हुज़ूर ईसा अलमसीह इब्न-ए-दाऊद और इब्न-ए-इब्राहीम का नस्बनामा ये है: हज़रत इब्राहीम से हज़रत इज़हाक़ पैदा हुए, और हज़रत इज़हाक़ से हज़रत याक़ूब, हज़रत याक़ूब से हज़रत यहूदाह और उन के भाई पैदा हुए, हज़रत यहूदाह से फ़ारस और ज़ारह पैदा हुए, उन की मां का नाम तमर था, और फ़ारस से हसरोन, हसरोन से अराम पैदा हुए, अराम से अम्मीनदाब, और अम्मीनदाब से नहसून, और नहसून से सलमोन पैदा हुए, और सलमोन से बोअज़ पैदा हुए, उन की मां का नाम राहब था, हज़रत बोअज़ से ओबैद पैदा हुए उन की मां का नाम रूत था, हज़रत ओबैद से यस्सी पैदा हुए, और हज़रत यस्सी से हज़रत दाऊद बादशाह पैदा हुए। हज़रत दाऊद से हज़रत सुलैमान पैदा हुए, आप की मां पहले उरियाह की बीवी थी, हज़रत सुलैमान से रहुबआम, और रहुबआम से अबिय्याह, और अबिय्याह से आसा पैदा हुए, और आसा से यहूसफ़त, और हज़रत यहूसफ़त से यूराम, और यूराम से उज़्ज़ियाह पैदा हुए, और उज़्ज़ियाह से यूताम, और यूताम से आख़ज़, और आख़ज़ से हिज़क़ियाह पैदा हुए, और हिज़क़ियाह से मनस्सी, और मनस्सी से अमून, और अमून से यूसियाह पैदा हुए, यहूदियों के जिला वतन होकर बाबुल जाते वक़्त यूसियाह यख़ूनियाह और उस के भाई पैदा हुए। बाबुल में जलावतनी के बाद: यख़ूनियाह से सियालतीएल, और सियालतीएल से ज़रूब्बाबिल पैदा हुए, और हज़रत ज़रूब्बाबिल से अबीहूद, और अबीहूद से एलियाक़ीम और एलियाक़ीम से आज़ोर पैदा हुए, और हज़रत आज़ोर से सदोक़, और सदोक़ से अख़ीम, और अख़ीम से इलीहूद पैदा हुए, और इलीहूद से एलीअज़र, और एलीअज़र से मत्तान, और मत्तान से याक़ूब पैदा हुए, और हज़रत याक़ूब से यूसुफ़ पैदा हुए जो हज़रत मरियम के शौहर थे और हज़रत मरियम से हुज़ूर ईसा पैदा हुए जो ख़ुदावन्द अलमसीह कहलाते हैं। चुनांचे हज़रत इब्राहीम से हज़रत दाऊद तक चौदह पुश्तें, हज़रत दाऊद से यहूदियों के जलावतन होकर बाबुल जाने तक चौदह पुश्तें और बाबुल में जलावतनी के अय्याम से ख़ुदावन्द अलमसीह तक चौदह पुश्तें हुईं। हुज़ूर ईसा अलमसीह की पैदाइश इस तरह हुई के जब आप की मां हज़रत मरियम की मंगनी हज़रत यूसुफ़ के साथ हुई तो वह शादी से पहले ही पाक रूह की क़ुदरत से हामिला पाई गईं। उन के शौहर हज़रत यूसुफ़ एक रास्तबाज़ आदमी थे, इसलिये उन्होंने चुपके से तलाक़ देने का इरादा कर लिया ताके हज़रत मरियम की बदनामी न हो। अभी वह ये बातें सोच ही रहे थे के ख़ुदावन्द के एक फ़रिश्ते ने ख़्वाब में ज़ाहिर होकर उन से फ़रमाया, “ऐ यूसुफ़, इब्न-ए-दाऊद! अपनी बीवी मरियम को अपने घर ले आने से मत डर क्यूंके जो उन के पेट में है वह पाक रूह की क़ुदरत से है। मरियम को एक बेटा होगा और तुम उस का नाम ईसा रखना क्यूंके वोही अपने लोगों को उन के गुनाहों से नजात देंगे।” ये सब कुछ इसलिये हुआ ताके ख़ुदावन्द ने जो कलाम नबी की मारिफ़त फ़रमाया था, वह पूरा हो: “एक कुंवारी हामिला होगी और उस से एक बेटा पैदा होगा और उस का नाम इम्मानुएल रखा जायेगा,” जिस का तरजुमा है, “ख़ुदा हमारे साथ।” हज़रत यूसुफ़ ने नींद से जाग कर जैसा ख़ुदावन्द के फ़रिश्ते ने उन्हें हुक्म दिया था वैसा ही किया और अपनी बीवी, हज़रत मरियम को घर ले आये। लेकिन हुज़ूर ईसा की पैदाइश होने तक वह उन से दूर रहे, और हज़रत यूसुफ़ ने बच्चे का नाम ईसा रखा। हुज़ूर ईसा हेरोदेस बादशाह के ज़माने में यहूदिया के शहर बैतलहम में पैदा हुए, तो मशरिक़ कई मजूसी यरूशलेम पहुंच कर पूछने लगे, “यहूदियों का बादशाह जो पैदा हुआ है, वह कहां है? क्यूंके मशरिक़ में हम ने हुज़ूर की आमद का सितारा देखकर उन्हें सज्दा करने वास्ते आये हैं।” जब हेरोदेस बादशाह ने ये बात सुनी तो वह और उस के साथ सब यरूशलेम के लोग घबरा गये। और हेरोदेस ने क़ौम के सब अहम-काहिनों और उलमा-ए-शरीअत, को जमा कर के उन से पूछा के हज़रत अलमसीह की पैदाइश कहां होनी चाहिये। उन्होंने जो जवाब दिया, “यहूदिया के बैतलहम में, क्यूंके नबी की मारिफ़त यूं लिख्खा गया है: “ ‘लेकिन ऐ बैतलहम, तू जो यहूदाह के इलाक़े में है, तू यहूदाह के हाकिमों में हरगिज़ कमतरीन नहीं; क्यूंके तुझ में से एक ऐसा हाकिम बरपा होगा जो मेरी उम्मत इस्राईल की गल्लेबानी करेगा।’ ” तब हेरोदेस ने मजूसियों को चुपके से बुलाकर उन से सितारे के नमूदार होने का ठीक वक़्त दरयाफ़्त किया। और उन्हें ये कह कर बैतलहम भेजा, “जाओ उस बच्चे का ठीक-ठीक पता करो और जब वह तुम्हें मिल जाये तो मुझे भी ख़बर दो ताके मैं भी जा कर उसे सज्दा करूं।” वह बादशाह की बात सुना कर रवाना हुए और वह सितारा जो उन्हें मशरिक़ में दिखाई दिया था, उन के आगे-आगे चलने लगा यहां तक के उस जगह के ऊपर जा ठहरा जहां वह बच्चा मौजूद था। सितारे, को देखकर उन्हें बड़ी ख़ुशी हुई। तब वह उस घर में दाख़िल हुए और बच्चे को उस की मां हज़रत मरियम के पास जा कर उन के आगे झुक कर सज्दा किया और अपने डिब्बे खोल कर सोना, लोबान और मुर्र उस को नज़्र किया। और ख़्वाब में हेरोदेस के पास फिर न जाने की हिदायत पा कर वह किसी दूसरे रास्ते से अपने मुल्क वापस चले गये। उन के चले जाने के बाद, ख़ुदावन्द के एक फ़रिश्ते ने हज़रत यूसुफ़ को ख़्वाब में दिखाई दे कर हुक्म दिया। “उठो, बच्चे और उस की मां को साथ ले कर मिस्र भाग जाओ और मेरे कहने तक वहीं रहना, क्यूंके हेरोदेस इस बच्चे को ढूंड कर हलाक करना चाहता है।” चुनांचे वह उठे और बच्चे और उस की मां को साथ ले कर रातों रात मिस्र को रवाना हो गये, और हेरोदेस की वफ़ात तक वहीं रहे ताके जो बात ख़ुदावन्द ने नबी की मारिफ़त कही थी वह पूरी हो जाये: “मैं अपने बेटे को मिस्र से बुलाया।” जब हेरोदेस को मालूम हुआ के मजूसियों ने उस के साथ दग़ाबाज़ी की है, तो उसे बहुत ग़ुस्सा आया, और मजूसियों से मिली इत्तिलाअ के मुताबिक़ उस ने बैतलहम और उस की सब सरहदों के अन्दर सिपाही भेज कर तमाम लड़कों को जो दो साल या उस से कम उम्र के थे, क़त्ल करवा दिया। इस तरह यरमियाह नबी की पेशीनगोई पूरी हुई: “रामाह शहर में एक आवाज़ सुनाई दी, रोने, चिल्लाने और शदीद मातम की आवाज़ें, राख़िल अपने बच्चों के लिये रो रही है और तसल्ली क़बूल नहीं कर रही, क्यूंके वह हलाक हो चुके हैं।” हेरोदेस की मौत के बाद ख़ुदावन्द के एक फ़रिश्ते ने मिस्र में हज़रत यूसुफ़ को ख़्वाब में दिखाई दे कर फ़रमाया, “उठो! बच्चे और उस की मां को साथ ले कर इस्राईल के मुल्क में चले जाओ क्यूंके जो लोग बच्चे को जान से मार डालना चाहते थे अब वह मर चुके हैं।” लिहाज़ा हज़रत यूसुफ़ उठे और बच्चे और उस की मां को ले कर इस्राईल के मुल्क में लौट आये। मगर ये सुन कर के अर-ख़िलाउस अपने बाप हेरोदेस की जगह पर यहूदिया में बादशाही कर रहा है, तो यूसुफ़ वहां जाने से डरे और ख़्वाब में हिदायत पा कर सूबे गलील के इलाक़े को रवाना हुए। वहां पहुंच कर नासरत नाम एक शहर में रहने लगे ताके जो बात नबियों की मारिफ़त कही गई थी वह पूरी हो: वह नासरी कहलायेगा। उन दिनों में पाक-ग़ुस्ल देने वाले हज़रत यहया की आमद हुई और यहूदिया के ब्याबान में जा कर ये मुनादी करने लगे, “तौबा करो क्यूंके आसमान की बादशाही नज़दीक आ गई है।” हज़रत यहया वोही शख़्स हैं जिस के बारे में यसायाह नबी की मारिफ़त यूं बयान किया गया था: “ब्याबान में कोई पुकार रहा है, ‘ख़ुदावन्द के लिये राह तय्यार करो, उस के लिये राहें सीधी बनाओ।’ ” हज़रत यहया ऊंट के बालों से बुना लिबास पहनते थे और उन का कमरबन्द चमड़े का था। हज़रत यहया की ख़ुराक़ टिड्डियां और जंगली शहद थी। यरूशलेम, यहूदिया और यरदन के सारे इलाक़ों से सब लोग निकल कर हज़रत यहया के पास गये। और अपने गुनाहों का इक़रार किया और उन्होंने हज़रत यहया से दरया-ए-यरदन में पाक-ग़ुस्ल लिया। लेकिन जब हज़रत यहया ने देखा के बहुत से फ़रीसी और सदूक़ी पाक-ग़ुस्ल लेने के लिये उन के पास आ रहे हैं तो उन से कहा: “ऐ ज़हरीले सांप के बच्चो! तुम्हें किस ने आगाह कर दिया के आने वाले ग़ज़ब से बच कर भाग निकलो? अपनी तौबा के लाइक़ फल भी लाओ। और ख़ुद से इस गुमान में न रहना के तुम कह सकते हो, ‘हम तो हज़रत इब्राहीम की औलाद हैं।’ क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के ख़ुदा इन पत्थरों से भी हज़रत इब्राहीम के लिये औलाद पैदा कर सकता है। अब दरख़्तों की जड़ पर कुल्हाड़ा रख दिया गया है, लिहाज़ा जो दरख़्त अच्छा फल नहीं लाता वह काटा और आग में झोंका जाता है। “मैं तो तुम्हें तौबा के लिये सिर्फ़ पानी से पाक-ग़ुस्ल देता हूं लेकिन जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से भी ज़्यादा ज़ोरआवर है। मैं तो उन के जूतों को भी उठाने के लाइक़ नहीं हूं। वह तुम्हें पाक रूह और आग से पाक-ग़ुस्ल देंगे। उस का छाज उस के हाथ में है, और वह अपनी खलियान को ख़ूब फटकेगा, गेहूं को तो अपने खत्ते में जमा करेगा लेकिन भूसे को उस जहन्नुम की आग में झोंक देगा जो कभी न बुझेगी।” उस वक़्त हुज़ूर ईसा सूबे गलील से दरया-ए-यरदन के किनारे हज़रत यहया से पाक-ग़ुस्ल लेने आये। लेकिन हज़रत यहया ने उन्हें मना करते हुए कहा, “मुझे तो आप से पाक-ग़ुस्ल लेने की ज़रूरत है और आप मेरे पास आये हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अभी तो ऐसा ही होने दो; क्यूंके हमारे लिये तो यही मुनासिब है के हम सारी रास्तबाज़ी को इसी तरह पूरा करें।” तब हज़रत यहया राज़ी हो गये। जैसे ही हुज़ूर ईसा पाक-ग़ुस्ल लेने के बाद पानी से बाहर आये तो आसमान खुल गया और ख़ुदा की रूह को कबूतर की शक्ल में अपने ऊपर नाज़िल होते देखा। और आसमान से एक आवाज़ आई, “ये मेरा प्यारा बेटा है, जिस से मैं महब्बत करता हूं; जिस से मैं बहुत ख़ुश हूं।” फिर हुज़ूर ईसा पाक रूह की हिदायत से ब्याबान में गये ताके इब्लीस उन्हें आज़माये। चालीस दिन और चालीस रात रोज़े रखने के बाद हुज़ूर ईसा को भूक लगी। तब आज़माइश करने वाले ने आप के पास आकर कहा, “अगर आप ख़ुदा का बेटा हो तो इस पत्थरों से कहें के रोटियां बन जायें।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “यह लिख्खा है: ‘इन्सान सिर्फ़ रोटी ही से नहीं लेकिन ख़ुदा के मुंह से निकलने वाले हर कलाम से ज़िन्दा रहता है।’ ” फिर इब्लीस उन्हें मुक़द्दस शहर में ले गया और बैतुलमुक़द्दस के सब से ऊंचे मक़ाम पर खड़ा कर के आप से कहा। “अगर आप ख़ुदा का बेटा हो, तो यहां से, अपने को नीचे गिरा दें। क्यूंके लिख्खा है: “ ‘वह तुम्हारे मुतअल्लिक़ अपने फ़रिश्तों को हुक्म देगा, और वह आप को अपने हाथों पर उठा लेंगे, ताके आप के पांव को किसी पत्थर से ठेस न लगने पाये।’ ” लेकिन हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ये भी तो लिख्खा है: ‘तुम ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा की आज़माइश न करो।’ ” फिर, इब्लीस उन्हें एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और दुनिया की तमाम सल्तनतें और उन की शान-ओ-शौकत हुज़ूर को दिखाई और कहा, “अगर तुम मुझे झुक कर सज्दा करो तो मैं ये सब कुछ तुम्हें दे दूंगा।” हुज़ूर ईसा ने जवाब में उस से कहा, “ऐ शैतान! मुझ से दूर हो जा, क्यूंके लिख्खा है: ‘तू अपने ख़ुदावन्द ख़ुदा ही को सज्दा कर, और सिर्फ़ उसी की ख़िदमत कर।’ ” फिर इब्लीस उन्हें छोड़कर चला गया और फ़रिश्ते आकर हुज़ूर ईसा की ख़िदमत करने लगे। जब हुज़ूर ईसा ने सुना के हज़रत यहया को क़ैद कर लिया गया है तो वह सूबे गलील को रवाना हुए। और नासरत को छोड़कर, कफ़रनहूम में जा कर रहने लगे जो झील के किनारे ज़बूलून और नफ़्ताली के इलाक़े में है। ताके जो बात हज़रत यसायाह नबी की मारिफ़त से कही गई थी, पूरी हो जाये। “ज़बूलून और नफ़्ताली के ज़मीनी इलाक़े, समुन्दरी शाहराह, यरदन के उस पार, और ग़ैरयहूदियों की सूबे गलील। जो लोग अन्धेरे में ज़िन्दगी गुज़ारते थे उन्होंने एक बड़ी रोशनी देखी; और जो लोग मौत के साये के मुल्क में ज़िन्दगी गुज़ार रहे थे उन पर एक नूर आ चमका।” उस वक़्त से हुज़ूर ईसा ने ये मुनादी शुरू कर दी, “तौबा करो क्यूंके आसमान की बादशाही नज़दीक आ गई है।” एक दिन सूबे गलील की झील के किनारे चलते हुए हुज़ूर ईसा ने दो भाईयों को, यानी शमऊन को जो पतरस कहलाते हैं और उन के भाई अन्द्रियास को देखा। यह दोनों उस वक़्त झील में जाल डाल रहे थे, क्यूंके उन का पेशा ही मछली पकड़ना था। हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मेरे, पीछे चले आओ, तो मैं तुम्हें आदमगीर बनाऊंगा।” वह उसी वक़्त अपने जाल छोड़कर आप के हमनवा होकर पीछे हो लिये। जब हुज़ूर थोड़ा और आगे बढ़े तो आप ने दो और भाईयों, ज़ब्दी के बेटे याक़ूब और उन के भाई यूहन्ना को देखा, दोनों अपने बाप ज़ब्दी के साथ कश्ती में जालों की मरम्मत कर रहे थे। हुज़ूर ईसा ने उन्हें बुलाया, और वह भी एक दम कश्ती और अपने बाप को छोड़कर हुज़ूर के पीछे चल दिये। हुज़ूर ईसा सारे सूबे गलील में जा कर उन के यहूदी इबादतगाहों में तालीम देते और आसमानी बादशाही की ख़ुशख़बरी की मुनादी करते रहे और लोगों के दरमियान हर क़िस्म की बीमारी और कमज़ोरियों को शिफ़ा बख़्शते रहे। और हुज़ूर की शौहरत तमाम सीरिया में फैल गई और लोग सब मरीज़ों को जो तरह-तरह की बीमारीयों और तकालीफ़ में मुब्तिला थे, जिन में बदरूहें थीं, और मिर्गी के मरीज़ों को और मफ़्लूजों को हुज़ूर ईसा के पास लाते थे और हुज़ूर सब को शिफ़ा बख़्शते थे। और सूबे गलील, दिकपुलिस यरूशलेम, यहूदिया और दरया-ए-यरदन पार के इलाक़ों से लोगों का एक बड़ा हुजूम हुज़ूर ईसा के पीछे चला जा रहा था। हुज़ूर ईसा उस बड़े हुजूम को देखकर पहाड़ पर चढ़ गये और जब बैठ गये तो आप के शागिर्द आप के पास आये तब हुज़ूर ईसा उन्हें तालीम देने लगे। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया: “मुबारक हैं वह जो दिल के हलीम हैं, क्यूंके आसमान की बादशाही उन ही की है, मुबारक हैं वह जो ग़मगीन हैं, क्यूंके वह तसल्ली पायेंगे। मुबारक हैं वह जो हलीम हैं, क्यूंके वह ज़मीन के वारिस होंगे। मुबारक हैं वह जिन्हें रास्तबाज़ी की भूक और प्यास है, क्यूंके वह आसूदः होंगे। मुबारक हैं वह जो रहम दिल हैं, क्यूंके उन पर रहम किया जायेगा। मुबारक हैं वह जो पाक दिल हैं, क्यूंके वह ख़ुदा को देखेंगे। मुबारक हैं वह जो सुलह कराते हैं, क्यूंके वह ख़ुदा के बेटे कहलायेंगे। मुबारक हैं वह जो रास्तबाज़ी के सबब सताये जाते हैं, क्यूंके आसमान की बादशाही उन ही की है। “मुबारक हो तुम जब लोग तुम्हें मेरे सबब से लान-तान करें और सतायें और तरह-तरह की बुरी बातें तुम्हारे बारे में नाहक़ कहें। तो तुम ख़ुश होना और जश्न मनाना क्यूंके तुम्हें आसमान पर बड़ा अज्र हासिल होगा। इसलिये के उन्होंने उन नबियों को भी जो तुम से पहले थे इसी तरह सताया था। “तुम ज़मीन के नमक हो लेकिन अगर नमक की नमकीनी जाती रहे तो उसे दुबारा कैसे नमकीन किया जायेगा? तब तो वह किसी काम का नहीं रहता सिवाए उस के उसे बाहर फेंक दिया जाये और लोगों के पांव से रौंदा जाये। “तुम दुनिया के नूर हो। पहाड़ी पर बसा हुआ शहर छुप नहीं सकता। और लोग चिराग़ जला कर पैमाने के नीचे नहीं लेकिन चिराग़दान पर रखते हैं ताके वह घर के सारे लोगों को रोशनी दे। इसी तरह तुम्हारी रोशनी लोगों के सामने चमके ताके वह तुम्हारे नेक कामों को देखकर तुम्हारे आसमानी बाप की तम्जीद करें। “ये न समझो के मैं तौरेत या नबियों की किताबों को मन्सूख़ करने आया हूं; मैं उन्हें मन्सूख़ करने नहीं लेकिन पूरा करने आया हूं। क्यूंके मैं तुम से सच कहता हूं के जब तक आसमान और ज़मीन नाबूद नहीं हो जाते, शरीअत से एक नुक़्ता या एक शोशा तक जब तक सब कुछ पूरा न हो जाये हरगिज़ मिटने न पायेगा। इसलिये जो कोई इन छोटे से छोटे हुक्मों में से किसी भी हुक्म को तोड़ता है और दूसरों को भी यही सिखाता है तो वह आसमान की बादशाही में सब से छोटा कहलायेगा; लेकिन जो इन पर अमल करता और तालीम देता है; वह आसमान की बादशाही में बड़ा कहलायेगा। क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के जब तक तुम्हारी रास्तबाज़ी शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों से बेहतर न होगी, तो तुम आसमान की बादशाही में हरगिज़ दाख़िल न होगे। “तुम सुन चुके हो के पुराने ज़माने के लोगों से कहा गया था के, ‘तुम ख़ून न करना और जो ख़ून करेगा वह अदालत की जानिब से सज़ा पायेगा।’ लेकिन मैं तुम से ये कहता हूं के जो कोई अपने भाई या बहन या दोस्त से नाहक़ ग़ुस्सा करता है तो वह भी अदालत की जानिब से सज़ा पायेगा। और जो कोई अपने भाई या बहन को ‘ राका,’ कहेगा वह अदालते-आलिया में जवाबदेह होगा और जो उन्हें, ‘बेवक़ूफ़ इन्सान!’ कहेगा वह जहन्नुम की आग का सज़ावार होगा। “चुनांचे, अगर क़ुर्बानगाह पर नज़्र चढ़ाते वक़्त तुम्हें याद आये के तुम्हारे भाई या बहन को तुम से कोई शिकायत है, तो अपनी नज़्र वहीं क़ुर्बानगाह के सामने छोड़ दे और जा कर पहले अपने भाई या बहन से सुलह कर ले, फिर आकर अपनी नज़्र चढ़ा। “अगर तुम्हारा दुश्मन तुम्हें अदालत में ले जा रहा हो तो रास्ते ही में जल्दी से उस से सुलह कर लो वर्ना वह तुम्हें मुन्सिफ़ के हवाले कर देगा और मुन्सिफ़ तुम्हें सिपाही के हवाले कर देगा और सिपाही तुम्हें ले जा कर क़ैदख़ाने में डाल देंगे। मैं तुम से सच कहता हूं के जब तक तुम एक-एक पैसा अदा न कर दोगे, वहां से हरगिज़ निकल न पाओगे। “तुम सुन चुके हो के कहा गया था, ‘तुम ज़िना न करना।’ लेकिन मैं तुम से कहता हूं के जो कोई किसी ख़ातून पर बुरी नज़र डालता है वह अपने दिल में पहले ही उस के साथ ज़िना कर चुका। इसलिये अगर तुम्हारी दायीं आंख तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस बनती है तो उसे निकाल कर फेंक दो। क्यूंके तुम्हारे लिये यही मुफ़ीद है के तुम्हारे आज़ा में से एक उज़ू जाता रहे और तुम्हारा सारा बदन जहन्नुम की आग में न डाला जाये। और अगर तुम्हारा दायां हाथ तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस हो तो, उसे काट कर फेंक दो। तुम्हारे लिये यही बेहतर है के तुम्हारे आज़ा में से एक उज़ू जाता रहे और तुम्हारा सारा बदन जहन्नुम में न डाला जाये। “ये भी कहा गया था के, ‘जो कोई अपनी बीवी को छोड़ दे उसे लाज़िम है के एक तलाक़ नामा लिख कर उसे दे।’ लेकिन मैं तुम से कहता हूं के जो कोई अपनी बीवी को जिन्सी बदफ़ेली के बाइस नहीं लेकिन किसी और वजह से तलाक़ देता है, तो वह उसे ज़िनाकार बनाने का सबब बनता है, और जो कोई उस तलाक़ शुदः ख़ातून से शादी करता है, तो वह भी ज़िना करता है। “और तुम ये भी सुन चुके हो के पुराने ज़माने के लोगों से कहा गया था, ‘झूटी क़सम न खाना, लेकिन अगर ख़ुदा की क़समें खाओ तो उन्हें पूरा करना।’ लेकिन मैं तुम से कहता हूं के क़सम हरगिज़ न खाना: न तो आसमान की, क्यूंके वह ख़ुदा का तख़्त है; और न ज़मीन की, क्यूंके वह उस के पांव की चौकी है; न यरूशलेम की, क्यूंके वह अज़ीम बादशाह का शहर है। और न अपने सर की क़सम खाना क्यूंके तुम अपने एक बाल को भी सफ़ैद या स्याह नहीं कर सकते। चुनांचे तुम्हारा कलाम ‘हां’ की जगह हां और ‘नहीं’ की जगह नहीं हो; क्यूंके जो कुछ इस के अलावा है वो उस शैतान से है। “तुम सुन चुके हो के कहा गया था, ‘आंख के बदले आंख और दांत के बदले दांत।’ लेकिन मैं तुम से कहता हूं के बुरे इन्सान का मुक़ाबला ही मत करना। अगर कोई तुम्हारे दाएं गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा भी उस की तरफ़ फेर दे। और अगर कोई तुम पर मुक़द्दमा कर के तुम्हारा चोग़ा लेना चाहता है तो उसे कुर्ता भी दे दो। अगर कोई तुम्हें एक किलोमीटर चलने के लिये मजबूर करता है तो उस के साथ दो किलोमीटर चले जाओ। जो तुम से कुछ मांगे उसे ज़रूर दो, और जो तुम से क़र्ज़ लेना चाहता है उस से मुंह न मोड़ो। “तुम सुन चुके हो के कहा गया था, ‘अपने पड़ोसी से महब्बत रखो और अपने दुश्मन से अदावत।’ लेकिन मैं तुम से कहता हूं के अपने दुश्मनों से महब्बत रखो और जो तुम्हें सताते हैं उन के लिये दुआ करो, ताके तुम अपने आसमानी बाप के बेटे बन सको, क्यूंके वह अपना सूरज बदकार और नेकोकार दोनों पर रोशन करता है, और रास्तबाज़ और बेदीनों दोनों पर मेंह बरसाता है। अगर तुम सिर्फ़ उन ही से महब्बत रखते हो तो जो तुम से महब्बत रखते हैं, तो तुम क्या अज्र पाओगे? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा नहीं करते? और अगर तुम सिर्फ़ अपने ही भाईयों को सलाम करते हो तो तुम दूसरों से क्या ज़्यादा बेहतर करते हो? क्या ग़ैरयहूदी भी ऐसा नहीं करते? पस तुम कामिल बनो जैसा के तुम्हारा आसमानी बाप कामिल है। “ख़बरदार! अपने रास्तबाज़ी के काम लोगों को दिखाने के लिये न करो वर्ना तुम्हें अपने आसमानी बाप से कोई अज्र हासिल न होगा। “लिहाज़ा जब तुम मिस्कीनों को देते हो तो नरसिंगा न बजाओ, जैसा के रियाकार यहूदी इबादतगाहों और सड़कों पर करते हैं, ताके लोग उन की तारीफ़ करें। मैं तुम से सच कहता हूं के वह अपना पूरा अज्र पा चुके हैं। लेकिन जब तुम ज़रूरतमन्दों को ख़ैरात करो, तो जो कुछ तो अपने दाएं हाथ से करता है उसे तुम्हारा बायां हाथ न जानने पाये, ताके तुम्हारी ख़ैरात पोशीदा रहे। तब तुम्हारा आसमानी बाप जो पोशीदगी में देखता है और सब कुछ जानने वाला है, तुम्हें अज्र देगा। “जब तुम दुआ करो तो रियाकारों की मानिन्द मत बनो, जो यहूदी इबादतगाहों और बाज़ारों के मोडूं पर खड़े होकर दुआ करना पसन्द करते हैं ताके लोग उन्हें देखें। मैं तुम से सच कहता हूं के जो अज्र उन्हें मिलना चाहिये था, मिल चुका। लेकिन जब तुम दुआ करो, तो अपनी कोठरी में जाओ और दरवाज़ा बन्द कर के अपने आसमानी बाप से, जो पोशीदगी में है, दुआ करो, तब तुम्हारा आसमानी बाप जो पोशीदगी में देखता है, तुम्हें अज्र देगा। और जब तुम दुआ करो, तो ग़ैरयहूदियों की तरह बेमतलब लगातार मत बुड़बुड़ाओ। क्यूंके वह ये समझते हैं के उन के बहुत बोलने की वजह से उन की सुनी जायेगी। पस उन की मानिन्द न बनो क्यूंके तुम्हारा आसमानी बाप तुम्हारे मांगने से पहले ही तुम्हारी जरूरतों को जानता है। “चुनांचे, तुम इस तरह से दुआ किया करो: “ ‘ऐ हमारे बाप! आप जो आसमान में हैं, आप का नाम पाक मान जाये, आप की बादशाही आये, जैसे आप की मर्ज़ी आसमान पर पूरी होती है, वैसे ही ज़मीन पर भी हो। रोज़ की रोटी हमारी आज हमको दीजिये। और जिस तरह हम ने अपने क़ुसूरवारों को मुआफ़ किया है, वैसे ही आप हमारे क़ुसूरों को मुआफ़ कीजिये। और हमें आज़माइश में न पड़ने दें, बल्के उस शरीर से बचायें।’ क्यूंके बादशाही, क़ुदरत और जलाल, हमेशा आप ही की हैं। आमीन। अगर तुम दूसरों के क़ुसूर को मुआफ़ करोगे तो तुम्हारा आसमानी बाप भी तुम्हें मुआफ़ करेगा और अगर तुम दूसरों के क़ुसूर मुआफ़ न करोगे तो तुम्हारा बाप भी तुम्हारे गुनाह मुआफ़ न करेगा। “जब तुम रोज़ा रखो, तू रियाकारों की तरह अपना चेहरा उदास न बनाओ, क्यूंके वह अपना मुंह बिगाड़ते हैं ताके लोगों को मालूम हो के वह रोज़ेदार हैं। मैं तुम से सच कहता हूं के जो अज्र उन्हें मिलना चाहिये था वह उन्हें मिल चुका। लेकिन जब तुम रोज़ा रखो, तो अपना मुंह धो और सर पर तेल डालो, ताके इन्सान नहीं लेकिन तुम्हारा आसमानी बाप जो पोशीदगी में है, और पोशीदगी में होने वाले सब कामों को जानता है, तुम्हें रोज़ेदार जाने, और तुम्हें अज्र दे। “अपने लिये ज़मीन पर माल-ओ-ज़र जमा न करो जहां कीड़ा और ज़ंग लग जाता है और जहां चोर नक़ब लगा कर चुरा लेते हैं। लेकिन अपने लिये आसमान में ख़ज़ाना जमा करो जहां कीड़ा और ज़ंग नहीं लगते और न चोर नक़ब लगा कर चुराते हैं। क्यूंके जहां तुम्हारा ख़ज़ाना है वहीं तुम्हारा दिल भी लगा रहेगा। “आंख बदन का चिराग़ है। अगर तुम्हारी आंखें तनदुरुस्त हैं, तो तेरा सारा बदन भी रोशन होगा। लेकिन अगर तुम्हारी आंखें सेहत बख़्श नहीं हैं तो तुम्हारा सारा जिस्म भी तारीक होगा। पस अगर वह रोशनी जो तुम में है तारीकी बन जाये, तो वह तारीकी कैसी बड़ी होगी! “कोई ख़ादिम दो मालिकों की ख़िदमत नहीं कर सकता, या तो वह एक से नफ़रत करेगा और दूसरे से महब्बत या एक से वफ़ा करेगा और दूसरे को हक़ारत की नज़र से देखेगा। तुम ख़ुदा और दौलत दोनों की ख़िदमत नहीं कर सकते। “इसलिये मैं तुम से कहता हूं के न तो अपनी जान की फ़िक्र करो, तुम क्या खाओगे या क्या पियोगे; और न अपने बदन की के क्या पहनोगे? क्या जान ख़ुराक़ से और बदन पोशाक से बढ़कर नहीं? हवा के परिन्दों को देखो, जो न बोते हैं और न ही फ़सल को काट कर खत्तों में जमा करते हैं, फिर भी तुम्हारा आसमानी बाप उन्हें खिलाता है। क्या तुम्हारी क़दर-ओ-क़ीमत परिन्दों से भी ज़्यादा नहीं है? क्या तुम में कोई ऐसा है जो फ़िक्र कर के अपनी उम्र में एक घड़ी भी बढ़ा सके? “पोशाक के लिये क्यूं फ़िक्र करते हो? जंगली सोसन के फूलों को देखो के वह किस तरह बढ़ते हैं। वह न मेहनत करते हैं न कातते हैं। तो भी मैं तुम से कहता हूं के बादशाह सुलैमान भी अपनी सारी शान-ओ-शौकत के बावुजूद उन में से किसी की तरह मुलब्बस न थे। पस जब ख़ुदा मैदान की घास को जो आज है और कल तनूर में झोंकी जाती है, ऐसी पोशाक पहनाता है, तो ऐ कम ईमान वालो! क्या वह तुम्हें बेहतर पोशाक न पहनायेगा? लिहाज़ा फ़िक्रमन्द होकर ये न कहना, ‘हम क्या खायेंगे?’ या ‘क्या पियेंगे?’ या ‘ये के हम क्या पहनेंगे?’ क्यूंके इन चीज़ों की तलाश में तो ग़ैरयहूदी रहते हैं; और तुम्हारा आसमानी बाप तो जानता ही है के तुम्हें इन सब चीज़ों की ज़रूरत है। लेकिन पहले तुम ख़ुदा की बादशाही और रास्तबाज़ी की तलाश करो तो ये सारी चीज़ें भी तुम्हें मिल जायेंगी। पस कल की फ़िक्र न करो, क्यूंके कल का दिन अपनी फ़िक्र ख़ुद ही कर लेगा। आज के लिये आज ही का दुख काफ़ी है। “ऐबजोई न करो, ताके तुम्हारी भी ऐबजोई न हो। क्यूंके जिस तरह तुम ऐबजोई करोगे उसी तरह तुम्हारी भी ऐबजोई की जायेगी और जिस पैमाने से तुम नापते हो उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जायेगा। “तुम अपने भाई की आंख का तिनका क्यूं देखते हो जब के तुम्हारी अपनी आंख में शहतीर है जिस का तुम ख़्याल तक नहीं करते? और जब तुम्हारी अपनी ही आंख में हर वक़्त शहतीर पड़ा हुआ है तो किस मुंह से अपने भाई या बहन से कह सकते हो, ‘लाओ, मैं तुम्हारी आंख में से तिनका निकाल दूं?’ ऐ रियाकार! पहले अपनी आंख में से तो शहतीर निकाल, फिर अपने भाई या बहन की आंख में से तिनके को अच्छी तरह देखकर निकाल सकेगा। “पाक चीज़ कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे न डालो, कहीं ऐसा न हो के वह उन्हें पांव से रौंद कर पलटें और तुम्हें फाड़ डालें। “पस मैं तुम से कहता हूं, मांगो तो तुम्हें दिया जायेगा, ढूंडोगे तो पाओगे, दरवाज़ा खटखटाओगे, तो तुम्हारे लिये खोला जायेगा। क्यूंके जो मांगता है उसे मिलता है, जो ढूंडता है वह पाता है और जो खटखटाता है उस के लिये दरवाज़ा खोला जायेगा। “तुम में ऐसा कौन सा आदमी है के अगर उस का बेटा उस से रोटी मांगे तो वह उसे पत्थर दे? या मछली मांगे तो उसे सांप दे? पस जब तुम बुरे होने के बावुजूद भी, अपने बच्चों को अच्छी चीज़ें देना जानते हो, तो क्या तुम्हारा आसमानी बाप उन्हें जो उस से मांगते हैं, अच्छी चीज़ें इफ़रात से अता न फ़रमायेगा। पस जैसा तुम चाहते हो के दूसरे लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्यूंके तौरेत और नबियों की तालीमात यही है। “तंग दरवाज़े से दाख़िल हो, क्यूंके वह दरवाज़ा चौड़ा है और वह रास्ता कुशादा है जो हलाकत की तरफ़ ले जाता है और उस से दाख़िल होने वाले बहुत हैं। क्यूंके वह दरवाज़ा तंग और वह रास्ता सुकड़ा है जो ज़िन्दगी की तरफ़ ले जाता है और उस के पाने वाले थोड़े हैं। “झूटे नबियों से ख़बरदार रहो, वह तुम्हारे पास भेड़ों के लिबास में आते हैं लेकिन बातिन में फाड़ने वाले भेड़िये हैं। तुम उन के फलों से उन्हें पहचान लोगे। क्या लोग झाड़ियों से अंगूर या कांटों वाले दरख़्तों से अन्जीर तोड़ते हैं? लिहाज़ा, हर अच्छा दरख़्त अच्छा फल लेकिन हर बुरा दरख़्त बुरा फल देता है। ये मुम्किन ही नहीं के एक अच्छा दरख़्त बुरा फल लाये और बुरा दरख़्त अच्छा फल लाये। हर एक दरख़्त जो अच्छा फल नहीं लाता है, उसे काट कर आग में डाला जाता है। पस तुम झूटे नबियों को उन के फलों से पहचान लोगे। “जो मुझ से, ‘ऐ ख़ुदावन्द, ऐ ख़ुदावन्द,’ कहते हैं उन में से हर एक शख़्स आसमान की बादशाही में दाख़िल न होगा, मगर वोही जो मेरे आसमानी बाप की मर्ज़ी पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘ऐ ख़ुदावन्द! ऐ ख़ुदावन्द! क्या हम ने आप के नाम से नुबुव्वत नहीं की? और आप के नाम से बदरूहों को नहीं निकाला और आप के नाम से बहुत से मोजिज़े नहीं दिखाये?’ उस वक़्त मैं उन से साफ़-साफ़ कह दूंगा, ‘मैं तुम से कभी वाक़िफ़ न था। ऐ बदकारों! मेरे सामने से दूर हो जाओ।’ “चुनांचे जो कोई मेरी ये बातें सुनता और उन पर अमल करता है वह उस अक़्लमन्द आदमी की मानिन्द ठहरेगा जिस ने अपना घर चट्टान पर तामीर किया हो। और ज़ोर की बारिश आई और सेलाब आया और आन्धियां चलीं और उस घर से टकराईं मगर वह न गिरा क्यूंके उस की बुनियाद चट्टान पर डाली गई थी। लेकिन जो मेरी ये बातें सुनता है मगर उन पर अमल नहीं करता है, वह उस बेवक़ूफ़ इन्सान की मानिन्द है जिस ने अपना घर रेत पर बनाया। और ज़ोर की बारिश आई और सेलाब आया और आन्धियां चलीं और उस घर से टकराईं, और वह गिर पड़ा और बिलकुल बर्बाद हो गया।” जब हुज़ूर ईसा ने ये इल्म की बातें ख़त्म कीं तो हुजूम उन की तालीम से दंग रह गया, क्यूंके हुज़ूर उन्हें उन के शरीअत के आलिमों की तरह नहीं लेकिन एक साहिबे इख़्तियार की तरह तालीम दे रहे थे। हुज़ूर ईसा जब उस पहाड़ से नीचे आये तो बहुत बड़ा हुजूम उन के पीछे हो लिया। इस दौरान एक कोढ़ी ने हुज़ूर ईसा के पास आकर उन्हें सज्दा किया और कहा, “ऐ ख़ुदावन्द! अगर आप चाहें तो मुझे कोढ़ से पाक कर सकते हैं।” हुज़ूर ईसा ने हाथ बढ़ा कर उसे छुआ और फ़रमाया, “मैं चाहता हूं के तो पाक साफ़ हो जा!” और वह फ़ौरन कोढ़ से पाक साफ़ हो गया। तब हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “ख़बरदार किसी से न कहना। लेकिन जा कर अपने आप को काहिन को दिखा और जो नज़्र हज़रत मूसा ने मुक़र्रर की है उसे अदा कर ताके सब लोगों के लिये गवाही हो।” जब हुज़ूर ईसा कफ़रनहूम में दाख़िल हुए तो रोमी फ़ौज का एक अफ़सर हुज़ूर के पास आया और मिन्नत करने लगा। “ऐ ख़ुदावन्द! मेरा ख़ादिम फ़ालिज का मारा घर में बीमार पड़ा है और बड़ी तकलीफ़ में है।” हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “मैं आकर उसे शिफ़ा दूंगा।” लेकिन रोमी अफ़सर ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, मैं इस लाइक़ नहीं हूं के आप मेरी छत के नीचे आयें। लेकिन अगर आप सिर्फ़ ज़बान से कह दें तो मेरा ख़ादिम शिफ़ा पा जायेगा। क्यूंके मैं ख़ुद भी किसी के इख़्तियार में हूं, और सिपाही मेरे इख़्तियार में हैं। जब मैं एक से कहता हूं, ‘जा,’ तो वह चला जाता है; और दूसरे से ‘आ,’ तो वह आ जाता है और किसी ख़ादिम से कुछ करने को कहूं तो वह करता है।” हुज़ूर ईसा को ये सुन कर बड़ा तअज्जुब हुआ और अपने पीछे आने वाले लोगों से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, मैंने इस्राईल में भी ऐसा बड़ा ईमान नहीं पाया। मैं तुम से कहता हूं के बहुत से लोग मशरिक़ और मग़्रिब से आकर हज़रत इब्राहीम, इज़हाक़ और याक़ूब के साथ आसमान की बादशाही की ज़ियाफ़त में शरीक होंगे। मगर बादशाही के असल वारिसैन को बाहर अन्धेरे में डाल दिया जायेगा जहां वह रोते और दांत पीसते रहेंगे।” हुज़ूर ईसा ने उस अफ़सर से फ़रमाया, “जा जैसा तेरा ईमान है, तेरे लिये वैसा ही होगा।” और उसी घड़ी उस के ख़ादिम ने शिफ़ा पाई। जब हुज़ूर ईसा पतरस के घर में दाख़िल हुए तो उन्होंने पतरस की सास को तेज़ बुख़ार में बिस्तर पर पड़े देखा। हुज़ूर ने उस का हाथ छुआ और उस का बुख़ार उतर गया, और वह उठ कर उन सब की ख़िदमत में लग गई। जब शाम हुई तो लोग कई मरीज़ों को जिन में बदरूहें थीं, हुज़ूर के पास लाने लगे, और हुज़ूर ईसा ने सिर्फ़ हुक्म दे कर बदरूहों को निकाल दिया और सब मरीज़ों को शिफ़ा बख़्शी। ताके यसायाह नबी की मारिफ़त कही गई ये बात पूरी हो जाये: “उन्होंने ख़ुद हमारी कमज़ोरियों को अपने ऊपर ले लिया और हमारी बीमारीयों को अपने ऊपर उठा लिया।” जब हुज़ूर ईसा ने अपने चारों तरफ़ लोगों का बड़ा हुजूम देखा तो अपने शागिर्दों को झील के उस पार जाने का हुक्म दिया। उसी वक़्त एक शरीअत आलिम हुज़ूर के पास आकर अर्ज़ करने लगा, “ऐ उस्ताद मुहतरम, आप जहां भी जायेंगे मैं आप की पैरवी करूंगा।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “लोमड़ियों के भी भट और हवा के परिन्दों के घोंसले होते हैं, लेकिन इब्न-ए-आदम के लिये कोई जगह नहीं जहां वह अपना सर भी रख सके।” एक और शागिर्द ने हुज़ूर से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, पहले मुझे इजाज़त दें के मैं जा कर अपने बाप को दफ़न कर लूं।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “तू मेरे पीछे चल, और मुर्दों को अपने मुर्दे दफ़न करने दे।” हुज़ूर ईसा जब कश्ती पर सवार हुए तो उन के शागिर्द भी उन के साथ हो लिये। और झील में अचानक ऐसा ज़बरदस्त तूफ़ान उठा के लहरें कश्ती के ऊपर से गुज़रने लगीं, लेकिन हुज़ूर ईसा उस वक़्त सो रहे थे। तब शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा के पास आकर उन्हें जगाकर कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, हमें बचायें! हम तो हलाक हुए जा रहे हैं!” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ऐ कम ईमान वालो! तुम ख़ौफ़ज़दा क्यूं हो?” तब हुज़ूर ने उठ कर तूफ़ान और लहरों को डांटा और बड़ा अमन हो गया। और लोग तअज्जुब कर के कहने लगे, “ये किस तरह का इन्सान है के तूफ़ान और लहरें भी इस का हुक्म मानती हैं!” जब हुज़ूर ईसा झील के उस पार गदरीनियों के इलाक़े में पहुंचे तो वहां दो आदमी जिन में बदरूहें थीं, क़ब्रों से निकल कर उन्हें मिले। वह इतने ज़ालिम थे के कोई उस रास्ते से गुज़र नहीं सकता था। वह चिल्ला-चिल्ला कर कहने लगे, “ऐ ख़ुदा के बेटे, आप का हम से क्या लेना देना है? क्या आप मुक़र्रर वक़्त से पहले ही हमें अज़ाब में डालने आ गये हैं?” उन से कुछ दूर बहुत से सूअरों का एक बड़ा ग़ोल चर रहा था। पस बदरूहों ने हुज़ूर से मिन्नत कर के कहा, “अगर आप हमें निकालते हैं तो हमें सूअरों के ग़ोल में भेज दीजिये।” लिहाज़ा हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “जाओ!” और वह निकल कर सूअरों में दाख़िल हो गईं और सुअरों का सारा ग़ोल ऊंची ढलान से लपका और झील में जा गिरा और डूब मरा। सुअर चराने वाले भाग खड़े हुए और शहर में जा कर लोगों से सारा माजरा और उन बदरूहों से परेशान आदमियों का हाल बयान किया। तब शहर के सब लोग हुज़ूर ईसा से मिलने को निकले और हुज़ूर को देखते ही मिन्नत करने लगे के आप हमारी सरहद से बाहर चले जायें। हुज़ूर ईसा कश्ती में सवार होकर झील पार कर के अपने शहर में तशरीफ़ लाये। और कुछ लोग एक मफ़्लूज को जो बिछौने पर पड़ा हुआ था हुज़ूर के पास लाये। जब हुज़ूर ईसा ने उन का ईमान देखा तो उस मफ़्लूज से फ़रमाया, “बेटा, इत्मीनान रख; तेरे गुनाह मुआफ़ हुए।” इस पर बाज़ उलमा-ए-शरीअत अपने दिल में कहने लगे, “ये तो कुफ़्र बकता है।” हुज़ूर ईसा ने उन के ख़्यालात जानते हुए फ़रमाया, “तुम अपने दिलों में बुरी बातें क्यूं सोचते हो? ये कहना ज़्यादा आसान है: ‘तेरे गुनाह मुआफ़ हुए,’ या ‘ये कहना के उठ और चल फिर’? लेकिन मैं चाहता हूं के तुम्हें मालूम हो के इब्न-ए-आदम को ज़मीन पर गुनाह मुआफ़ करने का इख़्तियार है।” हुज़ूर ने मफ़्लूज से कहा, “मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपना बिछौना उठाकर अपने घर चला जा।” तब वह उठा और अपने घर चला गया। जब लोगों ने ये हुजूम देखा, तो ख़ौफ़ज़दा हो गये; और ख़ुदा की तम्जीद करने लगे, जिस ने इन्सान को ऐसा इख़्तियार बख़्शा है। वहां से आगे बढ़ने पर हुज़ूर ईसा ने मत्ती नाम के एक शख़्स को महसूल की चौकी पर बैठे देखा और हुज़ूर ने उस से फ़रमाया, “मेरे पैरोकार हो जाओ,” और हज़रत मत्ती उठे और आप के पीछे चल दिये। जब हुज़ूर ईसा हज़रत मत्ती के घर में खाना खाने बैठे तो कई महसूल लेने वाले और गुनहगार आकर हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्दों के साथ खाना खाने बैठे। फ़रीसियों ने जब ये देखा तो हुज़ूर ईसा के शागिर्दों से पूछा, “तुम्हारा उस्ताद महसूल लेने वालों और गुनहगारों के साथ क्यूं खाता है?” हुज़ूर ईसा ने ये सुन कर जवाब दिया, “बीमारों को तबीब की ज़रूरत होती है, सेहतमन्दों को नहीं। मगर तुम जा कर इस बात का मतलब दरयाफ़्त करो: ‘मैं क़ुर्बानी से ज़्यादा रहमदिली को पसन्द करता हूं।’ क्यूंके मैं रास्तबाज़ों को नहीं, लेकिन गुनहगारों को अपना पैरोकार होने के वास्ते बुलाने आया हूं।” उस वक़्त हज़रत यहया के शागिर्दों ने हुज़ूर के पास आकर पूछा, “क्या वजह है के हम और फ़रीसी तो अक्सर रोज़ा रखते हैं लेकिन आप के शागिर्द रोज़ा नहीं रखते?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या बराती दुल्हा की मौजूदगी में मातम कर सकते हैं? लेकिन वह वक़्त भी आयेगा जब दुल्हा उन से जुदा किया जायेगा; तब वह रोज़ा रखेंगे। “पुरानी पोशाक पर नये कपड़े का पैवन्द कोई नहीं लगाता क्यूंके नया कपड़ा उस पुरानी पोशाक में से कुछ खींच लेता है और पोशाक ज़्यादा फट जाती है। इसी तरह नये अंगूरी शीरे को भी पुरानी मश्कों में कोई नहीं भरता वर्ना मश्कें फट जायेंगी और अंगूरी शीरे के साथ मश्कें भी बर्बाद हो जायेंगी। लिहाज़ा नये अंगूरी शीरे को नई मश्कों ही में भरना चाहिये ताके दोनों सलामत रहें।” हुज़ूर ईसा जब ये बातें कह ही रहे थे तभी यहूदी इबादतगाह का एक रहनुमा आया और हुज़ूर को सज्दा कर के मिन्नत करने लगा, “मेरी बेटी अभी-अभी मरी है लेकिन हुज़ूर आप चल कर अपना हाथ उस पर रख दें, तो वह ज़िन्दा हो जायेगी।” हुज़ूर ईसा उठे और फ़ौरन अपने शागिर्दों के साथ उस शख़्स के साथ चल दिये। और ऐसा हुआ के एक ख़ातून ने जिसे बारह बरस से ख़ून बहने की अन्दरूनी बीमारी थी, उस ने हुज़ूर ईसा के पीछे से आकर उन की पोशाक का किनारा छुआ। क्यूंके वह अपने दिल में ये कहती थी, “अगर मैं सिर्फ़ हुज़ूर की पोशाक ही छू लूंगी तो शिफ़ा पा जाऊंगी।” हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर उसे देखा और फ़रमाया, “बेटी! इत्मीनान रख, तुम्हारे ईमान ने तुम्हें शिफ़ा बख़्शी।” और वह ख़ातून उसी घड़ी अच्छी हो गई। और जब हुज़ूर ईसा यहूदी इबादतगाह के रहनुमा के घर पहुंचे तो लोगों हुजूम को बांसुरी बजाते और मातम करते देखा। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “हट जाओ! लड़की मरी नहीं लेकिन सो रही है।” लेकिन वह हुज़ूर पर हंसने लगे। मगर जब हुजूम को वहां से निकाल दिया गया तो हुज़ूर ईसा ने अन्दर जा कर लड़की का हाथ पकड़ कर जगाया और वह उठ बैठी। इस बात की ख़बर उस तमाम इलाक़े में फैल गई। हुज़ूर ईसा जब वहां से आगे रवाना हुए तो दो अन्धे आप के पीछे ये चिल्लाते हुए आ रहे थे, “ऐ इब्न-ए-दाऊद! हम पर रहम फ़रमाईये।” और जब हुज़ूर ईसा घर में दाख़िल हुए तो वह अन्धे भी उन के पास आये और हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “क्या तुम्हें यक़ीन है के मैं तुम्हें शिफ़ा दे सकता हूं?” उन्होंने जवाब दिया, “हां ख़ुदावन्द।” तब हुज़ूर ईसा ने उन की आंखों को छुआ और फ़रमाया, “तुम्हारे ईमान के मुताबिक़ तुम्हें शिफ़ा मिले।” और उन की आंखों में रोशनी आ गई। हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीदन ख़बरदार करते हुए फ़रमाया, “देखो ये बात किसी को मालूम न होने पाये।” लेकिन उन्होंने बाहर निकल कर उस तमाम इलाक़े में हुज़ूर की शौहरत फैला दी। जब वह बाहर जा रहे थे तो लोग एक गूंगे को जिस में बदरूह का साया था, हुज़ूर ईसा के पास लाये। जब बदरूह उस में से निकाल दी गई तो गूंगा बोलने लगा। यह देखकर हुजूम को बड़ा तअज्जुब हुआ और वह कहने लगे, “ऐसा वाक़िया तो इस्राईल में पहले कभी नहीं देखा गया।” लेकिन फ़रीसियों ने कहा, “ये तो बदरूहों के रहनुमा की मदद से बदरूहों को निकालता है।” हुज़ूर ईसा सब शहरों और गांवों में जा कर उन के यहूदी इबादतगाहों में तालीम देते, और आसमानी बादशाही की ख़ुशख़बरी की मुनादी करते रहे, और लोगों की हर क़िस्म की बीमारी और कमज़ोरियों को शिफ़ा बख़्शते रहे। और जब आप ने हुजूम को देखा, तो आप को उन पर बड़ा तरस आया, क्यूंके वह लोग उन भेड़ों की मानिन्द बेबस और ख़स्तःहाल थे जिन का कोई गल्लेबान न हो। तब हुज़ूर ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “फ़सल तो बहुत है, लेकिन मज़दूर कम हैं। इसलिये फ़सल के ख़ुदावन्द से इल्तिजा करो के, वह अपनी फ़सल काटने के लिये मज़दूर भेज दे।” फिर हुज़ूर ईसा ने अपने बारह शागिर्दों को पास बुलाया और उन्हें बदरूहों को निकालने और हर तरह की बीमारी और तकलीफ़ को दूर करने का इख़्तियार अता फ़रमाया। और बारह रसूलों के नाम ये हैं: पहला शमऊन जो पतरस के नाम से भी जाने जाते हैं और फिर उन का भाई अन्द्रियास; ज़ब्दी का बेटा याक़ूब और उन का भाई यूहन्ना; फ़िलिप्पुस और बरतुल्माई, तोमा और मत्ती महसूल लेने वाला; हलफ़ई का बेटा याक़ूब और तद्दी; शमऊन क़नानी और यहूदाह इस्करियोती, जिस ने हुज़ूर से दग़ाबाज़ी भी की थी। हुज़ूर ईसा ने बारह को इन हिदायात के साथ रवाना किया: “ग़ैरयहूदियों के दरमियान मत जाना और न सामरियों के किसी शहर में दाख़िल होना। लेकिन इस्राईल के घराने की खोई हुई भेड़ों के पास जाना और चलते-चलते, इस पैग़ाम की मुनादी करना: ‘आसमान की बादशाही नज़दीक आ गई है।’ बीमारों को शिफ़ा देना, मुर्दों को ज़िन्दा करना, और कोढ़ियों को पाक साफ़ करना, बदरूहों को निकालना। तुम ने मुफ़्त में पाया है; मुफ़्त ही देना। “अपने कमरबन्द में न सोना न चांदी न ही पैसे रखना, न रास्ते के लिये थैला लेना न दो-दो कुर्ते, न जूते और न लाठी क्यूंके मज़दूर अपनी मज़दूरी का हक़्दार है। जब तुम किसी शहर या गांव में दाख़िल हो तो, किसी ऐसे शख़्स का पता करो जो एतबार के लाइक़ हो और जब तक तुम्हारे रुख़्सत होने का वक़्त न आ जाये, उसी घर में ठहरे रहो। किसी घर में दाख़िल होते वक़्त, सलाम करो। अगर वह घर तुम्हारी सलामती के लाइक़ होगा तो तुम्हारी सलामती की बरकत उस तक पहुंचेगी, अगर लाइक़ न होगा तो तुम्हारी सलामती की बरकत तुम्हारे पास वापस आ जायेगी। अगर कोई तुम्हें क़बूल न करे और तुम्हारी बात सुनना न चाहें तो उस घर या शहर को छोड़ते वक़्त अपने पांव की गर्द भी वहां झाड़ देना। मैं तुम से सच कहता हूं के अदालत के दिन उस शहर की निस्बत सदूम और अमूरा के इलाक़े का हाल ज़्यादा बर्दाश्त के लाइक़ होगा। “देखो, मैं तुम्हें गोया भेड़ों को भेड़ियों के दरमियान भेज रहा हूं। लिहाज़ा तुम सांपों की तरह होशयार और कबूतरों की मानिन्द मासूम बनो। मगर ख़बरदार रहना; क्यूंके वह तुम्हें पकड़ कर अदालतों के हवाले करेंगे और तुम यहूदी इबादतगाहों में कोड़ों से पीटे जाओगे। और तुम मेरी वजह से हाकिमों और बादशाहों के सामने हाज़िर किये जाओगे ताके उन के और ग़ैरयहूदियों के दरमियान मेरी गवाही दे सको। लेकिन जब वह तुम्हें गिरिफ़्तार करें तो फ़िक्र न करना के हम क्या कहेंगे और कैसे कहेंगे क्यूंके जो कुछ कहना होगा उसी घड़ी तुम्हें बता दिया जायेगा। इसलिये के बोलने वाले तुम नहीं बल्के तुम्हारे आसमानी बाप का रूह होगा जो तुम्हारे ज़रीये कलाम करेगा। “भाई अपने भाई को और बाप अपने बेटे को क़त्ल के लिये हवाले करेगा, और बच्चे अपने वालिदैन के ख़िलाफ़ खड़े होकर उन्हें क़त्ल करवा डालेंगे। और मेरे नाम के सबब से लोग तुम से दुश्मनी रखेंगे, लेकिन जो आख़िर तक बर्दाश्त करेगा वह नजात पायेगा। जब लोग तुम्हें एक शहर में सतायेंगे तो दूसरे शहर को भाग जाना। मैं तुम से सच कहता हूं के तुम्हारे इस्राईल के सब शहरों में सफ़र ख़त्म करने से पहले ही इब्न-ए-आदम दुबारा आ जायेगा। “शागिर्द अपने उस्ताद से बड़ा नहीं होता और न ही ख़ादिम अपने आक़ा से। शागिर्द के लिये यही काफ़ी है के वह अपने उस्ताद की मानिन्द हो जाये; और ख़ादिम अपने आक़ा की मानिन्द हो जाये। अगर उन्होंने घर के मालिक को बालज़बूल कहा है तो उस के घराने के लोगों को और क्या कुछ बुरा भला क्यूं न कहेंगे! “पस तुम उन से मत डरो, क्यूंके ऐसी कोई चीज़ ढकी हुई नहीं है जो खोली न जायेगी या कोई ऐसा राज़ है उस का पर्दा फ़ाश न किया जायेगा। जो कुछ मैं तुम से अन्धेरे में कहता हूं, तुम उसे दिन की रोशनी में कहो; और जो कुछ तुम्हारे कानों में चुपके से कहा जाता है तुम उस का एलान छतों से करो। उन से मत डरो जो बदन को तो हलाक कर सकते हैं लेकिन रूह को नहीं, मगर उस से डरो जो बदन और रूह दोनों को जहन्नुम में हलाक कर सकता है। क्या एक सिक्‍के में दो गौरय्यां नहीं बिकतीं? लेकिन उन में से एक भी तुम्हारे आसमानी बाप की मर्ज़ी के बग़ैर ज़मीन पर नहीं गिर सकती। और यहां तक के तुम्हारे सर के सभी बाल भी गिने हुए हैं। लिहाज़ा डरो मत; तुम्हारी क़ीमत तो बहुत सी गौरय्यों से भी ज़्यादा है। “पस जो कोई लोगों के सामने मेरा इक़रार करता है, तो मैं भी अपने आसमानी बाप के सामने उस का इक़रार करूंगा। लेकिन जो कोई आदमियों के सामने मेरा इन्कार करता है, तो मैं भी अपने आसमानी बाप के सामने उस का इन्कार करूंगा। “ये न समझो के मैं ज़मीन पर सुलह कराने आया हूं, सुलह कराने नहीं लेकिन तलवार चलवाने आया हूं। क्यूंके मैं इसलिये आया हूं के “ ‘बेटे को उस के बाप के ख़िलाफ़, और बेटी को उस की मां के ख़िलाफ़, और बहू को उस की सास के ख़िलाफ़ कर दूं। आदमी के दुश्मन उस के अपने घर ही के लोग होंगे।’ “जो कोई अपने बाप या अपनी मां को मुझ से ज़्यादा प्यार करता है वह मेरे लाइक़ नहीं; और जो कोई अपने बेटे या बेटी को मुझ से ज़्यादा प्यार करता है वह मेरे लाइक़ नहीं। जो कोई अपनी सलीब उठाकर मेरे पीछे नहीं चलता, वह मेरे लाइक़ नहीं। जो कोई अपनी जान को अज़ीज़ रखता है, वह उसे खोयेगा, और जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खो देता है, वह उसे महफ़ूज़ रखेगा। “जो तुम्हें क़बूल करता है वह मुझे क़बूल करता है, और जो मुझे क़बूल करता है वह मेरे भेजने वाले को क़बूल करता है। जो नबी को नबी समझ कर क़बूल करता है वह नबी का अज्र पायेगा और जो किसी रास्तबाज़ को रास्तबाज़ समझ कर क़बूल करता है वह रास्तबाज़ का अज्र पायेगा। और जो इन मामूली बन्दों में से किसी एक को मेरा शागिर्द जान कर, एक प्याला ठंडा पानी ही पिलाता है तो मैं तुम से सच कहता हूं के वह अपना अज्र हरगिज़ न खोयेगा।” जब हुज़ूर ईसा अपने बारह शागिर्दों को हिदायत दे चुके तो वहां से सूबे गलील के उन शहरों को रवाना हुए ताके उन में भी तालीम दें और मुनादी करें। हज़रत यहया ने, क़ैदख़ाने में, ख़ुदावन्द अलमसीह के कामों के बारे में सुना तो, उन्होंने अपने शागिर्दों को तहक़ीक़ात करने भेजा “क्या आने वाले ख़ुदावन्द अलमसीह आप ही हैं, या हम किसी और की राह देखें?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया के, “जो कुछ तुम देखते और सुनते हो, जा कर हज़रत यहया से बयान कर दो: के अन्धे देखते हैं, लंगड़े चलते हैं, और कोढ़ी पाक साफ़ किये जाते हैं, बहरे सुनते हैं, मुर्दे ज़िन्दा किये जाते हैं और ग़रीबों को ख़ुशख़बरी सुनाई जाती है। मुबारक है वह जो मेरे सबब से ठोकर न खाये।” जब हज़रत यहया के शागिर्द वहां से जा ही रहे थे, हुज़ूर ईसा हज़रत यहया के बारे में हुजूम से कहने लगे: “तुम ब्याबान में क्या देखने गये थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकंडे को? अगर नहीं, तो फिर क्या देखने गये थे? नफ़ीस कपड़े पहने हुए किसी शख़्स को? उन्हें, जो नफ़ीस कपड़े पहनते हैं वह शाही महलों में रहते हैं। आख़िर तुम क्या देखने गये थे? क्या किसी नबी को? हां, मैं तुम्हें बताता हूं के नबी से भी बड़े को। ये वोही है जिस की बाबत सहीफ़े में लिख्खा है: “ ‘देख! मैं अपना पैग़म्बर तेरे आगे भेज रहा हूं, जो तेरे आगे तेरी राह तय्यार करेगा।’ मैं तुम से सच कहता हूं के जो औरतों से पैदा हुए हैं उन में हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले से बड़ा कोई नहीं हुआ, लेकिन जो आसमान की बादशाही में सब से छोटा है वह हज़रत यहया से भी बड़ा है। हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले के दिनों से अब तक, ख़ुदा की बादशाही क़ुव्वत के साथ आगे बढ़ रहा है और ज़ोरआवर शख़्स उस पर हमला कर रहे हैं। क्यूंके सारे नबियों और तौरेत ने हज़रत यहया तक पेशीनगोई की। अगर तुम चाहो तो मानो; हज़रत एलियाह जो आने वाले थे वह यहया ही हैं। जिस के पास सुनने के कान हों वह सुन ले। “मैं इस ज़माने के लोगों की किस से तश्बीह दूं? वह उन लड़कों की मानिन्द हैं जो बाज़ारों में बैठे हुए अपने हमजोलियों को पुकार कर कहते हैं: “ ‘हम ने तुम्हारे लिये बांसुरी बजाई, लेकिन तुम न नाचे; हम ने मर्सिया पढ़ा, तब भी तुम ने मातम न किया।’ क्यूंके हज़रत यहया न खाते थे और न पीते थे, और लोग कहते हैं, ‘उस में बदरूह है।’ इब्न-ए-आदम खाते पीते आया, और वह कहते हैं देखो, ‘ये खाऊ और शराबी आदमी, महसूल लेने वालों और गुनहगारों का यार।’ मगर हिक्मत अपने कामों से रास्त ठहरती है।” तब हुज़ूर ईसा उन शहरों को मलामत करने लगे जिन में हुज़ूर ने अपने सब से ज़्यादा मोजिज़े दिखाये थे लेकिन उन्होंने तौबा न की थी। “ऐ ख़ुराज़ीन! तुझ पर अफ़सोस, ऐ बैतसैदा! तुझ पर अफ़सोस, क्यूंके जो मोजिज़े तुम्हारे दरमियान दिखाये गये अगर सूर और सैदा में दिखाये जाते, तो वह टाट ओढ़ कर और सर पर राख डाल कर कब के तौबा कर चुके होते। लेकिन मैं तुम से कहता हूं के अदालत के दिन सूर और सैदा का हाल तुम्हारे हाल से ज़्यादा क़ाबिल-ए-बर्दाश्त होगा। और तू ऐ कफ़रनहूम, क्या तू आसमान तक बुलन्द किया जायेगा? हरगिज़ नहीं, बल्के तू आलमे-अर्वाह में उतार दिया जायेगा। क्यूंके ये मोजिज़े जो तुझ में दिखाये गये अगर सदूम में दिखाये जाते तो वह आज के दिन तक क़ाइम रहता। लेकिन मैं तुम से कहता हूं के अदालत के दिन सदूम का हाल तुम्हारे हाल से ज़्यादा क़ाबिल-ए-बर्दाश्त होगा।” उसी घड़ी हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ बाप! आसमान और ज़मीन के ख़ुदावन्द! मैं आप की हम्द करता हूं के आप ने ये बातें आलिमों और दानिश्वरों से पोशीदा रख्खीं, और बच्चों पर ज़ाहिर कीं। हां, ऐ बाप! क्यूंके आप की ख़ुशी इसी में थी। “सारी चीज़ें मेरे बाप की जानिब से मेरे सुपुर्द कर दी गई हैं। और सिवा बाप के बेटे को कोई नहीं जानता है, और सिवा बेटे के कोई नहीं जानता के बाप कौन है और सिवाए उस शख़्स के जिस पर बेटा बाप को ज़ाहिर करने का इरादा करे। “ऐ मेहनत कशो और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ और मैं तुम्हें आराम बख़्शूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो और मुझ से सीखो, क्यूंके मैं हलीम हूं और दिल का फ़रोतन और तुम्हारी रूहों को आराम मिलेगा। क्यूंके मेरा जूआ आसान और मेरा बोझ हल्का है।” उस वक़्त सबत के दिन हुज़ूर ईसा खेतों में से होकर जा रहे थे। आप के शागिर्द भूके थे और वह बालें तोड़-तोड़ कर खाने लगे। जब फ़रीसियों ने ये देखा तो हुज़ूर से कहने लगे, “देख! तेरे शागिर्द वह काम कर रहे हैं जो सबत के दिन करना जायज़ नहीं।” हुज़ूर ने उन्हें जवाब दिया, “क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा के जब हज़रत दाऊद और उन के साथी भूके थे तो उन्होंने क्या किया? हज़रत दाऊद ख़ुदा के घर में दाख़िल हुए और नज़्र की रोटियां ले कर ख़ुद भी खाईं और अपने साथियों को भी ये रोटियां खाने को दीं, जिसे काहिनों के सिवाए किसी और को खाना शरीअत के मुताबिक़ रवा नहीं था। या क्या तुम ने तौरेत में ये नहीं पढ़ा के काहिन सबत के दिन बैतुलमुक़द्दस में सबत की बेहुरमती करने के बावुजूद बेक़ुसूर रहते हैं? मैं तुम से कहता हूं के यहां वह हाज़िर है जो बैतुलमुक़द्दस से भी बड़ा है। अगर तुम इन आयात का मतलब जानते, ‘मैं क़ुर्बानी नहीं लेकिन रहमदिली को पसन्द करता हूं,’ तो तुम बेक़ुसूरों को क़ुसूरवार न ठहराते। क्यूंके इब्न-ए-आदम सबत का भी मालिक है।” वहां से रवाना होकर हुज़ूर उन की यहूदी इबादतगाह में दाख़िल हुए। वहां एक आदमी था जिस का एक हाथ सूखा हुआ था। उन्होंने हुज़ूर ईसा पर इल्ज़ाम लगाने के इरादे से ये पूछा, “क्या सबत के दिन शिफ़ा देना जायज़ है?” हुज़ूर ने उन से फ़रमाया, “अगर तुम में से किसी के पास एक भेड़ हो और सबत के दिन वह गढ़े में गिर जाये तो क्या तुम उसे पकड़ कर बाहर न निकालोगे? पस इन्सान की क़दर तो भेड़ से कहीं ज़्यादा है! इसलिये सबत के दिन नेकी करना जायज़ है।” तब हुज़ूर ने उस आदमी से फ़रमाया, “अपना हाथ बढ़ा।” उस ने बढ़ाया और वह उस के दूसरे हाथ की तरह बिलकुल ठीक हो गया। मगर फ़रीसी बाहर जा कर हुज़ूर ईसा को हलाक करने की साज़िश करने लगे। जब हुज़ूर ईसा को ये मालूम हुआ तो वह उस जगह से रवाना हुए। और एक बहुत बड़ा हुजूम भी आप के पीछे चल रहा था और हुज़ूर ने उन में से सभी बीमारों को शिफ़ा बख़्शी। और हुज़ूर ने उन्हें ताकीद की के इस के बारे में दूसरों से बयान न करना। ताके यसायाह नबी की मारिफ़त कही गई ये बात पूरी हो जाये: “ये मेरा ख़ादिम है जिसे मैंने चुन है, मेरा महबूब है जिस से मेरा दिल ख़ुश है; मैं अपनी रूह उस पर नाज़िल करूंगा, और वह ग़ैरयहूदियों में इन्साफ़ का एलान करेगा। वह न तो झगड़ा करेगा न शोर मचाएगा; और राहों में कोई भी उस की आवाज़ न सुनेगा। वह कुचले हुए सरकंडे को न तोड़ेगा, न टिमटिमाते हुए दिये को बुझायेगा, जब तक के इन्साफ़ को फ़तह तक न पहुंचा दे। और ग़ैरयहूदियों की उम्मीद उस के नाम में होगी।” तब लोग एक अन्धे और गूंगे आदमी को जिस में बदरूह थी, हुज़ूर ईसा के पास लाये और हुज़ूर ने उसे अच्छा कर दिया। चुनांचे वह देखने और बोलने लगा। और सब लोग हैरान होकर कहने लगे, “कहीं ये इब्न-ए-दाऊद तो नहीं है?” लेकिन जब फ़रीसियों ने ये बात सुनी तो कहा, “ये बदरूहों के रहनुमा बालज़बूल की मदद से बदरूहों को निकालता है।” हुज़ूर ईसा ने उन के ख़्यालात जान कर उन से फ़रमाया, “अगर किसी सल्तनत में फूट पड़ जाये तो वह मिट जाती है, और जिस शहर या घर में फूट पड़ जाये तो वह भी क़ाइम नहीं रहेगा। अगर शैतान ही शैतान को बाहर निकालने लगे तो वह आप ही अपना मुख़ालिफ़ हो जायेगा, फिर उस की सल्तनत कैसे क़ाइम रह सकती है? अगर मैं बालज़बूल की मदद से बदरूहों को निकालता हूं तो तुम्हारे शागिर्द उन्हें किस की मदद से निकालते हैं? पस वोही तुम्हारे मुन्सिफ़ होंगे। लेकिन अगर मैं ख़ुदा के रूह की मदद से बदरूहों को निकालता हूं तो ख़ुदा की बादशाही तुम्हारे दरमियान आ पहुंची। “या कैसे, ये मुम्किन हो सकता है के कोई किसी ज़ोरआवर शख़्स के घर में घुस कर उस का माल-ओ-अस्बाब लूट ले? जब तक के पहले उस ज़ोरआवर शख़्स को बांध न ले? तभी वह उस का घर लूट सकता है। “जो मेरे साथ नहीं वह मेरा मुख़ालिफ़ है और जो मेरे साथ जमा नहीं करता, वह बिखेरता है। इसलिये मैं तुम से कहता हूं के आदमियों का हर गुनाह और कुफ़्र तो मुआफ़ किया जायेगा लेकिन जो पाक रूह के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकेगा वह हरगिज़ न बख़्शा जायेगा। जो कोई इब्न-ए-आदम के ख़िलाफ़ कुछ कहेगा तो उसे मुआफ़ कर दिया जायेगा लेकिन जो पाक रूह के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकेगा तो उसे न तो इस दुनिया में और न आने वाली दुनिया में बख़्शा जायेगा। “अगर दरख़्त अच्छा है तो उस का फल भी अच्छा ही होगा और अगर दरख़्त अच्छा नहीं होगा तो उस का फल भी अच्छा नहीं होगा, क्यूंके दरख़्त अपने फल से पहचाना जाता है। ऐ ज़हरीले सांप के बच्चो! तुम बुरे होकर कोई अच्छी बात कैसे कह सकते हो? क्यूंके जो दिल में भरा होता है वोही ज़बान पर आता है। अच्छा आदमी अपने अन्दर के अच्छे ख़ज़ाने से अच्छी चीज़ें बाहर निकालता है और बुरा आदमी अपने अन्दर के बुरे ख़ज़ाने से बुरी चीज़ें बाहर लाता है। लिहाज़ा मैं तुम से कहता हूं के इन्साफ़ के दिन लोगों को अपनी कही हुई हर बेफ़ुज़ूल बातों का हिसाब देना होगा। क्यूंके तुम अपनी बातों के बाइस रास्तबाज़ या क़ुसूरवार ठहराये जाओगे।” तब बाज़ फ़रीसी और शरीअत के उलमा ने कहा, “ऐ उस्ताद मुहतरम! हम आप से कोई इलाही निशान देखना चाहते हैं।” लेकिन हुज़ूर ने जवाब दिया, “इस ज़माने के बदकार और ज़िनाकार लोग निशान देखना चाहते हैं! मगर उन्हें हज़रत यूनुस नबी के निशान के सिवा कोई और इलाही निशान न दिया जायेगा। क्यूंके जिस तरह हज़रत यूनुस तीन दिन और तीन रात भारी भरकम मछली के पेट में रहे, उसी तरह इब्न-ए-आदम भी तीन दिन और तीन रात ज़मीन के अन्दर रहेगा। नीनवे के लोग अदालत के दिन इस ज़माने के लोगों के साथ खड़े कर उन्हें मुजरिम ठहरायेंगे, इसलिये के उन्होंने हज़रत यूनुस की मुनादी की वजह से तौबा कर ली थी और देखो! यहां वह मौजूद है जो यूनुस से भी बड़ा है। जुनूब की मलिका अदालत के दिन इस ज़माने के लोगों के साथ खड़ी होकर उन्हें मुजरिम ठहरायेगी क्यूंके वह बड़ी दूर से हज़रत सुलैमान की हिक्मत सुनने के लिये आई थी और देखो यहां हज़रत सुलैमान से भी बड़ा मौजूद है। “जब किसी आदमी में से बदरूह निकल जाती है तो वह सूखे मक़ामों में जा कर आराम ढूंडती है और जब नहीं पाती। तो कहती है, ‘मैं अपने उसी घर में फिर वापस चली जाऊंगी जहां से मैं निकली थी।’ और वापस आकर उसे साफ़ सुथरा और आरास्ता पाती है। तब वह जा कर अपने से भी बद्तर अपने साथ सात और बदरूहों को साथ ले आती है और वह अन्दर जा कर उस में रहने लगती हैं। और उस आदमी की आख़िरी हालत पहले से भी ज़्यादा बुरी हो जाती है। इस ज़माने के बुरे लोगों का हाल भी ऐसा ही होगा।” हुज़ूर ईसा हुजूम से अभी बात कर ही रहे थे के हुज़ूर की मां और उन के भाई उन से मुलाक़ात करने के लिये वहां पहुंचे और बाहर खड़े हुए थे। किसी ने हुज़ूर को ख़बर दी के देखिये, “आप की मां और आप के भाई बाहर खड़े हैं और आप से मुलाक़ात करना चाहते हैं।” हुज़ूर ने ख़बर लाने वाले से फ़रमाया, “कौन है मेरी मां और कौन हैं मेरा भाई?” तब हुज़ूर ने अपने शागिर्दों की तरफ़ इशारा कर के फ़रमाया, “देखो! ये मेरी मां और मेरे भाई हैं। क्यूंके जो कोई मेरे आसमानी बाप की मर्ज़ी पर चले वोही मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी मां है।” उसी दिन हुज़ूर ईसा घर से बाहर निकल कर झील के किनारे जा बैठे। हुज़ूर के चारों तरफ़ लोगों की इतना हुजूम जमा हो गया के हुज़ूर ईसा एक कश्ती में जा बैठे और सारा हुजूम किनारे पर ही खड़ा रहा। तब हुज़ूर उन से तम्सीलों में बहुत सी बातें यूं कहने लगे: “एक बीज बोने वाला बीज बोने निकला। बोते वक़्त कुछ बीज, राह के किनारे, गिरे और परिन्दों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ पथरीली ज़मीन पर गिरे जहां मिट्टी कम थी। चूंके मिट्टी गहरी न थी, वह जल्द ही उग आये। लेकिन जब सूरज निकला, तो जल गये और जड़ न पकड़ने के बाइस सूख गये। कुछ बीज झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने फैल कर उन्हें दबा लिया। लेकिन कुछ अच्छी ज़मीन में गिरे और फल लाये, कुछ सौ गुना, कुछ साठ गुना, कुछ तीस गुना। जिस के पास सुनने के कान हों वह सुन ले।” तब शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा के पास आकर पूछा, “आप लोगों से तम्सीलों में बातें क्यूं करते हैं?” हुज़ूर ने जवाब दिया, “तुम्हें तो आसमान की बादशाही के राज़ों समझने की क़ाबिलीयत दी गई है, लेकिन उन्हें नहीं गई है।” क्यूंके जिस के पास है उसे और भी दिया जायेगा और उस के पास इफ़रात से होगा लेकिन जिस के पास नहीं है, उस से वह भी जो उस के पास है, ले लिया जायेगा। मैं उन से तम्सीलों में इसलिये बात करता हूं: “क्यूंके वह देखते हुए भी, कुछ नहीं देखते; और सुनते हुए भी, कुछ नहीं समझते।” यसायाह नबी की ये पेशीनगोई उन के हक़ में पूरी होती है: “ ‘तुम सुनते तो रहोगे लेकिन समझोगे नहीं; देखते रहोगे लेकिन पहचान न पाओगे। क्यूंके इस क़ौम के दिल शिकस्ता हो गये हैं; वह ऊंचा सुनने लगे हैं, और उन्होंने अपनी आंखें बन्द कर रख्खी हैं। कहीं ऐसा न हो के उन की आंखें देख लें, और उन के कान सुन लें, और उन के दिल समझ लें, और वह मेरी तरफ़ फिरें, और मैं उन्हें शिफ़ा बख़्शूं।’ लेकिन तुम्हारी आंखें मुबारक हैं क्यूंके वह देखती हैं और तुम्हारे कान मुबारक हैं क्यूंके वह सुनते हैं। क्यूंके मैं तुम से सच कहता हूं के बहुत से नबियों और रास्तबाज़ों यह आरज़ू थी के जो तुम देखते हो वह भी देखें मगर न देख सके और जो तुम सुनते हो सुनें, मगर न सुन सके। “अब बीज बोने वाले की तम्सील के मानी सुनो: जब कोई आसमानी बादशाही का पैग़ाम सुनता है लेकिन समझता नहीं तो जो बीज उस के दिल में बोया गया था, शैतान आता है और उसे छीन ले जाता है। ये वोही बीज है जो राह के किनारे बोया गया था। और जो बीज पथरीली ज़मीन पर गिरा, ये उस शख़्स की मानिन्द है जो कलाम को सुनते ही उसे ख़ुशी से क़बूल कर लेता है। लेकिन वह उस के अन्दर जड़ नहीं पकड़ पाता और थोड़े दिनों तक ही क़ाइम रह पाता है। क्यूंके जब कलाम के सबब से ज़ुल्म या मुसीबत आती है तो वह फ़ौरन गिर पड़ता है। और झाड़ियों में गिरने वाले बीज से मुराद वह हैं जो कलाम को सुनते तो हैं लेकिन दुनिया की फ़िक्र और दौलत का फ़रेब उसे दबा देते हैं और वह फल नहीं ला पाता है। लेकिन अच्छी ज़मीन में बोए गये बीज, वह लोग हैं जो कलाम को सुनते और समझते हैं और फल लाते हैं, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना और कोई तीस गुना।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें एक और तम्सील सुनाई: “आसमान की बादशाही उस शख़्स की मानिन्द है जिस ने अपने खेत में अच्छा बीज बोया। लेकिन जब लोग सो रहे थे तो उस का दुश्मन आया और गेहूं में ज़हरीली बूटीयों का बीज बो गया। जब पत्तियां निकलें और बालें आयें तो वह ज़हरीली बूटीयां भी नमूदार हो गईं। “मालिक के ख़ादिमो ने आकर उस से कहा, ‘हुज़ूर, क्या आप ने अपने खेत में अच्छा बीज नहीं बोया था? फिर ये ज़हरीली बूटीयां कहां से आ गईं?’ “मालिक ने जवाब दिया, ‘ये किसी दुश्मन का काम है।’ “तब ख़ादिमो ने मालिक से पूछा, ‘क्या आप चाहते हैं के हम जा कर उन्हें उखाड़ फेकें?’ “लेकिन आप ने फ़रमाया नहीं, ‘कहीं ऐसा न हो के उन्हें ज़हरीली बूटीयां उखाड़ते वक़्त तुम गेहूं को भी नुक़्सान पहुंचा बैठो। कटाई तक दोनों को इकट्-ठा बढ़ने दो और कटाई के वक़्त में कटाई करने वालों से कह दूंगा के पहले ज़हरीली बूटीयों को जमा करो और जलाने के लिये उन के गट्-ठे बांध लो; और गेहूं को मेरे खत्ते में जमा कर दो।’ ” हुज़ूर ने उन्हें एक और तम्सील सुनाई: “आसमान की बादशाही राई के दाने की मानिन्द है, जिसे एक आदमी ने लिया और अपने खेत में बो दिया। हालांके ये सब बीजों में सब से छोटा होता है मगर जब बढ़ता है तो, बाग़ीचे के पौदों में सब से बड़ा हो जाता है और गोया ऐसा दरख़्त बन जाता है के हवा के परिन्दे आकर उस की डालियों पर बसेरा करने लगते हैं।” हुज़ूर ने उन्हें एक और तम्सील सुनाई: “आसमान की बादशाही ख़मीर की मानिन्द है जिसे एक ख़ातून ने ले कर 27 किलो आटे में मिला दिया और यहां तक के सारा आटा ख़मीर हो गया।” ये सारी बातें हुज़ूर ईसा ने हुजूम से तम्सीलों में कहीं; और बग़ैर तम्सील के वह उन से कुछ न कहते थे। ताके जो बात नबी की मारिफ़त कही गई थी वह पूरी हो जाये: “मैं तम्सीलों के लिये अपना मुंह खोलूंगा, और वह बातें बताऊंगा जो बिना-ए-आलम के वक़्त से पोशीदा रही हैं।” तब हुज़ूर ईसा हुजूम से जुदा होकर घर के अन्दर चले गये और हुज़ूर के शागिर्द उन के पास आकर कहने लगे, “हमें ज़हरीली बूटीयों की तम्सील का मतलब समझा दीजिये।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो अच्छा बीज बोता है वह इब्न-ए-आदम है। खेत ये दुनिया है और अच्छे बीज से मुराद है आसमानी बादशाही के फ़र्ज़न्द, ज़हरीली बूटीयां शैतान के फ़र्ज़न्द हैं। और दुश्मन जिस ने उन्हें बोया, वह शैतान है। कटाई के मानी है दुनिया का आख़िर और कटाई करने वाले फ़रिश्ते हैं। “जिस तरह ज़हरीली बूटीयां जमा की जाती हैं और आग में जलायी जाती हैं, उसी तरह दुनिया के आख़िर में होगा। इब्न-ए-आदम अपने फ़रिश्तों को भेजेगा और वह उस की बादशाही में से सभी ठोकर खिलाने वाली चीज़ों और बदकारों को जमा कर लेंगे। और उन्हें आग की भट्टी में फेंक देंगे, जहां रोना और दांत पीसना जारी रहेगा। उस वक़्त रास्तबाज़ अपने बाप की बादशाही में सूरज की मानिन्द चमकेंगे। जिस के सुनने के कान हों वह सुन ले। “आसमान की बादशाही किसी खेत में छुपे हुए उस ख़ज़ाने की मानिन्द है जिसे किसी शख़्स ने पा कर फिर से खेत में छुपा दिया फिर ख़ुशी के मारे जा कर अपना सब कुछ बेच कर उस खेत को ख़रीद लिया। “फिर आसमान की बादशाही उस सौदागर की मानिन्द है जो उम्दा मोतीयों की तलाश में था। जब उसे एक बेशक़ीमती मोती मिला तो उस ने जा कर अपना सब कुछ बेच दिया और उसे ख़रीद लिया। “फिर आसमान की बादशाही उस बड़े जाल की मानिन्द है जो झील में डाला गया और हर क़िस्म की मछलियां समेट लाया। और जब भर गया तो माहीगीर उसे किनारे पर खींच लाये; और बैठ कर अच्छी-अच्छी मछलियों को टोकरों में जमा कर लिया और जो ख़राब थीं उन्हें फेंक दिया। दुनिया के आख़िर में भी ऐसा ही होगा। फ़रिश्ते आयेंगे और बदकारों को रास्तबाज़ों से जुदा करेंगे। और उन्हें आग की भट्टी में फेंक देंगे, जहां रोना और दांत पीसना जारी रहेगा। “हुज़ूर ईसा ने पूछा, क्या तुम ये सब बातें समझ गये?” उन्होंने जवाब दिया, “जी हां।” तब हुज़ूर ने उन से फ़रमाया, “शरीअत का हर आलिम जो आसमानी बादशाही का शागिर्द बना है, वह उस घर के मालिक की मानिन्द है जो अपने ज़ख़ीरे से नई और पुरानी, दोनों चीज़ें निकालता है।” जब हुज़ूर ईसा ये तम्सीलें सुना चुके तो वहां से रवाना हुए। और अपने शहर में वापस आकर वहां के यहूदी इबादतगाह में तालीम देने लगे, और लोग हुज़ूर की तालीम सुन कर हैरान हुए। “और कहने लगे ये हिक्मत और मोजिज़े इस शख़्स को कहां से हासिल हुए? क्या ये बढ़ई का बेटा नहीं? उन्होंने सवाल किया, क्या इस की मां का नाम मरियम नहीं और क्या याक़ूब, यूसुफ़, शमऊन और यहूदाह इस के भाई नहीं? और क्या इस की सब बहनें हमारे दरमियान नहीं रहतीं? फिर इसे ये सब कैसे हासिल हो गया?” फिर उन्होंने उन बातों के सबब से ठोकर खाई। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “नबी की बेक़द्री उस के अपने शहर और घर के सिवा और कहीं नहीं होती है।” चुनांचे हुज़ूर ने उन की बेएतक़ादी के सबब से वहां ज़्यादा मोजिज़े नहीं दिखाये। उस वक़्त हेरोदेस ने जो मुल्क के चौथे हिस्से पर हुकूमत करता था हुज़ूर ईसा की शौहरत सुनी, और अपने ख़ादिमो से फ़रमाया, “ये हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले; जो मुर्दों में से जी उठे हैं! और इसीलिये तो उन में मोजिज़े दिखाने की क़ुदरत है।” असल में हेरोदेस ने हज़रत यहया को अपने भाई फ़िलिप्पुस की बीवी, हेरोदियास की वजह से पकड़वा कर बंधवाया और क़ैदख़ाने में डाल दिया था। क्यूंके हज़रत यहया हेरोदेस से बार-बार कह रहे थे के: “तुम्हें हेरोदियास को अपनी बीवी बना कर रखना जायज़ नहीं।” और हेरोदेस, हज़रत यहया को क़त्ल करना चाहता था लेकिन अवाम से डरता था क्यूंके वह हज़रत यहया को नबी मानते थे। हेरोदेस की सालगिरह के जश्न में हेरोदियास की बेटी ने मेहमानों के सामने नाच कर हेरोदेस को बहुत ख़ुश किया और हेरोदेस ने क़सम खाकर उस से वादा किया के तू जो चाहे मांग ले, मैं तुझे दूंगा। लड़की ने अपनी मां के सिखाने पर कहा, “मुझे हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले का सर थाल में यहां चाहिये।” ये सुन कर बादशाह को अफ़सोस हुआ, लेकिन वह मेहमानों के सामने क़सम दे चुका था, उस ने हुक्म दिया के लड़की को हज़रत यहया का सर दे दिया जाये। चुनांचे उस ने किसी को क़ैदख़ाने में भेज कर हज़रत यहया का सर क़लम करवा दिया और हज़रत यहया का सर थाल में रखकर लाया गया और लड़की को दे दिया। और वह उसे अपनी मां के पास ले गई। तब हज़रत यहया के शागिर्द आये और उन की लाश उठाकर ले गये और उन्हें दफ़न कर दिया और जा कर हुज़ूर ईसा को ख़बर दी। जब हुज़ूर ईसा ने ये ख़बर सुनी तो वह कश्ती के ज़रीये एक वीरान जगह की तरफ़ रवाना हुए। और हुजूम को पता चला तो लोग शहरों से इकट्-ठे होकर पैदल ही आप के पीछे चल दिये। जब हुज़ूर ईसा कश्ती से किनारे पर उतरे तो आप ने एक बड़े हुजूम को देखा, और आप को उन पर बड़ा तरस आया और आप ने उन के बीमारों को शिफ़ा बख़्शी। जब शाम हुई तो आप के शागिर्द आप के पास आकर कहने लगे, “ये एक वीरान जगह है और काफ़ी देर भी हो चुकी है, इसलिये हुजूम को रुख़्सत कर दीजिये ताके वह गांव में जा कर अपने लिये खाना ख़रीद सकें।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “उन्हें जाने की ज़रूरत नहीं, तुम ही उन्हें कुछ खाने को दो।” उन्होंने जवाब दिया, “यहां हमारे पास सिर्फ़ पांच रोटियां और दो मछलियां हैं।” हुज़ूर ने फ़रमाया, “उन्हें यहां मेरे पास ले आओ।” तब हुज़ूर ने लोगों को घास पर बैठ जाने का हुक्म दिया और पांच रोटियां और दो मछलियां ले कर आसमान की तरफ़ नज़र उठाकर उन पर बरकत मांगी फिर आप ने रोटियों के टुकड़े तोड़ कर शागिर्दों को दिये और शागिर्दों ने उन्हें लोगों को दिया। सब लोग खाकर सेर हो गये और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरियां भर कर उठाई गईं। खाने वालों की तादाद औरतों और बच्चों के अलावा तक़रीबन पांच हज़ार मर्दों की थी। इस के फ़ौरन बाद हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों को हुक्म दिया के तुम कश्ती में बैठ कर मुझ से पहले झील के पार चले जाओ और जब तक मैं हुजूम को रुख़्सत कर के आता हूं। उन्हें रुख़्सत करने के बाद वह तन्हाई में दुआ करने के लिये एक पहाड़ी पर चले गये। और रात हो चुकी थी और वह वहां तन्हा थे। और उस वक़्त कश्ती किनारे से काफ़ी दूर पहुंच चुकी थी और मुख़ालिफ़ हवा के बाइस लहरों से डगमगा रही थी। रात के चौथे पहर के क़रीब हुज़ूर ईसा झील पर चलते हुए उन के पास पहुंचे। जब शागिर्दों ने हुज़ूर को झील पर चलते देखा तो घबरा गये, और कहने लगे, “ये तो कोई भूत है,” और डर के मारे चिल्लाने लगे। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से फ़ौरन कलाम किया, “हौसला रखो! मैं हूं। डरो मत।” पतरस ने जवाब दिया, “ऐ ख़ुदावन्द, अगर आप ही हैं तो मुझे हुक्म दें के मैं भी पानी पर चल कर आप के पास आऊं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “आ।” चुनांचे पतरस कश्ती से उतर कर हुज़ूर ईसा के पास पानी पर चल कर जाने लगा। मगर जब उस ने हवा का ज़ोर देखा तो डर गया और डूबने लगा, तब उस ने चिल्ला कर कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, मुझे बचाईये।” हुज़ूर ईसा ने फ़ौरन अपना हाथ बढ़ाया और पतरस को पकड़ लिया और फ़रमाया, “ऐ कम-एतक़ाद, तूने शक क्यूं किया?” और जब वह दोनों कश्ती में चढ़ गये और हवा थम गई। तब जो कश्ती में थे उन्होंने हुज़ूर को ये कहते हुए सज्दा किया, “आप यक़ीनन ख़ुदा के बेटे हैं।” झील को पार करने के बाद, वह गनेसरत के इलाक़े में पहुंचे। और जब वहां के लोगों ने हुज़ूर ईसा को पहचान लिया और आस-पास के सारे इलाक़े में ख़बर कर दी। और लोग सब बीमारों को हुज़ूर के पास ले आये और वह मिन्नत करने लगे के उन्हें अपनी पोशाक का किनारा ही छू लेने दें और जितनों ने छुआ, वह बिलकुल अच्छे हो गये। तब बाज़ फ़रीसी और शरीअत के आलिम यरूशलेम से हुज़ूर ईसा के पास आये और कहने लगे, “आप के शागिर्द बुज़ुर्गों की रिवायत के ख़िलाफ़ क्यूं चलते हैं? और खाने से पहले अपने हाथ नहीं धोते?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तुम अपनी रिवायत से ख़ुदा के हुक्म की ख़िलाफ़ वर्र्ज़ी क्यूं करते हो? क्यूंके ख़ुदा ने फ़रमाया है, ‘तुम अपने बाप और मां की इज़्ज़त करना’ और, ‘जो कोई बाप या मां को बुरा कहे वह ज़रूर मार डाला जाये।’ मगर तुम कहते हो के अगर कोई अपने बाप या मां से कहे के जो कुछ आप को मुझ से मदद के लिये इस्तिमाल होना था वह ‘ख़ुदा को नज़्र हो चुकी है,’ तो उस पर अपने ‘बाप या मां की इज़्ज़त करना’ फ़र्ज़ नहीं है। यूं तुम ने अपनी रिवायत से ख़ुदा का कलाम रद्द कर दिया है। ऐ रियाकारों! हज़रत यसायाह नबी ने तुम्हारे बारे में क्या ख़ूब नुबुव्वत की है: “ ‘ये उम्मत ज़बान से तो मेरी ताज़ीम करती है, मगर इन का दिल मुझ से दूर है। ये लोग बेफ़ाइदा मेरी परस्तिश करते हैं; क्यूंके आदमियों के हुक्मों की तालीम देते हैं।’ ” हुज़ूर ईसा ने हुजूम को अपने पास बुलाकर फ़रमाया, “मेरी बात सुनो और समझने की कोशिश करो। जो चीज़ इन्सान के मुंह में जाती है उसे नापाक नहीं करती, लेकिन जो उस के मुंह से निकलती है, वोही उसे नापाक करती है।” तब शागिर्दों ने हुज़ूर के पास आकर कहा, “क्या आप जानते हैं के फ़रीसियों ने ये बात सुन कर ठोकर खाई है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो पौदा मेरे आसमानी बाप ने नहीं लगाया, उसे जड़ से उखाड़ दिया जायेगा। उन की पर्वा न करो; वह अन्धे रहनुमा हैं। और अगर एक अन्धा दूसरे अन्धे की रहनुमाई करने लगे तो वह दोनों गढ़े में जा गिरेंगे।” पतरस ने गुज़ारिश की, “ये तम्सील हमें समझा दीजिये।” “क्या तुम अभी तक न समझ हो?” हुज़ूर ईसा ने पूछा। “क्या तुम नहीं जानते के जो कुछ मुंह में जाता है वह पेट में पड़ता है और फिर बदन से ख़ारिज होकर बाहर निकल जाता है? मगर जो बातें मुंह से निकलती हैं, वह दिल से निकलती हैं और वोही आदमी को नापाक करती हैं। क्यूंके बुरे ख़्याल, क़त्ल, ज़िना, जिन्सी बदफ़ेली, चोरी, कुफ़्र झूटी गवाही, दिल ही से निकलती हैं। ये ऐसी बातें हैं जो इन्सान को नापाक करती हैं; लेकिन बग़ैर हाथ धोए खाना खा लेना इन्सान को नापाक नहीं करता।” फिर हुज़ूर ईसा वहां से निकल कर सूर और सैदा के इलाक़े को रवाना हुए। और उस इलाक़े की एक कनानी ख़ातून हुज़ूर के पास आई और पुकार कर कहने लगी, “ऐ ख़ुदावन्द, इब्न-ए-दाऊद, मुझ पर रहम कर। मेरी बेटी में बदरूह है जो उसे बहुत सताती है।” मगर हुज़ूर ने उसे कोई जवाब न दिया। लिहाज़ा हुज़ूर के शागिर्द पास आकर आप से मिन्नत करने लगे, “उसे रुख़्सत कर दीजिये क्यूंके वह हमारे पीछे चिल्लाते हुए आ रही है।” हुज़ूर ने जवाब दिया, “मैं इस्राईल के घराने की खोई हुई भेड़ों के सिवा किसी और के पास नहीं भेजा गया हूं।” मगर उस ने आकर हुज़ूर को सज्दा कर के कहने लगी, “ऐ ख़ुदावन्द, मेरी मदद कर!” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “बच्चों की रोटी ले कर कुत्तों को डाल देना मुनासिब नहीं है।” “हां ख़ुदावन्द, क्यूंके कुत्ते भी उन टुकड़ों में से खाते हैं जो उन के मालिकों की मेज़ से नीचे गिरते हैं।” इस पर हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ऐ ख़ातून, तेरा ईमान बहुत बड़ा है! तेरी इल्तिजा क़बूल हुई।” और उस की बेटी ने उसी वक़्त शिफ़ा पाई। हुज़ूर ईसा वहां से निकल कर सूबे गलील की झील से होते हुए पहाड़ पर चढ़ कर वहीं बैठ गये। और बड़ा हुजूम, अन्धों, लंगड़ों, लूलों, गूगों और कई दूसरे बीमारों को साथ ले कर आया और उन्हें हुज़ूर के क़दमों में रख दिया और हुज़ूर ने उन्हें शिफ़ा बख़्शी। चुनांचे जब लोगों ने देखा के गूंगे बोलते हैं, लूले तनदरुस्त होते हैं, लंगड़े चलते हैं और अन्धे देखते हैं तो बड़े हैरान हुए और इस्राईल के ख़ुदा की तम्जीद की। और हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों को पास बुलाया और उन से फ़रमाया, “मुझे इन लोगों पर तरस आता है; क्यूंके ये तीन दिन से बराबर मेरे साथ हैं और इन के पास खाने को कुछ भी नहीं रहा। मैं इन्हें भूका रुख़्सत करना नहीं चाहता, कहीं ऐसा न हो के ये रास्ते में ही बेहोश हो जायें।” आप के शागिर्दों ने जवाब दिया, “इस ब्याबान में इतनी रोटियां कहां से लायेंगे के इतने बड़े हुजूम को खिला कर सेर करें?” हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं?” उन्होंने जवाब दिया, “सात, और थोड़ी सी छोटी मछलियां हैं।” हुज़ूर ईसा ने हुजूम से फ़रमाया के सब ज़मीन पर बैठ जायें। और हुज़ूर ने वह सात रोटियां और मछलियां ले कर ख़ुदा का शुक्र अदा किया, और उन के टुकड़े किये और उन्हें शागिर्दों को देते गये और शागिर्दों ने उन्हें लोगों को दिया। सब ने पेट भर कर खाया। और जब बचे हुए टुकड़े जमा किये गये तो सात टोकरियां भर गईं। और खाने वालों की तादाद औरतों और बच्चों के अलावा चार हज़ार मर्दों की थी। फिर हुजूम को रुख़्सत करने के बाद हुज़ूर ईसा कश्ती में सवार हुए और मगदन की सरहदों के लिये रवाना हो गये। बाज़ फ़रीसी और सदूक़ी, हुज़ूर ईसा के पास आये और हुज़ूर को आज़माने की ग़रज़ से कोई आसमानी निशान दिखाने की दरख़्वास्त की। हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जब शाम होती है, तो तुम कहते हो के, ‘मौसम अच्छा रहेगा, क्यूंके आसमान सुर्ख़ है,’ और सुबह के वक़्त कहते हो के, ‘आज आंधी आयेगी क्यूंके आसमान सुर्ख़ है और धुंदला है।’ तुम आसमान का रंग देखकर मौसम का अन्दाज़ा लगाना तो जानते हो, लेकिन ज़मानों की अलामात को नहीं पहचान सकते। इस ज़माने के बदकार और ज़िनाकार लोग निशान तलब करते हैं, लेकिन उन्हें हज़रत यूनुस के निशान के सिवा कोई और निशान न दिया जायेगा।” और तब हुज़ूर ईसा उन्हें छोड़कर चले गये। शागिर्द झील के पार जाते वक़्त रोटी साथ लेना भूल गये थे। हुज़ूर ईसा ने उन से ताकीदन फ़रमाया, “ख़बरदार, देखो फ़रीसियों और सदूक़ियों के ख़मीर से होशयार रहना।” और वह आपस में बहस करने लगे के देखा हुज़ूर इसलिये के रहे हैं क्यूंके, “हम रोटी नहीं लाये।” हुज़ूर ईसा को ये बात मालूम थी, लिहाज़ा आप ने फ़रमाया, “ऐ कम-एतक़ादो, तुम आपस में क्यूं बहस करते हो के हमारे पास रोटी नहीं है? क्या तुम अब तक नहीं समझ पाये? और तुम्हें पांच हज़ार आदमियों के लिये वह पांच रोटियां याद नहीं, और ये भी के तुम ने कितनी टोकरियां भर कर उठाई थीं? और न उन चार हज़ार के लिये वह सात रोटियां और न ये के तुम ने कितनी टोकरियां उठाई थीं? तुम क्यूं नहीं समझते के जब मैंने फ़रीसियों और सदूक़ियों के ख़मीर से ख़बरदार रहने को कहा था तो रोटी की बात नहीं की थी?” तब उन की समझ में आया के हुज़ूर ने रोटी के ख़मीर से नहीं, लेकिन फ़रीसियों और सदूक़ियों की तालीम से ख़बरदार रहने को कहा था। जब हुज़ूर ईसा क़ैसरिया फ़िलिप्पी के इलाक़े में आये तो आप ने अपने शागिर्दों से पूछा, “लोग इब्न-ए-आदम को क्या कहते हैं?” उन्होंने कहा, “बाज़ हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला कहते हैं; बाज़ एलियाह, और बाज़ यरमियाह या नबियों में से कोई एक।” हुज़ूर ने उन से पूछा, “मगर तुम मुझे क्या कहते हो?” शमऊन पतरस ने जवाब दिया, “आप ज़िन्दा ख़ुदा के बेटे अलमसीह हैं।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ऐ यूनाह के बेटे शमऊन! तू मुबारक है क्यूंके ये बात गोश्त और ख़ून ने नहीं लेकिन मेरे आसमानी बाप ने तुझ पर ज़ाहिर की है। और मैं तुझ से कहता हूं के तो पतरस है और मैं इस चट्टान पर अपनी इबादतगाह क़ाइम करूंगा और आलमे-अर्वाह के दरवाज़े उस पर ग़ालिब न आयेंगे। मैं आसमानी बादशाही की कुन्जियां तुझे दूंगा; और जो कुछ तुम ज़मीन पर बांधोगे वह आसमान पर बांधा जायेगा और जो कुछ तुम ज़मीन पर खोलोगे वह आसमान पर खोला जायेगा।” तब हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों को हुक्म दिया के किसी को मत बताना के मैं ही अलमसीह हूं। उस के बाद हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों पर ज़ाहिर करना शुरू कर दिया के उन्हें यरूशलेम जाना लाज़िमी है ताके वह बुज़ुर्गों, अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों के हाथों बहुत दुख उठाये, क़त्ल किया जाये और तीसरे दिन फिर से जी उठे। तब पतरस हुज़ूर को अलग ले जा कर मलामत करने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, ख़ुदा न करे के आप के साथ ऐसा कभी हो।” हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर पतरस से फ़रमाया, “ऐ शैतान! मेरे सामने से दूर हो जा! तू मेरे लिये ठोकर का बाइस है; क्यूंके तेरा दिल ख़ुदा की बातों में नहीं, लेकिन आदमियों की बातों में लगा है।” तब हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “अगर कोई मेरी पैरवी करना चाहता है तो उस के लिये ज़रूरी है के वह अपनी ख़ुदी का इन्कार करे और अपनी सलीब उठाये और मेरे पीछे हो ले। क्यूंके जो कोई अपनी जान को बाक़ी रखना चाहता है वह उसे खोयेगा और जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खोयेगा वह उसे महफ़ूज़ रखेगा। अगर कोई आदमी सारी दुनिया हासिल कर ले, लेकिन अपनी जान का नुक़्सान उठाये तो उसे क्या फ़ायदा होगा? या आदमी अपनी जान के बदले में क्या देगा? क्यूंके जब इब्न-ए-आदम अपने बाप के जलाल में अपने फ़रिश्तों के साथ आयेगा तब वह हर एक को उस के कामों के मुताबिक़ अज्र देगा। “मैं तुम से सच कहता हूं के बाज़ लोग जो यहां खड़े हैं, जब तक इब्न-ए-आदम को अपनी बादशाही में आते हुए न देख लेंगे, हरगिज़ न मरेंगे।” छः दिन के बाद हुज़ूर ईसा ने पतरस, याक़ूब और उस के भाई यूहन्ना को अपने साथ लिया और उन्हें एक ऊंचे पहाड़ पर अलग ले गये। वहां उन के सामने हुज़ूर की सूरत बदल गई। और हुज़ूर का चेहरा सूरज की मानिन्द चमकने लगा और हुज़ूर के कपड़े नूर की मानिन्द सफ़ैद हो गये। उसी वक़्त हज़रत मूसा और एलियाह उन्हें हुज़ूर ईसा से बातें करते हुए नज़र आये। फिर पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, हमारा यहां रहना अच्छा है। अगर आप चाहें तो मैं तीन डेरे खड़े करूं, एक आप के लिये, एक हज़रत मूसा और एक एलियाह के लिये।” वह ये कह ही रहे थे के एक नूरानी बादल ने उन पर साया कर लिया और उस बादल में से आवाज़ आई, “ये मेरा प्यारा बेटा है जिस से मैं महब्बत रखता हूं; और जिस से मैं बहुत ख़ुश हूं, इस की बात ग़ौर से सुनो!” जब शागिर्दों ने ये सुना तो डर के मारे मुंह के बल ज़मीन पर गिर गये। लेकिन हुज़ूर ईसा ने पास आकर उन्हें छुआ और फ़रमाया, “उठो, डरो मत।” जब उन्होंने नज़रें उठाईं तो हुज़ूर ईसा के सिवा और किसी को न देखा। जब वह पहाड़ से नीचे उतर रहे थे तो हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद की, “जब तक इब्न-ए-आदम मुर्दों में से जी न उठे, जो कुछ तुम ने देखा है इस वाक़िये का ज़िक्र किसी से न करना।” शागिर्दों ने हुज़ूर से पूछा, “फिर शरीअत के आलिम ये क्यूं कहते हैं के हज़रत एलियाह का पहले आना ज़रूरी है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “एलियाह ज़रूर आयेगा और सब कुछ बहाल करेगा। लेकिन मैं तुम से कहता हूं के एलियाह तो पहले ही आ चुका है, और उन्होंने उसे नहीं पहचाना लेकिन जैसा चाहा वैसा उस के साथ किया। इसी तरह इब्न-ए-आदम भी उन के हाथों दुख उठायेगा।” तब शागिर्द समझ गये के वह उन से हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले के बारे में कह रहे हैं। और जब वो हुजूम के पास आये तो एक आदमी हुज़ूर ईसा के पास आया और आप के सामने घुटने टेक कर कहने लगा। “ऐ ख़ुदावन्द, मेरे बेटे पर रहम कर, क्यूंके उसे मिर्गी की वजह से ऐसे सख़्त दौरे पड़ते हैं के वह अक्सर आग या पानी में गिर पड़ता है। और मैं उसे आप के शागिर्दों के पास लाया था लेकिन वह उसे शिफ़ा न दे सके।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ बेएतक़ाद और टेढ़ी पुश्त, मैं कब तक तुम्हारे साथ तुम्हारी बर्दाश्त करता रहूंगा? लड़के को यहां मेरे पास लाओ।” हुज़ूर ईसा ने बदरूह को डांटा और वह लड़के में से निकल गई और वह उसी वक़्त अच्छा हो गया। तब शागिर्दों ने तन्हाई में हुज़ूर ईसा के पास आकर पूछा, “हम इस बदरूह को क्यूं नहीं निकाल सके?” हुज़ूर ने जवाब दिया, “इसलिये के तुम्हारा ईमान कम है, मैं तुम से सच कहता हूं के अगर तुम्हारा ईमान राई के दाने के बराबर भी होता, तो, ‘तुम इस पहाड़ से कह सकोगे के यहां से वहां सरक जा,’ तो वह सरक जायेगा और तुम्हारे लिये कोई काम भी नामुम्किन न होगा।” लेकिन इस क़िस्म की बदरूह दुआ और रोज़े के बग़ैर नहीं निकलती। जब वह सूबे गलील में एक साथ जमा हुए तो हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “इब्न-ए-आदम आदमियों के हवाले किया जायेगा। वह उसे क़त्ल कर डालेंगे और वह तीसरे दिन फिर से जी उठेगा।” शागिर्द ये सुना कर निहायत ही ग़मगीन हुए। और जब वह कफ़रनहूम में पहुंचे तब, दो दिरहम बैतुलमुक़द्दस का महसूल लेने वाले पतरस के पास आकर पूछने लगे के, “क्या तुम्हारा उस्ताद मुक़र्ररः महसूल अदा नहीं करता?” पतरस ने जवाब दिया, “हां, अदा करता है।” जब पतरस घर में दाख़िल हुए तो हुज़ूर ईसा ने पहले यही फ़रमाया, “ऐ शमऊन! तुम्हारा क्या ख़्याल है? दुनिया के बादशाह किन लोगों से महसूल या जिज़्यः लेते हैं? अपने बेटों से या ग़ैरों से?” जब पतरस ने कहा, “ग़ैरों से।” तब हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “फिर तो बेटे बरी हुए। लेकिन हम उन के लिये ठोकर का बाइस न हों, इसलिये तुम झील पर जा कर बंसी डालो और जो मछली पहले हाथ आये, उस का मुंह खोलना तो तुम्हें चार दिरहम का सिक्‍का मिलेगा। उसे ले जाना और हम दोनों के लिये महसूल अदा कर देना।” उस वक़्त शागिर्द हुज़ूर ईसा के पास आये और पूछने लगे के, “आसमान की बादशाही में सब से बड़ा कौन है?” हुज़ूर ने एक बच्चे को पास बुलाया और उसे उन के दरमियान में खड़ा कर दिया। और फ़रमाया: “मैं तुम से सच कहता हूं के अगर तुम तब्दील होकर छोटे बच्चों की मानिन्द न बनो, तो तुम आसमानी बादशाही में हरगिज़ दाख़िल न होगे। लिहाज़ा जो कोई अपने आप को इस बच्चे की मानिन्द छोटा बनायेगा वोही आसमानी बादशाही में सब से बड़ा होगा। और जो कोई ऐसे बच्चे को मेरे नाम पर क़बूल करता है वह मुझे क़बूल करता है। “लेकिन जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर ईमान लाये हैं, किसी को ठोकर खिलाता है तो उस के लिये यही बेहतर है के बड़ी चक्की का भारी पत्थर उस के गले में लटकाया जाये, और उसे गहरे समुन्दर में डुबो दिया जाये। ठोकरों की वजह से दुनिया पर अफ़सोस है क्यूंके ठोकरें तो ज़रूर लगेंगी! लेकिन उस पर अफ़सोस है जिस की वजह से ठोकर लगे! पस अगर तुम्हारा हाथ या तुम्हारा पांव तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस हो तो, उसे काट कर फेंक दो। क्यूंके तुम्हारा टुंडा या लंगड़ा होकर ज़िन्दगी में दाख़िल होना दोनों हाथों या दोनों पांव के साथ अब्दी आग में डाले जाने से बेहतर है। और अगर तुम्हारी आंख तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस बनती है तो, उसे निकाल कर फेंक दो। क्यूंके कान होकर ज़िन्दगी में दाख़िल होना दो आंखें होते जहन्नुम की आग में डाले जाने से बेहतर है। “ख़बरदार! इन छोटों में से किसी को नाचीज़ न समझना क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के आसमान पर इन के फ़रिश्ते हर वक़्त मेरे आसमानी बाप का मुंह देखते रहते हैं। क्यूंके इब्न-ए-आदम खोये हुए लोगों को ढूंडने और नजात देने आया है। “तुम्हारा क्या ख़्याल है? अगर किसी के पास सौ भेड़ें हों, और उन में से एक भटक जाये तो क्या वह निनानवे को छोड़कर और पहाड़ों पर जा कर उस खोई हुई भेड़ को ढूंडने न निकलेगा? और अगर वह उसे ढूंड लेगा तो मैं तुम से सच कहता हूं के वह इन निनानवे की निस्बत जो भटकी नहीं हैं, इस एक के दुबारा मिल जाने पर ज़्यादा ख़ुशी महसूस करेगा। इसी तरह तुम्हारा आसमानी बाप ये नहीं चाहता के इन छोटों में से एक भी हलाक हो। “अगर तुम्हारा भाई या बहन गुनाह करे तो जाओ और तन्हाई में उसे समझाओ। अगर वह तुम्हारी सुने तो समझ लो के तुम ने अपने भाई को पा लिया। और अगर वह न सुने तो अपने साथ एक या दो आदमी और ले जाओ, ताके, ‘हर बात दो या तीन गवाहों की ज़बान से साबित हो जाये।’ और अगर वह उन की भी न सुने तो, मसीही जमाअत को ख़बर करो; और अगर वह मसीही जमाअत की भी न सुने तो उसे महसूल लेने वाले और ग़ैरयहूदी के बराबर जानो। “मैं तुम से सच कहता हूं, और जो कुछ तुम ज़मीन पर बांधोगे वह आसमान पर बांधा जायेगा और जो कुछ तुम ज़मीन पर खोलोगे वह आसमान पर खोला जायेगा। “फिर, मैं तुम से सच कहता हूं के अगर तुम में से दो शख़्स ज़मीन पर किसी बात के लिये जिसे वह चाहें और राज़ी हूं तो वह मेरे आसमानी बाप के जानिब से उन के लिये हो जायेगा। क्यूंके जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्-ठे होते हैं वहां मैं उन के दरमियान मौजूद होता हूं।” तब पतरस ने हुज़ूर ईसा के पास आकर पूछा, “ऐ ख़ुदावन्द, अगर मेरा भाई या बहन मेरे ख़िलाफ़ गुनाह करता रहे तो मैं उसे कितनी दफ़ा मुआफ़ करूं? क्या सात बार तक?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुझ से सात दफ़ा नहीं, लेकिन सत्तर के सात गुना तक मुआफ़ करने के लिये कहता हूं। “पस आसमानी बादशाही उस बादशाह की मानिन्द है जिस ने अपने ख़ादिमो से हिसाब लेना चाहा। और जब वह हिसाब लेने लगा तो, एक कर्ज़दार उस के सामने हाज़िर किया गया जो बादशाह से लाखों रूपये क़र्ज़ ले चुका था। मगर उस के पास क़र्ज़ चुकाने के लिये कुछ न था, इसलिये उस के मालिक ने हुक्म दिया के उसे, उस की बीवी को और बाल बच्चों को और जो कुछ उस का है सब कुछ बेच दिया जाये और क़र्ज़ वसूल कर लिया जाये। “पस उस ख़ादिम ने मालिक के सामने गिरकर उसे सज्दा किया और कहा, ‘ऐ मालिक, मुझे कुछ मोहलत दे और मैं तेरा सारा क़र्ज़ चुका दूंगा।’ मालिक ने ख़ादिम पर रहम खाकर उसे छोड़ दिया और उस का क़र्ज़ भी मुआफ़ कर दिया। “लेकिन जब वह ख़ादिम वहां से बाहर निकला तो उसे एक ऐसा ख़ादिम मिला जो उस का हम ख़िदमत था और जिसे उस ने सौ दीनार क़र्ज़ के तौर पर दे रखा था। उस ने उसे पकड़ कर उस का गला दबाया और कहा, ‘ला, मेरी रक़म वापस कर!’ “पस उस के हम ख़िदमत ने उस के सामने गिरकर उस की मिन्नत की और कहा, ‘मुझे मोहलत दे, मैं सब अदा कर दूंगा।’ “लेकिन उस ने एक न सुनी और उस को क़ैदख़ाने में डाल दिया ताके क़र्ज़ अदा करने तक वहीं रहे। पस जब उस के दूसरे ख़ादिमो ने ये देखा तो वह बहुत ग़मगीन हुए और मालिक के पास जा कर उसे सारा वाक़िया कह सुनाया। “तब मालिक ने उस ख़ादिम को बुलवा कर फ़रमाया, ‘ऐ शरीर ख़ादिम! मैंने तेरा सारा क़र्ज़ इसलिये मुआफ़ कर दिया था के तूने मेरी मिन्नत की थी। क्या तुझे लाज़िम न था के जैसे मैंने तुझ पर रहम किया, तो तू भी अपने हम ख़िदमत पर वैसे ही रहम करता?’ और मालिक ने ग़ुस्से में आकर उस ख़ादिम को सिपाहियों के हवाले कर दिया ताके क़र्ज़ अदा करने तक उन की क़ैद में रहे। “अगर तुम में से हर एक अपने भाई या बहन को दिल से मुआफ़ न करे तो मेरा आसमानी बाप भी तुम्हारे साथ इसी तरह पेश आयेगा।” अपनी ये बातें ख़त्म कर चुकने के बाद हुज़ूर ईसा सूबे गलील से रवाना होकर दरया-ए-यरदन के पार यहूदिया के इलाक़े में गये। और बड़ा हुजूम आप के पीछे हो लिया और आप ने उन्हें शिफ़ा बख़्शी। बाज़ फ़रीसी हुज़ूर ईसा को आज़माने के लिये उन के पास आये और कहने लगे, “क्या हर एक सबब से अपनी बीवी को तलाक़ देना जायज़ है?” हुज़ूर ने जवाब दिया, “क्या तुम ने नहीं पढ़ा के जिस ने उन्हें बनाया, तख़्लीक़ की शुरूआत ही से उन्हें ‘मर्द और औरत बना कर फ़रमाया,’ इस सबब से, ‘मर्द अपने बाप और मां से जुदा होकर अपनी बीवी के साथ मिला रहेगा, और वह दोनों एक जिस्म होंगे?’ चुनांचे वह अब दो नहीं, बल्के एक जिस्म हैं। पस जिन्हें ख़ुदा ने जोड़ा है, उन्हें कोई इन्सान जुदा न करे।” फ़रीसियों ने हुज़ूर से पूछा, “फिर हज़रत मूसा ने अपनी शरीअत में ये हुक्म क्यूं दिया के तलाक़ नामा लिख कर उसे छोड़ दिया जाये?” हुज़ूर ईसा ने उन को जवाब दिया, “हज़रत मूसा ने तुम्हारी सख़्त-दिली की वजह से अपनी बीवीयों को छोड़ देने की इजाज़त दी थी लेकिन इब्तिदा से ऐसा न था। लेकिन मैं तुम से कहता हूं के जो कोई अपनी बीवी को उस की जिन्सी बदफ़ेली के सिवा किसी और सबब से छोड़ देता है, और किसी दूसरी औरत से शादी कर लेता है तो ज़िना करता है।” शागिर्दों ने हुज़ूर से कहा, “अगर शौहर और बीवी के रिश्ता का ये हाल है तो बेहतर है के शादी की ही न जाये।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “सब इस बात को क़बूल नहीं कर सकते हैं। ऐसा वोही कर सकते हैं जिन्हें ये क़ुदरत मिली हो। क्यूंके बाज़ ख़ोजे तो पैदाइशी हैं, लेकिन बाज़ ख़ोजा ऐसे हैं जिन्हें इन्सानों ने बनाया है और बाज़ ऐसे भी हैं जो आसमान की बादशाही की ख़ातिर ख़ुद को ख़ोजो की मानिन्द बना दिया है। जो कोई उसे क़बूल कर सकता है, तो क़बूल करे।” उस के बाद लोग बच्चों को हुज़ूर के पास लाये ताके हुज़ूर उन पर हाथ रखें और उन्हें दुआ दें। लेकिन शागिर्दों ने उन्हें झिड़क दिया। लेकिन हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “बच्चों को मेरे पास आने से मत रोको क्यूंके आसमान की बादशाही ऐसों ही की है।” तब हुज़ूर ने उन पर अपना हाथ रखा और फिर वहां से चले गये। और एक आदमी हुज़ूर ईसा के पास आया और पूछने लगा, “ऐ उस्ताद मुहतरम! मैं कौन सी नेकी करूं के अब्दी ज़िन्दगी हासिल कर लूं?” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “तुम मुझ से नेकी के बारे में क्यूं पूछते हो? नेक तो सिर्फ़ एक ही है। लेकिन अगर तू ज़िन्दगी में दाख़िल होना चाहता है तो हुक्मों पर अमल कर।” उस ने पूछा, “कौन से हुक्मों पर?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ ‘ये के ख़ून न करना, ज़िना न करना, चोरी न करना, झूटी गवाही न देना, अपने बाप या मां की इज़्ज़त करना,’ और ‘अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखना।’ ” उस नौजवान ने आप को जवाब दिया, “इन सब हुक्मों पर तो मैं अमल करता आया हूं, अब मुझ मैं किस चीज़ की कमी है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर तू कामिल होना चाहता है तो जा, अपना सब कुछ बेच कर ग़रीबों की मदद कर तो तुझे आसमान में ख़ज़ाना मिलेगा और आकर मेरे पीछे हो ले।” मगर जब उस नौजवान ने ये बात सुनी, तो वह ग़मगीन होकर चला गया क्यूंके वह बहुत दौलतमन्द था। तब हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं के दौलतमन्द का आसमान की बादशाही में दाख़िल होना मुश्किल है। मैं फिर कहता हूं के ऊंट का सुई के नाके में से गुज़र जाना किसी दौलतमन्द के ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होने से ज़्यादा आसान है।” जब शागिर्दों ने ये बात सुनी तो निहायत हैरान हुए और हुज़ूर ईसा से पूछा, “फिर कौन नजात पा सकता है?” हुज़ूर ईसा ने उन की तरफ़ देखकर फ़रमाया, “ये इन्सानों के लिये तो नामुम्किन है, लेकिन ख़ुदा के लिये सब कुछ मुम्किन है।” तब पतरस ने हुज़ूर से कहा, “देखिये हम सब कुछ छोड़कर आप के पीछे चले आये हैं! तो हमें क्या मिलेगा?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “मैं तुम से सच कहता हूं के नई तख़्लीक़ में जब इब्न-ए-आदम अपने जलाली तख़्त पर बैठेगा तो तुम भी जो मेरे पीछे चले आये हो बारह तख़्तों पर बैठ कर, इस्राईल के बारह क़बीलों का इन्साफ़ करोगे। और जिस किसी ने मेरी ख़ातिर घरों या भाईयों या बहनों या मां या बाप या बीवी या बच्चों या खेतों को छोड़ दिया है वह इन से सौ गुना पायेगा और अब्दी ज़िन्दगी का वारिस होगा। लेकिन बहुत से जो अव्वल हैं आख़िर हो जायेंगे और जो आख़िर हैं, वह अव्वल।” “क्यूंके आसमान की बादशाही उस ज़मींदार की मानिन्द है जो सुब्ह-सवेरे बाहर निकला ताके अपने अंगूरी बाग़ में मज़दूरों को काम पर लगाये।” उस ने एक दीनार रोज़ाना की मज़दूरी तै कर के उन्हें अपने अंगूरी बाग़ में भेज दिया। “फिर तक़रीबन तीन घंटे बाद बाहर निकल कर उस ने औरों को बाज़ार में बेकार खड़े देखा। और उस ने उन से फ़रमाया, ‘तुम भी मेरे अंगूरी बाग़ में चले जाओ और जो वाजिब है, मैं तुम्हें दूंगा।’ ” पस वह चले गये। “फिर उस ने दोपहर और तीसरे पहर के क़रीब बाहर निकल कर ऐसा ही किया। दिन ढलने से कुछ देर पहले वह फिर बाहर निकला और चंद और को खड़े पाया। उस ने उन से पूछा, ‘तुम क्यूं सुबह से अब तक बेकार खड़े हुए हो?’ “ ‘हमें किसी ने काम पर नहीं लगाया,’ उन्होंने जवाब दिया। “उस ने उन से फ़रमाया, ‘तुम भी मेरे अंगूरी बाग़ में चले जाओ और काम करो।’ “जब शाम हुई तो अंगूरी बाग़ के मालिक ने अपने मुनीम से कहा, ‘मज़दूरों को बुलाओ और पिछलों से ले कर पहलों तक की उन की मज़दूरी दे दो।’ “जो एक घंटा दिन ढलने से पहले लगाये गये थे वह आये और उन्हें एक-एक दीनार मिला। जब शुरू के मज़दूरों की बारी आई तो उन्होंने सोचा के हमें ज़्यादा मज़दूरी मिलेगी। लेकिन उन्हें भी एक-एक दीनार मिला। जिसे ले कर वह ज़मींदार पर बुड़बुड़ाने लगे के ‘इन पिछलों ने सिर्फ़ एक घंटा काम किया है, और हम ने धूप में दिन भर मेहनत की है लेकिन तूने उन्हें हमारे बराबर कर दिया।’ “लेकिन मालिक ने उन में से एक से कहा, ‘दोस्त! मैंने तेरे साथ कोई नाइन्साफ़ी नहीं की है। क्या तेरे साथ मज़दूरी का एक दीनार तै नहीं हुआ था? लिहाज़ा जो तेरा है ले और चलता बन! ये मेरी मर्ज़ी है के जितना तुझे दे रहा हूं उतना ही इन पिछलों को भी दूं। क्या मुझे ये हक़ नहीं के अपने माल से जो चाहूं सौ करूं? या क्या तुझे मेरी सख़ावत तुम्हारी नज़रों में बुरी लग रही है?’ “पस बहुत से जो आख़िर हैं वह अव्वल हो जायेंगे और जो अव्वल हैं वह आख़िर।” और यरूशलेम जाते वक़्त हुज़ूर ईसा ने बारह शागिर्दों को अलग ले जा कर रास्ता में उन से कहा, “देखो! हम यरूशलेम शहर जा रहे हैं, जहां इब्न-ए-आदम अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों के हवाले किया जायेगा। और वह उस के क़त्ल का हुक्म सादर कर के और उसे ग़ैरयहूदियों के हवाले कर देंगे और वह लोग उस की हंसी उड़ायेंगे, उसे कोड़े मारेंगे और मस्लूब कर देंगे लेकिन वह तीसरे दिन फिर से ज़िन्दा किया जायेगा।” उस वक़्त ज़ब्दी के बेटों की मां अपने बेटों के साथ हुज़ूर ईसा के पास आई और आप को सज्दा कर के आप से अर्ज़ करने लगी। हुज़ूर ईसा ने उस से पूछा, “तुम क्या चाहती हो?” उस ने जवाब दिया, “हुक्म दीजिये के आप की बादशाही में मेरे बेटों में से एक आप की दाईं तरफ़ और दूसरा बाईं तरफ़ बैठे।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “तुम नहीं जानते के क्या मांग रहे हो? क्या तुम वह प्याला पी सकते हो जो मैं पीने पर हूं।” उन्होंने जवाब दिया, “हां, हम पी सकते हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “तुम मेरा प्याला तो ज़रूर पियोगे, लेकिन ये मेरा काम नहीं के किसी को अपनी दाएं या बाएं तरफ़ बिठाऊं। मगर जिन के लिये मेरे बाप की जानिब से मुक़र्रर किया जा चुका है, उन ही के लिये है।” जब बाक़ी दस शागिर्दों ने ये सुना तो वह इन दोनों भाईयों पर ख़फ़ा होने लगे। मगर हुज़ूर ईसा ने उन्हें पास बुलाया और उन से फ़रमाया, “तुम्हें मालूम है के इस जहान के ग़ैरयहूदियों के हुक्मरां उन पर हुक्मरानी करते हैं और उन के उम्रा उन पर इख़्तियार जताते हैं। मगर तुम में ऐसा नहीं होना चाहिये, लेकिन तुम में जो बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा ख़ादिम बने, और अगर तुम में कोई सब से ऊंचा दर्जा हासिल करना चाहे वह तुम्हारा ग़ुलाम बने। चुनांचे इब्न-ए-आदम इसलिये नहीं आया के ख़िदमत ले बल्के, इसलिये के ख़िदमत करे, और अपनी जान दे कर बहुतेरों को रिहाई बख़्शे।” जब हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्द यरीहू से निकल रहे थे तो एक बड़ा हुजूम हुज़ूर के पीछे हो लिया। दो अन्धे राह के किनारे बैठे हुए थे। जब उन्होंने सुना के हुज़ूर ईसा वहां से गुज़र रहे हैं तो वह चिल्लाने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, ऐ इब्न-ए-दाऊद! हम पर रहम कीजिये!” हुजूम ने उसे डांटा के ख़ामोश हो जाओ, मगर वो और भी चिल्लाने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, ऐ इब्न-ए-दाऊद! हम पर रहम कीजिये!” हुज़ूर ईसा रुक गये और उन्हें बुलाकर पूछा, “बताओ! मैं तुम्हारे लिये क्या करूं?” उन्होंने जवाब दिया, “ख़ुदावन्द! हम चाहते हैं के हमारी आंखें खुल जायें।” हुज़ूर ईसा ने रहम खाकर उन की आंखों को छुआ और वह फ़ौरन देखने लगे और हुज़ूर ईसा के पैरोकार बन गये। जब वह यरूशलेम के नज़दीक पहुंचे और ज़ैतून के पहाड़ पर बैतफ़गे के पास आये, तो हुज़ूर ईसा ने अपने दो शागिर्दों को ये हुक्म दे कर आगे भेजा, “अपने सामने वाले गांव में जाओ, वहां दाख़िल होते ही तुम्हें एक गधी बंधी हुई और उस के साथ उस का बच्चा भी होगा। उन्हें खोल कर मेरे पास ले आना। और अगर कोई तुम से कुछ कहे तो उस से कहना के ख़ुदावन्द को इन की ज़रूरत है, वह फ़ौरन ही उन्हें भेज देगा।” ये इसलिये हुआ के जो कुछ नबी की मारिफ़त फ़रमाया गया था, वह पूरा हो जाये: “सिय्यून की बेटी से कहो के, ‘तेरा बादशाह तेरे पास आता है, वह हलीम है और गधे पर सवार है, हां गधी के बच्चे पर, बोझ ढोने वाले के बच्चे पर।’ ” चुनांचे शागिर्द रवाना हुए और जैसा हुज़ूर ईसा ने उन्हें हुक्म दिया था वैसा ही किया। वह गधे और उस के बच्चे को ले आये और अपने कपड़े उन पर डाल दिये और हुज़ूर उस पर सवार हो गये। और हुजूम में से बहुत से लोगों ने अपने कपड़े रास्ते में बिछा दिये और बाज़ ने दरख़्तों की डालियां काट-काट कर रास्ते में फैला दें। और वह हुजूम जो हुज़ूर ईसा के आगे-आगे और पीछे-पीछे चल रहा था, नारे लगाने लगा, “इब्न-ए-दाऊद की होशाना! ” “मुबारक है वह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है! ” “आलमे-बाला पर होशाना!” और जब हुज़ूर ईसा यरूशलेम शहर में दाख़िल हुए तो सारे शहर में हलचल मच गई और लोग पूछने लगे के, “ये कौन है?” हुजूम ने कहा, “ये सूबे गलील के शहर नासरत के नबी हुज़ूर ईसा हैं।” और हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सहनों में दाख़िल हुए और आप वहां से ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त करने वालों को बाहर निकालने लगे। आप ने पैसे तब्दील करने वाले सर्राफों के तख़्ते और कबूतर फ़रोशों की चौकियां उलट दीं। और हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “लिख्खा है, ‘मेरा घर दुआ का घर कहलायेगा,’ मगर तुम ने उसे डाकूओं का अड्डा बना रख्खा है।” तब कई अन्धे और लंगड़े बैतुलमुक़द्दस में हुज़ूर के पास आये और आप ने उन्हें शिफ़ा बख़्शी। लेकिन जब अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों ने आप के मोजिज़े देखे और लड़कों को बैतुलमुक़द्दस में, “इब्न-ए-दाऊद की होशाना” पुकारते देखा तो ख़फ़ा हो गये। “और उन्होंने हुज़ूर ईसा से पूछा, क्या आप सुन रहे हैं के ये बच्चे क्या नारे लगा रहे हैं?” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “हां, मैं सुन रहा हूं, क्या तुम ने ये कभी नहीं पढ़ा, “ ‘बच्चों और शीरख़्वारों के लबों से भी ऐ ख़ुदावन्द, आप ने, अपनी हम्द करवाई’?” और तब हुज़ूर उन्हें छोड़कर शहर से बाहर और बैतअन्नियाह गांव में गये और रात को वहीं रहे। और जब सुबह को फिर हुज़ूर ईसा शहर की तरफ़ जा रहे थे तो आप को भूक लगी। हुज़ूर ने राह के किनारे अन्जीर का दरख़्त देखा और वह नज़दीक पहुंचा तो सिवाए पत्तों के उस में और कुछ न पाया। लिहाज़ा आप ने दरख़्त से फ़रमाया, “आइन्दा तुझ में कभी फल न लगे।” और उसी वक़्त अन्जीर का दरख़्त सूख गया। शागिर्दों ने ये देखा तो हैरान होकर पूछने लगे के, “ये अन्जीर का दरख़्त एक दम कैसे सूख गया?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुम से सच कहता हूं के अगर तुम ईमान रखो और शक न करो तो, तुम न सिर्फ़ वोही करोगे जो अन्जीर के दरख़्त के साथ हुआ, लेकिन अगर इस पहाड़ से भी कहोगे, ‘अपनी जगह से उखड़ जा और समुन्दर में जा गिर,’ तो ये भी हो जायेगा। और जो कुछ दुआ में ईमान के साथ मांगोगे वह सब तुम्हें मिल जायेगा।” जब हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस में आकर तालीम दे रहे थे तो अहम-काहिनों और यहूदी बुज़ुर्गों ने आप के पास आकर पूछा, “आप ये काम किस इख़्तियार से करते हैं? और ये इख़्तियार आप को किस ने दिया?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं भी तुम से एक बात पूछता हूं। अगर तुम उस का जवाब दोगे, तो मैं भी बताऊंगा के मैं ये काम किस इख़्तियार से करता हूं। जो पाक-ग़ुस्ल हज़रत यहया देते थे वह कहां से था? आसमान की जानिब से या इन्सान की जानिब से?” वह आपस में बहस करने लगे के, “अगर हम कहें, ‘के आसमान की जानिब से था,’ तो ‘वह हम से पूछेगा के फिर तुम ने हज़रत यहया का यक़ीन क्यूं न किया?’ लेकिन अगर हम कहें, ‘के इन्सान की जानिब से था’ तो हमें अवाम का डर है क्यूंके वह हज़रत यहया को वाक़ई नबी मानते हैं।” लिहाज़ा उन्होंने हुज़ूर ईसा को जवाब दिया, “हम नहीं जानते हैं।” तब हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैं भी तुम्हें नहीं बताता के इन कामों को किस इख़्तियार से करता हूं। “अब तुम्हारी राय किया है? किसी आदमी के दो बेटे थे। उस ने बड़े के पास जा कर कहा, ‘बेटा, आज अंगूरी बाग़ में जा और वहां काम कर।’ “उस ने जवाब दिया, ‘मैं नहीं जाऊंगा लेकिन बाद में उस ने अपना ख़्याल बदल दिया और अंगूरी बाग़ में चला गया।’ “फिर बाप ने दूसरे बेटे के पास जा कर भी यही बात कही। उस ने जवाब दिया, ‘अच्छा जनाब, मैं जाता हूं लेकिन गया नहीं।’ “इन दोनों में से किस ने अपने बाप का हुक्म माना?” “उन्होंने जवाब दिया, बड़े बेटे ने।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं के महसूल लेने वाले और फ़ाहिशा औरतें तुम से पहले ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होती हैं। क्यूंके हज़रत यहया तुम्हें रास्तबाज़ी का रास्ता दिखाने आया और तुम ने उस का यक़ीन न किया लेकिन महसूल लेने वालों और फ़ाहिशा औरतों ने किया, ये देखकर भी तुम ने न तो तौबा किया और न उस पर ईमान लाये। “एक और तम्सील सुनो! एक ज़मींदार ने अंगूरी बाग़ लगाया और उस के चारों तरफ़ अहाता खड़ा किया, उस में अंगूरों के रस का एक हौज़ खोदा और निगहबानी के लिये एक बुर्ज भी बनाया और तब उस ने अंगूरी बाग़ काश्तकारों को ठेके पर दे दिया और ख़ुद परदेस चला गया। जब अंगूर तोड़ने का मौसम आया तो उस ने अपने ख़ादिमो को ठेकेदारों के पास अपने फलों का हिस्सा लेने भेजा। “ठेकेदारों ने उस के ख़ादिमो को पकड़ कर किसी को पीटा, किसी को क़त्ल किया और किसी पर पत्थर बरसाये। तब उस ने कुछ और ख़ादिमो को भेजा जिन की तादाद पहले ख़ादिमो से ज़्यादा थी लेकिन किसानों ने उन के साथ भी वोही सुलूक किया। आख़िरकार उस ने अपने बेटे को उन के पास भेजा और सोचा, ‘के वह मेरे बेटे का तो ज़रूर एहतिराम करेंगे।’ “मगर जब ठेकेदारों ने उस के बेटे को देखा तो आपस में कहने लगे, ‘यही वारिस है, आओ इसे क़त्ल दें और उस की मीरास पर क़ब्ज़ा कर लें।’ लिहाज़ा उन्होंने उसे पकड़ कर अंगूरी बाग़ के बाहर निकाला और क़त्ल कर डाला। “पस जब अंगूरी बाग़ का मालिक ख़ुद आयेगा, तो वह उन ठेकेदारों के साथ क्या करेगा?” “उन्होंने जवाब दिया के वह उन बदकारों को बुरी तरह हलाक कर के अंगूरी बाग़ का ठेका दूसरे ठेकेदारों को देगा, जो मौसम पर उसे फल का हिस्सा अदा करें।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “क्या तुम ने किताब-ए-मुक़द्दस में कभी नहीं पढ़ा: “ ‘जिस पत्थर को मेमारों ने रद्द कर दिया वोही कोने के सिरे का पत्थर हो गये; ये काम ख़ुदावन्द ने किया है, और हमारी नज़र में यह तअज्जुब अंगेज़ है?’ “इसलिये मैं तुम से कहता हूं के ख़ुदा की बादशाही तुम से ले ली जायेगी और उस क़ौम को जो फल लाये, उसे दे दी जायेगी। और जो कोई इस पत्थर पर गिरेगा, टुकड़े-टुकड़े हो जायेगा लेकिन जिस पर ये गिरेगा उसे पीस डालेगा।” जब अहम-काहिन और फ़रीसी हुज़ूर ईसा की तम्सीलें सुनी तो, समझ गये के वह ये बातें हमारे हक़ में कहता है। और उन्होंने हुज़ूर को पकड़ने की कोशिश की लेकिन हुजूम से डरते थे क्यूंके लोग आप को नबी मानते थे। और हुज़ूर ईसा फिर उन से तम्सीलों में कहने लगे: “आसमान की बादशाही एक बादशाह की मानिन्द है जिस ने अपने बेटे की शादी की दावत दी। अपने ग़ुलामों को भेजा के वह उन लोगों को जिन्हें शादी की दावत दी गई थी, बुला लायें, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। “फिर उस ने और ग़ुलामों को ये कह कर रवाना किया के, ‘जिन्हें मैंने दावत दी है उन्हें कहो के खाना तय्यार हो चुका है: मेरे बैल और मोटे-मोटे जानवर ज़ब्ह किये जा चुके हैं और सब कुछ तय्यार है। शादी की दावत में शरीक होने के लिये आ जाओ।’ “लेकिन उन्होंने कोई पर्वा न की और चल दिये। कोई अपने खेत में चला गया, कोई अपने कारोबार में लग गया, बाक़ियों ने उस के ग़ुलामों को पकड़ कर उन की बेइज़्ज़ती की और जान से मार भी डाला। बादशाह बहुत ग़ज़बनाक हुआ। उस ने अपने सिपाही भेज कर उन ख़ूनियों को हलाक करवा दिया और उन के शहर को जला दिया। “तब उस ने अपने ग़ुलामों से कहा, ‘शादी की ज़ियाफ़त तय्यार है, लेकिन जो बुलाए गये थे वह इस के लाइक़ न थे। इसलिये चौराहों पर जाओ और जितने तुम्हें मिलें इन सब को ज़ियाफ़त में बुला लाओ।’ लिहाज़ा वह ग़ुलाम गये और जितने बुरे भले उन्हें मिले, सब को जमा कर के ले आये और शादीख़ाना मेहमानों से भर गया। “और जब बादशाह मेहमानों को देखने अन्दर आया तो उस की नज़र एक आदमी पर पड़ी जो शादी के लिबास में न था। बादशाह ने उस से पूछा, ‘दोस्त, तुम शादी का लिबास पहने बग़ैर यहां कैसे चले आये?’ लेकिन उस के पास इस का कोई जवाब न था। “इस पर बादशाह ने अपने ख़ादिमो से फ़रमाया, ‘इस के हाथ पांव बांध कर उसे बाहर अन्धेरे में डाल दो, जहां वह रोता और दांत पीसता रहेगा।’ “क्यूंके बुलाए हुए तो बहुत हैं, मगर चुने हुए कम हैं।” तब फ़रीसी वहां से चले गये और आपस में मशवरा किया के हुज़ूर को कैसे बातों में फंसायें। लिहाज़ा उन्होंने अपने बाज़ शागिर्द और हेरोदियों के सियासी गिरोह के साथ कुछ आदमी हुज़ूर ईसा के पास भेजे। उन्होंने कहा, “ऐ उस्ताद मुहतरम, हम जानते हैं के आप सच बोलते हैं और ये ख़्याल किये बग़ैर के कौन क्या है, रास्ती से ख़ुदा की राह पर चलने की तालीम देते हैं। इसलिये हमें बतायें के आप की राय में क़ैसर को महसूल अदा करना रवा है या नहीं?” हुज़ूर ईसा उन की मुनाफ़क़त को समझ गये और फ़रमाया, “ऐ रियाकारों! मुझे क्यूं आज़माते हो? जो सिक्‍का महसूल के तौर पर देते हो उसे मुझे दिखाओ।” वह एक दीनार ले आये। हुज़ूर ने उन से पूछा, “इस दीनार पर किस की सूरत और किस का नाम लिख्खा हुआ है?” उन्होंने जवाब दिया, “क़ैसर का।” तब हुज़ूर ने उन से फ़रमाया, “जो क़ैसर का है वह क़ैसर को और जो ख़ुदा का है, वह ख़ुदा को अदा करो।” और वह ये जवाब सुन कर, हैरान रह गये और हुज़ूर को छोड़कर चले गये। उसी दिन सदूक़ी जो क़ियामत के मुन्किर हैं, हुज़ूर ईसा के पास आये। और आप से ये सवाल किया, “ऐ उस्ताद मुहतरम, हज़रत मूसा ने फ़रमाया है के अगर कोई आदमी बेऔलाद मर जाये तो उस का भाई उस की बेवा से शादी कर ले ताके अपने भाई के लिये नस्ल पैदा कर सके। हमारे यहां सात भाई थे। पहले ने शादी की और बेऔलाद मर गया, वह अपनी बीवी अपने भाई के लिये छोड़ गया ताके वह उस की बीवी बन जाये। यही वाक़िया उस के दूसरे और तीसरे और सातवें भाई तक होता रहा। और आख़िरकार, वह औरत भी मर गई। अब ये बतायें के क़ियामत के दिन उन सातों में से किस की बीवी होगी क्यूंके उन सब ने उस से शादी की थी?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तुम गुमराह हो गये हो के तुम न तो किताब-ए-मुक़द्दस को ही जानते हो, और न ही ख़ुदा की क़ुदरत को। क्यूंके जब क़ियामत होगी तो लोग शादी नहीं करेंगे और न ही निकाह में दिये जायेंगे; लेकिन आसमान पर फ़रिश्तों की मानिन्द होंगे। और जहां तक क़ियामत यानी मुर्दों के जी उठने का सवाल है, तो क्या तुम ने वह जो ख़ुदा ने फ़रमाया है नहीं पढ़ा के ‘मैं इब्राहीम, इज़हाक़ और याक़ूब का ख़ुदा हूं?’ यानी वह मुर्दों का नहीं लेकिन ज़िन्दों का ख़ुदा है।” हुजूम हुज़ूर की ये तालीम सुन कर हैरान रह गये। जब फ़रीसियों ने सुना के हुज़ूर ईसा ने सदूक़ियों का मुंह बन्द कर दिया तो वह जमा हुए। और उन में से एक जो शरीअत का आलिम था, हुज़ूर ईसा को आज़माने की ग़रज़ से पूछा: “ऐ उस्ताद मुहतरम, तौरेत में सब से बड़ा हुक्म कौन सा है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया: “ ‘तुम ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा से अपने सारे दिल, अपनी सारी जान और अपनी सारी अक़्ल से महब्बत रखो। ’ सब से बड़ा और पहला हुक्म यही है। और दूसरा जो उस की मानिन्द है: ‘तुम अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखना।’ सारी शरीअत और नबियों के सहाइफ़ उन ही दो हुक्मों पर ज़ोर देते हैं।” जब फ़रीसी वहां जमा थे तो हुज़ूर ईसा ने इन से पूछा, “अलमसीह के बारे मैं तुम्हारा क्या ख़्याल है? वह किस का बेटा है?” उन्होंने जवाब दिया, “दाऊद का बेटा है।” हुज़ूर ने इन से फ़रमाया, “फिर दाऊद पाक रूह की हिदायत से, उसे ‘ख़ुदावन्द’ क्यूं कहते हैं? क्यूंके हज़रत दाऊद फ़रमाते हैं, “ ‘ख़ुदा तआला ने मेरे ख़ुदावन्द से कहा: “मेरी दाहिनी तरफ़ बैठो जब तक के मैं तुम्हारे दुश्मनों को तुम्हारे पांव के नीचे न कर दूं।” ’ पस अगर दाऊद अलमसीह को ‘ख़ुदावन्द,’ कहते हैं तो वह किस तरह दाऊद का बेटा हो सकते हैं?” उन में से कोई एक लफ़्ज़ भी जवाब में न कह सका, और उस दिन से फिर किसी ने भी हुज़ूर से और कोई सवाल करने की जुरअत न की। उस वक़्त हुज़ूर ईसा ने हुजूम से और अपने शागिर्दों से ये फ़रमाया: “शरीअत के आलिम और फ़रीसी हज़रत मूसा की गद्दी पर बैठे हैं। लिहाज़ा जो कुछ ये तुम्हें सिखायें इसे मानो और उस पर अमल करो लेकिन उन के नमूने पर मत चलो क्यूंके वह कहते तो हैं मगर करते नहीं। वह ऐसे भारी बोझ लादते जिन को उठाना मुश्किल है, बांध कर लोगों के कंधों पर रखते हैं लेकिन ख़ुद उसे हटाने के लिये अपनी उंगली तक नहीं लगाते। “वह अपने सब कामों को दिखाने को करते हैं: क्यूंके वह बड़े-बड़े तावीज़ पहनते हैं और अपनी पोशाक के किनारे चौड़े रखते हैं। वह ज़ियाफ़तों में सद्र नशीनी और यहूदी इबादतगाहों में आला दर्जे की कुर्सियां चाहते हैं। और बाज़ारों में एहतिरामन मुबारकबादी सलाम और लोगों से ‘रब्बी’ कहलाना पसन्द करते हैं। “लेकिन तुम ‘रब्बी,’ न कहलाओ क्यूंके तुम्हारा उस्ताद एक ही है और तुम सब भाई हो। और ज़मीन पर किसी को अपना ‘बाप,’ मत कहो क्यूंके तुम्हारा बाप एक ही है जो आसमान में है। और न ही हादी कहलाओ क्यूंके तुम्हारा एक ही हादी है यानी अलमसीह। लेकिन जो तुम में बड़ा है वह तुम्हारा ख़ादिम बने। और जो कोई अपने आप को बड़ा बनायेगा वह छोटा किया जायेगा और जो अपने आप को हलीम बनायेगा वह बड़ा किया जायेगा। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियो! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम ने आसमान की बादशाही को लोगों के दाख़िले के लिये बन्द कर देते हो, क्यूंके न तो ख़ुद दाख़िल होते हो तो और न दाख़िल होने वाले को दाख़िल होने देते हो। ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम बेवाओं के घरों को हड़प कर लेते हो और दिखावे के तौर पर लम्बी-लम्बी दुआएं करते हो। तुम्हें ज़्यादा सज़ा मिलेगी। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम किसी को अपना मुरीद बनने के लिये समुन्दर और ख़ुश्की का सफ़र करते हो, और जब बना लेते हो तो उसे अपने से दुगना जहन्नुमी बना देते हो। “ऐ अन्धे रहनुमाओ! तुम पर अफ़सोस तुम कहते हो, ‘के अगर कोई बैतुलमुक़द्दस की क़सम खाये तो कोई हर्ज नहीं लेकिन अगर बैतुलमुक़द्दस के सोने की क़सम खाये तो क़िस्म का पाबन्द होगा।’ ऐ अन्धों और अहमक़ों! बड़ा क्या है: सोना या बैतुलमुक़द्दस जिस की वजह से सोना पाक समझा जाता है? तुम कहते हो के, ‘अगर कोई क़ुर्बानगाह की क़सम खाये तो कोई हर्ज नहीं लेकिन अगर नज़्र की जो उस पर चढ़ाई जाती है, क़सम खाये तो क़सम का पाबन्द होगा।’ ऐ अन्धों! बड़ी चीज़ कौन सी है, नज़्र या क़ुर्बानगाह जिस की वजह से नज़्र को मुक़द्दस समझा जाता है? चुनांचे जो कोई क़ुर्बानगाह की क़सम खाता है वह क़ुर्बानगाह की और उस पर चढ़ाई जाने वाली सब चीज़ों की क़सम खाता है। और जो कोई बैतुलमुक़द्दस की क़सम खाता है वह बैतुलमुक़द्दस की और उस में रहने वाले की क़सम खाता है। और जो कोई आसमान की क़सम खाता है वह ख़ुदा के तख़्त और उस पर बैठने वाले की क़सम खाता है। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम पोदीना, सौंफ़ और ज़ीरा का दसवां हिस्सा तो ख़ुदा के नाम पर देते हो लेकिन शरीअत की ज़्यादा वज़्नी बातों यानी इन्साफ़, और रहमदिली और ईमान को फ़रामोश कर बैठे हो। तुम्हें लाज़िम था के ये भी करते और वह भी न छोड़ते। ऐ अन्धे रहनुमाओ! तुम मच्छर को छानते हो मगर ऊंट को निगल लेते हो। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम प्याले और रकाबी को बाहर से तो साफ़ करते हो मगर अन्दर से वह लूट और नारास्ती से भरी पड़ी है। ऐ अन्धे फ़रीसी! पहले प्याले और रकाबी को अन्दर से साफ़ कर ताके वह बाहर से भी साफ़ हो जायें। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम उन क़ब्रों की तरह हो जिन पर सफ़ेदी फिरी हुई है। वह बाहर से तो ख़ूबसूरत दिखाई देती हैं लेकिन अन्दर मुर्दों की हड्डीयों और हर तरह की नजासत से भरी होती हैं। इसी तरह तुम भी बाहर से तो लोगों को रास्तबाज़ नज़र आते हो लेकिन अन्दर रियाकारी और बेदीनी से भरे हुए हो। “ऐ शरीअत के आलिमों और फ़रीसियों! ऐ रियाकारों! तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम नबियों के लिये मक़बरे बनाते हो, और रास्तबाज़ों की क़ब्रें आरास्ता करते हो, और कहते हो, ‘के अगर हम अपने बाप दादा के ज़माने में होते तो नबियों को क़त्ल करने में उन का साथ न देते।’ यूं तुम ख़ुद ही गवाही देते हो के तुम नबियों को क़त्ल करने वालों की औलाद हो। ग़रज़ तुम अपने बाप दादा की रही सही कसर पूरी कर दो। “ऐ सांपो! ऐ ज़हरीले सांप के बच्चो! तुम जहन्नुम की सज़ा से कैसे बचोगे? इसलिये मैं नबियों, दानाओं और शरीअत के आलिमों को तुम्हारे पास भेज रहा हूं। तुम उन में से बाज़ को क़त्ल कर डालोगे, बाज़ को सलीब पर लटका दोगे और बाज़ को अपने यहूदी इबादतगाहों में कोड़ों से मारोगे और शहर-ब-शहर उन को सताते फिरोगे। ताके तमाम रास्तबाज़ों का ख़ून जो ज़मीन पर बहाया गया है, उस का अज़ाब तुम पर आये। यानी रास्तबाज़ हाबिल के ख़ून से ले कर बरकियाह के बेटे ज़करियाह के ख़ून तक का, जिसे तुम ने बैतुलमुक़द्दस और क़ुर्बानगाह के दरमियान क़त्ल किया था। मैं तुम से सच कहता हूं के ये सब कुछ इसी ज़माने के लोगों पर आयेगा। “ऐ यरूशलेम! ऐ यरूशलेम! तू जो नबियों को क़त्ल करती है और जो तेरे पास भेजे गये उन्हें संगसार कर डालती है, मैंने कई दफ़ा चाहा के तेरे बच्चों को एक साथ जमा कर लूं, जिस तरह मुर्ग़ी अपने चूज़ों को अपने परों के नीचे जमा कर लेती है, लेकिन तुम ने न चाहा। देखो! तुम्हारा घर तुम्हारे ही लिये वीरान छोड़ा जा रहा है। और मैं तुम से कहता हूं के तुम मुझे उस वक़्त तक हरगिज़ न देखोगे जब तक ये न कहोगे, ‘मुबारक है वह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है।’ ” और हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस से निकल कर बाहर जा रहे था के आप के शागिर्द आप के पास आये ताके हुज़ूर को बैतुलमुक़द्दस की मुख़्तलिफ़ इमारतें दिखायें। हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “क्या तुम ये सब कुछ देख रहे हो? मैं तुम से सच कहता हूं के यहां कोई एक भी पत्थर दूसरे के ऊपर बाक़ी न रहेगा जो गिराया न जायेगा।” जब हुज़ूर कोहे-ज़ैतून पर बैठे थे तो आप के शागिर्द तन्हाई में आप के पास आये और पूछने लगे, “हमें बतायें के ये बातें कब होंगी और आप के आमद और दुनिया के ख़त्म होने का निशान क्या है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब में उन से फ़रमाया: “ख़बरदार! कोई तुम्हें गुमराह न कर दे। क्यूंके बहुत से मेरे नाम से आयेंगे और दावा करेंगे, ‘मैं ही अलमसीह हूं,’ और यह कह कर बहुत से लोगों को गुमराह कर देंगे। और तुम लड़ाईयों की ख़बरें और अफ़्वाहें सुनोगे। ख़बरदार! घबराना मत, क्यूंके इन बातों का होना ज़रूरी है। लेकिन अभी ख़ातिमा न होगा। क्यूंके क़ौम पर क़ौम और सल्तनत पर सल्तनत हमला करेगी। और जगह-जगह क़हत पड़ेंगे और ज़लज़ले आयेंगे। ये सब आगे आने वाली मुसीबतों का ये सिर्फ़ आग़ाज़ ही होगा। “उस वक़्त लोग तुम्हें पकड़-पकड़ कर सख़्त ईज़ा देंगे और तुम्हें क़त्ल करेंगे, और सारी क़ौमें मेरे नाम की वजह से तुम से दुश्मनी रखेंगी। उस वक़्त बहुत से लोग ईमान से बर्गश्तः होकर एक दूसरे को पकड़वायेंगे और आपस में अदावत रखेंगे। और बहुत से झूटे नबी उठ खड़े होंगे और बहुत से लोगों को गुमराह कर देंगे। और बेदीनी के बढ़ जाने के बाइस कई लोगों की महब्बत ठंडी पड़ जायेगी। लेकिन जो आख़िर तक बर्दाश्त करेगा वह नजात पायेगा। और इस आसमानी बादशाही की ख़ुशख़बरी सारी दुनिया में सुनाई जायेगी ताके सब क़ौमों पर इस की गवाही हो और तब दुनिया का ख़ातिमा होगा। “पस जब तुम उस ‘उजाड़ देने वाली मकरूह चीज़ को,’ जिस का ज़िक्र दानीएल नबी ने किया है, मुक़द्दस मक़ाम में खड़ा देखो (पढ़ने वाला समझ ले) तब उस वक़्त जो यहूदिया में हों वह पहाड़ों पर भाग जायें। जो कोई छत पर हो वह नीचे न उतरे और न ही घर के अन्दर जा कर कुछ बाहर निकालने की कोशिश करे। जो शख़्स खेत में हो, अपना कपड़ा लेने के लिये वापस न लौटे। मगर हामिला ख़्वातीन और उन मांओं का जो उन दिनों में दूध पिलाती होंगी, वह दिन कितने ख़ौफ़नाक होंगे! पस दुआ करो के तुम्हें सर्दियों में या सबत के दिन भागना न पड़े। क्यूंके उस वक़्त की मुसीबत ऐसी बड़ी होगी के दुनिया के शुरू से न तो अब तक आई है और न फिर कभी आयेगी। “अगर उन दिनों की तादाद कम न करता तो, कोई जानदार ज़िन्दा न बचाया जाता, लेकिन चुने हुए लोगों की ख़ातिर उन दिनों की तादाद कम कर दी जायेगी। उस वक़्त अगर कोई तुम से कहे के, ‘देखो, अलमसीह यहां है!’ या, ‘वह वहां है!’ तो यक़ीन न करना। क्यूंके झूटे अलमसीह और झूटे नबी उठ खड़े होंगे और बड़े मोजिज़े और अजीब काम दिखायेंगे, ताके अगर मुम्किन हो तो बरगुज़ीदा लोगों को भी गुमराह कर दें। देखो, मैंने पहले ही तुम्हें बता दिया है। “पस अगर कोई तुम से कहे, ‘देखो वह ब्याबान में है, तो बाहर न जाना; या ये के वह अन्दरूनी कमरों में है, तो यक़ीन न करना।’ ” क्यूंके जैसे बिजली मशरिक़ से चमक कर मग़्रिब तक दिखाई देती है वैसे ही इब्न-ए-आदम का आना होगा। जहां मरा हुआ जानवर होता है वहां गिद्ध भी जमा हो जाते हैं। “उन दिनों की मुसीबत के बाद फ़ौरन “ ‘सूरज तारीक हो जायेगा, और चांद की रोशनी जाती रहेगी; आसमान से सितारे गिरेंगे, और आसमान की क़ुव्वतें हिलाई जायेंगी।’ “और उस वक़्त इब्न-ए-आदम का निशान आसमान पर दिखाई देगा और तब दुनिया की सब क़ौमें छाती पीटेंगी और इब्न-ए-आदम को आसमान के बादलों पर अज़ीम क़ुदरत और जलाल के साथ आते देखेंगी। और हुज़ूर अपने फ़रिश्तों को नरसिंगे की तेज़ आवाज़ के साथ भेजेंगे और वह अपने बरगुज़ीदा लोगों को चारों जानिब से यानी आसमान के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जमा करेंगे। “अन्जीर के दरख़्त से ये सबक़ सीखो: जूंही ही उस की डाली नरम होती है और पत्ते निकलते हैं तो तुम्हें मालूम हो जाता है, के गर्मी नज़दीक है। इसी तरह, जब तुम यह सब बातें होते देखो, तो जान लोगे के वह नज़दीक है, बल्के दरवाज़े ही पर है। मैं तुम से सच कहता हूं के इस नस्ल के ख़त्म होने से पहले ही ये सब कुछ पूरा होगा। आसमान और ज़मीन टल जायेंगी लेकिन मेरी बातें कभी नहीं टलेंगी। “मगर वो दिन और वक़्त कब आयेगा कोई नहीं जानता, न तो आसमान के फ़रिश्ते जानते हैं, न बेटा, मगर सिर्फ़ बाप ही जानते हैं। जैसा नूह के दिनों में हुआ था वैसा ही इब्न-ए-आदम की आमद के वक़्त होगा। क्यूंके जिस तरह तूफ़ानों से पहले के दिनों में लोग खाते पीते और शादी करते कराते रहे, जब तक हज़रत नूह उस लकड़ी के जहाज़ में दाख़िल न हो गये। और जब तक के सेलाब आकर उन्हें बहा न ले गया उन सब को ख़बर तक न हुई। उसी तरह इब्न-ए-आदम की आमद भी होगी। उस वक़्त दो आदमी खेत में होंगे; एक ले लिया जायेगा और दूसरा छोड़ दिया जायेगा। दो औरतें चक्की पीसती होंगी; एक ले ली जायेगी और दूसरी छोड़ दी जायेगी। “पस जागते रहो क्यूंके तुम नहीं जानते के तुम्हारा ख़ुदावन्द किस दिन आयेगा। लेकिन याद रखो के अगर घर के मालिक को मालूम हो ताके चोर रात को किस वक़्त आयेगा तो वह जागता रहता और अपने घर में नक़ब न लगने देता। पस तुम भी तय्यार रहो क्यूंके जिस घड़ी तुम्हें उम्मीद तक न होगी इब्न-ए-आदम उसी वक़्त आ जायेगा। “फिर वह वफ़ादार और होशयार ख़ादिम कौन सा है, जिसे उस के मालिक ने अपने घर के ख़ादिमो पर मुक़र्रर किया ताके उन्हें वक़्त पर खाना दिया करे? वह ख़ादिम बड़ा मुबारक है अगर उस का मालिक आकर उसे ऐसा ही करते पाये। मैं तुम से सच कहता हूं के वह अपनी सारी मिल्कियत की देख-भाल का इख़्तियार उस के हवाले कर देगा। लेकिन अगर वह ख़ादिम बुरा निकले और अपने दिल में कहने लगे, ‘मेरे मालिक के आने में अभी देर है,’ और अपने साथियों को मारने पीटने लगे और शराबियों के साथ खाना-पीना शुरू कर दे। तो उस ख़ादिम का मालिक किसी ऐसे दिन वापस आ जायेगा, जिस की उसे उम्मीद न होगी, और जिस घड़ी की उसे ख़बर न होगी। तो वह उसे ग़ज़बनाक सज़ा देगा उस का अन्जाम रियाकारों के जैसा होगा जहां वह रोता और दांत पीसता रहेगा। “उस वक़्त आसमान की बादशाही इन दस कुंवारियों की मानिन्द होगी जो अपने मशालें ले कर दुल्हा से मुलाक़ात करने निकलें। इन में से पांच बेवक़ूफ़ और पांच अक़्लमन्द थीं। जो बेवक़ूफ़ थीं उन्होंने मशालें तो ले लें लेकिन अपने साथ तेल न लिया। मगर जो अक़्लमन्द थीं उन्होंने अपने मशालों के अलावा कुप्पियों में तेल भी अपने साथ ले लिया। और जब दुल्हा के आने में देर हो गई तो वह सब की सब ऊंघते-ऊंघते सो गईं। “आधी रात हुई तो धूम मच गया: ‘के दुल्हा आ गया है! उस से मिलने के लिये आ जाओ।’ “इस पर सब कुंवारियां जाग उठीं और अपनी-अपनी मशालें दुरुस्त करने लगीं। और बेवक़ूफ़ कुंवारियों ने अक़्लमन्द कुंवारियों से कहा, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दे दो क्यूंके हमारी मशालें बुझी जा रही हैं।’ ” अक़्लमन्द कुंवारियों ने जवाब दिया, “ ‘नहीं, शायद ये तेल हमारे और तुम्हारे दोनों के लिये काफ़ी न हो, बेहतर है के तुम दुकान पर जा कर अपने लिये तेल ख़रीद लो।’ “जब वह तेल ख़रीदने जा रही थीं तो दुल्हा आ पहुंचा। जो कुंवारियां तय्यार थीं, दुल्हा के साथ शादी की ज़ियाफ़त में अन्दर चली गईं और दरवाज़ा बन्द कर दिया गया। “फिर बाद में बाक़ी कुंवारियां भी आ गईं और कहने लगीं, ‘ऐ मालिक, ऐ मालिक, हमारे लिये दरवाज़ा खोल दीजिये।’ “लेकिन मालिक ने जवाब दिया, ‘सच तो ये है के मैं तुम्हें नहीं जानता।’ “लिहाज़ा जागते रहो, क्यूंके तुम नहीं जानते के वो दिन को न उस घड़ी को। “आसमान की बादशाही उस आदमी की तरह भी है, जो सफ़र पर रवाना होने को था, जो परदेस जाते वक़्त अपने ख़ादिमो को बुलाकर अपना माल उन के सुपुर्द कर दिया।” उस ने हर एक को उस की क़ाबिलीयत के मुताबिक़ दिया, एक को पांच तोड़े दिये, दूसरे को दो और तीसरे को एक तोड़ा और फिर वह सफ़र पर रवाना हो गया। जिस ख़ादिम को पांच तोड़े मिले थे उस ने फ़ौरन जा कर कारोबार किया और पांच तोड़े और कमाए। इसी तरह जिसको दो तोड़े मिले थे उस ने भी दो और कमा लिये। लेकिन जिस आदमी को एक तोड़ा मिला था उस ने जा कर ज़मीन खोदी और अपने मालिक की रक़म छुपा दी। “काफ़ी अर्से के बाद उन का मालिक वापस आया और ख़ादिमो से हिसाब लेने लगा। जिसे पांच तोड़े मिले थे वह पांच तोड़े और ले कर हाज़िर हुआ। ‘ऐ मालिक,’ उस ने कहा, ‘तूने मुझे पांच तोड़े दिये थे। देखिये! मैंने पांच और कमा लिये।’ “उस के मालिक ने उस से कहा, ‘ऐ अच्छे और वफ़ादार ख़ादिम, शाबाश! तूने थोड़ी सी रक़म को वफ़ादारी से इस्तिमाल किया है; मैं तुझे बहुत सी चीज़ों का मुख़्तार बनाऊंगा। और अपने मालिक की ख़ुशी में शामिल हो!’ “और जिसे दो तोड़े मिले थे वह भी हाज़िर हुआ और कहने लगा, ‘ऐ मालिक! तूने मुझे दो तोड़े दिये थे; देख मैंने दो और कमा लिये।’ “उस के मालिक ने उस से कहा, ‘ऐ अच्छे और वफ़ादार ख़ादिम, शाबाश! तूने थोड़ी सी रक़म को वफ़ादारी से इस्तिमाल किया है; मैं तुझे बहुत सी चीज़ों का मुख़्तार बनाऊंगा। और अपने मालिक की ख़ुशी में शामिल हो!’ “तब जिसे एक तोड़ा मिला था वह भी हाज़िर हुआ और कहने लगा, ‘ऐ मालिक! मैं जानता था के तू सख़्त आदमी है, जहां बोया नहीं वहां से भी काटता है और जहां बिखेरा नहीं वहां से जमा करता है। इसलिये मैंने डर के मारे आप के तोड़े को ज़मीन में गाड़ दिया था। देखिये, जो आप का था वह मैं आप को लौटा रहा हूं।’ “उस के मालिक ने जवाब दिया, ‘ऐ शरीर और सुस्त ख़ादिम! अगर तुझे मालूम था के जहां बोया नहीं, मैं वहां से काटता हूं और जहां बिखेरा नहीं वहां से जमा करता हूं? तो तुझे चाहिये था के मेरी रक़म साहूकारों के हवाले करता ताके मैं वापस आकर अपनी रक़म सूद समेत ले लेता। “ ‘अब ऐसा करो के इस से वह तोड़ा ले लो और उसे दे दो जिस के पास दस तोड़े हैं। क्यूंके जिस के पास है उसे और भी दिया जायेगा और उस के पास इफ़रात से होगा लेकिन जिस के पास नहीं है, उस से वह भी जो उस के पास है, ले लिया जायेगा। और इस निकम्मे ख़ादिम को बाहर अन्धेरे में डाल दो जहां वह रोता और दांत पीसता रहेगा।’  “जब इब्न-ए-आदम अपने जलाल में आयेगा और उस के साथ सभी फ़रिश्ते आयेंगे, तब वह अपने जलाली तख़्त पर बैठेगा। और सब क़ौमें उस के हुज़ूर में जमा की जायेंगी और वह लोगों को एक दूसरे से इस तरह जुदा करेगा जिस तरह गल्लेबान भेड़ों को बकरीयों से जुदा करता है। वह भेड़ों को अपनी दाईं तरफ़ और बकरीयों को बाईं तरफ़ खड़ा करेगा। “तब बादशाह अपनी दाईं तरफ़ के लोगों से कहेगा, ‘आओ, ऐ मेरे बाप के मुबारक लोगों! इस बादशाही को जो बिना-ए-आलम से तुम्हारे लिये तय्यार की गई है, इस मीरास को क़बूल करो। क्यूंके मैं भूका था और तुम ने मुझे खाना खिलाया, प्यासा था और तुम ने मुझे पानी पिलाया, परदेसी था और तुम ने घर में जगह दी, नंगा था तो मुझे कपड़े पहनाये, बीमार था तो तुम ने मेरी देख-भाल की, क़ैद में था तो तुम मुझ से मिलने आये।’ “तब रास्तबाज़ जवाब मैं कहेंगे, ‘ऐ ख़ुदावन्द! हम ने कब तुझे भूका देखकर खाना खिलाया, या प्यासा देखकर पानी पिलाया? हम ने कब तुम परदेसी देखकर घर में जगह दी या नंगा देखकर तुझे कपड़े पहनाये? और हम कब तुम को बीमार या क़ैद में देखकर तुम से मिलने आये?’ “इस पर बादशाह जवाब देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूं के जब तुम ने मेरे इन सब से छोटे भाईयों और बहनों में से किसी एक के साथ ये सुलूक किया तो गोया मेरे ही साथ किया।’ “तब वह अपनी बाईं तरफ़ वालों से कहेगा, ‘ऐ लानती लोगों! मेरे सामने से दूर हो जाओ और उस अब्दी आग में चले जाओ जो इब्लीस और उस के फ़रिश्तों के लिये तय्यार की गई है। क्यूंके मैं जब भूका था तो तुम ने मुझे खाना न खिलाया, प्यासा था तो तुम ने मुझे पानी न पिलाया। परदेसी था तो तुम ने मुझे अपने घर में जगह न दी। नंगा था तो मुझे कपड़े न पहनाये, बीमार और क़ैद में था तो तुम मुझ से मिलने न आये।’ “इस पर वह लोग भी कहेंगे, ‘ऐ ख़ुदावन्द, हम ने कब तुझे भूका या प्यासा, परदेसी या नंगा, बीमार या क़ैद में देखा और तेरी ख़िदमत न की?’ “तब बादशाह उन्हें जवाब देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूं के जब तुम ने मेरे इन सब से छोटे में से किसी एक के साथ ये सुलूक न किया तो गोया मेरे साथ भी नहीं किया।’ “चुनांचे ये लोग अब्दी सज़ा पायेंगे, मगर रास्तबाज़ अब्दी ज़िन्दगी में दाख़िल होंगे।” जब हुज़ूर ईसा ये सब बातें ख़त्म कर चुके तो हुज़ूर ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “तुम्हें पता है के दो दिन के बाद ईद-ए-फ़सह है और इब्न-ए-आदम को पकड़वा दिया जायेगा ताके वह मस्लूब किया जाये।” तब अहम-काहिनों और क़ौम के बुज़ुर्गों ने आला काहिन काइफ़ा की हवेली में जमा होकर, मशवरा किया के हुज़ूर ईसा को फ़रेब से पकड़ लें और क़त्ल कर दें। उन्होंने कहा, “मगर ईद के दौरान नहीं, कहीं ऐसा न हो लोगों में हंगामा बरपा हो जाये।” जिस वक़्त हुज़ूर ईसा बैतअन्नियाह में शमऊन कोढ़ी के घर में थे, तो एक ख़ातून संगमरमर के इत्रदान में क़ीमती इत्र ले कर उन के पास पहुंची और जब वह खाना खाने बैठे तो उन के सर पर इत्र उंडेल दिया। शागिर्द ये देखकर बहुत ख़फ़ा हुए और कहने लगे, “इत्र को ज़ाए करने की क्या ज़रूरत थी? अगर उसे बेचा जाता तो बड़ी क़ीमत हाथ आती जिसे ग़रीबों में तक़्सीम किया जा सकता था।” हुज़ूर ईसा ने ये जान कर उन से फ़रमाया, “तुम इस ख़ातून को क्यूं परेशान कर रहे हो? इस ने तो मेरे साथ भलाई की है। क्यूंके ग़रीब ग़ुरबा, तो हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे, लेकिन मैं यहां हमेशा तुम्हारे पास न रहूंगा। और इस ने तो पहले ही से मेरी तद्फ़ीन की तय्यारी के लिये मेरे जिस्म को इत्र से मसह कर दिया है। मैं तुम से सच कहता हूं के सारी दुनिया में जहां कहीं इन्जीलों की मुनादी की जायेगी वहां इस ख़ातून की यादगारी में इस के इस काम का ज़िक्र भी किया जायेगा।” फिर बारह शागिर्दों में से एक जिस का नाम यहूदाह इस्करियोती था, अहम-काहिनों के पास गया और उन से पूछा, “अगर मैं हुज़ूर ईसा को तुम्हारे हवाले कर दूं तो तुम मुझे क्या दोगे?” उन्होंने चांदी के तीस सके गिन कर उसे दे दिये। और वह उस वक़्त से हुज़ूर ईसा को पकड़वाने का मुनासिब मौक़ा ढूंडने लगा। ईद-ए-फ़तीर के पहले दिन शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा के पास आकर पूछा, “आप ईद-ए-फ़सह का खाना कहां खाना चाहते है ताके हम जा कर तय्यारी करें।” हुज़ूर ने जवाब दिया, “शहर में फ़ुलां शख़्स के पास जाओ और कहो, ‘उस्ताद फ़रमाते हैं के मेरा वक़्त नज़दीक है। मैं अपने शागिर्दों के साथ तेरे घर में ईद-ए-फ़सह मनाऊंगा।’ ” पस जैसा हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों को हुक्म दिया था, उन्होंने वैसा ही किया और ईद-ए-फ़सह का खाना तय्यार किया। जब शाम हुई तो हुज़ूर ईसा अपने बारह शागिर्दों के साथ दस्तरख़्वान पर खाना खाने बैठे। और खाते वक़्त हुज़ूर ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं के तुम में से एक मुझे पकड़वायेगा।” शागिर्दों को बड़ा रंज पहुंचा और वह बारी-बारी आप से पूछने लगे, “ख़ुदावन्द! क्या वह मैं तो नहीं हूं?” हुज़ूर ने जवाब दिया, “जो शख़्स मेरे साथ थाली में खा रहा है वोही मुझे पकड़वायेगा। इब्न-ए-आदम तो जैसा उस के हक़ में लिख्खा हुआ है। लेकिन उस शख़्स पर अफ़सोस जो इब्न-ए-आदम को पकड़वाता है! उस के लिये बेहतर था के वह पैदा ही न होता।” तब यहूदाह जो उसे पकड़वाने को था बोल उठा, “रब्बी! क्या मैं तो नहीं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तूने ख़ुद ही कह दिया।” जब वह खा ही रहे थे, हुज़ूर ईसा ने रोटी ली, और ख़ुदा का शुक्र कर के, उस के टुकड़े किये और शागिर्दों को ये कह कर दिया, “इसे लो और खाओ; ये मेरा बदन है।” फिर आप ने प्याला लिया, और ख़ुदा का शुक्र कर के, शागिर्दों को दिया और कहा, “तुम सब इस में से पियो। ये मेरा अह्द का वह ख़ून है जो बहुतेरों के गुनाहों की मुआफ़ी के लिये बहाया जाता है। मैं तुम से कहता हूं के मैं ये अंगूर का शीरा फिर कभी न पियूंगा जब तक के अपने आसमानी बाप की बादशाही में तुम्हारे साथ नया न पियूं।” तब उन्होंने एक नग़मा गाया, और वहां से कोहे-ज़ैतून पर चले गये। उस वक़्त हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “तुम इसी रात मेरी वजह से डगमगा जाओगे क्यूंके लिख्खा है: “ ‘मैं चरवाहे को मारूंगा, और गल्ले की भेड़ें मुन्तशिर हो जायेंगी।’ मगर मैं अपने जी उठने के बाद, तुम से पहले सूबे गलील को जाऊंगा।” पतरस ने जवाब दिया, “ख़्वाह तेरी वजह से सब लड़खड़ा जायें, लेकिन मैं कभी ठोकर नहीं खाऊंगा।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं के आज इसी रात, इस से पहले के मुर्ग़ बांग दे तुम तीन दफ़ा मेरा इन्कार करोगे।” लेकिन पतरस ने कहा, “अगर आप के साथ मुझे मरना भी पड़े, तब भी आप का इन्कार न करूंगा।” और बाक़ी शागिर्दों ने भी यही दोहराया। तब हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ गतसिमनी नामी एक जगह पहुंचे, और आप ने उन से फ़रमाया, “जब तक मैं दुआ करता हूं तुम यहीं बैठे रहना।” वह पतरस और ज़ब्दी के दोनों बेटों को साथ ले गये और ग़मगीन और परेशानी के आलम में थे। और उन से फ़रमाया, “ग़म की शिद्दत से मेरी जान निकली जा रही है। तुम यहां ठहरो और मेरे साथ जागते रहो।” फिर ज़रा आगे जा कर और मुंह के बल ज़मीन पर गिरकर हुज़ूर यूं दुआ करने लगे, “ऐ मेरे बाप! अगर मुम्किन हो तो ये प्याला मुझ से टल जाये, फिर भी जो मैं चाहता हूं वह नहीं लेकिन जो आप चाहते हैं वैसा ही हो।” जब वह शागिर्दों के पास वापस आये तो उन्हें सोते पाया। और पतरस से कहा, “क्या तुम एक घंटा भी मेरे साथ जाग न सके? जागते और दुआ करते रहो ताके आज़माइश में न पड़ो। रूह तो आमादा है, मगर जिस्म कमज़ोर है।” फिर हुज़ूर ईसा ने दुबारा जा कर यूं दुआ की, “ऐ मेरे बाप! अगर ये प्याला मेरे पिये बग़ैर नहीं टल सकता तो आप की मर्ज़ी पूरी हो।” और जब आप वापस आये तो शागिर्दों को फिर से सोते पाया क्यूंके उन की आंखें नींद से भरी थीं। लिहाज़ा हुज़ूर ईसा उन्हें छोड़कर चले गये और तीसरी दफ़ा वोही दुआ की जो पहले की थी। इस के बाद शागिर्दों के पास वापस आकर उन से कहने लगे, “क्या तुम अभी तक राहत की नींद सो रहे हो? बस करो, देखो! वह वक़्त आ पहुंचा है के इब्न-ए-आदम गुनहगारों के हवाले किया जाये। उठो! आओ चलें! देखो मेरा पकड़वाने वाला नज़दीक आ पहुंचा है!” हुज़ूर ईसा ये बातें कह ही रहे थे के यहूदाह जो बारह शागिर्दों में से एक था, वहां आ पहुंचा। उस के हमराह एक बड़ा हुजूम था जो तलवारें और लाठियां लिये हुए थे और जिन्हें अहम-काहिनों और क़ौम के बुज़ुर्गों ने भेजा था। यहूदाह यानी पकड़वाने वाले ने उन्हें ये निशान दिया था: “जिस का मैं बोसा लूं वोही हुज़ूर ईसा हैं; तुम उन्हें पकड़ लेना।” वहां आते ही वह हुज़ूर ईसा के नज़दीक गया और कहा, “सलाम, ऐ रब्बी!” और उन के बोसे लेने लगा। हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “दोस्त! जिस काम के लिये तुम आये हो, उसे पूरा कर लो।” चुनांचे लोगों ने आगे बढ़कर हुज़ूर ईसा को पकड़ा और क़ब्ज़ा में ले लिया। हुज़ूर ईसा के साथियों में से एक ने अपनी तलवार खींची और आला काहिन के ख़ादिम पर चलाई और उस का कान उड़ा दिया। हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “अपनी तलवार को मियान में रख ले क्यूंके जो तलवार चलाते हैं, तलवार ही से हलाक होंगे। क्या तुझे पता नहीं के मैं अपने बाप से मिन्नत कर सकता हूं और वह इसी वक़्त फ़रिश्तों के बारह लश्कर से भी ज़्यादा मेरे पास भेज देगा? लेकिन फिर किताब-ए-मुक़द्दस की वह बातें कैसे पूरी होंगी जिन में लिखा है के यह सब इसी तरह पूरा होना ज़रूरी?” फिर हुज़ूर ईसा ने हुजूम से फ़रमाया, “क्या मैं कोई डाकू हूं के तुम तलवारें और लाठियां ले कर मुझे पकड़ने आये हो? मैं हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस में बैठ कर तालीम दिया करता था, तब तो तुम ने मुझे गिरिफ़्तार नहीं किया। लेकिन ये सब कुछ इसलिये हुआ के किताब-ए-मुक़द्दस में नबियों की लिखी हुई बातें पूरी हो जायें।” तब सारे शागिर्द हुज़ूर को छोड़कर चले गये। जिन लोगों ने हुज़ूर ईसा को गिरिफ़्तार किया था वह आप को आला काहिन काइफ़ा के पास ले गये जहां शरीअत के आलिम और बुज़ुर्ग लोग जमा थे। और पतरस भी दूर से हुज़ूर ईसा का पीछा करते हुए आला काहिन की हवेली के अन्दर दीवानख़ाने तक जा पहुंचे। वह वहां पहरेदारों के साथ बैठ कर नतीजा का इन्तिज़ार करने लगे। अहम-काहिन और अदालते-आलिया के सब अरकान ऐसी झूटी गवाही की तलाश में थे जिस की बिना पर अहम-काहिन हुज़ूर ईसा को क़त्ल करवा सकें। मगर कुछ न पा सके, हालांके कई झूटे गवाह पेश भी हुए। आख़िर में दो गवाह सामने आये और गवाही दी, “ ‘इस शख़्स ने कहा था के मैं ख़ुदा के बैतुलमुक़द्दस को ढा कर तीन दिन में फिर से खड़ा कर सकता हूं।’ ” तब आला काहिन उन के बीच में खड़े होकर हुज़ूर ईसा से पूछने लगा, “क्या तेरे पास कोई जवाब है? ये तेरे खिलाफ़ क्या गवाही दे रहे हैं?” मगर हुज़ूर ईसा ख़ामोश रहे। आला काहिन ने फिर पूछा, “मैं तुझे ज़िन्दा ख़ुदा की क़सम देता हूं: हमें बता के क्या तू ख़ुदा का बेटा अलमसीह है?” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “तुम ने ख़ुद ही कह दिया है, फिर भी मैं तुम्हें बताता हूं के आइन्दा तुम इब्न-ए-आदम को क़ादिर-ए-मुतलक़ की दाहिनी तरफ़ बैठा और आसमान के बादलों पर आता देखोगे।” तब आला काहिन ने अपने कपड़े फाड़ कर कहा, “इस ने कुफ़्र बका है! अब हमें गवाहों की क्या ज़रूरत है? तुम ने अभी-अभी इस का कुफ़्र सुना है। तुम्हारी क्या राय है?” उन्होंने जवाब दिया, “वह क़त्ल के लाइक़ है।” इस पर आप के मुंह पर थूका, आप के मुक्के मारे और बाज़ ने तमांचे मार कर कहा, “ऐ अलमसीह, अगर तू नबी है तो नुबुव्वत कर के तुझे किस ने मारा?” पतरस बाहर दीवानख़ाने में बैठे हुए थे और एक कनीज़ वहां आई। और कहने लगी, “तू भी तो उस गलीली ईसा के साथ था।” लेकिन पतरस ने सब के सामने इन्कार किया और कहा, “पता नहीं तू क्या कह रही है?” तब वह बाहर फाटक की तरफ़ गये जहां एक और कनीज़ ने पतरस को देखकर उन लोगों से जो वहां थे, कहा, “ये आदमी भी ईसा नासरी के साथ था।” पतरस ने क़सम खाकर फिर इन्कार करते हुए कहा: “मैं तो इस आदमी को जानता तक नहीं!” कुछ देर बाद वह लोग जो वहां खड़े थे, पतरस के पास आये और कहने लगे, “यक़ीनन तू भी उन ही में से है क्यूंके तेरी बोली से भी यही ज़ाहिर होता है।” तब पतरस ख़ुद पर लानत भेजने लगा और क़समें खाकर कहने लगा, “मैं इस आदमी से वाक़िफ़ नहीं हूं।” उसी वक़्त मुर्ग़ ने बांग दी। तब पतरस को हुज़ूर ईसा की वह बात याद आई: “मुर्ग़ के बांग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।” और पतरस बाहर जा कर ज़ार-ज़ार रोये। सुबह होते ही सारे अहम-काहिनों और क़ौम के बुज़ुर्गों ने आपस में हुज़ूर ईसा को क़त्ल करने का मन्सूबा बनाया के उन्हें किस तरह मार डालें। और हुज़ूर ईसा को बांध कर ले गये और रोमी हाकिम पीलातुस के हवाले कर दिया। जब हुज़ूर ईसा को पकड़वाने वाले यहूदाह ने, ये देखा के हुज़ूर ईसा को मुजरिम ठहराया गया है, तो बहुत पशेमान हुआ और अहम-काहिनों और बुज़ुर्गों के पास जा कर चांदी के उनतीस सिक्‍को को ये कहते हुए वापस कर दिया। “मैंने गुनाह किया के एक बेक़ुसूर को क़त्ल के लिये पकड़वा दिया।” वह कहने लगे, “हमें इस से क्या लेना देना? तू ही जान ये तुम्हारी परेशानी है।” इस पर यहूदाह इन तीस सिक्‍को को बैतुलमुक़द्दस में फेंक कर चला गया और ख़ुद को फांसी लगा ली। अहम-काहिनों ने उन सिक्‍को को उठा लिया और कहा के, “ये रक़म तो ख़ून की क़ीमत है, उसे बैतुलमुक़द्दस के ख़ज़ाने में डालना जायज़ नहीं।” चुनांचे उन्होंने फ़ैसला कर के उस रक़म से कुम्हार का खेत परदेसियों को दफ़न करने के लिये ख़रीद लिया। यही वजह है के वह खेत आज तक ख़ून का खेत कहलाता है। तब वह बात पूरी हो गई जो यरमियाह नबी की मारिफ़त कही गई थी: “उन्होंने उस की मुक़र्ररः क़ीमत के तौर पर चांदी के तीस सिक्‍के ले लिये। ये क़ीमत बनी इस्राईल के बाज़ लोगों ने उस के लिये ठहराई थी, और उन्होंने उस रक़म का इस्तिमाल कुम्हार के खेत ख़रीदने के लिये किया, जैसा ख़ुदावन्द ने मुझे हुक्म दिया था।” हुज़ूर ईसा हाकिम के सामने लाये गये और हाकिम ने आप से पूछा, “क्या आप यहूदियों के बादशाह हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ये तो आप ख़ुद ही कह रहे हैं।” और जब अहम-काहिन और बुज़ुर्ग हुज़ूर ईसा पर इल्ज़ाम लगाये जा रहे थे तो आप ने कोई जवाब न दिया। इस पर पीलातुस ने आप से पूछा, “क्या तुम ये नहीं सुन रहे हो, ये लोग तुम्हारे ख़िलाफ़ कितने इल्ज़ाम लगा रहे हैं?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने पीलातुस को किसी भी इल्ज़ाम का कोई जवाब न दिया, इस पर हाकिम को बड़ा तअज्जुब हुआ। और यह हाकिम का दस्तूर था के वह ईद के मौक़े पर एक क़ैदी को जिसे हुजूम चाहता था छोड़ दिया करता था। उस वक़्त उन का ईसा बरअब्बा नामी एक मशहूर क़ैदी था। जब वह लोग पीलातुस के हुज़ूर में जमा हुए तो पीलातुस ने उन से पूछा, “तुम किसे चाहते हो के मैं तुम्हारी ख़ातिर रहा करूं? बरअब्बा को या ईसा को जो अलमसीह कहलाता है?” क्यूंके पीलातुस को बख़ूबी इल्म था के अहम-काहिनों ने महज़ हसद की वजह से उसे पकड़वाया है। और जब पीलातुस तख़्त-ए-अदालत पर बैठा था तो उस की बीवी ने उसे ये पैग़ाम भेजा: “इस रास्तबाज़ आदमी के ख़िलाफ़ कुछ मत करना क्यूंके मैंने आज ख़्वाब में इस के सबब से बहुत दुख उठाया है।” लेकिन अहम-काहिनों और बुज़ुर्गों ने लोगों को उकसाया के वह पीलातुस से बरअब्बा की रिहाई का मुतालबा करें और हुज़ूर ईसा को मरवा डालें। जब हाकिम ने उन से पूछा, “तुम इन दोनों में से किसे चाहते हो के मैं तुम्हारे लिये छोड़ दूं?” उन्होंने कहा, “बरअब्बा को।” पीलातुस ने उन से कहा, “फिर मैं ईसा के साथ क्या करूं, जिसे अलमसीह कहते हैं?” सब बोल उठे, “इसे मस्लूब करो!” “आख़िर क्यूं? ईसा ने कौन सा जुर्म किया है?” पीलातुस ने उन से पूछा। लेकिन सब लोग मज़ीद तैश में चिल्ला कर बोले, “इसे मस्लूब करो!” जब पीलातुस ने देखा के कुछ बन नहीं पड़ रहा, लेकिन उलटा बुलवा शुरू होने को है तो उस ने पानी ले कर लोगों के सामने अपने हाथ धोए और कहा। “मैं इस बेक़ुसूर के ख़ून से बरी होता हूं, अब तुम ही इस के लिये जवाबदेह हो।” और सब लोगों ने जवाब दिया, “इस का ख़ून हम पर और हमारी औलाद की गर्दन पर हो!” इस पर पीलातुस ने उन की ख़ातिर बरअब्बा को रिहा कर दिया और हुज़ूर ईसा को कोड़े लगवा कर उन के हवाले कर दिया ताके हुज़ूर को मस्लूब किया जाये। तब पीलातुस के फ़ौजियों ने हुज़ूर ईसा को प्राइतोरियम यानी शाही क़िले के अन्दरूनी सहन में ले गये और सारी पलटन को वहां जमा किया। उन्होंने आप के कपड़े उतार डाले और एक क़िरमिज़ी चोग़ा पहना दिया। फिर कांटों का ताज बना कर हुज़ूर के सर पर रखा और आप के दाहने हाथ में एक छड़ी को थमा दिया और हुज़ूर के सामने घुटने टेक कर आप की हंसी उड़ाने लगे; “ऐ यहूदियों के बादशाह, आदाब!” और हुज़ूर पर थूका और छड़ी ले कर आप के सर पर मारने लगे। जब सिपाही हुज़ूर की हंसी उड़ा चुके, तो उन्होंने वह क़िरमिज़ी चोग़ा उतार कर आप को उन के कपड़े पहन दिये और आप को सलीब देने के वास्ते वहां से ले जाने लगे। जब वह वहां से बाहर निकल रहे थे तो उन्हें एक कुरेनी आदमी मिला, जिस का नाम शमऊन था और उन्होंने उसे पकड़ा और मजबूर किया के वह हुज़ूर ईसा की सलीब उठाकर ले चले। और जब वो सब गुलगुता नामी जगह पर पहुंचे (जिस के मानी “खोपड़ी की जगह” है)। उन्होंने हुज़ूर ईसा को मुर मिला अंगूरी शीरा पीने के लिये दिया; लेकिन आप ने चख कर उसे पीने से इन्कार कर दिया। जब उन्होंने हुज़ूर ईसा को मस्लूब कर दिया तो उन्होंने आप के कपड़ों पर क़ुरा डाल कर आपस में तक़्सीम कर लिया। और वहीं बैठ कर उस की निगहबानी करने लगे। और उन्होंने एक तख़्ती पर हुज़ूर की सज़ा का फ़रमान लिख कर आप के सर के ऊपर सलीब पर लगा दिया: ये यहूदियों का बादशाह ईसा है। तब उन्होंने दो डाकूओं को हुज़ूर ईसा के साथ, एक को आप के दाईं तरफ़ और दूसरे को बाईं तरफ़ मस्लूब किया। वहां से गुज़रने वाले सब लोग सर हिला-हिला कर हुज़ूर को लान-तान करते और कहते थे, “अरे बैतुलमुक़द्दस को ढा कर तीन दिन में इसे फिर से बनाने वाले, अपने आप को बचा अगर तू ख़ुदा का बेटा है तो सलीब से नीचे उतर आ!” इसी तरह अहम-काहिन, शरीअत के आलिम और बुज़ुर्ग भी हुज़ूर की हंसी उड़ाते हुए कहते थे, “इस ने औरों को बचाया, लेकिन अपने आप को नहीं बचा सकता! ये तो इस्राईल का बादशाह है! अगर अब भी सलीब पर से नीचे उतर आये तो हम इस पर ईमान ले आयेंगे।” इस का तवक्कुल ख़ुदा पर है। अगर ख़ुदा उसे चाहता है तो अब भी इसे बचा ले, क्यूंके इस ने दावा किया था, “ ‘मैं ख़ुदा का बेटा हूं।’ ” इसी तरह वह डाकू भी जो हुज़ूर ईसा के साथ मस्लूब हुए थे, हुज़ूर को लान-तान कर रहे थे। बारह बजे से ले कर तीन बजे तक सारे इलाक़े में अन्धेरा छाया रहा। और तीन बजे के क़रीब हुज़ूर ईसा बड़ी ऊंची आवाज़ से चिल्लाये, “एली, एली, लमा शबक़्तनी?” (जिस का तरजुमा ये है, “ऐ मेरे ख़ुदा, ऐ मेरे ख़ुदा, आप ने मुझे क्यूं छोड़ दिया?”)। जो लोग वहां खड़े थे उन में से बाज़ ने ये सुना तो कहने लगे, “ये तो एलियाह को पुकारता है।” तब एक आदमी दौड़ कर गया और इस्फ़ंज को सिरके में डुबो कर लाया और उसे एक सरकंडे पर रखकर हुज़ूर ईसा को चुसाया। मगर दूसरों ने कहा, “अब इसे तन्हा छोड़ दो, देखें के एलियाह सलीब से नीचे उतारने और बचाने आते हैं या नहीं?” और हुज़ूर ईसा ने फिर ज़ोर से चिल्ला कर अपनी जान दे दी। और बैतुलमुक़द्दस का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया। ज़मीन लरज़ उठी और चट्टानें तड़क गईं, क़ब्रें खुल गईं और ख़ुदा के बहुत से मुक़द्दस लोग जो मौत की नींद सो चुके थे, ज़िन्दा हो गये। और हुज़ूर ईसा के जी उठने के बाद, क़ब्रों से निकल कर मुक़द्दस शहर में दाख़िल हुए और बहुत से लोगों को दिखाई दिये। “तब उस फ़ौजी अफ़सर ने और उस के साथियों ने जो हुज़ूर ईसा की निगहबानी कर रहे थे ज़लज़ला और सारा वाक़िया देखा तो, ख़ौफ़ज़दा हो गये और कहने लगे, ये शख़्स यक़ीनन ख़ुदा का बेटा था!” वहां बहुत सी औरतें जो सूबे गलील से हुज़ूर ईसा की ख़िदमत करती हुई उस के पीछे-पीछे चली आई थीं, दूर से देख रही थीं। उन में मरियम मगदलीनी, याक़ूब और यूसुफ़ की मां मरियम और ज़ब्दी के बेटों की मां शामिल थीं। जब शाम हुई तो अरिमतियाह का एक यूसुफ़ नाम का दौलतमन्द आदमी आया, जो ख़ुद भी हुज़ूर ईसा का शागिर्द था। उस ने पीलातुस के पास जा कर हुज़ूर ईसा की लाश मांगी, इस पर पीलातुस ने हुक्म दिया के लाश उस के हवाले कर दी जाये। यूसुफ़ ने लाश को ले कर एक साफ़ महीन सूती चादर में कफ़्नाया, और उसे अपनी नई क़ब्र में रख दिया; जो उस ने चट्टान में खुदवाई थी। फिर वह एक बड़ा सा पत्थर उस क़ब्र के दरवाज़े पर लुढ़का कर चला गया। और मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम वहां क़ब्र के सामने बैठी हुई थीं। दूसरे दिन यानी तय्यारी के दिन के बाद अहम-काहिन और फ़रीसी मिल कर पीलातुस के पास पहुंचे। “मेरे आक़ा,” उन्होंने कहा, “हमें याद है के इस धोके बाज़ ने अपने जीते जी कहा था, ‘मैं तीन दिन के बाद ज़िन्दा हो जाऊंगा।’ लिहाज़ा हुक्म दें के तीसरे दिन तक क़ब्र की निगरानी की जाये। कहीं ऐसा न हो के उस के शागिर्द आकर उस की लाश को चुरा न ले जायें और लोगों से कह दें के वह मुर्दों में से ज़िन्दा हो गया है। और ये बाद का फ़रेब पहले वाले फ़रेब से भी बद्तर होगा।” “तुम्हारे पास पहरेदार मौजूद हैं,” पीलातुस ने जवाब दिया। “उन्हें ले जाओ, और जहां तक हो सके क़ब्र की निगहबानी करो।” चुनांचे उन्होंने जा कर पत्थर पर मुहर लगा दी और क़ब्र की निगरानी के लिये पहरेदारों को बैठा दिया। सबत के बाद, हफ़्ते के पहले दिन, जब सुबह हो ही रही थी के मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम क़ब्र को देखने आईं। और उसी वक़्त अचानक एक बड़ा ज़लज़ला आया क्यूंके ख़ुदावन्द का फ़रिश्ता आसमान से उतरा और क़ब्र के पास जा कर पत्थर को लुढ़का दिया और उस पर बैठ गया। उस की सूरत बिजली की मानिन्द थी और उस की पोशाक बर्फ़ की तरह सफ़ैद थी। और पहरेदार उस के डर के मारे कांप उठे और मुर्दा से हो गये। फ़रिश्ते ने औरतों से फ़रमाया, “डरो मत, क्यूंके मैं जानता हूं के तुम हुज़ूर ईसा को ढूंड रही हो, जो मस्लूब हुए थे। हुज़ूर यहां नहीं हैं; क्यूंके वह अपने कहने के मुताबिक़ जी उठे हैं। आओ, वह जगह देखो जहां हुज़ूर ईसा को रखा गया था। और जल्दी जा कर हुज़ूर के शागिर्दों को ख़बर दो: ‘हुज़ूर मुर्दों में से जी उठे हैं और तुम से पहले सूबे गलील को पहुंच रहे हैं। तुम उन्हें वहीं देखोगे।’ देखो मैंने तुम्हें बता दिया है।” इसलिये वह औरतें ख़ौफ़ और बड़ी ख़ुशी के साथ क़ब्र से फ़ौरन बाहर आयें और दौड़ते हुए गईं ताके शागिर्दों को ख़बर दे सकें। अचानक हुज़ूर ईसा उन से मिले और फ़रमाया, “सलाम,” कहा। उन्होंने पास आकर हुज़ूर के पांव पकड़ लिये और उन्हें सज्दा किया। तब हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “डरो मत। जाओ और मेरे भाईयों से कहो के सूबे गलील के लिये रवाना हो जायें; वह मुझे वहीं देखेंगे।” अभी वह औरतें रास्ते ही में थीं के पहरेदारों में से बाज़ शहर गये और अहम-काहिनों से सारा माजरा कह सुनाया। इस पर अहम-काहिनों ने बुज़ुर्गों से मिल कर मशवरा किया और सिपाहियों को मन्सूबे के तहत, एक बड़ी रक़म अदा की, और कहा, “तुम ये कहना, ‘रात के वक़्त जब हम सो रहे थे तो उस के शागिर्द आये और ईसा की लाश को चुरा ले गये।’ और अगर ये बात हाकिम के कान तक पहुंची तो हम उसे मुतमइन कर देंगे और तुम्हें ख़तरे से बचा लेंगे।” चुनांचे सिपाहियों ने रक़म ले कर जैसा उन्हें सिखाया गया था वैसा ही किया और ये बात आज तक यहूदियों में मशहूर है। तब ग्यारह शागिर्द सूबे गलील के इस पहाड़ पर गये जहां हुज़ूर ईसा ने उन्हें जाने की हिदायत की थी। जब उन्होंने हुज़ूर ईसा को देखा तो आप को सज्दा किया; लेकिन बाज़ को अभी तक शक था। चुनांचे हुज़ूर ईसा ने उन के पास आकर उन से फ़रमाया, “आसमान और ज़मीन का पूरा इख़्तियार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ और तमाम क़ौमों को शागिर्द बनाओ और उन्हें बाप, बेटे और पाक रूह के नाम से पाक-ग़ुस्ल दो, और उन्हें उन सभी बातों पर अमल करने की तालीम दो जिन का मैंने तुम्हें हुक्म दिया है। और देखो! बेशक मैं दुनिया के आख़िर तक हमेशा तुम्हारे साथ हूं।” हुज़ूर ईसा अलमसीह, ख़ुदा के बेटे, की ख़ुशख़बरी इस तरह शुरू होती है, जैसा के हज़रत यसायाह नबी के सहीफ़े में लिख्खा हुआ है: “मैं अपना पैग़म्बर तेरे आगे भेज रहा हूं, जो तेरे आगे तेरी राह तय्यार करेगा” “ब्याबान में कोई पुकार रहा है, ‘ख़ुदावन्द के लिये राह तय्यार करो, उस के लिये राहें सीधी बनाओ।’ ” लिहाज़ा पाक-ग़ुस्ल देने वाले हज़रत यहया की आमद हुई और वह ब्याबान में, गुनाहों की मुआफ़ी के वास्ते तौबा करने और पाक-ग़ुस्ल लेने की मुनादी करने लगे। तब यहूदिया और यरूशलेम के सारे इलाक़ों से सब लोग निकल कर हज़रत यहया के पास गये और अपने गुनाहों का इक़रार किया, और उन्होंने हज़रत यहया से दरया-ए-यरदन में पाक-ग़ुस्ल लिया। हज़रत यहया ऊंट के बालों से बुना लिबास पहनते थे, और उन का कमरबन्द चमड़े का था। और उन की ख़ुराक़ टिड्डियां और जंगली शहद थी। और ये उन का पैग़ाम था: “जो मेरे बाद आने वाला है मुझ से भी ज़्यादा ज़ोरआवर शख़्स है, मैं इस लाइक़ भी नहीं के झुक कर उन के जूतों के तस्मे खोल सकूं। मैं तो तुम्हें सिर्फ़ पानी से पाक-ग़ुस्ल देता हूं, लेकिन वह तुम्हें पाक रूह से पाक-ग़ुस्ल देंगे।” उसी वक़्त हुज़ूर ईसा, सूबे गलील के शहर नासरत से आये और हज़रत यहया ने उन्हें दरया-ए-यरदन में पाक-ग़ुस्ल दिया। जब हुज़ूर ईसा पानी से बाहर आ रहे थे, तो उन्होंने देखा के आसमान खुल गया है और ख़ुदा की रूह कबूतर की शक्ल में उन पर नाज़िल हो रहा है। और आसमान से एक आवाज़ आई: “तू मेरा प्यारा बेटा है, जिस से मैं महब्बत करता हूं; तुम से मैं बहुत ख़ुश हूं।” फ़िलफ़ौर पाक रूह हुज़ूर ईसा को ब्याबान में ले गया, और वह चालीस दिन, तक वहां रहे, और शैतान के ज़रीये आज़माये जाते रहे। वह जंगली जानवरों के दरमियान रहे, और फ़रिश्ते हुज़ूर ईसा की ख़िदमत करते रहे। हज़रत यहया को क़ैद किये जाने के बाद, हुज़ूर ईसा सूबे गलील में आये, और ख़ुदा की ख़ुशख़बरी सुनाने लगे। और आप ने फ़रमाया, “वक़्त आ पहुंचा है,” और “ख़ुदा की बादशाही नज़दीक आ गई है। तौबा करो और ख़ुशख़बरी पर ईमान लाओ।” गलील सूबे की झील के किनारे जाते हुए, हुज़ूर ईसा ने शमऊन और उन के भाई अन्द्रियास को देखा यह दोनों उस वक़्त झील में जाल डाल रहे थे, क्यूंके उन का पेशा ही मछली पकड़ना था। हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मेरे, पीछे चले आओ, तो मैं तुम्हें आदमगीर बनाऊंगा।” वह उसी वक़्त अपने जाल छोड़कर आप के हमनवा होकर पीछे हो लिये। थोड़ा आगे जा कर, आप ने ज़ब्दी के बेटे याक़ूब और उन के भाई यूहन्ना को देखा दोनों कश्ती में जालों की मरम्मत कर रहे थे। आप ने उन्हें देखते ही बुलाया वह अपने बाप, ज़ब्दी को कश्ती में मज़दूरों के साथ छोड़कर हुज़ूर के पीछे चल दिये। वह सब कफ़रनहूम, में दाख़िल हुए, सबत के दिन हुज़ूर ईसा यहूदी इबादतगाह में गये और तालीम देनी शुरू की। हुज़ूर ईसा की तालीम सुन कर लोग दंग रह गये, क्यूंके हुज़ूर उन्हें शरीअत के आलिमों की तरह नहीं, लेकिन एक साहिबे इख़्तियार की तरह तालीम दे रहे थे। उस वक़्त यहूदी इबादतगाह में एक शख़्स था, जिस में बदरूह थी, वह चिल्लाने लगा, “ऐ ईसा नासरी, आप को हम से क्या काम? क्या आप हमें हलाक करने आये हैं? मैं जानता हूं के आप कौन हैं? आप ख़ुदा का क़ुददूस हैं!” हुज़ूर ईसा ने बदरूह को झिड़का और कहा, “ख़ामोश हो जा!” और इस आदमी में से, “निकल जा!” तब ही इन बदरूह ने उस आदमी को ख़ूब मरोड़ा और बड़े ज़ोर से चीख़ मार कर उस में से निकल गई। सब लोग इतने हैरान होकर एक दूसरे से कहने लगे, “ये क्या हो रहा है? ये तो नई तालीम है! ये तो बदरूहों को भी इख़्तियार के साथ हुक्म देते हैं और बदरूहें भी हुज़ूर ईसा का हुक्म मानती हैं।” हुज़ूर ईसा की शौहरत बड़ी तेज़ी से गलील के एतराफ़ में फैल गई। यहूदी इबादतगाह से बाहर निकलते ही वह याक़ूब और यूहन्ना के साथ सीधे शमऊन और अन्द्रियास के घर गये। उस वक़्त शमऊन की सास तेज़ बुख़ार में मुब्तिला थीं, देर किये बग़ैर आप को उस के बारे में बताया। हुज़ूर ईसा ने पास जा कर शमऊन की सास का हाथ पकड़ा और उन्हें उठाया, उन का बुख़ार उसी दम उतर गया और वह उन की ख़िदमत में लग गईं। शाम के वक़्त सूरज के डूबते ही लोग वहां के सब मरीज़ों को और उन्हें जिन में बदरूहें थीं, हुज़ूर ईसा के पास लाने लगे। यहां तक के सारा शहर दरवाज़े के पास जमा हो गया, हुज़ूर ईसा ने बहुत से लोगों को उन की मुख़्तलिफ़ बीमारीयों से शिफ़ा बख़्शी। और बहुत सी बदरूहों को निकाला, मगर आप बदरूहों को बोलने न देते थे क्यूंके बदरूहें उन को पहचानती थीं। अगले दिन सुब्ह-सवेरे जब के अन्धेरा ही था, हुज़ूर ईसा उठे, और घर से बाहर एक वीरान जगह में जा कर, दुआ करने लगे। शमऊन और उन के दूसरे साथी उन के की तलाश में निकले, जब आप उन्हें मिल गये, तो वह सब कहने लगे: “सभी आप को ढूंड रहे हैं!” हुज़ूर ईसा ने कहा, “आओ! हम कहीं और आस-पास के क़स्बों में चलें ताके मैं वहां भी मुनादी करूं क्यूंके मैं इसी मक़्सद के लिये निकला हूं।” चुनांचे वह सारे सूबे गलील, में, घूम फिर कर उन के यहूदी इबादतगाहों में मुनादी करते रहे और बदरूहों को निकालते रहे। एक कोढ़ी हुज़ूर ईसा के पास आया और घुटने टेक कर आप से मिन्नत करने लगा, “अगर आप चाहें तो मुझे कोढ़ से पाक कर सकते हैं।” हुज़ूर ईसा ने उस कोढ़ी पर तरस खाकर अपना हाथ बढ़ा कर उसे छुआ और फ़रमाया, “मैं चाहता हूं, तुम पाक साफ़ हो जाओ!” उसी दम उस का कोढ़ जाता रहा और वह पाक हो गया। हुज़ूर ईसा ने उसे फ़ौरन वहां से सख़्त तम्बीह करते हुए रुख़्सत किया, “ख़बरदार इस का ज़िक्र, किसी से न करना। बल्के सीधे काहिन के पास जा कर, अपने आप को दिखाओ और अपने साथ वह नज़्रें भी ले जाना जो हज़रत मूसा ने मुक़र्रर की हैं ताके सब पर गवाही हो, जाये के तुम पाक हो गये हो।” लेकिन वह वहां से निकल कर हर किसी से इस बात का इतना, चर्चा करने लगा, आइन्दा हुज़ूर ईसा किसी शहर में ज़ाहिरी तौर पर दाख़िल न हो सके बल्के शहर से बाहर वीरान जगहों में रहने लगे और फिर भी लोग हर जगह से आप के पास आते रहते थे। कुछ दिनों के बाद हुज़ूर ईसा फिर से कफ़रनहूम, में आये, तो ख़बर फैल गई के वह घर वापस आ गये हैं। चुनांचे इतने लोग जमा हो गये यहां तक के दरवाज़े के आस-पास, भी जगह न रही, हुज़ूर ईसा उन्हें कलाम की तब्लीग़ कर रहे थे। कुछ लोग, एक मफ़्लूज को हुज़ूर के पास लाये, जिसे चार आदमी उठाये हुए थे। जब वह उस बीमार को हुजूम के बाइस हुज़ूर ईसा के पास न ला सके, तो छत पर चढ़ गये और उन्होंने छत का वह हिस्सा उधेड़ डाला जिस के नीचे हुज़ूर ईसा बैठे हुए थे और मफ़्लूज को बिछौना समेत जिस पर वह लेटा था शिगाफ़ में से नीचे उतार दिया। उन लोगों के ईमान को देखकर, हुज़ूर ईसा ने मफ़्लूज से कहा, “बेटे, तुम्हारे गुनाह मुआफ़ हुए।” शरीअत के बाज़ आलिम वहां बैठे थे, वह दिल में ये सोचने लगे, “ये शख़्स ऐसा क्यूं कहता है? ये तो कुफ़्र है! ख़ुदा के सिवा कौन गुनाह मुआफ़ कर सकता है?” हुज़ूर ईसा ने फ़ौरन ही अपनी रूह से उसी वक़्त मालूम कर के वह अपने दिलों में क्या कुछ सोच रहे हैं, और हुज़ूर ईसा ने उन लोगों से कहा, “तुम अपने दिलों में ऐसी बातें क्यूं सोचते हो? क्या मफ़्लूज से ये कहना आसान है, ‘तुम्हारे गुनाह मुआफ़ हुए,’ या ये कहना, ‘उठो! अपने बिछौने को उठाकर चले जाओ’? लेकिन मैं चाहता हूं के तुम्हें मालूम हो के इब्न-ए-आदम को ज़मीन पर गुनाह मुआफ़ करने का इख़्तियार है।” हुज़ूर ईसा ने मफ़्लूज से कहा, “मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपना बिछौना उठाकर और अपने घर चला जा।” वह आदमी उठा, और उसी घड़ी अपने बिछौने को उठाकर सब के सामने वहां से चला गया। चुनांचे वह सब हैरान रह गये और ख़ुदा की तारीफ़ करते हुए, कहने लगे, “हम ने ऐसा कभी नहीं देखा!” हुज़ूर ईसा फिर से झील के किनारे गये। और बड़ा हुजूम आप के गिर्द जमा हो गया, और वह उन्हें तालीम देने लगे। चलते-चलते हुज़ूर ईसा ने, हलफ़ई के बेटे लावी को महसूल की चौकी पर बैठे देखा और लावी से कहा, “मेरे पैरोकार हो जाओ,” और वह उठ कर हुज़ूर ईसा के पीछे हो लिये। हुज़ूर ईसा लावी के घर, में खाना खाने बैठे, तो कई महसूल लेने वाले और गुनहगार लोग हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्दों के साथ खाने में शरीक हो गये, ऐसे बहुत से लोग हुज़ूर ईसा के पीछे हो लिये थे। शरीअत के आलिम जो फ़रीसी फ़िर्क़े से तअल्लुक़ रखते थे हुज़ूर ईसा को गुनहगारों और महसूल लेने वालों के साथ खाते देखा, तो फ़रीसियों ने शागिर्दों से पूछा: “ये महसूल लेने वालों और गुनहगारों के साथ क्यूं खाता है?” हुज़ूर ईसा ने ये सुन कर उन को जवाब दिया, “बीमारों को तबीब की ज़रूरत होती है, सेहतमन्दों को नहीं। मैं रास्तबाज़ों को नहीं, बल्के गुनहगारों को बुलाने आया हूं।” एक दफ़ा हज़रत यहया के शागिर्द और फ़रीसी रोज़े से थे। कुछ लोगों ने आकर हुज़ूर ईसा से पूछा, “क्या वजह है के हज़रत के शागिर्द और फ़रीसियों के शागिर्द तो रोज़ा रखते हैं, मगर आप के शागिर्द नहीं रखते?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या बराती दुल्हा की मौजूदगी में रोज़ा रख सकते हैं? हरगिज़ नहीं, क्यूंके जब तक दुल्हा उन के साथ है वह रोज़े नहीं रख सकते। लेकिन वह दिन आयेगा के दुल्हा उन से जुदा किया जायेगा, तब वह रोज़ा रखेंगे। “पुरानी पोशाक पर नये कपड़े का पैवन्द कोई नहीं लगाता और अगर ऐसा करता है, तो नया कपड़ा उस पुरानी पोशाक में से कुछ खींच लेगा, और पोशाक ज़्यादा फट जायेगी। नये अंगूरी शीरे को भी पुरानी मश्कों में कोई नहीं भरता वर्ना, मश्कें उस अंगूरी शीरे से फट जायेंगी और अंगूरी शीरे के साथ मश्कें भी बर्बाद हो जायेंगी। लिहाज़ा नये अंगूरी शीरे को, नई मश्कों ही में भरना चाहिये।” एक दफ़ा वह सबत के दिन अनाज के खेतों, में से होकर गुज़र रहे थे, और हुज़ूर ईसा के शागिर्द रास्ते में चलते-चलते, बालें तोड़ने लगे। इस पर फ़रीसियों ने हुज़ूर ईसा से कहा, “देखो, ये लोग ऐसा काम क्यूं कर रहे हैं जो सबत के दिन जायज़ नहीं है?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा के जब हज़रत दाऊद और उन के साथियों को भूक के बाइस खाने की ज़रूरत थी तो उन्होंने क्या किया? आला काहिन अबियातर के ज़माने में, हज़रत दाऊद ख़ुदा के घर में दाख़िल हुए और नज़्र की हुई रोटियां खाईं ऐसी रोटियों का खाना काहिनों के सिवाए किसी और के लिये रवा नहीं था। और उन्होंने ख़ुद भी खाईं और अपने साथियों को भी ये रोटियां खाने को दीं।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “सबत इन्सान के लिये बनाया गया था, न के इन्सान सबत के लिये। पस इब्न-ए-आदम सबत का भी मालिक है।” फिर से हुज़ूर ईसा यहूदी इबादतगाह में दाख़िल हुए और वहां, एक आदमी था जिस का एक हाथ सूखा हुआ था। और फ़रीसी हुज़ूर ईसा पर की ताक में थे इसलिये हुज़ूर को क़रीब से देखने लगे के अगर हुज़ूर सबत के दिन उस आदमी को शिफ़ा बख़्शते हैं तो वो हुज़ूर पर इल्ज़ाम लगा सकें। हुज़ूर ईसा ने उस सूखे हाथ वाले आदमी से कहा, “उठो और आकर सब के बीच में खड़े हो जाओ।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “सबत के दिन क्या करना रवा है: नेकी करना या बदी करना, जान बचाना या हलाक करना?” लेकिन वह ख़ामोश रहे। वह उन की सख़्त-दिली पर निहायत ही ग़मगीन हुए और, उन पर ग़ुस्से से नज़र कर के, हुज़ूर ईसा ने उस आदमी से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उस ने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया उस का हाथ बिलकुल ठीक हो गया था। ये देखकर फ़रीसी फ़ौरन बाहर चले गये और हेरोदियों के साथ हुज़ूर ईसा को हलाक करने की साज़िश करने लगे। हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ झील की तरफ़ तशरीफ़ ले गये, और सूबे गलील और यहूदिया से लोगों का एक बड़ा हुजूम भी आप के पीछे चल रहा था। और यहूदिया, यरूशलेम, इदूमिया, दरया-ए-यरदन के पार और सूर और सैदा के इलाक़ों के लोग भी आ पहुंचे, क्यूंके उन्हें पता चला था के हुज़ूर ईसा बहुत बड़े-बड़े काम करते हैं। हुजूम को देखकर हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा, मेरे लिये एक छोटी कश्ती तय्यार रखो लोग बहुत ही ज़्यादा हैं, कहीं ऐसा न हो के वह मुझे दबा दें। हुज़ूर ईसा ने बहुत से लोगों को शिफ़ा बख़्शी थी, लिहाज़ा जितने लोग बीमार थे आप को छूने की कोशिश में उन पर गिरे पड़ते थे। बदरूहें भी हुज़ूर ईसा को देखती थीं, उन के सामने गिरकर चलाने लगती थीं, “आप ख़ुदा के बेटे हैं।” हुज़ूर ईसा उन्हें सख़्त ताकीद की के वह दूसरों को उन के बारे में न बतायें। फिर हुज़ूर ईसा एक पहाड़ी पर चढ़ गये और वह जिन्हें चाहते थे, उन्हें अपने पास बुलाया और वह हुज़ूर के पास चले आये। हुज़ूर ईसा ने बारह को बतौर रसूल मुक़र्रर किया ताके वह उन के साथ रहें और वह उन्हें मुनादी करने के लिये भेजें और बदरूहों को निकालने का इख़्तियार हासिल हो। चुनांचे हुज़ूर ईसा ने इन बारह को मुक़र्रर किया: शमऊन (जिसे हुज़ूर ईसा ने पतरस का नाम दिया), याक़ूब उस का भाई यूहन्ना जो ज़ब्दी के बेटे थे (हुज़ूर ईसा ने उन का तख़ल्लुस बुआनिरगिस यानी “रअद का बेटा रखा”), अन्द्रियास, फ़िलिप्पुस और बरतुल्माई, मत्ती, और तोमा, हलफ़ई का बेटा याक़ूब और तद्दी, और शमऊन क़नानी और यहूदाह इस्करियोती जिस ने हुज़ूर ईसा से दग़ाबाज़ी भी की थी। हुज़ूर ईसा एक घर में दाख़िल हुए, और वहां इस क़दर भेड़ लग गई के वह, और उन के शागिर्द खाना भी न खा सके। जब उन के अहल-ए-ख़ाना को ख़बर हुई तो वह हुज़ूर ईसा को अपने साथ ले जाने के लिये आये क्यूंके उन का कहना था, “हुज़ूर अलमसीह अपना ज़हनी तवाज़ुन खो बैठे हैं।” शरीअत के आलिम जो यरूशलेम से आये थे उन का कहना था, “हुज़ूर ईसा में बालज़बूल है! और ये भी के वह बदरूहों के रहनुमा की मदद से बदरूहों को निकालते हैं।” हुज़ूर ईसा उन्हें अपने पास बुलाकर उन से तम्सीलों में कहने लगे: “शैतान को ख़ुद शैतान ही निकाले ये कैसे हो सकता है? अगर किसी सल्तनत में फूट पड़ जाये, तो उस का वुजूद क़ाइम नहीं रह सकता। अगर किसी घर में फूट पड़ जाये, तो वह क़ाइम नहीं रह सकता। अगर शैतान अपने ही ख़िलाफ़ लड़ने लगे और उस के अपने अन्दर फूट पड़ जाये, तो वह भी क़ाइम नहीं रह सकता; बल्के उस का ख़ातिमा हो जायेगा। दर-हक़ीक़त, कोई शख़्स किसी ज़ोरआवर के घर में घुस कर उस का सामान नहीं लूट सकता जब तक के वह पहले उस ज़ोरआवर को बांध न ले। तब ही वह उस घर को लूट सकेगा। मैं तुम से सच कहता हूं, इन्सानों के सारे गुनाह और जितना कुफ़्र वह बकते हैं मुआफ़ किये जायेंगे, लेकिन पाक रूह के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकने वाला एक अब्दी गुनाह का मुर्तकिब होता है; इसलिये वह हरगिज़ न बख़्शा जायेगा।” हुज़ूर ईसा का इशारा उन ही की तरफ़ था क्यूंके वह कहते थे, “हुज़ूर ईसा में एक बदरूह है।” फिर हुज़ूर ईसा की मां और उन के भाई आ गये और उन्होंने हुज़ूर ईसा को बाहर बुलवा भेजा। हुज़ूर के आस-पास बैठा था, लोगों ने हुज़ूर को ख़बर दी, “वह देखिये! आप की मां और आप के भाई और बहन बाहर खड़े हैं और आप से मुलाक़ात करना चाहते हैं।” “मेरी मां और मेरे भाई कौन हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया। हुज़ूर ईसा ने अपने इर्दगिर्द बैठे हुए लोगों पर नज़र डाली और फ़रमाया, “ये हैं मेरी मां और मेरे भाई और बहन! क्यूंके जो कोई ख़ुदा की मर्ज़ी पर चलता है वोही मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी मां है।” हुज़ूर ईसा फिर झील के किनारे तालीम देने लगे और लोगों का ऐसा हुजूम इकट्-ठा हो गया। हुज़ूर ईसा झील के किनारे कश्ती पर जा बैठे, और सारा हुजूम ख़ुश्की पर झील के किनारे पर ही खड़ा रहा। तब वह उन्हें तम्सीलों के ज़रीये बहुत सी बातें सिखाने लगे, और अपनी तालीम देते हुए आप ने फ़रमाया: “सुनो! एक बीज बोने वाला बीज बोने निकला। बोते वक़्त कुछ बीज, राह के किनारे, गिरे और परिन्दों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ पथरीली ज़मीन पर गिरे जहां मिट्टी कम थी। चूंके मिट्टी गहरी न थी, वह जल्द ही उग आये। लेकिन जब सूरज निकला, तो जल गये और जड़ न पकड़ने के बाइस सूख गये। कुछ बीज कांटेदार झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने उन्हें दबा लिया। मगर कुछ बीज अच्छी ज़मीन पर गिरे। और उग कर बढ़े और बढ़कर फल लाये, कोई तीस गुना, कोई साठ गुना, और कोई सौ गुना।” हुज़ूर ईसा ने कहा, “जिस के पास सुनने के कान हों वह सुन ले।” जब वह तन्हाई में थे, हुज़ूर ईसा के बारह शागिर्दों और दूसरे साथियों ने आप से उन तम्सीलों के बारे में पूछा। आप ने उन से फ़रमाया, “तुम्हें तो ख़ुदा की बादशाही के राज़ों को समझने की क़ाबिलीयत दी गई है। लेकिन बाहर वालों के लिये सारी बातें तम्सीलों में बयान की जाती हैं, लिहाज़ा, “ ‘वह देखते हुए भी, कुछ नहीं देखते; और सुनते हुए भी कभी कुछ नहीं समझते; ऐसा न हो के वह तौबा करें और गुनाहों की मुआफ़ी हासिल कर लें!’ ” फिर हुज़ूर ईसा ने इन से कहा, “अगर तुम ये तम्सील नहीं समझे तो बाक़ी सब तम्सीलें? कैसे समझोगे? बोने वाला ख़ुदा के कलाम का बीज बोता है। कुछ लोग जिन्हें कलाम सुनाया जाता है राह के किनारे वाले हैं। जूंही ही कलाम का बीज बोया जाता है, शैतान आता है और उन के दिलों से वह कलाम निकाल ले जाता है। इसी तरह, पथरीली जगहों पर बोए हुए बीजों की तरह हैं, वह ख़ुदा के कलाम को सुनते ही ख़ुशी के साथ उसे क़बूल कर लेते हैं। मगर वह कलाम उन में जड़ नहीं पकड़ पाता, चुनांचे वह कुछ दिनों तक ही क़ाइम रहते हैं। और जब उन पर इस कलाम की वजह से मुसीबत या ईज़ा बरपा होती है तो वह फ़ौरन गिर जाते हैं। और दिगर, झाड़ियों में गिरने वाले बीज से मुराद वह लोग हैं, जो कलाम को सुनते तो हैं; लेकिन इस दुनिया की फ़िक्रें, दौलत का फ़रेब और दूसरी चीज़ों का लालच आड़े आकर इस कलाम को दबा देता है, और वह बेनतीजा हो जाता है। जो लोग, इस अच्छी ज़मीन की तरह हैं जहां बीज बोया जाता है, वह कलाम को सुनते हैं, क़बूल करते हैं, और फल लाते हैं, बाज़ तीस गुना, बाज़ साठ गुना, और बाज़ सौ गुना।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “क्या तुम चिराग़ को इसलिये जलाते हो के उसे टोकरे या चारपाई के नीचे रखा जाये? क्या इसलिये नहीं जलाते के उसे चिराग़दान पर रखा जाये? क्यूंके अगर कोई चीज़ छुपी हुई है, तो इसलिये के ज़ाहिर की जाये और जो कुछ ढका हुआ है तो इसलिये के उस का पर्दा फ़ाश किया जायेगा। जिस के पास सुनने के कान हों, वह सुन ले।” फिर आप ने उन से फ़रमाया, “तुम क्या सुनते हो उस के बारे में ग़ौर करो, जिस पैमाने से तुम नापते हो, तुम्हें भी उसी नाप से नापा जायेगा बल्के कुछ ज़्यादा ही। क्यूंके जिस के पास है उसे और भी दिया जायेगा और उस के पास इफ़रात से होगा लेकिन जिस के पास नहीं है, उस से वह भी जो उस के पास है, ले लिया जायेगा।” आप ने ये भी फ़रमाया, “ख़ुदा की बादशाही उस आदमी की मानिन्द है जो ज़मीन में बीज डालता है। रात और दिन चाहे, वह सोए या जागता रहे, बीज उग कर आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ते रहते हैं और उसे मालूम भी नहीं पड़ता, वह कैसे उगते और बढ़ते हैं। ज़मीन ख़ुद ब ख़ुद फल लाती है पहले पत्ती निकलती है, फिर बालें पैदा होती हैं और फिर उन में दाने भर जाते हैं। जिस वक़्त अनाज पक चुका होता है, तो वह फ़ौरन दरांती ले आता है क्यूंके फ़सल काटने का वक़्त आ पहुंचा।” फिर आप ने फ़रमाया, “हम ख़ुदा की बादशाही को किस चीज़ की मानिन्द कहें, या किस तम्सील के ज़रीये से बयान करें? वह राई के दाने की तरह है, जो ज़मीन में बोए जाने वाले बीजों में सब से छोटा होता है। मगर बोए जाने के बाद उगता है, तो पौदों में सब से बड़ा हो जाता है, और इस की शाख़ें, इस क़दर बढ़ जाती हैं के हवा के परिन्दे उस के साये में बसेरा कर सकते हैं।” इसी क़िस्म की कई तम्सीलों, के ज़रीये लोगों से उन की समझ के मुताबिक़ कलाम किया करते थे। और बग़ैर तम्सील के आप उन्हें कुछ न कहते थे, लेकिन जब हुज़ूर ईसा के शागिर्द तन्हा होते, तो वह उन्हें तम्सीलों के मानी समझा दिया करते थे। उसी दिन जब शाम हुई, आप ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “झील के उस पार चलें।” चुनांचे वह हुजूम को रुख़्सत कर के, और आप को जिस हाल में वह थे, कश्ती में अपने साथ ले कर, रवाना हुए। कुछ और कश्तियां भी उन के साथ थीं। अचानक आंधी आई, और पानी की लहरें कश्ती से बुरी तरह टकराने लगीं, और इस में पानी भरने लगा। हुज़ूर ईसा कश्ती के पिछले हिस्सा में एक तकिया लगा कर आराम फ़रमा रहे थे। शागिर्दों ने आप को जगाया और कहा, “उस्ताद मुहतरम, हम तो डूबे जा रहे हैं। आप को हमारी कोई पर्वा नहीं है?” वह जाग उठे, हुज़ूर ईसा ने हवा को हुक्म दिया और लहरों से डांटा, “ख़ामोश रह थम जा!” हवा थम गई और बड़ा अमन हो गया। हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों से कहा, “तुम इस क़दर ख़ौफ़ज़दा क्यूं रहते हो? ईमान क्यूं नहीं रखते?” मगर वह हद से ज़्यादा डर गये और एक दूसरे से कहने लगे, “ये कौन है के हवा और लहरें भी इन का हुक्म मानते हैं!” हुज़ूर ईसा झील के पार गिरासीनियों के इलाक़े में पहुंचे। जब वह कश्ती से उतरे, एक आदमी जिस में बदरूह थी क़ब्र से निकल कर आप के पास आया। ये आदमी क़ब्रों में रहता था, और अब उसे ज़न्जीरों में बांधना भी नामुम्किन हो गया था। क्यूंके पहले कई बार वह बेड़ियों और ज़न्जीरों से जकड़ा गया था, लेकिन वह ज़न्जीरों को तोड़ डालता और बेड़ियों के टुकड़े-टुकड़े कर देता था। और कोई उसे क़ाबू में न ला सकता था। वह दिन रात क़ब्रों और पहाड़ों में बराबर चीख़ता चिल्लाता रहता था और अपने आप को पत्थरों से ज़ख़़्मी कर लेता था। जब बदरूह ने हुज़ूर ईसा को दूर से देखा, तो दौड़ कर आप के पास पहुंची और आप के सामने सज्दे में गिरकर चिल्ला-चिल्ला कर कहा, “ऐ ईसा ख़ुदा तआला के बेटे, आप को मुझ से क्या काम, आप को ख़ुदा की क़सम? मुझे अज़ाब में न डालें!” बात दरअस्ल ये थी के आप ने उस से कहा था, “ऐ बदरूह, इस आदमी में से बाहर निकल आ!” आप ने बदरूह से पूछा, “तेरा नाम क्या है?” उस ने जवाब दिया, “मेरा नाम लश्कर है, क्यूंके हमारी तादाद बहुत ज़्यादा है।” बदरूह ने आप की मिन्नत की के हमें इस इलाक़े से बाहर न भेज। वहीं पहाड़ी के पास सूअरों का एक बड़ा ग़ोल चर रहा था। बदरूहें आप से मिन्नत करने लगीं, “हमें उन सूअरों, में भेज दीजिये; ताके हम उन में दाख़िल हो जायें।” चुनांचे आप की इजाज़त से, बदरूहें उस आदमी में से निकल कर सूअरों में दाख़िल हो गईं। और उस ग़ोल, के सारे सूअर जिन की तादाद तक़रीबन दो हज़ार थी, ढलान से झील की तरफ़ लपके और पानी में गिरकर डूब मरे। सूअर चराने वाले वहां से भाग खड़े हुए और उन्होंने शहर और दिहात में, इस बात की ख़बर पहुंचाई लोग ये माजरा देखने के लिये दौड़े चले आये। जब लोग हुज़ूर ईसा के पास पहुंचे और उस आदमी को जिस में बदरूहों का लश्कर था, उसे कपड़े पहने हुए, होश की हालत में; बैठे देखा तो बहुत ख़ौफ़ज़दा हुए। जिन्होंने ये वाक़िया देखा था उन्होंने बदरूहों वाले आदमी का हाल और सूअरों का तमाम माजरा उन से बयान किया। लोग हुज़ूर ईसा की मिन्नत करने लगे के आप हमारे इलाक़े से बाहर चले जायें। आप कश्ती में, सवार होने लगे तो वह आदमी जो पहले बदरूहों के क़ब्ज़े में था, हुज़ूर ईसा से मिन्नत की के मुझे भी अपने साथ ले चलिये। आप ने उसे इजाज़त न दी, बल्के उस से कहा, “घर जा कर अपने लोगों को बताओ के ख़ुदावन्द ने तुम्हारे लिये इतने बड़े काम किये, और तुम पर रहम किया है।” पस वह आदमी गया और दिकपुलिस में इस बात का चर्चा करने लगा हुज़ूर ईसा ने उस के लिये कैसे बड़े काम किये और सब लोग तअज्जुब करते थे। फिर हुज़ूर ईसा कश्ती के ज़रीये वापस हुए और झील के दूसरी पार पहुंचते ही एक बड़ी भेड़ आप के पास पर जमा हो गई, जब के आप झील के किनारे पर ही रहे। तब मक़ामी यहूदी इबादतगाह के रहनुमाओं, में से एक जिस का नाम याईर था, वहां पहुंचा, आप को देखकर, आप के क़दमों पर गिर पड़ा और मिन्नत कर के कहने लगा, “मेरी छोटी बेटी मरने पर है। मेहरबानी से चलिये और उस पर अपने हाथ रख दीजिये ताके वह शिफ़ायाब हो जाये और ज़िन्दा रहे।” पस आप उस के साथ चले गये। और इतनी बड़ी भेड़ आप के पीछे हो गई लोग आप पर गिरे पड़ते थे। एक ख़ातून थी जिस के बारह बरस से ख़ून जारी था। वह कई तबीबों से इलाज कराते-कराते परेशान हो गई थी और अपनी सारी पूंजी लुटा चुकी थी, लेकिन तनदरुस्त होने की बजाय पहले से भी ज़्यादा बीमार हो गई थी। उस ख़ातून ने हुज़ूर ईसा के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था, चुनांचे उस ने हुजूम में घुस कर पीछे से आप की पोशाक को छू लिया, क्यूंके वह कहती थी, “अगर मैं हुज़ूर ईसा की पोशाक ही को छू लूंगी, तो मैं शिफ़ा पा जाऊंगी।” उसी दम उस का ख़ून बहन बन्द हो गया और उसे अपने बदन में महसूस हुआ के उस की सारी तकलीफ़ जाती रही है। हुज़ूर ईसा ने फ़ौरन जान लिया के उन में से क़ुव्वत निकली है। लिहाज़ा आप हुजूम की तरफ़ मुड़े और पूछने लगे, “किस ने मेरी पोशाक को छुआ है?” शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आप देख रहे हैं के हुजूम किस तरह आप पर गिरा पड़ रहा है, और फिर भी आप पूछते हैं, ‘किस ने मुझे छुआ है?’ ” लेकिन आप ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई ताके देखें के किस ने ऐसा किया है। लेकिन वह ख़ातून, ये जानते हुए उस पर क्या असर हुआ है, ख़ौफ़ज़दा सी और कांपती हुई आई और आप के क़दमों में गिरकर, आप को सारी हक़ीक़त बयान की। आप ने उस से कहा, “बेटी, तुम्हारे ईमान ने तुम्हें शिफ़ा बख़्शी। सलामती के साथ रुख़्सत हो और अपनी परेशानियों से नजात पाओ।” आप अभी वाज़ दे ही रहे थे, यहूदी इबादतगाह के रहनुमा याईर के घर से कुछ लोग आ पहुंचे, रहनुमा ने ख़बर दी। “आप की बेटी मर चुकी है, अब उस्ताद को मज़ीद तकलीफ़ न दीजिये?” हुज़ूर ईसा ने ये सुन कर, यहूदी इबादतगाह के रहनुमा से कहा, “ख़ौफ़ न करो; सिर्फ़ ईमान रखो।” आप ने पतरस, याक़ूब और याक़ूब के भाई यूहन्ना के अलावा किसी और को अपने साथ न आने दिया। जिस वक़्त वह यहूदी इबादतगाह के रहनुमा के घर पहुंचे, तो आप ने देखा, वहां बड़ा कोहराम मचा हुआ है और लोग बहुत रो पीट रहे हैं। जब वह अन्दर पहुंचे तो उन से कहा, “तुम लोगों ने क्यूं इस क़दर रोना-पीटना मचा रखा है? बच्ची मरी नहीं बल्के सो रही है।” इस पर वह आप की हंसी उड़ाने लगे। लेकिन आप ने इन सब को वहां से बाहर निकलवा दिया, और बच्ची के मां बाप और अपने शागिर्दों को ले कर बच्ची के पास गये। वहां बच्ची का हाथ पकड़ कर आप ने उस से कहा, “तलीता क़ौमी!” (जिस के मानी हैं “ऐ बच्ची, मैं तुम से कहता हूं, उठो!”)। बच्ची एक दम उठी और चलने फिरने लगी (ये लड़की बारह बरस की थी)। ये देखकर लोग हैरत-ज़दा रह गये। हुज़ूर ईसा ने उन्हें सख़्त ताकीद की के इस की ख़बर किसी को न होने पाये, और फ़रमाया के लड़की को कुछ खाने को दिया जाये। फिर हुज़ूर ईसा वहां से अपने शहर को रवाना हुए, और उन के शागिर्द भी उन के साथ गये। जब सबत का दिन आया, आप मक़ामी यहूदी इबादतगाह तालीम देने लगे, बहुत से लोग हुज़ूर ईसा की तालीम सुन कर हैरान हुए और कहने लगे। “इस ने ये सारी बातें कहां से सीखी हैं? ये कैसी हिक्मत है जो इन्हें अता की गई है? और उन के हाथों कैसे-कैसे मोजिज़े होते हैं? क्या ये बढ़ई नहीं? जो मरियम का बेटा और याक़ूब, योसेस, यहूदाह, और शमऊन के भाई नहीं? क्या इन की बहनें हमारे यहां नहीं रहतीं?” और उन्होंने उन के सबब से ठोकर खाई। चुनांचे हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “नबी की बेक़द्री उस के अपने शहर, रिश्तेदारों और घर वालों में ही होती है और कहीं नहीं।” और आप चंद बीमारों पर हाथ रखकर उन्हें शिफ़ा देने, के सिवा कोई बड़ा मोजिज़ा वहां न दिखा सके। हुज़ूर ईसा ने वहां के लोगों की बेएतक़ादी पर तअज्जुब किया। और वह वहां से निकल कर इर्दगिर्द के गांव और क़स्बों में तालीम देने लगे। हुज़ूर ईसा ने अपने, बारह शागिर्दों को बुलाया और उन्हें दो-दो कर के रवाना किया और उन्हें बदरूहों को निकालने का इख़्तियार बख़्शा। उन्हें ये भी हिदायत दी, “अपने सफ़र के लिये सिवाए लाठी के और कुछ न लेना, न रोटी न थैला, न कमरबन्द में पैसे। जूती तो पहनना मगर दो-दो कुर्ते नहीं। हुज़ूर ईसा ने उन से ये भी कहा के जहां भी तुम किसी घर में दाख़िल हो, तो उस शहर से रुख़्सत होने तक उसी घर में ठहरे रहना। अगर किसी जगह लोग तुम्हें क़बूल न करें और कलाम सुनना न चाहें तो वहां से रुख़्सत होने तक अपने पांव की गर्द भी वहां से झाड़ देना ताके वह उन के ख़िलाफ़ गवाही दे।” चुनांचे वह रवाना हुए और मुनादी करने लगे के तौबा करो। उन्होंने बहुत सी बदरूहों को निकाला और बहुत से बीमारों को तेल मलकर शिफ़ा बख़्शी। हेरोदेस बादशाह ने हुज़ूर ईसा का ज़िक्र सुना, क्यूंके उन का नाम काफ़ी मशहूर हो चुका था। बाज़ लोग कहते थे, “हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले मुर्दों में से जी उठे हैं, और इसीलिये तो उन में मोजिज़े दिखाने की क़ुदरत है।” मगर बाज़ कहते थे, “वह एलियाह हैं।” और बाज़ लोगों का कहना था, “वह पुराने नबियों जैसे एक नबी हैं।” जब हेरोदेस ने ये सुना, तो उस ने कहा, “यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला जिस का मैंने सर क़लम करवा दिया था, फिर से जी उठा है!” असल में हेरोदेस ने हज़रत यहया को पकड़वा कर क़ैदख़ाने में डाल दिया था, वजह ये थी के हेरोदेस, ने अपने भाई फ़िलिप्पुस की बीवी, हेरोदियास से ब्याह कर लिया था। और हज़रत यहया हेरोदेस से कह रहे थे, “तुझे अपने भाई की बीवी अपने पास रखना जायज़ नहीं है।” हेरोदियास भी हज़रत यहया से दुश्मनी रखती थी और उन्हें क़त्ल करवाना चाहती थी। लेकिन मौक़ा नहीं मिलता था, इसलिये के हज़रत यहया, हेरोदेस बादशाह की नज़र में एक रास्तबाज़ और पाक आदमी थे। वह उन का बड़ा एहतिराम किया करता था और उन की हिफ़ाज़त करना अपना फ़र्ज़ समझता था, वह हज़रत यहया की बातें सुन कर परेशान तो ज़रूर होता था; लेकिन सुनता शौक़ से था। लेकिन हेरोदियास को एक दिन मौक़ा मिल ही गया। जब हेरोदेस ने अपनी सालगिरह की ख़ुशी में अपने उम्रा-ए-दरबार और फ़ौजी अफ़सरान और गलील के रईसों की दावत की। इस मौक़े पर हेरोदियास की बेटी ने महफ़िल में आकर रक़्स, किया और हेरोदेस बादशाह और उस के मेहमानों को इस क़दर ख़ुश कर दिया के बादशाह लड़की से मुख़ातिब होकर कहने लगा। तू जो चाहे मुझ से मांग ले, “मैं तुझे दूंगा।” बल्के इस ने क़सम खाकर कहा, “जो कुछ तू मुझ से मांगेगी, मैं तुझे दूंगा चाहे वह मेरी आधी सल्तनत ही क्यूं न हो।” लड़की ने बाहर जा कर अपनी मां, से पूछा, “मैं क्या मांगूं?” तब उस की मां ने जवाब दिया, “यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले का सर।” लड़की फ़ौरन बादशाह के पास वापस आई और अर्ज़ करने लगी: “मुझे अभी एक थाल में यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाले का सर चाहिये।” बादशाह को बेहद अफ़सोस हुआ, लेकिन वह मेहमानों के सामने क़सम दे चुका था, इसलिये बादशाह इन्कार न कर सका। चुनांचे बादशाह ने उसी वक़्त हिफ़ाज़ती दस्ता के एक सिपाही को हुक्म दिया के वह जाये, और हज़रत यहया का सर ले आये। सिपाही ने क़ैदख़ाने में जा कर, हज़रत यहया का सर तन से जुदा किया, और उसे एक थाल में रखकर लाया और लड़की के हवाले कर दिया, और लड़की ने उसे ले जा कर अपनी मां को दे दिया। जब हज़रत यहया के शागिर्दों ने ये ख़बर सुनी तो वह आये और उन की लाश उठाकर ले गये और उन्हें एक क़ब्र में दफ़न कर दिया। हुज़ूर ईसा के पास रसूल वापस आये और जो कुछ उन्होंने काम किये और तालीम सिखाई थी उन सब को आप से बयान किया। आप ने उन से कहा, “हम किसी वीरान और अलग जगह पर चलें और थोड़ी देर आराम करें, क्यूंके उन के पास बहुत से लोगों की आमद-ओ-रफ़्त लगी रहती थी और उन्हें खाने तक की फ़ुर्सत न मिलती थी।” तब हुज़ूर ईसा कश्ती में बैठ कर दूर एक वीरान जगह की तरफ़ रवाना हुए। लोगों ने उन्हें जाते देख लिया और पहचान लिया। और तमाम शहरों के लोग इकट्-ठे होकर पैदल ही दौड़े और आप से पहले वहां पहुंच गये। जब हुज़ूर ईसा कश्ती से किनारे पर उतरे तो आप ने एक बड़े हुजूम को देखा, और आप को उन पर बड़ा तरस आया, क्यूंके वह लोग उन भेड़ों की मानिन्द थे जिन का कोई गल्लेबान न हो। लिहाज़ा वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगे। इसी दौरान शाम हो गई, और शागिर्दों ने उन के पास आकर कहा, “ये जगह वीरान है, और दिन ढल चुका है। इन लोगों को रुख़्सत कर दीजिये ताके वह आस-पास की बस्तीयों और गांव में चले जायें और ख़रीद कर कुछ खा पी लें।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने जवाब में कहा, “तुम ही इन्हें खाने को दो।” शागिर्दों ने कहा, “क्या हम जायें और उन के खाने के लिये दो सौ दीनार! की रोटियां ख़रीद कर लायें?” उन्होंने पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? जाओ और देखो।” उन्होंने दरयाफ़्त कर के, बताया, “पांच रोटियां और दो मछलियां हैं।” तब हुज़ूर ईसा ने लोगों को छोटी-छोटी क़तारें बना कर सब्ज़ घास पर बैठ जाने का हुक्म दिया। और वह सौ-सौ और पचास-पचास की क़तारें बना कर बैठ गये। हुज़ूर ईसा ने वह पांच रोटियां और दो मछलियां लीं और आसमान, की तरफ़ नज़र उठाकर उन पर बरकत मांगी। फिर आप ने उन रोटियों के टुकड़े तोड़ कर शागिर्दों को दिये और कहा के इन्हें लोगों के सामने रखते जायें। इसी तरह ख़ुदावन्द ने दो मछलियां भी उन सब लोगों में तक़्सीम कर दीं। और सब लोग खाकर सेर हो गये, रोटियों और मछलियों के टुकड़ों की बारह टोकरियां भर कर उठाई गईं। जिन लोगों ने वह रोटियां खाई थीं उन में मर्द ही पांच हज़ार थे। लोगों को रुख़्सत करने से पहले उन्होंने शागिर्दों पर ज़ोर दिया, तुम फ़ौरन कश्ती पर सवार होकर झील के पार बैतसैदा चले जाओ, ताके मैं यहां लोगों को रुख़्सत कर सकूं। उन्हें रुख़्सत करने के बाद वह दुआ करने के लिये पहाड़ी पर चले गये। रात के आख़िर में, कश्ती झील के दरमियानी हिस्से में पहुंच चुकी थी, और वह किनारे पर तन्हा थे। हुज़ूर ईसा ने जब देखा के हवा मुख़ालिफ़ होने की वजह से शागिर्दों को कश्ती को खेने में बड़ी मुश्किल पेश आ रही है, लिहाज़ा वह रात चौथे पहर के क़रीब झील पर चलते हुए उन के पास पहुंचे, और चाहते थे के उन से आगे निकल जायें, लेकिन शागिर्दों ने उन्हें पानी पर चलते, देखा तो आप को भूत समझ कर, शागिर्द ख़ूब चिल्लाने लगे, क्यूंके सब उन्हें देखकर बहुत ही ज़्यादा ख़ौफ़ज़दा हो गये थे। मगर आप ने फ़ौरन उन से बात की और कहा, “हिम्मत रखो! मैं हूं। डरो मत।” तब वह उन के साथ कश्ती में चढ़ गये और हवा थम गई। शागिर्द अपने दिलों में निहायत ही हैरान हुए, क्यूंके वह रोटियों के मोजिज़ा से भी कोई सबक़ न सीख पाये थे; और उन के दिल सख़्त के सख़्त ही रहे। झील को पार करने के बाद, वह गनेसरत के इलाक़े में पहुंचे और कश्ती को किनारे से लगा दिया। जब वह कश्ती से उतरे तो लोगों ने हुज़ूर ईसा को एक दम पहचान लिया। पस लोग उन की मौजूदगी की ख़बर सुन कर हर जानिब से दौड़ पड़े और बीमारों को बिछौनों पर डाल कर उन के पास लाने लगे। और हुज़ूर ईसा गांव या शहरों या बस्तीयों में जहां कहीं जाते थे लोग बीमारों को बाज़ारों में रास्तों पर रख देते थे। और उन की मिन्नत करते थे के उन्हें सिर्फ़ अपनी पोशाक, का किनारा छू लेने दें और जितने हुज़ूर ईसा छू लेते थे। शिफ़ा पा जाते थे। एक दफ़ा यरूशलेम के बाज़ फ़रीसी और शरीअत के कुछ आलिम हुज़ूर ईसा के पास जमा हुए। उन्होंने देखा के उन के बाज़ शागिर्द नापाक हाथों से यानी, हाथ धोए बग़ैर खाना खाते हैं। (असल में फ़रीसी बल्के सब यहूदी अपने बुज़ुर्गों की रिवायतों के इस क़दर पाबन्द होते हैं जब तक अपने हाथों को रस्मी धुलाई तक धो न लें खाना नहीं खाते। और जब भी बाज़ार से आते हैं तो बग़ैर हाथ धोए खाना नहीं खाते। इसी तरह और भी बहुत सी रिवायतें हैं। जो बुज़ुर्गों से पहुंची हैं, जिन की वह पाबन्दी करते हैं मसलन प्याले, घड़ों और तांबे के बर्तनों को ख़ास तरीक़े से धोना।) लिहाज़ा फ़रीसियों और शरीअत के आलिमों ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “क्या वजह है आप के शागिर्द बुज़ुर्गों की रिवायत पर अमल नहीं करते और नापाक हाथों से खाना खाते हैं?” आप ने उन्हें जवाब दिया, “हज़रत यसायाह नबी ने तुम रियाकारों के बारे में क्या ख़ूब नुबुव्वत की है; जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “ ‘ये उम्मत ज़बान से तो मेरी ताज़ीम करती है, मगर इन का दिल मुझ से दूर है। ये लोग बेफ़ाइदा मेरी परस्तिश करते हैं; क्यूंके आदमियों के हुक्मों की तालीम देते हैं।’ तुम ख़ुदा के अहकाम को छोड़कर इन्सानी रिवायत को क़ाइम रखते हो।” फिर ये कहा, “तुम अपनी रिवायत को क़ाइम रखने के लिये ख़ुदा के हुक्म को कैसी ख़ूबी के साथ बातिल कर देते हो! मसलन हज़रत मूसा ने फ़रमाया है, ‘तुम अपने बाप और मां की इज़्ज़त करना,’ और, ‘जो कोई बाप या मां को बुरा कहे वह ज़रूर मार डाला जाये।’ मगर तुम ये कहते हो के जो चाहे अपने ज़रूरतमन्द बाप या मां से कह सकता है के मेरी जिस चीज़ से तुझे फ़ायदा पहुंच सकता था वह तो क़ुर्बान (यानी, ख़ुदा की नज़्र) हो चुकी तुम उसे अपने मां बाप की कुछ भी मदद नहीं करने देते। यूं तुम अपनी रिवायत से जो तुम ने जारी की है के ख़ुदा के कलाम को बातिल कर देते हो। तुम इस क़िस्म के और भी कई काम करते हो।” फिर हुज़ूर ईसा ने हुजूम को अपने पास बुलाकर फ़रमाया, “तुम सब, मेरी बात सुनो, और इसे समझने की कोशिश करो। जो चीज़ बाहर से इन्सान के अन्दर जाती है। वह उसे नापाक नहीं कर सकती। बल्के, जो चीज़ उस के अन्दर से बाहर निकलती है वोही उसे नापाक करती है।” जिस के पास सुनने वाले कान हैं वह सुन ले। जब वह हुजूम के पास से घर में दाख़िल हुए, तो उन के शागिर्दों ने इस तम्सील का मतलब पूछा। उन्होंने उन से कहा? “क्या तुम भी ऐसे न समझ हो? इतना भी नहीं समझते के जो चीज़ बाहर से इन्सान के अन्दर जाती है वह उसे नापाक नहीं कर सकती? इसलिये के वह उस के दिल में नहीं बल्के पेट में, जाती है और आख़िरकार बदन से ख़ारिज होकर बाहर निकल जाती है।” (ये कह कर, हुज़ूर ने तमाम खाने की चीज़ों को पाक ठहराया।) फिर उन्होंने कहा: “असल में जो कुछ इन्सान के दिल से बाहर निकलता है वोही उसे नापाक करता है। क्यूंके अन्दर से यानी उस के दिल, से बुरे ख़्याल बाहर आते हैं जैसे, जिन्सी बदफ़ेली, चोरी, ख़ूंरेज़ी ज़िना, लालच, बदकारी, मकर-ओ-फ़रेब, शहवत-परस्ती, बदनज़री, कुफ़्र, तकब्बुर और हमाक़त। ये सब बुराईयां इन्सान के अन्दर से निकलती हैं और उसे नापाक कर देती हैं।” हुज़ूर ईसा वहां से उठ कर सूर के इलाक़े में गये। जहां आप एक घर में दाख़िल हुए और आप नहीं चाहते थे के किसी को पता चले; लेकिन वह पोशीदा न रह सके। क्यूंके, एक ख़ातून जिस की छोटी बेटी में बदरूह थी, ये सुनते ही हुज़ूर ईसा वहां हैं, उन के पास आई और उन के क़दमों पर गिर गई। ये यूनानी, ख़ातून सूरफ़ीनीकी क़ौम की थी। वह हुज़ूर ईसा की मिन्नत करने लगी के मेरी लड़की में से बदरूह को निकाल दीजिये। हुज़ूर ईसा ने उस ख़ातून से कहा, “पहले बच्चों को पेट भर खा लेने दे, क्यूंके बच्चों की रोटी ले कर कुत्तों को डाल देना मुनासिब नहीं है।” लेकिन ख़ातून ने उन्हें जवाब दिया, “जी हां आक़ा, मगर कुत्ते भी बच्चों की मेज़ से नीचे गिराये हुए टुकड़ों में से खाते हैं।” इस पर हुज़ूर ईसा ने ख़ातून से कहा, “अगर ये बात है, तो घर जाओ; बदरूह तेरी बेटी में से निकल गई है।” जब वह घर पहुंची तो देखा के लड़की चारपाई पर लेटी हुई है, और बदरूह उस में से निकल चुकी है। फिर वह सूर के इलाक़े से निकले और सैदा, की राह से दिकपुलिस यानी दस शहर के इलाक़े से होते हुए गलील की झील पर पहुंचे। कुछ लोग एक बहरे आदमी को जो हकलाता भी था, हुज़ूर ईसा के पास लाये और मिन्नत करने लगे के उन पर अपना हाथ रख दीजिये। हुज़ूर ईसा उस आदमी को भेड़ से, अलग ले गये, और अपनी उंगलियां उस के कानों में डालीं। और थूक से उस की ज़बान छुई। और आसमान की तरफ़ नज़र उठाकर आह भरी और फ़रमाया, “इफ़्फ़ातह!” (यानी “खुल जाओ!”)। उसी वक़्त, उस आदमी के कान खुल गये, और ज़बान ठीक हो गई और वह साफ़ तौर से बोलने लगा। हुज़ूर ईसा ने लोगों से कहा के ये बात किसी को न बताना। लेकिन वह जितना मना करता थे, लोग उतना ही ज़्यादा चर्चा करते थे। लोग सुन कर हैरान होते थे और कहते थे। “वह जो भी करते हैं अच्छा करते हैं, बहरों को सुनने और गूगों को बोलने की ताक़त बख़्शते हैं।” उन ही दिनों एक बार फिर बहुत से लोग जमा हो गये। और उन के पास खाने को कुछ न था, इसलिये हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों को अपने पास बुलाया और फ़रमाया, “मुझे इन लोगों पर तरस आता है; क्यूंके ये तीन दिन से बराबर मेरे साथ हैं और उन के पास खाने को कुछ नहीं रहा। अगर मैं इन्हें भूका ही घर भेज दूं, तो ये रास्ते में ही बेहोश जायेंगे, क्यूंके इन में से बाज़ काफ़ी दूर के हैं।” उन के शागिर्दों ने उन्हें जवाब दिया, “यहां इस ब्याबान में इतनी रोटियां इतने लोगों का पेट भरने के लिये कोई कहां से लायेगा?” हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं?” उन्होंने जवाब दिया। “सात।” हुज़ूर ईसा ने हुजूम से फ़रमाया के सब ज़मीन पर बैठ जायें। और हुज़ूर ने वह सात रोटियां ले कर ख़ुदा का शुक्र अदा किया, और उन के टुकड़े किये और उन्हें लोगों के दरमियान तक़्सीम के लिये अपने शागिर्दों को देने लगे। उन के पास कुछ छोटी-छोटी मछलियां भी थीं; हुज़ूर ईसा ने उन पर भी बरकत दी और शागिर्दों से फ़रमाया के इन्हें भी लोगों के दरमियान तक़्सीम कर दो। लोगों ने पेट भर कर खाया। और जब बचे हुए टुकड़े जमा किये गये तो सात टोकरियां भर गईं। हालांके खाने वाले की तादाद चार हज़ार के क़रीब थी। इस के बाद हुज़ूर ईसा ने उन्हें रुख़्सत कर दिया, और ख़ुद अपने शागिर्दों के साथ कश्ती में सवार होकर फ़ौरन दलमनूथा के इलाक़े के लिये रवाना हो गये। बाज़ फ़रीसी हुज़ूर ईसा के पास आकर बहस करने लगे। और उन्हें आज़माने की ग़रज़ से उन से कोई आसमानी निशान दिखाने का मुतालबा किया। हुज़ूर ईसा ने अपनी रूह में बड़ी गहरी आह भरी और फ़रमाया, “इस ज़माने के लोग निशान क्यूं देखना चाहते हैं? मैं तुम से सच-सच कहता हूं, इस ज़माने के लोगों को कोई निशान नहीं दिखाया जायेगा।” तब वह उन्हें छोड़कर फिर से कश्ती में जा बैठे और झील के पार चले गये। ऐसा हुआ के शागिर्द रोटी लाना भूल गये, और उन के पास कश्ती में एक रोटी से ज़्यादा और कुछ न था। हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीदन फ़रमाया, “ख़बरदार, देखो फ़रीसियों के ख़मीर और हेरोदेस के ख़मीर से बचे रहना।” उन्होंने एक दूसरे से इस पर तबादला-ए-ख़्याल किया और वह कहने लगे, “देखा हम अपने साथ रोटियां लाना भूल गये।” हुज़ूर ईसा को मालूम हुआ, तो उन्होंने उन से पूछा: “तुम क्यूं तकरार करते हो के हमारे पास रोटियां नहीं हैं? क्या तुम अभी तक नहीं जानते और समझते हो? क्या तुम्हारे दिल सख़्त हो चुके हैं? तुम्हारी आंखें होने पर भी देख नहीं पा रहे हो, और कान होने पर भी कुछ नहीं सुनते हो? क्या तुम्हें कुछ याद नहीं रहा? जिस वक़्त मैंने पांच हज़ार आदमियों के लिये, पांच रोटियों के टुकड़े किये थे तो तुम ने बचे हुए टुकड़ों की कितनी टोकरियां उठाई थीं?” “बारह,” उन्होंने जवाब दिया। “और जब मैंने चार हज़ार आदमियों के लिये, इन सात रोटियों को दिया तो तुम ने बाक़ी बचे टुकड़ों से कितनी टोकरियां भरी थीं?” उन्होंने कहा, “सात।” तब हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “क्या तुम्हारी समझ में अभी भी कुछ नहीं आया?” हुज़ूर ईसा बैतसैदा पहुंचे, जहां कुछ लोग एक नाबीना को आप के पास लाये और मिन्नत करने लगे के वह उसे छूएं। वह उस नाबीना का हाथ पकड़ कर उसे गांव से बाहर ले गये। और उस की आंखें पर थूक कर अपने हाथ उस पर रखे, और आप ने पूछा, “तुम्हें कुछ नज़र आ रहा है?” उस आदमी ने निगाह ऊपर उठाकर कहा, “मैं लोगों को देखता हूं; लेकिन वह चलते दरख़्तों की तरह दिखते हैं।” हुज़ूर ईसा ने फिर अपने हाथ उस आदमी की आंखों पर रखे। और जब उस ने नज़र उठाई, आंखें खुल गईं, और उसे हर चीज़ साफ़ दिखाई देने लगी। हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “इस गांव में किसी को ये बात बताए बग़ैर सीधे अपने घर चले जाओ।” हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्द क़ैसरिया फ़िलिप्पी के दिहात की तरफ़ बढ़े। रास्ते में उन्होंने अपने शागिर्दों से पूछा, “लोग मुझे क्या कहते हैं?” उन्होंने जवाब दिया, “बाज़ आप को हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला कहते हैं; बाज़ एलियाह; और बाज़ कहते हैं, नबियों में से कोई नबी हैं।” तब आप ने उन से पूछा, तब आप ने उन से पूछा, “तुम मुझे क्या कहते हो? मैं कौन हूं?” पतरस ने जवाब दिया, “आप ख़ुदा के अलमसीह हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद की के मेरे बारे में किसी से ये न कहना। फिर वह अपने शागिर्दों को तालीम देने लगे इब्न-ए-आदम का दुख उठाना बहुत ज़रूरी है और ये भी वह बुज़ुर्गों, अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों की जानिब से रद्द किया जाये, और वह क़त्ल किया जाये और तीसरे दिन फिर ज़िन्दा हो जाये। हुज़ूर ईसा ने ये बात साफ़-साफ़ बयान की, और पतरस को अलग ले जा कर मलामत करने लगे। मगर आप ने मुड़ कर अपने दूसरे शागिर्दों को देखा, और पतरस को मलामत करते हुए कहा, “ऐ शैतान! मेरे सामने से दूर हो जा! क्यूंके तेरा दिल ख़ुदा की बातों में नहीं लेकिन आदमियों की बातों में लगा है।” तब उन्होंने मज्मे के साथ अपने शागिर्दों को भी अपने पास बुलाया और उन से मुख़ातिब हुए: “जो कोई मेरी पैरवी करना चाहे तो वह ख़ुदी का इन्कार करे, अपनी सलीब उठाये और मेरे पीछे हो ले। क्यूंके जो कोई अपनी जान को बाक़ी रखना चाहता है वह उसे खोयेगा, लेकिन जो कोई मेरी और इन्जील की ख़ातिर अपनी जान खो देता है वह उसे महफ़ूज़ रखेगा। आदमी अगर सारी दुनिया हासिल कर ले, मगर अपनी जान का नुक़्सान उठाये उसे क्या फ़ायदा होगा? या आदमी अपनी जान के बदले में क्या देगा? जो कोई इस ज़िनाकार और ख़ताकार पुश्त में मुझ से और मेरे कलाम से शरमाएगा तो इब्न-ए-आदम भी जब वह अपने बाप के जलाल में मुक़द्दस फ़रिश्तों के साथ आयेगा, उस से शरमाएगा।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं, बाज़ लोग जो यहां हैं वह जब तक के ख़ुदा की बादशाही की क़ुदरत को क़ाइम होता हुआ न देख लें वह मौत को हरगिज़ नहीं देखेंगे।” छः दिन बाद हुज़ूर ईसा ने पतरस, याक़ूब और यूहन्ना को हमराह लिया और उन्हें अलग एक ऊंचे पहाड़ पर ले गये, जहां कोई न था। वहां शागिर्दों के सामने उन की सूरत बदल गई। उन की पोशाक चमकने लगी, और इस क़दर सफ़ैद हो गई के इस सरज़मीं का कोई धोबी भी इस क़दर सफ़ैद नहीं कर सकता। तब एलियाह और हज़रत मूसा, हुज़ूर ईसा के साथ उन को दिखाई दिये और वह हुज़ूर ईसा के साथ गुफ़्तगू करते नज़र आये। पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “रब्बी, हमारा यहां रहना अच्छा है। क्यूं न हम तीन ख़ेमे लगाऐं एक आप के लिये, और एक हज़रत मूसा और एलियाह के लिये।” (दरअस्ल पतरस को नहीं मालूम था के और क्या कहे, क्यूंके वह बहुत ख़ौफ़ज़दा हो गये थे।) तब एक बादल ने उन पर साया कर लिया, और उस बादल में से आवाज़ आई: “ये मेरा प्यारा बेटा है। इस की बात ग़ौर से सुनो!” अचानक, जब उन्होंने आस-पास नज़र की, तो उन्होंने हुज़ूर ईसा के सिवा अपने साथ किसी और को न पाया। जिस वक़्त वह पहाड़ से नीचे उतर रहे थे, तो हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद की के जब तक इब्न-ए-आदम मुर्दों में से जी न उठे, जो कुछ तुम ने देखा है उस का ज़िक्र किसी से न करना। शागिर्दों ने ये बात अपने दिल में रख्खी, लेकिन वह आपस में बहस कर रहे थे “मुर्दों में से जी उठने” के क्या मानी हो सकते हैं। लिहाज़ा उन्होंने, हुज़ूर ईसा से पूछा, “शरीअत के आलिम क्यूं कहते हैं के एलियाह का पहले आना ज़रूरी है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ये ज़रूरी है के पहले एलियाह आये, और सब कुछ बहाल कर दे। मगर किताब-ए-मुक़द्दस में इब्न-ए-आदम के बारे में ये क्यूं लिख्खा है के वह बहुत दुख उठायेगा और ज़लील किया जायेगा? लेकिन मैं तुम से कहता हूं, एलियाह तो आ चुका, और जैसा के उस के मुतअल्लिक़ लिख्खा हुआ है, उन्होंने अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ उस के साथ जैसा चाहा वैसा किया।” जब वो दूसरे शागिर्दों के पास आये, उन्होंने देखा के उन के इर्दगिर्द एक बड़ा हुजूम हैं और शरीअत के आलिम उन से बहस कर रहे हैं। जूंही ही लोगों की नज़र आप पर पड़ी, वह हैरान होकर उन की तरफ़ सलाम करने दौड़े। हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों से पूछा? “तुम इन के साथ किस बात पर बहस कर रहे थे।” हुजूम में से एक ने जवाब दिया, “ऐ उस्ताद मुहतरम, में अपने बेटे को आप के पास लाया था, क्यूंके उस में बदरूह है जिस ने उसे गूंगा बना दिया है। जब भी बदरूह उसे पकड़ती है, ज़मीन पर पटक देती है। लड़के के मुंह से झाग निकलने लगता है, वह दांत पीसता है। और उस का जिस्म अकड़ जाता है। मैंने आप के शागिर्दों से कहा था के वह बदरूह को निकाल दें, लेकिन वह निकाल न सके।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ बेएतक़ाद पुश्त, मैं कब तक तुम्हारे साथ तुम्हारी बर्दाश्त करता रहूंगा? मैं तुम्हारे साथ कब तक चलूंगा? लड़के को मेरे पास लाओ।” चुनांचे वह उसे हुज़ूर ईसा के पास लाये। जूंही ही बदरूह ने हुज़ूर ईसा को देखा, उस ने लड़के को मरोड़ा। और वह ज़मीन पर गिर पड़ा और लौटने लगा, और इस के मुंह से झाग निकलने लगे। हुज़ूर ईसा ने लड़के बाप से पूछा, “ये तकलीफ़ इसे कब से है?” उस ने जवाब दिया, “बचपन से है। बदरूह कई दफ़ा इसे आग और पानी में गिरा कर मार डालने की कोशिश कर चुकी है। अगर आप से कुछ हो सके, हम पर तरस खाइये और हमारी मदद कीजिये।” “ ‘अगर हो सके तो’?” हुज़ूर ईसा ने कहा। “जो शख़्स ईमान रखता है उस के लिये सब कुछ मुम्किन हो सकता है।” फ़ौरन ही लड़के के बाप ने चीख़ कर कहा, “मैं ईमान लाता हूं; आप मेरी बेएतक़ादी पर क़ाबू पाने में मेरी मदद कीजिये!” जब हुज़ूर ईसा ने देखा के लोग दौड़े चले आ रहे हैं और भेड़ बढ़ती जाती है, आप ने बदरूह को झिड़का। और डांट कर कहा, “ऐ गूंगी और बहरी रूह, मैं तुझे हुक्म देता हूं, इस लड़के में से निकल जा और इस में फिर कभी दाख़िल न होना।” बदरूह ने चीख़ मारी, और लड़के को बुरी तरह मरोड़ कर इस में से बाहर निकल गई। लड़का मुर्दा सा होकर ज़मीन पर गिर पड़ा यहां तक के लोग कहने लगे, “वह मर चुका है।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने लड़के का हाथ पकड़ कर उसे उठाया, और वह उठ खड़ा हुआ। हुज़ूर ईसा जब घर के अन्दर दाख़िल हुए, तो तन्हाई में उन के शागिर्दों ने उन से पूछा, “हम इस बदरूह को क्यूं नहीं निकाल सके?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “इस क़िस्म की बदरूह दुआ के सिवा किसी और तरीक़े से नहीं निकल सकती।” फिर वह वहां से रवाना होकर गलील के इलाक़े से गुज़रे। हुज़ूर ईसा नहीं चाहते थे के किसी को उन की आमद की ख़बर हो, पस आप अपने शागिर्दों को तालीम देते हुए ये फ़रमाया, “इब्न-ए-आदम आदमियों के हवाले किया जायेगा। और वह उस का क़त्ल करेंगे, लेकिन तीन दिन के बाद वह मुर्दों में से जी उठेगा।” लेकिन वह शागिर्द हुज़ूर की इस बात का मतलब न समझ सके और उन से पूछने से भी से भी डरते थे। वह कफ़रनहूम में आये। जब घर में दाख़िल हुए, हुज़ूर ईसा ने शागिर्दों से पूछा, “तुम रास्ते में क्या बहस कर रहे थे?” वह ख़ामोश रहे क्यूंके रास्ते में वह आपस में ये बहस कर रहे थे के उन में बड़ा कौन है। जब आप बैठ गये, तो हुज़ूर ने बारह शागिर्दों को बुलाया और फ़रमाया, “अगर कोई अव्वल बनना चाहता है तो वह छोटा बने, और सब का ख़ादिम बने।” तब उन्होंने एक बच्चे को लिया और बच्चे को उन के दरमियान में खड़ा कर दिया। और फिर उसे गोद में ले कर, उन से मुख़ातिब हुए, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बच्चे को क़बूल करता है तो वह मुझे क़बूल करता है; और जो कोई मुझे क़बूल करता है तो वह मुझे नहीं बल्के मेरे भेजने वाले को क़बूल करता है।” यूहन्ना ने उन से कहा, “उस्ताद मुहतरम, हम ने एक शख़्स को आप के नाम से बदरूहें निकालते देखा था और हम ने उसे मना किया, क्यूंके वह हम में से नहीं है।” हुज़ूर ईसा ने कहा, “आइन्दा उसे मना न करना, ऐसा कोई भी नहीं जो मेरे नाम से मोजिज़े करता हो फ़ौरन मुझे बुरा भला कहने लगे, क्यूंके जो हमारे ख़िलाफ़ नहीं वह हमारे साथ है। मैं तुम से सच कहता हूं, जो कोई भी तुम्हें मेरे नाम पर एक प्याला पानी पिलाता है क्यूंके तुम अलमसीह के हो वह यक़ीनन अपना अज्र नहीं खोयेगा। “जो शख़्स मुझ पर ईमान लाने वाले इन छोटे बच्चों में से किसी के ठोकर खाने का बाइस बनता है तो ऐसे शख़्स के लिये, यही बेहतर है के चक्की का भारी पत्थर उस की गर्दन से लटका कर उसे समुन्दर में फेंक दिया जाये। चुनांचे अगर तुम्हारा हाथ तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस हो तो, उसे काट डालो क्यूंके तुम्हारा टुंडा होकर ज़िन्दगी में दाख़िल होना दोनों हाथों के साथ जहन्नुम की आग में डाले जाने से बेहतर है, जो कभी नहीं बुझती। जहन्नुम में उन का कीड़ा मरता नहीं और आग भी कभी नहीं बुझती। इसी तरह अगर तुम्हारा पांव तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस हो तो, उसे काट डालो। क्यूंके तुम्हारा लंगड़ा होकर ज़िन्दगी में दाख़िल होना दोनों पांव के साथ जहन्नुम की आग में डाले जाने से बेहतर है। जहन्नुम में उन का कीड़ा मरता नहीं और आग भी कभी नहीं बुझती और अगर तुम्हारी आंख तुम्हारे लिये ठोकर का बाइस बनती है तो, उसे निकाल दो। क्यूंके कान होकर ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होना दो आंखें होते जहन्नुम की आग में डाले जाने से बेहतर है, जहां, “ ‘उन का कीड़ा कभी नहीं मरता, और आग कभी नहीं बुझती।’ हर शख़्स आग से नमकीन किया जायेगा। “नमक अच्छी चीज़ है, लेकिन अगर नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किस चीज़ से नमकीन किया जायेगा? अपने में नमक रखो, और आपस में सुलह से रहो।” हुज़ूर ईसा वहां से रवाना होकर दरया-ए-यरदन के पार यहूदिया के इलाक़े में गये। वहां भी बेशुमार लोग उन के पास जमा हो गये, और आप अपने दस्तूर के मुताबिक़, उन्हें तालीम देने लगे। फ़रीसी फ़िर्क़े के बाज़ लोग उन के पास आये और उन्हें आज़माने की ग़रज़ से पूछने लगे, “क्या आदमी का अपनी बीवी को छोड़ देना जायज़ है?” हुज़ूर ने जवाब मैं फ़रमाया, “इस बाबत हज़रत मूसा ने तुम्हें क्या हुक्म दिया है?” फ़रीसियों ने जवाब दिया, “हज़रत मूसा ने तो ये इजाज़त दी है के आदमी तलाक़ नामा लिख कर उसे छोड़ सकता है।” हुज़ूर ईसा ने उन को जवाब दिया। “हज़रत मूसा ने तुम्हारी सख़्त-दिली की वजह से ये हुक्म दिया था, लेकिन तख़्लीक़ की शुरूआत ही से ख़ुदा ने उन्हें ‘मर्द और औरत बनाया है।’ ‘यही वजह है के मर्द अपने बाप और मां से जुदा होकर अपनी बीवी के साथ मिला रहेगा, और वह दोनों एक जिस्म होंगे।’ चुनांचे वह अब दो नहीं, बल्के एक जिस्म हैं। पस जिन्हें ख़ुदा ने जोड़ा है, उन्हें कोई इन्सान जुदा न करे।” जब वह दुबारा घर पर आये, शागिर्दों ने इस बात के बारे में आप से मज़ीद जानना चाहा। हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “अगर कोई आदमी अपनी बीवी को छोड़ दे और दूसरी औरत कर ले तो वह अपनी पहली बीवी के ख़िलाफ़ ज़िना करता है। और इसी तरह अगर कोई औरत अपने शौहर को छोड़कर, किसी दूसरे आदमी से शादी कर ले वह भी ज़िना करती है।” फिर बाज़ लोग बच्चों को हुज़ूर ईसा के पास लाने लगे ताके वह उन पर हाथ रखें, लेकिन शागिर्दों ने उन्हें झिड़क दिया। जब हुज़ूर ईसा ने ये देखा तो ख़फ़ा होते हुए उन से फ़रमाया, “बच्चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मना न करो, क्यूंके ख़ुदा की बादशाही ऐसों ही की है। मैं तुम से सच कहता हूं के जो कोई ख़ुदा की बादशाही को बच्चे की तरह क़बूल न करे तो वह उस में हरगिज़ दाख़िल न होगा।” फिर उन्होंने बच्चों को गोद में लिया, और उन पर अपना हाथ रखकर उन्हें बरकत दी। हुज़ूर ईसा घर से निकल कर बाहर जा रहे थे, रास्ता में एक आदमी दौड़ता हुआ आया और उन के सामने घुटने टेक कर पूछने लगा, “ऐ नेक उस्ताद, अब्दी ज़िन्दगी का वारिस बनने के लिये में क्या करूं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तू मुझे नेक क्यूं कहता है? नेक सिर्फ़ एक ही है यानी ख़ुदा। तुम हुक्मों को तो जानते हो: ‘के तुम ज़िना न करना, ख़ून न करना, चोरी न करना, झूटी गवाही न देना, अपने बाप और मां की इज़्ज़त करना।’ ” उस ने सफ़ाई पेश की, “उस्ताद मुहतरम, इन सब अहकाम पर मैं बचपन ही से अमल करता आ रहा हूं।” हुज़ूर ईसा ने उसे बग़ौर देखा और उस पर तरस आया और फ़रमाया। “तुम्हारा एक बात पर अमल करना अभी बाक़ी है, जाओ, अपना सब कुछ फ़रोख़त कर के और वह रक़म ग़रीबों में तक़्सीम कर दो, तो तुम्हें आसमान पर ख़ज़ाना मिलेगा। फिर आकर, मेरे पीछे हो लेना।” ये बात सुन कर उस आदमी के चेहरे पर उदासी छा गई। और वह ग़मगीन होकर चला गया, क्यूंके वह बहुत दौलतमन्द था। तब हुज़ूर ईसा ने लोगों पर नज़र की और अपने शागिर्दों से यूं मुख़ातिब हुए, “दौलतमन्द का ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होना कितना मुश्किल है!” ये सुन कर शागिर्द हैरान रह गये। लिहाज़ा हुज़ूर ईसा ने फिर फ़रमाया, “बच्चों, जो दौलत पर तवक्कुल करते हैं उन का ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होना कितना मुश्किल है! ऊंट का सुई के नाके में से गुज़रना ज़्यादा आसान है बनिस्बत एक दौलतमन्द आदमी का ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल हो जाना।” शागिर्द निहायत ही हैरान हुए, और एक दूसरे से कहने लगे, “फिर कौन नजात पा सकता है?” हुज़ूर ईसा ने उन की तरफ़ देखकर फ़रमाया, “ये इन्सानों के लिये तो नामुम्किन है, लेकिन ख़ुदा के लिये नहीं; क्यूंके ख़ुदा के लिये सब कुछ मुम्किन है।” पतरस उन से कहने लगे, “देखिये हम तो सब कुछ छोड़कर आप के पीछे हो लिये हैं!” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं, ऐसा कोई नहीं जिस ने मेरी और इन्जील की ख़ातिर अपने घर या भाईयों या बहनों या मां या बाप या बच्चों या खेतों को छोड़ दिया है। वह इस दुनिया में रंज और मुसीबत के बावुजूद घर, भाई, बहनें, माएं, बच्चे और खेत सौ गुना ज़्यादा पायेंगे और आने वाली दुनिया में अब्दी ज़िन्दगी। लेकिन बहुत से जो अव्वल हैं आख़िर हो जायेंगे, और आख़िर हैं वह अव्वल।” यरूशलेम जाते वक़्त राह में, हुज़ूर ईसा उन के आगे-आगे चल रहे थे, शागिर्द हैरान-ओ-परेशान थे। और जो लोग पीछे आ रहे थे वह भी ख़ौफ़ज़दा थे चुनांचे वह बारह शागिर्दों को साथ ले कर उन्हें बताने लगे के उन के साथ क्या कुछ पेश आने वाला है। उन्होंने कहा, “हम यरूशलेम शहर जा रहे हैं, और इब्न-ए-आदम अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों के हवाले किया जायेगा। वह उस के क़त्ल का हुक्म सादर कर के उसे ग़ैरयहूदियों के हवाले कर देंगे, वह लोग उस की हंसी उड़ायेंगे उस पर थूकेंगे, उसे कोड़े मारेंगे और क़त्ल कर डालेंगे लेकिन वह तीसरे दिन फिर से ज़िन्दा हो जायेगा।” तब ज़ब्दी के बेटे, याक़ूब और यूहन्ना हुज़ूर ईसा, के पास आये और मिन्नत कर के कहने लगे, “उस्ताद मुहतरम, हम आप से जो भी मिन्नत करें, वह आप हमारे लिये कर दीजिये।” हुज़ूर ईसा ने इन से पूछा, “तुम क्या चाहते हैं के मैं तुम्हारे लिये करूं?” उन्होंने कहा, “हम पर ये मेहरबानी कीजिये के आप के जलाल में हम में से एक आप के दाईं तरफ़ और दूसरा आप के बाएं तरफ़ बैठे।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “तुम नहीं जानते के क्या मांग रहे हो। क्या तुम वह प्याला पी सकते हो जो मैं पीने पर हूं और वह पाक-ग़ुस्ल लेने जा रहा हूं तुम ले सकते हो?” उन्होंने कहा, “हम उस के लिये भी तय्यार हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “इस में तो कोई शक नहीं के जो प्याला मैं पीने वाला हूं तुम भी पियोगे और जो पाक-ग़ुस्ल मैं लेने वाला हूं तुम भी लोगे, लेकिन ये मेरा काम नहीं के किसी को अपनी दाएं या बाएं तरफ़ बिठाऊं। ये मक़ाम जिन के लिये मुक़र्रर किया जा चुका है उन ही के लिये है।” जब बाक़ी दस शागिर्दों ने ये सुन, वह याक़ूब और यूहन्ना पर ख़फ़ा होने लगे। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन्हें पास बुलाया और उन से फ़रमाया, “तुम्हें मालूम है के इस जहान के ग़ैरयहूदियों के हुक्मरां उन पर हुक्मरानी करते हैं, और उन के उम्रा उन पर इख़्तियार जताते हैं। मगर तुम में ऐसा नहीं होना चाहिये। बल्के, तुम में वोही बड़ा होगा जो तुम्हारा ख़ादिम बनेगा और अगर तुम में कोई सब से ऊंचा दर्जा हासिल करना चाहे तो वह सब का ग़ुलाम बने। क्यूंके इब्न-ए-आदम इसलिये नहीं आया के ख़िदमत ले बल्के, इसलिये के ख़िदमत करे, और अपनी जान दे कर बहुतेरों को रिहाई बख़्शे।” फिर वह यरीहू शहर में आये। और जब वह और उन के शागिर्द बड़े हुजूम के हमराह, यरीहू शहर से बाहर निकल रहे थे, तो एक अन्धा भिकारी, बरतिमाई (“यानी तमाई का बेटा”), राह के किनारे बैठा हुआ भीक मांग रहा था। जूंही ही उसे पता चला के हुज़ूर ईसा नासरी वहां हैं, वह ज़ोर से चिल्लाने लगा, “ऐ इब्न-ए-दाऊद, हुज़ूर ईसा, मुझ पर रहम कीजिये!” लोग उसे डांटने लगे के ख़ामोश हो जाओ, मगर वह और भी ज़्यादा चिल्लाने लगा, “ऐ इब्न-ए-दाऊद, मुझ पर रहम कीजिये!” हुज़ूर ईसा ने रुके और हुक्म दिया, “उसे बुलाओ।” चुनांचे उन्होंने अन्धे को आवाज़ दी और कहा, “ख़ुशी मनाओ! उठो! हुज़ूर तुम्हें बुला रहे हैं।” इस ने अपनी चादर उतार फेंकी, और उछल कर खड़ा हो गया और हुज़ूर ईसा के पास आ गया। हुज़ूर ईसा ने उस से पूछा बताओ, “तुम क्या चाहते हो के मैं तुम्हारे लिये करूं?” अन्धे ने जवाब दिया, “ऐ रब्बी, मैं चाहता हूं के मैं देखने लगूं।” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “जाओ, तुम्हारे ईमान ने तुम्हें शिफ़ा बख़्शी।” उसी दम उस अन्धे की आंखों में रोशनी वापस आ गई और वह हुज़ूर ईसा का पैरोकार बन गया। जब वह बैतफ़गे और बैतअन्नियाह के पास पहुंचे जो यरूशलेम के बाहर कोहे-ज़ैतून पर वाक़े है, हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों में से दो को आगे भेजा, और फ़रमाया, “सामने वाले गांव में जाओ, वहां दाख़िल होते ही तुम एक गधी का जवान बच्चा बंधा हुआ पाओगे, जिस पर अब तक किसी ने सवारी नहीं की है। उसे खोल कर यहां ले आओ। और अगर कोई तुम से पूछे, ‘तुम ये क्या कर रहे हो?’ तो कहना, ‘ख़ुदावन्द को इस की ज़रूरत है और वह उसे फ़ौरन ही यहां भेज देगा।’ ” चुनांचे वह गये और उन्होंने गधी के बच्चे को सामने गली में, एक दरवाज़ा के पास बंधा हुआ पाया। जब वह उसे खोल रहे थे, तो कुछ लोग जो वहां खड़े थे शागिर्दों से पूछने लगे, “इस गधे को क्यूं खोल रहे हो?” शागिर्दों ने वोही कहा जो हुज़ूर ईसा ने उन्हें कहा था, लिहाज़ा उन्होंने शागिर्दों को जाने दिया। तब वह गधे के बच्चे को हुज़ूर ईसा के पास लाये और अपने कपड़े उस पर डाल दिये, और वह उस पर सवार हो गये। कई लोगों ने रास्ते में, अपने कपड़े बिछा दिये और बाज़ ने दरख़्तों से हरी डालियां काट कर फैला दीं। लोग जो हुज़ूर ईसा के आगे-आगे और पीछे-पीछे चल रहे थे, नारे लगाने लगे, “होशाना!” “मुबारक है वह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है!” “मुबारक है हमारे बाप दाऊद की बादशाही जो क़ाइम होने वाली है!” “आलमे-बाला पर होशाना!” यरूशलेम शहर में दाख़िल होते ही हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में तशरीफ़ ले गये। और वहां की हर चीज़ को ग़ौर से देखा, चूंके शाम हो चुकी थी, इसलिये वह बारह शागिर्दों के साथ वापस बैतअन्नियाह चले गये। अगले दिन जब वह बैतअन्नियाह से निकल रहे थे, तो हुज़ूर ईसा को भूक लगी। दूर से अन्जीर का एक सरसब्ज़ दरख़्त देखकर, वह उस के पास गये ताके देखें के उस में फल लगे हैं या नहीं। दरख़्त के नज़दीक जा कर, उन्हें सिर्फ़ पत्ते ही पत्ते नज़र आये, क्यूंके अन्जीर के फल का मौसम अभी शुरू नहीं हुआ था। तब उन्होंने दरख़्त से कहा, “आइन्दा तुझ से कोई शख़्स कभी फल न खाये।” उन की ये बात शागिर्दों ने भी सुनी। जब वह यरूशलेम पहुंचे तो, हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में दाख़िल हुए और आप वहां से ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त करने वालों को बाहर निकालने लगे। आप ने पैसे तब्दील करने वाले सर्राफों के तख़्ते और कबूतर फ़रोशों की चौकियां उलट दीं, और किसी को कोई सामान ले कर बैतुलमुक़द्दस के अहाते में से गुज़रने न दिया। फिर हुज़ूर ईसा ने तालीम देते हुए, फ़रमाया, “क्या किताब-ए-मुक़द्दस में ये नहीं लिख्खा: ‘मेरा घर सब क़ौमों के लिये दुआ का घर कहलायेगा? ’ मगर तुम ने उसे ‘डाकूओं का अड्डा बना रख्खा है।’ ” जब अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों ने ये बातें सुनें तो वह आप को हलाक करने का मौक़ा ढूंडने लगे, लेकिन वह हुज़ूर ईसा के ख़िलाफ़ ऐसा क़दम उठाने से डरते भी थे, क्यूंके सारा हुजूम उन की तालीम से निहायत हैरान थे। जब शाम हुई, हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ शहर से बाहर चले गये। अगली सुबह जब, वह उधर से गुज़रे, उन्होंने देखा के अन्जीर का दरख़्त जड़ तक सूखा हुआ है। पतरस को हुज़ूर ईसा की बात याद आई और वह कहने लगे, “रब्बी, देखिये! अन्जीर का वह दरख़्त जिस पर आप ने लानत भेजी थी, सूख गया है!” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “ख़ुदा पर ईमान रखो, मैं तुम से सच कहता हूं, अगर कोई इस पहाड़ से कहे, ‘अपनी जगह से उखड़ जा और समुन्दर में जा गिर,’ और अपने दिल में शक न करे बल्के यक़ीन रखे के जो कुछ वह कहता है वह हो जाये, तो उस के लिये वही हो जायेगा। लिहाज़ा मैं तुम से कहता हूं, तुम दुआ में जो कुछ मांगते हो, यक़ीन रखो के तुम ने पा लिया, तो तुम्हें वह मिल जायेगा। जब तुम दुआ के लिये खड़े होते हो, और तुम्हें किसी से कुछ शिकायत हो तो, उसे मुआफ़ कर दो, ताके तुम्हारा आसमानी बाप भी तुम्हारे गुनाह मुआफ़ कर दे। अगर तुम मुआफ़ न करोगे तो तुम्हारा आसमानी बाप भी तुम्हारे गुनाह मुआफ़ न करेगा।” वह फिर यरूशलेम में आये, और जब हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सहन में से गुज़र रहे थे, अहम-काहिन, शरीअत के आलिम और बुज़ुर्ग लोग हुज़ूर के पास पहुंचे। और उन से पूछने लगे, “आप किस के इख़्तियार से ये काम करते हैं? और ऐसे काम करने का इख़्तियार किस ने आप को दिया है?” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मैं भी तुम से एक बात पूछता हूं। अगर तुम उस का जवाब दोगे, तो मैं भी बताऊंगा के मैं ये काम किस के इख़्तियार से करता हूं। मुझे ये बताओ! यहया का पाक-ग़ुस्ल आसमान की जानिब से था, या इन्सान की जानिब से?” वह आपस में बहस करने लगे, “अगर हम कहें, ‘वह आसमान की जानिब से था,’ तो वह कहेंगे, ‘फिर तुम ने उस का यक़ीन क्यूं न किया?’ और अगर कहें, ‘इन्सान की जानिब से’ ” (तो अवाम का ख़ौफ़ था, क्यूंके वह हज़रत यहया को वाक़ई नबी मानते थे।) लिहाज़ा उन्होंने आप को जवाब दिया, “हम नहीं जानते।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मैं भी तुम्हें नहीं बताता के मैं ये काम किस के इख़्तियार से करता हूं।” हुज़ूर ईसा उन्हें तम्सीलों के ज़रीये तालीम देने लगे: “एक शख़्स ने अंगूरी बाग़ लगाया। और उस के चारों तरफ़ अहाता खड़ा किया, उस में अंगूरों का रस निकालने के लिये एक हौज़ खोदा और निगहबानी के लिये एक बुर्ज भी बनाया। और तब उस ने अंगूरी बाग़ काश्तकारों को ठेके पर दे दिया और ख़ुद परदेस चला गया।” जब अंगूर तोड़ने का मौसम आया तो उस ने एक ख़ादिम को ठेकेदारों के पास अंगूरी बाग़ के फलों से अपना हिस्सा लेने भेजा। लेकिन उन्होंने उसे पकड़ कर, उस को ख़ूब पीटा और ख़ाली हाथ लौटा दिया। उस ने एक और ख़ादिम को भेजा; लेकिन उन्होंने उस की ख़ूब बेइज़्ज़ती की यहां तक के उस का सर भी फोड़ डाला। उन्होंने एक और ख़ादिम को भेजा, जिसे उन्होंने क़त्ल कर डाला। बाद में उस ने कई और मुलाज़िम भेजे; जिन्हें या तो पीटा गया, या क़त्ल कर दिया गया। “लेकिन अभी एक बाक़ी था, यानी उस का अपना बेटा, जिसे वह बहुत ही प्यार करता था। उस ने सब से आख़िर में, उसे ये कहते हुए भेजा, ‘वह मेरे बेटे का तो ज़रूर एहतिराम करेंगे।’ “मगर ठेकेदारों ने उसे देखा तो एक दूसरे से कहने लगे, ‘यही वारिस है। आओ, हम इसे क़त्ल दें, ताके मीरास हमारी हो जाये।’ ” पस उन्होंने उसे अंगूरी बाग़ से बाहर निकाल कर क़त्ल कर डाला। “अब अंगूरी बाग़ का मालिक उन के साथ किस तरह पेश आयेगा? वह आकर उन ठेकेदारों को हलाक करेगा और अंगूरी बाग़ औरों के सुपुर्द कर देगा। क्या तुम ने किताब-ए-मुक़द्दस में नहीं पढ़ा: “ ‘जिस पत्थर को मेमारों ने रद्द कर दिया वोही कोने के सिरे का पत्थर हो गये; ये काम ख़ुदावन्द ने किया है, और हमारी नज़र में यह तअज्जुब अंगेज़ है’?” तब अहम-काहिनों, शरीअत के आलिमों और बुज़ुर्गों ने उन्हें गिरिफ़्तार करने का रास्ता तलाश किया क्यूंके वह जानते थे के हुज़ूर ने उन ही के लिये ये मिसाल कही है। लेकिन वह हुजूम से ख़ौफ़ज़दा थे; तब वह आप को छोड़कर चले गये। फिर उन्होंने बाज़ फ़रीसी और हेरोदेस की जमाअत के कुछ आदमी उन के पास भेजे ताके उन की कोई बात पकड़ सकें। चुनांचे वह आये और हुज़ूर ईसा से कहने लगे, “उस्ताद मुहतरम, हम जानते हैं के आप हमेशा सच बोलते हैं। और किसी की पर्वा नहीं करते के वह कौन हैं; आप किसी के तरफ़दार नहीं बल्के रास्ती से राहे ख़ुदा की तालीम देते हैं। हमें ये बताईये के क्या क़ैसर को महसूल अदा करना रवा है या नहीं? क्या हम क़ैसर को महसूल अदा करें या नहीं?” हुज़ूर ईसा उन की मुनाफ़क़त को समझ गये और फ़रमाया। “मुझे क्यूं आज़माते हो? मुझे एक दीनार लाकर दिखाओ।” वह एक दीनार ले आये, तब हुज़ूर ने पूछा, “इस दीनार पर किस की सूरत और किस का नाम लिख्खा हुआ है?” उन्होंने जवाब दिया, “क़ैसर का।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “जो क़ैसर का है वह क़ैसर को और जो ख़ुदा का है ख़ुदा को अदा करो।” वह ये जवाब सुन कर हैरान रह गये। फिर सदूक़ी जो क़ियामत के मुन्किर हैं, उन के पास आये, और पूछने लगे। “उस्ताद मुहतरम, हमारे लिये हज़रत मूसा का हुक्म है के अगर किसी आदमी का भाई अपनी बीवी की ज़िन्दगी में बेऔलाद मर जाये, तो वह अपने भाई की बेवा से शादी कर ले ताके अपने भाई के लिये नस्ल पैदा कर सके। फ़र्ज़ करो के सात भाई हैं। सब से बड़ा भाई शादी करता है और बेऔलाद मर जाता है। तब दूसरा भाई उस बेवा से शादी कर लेता है, लेकिन वह भी, बेऔलाद मर जाता है। तीसरा भी यही करता है और मर जाता है। दर-हक़ीक़त वह सातों बेऔलाद मर जाते हैं। और आख़िरकार, वह ख़ातून भी मर जाती है। अब बतायें के क़ियामत के दिन वो किस की बीवी होगी क्यूंके वो उन सातों की बीवी रह चुकी थी?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “क्या तुम गुमराह हो गये हो के तुम न तो किताब-ए-मुक़द्दस को ही जानते हो और न ही ख़ुदा की क़ुदरत को? क्यूंके जब क़ियामत में मुर्दे ज़िन्दा होंगे, तो वह शादी ब्याह नहीं करेंगे; बल्के आसमान पर फ़रिश्तों की मानिन्द होंगे। और जहां तक क़ियामत यानी मुर्दों के जी उठने का सवाल है क्या तुम ने हज़रत मूसा की किताब में, जलती हुई झाड़ी के बयान में ये नहीं पढ़ा, ख़ुदा ने हज़रत मूसा से फ़रमाया, ‘मैं हज़रत इब्राहीम का, इज़हाक़, का और याक़ूब का ख़ुदा हूं’? वह मुर्दों का ख़ुदा नहीं, बल्के ज़िन्दों का ख़ुदा है। देखा तुम किस क़दर गुमराही में पड़े हो!” शरीअत के उलमा में से एक आलिम वहां मौजूद था उस ने उन की बहस सुनी थी। और उन्हें हुज़ूर ईसा का जवाब बहुत पसन्द आया था, चुनांचे वह आप के पास आकर उन से पूछने लगा, “सब से बड़ा हुक्म कौन सा है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “पहला ये है: ‘सुन, ऐ इस्राईल: ख़ुदावन्द हमारा ख़ुदा ही वाहिद ख़ुदावन्द है। अपने ख़ुदावन्द ख़ुदा से अपने सारे दिल अपनी सारी जान सारी अक़्ल और सारी ताक़त से महब्बत रखो।’ और दूसरा ये है: ‘तुम अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखो।’ इन से बड़ा और कोई हुक्म नहीं।” शरीअत के आलिम ने उन से कहा, “उस्ताद मुहतरम, बहुत ख़ूब आप सच कहते हैं के ख़ुदा एक है और उन के सिवा और कोई नहीं। और उन से अपने सारे दिल, अपनी सारी अक़्ल और अपनी सारी ताक़त, से महब्बत रखो और अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखना सारी सोख़्तनी क़ुर्बानियों और ज़बीहों से बढ़कर है।” आप ने देखा के उन्होंने बड़ी अक़्लमन्दी से जवाब दिया, और हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “तुम से ख़ुदा की बादशाही दूर नहीं हो।” और इस के बाद किसी ने भी हुज़ूर से और कोई सवाल करने की जुरअत न की। जिस वक़्त हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में तालीम दे रहे थे, उन्होंने पूछा, “शरीअत के उलमा किस तरह कहते हैं के अलमसीह दाऊद का बेटा है? दाऊद ने तो, पाक रूह की हिदायत से, बयान किया है: “ ‘ख़ुदा तआला ने मेरे ख़ुदावन्द से कहा “मेरी दाहिनी तरफ़ बैठो जब तक के मैं तुम्हारे दुश्मनों को तुम्हारे पांव के नीचे न कर दूं।” ’ जब दाऊद ही ख़ुद उन्हें ‘ख़ुदावन्द’ कहते हैं। तो वह किस तरह दाऊद का बेटा हो सकते हैं?” तमाम हाज़िरीन को उन की बातें सुन कर बड़ी ख़ुशी हुई। उन्होंने तालीम देते, वक़्त ये भी फ़रमाया, “शरीअत के आलिमों से ख़बरदार रहना। जो लम्बे-लम्बे चोग़े पहन कर इधर-उधर चलना पसन्द करते हैं और चाहते हैं के लोग बाज़ारों में, उन्हें एहतिरामन सलाम करें। वह यहूदी इबादतगाहों में आला दर्जे की कुर्सियां और ज़ियाफ़तों में सद्र नशीनी चाहते हैं। वह बेवाओं के घरों को हड़प कर लेते हैं और दिखावे के तौर पर लम्बी-लम्बी दुआएं करते हैं। इन लोगों को सब से ज़्यादा सज़ा मिलेगी।” फिर वह बैतुलमुक़द्दस के ख़ज़ाने के सामने बैठे थे। आप देख रहे थे लोग ख़ज़ाना मैं किस तरह नज़राना डालते हैं। कई दौलतमन्द लोग उस में बड़ी-बड़ी रक़मे डाल रहे थे। इतने में एक ग़रीब बेवा वहां आई और उन्होंने सिर्फ़ दो बहुत छोटे तांबे के सिक्‍के डाले जिन की क़ीमत सिर्फ़ एक सैंट थी यानी दो पैसे। हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों को पास बुलाकर उन से फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं, बैतुलमुक़द्दस के ख़ज़ाने में नज़राना डालने वाले लोगों में, इस ग़रीब बेवा ने सब से ज़्यादा डाला है। क्यूंके उन्होंने तो अपनी ज़्यादती में से कुछ रक़म को डाला; मगर इस ने, ग़रीबी के बावुजूद, सब कुछ जो उस के पास था दे दिया यानी के अपनी सारी पूंजी डाल दी।” जब वह बैतुलमुक़द्दस से बाहर आये, तो उन के शागिर्दों में से एक ने उन से कहा, “देखिये, उस्ताद मुहतरम! ये कैसे-कैसे वज़्नी पत्थर और कैसी बुलन्द इमारतें हैं!” हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “तुम इन आलीशान इमारतों को देखते हो? इन का कोई भी पत्थर पर पत्थर बाक़ी न रहेगा; जो नीचे न गिरा दिया जायेगा।” जब हुज़ूर बैतुलमुक़द्दस के सामने कोहे-ज़ैतून पर बैठे थे, तो पतरस, याक़ूब, यूहन्ना और अन्द्रियास ने तन्हाई में उन से पूछा, “हमें बताईये, ये बातें कब वाक़े होंगी? और इन बातों की पूरा होने की क्या अलामत होगी के हर एक बात सच साबित हो?” हुज़ूर ईसा उन से फ़रमाने लगे: “ख़बरदार रहना कोई तुम्हें गुमराह न कर दे। क्यूंके बहुत से लोग मेरे नाम से आयेंगे, और ये दावा करेंगे, ‘मैं ही अलमसीह हूं,’ और यह कह कर बहुत से लोगों को गुमराह कर देंगे। और जब तुम जंगें और जंगों की अफ़्वाहें, सुनो तो घबरा न जाना। इन का वाक़े होना ज़रूरी है, मगर अभी आख़िर न होगा। क्यूंके क़ौम पर क़ौम, और सल्तनत पर सल्तनत हमला करेगी। और जगह-जगह ज़लज़ले आयेंगे, और क़हत पड़ेंगे। आगे आने वाली मुसीबतों का ये सिर्फ़ आग़ाज़ ही होगा। “चुनांचे तुम ख़बरदार रहो। क्यूंके लोग तुम्हें अदालतों के हवाले करेंगे तुम यहूदी इबादतगाहों में कोड़ों से पीटे जाओगे और मेरी वजह से हुक्काम और बादशाहों के सामने हाज़िर किये जाओगे ताके उन्हें मेरी गवाही दे सको। लेकिन इस से पहले ज़रूरी है के सारी दुनिया की तमाम क़ौमों में इन्जील की मुनादी की जाये। जब लोग तुम्हें पकड़ कर अदालत के हवाले करें, तो पहले से फ़िक्र न करना के हम क्या कहेंगे बल्के जो कुछ तुम्हें उस वक़्त बताया जाये वोही कहना, क्यूंके कहने वाले तुम नहीं, बल्के पाक रूह है। “भाई अपने भाई को और बाप अपने बेटे को क़त्ल के लिये हवाले करेगा, और बच्चे अपने वालिदैन के ख़िलाफ़ खड़े होकर उन्हें क़त्ल करवा डालेंगे। और मेरे नाम के सबब से लोग तुम से दुश्मनी रखेंगे, लेकिन जो आख़िर तक बर्दाश्त करेगा वह नजात पायेगा। “जब आप देखते हैं ‘मकरूह उजाड़ और नागवार चीज़ों को’ वहां खड़ा देखो जहां उस का मौजूद होना जायज़ नहीं पढ़ने वाला समझ ले उस वक़्त जो यहूदिया में हों वह पहाड़ों पर चले जायें। जो कोई छत पर हो वह नीचे न उतरे और न ही घर के अन्दर जा कर कुछ बाहर निकालने की कोशिश करे। जो शख़्स खेत में हो, अपना कपड़ा लेने के लिये वापस न जाये। मगर हामिला ख़्वातीन और उन मांओं का जो उन दिनों में दूध पिलाती होंगी, वह दिन कितने ख़ौफ़नाक होंगे! दुआ करो के ये मुसीबत सर्दियों में बरपा न हो, क्यूंके ये ऐसी बड़ी मुसीबत के दिन होंगे, न तो तख़्लीक़ के शुरू से जब ख़ुदा ने दुनिया को बनाया, अब तक न तो ऐसी मुसीबत आई है न फिर कभी आयेगी। “अगर ख़ुदावन्द उन दिनों की तादाद कम न करता तो, कोई जानदार ज़िन्दा न बचाया जाता। मगर उन्होंने अपने बरगुज़ीदा लोगों, की ख़ातिर उन, दिनों को घटा दिया है। उस वक़्त अगर कोई तुम से कहे, ‘देखो,’ अलमसीह ‘यहां है!’ या, ‘देखो,’ वह वहां है! तो यक़ीन न करना। क्यूंके झूटे अलमसीह और झूटे नबी उठ खड़े होंगे और मोजिज़े और अजीब काम दिखायेंगे, ताके अगर मुम्किन हो तो बरगुज़ीदा लोगों को भी गुमराह कर दें। लिहाज़ा ख़बरदार रहो; मैंने पहले ही तुम्हें सब कुछ बता दिया है। “लेकिन उन दिनों की, मुसीबत के बाद, “ ‘सूरज तारीक हो जायेगा और चांद की रोशनी जाती रहेगी; आसमान से सितारे गिरेंगे, और आसमान की क़ुव्वतें हिलाई जायेंगी।’ “उस वक़्त लोग इब्न-ए-आदम को बादलों में अज़ीम क़ुदरत और जलाल के साथ आता देखेंगे। और तब हुज़ूर अपने फ़रिश्तों को भेज कर आसमान की इन्तिहा से ज़मीन की इन्तिहा तक चारों जानिब से, अपने बरगुज़ीदा लोगों को जमा करेंगे। “अन्जीर के दरख़्त से ये सबक़ सीखो: जूंही ही उस की डाली नरम होती है और पत्ते निकलते हैं तो तुम्हें मालूम हो जाता है, के गर्मी नज़दीक है। इसी तरह जब तुम यह बातें होते देखो, तो जान लोगे के वह नज़दीक है, बल्के दरवाज़े ही पर है। मैं तुम से सच कहता हूं के इस नस्ल के ख़त्म होने से पहले ही ये सब कुछ पूरा होगा। आसमान और ज़मीन टल जायेंगी लेकिन मेरी बातें कभी नहीं टलेंगी। “मगर वो दिन और वक़्त कब आयेगा कोई नहीं जानता, न तो आसमान के फ़रिश्ते जानते हैं न बेटा, मगर सिर्फ़ बाप ही जानते हैं। पस तुम बेदार! ख़बरदार रहो! क्यूंके तुम नहीं जानते के वह वक़्त कब आयेगा। ये उस आदमी की तरह है जो परदेस जाता है: और चलते वक़्त अपना घर अपने ख़ादिमो के इख़्तियार में दे कर, हर एक को उस की ज़िम्मेदारी सुपुर्द कर के, वह अपने चौकीदार को हुक्म देता है के वह ख़ूब चौकस रहे। “पस जागते रहो क्यूंके तुम नहीं जानते के घर का मालिक कब आयेगा शाम को, या आधी रात को, या जब मुर्ग़ बांग देता है, या सुबह को। कहीं ऐसा न हो, के वह अचानक आ जाये और तुम्हें सोता पाये। मैं जो कुछ तुम से कहता हूं, वोही सब से कहता हूं: ‘जागते रहो!’ ” दो दिन के बाद ईद-ए-फ़सह और ईद-ए-फ़तीर होने वाली थी, और अहम-काहिन और शरीअत के आलिम मौक़ा ढूंड रहे थे के हुज़ूर को किस तरह फ़रेब से पकड़ लें और क़त्ल कर दें। उन का कहना था, “मगर ईद के दौरान नहीं, कहीं ऐसा न हो लोगों में हंगामा बरपा हो जाये।” जब वह बैतअन्नियाह में, शमऊन कोढ़ी के घर में बैठे हुए खाना खा रहे थे तो एक ख़ातून संगमरमर के इत्रदान में, जटामासी का ख़ालिस, और क़ीमती इत्र ले कर आई और इत्रदान को तोड़ कर सारा इत्र हुज़ूर ईसा के सर पर उंडेल दिया। मगर बाज़ में से कुछ लोग एक दूसरे से बरहम होकर दिल ही दिल में कहने लगे, “इत्र को इस तरह ज़ाए करने की क्या ज़रूरत थी? ये इत्र तीन सौ दीनार से ज़्यादा की क़ीमत में फ़रोख़त किया जा सकता था और रक़म ग़रीबों में तक़्सीम की जा सकती थी।” पस वह उस ख़ातून को बहुत बुरा भला कहने लगे। मगर हुज़ूर ईसा ने कहा, “इसे छोड़ दो, इसे क्यूं परेशान कर रहे हो? उन्होंने मेरे साथ भलाई की है। ग़रीब ग़ुरबा तो हमेशा तुम्हारे साथ हैं, तुम जब चाहो उन के साथ नेकी कर सकते हो। लेकिन मैं यहां हमेशा तुम्हारे पास न रहूंगा। इस से जो कुछ हो सकता था इस ने किया। इस ने पहले ही से मेरी तद्फ़ीन के लिये मेरे जिस्म पर ख़ुश्बू डाली और इत्र से मसह कर दिया है। मैं तुम से सच कहता हूं, सारी दुनिया में जहां कहीं इन्जीलों की मुनादी की जायेगी, वहां उस की यादगारी में उस के इस काम का ज़िक्र भी, किया जायेगा।” फिर यहूदाह इस्करियोती ने, जो बारह शागिर्दों में से एक था, अहम-काहिनों के पास जा कर बताया के वह हुज़ूर ईसा को उन के हवाले कर देगा। वह ये बात सुन कर बहुत ख़ुश हुए और उसे कुछ रक़म देने का वादा किया। इस के बाद वह हुज़ूर को पकड़वाने का मुनासिब मौक़ा ढूंडने लगा। ईद-ए-फ़तीर के पहले दिन जब ईद-ए-फ़सह के मौक़े पर भेड़ की क़ुर्बानी किये जाते थे, हुज़ूर ईसा के शागिर्दों ने उन से पूछा, “हमें बताईये आप ईद-ए-फ़सह का खाना कहां खाना चाहते हैं ताके हम जा कर तय्यारी करें?” हुज़ूर ने शागिर्दों में से दो को भेजा और उन से कहा, “शहर में जाओ, वहां तुम्हें एक आदमी मिलेगा जो पानी का घड़ा ले जा रहा होगा। उस के पीछे जाना। और जिस घर में वह दाख़िल हो, उस के मालिक से कहना, ‘उस्ताद ने पूछा है: मेरे लिये मेहमान-ख़ाना कहां है, जहां में अपने शागिर्दों के साथ ईद-ए-फ़सह का खाना खा सकूं?’ वह ख़ुद तुम्हें एक बड़ा सा कमरा ऊपर ले जा कर दिखायेगा, जो हर तरह से आरास्ता और तय्यार होगा। वहीं हमारे लिये तय्यारी करना।” पस शागिर्द रवाना हो गये, और शहर में आकर सब कुछ वैसा ही पाया जैसा उन्होंने उन्हें बताया था। और उन्होंने ईद-ए-फ़सह का खाना तय्यार किया। जब शाम हुई, तो हुज़ूर ईसा अपने बारह शागिर्दों के साथ वहां पहुंच गये। खाना खाते वक़्त हुज़ूर ईसा ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं के तुम में से, एक जो मेरे साथ खाना खा रहा है मुझे पकड़वायेगा।” शागिर्दों को बड़ा रंज पहुंचा, और वह बारी-बारी उन से पूछने लगे, “क्या मैं तो नहीं हूं?” आप ने उन्हें जवाब दिया, “वह बारह में से एक है, और मेरे साथ प्याले में रोटी डुबोता है। इब्न-ए-आदम तो जैसा उस के हक़ में लिख्खा हुआ है। लेकिन उस शख़्स पर अफ़सोस जो इब्न-ए-आदम को पकड़वाता है! उस के लिये बेहतर था के वह पैदा ही न होता।” जब वह खा ही रहे थे, हुज़ूर ईसा ने रोटी ली, और ख़ुदा का शुक्र कर के, उस के टुकड़े किये और शागिर्दों को ये कह कर दिया, “इसे लो; ये मेरा बदन है।” फिर आप ने प्याला लिया, और ख़ुदा का शुक्र कर के, शागिर्दों को दिया, और उन सब ने उस में से पिया। हुज़ूर ने उन से कहा, “ये मेरा अह्द का वह ख़ून है, जो बहुतेरों के लिये बहाया जाता है। मैं तुम से सच कहता हूं, मैं अंगूर का शीरा तब तक नहीं पियूंगा जब तक के ख़ुदा की बादशाही में नया न पियूं।” तब उन्होंने एक नग़मा गाया, और वहां से कोहे-ज़ैतून पर चले गये। हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम सब ठोकर खाओगे, क्यूंके यूं लिख्खा है: “ ‘मैं चरवाहे को मारूंगा, और भेड़ें मुन्तशिर हो जायेंगी।’ मगर मैं अपने जी उठने के बाद, तुम से पहले सूबे गलील को जाऊंगा।” पतरस ने उन से कहा, “ख़्वाह सब ठोकर खायें, मैं नहीं खाऊंगा।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं तुम से सच कहता हूं, आज इसी, रात इस से पहले के मुर्ग़ दो दफ़ा बांग दे तुम तीन दफ़ा मेरा इन्कार करोगे।” लेकिन पतरस ने बड़े जोश में आकर फ़रमाया, “अगर आप के साथ मुझे मरना भी पड़े, तब भी आप का इन्कार न करूंगा।” और दीगर ने भी यही दोहराया। फिर आप गतसिमनी नामी एक जगह पहुंचे, और हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “जब तक मैं दुआ करता हूं तुम यहीं बैठे रहना।” और ख़ुद पतरस, याक़ूब और यूहन्ना को साथ ले गये, और वह शदीद ग़म और परेशानी के आलम में थे। और उन से फ़रमाया, “ग़म की शिद्दत से मेरी जान निकली जा रही है, तुम यहां ठहरो और जागते रहो।” फिर ज़रा आगे जा कर, वह ज़मीन पर सज्दे में गिरकर दुआ करने लगे के अगर मुम्किन हो तो ये वक़्त मुझ पर से टल जाये। दुआ में आप ने कहा, “ऐ अब्बा, ऐ बाप, आप के लिये सब कुछ मुम्किन है। हो सके तो इस प्याला को मेरे सामने से हटा लीजिये, तो भी मेरी मर्ज़ी नहीं बल्के आप की मर्ज़ी पूरी हो।” फिर वह शागिर्दों के पास तशरीफ़ लाये और उन्हें सोते पाया। आप ने पतरस से कहा, “शमऊन, तुम सो रहे हो? क्या तुम्हारे लिये एक घंटा भी जागे रहना मुम्किन न था? जागते और दुआ करते रहो ताके आज़माइश में न पड़ो। रूह तो आमादा है, मगर जिस्म कमज़ोर है।” वह फिर बाग़ के अन्दर चले गये और उन्होंने वोही दुआ की जो पहले की थी। और जब आप वापस आये तो शागिर्दों को फिर से सोते पाया क्यूंके उन की आंखें नींद से भरी थीं। और वह जानते न थे के उन्हें क्या जवाब दूं। जब वह तीसरी दफ़ा उन के पास वापस आया, तो उन से कहने लगा, “तुम अभी तक राहत की नींद सो रहे हो? बस करो! वक़्त आ पहुंचा है। देखो, इब्न-ए-आदम गुनहगारों के हवाले किया जाये। उठो! आओ चलें! देखो मेरा पकड़वाने वाला नज़दीक आ पहुंचा है!” वह अभी ये कह ही रहे थे, के यहूदाह, जो बारह शागिर्दों में से था, वहां आ पहुंचा उस के हमराह एक बड़ा हुजूम था जो तलवारें और लाठियां लिये हुए था, और जिन्हें अहम-काहिनों, शरीअत के आलिमों और बुज़ुर्गों ने भेजा था। यहूदाह यानी पकड़वाने वाले ने उन्हें ये निशान दिया था: “जिस का मैं बोसा लूं वोही हुज़ूर ईसा हैं; तुम उन्हें पकड़ लेना और हिफ़ाज़त से सिपाहियों की निगरानी में ले जाना।” वहां आते ही वह हुज़ूर ईसा के नज़दीक गया और कहा, “ऐ रब्बी!” और उन के बोसे लेने लगा। उन्होंने हुज़ूर ईसा को पकड़ कर अपने क़ब्ज़े में ले लिया। जो लोग पास खड़े थे उन में से एक ने अपनी तलवार खींची और आला काहिन के ख़ादिम पर हमला कर के, उस का कान उड़ा दिया। हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “क्या मैं बग़ावत करने वाला रहनुमा हूं, तुम मुझे तलवारों और लाठियां ले कर पकड़ने आये हो? मैं तो हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस मैं तुम्हारे पास ही, तालीम दिया करता था, और तुम ने मुझे नहीं पकड़ा। लेकिन ये इसलिये हुआ के किताब-ए-मुक़द्दस की बातें पूरी हो जायें।” इस दौरान सारे शागिर्द उन्हें छोड़कर भाग गये। लेकिन एक हुज़ूर ईसा का पैरोकार नौजवान, जो सिर्फ़ सूती चादर ओढ़े हुए था, आप के पीछे आ रहा था। जब लोगों ने उसे पकड़ा तो वह अपनी चादर छोड़कर नंगा, ही भाग निकला। तब वह हुज़ूर ईसा को आला काहिन के पास ले गये, वहां सब काहिन, यहूदी बुज़ुर्ग और शरीअत के आलिम जमा थे। और पतरस भी दूर से, हुज़ूर ईसा का पीछा करते हुए आला काहिन की हवेली के अन्दर सहन तक जा पहुंचे। वहां वह पहरेदारों के साथ बैठ कर आग तापने लगे। अहम-काहिन और अदालते-आलिया के सब अरकान किसी ऐसी गवाही की तलाश में थे जिस की बिना पर अहम-काहिन हुज़ूर ईसा को क़त्ल करवा सकें, मगर कुछ न पा सके। और जिन्होंने झूटी गवाहियों की तस्दीक़ की, इन के बयान भी यकसां न निकले। बाज़ आदमियों ने खड़े होकर उन के ख़िलाफ़ ये झूटी गवाही दी: “हम ने इन्हें ये कहते सुन है के, ‘मैं इस बैतुलमुक़द्दस को जो हाथ का बन हुआ है, तबाह कर दूंगा और तीन दिन में दूसरा खड़ा कर दूंगा जो हाथ का बना हुआ नहीं है।’ ” मगर इस दफ़ा भी उन की गवाही यकसां न थी। तब आला काहिन उन के सामने खड़े होकर हुज़ूर ईसा से पूछा, “क्या तेरे पास कोई जवाब नहीं? ये तेरे ख़िलाफ़ क्या गवाही दे रहे हैं?” लेकिन वह ख़ामोश रहे और कोई जवाब न दिया। आला काहिन ने एक बार फिर पूछा, “क्या आप ही अलमसीह हो, आलीक़द्र के बेटे?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया हां, “मैं हूं, और तुम इब्न-ए-आदम को क़ादिर-ए-मुतलक़ की दाहिनी तरफ़ बैठा और आसमान के बादलों पर आता देखोगे।” तब आला काहिन ने अपने कपड़े फाड़ डाले और बोला, “अब हमें गवाहों की क्या ज़रूरत है? तुम ने ये कुफ़्र सुना। तुम्हारी क्या राय है?” उन सब का फ़ैसला ये था के इन्हें सज़ा-ए-मौत दी जाये। उन में से बाज़ हुज़ूर ईसा पर थूकने लगे; और आप की आंखों पर पट्टी बांध कर, आप के मुक्के मार कर पूछने लगे, अगर तू नबी है तो, “नुबुव्वत कर!” किस ने तुझे मारा और सिपाहियों ने आप को तमांचे मार कर अपने क़ब्ज़े में ले लिया। अभी पतरस नीचे सहन ही में थे, आला काहिन की एक ख़ादिमा वहां क़रीब आ गई। उस ने पतरस को आग तापते देखकर उन पर नज़र डाली, और कहने लगी। “तुम भी ईसा नासरी, के साथ थे।” मगर पतरस ने इन्कार किया। “मैं कुछ नहीं जानता और समझता आप क्या कह रही हो,” और वह, बाहर देवढ़ी में चला गया और मुर्ग़ ने बांग दी। जब उस ख़ादिमा ने पतरस को वहां देखा, तो उन से जो पास खड़े थे एक बार फिर कहा, “ये आदमी उन ही में से है।” पतरस ने फिर इन्कार किया। थोड़ी देर बाद वह लोग जो पास खड़े थे पतरस से फिर कहने लगे, “यक़ीनन तू उन ही में से है, क्यूंके तू भी तो गलीली है।” तब पतरस बोले मैं क़सम खाकर कहता हूं, जिस शख़्स की तुम बात कर रहे हो, “मैं उसे बिलकुल नहीं जानता और अगर मैं झूटा हूं तो मुझ पर लानत हो।” ऐन उसी वक़्त मुर्ग़ ने दूसरी दफ़ा बांग दी। तब पतरस को याद आया के; हुज़ूर ईसा ने उन से कहा था: “मुर्ग़ के दो बार बांग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।” और इस बात पर ग़ौर कर के पतरस रो पड़े। सुबह होते ही, अहम-काहिनों ने यहूदी बुज़ुर्गों, शरीअत के आलिमों और अदालते-आलिया के बाक़ी अराकीन से मिल कर मशवरा किया, और फ़ैसला कर के हुज़ूर ईसा, को बंधवाया और ले जा कर पीलातुस के हवाले कर दिया। पीलातुस ने आप से पूछा, “क्या आप यहूदियों के बादशाह हैं?” आप ने जवाब दिया, “तुम ख़ुद ही कह रहे हो।” अहम-काहिन आप पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाने लगे। लिहाज़ा पीलातुस ने आप से दुबारा पूछा, “आप ने कोई जवाब नहीं दिया? देखिये ये लोग आप पर कितने इल्ज़ाम पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं।” फिर भी हुज़ूर ईसा ने कोई जवाब नहीं दिया, और इस पर पीलातुस को बड़ा तअज्जुब हुआ। और यह दस्तूर था के वह ईद के मौक़े पर एक ऐसे क़ैदी को रिहा कर देता था जिस की रिहाई की लोग मिन्नत करते थे। बरअब्बा नामी एक आदमी उन बाग़ीयों के साथ क़ैद में था जिन्हें ख़ून के इल्ज़ाम में क़ैद किया गया था। अवाम एक हुजूम की शक्ल में पीलातुस के सामने जमा हो गये और मिन्नत की के वह अपने दस्तूर के मुताबिक़ अमल करे। पीलातुस ने उन से पूछा, “क्या तुम चाहते हो के मैं तुम्हारे लिये यहूदियों के बादशाह को छोड़ दूं?” क्यूंके पीलातुस को बख़ूबी इल्म था के अहम-काहिनों ने महज़ हसद की बिना पर हुज़ूर ईसा को उस के हवाले किया है। ताहम अहम-काहिनों ने हुजूम को उकसाया के वह पीलातुस से मिन्नत करें के ईसा की जगह बरअब्बा को रिहा कर दिया जाये। पीलातुस ने लोगों से दूसरी मर्तबा पूछा, “फिर मैं ईसा के साथ क्या करूं जिसे तुम यहूदियों का बादशाह कहते हो।” वह चीख़े, “इसे मस्लूब करो।” आख़िर क्यूं? पीलातुस ने उन से पूछा, “ईसा ने कौन सा जुर्म किया है?” लेकिन सब लोग मज़ीद तैश में चिल्ला कर बोले, “इसे मस्लूब करो!” पीलातुस ने हुजूम को ख़ुश करने की ग़रज़ से उन की ख़ातिर बरअब्बा को रिहा कर दिया। और हुज़ूर ईसा को कोड़े लगवा कर, उन के हवाले कर दिया ताके हुज़ूर को मस्लूब किया जाये। तब सिपाही हुज़ूर ईसा को प्राइतोरियम यानी शाही क़िले के अन्दरूनी सहन में ले गये और सारी पलटन को वहां जमा किया। तब उन्होंने हुज़ूर ईसा को एक अरग़वानी चोग़ा पहनाया, और कांटों का ताज बना कर उन के सर पर रख दिया। आप को सलाम कर के कहने लगे, “ऐ यहूदियों के बादशाह आदाब!” वह बार-बार हुज़ूर के सर पर सरकंडा मारते आप पर थूकते थे। इस के साथ ही घुटने टेक-टेक कर आप को सज्दा करते थे। जब सिपाही हुज़ूर की हंसी उड़ा चुके, तो उन्होंने वह अरग़वानी चोग़ा उतार कर आप को उन के कपड़े पहन दिये और सलीब देने के वास्ते बाहर ले जाने लगे। रास्ते में उन्हें शमऊन, कुरेनी नामी आदमी मिला जो सिकन्दर और रूफ़ुस का बाप था और गांव से यरूशलेम की तरफ़ आ रहा था, उन्होंने ज़बरदस्ती पकड़ लिया ताके वह हुज़ूर ईसा की सलीब उठाये। वो सब हुज़ूर ईसा को गुलगुता नामी जगह पर ले कर आये (जिस के मानी “खोपड़ी की जगह है”)। वहां उन्होंने हुज़ूर को ऐसा मुर मिला अंगूरी शीरा पिलाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उसे पीने से इन्कार कर दिया। और जब उन्होंने हुज़ूर ईसा को मस्लूब कर दिया। तो उन्होंने आप की पोशाक तक़्सीम करने के लिये क़ुरा डाला के आप के कपड़े किस को मिलें। जब उन्होंने हुज़ूर को सलीब पर चढ़ाया था तो सुबह के नौ बज रहे थे। और उन्होंने आप के सर के ऊपर इल्ज़ाम की एक तख़्ती लगा दी जिस पर लिख्खा था: यहूदियों का बादशाह। उन्होंने दो डाकूओं को भी हुज़ूर ईसा के साथ मस्लूब किया, एक को आप के दाईं तरफ़ और दूसरे को बाईं तरफ़। इस तरह किताब-ए-मुक़द्दस का ये नविश्ता पूरा हुआ के वह बदकारों के साथ शुमार किया गया। वहां से गुज़रने वाले सब लोग सर हिला-हिला कर हुज़ूर को लान-तान करते और कहते थे, “अरे बैतुलमुक़द्दस को ढा कर तीन दिन में इसे फिर से बनाने वाले, अब सलीब से नीचे उतर आ और अपने आप को बचा!” इसी तरह अहम-काहिन और शरीअत के आलिम मिल कर आपस में हुज़ूर ईसा की हंसी उड़ाते हुए कहते थे। “इस ने औरों को बचाया, लेकिन अपने आप को नहीं बचा सकता! यह अलमसीह, इस्राईल का बादशाह, अब भी सलीब पर से नीचे उतर आये, ताके ये देखकर हम ईमान ला सकें।” दो डाकू भी जो हुज़ूर ईसा के साथ मस्लूब हुए थे, वह भी हुज़ूर को लान-तान कर रहे थे। बारह बजे, से ले कर तीन बजे तक उस सारे इलाक़े में अन्धेरा छाया रहा था। तीन बजे हुज़ूर ईसा बड़ी ऊंची आवाज़ से चिल्लाये, “एलोई, एलोई, लमा शबक़्तनी?” (जिस का तरजुमा ये है, “ऐ मेरे ख़ुदा! ऐ मेरे ख़ुदा! आप ने मुझे क्यूं छोड़ दिया?”)। जो लोग पास खड़े थे उन में से बाज़ ने ये सुना तो कहने लगे, “ये तो एलियाह को पुकारता है।” ये सुन कर एक शख़्स दौड़ा और उस ने इस्फ़ंज को सिरके में डुबोया और उसे सरकंडे पर रखकर हुज़ूर ईसा को चुसाया। और कहा, “अब इसे तन्हा छोड़ दो। आओ देखें के एलियाह इसे सलीब से नीचे उतारने आते हैं या नहीं?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने बड़े ज़ोर से चिल्ला कर अपनी जान दे दी। और बैतुलमुक़द्दस का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया। एक फ़ौजी अफ़सर, जो हुज़ूर ईसा के सामने खड़ा था, ये देखकर के आप ने किस तरह जान दी है, वह पुकार उठा, “यक़ीनन ये शख़्स ख़ुदा का बेटा था!” कई औरतें दूर से ये सब कुछ देख रही थीं। उन में मरियम मगदलीनी, छोटे याक़ूब और योसेस की मां, मरियम और सलोमी थीं। जब हुज़ूर सूबे गलील में थे तो ये औरतें आप की पैरोकार थीं और उन की ख़िदमत क्या करती थीं और इस के अलावा कई ख़्वातीन आप के साथ यरूशलेम से आई थीं। चूंके शाम हो गई थी (और वह सबत से पहला यानी तय्यारी का दिन था)। अरिमतियाह का शहरी यूसुफ़ नामी एक शख़्स आया जो अदालते-आलिया का एक मुअज़्ज़ज़ रुक्न था और ख़ुद भी ख़ुदा की बादशाही का मुन्तज़िर था। वह बड़ी दिलेरी से पीलातुस के पास गया और हुज़ूर ईसा की लाश मांगने लगा। जब पीलातुस को मालूम हुआ के हुज़ूर मर चुके हैं तो उसे तअज्जुब हुआ। और उस ने अपने फ़ौजी कप्तान को बुलाकर, पूछा के हुज़ूर ईसा को मरे हुए कितनी देर हो चुकी है। जब पीलातुस को अपने फ़ौजी कप्तान से हक़ीक़त का पता चला तो उस ने हुक्म दिया के हुज़ूर की लाश यूसुफ़ को दे दी जाये। यूसुफ़ ने एक महीन सूती चादर ख़रीदी, और हुज़ूर ईसा की लाश को उतार कर उसे चादर से लपेट दिया, और ले जा कर एक क़ब्र में रख दिया जो चट्टान में, खोदी गई थी और उस क़ब्र के दरवाज़े पर एक बड़ा सा पत्थर लुढ़का दिया। मरियम मगदलीनी और योसेस की मां, मरियम दोनों देख रही थीं के हुज़ूर ईसा की लाश को कहां रख्खा गया है। जब सबत का दिन गुज़र गया, तो मरियम मगदलीनी, याक़ूब की मां मरियम और सलोमी ख़ुश्बूदार चीज़ें ख़रीद कर लाईं ताके उन्हें हुज़ूर ईसा की लाश पर मलें। और हफ़्ते के पहले दिन, सुब्ह-सवेरे सूरज के निकलते ही, वह क़ब्र पर आईं। वह आपस में कह रही थीं: “क़ब्र के दरवाज़े पर से हमारे लिये पत्थर कौन हटायेगा?” लेकिन जब उन्होंने ऊपर निगाह की, तो देखा के वह भारी पत्थर, पहले ही से लुढ़का हुआ था। जब वह ग़ारनुमा क़ब्र के अन्दर गईं तो, उन्होंने एक जवान आदमी को सफ़ैद चोग़ा पहने दाएं तरफ़ बैठे देखा, और वह घबरा गईं। लेकिन उस आदमी ने उन से कहा, “तअज्जुब न करो, तुम ईसा नासरी, को जो मस्लूब हुए थे ढूंडती हो। वह जी उठे हैं! वह यहां नहीं हैं। देखो ये वह जगह है जहां उन्होंने ईसा को रखा था। पस तुम जाओ, और उन के शागिर्दों और पतरस को ख़बर कर दो, ‘वह तुम से पहले सूबे गलील को पहुंच रहे हैं। तुम उन्हें वहीं देखोगे, जैसा के उन्होंने तुम से कहा था।’ ” वह औरतें हैरत-ज़दा और कांपती हुई, हुज़ूर ईसा की क़ब्र से निकल कर भागीं और इस क़दर ख़ौफ़ज़दा थीं के पतरस और किसी से कुछ भी कहने की हिम्मत न कर सकीं। हफ़्ते के पहले दिन सुबह के वक़्त, हुज़ूर ईसा अपने जी उठने के बाद सब से पहले मरियम मगदलीनी पर, ज़ाहिर हुए, जिस में से आप ने सात बदरूहें निकाली थीं। उस ने जा कर हुज़ूर ईसा के साथियों को जो ग़म के बाइस मलूल थे और रो रहे थे, उन को ख़बर दी। लेकिन उन्होंने ये सुन कर के आप जी उठे हैं और मरियम ने आप को देखा है यक़ीन न किया। इस के बाद हुज़ूर ईसा एक दूसरी सूरत में उन में से दो आदमियों पर उस वक़्त ज़ाहिर हुए जब वह अपने गांव की तरफ़ चले जा रहे थे। उन्होंने वापस जा कर बाक़ी लोगों को ख़बर दी; लेकिन उन्होंने उन का भी यक़ीन न किया। आख़िर में वह ग्यारह शागिर्दों पर जब वह दस्तरख़्वान पर बैठे खाना खा रहे थे; उन पर ज़ाहिर हुए और आप ने उन की बेएतक़ादी और सख़्त-दिली पर मलामत की क्यूंके उन्होंने उन का भी यक़ीन नहीं किया था जिन्होंने आप के जी उठने के बाद आप को देखा। फिर उन्होंने उन से कहा, “तमाम दुनिया में जा कर तमाम मख़्लूक़ को इन्जील की मुनादी करो। जो भी ईमान लाये और पाक-ग़ुस्ल ले वह नजात पायेगा, लेकिन जो ईमान न लाये वह मुजरिम क़रार दिया जायेगा। और ईमान लाने वालों के दरमियान ये मोजिज़े होंगे के वह मेरे नाम से बदरूहों को निकालेंगे; नई-नई ज़बानें बोलेंगे वह सांपों को उठा लेंगे; अगर कोई मुहलिक चीज़ पी लेंगे, तो उन्हें कुछ नुक़्सान न पहुंचेगा; वह बीमारों पर हाथ रखेंगे, और बीमार शिफ़ा पायेंगे।” जब ख़ुदावन्द ईसा उन से कलाम कर चुके, आप आसमान में ऊपर उठा लिये गये। और आप ख़ुदा के दाहिनी तरफ़ जा बैठे। तब शागिर्द बाहर निकले और हर जगह इन्जील की मुनादी की, और ख़ुदावन्द उन के साथ मिल कर काम करते रहे और कलाम को उन मोजिज़ों के ज़रीये जो साथ-साथ होते थे तस्दीक़ करते रहे। चूंके बहुत से लोगों ने उन बातों को जो हमारे दरमियान वाक़े हुई हैं उन्हें सिल्सिलेवार बयान करने की कोशिश की है, ख़ुसूसन उन बातों को हम तक उन लोगों ने पहुंचाया जो शुरू से ही उन के चश्मदीद गवाह और कलाम के ख़ादिम थे। इसलिये ऐ मुहतरम थियुफ़िलुस, मैंने ख़ुद शुरू से हर बात की ख़ूब तहक़ीक़ की, और मुनासिब समझा के सब बातों को तरतीबवार तहरीर कर के आप की ख़िदमत में पेश करूं, ताके आप को मालूम हो जाये के जिन बातों की आप ने तालीम पाई है वह किस क़दर पुख़्ता हैं। यहूदिया सूबे के बादशाह हेरोदेस के ज़माने में एक काहिन था जिस का नाम ज़करियाह था। वह अबिय्याह के फ़िर्क़े कहानत से तअल्लुक़ रखता था; उस की बीवी, ऐलीशाबैत भी हज़रत हारून के ख़ानदान से थी। वह दोनों ख़ुदा की नज़र में रास्तबाज़ थे और ख़ुदावन्द के सब अहकाम और क़वानीन पर पूरी तरह बेऐब अमल करते थे। लेकिन उन के औलाद न थी क्यूंके ऐलीशाबैत बांझ थीं और दोनों उम्र रसीदा थे। एक बार ज़करियाह के फ़िर्क़े की बारी पर जब वह ख़ुदा के हुज़ूर कहानत के फ़राइज़ अन्जाम दे रहे थे। तो कहानत के दस्तूर के मुताबिक़ ज़करियाह के नाम का क़ुरा निकला के वह ख़ुदावन्द के बैतुलमुक़द्दस में जा कर लोबान जलायें। जब लोबान जलाने का वक़्त आया और इबादत करने वाले बाहर जमा होकर दुआ कर रहे थे। तो ख़ुदावन्द का एक फ़रिश्ता ज़करियाह को लोबान के मज़्बह की दाहिनी तरफ़ खड़ा हुआ दिखाई दिया। ज़करियाह उसे देखकर, घबरा गये और उन पर दहश्त तारी हो गई। लेकिन फ़रिश्ते ने उन से कहा: “डरो मत, ज़करियाह; तुम्हारी दुआ सुन ली गई है। तुम्हारी बीवी ऐलीशाबैत से तुम्हारे लिये एक बेटा पैदा होगा और तुम उस का नाम यहया रखना। वह तुम्हारे लिये ख़ुशी और शादमानी का बाइस होगा और बहुत से लोग उस की विलादत से ख़ुश होंगे क्यूंके वह ख़ुदावन्द की नज़र में अज़ीम ठहरेगा। वह अंगूरी शीरे और शराब से हमेशा दूर रहेगा और अपनी मां के रहम ही से पाक रूह से मामूर होगा। वह बनी इस्राईल में से बहुत से अफ़राद को ख़ुदावन्द की तरफ़ जो उन का ख़ुदा है वापस ले आयेगा। और वह एलियाह की रूह और क़ुव्वत में ख़ुदावन्द के आगे-आगे चलेगा ताके वालिदैन के दिल उन की औलाद की तरफ़ और नाफ़रमानों को रास्तबाज़ों की दानाई की तरफ़ फेर दे और ख़ुदावन्द के लिये एक मुस्तइद क़ौम तय्यार कर दे।” ज़करियाह ने फ़रिश्ते से पूछा, “मैं ये कैसे यक़ीन करूं? मैं तो बूढ़ा हूं और मेरी बीवी भी उम्र रसीदा है।” फ़रिश्ते ने जवाब दिया, “मैं जिब्राईल हूं। मैं ख़ुदा के हुज़ूर खड़ा रहता हूं, और मुझे इसलिये भेजा गया है के मैं तुझ से कलाम करूं और तुझे ये ख़ुशख़बरी सुनाऊं। और सुनो! जब तक ये बातें पूरी नहीं हो जातीं तुम्हारी ज़बान बन्द रहेगी और तुम बोल न सकोगे, क्यूंके तुम ने मेरी इन बातों का, यक़ीन न किया जो अपने वक़्त पर पूरी होंगी।” उस दौरान, लोग ज़करियाह का इन्तिज़ार कर रहे थे और हैरान थे के उन्हें बैतुलमुक़द्दस में इतनी देर क्यूं हो रही है। जब वह बाहर आये, तो उन से बोल न सके। वह समझ गये के ज़करियाह ने बैतुलमुक़द्दस में कोई रोया देखी है, क्यूंके वह उन से इशारों में बातें करते थे लेकिन बोल नहीं सकते थे। जब ज़करियाह की ख़िदमत के दिन पूरे हो गये, तो वह घर चले गये। इस के बाद ज़करियाह की बीवी ऐलीशाबैत हामिला हो गईं और उन्होंने ख़ुद को पांच महीनों तक छुपाये रख्खा। ऐलीशाबैत ने कहा, “ख़ुदावन्द ने मेरे लिये ये काम किया है, ख़ुदावन्द ने इन दिनों में मुझ पर नज़रें करम की और मुझे लोगों में रुसवा होने से बचा लिया।” ऐलीशाबैत के हमल के छटे महीने में, ख़ुदा ने जिब्राईल फ़रिश्ते को गलील सूबे के एक शहर नासरत में, एक कुंवारी के पास भेजा जिन की मंगनी हज़रत यूसुफ़ नाम के एक मर्द से हो चुकी थी, जो हज़रत दाऊद की नस्ल से थे। उस कुंवारी का नाम हज़रत मरियम था। फ़रिश्ते ने उन के पास आकर कहा, “सलाम, आप पर बड़ा फ़ज़ल हुआ है! ख़ुदावन्द आप के साथ है।” हज़रत मरियम, फ़रिश्ते का कलाम सुन कर बहुत घबरा गईं और सोचने लगीं के ये कैसा सलाम है। लेकिन फ़रिश्ते ने उन से कहा, “ऐ मरियम! ख़ौफ़ न कर; आप पर ख़ुदा का फ़ज़ल हुआ है। आप हामिला होंगी और आप को एक बेटा पैदा होगा। आप उन का नाम ईसा रखना। वह अज़ीम होंगे और ख़ुदा तआला का बेटा कहलायेंगे। ख़ुदावन्द ख़ुदा उन के बाप हज़रत दाऊद का तख़्त उन्हें देगा, और वह हज़रत याक़ूब के घराने पर हमेशा तक बादशाही करेंगे; उन की बादशाही कभी ख़त्म न होगी।” हज़रत मरियम ने फ़रिश्ते से पूछा, “ये किस तरह होगा, मैं तो अभी कुंवारी ही हूं?” फ़रिश्ते ने जवाब दिया, “पाक रूह आप पर नाज़िल होगा, और ख़ुदा तआला की क़ुदरत आप पर साया डालेगी। इसलिये वह क़ुददूस जो पैदा होने वाले हैं, ख़ुदा का बेटा कहलायेंगे। और देख, आप की रिश्तेदार, ऐलीशाबैत, के बुढ़ापे में भी बेटा होने वाला है, जिन्हें लोग बांझ कहते थे वह छः माह से हामिला हैं। क्यूंके ख़ुदा का कोई भी कलाम कभी नाकाम नहीं होता।” हज़रत मरियम ने जवाब दिया, “मैं तो ख़ुदावन्द की बन्दी हूं, जैसा आप ने मुझ से कहा है वैसा ही हो।” तब फ़रिश्ता उन के पास से चला गया। उन ही दिनों में हज़रत मरियम तय्यार होकर फ़ौरन यहूदिया के पहाड़ी इलाक़े के एक शहर को गईं, और हज़रत ज़करियाह के घर में दाख़िल कर ऐलीशाबैत को सलाम किया। जब ऐलीशाबैत ने हज़रत मरियम का सलाम सुन तो, बच्चा उन के रहम में उछल पड़ा और ऐलीशाबैत पाक रूह से भर गईं। और बुलन्द आवाज़ से पुकार कर कहने लगीं: “आप औरतों में मुबारक हैं, और मुबारक है आप का पैदा होने वाला बच्चा! लेकिन मुझ पर ये फ़ज़ल किस लिये हुआ, के मेरे ख़ुदावन्द की मां मेरे पास आई? क्यूंके जूंही आप के सलाम की आवाज़ मेरे कानों में पहुंची, बच्चा ख़ुशी के मारे मेरे पेट में उछल पड़ा। मुबारक हो तुम जो ईमान लाईं के ख़ुदावन्द ने जो कुछ आप से कहा वह पूरा होकर रहेगा!” और मरियम ने कहा: “मेरी जान ख़ुदावन्द की ताज़ीम करती है। और मेरी रूह मेरे मुनज्जी ख़ुदा से निहायत ख़ुश है, क्यूंके ख़ुदा ने अपनी ख़ादिमा की पस्त हाली पर नज़र की है। अब से ले कर हर ज़माने के लोग मुझे मुबारक कहेंगे, क्यूंके ख़ुदा-ए-क़ादिर ने मेरे लिये बड़े-बड़े काम किये हैं। और उन का नाम क़ुददूस है। ख़ुदा की रहमत उस से डरने वालों पर, नस्ल-ब-नस्ल जारी रहती है। ख़ुदा ने अपने बाज़ू से अज़ीम काम किये हैं; जो अपने आप को बड़ा समझते थे, उस ने उन्हें परागंदा कर दिया। ख़ुदा ने हुक्मरानों को उन के तख़्त से उतार दिया लेकिन हलीमों को सरफ़राज़ कर दिया। ख़ुदा ने भूकों को अच्छी चीज़ों से सेर कर दिया लेकिन दौलतमन्दों को ख़ाली हाथ लौटा दिया। ख़ुदा ने अपने ख़ादिम इस्राईल की मदद की है, ख़ुदा ने अपने रहम दिल होने के वादे को याद रख्खा है जो ख़ुदा ने अब्दी वादा हज़रत इब्राहीम और उन की नस्ल से, और हमारे बाप दादा, से किया था।” और हज़रत मरियम तक़रीबन तीन माह तक ऐलीशाबैत के साथ रहीं। फिर अपने घर लौट गईं। अब ऐलीशाबैत के वज़-ए-हम्ल का वक़्त आ पहुंचा, तो उन के एक बेटा पैदा हुआ। उन के पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने ये सुन कर के ख़ुदावन्द ने ऐलीशाबैत पर बड़ी रहमत की है, उन के साथ मिल कर ख़ुशी मनाई। आठवीं दिन वह बच्चे का ख़तना करने के लिये आये और बच्चे का नाम उन के बाप के नाम पर ज़करियाह रखने लगे। लेकिन उन की मां बोल उठीं और कहने लगीं, “नहीं! बच्चे का नाम यहया होगा।” उन्होंने ऐलीशाबैत से कहा, “तुम्हारे ख़ानदान में कोई भी इस नाम का नहीं है।” तब उन्होंने बच्चे के बाप से इशारों में पूछा, के तुम बच्चे का नाम क्या रखना चाहते हो। हज़रत ज़करियाह ने तख़्ती मंगवाई, और उस पर ये लिख कर सब को हैरत में डाल दिया के, “बच्चे का नाम यहया है।” उसी वक़्त हज़रत ज़करियाह का मुंह खुल गया और उन की ज़बान काम करने लगी, और वह बोलने लगे, और ख़ुदा की तारीफ़ करने लगे। इस वाक़िये से पड़ोस के तमाम लोगों पर दहश्त छा गई, और यहूदिया के तमाम पहाड़ी इलाक़ों में इन सब बातों का तज़्किरा होने लगा। और सब सुनने वाले हैरान होकर सोचते थे के, “ये बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा?” क्यूंके ख़ुदावन्द का हाथ उन के साथ था। तब उन के बाप ज़करियाह पाक रूह से मामूर होकर नुबुव्वत करने लगे: “इस्राईल के ख़ुदावन्द, ख़ुदा की हम्द हो, क्यूंके ख़ुदा ने आकर अपने लोगों को मुख़्लिसी बख़्शी। उस ने अपने ख़ादिम हज़रत दाऊद के घराने में हमारे लिये एक ताक़तवर सींग नजात-दिहन्दः को भेजा (जैसा उस ने ज़माने क़दीम में अपने मुक़द्दस नबियों के मारिफ़त फ़रमाया था), ताके हम अपने सभी दुश्मनों से और नफ़रत रखने वालों से नजात पायें और वह हमारे बाप दादा पर रहम करे और अपने पाक अह्द को याद फ़रमाये, यानी उस क़सम को जो उस ने हमारे बाप हज़रत इब्राहीम से खाई थी: के वह हमें हमारे दुश्मनों से छुड़ायेगा, और हमें बेख़ौफ़ अपनी ख़िदमत करने के लाइक़ बनायेगा, ताके उस की हुज़ूरी में पाकीज़गी और रास्तबाज़ी से ज़िन्दगी भर रह सकें। “और ऐ मेरे बच्चे, तू ख़ुदा तआला का नबी कहलायेगा; क्यूंके तुम ख़ुदावन्द के आगे-आगे चल कर उन की राह तय्यार करोगे, ताके ख़ुदावन्द के लोगों को नजात का इल्म बख़्शो, जो गुनाहों की मुआफ़ी से हासिल होती है, हमारे ख़ुदा की उस बड़ी रहमत की वजह से, हम पर आलमे-बाला का आफ़ताब तुलू होगा ताके उन को रोशनी बख़्शे जो तारीकी और मौत के साये में बैठे हैं, और हमारे क़दमों को सलामती की राह पर ले चले।” और वह बच्चा बढ़ता गया और रूहानी तौर पर क़ुव्वत पाता गया; और इस्राईल पर आम तौर पर ज़ाहिर होने से पहले ब्याबान में रहा। उन दिनों में क़ैसर औगुस्तुस की जानिब से फ़रमान जारी हुआ के रोमी हुकूमत की सारी दुनिया के लोगों की इस्म नवीसी की जायें। (ये पहली इस्म नवीसी थी जो सीरिया के हाकिम कोरिन्युस के अह्द में हुई।) और सब लोग नाम लिखवाने के लिये अपने-अपने शहर को गये। यूसुफ़ भी गलील के शहर नासरत से यहूदिया में हज़रत दाऊद के शहर बैतलहम को रवाना हुआ क्यूंके वह दाऊद के घराने और औलाद से था। ताके वहां अपनी होने वाली बीवी मरियम के साथ जो हामिला थी, नाम लिखवाए। जब वह वहां थे तो उन के वज़-ए-हम्ल का वक़्त आ पहुंचा। और उस का पहलौठा बेटा पैदा हुआ। और उन्होंने उसे कपड़े में लपेट कर चरनी में रख्खा क्यूंके उन के लिये सराय में कोई जगह न थी। उसी इलाक़े में कुछ चरवाहे थे जो रात के वक़्त मैदान में अपने रेवड़ की निगहबानी कर रहे थे। और ख़ुदावन्द का फ़रिश्ता उन पर ज़ाहिर और ख़ुदावन्द का जलाल उन के चारों तरफ़ चमका, और वह बुरी तरह डर गये। लेकिन फ़रिश्ते ने उन से कहा, “डरो मत क्यूंके मैं तुम्हें बड़ी ख़ुशख़बरी की बिशारत देता हूं जो सारी उम्मत के वास्ते होगी। के आज दाऊद के शहर में तुम्हारे लिये एक मुनज्जी पैदा हुआ है; यही अलमसीह और ख़ुदावन्द है। और उस का तुम्हारे लिये ये निशान होगा के तुम एक बच्चे को कपड़े में लिपटा और चरनी में पड़ा हुआ पाओगे।” यकायक आसमान से फ़रिश्तों का एक लश्कर उस फ़रिश्ते के साथ ख़ुदा की तम्जीद करते और ये कहते हुए ज़ाहिर हुआ, “आलमे-बाला पर ख़ुदा की तम्जीद हो, और ज़मीन पर उन आदमियों पर ख़ुदा की सलामती जिन पर वह मेहरबान है।” जब फ़रिश्ते उन के पास से आसमान पर चले गये तो चरवाहों ने आपस में कहा, “आओ हम बैतलहम चलें और जिस वाक़िये की ख़बर ख़ुदावन्द ने हमें दी है उसे देखें।” लिहाज़ा वह जल्दी से रवाना हुए और मरियम, यूसुफ़ और बच्चे से मिले जो चरनी में पड़ा था। और बच्चे को देखकर वह बातें जो उन्हें उस के बारे में बताई गई थीं, उन्हें मशहूर कर दिया। और चरवाहों की बातें सुन कर सारे लोग तअज्जुब करने लगे। लेकिन मरियम सारी बातों को दिल में रखकर उन पर ग़ौर करती रहीं। और चरवाहे जैसा उन्हें बताया गया था वैसा ही सब कुछ देखकर और सुन कर ख़ुदा की तम्जीद और तारीफ़ करते हुए वापस चले गये। आठवें दिन जब उस के ख़तने का वक़्त आया तो उस का नाम ईसा रख्खा गया। ये वोही नाम है जो फ़रिश्ते ने उसे मरियम के हामिला होने से पहले दिया था। जब हज़रत मूसा की शरीअत के मुताबिक़ उन के पाक होने के दिन पूरे हो गये तो यूसुफ़ और मरियम उसे यरूशलेम ले गये ताके उसे ख़ुदावन्द को पेश करें (जैसा के ख़ुदावन्द की शरीअत में लिख्खा हुआ है, “हर पहलौठा ख़ुदावन्द के लिये मुक़द्दस ठहरेगा” ), और ख़ुदावन्द की शरीअत के मुताबिक़ क़ुमरीयों का “एक जोड़ा या कबूतर के दो बच्चे क़ुर्बानी के लिये लायें।” उस वक़्त यरूशलेम में एक आदमी था जिस का नाम शमऊन था। वह रास्तबाज़ और ख़ुदा तरस था। वह इस्राईल के तसल्ली पाने की राह देख रहा था और पाक रूह उस पर था। पाक रूह ने उस पर नाज़िल कर दिया था के जब तक वह ख़ुदावन्द के अलमसीह को देख न लेगा, मरेगा नहीं। वह रूह की हिदायत से बैतुलमुक़द्दस में आया और जब हुज़ूर ईसा के वालिदैन उसे अन्दर लाये ताके शरीअत के फ़राइज़ अन्जाम दें तो शमऊन ने उसे गोद में ले लिया और ख़ुदा की हम्द कर के कहने लगा: “ऐ ख़ुदावन्द! तू अपने वादे के मुताबिक़, अब अपने ख़ादिम को सलामती से रुख़्सत कर। क्यूंके मेरी आंखों ने तेरी नजात को देख लिया है, जिसे आप ने सारी उम्मतों के सामने तय्यार किया है: वह ग़ैरयहूदियों के लिये मुकाशफ़े का नूर और तुम्हारी उम्मत इस्राईल का जलाल है।” और बच्चे के मां बाप इन बातों को जो उस के बारे में कही जा रही थीं, तअज्जुब से सुन रहे थे। तब शमऊन ने उन्हें बरकत दी और उस की मां मरियम से कहा: “देख! ये तै हो चुका है के ये बच्चा इस्राईल में बहुत से लोगों के ज़वाल और उरूज का बाइस होगा और ऐसा निशान बनेगा जिस की मुख़ालफ़त की जायेगी। ताके बहुत से दिलों के अन्देशे ज़ाहिर हो जायें और ग़म की तलवार तेरी जान को भी छेद डालेगी।” वहां एक औरत भी थी जो नबिया थी। उस का नाम हन्‍ना था। वह आशर के क़बीला के एक शख़्स फ़नुएल की बेटी थी। वह बड़ी उम्र रसीदा थी और अपनी शादी के बाद सात साल तक अपने शौहर के साथ रही थी। अब वह बेवा थी और चौरासी बरस की हो चुकी थी। वह बैतुलमुक़द्दस से जुदा न होती थी बल्के रात दिन रोज़ों और दुआओं के साथ इबादत में लगी रहती थी। उस वक़्त वह भी वहां आकर ख़ुदा का शुक्र अदा करने लगी और उन सब से जो यरूशलेम की मुख़्लिसी के मुन्तज़िर थे, उस बच्चे के बारे में गुफ़्तगू करने लगी। जब यूसुफ़ और मरियम ख़ुदावन्द की शरीअत के मुताबिक़ सारे काम अन्जाम दे चुके तो गलील में अपने शहर नासरत को लौट गये। और वह बच्चा बढ़ता और क़ुव्वत पाता गया और हिक्मत से मामूर; होता गया और ख़ुदा का फ़ज़ल उस पर था। उस के वालिदैन हर साल ईद-ए-फ़सह के लिये यरूशलेम जाया करते थे। जब वह बारह बरस का गया तो वह ईद के दस्तूर के मुताबिक़ यरूशलेम गये। जब ईद के दिन गुज़र गये तो उस के वालिदैन वापस आये लेकिन लड़का ईसा यरूशलेम में ही ठहर गया लेकिन उस के वालिदैन को इस बात की ख़बर न थी। उन का ख़्याल था के वह क़ाफ़िले के साथ है। लिहाज़ा वह एक मंज़िल आगे निकल गये और उसे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों में ढूंडने लगे। जब वह उन्हें नहीं मिला तो उस की जुस्तुजू में यरूशलेम वापस आये। तीन दिन के बाद उन्होंने उसे बैतुलमुक़द्दस के अन्दर उस्तादों के दरमियान बैठे हुए उन की सुनते और उन से सवाल करते पाया। और जो लोग उस की बातें सुन रहे थे वह उन की ज़हानत और उस के जवाबों पर हैरत-ज़दा थे। जब उन के वालिदैन ने उन्हें देखा तो उन्हें हैरत हुई। उन की मां ने उन से पूछा, “बेटा, तूने हम से ऐसा सुलूक क्यूं किया? तेरे अब्बा और मैं तुझे ढूंडते हुए परेशान हो गये थे।” हुज़ूर ईसा ने पूछा, “आप लोग मुझे क्यूं ढूंडते फिरते थे? क्या आप लोगों को मालूम न था के मुझे अपने बाप के घर में होना ज़रूरी है?” लेकिन वह समझ न पाये के वह उन से क्या कह रहा है। तब वह उन के साथ रवाना होकर नासरत में आया और उन के ताबे रहा और उस की मां ने ये सारी बातें अपने दिल में रख्खीं। और हुज़ूर ईसा हिक्मत और क़द-ओ-क़ामत में बढ़ते और ख़ुदा और इन्सान की नज़र में मक़्बूल होते चले गये। क़ैसर तिब्रियुस की हुकूमत के पंद्रहवीं बरस जब पुन्तियुस पीलातुस यहूदिया का हाकिम था और हेरोदेस गलील के चौथाई हिस्से पर और उस का भाई फ़िलिप्पुस, इतूरिया और तरख़ोनीतिस चौथाई हिस्से और लिसानियास, अबलेने के चौथाई हिस्से पर हुक्मरां था और हन्‍ना और काइफ़ा आला काहिन थे। उस वक़्त ख़ुदा का कलाम ब्याबान में ज़करियाह के बेटे हज़रत यहया पर नाज़िल हुआ। और वह यरदन के इर्दगिर्द के इलाक़ों में जा कर गुनाहों की मुआफ़ी के वास्ते तौबा करने और पाक-ग़ुस्ल लेने की मुनादी करने लगे। जैसा के हज़रत यसायाह नबी ने अपने पाक सहीफ़े में लिख्खा है: “ब्याबान में कोई पुकार रहा है, ‘ख़ुदावन्द के लिये राह तय्यार करो, उस के लिये राहें सीधी बनाओ। हर वादी भर दी जायेगी, और हर पहाड़ और टीला नीचा कर दिया जायेगा। टेढ़े रास्ते सीधे कर दिये जायेंगे, और नाहमवार राहें हमवार बना दी जायेंगी और तमाम बनी नौअ़ इन्सान ख़ुदा की नजात देखेंगे।’ ” हज़रत यहया उस हुजूम से जो गिरोह दर गिरोह उन के पास पाक-ग़ुस्ल लेने के लिये आ रहा था उन से कहा, “ऐ ज़हरीले सांप के बच्चो! तुम्हें किस ने आगाह कर दिया के आने वाले ग़ज़ब से बच कर भाग निकलो? अपनी तौबा के लाइक़ अपने अन्दर फल भी लाओ। और ख़ुद से इस गुमान में न रहना के तुम कहने लगो, ‘हम तो हज़रत इब्राहीम की औलाद हैं।’ क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के ख़ुदा इन पत्थरों से भी हज़रत इब्राहीम के लिये औलाद पैदा कर सकता है। अब दरख़्तों की जड़ पर कुल्हाड़ा रख दिया गया है लिहाज़ा जो दरख़्त अच्छा फल नहीं लाता वह काटा और आग में झोंका जाता है।” “लोगों ने उस से पूछा के आख़िर हम क्या करें?” हज़रत यहया ने जवाब दिया, जिस के पास दो कुर्ते हों, “उस के साथ जिस के पास एक भी न हों बांट ले और जिस के पास खाना हो वह भी ऐसा ही करे।” और महसूल लेने वाले भी पाक-ग़ुस्ल लेने आये और पूछने लगे, “ऐ उस्ताद मुहतरम,” हम क्या करें? और आप ने उन से कहा, “जितना लेने का तुम्हें इख़्तियार दिया गया है उस से ज़्यादा न लो।” तब बाज़ सिपाहियों ने भी पूछा के हम क्या करें? और हज़रत यहया ने उन से कहा, “किसी पर झूटा इल्ज़ाम मत लगाओ और न डरा धमका कर किसी से कुछ लो। अपनी तनख़्वाह से मुतमइन रहो।” जब लोग बड़े शौक़ से मुन्तज़िर थे और दिल ही दिल में सोच रहे थे के शायद ये हज़रत यहया ही अलमसीह हैं। तो हज़रत यहया ने जवाब देते हुए कहा, “मैं तो तुम्हें सिर्फ़ पानी से पाक-ग़ुस्ल देता हूं लेकिन जो आने वाला है वह मुझ से भी ज़्यादा ज़ोरआवर है, मैं तो इस लाइक़ भी नहीं के उन की जूतों के तस्मे खोल सकूं। वह तुम्हें पाक रूह और आग से पाक-ग़ुस्ल देंगे। उस का छाज उस के हाथ में है और वह अपने खलियान को ख़ूब साफ़ करेगा और गेहूं को अपने खत्ते में जमा करेगा और भूसे को उस आग में जलायेगा जो बुझती ही नहीं।” और वह उन्हें नसीहत के तौर पर बहुत सी बातें बताते और ख़ुशख़बरी सुनाते रहे। हेरोदेस चौथाई इलाक़े पर हुक्मरां था जब हज़रत यहया ने उसे मलामत की थी क्यूंके उस ने अपने भाई फ़िलिप्पुस की बीवी हेरोदियास से शादी कर ली थी और दूसरी बहुत सी बदकारियां भी की थीं। उस ने सब से बुरी हरकत ये की के हज़रत यहया को क़ैद में डलवा दिया। जब सब लोग पाक-ग़ुस्ल ले रहे थे तो हुज़ूर ईसा ने भी पाक-ग़ुस्ल लिया और जब वह दुआ कर रहे थे तो आसमान खुल गया और पाक रूह जिस्मानी सूरत में कबूतर की शक्ल में हुज़ूर पर नाज़िल हुआ और आसमान से एक आवाज़ आई: “तू मेरा प्यारा बेटा है, जिस से मैं महब्बत करता हूं; तुम से मैं बहुत ख़ुश हूं।” जब हुज़ूर ईसा ने अपना काम शुरू किया तो वह तक़रीबन तीस बरस के थे। उन्हें यूसुफ़ का बेटा समझा जाता था, जो एली का बेटा था, एली मत्तात का, मत्तात लावी का, लावी मल्की का, मल्की यन्नाई का और यन्नाई यूसुफ़ का बेटा था, यूसुफ़ मत्तितियाह का, मत्तितियाह आमूस का, आमूस नाहूम का नाहूम ऍस्ली का और ऍस्ली नूगह का बेटा था, नूगह माअत का माअत मत्तितियाह का, मत्तितियाह शिमई का, शिमई यूसीख़ का यूसीख़ योदाह का बेटा था, योदाह यूनान का, यूनान रेसा का, रेसा ज़रूब्बाबिल का, ज़रूब्बाबिल सियालतीएल का, और सियालतीएल नेरी का, नेरी मल्की का, मल्की अददी का, अददी क़ोसाम का, क़ोसाम इल्मोदाम का और इल्मोदाम एर का बेटा था, एर यशु-अ का, यशु-अ एलीअज़र का, एलीअज़र यूरीम का, यूरीम मत्तात का, और मत्तात लावी का बेटा था, लावी शमऊन का, शमऊन यहूदाह का, यहूदाह यूसुफ़ का, यूसुफ़ योनाम का और योनाम इलियाक़ीम का बेटा था। इलियाक़ीम मेलिया का, मेलिया मिन्नाह का, मिन्नाह मत्तताह का, मत्तताह नातन का, और नातन दाऊद का बेटा था। दाऊद यस्सी का, यस्सी ओबैद का, ओबैद बोअज़ का, बोअज़ सल्मोन का और सल्मोन नहसून का बेटा था। नहसून अम्मीनदाब का, अम्मीनदाब आराम का, और आराम अरनी का, अरनी हसरोन का, हसरोन फ़ारस का, और फ़ारस यहूदाह का बेटा था। यहूदाह याक़ूब का, याक़ूब इज़हाक़ का, इज़हाक़ इब्राहीम का, इब्राहीम तारह का और तारह नहूर का बेटा था। नहूर सुरूज का, सुरूज रऊ का, रऊ फ़लज का, फ़लज इब्र का और इब्र सिलह का बेटा था। सिलह क़ीनान का। क़ीनान अरफ़कसद का, अरफ़कसद सिम का, सिम नूह का और नूह लमक का बेटा था। लमक मतूसिलह का, मतूसिलह हनोक का, हनोक यारद का, यारद मुहल्लिल-एल का, मुहल्लिल-एल क़ीनान का बेटा था। क़ीनान अनूस का, अनूस सेत का और सेत आदम का, और आदम ख़ुदा का बेटा था। 4 हुज़ूर ईसा पाक रूह से भरे हुए यरदन से लौटे और पाक रूह की हिदायत से ब्याबान में गये। और चालीस दिन तक इब्लीस के ज़रीये आज़माये जाते रहे। उन दिनों में आप ने कुछ न खाया और जब वह दिन पूरे हुए तो हुज़ूर को भूक लगी। तब इब्लीस ने उन से कहा, “अगर आप ख़ुदा का बेटा हो तो इस पत्थर से कहें के रोटी बन जाये।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “लिख्खा है: ‘इन्सान सिर्फ़ रोटी ही से ज़िन्दा नहीं रहता।’ ” और इब्लीस ने उन्हें एक ऊंचे मक़ाम पर ले जा कर पल-भर में दुनिया की दुनिया की तमाम सल्तनतें दिखा दीं। और इब्लीस ने हुज़ूर से कहा, “मैं ये सारा इख़्तियार और शान-ओ-शौकत तुझे अता कर दूंगा क्यूंके ये मेरे सुपुर्द किये गये हैं और मैं जिसे चाहूं दे सकता हूं। लिहाज़ा अगर आप मेरे आगे सज्दा करेंगे तो ये सब कुछ आप का हो जायेगा।” हुज़ूर ईसा ने जवाब में उस से कहा, “लिख्खा है: ‘तू अपने ख़ुदावन्द ख़ुदा ही को सज्दा कर और सिर्फ़ उसी की ख़िदमत कर।’ ” और फिर इब्लीस हुज़ूर ईसा को यरूशलेम में ले गया और बैतुलमुक़द्दस के सब से ऊंचे मक़ाम पर खड़ा कर के कहने लगा के, “अगर आप ख़ुदा का बेटा हो तो यहां से अपने आप को नीचे गिरा दें। क्यूंके लिख्खा है: “ ‘वह अपने फ़रिश्तों को तुम्हारे मुतअल्लिक़ हुक्म देगा के वो आप की ख़ूब हिफ़ाज़त करें; और वह आप को अपने हाथों पर उठा लेंगे, ताके आप के पांव को किसी पत्थर से ठेस न लगने पाये।’ ” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “फ़रमाया गया है: ‘तुम ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा की आज़माइश न करो।’ ” जब इब्लीस अपनी हर आज़माइश ख़त्म कर चुका तो कुछ मुनासिब अर्से तक के लिये हुज़ूर ईसा को छोड़कर चला गया। फिर हुज़ूर ईसा रूह की क़ुव्वत से मामूर, होकर सूबे गलील वापस हुए और चारों तरफ़ के सारे इलाक़े में आप की शोहरत फैल गई। वह उन के यहूदी इबादतगाहों में तालीम देते और सब लोग हुज़ूर की तारीफ़ करते थे। फिर हुज़ूर नासरत में आये जहां आप ने परवरिश पाई थी और अपने दस्तूर के मुताबिक़ सबत के दिन यहूदी इबादतगाह में गये। वह पढ़ने के लिये खड़े हुए। तो आप को यसायाह नबी का सहीफ़ा दिया गया। हुज़ूर ने उसे खोला और वह मक़ाम निकाला जहां ये लिख्खा: “ख़ुदावन्द का रूह मुझ पर है, उस ने मुझे मसह किया है ताके मैं ग़रीबों को ख़ुशख़बरी सुनाऊं। उस ने मुझे भेजा है ताके मैं क़ैदियों के लिये रिहाई और अन्धों को बीनाई की ख़बर दूं, कुचले हुओं को आज़ादी बख़्शूं। और ख़ुदावन्द के साल-ए-मक़्बूल का एलान करूं।” फिर हुज़ूर ईसा ने सहीफ़ा बन्द कर के ख़ादिम के हवाले कर दिया और बैठ गये। और जो लोग यहूदी इबादतगाह में मौजूद थे, उन सब की आंखें हुज़ूर पर लगी थीं। और हुज़ूर उन से कहने लगे, “ये नविश्ता जो तुम्हें सुनाया गया, आज पूरा हो गया।” और सब ने आप की तारीफ़ की और उन पुरफ़ज़ल बातों पर जो हुज़ूर के मुंह से निकलती थीं तअज्जुब कर के कहते थे, “क्या ये यूसुफ़ का बेटा नहीं?” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम ज़रूर ये मिसाल मुझ पर कहोगे: के ऐ हकीम, ‘अपना तू इलाज कर! जो बातें हम ने कफ़रनहूम में होते सुनी हैं उन्हें यहां अपने आबाई शहर में भी कर।’ ” और हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के कोई नबी अपने आबाई शहर में मक़्बूल नहीं होता। ये हक़ीक़त है के एलियाह के ज़माने में बहुत सी बेवायें इस्राईल में थीं, जब साढे़ तीन बरस तक बारिश न होने की वजह से तमाम मुल्क में सख़्त क़हत पड़ा था। तो भी एलियाह उन में से किसी के पास नहीं बल्के सैदा के एक शहर सारपत की एक बेवा के पास भेजा गया था। और ऐलीशा नबी के ज़माने में इस्राईल में बहुत से कोढ़ी थे लेकिन सिवाए नामान के जो सीरिया का बाशिन्दा था उन में से कोई पाक साफ़ न किया गया।” जो लोग यहूदी इबादतगाह में मौजूद थे, इन बातों को सुनते ही ग़ुस्से से भर गये। वह उठे और उन्होंने हुज़ूर ईसा को शहर से बाहर निकाल दिया और फिर आप को उस पहाड़ी की चोटी पर ले गये जिस पर उन का शहर आबाद था ताके हुज़ूर ईसा को वहां से नीचे गिरा दें। लेकिन हुज़ूर ईसा उन के दरमियान से निकल कर चले गये। फिर हुज़ूर ईसा गलील के एक शहर कफ़रनहूम को चले गये जहां वह हर सबत को तालीम देते थे। और लोग हुज़ूर ईसा की तालीम सुन कर दंग रह गये क्यूंके हुज़ूर साहिबे इख़्तियार की तरह तालीम दे रहे थे। यहूदी इबादतगाह में एक शख़्स था जिस में बदरूह थी। वह बड़ी ऊंची आवाज़ से चिल्लाने लगा, “ऐ ईसा नासरी, यहां से चले जायें! आप को हम से क्या काम? क्या आप हमें हलाक करने आये हैं? मैं जानता हूं के आप कौन हैं? आप ख़ुदा का क़ुददूस हैं!” “ख़ामोश हो जा!” हुज़ूर ईसा ने बदरूह को झिड़का और कहा, “और इस आदमी में से निकल जा!” इस पर बदरूह ने उस आदमी को उन के दरमियान ज़मीन पर पटका और उसे ज़रर पहुंचाये बग़ैर उस में से निकल गई। सब लोग हैरत-ज़दा कर एक दूसरे से कहने लगे के, “ये कैसा कलाम है? वह इख़्तियार और क़ुदरत के साथ बदरूहों को हुक्म देता है और वह निकल जाती हैं!” और आस-पास के हर इलाक़े में हुज़ूर की शौहरत बड़ी तेज़ी फैल गई। यहूदी इबादतगाह से निकल कर हुज़ूर ईसा शमऊन के घर पहुंचे। शमऊन की सास तेज़ बुख़ार में मुब्तिला थी। शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा से उसे ठीक करने की दरख़्वास्त की। और हुज़ूर ईसा ने उस की तरफ़ झुक कर बुख़ार को झिड़का और वह उतर गया। वह फ़ौरन उठी और उन की ख़िदमत में लग गईं। सूरज डूबते ही लोग घरों से मुख़्तलिफ़ बीमारीयों वाले मरीज़ों को हुज़ूर ईसा के पास लाये और आप ने एक-एक पर हाथ रखे और उन्हें शिफ़ा बख़्शी। और, बदरूहें भी चिल्लाती हुई, और ये कहती हुई के, “तू ख़ुदा का बेटा है!” कई लोगों में से निकल जाती थीं चूंके उन्हें मालूम था के वह अलमसीह हैं। हुज़ूर ईसा उन्हें झिड़कते थे और बोलने न देते थे। सुबह होते ही हुज़ूर ईसा निकल कर किसी वीरान जगह चले जाते थे। लोग हुजूम दर हुजूम आप को ढूंडते हुए आप के पास आ जाते थे और आप को रोकने की कोशिश करते थे के हमारे पास से न जायें। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मुझे दूसरे शहरों में भी ख़ुदा की बादशाही की ख़ुशख़बरी सुनाना ज़रूरी है क्यूंके मैं इसी मक़्सद से भेजा गया हूं।” और हुज़ूर ईसा यहूदिया सूबे के यहूदी इबादतगाहों में मुनादी करते रहे। एक दिन हुज़ूर ईसा गनेसरत की झील के किनारे खड़े थे और लोगों का एक हुजूम ख़ुदा का कलाम सुनने की ग़रज़ से आप पर गिरा पड़ता था। हुज़ूर ईसा ने दो कश्तियां किनारे लगी हुई देखीं। मछली पकड़ने वाले उन्हें वहां छोड़कर अपने जाल धोने में लगे हुए थे। हुज़ूर ईसा उन में से एक पर चढ़ गये और उस के मालिक शमऊन से दरख़्वास्त की के कश्ती को किनारे से हटा कर ज़रा दूर ले चल। फिर आप कश्ती में बैठ गये और लोगों को तालीम देने लगे। जब हुज़ूर ईसा उन से कलाम कर चुके तो आप ने शमऊन से कहा, “कश्ती को गहरे पानी में ले चल और तुम मछलियों पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।” शमऊन ने जवाब दिया, “ऐ मालिक, हम ने सारी रात मेहनत की लेकिन कुछ हाथ न आया, लेकिन आप के कहने पर, जाल डालता हूं।” चुनांचे उन्होंने जाल डाले और मछलियों का इतना बड़ा ग़ोल घेर लिया के उन के जाल फटने लगे। तब उन्होंने दूसरी कश्ती वाले साथियों को इशारा किया के आओ और हमारी मदद करो। पस वह आये और दोनों कश्तियों को मछलियों से इस क़दर भर दिया के वह डूबने लगीं। शमऊन पतरस ने ये देखा तो, वह हुज़ूर ईसा के पांव पर गिरकर कहने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द; मैं गुनहगार आदमी हूं। आप मेरे पास से चले जाईये!” वजह ये थी के वह और उन के साथी मछलियों के इतने बड़े शिकार के सबब हैरत-ज़दा थे। यही हाल ज़ब्दी के बेटों, याक़ूब और यूहन्ना का भी था जो शमऊन के साथी थे। ईसा ने शमऊन से कहा, “ख़ौफ़ न कर, अब से तू इन्सानों को पकड़ा करेगा।” वह कश्तियों को किनारे ले आये और सब कुछ छोड़कर आप के पीछे हो लिये। एक दफ़ा हुज़ूर ईसा उस इलाक़े के एक शहर में थे तो ऐसा हुआ के एक आदमी जिस के सारे जिस्म पर कोढ़ फैला हुआ था। हुज़ूर ईसा को देखकर मुंह के बल गिरा और इल्तिजा करने लगा के, “ऐ ख़ुदावन्द, अगर आप चाहें तो मुझे कोढ़ से पाक कर सकते हैं।” और हुज़ूर ईसा ने हाथ बढ़ा कर उसे छुआ और कहा, “मैं चाहता हूं” तू, “पाक साफ़ हो जा!” और उसी वक़्त उस ने कोढ़ से शिफ़ा पाई। तब हुज़ूर ईसा ने उसे ताकीद की के, “किसी से कुछ न कहना, बल्के सीधा काहिन के पास जा कर, अपने आप को दिखा और अपने साथ वह नज़्रें भी ले जा जो हज़रत मूसा ने तुम्हारे पाक साफ़ होने के लिये मुक़र्रर की हैं, ताके लोगों के सामने गवाही हो।” लेकिन हुज़ूर ईसा के बारे में सब को ख़बर गई और लोग कसरत से जमा होने लगे ताके हुज़ूर की तालीम सुनें और अपनी बीमारीयों से शिफ़ा पायें। लेकिन आप अक्सर ग़ैरआबाद मक़ामों में चले जाते और दुआ किया करते थे। एक दिन ऐसा हुआ के हुज़ूर ईसा तालीम दे रहे थे और कुछ फ़रीसी और शरीअत के आलिम जो गलील और यहूदिया के हर क़स्बे और यरूशलेम से आकर, वहां बैठे हुए थे, और ख़ुदावन्द की क़ुदरत हुज़ूर ईसा के साथ थी के वह बीमारों को शिफ़ा दें। कुछ लोग एक मफ़्लूज को बिछौने पर डाल कर लाये और कोशिश करने लगे के उसे अन्दर ले जा कर हुज़ूर ईसा के सामने रख दें। लेकिन हुजूम इस क़दर था के वह उसे अन्दर न ले जा सके। तब वह छत पर चढ़ गये और खपरैल हटा कर मफ़्लूज को चारपाई समेत लोगों के बीच में हुज़ूर ईसा के सामने उतार दिया। आप ने उन का ईमान देखकर कहा, “दोस्त! तेरे गुनाह मुआफ़ हुए।” शरीअत के आलिम और फ़रीसी सोचने लगे, “ये आदमी कौन है जो कुफ़्र बकता है। ख़ुदा के सिवा कौन गुनाह मुआफ़ कर सकता है?” हुज़ूर ईसा को उन के ख़्यालात मालूम हो गये के, “वह अपने दिलों में क्या सोच रहे हैं? तब आप ने जवाब में उन से पूछा, तुम अपने दिलों में ऐसी बातें क्यूं सोचते हो? क्या ये कहना ज़्यादा आसान है: ‘तेरे गुनाह मुआफ़ हुए,’ या ‘ये कहना के उठ और चल फिर’? लेकिन मैं चाहता हूं के तुम्हें मालूम हो के इब्न-ए-आदम को ज़मीन पर गुनाह मुआफ़ करने का इख़्तियार है।” हुज़ूर ने मफ़्लूज से कहा, “मैं तुझ से कहता हूं, उठ और अपना बिछौना उठाकर अपने घर चला जा।” वह उन के सामने उसी वक़्त उठ कर खड़ा हो गया और जिस बिछौने पर वह पड़ा था उसे उठाकर ख़ुदा की तम्जीद करता हुआ अपने घर चला गया। वह सब हैरान रह गये और ख़ुदा की तम्जीद करने लगे। और सब पर ख़ौफ़ तारी हो गया और वह कहने लगे, “के आज हम ने अजीब बातें देखी हैं।” इन वाक़ियात के बाद हुज़ूर ईसा वहां से निकले और एक महसूल लेने वाले को जिस का नाम लावी था, महसूल की चौकी पर बैठे देखा। हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “मेरे पेरोकार हो जाओ।” वह उठा और सब कुछ छोड़कर, हुज़ूर के पीछे चल दिया। फिर लावी ने अपने घर में हुज़ूर ईसा के लिये एक बड़ी ज़ियाफ़त तरतीब दी और वहां महसूल लेने वालों और दूसरे लोगों का जो ज़ियाफ़त में शरीक थे बड़ा मज्मा था। लेकिन फ़रीसी और शरीअत के आलिम जो फ़रीसी फ़िर्क़े से तअल्लुक़ रखते थे हुज़ूर ईसा के शागिर्दों से शिकायत कर के कहने लगे, “तुम महसूल लेने वालों और गुनहगारों के साथ क्यूं खाते पीते हो?” हुज़ूर ईसा ने जवाब में उन से कहा, “बीमारों को तबीब की ज़रूरत होती है, सेहतमन्दों को नहीं। मैं रास्तबाज़ों को नहीं बल्के गुनहगारों को तौबा करने के लिये बुलाने आया हूं।” फ़रीसी और शरीअत के आलिमों ने हुज़ूर ईसा से कहा, “हज़रत यहया के शागिर्द तो अक्सर रोज़ा रखते और दुआएं करते हैं और इसी तरह फ़रीसियों के भी लेकिन आप के शागिर्द तो खाते पीते रहते हैं?” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “क्या तुम दुल्हा की मौजूदगी में; बरातियों से रोज़ा रखवा सकते हो हरगिज़ नहीं। लेकिन वह दिन आयेंगे जब दुल्हा उन से जुदा किया जायेगा; तब उन दिनों में वह रोज़ा रखेंगे।” और हुज़ूर ने उन से ये तम्सील भी कही: “नई पोशाक को फाड़ कर उस का पैवन्द पुरानी पोशाक पर कोई नहीं लगाता वर्ना, नई भी फटेगी और उस का पैवन्द पुरानी पोशाक से मेल भी न खायेगा। ताज़ा अंगूरी शीरे को भी पुरानी मश्कों में कोई नहीं भरता वर्ना, मश्कें उस नये अंगूरी शीरे से फट जायेंगी, शीरा भी बह जायेगा और मश्कें भी बर्बाद हो जायेंगी। बल्के, नये अंगूरी शीरे को नई मश्कों में भरना चाहिये। पुराना शीरा पी कर नई की ख़ाहिश कोई नहीं करता, क्यूंके वह कहता है के, ‘पुरानी ही ख़ूब है।’ ” एक बार हुज़ूर ईसा सबत के दिन खेतों में से होकर गुज़र रहे थे, और उन के शागिर्द बालें तोड़ कर, हाथों से मल-मल कर खाते-जाते थे। इस पर बाज़ फ़रीसियों ने सवाल किया, “तुम ऐसा काम क्यूं करते जो सबत के दिन करना जायज़ नहीं?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा के जब दाऊद और उन के साथी भूके थे तो उन्होंने क्या किया? हज़रत दाऊद कैसे ख़ुदा के घर में दाख़िल हुए और नज़्र की हुई ये रोटियां ले कर, ख़ुद भी खाईं और अपने साथियों को भी ये रोटियां खाने को दीं जिसे काहिनों के सिवाए किसी और के लिये रवा नहीं था।” फिर हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “इब्न-ए-आदम सबत का भी ख़ुदावन्द है।” किसी और सबत के दिन हुज़ूर यहूदी इबादतगाह में जा कर तालीम दे रहे थे, वहां एक आदमी था जिस का दायां हाथ सूखा हुआ था। शरीअत के आलिम और फ़रीसी हुज़ूर ईसा की ताक में थे इसलिये हुज़ूर को क़रीब से देखने लगे के अगर हुज़ूर सबत के दिन उस आदमी को शिफ़ा बख़्शते हैं तो वो हुज़ूर पर इल्ज़ाम लगा सकें। लेकिन हुज़ूर ईसा को उन के ख़्यालात मालूम हो गये और उस सूखे हाथ वाले आदमी से कहा, “उठो और सब के बीच में खड़े हो जाओ।” वह उठा और खड़ा हो गया। तब हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मैं तुम से ये पूछता हूं: सबत के दिन नेकी करना रवा है या बदी करना, जान बचाना या हलाक करना?” और हुज़ूर ने उन सब पर नज़र कर के, उस आदमी से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उस ने बढ़ाया और उस का हाथ बिलकुल ठीक हो गया। लेकिन शरीअत के आलिम और फ़रीसी ग़ुस्से के मारे पागल गये और आपस में कहने लगे के हम हुज़ूर ईसा के साथ क्या करें। उन दिनों में ऐसा हुआ के हुज़ूर ईसा दुआ करने के लिये एक पहाड़ पर चले गये और ख़ुदा से दुआ करने में सारी रात गुज़ारी। जब दिन निकला तो, हुज़ूर ने अपने शागिर्दों को पास बुलाया और उन में से बारह को चुन कर, उन्हें रसूलों का लक़ब दिया: शमऊन जिस का नाम उन्होंने पतरस भी रख्खा और उस का भाई अन्द्रियास, और याक़ूब, और यूहन्ना, और फ़िलिप्पुस, और बरतुल्माई, और मत्ती, और तोमा, और हलफ़ई के बेटे याक़ूब, और शमऊन जो ज़ेलोतेस कहलाता था, और याक़ूब का बेटा यहूदाह, और यहूदाह इस्करियोती, जिस ने हुज़ूर ईसा से दग़ाबाज़ी भी की थी। तब हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ नीचे उतर कर मैदान में खड़े हुए। और वहां उन के बहुत से शागिर्द जमा थे और सारे यहूदिया और यरूशलेम और सूर और सैदा के साहिल के इलाक़े से आने वालों का एक बड़ा हुजूम भी वहां मौजूद था, ये लोग हुज़ूर ईसा की तालीम सुनने और अपनी बीमारीयों से शिफ़ा पाने के लिये आये थे। और जो लोग बदरूहों की वजह से दुख और तकलीफ़ में मुब्तिला थे वह भी अच्छे कर दिये गये, और सब आप को छूने की कोशिश करते थे, क्यूंके आप में से क़ुव्वत निकलती थी और सब को शिफ़ा इनायत करती थी। हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों पर नज़र डाली, और फ़रमाया: “मुबारक हैं वह जो दिल के हलीम हैं, और क्यूंके ख़ुदा की बादशाही तुम्हारी है। मुबारक हो तुम जो अभी ख़ुदा के लिये भूके हो, क्यूंके तुम आसूदः होगे। मुबारक हो तुम जो अभी रोते हो, क्यूंके तुम हंसोगे। मुबारक हो तुम जब लोग तुम से नफ़रत रखें, जब तुम्हें अलग कर दें, और तुम्हारी बेइज़्ज़ती करें, और तुम्हारे नाम को बुरा जान कर, इब्न-ए-आदम के सबब से इन्कार कर दें। “उस दिन तुम ख़ुश होना और जश्न मनाना, क्यूंके तुम्हें आसमान पर बड़ा अज्र हासिल होगा। इसलिये के उन के बाप दादा ने उन नबियों को भी इसी तरह सताया था। “मगर अफ़सोस तुम पर जो दौलतमन्द हो, क्यूंके तुम अपनी तसल्ली पा चुके हो। अफ़सोस तुम पर जवाब सेर हो, क्यूंके तुम भूक के शिकार होगे। अफ़सोस तुम पर जवाब हंसते हो, क्यूंके तुम मातम करोगे और रोओगे। अफ़सोस तुम पर जब सब लोग तुम्हें भला कहें, क्यूंके उन के बाप दादा भी झूटे नबियों के साथ ऐसा ही सुलूक किया करते थे। “लेकिन मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं: अपने दुश्मनों से महब्बत रखो, और जो तुम से नफ़रत रखते हैं उन का भला करो, जो तुम पर लानत करें उन के लिये बरकत चाहो, जो तुम्हारे साथ बुरा सुलूक करते हैं उन के लिये दुआ करो। अगर कोई तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो दूसरा भी उस की तरफ़ फेर दे। अगर कोई तेरा चोग़ा ले लेता है तो, उसे कुर्ता लेने से भी मत रोको। जो तुम से कुछ मांगे उसे ज़रूर दो, और अगर कोई तेरा माल ले लेता है तो उस से वापस मत मांग। जैसा तुम चाहते हो के लोग तुम्हारे साथ करें तुम भी उन के साथ वैसा ही करो। “अगर तुम सिर्फ़ उन ही से महब्बत रखते हो तो जो तुम से महब्बत रखते हैं तो, तुम्हारा क्या एहसान है? क्यूंके गुनहगार भी अपने महब्बत करने वालों से महब्बत करते हैं। और अगर तुम उन ही का भला करते जो तुम्हारा भला करते हो, तो तुम्हारा क्या एहसान है? क्यूंके गुनहगार भी ऐसा ही करते हैं। और अगर तुम उसी को क़र्ज़ देते जिस से वसूल कर लेने की उम्मीद है, तो तुम्हारा क्या एहसान है? क्यूंके गुनहगार भी गुनहगारों को क़र्ज़ देते हैं ताके उन से पूरा वसूल कर लें। मगर तुम अपने दुश्मनों से महब्बत रखो, उन का भला करो, क़र्ज़ दो और उस के वसूल पाने की उम्मीद न रखो, तो तुम्हारा अज्र बड़ा होगा और तुम ख़ुदा तआला के बेटे ठहरोगे क्यूंके वह नाशुकरों और बदकारों पर भी मेहरबान है। जैसा रहम दिल तुम्हारा बाप है, तुम भी वैसे ही रहम दिल बनो। “ऐबजोई न करो, तो तुम्हारी भी ऐबजोई न होगी। मुजरिम न ठहराओ तो तुम भी मुजरिम न ठहराये जाओगे। मुआफ़ करोगे, तो तुम भी मुआफ़ी पाओगे। दोगे, तो तुम्हें भी दिया जायेगा। अच्छा पैमाना, दबा-दबा कर, हिला-हिला कर और लबरेज़ कर के तुम्हारे पल्ले में डाला जायेगा क्यूंके जिस पैमाने से तुम नापते, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जायेगा।” उस ने उन से ये तम्सील भी कही: “क्या एक अन्धा दूसरे अन्धे को रास्ता दिखा सकता है? क्या वह दोनों गढ़े में नहीं गिरेंगे? कोई शागिर्द अपने उस्ताद से बड़ा नहीं होता, लेकिन जब पूरी तरह तरबियत पायेगा तो अपने उस्ताद जैसा हो जायेगा। “तुम अपने भाई की आंख का तिनका क्यूं देखते हो जब के तुम्हारी अपनी आंख में शहतीर है जिस का तुम ख़्याल तक नहीं करते? और जब तुम्हारी अपनी ही आंख में शहतीर है जिसे तुम ख़ुद नहीं देख सकते तो किस मुंह से अपने भाई या बहन से कह सकते हो, लाओ, ‘मैं तुम्हारी आंख में से तिनका निकाल दूं,’ ऐ रियाकार! पहले अपनी आंख में से तो शहतीर निकाल, फिर अपने भाई या बहन की आंख में से तिनके को अच्छी तरह देखकर निकाल सकेगा। “क्यूंके जो दरख़्त अच्छा होता है वह बुरा फल नहीं लाता और न ही बुरा दरख़्त अच्छा फल लाता है। हर दरख़्त अपने फल से पहचाना जाता है क्यूंके कांटों वाली झाड़ियों से न तो लोग अन्जीर तोड़ते हैं न झड़बेरी से अंगूर। अच्छा आदमी अपने दिल के अच्छे ख़ज़ाने से अच्छी चीज़ें निकालता है और बुरा आदमी बुरे ख़ज़ाने से बुरी चीज़ें बाहर लाता है क्यूंके जो दिल में भरा होता है वोही उस के मुंह पर आता है। “तुम मुझे, ‘ऐ ख़ुदावन्द, ऐ ख़ुदावन्द,’ क्यूं कहते हो, जब मेरे कहने पर अमल ही नहीं करते? मैं तुम्हें बताता हूं के मेरे पास आने वाला और मेरी बातें सुन कर उन पर अमल करने वाला किस की मानिन्द है। वह उस आदमी की मानिन्द है जिस ने घर बनते वक़्त, ज़मीन को काफ़ी गहराई तक खोदा और घर की बुनियाद चट्टान पर रख्खी। जब सैलाब आया, और पानी की लहरें उस के घर से टकराईं तो उसे हिला न सकीं, क्यूंके वह मज़बूत बना था। लेकिन जो मेरी बातें सुन कर उन पर अमल नहीं करता वह उस आदमी की मानिन्द है जिस ने ज़मीन पर घर को बग़ैर बुनियाद के बनाया। और जब पानी की लहरें उस से टकराईं, तो वह गिर पड़ा और बिलकुल तबाह हो गया।” जब हुज़ूर ईसा लोगों को अपनी सारी बातें सुना चुके, तो कफ़रनहूम में आये। वहां एक रोमी अफ़सर का ख़ादिम बीमार था, वह उसे बहुत अज़ीज़ था, और वह मरने के क़रीब था। उस ने हुज़ूर ईसा के बारे में सुना तो कई यहूदी बुज़ुर्गों को उन के पास भेजा ताके वह हुज़ूर ईसा से दरख़्वास्त करें के वह आकर उस के ख़ादिम को शिफ़ा बख़्शें। वह हुज़ूर ईसा के पास आये, और उन की मिन्नत कर के कहने लगे, “वह शख़्स इस लाइक़ है के आप उस की मदद करें, क्यूंके वह हमारी क़ौम से महब्बत रखता है और हमारी यहूदी इबादतगाह भी उसी ने बनवाई है।” हुज़ूर ईसा उन के साथ चल दिये। अभी वह उस घर से ज़्यादा दूर न थे के उस अफ़सर ने अपने बाज़ दोस्तों के ज़रीये हुज़ूर ईसा को कहलवा भेजा: “ऐ ख़ुदावन्द, तकलीफ़ न कीजिये, मैं इस लाइक़ नहीं के आप मेरी छत के नीचे आयें। इसीलिये मैंने ख़ुद को भी इस लाइक़ नहीं समझा के आप के पास आऊं। आप सिर्फ़ ज़बान से कह दें तो मेरा ख़ादिम शिफ़ा पा जायेगा। क्यूंके मैं ख़ुद भी किसी के इख़्तियार में हूं, और सिपाही मेरे इख़्तियार में हैं। जब मैं एक से कहता हूं, ‘जा,’ तो वह चला जाता है; और दूसरे से ‘आ,’ तो वह आ जाता है और किसी ख़ादिम से कुछ करने को कहूं तो वह करता है।” हुज़ूर ईसा ने ये सुन कर उस पर तअज्जुब किया, और मुड़ कर पीछे आने वाले लोगों से कहा, मैं तुम से कहता हूं, “मैंने इस्राईल में भी इतना बड़ा ईमान नहीं पाया।” जब वह लोग जो हुज़ूर ईसा के पास भेजे गये थे घर वापस आये तो उन्होंने उस ख़ादिम को तनदरुस्त पाया। अगले दिन ऐसा हुआ के, वह नाइन नाम के, एक शहर को गये। उन के शागिर्द और बहुत से लोग भी उन के साथ थे जब वह उस शहर के फाटक के नज़दीक पहुंचा तो एक जनाज़ा बाहर निकल रहा था जो एक बेवा के इकलौते बेटे का था और शहर के बहुत से लोग भी उस बेवा के हमराह थे। जब ख़ुदावन्द ने उस बेवा को देखा तो उन्हें उस पर तरस आया। हुज़ूर ने उस से कहा, “मत रो।” हुज़ूर ने पास आकर जनाज़े को छुआ और कंधा देने वाले ठहर गये। तब आप ने कहा, “ऐ जवान मैं तुझ से कहता हूं, उठ!” वह मुर्दा उठ बैठा और बोलने लगा। और हुज़ूर ईसा ने उसे उस की मां को सौंप दिया। तब सब लोगों पर ख़ौफ़ छा गया और वह ख़ुदा की तम्जीद कर के कहने लगे। “हमारे दरमियान एक बड़ा नबी बरपा हुआ है, और ख़ुदा अपने लोगों की मदद करने आया है।” और इस वाक़िये की ख़बर सारे यहूदिया और आस-पास के तमाम इलाक़े में फैल गई। हज़रत यहया के शागिर्दों ने इन सब बातों की ख़बर उन्हें दी तो, “उन्होंने अपने शागिर्दों में से दो को बुलाया?” और उन्हें ख़ुदावन्द ईसा के पास ये मालूम करने के लिये भेजा, “वह जो आने वाला है आप ही हैं या हम किसी और की राह देखें?” जब दोनों आदमियों ने हुज़ूर ईसा के पास आकर कहा, “पाक-ग़ुस्ल देने वाले हज़रत यहया ने हमें ये कह कर आप के पास भेजा है, ‘क्या जो आने वाला है आप ही हैं या हम किसी और की राह देखें?’ ” उस वक़्त हुज़ूर ईसा ने कई लोगों को बीमारीयों, आफ़तों और बदरूहों से ख़लासी बख़्शी और बहुत से अन्धों को बीनाई अता की। और तब हज़रत यहया के शागिर्दों से कहा: “जो कुछ तुम ने देखा और सुना है जा कर हज़रत यहया को बताओ: अन्धे फिर से देखने लगते हैं, लंगड़े चलने लगते हैं, कोढ़ी पाक साफ़ किये जाते हैं, बहरे सुनने लगते हैं, मुर्दे ज़िन्दा किये जाते हैं और ग़रीबों को ख़ुशख़बरी सुनाई जाती है। मुबारक है वह जो मेरे सबब से ठोकर न खाये।” वहां से हज़रत यहया के क़ासिदों के चले जाने के बाद, हुज़ूर ईसा हज़रत यहया के बारे में हुजूम से कहने लगे: “तुम ब्याबान में क्या देखने गये थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकंडे को? अगर नहीं, तो और क्या देखने गये थे? नफ़ीस कपड़े पहने हुए किसी शख़्स को? जो नफ़ीस कपड़े पहनते हैं और ऐश करते हैं, शाही महलों में रहते हैं। आख़िर तुम क्या देखने गये थे? क्या किसी नबी को? हां, मैं तुम्हें बताता हूं के नबी से भी बड़े को। ये वोही है जिस की बाबत सहीफ़े में लिख्खा है: “ ‘देख, मैं अपना पैग़म्बर तेरे आगे भेज रहा हूं, जो तेरे आगे तेरी राह तय्यार करेगा।’ मैं तुम्हें बताता हूं, के जो औरतों से पैदा हुए हैं उन में हज़रत यहया से बड़ा कोई नहीं; लेकिन जो ख़ुदा की बादशाही में सब से छोटा है वह हज़रत यहया से भी बड़ा है।” (जब लोगों ने और महसूल लेने वालों ने ये बातें सुनीं तो उन्होंने हज़रत यहया का पाक-ग़ुस्ल ले कर ख़ुदा को बरहक़ मान लिया। मगर फ़रीसियों और शरीअत के आलिमों ने हज़रत यहया से पाक-ग़ुस्ल न ले कर अपने निस्बत ख़ुदा के नेक इरादे को ठुकरा दिया।) हुज़ूर ईसा ने ख़िताब जारी रखते हुए फ़रमाया, “मैं इस ज़माने के लोगों को किस से तश्बीह दूं और उन्हें किस की मानिन्द कहूं? वह उन लड़कों की मानिन्द हैं जो बाज़ारों में बैठे हुए एक दूसरे को पुकार कर कहते हैं: “ ‘हम ने तुम्हारे लिये बांसुरी बजाई, और तुम न नाचे; हम ने मर्सिया पढ़ा, और तब भी तुम न रोये।’ हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला न तो रोटी खाता न अंगूरी शीरा पीता आया, और तुम कहते हो, ‘उस में बदरूह है।’ इब्न-ए-आदम खाता पीता आया और तुम कहते हो के देखो, ‘ये खाऊ और शराबी आदमी, महसूल लेने वालों और गुनहगारों का यार है।’ मगर हिक्मत को बरहक़ साबित उस पर अमल करने वाले ही करते हैं।” किसी फ़रीसी ने हुज़ूर ईसा से मिन्नत की के मेरे यहां खाना खायें और वह उस फ़रीसी के घर जा कर दस्तरख़्वान पर बैठ गये। एक बदचलन औरत जो उसी शहर की थी, ये सुन कर के हुज़ूर ईसा उस फ़रीसी के घर में खाना खाने बैठे हैं, संगमरमर के इत्रदान में इत्र लाई। उस ने हुज़ूर ईसा के पांव के पास पीछे खड़ी होकर रोना शुरू कर दिया और वह अपने आंसुओं से उन के पांव भिगोने लगी और अपने सर के बालों से उन्हें पोंछ कर बार-बार उन्हें चूमने लगी और इत्र से उन का मसह करने लगी। जिस फ़रीसी ने उन्हें दावत दी थी उस ने ये देखा, तो दिल ही दिल में कहने लगा, “अगर ये शख़्स नबी होता तो जान लेता के जो उसे छू रही है वह कौन है और कैसी औरत है यानी ये के वह बदचलन है।” हुज़ूर ईसा ने शमऊन से कहा, “शमऊन, मुझे तुझ से कुछ कहना है।” उस ने कहा, “ऐ उस्ताद मुहतरम कहिये।” “किसी साहूकार के दो कर्ज़दार थे। एक ने पांसो दीनार, और दूसरे ने पचास दीनार लिये थे। उन के पास क़र्ज़ अदा करने को कुछ भी न था, लिहाज़ा उस ने दोनों को उन का क़र्ज़ मुआफ़ कर दिया। उन में से कौन उसे ज़्यादा महब्बत करेगा?” शमऊन ने जवाब दिया, “मेरे ख़्याल में वह जिसे उस ने ज़्यादा मुआफ़ किया।” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा के तेरा फ़ैसला सही है। तब हुज़ूर ने औरत की तरफ़ मुड़ कर शमऊन से कहा, “तू इस ख़ातून को देखता है? मैं तेरे घर में दाख़िल हुआ तो, तूने मेरे पांव धोने के लिये पानी न दिया लेकिन इस ख़ातून ने अपने आंसुओं से मेरे पांव भिगो दिये और अपने बालों से उन्हें पोंछा। तूने मुझे बोसा न दिया लेकिन जब से मैं अन्दर आया हूं ये ख़ातून मेरे पांव चूमने से बाज़ नहीं आ रही है। तूने मेरे सर पर तेल न डाला लेकिन इस ख़ातून ने मेरे पांव पर इत्र उंडेला है। इसलिये, मैं तुम से कहता हूं के इस के गुनाह जो बहुत थे बख़्श दिये गये हैं चूंके इस ने बहुत महब्बत ज़ाहिर की लेकिन जिसको थोड़ा मुआफ़ किया गया है वह थोड़ी महब्बत दिखाता है।” तब हुज़ूर ईसा ने उस ख़ातून से कहा, “तेरे गुनाह मुआफ़ हुए।” जो लोग आप के साथ दस्तरख़्वान पर थे ये सुन कर दिल ही दिल में कहने लगे, “ये कौन है जो गुनाह भी मुआफ़ करता है?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने ख़ातून से कहा, “तेरे ईमान ने तुझे बचा लिया है, सलामती के साथ रुख़्सत हो।” इस के बाद, यूं हुआ के हुज़ूर ईसा शहर-ब-शहर और गांव-ब-गांव फिर कर, ख़ुदा की बादशाही की ख़ुशख़बरी सुनाते और मुनादी करते रहे। हुज़ूर ईसा बारह रसूलों के साथ थे, बाज़ औरतें भी साथ थीं जिन्होंने बदरूहों और बीमारीयों से शिफ़ा पाई थी: मसलन मरियम (मगदलीनी) जिस में से सात बदरूहें निकाली गई थीं; और यूआन्ना जो हेरोदेस के दीवान; ख़ूज़ह की बीवी थी, और सूसन्‍ना और कई दूसरी ख़्वातीन जो अपने माल-ओ-अस्बाब से उन की ख़िदमत करती थीं। जब एक बड़ा हुजूम जमा हो गया और हर शहर से लोग हुज़ूर ईसा के पास चले आते थे तो आप ने ये तम्सील सुनाई: “एक बीज बोने वाला बीज बोने निकला। बोते वक़्त कुछ बीज, राह के किनारे, गिरे उसे रौंदा गया और चिड़ियों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ चट्टान पर गिरे और उगते ही सूख गये क्यूंके उन्हें नमी न मिली। कुछ झाड़ियों में गिरे और झाड़ियों के साथ बढ़े लेकिन झाड़ियों ने फैल कर उन्हें बढ़ने से रोक दिया। और कुछ अच्छी ज़मीन पर गिरे और उग गये, और बढ़कर सौ गुना फल लाये।” ये बातें कह कर आप ने पुकारा, “जिस के पास सुनने के कान हों वह सुन ले।” हुज़ूर ईसा के शागिर्दों ने आप से पूछा के इस तम्सील का मतलब क्या है? आप ने फ़रमाया, “तुम्हें तो ख़ुदा की बादशाही के राज़ों को समझने की क़ाबिलीयत दी गई है, लेकिन दूसरे को ये बातें तम्सीलों में बयान की जाती हैं, क्यूंके, “ ‘वह देखते हुए भी कुछ नहीं देखते; और सुनते हुए भी कुछ नहीं समझते।’ “इस तम्सील का मतलब ये है: बीज ख़ुदा का कलाम है। राह के किनारे वाले वह हैं जो सुनते तो हैं लेकिन शैतान आता है और उन के दिलों से कलाम को निकाल ले जाता है, ऐसा न हो के वह ईमान लायें और नजात पायें। चट्टान पर के वह हैं जो कलाम को सुन कर उसे ख़ुशी से क़बूल करते हैं लेकिन कलाम उन में जड़ नहीं पकड़ता। वह कुछ अर्से तक तो अपने ईमान पर क़ाइम रहते हैं लेकिन आज़माइश के वक़्त पसपा हो जाते हैं। और झाड़ियों में गिरने वाले बीज से मुराद वह लोग हैं जो कलाम को सुनते तो हैं लेकिन रफ़्ता-रफ़्ता ज़िन्दगी की फ़िक्रो, दौलत और ऐश-ओ-इशरत में फंस जाते हैं और उन का फल पक नहीं पाता। अच्छी ज़मीन वाले बीज से मुराद वह लोग हैं जो कलाम को सुन कर उसे अपने उम्दा और नेक दिल में, मज़बूती से संभाले रहते हैं, और सब्र से फल लाते हैं। “कोई शख़्स चिराग़ जला कर उसे बर्तन से नहीं छुपाता और न ही चारपाई के नीचे रखता है लेकिन चिराग़दान पर रखता है ताके अन्दर आने वालों को उस की रोशनी दिखाई दे। क्यूंके कोई चीज़ छुपी हुई नहीं जो ज़ाहिर न की जायेगी और न ही कोई ऐसा राज़ है उस का पर्दा फ़ाश न किया जायेगा। लिहाज़ा ख़बरदार रहो के तुम किस तरह सुनते। क्यूंके जिस के पास है उसे और दिया जायेगा; जिस के पास नहीं है, लेकिन वह समझता है के है उस से वह भी ले लिया जायेगा।” फिर ऐसा हुआ के हुज़ूर ईसा की मां और उन के भाई उन के पास आये लेकिन लोगों का इस क़दर हुजूम जमा था के वह उन तक पहुंच न सके। चुनांचे उन्हें ख़बर दी गई के, “आप की मां और आप के भाई बाहर खड़े हैं और हुज़ूर से मिलना चाहते हैं।” लेकिन हुज़ूर ने जवाब में कहा, “मेरी मां और मेरे भाई तो वह हैं जो ख़ुदा का कलाम सुनते हैं और उस पर अमल करते हैं।” एक दिन हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा, “आओ हम झील के उस पार चलें।” चुनांचे वह बड़ी कश्ती में सवार हुए और रवाना हो गये। कश्ती चली जा रही थी के हुज़ूर ईसा को नींद आ गई। अचानक झील पर तूफ़ानी हवा चलने लगी और उन की कश्ती में पानी भरने लगा और वह बड़े ख़तरे में पड़ गये। शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा के पास आकर उन्हें जगाया और कहा, “आक़ा, आक़ा! हम तो डूबे जा रहे हैं!” वह उठे और आप ने हवा और पानी के ज़ोर-ओ-शोर को डांटा; दोनों थम गये और बड़ा अमन गया। तब हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “तुम्हारा ईमान कहां चला गया था?” वह डर गये और हैरत-ज़दा होकर एक दूसरे से कहने लगे, “आख़िर ये आदमी है कौन? जो हवा और पानी को भी हुक्म देता है और वह उस का हुक्म मानते हैं।” वह बड़ी कश्ती के ज़रीये गिरासीनियों, के इलाक़े में पहुंचे जो झील के उस पार गलील के सामने है। जब हुज़ूर ईसा ने किनारे पर क़दम रख्खा तो उन्हें शहर का एक आदमी मिला जिस में बदरूहें थीं। उस ने मुद्दत से कपड़े पहनने छोड़ दिये थे और वह किसी घर में नहीं, बल्के क़ब्रों में रहता था। जब उस ने हुज़ूर ईसा को देखा तो ज़ोर से चीख़ मारी और उन के सामने गिरा, और चिल्ला-चिल्ला कर कहने लगा, “ऐ हुज़ूर ईसा, ख़ुदा तआला के बेटे, आप को मुझ से क्या काम? मैं आप की मिन्नत करता हूं के मुझे अज़ाब में न डालें।” बात ये थी के हुज़ूर ईसा ने बदरूह को उस आदमी में से निकल जाने का हुक्म दिया था। अक्सर बदरूह उस आदमी को बड़ी शिद्दत से पकड़ लेती थी और लोग उसे क़ाबू में रखने के लिये ज़न्जीरों और बेड़ियों से जकड़ देते थे लेकिन वह ज़न्जीरों को तोड़ डालता था और वह बदरूह उसे ब्याबानों में भगाए फिरती थी। हुज़ूर ईसा ने उस से पूछा, “तेरा नाम क्या है?” उस ने कहा, “मेरा नाम लश्कर,” क्यूंके उस में बहुत सी बदरूहें घुसी हुई थीं। बदरूहें उस की मिन्नत करने लगीं के हमें बड़े अथाह गढ़े में जाने का हुक्म न दे। वहां पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा ग़ोल चर रहा था। उन बदरूहों ने हुज़ूर ईसा से इल्तिजा कर के कहा के हमें उन में दाख़िल हो जाने दें, और हुज़ूर ने उन्हें जाने दिया। चुनांचे बदरूहें उस आदमी में से निकल कर सूअरों में दाख़िल हो गईं और उस ग़ोल के सारे सूअर ढलान से झील की तरफ़ लपके और डूब मरे। ये माजरा देखकर सूअर चराने वाले भाग खड़े हुए और उन्होंने शहर और देहात में इस बात की ख़बर पहुंचाई। लोग इस माजरे को देखने निकले और हुज़ूर ईसा के पास आये। जब उन्होंने उस आदमी को जिस में से बदरूहें निकली थीं, कपड़े पहने और होश में हुज़ूर ईसा के पांव के पास बैठे देखा तो ख़ौफ़ज़दा रह गये। इस वाक़िये के देखने वालों ने उन्हें बताया के वह आदमी जिस में बदरूहें थीं किस तरह अच्छा हुआ। चूंके गिरासीनियों के आस-पास के इलाक़े के सारे बाशिन्दे दहशत-ज़दा हो गये थे इसलिये हुज़ूर ईसा से मिन्नत की के आप हमारे पास से चले जायें। लिहाज़ा वह कश्ती में सवार होकर वापस जाने लगे। और उस आदमी ने जिस में से बदरूहें निकली थीं हुज़ूर ईसा की मिन्नत की के मुझे अपने ही साथ रहने दें। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उसे रुख़्सत कर के कहा, “अपने घर लौट जा और लोगों को बता के ख़ुदा ने तेरे लिये क्या कुछ किया है।” चुनांचे वह वहां से चला गया और सारे शहर में उन मेहरबानीयों का जो हुज़ूर ईसा ने उस पर की थीं, चर्चा करने लगा। जब हुज़ूर ईसा वापस आये तो एक बड़ा हुजूम आप के इस्तिक़्बाल को मौजूद था क्यूंके सब लोग उस के मुन्तज़िर थे। मक़ामी यहूदी इबादतगाह का एक रहनुमा जिस का नाम याईर था, आया और हुज़ूर ईसा के क़दमों पर गिरकर उन की मिन्नत करने लगा के वह उस के घर चलें क्यूंके उस की बारह बरस की इकलौती बेटी मौत के बिस्तर पर पड़ी थी। जब वह जा रहा था तो लोग उस पर गिरे पड़ते थे। एक औरत थी जिस के बारह बरस से ख़ून जारी था, वह कई तबीबों से इलाज कराते-कराते अपनी सारी पूंजी लुटा चुकी थी लेकिन किसी के हाथ से शिफ़ा न पा सकी थी। उस ने पीछे से हुज़ूर ईसा के पास आकर उन की पोशाक का किनारा छुआ और उसी वक़्त उस का ख़ून बहन बन्द हो गया। इस पर हुज़ूर ईसा ने कहा, “मुझे किस ने छुआ है?” जब सब इन्कार करने लगे तो पतरस ने कहा, “ऐ आक़ा! लोग एक दूसरे को धकेल-धकेल कर तुझ पर गिरे पड़ते हैं।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने कहा, “किसी ने मुझे ज़रूर छुआ है; क्यूंके मुझे पता है के मुझ में से क़ुव्वत निकली है।” वह औरत ये देखकर के वह हुज़ूर ईसा से छिप नहीं सकती, कांपती हुई सामने आई और उन के क़दमों पर गिरकर सारे लोगों के सामने बताने लगी के उस ने किस ग़रज़ से हुज़ूर ईसा को छुआ था और वह किस तरह छूते ही शिफ़ायाब हो गई थी। हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “बेटी! तुम्हारे ईमान ने तुम्हें शिफ़ा बख़्शी। सलामती के साथ रुख़्सत हो!” वह ये कहने भी न पाये थे के यहूदी इबादतगाह के रहनुमा याईर के घर से किसी ने आकर कहा, “तेरी बेटी मर चुकी है, अब आक़ा को तकलीफ़ न दे।” लेकिन ये सुन कर हुज़ूर ईसा ने याईर से कहा, “डर मत; सिर्फ़ ईमान रख, वह बच जायेगी।” जब वह याईर के घर में दाख़िल हुए तो हुज़ूर ईसा ने पतरस, यूहन्ना और याक़ूब और लड़की के वालिदैन के सिवा किसी और को अन्दर न जाने दिया। सब लोग लड़की के लिये रो पीट रहे थे। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “रोना-पीटना बन्द करो, लड़की मरी नहीं बल्के सो रही है।” इस पर वह हुज़ूर ईसा की हंसी उड़ाने लगे क्यूंके उन्हें मालूम था के लड़की मर चुकी है। लेकिन हुज़ूर ने लड़की का हाथ पकड़ कर कहा, “मेरी बेटी उठ!” उस की रूह लौट आई और वह फ़ौरन उठ बैठी और उन्होंने हुक्म दिया के लड़की को कुछ खाने को दिया जाये। उस लड़की के वालिदैन हैरान रह गये। हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद की के जो कुछ हुआ है उस का ज़िक्र किसी से न करना। हुज़ूर ईसा ने अपने बारह रसूलों को बुलाया और उन्हें क़ुदरत और इख़्तियार बख़्शा के सारी बदरूहों को निकालें और बीमारीयों को दूर करूं। और उन्हें रवाना किया ताके वह ख़ुदा की बादशाही की मुनादी करें और बीमारों को अच्छा करें और उन से कहा: “रास्ते के लिये कुछ न लेना, न लाठी, न थैला, न रोटी, न नक़दी, न दो-दो कुर्ते। तुम जिस घर में दाख़िल हो, उस शहर से रुख़्सत होने तक उसी घर में ठहरे रहना। और जिस शहर में लोग तुम्हें क़बूल न करें तो उस शहर से निकलते वक़्त अपने पांव की गर्द भी झाड़ देना ताके वह उन के ख़िलाफ़ गवाही दे।” पस वह रवाना हुए और गांव-गांव जा कर हर जगह ख़ुशख़बरी सुनाते और मरीज़ों को शिफ़ा देते फिरे। हेरोदेस जो मुल्क के चौथाई हिस्से पर हुकूमत करता था ये बातें सुन कर घबरा गया। क्यूंके बाज़ का कहना था के हज़रत यहया मुर्दों में से जी उठा है, और बाज़ कहते थे के एलियाह ज़ाहिर हुआ है, और बाज़ कहते थे के पुराने नबियों में से कोई नबी ज़िन्दा हो गया है। मगर हेरोदेस ने कहा के, “हज़रत यहया का तो मैंने सर क़लम करवा दिया था। अब ये कौन है जिस के बारे में ऐसी बातें सुनने में आ रही हैं?” और वह हुज़ूर ईसा को देखने की कोशिश में लग गया। रसूल वापस आये और जो कुछ उन्होंने काम किये आकर हुज़ूर ईसा से बयान किया और आप उन्हें साथ ले कर अलग बैतसैदा नाम एक शहर की तरफ़ रवाना हुए। लेकिन लोगों को मालूम हो गया और वह आप का पीछा करने लगे। हुज़ूर ईसा ने ख़ुशी से उन से मुलाक़ात की और उन्हें ख़ुदा की बादशाही की बातें सुनाने लगे और जिन को शिफ़ा की ज़रूरत थी उन्हें शिफ़ा बख़्शी। जब दिन ढलने लगा तो उन बारह रसूलों ने पास आकर आप से कहा, “इन लोगों को रुख़्सत कर दे ताके वह आस-पास के गांव और बस्तीयों में जा सकें और अपने खाने-पीने का इन्तिज़ाम करें, क्यूंके हम तो एक वीरान जगह में हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम ही इन्हें कुछ खाने को दो।” उन्होंने कहा, “हमारे पास पांच रोटियों और दो मछलियों से ज़्यादा कुछ नहीं, जब तक के हम जा कर इन सब के लिये खाना ख़रीद न लायें।” क्यूंके पांच हज़ार के क़रीब मर्द वहां मौजूद थे। लेकिन उस ने अपने शागिर्दों से कहा, “इन लोगों को पचास-पचास की क़तारों में बैठा दो।” चुनांचे उन्होंने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया। हुज़ूर ईसा ने वह पांच रोटियां और दो मछलियां लीं और आसमान की तरफ़ नज़र उठाकर, उन पर बरकत मांगी फिर आप ने उन रोटियों के टुकड़े तोड़ कर शागिर्दों को दिये ताके वह उन्हें लोगों में तक़्सीम कर दीं। सब लोग खाकर सेर हो गये और बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियां भर कर उठाई गईं। एक दफ़ा हुज़ूर ईसा तन्हाई में दुआ कर रहे थे और उन के शागिर्द उन के पास थे, आप ने उन से पूछा, “लोग मेरे बारे में, क्या कहते हैं के मैं कौन हूं?” उन्होंने जवाब दिया, “कुछ हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला; लेकिन बाज़ एलियाह और बाज़ का ख़्याल है के पुराने नबियों में से कोई नबी जी उठा है।” तब आप ने उन से पूछा, “तुम मुझे क्या कहते हो? मैं कौन हूं?” पतरस ने जवाब दिया, “आप ख़ुदा के अलमसीह हैं।” इस पर हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद कर के हुक्म दिया के ये बात किसी से न कहना। और ये भी कहा, “इब्न-ए-आदम को कई तकालीफ़ का सामना करना पड़ेगा। वह बुज़ुर्गों, अहम-काहिनों और फ़क़ीहों की जानिब से रद्द कर दिया जायेगा, वह उसे क़त्ल कर डालेंगे लेकिन वह तीसरे दिन ज़िन्दा हो जायेगा।” फिर हुज़ूर ईसा ने उन सब से कहा: “अगर कोई मेरी पैरवी करना चाहे तो वह अपनी ख़ुदी का इन्कार करे और रोज़ाना अपनी सलीब उठाये और मेरे पीछे हो ले। क्यूंके जो कोई अपनी जान को बाक़ी रखना चाहता है वह उसे खोयेगा लेकिन जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खोयेगा वह उसे महफ़ूज़ रखेगा। आदमी अगर सारी दुनिया हासिल कर ले मगर अपना नुक़्सान कर ले या ख़ुद को खो बैठे तो क्या फ़ायदा? क्यूंके जो कोई मुझ से और मेरे कलाम से शरमाएगा तो इब्न-ए-आदम भी जब वह अपने, और बाप के जलाल में मुक़द्दस फ़रिश्तों के साथ आयेगा तो उस से शरमाएगा। “लेकिन मैं तुम से सच कहता हूं के बाज़ लोग जो यहां खड़े हैं, जब तक वह ख़ुदा की बादशाही को देख न लेंगे, मौत का मज़ा न चखने पायेंगे।” इन बातों के तक़रीबन आठ दिन बाद ऐसा हुआ के हुज़ूर ईसा, पतरस, यूहन्ना और याक़ूब को साथ ले कर एक पहाड़ पर दुआ करने की ग़रज़ से गये। और जब वह दुआ कर रहे थे तो उन की सूरत बदल गई और उन की पोशाक सफ़ैद होकर बिजली की मानिन्द चमकने लगी। और देखो दो आदमी हुज़ूर ईसा से बातें कर रहे थे। ये हज़रत मूसा और हज़रत एलियाह थे। जो जलाल में ज़ाहिर होकर हुज़ूर ईसा के आसमान पर उठाये जाने का ज़िक्र कर रहे थे जो यरूशलेम में वाक़े होने वाला था। लेकिन पतरस और इस के साथियों की आंखें नींद से भारी हो रही थीं। जब वह जागे तो उन्होंने हुज़ूर ईसा का जलाल देखा और उन दो आदमियों पर भी उन की नज़र पड़ी जो उन के साथ खड़े थे। जब वह हुज़ूर ईसा के पास से जाने लगे तो पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आक़ा! हमारा यहां रहना अच्छा है। क्यूं न हम यहां तीन डेरे खड़े करें, एक आप के लिये, एक हज़रत मूसा और एक हज़रत एलियाह के लिये।” (उसे पता न था के वह क्या कह रहा है।) वह ये कह ही रहा था के, एक बदली उन पर छा गई, और वह उस में घिर गये और ख़ौफ़ज़दा हो गये। तब उस बदली में से आवाज़ आई के, “ये मेरा प्यारा बेटा है, जिसे मैंने चुन लिया है; तुम उस की सुनो।” और आवाज़ आने के बाद, हुज़ूर ईसा तन्हा दिखाई दिये। शागिर्दों ने ये बात अपने तक ही रख्खी और उन दिनों जो कुछ देखा था उस का ज़िक्र किसी से न किया। अगले दिन ऐसा हुआ के जब वो पहाड़ से नीचे आये तो लोगों का एक बड़ा हुजूम उन से मिला। एक आदमी ने उस हुजूम में से चिल्ला कर कहा, “ऐ उस्ताद, मैं आप की मिन्नत करता हूं के मेरे बेटे पर नज़र कर, वह मेरा इकलौता बेटा है। एक बदरूह उसे क़ब्ज़े में ले लेती है और वह यकायक चिल्लाने लगता है; और उस को ऐसा मरोड़ती है के उस के मुंह से झाग निकलने लगता है। बदरूह उसे ज़ख़़्मी कर के मुश्किल से छोड़ती है। मैंने आप के शागिर्दों से इल्तिजा की थी के वह बदरूह को निकाल दें, लेकिन वह नहीं निकाल सके।” हुज़ूर ईसा ने जवाब में कहा, “ऐ बेएतक़ाद और गुमराह लोगो, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा और तुम्हारी बर्दाश्त करता रहूंगा? अपने बेटे को यहां ले आओ।” अभी वह लड़का आ ही रहा था के, बदरूह ने उसे मरोड़ कर ज़मीन पर दे पटका। लेकिन हुज़ूर ईसा ने बदरूह को झिड़का और लड़के को शिफ़ा बख़्शी और उसे उस के बाप के हवाले कर दिया। और सब लोग ख़ुदा की क़ुदरत देखकर हैरान रह गये। जब सब लोग उन कामों पर जो हुज़ूर ईसा करते थे तअज्जुब का इज़हार कर रहे थे तो हुज़ूर ने अपने शागिर्दों से कहा, “मेरी इन बातों को कानों में डाल लो क्यूंके: इब्न-ए-आदम आदमियों के हवाले किया जायेगा।” लेकिन वह इस बात का मतलब न समझ सके। क्यूंके वह उन से पोशीदा रख्खी गई थी ताके वह उसे समझ न सकें; और वह इस के बारे में उन से पूछने से भी डरते थे। फिर शागिर्दों में ये बहस छिड़ गई के हम में सब से बड़ा कौन है? हुज़ूर ईसा ने उन के दिल की बात मालूम कर के, एक बच्चे को लिया और उसे अपने पास खड़ा किया। और अपने शागिर्दों से कहा, “जो कोई इस बच्चे को मेरे नाम पर क़बूल करता है वह मुझे क़बूल करता है; और जो मुझे क़बूल करता है वह मेरे भेजने वाले को क़बूल करता है। क्यूंके जो तुम में सब से छोटा है वोही सब से बड़ा है।” तब यूहन्ना ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ आक़ा! हम ने एक शख़्स को आप के नाम से बदरूहें निकालते देखा तो उसे मना किया क्यूंके वह हम में से एक नहीं है।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “उसे मना न करना क्यूंके जो तुम्हारे ख़िलाफ़ नहीं वह तुम्हारी तरफ़ है।” जब हुज़ूर ईसा के आसमान पर उठाये जाने के दिन नज़दीक आ गये तो, आप ने पुख़्ता इरादे के साथ यरूशलेम का रुख़ किया। और अपने आगे क़ासिद रवाना कर दिये, ये क़ासिद गये और सामरियों के एक गांव में दाख़िल हुए ताके हुज़ूर ईसा के आने की तय्यारी करें; लेकिन वहां के लोगों ने उन का इस्तिक़्बाल न किया, क्यूंके हुज़ूर ईसा यरूशलेम जा रहे थे। ये देखकर आप के शागिर्द याक़ूब और यूहन्ना कहने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, आप हुक्म दें तो हम आसमान से आग नाज़िल करवा कर इन लोगों को भस्म कर दें?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर देखा और उन्हें झिड़का। तब वह किसी दूसरे गांव की तरफ़ रवाना हो गये। जब वह रास्ते में चले जा रहे थे तो, किसी ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आप जहां भी जायेंगे मैं आप की पैरवी करूंगा।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “लोमड़ियों के भी भट और हवा के परिन्दों के घोंसले होते हैं, लेकिन इब्न-ए-आदम के लिये कोई जगह नहीं जहां वह अपना सर भी रख सके।” फिर हुज़ूर ने एक और से कहा, “मेरे पीछे हो ले।” लेकिन उस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, पहले मुझे इजाज़त दें के मैं जा कर अपने बाप को दफ़न कर लूं।” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “मुर्दों को अपने मुर्दे दफ़न करने दें, लेकिन आप जायें और ख़ुदा की बादशाही की मुनादी करें।” एक और शख़्स ने कहा, “ख़ुदावन्द, मैं आप के पीछे चलूंगा; लेकिन पहले मुझे इजाज़त दें के मैं अपने घर वालों से रुख़्सत हो आऊं।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “जो कोई हल पर हाथ रखकर पीछे की तरफ़ देखता है वह ख़ुदा की बादशाही में ख़िदमत के लाइक़ नहीं।” इस के बाद ख़ुदावन्द ने बहत्तर शागिर्द और मुक़र्रर किये और उन्हें दो-दो कर के अपने से पहले उन शहरों और क़स्बों में रवाना किया जहां वह ख़ुद जाने वाले थे। और आप ने उन से कहा, “फ़सल तो बहुत है, लेकिन मज़दूर कम हैं। इसलिये फ़सल के ख़ुदावन्द से इल्तिजा करो के, वह अपनी फ़सल काटने के लिये मज़दूर भेज दे। जाओ! देखो मैं तुम्हें गोया बर्रों को भेड़ियों के दरमियान भेज रहा हूं। अपने साथ बटवा न ले जाना न थैली न जूते; और न किसी को राह में सलाम करना। “जब किसी घर में दाख़िल हो तो, पहले कहो के, ‘इस घर की सलामती हो।’ अगर वहां कोई सलामती का फ़र्ज़न्द होगा तो, तुम्हारा सलाम उस पर ठहरेगा; वर्ना, तुम्हारे पास लौट आयेगा। उसी घर में ठहरे रहो, और जो कुछ उन से मिले घर वालों के साथ खाओ और पियो, क्यूंके मज़दूर अपनी मज़दूरी का हक़्दार है। घर बदलते न रहना। “जिस शहर में तुम दाख़िल हो और उस शहर वाले तुम्हें क़बूल करें, तो जो कुछ तुम्हारे सामने रख्खा जाये उसे खाओ। वहां के बीमारों को शिफ़ा दो और बताओ के, ‘ख़ुदा की बादशाही तुम्हारे नज़दीक आ गई है।’ और अगर तुम किसी ऐसे शहर में क़दम रखते जहां के लोग तुम्हें क़बूल नहीं करते तो, उस शहर की गलीयों में जा कर कहो के, ‘हम तुम्हारे शहर की गर्द को भी जो हमारे पांव में लगी हुई है इसे एक इन्तिबाह के तौर पर तुम्हारे सामने झाड़ देते हैं। मगर ये याद रखो: ख़ुदा की बादशाही तुम्हारे नज़दीक आ गई है।’ मैं तुम से कहता हूं के, इन्साफ़ के दिन सदूम का हाल उस शहर के हाल से ज़्यादा क़ाबिल-ए-बर्दाश्त होगा। “ऐ ख़ुराज़ीन! तुझ पर अफ़सोस, ऐ बैतसैदा! तुझ पर अफ़सोस, क्यूंके जो मोजिज़े तुम्हारे दरमियान दिखाये गये अगर सूर और सैदा में दिखाये जाते, तो वह टाट ओढ़ कर और सर पर राख डाल कर कब के तौबा कर चुके होते। लेकिन अदालत के दिन सूर और सैदा का हाल तुम्हारे हाल से ज़्यादा क़ाबिल-ए-बर्दाश्त होगा। और तू ऐ कफ़रनहूम, क्या तू आसमान तक बुलन्द किया जायेगा? हरगिज़ नहीं, बल्के तू आलमे-अर्वाह में उतार दिया जायेगा। “जो तुम्हारी सुनता है वह मेरी सुनता है; जो तुम्हारी बेहुरमती करता है वह मेरी बेहुरमती करता है; लेकिन जो मेरी बेहुरमती करता है वह मेरे भेजने वाले की बेहुरमती करता है।” और वह बहत्तर शागिर्द ख़ुशी के साथ वापस आये और कहने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द! आप के नाम से तो बदरूहें भी हमारा हुक्म मानती हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “मैंने शैतान को बिजली की तरह आसमान से गिरते हुए देख रहा था। देखो, मैंने तुम्हें सांपों और बिच्छूओं को कुचलने का इख़्तियार दिया है और दुश्मन की सारी क़ुव्वत पर ग़लबा अता किया है; और तुम्हें किसी से भी नुक़्सान न पहुंचेगा। तो भी, इस बात से ख़ुश न हो के रूहें तुम्हारा हुक्म मानती हैं, बल्के इस बात से ख़ुश हो के तुम्हारे नाम आसमान पर लिखे हुए हैं।” उसी घड़ी हुज़ूर ईसा ने, पाक रूह की ख़ुशी से मामूर होकर फ़रमाया, “ऐ बाप! आसमान और ज़मीन के ख़ुदावन्द! मैं आप की हम्द करता हूं के आप ने ये बातें आलिमों और दानिश्वरों से पोशीदा रख्खीं, और बच्चों पर ज़ाहिर कीं। हां, ऐ बाप! क्यूंके आप की ख़ुशी इसी में थी। “सारी चीज़ें मेरे बाप की जानिब से मेरे सुपुर्द कर दी गई हैं। और सिवा बाप के कोई नहीं जानता के बेटा कौन है, और सिवा बेटे के कोई नहीं जानता के बाप कौन है और सिवाए उस शख़्स के जिस पर बेटा बाप को ज़ाहिर करने का इरादा करे।” तब वह अपने शागिर्दों की तरफ़ मुख़ातिब हुए और सिर्फ़ उन ही से कहने लगे, “मुबारक हैं वह आंखें जो ये बातें देखती हैं जिन्हें तुम देखते हो। क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के बहुत से नबियों और बादशाहों की ख़ाहिश थी के ये बातें देखें जो तुम देखते हो, मगर न देख पाये, और ये बातें सुनीं जो तुम सुनते हो मगर न सुन पाये।” तब एक शरीअत का आलिम उठा और हुज़ूर ईसा को आज़माने की ग़रज़ से कहने लगा। ऐ उस्ताद, “मुझे अब्दी ज़िन्दगी का वारिस बनने के लिये क्या करना होगा?” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “शरीअत में क्या लिख्खा है? तुम उसे किस तरह पढ़ते हो?” उस ने जवाब दिया, “ ‘ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा से अपने सारे दिल और अपनी सारी जान और अपनी सारी ताक़त और अपनी सारी अक़्ल से महब्बत रखो।’ और ‘अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखना।’ ” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “तूने ठीक जवाब दिया है। यही कर तो तू ज़िन्दा रहेगा।” मगर उस ने अपनी रास्तबाज़ी जताने की ग़रज़ से, हुज़ूर ईसा से पूछा, “मेरा पड़ोसी कौन है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब में कहा: “एक आदमी यरूशलेम से यरीहू जा रहा था के डाकूओं के हाथों में जा पड़ा। उन्होंने उस के कपड़े उतार लिये, उसे मारा पीटा और ज़ख़़्मी कर दिया और अध मुआ छोड़कर चले गये। इत्तिफ़ाक़न एक काहिन उस राह से जा रहा था, उस ने ज़ख़़्मी को देखा, मगर कतरा कर चला गया। इसी तरह, एक लावी, भी इधर आ निकला और उसे देखकर, कतरा कर चला गया। फिर एक सामरी, जो सफ़र कर रहा था, वहां आ निकला; ज़ख़़्मी को देखकर उसे बड़ा तरस आया। वह उस के पास गया और उस के ज़ख़्मों पर तेल और अंगूरी शीरा लगा कर उन्हें बांधा और ज़ख़़्मी को अपने गधे पर बिठा कर सराय में ले गया और उस की तीमारदारी की। अगले दिन उस ने दो दीनार निकाल कर सराय के रखवाले को दिये और कहा, ‘इस की देख-भाल करना, और अगर ख़र्चा ज़्यादा हुआ तो, मैं वापसी पर अदा कर दूंगा।’ “तुम्हारी नज़र में इन तीनों में से कौन उस शख़्स का जो डाकूओं के हाथों में जा पड़ा था, पड़ोसी साबित हुआ?” शरीअत के आलिम ने जवाब दिया, “वह जिस ने उस के साथ हमदर्दी की।” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “जा तू भी ऐसा ही कर।” हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्द चलते-चलते एक गांव में पहुंचे, वहां मर्था नाम की एक औरत ने आप के लिये अपने घर को खोला। उस की एक बहन भी थी जिस का नाम मरियम था, वह ख़ुदावन्द के क़दमों के पास बैठ कर उन की बातें सुन रही थी। लेकिन मर्था काम की ज़्यादती की वजह से घबरा गई और हुज़ूर ईसा के पास आकर कहने लगी, “ख़ुदावन्द! क्या ये सही है के मेरी बहन ख़िदमत करने में हाथ बटाने के बजाय यहां पर बैठी है और मुझे अकेला छोड़ दिया है? उस से कहिये के मेरी मदद करे!” ख़ुदावन्द ने जवाब में उस से कहा, “मर्था! मर्था! तू बहुत सी चीज़ों के बारे में फ़िक्रमन्द और परेशान हो रही है। हालांके एक ही चीज़ है जिस के बारे में फ़िक्र करने की ज़रूरत है। और मरियम ने वह उम्दा हिस्सा चुन लिया है जो उस से कभी छीन न जायेगा।” एक दिन हुज़ूर ईसा किसी जगह दुआ कर रहे थे। जब वह दुआ कर चुके तो उन के शागिर्दों में से एक ने कहा, “ख़ुदावन्द, जैसे हज़रत यहया ने अपने शागिर्दों को दुआ करना सिखाया, आप हमें भी सिखायें।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “जब तुम दुआ करो, तो कहो: “ ‘ऐ हमारे आसमानी बाप, आप का नाम पाक मान जाये, आप की बादशाही आये। हमारी रोज़ की रोटी हर दिन हमें अता फ़रमा। और हमारे गुनाहों को मुआफ़ कर, क्यूंके हम भी अपने हर क़ुसूरवार को मुआफ़ करते हैं। और हमें आज़माइश में न पड़ने दें।’ ” फिर हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “फ़र्ज़ करो के तुम में से किसी का एक दोस्त है, वह आधी रात को उस के पास जा कर कहता है के, ‘ऐ दोस्त, मेहरबानी कर के मुझे तीन रोटियां दे; क्यूंके मेरा एक दोस्त सफ़र कर के मेरे पास आया है और मेरे पास कुछ भी नहीं के उस की ख़ातिर तवाज़ो कर सकूं।’ और फ़र्ज़ करो के वह अन्दर से जवाब मैं कहता है, ‘मुझे तकलीफ़ न दे, दरवाज़ा बन्द हो चुका है और मैं और मेरे बाल बचे बिस्तर में हैं, मैं उठ कर तुझे दे नहीं सकता।’ मैं तुम से कहता हूं के अगरचे वह उस का दोस्त होने के बावुजूद भी उठ कर रोटी न भी देगा तो भी उस के बार-बार इसरार करने के बाइस ज़रूर उठेगा और जितनी रोटियों की उसे ज़रूरत है, देगा। “पस मैं तुम से कहता हूं: मांगो तो तुम्हें दिया जायेगा; ढूंडोगे तो पाओगे; दरवाज़ा खटखटाओगे, तो तुम्हारे लिये खोला जायेगा। क्यूंके जो मांगता है उसे मिलता है, जो ढूंडता है वह पाता है और जो खटखटाता है उस के लिये दरवाज़ा खोला जायेगा। “तुम में से ऐसा कौन सा बाप है के जब उस का बेटा मछली मांगे तो उसे मछली नहीं, बल्के सांप दे? या अन्डा मांगे तो उसे बिच्छू थमा दे। पस जब तुम बुरे होने के बावुजूद भी अपने बच्चों को अच्छी चीज़ें देना जानते हो, तो क्या तुम्हारा आसमानी बाप उन्हें जो उस से मांगते हैं, पाक रूह इफ़रात से अता न फ़रमायेगा!” एक दफ़ा हुज़ूर ईसा एक गूंगे शख़्स में से बदरूह को निकाल रहे थे और जब बदरूह निकल गई तो गूंगा बोलने लगा और लोग तअज्जुब करने लगे। लेकिन उन में से बाज़ ने कहा, वह बदरूहों के रहनुमा, “बालज़बूल, की मदद से बदरूहों को निकालता है।” बाज़ उन्हें आज़माने की ग़रज़ से उन से कोई आसमानी निशान तलब करने लगे। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन के ख़्यालात जान कर उन से कहा: “जिस हुकूमत में फूट पड़ जाती है वह वीरान हो जाती है और जिस घर में फूट पड़ जाती है वह क़ाइम नहीं रह सकता। और अगर शैतान अपनी ही मुख़ालफ़त करने लगे तो उस की हुकूमत कैसे क़ाइम रह सकती है? फिर भी तुम कहते हो के मैं बालज़बूल, की मदद से बदरूहों को निकालता हूं। अगर मैं बालज़बूल की मदद से बदरूहों को निकालता हूं तो तुम्हारे शागिर्द उन्हें किस की मदद से निकालते हैं? पस वोही तुम्हारे मुन्सिफ़ होंगे। लेकिन अगर मैं ख़ुदा की क़ुदरत से बदरूहों को निकालता हूं तो ख़ुदा की बादशाही तुम्हारे दरमियान आ पहुंची। “जब तक कोई ज़ोरआवर आदमी हथियारों से लैस कर अपने घर की हिफ़ाज़त करता है तो उस का माल-ओ-अस्बाब महफ़ूज़ रहता है। लेकिन जब उस से भी ज़्यादा ज़ोरआवर आदमी उस पर हमला कर के उसे मग़्लूब कर लेता है तो उस के सारे हथियार जिन पर उस का भरोसा था छीन लेता है और उस का सारा माल-ओ-अस्बाब लूट कर बांट देता है। “जो मेरे साथ नहीं वह मेरा मुख़ालिफ़ है और जो मेरे साथ जमा नहीं करता, वह बिखेरता है। “जब किसी आदमी में से बदरूह निकल जाती है तो वह सूखे मक़ामों में जा कर आराम ढूंडती है और जब नहीं पाती तो कहती है, ‘मैं अपने उसी घर में फिर वापस चली जाऊंगी जहां से मैं निकली थी।’ और वापस आकर उसे साफ़ सुथरा और आरास्ता पाती है। तब वह जा कर अपने से भी बद्तर सात और बदरूहों को साथ ले आती है और वह अन्दर जा कर उस में रहने लगती हैं और उस आदमी की आख़िरी हालत पहले से भी ज़्यादा बुरी हो जाती है।” हुज़ूर ईसा जब ये बातें कह रहे थे तभी हुजूम में से एक औरत ने ऊंची आवाज़ में आप से कहा, “मुबारक है वह पेट जिस से आप पैदा हुए और मुबारक हैं वह छातियों जिन्होंने आप को दूध पिलाया।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो लोग ख़ुदा का कलाम सुनते और उस पर अमल करते हैं वह ज़्यादा मुबारक हैं।” जब हुजूम ज़्यादा बढ़ने लगा तो हुज़ूर ईसा ने कहा, “इस ज़माने के लोग बुरे हैं जो मुझ से निशान तलब करते हैं मगर हज़रत यूनुस के निशान के सिवा कोई और निशान उन्हें नहीं दिया जायेगा। क्यूंके जिस तरह यूनुस नीनवे के बाशिन्दों के लिये निशान ठहरे उसी तरह इब्न-ए-आदम भी इस ज़माने के लोगों के लिये निशान ठहरेगा। जुनूब की मलिका अदालत के दिन इस ज़माने के लोगों के साथ खड़ी होकर उन्हें मुजरिम ठहरायेगी क्यूंके वह बड़ी दूर से हज़रत सुलैमान की हिक्मत सुनने के लिये आई थी और देखो यहां हज़रत सुलैमान से भी बड़ा मौजूद है। नीनवे के लोग अदालत के दिन इस ज़माने के लोगों के साथ खड़े कर उन्हें मुजरिम ठहरायेंगे, इसलिये के उन्होंने हज़रत यूनुस की मुनादी की वजह से तौबा कर ली थी और देखो! यहां वह मौजूद है जो यूनुस से भी बड़ा है। “कोई शख़्स चिराग़ जला कर तहख़ाने या पैमाने के नीचे नहीं लेकिन चिराग़दान पर रखता है ताके अन्दर आने वालों को रोशनी दिखाई दे। तेरे बदन का चिराग़ तेरी आंख है। जब तेरी आंख सालिम है तो तेरा पूरा बदन भी रोशन है; अगर ख़राब है तो तेरा बदन भी तारीक है। ख़बरदार, कहीं ऐसा नाके जो रोशनी तुझ में है वह तारीकी बन जाये। पस अगर तेरा सारा बदन रोशन और कोई हिस्सा तारीक न रहे तो वह सारे का सारा ऐसा रोशन होगा जैसे किसी चिराग़ ने अपनी चमक से तुझे रोशन कर दिया है।” हुज़ूर ईसा जब अपनी बात पूरी कर चुके तो किसी फ़रीसी ने हुज़ूर ईसा को अपने साथ खाने की मिन्नत की। हुज़ूर ईसा उस के घर में दाख़िल हुए और दस्तरख़्वान पर बैठ गये। फ़रीसी ने ये देखकर तअज्जुब किया के वह बग़ैर हाथ धोए खाना खाने बैठ गये। इस पर ख़ुदावन्द ने उस से कहा, “ऐ फ़रीसियों! तुम प्याले और रकाबी को बाहर से तो साफ़ करते हो, मगर तुम्हारे अन्दर लूट और बदी भरी पड़ी है। ऐ नादानो! क्या जिस ने बाहर वाले हिस्से को बनाया उस ने अन्दर वाले हिस्से को नहीं बनाया? चुनांचे जो कुछ तुम्हारे अन्दर है उसे ग़रीबों को दे दो, तो सब कुछ तुम्हारे लिये पाक साफ़ हो जायेगा। “मगर ऐ फ़रीसियों, तुम पर अफ़सोस, तुम पोदीना, सदाब और सब्ज़ी तरकारी का दसवां हिस्सा ख़ुदा को देते हो लेकिन दूसरी तरफ़ इन्साफ़ करने से और ख़ुदा की महब्बत से ग़ाफ़िल रहते हो। लाज़िम तो ये था के तुम पहले वाले को बग़ैर छोड़े पूरा करते और बाद वाले को भी अमल में लाते। “ऐ फ़रीसियों, तुम पर अफ़सोस, क्यूंके तुम यहूदी इबादतगाहों में आला दर्जे की कुर्सियां और बाज़ारों में लोगों से एहतिरामन सलाम पाना पसन्द करते हो। “तुम पर अफ़सोस, तुम उन पोशीदा क़ब्रों की तरह हो जिन पर से लोग अनजाने में पांव रखते हुए गुज़र जाते हैं।” तब शरीअत के आलिमों में से एक ने उन्हें जवाब में कहा, “ऐ उस्ताद, ये बातें कह कर, आप हमारी तौहीन करते हैं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ शरीअत के आलिमों, तुम पर भी अफ़सोस क्यूंके तुम आदमियों पर ऐसे बोझ लादते हो जिन्हें उठाना बेहद मुश्किल होता है और तुम ख़ुद अपनी एक उंगली भी उन की मदद के वास्ते नहीं उठाते। “तुम पर अफ़सोस, तुम तो नबियों की मज़ार तामीर करते जिन्हें तुम्हारे बाप दादा ने हलाक किया था। पस तुम गवाह हो के तुम अपने बाप दादा के कामों की पूरी ताईद करते क्यूंके उन्होंने तो नबियों को क़त्ल किया और तुम उन नबियों की मज़ार तामीर करते। इसलिये ख़ुदा की हिक्मत ने फ़रमाया, ‘मैं नबियों और रसूलों को उन के पास भेजूंगी। वह उन में से बाज़ को क़त्ल कर डालेंगे और बाज़ को सतायेंगे।’ पस ये मौजूदा नस्ल सारे नबियों के उस ख़ून की जो दुनिया के शुरू से बहाया गया है, ज़िम्मेदार ठहराई जायेगी। हाबिल के ख़ून से ले कर ज़करियाह के ख़ून तक जिसे क़ुर्बानगाह और पाक-मक़्दिस के दरमियान क़त्ल किया गया था। हां! मैं कहता हूं के ये नस्ल ही उन के ख़ून की ज़िम्मेदार ठहराई जायेगी। “ऐ शरीअत के आलिमों तुम पर अफ़सोस, तुम ने इल्म की कुन्जी छीन ली, तुम ख़ुद भी दाख़िल न हुए और जो दाख़िल हो रहे थे उन्हें भी रोक दिया।” जब वह वहां से बाहर निकला तो शरीअत के आलिम और फ़रीसी सख़्त मुख़ालिफ़ हो गये और निहायत ग़ुस्से में चारों जानिब से मुख़्तलिफ़ सवालात करने लगे, ताके उन्हें उन के मुंह से निकली हुई किसी बात में पकड़ लें। इसी दौरान हज़ारों आदमियों का मज्मा लग गया, और जब वह एक दूसरे पर गिरे पड़ रहे थे, तो हुज़ूर ईसा ने सब से पहले अपने शागिर्दों, से मुख़ातिब होकर फ़रमाया: “फ़रीसियों के ख़मीर यानी उन की रियाकारी से ख़बरदार रहना। कोई चीज़ ढकी हुई नहीं जो ज़ाहिर न की जायेगी और न ही कोई चीज़ छुपी हुई है जो जानी न जायेगी। इसलिये जो बातें तुम ने अन्धेरे में कही हैं वह रोशनी में सुनी जायेंगी और जो कुछ तुम ने कोठरियों में किसी के कान में कहा है, उस का एलान छतों पर से किया जायेगा। “दोस्तों, मैं तुम से कहता हूं के उन से मत डरो जो बदन को तो हलाक कर सकते हैं और उस के बाद और कुछ नहीं कर सकते। लेकिन मैं तुम्हें जताये देता हूं के किस से डरना चाहिये: उस से, जिसे बदन को हलाक करने, के बाद उसे जहन्नुम में डाल देने का इख़्तियार है। हां, मैं तुम से कहता हूं, उसी से डरो। अगरचे दो सिक्‍को में पांच गौरय्यां नहीं बिकतीं लेकिन ख़ुदा उन में से किसी को भी फ़रामोश नहीं करता। यक़ीनन, तुम्हारे सर के सभी बाल भी गिने हुए हैं। लिहाज़ा डरो मत; तुम्हारी क़ीमत तो बहुत सी गौरय्यों से भी ज़्यादा है। “मैं तुम्हें बताता हूं के जो कोई लोगों के सामने मेरा इक़रार करता है, इब्न-ए-आदम भी ख़ुदा के फ़रिश्तों के रूबरू उस का इक़रार करेगा। लेकिन जो कोई आदमियों के सामने मेरा इन्कार करता है, उस का इन्कार ख़ुदा के फ़रिश्तों के रूबरू किया जायेगा। अगर कोई इब्न-ए-आदम के ख़िलाफ़ कुछ कहेगा तो, उसे मुआफ़ कर दिया जायेगा लेकिन जो पाक रूह के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकेगा वह हरगिज़ न बख़्शा जायेगा। “जब वह तुम्हें यहूदी इबादतगाहों में हुक्काम और बाइख़्तियार अश्ख़ास के हुज़ूर में ले जायें तो फ़िक्र मत करना के हम क्या कहें और क्यूं और कैसे जवाब दें। क्यूंके पाक रूह ऐन वक़्त पर तुम्हें सिखा देगा के तुम्हें क्या कहना है।” हुजूम में से किसी ने उन से कहा, “ऐ उस्ताद, मेरे भाई को हुक्म दे के वह मीरास में से मेरा हिस्सा मेरे हवाले कर दे।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ऐ इन्सान, किस ने मुझे तुम्हारा मुन्सिफ़ या सालिसी मुक़र्रर किया है?” और हुज़ूर ने उन से कहा, “ख़बरदार! हर तरह के लालच से दूर रहो; किसी की ज़िन्दगी का इन्हिसार उस के माल-ओ-दौलत की कसरत पर नहीं है।” तब आप ने उन्हें ये तम्सील सुनाई: “किसी दौलतमन्द की ज़मीन में बड़ी फ़सल हुई। और वह दिल ही दिल में सोच कर कहने लगा, ‘मैं क्या करूं? मेरे पास जगह नहीं है जहां मैं अपनी पैदावार जमा कर सकूं।’ “फिर उस ने कहा, ‘मैं एक काम करूंगा के अपने खत्ते ढा कर नये और बड़े खत्ते बनाऊंगा और उस में अपना तमाम अनाज और माल-ओ-अस्बाब भर दूंगा। फिर अपनी जान से कहूंगा, “ऐ जान तेरे पास कई बरसों के लिये माल जमा है। आराम से रह, खा पी और ऐश कर।” ’  “मगर ख़ुदा ने उस से कहा, ‘ऐ नादान! इसी रात तेरी जान तुझ से तलब कर ली जायेगी। पस जो कुछ तूने जमा किया है वह किस के काम आयेगा?’ “चुनांचे जो अपने लिये तू ख़ज़ाना जमा करता है लेकिन ख़ुदा की नज़र में दौलतमन्द नहीं बनता उस का भी यही हाल होगा।” तब हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा: “यही वजह है के मैं तुम से कहता हूं, न तो अपनी जान की फ़िक्र करो, के तुम क्या खाओगे; न अपने बदन की, के तुम क्या पहनोगे। क्यूंके जान ख़ुराक़ से और बदन पोशाक से बढ़कर है। कौवों पर ग़ौर करो जो न तो बोते हैं न ही फ़सल को काट कर खत्तों में जमा करते हैं, न उन के पास गोदाम होता है न खत्ता, तो भी ख़ुदा उन्हें खिलाता है। तुम तो परिन्दों से भी ज़्यादा क़दर-ओ-क़ीमत वाले हो। तुम में ऐसा कौन है जो फ़िक्र कर के अपनी उम्र में घड़ी-भर का भी इज़ाफ़ा कर सके? पस जब तुम ये छोटी सी बात भी नहीं कर सकते तो बाक़ी चीज़ों की फ़िक्र किस लिये करते हो। “जंगली सोसन के फूलों को देखो के वह किस तरह बढ़ते हैं? वह न मेहनत करते हैं न कातते हैं तो भी मैं तुम से कहता हूं के बादशाह सुलैमान भी अपनी सारी शान-ओ-शौकत के बावुजूद उन में से किसी की तरह मुलब्बस न थे। पस जब ख़ुदा मैदान की घास को जो आज है और कल तनूर में झोंकी जाती है, ऐसी पोशाक पहनाता है, तो ऐ कम ईमान वालो! क्या वह तुम्हें बेहतर पोशाक न पहनायेगा? और इस फ़िक्र में मुब्तिला मत रहो के तुम क्या खाओगे और क्या पियोगे। इन चीज़ों के बारे में फ़िक्र मत करो। क्यूंके दुनिया की सारी ग़ैरक़ौमें इन चीज़ों की जुस्तुजू में लगी रहती हैं लेकिन तुम्हारा आसमानी बाप जानता है के तुम्हें इन चीज़ों की ज़रूरत है। बल्के पहले ख़ुदा की बादशाही की तलाश करो तो ये चीज़ें भी तुम्हें दे दी जायेंगी। “ऐ छोटे गल्ले! डर मत! क्यूंके तुम्हारे आसमानी बाप की ख़ुशी इसी में है के वह तुम्हें बादशाही अता फ़रमाये। अपना माल-ओ-अस्बाब बेच कर ख़ैरात कर दो और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ जो पुराने नहीं होते और न फटते हैं यानी आसमान पर ख़ज़ाना जमा करो जो ख़त्म नहीं होता, जहां चोर नहीं पहुंच सकता और जिस में कीड़ा नहीं लगता। क्यूंके जहां तुम्हारा ख़ज़ाना है वहीं तुम्हारा दिल भी लगा रहेगा। “ख़िदमत के लिये कमर-बस्ता रहो और अपना चिराग़ जलाये रखो। और उन ख़ादिमो की तरह बनों, जो अपने मालिक की शादी की ज़ियाफ़त से लौटने का इन्तिज़ार कर रहे हों ताके जब वह आये और दरवाज़ा खटखटाए तो फ़ौरन उस के लिये दरवाज़ा खोल दें। वह सभी ख़ादिम मुबारक हैं जिन्हें उन का मालिक अपनी वापसी पर जागता हुआ चौकस पाये। मैं तुम से सच कहता हूं के वह मालिक ख़ुद कमर-बस्ता होकर उन्हें दस्तरख़्वान पर बिठाएगा और पास आकर उन की ख़िदमत करेगा। मुबारक हैं वह ख़ादिम, जिन्हें उन का मालिक रात के दूसरे या तीसरे पहर में भी आकर उन को ख़ूब चौकस पाये। लेकिन याद रखो के अगर घर के मालिक को मालूम हो ताके चोर किस घड़ी आयेगा तो वह अपने घर में नक़ब न लगने देता। पस तुम भी तय्यार रहो क्यूंके जिस घड़ी तुम्हें उम्मीद तक न होगी इब्न-ए-आदम उसी वक़्त आ जायेगा।” पतरस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, ये तम्सील जो तूने कही, सिर्फ़ हमारे लिये है या सब के लिये है?” ख़ुदावन्द ने जवाब दिया, “कौन है वह वफ़ादार और अक़्लमन्द मुन्तज़िम, जिस का मालिक उसे अपने घर के ख़ादिम चाकरों पर मुक़र्रर करे ताके वह उन्हें उन की ख़ुराक़ मुनासिब वक़्त पर बांटता रहे? वह ख़ादिम मुबारक है जिस का मालिक आये तो उसे ऐसा ही करते पाये। मैं तुम से सच कहता हूं के वह अपनी सारी मिल्कियत की देख-भाल का इख़्तियार उस के हवाले कर देगा। लेकिन अगर वह ख़ादिम अपने दिल में ये कहने लगे, ‘मेरे मालिक के आने में अभी देर है,’ और दूसरे ख़ादिमो और ख़ादिमाओं को मारना-पीटना शुरू कर दे और ख़ुद खा पी कर नशे में मतवाला रहने लगे? तो उस ख़ादिम का मालिक किसी ऐसे दिन वापस आ जायेगा, जिस की उसे उम्मीद न होगी, और जिस घड़ी की उसे ख़बर न होगी। तो वह उसे ग़ज़बनाक सज़ा देगा और उस का अन्जाम बेएतक़ादों जैसा होगा। “अगर वह ख़ादिम जो अपने मालिक की मर्ज़ी जान लेने के बावुजूद भी तय्यार नहीं रहता और न ही अपने मालिक की मर्ज़ी के मुताबिक़ अमल करता है तो वह ख़ादिम बहुत मार खायेगा। मगर जिस ने अपने मालिक की मर्ज़ी को जाने बग़ैर मार खाने के काम किये वह कम मार खायेगा। पस जिसे ज़्यादा दिया गया है उस से उम्मीद भी ज़्यादा की जायेगी और जिस के पास ज़्यादा सौंपा गया है उस से तलब भी ज़्यादा ही किया जायेगा। “मैं ज़मीन पर आग बरसाने आया हूं। काश ये पहले से ही भड़क रही होती तो कितना अच्छा होता! लेकिन मुझे एक पाक-ग़ुस्ल लेना है और जब तक ले नहीं लेता, मैं बहुत दर्द में रहूंगा! क्या तुम सोचते हो के मैं ज़मीन पर सुलह क़ाइम कराने आया हूं? नहीं, मैं तो लोगों को एक दूसरे से जुदा कराने आया हूं। क्यूंके अब से एक घर के ही पांच आदमियों में मुख़ालफ़त पैदा हो जायेगी। तीन, दो के और दो, तीन के मुख़ालिफ़ हो जायेंगे। बाप, बेटे के ख़िलाफ़ होगा और बेटा, बाप के मां, बेटी के और बेटी मां के; सास, बहू के और बहू सास के ख़िलाफ़ होगी।” फिर हुज़ूर ईसा ने हुजूम से कहा: “जब तुम बादल को मग़्रिब से उठते देखते तो एक दम कहने लगते हो ‘बारिश आयेगी,’ और ऐसा ही होता है। और जब जुनूबी हवा चलने लगती है, तो तुम कहते हो, ‘गर्मी होगी,’ और ऐसा ही होता है। ऐ रियाकारों! तुम ज़मीन और आसमान की सूरत देखकर मौसम का अन्दाज़ा लगाना तो जानते हो लेकिन मौजूदा ज़माने की अलामात के बारे में क्यूं ग़ौर नहीं करते? “तुम ख़ुद ही अपने लिये फ़ैसला क्यूं नहीं कर लेते के ठीक क्या है? जब तू अपने दुश्मन के साथ मुन्सिफ़ के पास रास्ते में जा रहा है तो रास्ते ही में उस से छुटकारा हासिल कर ले, कहीं ऐसा न हो के वह तुझे मुन्सिफ़ के हवाले कर दे और मुन्सिफ़ तुझे सिपाही के सुपुर्द कर दे और सिपाही तुझे क़ैदख़ाने में डाल दे। मैं तुम से कहता हूं के जब तक तुम एक-एक पैसा अदा न कर दोगे, वहां से हरगिज़ निकल न पाओगे।” उस वक़्त बाज़ लोग वहां शरीक थे जो हुज़ूर ईसा को उन गलीलियों के बारे में बताने लगे जिन के ख़ून को पीलातुस ने उन की क़ुर्बानी के साथ में मिलाया था। हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या तुम ये समझते हो के इन गलीलियों का ऐसा बुरा अन्जाम इसलिये हुआ के वह बाक़ी सारे गलीलियों से ज़्यादा गुनहगार थे? इसलिये उन के साथ ऐसा हुआ मैं तुम से कहता हूं, के नहीं! बल्के अगर तुम भी तौबा न करोगे तो सब के सब इसी तरह हलाक जाओगे। या क्या वह अठ्ठारह जिन पर सिलवाम का बुर्ज गिरा और वह दब कर मर गये यरूशलेम के बाक़ी बाशिन्दों से ज़्यादा क़ुसूरवार थे? मैं तुम से कहता हूं के नहीं! बल्के अगर तुम तौबा न करोगे तो तुम सब भी इसी तरह हलाक होगे।” इस के बाद हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये तम्सील सुनाई: “किसी आदमी ने अपने अंगूरी बाग़ में अन्जीर का दरख़्त लगा रख्खा था, वह उस में फल ढूंडने आया मगर एक भी फल न पाया। तब उस ने बाग़बान से कहा, देख, ‘मैं पिछले तीन बरस से इस अन्जीर के दरख़्त में फल ढूंडने आता रहा हूं और कुछ नहीं पाता हूं। इसे काट डाल! ये क्यूं जगह घेरे हुए है?’ “लेकिन बाग़बान ने जवाब में उस से कहा, ‘मालिक,’ इसे इस साल और बाक़ी रहने दे, ‘मैं इस के इर्दगिर्द खुदाई कर के खाद डालूंगा। अगर ये अगले साल फल लाया तो ख़ैर है वर्ना इसे कटवा डालना।’ ” एक सबत के दिन हुज़ूर ईसा किसी यहूदी इबादतगाह में तालीम दे रहे थे। वहां एक औरत थी जिसे अठ्ठारह बरस से एक बदरूह ने इस क़दर मफ़्लूज कर दिया था के वह कुबड़ी हो गई थी और किसी तरह सीधी न हो सकती थी। जब हुज़ूर ईसा ने उसे देखा तो उसे सामने बुलाया और कहा, “ऐ ख़ातून, तू अपनी कमज़ोरी से आज़ाद हो गई।” तब हुज़ूर ईसा ने उस पर अपना हाथ रख्खा और वह फ़ौरन सीधी हो गई और ख़ुदा की तम्जीद करने लगी। लेकिन यहूदी इबादतगाह का रहनुमा ख़फ़ा हो गया क्यूंके, हुज़ूर ईसा ने सबत के दिन उसे शिफ़ा दी थी, और लोगों से कहने लगा के काम करने के लिये, “छः दिन हैं इसलिये उन ही दिनों में शिफ़ा पाने के लिये आया करो न के सबत के दिन।” ख़ुदावन्द ने उसे जवाब दिया, “ऐ रियाकारों! क्या तुम में से हर एक सबत के दिन अपने बैल या गधे को थान से खोल कर पानी पिलाने के लिये नहीं ले जाता? तो क्या ये मुनासिब न था के ये औरत जो इब्राहीम की बेटी है जिसे शैतान ने अठ्ठारह बरस से बांध कर रख्खा है, सबत के दिन इस क़ैद से छुड़ाई जाती?” जब हुज़ूर ईसा ने ये बातें कहीं तो उन के सब मुख़ालिफ़ शर्मिन्दा हो गये लेकिन सब लोग हुज़ूर ईसा के हाथों से होने वाले हैरत-अंगेज़ कामों को देखकर ख़ुश थे। तब हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “ख़ुदा की बादशाही किस चीज़ के मानिन्द है और मैं इसे किस चीज़ से तश्बीह दूं? वह राई के दाने की मानिन्द है जिसे एक शख़्स ने ले कर अपने बाग़ में बो दिया। वह उग कर इतना बड़ा पौदा गया, के हवा के परिन्दे उस की डालियों पर बसेरा करने लगे।” हुज़ूर ईसा ने फिर से पूछा, “मैं ख़ुदा की बादशाही को किस से तश्बीह दूं? वह ख़मीर की मानिन्द है जिसे एक ख़ातून ने ले कर 27 किलो आटे में मिला दिया और यहां तक के सारा आटा ख़मीर हो गया।” तब हुज़ूर ईसा यरूशलेम के सफ़र पर निकले और रास्ते में आने वाले गांव और शहरों में तालीम देते चले। किसी शख़्स ने आप से पूछा, “ऐ ख़ुदावन्द, क्या थोड़े से लोग ही नजात पा सकेंगे?” आप ने उसे जवाब दिया, “तंग दरवाज़े से दाख़िल होने की पूरी कोशिश करो क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के बहुत से लोग अन्दर जाने की कोशिश करेंगे लेकिन जाना मुम्किन न होगा। जब घर का मालिक एक दफ़ा उठ कर दरवाज़ा बन्द कर देता है और तुम बाहर खड़े होकर खटखटाते और दरख़्वास्त करते रहोगे के, ‘मालिक, मेहरबानी कर के हमारे लिये दरवाज़ा खोल दीजिये।’ “लेकिन वह जवाब देगा के, ‘मैं तुम्हें नहीं जानता के तुम कौन और कहां से आये हो?’ “तब तुम कहने लगोगे, ‘हम ने आप के साथ खाना खाया और पिया और आप हमारे गली कूचों में तालीम देते थे।’ “लेकिन वह तुम से कहेगा, ‘मैं तुम्हें नहीं जानता के तुम कौन और कहां से आये हो। ऐ बदकारों, तुम सब मुझ से दूर हो जाओ!’ “जब तुम इब्राहीम, इज़हाक़, याक़ूब और सब नबियों को ख़ुदा की बादशाही में शरीक देखोगे और ख़ुद को बाहर निकाले हुए पाओगे तो रोते और दांत पीसते रह जाओगे। लोग मशरिक़ और मग़्रिब, शुमाल और जुनूब से आकर ख़ुदा की बादशाही की ज़ियाफ़त में अपनी-अपनी जगह ले कर शिरकत करेंगे। बेशक, बाज़ आख़िर ऐसे हैं जो अव्वल होंगे और बाज़ अव्वल ऐसे हैं जो आख़िर हो जायेंगे।” उसी वक़्त बाज़ फ़रीसी हुज़ूर ईसा के पास आये और कहने लगे, “यहां से निकल कर कहीं और चले जाईये क्यूंके हेरोदेस आप को क़त्ल करवाना चाहता है।” लेकिन आप ने उन से कहा, “उस लोमड़ी से जा कर ये कह दो, ‘मैं आज और कल बदरूहों को निकालने और मरीज़ों को शिफ़ा देने का काम करता रहूंगा और तीसरे दिन अपनी मंज़िल पर पहुंच जाऊंगा।’ पस मुझे आज, कल और परसों अपना सफ़र जारी रखना है। क्यूंके मुम्किन नहीं के कोई नबी यरूशलेम से बाहर हलाक हो! “ऐ यरूशलेम! ऐ यरूशलेम! तू जो नबियों को क़त्ल करती है और जो तेरे पास भेजे गये उन्हें संगसार कर डालती है, मैंने कई दफ़ा चाहा के तेरे बच्चों को एक साथ जमा कर लूं जिस तरह मुर्ग़ी अपने चूज़ों को अपने परों के नीचे जमा कर लेती है, लेकिन तुम ने न चाहा। देखो, तुम्हारा घर तुम्हारे ही लिये उजाड़ छोड़ा जा रहा है और मैं तुम से कहता हूं के तुम मुझे उस वक़्त तक हरगिज़ न देखोगे जब तक ये न कहोगे, ‘मुबारक है वह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है।’ ” एक दफ़ा सबत के दिन, हुज़ूर ईसा किसी फ़रीसी रहनुमा के घर खाना खाने गये तो कई फ़रीसियों की नज़र उन पर थी। वहां एक जलन्दरी सूजन की बीमारी का मरीज़ भी आप के सामने बैठा था। हुज़ूर ईसा ने फ़रीसियों और शरीअत के आलिमों से पूछा, “सबत के दिन शिफ़ा देना जायज़ है या नहीं?” लेकिन सब ख़ामोश रहे, तब हुज़ूर ईसा ने उस शख़्स को छू कर शिफ़ा बख़्शी और रुख़्सत कर दिया। और तब उन से पूछा, “अगर तुम में से किसी का गधे या बैल कुंए में गिर पड़े और तो क्या वह सबत के दिन उसे फ़ौरन बाहर न निकालेगा?” और वह उन बातों का जवाब न दे सके। जब हुज़ूर ईसा ने देखा के जो लोग खाने पर बुलाए गये थे किस तरह मख़्सूस नशिस्तों की तलाश में हैं तो आप ने उन से एक तम्सील कही: “जब कोई तुझे शादी की ज़ियाफ़त पर बुलाए तो मेहमान ख़ुसूसी की जगह पर न बैठ, हो सकता है के कोई तुझ से भी ज़्यादा मुअज़्ज़ज़ शख़्स बुलाया गया हो। और, तुम दोनों को बुलाने वाला वहां आकर तुझ से कहे के ये जगह उस के लिये है, ‘तो तुझे शर्मिन्दा होकर उठना पड़ेगा’ और, सब से, पीछे बैठना पड़ेगा। बल्के जब भी तू किसी दावत पर बुलाया जाये तो सब से पिछली जगह बैठ जा ताके जब तेरा मेज़बान वहां आये तो तुझ से कहे, ‘दोस्त, सामने जा कर बैठ।’ तब सारे मेहमानों के सामने तेरी कितनी इज़्ज़त होगी। क्यूंके जो कोई अपने आप को बड़ा बनायेगा वह छोटा किया जायेगा और जो अपने आप को हलीम बनायेगा वह बड़ा किया जायेगा।” फिर हुज़ूर ईसा ने अपने मेज़बान से कहा, “जब तू दोपहर का या रात का खाना पकवाए, तो अपने दोस्तों, भाईयों या बहनों, रिश्तेदारों या अमीर पड़ोसियों को न बुला; क्यूंके वह भी तुझे बुलाकर, तेरा एहसान चुका सकते हैं। बल्के जब तू ज़ियाफ़त करे तो ग़रीबों, टुंडों, लंगड़ों, और अन्धों को बुला, और तू बरकत पायेगा। क्यूंके उन के पास कुछ नहीं जिस से वह तेरा एहसान चुका सकें, लेकिन तुझे इस एहसान का बदला रास्तबाज़ों की क़ियामत के दिन मिलेगा।” मेहमानों में से एक ने ये बातें सुन कर हुज़ूर ईसा से कहा, “ख़ुदा की बादशाही में खाना खाने वाला बड़ा मुबारक होगा।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया: “किसी शख़्स ने एक बड़ी ज़ियाफ़त की और बहुत से लोगों को बुलाया। जब खाने का वक़्त हो गया तो उस ने अपने ख़ादिम को भेजा के मेहमानों से कहे, ‘आओ अब, सब कुछ तय्यार है।’ “लेकिन सब ने मिल कर बहाना बनाना शुरू कर दिया। पहले ने उस से कहा, ‘मैंने हाल ही में खेत मोल लिया है, और मेरा उसे देखने जाना ज़रूरी है। मैं माज़िरत चाहता हूं।’ “दूसरे ने कहा, ‘मैंने अभी पांच जोड़ी बैल ख़रीदे हैं, और में उन्हें आज़माने जा रहा हूं। मैं माज़िरत चाहता हूं।’ “एक और ने कहा, ‘मैंने अभी ब्याह किया है इसलिये मेरा आना मुम्किन नहीं।’ “तब ख़ादिम ने वापस आकर ये सारी बातें अपने मालिक को बताईं। घर के मालिक को बड़ा ग़ुस्सा आया, उस ने अपने ख़ादिम को हुक्म दिया, ‘जल्दी कर और शहर के गली कूचों में जा कर ग़रीबों, टुंडों, अन्धों और लंगड़ों को यहां ले।’ “ख़ादिम ने कहा, ‘ऐ मालिक, आप के कहने के मुताबिक़ अमल किया गया लेकिन अभी भी जगह ख़ाली है।’ “मालिक ने ख़ादिम से कहा, ‘रास्तों और खेतों की बाड़ों की तरफ़ निकल जा और लोगों को मजबूर कर के वह आयें ताके मेरा घर भर जाये। क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के जो पहले बुलाए गये थे उन में से एक भी मेरी ज़ियाफ़त का खाना चखने न पायेगा।’ ” लोगों का एक बड़ा हुजूम हुज़ूर ईसा के साथ चल रही थी और आप ने मुड़ कर उन से कहा, “अगर कोई मेरे पास आता है लेकिन उस महब्बत को जो वह अपने वालिदैन, बीवी बच्चों और भाई बहनों और अपनी जान से अज़ीज़ रखता है, और उसे क़ुर्बान नहीं कर सकता तो वह मेरा शागिर्द नहीं हो सकता। और जो शख़्स अपनी सलीब उठाकर मेरे पीछे नहीं आता वह मेरा शागिर्द नहीं हो सकता। “मान लो के तुम में से कोई बुर्ज बनाना चाहता है। और पहले बैठ कर क्या वह ये नहीं सोचेगा के इस की तामीर पर कितना ख़र्च आयेगा और क्या उस के पास उतनी रक़म है के बुर्ज मुकम्मल हो जाये? कहीं अगर तुम बुनियाद डाल दो और उसे मुकम्मल न कर सको तो सभी देखने वाले तुम्हारी हंसी उड़ायेंगे, और कहेंगे, ‘इस आदमी ने इमारत शुरू तो की लेकिन उसे मुकम्मल न कर सका।’ “या फ़र्ज़ करो के एक बादशाह किसी दूसरे बादशाह से जंग करने जा रहा है तो क्या वह पहले बैठ कर मशवरा न करेगा के क्या मैं दस हज़ार फ़ौजियों से उस का मुक़ाबला कर सकूंगा जो बीस हज़ार फ़ौजियों के साथ हमला करने आ रहा है? अगर वह इस क़ाबिल नहीं तो वह उस बादशाह के पास जो अभी दूर है, एलची भेज कर सुलह की दरख़्वास्त करेगा। इसी तरह अगर तुम में से कोई अपना सब कुछ छोड़ न दे, मेरा शागिर्द नहीं हो सकता। “नमक अच्छी चीज़ है, लेकिन अगर नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किस चीज़ से नमकीन किया जायेगा? न तो वह ज़मीन के किसी काम का रहा न खाद के; लोग उसे बाहर फेंक दिया जाता है। “जिस के पास सुनने के कान हों वह सुन ले।” बहुत से महसूल लेने वाले और गुनहगार लोग हुज़ूर ईसा के पास उन का कलाम सुनने जमा हो रहे थे। लेकिन फ़रीसी और शरीअत के आलिम बताने लगे, “ये आदमी गुनहगारों से मेल-जोल रखता है और उन के साथ खाता पीता भी है।” तब हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये तम्सील सुनाई: “फ़र्ज़ करो के तुम में से किसी के पास सौ भेड़ें हों और उन में से एक खो जाये। तो वह क्या बाक़ी निनानवे भेड़ों को ब्याबान में छोड़कर उस खोई हुई भेड़ को जब तक मिल न जाये तलाश न करता रहेगा? और जब वह मिल जाती है तो ख़ुशी से उसे अपने कंधों पर उठा लेता है और घर जा कर अपने दोस्तों और पड़ोसियों को जमा करता है और कहता है, ‘मेरे साथ मिल कर ख़ुशी मनाओ क्यूंके मेरी खोई भेड़ मिल गई है।’ मैं तुम से कहता हूं के इसी तरह से एक तौबा करने वाले गुनहगार के बाइस आसमान पर ज़्यादा ख़ुशी मनाई जायेगी लेकिन निनानवे ऐसे रास्तबाज़ों की निस्बत ख़ुशी नहीं मनाई जायेगी जो सोचते हैं के उन्हें तौबा करने की ज़रूरत नहीं है। “या फ़र्ज़ करो के किसी औरत के पास चांदी के दस सिक्‍के हों और एक खो जाये तो क्या वह चिराग़ जला कर, घर में झाड़ू न लगाती रहेगी और जब तक मिल न जाये उसे ढूंडती न रहेगी? और ढूंड लेने के बाद वह अपनी सहेलियों और पड़ोसियों को साथ बुलाकर ये न कहेगी, ‘मेरे साथ मिल कर ख़ुशी मनाओ क्यूंके मैंने अपना खोया हुआ चांदी का सिक्‍का पा लिया है।’ पस मैं तुम से कहता हूं के इसी तरह एक गुनहगार के तौबा करने पर भी ख़ुदा के फ़रिश्तों के दरमियान ख़ुशी मनाई जाती है।” फिर हुज़ूर ईसा ने कहा: “किसी शख़्स के दो बेटे थे। उन में से छोटे ने अपने बाप से कहा, ‘ऐ बाप, जायदाद में जो हिस्सा मेरा है मुझे दे दो।’ इसलिये बाप ने अपनी जायदाद उन में बांट दी। “थोड़े दिनों बाद, छोटे बेटे ने अपना सारा माल-ओ-मता जमा किया, और दूर किसी दूसरे मुल्क को रवाना हो गया और वहां अपनी सारी दौलत ऐश-ओ-इशरत में उड़ा दी।” जब सब कुछ ख़र्च हो गया तो उस मुल्क में हर तरफ़ सख़्त क़हत पड़ा और वह मोहताज हो गया। तब वह उस मुल्क के एक बाशिन्दे के पास काम ढूंडने पहुंचा। उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के काम पर लगा दिया। वहां वह उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे, अपना पेट भरना चाहता था लेकिन कोई उसे फलियां भी खाने को नहीं देता था। “तब वह होश में आया, और कहने लगा, ‘मेरे बाप के मज़दूरों को ज़रूरत से भी ज़्यादा खाना मिलता है लेकिन मैं यहां भूक की वजह से मर रहा हूं! मैं उठ कर अपने बाप के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा: ऐ बाप! मैं आसमानी ख़ुदा की नज़र में और तेरी नज़र में गुनहगार हूं। अब तो मैं इस लाइक़ भी नहीं रहा के तेरा बेटा कहला सकूं; मुझे भी अपने मज़दूरों में शामिल कर ले।’ पस वह उठा और अपने बाप के पास चल दिया। “लेकिन अभी वह काफ़ी दूर ही था, के उस के बाप ने उसे देख लिया और उस के बाप को उस पर बड़ा तरस आया; और अपने बेटे की तरफ़ दौड़ कर, उसे गले लगा लिया और ख़ूब चूमा। “बेटे ने अपने बाप से कहा, ‘ऐ बाप! मैं आसमानी ख़ुदा की नज़र में और आप के नज़र में गुनहगार हूं, अब तो मैं इस लाइक़ भी नहीं रहा के आप का बेटा कहला सकूं।’ “मगर बाप ने अपने ख़ादिमो से कहा, ‘जल्दी करो! और सब से पहले एक बेहतरीन चोग़ा लाकर इसे पहनाओ। और इस के हाथ में अंगूठी और पांव में जूती पहनाओ। एक मोटा ताज़ा बछड़ा लाकर ज़ब्ह करो ताके हम खायें और जश्न मनायें। क्यूंके मेरा बेटा जो मर चुका था, अब वह ज़िन्दा हो गया है, खो गया था, अब मिला है।’ पस सभी ख़ुशी मनाने लगे। “इस दौरान, बड़ा बेटा जो खेत में था, जब वह घर के नज़दीक पहुंचा तो उस ने गाने बजाने और नाचने की आवाज़ सुनी। इसलिये उस ने एक ख़ादिम को बुलाया और पूछा के ये क्या हो रहा है? ‘तेरा भाई लौट आया है,’ उस ने उस से कहा, ‘और तेरे बाप ने एक मोटा ताज़ा बछड़ा ज़ब्ह कराया है क्यूंके उस ने उसे सही सलामत वापस पा लिया है।’ “लेकिन बड़ा भाई ख़फ़ा गया और अन्दर नहीं जाना चाहता था मगर उस का बाप बाहर आकर उसे मनाने लगा। उस ने बाप को जवाब में कहा, ‘देख! मैं इतने बरसों से तेरी ख़िदमत कर रहा हूं और कभी तेरी हुक्मउदूली नहीं की मगर तूने तो कभी एक बकरी का जवान बच्चा भी मुझे नहीं दिया के अपने दोस्तों के साथ ख़ुशी मनाता। लेकिन जब तेरा ये बेटा तेरा सारा माल तवाइफ़ों पर लुटा कर वापस आया तो, तूने इस के लिये एक मोटा ताज़ा बछड़ा ज़ब्ह कराया है!’ “ ‘मेरे बेटे,’ बाप ने उस से कहा, ‘तू हमेशा मेरे पास है और मेरा जो कुछ भी है सब तेरा ही है। लेकिन हमें ख़ुशी मनाना और शादमान होना मुनासिब था क्यूंके तेरा ये भाई जो मर चुका था और अब ज़िन्दा हो गया है; और खो गया था और अब मिल गया है।’ ” फिर हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा: “किसी अमीर आदमी का एक मुंशी था। उस के लोगों ने उस के मालिक से शिकायत की, के वह तेरा माल ग़बन कर रहा है। इसलिये मालिक ने उसे अन्दर बुलाया और कहा, ‘ये क्या बात है जो मैं तुम्हारे बारे में सुन रहा हूं? सारा हिसाब किताब मुझे दे, क्यूंके अब से तो मेरा मुंशी नहीं रहेगा।’ “मुंशी ने दिल में सोचा, ‘अब मैं क्या करूं? मेरा मालिक मुझे काम से निकाल रहा है। मुझ में मिट्टी खोदने की ताक़त तो नहीं है। और शरम के मारे भीक भी नहीं मांग सकता। मैं जानता हूं के मुझे क्या करना होगा, के बरतरफ़ किये जाने के बाद भी लोग मुझे अपने घरों में ख़ुशी से क़बूल करें।’ “पस उस ने अपने मालिक के एक-एक कर्ज़दार को तलब किया, पहले से पूछा, ‘तुझ पर मेरे मालिक की कितनी रक़म बाक़ी है?’ “ ‘तीन हज़ार लीटर ज़ैतून के तेल की क़ीमत,’ उस ने जवाब दिया। “मुंशी ने उस से कहा, ‘ये रहे तेरे काग़ज़ात, बैठ कर जल्दी से, पंद्रह सौ लीटर बना दे।’ “फिर दूसरे से पूछा, ‘तुझ पर कितना बाक़ी है?’ “ ‘तीस टन गेहूं के दाम,’ उस ने जवाब दिया। “उस ने कहा, ‘ये रहे तेरे काग़ज़ात, और इसे चौबीस टन लिख दे।’ “मालिक ने उस चालाक मुंशी की तारीफ़ की, इसलिये के उस ने बड़ी अय्यारी से काम लिया था क्यूंके इस दुनिया के फ़र्ज़न्द दुनिया वालों के साथ सौदेबाज़ी में नूर के फ़र्ज़न्दों से ज़्यादा अय्यार हैं। मैं तुम से कहता हूं के दुनियवी कमाई से भी अपने लिये दोस्त बना लो ताके जब वह जाती रहे तो तुम्हारे दोस्त तुम्हें दाइमी मक़ामों में जगह फ़राहम करें। “जो बहुत थोड़े में वफ़ादारी का मुज़ाहरः करता है वह बहुत ज़्यादा में भी वफ़ादार रहता है। और जो थोड़े में बेईमान है वह ज़्यादा में भी बेईमान है। पस अगर तुम दुनिया की दुनियवी दौलत के मुआमले में वफ़ादार न साबित हुए तो हक़ीक़ी दौलत कौन तुम्हारे सुपुर्द करेगा? और अगर तुम किसी दूसरे के माल में वफ़ादार न ठहरे तो जो तुम्हारा अपना है उसे कौन तुम्हें देगा? “कोई ख़ादिम दो मालिकों की ख़िदमत नहीं कर सकता, या तो वह एक से नफ़रत करेगा और दूसरे से महब्बत या एक से वफ़ा करेगा और दूसरे को हक़ारत की नज़र से देखेगा। तुम ख़ुदा और दौलत दोनों की ख़िदमत नहीं कर सकते।” तब ज़रदोस्त फ़रीसी ये बातें सुन कर हुज़ूर ईसा की हंसी उड़ाने लगे। उस ने उन से कहा, “तुम वह जो लोगों के सामने अपने आप को बड़े रास्तबाज़ ठहराते लेकिन ख़ुदा तुम्हारे दिलों को जानता है क्यूंके जो चीज़ आदमियों की नज़र में आला है वह ख़ुदा की नज़र में मकरूह है। “तौरेत और नबियों की बातें हज़रत यहया तक क़ाइम रहीं और फिर उस वक़्त से ख़ुदा की बादशाही की ख़ुशख़बरी सुनाई जाने लगी और हर कोई उस में दाख़िल होने की ज़बरदस्त कोशिश कर रहा है। आसमान और ज़मीन का ग़ायब हो जाना आसान है लेकिन तौरेत का एक शोशा तक भी मिटना मुम्किन नहीं है। “जो कोई अपनी बीवी को छोड़कर किसी दूसरी से शादी करता है, वह ज़िना करता है और जो आदमी छोड़ी हुई औरत से शादी करता है वह भी ज़िना का मुर्तकिब होता है। “एक बड़ा अमीर आदमी था जो अरग़वानी और नफ़ीस क़िस्म के सूती कपड़े इस्तिमाल करता था और हर रोज़ ऐश-ओ-इशरत में मगन रहता था। एक भिकारी आदमी जिस का नाम लाज़र था, उस के फाटक पर पड़ा रहता था। उस का तमाम जिस्म फोड़ों से भरा हुआ था। वह चाहत रखता था के अमीर आदमी की मेज़ से गिरे हुए टुकड़ों से ही अपना पेट भर ले। उस की ऐसी हालत थी के कुत्ते भी आकर उस के फोड़े को चाटते थे। “फिर ऐसा हुआ के वक़्त के मुताबिक़ भिकारी आदमी मर गया और फ़रिश्ते उसे उठाकर हज़रत इब्राहीम के पास में पहुंचा दिये वह अमीर आदमी भी मरा और दफ़नाया गया। जब, उस ने आलमे-अर्वाह में अज़ाब में मुब्तिला होकर, अपनी आंखें ऊपर उठाईं तो दूर से हज़रत इब्राहीम को देखा और ये भी के लाज़र, इब्राहीम के पास में है। उस ने चिल्ला कर कहा, ‘ऐ बाप इब्राहीम, मुझ पर रहम कर और लाज़र को भेज ताके वह अपनी उंगली का सिरा पानी से तर कर के मेरी ज़बान को ठंडक पहुंचाये क्यूंके में इस आग में तड़प रहा हूं।’ “लेकिन इब्राहीम ने कहा, ‘बेटा, याद कर के तू अपनी ज़िन्दगी में अच्छी चीज़ें हासिल कर चुका है और इसी तरह लाज़र बुरी चीज़ें, लेकिन अब वह यहां आराम से है और तुम तड़प रहे हो। और इन बातों के अलावा, हमारे और तुम्हारे दरमियान एक बड़ा गढ़ा वाक़े है ताके जो उस पार तुम्हारी तरफ़ जाना चाहें, न जा सकें और जो इस पार हमारी तरफ़ आना चाहें, न आ सकें।’ “उस अमीर आदमी ने कहा, ‘इसलिये ऐ बाप, मैं मिन्नत करता हूं के आप उसे दुनिया में मेरे बाप के घर भेज दें, जहां मेरे पांच भाई हैं ताके वह उन्हें आगाह करे, कहीं ऐसा न हो के वह भी इस अज़ाब वाली जगह आ जायें।’ “लेकिन हज़रत इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘उन के पास हज़रत मूसा की तौरेत और नबियों की किताबें तो हैं, वह उन पर अमल करें।’ “ ‘नहीं, ऐ बाप इब्राहीम,’ उस ने कहा, ‘अगर कोई मुर्दों में से ज़िन्दा होकर उन के पास जाये तो वह तौबा करेंगे।’ “लेकिन हज़रत इब्राहीम ने उस से कहा, ‘जब वह हज़रत मूसा और नबियों की नहीं सुनते, तो अगर कोई मुर्दों में से ज़िन्दा हो जाये तब भी वह क़ाइल न होंगे।’ ” तब हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा: “ये नामुम्किन है के लोगों को ठोकरें न लगें लेकिन अफ़सोस है उस शख़्स पर जो इन ठोकरों का बाइस बना। उस के लिये यही बेहतर था के चक्की का भारी सा भारी पत्थर उस की गर्दन से लटका कर उसे समुन्दर में फेंक दिया जाता ताके वह इन छोटों में से किसी के ठोकर खाने का बाइस न बनता। पस ख़बरदार रहो। “अगर तेरा भाई या बहन गुनाह करता है तो उसे मलामत कर और अगर वह तौबा करे तो उसे मुआफ़ कर दे। अगर वह एक दिन में सात दफ़ा भी तेरे ख़िलाफ़ गुनाह करे और सातों दफ़ा तेरे पास आकर कहे के, ‘मैं तौबा करता हूं,’ तो तू उसे मुआफ़ कर देना।” रसूलों ने ख़ुदावन्द से कहा, “हमारे ईमान को बढ़ा।” ख़ुदावन्द ने कहा, “अगर तुम्हारा ईमान राई के दाने के बराबर भी होता, तो तुम इस शहतूत के दरख़्त से कह सकते थे, ‘के यहां से उखड़ जा और समुन्दर में जा लग,’ तो वह तुम्हारा हुक्म मान लेता। “फ़र्ज़ करो के तुम में से किसी एक के पास ख़ादिम है जो ज़मीन जोतता या भेड़ चराता और जब वह खेत से आये तो उसे कहे के, ‘जल्दी से मेरे पास आ जा और दस्तरख़्वान पर खाने बैठ जा’? क्या वह ये न कहेगा, ‘मेरा खाना तय्यार कर, और जब तक मैं खा पी न लूं; कमर-बस्ता होकर मेरी ख़िदमत में लगा रहे। इस के बाद तू भी खा पी लेना’? क्या वह इसलिये ख़ादिम का शुक्र अदा करेगा के उस ने वोही किया जो उसे करने को कहा गया था? इसी तरह, जब तुम भी इन बातों की तामील कर चुको जिन के करने का तुम्हें हुक्म दिया गया था तो कहो, ‘के हम निकम्मे ख़ादिम हैं; जो काम हमें दिया गया था हम ने वोही किया।’ ” हुज़ूर ईसा यरूशलेम की तरफ़ सफ़र करते हुए सामरिया और गलील की सरहद से होकर गुज़र रहे थे। जब वह एक गांव में दाख़िल हुए तो उन्हें दस कोढ़ी मिले जो दूर खड़े हुए थे। उन्होंने बुलन्द आवाज़ से कहा, “ऐ हुज़ूर ईसा, ऐ आक़ा, हम पर रहम कीजिये!” हुज़ूर ईसा ने उन्हें देखकर कहा, “जाओ, अपने आप को काहिनों को दिखाओ और ऐसा हुआ के वह जाते-जाते कोढ़ से पाक साफ़ हो गये।” लेकिन उन में से एक ये देखकर के वह शिफ़ा पा गया, बुलन्द आवाज़ से ख़ुदा की तम्जीद करता हुआ वापस आया और हुज़ूर ईसा के क़दमों में मुंह के बल गिरकर उन का शुक्र अदा करने लगा। ये आदमी सामरी था। हुज़ूर ईसा ने उस से पूछा, “क्या दसों कोढ़ से पाक साफ़ नहीं हुए? फिर वह नौ कहां हैं? क्या इस परदेसी के सिवा दूसरों को इतनी तौफ़ीक़ भी न मिली के लौट कर ख़ुदा की तम्जीद करते?” तब हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “उठ और रुख़्सत हो, तेरे ईमान ने तुझे शिफ़ा दी है।” एक बार फ़रीसियों ने हुज़ूर ईसा से पूछा के ख़ुदा की बादशाही कब आयेगी? हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “ख़ुदा की बादशाही ऐसी नहीं के लोग उसे आता देख सकें, और कह सकें के देखो ‘वह यहां है,’ या ‘वहां है,’ लेकिन ख़ुदा की बादशाही तुम्हारे दरमियान में है।” तब आप ने अपने शागिर्दों से कहा, “वह दिन भी आने वाले हैं जब तुम इब्न-ए-आदम के दिनों में से एक दिन को देखने की आरज़ू करोगे मगर न देख पाओगे। लोग तुम से कहेंगे, ‘के देखो वह वहां है!’ या ‘देखो वह यहां है!’ मगर तुम इधर भागते हुए उन के पीछे मत जाना। क्यूंके जैसे बिजली आसमान में कौन्द कर एक जानिब से दूसरी तरफ़ चमकती चली जाती है वैसे ही इब्न-ए-आदम अपने मुक़र्ररः दिन ज़ाहिर होगा। लेकिन लाज़िम है के पहले वह बहुत दुख उठाये और इस ज़माने के लोगों की जानिब से रद्द किया जाये। “और जैसा हज़रत नूह के दिनों में हुआ था, वैसा ही इब्न-ए-आदम के दिनों में होगा। के लोग खाते पीते थे और शादी ब्याह नूह के लकड़ी वाले पानी के जहाज़ में दाख़िल होने के दिन तक करते कराते थे। फिर सैलाब आया और उस ने सब को हलाक कर दिया। “और ऐसा ही हज़रत लूत के दिनों में हुआ था के लोग खाने-पीने, ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त करने, दरख़्त लगाने और मकान तामीर करने में मश्ग़ूल थे। लेकिन जिस दिन हज़रत लूत, सदूम से बाहर निकले, आग और गन्धक ने आसमान से बरस कर सब को हलाक कर डाला। “उसी तरह इब्न-ए-आदम के ज़ाहिर होने के दिन भी ऐसा ही होगा। उस दिन जो छत पर और उस का माल-ओ-अस्बाब घर के अन्दर में, वह उसे लेने के लिये नीचे न उतरे। जो खेत में वह भी किसी चीज़ के लिये वापस न जाये। हज़रत लूत की बीवी को याद रखो। जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान बाक़ी रखने की कोशिश करेगा वह उसे खोयेगा और जो कोई उसे खोयेगा, उसे बचाएगा। मैं कहता हूं के उस रात दो लोग चारपाई पर होंगे, एक ले लिया जायेगा और दूसरा वहीं छोड़ दिया जायेगा। दो औरतें मिल कर चक्की पीसती होंगी, एक ले ली जायेगी और दूसरी वहीं छोड़ दी जायेगी। दो आदमी खेत में होंगे। एक ले लिया जायेगा और दूसरा छोड़ दिया जायेगा।” उन्होंने आप से पूछा, “ऐ ख़ुदावन्द, ये कहां होगा?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “जहां लाशें होंगी, वहां गिद्ध भी जमा हो जायेंगे।” हुज़ूर ईसा चाहते थे के शागिर्दों को मालूम हो के हिम्मत हारे बग़ैर दुआ में लगे रहना चाहिये, इसलिये आप ने उन्हें ये तम्सील सुनाई। “किसी शहर में एक क़ाज़ी था। वह न तो ख़ुदा से डरता था, न इन्सान की पर्वा करता था। और उसी शहर में एक बेवा भी थी जो उस क़ाज़ी के पास लगातार फ़र्याद ले कर आती रहती थी के, ‘मेरा इन्साफ़ कर और मुझे मेरे रक़ीब से बचा।’ “पहले तो वह कुछ अर्से तक तो मना करता रहा। लेकिन आख़िर में उस ने अपने जी में कहा, ‘सच है के मैं ख़ुदा से नहीं डरता और न इन्सान की पर्वा करता हूं, लेकिन ये बेवा मुझे परेशान करती रहती है, इसलिये मैं उस का इन्साफ़ करूंगा, वर्ना ये तो बार-बार आकर मेरे नाक में दम कर देगी!’ ” और ख़ुदावन्द ने कहा, “सुनो, ये बेइन्साफ़ क़ाज़ी क्या कहता है। पस क्या ख़ुदा अपने चुने हुए लोगों का इन्साफ़ करने में देर करेगा, जो दिन रात उस से फ़र्याद करते रहते हैं? क्या वह उन्हें टालता रहेगा? मैं तुम से कहता हूं के ख़ुदा उन का इन्साफ़ करेगा और जल्द करेगा। फिर भी जब इब्न-ए-आदम आयेगा तो क्या वह ज़मीन पर ईमान पायेगा?” हुज़ूर ईसा ने बाज़ ऐसे लोगों को जो अपने आप को तो रास्तबाज़ समझते थे लेकिन दूसरे को नाचीज़ जानते थे, ये तम्सील सुनाई: “दो आदमी दुआ करने के लिये बैतुलमुक़द्दस में गये, एक फ़रीसी था और दूसरा महसूल लेने वाला। फ़रीसी ने खड़े होकर ये दुआ की: ‘ऐ ख़ुदा! मैं तेरा शुक्र करता हूं के मैं दूसरे आदमियों की तरह नहीं हूं जो लुटेरे, ज़ालिम और ज़िनाकार हैं और न ही इस महसूल लेने वाले की मानिन्द हूं। मैं हफ़्ते में दो बार रोज़ा रखता हूं और अपनी सारी आमदनी का दसवां हिस्सा नज़्र कर देता हूं।’ “लेकिन उस महसूल लेने वाले ने जो दूर खड़ा हुआ था। और उस ने आसमान की तरफ़ नज़र भी उठाना न चाहा, बल्के छाती पीट-पीट कर कहा, ‘ख़ुदा, मुझ गुनहगार पर रहम कर।’ “मैं तुम से कहता हूं ये आदमी, उस दूसरे से, ख़ुदा की नज़र में ज़्यादा रास्तबाज़ ठहर कर अपने घर गया क्यूंके जो कोई अपने आप को बड़ा बनायेगा वह छोटा किया जायेगा और जो अपने आप को हलीम बनायेगा, वह बड़ा किया जायेगा।” फिर बाज़ लोग छोटे बच्चों को हुज़ूर ईसा के पास लाने लगे ताके वह उन पर हाथ रखें। शागिर्दों ने जब ये देखा तो उन्हें झिड़क दिया। लेकिन हुज़ूर ईसा ने बच्चों को अपने पास बुलाया और शागिर्दों से कहा, “छोटे बच्चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मना मत करो क्यूंके ख़ुदा की बादशाही ऐसों ही की है। मैं तुम से सच कहता हूं के जो कोई ख़ुदा की बादशाही को बच्चे की तरह क़बूल न करे तो वह उस में हरगिज़ दाख़िल न होगा।” किसी यहूदी हाकिम ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “ऐ नेक उस्ताद! अब्दी ज़िन्दगी का वारिस बनने के लिये मैं क्या करूं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तू मुझे नेक क्यूं कहता है? नेक सिर्फ़ एक ही है यानी ख़ुदा। तुम हुक्मों को तो जानते हो: ‘के तुम ज़िना न करना, ख़ून न करना, चोरी न करना, झूटी गवाही न देना, अपने बाप और मां की इज़्ज़त करना।’ ” उस ने कहा, “इन सब पर तो मैं लड़कपन से, अमल करता आ रहा हूं।” जब हुज़ूर ईसा ने ये सुना तो उस से कहा, “अभी तक तुझ में एक बात की कमी है। अपना सब कुछ बेच दे और रक़म ग़रीबों में बांट दे, तो तुझे आसमान पर ख़ज़ाना मिलेगा। फिर आकर मेरे पीछे हो लेना।” ये बात सुन कर उस पर बहुत उदासी छा गई, क्यूंके वह काफ़ी दौलतमन्द था। हुज़ूर ईसा ने उसे देखकर कहा, “दौलतमन्दों का ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होना कितना मुश्किल है! बेशक, ऊंट का सुई के नाके में से गुज़र जाना किसी दौलतमन्द के ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होने से ज़्यादा आसान है।” जिन्होंने ये बात सुनी वह पूछने लगे, “फिर कौन नजात पा सकता है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो बात आदमियों के लिये नामुम्किन है वह ख़ुदा के लिये मुम्किन है।” पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आप की पैरवी करने के लिये हम तो अपना सब कुछ छोड़कर चले आये हैं!” हुज़ूर ने उन से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, ऐसा कोई नहीं जिस ने ख़ुदा की बादशाही की ख़ातिर घर या बीवी या भाईयों या बहनों या वालिदैन या बच्चों को छोड़ दिया और वह इस दुनिया में कई गुना ज़्यादा न पाये और आने वाली दुनिया में अब्दी ज़िन्दगी।” हुज़ूर ईसा ने बारह शागिर्दों को एक तरफ़ किया और उन से कहा, “देखो हम यरूशलेम जा रहे हैं और नबियों ने जो कुछ इब्न-ए-आदम के बारे में लिख्खा है वह सब पूरा होगा। उसे ग़ैरयहूदियों के हवाले किया जायेगा। वह उस की हंसी उड़ायेंगे, बेइज़्ज़त करेंगे और उस पर थूकेंगे। उसे कोड़े मारेंगे और क़त्ल कर डालेंगे। लेकिन वह तीसरे दिन फिर से ज़िन्दा हो जायेगा।” लेकिन ये बातें शागिर्दों की समझ में बिलकुल न आईं और उन बातों का मतलब उन से पोशीदा रहा और उन की समझ में न आया के हुज़ूर ईसा किस के बारे में उन से बात कर रहे थे। और ऐसा हुआ के जब हुज़ूर ईसा यरीहू के नज़दीक पहुंचे, तो एक अन्धा राह के किनारे बैठा भीक मांग रहा था। जब उस ने हुजूम के गुज़रने की आवाज़ सुनी तो वह पूछने लगा के ये क्या हो रहा है? लोगों ने उसे बताया, “हुज़ूर ईसा नासरी जा रहे हैं।” उस ने चिल्ला कर कहा, “ऐ इब्न-ए-दाऊद! हुज़ूर ईसा, मुझ पर रहम फ़रमाईये!” जो लोग हुजूम की रहनुमाई कर रहे थे उसे डांटने लगे के ख़ामोश हो जाओ, मगर वह और भी ज़्यादा चिल्लाने लगा, “ऐ इब्न-ए-दाऊद, मुझ पर रहम कीजिये!” हुज़ूर ईसा ने रुक कर हुक्म दिया के उस आदमी को मेरे पास लाओ। जब वह पास आया तो हुज़ूर ईसा ने उस से पूछा, “तू क्या चाहता है के मैं तेरे लिये करूं?” उस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द! मैं अपनी आंखों से देखना चाहता हूं?” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “तुम्हारी आंखों में रोशनी आ जाये, तुम्हारे ईमान ने तुम्हें अच्छा कर दिया है।” वह उसी दम देखने लगा और ख़ुदा की तम्जीद करता हुआ हुज़ूर ईसा का पैरोकार बन गया। ये देखकर सारे लोग ख़ुदा की हम्द करने लगे। हुज़ूर ईसा यरीहू में दाख़िल कर जा रहे थे। वहां एक आदमी था जिस का नाम ज़क्काई था। वह महसूल लेने वालों का अफ़सर था और काफ़ी दौलतमन्द था। वह हुज़ूर ईसा को देखने का ख़ाहिशमन्द था, लेकिन उस का क़द छोटा था इसलिये वह हुजूम में हुज़ूर ईसा को देख न सकता था। लिहाज़ा वह दौड़ कर आगे चला गया और एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया ताके जब हुज़ूर ईसा उस जगह से गुज़रे तो वह आप को ऊपर से देख सके। जब हुज़ूर ईसा उस जगह पहुंचे तो आप ने ऊपर देखकर उस से कहा, “ऐ ज़क्काई जल्दी से नीचे उतर आ क्यूंके आज मुझे तेरे घर में रहना लाज़िमी है।” पस वह फ़ौरन नीचे उतर आया और हुज़ूर ईसा का इस्तिक़्बाल करते हुए ख़ुशी से अपने घर ले गया। ये देखकर सारे लोग बुड़बुड़ाने लगे, “के वह एक गुनहगार के यहां मेहमानी करने गया है।” लेकिन ज़क्काई ने खड़े होकर ख़ुदावन्द से कहा, “देखिये, ख़ुदावन्द! मैं अपना आधा माल ग़रीबों को अभी देता हूं और अगर मैंने धोके से किसी का कुछ लिया है तो उस का चौगुना वापस करता हूं।” हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “आज इस घर में नजात आई है क्यूंके ये आदमी भी इब्राहीम की औलाद है। क्यूंके इब्न-ए-आदम खोये हुओं को ढूंडने और हलाक होने वालों को नजात देने आया है।” जब लोग हुज़ूर ईसा की ये बातें सुन रहे थे तो आप ने उन से एक तम्सील कही, क्यूंके आप यरूशलेम के नज़दीक पहुंच चुके थे और लोगों का ख़्याल था के ख़ुदा की बादशाही जल्द आने वाली है। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया: “एक ख़ानदानी रईस दूर किसी दूसरे मुल्क को रवाना हुआ ताके उसे बादशाह मुक़र्रर किया जाये और फिर वापस आये। इसलिये उस ने अपने ख़ादिमो में से दस को बुलाया और ‘दसों को सोने का एक-एक सिक्‍का दे कर’ कहा, ‘मेरे वापस आने तक इस रक़म से कारोबार करना।’ “लेकिन उस की रईयत उस से नफ़रत करती थी लिहाज़ा उन्होंने उस के पीछे एक वफ़द इस पैग़ाम के साथ रवाना किया, ‘के हम नहीं चाहते के ये आदमी हम पर हुकूमत करे।’ “बादशाह बनने के बाद, जब, वह वापस आया। तो उस ने अपने ख़ादिमो को बुलाया जिन्हें उस ने कारोबार के लिये रक़म दी थी ताके मालूम करे के हर एक ने कितना-कितना कमाया है। “पहला ख़ादिम आया तो उस ने कहा, ‘ऐ मालिक, मैंने एक सिक्‍के से दस सिक्‍के कमाए।’ “ ‘शाबाश, ऐ नेक ख़ादिम!’ उस ने जवाब दिया, ‘क्यूंके तूने थोड़ी सी रक़म को भी वफ़ादारी से इस्तिमाल किया इसलिये तुझे, दस शहरों पर इख़्तियार अता किया जाता है।’ “दूसरे ख़ादिम ने आकर कहा, ‘ऐ मालिक, मैंने तेरे सिक्‍के से पांच और सिक्‍के कमाए।’ “बादशाह ने उस से भी कहा, ‘तुझे भी पांच शहरों पर इख़्तियार अता किया जाता है।’ “तब तीसरे ख़ादिम ने आकर कहा, ‘ऐ मालिक, ये रहा तेरा सिक्‍का; मैंने इसे रूमाल में बांध कर रख दिया था। क्यूंके तू सख़्त आदमी है इसलिये मुझे तेरा ख़ौफ़ था, तू जहां पर रूपया नहीं लगाया होता है वहां से भी उठा लेता है और जहां बोया नहीं वहां से भी काटता है।’ “मालिक ने उस से कहा, ‘ऐ शरीर ख़ादिम! मैं तेरी ही बातों से तुझे मुल्ज़िम ठहराता हूं, जब तू जानता था, के मैं सख़्त आदमी हूं, और जहां पर रूपया नहीं लगाया होता है वहां से भी उठा लेता हूं, और जिसे बोया नहीं होता उसे भी काट लेता हूं? तो फिर तूने मेरा सिक्‍का किसी साहूकार के पास जमा क्यूं नहीं कराया, ताके मैं वापस आकर उस से सूद समेत वसूल कर लेता?’ “तब उस ने उन से जो पास खड़े थे कहा, ‘के इस से ये सिक्‍का ले लो और उसे दे दो जिस के पास दस सिक्‍के हैं।’ “ ‘ऐ मालिक,’ उन्होंने उस से कहा, ‘उस के पास तो पहले ही से दस सिक्‍के मौजूद हैं!’ “हुज़ूर ईसा ने जवाब में कहा, ‘मैं तुम से कहता हूं के जिस के पास होगा, उसे और भी दिया जायेगा, और जिस के पास नहीं होगा, उस से वह भी जो उस के पास है, ले लिया जायेगा। लेकिन मेरे उन दुश्मनों को जो नहीं चाहते थे के मैं उन का बादशाह बनूं, यहां ले आओ और मेरे सामने क़त्ल कर दो।’ ” ये बातें कह कर हुज़ूर ईसा यरूशलेम पहुंचने के लिये आगे बढ़ने लगे। जब वह बैतफ़गे और बैतअन्नियाह के पास पहुंचे जो कोहे-ज़ैतून पर आबाद हैं तो हुज़ूर ईसा ने अपने दो शागिर्दों को ये कह कर आगे भेजा, “सामने वाले गांव में जाओ, वहां दाख़िल होते ही तुम एक गधी का जवान बच्चा बंधा हुआ पाओगे, जिस पर अब तक किसी ने सवारी नहीं की है। उसे खोल कर यहां ले आओ। और अगर कोई तुम से पूछे, ‘के उसे क्यूं खोल रहे तो कहना के ख़ुदावन्द को इस की ज़रूरत है।’ ” आगे भेजे जाने वालों ने जा कर जैसा हुज़ूर ईसा ने उन से कहा था वैसा ही पाया। जब वह गधी के बच्चे को खोल रहे थे, तो उस के मालिकों ने उन से पूछा, “इस बच्चे को क्यूं खोल रहे हो?” उन्होंने जवाब दिया, “ख़ुदावन्द को इस की ज़रूरत है।” पस वह उसे हुज़ूर ईसा के पास लाये और उस गधे के बच्चे पर अपने कपड़े डाल कर हुज़ूर ईसा को उस पर सवार कर दिया। जब हुज़ूर ईसा जा रहे थे तो लोगों ने रास्ते में अपने कपड़े बिछा दिये। जब वह उस मक़ाम के नज़दीक पहुंचा जहां सड़क कोहे-ज़ैतून से नीचे की तरफ़ जाती है, तो शागिर्दों की सारी जमाअत उन सारे मोजिज़ों की वजह से जो उन्होंने देखे थे, ख़ुश होकर ऊंची आवाज़ से ख़ुदा की तम्जीद ये कह कर करने लगी: “मुबारक है वह बादशाह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है!” “आसमान पर सुलह और आलमे-बाला पर जलाल!” हुजूम में बाज़ फ़रीसी भी थे, वह हुज़ूर ईसा से कहने लगे, “ऐ उस्ताद, अपने शागिर्दों को डांटिये के वह चुप रहें!” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “मैं तुम से कहता हूं के अगर ये चुप हो जायेंगे तो पत्थर चिल्लाने लगेंगे।” जब हुज़ूर ईसा यरूशलेम के नज़दीक पहुंचे और शहर को देखे तो रो पड़े। वह कहने लगे, “काश के तू, इसी दिन अपनी सलामती से तअल्लुक़ रखने वाली बातों को जान लेती! लेकिन अब ये बात तेरी आंखों से ओझल हो गई है। तुझे वह दिन देखने पड़ेंगे जब तेरे दुश्मन तेरे ख़िलाफ़ मोरचा बांध कर तुझे चारों जानिब से घेर लेंगे और तुझ पर चढ़ आयेंगे। और तुझे और तेरे बच्चों को तेरी पनाह में हैं ज़मीन पर पटक देंगे और किसी पत्थर पर पत्थर बाक़ी न रहने देंगे, इसलिये के तूने उस वक़्त को न पहचाना जब तुझ पर ख़ुदा की नज़र पड़ी थी।” तब हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में दाख़िल हुए और वहां से ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त करने वालों को बाहर निकालने लगे। हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “लिख्खा है, ‘मेरा घर दुआ का घर’ कहलायेगा; मगर तुम ने ‘उसे डाकूओं का अड्डा बना रख्खा है।’ ” हुज़ूर ईसा हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस में तालीम देते थे मगर अहम-काहिन, शरीअत के आलिम और यहूदी बुज़ुर्ग आप को हलाक करने की कोशिश में लगे हुए थे। लेकिन उन्हें ऐसा करने का मौक़ा नहीं मिलता था क्यूंके सारे लोग हुज़ूर ईसा की बातें सुनने के लिये उन्हें घेरे रहते थे। एक दिन जब हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस में लोगों को तालीम दे रहे थे और उन्हें इन्जील सुना रहे थे तो अहम-काहिन और शरीअत के आलिम, यहूदी बुज़ुर्गों के साथ आप के पास पहुंचे। और कहने लगे, “आप ये सारी बातें किस इख़्तियार से करते हैं या आप को ये इख़्तियार किस ने दिया है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं भी तुम से एक सवाल पूछता हूं, मुझे बताओ: हज़रत यहया का पाक-ग़ुस्ल ख़ुदा की जानिब से था या इन्सान की जानिब से?” वह आपस में बहस करने लगे, “के अगर हम कहें, ‘के आसमानी ख़ुदा की जानिब से था,’ तो वह पूछेगा, ‘के फिर तुम उन पर ईमान क्यूं न लाये?’ लेकिन अगर कहें, ‘के इन्सान की जानिब से था’ तो लोग हमें संगसार कर डालेंगे, क्यूंके वह यहया को नबी मानते हैं।” लिहाज़ा उन्होंने जवाब दिया, “हम नहीं जानते के किस की तरफ़ से था।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तब तो मैं भी तुम्हें नहीं बताऊंगा के इन कामों को किस इख़्तियार से करता हूं।” फिर हुज़ूर ईसा ने लोगों को ये तम्सील सुनाई: “एक शख़्स ने अंगूरी बाग़ लगाया और उसे कुछ काश्तकारों को ठेके पर दे कर ख़ुद एक लम्बे अर्से के लिये परदेस चला गया। जब अंगूर तोड़ने का मौसम आया तो उस ने एक ख़ादिम को ठेकेदारों के पास अंगूरी बाग़ के फलों से अपना कुछ हिस्सा लेने भेजा। लेकिन ठेकेदारों ने उस को ख़ूब पीटा और ख़ाली हाथ लौटा दिया। तब उस ने एक और ख़ादिम को भेजा लेकिन उन्होंने उस की भी बेइज़्ज़ती की और मार पीट कर के उसे ख़ाली हाथ लौटा दिया। फिर उस ने तीसरे ख़ादिम को भेजा। उन्होंने उसे भी ज़ख़़्मी कर के भगा दिया। “तब अंगूरी बाग़ के मालिक ने कहा, ‘मैं क्या करूं? मैं अपने प्यारे बेटे को भेजूंगा, जिस से मैं महब्बत करता हूं; शायद वह उस का तो ज़रूर एहतिराम करेंगे।’ “मगर जब ठेकेदारों ने उसे देखा तो, ‘आपस में मशवरा कर के,’ कहने लगे, ‘यही वारिस है,’ आओ ‘हम इसे क़त्ल दें, ताके मीरास हमारी हो जाये।’ पस उन्होंने उसे अंगूरी बाग़ से बाहर निकाल कर क़त्ल कर डाला। “अब अंगूरी बाग़ का मालिक उन के साथ किस तरह पेश आयेगा? वह आकर उन ठेकेदारों को हलाक करेगा और अंगूरी बाग़ औरों के सुपुर्द कर देगा।” ये सुन कर लोगों ने कहा, “के काश ऐसा कभी न होता!” हुज़ूर ईसा ने उन की तरफ़ नज़र कर के पूछा, “तो फिर किताब-ए-मुक़द्दस के इस हवाले का क्या मतलब है: “ ‘जिस पत्थर को मेमारों ने रद्द कर दिया वोही कोने के सिरे का पत्थर हो गये’? जो कोई इस पत्थर पर गिरेगा टुकड़े-टुकड़े हो जायेगा; लेकिन जिस पर ये गिरेगा उसे पीस डालेगा।” शरीअत के उलमा और अहम-काहिनों ने उसी वक़्त हुज़ूर ईसा को पकड़ने की कोशिश की, क्यूंके वह जान गये थे के आप ने वह तम्सील उन ही के बारे में कही है लेकिन वह लोगों से डरते थे। चुनांचे वह हुज़ूर ईसा को पकड़ने की ताक में लगे रहे और उन्होंने दियानतदारों के शक्ल में जासूसों को आप के पास भेजा ताके आप की कोई बात पकड़ सकें और आप को हाकिम के क़ब्ज़े इख़्तियार में दे दें। जासूसों ने हुज़ूर ईसा से पूछा: “ऐ उस्ताद, हम जानते हैं के आप सच बोलते हैं और सच्चाई की तालीम देते हैं, और किसी की तरफ़दारी नहीं करते बल्के सच्चाई से ख़ुदा की राह की तालीम देते हैं। क्या हमारे लिये क़ैसर को महसूल अदा करना रवा है या नहीं?” हुज़ूर ईसा ने उन की मुनाफ़क़त को जानते हुए उन से कहा, “मुझे एक दीनार लाकर दिखाओ, इस पर किस की सूरत और किस का नाम लिख्खा है?” उन्होंने जवाब दिया, “क़ैसर का।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “जो क़ैसर का है क़ैसर को और जो ख़ुदा का है ख़ुदा को अदा करो।” और वह लोगों के सामने हुज़ूर ईसा की कही हुई कोई बात न पकड़ सके बल्के आप के जवाब से दंग होकर ख़ामोश हो गये। कुछ सदूक़ी जो कहते हैं के रोज़े क़ियामत है ही नहीं, वह हुज़ूर ईसा के पास आये और पूछने लगे। “ऐ उस्ताद, हमारे लिये हज़रत मूसा का हुक्म है के अगर किसी आदमी का शादीशुदा भाई बेऔलाद मर जाये तो वह अपने भाई की बेवा से शादी कर ले ताके अपने भाई के लिये नस्ल पैदा कर सके। चुनांचे सात भाई थे। पहले ने शादी की लेकिन बेऔलाद मर गया। फिर दूसरे और तीसरे भाई ने उस से शादी की, और बेऔलाद मर गया यही सिलसिला सातवें भाई तक बेऔलाद मरने का जारी रहा। आख़िर में वह औरत भी मर गई। अब बतायें के क़ियामत के दिन वो किस की बीवी होगी, क्यूंके वो उन सातों की बीवी रह चुकी थी?” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “इस दुनिया के लोगों में तो शादी ब्याह करने का दस्तूर है, लेकिन जो लोग आने वाली दुनिया के लाइक़ ठहरेंगे और मुर्दों में से जी उठेंगे वह शादी ब्याह नहीं करेंगे। वह मरेंगे भी नहीं; क्यूंके वह फ़रिश्तों की मानिन्द होंगे। और क़ियामत के फ़र्ज़न्द के बाइस ख़ुदा के फ़र्ज़न्द होंगे। और जलती हुई झाड़ी के बयान में, हज़रत मूसा ने भी ये इशारा किया के मुर्दे जी उठेंगे, क्यूंके हज़रत मूसा ने ख़ुदावन्द को ‘इब्राहीम का ख़ुदा, इज़हाक़ का ख़ुदा और याक़ूब का ख़ुदा कह कर पुकारते हैं।’ ख़ुदा मुर्दों का नहीं, बल्के ज़िन्दों का ख़ुदा है क्यूंके उस के नज़दीक सब ज़िन्दा हैं।” शरीअत के उलमा में से बाज़ ने जवाब दिया, “ऐ उस्ताद, आप ने ख़ूब फ़रमाया है!” और उन में से फिर किसी ने भी हुज़ूर से और कोई सवाल करने की जुरअत न की। फिर हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “अलमसीह को दाऊद का बेटा किस तरह कहा जाता है? क्यूंके दाऊद तो ख़ुद ज़बूर शरीफ़ में फ़रमाते हैं: “ ‘ख़ुदा तआला ने मेरे ख़ुदावन्द से कहा: “मेरी दाहिनी तरफ़ बैठ जब तक के मैं तेरे दुश्मनों को तुम्हारे पांव के नीचे न कर दूं।” ’ दाऊद तो उसे ‘ख़ुदावन्द’ कहते हैं। फिर वह उन का बेटा कैसे हुआ?” जब सब लोग सुन रहे थे तो हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से कहा, “शरीअत के आलिमों से ख़बरदार रहना। जो लम्बे-लम्बे चोग़े पहन कर इधर-उधर चलना पसन्द करते हैं और चाहते हैं के लोग बाज़ारों में उन्हें एहतिरामन मुबारकबादी सलाम करें। वह यहूदी इबादतगाहों में आला दर्जे की कुर्सियां और ज़ियाफ़तों में सद्र नशीनी चाहते हैं। वह बेवाओं के घरों को हड़प कर लेते हैं और दिखावे के तौर पर लम्बी-लम्बी दुआएं करते हैं। इन लोगों को सब से ज़्यादा सज़ा मिलेगी।” हुज़ूर ईसा ने नज़र उठाकर देखा के दौलतमन्द लोग बैतुलमुक़द्दस के ख़ज़ाने में अपने नज़्राने डाल रहे थे। आप ने एक ग़रीब बेवा को भी देखा जिस ने तांबे के दो छोटे-छोटे सिक्‍के डाले। इस पर हुज़ूर ईसा ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, के इस बेवा ने सब लोगों से ज़्यादा नज़राना डाला है। क्यूंके बाक़ी सब लोगों ने तो अपनी सारी पूंजी में से कुछ बतौर नज़्र डाला लेकिन इस औरत ने अपनी नादारी की हालत में भी जो कुछ उस के पास था सब डाल दिया।” हुज़ूर ईसा के बाज़ शागिर्द बैतुलमुक़द्दस की तारीफ़ कर रहे थे के वह नफ़ीस पत्थरों और नज़्र किये गये तोहफ़ों से आरास्ता है। तो ये सुन कर हुज़ूर ईसा ने कहा, “वह दिन आयेंगे के ये चीज़ें जो तुम यहां देख रहे हो, इन का कोई भी पत्थर अपनी जगह बाक़ी न रहेगा बल्के गिरा दिया जायेगा।” शागिर्दों ने आप से पूछा, “ऐ उस्ताद, हमें बताइये, ये बातें कब वाक़े होंगी? और उन बातों की पूरा होने की क्या अलामत होगी और उन के ज़ाहिर में आने के वक़्त का निशान क्या-क्या होगा?” हुज़ूर ईसा ने कहा: “ख़बरदार गुमराह न हो जाना क्यूंके कई लोग मेरे नाम से आयेंगे, और कहेंगे, ‘मैं ही अलमसीह हूं,’ और ‘ये भी के वक़्त नज़दीक आ पहुंचा है।’ तुम उन के पीछे मत चले जाना। और जब लड़ाईयों और बग़ावतों की अफ़्वाहें सुनो, तो ख़ौफ़ज़दा मत होना। क्यूंके पहले उन का वाक़े होना ज़रूरी है, लेकिन अभी आख़िरत न होगी।” तब आप ने उन से फ़रमाया, “क़ौम पर क़ौम, और सल्तनत पर सल्तनत हमला करेगी। जगह-जगह बड़े-बड़े ज़लज़ले आयेंगे, क़हत पड़ेंगे और वबाएं कई जगह पर फैलेंगी, दहशतनाक वाक़ियात और आसमान पर अज़ीम निशानात ज़ाहिर होंगे। “लेकिन इन सब बातों के होने से पहले, लोग तुम्हें गिरिफ़्तार करेंगे और सतायेंगे। वह तुम्हें यहूदी इबादतगाहों की अदालतों में हाज़िर करेंगे और क़ैदख़ानों में डलवाएंगे और बादशाहों और हुक्काम के हुज़ूर में पेश करेंगे और ये इसलिये होगा के तुम मेरे पैरोकार हो। तब तुम्हें मेरी गवाही देने का अच्छा मौक़ा मिलेगा। लेकिन तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं के तुम पहले ही से फ़िक्र करने लगो के हम क्या कहेंगे। क्यूंके मैं तुम्हें ऐसे अल्फ़ाज़ और हिक्मत अता करूंगा के तुम्हारा कोई भी मुख़ालिफ़ न तो तुम्हारा सामना कर सकेगा न तुम्हारे ख़िलाफ़ कुछ कह सकेगा। और तुम्हारे वालिदैन, भाई और बहनें, रिश्तेदार और दोस्त तुम से बेवफ़ाई करेंगे और तुम में से बाज़ को क़त्ल भी करेंगे। और मेरे नाम की वजह से सारे लोग तुम से नफ़रत करने लगेंगे लेकिन तुम्हारे सर का एक बाल भी बेका नहीं होगा। सब कुछ बर्दाश्त कर के ही तुम अपनी जानों को महफ़ूज़ रख सकोगे। “और जब यरूशलेम को फ़ौजों के मुहासिरे में देखो तो जान लेना के उस की तबाही के दिन नज़दीक आ गये हैं। तब उस वक़्त जो यहूदिया में हों वह पहाड़ों पर भाग जायें और जो यरूशलेम के अन्दर हों बाहर निकल जायें और जो देहात में हों वह शहर में दाख़िल न हों। क्यूंके ये ग़ज़ब-ए-इलाही के दिन होंगे जिन में वह सब कुछ जो पहले से किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा जा चुका है पूरा होगा। मगर हामिला ख़्वातीन और उन मांओं का जो उन दिनों में दूध पिलाती होंगी, वह दिन कितने ख़ौफ़नाक होंगे! क्यूंके इस मुल्क में बहुत बड़ी मुसीबत बरपा होगी और इस क़ौम पर ख़ुदा का बड़ा ग़ज़ब नाज़िल होगा। वह तलवार का लुक़मा बन जायेंगे और असीर कर सब मुल्कों में पहुंचाये जायेंगे और ग़ैरयहूदी लोग यरूशलेम को पांव तले कुचल डालेंगे ये सिलसिला उस वक़्त तक जारी रहेगा जब तक उन की मीआद पूरी न हो जाये। “सूरज, चांद और सितारों में निशान ज़ाहिर होंगे और ज़मीन पर मुल्कों को अज़ीय्यत पहुंचेगी क्यूंके समुन्दर और उस की लहरों का ज़ोर-ओ-शोर उन्हें ख़ौफ़ज़दा कर देगा। लोग इस अन्देशे से के दुनिया पर क्या-क्या मुसीबतों आने वाली हैं इस क़दर ख़ौफ़ खायेंगे के उन के होश-ओ-हवास बाक़ी न रहेंगे, क्यूंके आसमान की क़ुव्वतें हिलाई जायेंगी। तब लोग इब्न-ए-आदम को अज़ीम क़ुदरत और जलाल के साथ बादलों में आता देखेंगे। जब ये बातें होना शुरू जायें तो सीधे खड़े होकर अपना सर ऊपर उठाना क्यूंके तुम्हारी मुख़्लिसी नज़दीक होगी।” तब हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये तम्सील सुनाई: “तुम अन्जीर के दरख़्त और सारे दरख़्तों पर ग़ौर करो। जूंही उन में कोन्पलें फूटने लगती हैं, तुम देखकर जान लेते हो के अब गर्मी नज़दीक है। इसी तरह, जब तुम यह बातें होते देखो, तो जान लो के ख़ुदा की बादशाही नज़दीक है। “मैं तुम से सच कहता हूं, के इस नस्ल के ख़त्म होने से पहले ही ये सब कुछ पूरा होगा। आसमान और ज़मीन टल जायेंगी लेकिन मेरी बातें कभी नहीं टलेंगी। “पस तुम ख़बरदार रहो। कहीं ऐसा न हो के तुम्हारे दिल अय्याशी, नशेबाज़ी और इस ज़िन्दगी की फ़िक्रों से सुस्त पड़ जायें और वह दिन तुम पर फन्दे की तरह अचानक आ पड़े। क्यूंके वह रोये ज़मीन पर मौजूद तमाम लोगों पर फन्दे की तरह आ पड़ेगा। पस हर वक़्त चौकस रहो और दुआ में लगे रहो ताके तुम इन सब बातों से जो होने वाली हैं, बच कर इब्न-ए-आदम के हुज़ूर में खड़े होने के लाइक़ ठहरो।” हुज़ूर ईसा हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस में तालीम देते थे, और हर रात को बाहर जा कर उस पहाड़ पर रात गुज़ारते थे जिस का नाम कोहे-ज़ैतून था, और सुबह होते ही सब लोग आप की बातें सुनने बैतुलमुक़द्दस में आ जाते थे। ईद-ए-फ़तीर जिसे ईद-ए-फ़सह भी कहते हैं नज़दीक आ गई थी। अहम-काहिन और शरीअत के आलिम हुज़ूर ईसा को क़त्ल करने का सही मौक़ा ढूंड रहे थे क्यूंके वह अवाम से डरते थे। तभी शैतान यहूदाह में समा गया, जिसे इस्करियोती भी कहते थे, जो के बारह शागिर्दों में से एक था। वह अहम-काहिनों और बैतुलमुक़द्दस के पहरेदारों के अफ़सरान और रहनुमाओं के पास गया और उन से मशवरा करने लगा के वह किस तरह हुज़ूर ईसा को उन के हाथों में पकड़वा दे। वह बड़े ख़ुश हुए और उसे रूपये देने पर राज़ी हो गये। यहूदाह ने उन की बात मान ली और मौक़ा ढूंडने लगा के जिस वक़्त आस-पास कोई भेड़ न हो हुज़ूर ईसा को किस तरह उन के हवाले कर दे। तब ईद-ए-फ़तीर का दिन आया, उस दिन ईद-ए-फ़सह के बर्रे की क़ुर्बानी करना फ़र्ज़ था। हुज़ूर ईसा ने पतरस और यूहन्ना को ये कह कर रवाना किया, “के जाओ और हमारे लिये ईद-ए-फ़सह खाने की तय्यारी करो।” उन्होंने पूछा, “आप कहां चाहते हैं के हम फ़सह का खाना तय्यार करें?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “शहर में दाख़िल होते ही तुम्हें एक आदमी मिलेगा जो पानी का घड़ा ले जा रहा होगा। उस के पीछे जाना और जिस घर में वह दाख़िल हो। उस घर के मालिक से कहना, ‘उस्ताद ने पूछा है: वह मेहमान-ख़ाना कहां है, जहां मैं अपने शागिर्दों के साथ ईद-ए-फ़सह का खाना खा सकूं?’ वह तुम्हें एक बड़ा सा कमरा ऊपर ले जा कर दिखायेगा जो हर तरह से आरास्ता होगा। वहीं हमारे लिये तय्यारी करना।” उन्होंने जा कर सब कुछ वैसा ही पाया जैसा हुज़ूर ईसा ने उन्हें बताया था फिर ईद-ए-फ़सह का खाना तय्यार किया। जब खाने का वक़्त आया तो हुज़ूर ईसा और उन के रसूल दस्तरख़्वान के इर्दगिर्द खाना खाने बैठ गये। और आप ने उन से कहा, “मेरी बड़ी आरज़ू थी के अपने दुख उठाने से पहले ईद-ए-फ़सह का ये खाना तुम्हारे साथ खाऊं। क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के आइन्दा में उसे उस वक़्त तक न खाऊंगा जब तक के ख़ुदा की बादशाही में इस का मक़्सद पूरा न हो जाये।” फिर हुज़ूर ईसा ने प्याला लिया, और ख़ुदा का शुक्र अदा कर के कहा, “इसे लो और आपस में बांट लो। क्यूंके मैं तुम से कहता हूं के मैं अंगूर का शीरा तब तक नहीं पियूंगा जब तक के ख़ुदा की बादशाही आ न जाये।” फिर आप ने रोटी ली और ख़ुदा का शुक्र कर के उस के टुकड़े किये, और शागिर्दों को ये कह कर दिया, “ये मेरा बदन है जो तुम्हारे लिये दिया जाता है, मेरी यादगारी के लिये यही किया करो।” इसी तरह खाने के बाद हुज़ूर ईसा ने प्याला लिया, और ये कह कर दिया, “यह प्याला मेरे ख़ून में नया अह्द है जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है। मगर मुझे गिरिफ़्तार कराने वाले का हाथ मेरे साथ दस्तरख़्वान पर है। इब्न-ए-आदम तो जा ही रहा है जैसा के उस के लिये पहले से मुक़र्रर हो चुका है लेकिन उस आदमी पर अफ़सोस जो मुझे धोका देता है!” ये सुन कर वह आपस में पूछने लगे के हम में ऐसा कौन है जो ये काम करेगा? शागिर्दों में इस बात पर आपस में बहस होने लगी के उन में कौन सब से बड़ा समझा जाता है। हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “ग़ैरयहूदियों पर उन के हुक्मरां हुक्मरानी करते हैं और जो इख़्तियार वाले हैं वह मोहसिन कहलाते हैं। लेकिन तुम्हें उन के जैसा नहीं होना है, इस के बजाय, तुम में जो सब से बड़ा है वह सब से छोटे की मानिन्द और जो हाकिम है वह ख़ादिम की मानिन्द हो। क्यूंके बड़ा कौन है? वह जो दस्तरख़्वान पर बैठा है या वह है जो ख़िदमत करता है? क्या वह बड़ा नहीं है जो दस्तरख़्वान पर बैठा है? लेकिन मैं तो तुम्हारे बीच में एक ख़ादिम की मानिन्द हूं। मगर तुम वह जो मेरी आज़माइशों में बराबर मेरे साथ खड़े रहे हो। जैसे मेरे बाप ने मुझे एक सल्तनत अता की है, वैसे ही मैं भी तुम्हें एक सल्तनत अता करता हूं। ताके तुम मेरी सल्तनत में मेरे दस्तरख़्वान से खाओ और पिओ और तुम शाही तख़्तों पर बैठ कर इस्राईल के बारह क़बीलों का इन्साफ़ करोगे। “शमऊन! शमऊन! शैतान ने तुम सभी को गन्दुम की तरह फटकने की इजाज़त मांगी है। लेकिन शमऊन, के मैंने तुम्हारे लिये शिद्दत से दुआ की है के तेरा ईमान जाता न रहे और जब तू तौबा कर चुके तो अपने भाईयों के ईमान को मज़बूत करना।” पतरस ने आप से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, आप के साथ तो मैं क़ैद होने और मरने को भी तय्यार हूं।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ऐ पतरस! मैं तुम से कहता हूं, के आज इस से पहले के मुर्ग़ बांग दे तुम तीन दफ़ा मेरा इन्कार करोगे के तुम मुझे जानते तक नहीं।” उस के बाद हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “जब मैंने तुम्हें बटुए, थैली और जूतों के बग़ैर भेजा था तो क्या तुम किसी चीज़ के मोहताज हुए थे?” उन्होंने कहा, “किसी चीज़ के नहीं।” आप ने उन से फ़रमाया, “मगर अब जिस के पास बटवा हो वह उसे साथ रख ले और इसी तरह थैली भी और जिस के पास तलवार न हो वह अपने कपड़े बेच कर तलवार ख़रीद ले। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: ‘उसे बदकारों के साथ शुमार किया गया’ और मैं तुम को बताता हूं के ये बात मेरे हक़ में पूरा होना लाज़िमी है। हां, जो कुछ मेरे बारे में लिख्खा हुआ है वह पूरा होना ही है।” शागिर्दों ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, देखिये, यहां दो तलवारें हैं।” आप ने उन से फ़रमाया, “बहुत हैं।” फिर हुज़ूर ईसा बाहर निकले और जैसा आप का दस्तूर था कोहे-ज़ैतून पर गये, और आप के शागिर्द भी पीछे हो लिये। उस जगह पहुंच कर आप ने उन से फ़रमाया, “दुआ करो ताके तुम आज़माइश में न पड़ो।” फिर हुज़ूर ईसा उन्हें छोड़कर कुछ आगे चले गये, तक़रीबन इतने फ़ासिले पर जितनी दूरी तक पत्थर फेंका जा सकता है। वहां वह झुक कर यूं दुआ करने लगे, “ऐ बाप, अगर आप की मर्ज़ी हो; तो इस प्याले को मुझ से हटा ले लेकिन फिर भी मेरी मर्ज़ी नहीं बल्के तेरी मर्ज़ी पूरी हो।” और आसमान से एक फ़रिश्ता उन पर ज़ाहिर हुआ जो उन्हें तक़्वियत देता था। फिर वह सख़्त दर्द-ओ-करब में मुब्तिला होकर और भी दिल सोज़ी से दुआ करने लगे और उन का पसीना ख़ून की बूंदों की मानिन्द ज़मीन पर टपकने लगा। जब वह दुआ से फ़ारिग़ होकर खड़े हुए, और शागिर्दों के पास वापस आये, तो उन्हें उदासी के सबब, सोते पाया। और उन से पूछा, “तुम क्यूं सो रहे? उठ कर दुआ करो ताके तुम आज़माइश में न पड़ो।” अभी हुज़ूर ईसा ये बात कह ही रहे थे के एक हुजूम पहुंचा, और उन बारह में से एक, जिस का नाम यहूदाह था, उन के आगे-आगे चला आ रहा था। वह हुज़ूर ईसा को बोसे से सलाम करने के लिये आगे आया। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “यहूदाह, क्या तू एक बोसे से इब्न-ए-आदम को पकड़वाता है?” जब हुज़ूर ईसा के साथियों ने ये माजरा देखा तो कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, क्या हम तलवार चलायें?” और उन में से एक ने आला काहिन के ख़ादिम पर तलवार चला कर, उस का दायां कान उड़ा दिया। “बस करो! बहुत हो चुका” इस पर हुज़ूर ईसा ने कहा, और आप ने उस के कान को छू कर अच्छा कर दिया। तब हुज़ूर ईसा ने अहम-काहिनों, और बैतुलमुक़द्दस के सिपाहियों, और बुज़ुर्गों से जो उसे गिरिफ़्तार करने आये थे, से कहा, “क्या तुम तलवारें और लाठियां ले कर किसी बग़ावत करने वाले को पकड़ने निकले हो? जब में हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस मैं तुम्हारे साथ होता था, तो तुम ने मुझ पर हाथ न डाला लेकिन ये तुम्हारे और तारीकी के इख़्तियार का वक़्त है।” तब उन्होंने हुज़ूर ईसा को गिरिफ़्तार कर लिया और उन्हें वहां से आला काहिन के घर में ले गये। पतरस भी कुछ फ़ासिले पर रह कर उन के पीछे-पीछे हो लिया। और जब कुछ लोग सहन के बीच में आग जला कर एक साथ बैठे हुए थे तो पतरस भी उन के साथ बैठ गया। और एक कनीज़ ने उसे आग के पास बैठा देखकर उसे पहचानते हुए कहा, “के ये आदमी भी हुज़ूर ईसा के साथ था।” मगर पतरस ने इन्कार कर के कहा, “ऐ औरत मैं उसे नहीं जानता।” थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, “तू भी उन ही में से एक है।” पतरस ने कहा, “नहीं भाई, मैं नहीं हूं!” तक़रीबन एक घंटा बाद किसी और ने बड़े यक़ीन से कहा, “ये आदमी बिला शक उन के साथ था, क्यूंके ये भी तो गलीली है।” लेकिन पतरस ने कहा, “जनाब, मैं नहीं जानता के तुम क्या बोल रहे हो!” वह अभी कह ही रहा था के मुर्ग़ ने बांग दे दी। और ख़ुदावन्द ने मुड़ कर पतरस को सीधे देखा और पतरस को ख़ुदावन्द की वह बात याद आई जो आप ने पतरस से कही थी: “आज मुर्ग़ के बांग देने से पहले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।” और वह बाहर जा कर ज़ार-ज़ार रोया। जो आदमी हुज़ूर ईसा को अपने क़ब्ज़े में लिये हुए थे, आप की हंसी उड़ाने और पीटने लगे। उन्होंने आप की आंखों पर पट्टी बांध कर पूछा, “नुबुव्वत कर! के तुझे किस ने मारा?” और उन्होंने आप को बहुत सी गालियां भी दें। सुबह होते ही क़ौम के बुज़ुर्गों, अहम-काहिनों और शरीअत के आलिमों ने जमा होकर हुज़ूर ईसा को अपनी अदालते-आलिया में पेश किया और कहने लगे, “अगर तू अलमसीह है तो हम से कह दे।” आप ने उन से कहा, “अगर मैं तुम से कह भी दूं तब भी तुम ईमान न लाओगे। और अगर तुम से पूछूं, तो तुम जवाब नहीं दोगे। लेकिन अब से इब्न-ए-आदम क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा की दाहिनी तरफ़ बैठा रहेगा।” इस पर वह सब बोल उठे, “के क्या तू ख़ुदा का बेटा है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया के तुम ख़ुद कहते हो के मैं हूं। उन्होंने कहा, “अब हमें और गवाही की क्या ज़रूरत है? क्यूंके हम ने उसी के मुंह से इस बात को सुन लिया है।” तब पूरी मज्लिस उठी और हुज़ूर ईसा को पीलातुस के पास ले गई। और आप पर ये कह कर इल्ज़ाम लगाने लगे, “के हम ने इसे हमारी क़ौम को बहकाते पाया है। वह क़ैसर को महसूल अदा करने से मना करता है और दावा करता है के मैं अलमसीह, और एक बादशाह हूं।” तब पीलातुस ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “क्या आप यहूदियों के बादशाह हैं?” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “तुम ने ख़ुद ही कह दिया।” पीलातुस ने अहम-काहिनों और अवाम से कहा, “मैं इस शख़्स में कोई क़ुसूर नहीं पाता।” लेकिन वह इसरार कर के कहने लगे, “वह पूरे यहूदिया में गलील से ले कर यहां तक लोगों को अपनी तालीम से उकसाता है।” जब पीलातुस ने ये सुना तो उस ने पूछा, क्या ये आदमी गलीली है? और जूंही उसे मालूम हुआ के वह हेरोदेस की अमलदारी का है, उसे हेरोदेस के पास भेज दिया जो इन दिनों ख़ुद भी यरूशलेम में था। जब हेरोदेस ने हुज़ूर ईसा को देखा, तो निहायत ख़ुश हुआ, इसलिये के उसे एक अर्से से हुज़ूर ईसा को देखने की ख़ाहिश थी और उस ने आप के बारे में बहुत सी बातें सुन रख्खी थीं और उसे उम्मीद थी के वह हुज़ूर ईसा का कोई मोजिज़ा भी देख सकेगा। उस ने हुज़ूर ईसा से बहुत कुछ पूछा, लेकिन हुज़ूर ईसा ने उसे कोई जवाब न दिया। और अहम-काहिन और शरीअत के आलिम वहां खड़े होकर, बड़ी सख़्ती से आप पर इल्ज़ाम लगा रहे थे। तब हेरोदेस और उस के सिपाहियों ने साथ मिल कर हुज़ूर ईसा की बेइज़्ज़ती की और हंसी उड़ाई। फिर एक चमकदार लिबास पहना कर आप को पीलातुस के पास वापस भेज दिया। उसी दिन पीलातुस और हेरोदेस एक दूसरे के दोस्त बन गये हालांके इस से पहले उन में दुश्मनी थी। तब पीलातुस ने अहम-काहिनों, हुक्काम और अवाम को जमा किया और उन से कहा, “तुम इस शख़्स को मेरे पास ये कहते हुए लाये के ये लोगों को बग़ावत करने के लिये बहकाता है। मैंने ख़ुद भी तुम्हारे सामने उस से बाज़पुर्स की मगर जिस जुर्म का इल्ज़ाम तुम उस पर लगाते, मैंने उसे क़ुसूरवार नहीं पाया है। और न ही हेरोदेस ने, क्यूंके उस ने उसे हमारे पास वापस भेज दिया। देखो, इस ने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो उसे क़त्ल के लाइक़ ठहराये। लिहाज़ा, मैं इसे पिटवा कर छोड़ दूंगा।” उसे लाज़िम था के ईद के मौक़े पर मुजरिमों में से किसी एक को उन की ख़ातिर रिहा कर दे। लेकिन पूरी अवाम एक आवाज़ में चिल्लाने लगी, “के इस आदमी को मार डालो! हमारी ख़ातिर बरअब्बा को रिहा कर दे!” (बरअब्बा शहर में बग़ावत, और ख़ून के इल्ज़ाम में क़ैद किया गया था।) पीलातुस ने हुज़ूर ईसा को रिहा करने के इरादे से, उन से दुबारा पूछा। लेकिन वह चिल्लाने लगे, “के इसे मस्लूब करो! इसे मस्लूब करो!” तब उस ने उन से तीसरी बार पूछा: “क्यूं? आख़िर इस ने कौन सा जुर्म किया है? मैंने इस में ऐसा कोई क़ुसूर नहीं पाया के वह सज़ा-ए-मौत का मुस्तहिक़ हो। इसलिये में इसे पिटवा कर छोड़ देता हूं।” लेकिन वह चिल्ला-चिल्ला कर मुतालबा करने लगे के वह मस्लूब किया जाये और उन का चिल्लाना कारगर साबित हुआ। पस पीलातुस ने उन की दरख़्वास्त के मुताबिक़ मौत का हुक्म सादर कर दिया। और जो आदमी बग़ावत और ख़ून के जुर्म में क़ैद में था जिस की रिहाई उन्होंने मांगी थी, उसे छोड़ दिया गया, और हुज़ूर ईसा को उन की मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ उन के हवाले कर दिया। जब फ़ौजी हुज़ूर ईसा को लिये जा रहे थे, तो उन्होंने शमऊन कुरेनी को जो अपने गांव से आ रहा था पकड़ लिया, और सलीब उस पर रख दी ताके वह उसे उठाकर हुज़ूर ईसा के पीछे-पीछे ले चले। लोगों का एक बड़ा हुजूम आप के पीछे हो लिया, और हुजूम में कई औरतें भी थीं जो आप के लिये नोहा और मातम कर रही थीं। हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर उन से कहा, “ऐ यरूशलेम की बेटीयों! मेरे लिये मत रोओ; बल्के अपने लिये और अपने बच्चों के लिये रोओ। क्यूंके वह दिन आने वाले हैं जब तुम ये कहोगी, ‘के वह बांझ औरतें मुबारक हैं जिन के रहम बच्चों से ख़ाली रहे, और जिन की छातियों ने दूध नहीं पिलाया!’ तब “ ‘वह पहाड़ों से कहेंगे, “हम पर गिर पड़ो!” और टीलों से, “के हमें छुपा लो!” ’ क्यूंके, जब लोग हरे दरख़्त के साथ ऐसा सुलूक करते हैं, तो फिर सूखे दरख़्त के साथ क्या करेंगे?” दो और मुजरिम आदमी भी थे जिन्हें हुज़ूर ईसा के साथ ले जाया जा रहा था, ताके उन्हें भी क़त्ल किया जाये। जब वो सब खोपड़ी नामी जगह पर पहुंचे, तो वहां उन्होंने हुज़ूर ईसा को दो मुजरिमों के दरमियान में एक को आप के दाईं तरफ़, और दूसरे को बाईं तरफ़ मस्लूब किया। हुज़ूर ईसा ने दुआ की, “ऐ बाप, इन्हें मुआफ़ कर, क्यूंके ये नहीं जानते के क्या कर रहे हैं।” और उन्होंने आप के कपड़ों पर क़ुरा डाल कर आपस में तक़्सीम कर लिया। लोग खड़े-खड़े ये सब कुछ देख रहे थे और रहनुमा लोग भी हुज़ूर पर ताना कसते थे और कहते थे, “इस ने औरों को बचाया; अगर ये ख़ुदा का अलमसीह, जो बरगुज़ीदा है तो अपने आप को बचा ले।” सिपाहियों ने भी आकर आप की हंसी उड़ाया और पीने के लिये आप को सिरका दिया। और कहा, “अगर तू यहूदियों का बादशाह है, तो अपने आप को बचा ले।” हुज़ूर के सर के ऊपर एक नविश्ता भी लगाया गया था के ये: यहूदियों का बादशाह है। दो मुजरिम जो मस्लूब किये गये थे, उन में से एक ने हुज़ूर ईसा को लान-तान करते हुए कहा: “अगर तू अलमसीह है? तू अपने आप को और हमें बचा!” लेकिन दूसरे ने उसे डांटा और कहा, “क्या तुझे ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं हालांके तो ख़ुद भी वोही सज़ा पा रहा है! हम तो अपने जराइम की वजह से सज़ा पा रहे हैं, और हमारा क़त्ल किया जाना वाजिब है लेकिन इस इन्सान ने कोई ग़लत काम नहीं किया है।” तब उस ने कहा, “ऐ हुज़ूर ईसा! जब आप अपनी बादशाही में आयें तो मुझे याद करना।” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “मैं तुझे यक़ीन दिलाता हूं के तू आज ही मेरे साथ फ़िरदौस में होगा।” तक़रीबन दोपहर का वक़्त था, के चारों तरफ़ अन्धेरा छा गया और तीन बजे तक पूरे मुल्क की यही हालत रही। सूरज तारीक हो गया और बैतुलमुक़द्दस का पर्दा फट कर दो टुकड़े हो गया और हुज़ूर ईसा ने ऊंची आवाज़ से पुकार कर कहा, “ऐ बाप! मैं अपनी जान तुम्हारे हाथों में सौंपता हूं” और ये कह कर दम तोड़ दिया। जब फ़ौजी अफ़सर ने ये माजरा देखा, तो ख़ुदा की तम्जीद करते हुए कहा, “ये शख़्स वाक़ई रास्तबाज़ था।” और सारे लोग जो वहां जमा थे ये मंज़र देखकर, सीना-कूबी करते हुए लौट गये। लेकिन हुज़ूर ईसा के सारे जान पहचान वाले और वह औरतें जो सूबे गलील से आप के पीछे-पीछे आई थीं, कुछ फ़ासिले पर खड़ी ये सब देख रही थीं। यूसुफ़ नाम का एक आदमी था, वह यहूदियों की अदालते-आलिया का एक रुक्न था और बड़ा नेक और रास्तबाज़ था, वह अदालते-आलिया के अराकीन के फ़ैसला और अमल के हक़ में न था। वह यहूदियों के शहर अरिमतियाह का बाशिन्दा था, और ख़ुदा की बादशाही का मुन्तज़िर था। उस ने पीलातुस के पास जा कर हुज़ूर ईसा की लाश मांगी। और लाश को सलीब पर से उतार कर महीन सूती चादर में कफ़्नाया, और उसे एक क़ब्र में रख दिया, जो चट्टान में खोदी गई थी, जिस में कभी किसी को दफ़नाया नहीं गया था। वह तय्यारी का दिन था, और सबत का दिन शुरू होने ही वाला था। वह औरतें जो गलील से हुज़ूर ईसा के साथ आई थीं, यूसुफ़ के पीछे-पीछे गईं और उन्होंने उस क़ब्र को और हुज़ूर ईसा की लाश को देखा के किस तरह उस में रख्खा गया है। तब वह घर लौट गईं और उन्होंने ख़ुश्बूदार मसाले और इत्र तय्यार किया और शरीअत के हुक्म के मुताबिक़ सबत के दिन आराम किया। हफ़्ते के पहले दिन यानी इतवार, के सुब्ह-सवेरे, बाज़ औरतें ख़ुश्बूदार मसाले जो उन्होंने तय्यार किये थे, अपने साथ ले कर क़ब्र पर आईं। लेकिन उन्होंने पत्थर को क़ब्र के मुंह से लुढ़का हुआ पाया, लेकिन जब वह अन्दर गईं तो उन्हें ख़ुदावन्द ईसा की लाश न मिली। जब वह इस बारे में हैरत में मुब्तिला थीं तो अचानक दो शख़्स बिजली की तरह चमकदार लिबास में उन के पास आ खड़े हुए। वह ख़ौफ़ज़दा हो गईं और अपने सरज़मीं की तरफ़ झुका दिये, लेकिन उन्होंने उन से कहा, “तुम ज़िन्दा को मुर्दों में क्यूं ढूंडती हो? हुज़ूर ईसा यहां नहीं हैं; बल्के वह जी उठे हैं! तुम्हें याद नहीं, के जब वह गलील में तुम्हारे साथ थे तो उन्होंने तुम से कहा था: ‘के इब्न-ए-आदम को गुनहगारों के हवाले किया जाना, सलीब पर मस्लूब होना और तीसरे दिन फिर से जी उठना ज़रूरी है।’ ” तब उन्हें हुज़ूर ईसा की बातें याद आईं। जब वह ख़्वातीन क़ब्र से वापस आईं, तो ग्यारह रसूलों और बाक़ी सब शागिर्दों को सारी बातें बयान कर दीं। मरियम मगदलीनी, यूआन्ना, और याक़ूब की मां मरियम, और उन के साथ कई दूसरी औरतें थीं, जिन्होंने रसूलों को इन बातों की ख़बर दी थी। लेकिन उन्होंने औरतों का यक़ीन न किया, क्यूंके उन की बातें उन्हें फ़ुज़ूल सी लगीं। मगर पतरस उठे, और क़ब्र की तरफ़ दौड़े। वहां पतरस ने झुक कर अन्दर देखा, तो उन्हें सिर्फ़ ख़ाली कफ़न के कपड़े पड़े हुए नज़र आये, और वह तअज्जुब करते हुए के क्या हो गया है, चले गये। फिर ऐसा हुआ के उन में से दो शागिर्द उसी दिन इमाऊस नाम के एक गांव की तरफ़ जा रहे थे जो यरूशलेम से ग्यारह किलोमीटर की दूरी पर था वह आपस में उन वाक़ियात के बारे में बातें करते जा रहे थे जो हुई थीं। जब वह बातों में मश्ग़ूल थे और आपस में बहस कर रहे थे, तो हुज़ूर ईसा ख़ुद ही नज़दीक आकर उन के साथ-साथ चलने लगे; लेकिन वह हुज़ूर को पहचान न पाये क्यूंके उन की आंखों पर पर्दा पड़ा हुआ था। हुज़ूर ईसा ने उन से पूछा, “तुम लोग आपस में क्या बहस करते हुए जा रहे हो?” वह ये सुन कर ख़ामोश मायूस सा चेहरा लटकाए खड़े हो गये। तब उन में से एक जिस का नाम क्लयुपास था, आप से पूछा, “क्या यरूशलेम में अकेला तू ही अजनबी है जो ये भी नहीं जानता के इन दिनों में शहर में क्या-क्या हुआ है?” आप ने उन से पूछा, “क्या हुआ है?” उन्होंने जवाब दिया, “हुज़ूर ईसा नासरी का वाक़िया, वह एक नबी थे। जिन्हें काम और कलाम के बाइस ख़ुदा की नज़र में और सारे लोगों के नज़दीक बड़ी क़ुदरत हासिल थी। और हमारे अहम-काहिनों और हुक्काम ने हुज़ूर को क़त्ल करने का फ़रमान जारी कराया, और हुज़ूर को सलीब पर मस्लूब कर दिया; लेकिन हमें तो ये उम्मीद थी के यही वह शख़्स है जो इस्राईल को मुख़्लिसी अता करने वाला है और इस के अलावा इन वाक़ियात को हुए आज तीसरा दिन है। इस के अलावा, हमारे गिरोह की चंद औरतों ने हमें हैरत में डाल दिया है जो आज सुब्ह-सवेरे उन की क़ब्र पर गई थीं, लेकिन उन्हें हुज़ूर ईसा की लाश न मिली। उन्होंने लौट कर हमें बताया के उन्होंने फ़रिश्तों को देखा और फ़रिश्तों ने उन्हें बताया के हुज़ूर ईसा ज़िन्दा हो गये हैं। तब हमारे बाज़ साथी भी क़ब्र पर गये और जैसा औरतों ने कहा था उन्हें वैसा ही पाया। लेकिन उन्होंने भी हुज़ूर ईसा को नहीं देखा।” हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम कितने नादान, और नबियों की बताई बातों को यक़ीन करने में कितने सुस्त हो! क्या अलमसीह के लिये ज़रूरी न था के वह अज़ीय्यतों को बर्दाश्त करता और फिर अपने जलाल में दाख़िल होता?” और आप ने हज़रत मूसा से ले कर सारे नबियों की बातें जो आप के बारे में किताब-ए-मुक़द्दस में दर्ज थीं, उन्हें समझा दीं। इतने में वह उस गांव के नज़दीक पहुंचे जहां उन्हें जाना था, लेकिन हुज़ूर ईसा के चलने के ढंग से ऐसा मालूम हुआ गोया वह और आगे जाना चाहते हैं। लेकिन उन्होंने हुज़ूर को ये कह कर मजबूर किया, “के हमारे पास रुक जायें, क्यूंके दिन तक़रीबन ढल चुका है; और शाम होने वाली है; पस वह उन के साथ ठहरने के लिये अन्दर चले गये।” जब वह उन के साथ दस्तरख़्वान पर बैठे, तो आप ने रोटी ली, और शुक्र कर के तोड़ा, और उन्हें देने लगे। तब उन की आंखें खुल गईं और उन्होंने हुज़ूर को पहचान लिया, और हुज़ूर ईसा उन की नज़रों से ग़ायब हो गये। उन्होंने आपस में कहा, “क्या हमारे दिल जोश से नहीं भर गये थे जब वह रास्ते में हम से बातें कर रहे थे और हमें किताब-ए-मुक़द्दस से बातें समझा रहे थे।” तब वह उसी घड़ी उठे और यरूशलेम वापस आये। जहां उन्होंने ग्यारह रसूलों और उन के साथियों को एक जगह इकट्-ठे पाया, वह कह रहे थे, “ख़ुदावन्द सच-मुच मुर्दों में से जी उठे हैं! और शमऊन को दिखाई दिये हैं।” तब उन दोनों ने रास्ते की सारी बातें बयान कीं, और यह भी के उन्होंने किस तरह हुज़ूर ईसा को रोटी तोड़ते वक़्त पहचाना था। अभी वह ये बातें कह ही रहे थे, के हुज़ूर ईसा ख़ुद ही उन के दरमियान आ खड़े हुए और उन से फ़रमाया, “तुम्हारी सलामती हो।” लेकिन वह इस क़दर हिरासां और ख़ौफ़ज़दा हो गये, के समझने लगे के किसी रूह को देख रहे हैं। हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम क्यूं घबराये हुए हो और तुम्हारे दिलों में शक क्यूं पैदा हो रहे हैं? मेरे हाथ और पांव देखो, मैं ही हूं! मुझे छू कर देखो; क्यूंके रूह की हड्डियां और गोश्त नहीं होती हैं, जैसा तुम मुझ में देख रहे हो।” ये कहने के बाद, आप ने उन्हें अपने हाथ और पांव दिखाये। लेकिन ख़ुशी और हैरत के मारे जब उन्हें यक़ीन नहीं आ रहा था, लिहाज़ा हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “क्या यहां तुम्हारे पास कुछ खाने को है?” उन्होंने हुज़ूर को भुनी हुई मछली का क़त्ला पेश किया, और आप ने उसे लिया और उन के सामने खाया। फिर आप ने उन से कहा, “जब मैं तुम्हारे साथ था तो मैंने तुम्हें ये बातें बताई थीं: के हज़रत मूसा की तौरेत, नबियों की किताबों और ज़बूर में मेरे बारे में जो कुछ लिख्खा है वह सब ज़रूर पूरा होगा।” तब आप ने उन का ज़हन खोला ताके वह किताब-ए-मुक़द्दस को समझ सकें। और उन से कहा, “यूं लिख्खा है: के अलमसीह दुख उठायेगा और तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठेगा, और मेरे नाम से यरूशलेम से शुरू कर के तमाम क़ौमों में, गुनाहों की मुआफ़ी के लिये तौबा करने की मुनादी की जायेगी। तुम इन बातों के गवाह हो। मेरे बाप ने जिस का वादा किया है मैं उसे तुम पर नाज़िल करूंगा; लेकिन जब तक तुम्हें आसमान से क़ुव्वत का लिबास अता न हो इसी शहर में ठहरे रहना।” फिर हुज़ूर ईसा उन्हें बैतअन्नियाह तक बाहर ले गये, और अपने हाथ उठाकर उन्हें बरकत बख़्शी। जब वह उन्हें बरकत दे रहे थे, तो उन से जुदा हो गये और आसमान में ऊपर उठा लिये गये। शागिर्दों ने हुज़ूर को सज्दा किया और फिर बड़ी ख़ुशी के साथ यरूशलेम लौट गये। और वह बैतुलमुक़द्दस में लगातार हाज़िर होकर, ख़ुदा की हम्द किया करते थे। इब्तिदा में कलाम था और कलाम ख़ुदा के साथ था और कलाम ख़ुदा ही था। कलाम इब्तिदा से ही ख़ुदा के साथ था। सब चीज़ें कलाम के वसीले से ही पैदा की गईं; और कोई भी चीज़ ऐसी नहीं जो कलाम के बग़ैर वुजूद में आई हो। कलाम में ज़िन्दगी थी और वह ज़िन्दगी सब आदमियों का नूर थी। नूर तारीकी में चमकता है, और तारीकी उसे कभी मग़्लूब नहीं कर सकती। ख़ुदा ने एक शख़्स को भेजा जिन का नाम हज़रत यहया था। वह इसलिये आये के उस नूर की गवाही दें, ताके सब लोग हज़रत यहया के ज़रीये से ईमान लायें। वह ख़ुद तो नूर न थे; मगर नूर की गवाही देने के लिये आये थे। हक़ीक़ी नूर जो हर इन्सान को रोशन करता है, दुनिया में आने वाला था। वह दुनिया में थे और हालांके दुनिया उन्हीं के वसीले से पैदा हुई फिर भी दुनिया वालों ने उन्हें न पहचाना। वह अपने लोगों में आये, लेकिन उन के अपनों ही ने उन्हें क़बूल नहीं किया। लेकिन जितनों ने उन्हें क़बूल किया, उन्होंने उन्हें ख़ुदा के फ़र्ज़न्द होने का हक़ बख़्शा यानी उन्हें जो उन के नाम पर ईमान लाये। वह न तो ख़ून से, न जिस्मानी ख़ाहिश से और न इन्सान के अपने इरादे से और न ही शौहर की मर्ज़ी से बल्के ख़ुदा से पैदा हुए हैं। और कलाम मुजस्सम हुआ और हमारे दरमियान फ़ज़ल और सच्चाई से मामूर होकर ख़ेमा ज़न हुआ, और हम ने उन का ऐसा जलाल देखा, जो सिर्फ़ आसमानी बाप के इकलौते बेटे का होता है। (उन के बारे में हज़रत यहया ने गवाही दी। यहया ने पुकार कर, कहा, “ये वोही हैं जिस के हक़ में मैंने फ़रमाया था, ‘वह जो मेरे बाद आने वाले हैं, मुझ से कहीं मुक़द्दम हैं क्यूंके वह मुझ से पहले ही मौजूद थे।’ ”) वह फ़ज़ल से मामूर हैं और हम सब ने उन की मामूरी में से फ़ज़ल पर फ़ज़ल हासिल किया है। क्यूंके शरीअत तो हज़रत मूसा की मारिफ़त दी गई; मगर फ़ज़ल और सच्चाई की बख़्शिश हुज़ूर ईसा अलमसीह की मारिफ़त मिली। ख़ुदा को किसी ने कभी नहीं देखा, लेकिन इस वाहिद ख़ुदा ने जो बाप के सब से नज़दीक है, उन्होंने ही बाप को ज़ाहिर किया। और हज़रत यहया की गवाही ये है के जब यरूशलेम शहर के यहूदी रहनुमाओं ने बाज़ काहिनों और लावियों को हज़रत यहया के पास भेजा ताके वह उन से पूछें के वह कौन हैं। हज़रत यहया ने खुल कर इक़रार किया, “मैं तो अलमसीह नहीं हूं।” उन्होंने उन से पूछा, “फिर आप कौन हैं? क्या आप हज़रत एलियाह हैं?” हज़रत यहया ने जवाब दिया, “मैं नहीं?” “क्या आप वह नबी हैं?” हज़रत यहया ने जवाब दिया, “नहीं।” उन्होंने आख़िरी मर्तबा पूछा, “फिर आप कौन हैं? हमें जवाब दीजिये ताके हम अपने भेजने वालों को बता सकें। आख़िर आप अपने बारे में क्या कहते हैं?” हज़रत यहया ने यसायाह नबी के अल्फ़ाज़ में जवाब दिया, “मैं ब्याबान में पुकारने वाले की आवाज़ हूं, ‘ख़ुदावन्द के लिये राह तय्यार करो।’ ” तब वह फ़रीसी जो हज़रत यहया के पास भेजे गये थे उन से पूछने लगे, “अगर आप अलमसीह नहीं हैं, न हज़रत एलियाह हैं, और न ही वह नबी हैं तो फिर पाक-ग़ुस्ल क्यूं देते हैं?” हज़रत यहया ने उन्हें जवाब दिया, “मैं तो सिर्फ़ पानी से पाक-ग़ुस्ल देता हूं, लेकिन तुम्हारे दरमियान वह शख़्स मौजूद है जिसे तुम नहीं जानते। वह मेरे बाद आने वाला है, और मैं इस लाइक़ भी नहीं के उन के जूतों के तस्मे भी खोल सकूं।” ये वाक़ियात दरया-ए-यरदन के पार बैतअन्नियाह में हुआ जहां हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल दिया करते थे। अगले दिन हज़रत यहया ने हुज़ूर ईसा को अपनी तरफ़ आते देखकर कहा, “देखो, ये ख़ुदा का बर्रा है, जो दुनिया का गुनाह उठा ले जाता है! ये वोही हैं जिन की बाबत मैंने कहा था, ‘मेरे बाद एक शख़्स आने वाला है जो मुझ से कहीं मुक़द्दम हैं क्यूंके वह मुझ से पहले ही मौजूद थे।’ मैं ख़ुद भी उन्हें नहीं जानता था, मगर में इसलिये पानी से पाक-ग़ुस्ल देता हुआ आया था ताके वह बनी इस्राईल पर ज़ाहिर हो जायें।” फिर हज़रत यहया ने ये गवाही दी: “मैंने रूह को आसमान से कबूतर की शक्ल में नाज़िल होते देखा और वह हुज़ूर ईसा पर ठहर गया। मैं उन्हें न पहचानता था, मगर ख़ुदा जिन्होंने मुझे पानी से पाक-ग़ुस्ल देने के लिये भेजा था उसी ने मुझे बताया, ‘जिस इन्सान पर तू पाक रूह को उतरते और ठहरते देखे वोही वह शख़्स है जो पाक रूह से पाक-ग़ुस्ल देगा।’ अब मैंने देख लिया है और गवाही देता हूं के ये ख़ुदा का मख़्सूस किया हुआ बेटा है।” उस के अगले दिन हज़रत यहया फिर अपने दो शागिर्दों के साथ खड़े थे। हज़रत यहया ने हुज़ूर ईसा को वहां से गुज़रते देखकर कहा, “देखो, ये ख़ुदा का बर्रा है!” जब उन दो शागिर्दों ने हज़रत यहया को ये कहते सुन तो, वह हुज़ूर ईसा के पीछे हो लिये। हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर उन्हें पीछे आते देखा तो उन से पूछा, “तुम क्या चाहते हो?” उन्होंने कहा, “रब्बी” (यानी “उस्ताद”), “आप कहां रहते हो?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “चलो, तो देख लोगे।” चुनांचे उन्होंने आप के साथ जा कर वह जगह देखी जहां आप ठहरे हुए थे, और उस वक़्त शाम के चार बज चुके थे इसलिये वह उस दिन हुज़ूर के साथ रहे। उन दो शागिर्दों में एक अन्द्रियास था, जो शमऊन पतरस का भाई था, जो हज़रत यहया की बात सुन कर हुज़ूर ईसा के पीछे हो लिया था। अन्द्रियास ने सब से पहला काम ये किया के अपने भाई शमऊन को ढूंडा और बताया के, “हमें ख़्रिस्तुस” यानी (ख़ुदा के, अलमसीह) मिल गये हैं। तब अन्द्रियास उसे साथ ले कर हुज़ूर ईसा के पास आया। हुज़ूर ईसा ने उस पर निगाह डाली और फ़रमाया, “तुम यूहन्ना के बेटे शमऊन हो, अब से तुम्हारा नाम कैफ़ा यानी पतरस होगा।” अगले दिन हुज़ूर ईसा ने गलील के इलाक़े में जाने का इरादा किया। और फ़िलिप्पुस से मिल कर हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “तू मेरे पीछे हो ले।” फ़िलिप्पुस, अन्द्रियास और पतरस की तरह बैतसैदा शहर का बाशिन्दा था। फ़िलिप्पुस, नतनएल से मिला और उसे बताया के, “जिस शख़्स का ज़िक्र हज़रत मूसा ने तौरेत शरीफ़ में और नबियों ने अपनी सहीफ़ों में किया है वह हमें मिल गया है। वह यूसुफ़ का बेटा हुज़ूर ईसा नासरी हैं।” नतनएल ने पूछा, “क्या नासरत से भी कोई अच्छी चीज़ निकल सकती है?” फ़िलिप्पुस ने कहा, “चल कर ख़ुद ही देख लो।” जब हुज़ूर ईसा ने नतनएल को पास आते देखा तो उस के बारे में फ़रमाया, “ये है हक़ीक़ी इस्राईली, जिस के दिल में खोट नहीं।” नतनएल ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “आप मुझे कैसे जानते हैं?” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “फ़िलिप्पुस के बुलाने से पहले मैंने तुझे देख लिया था जब तू अन्जीर के दरख़्त के नीचे था।” नतनएल ने कहा, “रब्बी, आप ख़ुदा के बेटे हैं; आप इस्राईल के बादशाह हैं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “क्या तुम ये सुन कर ईमान लाये हो के मैंने तुम से ये कहा के मैंने तुम्हें अन्जीर के दरख़्त के नीचे देखा था। तुम इस से भी बड़ी-बड़ी बातें देखोगे।” हुज़ूर ईसा ने ये भी फ़रमाया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं तुम ‘आसमान को खुला हुआ, और ख़ुदा के फ़रिश्तों को इब्न-ए-आदम के लिये ऊपर चढ़ते और नीचे उतरते’ देखोगे।” तीसरे दिन क़ाना-ए-गलील गलील में एक शादी थी। हुज़ूर ईसा की मां भी वहां मौजूद थीं। हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्द भी शादी में बुलाए गये थे। जब अंगूरी शीरा ख़त्म हो गया, तो हुज़ूर ईसा की मां ने उन से कहा, “इन लोगों के पास अब और अंगूरी शीरा नहीं रहा।” हुज़ूर ईसा ने अपनी मां से फ़रमाया, “ऐ ख़ातून, इस से आप का और मेरा क्या वास्ता है? अभी मेरा वक़्त नहीं आया है।” हुज़ूर ईसा की मां ने ख़ादिमो से फ़रमाया, “जो कुछ ईसा तुम से फ़रमायें वोही करना।” नज़दीक ही छः पत्थर के मटके रखे हुए थे, जो यहूदियों की रस्म-ए-तहारत के लिये इस्तिमाल में आते थे, उन मटकों में 75 से 115 लीटर पानी की गुन्जाइश थी। हुज़ूर ईसा ने ख़ादिमो से फ़रमाया, “मटकों में पानी भर दो”; इसलिये उन्होंने मटकों को लबालब भर दिया। उस के बाद हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “अब कुछ निकाल कर अमीर-ए-मजलिस के पास ले जाओ।” उन्होंने ऐसा ही किया। जब अमीर-ए-मजलिस ने वह पानी चखा जो अंगूरी शीरे में तब्दील हो गया था। उसे पता न था के वह अंगूरी शीरा कहां से आया है, लेकिन उन ख़ादिमो को मालूम था जो उसे निकाल कर लाये थे, चुनांचे अमीर-ए-मजलिस ने दुल्हा को बुलाया और उस से कहा, “हर शख़्स शुरू में अच्छा अंगूरी शीरा पेश करता है और बाद में जब मेहमान सेर हो जाते हैं तो घटिया क़िस्म का अंगूरी शीरा पेश करता है मगर तूने अच्छा अंगूरी शीरा अब तक रख छोड़ा है।” ये हुज़ूर ईसा का पहला मोजिज़ा था जो आप ने क़ाना-ए-गलील गलील में दिखाया और अपना जलाल ज़ाहिर किया; और आप के शागिर्द आप पर ईमान लाये। उस के बाद हुज़ूर ईसा, अपनी मां, भाईयों और शागिर्दों के साथ कफ़रनहूम चले गये और वहां कुछ दिन तक क़ियाम किया। जब यहूदियों की ईद-ए-फ़सह नज़दीक आई तो हुज़ूर ईसा यरूशलेम रवाना हुए। आप ने वहां बैतुलमुक़द्दस के सहनों में लोगों को बैल, भेड़ और कबूतर फ़रोशों को और पैसे तब्दील करने वाले सर्राफों को भी तख़्तों पर बैठे हुए पाया। इसलिये हुज़ूर ईसा ने रस्सियों का कोड़ा बना कर उन सब को भेड़ों और बैलों समेत, पैसे तब्दील करने वाले सर्राफों के सिक्‍के बिखेर दिये और उन के तख़्ते उलट कर उन्हें बैतुलमुक़द्दस से बाहर निकाल दिया। और कबूतर फ़रोशों से फ़रमाया, “इन्हें यहां से ले जाओ, मेरे बाप के घर को तिजारत का घर मत बनाओ।” हुज़ूर के शागिर्दों को याद आया के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “तेरे घर की ग़ैरत मुझे खाये जाती है।” तब यहूदी रहनुमाओं ने आप से कहा, “क्या तुम कोई मोजिज़ा दिखा कर साबित कर सकते हो के तुम्हें ये सब करने का हक़ है?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “इस बैतुलमुक़द्दस को गिरा दो, तो मैं इसे तीन दिन में फिर खड़ा कर दूंगा।” यहूदियों ने जवाब दिया, “इस बैतुलमुक़द्दस की तामीर में छियालीस साल लगे हैं, और क्या तुम तीन दिन में इसे दुबारा बना दोगे?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने जिस बैतुलमुक़द्दस की बात की थी वह उन का अपना जिस्म था। चुनांचे जब वह मुर्दों में से जी उठे तब आप के शागिर्दों को याद आया के हुज़ूर ने ये बात कही थी। तब उन्होंने किताब-ए-मुक़द्दस पर और हुज़ूर ईसा के कहे हुए अल्फ़ाज़ पर यक़ीन किया। जब हुज़ूर ईसा ईद-ए-फ़सह पर यरूशलेम में थे तो बहुत से लोग आप के मोजिज़े देखकर आप के नाम पर ईमान ले आये। मगर हुज़ूर ईसा को उन पर एतबार न था, इसलिये के आप सब इन्सानों का हाल जानते थे। हुज़ूर को ये ज़रूरत न थी के कोई आदमी आप को किसी दूसरे आदमी के बारे में गवाही दे क्यूंके हुज़ूर ईसा हर एक इन्सान के दिल का हाल जानते थे। फ़रीसियों में एक आदमी था जिस का नाम निकुदेमुस था जो यहूदियों की अदालते-आलिया का रुक्न था। एक रात वह हुज़ूर ईसा के पास आकर कहने लगा, “ऐ रब्बी, हम जानते हैं के ख़ुदा ने आप को उस्ताद बना कर भेजा है क्यूंके जो मोजिज़े आप दिखाते हैं, कोई नहीं दिखा सकता जब तक के ख़ुदा उस के साथ न हो।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “के मैं तुझ से सच-सच कहता हूं के जब तक कोई नये सिरे से पैदा न हो, वह ख़ुदा की बादशाही को नहीं देख सकता।” निकुदेमुस ने पूछा, “अगर कोई आदमी बूढ़ा हो तो वह किस तरह दुबारा पैदा हो सकता है? ये मुम्किन नहीं के वह फिर से अपनी मां के पेट में दाख़िल होकर पैदा हो।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुझ से सच-सच कहता हूं के जब तक कोई शख़्स पानी और रूह से पैदा न हो, वह ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल नहीं हो सकता। बशर से तो बशर ही पैदा होता है मगर जो रूह से पैदा होता है वह रूह है। तअज्जुब न कर मैंने तुझ से फ़रमाया, ‘तुम सब को नये सिरे से पैदा होना लाज़िमी है।’ हवा जिधर चलन चाहती है चलती है। तुम उस की आवाज़ तो सुनते हो, मगर ये नहीं जानते के वह कहां से आती है और कहां जाती है। पस रूह से पैदा होने वाले हर आदमी का हाल भी ऐसा ही है।” निकुदेमुस ने पूछा, “ये कैसे मुम्किन हो सकता है?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “तुम तो बनी इस्राईल में उस्ताद का दर्जा रखते हो, फिर भी ये बातें नहीं समझते? मैं तुझ से सच-सच कहता हूं के हम जो जानते हैं वोही कहते हैं और जिसे देख चुके हैं उसी की गवाही देते हैं। फिर भी तुम लोग हमारी गवाही को नहीं मानते। मैंने तुम से ज़मीन की बातें कहीं और तुम ने यक़ीन न किया तो अगर मैं तुम से आसमान की बातें कहूं तो तुम कैसे यक़ीन करोगे? कोई इन्सान आसमान पर नहीं गया सिवाए उस के जो आसमान से आया यानी इब्न-ए-आदम। जिस तरह हज़रत मूसा ने ब्याबान में पीतल के सांप को लकड़ी पर लटका कर ऊंचा किया उसी तरह ज़रूरी है के इब्न-ए-आदम भी बुलन्द किया जाये। ताके जो कोई उन पर ईमान लाये अब्दी ज़िन्दगी पाये।” क्यूंके ख़ुदा ने दुनिया से इस क़दर महब्बत की के अपना इकलौता बेटा बख़्श दिया ताके जो कोई बेटे पर ईमान लाये हलाक न हो बल्के अब्दी ज़िन्दगी पाये। क्यूंके ख़ुदा ने बेटे को दुनिया में इसलिये नहीं भेजा के दुनिया को सज़ा का हुक्म सुनाये बल्के इसलिये के दुनिया को बेटे के वसीले से नजात बख़्शे। जो बेटे पर ईमान लाता है उस पर सज़ा का हुक्म नहीं होता लेकिन जो बेटे पर ईमान नहीं लाता उस पर पहले ही सज़ा का हुक्म हो चुका है क्यूंके वह ख़ुदा के इकलौते बेटे के नाम पर ईमान नहीं लाया। और सज़ा के हुक्म का सबब ये है के नूर दुनिया में आया है मगर लोगों ने नूर की बजाय तारीकी को पसन्द किया क्यूंके उन के काम बुरे थे। जो कोई बुरे काम करता है वह नूर से नफ़रत करता है और नूर के पास नहीं आता। कहीं ऐसा न हो के उस के बुरे काम ज़ाहिर हो जायें। लेकिन जिस की ज़िन्दगी सच्चाई के लिये वक़्फ़ है वह नूर के पास आता है ताके ज़ाहिर हो के उस का हर काम ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ अन्जाम पाया हुआ है। इन बातों के बाद हुज़ूर ईसा और उन के शागिर्द यहूदिया के इलाक़े में गये, और वहां रह कर लोगों को पाक-ग़ुस्ल देने लगे। हज़रत यहया भी एनोन में पाक-ग़ुस्ल देते थे जो शालीम के नज़दीक था। वजह ये थी के वहां पानी बहुत था, और लोग पाक-ग़ुस्ल लेने के लिये आते रहते थे। (ये हज़रत यहया के क़ैदख़ाने में डाले जाने के पहले की बात है।) हज़रत यहया के शागिर्दों की एक यहूदी से उस रस्म-ए-तहारत के बारे में जो पानी से अन्जाम दी जाती थी, बहस शुरू हुई। इसलिये वह हज़रत यहया के पास आकर कहने लगे, “ऐ रब्बी, वह शख़्स जो दरया-ए-यरदन के उस पार आप के साथ था और जिन के बारे में आप ने गवाही दी थी, वह भी पाक-ग़ुस्ल देते हैं और सब लोग उन्हीं के पास जाते हैं।” हज़रत यहया ने जवाब दिया, “इन्सान कुछ नहीं हासिल कर सकता जब तक उसे आसमानी ख़ुदा की जानिब से न दिया जाये। तुम ख़ुद गवाह हो के मैंने कहा था के, ‘मैं अलमसीह नहीं बल्के उन से पहले भेजा गया हूं।’ दुल्हन तो दुल्हा की होती ही है मगर दुल्हे का दोस्त जो दुल्हा की ख़िदमत में होता है, दुल्हा की हर बात पर कान लगाये रखता है और उस की आवाज़ सुन कर ख़ुश होता है। पस अब मेरी ये ख़ुशी पूरी हो गई। लाज़िम है के वह बढ़े और मैं घटता रहूं।” जो ऊपर से आता है वह सब से ऊंचा होता है; जो शख़्स ज़मीन से है ज़मीनी है, और ज़मीन की बातें करता है। मगर जो आसमान से आता है वह सब से ऊंचा होता है। उन्होंने जो कुछ ख़ुद देखा और सुना है उसी की गवाही देते हैं। लेकिन उन की गवाही कोई भी नहीं क़बूल करता। लेकिन जिस ने उन की गवाही को क़बूल किया है वह तस्दीक़ करता है के ख़ुदा सच्चा है। क्यूंके जिसे ख़ुदा ने भेजा है वह ख़ुदा की बातें कहता है, इसलिये के ख़ुदा बग़ैर हिसाब के पाक रूह देता है। बाप बेटे से महब्बत रखता है और बाप ने सब कुछ बेटे के हवाले कर दिया है। जो कोई बेटे पर ईमान लाता है वह अब्दी ज़िन्दगी पाता है, लेकिन जो कोई बेटे को रद्द करता है वह ज़िन्दगी से महरूम होकर, ख़ुदा के ग़ज़ब में मुब्तिला रहता है। फ़रीसियों के कानों तक ये बात पहुंची के बहुत से लोग हुज़ूर ईसा के शागिर्द बन रहे हैं और उन की तादाद हज़रत यहया से पाक-ग़ुस्ल पाने वालों से भी ज़्यादा है। हालांके हक़ीक़त ये थी के हुज़ूर ईसा ख़ुद नहीं बल्के उन के शागिर्द पाक-ग़ुस्ल देते थे। जब ख़ुदावन्द को ये बात मालूम हुई तो वह यहूदिया को छोड़कर वापस गलील को चले गये। चूंके ख़ुदावन्द को सामरिया से होकर गुज़रना था इसलिये वह सामरिया के एक सूख़ार नामी शहर में आये उस आराज़ी के नज़दीक वाक़े है जो याक़ूब ने अपने बेटे यूसुफ़ को दिया था। याक़ूब का कुआं वहीं था और हुज़ूर ईसा सफ़र की थकान की वजह से उस कुंए के नज़दीक बैठ गये। ये दोपहर का दरमियानी वक़्त था। एक सामरी औरत वहां पानी भरने आई। हुज़ूर ईसा ने औरत से कहा, “मुझे पानी पिला?” (क्यूंके हुज़ूर ईसा के शागिर्द खाना मोल लेने शहर गये हुए थे।) उस सामरी औरत ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आप तो यहूदी हैं और मैं एक सामरी औरत हूं। आप तो मुझ से पानी पिलाने को कहते हैं?” (क्यूंके यहूदी सामरियों से कोई मेल-जोल पसन्द नहीं करते थे)। हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “अगर तू ख़ुदा की बख़्शिश को जानती और ये भी जानती के कौन तुझ से पानी मांग रहा है तो तू उस से मांगती और वह तुझे ज़िन्दगी का पानी देता।” औरत ने कहा, “जनाब, आप के पास पानी भरने के लिये कुछ भी नहीं और कुआं बहुत गहरा है, आप को ज़िन्दगी का पानी कहां से मिलेगा? क्या आप हमारे बाप याक़ूब से भी बड़े हो जिन्होंने ये कुआं हमें दिया और ख़ुद उन्होंने और उन की औलाद ने और उन के मवेशियों ने इसी कुंए का पानी पिया?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो कोई ये पानी पीता है वह फिर प्यासा होगा लेकिन जो कोई वह पानी पीता है जो मैं देता हूं, वह कभी प्यासा न होगा। हक़ीक़त तो ये है के जो पानी में दूंगा वह उस में ज़िन्दगी का चश्मा बन जायेगा और हमेशा जारी रहेगा।” औरत ने हुज़ूर ईसा से कहा, “जनाब! मुझे भी ये पानी दे दीजिये ताके मैं प्यासी न रहूं और न ही मुझे पानी भरने के लिये यहां आना पड़े।” हुज़ूर ईसा ने औरत से फ़रमाया, “जा, और अपने शौहर को बुला ला।” औरत ने जवाब दिया, “मेरा कोई शौहर नहीं है।” हुज़ूर ईसा ने औरत से फ़रमाया, “तू सच कहती है के तेरा कोई शौहर नहीं है। तू पांच शौहर कर चुकी है और जिस के पास तू अब रहती है वह आदमी भी तेरा शौहर नहीं है। आप ने जो कुछ अर्ज़ किया बिलकुल सच है।” औरत ने कहा, “जनाब, मुझे लगता है के आप कोई नबी हैं। हमारे आबा-ओ-अज्दाद ने इस पहाड़ पर परस्तिश की लेकिन तुम यहूदी दावा करते हो के वह जगह जहां परस्तिश करना चाहिये यरूशलेम में है।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ औरत मेरा यक़ीन कर। वह वक़्त आ रहा है जब तुम लोग बाप की परस्तिश न तो इस पहाड़ पर करोगे न यरूशलेम में। तुम सामरी लोग जिस की परस्तिश करते हो उसे जानते तक नहीं। हम जिस की परस्तिश करते हैं उसे जानते हैं क्यूंके नजात यहूदियों में से है। लेकिन वह वक़्त आ रहा है बल्के आ चुका है जब सच्चे परस्तार बाप की रूह और सच्चाई से परस्तिश करेंगे क्यूंके बाप को ऐसे ही परस्तारों की जुस्तुजू है ख़ुदा रूह है और ख़ुदा के परस्तारों को लाज़िम है के वह रूह और सच्चाई से ख़ुदा की परस्तिश करें।” औरत ने कहा, “मैं जानती हूं के अलमसीह” जिसे (ख़्रिस्तुस कहते हैं) “आने वाले हैं। जब वह आयेंगे, तो हमें सब कुछ समझा देंगे।” इस पर हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं जो तुझ से बातें कर रहा हूं, वोही तो मैं हूं।” इतने में हुज़ूर ईसा के शागिर्द लौट आये और हुज़ूर ईसा को एक औरत से बातें करता देखकर हैरान हुए। लेकिन किसी ने न पूछा, “आप क्या चाहते हैं?” या इस औरत से किस लिये बातें कर रहे हैं? वह औरत पानी का घड़ा वहीं छोड़कर वापस शहर चली गई और लोगों से कहने लगी, “आओ एक आदमी से मिलो जिस ने मुझे सब कुछ बता दिया, जो मैंने किया था। क्या यही अलमसीह तो नहीं?” शहरी लोग बाहर निकले और हुज़ूर ईसा की तरफ़ रवाना हो गये। इस दौरान हुज़ूर ईसा के शागिर्द उन से दरख़्वास्त करने लगे, “उस्ताद मुहतरम, कुछ खा लीजिये।” लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मुझे एक खाना लाज़िमी तौर पर खाना है लेकिन तुम्हें उस के बारे में कुछ भी ख़बर नहीं।” तब शागिर्द आपस में कहने लगे, “क्या कोई पहले ही से उन के लिये खाना ले आया है?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मेरा खाना, ये है के जिन्होंने मुझे भेजा है, मैं उन ही की मर्ज़ी पूरी करूं और उन का काम अन्जाम दूं। ये मत कहो के क्या फ़सल पकने में, ‘अभी चार माह बाक़ी हैं’? मैं तुम से कहता हूं के अपनी आंखें खोलो और खेतों पर नज़र डालो। उन की फ़सल पक कर तय्यार है। बल्के अब फ़सल काटने वाला अपनी मज़दूरी पाता है और अब्दी ज़िन्दगी की फ़सल काटता है ताके बोने वाला और काटने वाला दोनों मिल कर ख़ुशी मनायें। चुनांचे ये मिसाल बरहक़ है ‘बोता कोई और है और काटता कोई और।’ मैंने तुम्हें भेजा ताके उस फ़सल को जो तुम ने नहीं बोई, काट लो। दूसरों ने मेहनत से काम किया और तुम उन की मेहनत के फल में शामिल हुए।” शहर के बहुत से सामरी उस औरत की गवाही सुन कर हुज़ूर ईसा पर ईमान लाये, “उन्होंने मुझे सब कुछ बता दिया जो मैंने किया था।” पस जब शहर के सामरी उन के पास आये तो हुज़ूर ईसा से दरख़्वास्त करने लगे के हमारे पास ठहर जायें, लिहाज़ा वह दो दिन तक उन के साथ रहे और भी बहुत से लोग थे जो अलमसीह की तालीम सुन कर आप पर ईमान लाये। उन्होंने उस औरत से कहा, “हम तेरी बातें सुन कर ही ईमान नहीं लाये; बल्के अब हम ने अपने कानों से सुन लिया है और हम जान गये हैं के ये आदमी हक़ीक़त में दुनिया का मुनज्जी है।” दो दिन बाद हुज़ूर ईसा फिर गलील की सिम्त चल दिये। हुज़ूर ईसा ने ख़ुद ही बता दिया था के कोई नबी अपने वतन में इज़्ज़त नहीं पाता। जब वह गलील में आये तो अहल-ए-गलील ने हुज़ूर ईसा को क़बूल क्या इसलिये के उन्होंने वह सब कुछ जो आप ने ईद-ए-फ़सह के मौक़े पर यरूशलेम में किया था अपनी आंखों से देखा था क्यूंके वह ख़ुद भी वहां मौजूद थे। ये दूसरा मौक़ा था जब वह क़ाना-ए-गलील गलील में आये थे जहां आप ने पानी को अंगूरी शीरे में तब्दील किया था। एक शाही हाकिम था जिस का बेटा कफ़रनहूम में बीमार पड़ा था। जब हाकिम ने सुना के हुज़ूर ईसा यहूदिया से गलील में आये हुए हैं तो वह हुज़ूर ईसा के पास पहुंचा और दरख़्वास्त करने लगा के मेरा बेटा मरने के क़रीब है। आप चल कर उसे शिफ़ा दे दीजिये। हुज़ूर ईसा ने शाही हाकिम से फ़रमाया, “जब तक तुम लोग निशान और अजीब काम न देख लो, हरगिज़ ईमान न लाओगे।” उस शाही हाकिम ने कहा, “ऐ आक़ा! जल्दी कीजिये, कहीं ऐसा न हो के मेरा बेटा मर जाये।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “रुख़्सत हो, तेरा बेटा ज़िन्दा रहेगा।” उस ने हुज़ूर ईसा की बात का यक़ीन किया और वहां से चला गया। अभी वह रास्ता ही में था के उस के ख़ादिम उसे मिले और कहने लगे के आप का बेटा सलामत है। जब शाही हाकिम ने पूछा के मेरा बेटा किस वक़्त से अच्छा होने लगा था तो ख़ादिमो ने बताया, “कल दोपहर तक़रीबन एक बजे के क़रीब बेटे का बुख़ार उतर गया था।” तब बाप को एहसास हुआ के ऐन वोही वक़्त था जब हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया था, “तेरा बेटा सलामत रहेगा।” चुनांचे वह ख़ुद और उस का सारा ख़ानदान हुज़ूर ईसा पर ईमान लाया। ये दूसरा मोजिज़ा था जो हुज़ूर ईसा ने यहूदिया से आने के बाद गलील में किया था। इस के बाद हुज़ूर ईसा यहूदियों की एक ईद के लिये यरूशलेम तशरीफ़ ले गये। यरूशलेम में भेड़ दरवाज़ा के पास एक हौज़ है जो इब्रानी ज़बान में बैतहस्दा कहलाता है और जो पांच बरामदों से घिरा हुआ है। इन बरामदों में बहुत से अन्धे, लंगड़े और मफ़्लूज पड़े रहते थे, पड़े-पड़े पानी के हिलने का इन्तिज़ार करते थे। कहा जाता था के ख़ुदावन्द का फ़रिश्ता किसी वक़्त नीचे उतर कर पानी हिलाता और पानी के हिलते ही जो कोई पहले हौज़ में उतर जाता था वह तनदरुस्त हो जाता था ख़्वाह वह किसी भी मर्ज़ का शिकार हो। वहां एक ऐसा आदमी भी पड़ा हुआ था जो अड़तीस बरस से मफ़्लूज था। जब हुज़ूर ईसा ने उसे वहां पड़ा देखा और जान लिया के वह एक मुद्दत से उसी हालत में है तो हुज़ूर ईसा ने उस मफ़्लूज से पूछा, “क्या तू तनदरुस्त होना चाहता है?” उस मफ़्लूज ने जवाब दिया, “आक़ा, जब पानी हिलाया जाता है तो मेरा कोई नहीं है जो हौज़ में उतरने के लिये मेरी मदद कर सके बल्के मेरे हौज़ तक पहुंचते-पहुंचते कोई और उस में उतर जाता है।” हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “उठ, और अपना बिछौना उठा और चल, फिर।” वह आदमी उसी वक़्त तनदरुस्त हो गया और अपनी बिछौना उठाकर चलने फिरने लगा। ये वाक़िया सबत के दिन हुआ था। यहूदी रहनुमा उस आदमी से जो तनदरुस्त हो गया था कहने लगे, “आज सबत का दिन है; और शरीअत के मुताबिक़ तेरा बिछौना उठाकर चलन रवा नहीं।” उस ने जवाब दिया, “जिस आदमी ने मुझे शिफ़ा बख़्शी उन्हीं ने मुझे हुक्म दिया था के, ‘अपना बिछौना उठाकर चल फिर।’ ” उन्होंने उस मफ़्लूज से पूछा, “कौन है वह जिस ने तुझे बिछौना उठाकर चलने फिरने का हुक्म दिया है?” शिफ़ा पाने वाले आदमी को कुछ नहीं मालूम था के उसे हुक्म देने वाला कौन है क्यूंके हुज़ूर ईसा लोगों की भेड़ में कहीं आगे निकल गये थे। बाद में हुज़ूर ईसा ने उस आदमी को बैतुलमुक़द्दस में देखकर उस से फ़रमाया, देख, “अब तू तनदरुस्त हो गया है, गुनाह से दूर रहना वर्ना तुझ पर इस से भी बड़ी आफ़त न आ जाये।” उस ने जा कर यहूदी रहनुमाओं को बताया के जिस ने मुझे तनदरुस्त किया वह हुज़ूर ईसा हैं। हुज़ूर ईसा ऐसे मोजिज़े सबत के दिन भी करते थे इसलिये यहूदी रहनुमा आप को सताने लगे। हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मेरा बाप अब तक अपना काम कर रहा है और में भी कर रहा हूं।” इस वजह से यहूदी रहनुमा हुज़ूर ईसा को क़त्ल करने की कोशिश में पहले से भी ज़्यादा सरगर्म हो गये क्यूंके उन के नज़दीक हुज़ूर ईसा न सिर्फ़ सबत के हुक्म की ख़िलाफ़वर्ज़ी करते थे बल्के ख़ुदा को अपना बाप कह कर पुकारते थे गोया वह ख़ुदा के बराबर थे। हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये जवाब दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के बेटा अपने आप कुछ नहीं कर सकता। वह वोही करता है जो वह अपने बाप को करते देखता है क्यूंके बाप बेटे से प्यार करता है और अपने सारे काम उसे दिखाता है। तुम्हें हैरत होगी के वह इन से भी बड़े-बड़े काम उसे दिखायेगा। क्यूंके जिस तरह बाप मुर्दों को ज़िन्दा करता है और ज़िन्दगी बख़्शता है उसी तरह बेटा भी जिसे चाहता है उसे ज़िन्दगी बख़्शता है। बाप किसी की अदालत नहीं करता बल्के उस ने अदालत का सारा इख़्तियार बेटे को सौंप दिया है, ताके सब लोग बेटे को भी वोही इज़्ज़त दें जो वह बाप को देते हैं। जो बेटे की इज़्ज़त नहीं करता वह बाप की भी जिस ने बेटे को भेजा है, इज़्ज़त नहीं करता। “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जो कोई मेरा कलाम सुन कर मेरे भेजने वाले पर ईमान लाता है, अब्दी ज़िन्दगी उसी की है और इस पर सज़ा का हुक्म नहीं होता बल्के वह मौत से बच कर ज़िन्दगी में दाख़िल हो गया। मैं तुम से सच कहता हूं के वह वक़्त आ रहा है बल्के आ चुका है जब मुर्दे ख़ुदा के बेटे की आवाज़ सुनेंगे और उसे सुन कर ज़िन्दगी हासिल करेंगे। क्यूंके जैसे बाप अपने आप में ज़िन्दगी रखता है वैसे ही बाप ने बेटे को भी अपने में ज़िन्दगी रखने का शरफ़ बख़्शा है। बल्के बाप ने अदालत करने का इख़्तियार बेटे को बख़्श दिया है क्यूंके वह इब्न-ए-आदम हैं। “इन बातों पर तअज्जुब न करो, क्यूंके वह वक़्त आ रहा है जब सारे मुर्दे उस की आवाज़ सुनेंगे और क़ब्रों से बाहर निकल आयेंगे जिन्होंने नेकी की है वह ज़िन्दगी की क़ियामत के लिये जायेंगे और जिन्होंने बदी की है वह क़ियामत की सज़ा पायेंगे मैं अपने आप कुछ नहीं कर सकता। जैसा सुनता हूं फ़ैसला देता हूं और मेरा फ़ैसला बरहक़ होता है क्यूंके में अपनी मर्ज़ी का नहीं बल्के अपने भेजने वाले की मर्ज़ी का तालिब हूं। “अगर में अपनी गवाही ख़ुद ही दूं तो मेरी गवाही बरहक़ नहीं। लेकिन एक और है जो मेरे हक़ में गवाही देता है और मैं जानता हूं के मेरे बारे में उस की गवाही बरहक़ है। “तुम ने हज़रत यहया के पास पैग़ाम भेजा और उन्होंने सच्चाई की गवाही दी। मैं अपने बारे में इन्सान की गवाही मन्ज़ूर नहीं करता लेकिन इन बातों का ज़िक्र इसलिये करता हूं के तुम नजात पाओ। यहया एक चिराग़ थे जो जले और रोशनी देने लगे और तुम ने कुछ अर्से के लिये उन ही की रोशनी से फ़ैज़ पाना बेहतर समझा। “मेरे पास हज़रत यहया की गवाही से बड़ी गवाही मौजूद है क्यूंके जो काम ख़ुदा ने मुझे अन्जाम देने के लिये सौंपे हैं और जिन्हें मैं अन्जाम दे रहा हूं वह मेरे गवाह हैं के मुझे बाप ने भेजा है। और बाप जिन्होंने मुझे भेजा है, ख़ुद उन ही ने मेरे हक़ में गवाही दी है। तुम ने न तो कभी उन की आवाज़ सुनी है न ही उन की सूरत देखी है। न ही उन का कलाम तुम्हारे दिलों में क़ाइम रहता है। क्यूंके जिसे बाप ने भेजा है तुम उन का यक़ीन नहीं करते। तुम किताब-ए-मुक़द्दस का बड़ा गहरा मुतालअः करते हो क्यूंके तुम समझते हो के उस में तुम्हें अब्दी ज़िन्दगी मिलेगी। यही किताब-ए-मुक़द्दस मेरे हक़ में गवाही देती है। फिर भी तुम ज़िन्दगी पाने के लिये मेरे पास आने से इन्कार करते हो। “मैं आदमियों की तारीफ़ का मोहताज नहीं, क्यूंके मुझे मालूम है के तुम्हारे दिलों में ख़ुदा के लिये कोई महब्बत नहीं। मैं अपने बाप के नाम से आया हूं और तुम मुझे क़बूल नहीं करते लेकिन अगर कोई अपने ही नाम से आये तो तुम उसे क़बूल कर लोगे। तुम एक दूसरे से इज़्ज़त पाना चाहते हो और जो इज़्ज़त वाहिद ख़ुदा की जानिब से मिलती है उसे हासिल करना नहीं चाहते, तुम कैसे ईमान ला सकते हो? “ये मत समझो के मैं बाप के सामने तुम्हें मुजरिम ठहराऊंगा। तुम्हें मुजरिम ठहराने वाला तो हज़रत मूसा हैं जिस से तुम्हारी उम्मीदें वाबस्ता हैं। अगर तुम हज़रत मूसा का यक़ीन करते हो तो मेरा भी करते, इसलिये के हज़रत मूसा ने मेरे बारे में लिख्खा है लेकिन जब तुम हज़रत मूसा की लिखी हुई बातों का यक़ीन नहीं करते तो मेरे मुंह से निकली हुई बातों का कैसे यक़ीन करोगे?” कुछ देर बाद हुज़ूर ईसा कश्ती के ज़रीये गलील की झील यानी तिबरियास की झील के उस पार चले गये। लोगों का एक बड़ा हुजूम उन के पीछे था क्यूंके वह लोग बीमारों को शिफ़ा देने के लिये मोजिज़े जो हुज़ूर ईसा ने किये थे, देख चुके थे। हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ एक पहाड़ी पर जा बैठे। यहूदियों की ईद-ए-फ़सह नज़दीक थी। जब हुज़ूर ईसा ने नज़र उठाई तो एक बड़ी भेड़ को अपनी तरफ़ आते देखा। हुज़ूर ईसा ने फ़िलिप्पुस से फ़रमाया, “हम इन लोगों के खाने के लिये रोटियां कहां से मोल लायें?” हुज़ूर ईसा ने महज़ आज़माने के लिये उन्हें ये फ़रमाया था क्यूंके ख़ुदावन्द ने पहले ही से सोच रखा था के वह क्या करने वाले हैं। फ़िलिप्पुस ने ख़ुदावन्द को जवाब दिया, “इन लोगों के खाने के लिये रोटियां मोल लेने के लिये दो सौ दीनार भी हों तो काफ़ी न होंगे के हर एक को थोड़ी मिक़्दार में मिल जाये।” हुज़ूर ईसा के शागिर्दों में से एक शागिर्द, अन्द्रियास जो शमऊन पतरस का भाई था, बोल उठे। “यहां एक लड़का है जिस के पास जौ की पांच छोटी रोटियां और दो छोटी मछलियां हैं। लेकिन इन से इतने लोगों का क्या होगा?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “लोगों को बिठा दो।” वहां काफ़ी घास थी चुनांचे वह लोग (जो पांच हज़ार के क़रीब थे नीचे बैठ गये)। हुज़ूर ईसा ने वह रोटियां हाथ में ले कर, ख़ुदा का शुक्र अदा किया और बैठे हुए लोगों में उन की ज़रूरत के मुताबिक़ तक़्सीम किया। इसी तरह ख़ुदावन्द ने मछलियां भी तक़्सीम कर दीं। जब लोग पेट भर कर खा चुके तो हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “बचे हुए टुकड़ों को जमा कर लो। कुछ भी ज़ाए न होने पाये।” पस उन्होंने जौ की रोटियों के बचे हुए टुकड़ों को जमा किया और उन से बारह टोकरियां भर लीं। जब लोगों ने हुज़ूर ईसा का मोजिज़ा देखा तो कहने लगे, “यक़ीनन यही वह नबी हैं जो दुनिया में आने वाले थे।” हुज़ूर ईसा को मालूम हो गया था के वह उन्हें बादशाह बनने पर मजबूर करेंगे इसलिये वह तन्हा एक पहाड़ की तरफ़ रवाना हो गये। जब शाम हुई तो आप के शागिर्द झील पर पहुंचे और कश्ती में बैठ कर झील के पार कफ़रनहूम के लिये रवाना हो गये। अन्धेरा हो चुका था और हुज़ूर ईसा उन के दरमियान में न थे। हवा मुख़ालिफ़ होने की वजह से अचानक आंधी चली और झील में मौजें उठने लगीं। पस जब वो कश्ती को खेते-खेते क़रीब पांच या छः किलोमीटर आगे निकल गये, तब उन्होंने हुज़ूर ईसा को पानी पर चलते हुए और कश्ती की तरफ़ आते देखा और वह निहायत ही ख़ौफ़ज़दा हो गये। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “ख़ौफ़ न करो, मैं हूं।” शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा को कश्ती में सवार कर लिया और उन की कश्ती उसी वक़्त दूसरे किनारे जा पहुंची जहां शागिर्द जाना चाहते थे। अगले दिन उस हुजूम ने जो झील के पार खड़ा था देखा के वहां सिर्फ़ एक ही कश्ती है, वह समझ गये के हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों के साथ कश्ती पर सवार नहीं हुए थे और आप के शागिर्द आप के बग़ैर ही चले गये थे। तब तिबरियास की जानिब से कुछ कश्तियां वहां किनारे आ लगीं। ये वह जगह थी जहां ख़ुदावन्द ने शुक्र अदा कर के लोगों को रोटी खिलाई थी। जब लोगों ने देखा के न तो हुज़ूर ईसा ही वहां हैं न उन के शागिर्द तो वह ख़ुद उन कश्तियों में बैठ कर हुज़ूर ईसा की जुस्तुजू में कफ़रनहूम की तरफ़ रवाना हो गये। तब वह हुज़ूर ईसा को झील के पार देखकर पूछने लगे, “रब्बी, आप यहां कब पहुंचे?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंडते हो, मेरे मोजिज़े देखो बल्के इसलिये के तुम्हें पेट भर खाने को रोटियां मिली थीं। इस ख़ुराक़ के लिये जो ख़राब हो जाती है दौड़ धूप न करो, बल्के उस के लिये जो अब्दी ज़िन्दगी तक बाक़ी रहती है, जो इब्न-ए-आदम तुम्हें अता करेगा क्यूंके ख़ुदा बाप ने उन पर मुहर की है।” तब उन्होंने हुज़ूर ईसा से पूछा, “ख़ुदा के काम अन्जाम देने के लिये हमें क्या करना चाहिये?” हुज़ूर ईसा ने जवाब में फ़रमाया, “ख़ुदा का काम ये है के जिसे उस ने भेजा है उस पर ईमान लाओ।” तब वह ख़ुदावन्द से पूछने लगे, “आप और कौन सा मोजिज़ा दिखायेंगे जिसे देखकर हम आप पर ईमान लायें? हमारे आबा-ओ-अज्दाद ने ब्याबान में मन्न खाया; जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: ‘ख़ुदा ने उन्हें खाने के लिये आसमान से रोटी भेजी।’ ” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं, वह रोटी तुम्हें आसमान से हज़रत मूसा ने तो नहीं दी, बल्के मेरे बाप ने तुम्हें आसमान से हक़ीक़ी रोटी दी है। क्यूंके ख़ुदा की रोटी वह है जो आसमान से उतरती है और दुनिया को ज़िन्दगी अता करती है।” उन्होंने कहा, “जनाब ये रोटी हमें हमेशा अता होती रहे।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ज़िन्दगी की रोटी मैं ही हूं, जो मेरे पास आयेगा कभी भूका न रहेगा और जो मुझ पर ईमान लायेगा कभी प्यासा न होगा। लेकिन मैं तुम से कह चुका हूं के तुम ने मुझे देख लिया है फिर भी ईमान नहीं लाते। वह सब जो बाप मुझे देता है वह मुझ तक पहुंच जायेगा और जो कोई मेरे पास आयेगा, मैं उसे अपने से जुदा न होने दूंगा। क्यूंके मैं आसमान से इसलिये नहीं उतरा के अपनी मर्ज़ी पूरी करूं बल्के इसलिये के अपने भेजने वाले की मर्ज़ी पर अमल करूं। और जिस ने मुझे भेजा है उस की मर्ज़ी ये है के मैं उन में से किसी को हाथ से न जाने दूं जिन्हें उस ने मुझे दिया है बल्के सब को आख़िरी दिन फिर उसे ज़िन्दा कर दूं। क्यूंके मेरे बाप की मर्ज़ी ये है के जो कोई बेटे को देखे और उस पर ईमान लाये वह अब्दी ज़िन्दगी पाये, और मैं उसे आख़िरी दिन फिर से ज़िन्दा करूं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया था, “जो रोटी आसमान से उतरी, मैं ही हूं।” ये सुन कर यहूदी रहनुमाओं ने उन पर बुड़बुड़ाना शुरू कर दिया। वह कहने लगे, “क्या ये यूसुफ़ का बेटा ईसा नहीं, जिस के बाप और मां को हम जानते हैं? अब वह ये कैसे कहता है, ‘मैं आसमान से उतरा हूं’?” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “आपस में बुड़बुड़ाना बन्द करो, मेरे पास कोई नहीं आ सकता जब तक के बाप जिस ने मुझे भेजा है उसे खींच न लाये, और मैं उसे आख़िरी दिन फिर उसे ज़िन्दा कर दूंगा। नबियों के सहीफ़ों में लिख्खा है: ‘ख़ुदा उन सब को इल्म बख़्शेगा।’ जो कोई बाप की सुनता है और बाप से सीखता है वह मेरे पास आता है। बाप को किसी ने नहीं देखा सिवाए उस के जो ख़ुदा की जानिब से है; सिर्फ़ उसी ने बाप को देखा है। मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जो कोई ईमान लाता है, अब्दी ज़िन्दगी उस की है। ज़िन्दगी की रोटी मैं ही हूं। तुम्हारे बाप दादा ने ब्याबान में मन्ना खाया फिर भी वह मर गये। लेकिन जो रोटी आसमान से उतरी है यहां मौजूद है ताके आदमी उस रोटी में से खाये और न मरे। मैं ही वह ज़िन्दगी की रोटी हूं जो आसमान से उतरी है। अगर कोई इस रोटी में से खायेगा तो वह हमेशा ज़िन्दा रहेगा। ये रोटी मेरा गोश्त है जो मैं सारी दुनिया की ज़िन्दगी के लिये दूंगा।” यहूदी रहनुमाओं में झगड़ा शुरू हो गया और वह कहने लगे, “ये आदमी हमें कैसे अपना गोश्त खाने के लिये दे सकता है?” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जब तक तुम इब्न-ए-आदम का गोश्त न खाओ और उस का ख़ून न पियो, तुम में ज़िन्दगी नहीं। जो कोई मेरा गोश्त खाता और मेरा ख़ून पीता है उस में अब्दी ज़िन्दगी है और मैं उसे आख़िरी दिन फिर से ज़िन्दा करूंगा। इसलिये के मेरा गोश्त वाक़ई खाने की चीज़ है और मेरा ख़ून वाक़ई पीने की चीज़ है। जो कोई मेरा गोश्त खाता और मेरा ख़ून पीता है, मुझ में क़ाइम रहता है और में उस में। मेरा बाप जिस ने मुझे भेजा है ज़िन्दा है और में भी बाप की वजह से ज़िन्दा हूं। इसी तरह जो मुझे खायेगा वह मेरी वजह से ज़िन्दा रहेगा। यही वह रोटी है जो आसमान से उतरी। तुम्हारे आबा-ओ-अज्दाद ने मन्ना खाया फिर भी मर गये लेकिन जो इस रोटी को खाता है, हमेशा तक ज़िन्दा रहेगा।” हुज़ूर ईसा ने ये बातें उस वक़्त कहीं जब वह कफ़रनहूम शहर के यहूदी इबादतगाह में तालीम दे रहे थे। ये बातें सुन कर हुज़ूर ईसा के बहुत से शागिर्द कहने लगे, “ये तालीम बड़ी सख़्त है। इसे कौन क़बूल कर सकता है?” हुज़ूर ईसा ने जान लिया के उन के शागिर्द इस बात पर आपस में बुड़बुड़ा रहे हैं लिहाज़ा ख़ुदावन्द ने उन से कहा, “क्या तुम्हें मेरी बातों से ठेस पहुंची है? अगर तुम इब्न-ए-आदम को ऊपर जाते देखोगे जहां वह पहले था! तो क्या होगा? रूह ज़िन्दगी बख़्शती है; जिस्म से कोई फ़ायदा नहीं जो बातें मैंने तुम से कही हैं वह रूह और ज़िन्दगी दोनों से पुर हैं। फिर भी तुम में बाज़ ऐसे हैं जो ईमान नहीं लाये।” हुज़ूर ईसा को शुरू से इल्म था के उन में कौन ईमान नहीं लायेगा और कौन उन्हें पकड़वायेगा। फिर हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “इसीलिये मैंने तुम से कहा था के मेरे पास कोई नहीं आता जब तक के बाप उसे खींच न लाये।” इस पर उन के कई शागिर्द हुज़ूर ईसा को छोड़कर चले गये और फिर उन के साथ न रहे। “तब हुज़ूर ईसा ने उन बारह शागिर्दों से पूछा, क्या तुम भी मुझे छोड़ जाना चाहते हो?” शमऊन पतरस ने आप को जवाब दिया, “ऐ ख़ुदावन्द, हम किस के पास जायें? अब्दी ज़िन्दगी की बातें तो आप ही के पास हैं। हम ईमान लाये और जानते हैं के आप ही ख़ुदा के क़ुददूस हैं।