले आएँगे। बहुत से लोग उनके समान लुचपन करेंगे, और उनके कारण सत्य के मार्ग की निंदा होगी। वे लोभ में आकर बनावटी बातें गढ़ेंगे और तुम्हारा अनुचित लाभ उठाएँगे। दंड की आज्ञा उन पर पहले से ही हो चुकी है, जिसमें न तो अब देरी है, और न उनका विनाश सोया हुआ है। जब परमेश्‍वर ने पाप करनेवाले स्वर्गदूतों को नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें नरक में फेंक दिया और न्याय के दिन तक के लिए अंधकार की बेड़ियों से बाँधकर रखा है; और उसने प्राचीन काल के संसार को भी न छोड़ा बल्कि भक्‍तिहीनों के संसार पर जलप्रलय भेजा, पर धार्मिकता के प्रचारक नूह समेत आठ मनुष्यों को बचा लिया; और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाशकारी दंड देकर राख में मिला दिया कि वे आने वाले अधर्मियों के लिए एक उदाहरण ठहरें, परंतु धर्मी लूत को जो अधर्मियों के वासनापूर्ण आचरण से दुःखी था, बचा लिया (क्योंकि वह धर्मी मनुष्य उनके बीच रहते हुए उनके अधर्म के कार्यों को देखता और सुनता था तथा उसकी धर्मी आत्मा दिन-प्रतिदिन पीड़ित होती रहती थी); तो स्पष्‍ट है कि प्रभु धर्मियों को परीक्षा में से निकालना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दंड की दशा में रखना भी जानता है, विशेषकर उन्हें जो अपनी अशुद्ध शारीरिक लालसाओं में लिप्‍त रहते और प्रभुता को तुच्छ जानते हैं। ये ढीठ और हठीले लोग हैं जो महिमामय प्राणियों की निंदा करने से भी नहीं डरते; जबकि स्वर्गदूत भी जो शक्‍ति और सामर्थ्य में उनसे बड़े हैं, प्रभु के सामने उन पर कोई निंदापूर्ण दोष नहीं लगाते। ये लोग स्वाभाविक रूप से बुद्धिहीन पशुओं के समान हैं, जो पकड़े जाने और नाश होने के लिए उत्पन्‍न‍ हुए हैं। वे जिन बातों को समझते भी नहीं उनकी निंदा करते हैं। वे अपनी ही सड़ाहट में नष्‍ट हो जाएँगे। उन्हें बुराई का प्रतिफल बुरा ही मिलेगा। दिन के उजियाले में भोग-विलास करना उन्हें अच्छा लगता है। वे कलंक और धब्बे हैं, जो तुम्हारे साथ भोज में सहभागी होते समय अपने किए छलावे पर आनंद मनाते हैं। उनकी आँखें व्यभिचार से भरी हैं और वे पाप करने से नहीं रुकते। वे अस्थिर मनवालों को फुसला लेते हैं। उनका मन लोभ का आदी हो गया है, और वे शापित संतान हैं। वे सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं; उन्होंने बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग का अनुसरण किया, जिसने अधर्म की मज़दूरी को प्रिय जाना था, परंतु उसे अपने इस अपराध के लिए फटकार भी पड़ी। एक अबोल गधे ने मनुष्य की बोली में बोलकर उस भविष्यवक्‍ता को उसके पागलपन से रोका। ये मनुष्य सूखे कुएँ और आँधी से उड़ाए जानेवाले बादल हैं जिनके लिए घोर अंधकार ठहराया गया है। वे घमंड की व्यर्थ बातें बोलने और शारीरिक अभिलाषाओं और लुचपन के द्वारा उन लोगों को फँसा लेते हैं जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं। वे उनसे स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा तो करते हैं, पर स्वयं सड़ाहट के दास हैं, क्योंकि एक मनुष्य जिससे पराजित हो जाता है, वह उसी का दास बन जाता है। यदि वे हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के ज्ञान के द्वारा इस संसार की अशुद्धताओं से बच निकलने के बाद फिर से उनमें फँसकर हार जाते हैं, तो उनकी दशा पहले से भी बुरी हो जाती है। उनके लिए उस पवित्र आज्ञा को जानकर, जो उन्हें सौंपी गई थी, फिर जाने की अपेक्षा भला होता कि वे धार्मिकता के मार्ग को ही न जानते। उन पर यह कहावत ठीक बैठती है, कुत्ता अपनी उलटी के पास लौटता है और “नहाई हुई सूअरनी कीचड़ में लोटने के लिए वापस लौटती है।” हे प्रियो, मैं तुम्हें यह दूसरा पत्र लिख रहा हूँ। इन दोनों पत्रों में मैंने यह स्मरण दिलाकर तुम्हारे सच्‍चे मन को उभारा है, कि तुम पवित्र भविष्यवक्‍ताओं के द्वारा पहले से कही गई बातों को तथा प्रभु और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्मरण रखो जो तुम्हें प्रेरितों के द्वारा दी गई थी। सब से पहले तुम यह समझ लो कि अंतिम दिनों में ठट्ठा करनेवाले ठट्ठा करते हुए आएँगे, और अपनी लालसाओं के अनुसार चलेंगे, और कहेंगे, “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से हमारे पूर्वज सो गए हैं तब से सब कुछ वैसा ही बना हुआ है जैसा सृष्‍टि के आरंभ से था।” वे जानबूझकर इस बात को अनदेखा कर देते हैं कि परमेश्‍वर के वचन के द्वारा आकाश का अस्तित्व तो बहुत पहले से है, और उसी के द्वारा पृथ्वी जल में से रची गई और जल के द्वारा स्थिर है, और इसी के द्वारा उस समय का जगत जलमग्‍‍न होकर नष्‍ट हो गया था। परंतु उसी वचन के द्वारा यह आकाश और यह पृथ्वी आग से भस्म किए जाने के लिए रखे गए हैं तथा ये अधर्मी मनुष्यों के न्याय और विनाश के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे। हे प्रियो, यह बात तुमसे छिपी न रहे कि प्रभु के लिए एक दिन हज़ार वर्ष के समान है और हज़ार वर्ष एक दिन के समान। प्रभु अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने में देर नहीं करता, जैसा कुछ लोग समझते हैं; परंतु प्रभु तुम्हारे विषय में धीरज धरता है और नहीं चाहता कि कोई नाश हो, बल्कि यह कि सब लोगों को पश्‍चात्ताप का अवसर मिले। परंतु प्रभु का दिन चोर के समान आएगा। उस दिन आकाश बड़ी गर्जन के साथ मिट जाएगा, तत्त्व जलकर पिघल जाएँगे और पृथ्वी तथा उस पर किए गए कार्य भस्म हो जाएँगे। जबकि ये सब वस्तुएँ इस प्रकार नाश होनेवाली हैं, तो तुम्हें पवित्र आचरण और भक्‍ति में कैसे लोग होना चाहिए, और कैसे परमेश्‍वर के दिन के शीघ्र आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए! उस दिन के कारण आकाश आग से जलकर नष्‍ट हो जाएगा और उसके तत्त्व प्रचंड ताप के कारण पिघल जाएँगे। परंतु हम उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार नए आकाश और नई पृथ्वी की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिसमें धार्मिकता वास करती है। इसलिए, हे प्रियो, जब तुम इन बातों की प्रतीक्षा करते हो, तो यत्‍न करो कि तुम शांतिपूर्ण हृदय के साथ उसके सामने निष्कलंक और निर्दोष पाए जाओ, और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार का अवसर समझो, जैसा हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। वह अपने सब पत्रों में भी इन बातों के विषय में कहता है, जिनमें से कुछ बातें समझने में कठिन होती हैं। अज्ञानी और अस्थिर लोग अपने ही विनाश के लिए उनके अर्थों को तोड़ते मरोड़ते हैं, जैसा कि वे पवित्रशास्‍त्र की अन्य बातों के साथ भी करते हैं। अतः हे प्रियो, तुम इन बातों को पहले ही से जानते हो, इसलिए सावधान रहो कि तुम उन अधर्मी मनुष्यों के भ्रम में पड़कर अपनी दृढ़ता को खो न दो, बल्कि हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और ज्ञान में बढ़ते जाओ। उसकी महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन। उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हमने सुना, जिसे हमने अपनी आँखों से देखा, जिसे हमने ध्यान से देखा और अपने हाथों से छुआ— वह जीवन प्रकट हुआ, और हमने उसे देखा और उसकी साक्षी देते हैं और तुम्हें उस अनंत जीवन का समाचार देते हैं जो पिता के साथ था और हम पर प्रकट हुआ— जो कुछ हमने देखा और सुना है, उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, ताकि तुम भी हमारे साथ सहभागिता रखो। वास्तव में हमारी यह सहभागिता पिता और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। ये बातें हम इसलिए लिख रहे हैं कि हमारा आनंद पूरा हो जाए। वह संदेश जो हमने उससे सुना और तुम्हें सुनाते हैं, यह है: परमेश्‍वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अंधकार नहीं। यदि हम कहें कि हमारी उसके साथ सहभागिता है फिर भी अंधकार में चलें, तो हम झूठ बोलते हैं और सत्य पर नहीं चलते। परंतु यदि हम ज्योति में चलें जैसे वह ज्योति में है, तो हमारी एक दूसरे के साथ सहभागिता है और उसके पुत्र यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। यदि हम कहें कि हममें पाप नहीं, तो हम अपने आपको धोखा देते हैं और हममें सत्य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्‍वासयोग्य और धर्मी है। यदि हम कहें कि हमने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं और उसका वचन हममें नहीं। हे मेरे बच्‍चो, मैं ये बातें तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो। परंतु यदि कोई पाप करता है, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् यीशु मसीह जो धर्मी है। वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है, और न केवल हमारे बल्कि संपूर्ण जगत के पापों का भी। यदि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं तो इससे हम जान जाते हैं, कि हम उसे जान गए हैं। जो कहता है, “मैं उसे जान गया हूँ,” परंतु उसकी आज्ञाओं का पालन नहीं करता, वह झूठा है, और उसमें सत्य नहीं। परंतु जो कोई उसके वचन का पालन करता है, उसमें सचमुच परमेश्‍वर का प्रेम सिद्ध हो चुका है। इससे हम जान जाते हैं कि हम उसमें हैं। जो यह कहता है कि मैं उसमें बना रहता हूँ, उसे स्वयं भी वैसे ही चलना चाहिए जैसे वह चला। हे प्रियो, मैं तुम्हारे लिए कोई नई आज्ञा नहीं, परंतु वही पुरानी आज्ञा लिख रहा हूँ जो तुम्हें आरंभ से मिली है। यह पुरानी आज्ञा वह वचन है जो तुमने आरंभ से सुना है। साथ ही मैं तुम्हें एक नई आज्ञा लिख रहा हूँ जो उसमें और तुममें सच्‍ची है क्योंकि अंधकार मिटता जा रहा है और सच्‍ची ज्योति अब चमकने लगी है। जो यह कहता है कि मैं ज्योति में हूँ परंतु अपने भाई से घृणा करता है, वह अब तक अंधकार में है। जो अपने भाई से प्रेम रखता है वह ज्योति में बना रहता है और उसमें ठोकर का कारण नहीं। परंतु जो अपने भाई से घृणा करता है, वह अंधकार में है और अंधकार में चलता है, और नहीं जानता कि वह कहाँ जाता है, क्योंकि अंधकार ने उसकी आँखें अंधी कर दी हैं। हे बच्‍चो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि यीशु के नाम के कारण तुम्हारे पाप क्षमा हुए हैं। पिताओ, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुम उसे जान गए हो जो आदि से है। युवको, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुमने उस दुष्‍ट पर जय पाई है। बच्‍चो, मैंने तुम्हें इसलिए लिखा क्योंकि तुम पिता को जान गए हो। पिताओ, मैंने तुम्हें इसलिए लिखा क्योंकि तुम उसे जान गए हो जो आदि से है। युवको, मैंने तुम्हें इसलिए लिखा क्योंकि तुम बलवंत हो और परमेश्‍वर का वचन तुममें बना रहता है और तुमने उस दुष्‍ट पर जय पाई है। संसार से प्रेम न रखो, और न संसार की वस्तुओं से। यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, आँखों की लालसा और धन-संपत्ति का घमंड, वह सब पिता की ओर से नहीं बल्कि संसार की ओर से है। संसार और उसकी लालसाएँ मिटती जाती हैं, परंतु जो परमेश्‍वर की इच्छा पर चलता है वह सदा बना रहेगा। हे बच्‍चो, यह अंतिम घड़ी है और जैसे तुमने सुना था कि मसीह-विरोधी आने वाला है, वैसे ही अब बहुत से मसीह-विरोधी आ चुके हैं; इससे हम जानते हैं कि यह अंतिम घड़ी है। वे हममें से निकले पर हमारे नहीं थे; क्योंकि यदि वे हमारे होते, तो हमारे साथ बने रहते। परंतु वे इसलिए निकले कि यह स्पष्‍ट हो जाए कि वे सब हमारे नहीं हैं। परंतु तुम्हारा अभिषेक उस पवित्र के द्वारा हुआ है, और तुम सब यह जानते हो। मैंने तुम्हें यह इसलिए नहीं लिखा कि तुम सत्य को नहीं जानते, परंतु इसलिए कि तुम उसे जानते हो, और इसलिए कि कोई भी झूठ, सत्य की ओर से नहीं। झूठा कौन है? केवल वही जो यह इनकार करता है कि यीशु ही मसीह है। मसीह-विरोधी वही है जो पिता और पुत्र का इनकार करता है। प्रत्येक जो पुत्र का इनकार करता है उसके पास पिता भी नहीं; जो पुत्र को मान लेता है उसके पास पिता भी है। तुमने जो आरंभ से सुना है वह तुममें बना रहे। तुमने जो आरंभ से सुना है, वह यदि तुममें बना रहेगा, तो तुम पुत्र में और पिता में बने रहोगे। जो प्रतिज्ञा उसने स्वयं हमसे की है वह अनंत जीवन है। मैंने ये बातें तुम्हें उन लोगों के विषय में लिखी हैं जो तुम्हें भरमाते हैं। परंतु जहाँ तक तुम्हारा संबंध है, जो अभिषेक तुमने उससे प्राप्‍त किया वह तुममें बना रहता है, इसलिए आवश्यकता नहीं कि कोई तुम्हें सिखाए। वह अभिषेक सब बातों के विषय में तुम्हें सिखाता है, और वह सत्य है और झूठ नहीं, इसलिए जैसे उसने तुम्हें सिखाया है, उसमें बने रहो। अतः हे बच्‍चो, अब उसी में बने रहो ताकि जब वह प्रकट हो तो हमें साहस हो, और उसके आगमन पर हमें उसके सामने लज्‍जित न होना पड़े। यदि तुम जानते हो कि वह धर्मी है, तो यह भी जानते हो कि प्रत्येक जो धार्मिकता का कार्य करता है वह उससे उत्पन्‍न‍ हुआ है। देखो, पिता ने हमसे कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्‍वर की संतान कहलाएँ, और हम हैं भी। इस कारण संसार हमें नहीं जानता क्योंकि संसार ने उसे भी नहीं जाना। प्रियो, हम अब परमेश्‍वर की संतान हैं, परंतु अभी तक यह प्रकट नहीं हुआ कि हम क्या होंगे। हम यह जानते हैं कि जब वह प्रकट होगा तो हम उसके समान हो जाएँगे, क्योंकि हम उसे वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। प्रत्येक जो उस पर यह आशा रखता है, अपने आपको वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है। प्रत्येक जो पाप करता है वह व्यवस्था का उल्‍लंघन करता है, क्योंकि पाप तो व्यवस्था का उल्‍लंघन है। तुम जानते हो कि वह इसलिए प्रकट हुआ कि हमारे पापों को उठा ले; और उसमें कोई पाप नहीं। प्रत्येक जो उसमें बना रहता है, वह पाप में नहीं चलता । प्रत्येक जो पाप में चलता है, उसने न तो उसे देखा है और न उसे जाना है। बच्‍चो, कोई तुम्हें भरमा न दे। जो धार्मिकता के कार्य करता है वह वैसा ही धर्मी है, जैसा वह धर्मी है। जो पाप करता है वह शैतान से है क्योंकि शैतान आरंभ ही से पाप करता आया है। परमेश्‍वर का पुत्र इसलिए प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्यों का नाश करे। प्रत्येक जो परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है वह पाप नहीं करता, क्योंकि परमेश्‍वर का बीज उसमें बना रहता है; और वह पाप में नहीं चल सकता, क्योंकि वह परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है। इसी से परमेश्‍वर की संतान और शैतान की संतान की पहचान होती है; प्रत्येक जो धार्मिकता पर नहीं चलता, वह परमेश्‍वर से नहीं, और न ही वह जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता। जो संदेश तुमने आरंभ से सुना वह यह है कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें। कैन के समान न हों जो उस दुष्‍ट से था और जिसने अपने भाई का वध किया। उसने किस लिए उसका वध किया? इसलिए कि उसके कार्य बुरे, और उसके भाई के कार्य धार्मिकता के थे। भाइयो, यदि यह संसार तुमसे घृणा करता है तो आश्‍चर्य न करना। हम जानते हैं कि हम मृत्यु में से निकलकर जीवन में प्रवेश कर चुके हैं क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं। जो प्रेम नहीं रखता वह मृत्यु में बना रहता है। प्रत्येक जो अपने भाई से घृणा करता है, वह हत्यारा है और तुम जानते हो कि किसी भी हत्यारे में अनंत जीवन वास नहीं करता। हमने प्रेम को इसी से जाना है, कि उसने हमारे लिए अपना प्राण दे दिया; अतः हमें भी भाइयों के लिए अपना प्राण देना चाहिए। परंतु जिसके पास सांसारिक धन-संपत्ति है और अपने भाई को आवश्यकता में देखकर उसके प्रति अपना हृदय कठोर कर लेता है, तो परमेश्‍वर का प्रेम उसमें कैसे बना रहेगा? बच्‍चो, हम अपने शब्द या जीभ से ही नहीं, बल्कि कार्य और सच्‍चाई के द्वारा भी प्रेम रखें। इसी से हम जानेंगे कि हम सत्य के हैं और यदि हमारा मन हमें दोषी ठहराएगा तो हम उसके सामने अपने-अपने मन को आश्‍वस्त कर सकेंगे, क्योंकि परमेश्‍वर हमारे मन से कहीं अधिक महान है और वह सब कुछ जानता है। प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोषी न ठहराए, तो परमेश्‍वर के सामने हमें साहस होता है, और जो कुछ हम माँगते हैं, वह उससे पाते हैं, क्योंकि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं और वही कार्य करते हैं जिससे वह प्रसन्‍न होता है। उसकी आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्‍वास करें और जैसे उसने हमें आज्ञा दी, हम एक दूसरे से प्रेम रखें। जो उसकी आज्ञाओं का पालन करता है वह परमेश्‍वर में बना रहता है और परमेश्‍वर उसमें; और जो आत्मा उसने हमें दिया है उसी के द्वारा हम जान जाते हैं कि वह हममें बना रहता है। हे प्रियो, हर एक आत्मा पर विश्‍वास न करो, बल्कि आत्माओं को परखो कि वे परमेश्‍वर की ओर से हैं या नहीं, क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यवक्‍ता जगत में निकल पड़े हैं। तुम परमेश्‍वर के आत्मा को इससे जान सकते हो: हर एक आत्मा जो मानती है कि यीशु मसीह देह में होकर आया है, वह परमेश्‍वर की ओर से है, और प्रत्येक आत्मा जो यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्‍वर की ओर से नहीं है; और यही मसीह-विरोधी की आत्मा है जिसके विषय में तुम सुन चुके हो कि वह आने पर है और अब तो जगत में ही है। बच्‍चो, तुम परमेश्‍वर के हो और तुमने झूठे भविष्यवक्‍ताओं पर जय पाई है, क्योंकि जो तुममें है वह उससे जो संसार में है, कहीं अधिक बढ़कर है। वे संसार के हैं; इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं और संसार उनकी सुनता है। हम परमेश्‍वर के हैं। जो परमेश्‍वर को जानता है वह हमारी सुनता है, जो परमेश्‍वर का नहीं है वह हमारी नहीं सुनता। इसी से हम सत्य के आत्मा और भ्रम की आत्मा को जान लेते हैं। हे प्रियो, हम एक दूसरे से प्रेम रखें, क्योंकि प्रेम परमेश्‍वर से है, और प्रत्येक जो प्रेम रखता है वह परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है और परमेश्‍वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम है। परमेश्‍वर का प्रेम हमारे बीच इससे प्रकट हुआ कि परमेश्‍वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेज दिया कि हम उसके द्वारा जीवित रहें। प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्‍वर से प्रेम रखा, बल्कि इसमें है कि परमेश्‍वर ने हमसे प्रेम रखा और अपने पुत्र को हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिए भेजा। प्रियो, जब परमेश्‍वर ने हमसे ऐसा प्रेम रखा, तो हमें भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। परमेश्‍वर को कभी किसी ने नहीं देखा। यदि हम आपस में प्रेम रखते हैं, तो परमेश्‍वर हममें बना रहता है और उसका प्रेम हममें सिद्ध हो चुका है। उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है, इसलिए हम जानते हैं कि हम उसमें बने रहते हैं और वह हममें। हमने देखा और साक्षी देते हैं कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता होने के लिए भेजा। जो कोई यह मान लेता है कि यीशु परमेश्‍वर का पुत्र है, परमेश्‍वर उसमें बना रहता है और वह परमेश्‍वर में। जो प्रेम परमेश्‍वर हमसे रखता है उसे हम जान गए हैं, और हमने उस पर विश्‍वास किया है। परमेश्‍वर प्रेम है, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्‍वर में बना रहता है और परमेश्‍वर उसमें बना रहता है। इससे प्रेम हममें सिद्ध हुआ है ताकि न्याय के दिन हमें साहस हो, क्योंकि जैसे वह है वैसे ही इस जगत में हम भी हैं। प्रेम में भय नहीं होता बल्कि सिद्ध प्रेम भय को दूर करता है। क्योंकि भय का संबंध दंड से है और जिसको भय है वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। हम इसलिए प्रेम रखते हैं, क्योंकि उसने पहले हमसे प्रेम रखा। यदि कोई कहे, “मैं परमेश्‍वर से प्रेम रखता हूँ” और अपने भाई से घृणा करे तो वह झूठा है। क्योंकि जो अपने उस भाई से प्रेम नहीं रखता जिसे उसने देखा है, तो वह उस परमेश्‍वर से प्रेम नहीं रख सकता जिसे उसने नहीं देखा। हमें उससे यह आज्ञा मिली है कि जो परमेश्‍वर से प्रेम रखता है वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। प्रत्येक जो यह विश्‍वास करता है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है और प्रत्येक जो अपने पिता से प्रेम रखता है वह उससे भी प्रेम रखता है जो पिता से उत्पन्‍न‍ हुआ है। जब हम परमेश्‍वर से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाओं पर चलते हैं, तो इससे हम जानते हैं कि हम परमेश्‍वर की संतानों से भी प्रेम रखते हैं। क्योंकि परमेश्‍वर से प्रेम रखना यह है कि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करें, और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं हैं। क्योंकि जो कोई परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है वह संसार पर जय पाता है; और वह विजय जिसने संसार पर जय पाई है, हमारा विश्‍वास है। संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जो यह विश्‍वास करता है कि यीशु ही परमेश्‍वर का पुत्र है। यह वही है जो जल और लहू के द्वारा आया, अर्थात् यीशु मसीह: वह केवल जल के द्वारा नहीं, बल्कि जल और लहू दोनों के द्वारा आया; और जो साक्षी देता है वह आत्मा है, क्योंकि वह आत्मा सत्य है। जो साक्षी देते हैं तीन हैं, आत्मा, जल और लहू; और ये तीनों एकमत हैं। यदि हम मनुष्यों की साक्षी स्वीकार करते हैं, तो परमेश्‍वर की साक्षी तो उससे कहीं बढ़कर है; क्योंकि परमेश्‍वर की साक्षी यह है कि उसने अपने पुत्र के विषय में साक्षी दी है। जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है, वह स्वयं में यह साक्षी रखता है। जो परमेश्‍वर पर विश्‍वास नहीं करता उसने उसे झूठा ठहरा दिया है, क्योंकि उसने उस साक्षी पर विश्‍वास नहीं किया जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। वह साक्षी यह है: परमेश्‍वर ने हमें अनंत जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है उसके पास यह जीवन है। जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं है उसके पास यह जीवन नहीं। मैंने तुम्हें, जो परमेश्‍वर के पुत्र के नाम पर विश्‍वास करते हो, ये बातें इसलिए लिखीं कि तुम जानो कि अनंत जीवन तुम्हारा है । उसके प्रति हमारा भरोसा यह है कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगें, तो वह हमारी सुनता है। यदि हम जानते हैं कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो हम यह भी जानते हैं कि जो कुछ हमने उससे माँगा है, उसे पाया है। यदि कोई अपने भाई को ऐसा पाप करते देखे, जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता हो, तो वह उसके लिए प्रार्थना करे और परमेश्‍वर उसे जीवन देगा। यह उनके लिए है जिन्होंने ऐसा पाप किया है जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता। ऐसा भी पाप है जो मृत्यु की ओर ले जाता है; मैं इसके लिए नहीं कहता कि कोई विनती करे। प्रत्येक अधार्मिकता पाप है, परंतु ऐसा पाप भी है जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता। हम जानते हैं कि जो कोई परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है, वह पाप में नहीं चलता, बल्कि वह जो परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है, उसे बचाए रखता है, और दुष्‍ट उसे छू नहीं पाता। हम जानते हैं कि हम परमेश्‍वर के हैं और संपूर्ण संसार उस दुष्‍ट के वश में पड़ा है। हम जानते हैं कि परमेश्‍वर का पुत्र आया, और उसने हमें समझ दी है कि हम उस सत्य को जानें; और हम सत्य में हैं, अर्थात् उसके पुत्र यीशु मसीह में। वही सच्‍चा परमेश्‍वर और अनंत जीवन है। बच्‍चो, अपने आपको मूर्तियों से बचाए रखो। मुझ प्रवर की ओर से उस चुनी हुई महिला और उसके बच्‍चों के नाम, जिनसे मैं सत्य में प्रेम रखता हूँ—और न केवल मैं, बल्कि वे सब भी जो उस सत्य को जानते हैं— क्योंकि वह सत्य हममें बना रहता है और सदा हमारे साथ रहेगा। परमेश्‍वर पिता की ओर से, और पिता के पुत्र यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह, दया और शांति हमारे साथ सत्य और प्रेम में बनी रहेगी। मैं बहुत आनंदित हुआ कि मैंने तेरे कुछ बच्‍चों को उस आज्ञा के अनुसार सत्य पर चलते हुए पाया जो हमें पिता से मिली थी। अब हे महिला, मैं तुझसे विनती करता हूँ कि हम आपस में प्रेम रखें; यह मैं तुझे किसी नई आज्ञा के रूप में नहीं बल्कि वही लिख रहा हूँ जो आरंभ से हमें मिली है। प्रेम यह है कि हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलें। आज्ञा यह है जो तुमने आरंभ से सुनी कि तुम प्रेम में चलो। क्योंकि संसार में बहुत से भरमानेवाले निकल पड़े हैं जो नहीं मानते कि यीशु मसीह देह में आया। यही भरमानेवाला और मसीह-विरोधी है। अपनी चौकसी करो ताकि तुम उन्हें गँवा न दो जिनके लिए हमने परिश्रम किया, बल्कि पूरा प्रतिफल पाओ। जो कोई मसीह की शिक्षा से दूर चला जाता है और उसमें बना नहीं रहता, उसके पास परमेश्‍वर नहीं; जो उस शिक्षा में बना रहता है, उसके पास पिता और पुत्र दोनों हैं। यदि कोई तुम्हारे पास आए और यह शिक्षा न दे, तो उसे न अपने घर में आने दो और न उसे नमस्कार करो; क्योंकि जो उसे नमस्कार करता है, वह उसके बुरे कार्यों में सहभागी होता है। बहुत सी बातें हैं पर मैं कागज़ और स्याही से तुम्हें लिखना नहीं चाहता, परंतु आशा करता हूँ कि तुम्हारे पास आकर आमने-सामने बात करूँ, जिससे हमारा आनंद पूरा हो जाए। चुनी हुई तेरी बहन के बच्‍चे तुझे नमस्कार कहते हैं। मुझ प्रवर की ओर से प्रिय गयुस के नाम जिससे मैं सत्य में प्रेम रखता हूँ। हे प्रिय, मेरी प्रार्थना है कि