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैंने तुम बारह को चुन तो लिया है लेकिन तुम में से एक शख़्स शैतान है!” (उस का मतलब शमऊन इस्करियोती के बेटे यहूदाह से था, जो, अगरचे उन बारह शागिर्दों में से एक, बाद में हुज़ूर ईसा को पकड़वाने को था।) उस के बाद, हुज़ूर ईसा गलील में इधर-उधर मुसाफ़रत करते रहे। वह सूबे यहूदिया से दूर ही रहना चाहते थे क्यूंके वहां यहूदी रहनुमा हुज़ूर ईसा के क़त्ल के फ़िराक़ में थे। और यहूदियों की ईद-ए-ख़ियाम नज़दीक थी। ख़ुदावन्द के भाईयों ने आप से कहा, “यहां से निकल कर यहूदिया चले जायें, ताके आप के शागिर्द ये मोजिज़े जो आप ने किये हैं देख सकें। जो कोई अपनी शौहरत चाहता है वह छुप कर काम नहीं करता। आप जो ये मोजिज़े करते हैं तो ख़ुद को दुनिया पर ज़ाहिर कर दीजिये।” बात ये थी के ख़ुदावन्द के भाई भी आप पर ईमान न लाये थे। हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “ये वक़्त मेरे लिये मुनासिब नहीं है, तुम्हारे लिये तो हर वक़्त मुनासिब है। दुनिया तुम से अदावत नहीं रख सकती, लेकिन मुझ से रखती है क्यूंके मैं उस के बुरे कामों की वजह से उस के ख़िलाफ़ गवाही देता हूं। तुम लोग ईद के जश्न में चले जाओ। मैं अभी नहीं जाऊंगा क्यूंके मेरे जाने का अभी वक़्त पूरा नहीं हुआ है।” ये कह कर वह गलील ही में ठहरे रहे। ताहम, आप के भाई ईद पर चले गये बल्के हुज़ूर ईसा भी अवामी तौर पर नहीं बल्के ख़ुफ़िया तौर पर गये। वहां ईद में यहूदी रहनुमा हुज़ूर ईसा को ढूंडते और पूछते फिरते थे, “वह कहां हैं?” लोगों में आप के बारे में बड़ी सरगोशियां हो रही थीं। बाज़ कहते थे, “वह एक नेक आदमी है।” बाज़ का कहना था, “नहीं, वह लोगों को गुमराह कर रहा है।” लेकिन यहूदियों के ख़ौफ़ की वजह से कोई हुज़ूर ईसा के बारे में खुल कर बात नहीं करता था। जब ईद के आधे दिन गुज़र गये तो हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस में गये और वहीं तालीम देने लगे। यहूदी रहनुमा मुतअज्जिब होकर कहने लगे, “इस आदमी ने बग़ैर सीखे इतना इल्म कहां से हासिल कर लिया?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ये तालीम मेरी अपनी नहीं है बल्के ये मुझे मेरे भेजने वाले की जानिब से हासिल हुई है। अगर कोई ख़ुदा की मर्ज़ी पर चलन चाहे तो उसे मालूम हो जायेगा के ये तालीम ख़ुदा की जानिब से है या मेरी अपनी जानिब से। जो कोई अपनी जानिब से कुछ कहता है वह अपनी इज़्ज़त का भूका होता है लेकिन जो अपने भेजने वाले की इज़्ज़त चाहता है वह सच्चा है और इस में नारास्ती नहीं पाई जाती। तुम क्यूं मुझे हलाक करने पर तुले हुए हो? क्या हज़रत मूसा ने तुम्हें शरीअत नहीं दी? लेकिन तुम में से कोई इस पर अमल नहीं करता। आख़िर तुम मुझे क्यूं क़त्ल करना चाहते हो?” लोगों ने कहा, “आप में ज़रूर कोई बदरूह है, कौन आप को हलाक करना चाहता है?” हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “मैंने एक मोजिज़ा किया और तुम तअज्जुब करने लगे। लेकिन फिर भी, हज़रत मूसा ने तुम्हें ख़तना करने का हुक्म दिया है (हालांके तुम्हारे आबा-ओ-अज्दाद ने हज़रत मूसा से कहीं पहले ये रस्म शुरू कर दी थी), तुम सबत के दिन लड़के का ख़तना करते हो। अगर लड़के का ख़तना सबत के दिन किया जा सकता है ताके हज़रत मूसा की शरीअत क़ाइम रहे तो अगर मैंने एक आदमी को सबत के दिन बिलकुल तनदरुस्त कर दिया तो तुम मुझ से किस लिये ख़फ़ा हो गये? आप का इन्साफ़ ज़ाहिरी नहीं, बल्के सच्चाई की बुनियाद पर मब्नी हो।” तब यरूशलेम के बाज़ लोग पूछने लगे, “क्या ये वोही आदमी तो नहीं जिस के क़त्ल की कोशिश हो रही है? देखो वह, एलानिया तालीम देते हैं, और उन्हें कोई कुछ नहीं कहता। क्या हमारे हुक्काम ने भी तस्लीम कर लिया है के यही अलमसीह हैं? हम जानते हैं के ये आदमी कहां का है; लेकिन जब अलमसीह का ज़हूर होगा, तो किसी को इस का इल्म तक न होगा के वह कहां के हैं।” फिर, हुज़ूर ईसा ने बैतुलमुक़द्दस में तालीम देते वक़्त, पुकार कर फ़रमाया, “हां, तुम मुझे जानते हो, और ये भी जानते हो के मैं कहां से हूं। मैं अपनी मर्ज़ी से नहीं आया, लेकिन जिस ने मुझे भेजा है वह सच्चा है। तुम उन्हें नहीं जानते हो, लेकिन मैं उन्हें जानता हूं क्यूंके मैं उन की जानिब से हूं और उन ही ने मुझे भेजा है।” इस पर उन्होंने हुज़ूर अलमसीह को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन कोई उन पर हाथ न डाल सका, क्यूंके अभी हुज़ूर अलमसीह का वक़्त नहीं आया था। मगर, भेड़ में से कई लोग हुज़ूर अलमसीह पर ईमान लाये। लोग कहने लगे, “जब अलमसीह आयेंगे, तो क्या वह इस आदमी से ज़्यादा मोजिज़े दिखायेंगे?” जब फ़रीसियों ने लोगों को हुज़ूर ईसा के बारे में सरगोशियां करते देखा तो उन्होंने और अहम-काहिनों ने बैतुलमुक़द्दस के सिपाहियों को भेजा के हुज़ूर ईसा को गिरिफ़्तार कर लें। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं कुछ अर्से तक तुम्हारे पास हूं। फिर मैं अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा। तुम मुझे तलाश करोगे लेकिन पा न सकोगे और जहां मैं हूं तुम वहां नहीं आ सकते।” यहूदी रहनुमा आपस में कहने लगे, “ये आदमी कहां चला जायेगा के हम उसे तलाश न कर पायेंगे? क्या ये शख़्स हमारे लोगों के पास जो यूनानियों के दरमियान मुन्तशिर होकर रहते हैं, इन यूनानियों को भी तालीम देगा? जब हुज़ूर ईसा ने कहा था, ‘तुम मुझे तलाश करोगे, लेकिन पा न सकोगे,’ और ‘जहां मैं हूं तुम वहां नहीं आ सकते?’ ” ईद के आख़िरी और ख़ास दिन हुज़ूर ईसा खड़े हुए और ब-आवाज़ बुलन्द फ़रमाया, “अगर कोई प्यासा है तो मेरे पास आये और पिये। जो कोई मुझ पर ईमान लाता है, जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: उस के अन्दर से, आबे-हयात के दरिया जारी हो जायेंगे।” इस से उन का मतलब था पाक रूह जो हुज़ूर ईसा पर ईमान लाने वालों पर नाज़िल होने वाला था। वह पाक रूह अभी तक नाज़िल न हुआ था क्यूंके हुज़ूर ईसा अभी अपने आसमानी जलाल को न पहुंचे थे। ये बातें सुन कर, बाज़ लोग कहने लगे, “ये आदमी वाक़ई नबी है।” बाज़ ने कहा, “ये अलमसीह हैं।” बाज़ ने ये भी कहा, “अलमसीह गलील से कैसे आ सकते हैं? क्या किताब-ए-मुक़द्दस में नहीं लिख्खा के अलमसीह दाऊद की नस्ल से होंगे और बैतलहम में पैदा होंगे, जिस शहर के दाऊद थे?” पस लोगों में हुज़ूर ईसा के बारे में इख़्तिलाफ़ पैदा हो गया। इन में से बाज़ हुज़ूर अलमसीह को पकड़ना चाहते थे, लेकिन किसी ने उन पर हाथ न डाला। चुनांचे बैतुलमुक़द्दस के सिपाही, फ़रीसियों और अहम-काहिनों के पास लौटे, तो उन्होंने सिपाहियों से पूछा, “तुम हुज़ूर अलमसीह को गिरिफ़्तार कर के क्यूं नहीं लाये?” सिपाहियों ने कहा, “जैसा कलाम हुज़ूर अलमसीह के मुंह से निकलता है वैसा किसी बशर के मुंह से कभी नहीं सुना।” फ़रीसियों ने कहा, “क्या तुम भी इस के फ़रेब में आ गये? क्या किसी हाकिम या काहिनों और फ़रीसियों में से भी कोई हुज़ूर अलमसीह पर ईमान लाया है? कोई नहीं! लेकिन आम लोग शरीअत से क़तअन वाक़िफ़ नहीं, उन पर लानत हो।” निकुदेमुस जो हुज़ूर ईसा से पहले मिल चुका था और जो इन ही में से था, पूछने लगा, “क्या हमारी शरीअत किसी शख़्स को मुजरिम ठहराती है जब तक के इस की बात न सुनी जाये और ये न मालूम कर लिया जाये के उस ने क्या किया है?” उन्होंने जवाब दिया, “क्या तुम भी गलील के हो? तहक़ीक़ करो और देखो के गलील में से कोई नबी बरपा नहीं होने का।” तब वह उठे और अपने-अपने घर चले गये। इस के बाद हुज़ूर ईसा कोहे-ज़ैतून पर चले गये। सुबह होते ही वह बैतुलमुक़द्दस में फिर वापस हुए और सब लोग हुज़ूर ईसा के पास जमा हो गये। तब आप बैठ गये और उन्हें तालीम देने लगे। इतने में शरीअत के आलिम और फ़रीसी एक औरत को लाये जो ज़िना करती हुई पकड़ी गई थी। उन्होंने उसे दरमियान में खड़ा कर दिया और हुज़ूर ईसा से फ़रमाया, “ऐ उस्ताद, ये औरत ज़िना करती हुई पकड़ी गई है। हज़रत मूसा ने तौरेत में हमें हुक्म दिया है के ऐसी औरतों को संगसार करें, अब आप क्या फ़रमाते हैं?” वह ये सवाल महज़ हुज़ूर ईसा को आज़माने के लिये पूछ रहे थे ताके किसी सबब से हुज़ूर ईसा पर इल्ज़ाम लगा सकें। लेकिन हुज़ूर ईसा झुक कर अपनी उंगली से ज़मीन पर कुछ लिखने लगे। जब वह सवाल करने से बाज़ न आये तो हुज़ूर ईसा ने सर उठाकर उन से फ़रमाया, “तुम में जो बेगुनाह हो वोही इस औरत पर सब से पहले पत्थर फेंके।” वह फिर झुक कर ज़मीन पर कुछ लिखने लगे। ये सुन कर, सब छोटे बड़े एक-एक कर, चले गये, यहां तक के हुज़ूर ईसा वहां तन्हा रह गये। तब हुज़ूर ईसा ने सीधे होकर औरत से पूछा, “ऐ औरत, ये लोग कहां चले गये? क्या किसी ने तुझे मुजरिम नहीं ठहराया?” उस औरत ने कहा, “ऐ आक़ा, किसी ने नहीं।” हुज़ूर ईसा ने एलानिया फ़रमाया, “तब मैं भी तुझे मुजरिम नहीं ठहराता, अब जाओ और आइन्दा गुनाह न करना।” जब हुज़ूर ईसा ने लोगों से फिर ख़िताब किया, “मैं दुनिया का नूर हूं, जो कोई मेरी पैरवी करता है वह कभी तारीकी में न चलेगा बल्के ज़िन्दगी का नूर पायेगा।” फ़रीसियों ने हुज़ूर अलमसीह से सख़्त लहजे में कहा, “आप अपने ही हक़ में अपनी गवाही देते हैं, आप की गवाही क़ाबिले क़बूल नहीं है।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर में अपने ही हक़ में गवाही देता हूं, तो भी मेरी गवाही क़ाबिले क़बूल नहीं है, क्यूंके मैं जानता हूं के कहां से आया हूं और कहां जाता हूं। लेकिन तुम्हें क्या मालूम के मैं कहां से आया हूं और कहां जाता हूं। तुम सूरत देखकर फ़ैसला करते हो, में किसी के बारे में फ़ैसला नहीं करता। लेकिन अगर मैं फ़ैसला करूं भी, तो मेरा फ़ैसला, सही होगा, क्यूंके मैं तन्हा नहीं। बल्के बाप जिस ने मुझे भेजा है, मेरे साथ हैं। तुम्हारी तौरेत में भी लिख्खा है के दो आदमियों की गवाही सच्ची होती है। मैं ही अपनी गवाही नहीं देता; बल्के मेरा दूसरा गवाह आसमानी बाप है जिन्होंने मुझे भेजा है।” तब उन्होंने हुज़ूर अलमसीह से पूछा, “आप का बाप कहां है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तुम मुझे नहीं जानते हो न ही मेरे बाप को, अगर तुम ने मुझे जाना होता तो मेरे बाप को भी जानते।” हुज़ूर अलमसीह ने ये बातें बैतुलमुक़द्दस में तालीम देते वक़्त उस जगह कहीं जहां नज़्राने जमा किये जाते थे। लेकिन किसी ने आप को न पकड़ा क्यूंके अभी हुज़ूर अलमसीह का वक़्त न आया था। हुज़ूर ईसा ने फिर फ़रमाया, “मैं जा रहा हूं और तुम मुझे ढूंडोगे, और अपने गुनाह में मर जाओगे। जहां मैं जा रहा हूं तुम वहां नहीं आ सकते।” इस पर यहूदी रहनुमा कहने लगे, “क्या वह ख़ुद को मार डालेगा? क्या वह इसीलिये ये कहता है, ‘जहां मैं जाता हूं, तुम नहीं आ सकते’?” हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “तुम नीचे के यानी ज़मीन के हो; मैं ऊपर का हूं। तुम इस दुनिया के हो, में इस दुनिया का नहीं हूं। मैंने तुम्हें बता दिया के तुम अपने गुनाह में मर जाओगे; अगर तुम्हें यक़ीन नहीं आता के वोही तो मैं हूं तो तुम वाक़ई अपने गुनाहों में मर जाओगे।” उन्होंने पूछा, “आप कौन हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं वोही हूं जो शुरू से तुम्हें कहता आ रहा हूं, मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ कहना और फ़ैसला करना है। लेकिन मेरा भेजने वाला सच्चा है और जो कुछ मैंने उन से सुना है वोही दुनिया को बताता हूं।” वह न समझे के वह उन्हें अपने आसमानी बाप के बारे में बता रहे हैं। लिहाज़ा हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “जब तुम इब्न-ए-आदम को ऊपर यानी सलीब पर चढ़ाओगे तब तुम्हें मालूम होगा के वोही तो मैं हूं। मैं अपनी जानिब से कुछ नहीं करता बल्के वोही कहता हूं जो बाप ने मुझे सिखाया है। और जिन्होंने मुझे भेजा है वह मेरे साथ हैं; उन्होंने मुझे अकेला नहीं छोड़ा, क्यूंके में हमेशा वोही करता हूं जो बाप को पसन्द आता है।” हुज़ूर ईसा ये बातें कह ही रहे थे के बहुत से लोग उन पर ईमान ले आये। हुज़ूर ईसा ने इन यहूदियों से जो आप पर ईमान लाये थे कहा, “अगर तुम मेरी तालीम पर क़ाइम रहोगे, तो हक़ीक़त में मेरे शागिर्द होगे। तब तुम सच्चाई को जान जाओगे, और सच्चाई तुम्हें आज़ाद करेगी।” उन्होंने उन को जवाब दिया, “हम इब्राहीम की औलाद हैं और कभी किसी की ग़ुलामी में नहीं रहे। आप कैसे कहते हैं के हम आज़ाद कर दिये जायेंगे?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जो कोई गुनाह करता है वह गुनाह का ग़ुलाम है ग़ुलाम मालिक के घर में हमेशा नहीं रहता लेकिन बेटा हमेशा रहता है। इसलिये अगर बेटा तुम्हें आज़ाद करेगा, तो तुम हक़ीक़त में आज़ाद हो जाओगे। मैं जानता हूं के तुम इब्राहीम की औलाद हो, फिर भी तुम मुझे मार डालना चाहते हो क्यूंके तुम्हारे दिलों में मेरे कलाम के लिये कोई जगह नहीं है। मैंने जो कुछ बाप के यहां देखा है, तुम्हें बता रहा हूं, और तुम भी वोही करते हो जो तुम ने अपने बाप से सुना है।” उन्होंने कहा, “हमारा बाप तो इब्राहीम है।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “अगर तुम इब्राहीम की औलाद होते, तो तुम इब्राहीम के से काम भी करते। लेकिन अब तो तुम मुझ जैसे आदमी को हलाक कर देने का इरादा कर चुके हो जिस ने तुम्हें वह हक़ बातें बयान कीं जो मैंने ख़ुदा से सुनी। इब्राहीम ने ऐसी बातें नहीं कीं। तुम वोही कुछ करते हो जो तुम्हारा बाप करता है।” उन्होंने कहा, “हम नाजायज़ औलाद नहीं, हमारा बाप एक ही है यानी वह ख़ुद ख़ुदा है।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “अगर ख़ुदा तुम्हारा बाप होता तो तुम मुझ से महब्बत करते, इसलिये के मेरा ज़हूर ख़ुदा में से हुआ है और अब मैं यहां मौजूद हूं। मैं अपने आप नहीं आया; बल्के बाप ने मुझे भेजा है। तुम मेरी बातें क्यूं नहीं समझते? इसलिये के मेरे कलाम को सुनते नहीं। तुम अपने बाप यानी इब्लीस के हो, और अपने बाप की मर्ज़ी पर चलन चाहते हो। वह शुरू ही से ख़ून करता आया है, और कभी सच्चाई पर क़ाइम नहीं रहा क्यूंके इस में नाम को भी सच्चाई नहीं। जब वह झूट बोलता है तो, अपनी ही सी कहता है, क्यूंके वह झूटा है और झूट का बाप है। चूंके मैं सच बोलता हूं, इसलिये तुम मेरा यक़ीन नहीं करते! तुम में कोई है जो मुझ में गुनाह साबित कर सके? अगर मैं सच बोलता हूं तो तुम मेरा यक़ीन क्यूं नहीं करते? जो ख़ुदा का होता है वह ख़ुदा की बातें सुनता है। चूंके तुम ख़ुदा के नहीं हो इसलिये ख़ुदा की नहीं सुनते।” यहूदी रहनुमाओं ने हुज़ूर ईसा को जवाब दिया, “अगर हम कहते हैं के आप सामरी हैं और आप में बदरूह है तो क्या ये ठीक नहीं?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मुझ में बदरूह नहीं, मगर में अपने बाप की इज़्ज़त करता हूं और तुम मेरी बेइज़्ज़ती करते हो। लेकिन में अपना जलाल नहीं चाहता; हां एक है जो चाहता है, और वोही फ़ैसला करता है। मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जो कोई मेरे कलाम पर अमल करता है वह मौत का मुंह तक कभी न देखेगा।” ये सुन कर यहूदी चहक कर कहने लगे, “अब हमें मालूम हो गया के आप में बदरूह है। हज़रत इब्राहीम मर गये और दूसरे नबी भी। मगर आप कहते हो के जो कोई मेरे कलाम पर अमल करेगा वह मौत का मुंह कभी न देखेगा क्या आप हमारे बाप हज़रत इब्राहीम से भी बड़े हैं। वह मर गये और नबी भी मर गये। आप अपने को क्या समझते हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर मैं अपना जलाल आप ज़ाहिर करूं तो वह जलाल किस काम का? मेरा बाप जिसे तुम अपना ख़ुदा कहते हो, वोही मेरा जलाल ज़ाहिर करता है। तुम उन्हें नहीं जानते मगर मैं जानता हूं, अगर कहूं के नहीं जानता तो तुम्हारी तरह झूटा ठहरूंगा, लेकिन में उन्हें जानता हूं और उन के कलाम पर अमल करता हूं। तुम्हारे बाप इब्राहीम को बड़ी ख़ुशी से मेरे इस दिन के देखने की तमन्ना थी; इब्राहीम ने वह दिन देख लिया और ख़ुश हो गये।” यहूदी रहनुमा ने हुज़ूर ईसा पर तंज़ किया, “आप की उम्र तो अभी पचास साल की भी नहीं हुई, और आप ने इब्राहीम को देखा है!” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं, इब्राहीम के पैदा होने से पहले मैं हूं।” इस पर उन्होंने पत्थर उठाये के आप को संगसार करें, लेकिन हुज़ूर ईसा ख़ुद, उन की नज़रों से बच कर बैतुलमुक़द्दस से निकल गये। जब हुज़ूर ईसा जा रहे थे तो आप ने एक आदमी को देखा जो पैदाइशी अन्धा था। आप के शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “रब्बी, किस ने गुनाह किया था, इस ने या इस के वालिदैन ने जो ये अन्धा पैदा हुआ?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “न तो इस आदमी ने गुनाह किया था न इस के वालिदैन ने, लेकिन ये इसलिये अन्धा पैदा हुआ के ख़ुदा का काम इस में ज़ाहिर हो। जिस ने मुझे भेजा है उस का काम हमें दिन ही दिन में करना लाज़िम है। वह रात आ रही है जिस में कोई शख़्स काम न कर सकेगा जब तक मैं दुनिया में हूं, दुनिया का नूर हूं।” ये कह कर हुज़ूर ईसा ने ज़मीन पर थूक कर मिट्टी सानी और उस आदमी की आंखों पर लगा दी और उन्होंने अन्धे से फ़रमाया, “जा, सिलवाम के हौज़ में धोले” (सिलवाम का मतलब है “भेजा हुआ”)। लिहाज़ा वह आदमी चला गया। उस ने अपनी आंखें धोईं और बीना होकर वापस आया। उस के पड़ोसी और दूसरे लोग जिन्होंने पहले उसे भीक मांगते देखा था, कहने लगे, “क्या ये वोही आदमी नहीं जो बैठा भीक मांगा करता था?” बाज़ ने कहा के हां वोही है। बाज़ ने कहा, नहीं, “मगर उस का हमशक्ल ज़रूर है।” लेकिन उस आदमी ने कहा, “मैं वोही अन्धा हूं।” उन्होंने इस से पूछा, “फिर तेरी आंखें कैसे खुल गईं?” इस ने जवाब दिया, “लोग जिसे हुज़ूर ईसा कहते हैं, उन्होंने मिट्टी सानी और मेरी आंखों पर लगाई और कहा के जा और सिलवाम के हौज़ में आंखें धोले। लिहाज़ा मैं गया और आंखें धोकर बीना हो गया।” उन्होंने उस से पूछा, “वह आदमी कहां है?” उस ने कहा, “मैं नहीं जानता।” लोग उस आदमी को जो पहले अन्धा था फ़रीसियों के पास लाये। जिस दिन हुज़ूर ईसा ने मिट्टी सान कर अन्धे की आंखें खोली थीं वह सबत का दिन था। इसलिये फ़रीसियों ने भी उस से पूछा के तुझे बीनाई कैसे मिली? उस ने जवाब दिया, “हुज़ूर ईसा ने मिट्टी सान कर मेरी आंखों पर लगाई, और मैंने उन्हें धोया, और अब मैं बीना हो गया हूं।” फ़रीसियों में से बाज़ कहने लगे, “ये आदमी ख़ुदा की जानिब से नहीं क्यूंके वह सबत के दिन का एहतिराम नहीं करता।” बाज़ कहने लगे, “कोई गुनहगार आदमी ऐसे मोजिज़े किस तरह दिखा सकता है?” पस उन में इख़्तिलाफ़ पैदा हो गया। आख़िरकार वह अन्धे आदमी की तरफ़ मुतवज्जेह हुए और पूछने लगे के जिस आदमी ने तेरी आंखें खोली हैं उस के बारे में तेरा क्या ख़्याल है? उस ने जवाब दिया, “वह ज़रूर कोई नबी है।” यहूदियों को अभी भी यक़ीन न आया के वह पहले अन्धा था और बीना हो गया है। पस उन्होंने इस के वालिदैन को बुला भेजा। तब उन्होंने उन से पूछा, “क्या ये तुम्हारा बेटा है? जिस के बारे में तुम कहते हो के वह अन्धा पैदा हुआ था? अब वह कैसे बीना हो गया?” वालिदैन ने जवाब दिया, “हम जानते हैं के वह हमारा ही बेटा है, और ये भी के वह अन्धा ही पैदा हुआ था। लेकिन अब वह कैसे बीना हो गया और किस ने उस की आंखें खोलें ये हम नहीं जानते। तुम उसी से पूछ लो, वह तो बालिग़ है।” उस के वालिदैन ने ये इसलिये कहा था के यहूदी रहनुमा से डरते थे क्यूंके यहूदियों ने फ़ैसला कर रखा था के जो कोई हुज़ूर ईसा को अलमसीह की हैसियत से क़बूल करेगा, उसे यहूदी इबादतगाह से ख़ारिज कर दिया जायेगा। इसीलिये उस के वालिदैन ने कहा, “वह बालिग़ है, उसी से पूछ लो।” उन्होंने उस आदमी को जो पहले अन्धा था फिर से बुलाया और कहा, “सच बोल कर ख़ुदा को जलाल दे, हम जानते हैं के वह आदमी गुनहगार है।” उस ने जवाब दिया, “वह गुनहगार है या नहीं, मैं नहीं जानता। एक बात ज़रूर जानता हूं के मैं पहले अन्धा था लेकिन अब देखता हूं!” उन्होंने उस से पूछा, “उस ने तेरे साथ क्या किया? तेरी आंखें कैसे खोलीं?” उस ने जवाब दिया, “मैं तुम्हें पहले ही बता चुका हूं लेकिन तुम ने सुना नहीं। अब वोही बात फिर से सुनना चाहते हो? क्या तुम्हें भी उस के शागिर्द बनने का शौक़ चर्राया है?” तब वह उसे बुरा भला कहने लगे, “तू उस का शागिर्द होगा। हम तो हज़रत मूसा के शागिर्द हैं! हम जानते हैं के ख़ुदा ने हज़रत मूसा से कलाम किया लेकिन जहां तक इस आदमी का तअल्लुक़ है, हम तो ये भी नहीं जानते के ये कहां का है।” उस आदमी ने जवाब दिया, “ये बड़ी अजीब बात है! तुम नहीं जानते के वह कहां का है हालांके उस ने मेरी आंखें ठीक कर दी हैं। सब जानते हैं के ख़ुदा गुनहगारों की नहीं सुनता लेकिन अगर कोई ख़ुदापरस्त हो और उस की मर्ज़ी पर चले तो उस की ज़रूर सुनता है। ज़माने क़दीम से ऐसा कभी सुनने में नहीं आया के किसी ने एक पैदाइशी अन्धे को बीनाई दी हो। अगर ये आदमी ख़ुदा की जानिब से न होता तो कुछ भी नहीं कर सकता था।” ये सुन कर उन्होंने जवाब दिया, “तू जो सरासर गुनाह में पैदा हुआ; हमें क्या सिखाता है!” ये कह कर उन्होंने अन्धे को बाहर निकाल दिया। हुज़ूर ईसा ने ये सुना के फ़रीसियो ने उसे इबादतगाह से निकाल दिया है। चुनांचे उसे तलाश कर के उस से पूछा, “क्या तू इब्न-ए-आदम पर ईमान रखता है?” उस ने पूछा, “ऐ आक़ा! वह कौन है? मुझे बताईये ताके में उस पर ईमान लाऊं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “तूने उन्हें देखा है और हक़ीक़त तो ये है के जो इस वक़्त तुझ से बात कर रहा है, वोही है।” तब उस आदमी ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, मैं ईमान लाता हूं,” और उस ने हुज़ूर ईसा को सज्दा किया। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं दुनिया की अदालत करने आया हूं ताके जो अन्धे हैं देखने लगीं और जो आंखों वाले हैं, अन्धे हो जायें।” बाज़ फ़रीसी जो उस के साथ थे ये सुन कर पूछने लगे, “क्या कहा? क्या हम भी अन्धे हैं?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “अगर तुम अन्धे होते तो इतने गुनहगार न समझे जाते; लेकिन अब जब के तुम कहते हो के हमारी आंखें हैं, तो तुम्हारा गुनाह क़ाइम रहता है। “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जो आदमी भेड़ख़ाने में दरवाज़े से नहीं बल्के किसी और तरीक़ा से अन्दर दाख़िल हो जाता है वह चोर और डाकूओं है। लेकिन जो दरवाज़ा से दाख़िल होता है वह भेड़ों का गल्लेबान है। दरबान उस के लिये दरवाज़ा खोल देता है और भेड़ें उस की आवाज़ सुनती हैं। वह अपनी भेड़ों को नाम बनाम पुकारता है और उन्हें बाहर ले जाता है। जब वह अपनी सारी भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है तो उन के आगे-आगे चलता है और उस की भेड़ें उस के पीछे-पीछे चलने लगती हैं, इसलिये के वह उस की आवाज़ पहचानती हैं। वह किसी अजनबी के पीछे कभी न जायेंगी; बल्के, सच तो ये है के उस से दूर भागेंगी क्यूंके वह किसी ग़ैर की आवाज़ को नहीं पहचानतीं।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये तम्सील सुनाई लेकिन फ़रीसी न समझे के इस का मतलब क्या है। चुनांचे हुज़ूर ईसा ने उन से फिर फ़रमाया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं, भेड़ों का दरवाज़ा मैं हूं। वह सब जो मुझ से पहले आये चोर और डाकू थे इसलिये भेड़ों ने उन की न सुनी। दरवाज़ा मैं हूं; अगर कोई मेरे ज़रीये दाख़िल हो तो नजात पायेगा। वह अन्दर बाहर आता जाता रहेगा और चरागाह पायेगा। चोर सिर्फ़ चुराने, हलाक करने और बर्बाद करने आता है; मैं आया हूं के लोग ज़िन्दगी पायें और कसरत से पायें। “अच्छा गल्लेबान मैं हूं। अच्छा गल्लेबान अपनी भेड़ों के लिये जान देता है। कोई मज़दूर न तो भेड़ों को अपना समझता है न उन का गल्लेबान होता है। इसलिये जब वह भेड़िये को आता देखता है तो भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है। तब भेड़िया गल्ले पर हमला कर के उसे मुन्तशिर कर देता है। चूंके वह मज़दूर होता है इसलिये भाग जाता है और भेड़ों की परवाह नहीं करता। “अच्छा गल्लेबान मैं हूं; मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं और मैं भेड़ों के लिये अपनी जान देता हूं। जैसे बाप मुझे जानता है, वैसे ही मैं बाप को जानता हूं। मैं अपनी भेड़ों के लिये अपनी जान-निसार कर देता हूं। मेरी और भेड़ें भी हैं जो इस गल्ले में शामिल नहीं। मुझे लाज़िम है के मैं उन्हें भी ले आऊं। वह मेरी आवाज़ सुनेंगी और फिर एक ही गल्ला और एक ही गल्लेबान होगा। मेरा बाप मुझे इसलिये प्यार करता है के मैं अपनी जान क़ुर्बान करता हूं ताके उसे फिर वापस ले लूं। उसे कोई मुझ से छीनता नहीं बल्के में अपनी मर्ज़ी से उसे क़ुर्बान करता हूं। मुझे उसे क़ुर्बान करने का इख़्तियार है और फिर वापस ले लेने का हक़ भी है। ये हुक्म मुझे मेरे बाप की जानिब से मिला है।” ये बातें सुन कर यहूदियों में फिर इख़्तिलाफ़ पैदा हुआ। उन में से कई एक ने कहा, “इस में बदरूह है और वह पागल हो गया है। इस की क्यूं सुनें?” लेकिन औरों ने कहा, “ये बातें बदरूह के मुंह से नहीं निकल सकतीं। क्या कोई बदरूह अन्धों की आंखें खोल सकती है?” यरूशलेम में बैतुलमुक़द्दस के मख़्सूस किये जाने की ईद आई। सर्दी का मौसम था और हुज़ूर ईसा बैतुलमुक़द्दस में सुलैमानी बरामदह में टहल रहे थे। यहूदी उन के इर्दगिर्द जमा हो गये और कहने लगे, “तू कब तक हमें शक में मुब्तिला रखेगा? अगर तू अलमसीह है तो हमें साफ़-साफ़ बता दे।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं तुम्हें बता चुका हूं लेकिन तुम तो मेरा यक़ीन ही नहीं करते। जो मोजिज़े मैं अपने बाप के नाम से करता हूं वोही मेरे गवाह हैं। लेकिन तुम यक़ीन नहीं करते क्यूंके तुम मेरी भेड़ें नहीं हो। मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ सुनती हैं। मैं उन्हें जानता हूं और वह मेरे पीछे-पीछे चलती हैं। मैं उन्हें अब्दी ज़िन्दगी देता हूं। वह कभी हलाक न होंगी और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन नहीं सकता। मेरा बाप, जिस ने उन्हें मेरे सुपुर्द किया है सब से बड़ा है; कोई उन्हें मेरे बाप के हाथ से नहीं छीन सकता। मैं और बाप एक हैं।” यहूदियों ने फिर आप को संगसार करने के लिये पत्थर उठाये। लेकिन हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मैंने तुम्हें अपने बाप की जानिब से बड़े-बड़े मोजिज़े दिखाये हैं। उन में से किस मोजिज़ा की वजह से मुझे संगसार करना चाहते हो?” यहूदियों ने जवाब दिया, “हम आप को किसी नेक काम के लिये नहीं, बल्के इस कुफ़्र के लिये संगसार करना चाहते हैं के आप महज़ एक इन्सान होते हुए भी ख़ुदा होने का दावा करते हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “क्या तुम्हारी शरीअत में ये नहीं लिख्खा है, ‘मैंने कहा, तुम “माबूद” हो?’ अगर शरीअत उन्हें ‘माबूद,’ कहती है जिन्हें ख़ुदा का कलाम दिया गया और किताब-ए-मुक़द्दस झुटलाया नहीं जा सकता। तो तुम उस के बारे में क्या कहते हो जिसे बाप ने मख़्सूस कर के दुनिया में भेजा है? चुनांचे तुम मुझ पर कुफ़्र का इल्ज़ाम क्यूं लगाते हो? क्या इसलिये के मैंने फ़रमाया, ‘में ख़ुदा का बेटा हूं’? अगर मैं बाप के कहने के मुताबिक़ काम न करूं तो मेरा यक़ीन न करो। लेकिन अगर करता हूं तो चाहे मेरा यक़ीन न करो लेकिन इन मोजिज़ों का तो यक़ीन करो ताके जान लो और समझ जाओ के बाप मुझ में है और मैं बाप में हूं।” उन्होंने फिर हुज़ूर ईसा को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह उन के हाथ से बच कर निकल गये। इस के बाद हुज़ूर ईसा यरदन पार उस जगह तशरीफ़ ले गये जहां हज़रत यहया शुरू में पाक-ग़ुस्ल दिया करते थे। आप वहां ठहर गये। और बहुत से लोग उन के पास आये और एक दूसरे से कहने लगे, “हज़रत यहया ने ख़ुद तो कोई मोजिज़ा नहीं दिखाया लेकिन जो कुछ हज़रत यहया ने इन के बारे में फ़रमाया वह सब सच साबित हुआ।” और उस जगह बहुत से लोग हुज़ूर ईसा पर ईमान लाये। एक आदमी जिस का नाम लाज़र था, वह बीमार था। वह बैतअन्नियाह में रहता था जो मरियम और इस की बहन मर्था का गांव था। (ये मरियम जिस का भाई लाज़र बीमार पड़ा था वोही औरत थी जिस ने ख़ुदावन्द के सर पर इत्र डाला था और अपने बालों से ख़ुदावन्द के पांव पोंछे थे।) इन दोनों बहनों ने हुज़ूर ईसा के पास पैग़ाम भेजा, “ऐ ख़ुदावन्द जिसे आप प्यार करते हैं, बीमार पड़ा हुआ है।” जब हुज़ूर ईसा ने ये सुना तो फ़रमाया, “ये बीमारी मौत के लिये नहीं बल्के ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर करने के लिये है ताके इस के ज़रीये ख़ुदा के बेटे का जलाल भी ज़ाहिर हो जाये।” हुज़ूर ईसा मर्था, उस की बहन मरियम और लाज़र से महब्बत रखते थे। फिर भी जब आप ने सुना के लाज़र बीमार है तो वह उसी जगह जहां वह थे दो दिन और ठहरे रहे। फिर हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों से फ़रमाया, “आओ हम वापस यहूदिया चलें।” शागिर्दों ने कहा, लेकिन, “ऐ रब्बी, अभी थोड़ी देर पहले यहूदी रहनुमा आप को संगसार करना चाहते थे और फिर भी आप वहां जाना चाहते हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “क्या दिन में बारह घंटे नहीं होते? जो आदमी दिन में चलता है, ठोकर नहीं खाता, इसलिये के वह दुनिया की रोशनी देख सकता है। लेकिन अगर वह रात के वक़्त चलता है तो अन्धेरे के बाइस ठोकर खाता है।” जब वह ये बातें कह चुके तो शागिर्दों से कहने लगे, “हमारा दोस्त लाज़र सो गया है लेकिन में उसे जगाने जा रहा हूं।” शागिर्दों ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, अगर उसे नींद आ गई है तो इस की हालत बेहतर हो जायेगी।” हुज़ूर ईसा ने लाज़र की मौत के बारे में फ़रमाया था, लेकिन आप के शागिर्दों ने समझा के इस का मतलब आराम की नींद से है। लिहाज़ा हुज़ूर ईसा ने उन्हें साफ़ लफ़्ज़ों में बताया, “लाज़र मर चुका है, और मैं तुम्हारी ख़ातिर ख़ुश हूं के वहां मौजूद न था। अब तुम मुझ पर ईमान लाओगे। लेकिन आओ उस के पास चलें।” तब तोमा जिसे तवाम भी कहते थे बाक़ी शागिर्दों से कहने लगा, “आओ हम लोग भी चलें ताके उन के साथ मर सकें।” वहां पहुंचने पर हुज़ूर ईसा को मालूम हुआ के लाज़र को क़ब्र में रखे चार दिन हो गये हैं। बैतअन्नियाह, यरूशलेम से तक़रीबन तीन किलोमीटर के फ़ासिले पर था और बहुत से यहूदी मर्था और मरियम को उन के भाई की वफ़ात पर तसल्ली देने के लिये आये हुए थे। जब मर्था ने सुना के हुज़ूर ईसा आ रहे हैं तो वह आप से मिलने के लिये बाहर चली गई लेकिन मरियम घर में ही रही। मर्था ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द! अगर आप यहां होते तो मेरा भाई न मरता। लेकिन मैं जानती हूं के अभी आप जो कुछ ख़ुदा से मांगोगे वह आप को देगा।” हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “तेरा भाई फिर से जी उठेगा।” मर्था ने जवाब दिया, “मैं जानती हूं के वह आख़िरी दिन क़ियामत के वक़्त जी उठेगा।” हुज़ूर ईसा ने उस से फ़रमाया, “क़ियामत और ज़िन्दगी मैं ही हूं। जो कोई मुझ पर ईमान रखता है वह मरने के बाद भी ज़िन्दा रहेगा और जो कोई ज़िन्दा है और मुझ पर ईमान लाता है कभी न मरेगा। क्या तू इस पर ईमान रखती है?” मर्था ने जवाब दिया, “हां, ख़ुदावन्द,” मेरा ईमान है, आप तू ख़ुदा का बेटा अलमसीह हैं जो दुनिया में आने वाले थे। जब वह ये बात कह चुकी तो वापस गई और अपनी बहन मरियम को अलग बुलाकर कहने लगी, “उस्ताद आ चुके हैं और तुझे बुला रहे हैं।” जब मरियम ने ये सुना तो वह जल्दी से उठी और हुज़ूर ईसा से मिलने चल दी। हुज़ूर ईसा अभी गांव में दाख़िल न हुए थे बल्के अभी उसी जगह थे जहां मर्था उन से मिली थी। जब इन यहूदियों ने जो घर में मरियम के साथ थे और उसे तसल्ली दे रहे थे देखा मरियम जल्दी से उठ कर बाहर चली गई है तो वह भी इस के पीछे गये के शायद वह मातम करने के लिये क़ब्र पर जा रही है। जब मरियम उस जगह पहुंची जहां हुज़ूर ईसा थे तो आप को देखकर हुज़ूर ईसा के पांव पर गिर पड़ी और कहने लगी, “ख़ुदावन्द, अगर आप यहां होते, तो मेरा भाई न मरता।” जब हुज़ूर ईसा ने उसे और इस के साथ आने वाले यहूदियों को रोते हुए देखा, तो हुज़ूर ईसा दिल में निहायत ही रंजीदा हुए। और ग़मगीनी अल्फ़ाज़ में पूछा, तुम ने लाज़र को कहां रखा है? उन्होंने कहा, “आईये ख़ुदावन्द, और ख़ुद ही देख लीजिये।” हुज़ूर ईसा की आंखों में आंसुओं भर आये। ये देखकर यहूदी कहने लगे, “देखो लाज़र उन का किस क़दर अज़ीज़ था!” लेकिन इन में से बाज़ ने कहा, “क्या ये जिस ने अन्धे की आंखें खोलें, इतना भी न कर सका के लाज़र को मौत से बचा लेता?” हुज़ूर ईसा ग़मगीन दिल के साथ क़ब्र पर आये। ये एक ग़ार था जिस के मुंह पर एक पत्थर रखा हुआ था। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “पत्थर को हटा दो।” मरहूम की बहन मर्था, एतराज़ करते हुए बोली, “लेकिन, ख़ुदावन्द, उस में से तो बदबू आने लगी होगी क्यूंके लाज़र को क़ब्र में चार दिन हो गये हैं।” इस पर हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “क्या मैंने नहीं कहा था के अगर तेरा ईमान होगा तो तू ख़ुदा का जलाल देखेगी?” पस उन्होंने पत्थर को दूर हटा दिया। तब हुज़ूर ईसा ने आंखें ऊपर उठाकर फ़रमाया, “ऐ बाप, में आप का शुक्रगुज़ार हूं के आप ने मेरी सुन ली है। मैं जानता हूं के आप हमेशा मेरी सुनते हैं लेकिन मैंने उन लोगों की ख़ातिर जो चारों तरफ़ खड़े हुए हैं ये कहा था ताके ये भी ईमान लायें।” ये कहने के बाद हुज़ूर ईसा ने बुलन्द आवाज़ से पुकारा, “लाज़र बाहर निकल आ!” और वह मुर्दा लाज़र निकल आया, उस के हाथ और पांव कफ़न से बंधे हुए थे और चेहरा पर एक रूमाल लिपटा हुआ था। हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “इस के कफ़न को खोल दो और लाज़र को जाने दो।” बहुत से यहूदी जो मरियम से मिलने आये थे, हुज़ूर ईसा का मोजिज़ा देखकर उन पर ईमान लाये। लेकिन इन में से बाज़ ने फ़रीसियों के पास जा कर जो कुछ हुज़ूर ईसा ने किया था, उन्हें कह सुनाया। तब अहम-काहिनों और फ़रीसियों ने अदालते-आलिया का इजलास तलब किया और कहने लगे, “हम क्या कर रहे हैं? ये आदमी तो यहां मोजिज़ों पर मोजिज़े किये जा रहा है। अगर हम इसे यूं ही छोड़ देंगे तो सब लोग इस पर ईमान ले आयेंगे और रोमी यहां आकर हमारे बैतुलमुक़द्दस और हमारे मुल्क दोनों पर क़ब्ज़ा जमा लेंगे।” तब उन में से एक जिस का नाम काइफ़ा था, और जो उस साल आला काहिन था, कहने लगा, “तुम लोग कुछ नहीं जानते! तुम्हें मालूम होना चाहिये के बेहतर ये है के लोगो की ख़ातिर एक शख़्स मारा जाये न के सारी क़ौम हलाक हो।” ये बात इस ने अपनी जानिब से नहीं कही थी बल्के इस साल के आला काहिन की हैसियत से इस ने पेशीनगोई की थी के हुज़ूर ईसा सारी यहूदी क़ौम के लिये अपनी जान देगा। और सिर्फ़ यहूदी क़ौम के लिये ही नहीं बल्के इसलिये भी के ख़ुदा के सारे फ़र्ज़न्दों को जो जा-ब-जा बिखरे हुए हैं जमा कर के वाहिद क़ौम बना दे। पस उन्होंने इस दिन से हुज़ूर ईसा के क़त्ल का मन्सूबा बनाना शुरू कर दिया। इस के नतीजा में हुज़ूर ईसा ने यहूदिया में सर-ए-आम घूमना-फिरना छोड़ दिया और ब्याबान के नज़दीक के इलाक़े में इफ़्राईम नाम गांव को चले गये और वहां अपने शागिर्दों के साथ रहने लगे। जब यहूदियों की ईद-ए-फ़सह नज़दीक आई तो बहुत से लोग इर्दगिर्द के इलाक़ों से यरूशलेम आने लगे ताके ईद-ए-फ़सह से पहले तहारत की सारी रस्में पूरी कर सकें। वह हुज़ूर ईसा को ढूंडते फिरते थे, और जब बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में जमा हुए तो एक दूसरे से कहने लगे, “क्या ख़्याल है, क्या वह ईद में आयेगा या नहीं?” क्यूंके अहम-काहिनों और फ़रीसियों ने हुक्म दे रखा था के अगर किसी को मालूम हो जाये के हुज़ूर ईसा कहां हैं तो वह फ़ौरन इत्तिलाअ दे ताके वह हुज़ूर ईसा को गिरिफ़्तार कर सकें। ईद-ए-फ़सह से छः दिन पहले, हुज़ूर ईसा बैतअन्नियाह में तशरीफ़ लाये जहां लाज़र रहता था, जिसे हुज़ूर ईसा ने मुर्दों में से ज़िन्दा किया था। यहां हुज़ूर ईसा के लिये एक ज़ियाफ़त तरतीब दी गई। मर्था ख़िदमत कर रही थी, जब के लाज़र उन मेहमानों में शामिल था जो हुज़ूर ईसा के साथ दस्तरख़्वान पर खाना खाने बैठे थे। उस वक़्त मरियम ने तक़रीबन निस्फ़ लीटर ख़ालिस और बड़ा क़ीमती इत्र ईसा के पांव पर डाल कर, अपने बालों से आप के पांव को पोंछना शुरू कर दिया। और सारा घर इत्र की ख़ुश्बू से महक उठा। हुज़ूर ईसा के शागिर्दों में से एक, यहूदाह इस्करियोती, जिस ने आप को बाद में पकड़वाया था, शिकायत करने लगा, “ये इत्र अगर फ़रोख़त किया जाता तो तीन सौ दीनार वसूल होते जो ग़रीबों में तक़्सीम किये जा सकते थे।” उस ने ये इसलिये नहीं कहा था के उसे ग़रीबों का ख़्याल था बल्के इसलिये के वह चोर था; और चूंके उस के पास पैसों की थैली रहती थी, जिस में लोग रक़म डालते थे। वह उस में से अपने इस्तिमाल के लिये कुछ न कुछ निकाल लिया करता था। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “उसे परेशान न करो उसे ऐसा करने दो, उस ने ये इत्र मेरी तद्फ़ीन के लिये संभाल कर रखा हुआ है। ग़रीब ग़ुरबा तो हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे, लेकिन मैं यहां हमेशा तुम्हारे पास न रहूंगा।” इस दौरान यहूदी अवाम को मालूम हुआ के हुज़ूर ईसा बैतअन्नियाह में हैं, लिहाज़ा वह भी वहां आ गये। वह सिर्फ़ हुज़ूर ईसा को ही नहीं बल्के लाज़र को भी देखना चाहते थे जिसे आप ने मुर्दों में से ज़िन्दा किया था। तब अहम-काहिनों ने लाज़र को भी क़त्ल करने का मन्सूबा बनाया, क्यूंके उस वक़्त बहुत से यहूदी हुज़ूर ईसा की तरफ़ माइल होकर आप पर ईमान ले आये थे। अगले दिन अवाम जो ईद के लिये आये हुए थे, ये सुन कर के हुज़ूर ईसा भी यरूशलेम आ रहे हैं, खजूर की डालियां ले कर आप के इस्तिक़्बाल को निकले और नारे लगाने लगे, “होशाना!” “मुबारक हैं वह जो ख़ुदावन्द के नाम से आते हैं!” “इस्राईल का बादशाह मुबारक है!” हुज़ूर ईसा एक कमसिन गधे को ले कर उस पर सवार हो गये, जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “ऐ सिय्यून की बेटी, तू मत डर; देख, तेरा बादशाह आ रहा है, वह गधे के बच्चे पर बैठा हुआ है।” शुरू में तो हुज़ूर ईसा के शागिर्द कुछ न समझे के ये क्या हो रहा है। लेकिन बाद में जब हुज़ूर ईसा अपने जलाल को पहुंचे तो उन्हें याद आया के ये सब बातें आप के बारे में लिखी हुई थीं और ये के लोगों का ये सुलूक भी उन ही बातों के मुताबिक़ था। जब हुज़ूर ईसा ने आवाज़ दे कर लाज़र को क़ब्र से बाहर बुलाया और उसे मुर्दों में से ज़िन्दा किया तो ये लोग भी आप के साथ थे और उन्होंने ये ख़बर हर तरफ़ फैला दी थी। बहुत से और लोग, भी ये सुन कर के हुज़ूर ईसा ने एक बहुत बड़ा मोजिज़ा दिखाया है, आप के इस्तिक़्बाल को निकले। फ़रीसी ये देखकर एक दूसरे से कहने लगे, “ज़रा सोचो तो आख़िर हमें क्या हासिल हुआ। देखो सारी दुनिया उस के पीछे कैसे चल रही है!” जो लोग ईद के मौक़े पर इबादत करने के लिये आये थे उन में बाज़ यूनानी भी थे। वह फ़िलिप्पुस के पास आये, जो गलील के शहर बैतसैदा का बाशिन्दा था, और इस से दरख़्वास्त करने लगे। “जनाब, हम हुज़ूर ईसा को देखना चाहते हैं।” फ़िलिप्पुस ने अन्द्रियास को बताया; और फिर दोनों ने आकर हुज़ूर ईसा को ख़बर दी। हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “इब्न-ए-आदम के जलाल पाने का वक़्त आ पहुंचा है। मैं तुम से सच-सच कहता हूं के जब तक गेहूं का दान ख़ाक में मिल कर फ़ना नहीं हो जाता, वह एक ही दान रहता है। लेकिन अगर वह फ़ना हो जाता है, तो बहुत से दाने पैदा करता है। जो आदमी अपनी जान को अज़ीज़ रखता है, उसे खोयेगा लेकिन जो दुनिया में अपनी जान से अदावत रखता है वह उसे अब्दी ज़िन्दगी के लिये महफ़ूज़ रखेगा। जो कोई मेरी ख़िदमत करना चाहता है उसे लाज़िम है के मेरी पैरवी करे; ताके जहां में हूं, वहां मेरा ख़ादिम भी हो। जो मेरी ख़िदमत करता है मेरा आसमानी बाप उसे इज़्ज़त बख़्शेंगे। “अब मेरा दिल घबराता है, तो क्या मैं ये कहूं? ‘ऐ बाप, मुझे इस घड़ी से बचाए रख’? हरगिज़ नहीं, क्यूंके इसीलिये तो मैं आया हूं के इस घड़ी तक पहुचूं। ऐ बाप, अपने नाम को जलाल बख़्श!” तब आसमान से एक आवाज़ सुनाई दी, “मैंने जलाल बख़्शा है और फिर बख़्शूंगा।” जब लोगों का हुजूम जो वहां जमा था ये सुना तो कहा के बादल गरजा है; दूसरों ने कहा के किसी फ़रिश्ते ने हुज़ूर ईसा से कलाम किया है। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ये आवाज़ तुम्हारे लिये आई है नाके मेरे लिये। अब वह वक़्त आ गया है के दुनिया की अदालत की जाये। अब इस दुनिया का हुक्मरां बाहर निकाला जायेगा लेकिन जिस वक़्त में, ज़मीन पर, ऊंचा उठाया जाऊंगा तो सब लोगों को अपने पास खींच लूंगा।” हुज़ूर ईसा ने ये कह कर ज़ाहिर कर दिया के वह किस क़िस्म की मौत से मरने वाले हैं। लोगों ने आप से कहा, “हम ने शरीअत में सुना है के अलमसीह हमेशा ज़िन्दा रहेंगे, फिर आप कैसे कहते हैं, ‘इब्न-ए-आदम का सलीब पर चढ़ाया जाना ज़रूरी है’? ये ‘इब्न-ए-आदम कौन है’?” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “नूर तुम्हारे दरमियान थोड़ी देर और मौजूद रहेगा। नूर जब तक तुम्हारे दरमियान है नूर में चले चलो, इस से पहले के तारीकी तुम्हें आ ले। जो कोई तारीकी में चलता है, नहीं जानता के वह किधर जा रहा है। जब तक नूर तुम्हारे दरमियान है तुम नूर पर ईमान लाओ, ताके तुम नूर के फ़र्ज़न्द बन सको।” जब हुज़ूर ईसा ये बातें कह चुके, तो वहां से चले गये और उन की नज़रों से ओझल हो गये। अगरचे हुज़ूर ईसा ने उन के दरमियान इतने मोजिज़े दिखाये थे फिर भी वह उन पर ईमान न लाये ताके यसायाह नबी का क़ौल पूरा हो: “ऐ ख़ुदावन्द, हमारे पैग़ाम पर कौन ईमान लाया और ख़ुदावन्द के बाज़ू की क़ुव्वत किस पर ज़ाहिर हुई?” यही वजह थी के वह ईमान न ला सके। यसायाह एक और जगह कहते हैं: “ख़ुदा ने उन की आंखों को अन्धा और दिलों को सख़्त कर दिया है, ताके ऐसा न हो के अपनी आंखों से देख सकें, और अपने दिलों से समझ सकें, और तौबा करें के मैं उन्हें शिफ़ा बख़्शूं।” यसायाह ने ये इसलिये कहा क्यूंके यसायाह ने ख़ुदावन्द का जलाल देखा था और उन के बारे में कलाम भी किया। इस के बावुजूद भी यहूदियों के कई रहनुमा उन पर ईमान तो ले आये लेकिन वह फ़रीसियों की वजह से अपने ईमान का इक़रार न करते थे क्यूंके उन्हें ख़ौफ़ था के वह यहूदी इबादतगाह से ख़ारिज कर दिये जायेंगे; दरअस्ल वह ख़ुदा की जानिब से इज़्ज़त पाने की बजाय इन्सानों की जानिब से इज़्ज़त पाने के ज़्यादा मुतलाशी थे। तब हुज़ूर ईसा ने पुकार कर कहा, “जो कोई मुझ पर ईमान लाता है, वह न सिर्फ़ मुझ पर बल्के मेरे भेजने वाले पर भी ईमान लाता है। और जब वह मुझ पर नज़र डालता है तो मेरे भेजने वाले को देखता है। मैं दुनिया में नूर बन कर आया हूं ताके जो मुझ पर ईमान लाये वह तारीकी में न रहे। “अगर कोई मेरी बातें सुनता है और उन पर अमल नहीं करता तो मैं उसे मुजरिम नहीं ठहराता क्यूंके मैं दुनिया को मुजरिम ठहराने नहीं आया बल्के नजात देने आया हूं। जो मुझे रद्द करता है और मेरी बातें क़बूल नहीं करता उस का इन्साफ़ करने वाला एक है यानी मेरा कलाम जो आख़िरी दिन उसे मुजरिम ठहरायेगा। क्यूंके मैंने अपनी जानिब से कुछ नहीं कहा बल्के आसमानी बाप जिस ने मुझे भेजा है उन ही ने मुझे सब कुछ कहने का हुक्म दिया है। मैं जानता हूं के उन का हुक्म बजा लाना अब्दी ज़िन्दगी की तरफ़ ले जाता है। लिहाज़ा मैं वोही कहता हूं जिस के कहने का हुक्म मुझे बाप ने दिया है।” ईद-ए-फ़सह के आग़ाज़ से पहले हुज़ूर ईसा ने जान लिया के उन के दुनिया से रुख़्सत होकर बाप के पास जाने का वक़्त आ गया है। वह अपने लोगों से महब्बत करते थे जो दुनिया में थे, और उन की महब्बत उन से आख़िरी वक़्त तक क़ाइम रही। वह लोग शाम का खाना खा रहे थे, और शैतान ने पहले ही शमऊन के बेटे यहूदाह इस्करियोती के दिल में, हुज़ूर ईसा के पकड़वा देने का ख़्याल, डाल दिया था। आप को मालूम था के बाप ने सारी चीज़ें उन के हाथ में कर दी हैं, और ये भी के वह ख़ुदा की जानिब से आये हैं और ख़ुदा की तरफ़ वापस जा रहे हैं; पस वह दस्तरख़्वान से उठे, और अपना चोग़ा उतार डाला और एक तौलिया ले कर अपनी कमर के गिर्द लपेट लिया। इस के बाद, हुज़ूर ईसा ने एक बर्तन में पानी डाला और अपने शागिर्दों के पांव धोकर, उन्हें अपनी कमर में बंधे हुए तौलिया से पोंछने लगे। जब वह शमऊन पतरस तक पहुंचे तो पतरस कहने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, क्या आप मेरे पांव धोना चाहते हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जो मैं कर रहा हूं तुम उसे अभी तो नहीं जानते, लेकिन बाद में समझ जाओगे।” पतरस ने जवाब दिया, “नहीं, मैं आप को अपने पांव हरगिज़ नहीं धोने दूंगा।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर मैं तुम्हें न धोऊं, तो तुम्हारी मेरे साथ कोई शिराकत नहीं रह सकती।” इस पर, शमऊन पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, अगर ये बात है तो सिर्फ़ मेरे पांव ही नहीं बल्के हाथ और सर भी धो दीजिये!” हुज़ूर ईसा ने पतरस से फ़रमाया, “जो शख़्स ग़ुस्ल कर चुका है उसे सिर्फ़ पांव धोने की ज़रूरत होती है; उस का सारा जिस्म तो पाक होता है। तुम लोग पाक हो लेकिन सब के सब नहीं।” हुज़ूर ईसा को मालूम था के कौन उन्हें पकड़वायेगा। इसीलिये आप ने फ़रमाया, तुम सब के सब पाक नहीं हो। जब वह उन के पांव धो चुके, तो अपना चोग़ा पहन कर अपनी जगह आ बैठे। तब आप ने उन से पूछा, “मैंने तुम्हारे साथ जो कुछ किया, क्या तुम इस का मतलब समझते हो? तुम मुझे ‘उस्ताद’ और ‘ख़ुदावन्द,’ कहते हो, और तुम्हारा कहना बजा है, क्यूंके मैं वाक़ई तुम्हारा उस्ताद और ख़ुदावन्द हूं। जब मैंने, यानी तुम्हारे उस्ताद और ख़ुदावन्द, ने तुम्हारे पांव धोए, तो तुम्हारा भी फ़र्ज़ है के एक दूसरे के पांव धोया करो। मैंने तुम्हें एक नमूना दिया है के जैसा मैंने किया तुम भी किया करो। मैं तुम से सच-सच कहता हूं, कोई ख़ादिम अपने आक़ा से बड़ा नहीं होता, न ही कोई क़ासिद अपने पैग़ाम भेजने वाले से बड़ा होता है। तुम इन बातों को जान गये हो, इन बातों पर अमल भी करोगे तो तुम मुबारक होगे। “मेरा इशारा तुम सब की तरफ़ नहीं है; जिन्हें मैंने चुन है उन्हें मैं जानता हूं। लेकिन किताब-ए-मुक़द्दस की इस बात का पूरा होना ज़रूरी है: ‘जो मेरी रोटी खाता है वोही मुझ पर लात उठाता है।’ “इस से पहले के ऐसा हो, मैं तुम्हें बता रहा हूं, ताके जब ऐसा हो जाये तो तुम ईमान रखो के वह में ही हूं। मैं तुम से सच-सच कहता हूं, जो मेरे भेजे हुए को क़बूल करता है वह मुझे क़बूल करता है; और जो मुझे क़बूल करता है वह मेरे भेजने वाले को क़बूल करता है।” उन बातों के बाद, हुज़ूर ईसा अपने दिल में निहायत ही रंजीदा हुए और ये गवाही दी, “मैं तुम से सच-सच कहता हूं के तुम में से, एक मुझे पकड़वायेगा।” उन के शागिर्द एक दूसरे को शुब्ह की नज़र से देखने लगे, क्यूंके उन्हें मालूम न था के उन का इशारा किस की तरफ़ है। उन में से एक, शागिर्द जिस से हुज़ूर ईसा महब्बत रखते थे, दस्तरख़्वान पर उन के नज़दीक ही झुका बैठा था। शमऊन पतरस ने उस शागिर्द से इशारों में पूछा, “हुज़ूर ईसा किस के बारे में कह रहे हैं।” उन शागिर्द ने हुज़ूर ईसा की तरफ़ झुक कर, आप से पूछा, “ऐ ख़ुदावन्द, वह कौन है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जिसे मैं निवाला डुबो कर दूंगा वोही है।” तब, आप ने निवाला डुबो कर, शमऊन इस्करियोती के बेटे यहूदाह, को दिया। और उस निवाले के बाद, शैतान यहूदाह इस्करियोती में समा गया। तब हुज़ूर ईसा ने यहूदाह इस्करियोती से फ़रमाया, “जो कुछ तुझे करना है, जल्दी कर ले।” लेकिन दस्तरख़्वान पर किसी को मालूम न हुआ के आप ने उसे ऐसा क्यूं कहा। यहूदाह के पास पैसों की थैली रहती थी, इसलिये बाज़ ने सोचा के हुज़ूर ईसा उसे ईद के लिये ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिये कह रहे हैं, या ये के ग़रीबों को कुछ दे देना। जूंही ही यहूदाह ने रोटी का निवाला लिया, फ़ौरन बाहर चला गया। और रात हो चुकी थी। जब यहूदाह चला गया, तो हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “अब जब के इब्न-ए-आदम ने जलाल पाया है तो गोया ख़ुदा ने उस में जलाल पाया है। चूंके ख़ुदा ने हुज़ूर अलमसीह में जलाल पाया है, तो ख़ुदा भी अपने बेटे को अपना जलाल देगा और फ़ौरी तौर पर देगा। “मेरे बच्चो, में कुछ देर और तुम्हारे साथ हूं। तुम मुझे ढूंडोगे और जैसा मैंने यहूदी रहनुमाओं से फ़रमाया, तुम से भी कहता हूं: जहां मैं जा रहा हूं, तुम वहां नहीं आ सकते। “मैं तुम्हें एक नया हुक्म देता हूं: एक दूसरे से महब्बत रखो। जिस तरह मैंने तुम से महब्बत रख्खी, तुम भी एक दूसरे से महब्बत रखो। अगर तुम एक दूसरे से महब्बत रखोगे, तो इस से सब लोग जान लेंगे के तुम मेरे शागिर्द हो।” शमऊन पतरस ने उन से कहा, ऐ ख़ुदावन्द! आप कहां जा रहे हैं? हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “जहां मैं जा रहा हूं तुम अभी तो मेरे साथ नहीं आ सकते लेकिन बाद में आ जाओगे।” पतरस ने पूछा, ऐ ख़ुदावन्द, “मैं आप के साथ अभी क्यूं नहीं आ सकता? मैं तो अपनी जान तक आप पर निसार कर दूंगा।” ये सुन कर हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “क्या तुम वाक़ई मेरे लिये अपनी जान दोगे? मैं तुम से सच-सच कहता हूं के इस से पहले के मुर्ग़ बांग दे तुम तीन दफ़ा मेरा इन्कार करोगे! “तुम्हारा दिल परेशान न हो। तुम ख़ुदा पर ईमान रखते हो; तो मुझ पर भी ईमान रखो। मेरे बाप के यहां बहुत से रिहाइशी मक़ाम हैं; अगर न होते, तो मैं तुम्हें बता देता मैं तुम्हारे लिये जगह तय्यार करने वहां जा रहा हूं। और अगर मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तय्यार करूं, तो वापस आकर तुम्हें अपने साथ ले जाऊंगा ताके जहां में हूं वहां तुम भी हो। जहां मैं जा रहा हूं, तुम वहां की राह जानते हो।” तोमा ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, हम ये नहीं जानते के आप कहां जा रहे हैं, तो हम रास्ता कैसे जान सकते हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब में फ़रमाया, “राह और हक़ और ज़िन्दगी मैं ही हूं। मेरे वसीले के बग़ैर कोई बाप के पास नहीं आता। अगर तुम ने वाक़ई मुझे जाना होता, तो मेरे बाप को भी जानते। अब तुम उन्हें जान गये हो बल्के उन्हें देख भी चुके हो।” फ़िलिप्पुस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, हमें बाप का दीदार करा दीजिये, बस यही हमारे लिये काफ़ी है।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया: “फ़िलिप्पुस मैं इतने अर्से से तुम लोगों के साथ हूं, क्या तुम मुझे नहीं जानते? जिस ने मुझे देखा है उस ने बाप को देखा है। तुम कैसे कहते हो? ‘हमें बाप का दीदार करा दीजिये’? क्या तुम्हें यक़ीन नहीं के मैं बाप में हूं, और बाप मुझ में हैं? मैं जो बातें तुम से कहता हूं वह मेरी जानिब से नहीं बल्के, मेरा बाप, मुझ में रह कर, अपना काम करते हैं। जब मैं कहता हूं के मैं बाप में हूं और बाप मुझ में हैं तो यक़ीन करो या कम अज़ कम मेरे कामों का तो यक़ीन करो जो मेरे गवाह हैं। मैं तुम से सच-सच कहता हूं, जो मुझ पर ईमान रखता है वह भी वोही करेगा जो मैं करता हूं, बल्के वह उन से भी बड़े-बड़े काम करेगा, क्यूंके मैं बाप के पास जा रहा हूं। जो कुछ तुम मेरा नाम ले कर मांगोगे, मैं तुम्हें दूंगा ताके बाप का जलाल बेटे के ज़रीये ज़ाहिर हो। तुम मेरे नाम से कुछ भी फ़र्याद करोगे, तो मैं उसे ज़रूर पूरा करूंगा। “अगर तुम मुझ से महब्बत करते हो तो मेरे अहकाम बजा लाओगे। और मैं बाप से दरख़्वास्त करूंगा, और वह तुम्हें एक और मददगार बख़्शेगा ताके वह हमेशा तक तुम्हारे साथ रहे। यानी रूहे हक़। जिसे ये दुनिया हासिल नहीं कर सकती, क्यूंके न तो उसे देखती है न जानती है। लेकिन तुम उसे जानते हो, क्यूंके उस की सुकूनत तुम्हारे साथ है और उस का क़ियाम तुम्हारे दिलों में होगा। मैं तुम्हें यतीम न छोड़ूंगा। मैं तुम्हारे पास आऊंगा ये दुनिया कुछ देर बाद, मुझे न देख पायेगी, लेकिन तुम मुझे देखते रहोगे। चूंके मैं ज़िन्दा रहूंगा, तुम भी ज़िन्दा रहोगे। उस दिन तुम जान लोगे के मैं अपने बाप में हूं, और तुम मुझ में हो, और मैं तुम में। जिस के पास मेरे अहकाम हैं और वह उन्हें मानता है वोही मुझ से महब्बत करता है, और वह मेरे बाप का प्यारा होगा और में भी उस से महब्बत रख्खूंगा और अपने आप को उस पर ज़ाहिर करूंगा।” तब यहूदाह (यहूदाह इस्करियोती नहीं) ने कहा, “लेकिन, ऐ ख़ुदावन्द, क्या वजह है के हुज़ूर आप ख़ुद को हम पर ज़ाहिर करेंगे लेकिन दुनिया पर नहीं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब मैं फ़रमाया, “अगर कोई मुझ से महब्बत रखता है तो वह मेरे कलाम पर अमल करेगा। मेरे बाप उस से महब्बत रखेंगे और हम उन के पास आकर और उन के साथ रहेंगे। जो मुझ से महब्बत नहीं रखता वह मेरे कलाम पर अमल नहीं करता। ये कलाम जो तुम सुन रहे हो; मेरे अपना नहीं बल्के मेरे बाप का है जिस ने मुझे भेजा है। “ये सारी बातें मैंने तुम्हारे साथ रहते हुए कहीं। लेकिन वह मददगार, यानी पाक रूह, जिसे बाप मेरे नाम से भेजेगा, तुम्हें सारी बातें सिखायेगा और हर बात जो मैंने तुम से कही है, याद दिलायेगा। मैं तुम्हारे साथ अपनी सलामती छोड़े जाता हूं। मैं अपनी सलामती तुम्हें देता हूं। जिस तरह दुनिया देती है उस तरह नहीं। चुनांचे दिलों को परेशान न होने दो और ख़ौफ़ज़दा न हो। “तुम ने मुझे ये कहते सुना, ‘मैं जा रहा हूं और तुम्हारे पास फिर आऊंगा।’ अगर तुम मुझ से महब्बत करते तो ख़ुश होते के मैं बाप के पास जा रहा हूं, क्यूंके बाप मुझ से बड़ा है। मैंने सारी बातें पहले ही तुम्हें बता दी हैं ताके जब वह पूरी हो जायें तो तुम मुझ पर ईमान लाओ। अब मैं तुम से और ज़्यादा बातें नहीं करूंगा, क्यूंके इस दुनिया का हुक्मरां आ रहा है। उस का मुझ पर कोई इख़्तियार नहीं, लेकिन दुनिया को मालूम होना चाहिये के मैं बाप से महब्बत करता हूं और उस के हर हुक्म की पैरवी करता हूं जिस का बाप मुझे हुक्म देता है। “अब आओ; यहां से चलें। “मैं अंगूर की हक़ीक़ी बेल हूं, और मेरा बाप बाग़बान है। मेरी जो शाख़ फल नहीं लाती वह उसे काट डालता है, और जो फल लाती है उसे तराशता है ताके वह ज़्यादा फल लाये। तुम इस कलाम के बाइस जो मैंने तुम से किया है पहले ही पाक साफ़ हो चुके हो। तुम मुझ में क़ाइम रहो तो में भी तुम में क़ाइम रहूंगा। कोई शाख़ अपने आप फल नहीं लाती; उस शाख़ का अंगूर की बेल से पैवस्ता रहना लाज़िम है। तुम भी मुझ में क़ाइम रहे बग़ैर फल नहीं ला सकते। “अंगूर की बेल में हूं और तुम मेरी शाख़ें हो। जो मुझ में क़ाइम रहता है और में उस में वह ख़ूब फल लाता है; मुझ से जुदा होकर तुम कुछ नहीं कर सकते। अगर तुम मुझ में क़ाइम नहीं रहते हो, तो उस शाख़ की तरह हो जो दूर फेंक दी जाती और सूख जाती है; ऐसी शाख़ें जमा कर के, आग में झोंकी और जिला दी जाती हैं। अगर तुम मुझ में क़ाइम रहोगे और मेरा कलाम तुम्हारे दिल में क़ाइम रहेगा, तो जो चाहो मांगो, वह तुम्हें दिया जायेगा। मेरे बाप का जलाल इस में है, के जिस तरह तुम बहुत सा फल लाते हो, और ऐसा करना तुम्हारे शागिर्द होने की दलील है। “जैसे बाप ने मुझ से महब्बत की है वैसे ही मैंने तुम से की है। अब मेरी महब्बत में क़ाइम रहो। जिस तरह मैंने अपने बाप के हुक्मों पर अमल किया है, और उन की महब्बत में क़ाइम हूं, उसी तरह अगर तुम भी मेरे अहकाम बजा लाओगे तो मेरी महब्बत में क़ाइम रहोगे। मैंने ये बातें तुम्हें इसलिये बताई हैं के मेरी ख़ुशी तुम में हो और तुम्हारी ख़ुशी पूरी हो जाये। मेरा हुक्म ये है के जैसे मैंने तुम से महब्बत रख्खी तुम भी एक दूसरे से महब्बत रखो। इस से ज़्यादा महब्बत कोई नहीं करता: अपनी जान अपने दोस्तों के लिये क़ुर्बान कर दे। तुम मेरे दोस्त हो बशर्ते के मेरे हुक्म पर अमल करते रहो। अब से मैं तुम्हें ख़ादिम नहीं कहूंगा, क्यूंके ख़ादिम नहीं जानता के उस का मालिक क्या करता है। बल्के, मैंने तुम्हें दोस्त मान है क्यूंके सब कुछ जो मैंने बाप से सुना है तुम्हें बयान कर दिया है। तुम ने मुझे नहीं चुन, बल्के मैंने तुम्हें चुन और मुक़र्रर किया है ताके तुम जा कर फल लाओ ऐसा फल जो क़ाइम रहे ताके जो कुछ तुम मेरा नाम ले कर बाप से मांगोगे वह तुम्हें अता करेगा। मैं तुम्हें हुक्म देता हूं: आपस में महब्बत रखो। “अगर दुनिया तुम से दुश्मनी रखती है तो याद रखो के उस ने पहले मुझ से भी दुश्मनी रख्खी है। अगर तुम दुनिया के होते, तो ये दुनिया तुम्हें अपनों की तरह अज़ीज़ रखती। लेकिन अब तुम, दुनिया के नहीं हो क्यूंके मैंने तुम्हें चुन कर दुनिया से अलैहदा कर दिया है। यही वजह है के दुनिया तुम से दुश्मनी रखती है। मेरी ये बात याद रखो: ‘कोई ख़ादिम अपने आक़ा से बड़ा नहीं होता। ’ अगर दुनिया वालों ने मुझे सताया है, तो वह तुम्हें भी सतायेंगे। अगर उन्होंने मेरी बात पर अमल किया, तो तुम्हारी बात पर भी अमल करेंगे। वह मेरे नाम की वजह से तुम से इस तरह का सुलूक करेंगे, क्यूंके वह मेरे भेजने वाले को नहीं जानते। अगर मैंने आकर उन से कलाम न क्या होता, तो वह गुनहगार न ठहराये जाते लेकिन अब उन के गुनाह का उन के पास कोई उज़्र बाक़ी नहीं रहा। जो मुझ से दुश्मनी रखता है, मेरे बाप से भी दुश्मनी रखता है अगर में उन के दरमियान वह काम न करता जो किसी दूसरे ने नहीं किये, तो वह गुनहगार नहीं ठहरते। लेकिन अब, उन्होंने मेरे कामों को देख लिया है, और उन्होंने मुझ से और मेरे बाप दोनों से दुश्मनी रख्खी है। लेकिन ये इसलिये हुआ के इन की शरीअत में लिख्खा हुआ क़ौल पूरा हो जाये: ‘उन्होंने मुझ से बिला वजह दुश्मनी रख्खी।’ “जब वह मददगार यानी रूहे हक़ आयेगा जिसे मैं बाप की जानिब से भेजूंगा तो वह मेरे बारे में गवाही देगा। और तुम भी मेरी बाबत गवाही दोगे क्यूंके तुम शुरू ही से मेरे साथ रहे हो। “मैंने तुम्हें ये सारी बातें इसलिये बताई हैं के तुम गुमराह न हो जाओ। वह तुम्हें यहूदी इबादतगाहों से ख़ारिज कर देंगे; दर-हक़ीक़त, ऐसा वक़्त आ रहा है के अगर कोई तुम्हें क़त्ल कर डालेगा तो ये समझेगा के वह ख़ुदा की ख़िदमत कर रहा है। वह ये सब इसलिये करेंगे के न तो उन्होंने कभी बाप को जाना और न मुझे। मैंने ये बातें तुम्हें इसलिये बताई हैं के जब वह पूरी होने लगीं तो तुम्हें याद आ जाये के मैंने तुम्हें पहले ही से आगाह कर दिया था। शुरू में इसलिये नहीं बताईं के मैं ख़ुद तुम्हारे साथ था, लेकिन अब में अपने भेजने वाले के पास वापस जा रहा हूं और तुम में से कोई भी ये नहीं पूछता, ‘आप कहां जा रहे हैं?’ चूंके, मैंने तुम्हें बता दिया है इसलिये तुम बड़े ग़मगीन हो गये हो। मगर में तुम से सच-सच कहता हूं, मेरा यहां से रुख़्सत हो जाना तुम्हारे हक़ में बेहतर साबित होगा। क्यूंके अगर मैं न जाऊंगा, तो वह मददगार तुम्हारे पास नहीं आयेगा; लेकिन अगर मैं चला जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। जब वह मददगार आयेगा, तो वह दुनिया को गुनाह और रास्तबाज़ी, और इन्साफ़ की बाबत दुनिया को मुजरिम ठहरायेगा: गुनाह के बारे में, इसलिये के लोग मुझ पर ईमान नहीं लाते; रास्तबाज़ी की बाबत, यह के मैं वापस बाप के पास जा रहा हूं, और तुम मुझे फिरना देखोगे; और इन्साफ़ की बाबत यह के दुनिया का हाकिम मुजरिम ठहराया जा चुका है। “मुझे तुम से और भी बहुत कुछ कहना है मगर अभी तुम उसे बर्दाश्त न कर पाओगे। लेकिन जब वह, रूह हक़, आयेगा, तो वह सारी सच्चाई की तरफ़ तुम्हारी राहनुमाई करेगा। वह अपनी जानिब से कुछ न कहेगा; बल्के तुम्हें सिर्फ़ वोही बतायेगा जो वह सुनेगा, और मुस्तक़बिल में पेश आने वाली बातों की ख़बर देगा वह मेरा जलाल ज़ाहिर करेगा क्यूंके वह मेरी बातें मेरी ज़बानी सुन कर तुम तक पहुंचायेगा। सब कुछ जो भी बाप का है वह मेरा है। यही वजह है के मैंने कहा के पाक रूह मेरी बातें मेरी ज़बानी सुन कर तुम तक पहुंचायेगा।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “थोड़ी देर बाद तुम मुझे देखना पाओगे, और इस के थोड़ी देर बाद फिर मुझे देख लोगे।” इस पर बाज़ शागिर्द आपस में कहने लगे, “इस जुमले के कहने का क्या मतलब है, ‘थोड़ी देर के बाद तुम मुझे न देख पाओगे, और इस के थोड़ी देर बाद फिर मुझे देख लोगे’ और ‘ये भी के मैं बाप के पास जा रहा हूं’?” चुनांचे वह एक दूसरे से पूछते रहे, “इस जुमले का क्या मतलब है? ‘थोड़ी देर बाद’ हमारी समझ में तो कुछ नहीं आता के वह क्या फ़रमा रहे हैं।” हुज़ूर ईसा ने देखा के वह उन से इस बारे में, पूछना चाहते हैं, लिहाज़ा आप ने इन से फ़रमाया, “क्या तुम आपस में ये पूछ रहे हो, मेरी इस बात का क्या मतलब है ‘थोड़ी देर के बाद तुम मुझे न देख पाओगे, और इस के थोड़ी देर बाद फिर मुझे देख लोगे’? मैं तुम से सच-सच कहता हूं, तुम रोओगे और मातम करोगे लेकिन दुनिया के लोग ख़ुशी मनायेंगे। तुम ग़मगीन तो होगे, लेकिन तुम्हारा ग़म ख़ुशी में बदल जायेगा जब किसी औरत के दर्द ज़ह होने लगता है तो वह ग़मगीन हो जाती है इसलिये के इस के दुख की घड़ी आ पहुंची; लेकिन जूंही ही बच्चा पैदा हो जाता है तो इस ख़ुशी के बाइस के दुनिया में एक बच्चा पैदा हुआ है वह अपना दर्द भूल जाती है। यही हाल तुम्हारा है: अब तुम ग़मगीन हो, मगर मैं तुम से फिर मिलूंगा और तब तुम ख़ुशी मनाओगे, और तुम से तुम्हारी ख़ुशी कोई भी छीन न सकेगा। उस दिन तुम्हें मुझ से कोई भी सवाल करने की ज़रूरत न होगी। मैं तुम से सच-सच कहता हूं के अगर तुम मेरा नाम ले कर बाप से कुछ मांगोगे तो बाप तुम्हें अता करेगा। तुम ने मेरा नाम ले कर अब तक कुछ नहीं मांगा। मांगो तो पाओगे, और तुम्हारी ख़ुशी पूरी हो जायेगी। “अगरचे मैं ये बातें तुम्हें तम्सीलों के ज़रीये बयान करता हूं, मगर वक़्त आ रहा है के मैं तम्सीलों से बात नहीं करूंगा बल्के मैं अपने बाप के बारे में तुम से वाज़ेह तौर पर बातें करूंगा। इस दिन तुम मेरा नाम ले कर मांगोगे। मैं ही तुम्हारी ख़ातिर बाप से मिन्नत करूंगा क्यूंके, बाप तो ख़ुद तुम से महब्बत रखता है इसलिये के तुम ने मुझ से महब्बत रख्खी है और तुम ईमान लाये हो के मैं ख़ुदा की जानिब से आया हूं। मैं बाप में से निकल कर दुनिया में आया हूं; अब दुनिया से रुख़्सत होकर बाप के पास वापस जा रहा हूं।” इस पर शागिर्दों ने आप से कहा, “अब तो आप तम्सीलों में नहीं बल्के वाज़ेह तौर बातें बयान कर रहे हैं। अब हम ने जान लिया के आप को सब कुछ मालूम है और आप इस के मोहताज नहीं के कोई आप से पूछे। हम ईमान लाते हैं के आप ख़ुदा की जानिब से आये हैं।” हुज़ूर ईसा ने उन्हें जवाब दिया, “क्या अब तुम मुझ पर ईमान रखते हो? लेकिन वह वक़्त आ रहा है बल्के आ पहुंचा है के तुम सब मुन्तशिर होकर, अपने-अपने घर की राह लोगे। मुझे तन्हा छोड़ दोगे, फिर भी मैं तन्हा नहीं, क्यूंके मेरा बाप मेरे साथ है। “मैंने तुम से ये बातें इसलिये बतायें के तुम मुझ में इत्मीनान पाओ। तुम दुनिया में मुसीबत उठाते हो। मगर हिम्मत से काम लो! मैं दुनिया पर ग़ालिब आया हूं।” जब हुज़ूर ईसा ये सब कह चुके, तो आप ने आसमान की तरफ़ आंखें उठाकर ये दुआ की: “ऐ बाप, अब वक़्त आ गया है। अपने बेटे को जलाल बख़्शिए, ताके बेटा आप का जलाल ज़ाहिर करे। क्यूंके आप ने उसे तमाम इन्सानों पर इख़्तियार बख़्शा है ताके वह इन सब को अब्दी ज़िन्दगी अता करे जो आप ने उस के सुपुर्द की है। अब्दी ज़िन्दगी ये है के वह आप को हक़ीक़ी सच्चा ख़ुदा जानें, और हुज़ूर ईसा अलमसीह को भी जानें जिसे आप ने भेजा है। मैंने इस काम को जो आप ने मेरे सुपुर्द किया था उस काम को अन्जाम दे कर मैंने ज़मीन पर आप का जलाल ज़ाहिर किया। और अब, ऐ बाप, आप मुझे अपनी हुज़ूरी में उसी जलाल से जलाली बना दें जो जलाल मेरा आप के साथ में दुनिया की तख़्लीक़ होने से पहले था। “मैंने आप को उन लोगों पर ज़ाहिर किया जिन्हें आप ने दुनिया में से चुन कर मेरी सुपुर्दगी में दिया था। वह आप के लोग थे; आप ने उन्हें मेरे सुपुर्द किया था और उन्होंने आप के कलाम पर अमल किया अब वह जानते हैं के जो कुछ आप ने मुझे दिया है वह सब आप ही की जानिब से है। इसलिये जो पैग़ाम आप ने मुझे दिया, मैंने उन तक पहुंचा दिया और उन्होंने उसे क़बूल किया और वह इस हक़ीक़त से वाक़िफ़ हो गये के मैं आप की जानिब से आया हूं और उन का ईमान है के मुझे आप ही ने भेजा है। मैं उन के लिये दुआ करता हूं। मैं दुनिया के लिये दुआ नहीं करता बल्के उन के लिये जिन्हें आप ने मुझे दिया है, क्यूंके वह आप के हैं। मेरा सब कुछ आप का है और जो आप का है, वह सब मेरा है। और उन के वसीले से मुझे जलाल मिला मैं अब और दुनिया में नहीं रहूंगा, लेकिन वह तमाम अभी दुनिया में हैं और मैं आप के पास आ रहा हूं। ऐ क़ुददूस बाप, अपने इस नाम की क़ुदरत से जो आप ने मुझे दिया है इन्हें महफ़ूज़ रखिए ताके वह एक हूं जैसे हम एक हैं। जब में उन के साथ था, मैंने उन को महफ़ूज़ रखा और उन्हें आप के दिये हुए नाम के ज़रीये बचाए रखा। उन में से कोई हलाक नहीं हुआ सिवाए उस के जो हलाकत के लिये ही पैदा हुआ था ताके किताब-ए-मुक़द्दस का लिख्खा पूरा हो। “अब मैं आप के पास आ रहा हूं लेकिन जब तक में दुनिया में हूं ये बातें कह रहा हूं, ताके मेरी सारी ख़ुशी उन्हें हासिल हो जाये। मैंने उन्हें आप का कलाम पहुंचा दिया है और दुनिया ने इन से दुश्मनी रख्खी, क्यूंके जिस तरह में दुनिया का नहीं वह भी दुनिया के नहीं। मेरी मिन्नत ये नहीं के बाप उन्हें दुनिया से उठा ले बल्के ये है के उन्हें शैतान से महफ़ूज़ रखे। जिस तरह में दुनिया का नहीं, वह भी दुनिया के नहीं। हक़ के ज़रीये उन्हें मख़्सूस कर दीजिये; आप का कलाम ही हक़ है। जिस तरह बाप ने मुझे दुनिया में भेजा, उसी तरह मैंने भी उन्हें दुनिया में भेजा है। मैं अपने आप को उन के लिये मख़्सूस करता हूं, ताके वह भी हक़ के ज़रीये मख़्सूस किये जायें। “मेरी मिन्नत सिर्फ़ इन के लिये ही नहीं बल्के उन के लिये भी है जो इन के पैग़ाम के ज़रीये मुझ पर ईमान लायेंगे, ताके वह सब एक, हो जायें जैसे ऐ बाप, आप मुझ में हैं और मैं आप में। काश वह भी हम में हूं ताके सारी दुनिया ईमान लाये के आप ही ने मुझे भेजा है। मैंने उन्हें वह जलाल बख़्शा है जो बाप ने मुझे अता किया था ताके वह भी एक हूं जिस तरह हम एक हैं, मैं उन में और आप मुझ में, ताके वह कामिल तौर पर एक हो जायें। और तब दुनिया जान लेगी के आप ही ने मुझे भेजा और उन से भी इसी तरह महब्बत की है जिस तरह आप ने मुझ से महब्बत रख्खी। “ऐ बाप, आप ने जिन्हें मुझे दिया है मैं चाहता हूं के जहां में हूं वह भी मेरे साथ हूं, और इस जलाल को देख सकें जो आप ने मुझे अता किया, क्यूंके आप ने दुनिया की तख़्लीक़ से पेशतर ही मुझ से महब्बत रख्खी। “ऐ रास्तबाज़ बाप, अगरचे दुनिया ने आप को नहीं जाना, मगर में आप को जानता हूं, और इन्होंने ने भी जान लिया है के आप ने मुझे भेजा है। मैंने इन्हें आप के नाम से वाक़िफ़ करा दिया है और आइन्दा भी कराता रहूंगा ताके आप की वह महब्बत जो आप ने मुझ से की वह उन में हो और में भी इन में हूं।” जब हुज़ूर ईसा दुआ कर के फ़ारिग़ हुए, तो वह अपने शागिर्दों के साथ बाहर आये और वह सब क़िद्रोन की वादी को पार कर के एक बाग़ में चले गये। हुज़ूर का पकड़वाने वाला यहूदाह, उस जगह से वाक़िफ़ था क्यूंके हुज़ूर ईसा कई बार अपने शागिर्दों के साथ वहां जा चुके थे। पस यहूदाह बाग़ में दाख़िल हुआ, और यहूदाह के साथ चंद रोमी फ़ौजी दस्ते और अहम-काहिनों और फ़रीसियों के कुछ ओहदेदार भेजे गये थे। वह अपने हाथों में मशालें, लालटेनें और अिस्लाहः लिये हुए थे। हुज़ूर ईसा, ख़ूब जानते थे के उन के साथ क्या होने वाला है, लिहाज़ा वह बाहर आकर उन से पूछने लगे, “तुम किसे ढूंडते हो?” उन्होंने जवाब दिया, “ईसा नासरी को।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं वोही हूं,” (और उन का पकड़वाने वाला यहूदाह भी उन के साथ खड़ा था।) जब हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मैं वोही हूं,” तो सब घबरा कर पीछे हटे और ज़मीन पर गिर पड़े। चुनांचे हुज़ूर ने दूसरी मर्तबा पूछा, “तुम किसे ढूंडते हो?” उन्होंने कहा, “ईसा नासरी को।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैंने कह तो दिया के मैं वोही हूं। अगर तुम मुझे ढूंडते हो, तो मेरे शागिर्दों को जाने दो।” इस से हुज़ूर की ग़रज़ ये थी के वह क़ौल पूरा हो जाये: “जिन्हें आप ने मुझे दिया था मैंने उन में से किसी एक को भी नहीं खोया।” शमऊन पतरस के पास एक तलवार थी, पतरस ने वह तलवार खींची और आला काहिन के ख़ादिम पर चला कर, उस का दायां कान उड़ा दिया। (उस ख़ादिम का नाम मल्ख़ुस था।) हुज़ूर ईसा ने पतरस को हुक्म दिया, “अपनी तलवार मियान में रखो! क्या मैं वह प्याला न पियूं जो मेरे बाप ने मुझे दिया है?” तब रोमी सिपाहियों, उन के सालार और यहूदी हुक्काम ने हुज़ूर ईसा को गिरिफ़्तार कर लिया और उन के हाथ बांध कर उन्हें पहले हन्‍ना के पास ले गये जो काइफ़ा का ससुर था। काइफ़ा इस साल आला काहिन था। और काइफ़ा ने यहूदी रहनुमाओं को सलाह दी थी के सारी क़ौम की हलाकत से ये बेहतर है के एक शख़्स मारा जाये। शमऊन पतरस और एक और शागिर्द हुज़ूर ईसा के पीछे-पीछे गये। ये शागिर्द आला काहिन से वाक़िफ़ था, इसलिये वह आप के साथ आला काहिन की हवेली में दाख़िल हो गया, लेकिन पतरस को बाहर फाटक पर ही रुक जाना पड़ा। ये शागिर्द जो आला काहिन का वाक़िफ़ कार था, वापस आया, और इस ख़ादिमा से जो फाटक पर निगरानी करती थी, बात कर के पतरस को अन्दर ले गया। ख़ादिमा ने फाटक पर पतरस से पूछा, “क्या तू उन के शागिर्दों में से एक नहीं है?” पतरस ने कहा, “नहीं, मैं नहीं हूं।” सर्दी की वजह से, ख़ादिमो और सिपाहियों ने आग जला रख्खी थी और वह चारों तरफ़ खड़े होकर आग ताप रहे थे। पतरस भी उन के साथ खड़े होकर आग तापने लगे। इस दौरान, आला काहिन हुज़ूर ईसा से उन के शागिर्दों और उन की तालीम के बारे में पूछने लगा। हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैंने दुनिया से खुले आम बातें की हैं, मैं हमेशा यहूदी इबादतगाहों और बैतुलमुक़द्दस में तालीम देता रहा हूं, जहां तमाम यहूदी जमा होते हैं। मैंने पोशीदा कभी भी कुछ नहीं कहा। आप मुझ से क्यूं सवाल पूछते हैं? जिन्होंने मेरी बातें सुनी हैं इन से पूछिए। वह ख़ूब जानते हैं के मैंने क्या कुछ कहा है।” हुज़ूर के ऐसा कहने पर सिपाहियों में से एक ने जो पास ही खड़ा था, हुज़ूर ईसा को थप्पड़ मारा और कहा, “क्या आला काहिन को जवाब देने का यही तरीक़ा है?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर मैंने कुछ बुरा कहा तो, उसे बुरा साबित कीजिये। लेकिन अगर अच्छा कहा है, तो थप्पड़ क्यूं मारते हो?” इस पर हन्‍ना ने हुज़ूर ईसा के हाथ बंधवा कर आप को आला काहिन काइफ़ा के पास भेज दिया। जब, शमऊन पतरस खड़े हुए आग ताप रहे थे तो किसी ने उन से पूछा, “क्या तू भी उन के शागिर्दों में से एक नहीं है?” पतरस ने इन्कार करते हुए कहा, नहीं, “मैं नहीं हूं।” आला काहिन के सिपाहियों में से एक जो उस ख़ादिम का रिश्तेदार था जिस का कान पतरस ने तलवार से उड़ा दिया था, पतरस से पूछने लगा, “क्या मैंने तुम्हें उन के साथ बाग़ में नहीं देखा?” पतरस ने फिर इन्कार किया, और उसी वक़्त मुर्ग़ ने बांग दी। वह सुब्ह-सवेरे ही हुज़ूर ईसा को काइफ़ा के पास से रोमी हाकिम के महल में ले गये। यहूदी रहनुमा महल के अन्दर नहीं गये। उन्हें ख़ौफ़ था के वह नापाक हो जायेंगे और ईद-ए-फ़सह का खाना न खा सकेंगे लिहाज़ा पीलातुस उन के पास बाहर आया और कहने लगा, “तुम इस शख़्स पर क्या इल्ज़ाम लगाते हो?” उन्होंने जवाब दिया, “अगर वह मुजरिम न होता तो हम इसे यहां लाकर आप के सामने क्यूं पेश करते।” पीलातुस ने कहा, “तुम इसे ले जाओ और अपनी शरीअत के मुताबिक़ ख़ुद ही इस का फ़ैसला करो।” यहूदियों ने कहा, “लेकिन हमें तो किसी को भी क़त्ल करने का इख़्तियार नहीं है।” ये इसलिये हुआ के वह कलाम पूरा हो जो हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया था के आप की मौत किस तरह की होगी। तब पीलातुस महल में के अन्दर चला गया, और उस ने हुज़ूर ईसा को वहां तलब कर के आप से पूछा, “क्या आप यहूदियों के बादशाह हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “तुम ये बात अपनी जानिब से कहते हो, या औरों ने मेरे बारे मैं तुम्हें ये ख़बर दी है?” पीलातुस ने जवाब दिया, “क्या मैं कोई यहूदी हूं? तुम्हारी क़ौम ने और अहम-काहिनों ने आप को मेरे हवाले किया है। बताईये आख़िर आप ने क्या किया है?” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मेरी बादशाही इस दुनिया की नहीं। अगर दुनिया की होती, तो मेरे ख़ादिम जंग करते और मुझे यहूदी रहनुमाओं के हाथों गिरिफ़्तार न होने देते। लेकिन अभी मेरी बादशाही यहां की नहीं है।” पस पीलातुस ने कहा, “तो क्या आप एक बादशाह हैं।” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “ये तो आप का कहना है के मैं एक बादशाह हूं। दरअस्ल, में इसलिये पैदा हुआ और इस मक़सद से दुनिया में आया के हक़ की गवाही दूं। हर कोई जो हक़ की तरफ़ है मेरी बात सुनता है।” पीलातुस ने पूछा, “हक़ क्या है?” ये कहते ही वह फिर यहूदियों के पास गया और कहने लगा, “मैं तो इस शख़्स को मुजरिम नहीं समझता। लेकिन तुम्हारे दस्तूर के मुताबिक़ मैं ईद-ए-फ़सह के मौक़े पर तुम्हारे लिये एक क़ैदी को रिहा कर देता हूं। क्या तुम चाहते हो के मैं तुम्हारे लिये ‘यहूदियों के बादशाह’ को छोड़ दूं?” वह फिर चिल्लाने लगे, “नहीं, इसे नहीं, हमारे लिये बरअब्बा को रिहा कर दीजिये!” जब के बरअब्बा एक बाग़ी था। तब पीलातुस ने हुज़ूर ईसा को ले जा कर कोड़े लगवाए और फ़ौज के सिपाहियों ने कांटों का ताज बनाया और आप के सर पर रखा और आप को सुर्ख़ रंग का चोग़ा पहन दिया। वह बार-बार हुज़ूर के सामने जाते और कहते थे, “ऐ यहूदियों के बादशाह, आदाब!” और आप के मुंह पर थप्पड़ मारते थे। पीलातुस एक बार फिर बाहर आया और यहूदियों से कहने लगा, “देखो, मैं इन्हें तुम्हारे पास बाहर ला रहा हूं। तुम्हें मालूम हो के मैं किसी बिना पर भी उन पर फ़र्द-ए-जुर्म आयद नहीं कर सकता।” जब हुज़ूर ईसा कांटों का ताज सर पर रखो और सुर्ख़ चोग़ा पहने हुए बाहर आये, तो पीलातुस ने यहूदियों से कहा, “ये रहा वह आदमी!” अहम-काहिन और उन के सिपाही आप को देखते ही, चिल्लाने लगे, “इसे मस्लूब करो! इसे मस्लूब करो!” लेकिन पीलातुस ने जवाब दिया, “तुम ही इन्हें ले जाओ और सलीब दो। जहां तक मेरा तअल्लुक़ है, मैं इस में मुजरिम ठहराने का कोई क़ुसूर नहीं पाता।” यहूदी रहनुमा असरार करने लगे, “हम अहल-ए-शरीअत हैं, और हमारी शरीअत के मुताबिक़ वह वाजिबुल-क़त्ल है, क्यूंके इस ने कहा है के वह ख़ुदा का बेटा है।” जब पीलातुस ने ये सुना, तो वह और भी ख़ौफ़ज़दा हो गया, और पीलातुस ने दुबारा महल में जा कर पूछा, “आप कहां के हो?” लेकिन हुज़ूर ईसा ने पीलातुस को कुछ जवाब नहीं दिया। पीलातुस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “क्या आप को पता नहीं के मुझे इख़्तियार है के आप को छोड़ दूं या मस्लूब कर दूं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर ये इख़्तियार आप को ऊपर से न मिला होता तो आप का मुझ पर कोई इख़्तियार न होता। मगर जिस शख़्स ने मुझे आप के हवाले किया है वह और भी बड़े गुनाह का मुर्तकिब हुआ है।” इस के बाद पीलातुस ने हुज़ूर ईसा को छोड़ देने की कोशिश की, लेकिन यहूदी रहनुमा चिल्ला-चिल्ला कर कहने लगे, “अगर आप ने इस शख़्स को रिहा कर दिया तो आप शहंशाह क़ैसर के ख़ैरख़ाह नहीं। अगर कोई भी अपने बादशाह होने का एलान करता है तो वह शहंशाह क़ैसर का मुख़ालिफ़ समझा जाता है।” जब पीलातुस ने ये सुना तो उस ने हुज़ूर ईसा को बाहर बुलाया और अपने तख़्त-ए-अदालत पर बैठ गया जो एक संगी चबूतरे पर क़ाइम था जिसे इब्रानी ज़बान में गब्बथा कहते हैं। ये ईद-ए-फ़सह की तय्यारी का दिन था; और तक़रीबन दोपहर का वक़्त थी। पीलातुस ने यहूदियों से कहा, “ये रहा तुम्हारा बादशाह।” लेकिन वह चिल्लाये, “इसे यहां से ले जाओ! ले जाओ! और इसे मस्लूब करो!” पीलातुस ने कहा, “क्या मैं इसे जो तुम्हारा बादशाह है मस्लूब कर दूं?” अहम-काहिनों ने कहा, “क़ैसर के सिवा हमारा कोई बादशाह नहीं।” इस पर पीलातुस ने हुज़ूर ईसा को उन के हवाले कर दिया ताके हुज़ूर को मस्लूब किया जाये। चुनांचे सिपाही ने उन्हें अपने क़ब्ज़ा में ले कर वहां से चले गये। हुज़ूर ईसा अपनी सलीब उठाकर, खोपड़ी नामी जगह की तरफ़ रवाना हुए (जिसे इब्रानी ज़बान में गुलगुता कहते हैं)। वहां उन्होंने दाहिनी और बाएं तरफ़ दो डाकूओं को और दरमियान में हुज़ूर ईसा को सलीब पर मस्लूब कर दिया। पीलातुस ने एक कुतबा तय्यार करवा कर सलीब पर लगा दिया। उस पर ये तहरीर था: ईसा नासरी, यहूदियों का बादशाह। कई यहूदियों ने ये कुतबा पढ़ा, क्यूंके जिस जगह हुज़ूर ईसा को सलीब पर लटकाया गया था वह शहर के नज़दीक ही थी, और कुतबा की इबारत इब्रानी, लातीनी और यूनानी तीनों ज़बानों में लिख्खी गई थी। यहूदियों के अहम-काहिनों ने पीलातुस से दरख़्वास्त की, “यहूदियों का बादशाह न लिख बल्के ये उस का दावा था, ‘मैं यहूदियों का बादशाह’ हूं।” पीलातुस ने जवाब दिया, “मैंने जो कुछ लिख दिया, वह लिख दिया।” जब सिपाही हुज़ूर को मस्लूब कर चुके, तो उन्होंने हुज़ूर ईसा के कपड़े लिये, और उन के चार हिस्से किये ताके हर एक को, एक-एक हिस्सा मिल जाये, सिर्फ़ उन का कुर्ता, बाक़ी रह गया जो बग़ैर किसी जोड़ के ऊपर से नीचे तक बन हुआ था। उन्होंने आपस में तै किया। “इस को फाड़ने के बजाय, उस पर क़ुरा डाल कर देखें के ये किस के हिस्से में आता है।” ये इसलिये हुआ के किताब-ए-मुक़द्दस का लिख्खा हुआ क़ौल पूरा हो जाये, “उन्होंने मेरे कपड़े आपस में तक़्सीम कर लिये और मेरी पोशाक पर क़ुरा डाला।” चुनांचे सिपाहियों ने यही किया। हुज़ूर ईसा की सलीब के पास उन की मां, मां की बहन, मरियम जो क्लोपास की बीवी थी, और मरियम मगदलीनी खड़ी थीं। जब हुज़ूर ईसा ने अपनी मां को, और अपने एक अज़ीज़ शागिर्द को नज़दीक ही खड़े देखा, तो मां से कहा, “ऐ ख़ातून, अब से आप का बेटा ये है,” और शागिर्द से फ़रमाया, “अब से तुम्हारी मां ये हैं।” वह शागिर्द तब से, उन्हें अपने घर ले गया। जब, हुज़ूर ईसा ने जान लिया के अब सब बातें तमाम हुईं, तो इसलिये के किताब-ए-मुक़द्दस का लिख्खा पूरा हो, आप ने कहा, “मैं प्यासा हूं।” नज़दीक ही एक मर्तबान सिरके से भरा रखा था, उन्होंने इस्फ़ंज को सिरके में डुबो कर ज़ूफ़े की डाली पर रखकर, हुज़ूर ईसा के होंटों से लगाया। हुज़ूर ईसा ने उसे पीते ही, फ़रमाया, “पूरा हुआ” और, सर झुका कर जान दे दी। ये फ़सह की तय्यारी का दिन था, और उगला दिन ख़ुसूसी सबत था। यहूदी रहनुमा नहीं चाहते थे के सबत के दिन लाशें सलीबों पर टंगी रहें, लिहाज़ा उन्होंने पीलातुस के पास जा कर दरख़्वास्त की के मुजरिमों की टांगें तोड़ कर उन की लाशों को नीचे उतार लिया जाये। चुनांचे सिपाही आये और उन्होंने पहले इन दो आदमियों की टांगें तोड़ें जिन्हें हुज़ूर के साथ मस्लूब किया गया था। लेकिन जब हुज़ूर ईसा की बारी आई तो उन्होंने देखा के वह तो पहले ही मर चुके हैं लिहाज़ा उन्होंने आप की टांगें न तोड़ें। मगर, सिपाहियों में से एक ने अपना नेज़ा ले कर हुज़ूर ईसा के पहलू में मारा, और आप की पसली छेद डाली जिस से फ़ौरन ख़ून और पानी बहने लगा। जो शख़्स इस वाक़िया का चश्मदीद गवाह है वह गवाही देता है, और उस की गवाही सच्ची है। वह जानता है के वह सच कह रहा है, ताके तुम भी ईमान लाओ। ये सारी बातें इसलिये हुईं के किताब-ए-मुक़द्दस का लिख्खा क़ौल पूरा हो जाये: “उन की कोई हड्डी न तोड़ी जायेगी,” और, किताब-ए-मुक़द्दस एक और जगह बयान करती है, “वह हुज़ूर ईसा पर जिसे उन्होंने छेद डाला नज़र करेंगे।” इन बातों के बाद, एक शख़्स यूसुफ़ जो अरिमतियाह का बाशिन्दा था, पीलातुस के पास गया और उन से हुज़ूर ईसा की लाश को ले जाने की इजाज़त मांगी। ये शख़्स यहूदी रहनुमाओं के डर की वजह से ख़ुफ़िया तौर पर हुज़ूर का शागिर्द था, वह पीलातुस से मिन्नत कर के, हुज़ूर की लाश को ले गया। निकुदेमुस भी आया, जिस ने कुछ अर्से पहले हुज़ूर ईसा से रात में मुलाक़ात की थी। निकुदेमुस अपने साथ मुर्र और ऊद ऐसी चीज़ों से बना हुआ ख़ुश्बूदार मसाले लाया था जो वज़न में तक़रीबन चौंतीस किलो के बराबर था। उन दोनों ने हुज़ूर ईसा की लाश को ले कर, उन्हें इन ख़ुश्बूदार मसाले, समेत एक सूती चादर में कफ़्नाया, जिस तरह यहूदियों में दफ़न करने का दस्तूर था। जिस मक़ाम पर हुज़ूर ईसा को मस्लूब किया गया था, वहां एक बाग़ था, और उस बाग़ में एक नई क़ब्र थी, जिस में कभी किसी को दफ़नाया नहीं गया था। चूंके ये यहूदियों की तय्यारी का दिन था और क़ब्र नज़दीक थी, उन्होंने हुज़ूर ईसा को वहां रख दिया। हफ़्ते के पहले दिन सुब्ह-सवेरे, जब के अन्धेरा ही था, मरियम मगदलीनी क़ब्र पर आईं। उन्होंने ये देखा के क़ब्र के मुंह से पत्थर हटा हुआ है। वह दौड़ती हुई शमऊन पतरस और उन दूसरे शागिर्द के पास पहुंचीं, जो हुज़ूर ईसा का चहेता था, और कहने लगीं, “वह ख़ुदावन्द को क़ब्र से निकाल कर ले गये हैं, और पता नहीं कहां रख दिया है!” ये सुनते ही पतरस और वह दूसरा शागिर्द क़ब्र की तरफ़ चल दिये। दोनों दौड़े जा रहे थे लेकिन वह दूसरा शागिर्द, पतरस से आगे निकल गया और क़ब्र पर उस से पहले जा पहुंचा। उस ने झुक कर अन्दर झांका और सूती कपड़े पड़े देखे लेकिन अन्दर नहीं गया। इस दौरान शमऊन पतरस भी पीछे-पीछे वहां पहुंच गये और सीधे क़ब्र में दाख़िल हो गये। उन्होंने देखा के वहां सूती कपड़े पड़े हुए हैं, और कफ़न का वह रूमाल भी जो हुज़ूर ईसा के सर पर लपेटा गया था। सूती कपड़ों से अलग एक जगह तह किया हुआ, पड़ा था। तब वह दूसरा शागिर्द भी, जो क़ब्र पर पहले पहुंचा था, अन्दर दाख़िल हुआ। उस ने भी देखकर यक़ीन किया। क्यूंके वह अभी तक किताब-ए-मुक़द्दस की इस बात को समझ न पाये थे जिस के मुताबिक़ हुज़ूर ईसा का मुर्दों में से जी उठना लाज़िमी था। तब ये शागिर्द वापस घर चले गये। लेकिन मरियम क़ब्र के बाहर खड़ी हुई रो रही थीं। रोते-रोते, मरियम ने झुक कर क़ब्र के अन्दर नज़र की तो वहां मरियम को दो फ़रिश्ते दिखाई दिये जो सफ़ैद लिबास में थे, और जहां हुज़ूर ईसा की लाश रख्खी गई थी, वहां एक को सिरहाने और दूसरे को पैंताने बैठे देखा। उन्होंने मरियम से पूछा, “ऐ औरत, तुम क्यूं रो रही हो?” मरियम कहा, “मेरे ख़ुदावन्द को उठाकर ले गये हैं और पता नहीं उन्हें कहां रख दिया है।” ये कहते ही, वह पीछे मुड़ें और वहां हुज़ूर ईसा को खड़ा देखा, लेकिन पहचान न सकीं के वह हुज़ूर ईसा हैं। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “ऐ ख़ातून, तुम क्यूं रो रही हो? तुम किसे ढूंडती है?” मरियम ने समझा शायद वह बाग़बान है, इसलिये कहा, “जनाब, अगर आप ने इन्हें यहां से उठाया है, तो मुझे बतायें के इन्हें कहां रख्खा है, ताके मैं उन्हें ले जाऊं।” हुज़ूर ईसा ने उन से फ़रमाया, “मरियम।” वह उन की तरफ़ मुड़ें और इब्रानी ज़बान में बोलीं, “रब्बूनी!” (जिस का मतलब मेरे “उस्ताद”)। हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “मुझे थामे मत रहो, क्यूंके मैं अभी बाप के पास ऊपर नहीं गया हूं। बल्के जाओ और मेरे भाईयों को ख़बर कर दो, ‘मैं अपने बाप और तुम्हारे बाप, अपने ख़ुदा और तुम्हारे ख़ुदा’ के पास ऊपर जा रहा हूं।” मरियम मगदलीनी ने शागिर्दों के पास आकर उन्हें ख़बर दी: “मैंने ख़ुदावन्द को देखा है!” और उन्होंने मुझ से ये बातें कीं। हफ़्ते के पहले दिन शाम के वक़्त, जब शागिर्द एक जगह जमा थे, और यहूदी रहनुमाओं के ख़ौफ़ से दरवाज़े बन्द किये बैठे थे, हुज़ूर ईसा अचानक उन के दरमियान आ खड़े हुए और फ़रमाया, “तुम पर सलामती हो!” ये कह कर आप ने अपने हाथ और अपनी पसली उन्हें दिखाई। शागिर्द ख़ुदावन्द को देखकर ख़ुशी से भर गये। हुज़ूर ईसा ने फिर से फ़रमाया, “तुम पर सलामती हो! जैसे बाप ने मुझे भेजा है वैसे ही, में तुम्हें भेज रहा हूं।” ये कह कर आप ने उन पर फूंका और फ़रमाया, “पाक रूह पाओ। अगर तुम किसी के गुनाह मुआफ़ करते हो, तो उस के गुनाह मुआफ़ किये जाते हैं; अगर मुआफ़ नहीं करते, तो मुआफ़ नहीं किये जाते।” जब हुज़ूर ईसा अपने शागिर्दों पर ज़ाहिर हुए, तो तोमा (जिसे तवाम भी कहते हैं) और जो इन बारह में से एक था, वहां मौजूद न था। चुनांचे बाक़ी शागिर्दों ने तोमा को बताया, “हम ने ख़ुदावन्द को देखा है!” मगर तोमा ने उन से कहा, “जब तक मैं कीलों के सुराख़ के निशान उन के हाथों में देखकर अपनी उंगली उन में न डाल लूं, और अपने हाथ से उन की पसली न छूलूं, तब तक यक़ीन न करूंगा।” एक हफ़्ता बाद हुज़ूर ईसा के शागिर्द एक बार फिर उसी जगह मौजूद थे, और तोमा भी उन के साथ था। अगरचे दरवाज़े बन्द थे, हुज़ूर ईसा आकर उन के दरमियान आ खड़े हुए, और उन से फ़रमाया, “तुम पर सलामती हो!” फिर आप ने तोमा से फ़रमाया, “अपनी उंगली ला; और मेरे हाथों को देख और अपना हाथ बढ़ा और मेरी पसली को छू, शक मत कर बल्के एतक़ाद रख।” तोमा ने आप से कहा, “ऐ मेरे ख़ुदावन्द और ऐ मेरे ख़ुदा!” हुज़ूर ईसा ने तोमा से फ़रमाया, “तुम मुझे देखकर मुझ पर ईमान लाये, मुबारक वह हैं जिन्होंने मुझे देखा भी नहीं फिर भी ईमान लाये।” हुज़ूर ईसा ने अपने शागिर्दों की मौजूदगी में बहुत से मोजिज़े किये, जो इस किताब में नहीं लिखे गये। लेकिन जो लिखे गये हैं इन से ग़रज़ ये है के तुम ईमान लाओ के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं, यानी ख़ुदा का बेटा हैं, और उन पर ईमान लाकर उन के नाम से ज़िन्दगी पाओ। बाद में हुज़ूर ईसा ने ख़ुद को एक बार फिर अपने शागिर्दों पर, तिबरियास की झील के किनारे। इस तरह ज़ाहिर किया: जब शमऊन पतरस, तोमा (यानी तवाम), नतनएल जो क़ाना-ए-गलील गलील का था, ज़ब्दी के बेटे, और दूसरे दो शागिर्द वहां जमा थे तो शमऊन पतरस उन से कहने लगे, “मैं तो मछली पकड़ने जाता हूं।” उन्होंने कहा, “हम भी आप के साथ चलेंगे।” लिहाज़ा वह निकले और जा कर कश्ती में सवार हो गये, मगर उस रात उन के हाथ कुछ भी न आया। सुब्ह-सवेरे ही, हुज़ूर ईसा किनारे पर आ खड़े हुए, लेकिन शागिर्दों ने उन्हें नहीं पहचाना के वह हुज़ूर ईसा हैं। हुज़ूर ईसा ने उन्हें आवाज़ दे कर कहा, “दोस्तों, क्या कुछ मछलियों हाथ आईं?” उन्होंने जवाब दिया, “नहीं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “जाल को कश्ती की दाईं तरफ़ डालिये तो ज़रूर पकड़ सकोगे।” चुनांचे उन्होंने ऐसा ही किया और मछलियों की कसरत की वजह से जाल इस क़दर भारी हो गया के वह उसे खींच न सके। तब हुज़ूर ईसा के अज़ीज़ शागिर्द ने पतरस से कहा, “ये तो ख़ुदावन्द हैं!” जैसे ही शमऊन पतरस ने ये सुना, “ये तो ख़ुदावन्द हैं,” पतरस ने अपना कुर्ता पहन (जिसे पतरस ने उतार रख्खा था) और पानी में कूद पड़े। दूसरे शागिर्द जो कश्ती में थे, जाल को जो मछलियों से भरा हुआ था खींचते हुए लाये, क्यूंके वह किनारे से, तक़रीबन सौ मीटर से ज़्यादा दूर न थे। जब वह किनारे पर उतरे तो देखा के कोयलों की आग पर मछली रख्खी है, और पास ही रोटी भी है। हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “जो मछलियों तुम ने अभी पकड़ी हैं इन में से कुछ यहां ले आओ।” शमऊन पतरस कश्ती पर चढ़ गये और जाल को किनारे पर खींच लाये जो एक सौ तिरपन, बड़ी-बड़ी मछलियों से भरा हुआ था, फिर भी वह फटा नहीं। हुज़ूर ईसा ने इन से फ़रमाया, “आओ और कुछ खा लो।” शागिर्दों में से किसी को भी जुरअत न हुई के पूछे, “आप कौन हैं?” वह जानते थे के आप ख़ुदावन्द ही हैं। हुज़ूर ईसा ने आकर रोटी ली, और उन्हें दी और मछली भी दी। हुज़ूर ईसा मुर्दों में से ज़िन्दा हो जाने के बाद तीसरी मर्तबा अपने शागिर्दों पर ज़ाहिर हुए। जब वह खाना खा चुके, तो आप ने शमऊन पतरस से फ़रमाया, “यूहन्ना के बेटे शमऊन, क्या तुम मुझ से इन सब से ज़्यादा महब्बत रखते हो?” शमऊन पतरस ने कहा, “हां, ख़ुदावन्द, आप तो जानते ही हैं के मैं आप से महब्बत रखता हूं।” हुज़ूर ईसा ने पतरस से फ़रमाया, “मेरे बर्रों को चरा।” हुज़ूर ईसा ने फिर फ़रमाया, “यूहन्ना के बेटे शमऊन, क्या तुम वाक़ई मुझ से महब्बत रखते हो?” पतरस ने जवाब दिया, “हां, ख़ुदावन्द, आप तो जानते ही हैं के मैं आप से महब्बत रखता हूं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “तो फिर मेरी भेड़ों की गल्लेबानी करो।” हुज़ूर ने तीसरी मर्तबा फिर पूछा, “यूहन्ना के बेटे शमऊन क्या तुम मुझ से महब्बत रखते हो?” पतरस को रंज पहुंचा क्यूंके हुज़ूर ईसा ने पतरस से तीन दफ़ा पूछा था, “क्या तुम मुझ से महब्बत रखते हो?” पतरस ने कहा, “ख़ुदावन्द, आप तो सब कुछ जानते हैं; हुज़ूर आप को ख़ूब मालूम है के मैं हुज़ूर से महब्बत रखता हूं।” हुज़ूर ईसा ने फ़रमाया, “तुम मेरी भेड़ें चराओ। मैं तुम से सच्ची हक़ीक़त बयान करता हूं के जब तुम जवान थे और जहां तुम्हारी मर्ज़ी होती थी, अपनी कमर बांध कर चल दिया करते थे; लेकिन जब तुम बूढ़े हो जाओगे तो अपने हाथ बढ़ाओगे, और कोई दूसरा तुम्हारी कमर बांध कर जहां तुम जाना भी न चाहोगे, तुम्हें वहां उठा ले जायेंगे।” हुज़ूर ईसा ने ये बात कह कर इशारा कर दिया के पतरस किस क़िस्म की मौत मर के ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर करेंगे। तब हुज़ूर ईसा ने पतरस से फ़रमाया, “मेरे पीछे हो ले!” पतरस ने मुड़ कर देखा के हुज़ूर ईसा का अज़ीज़ शागिर्द उन के पीछे-पीछे चला आ रहा है। (यही वह शागिर्द था जिस ने शाम के खाने के वक़्त हुज़ूर ईसा की तरफ़ झुक कर पूछा था, “ऐ ख़ुदावन्द, वह कौन है जो आप को पकड़वायेगा?”) पतरस ने उसे देखकर, हुज़ूर ईसा से पूछा, “ऐ ख़ुदावन्द, इस शागिर्द का क्या होगा?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “अगर मैं चाहूं के ये मेरी वापसी तक ज़िन्दा रहे, तो इस से तुम्हें क्या? तुम मेरे पीछे-पीछे चले आओ।” यूं, भाईयों में ये बात फैल गई के ये शागिर्द नहीं मरेगा। लेकिन हुज़ूर ईसा ने ये नहीं फ़रमाया था के वह न मरेगा; बल्के ये फ़रमाया था, “अगर मैं चाहूं के वह मेरे वापस आने तक ज़िन्दा रहे, तो इस से तुम्हें क्या?” यही वह शागिर्द है जो इन बातों की गवाही देता है और जिस ने उन्हें तहरीर किया है। हम जानते हैं के उस की गवाही सच्ची है। हुज़ूर ईसा ने और भी बहुत से काम किये। अगर हर एक के बारे में तहरीर किया जाता तो मैं समझता हूं के जो किताबें वुजूद में आतीं उन के लिये दुनिया में गुन्जाइश न होती। मैंने अपनी पहली किताब में, मुहतरम थियुफ़िलुस, उन तमाम तालीमी बातों को तहरीर कर दिया है जो हुज़ूर ईसा के ज़रीये अमल में आईं उस दिन तक जिस में हुज़ूर ईसा ने अपने मुन्तख़ब रसूलों को पाक रूह के वसीले से कुछ हिदायात भी अता करने के बाद ऊपर आसमान पर उठाये गये। दुख सहने के बाद, हुज़ूर ईसा ने अपने ज़िन्दा हो जाने के कई क़वी सबूतों से अपने आप को उन पर ज़ाहिर भी किया और आप चालीस दिन तक उन्हें नज़र आते रहे और ख़ुदा की बादशाही की बातें सुनाते रहे। एक मर्तबा, जब आप उन के साथ खाना खा रहे थे, तो हुज़ूर ईसा ने उन्हें ये हुक्म दिया: “यरूशलेम से बाहर न जाना, और मेरे बाप के इस वादे के पूरा होने का इन्तिज़ार करना, जिस का ज़िक्र तुम मुझ से सुन चुके हो। क्यूंके हज़रत यहया तो पानी से पाक-ग़ुस्ल देते थे, लेकिन तुम थोड़े दिनों के बाद पाक रूह से पाक-ग़ुस्ल पाओगे।” पस जब वह सब एक जगह जमा थे तो उन्होंने हुज़ूर ईसा अलमसीह से पूछा, “ख़ुदावन्द! क्या आप इसी वक़्त इस्राईल को फिर से इस की बादशाही अता करने वाले हैं?” हुज़ूर ईसा अलमसीह ने उन से फ़रमाया, “जिन वक़्तों या मीआदों को मुक़र्रर करने का इख़्तियार सिर्फ़ आसमानी बाप को है उन्हें जानना तुम्हारा काम नहीं। लेकिन जब पाक रूह तुम पर नाज़िल होगा तो तुम क़ुव्वत पाओगे; और तुम यरूशलेम, और तमाम यहूदिया और सामरिया में बल्के ज़मीन की इन्तिहा तक मेरे गवाह होगे।” इन बातों के बाद वह उन के देखते-देखते आसमान में ऊपर उठा लिये गये। और बदली ने हुज़ूर ईसा अलमसीह को उन की नज़रों से छुपा लिया। जब वह टिकटिकी बांधे हुज़ूर ईसा अलमसीह को आसमान की तरफ़ जाते हुए देख रहे थे, तो देखो दो मर्द सफ़ैद लिबास में उन के पास आ खड़े हुए। और कहने लगे, “ऐ गलीली मर्दो, तुम खड़े-खड़े आसमान की तरफ़ क्यूं देख रहे हो? यही ईसा जो तुम्हारे पास से आसमान पर उठाये गये हैं, इसी तरह फिर आयेंगे जिस तरह तुम लोगों ने हुज़ूर ईसा को आसमान पर जाते देखा है।” तब रसूल कोहे-ज़ैतून, से जो यरूशलेम के नज़दीक सबत के दिन की मंज़िल पर है वापस यरूशलेम शहर लौटे। ये पहाड़ यरूशलेम से तक़रीबन एक किलोमीटर के फ़ासले पर है। जब वह शहर में दाख़िल होकर, उस बालाख़ाने में तशरीफ़ ले गये जहां वह ठहरे हुए थे। जिस में: पतरस, यूहन्ना, याक़ूब, और अन्द्रियास; फ़िलिप्पुस और तोमा; बरतुल्माई और मत्ती; हलफ़ई का बेटा याक़ूब, शमऊन जो ज़ेलोतेस भी हैं और याक़ूब का बेटा यहूदाह रहते थे। ये सब चंद ख़्वातीन और ख़ुदावन्द ईसा की मां, मरियम और उन के भाईयों के साथ एक दिल होकर दुआ में मश्ग़ूल रहते थे। उन ही दिनों में पतरस उन भाईयों और बहनों की जमाअत में जिन की तादाद (एक सौ बीस के क़रीब थी) पतरस खड़े होकर फ़रमाया, “ऐ भाईयो और बहनों, किताब-ए-मुक़द्दस की उस बात का जो पाक रूह ने दाऊद की ज़बान से पहले ही कहलवा दी थी पूरा होना ज़रूरी था। वह बात यहूदाह के बारे में थी, जिस ने ख़ुदावन्द ईसा के पकड़वाने वालों की रहनुमाई की थी। ख़ुदावन्द ईसा हमारे हम ख़िदमत थे और हम लोगों में गिन जाता था।” उस ने (अपनी बदकारी से कमाई, हुई रक़म से एक खेत ख़रीदा; जहां वह सर के बल गिरा और इस का पेट फट गया और सारी अन्तड़ियां बाहर निकल पड़ीं। यरूशलेम के तमाम बाशिन्दों को ये बात मालूम हो गई, यहां तक के उन्होंने अपनी ज़बान में इस खेत का नाम ही हक़्क़लदमा, रख दिया जिस का मतलब है, ख़ून का खेत।) “क्यूंके,” पतरस ने फ़रमाया, “ज़बूर शरीफ़ में ये लिखा है: “ ‘उन का मक़ाम वीरान हो जाये; और उन के ख़ेमों में बसने वाला कोई न हो, ’ और, “ ‘उस का ओहदा कोई और सम्भाल ले।’ लिहाज़ा ये ज़रूरी है के ख़ुदावन्द ईसा के हमारे साथ आने जाने के वक़्त तक, यानी हज़रत यहया के पाक-ग़ुस्ल से ले कर हुज़ूर ईसा के हमारे पास से ऊपर उठाये जाने तक जो लोग बराबर हमारे साथ रहे, उन में से एक शख़्स चुन लिया जाये जो हमारे साथ ख़ुदावन्द ईसा के जी उठने का गवाह बने।” लिहाज़ा उन्होंने दो को नामज़द किया: एक हज़रत यूसुफ़ को जो बरसब्बा कहलाते हैं और (जिन का लक़ब यूसतुस भी है) और दूसरा मत्तियाह को। उन्होंने ये कह कर दुआ की, “ऐ ख़ुदावन्द, आप सब के दिलों को जानते हैं। हम पर ज़ाहिर कर के इन दोनों में से आप ने किस को चुन है के वह इस ख़िदमत और रिसालत पर मामूर हो, जिसे यहूदाह छोड़कर इस अन्जाम तक पहुंचा जिस का वह मुस्तहिक़ था।” और उन्होंने उन के बारे में क़ुरा डाला, और जो मत्तियाह के नाम का निकला; लिहाज़ा वह ग्यारह रसूलों के साथ शुमार किये गये। जब ईद-ए-पन्तिकुस्त का दिन आया, तो वह सब एक जगह जमा थे। अचानक आसमान से आवाज़ आई जैसे बड़ी तेज़ आंधी चलने लगी हो और इस से वह सारा घर गूंजने लगा जहां वह बैठे हुए थे और उन्हें आग के शोलों की सी ज़बानें दिखाई दें जो जुदा-जुदा होकर उन में से हर एक पर आ ठहरें। और वह सब पाक रूह से भर हो गये और ग़ैरज़बानें बोलने लगे जिस तरह पाक रूह ने उन्हें क़ुव्वत बख़्शी। इस वक़्त बहुत से ख़ुदा तरस यहूदी जो आसमान के नीचे दुनिया के हर मुल्क से, यरूशलेम में मौजूद थे। जब उन्होंने ये आवाज़ सुनी तो भेड़ लग गई और सब के सब दंग रह गये, क्यूंके हर एक ने उन्हें अपनी ही बोली बोलते सुना। और सब इन्तिहाई हैरत-ज़दा होकर पूछने लगे: “ये बोलने वाले क्या सब के सब गलीली नहीं? फिर ये कैसे मुम्किन है के हम में से हर एक उन के मुंह से अपने-अपने वतन की बोली सुन रहा है। हम तो पार्थिया, मादिया, ऐलामी; और मसोपोतामिया के रिहाइशी इलाक़े यहूदिया, कप्पदुकिया, पुन्तुस आसिया, फ़रूगिया और पम्फ़ीलिया के रहने वाले हैं। और हम मिस्र और लिबिया के इस इलाक़े से हैं जो कुरेने के नज़दीक है; हम में से बाज़ सिर्फ़ रोमी मुसाफ़िर हैं ख़्वाह यहूदी ख़्वाह उन के मुरीद क्रेती और अरबी भी हैं इस के बावुजूद हम अपनी-अपनी मादरी ज़बान में इन से ख़ुदा के अजीब कामों का बयान सुन रहे हैं!” वह सब बड़े हैरान हुए और घबरा कर एक दूसरे से पूछने लगे, “ये जो बोल रहे हैं इस का क्या मतलब है?” लेकिन, बाज़ ने, उन की हंसी उड़ा कर कहा, “उन्होंने अंगूर का शीरा कुछ ज़्यादा पी लिया है।” इस पर पतरस बाक़ी ग्यारह रसूलों के साथ, खड़े हो गये और ऊंची आवाज़ में लोगों से यूं ख़िताब किया: “ऐ यहूदियों और यरूशलेम के तमाम बाशिन्दो, मेरी बात तवज्जोह से सुनो; मैं बताता हूं के यहां क्या हो रहा है। जैसा तुम समझ रहे हो, ये आदमी नशा में नहीं हैं क्यूंके अभी तो सुबह के नौ ही बजे हैं। बल्के, ये वह बात है जो योएल नबी की मारिफ़त कही गई थी: “ ‘आख़िरी दिनों में, ख़ुदा फ़रमाता है, मैं तमाम लोगों पर अपना रूह नाज़िल करूंगा। और तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियां नुबुव्वत करेंगी तुम्हारे नौजवान रोया, और तुम्हारे बुज़ुर्ग ख़्वाब देखेंगे। बल्के मैं उन दिनों में अपने बन्दों और बन्दियों पर भी, अपना रूह नाज़िल करूंगा और वह नुबुव्वत करेंगे। मैं ऊपर आसमान पर मोजिज़े और नीचे ज़मीन पर करिश्मे दिखाऊंगा, यानी ख़ून और आग और गाढ़ा धुआं। सूरज तारीक हो जायेगा और चांद ख़ून की तरह सुर्ख़ इस से क़ब्ल के ख़ुदावन्द का अज़ीम-ओ-जलील दिन आ पहुंचे। और जो कोई ख़ुदावन्द का नाम लेगा नजात पायेगा।’ “ऐ इस्राईलियो, ये बातें सुनो: हुज़ूर ईसा नासरी एक शख़्स थे जिन्हें ख़ुदा ने तुम्हारे लिये भेजा था और इस बात की तस्दीक़ उन अज़ीम मोजिज़ों, कारनामों और निशानों से होती है, जिसे ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा की मारिफ़त तुम्हारे दरमियान दिखाये, जैसा के तुम ख़ुद भी जानते हो। ये शख़्स हुज़ूर ईसा ख़ुदा के मुक़र्ररः इन्तिज़ाम और इल्म साबिक़ के मुताबिक़ पकड़वाये गये; तो तुम ने, हुज़ूर ईसा को बेशरअ के हाथों, सलीब पर टंगवा कर मार डाला। लेकिन ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा को मौत के, शिकंजे से छुड़ा कर ज़िन्दा कर दिया, क्यूंके ये नामुम्किन था के वह मौत के क़ब्ज़ा में रहते।” क्यूंके दाऊद हुज़ूर ईसा के बारे में फ़रमाते हैं: “ ‘मैं ख़ुदावन्द को हमेशा अपने सामने देखता रहा। क्यूंके वह मेरी दाईं तरफ़ है, इसलिये मुझे जुम्बिश न होगी। चुनांचे मेरा दिल ख़ुश है और मेरी ज़बान शादमान; बल्के मेरा जिस्म भी उम्मीद में क़ाइम रहेगा, क्यूंके तू मुझे क़ब्र में छोड़ नहीं देगा, और न ही अपने मुक़द्दस फ़र्ज़न्द के जिस्म के सड़ने की नौबत ही न आने देगा। तूने मुझे ज़िन्दगी की राहें दिखाईं; तू अपने दीदार की ख़ुशी से मुझे भर देगा।’ “ऐ बनी इस्राईल, मैं क़ौम के बुज़ुर्ग दाऊद के बारे में तुम से दिलेरी के साथ कह सकता हूं के वह फ़ौत हुए दफ़न भी हुए, और उन की क़ब्र आज भी हमारे दरमियान मौजूद है। लेकिन वह नबी थे और, जानते थे के ख़ुदा ने उन से क़सम खाकर वादा किया है के उन की नस्ल में से एक शख़्स उन के तख़्त पर बैठेगा। आप ने बतौर पेशीनगोई, हुज़ूर अलमसीह के मुर्दों में से जी उठने का ज़िक्र किया, न तो वह अपने फ़र्ज़न्द को क़ब्र में छोड़ेगा और न ही उन के जिस्म के सड़ने की नौबत ही न आने देगा। हुज़ूर ईसा को ख़ुदा ने ज़िन्दा क्या इस के हम सब गवाह हैं। हुज़ूर ईसा ख़ुदा के दाहिनी तरफ़ सरबुलन्द हुए, और बाप से पाक रूह हासिल किया जिस का वादा किया गया था। ये उसी रूह का नुज़ूल है जिसे तुम देखते और सुनते हो। क्यूंके दाऊद तो आसमान पर नहीं चढ़े फिर भी वह ख़ुद फ़रमाते हैं, “ ‘ख़ुदा तआला ने मेरे ख़ुदावन्द से फ़रमाया: “मेरी दाहिनी तरफ़ बैठ जब तक के मैं तेरे दुश्मनों को तुम्हारे पांव के नीचे न कर दूं।” ’ “इसलिये इस्राईल का सारा घराना यक़ीन जान ले के ख़ुदा ने इसी हुज़ूर ईसा को जिसे तुम ने सलीब पर मस्लूब किया, ख़ुदावन्द भी ठहराया और अलमसीह भी।” ये बातें सुन कर उन के दिलों पर चोट लगी, तब उन्होंने पतरस और दूसरे रसूलों से कहा, “ऐ भाईयो, हम क्या करें?” पतरस ने उन से जवाब दिया, “तौबा करो और तुम में से हर एक, अपने गुनाहों की मुआफ़ी के लिये हुज़ूर ईसा अलमसीह के नाम पर पाक-ग़ुस्ल लो। तो तुम पाक रूह इन्आम में पाओगे। इसलिये के ये वादा तुम से और तुम्हारी औलाद से है और उन सब से भी है जो उस से दूर हैं जिन्हें ख़ुदावन्द हमारा ख़ुदा अपने पास बुलाएगा।” पतरस ने और बहुत सी बातों से ख़बरदार किया और उन्हें नसीहत फ़रमाई, “अपने आप को इस गुमराह क़ौम से बचाये रखो।” जिन्होंने पतरस का पैग़ाम क़बूल किया उन्हें पाक-ग़ुस्ल दिया गया, और इस दिन तक़रीबन तीन हज़ार आदमियों के क़रीब उन में शामिल हो गये। उन्होंने ख़ुद को रसूलों से, तालीम पाने रिफ़ाक़त रखने, रोटी तोड़ने और दुआ करने के लिये वक़्फ़ कर दिया। रसूलों के ज़रीये बहुत से मोजिज़े और निशान दिखाये गये और हर शख़्स पर ख़ौफ़ तारी हो गया। हुज़ूर अलमसीह पर ईमान लाने वाले तमाम अफ़राद इकट्-ठे रहते थे और तमाम चीज़ों में एक दूसरे को शरीक समझते थे। वह अपनी जायदाद और माल-ओ-अस्बाब बेच-बेच कर हर एक को उस की ज़रूरत के मुताबिक़ रक़म तक़्सीम कर दिया करते थे। वह हर रोज़ एक दिल होकर बैतुलमुक़द्दस के सहन में जमा होते थे। अपने घरों में रोटी तोड़ते थे और इकट्-ठे होकर ख़ुशी और साफ़ दिली से खाना खाते थे। वह ख़ुदा की तम्जीद करते थे और सब लोगों की नज़र में मक़्बूल थे। और ख़ुदावन्द नजात पाने वालों की तादाद में रोज़-ब-रोज़ इज़ाफ़ा करते रहते थे। एक दिन पतरस और यूहन्ना दुआ के वक़्त जब के तीन बज चुके थे, बैतुलमुक़द्दस को जा रहे थे। और लोग एक आदमी को जो पैदाइशी लंगड़ा था बैतुलमुक़द्दस के ख़ूबसूरत नामी एक दरवाज़े पर छोड़ जाते थे, जहां वह बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में हर रोज़ अन्दर जाने वालों से भीक मांगा करता था। जब इस ने पतरस और यूहन्ना को बैतुलमुक़द्दस में दाख़िल होते देखा, तो उन बड़ी हसरत से भीक मांगने लगा। पतरस और यूहन्ना ने इस की तरफ़ मुतवज्जेह होकर इस से फ़रमाया, “हमारी तरफ़ देख!” वह इस उम्मीद पर के उसे उन से कुछ मिलेगा, उन की तरफ़ मुतवज्जेह हुआ। तब पतरस ने फ़रमाया, “चांदी सोना तो मेरे पास है नहीं, लेकिन जो मेरे पास है मैं तुझे दिये देता हूं। तो हुज़ूर ईसा अलमसीह नासरी के नाम से उठ और चल फिर।” पतरस ने जैसे ही इस का दायां हाथ पकड़ कर, उसे उठाया, उस के पांव और टख़नों में क़ुव्वत आ गई वह उछल कर खड़ा हो गया और चलने फिरने लगा। फिर वह कूदता फांदता, और ख़ुदा की तारीफ़ करता हुआ, उन के साथ बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में दाख़िल हो गया। और सब लोगों ने जो वहां मौजूद थे उसे चलते फिरते और ख़ुदा की हम्द करते देखकर, उन्होंने उसे पहचान लिया के ये तो वोही है जो बैतुलमुक़द्दस के ख़ूबसूरत नामी दरवाज़े पर बैठा भीक मांगा करता था, वह इस वाक़िया को जो उस के साथ पेश आया था देखकर बड़ी ही हैरत में पड़ गये। अभी वह आदमी पतरस और यूहन्ना को पकड़े खड़ा था, तो सब लोग जो वहां खड़े थे निहायत ही हैरान होकर उन के पास सुलैमानी बरामदे में दौड़े चले आये। पतरस ने ये देखा तो वह लोगों से यूं मुख़ातिब हुए: “ऐ इस्राईलियो, तुम इस बात पर हैरान क्यूं हो? और हमें ऐसे क्यूं देख रहे हो गोया हम ने अपनी क़ुदरत और पारसाई से इस लंगड़े को चलने फिरने के क़ाबिल बना दिया है? मैं तेरे आबा-ओ-अज्दाद का यानी हज़रत इब्राहीम, इज़हाक़ और याक़ूब का, ख़ुदा हूं यानी हमारे आबा-ओ-अज्दाद के, ख़ुदा ने अपने ख़ादिम हुज़ूर ईसा को जलाल बख़्शा। लेकिन तुम ने उन्हें पकड़वा दिया और पीलातुस की हुज़ूरी में मरदूद ठहराया, हालांके पीलातुस उन्हें छोड़ देने का इरादा कर चुका था। तुम ने हुज़ूर ईसा क़ुददूस और रास्तबाज़ को रद्द कर के पीलातुस से दरख़्वास्त की के वह एक क़ातिल को तुम्हारी ख़ातिर रिहा कर दे। तुम ने तो ज़िन्दगी के देने वाले को क़त्ल कर डाला, लेकिन हम गवाह हैं के ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा कर दिया। हुज़ूर ईसा के नाम की क़ुदरत ने, इस शख़्स को मज़बूत किया। जिसे तुम देखते और जानते हो, हुज़ूर ईसा के नाम ने उस ईमान के वसीले इस को कामिल शिफ़ा बख़्शी, जिसे तुम सब देखते हो। “अब, ऐ भाईयो, मैं जानता हूं के तुम ने ये काम नादानी की वजह से किया था, जैसा तुम्हारे रहनुमाओं ने भी। मगर ख़ुदा ने उन सारी बातों को जो इस ने अपने नबियों की ज़बानी, कही थीं के ख़ुदा का अलमसीह दुख उठायेगा को पूरा कर दिखाया। पस तौबा करो, और ख़ुदा की तरफ़ रुजू करो, ताके वह तुम्हारे गुनाहों को मिटा दे, और ख़ुदा की जानिब से तुम्हारे लिये रूहानी ताज़गी के दिन आयें। और वह ख़ुदावन्द अलमसीह यानी ईसा को जिसे ख़ुदावन्द ने मुक़र्रर किया है, तुम्हारे लिये भेजे, लेकिन जब तक वह सारी चीज़ें जिन का ज़िक्र ख़ुदा ने क़दीम ज़मानों में अपने पाक नबियों की ज़बानी किया है, बहाल न कर दी जायें, हुज़ूर ईसा का आसमान पर रहना लाज़िम है। हज़रत मूसा ने भी इसी सिलसिले में फ़रमाया, ‘ख़ुदावन्द तुम्हारा ख़ुदा तुम्हारे अपने भाईयों में से तुम्हारे लिये मेरी मानिन्द एक नबी पैदा करेगा; और तुम उस की हर बात पर कान लगाना। जो कोई उस की बात न सुनेगा वह ख़ुदा के लोगों में से निकाल कर हलाक दिया जायेगा।’ “बल्के, हज़रत समुएल से ले कर, पिछले तमाम नबियों ने, इन बातों के बारे में ख़बर दी है। तुम नबियों की औलाद हो और जो अह्द ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद से बांधा था इस में तुम सब शरीक हो। ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से फ़रमाया, ‘मैं तेरी औलाद के ज़रीये ज़मीन के तमाम ग़ैरयहूदियों को बरकत दूंगा।’ ख़ुदा ने अपने ख़ादिम को, चुन कर पहले तुम्हारे पास भेजा ताके तुम्हें ये बरकत हासिल हो के तुम में से हर एक अपनी बदकारियों से बाज़ आये।” अभी पतरस और यूहन्ना लोगों से कलाम ही कर रहे थे के कुछ काहिन बैतुलमुक़द्दस के रहनुमा और बाज़ सदूक़ी वहां पहुंचे। वह सख़्त रंजीदा थे क्यूंके रसूल लोगों को ये तालीम देते थे, जिस तरह हुज़ूर ईसा मुर्दों में से ज़िन्दा हो गये हैं इसी तरह सब लोग मौत के बाद ज़िन्दा हो जायेंगे। उन्होंने पतरस और यूहन्ना को गिरिफ़्तार कर लिया और, चूंके शाम का वक़्त था, उन्हें अगले दिन तक के लिये क़ैदख़ाने में डाल दिया। फिर भी कई लोग उन का पैग़ाम सुन कर ईमान लाये; और उन की तादाद बढ़ते-बढ़ते पांच हज़ार के क़रीब जा पहुंची। अगले दिन यहूदियों के रहनुमा, बुज़ुर्ग और शरीअत के आलिम यरूशलेम में जमा हुए। आला काहिन हन्‍ना वहां मौजूद था, और काइफ़ा, यूहन्ना, इस्कन्दर और आला काहिन के ख़ानदान के दूसरे लोग भी मौजूद थे। उन्होंने पतरस और यूहन्ना को अपने सामने बुलवाया और उन से पूछा: “तुम ने किस क़ुदरत या किस के नाम से ये काम किया है?” तब पतरस, पाक रूह से मामूर होकर उन से यूं गोया हुए: “क़ौम के रहनुमा और बुज़ुर्गो! अगर आज हम से इस एहसान की बाबत बाज़पुर्स की जाती है जो एक नातुवां पर हुआ जो हम ने एक मफ़्लूज के लिये किया और उसे शिफ़ा दी, फिर अब ये, तुम्हें और सारी इस्राईली क़ौम को मालूम हो: ये शख़्स उन हुज़ूर ईसा अलमसीह नासरी, जिसे तुम ने मस्लूब किया, लेकिन जिसे ख़ुदा ने उसे मुर्दों में से ज़िन्दा कर दिया, के नाम की क़ुदरत से शिफ़ायाब होकर तुम्हारे सामने मौजूद है। हुज़ूर ईसा ही “ ‘वोही पत्थर हैं जिसे तुम मेमारों ने रद्द कर दिया, लेकिन वोही कोने के सिरे का पत्थर हो गये।’ नजात किसी और के वसीले से नहीं है, क्यूंके आसमान के नीचे लोगों को कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है जिस के वसीले से हम नजात पा सकें।” जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना की दिलेरी देखी और उन्हें मालूम हुआ के वह अनपढ़, मामूली आदमी हैं, तो बहुत हैरान हुए और तब उन्होंने जान लिया के ये आदमी हुज़ूर ईसा के साथ रह चुके हैं। लेकिन वह उन के ख़िलाफ़ कुछ न कह सके इसलिये के जिस शख़्स ने शिफ़ा पाई थी वह उन के साथ खड़ा हुआ था। चुनांचे उन्होंने पतरस और यूहन्ना को मज्लिस आम्मा से बाहर जाने को कहा और आपस में मशवरा कर के कहने लगे, “हम इन आदमियों के साथ क्या करें? यरूशलेम के सब लोग जानते हैं के उन्होंने एक बड़ा मोजिज़ा कर दिखाया है, और जिस का हम भी इन्कार नहीं कर सकते। लेकिन हम नहीं चाहते के ये बात लोगों में ज़्यादा मशहूर हो, बेहतर यही है के हम उन्हें तम्बीह कर दें के वह आइन्दा हुज़ूर ईसा का नाम ले कर किसी से बात न करें।” लिहाज़ा उन्होंने उन्हें अन्दर बुलाकर हुक्म दिया के हुज़ूर ईसा का नाम ले कर हरगिज़ बात न करें और न तालीम दें। लेकिन पतरस और यूहन्ना ने उन्हें जवाब दिया, “क्या ख़ुदा की नज़र में ये भला है: हम तुम्हारी बात मानें, न के ख़ुदा की? तुम ख़ुद ही फ़ैसला करो! हमारे लिये मुम्किन नहीं के हम ने जो कुछ देखा और सुना है इस का बयान न करें।” तब उन्होंने उन को डरा धमका कर छोड़ दिया। दरअस्ल वह फ़ैसला न कर सके के उन्हें सज़ा दें तो कैसे दें, क्यूंके तमाम लोग इस माजरे के सबब से ख़ुदा की तम्जीद कर रहे थे। और जो आदमी मोजिज़ाना तौर पर शिफ़ायाब हुआ था, चालीस बरस से ऊपर का था। अपनी रिहाई के बाद, पतरस और यूहन्ना अपने लोगों के पास चले गये और जो कुछ अहम-काहिनों और बुज़ुर्गों ने उन से कहा था, उन का बयान किया। जब उन्होंने ये बातें सुनीं, तो बुलन्द आवाज़ से ख़ुदा से दुआ करने लगे। उन्होंने फ़रमाया, “ऐ क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदावन्द,” तूने आसमानों और ज़मीन और समुन्दर को और जो कुछ उन में मौजूद हर चीज़ को पैदा किया है। तूने पाक रूह के वसीले से अपने ख़ादिम, और हमारे बाप दाऊद की ज़बानी फ़रमाया: “ ‘क़ौमें तैश में क्यूं हैं और उम्मतों ने फ़ुज़ूल मन्सूबे बांधे? ज़मीन के बादशाह उठ खड़े हुए और हुक्मरां इकट्-ठा हो गये ख़ुदावन्द के ख़िलाफ़ और उस के मम्सूह की मुख़ालफ़त की।’ ये हक़ीक़त है के हेरोदेस और पुन्तियुस पीलातुस ने इस शहर में ग़ैरयहूदी और इस्राईली लोग ये सब मिल कर तेरे मुक़द्दस ख़ादिम हुज़ूर ईसा के ख़िलाफ़ हो गये जिसे तूने अलमसीह मुक़र्रर किया। वह इसलिये जमा हुए के जो कुछ तो अपनी क़ुदरत और इरादे के मुताबिक़ पहले ही से ठहरा चुका था उसे अमल में लायेंगे। अब, ऐ ख़ुदावन्द, उन की धमकीयों को देख और अपने बन्दों को तौफ़ीक़ बख़्श के वह तेरा कलाम बड़ी दिलेरी के साथ लोगों को सुनायें। ख़ुदा अपना हाथ बढ़ा और अपने मुक़द्दस ख़ादिम हुज़ूर ईसा के नाम से शिफ़ा बख़्श, मोजिज़े दिखा और हैरत-अंगेज़ काम ज़ाहिर कर।” जब वह दुआ कर चुके तो वह जगह जहां वह जमा थे लरज़ उठी और वह सब पाक रूह से मामूर हो गये और ख़ुदा का कलाम दिलेरी से सुनाने लगे। मोमिनीन की जमाअत एक दिल और एक जान थी। कोई भी ऐसा न था जो अपने माल को सिर्फ़ अपना समझता हो बल्के दूसरों को भी सारी चीज़ों में शरीक समझता था। और रसूल बड़ी क़ुदरत के साथ ख़ुदावन्द ईसा के मुर्दों में से जी उठने की गवाही देते थे। और उन सब पर ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल था उन में कोई भी मोहताज न था। वक़्तन-फ़-वक़्तन जो लोग ज़मीन या मकान के मालिक थे वह उन्हें बेच-बेच कर, उन की क़ीमत लाते थे। और उसे रसूलों के क़दमों में रख देते थे, और वह हर एक को उस की ज़रूरत के मुताबिक़ बांट दी जाती थी। यूसुफ़, एक लावी जो साइप्रस का बाशिन्दा था, इस को रसूलों ने बरनबास का नाम दिया (जिस का मतलब है “नसीहत का बेटा”), इस ने अपना खेत बेचा और क़ीमत लाकर रसूलों के क़दमों में रख दी। हननयाह नामी एक आदमी और इस की बीवी सफ़ीरा ने अपनी जायदाद का कुछ हिस्सा फ़रोख़त किया। उस ने क़ीमत में से कुछ अपने पास रख लिया, जिस का उस की बीवी को इल्म था और बाक़ी के हिस्सा की रक़म लाकर रसूलों के क़दमों में रख दी। तब पतरस ने इस से कहा, “ऐ हननयाह, शैतान ने तेरे दिल में ये बात कैसे डाल दी के तो पाक रूह से झूट बोले और ज़मीन की क़ीमत में से कुछ रख ले? क्या फ़रोख़त किये जाने से क़ब्ल ज़मीन तेरी न थी? लेकिन बिक जाने के बाद तेरे इख़्तियार में न रही? तुझे दिल में ऐसा सोचने पर किस ने मजबूर कर दिया? तूने इन्सान से नहीं बल्के ख़ुदा से झूट बोला है।” हननयाह ये बातें सुनते ही, गिर पड़ा और इस का दम निकल गया। और जिन लोगों ने ये सुना उन पर बड़ा ख़ौफ़ तारी हो गया। तब कुछ जवान मर्द आये और उन्होंने इस की लाश को कफ़न में लपेटा और बाहर ले जा कर उस को दफ़न कर दिया। तक़रीबन तीन घंटे बाद उस की बीवी वहां आई। वह इस माजरे से बेख़बर थी। पतरस ने उस से पूछा, “मुझे बता, क्या ज़मीन की इतनी ही क़ीमत मिली थी?” उस ने कहा, “हां, कुल क़ीमत इतनी ही थी।” पतरस ने उस से फ़रमाया, “ख़ुदावन्द की पाक रूह को आज़माने के लिये तुम किस तरह राज़ी हो गये? सुनो! जिन लोगों ने तेरे ख़ून को दफ़न क्या उन के क़दम दरवाज़े तक पहुंच चुके हैं, और वह तुझे भी बाहर ले जायेंगे।” वह उसी वक़्त पतरस के क़दमों में गिर पड़ी और इस का दम निकल गया। जब जवान मर्द अन्दर आये तो उसे मुर्दा पा कर बाहर उठा ले गये और उसे उस के शौहर के पहलू में दफ़न कर दिया। सारी जमाअत, बल्के इस हादिसा के तमाम सुनने वालों पर बड़ा ख़ौफ़ तारी हो गया। रसूलों ने लोगों में कई निशानात और हैरत-अंगेज़ काम किये और तमाम मोमिनीन एक दिल होकर सुलैमानी बरामदे में जमा हुआ करते थे। हालांके लोग उन की बहुत ज़्यादा इज़्ज़त करते थे, लेकिन किसी को ये जुरअत न होती थी के उन में शामिल हो जाये। इस के बावुजूद, कई मर्द और कई औरतें ख़ुदावन्द पर ईमान लायेंगे और मोमिनीन की तादाद में इज़ाफ़ा होता चला गया। यहां तक के लोग बीमारों को चारपाईयों और चटाईयों पर रखकर गलीयों में ले आते थे ताके जब पतरस वहां से गुज़रें तो कम अज़ कम इतना तो हो के उन का साया ही उन में से किसी पर पड़ जाये। यरूशलेम के चारों तरफ़ के क़स्बों से बेशुमार लोग बीमारों और बदरूहों की तकलीफ़ में मुब्तिला लोगों को लाते थे, और वह सब के सब शिफ़ा पाते थे। इस पर आला काहिन और इस के सारे साथी जो सदूक़ियों के फ़िर्क़ा के थे हसद से भर गये और रसूलों की मुख़ालफ़त करने पर उतर आये और उन्होंने रसूलों को गिरिफ़्तार करवा कर क़ैदख़ाने में डाल दिया। लेकिन रात को ख़ुदावन्द का फ़रिश्ता क़ैदख़ाने के दरवाज़े खोल कर रसूलों को बाहर निकाल लाया। फ़रिश्ते ने उन से कहा, “जाओ, बैतुलमुक़द्दस के सहन में खड़े हो जाओ, और इस नई ज़िन्दगी की सारी बातें लोगों को सुनाओ।” चुनांचे सुबह होते ही वह बैतुलमुक़द्दस के सहन में जा पहुंचे, जैसा हुक्म मिला था, लोगों को तालीम देने लगे। जब आला काहिन और इस के साथी वहां आये तो उन्होंने मज्लिस आम्मा का इजलास तलब किया जिस में इस्राईल के सारे बुज़ुर्ग जमा थे और उन्होंने क़ैदख़ाने से रसूलों को बुला भेजा के उन्हें लायें। जब सिपाही क़ैदख़ाने में पहुंचे, तो उन्होंने रसूलों को वहां न पाया। फिर उन्होंने वापस आकर ख़बर दी, “हम ने तो क़ैदख़ाने को बड़ी हिफ़ाज़त से बन्द किया था, पहरेदारों को दरवाज़ों पर खड़े पाया; लेकिन जब हम ने दरवाज़ा खोला, तो हमें अन्दर कोई नहीं मिला।” इस ख़बर को सुन कर, बैतुलमुक़द्दस के रहनुमा और अहम-काहिन सब के सब हैरान रह गये, के अब उन का क्या अन्जाम होगा। उसी वक़्त किसी ने आकर ख़बर दी, “देखो! वह आदमी जिन्हें तुम ने क़ैदख़ाने में डाला था बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में खड़े होकर लोगों को तालीम दे रहे हैं।” इस पर, कप्तान अपने सरबराहों के साथ गया और रसूलों को पकड़ लाया। उन्होंने ताक़त का इस्तिमाल इसलिये नहीं किया के उन्हें ख़द्शा था के लोग उन्हें संगसार न कर दें। उन्होंने रसूलों को लाकर मज्लिस आम्मा में पेश किया और आला काहिन ने उन से कहा, “हम ने तुम्हें सख़्त ताकीद की थी के ईसा का नाम ले कर तालीम न देना,” उन्होंने कहा। “तुम ने सारे यरूशलेम में अपनी तालीम फैला दी है और हमें इस शख़्स के ख़ून का ज़िम्मेदार ठहराना पर तुले हो।” पतरस और दूसरे रसूलों ने जवाब दिया: “हम पर इन्सान के हुक्म के बजाय ख़ुदा का हुक्म मानना ज़्यादा फ़र्ज़ है! हमारे बाप दादा के ख़ुदा ने इस ईसा को मुर्दों में से ज़िन्दा कर दिया जिसे तुम ने सलीब पर लटका कर मार डाला था। ख़ुदा ने इसी को ख़ुदावन्द और मुनज्जी ठहरा कर अपने दाहने हाथ की तरफ़ सरबुलन्दी बख़्शी ताके वह इस्राईल को तौबा की तौफ़ीक़ और गुनाहों की मुआफ़ी अता फ़रमाये। हम इन बातों के गवाह हैं, और पाक रूह भी शाहिद है, जिसे ख़ुदा ने अपने फ़रमांबरदारों को अता की है जो उस का हुक्म मानते हैं।” जब उन्होंने ये सुना तो जल-भुन गये और चाहा के उन्हें ठिकाने लगा दें। लेकिन एक फ़रीसी ने जिस का नाम गमलीएल था, जो शरीअत का मुअल्लिम था, जो सब लोगों में मुअज़्ज़ज़ समझा जाता था, मज्लिस आम्मा में खड़े होकर हुक्म दिया के इन आदमियों को थोड़ी देर के लिये बाहर भेज दो। फिर वह मज्लिस से यूं मुख़ातिब हुए: “ऐ इस्राईल के मर्दो, जो कुछ तुम इन आदमियों के साथ करना चाहते हो उसे होशयारी से करना। क्यूंके कुछ अर्से पहले थियूदास उठा, और उस ने ये दावा किया था, के में भी कुछ हूं और तक़रीबन चार सौ आदमी इस से मिल गये थे। मगर वह मारा गया, उस के तमाम पैरोकार मुन्तशिर होकर ख़त्म हो गये। उस के बाद, यहूदाह गलीली इस्म नवीसी के अय्याम में नमूदार हुआ और उस ने कई लोगों को अपना हमनवा बना लिया। वह भी मारा गया, और उस के जितने भी पैरोकार थे सब के सब मुन्तशिर हो गये। लिहाज़ा, मैं तो तुम से यही कहूंगा: के इन आदमियों से दूर ही रहो! उन से कोई काम न रखो! और इन्हें जाने दो क्यूंके अगर ये तद्बीर या ये काम इन्सानों की जानिब से है, तो ख़ुद ब ख़ुद बर्बाद जायेगा। लेकिन अगर ये ख़ुदा की जानिब से है, तो तुम इन आदमियों का कुछ भी न बिगाड़ सकोगे; बल्के ख़ुदा के ख़िलाफ़ लड़ने वाले ठहरोगे।” उन्होंने उस की सलाह मान ली। और रसूलों को अन्दर बुलाकर उन्हें कोड़े लगवाए। उन को ताकीद की के आइन्दा ईसा का नाम ले कर कोई बात न करना और उन्हें जाने दिया। रसूल मज्लिस आम्मा से चले गये, वह इस बात पर ख़ुश थे के ख़ुदावन्द के नाम की ख़ातिर बेइज़्ज़त होने के लाइक़ तो समझे गये। रोज़-ब-रोज़ वह तालीम देने से बाज़ न आये बल्के हर रोज़ बैतुलमुक़द्दस के सेहनों में और घरों में, ख़ुशख़बरी सुनाते रहे के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं ये कहने से बाज़ न आये। उन दिनों जब शागिर्दों की तादाद बढ़ती जा रही थी तो यूनानी यहूदी मक़ामी इब्रानी यहूदियों की शिकायत कर के कहने लगे क्यूंके रोज़मर्रा के खाने की तक़्सीम के वक़्त हमारी बेवाओं को नज़र-अन्दाज़ किया जाता है। ये सुन कर बारह रसूलों ने सारे शागिर्दों को जमा किया और कहा, “हमारे लिये मुनासिब नहीं के हम ख़ुदा के कलाम की मुनादी को छोड़कर और खाने-पीने का इन्तिज़ाम करने लगीं। इसलिये ऐ भाईयो और बहनों, अपने में से सात नेकनाम अश्ख़ास को चुन लो जो पाक रूह और दानाई से मामूर हों ताके हम उन्हें इस काम की ज़िम्मेदारी सौंप दें और हम तो दुआ करने और कलाम सुनाने की ख़िदमत में मश्ग़ूल रहेंगे।” ये तजवीज़ सारी जमाअत को पसन्द आई। उन्होंने एक तो इस्तिफ़नुस को, जो ईमान और पाक रूह से भरे हुए थे; इस के अलावा फ़िलिप्पुस, पुरख़ुरस, नीकानोर, तिमोन, परमिनास और नीकुलाउस, जो अन्ताकिया के, एक नौ मुरीद यहूदी थे को, मुन्तख़ब किया। और उन्हें रसूलों के हुज़ूर में पेश किया, जिन्होंने उन के लिये दुआ की और उन पर हाथ रखो। इस तरह ख़ुदा का कलाम तेज़ी से फैलता चला गया। यरूशलेम में शागिर्दों की तादाद बहुत ही बढ़ गई, और बहुत से काहिन भी ईमान लाये और मसीही हो गये। अब इस्तिफ़नुस, ख़ुदा के फ़ज़ल और इस की क़ुव्वत से भरे हुए, और लोगों में हैरत-अंगेज़ काम और बड़े मोजिज़े दिखाते थे। उसी वक़्त आज़ादी पाये हुए यहूदी इबादतगाह के रुक्न में से (जैसा ये कहा जाता था) मुख़ालिफ़ उठ खड़े हुए कुरेनियों और इस्कन्दरियों के साथ-साथ किलकिया और आसिया के कुछ यहूदी मिल कर इस्तिफ़नुस से बहस करने लगे। लेकिन इस्तिफ़नुस जिस हिक्मत और रूह से कलाम करते थे वह उन का मुक़ाबला न कर सके। तब उन्होंने चुपके-चुपके कुछ लोगों को उकसाते हुए कहा, “वह ये कहें के हम ने इस्तिफ़नुस को हज़रत मूसा और ख़ुदा के ख़िलाफ़ कुफ़्र बकते सुना है।” इस तरह उन्होंने अवाम को यहूदी बुज़ुर्गों और शरीअत के आलिमों को इस्तिफ़नुस के ख़िलाफ़ उभारा। उन्होंने इस्तिफ़नुस को पकड़ा और उन्हें मज्लिस आम्मा में पेश कर दिया। उन्होंने बहुत से झूटे गवाह भी पेश किये, जिन्होंने ये शहादत दी, “ये शख़्स इस मुक़द्दस मक़ाम और शरीअत के ख़िलाफ़ ज़बान चलाने से बाज़ नहीं आता। और हम ने उसे ये भी कहते सुना है के हुज़ूर ईसा नासरी इस मक़ाम को तबाह कर देंगे और उन रस्मों को भी बदल डालेंगे जो हमें हज़रत मूसा ने अता की हैं।” मज्लिस आम्मा के अराकीन इस्तिफ़नुस को घूर, घूर कर देखने लगे लेकिन इस्तिफ़नुस चेहरा फ़रिश्ते की मानिन्द दिखाई दे रहा था। तब आला काहिन ने इस्तिफ़नुस से पूछा, “क्या ये इल्ज़ामात दुरुस्त हैं?” इस्तिफ़नुस ने जवाब दिया: “मेरे भाईयो और बुज़ुर्गो, मेरी सुनो! ख़ुदा का जलाल हमारे बुज़ुर्ग हज़रत इब्राहीम पर उस वक़्त ज़ाहिर हुआ जब वह हारा न मैं मुक़ीम होने से पहले मसोपोतामिया, में रहते थे। ख़ुदा ने उन से फ़रमाया, ‘अपने वतन और अपने लोगों को छोड़कर, और उस मुल्क में जा बस, जो मैं तुझे दिखाऊंगा।’ “चुनांचे आप ने कसदियों सरज़मीं को छोड़ दिया और हारा न में जा बसे। उन के वालिद की वफ़ात के बाद, ख़ुदा ने उन्हें इस मुल्क में ला बसाया जहां अब तुम बसे हुए हो। ख़ुदा ने उन्हें यहां कुछ भी विरासत में नहीं दिया, एक गज़ ज़मीन भी नहीं। लेकिन वादा ज़रूर किया के मैं ये ज़मीन तुझे और तेरे बाद तेरी नस्ल के क़ब्ज़ा में दे दूंगा हालांके उस वक़्त हज़रत इब्राहीम के कोई औलाद न थी। ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से फ़रमाया: ‘चार सौ बरस तक तेरी नस्ल एक दूसरे मुल्क में परदेसियों की तरह रहेगी, और वहां के लोग उस से ग़ुलामी में रखेंगे और उस से बदसुलूकी से पेश आते रहेंगे। ख़ुदा ने फ़रमाया, लेकिन में उस क़ौम को जो उसे ग़ुलाम बनायेगी सज़ा दूंगा,’ ख़ुदा ने फ़रमाया, ‘और उस के बाद तुम्हारी नस्ल के लोग वहां से बाहर निकल कर इस जगह मेरी इबादत करेंगे।’ और ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से एक अह्द बांधा जिस का निशान ख़तना था। चुनांचे जब हज़रत इब्राहीम इज़हाक़ के बाप बने और इज़हाक़ आठ दिन के हो गये तो हज़रत इब्राहीम ने हज़रत इज़हाक़ का ख़तना किया। फिर हज़रत इज़हाक़ याक़ूब के बाप बने, और हज़रत याक़ूब हमारी क़ौम के बारह क़बीलों के बाप बने। “पस हज़रत याक़ूब के बेटों ने हसद में आकर अपने भाई यूसुफ़ को, चंद मिस्रियों के हाथ बेच डाला और वह आप को ग़ुलाम बना कर मिस्र ले गये। मगर ख़ुदा आप के साथ था और ख़ुदा ने उन्हें सारी मुसीबतों से बचाए रखा। उन्हें हिक्मत अता की और मिस्र के बादशाह फ़िरऔन की नज़र में ऐसी मक़्बूलियत बख़्शी। चुनांचे फ़िरऔन ने हज़रत यूसुफ़ को मिस्र का हाकिम मुक़र्रर कर दिया और अपने महल का मुख़्तार बना दिया। “एक मर्तबा सारे मिस्र और कनान में क़हत पड़ गया, बड़ी मुसीबत आई, और हमारे आबा-ओ-अज्दाद को भी ग़ल्ले की क़िल्लत महसूस होने लगी। जब हज़रत याक़ूब ने सुना के मिस्र में ग़ल्ला मिल सकता है, आप ने हमारे बुज़ुर्गों को मिस्र रवाना किया जहां वह पहली मर्तबा गये थे। जब वह दूसरी मर्तबा मिस्र गये, तो हज़रत यूसुफ़ ने अपनी पहचान अपने भाईयों पर ज़ाहिर कर दी, और फ़िरऔन को भी हज़रत यूसुफ़ के ख़ानदान के बारे में मालूम हो गया। इस वाक़िया के बाद हज़रत यूसुफ़ ने अपने बाप हज़रत याक़ूब को और उन के सारे ख़ानदान को जो पिछत्तर अफ़राद पर मुश्तमिल था, को बुला भेजा। चुनांचे हज़रत याक़ूब मिस्र को तशरीफ़ ले गये, वहां वह और हमारे आबा-ओ-अज्दाद वहीं इन्तिक़ाल कर गये। उन की लाशों को वहां से सिकम मुन्तक़िल किया गया और उन्हें उस मक़बरे में दफ़न किया गया जिसे हज़रत इब्राहीम ने रक़म दे कर सिकम में बनी हमूर से ख़रीदा था। “जब उस वादे के पूरे होने का वक़्त आया जो ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से किया था तो मिस्र में हमारे लोगों की तादाद काफ़ी बढ़ चुकी थी। उस वक़्त ‘एक नया बादशाह, जो हज़रत यूसुफ़ के बारे में कुछ भी नहीं जानता था, मिस्र पर हुक्मरां हो चुका था।’ इस ने हमारी क़ौम के साथ धोका बाज़ी की और हमारे आबा-ओ-अज्दाद पर बड़े ज़ुल्म ढाए और उन्हें मजबूर कर दिया के वह अपने नन्हें बच्चों को बाहर फेंक आयें ताके वह मर जायें। “उन ही दिनों हज़रत मूसा पैदा हुए। वह ख़ुदा की नज़र में निहायत मामूली बच्चा न थे। वह तीन माह तक अपने बाप के घर में परवरिश पाते रहे। बाद को जब उन्हें बाहर फेंका गया, तो फ़िरऔन की बेटी उन्हें उठा लाई और अपने बेटे की तरह उन की परवरिश की। हज़रत मूसा ने मिस्रियों की सारी तालीम-ओ-तरबियत हासिल की और वह कलाम और अमल दोनों में क़ुव्वत वाले थे। “जब हज़रत मूसा चालीस बरस के हुए, तो उन के दिल में आया के वह अपने भाईयों यानी बनी इस्राईल का हाल मालूम करें। उन्होंने उन में से एक को ज़ुल्म सहते हुए देखा तो उस की मदद को पहुंचे और इस ज़ालिम मिस्री को क़त्ल कर के उस के ज़ुल्म का बदला ले लिया। हज़रत मूसा का ख़्याल था के मेरे भाईयो को इस बात का एहसास हो जायेगा के ख़ुदा उन के ज़रीये इस्राईलियो को ग़ुलामी से नजात बख़्शेगा, लेकिन उन को इस का एहसास तक न हुआ। अगले दिन हज़रत मूसा ने दो इस्राईलियो को आपस में लड़ते देखा। आप ने उन में सुलह कराने की कोशिश करते हुए उन से ये फ़रमाया, ‘ऐ आदमियों, तुम तो आपस में भाई-भाई हो; क्यूं एक दूसरे पर ज़ुल्म कर रहे हो?’ “लेकिन जो आदमी अपने पड़ोसी पर ज़ुल्म कर रहा था इस ने हज़रत मूसा को धुतकार दिया और कहा, ‘आप को किस ने हम पर हाकिम और क़ाज़ी मुक़र्रर किया है? जिस तरह आप ने कल उस मिस्री को क़त्ल कर डाला था क्या मुझे भी उसी तरह मार डालना चाहते हैं?’ ये बात सुनते ही, हज़रत मूसा वहां से मुल्क मिद्यान में तशरीफ़ ले गये, जहां वह एक परदेसी की तरह रहने लगे और वहां उन के दो बेटे पैदा हुए। “चालीस बरस बाद, कोहे सीना के ब्याबान में उन्हें एक जलती हुई झाड़ी के बीच आग के शोलों में फ़रिश्ता दिखाई दिया। जैसे ही हज़रत मूसा ने ये मंज़र देखा तो हैरान रह गये और जब उसे ग़ौर से देखने के लिये नज़दीक बढ़े, तो उन्हें ख़ुदावन्द की आवाज़ सुनाई दी: ‘मैं तुम्हारे आबा-ओ-अज्दाद का यानी हज़रत इब्राहीम, इज़हाक़ और याक़ूब का, ख़ुदा हूं।’ हज़रत मूसा उस मंज़र की ताब न ला सके और डर के मारे कांपने लगे। “तब ख़ुदावन्द ने उन से फ़रमाया, ‘अपने जूते उतारो, क्यूंके जिस जगह तुम खड़े हो वह पाक सरज़मीं है। मैंने मिस्र में अपने लोगों की मुसीबत देख ली है। मैंने उन की आहोज़ारी भी सुनी है और इसलिये में उन्हें छुड़ाने के लिये नीचे उतरा हूं। अब, मैं तुझे मिस्र में वापस भेजूंगा।’ “यही हैं वह हज़रत मूसा जिन का उन्होंने इन्कार किया था, ‘आप को किस ने हम पर हाकिम और क़ाज़ी मुक़र्रर किया है?’ इन ही हज़रत मूसा को ख़ुदा ने, उस फ़रिश्ते की मारिफ़त जो उन्हें झाड़ी में नज़र आया था हाकिम और छुड़ाने वाला बना कर भेज दिया। हज़रत मूसा लोगों को मिस्र से निकाल लाये और मुल्क मिस्र में, बहरे-क़ुलज़ुम पर और ब्याबान में चालीस बरस तक हैरत-अंगेज़ मोजिज़े और निशान दिखाते रहे। “इन्हें हज़रत मूसा ने बनी इस्राईल से फ़रमाया था, ‘ख़ुदा तुम्हारे अपने भाईयों में से तुम्हारे लिये मेरी मानिन्द एक नबी पैदा करेगा।’ यही ब्याबान में इस्राईली जमाअत में फ़रिश्ते के साथ था जो कोहे सीना पर हज़रत मूसा से हम कलाम हुआ, और हमारे आबा-ओ-अज्दाद के साथ; और इन ही को ज़िन्दा कलाम अता किया गया ताके वह हम तक पहुंचा दें। “लेकिन हमारे आबा-ओ-अज्दाद ने उन की फ़रमांबरदार न की। बल्के, उन्हें रद्द कर दिया और उन के दिल मिस्र की तरफ़ राग़िब होने लगे। उन्होंने हज़रत हारून से कहा, ‘हमारे लिये ऐसे माबूद बना दे जो हमारे आगे-आगे चलें। क्यूंके हम नहीं जानते के हज़रत मूसा जो हमें मुल्क मिस्र से निकाल कर लाये हैं, उन के साथ क्या हुआ!’ तब उन्होंने बछड़ा नुमा बुत बनाया। इस के आगे क़ुर्बानियां चढ़ाईं और अपने हाथों की कारीगरी पर जश्न मनाया। लेकिन ख़ुदा ने उन से मुंह मोड़ लिया और उन्हें आसमान सूरज, चांद, और सय्यारों की परस्तिश करने के लिये छोड़ दिया। जैसा के नबियों की किताब में लिखा है: “ ‘ऐ बनी इस्राईल क्या तुम चालीस बरस तक ब्याबान में, मेरे लिये क़ुर्बानियां करते और नज़्रें लाते रहे? बल्के तुम अपने साथ मोलक के ख़ेमे और अपने माबूद रिफ़ान, के सितारे को लिये फिरते थे, यानी वह बुत जिन्हें तुम ने परस्तिश के लिये बनाया था। लिहाज़ा मैं तुम्हें बाबुल से भी परे जलावतन’ कर के भेज दूंगा। “ब्याबान में हमारे आबा-ओ-अज्दाद के पास शहादत का ख़ेमा था। जिस का नमूना हज़रत मूसा ने देखा था और ख़ुदा ने उन्हें हिदायत की थी के एक ख़ेमा इसी के मुवाफ़िक़ बनाना, चुनांचे इसी नमूने के मुताबिक़ बनाया गया जो आप ने देखा था। जब ये ख़ेमा हमारे आबा-ओ-अज्दाद को मिला, तो वह इसे ले कर हज़रत यशु-अ के साथ उस सरज़मीं पर पहुंचे जो उन्होंने उन ग़ैरयहूदी से छीनी थी जिन्हें ख़ुदा ने उन के सामने वहां से निकाल दिया था। वह ख़ेमा दाऊद के ज़माने तक वहीं रहा, दाऊद ख़ुदा के मक़्बूल नज़र हुए और उन्होंने ख़ुदा से दरख़्वास्त की के मुझे हज़रत याक़ूब के लिये एक मस्कन बनाने की इजाज़त दी जाये। मगर वह हज़रत सुलैमान थे जिन्हें ख़ुदा के लिये मस्कन के तामीर करने की तौफ़ीक़ मिली। “लेकिन, ख़ुदा तआला इन्सानी हाथों के बनाये हुए ऊंचे घरों में नहीं रहता जैसा के नबी ने फ़रमाया है: “ ‘आसमान मेरा तख़्त है, और ज़मीन मेरे पांव की चौकी। तुम मेरे लिये किस क़िस्म का घर तामीर करोगे? ख़ुदावन्द फ़रमाता है। या मेरी आरामगाह कहां होगी? क्या ये सारी चीज़ें मेरी बनाई हुई नहीं?’ “ऐ गर्दन कशो तुम्हारे दिल और कान दोनों न मख़्तून हैं। जैसे तुम्हारे आबा-ओ-अज्दाद करते आये हैं: वैसे ही तुम भी पाक रूह की हमेशा मुख़ालफ़त करते रहते हो! क्या कोई नबी ऐसा भी गुज़रा है जिसे तुम्हारे बाप दादा ने नहीं सताया? उन्होंने तो उन नबियों को भी क़त्ल कर दिया जिन्होंने इस रास्तबाज़ के आने की पेशीनगोई की थी। और अब तुम ने उन्हें पकड़वा कर क़त्ल करवा दिया। तुम ने वह शरीअत पाई जो फ़रिश्तों की मारिफ़त अता की गई लेकिन इस पर अमल न किया।” जब उन्होंने ये बातें सुनीं तो जल-भुन कर रह गये और इस्तिफ़नुस पर दांत पीसने लगे। लेकिन इस्तिफ़नुस ने, पाक रूह से मामूर होकर, आसमान की तरफ़ ग़ौर से निगाह की तो उन्हें ख़ुदा का जलाल दिखाई दिया, और आप ने हुज़ूर ईसा अलमसीह को ख़ुदा के दाहने हाथ खड़े हुए देखा। “देखो,” इस्तिफ़नुस ने फ़रमाया, “मैं आसमान को खुला हुआ और इब्न-ए-आदम को ख़ुदा के दाहने हाथ खड़े हुए देखता हूं।” ये सुनते ही लोग ज़ोर से चिल्लाये और, अपने कानों में उंगलियां दे लीं, और एक साथ इस्तिफ़नुस पर झपट पड़े। और इस्तिफ़नुस को घसीट कर शहर से बाहर ले गये और आप पर पत्थर बरसाने लगे। इस दौरान, गवाहों ने अपने चोग़े को उतार कर साऊल नामी एक जवान आदमी के पास रख दिये। जब वह इस्तिफ़नुस पर पत्थर बरसा रहे थे तो आप ये दुआ कर रहे थे, “ऐ ख़ुदावन्द ईसा, मेरी रूह को क़बूल फ़रमा।” फिर उन्होंने घुटने टेक कर ज़ोर से पुकारा, “ऐ ख़ुदावन्द, ये गुनाह उन के ज़िम्मे न लगाना।” ये कहने के बाद, वह मौत की नींद सो गये। और साऊल इस्तिफ़नुस के क़त्ल में शामिल था। इसी दिन यरूशलेम में जमाअत पर मज़ालिम का सिलसिला शुरू हो गया, और रसूलों के सिवा सारे मसीही यहूदिया और सामरिया की एतराफ़ में बिखर गये। बाज़ दीनदार आदमियों ने इस्तिफ़नुस को ले जा कर दफ़नाया और उन पर बड़ा मातम किया। उधर साऊल ने जमाअत को तबाह करना शुरू कर दिया। वह घर-घर जाता था, मर्दों और औरतों दोनों को बाहर घसीट कर क़ैद कराता था। जमाअत के लोग बिखर जाने के बाद जहां-जहां गये, कलाम की ख़ुशख़बरी सुनाते फिरे। चुनांचे फ़िलिप्पुस सामरिया के एक शहर में गये और वहां अलमसीह की मुनादी करने लगे। जब लोगों ने फ़िलिप्पुस की बातें सुनीं और उन के मोजिज़े देखे तो वह सब के सब बड़े शौक़ से उन की तरफ़ मुतवज्जेह होने लगे। कई लोगों में से बदरूहें चिल्लाती हुई निकलें और बहुत से मफ़्लूज और लंगड़े शिफ़ायाब हुए जिस से शहर वालों को बड़ी ख़ुशी हुई। कुछ अर्से से शमऊन नाम एक आदमी ने सामरिया शहर में अपनी जादूगरी से सारे सामरिया के लोगों को हैरत में डाल रखा था और कहता था के वह एक बड़ा आदमी है। और छोटे बड़े, सब, उस की तरफ़ मुतवज्जेह होकर कहने लगे। “इस आदमी को ही ख़ुदा की अज़ीम ताक़त कहा जाता है।” चूंके उस ने अपने जादू से उन्हें हैरान कर रखा था इसलिये लोग उसे तवज्जोह के क़ाबिल समझने लगे। लेकिन जब फ़िलिप्पुस ने ख़ुदा की बादशाही और हुज़ूर ईसा अलमसीह के नाम की ख़ुशख़बरी सुनानी शुरू की तो सारे मर्द-ओ-ज़न ईमान ले आये और पाक-ग़ुस्ल लेने लगे। शमऊन ख़ुद भी ईमान लाया और पाक-ग़ुस्ल लिया। और वह फ़िलिप्पुस के साथ हो लिया, और वह बड़े-बड़े निशान और मोजिज़े देखकर दंग रह गया। जब यरूशलेम में रसूलों ने सुना के सामरिया के लोगों ने ख़ुदा का कलाम क़बूल कर लिया, तो उन्होंने पतरस और यूहन्ना को सामरिया भेजा। जब वह वहां पहुंचे तो उन्होंने उन लोगों के लिये दुआ की के वह पाक रूह पायें, इसलिये के अभी पाक रूह उन में से किसी पर नाज़िल न हुआ था; उन्होंने सिर्फ़ ख़ुदावन्द ईसा के नाम पर पाक-ग़ुस्ल लिया था। तब पतरस और यूहन्ना ने उन पर हाथ रखो और उन्होंने भी पाक रूह पाया। जब शमऊन ने देखा के रसूलों के हाथ रखने से पाक रूह मिलता है, तो इस ने रूपये लाकर रसूलों को पेश किये और कहा, “मुझे भी इख़्तियार दो के मैं जिस किसी पर हाथ रखूं वह पाक रूह पाये।” पतरस ने जवाब मैं फ़रमाया: “तेरे रूपये तेरे साथ ग़ारत हों, क्यूंके तूने रूपयों से ख़ुदा की इस नेमत को ख़रीदना चाहा! इस मुआमले में तेरा कोई भी हिस्सा या बिखरा नहीं, क्यूंके ख़ुदा के नज़दीक तेरा दिल साफ़ नहीं है। अपनी इस बददियानती से तौबा कर और ख़ुदावन्द से दुआ कर के शायद वह इस दिल की बुरी नियत के लिये तुझे मुआफ़ कर दे। क्यूंके मैं देखता हूं के तो शदीद तल्ख़ी और नारास्ती के बन्द में गिरिफ़्तार है।” तब शमऊन ने जवाब दिया, “मेरे लिये ख़ुदावन्द से दुआ करो के जो कुछ तुम ने कहा है वह मुझे पेश न आये।” तब रसूल ख़ुदावन्द का कलाम सुनाने और हुज़ूर ईसा की गवाही देने के बाद यरूशलेम लौट गये, और रास्ते में सामरियों के कई क़स्बों में भी ख़ुशख़बरी सुनाते गये। फिर ख़ुदावन्द के फ़रिश्ते ने फ़िलिप्पुस से कहा, “उठो और जुनूब की तरफ़ उस राह पर जाओ जो यरूशलेम से ब्याबान में होती हुई ग़ज़्ज़ह को जाती है।” चुनांचे फ़िलिप्पुस उठे और रवाना हुए, रास्ते में उन की मुलाक़ात एक ख़ोजा से हुई जो एथोपीया की मलिका कन्दाके के का एक वज़ीर था और उस के सारे ख़ज़ाना की देख-भाल उस के ज़िम्मे थी। ये शख़्स यरूशलेम में इबादत की ग़रज़ से आया था, और अब वहां से लौट कर अपने वतन जा रहा था। वह अपने रथ पर सवार था और यसायाह नबी का सहीफ़ा पढ़ रहा था। पाक रूह ने फ़िलिप्पुस को हुक्म दिया, “नज़दीक जाओ और रथ के हमराह हो लो।” फ़िलिप्पुस दौड़ कर रथ के नज़दीक पहुंचे और रथ सवार को यसायाह नबी का सहीफ़ा पढ़ते हुए सुना। फ़िलिप्पुस ने उस से पूछा, “क्या जो कुछ तू पढ़ रहा है उसे समझता भी है?” उस ने मिन्नत कर के कहा, “मैं कैसे समझ सकता हूं, जब तक के कोई मुझ से इस की वज़ाहत न करे?” तब उस ने फ़िलिप्पुस को मदऊ किया के उस के साथ रथ में आ बैठें। किताब-ए-मुक़द्दस में से जो ख़ोजा पढ़ रहा था ये था: “लोग उन्हें भेड़ की तरह ज़ब्ह करने के लिये ले गये, और जिस तरह बर्रा अपने बाल कतरने वालों के सामने बेज़बान होता है, इसी तरह उन्होंने भी अपना मुंह नहीं खोला। अपनी पस्त हाली में वह इन्साफ़ से महरूम कर दिये गये। कौन उन की नस्ल का हाल बयान करेगा? क्यूंके ज़मीन पर से उन की ज़िन्दगी मिटाई जाती है।” ख़ोजा ने फ़िलिप्पुस से कहा, “मेहरबानी से मुझे बताईये, नबी ये बातें किस के बारे मैं कहता है। ख़ुद या किसी और के बारे में?” फ़िलिप्पुस ने किताब-ए-मुक़द्दस के उसी हिस्से से शुरू कर के उसे हुज़ूर ईसा के बारे में ख़ुशख़बरी सुनाई। सफ़र करते-करते वह रास्ते में एक ऐसी जगह पहुंचे जहां पानी था। ख़ोजा ने कहा, “देखिये, यहां पानी है। अब मुझे पाक-ग़ुस्ल लेने से कौन सी चीज़ रोक सकती है?” फ़िलिप्पुस ने कहा, “अगर तू दिल-ओ-जान से ईमान लाये तो पाक-ग़ुस्ल ले सकता है।” उस ने जवाब दिया, “मैं ईमान लाता हूं के हुज़ूर ईसा ख़ुदा के बेटे हैं।” फिर आप ने रथ के ठहराने का हुक्म दिया। पस दोनों फ़िलिप्पुस और ख़ोजा पानी में उतरे और फ़िलिप्पुस ने उसे पाक-ग़ुस्ल दिया। जब वह पानी में से बाहर निकले तो ख़ुदावन्द का रूह फ़िलिप्पुस को वहां से उठा ले गया और ख़ोजा ने उन्हें फिर न देखा लेकिन वह ख़ुशी, ख़ुशी अपनी जगह पर रवाना हो लिया। ताहम, फ़िलिप्पुस, अशदूद में नज़र आये और वहां सफ़र करते और सारे क़स्बों में ख़ुशख़बरी सुनाते हुए क़ैसरिया में पहुंच गये। इस दौरान, साऊल जो ख़ुदावन्द के शागिर्दों को मार डालने की धमकियां दिया करता था। आला काहिन के पास गया और उस से दमिश्क़ शहर के यहूदी इबादतगाहों के लिये ऐसे ख़ुतूत मांगे, जो उन्हें इख़्तियार दें के अगर वहां वह किसी को इस राह पर चलता पाये, ख़्वाह वह मर्द हो या औरत, तो उन्हें गिरिफ़्तार कर के बतौर क़ैदी यरूशलेम ले आये। जब वह सफ़र करते-करते दमिश्क़ शहर के नज़दीक पहुंचे, तो अचानक एक नूर आसमान से आया और उन के इर्दगिर्द चमकने लगा। वह ज़मीन पर गिर पड़ा और उस ने एक आवाज़ सुनी, “ऐ साऊल, ऐ साऊल, तू मुझे क्यूं सताता है?” साऊल ने पूछा, “ऐ आक़ा, आप कौन हैं?” हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया, “मैं ईसा हूं, जिसे तू सताता है, अब उठ और शहर में दाख़िल हो, और तुझे बता दिया जायेगा के तुझे क्या करना है।” जो लोग साऊल के हमसफ़र थे ख़ामोश खड़े रह गये; उन्हें आवाज़ तो सुनाई दे रही थी लेकिन नज़र कोई नहीं आ रहा था। साऊल ज़मीन पर से उठा और जब इस ने अपनी आंखें खोलें तो वह कुछ भी नहीं देख सका और इस के साथी उस का हाथ पकड़ कर उसे दमिश्क़ शहर ले गये। वह तीन दिन तक नहीं देख सका, और उस ने न कुछ खाया और न कुछ पिया। दमिश्क़ शहर में हुज़ूर ईसा अलमसीह के एक शागिर्द रहते थे जिस का नाम हननयाह था। ख़ुदावन्द ने हननयाह को रोया में फ़रमाया, “ऐ हननयाह!” उस ने जवाब दिया, “हां, ख़ुदावन्द,” ख़ुदावन्द ने उस से फ़रमाया, “उस कूचे में जो सीधा कहलाता है, यहूदाह के घर जाना वहां साऊल तरसुस नामी एक आदमी है तो उस के बारे में पूछना क्यूंके देख वह दुआ करने में मश्ग़ूल है। साऊल ने रोया में एक हननयाह नामी आदमी को आते और अपने ऊपर उस के हाथ रखते हुए देखा है ताके वह फिर से बीना हो जाये।” हननयाह ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द मैंने इस शख़्स के बारे में कई लोगों से बहुत सी बातें सुनी हैं और ये भी के इस ने तेरे मुक़द्दसीन के साथ यरूशलेम में कैसी-कैसी बुराईयां की हैं। और उन अहम-काहिनों की जानिब से इख़्तियार मिला है के यहां भी उन सब को जो आप का नाम लेते हैं गिरिफ़्तार कर ले।” लेकिन ख़ुदावन्द ने हननयाह से फ़रमाया, “जाओ! क्यूंके मैंने इस आदमी को एक हथियार की मानिन्द चुन लिया है ताके इस के वसीले से ग़ैरयहूदी, बादशाहों और बनी इस्राईल में मेरे नाम का इज़हार हो। मैं उसे जता दूंगा के मेरे नाम की ख़ातिर उसे किस क़दर दुख उठाना पड़ेगा।” तब हननयाह गया और उस घर में दाख़िल हुआ। उस ने मुझ पर अपने हाथ रखे और कहा, “भाई साऊल, उस ख़ुदावन्द ईसा ने जो तुझ पर यहां रास्ते में ज़ाहिर हुए थे। उन ही ने मुझे यहां भेजा है ताके तू फिर से देखने लगे और पाक रूह से मामूर हो जाये।” उसी वक़्त साऊल की आंखों से छिलके से गिरे, और वह बीना हो गया। तब साऊल ने उठ कर पाक-ग़ुस्ल लिया। और कुछ खाकर, नये सिरे से क़ुव्वत पाई। और फिर कुछ दिनों तक शागिर्दों के साथ दमिश्क़ शहर में रहे। इस के फ़ौरन बाद साऊल ने यहूदी इबादतगाहों में मुनादी शुरू कर दी के हुज़ूर ईसा ही ख़ुदा का बेटा हैं। जितनों ने साऊल की बातें सुनीं वह सब हैरान होकर पूछने लगे, “क्या ये वोही शख़्स नहीं जिस ने यरूशलेम में ख़ुदावन्द के नाम लेवा को तबाह कर डाला था? क्या ये यहां भी इसलिये नहीं आया के ऐसे लोगों को गिरिफ़्तार कर के अहम-काहिनों के पास ले जाये?” इस के बावुजूद साऊल क़ुव्वत पाता गया और इस बात को साबित कर के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं दमिश्क़ शहर के बाशिन्दों और यहूदियों को हैरत में डाल दिया। जब काफ़ी दिन गुज़र गये तो यहूदियों ने मिल कर साऊल को क़त्ल कर डालने का मशवरा किया। वह दिन रात शहर के दरवाज़ों पर लगे रहते थे ताके साऊल को मार डालें लेकिन साऊल को उन की साज़िश का इल्म हो गया। चुनांचे साऊल के शागिर्दों ने रात को उन्हें एक बड़े टोकरे में बिठाया और शहर की दीवार के शिगाफ़ में से लटका कर बाहर उतार दिया। जब साऊल यरूशलेम पहुंचा और इस ने शागिर्दों में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन सब साऊल से डरते थे क्यूंके उन्हें यक़ीन नहीं आता था के वह वाक़ई हुज़ूर ईसा का पैरोकार हो गया है। मगर बरनबास साऊल को अपने साथ रसूलों के पास लाये। उन्हें बताया के किस तरह साऊल ने सफ़र करते वक़्त ख़ुदावन्द देखा और ख़ुदा ने इस से बातें कीं, और साऊल ने कैसी दिलेरी के साथ दमिश्क़ शहर में हुज़ूर ईसा के नाम से मुनादी की। तब साऊल यरूशलेम में उन से मिलता जुलता रहा और बड़ी दिलेरी से ख़ुदावन्द की मुनादी करता रहा। आप यूनानी बोलने वाले यहूदियों के साथ भी गुफ़्तगू और बहस किया करते थे, लेकिन वह आप को मार डालने पर तुले हुए थे। जब मसीही भाईयों को इस का इल्म हुआ, तो वह आप को क़ैसरिया ले गये और वहां से साऊल को तरसुस रवाना कर दिया। तब तमाम यहूदिया, गलील और सामरिया में जमाअत को अमन नसीब हुआ, वह मज़बूत होती गई ख़ुदावन्द के ख़ौफ़-ओ-अक़ीदत में ज़िन्दगी गुज़ारने और पाक रूह की हौसला अफ़्ज़ाई से जमाअत की तादाद में इज़ाफ़ा होता चला गया। जब पतरस मुख़्तलिफ़ क़स्बों और दिहात से होते हुए लुद्दा में रहने वाले मुक़द्दसीन के पास पहुंचे तो आप को वहां ऐनियास नामी का एक शख़्स मिला जो मफ़्लूज था और आठ बरस से बिस्तर पर पड़ा था। पतरस ने उस से कहा, “ऐ ऐनियास, हुज़ूर ईसा अलमसीह तुझे शिफ़ा बख़्शते हैं। उठ और अपना बिस्तर समेट।” वह इसी दम उठ खड़ा हुआ। तब लुद्दा और शारून के सारे बाशिन्दे ऐनियास को देखकर ख़ुदावन्द पर ईमान लाये। याफ़ा में एक मसीही ख़ातून शागिर्द थी जिस का नाम तबीता (यूनानी में डोरकास यानी) हिरनी था जो हमेशा नेकी करने और ग़रीबों की मदद करने में लगी रहती थी। उन ही दिनों में वह बीमार हुई और मर गई, उस की लाश को ग़ुस्ल दे कर ऊपर के कमरे में रख दिया। लुद्दा याफ़ा के नज़दीक ही था; लिहाज़ा जब शागिर्दों ने सुना के पतरस लुद्दा में है, तो दो आदमी भेज कर आप से दरख़्वास्त की, “मेहरबानी से फ़ौरन चलिये!” पतरस उन के साथ रवाना हुए और जब वहां पहुंचे तो वह आप को ऊपर वाले कमरे में ले गये। सारी बेवा औरतें रोती हुई आप के इर्दगिर्द आ खड़ी हुईं और पतरस को वह कुर्ते और दूसरे कपड़े जो डोरकास ने उन के दरमियान रह कर सिए थे, दिखाने लगीं। पतरस ने उन सब को कमरा से बाहर भेज दिया और ख़ुद घुटनों के बल होकर दुआ करने लगे। फिर आप ने लाश की तरफ़ मुंह कर के, पतरस ने फ़रमाया, “ऐ तबीता, उठ।” उस ने अपनी आंखें खोल दीं, और पतरस को देखकर वह उठ बैठी। पतरस ने अपने हाथ से पकड़ कर उसे उठाया और पैरों पर खड़े होने में उस की मदद की। तब आप ने मोमिनीन, ख़ुसूसन बेवाओं को बुलाया और तबीता को ज़िन्दा उन के सुपुर्द कर दिया। इस वाक़िया की ख़बर सारे याफ़ा में फैल गई और बहुत से लोग ख़ुदावन्द पर ईमान लाये। पतरस ने कुछ अर्से तक याफ़ा में शमऊन नाम चमड़ा रंगने वाले के यहां क़ियाम किया। क़ैसरिया में एक आदमी था जिस का नाम कुरनेलियुस था, वह एक इतालवी फ़ौजी दस्ता का कप्तान था। वह और इस के घर के सब लोग बड़े दीनदार और ख़ुदा से ख़ौफ़ खाते थे; वह ज़रूरतमन्द लोगों को बहुत ख़ैरात देता था और ख़ुदा से बराबर दुआ किया करता था। एक दिन सिह-पहर तीन बजे के क़रीब कुरनेलियुस ने रोया देखी। इस ने इस में साफ़-साफ़ ख़ुदा के एक फ़रिश्ते को देखा, जो कुरनेलियुस के पास आया और कहा, “ऐ कुरनेलियुस!” कुरनेलियुस ने ख़ौफ़ज़दा होकर उस की तरफ़ ग़ौर से देखा। “आक़ा, क्या बात है?” उस ने पूछा। फ़रिश्ते ने जवाब दिया, “तेरी ख़ैरात के नज़्राने और दुआएं यादगारी के तौर पर ख़ुदा के हुज़ूर में पहुंच चुके हैं। अब कुछ आदमियों को याफ़ा भेज कर शमऊन को जिसे पतरस भी कहते हैं, को अपने यहां बुलवा ले। वह शमऊन जो चमड़ा रंगने का काम करता है के पास ठहरे हुए हैं, जिस का घर साहिल समुन्दर पर वाक़े है।” जब फ़रिश्ता कुरनेलियुस से ये बातें कह कर चला गया, तो उस ने अपने दो ख़ादिमो और अपने ख़ास सिपाहियों में से एक ख़ुदापरस्त सिपाही को बुलाया। और उन्हें सारा वाक़िया जो पेश आया था, बताया और याफ़ा की तरफ़ रवाना कर दिया। अगले दिन जब वह सफ़र करते-करते शहर के नज़दीक पहुंचे तो दोपहर के क़रीब पतरस ऊपर छत पर गये ताके दुआ करें। आप को भूक लगी और पतरस कुछ खाना चाहते थे, लेकिन जब लोग खाना तय्यार कर ही रहे थे, तो पतरस पर बेख़ुदी सी तारी हो गई। आप ने देखा के आसमान खुल गया है और कोई शै एक बड़ी सी चादर की मानिन्द चारों कोनों से लटकती हुई ज़मीन की तरफ़ आ रही है। उस में हर क़िस्म के ज़मीन पर पाये जाने वाले चारपाओं वाले जानवर, रेंगने वाले जानवर और हवा के परिन्दे थे। तब एक आवाज़ ने आप से कहा, “ऐ पतरस। उठ, ज़ब्ह कर और खा।” “हरगिज़ नहीं, ऐ ख़ुदावन्द!” पतरस ने जवाब दिया। “मैंने कभी कोई नापाक और हराम शै नहीं खाई।” वह आवाज़ दूसरी मर्तबा फिर आप को सुनाई दी जो कह रही थी, “तू किसी भी चीज़ को जिसे ख़ुदा ने पाक ठहराया है, उन्हें हराम न कह।” ये वाक़िया तीन मर्तबा पेश आया, और फिर वह चादर फ़ौरन वापस आसमान की तरफ़ उठा ली उठा ली गई। पतरस दिल में सोच ही रहे थे के ये कैसी रोया है जो मैंने देखी है, इतने में कुरनेलियुस के भेजे हुए आदमी शमऊन का मकान पूछ कर दरवाज़े पर आ खड़े हुए। उन्होंने आवाज़ दे कर पूछा: क्या शमऊन जो पतरस कहलाते हैं यहां ठहरे हुए हैं। अभी पतरस अपनी रोया के बारे में सोच ही रहे थे, पाक रूह ने आप से कहा, “शमऊन, तीन आदमी तुझे तलाश कर रहे हैं। इसलिये उठ और नीचे जा। उन के साथ बिलाझिजक चले जाना चूंके मैंने ही उन्हें भेजा है।” पतरस नीचे उतरे और उन आदमियों से फ़रमाया, “जिसे तुम देख रहे हो वह में ही हूं। तुम किस लिये आये हो?” आदमियों ने जवाब दिया, “हम कप्तान कुरनेलियुस की जानिब से आये हैं। वह एक रास्तबाज़ और ख़ुदा से डरने वाला आदमी है, जिस की तारीफ़ तमाम यहूदी क़ौम करती है। एक मुक़द्दस फ़रिश्ते ने उन्हें हिदायत की है के आप को अपने घर बुलाकर आप से कलाम की बातें सुने।” तब पतरस ने उन्हें अन्दर बुला लिया और उन की मेहमान-नवाज़ी की। अगले दिन पतरस उन लोगों के साथ रवाना हुए और याफ़ा से कुछ और मसीही भाई भी आप के साथ हो लिये। दूसरे दिन वह क़ैसरिया पहुंच गये। कुरनेलियुस उन के इन्तिज़ार में था और उस ने अपने रिश्तेदारों और क़रीबी दोस्तों को भी बुला रखा था। पतरस के घर में दाख़िल होते ही कुरनेलियुस ने आप का इस्तिक़्बाल किया और आप के क़दमों में गिरकर आप को सज्दा करने लगा। लेकिन पतरस ने कुरनेलियुस को उठाया और फ़रमाया, “खड़े हो जाओ, मैं भी तो एक सिर्फ़ इन्सान हूं।” फिर कुरनेलियुस से बातें करते हुए, पतरस अन्दर दाख़िल हुए और वहां लोगों का बड़ा मज्मा पाया। आप ने उन से कहा, “तुम ख़ूब जानते हो के किसी यहूदी का ग़ैरयहूदी से मेल-जोल रखना नाजायज़ है। लेकिन ख़ुदा ने मुझ पर ज़ाहिर कर दिया के मुझे किसी भी इन्सान को नजिस या नापाक कहने का कोई इख़्तियार नहीं। लिहाज़ा जब मुझे बुलाया गया, तो मैं बिला हुज्जत चला आया। क्या मैं पूछ सकता हूं के मुझे यहां क्यूं बुलाया गया है?” कुरनेलियुस ने जवाब दिया: “तीन दिन पहले मैं अपने घर में सिह-पहर इसी वक़्त, यानी तीन बजे के क़रीब दुआ कर रहा था। अचानक एक शख़्स चमकदार पोशाक में मेरे सामने आ खड़ा हुआ और कहने लगा, ‘ऐ कुरनेलियुस, ख़ुदा ने तेरी दुआ सुन ली है और तेरी ख़ैरात को भी क़बूलियत बख़्शी है। किसी को याफ़ा भेज कर शमऊन को जिसे पतरस भी कहते हैं को बुलवा ले। वह शमऊन चमड़ा रंगने का काम करता है, के घर में है जो साहिल समुन्दर पर रहता है।’ ये सुनते ही मैंने आप को बुला भेजा, और बड़ा अच्छा हुआ के आप तशरीफ़ लाये। अब हम सब ख़ुदावन्द की हुज़ूरी में हैं और चाहते हैं के जो कुछ ख़ुदा ने आप से फ़रमाया है उसे सुनें।” तब पतरस ने बोलना शुरू किया: “मुझे अब इस सच्चाई का एहसास हो गया के ख़ुदा किसी का तरफ़दार नहीं लेकिन हर क़ौम में जो कोई ख़ुदावन्द से डरता और जो रास्त है वोही करता है जो ख़ुदावन्द की नज़रों में सही है। तुम जानते हो के ख़ुदावन्द ने बनी इस्राईल के पास अपना सलामती का कलाम भेजा, जिस ने हुज़ूर ईसा अलमसीह की मारिफ़त सुलह की ख़ुशख़बरी सुनाई, जो सब का ख़ुदावन्द है। इस बात को तुम जानते हो के जो हज़रत यहया के पाक-ग़ुस्ल की मुनादी के बाद गलील से शुरू होकर तमाम यहूदिया सूबे, में की गई। के किस तरह ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा नासरी को पाक रूह से मामूर कर के किस तरह मसह किया, और किस तरह हुज़ूर ईसा जगह-जगह जा कर लोगों के वास्ते नेक काम किया करते और उन सब को शिफ़ा बख़्शते थे, जो इब्लीस के ज़ुल्म का शिकार थे क्यूंके ख़ुदा आप के साथ था। “हम उन सब कामों के गवाह हैं जो आप ने यहूदियों के मुल्क और यरूशलेम में किये। उन्होंने हुज़ूर ईसा को सलीब पर लटका कर मार डाला। लेकिन ख़ुदा ने उन ही हुज़ूर ईसा को तीसरे दिन मुर्दों में से ज़िन्दा कर के ज़ाहिर किया। वह सारी उम्मत पर नहीं बल्के उन गवाहों पर ज़ाहिर हुए जिन्हें ख़ुदा ने पहले से चुन रखा था यानी हम पर जिन्होंने हुज़ूर ईसा के मुर्दों में से ज़िन्दा हो जाने के बाद आप के साथ खाया पिया भी। और आप ने हुक्म दिया के हम लोगों में मुनादी करें और गवाही दें के हुज़ूर ईसा ही वोही हैं जिसे ख़ुदा ने ज़िन्दों और मुर्दों का मुन्सिफ़ मुक़र्रर किया है। तमाम नबी हुज़ूर ईसा के बारे में गवाही देते हैं के जो कोई आप पर ईमान लाता है वह हुज़ूर ईसा के नाम से गुनाहों की मुआफ़ी पाता है।” पतरस ये बातें बयां ही कर रहे थे, के पाक रूह उन सब पर नाज़िल हुआ जो ये कलाम सुन रहे थे। पतरस के साथ आने वाले मख़्तून जो मसीही मोमिनीन हो चुके थे तअज्जुब करने लगे के ग़ैरयहूदियों को भी पाक रूह की नेमत बख़्शी गई है। क्यूंके उन्होंने ग़ैरयहूदियों को तरह-तरह की ज़बानें बोलते और ख़ुदा की तम्जीद करते सुना। तब पतरस ने फ़रमाया, “यक़ीनन क्या कोई उन लोगों को पानी का पाक-ग़ुस्ल लेने से रोक सकता है। क्यूंके जिस तरह हम ने पाक रूह पाया है, उन्होंने भी पाया है।” लिहाज़ा आप ने हुक्म दिया के उन्हें हुज़ूर ईसा अलमसीह के नाम पर पाक-ग़ुस्ल दिया जाये। तब उन्होंने पतरस से दरख़्वास्त की के हमारे पास कुछ रोज़ और क़ियाम करें। यहूदिया में रहने वाले रसूलों और मोमिनीन ने ये ख़बर सुनी के ग़ैरयहूदी ने भी ख़ुदा का कलाम क़बूल किया है। चुनांचे जब पतरस वापस यरूशलेम आये, तो मख़्तून यहूदी जो मोमिन हो गये थे पतरस से तन्क़ीद करने लगे और उन्होंने कहा, “आप न मख़्तून लोगों के पास गये और उन के साथ खाना खाया।” पतरस ने उन से सारा वाक़िया शुरू से आख़िर तक तरतीबवार यूं बयान किया, “मैं याफ़ा शहर में दुआ में मश्ग़ूल था, और मुझ पर बेख़ुदी तारी हो गई और मुझे एक रोया दिखाई दी। मैंने देखा के कोई शै एक बड़ी सी चादर की मानिन्द चारों कोनों से लटकती हुई आसमान से नीचे उतरी और मुझ तक आ पहुंची। मैंने उस पर नज़र डाली और उस में ज़मीन के चारपाओं वाले जानवर, जंगली जानवर, रेंगने वाले जानवर और हवा के परिन्दे थे। तब मुझे एक आवाज़ सुनाई दी, ‘उठ, ऐ पतरस। ज़ब्ह कर और खा।’ “मैंने जवाब दिया, ‘हरगिज़ नहीं, ऐ ख़ुदावन्द! कोई नापाक और हराम शै मेरे मुंह में कभी नहीं गई।’ “उस आवाज़ ने आसमान से दूसरी मर्तबा कहा, ‘तू किसी भी चीज़ को जिसे ख़ुदा ने पाक ठहराया है उन्हें हराम न कह।’ ये वाक़िया तीन मर्तबा पेश आया और वह चीज़ें फिर से आसमान की तरफ़ उठा ली गईं। “ऐन उसी वक़्त तीन आदमी जो क़ैसरिया से मेरे पास भेजे गये थे उस घर के सामने आ खड़े हुए जहां में ठहरा हुआ था। पाक रूह ने मुझे हिदायत की के मैं बिलाझिजक उन के हमराह हो लूं। ये छः भाई भी मेरे साथ गये, और हम इस शख़्स के घर में दाख़िल हुए। इस ने हमें बताया के एक फ़रिश्ता उस के घर में ज़ाहिर हुआ और कहने लगा, ‘याफ़ा में किसी आदमी को भेज कर शमऊन को जिसे पतरस भी कहते हैं को बुलवा ले। वह आकर तुझे एक ऐसा पैग़ाम देंगे जिस के ज़रीये तो और तेरे ख़ानदान के सारे अफ़राद नजात पायेंगे।’ “जब मैंने वहां जा कर पैग़ाम सुनाना शुरू किया, तो पाक रूह उन पर उसी तरह नाज़िल हुआ जैसे शुरू में हम पर नाज़िल हुआ था। तब मुझे याद आया के ख़ुदावन्द ने फ़रमाया था: ‘हज़रत यहया ने तो पानी से पाक-ग़ुस्ल दिया लेकिन तुम पाक रूह से पाक-ग़ुस्ल पाओगे।’ पस अगर ख़ुदा ने उन्हें वोही नेमत अता की जो हमें हुज़ूर ईसा अलमसीह पर ईमान लाने के बाइस दी गई थी तो मैं कौन था के ख़ुदावन्द के रास्ता में रुकावट बनता?” जब उन्होंने ये सुना, तो ख़ामोश हो गये और ख़ुदा की तम्जीद कर के कहने लगे, “तब तो, साफ़ ज़ाहिर है के ख़ुदावन्द ने ग़ैरयहूदी को भी तौबा कर के ज़िन्दगी पाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाई है।” अब वह सब जो उस ईज़ारसानी के बाइस जिस का आग़ाज़ इस्तिफ़नुस से हुआ था, इधर-उधर मुन्तशिर हो गये और फिरते फिराते फ़ीनिके, जज़ीरे साइप्रस और अन्ताकिया तक जा पहुंचे, लेकिन उन्होंने कलाम की मुनादी को सिर्फ़ यहूदियों तक ही महदूद रखा। पस, उन में से बाज़, जो जज़ीरे साइप्रसी और कुरेनी के थे, अन्ताकिया में जा कर यूनानियों को भी, ख़ुदावन्द ईसा की ख़ुशख़बरी सुनाने लगे। ख़ुदावन्द का हाथ उन पर था, और लोग बड़ी तादाद में ईमान लाये और ख़ुदावन्द की तरफ़ रुजू किया। इस की ख़बर यरूशलेम की जमाअत के तक पहुंची और उन्होंने बरनबास को अन्ताकिया रवाना कर दिया। जब वह वहां पहुंचे तो देखा के ख़ुदा के फ़ज़ल ने क्या किया है और उन की हौसला अफ़्ज़ाई कर के उन्हें नसीहत दी के पूरे दिल से ख़ुदावन्द के वफ़ादार रहें। बरनबास नेक इन्सान थे और पाक रूह और ईमान से मामूर थे, और लोगों की बड़ी तादाद ख़ुदावन्द की जमाअत में शामिल हो गई। इस के बाद बरनबास, साऊल की जुस्तुजू में तरसुस रवाना हो गये। आप साऊल को ढूंड कर अन्ताकिया लाये जहां वह दोनों साल भर तक जमाअत से मिले और बहुत से लोगों को तालीम देते रहे। अलमसीह के शागिर्दों को पहली बार अन्ताकिया में ही मसीही कह कर पुकारा गया। इन ही दिनों में कुछ नबी यरूशलेम से अन्ताकिया पहुंचे। और उन में से एक ने जिन का नाम अगबुस था, खड़े होकर पाक रूह की हिदायत के मुताबिक़ ये पेशीनगोई की के सारी रोमी दुनिया में एक सख़्त क़हत पड़ेगा (क़हत का ये वाक़िया क़ैसर क्लोदियुस के अह्द में पेश आया था)। लिहाज़ा शागिर्दों, ने फ़ैसला किया के हम में से हर एक अपनी-अपनी माली हैसियत के मुताबिक़ कुछ दे ताके यहूदिया में रहने वाले मसीही भाईयों और बहनों की मदद की जाये। पस उन्होंने, कुछ अतिये की रक़म जमा की और बरनबास और साऊल के हाथ यरूशलेम में बुज़ुर्गों के पास भिजवा दी। इन ही दिनों हेरोदेस बादशाह ने जमाअत के, कुछ अफ़राद को गिरिफ़्तार कर लिया ताके अज़ीय्यत पहुंचाये। और यूहन्ना के भाई, याक़ूब, को तलवार से क़त्ल करवा दिया। जब इस ने देखा के यहूदियों ने इस बात को पसन्द किया, तो इस ने ईद-ए-फ़तीर के दिनों में पतरस को भी गिरिफ़्तार कर लिया। पतरस को गिरिफ़्तार करने के बाद, हेरोदेस ने उन्हें क़ैदख़ाने में डलवा दिया, और निगहबानी के लिये पहरेदारों के चार दस्ते मुक़र्रर कर दिये। हर दस्ता चार-चार सिपाहियों पर मुश्तमिल था। हेरोदेस का इरादा था के ईद-ए-फ़सह के बाद वह आप को अवाम के सामने हाज़िर करेगा। पतरस तो सख़्त क़ैद में थे मगर सारी जमाअत आप के लिये ख़ुदा से दिल-ओ-जान से दुआ में मश्ग़ूल थी। हेरोदेस के आप को लोगों के सामने लाने से एक रात पहले, जब पतरस दो पहरेदारों के दरमियान ज़न्जीरों से जकड़े हुए पड़े सो रहे थे, और सिपाही क़ैदख़ाने के दरवाज़ा पर पहरा दे रहे थे। तो अचानक ख़ुदावन्द का एक फ़रिश्ता ज़ाहिर हुआ और सारी कोठरी मुनव्वर हो गई। फ़रिश्ते ने पतरस के एक तरफ़ मारा आप को जगाया। और कहा, “उठ, जल्दी कर” और ज़न्जीरें पतरस की कलाइयों में से खुल कर गिर गईं। फ़रिश्ते ने पतरस से कहा, “अपनी कमर बांध और जूती पहन ले।” पतरस ने ऐसा ही किया। फिर कहा, अपनी चोग़ा पहन ले और मेरे पीछे-पीछे चला आ। पतरस उस के पीछे-पीछे क़ैदख़ाने से बाहर निकल आये, लेकिन आप को मालूम न था के फ़रिश्ता जो कुछ कर रहा है वह हक़ीक़त है या वह कोई रोया देख रहे हैं। वह पहरे के पहले और फिर दूसरे हलक़े में से निकल कर बाहर आये और लोहे के फाटक के पास पहुंचे जो शहर की तरफ़ खुलता था। वह फाटक उन के लिये अपने आप ही खुल गया, और वह उस में से गुज़रे। बाहर निकल कर कूचे के आख़िर तक पहुंचे अचानक फ़रिश्ता पतरस को छोड़कर चला गया। पतरस के हवास दुरुस्त हुए तो वह कहने लगे, “अब मुझे पूरा यक़ीन हो गया के ख़ुदावन्द ने अपने फ़रिश्ते को भेज कर मुझे हेरोदेस के पंजा से छुड़ा लिया और यूं यहूदियों के इरादे को नाकाम कर दिया।” जब वह इस वाक़िया पर ग़ौर कर चुके तो मरियम के घर आये जो उन यूहन्ना की मां थीं जो मरक़ुस कहलाते थे, जहां बहुत से लोग जमा होकर दुआ कर रहे थे। पतरस ने बाहर का दरवाज़ा खटखटाया, तो एक कनीज़ जिस का नाम रूदी था दरवाज़ा खोलने आई। जब इस ने पतरस की आवाज़ पहचान ली तो इस क़दर ख़ुश हुई के दरवाज़ा खोले बग़ैर ही वापस दौड़ी आई और कहने लगी, “पतरस बाहर दरवाज़ा पर हैं!” “उन्होंने कहा, क्या तू पागल हो गई है,” लेकिन जब उस ने असरार किया के वह पतरस ही हैं तो वह कहने लगे, “पतरस का फ़रिश्ता होगा।” लेकिन पतरस बाहर दरवाज़ा खटखटाते रहे। जब उन्होंने आकर दरवाज़ा खोला, तो पतरस को देखकर हैरान रह गये। पतरस ने उन्हें हाथ से इशारा किया के ख़ामोश रहें और फिर अन्दर आकर सारा वाक़िया कह सुनाया के किस तरह ख़ुदावन्द ने उन्हें क़ैदख़ाने से बाहर निकाला। आप ने फ़रमाया, “याक़ूब और दूसरे मसीही भाईयों और बहनों को भी इस की ख़बर कर देना” और ख़ुद किसी दूसरी जगह के लिये रवाना हो गये। सुबह होते ही, सिपाहियों में हंगामा बरपा हुआ के पतरस के साथ क्या हुआ है। जब हेरोदेस ने आप की मुकम्मल तलाश की लेकिन न पाया तो इस ने पहरेदारों का मुआयना किया और हुक्म दिया के उन को सज़ा-ए-मौत दी जाये। तब हेरोदेस यहूदिया से क़ैसरिया गया और वहीं मुक़ीम रहा। हेरोदेस, सूर और सैदा के लोगों से बड़ा नाराज़ था, इसलिये सैदा के लोग मिल कर उस के पास आये और बादशाह के एक क़ाबिल एतमाद ज़ाती ख़ादिम बलस्तुस को अपना हामी बना कर बादशाह से सुलह की दरख़्वास्त की क्यूंके उन्हें बादशाह के मुल्क से रसद पहुंचती थी। लिहाज़ा हेरोदेस ने एक दिन मुक़र्रर किया, और अपना शाही लिबास पहन और तख़्त-ए-अदालत पर बैठ कर लोगों को एक अवामी ख़िताब किया। लोगों ने सुना तो पुकारने लगे, “ये इन्सान की नहीं बल्के कोई एक माबूद की आवाज़ है।” चूंके, हेरोदेस ने ख़ुदा की तम्जीद न की इसलिये इस पर इसी दम ख़ुदावन्द के फ़रिश्ते की ऐसी मार पड़ी के इस के जिस्म को कीड़े खा गये और वह मर गया। लेकिन ख़ुदा का कलाम तरक़्क़ी करता और फैलता चला गया। जब बरनबास और साऊल अपनी ख़िदमत को जो उन के सुपुर्द की गई थी पूरा कर चुके, तो यरूशलेम वापस हुए, और उन के साथ यूहन्ना को जो मरक़ुस कहलाते हैं, अपने साथ लेते आये। अन्ताकिया की जमाअत में कई नबी और उस्ताद थे: मसलन बरनबास, शमऊन काला, लूकीयुस कुरेनी, मनाहीम (जिस ने चौथाई मुल्क के हाकिम हेरोदेस के साथ परवरिश पाई थी) और साऊल। जब के वह रोज़े रखकर, ख़ुदावन्द की इबादत कर रहे थे तो पाक रूह ने कहा, “बरनबास और साऊल को इस ख़िदमत के लिये अलग कर दो जिस के लिये मैंने उन्हें बुलाया है।” चुनांचे उन्होंने रोज़ा रखा दुआ की, और उन पर हाथ रखकर उन्हें रवाना कर दिया। वह दोनों, जो पाक रूह की जानिब से भेजे गये थे, सलूकी पहुंचे और वहां से जहाज़ पर जज़ीरा साइप्रस चले गये। जब वह सलमीस पहुंचे, तो वहां यहूदी इबादतगाहों में ख़ुदा का कलाम सुनाने लगे। यूहन्ना उन के साथ ख़ादिम के तौर पर मौजूद थे। जब वह सारे जज़ीरे में घूम फिर चुके तो पाफ़ुस पहुंचे। वहां उन की मुलाक़ात एक यहूदी जादूगर और झूटे नबी से हुई जिस का नाम बरईसा था। जो एक हाकिम, सिरगियुस पौलुस का मुलाज़िम था। ये हाकिम एक दानिशमन्द शख़्स था, उस ने बरनबास और साऊल को बुला भेजा क्यूंके वह ख़ुदा का कलाम सुनाना चाहता था। लेकिन इलीमास जादूगर ने (उस के नाम का मतलब ही यही है) उन की मुख़ालफ़त की और हाकिम को ईमान लाने से रोकना चाहा। तब साऊल ने जिन का नाम पौलुस भी है पाक रूह से मामूर होकर उस पर गहरी नज़र डाली और फ़रमाया, “ऐ इब्लीस के फ़र्ज़न्द और तो हर उस चीज़ का दुश्मन है जो सही है! तू तमाम तरह की अय्यारी और मक्कारी से भरा हुआ है। क्या तू ख़ुदावन्द की सीधी राहों को बिगाड़ने से कभी नहीं बाज़ आयेगा? अब ख़ुदावन्द का हाथ तेरे ख़िलाफ़ उठा है। तो अन्धा हो जायेगा और कुछ अर्से तक सूरज को नहीं देख सकेगा।” उसी वक़्त कुहर और तारीकी ने इस पर ग़लबा पा लिया और वह इधर-उधर टटोलने लगा ताके कोई उस का हाथ पकड़ कर उसे ले चले। वह हाकिम ये माजरा देखकर और शागिर्दों से ख़ुदावन्द की तालीम सुन कर दंग रह गया और ख़ुदा पर ईमान ले आया। पाफ़ुस से पौलुस और उन के साथी जहाज़ के ज़रीये पम्फ़ीलिया के इलाक़े पिरगा, में पहुंचे जहां यूहन्ना ने उन्हें ख़ैरबाद कहा और यरूशलेम को वापस तशरीफ़ ले गये। और वह पिरगा से रवाना होकर पिसदिया के शहर अन्ताकिया में आये। सबत के दिन वह यहूदी इबादतगाह में दाख़िल हुए और जा बैठे। जब तौरेत और नबियों के सहीफ़ों में से तिलावत हो चुकी तो यहूदी इबादतगाह के क़ाइदीन ने उन को ये पैग़ाम भेजा, “भाईयो, अगर लोगों की हौसला अफ़्ज़ाई के लिये आप कुछ कहना चाहते हो तो बराह-ए-करम बयान कीजिये।” इस पर पौलुस ने खड़े होकर हाथ से इशारा करते हुए फ़रमाया: “ऐ बनी इस्राईल और ऐ ख़ुदा से डरने वाली ग़ैर-इस्राईलियो मेरी सुनो! उम्मत इस्राईल के ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद को चुन और जब वह मुल्क मिस्र में परदेसियों की तरह रहते थे, उन्हें ताक़त बख़्शी वह अपनी ताक़त के साथ उन को इस मुल्क से बाहर ले गया। फिर क़रीब चालीस बरस तक इस ने ब्याबान में उन के तर्ज़-ए-अमल को बर्दाश्त किया; और ख़ुदा ने कनान में सात ग़ैरयहूदी को ग़ारत कर के उन की सरज़मीं अपने लोगों को बतौर मीरास अता फ़रमाई। इन वाक़ियात को पेश आने में तक़रीबन चार सौ पचास बरस लग गये। “इस के बाद, ख़ुदा ने उन के लिये समुएल नबी के ज़माने तक क़ाज़ी मुक़र्रर किये। फिर लोगों ने बादशाह मुक़र्रर करने की दरख़्वास्त की और ख़ुदा ने क़ीस के बेटे साऊल को बादशाह मुक़र्रर किया, जो बिनयामीन के क़बीले से था, आप ने चालीस बरस तक हुकूमत की। फिर साऊल को माज़ूल करने के बाद ख़ुदा ने दाऊद को उन का बादशाह मुक़र्रर किया। ख़ुदा ने दाऊद के बारे में गवाही दी: ‘मुझे यस्सी का बेटा दाऊद मिल गया है, जो मेरा एक दिल पसन्द आदमी है; वोही मेरी तमाम ख़ाहिशात को पूरी करेगा।’ “ख़ुदा ने अपने वादे के मुताबिक़, दाऊद की नस्ल से एक मुनज्जी यानी हुज़ूर ईसा को इस्राईल के पास भेजा। हुज़ूर ईसा की आमद से क़ब्ल, यहया ने इस्राईल की सारी उम्मत को तब्लीग़ की के तौबा करो और पाक-ग़ुस्ल लो। जब यहया की ख़िदमत की मुद्दत पूरी होने को थी, तो आप ने फ़रमाया: ‘तुम मुझे क्या समझते हो? मैं वह नहीं हूं जो तुम देखते हो। लेकिन एक शख़्स है जो मेरे बाद आने वाला है और मैं इस लाइक़ भी नहीं के उन के जूतों के तस्मे भी खोल सकूं।’ “ऐ साथियो” फ़र्ज़दाने इब्राहीम और ख़ुदा से डरने वाले ग़ैर-इस्राईलियो, इस नजात के कलाम को हमारे पास भेजा गया है। अहले यरूशलेम ने और उस के हुक्काम ने हुज़ूर ईसा को नहीं पहचाना, फिर भी सज़ा-ए-मौत का फ़त्वा दे कर उन्होंने अम्बिया की उन बातों को पूरा कर दिया जो हर सबत को पढ़ कर सुनाई जाती हैं। अगरचे वह उन्हें मौत की सज़ा के लाइक़ साबित न कर सके, फिर भी उन्होंने पीलातुस से दरख़्वास्त की के उन्हें क़त्ल किया जाये। और जब उन्होंने सब कुछ जो हुज़ूर ईसा के बारे में लिख्खा हुआ था, पूरा कर दिया तो उन्हें सलीब पर से उतार कर एक क़ब्र में रख दिया। लेकिन ख़ुदा ने उसे मुर्दों में से ज़िन्दा कर दिया, और जो लोग गलील से आप के साथ यरूशलेम आये थे, वह उन्हें कई दिनों तक नज़र आते रहे। अब वोही उम्मत के लिये हुज़ूर अक़्दस ईसा के गवाह हैं। “हम तुम्हें वह ख़ुशख़बरी सुनाते हैं: जिस का वादा ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद के साथ किया था ख़ुदा ने अपनी औलाद, यानी हमारे लिये हुज़ूर ईसा को फिर से ज़िन्दा कर के अपने वादे को पूरा कर दिया। चुनांचे ज़बूर पाक के दूसरे बाब में लिखा है: “ ‘तू मेरा बेटा है; आज से मैं तेरा बाप बन गया हूं।’ ” ये हक़ीक़त के ख़ुदा ने आप को मुर्दों में से जिला दिया ताके वह फिर कभी न मरें। ख़ुदा के कलाम में यूं बयान किया गया है, “ ‘मैं तुम्हें पाक और सच्ची नेमतें बख़्शूंगा जिन का वादा मैंने हज़रत दाऊद से किया था।’ ” एक और ज़बूर में हज़रत दाऊद फ़रमाते हैं: “ ‘ख़ुदा अपने मुक़द्दस के जिस्म के सड़ने की नौबत ही न आने देगा।’ “जब के दाऊद अपनी पुश्त में ख़ुदा के मक़सद पूरा करने के बाद, मौत की नींद सो गये; अपने आबा-ओ-अज्दाद के साथ दफ़न हुए और आप का जिस्म सड़ गया। लेकिन जिसे ख़ुदा ने मुर्दों में से जी उठाया उन के सड़ने की नौबत तक न आई। “पस ऐ अज़ीज़ों, जान लो के हुज़ूर ईसा के वसीले से ही तुम्हें गुनाहों की मुआफ़ी की मुनादी की जाती है। हज़रत मूसा की शरीअत के बाइस जिन बातों से तुम बरी नहीं हो सकते थे, उन सब से हर एक ईमान लाने वाला उस के वसीले से बरी होता है। बाख़बर रहो, ऐसा न हो के नबियों की ये बात तुम पर सादिक़ आये: “ ‘देखो, तुम जो दूसरों की तहक़ीर करते हो, तअज्जुब करो और नेस्त हो जाओ, क्यूंके मैं तुम्हारे दिनों में एक ऐसा काम करने पर हूं के अगर कोई उस का ज़िक्र तुम से करे भी, तो तुम हरगिज़ यक़ीन न करोगे।’ ” जब पौलुस और बरनबास यहूदी इबादतगाह से निकल कर जाने लगे, तो लोग उन से दरख़्वास्त करने लगे के अगले सबत को भी इन ही बातों का ज़िक्र किया जाये। जब मज्लिस बरख़ास्त हुई, तो बहुत से यहूदी और कई नौ मुरीद पौलुस और बरनबास के पीछे हो लिये, रसूलों ने उन से मज़ीद गुफ़्तगू की और उन्हें ख़ुदा के फ़ज़ल में बढ़ते चले जाने की तरग़ीब दी। अगले सबत को तक़रीबन सारा शहर ख़ुदावन्द का कलाम सुनने के लिये जमा हो गया। जब यहूदियों ने इतने बड़े हुजूम को देखा, तो बुग़ज़ से भर गये। यहूदी पौलुस की बातों की मुख़ालफ़त करने और आप से बदसुलूकी करने लगे। लिहाज़ा पौलुस और बरनबास ने दिलेरी से उन्हें जवाब में फ़रमाया: “लाज़िम था के हम पहले तुम्हें ख़ुदा का कलाम सुनाते। जब के तुम उसे मुस्तरद कर रहे हो और अपने आप को अब्दी ज़िन्दगी के लाइक़ नहीं समझते हो, तो देखो हम ग़ैरयहूदियों की तरफ़ रुजू करते हैं। क्यूंके ख़ुदावन्द ने हमें ये हुक्म दिया है: “ ‘मैंने तुझे ग़ैरयहूदियों के लिये नूर मुक़र्रर किया है, ताके तू ज़मीन की इन्तिहा तक नजात पहुंचाने का बाइस बने।’ ” जब ग़ैरयहूदियों ने ये सुना तो बहुत ख़ुश हुए और ख़ुदावन्द के कलाम की तम्जीद करने लगे; और जिन्हें ख़ुदा ने अब्दी ज़िन्दगी के लिये चुन रख्खा था, वह ईमान ले लाये। और ख़ुदावन्द का कलाम इस सारे इलाक़े में फैल गया। लेकिन यहूदी रहनुमाओं ने बाज़ ख़ुदा की अक़ीदतमन्द औरतों और शहर के दबदबे वाले मर्दों को उकसाया और उन्होंने पौलुस और बरनबास के ख़िलाफ़ ज़ुल्म-ओ-सितम बरपा किया, और उन्हें अपनी रियासत से बेदख़ल कर दिया। पौलुस और बरनबास ने एहतिजाज के तौर पर अपने पांव की गर्द भी झाड़ दी और वहां से इकुनियुम को चले गये। मगर शागिर्द बड़ी ख़ुशी और पाक रूह से भरे हुए थे। इकुनियुम में भी पौलुस और बरनबास एक साथ यहूदी इबादतगाह में गये और ऐसी तक़रीर की के यहूदी और यूनानी की बड़ी तादाद ईमान ले आई। लेकिन जो यहूदी कलाम के मुख़ालिफ़ थे उन्होंने ग़ैरयहूदियों को भड़काया और उन्हें भाईयों की जानिब से बदगुमान कर दिया। तो भी पौलुस और बरनबास ने वहां काफ़ी वक़्त गुज़ारा और दिलेरी के साथ ख़ुदावन्द के बारे में तालीम दी और ख़ुदा उन अज़ीम मोजिज़ों और अजीब-ओ-ग़रीब कामों के ज़रीये जो उन के हाथों अन्जाम पाते थे, अपने फ़ज़ल के कलाम को बरहक़ साबित करता रहा। शहर के लोगों में तफ़्रिक़ा पड़ गया। बाज़ यहूदियों के साथ और बाज़ रसूलों के साथ खड़े थे। यहूदी और ग़ैरयहूदी अपने रहनुमाओं के साथ मिल कर रसूलों को सताने और उन्हें संगसार करने की मुहिम शुरू करने वाले थे। के उन्हें इस बात का पता चल गया और वह वहां से भाग कर लुकाउनिया के शहर लुस्तरा और दरबे और आस-पास के क़स्बों में चले गये और वहां ख़ुशख़बरी सुनाने में लग गये। लुस्तरा में एक लूला आदमी बैठा हुआ था। वह पैदाइश से ही लूला था और कभी नहीं चला था वह पौलुस की बातों को ग़ौर से सुन रहा था। पौलुस ने मुतवज्जेह होकर उसे देखा तो जान लिया के इस में इतना ईमान है के वह शिफ़ा पा सके। आप ने ज़ोर से चिल्ला कर हुक्म दिया, “अपने पांव पर सीधा खड़े हो जा!” वह फ़ौरन, उछल कर खड़ा हुआ और चलने फिरने लगा। जब लोगों ने पौलुस का ये काम देखा तो वह लुकाउनिया की ज़बान में चिल्लाने लगे, “माबूद इन्सानी शक्ल में हमारे पास उतर आये हैं!” उन्होंने बरनबास को ज़ीऊस का, और पौलुस को हरमेस का नाम दिया क्यूंके आप तक़रीर करने में ज़्यादा माहिर थे। ज़ीऊस का मुजाविर जिस का बुतख़ाने शहर के बिलकुल सामने था, उस का मुजाविर बैल और फूलों के हार ले कर शहर के दरवाज़ों पर पहुंचा क्यूंके वह और शहर के लोग चाहते थे के रसूलों के लिये क़ुर्बानियां चढ़ाईं। जब रसूलों यानी पौलुस और बरनबास ने ये सुना तो वह अपने कपड़े फाड़ कर हुजूम में जा घुसे और चीख़-चीख़ कर कहने लगे: “अज़ीज़ों, तुम ये क्या कर रहे हो? हम भी तुम्हारी ही तरह, फ़क़त इन्सान ही हैं। हम तुम्हारे वास्ते ख़ुशख़बरी लाये हैं, ताके तुम इन फ़ुज़ूल चीज़ों को छोड़कर ज़िन्दा ख़ुदा की तरफ़ रुजू करो जिस ने आसमानों और ज़मीन और समुन्दर को और जो कुछ उन में मौजूद हर चीज़ को पैदा किया है। इस ने पिछले ज़माने में, सारी क़ौमों को, अपनी-अपनी राह पर चलने दिया तो भी इस ने अपने आप को बेगवाह नहीं छोड़ा: इस ने अपनी शफ़क़त को ज़ाहिर करने के लिये आसमान से बारिश बरसाई और फसलों के लिये मौसम अता किये; तुम्हें कसरत से ख़ुराक़ बख़्शी और तुम्हारे दिलों को ख़ुशी से भर दिया।” इतना कहने के बावुजूद भी उन्हें हुजूम को क़ुर्बानी करने से रोकने में दुश्वारी का सामना करना पड़ा। जब कुछ यहूदी अन्ताकिया से इकुनियुम में आये उन्होंने हुजूम को अपनी तरफ़ कर लिया। वह पौलुस पर पथराओ करने लगे और आप को शहर के बाहर घसीट ले गये, उन का ख़्याल था के आप फ़ौत हो गये। जब शागिर्द वहां पहुंचे और आप को घेरे में ले लिया तो पौलुस उठे और वापस शहर में आये और अगले दिन बरनबास के साथ दरबे तशरीफ़ ले गये। उन्होंने शहर में ख़ुशख़बरी सुनाई और कसरत से शागिर्द बनाये। इस के बाद वह लुस्तरा, इकुनियुम और अन्ताकिया लौट गये। वह शागिर्दों की हौसला अफ़्ज़ाई करते और उन्हें नसीहत देते थे के अपने ईमान पर मज़बूती से क़ाइम रहो और फ़रमाते थे, “हमें ख़ुदा की बादशाही में दाख़िल होने के लिये बहुत सी मुसीबतों का सामना करना लाज़िम है।” पौलुस और बरनबास ने हर जमाअत में उन के लिये बुज़ुर्ग मुक़र्रर किये और रोज़ा रखकर दुआएं कीं, और उन्हें ख़ुदावन्द के सुपुर्द किया, जिस पर वह ईमान लाये थे। फिर वह पिसदिया से होते हुए पम्फ़ीलिया के इलाक़े में आये और जब पिरगा में ख़ुशख़बरी सुना चुके तो अत्तलिया की तरफ़ चले गये। वहां से जहाज़ पर सवार होकर वापस अन्ताकिया गये जहां उन्हें इस ख़िदमत के लिये जो उन्होंने अब पूरी कर ली थी ख़ुदा के फ़ज़ल के सुपुर्द किया गया था। अन्ताकिया पहुंच कर उन्होंने जमाअत को जमा किया और जो कुछ ख़ुदा ने उन के ज़रीये किया था उसे उन के सामने बयान किया और यहां तक के ख़ुदा ने किस तरह ग़ैरयहूदियों के लिये भी ईमान का दरवाज़ा खोल दिया। और वह वहां शागिर्दों के पास काफ़ी अर्से तक मुक़ीम रहे। बाज़ लोग यहूदिया से अन्ताकिया पहुंचे और भाईयों को ये तालीम देने लगे: “अगर हज़रत मूसा की राइज की हुई रस्म के मुताबिक़ तुम्हारा ख़तना नहीं हुआ, तो तुम नजात नहीं पा सकते।” इस पर पौलुस और बरनबास की उन लोगों से सख़्त बहस-ओ-तकरार हुई। चुनांचे जमाअत ने पौलुस और बरनबास, और बाज़ दिगर अश्ख़ास को इस ग़रज़ से मुक़र्रर किया के वह यरूशलेम जायें और वहां इस मसले पर रसूलों और बुज़ुर्गों से बात करें। तब जमाअत ने उन्हें रवाना किया, और जब वह फ़ीनिके और सामरिया के इलाक़ों से गुज़र रहे थे, तो उन्होंने वहां के मसीही भाईयों को बताया के किस तरह ग़ैरयहूदी भी अलमसीह पर ईमान लाये और जमाअत में शामिल हो गये। ये ख़बर सुन कर सारे भाई निहायत ख़ुश हुए जब वह यरूशलेम आये तो जमाअत, रसूलों और बुज़ुर्गों ने उन का ख़ैर-मक़्दम किया, तब उन्होंने सब कुछ बयान किया के ख़ुदा ने उन के ज़रीये क्या-क्या काम अन्जाम दिये। फ़रीसियों के फ़िर्क़ा के बाज़ लोग जो ईमान ला चुके थे खड़े होकर कहने लगे, “ग़ैरयहूदी में से ईमान लाने वालों का ख़तना किया जाये और उन्हें हज़रत मूसा की शरीअत पर अमल करने का हुक्म दिया जाये।” लिहाज़ा रसूल और बुज़ुर्ग इस बात पर ग़ौर करने के लिये जमा हुए। काफ़ी बहस-ओ-तकरार के बाद, पतरस ने खड़े होकर उन्हें यूं मुख़ातिब किया: “ऐ भाईयो, तुम जानते हो के बहुत अर्से पहले ख़ुदा ने तुम लोगों में से मुझे चुन ताके ग़ैरयहूदी भी मेरी ज़बान से ख़ुशख़बरी का कलाम सुनें और ईमान लायें। ख़ुदा, जो दिल का हाल जानता है, उस ने हमारी तरह उन्हें भी पाक रूह दिया और गवाही दे कर ज़ाहिर कर दिया, के वह भी उस की नज़र में मक़्बूल ठहरे हैं। ख़ुदा ने हम में और उन में कोई इम्तियाज़ नहीं किया क्यूंके उन के ईमान लाने के बाइस उस ने उन के दिल भी पाक किये। तो अब तुम ख़ुदा को आज़माने के लिये मसीही शागिर्दों की गर्दन पर ऐसा जूआ क्यूं रखते हो जिसे हम ही उठा सके और न हमारे आबा-ओ-अज्दाद बर्दाश्त कर सके? हालांके! हमारा ईमान तो ये है के ख़ुदावन्द ईसा के फ़ज़ल की बदौलत जिस तरह वह नजात पायेंगे, इसी तरह हम भी पायेंगे।” सारी जमाअत पर ख़ामोशी छा गई और लोग बरनबास और पौलुस का बयान सुनने लगे के ख़ुदा ने उन के ज़रीये ग़ैरयहूदी में कैसे-कैसे मोजिज़े और अजीब निशान दिखाये। जब उन की बातें ख़त्म हुईं, तो याक़ूब ने बयान किया। “ऐ भाईयो,” आप ने मज़ीद फ़रमाया, “मेरी बात सुनो।” शमऊन तुम्हें बयान कर चुका है के पहले किस तरह ख़ुदा ग़ैरयहूदियों पर ज़ाहिर हुआ ताके उन में से लोगों को चुन कर अपने नाम की एक उम्मत बना ले। नबियों का कलाम भी इस के मुताबिक़ है, जैसा के लिखा है: “ ‘इस के बाद में फिर आऊंगा और दाऊद के गिरे हुए ख़ेमे को खड़ा करूंगा। उस के फटे टूटे की मरम्मत कर के, उसे फिर से तामीर करूंगा, ताके बाक़ी इन्सान ख़ुदावन्द की तलाश करें, ताके बाक़ी लोग यानी सब ग़ैरयहूदी जो ख़ुदावन्द के नाम के कहलाते हैं, वोही ख़ुदावन्द जो ये काम करेगा ये उसी ख़ुदा का क़ौल है’ जिसे अज़ल से अपनी कारीगरी का इल्म है। “इसलिये मेरी राय ये है के हम उन ग़ैरयहूदियों को तकलीफ़ में न डालें जो ख़ुदा की तरफ़ रुजू हो रहे हैं। बल्के उन्हें ख़त लिख कर ये बतायें के वह बुतों को नज़्र चढ़ाई हुई चीज़ों और जिन्सी बदफ़ेली से बचें और गला घोंटे हुए जानवरों के गोश्त से और उन के ख़ून परहेज़ करें। इसलिये के हर शहर में क़दीम ज़माने से हज़रत मूसा के हुक्मों की मुनादी की गई है और वह यहूदी इबादतगाहों में हर सबत को पढ़ कर सुनाये भी जाते हैं।” तब रसूलों और बुज़ुर्गों और सारी जमाअत ने मिल कर मुनासिब समझा के अपने में से चंद आदमियों को चुन कर उन्हें पौलुस और बरनबास के साथ अन्ताकिया रवाना किया जाये यानी यहूदाह को जो बरसब्बा कहलाता है और सीलास को जो भाईयों में मुक़द्दम थे। उन के हाथ यह ख़त रवाना किया जो यह है: रसूलों और बुज़ुर्ग भाईयों की जानिब से, अन्ताकिया, सीरिया और किलकिया के ग़ैरयहूदी मसीही भाईयों को सलाम पहुंचे। हम ने सुना है के बाज़ लोग हम से इख़्तियार लिये बग़ैर तुम्हारे यहां गये और उन्होंने अपनी बातों से तुम्हारे दिलों को परेशानी में मुब्तिला कर दिया। इसलिये हम ने मिल कर मुनासिब जाना के यहां से दो आदमियों को चुन कर अपने अज़ीज़ों पौलुस और बरनबास के हमराह तुम्हारे पास भेजा जाये। ये ऐसे आदमी हैं के जिन्हें हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम की ख़ातिर अपनी जानों तक की परवाह नहीं। लिहाज़ा हम ने यहूदाह और सीलास को भेजा है और वह ये बातें ज़बानी तौर पर भी बयान करेंगे। पाक रूह ने और हम ने मुनासिब समझा के इन ज़रूरी बातों के अलावा तुम पर कोई और बोझ न लादीं। पस तुम बुतों को नज़्र चढ़ाई हुई चीज़ों से, ख़ून से, गला घोंटे हुए जानवरों के गोश्त से परहेज़ करो और जिन्सी बदफ़ेली से अपने आप को बचाये रखो। इन चीज़ों से दूर रहना तुम्हारे लिये बेहतर होगा। वस्सलाम। पस वह आदमी रुख़्सत होकर अन्ताकिया पहुंचे जहां उन्होंने जमाअत को जमा कर के ये ख़त उन के हवाले कर दिया। वह ख़त में लिख्खी हुई नसीहतों को पढ़ कर ख़ुश हुए। यहूदाह और सीलास ख़ुद भी नबी थे। उन्होंने वहां के ईमान वालों को नसीहतें कीं और उन के ईमान को मज़बूत किया। कुछ दिनों बाद भाईयों ने उन्हें सलामती की दुआ के साथ रुख़्सत किया ताके वह अपने भेजने वालों के पास लौट जायें। सीलास को वहीं ठहरे रहना अच्छा लगा। मगर पौलुस और बरनबास अन्ताकिया ही में रुक गये जहां वह और कई दूसरे लोग मिल-जुल कर तालीम देते और ख़ुदावन्द के कलाम की तब्लीग़ करते रहे। कुछ अर्से बाद पौलुस ने बरनबास से फ़रमाया, “आओ हम उन सारे शहरों में वापस जायें जहां हम ने ख़ुदावन्द के कलाम की मुनादी की थी और भाईयों से मुलाक़ात करें और देखें के उन का क्या हाल है।” बरनबास की मर्ज़ी थी के यूहन्ना, को जो मरक़ुस कहलाते हैं, साथ ले जाना चाहते थे, लेकिन पौलुस ने मुनासिब न समझा के यूहन्ना उन के साथ जाये क्यूंके वह पम्फ़ीलिया में काम छोड़कर उन से अलग हो गया था। इस पर उन दोनों में इस क़दर सख़्त इन बन हुई के वह एक दूसरे से अलैहदा हो गये। बरनबास तो मरक़ुस को ले कर जहाज़ से जज़ीरा साइप्रस चला गया और पौलुस ने सीलास को साथ ले लिया और भाईयों ने उन्हें दुआओं के साथ ख़ुदावन्द के फ़ज़ल के सुपुर्द किया और वह वहां से चल दिये। पौलुस, सीरिया और किलकिया से होते हुए जमाअतों को मज़बूत करते गये। वह दरबे और फिर लुस्तरा पहुंचे जहां एक तिमुथियुस नामी शागिर्द रहता था जिस की मां यहूदी मसीही शागिर्द थी लेकिन बाप यूनानी था। तिमुथियुस, लुस्तरा और इकुनियुम के मसीही भाईयों में नेकनाम था। पौलुस उसे सफ़र पर अपने साथ ले जाना चाहते थे इसलिये उन्होंने तिमुथियुस का ख़तना किया क्यूंके उस इलाक़े के सारे यहूदी जानते थे के उस का बाप यूनानी है। वह जिन शहरों से गुज़रे वहां के लोगों को उन अहकाम के बारे में बताते गये जो यरूशलेम में रसूलों ने और बुज़ुर्गों ने मिल कर जारी किये थे ताके लोग उन पर अमल करें। पस जमाअतें ईमान में मज़बूत होती गईं और रोज़-ब-रोज़ उन का शुमार बढ़ता चला गया। पौलुस और उन के साथी फ़रूगिया और गलतिया के इलाक़े में से होकर गुज़रे क्यूंके पाक रूह ने उन्हें आसिया में कलाम सुनाने से रोक दिया था। जब वह मौसिया की सरहद पर पहुंचे तो उन्होंने बितूनिया में दाख़िल होना चाहा लेकिन हुज़ूर ईसा अलमसीह की रूह ने उन्हें जाने न दिया। लिहाज़ा वह मौसिया के पास से गुज़रे और त्रोआस के क़स्बा में चले गये। रात को पौलुस ने एक आदमी को रोया में देखा। वह मकिदुनिया का था और खड़ा हुआ पौलुस से इल्तिजा कर रहा था, “उस पार मकिदुनिया में आ और हमारी मदद कर।” पौलुस की इस रोया के बाद हम लोग फ़ौरन मकिदुनिया जाने के लिये तय्यार हो गये क्यूंके हम ने ये नतीजा निकाला के ख़ुदा ने हमें वहां के लोगों में तब्लीग़ करने के लिये बुलाया है। त्रोआस से हम जहाज़ पर रवाना हुए और समुत्राके जज़ीरा में आये और वहां से अगले दिन नियापुलिस शहर पहुंच गये। वहां से हम फ़िलिप्पी शहर रवाना हुए जो रोमियों की बस्ती और सूबे मकिदुनिया के इलाक़े का सद्र मक़ाम है। वहां हम कुछ दिनों तक रहे। सबत के दिन हम शहर के फाटक से निकल कर दरिया पर पहुंचे क्यूंके हमें उम्मीद थी के वहां पर ज़रूर कोई दुआ करने की जगह होगी। हम वहां जा कर बैठ गये और कुछ औरतें जो वहां जमा हो गई थीं, उन से कलाम करने लगे। हमारी बातें सुनने वाली औरतों में लुदिया नाम की एक औरत थी। वह थुआतीरा शहर की थी और क़िरमिज़ी रंग वाले कपड़े का कारोबार करती थी और बड़ी ख़ुदापरस्त थी। ख़ुदावन्द ने इस का कुशादा दिल किया के पौलुस का पैग़ाम सुने और उसे क़बूल करे। चुनांचे जब वह और उस के ख़ानदान के लोग पाक-ग़ुस्ल ले चुके तो उस ने हम से कहा, “अगर तुम लोग मुझे ख़ुदावन्द की मोमिन बन्दी समझते हो, तो चलो और मेरे घर में क़ियाम करो।” उस की इल्तिजा सुन कर हम राज़ी हो गये। एक मर्तबा जब हम दुआ के मक़ाम की तरफ़ जा रहे थे तो हमें एक कनीज़ मिली जिस में एक ग़ैबदान रूह थी। वह आइन्दा का हाल बता कर अपने आक़ाओं के लिये बहुत कुछ कमाती थी। इस लड़की ने पौलुस का और हमारा पीछा करना शुरू कर दिया और चला चिल्ला कर कहने लगी, “ये लोग ख़ुदा तआला, के ख़ादिम हैं जो तुम्हें नजात का रास्ता बताते हैं।” वह कई दिनों तक ऐसा ही करती रही। बिलआख़िर पौलुस इस क़दर तंग आ गये के उन्होंने मुड़ कर उस रूह से कहा, “मैं तुझे हुज़ूर ईसा अलमसीह के नाम से हुक्म देता हूं के इस में से निकल जा!” और उसी घड़ी वह रूह उस लड़की में से निकल गई। जब उस के आक़ाओं ने देखा के उन की कमाई की उम्मीद जाती रही तो वह पौलुस और सीलास को पकड़ कर शहर के चौक में हुक्काम के पास ले गये। उन्होंने पौलुस और सीलास को कचहरी में पेश किया और कहा, “ये लोग यहूदी हैं और हमारे शहर में बड़ी खलबली मचा रहे हैं और ऐसी रस्मों की तालीम देते हैं जिन का मानना या उन पर अमल करना हम रोमियों को हरगिज़ जायज़ नहीं।” ये सुन कर अवाम भी उन के साथ मिल गये और पौलुस और सीलास की मुख़ालफ़त पर उतर आये, इस पर अदालत के हुक्म ने उन की पोशाक फाड़ कर उन्हें नंगा करवा कर पिटवाने का हुक्म दिया। चुनांचे सिपाहियों ने उन्हें ख़ूब बेत लगाये और क़ैदख़ाने में डाल दिया। क़ैदख़ाने के दारोग़ा को हुक्म दिया गया के उन की पूरी निगहबानी करे। ये हुक्म पा कर दारोग़ा ने उन्हें एक काल कोठरी में बन्द कर दिया और उन के पैरों को लकड़ी में ठोंक दिया। आधी रात के क़रीब जब पौलुस और सीलास दुआ में मश्ग़ूल थे और ख़ुदा की हम्द-ओ-सना कर रहे थे और दूसरे क़ैदी सुन रहे थे। के अचानक एक बड़ा भूंचाल आया जिस से क़ैदख़ाने की बुनियाद हिल गई। और फ़ौरन दरवाज़े खुल गये और सब क़ैदियों की ज़न्जीरें भी खुल गईं। दारोग़ा जाग उठा और जब इस ने क़ैदख़ाने के दरवाज़े खुले देखे तो ख़्याल किया के सारे क़ैदी क़ैदख़ाने से निकल भागे हैं। इस ने अपनी तलवार खींची और चाहता था के अपने आप को मार डाले लेकिन पौलुस ने चिल्ला कर कहा, “अपने आप को नुक़्सान न पहुंचा क्यूंके हम सब यहां मौजूद हैं!” दारोग़ा ने चिराग़ मंगवाया और अन्दर दौड़ कर गया और कांपता हुआ पौलुस और सीलास के सामने सज्दा में गिर पड़ा। फिर उन्हें बाहर लाया और कहने लगा: “साहिबो! मैं क्या करूं के नजात पा सकूं?” उन्होंने जवाब दिया: “ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह पर ईमान लाईं तो आप और आप का सारा ख़ानदान नजात पायेगा।” तब उन्होंने दारोग़ा और उन के घर वालों को ख़ुदावन्द का कलाम सुनाया। उसी वक़्त रात को दारोग़ा उन्हें ले गया, उन के ज़ख़्म धोए और फ़ौरन उन्होंने और उन के सारे घर वालों ने पाक-ग़ुस्ल लिया। फिर दारोग़ा उन्हें ऊपर घर में ले गया और उन के खाने के लिये दस्तरख़्वान बिछाया; और अपने सारे घर वालों समेत ख़ुदा पर ईमान लाकर बड़े ख़ुश हुए। जब सुबह हुई तो रोमी अदालत के हुक्म ने अपने सिपाहियों को क़ैदख़ाने के दारोग़ा के पास ये हुक्म दे कर भेजा: “उन आदमियों को रिहा कर दे।” चुनांचे दारोग़ा ने पौलुस से कहा, “अदालत के हुक्म ने हुक्म भेजा है के तुझे और सीलास को रिहा किया जाये। लिहाज़ा अब तुम निकल कर। सलामत चले जाओ।” लेकिन पौलुस ने सिपाहियों से कहा: “उन्होंने हमारा क़ुसूर साबित किये बग़ैर हमें सब के सामने मारा पीटा और क़ैदख़ाने में डाल दिया हालांके हम रोमी शहरी हैं, क्या अब वह हमें चुपके से छोड़ देना चाहते हैं? नहीं! ऐसा नहीं हो सकता। बल्के वह ख़ुद यहां आयें और हमें क़ैदख़ाने से बाहर ले आयें।” सिपाहियों ने जा कर अदालत के हुक्काम को इन बातों की ख़बर दी और जब उन्होंने सुना के पौलुस और सीलास रोमी शहरी हैं, तो बहुत घबराये। और वहां आकर उन्हें मनाने लगे और फिर उन्हें क़ैदख़ाने से बाहर लाये और दरख़्वास्त की के शहर से चले जायें। पस पौलुस और सीलास क़ैदख़ाने से बाहर निकले, और लुदिया के यहां गये, जहां वह फ़िलिप्पी के मसीही भाईयों से मिले और उन्हें तसल्ली दे कर वहां से रवाना हो गये। इस के बाद पौलुस और सीलास, अम्फ़िपुलिस और अपुल्लोनिया के शहरों से होते हुए, थिसलुनीके शहर में आये, जहां की एक यहूदी इबादतगाह थी। पौलुस अपने दस्तूर के मुताबिक़, यहूदी इबादतगाह में गये, और तीन सबत तक किताब-ए-मुक़द्दस से उन के साथ बहस की। वह उस का मतलब वाज़ेह करते और दलीलों से साबित करते थे के अलमसीह का दुख उठाना और मुर्दों में से जी उठना लाज़िमी था, “और ये के जिस हुज़ूर ईसा की मुनादी वह करते हैं वोही अलमसीह हैं।” बाज़ यहूदी इस तालीम से मुतास्सिर होकर पौलुस और सीलास से आ मिले और इसी तरह बहुत सी ख़ुदापरस्त यूनानी और कई शरीफ़ औरतें भी उन के शरीक हो गईं। लेकिन दिगर यहूदियों ने जलन की वजह से; बाज़ बदमाशों को बाज़ारी लोगों में से चुन कर हुजूम जमा कर लिया, और शहर में बुलवा शुरू कर दिया। उन्होंने यासोन के घर पर हिला बोल दिया ताके पौलुस और सीलास को ढूंड कर हुजूम के सामने ले आयें। लेकिन जब वह उन्हें न पा सके तो यासोन और कई दूसरे मसीही भाईयों को घसीट कर शहर के हाकिम के पास ले गये, और चिल्लाने लगे: “ये आदमी जिन्होंने सारी दुनिया को उलट पलट कर दिया है अब यहां भी आ पहुंचे हैं, और यासोन ने उन्हें अपने घर में ठहराया है। ये लोग क़ैसर के अहकाम की ख़िलाफ़वर्ज़ी करते हैं और कहते हैं के बादशाह तो कोई और ही है, यानी ईसा।” ये बात सुन कर अवाम और हुक्काम शहर तिलमिला गये और उन्होंने यासोन और बाक़ी मसीही लोगों को ज़मानत पर छोड़ दिया। रात होते ही, मसीही मोमिनीन ने पौलुस और सीलास को वहां से फ़ौरन बिरिया रवाना कर दिया। जब वह वहां पहुंचे, तो यहूदी इबादतगाह में गये। बिरिया के यहूदी लोग थिसलुनीके के लोगों से ज़्यादा शरीफ़ साबित हुए, इसलिये के उन्होंने किताब-ए-मुक़द्दस को बड़े शौक़ से क़बूल किया। वह हर रात पाक नविश्तों की तहक़ीक़ करते थे ताके देखें के पौलुस की बातें बरहक़ हैं या नहीं। आख़िरकार कई यहूदी और साथ ही, बहुत से मुअज़्ज़ज़ यूनानी मर्द और औरतें भी ईमान लाये। जब थिसलुनीके के यहूदियों को मालूम हुआ के पौलुस बिरिया में ख़ुदा के कलाम की मुनादी कर रहे हैं, तो वह वहां भी आ पहुंचे और लोगों को हंगामा बरपा करने पर उकसाने लगे। इस पर भाईयों ने फ़ौरन पौलुस को साहिल समुन्दर की तरफ़ रवाना कर दिया, लेकिन सीलास और तिमुथियुस बिरिया ही में ठहरे रहे। जो लोग पौलुस की रहबरी कर रहे थे वह उन्हें अथेने में छोड़कर इस हुक्म के साथ वापस हुए के सीलास और तिमुथियुस जल्द से जल्द पौलुस के पास पहुंच जायें। जब पौलुस अथेने में उन का इन्तिज़ार कर रहे थे तो ये देखकर के सारा शहर बुतों से भरा पड़ा है, उन का दिल बड़ा रंजीदा हुआ। चुनांचे वह यहूदी इबादतगाह में यहूदियों और ख़ुदापरस्त यूनानियों से बहस किया करते थे और उन से भी जो पौलुस को हर रोज़ चौक में मिलते थे। बाज़ इपकोरी और स्तोइकी फ़लसफ़ी उन से बहस में उलझ गये। उन में से बाज़ ने कहा, “ये बकवासी क्या कहना चाहता है?” चूंके पौलुस, हुज़ूर ईसा अलमसीह और क़ियामत की बिशारत देते थे इसलिये बाज़ ये कहने लगे, “ये तो अजनबी माबूदों की तब्लीग़ करने वाला मालूम होता है।” तब वह पौलुस को अपने साथ अरियूपगुस पर ले गये, और वहां उन से कहने लगे, “क्या हम जान सकते हैं के ये नई तालीम जो तू देता फिरता है, क्या है? हम तेरे मुंह से बड़ी अजीब-ओ-ग़रीब नज़रीयात सुन रहे हैं। हम ये जानना चाहते हैं के इन का क्या मतलब है?” (असल में अथेने वाले क्या देसी क्या परदेसी, अपनी फ़ुर्सत का सारा वक़्त किसी और काम की बजाय सिर्फ़ नई-नई बातें सुनने या सुनाने में गुज़ारा करते थे।) लिहाज़ा पौलुस अरियूपगुस के बीच में खड़े हो गये और फ़रमाया: “ऐ अथेने वालो! मैं देखता हूं के तुम हर बात में बड़ी मज़हबियत दिखाते हो। क्यूंके जब मैं तुम्हारे शहर में घूम फिर रहा था तो मेरी नज़र तुम्हारी इबादत की चीज़ों पर पड़ी, और मेरी नज़र क़ुर्बानगाह पर भी पड़ी। जिस पर ये लिखा हुआ है: एक नामालूम ख़ुदा के लिये। पस तुम जिसे बग़ैर जानते पूजते हो, मैं तुम्हें उसी की ख़बर देता हूं। “जिस ख़ुदा ने दुनिया और इस की सारी चीज़ों को पैदा किया है वह आसमान और ज़मीन का मालिक है। वह हाथ की बनाई हुई यहूदी इबादतगाहों में नहीं रहता। वह इन्सान के हाथों से ख़िदमत नहीं लेता क्यूंके वह किसी चीज़ का मोहताज नहीं। वह तो सारे इन्सानों को ज़िन्दगी, सांस और सब कुछ देता है। ख़ुदा ने आदम को बनाया और उस एक से लोगों की हर क़ौम को पैदा किया ताके तमाम रोये ज़मीन आबाद हो; ख़ुदा ने उन की ज़िन्दगी के अय्याम मुक़र्रर किये और सुकूनत के लिये हदों को तअय्युन किया। ताके वह ख़ुदा को ढूंडीं और शायद तलाश करते-करते उसे पा लें, हालांके वह हम में से किसी से भी दूर नहीं। ‘क्यूंके हम ख़ुदा मैं ज़िन्दा रहते और हरकत करते और हमारा वुजूद क़ाइम है। ’ जैसा के तुम्हारे बाज़ शायरों ने भी कहा है, ‘हम तो उन की नस्ल भी हैं।’ “अगर हम हैं तो हमें ये नहीं सोचना चाहिये के नस्ले इलाही सोने, चांदी या पत्थर की मूरत है जो किसी इन्सान की माहिराना कारीगरी का नमूना हो। ख़ुदा ने माज़ी की ऐसी जहालत को नज़र-अन्दाज़ कर दिया, और अब वह सारे इन्सानों को हर जगह हुक्म देता है के तौबा करें। क्यूंके इस ने एक दिन मुक़र्रर कर दिया है जब वह रास्तबाज़ी के साथ सारी दुनिया का इन्साफ़ एक ऐसे आदमी के ज़रीये करेगा जिसे उस ने मामूर किया है और उसे मुर्दों में से ज़िन्दा कर के ये बात सारे इन्सानों पर साबित कर दी है।” जब उन्होंने मुर्दों की क़ियामत के बारे में सुना, तो उन में से बाज़ ने इस बात को हंसी में उड़ा दिया, और बाज़ ने कहा के, “हम इस मज़मून पर तुझ से फिर कभी सुनेंगे।” ये हाल देखकर पौलुस उन की मज्लिस से निकल कर चले गये। मगर कुछ लोग पौलुस से हमनवा हो गये और ईमान लाये। उन में एक दियोनुसीयुस, अरियूपगुस की मज्लिस का रुक्न था, एक औरत भी थी जिस का नाम दमरिस था और उन के अलावा और भी थे। इस के बाद पौलुस, अथेने से कुरिनथुस शहर चले गये। वहां पौलुस को एक यहूदी मिला जिस का नाम अक्विला था। वह पुन्तुस का रहने वाला था। और अपनी प्रिसकिल्लाह के साथ हाल ही में इतालिया से आया था क्यूंके क़ैसर क्लोदियुस ने हुक्म दिया था के तमाम यहूदी रोम शहर से निकल जायें। पौलुस उन के पास गये। अक्विला और परसकिल्लह का पेशा ख़ेमा-दोज़ी था और यही पेशा पौलुस का भी था। लिहाज़ा वह उन के साथ रह कर काम करने लगे। लेकिन हर सबत को वह यहूदी इबादतगाह जाते और यहूदियों और यूनानियों के साथ बहस कर के उन्हें क़ाइल करते थे। जब सीलास और तिमुथियुस दोनों मकिदुनिया से आये तो पौलुस बड़े जोश के साथ अपना सारा वक़्त कलाम की मुनादी करने में गुज़ारने लगे। वह यहूदियों के सामने गवाही देते थे के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं। लेकिन जब यहूदी पौलुस के बरख़िलाफ़ होकर गालियों पर उतर आये तो पौलुस ने एहतिजाज के तौर पर कपड़े झाड़े और उन से कहा, “तुम्हारा ख़ून तुम्हारी ही गर्दन पर हो! मैं इस से पाक हूं। अब से मैं ग़ैरयहूदी के पास जाऊंगा।” तब पौलुस यहूदी इबादतगाह से निकल गये और एक ख़ुदापरस्त शख़्स तितुस यूसतुस के घर जा ठहरे जो यहूदी इबादतगाह से मिला हुआ था। इस यहूदी इबादतगाह का रहनुमा क्रिसपुस था जो अपने सारे घराने समेत ख़ुदावन्द पर ईमान लाया और कुरिनथुस के कई और लोग भी कलाम सुन कर ईमान लाये और उन्होंने पाक-ग़ुस्ल लिया। एक रात ख़ुदावन्द ने पौलुस से रोया में कलाम किया: “ख़ौफ़ न कर; बल्के कहता चला जा, और ख़ामोश न रह। क्यूंके मैं तेरे साथ हूं और कोई तुझ पर हमला कर के तुझे नुक़्सान न पहुंचा सकेगा, इसलिये के इस शहर में मेरे कई लोग मौजूद हैं।” पस पौलुस वहां डेढ़ बरस तक रहे और उन्हें ख़ुदा का कलाम सिखाते रहे। जब गल्लियो सूबे अख़िया का हाकिम था, तो यहूदियों ने मिल कर पौलुस पर हिला बोल दिया और उन्हें पकड़ कर अदालत में ले गये। और कहने लगे, “ये आदमी लोगों को ऐसे तरीक़े से ख़ुदा की इबादत करने की तरग़ीब देता है जो हमारी शरीअत के बरख़िलाफ़ है।” पौलुस कुछ कहने ही वाले थे के गल्लियो ने यहूदियों से कहा, “ऐ यहूदियों! अगर ये किसी जुर्म की या किसी बड़ी शरारत की बात होती तो मैं ज़रूर तुम्हारी सुनता। लेकिन तुम्हारा इल्ज़ाम तो बाज़ लफ़्ज़ों, नामों और तुम्हारी अपनी शरीअत के मसलों से तअल्लुक़ रखता है। इस से तुम ख़ुद ही निपटो। मैं ऐसी बातों का मुन्सिफ़ नहीं बनूंगा।” और गल्लियो ने पौलुस को अदालत से निकलवा दिया। तब सब यहूदियों का हुजूम सोस्थिनेस पर टूट पड़े जो यहूदी इबादतगाह का रहनुमा था और उसे पकड़ कर अदालत के सामने ही मारने पीटने लगे। लेकिन गल्लियो ने कुछ पर्वा न की। पौलुस काफ़ी दिनों तक कुरिनथुस में रहे। फिर वह भाईयों और बहनों से रुख़्सत होकर जहाज़ पर सीरिया की तरफ़ चले गये। प्रिसकिल्लाह और अक्विला भी उन के साथ थे। रवानगी से पहले पौलुस ने अपनी मिन्नत पूरी करने के लिये किन्ख़रिया में अपना सर मुंडवाया। जब वह इफ़िसुस पहुंचे तो पौलुस ने अक्विला और प्रिसकिल्लाह को अल्विदाअ़ कहा और ख़ुद एक यहूदी इबादतगाह में जा कर यहूदियों से बहस करने लगे। जब उन्होंने पौलुस से दरख़्वास्त की के हमारे पास कुछ देर और रहें तो पौलुस ने मन्ज़ूर न किया। लेकिन जब पौलुस वहां से रवाना होने लगे, तो वादा किया, “अगर ख़ुदा की मर्ज़ी हुई तो मैं तुम्हारे पास फिर आऊंगा।” फिर वह जहाज़ पर सवार होकर इफ़िसुस से रवाना हो गये। जब वह क़ैसरिया में जहाज़ से उतरे तो यरूशलेम जा कर पौलुस ने जमाअत को सलाम अर्ज़ किया और फिर अन्ताकिया की तरफ़ रवाना हुए। अन्ताकिया में कुछ अर्से गुज़ारने के बाद वह वहां से रवाना हुए और गलतिया और फ़रूगिया के सारे इलाक़ों से गुज़रते हुए तमाम शागिर्दों के ईमान को मज़बूत करते गये। इस दौरान एक यहूदी जिस का नाम अपुल्लोस था और जो इस्कन्दरिया का बाशिन्दा था, इफ़िसुस में वारिद हुआ। वह बड़ा शीरीं बयान था और किताब-ए-मुक़द्दस का गहरा इल्म रखता था। अपुल्लोस ने ख़ुदावन्द की राह की तालीम पाई थी और वह बड़े जोश-ओ-ख़रोश से कलाम करते थे और हुज़ूर ईसा के बारे में सही तालीम देते थे लेकिन वह सिर्फ़ हज़रत यहया ही के पाक-ग़ुस्ल से वाक़िफ़ थे। अपुल्लोस यहूदी इबादतगाह में दिलेरी के साथ कलाम करने लगे और जब प्रिसकिल्लाह और अक्विला ने उन्हें सुना तो अपुल्लोस अपने घर ले गये और उन्हें ख़ुदा की राह की तालीम और बेहतर तौर पर दी। जब अपुल्लोस ने समुन्दर पार सूबे अख़िया जाने का इरादा किया तो भाईयों और बहनों ने उन की हिम्मत अफ़्ज़ाई की और वहां शागिर्दों को लिखा के उन से ख़ुलूस से मिलें। वहां पहुंच कर अपुल्लोस ने उन लोगों की बड़ी मदद की जो ख़ुदा के फ़ज़ल की बदौलत ईमान लाये थे। क्यूंके वह बहस-ओ-मुबाहसा में बड़े ज़ोर शोर से यहूदियों को खुले आम ग़लत साबित करते थे और किताब-ए-मुक़द्दस से क़ाइल कर देते के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं। जब अपुल्लोस कुरिनथुस में थे तो पौलुस इलाक़े की अन्दरूनी शाहराह से गुज़रते हुए इफ़िसुस पहुंचे। वहां उसे कई शागिर्द मिले। पौलुस ने उन से पूछा, “क्या तुम ने ईमान लाते वक़्त पाक रूह पाया था?” उन्होंने जवाब दिया, “नहीं, हम ने तो सुना भी नहीं के पाक रूह क्या चीज़ है।” इस पर पौलुस ने कहा, “फिर तुम ने किस का पाक-ग़ुस्ल लिया?” उन्होंने जवाब दिया, “हज़रत यहया का।” पौलुस ने कहा, “हज़रत यहया ने तो तौबा का पाक-ग़ुस्ल दिया और कहा के वह जो मेरे बाद आने वाला है, तुम इस पर ईमान लाओ यानी हुज़ूर ईसा अलमसीह पर।” ये सुन कर उन्होंने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम पर पाक-ग़ुस्ल लिया। जब पौलुस ने उन के ऊपर हाथ रखो तो पाक रूह उन पर नाज़िल हुआ और वह तरह-तरह की ज़बानें बोलने और नुबुव्वत करने लगे। वह सब कोई बारह आदमी थे। फिर पौलुस ने यहूदी इबादतगाह में जाना शुरू किया और तक़रीबन तीन माह तक दिलेरी के साथ ख़ुदा की बादशाही के बारे में दलायल दे, दे कर लोगों को क़ाइल करते रहे। लेकिन उन में से बाज़ सख़्त-दिल हो गये और उन्होंने ईमान लाने से इन्कार कर दिया और मसीही अक़ीदे को सर-ए-आम बुरा भला कहने लगे। लिहाज़ा पौलुस ने उन से किनारा कर के मसीही शागिर्दों को अलग कर लिया और तुरन्नुस के मदरसे में जाना शुरू कर दिया जहां वह हर रोज़ बहस मुबाहसे किया करते थे। ये सिलसिला दो बरस तक चलता रहा, यहां तक के आसिया के सूबा में रहने वाले तमाम यहूदियों और ग़ैरयहूदियों को ख़ुदावन्द का कलाम सुनने का मौक़ा मिला। और ख़ुदा पौलुस के ज़रीये बड़े-बड़े मोजिज़े दिखाते थे। यहां तक के जब ऐसे रूमाल और पटके भी जिन्हें पौलुस हाथ लगाते थे, बीमारों पर डाले जाते थे तो वह अपनी बीमारीयों से शिफ़ा पाते थे और अगर उन में बदरूहें होती थीं तो वह भी निकल जाती थीं। बाज़ यहूदी आमिल भी इधर-उधर जा कर ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से झाड़ फूंक करने लगे। वह बदरूहों को निकालने के लिये ये कहते थे, “जिस हुज़ूर ईसा अलमसीह की पौलुस मुनादी करता है, मैं इसी के नाम की क़सम दे कर तुझे निकल जाने का हुक्म देता हूं।” यहूदी अहम-काहिनों सिकिवा के सात बेटे भी यही काम करते थे। लेकिन एक दिन बदरूह ने उन से कहा, “मैं हुज़ूर ईसा अलमसीह को तो जानती हूं, और पौलुस से भी वाक़िफ़ हूं लेकिन तुम कौन हो?” तब जिस आदमी में बदरूह थी, वह उन पर छलांग लगा कर उन सब पर ग़ालिब आ गया। उस ने उन्हें इस क़दर पीटा के वह लहू लुहान हो गये और वहां से नंगे ही भाग निकले। जब इफ़िसुस के यहूदियों और यूनानियों को इस बात का इल्म हुआ तो उन पर ख़ौफ़ छा गया और ख़ुदावन्द ईसा का नाम सरबुलन्द हुआ। कई लोगों ने जो ईमान लाये थे, आकर अपने बुरे कामों का बरमला इज़हार और इक़रार किया। कई जो जादूगरी करते थे, अपने तूमारों को जमा कर के लाये और उन्हें सर-ए-आम जिला दिया। जब उन तूमारों की जिल्दों क़ीमत का अन्दाज़ा लगाया गया तो वह पचास हज़ार दिरहम की निकलें। इस तरह ख़ुदावन्द का कलाम बड़ी मज़बूती के साथ जड़ पकड़ता और फैलता गया। इन बातों के बाद पौलुस ने पक्का इरादा कर लिया के मैं मकिदुनिया और सूबे अख़िया के इलाक़े से होता हुआ यरूशलेम चला जाऊंगा। और फिर वहां से, “मैं रोम शहर को भी देख लूंगा।” पौलुस ने अपने साथियों में से तिमुथियुस और इरास्तुस दो आदमियों को सूबे मकिदुनिया रवाना किया और ख़ुद भी कुछ देर आसिया के सूबा में ठहरे रहे। इसी दौरान मसीही अक़ीदे के बारे में बड़ा हंगामा उठ खड़ा हुआ। एक चांदी कारीगर जिस का नाम दीमेत्रियुस था, अरतमिस देवी के बुतख़ाने के नमूने पर चांदी के छोटे-छोटे बुतख़ाने बनवाता था और अपने हमपेशा कारीगरों को बहुत काम दिलवाता था। उस ने अपने हमपेशा सारे कारीगरों को जमा किया और कहा, “भाईयो! तुम जानते हो के हम ये काम कर के काफ़ी रक़म कमा लेते हैं। लेकिन जैसा के तुम देखते और सुनते हो ये आदमी पौलुस किस तरह इफ़िसुस और तक़रीबन सारे सूबे आसिया में हमें बहुत से लोगों को क़ाइल कर के गुमराह कर रहा है और कहता है के हाथों के बनाये हुए बुत हरगिज़ माबूद नहीं हो सकते। ख़ौफ़ इस बात का है के न सिर्फ़ हमारे पेशा की बदनामी होगी बल्के अज़ीम देवी अरतमिस के बुतख़ाने की क़दर भी जाती रहेगी। और जैसे तमाम आसिया और सारी दुनिया भर में इस देवी की परस्तिश होती है। अब उस के नाम की अज़मत भी बाक़ी न रहेगी।” जब उन्होंने ये सुना तो ग़ुस्सा से आग बगूला हो गये और ज़ोर-ज़ोर से नारे लगाने लगे, “इफ़िसियों की देवी अरतमिस अज़ीम है!” देखते-देखते सारे शहर में अफ़रातफ़री फैल गई। लोगों ने गयुस और अरिसतरख़ुस को जो सूबे मकिदुनिया से पौलुस के साथ आये थे पकड़ लिया और उन्हें घसीटते हुए तमाशागाह की तरफ़ दौड़ पड़े। पौलुस ने भी मज्मा में जाना चाहा लेकिन शागिर्दों ने पौलुस को रोक दिया। और सूबे आसिया के बाज़ हुक्काम ने जो पौलुस के दोस्त थे, पौलुस को पैग़ाम भेज कर मिन्नत की के तमाशागाह में जाने से बाज़ रहे। उधर इज्तिमाअ में खलबली मची हुई थी क्यूंके बाज़ लोग एक नारा लगाते थे और बाज़ कोई और। बहुत से लोगों को तो ये भी मालूम न था के वह वहां किस लिये जमा हुए हैं। ये देखकर यहूदियों ने इस्कन्दर को आगे कर दिया और मज्मा के कई लोग उसे घेर कर कुछ-कुछ कहने लगे। इस्कन्दर ने लोगों को ख़ामोश हो जाने का इशारा किया ताके वह उन्हें अपनी सफ़ाई पेश कर सके। लेकिन जूंही लोगों को मालूम हुआ के वह यहूदी है तो सब हम-आवाज़ होकर दो घंटे तक चिल्लाये: “इफ़िसियों की देवी अरतमिस अज़ीम है!” और ये सिलसिला तक़रीबन दो घंटों तक जारी रहा। तब नाज़िम शहर ने लोगों के ग़ुस्सा को ठंडा कर के कहा: “इफ़िसुस के रहने वालो! कौन नहीं जानता के इफ़िसियों का शहर अज़ीम देवी अरतमिस के बुतख़ाने और इस के बुत का मुहाफ़िज़ है, जो आसमान से गिरा था। जब, इन बातों के ख़िलाफ़ कोई कुछ नहीं कह सकता, तो वाजिब है के तुम ख़ामोश रहो और जल्दबाज़ी से काम न लो। तुम जिन आदमियों को यहां लाये हो, उन्होंने मंदिरों ही को लूटा है न ही हमारी देवी के ख़िलाफ़ कुफ़्र बका है। इसलिये, अगर, दीमेत्रियुस और उस के हमपेशा कारीगरों को किसी पर दावा ही करना है, तो अदालत के दरवाज़े खुले हैं और सूबा के हुक्काम मौजूद हैं जहां वह अपनी नालिश पेश कर सकते हैं। और अगर कोई दूसरा मसला भी दरपेश है तो उस का फ़ैसला भी बाज़ाबिता मज्लिस में हो सकता है। हमें तो अन्देशा है के अगर कोई हम ही पर नालिश कर दे के आज के हंगामा के ज़िम्मेदार हम ख़ुद हैं तो हम क्या जवाब देंगे, क्यूंके ये हंगामा बिला वजह हुआ है।” इतना कहने के बाद नाज़िम शहर ने इज्तिमाअ को बरख़ास्त कर दिया। जब शोर-ओ-ग़ुल मौक़ूफ़ हो गया तो पौलुस ने शागिर्दों को बुलाया, उन्हें नसीहत की और उन से रुख़्सत होकर सूबे मकिदुनिया के लिये रवाना हो गये वह जहां-जहां से गुज़रे, लोगों को नसीहत करते गये और आख़िरकार यूनान जा पहुंचे। जहां वह तीन माह तक रहे। जब वह जहाज़ से सीरिया जाने वाले थे तो कुछ यहूदियों ने उन्हें मार डालने की साज़िश की। इसलिये पौलुस ने बेहतर समझा के सूबे मकिदुनिया वापस चला जाये। पुरुस का बेटा सोपत्रुस जो बिरिया का रहने वाला था, और थिसलुनीके शहर के अरिसतरख़ुस और सिकुन्दुस और दरबे का, गयुस और तिमुथियुस और आसिया के तुख़िकुस और तुरफ़िमुस, आसिया तक पौलुस के हमसफ़र रहे। ये लोग पौलुस से पहले रवाना हुए और त्रोआस में हमारा इन्तिज़ार करने लगे। लेकिन हम ईद-ए-फ़तीर के बाद फ़िलिप्पी से जहाज़ में रवाना हुए और पांच दिन बाद त्रोआस में उन से जा मिले और सात दिन तक वहां रहे। हफ़्ते के पहले दिन हम रोटी तोड़ने के लिये जमा हुए। पौलुस ने लोगों से ख़िताब किया। पौलुस को अगले दिन वहां से रवाना होना था, इसलिये वह रात देर गये तक कलाम करते रहे। ऊपर की मंज़िल पर जहां हम जमा थे, कई चिराग़ जल रहे थे। और एक नौजवान खिड़की में बैठा हुआ था जिस का नाम यूतख़ुस था। वह पौलुस की लम्बी तक़रीर सुनते-सुनते सो गया और गहरी नींद की हालत में तीसरी मंज़िल से नीचे जा गिरा। जब यूतख़ुस को उठाया गया तो वह मर चुका था। पौलुस नीचे उतरे और उस नौजवान को अपनी बाहों में ले कर उस से लिपट गये और फ़रमाया, “घबराओ मत, इस में जान बाक़ी है!” फिर आप ने ऊपर जा कर रोटी तोड़ी और सब के साथ मिल कर खाई और फिर कलाम करने लगे यहां तक के पो फट गई। तब वह वहां से रुख़्सत हो गये। लोग इस नौजवान को ज़िन्दा घर ले गये और उन्हें बड़ी तसल्ली हुई। हम आगे जा कर समुन्दरी जहाज़ पर सवार हुए और अस्सुस के लिये रवाना हुए ताके वहां पौलुस को भी जहाज़ पर सवार कर लें क्यूंके पौलुस ने पहले ही से वहां पैदल पहुंच जाने का इरादा कर लिया था। जब वह हमें अस्सुस में मिले तो हम ने उन्हें जहाज़ पर चढ़ा लिया और मितुलेने पहुंच गये। वहां से हम जहाज़ पर रवाना हुए और अगले दिन ख़ियुस के सामने पहुंचे। तीसरे दिन हम सामुस आये और अगले दिन मीलीतुस पहुंच गये। पौलुस ने फ़ैसला कर लिया था के वह इफ़िसुस के पास से गुज़र जायें ताके आसिया में मज़ीद रुके बग़ैर वह जल्दी से यरूशलेम पहुंच जायें अगर मुम्किन हो तो पिन्-तिकुस्त का दिन वहां गुज़ार सकें। मीलीतुस पहुंच कर पौलुस ने इफ़िसुस से जमाअत के बुज़ुर्गों को बुला भेजा। जब वह आये तो पौलुस ने उन से फ़रमाया: “तुम जानते हो के जिस दिन से मैंने आसिया में क़दम रखा है, मेरी ज़िन्दगी तुम्हारे दरमियान कैसी रही है। मैं बड़ी फ़िरोतनी के साथ आंसुओं बहा-बहा कर ख़ुदावन्द की ख़िदमत करता रहा जब के मुझे यहूदियों की बड़ी-बड़ी साज़िशों का सामना करना पड़ रहा था। और जो बातें तुम्हारे लिये फ़ाइदेमंद थीं उन्हें मैंने बग़ैर किसी झिजक के बयान किया बल्के जो कुछ भी सिखाया सर-ए-आम और घर-घर जा कर सिखाया। मैं यहूदियों और यूनानियों दोनों के सामने गवाही देता रहा के वह ख़ुदा के हुज़ूर में तौबा करें और हमारे ख़ुदावन्द ईसा पर ईमान लायेंगे। “देखो! मैं रूह का असीर होकर यरूशलेम जा रहा हूं, और मुझे मालूम नहीं वहां मुझ पर क्या गुज़रेगी। सिर्फ़ इतना जानता हूं के पाक रूह की जानिब से मुझे हर शहर में ये आगाही मिलती रही के क़ैद और मुसीबतों की ज़न्जीरें मेरी मुन्तज़िर हैं। लेकिन, मेरी जान मेरे लिये कोई क़दर-ओ-क़ीमत नहीं रखती; में तो बस ये चाहता हूं के मेरी दौड़ पूरी हो जाये और मैं ख़ुदा के फ़ज़ल की ख़ुशख़बरी सुनाने का काम जो ख़ुदावन्द ईसा ने मुझे दिया है को पूरी सदाक़त से कर लूं। “अब मैं जानता हूं के तुम सभी जिन के दरमियान मैं बादशाही की तब्लीग़ करता रहा हूं तुम सब मुझे दुबारा कभी नहीं देखोगे। लिहाज़ा, आज मैं तुम्हें क़तई तौर पर कहे देता हूं के जो लोग हलाक किये जायेंगे, मैं उन के ख़ून से बरी हुआ। क्यूंके मैं तुम्हें बग़ैर किसी झिजक के सिखाता रहा हूं के ख़ुदा का मक़सद तुम्हारे लिये क्या है। पस अपना और सारे गल्ले का ख़्याल रखो जिस के तुम पाक रूह की जानिब से निगहबां मुक़र्रर किये गये हो ताके ख़ुदा की जमाअत की निगहबानी करो जिसे ख़ुदा ने ख़ास अपने ही ख़ून से ख़रीदा है। मैं जानता हूं के मेरे चले जाने के बाद फाड़ डालने वाले भेड़िये तुम्हारे दरमियान आ घुसेंगे और गल्ले को नहीं छोड़ेंगे। बल्के तुम ही में से ऐसे लोग उठ खड़े होंगे जो सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करेंगे ताके शागिर्दों को अपनी तरफ़ कर लें। लिहाज़ा ख़बरदार रहो! याद रखो के मैं तीन बरस तक रात दिन आंसुओं बहा-बहा कर हर एक को इन ख़तरों से आगाह करता रहा हूं। “अब मैं तुम्हें ख़ुदा के इस फ़ज़ल के कलाम के सुपुर्द करता हूं, जो तुम्हारी तरक़्क़ी का बाइस हो सकता है और तुम्हें इस मीरास का हक़दार बना सकता है जो तुम बरगुज़ीदा लोगों के लिये है। मैंने किसी के सोने, चांदी या कपड़े का लालच नहीं किया। तुम ख़ुद जानते हो के मेरे अपने हाथों ने मेरी अपनी और मेरे साथियों की ज़रूरतें पूरी की हैं। हम किस तरह मेहनत कर के कमज़ोरों को संभाल सकते हैं? ये मैंने तुम्हें कर के दिखाया। हम ख़ुदावन्द ईसा के अल्फ़ाज़ याद रख्खीं: ‘देना लेने से ज़्यादा मुबारक है।’ ” इन बातों के बाद, पौलुस ने उन सब के साथ घुटने टेक कर दुआ की। वह सब बहुत रोये और गले मिल कर पौलुस के बोसे लिये। और पौलुस के जिन अल्फ़ाज़ ने ख़ासतौर पर उन्हें ग़मगीन किया ये थे के तुम मुझे फिर न देख पाओगे। तब वह पौलुस को समुन्दरी जहाज़ तक छोड़ने गये। जब हम उन से जुदा होकर जहाज़ से रवाना हुए तो सीधे कूस में आये। अगले दिन हम रुदुस पहुंचे। फिर वहां से पतरा चल दिये। वहां हम ने देखा के एक समुन्दरी जहाज़ फ़ीनिके, जा रहा है। हम इस पर सवार होकर रवाना हो गये। जब हमारी नज़र जज़ीरे साइप्रस पर पड़ी, तो हम उसे बाएं हाथ छोड़कर मुल्के सीरिया के लिये रवाना हुए। हम सूर में उतर पड़े क्यूंके वहां हमारे समुन्दरी जहाज़ से माल उतारना था। वहां शागिर्दों की तलाश कर के हम उन के साथ सात दिन तक रहे। उन्होंने रूह की हिदायत से पौलुस को यरूशलेम जाने से मना किया। जब सात दिन गुज़र गये, तो हम वहां से आगे जाने के लिये निकले। सारे शागिर्द बीवी बच्चों समेत शहर के बाहर तक हमारे साथ हो लिये, समुन्दर के किनारे पहुंच कर हम ने घुटने टेक कर दुआ की। फिर हम उन से जुदा हुए, और समुन्दरी जहाज़ पर सवार हो गये, और वह अपने-अपने घर लौट गये। हम सूर से आगे चले और पतलुमीयस जहाज़ से उतर गये, वहां हम ने भाईयों को सलाम किया और उन के साथ एक दिन तक रहे। अगले दिन हम रवाना हुए और क़ैसरिया शहर में आये और फ़िलिप्पुस नामी एक मुबश्-शिर के घर में रहे, जो यरूशलेम में चुने जाने वाले सात ख़ादिमों में से एक थे। उन की चार बेटियां थीं जो अभी कुंवारी थीं और नुबुव्वत क्या करती थीं। जब हमें वहां रहते कई दिन गुज़र गये, तो एक नबी जिन का नाम अगबुस था, यहूदिया से आये। अगबुस ने हमारे पास आकर पौलुस के कमरबन्द से अपने हाथ और पांव बांध लिये और कहने लगे, “पाक रूह फ़रमाता है, ‘यरूशलेम के यहूदी रहनुमा उस कमरबन्द के मालिक को इसी तरह बांध कर ग़ैरयहूदियों के हवाले कर देंगे।’ ” ये सुन कर हम ने, और वहां के लोगों ने पौलुस की मिन्नत की के वह यरूशलेम जाने से बाज़ रहीं। लेकिन पौलुस ने जवाब दिया, “तुम ये क्या कर रहे हो? क्यूं रो-रो कर मेरा दिल तोड़ते हो? मैं यरूशलेम में ख़ुदावन्द ईसा के नाम की ख़ातिर सिर्फ़ बांधे जाने के लिये ही नहीं बल्के मरने को भी तय्यार हूं।” जब वह किसी तरह राज़ी न हुए तो हम ये कह कर ख़ामोश हो गये, “ख़ुदावन्द की मर्ज़ी पूरी हो।” उस के बाद, हमसफ़र की तय्यारी में लग गये और फिर यरूशलेम के लिये रवाना हुए। क़ैसरिया के कुछ शागिर्द भी हमारे साथ हो लिये और हमें मनासोन के घर लाये, जहां हमें क़ियाम करना था। मनासोन, जज़ीरे साइप्रस का रहने वाला था और क़दीम शागिर्दों में से एक था। जब हम यरूशलेम पहुंचे, तो भाई और बहन हम से गर्मजोशी के साथ मिले। अगले दिन हम पौलुस को ले कर याक़ूब से मिलने गये, और वहां सब बुज़ुर्ग पहले ही से जमा थे। पौलुस ने उन्हें सलाम कहा और तफ़्सील से बताया के ख़ुदा ने पौलुस की ख़िदमत के ज़रीये से ग़ैरयहूदी में क्या कुछ किया। जब उन्होंने ये सुना, उन्होंने ख़ुदा की तम्जीद की। और फिर पौलुस से कहने लगे: “ऐ भाई देखो, कितने हज़ारों यहूदी ईमान ले आये हैं, और वह सब शरीअत पर अमल करने में बड़े सरगर्म हैं। उन्हें तो ये बताया गया है के आप सारे यहूदियों को जो ग़ैरयहूदियों के दरमियान रहते हैं ये तालीम देते हैं के हज़रत मूसा को छोड़ दो, अपने बच्चों का ख़तना न कराओ और यहूदियों की रस्मों को तस्लीम न करो। अब आप यहां आये हैं और ये बात लोगों के कानों तक ज़रूर पहुंच जायेगी, लिहाज़ा अब क्या किया जाये? हमारा मशवरा तो ये है के हमारे पास चार आदमी हैं जिन्होंने क़सम खाई है आप उन्हें अपने साथ ले जायें और उन के साथ मिल कर तहारत की सारी रस्में पूरी करें और उन का ख़र्च भी उठायें ताके वह अपने सर मुंडवा सकें। तब हर किसी को मालूम हो जायेगा के जो बातें आप के ख़िलाफ़ फैलाई गई हैं वह ग़लत हैं बल्के आप ख़ुद भी ताबेदारी से शरीअत पर अमल करते हो। और जहां तक उन ग़ैरयहूदी क़ौमों का सवाल है जो ईमान ले आई हैं, उन के बारे में हम फ़ैसला कर के पहले ही ख़त लिख चुके हैं के वह बुतों को नज़्र चढ़ाई हुई चीज़ों से, ख़ून से, गला घोंटे हुए जानवरों के गोश्त से परहेज़ करें और जिन्सी बदफ़ेली से बचें।” अगले दिन पौलुस उन आदमियों को ले गये और उन के साथ ख़ुद भी तहारत की रस्में अदा कर के बैतुलमुक़द्दस में दाख़िल हुए और ख़बर दी के तहारत के दिनों के पूरा हो जाने पर वह सब अपनी-अपनी नज़्रें चढ़ायेंगे। जब तहारत के सात दिन पूरे होने को थे, तो आसिया के चंद यहूदियों ने पौलुस को बैतुलमुक़द्दस में देखकर लोगों में हलचल मचा दी और पौलुस को पकड़ कर, चिल्लाने लगे, “ऐ इस्राईलियो, हमारी मदद करो! यही वह आदमी है जो हर जगह लोगों को हमारे ख़िलाफ़ हमारी शरीअत के बरख़िलाफ़ और बैतुलमुक़द्दस के ख़िलाफ़ तालीम देता फिरता है। और इस के अलावा, इस ने यूनानियों को हमारे बैतुलमुक़द्दस में लाकर उस पाक मक़ाम को नापाक कर डाला है।” (वह पहले ही तुरफ़िमुस इफ़िसी को शहर में पौलुस के साथ देख चुके थे और सोच रहे थे के पौलुस उसे ज़रूर बैतुलमुक़द्दस में ले गया होगा।) सारे शहर में हलचल मच गई, और लोग दौड़-दौड़ कर जमा होने लगे। तब उन्होंने पौलुस को पकड़ लिया, यहूदी इबादतगाह से घसीट कर बाहर निकाल लाये और दरवाज़े बन्द कर दिये। जब वह पौलुस को मार डालने की कोशिश में थे, तो रोमी पलटन के सालार को ख़बर पहुंची के सारे यरूशलेम में खलबली पड़ गई है। वह फ़ौरन पलटन के अफ़सरान और सिपाहियों को ले कर हुजूम के पास नीचे दौड़ा आया। जब लोगों ने पलटन के सालार और सिपाहियों को देखा, तो पौलुस की मार पेट से बाज़ आये। पलटन के सालार ने नज़दीक आकर पौलुस को अपने क़ब्ज़ा में ले लिया और आप को दो ज़न्जीरों से बांधने का हुक्म दिया। फिर इस ने पूछा के ये आदमी कौन है और इस ने क्या किया है? हुजूम में से कुछ एक चीख़, चीख़ कर कहते थे और बाज़ कुछ और बात, शोर-ओ-ग़ुल इस क़दर ज़्यादा था के सालार को हक़ीक़त मालूम न हो सकी, लिहाज़ा उस ने हुक्म दिया के पौलुस को फ़ौजियों के ख़ेमे में पहुंचा दिया जाये। जब सिपाही पौलुस को सीढ़ीयों से ऊपर ले जा रहे थे, तो हुजूम की ज़बरदस्ती की वजह से उन्होंने पौलुस को ऊपर उठा लिया। सब लोग जो पौलुस के पीछे पड़े हुए थे चिल्लाते जा रहे थे, “इसे ख़त्म कर दो!” सिपाही पौलुस को फ़ौजियों के ख़ेमे के अन्दर ले जाने ही वाले थे, पौलुस ने पलटन के सालार से कहा, “क्या मैं मुम्किन तौर पर तुझ से कुछ अर्ज़ कर सकता हूं?” सालार ने पूछा, “क्या तू यूनानी जानता है? क्या तू वह मिस्री तो नहीं जिस ने कुछ अर्से पहले बग़ावत की थी और चार हज़ार बाग़ीयों के साथ जंगल में पनाह ली थी?” पौलुस ने जवाब दिया, “मैं तो यहूदी हूं, और तरसुस का बाशिन्दा हूं जो किलकिया का मशहूर शहर है। बराह-ए-करम मुझे लोगों से ख़िताब करने की इजाज़त दी जाये।” सालार से इजाज़त पा कर, पौलुस ने सीढ़ीयों पर खड़े होकर लोगों को हाथ से इशारा किया। जब वह ख़ामोश हो गये, तो पौलुस ने उन से अरामी ज़बान में यूं कहना शुरू किया: “भाईयो और पिद्रान, अब मेरा बयान सुनो जो में अपनी सफ़ाई में पेश करता हूं।” जब लोगों ने पौलुस को अरामी बोलते सुना, तो सब के सब ने ख़ामोशी इख़्तियार कर ली। तब पौलुस ने कहा: “मैं एक यहूदी हूं, किलकिया के शहर तरसुस में पैदा हुआ, लेकिन मेरी तरबियत इसी शहर में हुई। मैंने गमलीएल के क़दमों में अपने आबा-ओ-अज्दाद की शरीअत पर अमल करने की तालीम पाई। में भी ख़ुदा के लिये ऐसा ही सरगर्म था जैसे आज तुम हो। मैंने मसीही अक़ीदे पर चलने वालों को सताया यहां तक के क़त्ल भी किया, मैं मर्दों और औरतों दोनों को बांध-बांध कर क़ैदख़ाने में डलवाता रहा, आला काहिन और सब बुज़ुर्गों की अदालते-आलिया इस बात के गवाह हैं। मैंने उन से दमिश्क़ शहर में रहने वाले यहूदी भाईयों के लिये ख़ुतूत हासिल किये, और वहां इस ग़रज़ से गया के जितने वहां हों उन लोगों को भी गिरिफ़्तार कर के बतौर क़ैदी यरूशलेम में लाऊं और सज़ा दिलाऊं। “मैं जब सफ़र करते-करते दमिश्क़ शहर के नज़दीक पहुंचा, तो दोपहर के वक़्त आसमान से एक तेज़ रोशनी आई और मेरे चारों तरफ़ चमकने लगी। मैं ज़मीन पर गिर पड़ा और मैंने एक आवाज़ सुनी जो मुझ से कह रही थी, ‘ऐ साऊल! ऐ साऊल! तू मुझे क्यूं सताता है?’ “ ‘मैंने पूछा, ऐ आक़ा, आप कौन हैं?’ “ ‘मैं ईसा नासरी हूं जिसे तू सताता है,’ हुज़ूर ईसा ने जवाब दिया। मेरे साथियों ने रोशनी तो देखी, आवाज़ तो सुनाई दे रही थी लेकिन मुझ से क्या कह रही समझ कुछ नहीं आ रहा था। “ ‘मैंने पूछा, मैं क्या करूं, ऐ ख़ुदावन्द?’ ख़ुदावन्द ने जवाब दिया। “ ‘उठ, और दमिश्क़ शहर को जा। वहां तुझे वह सब कुछ जो तेरे करने के लिये मुक़र्रर हुआ है तुझे बता दिया जायेगा।’ मेरे साथी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे दमिश्क़ शहर में ले गये, क्यूंके उस तेज़ रोशनी ने मुझे अन्धा कर दिया था। “वहां एक आदमी जिस का नाम हननयाह था मुझे देखने आया। वह दीनदार और शरीअत का सख़्त पाबन्द था और वहां के यहूदियों में बड़ी इज़्ज़त की नज़र से देखा जाता था। वह मेरे पास आकर कहने लगा, ‘भाई साऊल, अपनी बीनाई हासिल कर!’ मैं उसी घड़ी बीना हो गया और हननयाह को देखने लगा। “तब हननयाह ने कहा: ‘तेरे आबा-ओ-अज्दाद के ख़ुदा ने तुझे चुन लिया है ताके तू ख़ुदा की मर्ज़ी को जाने और अलमसीह रास्तबाज़ को देखे और उन के मुंह की बातें सुने। क्यूंके तू सारे लोगों में अलमसीह का गवाह होगा और उन्हें बतायेगा के तूने क्या कुछ देखा और सुना है। और अब देर कैसी? उठ, ख़ुदावन्द अलमसीह के नाम से, पाक-ग़ुस्ल ले और अपने गुनाह धो डाल।’ “जब मैं यरूशलेम लौटा और बैतुलमुक़द्दस में जा कर दुआ कर ही रहा था, मुझ पर बेख़ुदी तारी हो गई। और मैंने ख़ुदावन्द को देखा और ये कहते सुना के, ‘जल्दी कर!’ और ‘यरूशलेम से फ़ौरन निकल जा क्यूंके वह मेरे बारे में तेरी गवाही क़बूल न करेंगे।’ “ ‘ख़ुदावन्द,’ मैंने जवाब दिया, ‘ये लोग जानते हैं के मैं जा-ब-जा हर एक यहूदी इबादतगाह में जाता था और किस तरह आप पर ईमान लाने वालों को क़ैद कराता और पटवाता था। और जब तुम्हारे शहीद इस्तिफ़नुस का ख़ून बहाया जा रहा था तो में भी वहीं मौजूद था और इस्तिफ़नुस के क़त्ल पर राज़ी था और उन क़ातिलों के कपड़ों की हिफ़ाज़त कर रहा था जो उन को क़त्ल कर रहे थे।’ “तब ख़ुदावन्द ने मुझ से कहा, ‘जाओ; मैं तुम्हें ग़ैरयहूदियों के पास दूर से दूर जगहों में भेजूंगा।’ ” सारा मज्मा यहां तक तो पौलुस की बातें सुनता रहा लेकिन अब सारे लोग बुलन्द आवाज़ से चलाने लगे, “इस शख़्स के वुजूद से ज़मीन को पाक कर दो ये ज़िन्दा रहने के लाइक़ नहीं है!” जब लोगों का चीख़ना और चिल्लाना जारी रहा और वह कपड़े फेंक-फेंक कर धूल उड़ाने लगे, तो पलटन के सालार ने पौलुस को फ़ौजियों के ख़ेमे के अन्दर ले जाने का हुक्म दिया और कहा के उसे कोड़ों से मारा जाये और इस का बयान लिया जाये ताके मालूम हो के ये लोग इस पर इस तरह क्यूं चला रहे हैं? जब वह कोड़े लगाने के लिये पौलुस को बांधने लगे तो आप ने एक कप्तान से जो पास ही खड़ा था कहा, “क्या एक रोमी शहरी को इस का क़ुसूर साबित किये बग़ैर कोड़ों से मारना जायज़ है?” जब उस कप्तान ने ये सुना, तो वह पलटन के सालार के पास गया और उसे ख़बर दी और उस ने कहा, “आप क्या करने जा रहे हैं? ये आदमी तो रोमी शहरी है।” पलटन के सालार ने पौलुस के पास आकर पूछा, “मुझे बता, क्या तू रोमी शहरी है?” “हां, मैं हूं,” पौलुस ने जवाब दिया। सालार ने कहा, “मैंने तो एक कसीर रक़म अदा कर के रोमी शहरीयत हासिल की थी।” “लेकिन मैं तो पैदाइशी रोमी हूं,” पौलुस ने जवाब दिया। जो लोग पौलुस का बयान लेने को थे, उसी वक़्त वहां से हट गये, और पलटन का सालार भी ये मालूम कर के बड़ा घबराया के जिस आदमी को इस ने ज़न्जीरों से बांधा है वह रोमी शहरी है। सिपहसालार ये जानना चाहता था के यहूदियों के ज़रीये पौलुस पर इल्ज़ाम क्यूं आयद किया जा रहा है। चुनांचे अगले दिन पलटन के सालार ने पौलुस को रिहा कर दिया और ये हक़ीक़त जानने के लिये के यहूदी उन पर क्या इल्ज़ाम लगाते हैं। सिपहसालार ने यहूदियों की मज्लिस आम्मा के अराकीन को जमा किया और अहम-काहिनों को भी बुला लिया। तब सिपहसालार ने पौलुस को लाकर उन के सामने खड़ा कर दिया। पौलुस ने मज्लिस आम्मा के अराकीन पर गहरी नज़र डाल कर कहा, “मेरे भाईयो, मैं आज तक बड़ी नेकनियती से ख़ुदा के हुक्मों के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारता आया हूं।” आला काहिन, हननयाह ने पौलुस के पास खड़े हुए लोगों को हुक्म दिया के पौलुस के मुंह पर थप्पड़ मारो। पौलुस ने आला काहिन से कहा, “ऐ सफ़ेदी फिरी हुई दीवार! तुम पर ख़ुदा की मार, हननयाह यहां बैठे हो के शरीअत के मुताबिक़ मेरा इन्साफ़ करो, फिर भी तुम ख़ुद शरीअत के ख़िलाफ़ मुझे मारने का हुक्म देते हो!” जो पास खड़े थे कहने लगे, “तुझे ख़ुदा के आला काहिन को बुरा कहने की जुरअत कैसे हुई!” पौलुस ने जवाब दिया, “भाईयो, मुझे मालूम न था के ये आला काहिन हैं; शरीअत में लिख्खा है; ‘तू अपनी क़ौम के रहनुमाओं पर लानत मत भेजना।’ ” पौलुस को मालूम था के उन में बाज़ सदूक़ी हैं और बाज़ फ़रीसी, वह मज्लिस आम्मा में पुकार कर कहने लगे, “मेरे भाईयो, मैं फ़रीसी हूं, फ़रीसियों से आया हूं। मुझ पर इसलिये मुक़द्दमा चिल्लाया जा रहा है के मैं उम्मीद रखता हूं मुर्दों की क़ियामत यानी मुर्दे फिर से जी उठेंगे।” उन के ये कहते ही फ़रीसियों और सदूक़ियों में तकरार शुरू हो गई, और हाज़िरीन में तफ़रीक़ पड़ गई। (सदूक़ी कहते हैं के क़ियामत नहीं होगी, और न तो फ़रिश्ता कोई चीज़ है न ही रूहें, लेकिन फ़रीसी इन सब चीज़ों के क़ाइल हैं।) फ़ौरन बड़ा हंगामा बरपा हो गया, और शरीअत के आलिमों में से बाज़ जो फ़रीसी थे खड़े होकर बहस करने लगे। “हम इस आदमी में कोई क़ुसूर नहीं पाते,” उन्होंने कहा। “अगर किसी फ़रिश्ते या रूह ने इस से बात की है तो क्या हुआ?” बात इतनी बढ़ी के पलटन के सालार को ख़ौफ़ महसूस होने लगा के कहीं पौलुस के टुकड़े-टुकड़े न कर दिये जायें। इस ने सिपाहियों को हुक्म दिया के नीचे जायें और पौलुस को वहां से ज़बरदस्ती निकाल कर फ़ौजियों के ख़ेमे में ले जायें। इसी रात ख़ुदावन्द ने पौलुस के पास आकर फ़रमाया, “हौसला रख! जैसे तूने यरूशलेम में मेरी गवाही दी है, वैसे ही तुझे रोम शहर में भी गवाही देना होगी।” अगले दिन सुबह बाज़ यहूदियों ने मिल कर फ़ैसला किया और क़सम खाई के जब तक हम पौलुस को हलाक नहीं कर देते न कुछ खायेंगे न पियेंगे। इस साज़िश में चालीस से ज़्यादा आदमी शरीक थे। वह अहम-काहिनों और बुज़ुर्गों के पास गये और कहने लगे, “हम पर लानत अगर हम पौलुस को हलाक किये बग़ैर कुछ खाईं या पियेंगे। हम ने तो उसे ख़त्म कर देने की क़सम खा रख्खी है। लिहाज़ा अब तुम और अदालत वाले मिल कर पलटन के सालार से दरख़्वास्त करो के वह पौलुस को तुम लोगों के सामने लाये ताके इस मुक़द्दमा की सारी तफ़्तीश फिर से की जाये और इस से पहले के पौलुस यहां पेश किया जाये हम तय्यार हैं के उसे राह में ही ठिकाने लगा दें।” लेकिन जब पौलुस के भांजे को इस साज़िश का इल्म हुआ, और इस ने फ़ौजियों के ख़ेमे में जा कर पौलुस को ख़बर कर दी। तब पौलुस ने एक कप्तान को बुलाया और कहा, “इस जवान को पलटन के सालार के पास ले जा; क्यूंके ये कुछ बताने के लिये आया है।” पस वह उसे पलटन के सालार के पास ले गया। कप्तान कहने लगा, “क़ैदी पौलुस, ने मुझे बुलाया और मुझ से दरख़्वास्त की के इस जवान को तेरे पास लाऊं क्यूंके ये तुझे कुछ बताना चाहता है।” पलटन का सालार इस जवान का हाथ पकड़ कर उसे अलग ले गया और पूछने लगा, “तुम मुझे क्या बताना चाहते हो?” इस ने कहा: “बाज़ यहूदियों ने एका कर के आप से दरख़्वास्त करने का फ़ैसला किया है के तुम पौलुस को मज़ीद तहक़ीक़ात के बहाने से मज्लिस आम्मा के सामने लायें। उन की बात मत मानना क्यूंके चालीस से ज़्यादा यहूदी पौलुस पर हमला करने की ताक में हैं। उन्होंने क़सम खाई है के अगर हम पौलुस को मारे बग़ैर कुछ भी खाईं या पियेंगे तो हम पर लानत हो। अब वह तय्यार हैं, सिर्फ़ तुम्हारी दरख़्वास्त के इन्तिज़ार में हैं।” सालार ने इस जवान को भेज दिया और ताकीद की: “इन बातों का जो तूने मुझे बताई हैं, किसी और को पता न चले।” तब कप्तान ने अपने दो अफ़सरान को बुलाया और कहा, “पलटन के दो सिपाही, सत्तर घोड़ा सवार और दो सौ नेज़ा बर्दार तय्यार रखो। उन्हें रात के नौ बजे क़ैसरिया जाना होगा। फिर हुक्म दिया के पौलुस की सवारी के लिये घोड़े का इन्तिज़ाम किया जाये ताके वह सूबा के हाकिम फ़ेलिक्स के पास हिफ़ाज़त से पहुंच जाये।” और इस ने एक ख़त उस मज़मून का लिख्खा, क्लोदियुस लूसियास, की जानिब से मुअज़्ज़ज़ सूबा के हाकिम फ़ेलिक्स को, सलाम पहुंचे! ये वह आदमी है जिसे यहूदियों ने पकड़ा था। वह उसे हलाक करने ही वाले थे के मैं सिपाहियों को ले कर गया और उसे छुड़ा लाया, क्यूंके मुझे मालूम हुआ था के वह एक रोमी शहरी है। लिहाज़ा ये दरयाफ़्त करने के लिये के वह पौलुस पर क्या इल्ज़ाम लगाते हैं, मैंने इसे उन की मज्लिस आम्मा में पेश किया। मालूम हुआ के उन का इल्ज़ाम उन की शरीअत के मसलों से तअल्लुक़ रखता है लेकिन पौलुस के बरख़िलाफ़ ऐसा कोई इल्ज़ाम नहीं है जिस की बिना पर उसे मौत या क़ैद की सज़ा दी जाये। जब मुझे ख़बर मिली के इस आदमी के ख़िलाफ़ कोई साज़िश हो रही है तो मैंने फ़ौरन उसे तुम्हारे पास भेज दिया। मैंने इस पर दावा करने वालों से भी कहा है के वह तुम्हारे हुज़ूर में आकर अपना मुक़द्दमा पेश करें। पस सिपाही उस के हुक्म के मुताबिक़ पौलुस को अपने हमराह ले गये और रातों रात पौलुस को अन्तिपत्रिस में पहुंचा दिया। अगले दिन उन घुड़सवारों को उन के साथ आगे जाने का हुक्म दे कर ख़ुद फ़ौजियों के ख़ेमे को लौट गये। जब घुड़सवार क़ैसरिया पहुंचे, तो उन्होंने सूबा के हाकिम को ख़त दे कर पौलुस को इस के हुज़ूर में पेश कर दिया। सूबा के हाकिम ने ख़त पढ़ कर पूछा, ये कौन से सूबे का है? जब उसे मालूम हुआ के वह किलकिया का है तो उस ने कहा, “मैं तुम्हारा मुक़द्दमा उस वक़्त सुनूंगा जब तुम्हारे मुद्दई भी यहां हाज़िर होंगे।” तब उस ने हुक्म दिया के पौलुस को हेरोदेस के महल में निगरानी में रखा जाये। पांचवें दिन के बाद आला काहिन हननयाह बाज़ बुज़ुर्गों और तिरतुलुस, नामी वकील के हमराह क़ैसरिया पहुंचा और सूबे के हाकिम के हुज़ूर में जा कर पौलुस के ख़िलाफ़ अपने इल्ज़ामात पेश किये। जब पौलुस को हाज़िर किया गया तो तिरतुलुस ने उस पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा, “हम आप के बाइस बड़े अमन से ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं और आप ने अपनी दूर अन्देशी से बहुत सी इस्लाहात की हैं जिन से इस मुल्क को फ़ायदा पहुंचा है। फ़ज़ीलत-मआब फ़ेलिक्स, हम हर जगह और हर वक़्त, आप की मेहरबानीयों की वजह से आप के शुक्रगुज़ार हैं। लेकिन आप का ज़्यादा वक़्त लिये बग़ैर अर्ज़ करता हूं के मेहरबानी से हमारी मुख़्तसर सी दरख़्वास्त सुन लें। “हम ने इस शख़्स को फ़साद बरपा करने वाला पाया है, ये दुनिया के सारे यहूदियों में फ़ित्ना अंगेज़ी करता फिरता है और नासरियों के बदनाम फ़िर्क़ा का सरग़ना बना हुआ है। इस ने तो बैतुलमुक़द्दस को भी नापाक करने की कोशिश की। लिहाज़ा हम ने उसे पकड़ लिया। लेकिन पलटन का सालार लिसियास इसे हमारे हाथों से ज़बरदस्ती छीन कर ले गया आप उन की तहक़ीक़ात करेंगे तो आप को इन इल्ज़ामात की हक़ीक़त मालूम हो जायेगी जो हम ने पौलुस पर लगाये हैं। और हुक्म दिया के पौलुस के मुद्दई यहां आकर उन पर मुक़द्दमा दायर करें।” दूसरे यहूदी भी उन से मुत्तफ़िक़ होकर कहने लगे, ये बातें बिलकुल सही हैं। जब सूबे के हाकिम ने पौलुस को बोलने का इशारा किया, तो पौलुस ने जवाब दिया: “मुझे मालूम है के आप कई सालों से इस मुल्क का मुन्सिफ़ रहे हो; इसलिये मैं ख़ुशी से अपनी सफ़ाई पेश करता हूं। आप ख़ुद पता लगा सकते हो के बारह दिन पहले मैं यरूशलेम में इबादत करने गया था। मेरे मुद्दईयों ने मुझे बैतुलमुक़द्दस में किसी के साथ भी बहस करते या यहूदी इबादतगाहों में या इधर-उधर शहर में फ़साद बरपा करते नहीं देखा। अब वह इन इल्ज़ामात को जो वह मुझ पर लगा रहे हैं, आप के सामने साबित नहीं कर सकते। हां में ये इक़रार ज़रूर करता हूं के जिस मसीही अक़ीदे को वह बिदअत क़रार देते हैं उस के मुताबिक़ में अपने आबा-ओ-अज्दाद के ख़ुदा की इबादत करता हूं और जो कुछ तौरेत और नबियों के सहाइफ़ में लिख्खा है उन सब पर मेरा ईमान है। में भी ख़ुदा से वोही उम्मीद रखता हूं जो ये रखते हैं के रास्तबाज़ों और बदकारों दोनों की क़ियामत होगी। लिहाज़ा मेरी तो यही कोशिश रहती है के ख़ुदा और इन्सान दोनों के सामने मेरी नेकनियती बनी रहे। “कई बरसों की गै़रहाज़िरी के बाद में अपनी क़ौम के लिये अतिये की रक़म और नज़्राने ले कर यरूशलेम आया था। जब उन्होंने मुझे बैतुलमुक़द्दस में पाया तो मैं तहारत की रस्म अदा कर रहा था। मेरे साथ न तो कोई मज्मा था और न ही में कोई फ़साद बरपा कर रहा था। हां, आसिया के चंद यहूदी ज़रूर वहां मौजूद थे। अगर उन्हें मुझ से कोई शिकायत थी तो वाजिब था के वह यहां हाज़िर होकर मुझ पर दावा करते। ये लोग जो यहां मौजूद हैं बतायें के जब मैं मज्लिस आम्मा में पेश हुआ था तो उन्होंने मुझ में क्या जुर्म पाया था? सिवाए इस एक बात के जो मैंने खड़े होकर बुलन्द आवाज़ से कही थी: ‘ये आज तुम्हारे सामने मुझ पर मुर्दों की क़ियामत यानी मुर्दे फिर से जी उठेंगे के बारे में मुक़द्दमा चिल्लाया जा रहा है।’ ” तब फ़ेलिक्स ने जो मसीही अक़ीदे के बारे में बहुत कुछ जानता था, ये कह कर मुक़द्दमा मुल्तवी कर दिया। “जब पलटन का सालार लूसियास यहां आयेगा मैं तुम्हारे मुक़द्दमा का फ़ैसला करूंगा।” इस ने फ़ौजी कप्तान से कहा के पौलुस को पहरा में आराम से रखा जाये और इस के दोस्तों में से किसी को भी इस की ख़िदमत करने से मना न किया जाये। कुछ दिनों के बाद फ़ेलिक्स अपनी बीवी द्रुसिल्ला के साथ आया, जो यहूदी थी। उस ने पौलुस को बुला भेजा और ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा पर ईमान की बाबत उस की बातें सुनीं। जब पौलुस ने रास्तबाज़ी, परहेज़गारी और आने वाली अदालत के बारे में बयान किया तो फ़ेलिक्स डर गया और कहने लगा, “अभी इतना ही काफ़ी है! तो जा सकता है। मुझे फ़ुर्सत मिलेगी तो मैं तुझे फिर बुलवाऊंगा।” साथ ही फ़ेलिक्स को ये भी उम्मीद थी के उसे पौलुस की जानिब से रिशवत मिलेगी, लिहाज़ा वह पौलुस को बार-बार बुलाता और उस के साथ गुफ़्तगू करता था। पूरे दो बरस बाद, फ़ेलिक्स की जगह पुरकियुस फ़ेस्तुस सूबा का हाकिम मुक़र्रर हुआ, लेकिन फ़ेलिक्स ख़ुद को यहूदियों का मोहसिन साबित करने के लिये, वह पौलुस को क़ैद ही में छोड़ गया। सूबे का हाकिम फ़ेस्तुस वारिद होने के तीन दिन बाद, क़ैसरिया से यरूशलेम गया जहां अहम-काहिन और यहूदी रहनुमा उस के हुज़ूर में आकर पौलुस के ख़िलाफ़ पैरवी करने लगे। उन्होंने फ़ेस्तुस से मिन्नत की, वह फ़ौरन पौलुस के यरूशलेम में मुन्तक़िल करने का हुक्म दे, दरअस्ल उन्होंने पौलुस को राह ही में मार डालने की साज़िश की हुई थी। मगर फ़ेस्तुस ने जवाब दिया, “पौलुस तो क़ैसरिया में क़ैद हैं और मैं ख़ुद भी जल्द ही वहां पहुंचने वाला हूं। क्यूं न तुम में से चंद इख़्तियार वाले लोग मेरे साथ चलें, और अगर उन्होंने वाक़ई कोई ग़लत काम किया है तो वहां उन पर मुक़द्दमा दायर करें।” उन के साथ आठ या दस दिन गुज़ारने के बाद, फ़ेस्तुस क़ैसरिया गया। अगले दिन इस ने अदालत तलब की और हुक्म दिया के पौलुस को इस के सामने लाया जाये। जब पौलुस हाज़िर हुए तो यरूशलेम से आने वाले यहूदियों ने पौलुस को घेर कर उन पर चारों जानिब से संगीन इल्ज़ामात की भरमार शुरू कर दी लेकिन कोई सबूत पेश न कर सके। पौलुस ने अपनी सफ़ाई पेश करते हुए कहा: “मैंने न तो यहूदियों की शरीअत के बरख़िलाफ़ कोई क़ुसूर किया है न बैतुलमुक़द्दस का और क़ैसर के ख़िलाफ़।” मगर फ़ेस्तुस ख़ुद को यहूदियों का मोहसिन साबित करना चाहता था, इसलिये उस ने पौलुस से कहा, “क्या तुझे यरूशलेम जाना मन्ज़ूर है ताके में इस मुक़द्दमा का फ़ैसला वहां करूं?” पौलुस ने जवाब दिया: “मैं यहां क़ैसर की अदालत में खड़ा हूं, मेरे मुक़द्दमा का फ़ैसला इसी जगह होना चाहिये। आप ख़ुद भी अच्छी तरह जानते हैं के मैंने यहूदियों के ख़िलाफ़ कोई जुर्म नहीं किया। ताहम, अगर, मैं क़ुसूरवार हूं, और मौत की सज़ा के लाइक़ हूं तो मुझे मरने से इन्कार नहीं। लेकिन जो इल्ज़ामात यहूदी मुझ पर लगा रहे हैं, अगर वह सच नहीं हैं तो फिर किसी को हक़ नहीं के मुझे उन के हवाले करे। मैं क़ैसर के हां अपील करता हूं!” फ़ेस्तुस ने अपने सलाहकारों से मशवरा कर के, उस ने एलान किया: “तूने क़ैसर के हां अपील की है। क़ैसर के पास ही जायेगा!” कुछ दिनों बाद अग्रिप्पा बादशाह और बिरनीके, क़ैसरिया आये ताके फ़ेस्तुस से मुलाक़ात कर सकें। चूंके वह काफ़ी दिनों तक वहीं रहे इसलिये फ़ेस्तुस ने पौलुस के मुक़द्दमा का हाल बादशाह से बयान किया: “यहां एक आदमी है जिसे फ़ेलिक्स क़ैद में छोड़ गया है। जब मैं यरूशलेम में था तो अहम-काहिनों और यहूदियों के बुज़ुर्ग मेरे पास ये फ़र्याद ले कर आये के इस के ख़िलाफ़ सज़ा का हुक्म सादर किया जाये। “मैंने उन्हें बताया के रोमी दस्तूर के मुताबिक़ कोई शख़्स सज़ा पाने के लिये हवाले नहीं किया जा सकता जब तक के उसे अपने मुद्दईयों के रूबरू उन के इल्ज़ाम के बारे में अपनी सफ़ाई पेश करने का मौक़ा न दिया जाये। चुनांचे जब वह लोग यहां आये तो मैंने फ़ौरन अगले ही दिन उसे अपनी अदालत में हाज़िर होने का हुक्म दिया। जब उस के मुद्दई अपना दावा पेश करने के लिये उठे तो उन्होंने इस पर किसी ऐसे जुर्म का इल्ज़ाम न लगाया जिस का मुझे गुमान था। बल्के उन का झगड़ा उन के अपने मज़हब और किसी आदमी हुज़ूर ईसा अलमसीह के बारे में था जो मर चुका है मगर पौलुस उसे ज़िन्दा बताता है। मैं बड़ी उलझन में हूं के ऐसी बातों की तहक़ीक़ात कैसे करूं; इसलिये मैंने पौलुस से पूछा के क्या उसे यरूशलेम जाना मन्ज़ूर है ताके इन बातों का फ़ैसला वहां हो? लेकिन पौलुस ने अपील कर दी के उन के मुक़द्दमा का फ़ैसला क़ैसर की अदालत में हो, लिहाज़ा मैंने हुक्म दिया के वह क़ैसर के पास भेजे जाने तक हवालात में रहे।” तब अग्रिप्पा फ़ेस्तुस से कहा, “मैं भी इस शख़्स की बातें उस की ज़बानी सुनना चाहता हूं।” फ़ेस्तुस ने जवाब दिया, “आप उसे कल सुन सकेंगे।” अगले दिन अग्रिप्पा और बिरनीके बड़ी शान-ओ-शौकत के साथ आये और पलटन के आला अफ़सरान और शहर के मुअज़्ज़ज़ लोगों के साथ दीवानख़ाने में दाख़िल हुए। फ़ेस्तुस ने हुक्म दिया, पौलुस को वहां हाज़िर किया जाये। फिर फ़ेस्तुस ने कहा: “अग्रिप्पा बादशाह, और जमा हाज़िरीन, तुम इस शख़्स को देखते हो! जिस के बरख़िलाफ़ सारी यहूदी क़ौम ने मुझ से यरूशलेम में और यहां क़ैसरिया में, चिल्ला-चिल्ला कर दरख़्वास्त की है के इसे ज़िन्दा न छोड़ा जाये। लेकिन मुझे मालूम हुआ है के पौलुस ने ऐसी कोई ख़ता नहीं की के उसे सज़ा-ए-मौत दी जाये, चूंके अब इस ने क़ैसर के हां अपील की है तो मैंने मुनासिब समझा के उसे रोम भेज दूं। लेकिन आक़ा-ए-आला क़ैसर को लिखने के लिये मेरे पास कोई ख़ास बात नहीं है। लिहाज़ा मैंने उसे यहां तुम्हारे, और ख़ासतौर पर अग्रिप्पा बादशाह के सामने हाज़िर किया है, ताके तहक़ीक़ात के बाद कोई ऐसी बात मालूम हो जिसे मैं क़ैसर को लिख कर भेज सिक्‍को। क्यूंके किसी क़ैदी को भेजते वक़्त इस पर लगाये गये इल्ज़ामात को ज़ाहिर न करना मेरे नज़दीक दानिशमन्दी नहीं है।” इस पर अग्रिप्पा पौलुस से कहा, “तुझे अपने बारे में बोलने की इजाज़त है।” लिहाज़ा पौलुस हाथ से इशारा करते हुए अपनी सफ़ाई पेश करने लगे: “ऐ बादशाह अग्रिप्पा, में अपने आप को ख़ुश क़िस्मत समझता हूं के आप के सामने खड़े होकर यहूदियों के इल्ज़ामात के ख़िलाफ़ अपनी सफ़ाई पेश कर सकता हूं, और ख़ुसूसन इसलिये के आप सारे यहूदी रस्म-ओ-रिवाज और मसलों से बख़ूबी वाक़िफ़ हैं। लिहाज़ा में इल्तिजा करता हूं के आप हलीमी से मेरी सुन लीजिये। “यहूदी अच्छी तरह जानते हैं के पहले मेरे अपने वतन में और बाद में यरूशलेम में अय्याम जवानी से मेरा चाल चलन कैसा रहा है। वह मुद्दत से मुझे जानते हैं और अगर चाहें तो मेरे हक़ में गवाही दे सकते हैं के मैं अपने कट्टर मज़हबी फ़िर्क़े के मुताबिक़ एक फ़रीसी की हैसियत से किस तरह ज़िन्दगी गुज़ारता आया हूं। ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद से एक वादा किया था। मुझे उम्मीद है के वह पूरा होगा। उसी उम्मीद की वजह से मुझ पर ये मुक़द्दमा चिल्लाया जा रहा है। उसी वादे के पूरा होने की उम्मीद हमारे बारह के बारह क़बीलों को है। इसलिये वह दिन रात दिल-ओ-जान से ख़ुदा की इबादत किया करते हैं। ऐ बादशाह! मेरी इसी उम्मीद के बाइस यहूदी मुझ पर मुक़द्दमा दायर कर रहे हैं। क्या तुम इस बात को के ख़ुदा मुर्दों की क़ियामत यानी मुर्दों को फिर से ज़िन्दा कर देगा, ग़ैर-मोतबर समझते हो? “कभी में भी समझता था के हुज़ूर ईसा अलमसीह नासरी के नाम की हर तौर से मुख़ालफ़त करना मुझ पर फ़र्ज़ है। चुनांचे मैंने यरूशलेम में ऐसा ही किया। मैंने अहम-काहिनों से इख़्तियार पा कर बहुत से मुक़द्दसीन को क़ैद में डाला और जब उन्हें सज़ा-ए-मौत सुनाई जाती थी तो में भी यही राय देता था। मैं हर एक यहूदी इबादतगाह में जाता और उन्हें सज़ा दिलवाता था और हुज़ूर ईसा अलमसीह के ख़िलाफ़ कुफ़्र बिकने पर मजबूर करता था। उन की मुख़ालफ़त ने मुझे इतना दीवान बना दिया था के मैं दूर दराज़ के बैरूनी शहरों में भी जा-जा कर उन्हें सताता था। “एक बार अहम-काहिनों के हुक्म और उन के इख़्तियार से इसी काम के लिये दमिश्क़ शहर का सफ़र कर रहा था और ऐ बादशाह! जब मैं राह में था तो दोपहर के वक़्त मैंने आसमान से रोशनी आती देखी जो सूरज की रोशनी से भी तेज़-तर थी और वह आकर हमारे गिर्द चमकने लगी। हम सब ज़मीन पर गिर पड़े, और मैंने एक आवाज़ सुनी जो मुझ से अरामी ज़बान में ये कह रही थी, ‘ऐ साऊल, ऐ साऊल, तू मुझे क्यूं सताता है? बेल हांकने की छड़ी पर लात मारना तेरे लिये मुश्किल है।’ “तब मैंने कहा, ‘ऐ आक़ा, आप कौन हैं?’ “ ‘मैं ईसा हूं, जिसे तू सताता है,’ ख़ुदावन्द ने उसे जवाब दिया। ‘अब उठ और अपने पांव पर खड़ा हो जा। मैं तुझ पर इसलिये ज़ाहिर हुआ हूं के तुझे अपना ख़ादिम मुक़र्रर करूं और जो कुछ तूने मुझ से देखा है और देखेगा उस का तुझे गवाह बनाऊं। मैं तुझे तेरे लोगों से और ग़ैरयहूदियों से बचाता रहूंगा। मैं तुझे उन में भेज रहा हूं ताके तो उन की आंखें खोले और उन्हें तारीकी से रोशनी में ले आये, और शैतान के इख़्तियार से निकाल कर ख़ुदा की तरफ़ फेर दे, ताके वह मुझ पर ईमान लायेंगे और गुनाहों की मुआफ़ी पायें और ख़ुदा के बरगुज़ीदा लोगों में शरीक होकर मीरास हासिल करें।’ “इसलिये ऐ अग्रिप्पा बादशाह, मैं इस आसमानी रोया का नाफ़रमान नहीं हुआ। बल्के पहले मैंने दमिश्क़ शहर के लोगों में, फिर यरूशलेम और सारे यहूदिया के रहने वालों और ग़ैरयहूदियों में भी मुनादी की, मैंने तब्लीग़ की के वह तौबा करें और ख़ुदा की तरफ़ रुजू हूं और अपने नेक अमल से अपनी तौबा का सबूत दें। इन ही बातों के सबब से यहूदियों ने मुझे बैतुलमुक़द्दस में पकड़ लिया और फिर मार डालने की कोशिश की। लेकिन मैं ख़ुदा की मदद से आज तक ज़िन्दा हूं; इसलिये में हर छोटे बड़े के सामने गवाही देता हूं। मैं जो बातें कहता हूं वोही हैं जिन की पेशीनगोई नबियों ने और हज़रत मूसा नेकी है। यानी ये के अलमसीह ज़रूर दुख उठायेंगे और सब से पहले वोही मुर्दों में से ज़िन्दा होकर यहूदी क़ौम को और ग़ैरयहूदियों को नूर का पैग़ाम देंगे।” जब वह अपनी सफ़ाई में ये बयान कर ही रहे थे तो फ़ेस्तुस ने उन्हें इशारे से रोक कर बुलन्द आवाज़ से कहा, पौलुस! “तू पागल हो गया है, इल्म की ज़्यादती ने तुझे पागल कर दिया है।” “मुअज़्ज़म फ़ेस्तुस,” मैं पागल नहीं हूं, पौलुस ने जवाब दिया। “मैं जो कुछ कह रहा हूं सच और माक़ूल है। बादशाह इन बातों से वाक़िफ़ है, और मैं उस से खुल कर बात कर सकता हूं। मुझे यक़ीन है के इन बातों में से कोई भी उन से छिपी नहीं है क्यूंके ये माजरा किसी गोशा में नहीं हुआ। अग्रिप्पा बादशाह, क्या आप नबियों पर ईमान रखते हैं? मैं जानता हूं के आप ईमान रखते हैं।” अग्रिप्पा पौलुस से कहा, “क्या तू मुझे ज़रा सी तरग़ीब से मसीही बना लेना चाहता है?” पौलुस ने जवाब दिया, “ख़्वाह ज़रा सी ख़्वाह ज़्यादा, मैं तो ख़ुदा से दुआ करता हूं के न सिर्फ़ आप बल्के जितने भी आज मेरी बात सुन रहे हैं मेरी मानिन्द हो जायें, सिवाए इन ज़न्जीरों के।” तब बादशाह उठ खड़ा हुआ और उस के साथ सूबा के हाकिम और बिरनीके और उन के हमनशीन भी उठ खड़े हुए। कमरे से निकलने के बाद, वह एक दूसरे से कहने लगे, “ये आदमी कोई ऐसा काम तो नहीं कर रहा है के उसे सज़ा-ए-मौत दी जाये या क़ैद में रखा जाये।” अग्रिप्पा ने फ़ेस्तुस से कहा, “अगर ये आदमी क़ैसर के हां अपील न करता तो रिहाई पा सकता था।” जब ये तै पाया के हम लोग जहाज़ से इतालिया जायेंगे, तो पौलुस और बाज़ दूसरे क़ैदी शाही पलटन के एक कप्तान के सुपुर्द कर दिये गये, जिस का नाम यूलियुस था। हम अद्रामुतय्युम से एक समुन्दरी जहाज़ पर सवार होकर रवाना हुए जो आसिया की साहिली बन्दरगाहों से होता हुआ आगे जाने वाला था, हमारे साथ, थिसलुनीके से तअल्लुक़ रखने वाला, एक मकिदुनी अरिसतरख़ुस भी था। अगले दिन जब जहाज़ सैदा में रुका तो यूलियुस ने पौलुस पर मेहरबानी कर के उन्हें अपने दोस्तों से मुलाक़ात करने की इजाज़त दे दी ताके उन की ख़ातिर तवाज़ो हो सके। वहां से हम फिर जहाज़ पर रवाना हुए और जज़ीरा साइप्रस की आड़ में होकर गुज़रे क्यूंके हवा हमारे मुख़ालिफ़ थी। फिर हम किलकिया और पम्फ़ीलिया के समुन्दरी साहिल से गुज़र कर आगे बढ़े तो लूकिया के शहर मूरा में जा उतरे। फ़ौजी कप्तान को वहां इस्कन्दरिया का एक समुन्दरी जहाज़ मिल गया जो इतालिया जा रहा था। इस ने हमें इस पर सवार करा दिया। हम बहुत दिनों तक आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ते रहे और किनदुस के सामने जा पहुंचे लेकिन तेज़ हवा की वजह से हमें आगे जाने में दुश्वारी महसूस हुई लिहाज़ा हम सलमोने के सामने से होकर क्रेते की आड़ में हो लिये। और बड़ी मुश्किल से साहिल के साथ-साथ आगे बढ़ते हुए हसीन बन्दरगाह में पहुंचे जहां से लसया शहर नज़दीक था। वक़्त बहुत ज़ाए हो चुका था, वहां हमें कई दिनों तक रुक्न पड़ा क्यूंके रोज़े का दिन गुज़र चुका था और इस मौसम में समुन्दरी सफ़र और भी पुर-ख़तर हो जाता है। इसलिये पौलुस ने उन्हें नसीहत के तौर पर कहा, “ऐ भाईयो, मुझे लगता है के हमारा सफ़र पर ख़तर साबित होगा और सिर्फ़ माल-ओ-अस्बाब और समुन्दरी जहाज़ का बल्के हमारी जानों का भी ख़तरा है।” लेकिन फ़ौज के कप्तान ने पौलुस की बात सुनने की बजाय जहाज़ के कप्तान और मालिक की बातों को ज़्यादा अहम्मीयत दी। चूंके वह बन्दरगाह सर्दी का मौसम गुज़ारने के लिये मौज़ूं न थी, इसलिये अक्सरीयत का फ़ैसला ये था के हम आगे बढ़ीं और उम्मीद रख्खीं के फीनिक्स में पहुंच कर सर्दी का मौसम वहां गुज़ार सकेंगे। ये क्रेते की एक बन्दरगाह थी जिस का रुख़ शुमाल मशरिक़ और जुनूब मशरिक़ की जानिब था। जब जुनूब की जानिब से हल्की-हल्की हवा चलन शुरू हो गई, तो वह समझे के अब हमारी मुश्किल जाती रही; लिहाज़ा उन्होंने लंगर उठाया और क्रेते के साहिल के साथ-साथ आगे बढ़े। लेकिन जल्द ही बड़ी तूफ़ानी हवा जिसे यूरकुलोन कहते हैं शुमाल मशरिक़ की जानिब से आई जज़ीरा के नीचे बह गई। समुन्दरी जहाज़ तूफ़ानों की गिरिफ़्त में आ गया और जहाज़ हिचकोले खाने लगा; लिहाज़ा हम ने लाचार होकर जहाज़ हवा के रहम-ओ-करम पर छोड़ दिया। जब हम बहते-बहते एक छोटे जज़ीरा कोदह तक पहुंचे, हम डोंगी को बड़ी मुश्किल से क़ाबू में ला सके, इसलिये हमारे आदमियों ने उसे ऊपर चढ़ा लिया। पस समुन्दरी जहाज़ को टूटने से बचाने के लिये उसे ऊपर से नीचे तक रस्सों से बांध दिया। क्यूंके उन्हें ख़ौफ़ था के कहीं ऐसा न हो के जहाज़ सूर्तिस की खाड़ी की रेत में धंस कर रह जाये, लिहाज़ा उन्होंने समुन्दरी लंगर को नीचे कर दिया और जहाज़ को इसी तरह बहने दिया। जब जहाज़ तूफ़ानी हवा में बहुत ही हिचकोले खाने लगा तो अगले दिन उन्होंने जहाज़ का माल समुन्दर में फेंकना शुरू कर दिया। तीसरे दिन उन्होंने अपने हाथों से समुन्दरी जहाज़ के आलात वग़ैरा भी नीचे फेंक दिये। जब कई दिनों तक सूरज नज़र आया न तारे और तूफ़ानों का ज़ोर भी बढ़ने लगा तो बचने की आख़िरी उम्मीद भी जाती रही। लोगों को खाना-पीना छोड़े हुए कई दिन हो गये थे इसलिये पौलुस ने उन के बीच में खड़े होकर कहा: “ऐ भाईयो, अगर तुम मेरी नसीहत क़बूल कर लेते और क्रेते से आगे रवाना ही न होते तो तुम्हें इस नुक़्सान और तकलीफ़ का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन अब मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूं के हौसला न हारो। तुम में से कोई भी हलाक न होगा; सिर्फ़ समुन्दरी जहाज़ तबाह हो जायेगा क्यूंके मेरे ख़ुदा जिस की मैं इबादत करता हूं उस का फ़रिश्ता कल रात मेरे पास आ खड़ा हुआ और कहने लगा, ‘पौलुस, ख़ौफ़ज़दा मत हो। तेरा क़ैसर के हुज़ूर में पेश होना लाज़िम है; और तेरी ख़ातिर ख़ुदा अपने फ़ज़ल से इन सब की जान सलामत रखेगा जो जहाज़ पर तेरे हमसफ़र हैं।’ इसलिये साहिबो, तुम अपना हौसला बुलन्द रखो, मेरा ईमान है के मेरे ख़ुदा ने जो कुछ मुझ से फ़रमाया है वोही होगा। ताहम, हमें ज़रूर किसी जज़ीरे पर ठहरना होगा।” चौद्हवीं रात को जब हम बहर-ए-आद्रिया मैं इधर-उधर टकराते फिरते थे तो आधी रात के वक़्त मल्लाहों ने महसूस किया के वह किनारे के नज़दीक पहुंच रहे हैं। उन्होंने पानी की गहराई नापी तो वह एक सौ बीस फ़िट गहरी निकली। फिर थोड़ा आगे जा कर नापा तो पाया ये नव्वे फ़िट गहरी है। इस ख़ौफ़ से के कहीं चट्टानों से न टकरा जायें उन्होंने जहाज़ के पिछले हिस्सा से चार लंगर समुन्दर में डाल दिये और सुबह की रोशनी की तमन्ना में दुआ करने लगे। मल्लाहों ने समुन्दरी जहाज़ से बच निकलने के लिये डोंगी नीचे उतारी लेकिन ज़ाहिर ये किया के वह जहाज़ के अगले हिस्सा से पानी में लंगर डालना चाहते हैं। तब पौलुस ने फ़ौजी कप्तान और सिपाहियों से कहा, “अगर ये लोग समुन्दरी जहाज़ पर न रहेंगे, तो तुम लोगों का बचना मुश्किल है।” लिहाज़ा सिपाहियों ने डोंगी की रस्सियां काट दें और जहाज़ समुन्दर में छोड़ दिया। सुबह होने से ज़रा पहले पौलुस ने सब की मिन्नत की के कुछ खा लें। आप ने कहा, “पिछले चौदह दिन से, तुम लोग शक-ओ-शुबा में पड़े हुए हो और तुम ने खाने को छुआ तक नहीं। अब मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूं के कुछ खा लो क्यूंके तुम्हारी सलामती इसी पर मौक़ूफ़ है और यक़ीन रखो के तुम में से किसी के सर का एक बाल भी बाका न होगा।” जब वह ये कह चुके तो उन्होंने कुछ रोटी ली और सब के सामने ख़ुदा का शुक्र किया और रोटी तोड़ कर खाने लगे। इस से सब की हिम्मत बंधी और वह भी खाने लगे। हम सब मिल कर दो सौ छिहत्तर आदमी थे जो इस समुन्दरी जहाज़ पर सवार थे। जब वह पेट भर कर खा चुके तो उन्होंने सारा गेहूं समुन्दर में फेंकना शुरू कर दिया ताके समुन्दरी जहाज़ हल्का हो जाये। जब दिन निकला तो उन्होंने ख़ुश्की को न पहचाना लेकिन एक खाड़ी देखी जिस का किनारा नज़र आया। उन्होंने सलाह की के अगर मुम्किन हो तो समुन्दरी जहाज़ को इसी पर चढ़ा लें। पस लंगर खोल कर समुन्दर में छोड़ दिये और पतवारों की रस्सियां भी खोल दें। सामने का बादबान खोल कर ऊपर चढ़ा दिया और किनारे की तरफ़ बढ़े। लेकिन समुन्दरी जहाज़ ख़ुश्की पर पहुंच कर रेत पर जा टिका। इस के सामने वाला अगला हिस्सा तो किनारे पर रेत में धंस गया लेकिन पिछला हिस्सा लहरों के ज़ोर से टुकड़े-टुकड़े हो गया। सिपाहियों की सलाह थी के क़ैदियों को मार डालें ताके उन में से कोई तैर कर भाग न जाये। लेकिन फ़ौजी कप्तान ने पौलुस की ज़िन्दगी महफ़ूज़ रखने के लिये उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और हुक्म दिया के जो तैर सकते हैं वह पहले कूद जायें और ख़ुश्क ज़मीन पर पहुंच कर जान बचा लें। बाक़ी मुसाफ़िरों ने लकड़ी के तख़्तों और समुन्दरी जहाज़ को दूसरी चीज़ों की मदद से किसी न किसी तरह अपनी जान बचाई। पस इस तरह सब के सब ख़ुश्क ज़मीन पर ब हिफ़ाज़त पहुंच गये। जब हम सलामती से साहिल पर पहुंच गये, तो हमें मालूम हुआ के जज़ीरा का नाम माल्टा है। वहां के जज़ीरा के बाशिन्दों ने हमारे साथ बड़ी मेहरबानी का सुलूक किया। तेज़ बारिश हो रही थी और सर्दी भी ज़ोरों पर थी इसलिये उन्होंने आग जलाई और हमारी ख़ातिर तवाज़ो की। पौलुस ने सूखी लकड़ियां जमा कर के गठ्-ठा बनाया और, जब वह उसे आग में डालने लगे, तो आग की गर्मी की वजह से, एक ज़हरीला सांप, लकड़ियों में से निकल कर पौलुस के हाथ पर लिपट गया। जब जज़ीरा के बाशिन्दों ने सांप को उन के हाथ से लटकते हुए देखा तो आपस में कहने लगे, “ये आदमी ज़रूर कोई ख़ूनी है; ये समुन्दर में ग़र्क़ होने से ज़िन्दा बच गया, लेकिन इन्साफ़ की देवी इन्हें ज़िन्दा नहीं छोड़ेगी।” मगर पौलुस ने सांप को आग में झटक दिया और उन्हें कोई नुक़्सान न हुआ। वह लोग इन्तिज़ार में थे के उस का बदन सूज जायेगा और वह मर के ढेर हो जायेगा। लेकिन काफ़ी इन्तिज़ार के बाद जब पौलुस को कोई ज़रूर न पहुंचा तो उन्होंने अपना ख़्याल बदल दिया और कहने लगे के ये तो कोई माबूद है। वह इलाक़े उस जज़ीरे के हाकिम पुबलियुस, की मिल्कियत में था। उस ने हमें अपने घर पर मदऊ किया और तीन दिन तक हमारी ख़ूब ख़ातिर तवाज़ो की। पुबलियुस का बाप बुख़ार और पेचिश के बाइस बीमार पड़ा था। पौलुस उस की इयादत करने गये और दुआ के बाद अपने हाथ इस पर रखो और उसे शिफ़ा बख़्शी। जब ऐसा हुआ, तो उस जज़ीरे के बाक़ी मरीज़ भी आकर शिफ़ा पाने लगे। जज़ीरे में बाक़ी बीमार आये और सेहतयाब हो गये। उन्होंने हमारी बड़ी इज़्ज़त की और जब हम आगे जाने के लिये तय्यार हुए तो सफ़र के लिये हमारी ज़रूरत की सारी चीज़ें जहाज़ पर रखवा दीं। हमारे समुन्दरी जहाज़ को तबाही के तीन माह बाद हम इस्कन्दरिया के एक जहाज़ से रवाना हुए जो सर्दियां गुज़ारने के लिये इस जज़ीरा में रुका हुआ था। इस पर यूनानियों के जुड़वां माबूदों की सूरत बनी हुई थी। पहले हम सरकूसा पहुंचे और तीन दिन वहां रहे वहां से हम चक्कर काटते हुए रेगियुम में गये। अगले दिन जुनूबी हवा चलने लगी और हम एक दिन बाद पुतियुली जा पहुंचे। वहां हमें कुछ भाई और बहन मिले उन्होंने हमें अपने यहां ठहरने की दावत दी हम सात दिन उन के पास रहे। और इस तरह हम रोम आये। वहां के भाईयों और बहनों को ख़बर पहुंच चुकी थी के हम आ रहे हैं। वह हमारे इस्तिक़्बाल के लिये अप्पियुस के चौक और तीन सराय तक आये। पौलुस ने उन्हें देखकर ख़ुदा का शुक्र अदा किया और बड़ी तसल्ली पाई। जब हम रोम शहर पहुंचे, तो पौलुस को तन्हा रहने की इजाज़त मिल गई के वह एक पहरेदार की निगरानी में जहां चाहें रह सकते हैं। जब तीन दिन गुज़र गये तो पौलुस ने यहूदी रहनुमाओं के को बुलवाया। जब वह जमा हुए, तो पौलुस ने उन से कहा: “मेरे भाईयो, मैंने अपनी उम्मत के और बाप दादा की रस्मों के ख़िलाफ़ कोई काम नहीं किया तो भी, मुझे यरूशलेम में गिरिफ़्तार कर के रोमियों के हवाले कर दिया गया। उन्होंने तहक़ीक़ात के बाद मुझे छोड़ देना चाहा, क्यूंके मैंने कोई ऐसा काम नहीं किया था के मुझे सज़ा-ए-मौत दी जाती। मगर जब यहूदियों ने मुख़ालफ़त की तो मैंने क़ैसर के हां अपील कर दी। मैं यक़ीनी तौर पर अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ कोई इल्ज़ाम आयद करने का इरादा नहीं रखता था। चुनांचे मैंने तुम्हें इसलिये बुलाया है के तुम से मिलूं और बात करूं। क्यूंके मैं इस्राईल की उम्मीद के सबब से ज़न्जीर से जकड़ा हुआ हूं।” उन्होंने जवाब दिया, “हमें यहूदिया से आप के बारे में न तो ख़ुतूत मिले न वहां से आने वाले भाईयों ने हमें आप की कोई ख़बर दी न आप के ख़िलाफ़ कुछ कहा। लेकिन हम आप के ख़्यालात जानना चाहते हैं। ये तो हमें मालूम है के लोग हर जगह इस फ़िर्क़ा के ख़िलाफ़ बातें करते हैं।” तब उन्होंने पौलुस की बातें सुनने के लिये एक दिन मुक़र्रर किया। जब वह दिन आया तो वह पहले से भी ज़्यादा तादाद में उन की रिहाइश पर हाज़िर हुए। पौलुस ने उन्हें ख़ुदा की बादशाही के बारे में समझाया और साथ ही हुज़ूर ईसा अलमसीह के बारे में हज़रत मूसा की शरीअत और नबियों की किताबों से उन्हें क़ाइल करने की कोशिश की। गुफ़्तगू का ये सिलसिला सुबह से शाम तक जारी रहा। बाज़ पौलुस की बातें सुन कर क़ाइल हो गये लेकिन बाज़ यक़ीन न लाये। जब वह आपस में मुत्तफ़िक़ न हुए तो पौलुस ने उन के रुख़्सत होने से पहले ये बयान दिया: “पाक रूह ने यसायाह नबी की मारिफ़त तुम्हारे बारे में ठीक ही कहा था: “ ‘इस क़ौम के पास जाओ और कहो, “तुम सुनते तो रहोगे लेकिन समझोगे नहीं; देखते रहोगे लेकिन कभी पहचान न पाओगे।” क्यूंके इस क़ौम के दिल शिकस्ता हो गये हैं; वह ऊंचा सुनने लगे हैं, और उन्होंने अपनी आंखें बन्द कर रख्खी हैं। कहीं ऐसा न हो के उन की आंखें देख लें। उन के कान सुन लें, उन के दिल समझ लें। और वह मेरी तरफ़ फिरें और मैं उन्हें शिफ़ा बख़्शूं।’ “इसलिये मैं चाहता हूं के तुम जान लो के ख़ुदा की नजात का पैग़ाम ग़ैरयहूदियों के पास भी भेजा गया है और वह उसे सुनेंगे!” जब पौलुस ने ये कहा तो यहूदी आपस में बहस करते हुए वहां से चले गये। पौलुस पूरे दो बरस तक अपने कराया के मकान में रहे और जो उन से मुलाक़ात करने आते थे उन सब से मिला करते थे। वह बड़ी दिलेरी से ख़ुदा की बादशाही की ख़ुशख़बरी तब्लीग़ और हुज़ूर ईसा अलमसीह के बारे में तालीम देते रहे और किसी ने पौलुस को रोकने की कोशिश नहीं की! पौलुस की तरफ़ से लिखा हुआ ख़त, जो ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ख़ादिम, और रसूल होने के लिये बुलाए गये और ख़ुदा की ख़ुशख़बरी सुनाने के लिये मख़्सूस किये गये, जिस का वादा ख़ुदा ने बहुत पहले से अपने नबियों की मारिफ़त किताब-ए-मुक़द्दस में किया था जो अपने बेटे अलमसीह की निस्बत से था, जो जिस्मानी एतबार से तो दाऊद की नस्ल से थे, लेकिन पाकीज़गी की रूह के एतबार से मुर्दों में से जी उठने के बाइस बड़ी क़ुदरत के साथ ख़ुदा का बेटा ठहरे: यानी हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह। आप की मारिफ़त हमें फ़ज़ल और रिसालत मिली ताके हम सब ग़ैरयहूदियों को आप के नाम की ख़ातिर ईमान से आने वाली इताअत के ताबे हों। और तुम भी उन ग़ैरयहूदियों में शामिल हो और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के होने के लिये बुलाए गये हो। उन सब ख़ुदा के प्यारों के नाम जो रोम शहर में हैं और मुक़द्दस लोग होने के लिये बुलाए गये हैं: हमारे बाप ख़ुदा और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। पहले, तो मैं तुम सब के लिये ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से अपने ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं के तुम्हारे ईमान का चर्चा सारी दुनिया में हो रहा है। ख़ुदा जिस के बेटे की ख़ुशख़बरी की तब्लीग़ की ख़िदमत में दिल-ओ-जान से अन्जाम दे रहा हूं, मेरी ये गवाही है के आप को हर वक़्त अपनी दुआओं में कितनी कसरत से याद करता हूं और यही दुआ करता हूं; ख़ुदा की मर्ज़ी से तुम्हारे पास आने का मेरे लिये रास्ता खुल जाये। क्यूंके मैं तुम से मिलने का मुश्ताक़ हूं ताके तुम्हें कोई ऐसी रूहानी नेमत दे सकूं जो तुम्हारे ईमान की मज़बूती का बाइस हो। मेरा मतलब ये है के मेरे ईमान से तुम्हारी और तुम्हारे ईमान से मेरी हौसला अफ़्ज़ाई हो। ऐ भाईयो और बहनों! मैं नहीं चाहता के तुम इस बात से नावाक़िफ़ रहो के मैंने बारहा तुम्हारे पास आने का इरादा किया ताके जैसे ग़ैरयहूदियों में मेरी ख़िदमत फल लाई, तुम में भी लाये। मगर कोई न कोई रुकावट पैदा होती रही। मैं यूनानियों और गै़रयूनानियों और दानिशमन्दों और नादानों दोनों ही का कर्ज़दार हूं। इसलिये मैं तुम्हारे दरमियान भी जो रोम में हो ख़ुशख़बरी सुनाने का बेहद मुश्ताक़ हूं। मैं इन्जील से नहीं शरमाता क्यूंके वह हर ईमान लाने वाले की नजात के लिये ख़ुदा की क़ुदरत है। पहले यहूदी के लिये फिर ग़ैरयहूदी के लिये। क्यूंके इन्जील मैं ख़ुदा की जानिब से उस रास्तबाज़ी को ज़ाहिर किया गया है जो शुरू से आख़िर तक ईमान ही के ज़रीये हासिल होती है। जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस लिखा है: “रास्तबाज़ ईमान से ज़िन्दा रहेगा।” आसमान से उन लोगों की सारी बेदीनी और नारास्ती पर ख़ुदा का ग़ज़ब नाज़िल होता है जो सच्चाई को अपनी नारास्ती से दबाए रखते हैं। चूंके ख़ुदा के मुतअल्लिक़ जो कुछ भी मालूम हो सकता है वह उन पर ज़ाहिर है इसलिये के ख़ुदा ने ख़ुद उसे उन पर ज़ाहिर कर दिया है। क्यूंके ख़ुदा की अज़ली क़ुदरत और उलूहीयत जो उस की इन देखी सिफ़ात हैं दुनिया की के वक़्त से उस की बनाई हुई चीज़ों से अच्छी तरह ज़ाहिर हैं। लिहाज़ा इन्सान के पास कोई उज़्र नहीं। अगरचे उन्होंने ख़ुदा के बारे में जान लिया था लेकिन उन्होंने उस की तम्जीद और शुक्र गुज़ारी न की जिस के वह लाइक़ था। बल्के उन के ख़यालात फ़ुज़ूल साबित हुए और उन के न समझ दिलों पर अन्धेरा छा गया। वह अक़्लमन्द होने का दावा करते थे लेकिन बेवक़ूफ़ निकले। और ग़ैरफ़ानी ख़ुदा के जलाल को फ़ानी इन्सान और परिन्दों, चौपायों और रेंगने वाले जानवर की सूरत में बदल डाला। इसीलिये ख़ुदा ने भी उन्हें उन के दिलों की गुनाह आलूदा ख़ाहिशों के मुताबिक़ शहवत-परस्ती के हवाले कर दिया ताके वह अपने बदनों से एक दूसरे के साथ गंदे और नापाक काम करें। उन्होंने ख़ुदा की सच्चाई को झूट से बदल डाला, और ख़ालिक़ की बनिस्बत मख़्लूक़ात की परस्तिश में ज़्यादा मश्ग़ूल हो गये हालांके ख़ालिक़ ही अबद तक हम्द-ओ-सिताइश के लाइक़ है। आमीन। इसी सबब से ख़ुदा ने उन्हें उन के दिलों की शर्मनक ख़ाहिशात में छोड़ दिया यहां तक के उन की औरतों ने अपने तब्ई जिन्सी-फे़ल को ग़ैर-तब्ई फे़अल से बदल डाला। इसी तरह मर्दों ने भी औरतों के साथ अपने तब्ई जिन्सी-फे़ल को छोड़ दिया और आपस की शहवत के ग़ुलाम होकर एक दूसरे से जिन्सी तअल्लुक़ात पैदा कर लिये। इस का नतीजा ये हुआ के उन्होंने अपनी गुमराही की मुनासिब सज़ा पाई। चूंके उन्होंने ख़ुदा की पहचान पर क़ाइम रहना मुनासिब न समझा इसलिये उस ने उन्हें नापसन्दीदा ख़यालों और नामुनासिब हरकात का शिकार होने दिया। वह हर तरह की बदकारी, बुराई हिर्स और बदचलनी से भर गये। और हसद, ख़ूंरेज़ी, झगड़े, अय्यारी और बुग़्ज़ से मामूर हो गये, बदगो, ख़ुदा से नफ़रत करने वाले, गुस्ताख़, मग़रूर और शेख़ी बाज़, बदी के बानी और अपने वालिदैन के नाफ़रमान, बेवक़ूफ़, बेवफ़ा, संगदिल और बेरहम हो गये। हालांके उन्हें मालूम है के ऐसे काम करने वाले ख़ुदा के आदिलाना हुक्म के मुताबिक़ मौत की सज़ा के मुस्तहिक़ हैं फिर भी न सिर्फ़ वह ख़ुद यही काम करते हैं बल्के ऐसा करने वालों को पसन्द करते हैं। चुनांचे, ऐ इल्ज़ाम लगाने वालो, तुम्हारे पास कोई उज़्र नहीं, क्यूंके तुम जिस बात का इल्ज़ाम दूसरे पर लगाते हो, और ख़ुद पर सज़ा का हुक्म नाफ़िज़ कर रहो है, तुम अपने आप को मुजरिम ठहराते हो। हम जानते हैं के ख़ुदा ऐसे काम करने वालों की सच्चाई से अदालत करता है। लिहाज़ा तुम, जो महज़ इन्सान, होते हुए ऐसे काम करने वालों पर इल्ज़ाम लगाते हो और ख़ुद वोही काम करते हो, क्या तुम समझते हो के तुम ख़ुदा की अदालत से बच जाओगे? क्या तुम ख़ुदा की मेहरबानी, तहम्मुल और सब्र की दौलत की तौहीन करते हो, ये नहीं जानते के ख़ुदा की मेहरबानी तुम्हें तौबा की तरफ़ माइल करती है? लेकिन तुम्हारा दिल इतना सख़्त हो गया के तुम तौबा नहीं करते, लिहाज़ा तुम अपने हक़ में उस रोज़ क़हर के लिये ग़ज़ब कमा रहे हो, जब ख़ुदा का सच्चा इन्साफ़ ज़ाहिर होगा। ख़ुदा “हर शख़्स को उस के आमाल के मुताबिक़ बदला देगा।” जो नेक कामों की तलाश में हैं जलाल, इज़्ज़त और बक़ा चाहते हैं, उन्हें वह अब्दी ज़िन्दगी अता फ़रमायेगा। लेकिन जो ख़ुद ग़रज़ हैं और सच्चाई को तर्क कर के बदी की पैरवी करते हैं, उन पर ख़ुदा का क़हर और ग़ज़ब नाज़िल होगा। हर इन्सान पर जो बदी करता है मुसीबत और तंगी आयेगी: पहले यहूदी पर, फिर ग़ैरयहूदी पर। लेकिन हर उस शख़्स को जो नेकी करता है उन सब के लिये जलाल, इज़्ज़त और इत्मीनान मिलेगा। पहले यहूदी को, फिर ग़ैरयहूदी को। क्यूंके ख़ुदा किसी की तरफ़दारी नहीं करता। जो लोग शरीअत पाये बग़ैर गुनाह करते हैं वह सब शरीअत के बग़ैर हलाक भी होंगे और जो शरीअत के मातहत रह कर गुनाह करते हैं उन की अदालत शरीअत के मुताबिक़ होगी। क्यूंके शरीअत के महज़ सुनने वाले ख़ुदा की नज़्र में रास्तबाज़ नहीं होते बल्के शरीअत पर अमल करने वाले ही रास्तबाज़ क़रार दिये जायेंगे। अलबत्ता जब वह ग़ैरयहूदी जो शरीअत नहीं रखते और तब्ई तौर पर शरीअत के मुताबिक़ काम करते हैं तो शरीअत न रखते हुए भी वह ख़ुद अपने लिये एक शरीअत हैं। इस तरह वह ये ज़ाहिर करते हैं के शरीअत के अहकाम उन के दिलों पर नक़्श हैं और उन का ज़मीर भी इस बात की गवाही देता है और उन के ख़यालात भी कभी उन पर इल्ज़ाम लगाते हैं, कभी उन्हें बरी ठहराते हैं। जैसा के उस ख़ुशख़बरी के मुताबिक़ जिस का मैं एलान करता हूं। ये उस रोज़ होगा जब ख़ुदा ईसा अलमसीह, की मारिफ़त आदमियों की पोशीदा बातों की अदालत करेगा। अगर तुम यहूदी कहलाते हो; और शरीअत पर ईमान और ख़ुदा के साथ अपने रिश्ते पर फ़ख़्र करते हो; अगर तुम उस की मर्ज़ी जानते हो और शरीअत की तालीम पा कर उम्दा बातें पसन्द करता हो; अगर तुम्हें इस बात पर भी यक़ीन है के तुम अन्धों के रहनुमा और तारीकी में पड़े हुए लोगों के लिये रोशनी हो, नादानों की तरबियत करने वाले और बच्चों के उस्ताद हो के इल्म और हक़ का अन्जाम शरीअत में है और वह तुम्हारे पास है तुम जब औरों को सिखाते हो तुम अपने आप को क्यूं नहीं सिखाते? तुम जो तब्लीग़ करते हो के चोरी न करना, तुम ख़ुद क्यूं चोरी करते हो? तुम जो कहते हो के ज़िना मत करना, ख़ुद क्यूं ज़िना करते हो? तुम जो बुतों से नफ़रत रखते हो, ख़ुद क्यूं बुत ख़ानों को लूटते हो? तुम जो शरीअत पर फ़ख़्र करते हो, ख़ुद क्यूं शरीअत की नाफ़रमानी कर के ख़ुदा की बेइज़्ज़ती करते हो? जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “तुम्हारे सबब ग़ैरयहूदियों में ख़ुदा के नाम पर कुफ़्र बका जाता है।” ख़तना से फ़ायदा है बशर्ते के तुम शरीअत पर अमल करो। लेकिन अगर तुम ने शरीअत की नाफ़रमानी की तो तुम्हारा ख़तना नामख़्तूनी के बराबर ठहरा। अगर नामख़्तून लोग शरीअत के अहकाम पर अमल करें तो क्या उन की नामख़्तूनी ख़तना के बराबर न गिनी जायेगी? वह शख़्स जो नामख़्तून है मगर शरीअत पर अमल करता है तो वह तुम्हें शरीअत की नाफ़रमानी करने के लिये क़ुसूरवार न ठहरायेगा, जब के तुम्हारे पास जो शरीअत मौजूद है, और तुम्हारा ख़तना भी हो चुका है। जो महज़ ज़ाहिरी हो वह यहूदी नहीं होता और न ही वह ख़तना होता है जो महज़ ज़ाहिरी और जिस्मानी है। बल्के यहूदी वोही है जो बातिन में यहूदी है और ख़तना वोही है जो दिल का और रूहानी है न के शरीअत के वसीले से किया जाता है। ऐसे इन्सान की तारीफ़ आदमियों की जानिब से नहीं बल्के ख़ुदा की जानिब से होती है। क्या यहूदी का दर्जा ऊंचा है और ख़तने का कोई फ़ायदा है? बहुत है और हर लिहाज़ से है। ख़ुसूसन ये के ख़ुदा का कलाम उन के सुपुर्द किया गया। बाज़ बेवफ़ा निकले तो क्या हुआ? क्या उन की बेवफ़ाई ख़ुदा की वफ़ादारी को बातिल कर सकती है? हरगिज़ नहीं, ख़्वाह हर आदमी झूटा निकले, ख़ुदा सच्चा ही ठहरेगा जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “तुम अपनी बातों में रास्तबाज़ ठहरो और अपने इन्साफ़ में हक़ बजानिब साबित हो।” मैं बतौर इन्सान ये बात कहता हूं के अगर हमारी नारास्ती ख़ुदा की रास्तबाज़ी की सिफ़त को ज़्यादा सफ़ाई से ज़ाहिर करती है तो क्या हम ये कहीं के ख़ुदा बेइन्साफ़ है जो हम पर ग़ज़ब नाज़िल करता है? मैं इन्सानी दलील इस्तिमाल कर रहा हूं। हरगिज़ नहीं। इस सूरत में ख़ुदा दुनिया का इन्साफ़ कैसे करेगा? शायद कोई कहे, “अगर मेरे झूट के सबब से ख़ुदा की सच्चाई ज़्यादा सफ़ाई से नज़्र आती है और ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर होता है तो फिर मैं क्यूं गुनहगार शुमार किया जाता हूं?” क्यूं न ये कहें। “आओ हम बदी करें ताके भलाई पैदा हो?” इन्साफ़ का तक़ाज़ा तो ये है! फिर नतीजा क्या निकला? क्या हम यहूदी दूसरों से बेहतर हैं? हरगिज़ नहीं! हम तो पहले ही साबित कर चुके हैं के यहूदी और यूनानी सब के सब गुनाह के क़ब्ज़ा में हैं। जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “कोई भी इन्सान रास्तबाज़ नहीं, एक भी नहीं; कोई भी समझदार नहीं, कोई भी ख़ुदा का मुतलाशी नहीं। सब के सब ख़ुदा से गुमराह हो गये, वह किसी काम के नहीं रहे; उन में कोई भी इन्सान नहीं जो नेकी करता हो, एक भी नहीं।” “उन के हलक़ खुली हुई क़ब्रों की मानिन्द हैं; उन की ज़बानों से दग़ाबाज़ी की बातें निकलती हैं।” “उन के लबों पर अफ़ई का ज़हर होता है।” “उन के मुंह लानत और कड़वाहट से भरे हुए हैं।” “उन के क़दम ख़ून बहाने के लिये तेज़-रफ़्तार हो जाते हैं; उन की राहों में तबाही और बदहाली है, और वह सलामती की राह से सदा से ही अन्जान हैं।” “न ही उन की आंखों में ख़ुदा का ख़ौफ़ है।” अब हम जानते हैं के शरीअत जो कुछ कहती है उन से कहती है जो शरीअत के मातहत हैं ताके हर मुंह बन्द हो जाये और सारी दुनिया ख़ुदा के सामने सज़ा की मुस्तहिक़ ठहरे। क्यूंके शरीअत के आमाल से कोई शख़्स ख़ुदा की हुज़ूरी में रास्तबाज़ नहीं ठहरेगा; इसलिये के शरीअत के ज़रीये से ही आदमी गुनाह को पहचानता है। मगर अब ख़ुदा ने एक ऐसी रास्तबाज़ी ज़ाहिर की है जिस का तअल्लुक़ शरीअत से नहीं है हालांके शरीअत और नबियों की किताबें इस की गवाही ज़रूर देती हैं। ये ख़ुदा की वह रास्तबाज़ी है जो सिर्फ़ हुज़ूर ईसा अलमसीह पर ईमान लाने से इन्सानों को हासिल होती है। अलमसीह पर ईमान लाने से यहूदी और ग़ैरयहूदी के माबैन कोई तफ़रीक़ नहीं, क्यूंके सब ने गुनाह किया है और ख़ुदा के जलाल से महरूम हैं, मगर उन के फ़ज़ल के सबब उस मुख़्लिसी के वसीले से जो हुज़ूर अलमसीह ईसा में है, मुफ़्त रास्तबाज़ ठहराये जाते हैं। ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा को मुक़र्रर किया के वह अपना ख़ून बहायें और इन्सान के गुनाह का कफ़्फ़ारा बन जायें और उन पर ईमान लाने वाले फ़ायदा उठायें। ये कफ़्फ़ारा ख़ुदा की रास्तबाज़ी को ज़ाहिर करता है इसलिये के ख़ुदा ने बड़े सब्र और तहम्मुल के साथ उन गुनाहों को जो पेशतर हो चुके थे, दर गुज़र किया। ख़ुदा इस ज़माने में भी अपनी रास्तबाज़ी ज़ाहिर करता है क्यूंके वह आदिल भी है और हर शख़्स को जो हुज़ूर ईसा पर ईमान लाता है रास्तबाज़ ठहराता है। पस फ़ख़्र कहां रहा? इस की गुन्जाइश ही न रही। किस के वसीले से? क्या शरीअत पर अमल करने के वसीले से? नहीं, बल्के ईमान की शरीअत के वसीले से। चुनांचे हम इस नतीजा पर पहुंचते हैं के इन्सान शरीअत पर अमल करने से नहीं बल्के ईमान लाने के बाइस ख़ुदा के हुज़ूर में रास्तबाज़ ठहरता है। क्या ख़ुदा सिर्फ़ यहूदियों का है? क्या वह ग़ैरयहूदियों का ख़ुदा नहीं? बेशक, वह ग़ैरयहूदियों का भी है। सच तू ये है के ख़ुदा ही वह वाहिद ख़ुदा है जो मख़्तूनों को उन के ईमान लाने की बिना पर और नामख़्तूनों को भी उन के ईमान ही के वसीले से रास्तबाज़ ठहरायेगा। क्या हम इस ईमान के ज़रीये से शरीअत को मन्सूख़ कर देते हैं? हरगिज़ नहीं! बल्के, इस से शरीअत को क़ाइम रखते हैं। हम हज़रत इब्राहीम के बारे में जो हमारे जिस्मानी बाप हैं क्या कहें? आख़िर हज़रत इब्राहीम को क्या हासिल हुआ? अगर हज़रत इब्राहीम अपने आमाल की बिना पर रास्तबाज़ ठहराये जाते तो उन्हें फ़ख़्र करने का हक़ होता लेकिन ख़ुदा के हुज़ूर में नहीं। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस क्या कहती है? “हज़रत इब्राहीम ख़ुदा पर ईमान लाये और ये उन के लिये रास्तबाज़ी शुमार किया गया।” जब कोई शख़्स काम कर के अपनी उजरत हासिल करता है तो उस की उजरत बख़्शिश नहीं बल्के उस का हक़ समझी जाती है। मगर जो शख़्स अपने काम पर नहीं बल्के बेदीनों को रास्तबाज़ ठहराने वाले ख़ुदा पर ईमान रखता है, उस का ईमान उस के लिये रास्तबाज़ी शुमार किया जाता है। पस जिस शख़्स को ख़ुदा उस के कामों का लिहाज़ किये बग़ैर रास्तबाज़ ठहराता है, दाऊद भी उस की मुबारक हाली का ज़िक्र इस तरह करते हैं, “मुबारक हैं वो लोग जिन की ख़ताएं बख़्शी गईं, और जिन के गुनाहों ढांका गया। मुबारक है वह आदमी जिन के गुनाह ख़ुदावन्द कभी हिसाब में नहीं लायेगा।” क्या ये मुबारकबादी सिर्फ़ उन के लिये है जिन का ख़तना हो चुका है या उन के लिये भी है जिन का ख़तना नहीं हुआ? क्यूंके हम कहते आये हैं के हज़रत इब्राहीम का ईमान उन के वास्ते रास्तबाज़ी शुमार किया गया। सवाल ये है के वह किस हालत में रास्तबाज़ गिना गया। ख़तना कराने से पहले या ख़तना कराने के बाद? ये उस के ख़तना कराने से पहले की बात थी न के बाद की। जब हज़रत इब्राहीम का ख़तना नहीं हुआ था, ख़ुदा ने उस के ईमान के सबब से उसे रास्तबाज़ ठहराया था। बाद में उस ने ख़तने का निशान पाया जो उस की रास्तबाज़ी पर गोया ख़ुदा की मुहर थी। यूं हज़रत इब्राहीम सब का बाप ठहरे जिन का ख़तना तो नहीं हुआ मगर वह ईमान लाने के बाइस रास्तबाज़ गिने जाते हैं। और वह उन का भी बाप ठहरता है जिन का ख़तना हो चुका है और यही नहीं बल्के वह हमारे बाप हज़रत इब्राहीम के उस ईमान की पैरवी करते हैं जो उसे उस के ख़तने से पहले ही हासिल था। ये वादा जो हज़रत इब्राहीम और उन की नस्ल से किया गया था के वह दुनिया के वारिस होंगे, शरीअत पर अमल करने की बिना पर नहीं बल्के उन के ईमान की रास्तबाज़ी के वसीले से किया गया था। क्यूंके अगर अहले शरीअत ही दुनिया के वारिस ठहराये जाते तो ईमान का कोई मतलब ही न होता और ख़ुदा का वादा भी फ़ुज़ूल ठहरता। बात ये है के जहां शरीअत है वहां ग़ज़ब भी है और जहां शरीअत नहीं वहां शरीअत का उदूल भी नहीं। चुनांचे ये वादा ईमान की बिना पर दिया जाता है ताके बतौर फ़ज़ल समझा जाये और हज़रत इब्राहीम की कुल नस्ल के लिये हो, सिर्फ़ उन ही के लिये नहीं जो अहले शरीअत हैं बल्के उन के लिये भी जो ईमान लाने के लिहाज़ से उस की नस्ल हैं क्यूंके हज़रत इब्राहीम हम सब के बाप हैं। जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “मैंने तुम्हें बहुत सी क़ौमों का बाप मुक़र्रर किया है।” वह उस ख़ुदा की निगाह में हमारा बाप है जिस पर वह ईमान लाया। वह ख़ुदा जो मुर्दों को ज़िन्दा करता है और गैर मौजूद अशया को यूं बुला लेता है गोया वह मौजूद हैं। हज़रत इब्राहीम नाउम्मीदी की हालत में भी उम्मीद के साथ ईमान लाये और बहुत सी क़ौमों का बाप मुक़र्रर किये गये जैसा के उन से कहा गया था “तुम्हारी नस्ल ऐसी ही होगी।” वह तक़रीबन सौ बरस के थे और अपने बदन के मुर्दा हो जाने के बावुजूद और ये जानते हुए भी के सारह का रहम भी मुर्दा हो चुका है, हज़रत इब्राहीम का ईमान कमज़ोर न हुआ। न ही बेएतक़ाद होकर हज़रत इब्राहीम ने ख़ुदा के वादे पर शक किया बल्के ईमान में मज़बूत होकर ख़ुदा की तम्जीद की। हज़रत इब्राहीम कामिल यक़ीन था के जिस ख़ुदा ने वादा किया है वह उसे पूरा करने की भी क़ुदरत रखता है। “इसी वास्ते हज़रत इब्राहीम का ईमान उन के वास्ते रास्तबाज़ी शुमार किया गया।” और ये अल्फ़ाज़ उन के वास्ते रास्तबाज़ी शुमार किये गये, सिर्फ़ हज़रत इब्राहीम के लिये नहीं लिखे गये, बल्के हमारे लिये भी जिन के लिये ईमान रास्तबाज़ी गिन जायेगा। इसलिये के हम भी ख़ुदा पर ईमान लाये हैं जिस ने हमारे ख़ुदावन्द ईसा को मुर्दों में से ज़िन्दा किया। हुज़ूर ईसा हमारे गुनाहों के लिये मौत के हवाले किये गये और फिर ज़िन्दा किये गये ताके हम रास्तबाज़ ठहराये जायें। चूंके, हम ईमान की बिना पर रास्तबाज़ ठहराये गये हैं, इसलिये हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से हमारी ख़ुदा के साथ सुलह हो चुकी है। ईमान लाने से हम ने अलमसीह के वसीले से उस फ़ज़ल को पा लिया है और उस पर क़ाइम भी हैं और इस उम्मीद पर नज़र करते हैं के हम भी ख़ुदा के जलाल में शरीक होंगे। और सिर्फ़ यही नहीं बल्के हम अपनी मुसीबतों में भी ख़ुश होते हैं क्यूंके हम जानते हैं के मुसीबत से साबित क़दमी पैदा होती है। और साबित क़दमी से मुस्तक़िल मिज़ाजी और मुस्तक़िल मिज़ाजी से उम्मीद पैदा होती है। ऐसी उम्मीद हमें मायूस नहीं करती क्यूंके जो पाक रूह हमें बख़्शी गई है उस के वसीले से ख़ुदा की महब्बत हमारे दिलों में डाली गई है। क्यूंके जब हम न ताक़ती से बेबस ही थे तो अलमसीह ने ऐन वक़्त पर बेदीनों के लिये अपनी जान दी। किसी रास्तबाज़ की ख़ातिर भी मुश्किल से कोई अपनी जान देगा मगर शायद किसी में जुरअत हो के वह किसी नेक शख़्स के लिये अपनी जान क़ुर्बान कर दे। लेकिन ख़ुदा हमारे लिये अपनी महब्बत यूं ज़ाहिर करता है के जब हम गुनहगार ही थे तो अलमसीह ने हमारी ख़ातिर अपनी जान क़ुर्बान कर दी। पस जब हम अलमसीह के ख़ून बहाये जाने के बाइस रास्तबाज़ ठहराये जाते हैं तो हम उन ही के वसीले से ग़ज़ब इलाही से भी ज़रूर बचेंगे। क्यूंके जब ख़ुदा के दुश्मन होने के बावुजूद उस के बेटे की मौत के वसीले से हमारी उस से सुलह हो गई तो सुलह होने के बाद तो हम उस की ज़िन्दगी के सबब से ज़रूर ही बचेंगे। और न सिर्फ़ ये बल्के हम अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ज़रीये ख़ुदा की रिफ़ाक़त पर फ़ख़्र करते हैं क्यूंके अलमसीह के बाइस ख़ुदा के साथ हमारी सुलह हो गई है। पस जैसे एक आदमी के ज़रीये गुनाह दुनिया में दाख़िल हुआ और गुनाह के सबब से मौत आई वैसे ही मौत सब इन्सानों में फैल गई क्यूंके सब ने गुनाह किया। शरीअत के दिये जाने से पहले दुनिया में गुनाह तो था लेकिन जहां शरीअत नहीं होती वहां गुनाह का हिसाब भी नहीं होता। फिर भी आदम से मूसा तक मौत ने उन्हें भी अपने क़ब्ज़ा में रख्खा जिन्होंने आदम की सी नाफ़रमानी वाला गुनाह नहीं क्या था। ये आदम एक आने वाले की शबीह रखते थे। मगर ऐसी बात नहीं के जितना क़ुसूर है इतनी ही फ़ज़ल की नेमत है। क्यूंके जब एक आदमी के क़ुसूर के सबब से बहुत से इन्सान मर गये तो एक आदमी यानी हुज़ूर ईसा अलमसीह के फ़ज़ल के सबब बहुत से इन्सानों को ख़ुदा के फ़ज़ल की नेमत बड़ी इफ़रात से अता हुई। इस के अलावा ख़ुदा के फ़ज़ल की बख़्शिश और उस एक आदमी के गुनाह के नताइज एक से नहीं। क्यूंके एक गुनाह का नतीजा सज़ा के हुक्म की सूरत में निकला लेकिन गुनाहों की कसरत ऐसे फ़ज़ल का बाइस हुई जिस के सबब से इन्सान रास्तबाज़ ठहराया गया। जब एक आदमी के गुनाह के सबब से मौत ने उसी एक के वसीले से सब पर हुकूमत की तो जो लोग फ़ज़ल और रास्तबाज़ी की नेमत इफ़रात से पाते हैं वह भी एक आदमी यानी हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से अब्दी ज़िन्दगी में ज़रूर ही बादशाही करेंगे। चुनांचे जिस तरह एक आदमी के क़ुसूर के सबब से सब आदमियों के लिये मौत की सज़ा का हुक्म हुआ उसी तरह एक ही की रास्तबाज़ी के काम के वसीले से सब आदमियों को वह नेमत मिली जिस से वह रास्तबाज़ ठहराये जाते हैं ताके ज़िन्दगी पायें। और जैसे एक आदमी की नाफ़रमानी से बहुत से लोग गुनहगार ठहरे वैसे ही एक आदमी की फ़रमांबरदार से बहुत से लोग रास्तबाज़ ठहराये जायेंगे। बाद में शरीअत मौजूद हुई ताके गुनाह ज़्यादा हो। लेकिन जहां गुनाह ज़्यादा हुआ वहां फ़ज़ल उस से भी कहीं ज़्यादा हुआ। ताके जिस तरह गुनाह ने मौत के सबब से बादशाही की उसी तरह फ़ज़ल भी रास्तबाज़ी के ज़रीये ऐसी बादशाही करे जो हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से अब्दी ज़िन्दगी तक क़ाइम रहे। लिहाज़ा हम क्या कहें? क्या गुनाह करते चले जायें ताके हम पर फ़ज़ल ज़्यादा हो? हरगिज़ नहीं! हम जो गुनाह के एतबार से मर चुके हैं तो फिर क्यूं कर गुनाह आलूदा ज़िन्दगी गुज़ारते हैं? क्या तुम नहीं जानते के हम में से जिन लोगों ने अलमसीह ईसा की ज़िन्दगी में शामिल होने का पाक-ग़ुस्ल लिया तो उन की मौत में शामिल होने का पाक-ग़ुस्ल भी लिया। चुनांचे मौत में शामिल होने का पाक-ग़ुस्ल ले कर हम उन के साथ दफ़न भी हुए ताके जिस तरह अलमसीह अपने आसमानी बाप की जलाली क़ुव्वत के वसीले से मुर्दों में से ज़िन्दा किये गये उसी तरह हम भी नई ज़िन्दगी में क़दम बढ़ाएं। क्यूंके जब हम अलमसीह की तरह मर के उन के साथ पैवस्त हो गये तो बेशक उन की तरह मुर्दों में से ज़िन्दा होकर भी उन के साथ पैवस्त होंगे। चुनांचे हम जानते हैं के हमारी पुरानी इन्सानियत अलमसीह के साथ मस्लूब हुई के गुनाह का बदन नेस्त हो जाये ताके हम आइन्दा गुनाह की ग़ुलामी में न रहें। क्यूंके जो मर गया वह गुनाह से भी बरी हो गया। पस जब हम अलमसीह के साथ मर गये तो हमें यक़ीन है के उन के साथ ज़िन्दा भी हो जायेंगे। क्यूंके हमें मालूम है के जब अलमसीह मुर्दों में से ज़िन्दा किया गया तो फिर कभी नहीं मरेगा। मौत का उस पर फिर कभी इख़्तियार न होगा। क्यूंके गुनाह के एतबार से तो अलमसीह एक ही बार मरा लेकिन ख़ुदा के एतबार से वह हमेशा ज़िन्दा है। इसी तरह तुम भी अपने आप को गुनाह के एतबार से तो मुर्दा मगर ख़ुदा के एतबार से अलमसीह ईसा में ज़िन्दा समझो। चुनांचे गुनाह को अपने फ़ानी बदन पर हुकूमत मत करने दो ताके वह तुम्हें अपनी ख़ाहिशात के ताबे न रख सके। और न ही अपने जिस्म के आज़ा को गुनाह के हवाला करो ताके वह नारास्ती के वसाइल न बनने पायें बल्के अपने आप को मुर्दों में से ज़िन्दा हो जाने वालों की तरह ख़ुदा के हवाला करो और साथ ही अपने जिस्म के आज़ा को भी ख़ुदा के हवाला करो ताके वह रास्तबाज़ी के वसाइल बन सकीं। क्यूंके तुम शरीअत के मातहत नहीं बल्के ख़ुदा के फ़ज़ल के मातहत हो इसलिये गुनाह का तुम पर इख़्तियार न होगा। फिर क्या करें? क्या हम गुनाह करते रहें इसलिये के हम शरीअत के मातहत नहीं बल्के ख़ुदावन्द के फ़ज़ल के मातहत हैं? हरगिज़ नहीं! क्या तुम नहीं जानते के जब तुम किसी की ख़िदमत करने के लिये ख़ुद को उस का ग़ुलाम बन जाने देते हो तो वह तुम्हारा मालिक बन जाता है और तुम उस की फ़रमांबरदार करने लगते हो। इसलिये अगर गुनाह की ग़ुलामी में रहोगे तो उस का अन्जाम मौत है। अगर ख़ुदा के फ़रमांबरदार बन जाओगे तो उस का अन्जाम रास्तबाज़ी है। लेकिन ख़ुदा का शुक्र है के अगरचे पहले तुम गुनाह के ग़ुलाम थे लेकिन अब दिल से उस तालीम के ताबे हो गये हो जो तुम्हारे सुपुर्द की गई। तुम गुनाह की ग़ुलामी से आज़ादी पा कर रास्तबाज़ी की ग़ुलामी में आ गये। में तुम्हारी इन्सानी कमज़ोरी के सबब से बतौर इन्सान ये कहता हूं। जिस तरह तुम ने अपने आज़ा को नापाकी और नाफ़रमानी की ग़ुलामी में दे दिया था और वह नाफ़रमानी बढ़ती जाती थी, अब अपने आज़ा को पाकीज़गी के लिये रास्तबाज़ी की ग़ुलामी में दे दो। जब तुम गुनाह के ग़ुलाम थे तो रास्तबाज़ी के एतबार से आज़ाद थे। लिहाज़ा जिन बातों से तुम अब शर्मिन्दा हो, उन से तुम्हें क्या हासिल हुआ? क्यूंके उन का अन्जाम तो मौत है। लेकिन अब तुम गुनाह की ग़ुलामी से आज़ाद होकर ख़ुदा की ग़ुलामी में आ चुके हो और तुम अपनी ज़िन्दगी में पाकीज़गी का फल लाते हो जिस का अन्जाम अब्दी ज़िन्दगी है। क्यूंके गुनाह की मज़दूरी मौत है लेकिन ख़ुदा की बख़्शिश हमारे ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा में अब्दी ज़िन्दगी है। ऐ भाईयो और बहनो! तुम जो शरीअत से वाक़िफ़ हो, क्या इस बात को नहीं जानते के इन्सान सिर्फ़ उस वक़्त तक शरीअत के मातहत है जब तक के वह ज़िन्दा है? मसलन शादीशुदा औरत, शरीअत के मुताबिक़ ख़ाविंद के ज़िन्दा रहने तक उस की पाबन्द होती है लेकिन अगर उस का ख़ाविंद मर जाये तो वह उस की पाबन्दी से आज़ाद हो जाती है। लिहाज़ा अगर वह अपने ख़ाविंद के जीते जी किसी दूसरे आदमी की हो जाये तो ज़ानिया कहलायेगी। लेकिन अगर उस का ख़ाविंद मर जाये तो वह इस शरीअत से आज़ाद हो जाती है। उस सूरत में वह किसी दूसरे आदमी की हो जाये तो ज़ानिया नहीं कहलायेगी। पस, ऐ भाईयो और बहनों! तुम भी अलमसीह के जिस्म साथ मर के शरीअत के एतबार से मर गये हो ताके किसी दूसरे के हो जाओ यानी उस के जो मुर्दों में से ज़िन्दा किया गया ताके हम ख़ुदा के लिये फल लायें। जब हम अपनी इन्सानी फ़ितरत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते थे तो शरीअत हम में गुनाह की रग़बत पैदा करती थी जिस से हमारे आज़ा मुतास्सिर होकर मौत का फल पैदा करते थे। लेकिन हम जिस चीज़ के क़ैदी थे उस के एतबार से मर गये तो शरीअत की क़ैद से ऐसे छूट गये के उस के लफ़्ज़ों के पुराने तरीक़ा के मुताबिक़ नहीं बल्के ख़ुदा की रूह के नये तरीक़े के मुताबिक़ ख़िदमत करते हैं। पस हम क्या कहें? क्या शरीअत गुनाह है? हरगिज़ नहीं, क्यूंके अगर शरीअत न होती तो मैं गुनाह को न पहचानता मसलन अगर शरीअत ये हुक्म न देती, “तुम लालच न करना, तो मैं लालच को न जानता।” मगर गुनाह ने इस हुक्म से फ़ायदा उठाया और मुझ में हर तरह का लालच पैदा कर दिया क्यूंके शरीअत के बग़ैर गुनाह मुर्दा है। एक वक़्त था के मैं शरीअत के बग़ैर ज़िन्दा था मगर जब हुक्म आया तो गुनाह ज़िन्दा हो गया और मैं मर गया। तब मुझे मालूम हुआ के जिस हुक्म का मन्शा ज़िन्दगी देना था वोही मौत का बाइस बन गया। क्यूंके गुनाह ने इस हुक्म से फ़ायदा उठाकर मुझे बहकाया और इस के ज़रीये मुझे मार डाला। पस शरीअत पाक है और हुक्म भी पाक, रास्त और अच्छा है। तो क्या वोही चीज़ जो अच्छी है मेरे लिये मौत बन गई? हरगिज़ नहीं! बल्के गुनाह ने एक अच्छी चीज़ से फ़ायदा उठाकर मेरी मौत का सामान पैदा कर दिया ताके गुनाह की अस्लीयत पहचानी जाये और हुक्म के ज़रीये गुनाह हद से ज़्यादा मकरूह मालूम हो। हम जानते हैं के शरीअत एक रूहानी चीज़ है लेकिन में जिस्मानी हूं और गोया गुनाह की ग़ुलामी में बिका हुआ हूं। में जो कुछ करता हूं उस का मुझे सही एहसास ही नहीं होता क्यूंके जो करना चाहता हूं उसे तो नहीं करता लेकिन जिस काम से नफ़रत है वोही कर लेता हूं। पस जब वह करता हूं जिसे में करना ही नहीं चाहता तो में मानता हूं के शरीअत अच्छी है। चुनांचे इस सूरत में जो कुछ में करता हूं वह में नहीं बल्के मुझ में बसा हुआ गुनाह करता है। में जानता हूं के मुझ में यानी मेरे जिस्म में कोई नेकी बसी हुई नहीं। अलबत्ता नेकी करने का इरादा तो मुझ में मौजूद है। चुनांचे जो नेकी करना चाहता हूं उसे तो करता नहीं लेकिन वह बदी जिसे करना नहीं चाहता उसे करता चला जाता हूं। पस जब के में वह करता हूं जिसे करना नहीं चाहता तो करने वाला में न रहा बल्के गुनाह है जो मेरे अन्दर बसा हुआ है। जो शरीअत मेरे सामने है उस के मुताबिक़ जब भी मैं नेकी करने का इरादा करता हूं तो बदी मेरे पास आ मौजूद होती है। क्यूंके बातिन में तो में ख़ुदा की शरीअत से बहुत ख़ुश हूं। लेकिन मुझे अपने जिस्म के आज़ा में एक और ही शरीअत काम करती दिखाई देती है जो मेरी अक़्ल की शरीअत से लड़ कर मुझे गुनाह की शरीअत का क़ैदी बना देती है जो मेरे आज़ा में मौजूद है। हाय! में कैसा बदबख़्त आदमी हूं! इस मौत के बदन से मुझे कौन छुड़ायेगा? ख़ुदा का शुक्र हो के उस ने हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से इसे मुम्किन बना दिया है। ग़रज़ मेरा हाल ये है के में अपनी अक़्ल से ख़ुदा की शरीअत का और जिस्म में गुनाह की शरीअत का महकूम हूं। चुनांचे, जो अलमसीह ईसा में हैं अब उन पर सज़ा का हुक्म नहीं क्यूंके अलमसीह ईसा के वसीले से पाक रूह की ज़िन्दगी बख़्शने वाली शरीअत ने मुझे गुनाह और मौत की शरीअत से आज़ाद कर दिया। इसलिये जो काम गुनाह आलूदा जिस्म के सबब से शरीअत कमज़ोर होकर न कर सकी वह ख़ुदा ने अपने-अपने ही बेटे को गुनाह की क़ुर्बानी के तौर पर गुनाह आलूदा जिस्म की सूरत में भेज कर जिस्म में गुनाह की सज़ा का हुक्म दिया। ताके हम में जो जिस्म के मुताबिक़ नहीं बल्के पाक रूह के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं शरीअत के नेक तक़ाज़े पूरे हूं। जो लोग जिस्म के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं उन के ख़्यालात नफ़्सानी ख़ाहिशात की तरफ़ लगे रहते हैं। लेकिन जो लोग पाक रूह के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं उन के ख़यालात रूहानी ख़ाहिशों की तरफ़ लगे रहते हैं। जिस्मानी ग़रज़ मौत है लेकिन रूहानी ग़रज़ ज़िन्दगी और इत्मीनान है। इसलिये के जिस्मानी ग़रज़ ख़ुदा की अदावत करती है; वह न तो ख़ुदा की शरीअत के ताबे है न हो सकती है। जो लोग जिस्म के ग़ुलाम हैं, ख़ुदा को ख़ुश नहीं कर सकते। लेकिन तुम अपने जिस्म के नहीं बल्के रूह के ताबे हो बशर्ते के ख़ुदा का रूह तुम में बसा हुआ हो। और जिस में अलमसीह का रूह नहीं वह अलमसीह का नहीं। लेकिन अगर अलमसीह तुम में है तो तुम्हारा बदन तो गुनाह के सबब से मुर्दा है लेकिन तुम्हारी रूह रास्तबाज़ी के सबब से ज़िन्दा है। और अगर उस का रूह तुम में बसा हुआ है जिस ने हुज़ूर ईसा को मुर्दों में से ज़िन्दा किया तो अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा करने वाला तुम्हारे फ़ानी बदनों को भी अपने उस रूह के वसीले से ज़िन्दा करेगा जो तुम में बसा हुआ है। चुनांचे ऐ भाईयो और बहनों! हम गुनाह आलूदा फ़ितरत के कर्ज़दार नहीं के उस फ़ितरत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारें। क्यूंके अगर तुम गुनाह आलूदा फ़ितरत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारोगे तो ज़रूर मरोगे लेकिन अगर पाक रूह के ज़रीये बदन के बुरे कामों को नाबूद करोगे तो ज़िन्दा रहोगे। इसलिये के जो ख़ुदा के रूह की हिदायत पर चलते हैं वोही ख़ुदा के बेटे हैं। क्यूंके तुम्हें वह रूह नहीं मिली जो तुम्हें फिर से ख़ौफ़ का ग़ुलाम बना दे बल्के फ़र्ज़न्दियत की रूह मिली है जिस के वसीले से हम “ अब्बा, ऐ बाप कह कर पुकारते हैं।” पाक रूह ख़ुद हमारी रूह के साथ मिल कर गवाही देता है के हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हैं। और अगर फ़र्ज़न्द हैं तो वारिस भी हैं यानी ख़ुदा के वारिस और अलमसीह के हम मीरास, बशर्ते के हम उन के साथ दुख उठायें ताके उन के जलाल में भी शरीक हों। में जानता हूं के ये दुख दर्द जो हम अब सहा रहे हैं उस जलाल के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं जो हम पर ज़ाहिर होने को है। चुनांचे सारी ख़िल्क़त बड़ी आरज़ू के साथ इस इन्तिज़ार में है के ख़ुदा अपने फ़र्ज़न्दों को ज़ाहिर करे। इसलिये के ख़िल्क़त अपनी ख़ुशी से नहीं बल्के ख़ालिक़ की मर्ज़ी से बतालत के इख़्तियार में कर दी गई थी, इस उम्मीद के साथ के वह भी आख़िरकार फ़ना की ग़ुलामी से छुड़ाई जायेगी और ख़ुदा के फ़र्ज़न्दों की जलाली आज़ादी में शरीक होगी। हम जानते हैं के सारी ख़िल्क़त आज तक कराहती है गोया के वह दर्देज़ेह में मुब्तिला है। और सिर्फ़ वोही नहीं बल्के हम भी जिन्हें पाक रूह के पहले फल हासिल हुए हैं अपने बातिन में कराहते हैं यानी उस वक़्त का इन्तिज़ार कर रहे हैं जब ख़ुदा हमें अपने फ़र्ज़न्द बना कर हमारे बदन को मुख़्लिसी बख़्शेगा। चुनांचे इसी उम्मीद के वसीले से हमें नजात मिली। मगर जब उम्मीद की हुई चीज़ नज़र आ जाये तो उम्मीद का कोई मतलब नहीं। क्यूंके पहले से मौजूद किसी चीज़ की कोई उम्मीद क्यूं करेगा? लेकिन अगर हम उस चीज़ की उम्मीद करते हैं जो अभी हमारे पास मौजूद नहीं तो सब्र से उस की राह देखते हैं। इसी तरह रूह हमारी कमज़ोरी में हमारी मदद करता है। हम तो ये भी नहीं जानते के किस चीज़ के लिये दुआ करें लेकिन पाक रूह ख़ुद ऐसी आहें भर-भर कर हमारी शफ़ाअत करता है के लफ़्ज़ों में उन का बयान नहीं हो सकता। और वह जो हमारे दिलों को परखता है पाक रूह की ग़रज़ को जानता है क्यूंके पाक रूह ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ मुक़द्दसीन की शफ़ाअत करता है। और हम जानते हैं के जो लोग ख़ुदा से महब्बत रखते हैं और उस के इरादे के मुताबिक़ बुलाए गये हैं, ख़ुदा हर हालत में उन की भलाई चाहता है। क्यूंके जिन्हें ख़ुदा पहले से जानता था उन्हें उस ने पहले से मुक़र्रर भी किया के वह उस के बेटे की मानिन्द बनें ताके उस का बेटा बहुत सारे मेरे भाईयों और बहनों में पहलोठा शुमार किया जाये। और जिन्हें उस ने पहले से मुक़र्रर किया, उन्हें बुलाया भी; और जिन्हें बुलाया, उन्हें रास्तबाज़ भी ठहराया; और जिन्हें रास्तबाज़ ठहराया, उन्हें अपने जलाल में शरीक भी किया। पस हम इन बातों के बारे में और क्या कहें? अगर ख़ुदा हमारी तरफ़ है तो कौन हमारा मुख़ालिफ़ हो सकता है? जिस ने अपने बेटे को बचाए रखने की बजाय उसे हम सब के लिये क़ुर्बान कर दिया तो किया वह उस के साथ हमें और सब चीज़ें भी फ़ज़ल से अता न करेगा? कौन ख़ुदा के चुने हुए लोगों पर इल्ज़ाम लगा सकता है? कोई नहीं। इसलिये के ख़ुदा ख़ुद उन्हें रास्तबाज़ ठहराता है। कौन उन्हें मुजरिम क़रार दे सकता है? कोई नहीं। इसलिये के अलमसीह ईसा ही वह हैं जो मर गये और मुर्दों में से जी उठे और जो ख़ुदा की दाहिनी तरफ़ मौजूद हैं। वोही हमारी शफ़ाअत भी करते हैं। कौन हमें अलमसीह की महब्बत से जुदा करेगा? क्या मुसीबत या तंगी? ज़ुल्म या क़हत, उर्यानी या ख़तरा या तलवार? चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “हम तो तेरी ख़ातिर सारा दिन मौत का सामना करते रहते हैं; हम तो ज़ब्ह होने वाली भेड़ों की मानिन्द समझे जाते हैं।” फिर भी इन सब हालतों में हमें अपने महब्बत करने वाले के वसीले से बड़ी शानदार फ़त्ह हासिल होती है। क्यूंके मुझे यक़ीन है के न मौत न ज़िन्दगी, न फ़रिश्ते न शैतान के लश्कर, न हाल की चीज़ें न मुस्तक़बिल की और न कोई क़ुदरतें, न बुलन्दी न पस्ती न कोई और काइनात की चीज़ें हमें ख़ुदा की उस महब्बत से जुदा न कर सकेगी जो हमारे अलमसीह ईसा में है। मैं अलमसीह में सच कहता हूं, झूट नहीं बोलता बल्के मेरा ज़मीर भी पाक रूह के ताबे होकर गवाही देता है के मुझे बड़ा ग़म है और मेरा दिल हर वक़्त दुखता रहता है। काश ऐसा हो सकता के अपने यहूदी भाईयों की ख़ातिर जो जिस्म के लिहाज़ से मेरी क़ौम के लोग हैं, मैं ख़ुद मलऊन होकर अलमसीह से महरूम हो जाता! यानी बनी इस्राईल, ख़ुदा के मुतनब्बा होने का हक़ के सबब जलाल, अह्द, शरीअत और ख़िदमत, बैतुलमुक़द्दस में इबादत का शरफ़ बख़्शा गया और ख़ुदा के वादे भी उन ही के लिये हैं। क़ौम के बुज़ुर्ग उन ही के हैं और अलमसीह भी जिस्मानी तौर पर उन ही की नस्ल से थे जो सब से आला हैं और अबद तक ख़ुदा-ए-मुबारक हैं। आमीन। इस का ये मतलब नहीं के ख़ुदा का वादा बातिल हो गया क्यूंके जितने इस्राईल की नस्ल से हैं वह सब के सब इस्राईली नहीं। और न ही सिर्फ़ उन की नस्ल होने के बाइस वह हज़रत इब्राहीम के फ़र्ज़न्द ठहरे बल्के ख़ुदा का वादा ये था, “तुम्हारी नस्ल का नाम इज़हाक़ ही से आगे बढ़ेगा।” इस से मुराद ये है: जिस्मानी तौर पर पैदा होने वाले फ़र्ज़न्द ख़ुदा के फ़र्ज़न्द नहीं बन सकते बल्के सिर्फ़ वह जो ख़ुदा के वादे के मुताबिक़ पैदा हुए हैं, हज़रत इब्राहीम की नस्ल शुमार किये जाते हैं। क्यूंके वादे के क़ौल यूं है: “मैं मुक़र्ररः वक़्त पर फिर वापस आऊंगा, और सारह के हां बेटा होगा।” सिर्फ़ यही नहीं बल्के रिबक़ा के बच्चे भी हमारे आबा-ओ-अज्दाद इज़हाक़ ही के तुख़्म से थे। और अभी न तो उस के जुड़वां लड़के पैदा हुए थे और न ही उन्होंने कुछ नेकी या बदी की थी के ख़ुदा ने अपने मक़सद को पूरा करने के लिये उन में से एक को चुन लिया। ख़ुदा का ये फ़ैसला उन के आमाल की बिना पर न था बल्के बुलाने वाले की अपनी मर्ज़ी पर था। इसीलिये रिबक़ा से कहा गया, “बड़ा छोटे की ख़िदमत करेगा।” जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “मैंने याक़ूब से महब्बत रख्खी मगर ऐसौं से अदावत।” तो फिर हम क्या कहें? क्या ये के ख़ुदा के हां नाइन्साफ़ी है? हरगिज़ नहीं! क्यूंके ख़ुदा हज़रत मूसा से फ़रमाता है, “जिस पर मुझे रहम करना मन्ज़ूर होगा उस पर रहम करूंगा, और जिस पर तरस खाना मन्ज़ूर होगा उस पर तरस खाऊंगा।” लिहाज़ा ये न तो आदमी की ख़ाहिश या उस की जद्दोजहद पर बल्के ख़ुदा के रहम पर मुन्हसिर है। इसीलिये किताब-ए-मुक़द्दस में फ़िरऔन से कहा गया है: “मैंने तुझे इसलिये बरपा क्या है के तेरे ख़िलाफ़ अपनी क़ुदरत ज़ाहिर करूं और सारी ज़मीन में मेरा नाम मशहूर हो जाये।” पस ख़ुदा जिस पर रहम करना चाहता है, रहम करता है और जिस पर सख़्ती करना चाहता है उस का दिल सख़्त कर देता है। शायद तुम में से कोई मुझ से ये पूछे: “अगर ये बात है तो ख़ुदा इन्सान को क्यूं क़ुसूरवार ठहराता है? कौन उस की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ खड़ा हो सकता है?” लेकिन ऐ इन्सान! तुम किस मुंह से ख़ुदा को जवाब देते हो? “क्या बनाई हुई शै अपने बनाने वाले से कह सकती है के तुम ने मुझे ऐसा क्यूं बनाया?” क्या कुम्हार को मिट्टी पर इख़्तियार नहीं के एक ही लौन्दे में से एक बर्तन तो ख़ास मौक़ों पर इस्तिमाल किये जाने के लिये बनाये और दूसरा आम इस्तिमाल के लिये। अगर ख़ुदा ने भी ऐसा किया तो तअज्जुब की कौन सी बात है? ख़ुदा अपने ग़ज़ब और अपनी क़ुदरत को ज़ाहिर करने के लिये इरादे से ग़ज़ब के बर्तनों को जो हलाकत के लिये तय्यार किये गये थे, निहायत सब्र से बर्दाश्त करता रहे। और ये इसलिये हुआ के ख़ुदा अपने जलाल की दौलत रहम के बर्तनों पर ज़ाहिर करे जिन्हें उस ने अपने जलाल के लिये पहले ही से तय्यार किया हुआ था। यानी हम पर जिन्हें उस ने न फ़क़त यहूदियों में से बल्के ग़ैरयहूदियों में से भी बुलाया। होसेअ नबी की किताब में भी ख़ुदा यही फ़रमाता है: “जो ‘मेरी उम्मत’ न थी उसे मैं अपनी उम्मत बना लूंगा; और जो मेरी महबूबा न थी उसे अपनी महबूबा कहूंगा,” और, “जिस जगह उन से ये कहा गया था, ‘तुम मेरी उम्मत नहीं हो,’ उसी जगह उन्हें ‘ज़िन्दा ख़ुदा के फ़र्ज़न्द कहा जायेगा।’ ” और यसायाह नबी भी इस्राईल के बारे में पुकार कर फ़रमाते हैं: “अगरचे बनी इस्राईल की तादाद समुन्दर की रेत के ज़र्रों के बराबर होगी, तो भी उन में से थोड़े ही बचेंगे। क्यूंके ख़ुदावन्द ज़मीन पर अपने फ़ैसले को निहायत तेज़ी के साथ अमल में लायेगा।” चुनांचे जैसा के हज़रत यसायाह ने पेशीनगोई की है: “अगरचे लश्करों का ख़ुदावन्द हमारी नस्ल को बाक़ी न रहने देता, तो हम सदूम की मानिन्द और अमूरा की मानिन्द हो जाते।” पस हम क्या कहें? ये के ग़ैरयहूदी जो रास्तबाज़ी के तालिब न थे, ईमान लाकर रास्तबाज़ी हासिल कर चुके, यानी वह रास्तबाज़ी जो ईमान के सबब से है। लेकिन इस्राईल जो रास्तबाज़ी की शरीअत का तालिब था, उस शरीअत तक न पहुंचा। क्यूं? इसलिये के उन्होंने ईमान से नहीं बल्के आमाल के ज़रीये उसे हासिल करना चाहा और ठोकर लगने वाले पत्थर से ठोकर खाई। जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “देखो, मैं सिय्यून में एक ठेस लगने का पत्थर रखता हूं जिस से लोग ठोकर खायेंगे और एक ठोकर खाने की चट्टान जो उन के गिरने का बाइस होगी, मगर जो कोई उस पर ईमान लायेगा वह कभी शर्मिन्दा न होगा।” ऐ भाईयो और बहनो! इस्राईलियो के लिये मेरी दिली आरज़ू और ख़ुदा से मेरी ये दुआ है के वह नजात पायें। क्यूंके मैं उन के बारे में गवाही देता हूं के वह ख़ुदा के लिये ग़ैरत तो रखते हैं लेकिन दानाई के साथ नहीं। चूंके वह ख़ुदा की रास्तबाज़ी से वाक़िफ़ न थे बल्के ख़ुद अपनी रास्तबाज़ी को क़ाइम रखने की कोशिश करते रहे, इसलिये वह ख़ुदा की रास्तबाज़ी के ताबे न हुए। अलमसीह ही शरीअत की तक्मील हैं क्यूंके वह हर ईमान लाने वाले को रास्तबाज़ी अता करते हैं। हज़रत मूसा ने उस रास्तबाज़ी के बारे में लिख्खा है जो शरीअत के ज़रीये हासिल हुई है: “जो शख़्स शरीअत पर अमल करता है वह शरीअत की वजह से ज़िन्दा रहेगा।” लेकिन जो रास्तबाज़ी ईमान से है वह ये कहती है: “अपने दिल में यूं न कह के आसमान पर कौन चढ़ेगा?” यानी अलमसीह को नीचे लाने के लिये “या, ‘कौन नीचे अथाह गढ़े में उतरेगा?’ ” यानी अलमसीह को, मुर्दों में से जी उठने से ऊपर लाने के लिये। लेकिन इस का क्या मतलब है? “ये के कलाम तुम्हारे पास है; बल्के तुम्हारे होंटों पर और तुम्हारे दिल में है,” ये ईमान का वोही कलाम है, जिस की हम मुनादी करते हैं: अगर तुम अपनी ज़बान से ये इक़रार करो, “ईसा ही ख़ुदावन्द ख़ुदा हैं,” और अपने दिल से ईमान लाओ के ख़ुदा ने उन्हें मुर्दों में से ज़िन्दा किया तो नजात पाओगे। क्यूंके रास्तबाज़ी के लिये इन्सान दिल से ईमान लाता है और ज़बान से इक़रार कर के नजात पाता है। जैसा के सहीफ़ा बयान करता है, “जो कोई उस पर ईमान लायेगा वह कभी शर्मिन्दा न होगा।” क्यूंके यहूदी और ग़ैरयहूदी में कोई फ़र्क़ नहीं इसलिये के एक वोही सब का ख़ुदावन्द है और उन सब को जो उस का नाम लेते हैं कसरत से फ़ैज़ पहुंचाता है। और, “जो कोई ख़ुदावन्द का नाम लेगा नजात पायेगा।” मगर जिस पर वह ईमान नहीं लाये उसे पुकारेंगे कैसे? जिस का ज़िक्र तक उन्होंने नहीं सुना उस पर ईमान कैसे लायेंगे और जब तक कोई उन्हें ख़ुशख़बरी न सुनाये वह कैसे सुनेंगे? और जब तक वह भेजे न जायें तब्लीग़ कैसे कर सकते हैं? चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “उन के क़दम कैसे ख़ुशनुमा हैं जो अच्छी चीज़ों की ख़ुशख़बरी लाते हैं!” लेकिन सब इस्राईलियो ने उस ख़ुशख़बरी पर कान नहीं धरा, चुनांचे यसायाह नबी ने फ़रमाया, “ऐ ख़ुदावन्द, हमारे पैग़ाम पर कौन ईमान लाया?” पस ईमान की बुनियाद पैग़ाम के सुनने पर है और पैग़ाम की बुनियाद अलमसीह के कलाम पर। लेकिन मैं पूछता हूं, क्या उन्होंने कलाम नहीं सुना? बेशक सुना: “क्यूंके उन की आवाज़ सारी रूए ज़मीन पर, और उन का कलाम दुनिया की इन्तिहा तक पहुंच चुका है।” मैं फिर पूछता हूं: क्या बनी इस्राईल इस से वाक़िफ़ न थे? सब से पहले, तो हज़रत मूसा जवाब देते हैं ख़ुदा फ़रमाता है; “मैं तुम्हें उन से ग़ैरत दिलाऊंगा जो कोई क़ौम नहीं; और एक नादान क़ौम से तुम्हें ग़ुस्सा दिलाऊंगा।” फिर यसायाह बड़ी दिलेरी से ये कहते हैं, ख़ुदा फ़रमाता है, “जिन्होंने मुझे ढूंडा भी नहीं उन्होंने मुझे पा लिया; जो मेरे तालिब न थे, मैं उन पर ज़ाहिर हो गया।” लेकिन ख़ुदा बनी इस्राईल के बारे में ये फ़रमाता है, “मैं दिन भर एक सरकश और हुज्जती क़ौम की तरफ़ अपने सुलह के हाथ बढ़ाए रहा। ” लिहाज़ा मैं पूछता हूं, क्या ख़ुदा ने अपनी उम्मत को रद्द कर दिया? हरगिज़ नहीं! क्यूंके मैं ख़ुद भी इस्राईली हूं और हज़रत इब्राहीम की नस्ल और बिनयामीन के क़बीले का हूं। ख़ुदा ने अपनी उम्मत को जिसे वह पहले से जानता था, रद्द नहीं किया? क्या तुम नहीं जानते के किताब-ए-मुक़द्दस में एलियाह नबी ख़ुदा से इस्राईल के ख़िलाफ़ ये फ़र्याद करते हैं? “ऐ ख़ुदावन्द! उन्होंने तेरे नबियों को क़त्ल किया और तेरी क़ुर्बानगाहों को ढा दिया। अब में तन्हा बाक़ी रह गया हूं और वह मुझे भी जान से मार डालना चाहते हैं।” लेकिन ख़ुदा ने एलियाह नबी को क्या जवाब दिया? “मैंने अपने लिये सात हज़ार आदमी महफ़ूज़ रखे हैं जिन्होंने बाल माबूद के बुत के सामने घुटने नहीं टेके। ” इसी तरह अब भी, कुछ लोग बाक़ी हैं जिन्हें ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल से चुन लिया था। और जब ख़ुदा ने उन्हें अपने फ़ज़ल की बिना पर चुना तो साफ़ ज़ाहिर है के उन के आमाल की बिना पर नहीं चुना; वर्ना उस का फ़ज़ल, फ़ज़ल न रहता। तो नतीजा क्या निकला? ये के बनी इस्राईल को वह चीज़ न मिली जिस की वह बराबर जुस्तुजू करते रहे। लेकिन ख़ुदा के चुने हुए लोगों को मिल गई और बाक़ी सब ने ख़ुदा को पुकारा उन के दिल सख़्त कर दिये गये। चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “ख़ुदा ने उन के दिल-ओ-दिमाग़ को बेहिस कर दिया, आज तक न तो आंखों से देख सकें, और न कानों से सुन सकें।” और हज़रत दाऊद फ़रमाते हैं: “उन का दस्तरख़्वान उन के लिये एक फन्दा और एक जाल, और ठोकर खाने और सज़ा का बाइस बन जाये। उन की आंखों पर अन्धेरा छा जाये ताके वो देख न सकें, और उन की कमरें हमेशा झुकी रहें।” मैं फिर पूछता हूं, क्या यहूदियों ने ऐसी ठोकर खाई के गिर पड़ें और फिर उठ न सकें। हरगिज़ नहीं! बल्के उन की नग़ज़िश से ग़ैरयहूदियों को नजात हासिल करने की तौफ़ीक़ मिली ताके यहूदियों को ग़ैरत आये। जब उन की नग़ज़िश दुनिया के लिये बरकत का बाइस हुई और उन का रूहानी ज़वाल ग़ैरयहूदियों के लिये नेमत की फ़रावानी का बाइस हुआ तो उन सब का पूरी तरह भरपूर हो जान ज़रूर ही कितनी ज़्यादा नेमत का बाइस होगा। अब में तुम ग़ैरयहूदियों से मुख़ातिब होता हूं क्यूंके में ग़ैरयहूदियों के लिये रसूल मुक़र्रर हुआ हूं इसलिये अपनी ख़िदमत पर फ़ख़्र करता हूं। हो सकता है के में अपनी क़ौम वालों को ग़ैरत दिला कर उन में से बाज़ को नजात दिला सकूं! क्यूंके जब इस्राईलियों का ख़ारिज हो जान दुनिया से ख़ुदा के सुलह का बाइस बन गया तो उन की क़बूलियत मुर्दों में से जी उठने के सिवा और क्या होगी? अगर नज़्र का पहला पेड़ा नज़्र कर दिये जाने के बाद पाक ठहरा तो सारा गुंधा हुआ आटा भी पाक ठहरेगा और अगर दरख़्त की जड़ पाक है तो उस की डालियां भी पाक होंगी। अगर बाज़ डालियां काट डाली गईं, और तुम, जंगली ज़ैतून होते हुए भी उन की जगह पैवन्द हो गये तो तुम भी ज़ैतून के दरख़्त की जड़ में हिस्सेदार होगे जो क़ुव्वत बख़्श रोग़न से भरी हुई है, उन बुरीदा डालियों को हक़ीर जान कर अपने आप पर फ़ख़्र न करो। अगर फ़ख़्र करेगा तो याद रहे के तो जड़ को नहीं बल्के जड़ तुझे संभाले हुए है। तुम ज़रूर ये कहोगे, “वह डालियां इसलिये काट डाली गईं के में पैवन्द हो जाऊं।” ठीक है, लेकिन वह तो ईमान न लाने के सबब से काटी गईं और तो ईमान लाने के सबब से क़ाइम हो। पस तकब्बुर न करो बल्के थरथराओ। क्यूंके जब ख़ुदा ने असली डालियों को न छोड़ा तो वह तुम्हें भी न छोड़ेगा। लिहाज़ा ख़ुदा की मेहरबानी और सख़्ती दोनों पर ग़ौर करो, सख़्ती उन पर जो गिर गये, मेहरबानी तुम पर बशर्ते के तो ख़ुदा की मेहरबानी पर भरोसा रखे वर्ना तुम्हें भी काट डाला जायेगा। अगर यहूदी भी बेएतक़ादी में न रहें तो पैवन्द किये जायेंगे, क्यूंके ख़ुदा उन्हें फिर से पैवन्द करने पर क़ादिर है। जब तुम उस के दरख़्त से जो तब्ई तौर पर जंगली ज़ैतून है, ख़िलाफ़-ए-तबअ अच्छे ज़ैतून के दरख़्त में पैवन्द किये गये हो तो ये जो असल डालियां हैं अपने ही ज़ैतून के दरख़्त में बाआसानी ज़रूर पैवन्द की जायेंगी। ऐ भाईयो और बहनों! मुझे मन्ज़ूर नहीं के तुम इस राज़ से नावाक़िफ़ रहो और अपने आप को अक़्लमन्द समझने लगो। वह राज़ ये है के इस्राईल का एक हिस्सा किसी हद तक सख़्त-दिल हो गया है और जब तक ख़ुदा के पास आने वाले ग़ैरयहूदियों की तादाद पूरी नहीं हो जाती वह वैसा ही रहेगा। तब तमाम इस्राईल नजात पायेगा। चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “नजात-दिहन्दः सिय्यून से आयेगा; और वह बेदीनी को याक़ूब से दूर करेगा। और उन के साथ मेरा ये अह्द होगा जब में उन के गुनाह दूर कर दूंगा।” इन्जील को क़बूल न करने की वजह से वह तुम्हारे नज़दीक ख़ुदा के दुश्मन ठहरे लेकिन बरगुज़ीदा क़ौम होने के बाइस और हमारे आबा-ओ-अज्दाद की वजह से वह ख़ुदा के अज़ीज़ हैं। क्यूंके ख़ुदा की नेमतें और उस का इन्तिख़ाब ग़ैरमुतबद्दल है। चुनांचे तुम ग़ैरयहूदी भी कभी नाफ़रमान थे लेकिन यहूदियों की नाफ़रमानी के सबब से अब तुम पर ख़ुदा का रहम हुआ है। इसी तरह अब यहूदी नाफ़रमानी करते हैं ताके तुम पर रहम होने के बाइस उन पर भी रहम हो। इसलिये के ख़ुदा ने सब को नाफ़रमानी में गिरिफ़्तार होने दिया ताके वह सब पर रहम फ़रमाये। वाह! ख़ुदा की नेमत, ख़ुदा की हिक्मत और उस का इल्म बेहद गहरा है! उस के फ़ैसले समझ से किस क़दर बाहर हैं, और उस की राहें बेनिशान हैं! “ख़ुदावन्द की अक़्ल को किस ने समझा, या कौन उस का सलाहकार हुआ?” “कौन है जिस ने ख़ुदा को कुछ दिया, के जिस का बदला उसे दिया जाये?” क्यूंके सब चीज़ें ख़ुदा ही की जानिब से हैं, और ख़ुदा के वसीले से हैं और ख़ुदा ही के लिये हैं। ख़ुदा की तम्जीद हमेशा तक होती रहे! आमीन। पस, ऐ भाईयो और बहनों! में ख़ुदा की रहमतों का वास्ता दे कर तुम से मिन्नत करता हूं के अपने बदन ऐसी क़ुर्बानी की ख़िदमत होने के लिये पेश करो जो ज़िन्दा है, पाक है और ख़ुदा को पसन्द है। यही तुम्हारी माक़ूल इबादत है। इस जहान के हमशक्ल न बनो बल्के ख़ुदा को मौक़ा दो के वह तुम्हारी अक़्ल को नया बना कर तुम्हें सरासर बदल डाले ताके तुम अपने तजुर्बे से ख़ुदा की नेक, पसन्दीदा और कामिल मर्ज़ी को मालूम कर सको। मैं उस फ़ज़ल की बन पर जो मुझ पर हुआ है तुम में से हर एक से कहता हूं के जैसा समझना मुनासिब है कोई अपने आप को उस से ज़्यादा न समझे बल्के जैसा ख़ुदा ने हर एक को अन्दाज़े से ईमान तक़्सीम किया है एतदाल के साथ अपने आप को वैसा ही समझे। जिस तरह हमारे एक बदन में बहुत से आज़ा हैं और उन तमाम आज़ा का काम यकसां नहीं। उसी तरह हम भी जो बहुत से हैं अलमसीह में शामिल होकर एक बदन हैं और आपस में एक दूसरे के आज़ा। और ख़ुदा का जो फ़ज़ल हम पर हुआ है उस की वजह से हमें तरह-तरह की नेमतें मिली हैं। इसलिये जिसे नुबुव्वत मिली हो वह ईमान के अन्दाज़े के मुताबिक़ नुबुव्वत करे। अगर ख़िदमत मिली हो तो ख़िदमत में लगा रहे। अगर तालीम देने की नेमत मिली है तो तालीम देता रहे। अगर नसीहत करने की नेमत मिली है तो नसीहत करता रहे; अगर किसी को हाजतमन्दों की ज़रूरतें पूरी करने की नेमत मिली है तो वह फ़य्याज़ी से काम ले, ख़ुश दिली से पेशवाई करता रहे; रहम करने वाला ख़ुशी से रहम करे। तुम्हारी महब्बत बेरिया हो, बदी से नफ़रत रखो, नेकी से लिपटे रहो। बाहमी महब्बत के लिये ख़ुद को वक़्फ़ करो। इज़्ज़त की रू से दूसरे को अपने से बेहतर समझो। कोशिश में सुस्ती न करो। रूहानी जोश से भरे रहो और ख़ुदावन्द की ख़िदमत करते रहो। उम्मीद में ख़ुश, मुसीबत में साबिर, दुआ में मश्ग़ूल रहो। मुक़द्दसीन की ज़रूरतें पूरी करो, मुसाफ़िर परवरी में लगे रहो। जो तुम्हें सताते हैं उन के लिये बरकत चाहो, लानत न भेजो। ख़ुशी करने वालों के साथ ख़ुशी मनाओ। आंसू बहाने वालों के साथ आंसू बहाओ। आपस में यकदिल रहो, मग़रूर न बनो बल्के अदना लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ाने पर राज़ी रहो। अपने आप को दूसरों से अक़्लमन्द न समझो। बुराई का जवाब बुराई से मत दो, वोही करने की सोचा करो जो सब की नज़्र में अच्छा है। जहां तक मुम्किन हो हर इन्सान के साथ सुलह से रहो। अज़ीज़ों! दूसरों से इन्तिक़ाम मत लो बल्के ख़ुदावन्द को मौक़ा दो के वह सज़ा दे क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “इन्तिक़ाम लेना मेरा काम है; बदला मैं ही दूंगा,” ख़ुदावन्द का भी यह क़ौल है। इस के बरअक्स: “अगर तुम्हारा दुश्मन भूका हो, तो उसे खाना खिलाओ; अगर प्यासा हो, तो उसे पानी पिलाओ। क्यूंके ऐसा करने से तुम उस के सर पर दहकते अंगारों का ढेर लगाओगे।” बदी से मग़्लूब न हो, बल्के नेकी से उस पर फ़त्ह पाओ। हर शख़्स का फ़र्ज़ है के हुकूमत के हुक्मरानों के ताबे रहे क्यूंके कोई हुकूमत ऐसी नहीं जो ख़ुदा की जानिब से न हो। जो हुकूमतें मौजूद हैं, ख़ुदा ही की मुक़र्रर की हुई हैं। लिहाज़ा जो कोई हुकूमत की मुख़ालफ़त करता है वह ख़ुदा के क़ाइम किये हुए इन्तिज़ाम की मुख़ालफ़त करता है, वह सज़ा पायेगा। क्यूंके नेक काम करने वाला हुक्काम से नहीं डरता। लेकिन बुरे काम करने वाला डरता है। अगर तो हाकिम से बेख़ौफ़ रहना चाहते हो तो नेकी किया करो, तब वह तुम्हारी तारीफ़ करेगा। ख़ुदा ने हाकिम को तुम्हारी भलाई के लिये ख़ादिम मुक़र्रर क्या है। लेकिन अगर तो बदी करने लगे तो इस बात से डर के उस के हाथ में तलवार किसी मक़सद के लिये दी गई है। वह ख़ुदा का ख़ादिम है और उस के क़हर के मुताबिक़ हर बदकार को सज़ा देता है। इसलिये न महज़ ख़ुदा के क़हर की वजह से इताअत करना वाजिब है बल्के ज़मीर के मुआमले के तौर पर भी इताअत करना लाज़िमी है। तुम हुक्काम को महसूल भी अदा करते हो क्यूंके वह ख़ुदा के ख़ादिम होते हुए अपना फ़र्ज़ अदा करने में मसरूफ़ रहते हैं। हर एक को उस का हक़ अदा करो: जिसे महसूल देना चाहिये, उसे महसूल दो; जिस से ख़ौफ़ करना चाहिये, उस से ख़ौफ़ करो; और जिस का एहतिराम करना चाहिये, उस का एहतिराम करो। आपस की महब्बत के सिवा किसी चीज़ के कर्ज़दार न रहो क्यूंके जो दूसरों से महब्बत रखता है वह गोया शरीअत पर अमल करता है। मतलब ये है के ये सब अहकाम, “तुम ज़िना न करना,” “तुम ख़ून न करना,” “तुम चोरी न करना,” “तुम लालच न करना,” और इन के अलावा और एक हुक्म जो बाक़ी है उन सब का ख़ुलासा इस एक हुक्म में पाया जाता है: “अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखना।” महब्बत अपने पड़ोसी से बदी नहीं करती इसलिये महब्बत शरीअत की तामील है। वक़्त को पहचानो और ऐसा ही करो, इसलिये के वह घड़ी आ पहुंची है के तुम नींद से जागो क्यूंके हमारी नजात ज़्यादा नज़दीक है बह निस्बत उस वक़्त के जब हम ईमान लाये थे। रात तक़रीबन गुज़र चुकी है और दिन निकलने को है लिहाज़ा हम तारीकी के कामों को छोड़कर रोशनी के ढाल के आलात से लैस हो जायें। और दिन की रोशनी के लाइक़ शाइस्ता ज़िन्दगी गुज़ारें जिस में नाच रंग, नशा बाज़ी, जिन्सी बदफ़ेली, शहवत-परस्ती, लड़ाई झगड़े और हसद वग़ैरा न हो। बल्के ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के हो जाओ और जिस्मानी ख़ाहिशात को पूरा करने की फ़िक्र में न लगे रहो। कमज़ोर ईमान वाले को अपनी रिफ़ाक़त में शामिल तो कर लो लेकिन उस के शक-ओ-शुबहात को बहस का मौज़ू न बनाओ। एक शख़्स का एतक़ाद है के वह हर चीज़ खा सकता है लेकिन दूसरा शख़्स जिस का ईमान कमज़ोर है, वह सिर्फ़ सब्ज़ियां ही खाता है। जो हर चीज़ के खाने को रवा समझता है वह परहेज़ करने वाले को हक़ीर न समझे और परहेज़ करने वाला हर चीज़ के खाने वाले पर इल्ज़ाम न लगाए क्यूंके उसे ख़ुदा ने क़बूल कर लिया है। तुम कौन हो जो किसी दूसरे के ख़ादिम पर इल्ज़ाम लगाता हो? ये तो मालिक का हक़ है के वह ख़ादिम को क़बूल करे या रद्द कर दे बल्के वह क़ाइम किया जायेगा क्यूंके ख़ुदावन्द उसे क़ाइम रखने पर क़ादिर है। कोई शख़्स तो एक दिन को दूसरे दिन से बेहतर समझता है और कोई सब दिनों को बराबर मानता है। हर शख़्स को अपने ज़मीर के मुताबिक़ फ़ैसला करना चाहिये। जो किसी दिन को ख़ास समझ कर मानता है वह ख़ुदावन्द की ख़ातिर मानता है। जो किसी चीज़ को खाता है वह भी ख़ुदावन्द की ख़ातिर खाता है इसलिये के ख़ुदा का शुक्र बजा लाता है और जो उस से परहेज़ करता है वह भी ख़ुदावन्द की ख़ातिर परहेज़ करता है क्यूंके वह भी ख़ुदा का शुक्र बजा लाता है। असल में हम में से कोई भी सिर्फ़ अपने वास्ते नहीं जीता और न ही कोई सिर्फ़ अपने वास्ते मरता है। अगर हम ज़िन्दा हैं तो ख़ुदावन्द की ख़ातिर ज़िन्दा हैं और अगर मरते हैं तो ख़ुदावन्द की ख़ातिर मरते हैं। चुनांचे ख़्वाह हम जियें या मरें, हम ख़ुदावन्द ही के हैं। क्यूंके अलमसीह इसीलिये मरे और ज़िन्दा हुआ के मुर्दों और ज़िन्दों दोनों का ख़ुदावन्द हूं। फिर तू अपने भाई या बहन पर क्यूं इल्ज़ाम लगाता है और उसे किस लिये हक़ीर समझता है? हम तो सब के सब ख़ुदा के तख़्त-ए-अदालत के सामने हाज़िर किये जायेंगे। जैसे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “ ‘ख़ुदावन्द फ़रमाते हैं, मुझे अपनी हयात की क़सम, हर एक घुटना मेरे आगे टिकेगा; और हर एक ज़बान ख़ुदा का इक़रार करेगी।’ ” पस हम में से हर एक को ख़ुद अपना हिसाब ख़ुदा को देना होगा। चुनांचे आइन्दा हम एक दूसरे पर इल्ज़ाम न लगाऐं बल्के दिल में इरादा कर लें के हम अपने भाई के सामने कोई ऐसी चीज़ न रखेंगे जो उस के ठोकर खाने या गिरने का बाइस हो। मुझे ख़ुदावन्द ईसा में पूरा यक़ीन है के कोई चीज़ बज़ात-ए-ख़ुद हराम नहीं है बल्के जो उसे हराम समझता है उस के लिये हराम है। अगर तुम्हारी किसी चीज़ के खाने से तुम्हारे भाई को रंज पहुंचता है तो फिर तुम महब्बत के उसूल पर नहीं चलते। जिस शख़्स के लिये अलमसीह ने अपनी जान क़ुर्बान की तुम उसे अपने खाने से हलाक न करो। इसलिये अपनी नेकी की बदनामी न होने दो। क्यूंके ख़ुदा की बादशाही खाने-पीने पर नहीं, बल्के रास्तबाज़ी, इत्मीनान और ख़ुशी पर मौक़ूफ़ है जो पाक रूह की जानिब से मिलती है। और जो कोई इस तरह अलमसीह की ख़िदमत करता है उसे ख़ुदा भी पसन्द करता है और वह लोगों में भी मक़्बूल होता है। आओ हम इन बातों की जुस्तुजू में रहें जो अमन और बाहमी तरक़्क़ी का बाइस होती हैं। सिर्फ़ किसी शै के खाने की ख़ातिर ख़ुदा के कलाम को मत बिगाड़ो। हर चीज़ पाक तो है लेकिन अगर तेरे किसी चीज़ के खाने से दूसरे को ठोकर लगती है तो उसे मत खा। और अगर तेरे गोश्त खाने, मय पीने या कोई ऐसा काम करने से तेरे भाई या बहन को ठोकर लगे तो बेहतर यही है के तुम उन चीज़ों से परहेज़ करो। चुनांचे इन बातों के मुतअल्लिक़ जो भी तुम्हारा एतक़ाद है उसे अपने और ख़ुदा के दरमियान ही रहने दे। वह शख़्स मुबारक है जो उस चीज़ के सबब से जिसे वह जाइज़ समझता है अपने आप को मुल्ज़िम नहीं ठहराता। लेकिन जो किसी चीज़ के बारे में शक करता है और फिर भी उसे खाता है वह अपने आप को मुजरिम ठहराता है। इसलिये के वह बेएतक़ाद से खाता है और जो बेएतक़ाद से है, वह गुनाह है। हम जो ईमान में पुख़्ता हैं हमारा फ़र्ज़ है के कमज़ोर ईमान वालों की कमज़ोरियों की रिआयत करें न के अपनी ख़ुशी करते रहें। हम में से हर शख़्स अपने पड़ोसी के फ़ायदा और ईमान में तरक़्क़ी का लिहाज़ रखते हुए उसे ख़ुश करे। क्यूंके अलमसीह ने भी अपनी ख़ुशी का ख़याल न रख्खा बल्के किताब-ए-मुक़द्दस में यूं लिख्खा है: “तेरे लअन-तअन करने वालों के लअन-तअन मुझ पर आ पड़े। ” क्यूंके जितनी बातें सहीफ़े में पहले लिख्खी गईं वह हमारी तालीम के लिये लिख्खी गईं ताके सब्र से और किताब-ए-मुक़द्दस की तसल्ली से हमारी उम्मीद क़ाइम रहे। अब सब्र और तसल्ली देने वाला ख़ुदा तुम्हें ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा के मेयार के मुताबिक़ आपस में यकदिल होकर रहने की तौफ़ीक़ बख़्शे, ताके तुम सब मिल कर और एक ज़बान होकर हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के बाप यानी ख़ुदा की तम्जीद करते रहो। जिस तरह अलमसीह ने ख़ुदा के जलाल के लिये तुम्हें क़बूल कर लिया है, इसी तरह तुम भी एक दूसरे को क़बूल करो। मेरा कहना ये है के अलमसीह मख़्तून यहूदियों का ख़ादिम बने ताके जो वादे ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद से किये थे उन्हें पूरा कर के ख़ुदा को सच्चा साबित करें। और ग़ैरयहूदी भी ख़ुदा के रहम के सबब से उस की तारीफ़ करें जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “इसलिये मैं ग़ैरयहूदियों में तेरी हम्द करूंगा; और तेरे नाम के नग़मे गाऊंगा। ” और फिर ये कहा गया है के “ऐ ग़ैरयहूदियों! उस ख़ुदा की उम्मत के साथ ख़ुशी मनाओ।” और ये भी, “ऐ तमाम ग़ैरयहूदियों! ख़ुदावन्द की हम्द करो, और ऐ सब उम्मतों! उन की सिताइश करो।” और यसायाह नबी भी फ़रमाते हैं, “यस्सी की जड़ फूट निकलेगी, यानी एक शख़्स ग़ैरयहूदियों पर हुकूमत करने को उठेगा; तमाम ग़ैरयहूदियों की उम्मीद उसी पर क़ाइम रहेगी।” क्यूंके तुम ईमान रखते हो इसलिये ख़ुदा जो उम्मीद का सरचश्मा है तुम्हें पूरे तौर पर ख़ुशी और इत्मीनान से मामूर कर दे ताके पाक रूह की क़ुदरत से तुम्हारी उम्मीद बढ़ती चली जाये। ऐ मेरे भाईयो और बहनो! मुझे तुम्हारे बारे में यक़ीन है के तुम ख़ुद भी नेकी से मामूर हो और इल्म भी बहुत ज़्यादा रखते हो और एक दूसरे को नसीहत करने के क़ाबिल भी हो। तो भी मैंने बाज़ बातें बड़ी दिलेरी के साथ तुम्हें लिख्खी हैं ताके तुम उन्हें याद रख सको, यह इसलिये के ख़ुदा ने मुझ पर फ़ज़ल किया है के मैं ग़ैरयहूदियों में अलमसीह ईसा का ख़ादिम बनूं। और काहिन के तौर पर ख़ुदा की ख़ुशख़बरी सुनाता रहूं, ताके ग़ैरयहूदी पाक रूह से मुक़द्दस होकर ऐसी नज़्र बन जायें जो ख़ुदा की हुज़ूरी में मक़्बूल ठहरे। चुनांचे मैं ख़ुदा की इस ख़िदमत पर फ़ख़्र करता हूं जिसे मैं अलमसीह ईसा में अन्जाम दे रहा हूं। मुझे किसी और काम के ज़िक्र करने की जुरअत नहीं सिवाए इन कामों के जो अलमसीह ने मेरे ज़रीये किये हैं ताके में ग़ैरयहूदियों को ख़ुदा के ताबे करूं। अलमसीह ने न सिर्फ़ काम और कलाम के वसीले से मुझ से ये कराया है बल्के निशानों और मोजिज़ों की क़ुव्वत यानी ख़ुदा की रूह की क़ुदरत के वसीले से भी मदद की है। इसलिये मैंने यरूशलेम शहर से ले कर चारों तरफ़ सूबे इल्लिरिकुम तक अलमसीह की इन्जील की मुनादी जुरअत के साथ की है। मेरे सामने सिर्फ़ एक ही मक़सद था के जहां अलमसीह का नाम नहीं जान गया वहां ख़ुशख़बरी सुनाऊं क्यूंके में किसी दूसरे की डाली हुई बुनियाद पर इमारत नहीं उठाना चाहता था। बल्के चाहता था के जैसा किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “वैसा ही हो, जिन्हें उस की ख़बर तक नहीं पहुंची वह देखेंगे, और जिन्होंने सुना तक नहीं वह समझेंगे।” में तुम्हारे पास आना चाहता था लेकिन अक्सर कोई न कोई रुकावट पेश आती रही। लेकिन चूंके अब इन इलाक़ों में मेरी ज़रूरत नहीं रही और मैं कई बरस से तुम्हारे पास आने का मुश्ताक़ भी हूं, इसलिये मुझे उम्मीद है के मुल्क स्पेन जाते वक़्त तुम्हारे पास होता हुआ जाऊंगा। जब तुम से दिल भर कर मुलाक़ात कर लूंगा तो मुझे उम्मीद है के तुम आगे जाने में मेरी मदद करोगे। अभी, फ़िलहाल तो, मैं ख़़ुदावन्द मुक़द्दसीन की ख़िदमत करने के लिये यरूशलेम जा रहा हूं क्यूंके मकिदुनिया और सूबे अख़िया के मसीही मोमिनीन यरूशलेम के ग़रीब मुक़द्दसीन के लिये अतीयः भेजना चाहते हैं। ये काम उन्होंने किया तो रज़ामन्दी से है लेकिन ये उन का फ़र्ज़ भी है क्यूंके जब ग़ैरयहूदी मसीही मोमिनीन ने यहूदी मसीही मोमिनीन की रूहानी बरकतों से फ़ायदा उठाया है तो लाज़िम है के वह भी अपनी जिस्मानी नेमतों से उन की ख़िदमत करें। लिहाज़ा मैं इस ख़िदमत को अन्जाम दे कर यानी पूरी रक़म उन तक पहुंचा कर स्पेन के लिये रवाना हो जाऊंगा और राह में ही तुम से मुलाक़ात करूंगा। मैं जानता हूं के जब तुम्हारे पास आऊंगा तो अलमसीह की सारी बरकतें ले कर आऊंगा। ऐ भाईयो और बहनों! मैं तुम्हें ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का, वास्ता दे कर और पाक रूह की महब्बत याद दिला कर तुम से इल्तिमास करता हूं के मेरे साथ मिल कर ख़ुदा से मेरे लिये दुआ करने में सरगर्म रहो। के मैं यहूदिया के इलाक़े के उन बेएतक़ादों से बचा रहूं जो अलमसीह के नाफ़रमान हैं और मेरी यरूशलेम में अन्जाम दी जाने वाली ख़िदमत वहां के मुक़द्दसीन को पसन्द आये और ख़ुदा की मर्ज़ी से तुम्हारे पास ख़ुशी से आकर ताज़ा दम हो सकूं। ख़ुदा जो सलामती का सरचश्मा है, तुम सब के साथ हो। आमीन। मैं तुम से फ़ीबे की सिफ़ारिश करता हूं। वह अलमसीह में हमारी बहन है। और किन्ख़रिया शहर की जमाअत की दियानतदार ख़ादिमा है। उसे ख़ुदावन्द में क़बूल करो जैसा के मसीही मोमिनीन को करना चाहिये। उस ने मेरी और बहुत से लोगों की मदद की है। लिहाज़ा जिस काम में वह तुम्हारी मदद की मोहताज हो, उस की मदद करो। प्रिसकिल्लाह और अक्विला से मेरा सलाम कहो। वह अलमसीह ईसा में मेरे हम ख़िदमत रहे हैं। बल्के उन्होंने मुझे बचाने के लिये अपनी जान ख़तरा में डाल दी थी। सिर्फ़ मैं ही नहीं बल्के ग़ैरयहूदियों की तमाम जमाअतें भी उन की शुक्रगुज़ार हैं। उन के घर की जमाअत से भी मेरा सलाम कहो। मेरे अज़ीज़ इपिनीतुस से सलाम कहो। वह सूबे आसिया का सब से पहला शख़्स है जो अलमसीह पर ईमान लाया। मरियम से सलाम कहो जिस ने तुम्हारी ख़ातिर बेहद मेहनत की है। अन्द्रनीकुस और यूनियास से सलाम कहो। वह मेरे रिश्तेदार हैं और मेरे साथ क़ैद में भी रहे थे। वह रसूलों में मशहूर हैं और मुझ से पहले अलमसीह पर ईमान ला चुके थे। अम्पलियातुस से जो ख़ुदावन्द में मेरा अज़ीज़ है, सलाम कहो। उर्बानुस से जो अलमसीह की ख़िदमत करने में मेरा साथी है और मेरे अज़ीज़ इस्तख़ुस से सलाम कहो। अपिल्लेस से सलाम कहो जो अलमसीह का वफ़ादार ख़ादिम है। अरिस्तुबुलुस के घर वालों से सलाम कहो। मेरे रिश्तेदार हेरोदियों से सलाम कहो। नरकिस्सुस के घर वालों में से उन्हें जो ख़ुदावन्द में हैं, सलाम कहो। त्रूफ़ैना और त्रुफ़ौसा से सलाम कहो जो ख़ुदावन्द की ख़िदमत में बहुत मेहनत करती हैं। अज़ीज़ा परसिस से सलाम कहो जिस ने ख़ुदावन्द की ख़ातिर बहुत मेहनत की है। रूफ़ुस जो ख़ुदावन्द का बरगुज़ीदा है और उस की मां जो मेरी भी मां है, दोनों से सलाम कहो। असुनक्रतुस और फ़लेगोन और हरमेस और पत्रुबास और हिरमास और उन भाईयों और बहनों से जो उन के साथ हैं सलाम कहो। फ़िलुलुगुस, यूलिया, निरयुस और उस की बहन और उलुमपास और सब मुक़द्दसीन से जो उन के साथ हैं, सलाम कहो। आपस में पाक बोसा ले कर एक दूसरे को मेरा सलाम कहना। अलमसीह की सब जमाअतें तुम्हें सलाम कहती हैं। पस ऐ भाईयो और बहनों! मैं तुम से इल्तिमास करता हूं के जो लोग उस तालीम की राह में जो तुम ने पाई है रोड़े अटकाते और लोगों में फूट डालते हैं, उन से होशयार रहो और उन से दूर ही रहो। क्यूंके ऐसे लोग हमारे ख़ुदावन्द अलमसीह की नहीं बल्के अपने पेट की ख़िदमत करते हैं और चिकनी चुपड़ी बातों और ख़ुशामद से सादा-दिलों को बहकाते हैं। चूंके तुम्हारी फ़रमांबरदार सब लोगों में मशहूर है इसलिये मैं तुम से बहुत ख़ुश हूं। लेकिन मैं चाहता हूं के तुम नेकी के एतबार से अक़्लमन्द और बदी के एतबार से मासूम बने रहो। ख़ुदा जो इत्मीनान का चश्मा है शैतान को तुम्हारे पांव से जल्द कुचलवा देगा। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम्हारे साथ हो! मेरा हम ख़िदमत तिमुथियुस और मेरे रिश्तेदार लूकीयुस, यासोन और सोसिपत्रुस तुम्हें सलाम कहते हैं। इस ख़त का कातिब तिरतियुस तुम्हें ख़ुदावन्द में सलाम कहता है। गियुस जो मेरा और सारी जमाअत का मेहमान-नवाज़ है तुम से सलाम कहता है। इरास्तुस जो शहर का ख़ाज़िन है और भाई क्वारतुस तुम्हें सलाम कहते हैं। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम सब के साथ हो। आमीन। और अब ख़ुदा की जो इस बात पर क़ादिर है के तुम्हें तुम्हारे मसीही ईमान में मज़बूत करे, उस ईमान में जो हुज़ूर ईसा अलमसीह की इन्जील के मुताबिक़ है और जिस की में मुनादी करता हूं वह एक ऐसा राज़ है जो अज़ल से पोशीदा रहा। लेकिन अब अज़ली ख़ुदा के हुक्म के मुताबिक़ और नबियों के नविश्तों के ज़रीये तमाम ग़ैरयहूदी क़ौमों को बता दिया गया है ताके वह ईमान लायें और ख़ुदा के फ़रमांबरदार बनें। उसी वाहिद और हकीम ख़ुदा की हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से हमेशा तक तम्जीद होती रहे! आमीन। पौलुस की तरफ़ से जो ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा का रसूल होने के लिये बुलाया गया है और भाई सोस्थिनेस की तरफ़ से, ख़ुदा की उस जमाअत के नाम जो कुरिनथुस शहर में है यानी उन के नाम जो अलमसीह ईसा में पाक किये गये और मुक़द्दस होने के लिये बुलाए गये हैं उन सब के नाम जो हर जगह हमारे और अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का नाम लेते हैं: हमारे ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। मैं तुम्हारे लिये हमेशा अपने ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं क्यूंके ख़ुदा ने अलमसीह ईसा के वसीले से तुम पर फ़ज़ल किया है। और ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा में तुम लोग हर लिहाज़ से माला-माल हुए यानी तुम इल्म वाले हो और कलाम करने में भी माहिर हो, और ख़ुदावन्द अलमसीह के बारे में हमारी गवाही तुम लोगों में ख़ूब क़ाइम हो चुकी है। इसलिये तुम किसी रूहानी नेमत से महरूम नहीं हो क्यूंके अब तुम हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ज़हूर के निहायत ही मुन्तज़िर हो। वोही तुम्हें आख़िर तक मज़बूती से क़ाइम रखेंगे ताके तुम हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ज़ाहिर होने के दिन बेइल्ज़ाम ठहरो। ख़ुदा क़ाबिले-एतमाद है, जिस ने तुम्हें अपने बेटे, हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की रिफ़ाक़त के लिये बुलाया है। ऐ भाईयो और बहनों! हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से तुम से इल्तिमास करता हूं के तुम एक दूसरे से मुताबक़त रखो ताके तुम में तफ़्रिक़े पैदा न हों और तुम सब एक दिल और एक राय होकर मुकम्मल तौर पर मुत्तहिद रहो। ऐ मेरे भाईयो और बहनों! ख़लोए के घर वालों में से चन्द लोगों ने मुझे इत्तिलाअ दी है के तुम में झगड़े होते हैं। मतलब ये है: “तुम में कोई तो अपने आप को पौलुस का पैरोकार कहता है,” “कोई अपुल्लोस का,” “कोई कैफ़ा का,” और कोई, “अलमसीह का पैरोकार।” क्या अलमसीह को तक़्सीम कर दिया गया? क्या पौलुस तुम्हारी ख़ातिर मस्लूब हुआ था? क्या तुम ने पौलुस के नाम पर पाक-ग़ुस्ल लिया था? में ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं के क्रिसपुस और गियुस के सवा मैंने किसी को पाक-ग़ुस्ल नहीं दिया। ताके कोई ये न कह सके के तुम ने मेरे नाम पर पाक-ग़ुस्ल लिया। (हां, इस्तिफ़िनास के ख़ानदान को भी मैंने पाक-ग़ुस्ल दिया; अगर, किसी और को पाक-ग़ुस्ल दिया हो तो मुझे याद नहीं।) क्यूंके अलमसीह ने मुझे पाक-ग़ुस्ल देने के लिये नहीं, बल्के ख़ुशख़बरी सुनाने के लिये भेजा है। वह भी इन्सानी हिक्मत के कलाम से नहीं ताके अलमसीह की सलीबी मौत बेतासीर न हो। हलाक होने वालों के लिये तो सलीब का पैग़ाम बेवक़ूफ़ी है लेकिन हम नजात पाने वालों के लिये ख़ुदा की क़ुदरत है। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “मैं दानिशमन्दों की दानिश को नेस्त कर डालूंगा; और अक़्लमन्दों की अक़्ल को बातिल कर दूंगा।” कहां का दानिशमन्द? कहां का फ़क़ीह? कहां का उस दूर का बहस करने वाला? क्या ख़ुदा ने दुनिया की हिक्मत को बेवक़ूफ़ी नहीं ठहराया? क्यूंके जब दुनिया वाले ख़ुदा की हिक्मत के मुताबिक़ अपनी दानिश से ख़ुदा को न जान सके तो ख़ुदा को पसन्द आया के ईमान लाने वालों को इस मुनादी की बेवक़ूफ़ी के वसीले नजात बख़्शे। यहूदी मोजिज़ों के तालिब हैं और यूनानी हिक्मत की तलाश में हैं मगर हम उस अलमसीह मस्लूब की मुनादी करते हैं: जो यहूदियों के नज़दीक ठोकर का बाइस और ग़ैरयहूदियों के नज़दीक बेवक़ूफ़ी है। लेकिन ख़ुदा के बुलाए हुए लोगों के लिये ख़्वाह वह यहूदी हों या ग़ैरयहूदी, अलमसीह ख़ुदा की क़ुदरत और ख़ुदा की हिक्मत है। क्यूंके जिसे लोग ख़ुदा की बेवक़ूफ़ी समझते हैं वह आदमियों की हिक्मत से ज़्यादा हिक्मत वाली है और जिसे लोग ख़ुदा की कमज़ोरी समझते हैं वह आदमियों की ताक़त से ज़्यादा ज़ोरआवर है। ऐ भाईयो और बहनों! ग़ौर करो के जब तुम बुलाए गये थे तब तुम क्या थे। तुम में से बहुत से न तो जिस्मानी लिहाज़ से दानिश्वर; बा-रसूख़ थे; और न ही नेक। लेकिन ख़ुदा ने उन्हें, जो दुनिया की नज़रों में बेवक़ूफ़ हैं, चुन लिया ताके आलिमों को शर्मिन्दा करे और उन्हें जो दुनिया की नज़र में कमज़ोर हैं, चुन लिया ताके ज़ोर औरों को शर्मिन्दा करे। ख़ुदा ने इस जहान के कमीनों, हक़ीरों बल्के बेवुजूदों को चुन लिया के मौजूदों को नेस्त करे। ताके कोई भी बशर ख़ुदा के सामने फ़ख़्र न कर सके। लेकिन तुम ख़ुदा की तरफ़ से अलमसीह ईसा में हो जिसे उस ने हमारे लिये हिक्मत, रास्तबाज़ी, पाकीज़गी और मुख़्लिसी ठहराया। ताके जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “अगर कोई फ़ख़्र करना चाहे तो वह ख़ुदावन्द पर फ़ख़्र करे।” ऐ भाईयो और बहनो! जब मैं तुम्हारे पास आया था तो मेरा मक़सद ये न था के ख़ुदा के भेद की गवाही देने में आला दर्जे की ख़िताबत और हिक्मत से काम लूं। क्यूंके मैंने फ़ैसला किया हुआ था के जब तक तुम्हारे दरमियान रहूंगा ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह मस्लूब की मुनादी के सवा किसी और बात पर ज़ोर न दूंगा। जब मैं तुम्हारे पास आया तो अपने आप को कमज़ोर महसूस करता बल्के डर के मारे कांपता हुआ आया। मेरा पैग़ाम और मेरी मुनादी दोनों दानाई के पुर असर अल्फ़ाज़ से ख़ाली थे लेकिन उन से पाक रूह की क़ुव्वत साबित होती थी। ताके तुम्हारा ईमान इन्सानी हिक्मत पर नहीं बल्के ख़ुदा की क़ुदरत पर मब्नी हो। फिर भी हम उन से जो रूहानी तौर पर बालिग़ हैं हिक्मत की बातें कहते हैं। लेकिन वह इस जहान की हिक्मत नहीं है और न ही इस जहान के हुक्काम का जो नेस्त होते जा रहे हैं। बल्के हम ख़ुदा की हिक्मत के उस राज़ को ज़ाहिर करते हैं, जो पोशीदा रख्खा गया था और जिसे ख़ुदा ने दुनिया के आग़ाज़ से पहले ही हमारे जलाल के वास्ते मुक़र्रर कर दिया था। इस जहान के हुक्काम में से किसी ने भी इस हिक्मत को न जाना। अगर जान लेते तो जलाली ख़ुदावन्द को मस्लूब न करते। मगर किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “जो न तो किसी आंख ने देखा, न किसी कान ने सुना, न किसी इन्सान के दिल में आया” उसे ख़ुदा ने उन के लिये तय्यार किया है जो उस से महब्बत रखते हैं। लेकिन हम पर अपने पाक रूह के वसीले से ज़ाहिर किया, क्यूंके पाक रूह सब बातें, यहां तक के ख़ुदा की गहरी बातों को भी आज़माता है। कौन शख़्स किसी दूसरे के दिल की बातें जान सकता है सिवाए उस की अपनी रूह के जो उस के अन्दर है? इसी तरह ख़ुदा के पाक रूह के सिवा कोई दिल की बातें नहीं जान सकता। हम ने इस दुनिया की रूह नहीं पाई बल्के ख़ुदा का पाक रूह पाया है, ताके हम उन नेमतों को समझ सकें जो हमें ख़ुदा की तरफ़ से बख़्शी गई हैं। हम यह बातें उन अल्फ़ाज़ में बयान नहीं करते, जो इन्सानी हिक्मत के सिखाए हुए हों बल्के पाक रूह के सिखाए हुए अल्फ़ाज़ बयान करते हैं, गोया रूहानी बातों के लिये रूहानी अल्फ़ाज़ इस्तिमाल करते हैं। जिस में ख़ुदा की पाक रूह नहीं वह ख़ुदा की बातें क़बूल नहीं करता क्यूंके वह उस के नज़दीक बेवक़ूफ़ी की नफ़्सानी बातें हैं, और न ही उन्हें समझ सकता है क्यूंके वह सिर्फ़ पाक रूह के ज़रीये समझी जा सकती हैं। लेकिन जिस में ख़ुदा का पाक रूह है वह सब कुछ परख लेता है, मगर वह ख़ुद परखा नहीं जाता, क्यूंके जैसा के सहीफ़े में लिख्खा है, “किस ने ख़ुदावन्द की अक़्ल को समझा के उसे तालीम दे सके?” लेकिन हमारे दिमाग़ में अलमसीह की अक़्ल है। ऐ भाईयो और बहनों! मैं तुम से इस तरह बातें न कर सका जिस तरह रूहानी लोगों से की जाती हैं बल्के मैंने तुम से इस तरह बातें कीं गोया तुम जिस्मानी हो और अभी अलमसीह में बच्चे हो। मैंने तुम्हें दूध पिलाया, खाना नहीं खिलाया, क्यूंके तुम उसे हज़्म करने के क़ाबिल न थे बल्के अब भी इस क़ाबिल नहीं हो। तुम अभी तक दुनियादारों की तरह ज़िन्दगी बसर कर रहे हो क्यूंके तुम हसद करते हो और आपस में झगड़ते हो। क्या तुम दुनियादार नहीं? क्या तुम दुनियवी तरीक़ पर नहीं चल रहे हो? क्यूंके जब तुम में से एक कहता है, “मैं पौलुस का पैरोकार हूं” और दूसरा कहता है, “मैं अपुल्लोस का हूं,” तो क्या तुम आम इन्सानों की तरह न हुए? आख़िर अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? यह महज़ ख़ादिम हैं जिन के ज़रीये तुम ईमान लाये हो। ख़ुदावन्द ने हर एक को उस की लियाक़त के मुताबिक़ कोई न कोई काम अता किया है। मैंने बीज बोया, अपुल्लोस ने पौदे को पानी से सींचा। मगर ये ख़ुदा ही है जिस ने उसे बढ़ाया। इसलिये न लगाने वाला कुछ है न सींचने वाला। मगर ख़ुदा ही सब कुछ है, जो उसे बढ़ाने वाला है। लगाने वाला और सींचने वाला दोनों एक ही मक़सद रखते हैं और हर एक अपनी मेहनत के मुवाफ़िक़ अज्र पायेगा। क्यूंके हम ख़ुदा के साथ काम करने वाले हम ख़िदमत हैं। तुम ख़ुदा की खेती हो, तुम ख़ुदा का इमारत हो। ख़ुदा के फ़ज़ल से मैंने एक माहिर मेमार की तरह बुनियाद रख्खी है और कोई दूसरा उस पर इमारत खड़ी कर रहा है। लेकिन हर एक को ख़बरदार रहना चाहिये के वह कैसी इमारत उठाता है। हुज़ूर ईसा अलमसीह वह बुनियाद है जो पहले से रख्खी जा चुकी है। अब कोई शख़्स दूसरी बुनियाद नहीं रख सकता। अगर कोई इस बुनियाद पर इमारत उठाते वक़्त सोने, चांदी, क़ीमती पत्थरों, लकड़ी, घास-फूस या भूसे को इस्तिमाल में लाये, तो इन्साफ़ के दिन उस का काम साफ़ ज़ाहिर हो जायेगा। क्यूंके वह दिन आग के साथ आयेगा, और आग अपने आप हर एक का काम आज़मा लेगी के कैसा है। इस बुनियाद पर जिस किसी बनाने वाले का काम आग से सलामत रहेगा वह अज्र पायेगा और जिस का काम जल जायेगा वह नुक़्सान तो उठायेगा मगर वह ख़ुद बच निकलेगा, फिर भी वह जलते-जलते भी बच जायेगा वैसा होगा। क्या तुम नहीं जानते के तुम ख़ुदा का मक़्दिस हो और ख़ुदा का पाक रूह तुम में बसा हुआ है? अगर कोई ख़ुदा के मक़्दिस को बरबाद करे तो ख़ुदा उसे बरबाद कर देगा। क्यूंके ख़ुदा का मक़्दिस पाक है और वह मक़्दिस तुम हो। अपने आप को फ़रेब मत दो। अगर तुम में से कोई अपने आप को इस जहान में हकीम समझता है तो वह बेवक़ूफ़ बने ताके सच-मुच हकीम बन सके। क्यूंके दुनिया जिसे हिक्मत समझती है वह ख़ुदा की नज़र में हमाक़त है। चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “वह दानाओं को उन ही की चालाकी में फंसा देता है”; और यह भी के, “ख़ुदावन्द जानता है के दानाओं के ख़्यालात बातिल होते हैं। ” लिहाज़ा किसी को किसी इन्सान पर फ़ख़्र नहीं करना चाहिये क्यूंके सब कुछ तुम्हारा है, चाहे वह पौलुस हो, अपुल्लोस हो, कैफ़ा हो, दुनिया हो, ज़िन्दगी हो, मौत हो, हाल हो या मुस्तक़बिल हो, सब कुछ तुम्हारा है, तुम अलमसीह के हो, और अलमसीह ख़ुदा के हैं। तुम हमें अलमसीह के ऐसे ख़ादिम समझो जिन्हें ख़ुदा के पोशीदा राज़ बख़्शे गये हैं। यह ज़रूरी है के ख़ज़ान्ची इख़्तियार पाने वाले वफ़ादार हों। मुझे इस बात की ज़्यादा पर्वा नहीं के तुम या कोई इन्सानी अदालत मुझे परखे बल्के मैं तो ख़ुद भी अपने आप को नहीं परखता। मेरा ज़मीर मुझे मलामत नहीं करता लेकिन इस से मैं बेक़ुसूर साबित नहीं होता। मेरा परखने वाला भी कोई है और वह ख़ुदावन्द है। इसलिये जब तक ख़ुदावन्द वापस न आयें, तुम वक़्त से पहले किसी बात का फ़ैसला न करो। जो बातें तारीकी में पोशीदा हैं वह उन्हें रोशनी में ले आयेंगे और लोगों के दिली मन्सूबे ज़ाहिर कर देंगे। उस वक़्त ख़ुदा की तरफ़ से हर एक की तारीफ़ की जायेगी। अब, ऐ भाईयो और बहनों! मैंने तुम्हारी ख़ातिर इन बातों के ज़रीये अपना और अपुल्लोस का हाल मिसाल के तौर पर पेश किया है ताके हमारी मिसाल से तुम्हें मालूम हो जाये, “लिखे हुए से तजावुज़ न करो।” तब तुम एक के मुक़ाबले में दूसरे पर ज़्यादा फ़ख़्र न करोगे। आख़िर कौन है जो तुम में और किसी दूसरों में फ़र्क़ करता है? तुम्हारे पास क्या है जो तुम ने किसी दूसरे से नहीं पाया? और जब तुम ने पाया है तो फिर फ़ख़्र कैसा? क्या वह किसी का दिया हुआ नहीं? तुम तो पहले ही से आसूदः हाल हो, पहले ही से दौलतमन्द हो और हमारे बग़ैर बादशाही भी करने लगे हो। काश तुम वाक़ई बादशाही करते ताके हम भी तुम्हारे साथ बादशाही कर सकते! मुझे तो ऐसा लगता है के ख़ुदा ने हम रसूलों को उन लोगों की क़तार में सब से पीछे रख्खा है जिन के लिये हुक्म सादर हो चुका है के वह तमाशागाह में क़त्ल किये जायें क्यूंके हम तमाम काइनात, फ़रिश्तों और इन्सानों के लिये तमाशा बने हुए हैं। हम अलमसीह की ख़ातिर बेवक़ूफ़ हैं लेकिन तुम अलमसीह में किस क़दर अक़्लमन्द हो, हम कमज़ोर हैं और तुम ज़ोरआवर हो, तुम इज़्ज़त वाले और हम बेइज़्ज़त। हम उस वक़्त तक भूके प्यासे हैं, चीथड़े पहनते हैं, मुक्के खाते और मारे-मारे फिरते, हम बेघर हैं। हम अपने हाथों से सख़्त मेहनत करते हैं। लोग हमें बुरा कहते हैं और हम उन्हें बरकत देते हैं। जब हम सताये जाते हैं तो सब्र से काम लेते हैं। वह हमें बुरा भला कहते हैं तो हम नरम मिज़ाजी से जवाब देते हैं। हम आज तक पांव की धूल और दुनिया के कूड़े-करकट की मानिन्द समझे जाते हैं। इन बातों के लिखने से मेरा मक़सद तुम्हें शर्मिन्दा करना नहीं है बल्के में तुम्हें अपना प्यारा फ़र्ज़न्द समझ कर नसीहत करता हूं। क्यूंके अगर अलमसीह में तुम्हारे दस हज़ार उस्ताद भी हूं तो भी बाप बहुत से नहीं। इसलिये के तुम्हें इन्जील सुनाने के बाइस मैं ही अलमसीह ईसा में तुम्हारा बाप बना। लिहाज़ा में तुम्हारी मिन्नत करता हूं के मेरे नमूने पर चलो। इसलिये मैं तिमुथियुस को जो ख़ुदावन्द में मेरा अज़ीज़ और वफ़ादार फ़र्ज़न्द है, तुम्हारे पास भेज रहा हूं। वह तुम्हें मेरे वह तरीक़े याद दिलायेगा जिन पर मैं अलमसीह ईसा में होते हुए अमल करता हूं और जिन्हें मैं हर जमाअत में हर जगह सिखाता हूं। तुम में से बाज़ मग़रूर हो गये हैं ये सोच कर के गोया मैं तुम्हारे पास आने से डरता हूं। लेकिन अगर ख़ुदावन्द ने चाहा तो मैं बहुत जल्द तुम्हारे पास आऊंगा और तब मुझे मालूम हो जायेगा के यह शेख़ी बाज़ सिर्फ़ बातें करते हैं या कुछ करने की ताक़त भी रखते हैं। क्यूंके ख़ुदा की बादशाही सिर्फ़ बातों पर नहीं बल्के क़ुदरत पर मौक़ूफ़ है। क्या तुम चाहते हो के में छड़ी ले कर तुम्हारे पास आऊं या महब्बत और नरम मिज़ाजी रूह के साथ? मैंने उस जिन्सी बदफ़ेली का ज़िक्र सुना है जो तुम्हारे दरमियान हो रही है। ऐसी जिन्सी बदफ़ेली जो बुतपरस्तों में भी नहीं होती: मसलन यह के तुम्हारी जमाअत में एक आदमी ऐसा भी है जो अपनी सौतेली मां के साथ गुनाह की ज़िन्दगी गुज़ार रहा है तुम फिर भी शेख़ी मारते हो! तुम्हें तो इस बात पर रंजो अफ़सोस होना चाहिये था। क्या तुम उस आदमी को जमाअत से ख़ारिज नहीं कर सकते थे? अगरचे मैं जिस्मानी तौर पर तुम्हारे दरमियान मौजूद नहीं मगर रूहानी एतबार से वहां तुम्हारे साथ हूं और इसी मौजूदगी की बिना पर मैं उस हरामकार के बारे में फ़ैसला कर चुका हूं। जब तुम हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से जमा हो तो, अलमसीह की क़ुदरत के साथ रूह में मुझे भी अपने दरमियान मौजूद समझो। और तब ख़ुदावन्द से क़ुव्वत पा कर उस आदमी को जिस्मानी एतबार से शैतान के हवाले कर दो ताके वह हलाक हो लेकिन ख़ुदावन्द के वापस आने के दिन उस की रूह बच जाये। तुम लोगों का फ़ख़्र करना अच्छी बात नहीं। क्या तुम नहीं जानते के ज़रा सा ख़मीर सारे गुंधे हुए आटे को ख़मीर कर देता है? बदी के पुराने ख़मीर से अपने आप को पाक कर लो ताके ताज़ा गुंधा हुआ आटा बन जाओ और तुम में ज़रा भी ख़मीर न हो क्यूंके अलमसीह जो फ़सह का बर्रा हैं हमारे लिये क़ुर्बान हो चुके हैं। पस आओ हम ईद मनायें लेकिन पुराने ख़मीर से नहीं जो शरारत और बदी का ख़मीर है बल्के पाकीज़गी और सच्चाई की बेख़मीरी रोटी से। मैंने अपने ख़त में तुम्हें यह लिख्खा था के हरामकार से मेल-जोल न रखना। मेरा मतलब यह कतअई यह न था के दुनिया के लोगों से नाता तोड़ लो जिस में हरामकार, लालची, ठग और बुत-परस्त बसते हैं। क्यूंके इस सूरत में तो तुम को दुनिया से ही ज़रूर बाहर जाना पड़ेगा। अब यह लिखता हूं के अगर कोई भाई या बहन कहलाता है और फिर भी हरामकार, लालची, बुत-परस्त, गाली देने वाला, शराबी या ठग हो तो उस से महब्बत न रखना बल्के ऐसे के साथ खाना तक न खाना। जो लोग जमाअत से बाहर हैं, उन के बारे में फ़ैसला करने से मुझे क्या वास्ता? जो जमाअत में हैं, क्या उन के बारे में फ़ैसला करना तुम्हारा काम नहीं? लेकिन बाहर वालों का इन्साफ़ तो ख़ुदा ही करेगा। पस जैसा के लिख्खा है, “उस हरामकार को अपने दरमियान से निकाल दो।” अगर तुम में एक का दूसरे के साथ झगड़ा चल रहा हो तो क्या वह अपने फ़ैसले के लिये मसीही मुक़द्दसीन की बजाय बेदीनों की अदालत में जाने की जुरअत करेगा? क्या तुम नहीं जानते के मुक़द्दस लोग दुनिया का इन्साफ़ करेंगे? और जब तुम्हें दुनिया का इन्साफ़ करना है तो क्या तुम इस क़ाबिल भी नहीं के छोटी-छोटी बातों का फ़ैसला कर सको? क्या तुम नहीं जानते के हम फ़रिश्तों का इन्साफ़ करेंगे? इस दुनिया के मुआमलात का तो ज़िक्र ही क्या? अगर तुम में ऐसे दुनियवी मुक़द्दमे हों तो क्या तुम उन का फ़ैसला ऐसे लोगों से कराओगे जिन की जमाअत में कोई हैसियत नहीं? मैं तुम्हें शर्मिन्दा करने के लिये यह कहता हूं। क्या सच-मुच तुम में एक भी अक़्लमन्द नहीं जो मसीही भाईयों के मुआमलात का बिलाझिजक फ़ैसला कर सके? बल्के एक मसीही भाई दूसरे मसीही भाई पर मुक़द्दमा दायर करता है और वह भी बेएतक़ादों की अदालत में। दरअस्ल तुम में बड़ा नुक़्श यह है के तुम आपस की मुक़द्दमे-बाज़ी में मश्ग़ूल हो। तुम ज़ुल्म उठाना क्यूं नहीं बेहतर जानते? अपना नुक़्सान क्यूं नहीं क़बूल करते? इस के बरअक्स तुम ज़ुल्म करते हो, नुक़्सान पहुंचाते हो और वह भी अपने ही मसीही भाईयों और बहनों को। क्या तुम नहीं जानते के बदकार ख़ुदा की बादशाही के वारिस न होंगे? धोके में न रहो! न हरामकार न बुत-परस्त, न ज़िनाकार, न लौंडे बाज़ न चोर, न लालची, न शराबी, न गाली बकने वाले, न ज़ालिम ख़ुदा की बादशाही के वारिस होंगे। तुम में बाज़ ऐसे ही थे मगर तुम ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम और हमारे ख़ुदा के पाक रूह से धुल गये, पाक हो गये और रास्तबाज़ ठहराये गये। सारी चीज़ें मेरे लिये जायज़ हैं मगर सारी चीज़ें मुफ़ीद नहीं। सारी चीज़ें मेरे लिये रवा हैं लेकिन में किसी चीज़ का ग़ुलाम न बनूंगा। खाना पेट के लिये और पेट खाने के लिये लेकिन ख़ुदा इन दोनों को नेस्त-ओ-नाबूद कर देगा। मगर बदन बदफ़ेली के लिये नहीं बल्के ख़ुदावन्द के लिये है और वोही उस का मालिक है। ख़ुदा ने अपनी क़ुदरत से ख़ुदावन्द ईसा को ज़िन्दा किया और वह हमें भी अपनी क़ुदरत से ज़िन्दा करेगा। क्या तुम नहीं जानते के तुम्हारे बदन अलमसीह के आज़ा हैं? क्या मैं अलमसीह के आज़ा ले कर उन्हें किसी फ़ाहिशा के साथ जोड़ दूं? हरगिज़ नहीं! क्या तुम नहीं जानते के जो किसी फ़ाहिशा से सुहबत करता है, उस के साथ एक जिस्म हो जाता है? क्यूंके सहीफ़े में लिख्खा है, “वो दोनों मिल कर एक जिस्म होंगे।” मगर जो ख़ुद को ख़ुदावन्द से जोड़ देता है वह रूहानी तौर पर उस के साथ एक हो जाता है। जिन्सी बदफ़ेली से दूर रहो। इन्सान के दूसरे सारे गुनाह बदन से तअल्लुक़ नहीं रखते लेकिन हरामकार अपने बदन का भी गुनहगार है। क्या तुम नहीं जानते के तुम्हारा बदन उस पाक रूह का मक़्दिस है जो तुम में बसा हुआ है और जिसे तुम ने ख़ुदा की तरफ़ से पाया है? तुम अपने नहीं हो। क्यूंके तुम क़ीमत से ख़रीदे गये हो। पस अपने बदन से ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर करो। जिन बातों के बारे में तुम ने मुझे अपने ख़त में लिख्खा है: “उन का जवाब यह है, आदमी के लिये अच्छा है के शादी न करे।” लेकिन चूंके जिन्सी बदफ़ेली ज़ोरों पर है इसलिये हर मर्द को चाहिये के वह अपनी-अपनी बीवी रखे और हर औरत को चाहिये के अपने-अपने शौहर रखे। शौहर अपनी बीवी का इज़्दिवाजी हक़ अदा करे और उसी तरह बीवी अपने शौहर का। बीवी के बदन पर सिर्फ़ उसी का इख़्तियार नहीं बल्के उस के शौहर का भी है। उसी तरह शौहर के बदन पर सिर्फ़ उसी का इख़्तियार नहीं बल्के उस की बीवी का भी है। तुम दोनों एक दूसरे से जुदा मत रहो लेकिन आपस की रज़ामन्दी से कुछ अरसा के लिये जुदा रह सकते हो ताके दुआ करने के लिये फ़ुर्सत पा सको। बाद में फिर इकट्-ठे हो जाओ। कहीं ऐसा न हो के तुम ज़ब्त न कर सको और शैतान तुम्हें आज़माइश में डाल दे। यह रिआयत मैं अपनी तरफ़ से दे रहा हूं, इसे मेरा हुक्म न समझ लेना। मैं तो यह चाहता हूं के जैसा मैं हूं सब मसीही मेरी तरह हों। लेकिन हर एक को ख़ुदा की तरफ़ से ख़ास-ख़ास तौफ़ीक़ मिली है, किसी को किसी तरह की, किसी को किसी तरह की। ग़ैरशादीशुदा और औरतें बेवाओं से मेरा यह कहना है: अगर वह मेरी तरह बग़ैर शादी का रहें तो अच्छा है। लेकिन अगर ज़ब्त की ताक़त न हो तो शादी कर लें क्यूंके शादी कर लेना नफ़्स की आग में जलते रहने से बेहतर है। मगर जिन की शादी हो चुकी है उन्हें में नहीं बल्के ख़ुदावन्द हुक्म देता है के बीवी अपने शौहर को न छोड़े। अगर उसे छोड़ती है तो बे निकाह रहे या अपने शौहर से फिर सुलह कर ले और शौहर भी अपनी बीवी को न छोड़े। बाक़ी लोगों से ख़ुदावन्द का नहीं बल्के मेरा कहना यह है के अगर किसी मसीही भाई की बीवी ग़ैरमसीही हो मगर उस के साथ रहने पर राज़ी हो तो वह शौहर उसे न छोड़े। और अगर किसी मसीही औरत का शौहर ग़ैरमसीही हो मगर उस के साथ रहने पर राज़ी हो तो वह औरत उसे न छोड़े। क्यूंके ग़ैरमसीही शौहर अपनी मसीही बीवी के सबब से पाक ठहरता है और ग़ैरमसीही बीवी अपने मसीही शौहर के सबब से पाक ठहरती है, वर्ना तुम्हारे बच्चे नापाक होते, मगर अब वह पाक हैं। लेकिन अगर कोई ग़ैरमसीही शौहर या बीवी, मसीही बीवी या मसीही शौहर से अलग होना चाहे तो उसे अलग हो जाने दो। इस सूरत में कोई मसीही भाई या बहन पाबन्द नहीं; क्यूंके ख़ुदा ने हमें अमन से रहने के लिये बुलाया है। ऐ मसीही बीवी! तुझे क्या ख़बर के शायद तू अपने शौहर को बचा ले और ऐ मसीही शौहर! तुझे क्या ख़बर के शायद तू अपनी बीवी को बचा ले? बहरहाल, हर एक शख़्स को चाहिये के वह ख़ुदावन्द की बख़्शी हुई तौफ़ीक़ के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारे और उसी हालत में रहे जिस में वह अपने बुलाए जाने के वक़्त था। मैं सब जमाअतों में यही उसूल मुक़र्रर करता हूं। अगर किसी का ख़तना हो चुका है और वह अलमसीह के पास आता है तो वह अपने आप को नामख़्तून ज़ाहिर न करे और अगर कोई नामख़्तून शख़्स मसीही होता है तो ज़रूरी नहीं के वह ख़तना कराये। ख़तना कराना या न कराना कोई अहम बात नहीं है बल्के ख़ुदा के हुक्मों पर अमल करना ही सब कुछ है। हर शख़्स उसी हालत में रहे जिस में वह अलमसीह के पास बुलाया गया। अगर तू ग़ुलामी की हालत में बुलाया गया तो फ़िक्र न कर लेकिन अगर तुझे आज़ाद होने का मौक़ा मिले तो उस मौक़े से फ़ायदा उठा। क्यूंके जो ग़ुलाम है और मसीही हो जाता है वह ख़ुदावन्द का आज़ाद किया हुआ है, इसी तरह जो आज़ाद है और अलमसीह के पास आता है वह अलमसीह का ग़ुलाम बन जाता है। तुम ख़रीद लिये गये हो और तुम्हारी क़ीमत अदा की जा चुकी है; अब आदमियों के ग़ुलाम मत बनों। ऐ भाईयो और बहनों! जो कोई जिस हालत में बुलाया गया है वह ख़ुदा के हुज़ूरी में उसी हालत में रहे। कुंवारियों के मुतअल्लिक़ मेरे पास ख़ुदावन्द का कोई हुक्म नहीं है: लेकिन ख़ुदावन्द की मेहरबानी से, एक वफ़ादार मसीही की हैसियत से में अपनी शख़्सी राय पेश करता हूं। हम बड़े नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं इसलिये तुम्हारे लिये यही बेहतर है के तुम जैसे हो वैसे ही रहो। अगर शादीशुदा हो तो बीवी को छोड़ देने का ख़्याल न करो। अगर अभी शादी नहीं की तो शादी करने का ख़्याल छोड़ दो। लेकिन अगर तुम शादी कर भी लो तो यह कोई गुनाह नहीं और अगर कोई कुंवारी लड़की शादी कर ले तो यह भी गुनाह नहीं। मगर शादी कर लेने वाले अपनी इन्सानी ज़िन्दगी में काफ़ी तकलीफ़ उठाते हैं और मैं तुम्हें इस तकलीफ़ से बचाना चाहता हूं। ऐ भाईयो और बहनों! में यह कहना चाहता हूं के वक़्त तंग है चुनांचे बीवीयों वाले आइन्दा ऐसे रहें जैसे वह बग़ैर बीवीयों के हैं। रोने वाले ऐसे हों के गोया वह रोते नहीं और ख़ुशी मनाने वाले ऐसे हों गोया वह ख़ुशी नहीं मनाते। ख़रीदने वाले ऐसे हों गोया उन के क़ब्ज़े में कुछ भी नहीं। दुनिया की चीज़ों से सरोकार रखने वाले इस दुनिया के ही होकर न रह जायें क्यूंके इस की सूरत बदलती जाती है। मैं यह चाहता हूं के तुम बे फ़िक्र रहो। बन ब्याहा आदमी ख़ुदावन्द की बातों की फ़िक्र में रहता है के किस तरह ख़ुदावन्द को ख़ुश करे। लेकिन शादीशुदा दुनिया के लिये फ़िक्रमन्द रहता है के किस तरह अपनी बीवी को ख़ुश करे। पस उस की तवज्जोह दोनों तरफ़ रहती है। बन ब्याही और कुंवारी औरत ख़ुदावन्द की बातों की फ़िक्र में रहती है ताके उस का जिस्म और रूह दोनों ख़ुदावन्द के लिये वक़्फ़ हों। लेकिन शादीशुदा औरत दुनिया की फ़िक्र में रहती है के किस तरह अपने शौहर को ख़ुश करे। में यह तुम्हारे फ़ायदा के लिये कहता हूं न के तुम्हारे लिये मुश्किल पैदा करने के लिये ताके तुम अच्छी ज़िन्दगी गुज़ारो और बिला ताम्मुल ख़ुदावन्द की ख़िदमत में मश्ग़ूल रहो। अगर कोई ये समझता है के मैं अपनी मंगनी शुदा कुंवारी का हक़ मार रहा हूं, कुंवारी लड़की की जवानी ढली जा रही है और ज़रूरी है के उसे शादी करनी चाहिये तो जैसा चाहे वैसा करे उसे इख़्तियार है के लड़की का ब्याह हो जाने दे क्यूंके ये कोई गुनाह नहीं। मगर वह बाप जो ऐसी ज़रूरत महसूस नहीं करता और उस ने अपने दिल में पक्का फ़ैसला कर लिया है के वह अपनी लड़की को कुंवारी ही रहने देगा तो वह अच्छा करता है। ग़रज़ जो अपनी कुंवारी लड़कियों को ब्याह देता है वह अच्छा करता है और जो ब्याह नहीं कर सकता वह भी अच्छा करता है। बीवी अपने शौहर के जीते जी उस की पाबन्द है लेकिन उस की मौत के बाद वह जिस से चाहे दूसरी शादी कर सकती है बशर्ते के वह आदमी ख़ुदावन्द में हो। मगर मेरी राय यह है के अगर वह बेवा ही रहे तो ज़्यादा ख़ुश रहेगी और मैं समझता हूं के यह बात ख़ुदा की रूह ने मेरे दिल में डाली है। उन क़ुर्बानियों के बारे में जो बुतों को पेश की जाती हैं: “मेरा कहना यह है के हम सब इल्म रखते हैं।” इल्म ग़ुरूर पैदा करता है लेकिन महब्बत तरक़्क़ी बख़्शती है। अगर कोई यह ख़याल करता है के वह कुछ जानता है तो जैसा समझना चाहिये वैसा अब तक नहीं जानता। लेकिन जो ख़ुदा से महब्बत रखता है, ख़ुदा उसे जानता है। अब रहा यह सवाल के बुतों को पेश की गई क़ुर्बानियों का गोश्त खाना चाहिये या नहीं: हम सब यह जानते हैं के “बुतों की हक़ीक़त दुनिया में कुछ भी नहीं ख़ुदा एक है और उस के सिवा कोई ख़ुदा नहीं।” अगरचे आसमान में और ज़मीन पर और बहुत से “ख़ुदा” और “ख़ुदावन्द” माने जाते हैं, लेकिन हमारे नज़दीक तो ख़ुदा एक ही है, जो आसमानी बाप है, और सब चीज़ों का ख़ालिक़ है और हम उसी के लिये जीते हैं; एक ही ख़ुदावन्द है, यानी हुज़ूर ईसा अलमसीह जिन के वसीले से सब चीज़ें पैदा हुईं और हम भी उन ही से। लेकिन यह इल्म सब को नहीं है। बाज़ लोग अब तक बुतों को की परसतिश के आदी हैं इसलिये जब वह क़ुर्बानी के गोश्त इस ख़्याल से खाते हैं के यह किसी ख़ुदा की नज़्र की क़ुर्बानी है, तो अपने ज़मीर की कमज़ोरी की वजह से, वह अपने आप को नापाक समझने लगते हैं। लेकिन खाना हमें ख़ुदा से नहीं मिलायेगा; अगर हम उसे न खायें, तो हमारा कोई नुक़्सान नहीं और अगर खा लें तो फ़ायदा भी नहीं। मगर ख़बरदार रहो, ऐसा न हो के तुम्हारी यह आज़ादी कमज़ोर ईमान वालों के लिये ठोकर का बाइस बन जाये। अगर कोई कमज़ोर ज़मीर वाला तुम जैसे साहिबे ईमान को बुतख़ाने में खाना खाते देखे, तो क्या उस के दिल में बुतों की नज़्र की क़ुर्बानी को खा लेने का हौसला पैदा न हो जायेगा? यूं तुम्हारा इल्म उस कमज़ोर भाई या बहन, की हलाकत का बाइस ठहरेगा, जिसे बचाने के लिये अलमसीह ने अपनी जान क़ुर्बान कर दी। इस तरह तुम अपने मसीही भाई और बहन के कमज़ोर ज़मीर को ठेस पहुंचा कर, न सिर्फ़ उन के गुनहगार होगे बल्के अलमसीह के भी गुनहगार ठहरोगे। इसलिये अगर मेरा खाना मेरे मसीही भाई और बहन के लिये ठोकर का बाइस हो, तो मैं गोश्त कभी नहीं खाऊंगा ताके अपने मसीही भाई और बहन के लिये ठोकर का बाइस न बनूं। क्या मैं आज़ाद नहीं? क्या मैं रसूल नहीं? क्या मैंने हुज़ूर ईसा को नहीं देखा जो हमारे ख़ुदावन्द हैं? क्या तुम ख़ुदावन्द के लिये मेरी ख़िदमत का फल नहीं हो? अगर मैं दूसरों की नज़र में रसूल नहीं तो कम अज़ कम! तुम्हारी नज़र में तो हूं क्यूंके तुम ख़ुद ख़ुदावन्द में मेरी रिसालत पर मुहर हो। जो मुझ से बाज़पुर्स करते हैं उन के लिये मेरा जवाब यह है। क्या हमें यह हक़ हासिल नहीं के हम भी खा पी सकें? क्या हमें यह इख़्तियार नहीं के किसी मसीही बहन को ब्याह कर उसे अपनी हमसफ़र बनाये रखें जैसा के दीगर रसूल और ख़ुदावन्द के भाई और कैफ़ा करते हैं? क्या सिर्फ़ मुझे और बरनबास को ही मेहनत-ओ-मशक़्क़त से बाज़ रहने का इख़्तियार नहीं है? कौन सा सिपाही अपनी गिरह से खाकर जंग करता है? कौन है जो अंगूर का बाग़ लगा कर अंगूर नहीं खाता? या कौन सा चरवाहा है जो अपने गल्ले का दूध नहीं पीता? क्या मैं यह बातें इन्सानी हैसियत से कहता हूं? क्या शरीअत भी यही नहीं कहती? क्यूंके हज़रत मूसा की शरीअत में लिख्खा है: “गाहते वक़्त बैल का मुंह न बांधना। ” क्या ख़ुदा को बैलों ही की पर्वा है? क्या वह ख़ासतौर पर यह हमारे लिये नहीं कहता? हां, यह हमारे लिये लिख्खा गया क्यूंके जोतने वाला इस उम्मीद पर जोतता है और गाहने वाला इस उम्मीद पर गाहता है के उन्हें फ़सल का कुछ हिस्सा ज़रूर मिलेगा। अगर हम ने तुम्हारे फ़ायदे के लिये रूहानी बीज बोया तो क्या यह कोई बड़ी बात है के हम तुम्हारी जिस्मानी चीज़ों की फ़सल काटें? जब औरों को यह हक़ हासिल है के तुम से कुछ हासिल करें, तो क्या हमारा हक़ उन से ज़्यादा न होगा? लेकिन हम ने इस हक़ से फ़ायदा न उठाया बल्के सब कुछ बर्दाश्त करते रहे ताके हमारी वजह से अलमसीह की ख़ुशख़बरी की तब्लीग़ में रुकावट पैदा न हो। क्या तुम नहीं जानते के जो बैतुलमुक़द्दस में ख़िदमत करते हैं वो वहीं से खाते हैं? और जो क़ुर्बानगाह पर क़ुर्बानियां चढ़ाने की ख़िदमत करते हैं वो उन क़ुर्बानियों का कुछ हिस्सा लेते हैं? इसी तरह ख़ुदावन्द ने भी मुक़र्रर किया है के जो इन्जील की मुनादी करते हैं वो इन्जील ही के वसीले से गुज़ारा करें। इस के बावुजूद मैंने इन में से किसी भी हक़ का कभी फ़ायदा नहीं उठाया और न ही इस ख़्याल से लिख रहा हूं के अब फ़ायदा उठाऊं, मैं मर जाना बेहतर समझता हूं बजाय इस के किसी का एहसान ले कर अपना फ़ख़्र खो दूं। अगर मैं इन्जील की मुनादी करता हूं, तो इसलिये नहीं के शेख़ी बघारूं, क्यूंके यह तो मेरा फ़र्ज़ है। बल्के मुझ पर अफ़सोस! अगर मैं इन्जील की मुनादी न करूं। अगर मैं अपनी मर्ज़ी से मुनादी करता हूं, तो अज्र पाने की उम्मीद भी रखता हूं; लेकिन अगर अपनी मर्ज़ी से नहीं, तो यूं समझ लो के ख़ुदा ने मुझे इन्जील सुनाने का इख़्तियार बख़्शा हुआ है। इस सूरत में मेरा अज्र क्या है? महज़ यह के इन्जील की मुनादी बिलकुल मुफ़्त कर के फ़ख़्र कर सकूं और उस हक़ का फ़ायदा न उठाऊं जो इन्जील ने मुझे दे रख्खा है। अगरचे मैं आज़ाद हूं और किसी का ग़ुलाम नहीं फिर भी मैंने अपने आप को सब का ग़ुलाम बना रख्खा है ताके ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को अलमसीह के पास ला सकूं। मैं यहूदियों में यहूदी बना ताके यहूदियों को अलमसीह के लिये जीत सकूं। अहल-ए-शरीअत के लिये शरीअत वाला बना ताके अहल-ए-शरीअत को जीत सकूं हालांके में ख़ुद शरीअत का पाबन्द नहीं। जो लोग शरीअत नहीं रखते, मैं उन के लिये बेशरअ बना ताके बेशरअ लोगों को जीत सकूं (मैं ख़ुदा की नज़र में बेशरअ नहीं था बल्के अलमसीह की शरीअत के ताबे था।) कमज़ोरों की ख़ातिर कमज़ोर बना ताके कमज़ोरों को जीत सकूं। मैं सब लोगों की ख़ातिर सब कुछ बना हुआ हूं ताके किसी न किसी तरह बाज़ को बचा सकूं। में यह सब कुछ इन्जील की ख़ातिर करता हूं ताके उस की बरकतों में शरीक हो सकूं। क्या तुम नहीं जानते के दौड़ के मैदान में मुक़ाबला के लिये सब ही दौड़ते हैं लेकिन इन्आम एक ही पाता है। तुम भी ऐसे दौड़ो के जीत सको। खेलों के मुक़ाबला में हिस्सा लेने वाला हर खिलाड़ी हर तरह की एहतियात बरतता है। वह लोग एक फ़ानी ताज पाने के लिये ऐसा करते हैं। लेकिन हम उस ताज के लिये ऐसा करते हैं जो ग़ैरफ़ानी है। मैं भी जीतने का मक़सद सामने रखकर दौड़ता हूं और मुक्के बाज़ की तरह लड़ता हूं, हवा को मारने वाले की तरह नहीं। बल्के मैं अपने बदन को मारता, पीटता और उसे क़ाबू में रखता हूं ताके ऐसा न हो के दूसरों को तब्लीग़ करने के बाद में ख़ुद इन्आम से महरूम रह जाऊं। ऐ भाईयो और बहनों! मैं नहीं चाहता के तुम हमारे आबा-ओ-अज्दाद की हालत को भूल जाओ के वह किस तरह बादल के नीचे महफ़ूज़ रहे और बहरे-क़ुलज़ुम पार कर के बच निकले। और उन सब ने बादल और समुन्दर बतौर हज़रत मूसा के पैरोकार पाक-ग़ुस्ल लिया। सब ने एक ही रूहानी ख़ुराक़ खाई। सब ने एक ही रूहानी पानी पिया क्यूंके वह उस रूहानी चट्टान से पानी पीते थे जो उन के साथ-साथ चलती थी और वह चट्टान हुज़ूर अलमसीह थे। इस के बावुजूद ख़ुदा उन की एक कसीर तादाद से राज़ी न हुआ; चुनांचे उन की लाशें ब्याबान में बिखरी पड़ी रहें। यह बातें हमारे लिये इबरत का बाइस हैं ताके हम बुरी चीज़ों की ख़ाहिश न करें जैसे उन्होंने की। और तुम बुत-परस्त न बनो जिस तरह उन में से बाज़ लोग बन गये जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “लोग खाने-पीने के लिये बैठे और फिर उठ कर रंगरेलियां मनाने लगे।” हम जिन्सी बदफ़ेली न करें जैसे उन लोगों में से बाज़ ने की और एक ही दिन में तेईस हज़ार मारे गये। हम ख़ुदावन्द अलमसीह की आज़माइश न करें जैसे उन में से बाज़ ने की और सांपों ने उन्हें हलाक कर डाला। बुड़बुड़ाना छोड़ दो जैसे उन में से बाज़ बुड़बुड़ाए और मौत के फ़रिश्ते के हाथों मारे गये। यह बातें उन्हें इसलिये पेश आईं के वह इबरत हासिल करें और हम आख़िरी ज़माने वालों की नसीहत के लिये लिख्खी गईं। पस जो कोई अपने आप को ईमान में क़ाइम और मज़बूत समझता है, ख़बरदार रहे के कहीं गिर न पड़े। तुम किसी ऐसी आज़माइश में नहीं पड़े जो इन्सान की बर्दाश्त से बाहर हो। ख़ुदा पर भरोसा रखो, वह तुम्हें तुम्हारी क़ुव्वत बर्दाश्त से ज़्यादा सख़्त आज़माइश में पड़ने ही न देगा। बल्के जब आज़माइश आयेगी तो उस से बच निकलने की राह भी पैदा कर देगा ताके तुम बर्दाश्त कर सको। इसलिये मेरे अज़ीज़ों! बुतपरस्ती से दूर रहो। मैं तुम्हें अक़्लमन्द समझ कर यह बातें कहता हूं। तुम ख़ुद मेरी बातों को परख सकते हो। जब हम इशा-ए-ख़ुदावन्दी का प्याला ले कर उसे शुक्र गुज़ारी के साथ पीते हैं तो क्या हम अलमसीह के ख़ून में शरीक नहीं होते? और जब हम रोटी तोड़ कर खाते हैं तो क्या अलमसीह के बदन में शरीक नहीं होते? चूंके रोटी एक ही है, इसी तरह हम सब जो बहुत से हैं मिल कर एक बदन हैं क्यूंके हम उसी एक रोटी में शरीक होते हैं। बनी इस्राईल पर निगाह करो। क्या क़ुर्बानी का गोश्त खाने वाले क़ुर्बानगाह के शरीक नहीं? क्या मेरे कहने का मतलब यह है के बुतों की नज़्र की क़ुर्बानी और बुत कोई अहम्मीयत रखते हैं। हरगिज़ नहीं, बल्के जो क़ुर्बानियां बुत-परस्त करते हैं वह शयातीन के लिये होती हैं न के ख़ुदा के लिये और मैं नहीं चाहता के तुम शयातीन से वास्ता रखो। तुम ख़ुदावन्द के प्याला से और साथ ही शैतान के प्याला से पियो ऐसा नामुम्किन है। तुम ख़ुदावन्द और शैतान दोनों ही के दस्तरख़्वान में शरीक नहीं हो सकते। क्या हम ऐसा करने से ख़ुदावन्द के ग़ज़ब को नहीं भड़काते? क्या हम उस से ज़्यादा ज़ोरआवर हैं? “हर चीज़ के जायज़ होने का यह मतलब नहीं, हर चीज़ मुफ़ीद है। हर चीज़ जायज़ हो तो भी वह तरक़्क़ी का बाइस नहीं होती।” कोई शख़्स महज़ अपनी बहतरी ही का ख़्याल न करे बल्के दूसरों की बहतरी का भी ख़्याल रखे। जो गोश्त बाज़ार में बिकता है ज़मीर के जायज़ या नाजायज़ होने का सवाल उठाये बग़ैर उसे खा लिया करो। क्यूंके यह दुनिया और उस की सारी चीज़ें ख़ुदावन्द ही की मिल्कियत हैं। अगर कोई ग़ैरमसीही तुम्हें खाने की दावत दे और तुम जान चाहो तो जो कुछ तुम्हारे सामने रख्खा जाये उसे ज़मीर के बिला हील-ओ-हुज्जत के खा लो। लेकिन अगर कोई तुम्हें बताए के यह क़ुर्बानी का गोश्त है तो उसे मत खाओ ताके तुम्हारा ज़मीर तुम्हें मलामत न करे और जताने वाला भी किसी ग़लतफ़हमी का शिकार न हो। मेरा मतलब तुम्हारे ज़मीर से नहीं दूसरे शख़्स के ज़मीर से है, बल्के उस दूसरे का, भला मेरी आज़ादी दूसरे शख़्स के ज़मीर से क्यूं आज़माई जाये? अगर मैं शुक्र कर के उस खाने में शरीक होता हूं तो किसी को हक़ नहीं पहुंचता के मुझे उस खाने के लिये बदनाम करे जिस के लिये मैंने ख़ुदा का शुक्र अदा किया था। पस तुम खाओ या पियो या ख़्वाह कुछ करो, सब ख़ुदा के जलाल के लिये करो। तुम दूसरों के लिये ठोकर का बाइस न बनो, ख़्वाह वह यहूदी या यूनानी या वह ख़ुदा की जमाअत के लोग हों। मैं ख़ुद भी यही करता हूं। मेरी कोशिश यही रहती है के अपने हर काम से दूसरों को ख़ुशी पहुंचाऊं। मैं अपना नहीं बल्के दूसरों का फ़ायदा ढूंडता हूं ताके लोग नजात पायें। तुम मेरे नमूने पर चलो जैसे में अलमसीह के नमूने पर चलता हूं। मैं तुम्हारी तारीफ़ करता हूं के तुम ने मेरी सारी बातें याद रख्खी हैं और मेरी उस तालीम पर जो मैंने तुम्हें दी, अमल करते हो। मैं चाहता हूं के तुम यह भी याद रखो के हर मर्द का सर अलमसीह है और औरत का सर मर्द है और अलमसीह का सर ख़ुदा है। इसलिये अगर कोई आदमी इबादत में दुआ या नुबुव्वत करते वक़्त अपना सर ढांकता है तो वह अपने सर की बेहुरमती करता है। और इसी तरह अगर कोई औरत इबादत में दुआ या नुबुव्वत करते वक़्त अपना सर नहीं ढांकती तो वह अपने सर की बेहुरमती करती है गोया उस ने सर मुंडवा दिया है। अगर कोई औरत ओढ़नी इस्तिमाल न करना चाहे तो वह अपना सर भी मुंडवा दे लेकिन अगर वह सर मुंडवाने को बाइस शरम समझती है तो वह ओढ़नी से अपना सर ढांके। अलबत्ता मर्द को अपना सर नहीं ढांकना चाहिये क्यूंके वह ख़ुदा की सूरत पर है और उस से ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर होता है। मगर औरत से मर्द का जलाल ज़ाहिर होता है। इसलिये के मर्द औरत से नहीं बल्के औरत मर्द से पैदा की गई। और मर्द औरत की ख़ातिर नहीं बल्के औरत मर्द की ख़ातिर पैदा की गई। इसलिये और फ़रिश्तों के सबब से औरत को चाहिये के अपना सर ढांके ताके ज़ाहिर हो के वह मर्द के ताबे है। तो भी ख़ुदावन्द की नज़र में औरत बग़ैर आदमी के नहीं और आदमी बग़ैर औरत के नहीं। क्यूंके जैसे औरत मर्द से पैदा की गई है वैसे ही मर्द भी औरत के वसीले से पैदा होता है। मगर हर चीज़ का ख़ालिक़ ख़ुदा है। तुम ख़ुद ही फ़ैसला करो, क्या किसी औरत का सर ढांके बग़ैर ख़ुदा से दुआ करना मुनासिब है? क्या फ़ितरत ख़ुद भी यह नहीं सिखाती के अगर किसी मर्द के सर के बाल लम्बे हूं तू यह उस के लिये शरम की बात है? लेकिन अगर औरत लम्बे बाल रखे तो यह उस के लिये ज़ीनत का बाइस हैं क्यूंके लम्बे बाल उसे गोया पर्दे की ग़रज़ से दिये गये हैं। अगर कोई इस बारे में हुज्जत करना चाहे तो उसे मालूम हो के न हमारा ऐसा दस्तूर है न ख़ुदा की जमाअतों का। अब जो हिदायत मैं तुम्हें दे रहा हूं उस में तुम्हारे लिये तारीफ़ की कोई बात नहीं क्यूंके तुम्हारे जमा होने से फ़ाइदा नहीं बल्के नुक़्सान होता है। पहली बात तो यह है के जब तुम्हारी जमाअत जमा होती है तो मैंने सुना है के तुम्हारे दरमियान तफ़्रिक़े उठ खड़े होते हैं। मैं इस बात को किसी हद तक क़ाबिले-यक़ीन समझता हूं। तुम लोगों में बिदअतों का पाया जान लाज़िमी है ताके ज़ाहिर हो जाये के तुम्हारी जमाअत में कौन से लोग राहे-रास्त पर हैं। क्यूंके जब तुम जमा होते हो तो तुम्हारा खाना-पीना इशा-ए-ख़ुदावन्दी नहीं हो सकता। इसलिये के हर एक दूसरे से पहले ही अपना खाना खा लेता है। कोई तो भूका रह जाता है और किसी को नशा भी हो जाता है। क्या खाने और पीने के लिये तुम्हारे घर मौजूद नहीं? या फिर ख़ुदा की जमाअत की तुम्हारे नज़दीक कोई अहम्मीयत नहीं और जिन के पास खाने को कुछ नहीं होता उन्हें शर्मिन्दा करते हो? मैं कहूं भी तो क्या कहूं? क्या तुम्हारी तारीफ़ करूं? नहीं, मैं इस मामले में तो तुम्हारी तारीफ़ नहीं कर सकता! यह बात मुझ तक ख़ुदावन्द के ज़रीये पहुंची और मैंने तुम तक पहुंचा दी के ख़ुदावन्द ईसा ने जिस रात वह पकड़वाये गये, रोटी ली, और ख़ुदा का शुक्र कर के तोड़ी और कहा, ये मेरा बदन है जो तुम्हारे लिये तोड़ा गया है, मेरी यादगारी के लिये यही किया करो। इसी तरह खाने के बाद हुज़ूर ईसा ने अंगूरी शीरे का प्याला लिया और ये कह कर दिया, यह प्याला मेरे ख़ून में नया अह्द है। जब भी इसे पियो मेरी यादगारी के लिये यही किया करो। क्यूंके जब कभी तुम यह रोटी खाते और इस प्याला में से पीते हो तो ख़ुदावन्द की मौत का इज़हार करते हो जब तक के ख़ुदावन्द की ज़मीन पर दूसरी आमद न हो जाये। इसलिये जो कोई गैर मुनासिब तौर पर ख़ुदावन्द की रोटी खाये या इस पियाले में से पिये वह ख़ुदावन्द के बदन और ख़ून का गुनहगार ठहरेगा। चुनांचे इस रोटी में से खाने और इस पियाले में से पीने से पहले हर शख़्स को चाहिये के वह अपने आप को जांच ले। क्यूंके जो इस रोटी में से खाते वक़्त और इस पियाले में से पीते वक़्त अलमसीह के बदन को नहीं पहचानता वह इस खाने और पीने के बावुजूद ख़ुदा की अदालत के दिन सज़ा पायेगा। यही वजह है के तुम में से बहुत से लोग कमज़ोर और बीमार हैं और कई एक मर भी गये हैं। अगर हम अपने आप को जांचते तो ख़ुदा की अदालत के दिन सज़ा न पाते। लेकिन ख़ुदावन्द हमें अदालत के दिन सज़ा दे कर हमारी तरबियत करते हैं ताके हम दुनिया के साथ मुजरिम न ठहराये जायें। इसलिये मेरे भाईयो और बहनों, जब तुम इशा-ए-ख़ुदावन्दी के लिये जमा होते हो तो एक दूसरे का इन्तिज़ार करो। अगर कोई भूका हो तो अपने घर में खाले ताके तुम्हारा जमा होना ख़ुदा की अदालत के दिन सज़ा का बाइस न हो। मैं बाक़ी बातों का फ़ैसला वहां आने पर करूंगा। ऐ भाईयो और बहनों! मैं नहीं चाहता के तुम रूहानी नेमतों के बारे में बेख़बर रहो। तुम्हें याद होगा के जब तुम बेदीन थे तो दूसरों की बातों में आकर गूंगे बुतों की पैरवी करने लगे थे। इसलिये मैं तुम्हें बताना चाहता हूं के जो शख़्स ख़ुदा की पाक रूह की हिदायत से कलाम करता है वह कभी भी हुज़ूर ईसा को मलऊन नहीं कह सकता और न ही पाक रूह की हिदायत के बग़ैर वह कह सकता है के हुज़ूर ईसा ख़ुदावन्द हैं। नेमतें तो मुख़्तलिफ़ हैं, लेकिन पाक रूह एक ही है। ख़िदमतें भी तरह-तरह की हैं, लेकिन ख़ुदावन्द एक ही है। उन के असरात भी मुख़्तलिफ़ होते हैं लेकिन ख़ुदा एक ही है जो सब में हर तरह का असर पैदा करता है। लेकिन पाक रूह का ज़हूर हर शख़्स को फ़ायदा पहचाने के लिये होता है। किसी को पाक रूह की तरफ़ से हिक्मत का कलाम अता किया जाता है और किसी को उसी रूह के वसीले से इल्मीयत का कलाम, किसी को उसी एक रूह से ईमान और किसी को शिफ़ा देने की तौफ़ीक़ मिलती है, किसी को मोजिज़े करने की क़ुदरत दी जाती है, और किसी को नुबुव्वत, किसी को रूहों में इम्तियाज़, किसी को तरह-तरह की ज़बानें बोलने की क़ाबिलीयत, और किसी को ज़बानों का तरजुमा करने की महारत। यह सारी नेमतें वोही एक रूह अता करता है और जैसा चाहता है हर एक को बांटता है। बदन एक है मगर उस के आज़ा बहुत से हैं और जब यह बहुत से आज़ा मिल जाते हैं तो एक तन हो जाते हैं। इसी तरह अलमसीह भी हैं। क्यूंके हम ख़्वाह यहूदी हूं या ग़ैरयहूदी, ख़्वाह ग़ुलाम हूं या आज़ाद, सब ने एक ही पाक रूह के वसीले से एक बदन होने के लिये पाक-ग़ुस्ल पाया और हम सब को एक ही रूह पिलाया गया। बदन एक उज़ू पर नहीं बल्के बहुत से आज़ा पर मुश्तमिल है। अगर पांव कहे, “चूंके मैं हाथ नहीं इसलिये बदन का हिस्सा नहीं,” तो क्या वह इस सबब से बदन से जुदा तो नहीं? और अगर कान कहे, “चूंके मैं आंख नहीं, इसलिये बदन का हिस्सा नहीं,” तो क्या वह इस सबब से बदन से जुदा तो नहीं रहता? अगर सारा बदन आंख ही होता तो वह कैसे सुनता? अगर सारा बदन कान ही होता तो वह कैसे सूंघता? मगर हक़ीक़त यह है के ख़ुदा ने हर उज़ू को बदन में अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ रख्खा है। अगर वह सब एक ही उज़ू होते तो बदन कहां होता? मगर अब आज़ा तो कई हैं लेकिन बदन एक ही है। आंख हाथ से नहीं कह सकती, “मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं,” और न सर पांव से कह सकता है, “मैं तुम्हारा मोहताज नहीं।” बदन के वह आज़ा जो गैर अहम और बड़े कमज़ोर दिखाई देते हैं, दरअस्ल वह बहुत ज़रूरी हैं। और बदन के वह आज़ा जिन्हें हम दूसरे आज़ा से हक़ीर जानते हैं, उन ही को ज़्यादा इज़्ज़त देते हैं और इस एहतियात से उन की निगहदाशत करते हैं। जिसे हम अपने दूसरे ज़ेबा आज़ा के लिये ज़रूरी नहीं समझते। मगर ख़ुदा ने बदन को ऐसे तरीक़े से बनाया है के उस के जिन आज़ा को कम अहम समझा जाता है वोही ज़्यादा इज़्ज़त के लाइक़ हैं, लेकिन बदन में तफ़्रिक़ा न हो बल्के उस के सब आज़ा एक दूसरे की बराबर फ़िक्र रखें। अगर बदन का एक उज़ू दुख पाता है तो सब आज़ा उस के साथ दुख पाते हैं और अगर एक उज़ू इज़्ज़त पाता है तो सब आज़ा उस की ख़ुशी में शरीक होते हैं। पस तुम मिल कर अलमसीह का बदन हो और फ़र्दन-फ़र्दन उस के आज़ा हो। और ख़ुदा ने जमाअत में बाज़ अश्ख़ास को अलग-अलग रुतबा दिया है। पहले रसूलों हैं, दूसरे नबी, तीसरे उस्ताद, फिर मोजिज़े करने वाले, उस के बाद शिफ़ा देने वाले, फिर मददगार, फिर मुन्तज़िम और फिर तरह-तरह की ज़बानें बोलने वाले। क्या सब रसूल हैं? क्या सब नबी हैं? क्या सब उस्ताद हैं? क्या सब मोजिज़े करते हैं? क्या सब को शिफ़ा देने की क़ुदरत मिली है? क्या सब तरह-तरह की ज़बानें बोलते हैं? क्या सब तरजुमा करते हैं? तुम बड़ी से बड़ी नेमतें हासिल करने की आरज़ू में रहो। लेकिन अब मैं तुम्हें सब से उम्दा तरीक़ा बताता हूं। अगर मैं इन्सानों और फ़रिश्तों की ज़बानें बोलूं लेकिन महब्बत से ख़ाली रहूं तो मैं ठनठनाते हुए पीतल या झनझनाती हुई झांझ की मानिन्द हूं। अगर मुझे नुबुव्वत करने की नेमत मिल जाये और मैं हर राज़ और हर इल्म से वाक़िफ़ हो जाऊं और मेरा ईमान इतना कामिल हो के पहाड़ों को सरका दूं, लेकिन महब्बत से ख़ाली रहूं, तो में कुछ भी नहीं। और अगर अपना सारा माल गरीबों में बांट दूं और अपना बदन क़ुर्बानी के तौर पर जलाये जाने के लिये दे दूं और महब्बत से ख़ाली रहूं तो मुझे कोई फ़ायदा नहीं। महब्बत सब्र और मेहरबान होती है। हसद नहीं करती, शेख़ी नहीं मारती, घमंड नहीं करती। बदतमीज़ी नहीं करती, ख़ुद ग़रज़ नहीं होती, तैश में नहीं आती, बदगुमानी नहीं करती। महब्बत नारास्ती से ख़ुश नहीं होती है बल्के रास्ती से ख़ुश होती है। सब का पर्दा रखती है, हमेशा भरोसा करती है, हमेशा उम्मीद रखती है, हमेशा बर्दाश्त से काम लेती है। महब्बत लाज़वाल है। नुबुव्वतें मौक़ूफ़ हो जायेंगी; ज़बानें जाती रहेंगी; इल्म मिट जायेगा। क्यूंके हमारा इल्म नाक़िस है और हमारी नुबुव्वत नातमाम, लेकिन जब कामिल आयेगा तो नाक़िस जाता रहेगा। जब मैं बच्चा था तो बच्चे की तरह बोलता था, बच्चे की सी सोच रखता था। लेकिन जब जवान हुआ तो बचपन की बातें छोड़ दीं। इस वक़्त तो हमें आईने में धुंदला सा दिखाई देता है लेकिन उस वक़्त रूबरू देखेंगे। इस वक़्त मेरा इल्म नाक़िस है मगर उस वक़्त मैं पूरे तौर पर पहचान लूंगा, जैसे मैं पहचाना गया हूं। ग़रज़ ईमान, उम्मीद और महब्बत यह तीनों दाइमी हैं लेकिन महब्बत इन में अफ़ज़ल है। महब्बत के तालिब रहो और रूहानी नेमतों के हासिल करने का भी शौक़ रखो, ख़ासतौर पर नुबुव्वत करने की नेमत का। इस की वजह यह है के जो किसी अजनबी ज़बान में कलाम करता है वह इन्सान से नहीं बल्के ख़ुदा से हम कलाम होता है क्यूंके उस की बात कोई नहीं समझता; वह पाक रूह की क़ुदरत से राज़ की बातें करता है। लेकिन जो नुबुव्वत करता है वह लोगों से उन की तरक़्क़ी, नसीहत और तसल्ली की बातें करता है। जो किसी अजनबी ज़बान में कलाम करता है वह अपने-अपने ही फ़ायदे के लिये ऐसा करता है। मगर जो नुबुव्वत करता है वह जमाअत की भलाई के लिये ऐसा करता है। अगरचे मेरी ये ख़ाहिश है के तुम सब के सब अजनबी ज़बानों में कलाम करो लेकिन इस से ज़्यादा बेहतर ये है के तुम नुबुव्वत करो। क्यूंके जो अजनबी ज़बानें बोलता है, अगर वह जमाअत की तरक़्क़ी के ख़्याल से उन का तरजुमा न करे तो नुबुव्वत करने वाला उस से बड़ा है। पस, ऐ भाईयो और बहनों! अगर मैं तुम्हारे पास आकर अजनबी ज़बानों में कलाम करूं लेकिन तुम से किसी मुकाशफ़े या इल्म या नुबुव्वत या तालीम की बातें न कहूं तो तुम्हें मुझ से क्या फ़ायदा होगा? अगर बांसुरी या बरबत ऐसे बेजान साज़ों को बजाते वक़्त उन के सुर साफ़-साफ़ न निकलें तो जो राग बजाया जा रहा है उसे कौन पहचान सकेगा? अगर तुरही की आवाज़ साफ़-साफ़ सुनाई न दे तो कौन जंग के लिये तय्यार होगा? वैसे ही अगर तुम ज़बान से साफ़-साफ़ बात न कहोगे तो कौन तुम्हारी समझेगा? सुनने वाले सोचेंगे के तुम हवा से बातें कर रहे हो। दुनिया में बेशुमार ज़बानें पाई जाती हैं और उन में से कोई भी बेमानी नहीं। लेकिन अगर मैं किसी ज़बान को समझ न सकूं तो मैं उस ज़बान के बोलने वाले की नज़र में अजनबी ठहरूंगा और वह बोलने वाला भी मेरी नज़र में अजनबी ठहरेगा। इसी तरह जब तुम रूहानी नेमतों के पाने की आरज़ू करो तो कोशिश करो के तुम्हारी रूहानी नेमतों के इज़ाफ़ा से जमाअत की तरक़्क़ी हो। चुनांचे वह जो किसी अजनबी ज़बान में कलाम करता है दुआ करे के वह उस का तरजुमा भी कर सके। क्यूंके अगर मैं किसी अजनबी ज़बान में दुआ करूं तो मेरी रूह तो दुआ करती है मगर मेरी अक़्ल बेकार रहती है। लिहाज़ा मुझे क्या करना चाहिये? मैं अपनी रूह से दुआ करूंगा, लेकिन मैं अपनी अक़्ल से भी दुआ करूंगा, मैं अपनी रूह से हम्द के गीत गाऊंगा, लेकिन मैं अपनी अक़्ल से भी गाऊंगा। अगर तुम सिर्फ़ रूह ही से ख़ुदा की तारीफ़ करो, तो नावाक़िफ़ शख़्स तेरी शुक्र गुज़ारी पर कैसे “आमीन” कहेगा? क्यूंके वह नहीं जानता के तुम क्या कह रहे हो। तुम तो बेशक ख़ुदा का शुक्र अदा करते हो जो अच्छी बात है लेकिन इस से दूसरे की तरक़्क़ी नहीं होती। मैं ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं के मैं तुम में सब से ज़्यादा ग़ैरज़बानें बोलता हूं। लेकिन जमाअत में किसी गैर ज़बान में दस हज़ार बातें कहने से मुझे यह ज़्यादा पसन्द है के औरों की तालीम के लिये सिर्फ़ पांच बातें अक़्ल से कहूं। ऐ भाईयो और बहनों! तुम अक़्ल के लिहाज़ से बच्चे न बने रहो। हां, बदी के लिहाज़ से तो मासूम बच्चे बना रहो लेकिन अक़्ल के लिहाज़ से, अपने आप को बालिग़ साबित करो। तौरेत में लिख्खा है ख़ुदावन्द फ़रमाता है: “मैं इस उम्मत से बेगाना ज़बानों में और बेगाना होंटों से बातें करूंगा, फिर भी उम्मत के लोग मेरी न सुनेंगे।” पस अजनबी ज़बानें मसीही मोमिनीन के लिये नहीं बल्के बेएतक़ादों के लिये निशान हैं। और नुबुव्वत बेएतक़ादों के लिये नहीं बल्के मसीही मोमिनीन के लिये निशान है। अगर सारी जमाअत एक जगह जमा हो और सब के सब अजनबी ज़बानें बोलने लगें और कुछ नावाक़िफ़ या बेएतक़ाद लोग अन्दर आ जायें तो क्या वह तुम्हें पागल नहीं समझेंगे? लेकिन अगर सब नुबुव्वत करें और कोई ग़ैरमसीही या नावाक़िफ़ शख़्स अन्दर आ जाये तो वह तुम्हारी बातें सुन कर क़ाइल हो जायेगा और सब लोग उसे अच्छी तरह परख भी लेंगे। उस के दिल के भेद ज़ाहिर हो जायेंगे और वह भी मुंह के बल गिरकर ख़ुदा को सज्दा करेगा और इक़रार करेगा के वाक़ई ख़ुदा तुम्हारे दरमियान मौजूद है। ऐ भाईयो और बहनो! तुम्हें क्या करना चाहिये? जब तुम इबादत की ग़रज़ से जमा होते हो तो किसी का दिल चाहता है के गीत गाए, कोई तालीम देना चाहता है, कोई मुकाशफ़े की बात कहना चाहता है, कोई किसी बेगाना ज़बान में कलाम करना चाहता है, कोई उस का तरजुमा करना चाहता है, लाज़िम है के जो कुछ किया जाये जमाअत की तरक़्क़ी के लिये हो। अगर कुछ लोग बेगाना ज़बान में कलाम करना चाहें तो दो या ज़्यादा से ज़्यादा तीन शख़्स एक-एक कर के बोलें और कोई उन का तरजुमा करे। अगर कोई तरजुमा करने वाला मौजूद न हो तो बेगाना ज़बान बोलने वाला जमाअत में ख़ामोश रहे और दिल ही दिल में ख़ुदा से बातें कर ले। नबियों में से दो या तीन कलाम करें और बाक़ी उन के कलाम को परखें। लेकिन अगर एक के कलाम करते वक़्त किसी दूसरे पर जो नज़दीक बैठा हो वही उतरने लगे तो पहला शख़्स ख़ामोश हो जाये। इस तरह तुम सब एक-एक कर के नुबुव्वत कर सकोगे और सब लोग सीखेंगे और उन का हौसला बढ़ेगा। और नबियों की रूहें नबियों के ताबे होती हैं। इसलिये के ख़ुदा बदनज़मी का नहीं बल्के अमन का बानी है। और जैसा मुक़द्दसीन की सब जमाअतों में दस्तूर है। औरतें जमाअत के मज्मे में ख़ामोश रहें। उन्हें बोलने की इजाज़त नहीं बल्के ताबे रहें जैसा के तौरेत में भी मरक़ूम है। हां अगर कोई बात सीखने की तमन्ना हो तो घर में अपने शौहरों से पूछें। इसलिये के जमाअत के मजमे में बोलना औरत के वास्ते शर्मनक बात है। क्या तुम लोगों का यह गुमान है के ख़ुदा का पैग़ाम तुम लोगों से शुरू हुआ है या सिर्फ़ तुम ही तक पहुंचा है? अगर कोई दावा करता है के वह नबी है या वह किसी और रूहानी नेमत से नवाज़ा गया है तो उसे मालूम होना चाहिये के जो कुछ मैं तुम्हें लिख रहा हूं वह भी ख़ुदावन्द ही का हुक्म है। अगर वह अन्जान बनता है, तो उसे अन्जान बना रहने दो। पस, ऐ भाईयो और बहनों! नुबुव्वत करने की आरज़ू रखो और बेगाना ज़बानें बोलने से किसी को मना मत करो। लेकिन यह सब कुछ शाइस्तगी और क़रीने से अमल में आये। अब, ऐ भाईयो और बहनों! मैं तुम्हें वह ख़ुशख़बरी याद दिलाना चाहता हूं जो में पहले तुम्हें दे चुका हूं, जिसे तुम ने क़बूल कर लिया था और जिस पर तुम मज़बूती से क़ाइम भी हो। उसी के वसीले तुम नजात भी पाते हो। बशर्ते के तुम उस ख़ुशख़बरी को याद रखो जो मैंने तुम्हें दी थी। वर्ना, तुम्हारा ईमान लाना बेफ़ाइदा है। क्यूंके एक बड़ी अहम बात जो मुझ तक पहुंची और मैंने तुम्हें सुनाई यह है: किताब-ए-मुक़द्दस के मुताबिक़ अलमसीह हमारे गुनाहों के लिये क़ुर्बान हुए, दफ़न हुआ और किताब-ए-मुक़द्दस के मुताबिक़ तीसरे दिन मुर्दों में से ज़िन्दा हो गये। और कैफ़ा को और फिर बारह रसूलों को दिखाई दिये। उस के बाद पांच सौ से ज़्यादा मसीही भाईयों और बहनों को एक साथ दिखाई दिये जिन में से अक्सर अब तक ज़िन्दा हैं, बाज़ अलबत्ता मर चुके हैं। फिर याक़ूब को दिखाई दिया। इस के बाद सब रसूलों को, और सब से आख़िर में मुझे दिखाई दिये जो गोया अधूरे दिनों की पैदाइश हूं। इसलिये के मैं रसूलों में सब से छोटा हूं बल्के रसूल कहलाने के लाइक़ भी नहीं, क्यूंके मैंने ख़ुदा की जमाअत को सताया था। लेकिन अब मैं जो कुछ हूं, ख़ुदा के फ़ज़ल से हूं और उस का फ़ज़ल जो मुझ पर हुआ बेफ़ाइदा नहीं हुआ, क्यूंके मैंने उन तमाम रसूलों से ज़्यादा मेहनत की और यह मेहनत मैंने अपनी कोशिश से नहीं की बल्के ख़ुदा के फ़ज़ल ने मुझ से वैसे कराई। लिहाज़ा ख़्वाह मैं हूं या ख़्वाह वह, हमारी ख़ुशख़बरी एक ही है और उसी पर तुम ईमान लाये। जब हम अलमसीह के मुर्दों में से जी उठने की मुनादी करते हैं तो तुम में से बाज़ किस तरह कह सकते हैं के मुर्दे ज़िन्दा नहीं होते? अगर मुर्दों की क़ियामत नहीं तो अलमसीह भी ज़िन्दा नहीं हुए। और अगर अलमसीह ज़िन्दा नहीं हुए, तो हमारी मुनादी का कोई फ़ायदा नहीं और तुम्हारा ईमान लाना भी बेफ़ाइदा ठहरा। अगर मुर्दों का जी उठना मुम्किन नहीं तो गोया ख़ुदा ने अलमसीह को भी ज़िन्दा नहीं किया, तो हमारी यह गवाही के उस ने अलमसीह को ज़िन्दा किया, झूटी ठहरी। अगर मुर्दे ज़िन्दा नहीं होते, तो अलमसीह भी नहीं जी उठे। और अगर अलमसीह नहीं जी उठे, तो तुम्हारा ईमान बेफ़ाइदा है; और तुम अभी तक अपने गुनाहों में गिरिफ़्तार हो। बल्के जो लोग अलमसीह में होकर सो गये वह भी हलाक हुए। अगर अलमसीह पर ईमान लाने से हमारी उम्मीद सिर्फ़ इसी ज़िन्दगी तक महदूद है, तो हम तमाम इन्सानों से ज़्यादा बदनसीब हैं। लेकिन हक़ीक़त तू यह है के अलमसीह मुर्दों में से जी उठे, लिहाज़ा जो सो गये हैं उन में पहला फल हुए। क्यूंके जब इन्सान के ज़रीये मौत आई, तो इन्सान ही के ज़रीये से मुर्दों की क़ियामत भी आई। और जैसे आदम में सब इन्सान मरते हैं, वैसे ही अलमसीह में सब ज़िन्दा किये जायेंगे। लेकिन हर एक अपनी-अपनी बारी के मुताबिक़: सब से पहले अलमसीह; फिर अलमसीह के लौटने पर, उन के लोग। उस के बाद आख़िरत होगी, उस वक़्त अलमसीह सारी हुकूमत, कुल इख़्तियार और क़ुदरत नेस्त कर के सल्तनत ख़ुदा बाप के हवाले कर देंगे। क्यूंके अपने सारे दुश्मनों को अपने क़दमों के नीचे न ले आने तक अलमसीह का सल्तनत करना लाज़िम है। आख़िरी दुश्मन जो नेस्त किया जायेगा वह मौत है। लिहाज़ा, जब किताब-ए-मुक़द्दस का फ़रमान है: “ख़ुदा ने सब कुछ उन के क़दमों के नीचे कर दिया है। ” और “सब कुछ उन के ताबे कर दिया गया” तो ज़ाहिर है के ख़ुदा इस में शामिल न रहा, जिस ने हर चीज़ को अलमसीह के ताबे कर दिया है। और जब सब कुछ ख़ुदा के ताबे हो जायेगा तो बेटा ख़ुद भी उस के ताबे हो जायेगा जिस ने सब चीज़ें बेटे के ताबे कर दें ताके ख़ुदा ही सब में सब कुछ है। अगर मुर्दों की क़ियामत है ही नहीं तो वह लोग क्या करेंगे जो मुर्दों की ख़ातिर पाक-ग़ुस्ल लेते हैं? अगर मुर्दे ज़िन्दा ही नहीं होते तो फिर उन के लिये पाक-ग़ुस्ल क्यूं लिया जाता है? और हम भी क्यूं हर वक़्त ख़तरा में पड़े रहते हैं? ऐ भाईयों, मैं ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा में तुम पर इसी फ़ख़्र की क़सम खाकर कहता हूं के मैं तो हर रोज़ मौत के मुंह में जाता हूं। अगर मैं महज़ इन्सानी ग़रज़ से इफ़िसुस शहर में दरिन्दों से लड़ा तो मुझे क्या फ़ायदा हुआ? अगर मुर्दे ज़िन्दा नहीं किये जायेंगे, जैसा के मक़ूला है: “तो आओ खायें, और पीयें, क्यूंके कल तो मरना ही है।” धोके में न रहो, “बुरे लोगों की सुहबत में रहने से अच्छी आदतें बिगड़ जाती हैं।” रास्तबाज़ होने के लिये होश में आओ और गुनाह न करो क्यूंके कितने शरम की बात है के तुम में बाज़ अभी तक ख़ुदा से नाआश्ना हैं। मुम्किन है के कोई यह सवाल करे: “मुर्दों का ज़िन्दा होना किस तरह मुम्किन है? अगर मुम्किन है तो उन का जिस्म कैसा होगा?” उसे बताओ के ऐ नादान! उस बीज को देखो जो तुम बोते हो। जब तक वह ख़ाक में नहीं मिल जाता, उगता नहीं। और जो दाना तुम बोते हो वह जिस्म नहीं जो पैदा होने वाला है, वह महज़ एक दाना होता है, ख़्वाह गेहूं का हो, ख़्वाह किसी और अनाज का। लेकिन ख़ुदा उस दाने को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ जिस्म अता करता है, बल्के हर बीज को उस की क़िस्म के मुताबिक़ एक ख़ास जिस्म देता है। सब गोश्त एक तरह का नहीं होता। आदमियों का गोश्त और है, जानवरों का और है, परिन्दों का और है और मछलियों का और है। जिस्म आसमानी भी होते हैं और ज़मीनी भी; मगर आसमानियों की शान और है, और ज़मीनियों की और। आफ़ताब का जलाल और है, महताब का और, सितारों का और बल्के सितारे-सितारे के जलाल में फ़र्क़ है। मुर्दों की क़ियामत भी ऐसी ही है। जिस्म फ़ना की हालत में दफ़न किया जाता है, और बक़ा की हालत में जी उठता है; वह बेहुरमती की हालत में गाढ़ा जाता है, और अज़मत की हालत में ज़िन्दा किया जाता है; कमज़ोरी की हालत में बोया जाता है, और क़ुव्वत की हालत में जी उठता है। नफ़्सानी जिस्म दफ़न किया जाता है, और रूहानी जिस्म जी उठता है। अगर नफ़्सानी जिस्म है, तो रूहानी भी है। चुनांचे लिख्खा है: “पहला आदमी यानी आदम ज़िन्दा नफ़्स बना”; आख़िरी आदम, ज़िन्दगी बख़्शने वाली रूह बना। यानी रूहानी पहले न था, बल्के नफ़्सानी था, बाद में रूहानी हुआ। पहला आदमी ज़मीन की ख़ाक से बनाया गया; मगर आख़िरी आदमी आसमान से आया। ख़ाकी इन्सान, आदम की तरह ख़ाकी हैं; लेकिन रूहानी इन्सान आसमान से आने वाले की तरह आसमानी हैं। जिस तरह हम उस ख़ाकी की सूरत पर पैदा हुए, उसी तरह हम उस आसमानी के मुशाबेह भी होंगे। ऐ भाईयो और बहनों! मेरा मतलब यह है के जिस्म इन्सानी जो ख़ून और गोश्त का मुरक्कब है, ख़ुदा की बादशाही का वारिस नहीं हो सकता, और न फ़ना बक़ा की वारिस हो सकती है। देखो, में तुम्हें एक राज़ की बात बताता हूं: हम सब मौत की नींद नहीं सोयेंगे, मगर बदल जायेंगे। यह पलक झपकते ही हो जायेगा यानी एक दम जब आख़िरी नरसिंगा फूंका जायेगा। क्यूंके सारे मुर्दे नरसिंगे के फूंके जाने पर ग़ैरफ़ानी जिस्म पा कर ज़िन्दा हो जायेंगे, और हम सब बदल जायेंगे। क्यूंके हमारे फ़ानी जिस्म को बक़ा के लिबास की ज़रूरत है, ताके इस मरने वाले जिस्म को हयात अब्दी मिल जाये। और जब फ़ानी जिस्म बक़ा का लिबास पहन चुकेगा, और यह मरने वाला जिस्म हयात अब्दी पा लेगा, तो यह किताब-ए-मुक़द्दस का फ़रमान पूरा हो जायेगा: “मौत फ़तह का लुक़मा हो गई है।” “ऐ मौत, तेरी फ़तह कहां रही? ऐ मौत! तेरा डंक कहां रहा?” मौत का डंक गुनाह है, और गुनाह का ज़ोर शरीअत है। मगर ख़ुदा का शुक्र हो के वह हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से हमें फ़तह बख़्शता है। इसलिये मेरे अज़ीज़ भाईयो और बहनों, साबित-क़दम रहो और ख़ुदावन्द की ख़िदमत में हमेशा सरगर्म रहो, क्यूंके तुम जानते हो के ख़ुदावन्द में तुम्हारी मेहनत बेफ़ाइदा नहीं है। जो अतीयः मसीही मुक़द्दसीन के लिये जमा किया जाता है: उस के बारे में तुम मेरी इस हिदायत पर अमल करो जो मैंने गलतिया सूबे की जमाअतों को दी हैं। यानी हर हफ़्ते के पहले दिन, तुम में से हर शख़्स अपनी आमदनी के मुताबिक़ अपने पास कुछ जमा कर के रखता रहे, ताके जब मैं आऊं तो तुम्हें पैसे जमा करने की ज़रूरत न हो। और जब में वहां आऊंगा, तो जिन्हें तुम मन्ज़ूर करोगे उन्हें में ख़त दे कर भेज दूंगा ताके वह तुम्हारे हदिये यरूशलेम पहुंचा दें। अगर मेरा जान भी मुनासिब होगा तो वह मेरे ही साथ जा सकेंगे। में सूबे मकिदुनिया से होता हुआ, तुम्हारे पास आऊंगा क्यूंके वहां मुझे मकिदुनिया होकर जाना ही है। शायद तुम्हारे पास कुछ दिन ठहरूं बल्के सर्दी का मौसम भी तुम्हारे यहां ही गुज़ारूं। फिर उम्मीद है के जहां मुझे जाना होगा, तुम मुझे भिजवा दोगे। में यह नहीं चाहता के मेरी मुलाक़ात तुम से रास्ता में हो; इसलिये अगर ख़ुदावन्द की मर्ज़ी हुई, तो मैं कुछ अर्से तुम्हारे पास रहूंगा। ईद-ए-पन्तिकुस्त तक तो मैं इफ़िसुस में रहूंगा, क्यूंके यहां मेरे लिये मुनादी करने का एक वसीअ दरवाज़ा खुला हुआ है, हालांके मुख़ालफ़त करने वाले भी बहुत हैं। अगर तिमुथियुस तुम्हारे यहां आये, तो उस का ख़्याल रखना के वह यहां तुम्हारे साथ बेख़ौफ़ रहे, क्यूंके वह भी मेरी तरह ख़ुदावन्द की ख़िदमत में लगा हुआ है। कोई उस से, हक़ारत के साथ पेश न आये। उसे मेरे पास सही सलामत भेज देना। मैं उस का और दूसरे मसीही भाईयों का इन्तिज़ार कर रहा हूं। भाई अपुल्लोस के बारे में: तुम्हें मालूम हो के मैंने बहुत इल्तिमास किया के वह भी मसीही भाईयों के साथ तुम्हारे पास आये। लेकिन इस वक़्त वह राज़ी न हुआ, बाद में मुनासिब मौक़ा मिलते ही वह भी आयेगा। जागते रहो; अपने ईमान पर क़ाइम रहो, बहादुर बनो; और मज़बूत होते जाओ। जो कुछ करते हो महब्बत से करो। ऐ भाईयो और बहनों! तुम इस्तिफ़िनास और उस के घर वालों को तो जानते ही हो। वह सूबे अख़िया में सब से पहले मसीही हुए थे। उन्होंने मसीही मुक़द्दसीन की ख़िदमत और मदद करने के लिये अपनी ज़िन्दगी वक़्फ़ कर रख्खी है। मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूं के ऐसे लोगों के ताबे रहो बल्के हर किसी के जो इस काम और मेहनत में शरीक है। मैं इस्तिफ़िनास, फ़रतूनातुस और अख़ियाकुस के आ जाने से ख़ुश हूं, क्यूंके जो तुम से रह गया था, उन्होंने पूरा कर दिया। क्यूंके उन्होंने तुम्हारी तरह मेरी रूह को भी ताज़ा दम कर दिया। ऐसे इन्सानों की क़दर करना ज़रूरी है। सूबे आसिया की जमाअतें तुम्हें सलाम कहती हैं। अक्विला और प्रिसकिल्लाह, उस जमाअत समेत जो उन के घर में जमा होती है, तुम्हें ख़ुदावन्द के नाम से सरगर्मी के साथ सलाम कहते हैं। यहां के सब मसीही भाई और बहन तुम्हें सलाम कहते हैं। पाक बोसा ले कर एक दूसरे को मेरा सलाम कहना। मैं पौलुस अपने हाथ से यह सलाम लिखता हूं। जो कोई ख़ुदावन्द से महब्बत नहीं रखता वह मलऊन हो, हमारे ख़ुदावन्द आने वाले हैं । ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम पर होता रहे। मेरी महब्बत अलमसीह ईसा में तुम सब के साथ बरक़रार रहे। आमीन। पौलुस की तरफ़ से जो ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा के रसूल हैं, और भाई तिमुथियुस की तरफ़ से भी, ख़ुदा की जमाअत के नाम जो कुरिनथुस शहर में है और तमाम सूबे अख़िया के सब मसीही मुक़द्दसीन के नाम यह ख़त लिख्खा: हमारे ख़ुदा बाप और हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ख़ुदा और बाप की हम्द हो, वह निहायत ही रहीम बाप है और हर तरह की तसल्ली देने वाला ख़ुदा है, वोही हमारी सारी मुसीबतों में हमें तसल्ली देता है, ताके हम उस ख़ुदादाद तसल्ली से दूसरों को भी तसल्ली दे सकें जो किसी भी तरह की मुसीबत में मुब्तिला हैं। क्यूंके जिस तरह अलमसीह की ख़ातिर हमारे दुख बढ़ते जाते हैं, उसी तरह हमें अलमसीह के वसीले से तसल्ली भी ज़्यादा मिलती है। अगर हम मुसीबत उठाते हैं, तो तुम्हारी तसल्ली और नजात के लिये उठाते हैं; और अगर तसल्ली पाते हैं, तो वह भी तुम्हारी तसल्ली के वास्ते, उस तसल्ली का असर यह होगा के तुम भी उन मुसीबतों को सब्र के साथ बर्दाश्त कर सकोगे जिन्हें हम बर्दाश्त करते हैं। और हम तुम्हारी तरफ़ से बड़े पुर उम्मीद हैं, क्यूंके हमें यक़ीन है के जिस तरह तुम तकालीफ़ में हमारे शरीक हो, उसी तरह हमारी तसल्ली में भी शरीक हो। ऐ भाईयो और बहनों! हम नहीं चाहते के तुम हमारी उस मुसीबत से बेख़बर रहो जो सूबे आसिया में हम पर आई। यह मुसीबत इस क़दर शदीद और हमारी क़ुव्वत बर्दाश्त से बाहर थी, के हम तो अपनी ज़िन्दगी से भी हाथ धो बैठे थे। हमें यक़ीन था के हमारी मौत का फ़त्वा सादर हो चुका है। लेकिन इस तजुर्बे ने हमें अपने आप की बजाय उस ख़ुदा पर भरोसा रखना सिखाया, जो मुर्दों को ज़िन्दा करता है। उस ने हमें बड़ी हलाकत से रिहाई बख़्शी और बख़्शेगा और हमें ख़ुदा से उम्मीद है के वो आइन्दा भी रिहाई बख़्शता रहेगा। अगर तुम मिल कर दुआ से हमारी मदद करोगे। तो वह फ़ज़ल जो बहुत से लोगों की दुआओं के वसीले से हम पर हुआ है, उस के लिये बहुत से लोग हमारी ख़ातिर ख़ुदा का शुक्र अदा करेंगे। हमें फ़ख़्र है: हमारा ज़मीर वफ़ादारी से गवाही देता है के हम लोग दुनिया वालों के और ख़ासतौर पर, तुम्हारे साथ तअल्लुक़ात, ख़ुदादाद पाकीज़गी और सच्चाई के साथ पेश आते रहे हैं। जो दुनियवी हिक्मत की नहीं बल्के ख़ुदा के फ़ज़ल की बदौलत है। हम तुम्हें वोही बातें लिखते हैं जो सच्ची हैं और जिन्हें तुम पढ़ सकते हो और मानते भी हो और उम्मीद है के आख़िर तक मानते रहोगे। तुम ने किसी हद तक तू यह बात मान ली है, और पूरी तरह मान भी लोगे के जिस तरह हम तुम्हारे लिये बाइस फ़ख़्र हैं उसी तरह तुम भी ख़ुदावन्द ईसा के वापसी के दिन तक हमारे लिये फ़ख़्र का बाइस होगे। इसी भरोसे पर मैंने इरादा किया था के पहले, तुम्हारे पास आऊं ताके तुम्हें दुगनी ख़ुशी हासिल हो। और तुम्हारे पास से मकिदुनिया के सूबे को चला जाऊं और वहां से वापसी पर तुम लोगों से एक बार फिर मिलूं, ताके तुम मुझे यहूदिया की तरफ़ रवाना कर दो। क्या तुम लोग यह सोचते हो के मैंने अपना इरादा बदल दिया और मैं ऐसा दुनियादार हूं के पक्का इरादा कर ही नहीं सकता? और अगर करता हूं तो उस में “हां की, हां” भी होती है और “नहीं की, नहीं” भी। जिस तरह ख़ुदा का क़ौल सच्चा है उसी तरह हमारा क़ौल अगर “हां” में है तो “हां” ही रहता है, “नहीं” में नहीं बदलता। सीलास, तिमुथियुस और मैंने जिस ख़ुदा के बेटे हुज़ूर ईसा अलमसीह की मुनादी तुम्हारे दरमियान की है उस में कोई “हां” ऐसी न थी जो “नहीं” में बदल सकती थी। बल्के उस की “हां” हमेशा “हां” ही रही। क्यूंके ख़ुदा के जितने भी वादे हैं उन सब की “हां” अलमसीह हैं। इसीलिये हम अलमसीह के वसीले से “आमीन” कहते हैं ताके ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर हो। ख़ुदा ही है जो हमें और तुम्हें अलमसीह में क़ाइम करता है। ख़ुदा ने ही हमें मसह किया है, ख़ुदा ने ही हम पर अपनी मुहर भी लगा दी है, और पाक रूह हमारे दिलों में डाल कर, गोया आने वाली बरकतों का बैआनः अदा कर दिया है। ख़ुदा गवाह है के मैं कुरिनथुस शहर में तुम्हारे पास अपनी ज़िन्दगी दाओं पर लगा कर इसलिये नहीं आया के तुम मेरी सख़्त कलामी से बचे रहो। हमारा यह मक़सद नहीं है के हम तुम्हारे ईमान के बारे में तुम पर हुक्म चलायें, हम आप की ख़ुशनूदी में आप के हम ख़िदमत हैं, बल्के तुम तो अपने ईमान पर मज़बूती से क़ाइम हो। चुनांचे मैंने दिल में ठान लिया था के फिर से तुम्हारे पास आकर तुम्हें रंजीदा नहीं करूंगा। क्यूंके अगर मैं तुम्हें रंजीदा करूं तो मुझे कौन ख़ुश करेगा, सिवाए तुम्हारे जो मेरे सबब से रंजीदा हुए? यही वजह है के मैंने तुम्हें वह पिछला ख़त लिख्खा था ताके जब मैं आऊं तो मुझे उन लोगों से रंज न पहुंचे जो मुझे ज़्यादा ख़ुशी दे सकते हैं। मुझे यक़ीन है के जो मेरी ख़ुशी है वोही तुम सब की भी है। मैंने बहुत रंजीदा और परेशानी की हालत आंसुओं बहा-बहा कर तुम्हें लिख्खा था। तुम्हें रंज पहुंचाना मेरा मक़सद नहीं था। बल्के मैं चाहता था के तुम उस गहरी महब्बत को जानो जो मुझे तुम से है। अगर किसी ने दुख पहुंचाया तो सिर्फ़ मुझे ही नहीं बल्के किसी हद तक तुम सब को पहुंचाया है। इसलिये कहता हूं के मैं उन के साथ बहुत सख़्ती से पेश न आऊं। और तुम सब की नाराज़गी की वजह से जो सज़ा उसे मिल चुकी है वह काफ़ी है। बेहतर यही है के अब तुम उस का क़ुसूर मुआफ़ कर दो और उसे तसल्ली दो। ऐसा न हो के वह ग़म की शिद्दत से फ़ना न हो जाये। लिहाज़ा मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूं के उसे अपनी महब्बत का यक़ीन दिलाओ। मैंने ख़त इसलिये भी लिख्खा था के तुम्हारा इम्तिहान लूं के तुम सारी बातों में फ़रमांबरदार हो या नहीं। जिसे तुम मुआफ़ करते हो उसे मैं भी मुआफ़ करता हूं। अगर मैंने मुआफ़ किया तो अलमसीह को हाज़िर जान कर तुम्हारी ख़ातिर किया, ताके शैतान को अपना दाओ चलाने का मौक़ा न मिले। क्यूंके हम उस की चालबाज़ी से वाक़िफ़ हैं। जब मैं अलमसीह की ख़ुशख़बरी सुनाने के लिये त्रोआस शहर पहुंचा तो मैंने देखा के ख़ुदावन्द ने मेरे लिये ख़िदमत का दरवाज़ा खोल रख्खा है। फिर भी मेरी रूह को तसल्ली न मिली। मैं परेशान हो गया क्यूंके मेरा भाई तितुस वहां न था। लिहाज़ा मैं वहां के लोगों से रुख़्सत होकर सूबे मकिदुनिया के लिये रवाना हो गया। लेकिन ख़ुदा का शुक्र है के वह अलमसीह में हमें हमेशा फ़ातिहानः जशन में लिये फिरता है और अपने इल्म की ख़ुश्बू हमारे वसीले से हर जगह फैलाता है। क्यूंके ख़ुदा के नज़दीक हम अलमसीह की वह ख़ुश्बू हैं जो नजात पाने वालों और हलाक होने वालों, दोनों ही के लिये है। बाज़ के लिये मौत की बू और बाज़ के लिये ज़िन्दगी की ख़ुश्बू। इस काम के लाइक़ और कौन है? लिहाज़ा हम उन बेशुमार लोगों की मानिन्द नहीं जो ख़ुदा के कलाम में आमेज़िश करते हैं बल्के हम कलाम को उसे साफ़ दिली के साथ ख़ुदा को हाज़िर जान कर अलमसीह के वफ़ादार ख़ादिमों की तरह पेश करते हैं। क्या हम अपनी नेकनामी का ढंडोरा पीटने लगें? क्या हमें ज़रूरत है के बाज़ लोगों की तरह सिफ़ारशी ख़ुतूत ले कर तुम्हारे पास आयें या तुम से सिफ़ारशी ख़ुतूत ले कर दूसरों के पास जायें? हमारा ख़त तो हमारे दिलों पर लिख्खा हुआ है, और वह ख़त तुम हो, उस ख़त को सब लोग जानते हैं और पढ़ भी सकते हैं। ज़ाहिर है के तुम वह ख़त हो जिसे हम ने अलमसीह के ख़ादिमो की हैसियत से तहरीर किया है, यह ख़त रौशनाई से नहीं, बल्के ज़िन्दा ख़ुदा के पाक रूह के ज़रीये पत्थर की तख़्तियों पर नहीं बल्के इन्सानी जिस्म के दिलों की तख़्तियों पर लिख्खा गया है। अलमसीह की मारिफ़त ख़ुदा पर हमारा ऐसा ही भरोसा है। यह बात नहीं के ख़ुद हम में कोई लियाक़त है के हम ऐसा ख़्याल करें बल्के हमारी लियाक़त ख़ुदा की अता करदा है। जिस ने हमें नये अह्द के ख़ादिम होने के लाइक़ भी किया। तहरीरी निज़ाम के नहीं बल्के रूह के ख़ादिम हैं; क्यूंके तहरीरी निज़ाम मार डालता है, मगर पाक रूह ज़िन्दगी अता करती है। जिस वक़्त मौत के अह्द के हुरूफ़ पत्थर की तख़्तियों पर कन्दा कर के, हज़रत मूसा को दिये गये, तो उन का चेहरा जलाल से पुर हो गया, और बनी इस्राईल उसे देखने की ताब न ला सके, हालांके वह जलाल कम होता जा रहा था, तो क्या पाक रूह का अह्द उस से कहीं बढ़कर जलाल वाला न होगा? जब मुजरिम ठहराने वाला अह्द जलाल वाला है तो रास्तबाज़ ठहराने वाला अह्द यक़ीनी तौर पर ज़्यादा जलाल वाला क्यूं न होगा? जो शै किसी वक़्त जलाल वाली थी, अब बेइन्तिहा जलाल वाली शै के मुक़ाबला में कुछ भी नहीं। क्यूंके जब मिटने वाली चीज़ जलाली थी तो अबद तक क़ाइम रहने वाली चीज़ किस क़दर ज़्यादा जलाल वाली होगी! लिहाज़ा इस उम्मीद की वजह से हम बड़े बेख़ौफ़ होकर बोलते हैं। हम मूसा की मानिन्द नहीं, जिस ने अपने चेहरा पर नक़ाब डाल ली थी ताके बनी इस्राईल उस जलाल को जो मिटता जा रहा था न देख सकें। उन की अक़्ल पर पर्दा पड़ गया था, और आज भी पुराने अह्द की किताबें पढ़ते वक़्त उन के दिलों पर पर्दा पड़ा रहता है। यह पर्दा उसी वक़्त उठता है जब कोई अलमसीह पर ईमान ले आता है। आज तक जब कभी शरीअत-ए-मूसवी की किताब पढ़ी जाती है, उन के दिलों पर वोही पर्दा पड़ा रहता है। लेकिन जब कभी किसी का दिल ख़ुदावन्द की तरफ़ रुजू होता है तो वह पर्दा हटा दिया जाता है। यहां ख़ुदावन्द से मुराद पाक रूह, और जहां ख़ुदावन्द का पाक रूह मौजूद है, वहां आज़ादी है। लेकिन हम सब, जिन के बेनक़ाब चेहरों से ख़ुदावन्द का जलाल इस तरह ज़ाहिर होता है, जिस तरह आईन में, तो हम ख़ुदावन्द के पाक रूह के वसीले से उस की जलाली सूरत में दर्जा-ब-दर्जा बदलते जाते हैं। पस जब हम ने ख़ुदा के मेहरबानी की बदौलत यह ख़िदमत पाई है, तो हम हिम्मत नहीं हारते। हम ने शरम की पोशीदा बातों को तर्क कर दिया है; हम मक्कारी की चाल नहीं चलते, और न ही ख़ुदा के कलाम में आमेज़िश करते हैं बल्के जो हक़ है उसे ज़ाहिर कर के ख़ुदा के हुज़ूर हर शख़्स के दिल में अपनी नेकनियती बिठाते हैं। अगर हमारी ख़ुशख़बरी अभी भी पोशीदा है, तो सिर्फ़ हलाक होने वालों के लिये पोशीदा है। चूंके इस जहान के झूटे ख़ुदा ने उन बेएतक़ादों की अक़्ल को अन्धा कर दिया है, इसलिये वह ख़ुदा की सूरत यानी अलमसीह के जलाल की ख़ुशख़बरी की रोशनी को देखने से महरूम हैं। क्यूंके हम अपनी नहीं, बल्के अलमसीह ईसा की मुनादी करते हैं के वोही ख़ुदावन्द हैं, और अपने हक़ में यही यह कहते हैं के हम अलमसीह की ख़ातिर तुम्हारे ग़ुलाम हैं। इसलिये के वह ख़ुदा जिस ने फ़रमाया: “तारीकी में से नूर चमके,” हमारे दिलों में चमका ताके हम पहचान सकें के जो नूर ईसा अलमसीह के चेहरा से जलवागर है वह ख़ुदा के जलाल का नूर है। लेकिन हमारे पास यह ख़ज़ाना मिट्टी के बर्तनों में रख्खा गया है ताके ज़ाहिर हो जाये के यह लामहदूद क़ुदरत ख़ुदा की तरफ़ से है न के हमारी तरफ़ से। हम हर तरफ़ से दबाए जाते हैं, लेकिन कुचले नहीं जाते; परेशान तो होते हैं, लेकिन नाउम्मीद नहीं होते; सताये जाते हैं, लेकिन अकेले नहीं छोड़े जाते; ज़ख़्म खाते हैं लेकिन हलाक नहीं होते। हम अपने बदन में हुज़ूर ईसा की मौत लिये फिरते हैं, ताके हुज़ूर ईसा की ज़िन्दगी भी हमारे बदन में ज़ाहिर हो। क्यूंके हम उम्र भर हुज़ूर ईसा की ख़ातिर मौत का मुंह देखते रहते हैं, ताके हुज़ूर ईसा की ज़िन्दगी भी हमारे फ़ानी बदन में ज़ाहिर हो। पस मौत तो हम में काम करती है, लेकिन ज़िन्दगी तुम में। किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा: “मैं ईमान लाया; इसीलिये बोला।” ईमान की वोही रूह हम में भी है, पस हम भी ईमान लाये और इसी सबब से बोलते हैं। क्यूंके हम जानते हैं के जिस ने ख़ुदावन्द ईसा को मुर्दों में से ज़िन्दा किया वह हमें भी हुज़ूर ईसा के साथ ज़िन्दा करेगा और तुम्हारे साथ अपने सामने हाज़िर करेगा। यह सब चीज़ें तुम्हारे फ़ायदा के लिये हैं, ताके जो फ़ज़ल ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच रहा है उस के ज़रीये से ख़ुदा के जलाल के लिये लोगों की शुक्र गुज़ारी में भी इज़ाफ़ा होता जाये। इसलिये हम हिम्मत नहीं हारते। ख़्वाह हमारी ज़ाहिरी तौर से जिस्मानी क़ुव्वत कम होती जा रही है, लेकिन बातिनी रूहानी क़ुव्वत रोज़-ब-रोज़ बढ़ती जा रही है। हमारी यह मामूली सी मुसीबत जो के आरज़ी है हमारे लिये ऐसा अब्दी जलाल पैदा कर रही है जो हमारे क़ियास से बाहर है। लिहाज़ा हम देखी हुई चीज़ों पर नहीं, बल्के अनदेखी चीज़ों पर नज़र करते हैं, क्यूंके देखी हुई चीज़ें चन्द रोज़ा हैं, मगर अनदेखी हमेशा के लिये हैं। हम जानते हैं के जब हमारा ख़ेमा जो ज़मीन पर हमारा आरज़ी घर है, गिरा दिया जायेगा तो हमें ख़ुदा की तरफ़ से आसमान पर एक ऐसी इमारत मिलेगी जो इन्सानी हाथों की बनाई हुई नहीं बल्के अब्दी है। चुनांचे हम इस मौजूदा जिस्म में कराहते हैं, और हमारी बड़ी आरज़ू है के हम अपने आसमानी मस्कन को लिबास की तरह पहन लें, ताके उसे पहन लेने के बाद हम नंगे न पाये जायें। हम इस ख़ेमा में रहते हुए बोझ के मारे कराहते हैं क्यूंके हम यह लिबास उतारना नहीं चाहते, बल्के उसी पर दूसरा पहन लेना चाहते हैं, ताके जो फ़ानी है वह बक़ा का लुक़मा बन जाये। वह ख़ुदा ही है जिस ने हमें इसी ग़रज़ से बनाया और अपना पाक रूह हमें आने वाली चीज़ों के बैआनः के तौर पर दिया है। पस हम हमेशा मुतमइन रहते हैं और जानते हैं के जब तक हम जिस्म के घर में हैं, ख़ुदावन्द के घर से दूर हैं। क्यूंके हम ईमान के सहारे ज़िन्दगी गुज़ारते हैं न के आंखों देखे पर। हम इत्मीनान से हैं लेकिन बेहतर यह है के इस जिस्मानी घर को छोड़कर ख़ुदावन्द के घर में रहने लगें। लेकिन ख़्वाह हम अपने घर में हों ख़्वाह उस से दूर, हमारा मक़सद तो ख़ुदावन्द को ख़ुश रखना है। क्यूंके हम सब को अलमसीह की अदालत में पेश होना है ताके हर शख़्स अपने अच्छे या बुरे आमाल का जो उस ने अपने बदन से दुनिया में किये हैं, बदला पाये। क्यूंके, हमें, मालूम है के ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ क्या है, इसलिये हम दूसरों को समझाने की कोशिश करते हैं। ख़ुदा हमारे दिलों का हाल अच्छी तरह जानता है, और मुझे उम्मीद है यह हाल तुम्हारे ज़मीर पर भी ज़ाहिर हुआ होगा। इस का मतलब यह नहीं के हम तुम्हारे सामने फिर से, अपनी नेकनामी जताने लगे हैं बल्के तुम्हें मौक़ा देना चाहते हैं के तुम हम पर फ़ख़्र कर सको, और उन लोगों को जवाब दे सको जो ज़ाहिर पर तो फ़ख़्र करते हैं लेकिन बातिन पर नहीं। अगर “हम दीवाने हैं” तो ख़ुदा के वास्ते हैं; और अगर होश में हैं, तो तुम्हारे वास्ते। हम अलमसीह की महब्बत के बाइस मजबूर हैं, क्यूंके हम समझते हैं के जब एक आदमी सब के लिये मरा है, तो सब मर गये। और वह इसलिये सब की ख़ातिर मरा के जो, जीते हैं वह आइन्दा अपनी ख़ातिर न जियें बल्के सिर्फ़ उस की ख़ातिर जो उन के लिये मरा और फिर से जी उठा। पस अब से हम किसी को जिस्मानी हैसियत से नहीं जानेंगे अगरचे एक वक़्त हम ने अलमसीह को भी जिस्मानी हैसियत से तरह जाना था। लेकिन अब हम उन्हें जान गये हैं। इसलिये अगर कोई अलमसीह में है तो वह नई मख़्लूक़ है। पुरानी चीज़ें जाती रहें। देखो! अब वह नई हो गईं! यह सब ख़ुदा की तरफ़ से है जिस ने अलमसीह के ज़रीये हमारे साथ सुलह कर ली और सुलह कराने की ख़िदमत हमारे सुपुर्द कर दी: मतलब यह है के ख़ुदा ने अलमसीह के ज़रीये दुनिया वालों से सुलह कर ली और उन्हें उन की तक़्सीरों का ज़िम्मेदार नहीं ठहराया। उस ने सुलह का यह पैग़ाम हमारे सुपुर्द कर दिया। इसलिये हम अलमसीह के एलची हैं, गोया ख़ुदा हमारे ज़रीये लोगों से मुख़ातिब होता है। लिहाज़ा हम अलमसीह की तरफ़ से इल्तिमास करते हैं: ख़ुदा से सुलह कर लो। ख़ुदा ने अलमसीह को जो गुनाह से वाक़िफ़ न था, हमारे वास्ते गुनाह ठहराया ताके हम अलमसीह में ख़ुदा की रास्तबाज़ हो जायें। हम जो ख़ुदा के काम में शरीक हैं तुम्हारी मिन्नत करते हैं के ख़ुदा के इस फ़ज़ल को जो ज़ाए न होने दो। क्यूंके ख़ुदा फ़रमाता है, “मैंने क़बूलियत के वक़्त तेरी सुन ली, और नजात के दिन तेरी मदद की।” देखो! क़बूलियत का वक़्त यही है और नजात का दिन आज ही है। हम नहीं चाहते के हमारी इस ख़िदमत पर हर्फ़ आये इसलिये हम कोशिश करते हैं के किसी के लिये रुकावट पैदा न करें। बल्के हर बात से यह ज़ाहिर करने की कोशिश करते हैं के हम ख़ुदा के ख़ादिम हैं: हम ने बड़े सब्र से मुसीबत; एहतियाज और तंगी का सामना किया; कोड़े खाये, क़ैद हुए, हंगामों से दो-चार हुए, मशक़्क़त की, अपनी नींद हराम की, भूके रहे; हम पाकीज़गी से, इल्म से, तहम्मुल से, मेहरबानी से; पाक रूह से, सच्ची महब्बत से; कलाम हक़ से, ख़ुदा की क़ुदरत से; रास्तबाज़ी के हथियारों के वसीले से जो हमारे दाएं और बाएं हैं; हमारी इज़्ज़त भी की जाती है और बेइज़्ज़ती भी, हम बदनाम हैं और नेकनाम भी, हम सच्चे हैं फिर भी हमें दग़ाबाज़ समझा जाता है; गुमनाम हैं तो भी मशहूर हैं; मुर्दों की तरह हैं फिर भी ज़िन्दा हैं; मार खाते रहते हैं मगर हलाक नहीं किये जाते; ग़मगीनी की मानिन्द हैं, मगर हमेशा ख़ुश रहते हैं; कंगाल दिखाई देते हैं मगर बहुतेरों को दौलतमन्द बना देते हैं; नादारों की मानिन्द हैं मगर सब कुछ रखते हैं। कुरिनथुस वालो! हम ने तुम से खुल कर बातें की हैं, बल्के अपना दिल खोल कर रख दिया है। हमारे हां तुम्हारे लिये तंग दिली नहीं है, लेकिन तुम्हारे ही दिमाग़ तज़बज़ब का शिकार हैं। मैं तुम्हें अपना फ़र्ज़न्द जान कर यह कहता हूं के तुम भी हमारी तरह कुशादा दिल हो जाओ। बेएतक़ादों के साथ नाहमवार जूए में न जुतो। क्यूंके रास्तबाज़ी और बेदीनी में किया मेल-जोल? या रोशनी और तारीकी में क्या शिराकत? अलमसीह को बलीआल से क्या मुवाफ़क़त? ईमान वालों का बेएतक़ादों से क्या वास्ता? ख़ुदा के मक़्दिस को बुतों से किया मुनासबत? ज़िन्दा ख़ुदा का मक़्दिस तो हम हैं जैसा के ख़ुदा ने फ़रमाया है: “मैं उन में बसूंगा और उन के दरमियान चला फिरा करूंगा। मैं उन का ख़ुदा होंगा और वह मेरी उम्मत होंगे।” लिहाज़ा, “ख़ुदावन्द ख़ुद फ़रमाता है। उन में से बाहर निकल आओ, अलैहदा हो जाओ। और जो चीज़ नापाक है उसे मत छूओ, तब मैं तुम्हें क़बूल करूंगा।” और, “मैं तुम्हारा बाप होंगा, और तुम मेरे बेटे, बेटियां होगे, यह क़ौल ख़ुदावन्द क़ादिर-ए-मुतलक़ का है।” अज़ीज़ों! जब के हम से ऐसे वादे किये गये हैं तो आओ हम अपने आप को सारी जिस्मानी और रूहानी आलूदगी से पाक करें और ख़ुदा के ख़ौफ़ के साथ पाकीज़गी को कमाल तक पहुंचायें। हमें अपने दिलों में जगह दो। हम ने किसी के साथ नाइन्साफ़ी नहीं की, किसी को नहीं बिगाड़ा, किसी से नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाया। मैं तुम्हें मुजरिम ठहराने के लिये नहीं कहता; मैं पहले ही कह चुका हूं के तुम हमारे दिलों में बस गये हो। अब हम एक साथ जियेंगे और मरेंगे। मुझे तुम पर बड़ा भरोसा है; बल्के में तुम पर फ़ख़्र भी करता हूं। मेरा हौसला बढ़ा है; तमाम मुसीबतों के बावुजूद मेरा दिल ख़ुशी से लबरेज़ है। सूबे मकिदुनिया में आने के बाद भी, हमारे जिस्म को चैन न मिला, हम पर हर तरफ़ से मुसीबतें आती थीं। बाहर लड़ाईयां थीं, और अन्दर दहश्तें। लेकिन पस्त हालों को हौसला देने वाले ख़ुदा ने तितुस को वहां भेज कर, हमें तसल्ली बख़्शी, न सिर्फ़ उस की आमद से बल्के उस तसल्ली से भी जो उस को तुम से हासिल हुई। और तितुस ने हमें तुम्हारा ग़म, तुम्हारा इश्तियाक़, और मेरे बारे में बड़ा जोश रखते हो, उस का बयान किया तो मुझे और भी ख़ुशी हुई। अगरचे मैंने अपने पहले ख़त से तुम्हारा दिल दुखाया, फिर भी में उस के लिखने पर पशेमान नहीं हूं। हां, पहले पशेमान था के मैंने तुम्हें ऐसा ख़त क्यूं लिख्खा जिस ने तुम्हें रंजीदा किया, ख़्वाह थोड़ी देर के लिये ही सही। अब में ख़ुश हूं, इसलिये नहीं के तुम्हें रंज पहुंचा, बल्के इसलिये के तुम्हारे रंज ने तुम्हें तौबा करने पर मजबूर किया। और ख़ुदा ने उस रंज के ज़रीये अपनी मर्ज़ी पूरी की और यूं तुम्हें हमारी वजह से कोई नुक़्सान नहीं हुआ। क्यूंके वह रंज जो ख़ुदा की मर्ज़ी को पूरा करता है, इन्सान को तौबा करने पर उभारता है जिस का नतीजा नजात है। और इस पर किसी को पछताने की ज़रूरत नहीं, लेकिन दुनिया का रंज मौत पैदा करता है। पस देखो उस रंज ने जो ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ था: तुम में किस क़दर सरगर्मी, माज़िरत ख़्वाही, नाराज़गी, ख़ौफ़े ख़ुदा इश्तियाक़, ग़ैरत और इन्तिक़ाम पैदा कर दिया। तुम ने हर तरह से साबित कर दिया के तुम इस मुआमले में बेक़ुसूर हो। मैंने वह ख़त लिख्खा तो ज़रूर था, लेकिन न तो उस ज़ालिम के बाइस लिख्खा और न उस के बाइस जिस पर ज़ुल्म हुआ। बल्के में चाहता था के हमारे वास्ते जो तुम्हारी सरगर्मी है वो तुम पर ख़ुदा की हुज़ूरी में ज़ाहिर हो जाये के तुम हमें कितनी अहम्मीयत देते हो। इसलिये हमें तसल्ली हुई। इस तसल्ली के इलावा तितुस को ख़ुश देखकर हमें और भी ज़्यादा ख़ुशी मुयस्सर हुई, क्यूंके तुम सब उस की रूह की ताज़गी का बाइस बने। मैंने उस के सामने तुम्हारी बाबत फ़ख़्र किया था। अच्छा हुआ के तुम ने मुझे शर्मिन्दा नहीं होने दिया। जिस तरह हम ने तुम्हारे सामने सारी बातें सच्चाई से बयान कीं, उसी तरह जो फ़ख़्र हम ने तितुस के सामने किया वह भी सच निकला। जब उसे याद आता है के तुम किस क़दर फ़रमांबरदार निकले और किस तरह ख़ौफ़ खाते और थरथराते हुए उस से मिले थे तो उस का दिल तुम्हारी महब्बत से लबरेज़ हो जाता है। अब मैं बहुत ही ख़ुश हूं और मुझे तुम्हारी तरफ़ से पूरा इत्मीनान हो गया है। ऐ भाईयो और बहनों, हम तुम्हें ख़ुदा के उस फ़ज़ल के बारे में बताना चाहते हैं जो मकिदुनिया की जमाअतों पर हुआ। इन्तिहाई मुफ़्लिसी और सख़्त मुसीबत में गिरिफ़्तार होने के बावुजूद, उन्होंने दिल खोल कर अतीयः दिया। मैं इस बात का गवाह हूं के उन्होंने जिस क़दर वह दे सकते थे, दिया बल्के अपने मक़्दूर से कहीं ज़्यादा दिया। और वह भी अपनी ख़ुशी से, उन्होंने ने हमारी उम्मीद के मुताबिक़ ख़ुदा को दिया बल्के उस से कहीं ज़्यादा दिया: और हमारी मिन्नत की के उन्हें भी मुक़द्दसीन की इस ख़िदमत में शरीक किया जाये। उन्होंने न सिर्फ़ हमारी उम्मीद के मुताबिक़ ख़ुदा को दिया बल्के उस से कहीं ज़्यादा दिया: और ख़ुद को सब से पहले ख़ुदावन्द की और हमारी मर्ज़ी के सुपुर्द कर दिया। इसलिये हम ने तितुस से मिन्नत की के जिस तरह उस ने पहले इस ख़िदमत का आग़ाज़ किया था, आप के साथ भी फ़ज़ल के इस अमल को पूरा करे। और देखो के जिस तरह तुम हर बात में यानी ईमान में, कलाम में, इल्म में, जोश में और हमारी महब्बत में दूसरों से आगे हो। उसी तरह इस अतियों के काम में भी आगे रहो। मैं तुम्हें हुक्म नहीं दे रहा, बल्के तुम्हारी बेरिया महब्बत को आज़माने के लिये दूसरों की सरगर्मी की मिसाल दे रहा हूं। क्यूंके तुम तो हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के फ़ज़ल को जानते हो, वह दौलतमन्द थे, फिर भी तुम्हारी ख़ातिर ग़रीब बन गये, ताके तुम अलमसीह के ग़रीब हो जाने से दौलतमन्द हो जाओ। अब मेरी राय में तो तुम्हारे लिये यही बेहतर है। तुम ने जो काम पिछले साल शुरू किया था तुम लोग ही सब से पहले थे जिन्होंने ये अतीयः देने की पहल की थी। जैसे तुम इरादा करने में मुस्तइद थे वैसे ही उसे पूरी ताक़त से अमली जामा भी पहनाओ। क्यूंके अगर तुम्हारी नियत देने पर आमादा हो, तो उस के मुताबिक़ ख़ुदा तुम्हारा अतीयः क़बूल करेगा जो आदमी के पास है, न उस के मुताबिक़ जो उस के पास नहीं है। मेरा मतलब यह नहीं के औरों का बोझ तुम पर डाल कर तुम्हारे बोझ को और भारी कर दूं, मेरा मक़सद सिर्फ़ ये है के हर एक के साथ मुआमलात यकसां हों। चूंके इस वक़्त तुम्हारे पास काफ़ी है इसलिये तुम अपने अतीये से उन की कमी को पूरा कर सकते हो, और जब उन के पास काफ़ी होगा और तुम्हारे पास कम तो वह तुम्हारी मदद कर सकेंगे। यूं ज़िम्मेदारी का बोझ बराबर हो जायेगा, चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “जिस ने ज़्यादा जमा किया उस का कुछ ज़्यादा न निकला, और जिस ने कम जमा किया उस का कुछ कम न निकला।” ख़ुदा का शुक्र है, जिस ने तितुस के दिल में भी वोही सरगर्मी पैदा की जो मुझ में है। उस ने न सिर्फ़ हमारी दरख़्वास्त क़बूल की, बल्के वह पूरी सरगर्मी के साथ अपनी ख़ुशी से तुम्हारे पास पहुंच रहा है। हम एक मसीही भाई को भी उस के साथ भेज रहे हैं, जिस की ख़ुशख़बरी सुनाने की तारीफ़ तमाम जमाअतों में की जाती है। और सिर्फ़ यही नहीं बल्के जमाअत ने उसे मुन्तख़ब किया के वह अतियों की इस ख़िदमत के लिये हमारा हमसफ़र हो, हम यह काम ख़ुदावन्द के जलाल के लिये करते हैं और इस से हमारा शौक़ भी ज़ाहिर होता है। हम हरगिज़ नहीं चाहते के अतियों की इतनी बड़ी रक़म का ठीक से इन्तिज़ाम न करने के बारे में हमारी बदनामी हो। हमारा मक़सद तू यह है के हमारी यह तद्बीर ख़ुदावन्द और इन्सान दोनों की नज़र में, भली साबित हो। यही वजह है के हम ने उन के साथ उस भाई को भेजा है जिसे हम ने कई बातों में बारहा आज़माया और बड़ा सरगर्म पाया, अब चूंके तुम पर उसे बड़ा भरोसा है इसलिये वह और भी सरगर्म हो गया है। रही तितुस की बात, तो वह तुम्हारे दरमियान मेरा साथी और हम ख़िदमत है; जहां तक हमारे भाईयों की बात है, वह जमाअतों के नुमाइन्दे हैं और अलमसीह का जलाल ज़ाहिर करते हैं। पस जमाअतों की मौजूदगी में उन पर साबित करो के तुम हम से महब्बत रखते हो और हमारा फ़ख़्र जो हम तुम पर करते हैं, सहीह है। उस ख़िदमत के बारे में जिसे हम यहूदाह के मसीही मुक़द्दसीन की ख़ातिर अन्जाम दे रहे हैं, मुझे ज़्यादा लिखने की ज़रूरत नहीं। मैं जानता हूं के तुम्हें मदद करने का शौक़ है, इसलिये मैं मकिदुनिया के लोगों के सामने तुम्हारी तारीफ़ करता हूं, मैंने उन्हें बताया के तुम सूबे अख़िया वाले, पिछले साल से अतीयः देने के लिये तय्यार हो; तुम्हारी इस सरगर्मी से अक्सर मसीही मकिदुनी भाईयों में ऐसा करने का जोश पैदा हुआ। लेकिन मैं इन भाईयों को इसलिये भेज रहा हूं के तुम पर हमारा फ़ख़्र करना बेबुनियाद न ठहरे बल्के जिस तरह मैंने कहा, तुम बिलकुल उसी तरह तय्यार रहो। कहीं ऐसा न हो के मकिदुनिया के कुछ लोग मेरे साथ आयें और तुम्हें अतियः देने के लिये तय्यार न पायें, तुम्हारे उस भरोसे की वजह से जो हम ने किया है, हमें और तुम्हें शर्मिन्दा होना पड़े! इसलिये मैंने भाईयों से यह दरख़्वास्त करना बहुत ज़रूरी समझा के वह मुझ से पहले तुम्हारे पास पहुंच जायें और वह अतीयः जो तुम ने देने का वादा किया। वक़्त से पहले तय्यार कर रखें ताके वह ख़ुशी से दिया हुआ अतीयः मालूम हो, न के ऐसी रक़म जो ज़बरदस्ती जमा की गई हो। याद रखो: जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा, और जो ज़्यादा बोता है वह ज़्यादा काटेगा। जिस ने दिल में जिस क़दर देने का ख़्याल किया हुआ है बग़ैर किसी हिचकिचाहट के उतना ही दे और ख़ुशी से दे, न के मजबूरी से या किसी दबाओ से क्यूंके ख़ुदा ख़ुशी से देने वाले को अज़ीज़ रखता है। ख़ुदा तुम्हें कसरत से फ़ज़ल देने के क़ाबिल है, ताके तुम्हारे पास हर वक़्त और हर हालत में काफ़ी से ज़्यादा मौजूद रहे और तुम नेक कामों के लिये ख़ुशी से दे सको। चुनांचे कलाम में लिख्खा है: उन्होंने बिखेरा है, उन्होंने मिस्कीनों को दिया है; उन की रास्तबाज़ी हमेशा तक क़ाइम रहेगी। लिहाज़ा वह ख़ुदा जो बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी अता फ़रमाता है वोही तुम्हें भी बीज अता फ़रमायेगा, उसे उगाएगा और तुम्हारी रास्तबाज़ी की फ़सल को बढ़ाएगा। ख़ुदा तुम्हें माला-माल करेगा ताके तुम हर वक़्त बड़ी कसरत से दे सको, और लोग हमारे वसीले से तुम्हारा अतीयः पा कर ख़ुदा का शुक्र अदा करें। क्यूंके तुम्हारी इस ख़िदमत से न सिर्फ़ मुक़द्दसीन की ज़रूरतें पूरी होती हैं, बल्के बहुत से लोगों की तरफ़ से ख़ुदा का शुक्राना भी अदा किया जाता है। इस ख़िदमत से लोगों पर साबित हो जायेगा के तुम अलमसीह की ख़ुशख़बरी को मानने का दावा ही नहीं करते बल्के उस पर ताबेदारी से अमल भी करते हो। ख़ुदा की तारीफ़ करते और सब लोगों की मदद करने में बड़ी सख़ावत से काम लेते हो। साथ ही वह तुम्हें ख़ुदा के उस बड़े फ़ज़ल के सबब से जो तुम पर हुआ है, बड़ी महब्बत से अपनी दुआओं में याद करेंगे। शुक्र ख़ुदा का उस की उस बख़्शिश के लिये जो बयान से बाहर है! अब वोही पौलुस अलमसीह की फ़िरोतनी और नरमी दिलाते हुए, मैं, तुम से इल्तिमास करता हूं, मैं पौलुस, जब तुम्हारे सामने होता हूं तो “हलीम” बन जाता हूं लेकिन जब तुम से दूर होता हूं तो “बड़े सख़्त” ख़त लिखता हूं! बल्के मिन्नत करता हूं के मुझे मजबूर न करो के वहां आकर सख़्ती से काम लूं जो हम पर यह इल्ज़ाम लगाते हैं के हम महज़ दुनियवी जिस्मानी ख़ाहिशात की तक्मील के लिये ज़िन्दगी बसर कर रहे हैं। अगरचे हम दुनिया ही में रहते हैं, लेकिन हम दुनिया के जिस्मानियों की तरह नहीं लड़ते। जिन हथियारों से हम लड़ते हैं वह दुनिया के जिस्मानी हथियार नहीं। बल्के, ख़ुदा के ऐसे क़वी हथियार हैं जिन से हम बुराई के मज़बूत क़िलों को मिस्मार कर देते हैं। चुनांचे हम इन दलीलों और ऊंची बातों को जो ख़ुदा की पहचान के बरख़िलाफ़ उठती हैं ढा देते हैं, और हर एक ख़्याल को क़ैद कर के अलमसीह के ताबे कर देते हैं। हम हर तरह की नाफ़रमानी को सज़ा देंगे, लेकिन पहले ज़रूरी है के तुम्हारी फ़रमां बरदारी साबित हो। तुम सिर्फ़ ज़ाहिर पर नज़र करते हो। अगर वहां किसी को यह गुमान है के वह अलमसीह का है, तो उसे यह भी सोच लेना चाहिये के जैसे वह अलमसीह का है वैसे ही हम भी हैं। अगर मैं इस इख़्तियार पर कुछ ज़्यादा ही फ़ख़्र करता हूं जो ख़ुदावन्द ने मुझे तुम्हारी तरक़्क़ी के लिये दिया है न के तनज़्ज़ुली के लिये, तो इस में मेरे लिये शरम की कौन सी बात है? कोई यह न समझे के मैं अपने ख़ुतूत से तुम्हें डराने या धमकाने की कोशिश कर रहा हूं। क्यूंके कुछ लोग कहते हैं, “पौलुस के ख़ुतूत बहुत मुअस्सर और सख़्त होते हैं लेकिन जब वह ख़ुद आते हैं तो जिस्मानी एतबार से इतने कमज़ोर दिखाई देते हैं और ढंग से तक़रीर भी नहीं कर सकते।” ऐसा कहने वालों को मालूम हो के जो कुछ हम अपनी गै़रहाज़िरी में ख़ुतूत में लिखते हैं, वोही हम वहां हाज़िर होकर अमल में भी ला सकते हैं। हमारी जुरअत कहां के हम अपने आप को उन शख़्सों में शुमार करें या उन से अपना मुक़ाबला करें जो हमेशा अपने ही मुंह से अपनी तारीफ़ करते हैं। क्यूंके कुछ लोग ख़ुद को मेयार बना कर उस पर अपने आप को जांचते हैं और अपना मवाज़ना ख़ुद ही से कर के, अपनी नादानी का सबूत देते हैं। लेकिन हम ऐसा फ़ख़्र नहीं करेंगे जो बेअन्दाज़ा हो, बल्के हम अपने फ़ख़्र को ख़ुदा के मुक़र्रर किये हुए इलाक़े तक महदूद रखेंगे, जिस में तुम भी आ गये हो। अगर हम तुम तक नहीं पहुंचे होते तो हमारा फ़ख़्र बेअन्दाज़ा हो जाता लेकिन हम अलमसीह की ख़ुशख़बरी सुनाते हुए तुम तक पहुंच ही गये। हम दूसरों की मेहनत पर बेअन्दाज़ा फ़ख़्र नहीं करते। बल्के उम्मीद रखते हैं, तुम्हारे ईमान में तरक़्क़ी होगी, और तुम्हारी मदद से हमारे काम का दायरा ख़ुदा की मुक़र्रर की हुई हद के मुताबिक़ और भी बढ़ेगा, ताके हम तुम्हारी सरहद से परे दूसरे मुल्कों में भी ख़ुशख़बरी सुना सकें। यह नहीं के किसी दूसरे के इलाक़े में पहले से की गई ख़िदमत पर फ़ख़्र करने लगें। ग़रज़, “जो फ़ख़्र करे वह ख़ुदावन्द पर फ़ख़्र करे।” क्यूंके जो कोई अपने मुंह से अपनी तारीफ़ करता है वह मक़्बूल नहीं होता, बल्के जिसे ख़ुदावन्द नेकनाम ठहराता है वोही मक़्बूल होता है। काश तुम मेरी ज़रा सी बेवक़ूफ़ी बर्दाश्त कर सकते। हां, बर्दाश्त तो तुम करते ही हो! मेरे दिल में तुम्हारे लिये ख़ुदा की सी ग़ैरत है। क्यूंके मैंने एक ही शौहर यानी अलमसीह के साथ तुम्हारी निस्बत तै की है, ताके तुम्हें एक पाक दामन कुंवारी की तरह अलमसीह के पास हाज़िर कर दूं। लेकिन मुझे ख़द्शा है के कहीं तुम्हारे ख़यालात भी हव्वा की तरह, जिसे शैतान सांप ने मक्कारी से बहका दिया था, उस ख़ुलूस और अक़ीदत से जो अलमसीह के लाइक़ है, दूर न हो जायें। अगर कोई तुम्हारे पास आकर किसी दूसरे हुज़ूर ईसा की मुनादी करता है जिस की हम ने मुनादी नहीं की थी, या तुम्हें किसी और तरह की रूह या ख़ुशख़बरी मिलती है, जो पहले न मिली थी, तो तुम बड़ी ख़ुशी से उसे बर्दाश्त कर लेते हो। में अपने आप को उन “अफ़ज़ल रसूलों” किसी बात में कमतर नहीं समझता। में तक़रीर करने के लिहाज़ से बे शऊर सही लेकिन इल्म के लिहाज़ से नहीं। इस का सबूत तो हम हर बात में हर तरह से तुम पर ज़ाहिर कर चुके हैं। मैंने तुम्हें मुफ़्त ख़ुदा की इन्जील सुना कर ख़ुद फ़िरोतनी से काम लिया ताके तुम ऊंचे हो जाओ क्या यह मेरी ख़ता थी? मेरा तुम्हारे दरमियान रह कर दूसरी जमाअतों से उजरत लेना और तुम्हारी ख़िदमत करना गोया ऐसा था। जैसे मैंने तुम्हारे लिये दूसरी जमाअतों को लूटा हो। और जब मैं तुम्हारे पास था और मुझे पैसों की ज़रूरत पड़ी, तो मैंने तुम्हें ज़रा भी तकलीफ़ न दी, क्यूंके सूबे मकिदुनिया से मसीही भाईयों और बहनो ने आकर मेरी ज़रूरत पूरी कर दी थी। और मैंने हर एक बात में तुम पर बोझ डालने से बाज़ रहा और बाज़ रहूंगा। अलमसीह की रास्ती जो मुझ में है, मैं उस की क़सम खाकर कहता हूं के सूबे अख़िया में भी कोई शख़्स मुझे इस फ़ख़्र के इज़हार से बाज़ नहीं रख सकता। आख़िर क्यूं? क्या इसलिये के मैं तुम से महब्बत नहीं रखता? इस का ख़ुदा को इल्म है! जो मैं कर रहा हूं वोही करता रहूंगा ताके मौक़ा परस्तों को इस बात पर फ़ख़्र करने का मौक़ा न मिले के वह भी हमारी ही तरह ख़िदमत कर रहे हैं। ऐसे लोग झूटे रसूल हैं और दग़ाबाज़ी से काम लेते हैं, वह चाहते हैं के वह भी अलमसीह के रसूलों की तरह दिखाई दें। और यह कोई अजीब बात नहीं क्यूंके शैतान भी अपना हुलिया बदल लेता है ताके नूर का फ़रिश्ता दिखाई दे। चुनांचे अगर शैतान के ख़ादिम भी अपना हुलिया बदल कर ख़ुद को रास्तबाज़ी के ख़ादिमो की तरह ज़ाहिर करें, तो यह बड़ी बात नहीं, लेकिन ऐसे लोग अपने किये की सज़ा पा कर रहेंगे। मैं फिर कहता हूं: कोई मुझे बेवक़ूफ़ न समझे। लेकिन अगर तुम मुझे बेवक़ूफ़ समझते हो, तो भी मेरी सुन लो ताके में भी थोड़ा सा फ़ख़्र कर सकूं। मैं जो कुछ कह रहा हूं वह ख़ुदावन्द की तरह नहीं बल्के एक बेवक़ूफ़ की तरह कह रहा हूं, जो अपने आप पर फ़ख़्र करने की जुरअत करता है। जब बहुत से लोग दुनियवी बातों की बिना पर फ़ख़्र करते हैं, तो मैं भी करूंगा। तुम अक़्लमन्द होते हुए भी बेवक़ूफ़ों की बातें बख़ुशी सुन लेते हो! दर-हक़ीक़त, अगर कोई तुम्हें ग़ुलाम बनाता है या तुम्हें लूटता है, या तुम्हें फ़रेब देता है या तुम पर रोब जमाता है, और थप्पड़ रसीद करता है तो तुम यह भी बर्दाश्त कर लेते हो। मुझे शरम आती है के हम ऐसों के मुक़ाबला में बड़े कमज़ोर निकले! अगर किसी को किसी बात पर फ़ख़्र करने की जुरअत है तो ऐसी जुरअत मुझे भी है। यह बात में किसी बेवक़ूफ़ की तरह कह रहा हूं। क्या वोही इब्रानी हैं? मैं भी तो हूं। क्या वोही इस्राईली हैं? मैं भी तो हूं। क्या वोही इब्राहीम की नस्ल हैं? मैं भी तो हूं। क्या वोही, अलमसीह के ख़ादिम हैं? मैं उन से बढ़कर हूं (मेरा यह कहना पागलपन सही।) मैंने उन से बढ़कर मेहनत की है, उन से ज़्यादा क़ैद काटी है। उन से कहीं ज़्यादा कोड़े खाये हैं। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मैंने यहूदियों के हाथों पांच दफ़ा एक कम चालीस, कोड़े खाये। तीन दफ़ा रोमियों ने मुझे छड़ियों से पीटा। एक दफ़ा संगसार भी किया। तीन दफ़ा जहाज़ की तबाही का सामना किया। एक दिन और एक रात खुले समुन्दर में बहता फिरा। में अपने सफ़र के दौरान बारहा दर्याओं के ख़तरों में, डाकूओं के ख़तरों में, अपनी क़ौम के और ग़ैरयहूदियों के, शहर के, ब्याबान के, समुन्दर के ख़तरों में; झूटे मोमिनीन भाईयों के ख़तरों में घिरा रहा हूं। मैंने मेहनत की है, मशक़्क़त से काम लिया है, अक्सर नींद के बग़ैर रहा हूं; मैंने भूक प्यास बर्दाश्त कर के अक्सर फ़ाक़ा किया; मैंने सर्दी में बग़ैर कपड़ों के गुज़ारा किया है। कई और बातों के इलावा, तमाम जमाअतों की फ़िक्र का बोझ मुझे सताता रहा है। किस की कमज़ोरी से मैं कमज़ोर नहीं होता, और किस के गुनाहों में मुब्तिला होने पर मेरा दिल नहीं दुखता? अगर मुझे फ़ख़्र करना ही है, तो मैं उन बातों पर फ़ख़्र करूंगा जो मेरी कमज़ोरी को ज़ाहिर करती हैं। ख़ुदावन्द ईसा का ख़ुदा और बाप, उस की हमेशा तम्जीद हो, जानता है के मैं झूट नहीं बोल रहा हूं। दमिश्क़ शहर के हाकिम ने जो अरितास बादशाह के मातहत था, शहर के फाटकों पर पहरा बिठा रख्खा था ताके मुझे गिरिफ़्तार कर लिया जाये। लेकिन मुझे टोकरे में बिठा कर शहर की दीवार की एक खिड़की से बाहर नीचे उतार दिया गया, और यूं में उस के हाथ से बच निकला। में फ़ख़्र करने पर मजबूर हूं। हालांके इस से कोई फ़ायदा नहीं, मैं उन रोयाओं और मुकाशफ़ों का ज़िक्र करूंगा जो ख़ुदावन्द ने मुझ पर ज़ाहिर किये। अलमसीह पर ईमान लाने वाले की हैसियत से मैं एक ऐसे शख़्स को जानता हूं जो चौदह साल पहले अचानक तीसरे आसमान पर उठा लिया गया। यह सऊद जिस्मानी था या रूहानी मैं नहीं जानता ख़ुदा ही बेहतर जानता है। मुझे मालूम है के यही शख़्स जिस्मानी तौर पर या रूहानी तौर पर, जिस का इल्म ख़ुदा को है, अचानक फ़िरदौस में पहुंच गया और वहां उस ने ऐसी बातें सुनीं जो बयान से बाहर हैं, बल्के आदमी को उन का ज़बान पर लाना भी रवा नहीं। मैं ऐसे शख़्स का ज़िक्र तो फ़ख़्र से करूंगा, लेकिन अपने आप पर फ़ख़्र नहीं करूंगा, सिवाए उन बातों के जो मेरी कमज़ोरी ज़ाहिर करती हैं। अगर फ़ख़्र करना चाहूं भी, तो यह मेरी बेवक़ूफ़ी नहीं समझी जायेगी, इसलिये के मैं सच बोल रहा हूं। बहरहाल में फ़ख़्र करने से बाज़ रहूंगा, क्यूंके जो कोई जैसा मुझे देखता है या जैसा मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर न समझे, मुम्किन था के उन बेशुमार मुकाशफ़ों की वजह से जो मुझे ज़ाहिर किये गये। लिहाज़ा, मैं ग़ुरूर से भर जाता, इसलिये मेरे जिस्म में एक कांटा चुभो दिया गया, जो गोया शैतान का क़ासिद था, जो मुझे मुक्के मारता रहे ताके में फूल न जाऊं। मैंने इस के बारे में ख़ुदावन्द से तीन बार इल्तिमास किया के वह इसे मुझ से दूर कर दे। मगर ख़ुदावन्द ने मुझे जवाब दिया, “मेरा फ़ज़ल तेरे लिये काफ़ी है क्यूंके मेरी क़ुदरत कमज़ोरी ही में पूरी होती है।” लिहाज़ा मैं अपनी कमज़ोरियों पर फ़ख़्र करूंगा, ताके मैं अलमसीह की क़ुदरत के ज़ेरे साया रहूं। यही वजह है के मैं अलमसीह की ख़ातिर कमज़ोरी में, बेइज़्ज़ती में, जरूरतों में, अज़ीय्यतों में और तंगी में ख़ुशी महसूस करता हूं क्यूंके जब में कमज़ोर होता हूं। तो मुझे अपने क़वी होने का एहसास होने लगता है। तुम ने मुझे बेवक़ूफ़ बनने पर मजबूर कर दिया। ज़रूरत तो इस बात की थी के तुम मेरी तारीफ़ करते। अगरचे में कुछ भी नहीं हूं फिर भी तुम्हारे “अफ़ज़ल रसूलों,” से किसी बात में कमतर नहीं। मैंने बहुत से निशानों, हैरत-अंगेज़ कामों और मोजिज़ों के ज़रीये बड़े सब्र के साथ तुम्हारे दरमियान पर यह हक़ीक़त ज़ाहिर कर दी के में भी अलमसीह का रसूल हूं। मेरा माली बोझ उठाने के सिवा तुम दूसरी जमाअतों से किसी भी बात में कम न ठहरे। मैं दरअस्ल तुम पर बोझ नहीं बनना चाहता था। अगर ये नाइन्साफ़ी है तो मैं मुआफ़ी चाहता हूं। अब मैं तीसरी बार तुम्हारे पास आने की तय्यारी कर रहा हूं, लेकिन इस बार भी मैं तुम पर बोझ नहीं डालूंगा, क्यूंके मुझे तुम्हारे माल की ज़रूरत नहीं बल्के तुम्हारी ज़रूरत है। मतलब यह है के बच्चों को मां बाप के लिये नहीं, बल्के मां बाप को बच्चों के लिये माल जमा करना चाहिये। चुनांचे मैं तुम्हारी ख़ातिर रूहों के वास्ते बड़ी ख़ुशी से अपना सब कुछ बल्के ख़ुद भी ख़र्च हो जाने को तय्यार रहूंगा। जब मैं तुम से इस क़दर महब्बत रखता हूं तो क्या तुम मुझ से कम महब्बत रखोगे? जैसे भी हो, मैंने तुम पर बोझ नहीं डाला। शायद, कोई यह कहे के मैं फ़रेबी हूं, इसलिये मैंने तुम्हें फ़रेब दे कर अपने जाल फंसा लिया! ख़ैर! यह बताओ के जिन लोगों को मैंने तुम्हारे पास भेजा, क्या उन में से किसी के ज़रीये मैंने तुम से बेजा फ़ायदा उठाया? मैंने तितुस की मिन्नत की के वह तुम्हारे पास जाये और उस के साथ एक और मसीही भाई को भेजा। किया तितुस ने तुम से बेजा फ़ायदा उठाया? क्या वह और मैं एक ही रूह की हिदायत पा कर एक ही नक़्श क़दम पर नहीं चले? क्या तुम अभी तक यही समझते हो के हम अपनी सफ़ाई पेश कर रहे हैं? हम तो ख़ुदा को हाज़िर नाज़िर जान कर अलमसीह में बोलते हैं; अज़ीज़ों! और यह सब कुछ, तुम्हारी तरक़्क़ी के लिये है। क्यूंके मुझे डर है के वहां आकर में जैसा चाहता हूं तुम्हें वैसा न पाओ। और मुझे भी जैसा तुम चाहते हो वैसा न पाऊं, मुझे अन्देशा है के कहीं तुम में लड़ाई झगड़े, हसद, ग़ुस्सा, तफ़्रिक़े, बदगोई, चुग़लख़ोरी, शेख़ी और फ़साद न हों। कहीं ऐसा न हो के अब आऊं तो ख़ुदा तुम्हारे सामने मुझे आजिज़ कर दे, और मुझे बहुत से लोगों के लिये अफ़सोस करना पड़े जिन्होंने पहले तो गुनाह किये, और फिर अपनी नापाकी, हरामकारी और शहवत-परस्ती से तौबा भी न की। यह तीसरी बार है के मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं। “जिस बात की दो या तीन गवाह अपनी ज़बान से शहादत देंगे वह सच साबित होगी।” जब मैं पिछली बार तुम्हारे पास था तो मैंने ताकीद कर दी थी और अब दूसरी बार भी ग़ैर मौजूदगी में: गुनाह में ज़िन्दगी गुज़ारने वालों बल्के दीगर लोगों को ताकीद करता हूं के अगर फिर आऊंगा तो दर गुज़र नहीं करूंगा। क्यूंके तुम इस बात का सबूत तलब करते हो के अलमसीह मुझ में होकर कलाम करता है। और वह तुम्हारे वास्ते कमज़ोर नहीं बल्के तुम में ज़ोरआवर है। हां, वह कमज़ोरी के सबब से तो मस्लूब हुए मगर ख़ुदा की क़ुदरत के सबब से ज़िन्दा हैं। और हम भी कमज़ोरी में तो उन के शरीक हैं लेकिन ख़ुदा की क़ुदरत से उन की ज़िन्दगी में भी शरीक होंगे ताके तुम्हारी ख़िदमत कर सकें। अपने आप को जांचते रहो के तुम्हारा ईमान मज़बूत है या नहीं। ख़ुद को आज़माते रहो। क्या तुम अपने बारे में यह नहीं जानते के अलमसीह ईसा तुम में ज़िन्दा हैं? अगर नहीं तो तुम इस आज़माइश में नाकाम हुए, लेकिन मुझे उम्मीद है के तुम मालूम कर लोगे के हम नाकाम नहीं। हम ख़ुदा से दुआ करते हैं के तुम कभी बदी न करो, इसलिये नहीं के हम कामयाब मालूम हों बल्के इसलिये के तुम भलाई करो ख़्वाह हम नाकाम ही दिखाई दें। क्यूंके हम हक़ के बरख़िलाफ़ कुछ नहीं कर सकते, बल्के उस की ताईद ही कर सकते हैं। अगर तुम सच-मुच ज़ोरआवर हो तो हम अपने कमज़ोर होने पर भी ख़ुश हैं; और यह दुआ भी करते हैं के तुम ख़ूब कामिल होते चले जाओ। इसलिये मैं तुम्हारी ग़ैर मौजूदगी में यह बातें ख़त में लिख रहा हूं ताके जब वहां तुम्हारे पास पहुचूं तो मुझे तुम्हारे साथ सख़्ती से पेश न आना पड़े और मैं ख़ुदावन्द के दिये हुए इख़्तियार को तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं, बल्के बनाने के लिये काम में लाऊं। अब आख़िर में यह लिखता हूं के भाईयो और बहनों, ख़ुश रहो, कामिल बनो, तसल्ली पाओ, एक दिल रहो, मेल-जोल रखो और ख़ुदा जो महब्बत और मेल-जोल का सरचश्मा है तुम्हारे साथ होगा। पाक बोसे के साथ एक दूसरे को मेरा सलाम कहना। सब ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के मुक़द्दसीन तुम्हें सलाम कहते हैं। ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल, ख़ुदा की महब्बत और पाक रूह की रिफ़ाक़त, तुम सब के साथ होती रहे। पौलुस की तरफ़ से जो न तो इन्सानों की तरफ़ से, न किसी आदमी की तरफ़ से, बल्के ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह और ख़ुदा बाप की तरफ़ से रसूल मुक़र्रर किये गये, जिस ख़ुदा ने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा किया। और उन सब मसीही भाईयों और बहनो की तरफ़ से जो मेरे साथ हैं, गलतिया सूबे की जमाअतों के नाम लिख्खा गया ख़त: हमारे ख़ुदा बाप और हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे! अलमसीह ने अपने आप को हमारे गुनाहों के बदले में क़ुर्बान कर दिया, ताके वह हमें हमारे ख़ुदा और बाप की मर्ज़ी के मुताबिक़ इस मौजूदा बुरे ज़माने से बचा ले। उस की तम्जीद हमेशा तक होती रहे। आमीन। मुझे तअज्जुब है के तुम किसी और ख़ुशख़बरी की तरफ़ माइल हो रहे हो और जिस ने तुम्हें ख़ुदावन्द अलमसीह के फ़ज़ल से बुलाया था, तुम इतनी जल्दी उस से मुंह मोड़ रहे हो। कोई दूसरी ख़ुशख़बरी है ही नहीं। हां, कुछ लोग हैं जो ख़ुदावन्द अलमसीह की ख़ुशख़बरी को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और तुम्हें उलझन में डाले हुए हैं। लेकिन अगर हम या आसमान का कोई फ़रिश्ता उस ख़ुशख़बरी के इलावा जो हम ने तुम्हें सुनाई, कोई और ख़ुशख़बरी सुनाता है तो उस पर लानत हो। जैसा हम पहले कह चुके हैं वैसा ही मैं फिर कहता हूं: उस ख़ुशख़बरी के इलावा जिस पर तुम ईमान लाये थे, अगर कोई तुम्हें और ही ख़ुशख़बरी सुनाता है तो वह मलऊन ठहरे! क्या मैं आदमियों का मन्ज़ूरे नज़र बनना चाहता हूं या ख़ुदा का? क्या मैं आदमियों को ख़ुश करना चाहता हूं? अगर मैं आदमियों को ख़ुश करने की कोशिश में लगा रहता तो ख़ुदावन्द अलमसीह का ख़ादिम न होता। ऐ भाईयो और बहनों! मैं तुम्हें जताना चाहता हूं के जो ख़ुशख़बरी मैंने तुम्हें सुनाई है वह ऐसी बात नहीं जो किसी इन्सान की गढ़ी हुई हो। मैंने उसे किसी आदमी से हासिल नहीं किया, न वह मुझे किसी तालीम के ज़रीये सिखाया गया; बल्के, ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से उन का इन्किशाफ़ मुझ पर हुआ। तुम ने तो सुना है के जब मैं यहूदी मज़हब का पाबन्द था तो मेरा चाल चलन कैसा था। मैं ख़ुदा की जमाअत को कैसी बेरहमी से सताता और उसे तबाह करने की कोशिश करता था। मैं बतौर एक यहूदी अपने हमअस्र यहूदियों से ज़्यादा कट्टर होता जाता था, और बुज़ुर्गों की रिवायतों पर सरगर्मी के साथ अमल करता था। लेकिन ख़ुदा ने मुझे मेरे पैदा होने से क़ब्ल ही चुन लिया और जब उस की मर्ज़ी हुई, उस ने अपने फ़ज़ल से मुझे अपनी ख़िदमत के लिये बुला लिया ताके वह अपने बेटे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का इरफ़ान मुझे बख़्शे और मैं ग़ैरयहूदियों को उस की ख़ुशख़बरी सुनाऊं। मैंने इस वक़्त गोश्त और ख़ून से सलाह न ली। और न यरूशलेम में उन के पास गया, जो मुझ से पहले रसूल मुक़र्रर किये गये थे बल्के फ़ौरन मुल्क-ए-अरब चला गया और फिर वहां से दमिश्क़ शहर लौट आया। तीन बरस बाद, मैं कैफ़ा से मुलाक़ात करने के लिये यरूशलेम गया और पन्द्रह दिन तक उन के पास रहा। मगर दूसरे रसूलों में से सिवाए ख़ुदावन्द के भाई, याक़ूब के किसी और से मुलाक़ात न कर सका। ख़ुदा जानता है के जो बातें मैं तुम्हें लिख रहा हूं, बिलकुल सच्ची हैं। इस के बाद मैं सीरिया और किलकिया के इलाक़ों में चला गया। अगरचे यहूदिया सूबे की जमाअतें जो हुज़ूर अलमसीह पर ईमान रखती हैं मेरी शक्ल ओ-सूरत से नाआश्ना थीं। लेकिन उन्होंने मेरे बारे में यह ज़रूर सुन रखा था: “जो शख़्स पहले हमें सताता था वह अब उसी ईमान की ख़ुशख़बरी की मुनादी करता है जिसे वह मिटा देने पर तुला हुआ था।” और उन्होंने मेरी इस तब्दीली के बाइस ख़ुदा की तम्जीद की। चौदह बरस बाद, मैं फिर यरूशलेम चला गया, और बरनबास और तितुस को साथ ले गया। मेरा वहां जाना ख़ुदाई मुकाशफ़े के तहत हुआ, मैंने उन को वही मुनादी की, जिस ख़ुशख़बरी की तब्लीग़ मैंने ग़ैरयहूदियों को की थी, ख़ुफ़िया तौर से जमाअत में मोतबर समझे जाने वाले उन लोगों से मुलाक़ात की, इस ख़ौफ़ से कहीं ऐसा न हो के मेरी पहले की या अब तक की गई दौड़ धूप, बेफ़ाइदा जाये। चुनांचे मेरे साथी तितुस को, ख़तना कराने पर मजबूर नहीं किया गया, जब के वह यूनानी था। ख़तना का सवाल उन मसीही मुनाफ़क़ीन की तरफ़ से उठाया गया था, जो चुपके से हम लोगों में दाख़िल हो गये थे ताके अलमसीह ईसा में हासिल हुई उस आज़ादी की जासूसी कर के, हमें फिर से यहूदी रस्म-ओ-रिवाज का ग़ुलाम बना दें। लेकिन हम ने दम भर के लिये भी उन की इताअत क़बूल न की ताके ख़ुशख़बरी की सच्चाई तुम में क़ाइम रहे। जमाअत के उन अराकीन से जो अहम समझे जाते थे, मुझे कोई भी नई बात हासिल न हुई (वह कैसे भी थे, मुझे इस से कोई वास्ता नहीं क्यूंके ख़ुदा की नज़र में सब बराबर हैं)। इस के बरअक्स, हमें मालूम हुआ के जिस तरह यहूदी मख़्तूनों को ख़ुशख़बरी सुनाने का काम पतरस के सुपुर्द हुआ, उसी तरह ग़ैरयहूदी नामख़्तूनों को ख़ुशख़बरी सुनाने का काम मेरे सुपुर्द हुआ। क्यूंके जिस ख़ुदा ने पतरस पर असर डाला के वह मख़्तूनों के लिये रसूल बने, उसी ने मुझ पर असर डाला के मैं ग़ैरयहूदियों के लिये रसूल बनूं। वहां याक़ूब, कैफ़ा और यूहन्ना जमाअत के सुतून समझे जाते थे, जब उन पर यह हक़ीक़त खुली के ख़ुदा ने मुझे भी रिसालत की तौफ़ीक़ अता फ़रमाई है तो उन्होंने मुझ से और बरनबास से दायां हाथ मिला कर हमें अपनी रिफ़ाक़त में क़बूल कर लिया। ताके हम ग़ैरयहूदियों में ख़िदमत करें, और वो मख़्तूनों में। उन्होंने सिर्फ़ यह कहा के गरीबों को याद रखना, और दरअस्ल यह तो मैं पहले ही से करने को तय्यार था। जब कैफ़ा अन्ताकिया शहर में आया, तो मैंने सब के सामने उस की मुख़ालफ़त की, क्यूंके वह मलामत के लाइक़ था। बात यह थी के वह याक़ूब की तरफ़ से चन्द अश्ख़ास के भेजे जाने से पेशतर, ग़ैरयहूदियों के साथ खाना खा लिया करते थे। मगर जब वह लोग वहां पहुंचे, तो पतरस ने मख़्तूनों के ख़ौफ़ से ग़ैरयहूदियों से किनारा कर लिया। बाक़ी यहूदी मसीही भाईयों ने इस रियाकारी में पतरस का साथ दिया, यहां तक के उन की रियाकारी से बरनबास के क़दम भी डगमगा गये। जब मैंने देखा के उन की यह हरकत ख़ुशख़बरी की सच्चाई के बरख़िलाफ़ है तो मैंने सब के सामने कैफ़ा से कहा, “तुम यहूदी होने के बावुजूद ग़ैरयहूदियों की तरह ज़िन्दगी गुज़ारते हो। तो किस मुंह से, ग़ैरयहूदियों को मजबूर करते हो के वह यहूदियों के रस्म-ओ-रिवाज की पैरवी करें? “हम पैदाइशी यहूदी ज़रूर हैं और ग़ैरयहूदी गुनहगारों में से नहीं फिर भी हम यह जानते हैं के इन्सान जिस्मानी शरीअत पर अमल करने से नहीं, बल्के सिर्फ़ ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह पर ईमान लाने से रास्तबाज़ ठहराया जाता है। इसलिये, हम भी, अलमसीह ईसा पर ईमान लाये ताके शरीअत पर अमल करने से नहीं बल्के अलमसीह पर ईमान लाने से रास्तबाज़ ठहराये जायें, क्यूंके शरीअत के आमाल से कोई इन्सान रास्तबाज़ नहीं ठहराया जा सकता। “लेकिन, हम जो यह चाहते हैं के अलमसीह में रास्तबाज़ ठहराये जायें, अगर ख़ुद ही गुनहगार निकलें तो क्या अलमसीह गुनाह का बाइस हैं? हरगिज़ नहीं! शरीअत की जो दीवारें मैंने गिरा दी थीं, अगर उन्हें फिर से खड़ा करने लगूं तो अपने आप को ही क़ुसूरवार ठहराता हूं। “शरीअत के एतबार से तो मैं सलीब पर मर चुका हूं, ताके मैं ख़ुदा के एतबार से ज़िन्दा हो जाऊं। मैं अलमसीह के साथ जिस्मानी तौर से मस्लूब हो चुका हूं और मैं ज़िन्दा नहीं हूं, बल्के अलमसीह मुझ में ज़िन्दा है। और जो ज़िन्दगी अब मैं गुज़ार रहा हूं वह ख़ुदा के बेटे पर ईमान लाने की वजह से गुज़ार रहा हूं, जिस ने मुझ से महब्बत की और मेरे लिये अपनी जान क़ुर्बान कर दी। मैं ख़ुदा के इस फ़ज़ल को रद्द नहीं करता, क्यूंके अगर रास्तबाज़ी शरीअत के वसीले से हासिल की जा सकती थी, तो अलमसीह ने बिला मक़सद अपनी जान क़ुर्बान की!” नादान गलतियो! तुम पर किस ने जादू कर दिया? तुम्हारी तो गोया आंखों के सामने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह को सलीब पर टंगा दिखाया गया था। मैं तो तुम से सिर्फ़ यह मालूम करना चाहता हूं: क्या तुम ने शरीअत पर अमल कर के पाक रूह को पाया, या ईमान की ख़ुशख़बरी के पैग़ाम को सुन कर उसे हासिल किया? तुम किस क़दर नादान हो? पाक रूह की मदद से शुरू किये हुए काम को अब जिस्मानी कोशिश से पूरा करना चाहते हो? क्या तुम ने इतनी तकलीफ़ें बेफ़ाइदा उठाई हैं? तुम्हें कुछ फ़ायदा तो ज़रूर हुआ होगा? किया ख़ुदा अपना पाक रूह इसलिये तुम्हें देता है और तुम्हारे दरमियान इसलिये मोजिज़े करता है के तुम शरीअत के मुताबिक़ अमल करते हो, या इसलिये के जो पैग़ाम तुम ने सुना उस पर ईमान लाये हो? हज़रत इब्राहीम को देखो। वह “ख़ुदा पर ईमान लाये और उन का ईमान उन के लिये रास्तबाज़ी शुमार किया गया।” पस जान लो के ईमान लाने वाले लोग ही हज़रत इब्राहीम के हक़ीक़ी फ़र्ज़न्द हैं। किताब-ए-मुक़द्दस ने पहले ही से बता दिया था के ख़ुदा ग़ैरयहूदियों को ईमान से रास्तबाज़ ठहराता है: “चुनांचे उस ने पहले ही से हज़रत इब्राहीम को यह ख़ुशख़बरी सुना दी थी के तेरे वसीले से सब ग़ैरयहूदी क़ौमें बरकत पायेंगी।” पस जो ईमान लाते हैं वह भी ईमान लाने वाले इब्राहीम के साथ बरकत पाते हैं। मगर जितने शरीअत के आमाल पर तकिया करते हैं वह सब लानत के मातहत हैं। चुनांचे किताब-ए-मुक़द्दस यूं बयान करती है: “जो कोई शरीअत की किताब की सारी बातों पर अमल नहीं करता वह लानती है।” अब यह साफ़ ज़ाहिर है के शरीअत के वसीले से कोई शख़्स ख़ुदा की हुज़ूरी में रास्तबाज़ नहीं ठहराया जाता, क्यूंके लिख्खा है: “रास्तबाज़ ईमान से ज़िन्दा रहेगा।” तो भी शरीअत ईमान पर मब्नी नहीं है; बल्के इस के बरअक्स किताब-ए-मुक़द्दस का बयान करती है, “जो शख़्स शरीअत पर अमल करता है, वह शरीअत की वजह से ज़िन्दा रहेगा।” अलमसीह ने जो हमारे लिये लानती बना, हमें मोल ले कर शरीअत की लानत से छुड़ा लिया क्यूंके सहीफ़े में लिख्खा है: “जो कोई सलीब की लकड़ी पर लटकाया गया वह लानती है।” ताके हज़रत इब्राहीम को दी हुई बरकत अलमसीह ईसा के वसीले से ग़ैरयहूदियों तक भी पहुंचे, और हम ईमान के वसीले से उस पाक रूह को हासिल करें जिस का वादा किया गया है। ऐ भाईयो और बहनों, मैं रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक मिसाल पेश करता हूं। जब एक बार किसी इन्सानी अह्द पर फ़रीक़ैन के दस्तख़त हो जाते हैं तो कोई उसे बातिल नहीं कर सकता, और न ही उस में कुछ बढ़ा सकता है। ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम और उस की नस्ल से वादे किये। सहीफ़ा ये नहीं कहता “तुम्हारी नस्लों से यानी कई नस्लें” यहां लफ़्ज़ “तुम्हारी नस्ल” से सिर्फ़ एक ही शख़्स मुराद है, यानी अलमसीह। मेरा मतलब यह है के जो अह्द ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम के साथ बांधा था और जिस की उस ने तस्दीक़ कर दी थी, उसे शरीअत बातिल नहीं ठहरा सकती जो चार सौ तीस बरस बाद आई और न उस वादे को मन्सूख़ कर सकती है। अगर मीरास का हुसूल शरीअत पर मब्नी है, तो वह वादे पर मब्नी नहीं हो सकता; लेकिन ख़ुदा ने फ़ज़ल से हज़रत इब्राहीम को यह मीरास अपने वादे ही के मुताबिक़ बख़्शी। फिर शरीअत क्यूं दी गई? वह इन्सान की नाफ़रमानियों की वजह से बाद में दी गई ताके उस नस्ल के आने तक क़ाइम रहे जिस से वादा किया गया था। और वह फ़रिश्तों के वसीले से एक दरमियानी शख़्स की मारिफ़त मुक़र्रर की गई। अब दरमियानी, सिर्फ़, एक फ़रीक़ के लिये नहीं होता; लेकिन ख़ुदा एक ही है। तो क्या शरीअत ख़ुदा के वादों के ख़िलाफ़ है? हरगिज़ नहीं। क्यूंके अगर कोई ऐसी शरीअत दी जाती जो ज़िन्दगी-बख़्श सकती, तो रास्तबाज़ी शरीअत के ज़रीये हासिल की जा सकती थी। मगर सहीफ़े के मुताबिक़ सारी दुनिया गुनाह की क़ैद में है, ताके वह वादा जो ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह पर ईमान लाने पर मब्नी है उन सब के हक़ में पूरा किया जाये, जो अलमसीह पर ईमान लाये हैं। ईमान के ज़माने से पहले, हम शरीअत के तहत क़ैद में थे, और जो ईमान ज़ाहिर होने वाला था उस के आने तक हमारी यही हालत रही। पस शरीअत ने उस्ताद बन कर हमें अलमसीह तक पहुंचा दिया ताके हम ईमान के वसीले से रास्तबाज़ ठहराये जायें। मगर अब ईमान का दौर आ गया है, और हमें उस्ताद के तहत रहने की ज़रूरत नहीं रही। इसलिये के तुम सब अलमसीह ईसा पर ईमान लाने के वसीले से ख़ुदा के फ़र्ज़न्द बन गये हो, और तुम सब जिन्होंने अलमसीह के साथ एक हो जाने का पाक-ग़ुस्ल पाया उसे लिबास की तरह पहन लिया है। अब तुम में यहूदी, यूनानी, ग़ुलाम, आज़ाद, मर्द और औरत की तफ़रीक़ बाक़ी नहीं रही क्यूंके अब तुम सब अलमसीह ईसा में एक हो गये हो। अगर तुम अलमसीह के हो तो हज़रत इब्राहीम की नस्ल हो और वादे के मुताबिक़ वारिस भी हो। मैं यह कहता हूं के वारिस जब तक बच्चा है, उस की और एक ग़ुलाम की हालत में कोई फ़र्क़ नहीं हालांके वह अपने बाप की सारी जायदाद का मालिक होता है। और वह बाप की मुक़र्रर की हुई मीआद के पूरा होने तक सरपरस्तों और मुख़्तारों के इख़्तियार में रहता है। इसी तरह हम भी जब बच्चे थे तो दुनियवी इब्तिदाई बातों के ग़ुलाम होकर ज़िन्दगी बसर करते थे। लेकिन जब वक़्त पूरा हो गया तो ख़ुदा ने अपने बेटे को भेजा जो औरत से पैदा हुआ और शरीअत के मातहत पैदा हुआ, ताके उन्हें जो शरीअत के मातहत हैं ख़रीद कर छुड़ा ले और हम मुतनब्बा फ़र्ज़न्द होने का दर्जा पायें। चूंके तुम फ़र्ज़न्द हो इसलिये ख़ुदा ने अपने बेटे का रूह हमारे दिलों में भेजा और वह रूह, “ अब्बा, यानी ऐ बाप” कह कर पुकारता है। पस अब तुम ग़ुलाम नहीं रहे बल्के बेटे बन चुके हो और बेटे बन जाने के बाद ख़ुदा के वसीले से वारिस भी हो। हुज़ूर ईसा पर ईमान लाने से पहले तुम ख़ुदा से वाक़िफ़ न होने की वजह से ऐसे माबूदों के ग़ुलाम बने हुए थे जो हक़ीक़ी माबूद नहीं। मगर अब जब के तुम ने ख़ुदा को पहचान लिया है बल्के ख़ुदा ने तुम्हें पहचान है तो तुम क्यूं उन ज़ईफ़ और फ़ुज़ूल इब्तिदाई बातों की तरफ़ लौट रहे हो? क्या फिर से उन की ग़ुलामी में ज़िन्दगी गुज़ारना चाहते हो? तुम ख़ास-ख़ास दिनों, महीनों, मौसमों और बरसों को मुबारक मानते हो। मुझे डर है के जो मेहनत मैंने तुम पर की है, कहीं वह बेफ़ाइदा न रह जाये। ऐ भाईयो और बहनों, में तुम्हारी मिन्नत करता हूं के मेरी मानिन्द बनूं क्यूंके में भी तुम्हारी मानिन्द हूं। तुम ने मेरा कुछ नहीं बिगाड़ा। तुम्हें याद होगा के मैंने पहली दफ़ा जिस्मानी बीमारी की हालत में तुम्हें ख़ुशख़बरी सुनाई थी। मेरी बीमारी ने तुम्हें काफ़ी जिस्मानी अज़ीय्यतों में डाल दिया था। लेकिन इस के बावुजूद तुम ने न तो मुझे हक़ीर जान और न ही मुझ से नफ़रत की, बल्के मुझे ख़ुदा का फ़रिश्ता समझ कर अलमसीह ईसा की मानिन्द क़बूल किया। उस वक़्त, तुम ने बड़ी ख़ुशी मनाई थी। अब, वह ख़ुशी कहां गई? क्यूंके में तो तुम्हारा गवाह हूं के, अगर मुम्किन होता तो तुम अपनी आंखें भी निकाल कर मुझे दे देते। क्या तुम से हक़ बोलने की वजह से में तुम्हारा दुश्मन हो गया? वह लोग तुम्हें अपनाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन उन की नीयत साफ़ नहीं है। वह तुम्हें हम से जुदा कर देना चाहते हैं ताके तुम उन ही के बने रहो। अच्छा है के वह लोग नेकनियती से तुम्हें अपनाने की हर वक़्त कोशिश करें न के महज़ उस वक़्त जब में वहां तुम्हारे पास मौजूद होता हूं। मेरे बच्चो! में तुम्हारे लिये फिर से बच्चा जनने वाली औरत की तरह दर्द महसूस करता हूं यह दर्द जारी रहेगा जब तक के अलमसीह की सूरत तुम में क़ाइम न हो जाये, मेरा जी चाहता है के अभी तुम्हारे पास पहुंच जाऊं और अपना लहजा बदल लूं क्यूंके में तुम्हारी तरफ़ से बड़ी उलझन में हूं। मुझे बताओ! तुम जो शरीअत के मातहत होना चाहते हो, किया शरीअत की बातें सुनाने के लिये तय्यार नहीं? सहीफ़े में लिख्खा है के इब्राहीम के दो बेटे थे। एक लौंडी से, दूसरा आज़ाद औरत से। लौंडी का बेटा आम जिस्मानी बच्चों की तरह लेकिन आज़ाद का बेटा ख़ुदा के वादे के मुताबिक़ पैदा हुआ। यह बातें तम्सील के तौर पर हैं। इसलिये यह औरतें गोया दो अह्द हैं। हाजिरा उस अह्द की मिसाल है जो कोहे सीना पर बांधा गया और जिस से ग़ुलाम ही पैदा होते हैं। और वह हाजिरा, अरब के कोहे सीना की मानिन्द है जिस का मुक़ाबला मौजूदा यरूशलेम से किया जा सकता है, जो अपने लड़कों यानी बाशिन्दों समेत ग़ुलामी में है। मगर आसमानी यरूशलेम आज़ाद है और वोही हमारी मां है। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस में लिख्खा है: “ऐ बांझ! तू जिस के औलाद नहीं होती, ख़ुशी मनाना; तू जो दर्देज़ेह से वाक़िफ़ नहीं, आवाज़ बुलन्द कर के चिल्ला; तूने जो कभी मेहनत नहीं की; क्यूंके बेकस छोड़ी हुई की औलाद शौहर वाली की औलाद से ज़्यादा होगी।” लिहाज़ा, मेरे भाईयो और बहनों, तुम इज़हाक़ की तरह वादे के फ़र्ज़न्द हो। उस वक़्त जो बच्चा आम जिस्मानी बच्चों की तरह पैदा हुआ था वह उस बच्चा को सताता था जो ख़ुदा के रूह की क़ुदरत से पैदा हुआ था। वैसे ही अब भी होता है। मगर सहीफ़े का क्या बयान है? “यह के लौंडी और उस के बेटे को निकाल दे क्यूंके लौंडी का बेटा आज़ाद के बेटे के साथ उस की मीरास में हरगिज़ वारिस न होगा।” चुनांचे, मेरे भाईयो और बहनों, हम लौंडी के बेटे नहीं बल्के आज़ाद के हैं। अलमसीह ने हमें आज़ाद कर दिया ताके हम हमेशा आज़ाद रहें। पस साबित-क़दम रहो, और दुबारा ग़ुलामी के जूए में मत जुतो। देखो! मैं पौलुस, ख़ुद तुम से कहता हूं के अगर तुम ख़तना कराओगे तो तुम्हें अलमसीह से कुछ भी फ़ायदा न होगा। में हर उस आदमी से जो ख़तना कराता है बतौर गवाह यह कहता हूं के उसे सारी शरीअत पर अमल करना फ़र्ज़ है। तुम जो शरीअत के वसीले से रास्तबाज़ ठहरने की कोशिश कर रहे हो अलमसीह से जुदा हो गये हो; और फ़ज़ल से हाथ धो बैठे हो। मगर हम पाक रूह के वसीले से ईमान से रास्तबाज़ ठहराये जायेंगे और इस का हम उम्मीद से इन्तिज़ार कर रहे हैं। और जो कोई अलमसीह ईसा में है उस का ख़तना कराना या न कराना इतना मुफ़ीद नहीं। जितना मुफ़ीद अलमसीह पर ईमान रखना है जो महब्बत के ज़रीये असर करता है। तुम ईमान की दौड़ अच्छी तरह दौड़ रहे थे। किस ने नागहां मुदाख़लत कर के तुम्हें हक़ के मानने से रोक दिया? यह तरग़ीब ख़ुदा की तरफ़ से नहीं हो सकती जिस ने तुम्हें बुलाया है। “थोड़ा सा ख़मीर सारे गुंधे हुए आटे को ख़मीर कर देता है।” मुझे ख़ुदावन्द में तुम्हारे बारे में यक़ीन है के तुम मेरे ख़्याल से मुत्तफ़िक़ होगे। और जो शख़्स तुम्हें परेशान कर रहा है, सज़ा पायेगा, ख़्वाह वह कोई भी हो। ऐ भाईयो और बहनों! अगर मैं अब तक ख़तना की मुनादी करता हूं तो किस वजह से सताया जा रहा हूं? अगर मैं ख़तना की तालीम देता तो सलीब किसी के लिये ठोकर का बाइस न होती जिस की मैं मुनादी करता हूं। जो तुम्हें ख़तना कराने पर मजबूर करते हैं, काश वह ख़तने के वक़्त अपने आज़ा भी कट्वा देते! मेरे भाईयो और बहनों! तुम आज़ाद होने के लिये बुलाए गये हो। लेकिन इस आज़ादी को अपनी जिस्मानी नफ़्सानी ख़ाहिशात के लिये इस्तिमाल न करो; बल्के, महब्बत से एक दूसरे की ख़िदमत करते रहो। क्यूंके सारी शरीअत का ख़ुलासा इस एक हुक्म में पाया जाता है: “तुम अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखो।” अगर तुम एक दूसरे को काटते फाड़ते और खाते हो तो ख़बरदार रहना, कहीं ऐसा न हो के एक दूसरे को ख़त्म कर डालो। मेरा मतलब यह है, अगर तुम पाक रूह के कहने पर चलोगे तो जिस्म की बुरी ख़ाहिशों को हरगिज़ पूरा न करोगे। क्यूंके जिस्म पाक रूह के ख़िलाफ़ ख़ाहिश करता है, और पाक रूह जिस्म के ख़िलाफ़। यह दोनों एक दूसरे के मुख़ालिफ़ हैं, ताके जो तुम चाहते हो वह न कर सको। अगर तुम पाक रूह की हिदायत से ज़िन्दगी गुज़ारते हो, तो शरीअत के मातहत नहीं हो। अब इन्सानी फ़ितरत के काम साफ़ ज़ाहिर हैं यानी जिन्सी बदफ़ेली, नापाकी और शहवत-परस्ती; बुतपरस्ती, जादूगरी; दुश्मनी, झगड़ा, हसद, ग़ुस्सा, ख़ुदग़रज़ी, तकरार, फ़िर्क़ा परस्ती, बुग़्ज़, नशा बाज़ी, नाच रंग और इन की मानिन्द दीगर काम। इन की बाबत मैंने पहले भी तुम्हें ख़बरदार किया था, और अब फिर कहता हूं के ऐसे काम करने वाले ख़ुदा की बादशाही में कभी शरीक न होंगे। मगर पाक रूह का फल, महब्बत, ख़ुशी, इत्मीनान, सब्र, मेहरबानी, नेकी, वफ़ादारी, नरमी और परहेज़गारी है। ऐसे कामों की कोई शरीअत मुख़ालफ़त नहीं करती। और जो अलमसीह ईसा के हैं उन्होंने अपने जिस्म को उस की रग़बतों और बुरी ख़ाहिशों समेत सलीब पर चढ़ा दिया है। अगर हम पाक रूह के सबब से ज़िन्दा हैं तो लाज़िम है के पाक रूह की हिदायत के मुवाफ़िक़ ज़िन्दगी गुज़ारें। हमें शेख़ी मारना, एक दूसरे को भड़काना या एक दूसरे से हसद करना छोड़ देना चाहिये। ऐ भाईयो और बहनों! अगर कोई शख़्स किसी क़ुसूर में पकड़ा जाये तो तुम जो पाक रूह की हिदायत पर चलते हो, ऐसे शख़्स को नरम मिज़ाजी के साथ बहाल कर दो। और साथ ही अपना भी ख़्याल रखो के कहीं तुम भी किसी आज़माइश का शिकार न हो जाओ। एक दूसरे का बोझ उठाने में मददगार बनो, और यूं अलमसीह की शरीअत को पूरा करो। अगर कोई अपने आप को कुछ समझता है लेकिन कुछ भी नहीं है, तो वह ख़ुद को धोका देता है। चुनांचे हर शख़्स अपने ही किरदार का इम्तिहान ले। तो उसे किसी दूसरे से मुक़ाबला किये बग़ैर ख़ुद ही पर फ़ख़्र करने का मौक़ा मिलेगा, क्यूंके हर एक अपने ही कामों का ज़िम्मेदार है। बहरहाल कलाम-ए-ख़ुदा की तालीम पाने वाला अपनी सारी अच्छी चीज़ों में अपने मुअल्लिम को भी शरीक करे। फ़रेब न खाओ: ख़ुदा ठठ्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्यूंके आदमी जो कुछ बोता है वोही काटेगा। अगर कोई अपनी जिस्मानी ख़ाहिशों का ख़्याल रखते हुए बोता है, तो वह मौत की फ़सल काटेगा; और जो पाक रूह का ख़्याल रखते हुए बोता है, वह अब्दी ज़िन्दगी की फ़सल काटेगा। हम नेकी करने से बेज़ार न हूं क्यूंके अगर मायूस नहीं होंगे तो ऐन वक़्त पर फ़सल काटेंगे। चुनांचे जहां तक मौक़ा मिले, हम सब के साथ नेकी करें, ख़ासतौर पर अहल-ए-ईमान के साथ। देखो! मैं अपने हाथ से कैसे बड़े-बड़े हुरूफ़ में तुम्हें लिख रहा हूं। जो लोग जिस्मानी नुमूद-ओ-नुमाइश की फ़िक्र में हैं वह तुम्हें ख़तना कराने पर महज़ इसलिये मजबूर करते हैं, वह अलमसीह की सलीब के सबब से ख़ुद सताये न जायें। क्यूंके ख़तना कराने वाले ख़ुद भी शरीअत पर अमल नहीं करते, लेकिन तुम्हें ख़तना कराने पर मजबूर करते हैं ताके वह फ़ख़्र कर सकें के तुम ने इस जिस्मानी रस्म को क़बूल कर लिया है। ख़ुदा न करे के में किसी चीज़ पर फ़ख़्र करूं सिवा अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की सलीब के, जिस के ज़रीये दुनिया मेरे लिये मस्लूब हो गई है और मैं दुनिया के लिये। सच तो यह है के ख़तना कराना या न कराना अहम नहीं; लेकिन नई मख़्लूक़ बन जाना बड़ा अहम है। और जितने इस क़ाइदे पर चलते हैं, उन सब को और ख़ुदा के इस्राईल को इत्मीनान और रहम हासिल होता रहे। मुझे आख़िरी बात कहना है, कोई मुझे तकलीफ़ न दे क्यूंके में अपने बदन पर हुज़ूर ईसा के दाग़ लिये फिरता हूं। ऐ भाईयो और बहनो! हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल, तुम सब की रूह के साथ होता रहे। आमीन। पौलुस की तरफ़ से जो ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा के रसूल हैं, उन मुक़द्दसीन के नाम ख़त लिख्खा जो इफ़िसुस शहर में रहते हैं, और अलमसीह ईसा पर ईमान रखते हैं: हमारे ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ख़ुदा और बाप की तारीफ़ हो जिस ने हमें अलमसीह में आसमान की हर रूहानी बरकत बख़्शी है। ख़ुदा ने हमें दुनिया के बनाये जाने के पेशतर ही से अलमसीह में चुन लिया था ताके हम ख़ुदा के हुज़ूर महब्बत में पाक और बेऐब हों। ख़ुदा ने अपनी ख़ुशी से पहले ही यह नेक फ़ैसला कर लिया था, वह हमें हुज़ूर ईसा अलमसीह के ज़रीये अपने ले पालक फ़र्ज़न्द बनाये ताके उन के इस जलाली फ़ज़ल की सिताइश हो जो ख़ुदा ने अपने अज़ीज़ बेटे के वसीले से हमें मुफ़्त इनायत की। हमें उस फ़ज़ल की बदौलत, अलमसीह के ख़ून के वसीले से, मुख़्लिसी यानी गुनाहों की मुआफ़ी हासिल होती है। जो ख़ुदा ने हर तरह की हिक्मत और दानाई से हम पर इफ़रात के साथ नाज़िल किया, और ख़ुदा ने अपनी ख़ुशी से उस पोशीदा मक़सद को हम पर ज़ाहिर कर दिया, जिस का ख़ुदा ने अलमसीह की मारिफ़त अमल में लाने का इरादा किया हुआ था, उस वक़्त तक अमल में लाया जाये ताके औक़ात मुक़र्ररः पर सब चीज़ें ख़्वाह वह आसमान की हों या ज़मीन की, अलमसीह में मुत्तहिद की जायें। ख़ुदा की मस्लहत यह है के सब कुछ उस की मर्ज़ी के मुताबिक़ हो, ख़ुदा ने हमें अपनी मीरास के लिये पहले ही से चुन रख्खा था, ताके हम, जिन की उम्मीद पहले ही से अलमसीह से वाबस्ता थी, उन के जलाल की सिताइश का बाइस बनें। और जब तुम ने कलाम हक़ को सुना, जो तुम्हारी नजात की ख़ुशख़बरी है। और जब तुम अलमसीह पर ईमान लाये, तो ख़ुदा ने अपने वादे के मुताबिक़ तुम्हें पाक रूह दे कर तुम पर अपनी मुहर लगा दी, वह पाक रूह हमें मिलने वाली मीरास का बैआनः है गोया इस बात की ज़मानत है के हम मुख़्लिसी पा कर ख़ुदा की मिल्कियत बन जायें ताके उस के जलाल की सिताइश हो। जब से मैंने सुना है के तुम ख़ुदावन्द ईसा पर बड़ा ईमान रखते हो और सब मुक़द्दसीन से महब्बत रखते हो, में ख़ुदा का शुक्र बजा लाने से बाज़ नहीं आता, और अपनी दुआओं में तुम्हें याद करता हूं। के हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का ख़ुदा जो जलाली बाप है, तुम्हें हिक्मत और मुकाश्फ़ा की रूह अता फ़रमाये, ताके तुम उसे बेहतर तौर पर पहचान सको। और मैं दुआ करता हूं के तुम्हारे दिल की आंखें रोशन हो जायें ताके तुम जान लो के ख़ुदा ने जिस उम्मीद की तरफ़ तुम्हें बुलाया है, वह कैसी है और वह जलाली मीरास की कितनी बड़ी दौलत जो ख़ुदा ने अपने मुक़द्दसीन के लिये रख्खी है, और हम ईमान लाने वालों के लिये ख़ुदा की अज़ीम क़ुदरत की कोई हद नहीं। उन की अज़ीम क़ुदरत की तासीर के मुताबिक़ ख़ुदा ने उसी अज़ीम क़ुदरत की तासीर से अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा उठाकर आसमान पर अपनी दाहिनी तरफ़ बिठाया, और हर तरह की हुक्मरानी, और इख़्तियार, और क़ुदरत और रियासत पर क़ादिर है, और जो न सिर्फ़ इस जहान में और आइन्दा जहान में जो नाम भी किसी को दिया जायेगा। इस तरह ख़ुदा ने सब कुछ अलमसीह के क़दमों के नीचे कर दिया और आप को सब चीज़ों का सरदार बना कर जमाअत के लिये दे दिया। जमाअत हुज़ूर ईसा का बदन है, और अलमसीह से मामूर है जो सारी चीज़ों को पूरी तरह मामूर करने वाले भी हैं। तुम्हारे सरकशी और गुनाहों की वजह से तुम्हारा हाल मुर्दों का सा था, तुम उन में फंस कर इस दुनिया की रविश पर चलते थे और हवा की अमलदारी के हाकिम, शैतान की पैरवी करते थे जिस की रूह अब तक ख़ुदा के नाफ़रमान लोगों में तासीर करती है। कभी हम भी उन में शामिल थे, और नफ़्सानी ख़ाहिशों में ज़िन्दगी गुज़ारते थे और दिल-ओ-दिमाग़ की हर रविश को पूरा करने में लगे रहते थे। और तब्ई तौर पर दूसरे इन्सानों की तरह ख़ुदा के ग़ज़ब के मातहत थे। लेकिन ख़ुदा हम से बहुत ही महब्बत करने वाला, और रहम करने में ग़नी है, जब के हम अपनी सरकशियों के बाइस मुर्दा थे, ख़ुदा ने हमें अलमसीह के साथ ज़िन्दा किया। तुम्हें ख़ुदा के फ़ज़ल से ही तुम्हें नजात मिली है। ख़ुदा ने हमें अलमसीह के साथ ज़िन्दा किया और आसमानी मक़ामों पर अलमसीह ईसा के साथ बिठाया, ताके आने वाले ज़मानों में अपने उस बेहद फ़ज़ल को ज़ाहिर करे, जो ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से अलमसीह ईसा के ज़रीये हम पर किया था। क्यूंके तुम्हें ईमान के वसीले से ख़ुदा के फ़ज़ल ही से नजात मिली है, और यह तुम्हारी कोशिश का नतीजा नहीं, बल्के ख़ुदा की बख़्शिश है। और न ही यह तुम्हारे आमाल का अज्र है के कोई फ़ख़्र कर सके। क्यूंके हम ख़ुदा की कारीगरी हैं और हमें अलमसीह ईसा में नेक काम करने के लिये पैदा किया गया है, जिन्हें ख़ुदा ने पहले ही से हमारे करने के लिये तय्यार कर रख्खा था। पस याद रखो के पहले तुम पैदाइश के लिहाज़ से ग़ैरयहूदी थे और वह “मख़्तून” लोग जिन का ख़तना हाथ से किया हुआ जिस्मानी निशान है तुम्हें “नामख़्तून” कहते थे। याद करो तुम उस वक़्त बग़ैर अलमसीह के, इस्राईली क़ौम की शहरीयत से ख़ारिज और वादे के अह्द से नावाक़िफ़, और नाउम्मीदी की हालत में दुनिया में ख़ुदा से जुदा थे। मगर तुम जो पहले ख़ुदा से बहुत दूर थे, अब अलमसीह ईसा में होकर अलमसीह के ख़ून के वसीले से नज़दीक हो गये हो। क्यूंके वोही हमारी सुलह है जिस ने ग़ैरयहूदियों और यहूदियों, दोनों को एक कर दिया और जो बीच में अदावत की दीवार थी, उस को ढा दिया। अलमसीह ने शरीअत को उस के अहकाम और क़वानीन समेत अपने जिस्म के वसीले से मौक़ूफ़ कर दिया, ताके दोनों से अपने आप में एक नये इन्सान की तख़्लीक़ कर के सुलह करा दे, और अलमसीह सलीब पर दुश्मनी को ख़त्म कर के और दोनों को एक तन बना कर ख़ुदा से मिला सकें। जब अलमसीह तशरीफ़ लाये और उन ग़ैरयहूदियों को जो अलमसीह से दूर थे और उन यहूदियों को जो ख़ुदा के नज़दीक थे, दोनों को सुलह की ख़ुशख़बरी सुनाई। क्यूंके उस के वसीले से हम एक ही पाक रूह पा कर ख़ुदा बाप की हुज़ूरी में आ सकते हैं। पस अब तुम परदेसी और मुसाफ़िर नहीं रहे, बल्के ख़ुदा के मुक़द्दसीन के हम वतन और ख़ुदा के घराने के रुक्न बन गये, तुम गोया एक इमारत हो जो रसूलों और नबियों की बुनियाद पर तामीर की गई है, और अलमसीह ईसा ख़ुद कोने का बुनियादी पत्थर हैं। उसी में यह सारी इमारत बाहम पेवस्त होकर ख़ुदावन्द के लिये एक पाक-मक़्दिस बनती जा रही है। और तुम भी दूसरे मसीही मोमिनीन के साथ मिल मिला कर एक ऐसी इमारत बनते जा रहे हो जिस में ख़ुदा का पाक रूह सुकूनत कर सके। यही वजह है के मैं पौलुस, तुम ग़ैरयहूदी क़ौमों की ख़ातिर अलमसीह ईसा का क़ैदी हूं। तुम ने सुन होगा के ख़ुदा ने मुझे अपने फ़ज़ल से तुम्हारे लिये यह तौफ़ीक़ अता की। ख़ुदा ने ये राज़ मुकाश्फ़ा के ज़रीये मुझ पर ज़ाहिर किया, मैंने इस ख़त के पिछले हिस्से में तहरीरी तौर पर लिख्खा है। उसे पढ़ कर तुम्हें मालूम होगा के मैं अलमसीह के राज़ से किस क़दर आगाह हूं। गुज़रे ज़मानों में यह राज़ इन्सान को इस तरह मालूम न हुआ था, जिस तरह ख़ुदा के मुक़द्दस रसूलों और नबियों पर पाक रूह के वसीले से अब ज़ाहिर किया गया है। वह राज़ यह है के ख़ुशख़बरी के वसीले से ग़ैरयहूदियों का यहूदियों के साथ ख़ुदा की मीरास में हिस्सा है, वह एक ही बदन के आज़ा हैं, और ख़ुदा ने अलमसीह ईसा के वसीले से जो वादा किया है उस में शामिल हैं। यह ख़ुदा के फ़ज़ल के इन्आम की बदौलत है के उस की क़ुदरत ने मुझ में तासीर की और मैं इस ख़ुशख़बरी का ख़ादिम बना। अगरचे मैं ख़ुदा के मुक़द्दसीन में सब से छोटा हूं फिर भी मुझ पर उस का यह फ़ज़ल हुआ के मैं ग़ैरयहूदियों को अलमसीह की इस दौलत की ख़ुशख़बरी सुनाऊं जो बेक़ियास है। और सब लोगों पर रोशन करूं के वह राज़ जो ख़ालिक़े काइनात में अज़ल से पोशीदा रख्खा था, उस के ज़हूर में आने का क्या इन्तिज़ाम है। ताके अब जमाअत के वसीले से ख़ुदा की गूनागूं हिक्मत उन हुकूमत वालों और इख़्तियार वालों को मालूम हो, जाये जो आसमानी मक़ामों में हैं। यह सब कुछ ख़ुदा के अज़ली इरादा के मुताबिक़ हुआ जिसे उस ने हमारे अलमसीह ईसा में पूरा किया। चूंके हम अलमसीह पर ईमान लाये हैं इसलिये हम बड़ी दिलेरी और पूरे भरोसे के साथ ख़ुदा के हुज़ूर में जा सकते हैं। लिहाज़ा मैं दरख़्वास्त करता हूं के तुम मेरी इन मुसीबतों के सबब से, जो मैं तुम्हारी ख़ातिर सहता हूं, हिम्मत न हारो, क्यूंके वह तुम्हारे लिये जलाल का बाइस हैं। इसलिये में आसमानी बाप के आगे दुआ के लिये घुटने टेकता हूं, जिस से ज़मीन और आसमान का हर ख़ानदान नामज़द है। और ख़ुदा से दुआ करता हूं के वह अपने जलाल की दौलत से तुम्हें पाक रूह अता फ़रमाये जो अपनी क़ुदरत से तुम्हारी बातिनी इन्सानियत को ताक़तवर बना दे। और दरख़्वास्त करता हूं के तुम्हारे ईमान के वसीले से अलमसीह तुम्हारे दिलों में सुकूनत करने लगें ताके तुम महब्बत में जड़ पकड़ के और बुनियाद क़ाइम कर के, सब मुक़द्दसीन समेत बख़ूबी जान सकें के अलमसीह की महब्बत की लम्बाई, चौड़ाई, ऊंचाई और गहराई कितनी है, और अलमसीह की बेइन्तिहा महब्बत को समझ सको ताके ख़ुदा की सारी मामूरी तुम में समा जाये। ख़ुदा बड़ा क़ादिर ख़ुदा है, उस की क़ुदरत हम में तासीर करती है, और वह उस क़ुदरत के बाइस हमारे लिये हमारे मांगने या तसव्वुर से कहीं ज़्यादा कर सकता है, जमाअत में और अलमसीह ईसा में पुश्त दर पुश्त, और अबद तक उन की तम्जीद होती रहे। आमीन। पस मैं जो ख़ुदावन्द की ख़ातिर क़ैद में हूं, तुम से इल्तिमास करता हूं के उस मेयार के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारो जिस के लिये तुम बुलाए गये थे। हमेशा फ़रोतन और नरम दिल होकर ख़ुदा के ताबे रहो और सब्र के साथ एक दूसरे की महब्बत में बर्दाश्त करो। पाक रूह ने तुम्हें एक कर दिया है इसलिये कोशिश करो के एक दूसरे के साथ सुलह के बन्द से बंधे रहो। बदन एक ही है और पाक रूह भी एक ही है, जब तुम ख़ुदा की तरफ़ से बुलाए गये तो एक ही उम्मीद रखने के लिये बुलाए गये थे; हमारा एक ही ख़ुदावन्द, एक ही ईमान और एक ही पाक-ग़ुस्ल है; सब का ख़ुदा एक है, वोही सब का बाप है, वोही सब के ऊपर है, सब के दरमियान और सब के अन्दर है। लेकिन हम में से हर एक पर अलमसीह की बख़्शिश के अन्दाज़े के मुताबिक़ फ़ज़ल किया गया है। इसी वजह से किताब-ए-मुक़द्दस फ़रमान है: “जब आप आसमान पर चढ़े, तो क़ैदियों को अपने साथ ले गये आप ने लोगों को इन्आमात से नवाज़ा।” (उस के “आसमान पर चढ़ने से” क्या मुराद है? यही के वह ज़मीन के नीचे के इलाक़े में भी उतर गये थे? और यह जो नीचे उतरा वोही है जो सब आसमानों से भी बुलन्द मक़ाम पर चढ़ा, ताके सारी काइनात को मामूर करे।) चुनांचे अलमसीह ने ख़ुद ही बाज़ को रसूल, बाज़ को नबी, बाज़ को मुबश्-शिर और बाज़ को जमाअत के पासबान और बाज़ को उस्ताद मुक़र्रर किया, ताके ख़ुदा के मुक़द्दस लोग ख़िदमत करने के लिये मुकम्मल तौर पर तरबियत पायें, और अलमसीह के बदन की तरक़्क़ी का बाइस हों यहां तक के हम सब के सब ख़ुदा के बेटे को पूरे तौर पर जानने और उस पर ईमान रखने में एक हो जायें, और कामिल इन्सान बन कर अलमसीह के क़द के अन्दाज़े तक पहुंच जायें। तब हम आइन्दा को ऐसे बच्चे न रहेंगे के हमें हर ग़लत तालीम की तेज़ हवा, पानी की लहरों की तरह इधर-उधर उछालती रहे और हम चाल बाज़ और मक्कार लोगों के गुमराह कर देने वाले मन्सूबों का शिकार न बनते रहें। बल्के, हमें महब्बत के साथ हक़ पर क़ाइम रहना है, और अलमसीह के साथ पेवस्ता होकर बढ़ते जाना है क्यूंके वोही सर है यानी अलमसीह। अलमसीह की वजह से बदन के तमाम आज़ा, बाहम पेवस्ता हैं और बदन अपने हर जोड़ की मदद से क़ाइम रहता है, चुनांचे जब हर उज़ू अपना-अपना काम सही तौर पर करता है तो सारा बदन तरक़्क़ी करता, और महब्बत में बढ़ता जाता है। इसलिये मैं ख़ुदावन्द के नाम का वास्ता दे कर तुम से कहता हूं के आइन्दा को ग़ैरयहूदियों की मानिन्द जो अपने बेहूदा गवाही के ख़्यालात के मुताबिक़ चलते हैं, ज़िन्दगी न गुज़ारना। उन की अक़्ल तारीक हो गई है और वह अपनी सख़्त-दिली के बाइस जहालत में गिरिफ़्तार हैं, और ख़ुदा की दी हुई ज़िन्दगी में उन का कोई हिस्सा नहीं। तमाम हिस्सियात को खोने के बाद, उन्होंने अपने आप को शहवत-परस्ती के हवाले कर दिया है, और वह हर तरह के नापाक काम बड़े शौक़ से करते हैं। लेकिन, तुम ने अलमसीह की ऐसी तालीम नहीं पाई लेकिन तुम ने तो अलमसीह के बारे में सुना है और ईमान लाकर उस हक़ की तालीम पाई है, जो ख़ुदावन्द ईसा में है, के अपनी पुरानी फ़ितरत को उस की आदतों समेत उतार डालो जो बुरी ख़ाहिशों के फ़रेब में आकर बिगड़ती चली जा रही है; इसलिये तुम्हारे दिल-ओ-दिमाग़ रूहानी हो जाने से तुम नये इन्सान बनते चले जाओ; तुम नई इन्सानियत को पहन लो, जो ख़ुदा के मुताबिक़ ख़ुदा की सच्चाई के असर से रास्तबाज़ी और पाकीज़गी की हालत में पैदा की गई है। पस झूट बोलना छोड़कर हर शख़्स अपने पड़ोसी से सच बोले, क्यूंके हम सब एक ही बदन के आज़ा हैं। “ग़ुस्सा तो करो मगर तुम गुनाह से बाज़ रहो”: और तुम्हारा ग़ुस्सा सूरज के डूबने तक बाक़ी नहीं रहनी चाहिये, इब्लीस को फ़ायदा उठाने का मौक़ा मत दो। चोरी करने वाला आइन्दा चोरी न करे, बल्के कोई अच्छा पेशा इख़्तियार कर के अपने हाथों से मेहनत करे, ताके मोहताजों की मदद करने के लिये उस के पास कुछ हो। तुम्हारे मुंह से कोई बुरी बात न निकले, बल्के अच्छी बात ही निकले जो ज़रूरत के मुवाफ़िक़ तरक़्क़ी का बाइस हो, ताके सुनने वालों पर फ़ज़ल हो। ख़ुदा के पाक रूह को रंजीदा मत करो, क्यूंके ख़ुदा ने तुम पर मुहर लगाई है के तुम इन्साफ़ के दिन मुख़्लिसी पा सको। हर क़िस्म का कीना, क़हर, ग़ुस्सा, तकरार और कुफ़्र, सारी दुश्मनी समेत अपने से दूर कर दो। और हर एक के साथ मेहरबानी और नरम दिली से पेश आओ, जिस तरह ख़ुदा ने अलमसीह में तुम्हारे क़ुसूर मुआफ़ किये हैं, तुम भी एक दूसरे के क़ुसूर मुआफ़ कर दिया करो। चूंके तुम ख़ुदा के अज़ीज़ फ़र्ज़न्द हो, इसलिये, ख़ुदा की मानिन्द बनो। और महब्बत से चलो, जैसे अलमसीह ने हम से महब्बत की और अपने आप को हमारे लिये ख़ुश्बू की तरह ख़ुदा की नज़र कर के क़ुर्बान किया वैसे तुम भी महब्बत से चलो। तुम में जिन्सी बदफ़ेली या किसी क़िस्म की नापाकी या लालच का नाम तक न लिया जाये, क्यूंके इस तरह के अमल ख़ुदा के मुक़द्दसीन को ज़ेब नहीं देते। तुम्हारे लिये बेशर्मी, बेहूदा गोई या ठठ्ठेबाज़ी का ज़िक्र करना भी मुनासिब नहीं, बल्के तुम्हारी ज़बान पर शुक्र गुज़ारी के कलिमे हों। यक़ीन जानो के किसी हरामकार, नापाक या लालची शख़्स की अलमसीह और ख़ुदा की बादशाही में कोई मीरास नहीं क्यूंके ऐसा शख़्स बुत-परस्त के बराबर है। कोई तुम्हें फ़ुज़ूल बातों से धोका न देने पाये, क्यूंके इन ही गुनाहों के बाइस नाफ़रमान लोगों पर ख़ुदा का ग़ज़ब नाज़िल होता है। लिहाज़ा ऐसे लोगों का साथ मत दो। क्यूंके अलमसीह के आने से पहले तुम तारीकी में ज़िन्दगी गुज़ारते थे, मगर अब ख़ुदावन्द में नूर हो। पस नूर के फ़र्ज़न्दों की राह पर चलो क्यूंके नूर का फल हर तरह की नेकी, रास्तबाज़ी और सच्चाई है। और तजुर्बा से मालूम करते रहो के ख़ुदावन्द को किया पसन्द है। तारीकी के बे फल कामों में शरीक न हो, बल्के उन पर मलामत किया करो। क्यूंके नाफ़रमान लोगों के पोशीदा कामों का ज़िक्र करना भी शरम की बात है। लेकिन जो शै रोशनी में लाई जाती है वह सब साफ़-साफ़ नज़र आने लगती है क्यूंके नूर सब कुछ ज़ाहिर कर देता है। इसीलिये कहा गया है: “ऐ सोने वाले जागो, और मुर्दों में से जी उठो, तो अलमसीह का नूर तुम पर चमकेगा।” पस ग़ौर से देखो के किस तरह चलते हो, नादानों की तरह नहीं बल्के दानाओं की तरह चलो, और हर मौक़े को ग़नीमत समझो, क्यूंके दिन बुरे हैं। इसलिये नादानों की तरह ज़िन्दगी न गुज़ारो, बल्के ख़ुदावन्द की मर्ज़ी समझने की कोशिश करो। शराब में मतवाले न बनो, क्यूंके यह इन्सान को बदचलन बना देती है। बल्के, पाक रूह से मामूर रहा करो। एक दूसरे से ज़बूर, हम्द-ओ-सना और रूहानी ग़ज़लें और ख़ुदावन्द की तारीफ़ में दिल से गाते बजाते रहा करो, हर बात में हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से हमेशा ख़ुदा बाप का शुक्र करते रहो। और अलमसीह का ख़ौफ़ करते हुए एक दूसरे के ताबे रहो। बीवीयां अपने शौहरों के ताबे रहें जैसे ख़ुदावन्द के ताबे रहती हैं। क्यूंके शौहर बीवी का सर है जिस तरह अलमसीह अपने बदन का सर हैं, और उस का यानी अपनी जमाअत का मुनज्जी हैं। उसी तरह शौहर अपनी बीवी का सर है, पस जैसे जमाअत अलमसीह के ताबे है वैसे बीवीयां भी हर बात में अपने शौहरों की ताबे रहें। ऐ शौहरो! अपनी बीवीयों से वैसी ही महब्बत रखो, जैसी महब्बत अलमसीह ने अपनी जमाअत से रख्खी और उस के लिये अपनी जान दे दी, ताके वह जमाअत को ख़ुदा के कलाम के साथ पानी से ग़ुस्ल दे कर साफ़ करे, और उसे मुक़द्दस बना दे। और ऐसी जलाली जमाअत बना कर अपने पास हाज़िर करे, जिस में कोई दाग़ या झुर्री या कोई और नुक़्श न हो, बल्के वह पाक और बेऐब हो। इसी तरह, शौहरों को भी चाहिये के अपनी बीवीयों से अपने बदन तरह महब्बत रखें, जो अपनी बीवी से महब्बत रखता है वह गोया अपने आप से महब्बत रखता है। क्यूंके कोई शख़्स अपने जिस्म से दुश्मनी नहीं करता, बल्के अपने जिस्म की अच्छी तरह परवरिश करता और देख-भाल करता है, जैसा के अलमसीह जमाअत का ख़्याल रखते हैं, क्यूंके हम उन के बदन के आज़ा हैं। “किताब-ए-मुक़द्दस का बयान है के मर्द अपने बाप और मां से जुदा होकर अपनी बीवी के साथ रहेगा, और वो दोनों मिल कर एक जिस्म होंगे।” यह राज़ की बात तो बड़ी गहरी है लेकिन मैं समझता हूं के यह अलमसीह और जमाअत के बाहमी तअल्लुक़ की तरफ़ इशारा करती है। बहरहाल तुम में से हर शौहर को चाहिये के वह अपनी बीवी से अपनी मानिन्द महब्बत रखे, और बीवी को भी चाहिये के वह अपने शौहर से अदब से पेश आये। बच्चो! ख़ुदावन्द में अपने वालिदैन के फ़रमांबरदार रहो, क्यूंके यह मुनासिब है। “अपने बाप और मां की इज़्ज़त करना” उस वादे के साथ यह पहला हुक्म भी है “ताके तुम्हारा भला हो और ज़मीन पर तुम्हारी उम्र-दराज़ हो।” औलाद वालो! तुम अपने बच्चों को ग़ुस्सा न दिलाओ; बल्के, उन्हें ऐसी तरबियत और नसीहत दे कर उन की परवरिश करो जो ख़ुदावन्द को पसन्द हो। ख़ादिमो! अपने दुनियवी मालिकों की सिदक़-दिली से डरते और कांपते हुए, ऐसी फ़रमांबरदार करो जैसी अलमसीह की करते हो। आदमियों को ख़ुश करने वालों की तरह महज़ दिखावे के लिये ख़िदमत न करो, बल्के उसे ख़ुश दिली से अन्जाम दो गोया तुम अलमसीह के ख़ादिम हो, और ख़ुदा की मर्ज़ी बजा ला रहे हो। और ख़िदमत को आदमियों का नहीं, बल्के ख़ुदावन्द का काम समझ कर, और उसे जी जान से करो। क्यूंके तुम जानते हो के जो कोई अच्छा काम करेगा, ख़्वाह वह ग़ुलाम हो या आज़ाद, ख़ुदावन्द से उस का अज्र पायेगा। मालिको! तुम भी अपने ख़ादिमो से इसी क़िस्म का सुलूक करो। उन्हें धमकियां देना छोड़ दो क्यूंके तुम जानते हो के उन का और तुम्हारा दोनों का मालिक आसमान पर है, और उस के यहां किसी की तरफ़दारी नहीं होती। आख़िरी बात यह है के तुम ख़ुदावन्द में और उस की क़ुव्वत से मामूर होकर मज़बूत बन जाओ। ख़ुदा के दिये हुए तमाम हथियारों से लैस हो जाओ, ताके तुम इब्लीस के मन्सूबों का मुक़ाबला कर सको। क्यूंके हमें ख़ून और गोश्त यानी इन्सान से नहीं बल्के तारीकी की दुनिया के हाकिमों, इख़्तियार वालों और शरारत की रूहानी फ़ौजों से लड़ना है जो आसमानी मक़ामों में हैं। चुनांचे तुम ख़ुदा के तमाम हथियार बांध कर तय्यार हो जाओ, ताके जब उन के हमला करने का बुरा दिन आये, तो तुम उन का मुक़ाबला कर सको, और उन्हें पूरी तरह शिकस्त दे कर क़ाइम भी रह सको। इस मक़सद के लिये तुम सच्चाई से अपनी कमर कस लो, ख़ुदा की रास्तबाज़ी का बक्-तर पहन लो। सुलह की ख़ुशख़बरी की तय्यारी के जूते पहन कर तय्यार हो जाओ। और इन के इलावा ईमान की सिपर उठाये रखो, ताके उस से तुम शैतान के सारे आतिशी तीरों को बुझा सको। और नजात का बकतर और पाक रूह की तलवार को, जो ख़ुदा का कलाम है ले लो। पाक रूह की हिदायत से हर वक़्त मिन्नत और दुआ करते रहो और इस ग़रज़ से जागते रहो, ताके सब मुक़द्दसीन के लिये बिला नाग़ा दुआ कर सको। मेरे लिये भी दुआ करो ताके जब कभी मुझे बोलने का मौक़ा मिले तो मुझे पैग़ाम सुनाने की तौफ़ीक़ हो और मैं ख़ुशख़बरी के भेद को दिलेरी से ज़ाहिर कर सकूं, इस ख़ुशख़बरी की ख़ातिर में ज़न्जीर से जकड़ा हुआ एलची हूं। दुआ करो के में ऐसी दिलेरी से उसे बयान करूं जैसा मुझ पर फ़र्ज़ है। तुख़िकुस जो अज़ीज़ मसीही भाई और ख़ुदावन्द में वफ़ादार ख़ादिम है, तुम्हें सब कुछ बता देगा, ताके तुम मेरी नज़र बन्दी के हालात से वाक़िफ़ हो जाओ। मैं उसे तुम्हारे पास इस ग़रज़ से भेज रहा हूं, वह तुम्हें हमारे हालात से वाक़िफ़ कर के तुम्हारे दिलों को तसल्ली दे सके। ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से मसीही भाईयो और बहनों, को इत्मीनान हासिल हो, वह ईमान पर क़ाइम रहें और आपस में महब्बत रखें। जो हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह से लाज़वाल महब्बत रखते हैं उन सब पर उस का फ़ज़ल होता रहे। यह ख़त पौलुस और तिमुथियुस की तरफ़ से जो ईसा अलमसीह ईसा के ख़ादिम हैं, फ़िलिप्पी शहर के सारे मसीही मुक़द्दसीन, पासबानों और ख़ादिमो को लिख्खा जा रहा है। हमारे ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। मैं जब कभी तुम्हें याद करता हूं तो अपने ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं। और अपनी हर एक दुआ में जो तुम्हारे लिये करता हूं हमेशा ख़ुशी के साथ तुम सब के लिये मिन्नत करता हूं। इसलिये के तुम पहले दिन से आज तक ख़ुशख़बरी फैलाने में शरीक रहे हो, और मुझे इस बात का यक़ीन है के ख़ुदा, जिस ने तुम लोगों में अपना नेक काम शुरू किया है वह उसे अलमसीह ईसा की वापसी के दिन तक पूरा कर देगा। मेरा तुम सब की बाबत ये ख़्याल करना मुनासिब है, क्यूंके तुम हमेशा मेरे दिल में रहते हो, न सिर्फ़ उस वक़्त जब के मैं ज़न्जीरों में क़ैद हूं बल्के उस वक़्त भी जब मैं ख़ुशख़बरी की जवाबदेही और सबूत के अमल में, तुम सब मेरे साथ ख़ुदा के फ़ज़ल में शरीक रहे हो। ख़ुदा गवाह है के मेरे दिल में तुम्हारे लिये अलमसीह ईसा की सी महब्बत है और मैं तुम्हारा किस क़दर मुश्ताक़ हूं। मेरी दुआ है के तुम अपनी महब्बत में ख़ूब तरक़्क़ी करो और तुम्हारा इल्म और रूहानी तजुर्बा भी बढ़ता चला जाये, ताके तुम्हें मालूम हो सके के कौन सी बात सब से अच्छी है, और तुम अलमसीह के वापसी के दिन तक साफ़ दिल और बेऐब रहो, और हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से रास्तबाज़ी के फल से भरे रहो, ताके ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर हो और उस की सिताइश होती रहे। ऐ भाईयो और बहनों! मेरी ख़ाहिश है के तुम्हें यह बात मालूम हो जाये के जो कुछ मुझ पर गुज़रा है वह ख़ुशख़बरी की तरक़्क़ी का बाइस हुआ है। यहां तक के शाही महल के तमाम सिपाहियों और यहां के सब लोगों में यह बात मशहूर हो गई है के मैं अलमसीह के ख़ादिम होने की ख़ातिर क़ैद में हूं। मेरे क़ैद होने से कई भाई और बहन जो ख़ुदावन्द पर ईमान रखते हैं, दिलेर हो गये हैं, यहां तक के वह बेख़ौफ़ होकर ख़ुदा का कलाम सुनाने की जुरअत करने लगे हैं। बाज़ तो हसद और झगड़े की वजह से अलमसीह की मुनादी करते हैं, बाज़ नेकनियती से। जो महब्बत की वजह से मुनादी करते हैं, वह जानते हैं के ख़ुदा ने मुझे ख़ुशख़बरी की हिमायत करने के लिये मुक़र्रर किया है। लेकिन दूसरे इस मुआमले में साफ़ दिल नहीं हैं, बल्के मुझ से हसद की वजह से अलमसीह की मुनादी करते हैं, ताके क़ैद में भी मुझे रंज पहुंचायें। पस क्या हुआ? उन की नीयत बुरी हो या नेक, अलमसीह की ख़ुशख़बरी तो सुनाई जाती है। मैं इसी बात से ख़ुश हूं। हां, और मैं ख़ुश रहूंगा। क्यूंके मैं जानता हूं के तुम्हारी दुआ और हुज़ूर ईसा अलमसीह के पाक रूह के लुत्फ़-ओ-करम की वजह से मुझे नजात मिलेगी। मेरी दिली ख़ाहिश और उम्मीद यह है के मुझे किसी बात में भी शर्मिन्दगी का मुंह न देखना पड़े, बल्के जैसे मैं बड़ी दिलेरी से जिस्म से हमेशा अलमसीह का जलाल ज़ाहिर करता रहा हूं वैसे ही करता रहूंगा, ख़्वाह मैं ज़िन्दा रहूं या मर जाऊं। क्यूंके ज़िन्दा रहना मेरे लिये अलमसीह है, और मरना नफ़ा। लेकिन अगर मेरा जिस्मानी तौर पर ज़िन्दा रहना, मेरे काम के लिये ज़्यादा मुफ़ीद है। मैं क्या पसन्द करूं? मैं नहीं जानता। मैं बड़ी कशमकश में मुब्तिला हूं: जी तो चाहता है के दुनिया को ख़ैरबाद कह कर अलमसीह के पास जा रहूं क्यूंके यह ज़्यादा बेहतर है; फिर भी मेरा जिस्मानी तौर पर ज़िन्दा रहना तुम्हारे लिये ज़्यादा ज़रूरी है। चुनांचे मुझे इस बात का बड़ा यक़ीन है के मैं ज़िन्दा रहूंगा, बल्के तुम सब के साथ रहूंगा ताके तुम ईमान में तरक़्क़ी करो और ख़ुश रहो, और जब मैं तुम्हारे पास फिर आऊं तो अलमसीह ईसा में होने की वजह से वह फ़ख़्र जो तुम मुझ पर करते हो, और भी ज़्यादा हो जायेगा। कुछ भी हो, इतना ज़रूर करो के तुम्हारा चाल चलन अलमसीह की ख़ुशख़बरी के लाइक़ हो। ताके, ख़्वाह मैं तुम्हें देखने आऊं या न आऊं, यह ज़रूर सुन सकूं के तुम एक रूह में क़ाइम हो और एक जान होकर कोशिश कर रहे हो के लोग ख़ुशख़बरी पर ईमान लायें और यह भी के तुम किसी बात में भी अपने मुख़ालिफ़ों से ख़ौफ़ज़दा नहीं होते। यह उन के लिये तो हलाकत का, लेकिन तुम्हारे लिये नजात का निशान है और यह ख़ुदा की तरफ़ से है। क्यूंके ख़ुदावन्द अलमसीह की ख़ातिर तुम पर यह फ़ज़ल हुआ के न फ़क़त ख़ुदावन्द पर ईमान लाओ, बल्के ख़ुदावन्द की ख़ातिर दुख भी सहो, तुम भी उसी तरह जद्द-ओ-जहद करते रहो जिस तरह तुम ने मुझे करते देखा था, और अब भी सुनते हो के मैं अब तक उसी में मसरूफ़ हूं। पस अगर अलमसीह में तुम में तसल्ली और महब्बत से हौसला, और पाक रूह की रिफ़ाक़त में रहमदिली और हमदर्दी पाई जाती है, तो मेरी यह ख़ुशी पूरी कर दो के यकदिल रहो, यकसां महब्बत रखो, एक जान हो और हम ख़्याल रहो। तफ़्रिक़ा और फ़ुज़ूल फ़ख़्र के बाइस कुछ न करो। बल्के फ़रोतन होकर एक शख़्स दूसरे शख़्स को अपने से बेहतर समझे। हर एक सिर्फ़ अपने मफ़ाद का नहीं बल्के दूसरों के मफ़ाद का भी ख़्याल रखे। तुम्हारा मिज़ाज भी वैसा ही हो, जैसा अलमसीह ईसा का था: अगरचे वह ख़ुदा की सूरत पर थे, फिर भी हुज़ूर ईसा ने ख़ुदा की बराबरी को अपने क़ब्ज़े में रखने की चीज़ न समझा; बल्के अपने आप को ख़ाली कर दिया, और ग़ुलाम की सूरत इख़्तियार कर के, इन्सानों के मुशाबेह हो गये। हुज़ूर ईसा ने इन्सानी शक्ल में ज़ाहिर होकर, अपने आप को फ़रोतन कर दिया और मौत बल्के सलीबी मौत तक फ़रमांबरदार रहे! इसलिये ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा को निहायत ही ऊंचा दर्जा दिया, और हुज़ूर ईसा को वह नाम अता फ़रमाया जो हर नाम से आला है, ताके हुज़ूर ईसा के नाम पर हर कोई घुटनों के बल झुक जाये, चाहे वह आसमान पर हो, चाहे ज़मीन पर, चाहे ज़मीन के नीचे। और हर ज़बान ख़ुदा बाप के जलाल के लिये इक़रार करे, के हुज़ूर ईसा अलमसीह ही ख़ुदावन्द हैं। पस ऐ मेरे अज़ीज़ो! जिस तरह तुम ने मेरी मौजूदगी में हमेशा मेरी फ़रमांबरदार की है, उसी तरह अब मेरी ग़ैर मौजूदगी में भी ख़ूब डरते और कांपते हुए अपनी नजात के काम को जारी रखो, क्यूंके वह ख़ुदा ही है जो तुम में नीयत और अमल दोनों को पैदा करता है ताके उस का नेक इरादा पूरा हो सके। और सब काम किसी शिकायत और हुज्जत के बग़ैर ही कर लिया करो, ताके तुम बेऐब और पाक एक होकर बदअख़्लाक़ और गुमराह लोगों के दरमियान, “ख़ुदा के बेनुक़्श फ़र्ज़न्दों की तरह इस जहान ज़िन्दगी गुज़ारो।” ताके उन में तुम आसमान के सितारों की मानिन्द चमको और ज़िन्दगी का कलाम पेश करते हो ताके अलमसीह के लौटने के दिन मुझे फ़ख़्र हो के न तो मेरी दौड़ धूप फ़ुज़ूल गई और न मेहनत बेफ़ाइदा रही। अगर तुम्हारे ईमान और तुम्हारी ख़िदमत की क़ुर्बानी के साथ मुझे भी अपनी जान की क़ुर्बानी देना पड़े तो मुझे ख़ुशी होगी, और मैं तुम सब की ख़ुशी में शरीक हो सकूंगा। इसी तरह तुम्हें भी ख़ुश होकर मेरी ख़ुशी में शरीक होना चाहिये। मुझे ख़ुदावन्द ईसा में उम्मीद है के मैं तिमुथियुस को जल्द ही तुम्हारे पास रवाना कर दूं, ताके उस से तुम्हारी ख़ैरियत की ख़बर सुन कर मुझे भी इत्मीनान हासिल हो। क्यूंके उस के इलावा यहां मेरा कोई और हम ख़्याल नहीं जो सच्चे दिल से तुम्हारे लिये फ़िक्रमन्द हो। क्यूंके दूसरे सभी अपनी-अपनी बातों की फ़िक्र में हैं, न के हुज़ूर ईसा अलमसीह की। लेकिन तुम तिमुथियुस के किरदार से वाक़िफ़ हो के किस तरह उस ने एक बेटे की तरह मेरे साथ मिल कर ख़ुशख़बरी की मुनादी की ख़िदमत अन्जाम दी है। पस, मैं उम्मीद करता हूं के जितनी जल्दी मेरी सूरते हाल वाज़ेह हो जायेगी, मैं उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। बल्के मुझे ख़ुदावन्द पर भरोसा है के मैं ख़ुद भी जल्द ही आ जाऊंगा। लेकिन मैंने इपफ़रुदितुस को तुम्हारे पास भेजना ज़रूरी समझा, वह मेरा मसीही भाई, हम ख़िदमत और मेरी तरह अलमसीह का सिपाही है, वह तुम्हारा क़ासिद है, जिसे तुम ने मेरी ज़रूरतें पूरी करने के लिये भेजा था। वह तुम सब का मुश्ताक़ है और बेक़रार भी है क्यूंके तुम ने उस की बीमारी का हाल सुन था। बेशक वह अपनी बीमारी से, मरने के क़रीब था। लेकिन ख़ुदा ने उस पर रहम किया, और न सिर्फ़ उस पर बल्के मुझ पर भी, ताके मुझे ग़म पर ग़म न हो। इसलिये मुझे ख़्याल आया के उसे जल्द अज़ जल्द रवाना कर दूं, ताके जब तुम उसे फिर से देखो तो ख़ुश हो जाओ और मेरी बेक़रारी भी कम हो जाये। पस तुम उस का ख़ुदावन्द में अपना भाई समझ कर गर्मजोशी से उस का इस्तिक़्बाल करना, और ऐसे लोगों का एहतिराम करना लाज़िम है, क्यूंके वह अलमसीह की ख़िदमत की ख़ातिर मरने के क़रीब हो गया था। और उस ने अपनी जान को ख़तरा में डाल दिया ताके मेरी ख़िदमत में जो कमी तुम्हारी वजह से हुई वह उसे पूरा कर दे। ग़रज़, मेरे भाईयो और बहनों, ख़ुदावन्द में ख़ुश रहो! तुम्हें एक ही बात दुबारा लिखने में मुझे तो कुछ दिक़्क़त नहीं, और तुम्हारी इस में हिफ़ाज़त है। उन कुत्तों से ख़बरदार रहो, उन बदकिरदारों से और उन से जो ख़तना करवाने पर ज़ोर देते हैं। क्यूंके मख़्तून तो हम हैं, जो ख़ुदा के रूह की हिदायत से उस की इबादत करते हैं, और अलमसीह ईसा पर फ़ख़्र करते हैं और जिस्म पर भरोसा नहीं करते अगरचे मैं तो जिस्म पर भरोसा कर सकता हूं। लेकिन अगर कोई जिस्म पर भरोसा करने का ख़्याल कर सकता है, तो मैं उस से भी ज़्यादा कर सकता हूं: मेरी पैदाइश के सात दिन बाद आठवें दिन मेरा ख़तना हुआ, मैं इस्राईली क़ौम और बिनयामीन के क़बीले से हूं, इब्रानियों का इब्रानी; शरीअत के एतबार से, मैं एक फ़रीसी हूं; जोश के एतबार से जमाअत का सताने वाला; शरीअत की रास्तबाज़ी के एतबार से, बेऐब। लेकिन जो कुछ मेरे लिये नफ़े का बाइस था, मैंने उसे अलमसीह की ख़ातिर नुक़्सान समझ लिया है। बल्के मैं अपने ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा की पहचान की अपनी बड़ी ख़ूबी समझता हूं, जिन की ख़ातिर मैंने दूसरी तमाम चीज़ों का नुक़्सान उठाया। और उन चीज़ों को कूड़ा समझता हूं, ताके अलमसीह को हासिल कर लूं और अलमसीह में पाया जाऊं, लेकिन अपनी शरीअत वाली रास्तबाज़ी के साथ नहीं, बल्के उस रास्तबाज़ी के साथ जो अलमसीह पर ईमान लाने से हासिल होती है। यह रास्तबाज़ी ख़ुदा की तरफ़ से है और ईमान की बुनियाद पर मब्नी है। मैं यही चाहता हूं के अलमसीह को और उन के जी उठने की क़ुदरत को जानूं, अलमसीह के साथ दुखों में शरीक होने का तजुर्बा हासिल करूं, और अलमसीह की मौत से मुशाबहत पैदा कर लूं, ताके किसी तरह मुर्दों में से जी उठने के दर्जा तक जा पहुचूं। इस का मतलब यह नहीं के मैं उस मक़सद को पा चुका हूं या कामिल हो चुका हूं, बल्के मैं उस मक़सद को पाने के लिये दौड़ा चला जा रहा हूं जिस के लिये अलमसीह ईसा ने मुझे पकड़ा था। ऐ भाईयो और बहनों! मेरा यह गुमान नहीं के मैं उसे पा चुका हूं। बल्के सिर्फ़ यह कह सकता हूं: के जो चीज़ें पीछे रह गई हैं उन्हें भूल कर आगे की चीज़ों की तरफ़ बढ़ता जा रहा हूं, और तेज़ी से निशान की जानिब दौड़ा चला जाता हूं ताके वह इन्आम हासिल कर लूं जिस के लिये ख़ुदा ने मुझे अलमसीह ईसा में ऊपर आसमान पर बुलाया है। लिहाज़ा हम में से जितने रूहानी तौर पर बालिग़ हैं, यही ख़्याल रखें। और अगर तुम्हारा किसी और क़िस्म का ख़्याल हो, तो ख़ुदा उसे भी तुम पर ज़ाहिर कर देगा। बहरहाल जहां तक हम पहुंच चुके हैं उसी के मुताबिक़ चलते जायें। ऐ भाईयो और बहनों! तुम सब मेरे नक़्श क़दम पर चलो, और उन लोगों पर ग़ौर करो जो हमारे दिये हुए नमूने पर चलते हैं। क्यूंके, बहुत से ऐसे हैं जिन का ज़िक्र में बारहा कर चुका हूं और अब भी तुम से रो-रो कर कहता हूं, बहुत से लोग अपने चाल चलन से अलमसीह की सलीब के दुश्मन बन कर जीते हैं। उन का अन्जाम हलाकत है, उन का पेट ही उन का ख़ुदा है, वह अपनी उन बातों पर जो शरम का बाइस हैं फ़ख़्र करते हैं। और दुनियवी चीज़ों के ख़्याल में लगे रहते हैं। मगर हमारा वतन आसमान पर है। और हम अपने मुनज्जी ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वहां से, वापस आने के इन्तिज़ार में हैं, अलमसीह अपनी क़ुव्वत से सारी चीज़ों को अपने ताबे कर सकते हैं, इसी क़ुव्वत की तासीर से वह हमारे फ़ानी बदन की शक्ल को बदल कर उसे अपने की तरह जलाली बदन की मानिन्द बना देंगे। इसलिये मेरे अज़ीज़ भाईयो और बहनों, जिन का मैं मुश्ताक़ हूं और तुम जो मेरी ख़ुशी और मेरा ताज हो, ऐ मेरे अज़ीज़ों, ख़ुदावन्द में इसी तरह क़ाइम रहो! यूवदिया और सुन्तुख़े दोनों ख़्वातीन को मेरी नसीहत यह है के वह ख़ुदावन्द में यकदिल होकर रहें। और मेरे सच्चे हम ख़िदमत! मैं तुम से भी दरख़्वास्त करता हूं के इन दोनों ख़्वातीन की मदद करो, क्यूंके उन्होंने क्लेमेंस और मेरे बाक़ी हम ख़िदमतों समेत, मेरे साथ ख़ुशख़बरी फैलाने में बड़ी मेहनत की, इन सब के नाम किताब-ए-हयात में दर्ज हैं। ख़ुदावन्द मैं हर वक़्त ख़ुश रहो, मैं फिर कहता हूं: ख़ुश रहो! तुम्हारी नर्म मिज़ाजी सब लोगों पर ज़ाहिर हो। ख़ुदावन्द जल्द वापस लौटने वाले हैं। किसी बात की फ़िक्र न करो, और अपनी सब दुआओं में ख़ुदा के सामने अपनी ज़रूरतें, और मन्नतें शुक्र गुज़ारी के साथ ख़ुदा के सामने पेश किया करो। तब ख़ुदा का वह इत्मीनान हासिल होगा, जो इन्सान की समझ से बिलकुल बाहर है और जो तुम्हारे दिलों और ख़यालों को अलमसीह ईसा में महफ़ूज़ रखेगा। ग़रज़, ऐ भाईयो और बहनों! जितनी बातें सच हैं, लाइक़ हैं, मुनासिब हैं, पाक हैं, दिलकश और पसन्दीदा हैं यानी जो अच्छी और क़ाबिले-तारीफ़ हैं, उन ही बातों पर ग़ौर किया करो। जो बातों को तुम ने मुझ से सीखा या हासिल किया या सुना है या मुझ में देखा भी है, उन पर अमल करते रहोगे। तो ख़ुदा जो इत्मीनान का चश्मा है तुम्हारे साथ रहेगा। मैं ख़ुदावन्द में बहुत ख़ुश हूं के इतनी मुद्दत के बाद तुम्हें फिर से मेरी मदद करने का ख़्याल आया। बेशक, पहले भी तुम्हें मेरा ख़्याल था, मगर तुम्हें इसे ज़ाहिर करने का मौक़ा न मिला था। मैं यह इसलिये नहीं कह रहा हूं के मोहताज हूं, क्यूंके मैंने किसी भी हालात में राज़ी रहना सीख लिया है। मैंने नादारी और फ़रावानी के दिन भी देखे हैं, चाहे फ़ाक़ाकशी हो या आ आसूदगी और कसरत हो या क़िल्लत हर हालत में मुतमइन रहना सीख लिया है। जो मुझे ताक़त बख़्शता है उस की मदद से में सब कुछ कर सकता हूं। तो भी तुम ने अच्छा किया के मेरी मुसीबत में शरीक हुए। ऐ अहल-ए-फ़िलिप्पी! तुम अच्छी तरह जानते हो के शुरू-शुरू में जब में ख़ुशख़बरी सुनता हुआ, सूबे मकिदुनिया से रवाना हुआ था, तो तुम्हारे सिवा किसी जमाअत ने लेने देने के मुआमले में, मेरी मदद न की; जब मैं थिसलुनीके शहर में था, तो तुम ने मेरी जरूरतों को पूरा करने के लिये एक दफ़ा नहीं बल्के दो दफ़ा कुछ भेजा था। ये नहीं के मैं तुम्हारी भेजी हुई रक़म का मुश्ताक़ हूं; बल्के ऐसे इन्आम की ख़ाहिश करता हूं, जिस से आप की रूहानी बरकतों में इज़ाफ़ा हो जाये। मेरे पास सब कुछ है बल्के कसरत से है। तुम्हारे भेजे हुए तोहफ़े इपफ़रुदितुस के हाथ से मुझे मिल गये हैं, और मैं और भी आसूदः हो गया हूं। यह ख़ुश्बू और क़ुर्बानी ऐसी है, जो ख़ुदा की नज़र में पसन्दीदा है। मेरा ख़ुदा, अलमसीह ईसा के ज़रीये अपने जलाल की दौलत से तुम्हारी तमाम ज़रूरतें पूरी कर देगा। हमारे ख़ुदा और बाप की हमेशा तक तम्जीद होती रहे। आमीन। हर एक मुक़द्दस से अलमसीह ईसा में सलाम कहो। जो मसीही भाई और बहन मेरे साथ हैं, तुम्हें सलाम कहते हैं। ख़ुदा के तमाम मुक़द्दसीन, ख़ुसूसन तमाम अहल-ए-ईमान जो क़ैसर के महल वालों में से हैं, तुम्हें सलाम कहते हैं। ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम्हारी सब की रूह के साथ होता रहे। आमीन। यह ख़त ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा के रसूल पौलुस और भाई तिमुथियुस की जानिब से, कुलुस्से शहर के उन मुक़द्दस और अलमसीह में वफ़ादार साथी मोमिन भाईयों और बहनों के नाम लिख्खा हुआ ख़त: हमारे ख़ुदा बाप की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। जब हम तुम्हारे लिये दुआ करते हैं तो हमेशा अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के बाप यानी ख़ुदा का शुक्र अदा करते हैं, क्यूंके हम ने सुना है के तुम ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा पर ईमान रखते हो और सब मुक़द्दसीन से किस क़दर महब्बत करते हो। तुम्हारा यह ईमान और महब्बत उस चीज़ की उम्मीद के सबब से है जो तुम्हारे लिये आसमान पर जमा कर के रख्खी हुई है और जिस का ज़िक्र तुम ने पहले ही उस इन्जील के बरहक़ कलाम में सुना था ये पैग़ाम जो तुम्हारे पास पहुंच चुका है। ठीक उसी तरह पूरी दुनिया में फैल रहा और तरक़्क़ी कर रहा है, जिस तरह ये तुम्हारे दरमियान भी इसी दिन से काम कर रहा है जिस दिन तुम ने पहली मर्तबा उसे सुन कर ख़ुदा के फ़ज़ल की पूरी हक़ीक़त समझ ली थी। तुम ने उस की तालीम हमारे अज़ीज़ हम ख़िदमत इपफ़्रास से सीखी, जो हमारी तरफ़ से तुम्हारे दरमियान अलमसीह का वफ़ादार ख़ादिम है। इपफ़्रास ने हमें बताया के पाक रूह ने तुम्हारे अन्दर कैसी महब्बत पैदा की है। इसलिये जिस दिन से हम ने आप लोगों से सब बातें सुनी हैं, हम भी तुम्हारे वास्ते ख़ुदा से बिला नाग़ा दुआ करते और दरख़्वास्त करने से बाज़ नहीं आते के तुम्हें ख़ुदा अपनी मर्ज़ी के इल्म से, रूहानी हिक्मत और समझ से मामूर कर दे जिसे पाक रूह मुहय्या करता है। ताके तुम्हारी ज़िन्दगी ख़ुदावन्द के लाइक़ हो और ख़ुदावन्द को हर तरह से ख़ुश करने वाली हो: और सब नेक काम में फलदार बनो, और ख़ुदा के इल्म-ओ-इरफ़ान में बढ़ते चले जाओ, तुम लोगों के लिये हमारी दुआ है के तुम ख़ुदा की जलाली क़ुदरत से मिलने वाली हर तरह की क़ुव्वत से मज़बूत होते जाओ ताके तुम में बेहद तहम्मुल और सब्र पैदा हो, और ख़ुशी से ख़ुदा बाप का शुक्र करते रहो जिस ने तुम्हें नूर की बादशाही में अपने मुक़द्दस लोगों की मीरास में शामिल होने के लाइक़ बनाया, ख़ुदा ने हमें तारीकी के क़ब्ज़े से छुड़ा कर अपने अज़ीज़ बेटे की बादशाही में दाख़िल किया है, उसी अज़ीज़ बेटे के ज़रीये हमें मुख़्लिसी, यानी गुनाहों की मुआफ़ी मिली है। इब्न-ए-ख़ुदा अनदेखे ख़ुदा की सूरत है और तमाम मख़्लूक़ात में पहलौठे हैं। क्यूंके अलमसीह के वसीले से ख़ुदा ने सब कुछ ख़ल्क़ किया गया: चाहे वह चीज़ें आसमान की हों या ज़मीन की, नमूदार हों या पोशीदा, शाही तख़्त हों या उन की क़ुव्वतें, हुक्मरां हों या इख़्तियार वाले। सब चीज़ें अलमसीह के ज़रीये और उन ही के ख़ातिर पैदा हुई हैं। वह सब चीज़ों में सब से पहले है और अलमसीह में ही सब चीज़ें क़ाइम है। और वोही बदन यानी जमाअत का सर हैं। वोही पहले मुर्दों में से जी उठने वालों में पहलौठे हैं ताके सब चीज़ों में पहला दर्जा उन ही का हो। क्यूंके ख़ुदा को यह पसन्द आया के ख़ुदा की सारी मामूरी अलमसीह में सुकूनत करे, और अलमसीह के सलीब पर बहाए गये ख़ून के वसीले से, सब चीज़ों का चाहे वो आसमान की हों, या ज़मीन की, अपने साथ सुलह कर ले। किसी वक़्त तुम ख़ुदा से बहुत दूर थे, और अपने ज़हनों में दुश्मनी रखकर बुरे कामों में मश्ग़ूल थे। लेकिन अब उस ने अलमसीह की जिस्मानी मौत के वसीले से तुम्हारे साथ सुलह कर ली है ताके वह तुम्हें पाक, बेऐब और बेइल्ज़ाम बना कर अपने हुज़ूर में पेश करे। बशर्ते के तुम अपने ईमान की पुख़्ता बुनियाद पर क़ाइम रहो, और उस ख़ुशख़बरी की उम्मीद को जिसे तुम ने सुना था, न छोड़ो, जिस की मुनादी आसमान के नीचे सारी मख़्लूक़ में की गई, और मैं पौलुस उसी का ख़ादिम बना। अब तुम्हारी ख़ातिर दुख उठाना भी मेरे लिये ख़ुशी का बाइस है, क्यूंके मैं अपने जिस्म में अलमसीह की मुसीबतों की कमी को उस के बदन, यानी जमाअत की ख़ातिर पूरा कर रहा हूं। ख़ुदा ने अपने कलाम को पूरे तौर पर तुम्हें मुनादी करने की ज़िम्मेदारी मेरे सुपुर्द की और मुझे अपनी जमाअत का ख़ादिम मुक़र्रर किया। यानी वह राज़ जो तमाम ज़मानों और पुश्तों से पोशीदा रहा, लेकिन अब ख़ुदा के मुक़द्दसीन पर ज़ाहिर हुआ है। जिन्हें ख़ुदा ने मुन्तख़ब किया के ग़ैरयहूदियों के दरमियान उस बेशक़ीमती और जलाली राज़ को ज़ाहिर करे, वो राज़ अलमसीह हैं जो जलाल की उम्मीद हैं, और तुम में बसे हुए हैं। हम उसी अलमसीह की मुनादी करते, और कमाल दानाई से हर एक को नसीहत करते और तालीम देते हैं, ताके हर शख़्स को अलमसीह में कामिल कर के उसे ख़ुदा के हुज़ूर पेश कर सकें। और इसी मक़सद मैं अलमसीह की उस अज़ीम क़ुव्वत के मुवाफ़िक़ जो मुझ में तासीर करती है, जांफ़िशानी से सख़्त मेहनत और जद्दोजहद करता हूं। मैं चाहता हूं के तुम जान लो के में न सिर्फ़ तुम्हारे लिये बल्के लौदीकिया शहर वालों के लिये, और उन तमाम मोमिनीन के लिये भी कितनी सख़्त जद्द-ओ-जहद कर रहा हूं और जिन लोगो से मैं ज़ाती तौर से नहीं मिला। मेरी कोशिश ये है के उन की दिली हौसला अफ़्ज़ाई कर के आपसी महब्बत में एक किया जाये, ताके वो अक़्ल और दानिश की सारी दौलत पायें और ख़ुदा के राज़ को, जान लें यानी अलमसीह को, अलमसीह में ही हिक्मत और इल्म-ओ-इरफ़ान के सब ख़ज़ाने पोशीदा हैं। मैं यह इसलिये कहता हूं के कोई तुम्हें झूटी दलीलों से गुमराह न कर दे। अगरचे मैं जिस्मानी तौर पर तुम से दूर हूं मगर रूहानी तौर पर तुम्हारे नज़दीक, और यह देखकर ख़ुश होता हूं के तुम कितनी मुनज़्ज़म ज़िन्दगी गुज़ारते हो, और तुम्हारा अलमसीह पर ईमान कितना पुख़्ता है। पस जब तुम ने अलमसीह ईसा को अपना ख़ुदावन्द क़बूल कर लिया है, तो अलमसीह में ज़िन्दगी भी गुज़ारो, अलमसीह में जड़ पकड़ते और तामीर होते जाओ, और जिस तरह तुम ने तालीम पाई है उसी तरह ईमान में मज़बूत रहो, और ख़ुदा की बेहद शुक्र गुज़ारी किया करो। ख़बरदार, कोई शख़्स तुम्हें उन फ़ल्सफ़ियाना और पुर फ़रेब ख़्यालात का शिकार न बनाने पाये, जिन की बुनियाद अलमसीह पर नहीं बल्के इन्सानी रिवायतों और दुनियवी इब्तिदाई बातों पर है। क्यूंके उलूहीयत की सारी मामूरी अलमसीह में मुजस्सम होकर सुकूनत करती है, और तुम्हें अलमसीह की मामूरी में शरीक कर दिया गया है वोही हर तरह की हुक्मरानी और इख़्तियार वाले का सर हैं। अलमसीह में तुम्हारा ऐसा ख़तना हुआ है जो इन्सानी हाथ का नहीं। बल्के अलमसीह के वसीले से तुम्हारी पुरानी गुनाह आलूदा इन्सानियत को तुम से जुदा कर दिया गया, जब तुम पाक-ग़ुस्ल ले कर गोया अलमसीह के साथ दफ़न हो गये, और तुम ईमान के ज़रीये ज़िन्दा भी किये गये क्यूंके तुम ख़ुदा की उस क़ुदरत पर ईमान लाये, जिस ने अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा किया। और तुम अपने गुनाहों और नामख़्तून जिस्मानी हालत की वजह से मुर्दा थे लेकिन ख़ुदा ने अलमसीह के साथ तुम्हें भी ज़िन्दा कर दिया। और उस ने हमारे सारे क़ुसूर मुआफ़ कर दिये, और अहकाम के क़ानूनी दस्तावेज़ को जो हमारे ख़िलाफ़ लिखे गये थे, और हमें मुजरिम ठहराते थे उसे अलमसीह ने मौक़ूफ़ कर के सलीब पर कीलों से जड़ कर, हमारी नज़रों से दूर कर दिया। और ख़ुदा ने रूहानी हुक्मरानों और इख़्तियार वालों से अिस्लाहः छीन कर उन का एलानिया तमाशा बनाया, और अलमसीह ने सलीब के सबब से उन पर ज़फ़रयाबी का शादयाना बजाया। पस किसी को मौक़ा न दो के वह खाने-पीने, मज़हबी त्योहार मनाने, नये चांद और सबत मनाने के बारे में तुम्हें क़ुसूरवार ठहराये। ये सब चीज़ें तो सिर्फ़ मुस्तक़बिल में आने वाली हक़ीक़त का साया हैं; मगर, अलमसीह तो ख़ुद ही हक़ीक़त हैं। अगर कोई शख़्स ज़ाहिरी ख़ाकसारी और फ़रिश्तों की इबादत करने से ख़ुश होता है। ऐसा शख़्स बड़ी तफ़्सील से अपनी रोयाओं में देखी हुई चीज़ों का बयान करता है; और अपनी ग़ैर रूहानी अक़्ल पर बेफ़ाइदा फूल जाता है। वह शख़्स सर यानी अलमसीह से अपना तअल्लुक़ खो बैठता है जिस से सारा बदन जोड़ों और पठ्ठों के वसीले से परवरिश पा कर, और बाहम पेवस्ता होकर, ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ बढ़ता चला जाता है। जब तुम अलमसीह के साथ इस दुनिया की रूहानी क़ुव्वतों के लिये, मर चुके हो तो अब दुनियादारों की तरह, ज़िन्दगी क्यूं गुज़ारते हो? गोया तुम अभी भी दुनिया के अहकाम के ताबे हो मसलन: “इसे हाथ न लगाना! उसे न चखना! और उसे न छूना?” यह उसूल सिर्फ़ इन्सानी अहकाम और तालीमात हैं और यह सारी चीज़ें इस्तिमाल होकर फ़ना हो जाती हैं। यह ख़ुद साख़ता इबादत, क़ाइदे और क़ानून ज़ाहिर में तो माक़ूल लगते हैं, क्यूंके इन में जिस्मानी रियाज़त और ज़ाहिरी फ़िरोतनी पर ज़ोर दिया गया, मगर जिस्मानी ख़ाहिशों पर क़ाबू पाने में इन से कोई मदद नहीं मिलती। लिहाज़ा जब तुम अलमसीह के साथ ज़िन्दा किये गये तो आलमे-बाला की चीज़ों की जुस्तुजू में रहो, जहां अलमसीह ख़ुदा की दाहिनी तरफ़ तख़्त-नशीन हैं। आलमे-बाला की चीज़ों के ख़्याल में रहो न के ज़मीन पर की चीज़ों के। क्यूंके तुम मर गये, और तुम्हारी ज़िन्दगी अलमसीह के साथ ख़ुदा में पोशीदा है। और जब अलमसीह जो हमारी ज़िन्दगी हैं, ज़ाहिर होगें तो तुम भी उन के साथ उन के जलाल में ज़ाहिर किये जाओगे। पस तुम पस तुम अपनी दुनियवी फ़ितरत को मार डालो मसलन: जिन्सी बदफ़ेली, नापाकी, अपनी शहवत-परस्ती, बुरी ख़ाहिशात और लालच को जो बुतपरस्ती के बराबर है। क्यूंके इन ही के सबब से, ख़ुदा का ग़ज़ब नाज़िल होता है। एक वक़्त था, जब तुम ख़ुद भी अपनी पिछली ज़िन्दगी इसी तरह की ग़ुलामी में ज़िन्दगी गुज़ारते थे। मगर अब इन सब को: यानी ग़ुस्सा, क़हर, कीना, कुफ़्र और अपने मुंह से गाली बकना छोड़ दो। एक दूसरे से झूटे मत बोलो, क्यूंके तुम ने अपनी पुरानी फ़ितरत को उस की आदतों समेत उतार फेंका है और नई इन्सानियत को पहन लिया है, जिसे ख़ुदा ने अपनी सूरत पर पैदा किया है ताके तुम उस के इरफ़ान में बढ़ते और उस के मानिन्द बनते जाओ। चुनांचे इस नई ज़िन्दगी में न तो कोई यूनानी है न यहूदी, न ख़तना वाला न नामख़्तून, न वहशी न सकूती, न ग़ुलाम न आज़ाद, सिर्फ़ अलमसीह ही सब कुछ है और सब में अहम हैं। पस ख़ुदा के मुन्तख़ब किये हुए मुक़द्दस और अज़ीज़ मुन्तख़ब बरगुज़ीदों की तरह तरस, मेहरबानी, फ़िरोतनी, नरमी और तहम्मुल का लिबास पहन लो। एक दूसरे की बर्दाश्त करो और एक दूसरे को मुआफ़ करो अगर किसी को किसी से शिकायत हो। उसे वैसे ही मुआफ़ करो जैसे ख़ुदावन्द ने तुम्हें मुआफ़ किया है। और इन सब ख़ूबीयों पर महब्बत को पहन लो, जो सब कुछ एक साथ बांध कर कामिल इत्तिहाद क़ाइम करती है। अलमसीह का इत्मीनान तुम्हारे दिलों पर हुकूमत करे, जिस के लिये तुम एक ही बदन के आज़ा होने की हैसियत से ख़ुदा के ज़रीये बुलाए गये हो, और तुम शुक्र गुज़ारी भी करते रहो। अलमसीह के कलाम को अपने दिलों में कसरत से बसने दो और पूरी दानाई के साथ एक दूसरे को तालीम दो और नसीहत करते रहो, और अपने दिलों में ख़ुदा की शुक्र गुज़ारी करते हुए ज़बूर, हम्द-ओ-सना और रूहानी ग़ज़लें गाया करो। और जो कुछ तुम कहते या करते हो वह सब ख़ुदावन्द ईसा के नाम से करो, और ख़ुदा बाप का शुक्र करते रहो। ऐ बीवीयो! ख़ुदावन्द में मुनासिब है के तुम अपने शौहरों की ताबे रहो। ऐ शौहरो! अपनी बीवीयों से महब्बत रखो और उन पर सख़्ती न करो। ऐ बच्चो! तुम्हारा फ़र्ज़ है के हर बात में वालिदैन के फ़रमांबरदार रहो, क्यूंके ख़ुदावन्द को यह पसन्द है। ऐ औलाद वालो! अपने बच्चों पर इतनी भी सख़्ती न करो के वह बे दिल हो जायें। ऐ ग़ुलामों! अपने दुनियवी मालिकों के सब बातों में फ़रमांबरदार रहो; न सिर्फ़ ज़ाहिरी तौर पर उन्हें ख़ुश करने के लिये ख़िदमत करो, बल्के उसे ख़ुश दिली से और ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ मानते हुए अन्जाम दो। जो भी काम करो उसे दिल-ओ-जान से करो, गोया यह जान कर के ख़ुदावन्द के लिये कर रहे हो, न के किसी इन्सान के लिये। क्यूंके तुम जानते हो के ख़ुदावन्द तुम्हें इस के एवज़ में वादा की हुई मीरास देगा। क्यूंके तुम वाक़ई अलमसीह की ख़िदमत कर रहे हो। लेकिन हर कोई जो बदी करता है अपनी बदी का बदला पायेगा, क्यूंके ख़ुदा किसी की तरफ़दारी नहीं करता। ऐ मालिको! अपने ख़ादिमो के साथ जाइज़ और मुन्सिफ़ाना सुलूक करें, क्यूंके तुम जानते हो के आसमान पर तुम्हारा भी एक मालिक है। मुहतात होकर शुक्र गुज़ारी के साथ दुआ करने में मश्ग़ूल रहो। और हमारे लिये भी दुआ करो, ताके ख़ुदा हमारे लिये कलाम सुनाने का दरवाज़ा खोल दे और हम अलमसीह के पैग़ाम के उस राज़ को बयान कर सकें, जिस की वजह से मैं ज़न्जीरों से जकड़ा हूं। दुआ करो के मैं उसे ऐसे साफ़ गोई से बयान कर सकूं जैसा के मुझे करना लाज़िम है। हर मौक़े को ग़नीमत समझ कर; ग़ैरमसीहीयों के साथ दानिश-मन्दाना सुलूक करो। तुम्हारी गुफ़्तगू ऐसी पुरफ़ज़ल पुरकशिश हो, ताके तुम हर शख़्स को मुनासिब जवाब दे सको। अज़ीज़ भाई तुख़िकुस जो वफ़ादार ख़ादिम और ख़ुदावन्द में हम ख़िदमत रहा है, मेरा सारा हाल तुम्हें बयान करेगा। मैं उसे तुम्हारे पास इस ग़रज़ से भेज रहा हूं ताके तुम्हें हमारा सारा हाल मालूम हो जाये और वह तुम्हारे दिलों को तसल्ली दे सके। वह उनेसिमुस हमारे वफ़ादार और अज़ीज़ भाई के साथ रहा है, जो तुम्हारी ही जमाअत से है। ये दोनों तुम्हें यहां का सारा हाल बयान कर देंगे। अरिसतरख़ुस जो मेरे साथ क़ैद में है तुम्हें सलाम कहता है और मरक़ुस, जो बरनबास का रिश्ता का भाई है तुम्हें सलाम कहता है। (तुम्हें उस के बारे में हिदायात दी जा चुकी है; अगर वह तुम्हारे पास आये, तो उस का ख़ैर-मक़्दम करना)। और ईसा जो यूसतुस कहलाता है, तुम्हें सलाम कहता है। मख़्तून यहूदी मसीहीयों में से सिर्फ़ यही तीन शख़्स जो ख़ुदा की बादशाही का पैग़ाम फैलाने में मेरे हम ख़िदमत, और मेरी तसल्ली का बाइस रहे हैं। अलमसीह ईसा का ख़ादिम है इपफ़्रास भी, जो तुम्हारी ही जमाअत से है तुम्हें सलाम कहता है। वह बड़ी जांफ़िशानी से तुम्हारे लिये दुआ करता है के तुम कामिल बनो, और ईमान की पूरी पुख़्तगी से ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ चलो। मैं ख़ुद उस के हक़ में गवाही देता हूं के वह तुम्हारे और लौदीकिया और हिरापोलिस शहरों के लोगों के लिये किस क़दर मेहनत करता है। हमारे अज़ीज़ तबीब लूक़ा, और दीमास तुम्हें सलाम कहते हैं। लौदीकिया शहर के मसीही भाईयों और बहनों को, और बहन नुम्फ़ास और उस के घर की जमाअत से सलाम कहना। जब तुम यह ख़त पड़ चुको तो देखना के यह लौदीकिया की जमाअत में भी पढ़ा जाये और लौदीकिया से आये उस ख़त को तुम भी पढ़ लेना। अरख़िप्पुस से कहना: “जो ख़िदमत ख़ुदावन्द ने उस के सुपुर्द हुई है उसे होशयारी से अन्जाम दे।” मैं पौलुस अपने हाथ से तुम्हें सलाम लिखता हूं। मुझे याद रखना ये मत भूलना के मैं ज़न्जीरों में जकड़ा यानी क़ैदख़ाने में हूं। ख़ुदा का तुम पर फ़ज़ल होता रहे। पौलुस और सीलास और तिमुथियुस की तरफ़ से, थिसलुनीके शहर की जमाअत के नाम लिख्खा हुआ ख़त जो ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह में है: तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। तुम सब के लिये हम हमेशा ख़ुदा का शुक्र करते और तुम्हें अपनी दुआओं में भी याद रखते हैं। और हम अपने ख़ुदा और आसमानी बाप की हुज़ूरी मैं तुम्हारे ईमान के काम और मेहनत को जो महब्बत का नतीजा है और तुम्हारे उस सब्र को याद रखते हैं, जो हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह में उम्मीद की बाबत है। ऐ ख़ुदा के अज़ीज़ भाईयों और बहनों! हमें मालूम है के ख़ुदा ने तुम्हें मुन्तख़ब कर लिया है, क्यूंके तुम्हारे पास हमारी ख़ुशख़बरी महज़ लफ़्ज़ी तौर पर ही नहीं बल्के क़ुदरत, पाक रूह और पूरे यक़ीन के साथ तुम तक पहुंची; चुनांचे तुम जानते हो के हम तुम्हारी ख़ातिर तुम्हारे दरमियान किस तरह ज़िन्दगी गुज़ारते थे। और तुम हमारे और ख़ुदावन्द के नक़्श क़दम पर चलने वाले बन गये, क्यूंके तुम ने सख़्त मुसीबत के दरमियान भी कलाम को पाक रूह से मिलने वाली ख़ुशी के साथ क़बूल किया। इस का नतीजा यह हुआ के तुम मकिदुनिया और सूबे अख़िया के इलाक़ों के सारे मोमिनीन के लिये नमूना बन गये। ख़ुदावन्द का पैग़ाम तुम्हारे ज़रीये न सिर्फ़ मकिदुनिया और सूबे अख़िया में फैला बल्के ख़ुदा पर तुम्हारा ईमान ऐसा मशहूर हो गया है के अब हमें उस का ज़िक्र करने की ज़रूरत नहीं रही। क्यूंके ये सारी बातें ख़ुद ही बयान करती हैं के जब हम तुम्हारे यहां तशरीफ़ लाये तो तुम ने किस तरह हमारा इस्तिक़्बाल किया। और किस तरह बुतों की परस्तिश छोड़कर सच्चे और ज़िन्दा ख़ुदा की इबादत करने के लिये रुजू हुए। और ख़ुदा के बेटे हुज़ूर ईसा के आसमान से लौटने के मुन्तज़िर रहो, जिन्हें उस ने मुर्दों में से ज़िन्दा किया और जो हमें आने वाले इलाही ग़ज़ब से बचाते हैं। ऐ भाईयो और बहनों! तुम जानते हो के हमारा तुम्हारे पास आना बेफ़ाइदा न हुआ। तुम तो जानते हो के हम ने फ़िलिप्पी शहर में भी काफ़ी तकलीफ़ उठाई और बेइज़्ज़ती का सामना किया। लेकिन हमारे ख़ुदा ने हमें यह जुरअत बख़्शी के बड़ी मुख़ालफ़त के बावुजूद भी हम तुम्हें उस की तरफ़ से ख़ुशख़बरी सुनायें। चुनांचे हम जो कुछ भी अर्ज़ करते हैं तुम्हें ग़लती या नापाक मक़सद है और न ही हम तुम्हें फ़रेब देने की कोशिश में हैं। बल्के इस के बरअक्स, जैसे ख़ुदा ने हमें मक़्बूल कर के ख़ुशख़बरी हमारे सुपुर्द की वैसे ही हम बयान करते हैं; हम आदमियों को नहीं बल्के ख़ुदा को ख़ुश करने की कोशिश में हैं, जो हमारे दिलों को आज़माने वाला है। क्यूंके तुम जानते हो के हम ने कलाम में कभी भी न तो ख़ुशामद का सहारा लिया और न ही वो लालच का पर्दा बना, ख़ुदा इस बात का गवाह है। हम न तो आदमियों से और न ही तुम से और न किसी और से अपनी तारीफ़ चाहते थे, अगरचे हम ख़ुदावन्द अलमसीह के रसूलों की हैसियत से तुम पर अपना माली बोझ डाल सकते थे। लेकिन जिस तरह एक मां अपने बच्चों को नरमी से पालती है। उसी तरह हमारा भी सुलूक तुम्हारे साथ बड़ी नरमी वाला था। और तुम्हारी देख-भाल की। क्यूंके हम तुम्हें इतना ज़्यादा चाहने लगे थे, के न सिर्फ़ ख़ुदा की ख़ुशख़बरी बल्के हम अपनी जान तक भी तुम्हें देने को राज़ी थे। ऐ भाईयो और बहनों! जब हम तुम्हारे दरमियान रह कर इलाही ख़ुशख़बरी सुना रहे थे तो तुम्हें हमारी वो मेहनत और मशक़्क़त ज़रूर याद होगी जब हम रोज़ रात दिन अपने हाथों से काम करते थे ताके किसी पर बोझ न बनें। तुम भी गवाह हो और ख़ुदा भी गवाह है के हम ने तुम सभी मोमिनीन के दरमियान कैसी पाक, रास्तबाज़ और बेऐब ज़िन्दगी गुज़ारी। चुनांचे तुम जानते हो के जैसा सुलूक एक बाप अपने बच्चों के साथ करता है वैसा ही हम तुम्हारे साथ करते रहे, और तुम हर एक को हौसला और तसकीन देते और समझाते रहो ताके तुम्हारा चाल चलन ख़ुदा के लाइक़ हो, जो तुम्हें अपने जलाल और बादशाही में शरीक होने के लिये बुलाता है। इसलिये हम हमेशा ख़ुदा का शुक्र करते हैं के जब तुम ने हमारी ज़बानी ख़ुदा के पैग़ाम को सुना तो उसे आदमियों का कलाम नहीं बल्के ख़ुदा का कलाम समझ कर क़बूल किया, जैसा के वो हक़ीक़त में है, और वह तुम में जो ईमान लाये हो, तासीर भी कर रहा है। इसलिये ऐ भाईयो और बहनों! तुम भी ख़ुदा की उन जमाअतों की तरह बन गये हो जो यहूदिया में ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा में हैं: क्यूंके तुम ने भी अपनी क़ौम वालों से वही तकलीफ़ें उठाईं जो उन्होंने अपने हम वतन यहूदियों से पाई थीं। जिन्होंने ख़ुदावन्द ईसा और उन नबियों को भी मार डाला और हमें भी सता कर दर-ब-दर कर दिया। और ख़ुदा भी उन से नाराज़ है और वो सारे लोगों के दुश्मन बने हुए हैं। क्यूंके वह हमें ग़ैरयहूदियों को ख़ुदा का कलाम सुनाने से रोकते थे ताके उन में कोई नजात न पा सके। और ऐसा कर के वो अपने गुनाहों का पैमाना हमेशा भरते रहे। लेकिन आख़िरकार ख़ुदा के क़हर ने उन पर आ गया। ऐ भाईयो और बहनों! जब हम थोड़े अरसा के लिये तुम से जुदा हुए थे न के दिल से (जिस्मानी न के रूहानी तौर पर) तो तुम से दुबारा मिलने की हर मुम्किन कोशिश की। इसलिये हम ने (ख़ुसूसन मुझ पौलुस ने) तुम्हारे पास आने की बार-बार कोशिश की मगर शैतान ने हमें रोके रख्खा। भला हमारी उम्मीद, और ख़ुशी और फ़ख़्र का ताज कौन है? क्या हमारे ख़ुदावन्द ईसा के दूसरी आमद पर उन की हुज़ूरी में तुम ही न होगे। यक़ीनन हमारा जलाल और हमारी ख़ुशी तुम ही हो। आख़िरकार जब हम से और बर्दाश्त न हो सका तो हम ने अथेने शहर में तन्हा ठहरना बेहतर समझा। हम ने अलमसीह की ख़ुशख़बरी फैलाने में ख़ुदा के हम ख़िदमत और हमारे भाई तिमुथियुस को तुम्हारे पास इसलिये भेजा, ताके वह तुम्हें ईमान में मज़बूत करे और तुम्हारा हौसला बढ़ाए, ताके उन मुसीबतों की वजह से कोई घबरा न जाये। क्यूंके तुम ख़ुद जानते हो के हम पर मुसीबतों का आना ज़रूरी है। हक़ीक़त तो यह है के जब हम तुम्हारे पास थे तो तुम से कहा करते थे के हम सताये जायेंगे। चुनांचे जैसा के तुम जानते हो के ऐसा ही हुआ। इसी सबब से जब मैं और ज़्यादा बर्दाश्त न कर सका तो तुम्हारे ईमान का हाल दरयाफ़्त करने को भेजा; मुझे डर था के कहीं ऐसा न हुआ हो के शैतान ने तुम्हें आज़माया हो और हमारी मेहनत बेफ़ाइदा गई हो। लेकिन अभी तिमुथियुस तुम्हारे पास से यहां आया है और उस ने तुम्हारे ईमान और महब्बत और इस बात की हमें यह ख़ुशख़बरी दी है के तुम हमारा ज़िक्र-ए-ख़ैर हमेशा करते हो और हम से मिलने के ऐसे मुश्ताक़ हो जैसे के हम तुम सब से मिलने की आरज़ू रखते हैं। इसलिये, ऐ भाईयो और बहनों! हम ने अपनी सारी तंगी और मुसीबत में तुम्हारे ईमान के सबब से तुम्हारे बारे में तसल्ली पाई। और अब चूंके तुम ख़ुदावन्द में क़ाइम हो, इसलिये हम ज़िन्दा हैं। और तुम्हारी वजह से अपने ख़ुदा के सामने हमें जिस क़दर ख़ुशी हासिल हुई है, उस के बदले में किस तरह तुम्हारे ज़रीये हम ख़ुदा का शुक्र अदा करें? हम रात और दिन ख़ूब दुआ करते हैं के तुम से फिर मिलें और तुम्हारे ईमान में जो कमी है उसे पूरा कर दें! अब काश हमारा ख़ुदा और बाप ख़ुद और हमारा ख़ुदावन्द ईसा हमारे लिये रास्ता खोल दे के हम तुम्हारे पास आ सकें! और ख़ुदावन्द ऐसा करे के जिस तरह हमें तुम से महब्बत है उसी तरह तुम्हारी महब्बत भी आपस में और सब लोगों के साथ बढ़े और छलकती जाये। ताके वह तुम्हारे दिलों को ऐसा मज़बूत करे के जब हमारे ख़ुदावन्द ईसा अपने सब मुक़द्दसीन के साथ दुबारा लौटें, तो तुम हमारे ख़ुदा बाप के सामने पाक और बेऐब ठहरो। ग़रज़, ऐ भाईयो और बहनों! हम तुम से दरख़्वास्त करते हैं और ख़ुदावन्द ईसा में तुम्हारी हौसला-अफ़ज़ाई करते हैं के जिस तरह तुम ने हम से ख़ुदा को ख़ुश करने के लिये मुनासिब चाल चलना सीखा है, और तुम वैसी ही ज़िन्दगी गुज़ार भी रहे हो। और अब इसी तरह और तरक़्क़ी करते जाओ। क्यूंके तुम जानते हो के हम ने ख़ुदावन्द ईसा की तरफ़ से तुम्हें कौन-कौन से हुक्म पहुंचाये। चुनांचे ख़ुदा की मर्ज़ी यह है के तुम पाक बनो और जिन्सी बदफ़ेली से बचे रहो। और तुम में से हर एक अपने जिस्म को पाकीज़ा और बाइज़्ज़त तरीक़े से क़ाबू करना सीखे। और ये काम शहवत-परस्ती से नहीं और न ग़ैरयहूदियों की तरह जो ख़ुदा को नहीं जानती हैं। और इस मुआमले में कोई शख़्स अपने मोमिन भाई या बहन को न तो नुक़्सान पहुंचाये और न उसे दग़ा दे क्यूंके ख़ुदावन्द इन सब काम का बदला लेने वाला है जैसा के हम तुम्हें पहले भी ताकीद कर के बता चुके हैं। इसलिये के ख़ुदा ने हमें नापाकी के लिये नहीं बल्के पाकीज़ा ज़िन्दगी गुज़ारने के लिये बुलाया है। चुनांचे जो इन बातों को नहीं मानता वह न सिर्फ़ इन्सान की बल्के ख़ुदा की नाफ़रमानी करता है जो तुम्हें पाक रूह अता फ़रमाता है। अब बरादराना महब्बत के बारे में मुझे तुम को कुछ लिखने की ज़रूरत नहीं; क्यूंके आपस में महब्बत करने की तालीम तुम ने ख़ुदा से पाई है। और तुम सूबे मकिदुनिया के सारे मसीही मोमिनीन से ऐसी ही महब्बत करते हो। फिर भी ऐ भाईयो और बहनों! हम तुम्हें नसीहत करते हैं के तुम इस में और भी तरक़्क़ी करते जाओ। और जैसा हम पहले ही तुम्हें हुक्म दे चुके हैं, हर शख़्स ख़ामोशी से अपने काम में लगा रहे और अपने हाथों से मेहनत करे, ताके ग़ैरमसीही लोग तुम्हारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी को देखकर तुम्हें इज़्ज़त दें और तुम किसी चीज़ के मोहताज न रहो। भाईयो और बहनों! हम नहीं चाहते के तुम उन के हाल से नावाक़िफ़ रहो जो मौत की नींद सो चुके हैं ताके तुम बाक़ी इन्सानों की मानिन्द ग़म न करो जिन के पास कोई उम्मीद ही नहीं। क्यूंके हमारा ईमान है के जिस तरह हुज़ूर ईसा मरे और फिर ज़िन्दा हो गये, ठीक उसी तरह ख़ुदा हुज़ूर ईसा की आमद पर उन्हें भी ज़िन्दा कर देगा जो हुज़ूर ईसा में सो गये हैं। चुनांचे हम ख़ुदा के कलाम के मुताबिक़ तुम से फ़रमाते हैं के हम जो ख़ुदावन्द के दूसरी आमद के वक़्त तक ज़िन्दा बाक़ी रहेंगे, सोए हुओं से पहले हरगिज़ ख़ुदावन्द से नहीं मिलेंगे। क्यूंके ख़ुदावन्द ख़ुद बड़ी ललकार के साथ और मुक़र्रब फ़रिश्ते की आवाज़ और ख़ुदा की नरसिंगे की आवाज़ के साथ आसमान से नाज़िल होंगे और ख़ुदावन्द अलमसीह में जो लोग मर चुके हैं, सब से पहले ज़िन्दा हो जायेंगे। फिर हम जो ज़िन्दा बाक़ी होंगे उन के साथ बादलों पर उठा लिये जायेंगे ताके आसमान में ख़ुदावन्द का इस्तिक़्बाल करेंगे और हमेशा ख़ुदावन्द के साथ रहेंगे। पस तुम इन बातों से एक दूसरे को तसल्ली दिया करो। अब, ऐ भाईयो और बहनों! हमें वक़्त और तारीख़ों की बाबत तुम्हें लिखने की कोई ज़रूरत नहीं। क्यूंके तुम अच्छी तरह जानते हो के ख़ुदावन्द के लौटने का दिन रात के चोर की मानिन्द अचानक आ जायेगा। जब लोग कह रहे होंगे के अब, “अमन और सलामती है,” उसी वक़्त उन पर अचानक हलाकत इस तरह आ जायेगी जिस तरह हामिला औरत को दर्देज़ेह शुरू हो जाता है और वह हरगिज़ न बचेंगे। लेकिन ऐ भाईयो और बहनों! तुम तारीकी में न रहो के वह दिन चोर की मानिन्द अचानक तुम पर आ जाये और तुम्हें हैरत में डाल दे। क्यूंके तुम सब तो नूर के फ़र्ज़न्द और दिन के फ़र्ज़न्द हो; हम न तो रात के हैं और न तारीकी के हैं। लिहाज़ा हम दूसरों की तरह सोते न रहें बल्के जागते और होशयार रहें। क्यूंके जो सोते हैं वह रात को सोते हैं और जो मतवाले होते हैं वह भी रात को होते हैं। चूंके हम दिन के हैं इसलिये हम ईमान और महब्बत का बकतर लगा कर और नजात की उम्मीद का ख़ोद यानी टोपी पहन कर होशयार रहें। क्यूंके ख़ुदा ने हमें अपने ग़ज़ब के लिये नहीं बल्के हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से नजात हासिल करने के लिये मुक़र्रर किया है। और हुज़ूर ईसा अलमसीह ने हमारी ख़ातिर इसलिये जान दी के ख़्वाह हम ज़िन्दा हों या मुर्दा, हम सब मिल कर हुज़ूर ईसा के साथ ही जियें। इसलिये तुम एक दूसरे की हौसला अफ़्ज़ाई करो और तरक़्क़ी का बाइस बनो, जैसा के तुम कर रहे हो। अब ऐ भाईयो और बहनों! हम तुम से दरख़्वास्त करते हैं के उन लोगों की क़दर करो जो तुम्हारे दरमियान सख़्त मेहनत कर रहे हैं और ख़ुदावन्द में जो तुम्हारे पेशवा हैं और तुम्हें नसीहत करते हैं। उन की ख़िदमत के सबब से महब्बत के साथ उन की ख़ूब इज़्ज़त किया करो। और आपस में एक दूसरे के साथ अमन और सलामती से रहो। और ऐ भाईयो और बहनों! काहिल और बेक़ाइदा चलने वालों को समझाओ, बुज़दिल को हिम्मत दो और कमज़ोरों की मदद करो और सब के साथ तहम्मुल से पेश आओ। ख़बरदार! कोई शख़्स किसी से बदी के बदले बदी न करे बल्के हर वक़्त आपस में और सब के साथ नेकी करने की कोशिश में लगे रहो। हर वक़्त ख़ुश रहो। बुला नाग़ा दुआ करो। हर हालात में शुक्र गुज़ारी करो क्यूंके ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा में तुम्हारे लिये ख़ुदा की यही मर्ज़ी है। पाक रूह को मत बुझाओ। नुबुव्वतों की हक़ारत न करो। हर बात को आज़माओ, जो अच्छी हो उसे पकड़े रहो। हर तरह की बदी से दूर रहो। अमन का ख़ुदा ख़ुद ही तुम्हें मुकम्मल तौर से पाक करे; और तुम्हारी रूह, जान और जिस्म को पूरी तरह हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के आने तक बेऐब महफ़ूज़ रखे। तुम्हारा बुलाने वाला सच्चा है। वह ऐसा ही करेगा। ऐ भाईयो और बहनों! हमारे लिये भी दुआ करते रहना। ख़ुदा के सब मुक़द्दसीन भाईयों को पाक बोसे के साथ मेरा सलाम कहना। मैं ख़ुदावन्द के नाम से तुम्हें हिदायत देता हूं के वहां के सब मसीही भाईयों को यह ख़त पढ़ कर सुनाया जाये। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम सब पर होता रहे। पौलुस, सीलास और तिमुथियुस की जानिब से, थिसलुनीके शहर की जमाअत के नाम ख़त जो ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से कहलाती है: हमारे ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। ऐ भाईयो और बहनों! तुम्हारे लिये ख़ुदा का शुक्र करते रहना हमारा फ़र्ज़ है। ऐसा करना इसलिये मुनासिब है के तुम्हारा ईमान तरक़्क़ी पर है और तुम सब की बाहमी महब्बत भी बढ़ती जा रही है। यहां तक के हम ख़ुद ख़ुदा की जमाअतों के दरमियान फ़ख़्र से तुम्हारा ज़िक्र करते हैं के ज़ुल्म-ओ-सितम उठाने के बावुजूद तुम बड़े सब्र के साथ अपने ईमान पर क़ाइम हो। ये ख़ुदा के हक़ीक़ी इन्साफ़ की दलील है के तुम ख़ुदा की बादशाही के लाइक़ ठहरोगे, जिस की वजह से तुम तकलीफ़ उठा रहे हो। ख़ुदा के नज़दीक यही इन्साफ़ है: बदले में वह तुम पर मुसीबत लाने वालों को मुसीबत में डालेगा और तुम मुसीबत उठाने वालों को, और हमारे साथ आराम देगा। यह उस वक़्त होगा जब ख़ुदावन्द ईसा अपने ज़ोरआवर फ़रिश्तों के साथ भड़कती हुई आग में आसमान से ज़ाहिर होगें। और उन्हें सज़ा देंगे जो ख़ुदा को नहीं जानते और हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की ख़ुशख़बरी को नहीं मानते। वह हमेशा के लिये हलाक कर दिये जायेंगे और ख़ुदावन्द के चेहरे और उन के क़ुदरत के जलाल को कभी न देख सकेंगे यह उन की आमद के दिन होगा जब वह अपने मुक़द्दस लोगों में जलाल पायेंगे और तमाम मोमिनीन उन को देखकर हैरान रह जायेंगे। उन में तुम भी शामिल होगे क्यूंके तुम हमारी गवाही पर ईमान लाये हो। चुनांचे हम तुम्हारे लिये मुसलसल दुआ करते रहते हैं के हमारा ख़ुदा तुम्हें इस बुलावे के लाइक़ समझे, और अपनी क़ुदरत से तुम्हारी हर नेक ख़ाहिश पूरी करे और तुम्हें ईमान से काम करने की तौफ़ीक़ दे। ताके हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का नाम तुम्हारे सबब से जलाल पाये और तुम भी उस में जलाल पाओ। यह हमारे ख़ुदा और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के फ़ज़ल से होगा। ऐ भाईयो और बहनों! हम अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की दूसरी आमद और उन के पास अपने जमा होने की बाबत तुम से यह दरख़्वास्त करते हैं, के ऐसी किसी अफ़्वाह से के ख़ुदावन्द की आमद का दिन आ गया, परेशान न होना और न घबराना। या अगर कोई कहे के इस दिन को किसी रूह ने उस पर ज़ाहिर किया है या वह हमारे किसी ख़ास पैग़ाम या ख़त से उसे मालूम हुआ है तो यक़ीन मत करना। न ही किसी तरह किसी के फ़रेब में आना क्यूंके वह दिन नहीं आयेगा जब तक के लोग ख़ुदा के ख़िलाफ़ ईमान से बर्गश्तः न हो जायें, और वह मर्द-ए-गुनाह यानी हलाकत का फ़र्ज़न्द ज़ाहिर न हो जाये। वह हर नाम निहाद ख़ुदा या इबादत के लाइक़ किसी भी चीज़ की जो ख़ुदा या माबूद कहलाती है उस की मुख़ालफ़त करेगा, वह ख़ुद को इन सब से बड़ा माबूद ठहरायेगा और यहां तक के वो ख़ुदा के मक़्दिस में बैठ कर अपने ख़ुदा होने का एलान कर देगा। क्या तुम्हें याद नहीं के जब मैं तुम्हारे पास था तो तुम्हें यह बातें बताया करता था? और तुम जानते हो के अपने मुक़र्ररः वक़्त से पहले ज़ाहिर होने से, उसे कौन सी चीज़ रोके हुए है। क्यूंके बेदीनी की ताक़त पोशीदा तौर पर अब भी अपना असर डाल रही है; लेकिन एक रोकने वाला है और जब तक वह रास्ते से हटाया न जाये वह उसे रोके रहेगा। उस वक़्त वह बेदीन ज़ाहिर होगा, जिसे ख़ुदावन्द ईसा अपनी फूंक से मार डालेंगे और अपनी आमद की तजल्ली से नेस्त कर देंगे। यह बेदीन शैतान की सी क़ुव्वत के साथ आयेगा। और हर तरह के फ़र्ज़ी मोजिज़ात, निशानात और अजीब कामों को दिखायेगा, हलाक होने वालों को हर क़िस्म का फ़रेब देगा। वह इसलिये हलाक होंगे के उन्होंने हक़ की महब्बत को क़बूल न किया जिसे क़बूल करते तो नजात पाते। इस सबब से ख़ुदा उन पर गुमराही का ऐसा असर डालेगा के वह झूट को सच तस्लीम करने लगेंगे। और जो लोग हक़ पर यक़ीन नहीं करते बल्के नारास्ती को पसन्द करते हैं वह सब सज़ा पायेंगे। ऐ भाईयो और बहनों! तुम जो ख़ुदावन्द के प्यारे हो, तुम्हारे लिये ख़ुदा का शुक्र करते रहना हमारा फ़र्ज़ है क्यूंके उस ने तुम्हें पहले ही से चुन लिया था के तुम पाक रूह से पाकीज़गी हासिल कर के और हक़ पर ईमान लाकर नजात पाओ। जिस के लिये उस ने तुम्हें हमारी ख़ुशख़बरी के ज़रीये बुलाया, ताके हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के जलाल में शरीक हो। चुनांचे ऐ भाईयो और बहनों! उस सच्चाई पर साबित-क़दम रहो, जो रिवायती तालीमात तुम ने हम से ज़बानी या हमारे ख़त के ज़रीये हासिल की हैं। अब हमारा ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह ख़ुद और हमारा बाप ख़ुदा जिस ने हम से महब्बत रख्खी और अपने फ़ज़ल से अब्दी तसल्ली और अच्छी उम्मीद बख़्शी, तुम्हारे दिलों को तसल्ली अता फ़रमाये और हर नेक काम और कलाम में तुम्हें मज़बूत करे। ग़रज़ ऐ भाईयो और बहनों! हमारे लिये दुआ करो के हमारे ज़रीये ख़ुदावन्द का कलाम जल्द फैल जाये और जलाल पाये जैसा तुम में हुआ है। और हम बुरे और कजरौ लोगों से बचे रहें क्यूंके सब में ईमान नहीं है। लेकिन ख़ुदावन्द वफ़ादार है। वह तुम्हें मज़बूत करेगा और शैतानी हमलों से महफ़ूज़ रखेगा। हमें ख़ुदावन्द में यक़ीन है के जो हुक्म हम ने तुम्हें दिये थे, तुम उन पर अमल करते हो और करते रहोगे। ख़ुदावन्द तुम्हारे दिलों को ख़ुदा की महब्बत और ख़ुदावन्द अलमसीह के सब्र की तरफ़ राग़िब करे। ऐ भाईयो और बहनों! हम अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम में तुम्हें हुक्म देते हैं के हर उस मोमिन भाई से दूर रहो जो काम से जी चुराता है, और उस तालीम के मुताबिक़ नहीं चलता जो हम ने दी है। तुम आप जानते हो के तुम्हें किस तरह हमारी मानिन्द चलना चाहिये। क्यूंके जब हम तुम्हारे साथ थे तो काहिल नहीं थे, हम किसी की मुफ़्त की रोटी नहीं खाते थे। बल्के, रात दिन मेहनत-ओ-मशक़्क़त करते थे, ताके हम तुम में से किसी पर बोझ न बनें। इसलिये नहीं के हमारा तुम पर कोई हक़ न था, बल्के इसलिये के ऐसा नमूना बनो जिस पर तुम चल सको। और जब हम तुम्हारे पास थे तब भी हमारा यही हुक्म था: “जो आदमी काम नहीं करेगा वह खाने से भी महरूम रहेगा।” हम ने सुन है के तुम में बाज़ ऐसे भी हैं जो मेहनत से जी चुराते हैं। और वह ख़ुद तो कुछ करते नहीं; मगर दूसरों के काम में दख़ल देते हैं। ऐसे लोगों को हम ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के नाम से हुक्म देते हैं और नसीहत करते हैं के वह ख़मोशी से अपना काम करें और मेहनत की रोटी खायें। और तुम भाईयो और बहनों, नेक काम करने में कभी हिम्मत न हारो। अगर कोई हमारे ख़त में लिख्खी हुई नसीहत को न माने तो उन पर निगाह रखो, और उन से मिलना-जुलना छोड़ दो, ताके वह शर्मिन्दा हों। लेकिन उन्हें दुश्मन न समझो, बल्के मोमिन साथी समझ कर उन को नसीहत करो। अब ख़ुदावन्द जो इत्मीनान का सरचश्मा है ख़ुद ही हर हालत में तुम्हें इत्मीनान बख़्शे। ख़ुदावन्द ईसा तुम सब के साथ हों! मैं पौलुस अपने हाथ से सलाम लिखता हूं, हर ख़त में मेरा यही निशान है। मैं इसी तरह लिखता हूं। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम सब पर होता रहे। पौलुस की जानिब से, जो हमारे मुनज्जी ख़ुदा और हमारी उम्मीद अलमसीह ईसा के हुक्म के मुवाफ़िक़ अलमसीह ईसा के रसूल हैं, तिमुथियुस के नाम ख़त जो ईमान के लिहाज़ से मेरा हक़ीक़ी बेटा है। ख़ुदा बाप और हमारे अलमसीह ईसा की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल, रहम और सलामती हासिल होती रहे। मैंने सूबे मकिदुनिया जाते वक़्त तुझे नसीहत की थी के तू इफ़िसुस शहर में रह कर झूटी तालीम देने वाले बाज़ शख़्सों को ताकीद कर के वह आइन्दा ऐसा न करें। और उन फ़र्ज़ी दास्तानों और बेइन्तिहा नस्ब नामों का लिहाज़ न करें इन से ईमान पर मबनी नजात बख़्श इलाही काम आगे नहीं बढ़ता लेकिन महज़ झगड़े पैदा होते हैं। मेरे इस हुक्म का मक़सद यह है के सभी मसीही मोमिनीन के अन्दर एक दूसरे के लिये महब्बत पैदा हो जो ख़ुलूस दिल, नेक नीयत और हक़ीक़ी ईमान से पैदा होती है। कुछ लोग इन से किनारा कर के फ़ुज़ूल बातों की तरफ़ मुतवज्जेह हो गये हैं। वह शरीअत के मुअल्लिम बनना चाहते हैं, हालांके वो जो बातें कहते हैं और जिन का यक़ीनी तौर से दावा करते हैं उन्हें समझते भी नहीं हैं। हम जानते हैं के शरीअत अच्छी है बशर्ते के उसे सही तौर पर इस्तिमाल किया जाये। हम यह भी जानते हैं के शरीअत रास्तबाज़ों के लिये नहीं बल्के बेशरअ लोगों, सरकशों, बेदीनों, गुनहगारों, नापाक लोगों, नरास्तों और मां बाप के क़ातिलों और ख़ूनियों, और ज़िनाकारों, लौंडे बाज़ों, ग़ुलाम फ़रोशों, झूट बोलने वाले, झूटी क़समें खाने वाले और ऐसे तमाम काम हैं जो उस सही तालीम के ख़िलाफ़ में हैं, और यह पुरजलाल ख़ुशख़बरी में पाई जाती है, जिसे मुबारक ख़ुदा ने मेरे सुपुर्द किया है। मैं अपने ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा का शुक्र अदा करता हूं जिस ने मुझे क़ुव्वत अता की और वफ़ादार समझ कर अपनी ख़िदमत के लिये मुक़र्रर किया। हालांके मैं पहले कुफ़्र बकने वाला, लोगों को ईज़ा देने वाला और एक ज़ालिम आदमी था, लेकिन मुझ पर रहम हुआ क्यूंके मैंने नादानी और बेएतक़ादी की हालत में यह सब कुछ किया था। और हमारे ख़ुदावन्द का फ़ज़ल उस ईमान और महब्बत के साथ जो अलमसीह ईसा में है, मुझ पर बहुत कसरत से हुआ। यह बात सच और पूरी तरह क़बूल करने के लाइक़ है के अलमसीह ईसा गुनहगारों को नजात देने दुनिया में आये, जिन में सब से बड़ा गुनहगार मैं हूं। लेकिन मुझ पर इसलिये मेहरबानी हुई के अलमसीह ईसा मुझ जैसे बड़े गुनहगार के साथ तहम्मुल से पेश आयें ताके मैं उन के लिये नमूने बन सकूं जो अलमसीह पर ईमान लाकर अब्दी ज़िन्दगी पायेंगे। अब अज़ली बादशाह यानी उस ग़ैरफ़ानी, नादीदा वाहिद ख़ुदा की इज़्ज़त और ख़ुदा की तम्जीद हो हमेशा तक होती रहे। आमीन! मेरे बेटे तिमुथियुस! मैं तुझे यह हिदायत उन पेशीनगोइयों के मुताबिक़ दे रहा हूं जो तेरे बारे में पहले से की गई थीं, ताके तुम उन पेशीनगोइयों को याद रखो और अच्छी लड़ाई लड़ते रहो। और ईमान और नेकनियती पर क़ाइम रहो। जिसको दूर करने के सबब से बाज़ लोगों ने ऐसा ही किया और उन के ईमान का जहाज़ ग़र्क़ हो गया। उन ही में से हिमुन्युस और सिकन्दर भी हैं जिन्हें मैंने शैतान के हवाले कर दिया ताके वह कुफ़्र से बाज़ रहना सीखें। सब से पहले मैं यह इल्तिजा करता हूं के ख़ुदा के हुज़ूर में दरख़्वास्तें, दुआएं, शिफ़ारिशें और शुक्रगुज़ारियां सब के लिये की जायें। बादशाहों और सब बड़े मर्तबा रखने वालों के लिये भी इस ग़रज़ से के हम कमाल दीनदारी और पाकीज़गी से अमन और सलामती के साथ ज़िन्दगी बसर कर सकें। यह बात हमारे मुनज्जी ख़ुदा के नज़दीक ख़ूब और पसन्दीदा है, ख़ुदा चाहता है के सारे इन्सान नजात पायें और सच्चाई की पहचान तक पहुंचें। क्यूंके एक ही ख़ुदा है और ख़ुदा और इन्सानों के बीच में एक ही दरमियानी भी है यानी अलमसीह ईसा जो इन्सान हैं, जिस ने ख़ुद को सब की रिहाई की ख़ातिर फ़िदये के तौर पर क़ुर्बान कर दिया ताके उन की क़ुर्बानी की मुनासिब वक़्तों पर एक सबूत के तौर पर गवाही दी जाये। और इसी मक़सद के लिये मुझे मुन्नाद और रसूल और ग़ैरयहूदियों को ईमान और सच्चाई की बातें सिखाने वाला उस्ताद मुक़र्रर किया गया। मैं झूट नहीं बोलता, सच कह रहा हूं। पस मैं चाहता हूं के हर जमाअतों के मोमिन मर्द बग़ैर ग़ुस्से और तकरार के, मुक़द्दस हाथों को उठाकर दुआ किया करें। इसी तरह मैं चाहता हूं के ख़्वातीन भी हयादार लिबास पहन कर अपने आप को शराफ़त और शाइस्तगी से आरास्ता करें न के बाल गूंधने, सोने या मोतीयों के जे़वरात, या बेहद क़ीमती लिबास से, बल्के वह अपने आप को नेक कामों से आरास्ता करें जैसा के ख़ुदापरस्त औरतों को करना मुनासिब है। सी तरह ख़ातून को पूरी ख़ामोशी और कमाल ताबेदारी के साथ सीखना चाहिये। मैं औरत को इजाज़त नहीं देता के वह तालीम दे या मर्द पर हुक्म चलाये बल्के ख़ामोश रहे। क्यूंके पहले हज़रत आदम को ख़ल्क़ किया, बाद में हव्वा को। और हज़रत आदम ने फ़रेब नहीं खाया बल्के औरत फ़रेब खाकर गुनहगार ठहरी। लेकिन ख़्वातीन औलाद पैदा करने से नजात पाएंगी बशर्ते के वो ईमान, महब्बत, पाकीज़गी और परहेज़गारी के साथ ज़िन्दगी गुज़ारें। यह बात सच है के जो शख़्स जमाअत में निगहबान का ओहदा चाहता है वह अच्छे काम की ख़ाहिश करता है। लिहाज़ा निगहबान को चाहिये के वह बेइल्ज़ाम, एक बीवी का शौहर, परहेज़गार, ख़ुद पर क़ाबू रखने वाला, क़ाबिल-ए-एहतिराम, मुसाफ़िर परवर और तालीम देने के क़ाबिल हो। वह शराबी और मार पेट करने वाला न हो, बल्के नर्म मिज़ाज हो, और तकरार करने वाला और ज़रदोस्त न हो। वह अपने घर का बख़ूबी बन्दोबस्त करने वाला और अपने बच्चों को बड़ी संजीदगी के साथ ताबे रखता हो। क्यूंके अगर कोई अपने ही घर का बन्दोबस्त करना नहीं जानता, तो वह ख़ुदा की जमाअत की ख़बरगीरी कैसे करेगा? वह नौ मुरीद न हो, के तकब्बुर कर के कहीं वो इब्लीस की सी सज़ा न पाये। और बाहर वालों यानी ग़ैरमसीहीयों में भी उस की अच्छी गवाही हो, ताके कहीं ऐसा न हो के कोई उसे मलामत करे और वह इब्लीस के फन्दे में फंस जाये। इसी तरह जमाअत के ख़ादिमो को चाहिये के वह संजीदा मिज़ाज हों, दोरूख़े, शराबी और न जाइज़ कमाई के लालची न हों। लाज़िम है के वह साफ़ ज़मीर से ईमान की पुरअसरार सच्चाईयां अपने पाक दिल में महफ़ूज़ रखें। ज़रूरी है के उन्हें पहले आज़माया जाये, फिर अगर बेइल्ज़ाम निकलें तो ख़ादिम के तौर पर ख़िदमत का काम उन के सुपुर्द किया जाये। ठीक इसी तरह ख़्वातीन भी क़ाबिल-ए-एहतिराम, दूसरों पर तोहमत लगाने वाली न हों बल्के होशमंद और हर बात में वफ़ादार हों। ख़ादिम एक बीवी के शौहर, और अपने बच्चों और घरों को अच्छी तरह से बन्दोबस्त करने वाले हों। क्यूंके जो ख़िदमत का काम बख़ूबी अन्जाम देते हैं, वो अपने लिये अच्छा मर्तबा और उस ईमान में जो अलमसीह ईसा पर है, बड़ी दिलेरी हासिल करते हैं। मैं तेरे पास जल्द ही आने की उम्मीद कर रहा हूं, फिर भी तुझे यह बातें लिख रहा हूं, ताके अगर मुझे आने में देर हो जाये तो, तुझे मालूम हो के ख़ुदा के घर में, यानी ज़िन्दा ख़ुदा की जमाअत में जो हक़ का सुतून और बुनियाद है, लोगों को इस के साथ किस तरह पेश आना चाहिये। इस में कोई शक नहीं के हक़ीक़ी दीनदारी का सरचश्मा अज़ीम है यानी: वह जो जिस्म में ज़ाहिर हुए, और पाक रूह के वसीले सादिक़ ठहरे, और फ़रिश्तों को दिखाई दिये, ग़ैरयहूदियों में उन की मुनादी हुई, और सारी दुनिया में लोग उन पर ईमान लाये, और ख़ुदा ने हुज़ूर ईसा को अपने साथ रहने के लिये जलाल में आसमान पर उठा लिया। पाक रूह साफ़ तौर पर फ़रमाता है के आने वाले दिनों में बाज़ लोग मसीही ईमान से मुंह मोड़ कर गुमराह करने वाली रूहों और शयातीन की तालीमात की तरफ़ मुतवज्जेह होने लगेंगे। यह बातें उन झूटे आदमियों की रियाकारी के बाइस होंगी जिन का ज़मीर गोया गर्म लोहे से दाग़ा गया हो। यह लोग ब्याह करने से मना करते हैं और उन बाज़ खानों से परहेज़ करने का हुक्म देते हैं जिन्हें ख़ुदा ने इसलिये पैदा किया है के मोमिनीन और हक़ को जानने वाले उन्हें शुक्र गुज़ारी के साथ खायें। क्यूंके हर चीज़ जो ख़ुदा ने बनाई है, अच्छी है, और कोई चीज़ इन्कार के लाइक़ नहीं; बशर्ते के शुक्र गुज़ारी के साथ खाई जाये। क्यूंके उसे ख़ुदा के कलाम और दुआ से मुक़द्दस किया गया है। अगर तू भाईयो और बहनों को, यह बातें याद दिलायेगा तो अलमसीह ईसा का उम्दा ख़ादिम समझा जायेगा और साथ ही उस ईमान और अच्छी तालीम की बातों से परवरिश पायेगा जिस पर तू अमल करता आया है। लेकिन उन फ़ुज़ूल क़िस्सों और कहानियों से किनारा कर जो बूढ़ी औरतों की ज़बान पर रहती हैं इन की बजाय ख़ुदापरस्ती की ज़िन्दगी गुज़ारने के लिये ख़ुद की तरबियत कर। क्यूंके जिस्मानी मशक़्क़त से थोड़ा फ़ायदा तो होता है लेकिन ख़ुदापरस्ती सब चीज़ों के लिये फ़ाइदेमंद होती है क्यूंके इस में न सिर्फ़ मौजूदा ज़िन्दगी का बल्के मुस्तक़बिल ज़िन्दगी का वादा भी मौजूद है। यह बात सच है और हर तरह से क़बूल करने के लाइक़ है। इसलिये हम सख़्त मेहनत और कोशिश करते हैं क्यूंके हम ने अपनी उम्मीद उस ज़िन्दा ख़ुदा पर लगा रख्खी है जो सब इन्सानों का मुनज्जी, ख़ासकर उन का जो मोमिनीन हैं। यह बातें सिखा और उन पर अमल करने का हुक्म दे। कोई भी तेरी जवानी की हक़ारत न करने पाये बल्के तू ईमान लाने वालों के लिये गुफ़्तगू, चाल चलन, महब्बत, ईमान और पाकीज़गी में नमूना बन। जब तक मैं नहीं आ जाता, वहां मेरे आने तक तू जमाअत में पाक कलाम की तिलावत करने, नसीहत करने और तालीम देने में मश्ग़ूल रह। अपनी उस नेमत से ग़ाफ़िल न रहना जो तुझे नुबुव्वत के ज़रीये उस वक़्त मिली थी जब बुज़ुर्गों की जमाअत ने तुझ पर हाथ रखे थे। इन बातों पर ख़ासतौर से ग़ौर कर। और इन पर पूरी तरह अमल कर; ताके सब लोग तुझे तरक़्क़ी करता देख सकें। अपने किरदार और अपनी तालीम पर नज़र रख। इन बातों पर अमल किये जा क्यूंके ऐसा करने से तू अपनी और अपने सुनाने वालों की नजात का बाइस होगा। किसी उम्र रसीदा शख़्स को सख़्ती से न डांटना, बल्के उसे अपना बाप समझ कर नसीहत दे और जवानों को भाईयों की तरह समझा। और बुज़ुर्ग औरतों को मां और जवान ख़्वातीन को पाकीज़गी से बहन जान कर समझा। उन बेवाओं को जो सच-मुच ज़रूरतमन्द हैं, उन की मुनासिब देख-भाल कर। और अगर किसी बेवा के लड़के या पोते हों तो उन की पहली ज़िम्मेदारी अपने घर वालों के तईं अपना फ़र्ज़ अदा करते हुए ख़ुदा का बन्दा बनना सीखें इस तरह अपने वालिदैन और दादा दादी के हक़ अदा करना सीखें क्यूंके ये ख़ुदा की नज़र में पसन्दीदा है। जो औरत वाक़ई ज़रूरतमन्द बेवा है और उस का कोई नहीं है और वो ख़ुदा पर उम्मीद रखती है, और रात दिन ख़ुदा के साथ दुआओं और इल्तिजाओं में मश्ग़ूल रहती है। लेकिन जो बेवा अय्याशी में ज़िन्दगी गुज़ारती है वह जीते जी मुर्दा है। इन हिदायात को लोगों को दे ताके कोई उन पर खुले आम उंगली न उठा सके। जो शख़्स अपने अज़ीज़ों की, और ख़ासकर अपने घराने की ख़बरगीरी नहीं करता, तो वह ईमान का मुन्किर है और बेएतक़ादों से भी बद्तर है। जिस बेवा की उम्र साठ बरस से ज़्यादा हो उसी का नाम बेवाओं की फ़हरिस्त में दर्ज किया जाये और लाज़िम है के वो एक ही शौहर की बीवी रही हो। और वो नेक काम करने में मशहूर रही हो, और उस ने अपने बच्चों की तरबियत की हो, परदेसियों की मेहमान-नवाज़ी की हो, मुक़द्दसीन के पांव धोए हों, मुसीबतज़दों की मदद की हो और हर नेक काम करने में मश्ग़ूल रही हो। मगर जवान बेवाओं को इस फ़हरिस्त में शामिल न करना क्यूंके जब उन की जिस्मानी ख़ाहिशात उन पर ग़ालिब आती हैं तो वो अलमसीह से दूर होकर फिर से ब्याह करना चाहती हैं। यूं वो ख़ुद सज़ा के लाइक़ ठहरती हैं क्यूंके उन्होंने अलमसीह से किये गये अपने पहले अह्द को तोड़ दिया। इस के इलावा वो काहिल हो जाती हैं और घर-घर फिरती रहती हैं, वो न सिर्फ़ काहिल बन जाती हैं बल्के बक-बक करती रहती हैं और दूसरों के मुआमलों में दख़ल देती हैं और फ़ालतू बातें करती रहती हैं। इसलिये मैं जवान बेवाओं को मशवरा देता हूं के वह ब्याह करें, उन के औलाद हों, वह अपना घर बार संभाल लें और किसी मुख़ालिफ़ को मौक़ा न दें के वह उन्हें बदनाम करता फिरे। असल में बाज़ बेवायें गुमराह होकर शैतान की पैरवी करने लगी हैं। अगर किसी मसीही ख़ातून के घर में बेवायें हों तो वह उन की मदद करे ताके जमाअत पर उन का बोझ न पड़े ताके जमाअत उन की मदद कर सके और जो वाक़ई बेसहारा हैं। जो बुज़ुर्ग जमाअत की रहनुमाई का काम अच्छी तरह से करते हैं, ख़ासकर वो जो कलाम सुनाते और तालीम देते हैं, उन्हें दुगनी इज़्ज़त के लाइक़ समझा जाये। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस का बयान है, “गाहते वक़्त बैल का मुंह न बांधना,” और यह भी “मज़दूर अपनी मज़दूरी का हक़्दार है।” अगर किसी पासबान पर इल्ज़ाम लगाया जाता है तो दो या तीन गवाहों के बग़ैर तस्दीक़ किये; उन पर ग़ौर न कर। मगर गुनाह करने वाले पासबान को सब के सामने मलामत कर, ताके दूसरे ऐसी हरकत करने से ख़ौफ़ खायें। मैं ख़ुदा तआला और अलमसीह ईसा को और बरगुज़ीदा फ़रिश्तों को गवाह मान कर तुझे ताकीद करता हूं के इन हिदायात पर बग़ैर तअस्सुब और तरफ़दारी किये अमल करना। किसी शख़्स को मख़्सूस करने के वास्ते उस पर हाथ रखने में जल्दी न करना और न दूसरों के गुनाहों में शरीक होना। अपने आप को पाक रखना। आइन्दा को सिर्फ़ पानी ही न पिया कर बल्के अक्सर बीमार पड़ने और तेरे मेदे के ठीक न रहने के सबब से थोड़ी सी मय भी पी लिया कर। बाज़ लोगों के गुनाह उन के अदालत में हाज़िर होने से पहले ही ज़ाहिर हो जाते हैं और बाज़ के गुनाह बाद में। इसी तरह बाज़ लोगों के नेक काम भी ज़ाहिर हो जाते हैं मगर बाज़ नहीं होते, लेकिन वह हमेशा तक छुपाये भी नहीं जा सकते। जितने ग़ुलाम अभी तक ग़ुलामी के जूए में हैं वो अपने मालिकों को बड़ी इज़्ज़त के लाइक़ समझें ताके कोई ख़ुदा के नाम की और हमारी तालीम की तौहीन न करे। लेकिन जिन ग़ुलामों के मालिक मोमिन हैं वो इस ख़्याल से के अब वो उन के मोमिनीन भाई हैं, उन्हें हक़ीर न जानें बल्के उन की और ज़्यादा ख़िदमत करें क्यूंके अब उन की ख़िदमत से उन के अज़ीज़ मोमिनीन भाईयों को ही फ़ायदा पहुंचेगा। तू उन्हें इन ही बातों की तालीम दे और नसीहत कर। अगर कोई शख़्स हमारी तालीम से फ़र्क़ तालीम देता है और हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की सही हिदायात को और उन की तालीम को नहीं मानता जो ख़ुदापरस्त ज़िन्दगी के मुताबिक़ है, तो वो मग़रूर हैं और कुछ नहीं जानते। बल्के उन्हें सिर्फ़ फ़ुज़ूल बहस और लफ़्ज़ी तकरार करने का शौक़ है जिन का नतीजा हसद, झगड़े, बदगोई और बदज़बानी है। और जिन से उन लोगों में तनाज़ा पैदा होता है जिस से उन की अक़्ल बिगड़ गई है, और वो हक़ से महरूम हो गये हैं और ख़ुदापरस्ती को माली नफ़े का ज़रीअः समझते हैं। हां अगर ख़ुदापरस्ती क़नाअत के साथ हो तो बड़े नफ़े का ज़रीअः है। क्यूंके हम दुनिया में न तो कुछ ले कर आये हैं न कुछ उस में से ले जा सकते हैं। पस अगर हमारे पास खाने को खाना पहनने को लिबास है, तो उसी पर सब्र करें। जो लोग दौलतमन्द होना चाहते हैं वो कई तरह की आज़माइशों फन्दों और बेहूदा और मुज़िर ख़ाहिशों में फंस जाते हैं जो लोगों को तबाही और हलाकत में ग़र्क़ कर देती हैं। क्यूंके ज़रदोस्ती हर क़िस्म की बुराई की जड़ है और बाज़ लोगों ने दौलत के लालच में आकर अपना ईमान खो दिया और ख़ुद को काफ़ी अज़ीय्यत पहुंचाई है। मगर ऐ मर्द ऐ ख़ुदा! तू इन सब बातों से भाग और रास्तबाज़ी, दीनदारी, महब्बत, सब्र और नरमी का तालिब हो। ईमान की अच्छी कुश्ती लड़, अब्दी ज़िन्दगी को थामे रह जिसे पाने के वास्ते तुझे बुलाया गया था और तूने बहुत से गवाहों के रूबरू बख़ूबी इक़रार भी किया था। ख़ुदा तआला के नज़दीक, जो सब को ज़िन्दगी बख़्शता है और अलमसीह ईसा को जिस ने पुन्तियुस पीलातुस के सामने अच्छी गवाही दी, उन्हीं को गवाह मान कर तुझे ताकीद करता हूं के हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के दुबारा ज़ाहिर होने तक तुम इस हुक्म को बेदाग़ और बेइल्ज़ाम रखो, जिसे ख़ुदा तआला अपने मुनासिब वक़्त पर पूरा करेगा, जो मुबारक और वाहिद हुक्मरां है, जो बादशाहों का बादशाह और ख़ुदावन्दों का ख़ुदावन्द है, बक़ा सिर्फ़ उसी की है और ऐसे नूर में रहता है जिस के क़रीब कोई नहीं पहुंच सकता, उसे किसी इन्सान ने नहीं देखा है और न देख सकता है। उस की इज़्ज़त और क़ुदरत अब्दुल-आबाद रहे। आमीन। इस मौजूदा जहान के दौलतमन्दों को हुक्म दे के वो मग़रूर न हों, और नापायदार दौलत पर नहीं बल्के ख़ुदा पर उम्मीद रखें, जो हमें सब चीज़ें फ़य्याज़ी से मुहय्या करता है ताके हम मज़े से ज़िन्दगी गुज़ारें। उन्हें हुक्म दे के वो नेकी करें और नेक कामों के लिहाज़ से दौलतमन्द बनें, और सख़ावत पर तय्यार और दूसरों की मदद करने पर आमादा रहें। इस तरह वो अपने लिये ऐसा ख़ज़ाना जमा करेंगे जो आने वाले जहान के लिये एक मज़बूत बुनियाद क़ाइम करेगी, ताके वो उस ज़िन्दगी को जो असल में हक़ीक़ी ज़िन्दगी है थामे रह सकें। ऐ तिमुथियुस, इस अमानत को जो तेरे सुपुर्द की गई है हिफ़ाज़त से रख। और जिस चीज़ को इल्म कहना ही ग़लत है उस पर तवज्जोह न कर क्यूंके उस में बेहूदा बातें और इख़्तिलाफ़ात पाये जाते हैं, बाज़ लोग ऐसे इल्म का इक़रार कर के अपने ईमान से बर्गश्तः हो गये हैं। तुम सब पर ख़ुदा का फ़ज़ल होता रहे। पौलुस की जानिब से जो उस ज़िन्दगी के वादे के मुताबिक़ जो अलमसीह ईसा में है, ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा के रसूल हैं, प्यारे बेटे तिमुथियुस के नाम ख़त: ख़ुदा बाप और हमारे अलमसीह ईसा की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल, रहम और सलामती हासिल होती रहे। जिस ख़ुदा की इबादत मैं अपने बाप दादा की तरह साफ़ दिली से करता हूं, उसी का शुक्र अदा करता हूं के मैं तुझे रात दिन अपनी दुआओं में हमेशा याद करता हूं। और तुम्हारे आंसुओं को याद कर के, मैं तुम से मिलने का आरज़ूमन्द हूं ताके तुम से मिल कर ख़ुशी हो से भर जाऊं। मुझे तेरा वह सच्चा ईमान याद आता है जो पहले तेरी नानी लूइस और तेरी मां यूनीके का था और मुझे यक़ीन है के वोही ईमान तेरा भी है। इसी सबब से मैं तुझे याद दिलाता हूं के ख़ुदा की उस रूहानी नेमत के शोले को फिर से अपने अन्दर भड़का दे जो मेरे हाथ रखने की बरकत से तुझे हासिल हुई है। क्यूंके ख़ुदा ने हमें बुज़दिली की रूह नहीं बल्के क़ुव्वत, महब्बत और ख़ुद नज़्म-ओ-ज़ब्त रखने की रूह अता फ़रमाई है। पस तू हमारे ख़ुदावन्द की गवाही देने से और मुझ से जो उस का क़ैदी हूं शरम न कर बल्के जैसे मैं ख़ुशख़बरी की ख़ातिर दुख उठाता हूं, वैसे तू भी ख़ुदा की दी हुई क़ुदरत के मुताबिक़ इन्जील की ख़ातिर मेरे साथ दुख उठा। क्यूंके ख़ुदा ने हमें नजात बख़्शी और पाकीज़ा ज़िन्दगी गुज़ारने के लिये बुलाया है। ये हमारे आमाल के सबब से नहीं था बल्के उस के अपने ख़ास मक़सद और उस फ़ज़ल के मुवाफ़िक़ हुआ था जो हम पर अलमसीह ईसा में अज़ल ही से हो चुका था। मगर अब वह हमारे मुनज्जी अलमसीह ईसा की आमद से ज़ाहिर हुआ है जिस ने मौत को नेस्त कर दिया और ख़ुशख़बरी के ज़रीये ज़िन्दगी को रोशन कर दिया। इसी ख़ुशख़बरी के लिये ख़ुदा ने मुझे मुन्नाद, रसूल और उस्ताद मुक़र्रर किया है। इसी वजह से मैं दुख उठा रहा हू्ं और दुख उठाने से शर्मिन्दा नहीं हू्ं, क्यूंके जिस पर मैंने यक़ीन किया है, उसे जानता हूं और मुझे पूरा यक़ीन है के वो मेरी अमानत को अदालत के दिन तक महफ़ूज़ रखने के क़ाबिल है। अब तू उन सही तालीमात को जो तूने मुझ से सुनी हैं, उसे उस ईमान और महब्बत के साथ जो अलमसीह ईसा में है, अपना नमूना बनाये रख। और पाक रूह की मदद से जो हम में बसा हुआ है उस अमानत को संभाल कर रख जो तेरे सुपुर्द की गई है। तू जानता है के सूबे आसिया में सब लोगों ने मुझ से मुंह मोड़ लिया है। उन में फ़ूगलुस और हरमुगिनेस भी हैं। ओनेसिफुरस के घराने पर ख़ुदावन्द की रहमत हो क्यूंके उस ने कई दफ़ा मुझे ताज़ा दम किया और मेरी क़ैद की ज़न्जीरों से शर्मिन्दा न हुआ। बल्के जब वह रोम शहर में आया तो बहुत कोशिश से तलाश कर के मुझ से मिला। ख़ुदावन्द क़ियामत के दिन उस पर रहम करे! तुझे ख़ूब मालूम है के ओनेसिफुरस ने इफ़िसुस शहर में मेरे लिये क्या-क्या ख़िदमतें अन्जाम दीं। पस ऐ मेरे फ़र्ज़न्द! तुम उस फ़ज़ल से जो अलमसीह ईसा में है, मज़बूत बन जा। और जो बातें तूने बहुत से गवाहों की मौजूदगी में मुझ से सुनी हैं, उन्हें ऐसे वफ़ादार लोगों के सुपुर्द कर जो दूसरों को भी सिखाने के क़ाबिल हों। अलमसीह ईसा के अच्छे सिपाही की तरह मेरे साथ दुख उठा। कोई भी सिपाही मैदाने जंग में ख़ुद को रोज़मर्रा के मुआमलों में नहीं फंसाता क्यूंके वो एक फ़ौजी के नाता अपने भर्ती करने वाले को ख़ुश करना चाहता है। उसी तरह दंगल में मुक़ाबला करने वाला अगर कोई पहलवान मुक़र्ररः क़ाईदों के मुताबिक़ मुक़ाबला नहीं करता तो वो फ़तह का सहरा नहीं पाता। जो किसान सख़्त मेहनत करता है, पहले उसी को पैदावार का हिस्सा मिलना चाहिये। जो मैं कहता हूं उस पर ग़ौर कर क्यूंके ख़ुदावन्द तुझे इन सब बातों की समझ अता करेगा। हुज़ूर ईसा अलमसीह को याद रख जो मुर्दों में से जी उठे जो हज़रत दाऊद की नस्ल से हैं। मैं इसी ख़ुशख़बरी मुनादी करता हूं, इसी ख़ुशख़बरी के लिये मैं मुजरिम की तरह दुख उठाता और ज़न्जीरों से जकड़ा हुआ हूं। लेकिन ख़ुदा का कलाम क़ैद नहीं है। चुनांचे मैं ख़ुदा के मुन्तख़ब लोगों की ख़ातिर, सब कुछ बर्दाश्त करता हूं ताके वो भी उस नजात को जो अलमसीह ईसा के ज़रीअः मिलती है अब्दी जलाल के साथ हासिल करें। यह बात क़ाबिले एतबार है के अगर हम उस के साथ मर गये, तो उस के साथ ज़िन्दा भी होंगे; अगर हम सब्र से बर्दाश्त करते रहेंगे तो, उस के साथ हुकूमत भी करेंगे। अगर हम उस का इन्कार करेंगे तो, वह भी हमारा इन्कार करेगा। अगर हम बेवफ़ा निकले, तो भी वह वफ़ादार रहेगा, क्यूंके वह ख़ुद अपना इन्कार नहीं कर सकता। ये बातें ख़ुदा के मुक़द्दसीन को याद दिलाता रह। और ख़ुदावन्द को हाज़िर जान कर उन्हें ताकीद कर के वो लफ़्ज़ी तकरार न करें क्यूंके इस से कुछ हासिल नहीं होता बल्के सुनने वाले बर्बाद हो जाते हैं। ख़ुद को ख़ुदा के सामने मक़्बूल और ऐसे काम करने वाले की तरह पेश करने की कोशिश कर जिसे शर्मिन्दा न होना पड़े, और जो हक़ के कलाम को दुरुस्ती से काम में लाता हो। लेकिन बेहूदा बकवास से परहेज़ कर, क्यूंके जो लोग इस में शामिल होते हैं वह और भी ज़्यादा बेदीनी में तरक़्क़ी करेंगे। और उन की तालीम सरतान की तरह फैल जायेगी। हिमुन्युस और फ़िलेतुस उन ही में से हैं। जो यह कहते हैं के क़ियामत हो चुकी है और यूं वह ख़ुद हक़ से गुमराह होकर बाज़ लोगों का ईमान बिगाड़ रहे हैं। तो भी ख़ुदा की मज़बूत बुनियाद क़ाइम रहती है और उस पर इन अल्फ़ाज़ की मुहर लगी हुई है: “ख़ुदावन्द अपनों को पहचानते हैं,” और “जो कोई ख़ुदावन्द का नाम लेता है वह नारास्ती से बाज़ रहे।” एक दौलतमन्द घराने में न सिर्फ़ सोने चांदी के बर्तन होते हैं, बल्के, लकड़ी और मिट्टी के भी होते हैं; बाज़ ख़ास-ख़ास मौक़ों के लिये और बाज़ रोज़ाना इस्तिमाल के लिये। पस अगर कोई अपने आप को इन बेहूदा बातों से पाक साफ़ रखेगा तो वह मख़्सूस बर्तन बनेगा, अपने मालिक के लिये मुफ़ीद और हर नेक काम के लिये तय्यार होगा। जवानी की बुरी ख़ाहिशों से भाग। जो लोग पाक दिल से ख़ुदावन्द से दुआ करते हैं उन के साथ मिल कर रास्तबाज़ी, ईमान, महब्बत और सुलह का तालिब हो। बेवक़ूफ़ी और नादानी वाली बहसों से अलग रह क्यूंके तू जानता है के इन से झगड़े पैदा होते हैं। और ख़ुदावन्द का ख़ादिम फ़सादी न हो बल्के वह सब के साथ नरमी से पेश आये, और तालीम देने के लाइक़ हो, और नाइन्साफ़ी की हालात में भी सब्र से काम ले। अपने मुख़ालिफ़ों को हलीमी से समझाए। मुम्किन है के ख़ुदा उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दे और वह हक़ को पहचानें, और होश में आयें और शैतान के फन्दे और क़ैद से छूट जायें ताके शैतान की नहीं बल्के ख़ुदा की मर्ज़ी पूरी करने के लिये ताबे हो जायें। लेकिन ये बात जान ले के आख़री ज़माने में होलनाक दिन आयेंगे। लोग ख़ुद ग़रज़, ज़रदोस्त, शेख़ी बाज़, मग़रूर, बदगो, मां बाप के नाफ़रमान, नाशुकरे, नापाक, महब्बत से ख़ाली, मुआफ़ न करने वाले, तोहमत लगाने वाले, बेज़ब्त, वहशी, नेकी के दुश्मन, ग़द्दार, बेहया, मग़रूर, ख़ुदा की निस्बत ऐश-ओ-इशरत को ज़्यादा पसन्द करने वाले होंगे। वह बज़ाहिर ख़ुदापरस्त ज़िन्दगी तो गुज़ारेंगे लेकिन हक़ीक़ी ख़ुदापरस्त ज़िन्दगी की क़ुव्वत का इन्कार करेंगे। ऐसे इन्सानों से किनारा करना। इन ही में से बाज़ ऐसे भी हैं जो घरों में दबे पांव घुस आते हैं और बेवक़ूफ़ और छिछोरी औरतों को अपने क़ब्ज़े में कर लेते हैं जो गुनाहों में दबी होती हैं और हर तरह की बुरी ख़ाहिशों का शिकार बनी रहती हैं। ये औरतें हर वक़्त तालीम तो पाती रहती हैं मगर हक़ की पहचान तक कभी नहीं पहुंच सकतीं। जिस तरह यन्नेस और यम्ब्रेस ने हज़रत मूसा की मुख़ालफ़त की थी उसी तरह यह लोग भी हक़ की मुख़ालफ़त करते हैं। उन की अक़्ल बिगड़ी हुई है और यह ईमान के एतबार से न मक़्बूल हैं। लेकिन ये सब ज़्यादा वक़्त तक नहीं चलेगा क्यूंके इन की हमाक़त सब आदमियों पर ज़ाहिर हो जायेगी। लेकिन तिमुथियुस मेरी तालीम, चाल चलन और ज़िन्दगी के मक़सद से ख़ूब वाक़िफ़ है। तुम मेरे ईमान, तहम्मुल, महब्बत और मेरे सब्र को जानते हो। तुम्हें मालूम है के मुझे किस तरह सताया गया और मैंने क्या-क्या मुसीबतें उठाईं यानी वह मुसीबतें जो अन्ताकिया, इकुनियुम और लुस्तरा शहरों में, मुझ पर आ पड़ी थीं। मगर ख़ुदावन्द ने मुझे उन सब मुसीबतों से रिहाई बख़्शी। दरअस्ल जितने लोग अलमसीह ईसा में दीनदार ज़िन्दगी गुज़ारना चाहते हैं वह सब सताये जायेंगे। लेकिन बदकार, दग़ाबाज़ लोग फ़रेब देते और फ़रेब खाते हुए बिगड़ते चले जायेंगे। लेकिन तू उन बातों पर क़ाइम रह जो तूने सीखी हैं और जिन का तुझे पूरा यक़ीन है, क्यूंके तुझे मालूम है के तूने उन बातों को किस से सीखा है। और किस तरह तुम बचपन से उन मुक़द्दस सहीफ़ों से वाक़िफ़ हो जो तुम्हें वो इरफ़ान बख़्शती हैं जिस से अलमसीह ईसा पर ईमान लाने से नजात हासिल होती है। क्यूंके हर सहीफ़ा जो ख़ुदा के इल्हाम से वुजूद में आया है, वो तालीम देने, तम्बीह करने, इस्लाह और रास्तबाज़ी में तरबियत देने के लिये मुफ़ीद है, ताके ख़ुदा का ख़ादिम इस लाइक़ बने के हर नेक काम करने के लिये तय्यार हो जाये। मैं ख़ुदा तआला और अलमसीह ईसा की हुज़ूरी में, जो ज़िन्दों और मुर्दों की अदालत करेगा, और हुज़ूर की दूसरी आमद और उन की बादशाही ज़ाहिर होने की याद दिला कर तुझे ताकीद करता हूं: कलाम की मुनादी कर; वक़्त बे वक़्त तय्यार रह; बड़े सब्र और तालीम के साथ लोगों को समझा, मलामत और उन की हौसला अफ़्ज़ाई कर। क्यूंके ऐसा वक़्त आयेगा जब लोग सही तालीम की बर्दाश्त नहीं करेंगे बल्के अपनी ख़ाहिशों के मुताबिक़ बहुत से उस्ताद बना लेंगे जो उन्हें सिर्फ़ उन के कानों को अच्छा लगने वाली तालीम देंगे। और वह अपने कानों को हक़ की तरफ़ से फेर कर झूटे क़िस्से कहानियों की तरफ़ मुतवज्जेह होंगे। मगर तू हर हालत में होशयार रह, दुख उठा, मुबश्-शिर का काम अन्जाम दे और अपनी ख़िदमत को पूरा कर। क्यूंके अब मैं नज़्र की क़ुर्बानी की तरह उंडेला जा रहा हूं और मेरे इस दुनिया से जाने का वक़्त आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं। मैंने दौड़ को ख़त्म कर लिया है और मैंने अपने ईमान को महफ़ूज़ रख्खा है। मुस्तक़बिल में मेरे लिये रास्तबाज़ी का वो ताज रख्खा हुआ है, जो आदिल और मुन्सिफ़ ख़ुदावन्द मुझे अपने दुबारा आमद के दिन अता फ़रमायेगा। और न सिर्फ़ मुझे बल्के उन सब को भी जो ख़ुदावन्द की आमद के आरज़ूमन्द हैं। मेरे पास जल्द पहुंचने की कोशिश कर। क्यूंके दीमास ने दुनिया की महब्बत में फंस कर मुझे छोड़ दिया और थिसलुनीके शहर को चला गया। और क्रेसकेन्स सूबे गलतिया को और तितुस सूबे दलमतिया को चला गया। सिर्फ़ लूक़ा मेरे पास है। तू मरक़ुस को साथ ले कर चला आ क्यूंके वह इस ख़िदमत में मेरे बड़े काम का है। तुख़िकुस को मैंने इफ़िसुस शहर भेज दिया है। जब तू आये तो अपने साथ वो चोग़ा और तूमार ख़ासतौर पर चमड़े के नविश्ते जो मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया था, अपने साथ लेते आना। सिकन्दर ठठेरे ने मुझे बहुत नुक़्सान पहुंचाया है। ख़ुदावन्द उसे उस के कामों का बदला देगा। तू भी उस से ख़बरदार रहना क्यूंके उस ने हमारी बातों की सख़्त मुख़ालफ़त की थी। अदालत में मेरी पहली पेशी के वक़्त किसी ने मेरा साथ नहीं दिया बल्के सब ने मुझे छोड़ दिया था। काश ख़ुदा उन से उस का जवाब तलब न करे! मगर ख़ुदावन्द मेरा मददगार हुआ। ख़ुदावन्द ने मुझे क़ुव्वत बख़्शी ताके मेरे ज़रीये पैग़ाम पूरी तरह से मुनादी की जाये ताके सब ग़ैरयहूदी उसे सुन सकें। साथ ही मैं भूके शेरों के मुंह से भी छुड़ाया गया। और ख़ुदावन्द मुझे हर बदी के हमले से बचाएगा और सलामती के साथ अपनी आसमानी बादशाही में पहुंचाएगा। ख़ुदा की तम्जीद हमेशा तक होती रहे। आमीन। प्रिसकिल्लाह और अक्विला से और ओनेसिफुरस के ख़ानदान से सलाम कहना। इरास्तुस, कुरिनथुस शहर में रुक गया और तुरफ़िमुस की बीमारी की वजह से मुझे उसे बन्दरगाह शहर मीलीतुस में छोड़ना पड़ा। सर्दी के मौसम से पहले मेरे पास पहुंचने की कोशिश कर। यूबूलुस, पूदीनुस, लीनुस, क्लोदिया और सब मोमिन भाई तुझे सलाम कहते हैं। ख़ुदावन्द तेरी रूह के साथ रहे। तुम सब पर ख़ुदा का फ़ज़ल होता रहे। पौलुस की जानिब से जो ख़ुदा का ख़ादिम और हुज़ूर ईसा अलमसीह का रसूल है। ख़ुदा ने मुझे अपने बरगुज़ीदा लोगों के ईमान और हक़ के इरफ़ान में तरक़्क़ी की ख़ातिर मुन्तख़ब किया ताके वो दीनदारी की तरफ़ रुजू करूं। जो अब्दी ज़िन्दगी की उम्मीद पर क़ाइम है जिस का वादा ख़ुद ख़ुदा ने शुरू ज़माने से पेशतर ही कर दिया था, जो कभी झूट नहीं बोलता। और जिसे अब ख़ुदा ने अपने मुक़र्रर वक़्त पर अपने कलाम को मेरे इस मुनादी के ज़रीअः ज़ाहिर किया जो हमारे मुनज्जी ख़ुदा के हुक्म से मेरे सुपुर्द किया गया। तितुस के नाम ख़़त जो ईमान की शिरकत की रूह से मेरा हक़ीक़ी बेटा है: ख़ुदा बाप और हमारे मुनज्जी ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा की जानिब से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। मैंने तुझे जज़ीरे क्रेते में इसलिये छोड़ा था के जो काम वहां अधूरा रह गया था, तू उसे पूरा कर सके और मेरे हुक्म मुताबिक़ हर शहर की जमाअत में बुज़ुर्गों को मुक़र्रर करे। हर पासबान बेइल्ज़ाम हो, एक ही बीवी का शौहर हो, उस के बच्चे ईमान वाले हो और बदचलनी और नाफ़रमानी के इल्ज़ाम से पाक हो। क्यूंके निगहबान को ख़ुदा के घर का मुख़्तार होने की वजह से ज़रूर बेइल्ज़ाम होना चाहिये। न तो वो सख़्त-दिल, गर्म मिज़ाज, शराबी, झगड़ालू, और नाजायज़ नफ़े का लालची हो। बल्के वह मेहमान-नवाज़, ख़ैर दोस्त, अपने नफ़्स पर क़ाबू रखने वाला, रास्तबाज़, पाक और नज़्म-ओ-ज़ब्त वाला हो। और ईमान के कलाम पर जो इस तालीम के मुवाफ़िक़ है, क़ाइम रहने वाला हो ताके वो सही तालीम से दूसरों को नसीहत दे सके और मुख़ालिफ़ों को भी क़ाइल कर सके। क्यूंके बहुत से लोग ख़ासतौर पर वो जो ख़तना कराने पुरज़ोर देते हैं, बड़े सरकश, फ़ुज़ूल बातें कहने वाले और दग़ाबाज़ हैं। ऐसे लोगों का मुंह बन्द करना ज़रूरी है क्यूंके ये लोग नाजायज़ नफ़े की ख़ातिर ग़लत बातें सिखा कर जो उन्हें नहीं सिखाना चाहिये, घर के घर तबाह कर देते हैं। उन के नबियों में से एक ख़ुद क्रेते नबी ने तो यहां तक कह दिया: “क्रेती लोग हमेशा झूटे, मूज़ी दरिन्दे, काहिल और पेटू होते हैं।” यह गवाही सच्ची है। लिहाज़ा तू उन्हें सख़्ती से मलामत किया कर ताके उन का ईमान दुरुस्त हो जाये। और वह यहूदियों के क़िस्सों और ऐसे आदमियों के अहकाम पर तवज्जोह न करें जो हक़ से गुमराह हो गये हैं। जो ख़ुद पाक हैं उन के लिये सब चीज़ें पाक हैं लेकिन गुनाह आलूदा और बेईमान लोगों के लिये कोई भी चीज़ पाक नहीं क्यूंके उन की अक़्ल और ज़मीर दोनों नापाक हैं। वह ख़ुदा की पहचान का दावा तो करते हैं लेकिन अपने कामों से उस का इन्कार करते हैं। वह क़ाबिल-ए-नफ़रत हैं, नाफ़रमान हैं और कोई नेक काम करने के लाइक़ नहीं हैं। बहरहाल तुम वोही बातें बयान कर जो सही तालीम के मुताबिक़ हों। बुज़ुर्गों मर्दों को सिखा के वह परहेज़गार, क़ाबिल-ए-एहतिराम, अपने नफ़्स पर क़ाबू रखने वाले, ईमान, महब्बत और सब्र में पक्के हों। इसी तरह बुज़ुर्ग ख़्वातीन को हिदायत दो के वह भी मुक़द्दसीन की सी ज़िन्दगी बसर करें और तोहमत लगाने वाली और शराब पीने वाली न हों बल्के अच्छी बातों की तालीम देने वाली हों। तभी वह जवान ख़्वातीन को सिखा सकेंगी के वह अपने शौहरों और बच्चों को प्यार करें, अपने नफ़्स पर क़ाबू रखें और पाक दामन हों, घर का काम-काज करने वाली और मेहरबान हों और अपने शौहरों के ताबे रहें ताके ख़ुदा के कलाम की बदनामी न हो। ठीक इसी तरह नौजवानों को भी नसीहत कर के वह अपने नफ़्स पर क़ाबू रखें। तुम सब बातों में अपने आप को नेक कामों के करने में उन के लिये नमूना बन। और तेरी तालीम में ख़ुलूस दिली और संजीदगी हो, ताके जो कुछ तू सिखाए वह ऐसा सही कलाम हो के कोई हर्फ़गीरी न कर सके और कोई मुख़ालिफ़ हम पर ऐब लगाने का मौक़ा न पा सके बल्के शर्मिन्दा हो जाये। ग़ुलामों को सिखा के अपने मालिकों के सब ताबे रहें। उन के हर हुक्म की तामील करें और कभी उलट कर जवाब न दें, ख़ियानत न करें बल्के पूरी वफ़ादारी से काम करें ताके उन के सारे काम हमारे मुनज्जी ख़ुदा की तालीम की ज़ीनत का बाइस हो सकें। क्यूंके ख़ुदा का वह फ़ज़ल जो सारे इन्सानों की नजात का बाइस है, ज़ाहिर हो चुका है। वह फ़ज़ल हमें तरबियत देता है के हम बेदीनी और दुनियवी ख़ाहिशों को छोड़कर इस दुनिया में परहेज़गारी, सदाक़त और दीनदारी के साथ ज़िन्दगी गुज़ारें, और उस मुबारक उम्मीद यानी अपने अज़ीम ख़ुदा और मुनज्जी, हुज़ूर ईसा अलमसीह के जलाल के ज़ाहिर होने के मुन्तज़िर रहें, जिन्होंने अपने आप को हमारी ख़ातिर क़ुर्बान कर दिया ताके हमारा फ़िद्-या होकर हमें हर तरह की बेदीनी से छुड़ा लें और हमें पाक कर के अपने लिये एक ऐसी उम्मत बना लें जो नेक काम करने में सरगर्म रहे। तू इन बातों की पूरे इख़्तियार के साथ तालीम दे तम्बीह कर और नसीहत भी देता रह। कोई शख़्स तेरी हक़ारत न करने पाये। लोगों को याद दिला के वह हाकिमों और इख़्तियार रखने वालों के ताबे रहें, उन का हुक्म मानें और हर नेक काम को अन्जाम देने के लिये तय्यार रहें। किसी की बदगोई न करें, अमन पसन्द और नर्म मिज़ाज हों और सब लोगों के साथ बड़ी हलीमी से पेश आयें। क्यूंके हम भी ईमान लाने से पहले न समझ, नाफ़रमान, फ़रेब खाने वाले और हर तरह की ख़ाहिशों और अय्याशियों की ग़ुलामी में थे। बदनीयती और हसद में ज़िन्दगी गुज़ारते थे। लोग हम से नफ़रत करते थे और हम उन से। लेकिन जब हमारे मुनज्जी ख़ुदा की रहमत और महब्बत ज़ाहिर हुई, तो ख़ुदा ने हमें नजात बख़्शी, मगर ये हमारे रास्तबाज़ी के कामों के सबब से नहीं था बल्के उस की रहमत के मुताबिक़। हमें पाक रूह के ज़रीये नई ज़िन्दगी बख़्शी और रूहानी पैदाइश के ग़ुस्ल से हमारे दिलों को पाक साफ़ कर दिया। ख़ुदा ने हमारे मुनज्जी हुज़ूर ईसा अलमसीह की मारिफ़त से पाक रूह को हम पर बड़ी कसरत से नाज़िल किया, ताके हम ख़ुदा के फ़ज़ल से रास्तबाज़ ठहरें, और अब्दी ज़िन्दगी की उम्मीद के मुताबिक़ वारिस बनें। ये बात क़ाबिल-ए-यक़ीन है और मैं चाहता हूं के तुम इन बातों को बड़े यक़ीनी तौर से तालीम दो ताके ख़ुदा पर ईमान लाने वाले नेक कामों में मश्ग़ूल रहने पर ग़ौर करें। ये बातें अच्छी और इन्सानों के लिये मुफ़ीद हैं। लेकिन अहमक़ाना हुज्जतों, नस्ब नामों, बहसों और शरई तनाज़ों से परहेज़ करें, क्यूंके ऐसा करना बेफ़ाइदा और फ़ुज़ूल है। जो आदमी बिदअती या झूटी तालीम देने वाला हो उसे दो बार नसीहत करने के बाद भी अगर न माने तो उसे जमाअत की रिफ़ाक़त से ख़ारिज कर दो। ये जान कर के ऐसा आदमी गुमराह है और अपने हरकतों से ख़ुद ही मुजरिम ठहराता है और गुनाह में मश्ग़ूल रहता है। जब मैं इरतिमास और तुख़िकुस को तेरे पास भेजूं तो नीकुपुलिस शहर में मेरे पास आने की पूरी कोशिश करना क्यूंके मैंने फ़ैसला किया है के सर्दी का मौसम वहीं गुज़ारूं। ज़ीनास को जो वकील है और अपुल्लोस को रवाना करने की कोशिश करना और ये भी देखना के उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत न रहे। और हमारे लोग भी अच्छे कामों में मश्ग़ूल होना सीखीं ताके दूसरों की फ़ौरी जरूरतों को पूरा कर सकें और बे फल ज़िन्दगी न गुज़ारें। मेरे सब साथी तुझे सलाम कहते हैं। जो ईमान के रू से हम से महब्बत रखते हैं, उन्हें हमारा सलाम कहना। तुम सब पर ख़ुदा का फ़ज़ल होता रहे। ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा की ख़ातिर क़ैदी पौलुस और हमारे भाई तिमुथियुस की जानिब से, हमारे अज़ीज़ हम ख़िदमत फ़िलेमोन, और बहन अफ़्फ़िया, और भाई अरख़िप्पुस जो हम फ़ौजी है और उस जमाअत के नाम ख़त जो फ़िलेमोन के घर इकट्-ठा होती है। हमारे ख़ुदा बाप और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। अपनी दुआओं मैं तुझे याद करते हुए मैं हमेशा अपने ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूं, क्यूंके मैं सुनता हूं के तुम ख़ुदा के सब मुक़द्दसीन से महब्बत रखते हो और तुम्हारा ईमान ख़ुदावन्द ईसा पर है। मेरी दुआ है के काश ईमान में हमारे साथ तुम्हारी शिराकत अलमसीह की ख़ातिर हमारी तरफ़ से तक़्सीम की जाने वाली हर अच्छी चीज़ के बारे में तुम्हारी समझ को गहरा और मोअस्सर करे। ऐ भाई! मुझे तेरी महब्बत से बहुत ख़ुशी और तसल्ली हुई है क्यूंके तूने मुक़द्दसीन के दिलों को ताज़ा किया है। पस अगरचे अलमसीह में मुझे तुम्हें ये हुक्म देने का इख़्तियार है के तुझे क्या करना चाहिये, लेकिन फिर भी मैं बूढ़ा पौलुस जो इस वक़्त ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा की ख़ातिर क़ैदी हूं और महब्बत के साथ तुम से दरख़्वास्त करना मुनासिब समझता हूं। लिहाज़ा मैं अपने बेटे उनेसिमुस के लिये तुम से अर्ज़ करता हूं जो मेरे क़ैद के दौरान अलमसीह पर ईमान लाने से गोया मेरा रूहानी बेटा बन गया है। पहले तो वो तुम्हारे किसी काम का न था लेकिन अब वो तेरे और मेरे दोनों के लिये बड़े काम का है। अब मैं उसे यानी अपने लख़्त-ए-जिगर को तेरे पास वापस भेज रहा हूं। हालांके उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था ताके वो तुम्हारी जगह पर इस क़ैद में जो ख़ुशख़बरी सुनाने की ख़ातिर है, मेरी ख़िदमत करे। लेकिन तेरी रज़ामन्दी के बग़ैर में कुछ नहीं करना चाहता था, ताके जो भी मेहरबानी तू करे वो मजबूरी में नहीं लेकिन अपनी मर्ज़ी से करे। शायद उनेसिमुस तुझ से थोड़ी देर के वास्ते इसलिये जुदा हुआ था ताके वो हमेशा तुम्हारे साथ रहे। मगर अब से ग़ुलाम की तरह नहीं बल्के ग़ुलाम से बेहतर यानी एक अज़ीज़ भाई की तरह सुलूक करना, जो एक साथी मोमिन के तौर पर मुझे निहायत अज़ीज़ हो और मुझ से भी ज़्यादा ख़ुदावन्द में और एक भाई के तौर पर तुझे अज़ीज़ हो। पस अगर तुम मुझे अपना साथी समझते हो तो उनेसिमुस को भी वैसे ही क़बूल करना जैसे तुम मुझे करते हो। और अगर उस ने तेरा कुछ नुक़्सान किया है या उस पर तेरा कुछ क़र्ज़ है तो उसे मेरे नाम लिख लेना। मैं पौलुस अपने हाथ से ये लिखता हूं के तुझे अदा कर दूंगा। ये लिखने की कोई ज़रूरत नहीं के मेरा क़र्ज़ जो तुझ पर है वो तुम ख़ुद ही हो। ऐ भाई! मैं चाहता हूं के मुझे तेरी तरफ़ से ख़ुदावन्द में मदद हासिल हो, और अलमसीह में मेरे दिल को ताज़गी मिले। तेरी फ़रमांबरदार पर यक़ीन कर के तुझे लिख रहा हूं। क्यूंके मैं जानता हूं के जो कुछ मैं कहता हूं, तुम उस से भी ज़्यादा करोगे। इस के इलावा मेरे क़ियाम के लिये मेहमान-ख़ाना तय्यार रखना क्यूंके मुझे उम्मीद है के तुम लोगों की दुआओं के जवाब मैं ख़ुदा मुझे क़ैद से आज़ाद कर तुम्हारे दरमियान पहुंचा देगा। इपफ़्रास जो अलमसीह ईसा में मेरा साथी क़ैदी तुम्हें सलाम कहता है। और मरक़ुस, अरिसतरख़ुस, दीमास और लूक़ा जो मेरे हम ख़िदमत हैं, तुम्हें सलाम कहते हैं। ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल तुम्हारी सब की रूह के साथ होता रहे। आमीन। गुज़रे ज़माने में ख़ुदा ने हमारे आबा-ओ-अज्दाद से कई मौक़ों पर और मुख़्तलिफ़ तरीक़ों से नबियों की मारिफ़त कलाम किया। लेकिन इन आख़री दिनों में ख़ुदा ने हम से अपने बेटे की मारिफ़त कलाम किया, जिसे उस ने सब चीज़ों का वारिस मुक़र्रर किया और जिस के वसीले से उस ने काइनात को भी ख़ल्क़ किया। बेटा ख़ुदा के जलाल का अक्स और उस की ज़ात का ऐन नक़्श है, और अपने क़ुदरती कलाम से पूरी काइनात को संभालता है। और वो गुनाहों से पाक करने के बाद, आलमे-बाला पर जा कर ख़ुदा के दाहिनी तरफ़ तख़्त-नशीन हुए। चुनांचे वो फ़रिश्तों से उतना ही अज़ीम ठहरा जितना उस ने उन से मीरास मैं अफ़ज़ल नाम पाया था। क्यूंके फ़रिश्तों में से ख़ुदा ने कब किसी से कभी कहा, “तू मेरा बेटा है; आज से मैं तेरा बाप बन गया हूं?” और फिर यह, मैं उस का बाप होंगा, और वह मेरा बेटा होगा? और फिर जब ख़ुदा अपने अब्दी पहलौठे बेटे को दुनिया में भेजता है तो फ़रमाता है, “ख़ुदा के सब फ़रिश्ते उसे सज्दा करें।” और फ़रिश्तों के बारे में वह फ़रमाता है, “वह अपने फ़रिश्तों को हवाएं, और अपने ख़ादिमो को गोया आग के शोलों की मानिन्द बनाता है।” मगर बेटे के बारे में फ़रमता है, “ऐ ख़ुदा! तेरा तख़्त अब्दुल-आबाद तक क़ाइम रहेगा; तेरी बादशाही का असा इन्साफ़ का असा होगा। तूने रास्तबाज़ी से महब्बत और बदकारी से नफ़रत रख्खी; इसलिये ख़ुदा, यानी तेरे ख़ुदा ने तुझे शादमानी के तेल से मसह कर के तेरे साथियों की निस्बत तुम्हें ज़्यादा सरफ़राज़ किया।” वह यह भी फ़रमाता है, “ऐ ख़ुदावन्द! तूने इब्तिदा में ज़मीन की बुनियाद रख्खी, और आसमान तेरे ही हाथों की कारीगरी है। वो नेस्त हो जायेंगे मगर तू क़ाइम रहेगा; वो सब पोशाक की मानिन्द पुराने हो जायेंगे। तू उन्हें लिबास की मानिन्द लपेटेगा; और वो पोशाक की तरह बदल दिये जायेंगे। लेकिन ख़ुदावन्द हमेशा से लातब्दील है, और ख़ुदावन्द की ज़िन्दगी के साल कभी ख़त्म न होंगे।” लेकिन ख़ुदा तआला ने फ़रिश्तों में से किस से कभी फ़रमाया, “मेरी दाहिनी तरफ़ बैठो, जब तक मैं तुम्हारे दुश्मनों को तुम्हारे पांव के नीचे न कर दूं”? क्या वो तमाम फ़रिश्ते ख़िदमत गुज़ार रूहें नहीं जो नजात पाने वालों की ख़िदमत के लिये भेजी जाती हैं? चुनांचे जो बातें हम ने सुनीं उन पर हमें ख़ासतौर से दिल लगा कर ग़ौर करना चाहिये। कहीं ऐसा न हो के हम बहक कर उन से दूर चले जायें। क्यूंके जो कलाम फ़रिश्तों की मारिफ़त सुनाया गया था जब वह क़ाइम रहा और उस की हर ख़ता और नाफ़रमानी की मुनासिब सज़ा मिली, तो फिर हम इतनी बड़ी नजात को नज़र-अन्दाज़ कर के कैसे बच सकेंगे? क्यूंके इस नजात का एलान सब से पहले ख़ुदावन्द ने ख़ुद किया और फिर उस की तस्दीक़ उन लोगों ने हम से की जिन्होंने उसे सीधे ख़ुदावन्द से सुनी थी। और साथ ही ख़ुदा भी अपनी मर्ज़ी के मुवाफ़िक़, इलाही निशानों, हैरत-अंगेज़ कामों, तरह-तरह के मोजिज़ों और पाक रूह की नेमतों को देने के ज़रीअः से ख़ुद भी इस की गवाही देता रहा। ख़ुदा ने उस आने वाले जहान को जिस का हम ज़िक्र कर रहे हैं, उसे फ़रिश्तों के इख़्तियार में नहीं किया। जैसा के कलाम-ए-मुक़द्दस में फ़रमाया गया है: “इन्सान क्या चीज़ है तू उस का ख़्याल करे, और इब्न-ए-आदम क्या है के तू उस की ख़बरगीरी करे? तूने उसे फ़रिश्तों से कुछ ही कमतर बनाया; तूने उस के सर पर जलाल और इज़्ज़त का ताज पहनाया ख़ुदा ने सब कुछ उन के क़दमों के नीचे कर दिया है।” जब सब कुछ उन के ताबे कर दिया गया, तो इस का मतलब है के कोई चीज़ न रही, जो ख़ुदा के ताबे नहीं ख़ुदा ने बेशक हमें हाल में ये बात नज़र नहीं आती के सब चीज़ें उन के ताबे हैं। अलबत्ता हम हुज़ूर ईसा को देखते हैं जो फ़रिश्तों से कुछ ही कमतर किये गये थे, ताके वो ख़ुदा के फ़ज़ल से, हर इन्सान के वास्ते अपनी जान दें और चूंके हुज़ूर ईसा ने मौत का दुख सहा इसलिये अब उन्हें इज़्ज़त और जलाल का ताज पहनाया गया है। क्यूंके यही मुनासिब था के ख़ुदा जो सब चीज़ें को ख़ल्क़ करने वाला और उन्हें महफ़ूज़ रखने वाला है उस ने ये पक्का कर लिया था के वो तमाम फ़र्ज़न्दों को अपनी जलाल में शरीक करने के लिये उन की नजात के बानी हुज़ूर ईसा के दुख उठाने के ज़रीअः से कामिल करे। क्यूंके पाक करने वाला और पाक होने वाले दोनों एक ही असल से हैं, इसी बाइस हुज़ूर ईसा उन्हें भाई और बहन कहने से नहीं शरमाते। चुनांचे वो फ़रमाते हैं, “मैं अपने भाईयों और बहनों के सामने तेरे नाम का एलान करूंगा और जमाअत में तेरी सिताइश के नग़मे गाऊंगा। और फिर हुज़ूर ईसा फ़रमाते हैं “मैं उस पर तवक्कुल करूंगा।” और फिर यह के “मैं यहां हूं, और उन फ़र्ज़न्दों के साथ हूं जिन्हें ख़ुदा ने मुझे दिया है।” जिस तरह फ़र्ज़न्द ख़ून और गोश्त वाले इन्सान हैं तो हुज़ूर ईसा भी ख़ुद उन की मानिन्द ख़ून और गोश्त में शरीक हो गये ताके अपनी मौत के वसीले से उसे यानी इब्लीस को जिसे मौत पर क़ुदरत हासिल थी उस के इस क़ुव्वत को नेस्त कर दे। और उन्हें जो ज़िन्दगी भर मौत के डर से ग़ुलामी में गिरिफ़्तार थे उन्हें रिहाई बख़्शे। क्यूंके ये बात हक़ीक़त है के हुज़ूर ईसा फ़रिश्तों का नहीं बल्के हज़रत इब्राहीम की नस्ल की मदद करते हैं। पस हुज़ूर ईसा को हर लिहाज़ से अपने भाईयों की मानिन्द बनना लाज़िमी था ताके वो तमाम उम्मत के गुनाहों का कफ़्फ़ारा अदा करे और ख़ुदा की ख़िदमत के लिहाज़ से एक रहम दिल और वफ़ादार आला काहिन बने। चुनांचे हुज़ूर ईसा ने ख़ुद अपनी आज़माइश के दौरान दुख उठाये थे इसलिये वो उन की भी मदद कर सकते हैं जिन की आज़माइश होती है। लिहाज़ा ऐ मुक़द्दसीन भाईयों और बहनों, तुम जो आसमानी बुलावे में शरीक हो, हुज़ूर ईसा पर ग़ौर करो जिन का हम इक़रार रसूल और आला काहिन के तौर पर करते हैं। हुज़ूर ईसा अपने मुक़र्रर करने वाले के हक़ में उसी तरह मुकम्मल तौर से वफ़ादार थे जिस तरह हज़रत मूसा के सारे घराने में वफ़ादार थे। क्यूंके जिस तरह घर का बनाने वाला घर की निस्बत ज़्यादा इज़्ज़त के लाइक़ समझा जाता है। इसी तरह हुज़ूर ईसा भी हज़रत मूसा से ज़्यादा इज़्ज़त-ओ-एहतिराम के लाइक़ समझे गये। चुनांचे हर घर का कोई न कोई बनाने वाला ज़रूर होता है मगर सब चीज़ों का बनाने वाला ख़ुदा है। जो शहादतें मुस्तक़बिल में वाक़े होने वाली थीं, “उन का एलान करने में ख़ुदा के सारे घर में हज़रत मूसा एक ख़ादिम के तौर पर वफ़ादार थे।” मगर अलमसीह बेटा होने की हैसियत से ख़ुदा के घर का मुख़्तार हैं और ख़ुदा का घर हम लोग हैं; बशर्ते के हम अपनी दिलेरी और उस उम्मीद को मज़बूती से क़ाइम रखें जिस पर हम फ़ख़्र करते हैं। चुनांचे जैसा के पाक रूह फ़रमाता है, “अगर, आज तुम उस की आवाज़ सुनो, तो अपने दिलों को सख़्त न करो जिस तरह ब्याबान में तुम्हारे आबा-ओ-अज्दाद ने, ख़ुदा के ख़िलाफ़ बग़ावत की, जहां तुम्हारे बाप दादा ने मुझे आज़माया और मेरा इम्तिहान लिया, हालांके उन्होंने चालीस बरस तक मेरे मोजिज़े देखे। इसलिये मैं उस पुश्त से नाराज़ रहा; और मैंने कहा, ‘इन के दिल हमेशा गुमराह होते रहते हैं, और इन्होंने मेरी राहों को नहीं पहचाना।’ चुनांचे मैंने अपने क़हर में क़सम खाई, ‘के ये लोग मेरी उस आरामगाह में हरगिज़ दाख़िल न होंगे।’ ” ऐ भाईयो और बहनों, ख़बरदार! तुम में से किसी का ऐसा बुरा और बेएतक़ाद दिल न हो, जो ज़िन्दा ख़ुदा से बर्गश्तः हो जाये। बल्के जिस रोज़ तक आज का दिन कहा जाता है, हर रोज़ एक दूसरे को नसीहत करते रहो ताके तुम में से कोई शख़्स गुनाह के फ़रेब में आकर सख़्त-दिल न हो जाये। क्यूंके हम अलमसीह में शरीक हो चुके हैं, बशर्ते के अपने इब्तिदाई उम्मीद पर आख़िर तक मज़बूती से क़ाइम रहें। जैसा के मज़कूरा कलाम में फ़रमाया गया है: “अगर, आज तुम उस की आवाज़ सुनो, तो अपने दिलों को सख़्त न करो जिस तरह ब्याबान में बग़ावत के वक़्त किया था।” वो लोग कौन थे जिन्होंने ख़ुदा की आवाज़ सुन कर भी बग़ावत की? क्या वो सब वोही नहीं थे जो हज़रत मूसा की रहनुमाई में मिस्र से बाहर निकले थे? और ख़ुदा किन लोगों से चालीस बरस तक नाराज़ रहा? क्या उन लोगों से नहीं जिन्होंने गुनाह किया और उन की लाशें ब्याबान में पड़ी रहीं? और जिन के बारे में ख़ुदा ने क़सम खाई के जिन्होंने नाफ़रमानी की थी वो मेरे आराम में हरगिज़ दाख़िल न होने पाएंगे? चुनांचे हम देखते हैं के वो ईमान न लाने की वजह से ख़ुदा के आराम में दाख़िल न हो सके। पस जब ख़ुदा के आराम में दाख़िल होने का वादा अभी तक बाक़ी है तो हमें ख़बरदार रहना चाहिये ताके कहीं ऐसा न हो के तुम में से कोई उस में दाख़िल होने से महरूम रह जाये। क्यूंके हमें भी उन ही की तरह इलाही ख़ुशख़बरी सुनाई गई थी जैसे उन्हें सुनाया गया था, लेकिन जो पैग़ाम उन्होंने सुना वो उन के लिये बेफ़ाइदा साबित हुआ क्यूंके उन का ईमान ख़ुदा के फ़रमांबरदार लोगों के ईमान जैसा नहीं था। और अब हम जो ईमान ला चुके हैं, ख़ुदा के इस आरामगाह में दाख़िल होते हैं, जैसा के ख़ुदा ने फ़रमाया है, “इसलिये मैंने अपने क़हर में क़सम खाई के, ‘ये लोग मेरे इस आरामगाह में हरगिज़ दाख़िल न होंगे। ’ ” हालांके काइनात के ख़ल्क़ के वक़्त से ही ख़ुदा के काम पूरे हो चुके थे। क्यूंके ख़ुदा के सातवें दिन की बाबत किताब-ए-मुक़द्दस में यूं फ़रमाया, “चुनांचे सातवें दिन वो अपने सारे काम से फ़ारिग़ हुआ।” और फिर दूसरे मक़ाम पर फ़रमाता है, “ये लोग मेरी उस आरामगाह में हरगिज़ दाख़िल न होंगे।” चुनांचे जब अभी भी बाज़ लोग इस आराम में दाख़िल हो सकते हैं, लेकिन जिन्होंने पहले ये ख़ुशख़बरी सुनी वो अपनी नाफ़रमानी के सबब से दाख़िल न हो सके। तो फिर यही वजह है के ख़ुदा फिर एक ख़ास दिन मुक़र्रर करता है, जिसे वह “आज का दिन” कहता है और कई मुद्दत के बाद वह हज़रत दाऊद की किताब ज़बूर में उसे “आज का दिन” कहता है जैसा पहले ज़िक्र हो चुका है के, “अगर, आज तुम उस की आवाज़ सुनो, तो अपने दिलों को सख़्त न करो।” और अगर यशु-अ ने उन्हें आराम दिया होता तो ख़ुदा उस के बाद एक और दिन का ज़िक्र न करता। लिहाज़ा ख़ुदा के लोगों के लिये सबत का आराम बाक़ी है। क्यूंके जो कोई ख़ुदा के आराम में दाख़िल होता है वह ख़ुदा की तरह अपने कामों को पूरा कर के आराम करता है। लिहाज़ा आओ! हम उस आराम में दाख़िल होने की पूरी कोशिश करें ताके कोई शख़्स उन की तरह नाफ़रमानी कर के हलाक न हो जाये। क्यूंके ख़ुदा का कलाम ज़िन्दा, मोअस्सर और हर दो धारी तलवार से ज़्यादा तेज़ है जो हमारे अन्दर जा कर हमारी रूह, जान, बन्द-बन्द और गूदे-गूदे को चीरता हुआ गुज़र जाता है और हमारे दिल के ख़यालों और इरादों को जांचता है। और काइनात की कोई चीज़ ख़ुदा की नज़र से पोशीदा नहीं है और उस की आंखों के सामने हर चीज़ खुली और बेपर्दा है जिसे हमें भी हिसाब देना है। पस जब हमारा एक ऐसा आला काहिन ख़ुदा का बेटा हुज़ूर ईसा हैं जो आलमे-बाला पर ख़ुदा की हुज़ूरी में पहुंच चुके हैं, तो आओ हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ाइम रहें। क्यूंके हमारा आला काहिन ऐसा नहीं जो हमारी कमज़ोरियों में हमारा हमदर्द न हो सके बल्के वह सब बातों में हमारी तरह आज़माया गया तो भी बेगुनाह रहा। लिहाज़ा हम ख़ुदा के फ़ज़ल के तख़्त के पास दिलेरी से चलें ताके हम पर रहम हो, और वह फ़ज़ल हासिल करें जो ज़रूरत के वक़्त हमारी मदद करे। हर आला काहिन आदमियों में से आदमियों के लिये मुन्तख़ब किया जाता है ताके वो ख़ुदा से तअल्लुक़ रखने वाली बातों में लोगों की नुमाइन्दगी करे यानी नज़्रें और गुनाहों की क़ुर्बानियां पेश करे। और वह नादानों और गुमराहों से नरमी के साथ पेश आ सकता है क्यूंके वह ख़ुद भी कमज़ोरियों की गिरिफ़्त में मुब्तिला रहता है। यही वजह है के लोगों के गुनाहों के साथ-साथ उसे अपने गुनाहों की ख़ातिर भी क़ुर्बानियां पेश करनी पड़ती हैं। किसी भी शख़्स को आला काहिन होने की ये इज़्ज़त उस की अपनी कोशिश से हासिल नहीं होती, जब तक के वो हज़रत हारून की तरह ख़ुदा की तरफ़ से बुलाया न जाये। इसी तरह अलमसीह ने भी आला काहिन होने का ओहदा ख़ुद ही अपने आप को नहीं दिया बल्के ख़ुदा ने उन्हें मुक़र्रर कर के हुज़ूर से फ़रमाया, “तू मेरा बेटा है; आज से मैं तेरा बाप बन गया हूं?” और ख़ुदा दूसरे मक़ाम पर भी फ़रमाता है, “तू मलिक-ए-सिदक़ के तौर पर, अबद तक काहिन है।” हुज़ूर ईसा ने अपने जिस्म में बशर के दौरान, पुकार-पुकार कर और आंसू बहा-बहा कर ख़ुदा से दुआएं और इल्तिजाएं कीं जो उन्हें मौत से बचा सकता था और ख़ुदा तरसी की वजह से उस की सुनी गई। और बेटा होने के बावुजूद उस ने दुख उठा उठाकर फ़रमांबरदार सीखी और कामिल बन कर अपने सब फ़रमांबरदारों के लिये अब्दी नजात का सरचश्मा हुआ। और हुज़ूर ईसा को ख़ुदा की तरफ़ से मलिक-ए-सिदक़ के तौर पर आला काहिन का ख़िताब दिया गया। इस के बारे में हमें बहुत कुछ कहना है लेकिन तुम्हें समझाना मुश्किल है इसलिये के तुम रूहानी तौर पर न समझ हो और ऊंचा सुनने लगे हो। दरअस्ल अब तक वक़्त के ख़्याल से तो तुम्हें उस्ताद हो जाना चाहिये था लेकिन अब ज़रूरत तो इस बात की है के कोई शख़्स ख़ुदा के कलाम की बुनियादी बातें तुम्हें फिर से सिखाए। और सख़्त ग़िज़ा की बजाय तुम्हें तो दूध पीने की ज़रूरत पड़ है। क्यूंके जो सिर्फ़ दूध पीता है वह तो बच्चा होता है। उसे रास्तबाज़ी के कलाम का तजुर्बा ही नहीं होता। मगर सख़्त ग़िज़ा तो बालिग़ों के लिये होती है जो अपने तजुर्बा की वजह से इस क़ाबिल हो गये हैं के नेकी और बदी में इम्तियाज़ कर सकें। चुनांचे आओ! अलमसीह की तालीम की इब्तिदाई बुनियादी बातें छोड़कर कामलियत की तरफ़ क़दम बढ़ायें और ऐसी बातें दुहराने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिये जिन से ईमान की बुनियाद रखी जाती है मसलन बेकार रसूमात से तौबा करना, ख़ुदा पर ईमान रखना, मुख़्तलिफ़ पाक-ग़ुस्ल की हिदायात, किसी के सर पर हाथ रखना, मुर्दों की क़ियामत और अब्दी अदालत। चुनांचे अगर ख़ुदा ने चाहा, तो इन बातों को छोड़कर, हम आगे बढ़ेंगे। क्यूंके जिन लोगों के दिल एक बार नूरे इलाही से रोशन हो चुके हैं और जो आसमानी बख़्शिश का मज़ा चख चुके हैं, जो पाक रूह में शरीक हो चुके हैं, और ख़ुदा के उम्दा कलाम और आने वाली दुनिया की क़ुव्वतों का ज़ायक़ा ले चुके हैं, अगर वह अपने ईमान से बर्गश्तः हो जायें तो उन्हें फिर से तौबा की तरफ़ माइल करना मुम्किन नहीं। क्यूंके वह ख़ुदा के बेटे को अपनी इस हरकत से दुबारा सलीब पर मस्लूब कर उस की एलानिया बेइज़्ज़ती करते हैं। क्यूंके ख़ुदा उस ज़मीन को बरकत देता है जो अपने पर बार-बार पड़ने वाली बारिश को जज़बा कर के ऐसी फ़सल पैदा करती है जो काश्तकारों के लिये मुफ़ीद हो। लेकिन अगर वो ज़मीन सिर्फ़ कांटे और झाड़ झनकार उगाती रहे तो किसी काम की नहीं। और इस ख़तरे में है के उस पर जल्द ही लानत भेजी जाये और उस का आख़री अन्जाम आग में जलाया जाना है। ऐ अज़ीज़ों! अगरचे हम इस तरह की बातें कर रहे हैं, तो भी हम तुम्हारी निस्बत इन से बेहतर नजात वाली बातों का यक़ीन रखते हैं। इसलिये के ख़ुदा बेइन्साफ़ नहीं जो तुम्हारे काम और उस महब्बत को भूल जाये जो तुम ने उस की ख़ातिर उस के मुक़द्दसीन लोगों की ख़िदमत करने से ज़ाहिर की और अब भी कर रहे हो। लेकिन हम इस बात के बड़े आरज़ूमन्द हैं के तुम में से हर शख़्स इसी तरह आख़िर तक कोशिश करता रहे ताके जिन बातों की तुम उम्मीद रखते हो वो हक़ीक़त में पूरी हो जायें। हम नहीं चाहते के तुम सुस्त हो जाओ, बल्के तुम उन लोगों की मानिन्द बनो जो अपने ईमान और सब्र के बाइस ख़ुदा के वादों के वारिस हैं। चुनांचे जब ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से वादा करते वक़्त क़सम खाने के वास्ते किसी को अपने से बड़ा न पाया तो उस ने अपनी ही क़सम खाकर ये फ़रमाया, “मैं यक़ीनन तुम्हें बरकत दूंगा और तुम्हारी औलाद को बेशुमार बढ़ाऊंगा।” इसलिये हज़रत इब्राहीम सब्र के साथ इन्तिज़ार करते रहे और वादा की हुई बरकत को हासिल किया। आदमी तो अपने से बड़े की क़सम खाया करते हैं और इस तरह क़सम खाने से हर बात पक्की हो जाती है और हर झगड़े व हुज्जत की गुन्जाइश को ख़त्म कर देती है। लिहाज़ा ख़ुदा ने भी क़सम खाकर अपने वादे की तस्दीक़ की क्यूंके वो अपने वादे के वारिसैन पर साफ़ ज़ाहिर करना चाहता था के उस का इरादा कभी नहीं बदलेगा। चुनांचे ख़ुदा का वादा और ख़ुदा की क़सम यह दो ऐसी चीज़ें हैं जो लातब्दील हैं और इन के बारे में ख़ुदा कभी झूट नहीं बोलेगा, इसलिये हम जो दौड़ कर उस की पनाह में आये हैं, बड़े हौसला से इस उम्मीद को मज़बूती से थामे रख सकते हैं जो हमारे सामने पेश की है। क्यूंके यह उम्मीद हमारी जान के लिये ऐसा लंगर है ऐसा मज़बूत लंगर है जो साबित और क़ाइम है और आसमानी बैतुलमुक़द्दस के पाक-तरीन कमरे के पर्दे के अन्दर तक दाख़िल होती है। जहां हुज़ूर ईसा पहले से ही हमारे रहनुमा के तौर पर दाख़िल हो चुके हैं। और तू मलिक-ए-सिदक़ के तौर पर अबद तक आला काहिन मुक़र्रर हुए हैं। यह मलिक-ए-सिदक़, सालिम का बादशाह और ख़ुदा तआला का काहिन था। जब हज़रत इब्राहीम चन्द बादशाहों को ख़त्म कर के वापस आ रहे थे तो मलिक-ए-सिदक़ ने उन का इस्तिक़्बाल किया और उन्हें बरकत दी। हज़रत इब्राहीम ने सब माले-ग़नीमत का दसवां हिस्सा भी उसे नज़्र किया। अव्वल तो मलिक-ए-सिदक़ के नाम का लफ़्ज़ी मतलब है “रास्तबाज़ी का बादशाह।” फिर चूंके वह सालिम का बादशाह है इसलिये उस के नाम से “सुलह का बादशाह” है। न तो उस का बाप या मां है, और न ही उस का कोई नस्बनामा है, उस की ज़िन्दगी की न तो इब्तिदा है और न ही इन्तिहा। वो ख़ुदा के बेटे की मानिन्द अब्दीयत तक काहिन है। पस अब ग़ौर करो के कितना अज़ीम था। जिसे क़ौम के बुज़ुर्ग यानी हज़रत इब्राहीम ने सब माले-ग़नीमत का दसवां हिस्सा दिया। और अब शरीअत तलब करती है के वो बनी लावी में से जो काहिन मुक़र्रर जाते हैं, उन्हें हुक्म दिया गया है के वह अपनी उम्मत यानी अपने भाईयों से दसवां हिस्सा लें हालांके उन के भाई भी हज़रत इब्राहीम ही की नस्ल से हैं। मगर जिस की निस्बत लावी से जुदा है उस ने हज़रत इब्राहीम से दसवां हिस्सा लिया और जिस से वादे किये गये थे उसे बरकत दी। और इस में कोई शक नहीं के छोटा बड़े से बरकत पाता है। और यहां तो फ़ानी इन्सान दसवां हिस्सा लेते हैं मगर वहां वोही दसवां हिस्सा लेता है जिस के बारे में यह गवाही दी जाती है के वह ज़िन्दा है। पस हम कह सकते हैं के लावी ने भी जो दसवां हिस्सा लेता है, हज़रत इब्राहीम के ज़रीये दसवां हिस्सा दिया। क्यूंके जिस वक़्त मलिक-ए-सिदक़ ने हज़रत इब्राहीम का इस्तिक़्बाल किया था तो लावी उस वक़्त अपने बाप की सुलब में मौजूद था। पस अगर बनी लावी की कहानत से कामलियत हासिल होती (जिस की बिना पर उम्मत को शरीअत अता की गई थी) तो फिर हारून की मानिन्द के काहिन की बजाय मलिक-ए-सिदक़ के तौर पर एक दूसरे काहिन के बरपा होने की क्या ज़रूरत थी? क्यूंके जब कहानत बदल गई तो शरीअत का बदल जाना भी ज़रूरी है। हमारे ख़ुदावन्द की बाबत यह बातें कही जाती हैं वह एक दूसरे क़बीले से था और उस क़बीले के किसी फ़र्द ने कभी क़ुर्बानगाह की ख़िदमत नहीं की थी। चुनांचे यह ज़ाहिर है के हमारे ख़ुदावन्द यहूदाह की नस्ल में पैदा हुए थे और हज़रत मूसा ने इस फ़िर्क़े की कहानत के हक़ में कुछ ज़िक्र नहीं किया। और यह मुआमला और भी साफ़ हो जाता है जब मलिक-ए-सिदक़ की मानिन्द एक और काहिन बरपा होता है। जो अपने जिस्मानी अहकाम की शरीअत की बिना पर नहीं बल्के ग़ैरफ़ानी ज़िन्दगी की क़ुव्वत के मुताबिक़ काहिन मुक़र्रर हुआ। क्यूंके उस के बारे में यह तस्दीक़ की गई है, “तुम मलिक-ए-सिदक़ के तौर पर, अबद तक काहिन है।” चुनांचे वह पहला हुक्म कमज़ोर और बेफ़ाइदा होने के सबब से मन्सूख़ हो गया, क्यूंके शरीअत ने किसी भी चीज़ को कामिल नहीं किया। और उस की जगह हमें एक बेहतर उम्मीद दी गई है जिस के वसीले से हम ख़ुदा के नज़दीक जा सकते हैं। और ये नया निज़ाम ख़ुदा की क़सम से ही क़ाइम हुआ। मगर दूसरे काहिन तो क़सम के बग़ैर मुक़र्रर होते थे। मगर हुज़ूर ईसा क़सम के साथ काहिन मुक़र्रर किये गये जब ख़ुदा ने उन से फ़रमाया, “ख़ुदावन्द ने क़सम खाई है और वह अपना इरादा बदलेगा नहीं; ‘तुम अबद तक काहिन हो।’ ” इस क़सम की वजह से हुज़ूर ईसा एक बेहतर अह्द का ज़ामिन ठहरे। चूंके काहिन मौत के सबब से क़ाइम न रह सकते थे इसलिये वो कसरत से मुक़र्रर किये थे। मगर हुज़ूर ईसा अबद तक ज़िन्दा हैं इसलिये उन की कहानत कभी भी ख़त्म नहीं होगी। पस जो लोग हुज़ूर ईसा के वसीले से ख़ुदा के पास आते हैं वह उन्हें मुकम्मल तौर से नजात दे सकते हैं क्यूंके वह उन की शफ़ाअत करने के लिये हमेशा ज़िन्दा हैं। हमें ऐसे ही आला काहिन की ज़रूरत थी जो पाक, बेक़ुसूर, बेदाग़, गुनहगारों से अलग और आसमान से भी बुलन्द-तर किया गया हो। हुज़ूर ईसा को दूसरे आला-काहिनों की तरह इस की ज़रूरत नहीं के रोज़-ब-रोज़ पहले अपने गुनाहों के लिये और लोगों के गुनाहों के लिये क़ुर्बानियां पेश करें। क्यूंके हुज़ूर ने तो अपने आप को एक ही बार में क़ुर्बान कर के तमाम लोगों के गुनाहों का कफ़्फ़ारा हमेशा के लिये अदा कर दिया। मूसवी शरीअत तो ग़ैर कामिल आदमियों को आला काहिन मुक़र्रर करती है मगर शरीअत के बाद ख़ुदा ने क़सम खाकर अपने कलाम से अपने बेटे को मुक़र्रर किया जो अबद तक कामिल किया जा चुका है। जो बातें हम अब कह रहे हैं उस में बड़ी बात ये है के हमारा ऐसा आला काहिन है जो आसमान पर क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा के दाहिनी तरफ़ तख़्त-नशीन हुए। और उस पाक-मक़्दिस और हक़ीक़ी मुलाक़ात के ख़ेमे में ख़िदमत को अन्जाम देता है जिसे किसी इन्सान ने नहीं बल्के ख़ुद ख़ुदावन्द ने खड़ा किया है। चूंके हर आला काहिन ख़ुदा को नज़्राने और क़ुर्बानियां पेश करने के लिये मुक़र्रर किया जाता है। इसलिये ज़रूरी था के हमारे आला काहिन के पास भी पेश करने के लिये कुछ हो। और अगर वह ज़मीन पर होता तो हरगिज़ काहिन न होता क्यूंके यहां शरीअत के मुताबिक़ नज़्राने पेश करने वाले का काहिन मौजूद हैं। जो उस पाक-मक़्दिस में ख़िदमत करते हैं जो आसमानी मक़्दिस की नक़्ल और उस का अक्स है। यही वजह है के जब हज़रत मूसा ख़ेमा बनाने को थे तो ख़ुदा ने उन्हें हिदायत दी, “देख, जो नमूना तुझे पहाड़ पर दिखाया गया था उसी के मुताबिक़ सब चीज़ें बनना।” मगर जो ख़िदमत अब हुज़ूर ईसा को बतौर काहिन हासिल हुई है वो उस पुराने कहानत से ज़्यादा अफ़ज़ल है, क्यूंके जिस अह्द का वो दरमियानी है वो पुराने अह्द से ज़्यादा अफ़ज़ल है क्यूंके ये नया अह्द बेहतर वादों की बुनियाद पर बांधा गया है। क्यूंके अगर पहले अह्द में ख़ामी न होती तो दूसरे अह्द की ज़रूरत न पड़ती। लेकिन ख़ुदा उस पुश्त के लोगों में ख़ामियां पा कर फ़रमाता है: “देखो! वह दिन आ रहे हैं, जब मैं इस्राईल के घराने और यहूदाह के घराने के साथ एक नया अह्द बांधूंगा। यह उस अह्द की मानिन्द न होगा जो मैंने उन के बाप दादा से उस वक़्त बांधा था, जब मैंने मुल्क मिस्र से उन्हें निकाल लाने के लिये उन का हाथ पकड़ा था, क्यूंके वह मेरे उस अह्द के वफ़ादार न रहे, ख़ुदावन्द फ़रमाता है के इसलिये मैं भी उन से दूर हो गया। ख़ुदावन्द फ़रमाता है के जो अह्द मैं इस्राईल के घराने के साथ उन दिनों के बाद बांधूंगा वह यह है के मैं अपने क़वानीन उन के दिलों में डालूंगा और उन के ज़हनों पर नक़्श कर दूंगा। मैं उन का ख़ुदा होंगा, और वह मेरी उम्मत होंगे। और हर शख़्स अपने हमसाये को या अपने भाई को यह तालीम न देगा के, ‘तुम ख़ुदावन्द को पहचानो,’ क्यूंके छोटे से बड़े तक, सब मुझे पहचान लेंगे। इसलिये के मैं उन की बदकारियों को बख़्श दूंगा और उन के गुनाहों को फिर कभी याद न करूंगा।” जब ख़ुदा ने “नये,” अह्द का ज़िक्र करता है तो वो पुराने अह्द को रद्द कर देता है और जो शै पुरानी और मुद्दत की हो जाती है वो जल्दी मिट जाती है। ग़रज़ पहले अह्द के मुताबिक़ भी इबादत के क़वानीन मौजूद थे और एक ऐसा पाक-मक़्दिस भी था जो दुनियवी था। यानी एक ख़ेमा बनाया गया था। जिस के पहले कमरे में चिराग़दान, मेज़ और उस पर पड़ी मख़्सूस की हुई रोटियां रख्खी रहती थीं। इस हिस्से को पाक मक़ाम कहते थे। दूसरे कमरे के पर्दे के पीछे वो ख़ेमा था जिसे पाक-तरीन मक़ाम कहा जाता था। पाक-तरीन मक़ाम के अन्दर बख़ूर जलाने के लिये सोने का क़ुर्बानगाह और अह्द का सन्दूक़ था जो सोने से मंढा हुआ था। उस सन्दूक़ में मन्न से भरा हुआ सोने का मर्तबान और हज़रत हारून का असा था जिस में कोन्पलें फूट निकली थीं और अह्द की दो लौहें थीं जिन पर दस अहकाम कन्दाके थे। उस सन्दूक़ के ऊपर इलाही जलाल के दो मुक़र्रब फ़रिश्ते बने हुए थे जो सन्दूक़ के ढकने यानी कफ़्फ़ारे गाह पर साया करते थे। लेकिन इन बातों का एक-एक कर के बयान करने का अभी वक़्त नहीं है। पस जब सारी चीज़ें इसी तरह से तय्यार हो जाती थीं तो काहिन ख़ेमे के पहले कमरे में हर वक़्त दाख़िल होते रहते थे ताके अपनी ख़िदमत को जारी रखें। लेकिन दूसरे कमरे में सिर्फ़ आला काहिन साल में एक बार ही जाता था और बग़ैर क़ुर्बानी के ख़ून लिये नहीं जाता ताके उसे अपनी और अपनी उम्मत की अनजानी ख़ताओं के लिये पेश करे। इस से पाक रूह का ये इशारा था के जब तक पहला ख़ेमे मौजूद है, पाक-तरीन मक़ाम में दाख़िल होने की राह खुली नहीं है। वो ख़ेमे मौजूदा ज़माने के लिये एक मिसाल है और ये ज़ाहिर करता है के जो नज़्रे और क़ुर्बानियां वहां पेश की जाती हैं वो इबादत करने वाले के ज़मीर को पाक साफ़ कर के कामिल नहीं बना सकतीं। क्यूंके इन का तअल्लुक़ सिर्फ़ खाने-पीने और जिस्म की तहारत की मुख़्तलिफ़ रस्मों से है। ये जिस्मानी अहकाम हैं जो सिर्फ़ उस वक़्त तक के लिये हैं जो सिर्फ़ नये निज़ाम के आने तक अमल में हैं। लेकिन जब अलमसीह अच्छी चीज़ों का जो पहले से ही ज़ाहिर हो चुकी हैं, आला काहिन बन कर तशरीफ़ लाये, तब वो उस अज़ीम और कामिल आसमानी ख़ेमे में दाख़िल हुए जो इन्सानी हाथों का बनाया हुआ नहीं है और न ही इस बनाई हुई दुनिया का हिस्सा है। वो बकरों और बछड़ों का ख़ून ले कर नहीं बल्के अपना ख़ून ले कर एक ही बार हमेशा के लिये पाक-तरीन मक़ाम में दाख़िल हुआ और यूं हमें अब्दी नजात दिलाई। क्यूंके जब बकरों और बैलों के ख़ून और गाय की राख के छिड़के जाने से नापाक लोग जिस्मानी तौर पर पाक ठहराये जाते हैं। तो अलमसीह का ख़ून जिस ने अपने आप को अज़ली रूह के वसीले से ख़ुदा के सामने बेऐब क़ुर्बान कर दिया, तो उस का ख़ून हमारे ज़मीर को ऐसे कामों से और भी ज़्यादा पाक करेगा जिन का अन्जाम मौत है ताके हम ज़िन्दा ख़ुदा की ख़िदमत करें। इसी सबब से वो नये अह्द का दरमियानी है ताके जितने लोगों को ख़ुदा ने बुलाया है उन्हें ख़ुदा के वादे के मुताबिक़ अब्दी मीरास हासिल हो, और ये सिर्फ़ इसलिये मुम्किन हुआ क्यूंके अलमसीह ने मर कर फ़िदया दिया ताके लोग उन गुनाहों से नजात पायें जो उन से उस वक़्त सरज़द हुए थे, जब वो पहले अह्द के तहत थे। वसीयत के सिलसिले में वसीयत करने वाले की मौत का साबित होना ज़रूरी होता है, क्यूंके जब तक वसीयत करने वाला ज़िन्दा हो, वसीयत बेअसर होती है। उस की मौत के बाद ही वसीयत की तामील होती है। यही वजह है के पहला अह्द भी बग़ैर ख़ून के कारगर साबित नहीं हुआ था। चुनांचे जब हज़रत मूसा सारी उम्मत को शरीअत के तमाम हुक्म सुना चुके तो उन्होंने बछड़ों और बकरों का ख़ून पानी से मिला कर उसे सुर्ख़ लाल ऊन और ख़ुश्बूदार ज़ूफ़े के गुच्छे से ख़ून को शरीअत की किताब और पूरी क़ौम पर ये कहते हुए छिड़क दिया। और फ़रमाया, “ये इस अह्द का ख़ून है जिस पर अमल करने का हुक्म ख़ुदा ने तुम्हें दिया है।” इसी तरह हज़रत मूसा ने मुलाक़ात के ख़ेमे पर और ख़िदमत के तमाम सामान पर ख़ून छिड़का। और शरीअत के मुताबिक़ तक़रीबन सारी चीज़ें ख़ून से पाक की जाती हैं और बग़ैर ख़ून बहाए, गुनाहों की मुआफ़ी मुम्किन नहीं। पस जब ये ज़रूरी था के ये चीज़ें जो असल आसमानी चीज़ों की नक़ल हैं, ऐसी क़ुर्बानियों से पाक की जायें लेकिन आसमानी चीज़ें ख़ुद ऐसी क़ुर्बानियों का मुतालबा करती हैं जो इन से कहीं ज़्यादा बेहतर हों। क्यूंके अलमसीह सिर्फ़ इन्सानी हाथों से बने पाक-मक़्दिस में दाख़िल नहीं हुए जो हक़ीक़ी मक़्दिस की नक़ल है बल्के वो आलमे-बाला ही में दाख़िल हो गये जहां वो हमारी ख़ातिर ख़ुदा के रूबरू हाज़िर हैं। यहूदियों का आला काहिन तो पाक-तरीन मक़ाम में साल में एक बार ख़ुद अपना नहीं यानी जानवरों का ख़ून ले कर दाख़िल होता था लेकिन अलमसीह अपने आप को बार-बार क़ुर्बान करने के लिये दाख़िल नहीं हुए। वर्ना बिना-ए-आलम से ले कर अब तक उसे बार-बार दुख उठाना पड़ता। मगर अब आख़िर ज़माने में अलमसीह एक बार ज़ाहिर हुए ताके अपने आप को क़ुर्बान कर के गुनाह को नेस्त कर दे। और जिस तरह इन्सान का एक बार मरना और उस के बाद अदालत का होना मुक़र्रर है, उसी तरह अलमसीह भी एक ही बार तमाम लोगों के गुनाहों को उठा ले जाने के लिये क़ुर्बान हुए। और दूसरी बार जब वो ज़ाहिर होंगे तो गुनाहों को दूर करने के लिये नहीं बल्के उन्हें नजात देने के लिये तशरीफ़ लायेंगे जो उन का इन्तिज़ार बड़ी शिद्दत से कर हैं। मूसवी शरीअत आइन्दा की अच्छी चीज़ों का महज़ एक अक्स है न के उन की असली सूरत। इसलिये एक ही क़िस्म की क़ुर्बानियां जो साल-ब-साल पेश की जाती हैं वो ख़ुदा के पास आने वालों को हरगिज़ कामिल नहीं कर सकतीं। अगर वो कामिल कर सकतीं तो क़ुर्बानियां पेश करने की ज़रूरत नहीं होती? क्यूंके इस सूरत में इबादत करने वाले एक ही बार में हमेशा के लिये पाक साफ़ हो जाते तो उन का ज़मीर फिर उन्हें गुनहगार न ठहराता। लेकिन वो क़ुर्बानियां साल बह साल लोगों को याद दिलाती हैं के वो गुनहगार हैं। क्यूंके ये नामुम्किन है के बैलों और बकरों का ख़ून गुनाहों को दूर कर सके। लिहाज़ा अलमसीह इस दुनिया में तशरीफ़ लाते वक़्त ख़ुदा से यूं मुख़ातिब हुए, “तू क़ुर्बानियां और नज़रें नहीं चाहता, लेकिन तूने मेरे लिये एक बदन तय्यार किया; सोख़्तनी क़ुर्बानियों और गुनाह की क़ुर्बानियों से तू ख़ुश न हुआ। तब मैंने कहा, ‘ऐ ख़ुदा, देख, मैं हाज़िर हूं ताके तेरी मर्ज़ी पूरी करूं, जैसा के चमड़े के नविश्ते में मेरी बाबत लिख्खा हुआ है।’ ” पहले अलमसीह फ़रमाते हैं, “तू न क़ुर्बानियों, नज़्रों, सोख़्तनी क़ुर्बानियों और ख़ता के ज़बीहों को न चाहता था, और न उन से ख़ुश हुआ” हालांके यह क़ुर्बानियां शरीअत के मुताबिक़ पेश की जाती हैं। और फिर वह फ़रमाता है, “देख! में हाज़िर हूं ताके तेरी मर्ज़ी पूरी करूं।” यूं वह पहले निज़ाम को मौक़ूफ़ करता है ताके उस की जगह दूसरे निज़ाम को क़ाइम करे। और उस की मर्ज़ी पूरी हो जाने से हम हुज़ूर ईसा अलमसीह के बदन के एक ही बार क़ुर्बान होने के वसीले से हमेशा के लिये पाक कर दिये गये हैं। हर एक काहिन रोज़ाना बैतुलमुक़द्दस में खड़ा होकर अपनी ख़िदमत के फ़राइज़ अदा करता है और एक ही क़िस्म की क़ुर्बानियां बार-बार पेश करता है जो गुनाहों को कभी भी दूर नहीं कर सकतीं। लेकिन अलमसीह ने गुनाहों को दूर करने के लिये एक ही बार हमेशा की क़ुर्बानी पेश कर के ख़ुदा की दाएं तरफ़ तख़्त-नशीन हो गये। और उसी वक़्त से अलमसीह मुन्तज़िर हैं जब तक ख़ुदा तआला उन के दुश्मनों को उन के पांव की चौकी न बना दे। क्यूंके अलमसीह ने अपनी एक ही क़ुर्बानी से उन्हें हमेशा के लिये कामिल कर दिया है जिन्हें मुक़द्दस किया जा रहा है। पाक रूह भी इस के बारे में हमें यही गवाही देता है, पहले वो फ़रमाता है: ख़ुदावन्द फ़रमाता है जो अह्द मैं अपने लोगों के साथ उन दिनों के बाद बांधूंगा वह यह है के मैं अपने क़वानीन उन के दिलों में डालूंगा, और उन के ज़हनों पर नक़्श कर दूंगा। और फिर वह फ़रमाता है, “मैं उन के गुनाहों और उन की बदकारियों को फिर कभी याद न करूंगा।” पस जब इन की मुआफ़ी हो गई तो फिर गुनाहों को दूर करने की क़ुर्बानियों की ज़रूरत ही नहीं रही? इसलिये ऐ भाईयो और बहनों! जब हमें हुज़ूर ईसा के ख़ून के सबब से पूरे यक़ीन के साथ पाक-तरीन मक़ाम में दाख़िल हो सकते हैं। अपनी क़ुर्बानी से हुज़ूर ईसा ने एक नया और ज़िन्दगी बख़श रास्ता खोल दिया है ताके हम उस पर्दे यानी उन के बदन से गुज़र कर पाक-तरीन मक़ाम के अन्दर दाख़िल हो जायें। और हमारा एक ऐसा अज़ीम काहिन है जो ख़ुदा के घर का मुख़्तार है, तो आओ! हम सच्चे दिल और पूरे ईमान के साथ, अपने मुजरिम ठहराने वाले ज़मीर से पाक होने के लिये अपने दिल को उन के ख़ून के छींटों से और अपने बदन को मुक़द्दस पानी से साफ़ कर के ख़ुदा के हुज़ूर आयें। और अपनी उम्मीद के इक़रार को मज़बूती से थामे रहीं क्यूंके जिस ने वादा किया है वो सच्चा है। और हम इस बात पर ग़ौर करें के कैसे हम एक दूसरे को महब्बत और नेक काम करने के लिये तरग़ीब दे सकते हैं, बाहम जमा होना न छोड़ें जैसा बाज़ लोगों की जमा न होने की आदत बन गई है, बल्के हम एक दूसरे को नसीहत करें। ख़ासकर ये बात मद्देनज़र रखकर के ख़ुदावन्द की दुबारा आमद के दिन नज़दीक हैं। क्यूंके अगर हम हक़ की पहचान हासिल करने के बाद भी जान-बूझ कर गुनाह करें तो गुनाहों की कोई और क़ुर्बानी बाक़ी नहीं रही। हां सिर्फ़ रोज़ अदालत की ख़ौफ़नाक और ग़ज़बनाक आतिश बाक़ी रहेगी जो ख़ुदा के मुख़ालिफ़ों को जला कर ख़ाक कर देगी। जब हज़रत मूसा की शरीअत की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने वाला दो या तीन चश्मदीद गवाहों की गवाही से बेरहमी के साथ क़त्ल कर दिया जाता है। तो ख़्याल करो के वो शख़्स किस क़दर ज़्यादा सज़ा के लाइक़ ठहरेगा, जिस ने ख़ुदा के बेटे को पामाल किया, और अह्द के उस ख़ून को जिस से वो पाक किया गया था, नापाक जाना और जिस ने फ़ज़ल के रूह की बेहुरमती की? क्यूंके हम उसे जानते हैं जिस ने फ़रमाया है, “इन्तिक़ाम लेना मेरा काम है, बदला मैं ही दूंगा।” और फिर यह के “ख़ुदावन्द अपने लोगों का इन्साफ़ करेगा।” ज़िन्दा ख़ुदा के हाथों में पड़ना होलनाक बात है। लेकिन ईमान के उन इब्तिदाई दिनों को याद करो जब तुम ने हक़ीक़ी रोशनी पाई और शदीद तकालीफ़ का डट कर मुक़ाबला किया। यानी कभी तो लअन-तअन और मुसीबतों के बाइस तुम ख़ुद अवाम के सामने तमाशा बने और कभी तुम ने दूसरों की पूरी मदद की जो अज़ीय्यतें बर्दाश्त कर रहे थे। तुम ने क़ैदियों के साथ हमदर्दी की और अपने जायदाद का लुट जाना भी ख़ुशी से क़बूल किया क्यूंके तुम जानते थे के एक बेहतर और दाइमी मिल्कियत तुम्हारे पास मौजूद है। पस हिम्मत मत हारो क्यूंके उस का अज्र बड़ा है। चुनांचे तुम्हें उस वक़्त बड़े सब्र से काम लेना है ताके तुम ख़ुदा की मर्ज़ी पूरी कर के वादा की हुई चीज़ हासिल करो। क्यूंके किताब-ए-मुक़द्दस में यूं लिख्खा है, “अब थोड़ी ही देर बाक़ी है के आने वाला आयेगा और ताख़ीर न करेगा।” और, “लेकिन मेरा रास्तबाज़ ख़ादिम ईमान से ज़िन्दा रहेगा। और अगर वह डर कर पीछे हट जाये, तो मेरा दिल उस से ख़ुश न होगा।” मगर हम उन में से नहीं हैं जो पीछे हट कर तबाह हो जाते हैं, बल्के हम उन में से हैं जो ईमान रखकर नजात पाते हैं। अब ईमान उम्मीद की हुई चीज़ों का एतमाद और नादीदा चीज़ों की मौजूदगी का सबूत है। क़दीम ज़माने के बुज़ुर्गों के ईमान की वजह से ही उन के हक़ में उम्दा गवाही दी गई है। ईमान ही से हमें मालूम होता है के सारी काइनात की ख़ुदा के कलाम से ख़ल्क़ हुई। लेकिन ये नहीं के सब कुछ जो नज़र आता है इस की पैदाइश नज़र आने वाली चीज़ों से हुई हो। ईमान ही से हज़रत हाबिल ने क़ाइन से अफ़ज़ल क़ुर्बानी पेश की जिस की बिना पर इस की नज़्र क़बूल कर के ख़ुदा ने इस के रास्तबाज़ होने की गवाही दी और अगरचे हज़रत हाबिल की मौत हो चुकी है तो भी वो ईमान ही के वसीले से अब तक कलाम करते हैं। ईमान ही से हज़रत हनोक आसमान पर ज़िन्दा उठा लिये गये और मौत का ज़ाती मुशाहिदा न किया, “और वो नज़रों से ग़ायब हो गये क्यूंके ख़ुदा ने उन्हें आसमान पर उठा लिया था।” हज़रत हनोक के उठाये जाने से पहले उन के हक़ में गवाही दी गई के उन्होंने ख़ुदा को ख़ुश किया था। क्यूंके ईमान के बग़ैर ख़ुदा को पसन्द आना मुम्किन नहीं। पस वाजिब है के ख़ुदा के पास आने वालों को ईमान लाना चाहिये के ख़ुदा मौजूद है और वो अपने तालिबों को अज्र देता है। ईमान ही से हज़रत नूह ने उन चीज़ों की बाबत जो उस वक़्त तक नज़र न आती थीं, हिदायत पा कर ख़ुदा के ख़ौफ़ से अपने सारे ख़ानदान को बचाने के वास्ते लकड़ी का एक पानी का जहाज़ बनाया। और अपने ईमान के ज़रीये से हज़रत नूह ने दुनिया को मुजरिम ठहराया और उस रास्तबाज़ी का वारिस बने जो ईमान से हासिल होती है। ईमान ही से जब हज़रत इब्राहीम बुलाए गये तो वह ख़ुदा का हुक्म मान कर उस जगह चले गये जो बाद में उसे मीरास के तौर पर मिलने वाली थी हालांके वह जानते भी न थे के कहां जा रहे हैं। ईमान ही के सबब से वो वादा किये हुए इस मुल्क में एक अजनबी की मानिन्द रहने लगे; हज़रत इब्राहीम ख़ेमों में रहते थे और इसी तरह हज़रत इज़हाक़ और याक़ूब ने भी ज़िन्दगी गुज़ारी, जो हज़रत इब्राहीम के साथ इसी वादे के वारिस थे। क्यूंके हज़रत इब्राहीम इस अब्दी बुनियाद वाले शहर के इन्तिज़ार में थे, जिस का ख़ालिक़ और तामीर करने वाला ख़ुदा है। ईमान ही से सारह ने हामिला होने और बच्चा पैदा करने की क़ुव्वत पाई हालांके वो उम्र रसीदा थीं और बच्चा पैदा करने के क़ाबिल नहीं थीं, क्यूंके सारह को यक़ीन था के वादा करने वाला ख़ुदा वफ़ादार है। पस एक ऐसे शख़्स से जो मुर्दा सा था, तादाद में आसमान के सितारों और समुन्दर की रेत के मानिन्द बेशुमार औलाद पैदा हुई। ये सब लोग ईमान रखते हुए मर गये और वादा की हुई चीज़ें न पाऊं। मगर दूर ही से उन्हें देखकर ख़ुश होकर उस का इस्तिक़्बाल किया और इक़रार करते रहे के हम ज़मीन पर सिर्फ़ मुसाफ़िर और परदेसी हैं। जो ऐसी बातें कहते हैं वो ये ज़ाहिर करते हैं के हम अब तक अपने वतन की तलाश में हैं। अगर वो अपने छोड़े हुए मालिक का ख़्याल करते रहते तो उन्हें वापस लौट जाने का भी मौक़ा था। मगर हक़ीक़त में वो एक बेहतर यानी आसमानी मालिक की आरज़ू कर रहे थे। इसीलिये ख़ुदा उन का ख़ुदा कहलाने से नहीं शरमाता, क्यूंके उस ने उन के लिये एक शहर तय्यार किया है। ईमान ही से हज़रत इब्राहीम ने अपने इम्तिहान के वक़्त इज़हाक़ को क़ुर्बानी के तौर पर पेश किया। हालांके हज़रत इब्राहीम को इज़हाक़ की शक्ल में वादा मिल चुका था फिर भी अपने उसी इकलौते बेटे को क़ुर्बान करने वाले थे। हालांके ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम से फ़रमाया था के, “तुम्हारी नस्ल का नाम इज़हाक़ ही से आगे बढ़ेगा।” हज़रत इब्राहीम का ये ईमान था के ख़ुदा मुर्दों को ज़िन्दा करने की क़ुदरत रखता है, चुनांचे एक तरह से हज़रत इब्राहीम ने इज़हाक़ को गोया मुर्दों में से फिर से ज़िन्दा पाया। ईमान ही से हज़रत इज़हाक़ ने अपने दोनों बेटों, याक़ूब और ऐसौं को उन के मुस्तक़बिल के लिहाज़ से बरकत बख़्शी। ईमान ही से हज़रत याक़ूब ने मरते वक़्त हज़रत यूसुफ़ के दोनों बेटों को बरकत बख़्शी और अपने असा के सिरे का सहारा ले कर सज्दा किया। ईमान ही से हज़रत यूसुफ़ ने मरते वक़्त बनी इस्राईल के मुल्क मिस्र से निकल जाने का ज़िक्र किया और अपनी हड्डीयों को दफ़न करने के बारे में उन्हें हुक्म दिया के निकलते वक़्त उसे अपने साथ ले जाना। ईमान ही से हज़रत मूसा के वालिदैन ने उन के पैदा होने के बाद तीन महीने तक उन्हें छुपाये रख्खा क्यूंके उन्होंने देखा के वो बच्चा ख़ूबसूरत है और उन्हें बादशाह के हुक्म का ख़ौफ़ न रहा। ईमान ही से हज़रत मूसा ने बड़े होकर फ़िरऔन की बेटी का बेटा कहलाने से इन्कार किया। और गुनाह में चंद दिन लुत्फ़ उठाने की बजाय ख़ुदा की उम्मत के साथ बदसुलूकी बर्दाश्त करना ज़्यादा पसन्द किया। और हज़रत मूसा ने अलमसीह की ख़ातिर रुसवा होने को मिस्र के ख़ज़ानों से ज़्यादा बड़ी दौलत समझा क्यूंके उन की निगाह अज्र पाने पर लगी थी। ईमान ही से हज़रत मूसा ने बादशाह के ग़ुस्सा से ख़ौफ़ न खाया बल्के मुल्के मिस्र को छोड़ दिया; क्यूंके वो गोया ग़ैरमरई ख़ुदा को देखकर आगे क़दम बढ़ाते रहे। ईमान ही से हज़रत मूसा ने ईद-ए-फ़सह करने और ख़ून छिड़कने पर अमल किया ताके पहलोठों को हलाक करने वाला फ़रिश्ता बनी इस्राईल के पहलोठों को हाथ न लगाए। ईमान ही से बनी इस्राईल बहरे-क़ुलज़ुम से इस तरह गुज़र गये जैसे के ख़ुश्क ज़मीन हो। लेकिन जब मिस्रियों ने उसे पार करने की कोशिश की तो डूब गये। ईमान ही से यरीहू की शहरपनाह जब इस्राईली फ़ौज सात दिन तक उस के इर्दगिर्द चक्कर लगा चुकी तो वो शहरपनाह गिर पड़ी। ईमान ही से राहिब फ़ाहिशा नाफ़रमानों के साथ हलाक न हुई क्यूंके इस ने इस्राईली जासूसों का सलामती के साथ इस्तिक़्बाल किया था। अब और क्या कहूं? मेरे पास इतनी फ़ुर्सत कहां के जिदाऊन, बरक़, समसून, इफ़़ताह, हज़रत दाऊद और समुएल और दीगर नबियों का हाल बयान करूं, उन्होंने ईमान ही से सल्तनतों को मग़्लूब किया, रास्तबाज़ी के काम किये, वादा की हुई चीज़ों को हासिल किया, शेरों के मुंह बन्द किये, आग के भड़कते शोलों को बुझा दिया, शमशीर की धार से बच निकले, कमज़ोरी में उन्हें क़ुव्वत हासिल हुई, जंग में ताक़तवर साबित हुए, दुश्मनों की फ़ौजों को शिकस्त दी। औरतों ने अपने मुर्दा अज़ीज़ों को फिर से ज़िन्दा पाया, बाज़ मार खाते हुए मर गये मगर रिहाई मन्ज़ूर न की ताके उन्हें क़ियामत के वक़्त एक बेहतर ज़िन्दगी हासिल हो। बाज़ लोगों का मज़ाक़ उड़ाया गया और उन्हें कोड़े मारे गये, बाज़ ज़न्जीरों में जकड़े और क़ैदख़ानों में डाले गये। संगसार किये गये, आरे से चीरे गये; शमशीर से क़त्ल किये गये। उन्हें भेड़ों और बकरीयों की खाल ओढ़े हुए मारे-मारे फिरना पड़ा, मोहताजी और बदसुलूकी का सामना किया, उन पर ज़ुल्म-ओ-सितम ढाए गये। दुनिया उन के लाइक़ न थी। वो जंगलों और पहाड़ों में भटकते रहे, ग़ारों और ज़मीन के दरौं में आवारा फिरते रहे। इन सब के हक़ में उन के ईमान के सबब से अच्छी गवाही दी गई है, तो भी उन्हें वादा की हुई चीज़ हासिल न हुई। क्यूंके ख़ुदा ने हमारे लिये एक बेहतर मन्सूबा बनाया था के हम लोग उस के बग़ैर कामलियत तक न पहुंचें। चुनांचे जब गवाहों का इतना बड़ा बादल हमें घेरे हुए है तो हम भी हर एक रुकावट और उस गुनाह को जो हमें आसानी से उलझा लेता है, दूर कर के उस दौड़ में सब्र से दौड़ें जो हमारे लिये मुक़र्रर की गई है। आओ! हम ईमान के बानी और कामिल करने वाले हुज़ूर ईसा पर अपनी नज़रें जमाए रखें जिस ने उस ख़ुशी के लिये जो उन की नज़रों के सामने थी, शर्मिन्दगी की पर्वा न की बल्के सलीब का दुख सहा और ख़ुदा की दाहिनी तरफ़ तख़्त-नशीन हैं। तुम उन पर ग़ौर करो जिस ने गुनहगारों की तरफ़ से कितनी बड़ी मुख़ालफ़त बर्दाश्त की ताके बे दिल होकर हिम्मत न हारो। तुम ने गुनाह से लड़ते हुए अब तक ऐसा मुक़ाबला नहीं किया के तुम्हारा ख़ून न बहाया जाये। और क्या तुम उस नसीहत को भूल गये जिस में बाप ने तुम्हें फ़र्ज़न्द कह कर मुख़ातिब किया है, “ऐ मेरे बेटे! ख़ुदावन्द की तरबियत को नाचीज़ न जान, और जब वह तुझे मलामत करे तो बे दिल न हो, क्यूंके जिस से ख़ुदावन्द महब्बत रखता है उसे तम्बीह भी करता है, और जिसे बेटा बना लेता है उसे कोड़े भी लगाता है।” अपनी मुसीबतों को इलाही तम्बीह समझ कर बर्दाश्त करो गोया ख़ुदा तुम्हें अपने फ़र्ज़न्द समझ कर तुम्हारी तरबियत कर रहा है। क्यूंके वह कौन सा बेटा है जिसे उस का बाप तम्बीह नहीं करता? अगर तुम्हारी तम्बीह सब की तरह न की जाती तो तुम भी नाजायज़ फ़र्ज़न्द ठहरते और ख़ुदावन्द की हक़ीक़ी बेटियां और बेटे नहीं ठहरते। इस के इलावा, जब हमारे जिस्मानी बाप हमें तम्बीह करते थे तो हम उन की ताज़ीम करते थे, तो क्या रूहानी बाप की इस से ज़्यादा ताबेदारी न करें ताके ज़िन्दा रहें? हमारे जिस्मानी बाप तो थोड़े दिनों के लिये अपनी समझ के मुताबिक़ हमें तम्बीह करते थे लेकिन ख़ुदा हमारे फ़ायदा के लिये हमें तम्बीह करता है ताके हम उस की पाकीज़गी में शरीक होने के लाइक़ बन जायें। इस में शक नहीं के जब तम्बीह की जाती है तो उस वक़्त वह ख़ुशी का नहीं बल्के ग़म का बाइस मालूम होती है मगर जो उसे सहे-सहे कर पुख़्ता हो गये हैं उन्हें बाद में रास्तबाज़ी और सलामती का अज्र मिलता है। चुनांचे अपने थके हुए बाज़ुओं और कमज़ोर घुटनों को मज़बूत करो। “और अपने पांव के लिये सीधे रास्ते बनाओ” ताके लंगड़ा उज़ू टूट न जाये बल्के शिफ़ायाब रहे। सब के साथ सुलह से रहो और उस पाकीज़गी के तालिब रहो जिस के बग़ैर कोई ख़ुदावन्द को न देखेगा। इस बात पर ग़ौर करना के कोई शख़्स ख़ुदा के फ़ज़ल से महरूम रह जाये, और ऐसा न हो के कोई कड़वी जड़ फूट निकले और तुम्हें तकलीफ़ दे और बहुतों को नापाक कर दे। और न कोई शख़्स ज़िनाकार हो या ऐसौं की तरह ख़ुदा का मुख़ालिफ़ बनने पाये जिस ने चन्द लुक़मों के लिये अपने पहलोठे होने का हक़ बेच डाला। क्यूंके तुम जानते हो के बाद में जब उस ने बरकत पाने की कोशिश की तो नाकाम रहा। उस वक़्त उसे तौबा का मौक़ा न मिला हालांके उस ने आंसु बहा-बहा कर यह बरकत हासिल करने की कोशिश की। तुम उस पहाड़ के पास नहीं आये जिसे छूना मुम्किन था, और वह पहाड़ आग से जलता था और उस पर काली घटा, तारीकी और तूफ़ानों से घिरा हुआ था। और वहां नरसिंगे की तेज़ आवाज़ और कलाम करने वाले की ऐसी ख़ौफ़नाक आवाज़ सुनाई दी थी के जिन्होंने उसे सुना, उन्होंने दरख़्वास्त की के हम से अब और कलाम न किया जाये। क्यूंके वह उस हुक्म की बर्दाश्त न कर सके, “अगर कोई जानवर भी उस पहाड़ को छूए तो वह फ़ौरन संगसार किया जाये।” वो मन्ज़र इतना हैबतनाक था के हज़रत मूसा ने कहा, “मैं ख़ौफ़ के मारे थरथरा रहा हूं।” लेकिन तुम कोहे सिय्यून और ज़िन्दा ख़ुदा के शहर यानी आसमानी यरूशलेम और बेशुमार फ़रिश्तों और जश्न मनाने वाली जमाअत के पास आये हो। और उन पहलोठों की जमाअत के पास जिन के नाम आसमान पर लिखे हुए हैं। और तुम उस ख़ुदा के पास आ चुके हो जो सब का मुन्सिफ़ है। तुम कामिल किये हुए रास्तबाज़ों की रूहों, और नए अह्द के दरमियानी, हुज़ूर ईसा और इस के छिड़के हुए ख़ून के पास आ चुके हो, जो हाबिल के ख़ून की निस्बत बेहतर बातें कहता है। चुनांचे ख़बरदार रहो के उस का जो तुम से हम कलाम हो रहा है इन्कार न करना क्यूंके जब वो लोग ज़मीन पर तम्बीह करने वाले हज़रत मूसा का इन्कार कर के न बच सके तो हम आसमान पर के हिदायत करने वाले का इन्कार कर के कैसे बचेंगे? उस वक़्त तो उस की आवाज़ ने ज़मीन को हिला दिया था मगर अब उस ने ये वादा किया है के, “फिर एक बार में फ़क़त ख़ुश्की को ही नहीं बल्के आसमानों को भी हिला दूंगा।” और यह इबारत “एक बार फिर” साफ़ ज़ाहिर करती है के ख़ल्क़ की हुई सारी चीज़ें हिलाई और मिटा दी जायेंगी, ताके वोही चीज़ें क़ाइम रहें जो हिलाई नहीं जा सकती हैं। चुनांचे जब हमें ऐसी बादशाही अता की जा रही है जिसे हिलाया नहीं जा सकता तो आओ हम ख़ुदा का शुक्र अदा करें और उस की इबादत ख़ुदातरसी-व-ख़ौफ़ के साथ करें ताके वो ख़ुश हो सके। क्यूंके हमारा “ख़ुदा भस्म कर देने वाली आग है।” एक दूसरे से भाईयों और बहनों की तरह बरादराना महब्बत क़ाइम रखो। अजनबियों की मुसाफ़िर परवरी करना मत भूलो, क्यूंके ऐसा करने से बाज़ ने फ़रिश्तों की बेख़बरी में मेहमान-नवाज़ी की है। क़ैदियों को इस तरह याद रखो के गोया तुम ख़ुद उन के साथ क़ैद हो, और जिन के साथ बदसुलूकी की जाती है उन्हें भी ये समझ कर याद रखो गोया तुम्हारे जिस्म के साथ ये बदसुलूकी हो रही हो। शादी करना सब लोगों में इज़्ज़त की बात समझी जाये और शौहर और बीवी एक दूसरे के वफ़ादार रहें और उन के शादी का बिस्तर नापाक न होने पाए, क्यूंके ख़ुदा ज़िनाकारों और ज़ानियों की अदालत करेगा। अपनी ज़िन्दगी को ज़रदोस्ती से आज़ाद रखो, और जितना तुम्हारे पास है उसी पर क़नाअत करो क्यूंके ख़ुदा ने फ़रमाया है, “मैं तुझ से हरगिज़ दस्त-बरदार न होंगा; और तुझे कभी न छोड़ूंगा।” इसलिये हम पूरे यक़ीन के साथ कह सकते हैं के “ख़ुदावन्द मेरा मददगार है; इसलिये मैं ख़ौफ़ न करूंगा। इन्सान मेरा क्या बिगाड़ सकता है।” अपने रहनुमाओं को याद रखो जिन्होंने तुम्हें ख़ुदा का कलाम सुनाया था। और उन की ज़िन्दगी के अन्जाम पर ग़ौर करो के वो कैसी थी फिर उन के ईमान के नमूने पर अमल करो। हुज़ूर ईसा अलमसीह कल और आज बल्के अबद तक यकसां है। मुख़्तलिफ़ और अजीब तालीमात से गुमराह मत होना। बेहतर ये है के तुम्हारे दिल ख़ुदा के फ़ज़ल से क़ुव्वत पाऐं न के मुख़्तलिफ़ परहेज़ी खानों से इस से खाने वालों को कोई ख़ास फ़ायदा न पहुंचा। हमारी एक ऐसी क़ुर्बानगाह है जिस में से मक़्दिस के ख़ेमे की ख़िदमत करने वालों को खाने का कोई इख़्तियार नहीं। क्यूंके आला काहिन जिन जानवरों का ख़ून पाक-तरीन मक़ाम में गुनाह के कफ़्फ़ारा के वास्ते ले जाता है उन के जिस्म ख़ेमें की हुदूद से बाहर जला दिये जाते हैं। इसीलिये हुज़ूर ईसा ने भी उम्मत को ख़ुद अपने ख़ून से पाक करने के लिये शहर के फाटक के बाहर सलीबी मौत का दुख उठाया। चुनांचे आओ! हम ख़ेमे की हुदूद से बाहर निकल कर उस के पास चलें और उस की ज़िल्लत में शरीक हों। क्यूंके यहां हमारा कोई क़ाइम रहने वाला शहर नहीं बल्के हम एक आने वाले शहर की शदीद आरज़ू में हैं। चुनांचे हम हुज़ूर ईसा के वसीले से अपनी हम्द की क़ुर्बानी ख़ुदा के हुज़ूर में पेश करते रहें जो उस के नाम का इक़रार करने वाले होंटों का फल है। दूसरों के साथ नेकी और सख़ावत करना मत भूलो क्यूंके ख़ुदा ऐसी क़ुर्बानियों से ख़ुश होता है। अपने रहनुमाओं के फ़रमांबरदार और उन के ताबे रहो क्यूंके वो तुम्हारी रूहों के निगहबान हैं जिन्हें इस ख़िदमत का हिसाब ख़ुदा को देना होगा। उन की बात मानो ताके वो तकलीफ़ के साथ नहीं बल्के ख़ुशी से अपनी ख़िदमत सरअन्जाम दें। क्यूंके इस सूरत में तुम्हें कोई फ़ायदा न होगा। हमारे वास्ते दुआ करते रहो। हमें यक़ीन है के हमारा ज़मीर साफ़ है और हम हर लिहाज़ से एहतिराम के साथ ज़िन्दगी बसर करना चाहते हैं। मैं ख़ासकर तुम से इल्तिजा करता हूं के तुम दुआ करो के मैं जल्द तुम्हारे पास आ सकूं। अब ख़ुदा जो इत्मीनान का सरचश्मा है, जो अब्दी अह्द के ख़ून के बाइस, हमारे ख़ुदावन्द ईसा और भेड़ों के अज़ीम चरवाहे को मुर्दों में से ज़िन्दा कर के उठा लिया, वोही ख़ुदा तुम्हें हर नेक बात में कामिल करे ताके तुम उस की मर्ज़ी पूरी कर सको, और जो कुछ उस की नज़र में पसन्दीदा है, उसे हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से हम में भी पैदा करे। ख़ुदा की तम्जीद हमेशा तक होती रहे। आमीन। ऐ भाईयो और बहनों, मैं इल्तिमास करता हूं के मेरी नसीहत की बातों को सब्र के साथ सुन लो जिन्हें मैंने तुम्हें मुख़्तसर तौर पर सिर्फ़ चन्द अल्फ़ाज़ में तहरीर किया है। तुम्हें मालूम हो के हमारा भाई तिमुथियुस रिहा कर दिया गया है। अगर वह जल्द तशरीफ़ ले आये तो हम दोनों तुम सब से मिलने आयेंगे। अपने सब रहनुमाओं और ख़ुदावन्द के सारे मुक़द्दसीन को मेरा सलाम कहना। इतालिया के मोमिनीन तुम्हें सलाम कहते हैं। तुम सब पर ख़ुदा का फ़ज़ल होता रहे। आमीन। याक़ूब की जानिब से जो ख़ुदा का और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का ख़ादिम है, इस्राईल के बारह क़बीलों को जो तमाम जगहों में बिखरे हुए हैं, सलाम पहुंचे। मेरे भाईयो और बहनों! जब तुम तरह-तरह की आज़माइशों का सामना करते हो, तो इसे बड़ी ख़ुशी की बात समझो क्यूंके तुम जानते हो के तुम्हारे ईमान का इम्तिहान तुम्हारे अन्दर सब्र पैदा करता है। सब्र को अपना पूरा काम करने दो ताके तुम अपने ईमान में पुख़्ता और कामिल हो जाओ और तुम में किसी बात की कमी न रहे। अगर तुम में से किसी में हिक्मत की कमी हो तो वह ख़ुदा से मांगे जो सब को बग़ैर मलामत किये फ़य्याज़ी से देता है और तुम्हें भी अता फ़रमायेगा। मगर ईमान के साथ मांगे और ज़रा शक न करे, क्यूंके शक करने वाला समुन्दर की लहर की मानिन्द होता है जो हवा के ज़ोर से बहती और उछलती रहती है। ऐसा शख़्स यह न समझे के उसे ख़ुदावन्द से कुछ मिलेगा। इसलिये के वह शख़्स दो दिला है और अपने किसी काम में मुस्तक़िल नहीं। जो मोमिनीन पस्त हाली में हैं उन्हें अपने आला मर्तबा पर फ़ख़्र करना चाहिये। मगर दौलतमन्द को अपने अदना मर्तबा पर फ़ख़्र करना चाहिये क्यूंके दौलतमन्द जंगली फूल की तरह मुरझा कर ख़त्म हो जायेगा। क्यूंके सूरज तुलूअ होते ही सख़्त धूप लगती है और पौदे को सुखा देती है। और उस का फूल झड़ जाता है और उस की तमाम ख़ूबसूरती ख़त्म हो जाती है। इसी तरह दौलतमन्द की ज़िन्दगी भी इस के कारोबार के दौरान फ़ना हो जायेगी। मुबारक है वो आदमी जो आज़माइश के वक़्त सब्र से काम लेता है, क्यूंके जब मक़्बूल ठहरेगा तो ज़िन्दगी का ताज पायेगा जिस का ख़ुदावन्द ने अपने महब्बत करने वालों से वादा किया है। जब किसी को आज़माया जाये तो, वो ये न कहे, “मेरी आज़माइश ख़ुदा की तरफ़ से हो रही है।” क्यूंके न तो ख़ुदा बदी से आज़माया जा सकता है और न वो किसी को आज़माता है। मगर हर शख़्स ख़ुद अपनी ही ख़ाहिशों में खिंच कर और फंस कर आज़माया जाता है। फिर ख़ाहिश हामिला होकर गुनाह को पैदा करती है और गुनाह अपने शबाब पर पहुंच कर मौत को ख़ल्क़ करता है। ऐ मेरे प्यारे भाईयों और बहनों! फ़रेब मत खाओ। हर अच्छी नेमत और कामिल तोहफ़ा आसमान से और नूरों के बाप की तरफ़ से ही नाज़िल होता है। वो साया की तरह घटता या बढ़ता नहीं बल्के लातब्दील है। उस ने अपनी मर्ज़ी से हमें कलामे हक़ के वसीले से पैदा किया ताके उस की मख़्लूक़ात में से हम गोया पहले फल हों। ऐ मेरे अज़ीज़ भाईयों और बहनों! इस बात का ख़्याल रखना के हर आदमी सुनने में तेज़ और बोलने और ग़ुस्सा करने में धीमा हो। क्यूंके इन्सान का ग़ुस्सा वो रास्तबाज़ी पैदा नहीं करता जो ख़ुदा चाहता है। चुनांचे अपनी ज़िन्दगी की सारी नापाकी और बदी की सारी गंदगी को दूर कर के उस कलाम को हलीमी से क़बूल कर लो जो तुम्हारे दिलों में बोया गया है और जो तुम्हें नजात दे सकता है। सिर्फ़ कलाम के सुनने वाले न बनो। बल्के कलाम पर अमल करने वाले बनो। वर्ना तुम ख़ुदी को फ़रेब दे रहे हो। क्यूंके जो कोई कलाम को सुनता है लेकिन उस पर अमल नहीं करता वो उस आदमी की मानिन्द है जो आईने में अपनी सूरत देखता है। और ख़ुद को देखकर चला जाता है और फ़ौरन भूल जाता है के वो कैसा दिखाई देता है। लेकिन जो शख़्स आज़ाद करने वाली कामिल शरीअत का गहराई से ग़ौर करता और उस पर क़ाइम रहता है तो वो सुन कर भूलने वाला नहीं बल्के उस पर अमल करने वाला है। ऐसा शख़्स अपने हर काम में बरकत पायेगा। अगर कोई शख़्स अपने आप को दीनदार समझता है मगर फिर भी अपनी ज़बान को क़ाबू में नहीं रखता तो वो अपने आप को धोका देता है। और उस का दीन फ़ुज़ूल है। हमारे ख़ुदा बाप की नज़र में हक़ीक़ी और बेऐब दीनदारी ये है के मुसीबत के वक़्त यतीमों और बेवाओं की ख़बर लें और अपने आप को दुनिया से बेदाग़ रखें। ऐ मेरे भाईयो और बहनों! तुम जो हमारे जलाली ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह पर ईमान रखते हो, तरफ़दारी न दिखाया करो। फ़र्ज़ करो के एक शख़्स सोने की अंगूठी और नफ़ीस लिबास पहन कर तुम्हारी जमाअत में आये, और एक ग़रीब शख़्स मैले कुचैले कपड़े पहने हुए आये। और तुम उस उम्दा पोशाक वाले का ख़ास लिहाज़ कर के उस से कहो, “जनाब! आप यहां अच्छी जगह बैठिए” और उस ग़रीब शख़्स से कहो, “तू वहां खड़ा रह” या “मेरे पांव के पास फ़र्श पर बैठ जा।” तो क्या तुम ने बाहम तरफ़दारी न की और बदनीयती से फ़ैसला नहीं किया? ऐ मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, सुनो! क्या ख़ुदा ने दुनिया की नज़र में जो ग़रीब हैं उन्हें नहीं चुना ताके वो ईमान में दौलतमन्द और उस बादशाही के वारिस हो जायें जिस का उस ने अपने महब्बत रखने वालों से वादा किया है? लेकिन तुम ने ग़रीब आदमी की बेइज़्ज़ती की है, क्या दौलतमन्द ही तुम पर ज़ुल्म नहीं ढाते और तुम्हें अदालतों में खींच कर नहीं ले जाते? क्या ये लोग इस आला नाम पर कुफ़्र नहीं बकते जिस नाम से तुम पहचाने जाते हो। अगर तुम किताब-ए-मुक़द्दस की इस शाही शरीअत के मुताबिक़, “अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखो,” इस पर अमल करते हो तो, सही कर रहे हो। लेकिन अगर तुम तरफ़दारी करते हो तो गुनाह करते हो, और शरीअत तुम्हें क़ुसूरवार ठहराती है। क्यूंके अगर कोई सारी शरीअत पर अमल करे मगर किसी एक हुक्म को मानने में चूक जाये तो वह सारी शरीअत का क़ुसूरवार ठहराता है। क्यूंके जिस ने फ़रमाया, “ज़िना न करना,” उस ने यह भी फ़रमाया, “तुम ख़ून न करना।” पस अगर तूने ज़िना तो नहीं किया मगर ख़ून कर डाला, तो भी तुम शरीअत का नाफ़रमान ठहरे। इसलिये तुम्हारा क़ौल-ओ-अमल उन लोगों की मानिन्द हो, जिन का इन्साफ़ आज़ादी की शरीअत के मुताबिक़ होगा। इसलिये के जिस ने रहम नहीं किया उस का इन्साफ़ बग़ैर रहम के किया जायेगा। रहम इन्साफ़ पर ग़ालिब आता है। ऐ मेरे भाईयो और बहनों! अगर कोई कहे के में ईमान रखता हूं और वह आमाल न करता हो तो क्या फ़ायदा? क्या ऐसा ईमान उसे नजात दे सकता है? फ़र्ज़ करो के अगर किसी भाई या बहन के पास कपड़ों और रोज़ाना रोटी की कमी हो। और तुम में से कोई उन्हें कहे, “सलामती के साथ सो जाओ, गर्म कपड़े पहनो और खाकर सेर रहो,” लेकिन उन्हें ज़िन्दगी की ज़रूरी चीज़ें न दे तो ख़ाली अल्फ़ाज़ से क्या फ़ायदा होगा? ठीक इसी तरह से ईमान के साथ अगर आमाल न हो तो वो मुर्दा है। हो सकता है के कोई बहस करे, “तू ईमान रखता है और मैं आमाल रखता हूं।” तू बग़ैर आमाल के अपना ईमान मुझे दिखा और मैं अपना ईमान अपने आमाल से तुझे दिखाऊंगा। तू ईमान रखता है के ख़ुदा एक है। शाबाश! ये तो शयातीन भी ईमान रखते हैं और थरथराते हैं। ऐ बेवक़ूफ़ इन्सान! क्या तुझे अब सबूत चाहिये के ईमान अमल के बग़ैर फ़ुज़ूल है? क्या हमारे बाप हज़रत इब्राहीम ने जब अपने बेटे हज़रत इज़हाक़ को क़ुर्बानगाह पर नज़र किया तो क्या वो अपने उस आमाल से रास्तबाज़ नहीं ठहराये गये? चुनांचे तूने देख लिया के हज़रत इब्राहीम का ईमान और उन का आमाल साथ मिल कर असर किया और आमाल से ईमान कामिल हुआ। और यूं किताब-ए-मुक़द्दस की ये बात पूरी हुई, “हज़रत इब्राहीम ख़ुदा पर ईमान लाये और ये उन के वास्ते रास्तबाज़ी शुमार किया गया,” और वह ख़ुदा के ख़लील कहलाये। पस तुम ने देख लिया के इन्सान अपने आमाल से रास्तबाज़ गिना जाता है न के फ़क़त ईमान से। ठीक इसी तरह किया राहिब फ़ाहिशा भी जब उस ने क़ासिदों को पनाह दी और दूसरे रास्ते से रुख़्सत किया तो, क्या वो अपने आमाल के सबब से रास्तबाज़ न ठहरी? ग़रज़ जैसे बदन बग़ैर रूह के मुर्दा है वैसे ही ईमान भी बग़ैर आमाल के मुर्दा है। ऐ मेरे भाईयों और बहनों! तुम में से बहुत से लोग उस्ताद न बनें क्यूंके तुम जानते हो के हम उस्तादों की दूसरों के मुक़ाबला में ज़्यादा सख़्ती से इन्साफ़ किया जायेगा। हम सब के सब कई तरह से ख़ता करते हैं। मगर कामिल शख़्स वो है जो बोलने में कभी ख़ता नहीं करता। ऐसा आदमी ही अपने सारे बदन को क़ाबू में रखने के क़ाबिल है। जब हम घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं तो वो हमारे हुक्म पर चलते हैं और हम उन के सारे बदन को जिधर चाहें उधर मोड़ सकते हैं। या पानी जहाज़ की मिसाल लें। हालांके वो बड़े-बड़े होते हैं और तेज़ हवाओं से चलाये जाते हैं लेकिन एक निहायत ही छोटी सी पतवार के ज़रीये मांझी की मर्ज़ी के मुताबिक़ हर-सम्त में मोड़े जा सकते हैं। इसी तरह ज़बान भी बदन का एक छोटा सा उज़ू है मगर बड़ी शेख़ी मारती है। देखो! एक छोटी सी चिंगारी कैसे एक बड़े जंगल को जला कर राख कर देती है। ज़बान भी एक आग की मानिन्द है। ज़बान हमारे आज़ा में नारास्ती का एक आलम है जो सारे जिस्म को दाग़दार कर देती है। और सारी ज़िन्दगी में आग लगा देती है और ख़ुद जहन्नुम की आग से जलती रहती है। इन्सान हर क़िस्म के चौपायों, परिन्दों, कीड़े मकोड़ों और समुन्दरी मख़्लूक़ात को अपने क़ाबू में कर सकता है बल्के किये भी जा चुके हैं। लेकिन कोई इन्सान ज़बान को क़ाबू में नहीं कर सकता। ये मुहलिक ज़हर उगलने वाली वो बला है जिसे रोका नहीं जा सकता। इसी ज़बान से हम अपने ख़ुदावन्द और ख़ुदा बाप की हम्द करते हैं और इसी से इन्सानों को जो ख़ुदा की सूरत पर पैदा हुए हैं, बददुआ देते हैं। एक ही मुंह से बरकत और बददुआ निकलती है। ऐ मेरे भाईयों और बहनों! ऐसा तो नहीं होना चाहिये। क्या एक ही चश्मा के मुंह से मीठा और खारा पानी दोनों निकल सकता है? मेरे भाईयों और बहनों! जिस तरह अन्जीर के दरख़्त से ज़ैतून और अंगूर की बेल से अन्जीर पैदा नहीं हो सकते इसी तरह खारे पानी के चश्मे से मीठा पानी नहीं निकल सकता। तुम में कौन दानिशमन्द और समझदार है? जो ऐसा हो वो अपने कामों को नेक चाल चलन के वसीले से उस हलीमी के साथ ज़ाहिर करे जो हिक्मत से पैदा होती है। लेकिन अगर तुम अपने दिल में सख़्त जलन और ख़ुदग़रज़ी रखते हो तो हक़ के ख़िलाफ़ शेख़ी न मारो, और न ही झूट बोलो। ऐसी हिक्मत आसमान की तरफ़ से नहीं उतरती, बल्के दुनियवी, नफ़्सानी और शैतानी होती है। क्यूंके जहां जलन और ख़ुदग़रज़ी होती है वहां फ़साद और हर तरह का बुरा काम भी पाया जाता है। लेकिन जो हिक्मत आसमान से आती है, अव्वल तो वो पाक होती है, फिर सुलह पसन्द, नर्म-दिल, तरबियत पज़ीर, रहम दिल, और अच्छे फलों से लदी हुई बे तरफ़दार और ख़ुलूस दिल होती है। और सुलह कराने वाले अमन का बीज बो कर, रास्तबाज़ी की फ़सल काटते हैं। तुम्हारे दरमियान लड़ाईयां और झगड़े कहां से आते हैं? क्या उन ख़ाहिशों से नहीं जो तुम्हारे जिस्म के आज़ा में फ़साद पैदा करती हैं? तुम किसी चीज़ की ख़ाहिश करते हो, मगर वह तुम्हें हासिल नहीं होती। इसलिये तुम ख़ून कर देते हो। जलन की वजह से तुम झगड़ते और लड़ते हो हसद करते हो क्यूंके तुम हासिल नहीं कर पाते हो। तुम्हें इसलिये नहीं मिलता क्यूंके तुम ख़ुदा से नहीं मांगते। और जब मांगते हो तो पाते नहीं क्यूंके बुरी नीयत से मांगते हो ताके उसे ऐश-ओ-इशरत में ख़र्च कर सको। ऐ हरामकारो! क्या तुम्हें मालूम नहीं के दुनिया से दोस्ती रखना ख़ुदा से दुश्मनी करना है? जो कोई दुनिया का दोस्त बनना चाहता है वह अपने आप को ख़ुदा का दुश्मन बनाता है। क्या तुम यह समझते हो के किताब-ए-मुक़द्दस बेफ़ाइदा फ़रमाती है के जिस पाक रूह को ख़ुदा ने हमारे दिलों में बसाया है क्या वो ऐसी आरज़ू रखता है जिस का अन्जाम हसद हो? मगर वह तो हमें और ज़्यादा फ़ज़ल बख़्शता है। चुनांचे ख़ुदा का कलाम फ़रमाता है: “ख़ुदा मग़रूरों का मुक़ाबला करता है मगर हलीमों पर मेहरबानी करता है।” पस ख़ुदा के ताबे हो जाओ और इब्लीस का मुक़ाबला करो तो वह तुम से भाग जायेगा। ख़ुदा के नज़दीक आओ तो वह तुम्हारे नज़दीक आयेगा। ऐ गुनहगारों! अपने हाथों को साफ़ कर लो और ऐ दो दिलो! अपने दिलों को पाक कर लो। अफ़सोस और मातम करो और रोओ। तुम्हारी हंसी मातम में और तुम्हारी ख़ुशी ग़म में बदल जाये। ख़ुदावन्द के सामने हलीम कर दो तो वह तुम्हें सरबुलन्द करेगा। ऐ भाईयो और बहनों! तुम आपस में एक दूसरे की बदगोई न करो। जो अपने भाई की बदगोई करता और उस पर इल्ज़ाम लगाता है वह शरीअत की बदगोई करता है और उस पर इल्ज़ाम लगाता है। और अगर तुम शरीअत पर इल्ज़ाम लगाते हो तो तुम शरीअत पर अमल करने की बजाय उस का मुन्सिफ़ बन बैठे हो। शरीअत का देने वाला और उस का मुन्सिफ़ सिर्फ़ एक ही है जो बचा भी सकता है और हलाक भी कर सकता है। लेकिन तू कौन है जो अपने पड़ोसी का मुन्सिफ़ बन बैठा है? और अब मेरी बात सुनो! तुम जो ये कहते हो, “आज या कल हम फ़ुलां-फ़ुलां शहर में जायेंगे, एक बरस वहां ठहरेंगे और कारोबार कर के रूपया कमाएंगे।” जब के सच तो यह है के तुम यह भी नहीं जानते के कल क्या होगा? ज़रा सुनो तो; तुम्हारी ज़िन्दगी है ही क्या? वह सिर्फ़ धुएं की मानिन्द है जो थोड़ी देर के लिये नज़र आती और फिर ग़ायब हो जाती है। इस के बजाय तुम्हें यह कहना चाहिये, “अगर रब की मर्ज़ी हुई तो हम ज़िन्दा रहेंगे और ये या वह काम भी करेंगे।” मगर तुम शेख़ी मार कर अपने ग़ुरूर का इज़हार करते हो, और इस तरह की तमाम शेख़ी बाज़ी बुरी है। पस जो भलाई करना जानता है मगर करता नहीं करता, तो उस के लिये यह गुनाह है। ऐ दौलतमन्दो अब मेरी बात सुनो! तुम अपने ऊपर आने वाली मुसीबतों पर ख़ूब रोओ और मातम करो। तुम्हारा माल बरबाद हो गया और तुम्हारे कपड़े कीड़ों ने खा लिया। तुम्हारे सोने और चांदी को ज़ंग लग गया। वह ज़ंग तुम्हारे ख़िलाफ़ गवाही देगा और आग की तरह तुम्हारा गोश्त खायेगा। दुनिया का तो ख़ातिमा होने वाला है और तुम ने दौलत के अम्बार लगा लिये हैं। देखो! जिन मज़दूरों ने तुम्हारे खेतों में काम किया था उन की वो मज़दूरी जो तुम ने दग़ा कर के रोक ली है वो तुम्हारे ख़िलाफ़ चिल्ला रही है और फ़सल काटने वालों की फ़र्याद लश्करों के रब के कानों तक पहुंच चुकी है। तुम ने दुनिया में ऐश-ओ-इशरत की ज़िन्दगी गुज़ारी और ख़ूब मज़े किये। तुम ने अपने दिलों को ज़ब्ह के दिन के लिये ख़ूब मोटा ताज़ा कर लिया। तुम ने रास्तबाज़ शख़्स को जो तुम्हारा मुक़ाबला नहीं कर रहा था, क़ुसूरवार ठहराया और उसे क़त्ल कर डाला। इसलिये, ऐ भाईयों और बहनों। ख़ुदावन्द की दुबारा आमद तक सब्र करो। देखो, किसान ज़मीन से क़ीमती पैदावार हासिल करने के लिये मौसम-ए-ख़िज़ां और बरसात का सब्र से इन्तिज़ार करता है। तुम भी सब्र करो और अपने दिलों को मज़बूत रखो क्यूंके ख़ुदावन्द की दुबारा आमद क़रीब है। ऐ भाईयों और बहनों! एक दूसरे की शिकायत करने और बुड़बुड़ाने से बाज़ रहो ताके तुम सज़ा न पाओ। देखो! इन्साफ़ करने वाला दरवाज़े पर खड़ा है। ऐ भाईयों और बहनों! उन नबियों को अपना नमूना समझो जिन्होंने ख़ुदावन्द के नाम से कलाम सुनाते हुए दुख उठाया और सब्र किया। इसलिये हम उन्हें मुबारक कहते हैं जिन्होंने दुखों में सब्र के साथ ज़िन्दगी गुज़ारी। तुम ने हज़रत अय्यूब के सब्र का हाल तो सुना ही है और ये भी जानते हो के ख़ुदावन्द आख़िर मैं किस क़दर उन पर मेहरबान हुआ क्यूंके ख़ुदावन्द रहम दिल और शफ़क़त वाला है। ऐ भाईयों और बहनों! सब से बढ़कर ये है के क़सम हरगिज़ न खाना, न आसमान की और न ज़मीन की, न किसी और चीज़ की। बल्के “हां” की जगह हां और “नहीं” की जगह नहीं हो; ताके सज़ा से बच सको। अगर तुम में से कोई मुसीबत ज़दा है तो उसे चाहिये के दुआ करे। और ख़ुश है तो ख़ुदा की हम्द में गीत गाए। अगर तुम में कोई बीमार है तो वो जमाअत के बुज़ुर्गों को बुलाए और वो बुज़ुर्ग ख़ुदावन्द के नाम से इस बीमार पर तेल मिल कर उस के लिये दुआ करें। और ईमान की दुआ से बीमार बच जायेगा और ख़ुदावन्द उसे तनदरुस्ती बख़्शेगा और अगर उस ने गुनाह किये हूं, तो उन की भी मुआफ़ी हो जायेगी। इसलिये तुम आपस में एक दूसरे से अपने गुनाहों का इक़रार करो और एक दूसरे के लिये दुआ करो ताके शिफ़ा पाओ; क्यूंके रास्तबाज़ की दुआ क़ुव्वत और तासीर वाली होती है। हज़रत एलियाह भी हमारी तरह इन्सान थे। उन्होंने बड़ी शिद्दत से दुआ की के बारिश न हो और साढे़ तीन बरस तक ज़मीन पर बारिश न हुई। उन्होंने फिर दुआ की तो आसमान से बारिश हुई और ज़मीन ने अपनी फ़सलें पैदा कीं। ऐ मेरे भाईयों और बहनों! अगर तुम में से कोई राहे-हक़ से गुमराह हो जाये और कोई उसे दुबारा वापस ले आये, तो वो याद रखे के जो किसी गुनहगार को गुमराही से फेर लायेगा; वो एक जान को मौत से बचाएगा और बहुत से गुनाहों पर पर्दा डालेगा। पतरस की जानिब से जो हुज़ूर ईसा अलमसीह का रसूल है, उन बरगुज़ीदा मुहाजिरों और आरज़ी मक़ीमीन के नाम ख़त लिखे, जो पुन्तुस, गलतिया, कप्पदुकिया, आसिया और सूबे बितूनिया में जा-ब-जा रहते हैं। तुम ख़ुदा बाप के इल्म-ए-साबिक़ के मुवाफ़िक़ और पाक रूह के मुक़द्दस करने हुज़ूर ईसा अलमसीह के फ़रमांबरदार होने और उन के ख़ून के छिड़के जाने के लिये बरगुज़ीदा हुए हैं: तुम्हें कसरत से फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे। हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के ख़ुदा और बाप की हम्द हो! जिस ने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के मुर्दों में से जी उठने के सबब से अपनी बड़ी रहमत से हमें एक ज़िन्दा उम्मीद के लिये नये सिरे से पैदा किया है, ताके हम एक ग़ैरफ़ानी, बेदाग़ और लाज़वाल मीरास पायें जो ख़ुदा की तरफ़ से हमारे लिये आसमान पर महफ़ूज़ है। जो तुम्हारे ईमान के वसीले से और ख़ुदा की क़ुदरत से इस नजात के लिये महफ़ूज़ है जो इन आख़री वक़्त में ज़ाहिर होने वाली है। चुनांचे तुम इन सब के दरमियान ख़ूब ख़ुशी मनाते हो हालांके हो सकता है के तुम्हें अभी चंद रोज़ के लिये मुख़्तलिफ़ आज़माइशों का सामना करने से ग़म-ज़दा होना पड़े। और ये आज़माइशें इसलिये आई हैं ताके तुम्हारे साबित ईमान की सदाक़त आग में तपे हुए फ़ानी सोने से भी ज़्यादा क़ीमती हो, और हुज़ूर ईसा अलमसीह के ज़ाहिर होने के वक़्त तारीफ़, जलाल और इज़्ज़त के लाइक़ ठहरे। अगरचे तुम ने हुज़ूर ईसा को नहीं देखा, मगर फिर भी उन से महब्बत करते हो; हालांके तुम अभी भी हुज़ूर को अपने नज़रों के सामने नहीं पाते हो, फिर भी उन पर ईमान रखते हो और ऐसी ख़ुशी मनाते हो जो बयान से बाहर और जलाल से मामूर है, क्यूंके तुम्हारे ईमान का आख़री अज्र तुम्हारी रूहों की नजात है। इसी नजात की बाबत नबियों ने बड़ी एहतियात से तफ़्तीश की और उन्होंने उस फ़ज़ल की नबुव्वत की जो तुम पर होने वाला था। उन्होंने ये मालूम करने की कोशिश की के अलमसीह का रूह जो उन में था वो किस वक़्त और किस हालात के बारे में बात कर रहा था जब उस ने अलमसीह के दुख उठाने और उस के बाद जलाल पाने की बाबत नबुव्वत की थी। उन पर ये ज़ाहिर कर दिया गया था के उन की ये ख़िदमत अपने लिये नहीं बल्के तुम्हारे लिये कर रहे हैं। लिहाज़ा जो बातें उन्होंने कही थीं अब ख़ुशख़बरी सुनाने वालों ने पाक रूह की मदद से जो आसमान से नाज़िल हुआ, तुम्हें बतायें। ये सब इतनी ख़ूबसूरत है के फ़रिश्ते भी इन बातों को बारीकी से समझने की बड़ी आरज़ू रखते हैं। इसलिये अपनी अक़्ल से काम लो और होशयार रह कर, मुकम्मल संजीदगी से ज़िन्दगी गुज़ारो और उस फ़ज़ल पर पूरी उम्मीद रखो जो तुम्हें हुज़ूर ईसा अलमसीह के ज़ाहिर होने के वक़्त मिलने वाला है। और ख़ुदा के फ़रमांबरदार फ़र्ज़न्दों की मानिन्द उन पुरानी बुरी ख़ाहिशात को अपनी ज़िन्दगी में जगह न दो जिन्हें अपनी जहालत के दिनों में पूरा करने में लगे रहते थे। बल्के जिस तरह तुम्हारा बुलाने वाला ख़ुदा पाक है उसी तरह तुम भी अपने सारे चाल चलन में पाक बनो। क्यूंके लिख्खा है, “पाक बनों क्यूंके मैं पाक हूं।” और जब तुम ऐ बाप कह कर ख़ुदा से दुआ करते हो, जो बग़ैर तरफ़दारी के हर शख़्स के अमल के मुवाफ़िक़ उस का इन्साफ़ करता है तो तुम भी दुनिया में अपनी मुसाफ़रत का ज़माने ख़ौफ़ के साथ गुज़ारो। क्यूंके तुम जानते हो के तुम ने उस निकम्मे चाल चलन से ख़लासी पाई है जो तुम्हें तुम्हारे बाप दादा से मिला था, लेकिन ये मुख़्लिसी तुम ने सोने या चांदी जैसी फ़ानी चीज़ों से नहीं पाई, बल्के एक बेऐब और बेदाग़ बर्रे यानी अलमसीह के बेशक़ीमती ख़ून से। अलमसीह को तो दुनिया की तख़्लीक़ से पेशतर ही चुन लिया गया था लेकिन इन आख़री दिनों में तुम्हारी ख़ातिर ज़ाहिर किया गया। तुम उसी के वसीले से ख़ुदा पर ईमान लाये हो, जिस ने हुज़ूर को मुर्दों में से ज़िन्दा किया और जलाल बख्शा ताके तुम्हारा ईमान और उम्मीद ख़ुदा पर क़ाइम हो। चूंके तुम ने हक़ की ताबेदारी से अपने आप को पाक किया है जिस से तुम में भाईयों के लिये बेरिया बरादराना महब्बत का जज़बा पैदा हो गया है, इसलिये दिल-ओ-जान से आपस में बेपनाह महब्बत रखो। क्यूंके तुम फ़ानी तुख़्म से नहीं बल्के ख़ुदा के ज़िन्दा और अब्दी कलाम के वसीले से नये सिरे से पैदा हुए हो। क्यूंके, “हर बशर घास की मानिन्द है, और उन की सारी शान-ओ-शौकत मैदान के फूलों की मानिन्द है; घास सूख जाती है और फूल मुरझा जाते हैं, लेकिन ख़ुदावन्द का कलाम अबद तक क़ाइम है।” यह वोही ख़ुशख़बरी का कलाम है जो तुम्हें सुनाया गया था। पस हर क़िस्म की बुराई, फ़रेब, रियाकारी, हसद और बदगोई को दूर कर दो। और नौज़ाइदा बच्चों की मानिन्द ख़ालिस रूहानी दूध के आरज़ूमन्द रहो ताके उस के ज़रीये से नजात के मुकम्मल तजुर्बे में बढ़ते जाओ। क्यूंके तुम ने चख कर जान लिया है के ख़ुदावन्द कितना मेहरबान है। जब तुम उस ज़िन्दा पत्थर के पास आते हो जिसे इन्सानों ने रद्द कर दिया था लेकिन जो ख़ुदा की नज़र में बेशक़ीमती और मुन्तख़ब किया हुआ है। और तुम भी ज़िन्दा पत्थरों की मानिन्द हो जो पाक रूह का मक़्दिस बनते जा रहे हो, ताके तुम काहिनों का मुक़द्दस फ़िर्क़ा बन कर ऐसी रूहानी क़ुर्बानियां पेश करो जो हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से ख़ुदा के हुज़ूर में मक़्बूल होती हैं। जैसा के सहीफ़ा यूं बयान करता है: “देखो! मैं सिय्यून में कोने के सिरे का, एक मुन्तख़ब और क़ीमती पत्थर रख रहा हूं, और जो उस पर ईमान लायेगा वह कभी शर्मिन्दा न होगा।” पस तुम ईमान लाने वालों के लिये तो वह पत्थर क़ीमती है लेकिन ईमान न लाने वालों के लिये, “जिस पत्थर को मेमारों ने रद्द कर दिया था वोही कोने के सिरे का पत्थर हो गये। और, “ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान बन गया।” वह इसलिये ठोकर खाते हैं क्यूंके वह किताब-ए-मुक़द्दस पर ईमान नहीं लाते और यही सज़ा ख़ुदा ने उन के लिये भी मुक़र्रर की है। लेकिन तुम एक मुन्तख़ब उम्मत, शाही काहिनों की जमाअत, मुक़द्दस क़ौम और ख़ुदा की ख़ास मिल्कियत हो ताके तुम्हारे ज़रीअः उस की ख़ूबीयां ज़ाहिर हूं जिस ने तुम्हें तारीकी से अपनी अजीब रोशनी में बुलाया है। पहले तुम उस की उम्मत न थे, लेकिन अब ख़ुदा की उम्मत बन गये हो। तुम जो पहले ख़ुदा की रहमत से महरूम थे अब उस की रहमत को पा चुके हो। ऐ अज़ीज़ों! तुम जो मुहाजिरों और परदेसियों की मानिन्द ज़िन्दगी गुज़ार रहे हो, मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूं के तुम उन बुरी जिस्मानी ख़ाहिशों से दूर रहो जो तुम्हारी रूह से लड़ाई करती रहती हैं। और ग़ैरयहूदियों में अपना चाल चलन ऐसा नेक रखो ताके जिन बातों में वो तुम्हें बदकार जान कर तुम्हारी बदगोई करते हैं, वोही तुम्हारे नेक कामों को देखकर उन्हीं के सबब से ख़ुदा के ज़हूर के दिन उस की तम्जीद करें। ख़ुदावन्द की ख़ातिर, इन्सान के हर एक इन्तिज़ाम के ताबे रहो; बादशाह के इसलिये के वो सब से आला इख़्तियार वाला है। हाकिमों के इसलिये के ख़ुदा ने उन्हें बदकारों को सज़ा देने और नेकोकारों की तारीफ़ करने के लिये मुक़र्रर किया है। क्यूंके ख़ुदा की मर्ज़ी ये है के तुम नेकी कर के नादान लोगों की जहालत की बातों को बन्द कर दो। और तुम ख़ुद को आज़ाद जानो, मगर अपनी इस आज़ादी को बदकारी की लिये इस्तिमाल न करो, बल्के ख़ुदा के बन्दों की तरह ज़िन्दगी बसर करो। सब का मुनासिब एहतिराम करो, अपनी मोमिनीन बिरादरी से महब्बत रखो, ख़ुदा से डरो और बादशाह की ताज़ीम करो। ऐ ग़ुलामों! बड़े ख़ौफ़ और एहतराम के साथ अपने मालिकों के ताबे रहो, नेक और हलीम मालिकों के ही नहीं बल्के बुरे मालिकों के भी ताबे रहो। क्यूंके अगर तुम सब्र के साथ बेइन्साफ़ी के बाइस ये जान कर तकालीफ़ को बर्दाश्त करते हो के जो तुम कर रहे हो वो सही है तो ख़ुदा की नज़र में ये बात क़ाबिले-तारीफ़ है। लेकिन अगर तुम ने क़ुसूर कर के थप्पड़ खाये और सब्र किया तो क्या ये कोई फ़ख़्र की बात है? हां, अगर नेकी करने के बावुजूद दुख पाते और सब्र से काम लेते हो तो ये बात ख़ुदा की नज़र में क़ाबिले-तारीफ़ है। और तुम्हें भी इसी चाल चलन के लिये बुलाया गया है, क्यूंके अलमसीह ने भी तुम्हारे वास्ते दुख उठाकर एक मिसाल क़ाइम कर दी है ताके तुम उन के नक़्श-ए-क़दम पर चलो। “क्यूंके अलमसीह ने न तो कोई गुनाह किया, और न ही उन के मुंह से कोई फ़रेब बात निकली।” जब लोगों ने उन्हें गालियां दीं तो हुज़ूर ने जवाब में कभी गाली न दी, और न दुख पा कर कभी किसी को धमकी दी, बल्के अपने आप को सच्चे इन्साफ़ करने वाले ख़ुदा के हवाले करते थे। वो ख़ुद हमारे गुनाहों को अपने बदन पर लिये हुए सलीब पर चढ़ गया ताके हम गुनाहों के लिये मुर्दा और रास्तबाज़ी के लिये ज़िन्दा हो जायें। और उसी के मार खाने से तुम ने शिफ़ा है। क्यूंके पहले तुम भेड़ों की मानिन्द भटके हुए थे लेकिन अब अपनी रूहों के गल्लेबान और निगहबान के पास लौट आये हो। इसी तरह ऐ बीवीयों! तुम भी अपने-अपने शौहरों की ताबे रहो ताके अगर उन में से बाज़ जो किताब-ए-मुक़द्दस को न मानते हों, तो भी तुम्हारे कुछ कहे बग़ैर ही तुम्हारे नेक चाल चलन की वजह से ईमान में आ जायें। क्यूंके वो तुम्हारे पाकीज़ा और अच्छे चाल चलन को देखते रहते हैं। तुम्हारी ख़ूबसूरती सिर्फ़ ज़ाहिरी ख़ूबसूरती न हो, मसलन बाल गूंधने, सोने के ज़ेवर और तरह-तरह के क़ीमती लिबास पहनना। लेकिन तुम्हारी बातिनी और पोशीदा शख़्सियत हलीम और नरम मिज़ाज दिमाग़ की ग़ुरबत की ग़ैरफ़ानी जे़वरात से आरास्ता हो, क्यूंके ख़ुदा की नज़र में बातिनी हुस्न की बड़ी क़दर है। क्यूंके ख़ुदा पर उम्मीद रखने वाली मुक़द्दस ख़्वातीन माज़ी ज़माने में भी अपने आप को इसी तरह संवारती थीं और अपने शौहरों के ताबे रहती थीं। जैसे सारह हज़रत इब्राहीम के हुक्म में रहती थी और उसे अपना आक़ा कह कर तस्लीम करती थी। इसी तरह अगर तुम भी बग़ैर ख़ौफ़ खाये जो सही है उसे करो, तो तुम सारह की बेटीयां हो। ऐ शौहरों, इसी तरह तुम भी अपनी बीवीयों के साथ समझदारी से ज़िन्दगी बसर करो, और औरत को नाज़ुक ज़र्फ़ जान कर उस की इज़्ज़त करो, और यूं समझो के तुम दोनों ज़िन्दगी के फ़ज़ल के बराबर वारिस हो, ताके तुम्हारी दुआएं रुक न जायें। ग़रज़ तुम सब एक दिल रहो, और एक दूसरे के साथ हमदर्दी दिखाओ, आपस में बरादराना महब्बत से पेश आओ, नर्म-दिल और फ़रोतन बनो। बदी के बदले बदी न करो, और गाली का जवाब गाली से न दो। बल्के इस के बरअक्स ऐसे शख़्स को बरकत दो, क्यूंके ख़ुदा ने तुम्हें यही करने के लिये बुलाया है ताके तुम मीरास में बरकत के वारिस बनो। जैसा के किताब-ए-मुक़द्दस का बयान है, “जो कोई ज़िन्दगी से महब्बत रखता है और अच्छे दिन देखने का ख़ाहिशमन्द है, वह अपनी ज़बान को बदी से और लबों को दग़ा की बातों से बाज़ रखे। बदी से दूर रहे और नेकी करे; सुलह का तालिब हो और उस की कोशिश में रहे। क्यूंके ख़ुदावन्द की आंखें रास्तबाज़ों पर लगी रहती हैं और उस के कान उन की दुआओं पर लगे रहते हैं, मगर वह बदकारों से मुंह मोड़ लेता है।” अगर तुम नेकी करने में सरगर्म हो, तो कौन तुम्हारे साथ बदी करेगा? और अगर तुम रास्तबाज़ी की ख़ातिर दुख भी उठाओ तो मुबारक हो। “उन की धमकीयों से मत डरो; और न ही घबराओ।” बल्के अलमसीह को ख़ुदावन्द जान कर अपने दिलों में उसे मुक़द्दस समझो और अगर कोई तुम से तुम्हारी उम्मीद के बारे में दरयाफ़्त करे तो उसे जवाब देने के लिये हमेशा तय्यार रहो। लेकिन नरमी और एहतराम के साथ ऐसा करो। लेकिन शाइस्तगी और एहतराम के साथ अपना ज़मीर साफ़ रखो ताके जो लोग अलमसीह मैं तुम्हारे नेक चाल चलन के बारे में ग़लत बातें कर रहे हैं उन्हें अपनी तोहमत पर शर्मिन्दा होना पड़े। क्यूंके अगर ख़ुदा की यही मर्ज़ी है के तुम नेकी कर के दुख उठाओ, तो ये बदी कर के दुख उठाने से ज़्यादा बेहतर है। इसलिये अलमसीह भी गुनाहों के लिये एक ही बार क़ुर्बान हुआ, यानी एक रास्तबाज़ ने नारास्तों के लिये दुख उठाया ताके तुम्हें ख़ुदा के पास पहुंचाये। वो जिस्म के एतबार से तो मारा गया लेकिन रूह के ज़रीये से ज़िन्दा किया गया। और अलमसीह ने अपने रूहानी वुजूद में जा कर उन क़ैदी रूहों में मुनादी की। जो इस क़दीम ज़माने में नाफ़रमान रूहें थीं जब ख़ुदा हज़रत नूह के ज़माने में सब्र कर के उन्हें तौबा करने का मौक़ा बख्शा था। और उस वक़्त हज़रत नूह लकड़ी का जहाज़ तय्यार कर रहे थे जिस में सिर्फ़ आठ अश्ख़ास सवार होकर पानी से सही सलामत बच निकले थे। और उसी पानी का मुशाबेह भी यानी पाक-ग़ुस्ल हुज़ूर ईसा अलमसीह के जी उठने के वसीले से अब तुम्हें बचाता है। पाक-ग़ुस्ल से जिस्म की नजासत दूर नहीं की जाती है बल्के पाक-ग़ुस्ल के वक़्त हम साफ़ ज़मीर से ख़ुदा के साथ अह्द करते हैं। हुज़ूर ईसा अलमसीह आसमान पर जा कर ख़ुदा की दाहिनी तरफ़ तख़्त-नशीन हुए और फ़रिश्ते, आसमानी क़ुव्वतें और इख़्तियारात उन के ताबे कर दिये गये हैं। पस जब के अलमसीह ने जिस्म के एतबार से दुख उठाया था लिहाज़ा तुम भी ऐसे ही इरादे से मुसल्लह हो जाओ क्यूंके जिस ने जिस्म के एतबार से दुख उठाया वह गुनाह से फ़राग़त पाई। इसलिये अब से तुम्हारी बाक़ी जिस्मानी ज़िन्दगी नफ़्सानी ख़ाहिशात को पूरा करने में नहीं बल्के ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ गुज़रे। क्यूंके तुम ने माज़ी में अपनी ज़िन्दगी का बेशतर हिस्सा ग़ैरयहूदियों की तरह शहवत-परस्ती, बदख़ाहिशात, शराबनोशी, नाच रंग, नशा बाज़ी और मकरूह क़िस्म की बुतपरस्ती में गुज़ार दिया। और अब वो तअज्जुब करते हैं के तुम बदचलनी और अय्याशी में उन का साथ नहीं देते हो इसलिये अब वो तुम्हारी बुराई करते रहते हैं। लेकिन उन्हें उसी ख़ुदा को हिसाब देना पड़ेगा जो ज़िन्दा और मुर्दों का इन्साफ़ करने को तय्यार है। क्यूंके मुर्दों को भी ख़ुशख़बरी इसीलिये सुनाई गई थी के जिस्म के लिहाज़ से तो उन का इन्साफ़ इन्सानी पैमाना के मुताबिक़ हो, लेकिन अपनी रूह में वो ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ ज़िन्दा रहीं। दुनिया के ख़ातिमा का वक़्त नज़दीक आ गया है। इसलिये होशयार रहो, और सरगर्म होकर ख़ूब दुआ करो। सब से अहम बात ये है के आपस में एक दूसरे से गहरी महब्बत रखो, क्यूंके महब्बत बहुत से गुनाहों पर पर्दा डाल देती है। बग़ैर बुड़बुड़ाए एक दूसरे की मेहमान-नवाज़ी में लगे रहो। ख़ुदा ने तुम में से हर एक को अलग-अलग रूहानी नेमतें अता की हैं लिहाज़ा उन मुख़्तलिफ़ नेमतों को वफ़ादार मुख़्तारों की मानिन्द एक दूसरे की ख़िदमत करने में इस्तिमाल करो। अगर कोई कुछ बयान करे तो इस तरह करे गोया ख़ुदावन्द का कलाम पेश कर रहा है। अगर कोई ख़िदमत करे तो वो ख़ुदा से क़ुव्वत पा कर उसे अन्जाम दे ताके सब बातों में हुज़ूर ईसा अलमसीह के वसीले से ख़ुदा का जलाल ज़ाहिर हो। ख़ुदा का जलाल और उन की सल्तनत अब्दुल-आबाद तक होती रहे। आमीन। ऐ अज़ीज़ों! मुसीबत की आग जो तुम में भड़क उठी है वो तुम्हारी आज़माइश के लिये है। इस की वजह से तअज्जुब न करो के तुम्हारे साथ कोई अजीब बात हो रही है। बल्के ख़ुशी मनाओ की तुम अलमसीह के दुखों में शरीक हो रहे हो। ताके जब उन का जलाल ज़ाहिर हो, तो तुम और भी निहायत ख़ुश-ओ-ख़ुर्रम हो सको। अगर अलमसीह के नाम के सबब से तुम्हारी मलामत की जाती है तो तुम मुबारक हो, क्यूंके जलाल का रूह जो ख़ुदा का रूह है तुम पर साया किये हुए है। लेकिन ऐसा न हो के तुम में से कोई शख़्स किसी का क़त्ल, चोरी, बदकारी या दूसरों के काम में दख़ल देने की वजह से दुख उठाये। लेकिन अगर कोई मसीही होने की वजह से दुख उठाये तो शर्मिन्दा न हो बल्के ख़ुदा की तम्जीद करे के वो मसीही कहलाता है। क्यूंके वो वक़्त आ पहुंचा है के ख़ुदा के घर से ही अदालत शुरू हो, और जब उस की इब्तिदा हम ही से होगी तो उन का अन्जाम क्या होगा जो ख़ुदा की ख़ुशख़बरी को नहीं मानते हैं? और, “अगर रास्तबाज़ ही मुश्किल से नजात पायेगा, तो फिर बेदीन और गुनहगार का हश्र क्या होगा?” पस जो लोग ख़ुदा की मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ दुख और तकलीफ़ उठाते हैं, वो नेकी करते हुए अपने आप को वफ़ादार ख़ालिक़ के हाथों में सुपुर्द कर दें। तुम में जो जमाअत के बुज़ुर्ग हैं, मैं उन की मानिन्द एक हम बुज़ुर्ग और अलमसीह के दुखों का चश्मदीद गवाह और उस के ज़ाहिर होने वाले जलाल में शरीक होकर उन से ये दरख़्वास्त करता हूं। तुम ख़ुदा के उस गल्ले की गल्लेबानी करो जो तुम्हारे सुपुर्द किया गया है, लाचारी से नहीं बल्के ख़ुदा की मर्ज़ी और अपनी ख़ुशी से निगहबानी करो; इस ख़िदमत को नाजायज़ नफ़ा के मक़सद से नहीं बल्के दिल्ली शौक़ से अन्जाम दो। और जो लोग तुम्हारे सुपुर्द किये गये हैं उन पर हुकूमत मत करना बल्के गल्ले के लिये उम्दा नमूना बनो और जब आला गल्लेबान यानी अलमसीह ज़ाहिर होंगे तो तुम ऐसा जलाली सहरा पाओगे जो कभी नहीं मुरझाएगा। इसी तरह ऐ जवानों, तुम भी अपने बुज़ुर्गों के ताबे रहो। बल्के सब के सब एक दूसरे की ख़िदमत के लिये फ़िरोतनी से कमर-बस्ता रहो, क्यूंके, “ख़ुदा मग़रूरों का मुक़ाबला करता है मगर हलीमों पर मेहरबानी करता है।” पस ख़ुदा के क़वी हाथ के नीचे हलीमी से रहो, ताके वह मुनासिब वक़्त पर तुम्हें सरबुलन्द करेगा। अपनी सारी फ़िक्रें उस ख़ुदा पर डाल दो क्यूंके वह तुम्हारी फ़िक्र करता है। होशयार और ख़बरदार रहो क्यूंके तुम्हारा दुश्मन इब्लीस धाड़ते हुए शेर बब्बर की मानिन्द ढूंडता फिरता है के किस को फाड़ खाये। तुम ईमान में मज़बूत होकर और ये जान कर उस का मुक़ाबला करो के तुम्हारे मसीही मोमिनीन भाई और बहन जो इस दुनिया में हैं वो भी ऐसे ही दुख उठा रहे हैं। और अब ख़ुदा जो सारे फ़ज़ल का सरचश्मा है, जिस ने तुम्हें अलमसीह ईसा में अपने दाइमी जलाल में शरीक होने के लिये बुलाया है, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद, ख़ुदा आप ही तुम्हें कामिल और क़ाइम और मज़बूत कर देगा। ख़ुदा की सल्तनत अब्दुल-आबाद तक होती रहे। आमीन। मैंने तुम्हें ये मुख़्तसर ख़त सिलवानुस यानी सीलास की मदद से लिख्खा है, जिसे मैं वफ़ादार भाई समझता हूं ताके तुम्हारी हौसला-अफ़ज़ाई हो और मैं ये तस्दीक़ करता हूं के ख़ुदा का सच्चा फ़ज़ल यही है, इस पर क़ाइम रहना। बाबुल मैं तुम्हारी तरह एक बरगुज़ीदा जमाअत है जो तुम्हें सलाम कहती है। मेरा बेटा मरक़ुस भी तुम्हें सलाम कहता है। एक दूसरे को महब्बत से चूम कर सलाम करो। तुम सब को जो अलमसीह में हो इत्मीनान हासिल होता रहे। शमऊन पतरस की जानिब से जो हुज़ूर ईसा अलमसीह का ख़ादिम और रसूल है, उन लोगों के नाम ख़त, जिन्होंने हमारे ख़ुदा और मुनज्जी हुज़ूर ईसा अलमसीह की रास्तबाज़ी के वसीले से हमारी तरह बेशक़ीमती ईमान पाया है। ख़ुदा बाप और हमारे ख़ुदावन्द ईसा की पहचान के सबब से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान कसरत से हासिल होता रहे। ख़ुदा की इलाही क़ुदरत ने हमें वह सब कुछ अता किया है जो ख़ुदापरस्त ज़िन्दगी और दीनदारी के लिये ज़रूरी है, और हमें यह सब कुछ उसी की पहचान के वसीले से बख़्शा गया है, जिस ने हमें अपने ख़ास जलाल और नेकी के ज़रीये बुलाया है। उन्हें के ज़रीअः ख़ुदा ने हम से अज़ीम और बेशक़ीमती वादे किये हैं ताके तुम दुनिया की बुरी ख़ाहिशात से पैदा होने वाली ख़राबी से आज़ाद होकर ज़ात-ए-इलाही में शरीक हो सको। लिहाज़ा हर मुम्किन कोशिश करो के तुम्हारे ईमान में अख़्लाक़ का, अख़्लाक़ में इल्म का, इल्म में परहेज़गारी का, परहेज़गारी में सब्र का, सब्र में ख़ुदापरस्ती का, ख़ुदापरस्ती में बरादराना उल्फ़त का और बरादराना उल्फ़त में महब्बत का इज़ाफ़ा करते चले जाओ। क्यूंके अगर ये ख़ूबीयां तुम्हारे अन्दर मौजूद हैं और उन में इज़ाफ़ा होता जा रहा है तो तुम हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के मुकम्मल इल्म में बेकार और बे फल नहीं होगे। लेकिन जिस में ये ख़ूबीयां मौजूद नहीं हैं वो अन्धा या कोताह नज़र वाला है और भूल बैठा है के इस के पिछले गुनाहों से उसे पाक साफ़ किया जा चुका है। चुनांचे ऐ भाईयों और बहनों अपने बुलाए जाने और मुन्तख़ब किये जाने को साबित करने के लिये पूरी कोशिश करते रहो, क्यूंके अगर ऐसा करोगे तो कभी ठोकर न खाओगे। बल्के इस से तुम हमारे ख़ुदावन्द और मुनज्जी हुज़ूर ईसा अलमसीह की अब्दी बादशाही में बड़ी इज़्ज़त के साथ दाख़िल किये जाओगे। इसलिये मैं तुम्हें हमेशा इन बातों को याद दिलाता रहूंगा, हालांके तुम इन से वाक़िफ़ हो और मज़बूती से उस हक़ पर क़ाइम हो, जो तुम्हें हासिल है। बल्के में अपना फ़र्ज़ समझता हूं के जब तक में इस जिस्मानी ख़ेमे में ज़िन्दा हूं, इन बातों को याद दिला-दिला कर तुम्हें उभारना वाजिब समझता हूं, क्यूंके हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के क़ौल के मुताबिक़, मैं जानता हूं के मेरे जिस्मानी ख़ेमे के गिराये जाने का वक़्त जल्द आने वाला है। लिहाज़ा में पूरी कोशिश करूंगा के मेरे इन्तिक़ाल के बाद भी तुम इन बातों को हमेशा याद रख सको। क्यूंके जब हम ने अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की क़ुदरत और उन की आमद के बारे में तुम्हें वाक़िफ़ किया था, तो दग़ाबाज़ी से गढ़े हुए क़िस्सों का सहारा नहीं लिया था बल्के हम ने उन की अज़मत को ख़ुद अपनी आंखों से देखा था। जब अलमसीह ने ख़ुदा बाप से इज़्ज़त और जलाल पाया और उस अफ़ज़ल जलाल में से हुज़ूर के लिये ये आवाज़ आई, “ये मेरा प्यारा बेटा है, जिस से मैं महब्बत रखता हूं और जिस से बहुत ख़ुश हूं।” और जब हम हुज़ूर के साथ उस मुक़द्दस पहाड़ पर मौजूद थे तो हम ने ख़ुद ये आवाज़ आसमान से आती हुई सुनी थी। और उस तजुर्बे से ज़्यादा हमारे पास नबियों का वो कलाम है जो बड़ा मोतबर है और तुम अच्छा करते हो जो ये समझ कर इस पर ग़ौर करते रहते हो के वो एक चिराग़ है जो तारीकी में रोशनी देता है जब तक सुबह न हो और सुबह का सितारा अलमसीह तुम्हारे दिलों में चमकने न लगे। मगर सब से पहले ये जान लो के किताब-ए-मुक़द्दस की कोई भी नबुव्वत की बात की तफ़सीर अपने ज़ाती तौर पर नहीं कर सकता। क्यूंके नबुव्वत की कोई भी बात इन्सान की अपनी ख़ाहिश से कभी नहीं हुई बल्के लोग पाक रूह के इल्हाम के से ख़ुदा की तरफ़ से बोलते थे। जिस तरह बनी इस्राईल में झूटे नबी मौजूद थे इसी तरह तुम्हारे दरमियान भी झूटे उस्ताद होंगे। जो पोशीदा तौर पर हलाक करने वाली बिदअतें शुरू करेंगे और उस आक़ा अलमसीह का भी इन्कार करेंगे जिस ने उन्हें क़ीमत अदा कर के छुड़ाया है। ऐसी बातों से ये लोग जल्द ही अपने ऊपर हलाकत लायेंगे और बहुत से लोग उन की शहवत-परस्ती की पैरवी करेंगे जिन की वजह से राहे-हक़ की बदनामी होगी। और लालच के सबब से ऐसे उस्ताद तुम्हें फ़र्ज़ी क़िस्से सुना कर तुम से नाजायज़ फ़ायदा उठायेंगे। लेकिन उन पर बहुत पहले ही सज़ा का हुक्म हो चुका है और उन की हलाकत जल्द होने वाली है। क्यूंके जब ख़ुदा ने गुनाह करने वाले फ़रिश्तों को नहीं बख्शा बल्के जहन्नुम में भेज कर तारीकी की ज़न्जीरों में जकड़ दिया ताके अदालत के दिन तक हिरासत में रहें। और न क़दीम ज़माने के लोगों को बख्शा, बल्के बेदीन दुनिया पर सेलाब भेज कर हलाक कर दिया और सिर्फ़ रास्तबाज़ी की मुनादी करने वाले हज़रत नूह और सात दीगर अश्ख़ास को बचा लिया। और ख़ुदा ने सदूम और अमूरा के शहरों को मुजरिम क़रार दे कर जला कर राख कर दिया ताके आइन्दा ज़माने के लिये इबरत हो के उन के साथ कैसा सुलूक किया जायेगा। और ख़ुदा ने रास्तबाज़ हज़रत लूत को जो बेदीनों के नापाक चाल चलन से तंग आ चुके थे, बचा लिया। क्यूंके वो रास्तबाज़ शख़्स उन के दरमियान रह कर उन के बेशरअ कामों को दिन रात देखता और सुनता रहता था और उस का पाक दिल अन्दर ही अन्दर सख़्त तकलीफ़ में रहता था। तो ये ज़ाहिर है के ख़ुदावन्द रास्तबाज़ों को आज़माइशों से बचाना जानता है और बदकारों को रोज़ अदालत तक सज़ा में गिरिफ़्तार रखना भी जानता है। ख़ुसूसन उन को जो जिस्म की नापाक शहवतों के ग़ुलाम हो जाते हैं और इख़्तियार वालों को नाचीज़ जानते हैं। ये लोग गुस्ताख़ और मग़रूर हैं और आसमानी मख़्लूक़ पर कुफ़्र बकने से नहीं डरते, अगरचे फ़रिश्ते ताक़त और क़ुदरत में इन से अफ़ज़ल हैं लेकिन वो भी ख़ुदावन्द के हुज़ूर में उन पर लअन-तअन के साथ इल्ज़ाम लगाने की जुरअत नहीं करते। मगर ये झूटे उस्ताद जिन बातों का इल्म भी नहीं रखते, उन पर भी लानत भेजते हैं। ये लोग बेअक़ल जानवरों की मानिन्द हैं जो फ़ित्री तौर पर शिकार किये जाने और हलाक होने के लिये पैदा हुए हैं और ये लोग जानवरों की मानिन्द हलाक हो जायेंगे। ये अपने बुरे कामों का बदला पाएंगे। इन को दिन दहाड़े अय्याशी करने में मज़ा आता है। ये लोग मकरूह दाग़ और ऐब वाले हैं, ये तुम्हारे साथ महब्बत की ज़ियाफ़तों में शरीक होकर अपनी दग़ाबाज़ियों से ऐश-ओ-इशरत करते हैं। इन की आंखों में ज़िनाकारी बसी रहती हैं। ये गुनाह से बाज़ नहीं रह सकते। ये कमज़ोर दिलों को फांसना ख़ूब जानते हैं; इन के दिल लालच से भरे हुए हैं। ये लानत के फ़र्ज़न्द हैं। ये लोग सीधी राह छोड़कर गुमराह हो गये हैं और बऊर के बेटे बिलआम की राह चल पड़े हैं जिस ने नारास्ती की कमाई को अज़ीज़ जाना। लेकिन इस की बेज़बान गधी ने उस की ख़ता पर उसे मलामत की और इन्सान की तरह कलाम कर के उसे उस नबी की दीवानगी से बाज़ रख्खा। ये लोग अन्धे कुंए हैं और उस कुहर की मानिन्द हैं जिसे तेज़ हवा उड़ा ले जाती है। जहन्नुम की सख़्त तारीकी उन के लिये मुक़र्रर कर दी गई है। ये लोग मग़रूर हैं, बेहूदा बकवास करते रहते हैं और शहवत-परस्ती के ज़रीअः उन लोगों को फिर से नफ़्सानी ख़ाहिशात में फंसा देते हैं जो अभी गुमराही में से बच कर निकल ही रहे हैं। ये उन से तो आज़ादी का वादा करते हैं मगर ख़ुद बदी के ग़ुलाम हैं क्यूंके जो शख़्स जिस से मग़्लूब है वो उसी का ग़ुलाम है। अगर ऐसे लोग जो अपने ख़ुदावन्द और मुनज्जी ईसा अलमसीह को पहचान कर दुनिया की ख़राबियों से बच निकलने के बावुजूद भी, फिर से उन में फंस कर उन का शिकार होने लगें तो उन की बाद की हालत पहली हालत से ज़्यादा बद्तर होती है। क्यूंके उन के लिये तो यही बेहतर था के वो रास्तबाज़ी की राह से कभी वाक़िफ़ ही नहीं होते, मुक़ाबले इस के रास्तबाज़ी की राह जान लेने के बाद भी उस पाक हुक्म से फिर गये जो उन्हें दिया गया था। उन पर तो ये मिसाल सादिक़ आती है, “कुत्ता अपनी क़ै को फिर से चट कर जाता है,” और, “नहलाई हुई सुअरनी लौटने के लिये कीचड़ की तरफ़।” ऐ अज़ीज़ो! अब मैं तुम्हें ये दूसरा ख़त लिख रहा हूं। मैंने दोनों ख़ुतूत मैं तुम्हारी याददाश्त को ताज़ा करने और तुम्हारे साफ़ दिलों की हौसला-अफ़ज़ाई करने की कोशिश की है। ताके तुम उन नुबुव्वतों को जो पाक नबियों ने क़दीम ज़माने से की हैं और हमारे ख़ुदावन्द और मुनज्जी के उस हुक्म को याद रखो जो तुम्हारे रसूलों की मारिफ़त से तुम तक पहुंचा है। सब से पहले तुम्हें ये जान लेना चाहिये के आख़री दिनों में राहे-हक़ का मज़ाक़ उड़ाने वाले आयेंगे जो अपनी नफ़्सानी बदख़ाहिशात के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारेंगे। और कहेंगे, “अलमसीह के ‘आमद का’ वादा कहां गया? क्यूंके हमारे आबा-ओ-अज्दाद की वफ़ात से ले कर अब तब सब कुछ वैसा ही चला आ रहा है जैसा के दुनिया की तख़्लीक़ के वक़्त था।” वो तो जान-बूझ कर इस हक़ीक़त को नज़र-अन्दाज़ करते हैं के आसमान ख़ुदा के कलाम के ज़रीये से क़दीम ज़माने से मौजूद है और ज़मीन पानी में से बनी और पानी में क़ाइम है। और पानी ही से उस वक़्त की क़दीम दुनिया सेलाब में डूब कर तबाह हो गई। मगर इस वक़्त के आसमान और ज़मीन उसी ख़ुदा के कलाम के ज़रीये से इसलिये रखे गये हैं के आग में जलाये जायें; और ये बेदीन इन्सानों की अदालत और हलाकत के दिन तक महफ़ूज़ रहेंगे। लेकिन ऐ अज़ीज़ों! इस बात को कभी न भूलो के ख़ुदावन्द के यहां एक दिन हज़ार बरस और हज़ार बरस एक दिन के बराबर हैं। ख़ुदावन्द अपना वादा पूरा करने में देर नहीं करता, जिस तरह बाज़ लोग समझते हैं बल्के वो तुम्हारे लिये सब्र कर रहा है और नहीं चाहता के कोई शख़्स हलाक हो बल्के चाहता है के सब लोगों को तौबा करने का मौक़ा मिले। लेकिन ख़ुदावन्द के लौटने का दिन चोर की मानिन्द अचानक आ जायेगा। उस दिन आसमान बड़े शोर-ओ-ग़ुल के साथ ग़ायब हो जायेंगे और अजराम-ए-फ़लकी शदीद हरारत से पिघल जायेंगे और ज़मीन और उस पर की तमाम चीज़ें जल जायेंगी। जब तमाम चीज़ें इस तरह तबाह-ओ-बर्बाद होने वाली हैं तो तुम्हें कैसा शख़्स होना चाहिये? तुम्हें तो निहायत ही पाकीज़गी और ख़ुदापरस्ती की ज़िन्दगी गुज़ारनी चाहिये। और ख़ुदा के इस दिन का निहायत मुश्ताक़ और मुन्तज़िर रहना चाहिये जिस के बाइस अफ़्लाक जल कर तबाह हो जायेंगे और अजराम-ए-फ़लकी शदीद हरारत से पिघल जायेंगे। लेकिन हम ख़ुदा के वादों के मुवाफ़िक़ नए आसमान और नई ज़मीन के इन्तिज़ार में हैं जिस में रास्तबाज़ी सुकूनत करती है। चुनांचे ऐ अज़ीज़ों! जब के तुम इन बातों के मुन्तज़िर हो इसलिये पूरी कोशिश करो के ख़ुदावन्द की हुज़ूरी में अपने आप को बेदाग़, बेऐब और सुलह के साथ पाए जाओ। और हमारे ख़ुदावन्द का तहम्मुल लोगों को नजात पाने का मौक़ा देता है। चुनांचे हमारे प्यारे भाई पौलुस ने भी उस इरफ़ान के मुवाफ़िक़ जो उसे दिया गया है तुम्हें यही लिख्खा है। उस ने अपने तमाम ख़ुतूत में इन बातों का ज़िक्र किया है। उस के ख़ुतूत में बाज़ बातें ऐसी भी हैं जिन का समझना मुश्किल है और जिन्हें जाहिल और बेक़ियाम लोग उन के मानी को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं जैसा वो बाक़ी सहीफ़ों के साथ भी करते हैं और ऐसा कर के अपने ऊपर तबाही लाते हैं। इसलिये ऐ अज़ीज़ दोस्तों! मैंने तुम्हें इन बातों से पहले ही से आगाह कर दिया है ताके तुम होशयार रहो, और बेदीनों की गुमराही में फंस कर ख़ुद ही महफ़ूज़ मक़ाम से गिर न जाओ। बल्के हमारे ख़ुदावन्द और मुनज्जी ईसा अलमसीह के फ़ज़ल और इरफ़ान में बढ़ते जाओ। उसी की तम्जीद अब भी हो और अबद होती रहे। आमीन। हम आप सब को इस ज़िन्दगी के कलाम की बाबत बयान करते हैं जो इब्तिदा से मौजूद था, जिसे हम ने अपने कानों से सुना, अपनी आंखों से देखा, और जिस का मुशाहिदा हम ने किया और जिसे हम ने अपने हाथों से भी छुआ। यही कलाम जो ज़िन्दगी है हम पर ज़ाहिर हुआ और हम ने उसे देखा और उस की गवाही देते और तुम्हें इसी अब्दी ज़िन्दगी का पैग़ाम देते हैं जो ख़ुदा बाप के साथ था और हम पर ज़ाहिर हुआ। हम ने जो कुछ देखा और सुना उस की ख़बर तुम्हें भी देते हैं ताके तुम भी हमारी रिफ़ाक़त में जो ख़ुदा बाप और उस के बेटे हुज़ूर ईसा अलमसीह के साथ है, शरीक हो जाओ। और ये ख़त हम इसलिये लिख रहे हैं के हमारी ख़ुशी पूरी हो जाये। जो पैग़ाम हम ने अलमसीह से सुना और तुम्हें सुनाते हैं वो ये है के ख़ुदा नूर है और उस में ज़रा भी तारीकी नहीं है। अगर हम दावा करते हैं की ख़ुदा के साथ हमारी रिफ़ाक़त है और हम ख़ुद तारीकी में चलते हैं तो हम झूटे हैं और हक़ पर अमल नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर हम नूर में चलते हैं जैसा के ख़ुदा नूर में है तो फिर हम एक दूसरे के साथ रिफ़ाक़त रखते हैं और उस के बेटे हुज़ूर ईसा का ख़ून हमें तमाम गुनाहों से पाक साफ़ कर देता है। अगर हम दावा करते हैं के हम बेगुनाह हैं तो अपने आप को फ़रेब देते हैं और हम में सच्चाई नहीं है। लेकिन अगर हम अपने गुनाहों का इक़रार करें, तो वो हमारे गुनाहों को मुआफ़ करने और हमें सारी नारास्ती से पाक साफ़ करने में वफ़ादार और आदिल है। अगर हम दावा करें के हम ने गुनाह नहीं किया है तो हम ख़ुदा को झूटा ठहराते हैं और उस का कलाम हमारे अन्दर है ही नहीं। मेरे अज़ीज़ बच्चो! मैं तुम्हें यह बातें इसलिये लिखता हूं ताके तुम गुनाह न करो। लेकिन अगर कोई गुनाह करे तो ख़ुदा बाप के पास हमारा एक वकील मौजूद है यानी रास्तबाज़ हुज़ूर ईसा अलमसीह। और वोही हमारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा है और न सिर्फ़ हमारे ही गुनाहों का बल्के सारी दुनिया के गुनाहों का भी कफ़्फ़ारा है। अगर हम ख़ुदा के हुक्मों पर अमल करते हैं तो ये इस बात का सबूत है के हम ने उसे जान लिया है। जो कोई ये कहता है, “मैं उसे जान गया हूं,” मगर उस के हुक्मों पर अमल नहीं करता तो वो झूटा है और उस में सच्चाई नहीं है। लेकिन जो कोई उस के कलाम पर अमल करता है तो उस में यक़ीनन ख़ुदा की महब्बत कामिल हो गई है। इसी से हमें मालूम होता है के हम उस में क़ाइम हैं। जो कोई ये दावा करता है के वो हुज़ूर ईसा अलमसीह की रिफ़ाक़त में क़ाइम है, तो वो हुज़ूर की मानिन्द ज़िन्दगी भी बसर करे। ऐ अज़ीज़ों मैं तुम्हें कोई नया हुक्म नहीं लिख रहा हूं, बल्के वोही पुराना हुक्म है जो शुरू से तुम्हें मिला है। ये पुराना हुक्म वोही पैग़ाम है जिसे तुम सुन चुके हो। लेकिन दूसरी तरफ़ से ये हुक्म नया भी है क्यूंके उस की सच्चाई अलमसीह में और तुम्हारी ज़िन्दगी में नज़र आती है। क्यूंके तारीकी मिटती जा रही है और हक़ीक़ी नूर पहले से ही चमकना शुरू हो गया है। जो कोई ये दावा करता है के वो नूर में है लेकिन अपने भाई से दुश्मनी रखता है तो वो अभी तक तारीकी में ही है। जो कोई अपने भाई या बहन से महब्बत रखता है वो नूर में रहता है और दूसरों के लिये वो ठोकर का बाइस नहीं बनता है। मगर जो अपने भाई या बहन से दुश्मनी रखता है वो तारीकी में रहता है और तारीकी ही में चलता फिरता है। वो नहीं जानता के कहां जा रहा है क्यूंके तारीकी ने उसे अन्धा कर दिया है। प्यारे बच्चो! मैं तुम्हें इसलिये लिख रहा हूं, के अलमसीह के नाम से तुम्हारे गुनाह मुआफ़ कर दिये गये हैं। ऐ वालिदों मैं तुम्हें इसलिये लिख रहा हूं, क्यूंके तुम ने उसे जो इब्तिदा से मौजूद है, जान लिया है। ऐ जवान मर्दों! मैं तुम्हें इसलिये लिख रहा हूं, के तुम इब्लीस पर ग़ालिब आ गये हो। बच्चों! मैंने तुम्हें इसलिये लिख्खा है, क्यूंके तुम ख़ुदा बाप को जान गये हो। ऐ वालिदों! मैंने तुम्हें इसलिये लिख्खा है, के तुम ने उसे जो इब्तिदा से ही मौजूद है, जान लिया है। जवान मर्दों! मैंने तुम्हें इसलिये लिख्खा है, के तुम मज़बूत हो, और ख़ुदा का कलाम तुम्हारे अन्दर क़ाइम है, और तुम इब्लीस पर ग़ालिब आ गये हो। तुम न तो दुनिया से महब्बत रखो और न दुनिया की चीज़ों से, क्यूंके जो कोई दुनिया से महब्बत रखता है उस में ख़ुदा बाप की महब्बत नहीं है। क्यूंके जो कुछ दुनिया में है यानी जिस्म की ख़ाहिश, आंखों की ख़ाहिश और ज़िन्दगी का ग़ुरूर, वो आसमानी बाप की तरफ़ से नहीं बल्के दुनिया की तरफ़ से है। दुनिया और उस की बदख़ाहिशात, दोनों ख़त्म होती जा रही हैं लेकिन जो ख़ुदा की मर्ज़ी पूरी करता है वोही अबद तक क़ाइम रहेगा। ऐ बच्चों! ये आख़री घड़ी है और जैसा तुम ने सुना है के मुख़ालिफ़ अलमसीह आने वाला है, और हक़ीक़तन बहुत से ऐसे मुख़ालिफ़े अलमसीह आ चुके हैं। इसी से हमें मालूम होता है के आख़री घड़ी आ गई है। ये लोग निकले तो हम ही में से मगर हक़ीक़त में हम में से नहीं थे क्यूंके अगर वो हम में से होते तो हमारे ही साथ रहते। लेकिन निकल इसलिये गये ताके ज़ाहिर हो जाये के ये लोग हमारी जमाअत के असल मोमिन थे ही नहीं। लेकिन तुम को तो इस क़ुददूस की तरफ़ से मसह किया गया है और तुम पूरी सच्चाई को जानते हो। मैंने तुम्हें इसलिये नहीं लिक्खा के तुम सच्चाई से वाक़िफ़ नहीं बल्के इसलिये के तुम उसे जानते हो और इसलिये के कोई झूट सच्चाई की तरफ़ से नहीं आता है। फिर झूटा कौन है? वोही जो हुज़ूर ईसा के अलमसीह होने का इन्कार करता है और जो बाप और बेटे का इन्कार करता है वोही मुख़ालिफ़ अलमसीह है। जो कोई बेटे का इन्कार करता है इस के पास आसमानी बाप भी नहीं है और जो बेटे का इक़रार करता है वो आसमानी बाप का भी इक़रार करता है। चुनांचे जो पैग़ाम तुम ने शुरू से सुना है वोही तुम में क़ाइम रहे। अगर वो तुम में क़ाइम रहेगा तो तुम भी बेटे और आसमानी बाप में क़ाइम रहोगे। और उस ने हमें अब्दी ज़िन्दगी देने का वादा किया है। मैंने ये बातें तुम्हें उन की बाबत लिख्खी हैं जो तुम्हें सही राह से गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन तुम्हें तो ख़ुदा की तरफ़ से मसह किया गया है, वो तुम में क़ाइम है, इसलिये ज़रूरत नहीं के कोई तुम्हें सिखाए के सच क्या है? क्यूंके अलमसीह का रूह तुम्हें सब बातें सिखाता है जो तुम्हें जानना चाहिये, और जो कुछ वो सिखाता है वो सच है झूट नहीं। इसलिये जिस तरह पाक रूह ने तुम्हें सिखाया है इसी तरह तुम अलमसीह में क़ाइम रहो। ग़रज़ ऐ बच्चों! अलमसीह में क़ाइम रहो ताके जब वो ज़ाहिर हो तो हमें दिलेरी हो और हम उस की आमद पर उस के सामने शर्मिन्दा न हों। अगर तुम जानते हो के अलमसीह रास्तबाज़ हैं तो तुम्हें ये भी जानना चाहिये के जो कोई रास्तबाज़ी के काम करता है वो ख़ुदा से पैदा हुआ है। देखो, आसमानी बाप ने हम से कैसी महब्बत की है के हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्द कहलाते हैं और हम वाक़ई हैं भी। दुनिया हमें इसलिये नहीं जानती क्यूंके इस ने हुज़ूर ईसा को भी नहीं जाना। ऐ अज़ीज़ दोस्तों! इस वक़्त हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हैं लेकिन अभी तक ये ज़ाहिर नहीं हुआ है के हम और क्या होंगे लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं के जब हुज़ूर ईसा फिर से ज़ाहिर होंगे तो हम भी उन की मानिन्द होंगे क्यूंके हम हुज़ूर को वैसा ही देखेंगे जैसा वो हैं। और जो कोई हुज़ूर ईसा में ये उम्मीद रखता है वो अपने आप को वैसा ही पाक रखता है, जैसा वो पाक है। जो कोई गुनाह करता है वो शरीअत की मुख़ालफ़त करता है क्यूंके गुनाह शरीअत की मुख़ालफ़त ही है। लेकिन तुम जानते हो के हुज़ूर ईसा इसलिये ज़ाहिर हुए ताके वो हमारे गुनाहों को उठा ले ज़ाए और उस की ज़ात में गुनाह नहीं है। जो कोई उस में क़ाइम रहता है वो गुनाह नहीं करते रहता और जो कोई गुनाह करते रहता है उस ने न तो हुज़ूर ईसा को देखा है और न ही उन को जानता है। ऐ अज़ीज़ फ़र्ज़न्दों! किसी के फ़रेब में न आना। जो रास्तबाज़ी के काम करता है वो रास्तबाज़ है जैसा के हुज़ूर ईसा रास्तबाज़ हैं। जो शख़्स गुनाह करते रहता है वो इब्लीस से है क्यूंके इब्लीस शुरू ही से गुनाह करता आया है। ख़ुदा का बेटा इसलिये ज़ाहिर हुआ ताके इब्लीस के कामों को तबाह कर दे। जो कोई ख़ुदा से पैदा हुआ है वो लगातार गुनाह नहीं करता क्यूंके उन के अन्दर ख़ुदा का तुख़्म क़ाइम रखता है। वो लगातार गुनाह कर ही नहीं सकते क्यूंके वो ख़ुदा से पैदा हुए हैं। इसी से ज़ाहिर होता है के कौन ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हैं और कौन इब्लीस के। जो कोई रास्तबाज़ी के काम नहीं करता वो ख़ुदा का फ़र्ज़न्द नहीं और जो अपने भाई या बहन से महब्बत नहीं रखता वो भी ख़ुदा का फ़र्ज़न्द नहीं है। क्यूंके जो पैग़ाम तुम ने शुरू से ही सुना वो ये है के हम एक दूसरे से महब्बत रखें। और क़ाइन की मानिन्द न बनें जो इस शैतान से था। जिस ने अपने भाई को क़त्ल किया और क्यूं क़त्ल किया? इसलिये के उस के तमाम काम बदी के थे मगर उस के भाई के काम रास्तबाज़ी के थे। चुनांचे ऐ भाईयों और बहनों! अगर दुनिया तुम से दुश्मनी रखती है तो तअज्जुब न करो। क्यूंके हम जानते हैं के हम मौत से निकल कर ज़िन्दगी में दाख़िल हो गये हैं, क्यूंके हम एक दूसरे से महब्बत रखते हैं। जो महब्बत नहीं रखता वो गोया मुर्दे की तरह है। जो कोई अपने भाई से अदावत रखता है वो ख़ूनी है और तुम जानते हो के किसी ख़ूनी में अब्दी ज़िन्दगी मौजूद नहीं रहती। हम ने महब्बत को इसी से जाना है के हुज़ूर ईसा ने हमारे लिये अपनी जान क़ुर्बान कर दी। और हम पर भी ये फ़र्ज़ है के हम अपने भाईयों के वास्ते अपनी जान क़ुर्बान करें। अगर किसी के पास दुनिया का माल मौजूद है लेकिन वो अपने भाई को मोहताज देखकर उस पर रहम करने से बाज़ रहता है तो ख़ुदा की महब्बत उस में किस तरह क़ाइम रह सकती है? ऐ अज़ीज़ फ़र्ज़न्दों! हम महज़ कलाम और ज़बान ही से नहीं बल्के हक़ीक़ी तौर से और अपने अमल से भी महब्बत का इज़हार करें। ग़रज़ इस से हम जान लेते हैं के हम हक़ के हैं और हमें ख़ुदा की हुज़ूरी में दिली इत्मीनान हासिल होगा। अगर हमारा ज़मीर हमें इल्ज़ाम दे तो ख़ुदा तो हमारे ज़मीर से बड़ा है और वो सब कुछ जानता है। ऐ अज़ीज़ दोस्तों! अगर हमारा ज़मीर हमें मुजरिम नहीं ठहराता तो हमें ख़ुदा की हुज़ूरी में दिलेरी होती है। और हम जो कुछ ख़ुदा से मांगते हैं वो उस की तरफ़ से हमें मिलता है क्यूंके हम उस के हुक्मों पर अमल करते हैं और वोही करते हैं जो उसे पसन्द है। और उस का हुक्म ये है के हम उस के बेटे हुज़ूर ईसा अलमसीह के नाम पर ईमान लायें और उस के हुक्म के मुताबिक़ एक दूसरे से महब्बत रखें। जो कोई ख़ुदा के हुक्मों पर अमल करता है वो ख़ुदा में क़ाइम रहता है और ख़ुदा उस में, और ख़ुदा ने जो पाक रूह हमें बख़्शा है, हम उसी के वसीले से ये जानते हैं के ख़ुदा हम में क़ाइम रहता है। ऐ अज़ीज़ दोस्तों! तुम हर एक रूह का यक़ीन मत करो बल्के रूहों को आज़माओ के वो ख़ुदा की तरफ़ से हैं या नहीं। क्यूंके बहुत से झूटे नबी दुनिया में निकल चुके हैं। तुम ख़ुदा के पाक रूह को इस तरह पहचान सकते हो के जो रूह ये इक़रार करे के हुज़ूर ईसा अलमसीह मुजस्सम होकर दुनिया में तशरीफ़ लाये तो वो ख़ुदा की तरफ़ से है। लेकिन जो रूह हुज़ूर ईसा के मुजस्सम होने की बात का इक़रार न करे तो वो ख़ुदा की तरफ़ से नहीं है। यही मुख़ालिफ़ अलमसीह की रूह है जिस की ख़बर तुम सुन चुके हो के वो आने वाला है बल्के इस वक़्त भी दुनिया में मौजूद है। ऐ प्यारे छोटे बच्चों! तुम ख़ुदा से हो और उन पर ग़ालिब आ गये हो क्यूंके जो तुम में है वो उस से कहीं ज़्यादा बड़ा है जो दुनिया में है। वो दुनिया के हैं इसलिये दुनियवी नज़रिया से बातें करते हैं और दुनिया वाले उन की सुनते हैं। मगर हम ख़ुदा के लोग हैं और जो कोई ख़ुदा को जानता है वो हमारी सुनता है, लेकिन जो ख़ुदा से नहीं वो हमारी नहीं सुनता। इस तरह हम सच्चाई की रूह और फ़रेब देने वाली रूह में इम्तियाज़ करते हैं। ऐ अज़ीज़ दोस्तों! आओ हम एक दूसरे से महब्बत रखें क्यूंके महब्बत की इब्तिदा ख़ुदा से है और जो कोई महब्बत रखता है वो ख़ुदा से पैदा हुआ है और ख़ुदा को जानता है। लेकिन जो शख़्स महब्बत नहीं रखता इस ने ख़ुदा को कभी नहीं जाना क्यूंके ख़ुदा महब्बत है। जो महब्बत ख़ुदा हम से रखता है उसे ख़ुदा ने इस तरह ज़ाहिर किया के उस ने अपने अनोखे बेटे को दुनिया में भेजा ताके हम उस के सबब से ज़िन्दगी पायें। महब्बत ये नहीं के हम ने ख़ुदा से महब्बत की बल्के ये है के ख़ुदा ने हम से महब्बत की और हमारे गुनाहों के कफ़्फ़ारा के लिये अपने बेटे को भेजा। ऐ अज़ीज़ दोस्तों! जब ख़ुदा ने हम से ऐसी महब्बत रखें तो लाज़िम है के हम भी एक दूसरे से महब्बत रखें। ख़ुदा को किसी ने कभी नहीं देखा लेकिन अगर हम एक दूसरे से महब्बत रखते हैं तो ख़ुदा हमारे अन्दर रहता है और उस की महब्बत हमारे दिलों में कामिल हो जाती है। चूंके ख़ुदा ने अपना पाक रूह हमें अता फ़रमाया है इसलिये हम जानते हैं के वो हम में और हम उस में क़ाइम रहते हैं। और हम ने देख लिया है और अब गवाही देते हैं के आसमानी बाप ने अपने बेटे को दुनिया का मुनज्जी बना कर भेजा है। जो कोई इक़रार करता है के हुज़ूर ईसा ख़ुदा के बेटे हैं, तो ख़ुदा उन के अन्दर और वो ख़ुदा में पाए जाते हैं। और इसलिये जो महब्बत ख़ुदा को हम से है, उस महब्बत को हम जान गये हैं और हमें उस के महब्बत का यक़ीन है। ख़ुदा महब्बत है और जो महब्बत में क़ाइम रहता है वो ख़ुदा में और ख़ुदा इस में क़ाइम रहता है। पस इसी सबब से महब्बत हमारे दरमियान कामिल हो चुकी है, इसलिये हम इन्साफ़ के दिन पूरी दिलेरी के साथ खड़े हो सकेंगे क्यूंके हम इस दुनिया में हुज़ूर ईसा की मानिन्द ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं। महब्बत में ज़रा सा भी ख़ौफ़ नहीं होता। लेकिन कामिल महब्बत ख़ौफ़ को दूर कर देती है क्यूंके ख़ौफ़ का तअल्लुक़ सज़ा से होता है। और जो कोई ख़ौफ़ रखता है वो महब्बत में कामिल नहीं होता। हम इसलिये महब्बत रखते हैं क्यूंके पहले ख़ुदा ने हम से महब्बत रक्खी। अगर कोई कहे के वो ख़ुदा से महब्बत रखता है मगर अपने भाई या बहन से अदावत रखता है तो वो झूटा है। क्यूंके जो अपने भाई या बहन से जिसे उस ने देखा है, महब्बत नहीं करता तो वो ख़ुदा से कैसे महब्बत कर सकता है जिसे उस ने देखा तक नहीं? हमें तो ख़ुदा की तरफ़ से ये हुक्म मिला है: जो कोई ख़ुदा से महब्बत रखता है उसे लाज़िम है के अपने भाई और बहन से भी महब्बत रखे। जो कोई ये ईमान रखता है के हुज़ूर ईसा ही अलमसीह हैं वो ख़ुदा से पैदा हुआ है और जो बाप से महब्बत रखता है वो उस की औलाद से भी महब्बत रखता है। जब हम ख़ुदा से महब्बत रखते हैं और उस के हुक्मों पर अमल करते हैं तो इसी से हमें मालूम होता है के हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्दों से भी महब्बत रखते हैं। असल में ख़ुदा से महब्बत रखने से मुराद ये है के हम उस के हुक्मों पर अमल करते हैं और उन्हें अपने लिये बोझ नहीं समझते। क्यूंके जो कोई ख़ुदा से पैदा हुआ है वो दुनिया पर ग़ालिब आता है। और जिस ग़लबा से दुनिया मग़्लूब होती है वो हमारा ईमान है। दुनिया पर कौन ग़ालिब आता है? सिर्फ़ वोही जिस का ईमान है के हुज़ूर ईसा ख़ुदा के बेटे हैं। यही हैं वो जो पानी यानी पाक-ग़ुस्ल और ख़ून यानी सलीबी मौत के वसीले से ज़ाहिर हुए यानी हुज़ूर ईसा अलमसीह। वो सिर्फ़ पानी के वसीले से नहीं बल्के पानी और ख़ून दोनों के वसीले से तशरीफ़ लाये थे। और पाक रूह उस की गवाही देता है क्यूंके रूह ही हक़ है। और गवाही देने वाले तीन हैं: यानी पाक रूह, पानी और ख़ून और ये तीनों एक ही बात पर मुत्तफ़िक़ हैं। जब हम इन्सानों की गवाही क़बूल कर लेते हैं तो ख़ुदा की गवाही तो कहीं बढ़कर है जो उस ने अपने बेटे के हक़ में दी है। जो ख़ुदा के बेटे पर ईमान रखता है वो इस गवाही पर ईमान लाता है। जिस ने ख़ुदा पर यक़ीन नहीं रख्खा उस ने ख़ुदा को झूटा ठहराया है क्यूंके वो उस गवाही पर ईमान नहीं लाया जो ख़ुदा ने अपने बेटे के हक़ में दी है। और वो गवाही ये है के ख़ुदा ने हमें अब्दी ज़िन्दगी बख़्शी है और ये ज़िन्दगी उस के बेटे के वसीले से मिलती है। जिस के पास बेटा है उस के पास ज़िन्दगी है और जिस के पास ख़ुदा का बेटा नहीं उस के पास ज़िन्दगी भी नहीं। मैंने तुम्हें जो ख़ुदा के बेटे के नाम पर ईमान लाये हो ये बातें इसलिये लिखें के तुम्हें मालूम हो के तुम्हारे पास अब्दी ज़िन्दगी है। और हमें जो दिलेरी ख़ुदा के हुज़ूर में है उस का सबब ये है के अगर हम ख़ुदा की मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ कुछ मांगते हैं तो वो हमारी सुनता है। और हमें मालूम है के जो कुछ हम उस से मांगते हैं वो हमारी सुनता है, तो हम ये भी जानते हैं के जो कुछ हम ने उस से मांगा है वो पाया भी है। अगर कोई अपने भाई को ऐसा गुनाह करते देखे जिस का अन्जाम मौत न हो तो वो दुआ करे और ख़ुदा उस शख़्स को ज़िन्दगी बख़्शेगा। लेकिन ऐसा भी गुनाह होता है जिस का अन्जाम मौत होता है। मैं इस के बारे में दुआ करने की ताईद नहीं करता। वैसे तो हर क़िस्म की नारास्ती गुनाह है मगर सारे गुनाह का नतीजा मौत नहीं होता। हम जानते हैं के जो कोई ख़ुदा से पैदा हुआ है वो गुनाह करते नहीं रहता; क्यूंके ख़ुदा का बेटा उस की हिफ़ाज़त करता है और इब्लीस उसे नुक़्सान नहीं पहुंचा सकता। हम जानते हैं के हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हैं लेकिन सारी दुनिया इब्लीस के क़ब्ज़ा में है। और हम ये भी जानते हैं के ख़ुदा का बेटा आ गया है और उस ने हमें समझ बख़्शी है ताके हम उसे जान लें जो हक़ीक़ी है; और हम उस में हैं जो हक़ीक़ी है, यानी उस के बेटे हुज़ूर ईसा अलमसीह में। वोही हक़ीक़ी ख़ुदा और अब्दी ज़िन्दगी है। ऐ अज़ीज़ों! फ़र्ज़न्दों अपने आप को बुतों की परस्तिश से महफ़ूज़ रखो। बुज़ुर्ग हज़रत यूहन्ना की जानिब से, उस बरगुज़ीदा ख़ातून और उस के फ़र्ज़न्दों के नाम ख़त जिन से मैं सच्ची महब्बत रखता हूं और न सिर्फ़ मैं बल्के वह सब मोमिनीन को भी जो हक़ से वाक़िफ़ हैं। और ये महब्बत उस सच्चाई के सबब से है जो हमारे अन्दर रहता है और हमेशा तक हमारे साथ रहेगा। ख़ुदा बाप और ख़ुदा के बेटे हुज़ूर ईसा अलमसीह की तरफ़ से फ़ज़ल, रहम और इत्मीनान, सच्चाई और महब्बत में हमारे साथ क़ाइम रहेगी। मुझे बड़ी ख़ुशी हुई, जब मुझे पता चला के तेरे कुछ फ़र्ज़न्द उस हुक्म के मुताबिक़ सच्चाई पर अमल कर रहे हैं जो हमें बाप की तरफ़ से मिला है। और अब ऐ अज़ीज़ा ख़ातून मैं तुझे कोई नया हुक्म नहीं बल्के सिर्फ़ वोही जो शुरू से ही हमारे पास है, लिख रहा हूं और तुम से मिन्नत करता हूं के हम एक दूसरे से महब्बत रखें। और महब्बत इस में है के हम ख़ुदा के हुक्मों पर फ़रमांबरदार से चलें। ये वोही हुक्म है जो तुम ने शुरू से सुना है के तुम महब्बत से ज़िन्दगी बसर करो। क्यूंके बहुत से ऐसे गुमराह करने वाले दुनिया में निकल चुके हैं जो ये नहीं मानते हैं के हुज़ूर ईसा अलमसीह मुजस्सम होकर आये हैं, ऐसा हर शख़्स गुमराह करने वाला और मुख़ालिफ़ अलमसीह का यानी दज्जाल है। ख़बरदार रहो के जो मेहनत हम ने की है वो तुम्हारे सबब से ज़ाए न हो जाये बल्के तुम्हें उस का मुकम्मल अज्र मिले। जो कोई भटक कर आगे बढ़ जाता है और अलमसीह की तालीम पर क़ाइम नहीं रहता है, उस में ख़ुदा नहीं है। और जो उस की तालीम पर क़ाइम रहता है तो उस के पास बाप और बेटा दोनों हैं। अगर कोई तुम्हारे पास आये मगर ये तालीम न दे तो उसे घर में दाख़िल मत होने देना और न ही उसे सलाम करना। क्यूंके जो कोई ऐसे शख़्स का ख़ैर-मक़्दम करता है वो उन के बुरे कामों में शरीक होता है। मुझे बहुत सी बातें तुम को लिखना हैं, मगर में उन्हें काग़ज़ पर रौशनाई से लिखना नहीं चाहता; बल्के उम्मीद रखता हूं के तुम्हारे पास आकर रूबरू मुलाक़ात और गुफ़्तगू करूं ताके हमारी ख़ुशी मुकम्मल हो जाये। तेरी बरगुज़ीदा बहन के फ़र्ज़न्द यानी जमाअत के मोमिनीन तुझे सलाम कहते हैं। मुझ बुज़ुर्ग की जानिब से, मेरे अज़ीज़ गियुस के नाम ख़त जिस से मैं निहायत सच्ची महब्बत रखता हूं। मेरे अज़ीज़! मैं यह दुआ करता हूं के जिस तरह तो रूहानी तौर पर तरक़्क़ी कर रहा है उसी तरह सब बातों में तरक़्क़ी करे और तनदरुस्त रहे। मुझे इस बात से बहुत ख़ुशी हुई, के बाज़ कुछ मोमिनीन भाईयों ने आकर तुम्हारे बारे में गवाही दी के तू हक़-परस्ती में वफ़ादार है और उसी के मुताबिक़ ज़िन्दगी भी गुज़ार रहा है। मेरे लिये इस से बढ़कर और कोई ख़ुशी नहीं के मैं ये सुनूं के मेरे बच्चे हक़ पर चल रहे हैं। ऐ मेरे अज़ीज़! तू जिस क़दर मोमिनीन भाईयो और बहनों की ख़िदमत बड़ी वफ़ादारी से करता है ठीक उसी तरह से तू उन की भी ख़िदमत कर रहा है जो तेरे लिये अजनबी मोमिन भाई हैं। उन्होंने जमाअत के सामने तेरी महब्बत की गवाही दी थी। मेहरबानी से ख़ुदा के उन ख़ादिमों को आगे सफ़र पर इस क़दर रवाना कर जो ख़ुदा की नज़र में मुनासिब है। क्यूंके वो अलमसीह के नाम की ख़ातिर ख़िदमत करने निकले हैं और ग़ैरयहूदियों से कुछ भी मदद नहीं लेते हैं इसलिये हमारा फ़र्ज़ है के ऐसे लोगों की मदद और ख़ातिरदारी करें ताके हम उस हक़ के हम ख़िदमत हो सकें। मैंने जमाअत को कुछ लिख्खा तो था लेकिन दियुत्रिफ़ेस जो जमाअत का हमेशा ही मालिक बनना चाहता है, वो हमारी बातों को नहीं मानता है। पस जब मैं आऊंगा तो तुम्हारे सामने उस के सारे कामों को जो वो कर रहा है ज़ाहिर करूंगा के वो हमारे ख़िलाफ़ बुरी-बुरी बातें करता है। और जब वो आते हैं तो ख़ुद भी क़बूल नहीं करता और दूसरे मोमिनीन भाईयों को जो उसे क़बूल करना चाहते हैं, उन को मना करता है और जमाअत से बाहर निकाल देता है। मेरे अज़ीज़! बदी की नहीं बल्के नेकी की पैरवी करो। नेकी करने वाला ख़ुदा से है और जो बदी करता है उस ने ख़ुदा को न तो पहचाना है और न ही जानता है। दीमेत्रियुस की सब लोग तारीफ़ करते हैं और यहां तक के हक़ भी उस की गवाही देता है। और हम भी यही गवाही देते हैं और तू जानता है के हमारी गवाही सच्ची है। मुझे बहुत सी बातें तुम को लिखना हैं, मगर मैं उन्हें क़लम और रौशनाई से लिखना नहीं चाहता। मुझे उम्मीद है के तुम से जल्द ही मुलाक़ात होगी और तब हम रूबरू गुफ़्तगू करेंगे। तुझ पर सलामती हो। यहां के साथी मोमिनीन तुझे सलाम कहते हैं। वहां के मोमिनीन साथियों को नाम बनाम सलाम कहना। हज़रत यहूदाह की जानिब से जो हुज़ूर ईसा अलमसीह का ख़ादिम और हज़रत याक़ूब के भाई हैं, ख़ुदा बाप की तरफ़ से बुलाए हुए लोगों के नाम ख़त जिन से ख़ुदा ने महब्बत की और हुज़ूर ईसा अलमसीह के लिये महफ़ूज़ रख्खा है। तुम्हें रहम, इत्मीनान और महब्बत कसरत से हासिल होता रहे। अज़ीज़ दोस्तों जब मैं तुम्हें उस नजात के बारे में लिखने का बेहद मुश्ताक़ था जिस में हम सब शामिल हैं तो मैंने तुम्हें ये नसीहत लिखना ज़रूरी समझा ताके तुम इस ईमान के लिये पूरी जद्दोजहद करो जो ख़ुदा के मुक़द्दसीन को एक ही बार हमेशा के लिये सौंपा गया है। क्यूंके बाज़ लोग चोरी छुपे तुम्हारे दरमियान भी घुस आये हैं जिन की सज़ा का बयान क़दीम ज़माने से ही किताब-ए-मुक़द्दस में दर्ज कर दिया गया था। ये लोग बेदीन हैं और हमारे ख़ुदा के फ़ज़ल को अपनी शहवत-परस्ती से बदल डालते हैं और हमारे वाहिद, ख़ुद मुख़्तार आक़ा यानी ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का इन्कार करते हैं। पस अगरचे तुम्हें ये सब बातें पहले से ही मालूम हो चुका है, फिर भी मैं तुम्हें याद दिलाना चाहता हूं के ख़ुदावन्द ईसा ने अपनी क़ौम को मुल्क मिस्र से छुड़ाया लेकिन बाद में ईमान न लाने वालों को हलाक कर डाला। और जिन फ़रिश्तों ने अपने इख़्तियार वाले ओहदा को क़ाइम न रख्खा बल्के अपने मुक़र्रर ख़ास मक़ाम को छोड़ दिया, उन्हें ख़ुदा ने अज़ली ज़न्जीरों में जकड़ कर अदालत के दिन तक के लिये जहन्नुम की तारीकी में क़ैद कर रख्खा है। और इसी तरह सदूम और अमूरा और उन के आस-पास के शहरों के लोग भी उन इस्राईलियों की तरह जिन्सी बदफ़ेली करने लगे थे, चुनांचे अब्दी आग की सज़ा पा कर हमारे लिये बाइस इबरत ठहरे। ठीक उसी तरह ये लोग भी अपने ख़ाबों की ताक़त में मुब्तिला होकर उन की तरह अपने जिस्मों को नापाक करते हैं, हुकूमत को नाचीज़ जानते हैं और आसमानी मख़्लूक़ पर कुफ़्र बकते हैं। लेकिन मुक़र्रब फ़रिश्ते मीकाईल ने भी हज़रत मूसा की लाश के बारे में इब्लीस से बहस करते वक़्त उसे लअन-तअन करने और मुल्ज़िम ठहराने की जुरअत न की बल्के ये कहा, “ख़ुदावन्द तुझे मलामत करे।” मगर ये लोग जिन बातों का इल्म भी नहीं रखते, उन पर भी लानत भेजते हैं और जिन बातों को मिज़ाजी तौर पर समझते हैं उन में अपने आप को बेअक़ल जानवरों की मानिन्द हलाक कर देते हैं। इन पर अफ़सोस! क्यूंके ये लोग क़ाइन की राह पर चलते हैं और उन्होंने माली फ़ायदे की ख़ातिर बिलआम की सी ग़लती की है और क़ोरह की तरह मुख़ालफ़त कर के हलाक हुए। यह लोग तुम्हारे साथ महब्बत की ज़ियाफ़तों पर दाग़ हैं जिन का ज़मीर उन्हें इस में शामिल होते वक़्त थोड़ा भी मुजरिम नहीं ठहराता, ये ऐसे चरवाहे हैं जो सिर्फ़ अपना ही पेट भरते हैं। यह लोग बे पानी के उन बादलों की तरह हैं जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है, ये पतझड़ के ऐसे दरख़्त हैं जो दो बार मर चुके हैं क्यूंके ये फलदार नहीं हैं और अपनी जड़ से उखड़े हुए हैं। यह समुन्दर की पुरजोश लहरें हैं जो अपनी बेशर्मी का झाग उछालती हैं। यह वह आवारा गर्द सितारे हैं जिन के लिये जहन्नुम की सख़्त तारीकी का मक़ाम दाइमी तौर पर मुक़र्रर कर दिया गया है। हज़रत हनोक ने भी जो आदम से सातवें पुश्त में थे, इन के बारे में नुबुव्वत की थी के “देखो! ख़ुदावन्द अपने लाखों मुक़द्दसीन के साथ तशरीफ़ ला रहे हैं ताके सब लोगों का इन्साफ़ करें और बेदीनों को उन की सब बदकिरदार हरकतों की ख़ातिर जो उन्होंने बेदीनी से किये हैं, और उन सब बेदीन गुनहगारों को जिन्होंने ख़ुदावन्द की मुख़ालफ़त में कुफ़्र बका है उन्हें मुजरिम ठहराये।” यह लोग हमेशा बुड़बुड़ाते रहते शिकायत करते और दूसरों में ग़लतियां ढूंडते रहते हैं; यह अपनी नफ़्सानी बदख़ाहिशात के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारते हैं; और अपने मुंह से बड़ी शेख़ी मारते हैं और अपने फ़ायदा के लिये दूसरों की ख़ुशामद करते हैं। लेकिन ऐ अज़ीज़ दोस्तों! हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के रसूलों ने जिन बातों को पहले ही फ़रमाया था उन्हें याद रखो। उन्होंने तुम से कहा था, “आख़री दिनों में ठठ्ठा करने वाले ज़ाहिर होंगे जो अपनी बेदीनी की ख़ाहिशों के मुवाफ़िक़ चलेंगे।” यही वो लोग हैं जो तफ़्रिक़े डालते हैं। ये नफ़्सानी लोग हैं जिन में ख़ुदा की रूह नहीं है। मगर ऐ अज़ीज़ दोस्तों! तुम अपने पाक-तरीन ईमान में तरक़्क़ी करते जाओ, और पाक रूह की रहनुमाई में दुआ करते रहो। अपने आप को ख़ुदा की महब्बत में क़ाइम रखो और अब्दी ज़िन्दगी के लिये हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की रहमत के मुन्तज़िर रहो। बाज़ जो शक में मुब्तिला हैं, उन पर रहम करो। और बाक़ी लोगों को जो गोया उस अब्दी अज़ाब की आग में हैं उन्हें झपट कर निकाल लो। रहम करते हुए होशयार रहो, और उस पोशाक से भी नफ़रत करो जो उन के बदकार जिस्म के सबब से दाग़दार हो गई है। अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है और अपनी पुर जलाली हुज़ूरी में बड़ी ख़ुशी के साथ बेऐब बना कर पेश कर सकता है। उस वाहिद ख़ुदा का जो हमारा मुनज्जी है, हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के वसीले से जलाल, क़ुदरत, सल्तनत और इख़्तियार जैसा अज़ल से है, अब भी हो, और अबद तक क़ाइम रहे। आमीन। हुज़ूर ईसा अलमसीह का मुकाश्फ़ा जो उन्हें ख़ुदा ने अता फ़रमाया ताके वो अपने बन्दों को वो बातें दिखाये जिन का जल्द होना ज़रूरी है। और हुज़ूर ने अपना फ़रिश्ता भेज कर ये बातें अपने ख़ादिम यूहन्ना पर ज़ाहिर किया। जिस ने उन सब चीज़ों की जो उस ने देखी थीं यानी ख़ुदा के कलाम और हुज़ूर ईसा अलमसीह की गवाही की बाबत तस्दीक़ करता है। मुबारक है वो जो इस नबुव्वत की किताब को ब-आवाज़ बुलन्द पढ़ता है, और वो मोमिनीन जो इसे सुनते हैं और इस में लिख्खी हुई बातों पर अमल करते हैं; क्यूंके इन बातों के पूरा होने का मुक़र्रर वक़्त नज़दीक है। हज़रत यूहन्ना की जानिब से, उन सात जमाअतों के नाम जो सूबे आसिया में मौजूद हैं: तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे, और उस की तरफ़ से जो है, और जो था और जो आने वाला है, और उन सात रूहों यानी पाक रूह की तरफ़ से जो उस के तख़्त के सामने है, और हुज़ूर ईसा अलमसीह की तरफ़ से जो सच्चा गवाह और मुर्दों में से जी उठने वालों में अव्वल और दुनिया के बादशाहों पर हाकिम है। जो हम से महब्बत रखता है और जिस ने अपने ख़ून के वसीले से हमको हमारे सारे गुनाहों से मुख़्लिसी बख़्शी। और हमें अपनी उम्मत और काहिन भी बना दिया ताके हम ख़ुदा और बाप की ख़िदमत करें। उस का जलाल और क़ुदरत अब्दुल-आबाद होती रहे। आमीन! “देखो, वह बादलों के साथ आ रहे हैं,” “और हर आंख उन्हें देखेगी, और जिन्होंने हुज़ूर ईसा को छेदा था वह भी देखेंगे”; और रोये ज़मीन की सारी क़ौमें “उन के सबब से मातम करेंगी।” बेशक ऐसा ही होगा। आमीन। ख़ुदावन्द ख़ुदा जो है और जो था और जो आने वाला है, यानी क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है, “मैं अल्फ़ा और ओमेगा यानी इब्तिदा और इन्तिहा हूं।” मैं, यूहन्ना, जो तुम्हारा भाई और हुज़ूर ईसा के दुख दर्द और उन की बादशाही और सब्र-ओ-तहमुल में तुम्हारा शरीक हाल हूं। मैं ख़ुदा के कलाम की मुनादी और हुज़ूर ईसा की गवाही देने के बाइस जज़ीरा पतुमस में जलावतनी था। ख़ुदावन्द के दिन मैं पाक रूह से भर गया और मैंने अपने पीछे नरसिंगे की सी एक बड़ी आवाज़ सुनी, जिस ने फ़रमाया, “जो कुछ तू देखता है उसे किताब में लिख कर सातों जमाअतों यानी इफ़िसुस, सुमरना, परिगमुन, थुआतीरा, सरदीस, फ़िलदिल्फ़िया और लौदीकिया शहरों के पास भेज दे।” जब मैंने उस आवाज़ देने वाले की तरफ़ अपना मुंह फेरा जो मुझ से हम कलाम था। तो मुझे सोने के सात चिराग़दान नज़र आये, और मैंने उन चिराग़दानों के दरमियान एक शख़्स को देखा जो इब्न-ए-आदम की तरह था और पांव तक का जामा पहने और अपने सीने पर सोने के सीने बन्द बांधे हुए था। उस का सर और बाल सफ़ैद ऊन बल्के बर्फ़ की मानिन्द सफ़ैद थे, और उस की आंखें आग के शोले की मानिन्द थीं। और उस के पांव भट्टी में तपाए हुए ख़ालिस पीतल की मानिन्द थे और उस की आवाज़ ज़ोर से बहते हुए आबशार की मानिन्द थी। उस के दाहने हाथ में सात सितारे थे, उस के मुंह से एक दो धारी तेज़ तलवार निकलती थी; और उस का चेहरा दोपहर के वक़्त चमकने वाले आफ़ताब की मानिन्द ख़ूब चमक रहा था। उसे देखते ही मैं उस के पांव में गिरकर सज्दा किया। लेकिन उस ने अपना दायां हाथ मुझ पर रख्खा और फ़रमाया, “ख़ौफ़ न कर, मैं अव्वल और आख़िर हूं। मैं ज़िन्दा हूं; मैं मर गया था लेकिन देख मैं अबद तक ज़िन्दा रहूंगा। मौत और आलमे-अर्वाह की कुन्जियां मेरे पास हैं। “इसलिये, जो कुछ तुम ने देखा है, उसे लिख ले यानी वो बातें जो अभी हैं और जो इन के बाद वाक़ई होने वाली हैं।” यानी उन सोने के सात चिराग़दानों और सात सितारों का पोशीदा राज़ जिन्हें तुम ने मेरे दाएं हाथ में देखा था: वो सात सितारे तो सात जमाअतों के फ़रिश्ते हैं और सात चिराग़दान सात जमाअतें हैं। “इफ़िसुस की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जो अपने दाएं हाथ में सात सितारे लिये हुए है और सोने के सात चिराग़दानों के दरमियान चलता फिरता है, वह ये फ़रमाता है। मैं तुम्हारे कामों, तुम्हारे सख़्त मेहनत और तुम्हारे साबित क़दमी से वाक़िफ़ हूं। और मैं ये भी जानता हूं के तू बदकारों को बर्दाश्त नहीं कर सकता और तुम ने उन के दावों को जो ख़ुद को रसूल कहते हैं मगर हैं नहीं, उन्हें तुम ने आज़मा कर झूटा पाया। और तू सब्र करते हुए मेरे नाम की ख़ातिर मुसीबत पर मुसीबत उठाने के बावुजूद नहीं थका बल्के साबित-क़दम रहा। लेकिन मुझे तुझ से ये शिकायत है के तू मुझे उस तरह महब्बत नहीं करता जिस तरह पहले करता था। पस ख़्याल कर के तू कहां से गिरा है और तौबा कर के पहले की तरह काम कर। और अगर तू तौबा न करेगा तो मैं तुम्हारे पास आकर तुम्हारे चिराग़दान को उस की जगह से हटा दूंगा। अलबत्ता ये बात तुम्हारे हक़ में है के तू नीकुलीयों के कामों से नफ़रत करता है जिन से मैं भी नफ़रत रखता हूं। जिस के कान हों वह सुने के पाक रूह जमाअतों से क्या फ़रमाता है। जो ग़ालिब आयेगा मैं उसे उस शजरे हयात का फल खाने के लिये दूंगा जो ख़ुदा के फ़िरदौस में है। “सुमरना की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जो अव्वल और आख़िर है और जो मर गया था और फिर ज़िन्दा हो गया, वह ये फ़रमाता है। मैं तेरी मुसीबत और मुफ़्लिसी से वाक़िफ़ हूं लेकिन तू दौलतमन्द है और उन लोगों के लअन-तअन से भी वाक़िफ़ है जो अपने आप को यहूदी कहते हैं मगर हैं नहीं बल्के शैतानी यहूदी इबादतगाह है। जो दुख तुझे सहने हैं उन से ख़ौफ़ज़दा न हो। मैं तुम्हें आगाह करता हूं के शैतान तुम में से बाज़ को क़ैद में डालने वाला है ताके तुम्हारी आज़माइश हो और तुम दस दिन तक मुसीबत उठाओगे। जान देने तक वफ़ादार रह तो मैं तुझे ज़िन्दगी का ताज दूंगा। जिस के कान हों वह सुने के पाक रूह जमाअतों से किया फ़रमाता है। जो ग़ालिब आयेगा उसे दूसरी मौत से कोई नुक़्सान न पहुंचेगा। “परिगमुन की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जिस के पास दो धारी तेज़ तलवार है वह यह फ़रमाता है। मैं जानता हूं के जहां तुम रहते हो वह शैतान की तख़्त-गाह है लेकिन फिर भी तुम मेरे नाम के वफ़ादार रहे। और तुम ने उन दिनों में भी मुझ पर ईमान रखने से इन्कार न किया जिन दिनों में मेरा वफ़ादार गवाह अन्तिपास तुम्हारे शहर में उस जगह क़त्ल किया गया था जहां शैतान की हुकूमत है। लेकिन मुझे तुझ से चन्द बातों की शिकायत है, इसलिये के तेरे यहां बाज़ लोग बिलआम की तालीम पर क़ाइम हैं जिस ने बादशाह बलक़ को बनी इस्राईल को गुमराह करने के लिये बुतों को नज़र की गई क़ुर्बानियों का गोश्त खाने और जिन्सी बदफ़ेली करना सिखाया। चुनांचे तुम्हारे यहां भी ऐसे लोग हैं जो नीकुलीयों की तालीम पर अमल करते हैं। लिहाज़ा तौबा करो, वर्ना! मैं जल्द ही तुम्हारे पास आऊंगा और अपने मुंह की तलवार से उन के साथ लड़ूंगा। जिस के कान हों वह सुने के पाक रूह जमाअतों से किया फ़रमाता है। जो ग़ालिब आयेगा, मैं उसे पोशीदा मन्न में से कुछ दूंगा। मैं उसे एक सफ़ैद पत्थर भी दूंगा जिस पर एक नया नाम लिख्खा होगा, जिस का इल्म उस के पाने वाले के सिवा और किसी को न होगा। “थुआतीरा की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: ख़ुदा का बेटा जिस की आंखें भड़कती हुई आग के शोलों और जिस के पांव तपाए हुए ख़ालिस पीतल की मानिन्द हैं, वह ये फ़रमाता है। मैं तुम्हारे कामों महब्बत, ईमान, ख़िदमत और साबित क़दमी से वाक़िफ़ हूं, और ये भी जानता हूं के तू जो कुछ अब कर रहा है वो तुम्हारे पिछले कामों से ज़्यादा है। लेकिन मुझे तुझ से यह शिकायत है के तूने उस औरत ईज़बिल को अपने दरमियान रहने दिया, जो अपने आप को नबिया कहती है। और मेरे ख़ादिमो को जिन्सी बदफ़ेली करने और बुतों को नज़र की गई क़ुर्बानियों का गोश्त खाने की तालीम दे कर गुमराह करती है। मैंने उसे तौबा करने की मोहलत दी मगर वह अपनी बदचलनी से तौबा करना नहीं चाहती। लिहाज़ा मैं उसे बीमारी के बिस्तर पर डालता हूं और जो उस के साथ ज़िना करते हैं, अगर वो अपनी ज़िनाकारी से तौबा नहीं करते हैं तो, मैं उन्हें भी सख़्त अज़ाब में डालूंगा। मैं उस के फ़र्ज़न्दों को हलाक कर दूंगा। तब तमाम जमाअतों को मालूम हो जायेगा के दिलों और ज़हनों को जांचने वाला मैं ही हूं, और मैं तुम में से हर एक को उस के कामों के मुवाफ़िक़ बदला दूंगा। मगर थुआतीरा के बाक़ी लोगों से जो ईज़बिल की तालीम को नहीं मानते और जो उन बातों से नावाक़िफ़ हैं जिन्हें ये लोग शैतान का गहरा राज़ कहते हैं, ‘मैं ये फ़रमाता हूं के मैं तुम पर और ज़्यादा बोझ नहीं डालूंगा, अलबत्ता जो तुम्हारे पास है उसे मेरे आने तक थामे रहो।’ जो ग़ालिब आये और मेरी मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ आख़िर तक अमल करे, मैं उसे तमाम क़ौमों पर इख़्तियार दूंगा। वो लोहे के शाही असा से उन पर हुकूमत करेगा; और वो कुम्हार के बर्तनों की मानिन्द चकनाचूर हो जायेंगे। चुनांचे मैंने भी ऐसा ही इख़्तियार अपने बाप से पाया है। और मैं उसे सुबह का सितारा भी दूंगा। जिस के कान हों वह सुने के पाक रूह जमाअतों से क्या फ़रमाता है। “सरदीस की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जिस के पास ख़ुदा की सात रूहें यानी पाक रूह और सात सितारे हैं वह यह फ़रमाता है। मैं तुम्हारे कामों से वाक़िफ़ हूं; तू ज़िन्दा तो दिखाई देता है मगर है मुर्दा। इसलिये बेदार हो जाओ! और जो कुछ बाक़ी बचा हुआ है और ख़त्म होने ही वाला है उसे मज़बूती से क़ाइम कर क्यूंके मैंने तुम्हारे कामों को अपने ख़ुदा की नज़र में कामिल नहीं पाया है। इसलिये जो तालीम तुम ने पाई और सुनी थी उस पर क़ाइम रह और तौबा कर। लेकिन अगर तू बेदार न हुआ तो मैं चोर की मानिन्द अचानक आ जाऊंगा और तुझे ख़बर भी न होगी के मैं किस घड़ी तुम्हारे पास आ जाऊंगा। अलबत्ता सरदीस में तुम्हारे जमाअत में बाज़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने लिबास आलूदा नहीं किये हैं। वो सफ़ैद लिबास पहने हुए मेरे साथ सैर करेंगे क्यूंके वो इस इज़्ज़त के लाइक़ हैं। जो ग़ालिब आये उसे इसी तरह सफ़ैद लिबास पहनाई जायेगी और मैं उस का नाम किताब-ए-हयात से हरगिज़ ख़ारिज न करूंगा बल्के अपने बाप और उस के फ़रिश्तों के सामने उस के नाम का इक़रार करूंगा। जिस के कान हों वो सुने के पाक रूह जमाअतों से किया फ़रमाता है। “फ़िलदिल्फ़िया की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जो क़ुददूस और बरहक़ है और जिस के पास हज़रत दाऊद की कुन्जी है, और जिस के खोले हुए को कोई बन्द नहीं कर सकता और बन्द किये हुए को कोई खोल नहीं सकता। वो ये फ़रमाता है। मैं तुम्हारे कामों से वाक़िफ़ हूं। देख! मैंने तुम्हारे सामने एक दरवाज़ा खोल रख्खा है जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता। मुझे मालूम है के तेरी ताक़त कम है फिर भी तूने मेरे कलाम पर अमल किया और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया। देख, मैं शैतान के उन जमाअत वालों को तेरे क़ाबू में कर दूंगा, जो अपने आप को यहूदी कहते हैं मगर हैं नहीं बल्के झूटे हैं, देख, मैं ऐसा करूंगा के वो आकर तुम्हारे क़दमों में सज्दा करेंगे और वो तस्लीम करेंगे के मैं तुम से महब्बत रखता हूं। क्यूंके तुम ने उस सब्र और बर्दाश्त करने के हुक्म पर जो मैंने तुम्हें दिया था अमल किया है, इसलिये मैं भी आज़माइश के उस वक़्त तेरी हिफ़ाज़त करूंगा, जो तमाम दुनिया और इस के बाशिन्दों पर आने वाला है। मैं जल्द आ रहा हूं। जो कुछ तुम्हारे पास है उसे मज़बूती से थामे रख ताके कोई तुझ से तेरा ताज छीन न ले। जो ग़ालिब आये, मैं उसे अपने ख़ुदा की बैतुलमुक़द्दस में एक सुतून बनाऊंगा। वो फिर वहां से कभी बाहर न निकलेगा और मैं उस पर अपने ख़ुदा का नाम और अपने ख़ुदा के शहर का नाम यानी नए यरूशलेम का नाम लिखूंगा जो मेरे ख़ुदा की जानिब से आसमान से उतरने वाला है और मैं उस पर अपना नया नाम भी तहरीर करूंगा जिस के कान हों वो सुने के पाक रूह जमाअतों से किया फ़रमाता है। “और लौदीकिया की जमाअत के फ़रिश्ते को लिख: जो आमीन और क़ाबिले-एतमाद, बरहक़ गवाह और ख़ुदा की ख़िल्क़त का मब्दा है, वो ये फ़रमाता है। मैं तुम्हारे कामों से वाक़िफ़ हूं के तो न तो सर्द है न गर्म। काश के तो या तो सर्द या गर्म होता। पस क्यूंके तू न तो सर्द है न गर्म बल्के नीम गर्म है इसलिये मैं तुझे अपने मुंह से निकाल फेंकने को हूं। और तू कहता है के मैं दौलतमन्द हूं और मालदार बन गया हूं और मुझे किसी चीज़ की हाजत नहीं; मगर तू ये नहीं जानता के तू हक़ीक़त में नामुराद, बेचारा, ग़रीब, नाबीना और नंगा है। इसलिये मैं तुम्हें सलाह देता हूं के मुझ से आग में तपाया हुआ सोना ख़रीद ले ताके दौलतमन्द हो जाये और पहनने के लिये सफ़ैद पोशाक ख़रीद कर पहन लो ताके तुम्हारे नंगे पन की शर्मिन्दगी ज़ाहिर न होने पाए और अपनी आंखों में डालने के लिये सुरमा ले लो ताके तुम बेनाई पाओ। मैं जिन्हें प्यार करता हूं उन्हें डांटता और तम्बीह भी करता हूं। इसलिये पुरजोश हो और तौबा कर। देख! मैं दरवाज़ा पर खड़ा खटखटा रहा हूं। अगर कोई मेरी आवाज़ सुन कर दरवाज़ा खोले, तो मैं अन्दर दाख़िल होऊंगा, और हम एक दूसरे के साथ खाना खायेंगे। जो ग़ालिब आये, मैं उसे अपने साथ अपने तख़्त पर बैठने का हक़ दूंगा, जिस तरह मैं ग़ालिब आकर अपने बाप के साथ उस के तख़्त पर बैठ गया। जिस के कान हों वो सुने के पाक रूह जमाअतों से किया फ़रमाता है।” इस के बाद मैंने देखा के आसमान में एक दरवाज़ा खुला हुआ है। तब वोही नरसिंगे की आवाज़ जो मैंने पहले सुनी थी, मुझ से मुख़ातिब होकर, फ़रमाया, यहां ऊपर आ जा, मैं तुझे उन बातों को दिखाऊंगा जो इन बातों के बाद और ज़रूर होने वाली हैं। तब मैं फ़ौरन पाक रूह की गिरिफ़्त में आ गया और क्या देखता हूं के आसमान में एक तख़्त-ए-इलाही मौजूद है और उस पर कोई बैठा हुआ है। वह तख़्त-नशीन देखने में संग-ए-यशब और अक़ीक़ की तरह नज़र आ रहा था और उस तख़्त-ए-इलाही के इर्दगिर्द ज़मर्रुद की मानिन्द एक चमकदार क़ौसे-क़ुज़ह थी। उस तख़्त-ए-इलाही के चारों तरफ़ चौबीस बाक़ी तख़्त मौजूद थे जिन पर चौबीस बुज़ुर्ग हुक्मरां सफ़ैद जामे पहने बैठे हुए थे और उन के सरों पर सोने के ताज थे। उस तख़्त-ए-इलाही में से बिजली की चमक और बादलों के गरज की सदाएं निकल रही थीं। और उस तख़्त-ए-इलाही के ऐन सामने आग के सात चिराग़ जल रहे थे। जो ख़ुदा की सात रूहों यानी पाक रूह की निशानदही करते हैं। और उस तख़्त के सामने बिल्लौर की मानिन्द शफ़्फ़ाफ़ शीशे का समुन्दर था। तख़्त-ए-इलाही के बीच में और गिर्दागिर्द चार जानदार मख़्लूक़ थीं जिन के आगे पीछे आंखें ही आंखें थीं। पहली जानदार मख़्लूक़ शेर बब्बर की मानिन्द थी, दूसरी बछड़े की मानिन्द, तीसरे का चेहरा इन्सान का सा था और चौथा उड़ते हुए उक़ाब की मानिन्द था। इन चारों जानदारों के छः-छः पर थे और उन के सारे बदन में और पर के अन्दर और बाहर आंखें ही आंखें थीं। वो दिन रात लगातार बग़ैर आराम फ़रमाये ये कहते रहते हैं: “ ‘क़ुददूस, क़ुददूस, क़ुददूस ऐ क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदावन्द ख़ुदा,’ जो था, जो है और जो आने वाला है।” और जब वो जानदार मख़्लूक़ उस की हम्द-ओ-सिताइश, ताज़ीम और शुक्र गुज़ारी करते हैं जो तख़्त-नशीन है और जो अब्दुल-आबाद ज़िन्दा रहेगा तो वो चौबीस बुज़ुर्ग हुक्मरां ख़ुदा के सामने जो तख़्त-नशीन है, मुंह के बल सज्दे में गिर पड़ते हैं जो अबद तक ज़िन्दा रहेगा। वो अपने ताज ये कहते हुए उस तख़्त-ए-इलाही के सामने डाल देते हैं, “ऐ हमारे ख़ुदावन्द और ख़ुदा आप ही जलाल, इज़्ज़त और क़ुदरत के लाइक़ हैं, क्यूंके आप ही ने सब चीज़ें पैदा कीं, और वह सब आप ही की मर्ज़ी से थीं और वुजूद में आईं।” फिर मैंने उस तख़्त-नशीन के दाहने हाथ में एक किताब देखी जो अन्दर और बाहर दोनों तरफ़ से लिख्खी हुई थी और उसे सात मुहरें लगा कर बन्द किया गया था। फिर मैंने एक क़वी फ़रिश्ते को देखा जो बुलन्द आवाज़ से ये एलान कर रहा था, “कौन इस किताब को खोलने और इस की मुहरें तोड़ने के लाइक़ है?” मगर आसमान या ज़मीन पर या ज़मीन के नीचे कोई शख़्स उस किताब को खोलने और उस पर नज़र डालने के क़ाबिल न था। मैं ज़ार-ज़ार रोने लगा क्यूंके कोई भी इस लाइक़ न निकला, जो उस किताब को खोल सके या उस पर नज़र डाल सके। तब उन बुज़ुर्गों में से एक ने मुझ से कहा, “मत रो, देख, यहूदाह के क़बीले का शेर बब्बर जो हज़रत दाऊद की असल है, वोही उस किताब और उस की सातों मुहरों को खोलने के लाइक़ है और ग़ालिब आया है।” तब मैंने उस तख़्त-ए-इलाही और उन चारों जानदारों और उन बुज़ुर्गों के दरमियान गोया एक ज़ब्ह किया हुआ बर्रा खड़ा देखा। उस के सात सींग और सात आंखें थीं; ये ख़ुदा की सात रूहें यानी पाक रूह है जो तमाम रोय ज़मीन पर भेजी गई हैं। उस बर्रे ने आगे बढ़कर, उस तख़्त-नशीन के दाएं हाथ से वो किताब ले ली। और जब उस ने वो किताब ली तो चारों जानदार और चौबीस बुज़ुर्ग हुक्मरां उस बर्रे के सामने सज्दे में गिर पड़े। उन में से हर एक के पास बरबत और बख़ूर से भरे हुए सोने के प्याले थे। ये मुक़द्दसीन की दुआएं हैं। और वो ये नया नग़मा गाने लगे, “तू ही इस किताब को लेने और उस की मुहरें खोलने के लाइक़ है, क्यूंके तूने ज़ब्ह होकर, अपने ख़ून से हर क़बीले, और अहल-ए-ज़बान, हर उम्मत और हर क़ौम से लोगों को ख़ुदा के वास्ते ख़रीद लिया है। और उन्हें हमारे ख़ुदा के लिये शाही काहिनों की जमाअत बना दिया, और वो ज़मीन पर हुक्मरानी करेंगे।” फिर मैंने निगाह की तो उस तख़्त-ए-इलाही और उन जानदारों और बुज़ुर्गों के इर्दगिर्द मौजूद लाखों और करोड़ों फ़रिश्तों की आवाज़ सुनी। और उन्होंने बुलन्द आवाज़ से ये नग़मा गाया: “ज़ब्ह किया हुआ बर्रा ही, क़ुदरत, दौलत, हिक्मत, ताक़त इज़्ज़त, तम्जीद और हम्द के लाइक़ है!” फिर मैंने आसमान और ज़मीन और ज़मीन के नीचे और समुन्दर की सारी मख़्लूक़ात को और जो कुछ उन में हैं ये नग़मा गाते सुना: “जो तख़्त-नशीन है उस की और बर्रे की हम्द और इज़्ज़त और जलाल और क़ुदरत, अब्दुल-आबाद होती रहे।” और फिर चारों जानदारों ने, “आमीन” कहा और बुज़ुर्गों ने गिरकर सज्दा किया। फिर मैंने देखा के बर्रे ने उन सात मुहरों में से एक मुहर खोली और उन चारों जानदारों में से एक ने गरजती हुई आवाज़ में यह कहते सुना, “आ!” मैंने निगाह की तो सामने एक सफ़ैद घोड़ा देखा जिस के सवार के हाथ में एक कमान थी, उसे एक ताज दिया गया और वह फ़त्हमन्द की मानिन्द निकला के फ़तह पर फ़तह हासिल करता चला जाये। जब बर्रे ने दूसरी मुहर खोली तो मैंने दूसरे जानदार को यह कहते सुन के “आ!” तब एक सुर्ख़ घोड़ा निकला और उस के सवार को यह इख़्तियार दिया गया के वह ज़मीन पर से सुलह व सलामती उठा ले ताके लोग एक दूसरे को क़त्ल करें, और उसे एक बड़ी तलवार दी गई। जब बर्रे ने तीसरी मुहर खोली तो मैंने तीसरे जानदार को यह कहते सुना, “आ!” और मैंने एक काले रंग का घोड़ा देखा जिस के सवार के हाथ में एक तराज़ू थी। और मैंने एक आवाज़ सुनी जो उन चारों जानदारों के दरमियान से आ रही थी, “एक दिन की मज़दूरी की क़ीमत एक किलो गन्दुम, और एक दीनार का तीन किलो जौ होगी, लेकिन तेल और मय को नुक़्सान मत पहुंचाना।” जब बर्रे ने चौथी मुहर खोली, तो मैंने चौथे जानदार को ये कहते हुए सुना, “आ!” जब मैंने निगाह की तो देखा के एक घोड़ा है जिस का रंगे ज़र्द सा है और जिस के सवार का नाम मौत है। और उस के पीछे-पीछे आलमे-अर्वाह चला आ रहा था। और उन्हें ज़मीन के एक चौथाई हिस्सा पर इख़्तियार दिया गया के तलवार, क़हत, वबा और ज़मीन के वहशी दरिन्दों के ज़रीअः लोगों को हलाक कर डालें। जब उस ने पांचवें मुहर खोली तो मैंने क़ुर्बानगाह के नीचे उन लोगों की रूहें देखें जो ख़ुदा के कलाम के सबब से और गवाही पर क़ाइम रहने के बाइस क़त्ल कर दिये गये थे। उन्होंने बुलन्द आवाज़ से चला कर कहा, “ऐ क़ुददूस और बरहक़ ख़ुदावन्द! तो कब तक इन्साफ़ न करेगा और ज़मीन के बाशिन्दों से हमारे ख़ून का बदला न लेगा?” तब उन में से हर एक को सफ़ैद जामा दिया गया और उन से कहा गया के थोड़ी देर और इन्तिज़ार करो, जब तक के तुम्हारे हम ख़िदमत भाईयों और बहनों का भी शुमार पूरा न हो जाये, जो तुम्हारी तरह क़त्ल किये जाने वाले हैं। जब उस ने छटी मुहर खोली तो मैंने एक शदीद ज़लज़ला देखा और सूरज बालों से बुने हुए स्याह कम्बल की मानिन्द काला हो गया और पूरा चांद ख़ून की मानिन्द सुर्ख़ हो गया। आसमान के सितारे ज़मीन पर इस तरह गिर पड़े जैसे तेज़ हुआ से हिलने के बाइस कच्चे अन्जीर के दरख़्त के फल गिर पड़ते हैं। और आसमान यूं सरक गया जैसे कोई तूमार लपेट दिया गया हो और हर एक पहाड़ और जज़ीरा अपनी-अपनी जगह से टल गया। तब ज़मीन के बादशाह, उम्रा-ए, फ़ौजी अफ़सर, मालदार, ज़ोरआवर और सारे ग़ुलाम और आज़ाद, ग़ारों और पहाड़ों की चट्टानों में जा छुपे। और पहाड़ों और चट्टानों से चिल्ला कर कहने लगे के हम पर गिर पड़ो, “और हमें उस की नज़र से जो तख़्त-नशीन है और बर्रे के ग़ज़ब से छुपा लो। क्यूंके उन के ग़ज़ब का रोज़ अज़ीम आ पहुंचा है, और अब कौन ज़िन्दा बच सकता है?” इस के बाद मैंने देखा के ज़मीन के चारों कोनों पर चार फ़रिश्ते खड़े हैं। वह ज़मीन की चारों हवाओं को थामे हुए थे ताके ज़मीन या समुन्दर या किसी दरख़्त पर हुआ न चले। फिर मैंने एक और फ़रिश्ते को ज़िन्दा ख़ुदा की मुहर लिये हुए मशरिक़ से ऊपर की तरफ़ आते देखा। उस ने उन चारों फ़रिश्तों से जिन्हें ज़मीन और समुन्दर को नुक़्सान पहुंचाने का इख़्तियार दिया गया था बुलन्द आवाज़ से पुकार कर कहा, “जब तक हम अपने ख़ुदा के बन्दों की पेशानियों पर मुहर न लगा लें, तब तक ज़मीन और समुन्दर और दरख़्तों को नुक़्सान न पहुंचाना।” फिर मैंने सुना के बनी इस्राईल के तमाम क़बीलों में से जिन लोगों पर मुहर की गई थी उन का शुमार एक लाख चवालीस हज़ार था। यहूदाह के क़बीले में से बारह हज़ार, रोबिन के क़बीले में से बारह हज़ार पर, जद के क़बीले में से बारह हज़ार पर, आशर के क़बीले में से बारह हज़ार पर, नफ़्ताली के क़बीले में से बारह हज़ार पर, मनस्सी के क़बीले में से बारह हज़ार पर, शमऊन के क़बीले में से बारह हज़ार पर, लावी के क़बीले में से बारह हज़ार पर, इश्कार के क़बीले में से बारह हज़ार पर, ज़बूलून के क़बीले में से बारह हज़ार पर, यूसुफ़ के क़बीले में से बारह हज़ार पर, बिनयामीन के क़बीले में से बारह हज़ार पर। इस के बाद जब मैंने निगाह की तो देखता हूं के हर क़ौम, हर क़बीला, हर उम्मत और अहल-ए-ज़बान की एक ऐसी बड़ी भेड़ मौजूद है जिस का शुमार करना मुम्किन नहीं, ये सब सफ़ैद जामे पहने हुए और हाथों में खजूर की डालियां लिये हुए तख़्त-ए-इलाही के आगे और बर्रे के रूबरू खड़े थे। वह बुलन्द आवाज़ से चिल्ला-चिल्ला कह रहे थे: “नजात हमारे ख़ुदा की तरफ़ से, जो तख़्त-नशीन है, और बर्रे की तरफ़ से है।” और उन तमाम फ़रिश्तों ने जो उस तख़्त-ए-इलाही के और उन बुज़ुर्गों और चारों जानदारों के गिर्दागिर्द खड़े थे, तख़्त के सामने मुंह के बल सज्दे में गिर पड़े और ख़ुदा को सज्दा कर के, कहा, “आमीन! हम्द और जलाल और हिक्मत और शुक्र और इज़्ज़त और क़ुदरत और ताक़त हमारे ख़ुदा की अब्दुल-आबाद होती रहे। आमीन!” फिर बुज़ुर्गों में से एक ने मुझ से पूछा के यह सफ़ैद जामे पहने हुए लोग कौन हैं, और कहां से आये हैं? मैंने जवाब दिया, “ऐ मेरे आक़ा, यह तो आप ही मालूम है।” तब उस ने कहा, “यह वह लोग हैं जो बड़ी मुसीबत में से निकल कर आये हैं; उन्होंने अपने जामे बर्रे के ख़ून में धोकर सफ़ैद कर लिये हैं। इसलिये, “वह ख़ुदा के तख़्त के सामने मौजूद हैं और दिन रात उस के आसमानी बैतुलमुक़द्दस में उस की इबादत करते हैं; और वह जो तख़्त पर बैठा है अपनी हुज़ूरी में उन्हें पनाह देगा। ‘वह आइन्दा न तो कभी भूके होंगे; और न प्यासे। न तो सूरज की गर्मी उन्हें झुलसाएगी,’ और न उन्हें धूप सतायेगी। क्यूंके वह बर्रा जो तख़्त-ए-इलाही के दरमियान है, उन की गल्लेबानी करेगा; ‘और उन्हें आबे-हयात के चश्मों के पास ले जायेगा।’ ‘और ख़ुदा उन की आंखों से सब आंसु पोंछ डालेगा।’ ” जब बर्रे ने सातवीं मुहर खोली तो आसमान में तक़रीबन आध घंटे तक ख़मोशी छाई रही। और मैंने उन सातों फ़रिश्तों को देखा जो ख़ुदा के हुज़ूर खड़े रहते हैं। उन्हें सात नरसिंगे दिये गये। फिर एक और फ़रिश्ता सोने का बख़ूरदान लिये हुए आया और क़ुर्बानगाह के पास खड़ा हो गया। उसे बहुत सा बख़ूर दिया गया ताके वह उसे सब मुक़द्दसीन की दुआओं के साथ तख़्त-ए-इलाही के सामने की सुनहरी क़ुर्बानगाह पर नज़्र करे। और उस बख़ूर का धूवां मुक़द्दसीन की दुआओं के साथ उस फ़रिश्ते के हाथ से निकला और ख़ुदा के हुज़ूर जा पहुंचा। तब उस फ़रिश्ते ने क़ुर्बानगाह से आग ले कर उस बख़ूरदान में भरी और उसे ज़मीन पर डाल दिया जिस से बिजली की चमक और बादलों के गरज की सदाएं पैदा हुईं और ज़लज़ला आ गया। उस के बाद वह सातों फ़रिश्ते जिन के पास सात नरसिंगे थे, सातों को फूंकने के लिये तय्यार हुए। जब पहले फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो ख़ून मिले हुए ओले और आग पैदा हुई जो ज़मीन पर डाल दी गई जिस से एक तिहाई ज़मीन, और एक तिहाई दरख़्त और सारी हरी घास जल गई। जब दूसरे फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो एक बड़ा सा पहाड़ जो आग से जल रहा था समुन्दर में डाला गया जिस से एक तिहाई समुन्दर ख़ून में तब्दील हो गया और समुन्दर के तिहाई जानदार मर गये और एक तिहाई जहाज़ तबाह हो गये। जब तीसरे फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो मशाल की तरह जलता हुआ एक बड़ा सा सितारा आसमान से टूट कर एक तिहाई दर्याओं और पानी के चश्मों पर गिरा। उस सितारे का नाम नागदूना यानी कड़वाहट है। उस से एक तिहाई पानी कड़वा और ज़हरीला हो गया और बहुत से लोग उस ज़हरीले पानी के बाइस मर गये। जब चौथे फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो एक तिहाई सूरज, एक तिहाई चांद और एक तिहाई सितारों को ज़रर पहुंचा यहां तक के उन का एक तिहाई हिस्सा तारीक हो गया और इसी तरह दिन का तिहाई और रात का एक तिहाई हिस्सा तारीकी में डूब गया। जब मैंने फिर निगाह की तो एक बड़ा सा उक़ाब आसमान के फ़िज़ा में उड़ता देखा और उसे बुलन्द आवाज़ से ये कहते सुना, “उन तीन फ़रिश्तों के नरसिंगे की आवाज़ के बाइस जिन का फूंकना अभी बाक़ी है, अहल-ए-ज़मीन पर अफ़सोस, अफ़सोस, अफ़सोस!” जब पांचवें फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो मैंने आसमान से ज़मीन पर गिरा हुआ एक सितारा देखा। और उस सितारे को अथाह गढ़े की कुन्जी दी गई। जब उस ने अथाह गढ़े को खोला तो उस में से एक बड़ी भट्टी का सा धुआं उठा। उस धोईं के बाइस सूरज और सारी फ़िज़ा तारीक हो गई। और उस धोईं में से टिड्डियां निकल कर ज़मीन पर फैल गईं, और उन्हें ज़मीन के बिच्छूओं की सी ताक़त दी गई। और उन से कहा गया के ज़मीन की घास और किसी हरे पौदे या दरख़्त को नुक़्सान न पहुंचाना सिवाए उन लोगों के जिन की पेशानियों पर ख़ुदा की मुहर नहीं है। उन्हें किसी को मार डालने का नहीं लेकिन सिर्फ़ पांच माह तक लोगों को अज़ीय्यत देने का इख़्तियार दिया गया। ये ऐसी अज़ीय्यत थी जो इन्सान को बिच्छू के डंक मारने से होती है। इन दिनों में लोग मौत की तलाश करेंगे मगर उसे हरगिज़ न पाएंगे और मरने की आरज़ू करेंगे मगर मौत उन से दूर भागेगी। वो टिड्डियां उन घोड़ों की तरह दिखाई दे रही थीं जो लड़ाई के लिये तय्यार किये गये हों। उन टिड्डियों के सरों पर गोया सोने के ताज थे और उन के चेहरे इन्सानी चेहरों के मुशाबेह थे। और उन के बाल औरतों के बालों की तरह थे और दांत शेर बब्बर के दांतों जैसे थे। उन के बक्-तर लोहे के बक्-तरों की मानिन्द थे और उन के परों की आवाज़ ऐसी थी जैसे मैदाने जंग में लातादाद रथों और घोड़ों के दौड़ने से पैदा होती है। उन की दुमें बिच्छूओं की दुमों की तरह थीं जिन में डंक थे और उन दुमों को ऐसी ताक़त दी गई थी के वो पांच माह तक लोगों को सख़्त तकलीफ़ देती रहीं। अथाह गढ़े का फ़रिश्ता उन का बादशाह था। उस का नाम इब्रानी ज़बान में अबद्दोन और यूनानी में अपुलिल्योन यानी ग़ारत-गर है। पहला अफ़सोस तो हो चुका। अभी दो अफ़सोस और बाक़ी हैं। जब छटे फ़रिश्ता ने अपना नरसिंगा फूंका तो मैंने ख़ुदा के सामने वाली सुनहरी क़ुर्बानगाह के चार सींगों में से एक आवाज़ आती सुनी। जो उस छटे फ़रिश्ते को जो नरसिंगा लिये हुए था, ये कह रही थी, “उन चार फ़रिश्तों को जो बड़े दर्याए फ़रात के पास बंधे हुए हैं, खोल दे।” चुनांचे वो चारों फ़रिश्ते खोल दिये गये, जो उस ख़ास घड़ी, दिन और उसी महीने और साल के लिये एक तिहाई इन्सानों को मार डालने के लिये तय्यार रखे गये थे। और मेरे सुनने के मुताबिक़ उन के घुड़सवार फ़ौजियों की तादाद बीस करोड़ की थी। वो घोड़े और वो सवार जिन्हें मैंने अपनी रोया में देखा था, ऐसे बक्-तर पहने हुए थे जो आग की तरह सुर्ख़, सुंबल की तरह नीले और गन्धक की तरह ज़र्द थे और उन घोड़ों के सर शेर बब्बर के सर की मानिन्द थे। उन के मुंह से आग, धुआं और गन्धक निकलती थी। उन के मुंह से निकली हुई इन तीन वबाओं यानी आग, धोईं और गन्धक के बाइस एक तिहाई इन्सानों का हिस्सा हलाक हो गया। उन घोड़ों की ताक़त उन के मुंह और दुमों में थी; ये दुमें सांपों की मानिन्द थीं जिन में सर लगे हुए थे जिन से वो तबाही मचाते थे। और बाक़ी आदमियों ने जो इन आफ़तों से न मरे थे, अपने हाथों के कामों से तौबा न की, उन्होंने उन शयातीन और बुतों की जो सोने, चांदी, पीतल, पत्थर और लकड़ी की बनी हुई थीं, उन की परस्तिश करने से बाज़ नहीं आये जो न तो देख सकती हैं न सुन सकती हैं और न चल फिर सकती हैं। और जो क़त्ल, जादूगरी, जिन्सी बदफ़ेली और चोरी उन्होंने की थी उन कामों से तौबा न की। उस के बाद मैंने एक ज़ोरआवर फ़रिश्ते को आसमान से उतरते देखा। वो बादल ओढ़े हुए था और उस के सर के ऊपर क़ौसे-क़ुज़ह थी। उस का चेहरा आफ़ताब की मानिन्द था और पांव आग के सुतूनों की तरह थे। वो अपने हाथ में खुली हुई एक छोटी किताब थामे हुए था। उस ने अपना दायां पांव समुन्दर पर और बायां ज़मीन पर रख्खा। वो शेर बब्बर की तरह ज़ोर से दहाड़ा और उस के दहाड़ने से गरज की सी सात आवाज़ें पैदा हुईं। उन आवाज़ों को सुन कर मैंने लिखने का इरादा किया ही था के आसमान से एक आवाज़ आती सुनी, “जो कुछ उन गरज की सी सात आवाज़ों से सुनी हैं, उसे पोशीदा रख और तहरीर में न ला।” तब जिस फ़रिश्ता को मैंने समुन्दर और ज़मीन पर खड़े देखा था, उस ने अपना दायां हाथ आसमान की तरफ़ उठाया। और उस ने उस ख़ालिक़ की जो अबद तक ज़िन्दा है, जिस ने आसमान और उस के अन्दर की चीज़ें, और ज़मीन और उस के ऊपर की सब चीज़ों को, और समुन्दर और उस के अन्दर की चीज़ों को पैदा किया है, क़सम खाकर कहा, “अब और देर न होगी। बल्के उन अय्याम में जब सातवां फ़रिश्ता अपना नरसिंगा फूंकने वाला होगा तो उस की आवाज़ आते ही ख़ुदा का वो पोशीदा राज़ यानी मन्सूबा जिस की ख़ुशख़बरी उस ने अपने ख़ादिमो यानी नबियों को दी थी, पूरी हो जायेगी।” फिर जो आवाज़ आसमान से सुनाई दी थी, उस ने एक बार फिर मुझे से मुख़ातिब होकर फ़रमाया, “जा आगे बढ़कर उस फ़रिश्ता के हाथ से वो खुली हुई किताब ले लो जो समुन्दर और ज़मीन पर खड़ा हुआ है।” तब मैं उस फ़रिश्ते के पास गया और उस से इल्तिजा की के खुली हुई छोटी किताब मुझे दे दीजिये। उस ने कहा, “इसे ले और खाले। ये तुम्हारा पेट कड़वा कर देगी, ‘लेकिन तुम्हारे मुंह में शहद की तरह मीठी लगेगी।’ ” मैंने वो छोटी किताब फ़रिश्ते के हाथ से ले ली और उसे खा लिया। वो मेरे मुंह में तो शहद की तरह मीठी लगी लेकिन निगलने के बाद मेरा पेट कड़वा हो गया। फिर मुझे बताया गया, “लाज़िम है के तो बहुत सी उम्मतों, क़ौमों, अहल-ए-ज़बानों और बादशाहों के बारे में फिर से नबुव्वत करे। करे।” मुझे लाठी की मानिन्द पैमाइश करने की एक जरीब दी गई और मुझ से कहा गया, “जा और ख़ुदावन्द के बैतुलमुक़द्दस और क़ुर्बानगाह की पैमाइश कर और वहां इबादत करने वालों का शुमार कर। लेकिन बैतुलमुक़द्दस के बाहर वाले सहन को छोड़ देना क्यूंके वह ग़ैरयहूदी लोगों को दे दिया गया है। वह बयालीस महीनों तक मुक़द्दस शहर को पामाल करते रहेंगे। और मैं अपने दो गवाहों को इख़्तियार दूंगा और वह टाट ओढ़ कर एक हज़ार दो सौ साठ दिन तक नुबुव्वत करेंगे।” यह दो गवाह “ज़ैतून के वह दो दरख़्त” और वह दो चिराग़दान हैं, जो “ज़मीन के ख़ुदावन्द के हुज़ूर में खड़े हैं।” अगर कोई उन्हें नुक़्सान पहुंचाना चाहे तो उन के मुंह से आग निकलती है और उन के दुश्मनों को भस्म कर डालती है। जो कोई उन्हें नुक़्सान पहुंचाना चाहेगा तो वो भी ज़रूर उसी तरह हलाक होगा। उन्हें ये इख़्तियार है के आसमान को बन्द कर दें ताके उन की नबुव्वत के दिनों में बारिश न हो। और उन्हें पानियों को ख़ून में तब्दील करने का इख़्तियार है और जितनी बार चाहें ज़मीन पर हर क़िस्म की वबा नाज़िल करें। जब वो अपनी गवाही दे चुकेंगे तो अथाह गढ़े से निकलने वाला हैवान उन पर हमला करेगा और उन पर ग़ालिब आकर उन्हें मार डालेगा। और उन की लाशें उस शहर अज़ीम के बाज़ार में पड़ी रहेंगी, उस शहर को बतौर इस्तिआरा सदूम और मिस्र का नाम दिया गया है जहां उन का ख़ुदावन्द भी उसी शहर में मस्लूब हुआ था। और साढ़े तीन दिनों तक हर उम्मत, हर क़बीले, हर अहल-ए-ज़बान और हर क़ौम के लोग उन की लाशों को देखते रहेंगे और उन की तद्फ़ीन न होने देंगे। अहल-ए-ज़मीन उन की मौत पर ख़ुशी मनायेंगे और शादमान होकर एक दूसरे को तोहफ़े भेजेंगे क्यूंके उन दोनों नबियों ने अहल-ए-ज़मीन के बाशिन्दों को सताया था। लेकिन साढ़े तीन दिन बाद ख़ुदा की तरफ़ से उन में ज़िन्दगी की रूह दाख़िल हुई, वह अपने पांव के बल खड़े हो गये और उन के देखने वालों पर बड़ा ख़ौफ़ छा गया। तब उन्होंने आसमान से एक बड़ी आवाज़ आती सुनी, जिस ने उन से फ़रमाया, “यहां ऊपर आ जाओ।” और वह बादल पर सवार होकर आसमान पर चले गये और उन के दुश्मन देखते रह गये। फिर उसी घड़ी एक बड़ा ज़लज़ला आया और शहर का दसवां हिस्सा गिर पड़ा। और सात हज़ार लोग उस ज़लज़ला से मारे गये और जो बाक़ी बचे वो दहशत-ज़दा होकर आसमान के ख़ुदा की तम्जीद करने लगे। दूसरी आफ़त ख़त्म हुई। अब देखो तीसरी आफ़त जल्दी आने वाली है। जब सातवें फ़रिश्ते ने अपना नरसिंगा फूंका तो आसमान से बुलन्द आवाज़ें आने लगीं जो यह कह रही थीं: “दुनिया की बादशाही हमारे ख़ुदावन्द और उन के अलमसीह की हो गई, और वह अबद तक बादशाही करेंगे।” और उन चौबीस बुज़ुर्गों ने जो ख़ुदा के हुज़ूर अपने-अपने तख़्त पर बैठे हुए थे, मुंह के बल गिरकर ख़ुदा को सज्दा किया और उस की इबादत ये कह कर की, “ऐ क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदावन्द ख़ुदा! हम तेरा शुक्र करते हैं, तू जो है और जो था, क्यूंके तूने अपनी अज़ीम क़ुदरत का इस्तिमाल कर के और बादशाही करना शुरू कर दी है। और क़ौमों को ग़ुस्सा आया, और तेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ। और वो वक़्त आ पहुंचा है के मुर्दों का इन्साफ़ किया जाये, और तेरे ख़ादिमो, नबियों और मुक़द्दसीन और उन सब छोटे बड़ों को जो ख़ुदा के नाम की ताज़ीम करते हैं उन्हें अज्र दिया जाये और ज़मीन को तबाह करने वालों को तबाह कर दिया जाये।” तब ख़ुदा का बैतुलमुक़द्दस जो आसमान में है खोला गया और उस के बैतुलमुक़द्दस में उस के अह्द का सन्दूक़ नज़र आया। और बिजलियां कौंदी, आवाज़ें और बादलों की गरज पैदा हुईं, ज़लज़ला आया और बड़े-बड़े ओले गिरे। फिर आसमान पर एक अज़ीम निशान दिखाई दिया वह यह के एक ख़ातून आफ़ताब ओढ़े हुए थी और चांद उस के पांव के नीचे था और बारह सितारों का ताज उस के सर पर था। वह हामिला थी और दर्देज़ेह में मुब्तिला होने के बाइस चिल्ला रही थी क्यूंके वह बच्चा की पैदाइश करने ही वाली थी। फिर आसमान पर एक और निशान दिखाई दिया यानी एक बड़ा सा लाल अज़दहा जिस के सात सर और दस सींग थे और उस के सात सरों पर सात शाही ताज थे। उस की दम ने आसमान के एक तिहाई सितारे खींच कर उन्हें ज़मीन पर फेंक दिया। फिर वो अज़दहा उस ख़ातून के सामने जो बच्चा पैदा करने वाली थी, जा खड़ा हुआ, ताके जब वो बच्चा पैदा हो, तो उसे निगल जाये। और उस ने एक बेटे को पैदा किया, “जो लोहे के असा से सब क़ौमों पर हुकूमत करेगा।” फिर उस के बच्चा को वहां से उठाकर ख़ुदा के तख़्त के पास पहुंचा दिया गया। और वह ख़ातून ब्याबान में एक ऐसी जगह भाग गई जो ख़ुदा ने उस के लिये तय्यार कर रख्खी थी ताके वहां एक हज़ार दो सौ साठ दिन तक उस की परवरिश की जाये। फिर आसमान में जंग हुई। मीकाईल और इस के फ़रिश्ते अज़दहा से जंग करने निकले, अज़दहा और उस के फ़रिश्तों ने उन का मुक़ाबला किया। लेकिन अज़दहा और उस के फ़रिश्ते जंग हार गये और अपने आसमानी मक़ाम से भी निकाल दिये गये थे। तब वो बड़ा अज़दहा यानी वोही पुराना सांप जो इब्लीस और शैतान कहलाता है और जो सारी दुनिया को गुमराह करता है, ज़मीन पर फेंक दिया गया, और उस के फ़रिश्ते भी उस के साथ ज़मीन पर फेंक दिये गये। फिर मैंने आसमान से एक बड़ी आवाज़ आती सुनी “अब नजात, क़ुदरत और हमारे ख़ुदा की बादशाही, और उस के अलमसीह का इख़्तियार ज़ाहिर हुआ है। क्यूंके हमारे भाईयों और बहनों पर तोहमत लगाने वाला, जो दिन रात ख़ुदा के हुज़ूर उन पर तोहमत लगाता रहता था, उसे नीचे फेंक दिया गया है। वो बर्रे के ख़ून और अपनी गवाही की बदौलत उस पर ग़ालिब आये; और उन्होंने अपनी जानों को अज़ीज़ न समझा यहां तक के मौत भी गवारा कर ली। इसलिये ऐ आसमानों, और आसमानी बाशिन्दों, ख़ुशी मनाओ मगर ऐ ज़मीन और समुन्दर, तुम पर अफ़सोस, क्यूंके इब्लीस नीचे तुम्हारे पास गिरा दिया गया है वो क़हर से भरा हुआ है, क्यूंके वो जानता है के उस के पास वक़्त बहुत कम है।” जब अज़दहा ने देखा के वो ज़मीन पर फेंक दिया गया है तो उस ने उस ख़ातून का तआक़ुब किया जिस ने एक बेटे को पैदा किया था। लेकिन उस ख़ातून को बड़े उक़ाब के दो पर दिये गये ताके वो उस मक़ाम की तरफ़ परवाज़ कर जाये जो ब्याबान में उस के लिये तय्यार किया गया है ताके वो वहां अज़दहा की दस्तरस से बच कर साढे़ तीन बरस तक हिफ़ाज़त से रह सके। तब अज़दहा अपने मुंह से उस ख़ातून के पीछे दरिया की सूरत में पानी उगलने लगाता के उसे उस दरिया में बहा दे। मगर ज़मीन ने उस ख़ातून की मदद की और अपना मुंह खोल कर उस दरिया को पी लिया जो अज़दहा ने अपने मुंह से बहाई थी। तब उस अज़दहा को उस ख़ातून पर बड़ा ग़ुस्सा आया और वो उस की बाक़ी औलाद से यानी उन से जो ख़ुदा के हुक्मों पर अमल करते हैं और हुज़ूर ईसा की गवाही देने पर क़ाइम हैं, जंग करने निकल पड़ा। वो अज़दहा समुन्दर की रेत पर जा खड़ा हुआ। और मैंने एक हैवान को समुन्दर में से निकलते देखा। उस के दस सींग और सात सर थे और दस सींगों पर दस शाही ताज थे, और उस के सब सरों पर कुफ़्र भरे नाम लिखे हुए थे। और जो हैवान मैंने देखा उस की शक्ल तेन्दवे की मानिन्द थी, और पांव रीछ के से और मुंह शेर बब्बर का सा था। और उस अज़दहे ने अपनी क़ुदरत, अपना बड़ा इख़्तियार और अपना तख़्त उस हैवान के सुपुर्द कर दिया। उस हैवान के एक सर पर किसी मुहलिक ज़ख़्म का निशान था। वो ज़ख़्मे-कारी शिफ़ायाब हो गया और तमाम अहल-ए-दुनिया तअज्जुब करते हुए उस हैवान के पीछे चलने लगे। उन्होंने अज़दहा की परस्तिश की क्यूंके उस ने अपना इख़्तियार हैवान को दे दिया था, और उन्होंने ये कहते हुए उस हैवान की भी परस्तिश की, “इस हैवान की मानिन्द कौन है और कौन है जो उस से जंग कर सकता है?” उस हैवान को बड़ा बोल बोलने और कुफ़्र बिकने के लिये उसे एक मुंह दिया गया, और उसे बयालीस माह तक हुकूमत करने का इख़्तियार दिया गया। और उस ने ख़ुदा की निस्बत कुफ़्र बिकने के लिये अपना मुंह खोला के उस के नाम, और उस के ख़ेमे या क़यामगाह, और आसमानी बाशिन्दों की निस्बत उन की ख़ूब बदगोई करे। उसे ख़ुदा के मुक़द्दसीन से जंग करने और उन पर ग़ालिब आने की क़ुव्वत दी गई और उसे हर क़बीले, हर उम्मत, हर अहल-ए-ज़बान और हर क़ौम पर इख़्तियार दिया गया। और तमाम अहल-ए-ज़मीन के सब बाशिन्दे उस हैवान की परस्तिश करेंगे, वो सब जिन के नाम उस बनाये आलम से ज़ब्ह किये हुए बर्रे की किताब-ए-हयात में दर्ज नहीं किये थे। जिस के कान हूं वो सुन ले। “अगर कोई असीरी के लिये है, तो वो असीरी में जायेगा अगर कोई तलवार से क़त्ल करेगा, वो तलवार ही से क़त्ल किया जायेगा” इस का मतलब है के ख़ुदा के मुक़द्दसीन को सब्र और ईमान पर क़ाइम रहना ज़रूरी है। फिर मैंने एक हैवान को ज़मीन में से निकलते देखा। उस के दो सींग थे जो बर्रे के सींगों की तरह थे, लेकिन वो अज़दहा की तरह बोलता था। वो पहले हैवान का सारा इख़्तियार उस हैवान के सामने काम में लाता था और दुनिया और उस में रहने वालों से उस हैवान की परस्तिश कराता था, जिस का ज़ख़्मे-कारी शिफ़ायाब हो गया था। वो बड़े-बड़े मोजिज़ाना निशानात दिखाता था, यहां तक के लोगों की नज़रों के ऐन सामने आसमान से ज़मीन पर आग नाज़िल कर देता था। और ज़मीन के बाशिन्दों को उन मोजिज़ों और निशानात के सबब से, जिन्हें उस हैवान के सामने दिखाने का उस को क़ुव्वत दी गई था, और उन के ज़रीअः उस ने ज़मीन के सब बाशिन्दों को गुमराह किया था। और ज़मीन के सब बाशिन्दों को हुक्म देता था के जिस हैवान को तलवार का ज़ख़्मे-कारी लगा था वो ज़िन्दा हो गया है, इसलिये उस की ताज़ीम में बुत बनाओ। उसे पहले हैवान की बुत में जान डालने का इख़्तियार दिया गया ताके हैवान के बुत बोलने लगे और जो उस बुत को सज्दा करने से मना करें उन्हें क़त्ल करवा डाले। उस ने छोटे बड़े, अमीर ग़रीब, आज़ाद ग़ुलाम सब लोगों के दाएं हाथ या पेशानी पर एक ख़ास निशान लगवाने के लिये मजबूर किया, ताके उन के सिवा जिन पर उस हैवान का निशान यानी उस का नाम या उस के नाम का अदद न हो, और कोई दूसरा ख़रीदो फ़रोख़त न कर सके। यहां पर हिक्मत की ज़रूरत है। जो अक़्ल रखता है वो इस हैवान का अदद गिन ले क्यूंके ये आदमी का अदद है और उस का अदद छः सौ छयासठ है। फिर मैंने निगाह की तो देखा के वो बर्रा कोहे सिय्यून पर खड़ा है और उस के साथ एक लाख चवालीस हज़ार अफ़राद भी हैं जिन की पेशानी पर बर्रे यानी ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह और उस के आसमानी बाप का नाम लिख्खा हुआ है। फिर मैंने आसमान से एक ऐसी आवाज़ सुनी जो किसी बड़े आबशार और गरजते बादलों की मानिन्द थी। ये उस आवाज़ की मानिन्द थी जो बरबत नवाज़ अपने साज़ों से निकालते हैं। वो तख़्त-ए-इलाही के सामने और चारों जानदारों और बुज़ुर्गों के आगे एक नया नग़मा गा रहे थे और उन एक लाख चवालीस हज़ार अफ़राद के सिवा जो दुनिया में से ख़रीद लिये गये थे कोई और उस नग़मे को न सीख सका। ये वो हैं जिन्होंने अपने आप को औरतों के साथ आलूदा नहीं किया बल्के कंवारे हैं। ये वो हैं जो बर्रे के पीछे-पीछे चलते हैं, जहां भी वो जाता है। वो आदमियों में से ख़रीद लिये गये हैं ताके वो ख़ुदा और बर्रे के लिये पहले फल हों। और उन के मुंह से कभी झूट नहीं निकला। वो बेऐब हैं। फिर मैंने एक और फ़रिश्ते को फ़िज़ा में उड़ते हुए देखा। इस के पास एक अब्दी ख़ुशख़बरी थी ताके वो उसे रोय ज़मीन के बाशिन्दों यानी हर क़ौम, हर क़बीले, हर अहल-ए-ज़बान और हर उम्मत को सुनाये। उस ने बड़ी बुलन्द आवाज़ से कहा, “ख़ुदा से डरो और उस की तम्जीद करो क्यूंके उस की अदालत का वक़्त आ पहुंचा है। उसी को सज्दा करो जिस ने आसमान, ज़मीन, समुन्दर और पानी के चश्मे बनाये हैं।” उस के बाद एक दूसरा फ़रिश्ता आया और वह बुलन्द आवाज़ से ऐलान किया, “ ‘गिर पड़ा वो अज़ीम शहर बाबुल गिर पड़ा,’ जिस ने अपनी ज़िनाकारी के क़हर की मय सब क़ौमों को पिलाई है।” फिर उस के बाद तीसरा फ़रिश्ता आया और बुलन्द आवाज़ से कहा, “जो कोई उस हैवान और उस की बुत की परस्तिश करे और उस का निशान अपनी पेशानी या हाथ पर लगाता है, तो उसे भी ख़ुदा के क़हर की उस ख़ालिस मय को पीना होगा जो उस के ग़ज़ब के प्याला में भरी गई है। वो मुक़द्दस फ़रिश्तों और बर्रे के रूबरू उस आग और गन्धक के अज़ाब में मुब्तिला होकर तड़पता रहेगा और उन के अज़ाब का धुआं अबद तक उठता रहेगा और जो उस हैवान और उस के बुत की परस्तिश करते हैं और उस के नाम का निशान लगाते हैं, उन्हें दिन रात चैन न मिलेगा।” इस का मतलब है के ख़ुदा के मुक़द्दसीन को सब्र रखना और ईमान पर क़ाइम रहना ज़रूरी है, जो ख़ुदा के फ़रमांबरदार और हुज़ूर ईसा के पीछे वफ़ादारी से चलते हैं। फिर मैंने आसमान से एक आवाज़ आते सुनी, “लिख मुबारक हैं वो मुर्दे जो अब से ख़ुदावन्द में वफ़ात पाते हैं।” “बेशक,” पाक रूह फ़रमाता है, “क्यूंके वो अपनी मेहनत-ओ-मशक़्क़त से आराम पाएंगे, क्यूंके उन के आमाल उन के साथ जायेंगे।” फिर मैंने निगाह की तो क्या देखता हूं के एक सफ़ैद बादल है और उस पर इब्न-ए-आदम की मानिन्द कोई बैठा है जिस के सर पर सोने का ताज और हाथ में तेज़ दरांती है। फिर बैतुलमुक़द्दस में से एक और फ़रिश्ता बाहर निकला और उस ने बादल पर बैठे हुए शख़्स को बुलन्द आवाज़ से पुकार कर कहा, “अपनी दरांती चला और फ़सल काट, क्यूंके फ़सल काटने का वक़्त आ गया है, इसलिये के ज़मीन की फ़सल पक गई है।” चुनांचे जो बादल पर बैठा हुआ था उस ने अपनी दरांती ज़मीन पर चलाई और ज़मीन की फ़सल कट गई। फिर एक और फ़रिश्ता उस बैतुलमुक़द्दस में से बाहर निकला जो आसमान पर है, और उस के हाथ में भी एक तेज़ दरांती थी। फिर एक और फ़रिश्ता जिस का आग पर इख़्तियार था, क़ुर्बानगाह से बाहर निकला; और उस ने तेज़ दरांती वाले फ़रिश्ते को पुकार कर कहा, “अपनी तेज़ दरांती चला और ज़मीन के अंगूरी बाग़ से गुच्छे काट ले क्यूंके उस के अंगूर बिलकुल पक चुके हैं।” उस फ़रिश्ता ने अपनी दरांती ज़मीन पर चलाई और उस के अंगूरी बाग़ से अंगूर की फ़सल काट कर जमा की और उन्हें ख़ुदा के क़हर के बड़े हौज़ में डाल दिया। तब उन्हें शहर से बाहर उस बड़े अंगूरी बाग़ के हौज़ में रौंदा गया और हौज़ में से इस क़दर ख़ून बह निकला के उस की लम्बाई तक़रीबन तीन सौ किलोमीटर तक और ऊंचाई घोड़ों की लगामों तक जा पहुंची थी। फिर मैंने आसमान में एक और बड़ा और हैरत-अंगेज़ निशान देखा के सात फ़रिश्ते सात आख़री आफ़तों को लिये हुए थे। ये आख़री आफ़तें हैं क्यूंके उन के साथ ख़ुदा का क़हर ख़त्म हो जाता है। फिर मैंने शीशे का सा एक समुन्दर देखा जिस में आग मिली हुई थी। मैंने उस शीशे के समुन्दर के किनारे पर उन लोगों को खड़े हुए देखा, जो हैवान और उस की बुत और उस के नाम के अदद पर ग़ालिब आये थे। उन के हाथों में ख़ुदा की दी हुई बरबतें थीं। और वो ख़ुदा के ख़ादिम मूसा का नग़मा और बर्रे का नग़मा गा रहे थे, आप के काम कितने अज़ीम और अजीब हैं, “ऐ ख़ुदावन्द ख़ुदा, क़ादिर-ए-मुतलक़, तेरी राहें बरहक़ और रास्त हैं। ऐ अज़ली बादशाह, ऐ ख़ुदावन्द कौन आप का ख़ौफ़ न मानेगा और कौन आप के नाम की तम्जीद न करेगा क्यूंके सिर्फ़ तू ही क़ुददूस है। दुनिया की सब क़ौमें आकर तेरे सामने सज्दा करेंगी क्यूंके तेरे रास्तबाज़ी के काम ज़ाहिर हो गये हैं ये हैं।” इन बातों के बाद मैंने देखा के शहादत के ख़ेमे का बैतुलमुक़द्दस आसमान में खोला गया। और उस बैतुलमुक़द्दस में से सात फ़रिश्ते सात आफ़तें लिये हुए बाहर निकले। वो साफ़ चमकदार सूती लिबास पहने हुए थे और सुनहरी पटके सीनों पर बांधे थे। फिर उन चार जानदारों में से एक ने उन सात फ़रिश्तों को सोने के सात प्याले दिये जो अबद तक ज़िन्दा रहने वाले ख़ुदा के क़हर से भरे हुए थे। और सारा बैतुलमुक़द्दस ख़ुदा के जलाल और उस की क़ुदरत के धुएं से भर गया और जब तक उन सातों फ़रिश्तों की सातों आफ़तें ख़त्म न हो चुकें कोई उस बैतुलमुक़द्दस में दाख़िल न हो सका। फिर मैंने बैतुलमुक़द्दस में से किसी को बड़ी आवाज़ से उन सातों फ़रिश्तों से ये कहते सुना, “जाओ, और ख़ुदा के क़हर के सात प्यालों को ज़मीन पर उंडेल दो।” पहले फ़रिश्ता ने जा कर अपना प्याला ज़मीन पर उंडेल दिया, तब जिन लोगों पर उस हैवान की छाप थी और जो उस के बुत की परस्तिश करते थे, उन के जिस्मों पर बहुत बदसूरत तकलीफ़-दह फोड़े निकल आये। फिर दूसरे फ़रिश्ते ने अपना प्याला समुन्दर पर उंडेल दिया और सारा समुन्दर मुर्दे के ख़ून जैसा काला हो गया और समुन्दर के सारे जानदार मर गये। फिर तीसरे फ़रिश्ता ने अपना प्याला दर्याओं और पानी के चश्मों पर उंडेल दिया और उन का पानी भी ख़ून बन गया। तब मैंने सब पानियों पर इख़्तियार रखने वाले फ़रिश्ते को ये कहते सुना, “ऐ क़ुददूस ख़ुदा तो जो है और जो था, तू आदिल है के तूने ऐसा इन्साफ़ किया; क्यूंके उन्होंने तेरे मुक़द्दसीन और नबियों का ख़ून बहाया था, और तूने उन्हें पीने के लिये ख़ून ही दिया जिस के वो मुस्तहिक़ हैं।” फिर मैंने क़ुर्बानगाह में से ये आवाज़ सुनी “हां, ऐ ख़ुदावन्द ख़ुदा, क़ादिर-ए-मुतलक़, बेशक आप के फ़ैसले बरहक़ और रास्त हैं।” फिर चौथे फ़रिश्ता ने अपना प्याला सूरज पर उंडेल दिया और सूरज को इख़्तियार दिया गया के वो लोगों को आग से झुलसा डाले। और लोग शदीद तपिश से झुलस गये और उन्होंने ख़ुदा के नाम की निस्बत कुफ़्र बिकने लगे जिसे इन सब आफ़तों पर इख़्तियार था। मगर उन्होंने तौबा करने और ख़ुदा की तम्जीद करने से साफ़ इन्कार कर दिया। फिर पांचवें फ़रिश्ता ने अपना प्याला हैवान के तख़्त पर उंडेल दिया जिस से उस हैवान की बादशाही में तारीकी छा गई। और लोग दर्द के मारे अपनी ज़बानें काटने लगे, और अपने दुखों और फोड़ों की वजह से आसमान के ख़ुदा को कुफ़्र बिकने लगे लेकिन उन्होंने अपनी बदी से तौबा न की। फिर छटे फ़रिश्ते ने अपना प्याला बड़े दर्याए फ़रात पर उंडेल दिया और दरिया का पानी सूख गया ताके मशरिक़ के बादशाहों के आने के लिये राह तय्यार हो जाये। फिर मैंने तीन नापाक रूहों को मेंढ़कों की सूरत में अज़दहा के मुंह से और हैवान के मुंह से और उस झूटे नबी के मुंह से निकलते देखी। ये शयातीन की रूहें हैं जो मोजिज़े दिखाती हैं, और निकल कर पूरी दुनिया के बादशाहों के पास जाती हैं ताके उन्हें उस जंग के लिये जमा करें जो क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा के रोज़ हश्र के आने पर होगी। “देखो, मैं चोर की मानिन्द अचानक आ रहा हूं। मुबारक है वो जो जागता रहता है और अपनी पोशाक पहने रहता है ताके उसे लोगों के सामने नंगा होना न पड़े और लोग उस की बरहंगी न देखें।” फिर उन्होंने सब बादशाहों को उस जगह जमा किया जिस का इब्रानी नाम हरमगीदोन है। फिर सातवें फ़रिश्ते ने अपना प्याला हवा में उंडेला तो बैतुलमुक़द्दस के तख़्त-ए-इलाही की जानिब से एक बड़ी आवाज़ ये कहती हुई सुनाई दी, “पूरा हुआ!” फिर बिजलियां कौंदी, आवाज़ें और बादलों की गरज पैदा हुईं, और एक ऐसा बड़ा ज़लज़ला आया के इन्सान के ज़मीन पर पैदा होने के वक़्त से ले कर अब तक ऐसा ज़लज़ला कभी नहीं आया था। और वो ज़लज़ला इतना सख़्त था के अज़ीम शहर टूट कर तीन टुकड़े हो गया और तमाम क़ौमों के सब शहर भी तबाह हो गये। ख़ुदा ने बड़े शहर बाबुल को याद किया ताके वो उसे अपने शदीद क़हर की मय से भरा हुआ प्याला पिलाये। हर एक जज़ीरा अपनी जगह से टल गया और पहाड़ों का पता न चला। और आसमान से लोगों पर पैंतालीस किलो के बड़े-बड़े ओले गिरे। ओलों की इस आफ़त की वजह से लोग ख़ुदा की निस्बत कुफ़्र बकने लगे क्यूंके ये आफ़त निहायत सख़्त थी। जिन सात फ़रिश्तों के पास सात प्याले थे उन में से एक ने आकर मुझ से कहा, “इधर आ मैं तुझे उस बड़ी कस्बी यानी बड़े शहर की सज़ा दिखाऊं जो दरिया के किनारे पर बैठी हुई है। और जिस के साथ रोय ज़मीन के बादशाहों ने ज़िना किया था, और अहल-ए-ज़मीन के बाशिन्दे उस की ज़िनाकारी की मय से मतवाले हो गये थे।” वो फ़रिश्ता मुझे रूह में एक ब्याबान में ले गया। वहां मैंने एक औरत को क़िरमिज़ी रंग वाले एक ऐसे हैवान पर सवार देखा जिस के सारे जिस्म पर ख़ुदा की निस्बत कुफ़्र आमेज़ नाम लिखे हुए थे, और जिस के सात सर और दस सींग थे। वो औरत अरग़वानी और क़िरमिज़ी रंग वाला लिबास पहने हुए थी और सोने, जवाहर और मोतीयों से आरास्ता थी। और उस के हाथ में एक सोने का प्याला था जो मकरूह चीज़ों और उस की ज़िनाकारी की ग़िलाज़त से भरा हुआ था। उस की पेशानी पर ये पुरसरार नाम दर्ज था राज़ शहर अज़ीम बाबुल कस्बियों की वालिदा और ज़मीन की मकरूहात चीज़ों की मां। और मैंने देखा के वो औरत मुक़द्दसीन और हुज़ूर ईसा के शहीदों का ख़ून पी-पी कर मदहोश हो चुकी थी। और उसे देखकर मुझे सख़्त हैरत हुई। तब उस फ़रिश्ते ने मुझ से कहा, “तू हैरान क्यूं हो गया? मैं तुझे इस औरत और उस हैवान का राज़ बताता हूं, जिस पर वो सवार है और जिस के सात सर और दस सींग है।” जो हैवान तुम ने देखा वो पहले तो था लेकिन इस वक़्त नहीं है, और फिर दुबारा अथाह गढ़े में से निकलेगा और हलाकत का शिकार होगा। और रूए ज़मीन के वो बाशिन्दे जिन के नाम बिना-ए-आलम के वक़्त से किताब-ए-हयात में दर्ज नहीं हैं, उस हैवान को देखकर के पहले वो था और अब नहीं है लेकिन फिर दुबारा आयेगा हैरत-ज़दा हो जायेंगे। “इसे समझने के लिये बड़ी बसीरत की ज़रूरत है।” वो सातों सर सात पहाड़ियां हैं, जिन पर वो औरत बैठी है। वो सात बादशाह भी हैं। पांच तो ख़त्म हो चुके हैं, एक मौजूद है और एक अभी आया नहीं है। लेकिन जब वो आयेगा तो कुछ अरसा तक ज़रूर रहेगा और जो हैवान पहले था और अब नहीं है, वो आठवां बादशाह है और उन सातों में से ही एक है जिस की हलाकत मुक़र्रर कर दी गई है। “वो दस सींग जो तुम ने देखे, वो दस बादशाह हैं जिन्हें अभी तक बादशाही नहीं मिली है लेकिन वो एक घंटे के लिये उस हैवान के साथ बादशाहों का सा इख़्तियार पायेंगे। वो ये सभी बादशाह अपनी क़ुदरत और इख़्तियार उस हैवान के हवाले करने के लिये रज़ामन्द होंगे। वो बर्रे से जंग करेंगे लेकिन बर्रा उन पर ग़ालिब आयेगा क्यूंके वो ख़ुदावन्दों का ख़ुदावन्द और बादशाहों का बादशाह है और उस के साथ उस के बुलाए हुए, बरगुज़ीदा और वफ़ादार ख़ादिम भी ग़ालिब आयेंगे।” फिर उस फ़रिश्ते ने मुझ से कहा, “जिन दर्याओं के किनारे पर तूने उस बड़ी कस्बी को बैठी देखा है वो उम्मतें, हुजूम, क़ौमें और अहल-ए-ज़बान हैं। वो हैवान और दस सींग जिन्हें तुम ने देखा उस कस्बी से नफ़रत करेंगे। और उसे लाचार बना कर नंगा कर देंगे; और उस का गोश्त खा जायेंगे और उसे आग में जला डालेंगे। क्यूंके जब तक के ख़ुदा के कलाम की बातें पूरी न हो जायें तब तक ख़ुदा ने अपना मक़सद पूरा करने के लिये उन के दिल में ये बात डाली के वो इत्तिफ़ाक़ राय से अपनी हुक्मरानी का इख़्तियार उस हैवान के हवाले कर दें। और जिस औरत को तुम ने देखा, ये वो शहर अज़ीम है जो ज़मीन के बादशाहों पर हुकूमत करता है।” इस के बाद मैंने एक और फ़रिश्ते को आसमान से उतरते देखा। वह बड़ा साहिबे इख़्तियार था। उस के जलाल से सारी ज़मीन रोशन हो गई। उस ने बुलन्द आवाज़ से एलान किया, “ ‘गिर पड़ा, वह अज़ीम शहर बाबुल गिर पड़ा!’ जो बदरूहों का मस्कन और हर नापाक रूह का अड्डा बन गया था, और हर नापाक परिन्दे का बसेरा और हर नापाक और मकरूह हैवान का अड्डा हो गया था। क्यूंके सब क़ौमों ने उस की ज़िनाकारी के क़हर की मय पी है। रूए ज़मीन के बादशाहों ने उस के साथ ज़िना किया है, और दुनिया के ताजिरान उस की बड़ी ऐश-ओ-इशरत की बदौलत दौलतमन्द हो गये।” फिर मैंने आसमान से एक और आवाज़ ये कहती हुई सुनी: “ ‘ऐ मेरी उम्मत के लोगों! उस में से निकल आओ,’ ताके उस के गुनाहों में शरीक न हो जाओ, और उस की आफ़तों में से कोई तुम पर न आ जाये; क्यूंके उस के गुनाहों का आसमान पर ढेर लग चुका है, और ख़ुदा ने उस की बदकारियों को याद किया है। जैसा उस ने तुम्हारे साथ किया है, वैसा ही तुम भी उस के साथ करो; और उसे उस के कामों का दुगना बदला दो। और जिस क़दर उस ने अपने गुनाह का प्याला भरा, तुम उस के वास्ते दुगना भर दो। और जिस क़दर उस ने ख़ुद को शानदार बनाया और ऐश-ओ-इशरत में ज़िन्दगी गुज़ारी, उसी क़दर उस को अज़ाब और ग़म में डाल दो। क्यूंके वो अपने दिल में कहती है के, ‘मैं मलिका बन कर तख़्त-नशीन हूं। मैं कोई बेवा नहीं हूं; मैं कभी मातम नहीं करूंगी।’ लिहाज़ा उस पर एक ही दिन में आफ़तें आयेंगी मौत, मातम और क़हत। और वो आग में जला कर ख़ाक कर दी जायेगी क्यूंके उस की अदालत करने वाला ख़ुदावन्द ख़ुदा ज़ोरआवर है। “जब रूए ज़मीन के बादशाह जिन्होंने उस के साथ ज़िना किया और उस की अय्याशी में शरीक हुए थे, उस के जलने का धुआं देखेंगे तो रोयेंगे और उस पर मातम करेंगे।” और उस के अज़ाब से दहशत-ज़दा होकर दूर जा खड़े होंगे और कहेंगे, “ ‘अफ़सोस, अफ़सोस, ऐ अज़ीम शहर, ऐ बाबुल, ऐ शहर-ए-क़ुव्वत! घड़ी-भर में ही तुझे सज़ा मिल गई!’ “रूए ज़मीन के ताजिरान उस पर रोयेंगे और मातम करेंगे क्यूंके उन का माल अब कोई नहीं ख़रीदता: जो सोने, चांदी, जवाहर, मोतीयों और महीन कतानी, अरग़वानी, रेशमी और क़िरमिज़ी रंग के कपड़े, हर तरह की ख़ुश्बूदार लकड़ियां, हाथी दांत की बनी हुई चीज़ें, और निहायत बेशक़ीमती लकड़ी, पीतल, लोहे और संगमरमर की क़सम क़िस्म की चीज़ें, दारचीनी, मसालों, ऊद, मुर, लोबान, मय, ज़ैतून का तेल, बेहतरीन मैदा और गन्दुम, मवेशियों, भेड़ों, घोड़ों, गाड़ीयों, और इन्सानों को जिन्हें ग़ुलामों की मानिन्द बेचा जाता था, उन का कोई ख़रीदार न रहा। “ज़मीन के ताजिरान शहर अज़ीम बाबुल से कहेंगे, ‘तुम्हारे दिल पसन्द मेवे अब तुम्हारे पास से दूर हो गये। और तुम्हारी तमाम शान-ओ-शौकत और लज़ीज़ चीज़ें तुम्हारे हाथ से निकल गईं। अब वो तुम्हें कभी हासिल न होंगी।’  इन चीज़ों के ताजिरान जो उसे बेच कर दौलतमन्द बन गये थे, उस के अज़ाब से दहशत-ज़दा होकर दूर खड़े होकर रोयेंगे और मातम करेंगे और चला कर कहेंगे “ ‘अफ़सोस, अफ़सोस, वो अज़ीम शहर, जो महीन कतानी, अरग़वानी और क़िरमिज़ी कपड़े पहने हुए था, और सोने, जवाहर और मोतीयों से आरास्ता था! घड़ी-भर में ही उस की इतनी बड़ी दौलत बर्बाद हो गई!’ “सब बहरी जहाज़ के कप्तान, जहाज़ों के मुसाफ़िर, मल्लाह और तमाम समुन्दरी मज़दूर सब दूर खड़े होकर, उस शहर के जलने का धुआं देखेंगे और चिल्ला-चिल्ला कर कहेंगे, ‘क्या कभी कोई इतना बड़ा शहर इस अज़ीम शहर की मानिन्द मौजूद था?’ वो अपने सरों पर ख़ाक डालेंगे और रो-रो कर मातम करेंगे और चिल्ला-चिल्ला कर कहेंगे, “ ‘अफ़सोस, अफ़सोस, ऐ अज़ीम शहर! जिस की दौलत से तमाम बहरी जहाज़ों के मालिक, मालदार हो गये, घड़ी ही भर में वो शहर तबाह कर दिया गया!’  “ऐ आसमानों उस पर ख़ुशी मनाओ! ऐ मुक़द्दसीन! उस पर ख़ुशी मनाओ! ऐ रसूलों और नबियों! उस की तबाही पर ख़ुशी मनाओ! क्यूंके ख़ुदा ने उसे तुम्हारे साथ, की हुई बदसुलूकी की सज़ा उसे दे दी है।” फिर एक और फ़रिश्ता ने बड़ी चक्की के पाट की मानिन्द एक पत्थर उठाया और ये कह कर उसे समुन्दर में फेंक दिया, “बाबुल का अज़ीम शहर भी इसी तरह ज़ोर से गिराया जायेगा, और फिर उस का कभी पता न चलेगा।” और बरबत नवाज़ों, गाने वालों, बांसुरी नवाज़ों और नरसिंगा फूंकने वालों की आवाज़ तुझ में फिर कभी सुनाई न देगी। और किसी पेशे का कोई कारीगर तुझ में फिर कभी न पाया जायेगा। और चक्की की आवाज़ तुझ में फिर कभी सुनाई न देगी। और चिराग़ की रोशनी तुझ में फिर कभी न चमकेगी और दुल्हा और दुल्हन की आवाज़ें कभी तुझ में सुनाई न देंगी। क्यूंके तुम्हारे ताजिरान दुनिया के सब से बड़े लोग थे। और तेरी जादूगरी से सब क़ौमें गुमराह हो गईं। “और नबियों, और ख़ुदा के मुक़द्दसीन और ज़मीन के सारे मक़्तूलों का ख़ून, जिन्हें क़त्ल किया गया था, उसी शहर में पाया गया।” इस के बाद मैंने आसमान पर गोया एक बड़ी जमाअत को बुलन्द आवाज़ से ये कहते सुना, “हल्लेलुयाह! नजात और जलाल और क़ुदरत हमारे ख़ुदा ही की है, क्यूंके ख़ुदा के फ़ैसले बरहक़ और दुरुस्त हैं। इसलिये के ख़ुदा ने उस बड़ी कस्बी को मुजरिम ठहराया है जिस ने अपनी ज़िनाकारी से दुनिया को ख़राब कर दिया था। और ख़ुदा ने उस से अपने बन्दों के ख़ून का बदला ले लिया है।” फिर दूसरी बार उन्होंने पुकार कर कहा: “हल्लेलुयाह! और उस के जलने का धुआं अबद तक उठता रहेगा।” तब चौबीसों बुज़ुर्गों और चारों जानदारों ने मुंह के बल गिरकर ख़ुदा को जो तख़्त-नशीन था, सज्दा कर के कहा “आमीन, हल्लेलुयाह!” फिर तख़्त-ए-इलाही से ये आवाज़ आई, “ऐ ख़ुदा के सब बन्दों, ख़्वाह छोटे या बड़े, तुम जो उस का ख़ौफ़ रखते हो, हमारे ख़ुदा की हम्द करो!” फिर मैंने एक ऐसी बड़ी हुजूम की आवाज़ सुनी जो किसी बड़े आबशार के शोर और बिजली के कड़कने की ज़ोरदार आवाज़ की मानिन्द थी। वो कह रही थी “हल्लेलुयाह! क्यूंके ख़ुदावन्द हमारा ख़ुदा क़ादिर-ए-मुतलक़ बादशाही करता है।” आओ हम ख़ुशी मनाएं और निहायत शादमान हूं और ख़ुदा की तम्जीद करें क्यूंके बर्रे की शादी का वक़्त आ गया है, और उस की दुल्हन ने अपने आप को आरास्ता कर लिया है। “और उसे चमकदार और साफ़ महीन कतानी कपड़ा, पहनने का इख़्तियार दिया गया है।” (क्यूंके महीन कतानी कपड़े से मुराद, मुक़द्दसीन के रास्तबाज़ी के काम हैं।) फिर फ़रिश्ता ने मुझ से कहा, “लिख, मुबारक हैं वो जो बर्रे की शादी की ज़ियाफ़त में बुलाए गये हैं।” और उस ने मज़ीद कहा, “ये ख़ुदा की हक़ीक़ी बातें हैं।” तब मैं उस को सज्दा करने की ग़रज़ से उस के क़दमों पर गिर पड़ा। लेकिन उस ने मुझ से कहा, “ख़बरदार! ऐसा मत कर! मैं भी तेरा और तेरे भाईयों और बहनों का हम ख़िदमत हूं जो हुज़ूर ईसा की गवाही देने पर क़ाइम हैं। ख़ुदा ही को सज्दा कर! क्यूंके हुज़ूर ईसा की गवाही देना ही नबुव्वत की रूह है।” फिर मैंने आसमान को खुला हुआ देखा और मुझे एक सफ़ैद घोड़ा नज़र आया जिस का सवार वफ़ादार और बरहक़ कहलाता है। वो सदाक़त से इन्साफ़ और जंग करता है। उस की आंखें आग के शोलों की मानिन्द हैं और उस के सर पर बहुत से शाही ताज हैं। उस की पेशानी पर उस का नाम भी लिख्खा हुआ है जिसे सिवाए उस के कोई और नहीं जानता। वो ख़ून में डुबोये हुए जामा में मुलब्बस है और उस का नाम ख़ुदा का कलिमा है। आसमानी फ़ौजें सफ़ैद घोड़ों पर सवार, और सफ़ैद और साफ़ महीन कतानी लिबास पहने हुए उस के पीछे-पीछे चल रहीं थीं। और तमाम क़ौमों को हलाक करने के लिये उस के मुंह से एक तेज़ तलवार निकलती है। “वो लोहे के शाही असे से उन पर हुकूमत करेगा।” वो उन्हें क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा के क़हर की मय के हौज़ में अंगूरों की तरह रौंद डालता है। उस की पोशाक और रान पर ये नाम लिख्खा हुआ है बादशाहों का बादशाह, और ख़ुदावन्दों का ख़ुदावन्द। फिर मैंने एक फ़रिश्ता को आफ़ताब पर खड़े हुए देखा। उस ने फ़िज़ा में उड़ने वाले तमाम परिन्दों से बुलन्द आवाज़ से चला कर कहा, “आओ और ख़ुदा की बड़ी ज़ियाफ़त में शरीक होने के लिये जमा हो जाओ, ताके तुम बादशाहों, सिपहसालारों, ज़ोर-आवरों, घोड़ों और उन के सवारों का, आज़ाद या ग़ुलामों, छोटे या बड़े, सब आदमियों का गोश्त खाओ।” तब मैंने हैवान को और रूए ज़मीन के बादशाहों और उन की फ़ौजों को उस घोड़े पर सवार और उस के लश्कर से जंग करने के लिये जमा होते देखा। लेकिन उस हैवान को और उस के साथ उस झूटे नबी को भी जिस ने उस हैवान के नाम से मोजिज़ाना निशान दिखाये थे, गिरिफ़्तार कर लिया गया। जिस ने ऐसे निशान दिखा कर उन तमाम लोगों को गुमराह किया था, जिन्होंने हैवान का निशान लगवाया था और उस के बुत की परस्तिश की थी। वो दोनों आग की उस झील में ज़िन्दा ही डाल दिये गये जो गन्धक से जलती रहती है। और उन के बाक़ी लोग उस घोड़े के सवार के मुंह से निकलने वाली तलवार से हलाक कर दिये गये और सब परिन्दे उन का गोश्त खाकर सैर गये। फिर मैंने एक फ़रिश्ते को आसमान से उतरते देखा। उस के पास अथाह गढ़े की कुन्जी थी और वो हाथ में एक बड़ी ज़न्जीर लिये हुए था। उस ने अज़दहा यानी पुराने सांप को जो इब्लीस और शैतान है पकड़ा और उसे एक हज़ार साल के लिये बांधा। और अथाह गढ़े में डाल दिया और उसे बन्द कर के उस पर मुहर लगा दी ताके वो तमाम क़ौमों को गुमराह न कर सके, जब तक के हज़ार साल पूरे न हो जायें। इस के बाद उस का कुछ अरसा के लिये खोला जाना लाज़िमी है। फिर मैंने तख़्त देखे जिन पर वो लोग बैठे हुए थे जिन्हें इन्साफ़ करने का इख़्तियार दिया गया था। और मैंने उन लोगों की रूहें देखें जिन के सर हुज़ूर ईसा की गवाही देने और ख़ुदा के कलाम की वजह से काट दिये गये थे। उन लोगों ने न तो उस हैवान को न उस की बुत को सज्दा किया था, और न अपनी पेशानी या हाथों पर उस का निशान लगवाया था। और वो ज़िन्दा होकर एक हज़ार बरस तक अलमसीह के साथ बादशाही करते रहे। और जब तक ये हज़ार बरस पूरे न हुए, बाक़ी मुर्दे ज़िन्दा नहीं किये गये। ये पहली क़ियामत है। मुबारक और मुक़द्दस हैं वो लोग जो पहली क़ियामत में शरीक हूं। उन पर दूसरी मौत का कोई इख़्तियार नहीं बल्के वो ख़ुदा और अलमसीह के काहिन होंगे और हज़ार बरस तक उस के साथ बादशाही करते रहेंगे। जब हज़ार बरस पूरे हो चुकेंगे तो शैतान अपनी क़ैद से रिहा कर दिया जायेगा। और उन क़ौमों को जो ज़मीन की चारों तरफ़ आबाद होंगी, यानी याजूज और माजूज को गुमराह कर के जंग के लिये जमा करेगा। उन का शुमार समुन्दर की रेत के बराबर होगा। वो सारी ज़मीन पर फैल जायेंगी और मुक़द्दसीन की लश्करगाह और उस अज़ीज़ शहर को चारों तरफ़ से घेर लेंगी, तब आसमान से आग नाज़िल होगी और उन्हें भस्म कर डालेगी और इब्लीस को, जिस ने उन्हें गुमराह किया था, आग और गन्धक की उस झील में फेंक दिया जायेगा; जहां वो हैवान और झूटा नबी भी होगा और वो दिन रात अबद तक अज़ाब में रहेंगे। तब मैंने एक बड़ा सफ़ैद तख़्त-ए-इलाही देखा और उसे जो उस पर तख़्त-नशीन था। ज़मीन और आसमान उस की हुज़ूरी से भाग कर ग़ायब हो गये और उन्हें कहीं ठिकाना न मिला। और मैंने छोटे बड़े तमाम मुर्दों को तख़्त-ए-इलाही के सामने खड़े देखा। तब किताबें खोली गईं, फिर एक और किताब खोली गई यानी किताब-ए-हयात; और जिस तरह उन किताबों में दर्ज था, तमाम मुर्दों का इन्साफ़ उन के आमाल के मुताबिक़ किया गया। समुन्दर ने उन मुर्दों को जो उस के अन्दर थे दे दिया और मौत और आलमे-अर्वाह ने अपने अन्दर के मुर्दों को दे दिया, चुनांचे हर एक का इन्साफ़ उन के आमाल के मुताबिक़ किया गया। फिर मौत और आलमे-अर्वाह को आग की जलती झील में फेंक दिया गया। ये आग की झील दूसरी मौत है। और जिस किसी का नाम किताब-ए-हयात में दर्ज न मिला, उसे भी आग की जलती झील में फेंक दिया गया। फिर मैंने “एक नया आसमान और एक नई ज़मीन” को देखा, क्यूंके पहला आसमान और पहली ज़मीन ख़त्म हो गये थे और कोई समुन्दर भी मौजूद न था। फिर मैंने शहर मुक़द्दस यानी नए यरूशलेम को ख़ुदा के पास से आसमान से उतरते देखा जो उस दुल्हन की मानिन्द आरास्ता था जिस ने अपने शौहर के लिये सिंगार किया हो। फिर मैंने तख़्त-ए-इलाही पर से किसी को बुलन्द आवाज़ से ये कहते सुना, “देखो! अब ख़ुदा का मस्कन आदमियों के दरमियान है और वो उन के साथ सुकूनत करेगा। और वो उस के लोग होंगे और ख़ुदा ख़ुद उन के साथ रहेगा और उन का ख़ुदा होगा। ‘और वो उन की आंखों के सारे आंसू पोंछ देगा। फिर वहां न मौत बाक़ी रहेगी’ न मातम न आह-ओ-नाला, न कोई दर्द बाक़ी रहेगा क्यूंके जो पहली चीज़ें थीं मिट जायेंगी।” तब उस ने जो तख़्त-नशीन था मुझ से फ़रमाया, “देख! मैं सब कुछ नया बना रहा हूं।” फिर ख़ुदा ने फ़रमाया, “लिख ले क्यूंके ये बातें हक़ और मोतबर हैं।” फिर उस ने मुझ से कहा, “सारी बातें पूरी हो गईं हैं। मैं अल्फ़ा और ओमेगा यानी इब्तिदा और इन्तिहा हूं। मैं प्यासे को आबे-हयात के चश्मा से मुफ़्त पिलाऊंगा जो ग़ालिब आयेगा वो इन सब चीज़ों का वारिस होगा। और मैं उन का ख़ुदा होंगा और वो मेरे फ़र्ज़न्द होंगे। मगर बुज़दिलों, बेएतक़ादों, घिनोनों, क़ातिलों, ज़िनाकारों, जादूगरों, बुतपरस्तों और सब झूटों की जगह आग और गन्धक से जलने वाली झील में होगी। ये दूसरी मौत है।” फिर उन सात फ़रिश्तों में से जिन के पास आख़री सात आफ़तों से भरे हुए प्याले थे, एक ने आकर मुझ से कहा के आ, “मैं तुझे दुल्हन यानी बर्रे की बीवी दिखाऊं।” और वो मुझे रूह में एक बड़े ऊंचे पहाड़ पर ले गया और मुझे शहरे मुक़द्दस यरूशलेम को ख़ुदा के पास से आसमान से नीचे उतरते दिखाया। उस में ख़ुदा का जलाल था और उस की चमक निहायत ही क़ीमती पत्थर, यानी उस यशब की तरह थी जो बिल्लौर की तरह शफ़्फ़ाफ़ होता है। उस की फ़सील बहुत बड़ी और ऊंची थी और उस में बारह फाटक थे जिन पर बारह फ़रिश्ते तैनात थे। बारह फाटकों पर बनी इस्राईल के बारह क़बीलों के नाम लिखे हुए थे। तीन फाटक मशरिक़ की तरफ़, तीन शुमाल की तरफ़, तीन जुनूब की तरफ़ और तीन मग़्रिब की तरफ़ थे। शहर की फ़सील बारह बुनियादों पर क़ाइम थी जिन पर बर्रे के बारह रसूलों के नाम लिखे हुए थे। और जो फ़रिश्ता मुझ से मुख़ातिब था उस के पास शहर और उस के फाटकों और उस की फ़सील की पैमाइश करने के लिये सोने की एक जरीब थी। और वो शहर मुरब्बा शक्ल की था यानी उस का तूल और अर्ज़ बराबर था। उस ने जरीब से शहर की पैमाइश की तो वो तक़रीबन दो हज़ार चार सौ चौदह किलोमीटर लम्बा, इतना ही चौड़ा और ऊंचा था। फिर फ़रिश्ता ने इन्सानी पैमाइश के मुताबिक़ फ़सील की पैमाइश की तो उसे एक सौ चवालीस हाथ यानी पैंसठ मीटर पाया। वो फ़सील संग-ए-यशब से बनी हुई थी और शहर साफ़-ओ-शफ़्फ़ाफ़ शीशे की मानिन्द ख़ालिस सोने का बना हुआ था। शहर की फ़सील की बुनियादें हर क़िस्म के क़ीमती जवाहर से मुज़य्यन थीं। पहली बुनियाद संग-ए-यशब की, दूसरी नीलम की, तीसरी शबे-चराग़ की, चौथी ज़मर्रुद की, पांचवीं अक़ीक़ की, छटी अक़ीक़ अहमर की, सातवीं सुनहरे पत्थर की, आठवीं फ़ीरोज़ा की, नौवीं ज़बरजद की, दसवीं यमनी पत्थर की, ग्यारहवें संग-ए-सुम्बुली की, बारहवीं याक़ूत की थी। और बारह फाटक बारह मोतीयों के थे यानी हर फाटक सालिम मोती का था। और शहर की शाहराह शफ़्फ़ाफ़ शीशे की मानिन्द ख़ालिस सोने की थी। मैंने शहर में कोई बैतुलमुक़द्दस न देखा क्यूंके क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदावन्द ख़ुदा और बर्रा उस के बैतुलमुक़द्दस हैं। वो शहर, सूरज और चांद की रोशनी का मोहताज नहीं क्यूंके ख़ुदावन्द के जलाल ने उसे रोशन कर रख्खा है और बर्रा: उस का चिराग़ है। और दुनिया की सब क़ौमें उस की रोशनी में चले फिरेंगी और रूए ज़मीन के बादशाह उस में अपनी शान-ओ-शौकत के सामान उस में लायेंगे। और उस के फाटक कभी बन्द न होंगे क्यूंके वहां रात नहीं होगी। और दुनिया के तमाम लोगों की शान-ओ-शौकत और इज़्ज़त का सामान उस में लायेंगे। और उस में कोई नापाक चीज़ या कोई शख़्स जो शर्मनाक हरकत करता या झूटी बातें गढ़ता है, हरगिज़ दाख़िल न होगा, मगर वोही होंगे जिन के नाम बर्रे की किताब-ए-हयात में दर्ज हैं। फिर उस फ़रिश्ते ने मुझे आबे-हयात का एक दरिया दिखाया, जो बिल्लौर की मानिन्द शफ़्फ़ाफ़ था, जो ख़ुदा और बर्रे के तख़्त से निकल कर बहता था। यह दरिया उस शहर की शाहराह के वसत मैं बहता था। और उस दरिया के दोनों तरफ़ शजरे हयात थे। उस में बारह क़िस्म के फल आते थे और हर महीने में फल देता था और उस दरख़्त के पत्तों से दुनिया की सब क़ौमों को शिफ़ा होती थी। वहां लानत कभी न होगी। ख़ुदा और बर्रे का तख़्त उस शहर में होगा और उस के ख़ादिम उस की इबादत करेंगे। और वह उस का चेहरा देखेंगे और उस का नाम उन की पेशानी पर लिख्खा होगा। और वहां फिर कभी रात न होगी और वह चिराग़ और सूरज की रोशनी के मोहताज न होंगे क्यूंके ख़ुदावन्द ख़ुद उन्हें रोशनी देगा और वह अबद तक बादशाही करते रहेंगे। उस फ़रिश्ते ने मुझ से कहा, “यह बातें हक़ और मोतबर हैं। और ख़ुदावन्द ख़ुदा जो नबियों की रूहों को उभारने वाला है, अपने फ़रिश्ता को इस ग़रज़ से भेजा के वो अपने बन्दों पर वो बातें ज़ाहिर करे जिन का जल्द पूरा होना ज़रूरी है।” “देख, मैं जल्द आने वाला हूं! मुबारक है वह जो इस किताब की नुबुव्वत की बातों पर अमल करता है।” मैं यूहन्ना वह शख़्स हूं जिस ने इन बातों को सुन और देखा; और जब मैं यह बातें सुन चुका और देख चुका तो जिस फ़रिश्ते ने मुझे ये बातें दिखाईं, मैं उस के क़दमों पर सज्दे में गिर पड़ा। लेकिन उस ने मुझ से कहा, “ख़बरदार, ऐसा मत कर, में भी तेरा, और तेरे भाई नबियों और इस किताब की नबूव्वत की बातों पर अमल करने वालों का हम ख़िदमत हूं। ख़ुदा ही को सज्दा कर।” फिर उस ने मुझ से कहा के तो “इस किताब की नुबुव्वत की बातों को पोशीदा न रख क्यूंके वक़्त नज़दीक है। जो बुराई करता है वह बुराई ही करता चला जाये। जो नजिस है वह नजिस ही होता चला जाये। जो रास्तबाज़ है वह रास्तबाज़ी ही करता चला जाये और जो पाक है वह पाक ही होता चला जाये।” “ख़ुदावन्द ईसा फ़रमाते हैं, देख! मैं जल्द आने वाला हूं! और हर एक को उस के अमल के मुताबिक़ देने के लिये अज्र मेरे पास मौजूद है। मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा, अव्वल और आख़िर, इब्तिदा और इन्तिहा हूं। “मुबारक हैं वो जिन्होंने अपने लिबास धो लिये हैं क्यूंके उन्हें शजरे हयात के फल खाने का हक़ मिलेगा और वो फाटकों से शहर में दाख़िल हो सकेंगे। लेकिन कुत्ते, जादूगर, ज़िनाकार, क़ातिल, बुत-परस्त और झूट बोलने वाले और झूट को पसन्द करने वाले, ये सब उस शहर से बाहर ही रह जायेंगे। “मुझ हुज़ूर ईसा, ने अपना फ़रिश्ता तुम्हारे पास इसलिये भेजा के वो तमाम जमाअतों में इन बातों की तुम्हारे आगे गवाही दे के मैं हज़रत दाऊद की असल और नस्ल और का नूरानी सुबह का नूरानी सितारा हूं।” पाक रूह और दुल्हन कहती हैं, “आ!” और हर सुनने वाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वो आये; और जो पाने की तमन्ना रखता है वो आबे-हयात मुफ़्त हासिल कर ले। मैं यूहन्ना, इस किताब की नबुव्वत की बातें सुनने वाले हर शख़्स को आगाह करता हूं के अगर कोई इस किताब में किसी बात का इज़ाफ़ा करे तो ख़ुदा इस में लिख्खी हुई आफ़तें उस पर नाज़िल करेगा। और अगर कोई इस नबुव्वत की किताब की बातों में से कुछ निकाल दे तो ख़ुदा इस किताब में मज़कूर शजरे हयात और शहर मुक़द्दस में रहने का हक़ उस से छीन लेगा जिस का बयान इस किताब में है। जो इन सब बातों की तस्दीक़ करने वाले हैं, फ़रमाते हैं, “बेशक में जल्द आने वाला हूं।” आमीन। ऐ ख़ुदावन्द ईसा, आईये। ख़ुदावन्द ईसा का फ़ज़ल ख़ुदा के मुक़द्दसीन के साथ होता रहे। आमीन!