जैसे तू आत्मिक उन्‍नति कर रहा है, वैसे ही सब बातों में उन्‍नति करे और स्वस्थ रहे। क्योंकि जब भाइयों ने आकर तेरे सत्य में होने की साक्षी दी, जैसे तू सत्य पर चलता है, तो मैं बड़ा आनंदित हुआ। मेरे लिए इससे बढ़कर कोई आनंद नहीं कि मैं सुनूँ कि मेरे बच्‍चे सत्य पर चलते हैं। हे प्रिय, जो कुछ तू उन अपरिचित भाइयों के लिए करता है, वह विश्‍वासयोग्यता से करता है। उन्होंने कलीसिया के सामने तेरे प्रेम की साक्षी दी है। अच्छा होगा कि तू उन्हें इस रीति से विदा करे जो परमेश्‍वर को ग्रहणयोग्य हो; क्योंकि वे उसके नाम के लिए निकल पड़े हैं, और गैर मसीहियों से कुछ नहीं लेते। इसलिए हमें ऐसे लोगों की सहायता करनी चाहिए, ताकि हम सत्य के सहकर्मी हों। मैंने कलीसिया को कुछ लिखा था, परंतु दियुत्रिफेस जो उनमें प्रधान बनना चाहता है, हमें स्वीकार नहीं करता। इसलिए जब मैं आऊँगा, तो जो कार्य वह करता है, अर्थात् हमारे विषय में बुरी-बुरी बातें बकना, उनका स्मरण दिलाऊँगा। उसे इससे भी संतोष नहीं, वह भाइयों को स्वीकार नहीं करता, और जो करना भी चाहते हैं उन्हें रोकता है और कलीसिया से निकाल देता है। हे प्रिय, बुराई का नहीं बल्कि भलाई का अनुकरण कर। जो भलाई करता है वह परमेश्‍वर से है; पर जो बुराई करता है उसने परमेश्‍वर को नहीं देखा। दिमेत्रियुस के विषय में सब ने, यहाँ तक कि स्वयं सत्य ने भी साक्षी दी है; और हम भी साक्षी देते हैं, और तू जानता है कि हमारी साक्षी सच्‍ची है। मुझे बहुत सी बातें तुझे लिखनी थीं, परंतु स्याही और कलम से लिखना नहीं चाहता। मैं तुझसे शीघ्र मिलने की आशा करता हूँ, तब हम आमने-सामने बातें करेंगे। तुझे शांति मिले। यहाँ के मित्र तुझे नमस्कार कहते हैं। वहाँ के मित्रों को नाम ले लेकर नमस्कार कहना। यीशु मसीह के दास और याकूब के भाई यहूदा की ओर से उन बुलाए हुओं के नाम जो परमेश्‍वर पिता में प्रिय और यीशु मसीह के लिए सुरक्षित हैं; दया, शांति और प्रेम तुम्हें बहुतायत से मिले। हे प्रियो, जब मैं तुम्हें उस उद्धार के विषय में लिखने के लिए अत्यंत उत्सुक हो रहा था, जिसमें हम सहभागी हैं, तो मैंने यह आवश्यक समझा कि मैं तुम्हें लिखकर उस विश्‍वास के लिए प्रयत्‍नशील रहने को प्रोत्साहित करूँ जो पवित्र लोगों को एक ही बार सदा के लिए सौंपा गया है। इसलिए कि कुछ लोग चुपके से घुस आए हैं जिनके इस दंड के विषय में बहुत पहले से लिखा गया था: ये भक्‍तिहीन हैं, और हमारे परमेश्‍वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते हैं और हमारे एकमात्र स्वामी और प्रभु, यीशु मसीह का इनकार करते हैं। यद्यपि तुम इन सब बातों को पहले से जानते हो फिर भी मैं तुम्हें यह स्मरण दिलाना चाहता हूँ कि प्रभु ने अपने लोगों को मिस्र देश से छुड़ाने के बाद विश्‍वास न करनेवालों को नाश कर दिया था। फिर जिन स्वर्गदूतों ने अपने पद को स्थिर न रखा बल्कि अपने निवासस्थान को छोड़ दिया, उनको उसने उस भीषण दिन के न्याय के लिए अनंत बंधनों में बाँधकर अंधकार में रखा है। उसी प्रकार सदोम और अमोरा और उनके आस-पास के नगर, जो उनके समान व्यभिचारी होकर पराए शरीर के पीछे लग गए थे, अनंत आग का दंड पाकर एक उदाहरण ठहरे हैं। फिर भी, ये स्वप्नदर्शी इसी प्रकार एक ओर तो शरीर को अशुद्ध करते हैं और दूसरी ओर प्रभुता का इनकार करते और महिमामय प्राणियों की निंदा करते हैं। परंतु जब प्रधान स्वर्गदूत मीकाईल मूसा के शव के विषय में शैतान से वाद-विवाद कर रहा था, तो उसने भी निंदाजनक शब्दों के साथ उस पर दोष लगाने का साहस न किया बल्कि कहा, “प्रभु तुझे डाँटे।” परंतु ये लोग जिन बातों को समझते नहीं उनकी निंदा करते हैं और बुद्धिहीन पशुओं के समान जिन बातों को वे स्वाभाविक रूप से जानते हैं उन्हीं के द्वारा नष्‍ट हो जाते हैं। हाय उन पर! क्योंकि वे कैन के मार्ग पर चले और मज़दूरी के लिए बिलाम के समान भटक गए और कोरह के समान विद्रोह में नाश हुए। ये जो तुम्हारे प्रीति-भोजों में तुम्हारे साथ निडर होकर खाते-पीते हैं; वे कलंक के समान हैं और अपना ही ध्यान रखते हैं। ये निर्जल बादल हैं जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है। ये पतझड़ के निष्फल पेड़ हैं जो दो बार सूखकर जड़ से उखाड़े गए हैं। ये समुद्र की तूफ़ानी लहरें हैं जो अपनी ही लज्‍जा का झाग उछालती हैं। ये भटके हुए तारे हैं जिनके लिए घोर अंधकार सदा काल तक रखा गया है। हनोक ने भी, जो आदम से सातवीं पीढ़ी का था, इन लोगों के विषय में यह भविष्यवाणी की, “देखो, प्रभु अपने असंख्य पवित्र जनों के साथ आया है, कि सब का न्याय करे और प्रत्येक प्राणी को उनके अभक्‍ति के सब कार्यों के लिए जो उन्होंने भक्‍तिहीन दशा में किए, और उन सब कठोर बातों के लिए जो भक्‍तिहीन पापियों ने उसके विरुद्ध कहीं, दोषी ठहराए।” ये कुड़कुड़ानेवाले हैं, जो दोष ढूँढ़ते और अपनी लालसाओं के अनुसार चलते हैं। वे अपने मुँह से घमंड भरी बातें बोलते और लाभ के लिए चापलूसी करते हैं। परंतु हे प्रियो, तुम उन बातों को स्मरण रखो जिन्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरित पहले ही से कह चुके हैं। वे तुमसे कहा करते थे, “अंतिम समयों में ऐसे ठट्ठा करनेवाले होंगे जो अपनी बुरी अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।” ये वे हैं जो फूट डालते हैं; ये शारीरिक हैं जिनमें आत्मा नहीं। परंतु हे प्रियो, अपने अति पवित्र विश्‍वास में तुम अपनी उन्‍नति करते और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए, अपने आपको परमेश्‍वर के प्रेम में बनाए रखो और अनंत जीवन के लिए हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की प्रतीक्षा करते रहो। जो संदेह करते हैं उन पर दया करो, दूसरों को आग में से झपटकर बचा लो और भय के साथ अन्य लोगों पर दया करो, पर उस वस्‍त्र तक से घृणा करो जो शरीर से कलंकित हो गया है। अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है और अपनी महिमामय उपस्थिति में आनंद के साथ निर्दोष खड़ा कर सकता है, उस एकमात्र परमेश्‍वर अर्थात् हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, गौरव, पराक्रम और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन। यीशु मसीह का प्रकाशन, जो परमेश्‍वर ने उसे इसलिए दिया कि वह अपने दासों को वे बातें दिखाए जिनका शीघ्र पूरा होना अवश्य है; और उसने अपने स्वर्गदूत को भेजकर इन्हें अपने दास यूहन्‍ना को बताया, जिसने परमेश्‍वर के वचन की और यीशु मसीह की साक्षी दी अर्थात् जो कुछ उसने देखा था, उसकी साक्षी दी। धन्य है वह जो इस भविष्यवाणी के वचनों को पढ़ता है, और वे भी जो इसे सुनते और इसमें लिखी हुई बातों का पालन करते हैं, क्योंकि समय निकट है। यूहन्‍ना द्वारा आसिया की सातों कलीसियाओं के नाम: तुम्हें उसकी ओर से अनुग्रह और शांति मिले, जो है, जो था और जो आने वाला है; तथा सातों आत्माओं की ओर से जो उसके सिंहासन के सामने हैं; और यीशु मसीह की ओर से जो विश्‍वासयोग्य साक्षी, मृतकों में से जी उठनेवालों में पहलौठा और पृथ्वी के राजाओं का शासक है। वह हमसे प्रेम रखता है, और उसने अपने लहू के द्वारा हमें हमारे पापों से छुड़ाया है, और उसने हमें एक राज्य तथा अपने पिता परमेश्‍वर की सेवा में याजक बना दिया; उसकी महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। आमीन। देखो, वह बादलों के साथ आ रहा है, और प्रत्येक आँख उसे देखेगी, वे भी जिन्होंने उसे बेधा था; और पृथ्वी के समस्त कुल उसके लिए छाती पीटेंगे। यह निश्‍चित है। आमीन। प्रभु परमेश्‍वर, जो है, जो था, जो आने वाला है, और जो सर्वशक्‍तिमान है, यह कहता है, “मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा हूँ।” मैं यूहन्‍ना तुम्हारा भाई और उस क्लेश, राज्य तथा धीरज में तुम्हारा सहभागी हूँ जो यीशु में है। मैं परमेश्‍वर के वचन और यीशु की गवाही देने के कारण पतमुस नामक द्वीप पर था। प्रभु के दिन मैं आत्मा में आ गया, और मैंने अपने पीछे तुरही के समान एक ऊँची आवाज़ को यह कहते हुए सुना, “ जो कुछ तू देखता है उसे एक पुस्तक में लिख और उसे सातों कलीसियाओं अर्थात् इफिसुस, स्मुरना, पिरगमुन, थुआतीरा, सरदीस, फिलादेलफिया और लौदीकिया को भेज।” तब मैं उसे देखने के लिए मुड़ा जो मुझसे बात कर रहा था, और मुड़ने पर मैंने सोने की सात दीवटों को देखा, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र के समान एक पुरुष को देखा, जो पैरों तक का वस्‍त्र पहने और छाती पर सोने का पट्टा बाँधे हुए था। उसके सिर के बाल ऊन के समान श्‍वेत और हिम के समान उज्‍ज्‍‍वल थे, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं, और उसके पैर चमकते हुए पीतल के समान थे मानो भट्ठी में तपाकर चमकाए गए हों, और उसकी आवाज़ बहुत सी जल-धाराओं की आवाज़ के समान थी। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए था और उसके मुँह से तेज़ दोधारी तलवार निकल रही थी तथा उसका चेहरा पूरे तेज के साथ चमकते हुए सूर्य के समान था। जब मैंने उसे देखा तो मैं उसके पैरों पर मृतक के समान गिर पड़ा। तब उसने अपना दाहिना हाथ मेरे ऊपर रखा और कहा: “मत डर! मैं ही प्रथम, अंतिम और जीवित हूँ। मैं मर गया था और देख, मैं युगानुयुग जीवित हूँ। मृत्यु तथा अधोलोक की कुंजियाँ मेरे पास हैं। इसलिए जो बातें तूने देखी हैं और जो बातें हो रही हैं और जो बातें इनके बाद होने वाली हैं, उन्हें लिख ले। उन सात तारों का जिन्हें तूने मेरे दाहिने हाथ में देखा था, और उन सोने की सात दीवटों का भेद यह है: वे सात तारे सात कलीसियाओं के दूत हैं और वे सात दीवटें सात कलीसियाएँ हैं। “इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जो अपने दाहिने हाथ में सात तारों को थामे हुए है और सोने की सात दीवटों के मध्य में चलता-फिरता है, वह यह कहता है: मैं तेरे कार्य, और तेरे परिश्रम, और तेरे धीरज को जानता हूँ और यह भी कि तू बुरे लोगों को सह नहीं सकता। जो अपने आपको प्रेरित कहते हैं परंतु हैं नहीं, तूने उन्हें परखा और झूठा पाया है। तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के कारण तूने दुःख उठाया और थका नहीं है। परंतु मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तूने अपना पहला सा प्रेम छोड़ दिया है। इसलिए स्मरण कर कि तू कहाँ से गिरा है, और पश्‍चात्ताप कर और पहले के समान कार्य कर। यदि तू पश्‍चात्ताप नहीं करेगा तो मैं तेरे पास आकर तेरी दीवट को उसके स्थान से हटा दूँगा। परंतु तुझमें यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कार्यों से घृणा करता है, जिनसे मैं भी घृणा करता हूँ। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए उसे मैं जीवन के वृक्ष में से, जो परमेश्‍वर के स्वर्गलोक में है, खाने को दूँगा। “स्मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जो प्रथम और अंतिम है, और जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है: मैं तेरे क्लेश और तेरी निर्धनता को जानता हूँ (परंतु तू धनी है), और मैं उनकी निंदा को भी जानता हूँ जो अपने आपको यहूदी कहते हैं परंतु हैं नहीं, बल्कि शैतान की मंडली हैं। जिन दुःखों को तू भोगने वाला है उनसे मत डर। देख, शैतान तुममें से कुछ को बंदीगृह में डालने पर है कि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्लेश उठाना होगा। मृत्यु तक विश्‍वासयोग्य बना रह, तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए उसे दूसरी मृत्यु से कुछ भी हानि नहीं होगी। “पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जिसके पास तेज़ दोधारी तलवार है, वह यह कहता है: मैं जानता हूँ कि तू कहाँ रहता है—जहाँ शैतान का सिंहासन है। तू मेरे नाम को थामे रहता है और तूने उन दिनों में भी मुझ पर अपने विश्‍वास का इनकार नहीं किया जब मेरा विश्‍वासयोग्य साक्षी अंतिपास तुम्हारे बीच उस स्थान पर मार डाला गया, जहाँ शैतान का वास है। परंतु मुझे तेरे विरुद्ध कुछ कहना है: क्योंकि तेरे यहाँ कुछ ऐसे लोग हैं जो बिलाम की शिक्षा पर चलते हैं। उसने तो बालाक को सिखाया था कि वह इस्राएलियों को ठोकर खिलाए कि वे मूर्तियों को चढ़ाया गया भोजन खाएँ और व्यभिचार करें। इसी प्रकार तेरे यहाँ कुछ ऐसे भी हैं जो नीकुलइयों की शिक्षा पर चलते हैं । अतः पश्‍चात्ताप कर, नहीं तो मैं शीघ्र तेरे पास आकर अपने मुँह की तलवार से उनके साथ युद्ध करूँगा। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए उसे मैं गुप्‍त मन्‍ना में से दूँगा, और उसे एक श्‍वेत पत्थर भी दूँगा जिस पर एक नया नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके प्राप्‍त करनेवाले को छोड़ और कोई न जान पाएगा। “थुआतीरा की कलीसिया के दूत को यह लिख: “परमेश्‍वर का पुत्र जिसकी आँखें आग की ज्वाला के समान और जिसके पैर चमकते हुए पीतल के समान हैं, वह यह कहता है: मैं तेरे कार्य, प्रेम, विश्‍वास, सेवा और धीरज को जानता हूँ, और यह भी कि तेरे वर्तमान कार्य पिछले कार्यों से बढ़कर हैं। परंतु मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू इज़ेबेल नामक उस स्‍त्री को सह लेता है जो अपने आपको भविष्यवक्‍तिन कहती है और मेरे दासों को व्यभिचार करने और मूर्तियों को चढ़ाया गया भोजन खाने की शिक्षा देकर भरमाती है। मैंने उसे पश्‍चात्ताप करने का समय दिया, परंतु वह अपने व्यभिचार से पश्‍चात्ताप करना नहीं चाहती। देख, मैं उसे रोग-शय्या पर डाल रहा हूँ, और जो उसके साथ व्यभिचार करते हैं यदि वे उसके समान कार्यों से पश्‍चात्ताप नहीं करेंगे तो उन्हें मैं बड़े क्लेश में डालूँगा; और मैं उसके बच्‍चों को महामारी से मार डालूँगा। तब सब कलीसियाएँ जान जाएँगी कि मनों और हृदयों का परखनेवाला मैं ही हूँ, और मैं तुममें से प्रत्येक को तुम्हारे कार्यों के अनुसार प्रतिफल दूँगा। परंतु थुआतीरा के बाकी लोगों से, जो इस शिक्षा को नहीं मानते और उन बातों को जिन्हें वे ‘शैतान की गूढ़ बातें’ कहते हैं नहीं जानते, मैं यह कहता हूँ: मैं तुम पर और कोई बोझ नहीं डालूँगा। फिर भी, जो कुछ तुम्हारे पास है उसे मेरे आने तक दृढ़ता से थामे रहो। वह जो जय पाए, और मेरे कार्यों को अंत तक करता रहे, उसे मैं जाति-जाति पर अधिकार दूँगा, वह उन पर लोहे के राजदंड से शासन करेगा, और वे मिट्टी के बरतन के समान चकनाचूर हो जाएँगे। मुझे ऐसा ही अधिकार अपने पिता से मिला है; और मैं उसे भोर का तारा दूँगा। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। “सरदीस की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जिसके पास परमेश्‍वर की सात आत्माएँ और सात तारे हैं वह यह कहता है: मैं तेरे कार्यों को जानता हूँ कि तू जीवित तो कहलाता है, परंतु है मरा हुआ। जागता रह और उन बाकी वस्तुओं को जो मिटने पर हैं, दृढ़ कर; क्योंकि मैंने तेरे कार्यों को अपने परमेश्‍वर के सामने पूरा नहीं पाया है। इसलिए स्मरण कर कि तूने कैसी शिक्षा प्राप्‍त की और सुनी है; उसका पालन कर और पश्‍चात्ताप कर। यदि तू जागता न रहा, तो मैं चोर के समान आऊँगा, और तुझे पता भी नहीं चलेगा कि मैं किस घड़ी तेरे पास आ पहुँचूँगा। परंतु सरदीस में तेरे यहाँ कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने वस्‍त्रों को अशुद्ध नहीं किया। वे श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए मेरे साथ चलेंगे, क्योंकि वे इस योग्य हैं। “जो जय पाए उसे इसी प्रकार श्‍वेत वस्‍त्र पहनाए जाएँगे, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से कभी नहीं मिटाऊँगा, बल्कि अपने पिता और उसके स्वर्गदूतों के सामने उसका नाम स्वीकार कर लूँगा। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। “फिलादेलफिया की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जो पवित्र और सच्‍चा है, जिसके पास दाऊद की कुंजी है, जिसके खोले हुए को कोई बंद नहीं कर सकता और बंद किए हुए को कोई खोल नहीं सकता, वह यह कहता है: मैं तेरे कार्यों को जानता हूँ; देख, मैंने तेरे लिए एक द्वार खोल रखा है, जिसे कोई बंद नहीं कर सकता। यद्यपि तेरे पास थोड़ी ही शक्‍ति है, फिर भी तूने मेरे वचन का पालन किया और मेरे नाम का इनकार नहीं किया। देख, मैं शैतान की मंडली के उन लोगों को तेरे वश में कर दूँगा जो अपने आपको यहूदी कहते हैं परंतु हैं नहीं, वे झूठ बोलते हैं। देख, मैं उन्हें ऐसा कर दूँगा कि वे आकर तेरे पैरों पर गिरेंगे और यह जान जाएँगे कि मैं तुझसे प्रेम रखता हूँ। क्योंकि तूने मेरे धीरज के वचन का पालन किया है, इसलिए मैं भी तुझे परीक्षा की उस घड़ी से बचाऊँगा जो पृथ्वी पर रहनेवालों को परखने के लिए समस्त संसार पर आने वाली है। मैं शीघ्र आ रहा हूँ; जो कुछ तेरे पास है उसे दृढ़ता से थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले। “जो जय पाए मैं उसे अपने परमेश्‍वर के मंदिर का स्तंभ बनाऊँगा। वह फिर कभी वहाँ से बाहर न निकलेगा, और मैं उस पर अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् उस नए यरूशलेम का नाम जो मेरे परमेश्‍वर के स्वर्ग से उतरेगा, और अपना नया नाम लिखूँगा। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। “लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख: “जो आमीन, विश्‍वासयोग्य और सच्‍चा साक्षी है तथा परमेश्‍वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है: मैं तेरे कार्यों को जानता हूँ कि तू न तो ठंडा है और न ही गर्म। भला होता कि तू ठंडा होता या गर्म। इसलिए कि तू गुनगुना है और न तो गर्म है और न ठंडा, मैं तुझे अपने मुँह से उगलने पर हूँ। तू कहता है कि मैं धनवान हूँ और धनी हो गया हूँ, और मुझे किसी भी वस्तु की घटी नहीं है; परंतु तू यह नहीं जानता कि तू अभागा, दयनीय, कंगाल, अंधा और नग्‍न है। मैं तुझे सलाह देता हूँ कि तू आग में ताया हुआ सोना मुझसे खरीद ले कि तू धनी हो जाए, और श्‍वेत वस्‍त्र ले ले कि उन्हें पहनकर तेरे नंगेपन की लज्‍जा प्रकट न हो, और सुरमा ले ले कि अपनी आँखों में लगाकर देख सके। जिनसे मैं प्रीति रखता हूँ, उन्हें मैं झिड़कता और ताड़ना देता हूँ। इसलिए सरगर्म हो जा और पश्‍चात्ताप कर। देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ। यदि कोई मेरी आवाज़ सुनकर द्वार खोलता है, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ। “जो जय पाए उसे मैं अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊँगा, जैसे मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठा हूँ। “जिसके पास कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।” इन बातों के बाद मैंने दृष्‍टि की, और देखो, स्वर्ग में एक द्वार खुला हुआ था, और जिस आवाज़ को मैंने पहले तुरही के स्वर के समान अपने साथ बातें करते हुए सुना था, उसने कहा, “यहाँ ऊपर आ, और मैं तुझे उन बातों को दिखाऊँगा, जिनका इन बातों के बाद होना अवश्य है।” मैं तुरंत आत्मा में आ गया, और देखो, स्वर्ग में एक सिंहासन लगा हुआ था और उस सिंहासन पर कोई बैठा हुआ था; और जो बैठा था वह सूर्यकांत मणि और माणिक्य सा दिखाई देता था, और उस सिंहासन के चारों ओर पन्‍ना के सदृश्य मेघ-धनुष दिखाई दे रहा था। उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन थे, और उन सिंहासनों पर चौबीस प्रवर श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए बैठे थे, और उनके सिरों पर सोने के मुकुट थे। उस सिंहासन में से बिजलियाँ, गर्जन और बादल की गड़गड़ाहट निकल रही थीं, और सिंहासन के सामने आग के सात दीपक जल रहे थे, जो परमेश्‍वर की सात आत्माएँ हैं। सिंहासन के सामने बिल्‍लौर के समान काँच जैसा समुद्र था, और सिंहासन के मध्य और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी थे जिनके आगे और पीछे आँखें ही आँखें थीं। पहला प्राणी सिंह के समान, दूसरा प्राणी बछड़े के समान, तीसरे प्राणी का मुख मनुष्य के समान, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान था। चारों प्राणियों के छः-छः पंख थे, और उनके चारों ओर तथा भीतर आँखें ही आँखें थीं; और वे दिन और रात बिना विश्राम किए यह कहते रहते हैं: पवित्र, पवित्र, पवित्र, सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर, जो था, जो है और जो आने वाला है। जब-जब वे प्राणी उसे जो सिंहासन पर विराजमान और युगानुयुग जीवित है, महिमा, आदर और धन्यवाद देते, तब-तब चौबीसों प्रवर उसके सामने जो सिंहासन पर विराजमान है, गिर पड़ते और जो युगानुयुग जीवित है उसे दंडवत् करते, और अपने मुकुट सिंहासन के सामने यह कहते हुए रख देते हैं: हे हमारे प्रभु और परमेश्‍वर! तू ही महिमा, आदर और सामर्थ्य के योग्य है, क्योंकि तूने ही सब वस्तुओं को सृजा है, और तेरी ही इच्छा से वे सृजी गईं और अस्तित्व में हैं। तब जो सिंहासन पर विराजमान था, मैंने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी जिसके भीतर और बाहर लिखा हुआ था, और वह सात मुहरें लगाकर बंद की गई थी। फिर मैंने एक शक्‍तिशाली स्वर्गदूत को ऊँची आवाज़ में यह पुकारते हुए देखा: “इस पुस्तक को खोलने और इसकी मुहरों को तोड़ने के योग्य कौन है?” परंतु न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, और न ही पृथ्वी के नीचे, कोई उस पुस्तक को खोलने या उसे देखने के योग्य मिला। तब मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक को खोलने या उसे देखने के योग्य कोई न मिला। तब उन प्रवरों में से एक ने मुझसे कहा, “रो मत! देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, विजयी हुआ है। वही इस पुस्तक को और इसकी सात मुहरों को खोलने के योग्य है।” तब मैंने सिंहासन और उन चार प्राणियों तथा प्रवरों के मध्य, मानो एक वध किया हुआ मेमना खड़ा देखा। उसके सात सींग और सात आँखें थीं, ये परमेश्‍वर की सात आत्माएँ हैं, जो संपूर्ण पृथ्वी पर भेजी गई थीं। तब मेमने ने आकर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर विराजमान था, वह पुस्तक ले ली। जब उसने पुस्तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्रवर उस मेमने के सामने गिर पड़े। उनमें से प्रत्येक के पास वीणा, और धूप अर्थात् पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं से भरे सोने के कटोरे थे। तब वे यह नया गीत गाने लगे: तू ही इस पुस्तक को लेने और इसकी मुहरों को खोलने के योग्य है, क्योंकि तूने वध होकर अपने लहू से परमेश्‍वर के लिए प्रत्येक कुल, भाषा, राष्‍‍ट्र और जाति में से लोगों को खरीद लिया, और उन्हें हमारे परमेश्‍वर के लिए एक राज्य तथा याजक बना दिया; और वे पृथ्वी पर राज्य करेंगे। फिर मैंने देखा, और मैंने सिंहासन, प्राणियों और उन प्रवरों के चारों ओर बहुत से स्वर्गदूतों की आवाज़ सुनी—उनकी संख्या लाखों-करोड़ों में थी। वे ऊँची आवाज़ से कह रहे थे: वध किया हुआ मेमना ही सामर्थ्य, धन, बुद्धि, शक्‍ति, आदर, महिमा और प्रशंसा के योग्य है। फिर मैंने स्वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र में, प्रत्येक प्राणी को अर्थात् उनमें के सब प्राणियों को यह कहते हुए सुना: जो सिंहासन पर विराजमान है उसकी और मेमने की प्रशंसा, आदर, महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे। तब चारों प्राणियों ने कहा, “आमीन।” और प्रवरों ने गिरकर उसे दंडवत् किया। तब मैंने देखा कि मेमने ने सात मुहरों में से एक को खोला; और मैंने उन चार प्राणियों में से एक को गर्जन जैसी आवाज़ में यह कहते हुए सुना, “आ ।” मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक श्‍वेत घोड़ा था, और जो उस पर सवार था वह धनुष लिए हुए था; और उसे एक मुकुट दिया गया और वह जय प्राप्‍त करता हुआ निकला ताकि जयवंत हो। जब उसने दूसरी मुहर खोली, तो मैंने दूसरे प्राणी को यह कहते हुए सुना, “आ ।” तब लाल रंग का एक और घोड़ा निकला, और जो उस पर सवार था उसे यह अधिकार दिया गया कि पृथ्वी पर से मेल उठा ले, ताकि लोग एक दूसरे की हत्या करें; और उसे एक बड़ी तलवार दी गई। जब उसने तीसरी मुहर खोली, तो मैंने तीसरे प्राणी को यह कहते हुए सुना, “आ ।” तब मैंने दृष्‍टि की, और देखो एक काला घोड़ा था, तथा जो उस पर सवार था उसके हाथ में एक तराजू था। फिर मैंने चारों प्राणियों के बीच में से मानो एक आवाज़ को यह कहते हुए सुना, “एक दीनार का एक किलो गेहूँ और एक दीनार का तीन किलो जौ, परंतु तेल और दाखरस की हानि न करना।” जब उसने चौथी मुहर खोली, तो मैंने चौथे प्राणी को यह कहते हुए सुना, “आ ।” मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक पीला घोड़ा था, और जो उस पर सवार था उसका नाम मृत्यु था, तथा अधोलोक उसके पीछे-पीछे चल रहा था। उन्हें पृथ्वी के एक-चौथाई भाग पर यह अधिकार दिया गया कि लोगों को तलवार, अकाल, महामारी और पृथ्वी के वन-पशुओं के द्वारा मार डालें। जब उसने पाँचवीं मुहर खोली, तो मैंने वेदी के नीचे उन लोगों के प्राणों को देखा जो परमेश्‍वर के वचन के कारण और उस गवाही के कारण जो उन्होंने दी थी, वध किए गए थे। उन्होंने ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, “हे स्वामी, तू जो पवित्र और सच्‍चा है, तू कब तक न्याय न करेगा और पृथ्वी पर रहनेवालों से हमारे लहू का बदला न लेगा?” उनमें से प्रत्येक को श्‍वेत वस्‍त्र दिया गया, और उनसे थोड़ी देर और विश्राम करने के लिए कहा गया, जब तक कि उनके संगी दासों और भाइयों की, जो उन्हीं के समान वध होने वाले हैं, गिनती पूरी न हो जाए। फिर उसने छठी मुहर खोली, तब मैंने देखा कि एक बड़ा भूकंप हुआ और सूर्य ऐसा काला हो गया मानो बालों से बना टाट हो, और पूरा चंद्रमा लहू के समान लाल हो गया; और आकाश के तारे पृथ्वी पर ऐसे गिरने लगे, जैसे भयंकर आँधी से हिलकर अंजीर के पेड़ के कच्‍चे फल गिरते हैं, और आकाश फटकर ऐसे लिपट गया, जैसे चर्म-पत्र लिपट जाता है, और प्रत्येक पहाड़ और द्वीप अपने-अपने स्थान से हट गए। तब पृथ्वी के राजा, प्रधान, सेनापति, धनवान, शक्‍तिशाली मनुष्य, हर एक दास और स्वतंत्र, पहाड़ों की गुफाओं और चट्टानों में जा छिपे। वे पहाड़ों और चट्टानों से कहने लगे, “हम पर गिर पड़ो, और हमें उसकी दृष्‍टि से जो सिंहासन पर विराजमान है, और मेमने के प्रकोप से छिपा लो। क्योंकि उनके प्रकोप का भयानक दिन आ पहुँचा है, अब कौन खड़ा रह सकता है?” इसके बाद मैंने चार स्वर्गदूतों को पृथ्वी के चारों कोनों पर खड़े देखा, जो पृथ्वी की चारों ओर की हवाओं को थामे हुए थे ताकि पृथ्वी, समुद्र या किसी पेड़ पर हवा न चले। तब मैंने जीवित परमेश्‍वर की मुहर लिए हुए एक और स्वर्गदूत को पूर्व दिशा से ऊपर उठते हुए देखा। उसने उन चारों स्वर्गदूतों से, जिन्हें पृथ्वी और समुद्र को हानि पहुँचाने का अधिकार दिया गया था, ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा, “जब तक हम अपने परमेश्‍वर के दासों के माथों पर मुहर न लगा दें तब तक न पृथ्वी को, न समुद्र को और न ही पेड़ों को हानि पहुँचाना।” तब मैंने उनकी संख्या सुनी जिन पर मुहर लगाई गई थी: इस्राएल की संतान के सब गोत्रों में से एक लाख चौवालीस हज़ार पर मुहर लगाई गई थी। यहूदा के गोत्र में से बारह हज़ार पर मुहर लगाई गई, रूबेन के गोत्र में से बारह हज़ार पर, गाद के गोत्र में से बारह हज़ार पर, आशेर के गोत्र में से बारह हज़ार पर, नप्‍ताली के गोत्र में से बारह हज़ार पर, मनश्शे के गोत्र में से बारह हज़ार पर, शमौन के गोत्र में से बारह हज़ार पर, लेवी के गोत्र में से बारह हज़ार पर, इस्साकार के गोत्र में से बारह हज़ार पर, जबूलून के गोत्र में से बारह हज़ार पर, यूसुफ के गोत्र में से बारह हज़ार पर, और बिन्यामीन के गोत्र में से बारह हज़ार पर मुहर लगाई गई थी। इन बातों के बाद मैंने दृष्‍टि की, और देखो, प्रत्येक जाति, कुल, राष्‍‍ट्र और भाषा बोलनेवालों की एक बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था, श्‍वेत वस्‍त्र पहने और अपने हाथों में खजूर की डालियाँ लिए हुए सिंहासन और मेमने के सामने खड़ी थी। उन्होंने ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहा: सिंहासन पर विराजमान हमारे परमेश्‍वर और मेमने से ही उद्धार है। तब सारे स्वर्गदूत जो उस सिंहासन, प्रवरों और चारों प्राणियों के चारों ओर खड़े थे, सिंहासन के सामने मुँह के बल गिर पड़े, और परमेश्‍वर को दंडवत् करके कहने लगे: आमीन। हमारे परमेश्‍वर की स्तुति, महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य और शक्‍ति युगानुयुग बनी रहे। आमीन। तब उन प्रवरों में से एक ने मुझसे पूछा, “श्‍वेत वस्‍त्र पहने हुए ये लोग कौन हैं? और कहाँ से आए हैं?” मैंने उससे कहा, “हे मेरे स्वामी, तू ही जानता है।” उसने मुझसे कहा, “ये वे हैं जो उस बड़े क्लेश में से निकलकर आए हैं। इन्होंने अपने वस्‍त्रों को मेमने के लहू में धोकर श्‍वेत किया है। इसी कारण वे परमेश्‍वर के सिंहासन के सामने हैं, और उसके मंदिर में दिन और रात उसकी सेवा करते हैं, और वह जो सिंहासन पर विराजमान है, उन्हें अपनी शरण में ले लेगा। फिर वे कभी भूखे और प्यासे न होंगे, और न ही उन पर धूप और तपन पड़ेगी। क्योंकि मेमना, जो सिंहासन के मध्य है, उनकी रखवाली करेगा और उन्हें जीवन के जल के सोतों के पास ले जाएगा, और परमेश्‍वर उनकी आँखों से सब आँसुओं को पोंछ डालेगा।” जब उसने सातवीं मुहर खोली, तो स्वर्ग में लगभग आधे घंटे तक सन्‍नाटा छाया रहा। तब मैंने उन सातों स्वर्गदूतों को देखा जो परमेश्‍वर के सामने खड़े रहते हैं; और उन्हें सात तुरहियाँ दी गईं। फिर एक और स्वर्गदूत सोने का धूपदान लिए हुए आया और वेदी के पास खड़ा हो गया, और उसे बहुत सा धूप दिया गया कि वह उसे सब पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ सोने की उस वेदी पर जो सिंहासन के सामने है, चढ़ाए। उस धूप का धुआँ पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ स्वर्गदूत के हाथ से परमेश्‍वर के सामने ऊपर पहुँचा। तब स्वर्गदूत ने धूपदान लेकर उसमें वेदी की आग भरी और उसे पृथ्वी पर फेंक दी; इस पर गर्जन, गड़गड़ाहट, बिजलियों की चमक और भूकंप हुआ। फिर वे सातों स्वर्गदूत जिनके पास सात तुरहियाँ थीं, उन्हें फूँकने के लिए तैयार हुए। पहले स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो लहू मिले हुए ओले और आग उत्पन्‍न‍ हुए, जिन्हें पृथ्वी पर फेंक दिया गया; और पृथ्वी का एक-तिहाई भाग और एक-तिहाई पेड़ भस्म हो गए, तथा सारी हरी घास भी जलकर भस्म हो गई। दूसरे स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो मानो आग से जलते हुए विशाल पहाड़ जैसी एक वस्तु को समुद्र में फेंक दिया गया; और समुद्र का एक-तिहाई भाग लहू हो गया। और समुद्र के एक-तिहाई प्राणी मर गए, तथा एक-तिहाई जहाज़ नष्‍ट हो गए। तीसरे स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो एक विशाल तारा मशाल के सदृश्य जलता हुआ आकाश में से टूटा, और एक-तिहाई नदियों और जल के सोतों पर जा गिरा। उस तारे का नाम नागदौना है, और जल का एक-तिहाई भाग नागदौना जैसा कड़वा हो गया तथा उस जल के कड़वे हो जाने के कारण बहुत से लोग मर गए। चौथे स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी तो सूर्य के एक-तिहाई भाग, चंद्रमा के एक-तिहाई भाग और तारों के एक-तिहाई भाग पर प्रहार हुआ, जिससे उनका एक-तिहाई भाग अंधकारमय हो गया और दिन के एक-तिहाई भाग में प्रकाश न रहा और यही दशा रात की भी हुई। फिर मैंने दृष्‍टि की, और एक उकाब को आकाश में उड़ते और ऊँची आवाज़ में यह कहते हुए सुना, “उन तीन स्वर्गदूतों की तुरही की आवाज़ के कारण, जिनका फूँका जाना अभी बाकी है, पृथ्वी के रहनेवालों पर हाय! हाय! हाय!” पाँचवें स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो मैंने आकाश से पृथ्वी पर एक तारे को गिरते हुए देखा, और उसे अथाह कुंड की कुंजी दी गई। जब उसने अथाह कुंड को खोला तो उस कुंड में से बड़ी भट्ठी का सा धुआँ निकला, और उस धुएँ से सूर्य और वायु अंधकारमय हो गए। तब उस धुएँ में से पृथ्वी पर टिड्डियाँ निकलीं, और उन्हें पृथ्वी के बिच्छुओं जैसी शक्‍ति दी गई। उनसे यह कहा गया कि वे न पृथ्वी की घास को, न हरियाली को और न ही किसी पेड़ को हानि पहुँचाएँ, परंतु केवल उन मनुष्यों को हानि पहुँचाएँ जिनके माथों पर परमेश्‍वर की मुहर न लगी हो। उन्हें लोगों को मार डालने की नहीं बल्कि पाँच महीने तक पीड़ा देने की अनुमति दी गई थी; और वह पीड़ा ऐसी थी जैसी बिच्छू के डंक मारने से मनुष्य को होती है। उन दिनों में लोग मृत्यु को ढूँढ़ेंगे परंतु वह उन्हें नहीं मिलेगी; वे मरना चाहेंगे परंतु मृत्यु उनसे दूर भागेगी। उन टिड्डियों का स्वरूप युद्ध के लिए तैयार किए गए घोड़ों के समान था, और उनके सिर पर मानो सोने के मुकुट थे, और उनके मुख मनुष्यों के मुख के समान थे। उनके बाल स्‍त्रियों के बालों के समान, और उनके दाँत सिंहों के दाँतों के समान थे। उनके कवच लोहे के कवच के समान थे, और उनके पंखों की आवाज़ ऐसी थी जैसे युद्ध में रथों और बहुत से घोड़ों के दौड़ने की हो। उनकी पूँछें बिच्छुओं की सी थीं और उनमें डंक थे, और उनकी पूँछों में मनुष्यों को पाँच महीने तक हानि पहुँचाने की शक्‍ति थी। अथाह कुंड का दूत उनके ऊपर राजा था, जिसका नाम इब्रानी भाषा में अबद्दोन और यूनानी भाषा में अपुल्लयोन है। पहली विपत्ति बीत गई। देखो, इसके बाद दो और विपत्तियाँ आने वाली हैं। छठे स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो मैंने परमेश्‍वर के सामने रखी सोने की वेदी के चार सींगों में से एक आवाज़ सुनी, जो छठे स्वर्गदूत से, जिसके पास तुरही थी, कह रही थी, “उन चारों स्वर्गदूतों को खोल दे, जो फरात महानदी के पास बँधे हुए हैं।” अतः उन चारों स्वर्गदूतों को खोल दिया गया जिन्हें उस घड़ी, दिन, महीने और वर्ष के लिए तैयार किया गया था, ताकि वे एक-तिहाई मनुष्यों को मार डालें। सेना के घुड़सवारों की संख्या बीस करोड़ थी; मैंने उनकी यह संख्या सुनी थी। इस दर्शन में मुझे घोड़े और उनके सवार इस प्रकार दिखाई दिए: उन सवारों के कवच आग के समान लाल, धूम्रकांत के समान नीले और गंधक के समान पीले थे, और घोड़ों के सिर सिंहों के सिरों के समान थे और उनके मुँह से आग, धुआँ और गंधक निकल रहा था। इन तीन महामारियों, अर्थात् उनके मुँह से निकलनेवाली आग, धुएँ और गंधक के द्वारा एक-तिहाई मनुष्य मार डाले गए। उन घोड़ों का बल उनके मुँह और उनकी पूँछों में था। उनकी पूँछें साँपों के समान थीं, और उनमें सिर भी थे। इन्हीं से वे हानि पहुँचाते थे। बाकी बचे हुए लोगों ने, जो इन महामारियों से नहीं मरे थे, अपने हाथों के कार्यों से पश्‍चात्ताप नहीं किया कि वे दुष्‍टात्माओं की, और सोने, चाँदी, पीतल, पत्थर और लकड़ी की उन मूर्तियों की पूजा न करें, जो न देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न ही चल-फिर सकती हैं। उन्होंने न अपने हत्या के कार्यों से, न जादू-टोनों से, न व्यभिचार से और न ही चोरी से पश्‍चात्ताप किया। फिर मैंने एक और शक्‍तिशाली स्वर्गदूत को स्वर्ग से नीचे उतरते हुए देखा। वह बादल से ढका हुआ था, और उसके सिर पर मेघ-धनुष था। उसका मुख सूर्य के समान था, और उसके पैर अग्‍नि-स्तंभ के समान थे। उसके हाथ में एक छोटी सी खुली हुई पुस्तक थी। उसने अपना दाहिना पैर समुद्र पर, और बायाँ भूमि पर रखा; और वह ऊँची आवाज़ से चिल्‍लाया, जैसे सिंह दहाड़ता है। जब वह चिल्‍लाया, तो सात मेघ-गर्जन बोल उठे। जब सातों मेघ-गर्जन बोल चुके, तो मैं लिखने पर ही था, परंतु मैंने स्वर्ग से एक आवाज़ को यह कहते हुए सुना, “जो बातें इन सातों मेघ-गर्जनों ने कही हैं उन पर मुहर लगा दे, और उन्हें न लिख।” तब जिस स्वर्गदूत को मैंने समुद्र और भूमि पर खड़े देखा था, उसने अपना दाहिना हाथ स्वर्ग की ओर उठाया, और जो युगानुयुग जीवित है, जिसने आकाश और उसकी सब वस्तुएँ, पृथ्वी और उसकी सब वस्तुएँ तथा समुद्र और उसकी सब वस्तुएँ सृजी हैं, उसकी शपथ खाकर कहा कि अब और देर नहीं होगी। परंतु सातवें स्वर्गदूत के आवाज़ देने के दिनों में, जब वह तुरही फूँकने ही वाला होगा, तब परमेश्‍वर का वह रहस्य पूरा हो जाएगा, जिसका समाचार उसने अपने दास भविष्यवक्‍ताओं को दिया था। तब वह आवाज़ जो मुझे स्वर्ग से आती हुई सुनाई दी थी, उसने मुझसे फिर बात की और कहा, “जा, उस स्वर्गदूत के हाथ से, जो समुद्र और भूमि पर खड़ा हुआ है, उस खुली हुई पुस्तक को ले ले।” अतः मैंने उस स्वर्गदूत के पास जाकर उससे कहा, “वह छोटी पुस्तक मुझे दे दे।” उसने मुझसे कहा, “ले और इसे खा जा, यह तेरे पेट को कड़वा तो कर देगी, पर तेरे मुँह में शहद जैसी मीठी लगेगी।” तब मैंने वह छोटी पुस्तक स्वर्गदूत के हाथ से ली और उसे खा गया। वह मेरे मुँह में शहद जैसी मीठी लगी पर जब मैं उसे खा गया तो मेरा पेट कड़वा हो गया। इसके बाद मुझसे कहा गया, “तुझे बहुत से राष्‍ट्रों, जातियों, भाषाओं और राजाओं के विषय में फिर से भविष्यवाणी करनी होगी।” फिर मुझे छड़ी के समान एक मापदंड दिया गया, और कहा गया, “उठ और परमेश्‍वर के मंदिर और वेदी को नाप, और जो उसमें उपासना कर रहे हैं उनको गिन। परंतु मंदिर के बाहरी आँगन को छोड़ दे; उसे मत नाप, क्योंकि वह गैरयहूदियों को दिया गया है। वे इस पवित्र नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगे। मैं अपने दो गवाहों को अधिकार दूँगा और वे टाट ओढ़कर एक हज़ार दो सौ साठ दिन तक भविष्यवाणी करेंगे।” ये जैतून के वही दो वृक्ष और दो दीवट हैं जो पृथ्वी के प्रभु के सामने खड़े रहते हैं। यदि कोई उन्हें हानि पहुँचाना चाहता है तो उनके मुँह से आग निकलती है और उनके शत्रुओं को भस्म कर देती है। अतः यदि कोई उन्हें हानि पहुँचाना चाहे तो उसका इसी प्रकार से मारा जाना अवश्य है। उनके पास आकाश को बंद करने का अधिकार है, ताकि उनके भविष्यवाणी के दिनों में वर्षा न हो; और उनके पास पानी को लहू में परिवर्तित करने का तथा जब चाहें तब पृथ्वी पर कोई भी विपत्ति भेजने का अधिकार भी है। जब वे अपनी गवाही दे चुके होंगे, तब अथाह कुंड में से निकलनेवाला पशु उनसे युद्ध करेगा और उन पर विजयी होकर उन्हें मार डालेगा। उनके शव उस महानगर के चौक पर पड़े रहेंगे, जो आत्मिक रूप से सदोम और मिस्र कहलाता है, जहाँ उनका प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। साढ़े तीन दिन तक राष्‍ट्रों, कुलों, भाषाओं और जातियों के लोग उनके शवों को देखते रहेंगे, और वे उनके शवों को कब्र में रखने की अनुमति नहीं देंगे। पृथ्वी पर रहनेवाले उनके मरने से आनंदित और मगन होंगे, और एक दूसरे के पास उपहार भेजेंगे, क्योंकि इन दोनों भविष्यवक्‍ताओं ने पृथ्वी पर रहनेवालों को कष्‍ट पहुँचाया था। परंतु साढ़े तीन दिन के बाद परमेश्‍वर की ओर से उनमें जीवन के श्‍वास ने प्रवेश किया, और वे अपने पैरों पर खड़े हो गए; और जिन्होंने उन्हें देखा उन पर बड़ा भय छा गया। तब उन्हें स्वर्ग में से एक ऊँची आवाज़ यह कहते हुए सुनाई दी, “यहाँ ऊपर आओ,” और वे अपने शत्रुओं के देखते-देखते बादल पर सवार होकर स्वर्ग को चले गए। उसी समय एक बड़ा भूकंप हुआ, और नगर का दसवाँ भाग गिर पड़ा। उस भूकंप में सात हज़ार लोग मारे गए, और बाकी लोगों ने भयभीत होकर स्वर्ग के परमेश्‍वर की महिमा की। दूसरी विपत्ति बीत गई। देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र आने वाली है। सातवें स्वर्गदूत ने जब तुरही फूँकी, तो स्वर्ग में ऊँची आवाज़ें सुनाई दीं, जो कह रही थीं: जगत का राज्य हमारे प्रभु और उसके मसीह का हो गया है, और वह युगानुयुग राज्य करेगा। तब चौबीसों प्रवर जो परमेश्‍वर के सामने अपने सिंहासनों पर बैठे हुए थे, मुँह के बल गिर पड़े, और उन्होंने यह कहते हुए परमेश्‍वर को दंडवत् किया: हे सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर! जो है और जो था, हम तेरा धन्यवाद करते हैं, क्योंकि तूने अपने बड़े सामर्थ्य के द्वारा राज्य किया है। जाति-जाति के लोग क्रोधित हुए, पर तेरा प्रकोप भड़क उठा। वह समय आ पहुँचा है कि मरे हुओं का न्याय किया जाए तथा तेरे दासों, भविष्यवक्‍ताओं, और पवित्र लोगों को तथा तेरे नाम का भय माननेवाले छोटे और बड़ों को, प्रतिफल दिया जाए, और पृथ्वी को नष्‍ट करनेवालों का नाश किया जाए। तब परमेश्‍वर का मंदिर जो स्वर्ग में है, खोला गया। उसके मंदिर में उसकी वाचा का संदूक दिखाई दिया, और वहाँ बिजलियाँ चमकीं, गड़गड़ाहट और गर्जन हुए तथा भूकंप हुआ, और भारी ओलावृष्‍टि हुई। फिर स्वर्ग में एक बड़ा चिह्‍न दिखाई दिया: एक स्‍त्री सूर्य को ओढ़े हुए थी, और चंद्रमा उसके पैरों तले था और उसके सिर पर बारह तारों का मुकुट था। वह गर्भवती थी, और बच्‍चे को जन्म देने की प्रसव-पीड़ा में चिल्‍ला रही थी। तब स्वर्ग में एक और चिह्‍न दिखाई दिया: और देखो, लाल रंग का एक बड़ा अजगर था, जिसके सात सिर और दस सींग थे और उसके सिरों पर सात मुकुट थे। उसकी पूँछ ने आकाश के तारों का एक-तिहाई भाग नीचे खींचकर पृथ्वी पर फेंक दिया। फिर वह अजगर उस स्‍त्री के सामने खड़ा हो गया जो बच्‍चे को जन्म देने वाली थी, ताकि जब वह अपने बच्‍चे को जन्म दे तो वह उसे निगल जाए। तब उस स्‍त्री ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो लोहे के राजदंड से सब जातियों पर शासन करने वाला था। उसके बच्‍चे को परमेश्‍वर और उसके सिंहासन के पास पहुँचाया गया। वह स्‍त्री जंगल में भाग गई, जहाँ परमेश्‍वर के द्वारा उसके लिए एक स्थान तैयार किया गया था कि एक हज़ार दो सौ साठ दिन तक वहाँ उसका पालन-पोषण किया जाए। फिर स्वर्ग में युद्ध छिड़ गया। मीकाईल और उसके स्वर्गदूत उस अजगर से युद्ध करने के लिए निकले; और अजगर और उसके दूतों ने भी युद्ध किया, परंतु प्रबल नहीं हो सके, और फिर उन्हें स्वर्ग में कोई स्थान न मिला। और उस बड़े अजगर को अर्थात् उस पुराने साँप को, जो इब्लीस और शैतान कहलाता है और समस्त संसार को भरमाता है, पृथ्वी पर फेंक दिया गया, और उसके साथ उसके दूतों को भी फेंक दिया गया। तब मैंने स्वर्ग से एक ऊँची आवाज़ को यह कहते हुए सुना: हमारे परमेश्‍वर का उद्धार, सामर्थ्य और राज्य तथा उसके मसीह का अधिकार अब प्रकट हुआ है, क्योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगानेवाले को नीचे फेंक दिया गया है, अर्थात् उसे जो दिन और रात हमारे परमेश्‍वर के सामने उन पर दोष लगाता रहता था। उन्होंने मेमने के लहू के द्वारा और अपनी साक्षी के वचन के द्वारा उस पर जय प्राप्‍त की, और अपने प्राणों को प्रिय नहीं जाना, यहाँ तक कि मृत्यु भी सह ली। इसलिए हे स्वर्ग और उसमें रहनेवालो, आनंद मनाओ! परंतु पृथ्वी और समुद्र, तुम पर हाय! क्योंकि शैतान यह जानते हुए कि उसके पास थोड़ा ही समय है, अत्यंत क्रोधित होकर तुम्हारे पास उतर आया है। जब अजगर ने देखा कि उसे पृथ्वी पर फेंक दिया गया है, तो उसने उस स्‍त्री को सताया जिसने पुत्र को जन्म दिया था। परंतु उस स्‍त्री को विशाल उकाब के दो पंख दिए गए, ताकि वह उस अजगर के सामने से जंगल में अपने उस स्थान को उड़ जाए, जहाँ एक समय और समयों, और आधे समय तक उसका पालन-पोषण किया जा सके। फिर साँप ने उस स्‍त्री के पीछे अपने मुँह से नदी के सदृश्य पानी बहाया कि वह उसे उस नदी में बहा दे। परंतु पृथ्वी ने उस स्‍त्री की सहायता की, और अपना मुँह खोलकर उस नदी को पी लिया जो उस अजगर ने अपने मुँह से बहाई थी। तब अजगर उस स्‍त्री पर क्रोधित हुआ, और उसकी बाकी संतान से, जो परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानती है और यीशु की साक्षी पर स्थिर है, युद्ध करने को निकल पड़ा; और वह समुद्र की बालू पर जा खड़ा हुआ। फिर मैंने एक पशु को समुद्र में से निकलते हुए देखा। उसके दस सींग और सात सिर थे और उसके सींगों पर दस मुकुट थे तथा उसके सिरों पर परमेश्‍वर की निंदा के नाम लिखे हुए थे। जो पशु मैंने देखा वह चीते के समान था। उसके पैर भालू के समान तथा उसका मुँह सिंह के समान था। उस अजगर ने अपनी शक्‍ति, अपना सिंहासन और बड़ा अधिकार उसे दे दिया। उसके सिरों में से एक ऐसा था मानो उस पर प्राणघातक प्रहार किया गया हो। फिर उसका यह प्राणघातक घाव ठीक हो गया, और संपूर्ण पृथ्वी के लोग आश्‍चर्यचकित होकर उस पशु के पीछे चल पड़े। लोगों ने उस अजगर की पूजा की, क्योंकि उसने उस पशु को अधिकार दे दिया था; और उन्होंने यह कहते हुए पशु की भी पूजा की, “इस पशु के तुल्य कौन है? इसके साथ कौन युद्ध कर सकता है?” उसे बड़ी-बड़ी बातें बोलने और परमेश्‍वर की निंदा करने के लिए एक मुँह दिया गया, और उसे बयालीस महीनों तक ऐसा करने का अधिकार दिया गया। उसने परमेश्‍वर की निंदा करने के लिए अपना मुँह खोला कि उसके नाम और उसके निवासस्थान, अर्थात् स्वर्ग में रहनेवालों की निंदा करे। उसे पवित्र लोगों के साथ युद्ध करने और उन पर विजय पाने का अधिकार दिया गया, और प्रत्येक कुल, राष्‍‍ट्र, भाषा और जाति पर भी उसे अधिकार दिया गया। पृथ्वी के वे सब रहनेवाले—जिनके नाम जगत की उत्पत्ति से ही वध किए गए मेमने की जीवन की पुस्तक में नहीं लिखे गए हैं—उस पशु की पूजा करेंगे। यदि किसी के पास कान हों, तो वह सुन ले। यदि किसी को बंधुआई में जाना है, तो वह बंधुआई में ही जाएगा, यदि किसी को तलवार से मरना है तो वह तलवार से ही मारा जाएगा। पवित्र लोगों का धीरज और विश्‍वास इसी में है। फिर मैंने एक और पशु को पृथ्वी में से निकलते हुए देखा। उसके मेमने के समान दो सींग थे और वह अजगर के समान बोलता था। वह पहले पशु के सब अधिकारों को उसके सामने काम में लाता था, और पृथ्वी और उस पर रहनेवालों से उस पहले पशु की, जिसका प्राणघातक घाव ठीक हो गया था, पूजा कराता था। वह बड़े-बड़े चिह्‍न दिखाता था, यहाँ तक कि वह लोगों के सामने आकाश से पृथ्वी पर आग बरसा देता था, और वह इन चिह्‍नों के द्वारा जिन्हें उस पशु की ओर से दिखाने का उसे अधिकार मिला था, पृथ्वी पर रहनेवालों को भरमाता था और उनसे उस पशु की मूर्ति बनाने के लिए कहता था, जो तलवार से घायल था और फिर भी जीवित था। उसे उस पशु की मूर्ति में प्राण डालने का अधिकार दिया गया जिससे पशु की वह मूर्ति बोलने लगे और उन्हें मरवा डाले, जो उस मूर्ति की पूजा नहीं करते। उसने छोटे और बड़े, धनी और निर्धन, स्वतंत्र और दास सब के दाहिने हाथ या माथे पर छाप लगवा दी, ताकि जिस व्यक्‍ति पर उस पशु का नाम या उसके नाम की संख्या की छाप हो, उसको छोड़ कोई भी व्यक्‍ति कुछ खरीद या बेच न सके। बुद्धिमानी इसी में है: जिस किसी के पास समझ हो वह उस पशु की संख्या को गिन ले, क्योंकि यह मनुष्य की संख्या है, और उसकी संख्या छः सौ छियासठ है। फिर मैंने दृष्‍टि की, और देखो, वह मेमना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा हुआ था और उसके साथ एक लाख चौवालीस हज़ार लोग थे, जिनके माथे पर उसका नाम और उसके पिता का नाम लिखा हुआ था। फिर मैंने स्वर्ग में से बहुत सी जल-धाराओं और भयंकर गर्जन के समान एक आवाज़ सुनी; और मैंने जो आवाज़ सुनी वह ऐसी थी मानो वीणा बजानेवाले अपनी वीणाएँ बजा रहे हों। वे सिंहासन, चारों प्राणियों और प्रवरों के सामने एक नया गीत गा रहे थे; परंतु उस गीत को उन एक लाख चौवालीस हज़ार लोगों को छोड़, जो पृथ्वी पर से छुड़ा लिए गए थे, कोई और नहीं सीख सकता था। ये वे हैं जो स्‍त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, और कुँवारे हैं। ये वे हैं, जो मेमने के पीछे-पीछे जहाँ कहीं वह जाता है चलते हैं। ये परमेश्‍वर और मेमने के लिए प्रथम फल के रूप में मनुष्यों में से छुड़ा लिए गए हैं। इनके मुँह से कभी झूठ नहीं निकला था, वे निर्दोष हैं। तब मैंने एक और स्वर्गदूत को आकाश में उड़ते हुए देखा। उसके पास पृथ्वी पर रहनेवाली प्रत्येक जाति, कुल, भाषा और राष्‍‍ट्र के लोगों को सुनाने के लिए सनातन सुसमाचार था। उसने ऊँची आवाज़ से कहा, “परमेश्‍वर का भय मानो और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है। उसकी आराधना करो जिसने आकाश, पृथ्वी, समुद्र और जल के सोतों को बनाया है।” फिर एक और, दूसरा स्वर्गदूत उसके पीछे यह कहता हुआ आया, “गिर गई! महानगरी बेबीलोन गिर गई! जिसने अपने व्यभिचार की कोपमय मदिरा सब जातियों को पिलाई थी।” इसके बाद एक और, तीसरा स्वर्गदूत उनके पीछे ऊँची आवाज़ से यह कहता हुआ आया, “यदि कोई उस पशु की और उसकी मूर्ति की पूजा करेगा तथा अपने माथे या अपने हाथ पर छाप लगवाएगा, तो वह परमेश्‍वर के प्रकोप की मदिरा को पीएगा, जो उसके क्रोध के कटोरे में बिना किसी मिलावट के उंडेली जाएगी, और उसे पवित्र स्वर्गदूतों तथा मेमने की उपस्थिति में आग और गंधक से यातनाएँ दी जाएँगी। उनकी पीड़ा का धुआँ युगानुयुग उठता रहेगा, और जो उस पशु की और उसकी मूर्ति की पूजा करते हैं और उसके नाम की छाप लगवाते हैं, उन्हें दिन और रात विश्राम न मिलेगा।” पवित्र लोगों का धीरज इसी में है, अर्थात् उनका जो परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानते हैं और यीशु पर विश्‍वास करते हैं। तब मैंने स्वर्ग से एक आवाज़ को यह कहते हुए सुना, “लिख: वे मृतक जो अब से प्रभु में मरते हैं, धन्य हैं!” आत्मा कहता है, “यह सच है, क्योंकि वे अपने परिश्रम से विश्राम पाएँगे, और उनके कार्य उनके साथ जाएँगे।” तब मैंने दृष्‍टि की, तो देखो एक श्‍वेत बादल था और उस बादल पर मनुष्य के पुत्र जैसा कोई बैठा था, जिसके सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में तेज़ धारवाला हँसिया था। फिर मंदिर में से एक और स्वर्गदूत निकला, और उससे जो बादल पर बैठा था ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहने लगा, “अपना हँसिया चला, और फसल काट, क्योंकि कटनी का समय आ पहुँचा है और पृथ्वी की फसल पक चुकी है।” तब जो बादल पर बैठा था, उसने अपना हँसिया पृथ्वी पर चलाया और पृथ्वी की फसल काटी गई। फिर स्वर्ग के मंदिर में से एक और स्वर्गदूत निकला, और उसके पास भी एक तेज़ धारवाला हँसिया था। तब एक और स्वर्गदूत वेदी में से निकला, जिसके पास आग पर अधिकार था। वह उससे जिसके पास तेज़ धारवाला हँसिया था, ऊँची आवाज़ से पुकारकर कहने लगा, “अपना तेज़ धारवाला हँसिया चला और पृथ्वी के अंगूर के गुच्छों को एकत्रित कर, क्योंकि उसके अंगूर पक चुके हैं।” तब उस स्वर्गदूत ने अपना हँसिया पृथ्वी पर चलाया और पृथ्वी के अंगूर के गुच्छों को एकत्रित किया, और उन्हें परमेश्‍वर के प्रकोप के बड़े से रसकुंड में डाल दिया। फिर नगर के बाहर उस रसकुंड में उन्हें रौंदा गया, और रसकुंड में से इतना लहू बहा कि उसकी ऊँचाई घोड़ों की लगामों तक और फैलाव लगभग तीन सौ किलोमीटर तक था। तब मैंने स्वर्ग में एक और बड़ा तथा अद्भुत चिह्‍न देखा: सात स्वर्गदूत सात अंतिम विपत्तियाँ लिए हुए थे, क्योंकि इनके साथ ही परमेश्‍वर का प्रकोप भी समाप्‍त हो जाएगा। फिर मैंने अग्‍नि-मिश्रित काँच के समुद्र जैसा कुछ देखा, और जो लोग उस पशु पर और उसकी मूर्ति पर तथा उसके नाम की संख्या पर जयवंत हुए थे, वे उस काँच के समुद्र पर परमेश्‍वर की वीणाएँ लिए हुए खड़े थे। वे परमेश्‍वर के दास मूसा का गीत और मेमने का गीत गा रहे थे: “हे सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर! तेरे कार्य महान और अद्भुत हैं। हे जाति-जाति के राजा! तेरे मार्ग न्यायसंगत और सच्‍चे हैं। हे प्रभु! कौन तुझसे न डरेगा और तेरे नाम की महिमा न करेगा? क्योंकि केवल तू ही पवित्र है। सब जातियाँ आएँगी और तेरे सामने दंडवत् करेंगी, क्योंकि तेरे न्याय के कार्य प्रकट हो गए हैं।” इन बातों के बाद मैंने देखा कि स्वर्ग में साक्षी का तंबू अर्थात् मंदिर खोला गया, और वे सातों स्वर्गदूत जिनके पास सात विपत्तियाँ थीं, मलमल के स्वच्छ और चमकीले वस्‍त्र पहने और छाती के चारों ओर सोने की पट्टियाँ बाँधे हुए मंदिर से निकले। तब उन चारों प्राणियों में से एक ने उन सातों स्वर्गदूतों को युगानुयुग जीवित परमेश्‍वर के प्रकोप से भरे सोने के सात कटोरे दिए। तब परमेश्‍वर की महिमा और उसके सामर्थ्य के कारण मंदिर धुएँ से भर गया, और जब तक सातों स्वर्गदूतों की सातों विपत्तियाँ समाप्‍त न हुईं तब तक मंदिर में कोई भी प्रवेश न कर सका। फिर मैंने मंदिर में से एक ऊँची आवाज़ को सातों स्वर्गदूतों से यह कहते हुए सुना, “जाओ और परमेश्‍वर के प्रकोप के सातों कटोरों को पृथ्वी पर उंडेल दो।” अतः पहले स्वर्गदूत ने जाकर अपना कटोरा पृथ्वी पर उंडेल दिया। तब उन मनुष्यों के, जिन पर पशु की छाप थी और जो उसकी मूर्ति की पूजा करते थे, भयंकर और कष्‍टदायक फोड़े निकल आए। फिर दूसरे स्वर्गदूत ने अपना कटोरा समुद्र पर उंडेल दिया, और समुद्र मरे हुए मनुष्य के लहू के समान हो गया, और समुद्र का प्रत्येक प्राणी मर गया। तीसरे स्वर्गदूत ने अपना कटोरा नदियों और जल के सोतों पर उंडेल दिया, और वे भी लहू बन गए। तब मैंने जल के स्वर्गदूत को यह कहते हुए सुना: हे पवित्र! जो है और जो था, तू धर्मी है, क्योंकि तूने इन बातों का न्याय किया है। इन लोगों ने पवित्र जनों और भविष्यवक्‍ताओं का लहू बहाया था, और तूने इन्हें पीने के लिए लहू दिया। वे इसी के योग्य हैं। फिर मैंने वेदी में से किसी को यह कहते हुए सुना: हाँ, हे सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर! तेरे निर्णय सच्‍चे और न्यायसंगत हैं। चौथे स्वर्गदूत ने अपना कटोरा सूर्य पर उंडेल दिया, और उसे मनुष्यों को आग से झुलसाने का अधिकार दिया गया। तब मनुष्य भयंकर गर्मी से झुलस गए, और उन्होंने इन विपत्तियों पर अधिकार रखनेवाले परमेश्‍वर के नाम की निंदा की, परंतु पश्‍चात्ताप नहीं किया कि उसे महिमा दें। फिर पाँचवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा पशु के सिंहासन पर उंडेल दिया, और उसका राज्य अंधकारमय हो गया; और मनुष्य पीड़ा के कारण अपनी जीभ चबाने लगे। उन्होंने अपनी पीड़ाओं और अपने फोड़ों के कारण स्वर्ग के परमेश्‍वर की निंदा की, परंतु अपने कार्यों से पश्‍चात्ताप नहीं किया। छठे स्वर्गदूत ने अपना कटोरा फरात महानदी पर उंडेल दिया, और उसका जल सूख गया कि पूर्व दिशा के राजाओं के लिए मार्ग तैयार हो जाए। तब मैंने उस अजगर के मुँह से, और उस पशु के मुँह से और उस झूठे भविष्यवक्‍ता के मुँह से तीन अशुद्ध आत्माओं को मेंढकों के रूप में निकलते हुए देखा। ये चिह्‍न दिखानेवाली वे दुष्‍टात्माएँ हैं, जो समस्त संसार के राजाओं के पास जाकर उन्हें सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर के महान दिन के युद्ध के लिए इकट्ठा करती हैं। (“देख, मैं चोर के समान आ रहा हूँ। धन्य है वह, जो जागता और अपने वस्‍त्रों की रक्षा करता है, कहीं ऐसा न हो कि वह नग्‍न फिरे और लोग उसका नंगापन देखें।”) तब दुष्‍टात्माओं ने राजाओं को उस स्थान पर इकट्ठा किया जो इब्रानी भाषा में हर-मगिदोन कहलाता है। फिर सातवें स्वर्गदूत ने अपना कटोरा हवा पर उंडेल दिया। तब मंदिर के सिंहासन में से एक ऊँची आवाज़ यह कहते हुए आई, “हो गया।” फिर बिजलियाँ चमकीं, गड़गड़ाहट और गर्जन हुए तथा एक ऐसा बड़ा भूकंप हुआ कि जब से मनुष्य पृथ्वी पर है तब से ऐसा भयानक और बड़ा भूकंप कभी नहीं हुआ था। इससे उस महानगरी के तीन टुकड़े हो गए और राज्य-राज्य के नगर गिर पड़े। तब परमेश्‍वर के सामने महानगरी बेबीलोन का स्मरण हुआ और उसे परमेश्‍वर के भयंकर प्रकोप की मदिरा पिलाई गई। प्रत्येक द्वीप लुप्‍त हो गया और पहाड़ों का कुछ पता न चला। आकाश से लोगों के ऊपर मन-मन भर के बड़े ओले गिरे, और ओलों की उस विपत्ति के कारण लोगों ने परमेश्‍वर की निंदा की, क्योंकि यह विपत्ति अत्यंत भारी थी। जिन सात स्वर्गदूतों के पास सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मुझसे कहा, “आ, मैं तुझे उस बड़ी वेश्या का दंड दिखाऊँगा जो बहुत से जल के ऊपर बैठी है, जिसके साथ पृथ्वी के राजाओं ने व्यभिचार किया, और पृथ्वी पर रहनेवाले उसके व्यभिचार की मदिरा से मतवाले हो गए थे।” फिर वह आत्मा में मुझे एक निर्जन स्थान पर ले गया। तब मैंने एक स्‍त्री को लाल रंग के पशु पर बैठे हुए देखा जो परमेश्‍वर के निंदा के नामों से भरा हुआ था, और जिसके सात सिर और दस सींग थे। वह स्‍त्री बैंजनी और गहरे लाल रंग के वस्‍त्र पहने थी, और सोने, बहुमूल्य पत्थरों और मोतियों से सजी थी। उसके हाथ में सोने का एक कटोरा था, जो घृणित वस्तुओं और उसके व्यभिचार की अशुद्धताओं से भरा हुआ था। उसके माथे पर यह नाम लिखा हुआ था, “भेद—महानगरी बेबीलोन, वेश्याओं और पृथ्वी की घृणित वस्तुओं की माता।” फिर मैंने उस स्‍त्री को पवित्र लोगों के लहू और यीशु के गवाहों के लहू को पीकर मतवाली होते देखा। उसे देखकर मैं अत्यंत आश्‍चर्यचकित हो गया। तब स्वर्गदूत ने मुझसे कहा, “तू आश्‍चर्यचकित क्यों होता है? मैं तुझे इस स्‍त्री और सात सिर तथा दस सींगवाले उस पशु का भेद बताऊँगा, जिस पर वह स्‍त्री सवार है। जो पशु तूने देखा, वह पहले था पर अब नहीं है, वह अथाह कुंड में से अपने विनाश के लिए निकलने वाला है। पृथ्वी पर रहनेवाले लोग जिनके नाम जगत की उत्पत्ति से जीवन की पुस्तक में नहीं लिखे गए हैं, वे इस पशु को जो पहले था और अब नहीं है पर आने वाला है, देखकर आश्‍चर्यचकित होंगे। बुद्धि की बात तो यह है: वे सात सिर सात पहाड़ हैं, जिन पर वह स्‍त्री बैठी हुई है; और वे सात राजा भी हैं। उनमें से पाँच का पतन हो चुका है, और एक अभी है, और एक अब तक आया नहीं, और जब वह आएगा तो उसका कुछ समय तक रहना आवश्यक है। वह पशु जो पहले था परंतु अब नहीं है, वह स्वयं आठवाँ तो है पर उन सातों में से है, और उसका विनाश होने वाला है। जो दस सींग तूने देखे वे दस राजा हैं, जिन्हें अभी तक राज्य नहीं मिला है, परंतु उन्हें उस पशु के साथ घड़ी भर के लिए राजाओं के समान अधिकार मिलेगा। वे एकमत होंगे, और अपनी शक्‍ति और अधिकार उस पशु को दे देंगे। वे मेमने के साथ युद्ध करेंगे पर मेमना उन पर विजयी होगा, क्योंकि वह प्रभुओं का प्रभु और राजाओं का राजा है, और जो उसके साथ हैं वे बुलाए हुए, चुने हुए और विश्‍वासयोग्य हैं।” फिर उसने मुझसे कहा, “जो जल तूने देखे थे जिन पर वह वेश्या बैठी थी, वे राष्‍‍ट्र, भीड़, जातियाँ और भाषाएँ हैं। जो दस सींग तूने देखे, वे और पशु उस वेश्या से घृणा करेंगे। वे उसे उजाड़ देंगे और निर्वस्‍त्र कर देंगे। वे उसका मांस खा जाएँगे और उसे आग में जला देंगे। परमेश्‍वर ने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनके मनों में यह बात डाली है कि जब तक परमेश्‍वर का वचन पूरा न हो जाए, वे एकमत रहें और अपना-अपना राज्य उस पशु को दे दें। जो स्‍त्री तूने देखी, वह ऐसी महानगरी है जो पृथ्वी के राजाओं पर राज्य करती है।” इसके बाद मैंने एक और स्वर्गदूत को स्वर्ग से नीचे उतरते हुए देखा जिसे बड़ा अधिकार प्राप्‍त था, और उसके तेज से पृथ्वी प्रकाशित हो उठी। उसने ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहा: “गिर गई! महानगरी बेबीलोन गिर गई, और वह दुष्‍टात्माओं का निवासस्थान और हर एक अशुद्ध आत्मा, अशुद्ध पक्षी और अशुद्ध वन-पशु का अड्डा बन गई और घृणित हो गई। क्योंकि उसके व्यभिचार की कोपमय मदिरा सब जातियों ने पी है, और पृथ्वी के राजाओं ने उसके साथ व्यभिचार किया है और पृथ्वी के व्यापारी उसके सुख-विलास की बहुतायत के कारण धनवान हुए हैं।” फिर मैंने स्वर्ग में से एक और आवाज़ को यह कहते हुए सुना: “हे मेरे लोगो, उसमें से निकल आओ, जिससे तुम उसके पापों में सहभागी न बनो, और तुम पर उसकी विपत्तियाँ न आ पड़ें। क्योंकि उसके पापों का ढेर स्वर्ग तक पहुँच गया है और परमेश्‍वर ने उसके अधर्म को स्मरण किया है। जैसा उसने तुम्हें दिया है वैसा ही उसको दो, और उसके कार्यों के अनुसार उसे दुगुना बदला दो; जिस कटोरे में उसने मिलाया, उसी में उसके लिए दुगुना मिलाओ। जितनी उसने अपनी बड़ाई की और भोग-विलास किया, उतनी ही उसे पीड़ा और शोक दो। क्योंकि वह अपने मन में कहती है, ‘मैं रानी बनकर बैठी हूँ, मैं विधवा नहीं हूँ; मैं कभी शोक नहीं देखूँगी।’ इसलिए एक ही दिन में उस पर विपत्तियाँ आ पड़ेंगी अर्थात् मृत्यु, शोक और अकाल; और वह आग में भस्म कर दी जाएगी, क्योंकि प्रभु परमेश्‍वर जो उसका न्याय करनेवाला है, सामर्थी है। “पृथ्वी के राजा जिन्होंने उसके साथ व्यभिचार किया और भोग-विलास का जीवन बिताया, जब वे उसके जलने के धुएँ को देखेंगे, तो उसके लिए रोएँगे और छाती पीटेंगे, वे उसकी पीड़ा से भयभीत होकर दूर ही खड़े रहेंगे और कहेंगे: हाय! हाय! हे महानगरी, हे शक्‍तिशाली नगरी बेबीलोन! घड़ी भर में ही तुझे दंड मिल गया। “पृथ्वी के व्यापारी भी उसके लिए रोएँगे और शोक मनाएँगे, क्योंकि उनका सामान अब कोई नहीं खरीदेगा, अर्थात् सोना, चाँदी, बहुमूल्य पत्थर, मोती; और मलमल, बैंजनी, रेशम, तथा गहरे लाल रंग के वस्‍त्र और हर प्रकार की सुगंधित लकड़ी, हाथी दाँत की बनी तरह-तरह की वस्तुएँ, और हर प्रकार की बहुमूल्य लकड़ी, पीतल, लोहे और संगमरमर की वस्तुएँ, और दालचीनी, मसाले, धूप, इत्र, लोबान, मदिरा, तेल, मैदा, गेहूँ, पशु, भेड़, घोड़े, रथ, दास, और मनुष्यों के प्राण। तेरे मन भावने फल तुझसे दूर हो गए, और तेरी हर प्रकार की विलासिता और वैभव की वस्तुएँ तुझमें से नष्‍ट हो गईं, और वे अब फिर कभी नहीं मिलेंगी। इन वस्तुओं के व्यापारी जो उसके कारण धनवान हो गए थे, उसकी पीड़ा से भयभीत होकर दूर ही खड़े रहेंगे, तथा रोते और विलाप करते हुए कहेंगे: हाय! हाय! वह महानगरी, जो मलमल के बैंजनी और गहरे लाल रंग के वस्‍त्र पहनती थी, और सोने, बहुमूल्य पत्थरों और मोतियों से सुसज्‍जित थी, घड़ी भर में ही उसका ऐसा बड़ा वैभव नष्‍ट हो गया। “प्रत्येक कप्‍तान और प्रत्येक यात्री तथा नाविक और जितने समुद्र से व्यापार करते हैं, वे दूर खड़े रहे, और जब उन्होंने उसके जलने का धुआँ देखा तो चिल्‍ला उठे, ‘कौन सी नगरी इस महानगरी के समान है?’ उन्होंने अपने सिरों पर धूल डाली और चिल्‍लाते, रोते और विलाप करते हुए कहा: हाय! हाय! यह महानगरी, जिसके धन से समुद्र के सब जहाज़वाले धनवान हो गए थे, वह घड़ी भर में ही नष्‍ट हो गई। हे स्वर्ग! हे पवित्र लोगो, प्रेरितो और भविष्यवक्‍ताओ! उसके कारण आनंद मनाओ, क्योंकि परमेश्‍वर ने तुम्हारा न्याय किया है और उसके विरुद्ध निर्णय दिया है।” तब एक शक्‍तिशाली स्वर्गदूत ने चक्‍की के पाट जैसा एक बड़ा पत्थर उठाया और उसे यह कहकर समुद्र में फेंक दिया, “महानगरी बेबीलोन को ऐसे ही बलपूर्वक फेंक दिया जाएगा, और फिर उसका कहीं पता भी नहीं चलेगा। वीणा बजानेवालों, संगीतकारों, बाँसुरी बजानेवालों और तुरही फूँकनेवालों का स्वर तुझमें फिर कभी सुनाई न देगा, और किसी कला का कोई शिल्पकार तुझमें फिर कभी न मिलेगा, और चक्‍की की आवाज़ तुझमें फिर कभी सुनाई नहीं देगी, और दीपक का प्रकाश तुझमें फिर कभी नहीं चमकेगा, दूल्हा और दुल्हन का स्वर तुझमें फिर कभी सुनाई नहीं देगा; क्योंकि तेरे व्यापारी पृथ्वी के सब से महान लोग थे, और तेरे जादू-टोने से सब जातियाँ भरमाई गई थीं, और तुझमें भविष्यवक्‍ताओं, पवित्र लोगों और उन सब का लहू पाया गया है जो पृथ्वी पर वध किए गए थे।” इन बातों के बाद मैंने स्वर्ग में एक बड़ी भीड़ को ऊँची आवाज़ से यह कहते हुए सुना: हाल्‍लेलूय्याह! उद्धार, महिमा और सामर्थ्य हमारे परमेश्‍वर ही के हैं, क्योंकि उसके निर्णय सच्‍चे और न्यायसंगत हैं। उसने उस बड़ी वेश्या को, जो अपने व्यभिचार से पृथ्वी को भ्रष्‍ट कर रही थी दंड दिया, और उससे अपने दासों के लहू का बदला लिया। उन्होंने फिर दूसरी बार कहा: हाल्‍लेलूय्याह! उसका धुआँ युगानुयुग उठता रहेगा। तब चौबीसों प्रवरों और चारों प्राणियों ने परमेश्‍वर को, जो सिंहासन पर विराजमान था, गिरकर दंडवत् किया और कहा: आमीन! हाल्‍लेलूय्याह! तब सिंहासन में से एक आवाज़ आई जो यह कह रही थी: उसके सब दासो, तुम जो उसका भय मानते हो, चाहे छोटे हो या बड़े, हमारे परमेश्‍वर की स्तुति करो। फिर मैंने एक बड़ी भीड़, और बहुत सी जल-धाराओं और भयंकर गर्जनों के समान एक आवाज़ को यह कहते हुए सुना: हाल्‍लेलूय्याह! क्योंकि हमारा सर्वशक्‍तिमान, प्रभु परमेश्‍वर राज्य करता है। आओ हम आनंदित और मगन हों और उसकी महिमा करें, क्योंकि मेमने के विवाह का समय आ पहुँचा है, और उसकी दुल्हन ने अपने आपको तैयार कर लिया है। उसे मलमल का स्वच्छ और चमकीला वस्‍त्र पहनने के लिए दिया गया; क्योंकि मलमल के वस्‍त्र का अर्थ पवित्र लोगों के धार्मिकता के कार्य हैं। तब उसने मुझसे कहा, “लिख: धन्य हैं वे जो मेमने के विवाह-भोज में आमंत्रित किए गए हैं।” और उसने मुझसे कहा, “ये वचन, परमेश्‍वर के सत्य वचन हैं।” तब मैं उसे दंडवत् करने के लिए उसके पैरों पर गिर पड़ा। परंतु उसने मुझसे कहा, “देख, ऐसा मत कर; मैं तेरा और तेरे उन भाइयों का संगी दास हूँ, जो यीशु की साक्षी पर स्थिर हैं; केवल परमेश्‍वर को ही दंडवत् कर। क्योंकि यीशु की साक्षी भविष्यवाणी की आत्मा है।” फिर मैंने स्वर्ग को खुला हुआ देखा, और देखो, एक श्‍वेत घोड़ा है, और जो उस पर सवार है वह विश्‍वासयोग्य और सत्य कहलाता है, और वह धार्मिकता के साथ न्याय और युद्ध करता है। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, और उसके सिर पर बहुत से मुकुट हैं, और उस पर एक नाम लिखा है जिसे उसको छोड़ और कोई नहीं जानता, वह लहू में डुबोया हुआ वस्‍त्र पहने हुए है, और उसका नाम परमेश्‍वर का वचन है। स्वर्ग की सेनाएँ मलमल के स्वच्छ और श्‍वेत वस्‍त्र पहने श्‍वेत घोड़ों पर उसके पीछे-पीछे चल रही थीं। उसके मुँह से एक तेज़ धारवाली तलवार निकल रही थी, कि वह उससे जाति-जाति पर प्रहार करे। वह लोहे के राजदंड से उन पर शासन करेगा, और वह सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर के भयंकर प्रकोप की मदिरा के रसकुंड में दाख रौंदेगा; और उसके वस्‍त्र और जाँघ पर एक नाम लिखा हुआ है: राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु। तब मैंने एक स्वर्गदूत को सूर्य पर खड़े हुए देखा, और उसने आकाश में उड़नेवाले सब पक्षियों से ऊँची आवाज़ में पुकारकर कहा, “आओ, परमेश्‍वर के बड़े भोज के लिए इकट्ठे हो जाओ, कि तुम राजाओं, सेनापतियों, शक्‍तिशाली पुरुषों, घोड़ों और उनके सवारों का, चाहे स्वतंत्र हों या दास, छोटे हों या बड़े सभी का मांस खाओ।” तब मैंने उस पशु को और पृथ्वी के राजाओं तथा उनकी सेनाओं को इकट्ठा होते हुए देखा कि वे घोड़े के सवार और उसकी सेना के साथ युद्ध करें। परंतु पशु और उसके साथ वह झूठा भविष्यवक्‍ता पकड़ा गया, जिसने उसके सामने चिह्‍न दिखाए थे। उन चिह्‍नों से उसने उन लोगों को भरमाया जिन पर पशु की छाप थी और जो उसकी मूर्ति की पूजा करते थे। उन दोनों को गंधक से जलती हुई आग की झील में जीवित ही फेंक दिया गया। बाकी लोग, घोड़े पर बैठनेवाले के मुँह से निकलती हुई तलवार से मार दिए गए, और सब पक्षी उनके मांस से तृप्‍त हो गए। फिर मैंने एक स्वर्गदूत को स्वर्ग से नीचे उतरते हुए देखा जो अपने हाथ में अथाह कुंड की कुंजी और एक बड़ी ज़ंजीर लिए हुए था। उसने अजगर अर्थात् उस पुराने साँप को, जो इब्लीस और शैतान है, पकड़ लिया, और उसे एक हज़ार वर्ष के लिए बाँध दिया, और अथाह कुंड में डाल दिया तथा उसे बंद करके उस पर मुहर लगा दी, कि जब तक हज़ार वर्ष पूरे न हो जाएँ, वह जाति-जाति के लोगों को फिर न भरमाए। इन बातों के बाद उसका थोड़े समय के लिए खोला जाना आवश्यक है। फिर मैंने सिंहासन देखे और उन पर लोग बैठ गए और उन्हें न्याय करने का अधिकार दिया गया। फिर मैंने उन लोगों की आत्माओं को भी देखा जिनके सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्‍वर के वचन के कारण काट दिए गए थे, और जिन्होंने न तो उस पशु की और न ही उसकी मूर्ति की पूजा की थी और न अपने माथे और हाथों पर उसकी छाप लगवाई थी। फिर वे जीवित हो गए और उन्होंने एक हज़ार वर्ष तक मसीह के साथ राज्य किया। जब तक एक हज़ार वर्ष पूरे न हो गए, बाकी मृतक जीवित न हुए। यह तो पहला पुनरुत्थान है। धन्य और पवित्र है वह जो पहले पुनरुत्थान में भागी है; उन पर दूसरी मृत्यु का अधिकार नहीं है, बल्कि वे परमेश्‍वर और मसीह के याजक होंगे और उसके साथ एक हज़ार वर्ष तक राज्य करेंगे। जब एक हज़ार वर्ष पूरे हो जाएँगे तो शैतान के बंधन खोल दिए जाएँगे; और वह पृथ्वी के चारों कोनों तक की जातियों को, अर्थात् गोग और मागोग को भरमाने के लिए निकलेगा, जिनकी संख्या समुद्र की बालू के समान है, और उन्हें युद्ध के लिए इकट्ठा करेगा। वे सारी पृथ्वी पर निकल गए और उन्होंने पवित्र लोगों की छावनी और उस प्रिय नगर को घेर लिया, तब स्वर्ग से आग गिरी और उन्हें भस्म कर दिया। फिर उन्हें भरमानेवाला शैतान उस आग और गंधक की झील में फेंक दिया गया, जिसमें वह पशु और झूठा भविष्यवक्‍ता डाले गए थे; और वे दिन और रात युगानुयुग तड़पते रहेंगे। तब मैंने एक बड़ा श्‍वेत सिंहासन और उसे देखा जो उस पर विराजमान था; उसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए और उन्हें कोई स्थान नहीं मिला। फिर मैंने छोटे और बड़े, सब मृतकों को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा। तब पुस्तकें खोली गईं; फिर एक और पुस्तक खोली गई, जो जीवन की पुस्तक है। उन पुस्तकों में लिखी हुई बातों के आधार पर सब मृतकों का न्याय उनके कार्यों के अनुसार किया गया। तब समुद्र ने उन मृतकों को जो उसमें थे, दे दिया और मृत्यु और अधोलोक ने भी उन मृतकों को जो उनमें थे, दे दिया; और प्रत्येक का न्याय उनके कार्यों के अनुसार किया गया। तब मृत्यु और अधोलोक को आग की झील में डाल दिया गया। यह आग की झील दूसरी मृत्यु है। जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ नहीं मिला, उसे आग की झील में फेंक दिया गया। तब मैंने एक नए आकाश और एक नई पृथ्वी को देखा; क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी लुप्‍त हो गई और समुद्र भी नहीं रहा। फिर मैंने पवित्र नगर नए यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से नीचे उतरते हुए देखा, उसे ऐसे तैयार किया गया था जैसे एक दुल्हन को उसके पति के लिए सजाया जाता है। तब मैंने सिंहासन से एक ऊँची आवाज़ को यह कहते हुए सुना, “देख! परमेश्‍वर का निवासस्थान मनुष्यों के साथ है, और वह उन्हीं के साथ वास करेगा, और वे उसके लोग होंगे और परमेश्‍वर स्वयं उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्‍वर होगा। वह उनकी आँखों से सब आँसुओं को पोंछ डालेगा, और फिर न मृत्यु रहेगी और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; क्योंकि पहली बातें बीत गईं।” तब जो सिंहासन पर विराजमान था, उसने कहा, “देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूँ।” उसने यह भी कहा, “लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्‍वसनीय और सत्य हैं।” फिर उसने मुझसे कहा, “ये बातें पूरी हो गई हैं। मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा, आदि और अंत हूँ। जो प्यासा होगा मैं उसे जीवन के जल के सोते से मुफ़्त में पिलाऊँगा। जो जय पाए वही इन वस्तुओं का उत्तराधिकारी होगा और मैं उसका परमेश्‍वर होऊँगा और वह मेरा पुत्र होगा। परंतु डरपोकों, अविश्‍वासियों, घृणितों, हत्यारों, व्यभिचारियों, जादू-टोना करनेवालों, मूर्तिपूजकों और सब झूठों का भाग आग और गंधक से जलती हुई झील में होगा, जो दूसरी मृत्यु है।” तब जिन सात स्वर्गदूतों के पास अंतिम सात विपत्तियों से भरे हुए सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मुझसे कहा, “आ, मैं तुझे दुल्हन अर्थात् मेमने की पत्‍नी दिखाऊँगा।” तब वह मुझे आत्मा में एक विशाल और ऊँचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से नीचे उतरते हुए दिखाया। उसमें परमेश्‍वर की महिमा थी, और उसकी चमक बहुमूल्य पत्थर के समान अर्थात् सूर्यकांत पत्थर के समान थी और वह बिल्‍लौर जैसी स्वच्छ थी। उसकी शहरपनाह बड़ी और ऊँची थी, और उसके बारह फाटक थे तथा फाटकों पर बारह स्वर्गदूत थे, और उन फाटकों पर इस्राएलियों के बारह गोत्रों के नाम लिखे थे। पूर्व की ओर तीन फाटक, उत्तर की ओर तीन फाटक, दक्षिण की ओर तीन फाटक और पश्‍चिम की ओर तीन फाटक थे। नगर की शहरपनाह की बारह नीवें थीं और उन पर मेमने के बारह प्रेरितों के बारह नाम लिखे थे। जो मुझसे बातें कर रहा था उसके पास नगर और उसके फाटकों को और उसकी शहरपनाह को नापने के लिए सोने का एक मापदंड था। वह नगर वर्गाकार था और उसकी लंबाई, चौड़ाई के बराबर थी। उसने जब नगर को मापदंड से नापा तो वह लगभग दो हज़ार दो सौ बीस किलोमीटर निकला। उसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई एक समान थी। जब उसने उसकी शहरपनाह को नापा तो वह मनुष्य के नाप के अनुसार, जो स्वर्गदूत का नाप भी है, पैंसठ मीटर निकली। उसकी शहरपनाह सूर्यकांत मणि से बनी थी और नगर स्वच्छ काँच के समान शुद्ध सोने का था। नगर की शहरपनाह की नीवें हर प्रकार के बहुमूल्य पत्थरों से सुसज्‍जित थीं: पहली नींव सूर्यकांत मणि की, दूसरी नीलम, तीसरी स्फटिक, चौथी मरकत, पाँचवीं गोमेद, छठी माणिक्य, सातवीं पीतमणि, आठवीं पेरोज, नवीं पुखराज, दसवीं लहसनिया, ग्यारहवीं धूम्रकांत और बारहवीं चंद्रकांत की थी। बारह फाटक बारह मोतियों के थे, एक-एक फाटक एक-एक मोती का था; और नगर की सड़क पारदर्शी काँच के समान शुद्ध सोने की थी। मैंने उसमें कोई मंदिर नहीं देखा, क्योंकि सर्वशक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर और मेमना ही उसका मंदिर है। उस नगर को न तो सूर्य की और न ही चंद्रमा की आवश्यकता है कि वे उसे प्रकाश दें, क्योंकि परमेश्‍वर की महिमा से वह प्रकाशित है, और मेमना उसका दीपक है। जाति-जाति के लोग उसके प्रकाश में चलेंगे, और पृथ्वी के राजा अपना वैभव उसमें लाएँगे। उसके फाटक दिन में कभी बंद नहीं होंगे, और वहाँ रात न होगी, और लोग उसमें जाति-जाति का वैभव और प्रतिष्‍ठा लाएँगे। जिन लोगों के नाम मेमने की जीवन की पुस्तक में लिखे हैं, उनको छोड़ कोई भी अपवित्र वस्तु और कोई घृणित कार्य करनेवाला या झूठ बोलनेवाला उसमें प्रवेश नहीं करेगा। तब स्वर्गदूत ने मुझे बिल्‍लौर के समान चमकती हुई जीवन के जल की नदी दिखाई, जो परमेश्‍वर और मेमने के सिंहासन से निकलती थी। वह सड़क के बीचों-बीच बहती थी। नदी के इस ओर और उस ओर जीवन का वृक्ष था, जिसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था, और उस वृक्ष की पत्तियों से जाति-जाति के लोग स्वस्थ होते थे। अब से कोई शाप न रहेगा। उस नगर में परमेश्‍वर और मेमने का सिंहासन होगा, और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। वे उसके मुख को देखेंगे, और उसका नाम उनके माथों पर होगा। फिर कभी रात न होगी और न ही उन्हें दीपक और सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होगी, क्योंकि प्रभु परमेश्‍वर उन्हें प्रकाश देगा और वे युगानुयुग राज्य करेंगे। तब उसने मुझसे कहा, “ये वचन विश्‍वसनीय और सत्य हैं, और प्रभु, जो भविष्यवक्‍ताओं की आत्माओं का परमेश्‍वर है, उसने अपने स्वर्गदूत को इसलिए भेजा कि वह अपने दासों को वे बातें दिखाए जिनका शीघ्र पूरा होना अवश्य है।” “देख, मैं शीघ्र आ रहा हूँ। धन्य है वह जो इस पुस्तक की भविष्यवाणी के वचनों को मानता है।” मैं वही यूहन्‍ना हूँ जिसने इन बातों को सुना और देखा है। जब मैंने इन्हें सुन और देख लिया, तो मैं दंडवत् करने के लिए उस स्वर्गदूत के पैरों पर गिर पड़ा जो मुझे इन बातों को दिखा रहा था। परंतु उसने मुझसे कहा, “देख, ऐसा मत कर; मैं तेरा और तेरे भाई भविष्यवक्‍ताओं का, और जो इस पुस्तक के वचनों को मानते हैं, उनका संगी दास हूँ। केवल परमेश्‍वर को ही दंडवत् कर।” फिर उसने मुझसे कहा, “इस पुस्तक की भविष्यवाणी के वचनों को गुप्‍त न रख, क्योंकि समय निकट है। जो अन्याय करता है वह अन्याय करता रहे, और जो अपवित्र है वह अपवित्र ही बना रहे; और जो धर्मी है वह धार्मिकता के कार्य करता रहे, और जो पवित्र है वह पवित्र ही बना रहे।” “देख, मैं शीघ्र आ रहा हूँ, और प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार देने के लिए मेरे पास प्रतिफल है। मैं अल्फ़ा और ओमेगा, प्रथम और अंतिम, आदि और अंत हूँ। “धन्य हैं वे जो अपने वस्‍त्र धोते हैं, ताकि वे जीवन के वृक्ष के अधिकारी हों, और वे फाटकों से नगर में प्रवेश कर सकें। परंतु कुत्ते, जादू-टोना करनेवाले, व्यभिचारी, हत्यारे, मूर्तिपूजक और वे सब जो झूठ को प्रिय जानते और उसका पालन करते हैं, बाहर रहेंगे। “मुझ यीशु ने अपने स्वर्गदूत को इसलिए भेजा कि वह इन बातों के विषय में कलीसियाओं के लिए तुम्हें साक्षी दे। मैं ही दाऊद का मूल और वंशज हूँ, और भोर का चमकता तारा हूँ।” आत्मा और दुल्हन दोनों कहते हैं, “आ!” और जो सुनता है वह भी कहे “आ!” और जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल मुफ़्त में ले। मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यवाणी के वचनों को सुनता है, यह चेतावनी देता हूँ: “यदि कोई इनमें कुछ जोड़ता है, तो परमेश्‍वर इस पुस्तक में लिखी विपत्तियों को उस पर डालेगा, और यदि कोई इस पुस्तक की भविष्यवाणी के वचनों में से कुछ निकालता है, तो परमेश्‍वर भी उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिनका वर्णन इस पुस्तक में किया गया है, उसके भाग को निकाल देगा।” जो इन बातों की साक्षी देता है वह यह कहता है, “हाँ, मैं शीघ्र आ रहा हूँ।” आमीन। हे प्रभु यीशु आ! प्रभु यीशु का अनुग्रह तुम सब पर होता रहे। आमीन।